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- Dec 5, 2013
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आधी रात को उसे किसी ने उठाया. जब उसने आँखे खोली तो सामने किसी को खड़ा पाया.
ठाकुर – ……….तुम यहाँ……………………
अब आगे…………
अघोरी – तो नयी जिंदगी का जश्न मन चुके? अब कुछ काम की बाटे कर ले?
ठाकुर – अरे कहे का जश्न कोई लोंड़िया तो मिली नहीं ढीली छूट से काम चलना पड़ा. तुम बोलो.
अघोरी – छूट की तो लाइन लगी हुई है तेरे सामने बस देखने की जरुरत है.
ठाकुर बी- मए समझा नहीं
तेरे दुश्मन के घर में छूटो की कमी नहीं है. भूल गया क्या?
अघोरी मुस्करा के बोलै
ठाकुर – है यद् है मुझे लेकिन वह पे खतरा भी है
अघोरी - उसी बात का इलाज लेकर आया हु. तेरा छोटा बीटा मन्नू आ रहा है. अपने पूरे लाव लश्कर के साथ. अभी 4 बज रहे है. ठीक 5.30 बजे वो सामने वाली सड़क से गुजरेगा. तुझे उसे रोकना है और यहाँ लाना है. और उसे सब कुछ बता देना है. और तुम दोनों अपने दुश्मनो पे दो तरफ़ा हमला करोगे. एक तरफ से तुम, दूसरी तरफ से तेरा बीटा. अगर तुम दोनों भी न संभल पाए तो फिर पीछे मए हु hi. कुल मिला कर उस देव और उसके पूरे खंडन की माँ छोड़ने का वक़्त आ गया है. अब तू तैयार हो जा तेरे बेटे के आने का समय होता जा रहा है. मए चलता हु.
इतना सब कह कर अघोरी वह से अदृश्य हो गया. और ठाकुर ने एक पेग लगाया और वाशरूम से हो कर आ गया. और थोड़ा बहोत तैयार हो के वो मैं सड़क तक आ गया. अभी उसे आये हुए कुछ hi देर हुई थी उसे दूर से कुछ गाड़ियों की हेडलाइट नजर आने लगी.
विठल और मन्नू निकल चुके थे. अपने आदमियों के साथ उनके साथ करीब 30 लोग थे. 6 गाड़िया चल रही थी. बीच वाली गाड़ी में मन्नू और विठल बैठे थे. तभी उनकी गाड़िया जबरदस्त ब्रेक लगाती हुई रुक गयी. सरे आदमी गन्स लेकर बहार आये और सामने खड़े ठाकुर पे अपनी गन तान दी.
तभी विठल और मन्नू भी गाड़ियों से निकले. और आगे आये. उनके हाथो में भी गन आ चुकी थी. वो तेजी से सामने पहुंचे तो मन्नू की नजर अपने बाप पे गयी.
मन्नू - अरे पिताजी आप और यहाँ इस वक़्त? उसने इशारे से सबको गन नीचे करने को कहा.
ठाकुर – है बीटा मुझे पता चल गया के तू आने वाला है तो मए यहाँ तेरा hi इंतजार कर रहा था.
विठल – मन्नू क्या ये तेरे पिताजी है?
मन्नू - है विठल भाई
विठल - - नमस्कार बाबू जी अपुन विठल है मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन विठल भाई
ठाकुर ने हैरानी से मन्नू को देखा तो मन्नू ने मुस्करा के है में गार्डन हिलाई
ठाकुर – चलो बीटा बहोत कुछ बाटे करनी है तुमसे. चलो अपने फार्म हाउस पे चलते है. विठल भाई आप सब भी आइये .
फिर सब लोग गाड़ियों में बैठ गए इस बार विठल मन्नू और ठाकुर पहली वाली गाड़ी में बैठ गए और ठाकुर के रास्ता बताने पे साडी गाड़िया उनके पीछे आ गयी. दो मिनट में वो लोग फार्म हाउस पे थे. गाड़ी से उतर के.
मन्नू हमारे इस फार्म हाउस पे भी दुश्मनो का कब्ज़ा हो चुक्का है. लेकिन इस वक़्त उन में से कोई यहाँ नहीं इस लिए मए यहाँ आ पाया हु. ठाकुर ने मन्नू को देखते हुए कहा.
मन्नू - आप चिंता मत कीजिये. हमारे गार्ड्स उन्हें देख लगे.
फिर मन्नू ने वह गार्ड्स की ड्यूटी लगा दी और बाकि सब अंदर आ गए उसी ख़ुफ़िया कमरे में.
मन्नू - है पिताजी अब बताइये क्या कहानी है?
ठाकुर – बहोत बुरा हुआ. तेरे जाने के बाद काफी समय तक तो सब सही चलता रहा फिर एक दिन अचानक मेरी मुलाकात उस दन के बेटे देवा से हुई. मैने उसे एक आम गाँव वाला लोंदा समझा और उस पे धौंस जमनी चाही उसने मेरी hi खटिया कड़ी कर दी.
मन्नू – पूरी बात बताओ क्या हुआ था.
ठाकुर - दन ने मुझसे कुछ क़र्ज़ लिया था. और अपनी ज़मीन का एक टुकड़ा भी गिरवी रखा था. क़र्ज़ चुकाने के लिए उसने मुझसे 6 महीने का वक़्त भी माँगा था. मए जनता था के दन अपना क़र्ज़ 6 महीने में तो चुक्का hi देगा. लेकिन मए चाहता था के वो क़र्ज़ न चुक्का सके इसीलिए मए उसे टेंशन देने लगा और इसी कारन से मैने उसके लोंदे देवा को अपने घर बुलवाया क्यों की मए जनता था के उस वक़्त उसके घर में कोई नहीं है. देवा मेरे पास होगा तो उसकी बहु की इज्जत लूट जाएगी मेरे आदमिया के हाथो
मन्नू तो फिर दिक्कत क्या हुई?
ठाकुर – दिक्कत ये हुई के जब मैने उस देवा को हवेली में बुलवाया और उस पर रॉब झाड़ा तो वो भड़क गया और फिर…………… ठाकुर ने उसे शुरू से सब बताना शुरू किया. सब कुछ जान कर मन्नू के साथ साथ विठल का भी खून खोल उठा,.
मन्नू - बाबू जी उसने न सिर्फ आपका आतंक ख़तम किया बल्कि भैया को अपाहिज बनाया और मेरी बीवी के साथ साथ हमारे घर की हर औरत को छोड़ छोड़ के पेट से किया ये बहोत गलत कर गया वो. अब तो उसे हम से यमराज भी नहीं बचा सकता.
ठाकुर – बीटा उसके साथ कुछ देवीय ताकते भी है और हमारे साथ अघोरी की दी हुई शैतानी ताकते. हम उनका मुकाबला कर लगे लेकिन हमला दो तरफ़ा होगा. और अघोरी का हमला सबसे आखरी में होगा जब हम सब न संभल पाए तब.
विठल - किसी अघोरी की जरुरत नहीं अपुन सब मिल के उन सब को खल्लास कर डालेंगे बापू तुम चिंता मत करो.
मन्नू - आज का दिन उस दन और उसके परिवार का आखरी दिन होगा. जिस तरह उसके लोंदे देवा ने हमारे घर की हर छूट को छोड़ा है और पेट से किया है उसी तरह हम उसके घर की हर छूट को छोड़ेगे बल्कि उसने तो सिर्फ छोड़ा हम उनका बेरहमी से बलात्कार कर के उस के घर की हर छूट के चीथड़े उड़ायेंगे सब के सब अपने आदमी उन्हें नोच डालेंगे. उनका हर छेड़ फाड् देंगे और उस देवा और उसके बाप को तो कुत्ते की मौत मरेंगे.
उधर देवा के घर में उसी रात महाराज भैरव सिंह और सुमंत देव अदृश्य रूप में आते है. सुमंत देव सीधा पायल के कमरे में जाते है और वही जमीन पे आँखे बंद कर के बैठ जाते है. कुछ देर तक वो मंत्र पढ़ते है और फिर अपने दोनों हाथ धीरे धीरे हवा में उठाते है जिससे पायल का पलंग हवा में उठने लगता है उसे गहरी नींद थी. अचानक सड़ अपनी आंखे खोलते है और पलंग को देख के अपना एक हाथ आगे बड़ा के मुठी बंद कर देते है तो वो पलंग पायल समेत गायब हो जाता है. दूसरे कमरे में महाराज भैरव सिंह जी भी ऐसा hi कुछ कर रहे थे दिया और रघु के साथ उन्होंने भी इसी तरह उनका पलंग गायब कर दिया. और बहार आ गए. बहार उन्हें सुमंत देव भी मिले. उन दोनों ने आँखों hi आँखों में इशारा किया और दन के कमरे में पहुंच गए जहा वो और सावित्री देवी निश्चिन्त हो के सो रहे थे. महाराज भैरव सिंह ने वही विधि वह भी अपनायी लेकिन दन का पलंग तस से मास न हुआ. उन्होंने दो चार बार प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली. उन्होंने बेचैनी से सड़ की तरफ देखा.
बीएस - इनको मए गायब नहीं कर प् रहा हु. पता नहीं क्या बात है.
सड़ – रुकिए मए कोशिश करता हु.
फिर सड़ ने भी वही कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुआ.
दोनों hi परेशां हो गए बहोत बार उन्होंने कोशिश की लेकिन हर बार असफलता hi मिली उन्हें.
तभी भैरव सिंह हाथ जोड़ के एक कोने में बैठ गया थोड़ी hi देर में उसका संपर्क फ़कीर बाबा से जुड़ गया
बीएस – बाबा ये हम इन्हे क्यों नहीं ले जा प् रहे है?
फब – महाराज आप इन लोगो को नहीं ले जा पाएंगे ये बात तो मैने पहले hi कही थी के इनके गृह अनुकूल नहीं है इसीलिए आप इन्हे यही छोड़िये इन्हे ये संघर्ष करना होगा यही रह कर, पर आप चिंता न करे इनकी सुरक्षा के लिए देव ने बहोत इंतजाम किये है. आप लोग पूनम के परिवार को भी ले लीजिये और चलिए. क्यों की समय बहोत काम रह गया है.
आधी रात को उसे किसी ने उठाया. जब उसने आँखे खोली तो सामने किसी को खड़ा पाया.
ठाकुर – ……….तुम यहाँ……………………
अब आगे…………
अघोरी – तो नयी जिंदगी का जश्न मन चुके? अब कुछ काम की बाटे कर ले?
ठाकुर – अरे कहे का जश्न कोई लोंड़िया तो मिली नहीं ढीली छूट से काम चलना पड़ा. तुम बोलो.
अघोरी – छूट की तो लाइन लगी हुई है तेरे सामने बस देखने की जरुरत है.
ठाकुर बी- मए समझा नहीं
तेरे दुश्मन के घर में छूटो की कमी नहीं है. भूल गया क्या?
अघोरी मुस्करा के बोलै
ठाकुर – है यद् है मुझे लेकिन वह पे खतरा भी है
अघोरी - उसी बात का इलाज लेकर आया हु. तेरा छोटा बीटा मन्नू आ रहा है. अपने पूरे लाव लश्कर के साथ. अभी 4 बज रहे है. ठीक 5.30 बजे वो सामने वाली सड़क से गुजरेगा. तुझे उसे रोकना है और यहाँ लाना है. और उसे सब कुछ बता देना है. और तुम दोनों अपने दुश्मनो पे दो तरफ़ा हमला करोगे. एक तरफ से तुम, दूसरी तरफ से तेरा बीटा. अगर तुम दोनों भी न संभल पाए तो फिर पीछे मए हु hi. कुल मिला कर उस देव और उसके पूरे खंडन की माँ छोड़ने का वक़्त आ गया है. अब तू तैयार हो जा तेरे बेटे के आने का समय होता जा रहा है. मए चलता हु.
इतना सब कह कर अघोरी वह से अदृश्य हो गया. और ठाकुर ने एक पेग लगाया और वाशरूम से हो कर आ गया. और थोड़ा बहोत तैयार हो के वो मैं सड़क तक आ गया. अभी उसे आये हुए कुछ hi देर हुई थी उसे दूर से कुछ गाड़ियों की हेडलाइट नजर आने लगी.
विठल और मन्नू निकल चुके थे. अपने आदमियों के साथ उनके साथ करीब 30 लोग थे. 6 गाड़िया चल रही थी. बीच वाली गाड़ी में मन्नू और विठल बैठे थे. तभी उनकी गाड़िया जबरदस्त ब्रेक लगाती हुई रुक गयी. सरे आदमी गन्स लेकर बहार आये और सामने खड़े ठाकुर पे अपनी गन तान दी.
तभी विठल और मन्नू भी गाड़ियों से निकले. और आगे आये. उनके हाथो में भी गन आ चुकी थी. वो तेजी से सामने पहुंचे तो मन्नू की नजर अपने बाप पे गयी.
मन्नू - अरे पिताजी आप और यहाँ इस वक़्त? उसने इशारे से सबको गन नीचे करने को कहा.
ठाकुर – है बीटा मुझे पता चल गया के तू आने वाला है तो मए यहाँ तेरा hi इंतजार कर रहा था.
विठल – मन्नू क्या ये तेरे पिताजी है?
मन्नू - है विठल भाई
विठल - - नमस्कार बाबू जी अपुन विठल है मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन विठल भाई
ठाकुर ने हैरानी से मन्नू को देखा तो मन्नू ने मुस्करा के है में गार्डन हिलाई
ठाकुर – चलो बीटा बहोत कुछ बाटे करनी है तुमसे. चलो अपने फार्म हाउस पे चलते है. विठल भाई आप सब भी आइये .
फिर सब लोग गाड़ियों में बैठ गए इस बार विठल मन्नू और ठाकुर पहली वाली गाड़ी में बैठ गए और ठाकुर के रास्ता बताने पे साडी गाड़िया उनके पीछे आ गयी. दो मिनट में वो लोग फार्म हाउस पे थे. गाड़ी से उतर के.
मन्नू हमारे इस फार्म हाउस पे भी दुश्मनो का कब्ज़ा हो चुक्का है. लेकिन इस वक़्त उन में से कोई यहाँ नहीं इस लिए मए यहाँ आ पाया हु. ठाकुर ने मन्नू को देखते हुए कहा.
मन्नू - आप चिंता मत कीजिये. हमारे गार्ड्स उन्हें देख लगे.
फिर मन्नू ने वह गार्ड्स की ड्यूटी लगा दी और बाकि सब अंदर आ गए उसी ख़ुफ़िया कमरे में.
मन्नू - है पिताजी अब बताइये क्या कहानी है?
ठाकुर – बहोत बुरा हुआ. तेरे जाने के बाद काफी समय तक तो सब सही चलता रहा फिर एक दिन अचानक मेरी मुलाकात उस दन के बेटे देवा से हुई. मैने उसे एक आम गाँव वाला लोंदा समझा और उस पे धौंस जमनी चाही उसने मेरी hi खटिया कड़ी कर दी.
मन्नू – पूरी बात बताओ क्या हुआ था.
ठाकुर - दन ने मुझसे कुछ क़र्ज़ लिया था. और अपनी ज़मीन का एक टुकड़ा भी गिरवी रखा था. क़र्ज़ चुकाने के लिए उसने मुझसे 6 महीने का वक़्त भी माँगा था. मए जनता था के दन अपना क़र्ज़ 6 महीने में तो चुक्का hi देगा. लेकिन मए चाहता था के वो क़र्ज़ न चुक्का सके इसीलिए मए उसे टेंशन देने लगा और इसी कारन से मैने उसके लोंदे देवा को अपने घर बुलवाया क्यों की मए जनता था के उस वक़्त उसके घर में कोई नहीं है. देवा मेरे पास होगा तो उसकी बहु की इज्जत लूट जाएगी मेरे आदमिया के हाथो
मन्नू तो फिर दिक्कत क्या हुई?
ठाकुर – दिक्कत ये हुई के जब मैने उस देवा को हवेली में बुलवाया और उस पर रॉब झाड़ा तो वो भड़क गया और फिर…………… ठाकुर ने उसे शुरू से सब बताना शुरू किया. सब कुछ जान कर मन्नू के साथ साथ विठल का भी खून खोल उठा,.
मन्नू - बाबू जी उसने न सिर्फ आपका आतंक ख़तम किया बल्कि भैया को अपाहिज बनाया और मेरी बीवी के साथ साथ हमारे घर की हर औरत को छोड़ छोड़ के पेट से किया ये बहोत गलत कर गया वो. अब तो उसे हम से यमराज भी नहीं बचा सकता.
ठाकुर – बीटा उसके साथ कुछ देवीय ताकते भी है और हमारे साथ अघोरी की दी हुई शैतानी ताकते. हम उनका मुकाबला कर लगे लेकिन हमला दो तरफ़ा होगा. और अघोरी का हमला सबसे आखरी में होगा जब हम सब न संभल पाए तब.
विठल - किसी अघोरी की जरुरत नहीं अपुन सब मिल के उन सब को खल्लास कर डालेंगे बापू तुम चिंता मत करो.
मन्नू - आज का दिन उस दन और उसके परिवार का आखरी दिन होगा. जिस तरह उसके लोंदे देवा ने हमारे घर की हर छूट को छोड़ा है और पेट से किया है उसी तरह हम उसके घर की हर छूट को छोड़ेगे बल्कि उसने तो सिर्फ छोड़ा हम उनका बेरहमी से बलात्कार कर के उस के घर की हर छूट के चीथड़े उड़ायेंगे सब के सब अपने आदमी उन्हें नोच डालेंगे. उनका हर छेड़ फाड् देंगे और उस देवा और उसके बाप को तो कुत्ते की मौत मरेंगे.
उधर देवा के घर में उसी रात महाराज भैरव सिंह और सुमंत देव अदृश्य रूप में आते है. सुमंत देव सीधा पायल के कमरे में जाते है और वही जमीन पे आँखे बंद कर के बैठ जाते है. कुछ देर तक वो मंत्र पढ़ते है और फिर अपने दोनों हाथ धीरे धीरे हवा में उठाते है जिससे पायल का पलंग हवा में उठने लगता है उसे गहरी नींद थी. अचानक सड़ अपनी आंखे खोलते है और पलंग को देख के अपना एक हाथ आगे बड़ा के मुठी बंद कर देते है तो वो पलंग पायल समेत गायब हो जाता है. दूसरे कमरे में महाराज भैरव सिंह जी भी ऐसा hi कुछ कर रहे थे दिया और रघु के साथ उन्होंने भी इसी तरह उनका पलंग गायब कर दिया. और बहार आ गए. बहार उन्हें सुमंत देव भी मिले. उन दोनों ने आँखों hi आँखों में इशारा किया और दन के कमरे में पहुंच गए जहा वो और सावित्री देवी निश्चिन्त हो के सो रहे थे. महाराज भैरव सिंह ने वही विधि वह भी अपनायी लेकिन दन का पलंग तस से मास न हुआ. उन्होंने दो चार बार प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली. उन्होंने बेचैनी से सड़ की तरफ देखा.
बीएस - इनको मए गायब नहीं कर प् रहा हु. पता नहीं क्या बात है.
सड़ – रुकिए मए कोशिश करता हु.
फिर सड़ ने भी वही कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुआ.
दोनों hi परेशां हो गए बहोत बार उन्होंने कोशिश की लेकिन हर बार असफलता hi मिली उन्हें.
तभी भैरव सिंह हाथ जोड़ के एक कोने में बैठ गया थोड़ी hi देर में उसका संपर्क फ़कीर बाबा से जुड़ गया
बीएस – बाबा ये हम इन्हे क्यों नहीं ले जा प् रहे है?
फब – महाराज आप इन लोगो को नहीं ले जा पाएंगे ये बात तो मैने पहले hi कही थी के इनके गृह अनुकूल नहीं है इसीलिए आप इन्हे यही छोड़िये इन्हे ये संघर्ष करना होगा यही रह कर, पर आप चिंता न करे इनकी सुरक्षा के लिए देव ने बहोत इंतजाम किये है. आप लोग पूनम के परिवार को भी ले लीजिये और चलिए. क्यों की समय बहोत काम रह गया है.