अपडेट - 1
मेरा नाम मजीद hai....main के एक गांव मैं रहता hoon....aur मैं मेरे अम्मी -अब्बू का एकलौता लड़का हु....
हमारे गाओं का माहौल बहुत hi अच्छा hai...yaha हर jaati-dharm के लोग बास्ते hai...aur सब mil-jul कर रहते है....
मेरी आगे ** साल hai.....(itni है की चुदाई की बातें समझता hu)....main ब्लू फिल्म्स देखता रहता hu....doston के साथ lund-choot, चुदाई की बातें भी बहुत करता hu..unke लुंड भी देखे hai....aur खेत में सोँच के लिए जाने वाली मजदूर अयर्तों के चूतड़ भी देखे hai...aur haa....maine अपने ammi-abbu की चुदाई भी काफी बार देख ली है....
मैं ये कहानी मेरी और मेरे दोस्तों की जवानी से आपकी खिदमत में पेश करुगा....
वैसे तो हमारे गाओं में काफी ज्यादा भाईचारा hai....aur इस वजह से मेरे कई दोस्त भी है....
पर उनमे हम 4 दोस्त बहुत खास दोस्त hai....main यानि की माजिद, अफजल, आलम और फैज़....
हम सब दोस्त पढ़ने में उतना दिल नहीं lagate...jitna की चुदाई की बातों में लगते है...
हम सब रोज नदी जाते और वही पास में सुनसान जगह नंगे हो कर गन्दी बातें करते हुए अपनी ठरक मिटते...
ये सब हमारा रोज का काम tha....aur इसमें हम सबको मज़ा भी बहुत आता था......
पर इस सब में हमारे दिमाग भी काफी ख़राब हो चुके the.....jis वजह से हम दूसरी अयर्तों के sath-sath अपने दोस्त की अम्मी और आपि के बारे में भी गलत सोचने लगे थे...
यहाँ तक की खुद की अम्मी और आपि के बारे में भी....
पर ये बात हम दिल में rakhte....ek-dusre को इस बात का अहसास भी नहीं होने देते की हम उनके घर की इज्जत के बारे में गलत सोच रहे है.....
पर कहते है na...ki वक़्त आने पर दिल के अरमान बहार आ hi जाते hai....theek वैसा hi हमारे साथ भी हुआ.........
और इसकी सुरुवात कैसे hui.....ye आप खुद hi पढ़ लीजिये........
एक दिन मैं घर के बाहर घूम hi रहा था की मेरा दोस्त आलम मेरे पास भागता हुआ आया....
आलम- अरे मजीद ,मैं तेरे hi घर आ रहा था, चल मेरे साथ....
मैं- पर कहा, और तू इतना हाफ क्यों रहा है.....
आलम- अरे चल तो सही, तू देखेगा तो तू भी हाफने लगेगा, चल...
और आलम मेरा हाथ पकड़ के लगभग खींचते हुए मुझे ले जाने लगा.....
मैं- अरे बात क्या है, जो इतनी जल्दी है....
आलम- अरे तू चल तो, ऐसी बात है की तेरा दिल झूम उठेगा, जल्दी चल....
आलम ने बहुत खुश हो कर मुझे बोलै, तो मैं भी उसकी बात मान कर jaldi-jaldi चल पड़ा....
थोड़ी देर बाद आलम मुझे ले कर एक पुराने गोदाम के पास पहुंच gaya.....aur गॉड्डैम के आगे बैंक बॉउंड्री फाड़ने लगा.....
मुझे पता था की ये गोदाम किसका है, पर मैंने इस वक़्त आलम से कुछ नहीं पूछा, बस उसके पीछे चल दिया....
आगे जा कर आलम ने मुझे चुप रहने का इसरा किया और फिर हम दावे पाँव गोदाम की एक खिड़की के पास पहुंच गए....
फिर आलम ने मुझे इसारे से बोलै की अंदर देख....
तो मैं आलम के साथ उस खिड़की की सांस में से अंदर देखने लगा....
खिड़की में सिर्फ नीचे की तरफ थोड़ी सांस थी, जहा से हम दोनों अंदर का नजारा देख रहे थे.....
जब मैंने अंदर देखा तो मेरी आखे चौड़ी हो गई.....
अंदर एक ायरत बोर के ढेर पर झुकी हुई थी,. उसका काळा रंग का लिवास उसकी कमर तक चढ़ा हुआ था और उसकी सलवार उसके पंजो में फांसी थी....
और एक hatta-katta मर्द उसके पीछे खड़ा हुआ joor-joor से धक्के मार रहा था....
ये देखते hi मुझे समझते वक़्त न लगा की भीतर हो क्या रहा है, क्योकि चुदाई की बातों में हमारी जानकारी बहुत ज्यादा थी.....
मैं और आलम अपनी आँखे टिका कर भीतर देख रहे थे, और वह वो मर्द जोरदार धक्के मरे जा रहा था....
और वो ायरत बस, ूउम्म्म, आअह्ह्ह्ह, आअह्ह्ह की आवाज़े निकल रही थी.....
उस मर्द का हर धक्का जब ायरत की गांड पर पड़ता... तो ायरत की दूधिया गांड लचक मार जाती....
उस ायरत की गांड बहुत गोरी थी , और उसकी जाँघे भी, पर मर्द के धक्के खा कर उसकी गांड लाल पड़ने लगी थी....
हम दोनों ये देख कर मज़ा मार hi रहे थे की तभी उस ायरत की आवाज़ तेज हो गई, आआह्ह्ह्हह, aaahhhhh,aaaahhhh,aahh....
ऐसी आवाज़ निकाल कर वो ायरत बोर पर ढेर हो गई.....
और कुछ देर धक्के मारने के बाद वो मर्द भी तेज आवाज़ करने लगा, और उसने अपना लैंड बहार निकल लिया और फिर जोरदार पिचकियाँ मारते हुए उस ायरत की गांड को नहला दिया.....
हमे जैसे hi उस मर्द का पूरा लैंड देखा तो हमारी आँखे बड़ी हो गई, क्योकि एक तो वो लैंड हमारी तरह नहीं था और फिर उसकी kad-kathi भी बहुत ज्यादा थी....
हमने अपने मन में अनुमान लगाया तो उसका लैंड 8 या 8.5 इंच लम्बा था और 3 इंच मोटा था.....
हम तो उसका लुंड देखते hi सुन्न हो गए, ऊपर से उसके लुंड पर चमड़ी भी दिख रही थी,...,...
फिर हमने देखा की वो मर्द जा कर उस ायरत के पास बैठ गया और उसने उस ायरत को कुछ इसरा किया....
तो ायरत ने तुरंत उसकी तरफ गार्डन घुमाई और अपना नकाब हटा कर झुक गई....
ये सब हमारी दूसरी तरफ हुआ तो हमे कुछ दिखा नहीं, पर हम इतना तो समझ hi गए थे की वो ायरत उसका लैंड चूस रही थी....
क्योकि थोड़ी देर बाद जब वो मर्द उठ कर गया तो उसका लैंड साफ़ दिख रहा था, जो थोड़ी देर पहले छूट के पानी से लसलसा दिखा था....
वो मर्द उठा और साइड में निकल gaya....uska चेहरा हमे नहीं दिख प् रहा था......
थोड़ी देर बाद वो ायरत उठी और अपनी सलवार चढ़ा कर बाँध ली, और फिर अपना लिवास नीचे कर के वह से चल दी....
उनके जाते hi आलम ने इसरा किया तो हम भी वह से निकल कर बॉउंड्री के बाहर आ gaye.....aur भाग कर दूर खड़े हो गए......
आलम- क्या नजारा था न, मज़ा आ गया...
मैं- है भाई, क्या छोड़ रहा था वो उसे, मस्त...
आलम - अरे तूने उसका लैंड देखा, क्या लैंड था यार, कितना लम्बा और मोटा, और उसकी चमड़ी भी थी...
मैं- है यार, इसका मतलब वो **** hi था....
आलम- है भाई, ऐसे उन्ही के होते है, पर जो भी हो, लैंड एकदम तगड़ा था....
मैं- हां, और उसका जिश्म भी कितना कैसा हुआ था न.....
आलम- है, इतना की किसी को आगोश में ले ले तो वो पीस hi जाए....
मैं- है यार, पर वो था कौन....
आलम- और कौन होगा, जिसका गोदाम है वही होगा, गोलू भाई....
मैं- अरे नहीं, वो नहीं हो सकते....
आलम- क्यों नहीं, वो रोज कसरत करते है, उनका बदन बहुत कैसा हुआ है, बिकुल हीरो की तरह, जैसा अंदर दिखा, और वो गोर भी hai.....samjha.....
मैं- तेरी बात सही है यार, उनकी बॉडी मस्त है, पर वो नहीं हो सकते,
आलम- क्यों नहीं हो सकते......
मैं- क्योकि वो तो आज सहर गए है, सुबह मिले थे मुझे, तब बता रहे the....aur वो बड़े सरीफ इंसान है, समझा न.,...
आलम- हम्म, वो तो है, सरीफ तो बहुत है वो, तो इसका मतलब कोई दूसरा उनके गोदाम में गलत काम कर रहा है, तब तो उन्हें बताना होगा, नहीं तो उनकी भी बदनामी हो सकती है.....
मैं- सही कहा, मैं कल hi बता दुगा, पर ये नहीं बोलूगा की हमने क्या देखा, झूट बोल दुगा की कुछ लोग अंदर घुसे थे, तो वो गोदाम को टाला मार दे, ठीक है
आलम- हम्म, ठीक कहा, पर कल मत बताना, पहले हम पता कर ले की वो खातून दोवारा आती है की nhi...theek..
मैं- हम्म... पर वो खातून थी कौन, तू जनता है क्या...
आलम- अरे उसका चेहरा नकाब में था, मुझे क्या पता की कौन thi....par जो भी थी, उसे जन्नत दिख गई होगी....
मैं- है यार, क्या छोड़ा है उसे, 15-20 मिनट तो हमने hi देखा, कितने तेज धक्के लगे उसको, पूरी गांड लाल हो रही थी.....
आलम- अरे वो तो 1 घंटे से चुद रही है....
मैं- क्या कुछ भी, 1 घंटा कोई छोड़ पता है क्या....
आलम- अरे सच, पहले मैंने देखा था न , तो वो बोरियों के ढेर पर लेती हुई टाँगे उठाये थी और वो मर्द सामने खड़ा थोक तहा था, sata-sat, sata-sat....fir मैं तुझे बुलाने गया तो 30-40 मिनट तो यही हो गए, और मैं पहले पंहुचा था तो उनका काम सुरु हो चूका था, तो 1 घंटा तो मान hi ले, पक्का.....
मैं- या ****, इतनी देर तक, कोई कैसे छोड़ सकता है, इतना तो सिर्फ फिल्मो में होता है.....
आलम- है यार, मेरे अब्बू तो 10 मिनट भी नहीं टिक पते......
मैं आलम की बात सुन कर चौंक गया, और सोचने लगा की क्या उसने अपने अब्बू को छोड़ते देखा hai.....to आलम मेरा दिमाग पढ़ कर मुस्कुरा दिया....
आलम- ज्यादा सोच मत, हां, मैंने अपने abbu-ammi की चुदाई देखि है, अब्बू बस 5-7 मिनट धक्के मार कर ढेर हो जाते है....
मैं- क्या, तूने देख भी लिया, सामने से चुदाई, वह, अरे मैंने तो आज पहली बार hi देखि है, वो भी ऐसे लैंड से, आठ, मुझे तो वो लैंड पसंद आ गया यार...
( मैंने आलम को नहीं बताया की मैं भी abbu-ammi की चुदाई देख चूका hu....batata भी kya..mere अब्बू तो 5 मिनटर भी नहीं टिक पते )
आलम- लैंड पसंद aaya...hahaha...saale तुझे छोड़ना है kya....hahahaha....
मैं आलम की बात सुन कर शर्मिंदा हो गया और नजरें चुरा कर मुस्कुरा दिया....
आलम- अरे दर मत, पसंद आना अलग बात हैं, वैसे मुझे भी वो बड़ा पसंद आया, क्या तगड़ा लैंड था भाई, मज़ा आ गया....
हम दोनों दोस्त बातें कर hi रहे थे की हमे एक ायरत काले लिवास में आते हुए dikhi...to हम दोनों चौंक gaye..kyoki वो गोदाम की तरफ से hi आ रही थी जहा से हम आये the....aur उस तरफ ज्यादा घर नहीं थे, थोड़ा सुनसान इलाका था, तो हमे शक हुआ की ये वही तो नहीं...
तो हम दोनों उस ायरत को घूर कर देखने लगे की कही कोई सुराग मिल जाए तो हम उसे पहचान ले....
तभी वो ायरत हमारी तरफ देखि और बोली, तो हम चौंक गए.....
ायरत- कैसे हो बीटा, सब खैरियत....
हम दोनों चौंक कर ek-dusre को देखने लगे , की तभी उसने अपना नकाब हटाया और बोली.....
ायरत- क्या हुआ बीटा, पहचाना नहीं क्या.....
जैसे hi हमने उसका चेहरा देखा तो हम फिर चौंक gaye....kyoki सामने कड़ी ायरत हमारे एक दोस्त सोहेल की अम्मी थी, सरीना....
सरीना- ऐसे क्या घूर रहे हो....
मैं- kk..kuch नहीं चचीजां, वो आप नकाब में थी तो पहचान नहीं पाए, कैसी है आप....
सरीना- मैं खैरियत से hu....par तुम दोनों यहाँ कैसे....
आलम- hum...hum तो wo...haa..hum तो साणु के खेत गए थे चचीजां,.... वैसे आप कहा गई थी इस तरफ....
आलम ने जैसे hi सवाल किया तो सरीना थोड़ा सकपका सी gai....to मुझे शक हो गया की ये hi थी जो गोदाम में चुद रही थी.....
सरीना- मैं वो, हां, मैं सायरा चची के पास गई थी, अच्छा मैं चलती हु....
मैं- जी...
Aalam(sareena के जाते hi)- लगता है भाई ये झूठ बोल रही है, पाका ये hi थी वो, जो उस तगड़े लैंड से चुद रही थी...
मैं- लगा तो मुझे भी, पर ऐसे यकीन से कैसे बोल सकते है, हमने उसे देखा hi नहीं था, और ये भी ठीक दिख रही थी, कुछ अलग भी नहीं दिखा इनमे......
आलम- हो सकता है, पर हम एक काम करेंगे, इस पर नजर रखेंगे, क्योकि कोई भी ायरत उस लैंड से छोड़ने के बाद दोवारा जरूर छुड़ेगी....
मैं- hmm...sahi कहा, पर वो लैंड था किसका.....
आलम- वो बाद में सोचते है, देख, हम यहाँ तक आये hi है तो थोड़ा आगे साबिर मिया के बगीचे में चल कर अमरुद कहते है, ठीक है.....
मैं- है ठीक है.....
और फिर हम दोनों अमरुद खाने निकल gaye...jo गोदाम के आगे था....
करीब 1 घंटे तक हम अमरुद के मज़े मारते रहे और फिर अपने घर की तरफ आने लगे.....
पर जैसे hi हम गोलू भाई के गोदाम के करीब पहुंचे तो हमे एक ायरत उस गोदाम में जाते दिखी.....
हम उसे पहचान तो नहीं पाए क्योकि उसने नकाब पहना हुआ था......
आलम- bhai....ek aur.....ye साला माजरा क्या है....
मैं- मुझे क्या pata....chal कर देखे क्या....
आलम- अरे पूछ क्या रहा hai....hum तो पक्का dekhege....aur इस बार सायद उसका चेहरा दिख jaaye....chal.....
पर इससे पहले की हम बॉउंड्री फाड़ कर गोदाम के पीछे jate....waha तबरेज चाचा nikle....aur नसीब dekho...unki साइकिल की चैन वही उत्तरी जहा से हमे जाना था.....
उन्हें देख कर हम दोनों रुक gaye.....aur चाचा के जाने का इंतज़ार करने लगे.....
यहाँ हमे जल्दी पड़ी थी और वह चाचा की चैन नहीं चढ़ प् रही thi....aur इस सब में 10-15 मिनट बेकार निकल गए.....
फिर चाचा के निकलते hi हम aas-paas देख कर गोदाम के पीछे पहुंच gaye.....usi जगह जहा से हमने कुछ देर पहले चुदाई देखि थी.....