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अपडेट 48 चावला साहब इन कंपनी ऑफ़ सान्वी
उधर काफी देर से चावला साहब संजना की फ़ोन तरय कर रही थी जिस वक़्त संजना अपने पापा के साथ हमबिस्तर थी. और कोई जवाब नाह मिलने पर चावला साहब ने एहि कहा खुद से, “आज संजना अपने पापा को वो ख़ुशी दे रही होगी जिस्का इंतज़ार आनंद ने 5 सैलून तक किया. कितना खुश हो रहा होगा आनंद! कितना मज़ा ारः होगा उस्सको उस बहोत hi ज़्यादा क्यूट संजना को छोड़ते हुए….. जब मुझको इतना मज़ा देती है संजना तो अपने बाप को कितना खुश करती आयी होगी पिछले 5 सालों से!.. और आज संजना ने अपनी योनि की गहराई की दर्शन करवाई होगी अपने पिता को, वह आनंद किआ किस्मत पाया है तुमने यार!”
यह सब बातें चावला साहब खुद से बड़बड़ाते हुए कह रहा था मगर उस्सको पता नहीं था सान्वी उसस्के पीछे कड़ी थी, और शुक्र है के सान्वी बुसस अभी अभी आयी थी उनके कमरे में तो सब बातें को नहीं सुना उस्सने और सान्वी ने पूछा, “कौन किस्को मज़ा देता होगा अब? किश के बारे में बड़बड़ा रहे हो आप? आप को चढ़ गयी किआ? हम्म आप ने आज 5 पेग्स ले लिया हैं अब बुसस!”
सच में चावला साहब को कुछ नशा सा होने लगा था और ेंखें मिस कर सान्वी के तरफ देखा अपने बीएड से और मुस्कुराते हुए थोड़ा लड़खड़ाते जुबां से कहा, “विवान नहीं आया अब तक किआ कितने बजे हैं अभी?” सान्वी उनके तरफ बढ़ते हुए कहा, कैसे आएगा जल्दी? अब तो अकेला है वो ऑफिस में आरव तो बाहर है तो सब कुछ उसी को करना पड़ता है रात के बारह बजने के बाद आएगा वो आज, फ़ोन किया था मुझे! वहीँ डिनर भी करेगा कहा था.”
चावला साहब सान्वी को ऊपर से निचे तक देखा. सान्वी अपनी निघ्त्य में थी मगर गाउन ऊपर पहनी हुई थी. वैसे तो हर सुबह को चावला साहब उस्सको वैसे hi ड्रेस में देखता है और यह नार्मल था दोनों के लिए. और चावला साहब अपने एक शार्ट पहने हुए थे और बिना शर्ट के थे, तो हालां के वो नशे में थे उस्सको याद आया के संजना की बनायी हुई लोवेबिते उसस्के चेस्ट पर अब भी मौजूद है तो जल्दी से अपने टीशर्ट को पेहेन लिया सान्वी के करीब आने से पहले.
सान्वी उसके करीब आकर बैठी बीएड पर और चावला साहब ने पूछा, “और दीप्ति सो गयी? आज मैं ने उस के साथ बिल्कुल नहीं खेला, बुसस एक बार आयी थी मेरे साथ फिर भाग गयी.” सान्वी उसस्के पास बैठ कर बोली, “बुसस अब गिलास दीजिये आप ने बहोत पी लिया है आज. अब आराम कीजिये आप. सोने का टाइम हो गया.!”
“कैसे सो जॉन भला? दिमाग़ में हलचल मची हुई है मेरा!” चावला ने कहा. तो सान्वी हैरत से उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “क्यों? किश बात की टेंशन है आप को अब? कैसे हलचल मची हुई है आप के दिमाग़ में” चावला साहब ने सोचा के वो यह किआ बोल गया सान्वी को, वो तो संजना को सोचते हुए दिमाग़ में हलचल की बात कर रहे थे, तो उस्सने बुसस सर झुका लिया सान्वी के सवाल पर. और सान्वी उनके पास बीएड पर बैठ के उनके सर को अपने हाथ से दबाते हुए कहा, “सर दुःख रहा है आप का? दबा दूँ?”
जब सान्वी बैठी तो उस्सकी गाउन निघ्त्य से सरक कर एक तरफ हुई और उस्सकी जांघें साफ़ दिख रहे थे और क्यूंकि चावला साहब के सर झुके हुए थे तो उनकी नज़रें सान्वी की जाँघों पर टिक्के रहे कुछ देर तक और वो संजना की जाँघों को सोचने लगे….. जिस तरह से सान्वी ने उनके सर को थामा था चावला साहब के सर सान्वी के छाती पर डब्बे हुए थे और वो उस्सकी बूब्स को अपने गाल पर फील कर सकते थे और चावला साहब ने अपने एक हाथ को सान्वी के जांघ पर हलके से रखा, सान्वी ने देखा और फील किया मगर कुछ नहीं बोली वो उनके सर दबा रही थी…
और तब चावला साहब ने सर उठाते हुए संवी के गर्दन को चुम्मा, तो सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “किआ कर रहे हो आप पापा जी? आप को चढ़ गया है लेट जाईये आप ऐसे….. और सान्वी झुक कर चावला साहब को लेटने लगी जिस से उस्सकी पूरी क्लीवेज चावला साहब के ेंखों के सामने थे, लटके हुए बिना ब्रा के निघ्त्य के अंदर दोनों बूब्स साफ़ दिखाई दे रहे थे चावला साहब को और उस्का खड़ा होने लगा…..
जब सान्वी ने उनको लेता दिया और अब उठने लगी थी झुके हुए से तो चावला साहब ने जैसे बेखुदी में उसस्के बाहों को थाम कर अपने तरफ एक झटके से खींचा तो सान्वी उन् के ऊपर गिर्र पड़े बीएड पर hi…. तो सान्वी ने फिरसे हँस्ते हुए कहा, “ोफो आप ने क्यों खींचा मुझे, अब मैं जाती हूँ आप सो जाइए अब आप नशे में हो!” मगर चावला साहब ने कहा, “अब हुग नहीं लोगी? हम्म अब मुझे तुमको ज़ोर से हुग करने को मैं कर रहा है आवो नाह मेरी बाहों में एक ज़ोर का झप्पी दो मुझे!” तो सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “आप तो अब लेते हुए हो बीएड पर हुग तो हम खड़े होकर लेते हैं तो कैसे हुग करूँ आप को?”
चावला साहब ने उस्सकी जाँघों को देखते हुए कहा, बीएड पर hi हुग कर लेते हैं ाजाओ यहीं बीएड पर मेरे पास…..” सान्वी ने कुछ सोचते हुए कहा, “हम्म्म्म कैसे? विवान के आने का टाइम हो रहा है, आप को बिल्कुल चढ़ गया है पिता जी आप सो जाइये नाह!”
मगर चावला साहब ने ज़िद किया उस्सको हुग देने को पर पर लेते हुए hi.
तो सान्वी उनके बीएड के करीब गयी फिरसे, पता नहीं दिमाग़ में सान्वी किआ सोच रही थी, और जैसे hi उनके करीब हुए तो चावला साहब ने उस्का हाथ पाकर के ज़ोर से अपने ऊपर खींचा…. सान्वी की छाती उनके छाती पर दादी और चावला साहब ने उस्सको जाकर लिया बाहों में….. सान्वी उनके साँसों को अपने बूब पर फील कर रही थी और उस्सकी दिल की धड़कनें बढ़ने लगे…. फिर चावला साहब दिमाग़ में यह सोचते हुए के संजना उसस्के बाहों में हैं उस्सने अपने हाथ को सान्वी के पीठ पर फरते हुए उस्सकी नितम्बों पर हाथ किया और उस्सको अपने जिस्म पर कर लिया, मतलब अब सान्वी की जिस्म पुरे चावला साहब के जिस्म पर थे बीएड पर, चावला साहब अपने पीठ पर लेते हुए थे और सान्वी पथ के बल उनके ऊपर थे, तब तो सान्वी को पूरी तरह से अपने ससुर का तन्ना हुआ लुंड अपने जाँघों पर फील हुए और वो कांप उठी और चावला साहब उस्सकी गर्दन को चुम्मे जा रहे थे….. सान्वी की दिल की धड़कन बढ़ती गयी और उस्सने धीमी आवाज़ में कहा, “पापा जी आप किआ कर रहे हो, आप को चढ़ गया है चोररये नाह मुझे, विवान आने वाला है, दीप्ति भी मुझे बुला सकती है चोररये nah….tab तक सान्वी ने अपने नितम्बों पर चावला जी के हाथ को फरते हुए फील किया और सर को उठाकर उनके चेहरे में देखा के वो तो मस्त बेखुदी में जैसे सपनों की दुन्या में खोए हुए थे ेंखें बांध करके….
तो सान्वी उठ गयी उनके ऊपर से उनके बाहों को अपने ऊपर से अलग करते हुए…. अपने ड्रेस को अपने क्लीवेज पर बराबर करके ढांकते हुए सान्वी उनको देखे जा रही थी और तेज़ दिल के धड़कनों के साथ सान्वी ने खड़े होकर पूछा, “किआ संजना के साथ यह सब करते हो आप?”
तो बे कॉन्टिनोएड………………..
उधर काफी देर से चावला साहब संजना की फ़ोन तरय कर रही थी जिस वक़्त संजना अपने पापा के साथ हमबिस्तर थी. और कोई जवाब नाह मिलने पर चावला साहब ने एहि कहा खुद से, “आज संजना अपने पापा को वो ख़ुशी दे रही होगी जिस्का इंतज़ार आनंद ने 5 सैलून तक किया. कितना खुश हो रहा होगा आनंद! कितना मज़ा ारः होगा उस्सको उस बहोत hi ज़्यादा क्यूट संजना को छोड़ते हुए….. जब मुझको इतना मज़ा देती है संजना तो अपने बाप को कितना खुश करती आयी होगी पिछले 5 सालों से!.. और आज संजना ने अपनी योनि की गहराई की दर्शन करवाई होगी अपने पिता को, वह आनंद किआ किस्मत पाया है तुमने यार!”
यह सब बातें चावला साहब खुद से बड़बड़ाते हुए कह रहा था मगर उस्सको पता नहीं था सान्वी उसस्के पीछे कड़ी थी, और शुक्र है के सान्वी बुसस अभी अभी आयी थी उनके कमरे में तो सब बातें को नहीं सुना उस्सने और सान्वी ने पूछा, “कौन किस्को मज़ा देता होगा अब? किश के बारे में बड़बड़ा रहे हो आप? आप को चढ़ गयी किआ? हम्म आप ने आज 5 पेग्स ले लिया हैं अब बुसस!”
सच में चावला साहब को कुछ नशा सा होने लगा था और ेंखें मिस कर सान्वी के तरफ देखा अपने बीएड से और मुस्कुराते हुए थोड़ा लड़खड़ाते जुबां से कहा, “विवान नहीं आया अब तक किआ कितने बजे हैं अभी?” सान्वी उनके तरफ बढ़ते हुए कहा, कैसे आएगा जल्दी? अब तो अकेला है वो ऑफिस में आरव तो बाहर है तो सब कुछ उसी को करना पड़ता है रात के बारह बजने के बाद आएगा वो आज, फ़ोन किया था मुझे! वहीँ डिनर भी करेगा कहा था.”
चावला साहब सान्वी को ऊपर से निचे तक देखा. सान्वी अपनी निघ्त्य में थी मगर गाउन ऊपर पहनी हुई थी. वैसे तो हर सुबह को चावला साहब उस्सको वैसे hi ड्रेस में देखता है और यह नार्मल था दोनों के लिए. और चावला साहब अपने एक शार्ट पहने हुए थे और बिना शर्ट के थे, तो हालां के वो नशे में थे उस्सको याद आया के संजना की बनायी हुई लोवेबिते उसस्के चेस्ट पर अब भी मौजूद है तो जल्दी से अपने टीशर्ट को पेहेन लिया सान्वी के करीब आने से पहले.
सान्वी उसके करीब आकर बैठी बीएड पर और चावला साहब ने पूछा, “और दीप्ति सो गयी? आज मैं ने उस के साथ बिल्कुल नहीं खेला, बुसस एक बार आयी थी मेरे साथ फिर भाग गयी.” सान्वी उसस्के पास बैठ कर बोली, “बुसस अब गिलास दीजिये आप ने बहोत पी लिया है आज. अब आराम कीजिये आप. सोने का टाइम हो गया.!”
“कैसे सो जॉन भला? दिमाग़ में हलचल मची हुई है मेरा!” चावला ने कहा. तो सान्वी हैरत से उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “क्यों? किश बात की टेंशन है आप को अब? कैसे हलचल मची हुई है आप के दिमाग़ में” चावला साहब ने सोचा के वो यह किआ बोल गया सान्वी को, वो तो संजना को सोचते हुए दिमाग़ में हलचल की बात कर रहे थे, तो उस्सने बुसस सर झुका लिया सान्वी के सवाल पर. और सान्वी उनके पास बीएड पर बैठ के उनके सर को अपने हाथ से दबाते हुए कहा, “सर दुःख रहा है आप का? दबा दूँ?”
जब सान्वी बैठी तो उस्सकी गाउन निघ्त्य से सरक कर एक तरफ हुई और उस्सकी जांघें साफ़ दिख रहे थे और क्यूंकि चावला साहब के सर झुके हुए थे तो उनकी नज़रें सान्वी की जाँघों पर टिक्के रहे कुछ देर तक और वो संजना की जाँघों को सोचने लगे….. जिस तरह से सान्वी ने उनके सर को थामा था चावला साहब के सर सान्वी के छाती पर डब्बे हुए थे और वो उस्सकी बूब्स को अपने गाल पर फील कर सकते थे और चावला साहब ने अपने एक हाथ को सान्वी के जांघ पर हलके से रखा, सान्वी ने देखा और फील किया मगर कुछ नहीं बोली वो उनके सर दबा रही थी…
और तब चावला साहब ने सर उठाते हुए संवी के गर्दन को चुम्मा, तो सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “किआ कर रहे हो आप पापा जी? आप को चढ़ गया है लेट जाईये आप ऐसे….. और सान्वी झुक कर चावला साहब को लेटने लगी जिस से उस्सकी पूरी क्लीवेज चावला साहब के ेंखों के सामने थे, लटके हुए बिना ब्रा के निघ्त्य के अंदर दोनों बूब्स साफ़ दिखाई दे रहे थे चावला साहब को और उस्का खड़ा होने लगा…..
जब सान्वी ने उनको लेता दिया और अब उठने लगी थी झुके हुए से तो चावला साहब ने जैसे बेखुदी में उसस्के बाहों को थाम कर अपने तरफ एक झटके से खींचा तो सान्वी उन् के ऊपर गिर्र पड़े बीएड पर hi…. तो सान्वी ने फिरसे हँस्ते हुए कहा, “ोफो आप ने क्यों खींचा मुझे, अब मैं जाती हूँ आप सो जाइए अब आप नशे में हो!” मगर चावला साहब ने कहा, “अब हुग नहीं लोगी? हम्म अब मुझे तुमको ज़ोर से हुग करने को मैं कर रहा है आवो नाह मेरी बाहों में एक ज़ोर का झप्पी दो मुझे!” तो सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “आप तो अब लेते हुए हो बीएड पर हुग तो हम खड़े होकर लेते हैं तो कैसे हुग करूँ आप को?”
चावला साहब ने उस्सकी जाँघों को देखते हुए कहा, बीएड पर hi हुग कर लेते हैं ाजाओ यहीं बीएड पर मेरे पास…..” सान्वी ने कुछ सोचते हुए कहा, “हम्म्म्म कैसे? विवान के आने का टाइम हो रहा है, आप को बिल्कुल चढ़ गया है पिता जी आप सो जाइये नाह!”
मगर चावला साहब ने ज़िद किया उस्सको हुग देने को पर पर लेते हुए hi.
तो सान्वी उनके बीएड के करीब गयी फिरसे, पता नहीं दिमाग़ में सान्वी किआ सोच रही थी, और जैसे hi उनके करीब हुए तो चावला साहब ने उस्का हाथ पाकर के ज़ोर से अपने ऊपर खींचा…. सान्वी की छाती उनके छाती पर दादी और चावला साहब ने उस्सको जाकर लिया बाहों में….. सान्वी उनके साँसों को अपने बूब पर फील कर रही थी और उस्सकी दिल की धड़कनें बढ़ने लगे…. फिर चावला साहब दिमाग़ में यह सोचते हुए के संजना उसस्के बाहों में हैं उस्सने अपने हाथ को सान्वी के पीठ पर फरते हुए उस्सकी नितम्बों पर हाथ किया और उस्सको अपने जिस्म पर कर लिया, मतलब अब सान्वी की जिस्म पुरे चावला साहब के जिस्म पर थे बीएड पर, चावला साहब अपने पीठ पर लेते हुए थे और सान्वी पथ के बल उनके ऊपर थे, तब तो सान्वी को पूरी तरह से अपने ससुर का तन्ना हुआ लुंड अपने जाँघों पर फील हुए और वो कांप उठी और चावला साहब उस्सकी गर्दन को चुम्मे जा रहे थे….. सान्वी की दिल की धड़कन बढ़ती गयी और उस्सने धीमी आवाज़ में कहा, “पापा जी आप किआ कर रहे हो, आप को चढ़ गया है चोररये नाह मुझे, विवान आने वाला है, दीप्ति भी मुझे बुला सकती है चोररये nah….tab तक सान्वी ने अपने नितम्बों पर चावला जी के हाथ को फरते हुए फील किया और सर को उठाकर उनके चेहरे में देखा के वो तो मस्त बेखुदी में जैसे सपनों की दुन्या में खोए हुए थे ेंखें बांध करके….
तो सान्वी उठ गयी उनके ऊपर से उनके बाहों को अपने ऊपर से अलग करते हुए…. अपने ड्रेस को अपने क्लीवेज पर बराबर करके ढांकते हुए सान्वी उनको देखे जा रही थी और तेज़ दिल के धड़कनों के साथ सान्वी ने खड़े होकर पूछा, “किआ संजना के साथ यह सब करते हो आप?”
तो बे कॉन्टिनोएड………………..