Erotica मोहे रंग दे - Page 63 - SexBaba
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Erotica मोहे रंग दे

आप ने ही तो कहा था भगवान के आगे भोग लगाने का चढ़ावा चढाने का,

तो बस वही भोग लगवा रही हूँ,...

और अपने देवता को तो अक्षत फूल ही चढ़ाना है न, ... इसलिए ये कच्ची कली

;;;;

आपकी ये तारीफ़ मेरा सर चढ़ा देगी, मुझे ये भुलावा दे देगी की मैं भी अच्छा लिख लेती हूँ,.... ये सिर्फ आपका स्नेह है की आप ऐसी लब्ध लेखिका मेरे इस थ्रेड पे आके न सिर्फ कहानी पढ़ रही हैं बल्कि अच्छे अच्छे कमेंट्स से मेरा हौसला भी बढ़ा रही हैं,...

आभार के कोई भी शब्द कम पड़ेंगे
 
taarif to mujhe aapki karni chaahiye aap itte dhyaan se dhairy se story pe saath de rahi hain ,.... aur sex bina romance ke mujhe accha nahi lagata main manti hun ke ek ladki ki jindgi ek yahi cheej jo sabse bade sukh ka bhi karan hoti aur dukh ka bhi , jab marji se hota hai us ka bhi man karta hai maje hi maje hote hain jsi ke liye vo ghar baar chhod sakti hai aur agar jabrdsti huyi sirf hawas ki bhookh mitaane ke liye badle ke liye to uski jindagi ka sabse bada daag ban jaati hai , dukh ka karan hoti hai,... isliye main hemsaha sex ke pahle sedcution aur rajamandi men hi vishavas karti hun

aur yahn bhi sex ke saath romance ka bhi halka sa put, chhedchaad bhi

Thanks again
 
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नवीन वर्ष में नवीन पथ वरो,

नवीन वर्ष में नवीन प्रण करो,

नवीन वर्ष में नवीन रस भरो,

धरो नवीन देश-विश्व धारणा।
 
नूतन वर्षाभिनंदन

और नए वर्ष के पहले दिन एक नयी पोस्ट

इन्सेस्ट गाथा भाग ३९ - माँ, बेटा, बेटी

और बरसात की रात

please do read, enjoy , like and post your comments , best wishes for new year

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Erotica - जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

जोरू का गुलाम भाग २६३ पृष्ठ १६६२ मिसेज मोइत्रा और उनके दामाद ११, ५२५ शब्द -सुपर मेगा अपडेट पोस्टेड कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें

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जोरू का गुलाम

भाग १६४

गुड्डी की ' ख़ास पढ़ाई '

अपडेट पोस्टेड

Please read, enjoy, like and do share your comments , first post on this thread of new year
 
आपके कमेंट इतने सटीक और सहृदय होते हैं जैसा आज तक इस कहानी को छोड़िये मुझे नहीं मिला,

रही रीत की बात, तो रीत रीत निराली,...

कहते हैं चाचा चौधरी का दिमाग कम्प्यूटर से भी तेज चलता है

पर रीत का चाचा चौधरी से भी,... और बनारस का रस तो है ही उस रस की पुतली में,...

बार बार शत बार आभार, धन्यवाद इस सोई खोयी भूली बिसरी कहानी में सांस फूंकने के लिए

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एकदम सही कहा अपने

रीतू भाभी से हार कर ही तो मैंने अपनी ननदों से जीतने की सारी ट्रिक्स सीखीं,

और होली के खेल में ननद भाभी के रिश्ते में हारे कोई , जीते कोई मज़ा दोनों को आता है

लेकिन इस रस को पहचानने के लिए आप ऐसी रसिक रससिक्त हृदया पाठिका मिलना दुर्लभ है,...

:thanks::thanks::thank_you::thank_you:
 
Reet Europe men ek bade khufiya mission pe naam badal ke thi agar aapko yaad hoga ki Phagun ke din chaar ke end men uski poori identity hi change kar ke banars se door bhej diya gaya tha aur apne kisi bhi poorane parchit se vo baat bhi nahi kar sakati thi , kayi deshon ke dusht uske piche pade the isliye use ye sab tairke karane padte hain jisase kisi ko pata naa chale vo kahan pe hai

vo jahan hoti hai vahan to katayi nahi hoti
 
Yahi to sajan sajani ke rishte ka maja hai

aur yahi main is kahani men dikhana chaati thi

is forum men husband wife ke love romance or erotic rishton ki stories bahoot kam hai aur khas taur se paarivaarik mahaul ki ek kasbaayi shahar ki hamaare aaspaas ki

koshish maine vahi ki thi lekin aap aisi reader ko paake vo safal huyi thanks soooooooooo much
 
इस कहानी की सबसे बड़ी परेशानी थी

आप ऐसी पाठिकाओं, पाठकों का अभाव या कमी,... जो सहृदय हों , रसिक हों और धीमी आंच पे पके खाने का रस ले सकें , कई बार पोस्टों के बाद दो या तीन मित्रों के ही कम्नेट्स ही आते थे , ये आपने देखा होगा

लेकिन जो आते थे वो कहानी की भावना को समझने वाले और कहानी की पात्रों के साथ साथ चलने वाले थे, मेरे एक सहृदय मित्र पाठक का कमेंट मैं जस का तस कोट कर रही हूँ

कहानी का प्लाट और उसका एक्जीक्यूशन शानदार है..

विविधता भी है.. डायलॉग भी है... छेड़ छाड़ भी है.. मस्तियाँ भी है...

संवाद में अटैक और काउंटर अटैक भी है...

लेकिन व्यूज और रिप्लाई उतने नहीं मिल पा रहे..

ये आश्चर्यजनक है....

इसके तीन कारण मुझे समझ में आते है...

1. कहीं किसी जगह मैंने सर्वे में पढ़ा था कि किसी इस तरह की वेबसाइट पर जो कंटेंट रोज अपलोड होता है उसे पढ़ने और उस पर रिप्लाई देने के लिए पचास घंटे से ऊपर चाहिए...

लेकिन आदमी अपने सारे काम छोडकर सिर्फ इसी काम में लगा रहे तो भी उसके पास प्रतिदिन 24 घंटे हीं उपलब्ध है...

इसलिए सभी अपने अपने चॉइस से उसी कंटेंट पर जा कर रिएक्ट करते है....

2. शायद ज्यादातर लोगों की चॉइस इंसेस्ट (मम्मी, सगी बहन, पिता और अपना बेटा इत्यादि) है..

इसलिए संभवतः यह कहानी उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता और एक नजर मार कर वो आगे बढ़ जाते है...(शायद ममेरी बहन उन्हें इंसेस्ट में उतना उतेजित नहीं कर पाती..)

3. शायद कुछ क्लोज ग्रुप भी इस साईट पर हों जो किसी ख़ास कहानी का व्यूज बढ़ाने के लिए उस पर रिप्लाई पर रिप्लाई दिए जाते हैं..

जो इस स्वतंत्र, मौलिक और सृजनशील लेखिका को प्राप्त नहीं है...

लेकिन फिर भी लेखिका ने अपनी रचनात्मक शक्ति और कल्पना शीलता नहीं छोड़ी और कई लोगों के विरोध के बावजूद कहानी को अपने रफ्तार से जारी रखा है..

इसके लिए लेखिका स्तुति और अभिनंदन की पात्र है.
.( पृष्ठ २०४ और पोस्ट २०३७ )

और यह अकेले नहीं थे

भाई अच्छी quality हर कोई हज़म नहीं कर पाता, और इनकी कहानी इतनी अच्छी और perfect होती हैं कि वाह के अलावा कुछ लिख ही नहीं सकते।

यह कमेंट था उसी पन्ने पर ( पृष्ठ २०४ ) आखिरी कमेंट के रूप में

पृष्ठ २०१ से २०४ के बीच मात्र चार मित्रों के कमेंट्स

हाँ जिनके कमेंट होते थे वो बहुत हौसला बढाने वाले और साथ देने वाले थे पर जीवन की आपधापी में कई बार उन्हें भी समय नहीं मिलता होगा

और कई बार जब जीवन खुद शुष्क हो जाए कोई नागफनी के जंगल में हो तो उससे रस की एक छोटी से छोटी बूँद का रस का आसव पीने का आग्रह , शायद मेरा ही दुराग्रह हो

वैसे मैं इस कहानी की न आपने सिर्फ आत्मा को समझा उसके अंदर के रस का पान किया और तारीफ़ भी की पहली पोस्ट से लेकर अब तक जब कहानी की चला चली की बेला है ,

कोटिश साधुवाद आभार भी कम होगा

:thank_you::thank_you::thank_you::thank_you::thank_you::thank_you::thank_you::thank_you:
 
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