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नमीरा की लाश, रोशन राय की हवाइ जहाज जैसी गाड़ी की पिछली सीट पर आहिस्ता-आहिस्ता हिल रही थी।लाश पर एक सफेद चादर डाल दी गई थी। लाश के लगातार हिलने की वजह से वह चादर अब उसके चेहरे से हट गई थी। उसका एक हाथ फिसलकर नीचे आ गया था , जो अब लाश के साथ झूल रहा था। नमीरा के चेहरे पर कोमलता थी। एक हल्की-सी मुस्कुराहट थी। यह महसूस ही नहीं होता था कि उसको मरे हुए काफी वक्त हो चुका है ।गाड़ी अपनी फुल स्पीड से सफर तय कर रही थी ।रौली कभी -कभी पीछे मुड़कर देख लेता था। यही देखने को कि लाश किस पोजीश्न में हैं। कहीं हिल-हिल कर सीट के नीचे तो नहीं आ रही |वे मुम्बई से काफी दूर निकल आए थे। वो नमीरा को ठिकाने लगाने निकला था। रोशन राय ने बस इतना ही कहा था कि 'इसे ठिकाने लगा दो'-यह नहीं बताया था कि कहां और कैसे? अब यह मामला उसकी अपनी इच्छा पर था और वह सोच रहा था कि इस काम को कहां और कैसे निपटाया जाए?वह सागर तट के साथ -साथ सफर कर रहा था और शहर से बहुत दूर वीरानों में थी। उसने कुछ सोचा व गाड़ी समुद्र के निर्जन रेतीले किनारे की तरफ मोड़ दी। दूर तक रेत ही रेत थी। ऊंचे-नीचे रेत के टीले फैले हुए थे। गाड़ी जब इस रेतीले रास्ते पर काफी आगे आ गई....तो रौली को यकीन हो गया कि इन वीरानों में किसी इंसान का गुजर मुश्किल है तो उसने एक जगह गाड़ी रोक दी ।उसने अपने साथ बैठे हुए दोनों बन्दों को गाड़ी से उतरने का इशारा किया और खुद भी नीचे उतर गया ।उसने रेत पर खड़े होकर अपनी कमर सीधी की। वह काफी देर से ड्राइविंग कर रहा था। फिर उसने चारों तरफ एक निरीक्षणात्मक निगाह डाली। दूर तक वीराना व सन्नाटा था ।रौली को निकट ही एक गड्डा नजर आया। यह गड्डा दो-तीन फुट गहरा था। इस गड्ढे को अपने काम के लिए चुन लिया। उसने अपने एक साथी की मदद से नमीरा की लाश को गाड़ी से निकाला और उसे धीरे से उस गड्ढे में उतार दिया। उस पर चादर डालकर उसके हाथों-पैरों तले दबा दी। उसे एक तैयारशुदा कब्र मिल गई थी। वे तीनों मिलकर अपने हाथों से रेत को उस गड्ढे में गिराने लगे।तभी रौली को ख्याल आया कि एक प्लास्टिक की बाल्टी गाड़ी में है। उसने वह बाल्टी गाड़ी से मंगवा ली और फिर उस बाल्टी से ही रेत भर-भरकर लाश पर । डालने लगा ।यूं तीनों ने मिलकर शीध्र ही गड्ढे को रेत से ढक दिया।
देखते ही देखते वह एक कब्र-सी दिखाई देने लगी।रौली को जब यह इत्मीनान हो गया कि नमीरा की लाश अच्छी तरह सुरक्षित हो गई हैं तो वह हाथ झाड़ता उठ खड़ा हुआ और गाड़ी की तरफ बढ़ गया। रौली के स्टेयरिंग सम्भालते ही उसके दोनों साथी भी उसके साथ बैठे गये। रौली ने दूर से उसे रेत की कब्र पर एक नजर डाली....और फिर गाड़ी स्टार्ट करके स्टेयरिंग को तेजी से घुमाया। फिर गाड़ी अब वापिस हाई-वे की तरफ जा रही थी गाड़ी जब उस रेत की कब्र से बहुत दूर निकल गई तो पश्चिम दिशा से एक ऊंचे कद का व्यक्ति आता नजर आया ।उसका रूख नमीरा की कब्र था। वो हालांकि एक-एक कदम करके चल रहा था.....दौड़ नहीं रहा था....न तेज चल रहा था। इसके बावजूद यूं लगता था, जैसे वो हवा के घोड़ें पर सवार हो । वो देखते ही देखते कबग के निकट आ पहुंचा ।वह करीब आठ फुट ऊंचे आदमी था। एकदम काला भुजंग! चमकता हुआ काला बदल | उसने कवल एक सफेद चादर अपने शरीर पर लपेट रखी थी। ऊपर का बदन नंगा था और यह चादर भी घुटनों से ऊपर थी। नंगे पांव.....बड़ी और सफेद आंखें....चमकती हुई काली पुतलियां....मोटे-मोटे होंठ.....थोड़ा खुला हुआ मुंह और उसमें से झांकते हुए सफेद दाँत....धुंघराले सख्त बाल......चेहरा दाढ़ी-मूछों से साफ....कन्धे पर एक मोटी-सी जंजीर और उसमें बंधी एक घन्टी...यह घन्टी बायें हाथ के निकट लटकी हुई थी। जंजीर लोहे की थी, जबकि घन्टी पीतल की।जब वे कब्र के निकट आ रहा था, तो यह घन्टी टन-टन बज रही थी।यह अजीबो-गरीब शख्स कन के सामने आ खड़ा हुआ। उसने अपनी दोनों टांगें फैलाई। फिर जंजीर में बंधी हुई घन्टी उतारी। सीधे हाथ में घन्टी की जंजीर पकड़कर घन्टी को एक दायरे में घुमाया....और फिर झुककर बड़े जोर से घन्टी को कब्र पर मारा और बोला-"मैं हूं....हूरा..... "एकदम रेत का बादल-सा उठा और वह 'काला-देव' रेत के इस बादल में छिप गया ।
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देखते ही देखते वह एक कब्र-सी दिखाई देने लगी।रौली को जब यह इत्मीनान हो गया कि नमीरा की लाश अच्छी तरह सुरक्षित हो गई हैं तो वह हाथ झाड़ता उठ खड़ा हुआ और गाड़ी की तरफ बढ़ गया। रौली के स्टेयरिंग सम्भालते ही उसके दोनों साथी भी उसके साथ बैठे गये। रौली ने दूर से उसे रेत की कब्र पर एक नजर डाली....और फिर गाड़ी स्टार्ट करके स्टेयरिंग को तेजी से घुमाया। फिर गाड़ी अब वापिस हाई-वे की तरफ जा रही थी गाड़ी जब उस रेत की कब्र से बहुत दूर निकल गई तो पश्चिम दिशा से एक ऊंचे कद का व्यक्ति आता नजर आया ।उसका रूख नमीरा की कब्र था। वो हालांकि एक-एक कदम करके चल रहा था.....दौड़ नहीं रहा था....न तेज चल रहा था। इसके बावजूद यूं लगता था, जैसे वो हवा के घोड़ें पर सवार हो । वो देखते ही देखते कबग के निकट आ पहुंचा ।वह करीब आठ फुट ऊंचे आदमी था। एकदम काला भुजंग! चमकता हुआ काला बदल | उसने कवल एक सफेद चादर अपने शरीर पर लपेट रखी थी। ऊपर का बदन नंगा था और यह चादर भी घुटनों से ऊपर थी। नंगे पांव.....बड़ी और सफेद आंखें....चमकती हुई काली पुतलियां....मोटे-मोटे होंठ.....थोड़ा खुला हुआ मुंह और उसमें से झांकते हुए सफेद दाँत....धुंघराले सख्त बाल......चेहरा दाढ़ी-मूछों से साफ....कन्धे पर एक मोटी-सी जंजीर और उसमें बंधी एक घन्टी...यह घन्टी बायें हाथ के निकट लटकी हुई थी। जंजीर लोहे की थी, जबकि घन्टी पीतल की।जब वे कब्र के निकट आ रहा था, तो यह घन्टी टन-टन बज रही थी।यह अजीबो-गरीब शख्स कन के सामने आ खड़ा हुआ। उसने अपनी दोनों टांगें फैलाई। फिर जंजीर में बंधी हुई घन्टी उतारी। सीधे हाथ में घन्टी की जंजीर पकड़कर घन्टी को एक दायरे में घुमाया....और फिर झुककर बड़े जोर से घन्टी को कब्र पर मारा और बोला-"मैं हूं....हूरा..... "एकदम रेत का बादल-सा उठा और वह 'काला-देव' रेत के इस बादल में छिप गया ।
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