Incest पहाडी मौसम - Page 6 - SexBaba
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Incest पहाडी मौसम

आंख खुली तो सूरज के होश उड़ चुके थे,,,, उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि वह सपना देख रहा था,,, क्योंकि उसका सपना भी एकदम हकीकत जैसा ही था वह अपनी बहन से सपने में भी एकदम रूबरू संभोग रत हुआ था,,, ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि वह कोई सपना है ऐसा ही लग रहा था कि बिल्कुल हकीकत ही है तभी तो वह आंख खुली तो पल भर के लिए अचंभित हो गया था,,, दरवाजे पर दस्तक की आवाज आ रही थी जो कि उसकी बहन ही दे रही थी,,,।

Mukhiya ki bibi ki chudai





कुछ देर बाद उसे सब कुछ हकीकत लगने लगा वह समझ गया कि वह जो कुछ भी देख रहा था बस इतना ही था जो कुछ भी अपनी बहन के साथ कर रहा था बस सपने में कर रहा था,,, कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगा था,, जब अपनी दोनों टांगों के बीच अपने हथियार की तरफ देखा था उसका वीर्य पात हो चुका था वह समझ चुका था कि जो कुछ भी अपनी बहन के साथ किया था वहां सपने में हुआ था,,, दरवाजे पर दस्तक देकर उसकी बहन जा चुकी थी और जब उसे हकीकत का एहसास हुआ तो उसके चेहरे पर मुस्कान करने लगी लेकिन जो गर्मी उसकी बहन की बदन से उसे सपने में महसूस हुई थी उसके चलते उसका पूरा बदन पसीने से तरबतर हो चुका था,,,, एक अद्भुत एहसास मे वह पूरी तरह से डूब चुका था,,,।





कुछ देर तक सूरज अपने बिस्तर पर ही बैठा रह गया और सपना के मनमोहक दृश्य को याद करने लगा,,, वह बार-बार अपने मन से पूछ रहा था क्या सच में वह सपना देख रहा था सब कुछ तो हकीकत जैसा लग रहा था उसकी बहन घर की सफाई कर रही थी उसकी उभरी हुई गांड देखकर कर वह उत्तेजित हो गया था,,, उसे पर बिल्कुल भी काबू नहीं रह गया था और वह दरवाजा बंद करके सीधे अपनी बहन के पास पहुंच गया था और जब वह घर की सफाई कर रही थी तो सीधा अपने हाथ को उसकी गांड पर रखकर जोर से दबाना शुरू कर दिया था,,,।

Sunaina ki jawani





इतना भी नहीं सोचा कि उसकी हरकत से उसकी बहन गुस्सा हो सकती है उसकी इस हरकत से शर्मिंदा हो सकती है उसकी इस हरकत को अपनी मां से बता सकती हैं,,, लेकिन उसे समय तो न जाने कैसी मदहोशी छाई हुई थी आंखों में तुम्हारी छाई हुई थी अपनी बहन में वह एक औरत देख रहा था जो की बहुत खूबसूरत थी और सीधा उसकी गांड को मसलना शुरू कर दिया था किसी भी परवाह नहीं थी कि उसकी सरकार का उसकी बहन पर क्या प्रभाव पड़ेगा वह क्या जवाब देगी,,, लेकिन ऐसा लग रहा था कि जैसे सूरज की किस्मत बहुत तेज थी उसकी हरकत का उसकी बहन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ रहा था वह तेजी तुम्हें जा रही थी बस ऊपरी मन से उसे रोकने की कोशिश कर रही थी,,,।





और फिर सूरज अपनी मनमानी करना शुरू कर दिया,,, जबरदस्ती तो बिल्कुल भी नहीं कहा जा सकता था क्योंकि उसकी बहन उसे रोकने का बिल्कुल भी प्रयास नहीं कर रही थी और सूरज देखते-देखते उसकी सलवार की डोरी खोलकर सलवार को नीचे खींच दिया था,,, अपनी बहन की नंगी कोरी गांड देखकर सूरज की दिलो दिमाग पर वासना पूरी तरह से अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था और वह देखते ही देखे अपनी बहन की नंगी गांड को मसलते हुए,,, उसके हाथों में अपना हथियार थमा दिया था,,,, और जैसे ही रानी अपने भाई के लंड को अपने हाथ में पकडी सूरज को तो लगा जैसे वह जन्नत में पहुंच गया हो,,, वह आनंद के सागर में गोते लगाने लगा,,,।

Suraj or mukhiya ki bibi





और फिर दीवार से उसकी बहन को सटाकर उसे घोड़ी बना दिया,, और फिर पीछे से उसकी चुदाई करना सब कर दिया क्या सपना इतना हकीकत था कि उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि वह सपना देख रहा था,,, अपनी आलस को अंगड़ाई लेकर मरोड़ते हुए,, गहरी सांस लेने और फिर अपने बिस्तर से नीचे उतर गया और फिर अपने पजामे को पहनने लगा ,,, और फिर घर से बाहर निकल गया,,,। इधर-उधर घूमता हुआ वहां खेतों से गुजर रहा की तभी उसके कानों में आवाज सुनाई थी जो की कोई उसका ही नाम लेकर पुकार रहा था,,,, अपना नाम सुनकर सूरज वहीं रुक और इधर देखने लगा,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था की आवाज कहां से आ रही है क्योंकि चारों तरफ बड़ी-बड़ी झाड़ियां थी,,, लहलहाते खेत थे,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था तभी वह आवाज एकदम नजदीक आने लगी और उसे इतना तो समझ में आने लगा कि उसका नाम पुकारने वाला कोई आदमी नहीं बल्कि कोई औरत है,,,।





अरे सूरज कब से तुझे आवाज लगा रही हूं सुनाई नहीं देता क्या,,,?(एकदम से गहरी गहरी सांस लेते हुए सोनू की चाची बोली,,,,, आवाज ठीक उसके पीछे से आ रही थी सिलेबस तुरंत पीछे मुड़कर देखने लगा तो सामने सोनू की चाची को देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,,)

अरे चाची तुम,,,,

अरे हां मैं ऐसा लग रहा है कि तुझे तो सुनाई ही नहीं देता,,,(गहरी गहरी सांस लेते हुए बोली,,)

अरे चाची ऐसी बात नहीं है आवाज तो सुनाई दे रही थी लेकिन समझ में नहीं आ रहा था कि कहां से आ रही है आवाज,,,, वैसे बताओ क्या काम था ऐसा लग रहा है कि जैसे भागते हुए आई हो,,,,।

(इस बीच लगातार सोनू की चाची गहरी गहरी सांस ले रही थी,,,)





हां ऐसा ही है,,,, मैं कब से किसी का इंतजार कर रही थी तो कोई तुम्हारे और घास का ढेर उठा कर मेरे सर पर रखें लेकिन इतनी देर से खड़ी हुं कोई दिखाई नहीं दिया,,,तु दीखाई दिया तो तुझे तो कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा है,,,,।

Rani ek din isi tarah se kudegi





(सूरज सोनू की चाची को गौर से देखने लगा,,, और सोनू अपने मन में अंदाजा लगाने लगा कि सोनू की चाची की उम्र उसकी मां से लगभग 7 साल कम ही है लेकिन बदन से भारी जिससे अगर मां को और सोनू की चाची को खड़ा कर दिया जाए तो दोनों बहने ही लगेंगी दोनों की उम्र में बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ेगा,,,, सूरज बड़ी गौर से सोनू की चाची को देख रहा था उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर उसकी निगाह ठीक जा रही थी गोल चेहरा एकदम गोरा भारी बदन की होने की वजह से गांड भी एकदम जानदार थी,,, और भाग कर यहां तक आने की वजह से कंधे से साड़ी का पल्लू नीचे सड़क गया था और हाथ की कोनी में जाकर टिक गया था जिसकी वजह से उसकी मलाईदार छाती एकदम समझ कर हो गई थी और सूरज उसी पर अपनी निगाहें गड़ाए हुआ था,,,। सोनू की चाची की बात सुनकर सूरज बोला,,,)

नहीं चाहिए ऐसी कोई भी बात नहीं है मुझे आवाज सुनाई दे रही थी लेकिन मैं अपनी ही धुन में था इसलिए समझ में नहीं आया की आवाज कहां से आ रही है,,,,(सोनू की चाची की चूचियों की तरफ देखते हुए बोला,,,)

चल कोई बात नहीं कहीं काम से जा रहा था क्या ,,,?

नहीं तो ऐसे ही टहलने निकला था,,,,।





चल तब तो ठीक है,,,,(एकदम खुश होते हुए सोनू की चाची बोली)

वैसे काम क्या है चाची,,,(फिर से सोनू की चाची की मलाई दार चूचियों की तरफ देखते हुए बोला,,)

अरे ज्यादा कुछ नहीं करना है बस घास का ढेर उठा कर मेरे सर पर रख देना मैं घर पर लेकर चली जाऊंगी,,,,।

अरे चाचा मेरे होते हुए भला आपको बोझ उठा कर चलना पड़े ऐसा कैसे हो सकता है मैं हूं ना,,,,(सूरज उत्तेजना में गहरी सांस लेते हुए बोला उसकी नजर अभी भी सोनू की चाची की चूचियों पर टिकी हुई थी और जैसे ही सोने की चाची फेस बात का एहसास हुआ वह अपनी साड़ी के पल्लू को एकदम से ठीक करने लगी,, और उसे इस तरह से साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए देखकर सूरज अपनी बात करने की दिशा को बदलते हुए बोला,,,)

चलो चाची कहां रखी हो घास का ढेर,,,!





वह बड़े से पेड़ के नीचे,,,(उंगली के इशारे से दूर बड़े से पेड़ की तरफ दिखाते हुए सोनू की चाची बोली,,, लेकिन सुरज की निगाहों को पहचान कर,,, सोनू की चाची का दिल जोरो से धड़कने लगा था,,,, सोनू की चाची के मन में अजीब सी हलचल होने लगी उसे दिन की बात याद आने लगी जब घास का बोझ उठाते समय सूरज उसकी कलाई थाम लिया था उसकी पकड़ को महसूस करके उसके तन बदन में अजीब सी उलझन हो रही थी जो की खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली कार में हलचल मचा रही थी और इस समय भी सोनू की चाची को यही महसूस हो रहा था वह एकदम से अजीब सी उलझन में होती जा रही थी इसलिए उंगली से इशारा करने के बाद तुरंत आगे आगे चलने लगी और उसे आगे चलता हुआ देखकर सूरज भी पीछे-पीछे चल दिया,,,,, और बोला,,,)





क्या चाची सोनू को बुला ली होती तो बेवजह इधर-उधर घूमता रहता है,,,,।(सूरज जानबूझकर सोनू का जिक्र कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसकी चाची सोनू से िचढ़ती है क्योंकि सोनू कोई काम का नहीं था,,,, इसमें सोनू का जिक्र होते ही उसकी चाची बोली।)

अरे वह हरामजादा अगर काम का होता तो उसे साथ में नहीं ले जाती वह कोई काम का ही नहीं है,,,,।(सोनू की चाची इतना कहने के साथ ही सुनैना की पड़ोसन की बात के बारे में सोचने लगी वह बार-बार उसे सोनू का नाम लेकर उकसा रही थी,,, वह बार-बार उसे कह रही थी कि सोनू के साथ चुदवा कर मां बन जा,,, यह बात याद आते ही सोनू की चाची के मन में हलचल होने लगी और उसे यह भी याद आने लगा कि सुनैना की पड़ोसन सूरज का भी नाम ले रही थी जो कि उसके साथ ही चल रहा है,,,, और सूरज का ख्याल उसके मन में आते हैं न जाने की उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान तैरने लगी और अपने आप ही उसके दिमाग में ख्याल आ गया कि सूरज उसके लिए बेहतर है,,,, और तभी उसे बाजार में पंडित जी की बात याद आ गई कि उसे संतान सुख तो है लेकिन उसके पति से नहीं है और यह ख्याल मन में आते ही,,, वह सोचने लगी की क्या वाकई में उसकी किस्मत में किसी गैर मर्द का साथलिखा है,,,,।





वह अपने मन में सोचने लगी थी पंडित की कहानी बात कभी गलत नहीं हुई है इसीलिए तो जब भी कोई जरूरत पड़ती है तो लोग बाजार में पंडित जी के पास ही जाते हैं और उनसे अपना भविष्य जानते हैं क्योंकि आज तक सब कुछ सच होता आ रहा था तो यह बात भी क्या सच है कि दूसरों के साथ चुदवा कर ही वह मां बन पाएंगी,,, अभी वह अपने मन में यही सब सोच रही थी कि सूरज बोला,,,)

बात तो तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो चाची,,, सोनू हमेशा आवारा लड़कों की तरह घूमते रहता है उसे आज तक मैं घर का कोई काम करते नहीं देखा और जब देखो तब अगर खेलते भी है तो कहेगा कि मैं थक गया हूं मैं थक गया हूं उसे चलाने जा रहा है मुझे खेल नहीं जा रहा है इसलिए उसके साथ खेलने में भी मजा नहीं आता,,,।





(सूरज इस बात को जानबूझकर उसकी चाची को बता रहा था क्योंकि वह जानता था कि औरत और मर्द के बीच में थकान नाम की कोई चीज नहीं होनी चाहिए अगर जो मर्द औरत के साथ थक गया वह औरत के काबिल नहीं इसलिए वह सोनू की चाची को एहसास दिख रहा था कि सोनू उसके बिल्कुल भी काबिल नहीं है क्योंकि सूरज की नजर सोनू की चाची पर बदलने लगी थी सूरज सोनू की चाची के साथ हम बिस्तर होना चाहता था उस संबंध बनाना चाहता था क्योंकि आगे वह है जिस तरह से ऊंची नीची पगडंडी पर पैर रखकर चल रही थी उसके चलने के कारण उसकी बड़ी-बड़ी गांड आपस में रगड़ खाते हुए साड़ी के ऊपर से उभार लिए हुए नजर आ रही थी,,, जिसे देखकर सूरज उत्तेजित हुआ जा रहा था और अपने मन में यही सोच रहा था कि अभीभले सोनू की चाची साड़ी पहनी हुई है लेकिन उसकी यही बड़ी-बड़ी गांड को वहां एक दिन नंगी देख चुका है उसे पेशाब करते हुए देख चुका है और यह पूरा से उसके भतीजे कोई जाता है जिसने इतना मदहोश कर देने वाला दृश्य उसे दिखाया था और उसके जीवन को बदल कर रख दिया था,,,, सूरज की बात सुनकर सोनू की चाची बोली,,,)

रानी और सुरज





बात तो तु सही कह रहा है सूरज,,, घर का एक काम नहीं करता है कोई भी कम करो बस ना कह देता और भाग जाता है बिल्कुल अपने चाचा की तरह ही है मरीयल यहां तक कि जब भी मैं नहाने जाती हूं तो उसे रहती हूं कि एक बाल्टी पानी पहुंचा दे तो उससे इतना भी नहीं होता,,,।

(सोनू की चाची की है बात सुनकर सूरज सोनू को अपने मन में ही गाली देने लगा कि साला इतना अच्छा मौका होने के बावजूद भी मौके का फायदा नहीं उठा पाता,,, साला मैं अगर होता तो,,, पानी पहुंचाने के बहाने सीधा गुसलखाने में बहुत ज्यादा और एक बहाने से नहला भी देता वाकई में सोनू एकदम नकारा है,,,, सोनू की चाची की बात को सुनकर सूरज बोला,,)

सोनू की चाची





पागल है सोनू ,,,चाची,,, मैं अगर सोनू की जगह होता तो मैं तुम्हारा सारा काम कर देता तुम्हें हाथ चलाने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ती,,,,(गहरी सांस लेते हुए सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी गांड को घूरते हुए वह बोला और उसकी बात सुनकर सोनू की चाची एकदम खुश हो गई और नजर पीछे घूमाकर सुरज की तरफ देखने लगी और उसकी तरफ देखकर एकदम से दंग रह गई क्योंकि उसे एहसास होगया कि सूरज उसकी बड़ी-बड़ी गांड को ही देख रहा था एकदम से सोनू की चाची वापस अपनी नजर को घुमा ली और हैरान होते हुए अपने मन में सोचने लगी कि यह सूरज उसके बारे में क्या सोच रहा हैं कभी उसकी चूची की तरफ तो कभी उसकी गांड की तरफ देख रहा है ऐसा तो मर्द औरत की तरह आकर्षित होने के बाद ही करते हैं क्या यह मेरी कृपा आकर्षित हो रहा है क्या यह मुझे कुछ चाहता है,,,, हे भगवान को समझ में नहीं आ रहा है कि सूरज के मन में चल क्या रहा है कहीं पंडित की कही बात सच तो नहीं हो जाएगी,,,, यही सब सोते हुए दोनों बड़े से पेड़ के पास आ गए थे सूरज ने देखा कि सोनू की चाची बड़ा सा घास का ढेर करके रखी हुई थी,,,, वहां पहुंचते ही सोनू की चाची बोली।

इसे बांध कर तू मेरे सर पर रख दे मैं घर लेकर चली जाऊंगी,,,,।

क्या बात कर रही है चाची मेरे होते हुए तुम्हें उठाना पड़े तो फिर मेरा होना ही बेकार है,,, मैं उठा कर ले जाऊंगा,,,,।

तू इतना बड़ा ढेर उठा लेगा,,,,!(जानबूझकर आश्चर्य जताते हुए सोनू की चाची बोली)

क्या बात कर रही हो चाची ,,,, इतना मजबूत शरीर क्यों बनाया हूं कहो तो तुम्हें भी उठा कर तुम्हारे घर तक ले चलु,,,।

(सूरज शरारत करते हुए बोला लेकिन उसकी इस बात को सुनकर सोनू की चाची की दोनों टांगों के बीच हलचल होने लगी,,,, क्योंकि सूरज एकदम मर्दों की तरह बात कर रहा था जो कि अपनी बात से ही उसे पानी पानी कर रहा था और इस बात से ही सोनू की चाची ना जाने क्यों उसकी तरफ आकर्षित हो जा रही थी एक तरफ पंडित जी की कही बात थी उसकी भविष्यवाणी थी और दूसरी तरफ का सूरज जो उसकी तरफ आकर्षित हुआ जा रहा था यह सब देखकर सोनू की चाची को न जाने क्यों ऐसा लगने लगा था की हालत इशारा कर रहा था पंडित की कही बात बिल्कुल सच होने जा रही थी सोनू की चाची को लगने लगा था कि कहीं उसका संबंध सूरज से ना बन जाए,,,। सूरज की बात सुनकर शरमाते हुए बोली,,,)

धत् कितना बेशर्म है तू,,,, कोई औरत को उठा कर ले जाता है क्या,,,!

अरे चाचा तुम्हें विश्वास नहीं है इसलिए कह रहा था आखिरकार मर्दानगी तो औरत पर ही दिखाई जाती है ना असली मर्द तो वही होता है जो औरत को हर हाल में खुश रखें,,,,।

तो तू मुझे खुश रखना चाहते हैं लेकिन यह काम तो पति का होता है,,,,।

होता तो है चाची,,, लेकिन जब जरूरत पड़े तो किसी को भी सहारा बन जाना चाहिए,,,।

तेरी बातों से तो ऐसा लग रहा है कि बहुत बड़ा हो गया है तू,,,।

(सोनू की चाची की बात को सुनकर सूरज अपने मन में ही बोला मैं क्या चाची मेरा लंड भी बड़ा हो गया है एक बार लेकर तो देखो,,,, फिर भी वह औपचारिकता निभाते हुए बोला,,,)

सही बोलु तो चाची समय के साथ इंसान को बड़ा हो जाना चाहिए,,,,। अब रुको जरा में घास को बांध दु,,,(और इतना क्या कर रहा है रस्सी ढूंढने वाला और सोनू की चाची को सही देख रही थी उसकी बात को सुनकर खास करके मर्दानगी वाली बात पर न जाने क्यों उसकी आंखों के सामने ऐसा नजर आने लगा कि जैसे वह उसे अपनी गोद में उठाकर उसे खटिया पर ले जाकर पटक दिया और उसका ब्लाउज खोलने की जगह जोर से खींच कर फाड़ दिया उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दोनों हाथों में भरकर जोर-जोर से दबाते हुए उसके लाल होंठों का रस पीने लगा,,,,,,, यह सब सो कर उसे कुछ-कुछ होने लगा था लेकिन न जाने किस तरह की कल्पना करने से बहुत मजा आ रहा था,,,,।

और वह फिर से अपनी कल्पना को आगे बढ़ाते हुए सोचने लगी की बिस्तर पर उसकी चूचियों से खेलने के बाद सूरज उसकी साड़ी को बिना खोले बिना उसकी पेटिकोट उतारे,,, सीधा एक झटके नहीं उठा कर उसे कमर तक खींच दिया और फिर दोनों टांगों को दोनों हाथों से पकड़ कर बड़ी ही बेरहमी से फैला दिया और फिर अपने मोटे तगड़े लंड को एक झटके में उसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया यह एहसास या कल्पना उसे पूरी तरह से पानी पानी कर दिया था वह मदहोश हो गई थी,,,, उसकी टांगों में कंपन हो रहा था बहुत तेज सेवा के परम शिखर पर केवल कल्पना करके ही पहुंच चुकी थी,,,,,।

वह कल्पना में तल्लीन थी और सूरज रस्सी ढूंढ कर घास के ढेर को बांध चुका था,,,, और फिर बिना सोनू की चाची का सहारा लिए वह अपने हाथ से ही उठाकर उसे अपने सर पर रख लिया था यह देखकर सोनू की चाची भी हैरान हो गई थी उसकी मर्दाना ताकत उसे पूरी तरह से मोहित कर रही थी,,,,, सर पर बोझा उठाए हुए वह सोनू की चाची से बोला,,,।

ले चलु चाची घर,,,,।

अब तुझे इनकार करूंगी तो भी तू माने वाला नहीं है,,,, काश सोनू की जगह तू होता तो मेरा कितना काम कर देता,,,(ऐसा मन में सोते हुए वह अपने आप से ही बोली मां बनने का भी सुख तेरे से ही प्राप्त हो जाता,,,)

क्या हो गया चाचा सोनू और मुझ में कोई फर्क है क्या सोनू की जगह ही मुझे समझो हमेशा मैं तुम्हारी मदद करते रहूंगा,,,,।

सोनू और तुझ में जमीन आसमान का फर्क है रे,,,,

मैं कुछ समझा नहीं चाची,,,,।

समय आएगा तो समझ जाएगा,,,,,,अब चल,,,, नहीं तो खड़े-खड़े थक जाएगा,,,।

क्या चाची तुम भी,,,, मुझे क्या समझी हो,,, मैं कभी भी नहीं दिखने वाला खड़े-खड़े या लेटे-लेटे चाहे जैसे कहो,,,,।

(सूरज कि ईस बात पर सोनू की चाची एकदम से शर्म से पानी पानी हो गई सोनू की चाची समझ रही थी कि सूरज क्या कहना चाह रहा है इसलिए अपने आप को सहज करते हुए बोली लेकिन इतने में भी उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,)

अच्छा चल,,,, बातें बना रहा है जब समय आएगा तो ढेर हो जाएगा,,,,।

अरे चाची,,, जब समय आएगा तो खुद ही देख लेना ढेर हो जाता हूं या ढेर कर देता हूं,,,।

(अब सोनू की चाची कुछ बोल नहीं पाई बस उसे चलने का इशारा की और सुरज आगे आगे चलने लगा ,, सूरज की बातें उसे झकझोर कर रख दे रही थी,,, बरसों बाद किसी ने उसे के साथ इस तरह की बातें किया था और इस तरह की बातें सुनकर उसका रोम रोम पुलकित हो गया था,,,।)
 
सूरज सोनू की चाची से बातों का आनंद ले रहा था सोनू की चाची से बात करने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,, यह वही सूरज था जब सोनू को कभी उसके घर बुलाने जाता था तो सोनू की चाची की तरफ देखता तक नहीं था,,, उसे समय भी सोनू की चाची उसे छोटे-मोटे काम करने के लिए बुलाती थी लेकिन वह भाग जाता था लेकिन आज ऐसा था कि सूरज खुद सोनू की चाची की तरफ आगे बढ़ता जा रहा था,,,,।

सर पर घास का ढेर लिए सूरज आगे आगे चल रहा था और सोनू की चाची पीछे-पीछे चल रही थी सोनू की चाची के मन में उसके तन बदन में अजीब सी हलचल मची हुई थी उसके मन में बहुत सारे सवाल उठ रहे थे खास करके बाजार में कही गई पंडित की बात को लेकर तो उसका मन बड़ा व्याकुल हो रहा था,,,। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या करना चाहिए शादी को काफी समय गुजर गया था लेकिन ना तो शरीर सुख मिल रहा था और नहीं संतान सुख,,,, सोनू की चाची अपने आप से ही सवाल करते हुए पूछ रही थी,,,।

क्या मैं बुढी हो गई हूं,,, क्या मेरी ख्वाहिश नहीं है क्या मैं शरीर सुख पानी की हकदार नहीं है क्या मुझे संतान सुख नहीं चाहिए,,,, मेरी उम्र ही क्या है शादी को सात आठ साल तो हुए हैं लेकिन फिर भी सब कुछ अधूरा सही है पति ऐसा मिला कि जो ना तो शरीर सुख दे पा रहा हूं नहीं संतान सो और जब शरीर सुख नहीं दे पा रहा है तो संतान सुख कहां से देगा,,, ओर हो सकता है शायद भगवान को भी यही मंजूर हो तभी तो पति ही ऐसा मिला है एकदम मरीयल सा,,, ना तो उसे औरतों को खुश करने की ताकत है और ना ही मां बनाने की क्षमता,,, और उसके किए की सजा मुझे मिल रही है मेरा क्या कसूर है क्या बिगाड़ा है मेने किसी का,,, जो मुझे इस तरह की सजा मिल रही है,,,।

दूसरी औरतों को देखती हूं तो सोचती हूं खास मेरा भी जीवन औरतों की तरह होता तो कितना अच्छा होता छोटे-छोटे बच्चे,,, जो दिन रात मां मां कह कर पुकारते,,, रात को मर्दाना ताकत से भरा हुआ पति हर धक्के में स्वर्ग का सुख देता,,,, काश ऐसी मेरी किस्मत होती तो मजा आ जाता,,,,, लेकिन कर भी क्या सकते हैं,,,,,(अपने आप से इस तरह की बात कर रही थी कि अपने ही सवाल में उसे जैसे जवाब मिल गया हो और वह एकदम से खुश होते हुए अपने आप से ही बोली)

हो सकता है क्यों नहीं हो सकता पंडित जी ने भी तो यही कहा था कि उसके हाथ की रेखा में संतान सुख जरूर है लेकिन उसके पति से नहीं किसी गैर मर्द से इसका मतलब साथ है कि ऊपर वाले ने ही उसे इजाजत दिया है दूसरे मर्द से संबंध बनाने के लिए अपनी खुशी ढूंढने के लिए मां बनने के लिए हर तरह का सुख पाने के लिए तो क्यों ना ऊपर वाले की मर्जी को सम्मान दिया जाए,,,, लेकिन किसके साथ,,,।

सोनूके साथ,,,, नहीं नहीं सोनू बिल्कुल भी नहीं वह भी तो अपने चाचा की तरह ही मरियल सा है घास का बोझ तो उठाया नहीं जाता वह उसे कैसे उठाएगा,,,, कहीं वह भी अपने चाचा की तरह ही निकल गया कि पहले ही धक्के में ढेर हो गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,, सारा मजा कीरकीरा हो जाएगा और अगर किसी तरह से वह सोनू से गर्भवती हो भी गई तो बच्चा भी उसी की तरह ही होगा मरियल सा नहीं नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं होने दूंगी,,, सोनू तो बिल्कुल भी नहीं,,,,।

यह सूरज कैसा रहेगा हट्टा कट्टा जवान बांका है ,, इसकी शरीर की कद काठी को देखकर ऐसा लगता है कि यह जरूर मुझे दुनिया की खुशी देगा शरीर सुख देगा और मुझे मा भी बनाएगा,,,, सूरज का नाम तो सुनेना दीदी की पड़ोसन भी ले रही थी,,, वही तो सही थी की सूरज के साथ संबंध बनाकर मां बन जा कोई बात सूरज की मां भी गई थी भले ही मजाक में कहीं हूं लेकिन कहीं तो थी ही क्योंकि शायद लोग भी जानती हैं कि उसके लिए सूरज से अच्छा लड़का कोई भी गांव में नहीं होगा जो उसकी जरूरत को पूरा कर सके,,, सूरज भी तो उसे टुकुर-टुकुर देखता हैं पहले तो पास में नहीं आता था नजर मिलाने से डरता था भाग जाता था उसे दिन तो घास का बोझ उठने के बहाने किस तरह से कलाई पकड़ लिया था उस समय तो मेरे बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,, उसकी पकड़ ही इतनी गजब की थी,,, और अभी भी तो उसकी नजर उसकी चूची ऊपर और बड़ी-बड़ी गांड पर ही है,,, यह सब ऐसे ही थोड़ी हो रहा है हो सकता है ऊपर वाले का इशारा है अगर ऊपर वाले ने किस्मत में कुछ और लिखा है तो इसके साथ संबंध बनाकर मां बनना लिखा है उसे भी तो मिलाना भी उसकी जिम्मेदारी है,,,,।

कहीं यह सब जो भी हो रहा है सूरज का उसके साथ मिलना जुलना उसके बदन को निहारना उसकी तरफ आकर्षित होना यह सब ऊपर वाले का ही तो इशारा नहीं है क्या ऊपर वाला खुद चाहता है कि मैं सूरज के साथ संबंध बनाऊं,,, वरना इतना बदलाव एक लड़के में कैसे आ सकता है जो लड़का कुछ दिन पहले औरतों से डरता था घबराता था उनके पास नहीं आता था आज वह खुद आगे चलकर मदद करने को तैयार है किसी भी तरह की मदद करने को हाजिर है,,,, सोनू की चाची अपने मन में यही सब सो रही थी और काफी देर तक खामोशी छाई रहने की वजह से सूरज बोला,,,।

क्या हुआ चाची खामोश क्यों हो,,? कुछ बोलती क्यों नहीं,,!

क्या बोलूं,,,,?

अरे कुछ भी बोल बोलने का कहां पैसा लगता है,,,।

मुझे मालूम है बोलने का पैसा नहीं लगता लेकिन कोई सुनने वाला भी तो होना चाहिए,,,,।

कैसी बातें कर रही हो चाची मैं हूं ना सुनने वाला तुम बोलो मैं सुन रहा हूं,,,(घास का बोझ सर पर उठाएं आगे आगे चलते हुए सूरज बोला,,,, पीछे पीछे सोनू की चाची अपने अरमानों को पंख देने की चाह में बहुत कुछ सोच रही थी,,, और सुरज की बात सुनकर बोली,,,)

तेरे सुनने से क्या होता है जिसको सुनना चाहिए वो तो सुनता ही नहीं है,,,।

क्या मतलब,,,, कहीं तुम सोनू की बात तो नहीं कर रही हो,,,,।

नहीं रे,,, सोनू तो निठल्ला है,,, बिल्कुल उसके चाचा की तरह,,, वह दोनों तो बिल्कुल भी नहीं सुनते,,,।

(सोनू की चाची की बातों का दर्द कुछ कुछ सूरज समझ रहा था,,, क्योंकि मैदान में सौच करते समय सोनू की चाची के साथ-साथ अपनी मां और अपनी पड़ोसन की बातों को उसने चोरी छिपे सुना था वह जानता था कि सोनू की चाची का दर्द क्या है क्या चाहती है ना तो उन्हें सभी सुख मिल रहा था और उसी का फायदा सूरज उठाना चाहता था,,,, इसलिए सोनू की चाची की बात को सुनकर वह बोला,,,)

क्या कह रही हो चाची क्या चाचा भी तुम्हारी बात नहीं सुनते,,, सोनू का तो मैं जानता हूं वह एकदम बेकार है लेकिन मुझे नहीं लगता कि चाचा के बारे में तुम्हारा कहना सही होगा,,,, मैं उन्हें जब भी देखता हूं तब वह खेतों में काम करते रहते हैं,,,,,।

हां बस खेतों में ही काम करते रहते हैं खेत की जुताई उन्हें अच्छी तरह से पता है लेकिन औरत की चू,,,(इतना कहकर वह एकदम से खामोश हो गई उसकी दिल की बात अचानक उसके होठों पर आते-आते रुक गई थी लेकिन सूरज उसकी बात के मतलब को समझ गया था,,,, उसके इस तरह से इकाई खामोश हो जाने की वजह से सूरज जानबूझकर बोला,,,)

क्या हुआ चाची,,, चुप क्यों हो गई चाचा की क्या गलती है,,,!

उनकी गलती यही है सूरज की वह सिर्फ खेतों के बारे में जानते हैं एक औरत के मन को नही जानते हैं और ना ही समझते हैं,,,।(सोनू की चाची थोड़ा गुस्से में बोल रही थी,,, और सूरज उसके कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रहा था लेकिन जानबूझकर अनजान बनने की कोशिश कर रहा था इसलिए वह बोला)

औरत को समझने में कौन सी पढ़ाई करनी पड़ती है चाची मैं तो औरतों की बातों को अच्छी तरह से समझ जाता हूं देखो तुम दूर से मुझे बुलाई मैं जल्दी से आ गया ना तुम्हारे पास तुम्हारी मदद करने,,,,

तू भी सोनू के चाचा किसी तरह है बातों को भी ना तो समझ पा रहा है या नहीं और उसके मन को समझ पा रहे हैं तुझे भी नहीं मालूम की औरत क्या चाहती है क्या जरूरत है,,, औरत का मन क्या- होता है,,, तू भी एकदम निठल्ला ही है,,,।

ऐसा क्यों कह रही हो चाची मैं तो सब कुछ समझता हूं,,,।

चल रहने दे,,,, दिखाई देता है तु कितना समझता है,,,।

( सोनू की चाची को ऐसा लगने लगा था कि सूरज भी उसके पति की तरह ही बेकार है वह भी उसके मन को नहीं समझ सकता,,, वरना इस तरह की बातें ना करता सीधे मतलब की बात पर आ जाता,,,, उसकी बातों को सुनकर उसे लगने लगा कि शायद सूरज उसके लिए ठीक नहीं है भले लंबा तगड़ा चौड़ा हो गया है लेकिन दिमाग से अभी बच्चा ही है,,, कहीं ऐसा ना होगी उसके साथ सभी संबंध बनाकर बदनामी उठाना पड़े अगर वह अपनी बालबुद्धि का प्रदर्शन करते हुए उसके बारे में किसी को कुछ भी बता दिया तो बदनामी हो जाएगी इसलिए पल भर के लिए सूरज का ख्याल सोनू की चाची के मन से निकलने लगा और इसी बीच उसका घर भी आ गया था,,,,।

दरवाजा बंद था इसलिए सोनू की चाची जल्दी से दरवाजे के पास आई और बोली,,,।

रुक रुक ,,,, यहां नहीं रखना मैं दरवाजा खोलती हूं,,,

(और इतना कहने के साथ ही सोनू की चाची लपक कर दरवाजे की कुंडी खोलने लगी,,, कुंडी खोलने के लिए उसने अपना हाथ थोड़ा सा ऊपर उठे और उसके हाथों पर उठाने की वजह से उसकी कमर की गहरी लकीर एकदम साफ दिखाई देने लगी जिसे देखकर सूरज का लंड करवट लेने लगा,,, सूरज के सर पर बोझ था उसका दोनों हाथ खाली नहीं था वरना इस समय वह यही सोच रहा था कि अपना हाथ उसकी कमर पर रखकर जोर से मसल दे क्योंकि वह जानता था कि सोनू की चाची को क्या चाहिए और वह बिल्कुल भी इनकार नहीं कर पाती,,,,।

सोनू की चाची जल्दी से दरवाजा खोल दी और फिर खुद अंदर प्रवेश करते हुए उसे अंदर आने के लिए बोली,,,,, घर का आंगन पूरी तरह से खुला हुआ था एक तरफ हेड पंप था जहां पर नहाने धोने का काम किया जाता था और दूसरे कोने पर ईंधन रखा हुआ था वहीं पर इशारा करते हुए सोनू की चाची बोली,,,)

यहां पर रख दे सूरज,,,,।

ठीक है चाची,,,,(और इतना कहने के साथ ही उसे कोने में वह घास का ढेर नीचे गिरा दिया और गहरी गहरी सांस लेने लगा यह देखकर सोनू की चाची बोली)

थक गया ना सूरज,,,।

नहीं चाची बिल्कुल भी नहीं,,, अगर तीन कोश और चलना होता तो भी मैं आराम से चल लेता,,,,।

चल इतना तो सही है मेहनत करने में अच्छा है लेकिन अभी भी तू नादान है,,,,।

नादान नहीं हुं चाची बड़ा हो गया हूं,,,,।

हां हां जानती हूं बड़ा हो गया है,,,, अब तो यहीं बैठ मैं तेरे लिए पानी लेकर आती हूं,,,,।

(इतना कहकर वह घर में चली गई,,, और सूरज जो दीवाल के सहारे खटिया खड़ी थी उसे गिराकर उसे गिराकर बैठ गया,,, और सोनू की चाची की उसे बात पर गौर करने लगा जब खेत की जुताई के बारे में बात कर रही थी साथ में ही औरत की चुदाई की भी बात उसके मुंह से अनजाने में निकल गई थी वह पूरी बात नहीं कर पाई थी लेकिन उसके कहने का मतलब यही था सूरज को पक्का यकीन हो गया था कि सोनू की चाची चुदवाने के लिए तड़प रही है,,, और यह ख्याल उसके मन में आते ही सूरज के पजामे में उसका लंड करवट लेने लगा,,, और वहां खटिया पर से खड़ा हो गया,,,, और जहां सोनू की चाची गई थी उसके पीछे चल दिया अपने मन में यह सोचकर कि आज सोनु की चाची से अपने मन की बात कह कर रहेगा,,,

धीरे-धीरे वह घर में प्रवेश कर गया घर सीधा-सीधा बना हुआ था एक कमरे से दूसरे कमरे में वह पहुंच चुका था लेकिन कहीं भी सोनू की चाची नजर नहीं आ रही थी बाहर से उजाला आ रहा था तो सोनू समझ गया कि शायद पीछे वाली जगह खुली हुई है वहीं पर होगी धीरे से घर के पीछे वाली जगह पर आ गया जहां पर चुल्हा रखा हुआ था,,, उसे देखकर सूरज समझ गया कि यहां पर ही रसोई बनती है,,, लेकिन फिर भी वह यहां वहां खड़ा होकर देख रहा था लेकिन कहीं भी सोनू की चाची नजर नहीं आ रही थी घर के पीछे की तरफ थोड़ी बहुत सब्जियां उड़ा रखी थी यहां पर कुछ अमरूद के पेड़ थे कुछ बैर के पेड़ थे,,, वह यह सब देख ही रहा था कि तभी उसे झाड़ियां के पीछे थोड़ी सी हलचल और चूड़ियों की आवाज सुनाई दी,,,, और वह उसे दिशा में अपने कदम आगे बढ़ा दिया,,,,।

जैसे ही झाड़ियों की दूसरी तरफ सूरज ने नजर बढाया तो उसकी आंखों के सामने जो नजारा दिखाई दिया उसे देखकर एक बार फिर से उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया,,, ऐसा नहीं था कि सूरज पहली बार सोनू की चाची को पेशाब करते हुए देख रहा हूं वह पहले भी दो-तीन बार सोनू की चाची को पेशाब करते हुए देख चुका था इसमें नयापन कुछ भी नहींथा,,,, लेकिन आज हालात बदल चुके थे क्योंकि जितनी बार भी वह सोनू की चाची को पेशाब करते हुए देखा था वह घर के बाहर खेतों में ही देखा था लेकिन आज माहौल पूरी तरह से बदल चुका था वह सोनू की चाची को उसके ही घर में पेशाब करते हुए देख रहा था और वह भी एकदम नजदीक से उसकी बड़ी-बड़ी गांड सुनहरी धूप में चमक रही थी जिसे देखकर सुरज का लंड अपनी औकात में आ चुका था,,,।

सूरज फटी आंखों से सोनू की चाची को पेशाब करते हुए देख रहा था उसके मन में जरा भी डर नहीं था कि अगर सोनू की चाची उसे देख लेगी तो क्या होगा क्योंकि सोनू की चाची के मन में क्या चल रहा है यह सूरज अच्छी तरह से जानता था वह जानताथा कि सोनू की चाची उसे कुछ नहीं बोलेगी बल्कि उसकी यह हरकत पर मदहोश हो जाएगी,,,,, इसीलिए सूरज हिम्मत दिखाकर वहीं पर खड़ा रहा और इस बात से अनजान की सूरज एकदम नजदीक से उसे पेशाब करते हुए देख रहा है अचानक ही उसे परछाई दिखाई दी और वह एकदम से घबरा गई जब नजर उठाकर देखी तो ठीक उसके पीछे सूरज खड़ा था और उसे पेशाब करते देख रहा था उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी उसकी नंगी गांड एकदम दिखाई दे रही थी यह देखकर वह एकदम से सन्न रह गई,,, और एकदम से उठकर खड़ी हो गई लेकिन खड़े होने के बावजूद भी वह साड़ी को कमर से नीचे गिराना भूल गई और इस अवस्था में खरीदा गई और अभी भी सूरज उसकी नंगी गांड को प्यासी आंखों से देख रहा था,,,।

सूरज सोनु की चाची को दो-तीन बार पेशाब करते हुए उसकी नंगी गांड को देख चुका था लेकिन यह बात सोनू की चाची नहीं जानती थी उसे क्या मालूम था कि सूरज उसकी जवानी की झलक को पहले भी देख चुका है वह तो यही जानती थी की पहली बार सूरज उसे इस अवस्था में देख रहा है इसलिए एकदम से शर्म में से पानी पानी हुई जा रही थी,,, जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि साड़ी अभी तक कमर तक उठी हुई है वह एकदम से साड़ी को नीचे छोड़ दी और एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा पड़ गया और वह हड़बड़ाते हुए बोली,,,।

तततत,,, तु यहां क्या कर रहा है,,, तुझे तो मैं वहां देखने के लिए बोली थी ना,,,,।

बोली तो थी चाची,,, लेकिन मैं यह कहने के लिए आया था कि तकलीफ की कोई जरूरत नहीं है मुझे जरुरी काम से जाना पड़ेगा इसलिए मैं रुक नहीं सकता,,,,,।

(और इतना कहने के साथ ही सूरज बिना सोनू की चाची का जवाब सुने वहां से चलता बना क्योंकि जिस तरह से उसे देखकर वह हड़बड़ाई थी सूरज अपने मन में सोचने लगा कि अगर सोनू की चाची चुदवाना चाहती है तो इस तरह से घबराती नहीं और इसीलिए उसे इस बात का डर था कि कहीं लेने के देने ना पड़ जाए इसलिए वह वहां से चलता बना,,, सोनू की चाची उसे रोकना चाहती थी लेकिन इस समय उसके मुंह से एक भी शब्द नहीं फूट रहे थे और देखते ही देखते सूरज चला गया था,,,।)
 
सूरज सोनू की चाची के घर से वापस आ चुका था और अपने घर ना जाकर सीधा बगीचे में चला गया था जहां पर उसकी मुलाकात नीलू से हुई थी और नीलू की चुदाई होते होते रह गई थी,,,, अब उसे पक्का यकीन हो गया था कि सोनू की चाची जल्द ही उसके नीचे आ जाएगी,,, सोनू को एहसास हो गया था कि वाकई में सोनू की चाची काफी प्यासी एक तो मर्द की तड़प दूसरी मां बनने की चाहत दोनों उसे उसके नीचे ले आने पर मजबूर कर देगी,,,,। अंदर ही अंदर सूरज बहुत खुश हो रहा था और बगीचे में इधर-उधर घूम रहा था क्योंकि यहीं पर वह नीलु का इंतजार करेगा ऐसा कहा था लेकिन इस बात पर वह पक्का नहीं था कि नीलू वहां पर दोबारा आएगी,,, लेकिन फिर भी जहां चाह होती है वहीं राह होती है यही सोचकर वह इधर-उधर घूमता रहता था,,,।

Sonu ki chachi k armaan





लेकिन शाम हो गई नीलू का कोई पता नहीं था इस तरह से सूरज तीन-चार दिन तक उसका इंतजार करता रहा,,,, लेकिन नीलू उधर नहीं आई,,, तब सूरज को लगने लगा कि शायद वाकई में वे ईधर नहीं आने वाली,,,, इसलिए एक दिन घूमता फिरता हुआ वह उसके घर के पास पहुंच गया,,, सुबह का समय था मौके पर मुखिया और मुखिया की बीवी दोनों वहीं पर मौजूद थे घर के बाहर कुर्सी डालकर दोनों बैठे हुए थे और मजदुरों को उनके काम के बारे में समझा रहे थे,,, और लोग अपने काम के बारे में पूछ कर वहां से काम करने के लिए निकल जा रहे थे तभी मुखिया की नजर सूरज पर पड़ी तो वह बोला,,,।

अरे सूरज आओ,,,आओ,,,, वहां खड़े क्या कर रहे हो,,,,।





कुछ नहीं मालिक बस घूमता हुआ इधर आ गया,,,(नमस्कार करते हुए सूरज बोला,,, पास में ही बैठी मुखिया की बीवी सूरज को देखते ही उसे उसे दिन वाली घटना याद आ गई जब वह खाना बना रही थी पास ही गुशल खाने में उसकी बड़ी लड़की नहा रही थी और सूरज अपनी हरकतों से उसे पूरी तरह से गर्म करके उसे चुदवाने पर मजबूर कर दिया था,,,, सूरज की हिम्मत और उसकी मर्दाना ताकत कि वह पूरी तरह से कायल हो चुकी थी बगीचे में तो वह जी भर कर सूरज के मर्दाना अंग का मजा ले चुकी थी लेकिन वह नहीं जानती थी कि सूरज इस तरह से घर में घुसकर उसकी चुदाई करके चला जाएगा उसकी यही अदा तो मुखिया की बीवी को उसका दीवाना बना दी थी,,, सूरज की तरफ मुस्कुरा कर देखते हुए मुखिया बोले इससे पहले ही वह बोली,,,,)

काम के लिए आया है क्या,,,?

ऐसी कोई बात नहीं है मालकिन बस घूमता हुआ इधर आ गया काम मिल गया तो काम ही सही,,,,।





जब कोई बात नहीं समय पर आ गया है,,,, घर के पीछे वाले खेतों में पानी दिया जा रहा है देख नाली में से पानी ठीक से जा रहा है कि नहीं अगर नहीं जा रहा है तो मिट्टी ठीक से काट देना ताकि आराम से पानी चला जाए खेतों में वर्ना सारा पानी इधर-उधर चला जाएगा,,,,।

की मालकिन,,,,(इतना कहकर वह चलने वाला था की मुखिया की बीवी बोली)

अरे फरसा तो ले ले क्या हाथ से ही मिट्टी काटेगा,, ।

जी मालकिन,,,,(और इतना कहने के साथ अभी पास नहीं पड़ा फरसा अपने हाथ में उठा लिया और उसे कंधे पर रखकर घर के पीछे की तरफ जाने लगा आज उसका काम करने में मन नहीं था बल्कि वह तो आज नीलू से मिलने आया था उससे बोलने आया था कि वहां बगीचा में क्यों नहीं आता जबकि रोज वह उसका वही इंतजार करता है,,,, मन में यही सोचता हुआ वहा घर के पीछे चला गया,,, और मुखिया की बीवी उसे घर के पीछे जाते हुए देखते रह गई क्योंकि उसके मन में तो कुछ और चल रहा था,,,,।





super deduper

वह जानती थी कि बुर की प्यास सूरज को यहां खींच लाई है और वह इसका पूरा मजा लूटना चाहती थी वह थोड़ी ही देर में घर के पीछे जाने के बारे में सोच रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उस जगह पर कोई नहीं होगा और वह वहां पर जाकर चुदाई का मजा ले सकेगी,,,,, लेकिन वह जाने ही वाली थी कि तभी उसे कुछ जरूरी काम आ गया,,,, और उसे काम के सिलसिले में मजदूर लेकर दूसरे खेत की तरफ जाना पड़ा वहां जाना जरूरी था,,,,,।

सूरज चलता हुआ खेत के पास पहुंच चुका था पास में ही ट्यूबवेल चालू था उसमें से पानी निकल रहा था और खेतों में जा रहा था,,,, सब कुछ सही था तभी उसकी नजर ट्यूबवेल के ही पास बनी कच्ची दीवार पर कपड़े पर गए जो उस पर रखे हुए थे और वह किसी लड़की के थे,,, सूरज सच में पड़ गया कि यहां लड़की के कपड़े कैसे आ गए,,,, और यही देखने के लिए वह धीरे-धीरे दीवार के पास पहुंच गया दीवार सूरज की लंबाई से तकरीबन एक हाथ कम ऊंचाई की थी इसलिए सूरज दीवार के पास आते ही दीवार की दूसरी ओर देखने लगा और दूसरी और देखते ही उसके होश उड़ गए,,,,।

Sonu ki chachi or suraj





उसकी आंखें फटी की फटी रह गई उसकी नजर उस दृश्य से हटने का नाम नहीं ले रही थी,,, क्योंकि नजर ही कुछ ऐसा था दीवार के पीछे ट्यूबवेल के पानी में मुखिया की लड़की नीलू पूरी तरह से निर्वस्त्र होकर नहा रही थी उसे नंगी देखकर सूरज का लंड अपने आप एकदम से अपनी औकात में आ गया,,, इस नजारे का रसपान व अपनी आंखों से और ज्यादा कर पाता इससे पहले ही नीलू की नजर सूरज पर पड़ गई और सूरज को इस तरह से अपने आप को घूरता हुआ देखकर नीलू एकदम से डर गई और अपनी नंगी जवान को छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली,,,,)

हाय दैया तू यहां क्या कर रहा है,,,?(अपनी चूचियों पर हाथ रखकर उसे छुपाने की कोशिश करते हुए)

मैं भी यही पूछना चाहता हूं कि तुम यहां क्या कर रही हो,,,,,।





उल्टा चोर कोतवाल को डांटे यह ट्यूबवेल मेरा है खेत मेरा है और तुम पूछ रहे हो कि मैं यहां क्या कर रही हूं,,,,,,।

अरे मेरा कहने का मतलब यह नहीं था मैं तो यह कहना चाह रहा था कि घर में भी तो नहाने का साधन मौजूद है फिर तुम यहां खेतों में क्या करने नहाने के लिए आई हो,,,,,, मैं तो यहां पर खेत में पानी ठीक से जा रहा है कि नहीं यह देखने के लिए मालकिन मुझे भेजि है,,,।(सूरज एकदम बेशर्मी दिखाते हुए अपनी नजर को बिल्कुल भी नीलू के निर्वस्त्र बदन पर से नहीं जाता रहा था बल्कि उसके नंगेपन का रस अपनी आंखों से लगातार पिए जा रहा था,,, यह देखकर नीलू बोली,,,)

तुमको बिल्कुल भी शर्म नहीं आती जब देख रहे हैं कि एक लड़की इस अवस्था में नहा रही है फिर भी उसे घूर-घूर कर देख रहे हो,,,,।

खूबसूरत चीज को देखना कौन सा पाप है,, मैं तो खूबसूरत लड़की को देख रहा हूं,,,।

(सूरज के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर नीलू एकदम से शर्मा गई शर्मा के मारे उसके गोरे-गोरे गाल टमाटर की तरह लाल हो गए,,,,, फिर भी वह सहज होते हुए बोली,,)

तुमको बिल्कुल भी शर्म नहीं आती एक लड़की से इस तरह से बात करते हुए अगर मां और बाबूजी को पता चल जाएगा तो तुम्हारी खैर नहीं है,,,।

जाकर बता दो लेकिन मैं भी कह दूंगा कि मेरी गलती थोड़ी है आप लोग ने ही मुझे खेत में पानी ठीक से जा रहा है कि नहीं यही देखने के लिए भेजे थे और मैं यही देख रहा था मुझे क्या मालूम था कि वहां पर तुम्हारी लड़की नंगी होकर नहा रही होगी,,,,।

(सूरज एकदम खुले शब्दों में नंगी शब्द का प्रयोग कर रहा था जिसे सुनकर नीलू के टांगों के बीच हलचल होने लगी और वह शर्माते हुए बोली,,,)

हाय दैया एक लड़की के सामने इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती,,,,।

Sonu ki chachi or suraj





पर मैंने कौन सा गलत कह दिया है जब एक लड़की और वह भी खूबसूरत लड़की अपने सारे कपड़े उतार देती थी इस अवस्था को क्या कहेंगे तुम ही बताओ,,, नंगी ही ना कहेंगे कि कुछ और कहेंगे तुम ही बता दो,,,।

देखो सूरज अब तुम हद पार कर रहे हो,,,,,(नीलू इस तरह से अपनी छाती पर हाथ रखे हुए अपनी जवानी को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी और यह भी देख रही थी कि सूरज की नजर उसकी छतिया पर ही नहीं बल्कि उसके पूरे बदन पर इधर-उधर घूम रही थी अगर वह घूम कर सामने की तरफ मुंह करके खड़ी हो जाती है तो उसकी गंद निर्वस्त्र हो जाएगी और अगर सामने उसकी तरफ मुंह करके खड़ी हो जाती है तो उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार उजागर हो जाएगी इसीलिए वह तिरछी खड़ी थी लेकिन फिर भी वह शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी,,,।)





मैं हद पार नहीं कर रहा हूं तुम बहुत खूबसूरत हो और कपड़े उतारने के बाद तो तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगने लगी हो देखो तो सही तुम्हारी गोल-गोल छतिया उभरी हुई गांड और टांग के बीच की पतली दरार का तो अनुभव में उस दिन बगीचे में ले चुका था लेकिन तुम डर के भाग गई वरना तुम भी मजा ले लेती,,, ।

(सूरज एकदम बेशर्म बन चुका था वह जानता था कि नीलू अपनी मां बाबूजी को इस बारे में कुछ भी नहीं बताएगी और सूरज की बात सुनकर नीलू की हालत खराब हो रही थी जिस दिन से बगीचे में से वह सूरज की पकड़ से छूटकर भाग थी उसे दिन से आज तक वहां उसे पाल के बारे में सोच रही थी और जब भी उसे पाल के बारे में सोचती तो उसकी बुर से पानी निकलने लगता था उसे बहुत मजा आता था और अपने मन में सोचती थी कि बेवजह वहां से भाग निकली वरना चुदाई का मजा ले लेती ,,, सूरज की बात सुनकर शर्म के मारे अपनी नजर झुका कर वह बोली,,,)

भाग ना जाती तो और क्या करती तुम मेरे साथ गलत काम कर रहे थे,,,,।

तुम एकदम बेवकूफ हो वह गलत काम नहीं था बल्कि मजा लेने वाला काम था तुम भाग गई वरना मैं तुम्हें पता था कि कितना मजा आता है आखिरकार तुम भी शादी करोगी तो तुम्हारा पति तुम्हारे साथ यही सब करेगा तो क्या कहोगी कि तुम्हारा पति गंदा काम करता है तुम्हें बात अपनी मां को भी नहीं बता सकती अगर बोलोगी कि वह गंदा काम करता है तो तुम्हारी मां खुद तुम्हें बेवकूफ कहेगी और बोलेगी कि जी भर कर चुदवा ,,।

(सूरज पूरी तरह से नीलू से गंदी बातें कर रहा था और इस तरह की बातें करते हुए और एक खूबसूरत लड़की को निर्वस्त्र अवस्था में देखकर उसका लंड अपनी औकात भूल रहा था वह पूरी तरह से अपनी औकात से बाहर जाकर पजामे को फाड़ कर बाहर निकलने को अातुर हुआ जा रहा था,,,, और उसकी इस तरह की बातें सुनकर नीलू की बुर उत्तेजना के मारे कचोरी की तरह फूलने लगी थी जिसका एहसास उसे अच्छी तरह से हो रहा था वह अपने कपड़े भी नहीं ले पा रही थी क्योंकि कपड़ा भी उसकी पहुंच से थोड़ा दूर था इसलिए मजबूरी में उसे नंगी ही सूरज के सामने खड़ी रहना पड़ा,,,, नीलू समझ गई की सूरत जाने वाला नहीं है इसलिए वह बोली,,,)

Sonu ki chachi





अच्छा तो अब तुम जाओ,,, कोई आ गया तो गजब हो जाएगा,,,,।

कुछ गजब नहीं होगा इस तरह का खूबसूरत नजारा छोड़कर भला कोई बेवकूफी होगा जो जाना चाहेगा मैं तो कभी ना जाऊं मैं तो दिन-रात तुम्हें इसी तरह से देखने के लिए तैयार हूं इतनी खूबसूरत हो की सुनहरी धूप में तुम्हारा बदन एकदम सोने की तरह चमक रहा है,,,,।

(सूरज की तारीफ भरी बातें सुनकर नीलू के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी उसे सूरज की बातें अच्छी लग रही थी खास करके उसकी तारीफ वाली बातें उसे अंदर तक मदहोश किए जा रही थी,,,)

चले जाओ यहां से कोई देख लेगा तो,,,।

कोई नहीं देखेगा वैसे भी यहां कौन आने वाला है देखो तो सही चारों तरफ खेत ही खेत है,,,,।





फिर भी सूरज तुम यहां से चले जाओ तुम नहीं जानते अगर बाबूजी देख लिए तो गजब हो जाएगा,,,,।

तुम्हारे बाबूजी तो घर के आंगन में बैठे हैं और मजदूरों को हिदायत दे रहे हैं इसलिए उनके पास समय नहीं है कि वह घर के पीछे आ सके,,,,।

देखो तुम्हें मेरी कसम चले जाओ यहां से,,,,।

चलो कोई बात नहीं चला जाता हूं,,,,, तुम रहती हो तो,,,, लेकिन पहले एक बात बताओ मैं तुम्हारा इतने दिन से बगीचे में इंतजार कर रहा हूं तुम आई क्यों नहीं,,,,?

कैसे आती मुझे बहुत डर लग रहा था,,,,(नजर नीचे झुकाए हुए ही वह सूरज से बातें कर रही थी नजर उठाने की ताकत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी उसकी आंखों में शर्म एकदम साफ नजर आ रही थी और उसके गाल सुर्ख लाल हो चुके थे,,,।)

डर लग रहा था लेकिन किससे और क्यों,,,?(पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को मसलते हुआ सूरज बोला,,,)





तुमसे,,,,

(इतना सुनते ही सूरज जोर-जोर से हंसने लगा उसे हंसता हुआ देखकर नीलू को गुस्सा भी आ रहा था इसलिए वह थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली)

इसमें हंसने की कौन सी बात है और इतनी जोर-जोर से मत हंसो कोई सुन लेगा तो इधर आ जाएगा,,,, और अब तुम यहां से चले जाओ वरना मैं ही शोर मचा दूंगी,,,,।

अरे वाह तुम तो ऐसी धमकी दे रही हो कि जैसे मैं तुम्हारी इज्जत लूटना चाहता हूं,,,।

तुम्हारा कोई भरोसा भी नहीं है बगीचे में मैंने देख ली हूं कि तुम क्या कर सकते हो,,,,।

(सूरज अच्छी तरह से जानता था कि यहां पर नीलू के साथ कुछ करने में मजा नहीं है क्योंकि यहां कोई भी आ सकता था और यहां पर नीलू ज्यादा खुल भी नहीं सकती थी डर-डर कर आगे बढ़ाने में बिल्कुल भी मजा नहीं था सूरज नीलू की इत्मीनान से लेना चाहता था,,, इसलिए वह बोला,,,,)





चलो कोई बात नहीं मैं यहां से चला जाता हूं लेकिन एक शर्त पर,,,,।

कैसी शर्त,,,,!(सूरज की तरफ देखे बिना ही वह आश्चर्य दिखाते हुए बोली,,,)

ज्यादा कुछ नहीं बस मेरी तरफ अपनी गांड कर दो मैं तुम्हारी गांड की खूबसूरती को देखना चाहता हूं उसकी गोलाई को देखना चाहता हूं देखना चाहता हूं कि ऊपर वाले ने तुम्हारी खूबसूरती के दोनों तरबूज को किस तरह से संवारा है,,,।

(सूरज की इस शर्त को और उसकी बातों को सुनकर नीलू एकदम से शर्म से पानी पानी होने लगी,,,, उत्तेजना के मारे उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और धड़कते दिल के साथ वह बोली,,,)

यह कैसी शर्त है,,,,।

Sonu ki chachi ki raseeli boor





तुम्हारी खूबसूरती देखकर तो यही शर्त वाजिब है,,,।

नहीं मुझे शर्म आती है,,,,।

शर्माने की जरूरत नहीं है नीलू इस जानती हो ना तुम्हारी बुर पर में लंड छुआ चुका था बस धक्का मारने की देरी थी और तुम्हारी बुर में मेरा पूरा लंड घुस जाता,,,, इसलिए मुझसे शर्माने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है,,,,।

(नीलू की तो हालत पल पल खराब होती जा रही थी,,,, उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि सूरज उसे इस तरह की गंदी से गंदी बातें करेगा इस तरह की बातें तो उसने आज तक अपनी बहन से भी नहीं कर पाई थी,,, इसलिए तो उसकी बुर से पानी टपक रहा था उसकी सांसों के साथ उसकी उठती बैठती चूचियों को देखकर सूरज की हालत खराब हो रही थी,,, नीलु समझ गई कि यह जाने वाला नहीं, है,,,, इसलिए वह धीरे से बोली,,)

तब तो चले जाओगे ना,,,,।

बिल्कुल चला जाऊंगा,,,,।





(उसका इतना कहना था कि नीलू इधर-उधर चारों तरफ यह देखने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन किसी के भी द्वारा देखे जाने की गुंजाइश वहां बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि चारों तरफ खेत ही खेत लहलहा रहे थे और खेत कि फसले ज्यादा ऊंचाई की थी इसलिए नीलू भी निश्चिंत थी,,,, और वह धीरे से अपनी पीठ अपनी गांड को सूरज की तरफ कर दी उसकी गांड देखकर सूरज एकदम से मदहोश हो गया और अपने लंड को जोर से दबा दिया वाकई में उसकी गांड लेने लायक थी सूरज अपने मन में ऐसा सोच कर मत हुआ जा रहा था और उसकी गांड को देखते हुए बोला,,,,)

वाह कसम से मैं आज तक इतनी खूबसूरत गांड किसी की नहीं देखी कितनी नजाकत है तुम्हारी गांड में एकदम हुई जैसी मुलायम मुलायम बस एक काम कर दो अपने दोनों हाथों को अपनी गांड पर रखकर सहलाओ,,,,।

(सूरज की यह बात सुनकर नीलू एकदम से सुंदर रह गई और गुस्सा दिखाते हुए बोली , )

अब यह क्या बेवकूफी है सूरज,,,।

बेवकूफी नहीं है नीलू मैं देखना चाहता हूं कि एक लड़की जब अपनी नंगी गांड पर हाथ रखती है तो कैसा लगता है,,,।

(नीलु जानती थी कि सूरज की बात माने बिना कोई दूसरा रास्ता नहीं है इसलिए वह धीरे से अपने दोनों हथेलियों को अपनी गांड की दोनों फांकों पर रख दी और उसे हल्के हल्के सहलाने लगी,,, यह देखकर सूरज एकदम मदहोश हो गया और बोला,,,,)

वाह ऐसा लग रहा है कि मेरी आंखों के सामने आसमान से परी उतर कर आ गई है और अपने कपड़े उतार कर नंगी होकर अपनी जवान दिखा रही है,,, कसम से मिलो पूरे गांव में तुमसे ज्यादा खूबसूरत कोई लड़की नहीं है,,,,(सूरज की बातें सुनकर नीलू एकदम गदगद हुए जा रही थी,,,, और सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) अच्छा सच बताना उसे दिन तुम्हें किसी से डर लग रहा था मुझे या मेरे लंड से,,,,।

(सूरज की यह बात सुनकर नीलु एकदम से गहरी सांस लेकर मस्त हो गई,,,, और मदहोश होते हुए बोली और स्पीच लगातार वह अपनी हथेली से अपनी गांड को सहला रही थी,,,)

सच-सच बताऊं तो मुझे तुम्हारे उससे बहुत डर लग रहा था,,,,।

Peticoat utarta hua suraj





लेकिन ऐसा क्यों लड़कियां इससे डरती नहीं है बल्कि इससे खेलती,,,,।

नहीं नहीं मुझे तो डर लग रहा था क्योंकि तुम्हारा बहुत लंबा और मोटा है,,,,,।

(नीलू की यह बात सुनकर सूरज से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह एकदम से दीवार से हटकर दूसरी तरफ से ठीक नहीं हो के सामने आकर खड़ा हो गया नीलू उसे देखते ही कम से काम आ गई क्योंकि उसके पजामी में तंबू बना हुआ था और वह एक झटके से अपने पजामी को नीचे करके अपने लंड को बाहर निकाल लिया और अपने हाथ से ऊपर नीचे करके हिलाना शुरू कर दिया यह देखकर नीलू एकदम से घबरा गई,,,,, और सूरज आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ लिया और सीधे उसे अपने लंड पर रख दिया,,,,।





सूरज की इस हरकत पर नीलू एकदम से घबरा गई उसके पसीने छूटने लगे क्योंकि उसके हाथ में सूरज का मोटा तगड़ा लंड जो था एकदम गरम,,,, सूरज मैन ही मन खुश होता हुआ उसकी हथेली पर अपना हाथ रखा हुआ था और अपने हाथ का सहारा देकर उसके हाथ से अपने लंड को मुठिया रहा था,,,, और इस हरकत को करते हुए वह बोला।।

इससे बिल्कुल भी डरने की जरूरत नहीं है नीलू इससे तो खेला जाता है देखना जिस दिन तुम्हारी बुर में जाएगा तुम खुश हो जाओगी और बार-बार इस पर उछलोगी,,,,।

मुझे डर लग रहा है सूरज चले जाओ यहां से,,,,(नीलू को भी सूरज की हरकत बहुत अच्छी लगाई थी खासकर के सूरज के लंड को पकड़ने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,)

चला जाऊंगा लेकिन पहले वादा करो कि बगीचे में जरूर आओगी,,, ।

नहीं,,,,,

Sonu ki chachi ki chudai





तब तो मै,,,नहीं जाऊंगा,,,(और इतना कहने के साथ ही अपना हाथ आगे बढ़कर वह नीलू की गांड पर रख दिया और उसे दबाना शुरू कर दिया यह देखकर नीलू की हालत और ज्यादा खराब हो गई और उसके बदन में उत्तेजना का संचार बड़ी तेजी से होने लगा और उसे इस बात का डर था कि अगर वहां सूरज को वो नहीं भगाई तो सूरज उसके साथ मनमानी करने पर उतारू हो जाएगा,,,, यहां पर ऐसा वह नहीं चाहती थी,,, इसलिए वह बोली,,,)

ठीक है मैं बगीचे में आऊंगी लेकिन आज नहीं कल आज मुझे कुछ काम है,,, लेकिन तुम्हें भी एक वादा करना होगा,,,,।

कैसा वादा,,,(सूरज इसी तरह से नीलू के हाथ पर अपना हाथ रख कर अपने लंड को मुठियाते हुए बोला,,,)





यही कि तुम मेरे साथ वहां कुछ भी नहीं करोगे,,,,।

चलो मंजूर है मैं कुछ नहीं करूंगा बस तुम चली आना कल मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा,,,,।

जरूर लेकिन अपना वादा याद रखना,,,,।

(यह बात मुझे अच्छी तरह से जानते थे कि इस वादे को सूरज बिल्कुल भी नहीं निभाएगा,,,, सूरज मुस्कुराता हुआ अपने लंड को फिर से पजामे में डाल दिया और फिर वहां से चला गया,,,, आज उसने अपनी मजदूरी लेने की भी जरूरत नहीं थी क्योंकि उसे अपनी मजदूरी आधी मिल चुकी थी और आधी मिलना बाकी थी जो कि उसकी लड़की बगीचे में आकर चुकाने वाली थी,,,,।)



 
सूरज जिस काम के लिए मुखिया के घर गया था उसका काम बन गया था,,,, वैसे तो वहां पहुंचकर मुखिया की बीवी ने उसे खेतों में पानी ठीक से जा रहा है कि नहीं यह काम देखने के लिए दे दिया था और वही काम करने के लिए वह घर के पीछे पहुंच भी गया था लेकिन घर के पीछे उसे एक अलग ही नजारा देखने को मिला था जिसके लिए वह वहां पर आया था,,,, अनजाने में उसे मुखिया की लड़की नीलू ट्यूबवेल पर एकदम नग्न अवस्था में नहाते हुए मिल गई और मौके का फायदा उठाकर सूरज उसे बगीचे में आने के लिए मनवा भी लिया था और साथ ही उसकी नंगी गांड के दर्शन करके मत हो गया था और फिर उसकी नंगी गांड देखने के बाद वह जानता था कि वहां पर वह कुछ कर नहीं पाएगा इसलिए जाते-जाते उसके हाथों में अपना मोटा लंड थमा दिया था जिसे उसकी उत्तेजना प्रज्वलित हो जाए और वह बगीचे में आने के लिए काम विवश हो जाए,,,,।

नीलू जो कि खुद जवानी की आग में जल रही थी सूरज की उस दिन की हरकत से जवानी की उमंग उसके बदन में उछल रही थी वह खुद एक बार उस अनुभव से गुजरना चाहती थी इसलिए बगीचे में जाने में उसे कोई दिक्कत नहीं थी,,, बस डर उसे इस बात का था कि कहीं किसी को कुछ पता ना चल जाए,,,, वह जानती थी कि आज घर पर काम है इसलिए वह दूसरे दिन का वादा करके सूरज को वहां से भगा दी थी क्योंकि सूरज की हरकत उसके साथ पढ़ने रखी थी और सूरज की हरकत को देखते हुए उसे इस बात का भी डर था की कहानी उसके मां बाबूजी उसे इस हालत में सूरज के साथ ना देख ले,,,।

सूरज का तो दिन बन गया था,,,, एक तरफ सोनू की चाची की बदन की प्यास बढ़ती जा रही थी जिसका एहसास सूरज को अच्छी तरह से हो गया था और दूसरी तरफ मुखिया की लड़की जो दूसरे दिन उससे आपके बगीचे में मिलने वाली थी यह सब देखकर उसकी उत्तेजना चरम सीमा पर थी,,,, वह मर्दाना तौर पर पूरी तरह से मजबूत था उसके लंड को धार की जरूरत नहीं थी वह प्राकृतिक रूप से धारदार था,,, जो कि किसी की भी बुर में जाकर खलबली मचाने में सक्षम था,,, जिसका ताजा उदाहरण थी मुखिया की बीवी,,, अगर ऐसा ना होता तो सूरज के प्रति इतना आकर्षित और उसके साथ संबंध बनाने के लिए बार-बार तैयार न होती,,,,।

इसलिए सूरज को अपनी मर्दानगी पर पूरा विश्वास था,, वह जानता था कि मुखिया की बीवी की तरह ही वह सोनू की चाची और मुखिया की लड़की नीलू को भी अपनी मर्दानगी का कायल बना देगा,,,,।

दिन भर वह इधर-उधर घूमता रहा,,, शाम होते ही वह जब घर पहुंचा तो,,,,,, घर पर खाना बन रहा था,,, उसकी मां खाना बना रही थी और उसकी बहन सब्जी काट रही थी आप मां बहन दोनों सूरज की आंखों में बस चुकी थी दोनों को सूरज वासना की नजर से देखने लगा था बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी बहन की नंगी गांड नाचती हुई नजर आने लगती थी उसका बार-बार इस तरह से पेशाब करना उसे ख्वाबों में भी आता था वह अपने मन में यही सोचता था कि उसकी बहन की गांड कितनी खूबसूरत है,,, अगर उसकी बहन के खूबसूरत बदन से खेलने का मौका मिलेगा तो कितना मजा आएगा,,,।

अपनी मां को तो वह दो-तीन बार नग्न अवस्था में देख चुका था एक बार तो नदी में नहाते हुए और एक बार अपने पिताजी के साथ चुदवाते हुए,,, यह सब अपने मन में सोते हुए सूरज भी उन दोनों के पास ही बैठ गया और अपने मन में अपनी मां की तरफ देखकर यही सोच रहा था कि काफी दिन हो गए हैं पिताजी घर पर नहीं है और उसकी मां अकेले ही कमरे में सोती है,,,। बिस्तर पर अकेली बिना मर्द के ,उसका मन भी तो करता होगा चुदवाने को,,, उसे भी तो मर्द की जरूरत पड़ती होगी आखिरकार भाभी से एक औरत है मुखिया की बीवी की तरह जो कि पति होने के बावजूद भी दूसरों के साथ संबंध बनाती है ताकि संतुष्ट हो सके अपनी जवानी की प्यास बुझा सके तो क्या इस तरह की प्यास उसकी मां के बदन में नहीं उठती होगी,,,, जरूर उठती होगी,,, आखिरकार औरतें भी तो एक जैसी ही होती है जिसे मुखिया की बीवी जैसे सोनू की चाची वह भी तो अपने पति से खुश नहीं है पति के होने के बावजूद भी उसे शरीर सुख नहीं मिल रहा है और यही हाल तो उसकी मां का भी है पति का ठिकाना ही नहीं है कि कहां है तकरीबन महीना गुजर गया है ऐसे में वह रात कैसे गुजारती होगी,,,।

यही सब सोच रहा था कि तभी उसकी मां बोली,,,।

अरे सूरज एक बात तुझसे कहना था,,,।

हां हां बोलो मां,,,,।

इस साल में बालों के लिए तेल नहीं बना पाई हुं ,, क्योंकि तूने इस बार आंवला लाया ही नहीं,,,,।

मुझे वहां जाने का मौका ही नहीं मिला,,,।

अरे वही तो बता रही हूं कि तुम दोनों साथ में वहां चले जाओ और वाला तोड़कर लो ताकि मैं साल भर का तेल बना सकूं सरसों का तेल भी अपने पास है पर्याप्त मात्रा में साल भर के लिए तेल बन जाएगा,,,,।

ठीक है मैं कल ही चला जाता हूं रानी को लेकर,,,(उसका इतना कहना था कि तभी उसे ख्याल आया कि कल तो उसे बगीचे में जाना है इसलिए वह एकदम से हड़बढ़ाते हुए बोला,,,) कल नहीं परसों चलेंगे कल तो मुझे काम है,,,.

कल क्या काम है तुझे,,,,?

अरे मां कल मुखिया के घर जाना है हो सकता है कुछ काम मिल जाए तो कुछ पैसे मिल जाएंगे,,,।

चल तब तो ठीक है परसों चली जाना या समय मिले तब चले जाना लेकिन जल्दी जाना ऐसा ना हो कि तेरे जाने से पहले ही अांवला के बगीचे से आंवाला खत्म हो जाए,,,,।

तुम चिंता मत करो मां मुझे मालूम है कहां-कहां आंवला का बगीचा है,,,, अगर उधर खत में भी हो गया तो दूसरी जगह से तोड़ लाऊंगा,,,।

तेरे पर मुझे पूरा भरोसा है ना जाने क्यों ऐसा लगने लगा कि तुम्हें बड़ा हो गया है जो बात मुझे तेरे पिताजी से कहानी चाहिए वह तुझसे कहनी पड़ती है,,,।

तो क्या हो गया मन बड़ा तो मैं हुई क्या पूरा मर्द हो गया,,,हुं,,(सूरज जानबूझकर मर्द शब्द का प्रयोग कर रहा था और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) पर वैसे भी तुम्हारी कहीं बात में पूरा करता हूं ना टालता तो नहीं फिर दिक्कत क्या है,,,।

हां यह बात तो है,,,(तवे पर रोटी रखते हुए) तू मेरी एक भी बात काटता नहीं है सारी बातों को पूरा करता है,,, इतना तो तेरे पिताजी भी पूरा नहीं कर पाते थे अब उसे दिन तो देख ले मुझे बाजार जाने के लिए पैसे की जरूरत थी और तू मेरे हाथों में पैसा थमा दिया इतनी जल्दी तो तेरे बाबूजी भी मेरे हाथ में पैसा नहीं रखते,,,,।

Sunaina ki raseeli boor





तुम चिंता मत करो ना मैं तुम्हारी सारी ख्वाहिश पूरी करूंगा,,,,(इतना कह कर वह अपने मन में ही बोला एक दिन तुम्हारी चुदाई भी करूंगा तुम्हें चुदाई का सुख भी दूंगा मैं जानता हूं तुम चुदवाने के लिए तड़प रही हो,,,,)

तू बहुत अच्छा है सुरज इसलिए तो देख महीना गुजर गए तेरे बाबूजी घर नहीं आए लेकिन तेरे होते हुए तेरे बाबूजी की कमी नहीं खलती ऐसा लगता ही नहीं है कि घर पर तेरे बाबुजी नहीं है ,,,।

लेकिन मां हमें उनका पता लगाना चाहिए कि आखिरकार है कहां गांव में तो नहीं है इतना पक्का है गांव में होते तो कोई ना कोई जरूर बताता लेकिन महीना गुजर गया है बाबूजी का कोई पता नहीं है,,,,।

वैसे तो रानी तु सही कह रही है,,, लेकिन बाबूजी की हरकत तो हम सभी जानते हैं कभी-कभी तो पांच छः महीने के लिए गायब हो जाते हैं,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपने मन में यही सोच रहा था कि उसके बाबूजी घर पर ना आवे तो ही सही है ताकि उसे मौका मिल सके अपनी मां की जवानी का प्यास बुझाने का,,,, अपने भाई की बात सुनकर रानी बोली,,,)

बात तो तुम सही कह रहे हो भैया लेकिन फिर भी हमें पता तो होना चाहिए कि आखिरकार वह है कहां,,,,।

अगर तुझे इतनी फिक्र है तो जाकर ढूंढ,,,, ऐसे बाप का होना ना होना एक बराबर है,,,,।(सूरज ऐसी बात गुस्से में कह रहा था और ऐसा नहीं था कि उसके पिताजी के ना आने का गुस्सा उसके महीने हो उसे इस बात का गुस्सा आ गया था कि उसकी बहन उसके पिताजी को ढूंढने के लिए बोल रही थी जबकि सूरज ऐसा नहीं चाहता था क्योंकि सूरज जानता था कि उसके पिताजी के गैर हाजिरी में ही उसकी मां के साथ उसका कुछ काम बन सकेगा,,,)

ऐसा क्यों कह रहे हो भैया,,,, आखिरकार वह हमारे पिताजी हैं,,,,।

तो क्या करूं,,,,।

(भाई बहन के बीच बहस देखकर उसकी मां बीच बचाव करती हुई बोली)

अरे यार तुम दोनों क्यों लड़ रहे हो वैसे भी सूरज सच ही कह रहा है तेरे बाबूजी कभी भी जिम्मेदार पिता नहीं बन पाए अगर जिम्मेदारी होती है अपनी जिम्मेदारी समझते तो इस समय हमारे साथ होते ना की इधर-उधर घूमते रहते हैं वैसे भी जब भी वह घर पर होते भी हैं तो कहां रात को घर सकते हैं ना जाने कहां घूमते रहते हैं,,,,।

(सूरज को इस बात की खुशी थी कि उसकी मां उसका पक्ष ले रही थी,,,, और सुनैना को इस बात की खुशी थी कि उसका बेटा आप समझदार हो गया था वह जानता था कि एक जिम्मेदार बाप का कर्तव्य क्या होता है जो कि उसके पिताजी इसमें बिल्कुल भी खरे नहीं उतरे थे,,,।)

Mukhiya ki bibi





ph

अब जाने दो यह सब बात ,,, उनके बारे में बहस करके कोई फायदा नहीं है,,,, खाना बन गया है अब जल्दी से तुम दोनों हाथ मुंह धो लो,,,।

ठीक है मां,,,,, चल रानी मेरे हाथ धुला,,,,।

ठीक है भैया,,,,,(इतना कहकर रानी अपनी जगह से खड़ी हो गई और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) बाहर चलना होगा भैया इधर पानी नहीं है,,,.

ठीक है चल,,,।

अरे आते समय एक बाल्टी साफ पानी लेते आना पीने के लिए,,,

ठीक है मां,,, (सूरज इतना बोला और बाहर की तरफ जाने लगा उसके साथ-साथ रानी भी चलने लगी और चलते हुए सूरज से बोली,,,)

क्या भैया तुम तो खामखा गुस्सा करने लगते हो,,,,।

(दोनों अंधेरे से गुजर रहे थे और सूरज के मन में खुरा पात चल रही थी,,, इसलिए वह अंधेरे में ही अपनी बहन की नरम नरम गांड पर चपत लगाते हुए बोला,,,)

तुझे बहुत पड़ी है पिताजी की उन्हें कुछ पड़ी नहीं है और तुझे ही उनकी ज्यादा फिक्र हो रही है,,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज दोबारा अपनी बहन की गांड पर चपत लगा दिया उसे अपनीबहन की नरम नरम गोल गोल गांड पर चपत लगाने में आनंद आने लगा लेकिन अपने भाई की हरकत पर रानी पूरी तरह से झेंप गई थी क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका भाई उसकी गांड पर चपत लगा देगा,,,, इसलिए उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,,, क्योंकि आखिरकार उसका भाई तो था एक मर्द ही और मर्द का हाथ अपने नितंबों पर महसूस करते ही उसके बदन में अजीब सी हलचल मचने लगी थी वह कुछ बोल नहीं पाई,,, और सूरज की तो हालत खराब हो गई थी चपत लगाने में ही उसे इस बात का एहसास होगी उसकी बहन की गांड कितनी गदराई है और वह अपने मन में सोचने लगा कि वाकई में उसकी बहन की गांड पर दोनों हाथों से पकड़ कर दबाने में बहुत मजा आएगा,,,।

सूरज अपनी हरकत को अंजाम देते हुए नल के पास पहुंच गया था जहां उसकी बहन हेड पंप चलने लगी थी और उसमें से पानी नीचे गिरने लगा था और उसका भाई उसे पानी से अपना हाथ मुंह धोने लगा था,,,, सूरज अपना हाथ मुंह धो कर जहां उसकी बहन खड़ी थी वहां पहुंच गया और उसे हाथ के सारे से ही हाथ में धोने के लिए बोलने लगा और वह नल चलाने लगा उसकी बहन भी अपने बदन में हो रही हलचल के साथ अपना हाथ पैर धोकर सांप की और फिर एक खाली बाल्टी को नल के नीचे रखकर उसे भरने के लिए छोड़ दी,,,, नल चलाते हुए उसका भाई बोला,,,)

अपना ऐसा उसूल होना चाहिए,,, जैसे के साथ ऐसा जैसे पिताजी हम लोगों की खबर नहीं ले रहे हैं वैसे हमें भी उनकी खबर नहीं लेना चाहिए,,,,।

लेकिन भैया वह अपने पिताजी है,,,,।

हम भी तो उनके बच्चे हैं कि नहीं उन्हें सबसे पहले हमारी खबर लेनी चाहिए अपनी बीवी बच्चों की उन्हें सोचना चाहिए कि उनकी बीवी बच्चे किस तरह से दिन गुजार रहे हैं लेकिन उन्हें तो कुछ परवाह ही नहीं है तो हम क्यों परवाह करें,,,,। अब चल बाल्टी उठा ले बाल्टी भर गई है,,,,,(सूरज खुद बाल्टी उठाना चाहता था लेकिन उसके दिमाग में कुछ और कर रहा था उसकी बात सुनते ही उसकी बहन रानी बाल्टी को उठा ली और चलने लगी और मौके का फायदा उठाते हुए सूरज पूरी तरह से अपनी बहन की गांड के एक फांक पर अपनी हथेली रखकर उसे दबाते हुए बोला,,,)

अब तू बड़ी हो गई है रानी तुझे भी सोचना चाहिए समझना चाहिए जो जैसा व्यवहार करता है उसके साथ में सही व्यवहार करना चाहिए,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज इस बीच दो बार उसकी गांड की फाग को अपनी हथेली में लेकर हल्के हल्के से दबा दिया था और यह एहसास रानी के बदन में आग लग रहा था वह एकदम आश्चर्यचकित थी,,, वह एकदम हैरान थी क्योंकि उसके भाई ने आज हरकत ही कुछ ऐसा कर दिया था पहली बार उसकी गांड पर किसी ने हाथ रखकर उसकी गांड को दबाया था,,,, लड़की की गांड पर और वह भी जवान लड़की की गांड पर मर्दों का इस तरह से हाथ रखकर दबाना इसके मतलब को वह समझने लगी थी,,, वह हैरान थी इस बात पर की उसका भाई आखिरकार उसकी गांड पर हाथ क्यों रखा ऐसी हरकत तो पहले कभी नहीं करता था लेकिन उसकी हरकत की वजह से उसके बाद में अजीब सी हलचल हो रही थी वह मदहोश हो गई थी उसे एक तरफ अजीब भी लगा था लेकिन दूसरी तरफ उसके बाद में मदहोशी छाने लगी थी वह अपने भाई से कुछ बोल नहीं पाई,,,।

और दूसरी तरफ अपनी बहन की गांड पर हाथ रख कर दबाने की वजह से सूरज का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था,,, वह इस बात से खुश था की उसकी हरकत का विरोध उसकी बहन बिल्कुल भी नहीं की थी,,,, और यह देखकर सूरज को लगने लगा कि उसकी हरकत की बहन को अच्छी लग रही है,,,, इसलिए रसोई के पास पहुंचते पहुंचते एक बार फिर से अपनी बहन की गांड पर रखकर उसे सहला दिया,,,, सूरज की हरकत खुद सूरज के तन बदन में आग लग रही थी वही उसकी बहन की बुर से पानी टपकने लगा था,,,, सूरज कुछ और करता था इससे पहले दोनों रसोई के पास पहुंच चुके थे और एक तरफ बाल्टी रखकर रानी बिना अपने भाई से नजर मिलाई लोटे में पानी भरने लगी और फिर तीनों साथ में बैठकर खाना खाने लगे,,,,।

खाना खाने के बाद सूरज इसी सोच में था कि उसकी बहन उसकी हरकत का बिल्कुल भी विरोध नहीं की थी ना ही गुस्से से उसकी तरफ देखी थी कहीं ऐसा तो नहीं उसकी बहन को उसकी हरकत अच्छी लग रही हो आखिरकार वापसी तो पूरी तरह से जवान हो चुकी थी एकदम नीलू की तरह,,,, जिस तरह से नीलू को सूरज की हरकत मदहोश कर रही थी उसी तरह से उसकी बहन को भी उसकी हरकत में मदहोश कर रही होगी इतना उसे यकीन हो रहा था वरना वह जरूर उस की तरफ गुस्से से देखती और जोर से बोलती,,, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था इसलिए अंदर ही अंदर सूरज प्रसन्न हो रहा था,,,,।

घर की सफाई करने के बाद अपने-अपने कमरे में जाने से पहले सुनैना रानी से बोली,,,।





रानी चल पीछे चलकर आते हैं,,,,।

(यह सुनकर पास में ही खटिया पर बैठा सूरज अपने मन में सोचने लगा कि ईतनी रात को उसकी मां रानी को पीछे क्यों लेकर जा रही है,,, तभी उसके दिमाग की घंटी बजी और उसे एहसास होने लगा कि उसकी मां रानी को पीछे पेशाब करने के लिए ले जा रही है दोनों सोने से पहले जरूर पीछे जाया करती थी पहले तो सूरज इन सब बातों पर ध्यान नहीं देता था लेकिन जब से अपनी बहन को पेशाब करते हुए देखा था तब से उसका ध्यान ही नहीं सब बातों पर घूमता रहता था और आज अपनी मां की बात सुनकर उसके कान खड़े होने लगे थे साथ में उसके दोनों टांगों के बीच का हथियार भी अपनी मां की बात सुनते ही रानी भी उसके साथ पीछे की तरफ चल दी,,,।

उन दोनों के जाते ही सूरज के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह अपने मन में सोचने लगा कि दोनों एक साथ अपनी साड़ी ऊपर करके और अपनी सलवार नीचे करके जब पेशाब करने बैठेंगी तो क्या नजारा होगा,,,, लेकिन यह नजारा देखा कैसे जाए,,,,।

सूरज कितने बदले में अजीब सी हलचल हो रही थी वह अपनी मां और बहन दोनों को पेशाब करते हुए देखना चाहता था दोनों की नंगी गांड को देखना चाहता था इसलिए उसका मन मचल रहा था कि कैसे देखा जाए तभी आंगन में ऊपर की तरफ दीवार से लगी हुई सीढ़ी पर उसकी नजर कहीं और उसकी आंख में चमक आने लगी वह तुरंत सीढ़ी पर चढ़ने लगा क्योंकि वह जानता था की सीढ़ी पर चढ़कर पीछे का नजारा बढ़िया आराम से देखा जा सकता है क्योंकि इस जगह से पीछे का ही नजारा दिखाई देता था,,,।

सूरज जल्दी-जल्दी सीढ़ी पर चढ़ने लगा क्योंकि वह जानता था कि जल्दी दोनों पीछे पहुंच जाएंगे और सूरज जल्दी से सीडीओ से होते हुए छत पर पहुंच गया छत खपड़े का बना हुआ था जो मिट्टी से बना होता है उसे पर धीरे-धीरे चढ़कर वह पीछे की तरफ देखने लगा उसकी किस्मत अच्छी थी की चांदनी रात थीऔर उसे सबकुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, वह इधर देखने लगा पीछे छोटी मोटी झाड़ियां थी और थोड़ी और आगे खेत ही खेत थे लेकिन अभी तक उसकी मां और बहन दोनों नजर नहीं आ रही थी वह देखकर उसके मन में शंका होने लगी की कही दोनों वहीं कहीं पास नहीं तो नहीं बैठ गए,,, और अगर ऐसा हुआ तो जल्दी वह दोनों घर में आ जाएंगे और उसे छत पर चढ़ा देकर क्या समझेंगी और यही सोच कर वह सीधी से नीचे उतरने की फिराक में था कि तभी दोनों मां बेटी साथ में दिखाई दी और उन्हें देखकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे,,,,।

सामने के नजारे को सूरज बड़ी गौर से देख रहा था वह जानता था कि जहां पर वह चढ़कर देख रहा है वहां पर उन दोनों की नजर कभी नहीं पहुंच पाएगी ना दोनों को कभी शक हो पाएगा दोनों धीरे-धीरे झाड़ियां के पास पहुंच गई थी जहां पर वह दोनों गई थी वहां का नजारा सूरज को एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,,,, सूरज जानता था कि कुछ ही देर में उसकी मां अपनी साड़ी ऊपर उठा देगी और उसकी बहन अपनी सलवार नीचे गिरा देगी दोनों की गांड एकदम नंगी नजर आने लगेगी और इसी पल के इंतजार में उसका लंड अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था,,,

सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था,,, दोनों आपस में कुछ बातें कर रही थी लेकिन उनकी आवाज सूरज के कानों तक नहीं पहुंच रही थी और देखते ही देखते की बहन का हाथ उसकी सलवार की डोरी पर पहुंच गया वह धीरे-धीरे उसे खोल रही थी और उसकी मां अपनी साड़ी को पकड़ कर धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठा रही थी और देखते ही देखते उसकी मां अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी और उसकी नंगी गांड जो की काफी बड़ी-बड़ी थी वह एकदम से उजागर हो गई,,, और यह नजारा देखते हैं सूरज की उत्तेजना एकदम प्रज्वलित हो गई और वह अपने पजामे में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया,,,, और उसे अपनी मुठ्ठी में भरकर हीलाना शुरू कर दिया,,,, सूरज अपनी मां की नंगी गांड देखकर उत्तेजित हुआ जा रहा था और उसकी मां भी अपनी गांड पर दोनों हाथ रखकर उसे हल्के हल्के सहला रही थी,,, और तब तक रानी भी अपनी सलवार की डोरी खोल चुकी थी उसकी सलवार उसकी कमर से ढीली पड़ गई थी,,,।

देखते देखते रानी भी अपनी सलवार को नीचे घुटने तक खींच दिया और उसकी नंगी गांड भी एकदम से उजागर हो गई मां बहन दोनों की नंगी गांड देखकर सूरज की उत्तेजना परम शिखर पर पहुंच गई उसके लंड का कडकपन कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगा वह अपने लंड को मुठीयाना शुरू कर दिया,,,, और देखते देखते उसकी मां और बहन दोनों पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई दोनों की ओर से पेशाब की धार निकलने लगी लेकिन उन दोनों की ओर से निकलने वाली सिटी की आवाज बड़ी मुश्किल से सूरज के कानों तक पहुंच रही थी लेकिन इतना भी सूरज के लिए काफी था उन दोनों की बुर से आ रही सीटी की आवाज सुनकर सूरज की उत्तेजना अद्भुत तरीके से आगे बढ़ती चली जा रही थी और जोर-जोर से अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया था मां बहन दोनों की नंगी गांड उसकी उत्तेजना और ऊर्जा दोनों में बढ़ोतरी कर रही थी,,,,।

दोनों की नंगी गांड देखकर सूरज अपने मन में सोचने लगा कि अगर मां बहन दोनों को चोदना हो तो एक ही बिस्तर पर कितना मजा आ जाएगा,,, यह एहसास उसकी उत्तेजना को बढ़ा रहा था और जब तक दोनों पेशाब करके उठकर खड़ी होती और अपने कपड़े व्यवस्थित करती तब तक सूरज झड़ चुका था उसका पानी निकल चुका था उसने अपना काम पूरा कर लिया था और तब तक उसकी मां और बहन दोनों अपनी नंगी गांड को कपड़ों में ढंक ली थी और जल्दी से सूरज नीचे उतर आया था,,,‌। और थोड़ी ही देर में तीनों अपने-अपने कमरे में जाकर सो गए थे,,,, लेकिन सूरज की आंखों में नींद नहीं थी क्योंकि उसके दिमाग में कुछ और चलरहा था,,,।
 
सूरज ने जो नजारा देखा था वह बेहद अद्भुत और अकल्पनीय था जिसके बारे में उसने शायद कल्पना भी नहीं किया था कभी भी उसने इस बारे में सोचा ही नहीं था कि वह एक साथ अपनी मां और अपनी बहन दोनों को पेशाब करते हुए देखेगा,,, घर की छत के ऊपर से यह नजारा देखने में वह बेहद उत्तेजना का अनुभव कर रहा था जिसके चलते अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड और अपनी बहन की सीमित आकार में गोल-गोल गांड को देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और इसीलिए उसे इस समय आंखों से अपनी मां और अपनी बहन की नंगी जवानी का रसपान करते हुए अपने लंड को हिला कर अपनी जवानी की गर्मी को शांत करना पड़ा था,,,।





मूठ मरने का यह एक अलग ही अनुभव था,,, वाकई में बन जा रहा है बेहद खास होता है जब एक जवान प्यासे भाई की आंखों के सामने उसकी मां और उसकी और यही हाल सूरजका और बहन अपनी साड़ी उठाकर अपनी सलवार नीचे गिरकर पेशाब करने बैठ गई हो और उसकी नंगी नंगी गांड को देखकर वाकई में ऐसे भाई को तो मुंह मांगी मुराद मिल जाती है ,, और यही हाल सूरज का भी था,,, ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि सूरज पहली बार इस तरह के नजारे को देख रहा हो,,, वह अपनी मां और बहन दोनों को पेशाब करते हुए देख चुका था लेकिन दोनों को एक साथ पेशाब करते हुए उसने कभी नहीं देखा था इसलिए तो उसकी उत्तेजना परम शिखर पर थी,,,,





सुबह जब सूरज उठा तो सबकुछ सामान्य सा था,,, सुनैना और रानी दोनों घर की सफाई कर रही थी पर दोनों को देखकर सूरज के मन में रात वाला दृश्य घूमने लगा दोनों इस समय सामान्य तौर पर वस्त्र पहनी हुई थी लेकिन पल भर के लिए सूरज अपनी मां और बहन दोनों को बिना कपड़ों की कल्पना करने लगा और सोचने लगा कि यह दोनों बिल्कुल नंगी होकर घर की सफाई करेंगे तो कैसी दिखाई देंगे,,,, दोनों के चेहरे का हाव-भाव कैसा होगा दोनों की चूचियां कैसी लचक रही होगी दोनों की गांड चिलचिलाती धूप में कैसी दिखाई देगी,,, यही सब सोच कर उसका लंड खड़ा हो गया और वह घर से निकल गया,,,, ।

आज वह बहुत खुश था क्योंकि वह जानता था कि बगीचे में आज उसे नीलू मिलने आने वाली है और आज उसके साथ जी भर कर रंग रलिया मनाएगा सूरज को इस बात का पक्का यकीन था कि नीतू उसके साथ शारीरिक संबंध जरूर बनाया और इसके लिए वह भी उत्सुक है अगर ऐसा ना होता तो ट्यूबवेल के पास वह उसे अपना नंगा बदन ना दिखाती,, उसकी बात मानकर अपनी गांड इंडियन के दर्शन ना करती और ना ही उसके लंड को हाथ में पकड़ जा रहा था अभी भी सही समय पर नीलु के आने में बहुत समय था,,, इसलिए बगीचे में पहुंचकर इधर-उधर घूमता रहा,,,,।





जो हाल सूरज का था वही हाल नीलू का भी था नीलू की सूरत से मिलने के लिए तड़प रही थी क्योंकि सूरज ने दो मुलाकात में जो उसके बदले में उत्तेजना भरी आग लगाया था उसे बुझाना भी जरूरी था और वह जानती थी कि इस आग को सूरज ही बुझा सकता है,,,। बार-बार उसकी आंखों के सामने सूरज का लहराता हुआ लंड घूमने लगता था उसमें से निकल रही पैसा आपकी धार को देखकर तो खुद उसकी बर पानी छोड़ रही थी पहली बार किसी मर्द को वह पेशाब करते हुए देखेगी पहली बार में किसी मर्द के इतने मोटे तगड़े लंड को देख रही थी इसलिए तो उसकी हालत भी खराब थी वह भी जल्द से जल्द सूरज से मिलना चाहती थी,,, जिस तरह से उसने अपनी मुट्ठी में सूरज के लंड को दबाई थी,,, ठंडे पानी में भीगी होने के बावजूद भी उसकी गर्मी उसे पूरे बदन में महसूस हो रही थी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच स्थिति तो बेहद नाजुक होती जा रही थी अगर उसे समय ही सूरज जल्दबाजी थोड़ी रंगबाजी दिखाता तो नीलू वही उससे चुद जाती,,,।





इधर-उधर घूमते हुए समय धीरे-धीरे गुजरने लगा और देखते ही देखते समय आ ही गया जिस समय पर सूरज ने नीलू को वहां पर बुलाया था,,,, सूरज बड़ा व्याकुल होकर इधर-उधर देख रहा था यह आम का बगीचा गांव से थोड़ा दूर था इसलिए यहां पर कोई आता जाता नहीं था,,,, चारों तरफ नजर घुमा कर देखने के बावजूद भी कोई कहीं दिखाई नहीं दे रहा है ना इसलिए सूरज को लगा कि शायद आज भी नीलू उसे बेवकूफ बना दी आई नहीं,,,, इसलिए वह निराश होकर वहीं एक बड़े से पेड़ के नीचे बैठ गया,,, लेकिन तभी उसके खानों में पायल के घुंघरू की आवाज सुनाई देने लगी जो उसके ठीक बाएं तरफ से आ रही थी सूरज जल्दी से नजर उठा कर उसे तरफ देखा तो घनी झाड़ियां के बीच से होती है नीलू आ रही थी नीलू को देखते ही सूरज के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,, क्योंकि वह निराश हो चुका था उसे लगने लगा था कि नीलू अपने वादे पर कभी खरा नहीं उतर सकती ,,।





देखते ही देखते उसके करीब आ गई उसे देखकर एकदम से उत्साहित होकर सूरज अपनी जगह से खड़ा हो गया और बोला,,,।

मुझे तो लगा था कि आज भी नहीं आओगी,,.

वैसे तो तुम सही सोच रहे थे लेकिन फिर मैंने सोचा की बार-बार किसी को धोखा देना अच्छी बात नहीं है,,,,।

चलो यह तो सही हुआ कि इतना तो तुम सोचती ही हो किसी के बारे में,,,।

किसी के बारे में नहीं सिर्फ तुम्हारे बारे में तुम्हारी जगह कोई और होता तो शायद में नहीं आती,,,।

अच्छा तो ऐसा क्या खास है मुझ में,,,,।

यह तो वक्त ही बताएगा,,,, अच्छा चलो छोड़ो आम खिलाने का वादा किए थे चलो जल्दी से आम तोड़ कर दो,,,

(नीलु की बात सुनकर सूरज उसे आश्चर्य से देखने लगा और बोला,,)

क्या सच में तुम यहां आम खाने के लिए आई हो,,,।

(सूरज के खाने के मतलब को नीलू अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए मुस्कुराते हुए बोली..)





हां आई तो हूं यहां पर आम खाने ही क्या कुछ और खिलाने का इरादा है क्या,,,!

खिलाने का नहीं चूसाने का इरादा है,,,।

अगर आम पका हुआ होगा तो चुस भी लेंगे,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो दबा दबा कर चूसने लायक बना दूंगा,,,,,।

(वैसे नीलू अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज बगीचे में उसे किस लिए बुलाया है लेकिन उसके खाने के मतलब को वह समझ नहीं पा रही थी जो उसने चूसने वाली बात उसे ठीक से समझ नहीं आ रही थी उसे ऐसा ही लग रहा था कि सूरज आम के बारे में ही बात कर रहा है लेकिन सूरज चूसने दबाने के शब्द का प्रयोग करके लंड और चूची के बारे में बात कर रहा था,,

सूरज अच्छी तरह से जानता था कि धीरे-धीरे ही इस खेल में मजा आएगा जल्दबाजी दिखाने ठीक नहीं था क्योंकि समय भी पर्याप्त था इसलिए वह नीलू से बोला,,,)





चलो कोई बात नहीं तुम्हें अच्छे-अच्छे और पके आम तोड़ कर देता हूं,,,(इतना कहकर सूरज आगे आगे चलने लगा और नीलू पीछे-पीछे,,, वह देखते ही देखते सूरज आम के बड़े पेड़ के नीचे आ गया और ऊपर की तरफ नजर करके नीलू को दिखाने लगा,,,,)

देखो नीलू एक से बढ़कर एक आम है अभी मैं तोड़ कर देता हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज पेड़ पर चढ़ने लगा नीलू उसे पेड़ पर चढ़ते हुए देख रही थी सूरज कोई तरह से आम के पेड़ पर चढ़ता हुआ देखकर नीलू को थोड़ा अजीब लगने लगा क्योंकि वह जानती थी कि सूरज यहां पर किस लिए बुलाया है लेकिन यहां तो वह किसी और काम में लग गया था उसे तो लगा था कि उसे देखते ही सूरज उसे कसके अपनी बाहों में भर लगा उसकी चुचियों का दबाएगा उसकी गांड को सहलाएगा और फिर अपनी मनमानी करके अपना भी मजा लेगा और उसे भी मजा देगा,,,, लेकिन यहां तो कुछ और ही चल रहा था फिर भी नीलु कुछ बोली नहीं और सूरज को देखने लगी जो की धीरे-धीरे करके पेड़ पर चढ़ चुका था,,,,। सूरज अंदर ही अंदर बहुत उत्साहित है क्योंकि वह जानता था कि नीलू का यहां बगीचे में आना उसकी मुराद को पूरी करना था,,,।





सूरज नापतोलकर आम को तोड़ रहा था एकदम गोल-गोल जिसका आकार नीलू की चूचियों से मिलती-जुलती हो,,,, जैसे तैसे करके सूरज चार-पांच आम तोड़ लिया और उसे धीरे-धीरे करके अपने पजामे में इधर-उधर डाल दिया क्योंकि उसके मन में कुछ और चल रहा था और नीलू की उपस्थिति में वह उत्तेजित हो चुका था जिसके कारण उसका लंड अपने आकार में आ चुका था और पजामे में अच्छा खासा तंबू बना चुका था,,, सूरज जानता था कि ईतना आम काफी है और वैसे भी सूरज नीलू को बगीचे में आम खिलाने के लिए नहीं बुलाया था बल्कि अपना केला चुसवाने के लिए बुलाया था,,, जल्दी-जल्दी सूरज पेड़ से नीचे उतर गया,,, और पेड़ से नीचे उतरते ही बोला,,,।

तुम्हारे लिए बहुत ही खास आम तोड़ कर लाया हूं,,,।

(और इतना कहने के साथ ही नीलू की आंखों के सामने ही अपने पहचाने को आगे की तरफ खींचकर उसमें से आम निकालने लगा वह जानता था कि नीलू की नजर उसके पजामे में खड़े उसके लंड पर जरूर पड़ेगी और ऐसा ही हो रहा था सूरज का लंड अपनी औकात में आ चुका था और नीलू भी उसके पजामी के अंदर देख रही थी जो कि उसके लंड के आकार को देखकर उसकी मोटाई को देखकर उसकी टांगों के बीच हलचल मचने लगी,,, वही लंड था जिसे दो दिन पहले उसने ट्युबवेल पर नहाते हुए पकड़ी थी,,, सूरज धीरे-धीरे करके उसमें से सभी आम निकाल कर नीलू के हाथों में थमा दिया और वह बड़ी मुश्किल से आम को संभाल पा रही थी क्योंकि उसकी नजर को सूरज के पजामे के अंदर थी सूरज की युक्ति काम कर गई थी,,,, और फिर धीरे से उसने पहचाने को व्यवस्थित कर लिया और फिर वही आम के पेड़ के नीचे बैठ गया और नीलु भी उसके पास मे हीं बैठ गई,,, वह भी अच्छा सा आम लेकर ऊपर से थोड़ा सा तोड़कर उसे दोनों हथेलियां के बीच लेकर गोल-गोल घुमाने लगी,,,, और उसे तुरंत मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी आम वास्तव में काफी मीठा था उसका स्वाद का अहसास होते ही वह खुश होते हुए बोली,,,)





सच में सूरज आम तो बहुत रसीला है,,,।

क्यों ना हो आखिरकार मैंने जो पसंद किया है,,,(दोनों हथेली में आम लेकर नीलू की तरफ करके दिखाते हुए) देख रही हो इसके आकार को एकदम तुम्हारी चूचियों की तरह है,,,(सूरज एकदम बेझिझक बोला पर उसकी बात सुनकर नीलू एकदम से शर्मा गई थी उसके भी तन बदन में आग लग रही थी इसलिए वह मुस्कुराते हुए और हल्के से शरमाते हुए बोली,,,)

तुमको कैसे मालूम तुमने तो देखे नहीं हो,,,,(नीलू ऐसा जानबूझकर बोल रही थी जबकि उसे मालूम था कि ट्यूबवेल पर नहाते हुए सूरज से पूरी तरह से नंगी देख चुका था और बगीचे में उसे हाथ में लेकर दबा भी चुका था इसलिए उसे उसकी चूची का आकार अच्छी तरह से मालूम था,,,)

भूल गई इसी बगीचे में तुम्हारी चूची को दबाया था और अभी दो दिन पहले ही तुम्हें नंगी नहाते हुए देखा था तुम्हारे नंगे बदन का आकार मेरे आंखों में बस गया है,,।

(सूरज की बातें सुनकर नीलू के चेहरे पर शर्म की लालिमा छाने लगी,,,, और वह शर्माते हुए बोली,,)

तुम्हें देखकर लगता नहीं है कि तुम इतने शरारती होगे ,,

तुमको देख कर शरारत सुझती है,,,, वैसे भी मैं यहां पर आम खाने के लिए तुम्हें नहीं बुलाया था बल्कि तुम्हारी चुची को दबा दबा कर पीने के लिए बुलाया था,,,,,,।

ना बाबा मुझे तो बहुत डर लगता है,,,।

डर के आगे ही तो मजा ही मजा है एक बार यह डर खत्म हुआ उसके बाद स्वर्ग का सुख मिलेगा,,,,।

Suraj ki kalpna apni ma k sath





नहीं मुझे नहीं लेना है स्वर्ग का सुख,,,,(नीलू आम खाते हुए बोली वैसे नीलू ऊपरी मन से ऐसा बोल रही थी अंदर से वह भी इस तरह का सुख पाना चाहती थी उसकी बात सुनकर सूरत से रहा नहीं गया और वह आगे बढ़कर अपने हाथ से कुर्ती के ऊपर से ही उसकी चूची को दबा दिया उसकी हरकत से नीलु एकदम से सिहर उठी उसकी आंखें अपने आप बंद हो गई और उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी फुट पड़ी,,, उसकी हालत देखकर सूरज अंदर ही अंदर खुश होने लगा,,,, और वह मौका देखकर अपनी उंगली को कुर्ती में डालकर उसे नीचे की तरफ खींचने लगा और दूसरे हाथ से उसकी चूची को पकड़ कर बाहर निकलने वाला यह हरकत नीलु के लिए मदहोश कर देने वाली थी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी,,,, और देखते ही देखते सूरज कुर्ती में से उसकी एक चूची को बाहर निकाल लिया जो कि एकदम टमाटर की तरह गोल-गोल और लाल हो गई थी,,,, शर्म और मदहोशी में नीलु की आंखें बंद थी,,, सूरज चाहता था कि वह अपनी आंखों को खोलें और इतना मादकता भरे नजारे को अपनी आंखों से देखें,,, इसलिए वह हल्के से नीलू की चूची को दबाते हुए बोला,,,,)

Suraj ki kalpna apni ma or bahan k sath





देखो तो सही नीलु दशहरी आम से भी ज्यादा खूबसूरत तुम्हारी चुची है,,,(इतना सुनकर नीलू अपनी आंखों को खोल दी और अपनी चूची की तरफ देखने लगी जो कि सूरज के हाथों में थी और उसकी आंख खोलते ही सूरज धीरे से अपने प्यास होठों को उसकी चूची की तरफ ले गया और उसकी आंखों में देखते हुए उसकी भूरे रंग की किशमिश को अपने होठों से दबाकर चूसने लगा और यह देखकर नीलू की बुर पानी छोड़ने लगी,,,। सूरज बड़ी ही मदहोशी के साथ नीलु की किसमिस के साथ-साथ उसकी चूची को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया था,,, नीलू की चूची दशहरी आम से भी ज्यादा रसीली थी,,, नीलू उत्तेजना के मारे गहरी गहरी सांस लेने लगी थी वह सूरज को रोकने में असमर्थ साबित हो रही थी क्योंकि सूरज की हरकत से उसे भी आनंद मिल रहा था और वह आम चूसना बंद कर दी थी और अपनी दशहरी आम की चुदाई को देख रही थी,,,,।

कुर्ती से एक चूची को बाहर निकालने के बाद और नीलू की मदहोशी को देखने के बाद सूरज की हिम्मत बढ़ने लगी तो वह एक सूची को मुंह में लेकर दूसरे हाथ से दूसरी चूची को भी उसकी कुर्ती से बाहर निकलने लगा जिसमें खुद नीलू उसकी मदद करने लगी और देखते-देखते उसकी दोनों चुची उसकी कुर्ती से बाहर आ गई,,,, और वह दोनों च को अपने हाथ में पकड़ कर दबाते हुए बोला,,,)









देख रही हो नीलू,,,, इसीलिए तो मैं तुम्हें यहां बुलाया हूं क्योंकि तुम्हारे दशहरी यहां पूरे बगीचे के दशहरे आम की तुलना में बेहद रसीले और खूबसूरत है,,,,(दोनों हाथों से नीलू की चूची को दबाते हुए बोला और उसकी हरकत से नीलू को तो मजा आई रहा था लेकिन जिस तरह से वह च को दबा रहा था उसे उसे हल्का-हल्का दर्द भी महसूस हो रहा था लेकिन यह दर्द मीठा था,,,, उसे इस दर्द में भी आनंद की अनुभूति हो रही थी,,,, एक तरफ वह सूरज की हरकतों का आनंद ले रही थी और दूसरी तरफ वह रह रहकर आम के बगीचे के चारों तरफ नजर दौड़ा कर देख भी ले रही थी कि कहीं कोई यहां तो नहीं रहा है क्योंकि ऐसी हालत में अगर उसे कोई देख ले तो वह शर्म से ही मर जाए और हो नहीं चाहती थी कि कोई हालत में उसे देखें क्योंकि वह दोनों आम के बगीचे में खुले में पेड़ के नीचे बैठकर इस तरह की हरकत को अंजाम दे रहे थे,,,, दोनों हाथों से नीलू की चूची को दबाते हुए सूरज बोला,,,)





कैसा लग रहा है नीलू,,,,,

(जवाब में नीलू कुछ बोली नहीं बस शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,, इसका मतलब साफ था कि उसे भी बहुत मजा आ रहा था और देखते ही देखते सूरज फिर से उसकी चूची को मुंह में लेकर पीने लगा हूं एक हाथ को सलवार के ऊपर से ही रखकर उसकी बुर को मसलने लगा जिससे उसका आनंद दुगना हो गया और उसकी बुर पानी पर पानी छोड़ने लगी,,,।

सूरज की हरकतों का मजा लेते हुए वह चारों तरफ नजर डालते हुए बोली,,,)

सूरज कोई आ गया तो,,,,।

यहां कोई नहीं आएगा नीलु,,,, तुमडरो मत,,,





नहीं मुझे तो डर लग रहा है अगर कोई देख लिया तो मेरे मां बाबुजी तो मुझे मार ही डालेंगे,,,।

ऐसा कुछ भी नहीं होगा,,,, क्योंकि यहां कोई नहीं होता,,,(बार-बार नीलू के सवालों का जवाब देने के लिए सूरज उसकी चूची से मुंह हटा लेता था और वापस उसकी चूची पर मुंह रख देता था,,,, लेकिन नीलू सूरज के जवाब से संतुष्ट नहीं थी इसलिए बोली,,,)

नहीं मुझे तो डर लग रहा है मैं जा रही हूं,,,,(ऐसा क्या करवा उठने वाली थी कि उसके कंधों पर दोनों हाथ रखकर उसे दबाते हुए सूरज उसकी आंखों में देखते हुए बोला,,,,)

चलो फिर ठीक है,,,,उस(उंगली के इशारे से एक झोपड़ी की और नीलू को दिखाते हुए बोला जो की थोड़ी ही दूरी पर दिखाई दे रही थी,,,) झोपड़ी में चलते हैं,,,

(नीलू भी उसे और देखने लगी जहां पर सूरज उंगली से दिख रहा था और उसे झोपड़ी को देखकर वह बोली,,,)

उसमें कोई रहता तो नहीं है ना,,,,।

नहीं इसमें कोई नहीं रहता वीरान है और वही जगह ठीक भी रहेगी हम दोनों के लिए,,,, रुको मैं ले चलता हूं तुम्हें वहां पर,,,,(इतना कहने के साथ ही वह उठकर खड़ा हो गया,,,, और नीलू भी उठकर खड़ी हो गई लेकिन वह अपने कदम आगे बढ़ाती इससे पहले ही सूरज उसे अपनी गोद में उठा लिया,,, यह देखकर नीलू एकदम से घबरा गई औरबोली,,,)

अरे अरे यह क्या कर रहे हो मैं गिर जाऊंगी,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो तुम सूरज की गोद में हो और मेरी गोद से तुम क्या तुम्हारी मां भी नहीं गिर सकती,,,,(ऐसा कहते हुए पूरी तरह से उसे अपनी गोद में उठा लिया था। एक पल के लिए सूरज के मुंह से अपनी मा का जिक्र सुनकर वह सन्न रह गई क्योंकि वह देखी थी कि सूरज उसकी मां से थोड़ा डरता ही था लेकिन उसे क्या मालूम था कि सूरज उसकी मां की न जाने कितनी बार चुदाई कर चुका था इसलिए तो उसके होंठों पर उसकी मा का जिक्र आया था,,, थोड़ा सहज होते हुए नीलू बोली,,,)

अच्छा उठा लोगे तुम मेरी मां को उसका शरीर कितना भारी है,,,।

तो क्या हुआ बोलो मेरे में दम भी तो बहुत है बढ़िया आराम से तुम्हारी मां को गोद में उठाकर इधर से उधर घूमा सकता हूं,,,,।

चलो रहने दो पहले मुझे गोद में से नीचे उतरो मुझे डर लग रहा है कहीं नीचे गिरा दिया तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,।

अच्छा तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं है तो देखो,,,(पर इतना कहकर उसे गोद में लिए हुए वह झोपड़ी की तरफ जाने लगा,,,, नीलू यही सोच रही थी कि उसकी मां का शरीर भारी भरकम है और सूरज जिस तरह से उसे गोद में उठाया है उसकी मां को बिल्कुल भी नहीं उठा सकता जबकि उसे क्या मालूम था कि हम के बगीचे में वह उसकी मां की जवानी से जी भर कर खेल चुका था और उसे गोद में उठाकर उसकी चुदाई भी कर चुका था,,,, मां के बाद आज बेटी का नंबर था आज सूरज मुखिया की बीवी नहीं मुखिया की लड़की की चुदाई करने जा रहा था उसे गोद में उठाए हुए वह झोपड़ी की,, तरफ आगे बढ़ रहा था)
 
सूरज के हाथों में रसमलाई लग चुकी थी वह अपनी गोद में नीलू को उठाकर कच्ची झोपड़ी की तरफ ले जा रहा था और वह अच्छी तरह से जानता था की कच्ची झोपड़ी में नीलू के साथ क्या करना है और नीलू भी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज उसे झोपड़ी में ले जाकर उसके साथ क्या करने वाला है,,, इसलिए तो उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी नीलू के लिए यह पहला मौका था जब वह किसी मर्द के साथ इस तरह से एकांत में समय बिताने जा रही थी,, और एक मर्द के साथ समय बिताना और वह भी एकांत में घर से दूर इतनी तो नादान वह थी नहीं कि वह इसका मतलब को ना समझती हो वह अपनी मर्जी से सूरज के पास आई थी बगीचे में सुनसान जगह पर दोपहर के समय वह जानती थी कि एक जवान लड़का उसके साथ क्या करना चाहता है,,,।





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और वैसे भी पेड़ के नीचे उसकी कुर्ती में से उसकी दोनों चूचियों को निकाल कर उससे खेल कर उसे गर्म कर चुका था,,,। इसीलिए तो वह चलते तैयार हो चुकी थी उसके साथ झोपड़ी में जाने के लिए और सूरज भी इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए उसे अपनी गोद में उठा लिया था एक औरत जात का एक मर्द द्वारा उसे गोद में उठाना इस बात की तसल्ली दिलाता है कि वह औरत को पूरी तरह से संतुष्ट कर देगा और पूरी तरह से औरत के लायक है,,,,,।

सूरज का पायजामा तनकर तंबू बन चुका था,, खूबसूरत जवान लड़की को गोद में उठाने का एहसास क्या होता है इस समय सूरज ही समझ पा रहा था वैसे तो वह नीलू की मां को भी अपनी गोद में उठ चुका था और उसे उठाने का भी आनंद बेहद अद्भुत और अतुलनीय था,,, नीलू शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर चुकी थी,,, एक जवान मर्द की भुजाओं में वह पूरी तरह से शर्म से सिमटी हुई थी आम के बगीचे में तो जवान बदन क्या गुल खिलाते हैं इस बात को जानने के लिए वह भी बेहद उत्सुक थी,,,। सूरज की हालत खराब हुई जा रही थी मुखिया की बीवी के बाद यह उसका दूसरा मौका था जब किसी दूसरी खूबसूरत जवान लड़की को चोदने के लिए वह झोपड़ी में ले जा रहा था,,,।





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देखते ही देखते सूरज नीलू को अपनी गोद में उठाए हुए झोपड़ी के पास पहुंच चुका था,,,, दरवाजे के रूप में लकड़ी का बना हुआ एक छोटा सा दरवाजा था जो कि बंद था लेकिन उसमें कोई भी कड़ी लगी हुई नहीं थी,,, और सूरज अपनी गोद में उठाए हुए ही थोड़ा सा नीचे की तरफ झुक कर अपने हाथ से दरवाजे को पकड़ कर बाहर की तरफ खोल दिया और धीरे से अंदर प्रवेश कर गया,,,,, और नीलू को अपनी गोद में से नीचे उतारकर वह दरवाजे को बंद कर दिया,,,, झोपड़ी में होने के बावजूद भी अंधेरा जैसा यहां कुछ भी नहीं था क्योंकि झोपड़ी इधर-उधर से टूटी हुई थी जिसमें से सूरज की रोशनी अंदर अपना उजाला बरसा रही थी और यह दोनों के लिए अच्छा भी था क्योंकि यह दोनों के लिए पहली बार था एक दूसरे के साथ हालांकि नीलू को इस उजाले से थोड़ा परहेज था क्योंकि वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी लेकिन झोपड़ी में उजाला देखकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे क्योंकि वह नीलु को जवानी को उसकी खूबसूरत नंगे बदन को अपनी आंखों से देखना चाहता था,,,।





झोपड़ी के बीचों बीच दोनों खड़े थे,,, इधर-उधर सूखी हुई घास का ढेर पड़ा हुआ था जो कि दोनों के लिए बिस्तर का काम करने वाला था नीलू तो सर में से पानी पानी हो जा रही थी अपनी नजरों को नीचे झुकाए हुई थी और सूरज उतावला हुआ जा रहा था नीलू के साथ एक जाकर होने के लिए लेकिन एक जाकर होने से पहले बहुत सा खेल बाकी था जिसे खेलने बहुत जरूरी था,,, और इसलिए मुखिया की बीवी के साथ का अनुभव बहुत कम आने वाला था मुखिया की बीवी के साथ बिताए हुए पल उसके लिए अनुभव का काम कर रहे थे,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि सीधे-सीधे संभोग क्रिया पर उतरना यह औरत के लिए अच्छा होता है ना ही एक मर्द के लिए क्योंकि संभोग क्रिया के पहले का जो कार्य होता है वह बेहद सुहाना और मादकता भरा होता है जो अपनी मंजिल तक धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की एक सीढ़ी होती है,,, और सीढ़ी पर एक-एक कदम रख कर आगे बढ़ते हुए मंजिल पर पहुंचने का जो मजा है जो एक नशा है वह बेहद अद्भुत है इस बात को सूरज अच्छी तरह से समझ गया था,,,,। नीलू के डर और उसकी शर्म को खत्म करने के इरादे से सूरज बोला,,,।





अब यहां से शर्म का काम खत्म हो जाता है अब यहां से शुरू होती है एक जवानी का मदहोश कर देने वाला खेल जिसमें शर्म की रत्ती भर भी गुंजाइश नहीं होना चाहिए तभी जवानी का मजा ले पाओगी,,,।

मुझे तो शर्म आती है,,,।(अपनी नजरों को नीचे झुकाए हुए ही नीलू बोल तो सूरज अपना हाथ आगे बढ़कर उसके खूबसूरत थोड़ी पर अपनी उंगली रखकर उसके चेहरे को हल्के से ऊपर उठाते हुए बोला,,,)

आंखें खोलो नीलू और जवानी का मजा को बंद आंखों से बिल्कुल भी मजा नहीं आएगा आंखें खोल कर रखोगी तो खुलकर मजा ले पाओगी,,,,(वह ऐसा कहते हुए अपने प्यास होठों को नीलू के दहकते हुए होठों के पास ले जा रहा था,,, नीलु इस बात से अनजान शर्मा तुम्हारी अपनी आंखों को बंद किए हुए थी,,, और तभी सूरज अपने होठों को उसके लाल-लाल होठों पर रख दिया नीलू को जैसे ही सूरज के होठों का एहसास अपने होठों पर हुआ उसकी आंखें एकदम से खुल गई और एक गहरी सांस उसके जिस्म को अकड़न भरने लगा और तभी सूरज जल्दबाजी दिखाता हुआ अपना एक हाथ जल्दी से उसकी कमर पर रखकर उसे एकदम से अपनी तरफ दावत लिया ऐसा करने से उसके पजामी बना तंबू सीधे उसकी दोनों टांगों के बीच सलवार के ऊपर से ही उसकी बुर पर दस्तक देने लगी और इस बात का एहसास नीलू को होते ही नीलू मदहोश हो गई और सूरज उसके लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए पलों की तरह उसकी कमर को अपने एक हाथ से अपने बदन से सटे हुए दूसरे हाथ से उसकी गांड को दबाना शुरू कर दिया,,, ।





सूरज अच्छी तरह से जानता था की औरतों की उत्तेजना धीरे-धीरे बढ़ती है उनके नितंबों को उनके स्तन को मर्दन करने से संभोग की लालसा उनके मन में तीव्र होती जाती है और इसी कार्य में अग्रसर होते हुए सूरज पूरी तरह से नीलू पर अपनी पकड़ जमाते हुए दोनों हाथों से उसके नितम्बो को पकड़कर सलवार के ऊपर से ही दबोचने लगा मसलने लगा दबाने लगा,,,, यह एहसास सूरज को जितना आनंद दे रहा था उससे कहीं ज्यादा आनंद नीलू को प्रदान कर रहा था नीलु तो मदहोशी के सागर में डूबने लगी थी,,, सूरज लगातार उसके खूबसूरत अंगों का मर्दन कर रहा था लेकिन अभी तक उसकी चूची पर उसके हाथ नहीं आए थे क्योंकि उसकी गांड से उसका मन नहीं भर रहा था,,, जवानी से भरी हुई नीलू के नितंबों का उभार बेहद जानलेवा था भले ही उसकी मां की तरह ज्यादा बड़ी-बड़ी नहीं थी लेकिन एकदम सुडौल और सीमित आकार में बेहद खूबसूरत लग रही थी नीलू भी मदहोश हुए जा रही थी और देखते ही देखते सूरज के द्वारा चुंबन का आनंद लेते हुए सूरज की तरह ही वह भी सूरज के होठों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी थी,,,।





नीलू की तरफ से इस तरह की प्रतिक्रिया को देखकर सूरज उत्साहित हो गया और तुरंत अपने एक हाथ को ऊपर की तरफ लाकर कुर्ती के ऊपर से ही उसकी नारंगी को दबोच लिया और उसे दबाना शुरू कर दिया,,,, सूरज के तो दोनों हाथों में रसगुल्ला आ चुका था जिसका स्वाद वह बारी-बारी से ले रहा था,,, सूरज काफी देर तक किसी तरह से उसके लाल-लाल होठों का रसपान करता रहा और अपने दोनों हाथों से कभी उसकी चूची तो कभी उसकी गांड को दबाता रहा मसलते रहा इस तरह का आनंद लेते हुए वह पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो चुका था और इस दौरान उसके पजामे में बना तंबू नीलू की बुर पर दस्तक देते हुए उसे पानी पानी कर रहा था,,,,।

अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी कोमल दूर पर कठोर अंग का स्पर्श उसे मदहोश किया जा रहा था और बार-बार उसका मन उसे पकड़ने को कर रहा था लेकिन मन में एक झिझक थी जो उसे रोक ले रही थी,,, लेकिन इस झिझक को भी सूरज दूर कर दिया,,, और नीलू के हाथ को पकड़ कर अपने पजामी के ऊपर बने तंबू पर रख दिया और नीलू के लिए यह बेहद अनमोल तोहफा था नीलू भी पजामे के ऊपर से ही उसके लंड को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दी,,, लेकिन ऐसा करने से भी उसके मन में एक डर पैदा हो गया क्योंकि वह पजामे के ऊपर से जिस तरह से सूरज के लंड को दबा रही थी उसकी मोटाई और लंबाई को लेकर उसके मन में अजीब सी हलचल हुई जा रही थी,,, और वह अपने मन में सूरज के लंड की मोटाई और अपनी बर के छोटे से छेद के बारे में सोच कर घबरा रही थी,,,,,।





नीलू के होठों पर से सूरज अपने होठों को हटाकर नजर नीचे करके नीलू की हरकत को देख रहा था नीलू पागलों की तरह पजामी के ऊपर से ही उसके लंड को बड़े जोर से दबा रही थी ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी यह देखकर सूरज नीलू से बोला,,,,।

कैसा लग रहा है नीलू,,,,।

पूछो मत सूरज डर भी लग रहा है और मजा भी आ रहा है,,,,।

लेकिन डर कैसा,,,,।

तुम्हारा बहुत मोटा है,,,,।

तो क्या इससे पहले भी किसी का अपने हाथ में ली हो,,, इससे खेली हो,,,।

नहीं,,,,(गहरी सांस लेते हुए नीलू बोली)

तो तुम्हें कैसे मालूम कि मेरा बहुत मोटा है,,,।

क्योंकि पहले में देखी हूं,,,।

कीसका,,,,,?(मदहोश होता हुआ सूरज बोला और उसके मन में यह शंका भी थी कि कहीं इतनी किसी और के साथ तो संबंध नहीं बन चुकी है,,)

ऐसे ही मैं और मेरी बहन खेतों में इधर-उधर घूम रहे थे तो एक जगह पेशाब करने के लिए बैठ गए थे झाड़ियां के बीच तभी सामने गांव का एक लड़का आया हूं अभी पजामा नीचे करके पेशाब करने लगा लेकिन उसका तो बहुत छोटा था मतलब एकदम उंगली जितना इसीलिए तो तुम्हारा देखकर मुझे डर लग रहा है,,,,।

(नीलू की नादानी भरी बात सुनकर सूरज के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह प्रसन्नता के भाव मन में लिए हुए बोला,,,)





तुम शायद नहीं जानती मिलो की उंगली जितने लंड से औरत को कभी भी संतुष्टि प्राप्त नहीं होती वह प्यासी ही रह जाती है,,, देखना आज मैं तुम्हें कितना खुश करता हूं तुम बार-बार मेरे पास आओगी,,,,।

(और इतना कहते हुए अपने दोनों हाथ को आगे बढ़कर नीलू की कुर्ती को पकड़ लिया और उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा यह देखकर नीलू के मन में थोड़ी जीजक होने लगी क्योंकि वह जानती थी कि सूरज उसे निर्वस्त्र करने जा रहा है उसे नंगी करने जा रहा है इसलिए वह बोली,,,)

मुझे डर लग रहा है कहीं कोई आ तो नहीं जाएगा,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो इस बिराने में कोई नहीं आता,,,,(और इतना कहते हुए वह कुर्ती को ऊपर की तरफ उठा दीया,,,और नीलू भी उसका साथ देखो इतनी दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाती ताकि वह आराम से उसकी कुर्ती को निकाल सके,,, देखते ही देखते सूरज अपने हाथों से इसकी कुर्ती निकाल कर उसकी कुर्ती को नीचे पड़ी घास पर रख दिया,,, कुर्ती के निकलते ही कमर के ऊपर नीलू पूरी तरह से नंगी हो गई उसकी दोनों नारंगिया एकदम से उजागर हो गई उसे देखते ही सूरज के मुंह में पानी आ गया और सूरज बिना एक पल गंवाए अपने प्यास होठों को नीलू की चूची पर रखकर उसे मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया उसकी हरकत से नीलु के बदन में दौड़ने लगी और गहरी गहरी सांस लेने लगी,,,,)

सहहहहहह ,,,,ऊमम ममममम,,,,,,,,।





(नीलू के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी थी यह उसके लिए पहला अनुभव था जब अनजाने में ही उसके मुंह से स्टार की आवाज निकल रही थी और उसकी इस तरह की आवाज सुनकर सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी और वह दूसरे हाथ से नीलू की चूची को दबाकर आनंद लेने लगा,,,,, नीलू की चूचियां अपने उफान पर थी बिल्कुल नंगी के आकार की भले ही वह उसकी मां की चुचियों जैसी बड़ी-बड़ी नहीं थी लेकिन इस समय पूरी तरह से आनंद से भरी हुई थी जिसके छुहारे को मुंह में लेकर पीने में सूरज को अत्यधिक उत्तेजना और आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,। सूरज नीलू की चूची से उलझा हुआ था और नीलू अपने दोनों हाथों को सूरज के कंधों पर रखकर सूरज की हरकत का आनंद ले रही थी उसके मन से डर धीरे-धीरे खत्म हो रहा था वह लगातार गहरी सांस लेते हुए रह रह कर शिसकारी भी ले रही थी,,,।

सूरज बारी-बारी से नीलू की दोनों चुचियों का मजा ले रहा था,,,, नीलू की जवानी का मुख्य द्वार का आज उद्घाटन होगा ऐसा निश्चित हो चुका था,,,, लेकिन उसके पहले बहुत सी प्रक्रिया बाकी थी जिसमें से नीलू गुजर रही थी और हर एक प्रक्रिया का वह आनंद ले रही थी,,,, गांव से दुर आम के बगीचे में दो जंवा बदन एकाकार होने की प्रतीक्षा में थे,,,।





सूरज नीलू की चूचियों को पी पीकर टमाटर की तरह लाल कर दिया था और हल्का-हल्का उसका आकार भी बढ़ चुका था क्योंकि उत्तेजना में हमेशा औरतों की चुचियों का आकार थोड़ा सा बढ़ ही जाता है, , ,,, काफी देर तक चुचियों का मजा लेने के बाद वह अपने होठों को नीलू की चूचियों से अलग किया और गहरी सांस लेते हुए नीलू की आंखों में देखने लगा नीलू भी गहरी गहरी सांस ले रही थी, उत्तेजना से उसका चेहरा भी सुर्ख लाल हो गया था उत्तेजना के मारे उसके पैर थरथरा रहे थे,,, लेकिन अब पीछे कम लेना उचित नहीं था नीलू भी आगे बढ़ चुकी थी वह भी उत्साहित थी आगे का हाल देखने के लिए,,,,।

सूरज मुस्कुराते हुए नीलू की आंखों में देखते हुए बोला,,,,।

अब असली खेल शुरू होगा,,, नीलू,,,,(और इतना कहने के साथ ही नीलू के हाथ को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसे अपने बदन से सटा लिया उसकी पीठ उसकी छाती से सटी हुई थी,,,, और नीलू के नितंबों का आकार सीधे-सीधे पजामे में तने उसके तंबू पर रगड़ खाने लगा यह नीलू के साथ-साथ सूरज को भी बेहद उत्तेजना कर देने वाला महसूस हो रहा था नीलु कसमसा रही थी और सूरज उसे अपनी बाहों में दबोच कर अपनी कमर को गोल-गोल घूमाते हुए,, अपने लंड को उसकी गांड पर रगड़ रहा था यह एहसास नीलू को पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डुबोए ले चला जा रहा था,,,, नीलू मदहोश हुए जा रही थी और सूरज,, सूरज अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ लाकर फिर से उसकी चूचियों को दबा दिया उसे जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया इस बीच में लगातार अपनी कमर को आगे पीछे खिलाते हुए नीलू को ऐसा महसूस करवा रहा था कि जैसे वह पीछे से उसकी चुदाई कर रहा हो और उसकी ईस हरकत से नीलू को भी मजा आ रहा था,,,।





झोपड़ी का वातावरण पूरी तरह से गरम होता चला जा रहा था,,, देखते देखते सूरज एक हाथ से उसकी सलवार की डोरी पकड़ लिया और उसे झटके से खींच लिया और ऐसा करने से उसकी सलवार उसकी कमर पर एकदम से ढीली पड़ गई यह देखकर नीलू के बदन में उत्तेजना का संचार बड़ी तेजी से होने लगा क्योंकि वह जानती थी अपने पास सूरज से नंगी कर देगा,,,,, एक खूबसूरत जवान लड़की के बदन से उसके कपड़े उतारने में कितना आनंद आता है इस बात को सूरज भली भांति जानता था और यह पहला एहसास था जब नीलू को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि किसी मर्द के द्वारा अपने कपड़े उतरवाने में कितना आनंद आता है,,,,।

नीलू की सलवार उसकी कमर पर ढीली पड़ गई थी जिसे दोनों हाथों से पकड़ कर सुरज नीचे की तरफ लिए जा रहा था,,, अपनी सलवार उतारता हुआ देखकर नीलू अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ करके पीछे की तरफ लाकर सूरज के गरदन में ऐसे अपनी बाहों को लपेट ली जैसे मानो कोई पेड़ से बेल लिपट जाती है,,,,। देखते ही देखते सूरज उसकी सलवार को उसके घुटनों तक नीचे खींच दिया एक तरह से वह पूरी तरह से निर्वस्त्र हो चुकी थी उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार पानी पानी हो चुकी थी अपने ही मदन रस में वह पूरी तरह से डूब चुकी थी जिस पर अपनी हथेली रखकर उसकी गरमाहट को महसूस करते हुए सूरज जोर-जोर से उसकी बुर को रगड़ना शुरू कर दिया ऐसा करने से वह नीलू के बदन में उत्तेजना का संचार बड़ी तेजी से बढ़ा रहा था,,,। सूरज पागलों की तरह उसकी दोनों टांगों के बीच अपनी हथेली रखकर जोर-जोर से रगड़ रहा था ऐसा करने में सूरज के साथ-साथ नीलू को भी बहुत मजा आ रहा था उसके बदन में कसमसाहट के साथ-साथ उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह मचल रही थी मछली की तरह तड़प रही थी,,, वह किसी भी तरह से सूरज के हाथ से छूटना चाहती थी उसकी बाहों से अलग होना चाहती थी क्योंकि उसकी तड़प उसे मदहोश कर रही थी उसे पागल बना रही थी वह अपनी उत्तेजना को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और किसी भी सूरत में सूरज से छोड़ना नहीं चाहता था और इसी बीच वह अपनी बीच वाली उंगली को उसकी बुर के अंदर प्रवेश करना शुरू कर दिया ऐसा करते ही नीलू एकदम से तड़प उठी और बोली,,,।





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सहहहहह सूरज यह क्या कर रहे हो मुझे दर्द हो रहा है,,,,आहहहहह रुक जाओ आराम से,,,,,आहहहहह,,,,(उसके रोकने के बावजूद भी सूरज अपनी बीच वाली आदि ऊंगली उसकी गुलाबी छेद की गली में प्रवेश करा चुका था,,, गुलाबी छेद में उंगली के प्रवेश होते ही सूरज को उसकी बुर की गर्मी का एहसास अच्छी तरह से होने लगा वह समझ गया कि नीलू की बुर में कितनी ज्यादा गर्मीहै,,,,।

चिंता मत करो नीलू कुछ नहीं होगा तुम डरो मत बहुत मजा आएगा,,, रुको पहले तुम्हारी सलवारउतार दूं,,,,(और इतना कहने के साथ चाहिए सूरज घुटनों के बल बैठ गया और उसकी सरकार को उतारने लगा उसके कंधे पर हाथ रखकर इसका सहारा लेकर अपनी शाम को एक-एक करके ऊपर उठाने लगी ताकि सूरज आराम से उसकी सलवार को उसकी टांगों से बाहर निकल सके,,,, और देखते ही देखते नीलू की दोनों टांगों से उसकी सलवार निकल चुकी थी और वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसके नंगेपन को देखकर सूरज एकदम मदहोश होता हुआ बोला,,,)





बाप रे नंगी होने के बाद तुमको और भी ज्यादा खूबसूरत लगती हो ऐसा लगता है कि कोई स्वर्ग से अप्सरा नीचे जमीन पर उतर आई हो,,,,(सूरज के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर नीलू मुस्कुराने लगी और उसे मुस्कुराता हुआ देख कर सूरज तुरंत उसका हाथ पकड़ कर उसे नीचे खींच लिया और उसे घास के ढेर पर एकदम से लेटा दिया,,, अब मौसम और भी ज्यादा मदहोश होने लगा था घास के ढेर पर नीलू संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में लेटी हुई थी और सूरज घुटनों के बाल उसके पास बैठा हुआ था उसके नंगे बदन को देख रहा था सूरज को इस तरह से अपने नंगे बदन को देखता हुआ पाकर नीलू शर्म के मारे अपनी हथेली से अपनी गुलाबी बुर को ढंक ली,,, यह देख कर सूरज मुस्कुराता हुआ बोला,,,,।)

इससे कोई फायदा होने वाला नहीं है सारा खेल यही से शुरू होता है और यहीं पर खत्म हो जाता है,,,( और ऐसा कहते हुए उसकी हथेली को पड़कर उसकी बुर से हटा दिया उसकी बुर एक बार फिर से नंगी हो गई,,, सूरज मदहोश हुआ जा रहा था उतावला हुआ जा रहा था उसे सब्र नहीं हो रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने नीलू की गुलाबी बुर पूरी तरह से गुलाब के फूल की तरह खीली हुई थी जिसकी पतली दरार में से मदन रस बार-बार बाहर मोती के दाने की तरह टपक रहा था,,,, यह देखकर सूरज से रहा नहीं गया और वह धीरे से घुटनों के बाल आगे बढ़ते हुए दोनों हाथों से नीलू की नरम नरम जांघों को पकड़कर उसे फैलाने लगा,,, उसकी टांगों को खोलने लगा और देखते-देखते नीलू का सहकार पाकर सूरज की टांगों को खोल दिया था उसकी गुलाबी बुर हल्का सा दरवाजे की दरार की तरह खुल सी गई थी लेकिन बड़ी प्यारी लग रही थी,,,,।





दोनों जांघों को अपनी हथेली में दबोचे हुए सूरज कभी नीलू की दोनों टांगों के बीच देखता तो कभी नीलु की तरफ देखता और जब-जब नीलू की तरफ देखता तो नीलू शर्मा के मारे अपनी आंखों को बंद कर देती,,,, और यह देखकर सूरज की उत्तेजना बढ़ती जाती सूरज से काबू नहीं हो रहा था,,,, सूरज का मन तो कर रहा था किसी समय अपने लंड को उसकी बुर में डाल दे लेकिन वह जानता था कि समय उसकी बुर उसके लंड को लेने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है धीरे-धीरे उसकी बुर में जगह बनाना जरूरी था क्योंकि इस बात से वह अच्छी तरह से वाकिफ था कि नीलू की बुर का छेद छोटा है और उसके लंड का सुपाड़ा कुछ ज्यादा ही मोटा है ऐसे में जल्दबाजी करना उचित नहीं है,,,,।

और इसीलिए सूरज नीलू की मां पर आजमाया हुआ उसके द्वारा सिखाया हुआ कार्य को बड़ी बखूबी से नीलू पर आजमाना चाहता था और इसीलिए धीरे-धीरे अपने पैसे होठों को उसकी दोनों टांगों के बीच ले जाने लगा ऐसा देखकर दिल के बदन में अजीब सी हलचल लगी उसका बदन कसमसाने लगा और अगले ही पल सूरज का प्यासा होठ नीलू के गुलाबी बुर पर स्पर्श होने लगा और यह एहसास किया स्पर्श नीलू के लिए पूरी तरह से जानलेवा साबित हो रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हो गई उसकी आंखें एकदम से बंद हो गई और उसका मुंह खुला का खुला रह गया जिसमें से गरमा गरम शिकारी की आवाज निकालते हुए उसकी कमर अपने आप ही तकरीबन पांच अंगुल ऊपर की तरफ उठ गई वह एकदम से मदहोश होने लगी और इसी बीच लगातार सूरज अपने होठों का स्पर्श उसके गुलाबी छेंद पर करता रहा उसमें से उठ रही मादक खुशबू से पूरी तरह से मदहोश बना रही थी,,,।





आहहहहह सूरज यह क्या कर रहे हो,,,ऊमममममम,,,, रहने दो ऐसा मत करो उस पर कोई अपना होठ लगाता है क्या,,,?

मैं तो ऐसे ही प्यार करता हूं,,,,(और ऐसा कहने के साथ ही इस बार पूरी तरह से अपने होठों को खोल कर वह नीलू की बुर को पूरी तरह से अपने मुंह में भर लिया और उसे चाटना शुरू कर दिया,,, चाटना क्या वह उसे खींच खींच कर पीना शुरू करदिया,,, सूरज की इस हरकत की वजह से नीलू अपनी उत्तेजना को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और इस बार पूरी तरह से अपनी कमर को हवा में उठा दे जिसे दोनों हाथों में सूरत दबोच कर उसकी बुर पर से अपने होठों को अलग किए बिना पागलों की तरह उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया,,,,, यह एहसास सूरज के लिए तो नया बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि वह इस तरह से उसकी मां के साथ प्यार कर चुका था उसकी मां की बुर को चाट चुका था,,, लेकिन यह एहसास नीलू के लिए बिल्कुल नया था एकदम सोच के परे वह पागल हुए जा रही थी मदहोश हुई जा रही थी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि कोई लड़का उसकी बुर को इस तरह से अपने होंठ लगाकर चाटेगा,,,।





आम के बगीचे हुस्न और जवानी का दौर शुरू हो चुका था,,, सूरज कच्ची झोपड़ी में नीलू की टांगें फैला कर उसके खूबसूरत लहसुन को अपने होठों से चाट रहा था,,, अपनी जीभ को उस गुलाबी छेद में डालकर उसकी गहराई को नापने की कोशिश कर रहा था,,, और उसकी हरकत से नीलू पागल हुए जा रही थी बार-बार अपने सर को दाएं बाएं पटक रही थी क्योंकि इतनी अत्यधिक उत्तेजना उसने आज तक महसूस नहीं की थी इसीलिए तो उसकी हालत पाल-पाल खराब होती जा रही थी और सूरज की हरकत बढ़ती जा रही थी,,,। जीभ के साथ-साथ वह अपनी बीच वाली उंगली को भी नीलू की बुर में प्रवेश करा चुका था और उसे गोल-गोल घूमा रहा था यह सूरज की तरफ से एक चाल थी क्योंकि वह अपनी हरकत से नीलू की झिझक के साथ-साथ उसके मन में बैठा मोटे लंड का डर भी खत्म करना चाहता था क्योंकि वह अपनी उंगली को गोल-गोल घूमाकर उसकी बुर में अपने लंड के लिए जगह बना रहा था,,,।





लेकिन उसकी यह हरकत नीलू के बदन में उन्मादकता भर रही थी मदहोशी भर रही थी,,, वह पागल हो जा रही थी और अपने आप ही उसका हाथ सूरज के सर पर आ गया और उसके बाल को कस के पकड़ कर वह उसके होंठों का दबाव अपनी बुर पर बढ़ा रही थी,, नीलू किए हरकत सूरज के लिए बेतहाशा मदहोशी का काम कर रही थी नीलू की हरकत को देखते हुए सूरज पागलों की तरह उसकी नंगी कमर पर दोनों हाथ रखकर उसे दबोच लिया और लपा लप अपनी जीभ को उनके अंदर बाहर करके चाटने लगा,,,, सूरज की यह हरकत पर अद्भुत और एब्स्मरणीय थी नीलू के लिए नीलू इसके एहसास में पूरी तरह से डूबती चली जा रही थी सूरज इसी तरह से नीलू की मां के साथ भी मदहोशी भरा खेल खेला था जो की उसकी मां ने ही इस खेल को सिखाई थी और आज इस खेल को सूरज नीलू पर आजमा रहा था,,,।

झोपड़ी के अंदर गरमा गरम शिसकारी की आवाज पूरी तरह से गूंजने लगी थी क्योंकि अब नीलू के मन से शर्म और झिझक दोनों जा चुकी थी,,, वह जितना छटपटाती थी उतना उसे आनंद आता था और सूरज भी अपनी क्रियाकलाप को एक नया रूप देते हुए,,, उसके खूबसूरत नंगे बदन पर अपनी हथेलियां की छाप छोड़ रहा था जहां भी वह अपनी हथेली रखता था उसे जगह का अंग पूरी तरह से टमाटर की तरह लाल हो जा रहा था कभी वह उसकी कमर तो कभी उसकी नंगी चिकनी पीठ तो कभी उसकी चूचियों को जोर से दबा देता था और इस बार वह अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर उसकी नंगी गांड की दोनों फांकों को दोनों हाथों में दबोचकर ऊपर की तरफ उठाकर उसकी बुर को चाट रहा था,,,,।





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और रह-रह कर अपनी उंगली को उसकी बुर में डालकर उसे गोल-गोल घुमा कर अपने लंड के लिए जगह भी बना रहा था इस दौरान नीलू एक बार झड़ चुकी थी,,,, लेकिन सूरज था कि रोकने का नाम नहीं ले रहा था,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से नीलू की खूबसूरत बुर से खेलता रहा लेकिन जब उसके लंड की अकड़ अत्यधिक बढ़ने लगी तब उसे एहसास होने लगा कि अब इस खेल को आगे बढ़ना चाहिए इसलिए वह धीरे से अपने होठों को नीलू की गुलाबी पर से हटा लिया और गहरी सांस लेते हुए नीलू की तरफ देखने लगा नीलू की सूरज की तरफ देख रही थी दोनों की सांस बड़ी तेजी से चल रही थी दोनों की नजर आपस में टकराई और दोनों मदहोश होने लगे,,, सूरज धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया और नीलू की बुर पर उसे रख कर उसे अपनी हथेली में उत्तेजना से दबोचते हुए बोला,,,।

बहुत खूबसूरत बुर है तुम्हारी नीलू,,,(और इतना सुनकर नीलू शर्मा गई और अपनी नजर को दूसरी तरफ घूम ली सूरज धीरे से अपनी कमी से निकाल कर एक तरफ रख दिया उसकी नंगी चिकनी छाती नीलू की जवानी को अपनी आगोश में लेने के लिए तड़प रही थी वह धीरे से उठकर खड़ा हुआ और अपने पजामे का नाडा खींचकर खोल दिया,,, और अगले ही पर उसका पजामा उसके भजन से अलग हो चुका था और वहां नीलू के सामने नीलू की तरह पूरी तरह से नंगा खड़ा था उसका लंड हवा में ऊपर नीचे झूल रहा था जिसे देखकर नीलू के तन बदन में आग लग रही थी वह उसे देखकर मदहोश भी हो रही थी और डर भी रही थी,,,, सूरज अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करके हिलाते हुए बोला,,,।

डरो मत नीलू तुम्हें भी इससे बहुत प्यार करना है तभी यह बदले में तुम्हें उतना ही प्यार देगा ताकि तुम एकदम मस्त हो सको,,,,।





कैसा प्यार,,,(मदहोशी भरी आवाज में नीलू बोली क्योंकि नीलू को सूरज का कहने का मतलब समझ में नहीं आ रहा था इसलिए सूरज घुटनों के बाल बैठ गया और नीलू का हाथ पकड़ कर उसे बैठने लगे और लगातार सूरज के लंड की तरफ देख रही थी और सूरज बिना कुछ बोले उसका हाथ सीधे अपने लंड पर रख दिया लेकिन इस बार नीलू की आंखों में मदहोशी थी इसलिए वह बिल्कुल भी नहीं घबराई और कस के सूरज के लंड को अपनी हथेली में दबोच और यह एहसास सूरज को मदहोश कर गया सूरज घुटनों के बाल दोनों टांगों को खोलकर सूखी घास पर बैठा हुआ था और नीलू के हाथ पैर से अपना हाथ हटा दिया था नीलू पागलों की तरह अपने हाथ को आगे पीछे करके सूरज के लंड को हिलाना शुरू कर दी थी हालांकि वह इस खेल में पूरी तरह से अनाड़ी थी लेकिन फिर भी वह जैसे तैसे करके सूरज के लंड से मजा ले रही थी,,,





नीलू की आंखों में उत्सुकता और मदहोशी दोनों साथ दिखाई दे रही थी सूरज को अब कहने और सीखाने की कोई जरूरत नहीं थी,,, नीलू सूरज के लंड में उलझी हुई थी और सूरज दोनों हाथ को उसके सर पर रखकर उसे अपने लंड की तरफ खींचने लगा,,, नीलू कुछ समझ पाती से पहले ही उसके लाल-लाल होठ सूरज के लंड के बैंगनी रंग के सुपाड़े के करीब आ गए,,,, इतने करीब एक मोटा तगड़ा जिंदगी में देखकर नीलू की बुर उत्तेजना के मारे फुल ने पीचकने लगी,,, और नीलू को समझ पाती कुछ कह पाती उससे पहले ही सूरज अपने हाथ में लंड को पड़कर उसके सुपाड़े को नीलू के लाल लाल होठों पर रगड़ना शुरू कर दिया,,, सूरज को लगा कि नीलू अपने होठों को पीछे खींच लगी लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ लंड की गर्मी उसके होठों की तपन से रगड़ खाकर उसके बदन में तूफ़ान पैदा कर रही थी,,, और नीलू बड़ी शिद्दत से अपनी आंखों को बंद करके अपने होठों को खुद उसके लंड की सुपाड़े से रख लेना शुरू कर दी और गहरी गहरी सांस लेना शुरू कर दी,,, सूरज मदहोश बज रहा था नीलू की हरकत से उसे बहुत मजा आ रहा है और वह उसकी उत्तेजना और उसके जोश को बढ़ाते हुए बोला,,,)





ओहहहहह नीलू तुम तो मेरी जान ही ले लोगी बहुत मजा आ रहा है मुझे,,,,सहहहहहहबह,,,,(ऐसा कहने के साथ ही सूरज ने देखा कि उत्तेजना के मारे नीलु के लाल-लाल होठ एकदम खुले हुए थे और मौका देखकर सूरज धीरे से अपने लंड के सुपाड़े को उसके लाल लाल होठों के बीच प्रवेश कराना शुरू कर दिया,, ओर आधा सुपाड़ा उसके लाल लाल होठों के बीच प्रवेश भी कर चुका था,,,, लेकिन तभी नीलू की आंखें एकदम से खुल गई और वह सूरज की तरफ देखने लगी,,, सूरज समझ गया की नीलु क्या कहना चाह रही है लेकिन वह कुछ कहती इससे पहले ही सूरज बोला,,,)

डरो मत नीलु बहुत मजा आने वाला है बस धीरे से इसे अपने मुंह में लेकर चूसो जैसे मैं तुम्हारी बुर चाटना चूस उससे प्यार किया वैसे तुम्हें भी करना है,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपने समुचे सुपाडे को उसके लाल लाल होठों के बीच प्रवेश कर कर उसके मुंह में डाल दिया शुरू शुरू में तो नीलू को बड़ा अजीब लगा लेकिन तभी उसे इस बात का भी एहसास हुआ कि सूरज भी इसी तरह से उसकी बुर को चाटा था जिसमें से वह पेशाब करती थी और ऐसा करने में उसे बहुत मजा आया था,,,, इसलिए वह भी अपनी जीभ को उसके सुपाड़े पर घूमाना शुरू कर दी,,, सूरज मदहोश होने लगा उसकी आंखें एकदम से बंद हो गई,,, और वह देखते-देखते अपनी कमर को आगे पीछे करके नीलु के मुंह में अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा,,,।





नीलू एक मजे हुए खिलाड़ी की तरह इस खेल को खेल रही थी सूरज को लगने लगा की कही नीलू इस तरह का खेल पहले भी तो नहीं किसी के साथ खेल चुकी है,,, लेकिन यह पूछना इस समय उचित नहीं था बस सूरज आनंद के सागर में गोते लगाते हुए उसके रेशमी बालों में अपनी उंगलियों को उलझाए हुए अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलाना शुरू कर दिया था,,, नीलू गहरी सांस लेते हुए सूरज के लंड को अपने गले तक उतार ले रही थी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस खेल को खेलने में उसे इतना मजा आएगा और जल्दी ही वह इस खेल का मजा ले पाएगी लेकिन आज उसकी सोच के विपरीत वह पूरी तरह से आनंदित हुए जा रही थी,,,,।





सूरज मदहोश हो चुका था पागल हो चुका था वह समझ गया था कि अब इस खेल में उसे बहुत मजा आने वाला है जितना मजा मिलन की मां ने देखी उससे भी कहीं ज्यादा मजा बेटी देने वाली है इस बात का अंदाजा उसे लग गया था और कुछ देर तक इसी तरह से अपनी कमर हिलाते हुए हुए वह धीरे से अपने लंड को नीलु के मुंह में से बाहर निकाला,,,, और मुंह में से लंड के बाहर निकलते ही नीलू गहरी गहरी सांस लेने लगी ऐसा लग रहा था कि सूरज का मोटा तगड़ा लैंड उसके सांस लेने में अवरोध पैदा कर रहा है जिसके निकल जाने के बाद वह बड़े आराम से सांस ले रही थी,,,।

नीलू तुमने मुझे आज खुश कर दिया आज से मैं तुम्हारा गुलाम हो गया हूं आज तुम्हें इतना मजा दूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,(अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में नीलू को उलझते हुए उसके दोनों कंधों पर हाथ रखकर उसे धीरे से सूखी हुई घास पर लेटा दिया और उसकी दोनों टांगों को खोलकर घुटनों के बाल उसकी दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बना लिया,,,, सूरज की हरकत देखकर नीलू समझ गई थी कि कुछ ही देर में उसका मोटा लंड उसकी बुर में जाने वाला है इसलिए उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी उसके बाद में कसमाशाहट बढ़ती जा रही थी वह बड़ी उत्सुकता के साथ सूरज की तरफ तो कभी अपनी दोनों टांगों के बीच की तरफ देख ले रही थी सूरज धीरे से अपने हाथों को आगे बढ़कर उसके नितंबों को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसे अपनी जांघो पर चढ़ा लिया,,, मर्दों का औरतों के साथ इस तरह की हरकत उसकी कमर को पकड़ कर अपनी तरफ खींच कर आसन बनाना उसके नितंबों पर हाथ रखकर उसे अपने आसन के समक्ष लाना यह औरत का मर्द की तरफ समर्पण की भावना दर्शाता है अगर औरत तैयार ना हो तो शायद मर्द इस तरह की हरकत कभी ना कर पाए और इसीलिए नीलू भी पूरी तरह से तैयार थी सूरज अपने लंड को हाथ में लेकर देर साथ अपने लंड पर लगाया और उसकी बुर पर लगाकर उसे चिकना कर दिया और अपने लंड के सुपाड़े को हाथोड़े की तरह उसकी गुलाबी छेद पर बरसाने लगा,,, सूरज का लंड काफी मोटा और लंबा होने के साथ-साथ बेहद वजनदार भी था और वाकई में नीलू की बुर पर एक हथौड़े की तरह चोट कर रहा था जिससे नीलू को दर्द भी हो रहा था,,, लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था जब जब सुपाड़ा उसकी बुर पर चोट करता ,,तब तब उसके बदन में सिहरन सी दौड़ जाती,,,,।





नीलू के गुलाबी छेद को देखकर सूरज के मुंह में पानी आ रहा और फिर वह धीरे से अपने सुपाड़े को उसके गुलाबी दरार के छेद पर रखकर उसे अंदर डालने की कोशिश करने लगा लंड का सुपाड़ा काफी मोटा था जिससे दिक्कत पेश आ रही थी लेकिन जैसे तैसे करके हल्का सा सुपाड़ा,,, नीलू के गुलाबी छेंद में प्रवेश कर गया,,, और यही उम्मीद की किरण सूरज को नजर आने लगी,,नीलु की तो हालत खराब थी पल भर में ही वह पसीने से तरबतर हो चुकी थी,,, उसे इस बात का डर था कि सूरज का लंड उसकी बुर में नहीं प्रवेश कर पाएगा अगर घुस भी किया तो उसकी बुर फट जाएगी इतनी मोटाइ वह झेल नहीं पाएगी,,,, लेकिन फिर भी न जाने क्यों उसे सूरज पर विश्वास था क्योंकि वह भी मदहोश हो चुकी थी वह भी छुड़वाना चाहती थी वह भी सूरज के लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस करना चाहती थी,,,,।

सूरज भी अपने अनुभव का उपयोग करते हुए नीलू की कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया था और अपनी कमर को धीरे-धीरे आगे की तरफ बढ़ने शुरू कर दिया था और साथ में उसकी गुलाबी छेंद पर थुक भी गिरा रहा था ताकि उसकी चिकनाहट तकरार रहे क्योंकि सूरज का लंड के साथ-साथ नीलु की बुर इतनी अत्यधिक गर्म थी कि झट से थुक एकदम से सूख जाता था,,,, सूरज की मेहनत रंग ला रही थी धीरे-धीरे उसका सुपाड़ा बुर की गहराई में उतरने लगा था,,, एक तरफ सूरज के चेहरे पर खुशी के भाव नजर आ रहे थे वहीं दूसरी तरफ नीलू के चेहरे पर डर और दर्द के भाव एकदम साफ नजर आ रहे थे पसीने से तड़प और उसका चेहरा डरा हुआ लग रहा था वह बार-बार अपनी नजर उठा कर अपनी दोनों टांगों के बीच देख ले रही थी सूरज के लंड की स्थिति को देख रही थी,,, जो की धीरे-धीरे चिकनाहट पाकर अंदर की तरफ सरक रहा था,,,।





नीलू की मां के साथ का अनुभव सूरज को बहुत काम आ रहा था वह इस खेल में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था लेकिन एक जगह जाकर जब उसका लंड आधा उसकी बुर में प्रवेश कर गया तब एकदम से रुक गया मानव के जैसे एकदम से उसकी बुर की गहराई के बीच अड़चन सी आ गई हो,,,, यह देखकर सूरज समझ गया कि आप प्रहार की जरूरत है तभी आगे का काम सफल हो पाएगा वरना यहीं पर अटक जाएगा और फिर सारा मजा किरकिरा हो जाएगा,,,, इसलिए सूरज अपनी हरकतों के साथ-साथ नीलु को अपनी बातों में उलझाने लगा,,,।

बाप रे नीलू मैं तो सोचा नहीं था कि तुम्हारी बुर इतनी कसी हुई होगी मुझे लगा था कि तुम पहले भी इस खेल का मजा ले चुकी होगी तो तुम्हारी बुर ढीली हो गई होगी,,,।

धत्,,,, पहली बार है,,,,(नीलू एकदम से शरमाते हुए बोली,,,)





वह तो मैं समझ ही गया अगर पहले चुदवाई होती तो मेरा लंड आराम से चला जाता मुझे तो इस बात की खुशी है कि मैं पहला मर्द हूं जो तुम्हारी बुर का द्वार खोल रहा है,,,,।

( ईतना सुनते ही नीलु एकदम से शर्मा गई,,,और ईसी मौके का फायदा उठाते हुए सूरज फिर से नीलू की कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और जोरदार करारा धक्का मारा और इस बार सूरज का लंड पूरी ताकत के साथ नीलू की बुर के अंदरूनी अवरोधों को दूर करता हुआ एकदम से उसकी जड़ में जाकर गड गया,,,, सूरज अपनी सूझबूझ के साथ नीलू की जवानी पर काबू पा चुका था लेकिन जिस तरह से दर्द से बिलबिला उठी थी,,,, पल भर के लिए तो लगा कि जैसे उसकी सांस ही अटक जाएगी,,,,)

उई मां,,,, मर गई रे यह क्या डाल दिया सूरज तूने मेरी बुर में,,,,आहहहहह दैया में तो मर जाऊंगी,,,ऊहहहहहह,,,,, बहुत दर्द कर रहा है जल्दी से निकालो सूरज इसे,,,,,





कुछ नहीं हुआ नीलु कुछ नहीं हुआ,,,, पहली बार थोड़ा दर्द करता है,,,, बाद में यह दर्द मजा बन जाता है,,,,

नहीं नहीं जल्दी से निकालो इसे मुझे नहीं चुदवाना,,,(ऐसा कहते हुए नीलू सूरज की पकड़ से निकलने की कोशिश करने लगी अपना हाथ पांव मारने लगी और सूरज जानता था कि अगर एक बार उसने अपने लंड को नीलू की बुर से बाहर निकाल दिया तो फिर कभी जिंदगी में उसकी बुर में नहीं डाल पाएगा सूरज को इस बात का डर था कि नहीं या मौका उसके हाथ से निकलना जाए लेकिन वह बड़े सूझबूझ के साथ काम ले रहा था वह अपना पूरा लंड नीलु की बुर में घुसाए हुए उसे अपनी बाहों में कस के दबोच लिया,,,, और उसे समझाते हुए बोला,,,)

ककककक कुछ नहीं हुआ नीलु कुछ नहीं हुआ,,,, तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो अभी सब ठीक हो जाएगा,,,,( और ऐसा कहते हुए सूरज तुरंत अपने होठों को खोलकर नीलू की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से उसकी चूची को दबाना शुरू कर दिया इस हरकत से नीलु फिर से मदहोश होने लगेगी,,,,, और ऐसा ही हुआ थोड़ी ही देर बाद नीलू हाथ पांव मारना बंद कर दे और धीरे-धीरे उसके साथ फिर से उत्तेजना के मारे गहरी चलने लगी और उसके चेहरे का हाव भाव बदलने लगा दर्द की जगह किसके चेहरे पर उत्तेजना का एहसास नजर आने लगा सूरज अपनी हरकत को लगातार जारी रखे हुए बारी-बारी से दोनों चूचियों को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया,,,,, जल्द ही नीलू पूरी तरह से उत्तेजित होने लगी उसे भी पूरा एहसास था कि एक मोटा तगड़ा बंद उसकी बुर की गहराई में घुसा हुआ है,,,, इसलिए बहुत उत्तेजना के मारे अपनी बाहों का हार बनकर सूरज के गले में डाल दी सूरज नीलू की हरकत से पूरी तरह से जोश में आ गया और नीलु की चूची का स्तनपान करते हुए अपनी कमर को हल्के से ऊपर की तरफ उठाया और तकरीबन एक अंगुल जितना लंड बाहर की तरफ खींच कर फिर से उसे गहराई में डाल दिया ऐसा वह तीन-चार बार किया और हर बार ऐसा करने पर नीलू मदहोश होने लगी,,,,। और उसकी यह मदहोशी और भी ज्यादा तेज धक्के के लिए उत्सुक होने लगी,,,,।





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सूरज पूरी तरह से चुड़वासी हो चुका था जोर-जोर धक्के लगाने के लिए तैयार हो चुका था नीलू की मदहोशी देखकर उसका जोश बढने लगा था वह समझ गया था कि अब नीलू उसके धक्के को झेल लेगी,,, इसलिए इस बार वह अपने पूरे लैंड को बाहर की तरफ निकला बस हल्का सा उसे अंदर की तरफ रहने दिया और फिर जोर से धक्का मारा इस बार भी नीलू के मुंह से हल्की सी चीख निकल गई लेकिन यह चीज दर्द भरी नहीं बल्कि मदहोशी और उत्तेजना के साथ-साथ आनंद से भरी हुई थी।

अब सूरज के लंड ने नीलू की बुर में अपने लिए जगह बना लिया था,,, अब सूरज बड़ी आराम से अपनी कमर को आगे पीछे करके नीलू को चोदना शुरू कर दिया था नीलू मदहोश हुए जा रही थी आसमान में उड़ रही थी इतना सुख चुदाई में मिलता है उसे इस बात का एहसास नहीं था हालांकि वह अपनी बहन के साथ अंगों को रगड़ने मसलने का मजा ले चुकी थी लेकिन चुदाई का मजा इतना अदभुत होता है आज उसे पहली बार इस बात का एहसास हो रहा था सूरज उसकी कमर में अपनी कमर हीरा रहा था उसके हर एक धक्के साथ उसकी नारंगिया रबड़ के गेंद की तरह उछल रही थी,,,





उसकी नारंगियों को देखकर सूरज को धक्के लगाने में और भी ज्यादा मजा आ रहा था और आगे अपना हाथ बढ़ाकर उसकी दोनों चूचियों को लपक लिया,,, फिर से जोर-जोर से दबाते हुए धक्के पर धक्का लगने लगा,,,, नीलू मदहोश हुए जा रही थी उत्तेजना से भरा हुआ उसका चेहरा और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था उसके लाल लाल होंठ हल्के से खुले हुए थे और वह गहरी गहरी सांस ले रही थी यह देखकर सूरज का मन लग जाए और वह नीचे झुक कर उसके होठों पर अपने होंठ रखकर उसे चुंबन करने लगा,,, नीलू भी उसका साथ देने लगी दोनों के होठ आपस में एकदम से गुत्थमगुत्था हो गए,,,, दोनों को बहुत मजा आ रहा था सूरज जोर-जोर से धक्के लगा रहा था अब उसका मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से उसकी बुर में अंदर बाहर हो रहा था,,, यह देखकर सूरज बोला,,,।

अब बोलो नीलू कैसा लग रहा है मजा आ रहा है ना,,,,

बहुत मजा आ रहा है सूरज,,,,।

तुम खामखा मेरा लंड देखकर डर रही थी,,,।

मैं क्या मेरी जगह कोई भी होती तो वह भी डर जाती,,,।

(नीलू की बात सुनकर पल भर के लिए सूरज के मन में ख्याल आया कि वह बोल दे कि तुम्हारी मां तो बिल्कुल भी नहीं डरी थी बल्कि वह खुद अपनी बुर में डलवाई थी,,,, लेकिन वह जानता था कि इस समय उसकी मां का जिक्र करना उचित नहीं है इसलिए खामोश रहा और धक्के पर धक्का लगाता रहा,,,,।

थोड़ी ही देर में सूरज उसे घोड़ी बनाकर पीछे से चोदना शुरू कर दिया इस आसन में भी नीलू को बहुत मजा आ रहा था नीलू पागलों की तरह धीरे-धीरे अपनी कमर को पीछे की तरफ भी ठेल रही थी जो कि उसकी उत्तेजना दर्शा रहा था,,,। सूरज पूरी तरह से नीलू को संतुष्ट करने में लगा था क्योंकि वह जानता था कि नीलू संतुष्ट हो जाएगी तो बार-बार उससे चुदवाने के लिए आएगी,,,, और देखते-देखते उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर जोर-जोर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,,।

दोनों धीरे-धीरे चरम सुख के नजदीक पहुंच रहे थे हालांकि इस दौरान नीलू दो बार झड़ चुकी थी लेकिन सूरज अभी भी बरकरार था लेकिन अब वह भी झड़ने के करीब था इसलिए तो जोर से उसकी कमर को दोनों हाथों से भींच कर जोर-जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया,,,, नीलू भी पूरी ताकत के साथ अपना पूरा सहयोग देते हुए अपनी गांड को पीछे की तरफ मार रही थी,,,, और एक साथ दोनों की सांस एकदम से ऊपर नीचे हुई और दोनों झड़ना शुरू कर दिए सूरज एकदम से उसकी पीठ पर पसर गया और अपने लंड में से गर्म फवारा उसकी बुर में मारने लगा,,,,।

वासना का तूफान शांत हो चुका था,,, काम क्रीड़ा का अद्भुत खेल खेलने के बाद नीलू जैसे ही अपने होश में आई वह शर्म से पानी पानी होने लगी हालांकि वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी मस्त हो चुकी थी आज सूरज ने उसे जवानी का अद्भुत सुख प्रदान किया था लेकिन फिर भी सूरज के सामने वह शर्म महसूस करने लगी,,,। सुरज मुस्कुराता हुआ उससे अलग होकर उसके बगल में पीठ के बल लेट गया और नीलू जो कि अभी तक घोड़ी बनी हुई थी वह धीरे से नर्म-नर्म घास पर बैठ गई सूरज का मन थोड़ी ही देर में दोबारा नीलू को चोदने को था लेकिन नीलू की नजर टूटी फूटी झोपड़ी में से बाहर गई तो उसे एहसास हुआ कि काफी समय गुजर गया है शाम हो चुकी थी वह जल्दी से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और अपने कपड़ों को हाथ में समेटते हुए बोली,,,।

हाय दइया यह तो शाम हो गई किसी को पता चल गया तो गजब हो जाएगी मैं इतनी देर घर से बाहर अकेले कभी नहीं रहती,,,,।

(उसकी बात सुनकर सूरज समझ गया था कि अब दोबारा इस समय वह नीलू की चुदाई नहीं कर पाएगा और वह भी उठकर खड़ा हो गया और कपड़े पहनने लगा लेकिन झोपड़ी से निकलते निकलते वह एक बार दिलों को बाहों में भरकर उसके होठों पर चुंबन कर दिया जिससे नीलू भी मुस्कुराती और फिर नीलू अपने घर की तरफ निकल गई और सूरज अपने घर की तरफ,,,)
 
सूरज नीलू की गुलाबी बर का उद्घाटन कर चुका था और यह उद्घाटन बेहद रंगारंग तरीके से समाप्त हुआ था लेकिन सूरज नीलू के साथ और ज्यादा मस्ती करना चाहता था लेकिन दोनों के पास समय पर्याप्त मात्रा में नहीं था इसलिए नीलू को वहां से जाना पड़ा लेकिन फिर भी सूरज पूरी तरह से नीलू को संतुष्ट कर चुका था और वह जानता था कि नीलू अब उसकी गुलाम बन चुकी है वह जब रहेगा तब वह बगीचे में आ जाएगी उस चुदवाने के लिए,,,।





मां बेटी दोनों को भोग कर सूरज आत्मविश्वास से भर चुका था उसे इतना तो ज्ञात हो चुका था कि वह किसी भी औरत को पूरी तरह से संतुष्ट करने में सक्षम है और यह एहसास उसको नीलू की मां ने ही दिलाई थी और वही एहसास को एक बार फिर से आत्मविश्वास में बदलते हुए उसकी बेटी के साथ ही संभोग सुख प्राप्त करके वह मदहोश हो चुका था,,,, सूरज अपने आप को बहुत किस्मत वाला समझने लगा था और वास्तव में वह किस्मत वाला ही था गांव की मुखिया की बीवी को चोदने के बाद मुखिया की लड़की भी अगर छोड़ने को मिल जाए तो भला यह किस्मत की बात ना हो तो क्या हो और ऐसी किस्मत लेकर पैदा हुआ था सूरज,,, जहां एक तरफ मां की बड़ी-बड़ी गांड बड़ी बड़ी चूचियां और पूरी तरह से अनुभव से भरी हुई एक मदहोश कर देने वाली नीलू की मां थी वही छोटे-छोटे संतरे की तरह चूची वाली और सुडौल काया के साथ-साथ सीमित आकर के नितंब वाली उसकी बेटी और सूरज दोनों के साथ बराबर का मजा लिया था,,,, पहली बार में लेकिन सूरज मां बेटी दोनों में कौन ज्यादा मजा दी किसके साथ ज्यादा आनंद की अनुभूति हुई यह तय नहीं कर पाया था क्योंकि जिस तरह का आनंद उसे मां से मिला था उसी तरह से उसकी बेटी से भी वह पूरी तरह से संतुष्ट था हां एक बात का एहसास उसे अच्छी तरह से था कि जहां मां की बुर में लंड बड़े आराम से चला जा रहा था वही बेटी की बुर में लंड एकदम कसा हुआ जाता था जिसका एहसास और आनंद सूरज के चेहरे पर दिखाई देता था,,,,।





दो-तीन दिन लगातार सूरज बगीचे में जाता रहा लेकिन नीलू वहां पर नहीं आई थी वह समझ नहीं पा रहा था कि नीलू वहां क्यों नहीं आ रही है क्योंकि इतना तो वह जानता ही था की जिस औरत को एक बार चुदाई का चस्का लग जाता है वह बार-बार इस सुख की तरफ बढ़ता है लेकिन नीलू क्यों नहीं आ रही थी इसके पीछे के कारण को सूरज समझ नहीं पा रहा था,,,, ऐसा नहीं था कि नीलु बगीचे में जाना नहीं चाहती थी,, वह बगीचे में बराबर जाना चाहती थी और सूरज के साथ चुदवाना चाहती थी संभोग सुख प्राप्त करना चाहती थी,,, लेकिन पहली बार की चुदाई से उसे अपने दोनों टांगों की बीच की पतली दरार में हल्का-हल्का दर्द महसूस होता था जिसका कारण साफ था कि सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था और नीलू पहली बार चुदवाई थी और चुदाई का इससे पहले कोई भी अनुभव न होने के कारण उसकी बुर का गुलाबी छेद सूरज के लंड की मोटाई के मुकाबले बहुत ही छोटा था हालांकि सूरज अनुभव और सुझ बुझ से काम लेते हुए इस अद्भुत कार्य में सफल तो हो चुका था लेकिन नीलू के मन में थोड़ा डर बैठ गया था ऐसा नहीं था कि उसे मजा नहीं आया था मजा तो उसे भी बहुत आया था,,, यहां तक कैसे एक जवान खूबसूरत लड़की होने का गर्व भी हो रहा था,,, लेकिन दर्द की वजह से वह मन होने के बावजूद भी बगीचे में नहीं जा रही थी वह बगीचे में जाने के लिए अपनी टांगों के बीच के दर्द को कम होने का इंतजार कर रही थी,,,,।





और दूसरी तरफ सोनू की चाची थी जो बाजार में ज्योतिष की बात को सुनकर अपने आप ही सूरज की तरफ झुकने लगी थी क्योंकि वह जानती थी कि गांव भर में एक वही ऐसा जवां मर्द है जो उसकी इच्छाओं की पूर्ति कर सकता था बिना किसी बदनामी के,,, इसलिए सोनू की चाची भी सूरज के साथ हम बिस्तर होने के लिए तड़प रही थी लेकिन लोग समाज का डर भी उसके मन में बहुत ज्यादा था क्योंकि वह जानती थी अगर एक बार बदनामी हो गई तो गांव में वह कर उठा कर रह नहीं पाएंगी लेकिन एक बार कामयाब हो गई तो बरसों की मेहनत और चाहत दोनों पूरी हो जाएगी,,,, और इसीलिए सूरज के बारे में सोच सोच कर बार-बार वह अपनी बुर को गीली कर ले रही थी और अपनी जवानी की आग बुझाने के लिए अपनी उंगलियों का सहारा लेकर रात गुजार रही थी,,,।

वैसे भी सूरज से उसे दिन के बाद दोबारा मुलाकात नहीं हुई थी और इसीलिए वह सूरज से मिलने के लिए तड़प रही थी क्योंकि सूरज जब उसकी मदद करने के लिए घास का देर अपने सर पर उठाए हुए उसके घर पर लाया था तो वह उसे पानी पिलाने के लिए बाहर बैठने के लिए बोली थी और वह खुद घर के अंदर चली गई थी लेकिन बड़े चोरों की पेशाब लगने की वजह से हुआ घर के दूसरी तरफ निकल कर झाड़ियां के बीच बैठकर पेशाब कर रही थी और ज्यादा देर हो जाने की वजह से सूरज घर के अंदर चला गया था और धीरे-धीरे उसी जगह पर पहुंच गया था जहां पर झाड़ियां में बैठकर सोनू की चाची पेशाब कर रही थी और अनजाने में ही उसकी नजर सोनू की चाची पर पड़ गई थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड उसकी मदमस्त जवानी देखकर सूरज तो उसे देखता ही रह गया था,,, और जब सोनू की चाची को इस बात का एहसास हुआ कि सूरज ने उसे पेशाब करते हुए देख लिया है तो उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी वह मत होश होने लगी वह अपने मन में सोचने लगी कि सूरज उसके बदन का कौन-कौन सा हिस्सा देख लिया होगा,,,,।

जिस तरह से वापस साफ करने के लिए बैठी थी और सूरज जहां पर खड़ा था उसे इतना तो ज्ञात हो गया था कि सूरज उसके कौन से अंग को देख लिया होगा वह जानती थी कि सूरज उसकी नंगी गांड को जरूर देख लिया होगा हालांकि भले वह पेशाब करने बैठी थी लेकिन वह जानती थी कि उसकी नजर उसकी बुर पर तो बिल्कुल नहीं पड़ी होगी क्योंकि दोनों टांगों के बीच उसकी गुलाबी छेद छुप सी गई थी,,, भले ही सूरज उसकी गुलाबी बुर को ना देख पाया हो लेकिन उसकी गांड देखकर वह हक्का-बक्का रह गया था,,, और इस बात को सोनू की चाची अच्छी तरह से जानती थी सोनू की चाची इस बात से परेशान थी कि उसकी नंगी गांड देखकर उसे पेशाब करते हुए देखकर सूरज अपने मन में क्या सोच रहा होगा उसके बारे में अच्छी बातें सोच रहा होगा या गंदी बातें लेकिन दुनिया का ऐसा कौन सा मर्द होगा जब औरत को पेशाब करता हुआ देखकर उसके बारे में गंदी बातें ना सोचता हो उसके बारे में गंदे ख्याल ना लाता हूं उसे देखकर अपना लंड ना खड़ा कर लिया हो सूरज भी उन मर्दों में से अपवाद बिल्कुल भी नहीं था उसकी नंगी गांड देखकर सूरज का भी मन बहक सा गया था,,, यही सब सो कर सोनू की चाची पागल हुए जा रही थी,,, और सूरज के बारे में गंदी-गंदी बातें सोच कर अपनी हालत खराब कर रही थी,,,,।

ऐसे ही एक दिन सूरज खाना खा रहा था उसकी मां भी पास में बैठकर खाना खा रही थी और रानी भी खाना खा रही थी,,, तभी बाहर से आवाज आई,,,।

दीदी,,,ओ ,,, दीदी,,,,।

अरे कौन है,,,?(मुंह में निवाला डालने से पहले सूरज की मां बोली)

अरे मैं हूं सोनू की चाची,,,,।

आजा अंदर आजा,,,,,।

(सोनू की चाची इतना सुनते ही सूरज की आंखों के सामने सोनू की चाची पेशाब करती हुई नजर आने लगी उसकी बड़ी-बड़ी गांड नजर आने लगी और वह उत्तेजित होने लगा थोड़ी ही देर में सोनू की चाची घर के आंगन में आ गई,,, जब उसकी नजर सूरज पर पड़ी तो उसे देखती रहेगी क्योंकि सूरज पजामा पहन कर खाना खा रहा था कमर के ऊपर उसका गठीला बदन एकदम नग्न था,,,, उसकी नंगी चौड़ी छाती पर नजर पड़ते हैं सोनू की चाची उसे देखते ही रहेगी और कुछ देर तक उसे देखती रही वह क्या करने आई थी क्या कहने आई थी उसे बिल्कुल भी भान नहीं रहा,,, और यह सब सुनैना देख रही थी,,,, सोनू की चाची की नजर में सूरज के लिए एक आकर्षक दिखाई दे रहा था और यह देखकर सुनैना बाजार में ज्योतिष की बात के बारे में सोचने लगी और अपनी पड़ोसन की बात के बारे में सोचने लगी ज्योतिष के अनुसार सोनू की चाची मां बन सकती थी लेकिन दूसरे मर्द का सहारा लेकर और उसकी पड़ोसन बार-बार उसे उकसा रही थी सूरज के साथ संबंध बनाने के लिए,,, कहीं यही सब के चलते सोनू की चाची उसके बेटे को तो नहीं घुर रही है,,, क्योंकि इतना तो वह जानती थी कि उसके बेटे की जवानी मरदाना अंदाज में खील रही थी उसका बदन भी एकदम गठीला था,,, और ऐसे में किसी भी औरत का ध्यान उसके बेटे पर जाना स्वाभाविक था इसलिए इस समय सोनू की चाची पर सुनैना को थोड़ा गुस्सा आने लगा और वह बोली,,,,।)

क्या हुआ कुछ बताएगी भी या देखती रहेगी,,,,।

(सुनैना की आवाज जैसे ही कानों में पड़ी वैसे ही सोने की चाची जैसे एकदम से होश में आई हो इस तरह से चकरा गई और हड़बड़ाते हुए बोली,,,,)

अरे मैं तो भूल ही गई,,,, अरे वह अपने पड़ोस के गांव वाले शर्मा जी है ना,,,,।

हां हां क्या हुआ,,,?

अरे हुआ कुछ नहीं उनकी बेटी का विवाह है और आज रात को गाना बजाना है तो उन्होंने एक आदमी को भेजे थे बुलावे में,,,,।

मतलब चाची गाना बजाना करने के लिए जाना है,,,(खाना खाते हुए रानी बोली)

हां क्यों नहीं,,,, और वैसे भी दीदी जाना तो पड़ेगा ही,,,, यह तो गांव की पुरानी परंपरा है एक दूसरे के सुख दुख में भागीदार होना ही पड़ता है,,,।

हां हां इसमें कोई बेमत नहीं है,,, जाना तो पड़ेगा ही,,,, लेकिन सोनू की चाची उनका घर तो दो किलोमीटर दूर है और रास्ते में एकदम सुनसान रहता है बड़ी-बड़ी झाड़ियां जंगल जैसा ही दिखता है जाने को तो चले जाएंगे लेकिन आते समय डर तो लगता है और वैसे कौन-कौन जा रहा है,,,,।

चार-पांच औरतें हैं,,,,। और वैसे अगर डर लगता है तो सूरज को भी साथ ले लेते हैं,,,,।

हां मा ये ठीक रहेगा मैं भी चलूंगा,,,,(सोनू की चाची की बात सुनते ही वह एकदम से बोल उठा,,,)

यह सब तो ठीक है लेकिन रानी अकेली रह जाएगी,,, उसका क्या घर में भी तो किसी को होना चाहिए,,।

तो इसमें क्या हो गया मां जब तक हम लोग नहीं आ जाते तब तक रानी पड़ोस वाली चाची के घर सो जाएगी,,,।

क्यों वह भी तो जाएगी ना,,,।

मुझे नहीं लगता है मां की वह जाएगी क्योंकि उन्हें थोड़ा बुखार था,,,,।

चल कोई बात नहीं मैं पूछ लुंगी,,,,।

(जितनी देर यह सब बातें हो रही थी इसलिए सोनू की चाची सूरज की नंगी छाती की तरफ ही देख रही थी वह अपने मन में सोच रही थी की अगर सब कुछ सही हुआ तो जब सूरज उसे अपनी बाहों में मिलेगा तो उसे एकदम से अपने सीने से लगा लगा कितना मजा आएगा जब उसकी नंगी चूची उसकी नंगी छाती से टकराएंगी ,,,रगड़ खाएंगी ,,,,एक तूफ़ान सा उठ जाएगा बहुत मजा आएगा,,,, सोनू की चाची को फिर से किसी ख्यालों में खोया हुआ देखकर सुनैना बोली,,,,)

अरे तेरा ध्यान कहां है कहां खो जा रही है,,,।

अरे कुछ नहीं दीदी अच्छा तो मैं चलती हूं,,,,(इतना कहकर बात जाने लगी तो सूरज बोल पड़ा)

अरे कहां जा रही हो चाची खाना तो खा लो,,,।

अरे नहीं मुझे बहुत कम है फिर किसी दिन खा लूंगी,,,,(इतना कहते हुए सोनू की चाची वहां से चली गई लेकिन जाते-जाते सुनैना के मन में शंका के बीज बो गई,,,, सूरज किस तरह से सोनू की चाची से बात किया था उसे देखकर सुनैना को शक होने लगा था की कहानी उसे ज्योतिष की बात सच तो नहीं हो जाएगी और इसमें उसके ही बेटे की अहम भूमिका तो नहीं होगी,,, यही सब सोच कर सुनना परेशान हो रही थी,,,।

धीरे-धीरे दिन ढल गया और शाम होने लगी सुनैना जल्दी-जल्दी खाना बनाने लगी,,, क्योंकि उसे पकड़ के गांव में नाच गाना करने के लिए जाना था,,,, खाना बनाते हुए वह रानी से बोली,,,)

रानी पड़ोस वाली चाची जाएंगी कि नहीं,,,।

नहीं मामा नहीं जा रही है भैया ठीक कहता था उनकी थोड़ी तबीयत खराब है,,,,।

चल तब तो ठीक है लेकिन तु उससे बात की है कि नहीं,,,!

हां कर ली हुं ,,, मैं खाना खाने के बाद उसके घर चली जाऊंगी सोने के लिए,,,।

चल ठीक है खाना बन गया है,,,,अब जल्दी से खाना खा लो,,,

तुम खाना परोसो तब तक भैया आता ही होगा,,,,।

(और थोड़ी ही देर में सूरज भी सही समय पर आ गया,,,, तीनों खाना खा चुके थे ,,, थोड़ी ही देर में तीन चार औरतों सुनैना के घर के बाहर इकट्ठी होने लगी सोनू की चाची भी आ चुकी थी,,,, अंधेरा हो चुका था और अब निकलना जरूरी था इसलिए सुनैना दरवाजा बंद करके उसे पर ताला लगती हो चाबी को रानी को ही समाधि और उसे बोली जाकर पड़ोस वाली चाची के घर सो जाए,,,,।

थोड़ी देर में सुनैना को लेकर पांच औरतों हो गई है सूरज भी लोगों के साथ निकल पड़ा वैसे तो चारों तरफ अंधेरा था लेकिन चांदनी रात होने की वजह से हल्का-हल्का दिखाई दे रहा था सूरज अपने हाथ में बड़ा सा मोटा डंडा लिया हुआ था,,,, और सभी औरतें आपस में बात करते हुए पड़ोस के गांव के लिए निकल गई सोनू की चाची सूरज से बात करना चाहती थी उस दिन के बारे में जब वह घर के पीछे पेशाब कर रही थी वह सूरज उसे देख लिया था यह जानते हुए भी की सूरज नहीं उसे पेशाब करते हुए देख लिया है फिर भी वह जानबूझकर इस बात का जिक्र सूरज से करना चाहती थी कि वह देखा था या नहीं देखा था क्योंकि अब धीरे-धीरे उसके बदन में भी उमंग उठने लगी थी,,,,।

कच्ची सड़क पर बातें करते हुए सभी बढ़ते चले जा रहे थे और कच्ची सड़क के दोनों तरफ बड़े-बड़े खेत लहलहा रहे थे और बड़ी-बड़ी जंगली घास भी होगी हुई थी जिससे चारों तरफ खेत ही खेत दिखाई दे रहे थे,,, गर्मी का मौसम होने के बावजूद भी शीतल हवा चल रही थी जिसे बदन में ठंडक का एहसास हो रहा था,,, और बिल्कुल भी आलस नहीं लग रहा था सभी के भजन में फुर्ती नजर आ रही थी और जल्दी-जल्दी का धमाके बढ़ाते हुए आगे बढ़ते चले जा रहे थे,,, सूरज के मन में भी कुछ और चल रहा था पांचों औरतें उसकी मां की उम्र के ही लगभग की थी,,,, सूरज अपने मन में कल्पना कर रहा था कि अगर पांचों औरतें अपने कपड़े उतारकर एकदम नंगी होकर इसी तरह से कच्ची सड़क पर चलती रहे तो क्या अद्भुत नजारा होगा सभी की नंगी गांड एकदम पानी भरे गुब्बारे की तरह आपस में लहराते हुए रगड़ खा रही होगी,,, और कितनी नंगी गांडो को देखकर उसका लंड एकदम से पागल हो जाएगा,,, यही सब सोचते हुए सूरज आगे आगे चलता चला जा रहा था तभी पीछे से आवाज आई,,,।

अरे सूरज धीरे-धीरे चल तू तो हम लोगों की रक्षा करने के लिए आया है कि खुद आगे भागने के लिए,,,।

(सूरज अच्छी तरह से जानता था कि यह किसकी आवाज़ है इसलिए एकदम से रुक गया और पीछे मुड़कर देखते हुए बोला)

बिल्कुल भी चिंता मत करो मेरे होते हुए कुछ भी गड़बड़ नहीं होगी,,,,।

अरे यह तो हम जानते हैं लेकिन आगे आगे क्यों चल रहा है साथ में चल,,,।

(सूरज की बात सुनकर सुनैना भी सोनू की चाची के सुर में सुर मिलाते हुए बोली क्योंकि वाकई में सूरज उन लोगों से जल्दी-जल्दी आगे बढ़ता चला जा रहा था,,,,)

अच्छा ठीक है मैं साथ में हीं चलता हूं बस,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज भी उन लोगों के साथ चलने लगा लेकिन तभी उन औरतों में से कुछ मस्तीखोर औरतें आपस में मस्ती भरी बातें करने लगी और उनमें से एक बोली,,,)

अरे मुन्ना की मां तू गाना गाने के लिए आ गई घर पर मुन्ना के बाबू क्या करेंगे,,,,।

(इतना सुनकर दूसरी औरत बोली)

अरे करेंगे क्या मुन्ना की मां के बारे में सोच कर हाथ से हिला कर काम चलाएंगे,,,,।

(इतना कहकर वह तीनों हंसने लगी सोनू की चाची भी हंसने लगी तो सूरज की मां बोली)

अरे तुम लोगों को शर्म आ रही है एक जवान लड़का साथ में चल रहा है और तुम लोग इस तरह की बातें कर रही हो,,,,।

अरे हां हम तुझे भूल गए इस तरह की बातें मत करो बहन कहीं इस तरह की बातें सुनकर सूरत चुदवासा हो गया तो हम मे से ही किसी एक औरत पर चढ़ाई कर देगा,,,,,,(इतना कहकर फिर से वह लोग हंसने लगी,,,, सूरज उन लोगों से तकरीबन 4 5 मीटर की दूरी पर आगे आगे चल रहा था,,,, उन औरतों की बात उसे साफ सुनाई दे रही थी,,,और उन औरतों की बात सुनकर उसे भी मजा आ रहा था लेकिन उसकी मां थोड़ा गुस्सा दिखा रही थी और फिर से बोली ,,,)

तुम लोगों को हमेशा यही सुझता है,,, अरेकुछ घंटे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो घर पर ही रुक जाती चढ़ जाती अपने पति के लंड पर,,,,।

(यह सुनकर उनमें से एक औरत बोली,,)

तुम तो एकदम से खोल कर ही बोल दी,,,,।

तो क्या करती तुम लोग बात ही ऐसी करते हो,, अरे अगर हम औरतें हो तो ठीक हैं इस तरह की बातें हंसी मजाक अच्छी लगती है लेकिन एक जवान लड़का साथ में फिर भी तुम लोग इसी तरह की बातें कर रहे हो क्या सोचेगा वह तुम लोगों के बारे में,,,,,

(यह सुनकर सोनू की चाची सुनैना का पक्ष लेते हुए बोली)

दीदी सही कह रही है तुम लोगों को थोड़ा सब्र करना चाहिए हंसी मजाक का,,, सही जगह सही समय पर किया गया मजाक ही अच्छा लगता है वरना शर्मिंदा होना पड़ता है,,,,,।

ठीक है दीदी गलती हो गई माफी दे दो,,,,।

(जिस औरत ने इस तरह की बातों की शुरुआत की थी वही कान पकड़कर माफी मांगते हुए बोली,,,, सुनैना को भी थोड़ा अजीब लगा क्योंकि वह ज्यादा गुस्सा दिखाती थी इसलिए वह भी मुस्कुराते हुए बोली,,,)

तुम लोग मेरी बात का बुरा मत मानना मुझे भी यह सब बातें अच्छी लगती है आपस में हंसी मजाक अच्छी लगती है लेकिन सही समय पर,,,,।

ठीक है दीदी आगे से ख्याल रखेंगे,,,,।

(सूरज इन सब बातों को अच्छी तरह से सुन रहा था लेकिन इस तरह से जता रहा था कि मानो जैसे उसे सुनाई ना दे रहा हो,,,, तभी वह एकदम से सबका ध्यान गंभीर बात से हटाते हुए बोला,,,)

हम जल्दी पहुंचने वाले हैं देखो ढोलक की आवाज आ रही है,,,,।

(सूरज की बात सुनते ही सभी लोग एकदम ध्यान से सुनाने लगे और वाकई में ढोलक की आवाज आ रही थी,,,,,)

हां हम पहुंचने वाले हैं,,,(सुनैना बोली,,, और उंगली से इशारा करते हुए बोली,,,)

वह देखो उजाला दिखाई दे रहा है,,,, लगता है कार्यक्रम शुरू हो गया है,,,,

हां मुझे भी ऐसा ही लग रहा है,,,,,,(सोनू भी सुनैना की हां में हां मिलाते हुए बोली ,,)



 
दूर से ही जहां पर नाच गाना था वहां का शोर सराबा और उजाला नजर आ रहा था जिसे देखकर सूरज के साथ-साथ बाकी लोग भी प्रसन्न हो गए थे क्योंकि वह लोग अपने स्थान पर पहुंचने वाले थे,,, और जल्दी-जल्दी अपने कदम आगे बढ़ा रहे थे,,, सुनैना भी अपने मन में यही सोच रही थी कि जल्दी से वहां पर पहुंचकर कुछ देर ठहरने के बाद वापस घर लौट आएंगे क्योंकि वह जानती थी कि उनके गांव से अपने गांव की दूरी काफी है और रात का मामला है इसलिए वह ज्यादा देर नहीं करना चाहती थी,,, वैसे तो सूरज साथ में था इसलिए ज्यादा डर तो नहीं लग रहा था लेकिन फिर भी सुनैना जल्द से जल्द वहां से लौटना चाहती थी,,,,।





रास्ते में जिस तरह की बात गांव की औरतें कर रही थी उसे सुनने के बाद सूरज के पजामे में उसका हथियार करवटें ले रहा था,,, और साथ में थी सोनू की चाची जिसे वह उसे कहीं घर पर पेशाब करते हुए देख चुका थाउसकी नंगी बड़ी बड़ी गांड देख कर उसे समय भी सूरज का लंड एकदम से खड़ा हो चुका था ईस समय भी सोनू की चाची के बारे में सोचकर उसका लंड अंगडाई ले रहा था,,, वह अपने मन में सोच रहा था कि अगर उसकी आंखों के सामने सोने की चाची अपने सारे वस्त्र उतार कर नंगी हो जाने की तो कैसी दिखाई देगी थोड़ा भारी भरकम शरीर होने के बावजूद भी निश्चित तौर पर वह स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा से काम नहीं लगेगी ,, यही सब सूरज अपने मन में सोच रहा था,,,,। क्योंकि आप उसका झूकाव सोनू की चाची की तरफ था,,, और दोनों के बीच काफी हद तक बातचीत भी हो चुकी थी भले ही ज्यादा खुलकर न हुई हो लेकिन फिर भी किसी औरत के साथ कोई भी मर्द अगर थोड़ी बहुत बात कर लेता है तो उसका आत्मविश्वास साथी आसमान पर पहुंच जाता है और यही सूरज के साथ भी था सूरज को न जाने क्यों अपने आप पर विश्वास था कि अगर वह सोनू की चाची के साथ कुछ ऐसा वैसा करता है तो सोनू की चाची बुरा नहीं मांनेगी और ना ही किसी से कुछ कहेगी,,,।





यही सब सोचते हुए सभी लोग शर्मा जी के घर पहुंच चुके थे,,,। वहां पर पहुंचते ही वहां के लोगों ने अच्छी तरह से स्वागत किया सबको एक साथ बैठाया मिठाई नाश्ता कराया,,,, बाकी की औरतें तो औरतों के साथ बैठकर गाना गाने में लग गई और सूरज एक तरफ कुर्सी पर बैठकर उन लोगों को देखने लगा,,,, सूरज की नजर तो वहां की औरतों पर ही थी जो की चारों तरफ चार-पांच लालटेन चल रही थी जिसे उजाले में हुआ औरतें एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,, उनमें से कुछ औरतें उठकर नाच रही थी ढोलक की टहल पर ताल मिला नहीं थी अपनी कमर लचका रही थी और सूरज की नज़र उनकी लचक्ति हुई कमर के साथ-साथ उनकी गोलाकार गांड पर टिकी हुई जो कि थिरकन ले रही थी तो उसके लंड की हालत खराब हो रही थी,,,,,,।





तभी उनमें से कुछ औरतें सोनू की चाची को नाचने के लिए बोलने लगी सोनू की चाची तो जैसे नाचने के लिए तैयार ही थी बस किसी के बोलने का इंतजार ही कर रही थी वह तुरंत उठकर खड़ी हो गई और उसके खड़े होते ही गांव की औरतें जोर-जोर से आवाज करने लगी और सोनू की चाची अपनी गांड मटकते लगी हाथ ऊपर उठकर वह अपनी कमर हिला रही थी जिसके साथ-साथ उसकी भारी भरकम गांड भी हवा में लहरा रही थी जिसे देखकर सूरज की हालत एकदम से खराब हो रही थी,,,, सूरज अपनी मन में यही सोच रहा था कि काश यह सब औरतें अगर सारे कपड़े उतार कर नाचने लगती तो कितना मजा आता इतनी सारी औरतों का नंगा नाच देख कर उसकी काम शक्ति और ज्यादा बढ़ जाती,,,।





सूरज अपने मन में यही सब सो रहा था कि तभी एक खूबसूरत नव विवाहित औरत और ऐसा लग रहा था कि अभी ठीक से औरत बनी भी नहीं थी उसकी शादी के दो-तीन साली हुए थे लेकिन अभी उसके चेहरे से भोलापन साफ दिखाई दे रहा था वह अपने हाथ में एक बड़ा सा थाल लेकर आई जिसमें ढेर सारे मिट्टी के कुल्हड़ रखे हुए थे और कूल्हड में मिठाई रखी हुई थी,,,, जिसे वह वहां बेठी सभी औरतों में बांटने के लिए हि लाई थी,,,, वह खूबसूरत औरत आधा घूंघट की हुई थी जिसे देखकर सूरज समझ गया था कि अभी यह नहीं नहीं शादी करके बहू बनकर आई है,,,, पतला शरीर था लेकिन छरहरा सुडोल,,, एकदम मदहोश कर देने वाली काया जिसे सूरज देखता ही रह गया,,, वह एक-एक करके औरतों को मिठाई का कुल्हड थमा रही थी,,,, वह ठीक सूरज की आंखों के सामने झुक झुक कर सबको मिठाई हमारे थे और उसके झुकाने की वजह से उसके नितंबों का घेराव एक अद्भुत आकार ले ले रहा था जिसे देख कर सूरज पूरी तरह से उसकी जवानी में डूबता चला जा रहा था,,,,।





सूरज किसी भी तरह से उससे बात करना चाहता था उसके बारे में जानना चाहता था,,, लेकिन बात की शुरुआत कैसे करें उसे समझ में नहीं आ रहा था,,,, और फिर एकाएक उसके दिमाग में युक्ति आई और वह तुरंत अपनी जगह से उठकर खड़ा हुआ और सीधे उसके पास क्या और उसके हाथ से थाल को लेते हुए बोला,,,।

आप रहने दीजिए भाभी मैं बाट देता हूं,,,,।

(सूरज की हरकत पर वह उसे एक तक देखने लगी उसे पहचानने की कोशिश करने लगी कि आखिरकार यह लड़का है कौन लेकिन लाख कोशिशें के बावजूद भी वह समझ नहीं पाई कि यह लड़का है कौन ,, और वह उसे देखते ही रह गई क्योंकि वहां बड़े अच्छे से सबको मिठाई दे रहा है उसके काम को पूरा कर रहा था और वह आगे घूंघट में वही खड़ी सूरज को देखते रह गई सूरज अपना काम खत्म करने के बाद मुझको बाबा उसके पास आया और बोला,,,)

Chanda ka blouse kholta suraj





लीजिए भाभी,,, मैंने आपका काम पूरा कर दिया,,,।

काम तो पूरा कर दिए हो लेकिन हो तुम मैं तुम्हें पहचान नहीं पा रही हूं,,,।

कैसे पहचानोगी भाभी मैं तुम्हारे पड़ोस के गांव का हूं,,,।

ओहहह तभी तो मैं सोची कि मैं तुम्हें पहचान क्यों नहीं पा रही हूं लेकिन इस तरह से मदद करने की क्या जरूरत थी,,,।

अरे क्या बात करती हो भाभी मेरे रहते हुए कोई इस तरह का काम करें मुझे अच्छा नहीं लगता अगर मैं नहीं रहता तो शायद इस तरह का तुम काम करती तो कोई बात नहीं थी,,, लेकिन मेरे होते हुए मैं यह नहीं करने दूंगा और मैं कब से देख रहा हूं कि तुम इधर-उधर भाग-भाग कर सारे काम कर रही हो और तुम्हारा कोई साथ देने वाला नहीं है,,,,, वैसे भैया कहां है उन्हें तो तुम्हारा हाथ बंटाना चाहिए,,,,(सूरज जानबूझकर इस तरह की बातें कर रहा था वह एक तरह से अपनी बातों में उसको उलझा रहा था और बात ही बात में उसके पति के बारे में पूछ कर वह तसल्ली करना चाहता था कि उसका पति वहां साथ में है या नहीं,,,,, और उसकी बात सुनकर उसके चेहरे पर एकदम से उदासी छा गई और वह उदास मन से बोली,,,)

Khet me Sonu ki chachi or suraj





कहां गए हैं पता नहीं,,,!

पता नहीं,,,, अरे ऐसा कैसे हो सकता है कहीं तो गए होंगे कमाने गए होंगे रिश्तेदार के वहां गए होंगे कुछ तो बता कर गए होंगे,,,,

कुछ भी पता करने के शादी के 1 महीने बाद ही बस इतना कह कर गए थे कि जल्दी लौट आऊंगा और आज तक नहीं आए और शादी के 3 साल हो गए हैं,,,।

(उसे औरत की बात सुनकर सूरज मन ही मन प्रसन्न हो रहा था,,,, क्योंकि उसका पति वहां मौजूद नहीं था और शादी के 1 महीने बाद ही वह घर से निकल गया था इसका मतलब साफ था कि 3 साल से उसे शरीर सुख नहीं मिला था अगर मिल भी होगा तो चोरी-छिपे किसी और के साथ,,,, लेकिन चूचियों की स्थिति को देखकर लगता नहीं था की शादी के बाद किसी और मर्द ने इतनी खूबसूरत बदन का उपभोग किया हो वरना बदन का सांचा बदल गया होता,,,। उसकी बात सुनकर अपने चेहरे पर आश्चर्य के भाव लाते हुए सूरज एकदम से बोला,,,)

Sonu ki chachi k jawani ka maja leta suraj





क्या बात कर रही हो भाभी कोई इतना कठोर कैसे हो सकता है और वह भी शादी के 1 महीने बाद ही,,,, इतने में तो विवाहित जीवन का सुख भी ठीक तरह से नहीं मिल पाता,,,,(सूरज के कहने का मतलब कुछ और था और वह सूरज के कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ भी रही थी इसलिए तो उसकी बात सुनते ही उसके चेहरे पर शर्म के भाव साफ नजर आने लगे,,, और सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

देखो बुरा मत मानना भाभी मैं तो सब कहूंगा भैया को तुम्हारी कोई कदर नहीं थी तभी इतनी खूबसूरत बीवी को छोड़कर ना जाने कहां चले गए,,,,(सूरज की बातों में उसे औरत के लिए सहानुभूति भी थी उसकी खूबसूरती की तारीफ भी थी और वह औरत सूरज की बातों को समझ भी रही थी और अपने लिए खूबसूरती की तारीफ के शब्द सुनकर वह अंदर ही अंदर प्रसन्न भी हो रही थी,,,,, इसलिए वह भी खुश होते हुए बोली,,,,।)

चलो जाने दो जैसी मेरी किस्मत,,,, लेकिन तुम कुछ क्यों नहीं खा रहे हो,,,,,।

नहीं नहीं मेरा चल जाएगा,,,,।

Suraj ko khus karti huyi Soni ki chachi





अरे ऐसे कैसे भाभी रहते हो और भाभी की बात भी नहीं मानते रुको मैं तुम्हारे लिए मिठाई लेकर आती हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह मिठाई लेने के लिए चली गई और सूरज मैन ही मन प्रसन्न होने लगा क्योंकि बहुत ही जल्द वह दूसरे गांव की भाभी को लाइन पर ले आया था और जब तक वह आती तब तक वह फिर से नाच देखने लगा लेकिन इस बार उसकी आंखों के सामने उसकी मां खड़ी होकर नाच रही थी और अपनी कमर हिला रही थी कमर के साथ-साथ वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड भी ला रही थी जिसे देखकर सूरज के तन बदन में आग लगने लगी पहली बार वह अपनी मां को नाचते हुए देख रहा था उसके बदन के लचक को देख रहा था,,, उसके खूबसूरत अंगों के मरोड को देख रहा था वह ढोलक की ताल पड़ताल मिलकर नाच रही थी और ऐसा करते हुए उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्लाउज में उछाल रही थी मानो अभी ब्लाउज फाड़ कर बाहर आ जाएंगे जब अपने हाथ को कमर पर रखकर रेखाओं पर करके अपनी कमर हिलती थी तो ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी आंखों के सामने स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा नृत्य कर रही हो,,,।





अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों का उछाल उसकी बड़ी-बड़ी गांड की थिरकन को देखकर ,,, सूरज का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ गया था,,, सूरज पहली बार अपनी मां को नाचते हुए देख रहा था और गांव की सभी औरतें उसकी मां का नाच देख कर बहुत खुश हो रही थी और कुछ औरतें तो सुनैना का साथ देते हुए उठकर खड़ी हो गई थी और नाच रही थी यह सब सूरज के लिए बेहद उन्मादकता भरा दृश्य बनता जा रहा था,,,, सूरज का मन तो कर रहा था किसी समय सभी औरतों के बीच घुस जाए और अपनी मां की साड़ी उठाकर सबकी आंखों के सामने ही उसकी गुलाबी बुर में लंड डालकर उसकी चुदाई करते लेकिन यह सिर्फ दिमाग की सोच ही थी इस पर खड़ा उतरना उसके बस में क्या किसी भी शरीफ मर्द के बस में नहीं था,,,,।

अभी यह सब चल ही रहा था कि तभी वह औरत अपनी हथेली में मिठाई लेकर आई,,, और इस बार सूरज के पास नहीं आई बल्कि दूर से ही उसकी आवाज देकर बुलाने लेकिन उसका नाम तो उसे मालूम नहीं था इसलिए समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे आवाज दे लेकिन तभी एक छोटे बच्चों को सूरज के पास भेजी और उसे अपने पास बुलाई,,,, सूरज तो एकदम खुश हो गया और सबसे ज्यादा खुशी उसकी दोनों टांगों के बीच हो रही थी क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि आज उसका जुगाड़ बन गया है,,,,,।





सूरज के मन में उसे औरत के प्रति गंदी भावना उमड़ रही थी लेकिन उसे औरत के मन में सूरज के प्रति ऐसा कुछ भी नहीं था बस न जाने क्यों सूरज की बातों से उसका मन हल्का हो रहा था और सूरज के प्रति उसका लगाव बढ़ता जा रहा था क्योंकि आज तक उसके जैसी मीठी बातें करने वाला कोई नहीं मिला था जो उसकी फिक्र करें उसकी बातों को समझे लेकिन कुछ ही देर में सूरज ने उसके मन पर काबू कर लिया था,,,,,।

सूरज उसका इशारा पातें ही उसके पास पहुंच गया था जहां पर थोड़ा अंधेरा था,,,,,, बाकी सब लोगों का ध्यान औरतों के नाच पर ही था,,,, एक कुर्सी पर सूरज बैठ गया था और उसके बगल में ही वह औरत खड़ी थी जिसे सूरज भाभी के संबोधन कर रहा था वह औरत अपनी हथेली सूरज की आंखों के सामने खोलकर उसे मुस्कुराते हुए मिठाई देने लगी सूरज भी उसमें से एक लड्डू उठाकर खाने लगा और बिल्कुल भी देर किए बिना दूसरा लड्डू उसकी हथेली से उठाकर उसकी तरफ आगे बढ़ा दिया और उसे खाने के लिए बोला तो वह मुस्कुराकर इनकार करने लगी उसकी मुस्कुराहट में एक अजीब आकर्षण था जिसमें सूरज पूरी तरह से खोने लगा था और इस मौके को गवाही बिना बात जल्दी से कुर्सी पर सूट कर खड़ा हुआ और लड्डू को सीधा उसके हल-लाल होठों पर लगा दिया,,,,, वह ना ना करने लगी,,,, लेकिन जैसे तैसे करके सूरज जबरदस्ती उसे लड्डू को उसके मुंह में डाल दिया और वह भी मुस्कुराते हुए खाने लगी,,,,।





वह भावना की प्यासी थी प्यार की प्यासी थी सूरज के द्वारा इस तरह की जबरदस्ती देख कर उसकी आंखों में आंसू आ गए थे क्योंकि आज तक ऐसा व्यवहार उसके साथ किसी ने नहीं किया था क्योंकि सबको ऐसा ही लगता था कि उसके आने से ही घर का बेटा घर छोड़कर चला गया था,,,, जबकि इस बात की हकीकत को केवल वही जानती थी यह बात वह राज ही रखी थी कि उसका पति औरत को शरीर सुख नहीं दे सकता और इसीलिए वह घर छोड़कर चला गया था,,,,, लेकिन वह संस्कारी औरत थी उसके घर की स्थिति ठीक नहीं थी और यह कारण देकर अपने मायके चले जाना कि उसका पति नामर्द है यह बात उसे गवारा नहीं थी क्योंकि उसे ऐसा लगता है कि अगर कोई यहां बात सुनता तो यही कहता कि इसे चुदवाने का शौक है तभी अपने पति को छोड़ दी,,,।





कुछ ही देर में दोनों में बहुत सारी बातें हो गई दोनों हंस-हंसकर एक दूसरे से बातें कर रहे थे लेकिन किसी का भी ध्यान दोनों की तरफ नहीं था,,,, तभी सूरज को पेशाब लगी और वह‌कुछ देर के लिए वहां से उठकर दूसरी तरफ चला गया,,, और इतने में ही उसकी सास उसे आवाज लगाते हुए बोली,,,।

बहु,,,,, जरा अच्छा लेकर आना कुछ देर और नाच गाना चलेगा फिर सबको बांटना है,,,,।

(अपनी सास की बात सुनकर वह बोली)

जी माजी अभी लेकर आती हूं,,,,,।

(और उसकी इस बात को सूरज भी सुन लिया था और जल्दी से पेशाब करने के बाद तुरंत वह उसऔरत के पास आया और बोला,,,)

मैं भी चलता हूं भाभी तुम्हारी मदद हो जाएगी,,,।

मैं भी तुम्हारा इंतजार कर रही थी,,,,।

ठीक है फिर चलो,,,,।





(इतना कहते हैं दोनों घर के अंदर प्रवेश करने लगे घर में चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था बस हल्की हल्की चांदनी रात होने की वजह से उसकी रोशनी में दोनों आगे बढ़ रहे थे कि तभी उसे औरत को हर किसी ठोकर लगी और गिरने को भी लेकिन तभी एकदम फुर्ती दिखाता हुआ सूरज अपना हाथ आगे बढ़कर उसकी कमर में अपना हाथ डालकर उसे एकदम से संभाल लिया और बोला,,,)

संभाल कर भाभी काफी अंधेरा है,,,,।

(वह संभल तो गई थी लेकिन जिस तरह से सूरज ने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे संभाला था वह एकदम से मदहोश हो गई थी बरसो बाद किसी मर्द कहां तो उसकी खूबसूरत बदन पर पड़ रहा था और वह भी उसकी कमर पर ,,,वह एकदम से झनझना गई थी,,,,, वह संभल गई थी और धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी पर देखते ही देखते दोनों उसे कमरे में आ गए थे जहां पर अच्छा रखा हुआ था लेकिन अच्छा थोड़ी ऊंचाई पर रखा हुआ था वह अंधेरे में इधर-उधर सीढ़ी ढूंढ रही थी लेकिन सीढ़ी उसे मिला नहीं,,, तो वह एकदम से परेशान होते हुए बोली,,,)





हाय दइया अब क्या होगा इधर तो सीढ़ी ही नहीं है ना जाने किसने कहां रख दी है,,,,।

तो क्या हो गया भाभी मैं हूं ना मैं तुम्हें उठा देता हूं तुम गुड निकाल लो जितना निकालना है,,,,।

(सूरज की बात सुनते ही उसे औरत के बदन में अजीब सी हलचल होने लगी और वह भी मुस्कुराते हुए बोली)

क्या तुम मुझे उठा लोगे,,,,।

(उसकी बात में आमंत्रण था बरसों की प्यास उसके होठों पर आ चुकी थी वह इशारे ही इशारे में अपने मन की भावनाओं को अपने होठों पर ला दी थी वरना अगर वह बरसों की प्यासी ना होती तो इस तरह से कभी भी सूरज की बात नहीं मानती उसकी बात सुनते ही सूरज बोला,,,)

क्यों नहीं भाभी तुम्हारा वजन ज्यादा थोड़ी है मैं बड़ी आराम से तुम्हें उठा लूंगा,,,,(और इतना कहते हैं वह दूसरी तरफ ठीक उसके सामने खड़ा हो गया दोनों का मुंह एक दूसरे के सामने था और सूरज धीरे से नीचे झुका और अपनी बाहों का घेरा उसके नितंबों के नीचे बनाता हुआ उसे उठाने लगा उसके नितंबों का घेराव काफी सुडौल था बेहद उन्नत इसलिए सूरज के लिए उसके नितंबों का उठाव और घेराव मानो किसी बड़ी नाव को काबू में करने के लिए लंगर का काम कर रहे थे उसकी बाहों के घेरे में वह खूबसूरत औरत एकदम से टिक गई थी,,,,, सूरज उसे धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठने लगा वह थोड़ा घबरा रही थी और अपने दोनों हाथ को उसके कंधों पर रख दी थी,,,, उस औरत का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह जानती थी कि एक अनजान नौजवान लड़के का हाथ उसकी गांड के ऊपर टिका हुआ था,,,,।





उसके दिल की धड़कन एकदम से बढ़ रही थी और सूरज की भी हालत खराब थी,,, क्योंकि वह एक खूबसूरत कमनीय काया वाली भाभी को अपनी गोद में उठाया हुआ था,,,,,, उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था देखते ही देखते सूरज उसे एकदम ऊपर उठा दिया था और वह बड़े आराम से गुड़ के पास पहुंच चुकी थी और वह धीरे-धीरे एक थैली में गुड भर रही थी और जब ढेर सारा गुड़ थैली में भर ली तो बोली,,,)

अब मुझे नीचे उतारो,,,,

क्यों क्या हुआ हो गया,,,!

हांहो गया,,,

लेकिन मैं अभी भी तुम्हें दो-तीन घंटे तक इसी तरह से उठा सकता हूं,,,,।

अरे हां बाबा तुम्हारी भुजाओं के बल को मैं देख ली हूं,,, अब मुझे नीचे उतारो,,,।

ठीक है भाभी जैसी तुम्हारी मर्जी,,,,।

(और इतना कहने के साथ ही सूरज उसे धीरे-धीरे नीचे उतरने लगा वह जानता था कि उसके पैजामे में तंबू बना हुआ है और जैसे ही वह उसे पूरी तरह से नीचे उतरेगा ऐसे में उसके पजामे में बना तंबू सीधे उसकी बुर पर दस्तक देने लगेगा और इसी पल का सूरज को बेसब्री से इंतजार था,,,, देखते ही देखते सूरज से नीचे उतरने लगा उसके पर एकदम से जमीन पर आ गए लेकिन इस बीच वह‌ उसको अपने बदन से एकदम सटाए हुए था,,,, और जैसा वह चाहता था वैसा ही हुआ उसकी कमर पर हाथ रखे हुए वह उसे अपने बदन से सटाया था और ऐसे में उसके पजामे बना तंबू

एकदम से उसकी टांगों के बीचों बीच उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर पर दस्तक देने लगा,,, और उसे औरत को तुरंत अपने कामों के बीच अपनी बर पर कठोर चीज की चुभन महसूस होने लगी,,, शादीशुदा होने के नाते उसे बिल्कुल भी देर नहीं लगी उसे चुभन को पहचानने में वह समझ गई की जो उसकी टांगों के बीच सीधा उसकी बुर पर दस्तक दे रहा है यह उसे जवान लड़के का लंड है वह एकदम से मदहोश हो गई,,,,।





उसके बदन में उत्तेजना का संचार होने लगा उसके बदन में मदहोशी छाने लगी और सूरज उसकी कमर पर हाथ रखे हुए उसे अपनी तरफ सटाया हुआ था,,, इस एहसास को महसूस करके उसकी बोलनी एकदम से बंद हो गई थी और वह इस एहसास में पूरी तरह से होने लगी थी जब किसी भी तरह की हलचल उसके बदन से महसूस नहीं हुई तो सूरज की हिम्मत बढ़ने लगी और सूरज धीरे से अपने दोनों हथेलियां को,,,, उसके गोलाकार नितंबों पर रख दिया एक अजनबी जवान लड़के की हथेली को अपनी गांड पर महसूस करते ही उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,,,, उसकी मां से गहरी सांस निकलने लगी,,, मदहोशी उसके पूरे बदन पर छाने लगी,,, शादी की पहली रात से ही वह प्यासी थी सुहागरात का सुख नहीं हो पाई थी एक मर्द का सुख से कभी प्राप्त नहीं हुआ था इसलिए एक जवान मर्द की हथेली अपनी गांड पर महसूस करते ही उसमें चुदास की लहर फैलने लगी,, ।

उत्तेजना के मारे उसका गला सूख रहा था,,,, उसके बदन में कसमसाहट बढ़ रही थी,,,, और सूरज की हथेलियां उसके बदन की हरकत को महसूस करके धीरे-धीरे उसके नितंबों पर कसती चली जा रही थी,,,, यह फल सूरज के साथ-साथ उस औरत के लिए भी बहुत खास था क्योंकि वह लाख चाहने के बावजूद भी अपने आप को सूरज के बाहों से अलग नहीं कर पा रही थी,,, वह औरत पूरी तरह से सूरज के काबू में थी,,,,,, सूरज इसका पूरा फायदा उठा रहा था सूरज जोर जोर से उसकी गांड को मसल रहा था,,,, हालात पूरी तरह से बेकाबू हुए जा रहे थे,,,, देखते ही देखते उसके मुख से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकलने लगी,,,,, और उसकी शिसकारी की आवाज सुनकर,,, सूरज की हिम्मत बढ़ने लगी और वह देखते ही अंधेरे में ही उसके लाल लाल होठों पर अपने होंठ रख दिया,,,, और उसके लाल-लाल होठों का रसपान करने लगा सूरज की यह हरकत कुछ प्यासी औरत के लिए जानलेवा साबित हो रही थी उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह अपने आप को संभाल नहीं पा रही थी और सूरज था कि अपनी हरकत को धीरे-धीरे आगे बढ़ा रहा था,,,।





सूरज हालत की स्थिति को अच्छी तरह से जानता था वह जानता था कि वह इस समय कहां पर है यहां पर समय उसे पर्याप्त मात्रा में मिलने वाला नहीं था इस बात को अच्छी तरह से जानते हुए वह उसे खूबसूरत औरत के होठों का रसपान करते हुए उसकी साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगा और देखते-देखते वह उसकी साड़ी को कमर तक उठा दिया था और उसकी नंगी गांड पर अपनी हथेली रखते ही सूरज एकदम मस्त हो गया उसकी मखमली गांड सूरज को दीवाना बना रही थी,,, और वह भी मदहोश हुए जा रही थी अपनी नंगी गांड पर एक जवान लड़के की हथेली को महसूस करके उसकी बुर पानी छोड़ रही थी,,, इस बात को अभी अच्छी तरह से जानती थी की सुहागरात की रात से ही वह प्यासी थी एक औरत होने का सुख से भी प्राप्त नहीं हुआ था मर्द का साथ उसे नहीं मिला था इसीलिए तो वहां सूरज की हरकतों से काम विह्वल हुए जा रही थी और ज्यादा कुछ बोल नहीं पाई बस इतनाबोली,,,।

कोई आ जाएगा,,,,।

(और उसका यह कहना सूरज के लिए आमंत्रण था क्योंकि अगर उसे सूरज की हरकत पसंद ना होतीतो वह उसे रोकती ,,, उसे अपने पास से हटाती शोर मचाती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं कर रही थी और उसकी ख़ामोशी सूरज के लिए खुला आमंत्रण था,,, और उसका यह कहना कि कोई आ जाएगा इस बात को साबित करती थी कि वह भी यही चाहती है बस इस बात से डर लग रही थी कि कहीं कोई देख ना ले और इसीलिए उसका दिलासा उसका हौसला बढ़ाते हुए सूरज बोला,,,)

mukhiya ki bibi





कोई नहीं आएगा भाभी बाहर अभी भी ढोलक की आवाज आ रही है मतलब नाच गान शुरू है तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,, आज मैं तुम्हें ऐसा सुख दूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,,(और ऐसा कहने के साथ ही सूरज उसकी बा पड़कर उसे गोल घुमा दिया और उसे पीछे से अपनी बाहों में भर लिया ऐसा करने से उसके नितंबों की गोलाई,,, एकदम से उसके जननांग से सट गया और इतनी अत्यधिक उत्तेजना का एहसास हुआ कि पल भर के लिए तो सूरज को लगा कि कहीं उसका लंड फट न जाए,,,, सूरज की हालत खराब हो रही थी अब वह बला हो चुका था उसके गर्दन पर अपने होंठ रखकर उसकी मदहोशी को बढ़ाते हुए सूरज अपने दोनों हाथों को ब्लाउज के ऊपर से इसकी चूचियों पर रखकर उसे जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,, चुची पर हथेली को रखते ही उसके आकार का एहसास सूरज को होने लगा,,,। उसकी चूचियां शादी होने के बावजूद भी अभी सेंटर के आकार की थी अगर शादी का सही सुख प्राप्त हुआ होता तो शायद उसकी चुचिया खरबूजा हो गई होती,,,,।

सूरज की हरकत बढ़ती जा रही थी,,, ब्लाउज के ऊपर से दबाते दबाते सूरज जल्दबाजी दिखाते हुए उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा,,,, सूरज की हरकत को देखकर वह बोली,,,।

ब्लाउज मत उतारना,,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो भाभी,,, मैं जानता हूं,,,,

मेरा नाम चंदा है,,,,।

तुम्हारी तरह तुम्हारा नाम भी बहुत खूबसूरत है चंदा रानी,,,,,,(और ऐसा कहते हुए उसके ब्लाउज के बटन खोलकर उसकी नंगी चूचियों को अपनी हथेली में लेकर दबाते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

और मेरा नाम सूरज है चंदा सूरज हम दोनों की जोड़ी खूबजमेगी,,,,।

(सूरज की बात सुनकर चंदा मुस्कुराने लगे सूरज की हरकत उसे बहुत अच्छी लग रही थी शादी के बाद से उसने ऐसा सुख नहीं प्राप्त किया था इसलिए तो पहली बार में ही वह सूरज की हरकत से मदहोश हुए जा रही थी उसकी बुर पानी पर पानी छोड़ रही थी,,, सूरज से भी अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था क्योंकि एक हथेली वह उसकी बुर पर रख दिया था जो की पूरी तरह से पानी से चिपचिपी हो गई,,, यह देखकर सूरज बोला,,,)

चंदा रानी तुम तो बहुत पानी छोड़ रही हो,,,।

(सूरज की यह बात सुनकर वह शर्मा गई लेकिन बोली कुछ नहीं और सूरज तुरंत उसकी साड़ी कमर तक उठाए हुए उसे आगे झुकने के लिए बोला वह भी घोड़ी बन गई और देखते ही देखते सूरज ढेर सारा थूक लगाकर अपने लंड को उसकी गुलाबी बुर में डालकर उसकी बुर का उद्घाटन कर दिया,,,, ऐसा नहीं था कि सूरज के मोटे-मोटे लंड को चला बड़े आराम से अपने अंदर ले ली,,, उसे भी अपनी बुर में लेने के लिए काफी मशक्कत उठानी पड़ी थी लेकिन उसकी चुदवाने की चाहत उसके काम को आसान कर दी थी।

Chanda ki chudai





सूरज अपनी कमर हिलता हुआ चंदा रानी के साथ सुहागरात मनाया उसको जी भर कर छोड़ा और उसे भी पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया इसके बाद दोनों आराम से घर के बाहर निकल आए तब तक गाना बजाना हो रहा था और उसके आने के थोड़ी ही देर बाद गाना बजाना बंद हो गया और चंदा की सास सबको थोड़ा-थोड़ा गुड देकर विदा की और चंदा सूरज से वादा ली कि वह उससे मिलने जरूर आएगा,,, और सूरज भी उसी से दोबारा मिलने का वादा कर दिया और फिर सबको लेकर अपने गांव वापस लौट आया,,,,।
 
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