Incest पहाडी मौसम - Page 4 - SexBaba
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Incest पहाडी मौसम

बहुत गर्म है मालकिन तुम्हारी बुर,,,

हां रे इसमें बहुत गर्मी है और जब इसमें गर्मी बढ़ती है तो औरत की हालत खराब हो जाती है,,,

जब उसकी गर्मी बढ़ती है तब क्या करती हो मालकिन,,,

तो मुझे मर्द के पास जाना पड़ता है,,,, और तू तो जानता ही है मर्द के पास औरत कब जाती है,,,,

जी नहीं,,,,(मदहोश होते हुए उसकी बुर को जोर-जोर से मसलते हुए सूरज बोला,,,)





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सच में तु बहुत बुद्धू है,,,।

(आधी रात के समय झोपड़ी के अंदर का दृश्य बेहद मादकता से भरा हुआ और नशीला होता जा रहा था लेकिन इस समय झोपड़ी के अंदर के दृश्य की गवाही देने वाला वहां कोई मौजूद नहीं था,,अगर मौजूद था तो केवल प्रकृति रात कि शीतल हवा रात का अंधेरा जिसे खुद लालटेन अपनी बात की रोशनी से दूर करने में लगा हुआ था और गवाह था वह झोपड़ी जिसमें यह काम क्रीड़ा का खेल रचा जा रहा था बाकी इंसानी तौर पर वहां कोई नहीं था सिवाय मुखिया की बीवी और सूरज के,,,।

सूरज अद्भुत जवानी की मालकिन मुखिया की बीवी के बदन पर बैठकर उसकी बुर की मालिश कर रहा था और वह कभी सपने भी नहीं सोचा था कि उसे किसी औरत के नंगे बदन के साथ-साथ उसकी बुर की भी मालिश करने का सौभाग्य मिलेगा,,, इसलिए तो वह अपने आप को खुश नसीब समझ रहा था,,, मालिश करते हुए उसकी उंगलियां और हथेली मुखिया की बीवी की चिकनी बुर पर फिसल रही थी,,, यह कार्य बेहद उन मादक और मदहोशी भरा था जिसे करने में सूरज के माथे से पसीना टपक रहा था मुखिया की गर्म जवानी में उसकी गर्मी पिघल रही थी लंड का बुरा हाल था,,, औरत के जिस अंग के बारे में सोच सोच कर सारे मर्द जुगाड़ ना होने पर अपने हाथ से हिलाते हैं वही उसी बुर बिना अनुभव के सूरज अपनी हथेली में लेकर जोर-जोर से मसल रहा था जितना तेज हुआ मसलते था उतनी ज्यादा उत्तेजना और आनंद का एहसास मुखिया की बीवी को होता था पल-पल उसके चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे,,, पसीने से वह भी तरबतर हो चुकी थी,,, जहां एक तरफ मुखिया की बीवी के नंगे बदन के साथ-साथ उसकी बुर की मालिश करते हुए सूरज का बदन पूरी तरह से तप रहा था वहीं मुखिया की बीवी के सवाल से उसका दिमाग पूरी तरह से झन्ना गया था,,,, वैसे तो सूरज को मुखिया की बीवी का सवाल का जवाब अच्छी तरह से समझ में आ रहा था लेकिन फिर भी वह पूरी तरह से जानता नहीं था इसीलिए वह अपने मन में उठे हुए इस सवाल का जवाब अच्छी तरह से जानना चाहता था,,, इसलिए बुर के ऊपरी हिस्से की मालिश करते हुए वह बोला,,,।)

मुखीया का बीवी की चूचीयो की मालीस





सच में मालकिन मुझे नहीं मालूम की गर्म होने के बाद औरत मर्द के पास किस लिए जाती है,,,।

तुझे देख कर लगता नहीं है कि तू यह सब जानता नहीं होगा जब मालिश तो इतनी अच्छी कर लेता है तो इन सब के बारे में भी तो जानकारी होनी चाहिए तुझे,,,

मालिश करने से और इस सवाल से क्या रिश्ता है मालकिन,,,,(सूरज मुखिया की बीवी की बुर की मालिश करते हुए अपनी उंगली को उसकी बुर की तरह में रगड़ते हुए नीचे की तरफ ला रहा था और ऊपर की तरफ लिखने जा रहा था हालांकि अभी तक सूरज की उंगली का प्रवेश मुखिया की बीवी के गुलाबी छेद में नहीं हुआ था लेकिन फिर भी मुखिया की बीवी को बहुत ही मजा आ रहा था और सूरज को भी,,,)

शायद तू नहीं समझेगा लेकिन तेरी उम्र के लड़कों को सब कुछ जानना जरूरी होता है मुझे तो लगता है कि पूरे गांव में तू ही अनजान है ,,,।

क्या करूं मालकिन,,, यह सब सीखने का समय ही नहीं मिला,,,

बुर पर तेल की धार गिराता हुआ





अरे पर तुझे सब सीखने के लिए समय निकालना पड़ता है समय मिलता नहीं है और तू कैसा नादान है औरतों के मामले में इतना पीछे रहेगा तो फिर शादी के बाद क्या करेगा,,,,।

क्या मालकिन अभी तो शादी में बहुत समय है,,,,।

(सूरज की बात सुनकर सूरज के भोलेपन पर मुखिया की बीवी मुस्कुरा रही थी,,,, बार-बार अपनी दोनों टांगों के बीच देख रही थी सूरज बड़े अच्छे से उसकी बुर की मालिश कर रहा था सरसों का तेल लगाकर उसकी बुर को और ज्यादा चिकनी बना दिया था जब जब उसकी उंगलियां बुर की पतली दरार में रगड़ खाती तब तब मुखिया की बीवी की मदहोशी परम शिखर पर पहुंच जाती उसके बदन की कसम शहर बढ़ जाती है और वह हल्के से अपने नितंबों को हवा में उठा देती ऐसा बार-बार हो रहा था तो सूरज उत्सुकता दिखाते हुए बोला,,,,)

तुम गांड क्यों उठा रही हो मालकिन कोई दिक्कत है क्या,,,,?(सूरज इस तरह के शब्दों का पहली बार उपयोग कर रहा था और मुखिया की बीवी के सामने इस तरह के शब्द का प्रयोग करने में उसे असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही थी,,,,)

पता नहीं क्यों तेरी उंगली जब से मेरी बुर की दरार में रगड़ खा रही है तब तब बदन में अजीब सा हो रहा है,,,

अजीब सा हो रहा है मैं कुछ समझ नहीं कहो तो मैं मालिश बंद कर दूं,,,,

नहीं नहीं मालिश मत बंद करना अजीब सा मतलब बहुत ही आनंद आ रहा है गुदगुदी सी लग जाती है,,,

यह बात है मुझे लगा कुछ और परेशानी हो रही है,,,।

(थोड़ा बहुत नादान बनने का नाटक सूरज कर रहा था हकीकत तो यह था कि उसे बहुत मजा आ रहा था मुखिया की बीवी की बुर से खेलने में उसका गुलाबी छेेद उसे बेहद आनंदित कर दे रहा था,,, रह रहकर सूरज अपनी हथेली से मुखिया की बीवी की बुर को ढक लेता था और उसे पर दबाव बनाता हुआ ऊपर से नीचे अपनी हथेली को ले जाता था और ऐसा करने की वजह से मुखिया की बीवी की चिकनी बुर मक्खन के मलाई की तरह फैल जाती थी,,,,और हथेली के बाहर उपसी हुई बुर की कीनारी सुरज के बदन में चार बोतल का नशा घोल रही थी,,। यह नजारा सूरज को बेहद लुभावना लग रहा था वह तो गनीमत थी कि अभी तक इस तरह के नजारे को देखकर और बुर की मालिश करते हुए उसके लंड की पिचकारी नहीं निकली थी,,,, और इसी बात से मुखिया की बीवी भी हैरान थी वरना अब तक के अनुभव से हो तो वह इतना जानते ही थी की औरतों के नंगे बदन को देखकर ही मर्द का पानी निकल जाता है,,,, दोनों के बीच कुछ देर तक खामोशी छाई रही झोपड़ी के अंदर मदहोशी पूरा अपना असर दिख रही थी मुखिया की बीवी की आंखों में चुदास पन की खुमारी छा रही थी,,, उसकी बुर लंड के लिए तड़प रही थी लेकिन अभी ऐसा लग रहा था कि बुर के अंदर लंड जाने में काफी समय है ,, मालिश करते हुए ही लगभग 2 घंटे गुजर चुके थे लेकिन फिर भी दोनों की आंखों में नींद गायब थी दोनों को ना तो थकान महसूस हो रही थी और ना हीं नींद आ रही थी दोनों आनंद के सागर में गोते लगा रहे थे,,, दोनों के बीच छाई चुप्पी को तोड़ते हुए सूरज बोला,,,)

बुर की गजब मालीस करता हुआ





मालकिन तुम्हारी बुर तो सारा सरसों का तेल सोख ले रही है,,,।

औरतों की बुर बहुत गर्म होती है इसलिए तेल जल्दी सोख लेती है,,,, और तेल गिराकर मालिश कर तेल कम पड़ जा रहा है लेकिन पानी बराबर मिल रहा है,,,

हां मालकिन यह बात तो है मेरी हथेली बार-बार गीली हो जा रही है,,,,।

पता है वह पानी कहां से निकल रहा है,,,,!(मंद मंद मुस्कुराते हुए मुखिया की बीवी बोली)

कहां से निकल रहा है मालकिन,,,,

मेरी बुर से,,,,( बेझिझक बेशर्मी दिखाते हुए बोली ,, सूरज मुखिया की बीवी की बात सुनकर एकदम से दंग है क्या मुखिया की बीवी बेझिझक एकदम खुले शब्दों में अपने अंग का नाम ले रही थी सूरज मुखिया की बीवी की बात सुनते ही बोला,,,)

बाप रे कहीं मुत तो नहीं रही हो,,,,(सूरज एकदम तपाक से बोला और उसकी यह बात सुनते ही मुखिया की बीवी खिलखिला कर हंसने लगी,,,, और हंसते हुए बोली)

अरे वह तो यह पैसाब नहीं है अगर मैं मुतती तो पेशाब की धार सीधे तेरे मुंह पर जाती,,,।

तो यह क्या है मालकिन,,,?

अरे पगली यह मेरी बुर में पानी आ रहा है,,,

पानी आ रहा है मैं कुछ समझ नहीं,,,

अरे बुद्धू रुक तुझे समझाती हूं,,,,(इतना कहते हुए मुखिया की बीवी अपने हाथ की दोनों कहानी से ठेका लेकर अपने सर को थोड़ा सा उठा ली और अपनी दोनों टांगों के बीच देखते हुए बोली) देख जब हम लोग कोई स्वादिष्ट व्यंजन देखते है भोजन देखते हैं तो क्या होता है,,,,

मुंह में पानी आ जाता है,,,,(तपाक से उत्तर देते हुए सूरज बोला)

Mukhiya ki bibi ki boor ki maalish





हांंं,,,,, अभी तु समझा,,, जैसे स्वादिष्ट भोजन देखकर मिठाई देखकर मुंह में पानी आता है इस तरह से औरतों का मन होता है,,, हट्टा कट्टा मर्द देखती है तो उनके बुरे में पानी आ जाता है,,,,।

(इतना सुनते ही सूरज की सांसे पर नीचे होने लगी वह उत्तेजित होने लगा,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, वह अपनी हथेली को मुखिया की बीवी के बुरे पर रखे हुए ही उसके खूबसूरत चेहरे की तरह देखने लगा उसकी भी सांस ऊपर नीचे हो रही थी जिसके साथ-साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह ऊपर नीचे उठ बैठ रही थी,,, और अपने मन की उत्सुकता को खत्म करने के हेतु बोला,,,)

औरतों का मन होता है मतलब,,,,!

अरे बुद्धू तुझे क्या सब कुछ बताना पड़ेगा औरतों का मन होता है मतलब चुदवाने का मन करता है तब,,,।

(मुखिया की बीवी पूरी तरह से बेशर्म बनते हुए बोली और उसके मुंह से इतना सुनते हैं आश्चर्य से सूरज का मुंह खुला का खुला रह गया और मुखिया की बीवी की तरफ वह देखता ही रह गया,,,, मुखिया की बीवी भी सूरज की तरफ ही देख रही थी दोनों की दूसरी आपस में टकरा रही थी सूरज तो शर्म से पानी पानी हुआ जा रहा था और अपनी हथेली को मुखिया की बीवी की बुर के ऊपर से हटाते हुए धीरे से बोला ,,)

.ukhiya ki bibi ki kachori jesi boor





तो क्या मालकिन तुम्हारा मन भी,,,,

हां इस समय मेरा भी मन बहुत कर रहा है,,,,।

(यह सुनते ही सूरज अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था मदहोशी पूरे बदन में असर दिखा रही थी लेकिन सूरज का भोलापन उसे आगे बढ़ने से रोक रहा था और वैसे भी उसे पता नहीं था कि आगे क्या करना है इसलिए वह धीरे से अपने हाथ को नीचे की तरफ लेकर और सरसों की तेल के सीसी को वापस अपने हाथ में ले लिया और उसका ढक्कन खोलकर बिना कुछ बोले तेल की धार को मुख्य की बीवी की बुर के बीचों बीच गिराना शुरू कर दिया,,, सरसों के तेल की धार अपनी बुर पर महसूस करते ही मुखिया की बीवी एकदम से मदहोश हो गई और उसके मुंह से सिसकारी फूट पड़ी,,,।)

सहहहहह,,,,आहहहहहहह ,,,

क्या हुआ मालकिन,,,?

बहुत अच्छा लग रहा है रे,,,,,,।

(इतना सुनते ही सूरज सरसों के तेल की शीशी को वापस खटिया के नीचे रख दिया धीरे-धीरे वह सरसों के तेल किसी से सरसों को खत्म करता चला जा रहा था लेकिन मुखिया की बीवी के बदन की मालिश अभी भी बाकी थी,,,,, सूरज बड़ी करे से मुखिया की बीवी की बुर को देख रहा था वह काफी फूली हुई नजर आ रही थी एकदम कचोरी की तरह गोल गोल इसलिए उत्सुकता बस वह बोला,,,)

मालकीन तुम्हारी बुर इतनी सुजी हुई क्यों है,,,,(इतना कहने के साथी सूरज अपने उंगलियों को सीधे-सीधे उसके बुर के ऊपरी हिस्से पर रखकर उसे पर दबाव बनाते हुए नीचे की तरफ लाया तो उसके बीच वाली उंगली एकदम से जगह पाकर उसके गुलाबी छेद में प्रवेश कर गई और सूरज एकदम से घबरा गया और अपनी उंगली को तुरंत बाहर खींच लिया लेकिन इस दौरान सूरज की उंगली अपनी बुर में महसूस करते ही मुखिया की बीवी एकदम से मस्त हो गई और अपनी आंखों को बंद करके गहरी सांस लेने लगी,,,,, सूरज थोड़ा घबराया हुआ था क्योंकि वह औरत के अंगों से नादान तो था ही उसे बर के बारे में भी उतना कुछ खास ज्ञान नहीं था चोदने के बारे में सुना था और यहां तक की अपनी मां और अपने बाबुजी की चुदाई को वह देख चुका था अपनी आंखों से अपनी मां की चुदाई है देख कर भी वह इतना नहीं समझ पाया था कि मर्द अपना लंड औरत के किस अंग में किस छेद में डालते हैं इसीलिए वह घबराते हुए मुखिया की बीवी की तरफ देख रहा था,,,,, मुखिया की बीवी मदहोश होकर अपनी आंखों को बंद कर चुकी थी लेकिन दोबारा उसे क्रिया को होता ना देख कर वह अपनी आंखों को खोल दी और सूरज की तरफ देखने लगी जो कि सूरज खुद हैरानी से मुखिया की बीवी की तरफ देख रहा था और उसे इस बात का भी एहसास हो रहा था कि उसकी उंगली में ढेर सारा चिपचिपा पदार्थ लगा हुआ था,,,,, मुखिया की बीवी सूरज से बोली,,,)

Mukhiya ki bibi ki gajab ki maalish





क्या हुआ सूरज ईतना परेशान क्यों है,,,?

वो,, वो,,,, मालकिन,,,,(इतना कहते हुए वह अपनी उंगली दिखाने लगा और उसकी बुर में डूबी हुई उंगली को देखकर मुखिया की बीवी बोली)

तो क्या हुआ निकाल क्यों लिया बहुत अच्छा लग रहा था,, जैसा तू गांड के छेद में उंगली डाल के अंदर बाहर किया उसमें भी डाल बहुत मजा आ रहा है,,,,।

सच में मालकिन,,,,

हां रे जल्दी कर,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह वापस अपनी दोनों टांगों के बीच देखने लगी,,,, और सूरज मदहोश होता होगा वापस अपनी उंगली को मुखिया की बीवी की गुलाबी छेंद मे डाल दिया और धीरे-धीरे अंदर बाहर करने लगा सूरज को एकदम साफ महसूस हो रहा था की मुखिया की बीवी की बुर अंदर से बहुत गर्म थी बहुत ही ज्यादा गर्म,,,,, लेकिन इस बार-बार इस बारे में मुखिया की बीवी से नहीं पूछा बस अपनी उंगली को अंदर बाहर करता रहा और मुखिया की बीवी एकदम मस्त हो गई थी खटिया पर वह चारों खाने चित नजर आ रही थी,,,,। सूरज की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी उसका लंड पजामा फाड़ कर बाहर आने के लिए आतुर हो गया था,,,,,, मुखिया की बीवी आनंद लेते हुए बोली,,,,)

तो मेरी बुर के बारे में कुछ बोल रहा था ना सूरज,,,

ककक ,, कुछ तो नहीं मालकिन,,,

नहीं नहीं कुछ बोल रहा था ना की सुजी हुई है,,,,।

हां मालकिन तुम्हारी बुर एकदम सुजी हुई नजर आ रही है,,,।(सूरज इस तरह से अपनी उंगली को उसकी बुर में पेलते हुए बोला,,,)

सूजी नहीं है रे,,,ये मस्त हो गई है,,,(एकदम मदहोश होते हुए वह बोली)

मस्त हो गई है,,,,मतलब ,,,(एकबार फिर से वह उत्सुकता भरे स्वर में बोला,,)

मतलब कि मेरी बुर प्यासी हो गई है तड़प रही है,,,,

लेकिन ऐसा क्यों मालकिन,,,,(मदहोशी के साथ अपनी उंगली को मुखिया की बीवी के गुलाबी छेंद में अंदर बाहर करते हुए बोला,,,)

Boor me ungli karta hua





क्योंकि ईसे मोटा तगड़ा और लंबा लंड चाहीए,,,,,(इतना कहने के साथ ही मुखिया की बीवी सूरज की आंखों में देखने लगी और सूरज मुखिया की बीवी के मुंह से इस तरह की बात सुनकर एकदम हक्का बक्का रह गया मुखिया की बीवी के साथ-साथ सूरज की भी सांसों पर नीचे होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कहें कैसे जवाब दे वह उत्तेजना के मारे अपनी पूरी की पूरी उंगली मुखिया की बीवी की बुर में डाल दिया था उसके बीच वाली उंगली मुखिया की बीवी की बुर की गहराई में खो चुकी थी,,, और वह फटी आंखों से मुखिया की बीवी को देख रहा था जो की मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,,)

ममम,,,,,मैं कुछ समझ नहीं,,,,,,

इसमें समझने जैसा नहीं करने जैसा होता है देख मैं तुझे समझाती हूं,,,,।(मुखिया की बीवी पूरी तरह से बेशर्मी पर विचार आए थे क्योंकि आधी रात से ज्यादा समय हो चुका था केवल मालिश करते-करते और वह आज की रात यूं ही मालिश करवाने में नहीं गुजारना चाहती थी ,,। बल्कि जिस मकसद के लिए वह सूरज को आम के बगीचे में लाई थी वह मकसद पूरा करना चाहती थी,,, इसलिए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) जब औरत को लंड की भूख होती है मतलब कि जब औरत चुदवाने के लिए तड़पती है,,, तब उसकी यह,,,,(बुर की तरह इशारा करते हुए जिसमें अभी भी सूरज की उंगली पूरी तरह से घुसी हुई थी)

बुर उत्तेजना के मारे तड़प उठती है कचोरी की तरह फूल जाती है और उसमें से मदन रस बहने लगता है जैसा कि इसमें से बह रहा है,,,।

इसका मतलब है मालकिन तुम्हारी बुर सजी नहीं है,,,(उत्तेजित स्वर में सूरज बोला)

बिल्कुल भी नहीं यह तो औरतों के लक्षण हो गए जब वह चुदवासी होती हैं,,, लेकिन क्या तुझे पता है जब मरद चुदवासा होता है तो उसके क्या लक्षण है,,,, और तू जानता है मर्द कब चुदवासा होता है,,,?

(सूरज मुखिया के बीवी के इस सवाल का जवाब शब्दों से नहीं बल्कि अपने सर को ना में हिला कर दिया और अपने सुखे गले को अपने थूक से गिला करते हुए अपनी उंगली को धीरे-धीरे फिर से मुखिया की बीवी की बुर के अंदर बाहर करने लगा मुखिया की बीवी की बातों से वह पूरी तरह से मदहोश हो रहा था और अपनी उंगली को मुखिया की बीवी की बुर में डालकर अंदर बाहर करते हुए मस्त हो रहा था और अपने मन में ही सोच रहा था कि काश उसकी उंगली की जगह उसका लंड होता तो बहुत मजा आता,,, और उसे तुरंत मुखिया की लडकी याद आ गई,,, उसकी बुर याद आ गई जिसकी झलक भर उसने बैर के बगीचे में देखा था और पल भर में ही वह,, मां बेटी दोनों की बुर की तुलना एक दूसरे की बुर से करने लगा है और नतीजन यहीं निकला था कि सूरज को बेटी से ज्यादा मन की बुर कुछ ज्यादा ही खूबसूरत और मजेदार लग रही थी,,,। सूरज का ना मे हिलता हुआ सर देखकर मुखिया की बीवी हल्के से मुस्कुराई और बोली,,,)





मैं बताती हूं,,,, की मर्द कब-कब चुदवासा होता है,,, किसी औरत को कपड़े बदलते हुए देखा है उसके अंगों को देखा है या उसके बेहद करीब रहकर उसके बदन से उठती हुई मादक खुशबू को सुंघता है,, उसके एहसास से मर्द चुदवासा होता है,,, और जब किसी औरत को नंगी देखा है अपने हाथों से उसे नंगी करता है तब उसका लंड एकदम से खड़ा हो जाता है उसे चोदने के लिए जैसा कि इस समय तेरा खड़ा है,,,,।

(मुखिया की बीवी के मुंह से इतना सुनते ही सूरज एकदम से घबरा गया उसे उम्मीद नहीं थी की मुखिया की बीवी उसके बारे में यह बात कहेगी,,, वह एकदम हक्का-बक्का सा मुखिया की बीवी की तरफ देखने लगा मुखिया की बीवी मुस्कुराते हुए उसके पजामे की तरफ देख रही थी सूरज उसकी नजर को पहचान लिया था और अपनी दोनों टांगों को सिकोड़ने लगा था लेकिन उसकी दोनों टांगों को अपने हाथों से पकड़ कर वह उसे हल्के से खोलते हुए बोली,,,,)

तू डर क्यों रहा है मैं तो हकीकत बता रही हूं मेरे नंगे बदन को मेरे नंगे बदन की मालिश करके तेरा लंड खड़ा हो गया है और इसमें तेरी कोई गलती नहीं है कसूर तो मेरी जवानी का है अगर तेरी जगह दुनिया का कोई भी मर्द होता तो उसकी हालत तेरे जैसी ही होती,,,(सूरज का मुंह खुला का खुला रहता था वह घबरा चुका था और मुखिया की बीवी की बात को बड़ी गौर से सुन रहा था उसके मन में घबराहट थी लेकिन अभी भी उसकी उंगली मुखिया की बीवी की बुर में थी जो की जता रहा था कि वाकई में वह पूरी तरह से मत हो चुका था मुखिया की बीवी को पाने के लिए,,, मुखिया की बीवी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली ,,) मैं अच्छी तरह से जानती हूं तेरा लंड अपनी औकात में आ गया है तू भी अपने लंड को मेरी बुर में डालकर चोदना चाहता है,,,।

नननन,, नहीं मालकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है मेरी इतनी औकात कहां जो मैं आपके बारे में इतनी गंदी बात सोच सकूं,,,

तो पगले तेरा लंड क्यों,,(पजामे के ऊपर से सूरज की लंड को पकड़ते हुए जो की काफी मोटा और तगड़ा था उसे हाथ में लेते हुए उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,,) खड़ाहै,,,, बाप रे यह तो बहुत मोटा और लंबा है चल दिखा दो जल्दी से मैं भी देखना चाहती हूं कि तू पजामे में कौन सा हथियार लेकर घूम रहा है,,,

यह क्या कह रही हो मालकीन,,,(ऐसा कहते हुए वह मुखिया की बीवी का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर से हटाने की कोशिश करने लगा लेकिन इसके बावजूद भी उसके दूसरे हाथ की उंगली अभी भी मुखिया की बीवी की बुर में घुसी हुई थी,,) ऐसा कुछ भी नहीं है,,,

.mukhiya ki bibi madhosh hote huye





चल मैं अच्छी तरह से जानती हूं ऐसा ही है मुझे बनने की कोशिश मत कर और वैसे भी मुझसे डरने की भी कोशिश मत कर मैं कहीं तुझे खा जाने वाली नहीं हूं,,, चल अब जल्दी से अपना पजामा उतार,,,,

नहीं नहीं मालकिन,,,,

क्यों क्या हुआ पजामा उतारने में तु इतना घबरा क्यों रहा है,,,,

मुझे शर्म आती है मैं भला तुम्हारे सामने कैसे अपना पजामा उतार सकता हूं,,,

वाह बेटा एक मर्द होकर शर्माता है लेकिन मैं तो तेरे सामने बिल्कुल भी शर्म नहीं कि तेरे सामने अपनी एक कपड़े उतार कर नंगी हो गई हो और तू है अपना पजामा उतारने में शर्मा रहा है,,, चल जल्दी कर मुझे भी देखना है तेरा हथियार तूने तो मेरा सब कुछ देख लिया आखिर मेरा भी हक बनता है तेरा देखने के लिए,,,,।

मुझसे नहीं होगा मालकिन,,,(सूरज शरमाते हुए बोला लेकिन ईस बीच अभी भी उसकी उंगली मुखिया की बीवी की बुर में अंदर बाहर हो रही थी,,,)

अच्छा तो उसे अपना पजामा उतार नहीं जा रहा है लेकिन अपनी उंगली को मेरी बुर में बराबर अंदर बाहर कर रहा है यह तुझसे अच्छे से हो रहा है मैं भी अच्छी तरह से जानती हूं तुझे भी मजा आ रहा है बस नाटक मत कर जल्दी से पजामा उतार,,,(बुर में उंगली वाली बात सुनकर सूरज एकदम से अपनी उंगली को बाहर निकाल लिया और मुखिया की बीवी की तरफ देखने लगा मुखिया की बीवी आपके सारे से उसे अपना पजामा उतारने के लिए कहने लगी,,,, सूरज के लिए यह जहां एक तरफ शर्मिंदगी वाली बात थी वहीं दूसरी तरफ किस्मत वाली भी बात थी क्योंकि मुखिया की बीवी उसका लंड देखना चाहती थी,,, सूरज को भी लग रहा था कि आज उसकी किस्मत चमकने वाली है इसलिए ज्यादा ना नुकुर करते हुए मुखिया की बीवी की बात मान लिया,,, और मुखिया की बीवी के ऊपर ही सवार बैठा हुआ था धीरे से घुटनों के बाद होकर खड़ा हो गया उसके दोनों घुटने मुखिया की बीवी की मोटी मोटी जांघों के ईर्द गिर्द टिकी हुई थी,,,, उसके इस तरह से उठते ही उसका अच्छा खासा तंबू एकदम से उभर कर सामने आ गया जिस पर नजर पढ़ते ही मुखिया की बीवी की बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी,,,, मुखिया की बीवी तो देखते ही रह गई,,, उसे रहा नहीं गया और वहां खुद अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर सूरज के पजामे को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसे नीचे की तरफ खींचने लगी,,,, सूरज का दिल जोरे से धड़क रहा था,,,, वह कुछ कर नहीं रहा था बल्कि मुखिया की बीवी की हरकत को देख रहा था,,, मुखिया की बीवी पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,, वह सूरज के पजामे को नीचे की तरफ खींच रही थी लेकिन सूरज का मोटा तगड़ा लंड लोहे के रोड की तरह एकदम से खड़ा था जिसकी वजह से सूरज का पायजामा खुटे में अड सा गया था,,,।

अनुभव से भरी हुई मुखिया की बीवी समझ गई की सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही लंबा है इसलिए वह धीरे से थोड़ा सा उठ गई और फिर उसके पजामी को आगे की तरफ खींचकर लंड की किनारी से हटाकर पजामे को उतारने लगी,,,

Mukhiya ki bibi or suraj





पजामा सूरज के घुटनों में लाकर वह अपनी आंखों के सामने की अद्भुत नजारे को देखते रह गई उसकी आंखें आश्चर्य से चोडी हो गई,,वह कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि किसी मर्द का लंड इतना मोटा और लंबा हो सकता है,,, गहरी सांस लेते हुए वह सूरज के लंड को देखती रह गई और उठती बैठती सांसों के साथ-साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा रही थी,,,, और सूरज मुखिया की बीवी की तरफ प्यासी नजरों से देख रहा था पहली बार हुआ किसी औरत के सामने नंगा हो रहा था पहली बार कोई औरत उसकी लंड को देख रही थी,,,, कुछ देर तक तो मुखिया की बीवी कुछ बोल नहीं पाई और फिर धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए उसे हल्के से सूरज के लंड पर रखते हुए बोली,,,।

हाय दैया इतना मोटा और लंबा और इतना गरम,,, बाप रे बाप,,,,

(मुखिया की बीवी के आश्चर्य को देखकर उसे हैरान होता हुआ देखकर सूरज बोला,,,)

क्या हुआ मालकिन इतनी हैरान क्यों है,,,,?

(सूरज को इस बात का आभास भी नहीं था कि उसका लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था कुदरत ने उसे कुछ ज्यादा ही मरदाना ताकत दिया था,,,)

अरे पगले हैरान ना होऊ तो क्या करु,,,

क्यों ऐसा क्या हो गया,,,

अरे यह पूछ क्या नहीं हुआ सच-सच बताना कौन से तेल से मालिश करता है तु अपने लंड की,,,

Mukhiya ki bibi I ki boor chat te huye





मालीश,,,, नहीं नहीं मालकिन बिल्कुल भी नहीं मैं इस पर मालिश नहीं करता,,,,

तो यह इतना मोटा और लंबा क्यों है,,,(सूरज के लंड को अपनी हथेली में दबाते हुए बोली और उसकी ईस हरकत से सूरज के मुंह से हल्किसी सिशिकारी फूट पड़ी,,,,,)

मुझे क्या मालूम मालकिन,,,(सूरज एकदम मदहोश होता हुआ बोला,,, वाकई में मुखिया की बीवी हैरान थी जिंदगी में उसने बहुत मर्दों के साथ हम बिस्तर हुई थी कई मर्दों के लंड को अपनी बुर मिली थी उनकी मोटी और लंबाई उसे अच्छी तरह से पहचानती थी समझती थी और जानती थी इसलिए तो वह सूरज के लंड की लंबाई और मोटी उसके आकार को देखकर पूरी तरह से हैरान थी क्योंकि इतना मोटा लंबा उसने आज तक नहीं देखी थी इसलिए तो सूरज के लंड को देखकर उसकी बुर पानी छोड़ रही थी,,,)

सच में तू कमाल का है,,,,(मुखिया की बीवी मदहोश हो चुकी थी वह अपना आपा खो चुकी थी आधी रात के समय गांव से दूर आम के बगीचे में झोपड़ी के अंदर लालटेन की रोशनी में एक जवान लड़के के सानिध्य में वह पूरी तरह से अपना आपा खो चुकी थी खास करके उसके लंड के दर्शन करके,,,, और इतना कहने के साथ ही सूरज को समझ पाता है इससे पहले ही वह अपने प्यासे होठों को धीरे से सूरज के लंड के करीब ले गई और फिर उसपर अपने होंठ रखकर चुंबन कर दी,,,, सूरज एकदम से खबर आ गया एकदम से चौंक गया एक खूबसूरत औरत के लाल-लाल होठों का स्पर्श अपने लैंड पर महसूस करते ही उसके बदन में सनसनी सी दौड़ गई और वह घबराकर अपने कमर को पीछे की तरफ ले लिया लेकिन अगले ही पल मुखिया की बीवी कुर्ती दिखाते हुए अपने दोनों हाथों को उसके नितंबों पर ले गई और उसे अपनी तरफ खींचकर बैठे-बैठे ही उसके लंड के सुपाड़े को अपने लाल लाल होठों के बीच भर ली,,,, सूरज हैरान आश्चर्य से भर चुका था क्योंकि उसका मोटा तगड़ा लंड उसका सुपाड़ा जो कि आलू बुखारा की तरह गोल-गोल और बड़ा था वह एक खूबसूरत औरत के लाल लाल होठों के बीच था,,, वह कभी सपने भी नहीं सोच सकता था कि औरत ईस तरह की भी हरकत कर सकती है,,, लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रहा था क्योंकि जिस तरह की हरकत मुखिया की बीवी ने की थी उसे हरकत के बारे में सोचकर उसे महसूस करके सूरज की बोलती बंद हो गई थी वह कुछ बोल पाता इससे पहले ही मुखिया की बीवी पूरी तरह से उसे अपने काबू में ले ली थी और धीरे-धीरे करके उसके आधे लंड को अपने मुंह में भर ली थी और उसे रसमलाई की तरह चूस रही थी चाट रही थी,,,, रह रहकर सूरज की सांस अटक जा रही थी सूरज मदहोश हो चुका था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह आसमान की सैर कर रहा हो,,, वह मुखिया की बीवी को इस तरह की हरकत करने से रोकना चाहता था लेकिन रोक भी नहीं पा रहा था क्योंकि उसे भी मजा आ रहा था पहली बार में ही बस स्वर्ग का सुख भोग रहा था एक औरत से किस तरह का सुख मिलता है आज उसे एहसास हो रहा था,,,,,।

Mukhiya ki bibi ki boor se khelte huye





देखते ही देखते मुखिया की बीवी मदहोश और उत्तेजना में अपने गले तक सुरज के लंड को उतार ली थी ईसके बावजूद भी डेढ़ इंच जितना लंड मुंह के बाहर ही रह जा रहा था,,, इसलिए तो वह और ज्यादा हैरान थी वह अपने मन में यही सोच रही थी कि जब उसकी बुर में घुसेगा तब क्या धमाल मचाएगा यही सोचकर उसकी बुर पानी छोड़ रही थी ,,,। और सूरज की तो हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी ना चाहते हुए भी मदहोशी में उसकी आंखें बंद हो चुकी थी और अपने आप ही उसकी कमर आगे पीछे करके हिलना शुरू कर दी थी,,,, उत्तेजना और मदहोशी में दोनों का बदन पसीने से तरबतर हो चुका था खिड़की से आ रही शीतल हवा भी दोनों की जवानी की गर्मी को शीतलता प्रदान करने में नाकामयाब साबित हो रही थी,,,।

मुखिया की बीवी के मुंह से,,गुं,,गुं ,, की आवाज लगातार आ रही थी उसे जब सांस लेने में दिक्कत होने लगी तो वह धीरे से अपने मुंह में से सूरज के लंड को बाहर निकाल दे और गहरी गहरी सांस लेने लगी उसका मुंह लंड के निकल जाने के बावजूद भी गोल छल्ले की तरह बना हुआ था जिसमें से लार टपक रहा था और सूरज का लंड भी मुखिया की बीवी के लार और थूक से पूरी तरह से सना हुआ था,,,। सूरज भी गहरी गहरी सांस ले रहा था और मुखिया की बीवी की तरफ देख रहा था मुखिया की बीवी सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली,,,।

कैसा लगा सूरज,,,?





बड़ा अजीब सा लग रहा था मालकिन मेरी तो सांस ही ऊपर नीचे हो गई,,,,(हांफते हुए सूरज बोला,,)

यह खेल ही ऐसा है इसमें सांस ऊपर नीचे हो ही जाती है,,, कि तेरा लंड सच में बहुत मोटा और लंबा है मैं आज तक ऐसा लंड नहीं देखी किसी की भी बुर में जाएगा तो बुर फाड़ देगा,,,,।

(मुखिया की बीवी के मुंह से अपनी मर्दानगी की ताकत की तारीफ को सुनकर सूरज गदगद हुआ जा रहा था लेकिन उसके द्वारा लंड चूसने वाली बात उसे कुछ समझ में नहीं आ रही थी क्योंकि काम क्रीड़ा के बारे में सूरज को कोई भी ज्ञान नहीं था और उसे नहीं मालूम था कि औरत मर्द को और मर्द औरत को किस-किस तरह से खुश करता है,,, इसलिए वह बोला,,,)

मालकिन लेकिन मुझे समझ में नहीं आया तुम इतने गंदे अंग को अपने मुंह में लेकर क्यों चूस रही थी,,,।

अरे बुद्धू यह गंदा अंग नहीं है बल्कि है तो हम औरतों के लिए कुदरत का उसे हिसाब खजाना है,,,, दौलत सूरत मिले ना मिले समय समय पर औरत को यह मिलना चाहिए और तेरे पास तो औरत को अपना गुलाम बनाने का हथियार है,,,, मैं सच कह रही हुं तू अपने लंड से जिस किसी की भी चुदाई करेगा वह जिंदगी भर तेरी गुलाम बनकर रह जाएगी,,,।

यह क्या कह रही हो मालकिन,,,,

.mukhiya ki bibi ki gadrai gaand





मैं सच कह रही हूं रे अपने अनुभव से बता रही हूं,,,, हर औरत की जरूरत का सामान तेरे पास है,,,, और तेरी जरूरत का सामान,,,,(इतना कहने के साथ है अपने दोनों हाथों को सूरज के चेहरे की तरफ ले गई और सूरज के चेहरे को दोनों हाथों में भरकर उसे अपनी छातियों की तरफ खींचने लगी और जैसे ही उसके होंठ,,,उसकी चुचियों के करीब आए वह तुरंत उसके होंठों को अपनी चूची के छुहारे पर सटाते हुए) मेरे पास है,,,,,(सूरज तो एकदम मदहोश हो गया,,, कुछ देर पहले वह अपने दोनों हाथों में लेकर उसकी चूचियों को मालिश करते हुए दबा रहा था मसल रहा था लेकिन यह एहसास बिल्कुल नया था उसके होठ मुखिया की बीवी के खरबूजे जैसी चूचियों से सटे हुए थे,,,, और वह इस तरह से गहरी गहरी सांस ले रहा था नरम नरम चुची का एहसास उसे दीवाना बना रहा था,,,, लेकिन सूरज ज्यों का त्यो था,,, इसलिए मुखिया की बीवी मदहोश होते हुए बोली,,,)
 
सूरज मेरे राजा बच्चों की तरह मेरी चूची मुंह में लेकर पी,,, जोर-जोर से दबा दबा के पी मेरे राजा,,,,,आहहहहह,,,,,(मुखिया की बीवी पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी और उसके मुंह से अपने लिए राजा सबसे सुनकर सूरज की उत्तेजना बढ़ने लगी थी अभी तक उसे नहीं मालूम था की मुखिया की बीवी की चूची के साथ क्या करना है लेकिन उसके दिशा निर्देश करने पर उसे समझ में आ गया था कि उसे क्या करना है इसलिए वह धीरे से अपने होठों को खोलकर मुखिया की बीवी के छुहारे जैसी तनी हुई निप्पल अपने मुंह में भर लिया और उसे पीना शुरू कर दिया बच्चों की तरह बरसों के बाद वह किसी औरत की चूची को मुंह में ले रहा था बचपन में कब हुआ अपनी मां की चूची मुंह में लेकर पिया था उसे याद भी नहीं था और बचपन से लेकर आज तक जब वह पूरी तरह से जवान हो चुका था तब जाकर उसके मुंह में एक जवान खूबसूरत औरत की चूची आई थी,,, और वह इस पल को पूरी तरह से जी लेना चाहता था वह पागलों की तरह लेकिन छोटे बच्चों की तरह मुखिया की बीवी की चूची को पी रहा था और मुखिया की बीवी उसे अपना दूध पिला रही थी हालांकि उसमें से दूध निकल नहीं रहा था लेकिन दोनों इसी तरह से जाता रहे थे कि सूरज दूध पी रहा है और वह पिला रही है,,,, बेहद अद्भुत नजारा था,,,, कुछ देर तक सूरज उसकी चूची को पीने के बाद अपने हाथ को उसकी नंगी चिकनी पीठ पर रख दिया यह उसकी तरफ से पहले हरकत थी मुखिया की बीवी की प्रति वर्ण व मुखिया की बीवी के आदेश के अनुसार मालीश कर रहा था,,, मुखिया की बीवी मदहोशी के सागर में पूरी तरह से डुबकी लगा रही थी आज उसके हाथों में एक जवान और पूरी तरह से अनछुआ मर्द हाथ लगा था,,, जिसका वह पूरा लाभ ले लेना चाहती थी कुछ देर तक अपनी एक चूची पिलाने के बाद वहां अपनी दूसरी चूची को हाथ में लेकर उसकी तरफ आगे बढ़ती और ऐसा लग रहा था कि जैसे वह भी धीरे-धीरे सीख रहा था वह तुरंत दूसरी चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया,,,,।

Mukhiya ki bibi





सूरज के तो दोनों हाथों में मलाई थी,,, सूरज को जैसे पूरी दुनिया उसकी मुट्ठी में आ गई थी वह पागलों की तरह मुखिया की बीवी की चूची को पी रहा था चुची को पीने का और उससे खेलने का उसका यह पहला मौका था,, और वह पूरी तरह से आनंद विभोर हुआ जा रहा था उसका लंड मदहोशी मे ठुनकी मार रहा था,,, दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे लेकिन वातावरण की गर्मी से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा था,,,, देखते ही देखते सूरज बारी बारी से मुखिया की बीवी की दोनों चूचियों को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया जिस तरह से वह मुखिया की बीवी की चूची से प्यार कर रहा था उसे मुंह में भरकर पी रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे आज वह मुखिया की बीवी की चूची को कच्चा चबा जाएगा जितना हो सकता था उतना चुची को मुंह में लेकर वह पीने की कोशिश करता था लेकिन चुची का आकार बड़ा था,,, वह पूरी तरह से सूरज के मुंह में नहीं आ रहा था लेकिन सूरज की कोशिश जारी थी और उसकी कोशिश को देखकर मुखिया की बीवी मुस्कुराते हुए बोली,,,)

क्या रे सूरज पूरी चुची हजम कर जाना चाहता है क्या,,, मैं जानती हूं तुम मर्दों की आदत को औरत का कोई भी अंग पा जाते हो तो उसे खा जाने के लिए दौड़ते हो,,,, ले पूरा ले अंदर मुझे भी अच्छा लगेगा जब तू पूरी चूची मुंह में लेकर पिएगा,,,,आहहहहहह, मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है पहली बार में ही तू कमाल कर दिया है,,,,सहहहहह आहहहहहहह,,,,ऊम मममममम,ओहहहहहहह राजजजाआआआआआ,,,,,उफफफ,,,,,।

Mukhiya ki bibi Suraj ko mast karti huyi





(मुखिया की बीवी मदहोश हुए जा रही थी पागल हुए जा रही थी,,, सूरज जिस तरह से उसे खुश कर रहा था मुखिया की बीवी आनंद के सागर में गोते लगा रही थी,,, सूरज को देखकर ऐसा लगता ही नहीं था कि यह उसकी पहली बार है ऐसा लगता था कि जैसे हुआ पहले भी कहीं औरतों के साथ इस तरह का खेल खेल चुका है लेकिन यह वास्तविक नहीं था,,, सूरज का यह पहला अनुभव ही था जिसमें वह पूरी तरह से सरोबोर हो चुका था,,,।

झोपड़ी के अंदर बीछी खटिया पर मुखिया की बीवी और सूरज दोनों एक दूसरे की जवानी का रस लूटने में लगे हुए थे,,, लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ चमक रहा था मुखिया के बीवी का गोरा नंगा बदन सोने के आभूषण की तरह चमक रहा था जिसकी चमक में सूरज की जवानी धीरे-धीरे पिघल रही थी,,,, सूरजमुखी की बीवी की चूचियों से खेल रहा था तो मुखिया की बीवी अपने हाथ में अपनी चूची पकड़ कर उसे पिलाते हुए दूसरे हाथ से बार-बार उसके लंड को पकड़ ले रही थी और इस हरकत को बार-बार दोहराने में उसे अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी क्योंकि सूरज के लंड की मोटाई और लंबाई कुछ ज्यादा ही थी और पहली बार मुखिया की बीवी इस तरह के मुसल जैसे लंड को अपने हाथ में ले रही थी,,, और सूरज भी मुखिया की बीवी की हरकत से बार-बार गनगना जा रहा था,,,।

सूरज अपने मुंह में भर भर कर चूसने की वजह से मुखिया की बीवी की गोरी गोरी चूचियों को टमाटर की तरह लाल कर दिया था और कहीं-कहीं उत्तेजना के मारे उसके दांत के गडने का निशान भी दिखाई दे रहा था,,,। और यह निशान सूरज की उत्तेजना को बयां कर रहे थे,,,,।

.mukhiya ki bibi





बस कर मेरे राजा चूचियों को ही पिता रहेगा कि आगे भी बढ़ेगा,,,,(ऐसा कहते हुए मुखिया की बीवी अपने हाथ से पकड़ कर अपनी चूची को सूरज के मुंह में से बाहर निकले सूरज गहरी सांस लेते हुए मुखिया की बीवी की तरफ देखने लगा,,, मुखिया की बीवी उत्तेजना अवस्था में भी मुस्कुरा कर सूरज की तरफ देख रही थी और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,,) औरत की खूबसूरत बदन में चुची ही नहीं और भी बहुत से अंग है प्यार करने के लिए,,,,(और इतना कहने के साथ ही मुखिया की बीवी अपने घुटनों को मोड़ने लगी और सूरज जो कि अभी भी उसके ऊपर ही बैठा हुआ था वह धीरे से उसके ऊपर से उठकर खटिया की पाटी पर बैठ गया,,, और मुखिया की बीवी खटिया पर पीठ के बल लेट गई और अपनी दोनों टांगों को खोल दी मानो की इशारों से ही सूरज को अपनी तरफ बुला रही है लेकिन सूरज उसके इशारे को समझ नहीं पा रहा था और खटिया की पार्टी पर बैठकर गहरी गहरी सांस लेती में एक बार फिर से उसके नंगे बदन को देख रहा था तो मुखिया की बीवी ही बोली,,,,।)

बेठा क्या है ,,,अपने कपड़े उतार कर नंगा हो जा ,,,वो क्या है ना यह खेल नंगा होने के बाद ही मजा आता है खेलने में,,,।

(जिस तरह का खेल मुखिया की बीवी सूरज से खिलवा रही थी सूरज समझ गया था कि वाकई में शर्म करने में कोई फायदा नहीं है इसलिए वह भी मुखिया की बीवी की बात मानते हुए धीरे से खटिया के पाटी से नीचे उतर गया और अपने पजामे को जो कि अभी भी उसके घुटनों में फंसा हुआ था धीरे से उसे उतार दिया और कमर के नीचे पूरी तरह से नंगा हो गया,,,, पजामे के उतरते ही मुखिया की बीवी बोली,,)

Chudai karta hua suraj





कुर्ता भी उतार दे मेरी तरह नंगा हो जा,,,

(अगर मुखिया की बीवी नहीं भी बोलती तो भी सूरज अपना कुर्ता निकालने जा रहा था और मुखिया की बीवी की बात सुनते हैं मुस्कुराते हुए अपने कुर्ते को उतार कर एकदम नंगा हो गया झोपड़ी के अंदर दो जवान जिस्म पूरी तरह से नग्नावस्था में एक दूसरे में समाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुके थे,,,, मुखिया की बीवी सूरज को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए उसका ध्यान अपनी बुर पर ले जाने के लिए सूरज की तरफ देखते हुए अपनी हथेली को अपनी बुर पर रखकर उसे हथेली से मसल रही थी और सूरत धीरे-धीरे और थोड़ा सहमे हुए खटिया के पाटी पर बैठ गया,,,, मुखिया की बीवी अभी भी उसकी आंखों में देखते हैं अपनी बुर को मसल रही थी और सूरज भी मुखिया की बीवी की ईस हरकत को देखकर मदहोश हुए जा रहा था और अपने आप ही उसका हाथ उसके लंड पर पहुंच गया,, और वह भी धीरे-धीरे,, अपने लंड को आगे पीछे करके मुठीयाना शुरू कर दिया यह नजारा बेहद ही उत्तेजना बढ़ा देने वाला था,,, क्योंकि एक तरफ जवानी से भरी हुई प्यासी मुखिया की बीवी अपनी बर मसाला रही थी और दूसरी तरफ उसकी हरकत को देखकर उसकी बुर को देखकर उसकी मदद कर देने वाली जवानी को देखकर एक जवान लड़का अपने लंड को हिला रहा था जो कि उसका इरादा साफ बता रहा था कि वह भी मुखिया की बीवी को चोदना चाहता है,,,, मुखिया की बीवी सूरज की आंखों में देखते हुए बोली,,,)

आज की रात हम दोनों के लिए बहुत खास है सूरज आज की रात तू बहुत कुछ सीखने वाला है आज तुम्हें जवान लड़के से एक मर्द बन जाएगा,,, औरत और मर्द के बीच चार दीवारी के अंदर किस प्रकार का रिश्ता होता है आज मैं तुझे बताऊंगी,,,,, मानेगा ना मेरी बात,,,,,

Mukhiya ki bibi mast hoti huyi





(ना मानने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता था,,, वह भी हां मे सिर हिलाया,,, और मुखिया की बीवी मुस्कुराने लगी,,,,)

अब सुरज तुझे मुझे खुश करना है,,,,,, और दुनिया की सारी औरतें मर्द से बस यही इच्छा रखती है कि वह उसे खुश करके और सही मायने में मर्द की मर्दानगी भी इसी से साबित होती है और मुझे तुझ पर पूरा भरोसा है तु मुझे खुश कर गाना सूरज,,,,

जी मालकिन में पूरी कोशिश करूंगा,,, लेकिन मुझे करना क्या होगा,,,,(अपने लंड को धीरे-धीरे हिलाते हुए सूरज बोला,,)

तुझे बस वही करना है जो मैं कहूंगी जैसा मैं कहूंगी तुझे मेरी सारी बात माननी होगी फिर मैं तुझे स्वर्ग का सुख दूंगी तू पागल हो जाएगा और रोज यही सुख के लिए मेरे पास आएगा,,,,।

जी मालकिन,,,,,

(अभी तक के हालात को देखते हुए सूरज इतना तो समझ गया था कि आज उसकी किस्मत खुलने वाली है आज उसके जीवन में औरत का सुख मिलने वाला है,,, इसीलिए उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव एकदम साफ नजर आ रहे थे और वह भी तैयार था आगे बढ़ने के लिए,,, और आगे की तैयारी करते हुए मुखिया की बीवी अपनी टांगों को थोड़ा सा और खोल दी और अपनी हथेली को अपनी बुर पर से हटाते हुए बोली,,,,)

देख रहा है ना मेरी बुर,,,





जी मालकिन,,,,,,,

कैसी ललीया गई है,,,,,(वाकई में उत्तेजना के मारे मुखिया की बीवी की गुलाबी बुर का अंदरुनी हिस्सा लीची की तरह ललीया गया था जिसे देखते ही सूरज के मुंह में पानी आ गया था,,, ऐसा कहते हुए अपनी बर पर से अपनी हथेली हटाने के बाद उससे रहा नहीं और वह खुद फिर से अपनी हथेली को अपनी बुर पर रखकर जोर-जोर से मसलने लगी और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली ,,) सहहहहह राजा,,,, अब तुझे इसकी सेवा करनी है तैयार है ना तू,,,,

बिल्कुल मालकिन,,,, करना क्या है मुझे बताओ,,,,

(सूरज उत्सुक उत्तेजित और उतावला हो रहा था क्योंकि उसे मालूम था कि अब मुखिया की बीवी उसे चोदने के लिए बोलेगी इसलिए वह बड़ी उत्तेजना में अपने लंड को दबाकर ऊपर नीचे करके हिला रहा था,,,,)

अब तुझे बहुत बड़ा काम करना है तुझे अपनी मर्दानगी साबित करना है,,,, जल्दी से मेरी दोनों टांगों के बीच आजा,,,।(मुखिया की बीवी उसी तरह से अपनी बुर को जोर-जोर से मसलते हुए और मदहोश होते हुए बोली,,,, और सूरज पूरी तरह से आज्ञाकारी बन चुका था एक तरह से मुखिया की बीवी का गुलाम बन चुका था और ऐसे हालात में ऐसे काम में कौन भला किसी खूबसूरत जवानी से भरी हुई औरत का गुलाम बनना पसंद नहीं करेगा जहां पर उसे एक औरत की जवानी का सुख भोगने को मिलता हो,, मुखिया की बीवी की बात सुनते ही सूरज तुरंत उसकी दोनों टांगों के बीच घुटनों के बल बैठ गया, , और मुखिया की बीवी अपनी हथेली को फिर से अपनी बुर पर से हटाते हुए अपनी चका चौंध गुलाबी कचोरी को एक बार फिर से सूरज की आंखों के सामने उजागर कर दी,,, अभी-अभी जवान हुए सूरज के लिए तो यह नजारा बेहद जान लेवा था उसके माथे से पसीना टपक रहा था खिड़की से आने वाली ठंडी हवा भी जवानी की गर्मी को शांत करने में नाकामयाब साबित हो रही थी,,, आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी बस आज्ञा की तेरी थी सूरज को लग रहा था कि बस एक ही काम रह गया है अब चुदाई लेकिन तभी अपनी एक उंगली को अपनी गुलाबी छेद में धीरे-धीरे से प्रवेश करते हुए सूरज की आंखों में देखते हुए बोली,,,)





सूरज मेरे राजा अब तुझे मेरी बुर को अपने होठों से लगा कर चाटना है इसके मदन रस को पीना है,,,,।

(सूरज पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डुबकी लगाने को तैयार था वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था उसकी आंखों में चार बोतलों का नशा उतर चुका था लेकिन मुखिया की बीवी की यह बात सुनकर उसकी आंखें चौड़ी हो गई और वह आश्चर्य से मुखिया की बीवी की तरफ देखने लगा क्योंकि बुर चाटने वाली बात उसने कभी अपने कानों से सुनी नहीं थी और जनता भी नहीं था कि वाकई में औरत की बुर को चाटा जाता है,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था उसे ऐसा ही था की पेशाब करने वाली जगह पर भला होठ कौन लगाता होगा उसे कोई कैसे चाट सकता है,,, लेकिन मुखिया की बीवी को ना कहने की ताकत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि वह भी एक आश्चर्य को पार करके आया था जो मुखिया की बीवी उसके लंड को मुंह में लेकर बड़े प्यार से चूस रही थी जब भी उसके लिए आश्चर्य से भरा हुआ था लेकिन इस खेल में जितना मजा मुखिया की बीवी को आया था उससे कहीं ज्यादा मजा सूरज को प्राप्त हुआ था इस बात से सूरज इनकार नहीं कर सकता था लेकिन फिर भी यह उसकी पहली बार था किसी औरत के गुप्तांग पर अपने होठ रखकर उसे जीभ से चाटने वाली बात उ‌ससे हजम नहीं हो रही थी,,,, और वह आश्चर्य से कभी मुखिया की बीवी की दोनों टांगों के बीच तो कभी उसके खूबसूरत चेहरे की तरफ देख रहा था,,,।

लेकिन इसी बीच मुखिया की बीवी सूरज की असमंजस्ता को अच्छी तरह से समझ गई वह जानती थी कि सूरज इस खेल में नया है और शायद उसे यह सब नहीं मालूम होगा और वह काफी उत्तेजित हो चुकी थी इसलिए बिना कुछ बोले अपने हाथ को सूरज के कर के पीछे की तरफ ले गई और उसे पर दबाव बनाते हैं उसे अपनी दोनों टांगों के बीच में करने लगी सूरज मुखिया की बीवी की मदहोश कर देने वाली जवानी में पूरी तरह से डूब चुका था उसके मद-मस्त यौवन के नशे में झूम रहा था और बिना किसी खेद के वह मुखिया की बीवी की आज्ञा के अधीन होकर धीरे-धीरे वह भी अपने चेहरे को मुखिया की बीवी की दोनों टांगों के बीच ले जाने लगा,,,। मुखिया की बीवी की सांस उत्तेजना के मारे ऊपर नीचे हो रहे थे उसकी चूचियां खरबूजे की तरह मदहोश कर देने वाले अंदाज में उठ रही थी और बैठ रही थी देखते-देखते सूरज का चेहरा एकदम मुखिया की बीवी की दोनों टांगों के बीच पहुंच गया जहां से उसके होंठों और उसकी बुर की दूरी मात्र तीन अंगुल जितनी ही रह गई थी,,, और ऐसे में मुखिया की बीवी की मादक बुर की खुशबू बड़े आराम से सूरज के नथुनो में पहुंच रही थी और उस खूसबु से सूरज का मन बहकने लगा उसके तन बदन में और भी ज्यादा मदहोशी छाने लगी,,,।

देखते ही देखते सूरज मुखिया की बीवी की बुर की इतनी करीब पहुंच चुका था कि वहां से उसे मुखिया की बीवी की बुर दिखाई नहीं दे रही थी बस उसकी मादक खुशबू का एहसास हो रहा था और उसे एहसास में सूरज अपने अस्तित्व को डूबता हुआ महसूस कर रहा था,,,। और अब वह कुछ समझ पाता इससे पहले ही मुखिया की बीवी अपना धैर्य खो बेठी और तुरंत दबाव बनाते हुए सूरज के प्यासे होठों को अपनी दहकती हुई बुर पर दबा दी,,,, सूरज के प्यासे होठ मुखिया की बीवी की फुली हुई कचोरी जैसी बुर पर एकदम से दब गई और बुर पर होठों का स्पर्श का एहसास से ही सूरज पूरी तरह से मदहोशी के आलम में डूब गया और वह गहरी सांस लेने लगा बदन रस के बहाव के कारण मुखिया की बीवी की बुर एकदम चिपचिपी हो गई थी,,,, और मुखिया की बीवी उसके सर पर इतना जोर से दबाव लगाई थी कि होठों के साथ-साथ सूरज की नाक भी उसकी बुर की दोनों फांकों के बीच धंस सी गई,,,, मुखिया की बीवी भी सूरज के होठों को अपनी बुर पर महसूस करके एकदम से मदहोश हो गई मस्त हो गई और एकदम से कसमसाते हुए अपने नितंबों को कुछ देर के लिए हवा में उठा दी,,,,, और गहरी गहरी सांस लेते हुए वापस अपने नितम्बों को खटिया पर रख दी,,,, सूरज को नहीं मालूम था कि उसे क्या करना है इसलिए वह अपनी नाक और होठ को उसकी बुर पर रखकर गहरी गहरी सांस ले रहा था,,, मुखिया की बीवी कुछ देर तक सूरज की हरकत का अानंद लेते हुए जब वह समझ गई की सूरज उसकी बुर को चाट नहीं रहा है तो वह,,, उसके बाल को पकड़ कर झकझोरने लगी और झकझोरने के साथ बोली,,,,।)

चाट,,,,, चाट मेरे राजा,,,,औरहहहहह मेरे राजा सूरज,,,,,ऊममममममममम,,,,,

(मुखिया की बीवी का इतना कहना था कि सूरज धीरे से अपनी जीभ को बाहर निकाला और उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया पहले तो उसके मदन रस का स्वाद कुछ कसैला लगा लेकिन धीरे-धीरे उसे मदहोशी छाने लगी वह उन्माद से भरने लगा,,, धीरे-धीरे इस खेल में उसे मजा आने लगा था वह मुखिया की बीवी की बुर को उसकी धार को नीचे से लेकर ऊपर तक उसमें जीभ डालकर रगड़ता हुआ ऊपर की तरफ ले जा रहा था,,,, और फिर उसी तरह से नीचे की तरफ ला रहा था और धीरे-धीरे उसके मदन रस को अपने जीभ के सहारे अपने गले के नीचे गटक भी रहा था,,, मुखिया की बीवी की बुर सूरज के चाटने के कारण और भी ज्यादा फूलने लगी थी मुखिया की बीवी मदहोशी की हालत में अपने हाथों से ही दोनों चुचियों को पकड़कर जोर-जोर से दबा रही थी और अपने नितंबों को गोल-गोल घूमाते हुए सूरज के द्वारा बुर चटाई का मजा लूट रही थी,,,,, थोड़ी सी देर में आम के बगीचे में ही उसे छोटी सी झोपड़ी में मुखिया की बीवी की गरमा गरम शिसकारी की आवाज गुंजने लगी,,,,।

सहहहहह आहहहहहह,,, ऊमममममम, मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है रे,,,,,ऊफफ,,,,, पूरी जीभ डालकर चाट,,,, खाजा मेरी मलाई को,,,,आहहहहहह ,,,हाय दईया,, ऊमममममममम,,,, (सूरज के बाल और उसके कंधों को पकड़कर मुखिया की बीवी कसमसाते हुए बोल रही थी,,, यह उसकी आदत थी ,,चुदवाने से पहले वह जमकर अपनी बर को चटवाती थी वह एक तरह से लंड के धक्के को सहने के लिए बर चटवा कर अपनी बुर को कचोरी की तरह फुलवा लेती थी,,, और यही काम इस समय सूरज भी कर रहा था पहले तो वह बुर चाटने के नाम से ही आश्चर्यचकित हो गया था उसे नहीं मालूम था,,, की औरत की बुर भी चाटी जाती है जिसमें से पेशाब की धार निकलती है,,,, लेकिन इस क्रिया को करके वह मदहोश हो चुका था नशे में चूर हो चुका था अब तो पागलों की तरह जितना हो सकता था उतनी जीभ अंदर डालकर उसकी मलाई को चाटने की कोशिश कर रहा था,,, नतीजन उसका पूरा मुंह नाक गाल होता उसकी थोड़ी सब कुछ मुखिया की बीवी के बुर की मलाई में भीग चुके थे,,,।

सूरज ईस खेल में नया था लेकिन जिस बखुबी से एक मजे हुए खिलाड़ी की तरह उसने मुखिया की बुर की चटाई किया था मुखिया की बीवी भी एकदम पानी पानी हो गई थी वह सोच भी नहीं सकती थी कि सूरज इतने अच्छे से उसकी बुर की मलाई चाटेगा,,,। लेकिन मुखिया की बीवी की सोच के विपरीत सूरज इस खेल में खरा उतरा था लेकिन अब असली खेल बाकी था,,,,,, मुखिया की बीवी को मोटा तगड़ा लंड चाहिए था अपनी बुर की गहराई में,, और वह अब तैयार हो चुकी थी सूरज के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए उससे चुदवाने के लिए,,,,, इसलिए उसके बाल को पकड़ कर वह धीरे से उसके होठों को अपनी बर पर से अलग की और गहरी सांस लेते हुए बोली,,,।)

बस मेरे राजा तूने मुझे बहुत गर्म कर दिया है अब ठंडी करने का भी समय आ गया है,,,,, अब जल्दी से अपने लंड को मेरी बुर में डाल दे,,, चोदने आता है ना तुझे,,,,

(मुखिया के बीवी के सवाल पर सूरज ना में सिर हिला दिया क्योंकि वाकई में उसे चोदना नहीं आता था,,, उसके इस भोलेपन पर मुखिया की बीवी मुस्कुराई और बोली मैं तुझे सिखा दूंगी बस अब जल्दी से अपने लंड को मेरी बुर में डालना शुरू कर और जैसे तेरा लैंड मेरी बुर में घुसे अपनी कमर को आगे पीछे करके जोर-जोर से हिलाना लेकिन पहले धीरे-धीरे हिलाना उसके बाद जैसे-जैसे मजा आएगा वैसे-वैसे अपनी कमर को आगे पीछे करते रहना तु खुद को खुद जान जाएगा,,,,।

जी मालकिन,,,,,(सूरज पूरी तरह से चारों खाने चित हो चुका था आया था तो यहां पर आम की रखवाली करने आम के बगीचे की देखभाल करने लेकिन मुखिया की बीवी को चोदने का सुख प्राप्त हो रहा था,,,, मुखिया की बीवी से रहा नहीं जा रहा था सूरज घुटनों के बाल उसकी दोनों टांगों के बीच बैठा हुआ था और मुखिया की बीवी खुद ही अपनी मोटी मोटी जांघों को उसकी जांघों पर अपनी गांड उठाकर रख दी थी,,,, सूरज का लंड उत्तेजना के मारे ठुनकी मार रहा था वह जल्द से जल्द मुखिया की बीवी की गुलाबी छेद में घुसना चाहता था,,,, सूरज को क्या करना है या नहीं मालूम था बस वही मैं जानता था कि अब मुखिया की बीवी को चोदना है,,,, क्या करें क्या ना करें इसी कसमकस सूरज लगा हुआ था कि तभी मुखिया की बीवी खुद ही उसका काम आसान करते हुए अपना हाथ आगे बढ़ा दिया सूरज के मोटे तगड़े लंड को पकड़ कर उसके मोटे सुपाड़े को अपने गुलाबी छेद पर रख दि और उसे हल्का सा दबाव देते हुए उसे अपने गुलाबी बुर के गुलाबी पत्तियों के बीच रख दी,,,,बुर का स्पर्श पाते ही सुरज का मुसल जैसा लंड एकदम से गनगना गया,,,,ओर वह एकदम से अकड़ कर टन्ना गया,,,,, और गहरी सांस लेते हुए मुखिया की बीवी बोली,,,,)

अब धीरे-धीरे डाल मेरी बुर में,,,,सहहहहहहह,,,,

(सूरज उत्तेजना की परिभाषा को पार कर चुका था उत्तेजना उसके तन बदन में अपना असर दिखा रही थी ,,,,, वह अगर नहीं भी बोलती तो वह खुद ही अपनी कमर आगे की तरफ ठेलने वाला था,,, और मुखिया की बीवी की बात सुनते ही वह धीरे से अपनी कमर को आगे की तरफ ठेला और उसके लंड का सुपाड़ा गीली बुर पाकर अंदर की तरफ सरकने लगी,,,, सूरज को इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत अभी वह पूरा लंड डाला भी नहीं था अभी तो शुरुआत थी इतने से ही वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था,,, सूरज की निगाहें उसका पूरा ध्यान मुखिया की बीवी की दोनों टांगों के बीच उसके गुलाबी क्षेंद पर टिका हुआ था,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और देखते ही देखते बुर की चिकनाहट पाकर सूरज के लंड का बैंगनी सुपाड़ा धीरे-धीरे पूरा बुर के अंदर घुस गया,,,, सुपाड़े का प्रवेश होते ही मुखिया की बीवी एकदम से मचल उठी,,, मदहोश हो गई और उसके संपूर्ण बुर का क्षेत्रफल एकदम से रक्त संचार से फूलने पिचकने लगा,,, यह पल मुखिया की बीवी के लिए जितना खास था उतना ही खास सूरज के लिए था दिल से मुखिया की बीवी को वह नमन कर रहा था उसका शुक्र गुजार था क्योंकि उसके जीवन में वह पहली औरत थी जो उसे अपना तन सौंप चुकी थी जिसका सुख सूरज भोगने को उतारू हो चुका था,,,,।

सुपाड़ा बुर में प्रवेश करते ही सूरज के बदन में अजीब सा कंपन होने लगा उसका मन मचलने लगा,,, यह कैसा पल था उसके जीवन का बेहद अद्भुत अतुलनीय और ऐसे पल के बारे में उसने शायद ही कल्पना किया था,, उसकी कल्पना तो बस यही थी कि किसी औरत को नग्न अवस्था में देखना उसके अंगों को देखना और फिर अपने हाथ से ही अपनी जवानी की गर्मी को शांत करना लेकिन यहां तो सब कुछ उसकी गोद में जैसे आकर गिर चुका था,,,, मुखिया की बीवी गदराई जवानी की मालकिन थी,,, लंबी कद काठी गोरा रंग अंगों का उभार बेहद आकर्षक,,, और इससे ज्यादा मर्द की क्या अपेक्षा हो सकती है किसी औरत से,,, मर्दों की जवानी की गर्मी को शांत करने का पूरा इंतजाम मुखिया की बीवी के पास था,,, चारपाई पर वह तड़प रही थी चुदवाने के लिए और सूरज उसकी जवानी के गर्मी को शांत करने में लगा हुआ था जो कि उसका यह पहला प्रयास था,,,।

पूरा सुपाड़ा प्रवेश कर जाने के बाद सूरज गहरी गहरी सांस ले रहा था वह पूरी तरह से पसीने से तरबतर हो चुका था,,,, मुखिया की बीवी अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी बुर की स्थिति को देख रही थी वह इतना तो जानती ही थी कि सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा है और इस समय उसे इस बात का भी एहसास हो रहा था कि उसमें दम भी बहुत है,,, उसे साफ दिखाई दे रहा था की सुपाड़े का प्रवेश होते ही उसकी बुर का आकार छल्ला नुमा बन चुका था,,,। मुखिया की बीवी हैरान थी और अपने आप को धन्य समझ रही थी,,, क्योंकि मैं जानती थी कि एक औरत की सबसे बड़ी ख्वाहिश यही होती है कि उसकी बुर में एकदम मोटा और लंबा तगड़ा लंड घुसकर उसकी चुदाई करें जो अब तक उसे नहीं मिला था लेकिन आज जाकर उसकी प्रतीक्षा उसकी तपस्या पूरी हो रही थी,,,,। सूरज उसी अवस्था में रुक चुका था मोटा तगड़ा सुपाड़ा गुलाबी बुर के छेद में प्रवेश कर चुका था,,,। कुछ देर तक इसी अवस्था में रहने के बाद मुखिया की बीवी बोली,,,।

रुक क्यों गया रे आगे बढ़ धक्का लगा,,,,।

(इतना सुनते ही सूरज एक बार फिर से आगे बढ़ने का प्रयास करने लगा और मोटी मोटी जांघों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर को आगे की तरफ धक्का लगने लगा लेकिन उसका लंड का सुपाड़ा टस से मस नहीं हो रहा था बुर के अंदर जाकर ऐसा लग रहा था कि कहीं फस गया है,,, इस बात का एहसास मुखिया की बीवी को भी हो रहा था और उसकी आंखें आश्चर्य से चोड़ी होती चली जा रही थी,, क्योंकि अब तक उसने न जाने कितने लंड को अपनी बुर में ले चुकी थी और किसी भी लंड को बुर में लेने में उसे बिल्कुल भी तकलीफ नहीं हुई थी ना तो डालने में किसी को किसी प्रकार की तकलीफ महसूस हो रही थी लेकिन यह पहला वाक्या था जब एक जवान लड़का अपने लंड को उसकी बुर में डालने में मसक्कत करना पड़ रहा था,,, कुछ देर प्रयास करने के बाद सूरज बोला,,।

अंदर घुस नहीं रहा है मालकिन,,,,,,(गहरी सांस लेते हुए सूरज बोला तो मुखिया की बीवी भी आश्चर्य जताते हुए बोली,,,)

मुझे भी ऐसा ही लग रहा है तेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा है,,,।

तो अब क्या होगा मालकिन,,,, ये अंदर नहीं घुस पाएगा,,,(चिंता जताते हुए सूरज बोला)

जिस तरह से तू डालने की सोच रहा है उसेक्ष तरह से तो बिल्कुल भी घुस नहीं पाएगा,,,,,

तो क्या करना होगा मालकिन,,,,(सूरज इस खेल में बिल्कुल नया था इसलिए उसे काम क्रीड़ा के दावपेच के बारे में बिल्कुल भी नहीं मालूम था इसलिए उसे बार-बार मुखिया की भी से पूछ कर उसके दिशा निर्देश का सहारा लेना पड़ रहा था अगर यही क्रिया को वहां सीख लिया होता तो शायद मुखिया की बीवी को भी ज्यादा दिशा निर्देश करने की जरूरत नहीं पड़ती और सूरज खुद ही अपनी जरूरत पूरी कर लेता और मुखिया की बीवी को भी मस्त कर देता लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था की मुखिया की बीवी को दिशा निर्देश करने में कोई मुश्किल या उसे अच्छा नहीं लग रहा हो उसे तो न जाने क्यों अच्छा लग रहा था एक नया खिलाड़ी को खेल में शामिल करने पर जो की बिल्कुल भी इस खेल से अनजान था उसे दीशा निर्देश करने में मजा आ रहा था,,,)

तू अपने लंड को बाहर निकाल ऐर सरसों का तेल उस पर लगा ले फिर एकदम आराम से जाएगा,,,

सच में मालकिन,,,

एकदम सच,,, और जल्दी कर मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,(अपनी दोनों चूचियों को हाथ में लेकर दबाते हुए बोली.. और सूरजमुखी की बीवी की बात मानते हुए जल्दी से सरसों के तेल को अपने लंड पर लगा लिया और फिर एक बार फिर तैयार हो गया मुखिया की बीवी की बुर में अपने लंड को डालने के लिए,,, इस बार फिर से मुखिया की बीवी अपने हाथ को आगे बढ़कर सूरज के लंड को पकड़कर उसके सुपाड़े को अपने गुलाबी छेद पर रख दी,,, और अब सूरज को मालूम था कि उसे क्या करना है और पहले की तरह ही इस बार भी हुआ तेज धक्का लगाया और सरसों के तेल की चिकनाहट और बुर की फिसलन पाकर,,, गप्प से सुपाडा अंदर घुस गया,,, और उसके घुसने से मुखिया की बीवी के मुंह से हल्की सी आह निकल गई,,,, और इस बार प्रयास करने पर धीरे-धीरे सूरज का मोटा तगड़ा लंड मुखिया की बीवी की बुर में घुसना शुरू कर दिया,,, और यह देखने के लिए की एक मोटा सा बड़ा लंड उसकी बुर में कैसे घुस रहा है वह तुरंत अपने हाथ की कोहनी का सहारा लेकर अपने सर को थोड़ा ऊपर उठाई और अपनी दोनों टांगों के बीच निगाह गड़ा दी,,,।

मुखिया की बीवी को अपनी दोनों टांगों के बीच अद्भुत दृश्य नजर आ रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे मोटा काला नाग किसी बिल में घुस रहा हो,,,, यह दृश्य देख कर मुखिया की बीवी रोमांचित हो उठी,,, देखते ही देखते सूरज अपने लंड को पूरा का पूरा मुखिया की बीवी की बुर में प्रवेश करा दिया,,, और जब तक उसका पूरा लंड मुखिया की बीवी की बुर में घुस नहीं किया तब तक वह राहत की सांस नहीं लिया क्योंकि उसे इतना तो मालूम ही था कि लंड को बुर में पूरा का पूरा डाल दिया जाता है,,, और मुखिया की बीवी की आंखें फटी की फटी रह गई थी क्योंकि सूरज का इतना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में ऐसा लग रहा था कि मानो खो गया हो जबकि उसके मन में इस बात की आशंका थी कि बुर की गहराई नापने के बाद भी एक या डेढ़ इंच जैसा बाहर ही रह जाएगा,, और इस बार मुखिया की बीवी को अपनी बुर पर गर्व हो रहा था और अपने मन में सोच रही थी कि अब तो वह गधे का लंड भी अपनी बुर में ले लेगी,,,।

ओहहह मालकिन यह तो पूरा घुस गया,,,

हां रे सूरज यह तो पूरा घुस गया,,, अब आएगा इस खेल का असली मजा,,,

अब क्या करूं मालकिन ,,,

करना क्या है मेरे राजा अब तो पूरा लंड तु मेरी बुर में डाल चुका है बस अब कमर हिला कर चोदना शुरू कर दे,,,।

(मुखिया की बीवी का इतना कहना था कि सूरज अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया वह अपनी कमर को आगे पीछे करना शुरू कर दिया और मुखिया की बीवी ने उसे यह निर्देश भी दिया की पूरा लंड बुर से बाहर मत निकालना सुपाड़ा भर रहने देना और फिर धक्का मार के अंदर डाल देना,,, ठीक उसी तरह से सूरज धक्का लगना शुरू कर दिया और उसे इतना आनंद मिल रहा था कि पूछो मत वह पूरी तरह से आनंद के सागर में डुबकी लगा रहा था,,,, मुखिया की बीवी पागल हो जा रही थी इतना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की अंदरुनी दीवारों पर अंदरूनी नसों पर रगड़ता हुआ अंदर बाहर हो रहा था जिससे उसका मजा कई गुना बढ़ जा रहा था,,,,।

अब कैसा लग रहा है मालकिन,,,?

आनंद ही आनंद बहुत मजा आ रहा है,,,,ऊममममम,, तेरा लंड एकदम गधे के लंड की तरह है। आहहहह गजब की ताकत है रे तेरे में,,,,उफ्फ,, ऐसे ही धक्के लगा,,,,,

की मालकिन,,,,(सूरज को धक्का लगाने में मजा आ रहा था उसका लंड जैसे-जैसे मुखिया की बीवी की बुर में रगडता हुआ अंदर की तरफ जाता और बाहर की तरफ आता ,,,इस क्रिया को करने में उसे इतना मजा आ रहा था कि उसके बदन से उसके रोम रोम से आनंद की फुहार छूट रही थी,,,, सूरज मुखिया की बीवी की कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया था उसकी चिकनी कमर को हाथों में लेकर उसकी उत्तेजना और बढ़ गई थी और उसकी रफ्तार भी धीरे-धीरे बढ़ रही थी,,, मुखिया की बीवी को ऐसा अनुमान था की पहली मर्तबा सूरज चुदाई कर रहा है तो जल्दी ही उसका पानी निकल जाएगा,,, लेकिन उसकी सोच की विपरीत सूरज टिका हुआ था मुखिया की बीवी की चिकनी बुर पर उसका मुसल जैसा लंड खूब कुटाई कर रहा था,,,,।

मुझे तो बहुत अच्छा लग रहा है सूरज लेकिन तुझे कैसा लग रहा है,,,,।

ओहहह मालकिन पूछो मत मैं कभी सोच भी नहीं सकता था की चुदाई करने में इतना मजा आता है,,,, मेरी तो हालत खराब हो रही है तुम्हारी बुर बहुत गर्म है अंदर से,,,

तेरा लंड भी कुछ कम नहीं है कुछ ज्यादा ही मोटा और लोहे के रोड की तरह है,,,

मुझे नहीं मालूम लेकिन मालकिन सबके पास तो ऐसा ही होता होगा,,,(जोर-जोर से धक्के लगाता हुआ सूरज बोला,,)

तू सच कह रहा है लंड तो सबके पास होता है लेकिन उसकी बनावट अलग-अलग होती है मैं आज तक तेरे जैसा मोटा और लंबा लंड किसी के पास नहीं देखी हूं सच में तु जिस औरत की चुदाई करेगा वह पूरी तरह से तेरी गुलाम बन जाएगी,,,,।

(मुखिया की बीवी के मुंह से अपनी मर्दानगी की तारीफ सुनकर सूरज सातवें आसमान पर पहुंच गया,,, और उसके धक्के तेज हो गए और उसके धक्के के साथ-साथ मुखिया की बीवी की बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छातियों पर इधर-उधर लोटने लगी जिसे देखकर सूरज के मुंह में पानी आ रहा था,,, सूरज की निगाहें मुखिया की बीवी को चोदते समय उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर टिकी हुई थी और मुखिया की बीवी उसकी नजर को पहचान गई,,, और खुद अपना हाथ आगे बढ़ाकर सूरज के दोनों हाथों को पकड़ ली और उसे अपनी चूची पर रखती सूरज की मुखिया की बीवी के इशारे को समझ गया और जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया और धक्के लगाना,,,।

आहहहह ,,आहहह,,, और जोर से चोद मुझे राजा,, ऊमममम,, बहुत मजा आ रहा है अंदर तक डाल,,,ऊफफ,,,,,ऊमममममममम,, ऐसे ही जोर-जोर से फाड़ दे मेरी बुर को,,,,आहहहह,,,,,।

(सूरज के द्वारा हो रही चुदाई से मुखिया की बीवी पूरी तरह से मदहोश और मदमस्त हो चुकी थी,,, आज तक उसकी ऐसी चुदाई नहीं सूरज का बाप भी उसे ईस तरह से नहीं चोद पाया था,,,, सूरज को तो जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई थी,,, अभी तक इसके बारे में हुआ कल्पना ही करता रहता था कि कैसी होगी कैसी दिखती होगी आज उसी बुर में अपना लंड डालकर चोद रहा था,,,। सूरज को भी आज अपने लंड की ताकत का एहसास हो रहा था वरना हाथ में लेकर हिलाकर वह जल्दी पानी निकाल देता था लेकिन आज उसी लंड को बुर में डालने पर उसकी ताकत चार गुना और ज्यादा बढ़ गई थी,,, मुखिया की बीवी पानी पानी हो रही थी वह पूरी तरह से पसीने से तरबतर हो चुकी थी लेकिन फिर भी वह संभोग सुख में पूरी तरह से डूब चुकी थी उसके हर एक धकके साथ खटिया चरमरा रही थी लेकिन उसके टूट जाने का भी कोई डर ना तो मुखिया की बीवी को था और ना ही सूरज को,,,।

मुखिया की बीवी हैरान थी एक ही मुद्रा में तकरीबन आधे घंटे से सूरज उसकी चुदाई कर रहा था,, लेकिन अभी तक उसके चेहरे पर थकान महसूस नहीं हो रही थी लेकिन मुखिया की बीवी की कमर दुखने लगी थी अब वह अपने आसन को बदलना चाहती थी इसलिए सूरज से बोली,,,)

अब थोड़ा अलग तरीके से,,, जरा अपना लंड बाहर निकालना तो,,,।

(इतना सुनकर सूरज उदास नजर आने लगा उसे अपना लंड बुर से बाहर निकालने में मजा नहीं आ रहा था और ना ही वह निकालना चाहता था,,, इसलिए मुखिया की बीवी की बात सुनते हुए भी वह निकालने की जगह अपने धक्के लगातार जारी रखते हुए बोला,,,)

क्यों क्या हो गया मालकिन,,,?

अरे हुआ कुछ नहीं मेरी कमर दुखने लगी है कितनी सेंड की तरह चुदाई करता है,,,, अब जरा दूसरे आसन में चुदाई करवाना है पीछे से,,,

पीछेसे,,,(आश्चर्य के साथ लगातार धक्के लगाता हुआ बोला,,)

हर हरामी पीछे से तु निकाल तो सही तब तुझे बताऊं,,,,।

(इस बार वह मुखिया की बीवी की बात से इंकार नहीं कर पाया और धीरे से अपने लंड को बाहर निकाल लिया,,,, और मुखिया की बीवी गहरी सांस लेते हैं अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी बुर की दशा को देखने लगी जो कि एकदम गोल छलले की तरह दिखाई दे रही थी उसका आकार खुल चुका था,,, यह पहली मर्तबा था जब वह देख रही थी कि उसकी बुर लंड निकल जाने के बावजूद भी लंड की मोटाई अभी तक उसकी बुर में अपना एहसास और असर दिखा रही थी,,,,)

हाय दैया क्या हालत कर दिया रे तूने मेरी बुर की,,,।

(उसकी बात सुनकर सूरज कुछ बोला नहीं बस मुस्कुराने लगा और मुखिया की बीवी धीरे से उठकर सूरज की तरफ अपनी गांड करके घोड़ी बन गई,,, उसे इस तरह से घोड़ी बना देखकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड को अपनी आंखों के सामने चमकता हुआ देखकर सूरज का लंड फिर से ठुनकी मारने लगा,,, और मुखिया की बीवी बोली,,,)

तुझे पीछे से बुर दिख रही है कि नहीं,,,।

(उसकी बात सुनकर सूरज हल्के से अपनी निगाहों को उसकी दोनों टांगों के बीच नीचे की तरफ ले गया तो उसे गुलाबी छेद नजर आने लगा जिसमें अभी-अभी वह अपना लंड डालकर चुदाई कर रहा था,,, और खुश होता हुआ वहबोला,,)

हां मालकिन दिखाई दे रही है,,,

बस मेरे राजा आप पीछे से मेरी बुर में अपना लंड डालना है और चोदना है पीछे से बहुत मजा आएगा,,,

ठीक है मालकिन,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज एक बार फिर से पीछे से मुखिया की बीवी की बुर में लंड डाल दिया और उसकी गांड पकड़ कर चोदना शुरू कर दिया वाकई में मुखिया की बीवी के कहे अनुसार पीछे से उसे भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा था,,, घोड़ी बनने के बाद इस अवस्था में तो मुखिया की बीवी के मुंह से चीख निकल जा रही थी,,, क्योंकि सूरज का लंड उसके बच्चेदानी तक पहुंच जा रहे थे लेकिन इसके बावजूद भी उसे बहुत मजा आ रहा था आनंद के सागर में वह गोते लगा रही थी,,,, और फिर देखते ही देखते दोनों की सांस उखड़ने लगी दोनों चरम सुख के करीब पहुंचने लगे मुखिया की बीवी खटिया के पाटी को दोनों हाथों से कस के पकड़ कर अपनी बड़ी-बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठेल कर अपनी तरफ से भी जवाबी कार्रवाई देने लगी,,, और फिर देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ना शुरू कर दिए मुखिया की बीवी को अपने बच्चेदानी पर सूरज के लंड की पिचकारी एकदम साफ महसूस हो रही थी वह एकदम से मदहोश हो गई थी इस पिचकारी को महसूस करके और सूरज भी उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से जोर से पकड़ कर झड़ रहा था,,,

थोड़ी सी देर में वासना का तूफान शांत हो चुका था दोनों तृप्त हो चुके थे लेकिन इच्छाएं अभी भी बाकी थी और अभी यह रात भी बाकी थी और यह खेल सुबह तक होना लाजिमी था,,, सूरज मुखिया की बीवी की पीठ पर पसर चुका था उसका लंड अभी भी मुखिया की बीवी की बुर में था जो की रह रह कर ठुनकी मार रहा था और इसका एहसास मुखिया की बीवी को अच्छी तरह से अपनी बुर में महसूस हो रहा था,,,।
 
वासना का तूफान शांत हो चुका था लेकिन मन नहीं भरा था ना तो मुखिया की बीवी का और ना ही सूरज का सूरज का तो यह पहली बार था इसलिए औरत की बुर का स्वाद एक बार पास आने के बाद नौजवान लड़के की क्या हालत होती है वही हालत सूरज की भी थी लेकिन मुखिया की बीवी का तो यह रोज का काम था लेकिन आज सूरज जैसे जवान लड़के के साथ संभोग सुख प्राप्त करके वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी और एक बार जमकर चुदवाने के बावजूद भी उसे एहसास हो रहा था कि अभी यह खेल खेलना बाकी है,,,।





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सूरज और मुखिया की बीवी दोनों पीठ केबल खटिया पर लेकर गहरी गहरी सांस ले रहे थे,,, और गहरी सांस के साथ-साथ मुखिया की बीवी की बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां जो कि सूरज के द्वारा स्तन मर्दन के कारण टमाटर की तरह लाल हो चुकी थी वह ऊपर नीचे हो रही थी,,, और उस पर सूरज की निगाह थी,,, सूरज पूरी तरह से नौजवान था और उसका यह पहला अनुभव था औरत को चोदने का यह पहला अवसर था किसी औरत की बुर में लंड डालने का,,, इसलिए तो गरमा गरम पानी के पिचकारी मार देने के बावजूद भी अभी भी उसका लंड खड़ा था बस हल्का सा उसमें लक आया था बाकी इस अवस्था में भी वह किसी का भी पानी निकाल देने में सक्षम था,,, गहरी सांस लेते हुए मुखिया की बीवी बोली,,,।

अब बता तुझे कैसा लगा,,,,(घास फूस की छत की ओर देखते हुए मुखिया की बीवी बोली)

मजा आ गया मालकिन मैं कभी सोच भी नहीं सकता कि एक औरत इतना मजा देती है,,,,।

पहली बार तूने बुर में लंड डाला है ना,,,





जी मालकिन,,, यह मेरा पहला अनुभव है,,, और तुम्हारा साथ पाकर में धन्य हो गया,,,।

(सूरज की यह बात सुनकर मुखिया की बीवी करवट लेकर सूरज की तरफ देखते हुए बोली)

धन्य तो मैं हो गई हूं रे,,, कसम से तेरे में बहुत दम है मैं अपनी पूरी जिंदगी में तेरे जैसा मर्द नहीं देखी,,,(सूरज के लंड की तरफ देखते हुए बोली)

यह तो मुझे नहीं मालूम मालकिन लेकिन आज की रात में जिंदगी भर नहीं भूलूंगा,,,

मैं भी कभी नहीं भुलूंगी,,,(इतना कहते हुए मुखिया की बीवी अपना हाथ आगे बढ़कर सूरज के लंड को पकड़ ले जो भी अभी भी ढीला नहीं हुआ था,, और उसके कड़कपन का एहसास अपनी हथेली में महसूस करते हुए बोली,,,) पहली बार मैं देख रही हूं कि एक बार जमकर चुदाई करने के बावजूद भी पानी निकल जाने के बावजूद भी लंड खड़ा है,,, वरना आज तक ऐसा नहीं हुआ कि पानी निकल जाए और लंड खड़ा का खड़ा रहे तु सबसे अलग है,,,(धीरे-धीरे अपनी मुट्ठी में लेकर सूरज के लंड को मुट्ठीयाते हुए बोली,,,)





लेकिन मालकिन,,,(मुखिया की बीवी की तरफ करवट लेते हुए) तुम्हारी बुर बहुत गर्म है ऐसा लगता है कि जैसे गरम रोटी,,,

(सूरज की बात सुनकर मुखिया की बीवी मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली)

रोटी की तरह लग रही थी तो खा जाना चाहिए ना,,,

मेरा बस चलता तो जरुर खा जाता लेकिन तुम्हारी बुर खाने की चीज नहीं बल्कि प्यार करने की चीज है,,,(ऐसा कहते हुए सूरज मुखिया की बीवी की झील सी गहरी आंखों में देखने लगा मुखिया की बीवी भी सूरज की बात सुनकर एकदम मदहोश होने लगी और भाभी सूरज की आंखों में देखने लगी दोनों एक दूसरे की तरफ करवट लेकर खटिया पर लेटे हुए थे और ऐसे में सूरज का तना हुआ लंड मुखिया की बीवी की जांघों के बीच हरकत करने लगा जिसकी रगड़ से सूरज के साथ-साथ मुखिया की बीवी भी मदहोश होने लगी और फिर देखते ही देखते मुखिया की बीवी अपने लाल लाल होठों को आगे बढ़कर सूरज की होठों पर रख दी और प्रगाढ़ चुंबन करने लगी,,, यह चुंबन काफी मदद कर देने वाला था सूरज मुखिया की बीवी की जवानी के नशे में एकदम से चुर होने लगा,, दोनों के होठ , हल्के से खुल गए और दोनों की जीभ एक दूसरे के होठों के बीच आदान-प्रदान होने लगी दोनों के मुंह का थूक और लार जीभ के द्वारा एक दूसरे के मुंह में घुलने लगा,, और यह लार और थुक इस समय शराब का काम कर रहा था दोनों पूरी तरह से मदहोश हुए जा रहे थे,,, सूरज के हाथ अपने आप मुखिया की बीवी के नितंबों पर आ गए और वह जोर-जोर से मुखिया की बीवी की गांड को दबाना शुरू कर दिया और दबाते दबाते उसे अपनी तरफ खींचने लगा था कि उसका लंड उसकी बुर में घुस जाए लेकिन सूरज नादान था कच्चा खिलाड़ी था उसकी कोशिश सफलता में तब्दील नहीं हो पा रही थी वह बार-बार कोशिश कर रहा था और उसका लंड भी समझता नहीं बार-बार उसकी चिकनी बुर से फिसल जाता था,,,।





मुखिया की बीवी सूरज को इतनी जल्दी तैयार हुआ देखकर खुद मदहोश हो गई,,, एक तरफ वह हैरान भी थी क्योंकि चुदाई के बाद तुरंत चोदने के लिए तैयार मर्द को उसने आज तक नहीं देखी थी,,। इसलिए सूरज के मर्दानगी भरे लंड के आगे वह नतमस्तक हो गई,,, दोनों के बीच अभी भी चुंबन की प्रक्रिया जारी थी दोनों पागलों की तरह एक दूसरे के होंठ को चबा रहे थे और सूरज उसके निचले होठों में अपने लंड को डालने की पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन सफल नहीं हो पा रहा था और उसकी असफलता को देखकर उसकी कोशिश को सफल करने के लिए मुखिया की बीवी अपनी टांग को हल्के से ऊपर की तरफ मोड़ ली और फिर एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर सूरज के लंड को पकड़ ली और अपनी बुर के मुहाने पर रखकर उसे मंजिल की तरफ आगे बढ़ने के लिए रास्ता दिखा दी ,,।

सूरज मदहोश हो चुका था मुखिया की बीवी की जवानी के नशे में पूरी तरह से चुर हो चुका था एक तरफ प्रगाढ चुंबन चालू था और दूसरी तरफ सूरज मुखिया की बीवी की गुलाबी गली में घोड़ा दौड़ाने की फिराक में था और सूरज के घोड़े के लिए खुद मुखिया की बीवी ही अपनी गुलाबी गली का रास्ता दिखा दी थी,,, मुखिया की बीवी के गुलाबी बुर के गुलाबी छेद का स्पर्श पाते ही सूरज का घोड़ा मचल उठा,, और सूरज ने घोड़े की लगाम खींचकर उसे हल्का सा इशारा दिया और उसकी कमर आगे की तरफ हुई,,,और लंड का बैगनी रंग का सुपाड़ा मुखिया की बीवी की गुलाबी छेद में प्रवेश कर गया और देखते-देखते सूरज अपनी मर्दाना ताकत का जोश दिखाते हुए मुखिया की बीवी की बड़ी बड़ी गांड को एक हथेली में पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए धीरे-धीरे करके आप ने पूरा लंड खटिया पर लेटे-लेटे ही मुखिया की बीवी की बुर में डाल दिया,,,।





मुखिया की बीवी हैरान थी इस तरह से किसी ने भी उसके साथ आज तक नहीं किया था पूरी तैयारी के साथ ही वह चुदवाती थी,, लेकिन एक बार जमकर चुदाई करने के बावजूद भी वह कभी सोची नहीं थी कि इतनी जल्दी सूरज उसकी बुर में अपना खड़ा लंड डाल देगा लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसमे मुखिया की बीवी को बहुत मजा आ रहा था।। इस दौरान भी चुंबन की प्रक्रिया जारी थी और धीरे-धीरे सूरज अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था वह मुखिया की बीवी को चोदना शुरू कर दिया था पहली बार की चुदाई के बाद से हुआ है ऐसा लग रहा था की मुखिया की बीवी के साथ खुल चुका था इसीलिए तो बिना आदेश पे ही वह उत्तेजना की स्थिति में मुखिया की बीवी की बुर में लंड डालने की पूरी कोशिश कर रहा था और नाकामयाब होने पर और मदहोश हो जाने की स्थिति में खुद मुखिया की बीवी ही हाथ से पकड़कर उसका लंड अपनी बुर में डलवाई थी,,,,।





एक बार अपनी बुर की गहराई में सूरज के मोटे तगड़े लैंड को महसूस करके उसकी रगड़ को महसूस कर ली तो मुखिया की बीवी एकदम से बेकाबू हो गई वह पागलों की तरह सूरज के होठों का चुंबन करने लगी इस दौरान उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां सूरज की छाती से रगड़ खा रही थी दोनों तरफ से वह मदहोश हो रही थी और निचले स्तर पर तो उसकी हालत एकदम पूरी होती जा रही थी क्योंकि सूरज मुखिया की बीवी की बड़ी-बड़ी गांड को अपनी हथेली में दबाते हुए करवट वाली स्थिति में भी जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और ऐसे हालात में खटिया की हालत भी खराब होती जा रही थी खटिया से चरर मरर की आवाज आ रही थी ,, लेकिन खटिया टूट जाने का डर दोनों में से किसी को नहीं था क्योंकि दोनों पूरी तरह से मदहोश हो चुके थे,,, दोनों एक दूसरे से बात कर पाते ऐसी स्थिति में भी नहीं थे क्योंकि दोनों के होंठ आपस में भीडे हुए थे,, बस गले में से रुंधी हुई शिसकारी की आवाज रह रहकर निकल रही थी,,, सूरज को मजा आ रहा था,,, सूरज के लिए तो मुखिया की बीवी इस समय स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा से काम नहीं थी जो कि उसकी खटिया पर नंगी लेटी हुई थी सूरज मदहोश हो चुका था पागल हो चुका था एक जवान लड़के को अपनी बिस्तर पर और क्या चाहिए था एक खूबसूरत नंगी औरत जिससे से वह अपनी जवानी की प्यास बुझा सके,,,,।





और एक जवान औरत और वह भी प्यासी औरत उसे भी क्या चाहिए हड्डियों को चटका देने वाला मर्द,, हर एक धक्के मे स्वर्ग का सुख देने वाला मर्द बस और क्या चाहिए था और ऐसा मर्द इस समय उसकी खटिया पर था जिसका लंड उसकी बुर में घुसा हुआ था दोनों की जरूरत दोनों एक दूसरे से पूरा कर रहे थे सूरज की कमर लगातार हिल रही थी मानो पहले ही चुदाई में वह सारा गुण सीख गया हो,,, सूरजमुखी की बीवी को अपने बदन से एकदम चिपकाए हुआ था हर एक ढक के साथ उसका लंड मुखिया की बीवी के बच्चेदानी पर पहुंच जा रहा था और इसमें मुखिया की बीवी को कोई आश्चर्य महसूस नहीं हो रहा था क्योंकि उसे पूरा यकीन था कि सूरज का लंड ही उसके बच्चेदानी तक पहुंच पाएगा और ऐसा हो भी रहा था,, सूरज कभी उसकी बड़ी-बड़ी गांड को मसल देता तो कभी हाथ को ऊपर की तरफ लाकर उसके खरबुजो को दबा देता, सूरज पूरी तरह से हर तरीके से मुखिया की बीवी के बदन से मजा ले रहा था,, मुखिया कीबीवी को सूरज का लंड अपनी बुर में फूलता हुआ महसूस हो रहा था जिससे उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,,।





सूरज का जोश एकदम से बढ़ चुका था और करवट लेकर चुदाई करने की अवस्था में उसकी कमर उतनी तेजी से आगे पीछे नहीं हो रही थी जितना कि वह चाहता था इसलिए वह मुखिया की बीवी की दोनों टांगों के बीच आना चाहता था और ऐसा करने के लिए उसे अपना लंड मुखिया की बीवी की बुर से बाहर निकालना पड़ता लेकिन वह ऐसा नहीं करना चाहता था वह एक पल के लिए भी अपने लंड को मुखिया की बीवी की गरम बुर से अलग नहीं रखना चाहता था,,, इसलिए वह एक हाथ नीचे से उसकी बाहों से डालते हुए उसे हाथ से पीछे से मुखिया की बीवी का सर थाम लिया दूसरे हाथ को उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर से हटाकर उसकी कमर में डाल दिया और फिर उसे जैसे अपनी गोद में दबाए हुए ही वह अपनी सारी ताकत लगाया और उसकी बुर में लंड डाले हुए ही उसे एकदम से पलट कर पीठ के बल लेटा दिया इस अवस्था में अभी भी सूरज का लंड उसकी बुर में घुसा हुआ था मुखिया की बीवी हैरान थी सूरज की ताकत को देखकर उसका दम देखकर वह चारों खाने चित हो चुकी थी,,, सूरज जो कि अभी भी मुखिया की बीवी के लाल लाल होठों से सटा हुआ था दोनों के बीच अभी भी चुंबन की प्रक्रिया जारी थी ऐसे हालात में सूरज जोर-जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया मुखिया की बीवी का भी आनंद बढ़ गया,,,, सूरज को मुखिया की बीवी की चुदाई करने में बहुत मजा आ रहा था वह कस कस के धक्के लगा रहा था,,,,।





कुछ देर बाद वह खुद ही मुखिया की बीवी के होठों से अपने होठों को अलग किया और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दोनों हाथों में लेकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और मुखिया की बीवी को भी गरमा गरम सिसकारी लेने का अवसर दे दिया दोनों के बीच गजब की चुदाई का खेल चल रहा था खटिया की रस्सी टूटने को हो रही थी और सूरज अपने लंड से मुखिया की बीवी की बुर के धागे खोल दिया था देखते ही देखते दोनों की सांस ऊपर नीचे होने लगी और फिर दोनों का बदन एक साथ अकड़ने लगा और फिर सूरज एकदम से मुखिया की बीवी पर ढेर हो गया और पिचकारी मारना शुरू कर दिया मुखिया की बीवी भी उसे अपनी बाहों में कसके उसकी पीठ को सहलाने लगी,,,,।

कुछ देर तक दोनों इसी अवस्था में लेटे रह गए सूरज का लंड अभी भी मुखिया की बीवी की बुर में घुसा हुआ था,,, दोनों गहरी गहरी सांस ले रहे थे मुखिया की बीवी पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी या यूं कह लो की सूरज ने उसे थका दिया था उसका बदन मीठा-मीठा दर्द कर रहा था,,, रात के लगभग 3:00 बज रहे थे और दोनों की आंखों में नींद नहीं थी दोनों दो-दो बार चुदाई का सुख हो चुके थे मुखिया की बीवी उसकी पीठ को सहला रही थी मानो उसे उसकी सफलता के रूप में उसे आशीर्वाद दे रही हो उसकी पीठ थपथपा रही हो और वैसे भी सूरज ने पीठ थपथपाने वाला ही काम किया था मुखिया की बीवी को चांद तारे दिखा दिया था मुखिया की बीवी को अपनी बुर फैली हुई महसूस होने लगी थी,,,, थोड़ी देर में दोनों की सांस दुरुस्त होने लगी और मुखिया की बीवी सूरज के नितंबों पर अपनी हथेली रखकर उसकी गोलाई को सहलाते हुए बोली,,,।





बस कर आप अपना लंड बाहर निकाल ले मुझे बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,,।

ऐसे ही कर लो ना मालकिन,,,।

पागल हो गया है क्या बिस्तर खराब करना है क्या,,,

तो क्या हो गया मैं गीले बिस्तर में भी सोने के लिए तैयार हूं,,,

चल रहने दे आशिकी दिखाने को,,,,(ऐसा कहते हुए उसके दोनों कंधों को पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठने लगी तो सूरज भी मुस्कुराते हुए धीरे से उसके ऊपर से उठने लगा और उसका मोटा तगड़ा लंड पुक्क की आवाज के साथ धीरे-धीरे उसकी बुर में से बाहर निकल गया मुखिया की बीवी सूरज के मोटे लंबे लंड को अपनी बुर की गहराई में से बाहर निकलता हुआ देख रही थी और उसे ऐसा ही लग रहा था कि जैसे बिल में से सांप बाहर निकल रहा हो,,,,।





मुखिया की बीवी खटिया पर से उठकर खड़ी हो गई,, और सूरज को लालटेन लेने के लिए बोली सूरज लालटेन लेने से पहले अपने पजामे को पहनने के लिए पजामे को उठाया ही था की मुखिया की बीवी बोली ,,।

अरे यहां कौन देखने वाला है जो कपड़े पहन रहा है देख में नंगी ही बाहर जा रही हुं,,,।

(और वाकई में मुखिया की बेटी नग्न अवस्था में ही दरवाजे की तरफ पहुंच गई तो सूरज भी अपना पहचान वापस छोड़कर कोने से लालटेन हाथ में ले लिया,,, और दोनों बाहर आ गए, बाहर का वातावरण एकदम ठंडा हो चुका था बाहर आने पर दोनों का एहसास हुआ कि बाहर कितना ठंडा है और वैसे तो अंदर भी ठंडा किसी लेकिन दोनों की गर्म जवानी की उसका वातावरण की ठंडक को भी गर्म करते रही थी बाहर निकलते ही मुखिया की बीवी गहरी सांस लेते हुए अपनी बाहों को हवा में फैला दी,, और मुस्कुराते हुए बोली,,,)





croatian alphabet keyboard

इस समय बाहर निकलने में कितना अच्छा लग रहा है और खासकर के बिना कपड़ों के,,,।

सही कह रही हो मालकिन इस तरह से रात में नंगा घूमने का अपना मजा ही कुछ और है,,,,(हाथ में लालटेन लिए हुए मुखिया की बीवी के पीछे खड़े होकर सूरज बोल लालटेन की पीली रोशनी में मुखिया की बीवी की बड़ी-बड़ी गांड एकदम साफ नजर आ रही थी और मुखिया की बीवी की गांड को देखकर सूरज अपने लंड को पकड़ कर हिलाने लगा वह कभी सोच भी नहीं सकता था कि आज की रात उसके जीवन की इतनी हसीन रातों की एक तरह से आज की रात उसके लिए सुहागरात थी बिना विवाह के आज वह मुखिया की बीवी के साथ सुहागरात मनाया था,,,.. दूर-दूर तक अंधेरा अंधेरा था आम के पेड़ बड़े-बड़े होने के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था पर तो अच्छा था कि हाथ में लालटेन थी वरना इतनी पास से सूरज को मुखिया की बीवी भी नजर नहीं आती इतना काला अंधेरा था,,,,।,)

क्या हुआ मालकिन मुतना नहीं है क्या,,,?

अरे हां रे मुतना तो है बड़े जोरों की आई है लेकिन ठंड वातावरण देखकर रुक गई,,,।

कहो तो लंड डालकर रास्ता साफ कर दु,,,





अच्छा यह बात है एक ही रात में इतना शैतान हो गया,,,

(मुखिया की बीवी की बात सुनकर सूरज मुस्कुराने लगा और मुखिया की बीवी को मुस्कुराने लगी वह धीरे-धीरे हैंडपंप की तरफ आगे बढ़ने लगी उसकी चाल में एक मादकता थी उसकी गांड की दोनों फांकें आपस में रगड़ खाते हुए ऊपर नीचे हो रही थी,, यही साड़ी पहनने पर भी होता था ,, बस उस समय ऐसा था कि सिर्फ कल्पना ही कर सकते थे लेकिन आज सूरज अपनी आंखों से देख रहा था एक खूबसूरत औरत की बड़ी-बड़ी नंगी गांड को मटकते हुए आपस में रगड़ खाते हुए,,,, देखते ही देखते मुखिया की बीवी हेड पंप के पास पहुंच गई,,,, और फिर बिना कुछ बोले सूरज की आंखों के सामने ही बैठ गई पेशाब करने के लिए और वैसे भी अब सूरज से कोई पर्दा नहीं रह गया था कोई शर्म नहीं रह गई थी कोई लिहाज नहीं रह गया था,,,।

पल भर में पेशाब की धार फूटने लगी और बुर में से मधुर ध्वनि पूरे वातावरण में गुंजने लगी,,, यह नजारा और बुर की मधुर ध्वनि सुनकर,,, सूरज का लंड फिर से हरकत में आ गया और वह पेशाब करती हुई मुखिया की बीवी को देखकर एक बार फिर से उत्तेजित होने लगा और अपने लंड को हिलाते हुए बोला,,,।





मालकिन तुम सच में ,, पेशाब करते हुए बहुत खूबसूरत लगती हो,,,,।

यह बातहै,,,,

हां मैं सच कह रहा हूं और पहली बार किसी औरत को पेशाब करते हुए देख रहा हूं,,,।

तू सच कह रहा है सूरज पेशाब करती हुई औरत को देखना हर एक मर्द का ख्वाब होता है सपना होता है और चोरी छुपे सब लोग यह दिल से देखने के लिए तड़पते रहते हैं लेकिन तू किस्मत वाला है जो मुझे पेशाब करते हुए देख रहा है,, ।

किस्मत वाला तो हूं मालकिन बाहर निकल रही है इस बुर में मैं अपना लंड डाल चुका हूं,,,।





हां यह बात भीसही है,,,,(मुखिया की बीवी पेशाब करते हुए बोली धीरे-धीरे उसकी पेशाब की धार कमजोर पड़ने लगी और वह पेशाब कर चुकी थी और धीरे से उठकर अपने हाथ से ही हेड पंप चलाने लगी हेड पंप चलाने की वजह से वह थोड़ा झुकी हुई थी और उसकी बड़ी-बड़ी गांड और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी वह हैंडपंप से निकलने वाले पानी को अपने हाथ में लेकर अपनी बुर पर मार रही थी वह उसे साफ कर रही थी,,, और यह नजारा देखकर सूरज से रहा नहीं गया और वह धीरे से मुखिया की बीवी के पास आया और लालटेन को पास में रखकर

धीरे से मुखिया की बीवी को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया मुखिया की बीवी पहले तो एकदम से चौंक गई लेकिन उसे सूरज के होने का अहसास होते ही वह एकदम से मचल उठे क्योंकि उसका मोटा तगड़ा लंड सीधे-सीधे उसकी गांड की फांकों के बीच फिर से रगड़ खाने लगा था,,,, सूरज के खड़े लंड को एक बार फिर से अपनी गांड पर महसूस करके वह एकदम से चौंक गई और बोली।

बाप रे दो-दो बार छोड़ चुका है लेकिन फिर भी तेरा लंड फिर से खड़ा हो गया तू आदमी है कि सांड,,,।





जब आंखों के सामने इतनी बड़ी-बड़ी गांड,(गांड को दोनों हाथों से सहलाते हुए,) एकदम नंगी हो तो सांड बनना ही पड़ता है,,,,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज पीछे से उसकी एक टांग को घुटनों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठा दिया वह अपने लंड के लिए जगह बना रहा था,,, सूरज की हरकत पर मुखिया की बीवी एकदम हैरान हो गई थी क्योंकि एक ही रात में सूरज उसके साथ मनमानी करने लगा था लेकिन उसकी यह मनमानी उसे बहुत अच्छी लग रही थी और देखते ही देखते सूरज इस बार मुखिया की बीवी की मदद लिए बिना ही अपने लंड को उसकी बुर में डाल दिया था और पीछे से उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया था,,,, आनंद की अनुभूति के साथ ही मुखिया की बीवी इस बात से भी हैरान थी क्योंकि पीछे से किसी भी मर्द का लैंड उसके बच्चेदानी तक आराम से नहीं पहुंच पाता था यहां तक की पहुंच ही नहीं पाता था,, लेकिन सूरज पीछे से भी आराम से उसकी चुदाई कर रहा था और हर एक धकके साथ अपने लंड को उसके बच्चेदानी तक पहुंचा रहा था,,,।





रात के 3:00 आम के बगीचे में मुखिया की बीवी और सूरज पूरी तरह से नंगे होकर हेड पंप पर खड़े होकर चुदाई का सुख भोग रहे थे सूरज पागलों की तरह पीछे से मुखिया की बीवी को छोड़ रहा था और मुखिया की बीवी हेडपंप के हत्थे को पकड़ कर थोड़ा सा झुकी हुई थी और चुदाई का सुख भोग रही थी,,,।

तू सच में इंसान नहीं सांड है इतने में तो कोई भी थक हार कर सो गया होता लेकिन तू है कि बिना थके फिर से शुरू हो गया और ना खुद सो रहा है ना मुझे सोने दे रहा है,,,।

ओहहह मेरीमालकिन,,,(जोर-जोर से धक्के लगाते हुए) तुम ही तो मुझे आम की रखवाली करने के लिए लाई थी तो फिर नींद कहां से आएगी,,,।

बातें भी बनाना तुझे आने लगा कोई बात नहीं मुझे मजा भी बहुत आ रहा है जोर-जोर से धक्के लगा,,,(एक बार फिर से आपके बगीचे के खुले वातावरण में मुखिया की बीवी की गरमा गरम से सिसकारी आवाज गुंजने लगी,, , जबरदस्त चुदाई के बाद मुखिया की बीवी एकदम से थक गई थी उसके पैरों में दर्द होने लगा था और वह सूरज‌ से बोली,, )





मैं झोपड़ी तक नहीं जा पाऊंगी मेरे पैरों में बहुत दर्द हो रहा है तूने तो मुझे पागल ही कर दिया है आज लगता है यही सोना पड़ेगा,,,

कैसी बातें कर रही हो मालकिन मेरे होते हुए तुम्हें चलने की क्या जरूरत है,,,(और इतना कहने के साथ ही मुखिया की बीवी को समझ पाती है इससे पहले ही सूरज उसे गोद में उठा लिया मुखिया की बीवी एकदम से घबरा गई की कही उसके वजन से वह उसे गिरा ना दे,,,, लेकिन सूरज पूरी तरह से मर्द बन चुका था उसकी भुजाओं में बहुत दम था वह बड़े आराम से मुखिया की बीवी को गोद में लिए हुए ही झोपड़ी में पहुंच गया और फिर उसे बिस्तर पर लेटा दिया और लालटेन को वापस कोने में टांग दिया झोपड़ी के दरवाजे को बंद करके वह भी मुखिया की बीवी के पास ही खटिया पर लेट गया दोनों एक दूसरे की बाहों में नींद की आगोश में चले गए सुबह पंछियों की आवाज के साथ दोनों की एक साथ नींद खुली तो मुखिया की बीवी जल्दी-जल्दी उठकर कपड़े पहने लगी,,, लेकिन सूरज अभी भी पीठ के पल लेटा हुआ था और मुखिया की बीवी को देखकर एक बार फिर से उसका लंड खड़ा हो चुका था इस बार मुखिया की बीवी सारा नहीं किया और वह कपड़े पहनने के बावजूद भी अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर सूरज के लंड के ऊपर सवार हो गई और अपनी प्यास बुझाने के बाद ही नीचे उतरी,, । और फिर दोनों गांव की तरफ लौट गए।



 
पंछियों के कलरव के बाद दोनों की नींद खुली तो दोनों एक दूसरे की बाहों में थे बिना कपड़ों के निर्वस्त्र,,,, खिड़की से बाहर देखने पर पता चल रहा था कि उजाला हो रहा था,,, मुखिया की बीवी जल्दी-जल्दी सूरज की बाहों में से अलग हुई और खटिया से नीचे उतर कर रात को अपने बदन से उतरे हुए कपड़ों को ढूंढने लगी,,, कपड़े उतारने में बिल्कुल भी समय नहीं लगा था लेकिन उसे पहनने में समय लग रहा था एक-एक कपड़ों को वहां धीरे-धीरे पहनकर तैयार हो चुकी थी सूरज अभी भी खटिया पर पड़ा हुआ था उसकी आंखें खुली हुई थी और वह मुखिया की बीवी को ही कपड़े पहनते हुए देख रहा था,,, औरतों को निर्वस्त्र होने में देखने में जितना आनंद आता है उतना ही आनंद उनके द्वारा धीरे-धीरे एक-एक करके कपड़े पहनने में भी आता है और इस बात का एहसास सूरज को अच्छी तरह से हो रहा था और इसी वजह से उसका लंड एक बार फिर तैयार हो चुका था लेकिन वह जानता था कि हम घर वापस लौटने का समय हो चुका है,, इसलिए अपने मन को मसोस कर रहा अपनी तरफ से किसी भी प्रकार की हरकत को नहीं कर रहा था,, बस इतना ही चेष्टा किया था कि वह मुखिया की बीवी को कपड़े पहनते हुए देखकर उसकी अदाओं को देखकर रात भर में जो कुछ भी हुआ था उसकी वजह से थोड़ा सा खुलकर वह मुखिया की बीवी की आंखों के सामने ही अपने लंड को पकड़कर झटका देते हुए हिला रहा था,,,।





सुबह-सुबह यह सूरज की तरफ से एक खूबसूरत जवान से भरी हुई औरत को देखकर औपचारिक क्रिया थी लेकिन उसकी इस क्रिया से मुखिया की बीवी के तन बदन में आग लग गया रात भर जी भर कर सूरज से चुदवाई थी,,, लेकिन इस समय उसकी आंखों में अलग ही खुमारी छाई हुई थी इसकी वजह से वह अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाई और अपनी साड़ी को कमर से पकड़ कर उसे ऊपर उठाते हुए खटिया पर चढ़ गई और अपने घुटनों को मोड़कर सूरज की कमर की इर्द-गिर्द रख दी और अपने ही हाथ से उसके औजार को पकड़कर निशाने पर दे मारी,,, रात भर में मुखिया की बीवी की गुलाबी गलियों की परिक्रमा करने के बाद सूरज उन गलियों से अच्छी तरह से वाकीफ हो चुका था,, और देखते ही देखते सूरज का समूचा लंड मुखिया की बीवी के गुलाबी छेद में अंदर तक घुस गया और मुखिया की बीवी एकदम मस्त होकर सूरज के लंड पर कूदना शुरू कर दी और तब तक कूदती रही जब तक की खुद के साथ-साथ सूरज का भी पानी निकल नहीं ली,,,।





लालटेन को बुझा कर सूरज उसे अपने हाथ में ले लिया था और एक हाथ में बड़ा सा लट्ठ भी ले लिया था जिसे वह रात में लेकर आया था और मुखिया की बीवी हाथ में कुल्हाड़ी ले ली थी यह औजार उन दोनों की सुरक्षा के लिए था,,, झोपड़ी से बाहर निकाल कर झोपड़ी को इस तरह से बंद करके वह दोनों गांव की ओर लौटने लगे सुबह का नजारा बेहद खूबसूरत था आम के बगीचे में बड़े-बड़े आम लगे हुए थे जिसे देखकर सूरज बोला,,,।

मालकिन तुम्हारा बगीचा तुम्हारा बहुत खूबसूरत है,,, और आम देखो कितने बड़े-बड़े हैं मेरे तो मुंह में पानी आ रहा है,,,

और रात भर जिस बगीचे में खेला है उसके आम तुझे कैसे लगे,,,(मुखिया की बीवी का इशारा अपनी खूबसूरत बदन की तरफ था और सूरज भी उसकी बात को समझ गया था इसलिए मुस्कुराते हुए बोला,,,)





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तुम्हारा बगीचा तो मालकिन इस बगीचे से लाख गुना अच्छा है और तुम्हारे आम,,, तुम्हारे बगीचे के सबसे खूबसूरत फल हैं जिसे रात भर तुमने खिला कर मुझे मस्त कर दी हो,,,।

(सूरज की बात सुनकर मुखिया की बीवी मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए अपनी चाल में मादकता लाते हुए वह आगे आगे चल रही थी,,, रात में जिस तरह का दर्द उसके बदन में था सुबह उसकी चाल देखकर लगी नहीं रहा था कि रात को उसे कोई तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी औपचारिकता निभाते हुए सूरज बोला,,,)





अब दर्द कैसा है मालकिन,,,।

(सूरज की बातें सुनकर मुखिया की बीवी को एकाएक याद आया कि उसे तो रात को बदन में बहुत तेज दर्द हो रहा था,,, और वह मुस्कुराते हुए सूरज की तरफ देखकर बोली,,)

दर्द,,,,,दर्द तो एकदम गायब हो गया ऐसा लग ही नहीं रहा है कि मेरे बदन में कल रात को बहुत दर्द था आखिरकार गायब क्यों नहीं होगा रात भर तूने मेहनत जो इतना किया है,,, वैसे सूरज तूने मालीस अच्छी किया,,,।

सब तुम्हारी कृपा है मालकिन,,,,

(और दोनों कुछ ही देर में घर पर पहुंच गए,,, घर के आंगन में कुर्सी खाली थी जिसे देखकर मुखिया की बीवी समझ गई थी की मुखिया घर पर नहीं है,,, लेकिन उसकी दोनों लड़कियां घर पर ही थी इस बात का अहसास होते ही उसके चेहरे पर थोड़ी सी उदासी छा गई,,,,)





अच्छा मालकिन अब मैं चलता हूं,,,(इतना कहकर सूरज चलने ही वाला था की मुखिया की बीवी उसे रोकते हुए बोली,,)

अरे कहां चल दिया,,, अपनी मजदूरी तो लेता जा,,,।

(मजदूरी का नाम सुनते ही सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह वहीं रुक गया और मुखिया की बीवी की तरफ देखने लगा मुखिया की बीवी मुस्कुराते हुए बोली,,,)

तू यही रूक में आती हुं,,,(और इतना कहकर घर के अंदर जाने लगी,, और मुखिया की बीवी को जाता हुआ देखकर सूरज मुस्कुराते हुए कुर्सी पर बैठ गया थोड़ा सा थका हुआ वह दिख रहा था क्योंकि रात भर उतने मेहनत भी भरपूर किया था और रात को सोया भी नहीं था इसलिए उसके बदन में थोड़ी थकान थी,,, थोड़ी देर में मुखिया की बीवी आई और उसे देखकर सूरज तुरंत कुर्सी पर से उठकर खड़ा हो गया,,, और उसकी जगह पर मुखिया की बीवी बैठ गई,,,, और मुस्कुराते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसे ₹2 देते हुए बोली,,,)





यह ले सूरज तेरी मजदूरी,,,

(यह वह जमाना था जहां दो रुपए₹50 से कम नहीं थे,,, सूरज दो रुपए देखकर एकदम खुश हो गया,,, और मुस्कुराते हुए बोला..)

बहुत-बहुत धन्यवाद मालकिन,,, अच्छा अब मैं जाऊं,,,

नहीं अभी रुक जा थोड़ी सब्जी तरकारी भी लेता जा,,,,

(और इतना कहने के साथ ही मुखिया की बीवी,,, थोड़ी-थोड़ी सब्जी करके दो-चार तरह की सब्जी के साथ-साथ पके हुए ढेर सारे आम रख दी जिसे देखकर सूरज बहुत खुश होने लगा लेकिन तभी उसके चेहरे पर परेशानी की लकीरें खींचने लगी जिसे देखकर मुखिया की बीवी कुर्सी पर बैठे हुए ही बोली,,,)

मालकिन यह तो आपने बहुत अच्छा किया कि इतनी सारी सब्जियां तरकारी और पके हुए आम भी दे दी लेकिन यह सब लेकर से जाऊंगा मैं इसे ले जाने के लिए तो थेले की जरूरत पड़ेगी,,, और मेरे पास इस समय कुछ भी नहीं है,,,।





long poems about nature

अरे बुद्धू मुझे मालूम है जा जाकर अंदर से मांग ले,,,

(मुखिया की बीवी थैला लेने के लिए खुद ही घर के अंदर जाने वाली थी लेकिन सूरज से बात करते हुए दो-चार मजदूर आ गए थे इसलिए उनसे बात करने लगी,,,, और सूरज को घर के अंदर जाना पड़ा पहली बार सूरज मुखिया के घर पर आया भी था और पहली बार में ही उसे घर के अंदर जाने की इजाजत भी मिल गई थी अंदर कौन है क्या है उसे कुछ नहीं मालूम था बस मुखिया की बीवी ने उसे कहा था कि अंदर जाकर मांग ले तो सूरज घर में आ चुका था इधर-उधर देखने के बाद उसे कहीं भी कोई भी नजर नहीं आ रहा था,,। सूरज को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें धीरे-धीरे वह आगे बढ़ने लगा मुखिया के घर में ढेर सारे कमरे थे लेकिन सभी कैमरे बंद थे तभी उसे दो-तीन कैमरा छोड़कर चौथा कमरा खुला नजर आ रहा था क्योंकि उसमें से हल्की-हल्की रोशनी बाहर आ रही थी और सूरज दबे पांव उस और जाने लगा,,,।





koshish karne walon ki haar nahi hoti poem in english

देखते ही देखते वह कमरे के दरवाजे पर पहुंच गया और दरवाजा खुला हुआ था दरवाजे पर पहुंचते ही अंदर का नजारा देखकर उसके होश उड गए,,, उसे साफ दिखाई दे रहा था कि कमरे के अंदर बिस्तर के पास खड़ी होकर एक खूबसूरत लड़की कपड़े पहन रही थी वह सलवार पहन चुकी थी और उसकी डोरी को बांध रही थी उसकी पीठ दरवाजे की तरफ थी,,, उसकी नंगी चिकनी पीठ और उसे सलवार की डोरी बांधते हुए देखकर सूरज के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, सूरज को समझते देर नहीं लगी कि उसकी आंखों के सामने जो लड़की अपने कपड़े पहन रही है वह मुखिया की लड़की है लेकिन छोटी वाली है या बड़ी वाली यह कहना उसके लिए मुश्किल था क्योंकि उसकी पीठ उसकी तरफ थी और चेहरा दूसरी तरफ था,,, सूरज को समझ में नहीं आ रहा था कि वह वहां पर खड़ा रहे या चला जाए क्योंकि जिस हालात में कमरे के अंदर मुखिया की लड़की थी ऐसी हालत में उसे देखते हुए कोई देख लेता तो मुसीबत आ जाती,,, लेकिन आंखों के सुकून देने वाला इतना मदहोश कर देने वाला नजर उसकी आंखों के सामने था कि उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें बस देखे जा रहा था,,,।

मुखिया की बीवी और सूरज





मुखिया की लड़की इस बात से बिलकुल बेखबर की दरवाजे पर कोई खड़ा है वह एक मिलन से अपने सलवार की डोरी बांध रही थी और उसे बांध चुकी थी,,, और अपनी कुर्ती लेने के लिए और बिस्तर की तरह हाथ बढाई तो उसे महसूस हुआ कि दरवाजे पर कोई खड़ा है और वह तुरंत पलट कर दरवाजे की तरफ मुंह करके देखने लगी और पल भर के लिए यह भूल गई की कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी थी और जैसे ही उसकी नजर दरवाजे पर खड़ी सूरज पर गई उसके चेहरे पर मुस्कान तेरने लगी लेकिन सूरज की नजर जैसे ही उसके खूबसूरत चेहरे पर और खूबसूरत चेहरे के नीचे उसकी छातियों पर गई तो उसके होश उड़ गए,,,।

कमर के ऊपर उसने कुछ नहीं पहनी थी,,, और उसकी कश्मीरी सेब को देखकर उसके होश उड़ गए उसकी नजर उसकी छातीयो पर गड़ी की गड़ी रह गई,,, और आश्चर्य से उसकी आंखें खुली की खुली रहेगी पल भर में उसकी आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी-बड़ी चूचियां नजर आने लगीऔर उसे इस बात का एहसास होने लगा की मां बेटी दोनों की चुचियों में कितना अंतर है,,, मां के पास खरबूजा है तो बेटी के पास संतरा,,,, और मजा दोनों बराबर देंगी,,, और सूरज उसे पहचान गया था यह मुखिया की बड़ी लड़की नीलू थी शालू की तो उसने बर के दर्शन किए थे लेकिन नीलू की चूचियों के दर्शन उसने कर लिए थे दोनों की जवानी नशा से भरपूर थी,,,, और होगी भी कैसे नहीं आखिरकार मा भी तो मयखाने से कम नहीं थी,,,।

दरवाजे पर सूरज को खड़ा देखकर नीलू के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे थे लेकिन उसकी नजर को जब अपनी छातियों पर भेदता हुआ महसूस की तो उसके होश एकदम से उड़ गए,,, उसे एहसास हो गया कि सूरज उसकी नंगी छाती हो कोई देख रहा है और पल भर के लिए नीलू के बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,,, और वह एकदम से अपने कश्मीरी से को छुपाने के लिए अपनी हथेलियों का सहारा लेकर उसे अपनी हथेली से छुपाते हुए बोली,,,।

हाय दैया सूरज तु यहां कैसे,,,(और इतना कहकर वापस सूरज की तरफ पीठ करके खड़ी हो गई,,, सूरज भी उसकी हरकत से एकदम घबरा गया और वह भी तुरंत दूसरी तरफ नजर घूमाकर माफी मांगते हुए बोला,, )

ममममम,,, मैं यहां थैला लेने आया था,,,

थैला ,,(नीलू आश्चर्य जताते हुए बोली,,,)

हां मुझे मालकिन ने भेजी थी वह कहना की सब्जी तरकारी और आम ले जाना है इसलिए थैला लेने के लिए मुझे भेज दी,,,,

ठीक है तुम जो मैं लेकर आती हूं,,,।

जी,,,जाता,,हुं ,,, लेकिन मैं अनजाने में यहां आ गया था मुझे माफ करना किसी से बताना नहीं,,,

ठीक है मैं किसी से नहीं बताऊंगी तुम अब जाओ जल्दी से,,,,

ठीक है,,,(इतना कहकर सूरज जल्दी-जल्दी घर से बाहर आ गया,,, और मुखिया की बीवी के पीछे खड़ा हो गया मुखिया की बीवी को एहसास तक नहीं हुआ कि वह उसके पीछे खड़ा है वह मजदूरों से बातें करने में मसगुल थी और थोड़ी ही देर में,, मुखिया की लड़की जल्दी-जल्दी कपड़े पहनकर हाथ में थैला लेकर बाहर आ गई और वह भी धीरे से सूरज को थैला पकड़ा दी,,, और सूरज ठेले में सब्जी तरकारी और पका हुआ आम भरने लगा,,, नीलू सूरज को ही देख रही थी,,, और अभी जो कुछ भी अंदर होगा उसके बारे में सोच कर मुस्कुरा रही थी हालांकि शर्म से उसके गाल लाल हो चुके थे,,, और अपने मन में यही सोच रही थी जहां कुछ देर पहले उसे कपड़े पहनते हुए देखकर उसकी चूचियों को देखकर सूरज सोच रहा था।

नीलू अपने मन में सोच रही थी कि सूरज की भी किस्मत कितनी तेज है जो उसकी छोटी वाली बहन की बुर के दर्शन कर लिया और फिर आज बड़ी बहन की चुचियों को देखकर मस्त हो गया,,,, इस बात को अपने मन में सोचते ही उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,,, थेले में सब्जी तरकारी भरते हुए,,, वह बार-बार नीलू की तरफ देख ले रहा था और नीलू भी उसे देखकर मुस्कुरा दे रही थी,,, थोड़ी ही देर में सूरज हाथ में थैला लेकर खड़ा हो गया था घर जाने के लिए बस मुखिया की बीवी से इजाजत लेना चाहता था जो कि अभी भी मजदूरों से बात करने में व्यस्त थी,,, लेकिन थोड़ी देर में दिन भर के काम की हिदायत देते हुए वह मजदूरों को खेतों पर भेज दी थी और फिर सूरज की तरफ देखते हुए बोली,,,।

जा रहा है सूरज,,,

जी मालकिन,,,

अच्छा जा,,, लेकिन शाम को समय पर आ जाना कल की तरह देर मत करना,,,

आज भी जाना है क्या मालकिन,,,(आश्चर्य जताते हुए सूरज बोला)

अरे बुद्धू बगीचे के हम जब तक मार्केट नहीं पहुंच जाते तब तक जाना ही होगा,,,।

(इतना सुनते ही सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव में चलने लगे रात भर की क्रियाकला पल भर में उसकी आंखों के सामने घूमने लगे और वह मुस्कुराते हुए बोला)

ठीक है मालकिन में समय पर आ जाऊंगा,,,(और इतना कहकर नीलू की तरफ देखकर मुस्कुराने लगा और अपने घर की तरफ निकल गया)
 
सूरज मुखिया की बीवी के द्वारा दी गई सब्जी तरकारी और आम के पके हुए ढेर सारे फल लेकर घर पहुंच गया था,,,,,,, सूरज अभी निकला नहीं था लेकिन उजाला होना शुरू हो गया था और ऐसा लग रहा था कि सूरज आज जैसे पहले ही उठ गया था वरना वह सूरज निकलने के बाद ही ज्यादातर बिस्तर छोड़ना था लेकिन मुखिया की बीवी के साथ रात गुजारने के बाद वह तुरंत जल्दी उठकर गांव के लिए निकल गया था लेकिन आम के बगीचे से निकलते निकलते एक बार फिर से वह मुखिया की बीवी की जवानी का रस चख लिया था,,,।





सूरज अपने आप को बेहद खुश किस्मत समझ रहा था और क्यों ना समझे आखिरकार,,, उसकी झोली में गांव की सबसे अमीर और खूबसूरत औरत जो आ गई थी,,, आ क्या गई थी सूरज का बिस्तर भी गर्म कर दी थी,,, सूरज कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसके जीवन में इस तरह से बदलाव आएगा,,, गांव का सबसे सीधा साधा लड़का था सूरज जो औरतों के करीब आने से भी डरता था,,, लेकिन जब एक दोस्त ने उसे अपने ही घर की औरत को पेशाब करते हुए दिखा दिया तब से औरतों के अंगों को लेकर उसके मन में कुतुहल जागने लगी थी,,, और उसके बाद मुखिया की बीवी को नहाते हुए देखना उसकी खूबसूरत अंगों को देखना उसके नितंबों का घेराव और उसका उठाव सब मिलकर सूरज को दीवाना बनाने लगा था और उसके बाद लगे हाथ उसने मुखिया की सबसे छोटी लड़की की बुर के भी दर्शन कर लिए उसके बाद से तो उसकी हालत खराब हो गई,,,।





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और उसके बाद मुखिया की बीवी उसे पूरी तरह से मर्द बनने के लिए आम के बगीचे में लेकर जहां पर उसने संभोग सुख क्या होता है संभोग क्या होता है यह सब कुछ एक ही रात में सीख लिया था,,, वह पूरी तरह से मुखिया की बीवी का गुलाम हो चुका था इसकी मत होश कर देने वाली जवानी के नशे में चूर हो चुका था और मुखिया के घर पहुंच कर उसकी बड़ी लड़की के भी संतरों के दर्शन करके मस्त हो गया था,, कुल मिलाकर उसके जीवन में पूरी तरह से जवानी की बहार आ गई थी,,, रात भर मुखिया की बीवी की जवानी से खेलने का इनाम भी उसे मिला था दो रुपया और सब्जी तरकारी के साथ-साथ पके हुए आम जिन्हें थैला में भरकर वह अपने घर की तरफ ले जा रहा था,,,।





घर जाते समय अपने मन नहीं सोच रहा था कि उसकी मां पके हुए आम और सब्जी तरकारी देखकर खुश हो जाएगी,,, वैसे तो खाने की कोई कमी नहीं थी खेतों में काम करके पैसे मिल जाते थे और थोड़ी बहुत जमीन थी जिसमें खेती का काम करके और खुद ही सब्जियां होगा कर जीवन निर्वाह अच्छे से हो रहा था और साथ में,, और दूध के लिए गाय और बकरी भी पाल रखी थी,,, लेकिन जब इस तरह से कभी कबार सब्जियां या कुछ दूध घी दही मिल जाता था तो सुनैना खुश हो जाती थी और यह बात को सूरज अच्छी तरह से जानता था इसलिए वह जानता तो यह सब देखकर उसकी मां बहुत खुश होगी,,,। वह जल्दी-जल्दी अपने घर की तरफ चला जा रहा था धीरे-धीरे सूरज निकलने लगा था और लोग भी धीरे-धीरे उठ रहे थे कुछ लोग घर के बाहर काम कर रहे थे कुछ लोग नित्य कर्म सोच क्रिया करने के लिए मैदान की तरफ जा रहे थे,,,।





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रात का पूरा वाक्या उसके जेहन में अपनी छाप छोड़ गया था जिसे वह जिंदगी भर भूल नहीं सकता था,, सब कुछ उसे अच्छी तरह से याद था मुखिया की बीवी का पेशाब करना उसकी बड़ी-बड़ी गांड के दर्शन करके खुद मस्त हो जाना,,, उसे भी पेशाब करने के लिए बोलना और तिरछी नजर से उसके लंड की तरफ देखना,,, यह सब उसे पागल बना रहा था उसकी कमर में दर्द करना,,, उसे सहारा देकर झोपड़ी तक पहुंचाना और फिर उसके बदन की मालिश करना और मुखिया की बीवी का धीरे-धीरे अपने वस्त्र उतारना,,, बदन के हर एक अंग पर मालिस करवाना,,, और मालिश करवाने के बहाने अपने बदन से सारे कपड़े उतार कर पूरी तरह से नंगी हो जाना यह सब तो सूरज के लिए किसी धमाके से कम नहीं था,,, क्योंकि आज तक सूरज नहीं कभी भी किसी औरत को या लड़की को पूरी तरह से निर्वस्त्रावस्था में नहीं देखा था जब किस्मत में साथ दिया तो अर्धनग्न अवस्था में देखा था लेकिन पूरी तरह से नंगी औरत को कभी नहीं देखा था जिसकी कसम मुखिया की बीवी ने पूरी कर दी थी,,,।





हां रात वाली घटना से पहले सूरज ने अपने ही घर में अपनी मां को चुदवाते हुए देखा था अपने पिताजी के साथ दोनों पूरी तरह से निर्वस्त्रावस्था में थे लेकिन उसे समय भी सूरज ज्यादा कुछ देख नहीं पाया था बस अपनी मां और अपने पिताजी की कमर को ही देख पाया था जो कि आगे पीछे बड़ी तेजी से हिल रही थी सूरज उसे समय उसे नजारे को देखकर पूरी तरह से गर्म हो चुका था,,, और समय सूरज के मन में भी संभोग करने की तीव्र लालसा जागरूक हो चुकी थी और अपने मन में यही सोच रहा था कि यह क्रिया करने को उसे कब मिलेगा लेकिन उसकी किस्मत तेज देखो बहुत ही जल्द चोदने के लिए उसे मुखिया की बीवी मिल गई,,, और अभी एक बार नहीं रात भर में सुबह होने तक चार-चार बार चोदने को मिली थी,,, सूरज अपने मन में यही सोचते हुए जा रहा था की कमर हिलाने में कितना मजा आता है कितना सुकून मिलता है जब लंड बुर की गहराई में जाता है,,,बुर के अंदर की गर्मी कितना पागल कर देती है,,, यह सब सो कर उसके पजामें फिर से तंबू बनने लगा था,,,।





थोड़ी देर में अपने घर पहुंच गया दूर से ही देखा तो उसकी बहन रानी घर के आंगन में झाड़ू लगा रही थी,,,,,,, वह चुकी हुई थी और उसका पिछवाड़ा सूरज की तरफ,,, दूर से ही ना जाने क्यों सूरज की नजर अपनी बहन के पिछवाड़े पर जम सी गई थी,, क्योंकि उसकी बहन रानी भी पूरी तरह से जवान हो चुकी थी उसके बदन में भी उभार आना शुरू हो गया था लेकिन आज से पहले उसने कभी भी अपनी बहन को गंदी नजर से नहीं देखा था लेकिन यह कुछ दिनों का बदलाव ही था जो आज ना चाहते हुए भी उसकी नजर अपनी बहन के पिछवाड़े से हट नहीं रही थी,,, क्योंकि झाड़ू लगाते समय उसके नितंबों में एक अद्भुत थिरकन हो रही थी,,, जिसकी वजह से उसके नितंबों के दोनों फांक उभरे हुए और लहर मारते हुए नजर आ रहे थे और इसी नजारे को देखकर वह अपनी बहन की तरफ आकर्षित हो गया था लेकिन तुरंत वह अपने मन को दुरुस्त कर लिया था और अपनी बहन के नितंबों पर से नजर हटाते हुए वह आवाज लगाता हुआ बोला,,,।





अरे रानी,,,, तू झाड़ू लगा रही है मां कहां है,,,,।

(अपने भाई की आवाज सुनते ही रानी तुरंत झाड़ू लगाना बंद कर दिया और अपने भाई की तरफ देखने लगी और प्रसन्न होते हुए बोली)

भैया तुम आ गए,,,, और यह सब क्या लेकर आए हो,,,(सूरज के हाथों में थैले को देखते हुए बोली,,,)

मुखिया की बीवी ने दी है थोड़ी बहुत सब्जी तरकारी है और पके हुए आम है ,,

पके हुए आम,,, तब तो मजा आ जाएगा भैया,,,(रानी एकदम खुश होते हुए बोली)

मजा तो आ जाएगा रानी लेकिन मां कहां है,,,

वह तो नहाने गई है,,,,

नहाने गई है इतनी सुबह लेकिन कहां,,,(आश्चर्य जताते हुए सूरज बोला,,,)





भैया आज तुम जल्दी उठ गए हो इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है मां तो बहुत जल्दी ही नदी पर चली जाती है नहाने के लिए क्योंकि सुबह-सुबह वहां कोई नहीं होता,,।

सही बात है रानी मैं इतनी जल्दी कभी नहीं उठता इसलिए मुझे कुछ पता नहीं है,,,, अच्छा लो यह थैला पकड़ो,,, उसे घर में जाकर रख दो,,,,।

ठीक है भैया,,,(सूरज के हाथ से थैला लेते हुए रानी बोली,,, लेकिन जिस समय वह खेल ले रही थी सूरज की नजर अपनी बहन की छाती ऊपर गई जिस पर उभार पूरे जोश में आ रहे थे एकदम नंगी की तरह गोल गोल सूरज की नजर अपनी बहन की छाती पर बढ़ गई वह दुपट्टा नहीं ली थी एक पल के लिए सूरज अपनी बहन की छाती को देखने लगा लेकिन अगले ही पल वह अपने आप से ही बोला यह क्या कर रहा है तू,,,, ऐसा तो पहले नहीं किया कभी,,, अपने आप को समझाते हुए अपनी नजर को दूसरी तरफ घूमा लिया और उसकी बहन उसके हाथ से थैला लेकर घर के अंदर जाते हुए बोली,,,)





मैं पानी लेकर आता हूं भैया,,,

नहीं रहने दे रानी मैं नदी पर जा रहा हूं,,,

अरे वहां क्यों जा रहे हो थोड़ी देर में मां आ जाएगी,,,

तू नहीं जानती रानी मुखिया की बीवी ने₹2 भी दी है और वह में मा को देने जा रहा हूं,,,

(₹2 का जिक्र सुनते ही रानी एकदम खुश हो गई और बोली)

सच में भैया,,,

हां रे मैं क्यों झूठ बोलूंगा इसलिए तुम्हें नदी पर जा रहा हूं क्योंकि यह मेरी पहली कमाई है मैं मां को देना चाहता हूं,,,,

तो क्या हो गया थोड़ी देर में मां आ जाएगी तो यहां ही दे देना,,,

नहीं नहीं अब मुझे रहा नहीं जा रहा है मैं जा रहा हूं,,,

ठीक है भैया जैसी तुम्हारी मर्जी,,,,।





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(और फिर सूरज नदी की तरफ चल दिया लेकिन नदी की तरफ जाते हुए वह अपने मन में नहीं सोच रहा था कि आज उसकी नजर क्यों खराब हो गई क्यों अपनी बहन को गलत नजर से देख रहा है ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ लेकिन यह वह भूल गया था कि अब वह पूरी तरह से जवान हो चुका था औरतों के हमको का निखार उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रहा था और ऐसा जवान होते लड़कों में सहज ही होता है,, और वैसे भी अपनी बहन से पहले वह अपनी मां को गंदी नजर से देख चुका है,,, लेकिन फिर भी सूरज को थोड़ा अजीब लग रहा था लेकिन अपने दिमाग से यह सब बातें निकालकर वह नदी की तरफ आगे बढ़ रहा था,,,, उसके पिताजी किसी काम की वजह से गांव से बाहर गए हुए थे,,,,,,,, इसलिए वह अपनी खुशी अपनी मां को बताना चाहता था,,,,।





थोड़ी ही देर में वह नदी पर पहुंच गया था,,, नदी पर कोई नहीं था चारों तरफ जंगली झाड़ियां होगी हुई थी और नदी मंद मंद धीरे-धीरे बह रही थी नदी का किनारा बेहद खूबसूरत लग रहा था क्योंकि यहां ठंडी हवा बह रही थी सूरज नदी पर पहुंचकर चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगा लेकिन कोई नजर नहीं आ रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां नदी पर आई थी या नहीं क्योंकि रास्ते में तो वह उसे मीली नहीं थी,,। फिर भी वह चारों तरफ नजर घूमाकर इधर-उधर देख रहा था लेकिन उसकी मां का कहीं अता पता नहीं था,, वह अपने मन में सोचने लगा कि लगता है उसकी मां नदी पर आई ही नहीं लेकिन तभी दूसरी तरफ उसे पानी में से,,,छपाक छपाक की आवाज आने लगी,,,, और वह उसे दिशा में देखने लगा जहां पर ढेर सारी झाड़ियां थी बड़े-बड़े पत्थर से उसके पीछे से आवाज आ रही थी,,, वह अपने मन में सोचने लगा कि इतनी घनी झाड़ियों के पीछे कौन है,,, और इसलिए उत्सुकता बस उस तरफ जाने लगा,,,।





जैसे-जैसे सूरज उसे जगह के करीब जा रहा था वैसे-वैसे आवाज तेज होती जा रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई नदी में नहा रहा है,,,, फिर भी सूरज देखना चाहता था की आखिरकार इतनी घनी जंगली झाड़ियां के बीच कौन है,,, पल भर के लिए उसका मन कहा कि कहीं जंगली जानवर तो नहीं क्योंकि यहां कोई आता नहीं है नहाने के लिए और वह वहां से चला जाना चाहता था लेकिन फिर भी उसकी उत्सव का बढ़ती जा रही थी यह धीरे-धीरे वह उसे जगह पर पहुंच गया और बड़े से पत्थर के आगे जैसे ही पहुंचा तो उसे नदी एकदम साफ दिखाई देने लगी और नदी के किनारे तकरीबन किनारे से तीन चार मीटर दूरी पर,,, उसे कुछ दिखाई नहीं दिया बस गोल-गोल तरंगे घूमती हुई नजर आने लगी वह सोच पड़ गया कि यह क्या हो रहा है,,,,।





उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्याहै,,, लेकिन तभी उसे जगह से एक बेहद खूबसूरत औरत नहाते हुए भारी उसका सर नदी के पानी से बाहर की तरफ निकला उसके मुंह में पानी भरा हुआ था और वह मुंह से पानी की पिचकारी नदी नहीं मार रही थी उसकी आंखें बंद थी,,,, पल भर के लिए तो उसे समझ में नहीं आया कि यह औरत कौन है लेकिन जब वह गौर से देखा तो उसके होश उड़ गए,,, क्योंकि वह औरत कोई और नहीं उसकी मां थी उसका दिल जोरों से धड़कने लगा,,, वह बड़े से पत्थर के पास ठीक अपनी मां के सामने चार-पांच मीटर की दूरी पर खड़ा था उसकी मां की नजर उसे करना पड़े इसलिए वह तुरंत बड़े से पत्थर के पीछे छुप गया और अपनी मां की तरफ देखने लगा,,,।





पहले वाला सूरज होता तो अपनी मां को इस अवस्था में देखने से पहले वह वहां से चला जाता लेकिन अब सूरज बदल चुका था पूरी तरह से जवान हो चुका था जवान क्या हुआ एक ही रात में मर्द बन चुका था औरतों की तरफ आकर्षित होना उसकी कमजोरी बन चुकी थी और अब भले चाहे उसकी मां हो या बहन उसका आकर्षण अपनी मां बहन की तरफ भी बढ़ने लगा था इसलिए वह बड़े से पत्थर के पीछे छुप गया था ताकि उसकी मां की नजर उस पर पड ना सके,,,।

सूरज का दिल जोरों से धढक रहा था क्योंकि पहली बार वह अपनी मां को नदी में नहाते हुए देख रहा था,, अभी भी नदी में केवल उसकी मां का सिर ही दिखाई दे रहा था और वह बड़े मजे लेकर नहा रहे थे सूरज के मन में यह उत्सुकता बढ़ रही थी की नदी के अंदर उसकी मां कपड़े पहनी है या बिना कपड़े के अंदर घुसकर नहा रही है यही देखने के लिए उसका मन तड़प रहा था और अपने मन में प्रार्थना भी कर रहा था कि पास उसकी मां एकदम नंगी होकर नदी में नहा रही हो तो मजा आ जाए,,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि जिस जगह पर उसकी मां खड़ी होकर नहा रही थी वहां पर पानी केवल उसकी छाती तक ही था,,,, और उसकी मां की कब काठी थोड़ी लंबी थी इसलिए अच्छी तरह से जानता था की खड़ी होने पर उसकी मां की छाती जरूर नजर आएगी,,,।





वह अपने मन में यही सोच रहा था कि तभी उसकी मां एक बार डुबकी लेकर फिर से नदी के पानी से ऊपर की तरफ उठी और इस बार वह पूरी तरह से नदी के पानी में खड़ी हो गई और कमर के नीचे का ऊपर पानी से ऊपर की तरफ उठी और इस बार वह पूरी तरह से नदी के पानी में खड़ी हो गई ,, और वही हुआ जिसके लिए सूरज प्रार्थना कर रहा था वाकई में उसकी मां कपड़े नहीं पहनी थी उसकी नंगी छातिया एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,, सूरज तो अपनी मां की चूचियों को देखकर पागल हो गया पर तुरंत उसे रात वाली घटना याद आने लगी मुखिया की बीवी बिस्तर पर नंगी याद आने लगी और अनजाने में ही सूरज मुखिया की बीवी की चूचियों से अपनी मां की चूचियों की तुलना करने लगा जिसमें उसकी मां की चुचिया मुखिया की बीवी की चूचियों से बेहद कसावदार और उससे थोड़ी सी बड़ी ही नजर आ रही थी,,, सूरज तो अपनी मां का यह रूप देखकर एकदम पागल हो गया उसकी आंखों में वासना के शोले नजर आने लगे,,,, उसकी माफी नदी के पानी को अपनी हथेली में लेकर बार-बार उसे अपनी छतिया पर दे मार रही थी जिसकी वजह से पानी का फवारा उसकी छतिया से टकराकर वापस पानी में गिर रहा था और पानी की बूंदे उसकी मां की चूचियों से मोती के दाने की तरह फिसल रही थी,,,, यह सब देखकर सूरज पागल हुआ जा रहा था,,,।

नदी में नहाती हुई सुनैना





सुनैना इस बात से बेखबर की उसका बेटा छूप कर उसकी नंगी जवानी को देख रहा है वह अपनी ही मस्ती में नदी में छप छपा कर नहा रही थी,,, सूरज अपनी मां का यह रूप देखकर पागल हुआ जा रहा था,, क्योंकि आज तक सूरज अपनी मां को इस तरह से नहाते हुए नहीं देखा था कमर के नीचे का भाग उसे अभी दिखाई नहीं दे रहा था उसे ऐसा ही लग रहा था कि ऊपर ना सही नीचे जरूर उसकी मां पेटिकोट पहनी होगी,,,, कुछ देर तक सुनैना इसी तरह से नहाती रही और सूरज बड़े से पत्थर के पीछे छुपकर अपनी मां की मदहोश जवानी को देखता रहा,, कुछ देर नहा देने के बाद उसकी मां चलते हुए थोड़ा सा आगे की तरफ आई और जैसे ही आगे की तरफ आई कमर के नीचे का भाग भी पानी से बाहर आता हुआ नजर आने लगा और इस नजारे को देखकर तो सूरज की आंखें फटी की फटी रह गई सूरज ने कभी कल्पना भी नहीं किया था कि वह अपनी मां को इस रूप में कभी देख पाएगा,,, ।

नदी मे सुनैना नहाती हुई





वैसे तो उसने उसे दिन भी कल्पना नहीं किया था कि वह अपनी मां को चुदवाते हुए देख पाएगा लेकिन उसे दिन की अपेक्षा आज का उसकी मां का रूप कुछ ज्यादा ही कामुक नजर आ रहा था,,,, जल्द ही सूरज को पता चल गया कि उसकी मां नदी में पूरी तरह से नंगी होकर नहा रही है,,, और यह ऐसा सही उसके लंड को खड़ा करने के लिए काफी था उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था,,,। इस तरह से खुले तोर पे उसने आज तक अपनी मां को नंगी नहीं देखा था,,, उसके लिए पहला मौका था जब वह नदी पर वह अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देख रहा था और एक औरत नदी पर नंगी होने के बाद कितनी खूबसूरत लगती है यह भी उसे आज ही एहसास हो रहा था,,,,।





नदी का पानी उसकी मोटी मोटी केले के समान चिकनी जांघों तक था,,, सूरज की नजर अपने आप ही अपनी मां की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार की तरफ जा रही थी लेकिन उसे इतनी दूर से अपनी मां की बुर एकदम साफ नजर नहीं आ रही थी बस हल्के-हल्के बालों का कुछ अच्छा नजर आ रहा है और इससे अवस्था में भी उसकी मां स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा की तरह खूबसूरत नजर आ रही थी अपनी मां की मधुमक कर देने वाली जवानी को देखकर सूरज का हाथ अपने आप ही अपने पजामें के ऊपर से अपने लंड पर चला गया था जिसे वह धीरे-धीरे दबा रहा था,,, और अपनी मां की नंगी जवानी देखते हुए अपने लंड को दबाने में उसे बहुत अच्छा लग रहा था,,,, सुनैना पूरी तरह से नहाने में मस्त थी उसे बिल्कुल भी आभास नहीं हो रहा था कि,,, ठीक उसकी आंखों के सामने ही उसका बेटा उसे छुप कर देख रहा है और अगर शायद यह पता चल जाता तो वह फिर से पानी की गहराई में जाकर अपने नंगे बदन को छुपा लेती,,,।

सूरज के तन बदन में आग लग रही थी रात भर मुखिया की बीवी की मदद कर देने वाली जवानी को भोगने के बाद एक बार फिर से उसकी मां चोदने के लिए आतुर हो रहा था तड़प रहा था,,, लेकिन यहां पर ऐसा कोई जुगाड़ नहीं था इसलिए वह अपने हाथ से ही अपने लंड को दबा रहा था,,, बड़े से पत्थर के पीछे छुपकर वह अपनी मां की मदद कर देने वाली जवानी को देख ही रहा था कि उसकी मां पानी में फिर से अपना क्रिया कलाप दिखाते हुए,,, दूसरी तरफ घूमने लगी और सूरज का दिन जोरों से धड़कने लगा क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां दूसरी तरफ घूमेगी तो उसकी बड़ी-बड़ी गांड उसकी आंखों के सामने नजर आ जाएगी और वह अपनी मां की नंगी गांड को देख सकेगा लेकिन उसकी गांड देख पाता इससे पहले उसकी मां एक बार फिर से पानी के अंदर डुबकी लगा दी,,,, सूरज का हाल बेहाल हुआ जा रहा था वह अपनी मां की गांड को देखने के लिए तरस रहा था,,, तभी कुछ ही क्षण उसकी मां पानी में डुबकी लगाकर बाहर निकली और पूरी तरह से खड़ी हो गई और इस बार सूरज के दिल पर हथौड़े चलने लगे उसकी मां की नंगी गांड उसकी आंखों के सामने थी जिस पर पानी की बूंदे फिसल रही थी गांड की दोनों फांकों के बीच की गहराई इतनी गजब की थी कि सूरज का मन उस गहराई में डूब जाने को कर रहा था,, ,,, सूरज अपनी मां की गांड को देखा ही रह गया और इसी अवस्था में सूरज की मां दो-तीन बार पानी में डुबकी लगाई और खड़ी हुई यह नजारा पूरी तरह से सूरज को उत्तेजित कर गया था,,,,।

सूरज का मन अपने लंड को बाहर निकाल कर अपनी मां को नंगी देखकर मुठिया मारने को कर रहा था,,, और ऐसा करने के लिए वह अपने पजामे को नीचे करके अपने खड़े लंड को बाहर निकाल भी लिया था लेकिन उसकी मां नहा चुकी थी और पानी से बाहर आ रही थी और अब सूरज का वहा खड़े रहना बिलकुल भी उचित नहीं था,,, इसलिए वह वापस पजामा पहन कर दबे पांव वहां से पीछे आ गया,,,।



 
रात भर जो कुछ भी सूरज ने मुखिया की बीवी के साथ किया था उसका नशा उसकी खुमारी अभी उसके बदन से उसके जेहन से निकली नहीं थी कि अपनी मां को नदी में एकदम नंगी नहाते हुए देख लिया,,,, नदी में नहाती हुई अपनी नंगी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को देखकर पल भर में ही सूरज मुखिया की बीवी को भूल गया,,,, पहली बार अपनी मां को नदी में नहाते हुए देख रहा था वह भी संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में,,, उसने कभी सोचा भी नहीं था कि उसकी मां अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर नदी में नहाने के लिए उतरती है ,,, सूरज तो यह जानकर पूरी तरह से हतप्रभ हो गया था वह कभी सोचा भी नहीं था कि नदी पर उसे इस तरह का दृश्य देखने को मिलेगा,,,।





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नदी पर सूरज आया था अपनी मां को अपनी जिंदगी की पहली कमाई देने जो रात भर उसने मुखिया की बीवी के साथ तन तोड़ मेहनत किया था उसके आवाज में उसे सब्जी तरकारी पके हुए आम और ₹2 नगद मिले थे,,, सब्जी तरकारी और आम तो उसने घर पर अपनी बहन को देखकर आ गया था और ₹2 देने के लिए अपनी मां के पास आया था नदी पर लेकिन वह नहीं जानता था की नदी पर तो बहुमूल्य अतुल्नीय दृश्य देखने को मिलेगा इसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था,,, घर पर बने गुसलखाने में अक्सर वह नहाती थी लेकिन कुछ दिनों से वह नदी पर नहाने के लिए आ रही थी गुशल खाने में जब वह नहाती थी तब सूरज हमेशा ईर्द गिर्द ही रहता था लेकिन कभी भी गुसलखाने में झांकने की उसने कोशिश नहीं किया था और ना ही कभी उसे इस चीज की जरूरत पड़ी थी,, लेकिन अब वक्त और हालात दोनों बदल चुके थे मुखिया की बीवी के मदहोश कर देने वाले बदन के दर्शन के साथ-साथ वह उसका भोग भी लगा चुका था जिसके चलते वह अपने बदन में मर्दाना एहसास को महसूस कर रहा था,,,, इसलिए तो अपनी मां को नहाते हुए देख कर वह अपनी नजरों को हटा नहीं पाया,,,।





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नदी में नहाती हुई सुनैना वैसे भी भला की खूबसूरत लग रही थी अगर सूरज की जगह कोई और होता तो वह भी अपनी नजरों को उस जगह से हटा नहीं पाता,, सूरज भी पागलों की तरह अपनी मां के खूबसूरत नंगे बदन को देख रहा था अपनी मां को नग्न अवस्था में देखने का यह उसका दूसरा मौका था,, पहली बार तो वह अपने घर में ही अपनी मां को नंगी होकर अपने ही पिताजी से चुदवाते हुए देखा था लेकिन उस समय दरवाजे के छोटे से सुराख से उसे ज्यादा कुछ देखने को मिला नहीं,, था लेकिन आज सब कुछ पर्याप्त मात्रा में था समय भी था और देखने को बहुत कुछ भी था नदी में नहाती हुई सुनैना इस बात से अनजान थी कि उसका बेटा चोरी छुपे बड़े से पत्थर के पीछे छुपकर सब कुछ देख रहा है अगर उसे इस बात का एहसास होता तो शायद वह ऐसा करती भी नहीं,,,, अपनी मां की बड़ी-बड़ी नंगी गांड देखकर उसे पैर फिसलते हुए पानी की बूंदे को देखकर खुद उसका ईमान फिसलने लगा था खरबूजे जैसी गोल गोल चूचियां उसके होश उड़ा रही थी,,, टांगों के बीच का त्रिकोण आकार उसके मुंह में पानी ला रहा था उस पर हल्के हल्के बाल उसका लंड खड़ा करने के लिए पर्याप्त था वह अपनी जवानी की गर्मी को अपनी मां के नंगे बदन को देखकर कुछ आना चाहता था जिसके लिए उसने अपने पजामे को नीचे भी कर दिया था लेकिन उसी समय सुनैना नहा कर बाहर आ रही थी और सूरज को सुनहरे मौके को छोड़ना पड़ा और वहां से धीरे से खसक लिया,,,।





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अब तो सूरज की हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी,,, अब तक उसकी आंखों के सामने मुखिया की बीवी का हर एक अंग नजर आ रहा था जिसके साथ रात भर उसने जी भर कर खेला था लेकिन पल भर में ही उसके जेहन ने मुखिया की बीवी की जगह सुनैना की जवानी का नजारा संजो लिया था,,,, सूरज के देखने सोचने का नजरिया पूरी तरह से बदल चुका था,,। नदी से लौटने बाद सूरज अपने घर नहीं गया बल्कि इधर-उधर घूम कर अपना समय व्यतीत करने लगा वह सही समय पर घर पर जाना चाहता था उसका मन नहीं लग रहा था बार-बार उसकी आंखों के सामने नदी में नहाती हुई उसकी मां नजर आ रही थी उसकी बड़ी-बड़ी चूचीया,, बड़ी-बड़ी गांड उसका गोरा बदन,,, नाचने लग जा रहा था,, लाख कोशिशों के बाद भी सूरज का ध्यान अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी से हट नहीं पा रही थी,,, बार-बार उसका लंड खड़ा हो जा रहा था,,,,।





सूरज एकदम परेशान हो चुका था उसके मन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह बार-बार अपनी मां के बारे में गंदे विचार अपने मन में जा रहा था वह अपने आप से ही सवाल कर रहा था की क्या वह अपनी मां को चोद सकता है,,,,, अगर ऐसा हो सका तो क्या इसमें कोई परेशानी तो नहीं है कि किसी को पता चल गया तो,,,, तब तो गजब हो जाएगा पूरे गांव में बदनाम हो जाएगा लेकिन ऐसा कैसे होगा यह सब कुछ तो चार दीवारी के अंदर होगा,, जैसा मुखिया की बीवी के साथ हुआ झोपड़ी के अंदर रात को जो कुछ भी होगा इसके बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं है और तब तक किसी को पता नहीं चलेगा जब तक की उन दोनों में से कोई यह किसी को बताया नहीं और यह बात दोनों किसी को बताने वाले नहीं है इसके बारे में खुद मुखिया की बीवी भी हिदायत दे चुकी है,,, अगर ऐसा होगा तो उसके और उसकी मां के बीच भी ऐसा संबंध संभव है चार दिवारी के अंदर सब कुछ मुमकिन है लेकिन यह सब होगा कैसे,,, इन सबके लिए मां कैसे तैयार होगी,,, मां कभी भी ऐसा करने को तैयार नहीं होगी,,,, लेकिन मैं क्या करूं मेरी तो हालत खराब हो रही है,,,।





सूरज गांव से बाहर तालाब के किनारे बैठकर इसी बारे में अपने आप से ही चर्चा विचार कर रहा था उसके मन में दव्ंद युद्ध चल रहा था,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,, वह अपने आप से ही अपने मन में ही बात करते हुए बोला,,,, भला मां अपने ही बेटे से चुदवाने के लिए क्यों तैयार होगी,,,,,, मेरा मन भले ही उनको चोदने के लिए कर रहा है लेकिन मां कभी तैयार नहीं होगी,,, अपने ही सवाल का जवाब अपने आप से ही देते हुए वह बोला,,, क्यों नहीं होगी वह भी तो एक औरत है औरत के जज्बात औरत की चाहत औरत का मन अगर खून में नहीं होता तो कमरे के अंदर पिताजी से क्यों चुदवाती और वह भी एकदम नंगी होकर,,, मुखिया की बीवी थी तो शादीशुदा है उसका भी तो पति है लेकिन वह मेरे साथ क्यों चुदवाई,,,, मुखिया की बीवी की तरह मा भी मुझसे चुदवा सकती है बस हालात और मौका सही होना चाहिए जैसा की मुखिया की बीवी के साथ हुआ था ,,, अगर वह आम की रखवाली करने मुझे रात को अपने साथ ना ले जाती तो शायद यह सब कभी ना होता,,,।





रात की तन्हाई एक झोपड़ी में मर्द और औरत का होना उसमें औरत के जज्बात भड़क जाना मौके की नजाकत को देखते हुए औरत का मन बहुत जल्दी बहक जाता है,,, अगर ऐसा कोई हालात उसकी मां के सामने आएगा तो जरूर उसकी मां भी उसके साथ हम बिस्तर होने के लिए तैयार हो जाएगी,,, और यह ख्याल मन में आते ही उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे,,,,, वह यह सब सो ही रहा था कि तभी पीछे से उसकी पीठ पर,,, हल्के से थपथपाहट हुई और वह पलट कर पीछे देखा तो सोनू खड़ा था और वह बोला,,,।

क्या दोस्त क्या हो रहा है,,, उसे दिन की तरह कहीं आज भी तो किसी को पेशाब करते हुए देखने का इरादा नहीं है,,,,





नहीं यार उसे दिन के बाद तो अभी तक कुछ भी देखने को नहीं मिला,,,,(सूरज अपने दोस्त से झूठ बोलते हुए बोला जबकि वह जवानी के समंदर में डुबकी लगा चुका था उसका दोस्त तो किनारे से ही और सूरज ने तो अपनी कश्ती तूफान में लेकर उतर गया था जिसका आनंद वह ले रहा था,,,)

मेरा भी कुछ ऐसा ही है उसे दिन के बाद चाची को भी देखने का मौका नहीं मिला,,,,।

यार सोनू मुझे समझ में नहीं आता कि तू अपनी चाची के पीछे क्यों पड़ा है कोई अपने परिवार में किसी औरत के पीछे पड़ता है क्या,,,?(सूरज ऊपरी मन से सोनू के मन की बात जानने के लिए बोला)





घर में जब खूबसूरत औरत हो तो बाहर नजर कहां जाती है सच कहूं तो चाची के ऊपर मेरा दिल आ गया है,,,,।

चाची को पता चल गया तो तेरी खैर नहीं है,, ।

हां यह बात तो है लेकिन फिर भी चाची को सही कहूं तो मोटे तगड़े लंड की जरूरत है,,, मुझे लगता नहीं है कि चाचा जी से कुछ होता होगा,,,

मतलब मैं कुछ समझा नहीं,,,

अरे यार तू एकदम बुद्धू है चाचा पीती कितनी हट्टी कट्टी खेली खाई औरत है और मेरे चाचा जी को देख एकदम मरियल से हैं,,,, तेरे को लगता है कि मोटी तगड़ी चाची की जवानी की प्यास मेरा पतला सा चाचा बुझा पाता होगा,,,।

तो तू भी तो मरियल सा है तुझे क्या लगता है कि तू अपनी चाची की प्यास बुझा लेगा,,,





तो क्या मुझे पूरा विश्वास है,,, चाचा को मेरे जैसा जवां मर्द चाहिए जो धक्के पर धक्का लगाता रहे चाची का पसीना छुड़ा दे,,,,।

(सोनू की बात सुनते ही,,,, सूरज की आंखों के सामने रात वाला दृश्य नजर आने लगा जब मुखिया की बीवी की दोनों टांगें खोलकर अपनी कमर जोर जोर से हिला रहा था,,, और उसे पूरा विश्वास था किया कर सोनू की चाची उसे चोदने के लिए मिल जाए तो वह उसकी भी प्यास पूरी तरह से बुझा सकता है क्योंकि रात भर में वह पूरी तरह से आत्मविश्वास से भर चुका था,,,, सोनू की बात सुनने के बाद सूरज बोला,,,)

अच्छा बात है तू तू बड़ी-बड़ी करता है लेकिन एक बात बता क्या तुमने कभी किसी औरत की चुदाई किया है जो इतना आत्मविश्वास तेरे में भरा हुआ है,,,

(सूरज की बात सुनकर सोनू खामोश हो गया क्योंकि आज तक उसे ऐसा कोई मौका नहीं मिला था जब किसी औरत को चोदने का उसे सुख प्राप्त हो,,, और तो कोई इसी तरह से सोच करते हुए देखकर उनके बारे में सोचकर वह अपने हाथ से हिलाकर अपनी जवानी की गर्मी को शांत करता आ रहा था,,,, सूरज की बात सुनकर उसके पास बोलने के लिए शब्द नहीं थे लेकिन फिर भी बात बनाते हुए बोला,,,)

मुखिया की बीवी





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हां हां क्यों नहीं,,,चोदा हु ना,,,

किसे,,,?

ममममम,,,, मेरे मामा की लड़की को,,,,

क्या बकवास कर रहा है मामा की लड़की को,,,

वह कब आ गई ईधर,,,,

वह इधर नहीं आई थी मैं खुद गया था शादी में तब उससे मुलाकात हुई थी और वहीं पर हम दोनों के बीच चुदाई का खेल हुआ था,,,,।

(सूरज अच्छी तरह से जानता था कि सोनू झूठ बोल रहा है क्योंकि उसकी जानकारी के मुताबिक आज तक कभी भी सोनू गांव छोड़कर बाहर किसी रिश्तेदार के वहां गया ही नहीं था लेकिन फिर भी वह सोनू की ज्यादा फजेती नहीं करना चाहता था इसलिए बोला,,,)





तब तो यार तुझे बहुत अनुभव होगा तब सच में तो अपनी चाची को धक्के पर धक्का धक्के पर धक्का लगाकर मत कर देगा,,,, लेकिन क्या तेरी चाची तुझे देगी,,,,

वही तो बात है यार,,,, अगर दे दे तो चोद चेद कर साली को मां बना दु,,,,

अच्छा हां तेरी चाची को तो एक भी बच्चा नहीं है ना,,,

चाचा कमजोर पड़ जाता है यार यह सब में सिर्फ तुझे ही बता रहा हूं कि तू ही मेरा दोस्त है सच्चा जो किसी को कुछ भी नहीं बोलेगा,,,





नहीं नहीं मैं क्यों बोलेगा भला,,,, मुझे तो बहुत खुशी होगी अगर तू अपने लक्ष्य में कामयाब हो गया तो,, तेरी चाची भी खुश हो जाएगी उनकी गोद में एक बच्चा आ जाएगा,,,, भले ही दुनिया के सामने तो उसका भाई कहलाएगा लेकिन उसकी मां जानती है कि उसका असली बाप तु है,,, ।

यार यह सब बोल कर तू तो मुझे सपना दिखा रहा है,,,आहहहा,, कितना मजा आएगा जब तेरी कहीं बात सच हो जाएगी,,, चाची मुझसे चुदवा चुदवा कर पेट से हो जाएगी,,,,ऊफफ ,,,(सोनू उसे पाल के बारे में सोचकर ही मस्त हुआ जा रहा था कि तभी,,, दूर से आ रही आवाज दोनों के कानों में पड़ी,,,,)

सोनु,,,ओ,,,,सोनु,,,,,।





अरे यार यह तो तेरी चाची की आवाज है,,,(सूरज तुरंत इधर-उधर देखते हुए बोला)

हां यार यह तो चाची की आवाज है लेकिन बोल कहां से रही है,,,,,।

(सोनू का इतना कहना था कि सूरज की नजर दूर से हरी हरी घास का गठ्ठर सर पर लादे हुए दूर से आई हुई सोनू की चाची पर पड़ गई और सूरज बोला,,,)

वह देखो आ रही है तेरी चाची बोझा उठाए हुए,,,,

(सूरज के द्वारा दिखाई गई जगह पर सोनू की नजर पड़ी तो वह एकदम से बोला)

बाप रे मर गए,,,

क्यों क्या हो गया,,,,?





अरे देख नहीं रहा है चाची कितना बड़ा बोझा उठा कर ला रही है,,,, अगर मैं उसके पास गया तो मुझे ही उठा कर लाना पड़ेगा,,,,

तो इसमें क्या हो गया अभी कुछ देर पहले तो बड़ा मर्द बना फिर रहा था की चाची की चुदाई कर करके पेट से कर देगा मां बना देगा और इतना सा बोझा उठाने में तेरा दम निकल जा रहा है,,, जब तुझे अपनी चाची को गोद में उठाकर चोदना पड़ेगा तब क्या करेगा,,,, क्या तब भी यही बोलेगा कि चाची मैं तुमको उठा नहीं पाऊंगा बस सीधे-सीधे लेट जाओ,,, साले यह सुनकर तेरी चाची लात मार कर चली जाएगी,,,,।

अरे सुन रहा है कि बहरा हो गया है,,,,(फिर से दूर से ही उसकी चाची आवाज लगाते हुए बोली,,)





देख तेरी चाची वहां से चिल्ला रही है यही मौका है चाची की नजर में ऊंचा उठने का,,, अगर तो उनकी थोड़ी बहुत मदद करते रहेगा तो जरूर तू अपने मकसद में कामयाब हो जाएगा,,,,

नहीं नहीं यार मैं नहीं जाऊंगा तू जानता है इतना बड़ा बोझा मैं नहीं उठा पाता,,,

अब बुला तो तुझे रही है चाची,,, तू कहे तो मैं चला जाऊं लेकिन फिर जानता है ना तेरी जगह तेरी चाची मुझे दे देगी और फिर ले धक्के पर धक्का धक्के पर धक्का,,,,

नहीं नहीं सूरज ऐसा बिल्कुल भी मत करना,,,,,, और वैसे भी चाची बहुत खड़ूस है बहुत गुस्से वाली है तुझे देगी भी नहीं,,,,

मुझे चाहिए भी नहीं,,,,(सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसके पास मुखिया की बीवी है जो पूरी तरह से जवानी से भरी हुई है और उसकी चाची से लाख गुना ज्यादा खूबसूरत है भला ऐसी औरत को छोड़कर सोनू की चाची के पीछे क्यों पड़ता वो,,, इसलिए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) लेकिन तेरी चाची का हाल देख गर्मी में पसीने से डूबी होगी,,,,।

अरे हराम जादे वहां बैठा बैठा क्या कर रहा है,,, जल्दी आ,,,,(इतना कहते हुए सोनू की चाची सर पर रखा हुआ बोझा नीचे रख दी,,,)





देख तेरी चाची तुझे गाली दे रही है,,,

मैं बोला था ना साली बहुत गुस्से वाली है,,,

इसीलिए तो कह रहा हूं चल जल्दी मदद कर दे उनकी वरना गुस्से में न जाने कितनी गाली दे डालेंगी और कहीं घर पर जाकर तेरी मां से शिकायत कर दी तो तेरी खैर नहीं है,,,,(इतना कहकर सूरज सोनू का हाथ पकड़ लिया और उसे उसकी चाची के पास ले जाने लगा,,, सोनू नहीं जाना चाहता था लेकिन सूरज उसे जबरदस्ती लेकर जा रहा था क्योंकि सूरज इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि इतना बड़ा बोझा सोनू कभी नहीं उठा पाएगा,,,, और ऐसे में उसकी चाची के सामने सोनू की मर्दानगी धरी की धरी रह जाएगी और वह खुद बोझा उठा कर,,, सोनू की चाची को प्रभावित कर लेगा,,,, और यही सोच कर वह सोनू को लिए हुए उसकी चाची के पास जाने लगा और थोड़ी देर में वह उसकी चाची के पास पहुंच गया उसकी चाची खेतों के बीच में से गुजरती हुई मिट्टी के ऊंचे मेड पर खड़ी थी जहां पर बच के चलना होता है वरना पैर फिसलने पर सीधा खेत में,,,,, जैसे ही सूरज सोनू को लेकर उसकी चाची के पास पहुंचा उसकी चाची गुस्से में तमतमाते हुए बोली,,,)





इतनी देर से तुझे बुला रही हूं तुझे समझ में नहीं आता,,,, एक भी काम तो घर पर करता नहीं है बस इधर-उधर हमारा लड़कों की तरह घूमते रहता है,,,,

मैं इसको यही समझा रहा था चाची,,,,(सूरज भी उसके सुर में सुर मिलाता हुआ बोला,,,,)

तेरे साथ घूमता रहता है लेकिन तु ईसे कुछ सीखाता क्यों नहीं,,,,(सोनू की चाची सूरज से बोली,,,,)

अब मैं कर भी क्या सकता हूं चाची,,, मैं तो सिर्फ समझ सकता हूं इससे ज्यादा हमें कुछ कर नहीं सकता करना तो इसे चाहिए,,,,।

यही तो बात यह हराम जादा कुछ करता नहीं है,,, दीदी भी,,(सोनू की मा) इससे परेशान हो गई है,,,

बस करो चाची रहने दो,,, करता तो हूं घर का काम,,,





कहां करता रहता है,,,,(सोनू की चाची गुस्से में अपने दोनों हाथ को अपनी कमर पर टिकाकर थोड़ा सा आगे छुपाकर उससे गुस्से में बात कर रही थी जिसकी वजह से उनकी चूचियां ब्लाउज से अच्छी तरह से बाहर की तरफ झांक रही थी जिस पर सूरज की नजर पड़ गई थी सूरज सोनू की चाची की चूचियों को ही देख रहा था,,,, सूरज की चाची भी अच्छी खासी दिखती थी बदन भी भरा हुआ था सूरज नजर चुरा कर पीछे की तरफ देखा तो सोनू की चाची का पिछवाड़ा भी गजब ढा रहा था सब मिलकर सोनू की चाची वाकई में चोदने लायक थी,,, सोनू की चाची अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) सुबह-सुबह तुझे कुएं पर से पानी लाने के लिए बोली थी ना गया था,,,।

भूल गया था,,,





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देखा,,, कैसे जवाब दे रहा है,,,, सुबह से एक भी काम नहीं किया है,,, गाय बकरियां चारा के लिए चिल्ला रही है,,, दीदी ने इस घास काट कर लाने के लिए बोली तो वह भी नहीं सुना और घूमने निकल गया मुझे आना पड़ा और आप देखो बोझा ले जाना है तो भी नानी याद आ रही है,,, (सोनू की चाची सूरज की तरफ देखकर सोनू को खरी खोटी सुना रही थी सूरज को बहुत अच्छा लग रहा था,,,, सूरज को आज एहसास हो रहा था कि वाकई में सोनु की चाची एकदम गदराई जवानी की मालकिन थी और अपने मन में अभी सो रहा था कि अगर सोनू को उसकी चाची चोदने को मिल जाती तो समझ लो उसके हाथ में सोने की चिड़िया लग जाती लेकिन उसके तेवर देखकर वह समझ गया था कि सोनू को यह कभी भी नहीं देने वाली सोनू की चाची की बात सुनकर सूरज आग में घी डालते हुए बोला,,,)





सोनू तुझे ऐसा नहीं करना चाहिए जब घर के लोग काम करने के लिए बोले तो घर का काम कर देना चाहिए मैं तो तुझे अच्छा लड़का समझता था लेकिन तू तो दूसरों की तरह निकला,,,,,, अब मुझे ही देख ले ,, घर से मैं तभी निकलता हूं जब घर का काम पूरा कर लेता हूं गाय बकरियों को चार देकर पानी देकर मां के काम में हाथ बटाकर ही घर से बाहर निकलता हूं,,,

सिख जरा कुछ अपने दोस्त से,,,,(सोनू की चाची सूरज की तरफ देखते हुए बोली,,, सोनू को बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रहा था वह अच्छी तरह से समझ रहा था कि सूरज उसकी बेइज्जती करवा रहा है,,,, लेकिन कुछ कर सकने में असमर्थ था,,,)

जाने दो चाची बोझा इसके सर पर रख दो यह लेकर चला जाएगा,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज नीचे की तरफ झुका और घास के बड़े ढेर को हाथों में उठा लिया और उसे सोनू के सर पर रखने लगा सोनू जानता था कि अब इसके सिवा दूसरा कोई रास्ता नहीं है और इस बात को भी अच्छी तरह से जानता था कि वह इतना बड़ा बोझा उठा कर चल नहीं सकता,,, लेकिन सूरज जानबूझकर यह सब कर रहा था देखते ही देखते सूरज उस बड़े से बोझे को सोनू के सर पर रख दिया और बोला,,,)





अब धीरे-धीरे चल सोनू हम दोनों पीछे ही हैं,,,

(इतना कहकर सूरज और सोनू की चाची दोनों साथ में चलने लगी,,, लेकिन सूरज पीछे था और सोनू की चाची आगे आगे चल रही थी,,, इस मुद्रा में चलते हुए सूरज को बहुत ही अच्छा लग रहा था उसे रात वाली घटना याद आ गई थी इसी तरह से मुखिया की बीवी आगे की चल रही थी और सूरज पीछे-पीछे और इस तरह से सूरज को सोनू की चाची का पिछवाड़ा देखने में बहुत मजा आ रहा था,,, सोनू की चाची की गांड भी कुछ ज्यादा बड़ी-बड़ी थी,,, ।

संभाल कर चलना,,,, नहीं तो गिर जाएगा,,,,(सोनू की चाची का इतना कहना था कि वाकई में सोनू का पेड़ लड़खड़ाया और वहां मिट्टी के मेड़ पर से नीचे खेतों में जा गिरा वह तो उसे चोट नहीं आई लेकिन वह पूरी तरह से असफल हो गया था उसकी चाची का गुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा,,,,)





हरामी खाने को तो थाली भर भर कर खाता है,,,, और थोड़ा सा भार उठाने को बोल दो तो नानी याद आ जाती है,,, लगता है मुझे ही उठा कर जाना पड़ेगा,,,(इतना कहते हुए सोनू की चाची खेत में उतरने लगी तो उन्हें रोकते हुए सूरज बोला)

अरे अरे चाचा तुम क्यों बोझा उठाओगी मैं हूं ना मेरे होते हुए तुम्हें बोझा उठाने की जरूरत नहीं है,,,

नहीं नहीं बेटा रहने दे,,,,,

नहीं नहीं रहने दो चाची,,, मैं हूं ना,,,,(सोनू की चाची और सूरज दोनों चुके हुए थे पूजा उठाने के लिए सोनू की चाची खुद उठाने जा रही थी और सूरज उन्हें बोझा उठाने से रोक रहा था,,, और इसी रोकने और उठाने के चक्कर में अनजाने में ही सूरज ने सोनू की चाची की कलाई थाम लिया उनकी चूड़ी सहित,,, सोनू की चाची का दिल एकदम से धक्क से करके रह गया,,, और वह सूरज की तरफ देखने लगी सूरज भी अनजाने में सोनू की चाची की हाथ में आई कलाई को देखकर एकदम से झटका कहा गया था और वह भी सोनू की चाची की तरफ देखने लगा दोनों की आंखें आपस में टकराई और सोनू की चाची एकदम से शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे झुका ली वहीं खड़ा सोनू भी यह सब देख रहा था कुछ पल के लिए सूरज सोनू की चाची की कलाई को थामे रह गया,,, सोनू की चाची को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह पूरी तरह से कसमसा रही थी,,, उनका गला एकदम से सूख गया था और वह अपने थूक से अपने सूखे गले को गिला करने की कोशिश कर रही थी,,, माहौल पूरी तरह से शांत हो गया था और ऐसे में सोनू की चाची के कलाइयों की चूड़ियों की खनक एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,,, जो की वातावरण में मादकता घोल रही थी,,, कुछ पल तक कसमसाने के बाद जब सोनु की चाची को इस बात का एहसास हुआ कि सूरज उसकी कलाई नहीं छोड़ रहा है तो वह धीरे से बोली,,,,)

मेरा हाथ तो छोड़ सूरज,,,

(सोनू की चाची की बात सुनकर सूरज को जैसे एकदम से होश आया हूं और वह एकदम से सोनू की चाची की कलाई छोड़ दिया और एकदम से सहज होते हुए बोला,,,)

मेरे होते हुए तुम क्यों उठाओगी चाची,,,(और इतना कहने के साथ ही अकेले ही उसे बड़े से गट्ठर को उठाकर अपने सर पर रख लिया बढ़िया आराम से चलने लगा रास्ते पर तीनों में से किसी ने एक शब्द नहीं बोला सोनू की चाची तो एकदम बावली हो गई थी जैसे तैसे करके वह घर पर पहुंची सोनू उनके बताएं अनुसार घास के ढेर को रख दिया और नमस्ते करके वहां से जल्दी से अपने घर के लिए निकल गया,,,।

घर पर उसकी मां खाने के लिए उसका इंतजार कर रही थी,,,।
 
सोनू की चाची का गदराया बदन सूरज को भा गया था,,, इसीलिए तो घास का ढेर उठाते समय सूरज उसका हाथ पकड़ लिया था और कुछ देर के लिए दोनों एक दूसरे की आंखों में खो गए थे वैसे तो सूरज को ज्यादा अनुभव औरतों के बारे में था नहीं लेकिन सोनू की चाची की आंखों में भी वही दिख रहा था जो मुखिया की बीवी की आंखों में दिख रहा था इससे सुरज अंदाजा लगा दिया था कि सोनू की चाची का भी हाल मुखिया की बीवी की तरह ही है,,,, वैसे तो सोनू की चाची से सूरज बहुत बार मिल चुका था कई बार मुलाकात हुई थी और बातचीत भी हुई थी क्योंकि वह सोनू का दोस्त जो था उसके घर पर आना जाना अक्सर उसका लगा रहता था लेकिन सूरज ने कभी भी सोनू की चाची को गलत नजरिए से नहीं देखा था लेकिन सोनू ने ही खुद सूरज को झाड़ियां में अपनी चाची को पेशाब करते हुए दिखाया था उसकी बड़ी-बड़ी गांड उसे समय सूरज के तन बदन में आग लगागई थी,,, उस समय सूरज को औरतों के अंगों के बारे में कुछ ज्यादा ज्ञान नहीं था लेकिन फिर भी सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी गांड उसे औरतों के बारे में सोने के लिए मजबूर कर गई थी,,,।





सोनू की चाची की गांड के दर्शन करने के बाद सूरज की मुलाकात मुखिया की बीवी के साथ हुआ था जिसने उसे एक ही बात में स्वर्ग का सुख प्रदान की थी,,, और मुखिया की बीवी के बदौलत ही औरतों के अंगों के बारे में सोचने समझने लगा था उनके तरफ आकर्षित होने लगा था और यही कारण था कि सोनू की चाची की तरफ उसका आकर्षण बढ़ता जा रहा था एक तो सोनू ने खुद अपनी ही चाची की मजबूरी बता दिया था सोनू ने खुद यह बता दिया था कि उसका मरियल सा चाचा उसकी चाची को खुश नहीं कर पाता इससे सूरत समझ गया था की मुखिया की बीवी की तरह सोनू की चाची को भी मोटा तगड़ा लंड चाहिए,,,।





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आगे आगे चल रही सोनू की चाची का पिछवाड़ा देखकर सूरज का लंड खड़ा हो गया था,, और सूरज मन ही मन ठान लिया था कि मुखिया की बीवी की तरह सोनू की चाची की भी बुर में वह झंडा गाड़ के रहेगा,,,, घास के गठ्ठर को सोनू के घर पहुंचाते पहुंचाते ही दोपहर हो गई थी,,, सूरज को बहुत जोरों की भूख लगी हुई थी,,,, दोपहर हो चली थी खाने का समय भी हो रहा था उसे मालूम था कि उसकी मां खाने पर उसका इंतजार कर रही होगी,,, इसलिए वह अपने घर की ओर चल दिया,,,।





नदी पर जो कुछ भी उसने देखा था वह एक अमिट छाप की तरह उसके दिमाग पर छप गया था,,,। उसे अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था की नदी पर जो कुछ भी उसने देखा था वह उसकी मां थी उसे तो ऐसा ही लग रहा था कि जैसे स्वर्ग से कोई अप्सरा नदी में नहाने के लिए नदी में जल क्रीड़ा करने के लिए उतर आई हो,,, उसकी अदाएं उसका भोलापन उसके घने घने बाल पानी में भीगे हुए जो कभी उसकी पीठ से चिपके हुए तो कभी बालों की लट सीधा उसकी चूचियों तक पहुंच रही थी पानी में भीगी हुई बालों की लट बेहद खूबसूरत लग रही थी,,, खरबूजे की तरह गोल-गोल चुचीया एकदम कसी हुई,,, भरावधार बदन होने के बावजूद भी पूरा बदन एकदम कसा हुआ था जरा भी ढीलापन नहीं था,,, गोलाकार नितंबों को देखकर सूरज को ऐसा ही लग रहा था कि जैसे चंद्रमा आसमान को छोड़कर नदी के पानी में उतर आया हो कुल मिलाकर नदी में जो कुछ भी सूरज ने देखा था उसे स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी वह यकीन नहीं कर पा रहा था कि,, नदी के पानी में नहा रही हो औरत स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा नहीं बल्कि उसकी मां है,,,।





सूरज इस बात को तो अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां खूबसूरत है लेकिन इतनी ज्यादा खूबसूरत है यह पहली बार उसे एहसास हो रहा था और पल भर में ही हुआ मुखिया की बीवी की खूबसूरती से अपनी मां की खूबसूरती की तुलना करने लगा था जिसमें उसकी मां की खूबसूरती बाजी मार गई थी,,, इसीलिए तो वह अपनी मां की तरफ आकर्षित हो गया था,,, वैसे भी जब उसका झुकाव औरतों की तरफ बढ़ रहा था,, तभी उसे अपनी मां में एक औरत नजर आने लगी थी जिसकी तरफ वह धीरे-धीरे आकर्षित हो रहा था लेकिन अब वह पक्के तौर पर अपनी मां की जवानी का दीवाना बन गया था,,,,।





देखते ही देखते थोड़ी देर में हो अपने घर पर पहुंच गया जहां पर उसकी मां खाने पर उसका इंतजार कर रही थी,,,, जैसे ही वह घर में प्रवेश किया तो सामने आंगन में ही उसकी मां बेठी हुई थी और उसे देखते ही मुस्कुराते हुए बोली,,,।

अरे खाना तो खा लिया होता,,, सुबह से गांव-गांव भटक रहा है,,,।

भूख नहीं लगी थी मां,,,(अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,)

अभी भी नहीं लगी है,,,

नहीं नहीं अभी तो लगी है इसीलिए तो आया हूं,,,,

तो जल्दी से हाथ मुंह धो ले,,,, मैं खाना परोस देती हूं,,,





ठीक है मां,,,(इतना कहकर वह हाथ मुंह धोने के लिए बाहर चला गया,,,, और हाथ मुंह धोते हुए अपने मन में सोचने लगा,,,,,,, नदी में नहा रही मां मे और अभी खाने पर इंतजार कर रही मां मे कितना जमीन आसमान का फर्क है,,,, इसे देखकर तो लगता ही नहीं है की नदी में यही नहा रही थी और वह भी एकदम नंगी होकर,,,, अभी तो घर में एकदम संस्कारी और मर्यादा से भरी हुई लग रही है लेकिन नदी पर अपने कपड़े उतार कर जिस तरह से नहा रही थी उसे देखने के बाद लगता ही नहीं था कि यह जमीन की कोई औरत है ऐसा ही लग रहा था कि स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा है,,,। इस समय वह अपने बदन के कीमती अंगों को कपड़ों में छुपा रखी है लेकिन उसे समय नदी पर अपने सारे कपड़े उतार कर अपने बेश कीमती अंगों को एकदम उजागर करके नहा रही थी,,,, यह सब सोच कर सूरज अपने मन में सोचने लगा कि कहीं उसकी मां का भी चरित्र मुखिया की बीवी की तरह तो नहीं फिर अपने ही मन में उठकर सवाल का खुद ही जवाब देते हुए वह बोला,,,





नहीं नहीं किसी के कपड़े उतारकर नहाने पर उसके चरित्र के बारे में कैसे जान सकते हो,, नंगी होकर नहाना तो कोई चरित्र का मापदंड नहीं है,,, मां बिल्कुल भी मुखिया की बीवी की तरह नहीं है अगर होती तो वह नदी में खुली जगह पर नहाती ना कि बड़े-बड़े पत्थरों के पीछे,,,, लेकिन फिर भी अगर मन को उसे समय उसे अवस्था में नहाते हुए कोई भी देख लेता तो उसका भी लंड खड़ा हो जाता,,,, यह सब सोते हुए उसे थोड़ी देर हो गई तो उसकी मां खुद घर के बाहर निकाल कर उसे देखने के लिए आई और उसे अभी भी हाथ पैर धोते हुए देखकर बोली,,,)

अभी तक धो नहीं पाया,,,।

(अपनी मां की आवाज सुनते ही वहां एकदम से अपने ख्यालों से बाहर आया और अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला ,,,)





बस बस हो गया,,, तुम चलो मैं आता हूं,,,,,।

ठीक है जल्दी आ,,,,(इतना कहकर वह अंदर की तरफ जाने लगी तब तक सूरज भी उसके पीछे-पीछे चलने लगा आगे आगे चल रही है अपनी मां का पिछवाड़ा देखकर वह अपने मन में कल्पना करने लगा कि अगर यह बिना कपड़े के चलेगी तो कैसी नज़र आएगी और उसकी कल्पना इतनीजबरदस्ती थी कि वह सच में सोचने लगा था कि जैसे उसकी मां सच में उसके आगे आगे बिना कपड़ों के नग्न अवस्था में चल रही है एकदम नंगी होकर और पीछे-पीछे वह चल रहा है,,, नदी पर नहाते हुए अपनी मां को पूरी तरह से नंगी दे चुका था इसलिए उसकी गांड के आकार की कल्पना करना उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी इसलिए वह बड़े आराम से अपनी मां की नंगी गांड की कल्पना कर रहा था और आगे आगे चल रही सुनैना उसके कल्पना के मुताबिक ही जबरदस्त लग रही थी अपनी गांड मटका मटका चल रही थी जिसे देखकर सूरज का लंड अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था,,,।





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आंगन में पहुंचने के बाद सूरज सबसे पहले पालथी मार कर बैठ गया क्योंकि उस समय उसके पजामे में तंबू बना हुआ था,,, और वह नहीं चाहता था कि उसकी मां की नजर उसके पजामे पर पड़े,,,, ठीक उसके सामने उसकी मां बैठ गई थी लेकिन वह सूरज की तरह नहीं बल्कि अपने घुटनों को मोड कर बैठी थी,,,, वह खाना परोस रही थी और खाना परोसते हुए उसकी साड़ी कंधे पर से नीचे सरक गई थी जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम भरावदार छातिया एकदम साफ नजर आ रही थी,, सूरज की नजर सीधे अपनी मां की छाती पर पहुंच गई उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों के बीच की लकीर एकदम साफ नजर आ रही थी जो की बहुत ही लंबी और गहरी थी और उसके सांस लेने की वजह से उसकी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जो कि सूरज को एकदम साफ नजर आ रही थी सूरज एकदम पागल हुआ जा रहा था मदहोश हुआ जा रहा था लेकिन इस बात से उसकी मां पूरी तरह से अनजान थी,,,।





उसकी मां सुनना तो सहज रूप से खाना परोस रही थी वह नहीं जानती थी कि उसका बेटा उसके अंगों को प्यासी नजरों से देख रहा है ब्लाउज में से झांक रही है उसकी चूचियां कबूतर की तरह फड़फड़ा रही थी मानो कि जैसे आजादी के लिए नारा लगा रही हो,,,, अपनी मां की चूचियों को देखकर जो की ब्लाउज में कह दी सूरज को मुखिया की बीवी की चुचीया याद आ गई,,,, क्योंकि सूरजमुखी की बीवी की तरह ही अपनी मां की चूचियों को आजाद करना चाहता था उन्हें ब्लाउज के कैद से बाहर निकलना चाहता था उन्हें खुली हवा में सांस लेने देना चाहता था,,,, लेकिन वह जानता था कि ऐसा करना उसके लिए नामुमकिन है,,,,।





देखते ही देखते सुनैना अपने बेटे के लिए और खुद के लिए खाना परोस ली और खाने की थाली को अपने बेटे की तरफ आगे बढ़कर अपनी जगह से उठने लगी तो वह थोड़ा सा आगे की तरफ झुक गई जिसकी वजह से उसकी सूचना ब्लाउज में एकदम खरबूजे की तरह गोल-गोल लटक गई उसकी चूचियां इतनी भारी हुई थी कि,,, सूरज को इस बात का डर था कि कहीं चूचियों के भार से उसकी मां की ब्लाउज का बटन ना टूट जाए,,,, और सूरज अपने मन में कल्पना करने लगा कि बिना ब्लाउज पहने नंगी चूचियां लेकर अगर उसकी मां उसके लिए खाना परोसेगी तो कैसी नज़र आएगी,,, अपनी मां के बारे में सोच सोच कर उसकी हालत खराब हुए जा रही थी,,,, तभी सुनैना पानी भर लोटा लेकर आई हो इस बार साड़ी को थोड़ा घुटनों के नीचे तक उठकर बैठ गई और पानी भर लोटा बीच में रख दी,,,,,।





अरे खाना तो खा,,,(खाने का निवाला अपने मुंह में डालते हुए सुनैना बोली)

खा रहा हूं मा ,,(और इतना कहकर वह भी खाने लगा,,, खाते-खाते वह बोला,,)

रानी कहां गई दिखाई नहीं दे रही है,,,,

पका हुआ आम लेकर अपनी सहेली के वहां गई है खाते हुए,,,,,,

लगता है आज वह बहुत खुश है,,,

हां खुश क्यों नहीं होगी पका हुआ आम जो मिल गया है,,,,,,।





सही कह रही हो मा रानी को आम बहुत पसंद है,,,

रानी को ही क्यों मुझे भी बहुत पसंद है लेकिन क्या करें,,, मौसम चल जाता है लेकिन जी भर कर आम खाने को नहीं मिलता,,,,।

लेकिन मैं और रानी बगीचे में आम तोड़ कर तो लाए थे,,,।

अरे उसे बगीचे के हम तो केवल अचार बनाने को ही काम आते हैं पकाने पर भी वह ठीक तरह से पकता नहीं है,,,(खाना खाते हुए सुनैना पूरी इस बार वह अपनी साड़ी को अपने कंधे से गिरने नहीं दी थी और सूरज अपने मन में यही चाहता था कि किसी भी तरह से उसकी मां की साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर जाए तो एक बार फिर से उसे बेहद खूबसूरत नजारा देखने को मिल जाए,,,, वैसे भी सूरज की तरह हर मर्दों कि यही फितरत होती है औरत को भले ही कितनी बार नंगी देखने अपने ही बिस्तर पर भोग ले लेकिन हर एक बार औरत के अंगों से उनकी नई ख्वाहिश जागने लगती है जिसमें सूरज भी बाकात नहीं था।)





और मुखिया के बगीचे का आम,,,(खाना खाते हुए सूरज अपनी मां से बोला)

अरे मुखिया के बगीचे का आम तो देखकर ही लगता है कि मीठा पका हुआ है देख नहीं रहा है उसकी खुशबू से सारा घर महक रहा है,,,।

हां तुम ठीक कह रही हो मा पूरा घर महक रहा है,, लेकिन तुमको भी खा लेना चाहिए था ना,,,,।

हां हां मैं तो खाऊंगी पहले खाना तो खा लु,,,।

(सूरज देख रहा था कि उसकी मां कितनी खुश नजर आ रही थी वाकई में पका हुआ आम बहुत कम ही खाने को मिलता था,,,, लेकिन अब उसे लग रहा था की मुखिया की बीवी के साथ जिस तरह का उसका रिश्ता है पूरे मौसम में उसके परिवार को जी भर कर पके हुए आम खाने को मिलेंगे,,,, थोड़ी देर में दोनों खाना खा चुके थे तो उसकी मां जल्दी से उठ कर गई और पानी में रखे हुए दो आम को लेकर आई जो कि बड़े-बड़े और एकदम पके हुए थे एक आम को वह सूरज की तरफ आगे बढ़ा दी जिसे सूरज ने थाम लिया और दूसरे आम को वह खुद ले ली और उसे गोल-गोल घुमा कर खुश होकर देखने लगी,,,, तभी सूरज बोला)





मां चाकु लाओ में आम तो काट लूं,,,,

तू एकदम बेवकूफ है भला आम को काट कर खाया जाता है,,, आम को तो देख ऐसे खाते हैं,,,(और इतना कहने के साथ ही सुनैना आम के ऊपरी हिस्से को थोड़ा सा नोच कर फेंक दी और उसे गोल-गोल घुमा कर मुंह में भरकर दबा दबा कर चूसना शुरू कर दी,,, और अपने बेटे को दिखाते हुए बोली,,,)

देख ऐसे खाया जाता है आम को,, दबा दबा कर और चुस चुस कर,,,,,

(सूरज अपनी मां को देख रहा था आम खाने के उसके तरीके को देख रहा था और उसे तरीके को देखकर उसे मुखिया की बीवी याद आ गई,,, जिसकी दोनों चूचियों को इसी तरह से दबा दबा कर उसे मुंह में लेकर चूस रहा था वाकई में इस तरह से मुखिया की बीवी के साथ उसे बहुत मजा आया था और यह ख्याल उसके मन में आते ही वह अपने मन में सोचने लगा कि उसकी मां सच कह रही है आम खाने का मजा दबा कर ही आता है और वह अपने मन में सोचने लगा कि काश इस समय उसके हाथों में उसकी मां की चूचियां होती तो वह अपनी मां की चूचियों को दबा दबा कर उसका रस पी जाता,,,,।





अपनी मां की तरह ही सूरज भी आम का लुफ्त उठाने लगा,,,, थोड़ी देर में दोनों आम खाकर तृप्त हो चुके थे,,,, सूरज अपनी मां को प्रसन्न मुद्रा में देखकर बोला,,,,।

और खाना चाहो तो और खा लो,,,

नहीं नहीं रात को खाएंगे आज रात को पूरी और तरकारी बनाऊंगी,,,

पूरी और तरकारी,,,(सूरज खुश होता हुआ बोला)

हां पूरी और तरकारी तुझे बहुत पसंद है ना,,, आम के साथ पूरी खाने में बहुत मजा आता है,,,।





चलो ठीक है,,,, लेकिन मां बाबूजी अभी तक नहीं आए हैं,,,,

कह कर तो गए थे चार-पांच दिन लग जाएंगे,,,,

अरे हां मां की याद आया तुम शाम को जल्दी खाना बना लेना कल देर हो गई थी बगीचे पर जाने में मालकिन ने कहा है कि जल्दी आना,,,,।

मतलब तुझे आज भी जाना है,,,,

कुछ दिन तक तो जाना होगा जब तक बगीचे के आम मार्केट में नहीं पहुंच जाते,,,,।





ओहहहहह ,,,,,, कोई बात नहीं लेकिन तेरी मालकिन बहुत दयालु है,,,, जो इतनी सारी सब्जी तरकारी फल और पके हुए आम दे दी ,,

सच में मां मुखिया की बीवी बहुत दयालु है वरना ईतना कुछ कोई नहीं देता,,,,।

(थोड़ी देर में दोनों हाथ मुंह धो कर खड़े हो गए थे,,,, सुनैना बोली)

अब खाना खा लिया है तो आराम कर ले रात भर जागना पड़ता होगा,,,,।





(यह सुनते ही सूरज की आंखों के सामने आम के बगीचे का झोपड़ी के अंदर का सारा दृश्य उसकी आंखों के सामने तैरने लगा रात भर नया खुद सोया था और ना ही मुखिया की बीवी सोई थी रात भर दोनों जवानी का खेल खेलते रह गए थे कितना मजा आया था दोनों को पहली बार में ही मुखिया की बीवी उसे औरत का सुख देकर मर्द बना दी थी,,, सूरज अपने मन में सोचने लगा कि,,, उसकी मां को यही लग रहा होगा की रात भर जाग कर वह आम के बगीचे की रखवाली कर रहा होगा,,, जबकि सच तो यह था कि रात भर वह पेड़ के आम की नहीं बल्कि,, मुखिया की बीवी की खूबसूरत बदन के दशहरी आम की चुसाई और उसकी चुदाई कर रहा था,,,, अपनी मां के सवाल का जवाब देते हुए सूरज बोला)





कोई दिक्कत नहीं है मां,,,, मुझे नींद नहीं आ रही है,,,,(और इतना कहकर वह जैसे ही घर के बाहर जाने वाला था कि तभी उसे कुछ याद आया और वह तुरंत घूम कर खुश होते हुए अपने कुर्ते की जेब में से₹2 निकाला और,,, अपना हाथ आगे करते हुए हथेली को खोल दिया,,,, सूरज की हथेली में₹2 का सिक्का देखकर सुनैना की आंखों की चमक बढ़ गई,,,, और वह तुरंत उस सिक्के को अपने बेटे की हथेली में से ले ली और बोली,,,)

ये पैसा कहां से लाया,,,,,?

मुखिया की बीवी ने दिए रानी ने नहीं बताई क्या,,,!

नहीं रानी नहीं तो मुझे सिर्फ आम सब्जी और तरकारी के बारे में ही बताई थी,,,,।





सुबह-सुबह आते समय मुखिया की बीवी ने यह पैसे भी दी थी,,, मैं तुम्हें देने के लिए ही रखा था,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनते ही सुनैना एकदम से खुश हो गई और आगे बढ़कर उसे अपने गले से लगा ली,, अपनी छाती से लगा ली,,,, सुनैना सहज थी वह खुशी से अपने बेटे को गले लगाई थी,,,, उसमें मार्तत्व झलक रहा था,,, लेकिन सूरज की हालत खराब हो चुकी थी क्योंकि उसकी मां की बड़ी-बड़ी चूचियां जिस पर कुछ देर पहले वह प्यासी नजरों से नजर बनाए बैठा था वही चूचियां सीधे-सीधे उसके सीने में चुभने लगी थी,,,,, ब्लाउज में कैद होने के बावजूद भी सुनैना की खरबूजे जैसी चूचियों का छोटा सा छुआरा भाले की नोक की तरह उसके सीने में धंस रहा था,,,,)





ओहहह सूरज मेरे बेटे तेरी जिंदगी की पहली कमाई है मैं बहुत खुश हूं,,,,(ऐसा कहते हुए सुनैना बहुत खुश हो रही थी लेकिन सूरज उत्तेजना के मारे तड़प रहा था पल भर में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था और वह अपनी दोनों हाथों को अपनी मां की पीठ पर रख दिया था सुनैना को सूरज की उत्तेजना का आभास तक नहीं हो रहा था लेकिन जैसे ही सुनैना को अपने दोनों टांगों के बीच कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ वह एकदम से सहम उठी,,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है लेकिन वह इतना तो समझ ही गई थी कि उसकी दोनों टांगों के बीच उगने वाली चीज क्या है इसलिए पल भर में उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी सूरज पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था वह अपनी मां की चिकनी पीठ पर अपने दोनों हाथ को रखा हुआ था उसका मन कर रहा था कि अपने दोनों हथेलियां को उसकी कमर से होता हुआ उसके नितंबों पर रख दे लेकिन ऐसा वह कर पाता इससे पहले ही सुनैना एकदम सहज होते हुए अपने बेटे से अलग हो गई और अपने चेहरे पर उत्तेजना के भाव को बिल्कुल भी ना लाते हुए एकदम सहज रूप से बोली,,,,)





मुझे बहुत खुशी है बेटा की तू कमाने लगा है,, भगवान करे तो ऐसे ही तरक्की करता रहे,,,।

ठीक है मा मैं हमेशा कोशिश करता रहूंगा और इसी तरह से तुम्हें खुश रखने की कोशिश करूंगा,,,,,(और इतना कहकर वह वहां से जाने लगा लेकिन उसके जाते-जाते सुनैना की नजर अपने बेटे के पजामे पर पड़ गई और उसके होश उड़ गए,,, क्योंकि उसके बेटे के पजामे में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था,,,।)
 
आज सुनैना अपने बेटे के अनुसार जल्दी खाना बनाने लगी थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा आज भी आम के बगीचे में रखवाली करने जाएगा,,,, सूरज ठीक समय पर अपने घर पर पहुंच गया था और जैसा कि दोपहर में उसकी मां ने सब्जी पूरी बनाने का वादा की थी सूरज को अपनी थाली में सब्जी पूरी ही मिली जिसे देखकर वह भी बहुत खुश था और साथ में पका हुआ आम पेट भर के खाने के बाद सूरज प्रसन्न होते हुए अपनी मां से बोला,,,।





तुम्हारे हाथों में तो जादू है मां,,,, सच में मजा आ गया बहुत दिनों बाद पूरी और आम खाने को मिला है,,,।

और यह सब तुम्हारी बदौलत भैया,,,,, अगर तुम आम की रखवाली करने के लिए मुखिया की बीवी के साथ ना जाते तो शायद यह सब नहीं मिलता,,,।

हां तु सच कह रही है रानी,,,, आज सच में बहुत मजा आ गया पिताजी होते तो वह भी बहुत खुश होते वैसे पिताजी का कुछ अता पता नहीं चल रहा है,,,,(सूरज अपनी मां की तरफ मुखातिब होता हुआ बोला)





क्या बताऊं बोल कर तो गई थी कि दो-चार दिन में लौट आऊंगा लेकिन अभी तक कोई पता ठिकाना नहीं है और यह कोई नई बात नहीं है दो-चार दिन का बोलकर जाते हैं और 10 12 दिन में ही वापस आते हैं,,,,।

कोई बात नहीं मां,,,, अच्छा अब मैं चलता हूं अंधेरा होने लगा है समय पर पहुंचना है,,,,।

बेटा तुझे डर तो नहीं लगता ना रात को,,,,

नहीं मन बिल्कुल भी नहीं लगता मुखिया की बीवी रहती है ना,,,, और वह तो हमेशा रात को वहां पर रुक चुकी है इसलिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है,,,।





वहां जाकर सो जाता है कि जागता रहता है,,,।

(अपनी मां के ही सवाल पर सूरज अपने मन में ही बोला मुखिया की बीवी जैसी खूबसूरत औरत हो तो भला नींद किसे आती है,,,, लेकिन फिर भी वह अपनी मां से ऐसा बोल तो सकता नहीं था इसलिए वह बोला,,,)

कोई दिक्कत नहीं है मां,,,, जब तक मालकिन जाती है तब तक जागना पड़ता है और मालकिन के नींद आते ही वह भी सो जाने के लिए बोलती है,,,,।

तब तो ठीक है,,,,,।

अच्छा मैं चलता हूं पहले मालकिन के वहां जाना है फिर वहां से बगीचा,,,,।





ठीक है बेटा संभाल कर जाना,,,, ।

(सूरज वहां से मुस्कुराता हुआ मालकिन के घर की तरफ चला गया था और सूरज की मां उसे छोड़ने के लिए दरवाजे तक आई थी और तब तक अपने बेटे को देखते रही जब तक कि वह आंखों से ओझल नहीं हो गया आखिरकार वह एक मां थी और उसका बेटा रात भर जाग कर आम की रखवाली करने के लिए गया था या एक तरह का काम ही था और उससे पहले कभी उसके बेटे ने इस तरह का काम नहीं किया था इसलिए उसके मन में थोड़ी चिंता भी थी अपने बेटे को लेकर,,, उसके जाते ही सुनैना लकड़ी से बने दरवाजे को बंद कर दिया और फिर अंदर आ गई अंदर अभी भी रानी खाना खा रही थी उसे सुनैना बोली,,,,)





खाना खाकर बर्तन साफ कर देना मैं कब तक झाड़ू लगा देती हूं,,,,,।

ठीक है मां,,,,,(हमको मुंह में लेकर चूसते हुए रानी बोली,,,, और थोड़ी ही देर में रानी अपनी मां के बताएं अनुसार बर्तन को साफ कर दी और उसकी मां झाड़ू लगाकर घर की सफाई कर दी और फिर वह अपने कमरे में सोने चली गई,,,,, सोते हुए वह अपने बेटे के बारे में सोच रही थी,,, उसके द्वारा लाई गई सब्जी तरकारी और फल के बारे में सोच रही थी और₹2 के बारे में सोच रही थी,,,,,₹2 के बारे में सोचकर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे,,,, वह मन ही मन यह सोचकर खुश हो रही थी कि उसका बेटा अब कमाने लगा था,,,, यह सोचकर प्रसन्न हो रही थी कि उसका बेटा आप जवान हो गया था बड़ा हो गया था घर की जवाबदारी को संभाल सकता था,,, लेकिन तभी उसे वह पल याद आ गया जब वह खुशी के मारा अपने बेटे को गले लगाई थी,,,,।





उसे पल को याद करके उसके बदन में एकदम से सिहरन सी दौड़ने लगी,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,, की जो कुछ भी हुआ था उसे पर उसे विश्वास नहीं हो रहा था वह पल एकदम अविश्वसनीय था,,, वह तो सहज रूप से अपने बेटे को खुशी के मारे गले लगाई थी लेकिन गले लगाने पर उसकी दोनों टांगों के बीच जी कठोर चीज में दस्तक दिया था उस चीज के बारे में सोचकर अभी भी उसकी टांगों के बीच हलचल महसूस हो रही थी,,,, वह अपने मन में यही सोच रही थी कि उसके बेटे का लंड आखिरकार खड़ा कैसे हो गया,,, दो बच्चों की मां होने के साथ-साथ में पूरी तरह से अनुभव से भरी हुई थी इतना तो वह जानती ही थी कि एक मर्द का लंड कब खड़ा होता है,,,।





अगर उसकी जगह कोई और औरत सूरज को गले लगाती तो शायद वह समझ सकती थी की औरत का इस वर्ष उसके बेटे को उत्तेजित कर गया था लेकिन वह तो उसकी मां थी और अपनी मां के गले लगते ही उसका बेटा क्यों उत्तेजित हो गया कि उसका लंड खड़ा हो गया और साथ ही साथ खड़ा होने के साथ ही सीधे-सीधे उसकी बुर पर ठोकर मारने लगा,,, यह बात पूरी तरह से सुनैना को अचंभित कर दे रही थी,,, और यह सब याद करके वह अपने बिस्तर पर करवट बदल रही थी,,,।

एक अजीब सा एहसास उसके बदन में मदहोशी घोल रहा था,,, जहां एक तरफ वह अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से स्तब्ध थी वहीं दूसरी तरफ ना जाने क्यों अपने बेटे की हरकत की वजह से उसके बदन में उत्तेजना की फुहार उठ रही थी वह अपने बेटे के बारे में सोने के लिए मजबूर हो गई थी,,, क्योंकि जिस तरह से वह अपने बेटे को गले लगाई थी उस तरह से,, उसे भी उसका पति बहुत बार गले लगा कर चुंबनों की बरसात उसके गर्दन पर उसके चेहरे पर उसके होठों पर कर दिया था लेकिन कभी भी उत्तेजना में पूरी तरह से समर्पित होने के बावजूद भी उसके पति का लंड कभी भी उसकी दोनों टांगों के बीच से गुजरता हुआ उसकी बुर पर ठोकर नहीं मारा था,, पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा होने के बावजूद भी लेकिन उसके बेटे का लंड बड़े आराम से सड़ी सहित उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था यह सुनैना के लिए बेहद अचंभित भरा था वह अपने मन में अपने बेटे के लैंड को सोचने पर मजबूर हो गई थी कि उसके बेटे का लंड वाकई में कितना बड़ा है और कितना दमदार है,,,।





ना चाहते हुए भी अपने बेटे के बारे में सोच कर उसके बदन में उत्तेजना का असर पूरी तरह से छाने लगा था वह मदहोश होने लगी थी यहां तक की कुछ दिनों से वह अपने पति से संभोग सुख प्राप्त नहीं कर पाई थी और वैसे भी उसका पति बहुत कम ही उसे संभोग सुख दे रहा था कभी यह बहाना तो कभी वह बहन कभी थकान का बहाना करके वह सो जाता था तो कभी रात रात भर वह घर से बाहर ही लेता था ऐसे हालात में सुनैना का बिस्तर पर करवट बदलना लाजमी था,,, इसलिए तो इस समय वह चुदवासी हुए जा रही थी,,,, मदहोश हुए जा रही थी,,, बार-बार उसे अपनी बुर पर अपने बेटे के लंड की ठोकर महसूस हो रही थी,,, जिसके चलते उसे अपनी बुर से मदन रस का बहाव होता हुआ महसूस हो रहा था ,,।





जवानी से भरी हुई खूबसूरत औरत की बेबसी इससे ज्यादा क्या होगी कि वह पति के होने के बावजूद अपनी बिस्तर पर अकेली करवटें बदल कर रात गुजार रही हो,,, इस समय सबसे खूबसूरत औरत होने के बावजूद भी सुनैना दुखियारी थी,,, जो सुख उसे झोली भर भर के मिलना था उस सुख के लिए वह तरस जाती थी,,,, लेकिन अपने बेटे के बारे में सोचकर अनजाने में ही उसके बारे में जिस तरह के ख्याल उसके मन में आ रहे थे उसके चलते उसकी साड़ी पूरी तरह से उसकी कमर के इर्द गिर्द इकट्ठा हो गई थी कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,, और अपनी आंखों को बंद करके वह अपने पति का ख्याल करते हुए अपनी हथेली को अपनी बुर पर रख दी थी और अपने पति की हरकत के बारे में सोच रही थी लेकिन वह एकदम से झटके से अपनी आंख खोल दी थी क्योंकि उसकी कल्पना में उसके ख्यालों में उसके पति का नहीं बल्कि उसके बेटे का चेहरा आ जा रहा था वह हैरान थी इस तरह की कल्पना से ,,,,, लेकिन वह इस बात से भी इनकार नहीं कर पा रही थी कि उसके बेटे का चेहरा उसकी आंखों के सामने आते ही उसके वतन में उत्तेजना का तूफान उठने लगता था जिसके चलते वह अपनी हथेली में अपनी बुर को दबोच ली थी,,,,।





आंखों को खोलकर हैरानी से वह अपने आप से ही बात करते हुए बोली,,,।

यह क्या हो रहा है,,,, सूरज का चेहरा क्यों आ जा रहा है मेरे ख्यालों में मैं तो अपने पति के बारे में सोच रही हूं,,,,,(गहरी सांस लेते हुए अपने आप से रिश्ता की बातें करते हुए फिर से अपनी आंखों को बंद कर दी और इस बार अपनी उंगली को धीरे-धीरे अपनी बुर में डालने लगी और कल्पना करने लगेगी जैसे उसका पति अपना लंड उसकी बुर में डाल रहा होगा लेकिन यह क्या और फिर से हैरान होकर अपनी आंखों को खोल दी क्योंकि इस बार भी उसके ख्यालों में उसका पति नहीं बल्कि उसका बेटा आ जा रहा था जो अपने दोनों हाथों से उसकी टांगों को खोल दिया था,,,, एक तरफ पूरी तरह से हैरान थी इस तरह की कल्पना को लेकर और दूसरी तरफ इस तरह की कल्पना उसके भजन में पूरी तरह से मदहोशी का नशा खोल दे रहा था वह ,,विवश हो जा रही थी इस तरह की कल्पना करने के लिए,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें ऐसा उसके साथ पहली बार हो रहा था। वह अपनी गरदन उठा कर अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच ले गई तो अभी भी उसकी उंगली उसकी बुर में फंसी हुई थी,,,,,।





सुनैना कुछ समझ नहीं पा रही थी कि वह क्या करें एक तरफ उसके बदन की प्यास उसे व्याकुल बना रही थी उसकी तड़प को बढ़ा रही थी और दूसरी तरफ अनजाने में ही उसके बेटे का ख्याल उसकी तरफ को और ज्यादा बढ़ा रहा था लेकिन आनंदित कर दे रहा था उसे अपनी बुर एकदम साफ दिखाई दे रही थी लालटेन की पीली रोशनी में उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी बुर उत्तेजना के मारे फुल कर कचोरी हो गई थी,,,,, उंगली का सहारा वह पहले भी ले चुकी थी,,,। ऐसी हालत में जब कभी भी उसे पति की जरूरत पड़ती थी तो मजबूरन उसे अपनी उंगली का सहारा लेना पड़ता था,,,,।

और ऐसा करके वह कुछ गलत नहीं करती थी वैसे तो सुनैना बहुत ही सीधी और संस्कारी औरत थी,,,, आज तक उसके बारे में कोई बोल नहीं सकता था कि उसका चरित्र खराब है या उसे किसी के साथ देखा गया है गांव की सबसे सीधी शादी औरत सुनैना ही थी लेकिन रात को कभी कबार अपने पति की जरूरत पड़ने पर मजबूर होकर वह अपनी उंगली का सहारा ले लेती थी और ऐसा करना उसके लिए बिल्कुल भी गलत नहीं था क्योंकि वह जानती थी कि वह तो अपने पसंद की प्यास बुझाने के लिए सिर्फ उंगली का सहारा ले रही है गांव में तो दूसरी ओर से जरूरत पड़ने पर दूसरी मर्दों का सहारा लेकर भले ही शरीर सुख प्राप्त कर लेती थी लेकिन चरित्रहीन बन जाती थी और ऐसे में कोई भी उन पर उंगली उठा सकता था लेकिन सुनैना संस्कारी औरत थी और वह नहीं चाहती थी कि उसकी बदनामी गांव में हो या उसके बारे में कोई गलत बातें करें या उसकी तरफ उंगली उठाएं इसीलिए वह अपनी जवानी को बरकरार रखी हुई थी ,,,।।





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वैसे तो वह अपने पति से शरीर सुख के मामले में बहुत खुश थी क्योंकि उसका पति जब भी उसके साथ शरीर संबंध बनाता था तो उसे पूर्ण रूप से संतुष्ट करता था वैसे भी भोला पूरी तरह से सक्षम था किसी भी औरत को संतुष्ट करने में,,, लेकिन उसके प्रति उसका बेरुखापन सुनैना को सोचने पर मजबूर कर देता था वह अपने आप को आईने में देखकर सोचती थी कि क्या वह खूबसूरत नहीं है जो उसका पति उसके साथ संभोग नहीं करता,,,, रात भर घर से गायब रहता है वह अपने मन में यही सोच रही थी कि अगर वह किसी और को मिली होती तो शायद दिन-रात वह उसकी पूजा सेवा करता उसे पूरी तरह से संतुष्ट करता लेकिन भोला बिल्कुल भी ऐसा नहीं करता था बहुत कहाँ पर ही वह उसके साथ शरीर संबंध बनाता था,,, सुनैना को तो यही लगता था कि शायद वह काम के चक्कर में खेतों में काम करने की वजह से ही उसके साथ ठीक से समय नहीं गुजार पाता,,,, क्योंकि हकीकत तो वह जानती ही नहीं थी कि उसके पति का मुखिया की बीवी के साथ चक्कर चल रहा था और वह दिन-रात मुखिया की बीवी के वहां ही पड़ा रहता था ,,,,,।





यह सब तो सुनैना की आप बीती थी उसका दर्द था उसके दिल का जख्म था लेकिन इस समय कमरे का हालात पूरी तरह से बदला हुआ था पति की करे हाजिरी में वह पूरी तरह से कामाअग्नि में जल रही थी ,,, ऊपर से उसकी कल्पना ने उसे पर और ज्यादा कहर बरसाया हुआ था,,, जहां वह अपनी उंगली का सहारा लेकर अपने पति की कल्पना करती थी वही आज कल्पना में उसके पति की जगह बार-बार उसके बेटे का चेहरा आ जा रहा था और यह सब दिन में जो कुछ भी हुआ था उसी का साया था उसी का अक्स था,,, जिसमें वह पूरी तरह से डूबती जा रही थी,,, ।

कमरे का लकड़ी का दरवाजा बंद था और कमरे में लालटेन जल रही थी जिसकी पीली रोशनी में सबको सांप दिखाई दे रहा था जवानी से भरी हुई मदहोश कर देने वाली जवानी की मालकिन सुनैना अपने खटिया पर लेटी हुई थी और उसकी साड़ी कमर के ईर्द गिर्द इकट्ठा हो गई थी,,, कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी थी और उसकी एक ऊंगली उसकी बुर के अंदर खुशी हुई थी और वह गरदन उठाकर अपनी दोनों टांगों के बीच ही देख रही थी,,,,, उसकी कल्पनाओं का घोड़ा बड़ी तेजी से दौड़ता था लेकिन आज हुआ बार-बार अपनी कल्पनाओं के घोड़े की लगाम को खींच दे रही थी उसे रोक दे रही थी क्योंकि कल्पनाओं का घोड़ा उसे मंजिल से भटक रहा था आज मंजिल का रास्ता बदल दे रहा था,,,,, मंजिल का रास्ता क्या आज पूरी मंजिल ही बदल दे रहा था सफर वैसा ही था लेकिन मंजिल का ठिकाना दूसरा हो चुका था सुनैना अपनी आंखों को बंद करने में घबरा रही थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि जो चेहरा उसके कल्पना में आ जा रहा है वह उसका बेटा है उसका सगा बेटा जिसके साथ वह कभी सपने में भी इस तरह की हरकत करने को सोच नहीं सकती थी लेकिन फिर भी आज क्यों ऐसा हो रहा है यह सब उसके समझ के परे था,,,,।





धीरे-धीरे उसके बदन में उत्तेजना और मदहोशी बढ़ने लगी थी अधूरा काम उसे पूरा करना था लेकिन उसका मन घबरा रहा था आंखों को बंद करने में वह डर रही थी लेकिन उसकी नज़रें उसकी कचोरी जैसी खुली हुई दूर के अंदर घुसी हुई उसकी उंगली पर टीकी हुई थी,,, क्योंकि उस उंगली को उसने लंड का कार्य करने की जिम्मेदारी जो सौंप रखी थी,,,,, बदन की प्यास बढ़ती जा रही है क्योंकि वह जानती थी कि अधूरा कार्य करके छोड़ देना उचित नहीं था बार-बार उसकी आंखों के सामने दोपहर वाला दृश्य नजर आ रहा था जब वह अपने बेटे को गले लगाई थी और उसे समय उसके बेटे का लंड सीधे उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था और उसने अपने बेटे के पजामे में बना हुआ तंबू भी देखी थी यह सब सुनैना के कदम को डगमगा रहा था,,, वह अपनी बुर में उंगली को डालकर बाकी हथेलियां से अपनी बुर को दबोच ले रही थी वह उत्तेजित हो रही थी मदहोश हो रही थी तड़प रही थी लेकिन आंखों को बंद नहीं कर रही थी,,,।





लेकिन ऐसा वह कब तक करती बदन की प्यास उसे पूरी तरह से मजबूर कर दे रही थी आंखों को बंद करने के लिए और फिर वह भी अपने मन में सोचने लगी कि वह वास्तव में तो अपने बेटे के साथ कुछ कर नहीं रही है तो कल्पना करने में क्या हर्ज है और यही सोचकर वह अपनी आंखों को बंद कर दी और आंखों को बंद करते ही एक बार फिर से उसकी कल्पनाओं के घोड़े की लगाम धीरी हो गई और उसका घोड़ा बड़ी तेजी से दौड़ने लगा दौड़ने क्या लगा मानो कि आसमान में उड़ने लगा पल भर में उसकी आंखों के सामने उसके बेटे का चेहरा नजर आने लगा के बेटे का चेहरा नहीं बल्कि उसका बेटा पुरा का पूरा खुद नजर आने लगा,, उसकी सांसे बड़ी तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी वह अपने मन में कल्पना करने लगी,,, ।





वह अपने मन में सोचने लगी कि वह इसी तरह से अपनी बिस्तर पर गहरी नींद में सो रही है और उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई है उसकी दोनों टांगें खुली हुई है और तभी कमरे का दरवाजा खुलता है और उसका बेटा कमरे में प्रवेश करता है उसके बेटे की नजर सीधे बिस्तर पर जाती है जहां पर वह खुद होकर सो रही है अपनी मां की खुली हुई टांग में से झांकती हुई उसकी गुलाबी बुर को देखकर सूरज की आंखों में वासना के दौर नजर आने लगते हो पूरी तरह से मदहोश हो जाता है,,,, कल्पना में अभी भी सुनैना की आंखें बंद है और वह पूरी तरह से नींद की आगोश में सो रही है,,,, सूरज की आंखें अपनी मां की जवानी देखकर फटी की फटी रह गई वह पूरी तरह से पागल हो गया पहली बार वह इस तरह से नजर देख रहा था अपनी मां को अर्धनग्न अवस्था में अर्थव्यवस्था हालत में सोता हुआ देखकर उसकी वासना पूरी तरह से जाग गई और वह धीरे से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया,,,,,।





और धीरे-धीरे अपनी मां के करीब बढ़ने लगा,,,, सुनैना की कल्पना बहुत ही तेज थी कल्पना में वह सब कुछ सोच रही थी उसका बेटा यह जानता था कि उसके पिताजी घर पर नहीं है और इसलिए वह इस मौके का फायदा उठाना चाहता था वह धीरे से आकर अपनी मां की खटिया पर बैठ गया जिसका हल्का सा एहसास सुनैना को हुआ लेकिन उसकी आंखें बंद की बंदे रही और धीरे से सूरज ने अपनी हथेली को अपनी मां की कचोरी जैसी फुली हुई बुर पर रख दिया,,, और वैसे ही तुरंत सुनैना की आंख खुल गई आंख खुलते ही सुनैना अपने पास अपने बेटे को बैठा हुआ देख कर एकदम से घबरा गई लेकिन सूरज बिल्कुल भी नहीं घबराया और इशारे में ही उसे चुप रहने का इशारा किया उसकी मां एकदम से शांत हो गई क्योंकि उसकी हथेली उसकी बुर पर जो थी और वह मदहोश हो रही थी,,,,,।

बहुत खूबसूरत बुर है तुम्हारी मां,,, आज तुम्हें तुम्हारी बुर में अपना लंड डालकर ही रहुंगा,,,।

नहीं बेटा ऐसा मत करना हम दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता है इस तरह का रिश्ता बिल्कुल भी मान्य नहीं है,,,।





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चारदीवारी के अंदर मां बेटे के बीच क्या चल रहा है भला दूसरों को क्या पता चलेगा,,, तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो किसी को कानों कान तक खबर नहीं पड़ेगी,,,(और इतना कहने के साथ तेरी सूरज खटिया पर से उठकर खड़ा हो गया और अपने पजामी को उतारने लगा सुनैना की नजर उसके पजामी पर ही टीकी हुई थी और जैसे ही पजामा उसने उतारा,,, अपने बेटे का लंड देखकर सुनैना की आंखें फटी की फटी रह गई,,,।)

नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल भी मत करना हम दोनों के बीच इस तरह का रिश्ता संभव नहीं है,,,।

कैसे संभव नहीं है,,,,(लंड को हाथ में लेकर हिलाते हुए,,,) तुम एक औरत हो और मैं एक मर्द बस इस समय यही रिश्ता हम दोनों के पीछे तुम्हारे पास खूबसूरत बुर है तो मेरे पास मोटा तगड़ा लंड है और तुम तो जानती हो की बोर और लंड अपने बीच किस तरह का रिश्ता होता है,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया इस तरह की कल्पना करते हुए सुनैना के तन बदन में आग लगी हुई थी वह पल भर में ही पसीने से तरबतर हो गई,,, उसकी कल्पना वाकई में बहुत जबरदस्त थी वह कल्पना में ही अपनी उंगली को अपनी बर के अंदर बाहर कर रही थी और मदहोश हुए जा रही थी,,,)





नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल भी मत करना तेरे पिताजी को पता चलेगा तो गजब हो जाएगा,,,।

कुछ नहीं होगा मां,,, तुम तो अच्छी तरह से जानती हो कि पिताजी बाहर गए हुए हैं और 10 12 दिन बाद ही लौटेंगे इसलिए तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो किसी को कुछ भी नहीं पता चलेगा और तुम एकदम मस्त हो जाओगी,,,,।

(और अपनी मां के नानुकुर के बावजूद भी सूरज अपनी मनमानी करता हुआ अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में डालना शुरू कर दिया और देखते-देखते हो अपनी मां की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और इस दौरान कल्पना करते हुए अपनी आंखों को बंद करके जवानी का मजा लूटते हुए सुनैना अपनी उंगली को बड़ी तेजी से अपनी बर के अंदर बाहर कर रही थी यहां तक की अपने बेटे का लंड का अंदाजा लगा लेने के बाद अच्छी तरह से जानती थी कि एक उंगली से उसका कुछ नहीं होने वाला इसलिए वह दूसरी उंगली भी अपनी बुर में डाल दी थी,, और फिर देखते ही देखते सुनैना के कल्पनाओं का घोड़ा उसे चरम सुख के बेहद करीब ले जाने लगा वह मदहोश होने लगी बार-बार अपनी कमर को ऊपर उठा ले रही थी और देखते ही देखते उसकी बुर से मदन रस की पिचकारी निकल पड़ी और वह एकदम से निहाल हो गई,,,,।

सुनैना की कल्पना





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जब वह कल्पना से बाहर आई तो बहुत देर हो चुकी थी अपने बेटे की कल्पना करके वह पूरी तरह से मत हो चुकी थी और आज उसे अपनी उंगली का सहारा लेने में इतना मजा आया था कि ऐसा माया उसे पहले कभी नहीं आया था लेकिन जैसे ही वासना का तूफान उसके सर से उतरा उसकी आंखों में आंसू आ गए क्योंकि कल्पना में ही सही वह गलत कर रही थी इस बात का अंदाजा उसे अच्छी तरह से था और फिर ऐसा दोबारा न करने की कसम खाकर वह सो गई,,।

दूसरी तरफ सूरज एक बार फिर से मुखिया की बीवी की जवानी को लुटने में पूरी तरह से मुसगुल हो गया,,, मुखिया की बीवी सूरज को धीरे-धीरे संभोग के सारे दांव पेंच सीखा रही थी, और धीरे-धीरे सूरज संभोग के हर एक आसन में पारंगत होता चला जा रहा था ऐसा रोज का सिलसिला हो चुका था रोज वह मुखिया की बीबी की जवानी कब मजा लूट रहा था और धीरे-धीरे वह पूरी तरह से मर्द बन चुका था यह सिलसिला कब तक चलता रहा जब तक की बगीचे का आम मार्केट में नहीं पहुंच गए,,,।

कुछ दिन गुजरने के बाद खेतों में काम करते-करते शाम ढलने लगी सूरज खेत पर अकेले ही काम कर रहा था,,,, और सूखी हुई लड़कियों का इकट्ठा कर रहा था ईंधन के लिए जब ढेर सारी लड़कियां इकट्ठी हो गई तो वह उन्हें बांधकर अपने सर पर गट्ठर बनाकर रख लिया था,,, और फिर गांव की तरफ आने के लिए निकल गया देखते ही देखते हैं अंधेरा होने लगा,,,, जब थोड़ी थकान महसूस हुई तो वह कट्टर अपने सर से उतर कर वहीं बगल में रख दिया और कुछ देर के लिए वहीं बैठ गया,,,, शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो चुका था,, लेकिन चांदनी रात होने की वजह से अंधेरा होने के बावजूद भी सब कुछ साफ नजर आ रहा था तभी उसे दूर से कुछ औरतों के हंसने और खिलखिलाना की आवाज आने लगी और वह वहीं पर छुप कर बैठ गया,,,, वह देखना चाहता था कि रात के अंधेरे में कौन औरतें इधर आ रही है,,,।
 
घास का ढेर सर पर लाद कर लौटते समय,, अंधेरा होने लगा था और ज्यादा वजन होने की वजह से वह थोड़ा आराम करने के लिए सूरज घास के गठ्ठर को वहीं पास में रखकर बैठ गया था और दूर से आ रही औरतों की हंसने और बात करने की आवाज से वह एकदम से हैरान हो गया था कि अंधेरे में कौन आ रहा है और यही देखने के लिए वह झाड़ियां के पीछे छुप गया था,,,।





शाम ढल चुकी थी धीरे-धीरे अंधेरा पूरी तरह से छाने लगा था लेकिन चांदनी रात होने की वजह से अंधेरे में भी सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, गांव से यह जगह थोड़ी दूर थी,,, और औरतों की आवाज उनके हंसने की आवाज जिस तरह से आ रही थी इसलिए सूरज सोच में पड़ गया था,,, कि आखिरकार यह औरतें कौन है और रात होने पर यहां क्यों आ रही है,,, यही छिपकर वह देखना चाह रहा था तभी औरतों की आवाज और उनके हंसने की आवाज और ज्यादा करीब आने लगी,,,, जिस जगह से उन औरतों की आवाज आ रही थी वह जगह बड़े-बड़े पेड़ों से घिरी हुई थी,,, इसलिए अभी तक वह औरतें नजर नहीं आई थी,,,,, तभी थोड़ी ही देर में औरतों की परछाई नजर आने लगी,,,, सूरज झाड़ियों के पीछे छुपकर यही देखना चाह रहा था कि वह औरतें कौन है और यहां क्या करने आ रही है,,,।





लेकिन जैसे ही वह औरतें और करीब आई चांदनी रात में उन औरतों का चेहरा सूरज को एकदम साफ नजर आने लगा और जैसे ही उन औरतों का चेहरा उसे दिखाई दिया उसका दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि वह तीन औरतें थी,,, एक उसकी खुद की मां थी एक पड़ोस वाली औरत थी और तीसरी सोनू की चाची थी तीनों आपस में बातें करते हुए सूरज जहां छुपा हुआ था इस झाड़ियां के करीब आ रही थी और जैसे ही सूरज की नजर उन तीनों के हाथ पर पड़ी और उन तीनों के हाथ में,,, लोटा देखा तो उसका दिल और ज्यादा जोरों से धड़कने लगा क्योंकि वह सारा माजरा समझ गया था कि वह तीन औरतें वहां क्या करने आ रही थी,,,,।





सूरज अपने आप को झाड़ियों के पीछे एकदम से छुपा लिया था,,, ताकि वह तीनों में से किसी के भी नजर उसे करना पड़े क्योंकि ऐसी हालत में अगर उसे पर नजर पड़ जाती तो वह शर्मिंदा हो जाता है इसलिए वह अपने आप को छुपाए हुए था,,, देखते देखते वह तीनों औरतें एकदम करीब आ गई सूरज को इस बात का डर था कि कहीं उन दिनों में से कोई उसकी तरफ या उसके पास ना आ जाए और उसे देखना ले लेकिन उसकी किस्मत अच्छी थी कि वह तीनों वह जिस झाड़ी के पीछे छुपा हुआ था ठीक उसके सामने जाकर खड़ी हो गई थी। तीनों के हाथ में लोटा था,, इसलिए सूरत समझ गया था कि वह तीनों सौच करने आई थी,,, लेकिन फिर वह अपने मन में सोचने लगा इतनी दूर आने की क्या जरूरत है कोई पास में ही तो नाला बताएं उसी में चले जाना चाहिए था उस नाले की गहराई में वह तीनों नजर भी नहीं आती,,,।





सूरज का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह समझ गया था कि थोड़ी देर में तीनों औरतों की नंगी गांड उसे दिखाई देने वाली है जिसमें उसकी खुद की सगी मां की भी गांड शामिल थी,,, वह तीनों कुछ देर खड़ी होकर बातें कर रही थी और उन तीनों की बातचीत सूरज को एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,, उनमें से पड़ोस वाली जो औरत थी वह बोली,,,।

सुन रही हो सुनैना भाभी,,,

क्या हुआ,,,,?

अरे हुआ क्या है,,,, सोनू की चाची को देखो पूरी तरह जवानी से गदराइ हुई है,,,,, और मजा लेने के चक्कर में अभी तक बच्चा पैदा नहीं कर रही है,,,।

(उसे औरत की बात सुनकर सूरज का दिन जोरों से धड़कने लगा क्योंकि उसकी बात सुनकर वह समझ गया था कि अब तीनों के बीच अंदरुनी बातें होने वाले हैं,,,, उस औरत की बात सुनकर सुनैना बोली,,,)





हां रे तू सच कह रही है,,, क्यों रे तुझे आगे की सोच नहीं है अभी तक तु मजा मार रही है,,,, जरा आगे की सोच इस उम्र में बच्चे हो जाएंगे तो आगे चलकर तुझे ही अच्छा लगेगा लेकिन तू है कि रोज मजा लेने के चक्कर में बच्चों के बारे में सोच ही नहीं रही है,,,।

क्या भाभी तुम भी इसकी बातों में आ गई,,, तुम्हें लगता है कि मैं बच्चा नहीं चाहती,,,,।

चाहती है तो अभी तक हुआ कि नहीं,,,।

अब यह सब तो भगवान की मर्जी है मैं तो चाहती हूं कि हो जाए,,,, लेकिन हो ही नहीं रहा है,,,,।





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थोड़ा जोर-जोर से धक्का मरवाया कर,,,, जल्दी बच्चा हो जाएगा,,,,(सूरज के पड़ोस वाली औरत बोली और उसकी बात सुनकर सूरज का लंड खड़ा होने लगा,,, उसकी बात सुनकर सुनैना हंसने लगी और उसे हंसता हुआ देखकर सोनू की चाची बोली,,,,)

क्या भाभी तुम भी,,,, उनको देखकर लगता है कि वह जोर-जोर से धक्का लगा पाते होंगे,,,,।

वही तो मैं भी सोच रही हूं,,,,, उनका शरीर देखकर मुझे लगता नहीं है कि वह कुछ कर पाते होंगे,,,,(सुनैना थोड़ा सा मजाक करते हुए बोली और अपनी मां के मुंह से इस तरह की बात सुनकर सूरज के तन बदन में आग लगने लगी,,,, क्योंकि उसकी बात सुनकर सूरज को एहसास हो रहा था कि उसकी मां भी जानती है कि औरत को छोड़ने के लिए मर्दाना अं ग के साथ-साथ गठीला बदन भी चाहिए,,,, सुनैना की बात सुनकर पड़ोस वाली औरत बोली)





हां भाभी मुझे भी कुछ जोड़ी जमती नहीं है,,, क्योंकि इनको देखो जवानी से भरी हुई ऊपर से नीचे तक जवानी से लदी हुई है,,, और भाई साहब को देखो मरीयल सा शरीर,,, मुझे तो लगता है की भाभी की बुर में डालते ही ढेर हो जाते होंगे,,,।(इतना कहने के साथ ही वह हंसने लगी साथ में सूरज की मां भी हंसने लगी उन दोनों का हंसता हुआ देखकर सोनू की चाची बोली)

हां हां हंस लो,,,, मेरी बेबसी पर तो हंसोगी ही ,,, तुम दोनों के पति हट्टे कट्टे हैं इसलिए,,, तुम दोनों जन ऐसा कह रही हो,,,।





नहीं रे ऐसा बिल्कुल भी नहीं है,,, यह तो थोड़ी बहुत हंसी मजाक हो रही थी लेकिन मैं सच में कह रही हूं कि तू बच्चा चाहती नहीं है या हो नहीं रहा है,,,।

सच कहूं तो भाभी हो ही नहीं रहा है मुझे भी बच्चों का बहुत शौक है लेकिन कर भी क्या सकती हूं,,,,

तेरे पति में तो खोट नहीं है,,,(सुनैना बोली)

मुझे और उनको देखकर क्या लगता है,,,

मुझे तो खोट तेरे पति मे हीं लगता है ,,(सुनैना बोली)

तो क्या भाभी,,,, मुझ में कोई कमी नहीं है मैं तो बच्चा चाहती हूं लेकिन सोनू के चाचा से ही कुछ नहीं होता,,,,।

(उन तीनों की बातों को सुनकर सूरज की हालत खराब हो रही थी सूरज इतना तो समझ गया था कि सोनू की चाची वाकई में बच्चा चाहती है लेकिन हो नहीं रहा था,,,, लेकिन अभी भी तीनों खड़ी की खड़ी ही थी तीनों में से कोई भी सौच करने के लिए बैठा नहीं था,,, जिसका सूरज को बेसब्री से इंतजार था,,,। वह तीनों औरतें आपस में विचार विमर्श कर ही रही थी कि तभी सूरज के पड़ोस वाली औरत बोली,,,,)





अरे भाभी देर हो रही है पहले जो करने आए हैं करते हुए बातचीत तो हगते हुए भी कर लेंगे,,,।

हां रे सच कह रही है,,, सोनू की चाची का दुख सुन कर तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,(सुनैना सोनू की चाची से सहानुभुति जताते हुए बोली,,,, सुनैना की बात सुनकर सूरज के पड़ोस वाली औरत बोली,,, )

समझना क्या है भाभी,,, मैं तो कहती हूं सोनू के साथ ही चुदवा कर मां बन जाना चाहिए,,,,(इतना कहते हुए वह धीरे-धीरे अपनी साड़ी ऊपर की तरफ उठने लगी वह सूरज जहां छुपा हुआ था उसके ठीक सामने खड़ी थी और उसकी मां और सोनू की चाची की पीठ सूरज की तरफ थी,,,, चांदनी रात के उजाले में सूरज को सब कुछ साथ नजर आ रहा था,,,, उसकी बात सुनकर सोनू की चाची बोली,,,,)

तू ही चुदवा ले अपने बेटे से दो-तीन और बच्चे पैदा कर ले,,,,।





मैं तो कर लूं,,, जिस दिन मुन्ना के बापू में लगेगा कि दम नहीं रहेगा तो मैं जरूर अपने बेटे से चुदवाऊंगी,,, आखिरकार यह भी तो जरूरी है लेकिन अभी तो मेरा मुन्ना बहुत छोटा है,,,, देखना उसे खिला-खिला कर सांड बनाऊंगी,,,,,,।

हां ताकि रोज तेरे ऊपर चढ़ सके,,, (उसकी बात सुनकर सुनैना भी चुटकी लेते हुए बोली तो अपनी मां की यह बात सुनकर सूरज का लंड एकदम से खड़ा हो गया क्योंकि सूरज को यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी मां इस तरह की बात करेगी क्योंकि आज तक उसने अपनी मां के मुंह से इस तरह के अश्लील शब्दों को कभी सुना भी नहीं,,था। और इस यकीन नहीं हो रहा था उसकी मां आपस में इस तरह की बातें कर रही है,,,,, सुनैना की बात सुनकर वह बोली,,)





हां भाभी मैं तो यही चाहती हूं,,,, आखिरकार औरत की होती किस लिए है,,,लंड लेने के लिए ही ना,,,

(उसे औरत की बात सुनकर तो सूरज की हालत और खराब होने लगी)

बुर लंड लेने के लिए बनी है तो क्या दिन रात लेती ही रहेगी,,,,(सुनैना भी उसकी बात पर चुटकी लेते हुए बोली तो अपनी मां के मुंह से लंड शब्द सुनकर सूरज का लंड एकदम से टन्ना गया,,,)

तो क्या भाभी मैं तो लेती रहूंगी मैं तो इसे भी यही समझा रही हूं,,, अगर भाई साहब से आग नहीं बुझ रही है तो,,, सोनू का ही ले ले वह भी तो जवान हो चुका है उसका भी तो लंड खड़ा होता होगा तुझे देख कर,,,,।





क्या बोल रही है रै थोड़ा तो शर्म कर,,,(सुनैना उसकी बात सुनकर उसकी बात को काटते हुए बोली)

तो क्या हो गया भाभी मैं सच कह रही हूं हर घर में यही हालत है लड़का जवान होते ही सबसे पहले उन लोगों की नजर घर की औरतों पर ही जाती है,,,,।

(सूरज के पड़ोस वाली औरत साड़ी को जांघों तक उठाए हुए बोली अभी तक वह भी अपनी साड़ी को कमर तक नहीं उठाई थी बाकी सोनू की चाची और सूरज की मां उसी तरह से हाथ में लोटा लेकर खड़ी थी,,, उसकी बात सुनकर सुनैना बोली,,,)

तुझे कैसे मालूम,,,, कि घर के लड़कों की नजर घर की औरतों पर ही रहती है,,,।

मुझे अनुभव है भाभी,,,,।





इसे तो सब चीज का अनुभव हो चुका है,,,,(सोनू की चाची बीच में बोली)

अनुभव से ही इंसान सीखता है और अनुभव से ही सुख का रास्ता प्राप्त होता है,,, तुम्हारे में अनुभव नहीं है इसीलिए तुम एक ही मर्द के पीछे खड़ी हो और अभी तक अपना दुख दूर नहीं कर पाई हो तुम्हारी जगह में होती तो अब तक सोनू से संबंध बनाकर मां बन गई होती,,,,।

तो फिर सोनू का नाम ली वह उसका भतीजा है,,,,(उसकी बात सुनकर सुनैना फिर से बोली,,, और सोनू की चाची भी सुनैना के सुर में सुर मिलाते हुए बोली)

तुझे लगता है कि सोनू से कुछ हो पाएगा ठीक से घास का ढेर तो उठा नहीं पाता है मेरा बोज कैसे उठा पाएगा,,,,।





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(उन तीन औरतों के पीछे सोनू का जिक्र हो रहा था और सोनू का जिक्र आते ही सूरज की हालत खराब होने लगी उसे समझ में आ गया कि घर में अगर जमा लड़का होता है तो उस पर औरतों की भी नजर रहती है,,, तभी तो सोनू की चाची ऐसा बोल रही है वह भी सोनू को अच्छी होगी,,,उसका दम खम देखी होगी,,, तभी तो उसके बारे में ऐसा बोल रही है,,,। सोनू की चाची की बात सुनकर वह औरत बोली,,,)

अरे भाभी रहने दो सोनू को पतला दुबला मत समझो जब ऐसा मौका मिलता है तो यही पतले दुबले लडके गोद में उठाकर चुदाई करते हैं,,,,।

अरे यह सब छोड़ तू बता रही थी कि तुझे अनुभव है तुझे कैसे पता चला कि घर के जवान लड़के घर की औरतों पर नजर रखते हैं,,,,(बीच में उसकी बात काटते हुए सुनैना बोली,,,,, सूरज अपने पड़ोस वाली औरत की बात सुनकर इसी बारे में सोच रहा था बस समझ गया था कि हर घर में यही होता है सोनू अपनी चाची को प्यासी नजरों से देखा है और वह खुद अपनी ही मां को गंदी नजरों से देखने लगा है,,, इसका मतलब साफ है हर घर में जवान लड़की घर की औरतों को ही गंदी नजर से देखते हैं और मौका तलाशते हैं,,,, सुनैना की बात सुनकर वह बोली,,,)





अरे हां भाभी,,,, तुम तो जानती हो कि सोनू की तरह ही मेरे घर में भी एक भतीजा था जो दो-तीन साल से दूसरे गांव चला गया,,,।

हां हां,,,,,(सुनैना उसके सुर में सुर मिलाते हुए बोली)

वो मुझ पर हमेशा गंदी नजर रखता था,,,।

गंदी नजर रखता था लेकिन तुझे कैसे पता चला,,,,,(सोनू की चाची होली क्योंकि भतीजे का सवाल था वह अपने भतीजे की काली करतूत बता रही थी और उसका खुद का भतीजा था सोनू इसलिए वह बड़े गौर से सुन रही थी)





अरे यह सब तो रोज का था लेकिन मुझे एक दिन पता चला जब मैं दोपहर में,,,सौच करने के लिए तालाब के किनारे जा रही थी,,, तो मुझे लगा कि कोई मेरे पीछे पीछे आ रहा है,,,, मैं बार-बार पीछे मुड़कर देख ले रही थी लेकिन वह पेड़ के पीछे छुप जा रहा था,,,। और मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी,,,, और देखते ही देखते मैं तालाब पर पहुंच मुझे इतना तो यकीन हो गया था कि कोई तो है जो मेरे पीछे-पीछे आ रहा है लेकिन मुझे इतने जोरो की लगी हुई थी कि मुझे ना चाहते हुए भी वही झाड़ियां में बठना पड़ा,,,,।

फिर क्या हुआ,,,?(उत्सुकता दिखाते हुए सुनैना बोली)





फिर क्या मैं तुमसे पीछे की तरफ देखी तो मैं दंग रह गई पेड़ के पीछे मेरा ही भतीजा छुप कर मुझे देख रहा था मेरी गांड देख रहा था,,,।

फिर तूने क्या की,,,,(सोनू की चाची बोली)

मैं तो एकदम दंग रह गई मुझे यकीन नहीं हो रहा है ताकि मेरा ही भतीजा मुझे इस हालत में देखने के लिए तड़प रहा है उस दिन तो मैंने कुछ नहीं बोली,,, दो-चार दिन इसी तरह से मैं दोपहर के समय आती रही और वह भी मेरे पीछे-पीछे आता रहा,,,,।

फिर,,,,(सुनैना बोली)

फिर क्या मैं तो परेशान होगई थी,,,, लेकिन एक बात है भाभी न जाने क्यों उसके सामने,,, साड़ी कमर तक उठाकर गांड दिखाने में बहुत मजा आने लगा था,,,।





क्या कह रही है तू,,,,(सोनू की चाची एकदम से आश्चर्य जताते हुए बोली,,, सूरज यह सब सुन रहा था उन औरतों की बातें सुनकर उसकी हालत खराब हो रही थी वह बेहद उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,और जिस तरह से सोनू की चाची पूछ रही थी सूरज अच्छी तरह से जानता था कि जिस तरह के हालात उसकी पड़ोसन के थे वही हालत सोनू की चाची के भी थे लेकिन सोनू की चाची को इस बात का अहसास तक नहीं था कि उसका भी भतीजा दिन रात उसे देखने की कोशिश करता रहता है,,,)

हां भाभी मुझे तो बहुत मजा आ रहा था मैं जानती थी कि वह मुझे चुप कर देख रहा है और उसकी मौजूदगी में मैं जब साड़ी उठाकर कमर तक लाती थी तो मेरी नंगी गांड देखकर जितना हुआ मस्त होता था उससे ज्यादा मजा मुझे भी आने लगा था मुझे पूरा विश्वास है अगर तुम लोग भी ऐसा करके देखोगी तो बहुत मजा आएगा,,,,।





अरे इसके तो भतीजा है मेरे कौन सा भतीजा है जो मैं दिखाती फिरूंगी,,,,(इस बार सुगंधा अपने हाथ में लिया हुआ लोटा नीचे जमीन पर रख दी और अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी यह देखकर सूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा और अपनी मां की बात सुनकर उसकी भी उत्सुकता बढ़ने लगी कि अब आगे क्या बात होती है,,,,)

हां सही बात है सुनैना भाभी के भतीजा कहां है,,,(इतना कहने के साथ ही सोनू की चाची भी अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी और यह देखकर सूरज का लंड टनटनाने लगा,,,,)

अरे भतीजा नहीं है तो बेटा तो है ना,,,, एकदम जवान गठीला बदन वाला,,,,।

(अपने पड़ोस वाली औरत के मुंह से अपना जिक्र सुनते ही सूरज एकदम से सचेत हो गया,,,, अपने बेटे का जिक्र सुनकर नाराजगी दिखाते हुए सुनैना बोली,,)

अरे पागल हो गई है क्या वह मेरा बेटा है,,,,।(और इतना कहने के साथ ही सुनैना अपनी साड़ी को एकदम कमर तक उठा दी और कमर तक साड़ी के उठते ही सूरज को उसकी मां की मदमस्त कर देने वाली नंगी गोरी गांड नजर आने लगी जो की चांदनी रात में चमक रही थी,,,,, यह नजारा देखते ही सूरज का लंड एकदम ताव में आ गया,,,,,, साड़ी को कमर तक उठाने पर कुछ क्षण तक इस स्थिति में खड़े रहने के बाद वह धीरे से बैठ गई ऐसा लग रहा था कि वह कुछ क्षण तक खड़ी होकर अपने बेटे को ही अपनी गांड के दर्शन करा रही थी,,, और सोनू की चाची भी उसी तरह से अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी नंगी गांड दिखाकर वह भी बैठ गई,,,,, अब तक जो खड़ी थी वह भी धीरे से बैठ गई अब इस तरह से दो औरतों की गांड सूरज के ठीक सामने थी और तीसरी सामने बैठी हुई थी और इतनी दूर से उसका कुछ भी नजर नहीं आ रहा था क्योंकि वहां पर बड़ी-बड़ी घास उगी हुई थी,,,, और वह औरत बोली,,,,)





बेटा है तो क्या हो गया,,,, एक बार अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी गांड दिखाना फिर कहना कि तुम्हारा बेटा अपनी आंखें बंद कर लिया या आंखें फाड़ कर देखने लगा,,,,,। भाभी इस दुनिया में सब मर्द एक जैसे ही होते हैं अगर उनकी आंखों के सामने उनकी मां बहन भी कपड़े उतार कर नंगी हो जाए तो उनके खूबसूरत बदन को देखने से वह इनकार नहीं कर पाएंगा,,,,।,,, इसीलिए कहती हूं भाभी अगर मेरी बात पर यकीन ना आए तो बस एक बार,,,, अपने बेटे के सामने अनजान बनते हुए कपड़े उतार कर देखना तुम्हारी नंगी गांड तुम्हारा नंगा बदन देखकर ना उसका लंड खड़ा हो जाए तो मेरा नाम बदल देना,,,,,।

(पड़ोस वाली औरत की बात सुनकर जहां पर सूरज के तन बदन में आग लग रही थी क्योंकि वह जानता था कि उसकी पड़ोसन जो कुछ भी कह रही है उसमें सत प्रतिशत सच्चाई है,,,, क्योंकि वह जानता था कि अगर उसकी पड़ोसन के कहे अनुसार उसकी मां अपने कपड़े उतार कर खड़ी हो जाएगी तो सच में उसका लंड खड़ा हो जाएगा,,,,।





वहीं दूसरी तरफ सूरज का जिक्र आते ही सोनू की चाची उस पल को याद करने लगी जिस पल वह भी घास का बड़ा सा गट्ठर सर पर उठाकर लाइ थी और उसकी मदद करने के लिए सोनू को बोली थी लेकिन सोनू से वजनदार घास का ढेर उठा नहीं और सूरज वाजद्दर घास को उठाने लगा जिसमें खुद सोनू की चाची उसकी मदद करने लगी और सोनू की चाची का हाथ सूरज पकड़ लिया था उसे पर सोनू की चाची पूरी तरह से मदहोश हो गई थी मस्त हो गई थी उस पल सोनू की चाची सूरज की आंखों में डूबने लगी थी,,,,

और दूसरी तरफ जिस तरह से उसकी पड़ोस वाली औरत सूरज का जिक्र कर रही थी सुनैना को तुरंत वह घटना याद आ गई,,, जब खुशी के मारे उसने अपने बेटे को गले लगाई थी और गले लगाने की वजह से उसके बेटे का लंड खड़ा हो गया था और सीधे उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था,,, उस घटना को याद करके सुनैना को अपने पड़ोस वाली औरत की बातों पर विश्वास हो गया,,, उसे यकीन हो गया कि दुनिया के सब मर्द एक जैसे ही होते हैं,,,





पड़ोस वाली औरत की बात सुनकर सुनैना बोली,,,, चल रहने दे,,, नहीं तो तु तो यह कहेगी की मुझे सूरज से चुदवा लेना चाहिए,,,,।

(इतना सुनते ही सूरज की हालत एकदम से खराब हो गई उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई उसके कानों में रस घोल रहा हो,,, वह पूरी तरह से मस्त हो गया था,,, एक तो उसे अपनी मां पर विश्वास नहीं था कि वह इस तरह से किसी गंदे शब्द का प्रयोग करेगी और वह भी उसमें उसका नाम जोड़कर,,,,, इसीलिए तो यह सुनने में वह पूरी तरह से मदहोश हो गया था,,,,, उसे अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं हो रहा था,,, और वह धीरे से अपना पैजामा नीचे करके अपने लंड को बाहर निकाल लिया और तीनों औरतों को देखकर उनकी नंगी गांड को देखकर उनकी अश्लील बातों को सुनकर अपने लंड को धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया,,, सुनैना की बात सुनकर,,,, वह औरत एकदम से उत्साहित होते हुए बोली,,,)





हां बिल्कुल भाभी मैं भी यही कहना चाह रही थी सूरज को देखते हो ना कितना गठीला बदन है उसका लंबा खट्टा खट्टा है उसका लंड जरूर एकदम गधे के जैसा लंबा और मोटा होगा,,,, एक बार बुर में जाएगा तो पानी निकालने के बाद ही निकलेगा बाहर,,,,।

(उसे औरत की बात सुनकर सुनैना की खुद की हालत खराब हो रही थी उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में से पेशाब तो निकल ही रहा था साथ में मदन रस भी निकल रहा था क्योंकि जैसा वह औरत बोलती थी उसे तरह की कल्पना सुनैना करने लगती थी,,,, और सूरज उसे औरत की बात सुनकर मन ही मन उसे धन्यवाद कर रहा था क्योंकि वहां उसकी मां को अपने ही बेटे के साथ हम बिस्तर होने का रास्ता दिखा रही थी,,,, उस औरत की बात सुनकर,,, सोनू की चाची बोली,,,,)

अच्छा मेरी चुदक्कड़ रानी तू कभी कह रही है की भाभी को अपने बेटे से चुदवा लेना चाहिए मुझे कह रही है कि अपने भतीजे से चुदवा लेना चाहिए,,, लेकिन क्या तू अपने भतीजे से चुदवाई यह तो तूने बताई ही नहीं,,,।





अरे यही तो बताने जा रही हूं और वैसे भी भाभी सोनू से तेरी प्यास बुझने वाली नहीं है तेरा गदराया बदन देखकर,,, तेरे लिए सूरज ही ठीक है,,,।

अरे बाबा तुम दोनों बारी-बारी से चुदवा लेना मेरे बेटे से,,,बस,,,, लेकिन तू यह तो बता फिर क्या हुआ,,,,।

(सूरज देख रहा था कि उसकी मां आगे की बात सुनने के लिए बहुत उत्सुक नजर आ रही थी और उन तीनों को देखकर उनकी बातों पर सुनकर सूरज की हालत खराब हो रही थी वह अपने लंड को मुठिया रहा था,,,,)

अरे फिर क्या भाभी मेरे भतीजे की हरकत की वजह से मुझे भी मजा आने लगा,,,, और एक दिन में नहा रही थी घर पर ही और वह चोरी से मुझे नहाते हुए देख रहा था मुझे मालूम था कि वह मुझे देख रहा है इसलिए मैं जानबूझकर अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर नहा रही थी और मुझे नंगी देखकर तो उसकी हालत खराब हो गई और उसने भी अपना लंड बाहर निकाल कर हिलाना शुरू कर दिया,,,, मौका देखकर मैं उसका हाथ पकड़ लिया और उसे एकदम से दीवार की औट से बाहर खींच ली,,, और जब मेरी नजर उसके लंड पर पड़ी तो मेरे तो होश उड़ गए,,, पहली बार में इतना मोटा और लंबा लंड देख रही थी मेरी तो बुर पानी पानी होने लगी,,,,।





फिर क्या करी,,,,?(सुनैना उत्साहित होते हुए बोली उसे उसकी बात में बहुत ही मजा आ रहा था यहां तक कि उसे अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव हो रहा था)

फिर क्या मैं उसे रंगे हाथ पकड़ ली थी मैं उसके साथ मनमानी कर लेना चाहती थी इसलिए मैं उससे बोली,,,,।

यह क्या कर रहा है तू अपनी चाची को देखकर इस तरह से कोई हरकत करता है क्या,,,,?

(तब वह घबराते हुए बोला,,,)

कुछ नहीं चाची तुम बहुत खूबसूरत हो इसलिए ना चाहते हुए भी मुझसे यह हरकत हो जाती है,,,।

इसका मतलब कि तू अपनी चाची को ही चोदना चाहता है ना,,,,।

(मेरी बात सुनकर वह हा में सिर हिला दिया,,, क्या करूं भाभी उसका लंड देखकर मैं खुद पागल हो गई थी और मैं न जाने कौन सी मदहोशी में थी कि सीधे उसका लंड पर हाथ रख दे जो एकदम गरम था एकदम मोटा लंबा और जानती थी कि अगर उसका लंड एक बार मेरी बुर में गया तुमने जिंदगी भर के लिए उसकी गुलाम हो जाऊंगी,,, और मैं उसके लंड को हिलाते हुए बोली,,,)

चोदेगा मुझे,,,,

(वह कुछ बोला नहीं बस हां मैं से हिला दिया मैं जानती थी वह इनकार नहीं कर सकता और मैं उसका हाथ पकड़ कर घुसल खाने में खींच ली लेकिन मेरी किस्मत खराब थी कि इस समय उसके चाचा आ गए और हम दोनों को गुसलखाने में देख ली मैं एकदम घबरा गई डर गई पर मैंने सारा ईल्जाम अपने भतीजे पर ही थोप दिया,,, उसके चाचा उस पर इतना गुस्सा हुए की दोनों भाइयों में झगड़ा हो गया और वह अपने बेटे को लेकर अपने परिवार को लेकर दूसरे गांव में जाकर बस गया,,,,।

बाप रे इतना कुछ हो गया था तुम दोनों में लेकिन यह तूने अच्छा नहीं की,,,,(सुनैना सोच करते हुए बोली)

क्या अच्छा नहीं की भाभी,,

तेरी भी गलती थी लेकिन तूने सारा एग्जाम उसे पर लगा दी जिसकी वजह से उस बेचारे को गांव छोड़ना पड़ा,,,।

अरे भाभी इस बात का अफसोस तो मुझे भी है लेकिन क्या करती रही हाथ जो पकड़ी गई थी अगर उसे पर एग्जाम ना लगती तो उसके चाचा तो मेरी जान ही ले लेते,,,, वैसे सही है भाभी उसे दिन अगर उसका लंड मेरी बुर में चला गया होता तो मेरी तो जिंदगी बन गई होती और हां जब तक पड़े न जाओ तब तक यह काम करते ही रहना चाहिए बहुत मजा आता है इसमें,,,,,,,,।

भाभी यह तो पागल हो गई है,,,(सोनू की चाची सुनैना से बोली तो सुनैना उसकी बात सुनकर बोली)

ऐसी बात नहीं है यह जो भी कह रही है उसमें सच्चाई है और मुझे तो लगता है शायद हर घर में ऐसा होता ही होगा तो भी अपनी सोनू पर नजर रखना कहीं ऐसा ना हो कि वह तुझ पर नजर रखता हो तुझे देख कर अपना हीलाता हो,,,,।

तब तो भाभी तुम्हें भी सूरज पर नजर रखना होगा सूरज तो एकदम सांड की तरह है कहीं ऐसा ना हो कि तुम्हारी नंगी गांड देखकर तुम पर ही टूट पड़े,,, और वैसे भी भाभी मुझे पूरा यकीन है कि अगर ऐसा कुछ हो गया तुम्हारे और सूरज के बीच में तो सूरज तुम्हें मत कर देना जिंदगी का एहसास सुख देगा कभी पाई नहीं होगी हर एक धक्का जबरदस्त होगा,,,।

धत्,,, बेशर्म,,,, मैं तो कहती हूं कि तू ही ले जा सूरज को अपने घर दिन रात उससे चुदवा,,,, उसका भी भला कर और वह तेरा भला कर देगा,,,, तुझे मां बनने का सुख देगा,,,,।

क्या भाभी तुम भी,,,

अरे सच कह रही हूं सोनू की चाची,,,, मुझे पूरा यकीन है कि मेरे बेटे से चुदवा कर तू मां जरूर बन जाएगी,,,।

(अपनी मां की तरह की बातें सुनकर सूरज के लंड में एकदम से ताव आ गया क्योंकि इसकी मां खुद सोनू की चाची को उसे चुदवाने के लिए बोल रही थी,, तीनों की गंदी बातों को सुनकर उसे पूरा यकीन हो गया था कि मर्दों की तरह औरतें भी आपस में इसी तरह की गंदी बातें करती हैं,,,, तीनों के बारे में सोचकर सूरज जोर-जोर से अपने लंड को हिला रहा था,,, और तीनों को भी यहां पर आए काफी देर हो चुकी थी इसलिए तीनों लोटे में से पानी लेकर अपनी गांड धोने लगी और धीरे से खड़ी हो गई सूरज अपनी मां की नंगी गांड को देखकर सोनू की चाची की नंगी गांड को देखकर जोर जोर से अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते उसके लंड से वीर्य का फवारा फुटा और वह गहरी सांस लेने लगा,,,,,।

तीनों औरतें वापस गांव की तरफ जा रही थी सूरज अपने पजामी को ऊपर करके कुछ देर तक वहीं बैठ रहा तो फिर जब वह तीनों औरतें उसकी आंख से ओझल हो गई तो अभी धीरे से उठकर खड़ा हुआ और घास के ढेर को अपने सर पर रखकर गांव की तरफ चलने लगा।)
 
घास लेकर लौटते समय मैदान में जो कुछ भी हुआ था उसे अपनी आंखों से देखकर सूरज की तो सीटी पीटी गुम हो गई थी,,,। क्योंकि उसने अपनी आंखों से एक साथ तीन-तीन औरतों को सौच करते हुए देखा था,, उन तीन औरतों में एक उसकी मां भी थी जिसकी नंगी गोरी गांड देख कर उसका लंड एकदम से खड़ा हो गया था,,,, यह उसके जीवन का पहला मौका था जब उसने एक साथ तीन-तीन औरतों को इस अवस्था में देखा था,,,। वैसे तो सूरज कभी भी औरतों को इस स्थिति में देखना पसंद नहीं करता था और ना ही कभी देखा था लेकिन जिस दिन से उसके दोस्त सोनू ने उसे अपनी ही चाची की मद-मस्त कर देने वाली गांड को दिखाया था,,, और उसी दिन से सूरज का औरतों को देखने का नजरिया पूरी तरह से बदल गया था,,,।





अब हालात इस तरह के बन गए थे कि वह अपने ही घर पर अपनी बहन और अपनी मां को गंदी नजर से देखना शुरू कर दिया था नतीजन मैदान में वह अपनी मां को और बाकी दोनों औरतों को सौच करते हुए देख रहा था ,, और उन तीनों की बातों को भी सुन रहा था उन बातों के केंद्र में सोनू और वह खुद था और सोनू और उसमें जिस तरह की तुलना हो रही थी सोनू उसमें बिल्कुल भी खड़ा नहीं उतर रहा था सूरज का पलड़ा गठीले बदन को देखकर भारी नजर आ रहा था,,,, सूरज उन तीनों औरतों की बातों को सुनकर पूरी तरह से आश्चर्यचकित हो गया था उसे यकीन नहीं हो रहा था की औरतें बिस्तर की बातें करती होगी खास करके उसे इस बात से और अचंभा हो रहा था कि उन तीनों औरतों में उसकी मां भी थी जो गंदी बातें कर रही थी,,,,।





उन तीनों की बातों को सुनकर सूरज समझ गया था कि सोनू की चाची मां बनने के लिए तड़प रही है लेकिन सोनू का चाचा उसे मां बनाने में सक्षम नहीं है यहां तक कि उसे शरीर सुख देने में भी सक्षम नहीं है, यह बात उसे अपनी ही पड़ोस वाली औरत से सुनने को मिली थी,,,,। उसे औरत की बात को सुनकर सूरज इतना तो समझ गया था कि औरत को खुश करने के लिए मर्दों का गठीला बदन और उसका मर्दाना अंग दोनों सांड की तरह होना चाहिए जैसा कि उसका खुद का था और बात ही बात में उसे पड़ोस वाली औरत ने यह भी कहा था कि अगर उसे मन बना है तो सूरज से चुदवा ले या सोनू से,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि सोनू की चाची सोनू से कभी भी नहीं चुदवाने वाली,, क्योंकि सोनू को वह हमेशा डांटती हई रहती थी क्योंकि सोनू कभी भी उसके चाचा के मां के मुताबिक काम नहीं करता था और इसीलिए वह भी सोचती हो कि कि जब वह छोटा-मोटा काम नहीं कर पता तो भला उसे चोदकर मां कैसे बनाएगा,,,,।





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उन तीनों की बातों को सुनकर सूरज को अपना भविष्य उज्जवल नजर आ रहा था,,,।,,, समझ गया था कि थोड़ी सी कोशिश करने पर सोनू की चाची के साथ-साथ उसकी पड़ोस वाली औरत की उसके नीचे आने के लिए तैयार हो जाएगी और अगर सही किस्मत रहे तो उसकी मां भी उसके सामने अपनी दोनों टांगें खोल देगी,,,, यही बात उसे पूरी तरह से उत्तेजित कर गई थी जिसके चलते हम तीनों औरतों की अश्लील बातों को सुनकर उनकी नंगी गांड देखकर सूरज से रहा नहीं गया था और वह अपनी मां के साथ-साथ दोनों औरतों की नंगी गांड देखकर अपने लंड को अपने पजामे से बाहर निकालने के लिए मजबूर हो गया था,,, और उन तीनों औरतों के पिछवाड़े को देखकर अपने हाथों से अपने लंड को निकाल कर अपने लंड की गर्मी को शांत किया,,,।





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उन तीनों को वहां से निकल जाने के बाद कुछ देर बाद सूरज भी अपने घर की तरफ चल दिया,,,,,,, रात हो चुकी थी उसकी मां खाना बना रही थी सूरज घास का ढेर उसके उचित स्थान पर रखकर सीधे अपनी मां के पास पहुंच गया वह जानता था कि अभी खाना नहीं बना होगा लेकिन वह अपनी मां से बातें करना चाहता था अपनी मां खूबसूरत चेहरे को देखना चाहता था उसकी गोलाईयों को झांकना चाहता था,,, इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,।

खाना तैयार हो गया क्या मां,,,,।

नहीं अभी समय है क्यों आज तुझे ज्यादा भूख लग गई है क्या,,,,?(गरम-गरम रोटी को तवे पर रखते हुए बोली,,,, और उसे गरम रोटी को देखकर सूरज अपने मन में तुरंत सोचने लगा कि उसकी मां की भी तवे की तरह एकदम गरम होगी और रोटी की तरह चुदवासी होने पर फुल जाती होगी,,,, कितना गजब लगता होगा उसकी बुर देखकर,,,, सूरज को इस तरह से ख्यालों में खोया देखकर सुनैना फिर बोली,,,)

क्या हुआ क्या सोच रहा है,,,?





कककक,,, कुछ तो नहीं मैं तो यह कह रहा था कि आज सच में मुझे बड़ी जोरों की भूख लगी है,,,,।

क्यों खेत में ज्यादा मेहनत करना पड़ गया क्या,,,?

हां मां आज इतना सारा खास काट कर लाया हूं कि तीन-चार दिन तक घास लाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी,,,,।

अरे कितना सारा घास काट कर लाया है और तूने इतना सारा घास उठा कैसे लिया,,,,।(सुनैना अपने बेटे की तरफ देखकर आश्चर्य जताते हुए बोली,,क्योंकि वह जानती थी कि ज्यादा से ज्यादा सूरज कितना बोझ उठा पाएगा,,,,)

अरे मा अभी तो अंधेरा हो गया है सुबह देखना तब तुम ही सोच में पड़ जाओगी,,,,,,।

अरे ज्यादा से ज्यादा कितना उठा लेगा दो टोकरी उससे ज्यादा कहा उठा पता है तू,,,,।





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अरे मां,,, अब मैं पहले वाला सूरज नहीं हूं,, पूरी तरह से मर्द बन गया हूं,,,,,।

(अपने बेटे के मुंह से मर्द शब्द सुनते ही सुनैना के तन बदन में हलचल सिमटने लगी और उसे उसे दिन वाली घटना याद आ गई जब उसे खुशी के मारे गले लगाई थी,, इस समय अपने बेटे का मर्द होने का एहसास उसने एकदम साफ तौर पर अपनी दोनों टांगों के बीच महसूस की थी,,,,, और पल भर में उसे अभी-अभी मैदान में सोच करने वाली घटना याद आती जब उसकी पड़ोस वाली औरत ही उसे भी अपने बेटे के साथ संबंध बनाने के लिए बोल रही थी और यह भी कह रही थी कि सूरज कितना गठीले बदन वाला है बहुत मजा देगा,,,,,,, सुनैना कुछ देर के लिए ख्यालों में खो गई थी तो इस बार सूरज उसे होश में लाते हुए बोला,,,,)





अरे क्या सोच रही हो मुझ पर विश्वास नहीं है क्या,,,?

नहीं नहीं अब तो तुझ पर विश्वास करना ही होगा,,,, क्योंकि अब तू तो रोजगारी भी करने लगा है बड़ा हो गया है,,,,।

बड़ा नहीं पूरा मर्द हो गया हूं,,,,।(सूरज मर्द शब्द का उपयोग अपनी मां के सामने बार-बार जानबूझकर कर रहा था,,,, क्योंकि बड़ा हो गया हूं इसका मतलब सामान्य होता है लेकिन पूरा मर्द हो गया हम इसका मतलब एक औरत को खुश करने लायक हो गया हूं ऐसा वह समझता था और ऐसा था अभी तभी तो जब-जब सूरज के मुंह से मर्द शब्द सुनती थी सुनैना के तन बदन में आग लग जाती थी,,)

हां हां पूरा मर्द हो गया है लेकिन यह तो समय आएगा तभी पता चलेगा,,,,,(सुनैना के मुंह से भी अचानक यह शब्द निकल गया उसके कहने का मतलब यह था कि जब कभी मौका मिलेगा तो वह भी आजमा लेगी कि उसका बेटा कितना मर्द हो गया है,,,। अपनी मां की बात सुनकर सूरज बोला,,,)





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कैसा समय इसमें समय क्या देखना आजमाना है तो अभी आजमा लो,,,,,,(सूरज अपनी मां से दो अर्थ वाली बात कर रहा था लेकिन एकदम सहज होकर ताकि उसकी मां को बिल्कुल भी सपना हो कि वह किस बारे में बात कर रहा था लेकिन उसकी मां उसके कहने के मतलब को अपने तरीके से ले रही थी इसलिए उसकी बात सुनकर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल मचने लगी,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या हो रहा है यह सब सौच करते समय की बात का ही नतीजा था,,,, जो उसके मन में अपने ही बेटे को लेकर गंदी-गंदी भावनाएं पैदा हो रही थी,,,,, फिर भी अपने आप को संभालते हुए सुनैना अपने बेटे से नजर मिलाई बिना ही तवे पर रोटी को पलटते हुए बोली,,, )





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अभी ईस समय आजमाने जैसा कुछ भी नहीं है,,,, जब आजमाना होगा तब आजमा लूंगी वैसे भी तू कहां भागा जा रहा है,,,।

(अपनी मां की बातें सुनकर सूरज अपने मन में ही बोला कल पर क्यों छोड़ती हो मां चलो अभी आजमालो चलो अपने कमरे में खटिया पर तुम्हारा बदन दर्द न करने लगे तो बोलना ऐसी चुदाई करूंगा की खटिया टूट जाएगी और तुम्हारी बुर का भोसड़ा बन जाएगा,,,, सूरज अपने मन में ही इस तरह की बातों को सोचकर एकदम से गर्म हो गया और उसका लंड एकदम से खड़ा हो गया वह जिस तरह से बैठा था उसके पजामे के आगे वाले भाग में,,,, ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे सूरज कुछ भरा हो,,, और अनजाने में ही सुनैना की नजर अपने बेटे की पजामे के आगे वाले भाग पर चली गई,,, और जैसे ही पजामे के आगे फुले वाले भाग को देखी,,, सुनैना के तो होश उड़ गई उसके बदन में मीठी-मीठी गुदगुदी होने लगी,,, उसे वाकई में एहसास होने लगा कि वाकई में उसका बेटा मर्द हो गया है,,,, लेकिन जल्द ही उसने अपनी नजर को वहां से हटा ली,,, सुनैना की हालत खराब हो रही थी,,,,,,, सुनैना का दिल जोरो से धड़क रहा था अपने बेटे की उपस्थिति में उसे पहली बार इस तरह का एहसास हो रहा था और यह सब किस लिए हो रहा था,,, उसे अच्छी तरह से समझ में आ रहा था,,,,,।





इसी बीच आटा गुंथने और तवे पर पकने में उसके साड़ी का पल्लू कब उसके कंधे से नीचे गिर गया उसे पता ही नहीं चला और साड़ी का पल्लू नीचे गिरते ही उसकी भारी भरकम चूचियां एकदम से नजर आने लगी जिस पर सूरज की नजर पडते ही उसकी आंखों में वासना की चमक दिखाई देने लगी,,, अजीब से असमंजस में पड़ी सुनैना को इस बात का भान हीं नहीं था कि उसके साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर गया है,,,, और ईसी का फायदा उठाते हुए सूरज अपनी आंखों को सेंक रहा था,,,, चूल्हे के सामने खाना बनाने से और गर्मी का मौसम होने की वजह से पसीने की बूंदे उसके माथे से होते हुए मोती के दाने की तरह उसके बदन से लुढ़कते हुए सीधे उसकी चूचियों के बीच की पतली दरार में प्रवेश कर रही थी,,,। यह नजारा ऐसा लग रहा था मानों जैसे गहरी खाई में झरना का पानी गिर रहा हो,,, और इससे कामुक नजारे को देखकर सूरज को इस बात का डर था की कही उसके लंड से झरना ना बहने लगे,,,,।





कुछ देर के लिए दोनों के बीच वार्तालाप एकदम से बंद हो चुकी थी क्योंकि सूरज अपनी मां की चूचियों को ताड़ने में लगा हुआ था,,, गनीमत इस बात का था कि उसकी मां की चूचियां ब्लाउज में कह देती अगर ब्लाउज के बाहर आजाद होती तो शायद सूरज अपनी मां के दोनों कबूतरों को अपनी हथेलियों में दबोच लेता,,, इसी बीच सुनैना की नजर जैसे ही अपनी बेटी पर पड़ी तो उसकी नजर के सिधान को देखकर वह एकदम से चौंक गई,,, तुरंत उसकी नजर अपनी छतिया पर गई तो उसके होश उड़ गए उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसके साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर गया है और उसकी भारी भरकम खरबूजा जैसी चुचीया एकदम से उजागर हो गई है,, और उसकी चूचियों को उसका ही बेटा प्यासी नजरों से देख रहा है,,,, सुनैना तो एकदम से बेहाल हो गई अपने बेटे के नजरिया को देखकर वह अंदर ही अंदर पानी पानी हो रही थी उसे नहीं मालूम था कि उसका बेटा वाकई में इतना बड़ा हो गया है कि खुद की मां को प्यासी नजरों से देख रहा है,,,,।





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सुनैना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें चूल्हे की आग को वह अपने हाथों से ठीक कर रही थी क्योंकि चूल्हे में आग कमजोर पड़ती जा रही थी लेकिन उसकी दोनों टांगों के बीच की आग भढ़कती जा रही थी,,,, सुनैना को साफ महसूस हो रहा था कि उसकी बुर पानी छोड़ रही थी,,, और यह एहसास उसे एकदम से सोचने पर मजबूर कर दे रहा था कि यह उसे क्या हो रहा है,,, ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ था और वह भी अपने बेटे की मौजूदगी में और अपने बेटे के कारण ही वह क्यों इतनी उत्तेजित हो रही है क्यों इतनी शर्मिंदगी महसूस हो रही है क्यों,,, उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल मची हुई है,,,,। वह अपनी साड़ी के पल्लु को ठीक कर लेना चाहती थी लेकिन ऐसा करने में उसे शर्म महसूस हो रही थी,,, लेकिन इसी तरह से बैठे रहना भी उचित नहीं था,,,, इसी बीच उसकी नजर एक बार फिर से अपने बेटे की पजामे के आगे वाले भाग पर गई तो वह फिर से मदहोश होने लगी,,, क्योंकि वह भाग और भी ज्यादा फूलने लगा था और यह देखकर तो उसके होश उड़े जा रहे थे क्योंकि वह अनुभवी थी वह जानती थी कि उत्तेजित होने पर मर्द का पजामा कितना ऊपर उठता है लेकिन उसके बेटे का तो ऐसा लग रहा था की बेल को बांधने वाला खूंटा हो गया,,, इसलिए सुनैना को समझ में नहीं आ रहा था कि उसके बेटे का लंड कितना मोटा और तगड़ा और लंबा है,,,,।

Sunaina or uska beta





उत्तेजना के हमारे सुनैना की सांस ऊपर नीचे हो रही थी और उसी के साथ ही उसकी भारी भरकम चूंचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जो कि उसे और भी ज्यादा शर्मिंदगी महसूस करवा रही थी क्योंकि उसकी उठाती बैठी थी चूचियों को देखकर उसके बेटे की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी,,,, वह इस स्थिति से निकलना चाहती थी लेकिन कैसे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि तभी उसने सब्जी में डालने के लिए पानी का ध्यान आ गया और वह अपने बेटे से बोली,,,।

सूरज जरा एक लोटा पानी लाना तो सब्जी में डालना है,,,,।





ठीक है मां अभी लाता हूं,,,,(सूरज बेमन से बोला क्योंकि वहां से हटने का मन उसका बिल्कुल भी नहीं था,,, क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मां की चूचियां थी जो बड़ी मादक तरीके से ऊपर नीचे हो रही थी,,,, सूरज वहां से पानी लेने चला गया और इसी मौके का फायदा उठाते हुए सुनैना अपनी साड़ी के पल्लू को एकदम से ठीक कर ली एक तरह से अपनी बेटी से घबरा गई थी उसकी नजरिया को देखकर अंदर ही अंदर उसे डर लगने लगा था और वह भी इस बात का एहसास करने लगी थी कि वाकई में उसकी चुचीया,, ब्लाउज के अंदर का देती वरना जिस तरह से उसका बेटा प्यासी आंखों से देख रहा था वह जरूर उसकी चूचियों को अपने हाथ में भर लेता,,,।





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थोड़ी ही देर में सूरज पानी भरकर ले आया और उसकी मां सब्जी में डालकर उसे अच्छे से पकाने लगी और थोड़ी देर में भोजन तैयार हो गया था,,,, भोजन तैयार होने पर वह खाना परोसने लगी और आवाज देकर रानी को बुलाई लेकिन रानी घर के बाहर अपनी सहेलियों से बातें कर रही थी इसलिए वह जोर से आवाज थोड़ी देर में आई,,,, तब तक सुनैना अपने बेटे के लिए भोजन परोस दी थी,,, सुनैना का पति भोला घर पर आ चुका था लेकिन अभी भी उसका ठिकाना नहीं था कभी-कभी आधी रात को आता था कभी-कभी आता ही नहीं था इसलिए वह उसका खाना नहीं परोसी और रानी का इंतजार करने लगी,,,।

तुम भी खा लो मां,,,,

नहीं तो खा ले मैं रानी के साथ खा लूंगी वरना उसे अकेले खाना पड़ेगा,,,।

Kalpna me Suraj or sunaina





ठीक है,,,(और ऐसा कहकर सूरज खाना खाने लगा,,,, सूरज बार-बार अपनी मां की तरफ देख ले रहा था लेकिन उसकी मां इस पर अपने कपड़ों को दुरुस्त करके बैठी हुई थी हालांकि साड़ी का पल्लू ठीक करने के बाद भी अपनी चूचियों की गोलाइयों को छुपा नहीं सकती थी क्योंकि उसकी चूचियां इतनी ज्यादा उन्नत और उभरी हुई थी की साड़ी के अंदर से भी अपने उभार को बखूबी दिखा रही थी,,,,,, तभी रोटी तोड़कर अपने मुंह में डालते हुए सूरज अपनी मां से बोला,,)

मां तवे पर रोटी क्यों फूल जाती है,,?(सूरज शरारत भरी अंदाज में बोला था रोटी के फूल ने से इसका मतलब साफ था वह अपनी मां की बुर के बारे में बात कर रहा था लेकिन सुनैना नहीं जानती थी कि उसका बेटा किस उद्देश्य से इस तरह की बात कर रहा है इसलिए वह एकदम सहज होते हुए बोली,,)

तभी पर जब रोटी गरम होती है तो अपने आप ही फुल जाती है,,,,।

(इस बात को कहने में उसे एकदम से अपनी दोनों टांगों के बीच की स्थिति का ख्याल आ गया,,, वह एकदम से मदहोश होने लगी और अपने आप से ही बोली यही हाल तो उसकी बुर का भी होता है जब वह गर्म होती है तो उसकी बुर भी तवे पर रखी हुई रोटी की तरह फूल जाती है,,,, और यह ख्याल उसके मन में आते हैं उसकी बुर से पानी टपकने लगा और वह अपने आप से ही बोली,,, यह मुझे क्या हो रहा है मेरे मन में इस तरह के ख्याल क्यों आ रहे है,,, और वह भी अपने बेटे को लेकर,,, नहीं नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए यह पाप है यह गलत है,,,,, और सूरज अपनी मां का जवाब सुनकर मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहा था क्योंकि वह जानता था कि वह किस बारे में पूछा है,,,,,, थोड़ी देर में खाना खाकर सूरज कुछ दिन के लिए बाहर डालने के लिए चला गया था और इसी बीच रानी भी घर में आकर अपनी मां के साथ खाना खा चुकी थी घर का काम खत्म करके,,, अपने कमरे में सोने चली गई थी,,,।

Sunaina ka kalpna apne bete k sath





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लेकिन उसकी आंखों में नींद नहीं थी बार-बार उसे अपने बेटे का ख्याल आ रहा था उसके पजामे में बने हुए तंबू का ख्याल आ रहा था और जिस तरह वह उसकी चूचियों को देख रहा था उसे बारे में सोच कर तो उसकी बुर से पानी टपक रहा था,,,, कुल मिलाकर सुनैना का बुरा हाल था बार-बार वह अपनी बेटी का ख्याल अपने मन में न लाने की दुहाई देती थी लेकिन अपने मां के आगे मजबूर हो जाती थी,,, बार-बार उसके मन में उसके बेटे का ख्याल आ रहा था वह बार-बार करवट बदल रही थी और अपने पति को याद कर रही थी क्योंकि इस मादकता भरे चक्रव्यूह से इस समय उसका पति ही उसे बाहर निकाल सकता था उसकी चुदाई करके,,, लेकिन वह जानती थी कि उसका पति का कोई ठिकाना नहीं है आए भी या ना भी आए,,,,,।

अपनी बुर की प्यास से वह लाचार हो चुकी थी,,,। जब कोई रास्ता नजर नहीं आया तो मजबूरन उसे अपनी उंगली का सहारा लेना पड़ा और अपनी आंखों को बंद करके धीरे-धीरे अपनी साड़ी को अपनी गांड ऊपर उठकर कमर तक अपनी साड़ी को खींच दी और कमर के नीचे हो पूरी तरह से नंगी हो गई अपनी गुलाबी बुर को अपनी हथेली से रगड़ने लगी,,, धीरे-धीरे उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,, वह मदहोश हो रही थी बेकाबू हो रही थी,,,। और न जाने कैसा नशा उसके दिलों दिमाग पर छाया हुआ था कि कल्पना ने उसे अपना बेटा नजर आने लगा जो उसकी प्यास को देखकर उसे पर तरस खा रहा था,,, ।

अपनी प्यासी बुर को लगातार मसलते हुए वह अपने बेटे की तरफ देख रही थी,,, उसका बेटा भी अपनी मां की स्थिति से वाकिफ हो चुका था इसलिए बिना कुछ बोले अपनी पजामा को उतार कर एकदम नंगा हो गया और अपने खड़े लंड को हाथ में लेकर हिलने लगा,,,, कल्पना में सुनैना अपने हाथ की उंगली से इशारा करके अपने बेटे को अपने पास बुलाने लगी,,, और सूरज अपने लंड को हिलाते हुए अपनी मां के पास पहुंच गया और धीरे से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया अब कुछ भी कहने की जरूरत नहीं थी आंखों को बंद करके सुनैना पूरी तरह से कल्पना की दुनिया में खो चुकी थी और वह कल्पना में देख रही थी कि उसका बेटा उसके गुलाबी छेंद पर अपना मोटा सुपाड़ा रखकर अपनी कमर को आगे की तरफ खेलने लगा और इसी बीच उसकी उंगली उसकी बुर में प्रवेश करने लगी और जैसे-जैसे वह उंगली को अंदर बाहर कर रही थी वैसे वैसे उसका बेटा कल्पना में अपनी कमर हिला कर अपनी मां को चोद रहा था देखते ही देखते उसके धक्के एकदम तेज हो गए,,

Sunaina kalpna me apne bete se chudwati huyi





और वास्तविक जीवन में सुनैना की उंगली बड़ी तेजी से अंदर बाहर होने लगी देखते ही देखते सूरज कल्पना में अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर जोर-जोर से धक्के लगना शुरू कर दिया और पूरे कमरे में सुनैना की सिसकारी की आवाज गुंजने लगी,,, और फिर देखते ही देखते उसका पानी निकल गया,,,, जब उसकी आंख खुली तो खटिया पर उसका बेटा नहीं था वह अकेले ही थी और उसकी उंगलि बुर में घुसी हुई थी,,, अपनी ना समझी और चाहत पर उसे हंसी आ गई लेकिन जो कुछ भी उसने की थी उसे लेकर उसे पछतावा होने लगा और आइंदा ऐसी गलती न करने की कसम खाकर वह करवट लेकर सो गई,,,।
 
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