Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 7 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

अपडेट 58 सान्वी टेकिंग केयर ऑफ़ चावला साहब

चावला साहब का खड़ा हो गया था जिस वक़्त उस्सने सान्वी के गर्दन को चूमा और हाथ फेर्रा था उसस्के जांघ पर. वो उठकर बाथरूम के तरफ बढ़ रहे थे और सान्वी किचन के तरफ जाते हुए कहती गयी, “दीप्ति दिन भर पूछती रही आप के बारे में आप को मिस करती है वो, दिन भर आप को नहीं देखा न इस लिए!”

तो चावला साहब बाथरूम तक पहुँच कर कहा, “और दीप्ति की मम्मी ने नहीं मिस किया मुझको? वो मुझको कभी मिस नहीं करती किआ?”

सान्वी ने उनके तरफ मुस्कुराते हुए देखा और होंठों को दांतों में दबाते हुए कहा, “नाह! बिल्कुल भी नहीं मिस करती वो आप को!” फिर हंस पड़ी!

और चावला साहब अंदर चले गए नहाने को. अंदर से नहाते हुए आवाज़ ऊंची करके चावला साहब ने कहा, “सुनों एक पेग बना दो प्लीज, एक पेग लेकर खाना कहूंगा फिर बाद में पियूँगा खाना खा कर!” सान्वी बाथरूम के दरवाज़े के पास गयी और कहा, “आप ने तो कहा के आप ने संजना के पापा के साथ पिया था नाह? तो और क्यों अभी? आप तो खाने के बाद पिटे हो?”

चावला साहब ने अंदर से जवाब दिया, “अरे कभी कभी ऐसे पीने का मूड बन जाता है बना दो नाह एक पेग!” तो सान्वी ने धीरे से कहा, “okay”

कुछ देर बाद चावला साहब बाथरूम से निकले एक शार्ट और टीशर्ट में टॉवल से सर पोंछते हुए और सान्वी उनके खाना लगा रही थी टेबल पर तो उसस्के पास आते हुए उन्हों ने पूछा, “आज विवान कितने बजे ारः है वापस?”

सान्वी ने मुस्कुराते हुए उनको देखा और पूछा, “क्यों?”

तो उन्हों ने चेयर खिंच कर बैठते हुए कहा, “अरे भाई किआ अब यह भी पूछना मन है किआ?”

सान्वी फिर दांतों में होठ दबाते हुए कहा, “सुबह के 1 बजे आएंगे वो, कुछ देर पहले फ़ोन किया था एक प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और काफी वर्कर ओवरटाइम कर रहे हैं कहा उस्सने!”

चावला साहब ने निवाला लेते हुए कहा, “हम्म गुड गुड अच्छा संभाल रहा है काम वो; मेरे जाने के बाद बिल्कुल कंपनी को चला पाएगा, मुझे अब कोई फ़िक्र नहीं कंपनी की!”

सान्वी भी चेयर खिंच कर उनके पास बैठी और कहा, “क्यों? आप कहाँ जा रहे हो जो आप के जाने के बाद कहा आप ने?”

चावला साहब ने कहा, “बूढ़ा हो रहा हूँ अब मर गया तो उसी को संभालना होगा नाह कंपनी को!”

सान्वी ने उनके बाज़ू को पकड़ते हुए कहा, “आप बूढ़े थोड़े hi हो? आप तो बहोत मज़बूत सॉलिड स्टड हो जी!! आप क्यों मरने लगे अभी?

चावला साहब ने अपने व्हिस्की का एकांत सिप लेते हुए कहा, “पता नहीं जैसे आज मुझे फील हुआ उस वक़्त जब बप लौ हुई थी तो एक डर सा लगा, के पता नहीं कब ऐसे hi एक दिन टपक जाऊं हहहहए!”

तब सान्वी ने अचानक पूछा, “किआ आप किसी बात या चीज़ से घबराये थे? घबराने से भी बप लौ या हाई होता है, स्ट्रेस लेने से भी होता है, तो उस वक़्त जब बप लौ हुई थी किआ आप किसी चीज़ से घबराये या स्ट्रेस लिए थे?”

अब यह तो चावला साहब नहीं बता सकता था सान्वी को के उस वक़्त उस्सने अपने आप को एक चोरर की तरह घर के अंदर महसूस किया था संजना को अपने पापा के साथ रिकॉर्ड करते हुए, तो बिल्कुल एक घबराहट की तरह हुई थी ठीक उसी वक़्त उनको घुटन सी मेहसूस हुई थी और ठंडी हवा खाने का मैं किया था…. तो चावला साहब अब समझे के क्यों उस्सकी बप लौ हुई थी उस वक़्त संजना के घर के अंदर!!

खाना ख़तम करने के बाद चावला साहब लाउन्ज में काउच पर बैठ कर टीवी ों किया और सान्वी बाकी के बर्तनों को धोने गयी. अपने काउच से चावला साहब सान्वी को देख रहे थे. सान्वी की निघ्त्य और गाउन दोनों साटन की मटेरियल थे और जब सान्वी टेबल से प्लेट्स उठा कर चल रही थी तो उसस्के नितम्बों का फॉर्म उस साटन मटेरियल में अच्छी तरह से दिख रहे थे और सान्वी के कमर का वो हिस्सा जो चउरवे होता है वो बिल्कुल नज़र आरहे थे चावला साहब ko….ussko उस तरह से देख कर चावला साहब संजना की जिस्म को याद करने लगे और सोचा के उस्सको टेक्स्ट करना चाहिए… मगर इस वक़्त वो सान्वी के जिस्म से इंटरेस्टेड हो रहे थे…. सोचा के सान्वी के जिस्म अंदर कैसा होगा? किआ वैसा hi होगा जैसा संजना की है? संजना कुंवारी है, माँ नहीं बानी है, सान्वी एक बची की माँ है फिर भी उस्सकी फिगर बिल्कुल एक कुंवारी लड़की जैसे hi दिख रहे थे….. चावला साहब उस्सकी क्लीवेज तो अक्सर देखा करता है, उस्सकी जांघें भी बहोत देखा है मगर सान्वी को उस से ज़्यादा अंदर नहीं देखा है कभी पिछले 5 सालों में, तो उस्सको देखने का मैं हो रहा था…

सान्वी ने कुछ देर बाद और ड्रिंक्स बनाये उनके लिए और उनके पास काउच पर बैठी बात करते हुए. चावला साहब ने ड्रिंक ख़तम किया और एक और बनाने को कहा जो सान्वी ने बना के दिया उनको….. फिर तीसरा भी बना के दिया और चौथा ड्रिंक बनाने लगी तो सान्वी ने कहा, यह आखरी है okay? इस से ज़्यादा नहीं पीना ठीक है?!”

जब चावला साहब ने चौथी पेग ख़तम किया तो नशा सा चा गया था और हिमत भी बढ़ गयी थी और सोचा के अब सान्वी के ज़्यादा करीब जा सकता है और अपने हरकतों को और मज़बूत कर सकता है….

सान्वी उनके दाएं तरफ बैठी थी सत् के उन् से. तो चावला साहब ने अपने दायां बाज़ू को सान्वी के काँधे पर किया और उस्सको अपने करीब किया तो सान्वी का सर उनके छाती तक गए, वैसे करना आदत थे उनके और सान्वी अक्सर अपना सर उनके छाती पर रखती थी टीवी देखते वक़्त. लगता था के बाप बेटी बैठे टीवी देख रहे हैं. उंनका प्यार वैसा था. मगर अभी चावला साहब की नियत कुछ और थे. उनके छाती के बालों में तो सान्वी ने कई बार अपने उँगलियों को फेर्रा था मगर अभी चावला साहब टीशर्ट में थे और उतार भी नहीं सकते थे क्यूंकि संजना की किये हुए लोवेबिट्स अभी भी मिठे नहीं थे, हल्का सा अब बी नज़र आरहे थे…. सान्वी उनके चेस्ट पर अपना हाथ फेरर रही थी हलके हलके जिस से चावला साहब को बहोत अच्छा महसूस हो रहा था और उतेजिना भी बढ़ रहे थे उंनका….

हिमत जूता कर उन्हों ने कहा, “तुम हमेशा इस गाउन को निघ्त्य के ऊपर पहनती हो, मगर मैं ने कभी भी तुमको इस्सके अंदर वाले निघ्त्य में नहीं देखा, आज दिखा दो किसी लगती हो इस में!”

सान्वी झट से हट गयी उनके करीब से और सीरियस होकर कहा, “अगर आप ऐसे बातें करोगे तो मैं जाती हो सोने हाँ!” चावला साहब ने तब कहा, “अरे सान्वी किआ बुरा कहा मैं ने? बुसस इस गाउन को निकालना है तो?”

संवी ने मुंह बनाते हुए कहा, “नहीं, मैं नहीं निकलने वाली इससे आप के सामने!”

चावला साहब ने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है तो फिर मैं hi निकाल देता हूँ क्यों?”

सान्वी कड़ी हो गयी और डेंटन में अपने होंठ को दबाते हुए कहा, “आप को चढ़ गयी है आप जब नशे में नहीं होते हो तब क्यों ऐसे बातें नहीं करते? मैं जा रही हूँ!”

चावला साहब ने उस्सको रोकते हुए कहा, “आरी सुनो तो, औ आओ नाह इधर मेरे पास!” सान्वी रुकी और एक दो कदम उनके करीब आयी तो चावला साहब ने कहा, “कौन कहता है के जब मैं नशे में होता हूँ तब ऐसे बेहवे करता हूँ? आज सुबह सुबह तो थी तुम मेरे बाहों में किचन में और तुमने वही अपना पुराण, ‘वह लोग आजायेंगे, जाग जाएंगे लगा रखा था? हम्म? तो किआ मैं सुबह सुबह नशे में था किआ?”

सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “मुझे लगता है के आप जब से संजना से मिले हो तो उस्सने आप की आदतें बिगाड़ दिया है कहीं आप उसस्के साथ ऐसे तो नहीं बेहवे करते हो? हम्म बताइये मुझे?!”

चावला साहब ने झूट बोलते हुए कहा, “अरे वो नयी है, उसस्के साथ इतना क्लोसनेस्स कहाँ जितना तुमसे हैं, आओ मेरे पास बैठो नाह, तुमको ज़ोर से हुग करने को मैं कर रहा है औ मेरे पास!”

सान्वी ने कहा, “हम्म्म हुग ठीक है…” और वो बैठी उनके पास और चावला साहब ने सान्वी को ज़ोर से बाहों में भरके सीने से दबाया, और सान्वी ने भी अपने बाहों को उनके पीठ पर करके उनको सीने से लगाया काउच पर बैठे हुए. ऐसे हुग करना दोनों के आदत थे.

मगर आज चावला साहब का हाथ उसस्के पीठ से धीरे धीरे हट कर सान्वी के काँधे पर आये और उस्सने हलके से गाउन को काँधे पर से थोड़ा सा सरकाया, और सान्वी की निघ्त्य की स्ट्राप पर उनके ऊँगली पड़े तो सान्वी ने उनके उँगलियों को अपने काँधे पर फील किया और उस्सने हुग चोर्रा और उनके बाहों से निकलने की कोशिश किया मगर चावला साहब उस्सको नहीं चोरर रहे थे और सान्वी के गर्दन को चुम्मा फिर गले पर अपना जीब फेर्रा और सान्वी को ज़ोर से अपने ऊपर दबाते हुए काउच पर पीठ के बल लेट गया जिस से सान्वी उनके ऊपर हो गए अपने कांड पर अपनी सर्कि हुई गाउन को देखते हुए……

तो बे कॉन्टिनोएड……………..
 
अपडेट 59 स्टिल सान्वी एंड चावला

उस पोजीशन में पहले सान्वी ने अपने काँधे पर अपने गाउन को ठीक किया फिर अपने मुठी बांध करके चावला साहब के छाती पर मारा हलके से यह कहते हुए, “छोरये मुहे चोररये नाह, किआ कर रहे हो आप पापा जी बुसस भी कीजिये अब चोररये नाह!!” मगर चावला साहब का जीब सान्वी के गर्दन को चाटते जा रहे थे और उस्का एक हाथ सान्वी के नितम्बों पर गया उस्सको दबाते हुए तो झट से सान्वी ने अपने हाथ से उस्का हाथ वहां से हटाया और ज़ोर लगाके उसस्के ऊपर से उठी हांफते हुए और थोड़ा जैसे नाराज़ होते हुए कहा, “उफ़ आप भी नाह, आप को बिल्कुल चढ़ गयी है मैं टीवी ऑफ करती हूँ आप जाइये अपने कमरे में इतस टाइम तो स्लीप, बप लौ होने पर यह हाल है ठीक होंगे आप तब किआ करेंगे भला उफ़!! जाओ जाओ सोने अब मैं तो चली अपने कमरे में, आप को जाना है तो जाओ वार्ना यहीं पड़े रहो आप!”

सान्वी का कमरा ऊपर था फर्स्ट फ्लोर पे और ससुर का कमरा निचे. तो ससुर वहीँ सोफे पर लेते अपने जीब को होंठों पर फरते हुए सान्वी को सीढ़ियां चढ़ते हुए देख रहे थे, उस्सकी गांड का मटकना, उस साटन वाले ड्रेस में कितना खूबसूरत और आकर्षित करती जा रही थी सान्वी ऊपर, एक दो बार नुड़कर उस्सने चावला साहब को देखा भी पर आगे बढ़ती गयी अपने बैडरूम के तरफ. जब कमरे तक आगयी तो दूर खोलने से पहले एक बार फिर सान्वी ने निचे लाउन्ज में चावला साहब को देखा के वो वहीँ लेते हुए हैं तो कहा, “ेय पिता जी जाओ अपने कमरे में यहीं रात गुजरने का इरादा है किआ आज रात?”

चावला साहब ने कहा, “ी ऍम ा साद मन टुनाइट!”

सान्वी हंससने लगी उनको सुनकर और पूछा, “क्यों साद मन हो आप आज की रात?”

चावला साहब ने कहा, “बेसोज माय सान्वी ऑलवेज मेक में स्लीप ों माय बीएड थें शी गोज तो स्लीप तो हेर रूम बूत टुनाइट शी लेफ्ट में हेरे अलोन एंड वेंट अवे! सो, ी ऍम ा बेरी बेरी साद मन टुनाइट!”

सान्वी ज़ोर से हंसी और सीढ़ियां उतारते हुए बोलती आयी, “आप भी नाह इमोशनल ब्लैकमेल करने में बहोत माहिर हो, चलो आप को आप की बैडरूम में चोरर कर आती हूँ वार्ना कहोगे के मैं ने आप का ख्याल नहीं रखा आवो चलो अब!” तब तक काउच के पास आ चुकी थी और चावला साहब को थाम कर उसस्के कमर पर और काँधे पर हाथ करके उसस्के बगल में चलते हुए उनके बैडरूम तक ले गयी उनको. जैसे के वो एक बेवड़ा था.

चावला साहब तो एहि चाहता था के उसस्के बीएड पर सान्वी को पटके इसी लिए वैसा इमोशनल ब्लैकमेल किया ताके सान्वी शो बीएड तक लेजाए.

अब सान्वी ने उनको कपडे उतारने को कहा, उनके टीशर्ट निकालने जा रही थी तो चावला साहब ने कहा, “नहीं यह नहीं सिर्फ शार्ट निकलूंगा टीशर्ट पेहेन कर सोऊंगा, ठण्ड है आज रात.” तो सान्वी ने कहा, “हाँ तो निकालिये शार्ट!” चावला साहब ने कहा, “नहीं तुम निकालो नाह!” सान्वी ने अपने दोनों बाहों को क्रॉस किया और खड़े होकर चावला साहब को देखते हुए कहा, “आप एक छोटा सा बचा हो जो मुझको आप के शार्ट निकलना चाहिए हम्म?”

चावला साहब ने कहा, “आरी तो किआ आज पहली बार है किआ? कितनी बार मैं नशे में होता हूँ तो मेरे सभी कपडे उतार कर मुहको सुलाकर तब जाती हो है के नहीं?”

सान्वी ने कहा, “हाँ सही है, मगर आज आप उतने नशे में नहीं हो, नशे में होते तो चल कर यहाँ तक नहीं आ पाते, और जो कुछ किया अभी मेरे साथ काउच पर? पुरे नशे में होते तो वो सब नहीं करते!”

और चावला साहब ने फिर कहा, “आओ नाह यहाँ बीएड पर मेरे पास आओ नाह …”

सान्वी ने कहा, “नहीं बिल्कुल नहीं आप बहोत नॉटी हो रहे हो नहीं आउंगी!”

चावला साहब: “तुम पे बहोत प्यार ारः है मुझे, आओ नाह प्यार करूँ तुमको थोड़ा सा प्लीज आओ नाह!”

सान्वी को दया आगया जिस तरह से उन्हों ने कहा, पिघल गयी वो, ेंखें भर आयी उस्सकी और चली गयी प्यार करने उन् से!”

और जैसे hi वो बैठी बीएड पर उनके पास चावला साहब ने बड़े प्यार से कहा “शार्ट तो उतार्दो नाह प्लीज,” वो लेता हुआ था अपने पीठ पर.

तो सान्वी ने उनके शार्ट निकाले और जैसे शार्ट निकल गयी तो संवी ने उनके बॉक्सर के निचे उनके मोठे लिंग को देखा जो एकदम तन्ना हुआ था, उस्का फॉर्म बहोत बड़ा दिख रहे थे और सान्वी जैसे स्टेचू बन गयी लिंग को देखा फिर उनके चेहरे में देखा दोबारा लिंग को देखा फिर उनको देखा के वो अपने होंठों पर जीब फरते हुए ेंखों से जैसे इशारे में पूछ रहे हो के किआ हुआ?

सान्वी जो बीएड पर बैठी थी उठ गयी और कहा अब जा रही है तो जल्दी से चावला साहब उठ बैठे बीएड पर और सान्वी का हाथ पाकर के उस्सको खींचा अपने तरफ और सान्वी को ठीक अपने लिंग पर बिठाया, सान्वी कुछ बोल नहीं रही थी उस्सको पता था के वो उनके लिंग पर बैठी है फील भी कर रही थी अपने नितम्बों के निचे उनके मोठे लिंग को, और क्यूंकि साटन मटेरियल की ड्रेस थी तो आसानी से फिसल रही थी और चावला साहब ने सान्वी को बाहों में जकरा और फिरसे उसस्के गर्दन को चूमते हुए जीब फेर्रा उसस्के गर्दन और गालों पर. सान्वी ने करने दिया और तब चावला साहब का जीब सान्वी के होंठ को छुआ तब सान्वी ने मुंह को एक तरह कर लिया और कहा, “बुसस अब मैं चलती हूँ आप होश में नहीं हो पिता जी मुझे यहाँ से चले जाना चाहिए अब!” सान्वी की धड़कनें तेज़ होने लगी थी और हलके से हांफने लगी थी और उस्सकी आवाज़ में एक थरर्ठराहट थी.

चावला साहब ने अपने कमर को थोड़ा सा हिलाया उस्सकी नितम्बों के निचे जो सान्वी ने खूब फील किया तब झट से उठ गयी और चल कर जाने लगी बिना कुछ कहे, चावला साहब बुलाता रहा उसे मगर वो बिना कुछ बोले चुप चाप निकल गयी कमरे से दरवाज़े को बांध करते हुए और चावला साहब को पता चल गया के अब वो नहीं आने वाली.

चावला साहब ने खुद से कहा के एक पहली बार के लिए इतना कम नहीं था, आहिस्ते आहिस्ते सान्वी ज़रूर रास्ते पे आजाएगी!

उधर सान्वी अपने कमरे में जाकर अपनी निघ्त्य के ऊपर वाले गाउन को निकला, खुद को आईने में देखा और कहा, “क्यों वो मुझे ऐसे देखना चाहते हैं? किआ है मुझ में जो वह देखना चाहते हैं? मुझे बहोत शर्म आएगी उनके सामने इस निघ्त्य में जाना, ब्रा नहीं है मेरे बूब्स साफ नज़र आरहे हैं, सब दिखेगा उनको, और वो शायद एहि देखना चाहते हैं…. किआ उनको पता है के मैं निघ्त्य के निचे ब्रा नहीं पहनती हूँ? और इस निघ्त्य में मेरा पंतय भी दिख रहा है, तो उनको सब दिखेगा… मुझको बहोत शर्म आएगी इस तरह उनके सामने रहना क्यों वो मुझे ऐसे देखना चाहते हैं भला? धत!!”

सान्वी बीएड पर लेट कर उनको सोचती रही. उनके बॉक्सर में उनके लिंग को सोचती गयी और किश तरह उसस्के ऊपर बैठी थी अपने नितम्बों के निचे उस्सको फील करते हुए, किश तरह से उसस्के दिल की धड़कनें तेज़ हुई थी, सब कुछ सान्वी लेते हुए सोच रही थी के उस्सकी ेंख लग गयी……….

तो बे कॉन्टिनोएड…………..
 
अपडेट 60 स्टिल अबाउट बोथ ऑफ़ थम

अगले सुबह को चावला साहब लेट उठे. सान्वी सुबह 5 बजे से उंनका वेट कर रही थी किचन में, मामूल से वो भी 5.30 तक उठ जाते हैं मगर आज सोते रहे वो, शायद कल की थकान की वजा से या बप लौ होने की वजा से सोते रहे… जब 8 बज गए और चावला साहब कमरे से नहीं निकले थे तो सान्वी को फ़िक्र हुआ के कहीं उनके बप की वजह से कोई प्रॉब्लम तो नहीं हुई है उनको, तो जल्दी से वो उनके कमरे में गयी तो देखा के वो नींद में है…. सान्वी उनको नींद में देख कर मुस्कुरायी उस्सको लगा जैसे एक बच्चा सो रहे हैं… कुछ नहीं ओढ़े थे उन्हों ने ऐसे hi थे टीशर्ट और बॉक्सर में, और सान्वी की नज़र बॉक्सर पर गयी तो देखा के लिंग कल रात की तरह तना हुआ नहीं है, नार्मल फॉर्म में थे उंनका लिंग. सान्वी को हंसी आयी और अपने मुंह को हाथ से कवर करके हंसी सान्वी ने. कुछ देर उनको वैसे सोते हुए देखते रहे फिर आहिस्ते से उनके बीएड पर बैठी और उनको हलके से छह कर जगाने की कोशिश की सान्वी ने, मगर चावला साहब ने एक करवट लिया और चेहरे उस तरफ करके सोते रहे…. तो सान्वी ने कहा, "सुबह के 8 बज गए हैं आज नहीं उठना है किआ जी?”

तब चावला साहब ने ेंख खोला सान्वी की आवाज़ सुनकर और पीठ पर आकर अपने बाहों को खोला सान्वी को बाहों में भरने के लिए, और सान्वी गयी उनके बाहों में अपने सर को उनके छाती पर रखते हुए. चावला साहब सान्वी के सार पर, उसस्के बालों में उँगलियाँ फरते हुए कहा, “क्यों इस से पहले नहीं जगाया तुमने? दीप्ति अभी तक नहीं उठी किआ?” विवान चला गया किआ काम पर?”

सान्वी उनके छाती पर सर रखे हुए hi जवाब दिया, “हम्म्म दीप्ति नहीं उठी अभी तक और विवान तो 10 बजे उठेगा नाह?” चावला साहब ने एक अंगराई लिया और सान्वी उनके चेस्ट पर हलके से हाथ मलते हुए पूछा, “कल रात की बात याद है आप को?” चावला साहब उस्सको फिर बाँहों में बरके कहा, “बिल्कुल याद है तुम हो के चली जाती हो हर बार मेरे साथ थोड़ा वक़्त नहीं गुज़ार सकती हो किआ?”

सान्वी ने कहा, “वैसे आप के साथ वक़्त गुज़ारना ठीक होगा किआ?”

चावला साहब उसस्के गर्दन को चूमते हुए कहा, “क्यों ठीक नहीं होगा? विवान तो 1 बजे आने वाला था तुम 11 बजे यहाँ थी, दो घंटे थे हमारे लिए तो कम से कम एक घंटे तक तो तुम मेरे साथ इस बीएड पर गुज़ार सकती थी तो क्यों चली गयी थी?”

सान्वी ने कहा, “आप ने किआ कहा था आप मुझे मेरे निघ्त्य में देखना चाहते हो क्यों? वो नशे में कहा था या सच में आप वैसा चाहते हो?”

चावला साहब ने कहा, “अभी इसी वक़्त भी देखना चाहता हूँ निकालो गाउन को और दिखाओ मैं सच में देखना चाहता तुम्हें इस निघ्त्य में!” सान्वी ने उनके छाती से सर उठाते हुए, उठकर कढ़ी हुई और कहा, “सच? मैं निकलूं गाउन को अभी के अभी?”

चावला साहब उठ बैठे बीएड पर और तैयार हो गए सान्वी को निघ्त्य में देखने के लिए मगर सान्वी ने अपने जीब निकालके उनको चेररते हुए दावती हुई कमरे से बाहर चली गयी. जाते जाते कहते गयी, “जल्दी नहाधो कर तैयार हो जाईये आप की चाहती संजना आप का वेट कर रही होगी ड्राइविंग सीखने के लिए!!”

चावला साहब सान्वी की उस ऐडा पर मर मिठे, जिस तरह से सान्वी ने जीब निकला उस्सको चेर्रा, वो बहोत इरोटिक और सेक्सी था. चावला साहब ने सोचा किआ सान्वी समझती है के वो उस तरह से जीब निकाल कर मुझको चेररणा एक इशारा दे गयी के वो राज़ी है मेरे साथ सोने के लिए? किआ वो अपनी निघ्त्य निकालना चाहती थी सच में या मुझको यूँही तरसा रही है? किआ है उसस्के दिल में इस बारे में?

उधर सान्वी वापस किचन में जा कर सोच रही थी किश तरह ससुर ने उस्सको अभी के अभी निघ्त्य की गाउन निकालने को कहा, खुद से कहा संवी ने, “विवान घर में है फिर भी सुबह सुबह वो मुझको मेरे निघ्त्य में देखना चाहते हैं? किआ करते वो अगर मैं सच में निघ्त्य में उनके सामने होगी तो? मुझको बाहों में भरेगा, मेरे बूब्स उनके सीने से चिपकेगा, और वो मेरे गर्दन को चूमेगा, पर मेरी एंटी पतली निघ्त्य की स्ट्राप, उस्का मुंह मेरे नंगे काँधे पर भी फ्रेगा, उफ़ मैं तो मर्डर जाउंगी उनके छुवन से, किआ मैं सेहेन कर पाऊँगी? बहोत लज्जा आएगी मुझको उन् के सामने ऐसे रहने को!! उफ़ यह पिता जी बी नाह? पता नहीं कैसे कैसे ख्याल पैदा करत्ते हैं मेरे में में! धत!!”

चावला साहब फ्रेश होकर तैयार होने लगे तो एक कपडे की तलाश कर रहे थे तो सान्वी को आवाज़ दिया उस कपडे को ढूंढ़ते हुए. सान्वी गए उनके कमरे में और कपडे को अलमारी से निकाल कर उनको देते हुए कहा, "अरे वह आप तो यंग और हैंडसम लगने लगे, शेव भी कर लिया? कौन सा आफ्टर शेव लगाया है जो इतना महक रहा है, ज़रा देखूं तो, यह कहते हुए सान्वी उनके पास गयी और उनके गाल को सुंघा, और चावला साहब ने उस्सको जाकर लिया और वही उस्सकी गले और गर्दन को चूमने लगा खड़े हुए पोजीशन में. सान्वी ने धीमी आवाज़ में कहा, “उफ़ आप फिर शुरू हो गए अब विवान उठने वाला है चोरडिये नाह, जाईये अपनी संजना को ऐसे जकरना, उस के साथ भी ऐसे hi करते होंगे आप, है नाह? सच बोलिये!”

चावला साहब अपने निचे के जिस्म का हिस्सा सान्वी के निचे वाले हिस्से पर ज़ोर से दबाते हुए कहा, “क्यों तुम हर बार संजना को लेकर ऐसे बातें करती हो? तुम समझती हो के जैसे तुमसे क्लोज हूँ उस से भी हूँगा? तुम समझती हो के वो नयी लड़की मुझको उससे ऐसे बाहों में भरने देगा किआ? हम्म?”

सान्वी ने उनके छाती पर अपने हथेली को ज़ोर से दबाते हुए , जैसे उनको पुश करते हुए कहा, “जिस तरह से मैं ने आप दोनों के ेंखों को एक दूसरे को देखते हुए देखा, जिस तरह से आप को उस से बातें करते हुए सुना तो एहि लगता है के आप उस से मुझसे बहोत ज़्यादा क्लोज हो, मुझे किआ पता आप किआ किआ करते होंगे उसस्के साथ? दिन दिन भर उसस्के साथ रहने लगे हो आप. आरव से ज़्यादा वक़्त तो आप बिताते हो उसस्के साथ, मांगितर आरव है या आप? आरव को उस से मिलना जाना चाहिए था तो यहाँ आप मिलने जाते हो जैसे आप से hi मांगनी हुई है उस्सकी, चलो जाओ आप उसी के पास और चोर्रो मुझे आप!!”

चावला साहब ने सान्वी को बाहों में जाकर hi रखा और उसस्के गालों को और नेकलिने पर अपने होंठ और जीब फरते हुए कहा, “हम्म्म तुम्हारे बातों से जलन की भूः आने लगी है, किआ तुम संजना से इन्सेक्युरे फील करने लगी हो? अभी तो वो इस घर में आयी भी नहीं है, जब आगयी तब किआ बोलोगी हम दोनों को तुम हम्म्म?”

सान्वी ने फील किया के उंनका लिंग मोटा हो गया और उसस्के पथ के निचे वो ज़ोर से दबा रहे हैं और थोड़ा रागढ भी रहे हैं, तो सान्वी उनके बाहों से निकलने के लिए स्ट्रगल करने लगी, अपने कमर को पीछे कर लिया, और चावला साहब ने अपना मुंह सान्वी के मुंह पर किया, उस्का जीब सान्वी के होंठ पर फ्री तो झट से सान्वी ने मुंह घुमा लिया और स्ट्रगल करती रही निकलने के लिए उनके बाहों से. मगर चावला साहब उस्सको नहीं चोरर रहे थे…

तो सान्वी ने बिनती किया, “ोफो चोररये नाह विवान अगर जाग गया तो हमारी आवाज़ उस तक पहुंचेगा, वो ऐसे hi चेररता रहता है मुझे के आप मेरे दूसरे पति हो और अब कहेगा के दूसरे पति के बाँहों में मौज मस्ती कर रही थी चोररये नाह!!”

चावला साहब ने अपने लिंग को कपडे समेत और ज़ोर से दबाया सान्वी के पथ के निचे और कहा, “तो बनालो मुझे अपना दूसरा पति, करलो मुझ मस्ती इस दूसरे पति से, एक किश दो मुझे तब चोररटा हूँ…”

सान्वी ने अपना मुंह उनके चेहरे तक किया उनके गालों पर किश करने के लिए जो हर रोज़ करती थी जो मामूली बात थी मगर आज चावला साहब ने सान्वी के मुंह को अपने मुंह में ले लिया और अपने जीब को उसस्के मुंह के अंदर डालना चाहा, सान्वी अपना मुंह नहीं हत्ता पायी क्यों के चावला साहब ने उसस्के सर के पीछे एक हाथ दबा रखे थे किश करते वक़्त…. सान्वी के होटों को चूसा चावला साहब ने और सान्वी चटपटा रही थी उनके बाहों से निकलने के लिए, फिर सान्वी के होंठों को चुस्सने के बाद चावला साहब ने कहा, “मुंह खोलो नाह, प्लीज खोलो नाह, अपने मुंह का स्वाद अपने मुंह में लेने दो नाह!!” सान्वी नाह में गर्दन हिलाती रही और मुंह नहीं खोला.

तो चावला साहब ने उस्सको चोरर दिया. सान्वी दो कदम पीछे हाथ कर उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “उफ्फ्फ!! मैं ने बिल्कुल नहीं सोचा था के आप इस तरह से किश करोगे मुझे, यह ठीक नहीं है!! किआ हो गया है आप को भला? किआ संजना को ऐसे किश करते हो किआ आप? बोलो?” किआ वो मुंह खोलती है हाय राम किआ आप और संजना यह सब करते हो तभी आप मुझसे भी अब वो सब करना चाहते हो? आप संजना से मिलने से पहले तो मेरे साथ ऐसे नहीं करते थे? बताइये किआ आप का संजना के साथ ऐसा सम्बन्ध है किआ?”

चावला साहब मुस्कुरा रहे थे संजना की बात आयी तो, और सान्वी के चेरे में देखते हुए कहा, "तुम पागल हो, उसस्के साथ ऐसा कुछ भी नहीं, तुम ग़लत सोच मत पालो अपने दिमाग़ में, तुम किआ समझती हो के हर कोई सान्वी है किआ मेरे लिए? तुम अब मेरे इस घर में मेरी पत्नी की तरह हो, विवान ने कहा नाह के मैं तुम्हारा दूसरा पति हूँ, सो हूँ और आज रात को अगर विवान लेट आया तो तुम मेरे बीएड पर मेरे साथ रहोगी सिर्फ निघ्त्य में बिना इस मनहूस गाउन के okay? सो सी यू टुनाइट डार्लिंग सान्वी…..”

यह कहकर चावला साहब अपने कमरे से निकले और सान्वी वहीँ कड़ी रह गयी अपने खुले मुंह पर अपना हाथ किये हुए! उस्सको झटका लगा चावला जी के बातों से…..

सान्वी उनके पीछे जल्दी से निकले लाल चेहरा लिए तब तक चावला साहब गेराज तक जा चुके थे, भागते हुए सान्वी गेराज तक गए और उनको रोका. चावला साहब कार का दरवाज़ा खोलने hi वाले थे के सान्वी वहां आयी और उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “आप ऐसे सोच अपने दिमाग़ से निकाल दीजिये, मैं आप की बहोत इज़त करती हूँ, प्यार भी करती होऊं मगर उस तरह नहीं जैसे आप सोच रहे हो, यह सब ग़लत है जी…. आप हमारे प्यार को बदनाम कर डोज अगर ऐसा कुछ हुआ तो.

चावला साहब मुस्कुराते हुए सान्वी के चेहरे में देख रहे थे और अचानक सान्वी का हाथ पाकर के अपने तरफ खिंचा और सान्वी के मुंह को फिर अपने मुंह में लिया, इस बार सान्वी का मुंह थोड़ा सा खुला था और चावला साहब का जीब कोई एक इंच तक उस्सने मुंह के अंदर गया….. फिर झट से तुरंत सान्वी ने उनको पुश करते हुए हट गयी और उनके चेहरे में देखते हुए भीगे ेंखों से कहा, “आप क्यों ऐसा कर रहे हो? किआ हो गया है आप को! मैं वैसी नहीं हूँ पिता जी!!”

सान्वी के ेंखों में ेंसू देख कर चावला साहब हैरान हुए और तरस आया उस्सको, तो जल्दी से उस्सको अपने बाहों में भरके उसस्के सर को सहलाते हुए कहा, “आरी इस में रोने की किआ बात है? ससष्ठ. छुप हो हो. शह्ह्ह्ह!” और सान्वी और ज़्यादा रोने लगी उनके सीने पर सर रख कर.

चावला साहब नहीं समझ रहे थे के अब किआ करें. सान्वी का पीठ सहलाता रहा और उस्सको छुप होने का वेट किया. और जब वो रुकी रोने से तो कहा, “अब जॉन मैं? हम्म okay अगर तुमको यह सब नहीं पसंद तो आज के बाद नहीं करूँगा यह सब ठीक है?”

सान्वी ने हाँ में सर हिलाया सर झुकाये हुए. और चावला साहब ने उसस्के गाल पर अपना हाथ फरते हुए उस्सको bye कहा और गुड डे विश किया, तब सान्वी अपने नाक के पानी अंदर खींचते हुए कहा, “हैवे ा नीस डे आप भी और ज़्यादा देर मत करना अँधेरा होने से पहले वापस आजाना आप” तब तक कार स्टार्ट कर दिया था चावला साहब ने और निकलने लगे थे वेव करते हुए सान्वी को तो सान्वी ने आवाज़ थोड़ा ऊंची करके कहा, “और खाना खा लेना टाइम पर, बप को लौ मत होने देना, bye!”

और चावला साहब निकल गए और ड्राइव करते हुए बड़बड़ाते गए, “इस्सके गर्दन को चूमूँ ठीक है, इस्सके गले को चूमूँ ठीक है, इस्सके जांघ पर पांच सालों से हाथ फरता चलूँ ठीक है, इस्को सीने से जी भर के दबाऊं ठीक है, मगर निघ्त्य में देखना चाहूँ तो रोने लगी, मुंह में किश करूँ तो नखरें भरी हुई है, चल कुछ नहीं करता तेरे साथ फिलहाल मगर एक दिन छोडूंगा तुझे भी सान्वी और तू छुडवाएगी मुझसे, एक बार छुड़वा लिया तब खुद बार बार कहेगी के तुझे छुड़वाना hai…chal जा, तुझसे तो मेरी संजना अच्छी!!!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………… (3400 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 61 चावला साहब इंडिफ्रेंट

संजना उंनका वेट कर रही थी रेडी होकर क्यूंकि कल बात हो गयी थी के सीधे शहर जाएंगे ड्राइविंग के लिए. चावला साहब कार में hi बैठे रहे और हॉंक किया. संजना घर के द्वार पर कड़ी उनको घर के अंदर आने का इंतज़ार कर रही थी. मगर चावला साहब ने कार से hi हाथ से कार में आने का इशारा किया संजना को.

संजना को बहोत हैरानी हुई क्यूंकि वो वेट कर रही थी के साहब अंदर आएगा उस्सको बाहों में भरके थोड़ा प्यार करेगा फिर कुछ देर बाद ड्राइविंग को जाएंगे, मगर जब चावला साहब ने उस्सको कार में आने के लिए कहा तो उस्सको कुछ अजीब लगा, मगर गयी कार में जाना तो था hi.

अंदर आते hi संजना ने चावला साहब को अपने गाल दिए किश के लिए तो उन्हों ने किश किया और फर्स्ट गियर लगा कर ड्राइव करने लगे, संजना ठीक से बैठी भी नहीं थी के कार चल पड़ा. संजना खामोश उनको देख रहे थे और उस्सको भी दिख गया के साहब का मूड कुछ ठीक नहीं लग रहे हैं. तो काफी देर तक संजना भी खामोश रही कुछ भी नहीं कहा. 20 कंस में शहर रीच होना था और ज़्यादा नहीं बचा था कोई 10 मीन्स में रीच होने वाले hi थे बिना एक भी बात किये…..

संजना के समझ में नहीं आरहे थे के किआ बात हुई है, वो यह सोचने लगी के कल रात को चावला साहब ने उसस्के पिता के साथ देखा वो उस्सको पसंद नहीं आया होगा इसी लिए वो इस तरह अजीब बेहवे कर रहे हैं…. संजना ने एक स्कर्ट और ब्लाउज पहनी थी जिस में वो बहोत सेक्सी दिख रही थी, उस्सने सोचा था पूरा रास्ता चावला साहब का हाथ उसस्के जाँघों को सहलाता जाएगा मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ बल्कि चावला साहब ने ठीक से उस्सको देखा तक नहीं…. संजना के समझ में नैन आरही थी के किआ करें!

और आखिर में उस ड्राइविंग स्कूल तक पहुँच गए बिना एक बात किये एक दूसरे से. ऐसा आज पहली बार हुआ था जब से दोनों मिले थे. चावला साहब का आशिकाना मिज़ाज, उस्का फ़्लर्ट करना, रोमांस करना सब ग़ायब थे. संजना उदास हो गयी और वो खामोश hi रहना बेहतर समझी.

कार रुकी, चावला साहब उतरे और संजना को बाहर निकलने का इशारा किया. वो उस आदमी से मिले और कहा, “हेरे शी इस, आप कितने बजे फिनिश करोगे उसस्के साथ? और किधर जाओगे सीखने को?” उस आदमी ने कहा शाम 1.30 को एक दूसरा आदमी ड्राइविंग के लिए आने वाला है तो 1.30 को वापस आजाएगा. तो चावला साहब ने कहा ok. और निकलने लगे.

संजना उनको देखती रही मगर उन्हों ने संजना के तरफ देखा भी नहीं और निकल गए…. संजना को रोना आया और रट हुए बाहर निकली उनके पीछे, और जैसे चावला साहब कार के अंदर जाने वाले थे संजना ने कहा, “सुनिए तो” तृप्ति आवाज़ में, और जब चावला साहब ने मुड़के देखा तो यह मोती मोती ेंसू बह रहे थे संजना के दोनों गैलन पर. चावला साहब को बहोत अफ़सोस हुआ, बिल्कुल जेईई एक छोटी बच्ची रोटी है उस तरह से संजना ने सिसकते हुए पूछा, “मुझसे कोई ग़लती हुई किआ जी?”

चावला साहब ने झपट के ज़ोर से संजना को अपने बाहों में भरा और उसस्के दोनों गैलन से उसस्के ेंसुओं को अपने जीब से चाटते हुए कहा, “no माय बेबी, no माय लव, कोई भी ग़लती नहीं हुई है तुमसे, मैं बुसस काम के सिलसिले में कुछ खोया हुआ था इसी लिए बात नहीं किया, ी ऍम वैरी सॉरी डार्लिंग, प्लीज फॉरगिव में, माफ़ करो मुझे मेरी जान. मऊवः.” और चरों तरफ किश किया उन्हों ने संजना को जो रोटी hi जा रही थी. जब रुकी तो संजना ने अपनी बचपने आवाज़ में सिसकते हुए रुक रुक कर कहा, “आप ने ka…kabhi बी.. बी … भी एईई…. ऐसे न… नहीं बेहवे की… किया मेरे साथ…. मैं ने सो… सोचा के…… मैं ने कुछ गलती कर दिया है….” रुक रुक कर सांस लेते हुए बात किया संजना ने एक प्यारी छोटी बच्ची की तरह जिस से चावला साहब का दिल बिल्कुल माँ हो गया.

चावला साहब काफी देर तक उस्सको अपने बाहों में जकरा रहा, उसस्के सर सहलाते हुए और गालों पर चुम्बन देते हुए जब तक के संजना बिल्कुल छुप नहीं हुई.

वो लड़की जो चुलबुली थी जो बात बात पर हीहीहीही करती रहती थी आज इतना रो पड़ा उनके बेहेवियर की वजा से यह खुद चावला साहब को बहोत hi बुरा लगा और खुद को कॉस्ट हुए उस्सने अपने आप से कहा के सान्वी का ग़ुस्सा वो संजना पर उतार रहे थे….. संजना छुप हुई तो उंनसे पूछा, “आप तब तक किआ करोगे, कहाँ रहोगे जब तक मैं ड्राइविंग के लिए जाउंगी?”

चावला साहब ने कहा “तुम मेरा फ़िक्र छोर्रो जाओ और अछि तरह से ड्राइविंग सीखना, ड्राइविंग पर कंसन्ट्रेट करना”

संजना ने कहा, “कैसे फ़िक्र नाह करूँ, आप मुझे यह बताओ के आप को कल किआ हुआ था मैं कितनी फ़िक्र कर रही थी, मैं ने आप को कितने मेस्सगेस भी सेंड किया रात को आप ने एक भी रिप्लाई नहीं किया मुझे, मेरे यहाँ आने से पहले फ़ोन भी नहीं किया, बताइये किआ हुआ था आप को कल?”

“कुछ ख़ास नहीं बुसस बप लौ हो गया था कुछ नहीं खाया था इस लिए, घर पर खाना खा लिया तो सब नार्मल हो गया, इस में कुछ फ़िक्र करने वाली बात hi नहीं है. संजना ने अपने मुंह पर हाथ रखते हुए कहा, “हाय, मैं ने आप को कुछ भी नहीं दिया था कल लंच के बाद, मैं बिल्कुल भूल गयी थी हम बातों में इतने बिजी थे और आप ने वो प्लान वाली बात कर दिया था तो उस में उलझ गए थे तो खाने पिने का बिल्कुल नहीं सोचा मैं ने भी, ी ऍम सॉरी!”

चावला साहब ने उस से कहा के उस में उस्सकी कोई भी दोष नहीं और माफ़ी मांगने की ज़रुरत hi नहीं. तो संजना ने कहा, “देखो आप, आज ज़रूर खा लेना बारह बजे वो देखिये वहां एक होटल है, एक ढाबा भी है उस तरफ, और उस तरफ मेरा कॉलेज है… और आप मेरा वेट करोगे नाह 1.30 बजे तक?”

चावला साहब ने कहा, “नहीं मैं वापस जा रहा हूँ तुम मुझे मत एक्सपेक्ट करना वापस आने के बाद!”

संजना बिल्कुल हैरान होकर उनको देखते हुए रोनी सूरत बना के कहा, “व्हाट? आप वापस जा रहे हो? तो आये क्यों थे मैं बस से भी तो यहाँ आ सकती थी!”

और चावला साहब ने कहा, “आरी बुद्धू मैं मज़ाक कर रहा हूँ, भला इतनी दूर आकर वापस जाऊंगा मैं किआ? तो संजना ने अपने बाहों को उनके गले का हार बना के उनके गालों को चूमा और चरों तरफ देख कर के कोई नहीं देख रहा तो चावला साहब के होंठों को किश किया संजना ने, और चावला साहब ने कहा, “अंदर आओ कार में!”

संजना ख़ुशी से अंदर गयी और दोनों एक लम्बी किश में एक दूसरे के जीब चूस्ते हुए कार में बैठे रहे जब तक उस ड्राइविंग स्कूल वाले ने अपने ड्राइविंग वाले कार से हॉंक नहीं किया!!

तब झट से संजना उनके बाहों से निकली और अपने ड्राइविंग कार के तरफ बढ़ते हुए मूढ़ कर चावला साहब से कहा, “खाना खाना मत भूलना और ईस्ट में कोई 3 किलोमीटर्स के बाद एक पार्क है वहां वक़्त गुज़ार सकते हो जब तक मैं वापस आऊं okay?”

चावला साहब ने उस्सको वेव किया और संजना चली गयी…..

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 
अपडेट 62 चावला वेटिंग फॉर संजना बूत ....

चावला साहब उस पार्क के तरफ ड्राइव करते गए जिस के बारे में जाते जाते संजना ने बताया. वहां पहुंचे तो कार पार्क करके एक बेंच पर एक दरखत के निचे बैठे और अपने दोनों हाथ सर के पीछे करके बेंच पर लेट गए. उस दरखत पे सब से ऊपर वाले डाली पर एक चिडया घोंसला बना रहे थे, चावला साहब उस्सको अदमीरे करने लगे. चावला साहब ने खुद से कहा, “हम इंसान समझते हैं के सिर्फ हम म्हणत करते हैं दुन्या में, इस छोटी सी चिडया को देखो, कितनी म्हणत से एक एक तिनके को किश तरह जोरर कर एक बाध्य घोंसला बना रहे हैं, कितना हिमत और पेशेंस हैं इस एक छोटी सी जान में, यह नाह घबराती है नाह दरर्ति है, इस्को पता है के यह घोंसला बनाना ज़रूरी है तो किसी भी हाल में यह इस्को बना के रहेगी…. वह वह वह!”

फिर अचानक चावला साहब उठ बैठे और अब खुद से कहा, “साला मैं ये फिलोसोफिकल बातें क्यों कर रहा हूँ, ऐसे hi आदमी शायर बनता होगा हाहाहाहा! अकेलापन, तन्हाई, घुटन यह ऐसे हालात इंसान को शायर बनता होगा हाहाहाहा….. मुझे यहाँ आने की बजाए किसी मैखाने में जाना चाहिए था, एक दो ड्रिंक मार्लोन तो बेहतर फील करूँगा…. लो किसी रेस्टोरेंट की तलाश करते हैं…”

वो अपने कार को वहीँ पार्किंग में चोरर कर चलते हुए शहर के भीड़ भर में गए और चारों तरफ ढूंढ़ते हुए एक रेस्टोरेंट में पहुंचा जहाँ दिन में भी ड्रिंक सर्वे होता है और एक टेबल पर बैठ गया और व्हिस्की का आर्डर दिया. वेटर आया तो उनको मेनू कार्ड दिखाया. चावला साहब ने कहा, “अबे मैं ने व्हिस्की मांगी है खाना नहीं” तो बॉय ने कहा, “सर यहाँ अगर आप खाना आर्डर नहीं करोगे तो ड्रिंक नहीं सर्वे होता!” चावला साहब ने ग़ुस्से में उस्सको देखा और कहा “व्हाट? यह कौन सी रूल है भाई?” वेटर ने कहा, “सर अगर आप ड्रिंक लेना चाहो तो ऑफ लेजा सकते हो, मगर इस वक़्त यहाँ खाने के बिना पीना अल्लोवेद नहीं है!”

तो चावला साहब ने कहा के उस्सको मैनेजर से मिलना है. वो प्रेजेंट नहीं था, तो चावला साहब ने काफी हंगामा किया वहां, बहोत ग़ुस्सा किया और निकल पड़े उस जगह से.

फिर एक दूकान में पहुंचे जहाँ थर्रा सर्वे होता था मगर चोरी छुपके क्यूंकि उस शेर में दिन में ड्रिंक बेचना अल्लोवेद नहीं था. चावला साहब ने वहां की ओनर को कुछ ज़्यादा पैसे दिए और उस से कहा के उसके लिए तीन चार पेग व्हिशक्य का आइस क्यूब के साथ बंदोबस्त करे कैसे भी करके. उस आदमी ने कहा के हो जायेगा… तक़रीबन 2 हज़ार रूपए दिए उस आदमी को. उस्का पहचान था वहां के लोगों से तो पता नहीं उस्सने कैसे करके व्हिस्की और आइस कुबेस ले आये कहीं से.

अब क्यूंकि उस्सको दिख गया के चावला साहब बड़ा आदमी है तो उस ओनर ने उनको अंदर अपने दूकान में पीछे के तरफ एक कमरे में टेबल और चेयर दे दिया बैठ कर आराम से पिने के लिए. उस्सको दो हज़ार रूपए जो मिल गए साहब का बड़ा ख्याल रखने लगा, शायद और पैसे ऐंठने को सोच लिया था उस्सने.

चावला साहब ने 15 मिनट में सभी ड्रिंक ख़तम कर दिए और उस ओनर ने पूछा और लाना है किआ? चावला साहब ने कहा हाँ. तो आदमी ने कहा और पैसा लगेगा इस वक़्त व्हिशक्य ढूंढ़ने के liye….to और 2 हज़ार रुपये दिए साहब ने उस आदमी को जिस ने कुछ देर बाद और 4 पेग और आइस कुबेस चावला साहब के टेबल पर लाकर रख दिया.

चावला साहब पीते हुए बड़बड़ाने लगे लड़खड़ाते जुबां में कहा, “साली सान्वी किआ समझती है अपने आप को, किआ मैं उसस्के सामने घुटने टेकूँगा? नाह! कभी नहीं, मैं बात तक नहीं करूँगा उस से घर वापस जाने के बाद. समझती किआ है अपने आप को महारानी है किआ वो? अरे मैं चावला हूँ, सूरजप्रकाश चावला, बॉस ऑफ़ थे चावला एम्पायर! मैं नहीं झुकता किसी के सामने, मैं ने सब कुछ अपने बल पर किया हुआ है. मैं ने कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया, मैं self-made मन हूँ, मुझको अपने ेंसुओं से तुगति है सान्वी साली!! किआ समझती है के मैं नहीं समझता के वो मुझको जान बुझ कर तारपा रही है? हिएण!!! किआ मैं अँधा हूँ? मैं hi मैं सब चाहती है मगर ऊपर से ढोंग करती है? साली उस्सकी वजा से मैं ने प्यारी संजना को रुला दिया आज. बेचारी संजना कितनी भोली है उसस्के ेंखों से कितने ेंसू बहे आज सुबह सुबह……”

चावला साहब ने सिगरेट की फरमाईश किये उस आदमी से और एक जलाया, और बाकी के व्हिस्की को ख़तम किये और नशे में धुत हो गए, बाहर निकले, चार कदम चले और पेवमेंट पर बैठ गए…. आते जाते लोग उस्सको बेवड़ा कहकर चले जाते!

वो वहीँ बैठे रहे ऊपर लोगों को आते जाते देखते और कहते, “मेरी संजना को बोल्दो के मैं इधर हूँ वो मुझको ढूंढेगी!!” जीन लोगों ने उस्सको सुना वो यह समझे के किसी संजना नाम की लड़की की वाजा से वो दीवाना हो गया है, और अपने प्यार को खोने के बाद ऐसा शराबी बन गया है!

उनको उठने की ताक़त नहीं थी इतना पिए हुए थे, एक दो बार तरय किया उठने को मगर गिर्र पड़े. कड़ी धुप थी बाहर और वो उसी धुप में पेवमेंट पर गिर्री पड़े रहे…. उनके ेंखों से सब धुंदला नज़र आरहे थे, सब कुछ दूर और तीन चार में दिखने लगे थे… 8 पेग व्हिशक्य पी लिए थे बिना कुछ खाये तो नशा होना लाज़मी था.. दिन के बारे बज गए थे और उधर संजना करीबन ड्राइविंग लेसन एन्ड करने वाली hi थी.

उधर एक आदमी काफी देर से चावला साहब को उस हालत में देख रहा था, वो खुद एक चोरर दीखता था.. घंटा भर चावला साहब को उस पोजीशन में देखने के बाद वो आदमी उनके पास गए और कहा, “अरे साहब आप ने कितना पी लिए हैं के आप खड़ा भी नहीं हो पा रहे हो? चलिए मैं आप को सहारा देता हूँ उठिये भी….” और उस आदमी ने चावला साहब को सहारा देने के बहाने उनके मोबाइल और कुछ पैसे उनके जेब से निकाल लिए और उनको थोड़ी दूर एक पेयर के निचे बिठा कर चल दिए मोबाइल और पैसों के साथ.

संजना वापस आयी 1.30 को और चावला साहब का वहीँ वेट करने लगी जहाँ उस्सको सुबह को चोर्रा था उन्हों ने. आधे घंटे वेट करने के बाद जब चावला साहब नज़र नहीं आये तो संजना ने उनको कॉल किया मगर मोबाइल स्विच ऑफ ारः था. संजना घबरा गयी और अब उसस्के समझ में नहीं ारः था के वो किआ करें उंनका और वेट करें या बस से वापस घर चली जाए!! वो सोचने लगी के किश तरह सुबह को चावला साहब अजीब बेहवे कर रहे थे उस से बिल्कुल बात भी नहीं किये थे. कुछ खफा सा लग रहे थे जैसे ग़ुस्से में हो, नाराज़ हो…. यह सब सोचते हुए संजना और बहोत परेशान होती जा रही थी…..

कुछ देर और इंतज़ार करने के बाद संजना ने सोचा के उनको पार्क को जाने के लिए कहा था तो उनको उस तरफ देखने को गयी संजना. 3 किलोमीटर्स चलना था और वो पैदल चल कर गयी उधर. और बात यह थी के जहाँ चावला सब निचे ज़मीन पर पड़े हुए थे संजना वहीँ से गुज़री मगर रास्ते के दूसरी तरफ से सामने देखते हुए.

जब संजना पार्क के करीब आयी तो चावला साहब की कार देख कर उनके जान में जान आयी और खुश हुई तो जल्दी से कार के तरफ बढ़ती गयी यह सोचते के चावला साहब की ेंख लग गयी होगी कार में, कार एक पेयर के निचे पार्क थे. मगर संजना को ताजुब हुआ के चावला साहब कार में नहीं थे, फिर भी उस्सने सोचा के वो पार्क में टहल रहे होंगे, तो पार्क के अंदर गयी उनको ढूंढ़ते हुए, पूरा पार्क छान मारा मगर चावला साहब कहीं नहीं थे तो संजना बहोत परेशान हुई, उनके मोबाइल तरय करती गयी पर वो स्विच ऑफ hi आरहे थे फिर उस्सने कार के दरवाज़े को तरय किया तो वो लॉक थे, पार्क में एते जाते लोगों से पूछा के उनको किसी ने देखा क्यूंकि वो इस शहर में अजनबी थे मगर किक्सी को कुछ पता नहीं था. संजना एक बेंच पर बैठ कर रोने लगी.

और आखिर में और 1 घंटा वेट करने के बाद संजना ने अपने पापा से मिलने का फैसला किया वो इसी शहर में काम करता था तो वो गयी अपने पापा की फैक्ट्री.

आनंद से मिलकर सब कुछ बताया संजना ने तो वो भी बहोत हैरान हुआ के कार पार्क में है तो चावला साहब किकधार गए होंगे!

आनंद ने छूती लिया काम से और संजना के साथ उस पार्क तक गए, कार्ट वहीँ था पर चावला साहब नहीं थे. आनंद के समझ में नहीं ारः था के अब किआ करें. सोचा के पुलिस को इन्फॉर्म करें, मगर संजना ने अपने पापा से पूछा, “किआ ठीक होगा पुलिस को बताना? वो बड़े आदमी है अगर बात बढ़ी तो उनको कहीं कोई तकलीफ नाह हो जाए!!”

संजना फिर रोने लगी अपने पापा के बाहों में लिपट कर. आनंद ने उस से कहा के चलें शहर के हर कोने में उस्सको ढूंढे अगर नहीं मिले तब पुलिस को बताना hi पड़ेगा.

और जब शहर में ढूढ़ने लगे तो देखा के चावला साहब निचे ज़मीन पर पड़े हुए हैं बिल्कुल नशे में धुत्त!! संजना ने उनको अपने बाहों में भर लिया और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी. आनंद ने संजना से कहा, “चुप कर देख लोग कैसे देख रहे हैं तमाशा मत कर, एक टैक्सी लेकर अत हूँ इनको घर लेचलते हैं चुप कर तू पागल लड़की!”

संजना ने कहा, “पापा उनके कार का किआ होगा?” आनंद घबरा गया के अब कार को कैसे घर ले जाया जाए!! तो आनंद ने कहा सुन्न एक काम करते हैं टैक्सी ड्राइवर को ज़्यादा पैसे दे कर कहेंगे के साहब की कार में खुद ड्राइव करके हमको घर चौररने को और वो वापस बस से अजय… मेरे पास उतने पैसे तो नहीं है देख साहब के जेब में शायद पैसा हो!!”

जब संजना ने चावला साहब के जेबों में देखा तो नाह पैसा था नाह मोबाइल. आनंद समझ गया के किसी ने हाथ मार दिया उनको ऐसे नशे में देख कर. आनंद ने पूछा, “कार की चाभी तो है के वो भी ग़ायब है?” संजना ने कहा, “सिर्फ कार की चाभी hi है उनके जेब में.” तो आनंद ने कहा, “तो शायद मोबाइल उनके कार में होगा!”

किसी तरह से एक टैक्सी ड्राइवर से आनंद ने बात किया और सब समझाया तो ड्राइवर राज़ी हुआ चावला साहब के कार को ड्राइव करके उनको घर चौररने को आनंद के यहाँ. रास्ते में जाते वक़्त आनंद ने संजना से कहा, “पता नहीं कितना पैसा मांगेगा यह ड्राइवर घर पर तो सिर्फ कोई 500 रूपए होंगे नाह?” तो संजना ने कहा, “पापा मेरे पास 2000 है मैं देदूंगी” आनंद ने कहा, “अरे? तुम्हारे पास कहाँ से आये इतने पैसे?” तो संजना ने कहा, “आप hi की दी हुई पैसे हैं पापा जो मैं सेव करती हूँ!” आनंद ने कहा, “पता नहीं कितने पैसे चुररये चोरर ने इनके जेब से, इनके पास तो 10 या 20 हज़ार ज़रूर होता होगा नाह?”

कार में मोबाइल ढूंढे संजना ने जो नहीं मिला पर ग्लोव बॉक्स में कई क्रेडिट और डेबिट कार्ड्स थे चावला साहब के नाम से. संजना ने उन् कार्ड्स को अपने हैंडबैग में रख लिए, साहब की ईद और लाइसेंस की कॉपी भी थे और कई कागज़ात थे जो संजना ने वापस ग्लोव बॉक्स में रखे.

संजना चावला साहब को अपने गॉड में लिए बैठी थी और उन् के सर को अपनी छाती से ज़ोर से दबा कर उनके चेहरे को चुम रही थी अपने पापा के सामने. आनंद ने कहा, “हम्म बहोत प्यार ारः है अपने आशिक पर तुझे?!” संजना ने “सशह्ह्ह” कहा आनंद को और ड्राइवर के तरफ इशारा करते हुए कहना चाही के वो सुन लेगा.

घर पहुँचने पर ड्राइवर 1500 रूपीस मांगे जो संजना ने दिए घर से पैसे लाकर. और चावला साहब को खुद अपनी रूम में अपने बीएड पर लगाई संजना अपने पापा के हेल्प से. चावला साहब बेहाल थे, जैसे बेहोश थे बिल्कुल नशे में थे….. आनंद ने कहा अब उस्सको जागने का वेट करना पड़ेगा… वो कुछ कन्हार रहे थे जैसे उस्सको चाओत लगा है कहीं, तो संजना ने उनके शर्ट उतारे आनंद के सामने hi और उनके जिस्म का मुआएना किया के कहीं कोई चोट तो नहीं लगी…. और उनके चेस्ट और गले पर लोवेबिट्स देख कर आनंद ने पूछा, “यह तेरा किया हुआ है नाह?”

संजना मुस्काई और सर झुका कर हाँ में हिलाया अपने पापा से नज़रें चुराते हुए….

आनंद ने कहा, “वह भाई वह, अपनी बेटी को उसस्के आशिक के साथ इस तरह शायद hi कोई बाप ने देखा होगा हाहाहा!”

संजना ने अपने पापा को हलके हलके छोटे छोटे थपड मारते हुए कहा, “अब आप जाओ यहाँ से मुझे इनके साथ रहने दीजिये आप!!”

आनंद ने उस्सको चावला साहब के सात बीएड पर चोरर दिया और चला गया. संजना चावला साहब के चेस्ट को चुम्मन लगी, उनको प्यार करने लगी उनके कपडे सभी उतार डेल और खुद के कपडे भी निकाल फेंकी उस्सने और उनको चारों तरफ किश करने लगी उन् के ऊपर चढ़ कर…..

तो बे कॉन्टिनोएड……………. (3420 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 63 इन सर्च ऑफ़ मोबाइल

संजना ने चावला साहब को सोते हुए में बहोत प्यार किया. यहाँ तक के अपने कमरे को अंदर से लॉक कर दिया और चावला साहब के नरम लिंग को चूसा, उस्सको खड़ा करने को तरय किया मगर नाकामयाब रही. उनके के जिस्म पर और कई जगहों पर लोवेबिट्स किये संजना ने, और उनके सीने पर सर रख कर उस्सकी भी ेंख लग गयी.

शाम 6 बजे चावला साहब जागे मगर फिर भी उनके जुबां लड़खड़ा रहे थे और सीधे खड़े नहीं हो पा रहे थे. संजना ने निम्बू पानी दिया मगर फिर पीने से रोका ये कहकर के उनके बप लौ हुए थे इस लिए, तो हॉट कॉफ़ी दिया पिने को और बिस्किट्स वग़ैरा दिया, सर दर्द की गोली दिए. चावला साहब जैसे एक सपनों की दुन्या में फील कर रहे थे खुदको.

शाम हो चूका था और अचानक अपना मोबाइल ढूंढा तो संजना ने कहा के वो चोरी हो गयी और उनके जेब से पैसे भी चुराए किसी ने जब वो बेहाल रास्ते पर पड़े हुए थे. संजना ने उनको सब बात बतायी के कैसे वो उनको दूध कर परेशान हो गयी फिर अपने पापा के साथ उनकी तलाश किये और टैक्सी ड्राइवर के द्वारा घर वापस आये.

चावला साहब ने धीरे से संजना से कहा, “मोबाइल में हमारा वीडियो क्लिप है!!” संजना के चेहरे से रंग ुध गए और बहोत परेशान हुई और पूछा के अब किआ होगा!

मगर चावला साहब ने कहा के फ़िक्र करने की कोई बात नहीं क्यूंकि उसस्के सभी वीडियोस और पिक्स भी पासवर्ड प्रोटेक्टेड हैं और फिर मोबाइल को अनलॉक करने के लिए उस्सकी फिंगर प्रिंट चाहिए वार्ना कोई उस्सको ओपन नहीं कर सकते.

तब संजना की जान में जान आयी, मगर फिर भी चावला साहब ने कहा मगर अगर एक हैकर की हाथ लग गयी तो वो सब क्रैक कर सकता है और वीडियोस भी निकल सकता है इस लिए तुरंत मोबाइल को ढूंढ़ना होगा.

शाम हो गयी थी, सूरज ढल गए थे अँधेरा होने hi वाला था तो संजना ने पूछा, “इस वक़्त अँधेरे में कहाँ ढूंढ़ने जाएंगे मोबाइल को? चावला साहब ने कहा जिस दूकान पर वो पीने को गए थे वहीँ से तलाश करना पड़ेगा वार्ना पुलिस स्टेशन में कह कर ढुँढ़वाना पड़ेगा.

तो आनंद भी साथ निकला चावला साहब की कार में सब उस शहर में वापस गए. चावला साहब ड्राइव तो कर रहे थे मगर अब भी नशे में फील कर रहे थे. वो उस दूकान में पहुंचे और उस आदमी से बात किया जिस्सको रस,2000 दिए थे दो बार के कहीं उस्का मोबाइल तो नहीं गिरा था उधर. मगर उस आदमी ने कहा नहीं बिल्कुल भी नहीं. चावला साहब ने कहा, “देखो यह सोफिस्टिकेटेड मोबाइल है मैं एक कंप्यूटर से उस्का लोकेशन देख सकता हूँ के इस वक़्त वो मोबाइल कहाँ पर है और अगर उस्का लोकेशन यहाँ दिखाई दिया तो पुलिस केस होगा, अगर लिया हो तो वापस करो इसी वक़्त!”

उस आदमी ने कहा, “कमाल है साहब, आप का स्वागत किया, आप को अंदर बैठने को जगह दिया, आप के लिए व्हिस्की लाया जो यहाँ मिलता hi नहीं, मैं ने आप के लिए इतना कुछ किया अब आप मुझ पर छोर्री का इलज़ाम लगा रहे हो? किआ भाई इसीलिए आज कल कोई किसी का मदद hi नहीं करता!”

तो चावला साहब ने उस्सको सॉरी कहा और आनंद से कहा के अब पुलिस स्टेशन hi चलना पड़ेगा. संजना से पूछा के यहाँ पुलिस स्टेशन किधर है. तो संजना ने ड्राइव करने को कहा और आगे बताती गयी जब तक पुलिस स्टेशन पहुंचे.

वहां अंदर जाते hi वहां की इंस्पेक्टर ने चावला साहब को आते देख कर खड़ा हो गए और कहा, “अरे चावला साहब आज आप हमारे छोटे से शहर में कैसे?” चावला साहब ने उस इंस्पेक्टर को देख कर उस्सको गले से लगाया और कहा, “अरे संदीप, तू कब से इधर है? तेरा ट्रांसफर कब हुआ?” संदीप ने कहा, “एक साल हो गया साहब, केहये आप की किआ खिदमत कर सकता हूँ मैं?”

चावला साहब ने उस्सको सब कुछ बता दिया तो इंस्पेक्टर ने चावला साहब से कहा, “अगर मोबाइल स्विच ऑफ है तो लोकेशन का पता नहीं चलेगा. चावला साहब ने कहा के उस्सकी मोबाइल नॉर्टन थेफ़्ट प्रोटेक्शन पर इनेबल्ड है चाहे वो स्विच ऑफ हो या समुन्दर में पानी के अंदर हो फिर भी वो दिखाएगा एक्सएक्ट लोकेशन, और उस्सको रिंग करवा सकते है एक कंप्यूटर से और पूछा के एक कंप्यूटर है के नहीं स्टेशन में. तो इंस्पेक्टर ने अपना लैपटॉप पेश किया. चावला साहब ने पूछा इंटरनेट है के नहीं, तो कनेक्शन था इंटरनेट की – और चावला साहब बैठ गए लैपटॉप पर नॉर्टन वेबसाइट पर लॉगिन करने को… मगर अपना पासवर्ड याद नहीं था, पासवर्ड तो मोबाइल में सेव था, अब फॉरगॉट पासवर्ड टाइप करता तो ईमेल अत फिर नई लॉगिन करना पड़ता पासवर्ड चेंज करना पड़ता इस लिए सोचा के घर फ़ोन करके अपने रेड डायरी से उस्का पासवर्ड ले लिया जाये!! मगर वो सान्वी से बात नहीं करना चाहता था, तो किया यह के विवान को फ़ोन किया संजना के मोबाइल से और विवान से कहा के सान्वी को फ़ोन करके उसस्के लाल डायरी से उंनका नॉर्टन की लॉगिन का पासवर्ड मांगे और संजना के मोबाइल उस्सको पासवर्ड संस करें.

जब विवान ने सान्वी को फ़ोन करके पासवर्ड माँगा तो सान्वी हैरान हुई और उस से कहा, “पिता जी कहाँ हैं उस्का मोबाइल कब से फ़ोन कर रही हूँ स्विच ऑफ ारः है कहाँ से फ़ोन किया उन्हों ने आप को और मुझको क्यों नहीं फ़ोन किया?” विवान बिजी था तो उस्सको इन् सब बातों में नहीं पड़ना था तो कहा के जल्दी से पासवर्ड लेकर उस्सको दें उसस्के पास वक़्त कम है……. सान्वी ने चावला साहब के कमरे से उस्सकी लाल डायरी से नॉर्टन लॉगिन का पासवर्ड विवान को संस किया जो विवान ने संजना के मोबाइल पर संस किया. और संजना ने चावला साहब को दिखाया तब जाके चावला साहब ने लॉगिन किया नॉर्टन वेबसाइट पर.

इंस्पेक्टर देख रहे थे, क्यूंकि खुद उस्सको भी नहीं पता था इन् सब के बारे में. चावला साहब के सभी पक, लैपटॉप, सान्वी की मोबाइल, विवान का मोबाइल और लैपटॉप, सब नॉर्टन वेबसाइट पर दिख रहे थे क्यूंकि सब प्रोटेक्टेड थे एंटी वायरस, मालवारे और एंटी थेफ़्ट से.. संजना सब देख रही वो भी. आनंद देख रहा था मगर कुछ भी नहीं समझ रहा था, संजना फॉलो कर रही थी और समझ गयी के अब किआ होगा….. चावला साहब ने अपने मोबाइल वाले आइकॉन पर क्लिक किया, उस्का मोबाइल नंबर और मोबाइल का मेक गैलेक्सी स8+ एज और कोड दिख रहे थे. तो चावला साहब ने लोकेशन ऑप्शन पर क्लिक किया तो मोबाइल उसी शहर में कोई 100 मीटर की दूरी पर शो हो रहा था और एक ग्रीन लाइट उस पर ब्लिंक हो रहा था….. तो चवा साहब ने इंस्पेक्टर से पूछा, “यह जगह कहाँ है?”

इंस्पेक्टर ने कहा “अरे यह तो यहीं है कोई 100 मीटर यहाँ से उस दूकान के पास एक बार है यह उस बार की लोकेशन है, मतलब मोबाइल उस बार के अंदर है इस वक़्त!” चावला साहब ने कहा के लैपटॉप को साथ लेकर जाना पड़ेगा, क्यूंकि इस लिंक से मोबाइल को रिंग किया जा सकता है, उस्सको शॉट किया जा सकता है चाहे वो ऑफ hi क्यों नाह हो!!

इंस्पेक्टर ने कहा चलो सब चलते हैं और तीन पुलिस ऑफिसर्स को अपने साथ लिया और सब उस बार में गए.

बार में पहुंचे तो चावला साहब इंस्पेक्टर के साथ गए लैपटॉप हाथ में लिए और बार ओनर से इंस्पेक्टर ने कहा के कोई भी नहीं निकलेगा जब तक वो नाह कहे और वहां की इंटरनेट कनेक्शन मांगे जो विफई से मिली तो चावला साहब ने लिंक को अपडेट किया और वापस वहीँ अपने मोबाइल पर कर्सर को किया …. संजना पास कड़ी देख रही थी के वो कैसे मोबाइल को शॉट करवाएगा….. सब लोग जो उस बार में मौजूद थे नहीं समझ रहे थे के किआ हो रहा है…. तो चावला साहब ने उस ऑप्शन पर क्लिक किया जहाँ उसस्के मोबाइल के साइड में लिखा था “मेक योर मोबाइल शॉट”

इंस्पेक्टर और बाकी के लोग चारों तरफ बार में देख रहे थे के किधर से मोबाइल की शॉट की आवाज़ आएगी, और जैसे hi चावला साहब ने शॉट पर क्लिक किया तो एक अजीब सी रिंगिंग, पियर्सिंग टोन सुनाई देने लगे एक आदमी के जेब से…. उस्सने जल्दी से अपने पंत के जेब में हाथ डालके मोबाइल निकला और ज़ोर से कहा, “अरे यह मोबाइल स्विच ऑफ है फिर भी बज रहा है यह किआ जादू है?!”

इंस्पेक्टर ने उसस्के हाथ से मोबाइल लेकर कहा, “यह जादू है mistar,”aur चावला साहब को मोबाइल दिया और कहा, “एहि है साहब?” चावला साहब ने कहा, “अगर यह मेरा नहीं तो मेरे फिंगर प्रिंट से ों नहीं होगा अनलॉक नहीं होगा okay? और अगर मेरे फिंगर प्रिंट से अनलॉक हो गया तो मेरा हुआ ऑलराइट? वहां के मौजूद सभी लोगों ने एक साथ जवाब दिए “यस वे एग्री!” वो आदमी जिस के जेब में मोबाइल था वो भागना चाहता था मगर इंपेक्टर संदीप ने उस्सको थाम लिया और रोके रखा… सब लोग देख रहे थे, संजना मुस्कुरा रही थी चावला साहब को अपने मोबाइल को अपने फिंगर प्रिंट से अनलॉक करते हुए; और मोबाइल अनलॉक हुआ और गैलेक्सी की रिंगिंग टोन बजी और चावला साहब का मोबाइल उनको वापस मिल गयी!! सब लोगों ने तालियां बजाये!

मगर इंस्पेक्टर का काम पूरा नहीं हुआ था, उस्सने उस आदमी को हिरासत में लिया मगर वो आदमी चिल्लाने लगा के उस्सको किसी और ने सिर्फ 500 में वो मोबाइल बेचा आज दिन में... चावला साहब ने उस आदमी से कहा, “500 में ख़रीदा आप ने इस्को? इस्सकी कीमत पता है आप को? “यह 55 हज़ार का है ओरिजिनल है” तब इंस्पेक्टर ने पूछा किआ वो उस आदमी को पहचानता है जिस ने उस्सको मोबाइल बेचा तो उस्सने कहा हाँ वो एक ड्रग एडिक्ट है हमेशा चुराता रहता है अपने ड्रग खरीदने के लिए…. तो इंस्पेक्टर उस्सको उसस्के पास लेचलने को कहा और वो वहां गए और उस्सको पकड़ा… उस्सने सब कबूल किया के चावला साहब नशे में धुत थे तो उस्सने मोबाइल और पैसे चुराए थे उनके… पैसे तो सब खर्च कर चुके थे और मोबाइल उस बार वाले आदमी से बेच दिया था 500 में…..

पुलिस दोनों को लॉक उप में डालने को लेजा रहे थे मगर चावला साहब ने कहा रहने दो माफ़ कर दिया दोनों को क्यूंकि उनको उंनका मोबाइल मिल गया था.

तो बे कॉन्टिनोएड………………
 
अपडेट 64 फाइंडिंग मोबाइल

घर लौटने से पहले चावला साहब ने संजना से पूछा किआ डिनर तैयार कर चुकी है घर पर? तो संजना ने कहा के नहीं कुछ भी नहीं किया है, तो चावला साहब एक ने पिज़्ज़ा ख़रीदे और बुरगेर्स भी और कहा के आज एहि डिनर में खाएंगे, कुछ स्लाड्स वग़ैरा सब कुछ ले लिया और घर वापस जाने लगे संजना के यहाँ.

रघु के शॉप के पास पहुंचे तो आनंद ने कहा, “साहब आप चलिए मैं ज़रा वो लेकर अत हूँ!!” तो चावला साहब ने पूछा, “घर चल कर पियोगे या यहाँ से पी कर आओगे?” आनंद ने कहा, “दोनों हेहेहे”

तो चावला साहब उस्सको वहीँ उतार कर संजना को घर चोर्ने चले गए….. घर आते hi संजना बहोत खुश दिख रही थी और चावला साहब को अपने बाहों में जाकर लिया और किश करने लगी….. वो बहोत hi खुश थी. तो संजना ने चावला साहब से कहा, “आप अब भी लड़खड़ा रहे हो इतनी दूर ड्राइव कैसे करोगे आज आप यहीं रुक जाईये नाह हमारे यहाँ, बस एक रात के liye…kal सुबह चले जाना.”

चावला साहब ने कहा, “किश ने कहा के मैं अभी ड्राइव करूँगा? आज मैं यहीं सोऊंगा वूहू!!!”

संजना ख़ुशी के मारे उछलने लगी और उस्सने भी चिल्ला कर कहा, “Youpieeeeeeeeee!!!!”

और दोनों एक दूसरे को बाँहों में भरे जैसे डांस करने लगे झूमते हुए….. और चावला साहब ने कहा अब मैं अपना दिया हुआ व्हिस्की खुद पियूँगा हहहहए!” संजना ने कहा, “बस थोड़ा सा क्यूंकि आप ने पता नहीं दिन में कितना पिए थे जो अभी तक ठीक से उतरा नहीं है….” चावला साहब ने कहा आरी पागल लड़की, जैसे लोहा लोहे को काटता है उसी तरह शराब शराब को मारता hai…meri दिन वाले नशे को यह व्हिस्की जो अब पियूँगा उस दिन के नशे को बिल्कुल मिटा देगा….”

दोनों बहोत खुश लग रहे थे और संजना ने पूछा, “आज सुबह आप मुझसे रूठे हुए क्यों थे? खफा खफा से लग रहे थे बताइये!” चावला साहब ने ज़ोर से संजना को बाहों में भर के कहा, “अरे मेरी प्यारी डार्लिंग, च्वीट च्वीट बेबी मैं तुमसे बिल्कुल भी खफा नहीं था मैं तो अपने आप से नाराज़ था वो, ेररर एक बिज़नेस पार्टनर से डिस्कशन हुई थी घर से निकलने से पहले इसी लिए मैं उस डिस्कशन को लेकर परेशान था बुसस और कुछ मत पूछना इस बारे में आईटी इस बिज़नेस मैटर्स okay?”

संजना ने कहा okay… और दोनों एक दूसरे को बाहों में भरके किश करने लगे.

कुछ देर बाद आनंद वापस आया, और चावला साहब ने अपने लिए ड्रिंक्स खुद बनाये, आनंद अपना पी रहा था और संजना नहाने चली गयी तब तक. आनंद से यह दिया गया के चावला साहब आज यहीं रुकेगा रात भर और कल घर वापस जाएगा.

चावला साहब का फ़ोन बज रहा था, सान्वी कॉल कर रही थी, चावला साहब ने नहीं उठाया और मोबाइल को साइलेंट मोड पर कर दिया. फिर विवान को मैसेज किया के वो आज घर वापस नहीं आरहे हैं कल सुबह को आएगा यह बात सान्वी को बता दें के वो वेट नाह करें. विवान ने okay में रिप्लाई किया.

और जब विवान ने सान्वी को मैसेज करके कह दिया के उस्का बाप आज वापस घर नहीं आएगा उस्का वेट नाह करें तो सान्वी का मान चैंका! सान्वी के समझ में नहीं ारः था के अब किआ करें, उस्सको समझ में आगया के चावला साहब उस्सको अवॉयड कर रहे हैं इसी लिए उसस्के कॉल्स नहीं ले रहे हैं और बात भी नहीं कर रहे हैं इस लिए जो कुछ कहना है वो विवान को कह रहे हैं!!!

सान्वी ने एक तरीका अपनाया, एक वौइस् कॉल रिकॉर्ड किया और सेंड किया चावला साहब को.

चवा साहब ने वौइस् कॉल को ओपन किया तो उनके ेंख भर आये और ेंसू टपक पड़े! वौइस् छोटी दीप्ति किट hi जो संजना ने रिकॉर्ड करके भेजा. रिकॉर्डिंग में दीप्ति कह रही थी, “दादू दादू कहाँ हो आप वापस औ, वे लव यू एंड वे मिस यू. प्लीज के बैक होम दादू!”

प्यारी दीप्ति की आवाज़ सुनकर चावला साहब टूट गए और अपने ेंसू पांच कर खड़ा होकर घर में एकांत कदम चले और आनंद ने पूछा, “आप की पोती की आवाज़ है नाह? कितनी प्यारी आवाज़ है बच्ची की, आप को ढूंढ रही घर पर नाह मालिक?”

चावला साहब वापस जाने को सोच रहे थे मगर कुछ देर बाद फिर सोचा के संवी अपने पैंतरे इस्तेमाल कर रही है उनको कमज़ोर करने के लिए ुर खुद से कहा, “बची का इस्तेमाल कर रही है मुझे घर वापस लाने के लिए? बहोत होशियार समझती है अपने आप को, दीप्ति से बात करवाके रिकॉर्ड किया?? जा; मैं नहीं आने वाला अब तो मोबाइल को भी स्विच ऑफ कर देता हूँ कल सुबह hi ों होगा अब यह मोबाइल!!”

चावला साहब मोबाइल ऑफ करके वापस ड्रिंक लेने लगे आनंद के साथ बैठ कर लाउन्ज में. और संजना नाहा कर आयी उन् दोनों के सामने. वो सिर्फ एक टॉवल लपेटी हुई थी अपने जिस्म पर और एक टॉवल से अपने बाल पांच रही थी और मुस्कुराते हुए एक एक करके दोनों को देखा, पहले चावला साहब से मुस्कुरायी फिर अपने पापा को देखा और वहीँ लाउन्ज में कड़ी दोनों को देखती रही!! वो टॉवल उस्सकी जाँघों तक hi लपेटे हुए थे और उस्सकी बूब्स तक थे ऊपर, पीला रंग का था जो संजना के स्किन कलर को बहोत निखार रहे थे, कुछ पानी की बूँदें संजना के कांधों पर और तंग पर इधर उधर दिख रहे थे जब लाइट उन् पर पड़ते थे तो चमक रहे थे…. वो बेहद हॉट और सेक्सी लग रही थी जैसे सीधे बीएड पर चढ़ने के लिए तैयार थी….

चावला साहब ने आनंद को देखा फिर संजना को, और आनंद मुस्कुराते हुए चावला साहब को देख रहे थे और संजना के पापा ने पता नहीं इशारे से किआ कहा संजना को जो चावला साहब ने नोटिस किये…. चावला साहब कल वाले दृष्ट को सोचने लगे जिस तरह से उस्सने इसी संजना को अपने पापा के लिंग को चूस्ते हुए देखा था, और फिर संजना के जाँघों पर अपने नज़र किया चावला साहब ने और फिर आनंद को देखा के वो भी अपनी बेटी की जाँघों को hi देख रहे थे….. चावला साहब का जमके खड़ा हो गया और उस्सने आनंद के पंत को देखा के उस्का भी खड़ा हुआ था!!! संजना दोनों को खड़े देख कर मुस्कुरा रही थी अपने चंचल अदाओं से…..

अचानक संजना ने ऊंची आवाज़ में कहा, “हे! हे! वे विल हैवे पिज़्ज़ा फॉर डिनर वूहू!! और दो तीन राउंड किया संजना ने घूमते हुए लाउन्ज में जैसे उस टॉवल में डांस कर रही थी…. और वैसे घूमते हुए वो चावला साहब के गॉड में जा बैठी और अपने बाहों को उनके गले में दाल कर कहा, “हम्म्म मुझे एक किसी दीजिये!” चावला साहब अपना चेहरा एक तरफ करते हुए आनंद को देख रहे थे और संजना ने कहा, “पापा को मत देखिये किआ उनको पता नहीं वो सब जानते हैं नाह?” तो आनंद उन् दोनों को देखते हुए कहा, “अरे मालिक समझ लीजिये के मैं यहाँ हूँ hi नहीं दे दीजिये किसी उस्सको नहीं तो आप की जान खा जाएगी मुझे पता है हाहाहा!”

और तुरंत संजना ने कहा, “हम्म अभी आप को भी मुझे किसी देना है पापा, मैं आप के पास बी आने वाली हूँ हम्म्म!”

चावला साहब सोच रहे थे के संजना ने अंदर अभी कुछ भी नहीं पहनी हुई है नाह पंतय नाह ब्रा… अगर ग़लती से वो टॉवल थोड़ा सा हल्का हुआ तो उस्सकी पूरी नंगी जिस्म उन् दोनों के सामने होगी…. तो चावला साहब ने अपना मुंह संजना के तरफ किया और संजना ने उनके मुंह को अपने मुंह में लिया और उनके जीब चुस्सने लगी अपने बाप के सामने, चावला साहब बार बार आनंद को देख रहे थे, और फिर संजना उठकर अपने पापा के पास गयी और उनके गॉड में बैठी, कुछ इस तरह से बैठी, के उस्सकी टांगें चावला साहब के तरफ थे क्यों के वो आनंद के अपोजिट बैठे हुए थे, और अपने पापा के मुंह में किश करते हुए संजना ने जान बुझ कर अपनी एक तंग को थोड़ा ऊपर किया जिस से चावला साहब को उसस्के जाँघों के बीच का नज़ारा देखने को मिला… और चावला साहब ने देखा के किश करते वक़्त आनंद का हाथ संजना के जाँघों पर आहिस्ते आहिस्ते फरने लगे थे ऊपर के तरफ बढ़ते हुए……

तो बे कॉन्टिनोएड…………… (3100 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 65 संजना सेदूसिंग….

संजना जैसे चावला साहब को सडके कर रही थी उस तरह से अपने पापा को उनके सामने किश करते हुए… एक दिन पहले hi तो चावला साहब ने संजना को अपने बाप के साथ करते हुए देखना चाहते थे तो आज खुद उनके सामने संजना अपने पिता के साथ थे. संजना को पता था चावला साहब को उस्सको अपने पापा के साथ देखना पसंद था…. और उसस्के पापा को भी पसंद था संजना को चावला साहब के साथ देखना तो संजना इस वक़्त दोनों मर्दों को खुश कर रही थी अपने तरीके से……

जब आनंद का हाथ संजना के जांघ पर ऊपर होते गए तो चावला साहब की ेंखें मोठे मोठे होते गए जैसे ेंखें बाहर निकल आएंगे वो देखना चाहते थे के कहाँ तक आननद अपने हाथ को अंदर डालेगा, अउ क्यूंकि संजना नाहा के अभी अभी निकली थी तो चावला साहब अंदाज़न समाज रहे थे के उस्सने अंदर अभी तो कुछ भी नहीं पहनी होगी तो इस इंतज़ार में थे चावला साहब के आनंद का हाथ संजना की योनि पर जाए और वो उस्सको नज़र आये…..

और संजना अपने पापा के जीब चूस्ते हुए चावला साहब के चेहरे में देखते जा रहे थे के वो किआ देख रहे हैं, उस्सको पता था के चावला साहब उसस्के जाँघों के बीच hi देख रहे हैं और जान बुझ कर अपनी टांगों को ऊपर उठा रही थी उनको देखिने के लिए hi….

मगर कुछ लम्हे बाद संजना अपने पापा के गॉड से भी उतरे और यह कहते हुए अपनी कमरे में गयी, “अब मई ड्रेस होक आती हूँ थें वे विल हैवे डिनर okay जेंटलमेन? आप दोनों अपने ड्रिंक्स ख़तम करो फ़ास्ट, ी ऍम हंगरी!” मगर चावला साहब आवाज़ ऊंचा करते हुए कहा, “मेरे साथ एक ड्रिंक तो पी लो पहले तब डिनर करेंगे ठीक है?” तो कमरे के अंदर से संजना ने जवाब दिया ज़ोर से, “okay सर िफ़ यू विश तो एक ड्रिंक ले लुंगी आप के साथ!”

और चावला साहब ने आनंद को देखते हुए मुस्कुराये और कहा, “बहोत नटखट है नाह?”

आनंद ने कहा, “हाँ मेरा hi बिगड़ा हुआ है, ज़्यादा प्यार और दुलार का नतीजा है!”

चावला साहब ने कहा, “दुलार तो मैं भी बहोत करने लगा हूँ भाई, मगर आप का हक़ पहले है, मैं तो बाद में आया नाह?”

आनंद ने तब कहा, “यह तो होना hi था आप नहीं तो किसी के घर तो जाती hi जाती वो…..”

चावला साहब तब अपने गिलास से एक सिप लेते हुए पूछा, “बहोत हैरान हूँ के कैसे तुमने उसस्के साथ शुरू किया होगा, किआ वो मान गयी थी?”

आनंद ने अपने पंत में अपने सामान को सीधा करते हुए कहा, “कहाँ नाह साब मेरे ज़्यादा प्यार और दुलार का नतीजा है, इतना प्यार किया उस से उस्सकी माँ के मरने के बाद के मुझे समझलो के उस से इश्क हो गया उस्सकी बाली उम्र में hi, वो अपनी माँ को रेप्लस करने लगी मेरी ज़िन्दगी में, इतना प्यार करती मुझसे के मैं कहीं भी छुवन उसे वो कुछ नहीं कहती, और मेरा यह नशे की आदत, साला रात को मेरे सात सोती वो तो मुझे मेरी पत्नी दिखती उस में और मैं उसस्के कपडे उतार देता और वो सेहमी हुई नंगी मेरे बाहों में खुद को सिमट लेती तो मैं करने लगता, रगड़ता और वीर्य चोररटा उसस्के जिस्म पर जबकि वो बिल्कुल नहीं समझती के मैं किआ कर रहा हूँ उसस्के साथ…..”

चावला साहब ने उस से कहा, “अरे वो मुझे सब बता चुकी है इस के बारे में क्यों बात करना अब चोर्रो भी जो भी हुआ ाचा hi हुआ, वार्ना मुझे कैसे मिलती वो, ठीक है भाई भूल जाओ बीती बातों को!”

आनंद ने पूछा, “आज रात को आप कहाँ सोओगे?”

चावला साहब ने कहा, “पता नहीं शायद उसी के साथ नाह? वो तो एहि चाहेगी नाह मेरे ख्याल से?”

आनंद ने कहा, “अगर हम दोनों hi आज की रात उसी के बीएड पर सोये तो आप को कोई ऐतराज़ है?”

चावला साहब का जमके खड़ा हो गया बुसस इस बात को सोचकर hi, और उस्सने अब अपने लिंग को पंत के अंदर सीधा करते हुए आनंद से कहा, “किआ वो मानेगी?”

आनंद ने कहा, “आप मुझे जवाब दो किआ आप को ऐतराज़ है उस्सकी बात बाद में करते हैं आप बोलो किआ मैं भी उसी बीएड पर एवं तो आप को ऐतराज़ है के नहीं?”

तो चावला साहब ने कहा, “नहीं नहीं भाई मुझे बिल्कुल भी ऐतराज़ नहीं के आप हमारे साथ बीएड पर रहो, मगर आप यह बताओ किआ संजना राज़ी होगी दोनों को एक साथ बीएड पर सुलाने को?”

आनंद ने कहा, “आप उस से अभी कुछ भी मत बोलना, उस्सको सरप्राइज देंगे जब सोने का टाइम हुआ तब okay? बिल्कुल कुछ भी मत बताना मुझे पता है के वो बहोत खुश होगी क्यूंकि वो दोनों को बराबर चाहती है. और अब आप उस्सको पिलाओगे नाह तो थोड़ा सा ज़्यादा पीला देना देखना कितनी ख़ुशी से दोनों को रिसीव करेगी…”

चावला साहब ने कहा, “okay भाई तुम उस्सको बेहतर जानते हो तो ठीक है!”

आनंद ने कहा, “अरे अभी अभी आप ने नहीं देखा कैसे सिर्फ टॉवल मैं आयी और आप के सामने मुझे किश तरह से किश किया और मेरे हाज़िरी में आप को? अध्नंगी आगयी दो दो मर्दों के paas…to उसस्के लिए यह बड़ी ख़ुशी की बात है क्यूंकि उसस्के दोनों चाहने वाले एक साथ है… वो बेहद खुश है अभी उसस्के लिए मुझ में और आप में कोई भी फर्क नहीं, उस्का प्यार सच्चा है और दिल से चाहती है आप को जैसे मुझको… उसस्के लिए हम दोनों की बहोत एहमियत है उस्सकी ज़िन्दगी में मैं तो सोचता हूँ आप का बीटा इस में पिसेगा!!”

चावला साहब ने कहा, “उस्सकी फ़िक्र आप मत करो, आरव खुश रहेगा संजना के साथ उस्का ख्याल मैं रखूँगा के दोनों खुश रहे… आरव से संजना भी प्यार करने लगेगी उसस्के साथ रेहने के बाद क्यूंकि आरव बहोत प्यारा बच्चा है….”

तो आनंद बोलै, “अरे साहब तो उस्का प्यार आप के साथ बांटेगी नाह? आरव की हिस्से का प्यार संजना आप को दे देगी तो कहीं आरव से वो दूरी नाह बना ले? इस्सके ख्याल रखना होगा आप को क्यूंकि वो आप को बहोत ज़्यादा चाहती है, आरव से तो फिलहाल वो बिल्कुल प्यार नहीं करती मुझे पता है!”

और संजना अपने कमरे से बहार आयी तो दोनों मर्दों के ेंखें फटे रह गए उस्सको देखते hi….. संजना एक पतली सी निघ्य में थी बिना ब्रा के… वही वाली जिस में एक दिन सुबह को चावला साहब ने फ़ोन किया था और अपने पापा को जाकर फ़ोन देने को कहा था और संजना ऐसे hi इसी निघ्य में गयी थी तो चावला साहब ने संजना से वीडियो टॉक किया था तो देखा इस निघ्त्य में है और पूछा था के अपने पापा के सामने इस निघ्त्य में गयी थी बिना ब्रा के, तो संजना ने उस दिन जवाब दिया था के पापा तो इस ड्रेस को जानती है बल्कि उसी ने ख़रीदा हुआ है………

तो अभी संजना उसी निघ्त्य में आयी दोनों मर्द के सामने दोनों में से किसी ने भी नहीं सोचा था के वो वैसे आएगी उन् दोनं के सामने… दोनों मर्द छुप थे बिल्कुल, और संजना जैसे खेलते हुए अपनी बचकानी हरकतों से गयी चावला साहब के पास बैठी और कहा, “कहाँ मेरा ड्रिंक? आप ने नहीं बनाया? मैं आप से और पापा दोनों से चियर्स करुँगी…..” वो आनंद के सामने बैठी थी चावला साहब के पास और उस्सकी बूब साफ़ दिख रहे थे आनंद को, और उस्सकी जांघें तो बुसस कमाल के तक़रीबन 90% सामने थे सिर्फ पंतय वाला हिस्सा छुपा हुआ था… सान्वी दोनों मर्दों को सडके कर रही थी…………

तो बे कॉन्टिनोएड…………. इम्मेडिएटली इन नेक्स्ट पोस्ट
 
अपडेट 66 Sanjana’s हॉट एनकाउंटर विथ….

चावला साहब ने संजना के लिए ड्रिंक बनाया और आइस क्यूब की कमी थी तो संजना फ्रिज से कुबेस लाने गयी…. तब चावला साहब ने आनंद से कहा, “तुम उसे अपने पास बुलाओ, मैं उस्सको तुम्हारे गॉड में बैठे हुए देखना चाहता हूँ, यहाँ से उस्सको निहारना चाहता हूँ. वो मेरे सामने होगी तब, अभी मेरे करीब है तो उस्सको ठीक से नहीं देख पा रहा हूँ…”

आनंद ने कहा, “वही तो मेरा हाल है, मैं उस्सको आप के साथ देखने में बहोत उत्तेजित हो रहा हूँ, मेरे लिए तो वो आप के साथ बेहतर सूट कर रही है ok फिर भी अपने पास बुलाता हूँ, बल्कि मैं तो कहूंगा के वो खुद आएगी कुछ देर बाद आप देख लेना…”

चावला साहब ने पूछा, “यह निघ्त्य तुम ने ख़रीदा था उसस्के लिए? सच है? उस्सने मुझसे एहि कहा था?!”

आनंद: “अरे साहब तो और कौन खरीदेगा उस्सकी पैंतीस और ब्रा मैं hi खरीदता हूँ, मैगजीन्स में देखता हूँ जो सबसे सेक्सी और अट्रैक्टिव लिंगेरिएस होते हैं वही खरीद के लता हूँ उसस्के लिए और उस्सको वैसे सेक्सी देखने में मुझे बड़ा मज़ा अत है, जैसे कुछ नया खरीदता हूँ तो तुरंत पेहेन कर नुमाईश करती है मेरे सामने…. और कभी कभी तो टीवी पर लिंगेरिएस के एड्स आटे हैं तो वो खुद दिखती है मुझे के ‘पापा यह देखो कितनी सेक्सी है मैं इस में किसी लगूंगी?’ तो दूसरे दिन मैं वही खरीद के लता हूँ उसस्के लिए…. उस्सको सेक्सी लग्न और दिखाना बहुत पसंद है… खुद को ज़रा एक्सहिबित भी करती है, मगर सिर्फ मेरे सामने करती थी मुझे पता नहीं था के आप के लिए भी करती है अब तो दोनों के सामने कर रही है, हमको तो खुश होना चाहिए नाह?”

चावला साहब खुश होते हुए कहा, “बिल्कुल खुश होना चाहिए हमें भाई और हो भी रहे हैं क्यों? यार काश मेरी एक ऐसे बेटी होती और मुझसे अपनी ुंडेरवेअर्स kharidwati…wah कितना मज़ा है इस में एक बिल्कुल अलग सेंसेशन है, है नाह भाई? तुमको बड़ा hi मज़ा अत होगा नाह? तभी तो इतनी कम्प्लीसिटी हैं तुम दोनों के बीच!”

आनंद ने कहा, “साहब, 5 साल पहले से यह सब शुरू हुआ, सोचिये किआ उम्र थी उस्सकी, उस आगे में जब माँ को उस्सकी ब्रा खरीदने चाहिए थे, माँ चल बस्सी, संजना बाली उम्र में hi उस्सकी जिस्म उभर आयी थी, माँ ने पहली ब्रा खरीदी ठीक 3 महीने बाद गुज़र गयी… तब से बाकी के ब्रा मुझको hi खरीदना पड़ा नाह? शुरू में वो थोड़ा झिज्जागति थी मुझसे कहने को के उस्सको दूसरी ब्रा की ज़रूरत है, मगर क्यूंकि रात को मेरे साथ सोने आई थी, तो वो छूना, सहलाना शुरू हो गया था और उस वक़्त उस्सने एक रात को हिमत कर के कह दिया के उस्सकी ब्रा और पैंतीस पुराने हो चुके हैं…. शुरुवात ऐसे हुआ था फिर तो आदत बन गयी हुज़ूर….”

तब तक संजना आ गयी आइस कुबेस के साथ और खड़े होकर कहा, “तुम दोनों मेरे बारे में बातें कर रहे हो हैं के नहीं बोलो बोलो और सच बोलो, क्यों पापा?”

आनंद ने जवाब दिया, “जब तुम जैसे हॉट बेबी हमारे बीच हो तो….”

और चावला साहब ने आनंद की बात को बीच में रोकते हुए ऐड किया, “… तो और किस्की बातें करेंगे भला? जैसे एक हॉट लड़की को रास्ते में चलते हुए देख कर लड़के उस्सको ऊपर से निचे तक देखते हुए उसस्के बारे में बात करते हैं हम वही तो कर रहे हैं और तुम वो बहोत hi हॉट और सेक्सी लड़की हो हमारे बीच इस वक़्त!”

संजना खुश दीखते हुए और हँस्ते हुए कहा, “हीहीहीहीहीही, लड़के? आप दोनों लड़के हो गए हीहीहीहीहीहीही ठीक है मुझे बाजोट अच्छा फील होता है जब कोई मुझको हॉट और सेक्सी कहता है”

और संजना ने अपनी लुभाती अदाओं में आइस कुबेस चावला साहब को दिए और खुद अपने आप अपने पापा के गॉड में गयी जैसे उस ने सुना था के चावला साहब ने आनंद से कहा था उस्सको अपने पास बुलाने को. और गॉड में बैठ के संजना ने कुछ इस तरह से अपने तंग को फैलाया के चावला साहब के ेंखें फटे रह गए उस्सकी जाँघों के बीच के हिस्सा को देखते हुए, उस्सकी पिंक पंतय भी नज़र आने लगे थे, संजना क ीक हाथ में व्हिस्की की गिलास थी और और एक हाथ को उस्सने अपने पापा के गले में डाले हुए थे और अपने होंठों को अपने पापा के गर्दन पर फेरर रही थी…. चावला साहब उस दृष्ट को देख कर ऐसा फील कर रहा था के कोई इरोटिक मूवी का सन देख रहा है और अपने व्हिस्की का गिलास ख़तम किया एक hi घूँट में.

आनंद ने चावला साहब के तरफ देखते हुए संजना के क्लीवेज पर अपना मुंह किया और जीब से संजना के बूब्स क ीक किस्से को छाता, और चावला साहब से एक ेंख मारा आनंद के वैसा करते हुए. संजना ने अपने सर ऊपर उठाते हुए बालों को पीछे झटका और एक नज़र चावला साहब पर दौड़ाई और देखा के वो देख रहे हैं तो उस्सने भी चावला साहब को एक ेंख मारी मुस्कुराते हुए और कुछ सेक्सी अंदाज़ में होंठ पर अपना जीब फरते हुए…. चावला साहब अपने लिंग पर अपने एक हाथ को दबाते हुए गहरी सांस ले रहे थे. और संजना का पिछवारा आनंद के लिंग पर दबे हुवे थे और संजना अपने कमर हिलाते हुए आहिस्ते आहिस्ते उस पर रागढ भी रही थी अपने पापा के लिंग को अपने निचे फील करते हुए…..

चावला साहब का मैं किया के अपने लिंग को पंत से बाहर निकले और हाथ से संजना को दिखाते हुए सहलाये, मगर नहीं समझ रहे थे के आनंद और संजना किआ सोचेंगे अगर उस्सने वैसा किया तो इस लिए खुद को रोके हुए थे लिंग को पंत के अंदर hi दबाते और हाथ से सहलाते हुए.

संजना ने भी अपने पापा को चुम्मते चाटते हुए अपनी व्हिस्की की गिलास को एक घूँट में निंगाल गयी कुछ सिप्स के बाद और चावला साहब के तरफ हाथ बधाई गिलास देते हुए, मतलब एक और पेग की फरमाईश कर रही थी, तो चावला साहब अपने जगह से उठे और संजना के हाथ से गिलास लेने आये तो संजना के जांघ पर अपने हाथ को फेर्रा, तब संजना ने उनके हाथ को थाम लिया और अपने तरफ खींचा, चावला साहब निचे बैठ गए, उस्सकी टांगों के पास, वो अपने पापा के गॉड में थी, आनंद देख रहा था और चावला साहब बैठे हुए संजना के जांघ पर अपने जीब फेर्रा, गिलास को निचे ज़मीन पर रख दिया और संजना के कमर पर हाथ रख के उस्सको चाटने लगे चावला साहब जबकि संजना अपने पापा के चेस्ट चाट रही थी, और आनंद क ीक हाथ संजना के बूब्स सेहला रहा था…..

तो बे कॉन्टिनोएड इन थे नेक्स्ट अपडेट इम्मेडिएटली……
 
अपडेट 67 संजना विथ बोथ में

चावला साहब ने जोश में अपने बाहों को संजना के कमर में कस लिया और उस्सको छत्ते गए उस्सकी पंतय तक यहाँ तक के उस्सकी पंतय को भिगो दिया छाते हुए और संजना अपने पापा पर बैठे हुए hi दोनों टांगों को बिल्कुल फैला दिए और आनंद अपनी नज़रें निचे करके चावला साहब को अपनी बेटी को चाटते हुए देख रहे थे….

वो भी बहोत उत्तेजित हो गए थे और उस्सने संजना को गॉड से सोफे पर कर दिया और अपने लिंग को पंत से बाहर निकला, जिस को संजना ने तुरंत हाथ में लेकर सहलाने लगी चावला साहब के तरफ देखते हुए…. चावला साहब ने उस्सको चाटना बांध किया और देखने लगे के संजना अब अपने बाप की लिंग के साथ किआ करती है… तब तक वो गिलास में व्हिस्की डालने गए आइस कुबेस के साथ दोनों पर नज़र जमाये हुए और वापस आये दोनों गिलास को व्हिशक्य के साथ लेकर, एक संजना के पास रखा उसस्के लिए और अपने गिलास को सिप करते हुए संजना की हरकतों को देखने लगे जो वो कर रही थी अपने पापा के लिंग के साथ…. चावला साहब को बहोत मैं कर रहा था के शूट करे उस एक्शन को अपने मोबाइल से मगर शायद आनंद नहीं पसंद करता इस लिए नहीं शूट किया और देखते रहे एक वोयर की तरह, अदमीरे कर रहे थे बाप बेटी के इस ईन्सेस्तुओस रिश्ते और एनकाउंटर ko….wo बहोत hi उत्तेजित हो चुके थे और उंनका लिंग जैसे पंत से बाहर निकलने वाले थे, वो एक हाथ से अपने लिंग को सहलाते हुए आनंद के तरफ देखा, तो आनंद ने उस्सको इशारे से लिंग को बाहर निकालने को कहा…. तब तक संजना झुक गयी अपने पापा के लिंग पर और जीब निकाल कर उस के लिंग का ऊपरी हिस्से को छाता, गोआल गोआल जीब को घुमाया लिंग की चढ़ के ऊपर जिस से आनंद की आह निकली, और संजना ने लिंग को मुंह में ले लिया नज़रों को चावला साहब पर किये हुए……

चावला साहब खड़े होकर देखते हुए अपना व्हिस्की को फिर एक hi घूंट में निंगाल गया और जल्दी से एक दूसरा बना कर वापस आया, और संजना के पास निचे बैठ कर उस्सकी निघ्त्य को कमर तक उठाया उस्सने और उस्सकी गांड को छाता चावला साहब ने फिर धीरे से उस्सकी पंतय को निचे खिस्काया, मगर संजना ने धीमी आवाज़ में कहा, “हम्म नहीं अभी मत उतारो, अभी टाइम नहीं हुआ उसस्के लिए….” और वापस अपने पापा की लुंड चुस्सने लगी….. आनंद ने फिर इशारे से चावला साहब को अपने लिंग को बाहर निकालने को कहा, तो अब चावला साहब ने अपने पंत उतारे और बॉक्सर को थोड़ा निचे करके अपने लिंग को सनजनके मुंह के पास किया… संजना मुस्कुराते हुए उनके देखा और फिर अपने पापा के चेहरे में देखा जिसस्ने संजना से कहा, “लेलो नाह, उनको भी तो खुश karo…do दो मिल गए आज तुमको मेरी गद्य दो एक साथ मज़े लूटलो अब बेबी!!”

तो संजना एक हाथ से अपने पापा के भीगे हुए लुंड पर हाट चला रही थी और दूसरे हाथ से चावला साहब के लिंग को लिया और सहलाते हुए उनके चेहरे में सर उठा कर देखा फिर जीब घुमाया उनके लिंग पर बिल्कुल उसी तरह जिस तरह अपने पापा के लिंग पर किया था फिर उस्सको अपने मुंह में ले लिया एक हाथ से अपने पापा के लिंग पर हाथ चलाते हुए… इधर चावला साहब को चूस रही थी उधर आनंद के लिंग पर हाथ चलाती जा रही थी……

फिर कुछ देर बाद संजना ने अपने व्हिस्की का गिलास लेकर एक सिप लिया और थोड़ा सा व्हिस्की चावला साहब के लिंग पर चिररका और व्हिस्की को लिंग समेत चुस्सने लगी…. मतलब लिंग से व्हिस्की पी रही थी!!

उस तरफ आनंद अपने कमर हिलाते हुए संजना के मुठी में अपने लिंग को जैसे ढाका देते हुए संजना की मुठी को अपने एक हाथ में दबा कर चला रहे थे…. जैसे संजना के मुठी को छोड़ रहा था आनंद…

संजना फिर रुकी, अपने गिलास को ख़तम किया और इस बार चावला साहब के लिंग को हाथ में लिए मुठी बंद करके हाथ चालते हुए और अपने पापा को लिंग को मुंह में लिया चुस्सने को… तब चावला साहब झुके संजना के मुंह को अपने मुंह में लेने को, तो संजना अपने पापा के लिंग को चोरर कर चावला साहब के जीब को मुंह में लिया और किश करते हुए संजना कड़ी हो गयी, और अपने बाहों को चावला साहब के कांधों पर करके, अपने दोनों टांगों को फैला कर चावला साहब के ऊपर दोनों तरफ टांगों को उनके कमर पर कसके लटक गयी और पीछे से उसस्के पापा के संजना के गांड पर अपने लिंग को दबाया पंतय के ऊपर hi थोड़ा रगड़ते हुए…. मतलब अब संजना बीच में थी और दो मर्द दोनों तरफ उसस्के आगे और पीछे खड़े पोजीशन में….

चावला साहब संजना को लेकर चलने लगे उस्सकी बैडरूम के तरफ किश को जारी रखते हुए और संजना को उस्सकी बीएड पर पटका चावला शब् ने, पीछे से आनंद आये. और बीएड क ीक तरफ से चावला साहब गए और दूसरी तरफ से आनंद आये बीएड पर…. तो संजना अब दोनों को देखते हुए मुस्कुराते हुए कहा, “अरे पिज़्ज़ा नहीं खाया अभी तक किसी ने भी, चलो पझले खाते हैं नाह?!

उसस्के पापा ने अपने लुंड को उसस्के मुंह के तरफ करते हुए कहा, आज इस पिज़ा को खाओ नाह, दो दो पिज़्ज़ा है खाने को तुम्हें आज गद्य!!”

और चावला साहब ने कहा, “आरी अभी तो पूरी रात बाकी है, पहले यह कर लें उसस्के बाद डिनर करेंगे बेबी!”

संजना ने नखरे वाली आवाज़ में कहा, “हम्म मुझे नींद आजाएगी यह करने के बाद नाह?!”

आनंद ने कहा, “मैं तुमको जगा दूंगा नाह खाने के टाइम पर!”

संजना ने कहा, “मगर मैं सोऊंगी नाह मेरे बीएड पर?”

तो चावला साहब ने कहा, “आज हम तीनों साथ सोयेंगे बेबी,” संजना तब अपने पापा के तरफ मूढ़ कर कहा, “सच पापा?”

आनंद ने कहा, “बिल्कुल सच गद्य आज पहली बार तुम दो आदमियों के साथ सोवोगी क्यों खुश नहीं हो?”

संजना बहोत खुश होते हुए कहा, “थैंक यू पापा बहोत बहोत hi खुश हूँ क्यों खुश नहीं हूँगी जब दोनों जिस से मैं प्यार करती हूँ एग्री करते हैं तो मुझे क्यों ख़ुशी नहीं होगी, मैं एहि तो चाहती थी नाह मगर सोचा था के आप दोनों पता नहीं राज़ी होंगे के नहीं अब मुझे बहोत ख़ुशी हुई यह देख कर के आप दोनों बिल्कुल राज़ी हो मुझे एक साथ लेने में…. इतस okay एंड फाइन ी ऍम वैरी हैप्पी.”

तो चावला साहब ने अपने सारे कपडे उतारे और आनंद ने भी…. संजना बीएड पर लेते दोनों को नंगे होते देख रही थी, मगर वो अपनी निघ्त्य में hi थी वेट कर रही थी के दोनों मिलकर उस्सको नंगा करें….

और उसस्के पापा उसस्के राइट साइड में बीएड पर गए और चावला साहब संजना के लेफ्ट में, दोनों मर्द बिल्कुल नंगे, लिंग बिल्कुल तन्ने हुए फनफनाते हुए दिख रहे थे संजना को, वो अपनी पीठ पर लेती थी और वेट कर रही थी, थोड़ा हल्का सा नशा हुआ था व्हिस्की पिने से और संजना अपने होंठों पर जीब फरते हुए चावला सजब को एक ेंख मारते हुए उनको अपनी जीब से चेर्रा और धीरे से कहा, “हम्म्म मुझे बाहों में भरलो अपने”…. और फिर मुड़कर अपने पापा से कहा, “पापा आप भी मुझको भरलो बाहों में मेरे पीठ के तरफ से मैं दोनों को अपने जिस्म पर फील करना चाहती हूँ ह्म्म्मम्म टेक में बोथ ऑफ़ यू पलेआएएससससससीई”

चावला साहब तो अपने लिंग को उसस्के मुंह के पास लेजा रहे थे पर क्यूंकि संजना खुद को उन् के बाहों में पाना चाहती थी तो चावला साहब लेट गए बीएड पर संजना के बगल में और उस्सको अपने बाहों में लिया और वैसे hi दूसरे तरफ से आनंद ने भी बीएड पर होकर संजना को उसस्के पीठ से बाहों में भरा, तो चावला और आनंद के बाहें एक दूसरे के बाहों से रागढ रहे थे…. और संजना दोनों मर्दों के बीच बीएड पर एक करवट में उन् दोनों ने बीच में थी… संजना के बाहें चावला साहब के जिस्म से लिपटे हुए थे, जिस दौरान चावला साहब का तन्ना हुआ लुंड संजना के ठीक योनि पर दबे हुए थे और पीछे आनंद का लिंग संजना के नितम्बों पर दबा हुआ था और संजना ने ेंखें बांध कर लिए दोनों को एक साथ फील करते हुए ज़ोर से चावला साहब को बाहों में भरके…..

और कुछ लम्हों के बाद चावला साहब ने संजना के मुंह को अपने मुंह में लेकर उस्सकी जीब चुस्सने लगे जबकि पीछे से आनंद ने संजना का निघ्त्य ऊपर उठाते हुए उस्सकी पंतय को थोड़ा निचे किया उसस्के जाँघों पर और अपने लुंड को उस्सकी चुतरों के बीच दबा कर हलके हलके रगड़ने लगा….. संजना चावला साहब को किश करते हुए, अपने नितम्बों को अपने पापा के तरफ पैरों को मोड़ कर पोजीशन दिया ताके उसस्के पापा को अच्छा पोजीशन मिले रगड़ने को, उस तरह से संजना के टाँगें आधा मोड हुए थे जिस से चावला साहब आगे के तरफ अपने लिंग को उसस्के घुटनों पर दबे हुए फील किये… फिर किश को बरकरार रखते हुए चावला साहब ने संजना की निघ्त्य की पतली सी स्ट्राप को धीरे धीरे काँधे से निचे किया उसस्के बाहों पर और हलके हलके संजना के बाहों से होते हुए स्ट्राप को बिल्कुल निकल दिया और तुरंत निघ्त्य को निचे के तरफ से खिंचा निकलने को जिस्सको आनंद ने बाहर निकालने में हेल्प किया पीछे से….. उसस्के बाद संजना ने अपने बूब्स को चावला साहब के छाती पर दबा कर रगड़ा जैसे उस्सको उस रागढ से बहोत अच्छा फील हो रहे थे, और अपने बाहों में चावला साहब को ज़्यादा ज़ोर से जकरा और उनके जीब को और भी ज़्यादा जोश से चुस्सने लगी….. पीछे से आनंद ने अब संजना की पंतय को बिल्कुल निचे किया उस्सकी घुटनों से भी ज़्यादा निचे, और संजना ने खुद एक तंग उठाया जिस से उसस्के पापा को आसानी हुई पंतय को बिल्कुल बाहर निकाल फेंकने की….. आनंद संजना के गले पर पीछे दांत दबाते हुए उस्सको चूस रहे थे अपने लिंग को उस्सकी जाँघों के बीच ो बीच रगड़ते हुए और आनंद ने एक हाथ संजना के चुतरों से होकर उस्सकी योनि तक लगाया और अपने उँगलियों को उस्सकी छूट पर मसलने लगा, योनि बिल्कुल hi गीली हो गयी थी और आनंद ने अपने ऊँगली को मुंह में दाल कर चूसा फिर दोबारा उँगलियों को उस्सकी छूट पर रगड़ा और इस बार उन् भीगे हुए उँगलियों को चावला और संजना के मुंह के बीच किया, वह दोनों तो किश करे रहे थे, मगर चावला साहब को सब पता था के आनंद किआ कर रहा है, तो उस्सने आनंद के ऊँगली से संजना का रस चूसा और उस रस को खुद संजना के मुंह में डाला किश को जारी रखते हुए…..

मतलब हुआ यह के आनंद ने अपनी बेटी का रस निकाल कर चावला साहब के मुंह में डाला जिस्सको चावला साहब ने वापस संजना के मुंह में डाला उसी के रस को…. और फिर तब आनंद ने खुद अपने उँगलियों को संजना के मुंह में डाला उससे खुद की रस चुस्सने के लिए… वो भी संजना को पता था चुस्सने से पहले के उसी का रस है जो उसस्के पापा ने उसस्के योनि से निकल कर उसस्के मुंह में डाला…..

संजना थोड़ा सा हांफने लगी थी और एक जोश सा दिख रहा यह उस में, उस्सने अपने गर्दन मोड़ कर अपने पापा के मुंह को अपने मुंह में लिया और अब उस्का जीब चुस्सने लगी जबकि इस बार चावला साहब ने उस्सकी छूट पर हाथ फेर्रा, उँगलियों को उसस्के अंदर डाला और उस्का रस निकला और अब उस्सने संजना और आनंद के मुंह में डाला जब वह किश कर रहे थे, और दोनों बाप बेटी किश करते हुए hi उस रस को जीब में लिए और एक दूसरे के मुंह में डाले और जीब चुस्सने लगे…. यह करते वक़्त चावला साहब दोनों बाप बेटी को ख़ुशी भरे नज़रों से देख रहा था…. कितना अपनापन और प्यार था उन् दोनों के बीच जैसे बिल्कुल पति और पत्नी थे वह दोनों…..

संजना की सिसकारियां निकलने लगे थे, क्यूंकि अब चावला साहब का लिंग उस्सकी योनि की पंखुरियों के बीच रगड़ने लगे थे, क्यूंकि गीली थी वहां तो आसानी से फिसलते हुए रगड़ते जा रहे थे ज़ोर से दबाते हुए और पीछे आनंद का लिंग उसस्के नितम्बों के बीच रागढ रहे थे और एकांत बार तो ऐसा हुआ के आनंद और चावला साहब, दोनों के लुंड एक दूसरे से टकराये संजना के जाँघों के बीच से होते हुए….

और चावला साहब ने घुर्राटे हुए पूछा, “कौन निचे लेगा और कौन ऊपर जाएगा?” तो नशीली ेंखों से संजना ने अपने पापा को देखा, और आनंद ने चावला साहब को देखा, तो धीमी सी तड़पती आवाज़ में संजना ने कहा, “पापा आप तो पीछे सालों से लेते आये हो, तो आप आगे लेलो और चावला साहब को पीछे लेने दो क्यों ठीक है नाह पापा?” आनंद ने भी नशीले हालत में कहा के ठीक है जैसा वो चाहे….

तो झट से संजना एप पापा को पीठ पर करके उन् के ऊपर चढ़ गयी अपने दोनों टांगों के फैलाते हुए, और बिना टाइम गंवाए हुए आनंद ने अपना लिंग संजना के अंदर थुश दिया….. चावला साहब ने कुछ पल दोनों को उस पोजीशन में देखा, संजना की आहें तड़पती हुई निकल रहे थे और उस्सकी आवाज़ आने लगे थे कुछ इस तरह से, “हम्म्म्म आअह्ह्ह हा स्स्स्सह्ह्हस्सस्स आआह्ह पापा ऊऊफफफफ फफफफफफफफ स्स्स्सह्ह्हह्ह” संजना को उस तरह से तड़पते हुए देख और सुनकर चावला साहब को बड़ा मज़ा ारः था, और उन्हों ने देखा किश तरह से संजना ने अपने पैरों को मोड़ कर खुद अपनी गांड हिलाते हुए अपने पापा का लुंड अपने अंदर बाहर किये जा रही थी और एक नज़र चावला साहब को भी देखि जा रही थी उसी नशीले ेंखों से…..

चावला साहब से रहा नाह गया और वो उन् दोनों के ऊपर चढ़ा, संजना के गांड पर हलके से थपड मारा और वो जगह लाल हो गया जहाँ उन्हों ने थपड मारा, और चावला साहब ने अपने लिंग को संजना के गांड के छेड़ में थोड़ा सात हुक लगाके ठुस्सा और थोड़ा ज़ोर लगाके अंदर घुसेड़ दिया खुद “आआअह्ह्ह्ह” करते हुए और संजना की चीख निकली “uuuuuuiiiiiiiiiii मम्माआआ आआआआह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ पापा दो दो मेरे अंदर हैं ओह माय गूऊऊडड़डडडडड!!! Aaaaaaaaaahhhhhh,” चावला साहब ने ढाका देना शुरू किया उस्सकी गांड में और निचे से आनंद ढाका दे रहा था उस्सकी छूट में, दोनों मर्द दोनों तरफ से ज़ोरों से ढके देने लगे और संजना कहाँणररते हुए तड़पती आवाज़ में हांफते हुए “आआअह्ह्ह्हह उउउउउइइइइइइइ माआआआ उफ्फ्फफ्फ्फ़ स्स्स्सस्स्स्शशशशश आआह आआह यह यह यह यह हां हआ…. होऊ!!!”

संजना सिसकने लगी थी और दो बार झाड़ गयी थी उसी दौरान मगर कुछ नहीं बोल रही थी क्यों के उस्सको लगता था वो इस दुन्या में नहीं है एक अजीब सी फीलिंग हो रही थी जैसे किसी बड़े ड्रग को लिया हुआ है, जैसे ऑपरेशन करने से पहले अनेस्तेसिअ की इंजेक्शन दिया जाता है तो कैसा फील होता है उस वक़्त संजना उस हालत में थी जैसे 100% किसी नशीली चीज़ लिया है उस्सने….. होश ो हवाज़ नहीं थी इतना मज़ा आया उस्सको के दुन्या से दूर किसी जन्नत जैसी जगह में खुद को पाया संजना ने उन् दो मर्दों के बीच…

संजना को उस तरह से कहाणररते और चिलाते हुए देख कर दोनों मर्द एक साथ झड़े… दोनों ने अपने अपने लिंग को एक साथ निकाले बाहर और एक ने संजना के गांड को भिगोया अपने पानी से और आनंद जो निचे था उसस्के वीर्य खुद उसस्के पथ पर गिर्रा जिस्सको संजना ने अपने पथ से दबा कर अपने पापा पर जैसे बेहोश hi होगयी हांफते हुए…

तीनों हांफ रहे थे, संजना बीच में थी, दो मर्दों के बीच… उसस्के बूब्स को किसी को टाइम hi नहीं मिला छूने को, दोनों बूब उसस्के पापा के छाती पर दबे हुए थे जैसे कुचल रहे थे आनंद के छाती पर, संजना के ऊपर चावला साहब ने अपने वज़न से दबाया हुआ था उस्सको, संजना दोनों के बीच जैसे कुचलती जा रही थी….

और आखिर में चावला साहब एक तरफ हुए और पीठ के बल बीएड पर लेट गया हांफते हुए और संजना भी उसस्के बाद अपने पापा पर से उठी और वो भी पीठ के बल लेती हांफते हुए hi… और आनंद छत ताकते हुए हंससने लगा धीरे धीरे, उस्सको सुन कर चावला साहब भी हंससने लगे तब उन् दोनों को देख कर संजना भी हंससने lagi…kaafi देर तक तीनों ज़ोर ज़ोर से हँस्ते रहे ख़ुशी के मारे….. क्यों हंस रहे थे किसी को पता नहीं था, ऐसा एक इमोशन हुआ के खुद बा खुद हंसी आयी थी…..

तो बे कॉन्टिनोएड…………… (5120 वर्ड्स फ्रॉम आल थ्री उपदटेस)
 
Back
Top