Fantasy इच्छाधारी देव - Page 29 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

अपडेट - 162

आधी रात को उसे किसी ने उठाया. जब उसने आँखे खोली तो सामने किसी को खड़ा पाया.

ठाकुर – ……….तुम यहाँ……………………

अब आगे…………

अघोरी – तो नयी जिंदगी का जश्न मन चुके? अब कुछ काम की बाटे कर ले?

ठाकुर – अरे कहे का जश्न कोई लोंड़िया तो मिली नहीं ढीली छूट से काम चलना पड़ा. तुम बोलो.

अघोरी – छूट की तो लाइन लगी हुई है तेरे सामने बस देखने की जरुरत है.

ठाकुर बी- मए समझा नहीं

तेरे दुश्मन के घर में छूटो की कमी नहीं है. भूल गया क्या?

अघोरी मुस्करा के बोलै

ठाकुर – है यद् है मुझे लेकिन वह पे खतरा भी है

अघोरी - उसी बात का इलाज लेकर आया हु. तेरा छोटा बीटा मन्नू आ रहा है. अपने पूरे लाव लश्कर के साथ. अभी 4 बज रहे है. ठीक 5.30 बजे वो सामने वाली सड़क से गुजरेगा. तुझे उसे रोकना है और यहाँ लाना है. और उसे सब कुछ बता देना है. और तुम दोनों अपने दुश्मनो पे दो तरफ़ा हमला करोगे. एक तरफ से तुम, दूसरी तरफ से तेरा बीटा. अगर तुम दोनों भी न संभल पाए तो फिर पीछे मए हु hi. कुल मिला कर उस देव और उसके पूरे खंडन की माँ छोड़ने का वक़्त आ गया है. अब तू तैयार हो जा तेरे बेटे के आने का समय होता जा रहा है. मए चलता हु.

इतना सब कह कर अघोरी वह से अदृश्य हो गया. और ठाकुर ने एक पेग लगाया और वाशरूम से हो कर आ गया. और थोड़ा बहोत तैयार हो के वो मैं सड़क तक आ गया. अभी उसे आये हुए कुछ hi देर हुई थी उसे दूर से कुछ गाड़ियों की हेडलाइट नजर आने लगी.

विठल और मन्नू निकल चुके थे. अपने आदमियों के साथ उनके साथ करीब 30 लोग थे. 6 गाड़िया चल रही थी. बीच वाली गाड़ी में मन्नू और विठल बैठे थे. तभी उनकी गाड़िया जबरदस्त ब्रेक लगाती हुई रुक गयी. सरे आदमी गन्स लेकर बहार आये और सामने खड़े ठाकुर पे अपनी गन तान दी.

तभी विठल और मन्नू भी गाड़ियों से निकले. और आगे आये. उनके हाथो में भी गन आ चुकी थी. वो तेजी से सामने पहुंचे तो मन्नू की नजर अपने बाप पे गयी.

मन्नू - अरे पिताजी आप और यहाँ इस वक़्त? उसने इशारे से सबको गन नीचे करने को कहा.

ठाकुर – है बीटा मुझे पता चल गया के तू आने वाला है तो मए यहाँ तेरा hi इंतजार कर रहा था.

विठल – मन्नू क्या ये तेरे पिताजी है?

मन्नू - है विठल भाई

विठल - - नमस्कार बाबू जी अपुन विठल है मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन विठल भाई

ठाकुर ने हैरानी से मन्नू को देखा तो मन्नू ने मुस्करा के है में गार्डन हिलाई

ठाकुर – चलो बीटा बहोत कुछ बाटे करनी है तुमसे. चलो अपने फार्म हाउस पे चलते है. विठल भाई आप सब भी आइये .

फिर सब लोग गाड़ियों में बैठ गए इस बार विठल मन्नू और ठाकुर पहली वाली गाड़ी में बैठ गए और ठाकुर के रास्ता बताने पे साडी गाड़िया उनके पीछे आ गयी. दो मिनट में वो लोग फार्म हाउस पे थे. गाड़ी से उतर के.

मन्नू हमारे इस फार्म हाउस पे भी दुश्मनो का कब्ज़ा हो चुक्का है. लेकिन इस वक़्त उन में से कोई यहाँ नहीं इस लिए मए यहाँ आ पाया हु. ठाकुर ने मन्नू को देखते हुए कहा.

मन्नू - आप चिंता मत कीजिये. हमारे गार्ड्स उन्हें देख लगे.

फिर मन्नू ने वह गार्ड्स की ड्यूटी लगा दी और बाकि सब अंदर आ गए उसी ख़ुफ़िया कमरे में.

मन्नू - है पिताजी अब बताइये क्या कहानी है?

ठाकुर – बहोत बुरा हुआ. तेरे जाने के बाद काफी समय तक तो सब सही चलता रहा फिर एक दिन अचानक मेरी मुलाकात उस दन के बेटे देवा से हुई. मैने उसे एक आम गाँव वाला लोंदा समझा और उस पे धौंस जमनी चाही उसने मेरी hi खटिया कड़ी कर दी.

मन्नू – पूरी बात बताओ क्या हुआ था.

ठाकुर - दन ने मुझसे कुछ क़र्ज़ लिया था. और अपनी ज़मीन का एक टुकड़ा भी गिरवी रखा था. क़र्ज़ चुकाने के लिए उसने मुझसे 6 महीने का वक़्त भी माँगा था. मए जनता था के दन अपना क़र्ज़ 6 महीने में तो चुक्का hi देगा. लेकिन मए चाहता था के वो क़र्ज़ न चुक्का सके इसीलिए मए उसे टेंशन देने लगा और इसी कारन से मैने उसके लोंदे देवा को अपने घर बुलवाया क्यों की मए जनता था के उस वक़्त उसके घर में कोई नहीं है. देवा मेरे पास होगा तो उसकी बहु की इज्जत लूट जाएगी मेरे आदमिया के हाथो

मन्नू तो फिर दिक्कत क्या हुई?

ठाकुर – दिक्कत ये हुई के जब मैने उस देवा को हवेली में बुलवाया और उस पर रॉब झाड़ा तो वो भड़क गया और फिर…………… ठाकुर ने उसे शुरू से सब बताना शुरू किया. सब कुछ जान कर मन्नू के साथ साथ विठल का भी खून खोल उठा,.

मन्नू - बाबू जी उसने न सिर्फ आपका आतंक ख़तम किया बल्कि भैया को अपाहिज बनाया और मेरी बीवी के साथ साथ हमारे घर की हर औरत को छोड़ छोड़ के पेट से किया ये बहोत गलत कर गया वो. अब तो उसे हम से यमराज भी नहीं बचा सकता.

ठाकुर – बीटा उसके साथ कुछ देवीय ताकते भी है और हमारे साथ अघोरी की दी हुई शैतानी ताकते. हम उनका मुकाबला कर लगे लेकिन हमला दो तरफ़ा होगा. और अघोरी का हमला सबसे आखरी में होगा जब हम सब न संभल पाए तब.

विठल - किसी अघोरी की जरुरत नहीं अपुन सब मिल के उन सब को खल्लास कर डालेंगे बापू तुम चिंता मत करो.

मन्नू - आज का दिन उस दन और उसके परिवार का आखरी दिन होगा. जिस तरह उसके लोंदे देवा ने हमारे घर की हर छूट को छोड़ा है और पेट से किया है उसी तरह हम उसके घर की हर छूट को छोड़ेगे बल्कि उसने तो सिर्फ छोड़ा हम उनका बेरहमी से बलात्कार कर के उस के घर की हर छूट के चीथड़े उड़ायेंगे सब के सब अपने आदमी उन्हें नोच डालेंगे. उनका हर छेड़ फाड् देंगे और उस देवा और उसके बाप को तो कुत्ते की मौत मरेंगे.

उधर देवा के घर में उसी रात महाराज भैरव सिंह और सुमंत देव अदृश्य रूप में आते है. सुमंत देव सीधा पायल के कमरे में जाते है और वही जमीन पे आँखे बंद कर के बैठ जाते है. कुछ देर तक वो मंत्र पढ़ते है और फिर अपने दोनों हाथ धीरे धीरे हवा में उठाते है जिससे पायल का पलंग हवा में उठने लगता है उसे गहरी नींद थी. अचानक सड़ अपनी आंखे खोलते है और पलंग को देख के अपना एक हाथ आगे बड़ा के मुठी बंद कर देते है तो वो पलंग पायल समेत गायब हो जाता है. दूसरे कमरे में महाराज भैरव सिंह जी भी ऐसा hi कुछ कर रहे थे दिया और रघु के साथ उन्होंने भी इसी तरह उनका पलंग गायब कर दिया. और बहार आ गए. बहार उन्हें सुमंत देव भी मिले. उन दोनों ने आँखों hi आँखों में इशारा किया और दन के कमरे में पहुंच गए जहा वो और सावित्री देवी निश्चिन्त हो के सो रहे थे. महाराज भैरव सिंह ने वही विधि वह भी अपनायी लेकिन दन का पलंग तस से मास न हुआ. उन्होंने दो चार बार प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली. उन्होंने बेचैनी से सड़ की तरफ देखा.

बीएस - इनको मए गायब नहीं कर प् रहा हु. पता नहीं क्या बात है.

सड़ – रुकिए मए कोशिश करता हु.

फिर सड़ ने भी वही कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुआ.

दोनों hi परेशां हो गए बहोत बार उन्होंने कोशिश की लेकिन हर बार असफलता hi मिली उन्हें.

तभी भैरव सिंह हाथ जोड़ के एक कोने में बैठ गया थोड़ी hi देर में उसका संपर्क फ़कीर बाबा से जुड़ गया

बीएस – बाबा ये हम इन्हे क्यों नहीं ले जा प् रहे है?

फब – महाराज आप इन लोगो को नहीं ले जा पाएंगे ये बात तो मैने पहले hi कही थी के इनके गृह अनुकूल नहीं है इसीलिए आप इन्हे यही छोड़िये इन्हे ये संघर्ष करना होगा यही रह कर, पर आप चिंता न करे इनकी सुरक्षा के लिए देव ने बहोत इंतजाम किये है. आप लोग पूनम के परिवार को भी ले लीजिये और चलिए. क्यों की समय बहोत काम रह गया है.
 
अपडेट – 163

फब – महाराज आप इन लोगो को नहीं ले जा पाएंगे ये बात तो मैने पहले hi कही थी के इनके गृह अनुकूल नहीं है इसीलिए आप इन्हे यही छोड़िये इन्हे ये संघर्ष करना होगा यही रह कर, पर आप चिंता न करे इनकी सुरक्षा के लिए देव ने बहोत इंतजाम किये है. आप लोग पूनम के परिवार को भी ले लीजिये और चलिए. क्यों की समय बहोत काम रह गया है.

अब आगे……

फिर फब, सड़, और बीएस वह से निकल जाते है. और घर में सन्नाटा पसरा हुआ रह जाता है.

जैसे hi दिन निकलता है. और नागार्जुन घर में जाता है तो उसे वह कोई नजर नहीं आता जब की ऐसा कभी नहीं हुआ था के सुबह सुबह जब वो घर में जाये तो उसे सावित्री या दिया नजर न आये. वो तुरंत सब के कमरे देखता है लेकिन सरे कमरे खली पड़े थे. दिया का कमरा पायल का कमरा और दन का कमरा सब खली थे नागार्जुन परेशां हो जाता है. वो यहाँ वह देख रहा था तभी उसे हॉल में टेबल पे एक कागज नजर आता है.

मए दीनानाथ और उसकी पत्नी को उठा के ले जा रहा हु जिसमे हिम्मत है मेरे फार्म हाउस पे आकर उन्हें ले जाये

ठाकुर

ये दो लाइन पढ़ते hi नागार्जुन का गुस्सा सातवे आसमना पे पहुंच जाता है. वो तुरंत शलाका को बुलाता है. उसके यद् करते hi शलाका सामने आ जाती है

शलाका - क्या हुआ जानेमन आज सुबह सुबह बुला लिया?

नागार्जुन का चेहरा कठोर हुआ पड़ा था. शलाका भी भांप जाती है की कोई गंभीर बात है. वो नागार्जुन के हाथ से कागज ले के पढ़ती है तो उसकी भी आँखे लाल हो जाती है.

शलाका - चलो उन कुत्तो की मौत आयी है. ये साला ठाकुर अपनी ज़ात दिखने से बाज नहीं आएगा. देव ने भी पता नहीं क्यों उसे छोड़ दिया. पर आज हम लोग नहीं छोड़ेगे इस नीच को.

तभी वह गुरुम पहुँचता है.

गुरुम - ये लैला मजनू कहा जा रहे है गुस्से में?

शलाका वो कागज गुरुम की तरफ बढ़ा देती है.

गुरुम वो कागज पढ़ के पहले तो गुस्से में आता है लेकिन अचानक वो शांत हो जाता है.

गुरुम - नागार्जुन तेरी सिक्योरिटी कोई मामूली नहीं. ऊपर से तुमने शील्ड कवर भी किया है घर को. फिर ऐसा कैसे हुआ के माँ और बाबू जी को कोई ले के चला गया और तू नहीं जान पाया?

नागार्जुन और शलाका भी अपना गुस्सा भूल कर सोचने लगते है. उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था.

नागार्जुन - चलो कैमरा देखते है

तीनो दौड़ते हुए बेसमेंट वाले रूम में जाते है. और रिकॉर्डिंग चेक करने लगते है…………

……………. कुछ देर तक सब सामान्य दीखता है तो शलाका रिकॉर्डिंग स्पीड बड़ा देती है. कुछ देर बाद उन्हें मैं गेट पे ठाकुर दीखता है. अकेला. वो हाथ बड़ा के कुछ मंत्र पढ़ रहा था. कुछ देर के बाद वो एक तरफ इशारा करता है तो कोई 10 आदमी काळा कपड़ो में नजर आते है जो तेजी से दौड़ते हुए. घर के अंदर घुसते है और एक एक कमरा चेक करने लगते है. सरे hi कमरे खली थे लेकिन दन के कमरे में दन और सावित्री थे जिन्हे वो बेहोश करते है और उठा के ले जाते है. और फिर ठाकुर कैमरा के सामने आकर हस्ता है. और फिर स्क्रीन ब्लेंक

गुरुम – मुझे लगा hi था के ऐसा कुछ होगा लेकिन मए कन्फर्म करना चाहता था. अब मए बताता हु. कोई ऐसी पावर है जिसने नागार्जुन की पावर को थोड़ी देर के लिए लूस किया. इसी बीच माँ और बाबू जी निकले गए. ले जाने वाले तो साधारण लोग थे लेकिन हम में से किसी को पता नहीं चल पाया क्यों की उसकी सहायत की ठाकुर ने जिसके पास कोई पावर आ गयी है अब ये कैसे आयी इसे देखना पड़ेगा.

शलाका – एक मिनट लेकिन वो लोग माँ बाबू जी को ले गए. बाकि लोग कहा गए घर से. उन्हें कौन ले गया.

तभी वह फ़कीर बाबा आते है. तीनो उन्हें नमस्कार करते है.

फब – तुम लोग परेशां मत हो बच्चो बाकि सब सुरक्षित है नागलोक में. इस घर के लोग भी और पूनम के घर के लोग भी. लेकिन देव के ये वाले माँ बाबू जी की जिंदगी खतरे में है. असल में ठाकुर को अघोरी का साथ मिल चूका है. वो तुम लोगो को उलझा रहा है. तुम लोग जा सकते हो वह लेकिन एक बात यद् रखना हवेली वालो की जिम्मेदारी भी तुम्हारी है उन्हें हम नागलोक नहीं ले जा सकते.

लेकिन बाबा…………… गुरुम ने कहना चाहा पर………

फब - इसी के साथ देवा ने जिन लड़कियों को आश्रय दिया है जो उसकी नयी बिल्डिंग में है उन्हें भी बचाना है. और तुम लोग हो सिर्फ चार. और तुम्हरे निशाने है तीन हवेली , नयी बिल्डिंग की लड़किया, और देवा के माँ बाबूजी.

गुरुम – बाबा जब आप सब को यहाँ से ले गए तो माँ बाबू जी को क्यों नहीं ले गए?

फब – बीटा ये बड़ी ताक़तों के फैसले है उन्हें ये संघर्ष पूरा करना है इसीलिए हमारी कोशिशों के बावजूद हम उन्हें नहीं ले जा पाए.

बाबा लेकिन उन लड़कियों और हवेली की लेडीज को तो आप सुरक्षित कर सकते है न. गुरुम बोलै

फब – नहीं बीटा ये हमारी दुनिया के नियम के विरूद्ध है. इस तरह हम पूरी यहाँ की दुनिया वह नहीं ले जा सकते. कुछ बाटे है जो देव यार पूनम से जुडी है जिनकी वजह से जो जो जा सकते थे उन्हें हम ले गए सब को नहीं ले जाया जा सकता. और फिर तुम लोग तो यहाँ हो hi. ईश्वर करेगा सब कुछ तुम्हारी सोच से भी अच्छा होगा. जाओ अब देर मत करो उन्होंने जल फैला दिया है अब जाकर उसे काटो जाओ.

इतना कह कर फब अदृश्य हो गए.

शलाका – मेरा एक विचार है. मए और चन्नो हवेली की लेडीज को ले कर नई बिल्डिंग में पहुंचते है वह पे अभी भी लड़किया है. अगर ठाकुर को पता चल गया तो वो उन्हें बर्बाद कर देगा. हम सब अलग अलग हो के किसी को नहीं बचा पाएंगे. अभी ठाकुर माँ बाबू जी को कुछ नहीं करेगा जब तक हम में से कोई वह नहींपहुचता क्यों की अगर उसे उन्हें मरना hi होता तो वो उन्हें ले के नहीं जाता. जाहिर है वो उन्हें हमारे सामने तड़पा के सुख लेना चाहता है. तो वह जाने का अभी कोई फायदा नहीं. पहले वह चलते है जहा अभी ठाकुर का ध्यान नहीं है,

नागार्जुन – सही कहा तुमने चलो हवेली और वह की चारो लेडीज को अदृश्य कर के नई बिल्डिंग में पहुंचते है.

फिर चारो टेलिपोर्ट हो कर हवेली पहुंचते है. जहा वो माला, कामिनी, रति और ज्योइती को अदृश्य कर देते है. और फिर चन्नो को साथ ले कर सभी सीधे पहुंचते है नई बिल्डिंग. ये वही बिल्डिंग है जो देवा ने शलाका से कह कर बनवायी थी जिसमे उसने विल्सन की गैंग से रिहा करवाई हुई लड़किया राखी है. इसके बारे में बाद में बात करेंगे.

इस वक़्त उस नयी बिल्डिंग में सभी पहुंच चुके थे. 18 लड़किया थी वह. और चार हवेली की लेडीज. और गुरुम एंड पार्टी.

शलाका – नागार्जुन तुम इस बिल्डिंग को बेस्ट सिक्योरिटी और सबसे मजबूत शील्ड दो. तुम जानते हो अब ठाकुर तुम्हारी घर वाली शील्ड को ब्रेक कर चूका है तो ऐसी शील्ड देना की वो साला ब्रेक करना तो दूर उस शील्ड से अंदर भी न झांक सके.

नागार्जुन – निश्चिन्त रहो. अब उसकी एक नहीं चलेगी. उसे यहाँ खली मैदान hi दिखेगा चाहे वो किसी भी शक्ति से देख ले. उसे यहाँ कुछ नहीं दिखेगा. न यहाँ की आवाज़ सुनेगा. इस बिल्डिंग के अंदर के लोगो को वो किसी भी एंगल से ट्रेस नहीं कर पायेगा चाहे कुछ भी कर ले न वो न साला उसका बाप अघोरी. न hi कोई अघोरी का बाप. ये वादा है मेरा.

नागार्जुन तुरंत छत पे जाता है और अपने हाथ फैला के. तेजी से मंत्र पढ़ने लगता है. कोई 5 मिनट तक वो हाथ फैलाये मंत्र पढ़ रहा था. अचानक जहा बिल्डिंग थी वह खली मैदान हो जाता है. कोई वह से निकल भी जाये तो उसे अहसास नहीं होगा. के यहाँ कुछ है. फुल ट्रांसपेरेंट लिखे एयर. जो है तो सही लेकिन किसी को नहीं दिखनी अब .

फिर नागार्जुन नीचे आता है. - अब ये बिल्डिंग हमारे ग्रुप के आलावा किसी को नहीं दिखनी. अब चले माँ बाबू जी के पास. लेकिन चन्नो तुम फिर भी इनके hi साथ रहोगी. और अगर कोई विपरीत हालत सामने नजर आये तो तुरंत हमें आवाज़ देना. हम पल में तुम्हरे पास होंगे.

चन्नो – ठीक है भैया…. आप सब जाइये और माँ बाबू जी को बचाइए क्यों की अगर कुछ भी गड़बड़ हुई तो देव भैया और रूद्र का सामना नहीं कर पाएंगे हम लोग. न hi उनसे नजर मिला पाएंगे. इसीलिए आप लोग सब जाइये यहाँ की चिंता मत कीजियेगा. देव भैया की ताक़त है मेरे पास और उसका मुकाबला करना किसी के लिए भी मामूली बात नहीं है. आप लोग निश्चिन्त रहे.

गुरुम – ध्यान रखना देवा नहीं है, हम सब की जिम्मेदारियां ज्यादा है और इतने सरे लोगो की जिम्मेदारी अभी सिर्फ तुम पर है.

चन्नो – देवा भैया का hi आशीर्वाद है मुझ पर भी आप निश्चिन्त रहिये. सब अच्छा hi होगा. आप लोग जाइये देर मत कीजिये. कही कुछ अनर्थ न हो जाये……………….

नागार्जुन - वो साला रूद्र सही कहता है देव ने एक से बढ़कर एक नगीने चुन रखे है अपनी टीम में. सब जितने मासूम उससे कही ज्यादा खतरनाक. भाई गुरुम तू संभल के रहना इन्हे तो साडी जिंदगी तेरे साथ hi रहना है अब.

ऐसे माहौल में भी नागार्जुन की ये ठिठोली सुन सब के चेहरे पे मुस्कान आ गयी लेकिन हालत की गंभीरता को देखते हुए बाकि सब तुरंत वह से निकल पड़े सब के दिलो दिमाग में अँधिया उड़ रही थी. फ्यूचर का सोच कर.
 
अपडेट 164

ऐसे माहौल में भी नागार्जुन की ये ठिठोली सुन सब के चेहरे पे मुस्कान आ गयी लेकिन हालत की गंभीरता को देखते हुए बाकि सब तुरंत वह से निकल पड़े सब के दिलो दिमाग में आँधिया उड़ रही थी. फ्यूचर का सोच कर.



अब आगे---------


सभी लोग निकल कर ठाकुर के फार्म हाउस पहुंचते है जहा पे इस वक़्त तक करीब 50 गार्ड्स ने पूरे फार्म हाउस को घेरा हुआ था. जो दूर से hi नजर आ रहे थे.

इधर मौत का जाल बिछ चूका था देव के माँ और बाबू जी की जिंदगी मौत की कगार पर थी और उधर तिलिस्मी चक्र में एक महल के छोटे से तालाब या स्विमिंग पूल कह लो उसमे एक के बाद एक पांच बेजान जिस्म पानी पर तैरते नजर आ रहे थे देव, पूनम, रूद्र, नीलम और रजनी ये सब उस नदी के बीच बने कुए (वेल) में गिरे और बेहोश हो गए थे लेकिन निकले थे एक महल के अंदर. और ये सब अभी गाँव के हालत से पूरी तरह अनजान थे.

वो सभी बेहोश थे लेकिन फिर भी कोई डूब नहीं रहा था. सभी लोग पानी में गिरे पत्तो की तरह तैर रहे the.Thodi देर के बाद कोई उन्हें पानी से निकल के. बहार लिटा देता है…….

……चलो भाई तुम लोगो के होश में आने का वक़्त आ गया है………….

और फिर सबसे पहले देव की आंखे खुलती है. सामने देखता है तो मुस्करा देता है. और एक कोने में बैठ के सबके होश में आने का इंतजार करता है. धीरे धीरे सब को होश आ जाता है सबसे आखरी में रूद्र की आंखे खुलती है. और वो जब सबको सुरक्षित देखता है तो खुश हो जाता है लेकिन जैसे hi सामने देखता है.

रूद्र – सेल तू कब आया यहाँ?

खतरा – मए तो परछाई हु आपकी त्रिकाल ने मुझे आपके साथ लगाया है. मए कभी जाता hi नहीं और जाता भी हु तो आपकी खबर रखता हु.

देव – ये कौन सी जगह है?

खतरा – ये त्रिकाल का महल है.

सभी एक साथ - क्या????????????

देव – त्रिकाल का महल?

रूद्र – तो आखिर तूने हमें फांस hi लिया न?

खतरा – मैने कहा कुछ किया तुम लोग hi मेरी बात को हर बार अनसुना कर के आगे बढ़ते रहे और आखिर यहाँ तक पहुंच hi गए. अब चलो अंदर.

सब लोग अंदर जाते है तो अंदर बहोत बड़ा शाही हॉल था दीवारों पे तरह तरह की पेंटिंग्स थी तलवारे लगी हुई थी. जो दिखने में hi बहोत ज्यादा भरी लग रही थी. छत पे विशाल झूमर लटक रहा था. दीवारों पर बड़े hi रोबदार शख्सियत वाले इंसाने की पेंटिंग्स लगी हुई थी. जो अजीब से कपडे पहने था. और कही खड़ा हुआ दिख रहा था तो कही सिंघासन पे शान से बैठा हुआ दिख रहा था.

देव – खतरा ये किस की पेंटिंग्स है यहाँ पर?

खतरा - तुम लोगो को यहाँ बैठने है तो यहाँ की साफ़ सफाई कर लो और फिर आराम करो मए बाद में आउगा और तुम लोगो के खाने पीने का सामान ला दुगा. ........उसने देव की बात को सुना अनसुना कर दिया.

रूद्र – हम लोग क्यों करे यहाँ की सफाई साला नौकर समझा है क्या? अबे सस्ती से सस्ती होटल में भी चले जाओ तो वह भी सब साफ तो मिलता है बैठने को जगह तो मिलती hi है. और तू तो कह रहा था ये त्रिकाल का महल है साला इससे ज्यादा साफ़ तो ढाबा होता है बे. ये कोई महल है अबे भूतिया हवेली है ये सेल शर्म नहीं आती खंडहर को महल कहता है? यही औकात है तेरे उस त्रिकाल की? कुछ नौकर लगा कर महल साफ नहीं कर सकता कहे का भगवन है बे वो?

खतरा – तू जो चाहे बोलता रह रूद्र मुझे गुस्सा नहीं आने वाला. आता हु मए.

इतना कह कर खतरा गायब हो जाता है.

देव – त्रिकाल का महल है ये. यहाँ आना भी सब के नसीब में नहीं होता बे. तुझे तो यहाँ झाड़ू मरने को मिल रही है, खुश किस्मत है तू. चलो शुरू हो जाओ.

रूद्र – वाह बस तू तो ऐसे बोल रहा है जैसे झाड़ू मरने से यहाँ गोल्ड मैडल मिलेगा. कहे की खुशकिस्मती है इसमें.

रूद्र बुरा सा मुँह बना के देव को देखता है. तो देव हंस देता है.

पूनम – क्या देव आप भी रूद्र को परेशां कर रहे है. हम तीनो मिल के सफाई कर देंगे आप निश्चिन्त रहो. फिर तीनो लेडीज सफाई में लग जाती है जब कोई भरी चीज़ हटाने या सरकने की जरुरत पड़ी तो देव और रूद्र ने कर दी. बीच बीच में रूद्र और देव भी उनका हाथ बता रहे थे. कोई 2-3 घंटे के बाद पूरा हॉल चमक रहा था. बस झूमर छोड़ के क्यों के वो बहोत ऊपर था.

रूद्र घूम रहा था वह की हर चीज़ को कोतुहल की नजर से देख रहा था. कभी पेंटिंग्स को छू कर देख रहा था. जिसमे मौजूद शख्स की आखे कुछ खास थी. उसके चेहरे का रौब तस्वीर में भी अलग hi डैम रखता था. , कभी वह तंगी तलवार उठा के देखता जो सच मच काफी वजनी थी और हिरे जेड थे उन तलवारो में लेकिन कही कही से गायब थे. वो भी ये समय की मार hi थी जो हर चीज़ पे दिख रही थी.

फिर यु hi घूमते घूमते उसकी नजर वह प्लेट फॉर्म पे रखे एक हिरन पे गयी नकली होने के नाते वो काफी बड़ा था जिससे वो असाधारण दिख रहा था. उसे देख कर यु लग रहा था अभी छलांग मर के निकल जायेगा आईटी वास् जस्ट रियल. वो बड़े गौर से उस हिरन को देख रहा था. जो सोने का बना हुआ था. और अभी सफाई होने के बाद काफी चमक रहा था. उसकी पीठ पे जहा असली हिरन की पीठ पे काळा गोल निशान होते है. वह इस हिरन की पीठ पे अलग अलग हिरे लगे हुए थे जो चमक रहे थे. लेकिन उस हिरन की आँखों में कुछ नहीं था वह बस दो गधे थे. उसमे से लाल रौशनी निकल रही थी और हल्का हल्का धुआँ सा. जैसे के उसमे आग लगी हुई हो.

रूद्र को बड़ा अजीब लग रहा था के ये कैसा तिलिस्म है सामने पेंटिंग है लेकिन चेहरे असली लग रहे है, तलवारे है उनकी नक्काशी गायब है, इतने अचे हिरन की आंखे इस बुरी हालत में है. अगर इसकी आंखे बना दी होती तो कितना खूबसूरत लगता. फिर वो यु hi टहलता हुआ आगे जाता है तो उसे एक औरत की मूर्ती दिखती है जो अपना एक हाथ कमर पे और एक हाथ सर की तरफ इस अंदाज़ में कर के कड़ी थी मनो वह पे उसने घड़े पकड़ रखे है लेकिन कोई घड़ा नहीं था न उसकी कमर पे न उसकी सर पे.

रूद्र – चूतिये है सेल. खुद को तिलिस्म का किंग मानते है कोई चीज़ परफेक्ट नहीं अब ये इतना खूबसूरत पुतला बनाया है जैसे ये औरत अभी बोल पड़ेगी. कोई गाँव वाली लग रही है. लेकिन इसके घड़े hi चीन लिए या बनाये hi नहीं. अकाल hi नहीं है. और खुद को बहोत बड़े तिलिस्मी जादूगर कहते है लौड़े.

रूद्र यु hi बड़बड़ाते हुए वापस आकर देव के पास बैठ जाता है. तभी वह खतरा आ जाता है. और एक तरफ इशारा कर के खाना लगा देता है.

खतरा – तुम लोग खाना खा के आराम करो और चाहो तो बाटे करो मुझे कोई मतलब नहीं. इतना कह कर खतरा फिर चला जाता है.

सभी लोग खाना खा लेते है. और वही पे लेट के सुस्ताने लगते है कोई एक दो घंटे बाद…….. उन्हें कोने में कोई बैठा नजर आता है.

रूद्र – अबे तू जाता क्यों नहीं हमसे चिपका क्यों हुआ है?

खतरा – यही काम है मेरा

देव – त्रिकाल कहा है?

तभी वह एक रौशनी का बिंदु चमकता है

खतरा हाथ जोड़ के अपना सर झुका देता है – त्रिकाल की जय हो, त्रिकाल महँ है.

त्रिकाल – तुम्हारे काम से मए खुश हु खतरा बढ़िया काम किया तुमने मए तुमसे बहोत खुश हु. इनका ध्यान रखना दो दिन बाद होश में आये है.

देव – दो दिन बाद?

त्रिकाल – है देव यहाँ के समय के हिसाब से दो दिन बाद. दो दिन से तुम लोग इसी तालाब में बेहोश तैर रहे हो.

देव – त्रिकाल हमें यहाँ क्यों लाये हो? जहा तक मए समझता हु तुम हमें कोई नुकसान तो नहीं पहुंचना चाहते क्यों की यदि ऐसा होता तो हम सब दो दिन से बेहोश तुम्हारे सामने थे तुम हमें मार सकते थे या बंदी बना सकते थे पर तुमने ऐसा कुछ नहीं किया. और अब जबकि हम तुम्हारे hi महल में है तो तुम खतरा को हमारा ध्यान रखने को कह रहे हो जैसे हम तुम्हारे मेहमान हो?

त्रिकाल – देव ये सब बाटे बेमानी है इन को छोडो काम की बात कर ले?

………तुम्हे जिस चीज़ की तलाश है वो यही मिलेगी इसीलिए यहाँ हो तुम लोग.

देव – क्या मतलब ?

त्रिकाल – मतलब स्वर्ण मणि

पूनम – लेकिन ……….

त्रिकाल – पूनम तुम अभी कुछ मत सोचो. क्यों की जो मए कहने आया हु वो सुन्ना ज्यादा जरुरी है………………..
 
थैंक्स फॉर योर लवली रिव्यु भाई आपने सही कहा फ़िलहाल अभी यहाँ किसी बल की जरुरत hi नहीं रह गयी है यहाँ तो बुद्धि hi काम करेगी. अब किस की और कैसे ये तो आने वाले उपदटेस में अत चल hi जायेगा. भाई आप लोगो का उतावलापन और उत्साह हम समझ सकते है लेकिन मए पहले भी कह चूका हु के ऑफिस का वर्क लोड अभी बहोत ज्यादा है उस पर स्टाफ को मैनेज करना तो सबसे टेडी खीर होती है. अभी इयरली ऑडिट और गस्त रिटर्न्स का टाइम चल रहा है सो हम ज्यादा गैप तो नहीं करेंगे लेकिन फिर भी एक डैम फुल स्पीड से भी अपडेट नहीं दे पाएंगे. क्यों की जल्दबाजी में अपडेट देने से कई पॉइंट्स छूट जाते है जिससे कहानी का तालमेल या अगर उसे किसी पिछले पॉइंट से लिंक करना हो तो वो छूट जाता है. बूत don't वोर्री ऐसे मोड़ पे लेकर हम काम से काम गायब नहीं होंगे और कोई लम्बा गैप नहीं करेंगे ये वादा है.
 
थैंक्स टाइगर 786 भाई, आपके ढेर सरे रेविएवस के लिए, और मेरे उन सभी पाठको का भी बहोत बहोत धन्यवाद जिन्होंने इस कहानी में मुझे यहाँ तक साथ दिया और अपना कीमती समय दिया. उम्मीद आहे इस कहानी के अंत तक आप सब अपना सहयोग यु hi देते रहेंगे. अभी तो ये सिर्फ 500 पेज का एक पड़ाव मात्र है आगे कहानी बहोत चलनी है. आप सब का साथ hi इसे और बुलंदियों तक ले जायेगा. एक बार फिर धन्यवाद आप सभी लोगो का

अब समय है नए अपडेट का जो बस थोड़ी hi देर में आप सब लोगो के सामने होगा.
 
अपडेट - 165

त्रिकाल – पूनम तुम अभी कुछ मत सोचो. क्यों की जो मए कहने आया हु वो सुन्ना ज्यादा जरुरी है………………..

अब आगे……

…………….तुम जो चाहते हो, जो लेने तुम लोग यहाँ तक आये हो इतनी मुश्किलों का सामना कर के, वो यही इसी महल में है. बस उसे ढूँढना तुम्हारे हाथ में है. और उसे जितनी जल्दी ढूंढो उतना हम सब के लिए अच्छा होगा. क्यों की ये तिलिस्म देव और पूनम के नाम बंधा हुआ है इसीलिए उसे खोलना तो तुम्हे hi होगा. लेकिन देव उसे ढूंढने में तुम्हारे दोस्त भी तुम्हारी सहायता करेंगे. मए जनता हु के तुम सब के दिलो दिमाग में बहोत से सवाल है लेकिन उन सब के लिए अभी न तो ये उचित समय है न hi मौका और हलाकि अभी मए तुम्हे कुछ बता नहीं सकता लेकिन इतना जान लो देव के तुम्हारे पास समय बहोत काम है तुम्हे जल्द hi कही पे पहुंचना चाहिए. कहा ये मए नहीं बताउगा अभी. क्यों के ये मेरे अधिकार छेत्र में नहीं आता. पर यदि तुमने स्वर्ण मणि धुंध ली तो शायद तुम वह पहुंच सको जहा तुम्हे अभी होना चाहिए. इसीलिए समय बर्बाद मत करो और जल्दी से वो आखरी तिलिस्मी टाला ढूंढो और फिर उसे खोलो. अब हम तभी मिलेंगे जब तुम वो तिलिस्मी टाला खोल लोगे जो तुम्हारे नाम से है ढूंढो उसे इसी महल में .

इतना कह कर त्रिकाल या वो रौशनी का बिंदु गायब हो जाता है.

रूद्र - भाई ये तो हमें हमारी मंजिल तक hi ले आये. लेकिन क्यों? त्रिकाल ने तो हमें रोकने की कोशिश की हमें मरवाने की कोशिश की न.

रजनी - ऐसा कुछ नहीं है. त्रिकाल की बातो से तो लगता है के वो hi हमें यहाँ लाया और अब उसी ने हमें ये बताया की स्वर्ण मणि यहाँ है. चलो ढूंढते है.

देव का चेहरा गंभीर होता जा रहा था क्यों की उसे कुछ बुरे की आशंका होने लगी थी उसका मन बेचैन होता जा रहा था. उसने ध्यान लगा का गाँव के बारे में जानने की कोशिश की लेकिन वो सफल न हो सका. जिससे उसकी बेचैनी और बढ़ गयी. उसने नगरी की तरफ ध्यान लगाया लेकिन उसे सिर्फ एक धुंध ली महसूस हुई जिससे देव परेशां हो गया. तभी उसे अपने कंधे पे किसी का हाथ महसूस हुआ उसने पलट कर देखा तो सामने पूनम थी उसकी भी आँखों में चिंता थी.

पूनम – मैने भी कोशिश की देव लेकिन किसी से कोई संपर्क नहीं हो प् रहा है त्रिकाल की बातो ने जहा हमें बेचैन किया है वही एक हलकी सी उम्मीद भी तो दिखाई है न के जल्द से जल्द स्वर्ण मणि को धुंध कर हम यहाँ से निकल सकते है तो समय बर्बाद मत करो अब तो वो स्वर्ण मणि भी इसी महल में है चलो उसे ढूंढते है फिर शायद हमारी इस नयी समस्या का हल भी मिल जाये पता नहीं कौन कौन खतरे में है देव उन्हें हमारी मदद की जरुरत है. जल्दी करो त्रिकाल ने कहा है हमारे पास समय काम है मतलब अभी तक तो सब ठीक है न. बस ये ठीक हालत ज्यादा देर नहीं रहने वाले. तो क्यों न इसी समय में हम यहाँ से निकल कर उन तक पहुंच जाये. चलो देव इस तरह हिम्मत हरने से कुछ नहीं होगा मेरी जान उठो अब चिंता छोडो भोलेनाथ है न वो सब संभल लगे. उठो.

फिर सभी महल में फ़ैल गए और कोई रास्ता ढूंढने लगे. जहा मणि होने का जरा सा भी अंदेशा होता वह देखने लगे इन्शोर्ट उन्होंने पूरा दिन और रत लगा दी और महल का कोना कोना देख लिया लेकिन उन्हें कोई ऐसी जगह नहीं मिली. तो वापस वो हॉल में आ गए. कोई बैठा था तो कोई लेता था. थकावट सब पे हावी हो रही थी. और सबके चेहरों से जाहिर थी.

रूद्र भी आंखे बंद कर के सोच रहा था कुछ.

देव – तुझे क्या हुआ भाई?

रूद्र - कुछ नहीं देव यार इस तिलिस्म का कोई हल नहीं मिल रहा है और अब जब जरुरत है तो साला खतरा भी नजर नहीं आ रहा है. न hi वो शंकर आया है. उधर त्रिकाल ने भी कहा है के जितना जल्दी हो सके तिलिस्मी टेल को खोलना है.

तभी रूद्र की नजर नीलम की तरफ जाती है जो अपनी hi सोच में बैठी थी गुमसुम वो भी शायद इस तिलिस्मी टेल के बारे में hi सोच रही थी और अपनी हाथो में पहनी हीरे की अंगूठी को ऊँगली में घूम रही थी गुरुम एक बार को तो नजर हटा लेता है लेकिन तभी उसके दिमाग में एक धमाका होता है वो बार बार नीलम को उसकी अंगूठी को घूमते हुए देखने लगता है और ख़ुशी से उछाल पड़ता है

रूद्र - yahooooooooooooooooooo……..

देव – अबे क्या हुआ पेट में मरोड़ उठ रही है क्या कूदने क्यों लगा?

रूद्र तेजी से उठकर नीलम के पास जाता है और उसे उठा के गोल गोल घूमने लगता है. और सब के सामने hi उसके होठो को जोर से चुम लेता है

देव – अबे ब्यौरा गया है क्या ये कर क्या रहा है तू? अगर बोलो तो हम सब बहार निकल जाये?

पूनम, रजनी यहाँ तक की नीलम भी रूद्र की ऐसी हरकत से उलझन में थी और नीलम तो शर्म से गाड़ी जा रही थी रूद्र की हरकतों से.

नीलम क्या हुआ जी आपको ? ये कर क्या रहे हो उतरो मुझे नीचे देव भैया और पूनम दीदी के सामने आप ये क्या कर रहे है?

रूद्र – अरे मेरी जान तू नहीं जानत तूने क्या किया है अरे तेरी वजह से मेरे दिमाग का बल्ब जला है इसीलिए तुझे उठा के झूम रहा हु मए.

और देव मेरे यार न तो मए पागल हुआ हु न hi बौराया हु. मए इसीलिए खुश हो रहा हु क्यों की मुझे 99.9% लगता है के मैने ये तिलिस्मी टाला खोल दिया है.

देव, पूनम, रजनी और नीलम चारो ख़ुशी और आश्चर्य से रूद्र का चहकता हुआ चेहरा देख रहे थे.

देव – 99.9% नहीं मेरे यार तूने 100% सही सोचा होगा जो भी सोचा होगा क्यों की फ़कीर बाबा ने कहा था के तेरे और नीलम के बिना यदि हम स्वर्ण मणि तक पहुंच भी गए तो आसानी से वो मणि नहीं ला पाएंगे लेकिन यदि तुम दोनों होंगे साथ में तो हमें ज्यादा दिक्कते नहीं होगी. इसीलिए वो टाला तो तेरे और नीलम की वजह से hi खुलना था अब बता कहा है रास्ता.

रूद्र ऐसे नहीं बताउगा बल्कि वो टाला खोल के दिखाऊगा.

एक काम करो देव वो हिरा दे जरा जो तुझे राजा ने दिया था. उस नगरी से जब हम लोग निकल रहे थे

देव ने तुरंत अपनी जेब से वो हिरा निकल के रूद्र को दिया.

रूद्र – भाभी आप भी वो हिरा मुझे दीजिये

पूनम ने भी चरण अपनी ब्रा में हाथ दाल का हिरा निकला और रूद्र को दिया. रूद्र दौड़ता हुआ उसी सोने के हिरन के पास गया और हिरण की खली आँखों को देखते हुए भगवन को यद् किया और धीरे से एक एक हिरा हिरन की सुनी लेकिन जलती हुई आँखों में फिट कर दिया. हिरे आसानी से बैठ गए.

रूद्र – yahooooooooooo मिल गया रास्ता devvvvvvvvvvvv…………

…………वो राजा ने जो हिरे दिए थे वो हिरे नहीं है इस सोने के हिरन की आंखे है ये देखो वही हिरे इस हिरन की आंख वाली जगह पे कैसे फिट बैठ गए है.

सभी वह आ कर देखते है. सच में हिरे ऐसे लग रहे थे जैसे हिरन की आंखे हो.

नीलम - लेकिन अगर ये कोई राज़ होता या तिलिस्म होता तो आँखे लगते hi कुछ होता न यहाँ तो कुछ हुआ hi नहीं.

पूनम - होगा भी नहीं. क्यों की तिलिस्म देव और मेरे नाम से बंधा है. रूद्र वो हिरे निकल के हमें दो

रूद्र ने हिरन की आंख से हिरे वापस निकल के एक एक हिरा देव और पूनम को दे दिया. और पीछे हैट गया. अब हिरन की आंख में देव ने हिरा फिट किया और दूसरी आंख में पूनम ने. फिर भी कुछ नहीं हुआ. वो लोग धायण से हिरन को hi देख रहे थे के तभी उस प्लेट फार्म में हलचल होने लगी…………

…………. सभी लोग झटके से प्लेट फार्म से नीचे कूद गए और प्लेट फार्म धीरे धीरे अपनी जगह से सरकने लगा. कोई 5-7 मिनट तक वो सरकता रहा और आखिर में वो रुक गया. सभी आगे बढे और उस खली जगह को देखने लगे जहा सीढिया थी लेकिन अँधेरा भी था. देव ने पूनम का हाथ थम के अपना कदम आगे बढ़ाया और फिर पूनम भी आगे बढ़ी जैसे hi दोनों के कदम पहली सीढ़ी पे पड़े वह भरपूर जगमगाहट हो गयी हर चीज़ साफ़ नजर आने लगी. तो देव और पूनम नीचे उतारते चले गए पीछे पीछे रूद्र नीलम और रजनी भी आने लगे. जब वो नीचे पहुंचे तो वह एक शख्स खड़ा मुस्करा रहा था. उसके बाल बहोत लम्बे थे कला लबादा टाइप का कुछ पहने वो अपनी घनी दाढ़ी मूछ में खड़ा था. उसे देखते hi आम इंसाने दर जाये इतना भयानक लग रहा था.

…… आओ देव पूनम मए तुम्हारा hi इंतजार कर रहा था. आज त्रिकाल के सामने आकर तुमने उसी का तिलिस्म तोडा है मए तुमसे बेहद खुश हु

देव – त्रिकाल…………. क्या ये आप हो?

त्रिकाल – है मए hi हु. त्रिकाल…………………
 
यही तो सबसे बड़ा सवाल है भाई अभी हमने वही कहा ऊपर लिब ऍम भाई के रपल्य में . के तिलिस्म तो ख़तम होने को है लेकिन गाँव की हेल्प ये लोग करने के लिए पहुंच पाएंगे या नहीं कह नहीं सकते. सोज़ वह की फील्डिंग तो मस्त है hi दूसरी बात ये लोग भोत दूर है तीसरी बात अभी इन्हे हालत की जानकारी नहीं है. तो सब कुछ होते होते देर न हो जाये.
 
अपडेट – 166

देव – त्रिकाल…………. क्या ये आप हो?

त्रिकाल – है मए hi हु. त्रिकाल…………………

अब आगे…….

देव – लेकिन आप यहाँ क्या कर रहे है?

मए इस तिलिस्म में कैद था और आज तुम्हारी वजह से आज़ाद हो पाउगा.

पूनम - लेकिन हमें तो यहाँ स्वर्ण मणि के लिए भेजा गया था न? या आपको आज़ाद करवाने?

त्रिकाल - है तुम सही कह रही हो पूनम. मए पूरी बात बताता हु. असल में ये सेकड़ो साल पहले की बात है जब मुझे स्वर्ण मणि को सुरक्षित रखने के लिए बड़ी ताक़तों ने चुना क्यों के मेरी विद्या असीम थी कोई मुझसे पार नहीं पा सकता था उन्हें लगा के स्वर्ण मणि को मुझसे बेहतर कोई नहीं संभल सकता. वैसे भी कुछ hi समय में इसके असली वारिस यानि तुम दोनों मुझसे मिल कर ये मणि लेने hi वाले थे. अपने विवाह के उपरांत. क्यों की बड़ी ताकते ये मणि तुम दोनों को विवाह के शुभ अवसर पर उपहार के रूप में देना चाहते थे जिससे तुम दोनों hi अपनी अपनी नागरियो और अपने मित्र राजाओ की नागरियो की सुरक्षा कर सको. इस मणि से तुम दोनों के गृह जुड़े है इसीलिए ये तुम में से किसी एक को नहीं दी जा सकती थी. लेकिन तुम्हारा विवाह होते hi ये समस्या भी ख़तम हो जनि थी और तब मए तुम दोनों को ये मणि दे देता खुद आ कर.

लेकिन तभी वह नगरी में लड़ाई छिड़ गयी जिसमे तुम दोनों की मौत हो गयी . कुछ समय तो ठीक था लेकिन अगर मणि को लम्बे समय के लिए बांध के रखा जाये तो ये मणि उसे भी कैद कर देती है जिसके पास ये हो. और अपने असली हक़दार के आने तक ये अपने सुरक्षा करने वाले को भी अपने साथ बांध देती है. है अगर ये अपने असली हक़दार के पास हो तो कोई बात hi नहीं. अब तुम दोनों तो मर चुके थे. और मुझे इस मणि की सुरक्षा को लेकर दर था. क्यों की ब्रम्हांड में मुझसे भी बड़ी ताकते है. जो किसी भी सूरत से अच्छी तो नहीं थीं ा hi उनका मक़सद स्वर्ण मणि का सदुपयोग करना था. ये भी हो सकता था के कुछ ताकते मिल के अपना आक्रर मुझे से भी दबा कर लेती तो मए अनंत ब्रम्हांड में जिन्दा भटकता रहता वो भी अनंत कल के लिए. जब तक किसी भी तरह ये मणि तुम लोगो तक नहीं पहुँचती. इसीलिए मैने तिलिस्मी चक्र की रचना कर दी. क्यों की मुझे भी इस मणि के साथ hi कैद होना था. मणि के नियम के अनुसार. अब समस्या ये थी के मए सीधे सीधे तुम लोगो की सहायता नहीं कर सकता था. ये तिलिस्म के नियमो के विरुद्ध होता है ये बात पूनम समझ सकती है. क्यों की तिलिस्म यानि एक मौत की पहेली अब ऐसा तो संभव hi नहीं है न की जो पहेली बनाये या पूछे, वही उसका हल भी बता दे. ये नियम के विरुद्ध होता. इसीलिए मैने अपनी ताक़त से ये कहट्रेनक और मौत से भरा तिलिस्म बनाया कदम कदम पर खतरे पैदा किये लेकिन तुम लोगो की सहायता भी मैने hi की परदे के पीछे रह कर. सामने से मए ये नहीं कर सकता था. सबसे पहले तो वो मान चित्र जो तुमने और रूद्र ने हासिल किया वो मैने hi बनाया था. उसके बाद खतरा , ढिबरी, नगरी का राजा ऐसे लोगो को भेज कर. और तुम लोगो को इसी रस्ते पे धकेलता रहा. किन्तु तुम्हारे अंदर एक आम इंसान भी बस्ता है जो काफी दिमाग रखता है और तर्क वितर्क भी करता है. इसीलिए तुम कई बार सही रास्ते पे होते हुए भी इधर उधर होते रहे ये तुम लोगो की गलती नहीं नियति hi थी. और अंत में तुम लोग यहाँ तक आ गए. ……..

…………… वैसे यकीन मनो अगर मए न चहु तो कोई इस तिलिस्मी चक्र में एक कदम भी नहीं बढ़ा सकता. उसकी मौत हर कदम पे निश्चित है. लेकिन तुम लोगो को कुछ नहीं हुआ. क्यों के इसके कुछ कारन भी थे. एक तो ये के स्वर्ण मणि के साथ मेरी आज़ादी भी बंधी हुई थी. दूसरी बात तुम सब के गृह एक साथ मिले हुए थे. तीसरी बात इस स्वर्ण मणि के तुम लोग hi असली हक़दार थे. कोई अन्य ताक़त तो उस रेगिस्तान को hi पर न कर पति यहाँ तक आना तो दूर की बात है. और ऐसा हुआ भी था कई ताक़तों ने प्रयास किया भी लेकिन उन्हें मिली तो सिर्फ मौत.

रूद्र – अब तो आप आज़ाद हो hi गए न त्रिकाल?

त्रिकाल - अभी नहीं जब देव और पूनम आकर मुझे छू लगे तब मए आज़ाद हो जाउगा.

देव – स्वर्ण मणि कहा है त्रिकाल……….?

उधर………. गुरुम, नागार्जुन और शलाका ने अपने मैजिक से खुद को निंजा ड्रेस से कवर किया जो की फुल्ली लोडेड थी निंजा वेपन्स से तीनो के चेहरे फुल्ली कवर थे. उनके हाथ में मोजर भी थे मग्स भी पॉकेट में थे, जेब में निंजा स्टार्स और पीठ पे कतनास लगी हुई थी. गुरुम ने दोनों को इशारा किया तो नागार्जुन और शलाका उछलते हुए बिना आवाज़ किये दूर दूर हो गए और पोजीशन ले ली और गुरुम को देखने लगे. गुरुम ने अपनी तीन उंगलिया निकली और एक एक कर के डाउन करने लगा जैसे hi तीसरी ऊँगली डाउन हुई तीनो ने सीलेंसर लगे मौजेर्स से गोलियों की बारिश कर दी जो गार्ड्स बहार टहल रहे थे बंदूके ले कर वो धड़ाधड़ गिरने लगे. देखते hi देखते उन्होंने बहार टहल रहे 15 गार्ड्स को मार गिराया. वो भी उन लोगो के कुछ समझने से पहले. जब तक बाकि के गार्ड्स कुछ समझते वो गिनती में काम हो चुके थे. बाकि के गार्ड्स ने पोजीशन ले ली. और फायरिंग करने लगे हलाकि उन्हें अभी अपने दुश्मनो की संख्या ताक़त और पोजीशन तक का पता नहीं था. न hi वो उन्हें अभी नजर आ रहे थे क्यों के ये लोग पेड़ो की आड़ में थे . और जगह बदल बदल के फायरिंग कर रहे थे. जब बहार का मैदान साफ हो गया और कोई नजर नहीं आ रहा था तो. ये लोग वेट करने लगे लेकिन अंदर से कोई भी नहीं निकला.

तो गुरुम आगे बड़ा लेकिन उस पर कोई फायरिंग नहीं हुई. वो फार्म हाउस के गेट तक पहुंच गया और वह आड़ में पोजीशन ले कर पीछे इशारा किया तो पहले नागार्जुन फिर शलाका आ गए. लेकिन तब भी उन पर कोई हमला नहीं हुआ.

गुरुम - दुश्मन बहोत चालक है वो हमें मौका दे रहा है के हम उनकी रेंज में आये. क्यों की अब तक हम छुपे हुए थे अब वो छुपा हुआ है.

नागार्जुन - प्लान क्या है?

गुरुम - प्लान ा वेट करते है, प्लान बी अंदर चलते है.

शलाका - प्लान बी इतना कह कर वो उठकर सीढ़ी कड़ी हो गयी और आराम से अंदर जाने लगी.

गुरुम - डेरिंग तो डेरिंग hi सही चलो उठो आराम से अंदर चलते है. इन की गोलिया हमारा वैसे भी घंटा कुछ नहीं बिगड़ पायेगी.

नागार्जुन और गुरुम भी उठकर खड़े हुए और अंदर की तरफ चल पड़े शलाका ने अंदर के दरवाजे पे हाथ रखा और उसे धकेल के एक डैम साइड हो गयी अंदर से गोलियों की बाद सी आयी जो हवा में hi गम हो गयी कज्यू की सामने निशाना कोई था hi नहीं.

जैसे hi अंदर से गोलिया चलनी बंद हुई नागार्जुन गुरुम और शलाका ने एक डैम से अंदर जम्प मार दी और गोलिया चलने लगे जिसकी रेंज में कई लोग आये और लुड़कते चले गए. अंदर उन्होंने 20 आदमी मर गिराए. कुछ गोलिया उन पे भी चली जो उन्हें छिलती हुई निकल गयी लेकिन इन पर कोई फरक नहीं पड़ा. जख्म तो तुरंत hi हील हो रहे थे इनके.

तभी ठाकुर की आवाज़ आयी – तुम लोग जो कोई भी हो मुझे उससे मतलब नहीं है. देवा को बोलो अगर उसके माँ बाप जिन्दा चाहिए तो सामने आये.

नागार्जुन – चूहों को मरने के लिए शेर मैदान में नहीं आते ठाकुर. जिन्दा रहना चाहता है तो माँ बाबू जी को हमारे हवाले कर दे.

ठाकुर गन्दी हसी हस्ता हुआ सामने आया.

ठाकुर - देवा और शेर? अरे वो चूहे से भी बदतर है. साला होगा मर्द तो सामने आएगा न पता नहीं किस के पेटीकोट में छुप के बैठ गया मुझसे दर के. अपने माँ बाप को छुड़ाने के लिए ये भाड़े के टट्टू भेज दिए. और तू क्या बोलै रे गांडू माँ , बाबू जी? अबे वो तुझे अब कभी नहीं मिलेंगे. तेरे उस देवा ने मेरे बेटे को मारा, इस बूढ़े दीनानाथ ने मेरे बेटे को जेल भिजवाया, मेरे घर की इज्जत ख़राब की, हमारे ठाकुर खंडन की हर औरत को उसने पेट से कर दिया और अपनी तरफ मिला लिया, हमारी पूरी जिंदगी को बर्बाद कर दिया. तू क्या समझता है मए उसके माँ बाप को जिन्दा छोड़ दुगा. नहीं कभी नहीं. बल्कि मए उन्हें वो मौत दुगा के मौत भी काँप जाएगी. ा….. ले के आओ रे उन दोनों को……….

तभी एक आदमी दन को घसीटता हुआ लाया दन की हालत बहोत ख़राब हो चुकी थी वो खून से नहाया हुआ था. शायद उसके हाथ पाँव की हड्डिया भी टूट चुकी थी. ठाकुर ने उसे बहोत मारा था.

गुरुम– Thakurrrrrrrrrrrrrrrrr………… तेरी माँ का भोसड़ा, बहनचोद suar…sale गन्दी नेल के कीड़े…………………
 
Hello फ्रेंड्स कुछ ज्यादा नहीं सिर्फ सॉरी hi कहुगा आप लोगो को इतना इंतजार करवाने के लिए. और इतने दिनों में मेरे बहोत से रीडर्स ने मुझे कमेंट किये है कई सरे नए रीडर्स भी जुड़े है जिन्होंने इस स्टोरी को पढ़ा है मए आप सभी को धन्यवाद देना चाहता हु. थैंक यू वैरी मच आल. और अब टाइम है एक मस्त अपडेट का तो चलिए नए अपडेट की तरफ चलते है.
 


अपडेट – 167


गुरुम– Thakurrrrrrrrrrrrrrrrr………… तेरी माँ का भोसड़ा, बहनचोद suar…sale गन्दी नेल के कीड़े…………………

तूने बाबू जी की ये हालत की…….. तू तो गया …………. गुरुम ठाकुर की तरफ लपकने लगा.

ठाकुर - जोश में मत आ बच्चे. तू मेरी झांट भी नहीं उखड सकता यकीन न हो तो चला गोली गन तेरे हाथ में है hi. लेकिन उससे पहले इस रांड सावित्री को भी देख लो . लाओ रे उस छिनाल को…….

तब दूसरा आदमी सावित्री को बालो से पकड़ के घसीटता हुआ लाया उसके बदन पे इस वक़्त सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट था और वो ब्लाउज भी बस लटक hi रहा था उसके गोर चुचो पे खरोचने के निशान थे जिससे खून रिस रहा था., उसके चेहरे पे भी मार के निशान थे होठो से खून बाह रहा था. पेटीकोट भी जगह जगह से फैट चूका था और उसकी गोरी जंघे भी कई जगह से खून बहा रही थी जैसे उन्हें भी खरोंचा गया हो., नोचा गया हो या दांतो से कटा गया हो. ये सब देख कर जहा गुरुम और नागार्जुन ने आँखे बंद कर ली और उनकी आँखों से आंसू निकल आये वही.

शलाका – ठाकुर कुत्ते की aulaaaaaaaaaadd…… मए तेरा खून पि जोगी हरामजादे. तू नहीं जनता तूने अपनी भयानक मौत को आवाज़ दी है. इन्हे तो हम ले के जायेगे. और तू मरेगा आज बहोत बुरी मौत मरेगा तू.

मन्नू - चिंता मत करो इस सावित्री की ये हालत सिर्फ मार की वजह से है अभी तक हम में से कोई इसके ऊपर चढ़ा नहीं है सिर्फ इसके जिस्म को जख्मी hi किया है. इस के ऊपर चढ़ने का मन तो बहोत हो रहा था इस उम्र में भी जवान लड़की को मात देने वाला बदन है इसका. लेकिन तुम लोगो का hi इंतजार था क्यों की हम इसे तुम सब की स्पेशली देवा की आँखों के सामने छोड़ना चाहते थे. चलो देवा न सही तुम सब तो हो वैसे ये छमिया कौन है बहोत कड़क मॉल दिख रही है जरा नक़ाब तो हटा मेरी जान और अपना खूबसूरत मुखड़ा दिखा मुझे फिर तुझे नंगी कर के यही छोड़ूगा, मन्नू साइड से निकल के बोलै.

नागार्जुन - ओह्ह्ह तो सांप के साथ सपोला भी है. तभी ये सांप इतना फड़फड़ा रहा है.

विठल – ा कबूतरों तुम लोग का नाच गण ख़तम हुआ चलो हथियार दाल दो. वार्ना

गुरुम - विठल……… तो तू है इन के साथ मुझे जनता है तू?

विठल - कौन है बे तू साला?

गुरुम - वही जिसके नाम से पूरा अंडरवर्ल्ड काँपता है मादरचोद. मए हु ये देख और गुरुम ने अपना मास्क उतर फेंका

विठल – ओह्ह्ह तेरी …….. गुरुम? अबे तू इनके साथ कहे को खड़ा है इधर आ तुझे जितना मॉल मांगता है अपुन देगा तेरे को. ले आ इस छमिया को.

गुरुम – तू क्या मुझे माल देगा कुत्ते, तेरे जैसे 100 विठल यही खड़े खड़े खरीद के फेंक सकता हु मए. तू मेरी कीमत नहीं लगा सकता क्यों के उसके लिए जिगर और जमीर चाहिए जो तेरे पास नहीं है तू इन जैसे कुत्तो को खरीद सकता है. बस.

इतना कह कर गुरुम ने अपनी गन सीढ़ी की और वह खड़े गुंडों पे फायरिंग कर दी. शलाका ने भी दो शॉट मरे और विठल और मन्नू के हाथो से गन निकल गयी. ठाकुर हड़बड़ा गया. इनकी ऐसी फुर्ती और दिलेरी देख कर क्यों की ये लोग ऐसी हरकत ऐसे हालत में कर जायेगे उनमे से किसी को सपने में भी उम्मीद नहीं थी. गुरुम और शलाका देख चुके थे के नागार्जुन ने सावित्री और दन को स्पेशल शील्ड कवर दे दिया है अब न तो उनकी जनदगी को कोई खतरा हो सकता था न hi उन्हें वह कोई छू सकता था.

इन तीनो के आलावा.

अंधाधुंध फायरिंग होने लगी गुरुम , नागार्जुन और शलाका बीच हॉल में खड़े हो कर चारो तरफ फायरिंग कर रहे थे क्यों की इन पे गोलिया असर करने नहीं वाली थी. थोड़ी देर की फायरिंग के बाद तीनो ने अपनी गन वही फेंक दी और अपनी कतनास निकल के बचे हुए गुंडों पे टूट पड़े. और उन्हें काटने लगे. इतना भयानक मंजर देख कर. विठल की हालत ख़राब हो गयी और वो मन्नू का हाथ पकड़ के साइड में ले गया .

विठल - मन्नू ये लोग तो ट्रेंड है बे. काटते hi जा रहे है सबको. निकल यहाँ से. दुबारा आएंगे इधर वैसे भी तेरा बदला पूरा हो चूका है वो देख दन आखरी साँसे गईं रहा है. बच भी गया तो किसी काम का नहीं रहा अब.

मन्नू – लेकिन विठल भाई मेरा बाप अभी फंसा हुआ है. मए नहीं जा सकता.

विठल - छोटे मुंबई में तेरे पास सब कुछ है. कहे को छोटे से लफड़े में पद के अपनी जिंदगी बर्बाद करता है कभी कभी पीछे हटना समझदारी कहलाता है. तेरा एक दुश्मन ख़तम हो गया ये दन अब तेरे दूसरे दुश्मन का वेलकम अपुन मुंबई में करेगा अपने बाप की ये हालत देख कर वो वह जरूर आएगा जहा अपुन मजबूत होयेगा. तेरे बाप से पूछ वो चलता है तो ले चल उसे भी. और दो गोली और मार दे दन की छाती में.

मन्नू धीरे धीर ठाकुर के पास पहुँचता है. – बाबू जी यहाँ से निकलना है. चलो मेरे साथ.

ठाकुर – कैसी बात करता है उस मादरचोद देवा ने हमारा खंडन छोड़ डाला और तू ऐसे hi जाना चाहता है.

मन्नू - उसे भी देख लगे अभी उसे चोट तो दे hi दी है और वैसे भी अभी वो यहाँ है नहीं . जब लौटेगा तो हमारे पीछे जरूर आएगा तब उसे लपेट लगे निकलो यहाँ से अभी.

उधर नागार्जुन , शलाका और गुरुम ने बचे हुए गुंडों को मार दिया था. और ठाकुर विठल और मन्नू को धुंध रहे थे. लेकिन वो लोग निकल चुके थे.

गुरुम - - मए उनके पीछे जाता हु. उन्हें आज मिटा दुगा मए. इतना कह कर गुरुम तेजी से बहार भगा जहा से विठल की कार जा रही थी. गुरुम की स्पीड बहोत ज्यादा तेज थी जैसे कोई गाड़ी 150 की राफ्तेर से चल रही हो. उसने चलती कार में हाथ दाल के विठल का गाला दबाया और उसे खिंचा बहार जो खिड़की से बहार निकल आया कार लहराती हुई सामने के पेड़ से जा टकराई गुरुम ने अपना हाथ ऊपर किया और उसके हाथ में कटना आगयी. उसने तेजी से कटना चलाई और विठल के टुकड़े करना चालू कर दिया कुछ hi पालो में वह विठल की कटी फटी लाश पड़ी थी. मन्नू की ये देख के hi गांड फैट गयी वो अपने बाप के पीछे जाने लगा तो गुरुम ने वही से फेंक के कटना मन्नू पे मरी जो गोल गोल घूमती हुई मन्नू की एक तंग को घुटने से स्विफ्टल्य काटती हुई निकल गयी. गुरुम दौड़ के वह पंहुचा तो उसके सामने ठाकुर आ गया और ठाकुर ने मन्नू का हाथ पकड़ा और कुछ मंत्र पढ़े जिससे वो दोनों तुरंत गायब हो गए. गुरुम उन्हें ढूंढने लगा लेकिन वो नहीं मिले. तो गुरुम वापस आया.

गुरुम – विठल को तो काट दिया मैने और मन्नू की अभी एक तंग hi कटी थी के ठाकुर उसे ले के गायब हो गया उसके पास अघोरी की ताक़त थी वो अब नहीं मिलने वाला लेकिन उसको ढूंढने की कोशिश करो तुम शलाका.

शलाका – नहीं उन्हें देव के लिए छोड़ दो. हम उन्हें मिटा सकते है लेकिन अभी नहीं. नुकसान तो हमारा बहोत होना था. लेकिन सब ठीक है कुछ ज्यादा गड़बड़ नहीं हुई. ये अघोरी को मिटाना पहले जरूरी है.

तभी शलाका चौंक उठी.

शलाका – ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह देव…… दीव आ गया… वो लोग आ गावे है गाँव में. मुझे देव बुला रहा है मए जाती हु तुम इन्हे सम्भालो मए सबको यही लती हु अभी

उधर तिलिस्मी चक्र में …………….

त्रिकाल – मुझे छूटे hi मणि सामने आ जाएगी क्यों की मणि को पता चल जायेगा के उसके असली वारिस आ चुके है. फिर वो मुझे छोड़ के तुम्हारे पास आ जाएगी.

देव और पूनम ने एक दूसरे की आँखों में देखा और आगे बढ़ के महाकाल यानि त्रिकाल को छुआ. त्रिकाल के शरीर में करंट सा दौड़ गया, एक जबरदस्त रौशनी का धमाका हुआ जिससे कुछ पल तक तो इन लोगो की आँखे भी चुंधिया गयी. फिर वो रौशनी थमी और सामने एक खूबसूरत चमकदार कपड़ो में शख्स खड़ा था जो महाकाल यानि त्रिकाल था.

त्रिकाल – धन्यवाद देव, पूनम . आज आप लोगो की वजह से मुझे इस कैद से मुक्ति मिली.
 
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