Anita Singh - Story of a Seductive Housewife - Page 16 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Anita Singh - Story of a Seductive Housewife

unnamed-72.jpg


unnamed-72-1.jpg
 
अपडेट 120

हरिया का नज़र वापस अनीता की चूँचियों पर चला गया और वह अनीता की चूँचियों को देखते हुए bola,"Haan मेमसाहेब अच्छे से देख लेते हैं जब सामने में खुला हुआ है तो"

तब तक रामु हरिया के मोबाइल का सिम स्लॉट खोल चूका था और अनीता को पिन देते हुए bola,"Yeh लीजिये मेमसाहेब"

अनीता मुस्कुराकर पिन लेकर रामु और हरिया को देखकर boli,"Khula हुआ है देख लीजिये अच्छे से और मोबाइल के सिम को लगा लीजिये तब तक मैं यह पिन लगा लेती हूँ" और बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी अपनी पल्लू उठाकर कंधे पर पिन कर ली.

रामु और हरिया मुस्कुरा कर अनीता को देखा तो वह भी पिन करके मुस्कुरा कर दोनों को देखि. रामु तब तक सिम डालकर मोबाइल चलने का कोशिश किया मगर नेटवर्क नहीं मिल रहा था वहीँ हरिया bola,"Are मेमसाहेब अब तो बांध हो गवा तो कैसे देखे?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर हरिया को देखि और अगले पल रामु को देखती हुयी boli,"Ab बांध तो करना hi पड़ेगा न, नहीं तोह मोबाइल कैसे चलेगी"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर मोबाइल का स्क्रीन उसे दिखते हुए bola,"lag रहा है मेमसाहेब फिर से खोलना होगा, मोबाइल ससुरा चल नहीं रहा है"

अनीता यह देखकर खुद मोबाइल लेकर कुछ सेटिंग्स करने का कोशिश की मगर नहीं हुआ तो वह boli,"Lag रहा है फिर से सिम खोलकर लगाना होगा"

रामु भी जवाब में bola,"Haan लग तो रहा है उहे करना होगा" और यह बोलकर वह अनीता की कंधे पर देखा और फिर उसकी ब्लाउज की कप पर देखा. ऐसे पल्लू लगाने पर भी अनीता की दायी ब्लाउज को कप पूरी दिख hi रही थी जिससे उसकी डे चूंकि का आकर साफ़ साफ़ समझ आ रही थी. उसकी बायीं ब्लाउज की कप भी बस थोड़ी सी hi ढंकी हुयी थी. पल्लू गिरने से बस उसकी वह थोड़ी सी ढंकी हुयी ब्लाउज कप भी साफ़ साफ़ दिखने लगती जिससे उसकी बायीं चूंकि का शेप पूरा दिखने लगती और साथ hi उसकी गोरी चिकनी सपाट पेट और उसके बीच नाभि में लटकी हुयी चमकती हुयी बेल्ली रिंग अच्छे से दिखने लगती.

हरिया अनीता की कमर पर हाथ फेरते हुए bola,"Usse पहले आपको खोलना होगा मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर हरिया को देखकर boli,"Haan हरिया जी" और अगले पल अपनी कंधे से पिन निकली तो फिर से उसकी पल्लू नीचे गिर गयी.

हरिया और रामु उसकी ब्लाउज कप देख रहे थे. अनीता पिन लेकर रामु को दी तो रामु उसकी चूंकि से नज़र हटाकर हाथ से पिन लेते हुए मुस्कुराया तो अनीता भी मुस्कुरा दी और इस बार अपनी पल्लू उठाने का कोशिश नहीं की यह सोचकर की जब पिन मिलेगा तो वह सीधा पल्लू को पिन कर लेगी और वैसे hi बैठकर रामु को देखने लगी.

अगले 5 मिनट अनीता वैसे hi बैठी रही क्यूंकि सिम को 3-4 बार निकलकर लगाया गया तब जाकर मोबाइल में नेटवर्क आया. इस बीच वह पिन भी थोड़ा सा टूट गया जिससे वह साड़ी पिन करने लायक नहीं रहा.

रामु यह देखकर bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब ी टूट गवा"

अनीता यह सुनकर boli,"Are कोई बात नहीं रामु जी. अब जो हो गया सो हो गया इसमें माफ़ी मांगने की क्या बात है"

अनीता यह बोलकर अपनी पल्लू उठाकर ऐसे hi कसुआलय कंधे पर दाल ली मगर बिना पिन के चिकना पल्लू टिकता कैसे. अनीता उसके बाद दो बार कोशिश की कंधे पर पल्लू टिकने की मगर नहीं हुयी.

दूसरी बार जब पल्लू गिरी तोह अनीता परेशानी से boli,"Offo" और उसकी नज़र हरिया पर पड़ी जो उसे देखकर मुस्कुरा रहा था. अनीता उसे मुस्कुराते देख मुस्कुराई और अगले पल रामु bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब, हमरे वजह से आपका पिन टूट गवा"

अनीता यह सुनकर रामु को देखती हुयी मुस्कुराकर boli,"Are कोई बात नहीं रामु जी. इसमें माफ़ी की कौन सी बात हुयी. पिन hi तो था, वह तो टूटी hi रहती है. ऐसे मेरे पास बहोत सारे पिन रहते हैं बैग में, लेकिन देखिये आज नहीं है तो एक पिन थी वह भी टूट गयी हेहेहे"

रामु भी यह सुनकर मुस्कुराया और हसने से अनीता की बड़ी चूँचियाँ हिलने लगी तो उसे देखने लगा. हरिया भी अनीता की बड़ी चूँचियों को देखने लगा. अनीता हस्ती हुयी उन दोनों के नज़र को अपनी चूँचियों पर देखने लगी. उसे ज़रा भी शर्म नहीं आ रही थी की कैसे दो ग़ैर मर्द उसकी छोटी ब्लाउज कप में कैद बड़ी चूँचियों को देख रहे थे वह भी उसके हसने से हिलते हुए और न hi उसे ख्याल आया अपनी पल्लू वापस कंधे पर रखने का ताकि काम से काम चूँचियाँ हिलती हुयी न दिखे. वह बेशर्मी से हस्ती हुयी देख रही थी की कैसे दो ग़ैर मर्द उसकी हिलती हुयी चूँचियों को देख रहे थे.

हरिया हस्ते हुए अनीता की हिलती चूँचियों को देखकर उसकी कमर सहलाते हुए bola,"Ab मेमसाहेब पिन टूट गवा तो टूट गवा. आप भी बेवजह का परेशां मत होइए"

और फिर वह नीचे बिस्तर पर पड़ी हुयी अनीता की पल्लू के तरफ आँखों से इशारा करते हुए bola,"Rehne दीजिये न ऐसे hi. कौन सा आप चल रही हैं की ी ज़मीन पर गिर कर गन्दा हो जायेगा. आप तो अभी बैठी हुई हैं. रहने दीजिये ऐसे hi"

फिर वह अनीता की चूँचियों को देखते हुए उसकी कमर सहलाते हुए bola,"Ka हो जायेगा ऐसे hi बैठने में"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर कामुक अदद से हरिया को देखि.

रामु भी अगले पल bola,"Haan मेमसाहेब आप परेशां मत होइए. आराम से बैठिये. हमरे वजह से आपका पिन टूट गवा और अब आप परेशान हो रही हैं ी हुंका अच्छा नहीं लग रहा है"

हरिया यह सुनकर अनीता की कमर सहलाते हुए उसकी चूँचियों को देखकर bola,"Ek तरह से अच्छा hi हुआ मेमसाहेब की वह ससुरा पिन टूट गवा"

अनीता यह सुनकर हरिया को देखि तो वह उसकी चूँचियों से नज़र हटाकर उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता कामुक अंदाज़ में puchhi,"Kyun हरिया जी?"

हरिया अनीता की कमर सहलाते हुए बोलै उसकी क्लीवेज के तरफ आँखों से इशारा करते हुए bola,"Ee देखिये कैसे पसीना आ रहा है आपको"

यह सुनकर रामु भी अनीता की क्लीवेज देखा जहाँ हलके पसीने आने से उसकी गोरी क्लीवेज हल्का चमकने लगी थी.

रामु अनीता की क्लीवेज देख hi रहा था और दूसरी तरफ हरिया अपना बात जारी रखते हुए bola,"Aapko एक में रहने का आदत है और इहाँ ससुरा गरम पंखा का हवा. काम से काम पिन टूट जाने से"

हरिया अनीता की कमर सहलाते हुए उसकी चूँचियों और नंगी पेट के तरफ देखते हुए आँखों से इशारा करके bola,"Ee पल्लू न होने से आपकी बदन में अच्छा से हवा तो लगेगा".

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुरा कर boli,"Offo हरिया जी कहाँ की बात आप कहाँ ले जाते हैं"

हरिया मुस्कुराते हुए अनीता को देखकर उसकी कमर सहलाते हुए फिर से उसकी चूँचियों और नंगी पेट के तरफ आँखों से इशारा करते हुए puchha,"Are मेमसाहेब कुछो ग़लत बोले का हम? आपको आराम नहीं मिल रहा है का aese?Dekhiye कैसे आपको पसीना आ रहा है और आपका गोरा दूध जइसन बदन गर्मी से hi हल्का गुलाबी हो गवा है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Hariya जी अब आप फिर से मेरी तारीफ मत करने लगिएगा" और फिर बेशर्मी से हसने lagi,"hehehe. घूम फिर कर बात वहीँ लेट हैं आप हेहेहे"

हरिया भी यह सुनकर उसकी गोरी चिकनी कमर सहलाते हुए हसने laga,"Hahaha"

फिर वह उसकी कमर सहलाते हुए उसकी क्लीवेज देखते हुए bola,"Are मेमसाहेब आप खुद देखिये न कैसे आपका दूध जैसे बदन गुलाबी हो गवा है हाहाहा"

अनीता पूरी बेशर्मी से पहले से hi खिलखिला रही थी और यह सुनकर वैसे hi खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe हरिया जी"

रामु भी मुस्कुराते हुए bola,"Haan मेमसाहेब सच में आपका बदन तो गुलाबी हो गवा है गर्मी से"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से हस्ती हुयी boli,"Hehehe तो आपने तो इंतज़ाम कर दिया न की मुझे गर्मी नहीं लगे. हेहेहे सच सच बताइये रामु जी आपने जान बूझकर तो पिन नहीं तोडा की मुझे ऐसे बैठना पड़े और मुझे हवा लगे"

अनीता यह बोलकर बेशर्मी से खिलखिलाती rahi,"Hehehe".

रामु यह सुनकर अनीता की बड़ी बड़ी चूँचियों को हसने के कारण हिलते हुए देखकर मुस्कुरा रहा था मगर वह कुछ बोलता इससे पहले हरिया अनीता की कमर सहलाते हुए उसकी हिलती हुयी चूँचियों से नज़र ऊपर करके उसे देखते हुए bola,"Ab ससुरा जान बूझकर किया या अनजाने में, लेकिन अच्छा हुआ की ससुरा पिन टूट गवा"

फिर वह अनीता की क्लीवेज को देखते हुए उसकी कमर सहलाते हुए bola,"Isi बहाने आपको आराम तो मिल रहा है नहीं तो हमार झोपडी में तो ससुरा साधारण पंखा में आपको गर्मी लग रही है"

अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Haan हरिया जी आराम मिल रहा है"

अनीता फिर एक कामुक आवाज़ में boli,"Sach में हरिया जी हालत कैसा भी हो, आप सब में कुछ न कुछ अच्छा खोज लेते हैं हेहेहे"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता मुस्कुराती हुयी उसे देखि और फिर रामु के तरफ देखती हुयी वैसे hi कामुक आवाज़ में boli,"Seekhiye कुछ हरिया जी से रामु जी. आप हैं की मेरी पिन टूटने के कारण माफ़ी मांग रहे हैं और हरिया जी को देखिये उसमे भी कुछ अच्छा चीज़ खोज लिए की इसी बहाने मुझे आराम तो मिल रही है हेहेहे"

रामु यह सुनकर अनीता की बड़ी बड़ी चूँचियों को हसने के कारण हिलते हुए देखकर मुस्कुराकर bola,"Haan मेमसाहेब, पिन तो हम जान बूझकर नहीं तोड़े, लेकिन एक तरह से अच्छा हुआ की टूट गवा. आपको इसी बहाने आराम तो मिल रहा है".

हरिया और रामु अनीता को हस्ते देख नज़र अनीता की हिलती चूँचियों पर hi थी. अनीता बेशर्मी से हस्ती हुयी उन दोनों का नज़र को अपनी चूँचियों पर देखि मगर कुछ बोली नहीं.

वह दोनों अनीता की चूँचियों और गोरी चिकनी पेट को बेझिझक देख रहे थे. हरिया तो अनीता की कमर पर हाथ भी फेर रहा था. अनीता को बिना शर्म के ऐसे बैठा देख रामु को भी अच्छा लग रहा था.

अनीता हसी रोकती हुयी हरिया का हाथ अपनी कमर पर महसूस करती हुयी boli,"Hariya जी मुझे तो आराम मिल रही है मगर लग रहा है आपका बुखार बढ़ गया है"

यह बोलकर वह अपनी बायीं हाथ हरिया के मांग पर रखती हुयी boli,"Haan हरिया जी यहाँ तो एक दम गरम हो चूका है. रुकिए मैं थोड़ी गीली पट्टी कर देती हूँ".

फिर वह रामु से boli,"Ramu जी एक कटोरी में पानी और एक साफ़ कपडा लेकर आइयेगा तो. हरिया जी का तो मांग बहोत गरम है इसे थोड़ा गीला कपडा से ठंडा कर देती हूँ"

हरिया यह सुनकर अनीता की कमर सहलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब ी का करात हैं आप. बेवजह का आप परेशान.."

हरिया इतना बोलै hi था की अनीता उसके होंठों पर ऊँगली रखकर एक कामुक अंदाज़ में boli,"Ssshhh हरिया जी. इसमें कोई परेशानी की बात नहीं है. आप लोग इतना कुछ करते हैं मेरे लिए तो क्या मैं आपका बुखार नहीं उतर सकती. कपडे को गीला करके बस आपके मांग पर hi तो रखना है"

हरिया यह सुनकर अनीता की कमर को सहलाते हुए उसे हल्का भींचते हुए bola,"Memsaheb आपका दिल सच में बड़ा है" और यह बोलते हुए वह उसकी बायीं चूंकि देखा और फिर रामु को देखकर bola,"Dekh रहे हो न रामु की मेमसाहेब का दिल काटना बड़ा है की हम जइसन ग़रीब लोगन का भी ख्याल रखती है"

अनीता यह सुनती हुयी एक नज़र रामु को देखि जो उसकी नयी चूंकि देख रहा था मगर कोई ऐतराज़ करने के बजाये अनीता की चेहरे पर एक कामुकता और गर्व की भावना थी जैसे उसे अपनी बड़े 'दिल' पर गर्व था और उसे ख़ुशी थी की हरिया और रामु जैसे दुमदार मर्द उसकी बड़े 'दिल' को देख रहे थे.

अनीता जैसे hi हरिया के मुंह से ग़रीब शब्द सुनी वह अपनी बायीं हाथ उसके मांग पर फेरती हुयी नाराज़ मगर कामुक अंदाज़ में boli,"Hariya जी फिर से वही ग़रीबी की बात"

हरिया यह सुनकर हसने laga,"Are मेमसाहेब हाहाहा".

अनीता भी उसके मांग पर हाथ फेरती हुयी हसने lagi,"Hehehe" जिससे उसकी चूँचियाँ हिलने लगी. रामु और हरिया फिर से बेझिजक अनीता की हिलती चूँचियों को देखने लगे.

हरिया अनीता की चूँचियों को देखते हुए bola,"Hum तो ी बता रहे थे की आपका दिल काटना बड़ा है"

अनीता हस्ती हुयी boli,"Hehehe हरिया जी ठीक है मेरा बड़ा दिल तो आप लोग देख hi रहे हैं हेहेहे"

हरिया भी हसना जारी रखा. अनीता बेशर्मी से हस्ती हुयी आगे boli,"Ohh माय गॉड हरिया जी आपके साथ होने से हसी नहीं आये ऐसा हो hi नहीं सकता"

फिर वह हरिया के मांग पर हाथ फेरती हुयी कामुकता से boli,"Ab बताइये यह सब बातें और हसी के लिए क्या अमीरी ग़रीबी मायने रखती हैं"

अनीता कामुकता से आगे boli,"Aap सच में फनी हैं हरिया जी और क्यों न हो आप इतने फनी आखिर आपके पास इतना बड़ा फन वाला चीज़ भी तो है"

हरिया यह सुनकर मुस्कुरा दिया तो अनीता कामुकता से boli,"Agar मेरा दिल बड़ा है तो आपका फानन वाला चीज़ क्या काम है? वह भी तो बहोत बड़ा है"

हरिया अपना अनीता की कमर सहलाते हुए उसे भींच कर bola,"Haan मेमसाहेब सही बोल रही हैं आप. एहि तो आपका बड़ा दिल दिखता है की आप हमारा ग़रीबी को न देखकर हमरा गुण देखती हैं, यह देखती हैं की हम कितना पहननी हूँ और हमरे पास बहोत बड़ा फानन वाला चीज़ है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुरा कर कामुकता से boli,"Haan हरिया जी असली गुण तो देखना hi चाहिए. लेकिन अब यह सब बातें छोड़िये. फिर से आप बातों में उलझा दिए मुझे"

हरिया यह सुनकर हसने laga,"Hahaha" तो अनीता भी खिलखिलाने lagi,"Hehehe" और फिर रामु को देखती हुयी boli,"Ramu जी जाइये पानी और कपडा लेजर आइये, नहीं तो हरिया जी फिर से बात बनाने लगेंगे हेहेहे"

हरिया यह सुनकर bola,"Are ु ससुरा खुद आपका बड़ा दिल देखने में लगा हुआ है हाहाहा"

अनीता यह सुनकर आँखें बड़ी करके मुस्कुराती हुयी बेशर्मी से boli,"Hariya जी" और फिर खिलखिलाती हुयी रामु को देखकर boli,"Hehehe देख रहे हैं न रामु जी फिर से हरिया जी कैसे बात बनाने लगे"

हरिया यह सुनकर bola,"Are ु ससुरा तो देख hi रहा है आपका बड़ा दिल"

अनीता यह सुनकर खिलखिलाती हुयी boli,"Offo हरिया जी हेहेहे" और फिर रामु को देखकर boli,"Aap जाइये पानी और कपडा लेकर आइये हेहेहे"

अगले पल हरिया अनीता की कमर पकड़ कर उसे सहलाते हुए थोड़ा खींचते हुए bola,"Memsaheb बिस्तर उतना साफ़ नहीं है. मगर जब आप बैठी hi हैं तो आराम से ऊपर बैठ जाइये न. ऐसे ऊपर बैठने से आपको हमार सर पर पट्टी करने में आसानी होगी"

रामु भी bola,"Haan मेमसाहेब बिस्तर तो साफ़ नहीं है लेकिन आप आराम से बैठिये न"

अनीता जो अब तक अपनी पेअर हरिया के चौकी वाले बिस्तर पर बैठी लटकाये हुए थी हरिया और रामु का बात सुनकर उसे उठाकर बिस्तर पर चढ़कर हरिया के सीने के पास बैठ गयी और मुस्कुराती हुयी boli,"Are बिस्तर जैसा भी है ठीक है, हरिया जी बीमार हैं तो धोने का मौक़ा भी तो नहीं मिलता होगा"

अनीता के ऐसा बैठने से उसकी चूँचियाँ हरिया के और करीब हो गयी और वह उसकी कमर सहलाते हुए भूखे हवस से पल्लू के बिना छोटी ब्लाउज कप में कैद अनीता की बड़ी चूँचियों को देखने लगा. उसके बदन और लुंड में खून तेज़ी से दौड़ने लगा.

अनीता हरिया को देखती हुयी एक कामुकता से puchhi,"Ab ठीक है तो हरिया जी?"

हरिया उसकी कमर सहलाते हुए उसकी चूँचियों को देखते हुए bola,"Ek दम सही है मेमसाहेब"

हरिया को ऐसे अपनी चूँचियों को हवस और भूख से देखते देख अनीता की बदन में भी एक अजीब सा मज़ा मिलने लगा और छूट में बेचैनी महसूस हुयी. उसे अच्छा लग रहा था हरिया का यूँ उसकी चूँचियों को ऐसे हवस से देखते देख और उसकी चेहरे पर गर्व की भाव आ गयी. अनीता को ज़रा सी भी शर्म नहीं थी की यह सब रामु के सामने hi हो रहा है. एहि तो उसकी बेशर्मी, बेहयाई, रान्दीपना और बदचलनी का साबुत था की उसे फ़र्क़ नहीं पद रहा था की रामु भी वहां था.

अनीता को तो बल्कि यह बात अच्छी लग रही थी की रामु से हरिया को जलन नहीं हो रही थी और कहीं न कहीं उसका यह सहजता उसके आत्मविश्वास को दिखा रहा था की उसे अपनी मर्दानगी पर इतना भरोसा है की वह रामु के होने से या उसे अनीता की चूँचियों को ऐसे देखने से जलन या ऐतराज़ नहीं हो रहा था. अनीता को यह हरिया के मर्दानगी का साबुत लग रहा था और एहि कारण था की अनीता हरिया के साथ इतनी कामुकता से पेश आ रही थी क्यूंकि उसे लग रहा था की वह दो असली मर्दों के साथ है और जब असली मर्द साथ हो तो उनके साथ खुलकर रहने में कोई बुराई नहीं है.

वहीँ हरिया को भी अनीता की बेशर्मी, बेहयाई और रान्दीपना देखकर अच्छा लग रहा था की रामु के सामने भी वह कितनी सहेज थी. उसे भी तो अनीता की एहि बेहयाई, बेशर्मी, रान्दीपना और बदचलनी पसंद था जिसके कारण से वह खुलकर अनीता को छेड़ता था और उसकी जिस्म को हवस और भूख से देखता था. इसके बावजूद भी अनीता के लिए हरिया और रामु के मैं में इज़्ज़त थी इसलिए ज़बरदस्ती या जल्दबाजी में नहीं रहते हैं और उसकी मर्ज़ी के बिना कुछ करते नहीं है और करते भी हैं तो इस बात का ख्याल रखते थे की अनीता थोड़ा सहेज रहे.

हरिया को अपनी जिस्म, खासकर अपनी चूँचियों को हवस और भूखे नज़र से देखते हुए देखने के बाद अगले पल अनीता रामु को देखकर एक ऐडा से कामुकता से boli,"Ramu जी पानी और कपडा लाइए. हरिया जी का थोड़ा बुखार उतार देती हूँ"

रामु उठकर घर के पीछे कल से पानी लेने चला गया तो हरिया अनीता को देखकर धीरे से bola,"Are मेमसाहेब हमार बुखार तो आपका"

फिर वह उसकी दायी चूंकि को पकड़ कर मसलते हुए bola,"ee दूध पीकर hi उतरेगा"

अनीता यह देखकर कामुक आह bhari,"Uhhm हरिया जी" और रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Pee लीजियेगा हरिया जी. सिर्फ यही क्यों"

फिर वह अपनी दूसरी चूंकि के तरफ आँखों से इशारा करती हुयी boli,"Ise भी पि लीजियेगा"

हरिया अगले पल उसकी दूसरी चूंकि को पकड़ कर मसलते हुए bola,"U तो पिएंगे hi मेमसाहेब. हम आपका दोनों दूध को पिएंगे"

वह उसकी चूंकि को मसलते हुए उसे हवस भरे नज़र से देखते हुए bola,"Uff का बड़ा बड़ा चूंकि है मेमसाहेब आपका, ससुरा काटना दूध होगा ीमे"

हरिया को ऐसे हवस भरे नज़र से अपनी चूँचियों को देखते हुए उसे मसलता देख अनीता की चेहरे पर गर्व की भाव आ गयी. उसे हरिया का यूँ हवस भरे नज़र से उसकी चूँचियों को देखना और मसलना अच्छा लग रहा था.

हरिया उसकी चूँचियों को मसलते हुए पुरे हवस भरे नज़र से देखते हुए आगे bola,"Hum आपका ी दोनों दूध को पूरा निचोड़ कर पि जाऊंगा"

अनीता यह सुनकर हरिया के सर के बाल में उँगलियाँ फेरती हुयी बेशर्मी से boli,"Uhhm हरिया जी आप कितने प्यासे हैं"

फिर वह अपनी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करती हुयी कामुक अंदाज़ में आगे boli,"Inke लिए"

हरिया यह सुनकर उसकी चूंकि मसलते हुए bola,"Are मेमसाहेब आपके जइसन खबसूरत जवान औरत का दूध देखकर हुंका प्यास कैसे नहीं लगेगा आप hi बताइये. हम सच सच बोले तो हमार मैं करात है की ी आपका ब्लाउज पहाड़ कर आपका दूध को मुंह में लेकर आपका चूंकि कच्चा चबा जाये"

अनीता देख रही थी की कैसे हरिया के आँखों में उसकी जिस्म के लिए हवस बढ़ रहा था. उसके आँखों में तो वह अपनी जिस्म के लिए हवस तो हमेशा hi देखती आयी है मगर अभी वह हवस बहोत ज़्यादा था. अनीता देख सकती थी की वह सच में उसकी चूँचियों के लिए प्यासा है और रामु नहीं होता तो उसकी चूँचियों को अभी तक मुंह में ले लिया होता.

अनीता को हरिया के आँखों में अपनी जिस्म के लिए ऐसी हवस और प्यास देखकर ज़रा सा भी बुरा नहीं लग रहा था बल्कि उसे अपनी जवानी और हरिया के हिम्मत और मर्दानगी पर गर्व हो रहा था.

अगले पल हरिया अपना बात जारी रखते हुए अनीता की चूंकि को मसलते हुए bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब की हम आपका ी कीमती ब्लाउज फाड़ने का बात कर रहे हैं मगर जो सच है हम..."

इससे पहले की वह पूरा बात बोलता अनीता उसके सर के बाल में उंगलियां फेरती हुयी दूसरे हाथ के ऊँगली को उसके होंठों पर रखती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"ssshhhh हरिया जी. कुछ सफाई देने की या माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं है. अरे शेर के सामने मांस होगा तो उसे तो उसे देखकर भूख लगेगी hi. अरे यह तो ऊपर वाले ने बनाया hi ऐसा है की शेर को मांस का भूख रहता है और आप जैसे असली मर्द को"

फिर वह अपनी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Iski प्यास रहती है. एहि तो प्रकृति का नियम है हरिया जी और आप तो प्रकृति का नियम का hi तो पालन कर रहे hain.Yeh तो आपकी मर्दानगी है हरिया जी की आप सिर्फ प्रकृति के नियम के अनुसार इनके लिए सिर्फ प्यासे hi नहीं है बल्कि आप अपने प्यास का बात और अपना प्यास बुझाने के लिए जो मैं में ख्याल रहता है वह सच सच खुल कर बोलते हैं और मुझे ख़ुशी है हरिया जी की आपके मैं में जो है उसे साफ़ साफ़ बोल रहे हैं, अपनी प्यास दिखा रहे हैं"

अगले पल हरिया उसकी चूंकि से हाथ हटाया और पीछे के दरवाज़े के तरफ देखा जहाँ से रामु कमरे में कटोरा लेते हुए आ रहा था. अनीता भी उसे देखि तो उसे समझ आया की हरिया उसकी चूंकि से हाथ क्यों हटाया. अनीता को सांस थोड़ी तेज़ होने लगी थी तो वह अपनी सांस को कबि करने की कोशिश करने लगी.

रामु कटोरा लाकर आया तो देखा की अनीता हरिया के सीने के पास बिना पल्लू के बैठी हुयी थी, जैसे वह देखकर पानी लाने गया था. वहां दरवाज़े के पास से यह देखकर दृश्य और कामुक लग रहा था की कैसे अनीता जैसी इतनी पढ़ी लिखी, अमीर घर की शादी शुदा और बेहद खूबसूरत औरत, जिसकी जिस्म दूध जैसी गोरी और चिकनी थी, वह इस झोपडी में हरिया जैसे ग़रीब मज़दूर के पास बैठी हुयी थी, वह भी साड़ी के पल्लू के बिना अपनी बड़ी बड़ी चूँचियों की उचाई का प्रदर्शन करती हुयी वही हरिया जैसा मज़दूर बेझिजक उस अमीर और बेहद खूबसूरत औरत की चूँचियों को बेझिझक देख रहा था.

अनीता जब रामु को देखि तो वह आकर बिस्तर के तकिये के पीछे रखे टेबल पर पानी का कटोरी रखा और फिर कमरे में एक रस्सी पर टंगे हरिया का लुंगी उठाकर अनीता को दिया तो अनीता boli,"Ramu जी यह हरिया जी का लुंगी क्यों दे रहे हैं आप. कोई छोटा कपडा नहीं है क्या?"

रामु यह सुनकर आस पास देखने लगा तो हरिया bola,"Are नहीं मेमसाहेब छोटा कपडा नहीं है"

अनीता यह सुनकर अपनी बैग से रुमाल निकाल कर boli,"Achha ठीक है कोई बात नहीं. मेरे पास रुमाल है"

हरिया यह देखकर bola,"Are मेमसाहेब आप अपना रुमाल कहे इस्तेमाल"

अनीता यह सुनकर रुमाल को निकालकर हरिया के तरफ बनावटी नाराज़गी से देखती हुयी boli,"Hariya जी क्या हो जायेगा इससे, रुमाल hi तो है. आप बस चुप चाप लेते रहिये"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Achha ठीक है मेमसाहेब"

अनीता फिर हरिया के सर के पीछे रखे टेबल पर पानी के कटोरा में रुमाल भीगने के लिए थोड़ा झुकी तो उसकी चूँचियाँ ठीक हरिया के चेहरे के ऊपर कुछ इनचेस के फासले पर ब्लाउज में कैद लटक रही थी. यह देखते hi हरिया का लुंड बौखलाने लगा. रामु भी खड़ा होकर यह दृश्य देखा और उसका भी लुंड बौखलाने लगा.

हरिया का सांस अनीता की चूँचियों को ऐसे अपने चेहरे के ऊपर लटके हुए देख तेज़ होने लगा जिसे अनीता अपनी क्लीवेज पर महसूस कर पा रही थी.

अनीता बिना शर्म के वैसे हु झुककर पानी में रुमाल भीगा कर निचोड़ी और फिर सीढ़ी होकर रुमाल को हरिया के मांग पर रख दी. वह रखकर मुस्कुराकर हरिया को देखि तो हरिया भी मुस्कुराकर उसे देखकर नज़र नीचे करके उसकी चूँचियों को देखने लगा. अनीता बिना कुछ बोले रामु के तरफ देखि जो टेबल के पास खड़ा होकर उसकी चूँचियों को देख रहा था. अनीता बिना शर्म के उससे boli,"Ramu जी आप खड़े क्यों है, बैठ जाइये"

रामु यह sunnkar,"Haan मेमसाहेब" बोलकर अनीता को देखते हुए कुर्सी पर बैठ गया और साइड से अनीता की जवान खूबसूरत जिस्म को देखने लगा. साइड से उसे अनीता की चूँचियों की उचाई साफ़ साफ़ पता चल रहा था. वह एक नज़र नीचे करके अनीता की नंगी पेट और उसके बीच नाभि में लटकी हुयी बेल्ली रिंग को देखा जो हल्का चमक रहा था. फिर वह नज़र उसकी पीठ के तरफ ले गया जो उस बैकलेस ब्लाउज में लगभग पूरी नंगी थी. अनीता की इतनी खूबसूरत और गोरी चिकनी जिस्म का ऊपरी भाग को यूँ तीन चौथाई नंगा देख कर उसका खून खौलने लगा और लुंड में बेचैनी होने लगा. अनीता की ऊपरी जिस्म का सिर्फ सामने छोटी ब्लाउज में उसकी चूँचियाँ hi ढकी हुयी थी, बाकी उसके नीचे का पेट और पीछे का लगभग पूरा पीठ मिलकर तीन चौथाई जिस्म नंगी hi थी.

रामु यह देख hi रहा था की तभी अनीता हरिया के मांग से अपनी रुमाल उठाकर वापस सामने झुककर रुमाल को पानी में डालकर निचोड़ने लगी और ऐसा करते वक़्त फिर से उसकी चूँचियाँ हरिया के चेहरे के ऊपर कुछ इनचेस के फासले पर लटक गयी. हरिया उसकी चूँचियों को हवस से देखते हुए तेज़ सांस ले रहा था जिसे अनीता अपनी क्लीवेज पर महसूस कर रही थी. रामु उसकी ऊपरी जिस्म की तीन चौथाई हिस्से की नग्नता को देख रहा था.
 
अपडेट 121

अनीता अगले 10 मिनट तक वैसे hi हरिया के मांग पर गीला पट्टी करती रही. जब भी वह उसके मांग से रुमाल हटाकर पानी में गीला करने के लिए हरिया के सर के तरफ रखे टेबल पर पानी के बर्तन में डालने के लिए सामने झुकती तो उसकी छोटे ब्लाउज में कैद उसकी बड़ी बड़ी चूँचियाँ हरिया के ठीक चेहरे के ऊपर कुछ इनचेस के फासले पर hi लटक जाती जिसे हरिया पुरे हवस भरे नज़र से देखता और उसका खून गरम होने लगता. गरम खून होने के कारण उसका सांस भी तेज़ और गरम हो जाता जिसे अनीता अपनी क्लीवेज और ब्लाउज से बाहर झांकती हुयी एक तिहाई चूंकि पर महसूस करती मगर कुछ रियेक्ट नहीं करती. वह जानती थी की हरिया का सांस उसकी चूँचियों को देखकर तेज़ हो रहा था जिसके कारण उसका सांस वह महसूस कर पा रही थी मगर वह कुछ रियेक्ट नहीं कर रही थी क्यूंकि उसके लिए यह नार्मल बात थी.

ऐसा नहीं था की अनीता जान बूझकर वैसे झुक रही थी. वह जानती थी की रुमाल को भीगने के लिए उसे सामने झुकना hi पड़ेगा क्यूंकि पानी का बर्तन रखने के लिए और कोई जगह नहीं था और जैसा पोजीशन था उसके हिसाब से उसकी चूँचियाँ हरिया के चेहरे के ऊपर लटकना hi था तो इस मामले में तो कुछ किया जा नहीं सकता था.

रहा बात हरिया के सांस का तो अनीता को यह भी नार्मल लग रही थी. अगर किसी मर्द के सामने वह भी उसके चेहरे के ऊपर किसी जवान औरत की चूँचियाँ ऐसे लटकेगी तो मर्द का सांस तो तेज़ होना hi है. अनीता को इसमें कोई बुराई नहीं लग रही थी, बल्कि हरिया का मर्दानगी का साबुत लग रहा था की एक असली मर्द के तरह उसकी चूँचियों को देखकर उसका खून खौल रहा था जिसके कारण उसका सांस तेज़ हो रहा था.

अनीता को इस बात की भी ख़ुशी थी की हरिया भले hi उसकी जिस्म को हवस से देख रहा था वह भी रामु के मौजूदगी में hi और उसके मौजूदगी में आराम से उसकी नंगी कमर पर हाथ रखे उसकी जिस्म को महसूस कर रहा था मगर इसके बावजूद उसकी चूँचियों को देखकर भी अपने आपको संभाले हुए था. उसके जैसी बेशर्म औरत के लिए हरिया का यूँ उसकी चूँचियों को देखना और जिस्म पर थोड़ा हाथ रख लेना वह भी रामु के सामने जिसे वह दोनों जानते थे वह कोई सोचने की बात नहीं थी. बल्कि हरिया का यह अंदाज़ कहीं न कहीं अनीता के मैं के किसी कोने में एक इम्प्रेससिवे बात लग रही थी जिस तरीके से रामु के सामने वह एक हक़ से उसकी कमर पर हाथ फेर रहा था और खुलकर उसकी चूँचियों की उभर को देख रहा था मगर फिर भी अपने आप को संभाले हुए था.

हरिया का एहि मर्दानगी वाला अंदाज़ के कारण अनीता जब उसके सामने झुककर रुमाल को पानी में भीगा कर निचोड़ने के बाद जब सीढ़ी होती तो जब हरिया उसकी चूँचियों से नज़र हटाकर उसकी चेहरे पर देखता तो वह उसे देखकर मुस्कुराकर प्यार और कामुकता से उसके मांग पर पहले हाथ फेरकर उस पर रुमाल रख देती.

हरिया भी उसे देखकर मुस्कुराता और फिर नज़र उसकी चेहरे से नीचे करके बिना पल्लू के उसकी ब्लाउज कप पर ले जाकर उसकी चूँचियों को हवस से देखने लगता. अनीता जैसे hi देखती की हरिया उसकी चूँचियों को हवस भरे नज़र से देख रहा है तो उसकी चेहरे पर शर्म के बजाय एक गर्व का भाव आ जाता और वह प्यार से हरिया के बालों में ऊँगली फेरने लगती. वहीँ हरिया उसकी चूँचियों को हवस और भूख से देखते हुए उसकी नंगी कमर पर हाथ फेरते रहता.

वहीँ रामु भी अनीता के झुकने से साइड से कभी उसकी लटकी हुयी चूँचियों का उभर देखता तो कभी उसकी लगभग पूरी नंगी पीठ. इतनी खूबसूरत, गोरी और चिकनी जिस्म को अपने आँखों के सामने इतने नज़दीक से ऐसे कामुक पोजीशन में देखकर उसका भी लुंड में बेचैनी होने लग रहा था जिससे उसका भी सांस तेज़ चल रहा था. उसके जैसा छोटे शहर का ग़रीब मज़दूर अनीता जितनी खूबसूरत औरत को बस टीवी और मोबाइल में hi देखा था और अब ऐसे सामने देख कर उसे यक़ीन नहीं हो रहा था. हालांकि वह अनीता को पहले भी देख चूका था यहाँ तक नींद में उसकी गांड और चूंकि को कपडे के ऊपर से hi महसूस कर चूका था मगर इसके बावजूद अभी का नज़ारा बहोत hi कामुक था.

अनीता एक बार रुमाल को निचोड़ कर जब सीधा होकर हरिया को अपनी चूँचियों को हवस से देखते हुए पायी तो वह प्यार से उसकी मांग पर हाथ फेरी तो हरिया उसकी चूँचियों से नज़र ऊपर करके उसे देखा तो अनीता उसके मांग पर हाथ फेरती हुयी कामुक अंदाज़ में puchhi,"Abhi कैसे लग रहा है हरिया जी, मुझे तो थोड़ा बुखार काम लग रहा है".

यह बोलकर वह उसके मांग पर रुमाल रखने लगी तो हरिया उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए bola,"Haan मेमसाहेब बुखार थोड़ा काम हो रहा है और हुंका अच्छा महसूस हो रहा है. अब आप इतना प्यार से हमरा मांग पर पट्टी कर रही हैं तो बुखार तो ससुरा उतरना hi है. सच में मेमसाहेब आप अटना अमीर, पढ़ी लिखी और खबसूरत हैं फिर भी आप कटनी अच्छी हैं की हमरा जइसन ग़रीब का ख्याल रख रही हैं. अब भले hi आप अमीरी ग़रीबी का बात नहीं मानती लेकिन सच्चाई तो इहे है. आप जतना खबसूरत है उतना बड़ा"

फिर वह उसकी बायीं चूंकि को देखकर bola,"Dil भी है"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी उसके बालों में अपना हाथ फेरती हुई कामुक अंदाज़ में boli,"Uhmm हरिया जी घूम फिरकर आप अमीरी ग़रीबी की बात ले आते हैं या मेरी तारीफ करने लगते हैं. मैं तो बस आपके बुखार के बारे में पूछ रही हूँ और आप हैं की बात मेरे ऊपर ले आये"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता की कमर सहलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब बुखार तो हमरा काम हो hi रहा है, लेकिन ीका मतबल ी नहीं की हम सच न बोलूं. मेमसाहेब तारीफ ुका hi हॉट है जो तारीफ के लायक हॉट है. का रामु ठीक बोलत हूँ तो हम?"

रामु जो हरिया और अनीता की बात सुनते हुए अनीता की जिस्म देख रहा था वह यह सुनकर हरिया को देखकर bola,"Haan, हाँ सही बात"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर रामु को देखि तो हरिया bola,"Ab आप hi बताइये मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर हरिया को देखि तो वह वह उसकी बायीं चूंकि को देखकर bola,"Ki आपका दिल बड़ा है तो ुका बड़ा तो बोलूंगा hi न हम. सच बोलना तारीफ है तो उहे सही, लेकिन हुंका सच बोलने में कउनो झिझक नाही है"

अनीता हरिया को अपनी चूंकि को देखकर बड़ा दिल वाले बात पर अपनी चेहरे पर गर्व लाती हुयी उसके मांग से रुमाल हटती हुयी प्यार से उसपर अपनी हाथ फेरकर कामुक अंदाज़ में boli,"Haan हरिया जी सच बोलने में कैसी झिझक. एहि बात आपकी तो ख़ास है हरिया जी की आपको जो सही लगता है वह बोलते हैं और करते हैं".

अनीता फिर झुककर रुमाल को भीगने लगी जिससे उसकी चूंकि फिर से हरिया के चेहरे के ऊपर लटक गयी और अनीता रुमाल को भीगती हुयी बोलना जारी rakhi,"Chaliye काम से काम आज मेमसाहेब की अमीरी के अलावा आपको कुछ और तो दिखा, काम से काम आप देख तो पा रहे हैं हरिया जी को मेमसाहेब के पास सिर्फ पैसे नहीं दिल भी है. मुझे ख़ुशी है हरिया जी की आप मेरा दिल देख पा रहे हैं"

हरिया अपने चेहरे के ऊपर लटकी हुयी छोटी ब्लाउज कप में कैद अनीता की चूँचियों को देखते हुए तेज़ सांस छोड़ते हुए उसकी कमर सहलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब कहे नहीं देखेंगे आपका बड़ा दिल? आप अपना बड़ा दिल दिखने वाला काम कीजियेगा तो हम तो देखूंगा hi आपका बड़ा दिल"

अनीता यह सुनकर रुमाल को निचोड़ कर सीधा होती हुयी मुस्कुराकर हरिया को देखती हुयी प्यार से उसके मांग पर हाथ फेरी तो हरिया bola,"Aap हमरा ख्याल रखकर तो दिखा रही हैं की आपका दिल काटना बड़ा है तो हुंका तो दिखेगा hi"

यह बोलकर हरिया वापस उसकी चूँचियों को देखने लगा. हरिया को वापस अपनी चूँचियों को देखते हुए देख अनीता बेशर्मी से मुस्कुरा कर उसके मांग पर रुमाल रखकर कामुक अंदाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी आप और आपकी बातें उफ़"

हरिया यह सुनकर हसने laga,"Hahaha" तो अनीता भी मुस्कुरा दी. रामु यह देखकर मुस्कुराने लगा तो हरिया उससे puchha,"Ka रे रामु तुमका नहीं लागत है की मेमसाहेब का दिल बड़ा है?"

अनीता मुस्कुराती हुयी अपनी आँखें बड़ी करके हरिया को देखकर boli,"Haan मेमसाहेब का दिल तो बड़ा है hi तभी तो हम ग़रीब लोगन के साथ इतना अच्छा से पेश आती है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Offo रामु जी फिर से अमीर ग़रीब की बात".

हरिया यह सुनकर है diya,"Hahaha" तो अनीता भी खिलखिलाने lagi,"Hehehe". अनीता के खिलखिलाने से उसकी चूँचियाँ ऊपर नीचे होकर हिलने लगी. ऐसा होते hi हरिया और रामु दोनों का नज़र अनीता जी चूँचियों पर चला गया. अनीता देखि की हरिया उसकी हिलती हुयी चूँचियों को खुलकर देख रहा है. अनीता अगले पल रामु के तरफ देखि तो उसे भी अपनी हिलती हुयी चूँचियों को देखते हुए पायी. यह देखकर अनीता की बदन में एक अजीब सा मज़ा का लेहेर दौड़ने लगा.

अनीता रामु को देख hi रही थी की हरिया उसकी कमर सहलाते हुए हस्ते हुए bola,"Memsaheb रामु भी आपका बड़ा दिल देखत है"

अनीता यह सुनकर अपनी आँखें बड़ी करके हरिया जो देखती हुयी खिलखिलाती हुयी boli,"Hariya जी?"

और फिर वह रामु के तरफ देखि तब तक रामु हरिया का बात सुनकर अनीता की चूंकि से नज़र हटा चूका था. अनीता जब हस्ती हुयी देखि तो रामु उसे देखकर हल्का मुस्कुरा दिया. अनीता खिलखिलाती हुयी उसे देखने के बाद हरिया को देखकर उसके मांग से रुमाल हटती हुयी प्यार से उसके मांग पर हाथ फेरती हुयी boli,"Ab आप रामु जी से मेरे बड़े दिल के बारे में पूछेंगे तो वह तो देखेंगे hi न हेहेहे".

अनीता यह बोलकर खिलखिलाती हुयी फिर से रुमाल लेकर सामने के तरफ झुकी जिससे उसकी हिलती चूँचियाँ हरिया के चेहरे के ऊपर हो गयी. अनीता को यह भी ख्याल नहीं था की हसने से उसकी चूँचियाँ हिल रही है तो वह थोड़ा रुक कर चूँचियों का हिलना बांध होने पर झुके. ख्याल रहता भी कैसे उसे तो इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा था की वह दो ग़ैर मर्द के सामने एक बांध कमरे में पल्लू के बगैर एक छोटी सी बैकलेस ब्लाउज में बैठी हुयी थी और उसकी चूँचियों को दोनों खुलकर देख रहे हैं. तो फिर उसे क्या hi फ़र्क़ पड़ता की उसकी चूँचियाँ थोड़ी हिल रही है. उसकी चेहरे पर ज़रा सा भी शर्म नहीं थी, बल्कि उसे तो एक अलग hi मज़ा मिल रहा था जो उसे अपने एक वाले कमरे में अकेले बैठकर नहीं मिलता.

अनीता खिलखिलाती हुयी झुककर रुमाल को गिला करती हुयी गर्दन घुमाकर रामु को देखती हुयी boli,"Hehehe है न रामु ji?hehehe"

अनीता जब रामु के तरफ घूमी तो उसे अपनी हिलती हुयी चूँचियों को देखते हुए पायी मगर बिना शर्म के वह उससे वह बात बोली. अनीता की बात सुनकर रामु उसकी चूँचियों से नज़र हटाया तो अनीता बेशर्मी से खिलखिलाती हुयी उसे देखि. अनीता को ऐसे खिलखिलाते देख रामु भी हल्का मुस्कुरा दिया.

अनीता रुमाल को गीला करके निचोड़तो हुयी रामु को देखकर बोलना जारी rakhi,"Ramu जी आप बोर तो नहीं हो रहे हैं? आप भी सोच रहे होंगे की मेमसाहेब सिर्फ हरिया जी का ख्याल रख रही है और आप बैठे बैठे बोर हो रहे हैं हेहेहे"

अनीता की बात सुनकर रामु थोड़ा शर्मिंदा होते हुए मगर मुस्कुरा कर bola,"Are नहीं मेमसाहेब आसान कउनो बात नहीं. हरिया तो बीमार है तो आप उसका ख्याल रख रही हैं"

अनीता खिलखिलाती हुयी रुमाल को हरिया के मांग पर रखती हुयी रामु को देखि तो उसे अपनी जिस्म पर देखते हुए पायी. तभी हरिया bola,"Are मेमसाहेब जब आप हैं इहाँ तो ससुरा कहे बोर होगा?"

अनीता यह सुनकर फिर से अपनी आँखें बड़ी करके हरिया को देखती हुयी boli,"Hariya जी?" और बेशर्मी से खिलखिलाने lagi,"Hehehe" और खिलखिलाती हुयी रामु को देखि तो उसे अपनी हिलती हुयी चूँचियों को देखते पायी. रामु अनीता की नज़र को भांप कर उसकी चूँचियों से नज़र हटाकर उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता बेशर्मी से खिलखिलाती हुयी puchhi,"Hehehe सच सच बताइये रामु जी अच्छा लग रहा है न आपको? आप बोर नहीं हो रहे हैं न?"

रामु इस बार अनीता को देखते हुए मुस्कुरा कर bola,"Are नहीं मेमसाहेब अटना हसी मज़ाक चल रहा है तो कइसन बोरियत. सच बताये मेमसाहेब तो आपको ऐसे हस्ता देखकर हुंका बहोत अच्छा लग रहा है की आज के ज़माने में आप के जइसन भी लोग है जो अमीरी ग़रीबी से ज़्यादा इंसानियत देखते हैं".

अनीता कुछ बोलती इससे पहले हरिया bola,"Are इसलिए तो हम बोलत हूँ की मेमसाहेब का दिल बहोत बड़ा है, बस मेमसाहेब का दिल देखने के लिए नज़र चाहिए"

अनीता यह सुनकर अपनी आँखें बड़ी करके हरिया को देखकर boli,"Hariya जी" तो हरिया हसने लगा. अनीता भी उसे देखकर हसने लगी तो फिर से उसकी चूँचियाँ हिलने लगी. हरिया अनीता की हिलती हुयी चूँचियों को देखने लगा तो अनीता उसके सर के बाल में उँगलियाँ फेरती हुयी खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe हरिया जी" और फिर वह रामु को एक नज़र देखि तो उसे भी अपनी चूँचियों को देखते हुए पायी तो हरिया हस्ते हुए bola,"Ab तो रामु भी आपका बड़ा दिल देख सकत है"

रामु यह सुनकर अनीता की चूँचियों से नज़र हटाकर उसकी चेहरे पर देखा तो वह बेशर्मी से खिलखिलाती रही और बिना कुछ बोले हरिया को देखकर boli,"Hehehe हरिया जी रामु जी भी समझ रहे हैं की अमीरी ग़रीबी से ऊपर भी कोई चीज़ होती है और वह है इंसानियत और इंसान का दिल इसलिए अब वह भी मेरा दिल देख रहे हैं हेहेहे"

अनीता को ऐसे बेशर्मी से खिलखिलाते देख हरिया भी हसने लगा और नज़र नीचे करके अनीता की हिलती हुयी चूँचियों को देखने लगा वहीँ रामु भी मुस्कुराते हुए अनीता की हिलती हुयी चूँचियों को देखने लगा.

अनीता खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe ओह माय गॉड हरिया जी सच में आप और रामु जी के साथ होने पर हसी मज़ाक हो जाती है और हसी रूकती hi नहीं है हेहेहे".

इतने में अनीता के मोबाइल पर कोई कॉल आया. अनीता बैग से निकल कर उसके स्क्रीन देखि तो प्रमोशनल कॉल था. अनीता कॉल को डिक्लाइन कर दी और टाइम देखती हुयी boli,"Achha हरिया जी मुझे देर हो रही है. अब मुझे जाना होगा".

हरिया भी समझ गया की शाम हो गया है और अनीता के पति का आने का टाइम होने जा रहा है उससे पहले उसे घर पहुंचना होगा. वह एक नज़र अनीता की चूंकि को देखकर उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता मुस्कुराकर उसके मांग से रुमाल हटाकर प्यार से उसे सहलाती हुयी boli,"Aapka बुखार भी पहले से काम हो गया है"

हरिया यह सुनकर उसकी कमर सहलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब आप अटना प्यार से गीला पट्टी की हैं तो उतरना hi था"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई और अपनी बैग में मोबाइल रखकर 500 का नोट निकल कर उसे देती हुयी boli,"Yeh एक थर्मामीटर खरीद लीजियेगा और बुखार चेक करते रहिएगा आप"

हरिया यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब ीका का ज़रूरत है, हम ी नहीं ले सकते. हम कउनो इंतज़ाम कर लूंगा"

अनीता यह सुनकर हरिया को देखकर थोड़ा नाराज़गी जताती हुयी boli,"Hariya जी यह क्या बात हुयी? मेमसाहेब मेमसाहेब करते रहते हैं आप और मेमसाहेब से कुछ लेना नहीं चाहते हैं?"

हरिया यह सुनकर उसकी कमर सहलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब जॉन चीज़ का ज़रूरत है ु कभी दीजियेगा तो हम ज़रूर लूंगा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुरा कर boli,"Hariya जी ज़रूरत का चीज़ तो मैं दूंगी hi आपको, लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं की और कुछ दूंगी तो आप नहीं लेंगे. अब आप लीजिये इसे"

हरिया यह सुनकर bola,"Theek है मेमसाहेब रामु को दे दीजिये ी लेते आएगा".

अनीता यह सुनकर पैसे रामु को दे दी तो हरिया bola,"Ramu मेमसाहेब को लेट हो रहा है. तुम जाकर रिक्क्षा का सीट साफ़ करो तब तक मेमसाहेब अपना साड़ी ठीक करके आती है"

रामु समझ गया की अनीता अपनी पल्लू ठीक करके आएगी तो वह एक नज़र अनीता को देखा तो अनीता मुस्कुरा कर boli,"Aap चलिए रामु जी मैं यह पल्लू थोड़ा ठीक करके आती हूँ"

रामु सर हिलाकर बाहर चला गया. अनीता उसे जाते देखने लगी की इतने में उसे अपनी ब्लाउज के ऊपर से हरिया का हाथ अपनी चूंकि पर महसूस हुयी. अनीता कुछ रियेक्ट नहीं की बस रामु को जाते देखि और जब वह दरवाज़े से बाहर चला गया तो अनीता हरिया को देखि तो हरिया उसकी चेहरे को देखने के बाद उसकी चूँचियों को हवस और भूख भरे नज़र से देखते हुए उसकी चूंकि को मसला तो अनीता प्यार से उसके मांग पर हाथ फेरती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Chalti हूँ हरिया जी. अपना ख्याल रखियेगा और बुखार चेक करते रहिएगा"

हरिया अनीता की हाथ पकड़ कर अपने लुंगी के ऊपर से लुंड पर रखकर bola,"Haan मेमसाहेब ु बुखार तो ठीक हो जायेगा मगर ी हमार लौड़ा को जो बुखार लगा है ु तो आपको छोड़ने के बाद hi उतरेगा"

हरिया का लुंड का सख्ती और फिर चुदाई की बात सुनकर अनीता की धड़कन और सांस तेज़ हो गयी मगर उसे न hi शर्म आयी न hi कोई आपत्ति हुई. वह अपनी सांस काबू करने के लिए एक गहरी सांस ली तो उसकी चूँचियाँ ऊपर के तरफ उठ गयी जिसे हरिया हवस और भूख से देखने लगा और उसका लुंड थोड़ा हिल गया. अनीता अपनी सांस काबू करती हुयी उसके लुंड को लुंगी के ऊपर से hi ऊपर नीचे करती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी कितना बौखलाया हुआ है आपका हथियार"

हरिया यह सुनकर अनीता की जिस्म को देखते हुए उसकी चूंकि को मसलते हुए bola,"Are मेमसाहेब आप का ी जवानी, ी गोरा चिकना बदन देखकर कौन ससुरा मरद का लौड़ा नहीं बौखलायेगा".

फिर वह अनीता की दोनों चूँचियों पर हाथ रखकर दोनों को एक साथ मसलते हुए bola,"Aur ऊपर से जब आप अपना ी दोनों बड़ा बड़ा चूंकि को ऐसे हमार चेहरा के ऊपर लटकाये रखियेगा तो हमार लौड़ा तो बौखलायेगा hi न. ससुरा हमार तो मैं कर रहा था की आपका ब्लाउज पहाड़ कर ससुरा कच्चा चबा जाये आपके चूंकि को"

अनीता की चेहरे पर एक गर्व की भावना आ गयी यह सुनकर और बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी उसके लुंड को लुंगी के ऊपर से पकड़ कर हिलती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी वह तो जबसे मैं आयी हूँ देख hi रही हूँ की आप कितने प्यासे हैं इन दोनों के लिए और खासकर जब मैं रुमाल भीगने के लिए झुक रही थी तो आपकी साँसे महसूस करके ऐसा लग रहा था जैसे किसी मांस के भूखे शेर के सामने झुकी हूँ. अगली बार जब मौक़ा मिलेगा तो चबा जाइएगा हरिया जी. जब आप जैसे मर्द साथ हो तो"

फिर अनीता आँखों के कोने से अपनी चूँचियों को तरफ इशारा करती हुयी boli,"Iski जगह यहाँ नहीं" फिर वह हरिया के होंठों पर अपना ऊँगली रखकर रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Yahan होनी चाहिए"

हरिया यह सुनकर अनीता की चूँचियों को हवस भरे नज़र से देखा तो अनीता boli,"Chalti हूँ हरिया जी. अपना ख्याल रखियेगा"

हरिया यह सुनकर "हाँ" में सर हिलाया तो अनीता उठकर अपनी पल्लू को पकड़ कर कंधे पर दाल ली और जाने लगी तो हरिया उसकी गांड की बायीं भाग पर थप्पड़ जड़ दिया. अनीता कामुक ऐडा में "आउच" करके घूमकर हरिया को देखि तो वह मुस्कुरा दिया. अनीता नाराज़गी से उसे देखि तो हरिया उसकी गांड की बायीं भाग को पकड़ कर मसलते हुए bola,"uff मेमसाहेब का मस्त गांड है आपका".

अनीता यह सुनकर नाराज़गी से boli,"Bas एहि है?" और फिर अपनी गांड की दायी भाग पर आँखों से इशारा करती हुयी boli,"Aur इसका क्या?"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता अपनी गांड को थोड़ा सा उसके तरफ उभर दी. हरिया अगले पल जोरदार थप्पड़ अनीता की दायी गांड पर जड़ दिया. अनीता की मुंह से सिसकारी निकल gayi,"ouch सीई".

हरिया उसकी गांड को सहलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब आपकी पूरी गांड मस्त है".

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराई और गांड मटकती हुयी चलने लगी तो हरिया धीरे से गाने laga,"Tohri गांड बड़ी है मस्त मस्त मस्त तोहरी गांड बड़ी है मस्त"

हरिया जब गाना शुरू किया तो अनीता घूमकर अपनी आँखें बड़ी करके उसे देखि तो वह मुस्कुरा दिया. अनीता अपनी चेहरे पर गर्व का भाव लाकर आँखों से अपनी गांड के तरफ इशारा करके गांड मटकती हुयी चलने लगी और हरिया गाना गेट रहा. दरवाज़े के पास जाकर अनीता हरिया को घूम काट देखि तो हरिया उसे देखने लगा. अनीता अपनी आँखों से अपनी गांड के तरफ इशारा करके झुक गयी और गांड हिलना लगी. हरिया उसे देखकर अपना लुंगी का गाँठ खोलने लगा तो अनीता बेशर्मी से उसके लुंड के उभर को देखती हुयी आँखों से उसके तरफ इशारा करके अपनी गांड के तरफ इशारा की. हरिया अपना लुंड नंगा करके उसे दिखाया तो अनीता की सांस तेज़ हो गयी मगर वह सांस काबू करती हुयी बेशर्मी से उसके लुंड के तरफ इशारा करके अपनी गांड के तरफ इशारा की तो हरिया अपना लुंड पकड़ दये हाथ से मुट्ठी बनाकर उसे छोड़ने का इशारा किया तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुरा दी और फिर सीढ़ी कड़ी होकर गांड मटकती हुयी बाहर निकल गयी.

बाहर गयी तो देखि की रामु रिक्शा के पास खड़ा था. अनीता उसके पास गयी और फिर रिक्शा चढ़ने लगी तो रामु उसके तरफ हाथ बढ़ाया. अनीता अपनी बायीं हाथ से उसका हाथ और दायी हाथ से रिक्शा पकड़ कर चढ़ने लगी तो उसकी पल्लू गिर कर उसकी बायीं हाथ पर अटक गयी. अनीता अपनी पल्लू का फ़िक़र किये बग़ैर चुप चाप रिक्शा में बैठकर रामु जो उसकी क्लीवेज देख रहा था उसके तरफ देखकर मुस्कुराकर "थैंक यू रामु जी" बोली तो रामु उसकी चेहरे पर देखा. अनीता मुस्कुराती हुयी उसे देखकर अपनी पल्लू कंधे पर दाल ली. रामु मुस्कुराकर उसे देखकर puchha,"Are थेंकु का का बात है मेमसाहेब. आप आराम से बैठ गयी तो?"

अनीता मुस्कुराकर "हाँ रामु जी" बोली तो रामु सामने ड्राइवर सीट पर बैठ गया और आइना को थोड़ा ऐसे सेट किया की उसमे अनीता की चेहरा और चूँचियाँ दोनों दिखे. सेट करने पर अनीता की चूँचियों को आईने में देखने के बाद नज़र ऊपर किया तो अनीता को आईने में देखते हुए पाया. अनीता उसे देखकर बेशर्मी से मुस्कुरा दी. रामु भी हल्का मुस्कुराया और रिक्शा चलने लगा. अनीता आस पास देखने लगी. थोड़ा चलने के बाद उसकी पल्लू कंधे से सदाकने लगी तो वह उसे पकड़ कर ठीक से कंधे पर एडजस्ट कर ली. थोड़ा आगे जाने के बाद फिर से उसकी पल्लू सदाकने लगी तो अनीता उसे पकड़ कर कंधे पर एडजस्ट कर ली.

थोड़ा आगे जाने के बाद ख़राब रोड शुरू हुआ तो अनीता रिक्शा को पकड़ ली जिसके बाद उसकी पल्लू कंधे से सड़क कर साइड में गिर गयी. अनीता उसे पकड़ कर उठाकर कंधे पर डालने लगी तो आईने में रामु उसकी चूँचियों को देखते हुए दिखाई दिया. अनीता के आईने में देखने पर रामु उसे देखकर मुस्कुराया तो अनीता भी मुस्कुराती हुयी अपनी पल्लू कंधे पर दाल ली और आस पास देखने लगी.

कुछ सेकण्ड्स बाद फिर से उसकी पल्लू सड़क गयी तो अनीता उसे देखि और फिर आईने में नज़र गया तो देखि की रामु उसकी चूँचियों को देख रहा था. अनीता के देखने पर रामु मुस्कुराया तो अनीता भी मुस्कुराती हुयी उसे देखती हुयी कंधे पर पल्लू दाल ली.

रामु यह देखकर bola,"Memsaheb माफ़ कीजियेगा. ी परेशानी हमरे वजह से हो रहा है आपको. हमरा वजह से पिन टूट गवा आपका"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Ramu जी अब जो हो गया सो हो गया. कोई बात नहीं, आपको माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं है"

अनीता इतना बोली थी की उसकी पल्लू फिर से सड़क गयी. अनीता यह देखकर उसे पकड़ कर आईने में रामु को देखती हुयी अपनी कंधे पर दाल ली और डालकर जैसे hi हाथ वहां से हटाकर एक झटके से बचने के लिए रिक्शा पकड़ी तो उसकी पल्लू फिर से गिर गयी.

रामु यह देखकर bola,"Memsaheb एक तो आपकी बदन इतनी चिकनी है ऊपर से यह साड़ी भी चिकना है, बिना पिन का टिकेगा नहीं"

अनीता यह सुनकर आईने में रामु को देखकर पल्लू उठाकर कंधे पर डालती हुयी मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी आप तो देख hi रहे हैं की मुश्किल हो रही है"

अनीता इतना बोलकर अपना हाथ वापस रिक्शा पकड़ने के लिए कंधे से हटाओ की तभी उसकी पल्लू फिर से कंधे से सड़क कर नीचे गिर गयी. ऐसा होते hi रामु उसकी चूँचियों से नज़र हटाकर उसकी चेहरे पर देखते हुए bola,"Dekhiye फिर से फिसल गवा"

अनीता बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी boli,"Haan रामु जी वही तो देख रही हूँ"

रामु यह सुनकर उसकी चूँचियों को देखने लगा जिसे अनीता आईने में देखि और देखती हुयी पल्लू उठाकर कंधे पर डालने लगी तो रामु bola,"Memsaheb रहने दीजिये न. कहे बेवजह का आप परेशान हो रही हैं. रोड ख़राब है, आप अपने आप को सम्भालिये. आपको चोट लग जायेगा तो हुंका अच्छा नहीं लगेगा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर कंधे से हाथ हटाकर रिक्शा पकड़ती हुयी boli,"Offo रामु जी हरिया जी की तरह आपको भी कितनी चिंता है मेमसाहेब की? मेमसाहेब को थोड़ा भी परेशानी में आपलोग नहीं देख सकते hain.Hai न? " और इतना बोलते hi उसकी पल्लू नीचे उसकी गॉड और सीट पर गिर गयी.

अनीता छोटी ब्लाउज कप में कैद ऊपर नीचे होती अपनी चूँचियों को रामु को देखते हुए देख puchhi,"Ab ठीक है तो रामु जी?"

रामु यह सुनकर आईने में अनीता को देखा तो वह कामुक अंदाज़ में puchhi,"Dekhkar बताइये न रामु जी अब ठीक है तो?"
 
अपडेट 122

यह सुनकर रामु के लुंड में एक बेचैनी आ गया. उसके बूढ़े बदन में एक जोश आ गया. वह अनीता की चूँचियों की उभर को ऊपर नीचे होते देखकर bola,"Ek दम सही है मेमसाहेब, अब आपको बार बार परेशां नहीं होना पड़ेगा और आप आराम से बैठ पाइयेगा"

रामु यह बोलकर आईने में अनीता को देखा तो वह मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी. अब तो आपको भी देखकर अच्छा लग रहा होगा की मुझे कोई परेशानी नहीं हो रही है".

रामु यह सुनकर मुस्कुराते हुए आईने में ऊपर नीचे होती उसकी चूँचियाँ को देखकर bola,"Haan मेमसाहेब देखकर अच्छा लग रहा है".

वह वापस नज़र ऊपर करके अनीता को देखा तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुरा दी तो रामु भी मुस्कुरा दिया और नज़र नीचे करके वापस उसकी चूँचियों को देखने लगा.

अनीता रामु के नज़र को वापस अपनी चूँचियों पर जाते देख चुप चाप बैठी हुयी आस पास देखने लगी. उसकी दोनों चूँचियों का ब्लाउज कप साफ़ साफ़ दिख रही थी क्यूंकि पल्लू नीचे गिरी हुयी थी और दोनों छोटे ब्लाउज कप में उसकी बड़ी चूँचियाँ हिल रही थी.

आगे चलकर थोड़ा रोड और ख़राब मिला तो रिक्शा जर्क करने लगा और अनीता की चूँचियाँ लगातार ऊपर नीचे होने लगी. रामु उसकी चूँचियों को देखते हुए bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब रोड ख़राब है"

अनीता यह सुनकर boli,"Are रामु जी कोई बात नहीं, रोड hi वैसा है तो क्या किया जा सकता है"

अगले कुछ सेकण्ड्स रोड बेहद ख़राब थी तो अनीता की दोनों चूँचियाँ लगातार ऊपर नीचे और दये बाये हो रही थी. रामु बार बार अनीता की दोनों चूँचियाँ हिलते हुए देख रहा था और अनीता भी आईने में अपनी हिलती हुयी चूँचियाँ और उसपर रामु का नज़र देख रही थी.

एक बार अचानक से थोड़ा रिक्शा ज़्यादा झटका मारा तो अनीता की चूँचियाँ ऊपर नीचे होने लगी और वह मुस्कुराती हुयी boli,"Ohh माय गॉड यह रास्ता भी न"

रामु यह सुनकर उसकी चूँचियाँ देखकर puchha,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब"

अनीता उसे देखकर boli,"Are रामु जी आप माफ़ी क्यों मांग रहे हैं. अब रास्ता hi ऐसा है तो क्या किया जा सकता है"

रामु यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब लेकिन आपको परेशानी हो रही क्या?"

अनीता को यह झूला जैसा महसूस हो रही थी तो उसकी चेहरे पर थोड़ी मुस्कराहट थी और वह रिक्शा में हिलती हुयी boli,"Nahin रामु जी ठीक है"

रामु अगले पल उसकी चूँचियों को देखते हुए bola,"Humaar मतबल है की" फिर वह अनीता की हिलती चूँचियों को आईने में देखकर आँखों से आईने में इशारा करते हुए bola,"Isse कउनो परेशानी तो नहीं हो रही है आपको"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क गयी. रामु भले hi उसकी चूँचियों को हिलते हुए लगातार देख रहा था मगर उसका यूँ उसके तरफ इशारा करना उसके लिए भी अनएक्सपेक्टेड था जिससे उसकी दिल धड़क गयी मगर उसे शर्म नहीं आयी. वह अपने धड़कते दिल को काबू में करती हुयी बेशर्मी से रामु को देखती हुयी boli,"Ramu जी आप भी कैसी बातें कर रहे हैं?"

अनीता की यह बात सुनकर रामु का दिल थोड़ा धड़क गया मगर अगले पल उसे राहत मिलने के साथ साथ उसके लुंड में हलचल हुआ जब

अनीता बात को जारी रखती हुयी बेशर्मी से अपनी आँखों से अपनी चूँचियों के तरफ इशारा करती हुयी boli,"isse क्या परेशानी होगी मुझे".

अनीता को ऐसे बेशर्मी से अपनी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करके बोलते हुए देख रामु के बूढ़े जिस्म में एक अलग hi जोश आ गया और उसे हिम्मत मिला और वह जवाब में अनीता की चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करके आगे bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब, हमार मतबल था की यह इतने हिल रहे हैं तो आपको परेशानी तो नहीं हो रहा न"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क गयी मगर वह बिना शर्म के रामु को देखती हुयी अपनी धड़कते दिल से boli,"Nahin रामु जी इसमें परेशानी की कोई बात नहीं है. रोड इतना ख़राब है की ऐसे लग रहा है जैसे मैं झूला झूल रही हूँ. ऐसे में बदन के साथ"

फिर अनीता आँखों से आईने में hi अपनी हिलती चूँचियों के तरफ इशारा करती हुयी boli,"yeh भी तो हिलेंगे न"

रामु यह सुनकर उसकी चूँचियों के तरफ देखते हुए bola,"Haan मेमसाहेब ससुरा रोड ख़राब है और ऊपर से आपका इतना बड़ा बड़ा है तो और ज़्यादा हिल रहा है"

अनीता यह सुनकर आँखें बड़ी करके रामु को आईने में देखती हुयी बेशर्मी से मुस्कुराकर boli,"Ramu जी?"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर उसे देखने लगा तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी अपनी सर हिलने लगी जैसे आश्चर्य होकर कोई हिलता है.

रामु यह देखकर bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब अगर हम कुछो ग़लत बोल दिए तो. वह हुंका लगा की आपको परेशानी हो रहा होगा इसलिए बोले"

अनीता यह सुनकर आईने में रामु को देखकर boli,"Are रामु जी इसमें माफ़ी मांगने की क्या बात है? आप जो देख रहे हैं वही बोल रहे हैं. मुझे तो उल्टा ख़ुशी है रामु जी की आप सिर्फ रिक्शा चलने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं बल्कि इस बात का भी ख्याल रख रहे हैं की मुझे कोई परेशानी न हो"

अनीता की बात सुनकर रामु को अच्छा लगा और उसके लुंड में बेचैनी बढ़ने लगा. उसके मर्दानगी में कहीं न कहीं जोश आने लगा था. वह एक नज़र वापस अनीता की ऊपर नीचे और दाए बाये हिलती हुयी चूँचियों को देखते हुए bola,"Haan मेमसाहेब"

रामु को अपनी चूँचियों को देखते देखती अगले पल अनीता कामुक अंदाज़ में puchhi,"Aese आपको बड़े बड़े अच्छे नहीं लगते हैं क्या रामु जी?"

रामु का लुंड यह सुनकर तन तना गया और वह नज़र उसकी चूँचियों से ऊपर करके उसे देखा. अगले पल अनीता जो बोली उसका लुंड धोती में झटका मरने लगा. अनीता आईने में उसके आँखों में देखती हुयी आईने में hi आँखों से अपनी चूँचियों के तरफ इशारा करती हुयी boli,"Dekhkar बताइये न रामु जी अच्छे नहीं लग रहे हैं क्या?"

अनीता जैसी अमीर, पढ़ी लिखी और बेहद खूबसूरत और जवान औरत को ऐसे बेशर्मी से अपनी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करके उसे देखने का निमंत्रण सुनकर रामु के बूढ़े बदन में एक अलग hi जोश आ गया और यह जोश उसके बदन के खून को उसके लुंड के तरफ ले जाकर उसके लुंड को जगा रहा था. रामु के अंदर इस उम्र में अब फिर से एक जोश और आत्मविश्वास आने लगा था.

रामु अनीता की बात सुनकर आईने में उसकी आँखों में देखा तो अनीता अपनी आँखों से अपनी चूँचियों के तरफ इशारा की तो रामु अपना नज़र उसकी चूँचियों के तरफ ले गया. अनीता की चूँचियाँ ऊपर नीचे हो रही थी जिसे रामु देख रहा था. अनीता को अच्छा लगा जब रामु उसकी चूँचियों को देखने लगा तो.

अनीता को रामु का खुलकर उसकी चूँचियाँ देखना और हिम्मत से यह पूछना की उसकी चूँचियाँ हिलने के कारण उसे कोई परेशानी तो नहीं हो रही है अच्छा लगा. उसे अच्छा लगा यह जानकार की रामु सिर्फ उसकी चूँचियों को देख नहीं रहा था बल्कि उसे चिंता भी थी की कहीं जोर से चूँचियों के हिलने से उसे दर्द या परेशानी तो नहीं हो रही है. अनीता को यह मर्दानगी का निशानी लगा. उसके नज़र में रामु भी एक दुमदार मर्द का मर्तबा पाने लगा था, जिसके पास एक बड़ा लुंड hi नहीं था बल्कि उसके जैसी जवान और खूबसूरत औरत को ऐसे खुलकर देखने का हिम्मत भी था. अब ऐसे में जब एक दुमदार मर्द उसकी चूँचियों को ऐसे देख रहा हो तो अनीता जैसी खुले विचार की बेशर्म औरत को अच्छा कैसे नहीं लगता.

हालाँकि अनीता के अंदर रान्दीपना, बेशर्मी और बेहयाई कूट कूट कर भरा था और एहि रान्दीपना, बेशर्मी और बेहयाई वह अभी दिखा रही थी जिसका नतीजा था की वह ऐसे अपनी चूँचियों के विषय में बेझिझक बात कर रही थी और रामु को उसे देखने के लिए बोल रही थी, लेकिन वह इसलिए क्यूंकि बातों का विषय उसकी चूँचियाँ थी, न की इसलिए क्यूंकि अनीता चाहती थी की रामु उसकी चूँचियाँ देखे. अगर रामु यूँ खुलकर उसकी चूँचियों को नहीं देखता या उसके बारे में बात नहीं करता तो अनीता को फ़र्क़ नहीं पड़ता और वह खुद से ऐसा कोशिश नहीं करती की रामु का ध्यान अपनी चूँचियाँ पर लाये.

यह तो रामु का हिम्मत और मर्दानगी था की वह उसकी चूँचियों को खुलकर हिलते हुए देख रहा था और उसके बारे में बात भी कर रहा था, इसलिए रामु का यूँ उसकी बड़ी बड़ी चूँचियों को हिलते हुए देखने पर उसे कोई ऐतराज़ नहीं था. वह जान रही थी की रामु जैसा मर्द को उसकी चूँचियाँ देखने का मैं करेगा hi तो वह तो देखेगा hi, उसमे कोई ग़लत बात नहीं है और रही बात रामु के आँखों में अपनी जिस्म के लिए हवस देखने की तो अनीता को यह भी प्राकृतिक बात लग रही थी की एक दुमदार मर्द होने के नाते रामु के आँखों में उसकी जैसी जवान और खूबसूरत औरत के जिस्म के लिए हवस तो होगा hi. अनीता को इससे भी कोई ऐतराज़ नहीं था बल्कि उसे अपनी जवानी और ख़ूबसूरती पर गर्व हो रही थी की रामु जैसा मर्द जो लगभग 50 साल का होगा उसका खून उसकी जवानी और ख़ूबसूरती देखकर गरम हो रहा है और उसे रामु का यूँ अब खुलकर उसकी जिस्म को देखना उसके असली मर्दानगी का निशान लग रहा था.

हालाँकि अनीता जान बुझ कर यह सब नहीं कर रही थी मगर जो भी हो रहा था उससे उसे कोई ऐतराज़ नहीं था और प्रकृति के नियम के अनुसार यह सब बातें और रामु का यूँ उसकी जिस्म को ऐसे देखने से उसे मज़ा मिल hi रही थी जिसके कारण वह और खुलकर रामु के साथ बात चित कर रही थी और उसे अपनी चूँचियों को देखने के लिए निमंत्रण दे रही थी की अगर रामु हिम्मत और मर्दानगी दिखा कर उसकी चूँचियों के साइज के बारे में बात कर hi रहा था तो क्यों न उससे खुलकर वह भी पूछ ले की उसके जैसे मर्द को उसकी चूँचियाँ कहीं हद्द से ज़्यादा बड़ी तो नहीं लग रही थी.

अनीता के कहने पर रामु उसकी चूँचियों को देख रहा था तभी अनीता की चूँचियाँ एक बार फिर हिलने लगी तो रामु नज़र उठाकर अनीता को देखकर मुस्कुराने लगा. अनीता भी बेशर्मी से मुस्कुराकर उसे देखती हुयी फिर से puchhi,"Aapko अच्छा नहीं लग रहा है क्या रामु जी?"

रामु यह सुनकर अनीता की आँखों में देखकर bola,"Are मेमसाहेब कइसन बात करात हैं आप"

फिर वह उसकी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करते हुए bola,"Eka देखकर हुंका कैसे अच्छा नहीं लगेगा"

यह सुनकर अनीता की चेहरे पर एक गर्व की भाव आ गयी थी. वह बेशर्मी से अपनी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करती हुयी puchhi,"Zyada बड़े तो नहीं है न, मेरा मतलब है की कुछ ज़्यादा हिल रहे हैं क्या?"

रामु यह सुनकर उसकी चूँचियों को देखकर bola,"Are नहीं मेमसाहेब, एकदम सही है आपका, जितना बड़ा होना चाहिए उतना hi है"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से boli,"Lekin फिर भी रामु जी देखिये न कितने हिल रहे हैं, इतने हिलते हुए अच्छे लग रहे हैं क्या?"

रामु अनीता की चूँचियों को देखते हुए bola,"Are मेमसाहेब ी हिलते हुए तो और अच्छा लग रहा है. और सच बताये तो ी तो आपकी ख़बसूरती को और बढ़ा देता है"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराकर boli,"Ramu जी अब मेरी तारीफ मत करने लगिएगा"

अनीता यह बोलकर खिलखिलाने lagi,"Hehehe आप और हरिया जी घूम फिरकर कोई भी बात मेरी तारीफ पर hi ले आते हैं हेहेहे"

हसने से और रिक्शा जर्क होने से अनीता की चूँचियाँ और हिलने लगी. रामु अनीता की बात सुनकर मुस्कुराकर उसकी चूँचियों को देखने लगा. अनीता बेशर्मी से हस्ती हुयी रामु को अपनी चूँचियों को देखते हुए देखने लगी. रामु देखते हुए मुस्कुराकर bola,"Are मेमसाहेब अब आप है hi अतनी खबसूरत तो हम लोगन भी का करे, मुंह से सच्चाई आ hi जाट हैं"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर रामु को देखकर कामुक अंदाज़ में boli,"Achha ठीक हैं रामु जी इतना hi सच आप बोलते हैं और आपको"

फिर वह अपनी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करती हुयी boli,"yeh हिलते हुए अच्छे लग रहे हैं तो फिर आप परेशान क्यों हो गए थे इन्हे हिलते हुए देखकर?"

अनीता की यह बेहयाई और बेशर्मी से रामु भी थोड़ा खुलने लगा था. वह अनीता की चूँचियों को देखकर bola,"Are मेमसाहेब देखकर तो अच्छा लगत है, मगर ीका मतबल ी थोड़े है की आपको परेशानी नहीं हो सकत है, उहे पूछ रहे थे की हिलने से कउनो परेशानी तो नहीं हो रही है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर कामुक अंदाज़ में boli,"Sach में रामु जी कितना ख्याल है आपको अपनी मेमसाहेब का परेशानी का. आप और हरिया जी हमेशा मेरा कितना ख्याल रखते हैं की थोड़ा सा भी कुछ होने पर चिंतित हो जाते हैं"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता को देखकर bola,"Are मेमसाहेब आप भी तो अटना अमीर, खबसूरत और पढ़ी लिखी होने के बावजूद हम लोगन से काटना अच्छा तरीके से पेश आती है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई तो रामु नज़र नीचे करके उसकी चूँचियों को देखकर puchha,"Aese मेमसाहेब हम जितना हो सकत है उतना आराम से रिक्क्षा चलावत हूँ लेकिन कउनो परेशानी होने पर बोलियेगा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Nahin रामु जी आप बहोत आराम से चला रहे हैं और सीट भी बहोत नरम है तो मुझे कोई परेशानी नहीं हो रही है. परेशानी तब होती जब अचानक से गड्ढे में चक्का चला जाता और जर्क होता. आप तो धीरे धीरे चला रहे हैं वह भी बहोत संभल कर और मैं भी रिक्शा अच्छे से पकड़ कर बैठी हूँ तो कोई परेशानी नहीं हो रही है"

अगले पल अनीता अपनी बेशर्मी दिखती हुयी अपनी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करके मुस्कुराकर कामुक अंदाज़ में boli,"Aur रही बात इसकी तो थोड़ा बहोत बदन हिलने पर यह तो हिलेंगे hi न. इसके हिलने से मुझे कोई परेशानी नहीं हो रही है तो आप इन्हे हिलते हुए देखकर चिंता मत कीजिये. आप बस आराम से रिक्शा चलाइये जैसे चला रहे हैं"

रामु अनीता की बात सुनकर bola,"Theek है मेमसाहेब" और नज़र नीचे करके उसकी चूँचियों को देखने लगा. अनीता उसके नज़र को देखि और फिर आस पास देखने लगी. हमेशा के जैसा वह सड़क सुननसँ था. नाले के किनारे सड़क था जिसके एक तरफ नाला और दूसरी तरफ पुराणी फैक्ट्रीज थी जो बांध पड़ी थी. एहि कारण था की अनीता को भी अपनी पल्लू की कोई फ़िक़र नहीं थी और वह बिना शर्म के रिक्शा पर पल्लू के बिना छोटे ब्लाउज में बैठी थी. अनीता भले hi बेशर्म थी मगर उसके अंदर एक अच्छे परिवार का संस्कार और एक क्लास था, जिसके कारण से वह कपडे भले hi बदन दिखाऊ पहनती थी मगर ऐसा नहीं की चीप लगे. उसे डीप नैक बैकलेस कुर्ती जिसमे उसकी एक तिहाई चूंकि और पीठ नंगी दिखे वह दुप्पट्टे के बिना पेहेन्ने में कुछ बुरा या अजीब नहीं लगता था इसलिए वह वैसे कपडे घर पर या बस के सफर में पेहेन लेती थी क्यूंकि दुपट्टे के बिना कुर्ती पेहेनना कुछ हद्द तक आम बात थी मगर ऐसे पल्लू के बिना साड़ी पहने रहना कोई आम बात नहीं थी और साड़ी पेहेन्ने का ये तरीक़ा भी नहीं था तो इसलिए अनीता को पल्लू के बिना रिक्शा पर सरेआम घूमना अजीब लगता, इसलिए नहीं की उसकी बदन दिखती बल्कि इसलिए की वह अजीब लगता. मगर क्यूंकि अभी हालत ऐसा था की उसके पास पिन नहीं थी और सड़क भी सुननसँ था तो वह बेफिक्र थी.

आगे चलकर रोड अच्छा था तो रिक्शा अच्छे से चल रहा था और अनीता की चूँचियाँ हिलना बांध हो गयी थी. रामु आईने में अनीता की चूँचियों को देख रहा था और अनीता यह महसूस करके आस पास देखना छोड़कर रामु को देख रही थी की कैसे उसका ध्यान उसकी चूँचियों पर है.

रामु उसकी चूँचियों को देखने के बाद ऊपर नज़र किया तो देखा की अनीता उसे चूँचियों को देखते हुए देख रही थी और अगले पल रामु का लुंड तन तना गया जब उसका नज़र अनीता की नज़र से मिलने पर अनीता बेशर्मी से मुस्कुरा दी.

रामु भी जवाब में मुस्कुराकर वापस एक नज़र उसकी चूँचियों को देखा. रामु उसकी चूँचियों को देखने के बाद फिर से अनीता को देखा तो वह उसे देखकर मुस्कुराकर puchhi,"Kya हुआ रामु जी? कुछ कहना छह रहे हैं क्या आप?"

रामु मुस्कुराकर आईने में अपने आँखों से अनीता की चूँचियों के तरफ इशारा करते हुए bola,"Haan मेमसाहेब, वह अब हिलना बांध हो गया"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी. अब रोड अच्छा है तो रिक्शा सही से चल रहा है"

फिर वह बेशर्मी से अपनी आँखों से अपनी चूँचियों के तरफ इशारा करती हुयी मुस्कुराकर boli,"To यह भी हिल नहीं रहे हैं"

अनीता को ऐसे बेशर्मी से अपनी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करते देख रामु का लुंड धोती में तन तना गया. इतनी खूबसूरत औरत, जो की न सिर्फ पढ़ी लिखी और अमीर घर की थी बल्कि शादी शुदा भी थी उसे ऐसे बेशर्मी और बेहयाई से बिना पल्लू के रिक्शा पर बैठे अपनी छोटी ब्लाउज में कैद बड़ी बड़ी चूँचियाँ, जो की एक चौथाई ब्लाउज के बाहर hi थी, उसके तरफ ऐसे आँखों से इशारा करते देख रामु को अच्छा लग रहा था और उसका खून में गर्मी आ रहा था जो उसके लुंड में जा कर उसके लुंड को खड़ा कर रहा था. रामु को अनीता की यह बेशर्मी, उसकी बेहयाई अच्छा लग रहा था जो उसके अंदर अनीता की जवान और खूबसूरत जिस्म के लिए हवस बढ़ा रहा था और उसे हिम्मत भी मिल रहा था अनीता की जिस्म को खुलकर गंदे हवस भरे नज़र से देखने के लिए.

वहीँ अनीता जान बूझकर अपनी चूँचियों का प्रदर्शन करके रामु का हवस नहीं बढ़ा रही थी. वह तो प्राकृतिक रूप से hi बेशर्म औरत थी. प्रकृति ने उसे बेशर्म बनाया hi था और हालत ऐसे थे की वह पल्लू को कंधे पर रख नहीं सकती थी तो रामु के कहने पर और कहीं न कहीं उसे भी एहि एक रास्ता दिखा की वह पल्लू को छोड़ दे और कंधे पर डालने का बेकार कोशिश न करे जिसके कारण वह बिना पल्लू के बैठी थी और बेशर्म होने के कारण उसे शर्म और झिझक भी नहीं थी.

रही बात अपनी चूँचियों के तरफ बेशर्मी से आँखों से इशारा करने की तो वह अपनी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा इसलिए की ताकि वह रामु को बता सके की उसकी चूँचियाँ इसलिए नहीं हिल रही है क्यूंकि रोड अच्छे हो गए थे और रिक्शा जर्क नहीं हो रहे थे.

रामु जवाब में आईने में अनीता की चूँचियों को देखकर अनीता को देखा तो वह बेशर्मी से मुस्कुरा दी तो रामु मुस्कुरा कर bola,"Haan मेमसाहेब" और एक नज़र फिर से आईने में अनीता की चूँचियों पर ले जाकर उसे देखने लगा तो अनीता puchhi,"Hil नहीं रहे हैं तो अच्छे नहीं लग रहे हैं क्या रामु जी?"

रामु यह सुनकर अपना नज़र अनीता की चूँचियों से हटाकर उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता उसके आँखों में देखती हुयी बेशर्मी से फिर से puchhi,"Dekhkar बताइये न रामु जी अच्छे नहीं लग रहे हैं क्या ऐसे?"

रामु अगले पल अनीता की आँखों में देखते हुए bola,"Are नहीं मेमसाहेब आप का बात करात हैं"

फिर वह उसकी चूँचियों को देखकर bola,"Aapka तो बहोत अच्छा लगता है, हिले चाहे न हिले. दोनों hi एक दम सही है आपका. एक तो आप अतनी खबसूरत है, एक दम मखमल जइसन चिकना और दूध जइसन गोरा बदन है आपका, ऊपर से आपका"

फिर रामु आँखों से आईने में अनीता की चूँचियों के तरफ इशारा करते हुए bola,"ee दोनों भी एक दम सही साइज का है"

अनीता बेशर्मी से रामु का बात सुनकर आईने में उसे देखते हुए मुस्कुरा रही थी. उसे शर्म नहीं आ रही थी की एक घरी मर्द जो उससे 20 साल बड़ा है उसके सामने वह बिना पल्लू के बैठी हुयी थी और वह खुलकर उसे छोटी ब्लाउज में कैद चूँचियों को देखते हुए उसकी जिस्म की तारीफ कर रहा है. अनीता की चेहरे पर शर्म नहीं, गर्व की भावना थी अपनी जिस्म की तारीफ सुनकर.

अगले पल रामु उसकी आँखों में देखा तो अनीता मुस्कुराती हुयी गर्व के भाव से रामु को देखि तो वह अनीता की आँखों में देखते हुए bola,"Upar वाला आपको दूध जइसन गोरा बदन दिया है"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुरा दी तो रामु उसकी चूँचियों को देखने के बाद उसकी नंगी पेट को देखने लगा. अनीता रामु के नज़र को आईने में देखि और फिर आस पास देखने लगी.

थोड़ा देर में रामु अनीता के गेट के बाहर रिक्शा रोककर उतारकर अनीता को bola,"Memsaheb चाबी दीजिये, हम गेट खोल डेट हूँ"

अनीता वैसे hi पल्लू के बिना बैठे अपनी बैग से चाबी निकल कर रामु को दे दी. रामु गेट खोलकर चाबी अनीता को दे दिया और रिक्शा अंदर ले गया. अंदर जाकर वह उतारते हुए bola,"Ek मिनट रुकिए मेमसाहेब, हम उतरने में मदद कर डेट हूँ".

अनीता रुक गयी और अपनी पल्लू उठाकर कंधे पर दाल ली. उससे कुछ ढँक नहीं रहा था क्यूंकि वह पल्लू बस फॉर्मेलिटी के लिए वह कंधे पर डाली थी.

रामु सीट के पास जाकर अपना बाय हाथ दिया तो अनीता अपनी दायी हाथ उसके हाथ में देकर बाये हाथ से रिक्शा पकड़ कर उठी और फिर उतारते वक़्त रामु के दये कंधे पर हाथ रख दी.

रामु अपना दया हाथ से अनीता की कमर को हल्का सा पकड़ कर उसे नीचे उतरने में मदद करते हुए bola,"Araam से मेमसाहेब". उतारते वक़्त अनीता की पल्लू नीचे गिर गयी और रामु के धोती के ऊपर अटक गयी.

अनीता जब उत्तरी तो रामु उसकी क्लीवेज देखने लगा. अनीता उसे अपना क्लीवेज देखते हुए देख बिना शर्म के मुस्कुरा कर boli,"Thank यू रामु जी".

रामु यह सुनकर उसकी क्लीवेज से नज़र हटाकर उसे देखा तो उसे मुस्कुराते देख खुद भी मुस्कुरा दिया. अनीता अगले पल नज़र नीचे करके अपनी पल्लू को देखि और उसे थोड़ा आश्चर्य हुआ रामु के धोती के ऊपर अटके देखे मगर अगले पल अनीता को समझ आया की उसकी पल्लू वहां क्यों अटकी है. यह समझते hi उसकी सांस तेज़ हो गयी.

अनीता की सांस तेज़ हुयी तो उसकी चूँचियों को ऊपर होते महसूस करके रामु अपना नज़र वापस वहां ले गया वहीँ अनीता अपनी पल्लू पकड़ कर रामु के धोती के सामने से हटाइये तो उम्मीद के मुताबिक़ उसके धोती के सामने तम्बू बना देखि. यह देखते hi अनीता की सांस तेज़ हो गयी.

वह एक नज़र उस तम्बू पर डालकर बिना कुछ बोले अपनी पल्लू कंधे पर रखकर रामु को देखि और बेशर्मी से मुस्कुरा कर boli,"Ramu जी मुझे पहुँचाने के लिए शुक्रिया. गर्मी बहोत है. आकर थोड़ा एक में बैठकर पानी या जूस पि लीजिये"

रामु को थोड़ा राहत मिला की अनीता उसके लुंड के उभर को देखकर कुछ नहीं बोली. मगर राहत के साथ उसे एक मज़ा भी मिला अनीता जैसी खूबसूरत औरत का यूँ उसके उभर का देखकर बुरा न मानने से.

पीने की बात सुनकर रामु अनीता की क्लीवेज देखने लगा तो अनीता चुप चाप कुछ सेकण्ड्स वैसे hi खड़ा रही और फिर कामुक अंदाज़ में boli,"Ab खड़े खड़े ऐसे देखेंगे आप या अंदर चलकर पिएंगे भी"

रामु यह सुनकर अनीता को देखा तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुराकर boli,"Ramu जी ऐसे hi खड़े रहेंगे गर्मी में या अंदर चलकर जूस या पानी पिएंगे भी?"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Haan मेमसाहेब"

और वह अनीता की सामान को रिक्शा से उठा कर चलने लगा. अनीता उससे थोड़ा आगे अपनी गांड मटकती हुयी चल रही थी. रामु पीछे से उसकी मटकती गांड और लगभग पूरी नंगी पीठ देख रहा था. अंदर जाकर अनीता रामु को बैठने के लिए बोली तो वह हमेशा के जैसा सीढ़ियों पर बैठ गए. अनीता गांड मटकती हुयी किचन में जाकर जूस निकली और एक गिलास में डालकर रामु के पास जाकर दी तोह उसकी पल्लू गिर गयी.

रामु अनीता की क्लीवेज और चूँचियों की उभर फिर से देखने लगा. अनीता पल्लू सँभालने की कोशिश नहीं की और मुस्कुरा कर boli,"Ramu जी अब देखेंगे hi या पिएंगे भी?"

रामु यह सुनकर अनीता को देखा तो वह मुस्कुराती हुयी आँखों से जूस के गिलास के तरफ इशारा की. रामु उसकी हाथ से जूस का गिलास ले लिया तो अनीता अपनी पल्लू पकड़ कर कंधे पर डालती हुयी boli,"Aur कुछ पीना होगा तो बोलियेगा रामु जी"

रामु अनीता की चूँचियों से नज़र हटाया तो अनीता मुस्कुरा दी. रामु भी मुस्कुराकर एक नज़र उसकी चूँचियों को देखकर bola,"Ji मेमसाहेब" और जूस पीने लगा.

रामु गटागट जूस पी रहा था तो अनीता का फ़ोन बजने लगा. रामु अनीता की चूँचियों को देखने लगा. अनीता उसे देख कर गांड मटकती हुयी सोफे के सामने टेबल पर रखे अपनी बैग से फ़ोन निकलने के लिए झुकी तो उसकी गांड रामु के तरफ उभर गयी. रामु का लुंड यह देखकर तन तना गया.

अनीता वैसे hi कुछ सेकण्ड्स झुकी हुयी फ़ोन निकल कर देखि और फिर घूम कर रामु को देखि तो उसे अपनी गांड को घूरते हुए देखि. यह देखकर अनीता की दिल धड़क गयी. रामु भी थोड़ा घबरा कर नज़र हटा लिया. अनीता सीधा होकर गांड मटकती हुयी रामु के पास गयी और मुस्कुरा कर boli,"Ramu जी मेरे पति आ रहे हैं. और कुछ चाहिए क्या आपको?"

रामु समझ गया. वह उठते हुए अनीता को गिलास देकर bola,"Nahin मेमसाहेब. जूस के लिए धन्यवाद"

अनीता मुस्कुराकर boli,"Are इसमें धन्यवाद की क्या बाय है रामु जी. आप मुझे घर पहुंचाए तो क्या मैं एक गिलास जूस भी नहीं पीला सकती आपको"

अनीता फिर उसे पैसे दी जो वह लेने से मन कर रहा था. अनीता उस पैसे को रामु के कुर्ते के पॉकेट में डालती हुयी उसके आँखों में देखती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Offo रामु जी ले लीजिये न. यह तो आपके म्हणत की कमाई है"

रामु मुस्कुरा कर वह पैसे ले लिया और फिर चला गया. अनीता उसे जाते हुए देखि. रामु रिक्शा पर बैठकर एक नज़र अनीता को देखा और फिर उसकी चूँचियों को देखकर चला गया.
 
कम्प्लीटली एग्री विथ यू तहत अस ा रीडर आईटी कैन बे फ़्रस्ट्रेटिंग तो सी इंफ्रेक्वेंट उपदटेस तहत तू थे शामे episode बीइंग ब्रोकन ईंटो मल्टीप्ल चैप्टर्स व्हिच अरे पोस्टेड मोनथस अपार्ट. होवेवेर, ी can't दो मच अस ी हैवे आलरेडी टोल्ड तहत थे स्टोरी इस नॉट ा प्रायोरिटी इन माय लाइफ. ी तरय तो पोस्ट ा फ्यू उपदटेस बैक तो बैक व्हॅनवर ी गेट टाइम एंड फील लिखे राइटिंग. थैंक्स.
 
अपडेट 123

रामु के जाने के बाद अनीता नहाने चली गयी. उसकी बदन और छूट में आग लगी थी, बल्कि छूट में गीलापन भी आ गयी थी हरिया और रामु का हवस भरा गन्दा नज़र अपनी जिस्म पर देख देखकर. वह नहाकर अपने आप को संभाली और डिनर बनाने लगी. रात में राज उसे फिर से बिना चोदे सो गया. अनीता इससे नाराज़ तो थी मगर वह देखि भी थी की राज वाक़ई थका हुआ था.

खैर एक अच्छी बीवी होने के कारण अनीता कुछ बोली तो नहीं मगर थी तो वह एक जवान औरत जिसके अंदर बेहयाई, बेशर्मी और रान्दीपना कूट कूट कर भरा हुआ था. ऐसे में चुदाई का ख्याल उसके दिमाग़ में नहीं आता ऐसा हो hi नहीं सकता था. राज तो सो गया मगर अनीता हरिया के लुंड के बारे में सोचने लगी की उसका लुंड कितना बड़ा, मोटा और सख्त है और उसे उसका लुंड छूकर कितना अच्छा लगता है. अनीता को याद आने लगा जब वह हरिया का सांस अपनी चूँचियों पर महसूस कर रही थी दिन में. यहाँ तक अनीता को रामु का यूँ उसकी हिलती हुयी चूँचियों को हवस से देखते हुए याद आने लगा था. उसे याद आने लगा की कैसे उसकी साड़ी की पल्लू रामु के धोती में उसके लुंड से बने तम्बू पर अटक गयी थी. अनीता को बार बार हरिया और रामु का लुंड याद आ रहा था की दोनों का लुंड वाक़ई कितना बड़ा, मोटा, सख्त और तगड़ा है.

अनीता एक नज़र अपनी मोबाइल को देखि और फिर उसे उठा कर गैलरी से बैकलेस ब्लाउज में एक कामुक फोटो को व्हाट्सप्प स्टेटस लगा दी. उस फोटो में उसकी साड़ी गांड का शेप भी अच्छे से दिखा रही थी. वह फोटो चलते वक़्त पीछे से लिया गया था. अनीता उस स्टेटस में सिर्फ हरिया का कांटेक्ट दाल कर फ़ोन रख दी और उसके लुंड और छोड़ने वाली बात के बारे में सोचती हुयी सो गयी.

अगले दिन लगभग 12 बजे अनीता को हरिया का फ़ोन आया. हरिया का नाम देखकर अनीता की दिल धड़क गयी मगर साथ hi चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी. वह धड़कते दिल से फ़ोन उठाकर boli,"Hello".

दूसरे तरफ से आवाज़ aaya,"Kaisan हैं आप मेमसाहेब?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Theek हूँ हरिया जी. आप कैसे हैं?"

हरिया जवाब में bola,"Hum भी ठीक हूँ, बस ससुरा आपका फोटो देखकर लौड़ा बौखला गवा है"

यह सुनकर अनीता की धड़कन तेज़ हो गयी मगर साथ hi चेहरे पर एक गर्व का भावना के साथ मुस्कराहट भी आ गयी.

वह मुस्कुराती हुयी कामुक अंदाज़ में जवाब di,"Offo हरिया जी आप और आपका हथियार. आखिर क्या देख लिया आपने की आपका हथियार बौखला गया?".

हरिया जवाब में bola,"Are मेमसाहेब आपका गांड और नंगा पीठ देखकर बौखला गवा है हमार लौड़ा. उफ़ मेमसाहेब का मस्त गरम माल लग रही हैं आप, ससुरा मैं तो करात है हमरा की हम फोटो में घुस कर आपको झुका कर आपकी गांड पकड़ कर पीछे से छोड़ना शुरू कर दे"

अनीता की सांस यह सुनकर तेज़ होने लगी और दिल धड़कने लगी. उसकी छूट में भी थोड़ी बेचैनी होने लगी. वह अपनी बायीं हाथ की उँगलियों में बालों को लपेटती हुयी हरिया का बात सुन्न रही थी. वह हरिया का बात सुनकर कामुक अंदाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी आप भी कैसी बातें करने लगते हैं"

हरिया जवाब में bola,"Hum आपको छोड़ने का बात कर रहा हूँ मेमसाहेब, आपको छोड़ने का. ी जो आप फोटो में अपनी गांड को ऐसे दिखा रही है, कसम से हम जब ठीक हो जाऊंगा तो हमरे सामने आप ऐसे अपनी गांड दिखाइयेगा तो हम जहाँ आपको ऐसे देखूंगा उहे जगह आपको झुका कर छोड़ दूंगा"

अनीता की सांस और धड़कन दोनों तेज़ हो रही थी हरिया का बात सुनकर. वह हरिया का बात सुनकर कामुक अंदाज़ में boli,"Hariya जी मैं कहा कुछ दिखा रही हूँ. यह तो बस नार्मल फोटो है. अब आपका नज़र वहीँ चला जा रहा है तो मैं क्या करू. नज़र आपका खुद वहां रहता है और फिर बोलते हैं मेमसाहेब दिखा रही है"

हरिया जवाब में puchha,"Kahan नज़र रहत है हमार मेमसाहेब?"

अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Wahin जहाँ आप बोल रहे हैं"

हरिया जवाब में puchha,"Are मेमसाहेब हम तो बहोत कुछ बोलत हूँ, आप बताइये न की हमार नज़र कहाँ रहत है"

अनीता मुस्कुराती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Bas शुरू हो गए आप अनजान बनना. वही जहाँ कल आपने थप्पड़ मारा था और जिसको देखकर गाना गए रहे थे"

हरिया यह सुनकर अगले पल bola,"Achha मेमसाहेब आप अपनी गांड की बात कर रही है"

अनीता को चेहरे पर यह सुनकर एक मुस्कान आ गयी. जिस तरह से हरिया खुलकर गन्दी बातें करता था वह अनीता को अच्छा लगने लगा था और उसका एहि खुलकर बातें करने और उसे छेड़ने का अंदाज़ से अनीता उसके तरफ आकर्षित होती थी.

अनीता अपनी बालों के एक लत को उँगलियों में फंसाये लपेटती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी कैसी बात करते हैं आप, उफ़"

हरिया यह सुनकर हंसने laga,"Hahaha अरे मेमसाहेब अब जब हम थप्पड़ आपकी गांड पर मारा हूँ और गाना भी आपकी गांड को देखकर गए रहा था तो उहे बोलेंगे न. आप भी तो उहे कहना चाहती थी. का हम कउनो ग़लत बात बोलै हूँ?"

अनीता यह सुनकर वैसे hi मुस्कुराती हुयी अपनी बालों के लत्त में उंगलियां फेरती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Lekin हरिया जी उसे कुछ और भी तो बोल सकते हैं आप?"

हरिया अगले पल bola,"Are मेमसाहेब हम आपके तरह पढ़ा लिखा तो हूँ नहीं की और कुछ बोलूं. हुंका जो आता है उहे बोलूंगा न. अब हम जानत हूँ की ओका गांड बोलत जाट है तो हम गांड बोलत हूँ"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Achha ठीक है हरिया जी जब आपको वही आता है तो वही सही. मगर यह तो बताइये की मैं दिखती हूँ या आपका hi वहां नज़र रहता है. आप खुद देखते रहते हैं वहां, देखकर वहां थप्पड़ भी मार देते हैं और किस तरीके से गाना गाने लगते हैं उसे देखकर और फिर मुझे बोलते हैं की मैं दिखती हूँ"

हरिया यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब तो आप भी तो हुंका अपनी गांड दिखती है. कैसे आप दरवाज़े के पास कड़ी होकर अपनी गांड दिखा रही थी और हुंका अपने पास बुला रही थी"

अनीता की सांस यह सुनकर तेज़ हो गई और बदन में मज़े की लेहेर दौड़ने लगी. वह अपनी सांस काबू करती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"To मैं और क्या करती हरिया जी. आप कैसे वहां देख रहे थे और कैसे गाना गए रहे थे उसे देखकर. ऐसा लग रहा था की आपके पेअर में चोट नहीं होता तो सच में जैसा आप थोड़ी देर पहले बोल रहे थे की मुझे जहाँ देखते वहीँ झुका कर ठुकाई करने लगते, वैसे hi उस वक़्त मुझे झुककर पीछे से ठुकाई करने लगते"

हरिया यह सुनकर हसने laga,"Hahaha"

अनीता की चेहरे पर भी एक बेशर्म और बेहयाई वाली मुस्कराहट आ गयी.

अगले पल वह हरिया का आवाज़ suni,"Hahaha तो ीका मतबल की आप अपनी गांड दिखा कर हुंका आपको छोड़ने के लिए बुला रही थी की हम आकर अपना लौड़ा घुसा कर आपको घापा है छोडूं?"

हरिया का यूँ खुलकर उसे छोड़ने का बात सुनकर अनीता की बदन और छूट में बेचैनी बढ़ने लगी थी और उसकी बेशर्मी, बेहयाई और रान्दीपना का hi असर था की यह बात सुनकर उसकी चेहरे पर गर्व की भाव आ गयी थी और जब हरिया हसने लगा तो वह भी बेशर्मी से मुस्कुराकर कामुक अंदाज़ में boli,"Offo हरिया जी आप और आपकी बातें"

हरिया हस्ते हुए आगे bola,"Hahaha मेमसाहेब अब जो सच है ु हम बोल रहा हूँ. बताइये न मेमसाहेब आप झुककर अपनी गांड दिखाकर हुंका छोड़ने के लिए hi इशारा कर रही थी न"

अनीता की छूट में यह सब सुनकर बेचैनी बढ़ती जा रही थी. उसे हरिया का यूँ खुलकर बातें करने से अच्छा लग रहा था. वह वैसे hi अपनी उँगलियों में बालों के लत को लपेटती हुयी कामुक रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी अब मैं क्या बोलूं. उससे पहले तो आप गाना गाना स्टार्ट कर दिए थे वहां देखकर"

हरिया हस्ते हुए आगे bola,"Hahaha अरे मेमसाहेब अब आपके जइसन अटना खबसूरत और जवान औरत, एक दम कड़क और गरम माल अइसन अपनी गांड मटका कर हमरे सामने चलेगी तो हमरा जइसन मरद ससुरा आपकी गांड को कैसे नहीं देखेगा. और ससुरा ु कउनो मरद हुआ जो आपका कातिल गांड को ऐसे हिलते हुए देखकर तारीफ में दो शब्द गाना न गए."

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी कामुक रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी माना की आप मेरी तारीफ में गाना गए रहे थे मगर देख तो रहे थे न. और एहि तो मैं भी बोल रही हूँ की देखते आप हैं, देखकर गाने आप गाते हैं, मुझे ठोकने की बात खुलकर आप करते हैं और नाम मेरा ले रहे हैं की मैं दिखती हूँ"

हरिया यह सुनकर बोलै हसने laga,"Hahaha" तो अनीता की चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी. हरिया हस्ते हुए bola,"Hahaha अरे मेमसाहेब अब आप अइसन अपनी गांड को मटकते और हिलाते हुए चलिएगा तो ुका देखकर हमरा जइसन असली मरद का खून तो गरम होगा hi. अब खून गरम होगा तो तारीफ के दो शब्द निकलने के साथ साथ हमरा लौड़ा भी तो खड़ा होगा"

हरिया के लुंड खड़ा होने वाले बात पर अनीता को चेहरे पर मुस्कराहट के साथ साथ एक गर्व की भावना भी आ गई.

हरिया आगे bola,"aur जब लौड़ा खड़ा होगा तो हुंका आपको छोड़ने का मैं करेगा hi और जब हमरा मैं आपको छोड़ने का करेगा तो उहे न बोलूंगा हम"

यह सुनकर अनीता की छूट में सनसनी मचने लगी और उसकी सांस तेज़ हो गयी. हरिया अनीता की तेज़ साँसों को मोबाइल से सुन्न सकता था. अनीता की चेहरे पर अब गर्व की भावना थी. अगले पल वह हरिया का बात suni,"Hum तो बता दिए मेमसाहेब की हुंका आपका गांड की देखकर आपको छोड़ने का मैं करता है लेकिन आप बताइये की आप कहे झुककर अपनी गांड हिला कर अपनी गांड के तरफ इशारा कर रही थी. आप भी तो चाहती हैं की हम आपको छोडूं. तो हम कहे नहीं बोलूं की आप अपनी गांड दिखा कर हमरा लौड़ा खड़ा करती हैं. बताइये मेमसाहेब"

यह सुनकर अनीता की चेहरे पर मुस्कान आ गयी और वह अपनी बाल की लातो को उँगलियों में लपेटते हुए कामुक रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhhm हरिया जी ठीक है मैं दिखा रही थी उस दिन लेकिन पहले तो आप hi देखकर गाना गए रहे थे और ठोकने की बात कर रहे थे. अब मेरे हरिया जी ऐसे वहां देखकर गाना जाएंगे और ठोकने की बात करेंगे तो मैं अपने हरिया जी को क्यों न दिखाऊं झुककर की देख लीजिये हरिया जी अगर आपको ठोकना है तो थोक लीजिये."

हरिया यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब उहे तो हम बोलत हूँ की आप झुककर अपनी गांड दिखा कर हुंका छोड़ने के लिए बुला रही थी"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर कामुक रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी लेकिन देख तो आप hi रहे थे तो मैं भी दिखा रही थी की देख लीजिये अपनी मेमसाहेब की जिसका आप इतना खुलकर तारीफ कर रहे थे. आप बताइये न हरिया जी जब मैं झुकी हुयी वैसे अपनी हिला रही थी तो आप क्या सोच रहे थे?"

हरिया यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब आपकी गांड को देखकर और का सोचेंगे. आपको छोड़ने का सोच रहे थे और सोच रहे थे की आपकी गांड ऐसे इतनी कातिल लग रही है तो जब हम आपको पूरा नंगा करके आपको पीछे से छोड़ेंगे और आपकी गांड हिलेंगी हर धक्के पर तब आपकी गांड कितनी कातिल लगेगी"

अनीता की सांस तेज़ हो रही थी और छूट में बेचैनी हो रही थी. वह सांस लेकर कामुक अंदाज़ में boli,"Uhmmm हरिया जी"

फिर वह bola,"Achha मेमसाहेब ु रामु आया है खाना लेकर, हम बाद में बात करता हूँ आपसे"

अनीता यह सुनकर boli,"Haan हरिया जी ठीक है"

और यह बोलकर वह फ़ोन रख दी.
 
अपडेट 124

रात में राज उसे छोड़ा नहीं. हरिया से बातें करने के बाद अनीता की छूट में बेचैनी थी मगर वह छोड़ा नहीं. अनीता को हरिया का गन्दा बात, उसका गन्दा हवस भरा नज़र और उसका तगड़ा लुंड याद आने लगा और वही सोचती हुयी वह सो गयी.

अगले दिन चंदा के काम करके जाने के बाद अनीता रामु को फ़ोन करके बोली की वह हरिया को देखने जाना चाहती हैं अगर वह थोड़ा वक़्त निकाल कर उसे लेने आ जायेगा तो अच्छा होगा. रामु दोपहर के खाने के वक़्त अनीता के घर आया और उसे लेकर गया.

अनीता जब हरिया के घर पहुंची तो वह मोबाइल में कुछ देख रहा था. अनीता देखि की मोबाइल उसके दये हाथ में था और बया हाथ लुंगी के अंदर था जिसका गाँठ खुला हुआ था और लुंगी के नीचे तम्बू बना हुआ था. यह देखते hi अनीता एक पल के लिए कमरे के दरवाज़े के पास रुक गयी. रामु भी उसके पीछे खड़ा यह देखा और फिर एक नज़र अनीता की चेहरे पर देखा जहाँ कोई एक्सप्रेशन नहीं था, जैसे कुछ हुआ hi न हो. मगर यह सब 5-6 सेकण्ड्स में hi हुआ क्यूंकि उसके बाद हरिया दरवाज़े पर किसी के होने का महसूस करके उधर देखा और bola,"Are मेमसाहेब आप?"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुरा कर boli,"Haan हरिया जी मैं"

हरिया अपना मोबाइल रखकर बया हाथ लुंगी से निकल कर बिना किसी झिझक के अनीता को देखते हुए लुंगी का गांठ बांधते हुए bola,"Are मेमसाहेब यहां कहे कड़ी है अंदर आइये"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुरा कर boli,"Haan हरिया जी" और फिर अपनी गांड मटकती हुयी अंदर जाने लगी और जाते वक़्त एक नज़र हरिया के लुंगी में उभर पर डाली. हरिया बिना झिझक के लुंगी का गाँठ बांधकर अनीता को देखने लगा. रामु भी अनीता के पीछे से देखा की कैसे हरिया के लुंगी में उभर है मगर वह यह नहीं देख पाया की अनीता की नज़र एक पल के लिए वहां जा चुकी थी.

रामु जानता था की अनीता बड़े शहर की पढ़ी लिखी और खुले विचार की औरत है, और जिस तरीके से पिछली बार भी हरिया को नंगी औरतों वाली मैगज़ीन देखते हुए देखकर या बिना पल्लू के दोनों के पास बैठी हुयी थी और फिर रिक्शा में अपनी हिलती हुयी चूँचियों के देखने पर रामु से उसे कोई ऐतराज़ नहीं था, तो अनीता का अभी हरिया का हाथ अपने लुंगी में देखकर ऐतराज़ न करना भी उसका खुला विचार का नतीजा लग रहा था या शायद कुछ रियेक्ट करके हरिया को और पुरे माहौल को शर्मिंदगी वाला नहीं बनाना छह रही थी. वह फिल्मो में या सोशल मीडिया में तस्वीरो को देखकर ये समझता था की बड़े शहर की अमीर औरतों में शर्म नहीं होती है और कहीं न कहीं वह अनीता को देखकर एहि समझ रहा था की उसके अंदर शर्म नहीं है इसलिए उसे कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा था मगर साथ hi वह समझदारी से अपने आप को पेश कर रही थी ताकि माहौल में शर्मिंदगी न आये. इसलिए अनीता की बेशर्मी और बेहयाई देखने के बावजूद उसके मैं में अनीता के लिए इज़्ज़त तो थी मगर एक मर्द होने के नाते अनीता की बेशर्मी और बेहयाई अच्छा लगने लगा था और उसके मैं में उसकी जिस्म के लिए भी धीरे धीरे हवस बढ़ रहा था.

रामु नज़र को बैकलेस ब्लाउज में अनीता की अधनंगी पीठ और उसके नीचे टाइट साड़ी में मटकती हुयी बड़ी गांड पर ले गया.

अनीता अपनी गांड मटकती हुयी हरिया के पास गयी तो हरिया अपना हाथ बढ़ाते हुए bola,"Aaiye मेमसाहेब बैठिये"

अनीता मुस्कुरा कर उसके पेट के पास बिस्तर पर बैठ गयी और उसके मांग पर हाथ रखती हुयी puchhi,"Aap कैसे हैं हरिया जी? बुखार उतरा या नहीं?"

हरिया यह सुनकर मुस्कुरा कर अपना हाथ अनीता की नंगी कमर पर रखकर सहलाते हुए bola,"Hum ठीक हूँ मेमसाहेब. आप कैसी हैं?"

अनीता मुस्कुराकर उसके मांग पर हाथ फेरती हुयी boli,"Main ठीक हूँ हरिया जी, मगर आप तो अभी भी ठीक नहीं हैं. बुखार तो अभी भी है"

हरिया अनीता की कमर सहलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब ु तो आप आयी हैं तो हमरा मांग गरम हो गवा है"

अनीता यह सुनकर थोड़ा आश्चर्य से हरिया को देखती हुयी puchhi,"Mere आने से गरम हो गया? वह कैसे?"

हरिया यह सुनकर अनीता की चेहरे को देखते हुए bola,"Are ु कहत है न की खबसूरत औरत" और वह नज़र नीचे करके अनीता की क्लीवेज, चूँचियों की उभर और नंगी पेट देखते हुए bola,"garam होती है और आप तो बहोत hi खबसूरत है"

यह सुनकर अनीता बेशर्मी से अपनी आँखें बड़ी करके हरिया को देखती हुयी boli,"Hariya जी? यह क्या बात हुयी हरिया जी?"

हरिया यह सुनकर अनीता की कमर सहलाते हुए हसने laga,"Hahaha"

रामु भी यह सुनकर मुस्कुरा दिया. अनीता एक नज़र रामु को देखकर boli,"Ramu जी आप भी मुस्कुराने लगे"

फिर वह नखरे से हरिया के मांग पर प्यार से हाथ फेरती हुयी boli,"Agar ऐसी बात है. अगर मेरे वजह से आपका बुखार बढ़ गया है तो मैं चली जाती हूँ"

फिर वह आवाज़ में कामुकता लाती हुयी उसके बालों में उँगलियाँ फेरती हुयी boli,"Main नहीं चाहती की मेरी वजह से आपका बुखार बढ़ जाये"

फिर वह रामु को देखि तो उसे अपनी चूँचियों को देखते हुए पायी मगर बिना कोई ऐतराज़ के कामुक अंदाज़ में boli,"Ramu जी चलिए मुझे घर पहुंचा दीजिये"

अनीता यह बोलकर उठने का कोशिश की तो हरिया उसकी कमर को मज़बूरी से पकड़ कर रोककर नीचे बिस्तर पर खींचते हुए bola,"Are मेमसाहेब अब जब आप आयी हैं"

इतने में अनीता वापस बिस्तर पर बैठकर खुद को सँभालने के लिए हरिया के सीने पर अपनी बायीं हाथ रखकर कामुक अंदाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी"

तो हरिया उसे देखते हुए bola,"to आराम से थोड़ा देर बैठकर आराम करके जाइये"

हरिया फिर उसकी क्लीवेज की तरफ आँखों से इशारा करके bola,"Dekhiye गर्मी से आप भी पसीने से भींग गयी है."

अनीता यह सुनकर हरिया के गंजी के ऊपर नंगे सीने पर बालों में उंगलियां फेरती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Ab आप बोल रहे हैं की मेरे कारण से आपको गर्मी लग रही है तो मुझे भी तो गर्मी लगेगी hi न. तोह पसीना तो होना hi है"

हरिया अनीता की कमर सहलाते हुए bola,"Are ीके लिए hi तो हम बोलत हूँ मेमसाहेब की थोड़ा हम मरद लोग के साथ बैठिये, आपका बदन का गर्मी थोड़ा काम हो जायेगा"

अनीता यह सुनकर हरिया के सीने के बालोज में उंगलियां फेरती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Offo हरिया जी बस बातें बनाना शुरू कर दिए आप"

हरिया अनीता की कमर सहलाते हुए रामु से bola,"Kaa रामु हम ग़लत बोलै हूँ?"

रामु यह सुनकर bola,"Nahin हरिया, ठीके बोलत हो तुम. मेमसाहेब थोड़ा आराम कर लेगी इहाँ तो" फिर वह भी अनीता की क्लीवेज के तरफ आँखों से इशारा करते हुए bola,"paseena सुख जायेगा"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Achha ठीक है रामु जी. लेकिन जब बैठना hi है तो मैं भी हरिया जी का पट्टी कर देती हूँ ताकि उनका बुखार काम हो जाये"

फिर वह हरिया को देखती हुयी उसके मांग पर हाथ फेरती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Nahin तो बोलेंगे की मेमसाहेब बदन को गरम तो कर दी मगर ठंडा नहीं की"

अनीता यह बोलकर बेशर्मी से हंसने lagi,"Hehehehe" तो हरिया भी हंसने लगा. अनीता की चूँचियाँ फिर से हंसने से हिलने लगी तो डोको का नज़र वहां चला गया. अनीता एक नज़र हरिया के आँखों पर डाली और पायी की वह हँसते हुए उसकी हिलती हुयी चूँचियों को देख रहा था. अगले पल अनीता रामु को देखि तो उसे भी हल्का हँसते हुए अपनी चूँचियों को हिलते हुए देख पायी.

अनीता बेशर्मी से हंसती हुयी boli,"Uff, आप दोनों के साथ होने से इतना हसी आता है की मैं क्या hi बोलूं हेहेहे"

फिर वह एक ऐडा से रामु को देखती हुयी boli,"Ramu जी थोड़ा पानी लेकर आइये, मैं हरिया जी के सर पर पट्टी कर देती हूँ"

रामु यह सुनकर उठने लगा तो हरिया अनीता की कमर सहलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब रहने दीजिये न इसका का ज़रूरत है. आप हमरे पास बैठी हैं इसी से हमरा बुखार उतर जायेगा"

अनीता यह सुनकर हरिया के मांग पर हाथ फर्काए उसके बालों में उंगलियां फेरती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Are हरिया जी मैं आपके पास बैठी तो हूँ hi. लेकिन साथ में पट्टी भी कर देती हूँ ताकि बुखार थोड़ा उतर जाये"

हरिया यह सुनकर उसकी कमर सहलाते हुए उसकी आँखों में देखा और फिर नज़र नीचे करके क्लीवेज देखने लगा. अनीता जब उसके नज़र को नीचे अपनी क्लीवेज पर जाते देखि तो वह घूमकर रामु के तरफ देखि जो खड़े होकर अनीता की क्लीवेज की गहराईयों में देख रहा था. अनीता बिना शर्म के उसे देखती हुयी boli,"Ramu जी पानी लेकर आइये और आराम से आप भी कुर्सी लेकर यहाँ बैठ जाइये"

रामु यह सुनकर सर हिलाकर घर के पीछे कल के पास पानी लेने चल गया. अनीता उसे जाते देखि तो हरिया उसे देखकर धीरे से bola,"Are मेमसाहेब असली बुखार तो हमार लौड़ा को लगा है"

अगले पल हरिया उसकी चूँचियों और नंगी पेट को हवस भरे नज़र से देखकर उसकी जिस्म के तरफ आँखों से इशारा करके bola,"Aap के ी जवानी का बुखार जो आपको छोड़ कर hi उतरेगा"

अनीता की सांस यह सुनकर तेज़ हो गयी और उसकी छूट में एक बेचैनी महसूस हुयी. अगले पल हरिया bola,"Jab हम अपना लौड़ा से अच्छे से घापा है करके आपको पेलुँगा और हमरे हर धक्का से आपकी बड़ी गांड हिलेगी"

अनीता एक पल के लिए इमेजिन की की वह अपनी बिस्तर पर पूरी नंगी होकर डोगग्य स्टाइल में झुकी है और हरिया भी पूरा नंगा होकर पीछे खड़ा होकर उसे छोड़ रहा है, एक हाथ से उसकी बाल पकडे और दूसरा हाथ से उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए जो उसके हर धक्के से हिल रही थी और थप्पड़ से हल्का लाल हो गयी है. यह इमेजिन करते hi अनीता की पूरी बदन में एक सुरसुरी महसूस हुयी और छूट में तो पूरी बेचैनी आ गई.
 
अनीता अपनी चुदाई के बारे में सोच hi रही थी की कैसे वह पूरी नंगी डोगग्य स्टाइल में झुकी हुयी है और हरिया भी पूरा नंगा होकर उसके पीछे खड़ा होकर उसे छोड़ रहा है की तभी उसे हरिया का मोटा लम्बा और तगड़ा लुंड का ध्यान आया की उसे कैसा महसूस होगा जब उसका उतना मोटा लम्बा और तगड़ा लुंड उसके अंदर घुसेगा. यह सोचते hi उसकी तेज़ सांस और धड़कन और भी तेज़ हो गयी और छूट की जो बेचैनी थी वह और बढ़ गयी.

अनीता को हरिया देखते हुए bola,"Kaa हुआ मेमसाहेब? का सोच रही हैं आप?"

फिर वह अनीता की चूँचियों को एक नज़र देखते हुए धीरे से bola,"Humse छुड़वाने का सोच रही हैं का आप?"

हरिया का बात सुनकर अनीता अपनी बेहयाई, अपनी बेशर्मी और रणदीपाने का साबुत देती हुयी मुस्कुरा दी और मुस्कुकर कामुक अंदाज़ में उसे देखती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhmm हरिया जी" और फिर अपनी बायीं हाथ पीछे लेजाकर लुंगी के ऊपर से उसके लुंड को पकड़ कर उसपर अपनी हाथ फेरती हुयी वैसे hi रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Yeh सोच रही हूँ हरिया जी की सच में आपके हथियार को बुखार लगा होगा तभी तो मैं जब आयी तो आप अपने हथियार का बुखार चेक कर रहे थे"

हरिया समझ गया अनीता क्या कहना छह रही थी. वह मुस्कुराते हुए अनीता की कमर पर हाथ फेरते हुए एक नज़र उसकी जिस्म पर ऊपर से नीचे तक डालते हुए bola,"Haan मेमसाहेब अपना लौड़ा पकड़ कर उहे चेक कर रहे थे की आपकी यह गरम जवाब जिसम के लिए हमरा लौड़ा में कितना बुखार है"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी कामुक अंदाज़ में उसे देखती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Bas बुखार देख रहे थे की यह भी सोच रहे थे की इसका बुखार कैसे उतरेगा?"

अनीता यह बोलकर थोड़ा सामने के तरफ झुककर दये हाथ को हरिया के मांग पर रखकर उस पर प्यार से हाथ फेरती हुयी बाये हाथ से उसके लुंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करती हुयी कामुक रणदीपाने वाली आवाज़ में बात जारी रखती हुयी puchhi,"Uhhm बताइये न हरिया जी"

अनीता के झुकने से उसके क्लीवेज की गहराई हरिया के आँखों के सामने था जिसे देखकर उसका खून गरम हो गया और उसका असर उसके लुंड पर हुआ. हरिया का लुंड तन तना कर झटका मारा तो अनीता अपनी हाथ में महसूस की. यह महसूस होते hi उसकी छूट में सुरसुरी महसूस हुयी और दिल धड़क गयी. साथ hi उसकी चेहरे पर एक गर्व की भाव आ गई.

हरिया अनीता की क्लीवेज को देखते हुए bola,"Haan मेमसाहेब लौड़ा का बुखार कैसे उतरेगा ु hi सोच रहे थे. दरअसल हम आपका hi फोटो देख रहे थे और आपको छोड़ने का सोचते हुए लौड़ा को बता रहे थे की आपके जइसन गरम जवान औरत के अंदर जब घापा है करते हुए ी ससुरा जायेगा तो अपने आप ीका बुखार उतर जायेगा"

अनीता की चेहरे पर गर्व की भाव आ गयी. वह उसके लुंड को हिलती हुयी उसके मांग पर प्यार से हाथ फेरती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी"

अनीता के झुकने से उसकी गांड बिस्तर से थोड़ा ऊपर उठ गयी थी. हरिया चुदाई की बात पर अनीता की चेहरे पर बेशर्मी से भरा मुस्कान देख कर उसकी गांड पर चटक से थप्पड़ मार दिया जिससे अनीता चौंक kar,"ouch" करके अपनी आँखें बड़ी करके हरिया को देखकर रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी" तो हरिया हसने laga,"Hahaha" तो अनीता भी बेशर्मी से खिलखिलाने lagi,"Hehehe".

अनीता को ऐसे झुककर बेशर्मी से खिलखिलाते देख हरिया का खून खौलने लगा खासकर उसकी गहरी क्लीवेज और लटकी हुयी चूँचियों को हांसे के कारण हिलते हुए देखकर. अनीता देख रही थी की कैसे हरिया उसकी चूँचियों को देखते हुए है रहा था और यह देखती हुयी वह बेशर्मी से खिलखिलाती हुयी हरिया के लुंड को पकड़ी हुयी हिला रही थी.

दोनों है रहे थे की तभी रामु वापस अंदर आया. अनीता उसे देख कर तुरंत हरिया के लुंड से हाथ हटाकर सीढ़ी होती हुयी boli,"Hehehehe रामु जी आइये"

यह सुनकर हरिया सर को पीछे के तरफ थोड़ा घुमा कर रामु के तरफ देखा तो रामु आ पानी का कटोरा लेकर आ रहा था.

अगले पल वह अनीता का आवाज़ suni,"Paani को यहाँ टेबल पर रख दीजिये"

अनीता फिर हरिया को देखती हुयी उसके मांग पर प्यार से हाथ फेरती हुयी boli,"Hariya जी का बुखार उतरना है. बहोत तेज़ बुखार है हरिया जी को"

रामु आकर हरिया के सिरहाने के तरफ रखे टेबल पर पानी का कटोरा रख दिया. हरिया अनीता की बात सुनकर उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए उसकी जिस्म को देखते हुए bola,"Memsaheb काटना ख्याल है आपको हमरा बुखार का"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Kyun ख्याल नहीं रहेगा हरिया जी. जब आप मेरा इतना ख्याल रख सकते हैं तो क्या मैं इतना नहीं कर सकती"

अनीता फिर अगले पल अपनी बैग से एक रुमाल निकली जिसे हरिया देखकर bola,"Are मेमसाहेब आप अपनी रुमाल कहे खराब कर रही है?"

अनीता यह सुनकर boli,"Are कोई बात नहीं हरिया जी. यह पट्टी के लिए सही होगा. आप बस आराम से लेते रहिये मैं आपके सर पर पट्टी करके बुखार उतार देती हूँ"

हरिया अनीता की कमर सहलाते हुए उसकी बात सुना और फिर नज़र नीचे करके उसकी क्लीवेज, चूँचियों की उभार और उसके नीचे नंगी पेट को देखकर bola,"Theek है मेमसाहेब".

हरिया को ऐसे अपनी जिस्म को खुलकर हवस भरे अंदाज़ से देखते हुए देख अनीता को अपनी जवानी और ख़ूबसूरती पर गर्व हो रहा था. उसे ज़रा भी शर्म नहीं थी की हरिया ऐसे रामु के सामने hi उसकी जिस्म को ऐसे देख रहा है, बल्कि उसे हरिया का हिम्मत और खुलापन और अच्छा लग रहा था.

रामु का ख्याल आते hi अनीता रामु के तरफ देखि तो उसे भी खड़ा होकर अपनी चूँचियों को देखते हुए पायी. अनीता के देखने पर रामु वहां से नज़र ऊपर करके अनीता को देखा तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी कुर्सी के तरफ आँखों से इशारा करके boli,"Aap खड़े क्यों है? बैठिये न"

रामु यह सुनकर सर "हाँ" में हिलाते हुए bola,"Haan मेमसाहेब" तो हरिया मुस्कुराते हुए bola,"Are ससुरा खड़ा होकर खाई का गहराई देख रहा है".

अनीता यह सुनकर हैरानी से अपनी आँखें बड़ी करके हरिया को देखि मगर उसकी चेहरे पर एक मुस्कान थी और वह मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी?" वहीँ रामु bola,"Are ससुरा का बोलत हो?"

हरिया यह सुनकर हसने laga,"Hahaha" तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुराकर हरिया को देखती हुयी सर हिलाई. हरिया उसे देखकर मुस्कुराते हुए अपना नज़र नीचे करके अनीता की चूँचियों और नंगी पेट को देखने लगा तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी रामु को देखकर boli,"Ramu जी हरिया जी की बातों को छोड़िये आप कुर्सी लाकर बैठिये".

रामु यह सुनकर "हाँ" में सर हिलाकर कुर्सी लेकर बिस्तर के बगल में बैठ गया. वहीँ अनीता रुमाल लेकर हरिया के तरफ झुककर उसके सिरहाने के तरफ रखे टेबल पर कटोरा के पानी में रुमाल गीला करने लगी. ऐसे झुकने से उसकी बड़ी बड़ी चूँचियाँ हरिया के चेहरे के ऊपर कुछ इनचेस के फासले पर थी. हरिया को फिर से अनीता की चूँचियों को ऐसे अपनी चेहरे से कुछ इनचेस के फासले पर देखकर उसका लुंड बौखलाने लगा ौड सांस तेज़ होने लगा जिसे अनीता अपनी चूँचियों पर महसूस की.

अनीता रुमाल को गीला करके हरिया के मांग पर डाली की तभी बिजली चली गयी. बिजली जाने पर अनीता ऊपर पंखे के तरफ देखि वहीँ हरिया bola,"Are ससुरा ी बिजली को अभी hi जाना था जब मेमसाहेब आयी है तब".

अनीता यह सुनकर हरिया को देखि और मुस्कुरा कर boli,"Ab हरिया जी बिजली को क्या पता की मैं आयी हूँ हेहेहे". अनीता की बात सुनकर हरिया हंस diya,"Hahaha" और रामु भी मुस्कुरा दिया. अनीता कुछ सेकण्ड्स बाद उसके फिर से रुमाल उसके मांग से उठाकर सामने झुककर गीला करने लगी तो हरिया उसकी चूँचियों को फिर से हवस भरे नज़र से देखते हुए गरम सांस छोड़ने लगा जिसे अनीता अपनी क्लीवेज पर महसूस कर पा रही थी. वहीँ रामु भी पास में बैठा साइड से अनीता की बड़ी चूँचियों को लटके हुए देख रहा था और साथ hi पीछे उसकी लगभग पूरी नंगी पीठ देख रहा था. इतनी गोरी चिकनी पीठ और बाद बड़ी चूँचियों को ऐसे लटका देख रामु के बूढ़े लुंड में भी बेचैनी आने लगा था और खड़ा होने लगा था.

अनीता वापस सीढ़ी होकर रुमाल को हरिया के मांग पर रख दी.

बिजली जाने से गर्मी के कारण अनीता की गोरी चिकनी बदन पर पसीना आने लगा और उसकी गोरी जिस्म में हल्का गुलाबीपन आने लगा. उसकी क्लीवेज में एक बून्द पसीना घुसने लगा तो हरिया उसकी नंगी कमर सहलाते हुए bola,"Memsaheb गर्मी से आपका बदन पसीना से भीगने लगा. ससुरा हम ग़रीब लोगन का घर में इहे परेशानी होता है"

अनीता यह सुनकर थोड़ी नाराज़गी से हरिया को देखकर boli,"Offo हरिया जी फिर से अमीर ग़रीब की बात. अरे थोड़ा देर गर्मी में रह लुंगी तो क्या जो जायेगा?"

फिर वह प्यार से हरिया के बालो में उँगलियाँ फेरती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Aur ऐसे भी आप तो खुद बोल रहे थे की मेमसाहेब गरम है. अब मैं गरम हूँ तो गर्मी तो लगेगी hi न"

हरिया यह सुनकर हंस दिया "हाहाहा" तो अनीता भी बेशर्मी से मुस्कुराई और फिर अपनी नज़र रामु के तरफ ले गयी जो की उसे देखते हुए मुस्कुरा रहा था.

अगले पल हरिया उसकी कमर सहलाते हुए bola,"U तो है मेमसाहेब".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी उसे देखि तो वह उसकी कमर सहलाते हुए उसकी जिस्म को एक बार ऊपर से नीचे तक देखने लगा, उसकी क्लीवेज, उसकी चूँचियों की उभर और उसके नीच नंगी चिकनी और सपाट पेट जिसके बीच नाभि में चमकती हुयी बेल्ली बटन रिंग लटकी थी और देखते हुए bola,"Aap गरम तो हैं hi"

अनीता चुप चाप हरिया को देखती हुई अपनी हाथ उसके मांग पर रखकर गीले रुमाल को उठाई और झुककर सिरहाने के पास रखे टेबल पर पानी के कटोरी में रुमाल को डालकर उसे फिर से भीगने लगी. ऐसे झुकने से अनीता की दोनों बड़ी बड़ी चूँचियाँ हरिया के चेहरे के ऊपर कुछ इंच के फासले पर लटक गयी. हरिया का सांस यह देखकर तेज़ हो रहा था जिसे अनीता अपनी क्लीवेज पर महसूस कर पा रही थी मगर वह बिना कोई शर्म या झिजक के वैसे hi झुकी हुयी रुमाल को गीला कर रही थी.

अनीता रुमाल को निचोड़ कर सीढ़ी हो hi रही थी उसे एहसास हुआ की वह पसीना का बंध उसकी क्लीवेज की गहराईयों से फिसल रहा था और जैसे hi वह सीधा होने वाली थी की तभी वह पसीना का बंध उसकी चूँचियों की उभर से अलग होते हुए महसूस हुआ. वह सीधे होती हुयी हरिया को देखि तो हरिया के होंठों पर पानी का बंध था. अनीता को समझ आ गया की उसकी क्लीवेज से पसीना का बंध हरिया के होंठों पर hi गिरा.

अनीता यह देखती हुयी boli,"Are हरिया जी मैं पोंछ देती हूँ" मगर हरिया तभी मुस्कुराते हुए अपना ज़बान निकाल कर वह चाट गया. अनीता बेशर्मी से अपनी आँखें पहाड़ कर हरिया को देखती हुयी मुस्कुराकर boli,"Hariya जी यह क्या किया आपने? ऐसे कोई करता है क्या?"

हरिया मुस्कुराते हुए उसकी कमर सहलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब का हो गवा तो". अनीता बस अपनी सर हिलाकर उसे देखि और फिर उसके मांग पर रुमाल रखकर प्यार से उसके सर के बालों में उंगलियां फेरने लगी. हरिया फिर से देखा की अनीता की गर्दन से होते हुए पसीने की बूंदें नीचे सदाकने लगा.

हरिया यह देखकर बोलै अनीता की कमर सहलाते हुए bola,"Memsaheb आपकी बदन का गर्मी मिटाना ज़रूरी है"

अनीता यह सुनकर हरिया के आँखों में देखि तो वह भी अनीता की आँखों में देखकर उसकी क्लीवेज के तरफ आँखों से इशारा kiya,"Dekhiye कितना पसीना से आप भीग रही है"

इससे पहले अनीता कुछ बोलती या रियेक्ट करती हरिया रामु के तरफ देखते हुए bola,"Are ससुरा रामु सिर्फ मेमसाहेब का पसीना hi देखेगा की मेमसाहेब का गर्मी मिटने का भी सोचेगा".

अनीता यह सुनकर रामु के तरफ देखि जो अब हरिया के तरफ देखकर उसका बात सुन्न रहा था.

हरिया रामु को bola,"Are ु हाथ पंखा लेकर आओ तो".

फिर वह अनीता की क्लीवेज को देखते हुए उसके तरफ आँखों से इशारा करके bola,"Dekh रहे हो की मेमसाहेब पसीने से भीग रही है, कैसे उनका गोरा दूध जैसा बदन गर्मी से लाल हो रहा है लेकिन कउनो इंतज़ाम नहीं कर रहे हो"

अनीता देखि की कैसे हरिया उसकी जिस्म को देखते हुए पसीने की बात कर रहा है मगर उसे ना hi कोई ऐतराज़ हो रहा था न hi कोई शर्म आ रही थी. बल्कि उसे अच्छा लग रहा था की हरिया उसके जिस्म पर पसीना देखकर उसे आराम देने के लिए पंखे का इंतज़ाम करने के लिए बोल रहा था.

रामु यह सुनकर उठते हुए bola,"Haan हम लाता हूँ".

यह बोलकर वह उठकर कमरे के बिस्तर के सिरहाने के तरफ के एक कोने में दीवार से लटकाये हुए हाथ के पंखे को लेने चला गया.

इतने में अनीता उसके मांग से रुमाल उठाकर फिर से सामने झुककर रुमाल को भीगने लगी. ऐसा करने से अनीता की बड़ी बड़ी चूँचियाँ जो ब्लाउज में दो तिहाई कैद और एक तिहाई बाहर थी वह हरिया के चेहरे के ऊपर कुछ इनचेस के फासले पर लटक गयी. हरिया उसे पुरे हवस से देखने लगा. ऐसा होने से उसका सांस तेज़ हो गया जिसे अनीता अपनी क्लीवेज पर महसूस करने लगी.

अनीता रुमाल को भीगा कर निचोड़ रही थी की तभी वह नज़र उठाकर सामने देखि तो रामु को अपनी क्लीवेज की गहराईयों में देखते हुए देखि. सिरहाने के तरफ होने से जब अनीता झुकी तो उसकी क्लीवेज की गेहरिया रामु के आँखों के सामने था और वह जैसे hi पंखा उतर कर घुमा तो उसका नज़र अनीता की क्लीवेज की गहराईयों में गया और वह वैसे hi खड़ा हुए देखने लगा.

जैसे hi रामु को एहसास हुआ की अनीता उसे देख रही है तो वह नज़र उसकी क्लीवेज की गहराईयों से हटाकर उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुरा दी. अनीता को ऐसे बेशर्मी से मुस्कुराते देख रामु भी मुस्कुरा दिया. अनीता कुछ नहीं बोली और रुमाल निचोड़ कर सीधा होकर हरिया के मान पर रखकर एक नज़र रामु के तरफ देखि तो उसे पंखा लेकर आते हुए देखि.

इतने में हरिया अनीता की कमर पर हाथ फेरते हुए उसकी क्लीवेज में बहते हुए पसीने को देखकर bola,"Uff मेमसाहेब काटना दूध जइसन गोरा बदन है आपका की गर्मी में लाल हो रहा है"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी अच्छी नहीं लग रही क्या मैं ऐसे लाल हो जाने से?"

हरिया यह सुनकर उसकी कमर सहलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब कइसन बात बोलत हैं आप" फिर वह अनीता की जिस्म को हवस से देखने के बाद उसे देखकर धीरे से bola,"Aap अच्छी नहीं लगे ी हो सकत है. ु तो हम आपको जो गर्मी लगत है ुका बात बोलत हूँ की कैसे गर्मी से आपका ी गोरा" फिर वह आँखों से अनीता की चूँचियों के तरफ इशारा करके bola,"doodh जइसन बदन लाल हो गवा है".

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुरा कर उसे देखि तब तक रामु पंखा लेकर आते हुए bola,"Haan मेमसाहेब आपका गोरा बदन गर्मी से लाल होने लगा है"

अनीता यह सुनकर रामु को देखि तो उसे अपनी क्लीवेज में झांकते हुए देखि. अगले पल रामु bola,"Hum पंखा से हवा कर देता हूँ आपको"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर उसे देखकर boli,"Sach में आप और हरिया जी कितना ख्याल रखते हैं मेरा. कुछ भी हो जाये आप दोनों मेमसाहेब को कोई तकलीफ होने नहीं देंगे".

हरिया यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब अब हमलोगां जइसन मरद के होते हुए आपको कउनो चीज़ का तकलीफ होये ी तो हमरे मर्दानगी पर ठु है"

हरिया यह बोलकर रामु को देखकर bola,"Kaa रामु?"

रामु कुछ बोलता इससे पहले अनीता यह सुनकर आँखें बड़ी करके boli,"Offo हरिया जी आप और आपकी बातें".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराया और फिर रामु से bola,"Are ससुरा अब देखत का हो? पंखा करो मेमसाहेब को".

अगले पल हरिया अपना हाथ अनीता की क्लीवेज के तरफ लेजाकर वहां बहती हुयी पसीने की एक बंध को अपनी उँगलियों से पोंछकर bola,"Dekh रहे हो की मेमसाहेब को पसीना आ रहा है मगर पंखा नहीं कर रहे हो"

अनीता देखि की कैसे हरिया रामु के सामने उसकी क्लीवेज की शुरुआत में ऊँगली से पसीने को पोंछा मगर वह कोई ऐतराज़ नहीं की और न hi चेहरे पर शर्म थी.

रामु यह सुनकर bola,"Haan करात हूँ" और वह खड़ा होकर अनीता की जिस्म पर पंखा करने लगा. ठंडी हवा मिलने पर अनीता को राहत मिला और वह मुस्कुराकर रामु को देखकर boli,"Ramu जी खड़े क्यों हैं आप, बैठिये न"

रामु यह सुनकर कुर्सी पर बैठ गया. अनीता हरिया के मांग से रुमाल हटाकर फिर से झुककर रुमाल गीला करने लगी. हरिया वैसे hi उसकी लटकी हुयी चूँचियों को हवस से देखते हुए गरम सांस छोड़ने लगा जिसे अनीता अपनी क्लीवेज पर महसूस कर रही थी. साथ hi वह अपनी जिस्म पर पंखा का हवा महसूस कर रही थी. रामु भी अनीता की लटकी हुयी चूँचियों को साइड से देखते हुए उसकी नंगी गोरी पीठ को देखते हुए पंखा कर रहा था.

अनीता जब वापस सीढ़ी होकर हरिया के मांग पर रुमाल राखी तो उसकी क्लीवेज में एक बंध पसीना फिर से फिसलने लगा. हरिया यह देखकर अपना ऊँगली ले जाकर उसे पोंछकर bola,"Memsaheb अभी भी पसीना हो रहा है" फिर वह उसकी कंधे के तरफ आँखों से इशारा करके bola,"Yeh पल्लू खोलकर पिछले दिन के तरह आराम से बैठिये न. आपको वैसे आराम मिलेगा"

रामु यह सुनकर हरिया को देखा और फिर अनीता को. अनीता अपनी बेशर्मी, बेहयाई और रणदीपाने का साबुत देती हुयी हरिया से boli,"Hariya जी थोड़ी बहोत पसीना तो आएगा hi, गर्मी जो है"

हरिया यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब लेकिन ी खोलकर बैठिएगा तो आपको आराम मिलेगा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर अपनी सर हिलती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Hariya जी मेमसाहेब को थोड़ा भी तकलीफ में आप देख नहीं सकते हैं है न? बस मेमसाहेब का आराम का ख्याल रहता है आपको"

हरिया उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए bola,"Ab हमरी मेमसाहेब है hi ऐसी तो कहे आराम का ख्याल नहीं रखूँगा हम. का रामु ठीक बोले की नहीं हम?"

रामु भी मुस्कुरा कर bola,"Haan मेमसाहेब, खोल दीजिये न ुका आपको आराम मिलेगा"

अनीता यह सुनकर रामु को देखकर boli,"Aap और हरिया जी भी न, बस मेमसाहेब की आराम का hi ख्याल रहता है. आप लोग भी तो पसीने में भीगने लगे हैं".

हरिया यह सुनकर मुस्कुरा कर bola,"Are मेमसाहेब हम मज़दूर लोग हूँ, गर्मी का आदत है. आप देखिये काटना नाज़ुक बदन है आपका, गर्मी से पूरा लाल हो रहा है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Achha ठीक है हरिया जी लेकिन देख तो रहे हैं की मेरी हाथ पानी से भीगा हुआ है".

फिर वह अपनी कंधे के तरफ आँखों से इशारा करके boli,"Aap hi खोल दीजिये न"

हरिया यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब हम खोल डेट हैं".

हरिया फिर हाथ बढ़ा कर अनीता की बायीं कंधे पर पिन किया हुआ पल्लू के पिन को खोल दिया और उसकी पल्लू सड़क कर बिस्तर पर गिर गयी. अनीता यह देखके मुस्कुरा कर boli,"Thank यू हरिया जी"

हरिया उसकी चूँचियों की उभर और क्लीवेज देखकर bola,"Are मेमसाहेब थेंकु का का ज़रूरत है. हम तो हूँ hi आपके मदद के लिए".

फिर वह पिन को अपने सिरहाने वाले टेबल पर रख दिया. अनीता अगले पल उसके मांग से रुमाल उठाकर झुक कर रुमाल को गीला करने लगी और फिर सीढ़ी होकर उसके मांग पर रख दी.

अनीता हरिया के मांग पर रुमाल रख रही थी की तभी हरिया रामु से bola,"Abe ससुरा देख नहीं रहा है की मेमसाहेब का"

फिर वह अनीता की चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करते हुए bola,"Eehan काटना गर्मी है". फिर वह रामु के हाथ से पंखा लेते हुआ bola,"Do हम पंखा करता हूँ" और यह बोलकर वह उसके हाथ से पंखा लेकर अनीता की चूँचियों के सामने पंखा हिलने लगा जिससे उसकी चूँचियों पर सीधा हवा लगे. अनीता जब अपनी चूँचियों पर हवा महसूस की तो उसे अच्छा लगा.

सच तो एहि था की अनीता की ऊपरी जिस्म में अगर कपडा कहीं थी तो वह चूँचियों के ऊपर hi थी, पीठ तो लगभग नंगी थी. ऐसे में अनीता को सबसे ज़्यादा गर्मी उसकी चूँचियों में hi लग रही थी और हरिया का यह बोलना की उसकी चूँचियों में कितनी गर्मी है यह सुनकर अनीता को अच्छा लगा की हरिया हालात को समझते हुए उसकी चूँचियों के ऊपर हवा कर रहा था.

कोई और औरत होती तो यह सब होने से शर्म आता उसे मगर यह तो अनीता थी जिसके अंदर शर्म नाम की चीज़ नहीं थी और वह हरिया का यूँ उसकी चूँचियों के सामने पंखा करना उसकी समझदारी लगा. अनीता को राहत मिल रही थी ऐसे पंखा का हवा अपनी चूँचियों पर महसूस करने से.

वह फिर से रुमाल को उठाकर झुककर रुमाल गीला करके सीढ़ी होकर अपनी क्लीवेज और चूँचियों पर हवा महसूस करती हुई हरिया के मांग पर रुमाल रख रही थी की तभी हरिया अपना बाय हाथ उसकी चूँचियों के तरफ बढ़ा कर बातो चूंकि की ऊपरी भाग जो ब्लाउज के बाहर थी उस पर से बाल का लत हटाने लगा.

अनीता के झुकने से बाल का एक लत्त सामने उसकी चूँचियों पर गिर गयी थी. हरिया यह देखकर बाय हाथ वहां लेजाकर अपनी उँगलियों से अनीता की चूँचियों से सत्ता हुआ बाल का वह लत्त हटाया तो अनीता मुस्कुराकर नीचे देखि और बाल का वह हिस्सा पकड़ा कर पीछे कर दी. अगले पल हरिया उसकी क्लीवेज की गहराई में फंसे बाल के एक लत को देखकर अपने बाये हाथ का अंगूठा और इंडेक्स फिंगर को उसकी क्लीवेज की गहराई के शुरुआत में डालकर बाल को पकड़ कर निकालते हुए bola,"Paseena से पूरा भीग गवा है मेमसाहेब इसलिए ससुरा बाल सात जा रहा है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर उस बाल को पकड़ कर पीछे के तरफ करती हुयी boli,"Haan हरिया जी मगर आप तो अब पंखा कर दे रहे हैं तो आराम मिल रहा है"

हरिया को ऐसे अपनी चूँचियों के ऊपरी भाग और क्लीवेज पर ऊँगली रखकर बाल हटते देख, वह भी रामु के सामने, अनीता की चेहरे पर न hi कोई शर्म थी और न hi झिझक.

हरिया यह सुनकर bola,"memsaheb थोड़ा झुक जाइये न, अच्छे से हवा कर देते हैं".

अनीता यह सुनकर बिना शर्म के थोड़ा सा झुक गयी और हरिया उसकी क्लीवेज के ऊपर हवा करने लगा जिससे अनीता को आराम मिल रहा था. अपनी क्लीवेज की गहराईयों में हवा महसूस करके अनीता को अच्छा लग रहा था और हरिया के इस अंदाज़ से वह इम्प्रेस्सेड हो रही थी. वह प्यार से हरिया के बाल में उँगलियाँ फेरकर उसके मांग से रुमाल उठाई और फिर से सामने झुककर रुमाल गीला करने लगी. ऐसा करने से उसकी चूँचियाँ ठीक हरिया के चेहरे के ऊपर लटक गयी.

ऐसा होने से हरिया अनीता की चूँचियों पर पंखा नहीं कर सकता था तो वह अनीता के पीछे पीठ पर पंखा करने लगा. अनीता अपनी नंगी पीठ पर हवा महसूस की तो उसे राहत मिली.

रामु का खून यह सब देखकर खौल रहा था की कैसे अनीता के झुकने पर उसकी बड़ी बड़ी चूँचियाँ ब्लाउज में कैद hi लटक रही थी और उसकी गोरी चिकनी पीठ पूरी नंगी हल्का पसीने से चमक रही थी. इतनी खूबसूरत और सेक्सी औरत को ऐसे देखकर अगर किसी का खून नहीं खौलता तो वह मर्द हो hi नहीं सकता था.

अनीता वापस सीधा होकर रुमाल को हरिया के मांग पर रखने लगी तो हरिया वापस पीठ से पंखा सामने चूँचियों पर झलने लगा तो अनीता बेशर्मी से थोड़ा झुक गयी और हरिया उसकी क्लीवेज के पास पंखा झलने लगा तो अनीता मुस्कुराकर हरिया को देखि.

हरिया अनीता से puchha,"memsaheb आराम मिल रहा है तो?"

अनीता मुस्कुराकर boli,"Haan हरिया जी".

फिर वह अपनी बायीं हाथ पीठ के तरफ लेजाकर boli,"Ramu जी वह मेरा बैग से एक टिश्यू पेपर लाकर दीजियेगा तो. पीछे पीठ पर पसीना हो रहा है"

रामु यह सुनकर उठा और टेबल पर रखे बैग के सामने वाले चैन से टिश्यू पेपर निकाल कर लायक और साथ hi एक पेपर लेकर आया और bola,"Memsaheb हम पीछे ी अखबार से पंखा कर डेट हूँ"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Are रामु जी आप दोनों कितना परेशां होंगे मेरी वजह से"

हरिया जो अनीता जी बात सुनकर उसकी पीठ पर पंख कर रहा था वह bola,"Are मेमसाहेब रामु ठीक तो कहत है. ी में परेशानी का का बात है. आपको एक में रहने का आदत है और इहाँ पंखा भी नहीं चल रहा है. फिर वह उसकी क्लीवेज हुए नंगी पेट के तरफ आँखों से इशारा करते हुए bola,"Dekhiye कैसे गर्मी से पूरा बदन आपका लाल हो रहा है. हम दोनों के रहते हुए आपको परेशानी होगा ी हुंका अच्छा नहीं लगेगा".

अगले पल रामु bola,"Are मेमसाहेब का पीठ भी पूरा लाल हो गवा है"

अनीता यह सुनकर रामु को देखि जो उसकी नंगी पीठ को देख रहा था. हरिया यह सुनकर bola,"Dekhiye मेमसाहेब पीछे भी लाल हो गवा है. थोड़ा हवा लगेगा तो आपको आराम मिलेगा"

अनीता यह सुनकर रामु से puchhi,"Bahot ज़्यादा लाल हो गया है क्या रामु जी?"

रामु यह सुनकर अनीता की नंगी पीठ को देखकर bola,"Nahin मेमसाहेब बहोत ज़्यादा नहीं हुआ है मगर आपका अटना दूध जइसन गोरा बदन है की थोड़ा रंग बदलने से साफ़ साफ़ पता चल रहा है"

हरिया यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब आपका बदन पूरा दूध जइसन है"

अनीता के हल्का झुकने से उसकी क्लीवेज की गहराई दिख रही थी. हरिया वही देखते हुए यह बात बोलै तो अनीता हरिया का बात सुनकर मुस्कुराकर boli,"Hariya जी?" तो हरिया मुस्कुरा दिया और bola,"Kaa रामु कुछो ग़लत बोलै हूँ का हम?"

अनीता यह सुनकर रामु के तरफ देखि जो उसकी क्लीवेज की गहराई को देखते हुए bola,"Nahin हरिया हम भी तो उहे बोलत हूँ की मेमसाहेब का बदन दूध जइसन है"

रामु यह बोलकर नज़र ऊपर करके अनीता को देखकर मुस्कुरा दिया तो अनीता की चेहरे पर भी एक मुस्कराहट थी और साथ hi एक गर्व की भाव थी. उसे अपनी जवानी, जिस्म की ख़ूबसूरती और जिस्म की उतर चढाव पर गर्व हो रहा था और साथ hi इस बात पर गर्व हो रहा था की वह दो ऐसे मर्द के साथ थी जो अपने दिल की बात बोलने से झिझक नहीं रहे थे और जो भी देख रहे थे उसे खुलकर बोल रहे थे.

अनीता रामु को देखकर मुस्कुराकर एक कामुक अंदाज़ में boli,"Achha ठीक है रामु जी. लेकिन अब मेमसाहेब का"

फिर वह अपनी बेशर्मी, बेहयाई और रणदीपाने का साबुत देती हुयी अपनी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करके मुस्कुराकर boli,"doodh जैसा बदन सिर्फ देखेंगे hi या पंखा भी करेंगे?"

हरिया यह सुनकर है diya,"Hahaha मेमसाहेब ठीक बोले आप, ससुरा सिर्फ देख रहा है कुछो मदद नहीं कर रहा है"

रामु भी अनीता की बेहयाई, बेशर्मी और रान्दीपना देखकर मुस्कुरा दिया मगर अनीता का रान्दीपना उसे अगले पल फिर देखने को मिला जब वह हरिया के बात पर मुस्कुराकर boli,"Haan हरिया जी, आप जब देखे की"

फिर वह अपनी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करके मुस्कुराकर boli,"idhar पसीना है तो कैसे आप इधर पंखा करने लगे"

फिर वह रामु को देखकर मुस्कुराकर boli,"Aur रामु जी पंखा करने की बात करके बस देख रहे हैं"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Are मेमसाहेब हम अभी कर देते हैं पीछे पंखा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Are रामु जी कोई बात नहीं आराम से कीजिये मैं तो बस मज़ाक कर रही थी?"

हरिया यह सुनकर है दिया तो अनीता भी खिलखिलाने लगी. रामु भी मुस्कुरा दिया. अनीता के हसने से उसकी बड़ी बड़ी चूँचियाँ हिलने लगी और रामु और हरिया का ध्यान उस पर hi चला गया.

अनीता की बाल की एक लत वापस उसकी क्लीवेज में फँस गयी तो वह हस्ती हुयी अपनी क्लीवेज के तरफ देखि और अगले पल हरिया का हाथ भी वहां देखि. हरिया उसकी क्लीवेज में ऊँगली घुसकर बाल को बाहर किया तो अनीता उसे पकड़ कर मुस्कुराती हुयी हरिया को देखकर कान के पीछे करने लगी.

तभी अनीता अपनी पीठ पर टिश्यू पेपर महसूस करके रामु के तरफ देखि जो उसकी पीठ से पसीना पोंछने लगा था और दूसरे हाथ से अखबार को हिलालकर पंखा कर रहा था. अनीता यह देखकर boli,"Ramu जी आराम से पीछे बैठ जाइये न. आपको पसीना पोंछने में आराम मिलेगा"

रामु यह सुनकर कुर्सी को थोड़ा एडजस्ट करके बीएड के पास ऐसे रखा की उस पर बैठ कर अनीता की पीठ उसके सामने हो.

रामु को ऐसे अनीता की नंगी पीठ इतने करीब से देखकर धड़कन और सांस तेज़ हो गया और लुंड में बेचैनी होने लगा. धोती में उसका लुंड हिलने लगा था.

वह टिश्यू पेपर लेकर अनीता की पीठ पोंछते हुए अखबार से पंखा करने लगा जिससे अनीता को राहत मिली और सामने से हरिया उसकी चूँचियों पर तो पंखा कर hi रहा था.

रामु धीरे अनीता की पीठ को पोंछने लगा. हरिया भी अपना सर घुमा कर टेबल के तरफ देखा और अनीता को पर्स से एक टिश्यू पेपर निकालकर अनीता की क्लीवेज पोंछने लगा. अनीता कुछ नहीं बोली और उसके मांग से रुमाल उठाकर झुककर रुमाल गीला करने लगी. रामु इस बीच उसकी नंगी पीठ को और हरिया उसकी क्लीवेज को पोंछता रहा.

अनीता सीढ़ी होकर रुमाल को हरिया के मांग पर राखी तो रामु उसकी पीठ से सटे बाल के कुछ लातो को हटाने लगा. अनीता अपनी नंगी पीठ पर रामु का हाथ मेहुस करके boli,"Ek मिनट रामु जी. आपको और हरिया जी को बालों के वजह से परेशानी हो रही है".

फिर अनीता अपनी बाल से क्लिप निकाल कर बालों को पकड़ कर बन हैरस्टीले करके क्लिप लगा दी. ऐसा करते hi अनीता की पूरा पीठ अब नंगी दिख रही थी. अनीता बन करके साइड में गर्दन करके रामु को देखकर boli,"Ab ठीक है तो रामु जी?"

रामु यह देखकर bola,"Haan मेमसाहेब ठीक है".

अनीता मुस्कुराकर boli,"Aap और हरिया जी को अब परेशानी नहीं होगी पसीना साफ़ करने में"

रामु और हरिया दोनों अनीता की खूबसूरत जिस्म को टिश्यू पेपर से साफ़ करते हुए पंखा करने लगे.

हरिया अनीता की क्लीवेज साफ़ करने के बाद उसकी नंगी पेट पर और कमर साफ़ करने लगा जहाँ उसकी नाभि से लटकी बेल्ली बटन रिंग चमक रही थी.
 
Back
Top