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अरे मैं भी तो यही चाहती हूँ की मेरी छुटकी ननदिया की कच्ची कच्ची अमिया कचकचा के ये काटें, इनके मन में भी उस कोरे माल के लिए चाहत पैदा हो जाए, फिर उसे पटाना तो मेरे बायें हाथ का खेल है, जबरदस्ती उसकी टाँगे फैलवा दूंगी अपने साजन के लिए, ... इसलिए चिढ़ा के छेड़ के,... मन से इनको तैयार करना चाहती हूँ, इनको,... इनकी बहन के लिए।
आपके हर कमेंट नगीना होते हैं, कहानी का मूल्य हजार गुना बढ़ा देते है, और हर भाग से जुड़ के , मैं कितना भी आभार कहूं कम है।
आपके हर कमेंट नगीना होते हैं, कहानी का मूल्य हजार गुना बढ़ा देते है, और हर भाग से जुड़ के , मैं कितना भी आभार कहूं कम है।