Chudai Kahani वो शाम कुछ अजीब थी - Page 5 - SexBaba
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Chudai Kahani वो शाम कुछ अजीब थी

शाम तक दोनो होटेल ललित में चेक्किन कर गये - इनके लिए सूयीट रूम बुक था जहाँ से खजुराहो के टेंपल दिखते थे.

सूयीट के बेड रूम में पहुँच के सुमन बिस्तर पे लूड़क गयी - आह कितनी थकान हो गयी है - नहा के फ्रेश होना पड़ेगा.

'मोम कॉन सी सहेली रहती है आपकी यहाँ और सीधे उसके घर क्यूँ नही गये'

सुमन खिलखिला के हँस पड़ी ' सहेली ! रात की बात भूल गया क्या वी आर ऑन डेट'

सुनील सीरीयस हो गया.

'बेटे इस डेट पे मुझे दो फ़र्ज़ निभाने हैं - एक माँ का और एक दोस्त का - जस्ट रिलॅक्स - मैं फ्रेश होके आती हूँ' सुमन जान बुझ के मटकती हुई बाथरूम की तरफ बड़ी लेकिन पहले उसने अपने बॅग से एक पारदर्शी नाइटी निकाल ली'

सुनील बाल्कनी में जा के खड़ा हो गया और ढलते हुए सूरज की छटा का असर खजुराहो के मंदिर पे होता देखने लगा.


सुमन और सुनील के जाने के बाद सागर हाल में अख़बार लेके बैठ गया.
उसे एक बात की हैरानी थी कि सुनील को इस कड़वे सच का पता कैसे चला -खैर जो भी हुआ - ये बात तो सुमन बता देगी - पर सुनील के अंदर जो दर्द समा गया था उस दर्द को सागर महसूस कर रहा था - शायद सुमन सागर को दर्द की इन लहरों से बाहर निकाल के ले आए - इस ख़याल से खुद को तसल्ली देते हुए उसने ठंडी सांस भरी और अपना ध्यान अख़बार में लगा दिया.

ना सागर ड्यूटी पे गया ना सोनल. दोनो ही सुनील के बारे में सोच रहे थे एक अपने बेटे के दर्द के बारे में और एक अपने प्यार के बारे में.

शाम हो चुकी थी अभी तक दोनो की कोई खबर नही आई. सोनल से रहा ना गया और सुनील का मोबाइल डाइयल कर लिया सुनील उस वक़्त बाल्कनी में खड़ा नज़ारे देख रहा था.

'हां दी बोलो - बस अभी होटेल पहुँचे हैं'

'अहह' सुनील को सोनल की सिसकी सुनाई दी.

सोनल :'तेरे बिना दिल नही लग रहा'

सुनील : 'दी ये क्या हो गया है आपको - प्लीज़ कल भी इतना समझाया था'

सोनल : 'प्यार पे किसी का ज़ोर नही होता पगले - बस हो जाता है और मुझे अपने प्यार पे भरोसा है'

सुनील :'कम ऑन प्लीज़ नोट अगेन'

सोनल : 'तरसा ले जालिम जितना तरसाना है - एक दिन मेरी भी बारी आएगी'


सुनील : 'उफफफ्फ़'

सोनल : अच्छा मोम कहाँ है

सुनील : बाथ ले रही हैं आती हैं तो फोन करवाता हूँ.

सोनल : चल मोम से बाद में बात करवा देना - एंजाय युवरसेल्फ - वेटिंग टू सी यू - लव बाइ

सुनील झुंझला के फोन को देखने लगता है . क्या हो गया है उसकी बहन को.

सुमन बाथ टब का मज़ा लेते हुए सोच रही थी कि उसे अब आगे क्या करना है.


सुमन जब बाथरूम से बाहर निकली तो इस तरह दिख रही थी कि

कमरे में ज़लज़ला आ गया था - यूँ लग रहा था खजुराहो मंदिर की कोई मूर्ति जीती जागती सामने हो - और उपर सवर्ग से देखती अप्सराएँ जल के कबाब हो गयी थी.

सुनील आँखें फाडे सुमन को देख रहा था - उसने ख्वाब में भी नही सोचा था कि उसकी माँ इस रूप में उसके सामने आएगी.

मर्यादा की दीवार कितनी भी सख़्त क्यूँ नाहो - संस्कारों का दबाव कितना भी क्यूँ ना हो - औरत का वो रूप जिसमे सुमन इस वक़्त थी विश्वामित्र तो क्या भीष्म पितामह की साधना भी शायद भंग कर देती.

सुनील की आँखों ने जो देखा उसका असर उसके जिस्म पे हुआ और उसका लंड खड़ा होने लग गया - उसकी पॅंट में बनते हुए तंबू को सुमन देख रही थी और मुस्कुरा रही थी .

सुमन ' ये था सेक्स का पहला लेसन - इट स्टार्ट्स फ्रॉम आइज़'

सुनील की तो आवाज़ ही नही निकली

सुमन खिलखिला के हसी ' अब जा फ्रेश हो कर आ'

सुनील ख़यालों से बाहर निकला - ग्लानि से भर वो फट से बाथरूम में घुस्स गया.

सुमन अच्छी तरहा जानती थी उसका खूबसूरत बदन जिसे बड़े जतन से उसने मेनटेन किया था वो क्या क्या गुल खिला सकता है.

बाथरूम में घुस सुनील बिना कपड़े उतारे शवर के नीचे खड़ा हो गया - खुद को गालियाँ देने लगा - उसे समझ में आ गया था क्यूँ उसका मोसा ( अब पिता) उसकी माँ का दीवाना बन गया था.

एक बेटा होते हुए उसके जिस्म ने ऐसे क्यूँ रिएक्ट किया - कहाँ गयी थी उसकी मर्यादा - कहाँ गये थे उसके संस्कार. 

'सेक्स स्टार्ट्स फ्रॉम आइज़' सुमन के ये अल्फ़ाज़ उसके कानो में गूंजने लगे. जिस्म की गर्मी ठंडे पानी के नीचे खड़े होने के बावजूद कम नही हो रही .

जिस्म की माँग और दिमाग़ में जंग छिड़ गयी थी.
 
सुनील ने बाथरूम की दीवार पे अपना सर दे मारा और नीचे बैठ के रोने लगा - ये गुनाह उस से कैसे हो गया - उसकी आँखों ने उसे धोखा क्यूँ दिया. इफ़ सेक्स स्टार्ट्स फ्रॉम आइज़, देन व्हाई माइ आइज़ डिड नोट रेस्पेक्ट माइ मदर. मैं क्यूँ उत्तेजित हुआ ? माँ चाहे पूरी नंगी भी हो के सामने आ जाए - एक बेटा कभी उत्तेजित नही हो सकता.

सुनील भूल गया था कि इंसान असल में एक जानवर ही तो है - ये रिश्ते - ये मर्यादा की दीवारें सब उसकी बनाई हुई हैं. क्यूंकी वो अधिपत्य चाहता था. कमजोरों को कुछ नही मिलता था - जो शक्ति शाली होते थे वो सभी औरतों पे अधिकार जमा लिया करते थे - जब बेटे बेटियाँ बड़े होते थे वो भी रंग में रंग जाते थे. धीरे धीरे दिमाग़ का विकास हुआ तो समझ की गड़ना हुई - एक परिवार की गड़ना हुई - फिर कहीं जा कर मर्यादा की दीवारें बनी.


सुनील के अंतर्द्वंद से बेख़बर बाहर बैठी सुमन सोच रही थी कि इतनी देर तो नहाने में इसने कभी नही लगाई - क्या अंदर मूठ मारने लग गया है - ये सोच के वो मुस्कुरा उसने रूम सर्विस फोन किया और रेड वाइन की एक बॉटल और कुछ स्नॅक्स मंगवा लिए - आगे उसने जो बातें करनी थी सुनील के साथ वो पूरे होश में रह कर नही कर सकती थी.

रूम सर्विस को ऑर्डर देने के बाद सुमन ने सागर को फोन किया.

सुमन : कैसे हो जानू

सागर : सूमी ये !!!!!!

सुमन : ट्रस्ट मी आ के समझा दूँगी.

सागर : ह्म्म

सुमन : तुम कल जल्दी क्यूँ सो गये.

सागर : अरे आधी रात को घर पहुँच के सोते नही तो क्या करते.

सुमन : क्यूँ मुझे चोदना नही था क्या - जब तक तुम से चुद नही जाती मुझे नींद कहाँ आती है.

सागर : समर ने कोटा पूरा नही किया क्या - उसके साथ हफ़्ता रहने के बाद तुम्हारी हालत ही कहाँ होती है एक दिन का ब्रेक तो लाज़मी हो जाता है तुम्हारे लिए

सुमन : हां तो इस बार हफ़्ता पूरा कहाँ हुआ. ओह आइ मिस यू सो मच.

सागर : मी टू लव.

सुमन : अच्छा रखती हूँ ज़रा अपने बर्खूदार को देख लूँ - इतनी देर हो गयी बाथरूम से निकला ही नही. सोनल का ध्यान रखना . कल फोन करती हूँ.

सुमन का फोन आने के बाद सागर को तसल्ली हो गयी वो सब संभाल लेगी - उसने पूछा तक नही कि वो कहाँ गयी है कहाँ ठहरी है - एक कमरा लिया है या दो. सागर को इन बातों से कोई मतलब नही था - वोई बस सुनील को हँसता खेलता देखना चाहता था.

सागर से बात करने के बाद सुमन ने अपने लिए एक पेग बनाया और पीने लग गयी ये पेग ख़तम करने में उसे 15 मिनट लगे तब तक भी सुनील बाथरूम से बाहर नही आया था. सुमन परेशान हो गयी वो बाथरूम पे नॉक करने जाने वाली थी कि सुनील बाथरोब पहन बाहर निकला - क्या मस्क्युलर बॉडी थी उसकी कोई भी लड़की कितना भी उसे अपनी खूबसूरती का गुमान हो - मोहित हुए बिना नही रह पाएगी.

सुमन उसे देखती रह गयी - बिल्कुल समर लग रहा था. सुनील ने अपने बॅग से नाइट सूट निकाला और फिर बाथरूम में घुस्स गया.

अहह सुमन सिसक पड़ी उसकी आँखों में खुमारी छाने लगी - खुद ही तो बोली थी सेक्स स्टार्ट्स फ्रॉम आइज़ - और उसने खुद पे असर होता हुआ महसूस किया - पर अभी तो सुनील से बहुत बातें करनी थी - ए स्लो पेनफुल स्टेप बाइ स्टेप प्रोसेस हॅड टू बेगिन.

सुनील कपड़े पहन के बाहर निकला तो एक झटका और लगा उसे पहली बार अपनी माँ को वाइन पीते हुए देख रहा था.

'कम जाय्न मी' सुमन बोली.

सुनील खड़ा रहा.

'कम ऑन यू आर अडल्ट नाउ - वन्स इन वाइल डज़ नोट हर्म'

सुनील सामने आ के बैठ गया और सोचने लगा मोम को नशे की ज़रूरत है - होश में तो वो ये बातें नही कर पाएगी जो करना चाहती है. फिर उसे ख़याल आया कि उसे खुद भी तो होश को दबाना है उसे भी तो कुछ नशे में रहना है वरना कोई बेटा अपनी माँ से वो बातें नही सुन सकता - जो सुमन उस के साथ करने वाली थी.

सुमन ने सुनील के लिए पेग बनाया और एक खुद के लिए. सुनील ने ग्लास उठा लिया.

'चियर्स यंग मॅन' सुमन ने ग्लास टकराते हुए बोला पर इस चियर्स का सुनील ने कुछ जवाब नही दिया.

'लर्न सम टेबल मॅनर्स' सुमन उसे घूरते हुए बोली.

सुनील को बोलना ही पड़ा ' चियर्स मोम'

'दट'स बेटर'

दोनो ने एक एक घूँट भरा. सुनील ने दोस्तो के साथ एक बार विस्की पी थी. वाइन आज पहली बार पी रहा था. थोड़ा खट्टा थोड़ा कड़वा सा टेस्ट उसके मुँह में रह गया, पर वाइन अच्छी क्वालिटी की थी.

सुनील सुमन की तरफ नही देख रहा था उसने अपनी नज़रें टेबल पे गढ़ा के रखी थी.

सुमन ने चिकन का पीस उठाते हुए कहा ' साथ में कुछ खाते रहो ऐसे नही पीते'

सुनील ने भी चिकन का रोस्टेड पीस उठा लिया.

सुमन का चेहरा अब सीरीयस हो गया.

'तुम जानते हो आज सुबह तुमने ना सिर्फ़ खुद को बल्कि मुझे भी गाली दी'

सुनील को सुमन की तरफ देखना ही पड़ा ये सुन और फिर वही हुआ जो नहाने से पहले हुआ था. सुमन के सुडोल उरोज़ जो सॉफ सॉफ दिख रहे थे उनका असर उसकी आँखों के द्वारा जिस्म पे पड़ने लगा.

'गाली' बड़ी मुश्किल से सुनील बोला और फिर नज़रें झुका ली.

'लुक अट मी व्हेन आइ आम टॉकिंग टू यू' सुमन गुस्से से बोली.

'म.....ओम' सुनील ने नज़रें उपर उठाई.

'तेरी हिम्मत कैसे हुई खुद को बस्टर्ड बोलने की - क्या मतलब जानता है इसका - इसका मतलब है तेरी माँ को यूज़ किया गया और प्रेग्नेंट कर के छोड़ दिया गया - जस्ट लाइक आ स्लट'

'मोम!!' सुनील की आवाज़ में दर्द था.

' क्या तू नही जानता अपने पिता का नाम -- मान लिया आज तुझे ये पता चला है कि तेरा बाइयोलॉजिकल फादर कोई और है - तो तो क्या फरक पड़ गया - मैं तेरी माँ हूँ जब मैने तुझे ये सिखाया था कि सागर तेरा पिता है - उसके बाद क्या बचता है - क्या कभी सागर ने तुझे ये अहसास होने दिया कि तू उनका बेटा नही - क्या कभी समर ने ये अहसास होने दिया कि तू सागर का नही उसका बेटा है' बोलते बोलते सुमन रोने लग गयी.

उसके आँसू सुनील की आँखों से भी बहने लगे. वो लपक के सुमन के पास गया उसे अपनी बाहों में भर लिया ' सॉरी मोम - सॉरी - प्लीज़ रोना मत - क्या करता मैं - बहुत हर्ट हुआ था मोम - पर तुम्हें कभी गाली नही दे सकता मोम - सॉरी - प्लीज़ प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो'
 
सुमन सुनील के कंधों पे सर रख रोने लगी - उसका रोना बंद ही नही हो रहा था.
जाने कितनी देर सुनील माफी माँगता रहा पर सुमन रोती रही.


शायद आधा घंटा सुमन रोती रही फिर जा के वो संभली और वाइन का ग्लास एक घूँट में ख़तम कर दिया. और फिर अपना सर सुनील के कंधे पे रख दिया.,

'अब कभी ऐसा मत सोचना बेटा --- नही तो तेरी माँ के साथ साथ पूरा परिवार मर जाएगा'

'मोम ओह मोम' सुनील सुमन के चेहरे पे चुंबन बरसाने लगा.


सुमन खुद को संभाल चुकी थी - उसने एक और पेग बनाया और सुनील को भी उसका ख़तम करने को बोला - सुनील के दिमाग़ में तो बवंडर चल रहे थे उसने खट से अपना पेग ख़तम कर लिया और दूसरा बना लिया.

सुमन : सुनील सेक्स और प्यार में फरक होता है - जितना मैं तेरे डॅड से प्यार करती हूँ किसी और से नही समर से भी करने लग गयी हूँ पर इतना नही जितना तेरे डॅड सागर से. सेक्स से सिर्फ़ जिस्म की भूख मिटती है - प्यार दो आत्माओं का मिलन होता है और सेक्स प्यार का एक हिस्सा होता है.

(सुमन सॉफ सॉफ इशारा कर रही थी कि सुनील के लिए उसका डॅड सागर ही है - समर का कोई वजूद नही - अब आगे क्या होता है देखते हैं)


वाइन के ग्लास का एक और दौर चला सुनील के दिमाग़ की परतें खुलती चली गयी - जो प्यार करता है वही हक़दार होता है - जनम देने का कारण कोई भी हो - सागर से तो अब भी वो बहुत प्यार करता था इनफॅक्ट वो तो उसका आइडल था - जिंदगी में जो भी कदम उसने उठाया था उसके पीछे सागर का प्यार - उसकी देखभाल - उसका प्रोत्साहन - उसकी दूरन्देशि - ये सब ही तो था. जो पालता है - दिशा दिखाता है वही असली पिता होता है - और सागर ने कभी कोई कसर नही छोड़ी थी. आत्म ग्लानि से सुनील की आँखें भर आई - एक कड़वे सच को कितना महत्व दे दिया था उसने - अगर डॅड को पता चला कितने दुखी होंगे वो - सॉरी डॅड - वो अपने मन में ही बोला.

वाइन की बॉटल ख़तम हो गयी पर अहसास की गर्मी अभी ठंडी नही हुई थी - भावनाओं के ज्वारभाटे अब भी दोनो के दिमाग़ में चल रहे थे. सुमन ने थोड़ी ज़्यादा पी थी पर उसे देख लगता ही नही था कि वो इतनी वाइन पी चुकी थी. कहते हैं कि जब दिल इतना दुखी हो जाता है तो शराब ही सहारा बनती है चाहे वो किसी भी रूप में हो - आज कुछ ऐसा ही हो रहा था.

सुमन ने दो बॉटल्स का ऑर्डर दे दिया और एक फ्रेश रोस्टेड चिकेन का - क्यूंकी जो पहले मँगवाया था वो तो इतना ठंडा हो चुका था खाने लायक नही रहा था - अब इस हालत में कॉन ढूंढता की सूट में माइक्रोवेव कहाँ है और उठ के गरम करता.

थोड़ी देर में दो बॉटल और रोस्टेड चिकन आ गया.

नयी बॉटल खुली -

नये ग्लास में दो जाम बने.

'चियर्स टू आ न्यू बेगिनिंग' इसके साथ ही सुमन ने जो हुआ उसे इतिहास बना दिया. वो कड़वा सच इतिहास में कहीं खोने को तयार हो गया था.

'चियर्स मोम - यू आर दा बेस्ट गाइड आइ एवर गॉट - लव यू' सुनील भी उस कड़वे सच को हद से ज़यादा तयार हो ही गया था इतिहास के पन्नो में छुपाने के लिए - बाकी वक़्त तो हर गम का मरहम बन ही जाता है.

सुमन : सुनील जब स्वापिंग शुरू हुई थी - मैं मजबूर थी - क्यूंकी तेरे डॅड आगे बढ़ गये थे और मुझे हिस्सा बनना ही पड़ा क्यूंकी सागर के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ - कुछ भी. लेकिन जब मैं पहली बार ना चाहते हुए भी समर के साथ हमबिस्तर हुई तब मुझे पता चला सेक्स के कितने रूप हैं - सागर मुझे एक फूल की तरहा हॅंडल करता है - कहीं कोई चोट ना आजाए - उसका सेक्स करने का तरीका औरत को सुगंध की वादियों में ले जाता है. पर समर बिल्कुल जंगली बन के सेक्स करता है, मुझे नही पता था कि मेरे अंदर एक और औरत भी छुपी हुई है - जो चाहती थी कि उसपे ज़ोर आजमाया जाए - उसे भूखे भेड़िए की तरहा नोचा खसोटा जाए - पहली बार समर ने ये ही किया था - तब मुझे अपने अंदर छुपी उस औरत का पता चला था जो चाहती है कि उसका मर्द उसे कभी फूल की तरहा सूँघे तो कभी जंगली बन के उसे रोन्द डाले. दोनो का अपना ही मज़ा होता है. सेक्स एक ऐसी भूख है जिस्म की जो एक टाइप से पूरी नही होती. जैसे हम एक ही सब्ज़ी रोज नही खा सकते उसी तरहा सेक्स है - वो भी वेराइटी माँगता है.
 
सुमन की बातों से जहाँ सुनील के दिल में उसकी और भी इज़्ज़त बढ़ रही थी वहीं उसके कानो से धुएँ निकलने लगे थे - एक तो जगह ऐसी खजुराहो - उपर से सेक्स ज्ञान वो भी माँ से. आख़िर था तो मर्द ही असर कैसे नही होता.

सुमन - सुनील के पास और उससे चिपक गयी और उसके होंठों को अपने होंठों से छू के हटा लिया 

दिस ईज़ दा सेकेंड लेसन ऑफ सेक्स.

सुनील की हालत वो हो गयी जैसे किसी कैदी के सामने उसकी रिहाई का वारंट हो पर वो उस तक पहुँच ना सकता हो.

' एक बार की बात होती तो जैसे लोग खाने का जाएका कुछ दिनो में भूल जाते हैं मैं भी भूल जाती - लेकिन जाने क्यूँ समर मुझे भोगना चाहता था और तेरे डॅड सविता को - ये स्वापिंग हर हफ्ते हर सनडे को होने लगी'

सुनील के बस का नही था और सुनील जब से उसकी माँ के होंठों ने उसके होंठों को छुआ था - सेक्स का वो दूसरा लेसन उसे किसी और दुनिया में ले गया था - वो अब भी लड़ रहा था खुद से - उसमे संस्कार इतने कूट कूट कर भरे गये थे जिन्हें तोड़ना बहुत मुश्किल था पर उसका जिस्म उसका साथ छोड़ता जा रहा था - सुमन के रस भरे होंठ उसे बुला रहे थे पर उसमे हिम्मत नही थी अपनी माँ के साथ कुछ भी करने की - दर्द और आकांक्षा की लहर उसके जिस्म में दौड़ गयी - आँखों से दर्द भरे आँसू टपक पड़े . उसने खुद को सुमन से अलग किया और अपना ध्यान वाइन की बॉटल पे लगा दिया - गटा गट एक पेग पी गया और जानवर की तरहा चिकन खाने लगा.

उसकी ये हालत देख सुमन को दुख हुआ पर क्या करती मजबूर हो गयी थी - उसे अपना बेटा वापस चाहिए था - गमो के बादल से बाहर निकला जीवन में आने वाले सुखों को भोगने के लिए तयार.

समर की बातें उसे याद आने लगी - उसके डगमगाते कदम मजबूत होने लगे - हां उसे इस रास्ते पे चलना ही पड़ेगा - चाहे कितनी तकलीफ़ हो - सुनील को एक मजबूत मर्द बनाना ही पड़ेगा - तभी जा के दिल को कुछ शांति मिलेगी --- जब वो संसार की वस्तुओं को दिल से भोगने लगेगा - अपने जनम के कड़वे सच को भुला कर - तब कहीं जा के ये साधना पूरी होगी - तब ये सफ़र पूरा होगा - सुमन का रोता तड़प्ता दिल थोड़ा शत हो गया.

भूख लगने लगी थी - सिर्फ़ वाइन और चिकन से पेट तो नही भरता. बातों बातों में कब रात हो गयी पता ही ना चला.

'सुनील रूम सर्विस से खाना मंगवा ले जो भी तुझे अच्छा लगे - रेस्टोरेंट में जाने की हिम्मत नही - अब मैं दुबारा कपड़े नही बदलना चाहती - कहती हुई सुमन बिस्तर पे लेट गयी '

सुनील ने खाने का ऑर्डर दे दिया और सोफे पे बैठ फिर से वाइन का पेग बना लिया . सुमन उसे ही देख रही थी - अब भी वो खुद से लड़ रहा था उसके चेहरे पे अब भी दर्द के निशान थे और सुमन का फ़ैसला उसे दर्द से बाहर निकालने का और भी ज़ोर पकड़ता गया.

'इधर आ मेरे पास' बिस्तर पे लेटी सुमन ने अपनी बाहें फैला दी.

माँ के आलिंगन को कॉन बेटा इनकार कर सकता है सुनील भी उन बाहों में समा गया - माँ और बेटा दोनो ही बहुत भावुक हो गये दोनो की आँखें नाम पड़ गयी.

आधा घंटा कैसे गुजरा पता ही ना चला रूम सर्विस ने खाना डेलिवर कर दिया.

दोनो माँ बेटा खाना खाने लगे.

ख़तम हो गया पर सुनील के होंठों पे कुछ बटर चिकन की तरी लगी रह गयी.

सुमन उठ के उसके पास आई उसके चेहरे को अपने हाथों में थाम लिया बड़े प्यार से उसे देखने लगी और फिर अपनी ज़ुबान से उसके होंठों पे लगी तरी को चाट लिया . कुछ देर और ऐसे ही अपनी ज़ुबान उसके होंठों पे फिराती रही.

'ये था सेक्स का तीसरा लेसन' और मुस्काती हुई बिस्तर पे लेट गयी .

सुनील बुत बना बैठा रहा उसे समझ ही नही आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा है वो सुमन को अपनी बाँहों में कस के भींचना चाहता था - पर उसकी मर्यादा की दीवार बहुत गहरी और बहुत मजबूत थी - उसके दोनो हाथों की मुठियाँ बहुत सख़्त हो गयी जैसे वो खुद को कुछ करने से रोक रहा हो.

सुनील को अब भी सुमन की ज़ुबान का अहसास हो रहा था - उसका मन मचल रहा था और दिमाग़ वॉर्निंग दे रहा था. उठ के वो बाहर बाल्कनी में जा के खड़ा हो गया. उसके अंदर छुपा जानवर जाग रहा था जिसे वो जागने नही देना चाहता था. फिर से एक जंग छिड़ गयी थी उसके दिमाग़ और जिस्म के बीच. उसने रजनी को एक दो बार चूमा था पर जो अहसास उसे अब हो रहा था पहले कभी नही हुआ था.

बिस्तर पे लेटी सुमन उसे देख रही थी - उसकी आँखों से आँसू टपक पड़े और खुद से बात करने लगी 'सॉरी सन टू मेक यू गो थ्रू दिस पेनफुल ऑर्डील' वाइन कुछ ज़यादा हो गयी थी और सुमन की आँखें कब बंद हुई उसे पता भी ना चला.
 
दूर गगन में बादल एक दूसरे में समाते और फिर अलग हो जाते एक नया ही रूप ले लेते. सुनील उन बादलों की लीला देख रहा था और उसे लग रहा था जैसे ये बादल अपना नया रूप ले रहे थे वो भी एक नया रूप लेने लगा है - पर वो नया रूप कैसा होगा ये अभी वो नही जानता था - क्यूंकी उस रूप की रचना फिर से उसकी माँ कर रही थी - जिसने उसे उसका पहला रूप दिया था.

सागर चैन की नींद सो चुका था उसे अपनी सुमन पे पूरा भरोसा था.

लेकिन सोनल जाग रही थी. अपने हाथों में सुनील की फोटो लिए लहरा रही थी अपने कमरे में मानो जैसे सुनील के साथ डॅन्स कर रही हो.

उसके लबों पे एक गीत था


ये समा, समा हैं ये प्यार का
किसी के इंतजार का
दिल ना चुरा ले कही मेरा, मौसम बहार का

बसने लगे आखों में कुच्छ ऐसे सपने
कोई बुलाए जैसे, नैनों से अपने
ये समा, समा हैं दीदार का, किसी के इंतजार का

मिल के ख़यालों में ही, अपने बलम से
नींद गवाई अपनी, मैने कसम से
ये समा, समा हैं खुमार का, किसी के इंतजार का


लहराती बलखाती गुनगुनाती सोनल बिस्तर पे लेट गयी - तकिये पे अपने सामने सुनील की फोटो को रख उसे निहारने लगी.

'कम से कम एक किस तो दे दे जालिम' बोलते हुए अपने तपते होंठ फोटो में सुनील के होंठों पे रख दिए. आँखें बंद हो गयी इस तस्सवुर में जैसे वाकयी में सुनील के होंठों को चूम रही हो.

सुनील बाल्कनी से अंदर आया तो बिस्तर पे सुमन को सोते हुए देखा - कितना मासूम और कितना प्यारा लग रहा था इस वक़्त सुमन का चेहरा.

मस्ट बी मिस्सिंग डॅड - सुनील के दिमाग़ में ये बात आ गयी जब गौर से उसने देखा किस तरहा सुमन ने तकिया दबाया हुआ था और उसके साथ लिपटी हुई थी.

सुनील की नज़र सुमन के मदमाते जिस्म पे पड़ी - आँखें उस योवन के रूप का रस पीना चाहती थी - पर सर झटक सुनील लिविंग हॉल में चला गया वाइन की बॉटल उठा कर.

अब ग्लास से काम नही चलने वाला था.

ये तीसरी बॉटल थी जिसका ढक्कन खोल सुनील ने होंठों से लगा लिया.


खिड़की से उसे खजुराहो के मंदिर नज़र आ रहे थे जहाँ इस वक़्त लाइट्स जल रही थी. एक बार उसने एक मॅग्ज़िन में खजुराहो के बारे में पढ़ा था और उसकी तस्वीरें उसकी आँखों के सामने लहराने लगी.

कहीं मोम मुझे वहाँ तो नही ले जाएगी - ये सोच के वो सिहर उठा और सुमन का मदमाता कामुक जिस्म फिर उसकी आँखों के सामने आ गया - उसे सेक्स का फर्स्ट लेसन याद आ गया और वो तड़पने लगा.

खटखट वाइन की बॉटल ख़तम कर डाली - नींद आँखों से गायब हो गयी थी रूम सर्विस को दो बॉटल का ऑर्डर और दे दिया.

रात के 11 बजने वाले थे बार बंद होने का टाइम हो चुका था फिर भी रूम सर्विस ने दो बॉटल सुनील के पास भिजवा दी .

एक बॉटल खोल सुनील ने होंठों से लगा ली और अब तक जो भी उसके साथ हुआ उसे सोचने लग गया.

वक़्त के पेट में क्या क्या छुपा हुआ है कोई नही जानता - तो सुनील कैसे जान लेता. ठंडी आँहें भरते हुए धीरे धीरे वाइन पीने लगा - रात धीरे धीरे सरक्ति रही और सुनील कब लिविंग हॉल में सोफे पे सो गया पता ही ना चला.

सुबह की पहली किरण के साथ अंगड़ाई लेते हुए सुमन उठी तो देखा साथ में कोई नही बिस्तर एक दम वैसे का वैसा - सुनील रात को बिस्तर पे नही सोया था. कहाँ गया वो --- सुमन घबरा के उठी और सीधा लिविंग हाल में गयी जहाँ सुनील एक सोफे पे लुड़का हुआ था वाइन की एक भरी बॉटल पड़ी थी और एक खाली.

उसने सुनील को डिस्टर्ब नही किया और फ्रेश होने चली गयी बाथरूम में
 
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