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- Dec 5, 2013
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यहाँ आ कर आरिफ में अपनी कहानी ख़त्म की और अपने दोस्तों को देखने laga....jo अपने लुंड को मसलते हुए फटी आँखों से आरिफ को घूर रहे थे....
आरिफ- अरे अभी तो बहुत कुछ बाकि hai....par वो बाद me...chal घर जाना है.....
फिर आरिफ ने आलम और माजिद के साथ मुठ मरी और घर निकल गए......
अब आगे.......
जब मजीद अपने घर में पंहुचा तो दरवाज़ा बाहर से बंद था.....
माजिद सोचने लगा की अब्बू तो लेट आते hai...par अम्मी इस वक़्त कहा gai...kyoki अँधेरा हो गया था....
Khair....majid दरवाज़ा खोल कर फ्रेश हुआ और अम्मी का इंतज़ार करने लगा....
करीब 40 मिनट बाद माजिद की अम्मी बापिस आई तो माजिद को देख कर थोड़ा हिचक गई....
अम्मी- अरे beta...tu कब आया....
माजिद- काफी वक़्त हो gaya....par आप कहा थी....
अम्मी- mai...are वो नीलम दीदी ने बुलाया tha.....fir गप्पो में फसा liya....wo chhod...tu bol....khana लगा दू...
माजिद- हम्म...
माजिद के कहते hi उसकी अम्मी किचेन में चली gai....aur माजिद भी थोड़ी देर में किचेन में पानी लेने आ गया....
अम्मी- माजिद se....kya hua...kuch चाहिए क्या.....
तभी माजिद ने अम्मी को देखा तो मुस्कुरा दिया....
अम्मी- ऐसे क्यों मुस्कुरा दिया.....
माजिद- लगता है आज नीलम आंटी ने फिर से मलाई खिलाई है....
माजिद की बात सुन कर उसकी अम्मी सकपका गई और अपना मुँह साफ़ करने लगी....
माजिद- अब क्या fayda...maine देख liya....aapne होंठो पर लगी थी...
Ammi(muskura कर)- क्या करू beta....wo जबरजस्ती करके मलाई खिला देती hai...aur मैं जल्दी में मुँह भी साफ़ नहीं कर पति...
माजिद- hmm..maze है aapke....par अब आगे से याद rakhna.....muh साफ़ कर लेना....
Ammi(muskura कर)- है बीटा आगे से पूरा ध्यान rakhugi....le खाना खा ले.....
फिर रात को सब apne-apne सपनो में खो कर सो गए........
==============================
नेक्स्ट डे..........
सुबह मजीद सोफे पर बैठा हुआ चाय पि रहा tha.....aur उसकी अम्मी जादू मार रही थी.....
चाय peete-peete मजीद के दिल में आरिफ की अम्मी का ख्याल आया तो उसकी नजरें अपने आप hi अपनी अम्मी पर चली गई....
और उसने जो नजारा dekha...usse मजीद के जिश्म में सुरसुरी दौड़ गई....
सामने उसकी अम्मी झुक कर झाड़ू मार रही thi....jisse उसकी कुर्ती सीने पर थोड़ी ढीली हो गई थी...
और मजीद को अपनी अम्मी के दूधो की एक हलकी सी झलक मिल रही थी...
माजिद ने एक बार idhar-udhar देखा और फिर तिरछी निगाहों से अम्मी के दूध की गहराई देखने लगा.....
जैसे hi उसकी अम्मी झाड़ू मारते हुए uper-neeche hoti....to उनके दूध भी उनके साथ ऊपर नीचे उछाल पड़ते....
ऐसा नजारा देखते हुए मजीद के लुंड में हलचल सुरु हो gai...aur वो अपनी अम्मी के दूधो को आरिफ की अम्मी के दूधो से बराबरी करने लगा.....
माजिद सोचने लगा की क्या उसकी अम्मी के दूध आरिफ की अम्मी से बड़े होंगे या छोटे....
क्या अब्बू भी अम्मी के दूध चूसते hoge....jaise गोलू भाई आरिफ की अम्मी के चूस रहे थे.....
Maajid(man में)- गोलू भाई ने कितनी बेरहमी से आरिफ की अम्मी के दूधो को मसला tha...aur मुँह में दवा कर इतना चूसा था की कोई बच्चा भी उतना न चूसे....
क्या मेरी अम्मी के दूध भी अब्बू ऐसे चूसते hoge...kya वो भी इनको मसलते होंगे......
फिर अचानक माजिद के दिल में ख्याल आया की उसने तो ammi-abbu की चुदाई देखि hai....aur उसने कभी अब्बू को अम्मी के जिश्म को चूमते -चाट ते नहीं देखा.....
यहाँ तक की अम्मी ने कभी अब्बू का लुंड भी नहीं choosa....abbu तो सिर्फ अम्मी को नंगा कर के दाल देते hai...aur कुछ धक्के मार कर लुढ़क जाते है....
और उस वक़्त अम्मी के चेहरे पर सिर्फ मायूसी छै रहती है.....
माजिद सोचने लगा की काश उसके अब्बू भी उसकी अम्मी की ऐसी hi चुदाई karte...jaise गोलू भाई करते hai.....to अम्मी को कितना मज़ा aata....wo खुश हो जाती....
तभी घर के दरवाजे पर दस्तक हुई तो मजीद अपने ख्यालों से बहार आ gaya...aur उसकी अम्मी भी चौंक कर कड़ी हो गई.....
माजिद ने देखा की दरवाज़े पर गोलू भाई खड़े hai..jinke हाथ में एक बॉक्स था....
माजिद ने गोलू भाई को देखा तो उठ कर उनके पास जाने लगा.....
गोलू भाई- मुबारक मिया है घर में....
माजिद- नहीं है saayad...hai न अम्मी.....
Ammi(muskura कर)- hmm...wo तो सुबह hi निकल गए the....aap आइये na...khade क्यों है....
गोलू भाई- जी जरूर.....
फिर गोलू भाई आ कर मजीद के साथ सोफे पर बैठ gaye...aur अम्मी सामने वाले सोफे पर.....
गोलू bhai(ammi को देख कर)- hmm...saaf-safaai हो रही thi...haa...
Ammi(muskura कर)- जी bas...thodi सी बाकि थी....
मजीद- गोलू bhai....meri अम्मी को saaf-safaai रखने का बड़ा सूक hai....din में 2-3 बार सफाई करती है....
गोलू bhai(mushkura कर)- जनता hu....saaf-safaai तो बहुत रखती hai.....bikul साफ़ और chikna....hai न मुमताज जी....
गोलू भाई की बात सुन कर अम्मी शर्मा gai....aur गोलू भाई मुस्कुरा उठे.....
Ammi(uth कर)- आप baithiye....main आपके लिए चाय लती हु....
गोलू भाई- अरे suno....chai बाद में lana...pahle ये रख लो....
ये कह कर गोलू भाई ने वो बॉक्स अम्मी की तरफ बड़ा diya...aur अम्मी ने एक नजर मुझे देखा और फिर वो बॉक्स ले लिया.....
मजीद- इसमें क्या है भैया....
मजीद के सवाल पर मुमताज गोलू भाई को देखने lagi....to गोलू भाई ने मजीद को देख कर मुस्कुरा दिया....
गोलू भाई- कुछ खास hai....tumhari अम्मी के लिए....
Majid(khush हो कर)- accha....to मुझे भी dikhao....ammi...box खोलो न....
माजिद की बात सुन कर मुमताज थोड़ा ghabraai...aur गोलू भाई को देखने lagi....to गोलू भाई ने माजिद के सर पर हाथ रखा और सहलाने लगे....
गोलू भाई- अरे beta....ye अयर्तों का सामान hai....inhe मर्द नहीं dekhte....hmm..
Ammi(jaldi में)- मैं चाय लती हु....
ये बोल कर अम्मी जल्दी से किचेन में चली गई और गोलू भाई उन्हें जाता देख मुस्कुरा दिए......
तभी माजिद का दोस्त आलम उसे बुलाने आ गया तो माजिद उसके साथ बाहर चला गया.....
मजीद- है bol...subah-subah क्या बात हो गई....
आलम- अरे मैं ये बताने आया था की आज हमे नदी पर दोपहर को चलना है...
माजिद- पर दोपहर को क्यों....
आलम- अरे मुझे पूरी रात ठीक से नीड नहीं aai...raat भर आरिफ की अम्मी की गोलू भाई से चुदाई hi याद आती रही....
मजीद- तो क्या hua...main भी उनकी चुदाई याद करता रहा.....
आलम- accha..to तू आगे की कहानी नहीं जानना chahta...bas इतने में खुश है...
माजिद- क्या बात कर रहा hai....beshaq जानना चाहता हु....
आलम- तो चल मेरे sath....hum आरिफ को दोपहर के लिए मन लेते hai...fir नदी जा कर शाम तक उसकी कहानी सुनेगे....
Maajid(khush हो कर)- hmm....ek मिनट de...main अम्मी को बोल कर आता हु....
फिर माजिद घर में गया तो उसमे देखा की गोलू भाई और उसकी अम्मी साथ में बैठे हुए मुस्कुरा रहे hai...aur अम्मी ने अभी भी दुपट्टा नहीं डाला था.....
माजिद - ammi....main आरिफ के घर जा रहा hu...thodi देर से आउगा....
Ammi(sakpaka कर)- hmm..aaraam से जाना......
और फिर मजीद खुश हो कर आलम के साथ निकल जाता है.....
दोनों दोस्त आरिफ के घर पहुंचते है तो वह उन्हें एक और खातून दिखाई देती है....
तो आरिफ उन्हें बताता है की वो उनकी खला hai....nagma....
फिर तीनो दोस्त घर के बाहर आते hai...aur वह माजिद और आलम मिल कर आरिफ को दोपहर को नदी चलने लिए मन लेते है....
Aarif(muskura कर)- तुम दोनों बड़े कमीने ho...meri अम्मी की थुखै सुनने के लिए पागल हुए जा रहे हो....
आलम- अरे bhai....hum तो अपनी अम्मी की भी ऐसी ठुकाई देखना चाहते hai...par साला कोई मौका hi नहीं hai...isliye तेरी अम्मी की कहानी sun-sun कर हिलाते है....
Aarif(has कर)- तू चाहे तो तुझे भी ये नजारा मिल सकता है....
आलम- कैसे....
आरिफ- अरे आसान है bhai....apni अम्मी को गोलू भाई से फसवा de....fir देख तेरी अम्मी की क्या जबरजस्त चुदाई होती hai...hahaha...
आलम- काश ऐसा हो pata....par ये मुमकिन नहीं...
आरिफ- abe..sab मुमकिन hai...tu बस कोसिस कर....
आलम- नहीं yaar...meri अम्मी नहीं manegi...aur फिर मेरी दादी भी तो है घर me....unke रहते तो कुछ भी नहीं हो सकता.....
आरिफ- अबे कुछ soch....sochne से कोई तो तरीका मिल hi jayga...aise हताश होने से कुछ नहीं hota.....samjha.....tu बस एक बार गोलू भाई को अपनी अम्मी का जलवा दिखा de...fir dekh...wo क्या करते है....
आलम- अबे ये सब....
Maajid(gusse से)- अबे जो है नहीं वो बकवास बाद me...abhi जो हो चूका है उसकी बात करो न...
आलम- है aarif....humari अम्मी की बाद में sochege....pahle तेरी कहानी तो सुन ले....
आरिफ- ठीक hai...aaj दोपहर को ऐसी कहानी सुनाऊंगा की तुम दोनों की मुट्ठ maar-maar कर हालत पतली हो जायगी....
माजिद- सच में.....
आरिफ- है bhai...tu sunna....fir batana...theek...
आलम- ohh..ab तो इंतज़ार भी नहीं होता यार.....
आरिफ- वो तो करना hoga.....filhaal नास्ता करते hai....khala ने बोलै था की तुम दोनों बिना खाये मत jana...chalo....
फिर तीनो दोस्त khushi-khushi नास्ता करने आरिफ के घर के भीतर चले गए......
करीब 1 घंटे बाद जब मजीद अपने घर लौटा तो उसने देखा की दरवाज़ा बाहर से बंद था.....
जब मजीद ने दरवाज़े पर दस्तक दी तो कोई आवाज़ नहीं aai....na hi दरवाज़ा खुला....
फिर जब मजीद ने अम्मी को पुकारते हुए दरवाज़ा पीटा तो करीब 3-4 मिनट बाद दरवाज़ा khula.....wo भी गोलू भाई ने खोला.....
गोलू भाई को देख कर माजिद चौंक gaya...kyoki गोलू भाई की शर्त के सारे बटन खुले हुए थे और उनका जिश्म भी पसीने से tar-batar हो रहा था.....
गोलू भाई- अरे maajid....khada क्यों hai...andar चल....
माजिद- huh..haa...par aap...aapko इतना पसीना......
गोलू भाई- paseena...are wo...wo मैं तुम्हारी अम्मी की मदद कर रहा tha.....wo saaf-safaai कर रही थी न....
मजीद- ओह्ह....
तभी मजीद की नजर सोफे पर padi....jiska कवर बिखरा पड़ा था....
गोलू भाई- वो सोफे के नीचे की सफाई करनी थी na...to मैंने पूरा सोफे उठाया tha....aur इसी चक्कर में पूरा बिखर gaya.....lao ठीक कर दू...
माजिद- अरे nhi...main करता हु na....waise अम्मी कहा है...
गोलू भाई- वो पसीने से भीग गई thi.....to नहाने चली gai.....bahut म्हणत की उन्होंने......
Majid(muskura कर)- hmm..mehnati तो बहुत है मेरी ammi....jo भी काम करती hai....dil लगा कर और पुरे जोश के साथ करती है....
गोलू bhai(muskura कर)- hmm..sahi kaha....bade जोश के साथ करती hai......accha..main चलता हु ...
माजिद- अरे ये kya...main आया और आप जाने lage....chaliye पहले थोड़ी हवा ले lo...bahut पसीना आ रहा है aapko...aur ये pankha.....ye तो ठीक से चल भी नहीं raha...aap...aap अब्बू के कमरे में चलिए वह नया पंखा लगा hai...aaiye....
फिर माजिद जबरजस्ती गोलू भाई को अपने abbu-ammi के कमरे में ले gaya...aur बीएड पर बैठा कर पंखा चालू कर दिया....
माजिद- आप थोड़ा आराम कर लो na...let जाओ....
गोलू bhai(muskura कर)- ठीक hai....par अगर सो जाओ तो जगा dena...hahaha....
Maajid(muskura कर)- जी बिलकुल ....
फिर गोलू भाई आँखे बंद कर के आधे लेट gaye....unki तागे अभी भी बिस्तर से लटकी हुई थी....
तभी माजिद की नजर गोलू भाई के सीने पर padi....jo बनियान में कैसा हुआ था....
माजिद सोचने लगा की इनके सीने के नीचे देव कर सलमा चची का कैसा हाल हुआ होगा.....
अरे सलमा चची तो ठीक hai....agar मेरी अम्मी होती तो उनका क्या hota...wo तो बड़ी नाजुक है....
तभी कमरे के साइड बने बाथरूम का दरवाज़ा खुला तो माजिद उस तरफ देखने लगा....
सामने से माजिद की अम्मी नाहा कर निकली thi....unke बाल बढे हुए थे और वो एक पतली से salwar-kurti पहने हुए थी....
अम्मी- अरे beta....tum कब आये....
माजिद- बस abhi-abhi...aur ये क्या ammi...aapne गोलू भाई से म्हणत karai...mujhe बोल देती न....
अम्मी- अरे beta...maine तो उन्हें बहुत roka....kai बार बोलै की माजिद आता hi hoga....par वो माने hi nhi...aur फिर तुझसे वो सब नहीं हो pata....to फिर मैं मान गई...
माजिद- hmm...bahut म्हणत की न गोलू भाई ne....thak गए होंगे....
Ammi(muskura कर)- अरे नहीं beta.....wo तो रोज इससे ज्यादा म्हणत करते hai......wo नहीं थकते.....
माजिद- hmm...abbu होते तो थक jate....us दिन nhi...jab उन्होंने बड़े में लकड़ियां राखी thi....kitni जल्दी थक गए थे न.....
Ammi(has कर)- hmm..par ये तुम्हारे अब्बू की तरह नहीं hai.....ye थकते nhi....par थका जरूर देते hai...(aakhiri लाइन अम्मी ने इतने डेरे बोली की माजिद को कुछ समझ नहीं आया )
ये बोल कर अम्मी अपने बालों को खोल कर उन पर लगा थोड़ा बहुत पानी झड़ने लगी......
यहाँ आ कर आरिफ में अपनी कहानी ख़त्म की और अपने दोस्तों को देखने laga....jo अपने लुंड को मसलते हुए फटी आँखों से आरिफ को घूर रहे थे....
आरिफ- अरे अभी तो बहुत कुछ बाकि hai....par वो बाद me...chal घर जाना है.....
फिर आरिफ ने आलम और माजिद के साथ मुठ मरी और घर निकल गए......
अब आगे.......
जब मजीद अपने घर में पंहुचा तो दरवाज़ा बाहर से बंद था.....
माजिद सोचने लगा की अब्बू तो लेट आते hai...par अम्मी इस वक़्त कहा gai...kyoki अँधेरा हो गया था....
Khair....majid दरवाज़ा खोल कर फ्रेश हुआ और अम्मी का इंतज़ार करने लगा....
करीब 40 मिनट बाद माजिद की अम्मी बापिस आई तो माजिद को देख कर थोड़ा हिचक गई....
अम्मी- अरे beta...tu कब आया....
माजिद- काफी वक़्त हो gaya....par आप कहा थी....
अम्मी- mai...are वो नीलम दीदी ने बुलाया tha.....fir गप्पो में फसा liya....wo chhod...tu bol....khana लगा दू...
माजिद- हम्म...
माजिद के कहते hi उसकी अम्मी किचेन में चली gai....aur माजिद भी थोड़ी देर में किचेन में पानी लेने आ गया....
अम्मी- माजिद se....kya hua...kuch चाहिए क्या.....
तभी माजिद ने अम्मी को देखा तो मुस्कुरा दिया....
अम्मी- ऐसे क्यों मुस्कुरा दिया.....
माजिद- लगता है आज नीलम आंटी ने फिर से मलाई खिलाई है....
माजिद की बात सुन कर उसकी अम्मी सकपका गई और अपना मुँह साफ़ करने लगी....
माजिद- अब क्या fayda...maine देख liya....aapne होंठो पर लगी थी...
Ammi(muskura कर)- क्या करू beta....wo जबरजस्ती करके मलाई खिला देती hai...aur मैं जल्दी में मुँह भी साफ़ नहीं कर पति...
माजिद- hmm..maze है aapke....par अब आगे से याद rakhna.....muh साफ़ कर लेना....
Ammi(muskura कर)- है बीटा आगे से पूरा ध्यान rakhugi....le खाना खा ले.....
फिर रात को सब apne-apne सपनो में खो कर सो गए........
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नेक्स्ट डे..........
सुबह मजीद सोफे पर बैठा हुआ चाय पि रहा tha.....aur उसकी अम्मी जादू मार रही थी.....
चाय peete-peete मजीद के दिल में आरिफ की अम्मी का ख्याल आया तो उसकी नजरें अपने आप hi अपनी अम्मी पर चली गई....
और उसने जो नजारा dekha...usse मजीद के जिश्म में सुरसुरी दौड़ गई....
सामने उसकी अम्मी झुक कर झाड़ू मार रही thi....jisse उसकी कुर्ती सीने पर थोड़ी ढीली हो गई थी...
और मजीद को अपनी अम्मी के दूधो की एक हलकी सी झलक मिल रही थी...
माजिद ने एक बार idhar-udhar देखा और फिर तिरछी निगाहों से अम्मी के दूध की गहराई देखने लगा.....
जैसे hi उसकी अम्मी झाड़ू मारते हुए uper-neeche hoti....to उनके दूध भी उनके साथ ऊपर नीचे उछाल पड़ते....
ऐसा नजारा देखते हुए मजीद के लुंड में हलचल सुरु हो gai...aur वो अपनी अम्मी के दूधो को आरिफ की अम्मी के दूधो से बराबरी करने लगा.....
माजिद सोचने लगा की क्या उसकी अम्मी के दूध आरिफ की अम्मी से बड़े होंगे या छोटे....
क्या अब्बू भी अम्मी के दूध चूसते hoge....jaise गोलू भाई आरिफ की अम्मी के चूस रहे थे.....
Maajid(man में)- गोलू भाई ने कितनी बेरहमी से आरिफ की अम्मी के दूधो को मसला tha...aur मुँह में दवा कर इतना चूसा था की कोई बच्चा भी उतना न चूसे....
क्या मेरी अम्मी के दूध भी अब्बू ऐसे चूसते hoge...kya वो भी इनको मसलते होंगे......
फिर अचानक माजिद के दिल में ख्याल आया की उसने तो ammi-abbu की चुदाई देखि hai....aur उसने कभी अब्बू को अम्मी के जिश्म को चूमते -चाट ते नहीं देखा.....
यहाँ तक की अम्मी ने कभी अब्बू का लुंड भी नहीं choosa....abbu तो सिर्फ अम्मी को नंगा कर के दाल देते hai...aur कुछ धक्के मार कर लुढ़क जाते है....
और उस वक़्त अम्मी के चेहरे पर सिर्फ मायूसी छै रहती है.....
माजिद सोचने लगा की काश उसके अब्बू भी उसकी अम्मी की ऐसी hi चुदाई karte...jaise गोलू भाई करते hai.....to अम्मी को कितना मज़ा aata....wo खुश हो जाती....
तभी घर के दरवाजे पर दस्तक हुई तो मजीद अपने ख्यालों से बहार आ gaya...aur उसकी अम्मी भी चौंक कर कड़ी हो गई.....
माजिद ने देखा की दरवाज़े पर गोलू भाई खड़े hai..jinke हाथ में एक बॉक्स था....
माजिद ने गोलू भाई को देखा तो उठ कर उनके पास जाने लगा.....
गोलू भाई- मुबारक मिया है घर में....
माजिद- नहीं है saayad...hai न अम्मी.....
Ammi(muskura कर)- hmm...wo तो सुबह hi निकल गए the....aap आइये na...khade क्यों है....
गोलू भाई- जी जरूर.....
फिर गोलू भाई आ कर मजीद के साथ सोफे पर बैठ gaye...aur अम्मी सामने वाले सोफे पर.....
गोलू bhai(ammi को देख कर)- hmm...saaf-safaai हो रही thi...haa...
Ammi(muskura कर)- जी bas...thodi सी बाकि थी....
मजीद- गोलू bhai....meri अम्मी को saaf-safaai रखने का बड़ा सूक hai....din में 2-3 बार सफाई करती है....
गोलू bhai(mushkura कर)- जनता hu....saaf-safaai तो बहुत रखती hai.....bikul साफ़ और chikna....hai न मुमताज जी....
गोलू भाई की बात सुन कर अम्मी शर्मा gai....aur गोलू भाई मुस्कुरा उठे.....
Ammi(uth कर)- आप baithiye....main आपके लिए चाय लती हु....
गोलू भाई- अरे suno....chai बाद में lana...pahle ये रख लो....
ये कह कर गोलू भाई ने वो बॉक्स अम्मी की तरफ बड़ा diya...aur अम्मी ने एक नजर मुझे देखा और फिर वो बॉक्स ले लिया.....
मजीद- इसमें क्या है भैया....
मजीद के सवाल पर मुमताज गोलू भाई को देखने lagi....to गोलू भाई ने मजीद को देख कर मुस्कुरा दिया....
गोलू भाई- कुछ खास hai....tumhari अम्मी के लिए....
Majid(khush हो कर)- accha....to मुझे भी dikhao....ammi...box खोलो न....
माजिद की बात सुन कर मुमताज थोड़ा ghabraai...aur गोलू भाई को देखने lagi....to गोलू भाई ने माजिद के सर पर हाथ रखा और सहलाने लगे....
गोलू भाई- अरे beta....ye अयर्तों का सामान hai....inhe मर्द नहीं dekhte....hmm..
Ammi(jaldi में)- मैं चाय लती हु....
ये बोल कर अम्मी जल्दी से किचेन में चली गई और गोलू भाई उन्हें जाता देख मुस्कुरा दिए......
तभी माजिद का दोस्त आलम उसे बुलाने आ गया तो माजिद उसके साथ बाहर चला गया.....
मजीद- है bol...subah-subah क्या बात हो गई....
आलम- अरे मैं ये बताने आया था की आज हमे नदी पर दोपहर को चलना है...
माजिद- पर दोपहर को क्यों....
आलम- अरे मुझे पूरी रात ठीक से नीड नहीं aai...raat भर आरिफ की अम्मी की गोलू भाई से चुदाई hi याद आती रही....
मजीद- तो क्या hua...main भी उनकी चुदाई याद करता रहा.....
आलम- accha..to तू आगे की कहानी नहीं जानना chahta...bas इतने में खुश है...
माजिद- क्या बात कर रहा hai....beshaq जानना चाहता हु....
आलम- तो चल मेरे sath....hum आरिफ को दोपहर के लिए मन लेते hai...fir नदी जा कर शाम तक उसकी कहानी सुनेगे....
Maajid(khush हो कर)- hmm....ek मिनट de...main अम्मी को बोल कर आता हु....
फिर माजिद घर में गया तो उसमे देखा की गोलू भाई और उसकी अम्मी साथ में बैठे हुए मुस्कुरा रहे hai...aur अम्मी ने अभी भी दुपट्टा नहीं डाला था.....
माजिद - ammi....main आरिफ के घर जा रहा hu...thodi देर से आउगा....
Ammi(sakpaka कर)- hmm..aaraam से जाना......
और फिर मजीद खुश हो कर आलम के साथ निकल जाता है.....
दोनों दोस्त आरिफ के घर पहुंचते है तो वह उन्हें एक और खातून दिखाई देती है....
तो आरिफ उन्हें बताता है की वो उनकी खला hai....nagma....
फिर तीनो दोस्त घर के बाहर आते hai...aur वह माजिद और आलम मिल कर आरिफ को दोपहर को नदी चलने लिए मन लेते है....
Aarif(muskura कर)- तुम दोनों बड़े कमीने ho...meri अम्मी की थुखै सुनने के लिए पागल हुए जा रहे हो....
आलम- अरे bhai....hum तो अपनी अम्मी की भी ऐसी ठुकाई देखना चाहते hai...par साला कोई मौका hi नहीं hai...isliye तेरी अम्मी की कहानी sun-sun कर हिलाते है....
Aarif(has कर)- तू चाहे तो तुझे भी ये नजारा मिल सकता है....
आलम- कैसे....
आरिफ- अरे आसान है bhai....apni अम्मी को गोलू भाई से फसवा de....fir देख तेरी अम्मी की क्या जबरजस्त चुदाई होती hai...hahaha...
आलम- काश ऐसा हो pata....par ये मुमकिन नहीं...
आरिफ- abe..sab मुमकिन hai...tu बस कोसिस कर....
आलम- नहीं yaar...meri अम्मी नहीं manegi...aur फिर मेरी दादी भी तो है घर me....unke रहते तो कुछ भी नहीं हो सकता.....
आरिफ- अबे कुछ soch....sochne से कोई तो तरीका मिल hi jayga...aise हताश होने से कुछ नहीं hota.....samjha.....tu बस एक बार गोलू भाई को अपनी अम्मी का जलवा दिखा de...fir dekh...wo क्या करते है....
आलम- अबे ये सब....
Maajid(gusse से)- अबे जो है नहीं वो बकवास बाद me...abhi जो हो चूका है उसकी बात करो न...
आलम- है aarif....humari अम्मी की बाद में sochege....pahle तेरी कहानी तो सुन ले....
आरिफ- ठीक hai...aaj दोपहर को ऐसी कहानी सुनाऊंगा की तुम दोनों की मुट्ठ maar-maar कर हालत पतली हो जायगी....
माजिद- सच में.....
आरिफ- है bhai...tu sunna....fir batana...theek...
आलम- ohh..ab तो इंतज़ार भी नहीं होता यार.....
आरिफ- वो तो करना hoga.....filhaal नास्ता करते hai....khala ने बोलै था की तुम दोनों बिना खाये मत jana...chalo....
फिर तीनो दोस्त khushi-khushi नास्ता करने आरिफ के घर के भीतर चले गए......
करीब 1 घंटे बाद जब मजीद अपने घर लौटा तो उसने देखा की दरवाज़ा बाहर से बंद था.....
जब मजीद ने दरवाज़े पर दस्तक दी तो कोई आवाज़ नहीं aai....na hi दरवाज़ा खुला....
फिर जब मजीद ने अम्मी को पुकारते हुए दरवाज़ा पीटा तो करीब 3-4 मिनट बाद दरवाज़ा khula.....wo भी गोलू भाई ने खोला.....
गोलू भाई को देख कर माजिद चौंक gaya...kyoki गोलू भाई की शर्त के सारे बटन खुले हुए थे और उनका जिश्म भी पसीने से tar-batar हो रहा था.....
गोलू भाई- अरे maajid....khada क्यों hai...andar चल....
माजिद- huh..haa...par aap...aapko इतना पसीना......
गोलू भाई- paseena...are wo...wo मैं तुम्हारी अम्मी की मदद कर रहा tha.....wo saaf-safaai कर रही थी न....
मजीद- ओह्ह....
तभी मजीद की नजर सोफे पर padi....jiska कवर बिखरा पड़ा था....
गोलू भाई- वो सोफे के नीचे की सफाई करनी थी na...to मैंने पूरा सोफे उठाया tha....aur इसी चक्कर में पूरा बिखर gaya.....lao ठीक कर दू...
माजिद- अरे nhi...main करता हु na....waise अम्मी कहा है...
गोलू भाई- वो पसीने से भीग गई thi.....to नहाने चली gai.....bahut म्हणत की उन्होंने......
Majid(muskura कर)- hmm..mehnati तो बहुत है मेरी ammi....jo भी काम करती hai....dil लगा कर और पुरे जोश के साथ करती है....
गोलू bhai(muskura कर)- hmm..sahi kaha....bade जोश के साथ करती hai......accha..main चलता हु ...
माजिद- अरे ये kya...main आया और आप जाने lage....chaliye पहले थोड़ी हवा ले lo...bahut पसीना आ रहा है aapko...aur ये pankha.....ye तो ठीक से चल भी नहीं raha...aap...aap अब्बू के कमरे में चलिए वह नया पंखा लगा hai...aaiye....
फिर माजिद जबरजस्ती गोलू भाई को अपने abbu-ammi के कमरे में ले gaya...aur बीएड पर बैठा कर पंखा चालू कर दिया....
माजिद- आप थोड़ा आराम कर लो na...let जाओ....
गोलू bhai(muskura कर)- ठीक hai....par अगर सो जाओ तो जगा dena...hahaha....
Maajid(muskura कर)- जी बिलकुल ....
फिर गोलू भाई आँखे बंद कर के आधे लेट gaye....unki तागे अभी भी बिस्तर से लटकी हुई थी....
तभी माजिद की नजर गोलू भाई के सीने पर padi....jo बनियान में कैसा हुआ था....
माजिद सोचने लगा की इनके सीने के नीचे देव कर सलमा चची का कैसा हाल हुआ होगा.....
अरे सलमा चची तो ठीक hai....agar मेरी अम्मी होती तो उनका क्या hota...wo तो बड़ी नाजुक है....
तभी कमरे के साइड बने बाथरूम का दरवाज़ा खुला तो माजिद उस तरफ देखने लगा....
सामने से माजिद की अम्मी नाहा कर निकली thi....unke बाल बढे हुए थे और वो एक पतली से salwar-kurti पहने हुए थी....
अम्मी- अरे beta....tum कब आये....
माजिद- बस abhi-abhi...aur ये क्या ammi...aapne गोलू भाई से म्हणत karai...mujhe बोल देती न....
अम्मी- अरे beta...maine तो उन्हें बहुत roka....kai बार बोलै की माजिद आता hi hoga....par वो माने hi nhi...aur फिर तुझसे वो सब नहीं हो pata....to फिर मैं मान गई...
माजिद- hmm...bahut म्हणत की न गोलू भाई ne....thak गए होंगे....
Ammi(muskura कर)- अरे नहीं beta.....wo तो रोज इससे ज्यादा म्हणत करते hai......wo नहीं थकते.....
माजिद- hmm...abbu होते तो थक jate....us दिन nhi...jab उन्होंने बड़े में लकड़ियां राखी thi....kitni जल्दी थक गए थे न.....
Ammi(has कर)- hmm..par ये तुम्हारे अब्बू की तरह नहीं hai.....ye थकते nhi....par थका जरूर देते hai...(aakhiri लाइन अम्मी ने इतने डेरे बोली की माजिद को कुछ समझ नहीं आया )
ये बोल कर अम्मी अपने बालों को खोल कर उन पर लगा थोड़ा बहुत पानी झड़ने लगी......