Doctor Sahab Desi Hindi Sex Kahani - SexBaba
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Doctor Sahab Desi Hindi Sex Kahani

hotaks

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इंट्रोडक्शन

Hero-ansh, उम्र 24 साल. सरीर और दिमाग दोनों से मजबूत.





रूबी- अंश की माँ, उम्र 48 साल.





डॉक्टर Nilam-ansh की मौसी, रूबी की छोटी बहन





रंजू- उम्र 52 साल मेडिकल ऑफिस स्टाफ,

ठाकुर वीरेन के दम पे उछलती है





जरा- उम्र 22 साल, मेडिकल ऑफिस स्टाफ





Shamima-umra 30, रहीम की बेगम. इसे बच्चा नहीं है





AArti-gaav की औरत उम्र 20 साल





Malti-umra 45 साल. मालती की सास, एकदम मोती लेकिन खूबसूरत चेहरा और खड़ूस स्वाभाव



 
इंट्रोडक्शन विथाउट पिक्टुरेस

Hero-ansh, उम्र 24 साल. सरीर और दिमाग दोनों से मजबूत.

अंश की फॅमिली

अंश की माँ -रूबी, उम्र 48 साल.

अंश की छोटी Mousi-Doctor नीलम.

अंश की बड़ी Mousi-Panna.

अंश के बड़े मां- हिरा लाल

अंश की Mami-richa देवी

अंश के कौसिने मां- विवेक

अंश की कौसिने mami-ridhi देवी

अंश के कौसिने मां beta-sohan और मोहन

अंश के छोटी nani-gomti

अंश की बड़ी nani-uroja

मेडिकल ऑफिस के स्टाफ

रंजू- उम्र 52 साल मेडिकल ऑफिस स्टाफ, ठाकुर वीरेन के दम पे उछलती है

जरा- उम्र 22 साल, मेडिकल ऑफिस स्टाफ

गांव के लोग

ठाकुर वीरेन (गांव का ठाकुर और सरपंच)

लालमति devi-Viren की पत्नी.

राम बाबू (वीरेन का कौसिने भाई और पांच में से एक)

सुधा devi-ram बाबू की पत्नी.

sonu-ram बाबू का बीटा.

pinki-ram बाबू की बहु (सोनू की पत्नी)

Shamima-umra 30, रहीम की बेगम. इसे बच्चा नहीं है

AArti-gaav की औरत उम्र 20 साल

Malti-umra 45 साल. आरती की सास, एकदम मोती लेकिन खूबसूरत चेहरा और खड़ूस स्वाभाव

हाकिम के दरबार के लोग

हाकिम सरीफ (एक नंबर का शैतान और ऐय्याश)

ramya-hakim की दासी

nagma-hakim की दासी (ये पढ़ी लिखी औरत है)

guddu-hakim का पालतू गुंडा.
 
Episode 1.

एक गांव जिसका नाम था जवाणीअ. नाम से तो ये गांव जवान है लेकिन रहन सहन ढंग ढंग के हिसाब से आज भी बहुत hi पिछड़ा गांव है. इस गांव में दो लोगो का hi राज चलता है. एक है ठाकुर बिरेन और दूसरे है हाकिम भाई सरीफ. जहाँ बिरेन पैसे और ताकत के बल पे गांव पे राज करता है तो वही हाकिम सरीफ गांव वालों में अंधविस्वास और दर बनाकर राज करता है. सबसे बड़ी बात ये है की न तो कभी हाकिम सरीफ बिरेन के काम में टांग डाटा है और न hi हाकिम सरीफ बिरेन के काम में. ये गांव एक तरफ से तो नदी से घिरा हुआ है तो दूसरे तरफ़ा एक छोटी पहाड़ी से इसलिए ये बाकी सहर से भी थोड़ा कटा और बिछड़ा हुआ है.

अब आते है सीधा कहानी पर. कहानी सुरु होता है दिल्ली के एक हॉस्पिटल से जहाँ एक लड़का अपने केबिन में बैठे कभी अपने मोबाइल को देखता तो कभी सामने पड़ा हुआ एक सरकारी लेटर को. इस लड़के का नाम है अंश. ये पैसे से एक डॉक्टर है. इसके घर में कुल मिलकर 4 लोग है. एक माँ दो छोटी बहने और ये खुद. इसके पिता बहुत साल पहले इस परिवार को छोड़कर कही चले गए. कहाँ गए पता नहीं और ना hi कभी इसकी माँ ने ये बताया की कहाँ गए है. आज इसका सरकारी नौकरी लग चूका है वो भी ब्लॉक मेडिकल अफसर के पोस्ट पर और पोस्टिंग मिली है जवाणीअ गांव में. ये अपने माँ को और दोनों बहनो को बता चूका है की इसकी सरकारी नौकरी लग गयी है लेकिन नौकरी गांव में है ये जान कर वो थोड़ा दुखी है. आखिर दुखी हो भी क्यों न. इस लड़के ने बचपन से गरीबी hi देखि है और इस गरीबी ने इसे बहुत दुःख दिए है. जब इसकी उम्मीद जगी की अब वो एक बड़ा आदमी बनकर सहर में रहेगा तब इसकी पोस्टिंग गांव में हो गयी. हलाकि वो चाहता तो ये नौकरी छोड़कर सहर में hi किसी हॉस्पिटल में काम कर लेता लेकिन इसके सपने बड़े है. इसे एक दिन बहुत बड़ा सरकारी मेडिकल अफसर बन न है और इस सपने के लिए सरकारी नौकरी जरुरी है. उसे ये भी पता है की हर 4 साल में मेडिकल अफसर का ट्रांसफर होता hi होता है तो 3-4 साल में वो ये गांव से निकल hi जायेगा यही सोचकर वो जोइनिंग लेटर को उठता है. अपने बैग में डालता है फिर अपने घर जाकर अपने माँ और छोटी बहनो से मिलता है. सबको बताता है की उसे एक गांव में पोस्टिंग मिली है. सहारा से दूर नौकरी की बात सुन उसकी माँ और बहने भी खुश नहीं थे लेकिन नौकरी तो करनी hi होती है. नौकरी करेगा तभी तो पैसे आएंगे. पैसे आएंगे तभी तो घर चलेगा और वो अपनी बहनो को भी अच्छे से पढ़ा पायेगा साथ hi खुद भी बड़ा ामी बन पायेगा. ये सब सोचते हुए अगले दिन वो ट्रैन पकड़ता है और चल देता है गांव. वैसे तो ये गांव दिल्ली से बहुत दूर नहीं था लेकिन डायरेक्ट रास्ता नहीं था. पहले 6 घंटे की ट्रैन फिर 1 घंटे की बस फिर 1 घंटे की कार के सफर के बाद वो पहुंच गया जवाणीअ गांव. ये तो था कहानी का थोड़ा सा इंट्रोडक्शन अब कहानी हीरो के हिसाब से लिखा जायेगा.
 
Episode 2

मई सुबह के 6 बजे दिल्ली से निकला था और दोपहर के 2 बजे मई यहाँ गांव में था. गांव की सड़क भी बहुत hi ख़राब. खैर सबसे पूछते पचते मई पहुंच गया ब्लॉक मेडिकल ऑफिस. वैसे तो एक ब्लॉक में 10-15 से लेकर 25-30 गांव तक होते है लेकिन यहाँ एक ब्लॉक में सिर्फ दो hi गांव है और ये दो गांव को भी यहाँ के लोग एक hi गांव मानते है.

मई जब मेडिकल ऑफिस पंहुचा तो देखा एक पुराण सा घर था. इसे हम लोग इस तरह से मान सकते है की दो 2भक प्लाट है. एक को मेडिकल अफसर का घर बना दिया गया है तो दूसरे को ऑफिस.

मई जैसे hi कार से उतरा बहार कड़ाके की धुप था. मई धुप से भाग कर तुरंत पेड़ के निचे पंहुचा. ड्राइवर मेरा सामन निकल hi रहा था की मई देखा बिलकुल हलके अक्षरों में एक तरफ लिखा हुआ था चिकित्सा कार्यालय और दूसरे तरफ़ा लिखा हुआ था निवास. मुझे समझ आ गया एक मेरा ऑफिस है तो दूसरा मेरा घर.

मई अभी पेड़ के निचे खड़ा hi था की मेडिकल ऑफिस से दो लोग आये और मेरे सामने खड़े हो गए. दोनों औरते hi थी एक की उम्र 50-52 की रही होगी तो दूसरे की उम्र 24-25 की.

जो बड़ी थी वो मेरे सामने आयी और boli-sir मेरा नाम रंजू है. मई यही काम करती हूँ और ये है जरा ये भी यही काम करती है.

फिर वो निवास के तरफ हाथ दिखते हुए boli-sir ये आपका घर है और ये ऑफिस. हमने दोनों साफ़ करवा दिया है. आप आराम कर सकते है.

मई pucha-yahan खाने पिने का उपाय.

रंजू boli-sir यहाँ तो खुद से बना के खाना पड़ेगा नहीं तो पास होटल है वहां से खाना ले सकते है. मई आपको नंबर दे देती हूँ. आप फ़ोन कर देंगे तो वो आपका खाना घर भी पंहुचा देगा.

मई bola-ji सुक्रिया फिर मई अपना बैग लेकर घर में आया. घर तो ठीक थक hi था. लेकिन घर के आगे और पीछे काफी खुला जगह था. सरकारी घरो और दफ्तरों की यही खास बात है जगह बहुत देते है. मई रंजू के दिए नंबर पे फ़ोन किया तो होटल से एक लड़का मुझे खाना दे गया. मई खाया और सो गया.

जब शाम हुआ तो सोचा एक बार घूम लेते है फिर मई ऐसे hi गांव का एक चक्कर लगाया पास का छोटा बाजार भी घूम आया. आते वक़्त उधर से hi खा कर घर आ गया.

अगली सुबह जब हुआ तो मई ऑफिस आया. ऑफिस में एक बिलकुल नया कंप्यूटर पड़ा हुआ था लेकिन बंद था और उसपर धुल भी लग गया था.

रंजू को बोलै तो रंजू और जरा मिलकर कंप्यूटर साफ़ कर दी और ों भी कर दी. कंप्यूटर में इंटरनेट भी सरकारी से दिया हुआ था जिसका टावर चाट पे लगा था.

रंजू मुझे बताई दो साल पहले hi ये सब लगा है लेकिन पहले यहाँ कोई भी अफसर नहीं था तो ये बंद hi रहता था.

मई कंप्यूटर ों किया फिर ऑनलाइन अपना सारा गवर्नमेंट का मेडिकल पोर्टल खोला. देखा हमे क्या क्या आल्लोट हुआ है. क्या क्या रिपोर्ट है और क्या क्या काम है किसका कब कब डेड लाइन है.

फिर मई जब रजिस्टर और बिल देखा तो पाया की रजिस्टर के बिल में कुछ गड़बड़ी है लेकिन मई कुछ नहीं बोलै बस सब चीजे नोट करके रख लिया.

जब मई सरकारी मेल खोला तो पाया की एक आर्डर आया हुआ है. 10 दिन के अंदर गांव की साड़ी महिलाओ का रिकॉर्ड जमा करना है जो 18 साल से बड़ी है. कौन कितनी पढ़ी है किसके कितने बच्चे है. किसी को कोई बीमारी है या नहीं ये सब.

मई रंजू और ज़रा को बुलाया और bola-dekhiye ऑफिस आर्डर आया है गांव का सर्वे करके फाइल ऑनलाइन जमा करना पड़ेगा.

रंजू boli-arey सर कुछ भी लिख के जमा कर दीजिये.

मई bola-nahi हमे रिपोर्ट अच्छे से बनाना चाहिए.

रंजू boli-arey सर मई बोल रही हूँ न जो मन में आये लिखिए और जमा कीजिये.

रंजू की बात सुनकर मुझे थोड़ा गुस्सा आया.

मई bola-ranju देखो मुझे पता है तुम पैसे में भी इधर उधर करती हो. उसे मई अनदेखा कर दे रहा हूँ क्यूंकि पैसे की रकम बहुत काम है लेकिन कुछ काम तो किया करो. पैसे काम करने के मिलते है.

मेरी बात पे रंजू भड़क गयी.

रंजू अपने जगह से कड़ी हो गयी और boli-doctor साहब ये सहर नहीं गांव है. जैसे सिस्टम चल रहा है चलने दीजिये नहीं तो अच्छा नहीं होगा. वैसे भी यहाँ के ठाकुर मेरे जान पहचान के है.

फिर वो ज़रा के तरफ देखि और मुझे boli-zara इनको बताओ 3 साल पहले जो डॉक्टर आयी थी उसका क्या हुआ. वो भी सिस्टम बदलने चली थी. इसी गांव में उनके पति को मार दिया गया. उसकी बेटी गांव छोड़ कर भाग गयी और वो पागल सी हो गयी. मेरी बात पे यकीं नहीं है न तो कभी अपने घर के पीछे जो झोपडी है उधर देख लेना. जवान हो नया खून है अच्छी बात है खून बचा के रखो बहने लग जायेगा तो दो कदम चलने लायक हिम्मत नहीं बचेगा.

रंजू की बात सुनकर मुझे पहले तो बहुत बुरा लगा फिर मेरे अंदर की भूख जागने लगा. मई सोचा इस गांव से अच्छा जगह हो hi नहीं सकता मुझे मेरा कर्रिएर बनाने के लिए. अगर इस गांव को मई ठीक कर पाया और डॉक्टर को भी इलाज करा के ठीक कर पाया तो मई खुद hi न्यूज़ पपएर में पैसे दे कर ये सब छपवाऊँगा जो बाद में मेरे प्रमोशन में खूब काम आएगा.

मई bola-arey रंजू जी गुस्सा नहीं. आपका जो मन है कीजिये मई तो बस बोल रहा था थोड़ा कृपा मुझपे भी किया कीजिये. सारा पैसा आप अकेले खा जाओगी ये अच्छी बात नहीं है . आपको रिपोर्ट नहीं बनाना है मत बनाइये. ये काम ज़रा करेगी.

ज़रा boli-lekin सर मई कैसे.

मई bola-arey मई हूँ न. सब हो जायेगा. आप लोग जाओ आराम करो मई भी आराम करता हूँ.
 
Episode 3

ऑफिस में अब कोई काम तो था नहीं. रंजू और जरा अपने अपने घर जा चुके थे. मुझे थोड़ा थोड़ा अंदाजा लग रहा था इस गांव के बारे में लेकिन मुझे कोई ऐसा चाहिए था जो अच्छे से इस गांव के बारे में बताये. मई तो इस गांव के लिए अनजान हूँ. रंजू या जरा खुलकर मुझे कुछ बताने से रहे या क्या पता उन दोनों को भी ज्यादा कुछ पता hi न हो. फिर मई सोचा एक बार देख आता हूँ रंजू बात किसकी कर रही है. और मई अपने घर से निकला और पीछे खेतो के तरफ एक झोपडी था वहां चला गया. अंदर झाका तो देखा एक औरत कोई 42-44 की होगी पुराने से कपडे पहने हुए चुप चाप बैठी हुई थी. देखने से तो बिलकुल भिखारी टाइप की लग रही थी.

मई bola-hello एक्चुअली ी ऍम अंश. ी ऍम नई मेडिकल अफसर हेरे.

मई जान बुझ के इंग्लिश में बोल रहा था. मुझे जान न था की क्या अभी भी उन्हें अपनी पढ़ाई लिखाई या पास्ट कुछ भी याद है या सब भूल गयी है.

मई देखा वो मेरी बात सुनी फिर कुछ देर कुछ नहीं बोली.

मुझे लगा ये सचमे पूरी पागल हो गयी है.

और मई मुदा तो पीछे से आवाज aaya-ansh... तुम कहाँ से आये हो.

मई घुमा और bola-dilli से.

वो boli-jinda रहना चाहते हो तो ये नौकरी छोड़ दो या तो ट्रांसफर लेलो.

उसकी बात सुन मई वही बैठ गया और bola-matlab आप पागल नहीं हो. गांव वाले बस पागल समझते है.

वो बस हाँ में सर हिलायी.

मई bola-aap भी तो ये गांव छोड़ कर जा सकते थे अपनी बेटी के पास क्यों नहीं गए.

मेरी बात सुन डॉक्टर के आंख में ाशूँ आ गया.

वो रट हुए boli-ye मेरी झोपडी देख रहे हो. ठीक इसी जगह इन कुत्तों ने हरमिओ ने मेरे पति को मार डाला मेरी बेटी की इज्जत लूटने की कोसिस की. अगर मई पागल बन ने का नाटक नहीं करती तो न मई अपनी बेटी को भगा पति न hi अपनी इज्जत बचा पति.

मई bola-jo बिट गया वो तो कोई नहीं बदल सकता है मैडम लेकिन आप अपना फ्यूचर तो अच्छा कर सकते है. आप पढ़ी लिखी लेडी हो सहर में अपनी बेटी के साथ एक अच्छी जिंदगी जी सकती हो.

वो boli-nahi मई कसम खायी हूँ या तो इसी गांव में तड़प तड़प के मर जाउंगी या फिर इस गांव से उसी दिन जाउंगी जिस दिन ये गांव के वो सरे लोग बर्बाद हो जायेंगे जिस किसी ने मेरे पति मेरी बेटी और मेरी जिंदगी उजड़ी है.

मई bola-aapko पता है न आपक्सा सपना बहुत मुश्किल है खैर कोसिस करते रहिये.

मुझे फिलहाल इस दलदल में नहीं फसना है मई चलता हूँ. आप चाहे तो ये झोपडी छोड़ कर मेरे घर में रह सकते है.

आपसे मिलकर ख़ुशी हुई मिस....

वो boli-nilam...

मई bola-okey डॉ. नीलम ...कंटिन्यू. करो आप...

और मई वहां से उठ खड़ा हुआ और अपने घर आ गया.

मई मन में सोचा कैसे पागल लोग है इस गांव के कौन सही में पागल है कौन पागल नहीं है जब ये भी लोग नहीं जान पा रहे है तो कितना hi दिमाग होगा इन बेवकूफों के पास.

खैर आते hi मई गांव के लड़ाई झगडे में नहीं पड़ना चाहता था. मेरा मकसद साफ़ है पहले अच्छे से सब कुछ जांच परख लो फिर बाद में हिसाब किया जायेगा. सब ठीक रहा तो ठीक गलत हुआ तो झोला बांधो और गायब हो जाओ गांव से.

फिर दोपहर से शाम हुआ शाम को घर से फ़ोन आया. मेरी छोटी बहन ने फ़ोन किया था. मेरी दोनों बहने एक एक करके मुझे हैप्पी बर्थडे विश की. मई तो भूल hi गया था आज मेरा बर्थडे था.

मई पहले अपने बहनो से बात किया फिर अपनी बहन को bola-maa से बात कराओ.

मेरी बहन boli-baat नहीं करा सकते एक सरप्राइज है. बहार जाकर गेट खोलो.

मई बहार गेट खोला तो देखा मेरी माँ बहार कड़ी थी.

मई bola-maa यहाँ आने की क्या जरुरत थी.

माँ boli-kuch जरूरते होती है इंसान की. वैसे भी आज तेरा जन्मदिन है तो सोची क्यों न तुम्हे कुछ सरप्राइज गिफ्ट दिया जाये इसलिए मई चली आयी.

फिर मई माँ को लेकर घर में आ गया.
 
Episode 4

मई माँ के साथ बैठकर बातें करने लगा.

मई bola-maa इतनी दूर से इतनी म्हणत करके आने की क्या जरुरत थी.

माँ boli-jarurat थी बीटा जरुरत थी तभी तो आयी हूँ.

मई bola-maa ये गांव आप लोगों के लिए सेफ नहीं है. देखो यहाँ कितनी दिक्कत है. यहाँ के लोग भी ठीक नहीं है.

माँ boli-beta तू मेरी इतनी चिंता क्यों करता है.

mai-maa करना पड़ता है.

माँ boli-wo सब छोड़ देख तेरे लिए एक अंगूठी लायी हूँ. इसे पहन ले.

फिर माँ मुझे एक अंगूठी दी. ये अंगूठी अजीब सा था. बहुत hi पतला और उसपे एक गहरे लाल रंग का एकदम बिलकुल सुई के नोक जितना छोटा मणि लेकिन मणि चमकदार बहुत था.

जैसे hi वो अंगूठी मई अपने उंगली में पहना देखने से लग hi नहीं रहा था की अंगूठी है. क्यूंकि उसका रंग बिलकुल मेरे उंगलिओ के रंग जैसा था.

मई हसकर bola-maa ये तो पहन ने का बाद पता hi नहीं चलता लेकिन अच्छा बहुत है.

माँ boli-mai यही देने आयी थी. अब मई जाती हूँ.

मई bola-arey माँ इतनी दूर से सिर्फ यही देने आयी थी जब आ hi गयी हो तो काम से काम आज भर तो रुक जाओ.

माँ boli-nahi नहीं बीटा लेकिन तू इतना बोलता है तो एक बार गांव घुमा दे. अच्छे से गांव देख लुंगी फिर चली जाउंगी.

मई माँ को गांव नहीं घूमना चाहता था क्यूंकि यहाँ के लोग मुझे बहुत सही नहीं लगते थे और मई बिलकुल नहीं चाहता था की रंजू या फिर बिरेन की नजर मेरी माँ पे पड़े. लेकिन माँ बोल रही थी और मई सोचा अभी अभी hi तो मई यहाँ आया हूँ. माँ को घुमा देते है नहीं तो उन्हें बुरा लगेगा.

फिर मई माँ को पूरा गांव घुमाया. अंत में माँ जब घर के पास आयी तो boli-ye पीछे झोपडी में कौन रहता है.

अब मई नहीं चाहता था माँ जाने की पिछले डॉक्टर के साथ क्या हुआ है इसलिए मई bola-koi पागल औरत रहती है जाने दो.

माँ boli-arey बीटा तू डॉक्टर है तुमको उसका मदद करना चाहिए. तू ऐसे कैसे बोल सकता है जाने दो. चल मई भी देखती हूँ.

और माँ मेरी बात बिना सुने उस झोपडी के पास चली गयी और अंदर बैठी औरत को देखने लगी. कुछ देर बाद अंदर बैठी औरत भी मेरी माँ को देखने लगी फिर अचानक से वो औरत यानि डॉक्टर नीलम रट हुए boli-didiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

मेरा तो दिमाग hi घूम गया.

डॉक्टर नीलम झोपडी से निकली और सीधा मेरे माँ के गले लग गयी. मई सोचा कही गांव का कोई देख न ले इसलिए फटफट दोनों को घर के पीछे वाले दरवाजे से घर के अंदर ले आया.

माँ भी रोने लगी और डॉक्टर नीलम भी.

माँ puchi-kya हुआ छोटी तो फिर डॉक्टर नीलम रट रट सबकुछ बताने लगी.

मुझे माँ से भी अब बहुत कुछ पूछना था. इतने साल हो गए मुझे आजतक नहीं पता था की हमारी कोई मौसी भी है लेकिन अचानक से ये क्या हो गया. मुझे लगा हो सकता है बचपन में दोनों एक जगह रहे होंगे लेकिन मई तुरंत hi गलत साबित हो गया क्यूंकि माँ boli-ansh बीटा ये तुम्हारी अपनी छोटी मौसी है. तभी मेरे डिंगा में खटका मेरे नाना ने अपनी बेटी का पत्तरों पे रखा है. मेरी माँ का नाम है रूबी और मौसी का नीलम.

माँ boli-nilam तू चिंता मत कर मेरा बीटा है न अब सब ठीक हो जायेगा.

मई तो दिल्ली जा रही हूँ लेकिन तुझे अपने शेर जैसे बेटे के पास छोड़ जा रही हूँ. तुम्हे पता है न इसका नाम अंश है.
 
Episode 5

माँ फिर एक बार मौसी के सर पे हाथ फेरी और घर से बहार आ गयी. मई भी मौसी को वही लेता कर आराम करने का बोलके घर से निकल गया माँ को पास के बाजार तक छोड़ने क्यूंकि टेम्पो भी वही से मिलना था.

जब हम घर से निकले और चलने लगे तो मई माँ से pucha-maa ये सब क्या है. मेरी एक मौसी है ये तुम मुझे आज बता रही हो.

माँ boli-kisne कहा तेरी एक मौसी है. तेरी दो दो मौसी है.

माँ फिर boli-dekh बीटा मई ज्यादा बात तो तुझे अभी नहीं बता सकती लेकिन बस इतना जान ले की मई और तेरे पापा भाग के शादी किये थे. ऐसा hi तेरी दोनों मौसियों ने भी किया है क्यूंकि हमारे घर में प्यार को अहमियत दी hi नहीं जाती है. लेकिन किस्मत देखो मेरे पति मुझे छोड़ के भाग गए. इसके पति मारे गए और पता नहीं बड़ी दीदी का क्या हुआ. जब हमारे घर में अपना कोई बचा hi नहीं तो अपना बोले किसे. मेरी बड़ी दीदी कहा है कैसे मुझे आज तक पता नहीं चला. मेरी छोटी बहन भी इस हालत में है ये मुझे आज पता चला. देख छोटी ने घर में सबसे ज्यादा दुःख दर्द तने सही है. न उसे कभी माँ बाप का प्यार ढंग से मिला और फिर नहीं पति का और न hi वो अपनी जिंदगी सवार पायी. वो पूरी तरह से टूट के बिखर चुकी है लेकिन मई चाहती हूँ तू उसे संभाले. तू ये कैसे करेगा मई नहीं जानती लेकिन मुझे यकीं है तू कर सकता है.

फिर माँ boli-beta मुझे तुमपे पूरा भरोसा है. जिसने भी छोटी का ये हाल किया है उसे सबक जरूर सीखना और सबक ऐसा सीखना की वो जिंदगी भर न भूले.

मई bola-thik है माँ.

माँ boli-ek बात बोलूं बीटा.

maa-mujhe लगता है नीलम का पति जिन्दा है और न केवल जिन्दा है उसी ने नीलम की जिंदगी बर्बाद की है.

मई bola-maa आज पहली बार मौसी से मिले हो शादी के बाद फिर ये बात आप कैसे बोल सकते हो. आप तो कभी मौसा से मिले भी नहीं हो.

maa-ek बार मिली हूँ. उसके जैसा कमीना इंसान को ये मामूली गांव वाले मार hi नहीं सकते. मामला जरूर कुछ और है. हो सकता है मई गलत सोच रही हूँ फिर भी एक बार तू पता करना बीटा.

मई bola-maa अब आप जाओ. इस से पहले की तुम और कोई बात बोलो और मुझे सदमा लग जाये. जब से आयी हो झटके पे झटका दिए जा रही हो.

माँ मुस्कुरायी और मेरे सर पे हाथ फेर कर ऑटो में बैठ गयी. माँ चल दी वापस दिल्ली और मई लौट चला वापस अपने घर.

जब मई वापस अपने घर लौट रहा था तब बहोत सी बातें सोच रहा था.

गांव में ज्यादातर लोग एक दूसरे को जानते है और आज किसी ने नहीं देखा है लेकिन कल नहीं तो परसो कोई न कोई मुझे मेरी मौसी के साथ देख hi लेगा उसके बाद मेरे पीछे लोग मेरे लिए क्या प्लान बनाएंगे मुझे आईडिया भी नहीं होगा लेकिन मौसी की मदद करना भी जरुरी है. मई सोचने लगा क्या करून फिर मुझे आईडिया आया क्यों न मौसी को मई अपने hi घर में रख लून. अगर मौसी गांव वालों को दिखेगी hi नहीं तो 4-5 दिन लोग बातें बनाएंगे फिर भूल जायेंगे और मई मौसी को अपने hi घर में रख कर उनका देखभाल भी कर पाउँगा इलाज भी कर पाउँगा और किसी को ये शक भी नहीं होगा की मेरी मौसी मेरे साथ है. गांव वालों को लगेगा पागल थी hi या तो मर वॉर गयी होगी या कही भाग गयी होगी.

ये सब सोचते सोचते मई घर जा रहा था तभी देखा सामने से रंजू आ रही थी और अचानक मेरे बगल से एक स्कार्पियो निकला जो सीधा रंजू के पास रुका. स्कार्पियो का शीशा निचे हुआ और अंदर से एक भरी आवाज aaya-aur रंजू किधर...

रंजू boli-pranm ठाकुर साहब... अभी बाजार जा रही हूँ तेल लेन.

ुहार से फिर से आवाज आया. जब तेल लेके आना तो मिलना अखाड़े पे.

रंजू सर झुकाई और boli-ji ठाकुर साहब...

और फिर स्कार्पियो का शीशा ऊपर हुआ और संन्न से धुल उडाता हुआ स्कार्पियो निकल गया. पुरे गांव में सिर्फ एक hi स्कार्पियो है और वो है ठाकुर वीरेन के पास.

मुझे अच्छे से पता चल गया क्यों रंजू ठाकुर के नाम पे उछलती रहती है. जब ठाकुर के लुंड पे उछलेगी तो स्वाभाविक है ठाकुर का नाम ले कर भी उछलेगी.

खैर मई चला अपने घर मौसी के पास. मुझे बहुत साड़ी बातें मौसी से करनी है. जब माँ घर पहुंच जाएगंगी फिर मुझे बहुत साडी बाते माँ से भी करना है. एक दिन में मेरे जिंदगी में बहुत कुछ बदल गया है.
 
Episode 6

मई जब वापस घर आया तो देखा मौसी जमीं पर hi सो चुकी थी. उनके आँखों में आशुंओ के बूँद अभी भी नजर आ रहे थे. उनका साड़ी घुटनो तक उठा हुआ था और मुझे नजर आया एक चोट. घुटनो के ठीक निचे चोट था या कहे पूरा घाव हो चूका था. फिर मई धयान से मौसी के हाथ को देखा गले को देखा तो हाथ और गले के चोट भी गांव बनकर सुख चुके थे. उनके पास जो कपडा था वो भी फटा पुराण सा था. मई घर लॉक करके बहार गया और बाजार से 3-4 निघ्त्य और दो सलवार सूट ले आया.

फिर मई ऑफिस से कुछ दवा भी ले आया. अभी मई अपनी मौसी को नहीं बल्कि एक मरीज को देख रहा था. मौसी सोई हुई थी मई उन्हें नींद का इंजेक्शन दिया फिर गॉड में उठाकर बीएड पे ले आया. सबसे पहले तो मई मौसी के सारे कपडे उतरे. मौसी अब सिर्फ एक पंतय में लेती हुई थी. मई मौसी की बदन में जहाँ जहाँ चोट था घाव था सब जगह को अच्छे से साफ़ किया. डेटोल लगाया. चेक करके देखा कही कोई फ्रैक्चर तो नहीं. किस्मत से कही भी फ्रैक्चर नहीं था सिर्फ चोट था. कुछ खून था जो सुख गए था. वो सब साफ़ किया अच्छे से पट्टी किया फिर जो एक नया निघ्त्य लाया था उन्हें पहना कर दूसरे कमरे में चला गया.

मई भी खाना खाया और सो गया. करीब रात के 9 बजे मेरा नींद खुला तो देखा मौसी अपने रूम में बैठी हुई है. मई जब उनके पास गया तो मेरे जाते hi वो मेरे गले लग गयी और फुट फुट के रोने लगी. मई उन्हें चुप करता रहा लेकिन वो कुछ देर रोई उसके बाद थोड़ा शांत हुई. मई समझ सकता था उन्हें इतने दुःख के बाद आज अपनी बहन का फिर भतीजे का सहारा मिला है तो उन्हें थोड़ा सुकून तो मिला hi होगा. मई उनके आंशूं पोछे फिर उनको भी खाना दिया वो खायी.

अब मौसी की हालत थोड़ा ठीक दिख रहा था. मई सोचा आज मौसी को आराम करने देते है कल बात करेंगे. ये सोचकर मई थाली मौसी के सामने से उठाया तो मौसी boli-thank यू अंशु..

मई bola-thank यू की क्या बात है. आप तो मेरी मौसी है और माँ ने मुझे आपका जिम्मा भी सौपा है. आपको ठीक तो करना hi पड़ेगा.

मौसी boli-tum सीधे तरीके से कभी भी न तो ठाकुर वीरेन से जीत पाओगे और न hi हाकिम सरीफ से जीत पाओगे.

मई भी कोसिस की थी की हाकिम सरीफ के झूठ और अंधविस्वास को मिटा दूँ लेकिन बदले में मुझे क्या हासिल हुआ कुछ भी नहीं.

मई bola-mousi आपने जो काम अधूरा छोड़ा है वो मई पूरा जरूर करूँगा ये वडा है मेरा.

मौसी बोली- वीरेन और हाकिम में हाकिम को हराना ज्यादा आसान है. मई भी हाकिम को बस हारने hi वाली थी की मुझे मेरे किस्मत ने धोखा दिया. तुम्हे तो पता hi है ये गांव के ज्यादातर लोग अनपढ़ है. बहुत सरे लोगों ने मेरी बात सिर्फ इसलिए नहीं मणि क्यूंकि मई एक लड़की हूँ. अगर मई लड़का होती तो वो लोग मेरी बात जरूर मान लेते.

इस गांव के बहुत में बहुत साडी औरते है जो माँ नहीं बन पति क्यूंकि उनके पति में कमजोरी है. यहाँ के ज्यादातर मर्द गांव की बानी सरब पिटे है जो उनके स्पर्म को कमजोर कर देता है.

अगर तुम सचमे चाहते हो की तुम इस हाकिम का नाम इस गांव से मिट जाये तो उसका बहुत hi आसान तरीका है तुम्हे गांव के कुछ शादी शुदा लड़कीओ को माँ बनाना होगा. ये गांव के लोग डॉक्टर, मेडिसिन इन सब के बारे में ज्यादा नहीं जानते. तुम्हे बस सुरु सुरु में उन्हें किसी तरह ये बताना पड़ेगा की तुम में कुछ शक्ति है इसलिए सर्कार ने तुम्हे इस गांव में भेजा है. और धीरे धीरे तुम लोगों को पढाई लिखे मेडिसिन इन सब के बारे में बताओगे तो तुम्हारे लिए ये आसान होगा.

मई मौसी की बात सुन कर bola-mousi लेकिन ये गलत है.

मौसी boli-mai इस गांव में दो साल में बहुत कुछ करके देखि हूँ कोई फायदा नहीं हुआ. देखो तुम्हे कितना नॉलेज है तुम्हे क्या आता है इस से गांव वालों को फर्क नहीं पड़ता. उन्हें फर्क पड़ता है सिर्फ एक चीज से वो है उनके पास बच्चा है या नहीं. कहा से आया कैसे आया ये सब समझने जाओगे तो इसी में उलझ जाओगे.

मौसी जो बाते बोल रही थी एक डॉक्टर के लिए वो बाते नियम के हिसाब से तो गलत है लेकिन अगर हम इस गांव के हिसाब से बात करें तो सही है. वैसे भी न जाने वो हाकिम साला गांव की औरतों के साथ क्या क्या करता होगा ये सोच पाना भी मेरे लिए मुश्किल hi है.

मौसी फिर boli-hakim बहुत चालक है वो भगवन की भी पूजा करता है और खुदा की दुआ लेता है. उस कमीने का एक गुरु था जो सिर्फ लोगों से पैसे ठगता था फिर ये हाकिम वहां का हेड बन गया और औरतों के साथ भी खेलने लग गया है.

मई कुछ देर सोचा फिर bola-mousi आप चिंता न करो मई हूँ न मई सब ठीक कर दूंगा. सबसे पहले उस हरामी हाकिम को hi निपटता हूँ.
 
Episode 7

अब मई सोच लिया था की मौसी को अपने घर में रखूँगा इलाज करूँगा साथ hi हाकिम का उपाय करता हूँ. अगले दिन जब में घर से निकल कर ऑफिस आया तो आज रंजू नहीं आयी थी सिर्फ जरा आयी थी.

जरा मुझसे boli-sir वो रिपोर्ट बनाने का काम बहुत मुश्किल है. आप तो जानते hi है गांव में सब औरत के पास जा जा के पूछना पड़ता है बहुत से औरत गुस्सा जाती है बहुत से औरत लोगों के मर्द गुस्सा जाते है.

मई bola-jara वो सब छोड़ो डिटेल में कुछ नहीं भरना है. तुम तो इसी गांव की हो तुमको बस सब औरतो और लड़कीओ के नाम जो 18 साल से ज्यादा के है और जिन लोगों की शादी हो गयी है उनके कितने बच्चे है ये भरना है. तुम्हे कही जाना भी नहीं है. तुम बस बताते जाओ मई कंप्यूटर में भरता जाता हूँ.

ये सुनकर जरा खुश हो गयी. और एक एक करके हर घर में कितनी लड़किया है कितनी औरते है. किसके कितने बच्चे है वो सब बताती गयी मई भरता गया.

करीब दो घंटे में ये काम ख़त्म हो गया.

अब मई सबसे पहले कंप्यूटर में बने फाइल में चेक किया कितनी औरते ऐसी है जिनकी उम्र 30 या उस से ज्यादा है लेकिन बच्चे एक भी नहीं है.

मुझे लिस्ट में लगभग 10 नाम ऐसे दिखे.

मई जरा को pucha-jara इन 10 में से कोई भी हकीम बाबा के पास नहीं गया था क्या.

जरा boli-sab गए थे सर. लेकिन हाकिम बाबा बोले की इनलोगों के जन्म दोष है पिछले जन्म में इनलोगों ने बहुत बुरे काम किये है उसी की सजा है ये.

मई bola-jab हाकिम ने ये बोलै तो इसमें से किसी के मर्द ने कुछ बोलै नहीं.

जरा boli-sir ऐसा मत बोलिये. हाकिम बाबा की बहुत अहसान है इस गांव पे.

मई bola-fir भी.

जरा boli-haan सर एक रहीम है न वो बाबा से बहुत गुस्सा हो गया था लेकिन फिर वो भी क्या करता वापस आ गया.

मई pucha-is बात को कितने दिन हो गए.

जरा बोली-6 महीने.

जरा फिर boli-mai तो सुनी हूँ रहीम अब दूसरा निकाह का सोच रहा है. उसकी बेगम शमीमा बहुत दुखी रहने लगी है.

मई bola-jara तुम मुझे रहीम से मिलवाओगी.

जरा boli-ji सर क्यों नहीं चलिए मई उसका घर आपको दिखा देती हूँ. अगर वो घर पर होगा तो जरूर मिल जायेगा.

फिर मई जरा के साथ चल दिया. गांव में hi एक छोटा सा घर था जो रहीम का था. उसके घर के सामने जाकर जरा आवाज di-rahim भाई रहीम भाई...

अंदर से एक 35-36 साल का आदमी निकला दिखने में पतला दुबला. देख के hi लग रहा था बहुत दारू पिता है क्यूंकि घर के सामने hi एक कोने में बहुत सा देसी दारू का प्लास्टिक पाउच फेका हुआ था.

फिलहाल तो वो होश में था.

रहीम bola-tumhe पहली बार देख रहा हूँ गांव में नया आये हो क्या.

मई bola-ji मई कल hi आया हूँ.

मई फिर bola-baith के बात करें.

रहीम bola-haa क्यों नहीं. और हम दोनों सामने पेड़ के निचे एक खटिया लगा था उसपे बैठ गए.

मई bola-pahle मई हिमालय में था. वहीँ पे पला बढ़ा पढाई लिखे यन्त्र तंत्र विद्या ये सब सीखा. फिर कुछ साल अजमेर में रहा फिर दिल्ली में रहा. वहां भी यन्त्र तंत्र और भी बहुत पढ़ाई किया. मई इतना पढ़ाई किया की सरकार को भी मुझे इस यन्त्र तंत्र के लिए नौकरी देना पड़ा.

रहीम भाई मेरा हमेशा से मकसद रहा है जो दुखी है उनकी मदद करना. मई आपके घर के बगल से गुजर रहा था लेकिन आपके घर से एक अजीब सा रोने का आवाज मुझे आपके घर के तरफ खींच लिया.

रहीम bola-lekin हमारे घर तो कोई नहीं रो रहा.

मई bola-rahin भाई मेरे पास तंत्र मंत्र है. मई सिर्फ बहार की hi नहीं अंदर से रोने की आवाज भी सुन लेता हूँ.

रहीम bola-achha तो बताओ कल रात हमारे घर कौन रोया है.

मुझे रहीम की बात पे इतना हसी आया.

मई bola-tumhari बेगम रोई है.

वैसे भी सेल के घर कोई रोया होगा तो वो इसकी बेगम hi होगी. पक्का दारू पीकर उसको पिता होगा.

मई फिर bola-mujhe ये भी पता है आपको कोई बच्चा नहीं है इसलिए आप बहुत दुखी रहते हो. मुझे ये भी पता है आप हाकिम के पास गए थे लेकिन कोई उपाय नहीं निकला. मुझे ये भी पता है आपके बेगम में पिछले जन्म का दोष है.

अब रहीम मेरी बात ध्यान से सुन रहा था.

मई bola-rahim भाई इतना hi नहीं मेरे पास वो शक्ति है मई आपकी बेगम का पिछले जन्म का दोष ख़त्म कर सकता हूँ.

रहीम का ये बात सुन आंख बड़ा बड़ा हो गया फिर वो bola-mujhe कैसे यकीं होगा की तुम सच बोल रहे हो.

मई bola-jab इतने साल में कुछ नहीं हुआ. हाकिम साहब भी हार मान गए तो एकबार मुझे आजमा के देख लो. मेरी लेकिन दो शर्ट है. पहला ये की इस बारे में तुम गांव में किसी को नहीं बताओगे नहीं तो नजर लग जायेगा. दूसरा तुम्हे मेरी बाते मन नई पड़ेगी जब मई तुम्हारी बेगम पे तंत्र विद्या अपनाउंगा. और हाँ ये बाते अगर तुमसे किसी और तक गयी तो तंत्र मंत्र कमजोर हो जायेगा.

मेरा फर्ज था तो मैंने बोल दिया बाकी मन न न मन न तुम्हारे ऊपर है. हाँ अगर तुम इस बारे में दूसरे से बात करोगे तब ये विद्या काम नहीं करेगी. मुझे लगा तुम्हारी मदद करनी चाहिए इसलिए एक छोटे भाई के हैसियत से आया हूँ. चलता हूँ रहीम भाई...

ये बोलकर मई जरा के साथ वहां से निकल गया.

मुझे कही न कही यकीं था की मेरा तीर निशाने पे जरूर लगेगा.

जब हम ऑफिस लौटे तो जरा मुझे घूर घूर के देख रही थी लेकिन बोल कुछ नहीं रही थी.

मई pucha-kya हुआ जरा तो वो बोली कुछ नहीं सर ...

फिर जरा भी चली गयी. मई भी ऑफिस बंद करके घर में आ गया.

मई मौसी को bola-mousi आप लेट जाओ मुझे आपके चोट चेक करने है.

मौसी boli-uski जरुरत नहीं है अंशु.

मई bola-mousi आप भी डॉक्टर हो मई भी डॉक्टर हूँ. आपको पता है डॉक्टर अपने काम अच्छे से करते है आप लेट जाओ.

मेरी बात सुन मौसी लेट गयी.

कल तो मौसी नींद में थी लेकिन आज होश में थी. मई धीरे से मौसी का निघ्त्य घुटने तक उठा दिया और फिर अपने डॉक्टर वाला कैची उठाया उसमे कॉटन लगाया और डेटोल में डूबा डूबा के मौसी के घुटनो के घाव को फिर से थोड़ा साफ़ किया क्रीम लगा दिया. अब एक चोट मौसी के घुटनो के थोड़ा ऊपर भी था तो मई इस बार निघ्त्य घुटना से थोड़ा और ऊपर उठा दिया.





आज जैसे hi मई निघ्त्य घुटने से थोड़ा ऊपर उठाया मौसी थोड़ा सा पेअर मोदी जिसके कारन अचानक से मेरे सामने मौसी का बुर और गांड आ गया. वैसे तो मई डॉक्टर हूँ फिर भी एक पल में hi मेरा लुंड पूरा खड़ा हो गया और जो मेरा हाल था वैसा hi हाल मौसी का भी था क्यूंकि वो भी शर्म से आंख बंद कर ली. कल जब मई मौसी के कपडे उतरे थे तब मौसी नींद में बेहोश थी और मुझे भी ऐसा कुछ नहीं हुआ था लेकिन आज तो मानो मेरा लुंड में तूफान आ गया. एक बात और भी था जो मई अब नोटिस किया. आज मौसी खुद से नहायी भी थी इसलिए मौसी कल के मुकाबले बहुत अच्छी दिख रही थी.

सायद नहाने में hi उनकी पंतय भीग गयी होगी और मौसी ने उसे खोल दिया होगा तब मुझे अहसास हुआ मौसी के पास सायद एक hi पंतय था. खैर मई मौसी के घुटने के ऊपर के जख्म की भी मरहम पट्टी किया फिर हाथ और पीठ के घाव को साफ़ किया क्रीम लगाया और मौसी को सो जाने को बोल दिया. जब मई वापस जाते जाते के बार मौसी को देखा तो फिर से मुझे उनका बुर और गांड के छेद दोनों दिख गए और उनका बुर और गांड का छेद दोनों न केवल गिला हो चूका था बल्कि जोर जोर से फड़क भी रहा था.





मौसी भले hi शांत होने का दिखावा कर रही थी लेकिन उनके अंदर आग लगा हुआ था ये बात मुझे साफ़ साफ़ पता चल रहा था और ये सब देख कर एक तरफ जहाँ मेरे अंदर जोश भर रहा था वही मई बहुत hi कंफ्यूज भी होता जा रहा था.
 
Episode 8

मई मौसी का मेडिकल चेक उप करने के बाद सो गया.

शाम को नींद तब खुला जब किसी ने दरवाज बजाय. मई उठा आंख मलते हुए दरवाजा खोला तो देखा सामने रहीम था. मतलब मेरा तीर निशाने पे लगा.

मई पहले अपना घर लॉक किया ताकि वी अंदर गलती से भी मौसी को न देख सके फिर उसे लेकर ऑफिस में आ गया.

मई bola-bolo रहीम भाई क्या बात है.

रहीम bola-dekho मुझे तुमपे बहुत भरोसा तो नहीं है लेकिन फिर भी तुम आये और जो कुछ बताये सब सही था. मई भी गांव वालों के ताने सुन सुन कर थक चूका हूँ. मई तो फिर से निकाह करने का सोच रहा हूँ लेकिन तुम बोल रहे हो तो सोचा क्यों न एक मौका दे के देख लेता हूँ. बताओ मुझे क्या करना होगा.

मई bola-karna कुछ नहीं है. कल अपनी बेगम को ले आओ. मई कुछ तंत्र विद्या से चेक करूँगा उसमे पूरा दिन लग जायेगा. ये गांव सही नहीं है तंत्र विद्या के लिए तो मई उसे सिर्फ कल के लिए दूसरे सहर ले जाऊंगा. तुम भी साथ में चल सकते हो. वो bola-thik है.

कल सुबह सुबह मई आ जाऊंगा.

मई bola-subah 8 बजे आ जाना.

फिर वो चला गया.

मई भी अपने घर आया. रात को खाना हम और मौसी को भी खाना दिया फिर सो गए.

रात में करीब दो बजे मुझे अचानक से मौसी के चीखने की आवाज सुनाई दिया.

मई भाग के अपने कमरे से मौसी के कमरे में गया तो देखा मौसी नींद में hi चिल्ला रही थी मुझे मत मारो... इनको मत मरूवू... मत मारो.....

मई तुरंत मौसी के करीब गया और उन्हें जोर से अपने गले लगा लिया. नींद में भी मौसी के आँखों में ाशूँ था. मेरे गले लगते hi धीरे धीरे मौसी शांत हो गयी. मई समझ गया गांव वाले इनको पागल क्यों समझते है. मौसी रात में नींद में ऐसे hi चिल्लाती है और लोग सोचते है ये पागल हो गयी लेकिन ये तो इन्हे लगा सदमा है.

रात में मई और मौसी सो गए.





देर रात अचानक से मेरा नींद खुला और जब नींद खुला तो देखा मौसी की निघ्त्य गांड तक ऊपर हो चूका था. उनकी गांड देखते hi मई धीरे धीरे अपना कण्ट्रोल खोने लगा.

मेरा लुंड पूरा खड़ा हो गया और मुझे अब बर्दास्त नहीं हो रहा था. मई भूलने लगा की मेरे बगल में मौसी सो रही है और मई अपना पेंट शर्ट खोला और अपना लुंड सहलाना सुरु कर दिया.





मई अपना लुंड सहला रहा था फिर भी मुझे चैन नहीं मिल रहा था उल्टा लुंड में अकड़न और दर्द और ज्यादा बढ़ने लगा. मुझे मेरे बगल में मौसी सोई हुई दिख रहा थी..

मई अपना लुंड पकड़ा और मौसी की गांड के गहराई में रगड़ने लगा. मौसी जाएगी थी या सोई थी इसका मुझे अंदाज भी नहीं था मई बस मस्ती में अपना लुंड मौसी के गांड के दरार में रगड़ने लगा.





अब मुझसे बर्दास्त और ज्यादा नहीं हो रहा था. मन करने लगा की मई अपना लुंड मौसी के बुर में नहीं तो गांड में घुसा दूँ लेकिन तब hi मेरा लुंड झटका खाने लगा और पुछठ पुछहःहःहः करके मेरे लुंड से माल निकला जो मौसी के पुरे गांड पे गिर गया.





जैसे hi मेर लुंड शांत हुआ मई भी शांत हो गया तब जाकर मुझे अहसास हुआ की जोश जोश में मई बहुत कुछ गलत करने वाला था. एक तो मौसी ऐसे hi परेशां है ऊपर से मई उनके साथ ये सब करूँगा तो और गलत हो जायेगा मई ये सोच रहा था तभी मेरा नकार मौसी के गांड के छेद पे गया जो पुरे जोश के साथ खुल रहा था और बंद हो रहा था. यही हाल मौसी के बुर का भी था.





मुझे ये तो समझ आ रहा था की मौसी बहुत प्यासी है. साथ hi मुझे ये भी पता है की मौसी बहुत दुखी और टूटी हुई भी है. मुझे हर एक कदम संभल संभल के रखना होगा. ये सब सोच सोच के मई सो गया.
 
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