- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 106,773
अपडेट 58 सान्वी टेकिंग केयर ऑफ़ चावला साहब
चावला साहब का खड़ा हो गया था जिस वक़्त उस्सने सान्वी के गर्दन को चूमा और हाथ फेर्रा था उसस्के जांघ पर. वो उठकर बाथरूम के तरफ बढ़ रहे थे और सान्वी किचन के तरफ जाते हुए कहती गयी, “दीप्ति दिन भर पूछती रही आप के बारे में आप को मिस करती है वो, दिन भर आप को नहीं देखा न इस लिए!”
तो चावला साहब बाथरूम तक पहुँच कर कहा, “और दीप्ति की मम्मी ने नहीं मिस किया मुझको? वो मुझको कभी मिस नहीं करती किआ?”
सान्वी ने उनके तरफ मुस्कुराते हुए देखा और होंठों को दांतों में दबाते हुए कहा, “नाह! बिल्कुल भी नहीं मिस करती वो आप को!” फिर हंस पड़ी!
और चावला साहब अंदर चले गए नहाने को. अंदर से नहाते हुए आवाज़ ऊंची करके चावला साहब ने कहा, “सुनों एक पेग बना दो प्लीज, एक पेग लेकर खाना कहूंगा फिर बाद में पियूँगा खाना खा कर!” सान्वी बाथरूम के दरवाज़े के पास गयी और कहा, “आप ने तो कहा के आप ने संजना के पापा के साथ पिया था नाह? तो और क्यों अभी? आप तो खाने के बाद पिटे हो?”
चावला साहब ने अंदर से जवाब दिया, “अरे कभी कभी ऐसे पीने का मूड बन जाता है बना दो नाह एक पेग!” तो सान्वी ने धीरे से कहा, “okay”
कुछ देर बाद चावला साहब बाथरूम से निकले एक शार्ट और टीशर्ट में टॉवल से सर पोंछते हुए और सान्वी उनके खाना लगा रही थी टेबल पर तो उसस्के पास आते हुए उन्हों ने पूछा, “आज विवान कितने बजे ारः है वापस?”
सान्वी ने मुस्कुराते हुए उनको देखा और पूछा, “क्यों?”
तो उन्हों ने चेयर खिंच कर बैठते हुए कहा, “अरे भाई किआ अब यह भी पूछना मन है किआ?”
सान्वी फिर दांतों में होठ दबाते हुए कहा, “सुबह के 1 बजे आएंगे वो, कुछ देर पहले फ़ोन किया था एक प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और काफी वर्कर ओवरटाइम कर रहे हैं कहा उस्सने!”
चावला साहब ने निवाला लेते हुए कहा, “हम्म गुड गुड अच्छा संभाल रहा है काम वो; मेरे जाने के बाद बिल्कुल कंपनी को चला पाएगा, मुझे अब कोई फ़िक्र नहीं कंपनी की!”
सान्वी भी चेयर खिंच कर उनके पास बैठी और कहा, “क्यों? आप कहाँ जा रहे हो जो आप के जाने के बाद कहा आप ने?”
चावला साहब ने कहा, “बूढ़ा हो रहा हूँ अब मर गया तो उसी को संभालना होगा नाह कंपनी को!”
सान्वी ने उनके बाज़ू को पकड़ते हुए कहा, “आप बूढ़े थोड़े hi हो? आप तो बहोत मज़बूत सॉलिड स्टड हो जी!! आप क्यों मरने लगे अभी?
चावला साहब ने अपने व्हिस्की का एकांत सिप लेते हुए कहा, “पता नहीं जैसे आज मुझे फील हुआ उस वक़्त जब बप लौ हुई थी तो एक डर सा लगा, के पता नहीं कब ऐसे hi एक दिन टपक जाऊं हहहहए!”
तब सान्वी ने अचानक पूछा, “किआ आप किसी बात या चीज़ से घबराये थे? घबराने से भी बप लौ या हाई होता है, स्ट्रेस लेने से भी होता है, तो उस वक़्त जब बप लौ हुई थी किआ आप किसी चीज़ से घबराये या स्ट्रेस लिए थे?”
अब यह तो चावला साहब नहीं बता सकता था सान्वी को के उस वक़्त उस्सने अपने आप को एक चोरर की तरह घर के अंदर महसूस किया था संजना को अपने पापा के साथ रिकॉर्ड करते हुए, तो बिल्कुल एक घबराहट की तरह हुई थी ठीक उसी वक़्त उनको घुटन सी मेहसूस हुई थी और ठंडी हवा खाने का मैं किया था…. तो चावला साहब अब समझे के क्यों उस्सकी बप लौ हुई थी उस वक़्त संजना के घर के अंदर!!
खाना ख़तम करने के बाद चावला साहब लाउन्ज में काउच पर बैठ कर टीवी ों किया और सान्वी बाकी के बर्तनों को धोने गयी. अपने काउच से चावला साहब सान्वी को देख रहे थे. सान्वी की निघ्त्य और गाउन दोनों साटन की मटेरियल थे और जब सान्वी टेबल से प्लेट्स उठा कर चल रही थी तो उसस्के नितम्बों का फॉर्म उस साटन मटेरियल में अच्छी तरह से दिख रहे थे और सान्वी के कमर का वो हिस्सा जो चउरवे होता है वो बिल्कुल नज़र आरहे थे चावला साहब ko….ussko उस तरह से देख कर चावला साहब संजना की जिस्म को याद करने लगे और सोचा के उस्सको टेक्स्ट करना चाहिए… मगर इस वक़्त वो सान्वी के जिस्म से इंटरेस्टेड हो रहे थे…. सोचा के सान्वी के जिस्म अंदर कैसा होगा? किआ वैसा hi होगा जैसा संजना की है? संजना कुंवारी है, माँ नहीं बानी है, सान्वी एक बची की माँ है फिर भी उस्सकी फिगर बिल्कुल एक कुंवारी लड़की जैसे hi दिख रहे थे….. चावला साहब उस्सकी क्लीवेज तो अक्सर देखा करता है, उस्सकी जांघें भी बहोत देखा है मगर सान्वी को उस से ज़्यादा अंदर नहीं देखा है कभी पिछले 5 सालों में, तो उस्सको देखने का मैं हो रहा था…
सान्वी ने कुछ देर बाद और ड्रिंक्स बनाये उनके लिए और उनके पास काउच पर बैठी बात करते हुए. चावला साहब ने ड्रिंक ख़तम किया और एक और बनाने को कहा जो सान्वी ने बना के दिया उनको….. फिर तीसरा भी बना के दिया और चौथा ड्रिंक बनाने लगी तो सान्वी ने कहा, यह आखरी है okay? इस से ज़्यादा नहीं पीना ठीक है?!”
जब चावला साहब ने चौथी पेग ख़तम किया तो नशा सा चा गया था और हिमत भी बढ़ गयी थी और सोचा के अब सान्वी के ज़्यादा करीब जा सकता है और अपने हरकतों को और मज़बूत कर सकता है….
सान्वी उनके दाएं तरफ बैठी थी सत् के उन् से. तो चावला साहब ने अपने दायां बाज़ू को सान्वी के काँधे पर किया और उस्सको अपने करीब किया तो सान्वी का सर उनके छाती तक गए, वैसे करना आदत थे उनके और सान्वी अक्सर अपना सर उनके छाती पर रखती थी टीवी देखते वक़्त. लगता था के बाप बेटी बैठे टीवी देख रहे हैं. उंनका प्यार वैसा था. मगर अभी चावला साहब की नियत कुछ और थे. उनके छाती के बालों में तो सान्वी ने कई बार अपने उँगलियों को फेर्रा था मगर अभी चावला साहब टीशर्ट में थे और उतार भी नहीं सकते थे क्यूंकि संजना की किये हुए लोवेबिट्स अभी भी मिठे नहीं थे, हल्का सा अब बी नज़र आरहे थे…. सान्वी उनके चेस्ट पर अपना हाथ फेरर रही थी हलके हलके जिस से चावला साहब को बहोत अच्छा महसूस हो रहा था और उतेजिना भी बढ़ रहे थे उंनका….
हिमत जूता कर उन्हों ने कहा, “तुम हमेशा इस गाउन को निघ्त्य के ऊपर पहनती हो, मगर मैं ने कभी भी तुमको इस्सके अंदर वाले निघ्त्य में नहीं देखा, आज दिखा दो किसी लगती हो इस में!”
सान्वी झट से हट गयी उनके करीब से और सीरियस होकर कहा, “अगर आप ऐसे बातें करोगे तो मैं जाती हो सोने हाँ!” चावला साहब ने तब कहा, “अरे सान्वी किआ बुरा कहा मैं ने? बुसस इस गाउन को निकालना है तो?”
संवी ने मुंह बनाते हुए कहा, “नहीं, मैं नहीं निकलने वाली इससे आप के सामने!”
चावला साहब ने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है तो फिर मैं hi निकाल देता हूँ क्यों?”
सान्वी कड़ी हो गयी और डेंटन में अपने होंठ को दबाते हुए कहा, “आप को चढ़ गयी है आप जब नशे में नहीं होते हो तब क्यों ऐसे बातें नहीं करते? मैं जा रही हूँ!”
चावला साहब ने उस्सको रोकते हुए कहा, “आरी सुनो तो, औ आओ नाह इधर मेरे पास!” सान्वी रुकी और एक दो कदम उनके करीब आयी तो चावला साहब ने कहा, “कौन कहता है के जब मैं नशे में होता हूँ तब ऐसे बेहवे करता हूँ? आज सुबह सुबह तो थी तुम मेरे बाहों में किचन में और तुमने वही अपना पुराण, ‘वह लोग आजायेंगे, जाग जाएंगे लगा रखा था? हम्म? तो किआ मैं सुबह सुबह नशे में था किआ?”
सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “मुझे लगता है के आप जब से संजना से मिले हो तो उस्सने आप की आदतें बिगाड़ दिया है कहीं आप उसस्के साथ ऐसे तो नहीं बेहवे करते हो? हम्म बताइये मुझे?!”
चावला साहब ने झूट बोलते हुए कहा, “अरे वो नयी है, उसस्के साथ इतना क्लोसनेस्स कहाँ जितना तुमसे हैं, आओ मेरे पास बैठो नाह, तुमको ज़ोर से हुग करने को मैं कर रहा है औ मेरे पास!”
सान्वी ने कहा, “हम्म्म हुग ठीक है…” और वो बैठी उनके पास और चावला साहब ने सान्वी को ज़ोर से बाहों में भरके सीने से दबाया, और सान्वी ने भी अपने बाहों को उनके पीठ पर करके उनको सीने से लगाया काउच पर बैठे हुए. ऐसे हुग करना दोनों के आदत थे.
मगर आज चावला साहब का हाथ उसस्के पीठ से धीरे धीरे हट कर सान्वी के काँधे पर आये और उस्सने हलके से गाउन को काँधे पर से थोड़ा सा सरकाया, और सान्वी की निघ्त्य की स्ट्राप पर उनके ऊँगली पड़े तो सान्वी ने उनके उँगलियों को अपने काँधे पर फील किया और उस्सने हुग चोर्रा और उनके बाहों से निकलने की कोशिश किया मगर चावला साहब उस्सको नहीं चोरर रहे थे और सान्वी के गर्दन को चुम्मा फिर गले पर अपना जीब फेर्रा और सान्वी को ज़ोर से अपने ऊपर दबाते हुए काउच पर पीठ के बल लेट गया जिस से सान्वी उनके ऊपर हो गए अपने कांड पर अपनी सर्कि हुई गाउन को देखते हुए……
तो बे कॉन्टिनोएड……………..
चावला साहब का खड़ा हो गया था जिस वक़्त उस्सने सान्वी के गर्दन को चूमा और हाथ फेर्रा था उसस्के जांघ पर. वो उठकर बाथरूम के तरफ बढ़ रहे थे और सान्वी किचन के तरफ जाते हुए कहती गयी, “दीप्ति दिन भर पूछती रही आप के बारे में आप को मिस करती है वो, दिन भर आप को नहीं देखा न इस लिए!”
तो चावला साहब बाथरूम तक पहुँच कर कहा, “और दीप्ति की मम्मी ने नहीं मिस किया मुझको? वो मुझको कभी मिस नहीं करती किआ?”
सान्वी ने उनके तरफ मुस्कुराते हुए देखा और होंठों को दांतों में दबाते हुए कहा, “नाह! बिल्कुल भी नहीं मिस करती वो आप को!” फिर हंस पड़ी!
और चावला साहब अंदर चले गए नहाने को. अंदर से नहाते हुए आवाज़ ऊंची करके चावला साहब ने कहा, “सुनों एक पेग बना दो प्लीज, एक पेग लेकर खाना कहूंगा फिर बाद में पियूँगा खाना खा कर!” सान्वी बाथरूम के दरवाज़े के पास गयी और कहा, “आप ने तो कहा के आप ने संजना के पापा के साथ पिया था नाह? तो और क्यों अभी? आप तो खाने के बाद पिटे हो?”
चावला साहब ने अंदर से जवाब दिया, “अरे कभी कभी ऐसे पीने का मूड बन जाता है बना दो नाह एक पेग!” तो सान्वी ने धीरे से कहा, “okay”
कुछ देर बाद चावला साहब बाथरूम से निकले एक शार्ट और टीशर्ट में टॉवल से सर पोंछते हुए और सान्वी उनके खाना लगा रही थी टेबल पर तो उसस्के पास आते हुए उन्हों ने पूछा, “आज विवान कितने बजे ारः है वापस?”
सान्वी ने मुस्कुराते हुए उनको देखा और पूछा, “क्यों?”
तो उन्हों ने चेयर खिंच कर बैठते हुए कहा, “अरे भाई किआ अब यह भी पूछना मन है किआ?”
सान्वी फिर दांतों में होठ दबाते हुए कहा, “सुबह के 1 बजे आएंगे वो, कुछ देर पहले फ़ोन किया था एक प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और काफी वर्कर ओवरटाइम कर रहे हैं कहा उस्सने!”
चावला साहब ने निवाला लेते हुए कहा, “हम्म गुड गुड अच्छा संभाल रहा है काम वो; मेरे जाने के बाद बिल्कुल कंपनी को चला पाएगा, मुझे अब कोई फ़िक्र नहीं कंपनी की!”
सान्वी भी चेयर खिंच कर उनके पास बैठी और कहा, “क्यों? आप कहाँ जा रहे हो जो आप के जाने के बाद कहा आप ने?”
चावला साहब ने कहा, “बूढ़ा हो रहा हूँ अब मर गया तो उसी को संभालना होगा नाह कंपनी को!”
सान्वी ने उनके बाज़ू को पकड़ते हुए कहा, “आप बूढ़े थोड़े hi हो? आप तो बहोत मज़बूत सॉलिड स्टड हो जी!! आप क्यों मरने लगे अभी?
चावला साहब ने अपने व्हिस्की का एकांत सिप लेते हुए कहा, “पता नहीं जैसे आज मुझे फील हुआ उस वक़्त जब बप लौ हुई थी तो एक डर सा लगा, के पता नहीं कब ऐसे hi एक दिन टपक जाऊं हहहहए!”
तब सान्वी ने अचानक पूछा, “किआ आप किसी बात या चीज़ से घबराये थे? घबराने से भी बप लौ या हाई होता है, स्ट्रेस लेने से भी होता है, तो उस वक़्त जब बप लौ हुई थी किआ आप किसी चीज़ से घबराये या स्ट्रेस लिए थे?”
अब यह तो चावला साहब नहीं बता सकता था सान्वी को के उस वक़्त उस्सने अपने आप को एक चोरर की तरह घर के अंदर महसूस किया था संजना को अपने पापा के साथ रिकॉर्ड करते हुए, तो बिल्कुल एक घबराहट की तरह हुई थी ठीक उसी वक़्त उनको घुटन सी मेहसूस हुई थी और ठंडी हवा खाने का मैं किया था…. तो चावला साहब अब समझे के क्यों उस्सकी बप लौ हुई थी उस वक़्त संजना के घर के अंदर!!
खाना ख़तम करने के बाद चावला साहब लाउन्ज में काउच पर बैठ कर टीवी ों किया और सान्वी बाकी के बर्तनों को धोने गयी. अपने काउच से चावला साहब सान्वी को देख रहे थे. सान्वी की निघ्त्य और गाउन दोनों साटन की मटेरियल थे और जब सान्वी टेबल से प्लेट्स उठा कर चल रही थी तो उसस्के नितम्बों का फॉर्म उस साटन मटेरियल में अच्छी तरह से दिख रहे थे और सान्वी के कमर का वो हिस्सा जो चउरवे होता है वो बिल्कुल नज़र आरहे थे चावला साहब ko….ussko उस तरह से देख कर चावला साहब संजना की जिस्म को याद करने लगे और सोचा के उस्सको टेक्स्ट करना चाहिए… मगर इस वक़्त वो सान्वी के जिस्म से इंटरेस्टेड हो रहे थे…. सोचा के सान्वी के जिस्म अंदर कैसा होगा? किआ वैसा hi होगा जैसा संजना की है? संजना कुंवारी है, माँ नहीं बानी है, सान्वी एक बची की माँ है फिर भी उस्सकी फिगर बिल्कुल एक कुंवारी लड़की जैसे hi दिख रहे थे….. चावला साहब उस्सकी क्लीवेज तो अक्सर देखा करता है, उस्सकी जांघें भी बहोत देखा है मगर सान्वी को उस से ज़्यादा अंदर नहीं देखा है कभी पिछले 5 सालों में, तो उस्सको देखने का मैं हो रहा था…
सान्वी ने कुछ देर बाद और ड्रिंक्स बनाये उनके लिए और उनके पास काउच पर बैठी बात करते हुए. चावला साहब ने ड्रिंक ख़तम किया और एक और बनाने को कहा जो सान्वी ने बना के दिया उनको….. फिर तीसरा भी बना के दिया और चौथा ड्रिंक बनाने लगी तो सान्वी ने कहा, यह आखरी है okay? इस से ज़्यादा नहीं पीना ठीक है?!”
जब चावला साहब ने चौथी पेग ख़तम किया तो नशा सा चा गया था और हिमत भी बढ़ गयी थी और सोचा के अब सान्वी के ज़्यादा करीब जा सकता है और अपने हरकतों को और मज़बूत कर सकता है….
सान्वी उनके दाएं तरफ बैठी थी सत् के उन् से. तो चावला साहब ने अपने दायां बाज़ू को सान्वी के काँधे पर किया और उस्सको अपने करीब किया तो सान्वी का सर उनके छाती तक गए, वैसे करना आदत थे उनके और सान्वी अक्सर अपना सर उनके छाती पर रखती थी टीवी देखते वक़्त. लगता था के बाप बेटी बैठे टीवी देख रहे हैं. उंनका प्यार वैसा था. मगर अभी चावला साहब की नियत कुछ और थे. उनके छाती के बालों में तो सान्वी ने कई बार अपने उँगलियों को फेर्रा था मगर अभी चावला साहब टीशर्ट में थे और उतार भी नहीं सकते थे क्यूंकि संजना की किये हुए लोवेबिट्स अभी भी मिठे नहीं थे, हल्का सा अब बी नज़र आरहे थे…. सान्वी उनके चेस्ट पर अपना हाथ फेरर रही थी हलके हलके जिस से चावला साहब को बहोत अच्छा महसूस हो रहा था और उतेजिना भी बढ़ रहे थे उंनका….
हिमत जूता कर उन्हों ने कहा, “तुम हमेशा इस गाउन को निघ्त्य के ऊपर पहनती हो, मगर मैं ने कभी भी तुमको इस्सके अंदर वाले निघ्त्य में नहीं देखा, आज दिखा दो किसी लगती हो इस में!”
सान्वी झट से हट गयी उनके करीब से और सीरियस होकर कहा, “अगर आप ऐसे बातें करोगे तो मैं जाती हो सोने हाँ!” चावला साहब ने तब कहा, “अरे सान्वी किआ बुरा कहा मैं ने? बुसस इस गाउन को निकालना है तो?”
संवी ने मुंह बनाते हुए कहा, “नहीं, मैं नहीं निकलने वाली इससे आप के सामने!”
चावला साहब ने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है तो फिर मैं hi निकाल देता हूँ क्यों?”
सान्वी कड़ी हो गयी और डेंटन में अपने होंठ को दबाते हुए कहा, “आप को चढ़ गयी है आप जब नशे में नहीं होते हो तब क्यों ऐसे बातें नहीं करते? मैं जा रही हूँ!”
चावला साहब ने उस्सको रोकते हुए कहा, “आरी सुनो तो, औ आओ नाह इधर मेरे पास!” सान्वी रुकी और एक दो कदम उनके करीब आयी तो चावला साहब ने कहा, “कौन कहता है के जब मैं नशे में होता हूँ तब ऐसे बेहवे करता हूँ? आज सुबह सुबह तो थी तुम मेरे बाहों में किचन में और तुमने वही अपना पुराण, ‘वह लोग आजायेंगे, जाग जाएंगे लगा रखा था? हम्म? तो किआ मैं सुबह सुबह नशे में था किआ?”
सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “मुझे लगता है के आप जब से संजना से मिले हो तो उस्सने आप की आदतें बिगाड़ दिया है कहीं आप उसस्के साथ ऐसे तो नहीं बेहवे करते हो? हम्म बताइये मुझे?!”
चावला साहब ने झूट बोलते हुए कहा, “अरे वो नयी है, उसस्के साथ इतना क्लोसनेस्स कहाँ जितना तुमसे हैं, आओ मेरे पास बैठो नाह, तुमको ज़ोर से हुग करने को मैं कर रहा है औ मेरे पास!”
सान्वी ने कहा, “हम्म्म हुग ठीक है…” और वो बैठी उनके पास और चावला साहब ने सान्वी को ज़ोर से बाहों में भरके सीने से दबाया, और सान्वी ने भी अपने बाहों को उनके पीठ पर करके उनको सीने से लगाया काउच पर बैठे हुए. ऐसे हुग करना दोनों के आदत थे.
मगर आज चावला साहब का हाथ उसस्के पीठ से धीरे धीरे हट कर सान्वी के काँधे पर आये और उस्सने हलके से गाउन को काँधे पर से थोड़ा सा सरकाया, और सान्वी की निघ्त्य की स्ट्राप पर उनके ऊँगली पड़े तो सान्वी ने उनके उँगलियों को अपने काँधे पर फील किया और उस्सने हुग चोर्रा और उनके बाहों से निकलने की कोशिश किया मगर चावला साहब उस्सको नहीं चोरर रहे थे और सान्वी के गर्दन को चुम्मा फिर गले पर अपना जीब फेर्रा और सान्वी को ज़ोर से अपने ऊपर दबाते हुए काउच पर पीठ के बल लेट गया जिस से सान्वी उनके ऊपर हो गए अपने कांड पर अपनी सर्कि हुई गाउन को देखते हुए……
तो बे कॉन्टिनोएड……………..