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- Dec 5, 2013
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अपडेट 122 गग
बलदेव निचे अत है तो देखता है सब भोजन कर रहे है बद्री और श्याम अब भी खा रहा था पर राजपाल और देवराज ने अपना भोजन कर लये थे
बलदेव निचे आकर
"कमला ज़रा देखना तुम्हारी महारानी बुला रही है"
Devraj:aao बलदेव भोजन करो
Rajpal:aao बीटा हम बास उठ ने वाले थे
Baldev:mujhe भूक तो बहुत लगी है
बलदेव का हाथ राधा दासी धुलती है
राजपाल देवराज बद्री और श्याम क साथ षुरूश्ती भी देख रही थी क बलदेव पसीने से तरबतर है और सब मंद मंद मुस्कुरा रहे थे
Baldev:lao बड़ी माँ मुझे बहुत भूक लगी है
Shurushti:han मेरे मेहनती बेटे को में डिल भर क खाना खिलाऊंगी
षुरूश्ती खुद से रसोई में जाती है और बलदेव को भोजन पडोसने लगती है
Shurushti:beta बलदेव अपने पसीने तो पॉच ले तेरा शरीर पसीने से भरा है लगता है बहुत ज़्यादा म्हणत क्या है बीटा
ये कहते हुए षुरूश्ती चुटकी लेती है और मुस्कुराती है
बलदेव झेप जाता है और अपने आगे से भोजन की थाली खींचते हुए
"बड़ी माँ आप भी न"
देवराज और राजपाल खाना खा चुके थे तो वो दोनों हाथ धो लेते है
Devraj:bhai अब हम चले सोने थक्क गए है
Baldev:ji मां जी आप विश्राम कीजिये
Rajpal:shurushti बलदेव को खाना खिला कर आजाना में भी चला अब सोने
shurushti:man me)jao सोने और तुम्हारी पहली पत्नी को आज रात भर उसका बीटा हे पलेगा
Shurushti:theek है आप जाये में थोड़ी देर से आती हु
Baldev:badri और श्याम तुम दोनों को नहीं सोना क्या
Badri:ab तुम सोने दो तो न
Baldev:maine क्या किया
Badri
ure महल में चीखे गूंज उठी जो भी क्या तुमने
Baldev
agal वो तो बस तुम्हारी भाबी डर गयी थी
Badri:acha कमला तो कह रही थी छिपकली देख ली थी महारानी देवरानी ने
बलदेव अब फस्स चूका था वो बास
Baldev:han हाँ वही देख क दरी थी
बलदेव को डरा हुआ झूट बोलता देख षुरूश्ती और श्याम है देते है
Shurushti:ary मेरे बेटे को तंग मत करो
तुम दोनों
और सब है पड़ते है
Shurushti:jab नयी नयी शादी होती है तो अक्सर दुल्हन डर जाती है
ये कह कर बलदेव को देखती है तो बलदेव अपना सर झुकाये शरमाते हुए अपना खाना खाने लगता है
ऊपर कमला बलदेव क कक्षा में जाती है तो देवरानी बेसुध पड़ी thi.devrani क जिस्म पर एक मात्रा ओढ़नी थी
Kamla:man me)Aise बेहोश पड़ी है जैसे इंसान ने नहीं सांड ने गांड मार लय हो
Kamla:Maharani आप ठीक तो है
देवरानी जो अपने आखे बंद कए हुए लम्बी लम्बी साँसे भर रही थी अपने आखे खोलती है
Devrani:meri जान जा रही है कमला बहुत मुश्किल से में ये ओढ़नी ओढ़ पायी हु मुझे बहुत दर्द हो रहा है
Kamla:kaha पर दर्द हो रहा है
Devrani
ichhe का भाग पूरा दर्द होरहा है
Kamla:lagta है महाराज बलदेव ने आपके पीछे क सुरंग को खोल दया
Devrani:aah कलमुही कमला कुछ करो मेरी जान चली जाएगी ाः में मर्डर गयी
Kamla:bass आप मुझे बताइये महारानी कहा पर दर्द हो रहा है
Devrani:ary कलमुही पिछवाड़े में दर्द हो रहा है चुतर से बैठा नहीं जा रहा
Kamla:to ऐसा कहो न गांड दुःख रही है अभी कुछ करती हु
कमला कमर पर हाथ लगा कर पूछती है
"यहाँ पैर दुःख रहा है "
"नहीं कमला"
कमला थोड़ा और निचे हाथ लगाती है जैसे कमला का हाथ लगता है देवरानी चिल्लाती है
"aaaaaaaaaaai हाथ हटाओ में मर्डर गयी"
"ाचा तो आपकी पूछ की हड्डी पे दर्द है में वैध जी से कह कर कुछ जड़ी बूटी ले आती हु"
"जल्दी लाओ जल्दी करो कमला"
"ये पहली बार था और ऊपर से महाराज का तगड़ा है वो इसलिए कुछ ज़ोर का झटका लग गया है "
"चुप कर तू तो कहती थी बहुत मज़ा आता है जल्दी जा अब ाः में मर्डर गयी"
कमला जल्दी से निचे उतरती है और सीधे वैध जी क यहाँ पहुंच जाती है वैध जी का दरवाज़ा थक थकती है
"वैध जी उठिये "
"हाँ आया कमला "
वैध जी दरवाज़ा खोलते है
"क्या हुआ कमला इतनी रात गए कही आज रात रंगीन करने का मन तो नहीं"
ये कह कर वैध जी कमला को अंदर खींचते हुए उसे अपने गले से लगा लेते है
"है दय्या बूढ़े हो गए पर अब भी ठरक काम नहीं हो रही आपकी"
"अब आधी रात मेरी कुटिया में तेरी जैसी गदराई छमिया आये तो क्या बात हो सकती है"
कमला वैध जी क बहो से छूट ते हुए
"छोरो भी मेरा आज बिलकुल मन नहीं है वो तो में कुछ काम से आई थी"
"क्या काम ाँ पद गया आधी रात को "
"वैध जी वो महारानी देवरानी दर्द से छटपटा रही है और में उनके पूछ की हदी छू कर देखो तो वो हाथ लगाने नहीं दी "
"ऐसा क्या हुआ जो इतना दर्द हो गया अचानक से "
"वैध जी आप भी न सब कुछ खुल कर हे बताना होगा महारानी देवरानी क पीछे क दुवार को महाराज बलदेव ने आज खोल दया या तो कहो तोड़ दया और अब देवरानी को अपने चुतर क बल बैठ भी नहीं जा रहा है"
"ाहः वो तो मुझे पहले से पता था क जिस दिन बलदेव अपना हथियार इस्तेमाल क्या उस दिन हड्डी तोड़ क रख देगा वैसे कोई बात नहीं ज़्यादा मज़बूत लिंग और लम्बे लिंग लेने क कारन महारानी क हड्डीओं पर बुरा असर पड़ा है जो धीरे धीरे हे ठीक होगा "
"हाँ वो तो है बलदेव जैसा घोडा का देवरानी हे ले सकती थी लैंड वर्ण और किसी की बात नहीं अब कुछ ऐसी जड़ी बूटी दो जिस से महारानी देवरानी का दर्द आराम हो "
"चिंता मत करो में एक लेप देता हु और कुछ जड़ी लेप लगा कर जड़ी खिला देना कुछ दिनों तक दर्द रहेगा फिर ठीक हो जायेगा"
वैध जी अपने कक्षा से जादीओ बूटीओ में सही जड़ी चुन कर निकलते है और साथ हे लेप ढूंढ कर कमला को देते हुए उसका हाथ पकड़ लेते है
"कमला रानी आज कल ज़्यादा व्यस्त रहती हो कभी हमारे सेवा का भी समय निकालो"
"अवश्य वैध जी पर अभी मुझे जाने दीजिये"
वैध जी अपना लैंड पकड़ कर सहलाते हुए कमला का हाथ छोड़ते है जिसे कमला देख कर मुस्कुराती है और जड़ी और लेप
ले कर वापस महल लौटने लगती है.
तो बे कॉन्टिनोएड..
बलदेव निचे अत है तो देखता है सब भोजन कर रहे है बद्री और श्याम अब भी खा रहा था पर राजपाल और देवराज ने अपना भोजन कर लये थे
बलदेव निचे आकर
"कमला ज़रा देखना तुम्हारी महारानी बुला रही है"
Devraj:aao बलदेव भोजन करो
Rajpal:aao बीटा हम बास उठ ने वाले थे
Baldev:mujhe भूक तो बहुत लगी है
बलदेव का हाथ राधा दासी धुलती है
राजपाल देवराज बद्री और श्याम क साथ षुरूश्ती भी देख रही थी क बलदेव पसीने से तरबतर है और सब मंद मंद मुस्कुरा रहे थे
Baldev:lao बड़ी माँ मुझे बहुत भूक लगी है
Shurushti:han मेरे मेहनती बेटे को में डिल भर क खाना खिलाऊंगी
षुरूश्ती खुद से रसोई में जाती है और बलदेव को भोजन पडोसने लगती है
Shurushti:beta बलदेव अपने पसीने तो पॉच ले तेरा शरीर पसीने से भरा है लगता है बहुत ज़्यादा म्हणत क्या है बीटा
ये कहते हुए षुरूश्ती चुटकी लेती है और मुस्कुराती है
बलदेव झेप जाता है और अपने आगे से भोजन की थाली खींचते हुए
"बड़ी माँ आप भी न"
देवराज और राजपाल खाना खा चुके थे तो वो दोनों हाथ धो लेते है
Devraj:bhai अब हम चले सोने थक्क गए है
Baldev:ji मां जी आप विश्राम कीजिये
Rajpal:shurushti बलदेव को खाना खिला कर आजाना में भी चला अब सोने
shurushti:man me)jao सोने और तुम्हारी पहली पत्नी को आज रात भर उसका बीटा हे पलेगा
Shurushti:theek है आप जाये में थोड़ी देर से आती हु
Baldev:badri और श्याम तुम दोनों को नहीं सोना क्या
Badri:ab तुम सोने दो तो न
Baldev:maine क्या किया
Badri
Baldev
Badri:acha कमला तो कह रही थी छिपकली देख ली थी महारानी देवरानी ने
बलदेव अब फस्स चूका था वो बास
Baldev:han हाँ वही देख क दरी थी
बलदेव को डरा हुआ झूट बोलता देख षुरूश्ती और श्याम है देते है
Shurushti:ary मेरे बेटे को तंग मत करो
तुम दोनों
और सब है पड़ते है
Shurushti:jab नयी नयी शादी होती है तो अक्सर दुल्हन डर जाती है
ये कह कर बलदेव को देखती है तो बलदेव अपना सर झुकाये शरमाते हुए अपना खाना खाने लगता है
ऊपर कमला बलदेव क कक्षा में जाती है तो देवरानी बेसुध पड़ी thi.devrani क जिस्म पर एक मात्रा ओढ़नी थी
Kamla:man me)Aise बेहोश पड़ी है जैसे इंसान ने नहीं सांड ने गांड मार लय हो
Kamla:Maharani आप ठीक तो है
देवरानी जो अपने आखे बंद कए हुए लम्बी लम्बी साँसे भर रही थी अपने आखे खोलती है
Devrani:meri जान जा रही है कमला बहुत मुश्किल से में ये ओढ़नी ओढ़ पायी हु मुझे बहुत दर्द हो रहा है
Kamla:kaha पर दर्द हो रहा है
Devrani
Kamla:lagta है महाराज बलदेव ने आपके पीछे क सुरंग को खोल दया
Devrani:aah कलमुही कमला कुछ करो मेरी जान चली जाएगी ाः में मर्डर गयी
Kamla:bass आप मुझे बताइये महारानी कहा पर दर्द हो रहा है
Devrani:ary कलमुही पिछवाड़े में दर्द हो रहा है चुतर से बैठा नहीं जा रहा
Kamla:to ऐसा कहो न गांड दुःख रही है अभी कुछ करती हु
कमला कमर पर हाथ लगा कर पूछती है
"यहाँ पैर दुःख रहा है "
"नहीं कमला"
कमला थोड़ा और निचे हाथ लगाती है जैसे कमला का हाथ लगता है देवरानी चिल्लाती है
"aaaaaaaaaaai हाथ हटाओ में मर्डर गयी"
"ाचा तो आपकी पूछ की हड्डी पे दर्द है में वैध जी से कह कर कुछ जड़ी बूटी ले आती हु"
"जल्दी लाओ जल्दी करो कमला"
"ये पहली बार था और ऊपर से महाराज का तगड़ा है वो इसलिए कुछ ज़ोर का झटका लग गया है "
"चुप कर तू तो कहती थी बहुत मज़ा आता है जल्दी जा अब ाः में मर्डर गयी"
कमला जल्दी से निचे उतरती है और सीधे वैध जी क यहाँ पहुंच जाती है वैध जी का दरवाज़ा थक थकती है
"वैध जी उठिये "
"हाँ आया कमला "
वैध जी दरवाज़ा खोलते है
"क्या हुआ कमला इतनी रात गए कही आज रात रंगीन करने का मन तो नहीं"
ये कह कर वैध जी कमला को अंदर खींचते हुए उसे अपने गले से लगा लेते है
"है दय्या बूढ़े हो गए पर अब भी ठरक काम नहीं हो रही आपकी"
"अब आधी रात मेरी कुटिया में तेरी जैसी गदराई छमिया आये तो क्या बात हो सकती है"
कमला वैध जी क बहो से छूट ते हुए
"छोरो भी मेरा आज बिलकुल मन नहीं है वो तो में कुछ काम से आई थी"
"क्या काम ाँ पद गया आधी रात को "
"वैध जी वो महारानी देवरानी दर्द से छटपटा रही है और में उनके पूछ की हदी छू कर देखो तो वो हाथ लगाने नहीं दी "
"ऐसा क्या हुआ जो इतना दर्द हो गया अचानक से "
"वैध जी आप भी न सब कुछ खुल कर हे बताना होगा महारानी देवरानी क पीछे क दुवार को महाराज बलदेव ने आज खोल दया या तो कहो तोड़ दया और अब देवरानी को अपने चुतर क बल बैठ भी नहीं जा रहा है"
"ाहः वो तो मुझे पहले से पता था क जिस दिन बलदेव अपना हथियार इस्तेमाल क्या उस दिन हड्डी तोड़ क रख देगा वैसे कोई बात नहीं ज़्यादा मज़बूत लिंग और लम्बे लिंग लेने क कारन महारानी क हड्डीओं पर बुरा असर पड़ा है जो धीरे धीरे हे ठीक होगा "
"हाँ वो तो है बलदेव जैसा घोडा का देवरानी हे ले सकती थी लैंड वर्ण और किसी की बात नहीं अब कुछ ऐसी जड़ी बूटी दो जिस से महारानी देवरानी का दर्द आराम हो "
"चिंता मत करो में एक लेप देता हु और कुछ जड़ी लेप लगा कर जड़ी खिला देना कुछ दिनों तक दर्द रहेगा फिर ठीक हो जायेगा"
वैध जी अपने कक्षा से जादीओ बूटीओ में सही जड़ी चुन कर निकलते है और साथ हे लेप ढूंढ कर कमला को देते हुए उसका हाथ पकड़ लेते है
"कमला रानी आज कल ज़्यादा व्यस्त रहती हो कभी हमारे सेवा का भी समय निकालो"
"अवश्य वैध जी पर अभी मुझे जाने दीजिये"
वैध जी अपना लैंड पकड़ कर सहलाते हुए कमला का हाथ छोड़ते है जिसे कमला देख कर मुस्कुराती है और जड़ी और लेप
ले कर वापस महल लौटने लगती है.
तो बे कॉन्टिनोएड..