Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 14 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 122 गग

बलदेव निचे अत है तो देखता है सब भोजन कर रहे है बद्री और श्याम अब भी खा रहा था पर राजपाल और देवराज ने अपना भोजन कर लये थे

बलदेव निचे आकर

"कमला ज़रा देखना तुम्हारी महारानी बुला रही है"

Devraj:aao बलदेव भोजन करो

Rajpal:aao बीटा हम बास उठ ने वाले थे

Baldev:mujhe भूक तो बहुत लगी है

बलदेव का हाथ राधा दासी धुलती है

राजपाल देवराज बद्री और श्याम क साथ षुरूश्ती भी देख रही थी क बलदेव पसीने से तरबतर है और सब मंद मंद मुस्कुरा रहे थे

Baldev:lao बड़ी माँ मुझे बहुत भूक लगी है

Shurushti:han मेरे मेहनती बेटे को में डिल भर क खाना खिलाऊंगी

षुरूश्ती खुद से रसोई में जाती है और बलदेव को भोजन पडोसने लगती है

Shurushti:beta बलदेव अपने पसीने तो पॉच ले तेरा शरीर पसीने से भरा है लगता है बहुत ज़्यादा म्हणत क्या है बीटा

ये कहते हुए षुरूश्ती चुटकी लेती है और मुस्कुराती है

बलदेव झेप जाता है और अपने आगे से भोजन की थाली खींचते हुए

"बड़ी माँ आप भी न"

देवराज और राजपाल खाना खा चुके थे तो वो दोनों हाथ धो लेते है

Devraj:bhai अब हम चले सोने थक्क गए है

Baldev:ji मां जी आप विश्राम कीजिये

Rajpal:shurushti बलदेव को खाना खिला कर आजाना में भी चला अब सोने

shurushti:man me)jao सोने और तुम्हारी पहली पत्नी को आज रात भर उसका बीटा हे पलेगा

Shurushti:theek है आप जाये में थोड़ी देर से आती हु

Baldev:badri और श्याम तुम दोनों को नहीं सोना क्या

Badri:ab तुम सोने दो तो न

Baldev:maine क्या किया

Badri:pure महल में चीखे गूंज उठी जो भी क्या तुमने

Baldev:pagal वो तो बस तुम्हारी भाबी डर गयी थी

Badri:acha कमला तो कह रही थी छिपकली देख ली थी महारानी देवरानी ने

बलदेव अब फस्स चूका था वो बास

Baldev:han हाँ वही देख क दरी थी

बलदेव को डरा हुआ झूट बोलता देख षुरूश्ती और श्याम है देते है

Shurushti:ary मेरे बेटे को तंग मत करो

तुम दोनों

और सब है पड़ते है

Shurushti:jab नयी नयी शादी होती है तो अक्सर दुल्हन डर जाती है

ये कह कर बलदेव को देखती है तो बलदेव अपना सर झुकाये शरमाते हुए अपना खाना खाने लगता है

ऊपर कमला बलदेव क कक्षा में जाती है तो देवरानी बेसुध पड़ी thi.devrani क जिस्म पर एक मात्रा ओढ़नी थी



Kamla:man me)Aise बेहोश पड़ी है जैसे इंसान ने नहीं सांड ने गांड मार लय हो

Kamla:Maharani आप ठीक तो है

देवरानी जो अपने आखे बंद कए हुए लम्बी लम्बी साँसे भर रही थी अपने आखे खोलती है

Devrani:meri जान जा रही है कमला बहुत मुश्किल से में ये ओढ़नी ओढ़ पायी हु मुझे बहुत दर्द हो रहा है

Kamla:kaha पर दर्द हो रहा है

Devrani:pichhe का भाग पूरा दर्द होरहा है

Kamla:lagta है महाराज बलदेव ने आपके पीछे क सुरंग को खोल दया

Devrani:aah कलमुही कमला कुछ करो मेरी जान चली जाएगी ाः में मर्डर गयी

Kamla:bass आप मुझे बताइये महारानी कहा पर दर्द हो रहा है

Devrani:ary कलमुही पिछवाड़े में दर्द हो रहा है चुतर से बैठा नहीं जा रहा

Kamla:to ऐसा कहो न गांड दुःख रही है अभी कुछ करती हु

कमला कमर पर हाथ लगा कर पूछती है

"यहाँ पैर दुःख रहा है "

"नहीं कमला"

कमला थोड़ा और निचे हाथ लगाती है जैसे कमला का हाथ लगता है देवरानी चिल्लाती है

"aaaaaaaaaaai हाथ हटाओ में मर्डर गयी"

"ाचा तो आपकी पूछ की हड्डी पे दर्द है में वैध जी से कह कर कुछ जड़ी बूटी ले आती हु"

"जल्दी लाओ जल्दी करो कमला"

"ये पहली बार था और ऊपर से महाराज का तगड़ा है वो इसलिए कुछ ज़ोर का झटका लग गया है "

"चुप कर तू तो कहती थी बहुत मज़ा आता है जल्दी जा अब ाः में मर्डर गयी"

कमला जल्दी से निचे उतरती है और सीधे वैध जी क यहाँ पहुंच जाती है वैध जी का दरवाज़ा थक थकती है

"वैध जी उठिये "

"हाँ आया कमला "

वैध जी दरवाज़ा खोलते है

"क्या हुआ कमला इतनी रात गए कही आज रात रंगीन करने का मन तो नहीं"

ये कह कर वैध जी कमला को अंदर खींचते हुए उसे अपने गले से लगा लेते है

"है दय्या बूढ़े हो गए पर अब भी ठरक काम नहीं हो रही आपकी"

"अब आधी रात मेरी कुटिया में तेरी जैसी गदराई छमिया आये तो क्या बात हो सकती है"

कमला वैध जी क बहो से छूट ते हुए

"छोरो भी मेरा आज बिलकुल मन नहीं है वो तो में कुछ काम से आई थी"

"क्या काम ाँ पद गया आधी रात को "

"वैध जी वो महारानी देवरानी दर्द से छटपटा रही है और में उनके पूछ की हदी छू कर देखो तो वो हाथ लगाने नहीं दी "

"ऐसा क्या हुआ जो इतना दर्द हो गया अचानक से "

"वैध जी आप भी न सब कुछ खुल कर हे बताना होगा महारानी देवरानी क पीछे क दुवार को महाराज बलदेव ने आज खोल दया या तो कहो तोड़ दया और अब देवरानी को अपने चुतर क बल बैठ भी नहीं जा रहा है"

"ाहः वो तो मुझे पहले से पता था क जिस दिन बलदेव अपना हथियार इस्तेमाल क्या उस दिन हड्डी तोड़ क रख देगा वैसे कोई बात नहीं ज़्यादा मज़बूत लिंग और लम्बे लिंग लेने क कारन महारानी क हड्डीओं पर बुरा असर पड़ा है जो धीरे धीरे हे ठीक होगा "

"हाँ वो तो है बलदेव जैसा घोडा का देवरानी हे ले सकती थी लैंड वर्ण और किसी की बात नहीं अब कुछ ऐसी जड़ी बूटी दो जिस से महारानी देवरानी का दर्द आराम हो "

"चिंता मत करो में एक लेप देता हु और कुछ जड़ी लेप लगा कर जड़ी खिला देना कुछ दिनों तक दर्द रहेगा फिर ठीक हो जायेगा"

वैध जी अपने कक्षा से जादीओ बूटीओ में सही जड़ी चुन कर निकलते है और साथ हे लेप ढूंढ कर कमला को देते हुए उसका हाथ पकड़ लेते है

"कमला रानी आज कल ज़्यादा व्यस्त रहती हो कभी हमारे सेवा का भी समय निकालो"

"अवश्य वैध जी पर अभी मुझे जाने दीजिये"

वैध जी अपना लैंड पकड़ कर सहलाते हुए कमला का हाथ छोड़ते है जिसे कमला देख कर मुस्कुराती है और जड़ी और लेप

ले कर वापस महल लौटने लगती है.

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 123

वैध जी अपने कक्षा से जादीओ बूटीओ में सही जड़ी चुन कर निकलते है और साथ हे लेप ढूंढ कर कमला को देते हुए उसका हाथ पकड़ लेते है

"कमला रानी आज कल ज़्यादा व्यस्त रहती हो कभी हमारे सेवा का भी समय निकालो"

"अवश्य वैध जी पर अभी मुझे जाने दीजिये"

वैध जी अपना लैंड पकड़ कर सहलाते हुए कमला का हाथ छोड़ते है जिसे कमला देख कर मुस्कुराती है और जड़ी से लेप

ले कर वापस महल लौटने लगती है.

बद्री और श्याम अब खाना खा चुके थे और षुरूश्ती क साथ बात चीत कर रहे रहे तभी कमला पहुँचती है तो देखती है बलदेव खाना खा रहा है बलदेव को देख मुस्कुराती है बदले में बलदेव भी मुस्कुराता है कमला सीडीओ से चढ़ कर ऊपर कक्षा में पहुँचती है

Devrani:aah मार दया रे यह में मर्डर गयी

Kamla:han में आगयी महारानी

Devrani:aagayi तो कुछ औषधि लगा मेरे पिछवाड़े में बहुत बुरा दर्द हो रहा है

Kamla:chinta मत कीजिये महारानी वैध जी बोले है थोड़े दिन में ठीक हो जायेगा

पीछे घूमिये में लेप लगा देती हु

देवरानी अपनी गांड घुमा कर लेट जाती है और कमला देवरानी क पिछवाड़े पे लेप लगाने लगती है

कमला का नज़र देवरानी क गांड और फिर छूट क छेड़ पर जाता है

kamla:man me)Aage और पीछे दोनों छेड़ को फैला कर रख दया महाराज बलदेव ने

कमला मुस्कुराते हुए

Devrani:aah धीरे से लगा दुःख रहा है

लेप लगाने क बाद जड़ी देवरानी को खिलाती है

Kamla:ab कुछ देर में आराम मिल जायेगा

में चलती हु

Devrani:aah ठीक है

कमला दरवाज़े पे पहुंच कर

"महारानी में जा क बलदेव महाराज को भी भेज देती हु "

ये कह कर मुस्कुराती है

Devrani:kamini हाँ जा भेज दे

ाः

कमला निचे आती है

Shurushti:sab ठीक तो है न

Kamla:han ठीक है

कमला षुरूश्ती क कान में जा कर कहती है

"महारानी देवरानी का पिछवाड़ा की हड्डी पर ज़ोर पड़ने से दर्द से छटपटा रही थी मेने जड़ी खिला दी हु लेप लगा दी हु"

"ओह ाचा"

और षुरूश्ती मुस्कुराती है

Badri:kya कान में फुसफुसा रही हो

हमे भी तो बताओ

shurushti:beta बद्री ये हम औरतो की बाद है मर्द इसे नहीं सुनते

थोड़ी देर बाद बलदेव अपना भोजन समाप्त करता है

shurushti:Beta कुछ देवरानी क खाने क लये ले जाओ

Baldev:mai ले जाऊ?

Shurushti:ab पत्नी क लये इतना तो हर कोई करता है चाहे वो कितना भी बड़ा राजा हो

बलदेव देवरानी क लये थाली के खाना ले कर ऊपर चला जाता है और बद्री श्याम अपने कक्षा के चले जाते है कमला महल से बहार निकल कर अपने गाओ क तरफ चली जाती है अपने गाओ में राधा पहले हे अपने घर जा चुकी थी सब चले जाते है पर षुरूश्ती अब भी महल क बीचो बीच बैठी सोच रही थी

Shurushti:man me)kitni नसीब वाली है देवरानी इतना ाचा पति मिला छूट क साथ गांड भी मार दया बलदेव ने वो भी इतनी बुरी तरह यहाँ एक मई हु जिसकी छूट की चुदाई भी ढंग से नहीं हो पति

षुरूश्ती उठ कर अपने कक्षा में जाती है जहा राजा राजपाल लेता हुआ अपने आखे फाड् सोच रहा था

Shurushti:Maharaj आप अभी तक सोये नहीं

rajpal:shurushti एक राजा जिसका राजपाट छीन गया हो उसकी पत्नी किसी और क साथ विवाह कर क रंगरंलिए मन रही हो उसे भला नींद कैसे आ सकती है

shurushti:Jo होना होता है वो होता है वैसे भी आपकी पहले पत्नी थी वो अब वो बलदेव की पत्नी है और आपने हे तो ब्याह कर क उसे अपना बहु बना कर लाये है ये सब सोचना बंद कीजिये

Rajpal:Han में बहु तो मान लय उसे पर मेरे दिमाग में आहे जाती है baat..waise देवरानी का क्या हाल है

षुरूश्ती: वो ठीक है गांड ठुकाई से तड़प गयी थी अब बलदेव भी जानवर की तरह

सम्भोग करता है .

राजपाल ये सुन कर लज्जा जाता है और अपना सर शर्म से निचे कर लेता है

षुरूश्ती बिस्तर पर लेट ते हुए

"यहाँ छूट का पानी निकल नहीं पता और वह देवरानी आगे से पीछे से हर जगह से मज़े ले रही है"

Rajpal:tum जानती हों रानी मेरी बुरी आदतों क वजह से

Shurushti:aap चुप करो महाराज और सो जाओ

षुरूश्ती राजपाल क उलटे तरफ कर क सो जाती है

पारस

इधर पारस में महल में सब सो रहे रहे पर महल क बहार सुल्तान मेरे वाहिद का भाई गुल शाह पारस क एक छोटे से मैखाने में चाँद शाह क साथ जाम की चुस्किअ ले रहा था

गुल shah:Ye साली भूरिया की यादे मुझे चैन से सोने भी नहीं देती

चाँद pasha:Ustaad धीरे बोलिये कोई सुन लेगा तो लेनी की देनी हो जाएगी आप का तो पता नहीं अगर किसी ने मेरी शिकायत कर दी तो शहज़ादे शमशेर मेरे साथ मेरे पुरे खंडन को क़त्ल कर देंगे

गुल shah:chand पाशा मई कितनी मुहब्बत करता हु हूरजहाँ से तुमको पता नहीं

चाँद pasha:mujhe इल्म है इस बात की उस्ताद अब तो मल्लिका जहाना भी आधी उम्र की हो गयी अभी आपने हासिल नहीं क्या अपना मुहब्बत तो क्या बूढी हो जाने क बाद मल्लिका ेजहाँ से मिलाप करोगे

गुल shah:shayad तुम ठीक कह रहे हो पर मुझे कोई रास्ता नहीं दीखता

चाँद pasha:Rasta तो है ustaad..jis से आप सुल्तान भी बन जाओगे और मल्लिका भी आपकी हो जाएगी

गुल shah:kaisa रास्ता hai..kya रास्ता है

गुल शाह मदिरा की चुस्की लेते हुए कहता है

छान pasha:aap बुरा मान जाओगे उस्ताद

Gulshah:nahi बोलो आज में भूरिया क लये पूरी दुन्या से जंग कर सकता हु

चाँद pasha:Ustad रास्ता साफ़ करना होगा

gulshah:matlab

Chandpasha:hume आपके भाई को रस्ते से साफ़ करना होगा

Gulshah:matlab..mujhe अपने भाई को मरना होगा वो भी जान से

Chanpasha:han उस्ताद वैसे में आप अपने भाई की बड़ी बीवी से रिश्ता तय करने का हक़ होगा और रिश्ता तय होते हे शादी होते हे आप सुल्ताना बानी हूरजहाँ क सुल्तान बन जाओगे और साथ हे सुल्तानान्ते क सुल्तान भी

Gulshah:ye सब क्या हो पायेगा इतना आसान nahi..tumhari बात तो सही है जब तक मेरा भाई मेरे वाहिद ज़िंदा है भूरिया मुझे घास तक नहीं डालेगी और तुम्हारी बात सही है सुल्तान मेरे वाहिद क मरते हे सुल्ताना भूरिया तख़्त पर बैठ जाएगी और जो उस से शादी कर लेगा वो सुल्तान बन जायेगा सल्तनत का

chandpasha:ji हुज़ूर

Gulshah:par ये सब होगा कैसे

Chandpasha:wo सब में इंतेज़ाम कर दूंगा उस्ताद बास मुझे कुछ वक़्त दीजिये इस काम क लये सही आदमी का चुनाव करना होगा

Gulshah:par तुम सब कुछ मेरे लये क्यों करोगे?

चाँद पाशा हस्ते हुए

"उस्ताद अगर आप सुल्तान बन गए तो में सिपासलार तो बन हे सकता हु "

Gulshah:tum भी बहुत लालची हो

और दोनों हसने लगते है

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 124

गहतराष्ट्रा

बलदेव को षुरूश्ती देवरानी क लये खाना देती है और बलदेव सीडीओ से होते हुए अपने कक्षा में जाता है देखता है देवरानी कहर रही है दर्द से तड़प रही है बलदेव खाने की थाली रख कर पहले दरवाज़ा बंद कर देता है

"माँ क्या दर्द काम नहीं हुआ"

"यह है काम नहीं हो रहा "

"ाचा चलो कुछ खा लो"

"नहीं ाः मुझसे नहीं खाया जायेगा "

देवरानी अब भी नंगे बदन पर ओढ़नी रखे हुए थी उसका संगमर मरी बदन बलदेव अपने आखो से ताड़े जा रहा था

"आह अब क्या देख रहा है बीटा मार हे दिया अपने माँ की गांड "

"माँ तुम कितनी सुन्दर हो"

"सुन्दर हु तो इतना ज़ोर से कोई पेलता है मेरी गांड की हड्डी दुःख रही है "

"अब क्या करू मेरा हथियार हे इतना बड़ा है माँ"

"सिर्फ बड़ा हे नहीं लोहे जैसा कड़ा है"

"अच्छा खा लो ान थोड़ा माँ नहीं तो कमज़ोरी हो जाएगी"

बलदेव देवरानी को तकिया लगा कर आधा लिटा देता है सीधा कर क क और खुद बईठ क देवरानी को अपने हाथ से खिलने लगता है देवरानी अपना मुँह खोल कर खाने लगती है

"ये हुई न बात माँ"

देवरानी मुस्कुरा देती है

"अब तू इतना प्यार करेगा माँ से अपने तो खाउंगी हे न"

"ठीक है खा क सो जाना अभी और कुछ नहीं करेंगे"

"कुछ सोचनी भी मत नहीं तो तलवार से लैंड काट दूंगी में राजपूतनी हु में जबरदस्ती करने की कोशिश भी मत करना "

"हाँ बाबा महारानी देवरानी मुझे ज्ञान है आप तलवारबाज़ी भी जानते है वैसे इस नन्हे जान को काट डौगी तो तुम्हारा हे नुकसान है"

"नन्हे जान खुनी है ये मेरे रोअम रोअम में दर्द उठ रहा है"

बात करते हुए देवरानी खाना ख़त्म करते हे पैट लेट जाती है और अपनी आखे बंद कर लेती बलदेव भी मुस्कुराता हु हाथ धो कर देवरानी क बगल में लेट जाता है

"माँ सो गयी क्या "

"बोलिये न"

"माँ खुश तो हो न या सिर्फ गुस्सा हु"

देवरानी अपना सर बलदेव क तरफ मोड़ कर

"बहुत खुश हु और खुशनसीब जो इतना मरदाना पति नसीब हुआ है जो गांड मार क छल्ली कर दया "

देवरानी है देती है बलदेव भी है देता है ऐसे हे बाते करते हुए दोनों सो जाते है

गहतराष्ट्रा में एक नयी सुबह होती है हर तरफ हल चल थी क बलदेव ने देवरानी को ब्याह कर पारस से लाये है जो की उसकी अपनी माँ है सुबह सवेरे कमला और राधा भी अपने गाओ से आजाती हैं महल में काम करने क लये सुबह सवेरे देवराज भी उठ जाते है रानी षुरूश्ती और जीविका अपने नए नवेली बहु क लये भोजन बनवा रही थी वही राजपाल अब भी अपने कक्षा में लेता था बद्री और श्याम उठ कर व्यायाम करने बहार चले गए थे

Devraj:Rani षुरूश्ती महाराज राजपाल नहीं उठे क्या

Shurushti:nahi उनकी ताब्यात ठीक नहीं

Devraj:acha

Devraj:Or महाराज बलदेव और महारानी देवरानी उठे क नहीं

Shurushti:abhi नयी शादी है इतनी जल्दी थोड़ी उठेगा ऐसा कीजिये आप हे अपने बहिन को और बहनोई को उठा दीजिये जा क

षुरूश्ती ये कह कर हस्ती है तभी बद्री और श्याम महल क अंदर आते है

Badri:aaj थक गए यार श्याम

devraj:aagaye तुम दोनों

Shyam:han महाराज हम व्यायाम करने गए थे

devraj:achi बात है

shyam:waise आज हमारा मित्र नहीं उठा

और न हे हमारे साथ व्यायाम करने आया

Badri:ary बुद्धू श्याम बलदेव अब अपने पत्नी क साथ व्यायाम करेगा हमारे साथ नहीं

ये सुन कर सब है देते है पर अपने बहिन और ने बहनोई की बात सुन कर देवराज झेप जाता है

Shurushti:aisa कीजिये आप जाये देवराज जी बुला लीजिये उनको कब तक सोये रहेंगे

उधर देवरानी उठती है और बलदेव को सोता हुआ देख अपना दुपट्टा हटा कर स्नानघर में जाने लगती है तभी बलदेव अपने आखे खोलता है और देवरानी का हाथ पकड़ लेता है

"ाजी छोड़िये न"

"क्यू छोडूंगा में अपनी पत्नी को में तो छोडूंगा अपने रानी माँ को"

"बाद में छोड़ लेना अभी सुबह सुबह मुझे पूजा भी करनी है"

"पहले इसे तो शांत कर दो"

बलदेव अपने धोती खींचता है तो 9 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा लैंड आसमान की ओरे सर झुकाये खड़ा था देवरानी अपना हाथ अपने मुँह पर रख

"हे भगवन ये तो पहले से भी बड़ा लग रहा है"

"हाँ तुम्हारी चुदाई कर क ये बड़ा हो गया"

"नहीं जी बलदेव ये तो मेरा खून पी क बड़ा हो रहा है"

बलदेव उठ क खड़ा होता है और पहले से नंगनी देवरानी को बहो में ले कर चूमने लगता है कभी गाल पे कभी कान क नीचे कभी गर्दन पर और अपना लैंड देवरानी क गांड में सत्ता कर अपने हाथ ले जा कर भरी मम्मो को दबाने लगता है

"ाजी लैंड पीछे से हटाए गांड क छेड़ पर लगने से दुखता है "

"एक दिन गांड चुदाई में दुखता है में तो तेरी रोज़ गांड मारूंगा माँ"

"आह राजा मार लेना पर अभी नहीं सब जग गए होंगे "

"बलदेव तो चूस मेरा लौड़ा और इसका अकड़पन दूर कर मेरी रानी माँ"

बलदेव देवरानी को बिठा देता है और देवरानी घापा है अपने बेटे का लौड़ा अपने मुँह में ले कर चूसने लगती है



"आठ मा ऐसा हे चुसो आह"

"आह माँ हाँ हे पूरा मुँह में लो"

देवरानी पूरा मुँह में लैंड लिए चुस्ती रहती ह

devranu:umnmmmmahhmmmmmm उम्मम्मम्म ahmmmmmmmmmmm

Baldev:aaah मा ओह ह ाआअह

उधर देवराज सीडीओ से चढ़ कर ऊपर आरहा था

Devraj:man me)pata नहीं बलदेव और देवरानी कैसी अवस्था में होंगे

देवराज सीडीओ से चढ़ कर ऊपर पहुँचता है और इधर अंदर कक्षा में देवरानी बलदेव का लैंड चूसते हुए जोश में आजाती है और बलदेव क ाँद को चाटने लगती है

"आह माँ ऐसे हे छतो आह मेरी पत्नी माँ"

"ुहम्म ाः बीटा कितने बड़े ाँद है तुम्हरे"

"मा इन्हे मुँह में ले लो"

देवरानी दोनों ाँद को अपना मुँह फाड़ क अपने मुँह में भर्र लेती है तभी उसके कानो में आवाज़ आती है

"देवरानी Behna..o महारानी देवरानी आअज पूजा नहीं करना क्या "

"ो महारानी देवरानी "

देवरानी अंदर कक्षा में अपने बेटे क लैंड क निचे मुँह लगाए ाँद को अपने मुँह में भरी होती है



पुर्र देवरानी क मुँह में बलदेव क ाँद थे देवरानी अपने मुँह से बड़ी मुष्किल से ाँद को बहार निकलती है और अपने भाई का जवाब देती है

"जी भैया आए कुछ काम है वो निपटा क"

Devrani:theek है जल्दी आओ पूजा का समय हो गया है बलदेव को भी लेते आना

Baldev:.dheere se)Ye साला देवराज जब मेरा लौड़ा तुम्हारे अंदर होता है बीच में टपक पड़ता है समझाओ अपने भाई को

बलदेव अपने लैंड को हाथ में ले कर दो बार देवरानी क गाल पर थपकी मारता है

"उठ जाओ चलो पूजा कर ले "

देवरानी उठ क कड़ी होती है

"साला साहब वो आपके है अब आप हे समझाओ अपने साला को क बीच में न टपके"

ये कहते हुए देवरानी स्नानघर में चली जाती है थोड़े देर में तैयार हो कर आजाती है फिर बलदेव जाता है और तैयार हो कर आजाता है

दोनों तैयार होजाते है देवरानी पूजा की थाली ले कर कड़ी थी



Baldev:is रूप में साक्छरत लक्समी का रूप लग रही है मेरी पत्नी

Devrani:dhanyawad चलिए अब निचे पति देव देव जी

Baldev:meri माँ आज तू सच में मेरी पत्नी लग रही है

devrani:ab तक आप मेरा सपना हे देख रहे है अब सब कुछ सच है राजा बीटा चलिए अब

देवरानी और बलदेव पूजा कक्षा में आजाते है अब तक राजपाल भी उठ चूका था

देवरानी अपना भजन गण शुरू करती है और राज परिवार क सदस्य देवरानी क पीछे पीछे भजन करने लगते है थोड़ी देर बाद

आरती का समय आता है बलदेव देवरानी एक साथ



भगवन की एआरटी करने लगते है देवरानी आखे बंद कए

मन me"hey भगवन मेरे पति बलदेव को हर दुःख से बचाना हमेशा हमारा प्रेम ऐसा हे रखना जैसा की अभी है"

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 125

भगवन की एआरटी करने लगते है देवरानी आखे बंद कए

मन me"hey भगवन मेरे पति बलदेव को हर दुःख से बचाना हमेशा हमारा प्रेम ऐसा हे रखना जैसा की अभी है"

अपने आँख खोल कर धुप की थाली उठा लेती है

Jeevika:ye धुआँ की बहुरानी

Devrani:dadi सास लोहवान की धुआँ से घर में शांति आती हैं और माँ लक्समी प्रसन्न होती है



jeevika:kitna भाग्यशाली है मेरा पोता बलदेव जो ऐसी धार्मिक पत्नी मिली है

Shurushti:meri बहु देवरानी तो लाखो में एक है

ये सुन कर पीछे खड़े राजपाल क तन बदन में आग लग जाती है और वो पीछे मुद कर अपने कक्षा की ओरे चला जाता है

jeevika:ye राजपाल बिना प्रसाद लिए क्यू चला गया



Devrani:jaane दीजिये शायद अब तक उन्होंने मुझे अपने बहु क रूप में स्वीकार नहीं क्या

देवरानी जीविका की ओरे धुआँ करते हुए कहती है

Jeevika:nahi बेटी देवरानी उसने स्वीकार कर लय है तुम्हे चिंता करने की बात नहीं

अब देवरबि षुरूश्ती की ओरे आजाती है और धुआँ करती है



Shurushti:Sada सुहागन रहो बहु

Badri:Bhabi माँ हमे भी प्रसाद दो

Devrani:abhi लाइ

देवरानी बद्री और श्याम को प्रसाद देती है और वो दोनों बहार चले जाते है

Shurushti:Baldev तू उधर बूट की तरह क्यू खड़ा है इधर आ

बलदेव धीरे से चलते हुए आता है

Baldev:badi माँ ,दादी माँ आप दोनों से मुझे कुछ पूछना था

Shurushti:bolo मेरे बचे

devrani:me आई ऊपर अपने कक्षा में धुआँ कर क

Devraj:Behna मेरा प्रसाद

devrani:ye लीजिये भैया

Devraj:me देखु राजपाल जी को क्या हुआ जो अचानक चले गए

Baldev:rukiye मां जी

Devraj:kya हुआ बलदेव मुझे आपसे भी कुछ बात करनी है

Jeevika:bolo मेरे पोते क्या बात है

Baldev:Badi maaa,dadi,mama जी आप सभी को ज्ञात है क मई राजपरिवार का एकलौता वारिस हु

Devraj:han हाँ क्यू

Baldev:mama जी ..माँ और में चिंतित क हमारे आने वाले बचे को किसी भी तरह का संकट न हो

ये सुनते हे देवरानी शर्मा कर सीढ़ीओ पर चढ़ने से पहले हे रुक जाती है

jeevika:Beta बलदेव तुम्हारे ऊपर हे ज़िम्मेदारी है हमारे वंश को बढ़ने की

Baldev:par महारानी देवरानी इस बात को ले कर चिंतित है क हमारे बचे का भविष्य क्या होगा क्या अआप सब स्वीकार करेंगे बास इसी लये देवरानी चाहती है क आप सब क अनुमति क बिना हम कोई बचे का नहीं सोचेंगे

Jeevika:pagle बलदेव मेरी अनुमति है पूरी तुम्हारे दस बचे हो तो भी तुम्हारी दादी उफ़ नहीं करेगी अब भी में पाल सकती हु बचे जैसे तुम्हे पला वैसे हे तेरे बच्चो को भी पाल लुंगी बास तुम दोनों पैदा करो

ये सुन कर देवरानी लज्जा कर अपना ाअँचल से अपना मुँह धक् लेती है



Devraj:Han भाई मेरे तरफ से भी हाँ है मुझे भी अपने भांजे भांजी खिलने है गॉड में

ये सुन कर देवरानी और लज्जा जाती है क उसका भाई कह रहा है क अपने बेटे से बचा पैदा करो और वो उन्हें खिलायेगा

Baldev:par बड़ी माँ देवरानी चाहती है क पिता जी भी इस बात की अनुमति दे

Shurushti:mere तरफ से तो हाँ है मुझे तो अपने पोते पोती देखने है मेरी कोई संतान नहीं पर तू हे मेरा बीटा है तेरे बचो को गॉड में खिला लू मरने से पहले यही इच्छा है

Baldev:par पिता जी का क्या

Shurushti:Theek है तो मई तुम्हारे पिता जी से बात करुँगी और वो खुद तुम्हे और बहु को अनुमति देंगे बचे क लये अब खुश

Baldev:bhut खुश

बलदेव षुरूश्ती क पेअर छूट है

उधर देवरानी ये सब सुन कर लज्जा क मारे सीडीओ पर जल्दी जल्दी चढ़ने लगती है

Shurushti:lagta है बहु शर्मा गयी

Baldev:han में जाता हु आपकी बहु की सेवा कर क आता हु

Shurushti:Bahu की सेवा करोगे तभी मेवा मिलेगा

इस बात पर सब है देते है अब तक देवरानी जल्दबाज़ी में सीडीओ से चढ़ कर अपने कक्षा में पहुंच जाती है और दरवाज़ा बंद कर क अपने कक्षा क मंदिर में धुआँ कर घुटने क बल बैठ जाती है आँख बंद कर क

Devrani:man me)Hey भगवन सब मान गए हमारे बचे क लये कृपा कर क मेरे ससुर राजपाल स्वीकृति भी मिल जाये तो बहुत ाचा हो जायेगा

देवरानी भगवन से मांग हे रही थी क बलदेव की आवाज़ उसके कान में गूंजती है

"माँ रानी मा दरवाज़ा खोलो "

देवरानी उठ क कड़ी होते हुए

"हाँ आई बाबा एक मिंट तो रुकिए "

जैसे हे दरवाज़ा खोलती है देवरानी बलदेव देवरानी को अपने बहो में कस्सस लेता है

"सुना तुमने माँ सबने अनुमति दे दया तुम्हे गर्भ से करने क लये मुझे"

"आह बीटा पर तुम्हारे पिता जी ने तो नहीं दया"



बलदेव बआहो में कस क देवरानी को पलंग पर लिटा देता है और देवरानी को बेतहासा चूमने लगता है

"तुम्हारे ससुर भी अनुमति दे देंगे माँ उनके पास और कोई दूसरा चारा नहीं"

"आह राजा धीरे रात से पिछवाड़ा अब्बी तक दुःख रहा है"

"एक बार और गांड मार लू ठीक हो जायेगा"

"मर्डर जाऊंगा अगर वह डाला तो "

"तो छूट मार लू माँ"

"पहले सुहागरात में ऐसी सुजाइ थी योनि अब तक फूली है"

"तो दूध हे पीला दो"

देवरानी पीछे पलंग क खिसकते हुए अपने ब्लाउज को खोल देती है आगे से और अपने साडी क पल्लू से अपने बड़े दूध जो गे क थान की तरह थे उसे छुपाने लगती है



पल्लू एक तरफ से निचे सरक जाता है

Baldev:Maa क्यू इतने मोठे और प्यारे थान को छुपा रही है इसमें दूध कब भरेंगे

Devrani:Doodh तो गर्भ से होने पर हे आएंगे

Baldev:maa दोनों थान दिखाओ न पीना है



देवरानी अपना पल्लू हटा क दोनों थान को ऊपर उठा क बलदेव को ललचाती है

"आजा राजा चूस ले मेरे दोनों आम को"

"आह रानी इन्हे तो चबा जाऊँगा में पुरे गहतराष्ट्रा में ऐसे आम बड़े नहीं है जितने तेरे बड़े आम है माँ"

बलदेव देवरानी को अपने बाहो में ले कर बिस्तर पर लेट जाता है और देवरानी अपने बेटे क ऊपर लेती अपने छूट को अपने बेटे क खड़े लैंड पर रगड़ते हुए

"बीटा आखिर में पारस की रानी और गहतराष्ट्रा की महारानी देवरानी सिंह हु बड़े तो थे हे तूने चूस चूस क और बड़े कर डाई है"

ये कहते हुए बलदेव क मुँह में अपने मम्मी देती है



बलदेव दोनों हाथ से पकड़ कर मम्मो को खूब ज़ोर से मसलता है

"आई माँ धीरे से राजा बेटे"

देवरानी दर्द से सीसकती है

बलदेव अब दोनों थान में अपने मुँह लगा क

"गलप्प गलप्प galp"chusne लगता है

"आह माँ क्या स्वादिष्ट आम है तेरे आह उम्म्म्म आह गलललपप"

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 126

बलदेव दोनों हाथ से पकड़ कर मम्मो को खूब ज़ोर से मसलता है

"आई माँ धीरे से राजा बेटे"

देवरानी दर्द से सीसकती है

बलदेव अब दोनों थान में अपने मुँह लगा क

"गलप्प गलप्प galp"chusne लगता है

"आह माँ क्या स्वादिष्ट आम है तेरे आह उम्म्म्म आह गलललपप"

"चूस क खा ले आजम मेरे मेरे राजा बीटा मेरे पति "

बलदेव देवरानी क भरी मम्मो को हाथ में लये बारी बारी से चूस रहा था क तभी उनके कानो में आवाज़ आती है

Shurushti:Bahuraani ो बहुरानी

Devrani:chhoriya ना सासु माँ बुला रही है

Baldev:nahi छोड़ूंगा मेरी चुड़क्कड़ माँ को

devrani:baad में कर लेना अभी आपकी बड़ी माँ बुला रही है नयी शादी है बात समझो

बलदेव देवरानी को छोर देता है देवरानी अपने ब्लाउज फिर से पहन कर निचे आती है

Devrani:aapne बुलाया

षुरूश्ती ऊपर से निचे तक देवरानी को देखती है देवरानी क अस्त ब्यस्थ साड़ी बिखरे बाल खींचे हुए ब्लाउज देख कर षुरूश्ती को समझ आगया क ऊपर दोनों माँ बीटा काम क्रिया में लीं थे

Shurushti:Lagta है गलत समय पैर बुला ली मेरी बहु को

देवरानी को देख षुरूश्ती मुस्कुराती है और मतलब समझते हे देवरानी बिना जवान दिए झेप जाती है

Devrani:koi बात नहीं आपका बीटा तो हर समय बास लगा हे रहता है

Shurushti:tum तो खुशनसीब हो महाराज बलदेव क रूप में इतना प्यार करने वाला पति मिला है

Shurushti:man me)Ek में हु जो राजा राजपाल क बूढ़ा लैंड को खड़ा करने में हे आधा घंटा लग जाता है

Devrani:man me)Shurushti रानी एक दिन था जब में तड़पती थी और तुम मज़े करती थी मेरे पति क साथ आज में जवान पति क साथ मज़े कर रही हु और तुम किसी रंडी की तररह किसी न किसी का लैंड लेते फिर रही हो मेरा शाप लगेगा तुमको तो जीवन भर प्यासी हे रहोगी

देवरानी अपने पुरे दिनों को याद करती है जब राजपाल से ब्याह क बाद षुरूश्ती ने राजपाल पर पाबन्दी लगा दी थी क वो देवरानी क कक्षा में न जाये और न हे रात गुज़ारे देवरानी भले से षुरूश्ती को क्षमा कर दी थी पर जीवन में पिछले 18 साल से योन सुख से तदपि देवरानी अपने दुःख क कारन रानी षुरूश्ती को अब भी अपने डिल से मुआफ नहीं की थी

Devrani:Kya हुआ सासु maa,kya सोचने लगी

Shurushti:Yahi क हमारा रिश्ता समय क साथ कितना बदल गया मेरी सौतन थी तुम आज मेरे बेटे की पत्नी और तुम अपने हे बेटे क पत्नी बन गयी

Devrani:man me)tumhe तो मेरे और बलदेव का प्यार काट रहा है षुरूश्ती छुपा किस से रही हो

Devrani:Ab नियति को जो मंजूर था हुआ वैसे अब में अपने जीवन से ज़्यादा खुश हु

Shurushti:han अब तुम महारानी हो अब तुम्हे सिर्फ अपने हे नहीं राज्य क लोगो क बारे में सोचना होगा .महिलाओ क सभा में साड़ी गहतराष्ट्रा की महिलाये अपने दुःख ले कर आती है अपने महारानी से बात करने उनसब का फैसला करना होगा

Devrani:Me एक कदम पीछे नहीं हटूंगी ये महारानी देवरानी बलदेव सिंह का वादा है

अपने राज्य क लये लहू की ज़रूरत पड़ेगी तो भी ये राजपूतनी पीछे नहीं हटेगी

Shurushti:waah महारानी हो तो aisi..aaj क खाने में क्या क्या बनवाये आप बता दीजिये महारानी जी

Devrani:kya आप में क्या बोलू

Shurushti:nahi अब से इस घर में महल में और इस राज्य में आपके निर्णय से हे सब काम होगा

देवरानी खुश होते हुए खाने का सब कुछ बता देती है जो उसे खाने की इच्छा थी रसोई में कमला और राधा काम करने लगती है और महारानी देवरानी वही सोफे पैर बैठ जाती है

पारस

आज सुबह से हे चाँद पाशा जो गुल शाह का चेला था अपने आदमी इकठे करने में लगा था सुल्तान मेरे वाहिद को मरने क लये .चाँद पाशा की यही खवाइश थी क सुल्तान क मरने क बाद गुलशाह सुल्तान बन जाये और गुल शाह क बरसो की ख्वाइश थी मल्लिका जहाँ भूरिया को भोगने की जो क रिवायत क अनुसार बड़े भाई क मरने क बाद गुलशाह अपने भाबी भूरिया से शादी कर सकता tha.Gulshah ने भी अपने सुल्तान बन ने की चाहत और भूरिया को पाने की आरज़ू से अपने भाई सुल्तान को मारने क लये चाँद पाशा को अपने आदमी ठीक करने क लये कह दया था

सुल्तान मेरे वाहिद क पिता सुल्तान दास्ताँ चाहते थे क सुल्तान का दावेदार शहज़ादे शान जो क सुल्तान की दूसरी पत्नी नाज़ बेगम का बीटा था वो अगला सुल्तान बने पर सुल्तान ने सब से खुलासा कर दया था क अगला सुल्तान शमशेर हे banega.sultan का जख्म धीरे धीरे ठीक हो रहा था

सुल्तान अपने हुजरे में अपनी बेगम नाज़ जो दूसरी बीवी थी उसके साथ वक़्त गुज़र रहे थे

Sultan:Naaz तुम्हे क्या चाहिए बेगम साफ़ साफ़ क्यू नहीं कहती

नाज़ सुल्तान क पेअर क पास बैठी सुल्तान क पेअर दबाते हुए

Naaz:Sultan आप कही बुरा न मान जाए में कोई गुस्ताखी नहीं करना चाहती

Sultan:nahi मेरी जान आप मेरी बीवी हो आपकी गुस्ताखी मुआफ है बोलिये क्या कहना चाहती है आप

Naaz:Me ये कह रही थी आपका बीटा शान भी बड़ा हो गया उसके कंधो पर भी कुछ ज़िम्मेदारी होनी चाहिए सल्तनत की

सुल्तान मुस्कुराते हुए

Sultan:Sultan दास्ताँ अब्बा जान भी यही चाहते है और लगभग हर अफ़राद खंडन का यही चाहता है क शहज़ादे शान अगले सुल्तान बने क्या में सही हु नाज़ बेगम?

Naaz:ji ji..wo

Sultan:Naaz बेगम आप सीधे कहिये न क आप चाहती है क अगला सुल्तान शहज़ादे शान बने न क शमशेर

Naaz:kya आप क दोनों बेटे आपके सामने अज़ीज़ नहीं एक जैसी अहमियत नहीं रखते और क्या बुराई है शान में

Sultan:mujhe पता है आप क्या कहना चाहती है यही न शमशेर आवारा है मैखाने में दिन रात गुज़रता कोठे पैर जाता है वेस्यो से रिश्ते रखता है

Naaz:ji गुस्ताखी मुआफ सुल्तान क्या ऐसा शक्श जो दिन रात नशे में हो वो सुल्तान बन ने क क़ाबिल है?

सुल्तान अपना पेअर खींच लेता है और मोड़ते हुए बैठ जाता है

Sultan:Begum नाज़ आपको इस बात की इल्म नहीं सल्तनत चलने क लये और बढ़ने क लये शान जैसा मासूम नहीं शमशेर जैसा चालक और तलवार जिसकी खून की प्यासी हो वो चाहिए

Naaz:mera बीटा शान भी ाचा तलवारबाज़ी करता है

Sultan:Bass आप इस बात की परख नहीं क कौन हमारे लये जुंग जीत सकता है शायद आपको पता नहीं किस बहादुरी से शमशेर ने जुंग जीती है गहतराष्ट्रा में और मेरा फैसला यही है क शमशेर हे तख़्त पर बैठेगा अगला सुल्तान होगा

Naaz:gustakhi मुआफ सुल्तान इ आज़म जैसी आपकी मर्ज़ी

सुल्तान मुस्कुराते हुए फिर लेट जाता है और नाज़ सुल्तान क पेअर को दबाने लगती है

उधर महल में तीन लोग सर क ऊपर पोटली ले कर महल में दाखिल हो रहे थे तो सैनिक उन्हें रोक देते है

Sainik:ary तुम सब कहा चले अंदर जाना मन है

Aadmi:bhai साहब इन सब पोतलिओं में मल्लिका इ जहाँ क सामान है

Sainik:mujhe खोल कर दिखाओ क्या सामान तुम महल में ले जा रहे हो

तभी वो आदमी पीछे मुड़ता है

पीछे शहज़ादे शमशेर आरहे थे

Aadmi:shehzade ये पोटली खोल कर दिखने को कह रहे है

शमशेर सैनिक क नज़दीक आते हुए

Shamshera:inhe जाने दो इन सब में मल्लिका जहाँ क कपडे है और कुछ नहीं

Sainik:gustakhi मुआफ शहज़ादे ..आप सब जाए

Shamshera:chalo मेरे साथ

वो तीनो आदमी शमशेर क साथ पीछे पीछे चलने लगते है थोड़ी देर चलने क बाद शमशेर एक हुजरे क आगे रुक जाता है

हुजरे क सामने दो दसिया कड़ी थी

Dasiya:salam शहज़ादे

Shamshera:ye दरवाज़ा बंद है मल्लिका इ जहाँ का

Dasi:wo मल्लिका नाहा रही थी

Shamshera:acha ठीक है ..तुम तीनो सामान यही रख दो और चले जाओ

तीनो पोटली रख क वो तीनो आदमी चले जाते है

Shamshera:Kaneez ज़रा अम्मी को आवज़ दे कर पूछो कितना वक़्त लगेगा

दासी दरवाज़े क पास जा कर

"मल्लिका इ जहाँ आपसे मिलने शहज़ादे आये है"

Hooriya:Bass खोलती हु

भूरिया जो अभी नाहा कर निकली थी जल्दी से अपने हिजाब पहन लेती है और कुछ देर तक अपने बाल सूखते हुए दरवाज़ा खोलती है

जैसे दरवाज़ा खुलता है सामने शमशेर को सामान क साथ देख

"बीटा ये सब क्या है"

"सलाम अम्मी जान वो दरजी खला ने आप क सारे कपडे सील दिए इसलिए ले आया में"

Shamshera:kaneez इन पोतलिओं को उठा कर अंदर हुजरे में रख दो

दोनों दसिआ मिल कर कपडे क पोटिलिओ को अंदर हुजरे में रख देती है

हुजरे का पर्दा बंद कर क भूरिया अंदर आती है

shamshera:Darwaza बंद कर दीजिये अम्मी जान

Hooriya:Me अपने बेटे क साथ हु हुजरे में दरवाज़ा बंद करना ठीक नहीं

Shamshera:me ये छह रहा था क आप एक दो काफटाण पहन कर देख लेते क दरजी खला ने तीन दिन में कैसे लोगो से सिल्वा डाई सरे कपडे

भूरिया भी आजाती है शमशेर क पास भूरिया हर कपडे को अलाट पलट कर देखने लगती है

Hooriya:waah बहुत खूब एक से बढ़कर एक कपडे hai..mai गुसलखाने से पहन कर आती हु ek..waise फ़िक़र मत करो बिना मेरी इजाज़त क कोई अंदर नहीं आता

Shamshera:aap ये काफटाण पहन कर देखिये

भूरिया उस काफटाण को उठा कर

Hoorya:ye बुरखा नुमा काफटाण है पर चौड़ाई में काम है बीटा मुझे तो ये सब कपडे कैसे हुए आएंगे ..मई नहीं पहन सकती

Shamshera:Aapko मेरी कसम अम्मी jaan..ab आपको सारे पुराने निक़ाब नहीं पहन ने है आप मल्लिका इ जहाँ है आप सुल्ताना है सल्तनत की आपको तो सजना सवर्ण चाहिए

Hooriya:har औरत सजना सवर्ण चाहती है पर तुम तो जानते हे हो लोग यहाँ मुझे देख कर क़त्ल हो रहे है

Shamshera:ab आप को कोई मई का लाल निगाह उठा कर भी नहीं देकहेगा क्यू क अगर किसी ने देखा तो उसके पुरे खंडन को में अपने हाथो से क़त्ल करूँगा

Hooriya:theek है अब जब तुमने कसम दे दी है तो में क्या कर सकती लाओ ये नीले रंग की पहन लेती हु आज

थोड़ी देर में हे भूरिया नीले रंग क काफटाण में बहार आती है जिसे देख कर शमशेर आखे फाड़े रह जाता है

Hooriya:kaisi लग रही हु मई..



शमशेर बास अपने पालक झपकाए अपने माँ क तराशे हुए बदन को देख रहा था

Hooriya:bolo न शमशेर

Shamshera:Bhut खूबसूरत लग रही हो अम्मी जाएं मुझे यक़ीन नहीं होता क मेरी ये वही अम्मी है

भूरिया घूमती है और उसके बड़े बड़े दूध कैसे हुए कपडे में साफ़ पता चल रहे थे



शमशेर अपने माँ क बड़े दूध को देख रहा था

Shamshera:man me)Kya सर उठा क मुझे चिढ़ा रहा है दोनों को एक दिन मसल कर रख दूंगा

Shamshera:ammi जान पीछे घूमो

shamshera:man me)ammi जान की गांड क नज़ारे तो करू

भूरिया जैसे हे पीछे घूमती है उसके भरी

गांड क दोनों पैट आपस में टकराते है



दोनों गांड आपस में टकरा कर एक दूसरे से

रगड़ कहते है जिसे देखते हे शमशेर का लैंड खड़ा हो जाता है और भूरिया फिर एक बार पलटी



इस बार दोनों गांड क रगड़ देख कर शमशेर का लौड़ा तन्न जाता है

shamshera:man me)jab काफटाण क ऊपर से इतने लचक रहे है गांड तो असल में नंगे होंगे तो कैसे लचकेंगे

शमशेर मौक़ा देखते हे अपना लैंड पर हाथ फेर देता है

Hooriya:ye काफ्तान तो बहुत तंग है कैसे हुए है पूरा जिस्म से चिपका है अजीब लग रहा है

Shamshera:aapko ढीले वाले निक़ाब की आदत है अम्मी जान आप कुछ दिनों में ऐसे लिबास की आदि है यक़ीन मानिये आप जैसी खूबसूरत पुरे पारस में नहीं

Hooriya:ab कहा बीटा एक वक़्त था जब मिश्रा में मेरी ख़ूबसूरती की मिसाल देते थे लोग अब तो बूढी हो गई

shamshera:aap अब भी उतनी हे खूबसूरत है में तो कहता हु आप तब से भी ज़्यादा खूबसूरत है और जो बूढी समझेगा वो गधा

Hooriya:man me)ab कैसे कहु क मेरा शौहर सुल्तान मेरे वाहिद हे मुझे अब बूढी मोती समझने लगा है

शमशेर मन me:kaise कोई इतनी अछि माल को बूढी कह क रुला दया मेरे अब्बा जान भी पागल है वैसे मुझे देवरानी मौसी ने ये बात बता कर अम्मी को पटाने का बेहतर मौक़ा दया है

Hooriya:kya सोच रहे हो

Shamshera:ammi में कह रहा था अब आप नए कपडे जो आये है उसमे से हे रोज़ पहनेंगे ढीले वाले निक़ाब नहीं जो सर से ले कर पेअर तक आपको धक् कर आपकी खूबसूरती छुपा देती है

Hooriya:man me)kya सच में में ऐसे लिबास में ज़्यादा खूबसूरत लगती हु

Shamshera:theek है अम्मी जान अब मुझे इजाज़त दीजिये

Hooriya:aate रहना ..मेरा मन अकेले हुजरे में नहीं लगता

Shamshera:man me)aapke मन को एक मज़बूत लौड़ा चाहिए जो आपके छूट और गांड का छल्ली कर दे जो अब्बा जान नहीं कर पा रहे है वो जल्द हे करूँगा में अम्मी जान

Hooriya:kya सोचने लगे

shamshera:kuch nahi.salam

शमशेर हुजरे से वापस बहार चला जाता है है और भूरिया आईने क सामने अपने आपको देखने लगती है पहले अपने आप को सामने से देखती है फिर जैसे हे पीछे से देखती है तो अपने लचकती गांड देख

Hooriya:man me)ye क्या क्या शमशेर ने मेरी मटकती हुई गांड की दीदार कर लय था इसलिए वो सोच में डूबा था ?

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 127

shamshera:man me)jab काफटाण क ऊपर से इतने लचक रहे है गांड तो असल में नंगे होंगे तो कैसे लचकेंगे

शमशेर मौक़ा देखते हे अपना लैंड पर हाथ फेर देता है

Hooriya:ye काफ्तान तो बहुत तंग है कैसे हुए है पूरा जिस्म से चिपका है अजीब लग रहा है

Shamshera:aapko ढीले वाले निक़ाब की आदत है अम्मी जान आप कुछ दिनों में ऐसे लिबास की आदि है यक़ीन मानिये आप जैसी खूबसूरत पुरे पारस में नहीं

Hooriya:ab कहा बीटा एक वक़्त था जब मिश्रा में मेरी ख़ूबसूरती की मिसाल देते थे लोग अब तो बूढी हो गई

shamshera:aap अब भी उतनी हे खूबसूरत है में तो कहता हु आप तब से भी ज़्यादा खूबसूरत है और जो बूढी समझेगा वो गधा

Hooriya:man me)ab कैसे कहु क मेरा शौहर सुल्तान मेरे वाहिद हे मुझे अब बूढी मोती समझने लगा है

शमशेर मन me:kaise कोई इतनी अछि माल को बूढी कह क रुला दया मेरे अब्बा जान भी पागल है वैसे मुझे देवरानी मौसी ने ये बात बता कर अम्मी को पटाने का बेहतर मौक़ा दया है

Hooriya:kya सोच रहे हो

Shamshera:ammi में कह रहा था अब आप नए कपडे जो आये है उसमे से हे रोज़ पहनेंगे ढीले वाले निक़ाब नहीं जो सर से ले कर पेअर तक आपको धक् कर आपकी खूबसूरती छुपा देती है

Hooriya:man me)kya सच में में ऐसे लिबास में ज़्यादा खूबसूरत लगती हु

Shamshera:theek है अम्मी जान अब मुझे इजाज़त दीजिये

Hooriya:aate रहना ..मेरा मन अकेले हुजरे में नहीं लगता

Shamshera:man me)aapke मन को एक मज़बूत लौड़ा चाहिए जो आपके छूट और गांड का छल्ली कर दे जो अब्बा जान नहीं कर पा रहे है वो जल्द हे करूँगा में अम्मी जान

Hooriya:kya सोचने लगे

shamshera:kuch nahi.salam

शमशेर हुजरे से वापस बहार चला जाता है है और भूरिया आईने क सामने अपने आपको देखने लगती है पहले अपने आप को सामने से देखती है फिर जैसे हे पीछे से देखती है तो अपने लचकती गांड देख

Hooriya:man me)ye क्या क्या शमशेर ने मेरी मटकती हुई गांड की दीदार कर लय था इसलिए वो सोच में डूबा था ?

भूरिया तो मारे शर्म की एक मुट्ठी की हो जाती है अपने आप को आईने में देखना छोर क्र वापस मुद क्र अपने पलंग पर बैठ जाती है और उसके कानो में देवरानी की कही हुई बात गूंजती है

भूरिया क मुँह निकल पड़ता है "ची में ये क्या सोच रही हु देवरानी तो अपना मुँह कला क्र ली और मुझे भी उकसा रही थी पर शमशेर ऐसा क्यू क्या मेरे सामने अपने उस को सहला रहा था कही ये मेरे आखो का धोका तो nahi..Ho सकता है मेरे से हे देखने में चूक हुई हो"

ये कह कर भूरिया अपने आप को समझा लेती है क उसका बीटा उसे देख क या उसकी लचकती मोती गांड क पतों क देख क नहीं अपना लैंड सहलाया हो

पारस क महल में अपने कक्षा में सुल्तान मेरे वाहिद क दूसरी पत्नी नाज़ बेगम अपने हुजरे में परेशां हो कर इधर से उधर टहल रही thi,Naaz क ढिल्लो ो दिमाग में सुल्तान मेरे वाहिद की बाते चल रही थी

Naaz:man me)Ye सुल्तान मेरे बेटे शान क रहते हुए इस आवारा शमशेर को कैसे सुल्तान बना सकते है

तभी नाज़ क कानो में आवाज़ गूंजती है "अम्मी जान क्या मई आ सकता हु"

Naaz:ary आओ बेटे शान

शान अंदर आता है और अपने माँ नाज़ क चेहरे को देख क्र भाप जाता है क वो किसी सोच में है और वो परेशां है

Shaan:ammi जान क्या हुआ आप परेशां मालूम पड़ती है

Naaz:Beta बात हे कुछ ऐसी है जो मुझे अंदर हे अंदर परेशां क्र रहे है

Shaan:ammi जान बताये क्या सबब है इस परेशानी की शायद में कोई काम आ सकू

Naaz:Beta बात ऐसी है क मई तुम्हारे बाप सुल्तान मेरे वाहिद से बात की और तुम्हे सुल्तान बनाने पर ज़ोर दया पर उन्होंने

शान मुस्कुराता है और कहता है

"पर वो शमशेर को सुल्तान देखना चाहते है पारस का सही कहा न "

Naaz:Beta तुम इतनी आसानी से कैसे कह सकते हो तुम्हे पता है मेरा ख्वाब है तुम्हे सुल्तान बनते देखना मेरा हे नहीं खंडन क सभी लोग यही चाहते पर ये सुल्तान

Shaan:Ammi जान आप फिक्र न करे हम सब की राय से कुछ रास्ता निकालेंगे

इधर महल से कोसो दूर सुल्तान मेरे वाहिद क छोटे भाई गुल शाह अपने घोड़े पे सवार जंगल क तरफ बढ़ रहे थे साथ में उनका सबसे ख़ास ामी छान पाशा भी था दोनों जंगल क बीचो बीच एक मैदान में अपने घोड़ो को रोकते हुए उतारते है

गुल shah:Ye हम कहा ाएगए और ये लोग कहा है छान पाशा

छान pasha:Ustaad वो आरहे है

गुल shah:Mujhe तो न घोड़ो की तप की आवाज़ सुनाई दे रही और न हे किसी इंसान की तुम्हे कहा दिख रहे है वो

छान pasha:Ustaad वो लूटेरे है हमारी तरह ज़मीन पैर नहीं रहते ऊपर देखें

गुल शाह जैसे हे ऊपर देखता है हु हु की आवाज़ क साथ ऊपर बड़े ुचे पेड़ो से लोग निचे कूदने लगते है

छान pasha:Ustaad ये लूटेरे है मेरे एक ख़ास आदमी ने हमारे कहने पर इन्हे यहाँ भेजा है

अब तक सारे लूटेरे अपने हाथो में एक अलग किस्म की खंजर लये निचे आ चुके थे

गुल shah:Kya बदबू आरही है इनसे ये नहाते नहीं kya..Chan पाशा तुम्हे क्या लगता है ये हमारी मदद करेंगे

छान pasha:Hum इन्हे सुल्तान मेरे वाहिद क जान की क़ीमत देंगे काम न होने पर एक कौड़ी नहीं

गुल shah:bhut खूब छान पाशा लगता है बहुत जल्द हम सुल्तान बन कर अपनी मेहबूबा सुल्ताना भूरिया से शादी करेंगे

छान pasha:Ji हाँ उस्ताद बहुत जल्द

तभी उन लूटेरो में से एक जो उन सब का सरदार था वो उनके करीब आता है

Lootera:Bolo छान पाशा हम आपके कैसे खिदमत करे

छान पाशा: मेरे चीनी दोस्त शुंग आज तुम्हारे पास हम बहुत बड़ा काम लाये है

ऐसा काम करने क बाद तौमर तुम्हे ये गंदे काम करने की ज़रूरत नहीं होगी

Shungu:Kaam बताओ छान पाशा हम बरसो से ऐसा काम हे देख रहे थे हम भी थक चुके है देश विदेश घूम कर

छान pasha:Shungu काम ये है क तुम्हे सुल्तान की जान लेनी है

शुंग भयभीत होजाता है और उसके चेहरे पर शिकन साफ़ देखि जा सकती थी

Shungu:chan पाशा क्या तुम सुल्तान मेरे वाहिद की बात क्र रहे हो तुम्हारा दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया

छान pasha:Han शुंग हम सुल्तान मेरे वाहिद की हे बात क्र रहे है

Shungu:Kya ये तुम्हारी चावल तो नहीं सल्तनत में की गई पुराणी लूट का बदला लेने की मुझ से

छान pasha:nahi नहीं शुंग

shungu:fir क्या वजह है क तुम अपने हे सुल्तान और इस दुन्या क सबसे ताक़तवर आदमी को मरवाना चाहते हो

छान pasha:Tum चीनी दिमाग तो बहुत लगते हो पर समझते नहीं तो सुनो ये सुल्तान क भाई है अब समझे

शुंग ऊपर से निचे तक गुल शाह को देखता है

गुल shah:Shungu..tumhe इस काम की मुँह बोली कीमत मिलेगी

Shungu:acha तो ये माज़रा है और हमारी जान पैर बात आई तो

गुल shah:Mahal क सिपाही मेरे रहते हुए तुम्हे कुछ नहीं करेंगे अब तुम खुद हे समझदार हो

शुंग कुछ देर सोचता है और फिर अपने सर को निचे करते हुए हिलता है और हाँ कहता है जिस पर छान पाशा हसने लगता है

छान pasha:Mujhe अपने तैयारी क बाद मिलो महल का रास्ता तुम्हे हम दिखा देंगे

गुल shah:Or है शुंग अब न तो तुम अपने कदम पीछे लोगे और न न हे ये बात किसी को कानो कान खबर होगी नहीं तो वो दिन तुम्हारा आखिरी दिन होगा

शुंग मुस्कुराते हुए " हम चीनी लूटेरे है लूट का माल कहते है पर अपने लूटने और मरने क सलाहियत पैट न हम कभी शक कए और में चाहता हु क आप भी न करो होने वाले सुल्तान गुल शाह"

सब हसने लगते है फिर गुल शाह और छान पाशा अपने घोड़ो से महल लौट जाते है..

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 128

गहतराष्ट्रा

Devrani:Kya हुआ सासु maa,kya सोचने लगी

Shurushti:Yahi क हमारा रिश्ता समय क साथ कितना बदल गया मेरी सौतन थी तुम आज मेरे बेटे की पत्नी और तुम अपने हे बेटे क पत्नी बन गयी

Devrani:man me)tumhe तो मेरे और बलदेव का प्यार काट रहा है षुरूश्ती छुपा किस से रही हो

Devrani:Ab नियति को जो मंजूर था हुआ वैसे अब में अपने जीवन से ज़्यादा खुश हु

Shurushti:han अब तुम महारानी हो अब तुम्हे सिर्फ अपने हे नहीं राज्य क लोगो क बारे में सोचना होगा .महिलाओ क सभा में साड़ी गहतराष्ट्रा की महिलाये अपने दुःख ले कर आती है अपने महारानी से बात करने उनसब का फैसला करना होगा

Devrani:Me एक कदम पीछे नहीं हटूंगी ये महारानी देवरानी बलदेव सिंह का वादा है

अपने राज्य क लये लहू की ज़रूरत पड़ेगी तो भी ये राजपूतनी पीछे नहीं हटेगी

Shurushti:waah महारानी हो तो aisi..aaj क खाने में क्या क्या बनवाये आप बता दीजिये महारानी जी

Devrani:kya आप में क्या बोलू

Shurushti:nahi अब से इस घर में महल में और इस राज्य में आपके निर्णय से हे सब काम होगा

देवरानी खुश होते हुए खाने का सब कुछ बता देती है जो उसे खाने की इच्छा थी रसोई में कमला और राधा काम करने लगती है और महारानी देवरानी वही सोफे पैर बैठ जाती है

Devrani:man me)Hey भगवन मुझे गहतराष्ट्रा की दुखी प्रजा क खुशहाली और समृद्धि का श्रोत bana,Mujhe इतनी शक्ति दे क मई अपने पति महाराज बलदेव क साथ साथ अपने प्रजा की सेवा आजीवन कर सकू

तभी वह पर षुरूश्ती आजाती है और देवरानी को चिंतित पा कर

Shurushti:Bahu रानी क्या सोच रहे हो

Devrani:Nahi कुछ नहीं सासु माँ वो में

Shurushti:kahi मेरी बहु को ये चिंता तो नहीं खाये जा रही क राजा राजपाल तुम्हे और तुम्हारे बेटे मेरा मतलब है पति को बचे की अनुमति देंगे या नहीं

Devrani:Nahi सासु माँ मेरा बीटा और मुझे पूर्ण विश्वास है क मेरे पूर्व पति बलदेव क पिता हमे और हमारे पुत्र बलदेव की इच्छा का सम्मान करेंगे

Shurushti:avashya तुम जैसा चाहती हो बलदेव क पिता स्वयं अपने मुँह से आप दोनों माँ बेटे को इस बात की अनुमति देंगे और बहुत जल्द वो चाहेंगे क वो दादा बन जाये

ये सुन्न कर देवरानी लज्जा जाती है

Shurushti:ab क्या शर्माना जब बलदेव जोट गया खेत अब तो बीज बोन की तैयारी करो

देवरानी इस बार झप्पट हुए मुस्कुराने लगती है और निचे उसके छूट में चीटिए रेंगने लगती है

Devrani:Deedi बास मेरे खेत पे हल चलने का असली मालिक मेरा पुत्र बलदेव हे है जो में बहुत देर समझी और वही इस खेत में अपने बीज बो कर इसे हरा भरा करेगा

Shurushti:Han मेरी बहु और तुम दोनों माँ पुत्र क संगम से जो फसल होगी वो अनूठी होगी ..

Devrani:kya दीदी

Shurushti:ab तुम्हारी सौतन नहीं में वैसे में तो चाहती हु मेरी बहिन देवरानी तुम बलदेव क काम से काम दस बच्चे जानो और हमारा राज परिवार में ये राज वंश की चिंता सदैव क लये ख़त्म हो जाये

Devrani:mai भी तो यही चाहती हु पर ये सब तो तब हे मुमकिन है जब

Shurushti:chinta मत करो में राजा राजपाल को मन लुंगी

Devrani:dhanyawad दीदी उर्फ़ सासु माँ आप ने हमारा साथ दया

Shurushti:wo सब छोरो और जाओ मेरे पुत्र बलदेव की देखभाल करो बहुत जल्द तुम्हारा काम हो जायेगा

Devrani:Theek है दीदी में कमला से कह कर उनका खाना लगवा देती हु

देवरानी कमला से कह कर ऊपर बलदेव क कक्षा में खाना लगवाने लगती है और षुरूश्ती निचे अपने पति राजा राजपाल क लये खाना ले कर अपने कक्षा में जाने लगती है

तभी बलदेव बद्री और श्याम क साथ आते हुए दीखता है

Shurushti:ary बीटा तुम यह हो अपने कक्षा में जाओ बहु तुम्हारी राह देख रही होगी

Baldev:Badi माँ ऐसा क्या हुआ जो वो..

Shurushti:buddhu एक पत्नी एक पति का राह तो हमेशा देखती है जब वो उनसे दूर होती है

ये सुन कर बद्री और श्याम हसने लगते है

Shurusht:Ary जाओ वो भोजन कर लो ऊपर

Baldev:par माँ हम सब साथ भोजन करते तो

Badri:han यार क्या अब हम सब मित्र एक साथ भोजन भी नहीं कर सकते मित्र श्याम

Shurushti:Kaan खींच लुंगी तुम दोनों क में बलदेव की नयी शादी है इसे कुछ दिन अपने पत्नी क साथ व्यतीत करने दो

Badri:Theek है रानी षुरूश्ती जैसी आपकी आज्ञा चलो श्याम

बद्री और श्याम चले जाते हुए बलदेव को गुस्से से देखते है

Baldev:Ye देखो माँ लगता है दोनों गुस्सा हुए

Shurushti:Hone दो जाओ बीटा पहले अपना पति धर्म निभाओ ये दोनों नाटकबाज़ है

Baldev:theek है बड़ी माँ

बलदेव ऊपर सीडीओ से चलते हुए कक्षा में परवेश करता है और पीछे मुर कर दरवाज़ा बंद करता है देवरानी झुकी हुई भोजन परोस रही थी दरवाज़े की आवाज़ सुन जैसे पलटने को होती है बलदेव का लौड़ा खच से देवरानी क गांड क दरार में फास जाता है देवरानी ु अचानक हमले से चिहक जाती है" आआआउच बलदेव"

बलदेव मोती गांड साडी में लिपटी देवरानी को झुका पा कर सीधा अपने माँ क गान से सात कर अपना लौड़ा को अपने माँ क गांड में फसा देता है और देवरानी अपने दोनों हाथ ज़मीन पर रख संभल कर घोड़ी बन जाती है

"ाः ाः मा ये गांड बहुत मदहोश कर देती है मुझे "

"उफ़ बीटा काम से काम भोजन तो कर लो "

"भोजन क बाद गांड डौगी मारने माँ"

"धत्त मैंने ऐसा तो न कहा"

बलदेव छत्त से बड़े बड़े चुतर क एक पैट पर अपने थप्पड़ जड़ देता है

"आह क्या गांड मटक टी है जब तुम चलती हो माँ मुझे गांड मारनी है सारी उठाओ"

"नही दूंगी हटो "

देवरानी पीछे धक्का देती हुए उठ टी है और बलदेव की ओरे देखती है तो पति ह उसका लैंड आसमान की ओरे देख रहा है धोती क बावजूद साफ़ सर उठाये खड़ा था

"हे भगवन ये हमेशा खड़ा रहता है"

बलदेव कुछ नहीं बोलता चुप चाप पलंग पर जा कर बैठ जाता है

"क्या हुआ बलदेव"

"कुछ नहीं मुझसे बात मत करो"

बलदेव मुँह बना कर दूसरी ओरे देखने लगता है तो देवरानी मुस्कुराते हुए अपने बेटे क पास जाती है

"क्या हुआ मेरे पति देव जी मेरे महाराज बलदेव जी"

देवरानी अपने हाथो को बलदेव क गर्दन में घेराव बना लेती है

बलदेव अपने हाथो से हाथ हटा देता है

"ओह्ह तो मेरा राजा बीटा गुस्सा है"

"मुझे कुछ नहीं सुन न"

Devrani:man me)Mujhe सब पता है मेरे राजा बीटा को मेरी गांड कितनी पसंद है और उस से कोई दूर कर दे तो कितना परेशां हो जाता है अभी इसके लौड़े को बताती हु बहुत मेरे गांड क पीछे पड़ा रहता है

देवरानी मुस्कुराते हुए झट से अपने बेटे क गॉड में बैठ जाती है बलदेव दोनों पेअर को लटकाये हुए पलंग पर बैठा था देवरानी भी उसी अंदाज़ से बैठ जाती hai.devrani क दोनों गांड क पतों क बीच में बलदेव का आधा सोया हुआ लैंड फास जाता है

"आह राजा तो मेरे बेटे को यही चाहिए न तो लो"

देवरानी बिस्तर का कोना पकड़ कर आगे पीछे होते हुए अपने गांड को बलदेव क लैंड पर हस्ती है

बलदेव का गुस्सा छू मंतर हो जाता है पर वो दिखावा करते हुए अपने निचले भाग से हे धक्का देता है

"उतरो देवरानी मेरा गुस्सा मत बढ़ाओ"

ऐसा करने से देवरानी तो निचे नहीं होती है उल्टा बलदेव का लैंड ज़ोर से देवरानी क गांड क दरार में घुसता है और पूरा आकर में किसी सांप की तरह फैन उठा लेता है

"ाचा मुँह से उतरो कह रहे हो निचे अपने सांप को कहो क सो जाये मेरी गांड पे आक्रमण न करे लगता है साड़ी क ऊपर से हे गांड में घुस जायेगा मेरे"

ये सुन कर बलदेव है देता है

"कामिनी देवरानी.."

देवरानी मुस्कुराते हुए बलदेव क एक हाथ ले कर अपने एक बड़े दूध पर रख देती है

"आह राजा मुझे तुमने हे कामिनी बना दया"

"तुम तो पहले से हे चुआड़ी की प्यासी थी "

और कास कर देवरानी क मम्मी को ब्लाउज क ऊपर से हे दबाता है

"आहे राजा ऐसा होता तो में गांड तुम्हारे पिता से न मरवाई होती "

"वो तो मेरे पिता क लैंड पे इतनी शक्ति हे नहीं थी जो इतने बड़े क किला पे सेंध लगा सके "

बलदेव ज़ोर से लैंड देवरानी क गांड में दरार में मारता है और दूध को दबाता है

"ाः उफ़ राजा इसलिए अपने पत्नी अपने महारानी से गुस्सा होते हो"

"तो मुझे धक्का क्यू दया"

"बीटा तुम कहो तो 24 घंटे में नग्न अवशता में रह लू और तुम दिन रात मुझे चूड़ो पेलो कोई चिंता नहीं पर सबका एक उचित समय होता है"

"काश ऐसा ho..par मुझे न टोका करो जब भी मई अपने पत्नी से प्रेम करना चहु में करूँगा"

"इतना चाहता है मुझे .."

"खुद से भी ज़्यादा इसलिए आज तुम पिता राजपाल क साथ नहीं मेरी लौड़े पे बैठी हो"

"राज पल से याद आया वो षुरूश्ती कह रही थी क बहुत जल्द तुम्हारे पिता मुझे गर्भ से करने की अनुमति दे देंगे"

"वह मा ये तो बहुत अछि बात है मेरे पिता मुझे तुम्हे छोड़ कर अपनी माँ को छोड़ कर अपनी बीज तुम्हारे छूट में पनपने क लये और तुम्हे मेरे बचे की माँ यानि क अपने बेटे को अपनी हे माँ को गर्भवती करने की अनुमति देंगे"

"हाँ बीटा मई नहीं चाहती क मेरे बचे कभी भी किसी दंड और भेदभाव का सामना करे"

"रानी माँ चिंता मत कीजिये हमारे रहते हुए हमारे बचे को कभी कोई छू भी नहीं सकता"

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 129

"वह मा ये तो बहुत अछि बात है मेरे पिता मुझे तुम्हे छोड़ कर अपनी माँ को छोड़ कर अपनी बीज तुम्हारे छूट में पनपने क लये और तुम्हे मेरे बचे की माँ यानि क अपने बेटे को अपनी हे माँ को गर्भवती करने की अनुमति देंगे"

"हाँ बीटा मई नहीं चाहती क मेरे बचे कभी भी किसी दंड और भेदभाव का सामना करे"

"रानी माँ चिंता मत कीजिये हमारे रहते हुए हमारे बचे को कभी कोई छू भी नहीं सकता"

देवरानी उठ क कड़ी हो जाती है बलदेव क गॉड में से

"चलो जी अब हम भोजन कर ले "

बलदेव भी अब उठ जाता है दोनों मिल कर भोजन करते है और अभी दोनों हाथ हे धो रहे थे तभी कमला की आवाज़ आती है

"महारानी महाराजा "

Devrani:Han कमला

कमला दरवाज़ा क पास आकर धक्का देती है तो बंद पाती है और एक धक्का देते हुए

"क्या महारानी दिन दहाड़े कमरा बाँदा कए हुए है में तो बर्तन लेने आई थी"

"आर्य कमला की बची आती हु"

देवरानी उठ कर दरवाज़ा खोलती है और कमला को देख मुस्कुराते हुए

"क्यू रे जो मन में आता है बक देती है"

"अब लो महारानी में तो सच हे बोल रही हु अब सच बोलना भी गलत है"

"हाँ कामिनी सब जानती है आओ बर्तन ले जाओ"

कमला बर्तन ले कर चली जाती है देवरानी दरवाज़ा बंद कर क अंदर आती है तो बलदेव पलंग पर बैठा नज़र आता है

Baldev:aajao माँ अपने बुर का मज़ा चखा दो

Devrani:aai राजा मेरे छूट क राजा

देवरानी अपने पल्लू को हटते हुए क़ातिल नज़र से बलदेव को देखती है



बलदेव अपने माँ क बड़े तरबूज़े जैसे दूध देख कर अपने लैंड को सहलाने लगता

है

"आह मा आजाओ मेरे रानी माँ मेरी पत्नी "

"उफ़ राजा धीरे धीरे बोलो कोई सुन लेगा भरी दुपहर है"

"सुन्न लेने दो सब को पता है नयी नवेली दुल्हन दुपहर क भोजन क बहाने चुद रही होगी"

देवरानी पास आती है बलदेव उसे अपने बहो में भर्र लेता है



देवरानी क दोनों मम्मो को हाथो में लये दबाने लगता है

"उफ़ राजा बीटा "



बलदेव अपने माँ को बाहो में भर लय था और देवरानी क चोली को पीछे से खोलने लगता है

"माँ तुम दिन दहाड़े बिजली गिरा रही हो अपने बड़े दूध और लचकती गांड से "

"आह उफ़ बीटा "

बलदेव देवरानी को पलंग पर लिटा देता है और खुद देवरानी क पैरो क निचे बैठ कर देवरानी क पैरो को चूमने लगता है

पैरो को चूमते हुए ऊपर जाता है और देवरानी क होठो को चूमते हुए बाहो में कस लेता है देवरानी क छूट पर बलदेव का लौड़ा पूरा रगड़ खा रहा था देवरानी अब गरम हो जाती है और बलदेव को बहो में लये पलट जाती है जिसका साथ बलदेव देता है और दोनों एक दूसरे को बाहो में लये पलट ते है इसी बीच बलदेव अपने हाथो से देवरानी का साड़ी और पेटीकोट खींच देता है और अपनी धोती खोल कर नंगा हो जाता है

देवरानी अब सिर्फ जांघिए में थी बलदेव अब ब्लाउज क बटन खोलने लगता है



"आह माँ क्या बड़े थान है ये हम्म"

"आह राजा मेरे बीटा तुमने हे इतने बड़े कए"

"माँ तुम्हारी छूट और दूध को असली लैंड तो अब मिला है पिता राजपाल ने तो सिर्फ तेरी छूट को खोला तो फैलाऊंगा में तुम्हारे मम्मो को पुचकारा था दबाऊंगा में बड़े में करूँगा"

बलदेव झट से देवरानी की ब्राज़िएर उतर फेकता है



बलदेव देवरानी क दोनों मम्मो को ले कर बारी बारी से चूसने लगता है

निचे देवरानी अपना सूझ बुझ दिखते हुए अपने बेटे क बड़े लैंड को हाथ के थम कर आगे पीछे करने लगती है

"माँ ुहम्म दाल दू क्या अब लौड़ा छूट में लगता है तू बहुत गरम हो गई"

"आह राजा छोड़ दे मुझे उठ "

बलदेव निचे आता है और देवरानी क छूट में अपना लौड़ा सटीक निशाना लगा कर एक बार में धक्का देता है पूरा लैंड घुस जाता है

"aaaaaaaaaah बलदेव ुह्ह्ह्ह "

"ाः क्या मख्हन छूट है ाः "

"आहे राजा धीरे से छोड़ो उफ़ मेरी आवाज़ कही बहार न चली जाये"

"ाः माँ ये ले मेरा लौड़ा भरी दुपहरी में खा मेरा लैंड"



"ाः उठ आआह उठ आआह उह्ह्ह ाः उठ नही आआह उठ उठ आआह ाः"

"ये ले मा आह घप्प घप्प घप्प घप्प की आवाज़ से लौड़ा अंदर बहार होते रहता है"

खूब हुमच हुमच कर बलदेव अपने माँ को पेल रहा था और देवरानी भी खूब गांड उठा उठा क अपने बेटे का लैंड ले रही थी

"आह उफ्फ्फ ाः बीटा"

आधा घंटा की धुवादरी चुदाई क बाद बलदेव झाड़ जाता है और देवरानी हांफने लगती है और अपने आखे बंद कए लेती रहती है बलदेव देवरानी क बगल के लेट जाता है और अपने माँ क चेहरे की ख़ुशी देख बहुत खुश होता है

"माँ खुश तो हो न"

"बीटा भला कौन औरत ऐसी चुदाई से खुश न होगी "

"में तो चाहता हु तुम गांड चुदाई में भी ऐसे हे मज़े लो पर तुम करने हे नहीं देती"

"उफ़ बीटा तुम एक बार में हे मेरे गांड की नसे ढीली क्र चुके हो अभी सूजन ख़तम नहीं हुई पूरी और तुम"

"आर्य माँ सूजन ठीक होने दो फिर पेलुँगा आपकी गांड और आपको बी आदत हो जाएगी "

"तब की तब देखेंगे जब से पारस से आयी हु तब से तो अपने निचे हे लिटाये हो कहा चैन है"

"ाचा मेरी रंडी माँ तो ऐसे बोल रही जैसे मेरी माँ को दिन रात मेरा लौड़ा नहीं चाहिए वैसे पारस से कोई सन्देश नहीं आया "

"बीटा सन्देश क्या आएगा बेचारा युवराज शमशेर लगा होगा अपनी अम्मी जान को पटाने में"

"मुझे तो नहीं लगता है क सुल्ताना भूरिया कभी मानेगी"

"कुछ भी हो सकता है बीटा "

"माँ तब की तब देखेंगे अभी तो में अपने माँ क मज़े ले लू"

देवरानी को अपने बहो के भर कर दोनों ाअखे बंद क्या सुस्ताने लगते है और उन्हें कब नींद आती है पता नहीं चलता

उधर राजा राजपाल अपने कक्षा में भोजन क बाद सुस्ता रहा था तो रानी षुरूश्ती आती है

"आओ रानी षुरूश्ती कोई काम था"

"क्यू में अपने पति देव से बिना काम क मिलने नहीं आसक्ति "

"क्यू नहीं मेरी रानी बैठो"

कुछ देर इधर उधर की बातो क बाद षुरूश्ती कहती है

"महाराज वो आपसे कुछ अनुमति चाहिए थी"

राजा राजपाल अपने हाथ में शराब की गिलास लये हुए एक गट ले कर कहता है

"कहो षुरूश्ती क्या बात है"

"महाराज आप तो जानते हे है क अब बलदेव अपने माता संग हे रात बीतता है पति पत्नी की तरह"

"हाँ ये बात तो सब को सब को पता है"

राजपाल ये सुन कर फिर एक गट पीटा है

"महाराज वो देवरानी और बलदेव चिंतित है "

"किसलिए"

"वो उनके आने वाले बचे क लये "

"देखो मुझे इस से अब कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है मैंने माँ से बात की थी अब वो चाहती है क बलदेव उनका वंश बढ़ाये तो मुझे कोई आपत्ति नहीं"

"महाराज "

"चुप करो षुरूश्ती मुझे मदिरा पीने दो अब मेरा बीटा और मेरी पत्नी एक दूसरे से सम्भोग करते है तो बचे होंगे हे"

"महाराज ऐसा है देवरानी कोई जड़ी बूटी कहती है गर्भ न ठहरने का और वो दर रही है"

"क्यू दर रही है मई समझा नहीं"

"महाराज वो सोच रही है कही आप भविष्य में जा कर अपने बेटे और पत्नी क बचे को कोई छाती न पहुचाये इसलिए वो आपकी अनुमति चाहती है गर्भवती होने से पहले वो चाहती है क आप अपने बेटे बलदेव और उसके माँ देवरानी को वचन दे क आप उनके बचे को अपनाएंगे और आप अपने बेटे को आयग्य दे क वो अपनी माँ को गर्भवती करें"

ये सुनते हे राजा राजपाल क हाथो से गिलास गिर जाता है और शीशे टूट कर फर्श पर बिखर जाते है राजपाल का मुँह क्रोध से लाल हो जाता है..

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 130

"देखो मुझे इस से अब कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है मैंने माँ से बात की थी अब वो चाहती है क बलदेव उनका वंश बढ़ाये तो मुझे कोई आपत्ति नहीं"

"महाराज "

"चुप करो षुरूश्ती मुझे मदिरा पीने दो अब मेरा बीटा और मेरी पत्नी एक दूसरे से सम्भोग करते है तो बचे होंगे हे"

"महाराज ऐसा है देवरानी कोई जड़ी बूटी कहती है गर्भ न ठहरने का और वो दर रही है"

"क्यू दर रही है मई समझा नहीं"

"महाराज वो सोच रही है कही आप भविष्य में जा कर अपने बेटे और पत्नी क बचे को कोई छाती न पहुचाये इसलिए वो आपकी अनुमति चाहती है गर्भवती होने से पहले वो चाहती है क आप अपने बेटे बलदेव और उसके माँ देवरानी को वचन दे क आप उनके बचे को अपनाएंगे और आप अपने बेटे को आयग्य दे क वो अपनी माँ को गर्भवती करें"

ये सुनते हे राजा राजपाल क हाथो से गिलास गिर जाता है और शीशे टूट कर फर्श पर बिखर जाते है राजपाल का मुँह क्रोध से लाल हो जाता है

Shurushti:Maharaj संयम रखे आपके क्रोधित होने से कुछ बदल तो नहीं जायेगा न

राजपाल अपने आखो को बंद कर थोड़ी देर बाद खोलता है और अपने आप आप पर काबू पाते हुए

"सहर्षति तुम ये कह रही हो क में खुद अपने बेटे को कहु क मेरी पत्नी को वो गर्भ से करे"

"महाराज आप चूक रहे है वो आपकी पत्नी नहीं देवरानी अब अपने पुत्र बलदेव की पत्नी है"

"सही कहा तुमने पर देवरानी मेरी पत्नी न सही बलदेव की माँ तो है हे में एक पुत्र को जो मेरी हे संतान है उसे कहु उसके हे माँ को गर्भवती करने क लये "

"महाराज में समझ सकती हु ये इतना आसान नहीं आप बलदेव क पिता है आप पर अपनी पत्नी खोने का पहले हे दुःख है में और दुःख नहीं बढ़ाना चाहती"

"धन्यवाद् रानी षुरूश्ती समझने क लये मेरी भावनाओ को"

"पर महाराज आप तो जानते हे है क अब पुरे राज परिवार और गहतराष्ट्रा की प्रजा यही चाहती है क महाराज बलदेव अपने पत्नी महारानी देवरानी से राज परिवार का वंश आगे बढ़ाये"

"तो षुरूश्ती मन किसने क्या है"

"महाराज में आप से विनती करती हो महारानी देवरानी की ये ज़िद्द मान लीजिये और उन्हें कह दीजिये क आप उनके होने वाले संतत क बांधे कभी नहीं आएंगे"

राजा राजपाल सोच में डूब जाता है कुछ देर बाद षुरूश्ती को देखते हु बुझे मन से कहता है

"ठीक है षुरूश्ती जब तुम सब यही चाहते हो तो में बलदेव और देवरानी को अनुमति दे कर कह देता हु उनके होने वाली संतान को हम कभी क्षति नहीं पहुचायेंगे"

षुरूश्ती खुश हो जाती है और राजा राजपाल क गले लग जाती है

"महाराज अब आप उन्हें भूल जाये में आपको हर सुख दूंगी आपको कभी देवरानी की कमी महसूस नहीं होगी"

राजा राजपाल अपनी रानी षुरूश्ती क गले लग जाता है और अपने डिल का बोझ कुछ हल्का करने की कोशिश करने लगता है

महल क एक कक्षा में बद्री और श्याम भोजन क बाद पलंग पर लेते सुस्ता रहे थे

Badri:Yaar हमारी जीवन में क्या है कुछ भी नहीं

shyam:Sab कुछ तो है तुम कहना क्या चाहते हो

Badri:Yaar श्याम हमारी आयु का हे है बलदेव देखो हमारे सामने कितना आगे बढ़ गया

Shyam:Jo बोलना है खुल क बोलो बद्री तुम्हारी मुहावरे मुझे समझ नहीं आते

Badri:Buddhu श्याम तुम आज तक अपने लैंड को हाथ से हिला रहे हो और बलदेव चुदाई क मज़े ले रहे है दिनन में भी हम तो हिलने क लये भी रात का प्रतीक्षा करते है

Shyam:ab वो प्रेम क जाल में फस्स गया और जोश में आकर विवाह कर लिया उसे तो बाद में पता चलेगा जब पारिवारिक जीवन संभालना होगा

Badri:Budhu हे रहोगे tum..Baldev ने तो इतना बड़ा डाव खेला है क वो महाराज बन गया अब भला उसे क्या कमी होगी जो अपने परिवार का पालन पोषण नहीं कर पायेगा

shyam:Shayad तुम ठीक कह रहे हो बद्री बलदेव अपने आयु से ज़्यादा शक्तिशाली शरीर से भी बूढी से भी

Badri:Han उसने बड़े सूझ बुझ से पहले अपने माँ को पटाया फिर अपना शारीरिक शक्ति दिखा क उनको अपने वश में कर लय फिर गहतराष्ट्रा का महाराज बन कर अपने पिता और अपने दादी का मुँह बंद करवा दया

Shayam:Han इसलिए वो महाराज बना क उनका कोई विरोध न करे

बद्री मुस्कुराते हुए

"हाँ शयाम इसलिए तो बलदेव दिन दहाड़े अपने माँ को पछाड़ दया आज क्यू क उनका अब कोई विरोधी नहीं"

Shyam:Apne जीभा को लगाम दो अब माँ देवरानी हमारी भाबी माँ है ऐसे शब्दों का प्रयोग करना उचित नहीं

बद्री हस्ते हुए

"बालक अब तुम्हे क्या पता क भाबी क साथ मज़ाक क्या जा सकता है"

Shayad:Han ये बात भी ठीक है चलो अब बहार चलते है संध्या होने को है

Badri:Han चलो देखे बलदेव अपने माँ क पल्लू से अब भी बंधा है क निकला अपने कक्षा से

Shayam:hahaha चलो चले देखे

badri:Han चलो

दोनों कक्षा से बहार निकलते है तो देखते है रानी षुरूश्ती पूजा की तैयारी कर रही थी और साथ कमला और राधा भी उनका साथ दे रही थी

Shyam:Rani षुरूश्ती आज क्या है

Shurusti:Aao युवराज कुछ नहीं बास संध्या को पूजा है उसी की तैयारी ..

Badri:Rani षुरूश्ती ये महाराज बलदेव दिखाई नहीं दे रहे

षुरूश्ती मुस्कुराते हुए

"वो शायद सो गए हो"

Badri:Din में बलदेव तो नहीं सोता कभी

Kamla:yuvraj अब वो शादीशुदा है सो रहे होंगे अपने रानी माँ को ले क्र

Radha:Han कमला पति भले हे महाराज हो सुनता तो अपने पत्नी की है हो सकता है महारानी की बात मान कर सो गए हो

Shurushti:Bass करो तुम दोनों काम पे ध्यान

दो और बद्री तुम चाहो तो उठा दो उन्हें जा कर वैसे भी में पूजा क लये उनको उठाने वाली थी

Badri:Jo आज्ञा रानी षुरूश्ती

बद्री सीडीओ से चढ़ते हुए ऊपर बलदेव क कक्षा में जाने लगता है पीछे से श्याम भी आरहा था दोनों ऊपर पहुंचते है तो देखते है बलदेव क कक्षा का दरवाज़ा बंद है

Badri:Baldev ो बलदेव उठो मेरे भाई

Shyam:Maharaj कहो कही वो गुस्सा न हो जाये हाहाहा

ये सुन कर बद्री भी हसने लगता है

Shyam:utho मित्र

Baldev:wo ऐसे नहीं उठने वाले

बलदेव अपने हाथो से दरवाज़ा को ज़ोर ज़ोर से पीटने लगता है

अंदर बलदेव और देवरानी बेखबर सोये थे



देवरानी अपने दोनों पेअर को बलदेव क दाहिने पेअर फसे थी और अपने सर को बलदेव कंधो पर रख अपने एक हाथ को बलदेव क पेट पर रख गहरी नींद में सोई थी

बद्री ज़ोर ज़ोर से दरवाज़े को ठकठकाने से बलदेव की गहरी नींद टूट जाती है पर देवरानी चुदाई क बाद ऐसी खुमारी में थी क वो अब तक न उठी बलदेव अपने आखे खोल कर देखता है तो सबसे पहले देवरानी को अचे से देखता है और एक सुकून का सांस लेते हुए अपने बाये हाथ से पास राखी तलवार को उठता है जिस से बलदेव देवरानी से दूर होता है वैसे हे देवरानी की आँख खुल जाती है

देवरानी झट से किसी क बहार होने की आशंका से अपने खुले तन को जल्दबाज़ी में एक ओढ़नी से धक् लेती है

दरवाज़ा अब भी बद्री ज़ोर ज़ोर से पीट रहा था

Baldev:Kaun है वह ?

Badri:Me हु बलदेव रानी षुरूश्ती ने हमे उठाने क लये भेजा था

बलदेव चिढ जाता है और अपने तलवार को एक तरफ फेकते हुए

Baldev:Ye दोनों सुधरेंगे नहीं बचपना की सीमा होती hai(Dheere से फुफुसाता है)

सामने बिस्तर पर जल्दबाज़ी में अपने अंग को ओढ़नी से ढके देवरानी बलदेव को



देख मुस्कुराने लगती है और बलदेव अपने माँ को देखते हे उसका गुस्सा शांत हो जाता है

देवरानी अपने हाथ क इशारे से सैन्यम बरतने क लये कहती है

Baldev:Badri जाओ हम आते है

Badri:Ary महाराज आप चलो भी उठ गए हो तो

Baldev:Badri मई उठ गया हु रानी माँ अब तक सो रही है उनको उठा कर साथ में आते है हम

Devrani:man me)wah बीटा बहुत जल्द सीख गए कैसे बात ताली जाती है बिना मन कए

Badri:Theek है तो ाआजाना पूजा की तैयारी होरही है

बद्री और श्याम चले जाते है

Baldev:Rani माँ जाये स्नान कर क तैयार हो जाये

Devrani:Nahi महाराज आप जाये पहले मुझे थोड़ा समय लगेगा

Baldev:Jo आदेश महारानी

बलदेव अपना सर झुकाये कहता है जिसे देख देवरानी मुस्कुराने लगती है

बलदेव और देवरानी बारी बारी से स्नान क्र तैयार हो कर निचे जाने लगते है

महल क बीचो बीच पूरा राज परिवार एकत्रित थे और पूजा शुरू हो चूका बलदेव और देवरानी तेज़ी से चलते हुए आकर अपना हाथ जोड़े महल में बने मंदिर क सामने खड़े भजन में लीं हो जाते है

कुछ देर में पूजा संपन्न हो जाती है और रानी षुरूश्ती सब को प्रसाद बांटने लगती है

तभी राजा राजपाल कहता है

"बलदेव कहा है"

राज माता jeevika:Rajpal हमारा पोता देरी से आया वो पीछे है

राजपाल पीछे घूम कर

"बलदेव बीटा ज़रा यहाँ आना "

बलदेव देवरानी क पास से खसक कर अपने पिता राजपाल क पास जाता है

"जी पिता जी"

"बीटा बलदेव में आज सब क उपस्तिथि में तुम से कुछ वचन देना चाहता हु"

बद्री और श्याम क पास खड़े देवराज कहता है

"कैसा वचन राजा राजपाल जी"

Rajpal:"Me आप सब की उपस्थिति में ये वचन देना चाहता हु"

पास कड़ी shurushti,Jeevika,kamla और राधा क साथ देवरानी गौर से देख रहे थे आखिर राजा राजपाल कहना क्या छह रहा है

Jeevika:beta राजपाल कहो हम सब जान न चाहते है

Rajpal:Maa आप सब भली भनित जानते है क इस राज परिवार का पुत्र बलदेव है और हम सब की चाहत है क हमारा राज वंश आये और हमारी पीढ़ी आगे बढे जो हमारे राज्य क भाग्य विधाता बने

Shurushti:Han हम सब परिचित है इस बात से क बलदेव हे है वो जो हमारे वंशज की नीव रखेगा

Rajpal:Han तो बीटा बलदेव मई चाहता हु क

पूरा परिवार जनता था क अब राजपाल क्या कहने वाले है महारानी देवरानी और महाराज बलदेव की धड़कने तेज़ हो जाती है और वो एक टूक राजा राजपाल को देखने लगते है

Baldev:Boliye पिता जी आप क्या चाहते है

Rajpal:Me यही चाहता हु क तुम अब बाप बन जाओ और मुझे दादा बन ने का सौभाग्य प्राप्त ho,Meri ीचा और अनुमति है क आप और महारानी देवरानी क संताने हो और हमारे वंश आगे बढे जो गहतराष्ट्रा क हिट में है

ये सुनते हे बलदेव क ख़ुशी का ठिकाना नहीं था वो चारो तरफ देखता है तो सब क आखो में नमी थी और सब अत्यधिक खुश थे



Shurushti:Dekha महारानी देवरानी बेकार हे सोच रही थी क उनके बचे का भविष्य क्या होगा

Rajpal:Baldev ..देवरानी में भगवन को साक्षी रख कर ये वचन लेता हु क तुम्हारी संतान जो मेरे पौत्र होंगे उन्हें अपनाउंगा और कोई भी उन्हें कभी भी हानि पहुंचने की कोशिश नहीं karunga..Bass अब तुम दोनों मुझे जल्द खुशखबरी सुना दो बीटा बलदेव और बहु देवरानी

ये सुनते हे देवरानी का पूरा शरीर काँप जाता है मारे लज्जा क और ख़ुशी क उसके मुँह से कुछ नहीं निकलता बास वो चहक उठ टी है



Shurushti:Lo मीठे खाओ देवरानी

षुरूश्ती देवरानी को थाली से मिठाई उठा क्र खिलाती है

Devrani:ary दीदी ये क्यू

Shurushti:meri बहु रानी अब से वो जड़ी बूटी खाना नहीं अब हमारे महल में बचे की किलकारी गूंजेगी

बलदेव अपने पिता की बात सुन कर झुक कर पेअर छूटा है

"धन्यवाद् पिता जी हमारे प्रेम को समझने क लये मई पूरी कोशिश करूँगा क आप जल्द से जल्द दादा बन जाये"

ये कहकर बलदेव खुद शर्मा जाता है राजपाल उसे अपने गले से लगा लेता है और बलदेव की बात सुन कर सब हसने लगते है

Shurushti:Baldev देवरानी तुम दोनों जा कर मासूम बच्चो को कुछ दान कर दो इस से हमारे घर शीघ्र हे गहतराष्ट्रा का वंसज होगा भगवन की कृपा से

बलदेव और देवरानी एक थाली लये हुआ महल क दुवार से बहार निकलते है

Baldev:Idhar आओ बचो देखो हमने तुमसब क लये कुछ लाये है

Devrani:man me)Bhagwan तेरा धन्यवाद कैसे करू आज मेरे पूर्व पति जो मुझे और मेरे बेटे क प्रेम को स्वीकार नहीं कर रहे थे आज खुद अपने बेटे से कह डाई मुझे गर्भवती करने क लये

ये सोच कर देवरानी का शरीर सिहर उठ ता ह



सारे बचे इकट्ठे होते है और बलदेव उनसब को मिठाई बाँटने लगता है और देवरानी अपने पेट पर हाथ रख कर

Devrani:man me)Bhut जल्द बीटा मेरे पति महाराज बलदेव का बीज इस कोख में पालेगा

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 131

पारस

अब शाम होने को थी महल में सब अपने कक्षा में आराम कर रहे थे भूरिया भी अपने कक्षा में आराम कर रही थी और बीते दिन हुए हर घटना को सोच रही थी

Hooriya:man me)Zindagi भी क्या अजीब है कब किस रंग में रंग जाती है समझ नहीं पति हु जिस देवरानी को हम सब एक निहायत हे नेक और हमेशा भगवन की भक्ति में होती थी आअज उसने अपने बेटे से हे नाजायज़ रिश्ता बना ली और ऊपर से शादी भी कर li...Beghairat मुझे भी उकसा रही थी क में शमशेर से chhi..Shamshera वैसे आज कल मेरा बहुत ख्याल रखता है नए कपडे बनवाये मेरे लये शायद मेरा बीटा न होता तो में आज ख़ुदकुशी कर ली होती जिस तरह से सुल्तान ने मुझे ज़लील क्या अपनी छोटी बेगम मुस्कान क सामने मुझे बूढी और बदसूरत कह कर जिन सुल्तान को में दिन रात चाही उनकी मुहब्बत भी झुट्टी और नकारी निकली

भूरिया सोच में डूबी थी तभी दासी अंदर आती है और पलंग पर लेती भूरिया को

Dasi:Mallika इ जहाँ वो आप से मिलने शहज़ादे शमशेर आये है

Hooriya:Bhej दो मेरे बचे को

भूरिया मुस्कुराते हुए कहती है और अपने निक़ाब को ढूंढ़ने लगती है

"ये मेरा हिजाब कहा गया उफ़ "

तभी शमशेर अंदर ाआजाता है और शमशेर की कदमो की आवाज़ सुनते हे भूरिया घूमती है

Shamshera:Ammi जान क्या ढूंढ रहे हो

भूरिया पलट टी है जिसे देख शमशेर अपने पालक झपकाए देखते रहता है



भूरिया एक तंग सूट में क़यामत लग रही थी भूरिया क बड़े बड़े थान देख क जो सूट क कपडे को फाड़ कर आने को तैयार थे शमशेर एक दूसरी दुन्या में चला जाता है

Hooriya:Beta क्या हुआ

भूरिया शमशेर का नज़रो का पीछा करती है जो उसके बदन को छली कर रहा था भूरिया झट से अपने दुपट्टे को खींचती है और अपने भारी मम्मो को छुपा लेती है



अपने सर पर अचे से दुपट्टे को धक् अपने बदन को धक् भूरिया अपने आप में शर्मा जाती है

Hooriya:Shamshera क्या हुआ तुम्हे

भूरिया हल्का सा ुचे आवाज़ से कहती है इस बार शमशेर हडबाता हुआ कांपने लगता है

Shamshera:Ji अम्मी वो ..में वो

Hooriya:Shehzade शमशेर आप कहना क्या चाहते हो साफ़ साफ़ कहो तुम्हारी ताब्यात ठीक नहीं शायद

भूरिया हालत को सँभालते हुए कहती है शमशेर अपने पकडे जाने से बहुत शर्मिंदा था

Shamshera:Han अम्मी जान थोड़ी ताब्यात ठीक नहीं लगती वैसे आप क्या ढूंढ रही थी

Shamshera:man me)Haaye अम्मी मेरी जान इ बहार आप किसी खूबसूरत पारी से बढ़ कर हो आप जैसी पारी को भला मेरे अब्बा जान सुल्तान मेरे वाहिद कैसे मोती और भद्दी कह सकता ह

Hooriya:nahi नहीं वो बास में अपना हिजाब ढूंढ रही थी आओ बैठो

भूरिया मन में) ऐसे घूरे जा रहा था जैसे मुझे खा जायेगा कही उस दिन अपने शर्म गाह पैर हाथ मुझे देख तो हे न फेरा हो ..उफ़ क्या करुँगी ये अगर सच हुआ तो

भूरिया पलंग पर बैठ जाती है और सामने सोफे पैर शमशेर बैठ जाता है

Shamshera:ammi जान आप अपने बेटे क सामने तो बिना निक़ाब क रह सकती है आप ने तो उस दिन वादा क्या था

Hooriya:Han बीटा वो तो ठीक है पर जवान बेटे से पर्दा करना चाहिए वैसे पुराने कपडे हे ठीक थे

Shamshera:Aisa क्यू कह रही हो क्या आप को इसमें ज़्यादा आराम नहीं मिल रहा और इस कपडे में कही से आप बेपर्दा नहीं हो

Hooriya:Theek है बीटा वैसे आज तुम नहीं गए कही घूमने

Shamshera:Kaha जाऊँगा अम्मी

Hooriya:Ab इतने भोले न बनो जहा जाते हो हमेशा

Shamshera:man me)ab अम्मी जान में मैखाने का रुख तो अआप से दूरियों क दर्द का इलाज करने जाता हु और कोठो पर न जाने कितने वैश्यों को आप को सामने रख कर छोड़ता हु

Hooriya:kya सोच रहे हो बोलो भी

Shamshera:Kuch नहीं अम्मी जान में क्यू जाऊँगा कही

Hooriya:Beta तू क्यू नहीं छोर देता ये सब अपने सुल्तान की दावेदारी मज़बूत करने क लये

Shamshera:Man me)Ammi जान अब तो ये रंडीबाज़ी न करने की एक हे वजह हो सकती है वो होगी तुम्हारी Muhabbat..meri वजह बन जाओ अम्मी जान

Shamshera:Ab जब अब्बा जान ने ये ऐलान कर हे दया है क अगला सुल्तान में होऊंगा तो खौफ इस बात की है

Hooriya:beta लोग राज गद्दी पैर बैठने क लये कुछ भी कर सकते है और ख़ास कर जब हमारी कमज़ोर कड़ी पता हो में सोच रही थी अब तुम्हे शादी कर लेनी चाहिए

Shamshera:nahi अम्मी में कोई शादी नहीं कर सकता

Hooriya:Mai तो ज़ोर नहीं दूंगी बीटा करो आवारागर्दी और बनाओ लोगो को मज़बूत अगर शादी कर लो तो शायद तब्दीली ाआजाये और लोग भी तुम्हारे खिलाफ कहे

Shamshera:ammi जान लोगो को जो कहना है कहे पर सिर्फ तख़्त पर बैठने की लालच से में शादी नहीं कर सकता

तभी दासी आती है

dasi:mallika इ जहाँ वो सुल्तान ने आपको याद क्या है

Hooriya:tum जाओ हम मिल लेंगे सुल्तान से जा कर

शमशेर :मन me)Ye सुल्तान तो न तो खुद खुश रखेगा अम्मी को न मुझे साथ रहने देगा

Hooriya:chalo बीटा में ज़रा सुल्तान से मिल लू

Shamshera:man me)Kahi मेरा बाप मेरी अम्मी को अपने हुजरे में ठोकने क लये तो नहीं बुलाया .नहीं ऐसा नहीं हो सकता

Hooriya:Beta ज़रा में अपना हिजाब पहन लू फिर साथ चलते है

भूरिया कक्षा क एक कोने में आईने क पास रखे अपने नए लिबासो में से एक हिजाब उठा कर पहनती है और मुर कर शमशेर की ओरे चल कर आने लगती है



भूरिया लचकती हुई मम्मी और मटकती हुई गांड क साथ एक ऐडा से आकर शमशेर से पूछती है

Hooriya:Kaisa लगा बीटा ये

शमशेर का इस बार अपने अम्मी की चाल देख लैंड खड़ा हो जाता है



Shamshera:man me)aah अम्मी तुम ऐसी माल हो जिसे में ज़िन्दगी भर पेलू तो भी न ठाकु

Shamshera:Maa अआप पर ये रंग ज़्यादा ाचा लग रहा है

Hooriya:shukria बीटा अब चलो चले तुम अपने हुजरे में जाओगे तो चले जाना

Shamshera:ji अम्मी थोड़ा आराम करूँगा ताब्यात ठीक नाह

शमशेर और भूरिया निकल कर सुल्तान मेरे वाहिद क हुजरे क तरफ जाने लगते पर रास्ते में हे शमशेर अपने हुजरे क तरफ मुद जाता है और भूरिया सीधा सुल्तान क हुजरे में चली जाती है

सुल्तान क हुजरे क दरवाज़े पे दोनों दसिआ कड़ी थी उनमे से एक दासी भूरिया को देख मुस्कुराती है

भूरिया को याद आजाता है कैसे उसने दासी क मदद से सुल्तान क कक्षा में प्रवेश कर अपने ायखो से सुल्तान की मुँह से अपनी बुराई सुनी जो सुल्तान मुस्कान से कर रहे थे

भूरिया जैसे अंदर जाती है सुल्तान मेरे वाहिद उठ खड़ा होता है

Sultan:Khushaamdid मल्लिका इ जहाँ हूर इ जहाँ उर्फ़ भूरिया

Hooriya:man me)Tum कैसे गिरगिट की तरह रंग बदल लेते हो सुल्तान तुम्हारे लये तो बरसो में दिन रात एक क्र क खिदमत की हमेशा साथ कड़ी रही सल्तनत बनाने में मदद की और तुम वो चूज़ी मुस्कान क लये मुझे मोती और बदसूरत kaha..tumhe अब मेरी कोई ज़रूरत नहीं तो अब से मुझे भी तुम्हारी ज़रूरत नहीं

Hooriya:Salam सुल्तान शुकरिअ आपका

Sultan:aao मेरे जान

सुल्तान से गले लग जाती है भूरिया

सुल्तान धीरे से भूरिया क कमर पर रखे हाथ को खिसकते हुए निचे ले जाता है जैसे हे इसका अहसास होता है भूरिया पीछे हैट जाती है

Sultan:Ye क्या गुस्ताखी है मल्लिका इ जहाँ

Hooriya:man me)Jab मुहब्बत हे नहीं आपके डिल में सुल्तान तो जिस्मी मुहब्बत का भी हम पर आपका कोई हक़ नहीं

भूरिया मुस्कुराते हुए

"सुल्तान वो कुछ वजह है में बहकना नहीं चाहती"

"क्या मतलब है तुम्हारा हम कितने दिनों बाद मिल रहे है और तुम कहती हो बहकना नहीं पता है हमने ने आपको कितना याद क्या भूरिया"

"Sultaan..aap मेरी बात का गलत मतलब न निकले बात ये है क आज हे मेरा महीना शुरू हुआ है बहक गयी तो आपको पूरा खुश नहीं कर पाऊँगी"

ये कह कर भूरिया अपने ज़ेहन पर इतराते हुए मुस्कुराती है

Sultan:acha तो ये बात है मेरी जान आज रात मुझे आप क साथ सोने की चाहत थी पर

Hooriya:sultan घबराये नहीं में नाज़ को भेज दूंगी आपके तो 4 बीवीए है

Sultan:Biwia तो है पर जो तुम में है वो मज़ा किसी और में नहीं

Hooriya:man me)Jhuti तसल्ली किसी और को देना सुल्तान में सब सच जान चुकी हु

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
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