Incest पहाडी मौसम - Page 14 - SexBaba
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Incest पहाडी मौसम

सूरज बड़े चलाकी से कमला को अपने आगे बैठने के लिए मजबूर कर दिया था भले ही कमला उसकी मां की सौतन थी लेकिन कमला को देखकर सूरज का भी लंड खड़ा हो जाता था, अपने बाप के साथ उसने कमला की काम कलाओं को बड़ी बारीकी से देखा था एक मर्द को खुश करने की कल उसे अच्छी तरह से आई थी,,, मर्दों को रिझाने की अदा बेहद काबिले तारीफ थी भले ही फिर वह मर्द के सामने अपनी गांड मटका के चलना हो या फिर धीरे-धीरे अपने बदन से वस्त्र उतार कर वस्त्र विहीन होना हो सभी कलाओं में वह पूरी तरह से पारंगत थी और उसकी यही कला का सूरज भी दीवाना हो गया था,,,।





कुछ देर पहले ही उसने शालू को अपनी हरकतों से मदहोश कर दिया था नीलू के मुकाबले शालू थोड़ी शर्मीली और शांत स्वभाव की थी मर्दों की हरकत के बारे में उसे ज्यादा कुछ जानकारी नहीं थी और ना ही उसने कभी मर्दों के उसे कठोर रंग को देखा था जिसे देखकर अक्सर और तो की टांगों के बीच की पतली दरार पानी पानी हो जाती है लेकिन कुछ देर पहले ही उसने उसे कठोर अंग को अपनी हथेली में महसूस की थी उसकी मोटाई उसकी गरमाहट को पल भर के लिए महसूस करके वह शर्म से पानी पानी हो गई थी। इसलिए तो वह एकदम शांत थी,,,, और अपने मन में यही सोच रही थी कि अब उस औरत का क्या होगा जो सूरज के साथ बैठने के लिए तैयार हो गई थी यही सोच कर उसका दिल जोरो से धड़क रहा था। सूरज अभी भी कमला को ठीक से अपने आगे बैठाने में व्यस्तथा,, उसका दिल सोच कर ही जोरों से धड़क रहा था कि एक जवानी से भरी हुई औरत उसकी टांगों के बीच बैठने जा रही थी उसकी गदराई मोटी मोटी गांड निश्चित तौर पर उसके मोटे तगड़े लंड से स्पर्श होने वाली थी,,,, सूरज पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डूबा जा रहा था क्योंकि कुछ देर पहले ही, मुखिया की बेटी को अपने लंड के अकड़ पन का एहसास दिलाया था और वैसे भी सूरज का अगला शिकार शालू ही थी जिसे भोगकर वह मुखिया के घर की तीनों औरतों का मजा ले चुका होगा,,,, और शायद पुर गांव में पूरे गांव में क्या गांव के अगल-बगल के 100 गांव में सूरज एक अकेला लौता मर्द होगा जो एक ही घर की तीनों औरतों के साथ मजा ले चुका होगा,,,।





ठीक से बैठो चाची आराम से कोई जल्दबाजी नहीं है,,, अरे मैं तो चला जा रहा था लेकिन तुमको छोटे-छोटे बच्चों के साथ खड़ी दुपहरी में ज्यादा देखकर मुझे रहा नहीं गया इसलिए तुम्हारी मदद कर रहा हूं तुम देख तो रही हो हमारी बैलगाड़ी में बिल्कुल भी जगह नहीं है,,,।

हां वह तो मैं देख ही रही हूं तुम्हारा बड़प्पन है जो मुझे बैलगाड़ी में जगह दे रहे हो,,, (कमला अपने आप को सूरज की दोनों टांगों के बीच व्यवस्थित करते हुए बोली उसकी भारी भरकम गांड पहले प्रयास में ही सूरज के मोटे तगड़े लंड से स्पर्श हो रही थी लेकिन इसका एहसास अभी कमला को बिल्कुल भी नहीं था कमल तो यह सब सहज रूप से ले रही थी उसे नहीं मालूम था कि सूरज के मन में कुछ और चल रहा है,,,, कमला अपनी भारी भरकम गांड को सूरज की दोनों टांगों के बीच व्यवस्थित करके बैठ चुकी थी, सूरज को बड़ा ही उत्तेजनात्मक पल लग रहा था और यह सूरज के लिए बहुत खुशी की बात थी कि आज कमला उसकी दोनों टांगों के बीच बैठी हुई थी जिसे वह अक्सर चुदवाते हुए देखा था इसकी बड़ी-बड़ी गांड हमेशा से उसके आकर्षण और उत्तेजना का केंद्र बिंदु बना था,,,, उसके गुलाबी छेद में लंड को अंदर बाहर होते हुए देखा था,, और तभी से उसका भी यही ख्वाब था कि वह भी कमला की चुदाई करें और आज किस्मत देखो की कमला खुद उसकी गोद में आकर बैठ चुकी थी,,,, किसी ने सच ही कहा है किसी को पाने की चाहत अगर ज्यादा तेज हो तो वह चीज अक्सर उसे मिल ही जाती है,,,, सूरज बहुत खुश था उसका यह सफर बेहद रोमांचक होने वाला था।





एक बार फिर से बैल गाड़ी चल चुकी थी,, सूरज इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि अगर किसी औरत के दिल में जगह बनाने हो तो उससे बातचीत के दौरान उसकी खूबसूरती की तारीफ करने से औरत जल्दी उसकी बातों में आ जाती है और सूरज अपने इस हुनर को यहां पर बाकायदा प्रदर्शित करने वाला था इसलिए वह बैलगाड़ी चलते हुए बात करते हुए बोला।

वैसे चाची इतनी धूप में कहां चली जा रही थी।

अरे बेटा,,, पास के गांव में शादी है वहीं जा रही थी,,,।

तो थोड़ा जल्दी निकल गई होती इतनी धूप में निकलने की क्या जरूरत थी,,,।

अब घर का काम इतना रहता है कि करते-करते दोपहर हो गई वरना मैं भी सुबह ही निकलना चाहती थी।

वैसे लड़के की शादी है की लड़की की,,,,

लड़की की,,,,,।

चलो तब तो कोई बात नहीं शाम को बारात आएगी,,,।





हां बेटा बारात तो शाम को ही आएगी लेकिन काम भी तो करना पड़ता है ना अब जा रहे हैं तो ऐसा तो नहीं की दिनभर बैठे रहना पड़ेगा काम में हाथ तो बंटाना पड़ेगा,,,।

वह तो है चाची,,,, वैसे भी शादी लड़के की हो या लड़की की काम करने में भी मजा आता है,,,,।

हममम,,,,।

(दोनों के बीच बातचीत जारी हो चुकी थी बैलगाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी पीछे बैठी शालू और नीलू दोनों छोटे बच्चों को संभाले हुए थी लेकिन शालू का ध्यान सूरज की बातों पर ही लगा हुआ था वह अपने मन में यही सोच रही थी कि इस समय सूरज का लंड खड़ा हो चुका होगा और उसे औरत की गांड में पीठ पर चुभ रहा होगा,,,, और वाकई में सूरज का लंड खड़ा हो चुका था कमला रानी के बदन की मादक खुशबू सूरज को उत्तेजित कर रही थी,,, इस दौरान बैलगाड़ी हिचकोले खाते हुए ऊंची नीची पगडंडी पर आगे बढ़ती चली जा रही थी जिसे रह-रह कर कमल का भजन पीछे की तरफ हो जाता था और सूरज की छाती से एकदम से उसकी पीठ चिपक जाती थी पहले तो यह सब कमला को सहज लग रहा था लेकिन जल्द ही लंड की गर्माहट उसे अपनी पीठ के निचले स्तर पर महसूस होने लगी जहां पर नितंबों की गहरी लकीर की शुरुआत होती है,,,, कमला खेली खाई औरत थी मर्दों की नस-नस से वाकिफ थी उसे एहसास हो गया था कि सूरज का लंड खड़ा हो चुका है,,,, लेकिन वह सामान्य बनी रही क्योंकि उसे लग रहा था कि हो सकता है कि यह सब सहज रूप से हुआ हो,,,, क्योंकि अभी तक सूरज ने ऐसी वैसी कोई हरकत भी नहीं किया था जैसे उसके मन की जिज्ञासा को जाना जा सके इसलिए कमल भी सामान्य बनी रही दोनों के बीच बातचीत जारी थी। तभी सूरज कमला से बोला।)





चाचा जी क्या करते हैं चाची,,,,।

(सूरज को अच्छी तरह से मालूम था कि उसका पति नहीं था लेकिन फिर भी वहां औपचारिकता निभाते हुए पूछ ही लिया इस सवाल पर कमला शांत होते हुए जवाब दी)

वह नहीं है कुछ साल पहले ही गुजर गए,,,।

ओहहह ,,,, मैं माफी चाहता हूं मुझे मालूम नहीं था।

कोई बात नहीं,,,,।

तो फिर खर्चा कैसे चलता है क्योंकि तुम्हारी तो दो बच्चे हैं उनकी देखरेख खाना पीना सब कुछ की जिम्मेदारी तो अब तुम्हारे सर पर है तो यह सब कैसे चलता है।

चलना पड़ता है मजदूरी कर लेती हूं दूसरे के खेतों में काम कर लेती हूं इसी तरह से गुजारा चल रहा है,,,।

(उसकी बात सुनकर सूरज अपने मन में ही बोल साले कितनी बड़ी रंडी है इतना झूठ बोल रही है मेरे पिताजी को गांड दे देकर उसकी सारी कमाई ले लेती है और कहती है की मजदूरी करती हूं एक साथ दो-दो मर्दों को फसाइ है,,,,, उसकी बात पर सांत्वना देते हुए वह उससे बोला,,,)





बड़ा मेहनत करती हो तुम सच में यह बहुत बड़े हिम्मत की बात है कि तुम दो-दो बच्चों का गुजारा मजदूरी करके चला रही हो पति के जाने के बाद क्या तुम दूसरी शादी के बारे में नहीं सोची,,,,,

नहीं,,,,, (एकदम शांत होते हुए जवाब दे वैसे अब उसके बदन में अजीब सी लहर उठने लगी थी क्योंकि खेली खाई कमला अपनी पीठ पर गर्माहट महसूस करके सूरज के लंड की लंबाई और मोटाई का अंदाजा लगा चुकी थी,,,, रह रहकर वह गहरी सांस ले ले रही थी जो कि इस बात का सबूत था कि उसके बदन में मस्ती की लहर उठ रही थी,,, सूरज भी एकदम से कमला को चांपे हुए था बैलगाड़ी के बैलों की रस्सियों को दोनों हाथों से वह इस तरह से पकड़ा हुआ था। जिसकी वजह से कमला उसकी बाहों में थी कमला को भी सूरज के कसरती बदन उसकी भुजाओं के बीच रहना अच्छा लग रहा था,,, कमला का ना मे जवाब सुनकर सूरज बोला)

पर तुमने ऐसा क्यों की तुम्हारी तो शुरुआत है देखो तुम्हें बुरा नहीं लगना चाहिए लेकिन मैं सच कह रहा हूं तुम अभी पूरी तरह से जवान हो तुम्हें देखने के बाद कोई का भी नहीं सकता कि तुम दो बच्चों की मां हो तुम्हें तो शादी कर लेना चाहिए जिंदगी बहुत बड़ी है।





(सूरज अपनी बातों का जाल कमला के ऊपर फेंक रहा था,, कमला को सूरज की यह बातें बहुत अच्छी लग रही थी, क्योंकि सूरज उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था और दुनिया में कौन सी ऐसी औरत होगी जिसे अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनना पसंद नहीं होगा ,,, सूरज की बातें सुनकर कमल के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली।)

धत् दो बच्चों की मां से कौन शादी करेगा,,,!

क्यों नहीं करेगा तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत हो तो कोई भी तुमसे शादी करने के लिए तैयार हो जाएगा तुम्हारे मैं किसी बात की कमी भी तो नहीं है खूबसूरत हो जवान हो तुम्हारा बदन भी एकदम गदराया हुआ है,,,,,, तुम्हारे में मुझे कहीं से थोड़ा सा भी कमी नहीं दिखाई दे रही है,,,,(सूरज पूरी तरह से अपनी बातों के जाल में कमला को फंसा लेना चाहता था वैसे भी उसने कमल के लिए गदराया बदन शब्द है का प्रयोग करके उसे पूरी तरह से मदहोश कर दिया था क्योंकि अक्सर यह शब्द का उपयोग औरत और मर्द के बीच के आकर्षण और मदहोशी में बोला जाता है कमला सूरज के मुंह से गदराया शब्द सुनकर उत्तेजित होने लगी थी,,,,,, फिर वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)





तुम्हें कोई कमी नहीं लग रही है ना लेकिन किसी को अगर शादी करना होगा तो कमीयां ही दिखाई देगी,,।

अंधे हैं वह लोग जिन्हें तुम्हारे में कमियां दिखाई देती है चाची मुझे तो तुम संपूर्ण खूबसूरती की मिसाल दिखाई देती हो,,,,,(इस तरह की बातें करते हुए सूरज अपनी आवाज को थोड़ी धीमी कर लिया था और जिस तरह से वह धीमी आवाज में बात कर रहा था उसी तरह से कमला भी धीरे से ही जवाब दे रही थी जिससे सूरज समझ गया था कि यह बहुत ही जल्द लाइन पर आने वाली है,,,, सूरज की बात सुनकर कमला मदहोश हो जा रही थी उसे सूरज की बातें अच्छी लग रही थी और अपने आप ही वह अपनी गांड को पीछे की तरफ खेल रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह सूरज के लंड को अच्छी तरह से अपनी गांड पर चुभता हुआ महसूस करना चाह रही हो,,,,, सड़क पूरी तरह से सुनसान थी कच्ची सड़क के दोनों तरफ बड़े-बड़े पेड़ लगे हुए थे और उसकी छांव पूरे सड़क को अपनी आगोश में लिए हुए थी जिससे गर्मी में भी उन लोगों को ठंडक का एहसास हो रहा था,,,, दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा है,,,, कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही कमला कुछ बोल नहीं पा रही थी हालांकि लगातार उसे अपनी गांड के ऊपरी सतह पर सूरज के लंड की गर्माहट अच्छी तरह से महसूस हो रही थी उसका मन कर रहा था कि हाथ पीछे की तरफ ले जाकर के उसके लंड को पकड़ ले लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि दोनों के बीच अभी इतनी जान पहचान नहीं थी,,, सुनसान सड़क को देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)





अच्छा चाची काफी देर से हम लोग की सड़क पर आगे बढ़ते चले जा रहे हैं लेकिन दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा है सोचो तुम इसी सड़क से आने वाली थी ना,,,।

हां,,,,।

बाप रे तुम्हें डर नहीं लगता इतनी दुपहरी में सुनसान सड़क पर अकेले जाते हुए,,,,।

नहीं तो,,,,।

अरे अब थोड़ा डरा करो,,,, कोई लुटेरा मिल गया तो सब कुछलूट लेगा,,,,।

अरे मेरे पास क्या है लूटने को ना तो मेरे पास कोई खाने हैं और ना ही मेरे पास पैसे हैं तो लुटेरा लूटेगा क्या,,,!(मुस्कुराते हुए कमला बोली तो उसकी बात सुनकर सूरज बोला)

कैसी बात कर रही हो चाची,,, यह बोलो क्या नहीं है तुम्हारे पास,,, धन दौलत गहने से भी ज्यादा कीमती चीज है तुम्हारे पास मुझे लूटने के लिए दुनिया का हर मर्द बेताब रहता है,,,,।

ऐसा कुछ भी तो नहीं है मेरे पास खामखा बातें बना रहे हो,,,।

नहीं चाची मैं सच कह रहा हूं,,,,,।

सच कह रहे हो क्या है मेरे पास बताओ तो,,,,।





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तुम्हारे पास है तुम्हारी जवानी,,,गदराई जवानी और सही मानो लूटेरा अगर लूटने आएगा तो तुम्हारे पास से पैसे या गहने नहीं लौटेगा बल्कि तुम्हारी जवानी लूट कर चला जाएगा,,,,।

(सूरज की यह बात सुनकर कमला एकदम से शर्मा गई औरशरमाते हुए बोली)

धत्,,,,, यह कैसी बातें कर रहे हो,,,,।

मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं चाची,,,,(सूरज अपनी बातों से कमला के तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठा रहा था,,,, और सचमुच में उसकी बातें कमला के तन बदन में असर कर रही थी बहुत तेज हो रही थी उसे अपनी बर से मदर रस का बहाव होता हुआ महसूस हो रहा था और सूरज इस बीच अपनी हरकतें भी जारी रखे हुए था अपने लंड का दबाव तो उसकी पीठ पर वह एकदम बराबर बनाया हुआ था,,, लेकिन बैलों की रस्सियों को खींचते हुए वह जानबूझकर अपनी बाहों का स्पर्श दोनों तरफ से कमल की बड़ी-बड़ी चूचियों पर कर रहा था जो की ब्लाउज में कबूतर की तरह फड़फड़ा रहे थे कमला को सूरज की यह हरकत भी काफी हद तक मदहोश कर रही थी,,,,। सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)





मेरी बात का यकीन करो चाची इस तरह से अकेले कहीं आया जाया मत कीया करो,,,, अब तुम ही जरा विचार करो चारों तरफ सुनसान सड़क इंसान की जात तक यहां नहीं है ऐसे में कोई लुटेरा तुम्हारी इज्जत लूट लिया तुम्हारी चुदाई करके चला गया तो तुम किसको बता पाओगी,,,,(सूरज जानबूझकर कमला के सामने चुदाई शब्द का प्रयोग कर दिया था वह देखना चाहता था कि उसकी बात पर कमला कैसे भाव प्रकट करती है लेकिन कमल उसकी बात सुनकर कुछ बोल नहीं पाई थी और सूरज के मुंह से चुदाई सबसे सुनकर उसके बदन में गनगनाहट सी फैलने लगी थी,,,, कमला ने उसकी अश्लील बात का बिल्कुल जवाब नहीं दी तो सूरज की हिम्मत खुलने लगी और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मैं सच कह रहा हूं चाची,,, मेरी बात को बिल्कुल भी मजाक में मत लेना अक्सर लुटेरे लुटेरे क्या कोई भी मर्द सुनसान सड़क पर तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत देखेगा तो उसका मन चोदने को ही कहेगा,,,,,।

(सूरज की बातें कमला के तन बदन में आग लग रही थी सूरज खुले तौर पर उससे चुदाई की बातें करने लगा था,,, यह देखकर कमला भी हैरान थी लेकिन वह मस्त में जा रही थी इस बात से भी वह इनकार नहीं कर सकती थी और वैसे भी सूरज जो कुछ भी कह रहा था उसमें सच्चाई थी इस बात का एहसास उसे भी अच्छी तरह से था वह जानती थी कि इस तरह से सुनसान सड़क पर एक जवान औरत का निकलना बिल्कुल भी ठीक नहीं था लेकिन उसकी मजबूरी थी शादी में उसे पहुंचना था और उसे देर हो गई थी इसलिए वह पैदल निकल पड़ी थी वह तो अच्छा हुआ कि सूरज उसे रास्ते में मिल गया और वह बैलगाड़ी पर बैठकर जा रही थी लेकिन सूरज कि ईस तरह की बातें किसी लुटेरे से बिल्कुल भी काम नहीं बैलगाड़ी वान किस अकल में सूरज से जवानी का लुटेरा लगने लगा था,,,,, सूरज की अश्लील बातों को सुनकर उसे बड़े जोरों की पेशाब लगने लगी थी,,,, लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह सूरत से कैसे कहें कि उसे पेशाब लगी है,,,,, फिर भी वह हिम्मत जुटाकर धीरे से बोली,,,।)





जरा यहां पर थोड़ा सा रोकना तो,,,,,।

क्यों क्या हुआ चाची,,,,?

अरे बहुत जरूरी है थोड़ा रोकना तो सही,,,।

अरे लेकिन हुआ क्या बताओ तो,,,,

अरे तुम रोको बताने जैसा नहीं है,,,,।

(सूरज समझ गया था कि कमला बैलगाड़ी को क्यों रोकने के लिए कह रही थी इसलिए वह जानबूझकर मुस्कुराते हुए बोला)

अच्छा पेशाब लगी है ऐसा कहो ना मुझे लगा कि क्या हो गया,,,,,,।(ऐसा कहते हुए सूरज एकदम से बैलगाड़ी की रस्सी खींचकर बैलगाड़ी को रोक दिया,,,, लेकिन सूरज की बात सुनकर कमला शर्मा गई थी और सूरज की तरफ देखने लगी थी और देखते हुए बोली,,,)

तुम बहुत बेशर्म हो,,,,,,।

अरे चाची ऐसा नहीं है यह सब तो औपचारिक है,,,,, अच्छा लो हांथ पकड़ लो आराम से उतरना गिरना नहीं,,,,,,(सूरज के हाथ का सहारा लेकर कमला बैलगाड़ी से नीचे उतर गई और खड़ी होकर इधर-उधर देखने लगी तब तक सूरज भी नीचे उतर गया और बैलगाड़ी के पीछे जाकर उन दोनों से भी बोला,,,,)

कुछ देर के लिए हम लोग यहां रख रही है अगर पेशाब लगी हो तो कर लो,,,,,,,(सूरज एकदम बेशर्मी दिखाते हुए बोला था शालू उसकी बात सुनकर एकदम शर्म से पानी पानी हो गई थी वह आश्चर्य से नीलू की तरफ देखने लगी तो नीलू जानबूझकर शालू से बोली)





पागल है,,,,, चलो जल्दी से हम भी पेशाब कर लेते हैं,,, मुझे भी काफी देर से बड़े जोरों की लगी हुई है,,,,(इतना कहकर नीलू बच्चों को भी नीचे उतारकर खुद भी नीचे उतर गई शालू को भी बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए दोनों बहने एक तरफ पेड़ के पास चली गई,,,,,, दोनों बच्चे भी वही खड़े-खड़े पेशाब करने लगे और कोई मौका होता तो इस समय सूरज के निशाने पर दोनों बहने होती और सूरज उन्हें पेशाब करते हुए देखा लेकिन इस समय उसका मुख्य ध्येय कमला थी इसलिए वह कमला की तरफ आगे बढ़ गया वह देख चुका था कि कमला कहां पर पेशाब करने बैठी है,,, इसलिए वह उत्साहित होता हुआ कमला की तरफ आगे बढ़ रहा था कमला अपनी धुन में झाड़ियां के बीच बैठकर पेशाब कर रही थी लेकिन वह सड़क के किनारे बैठी हुई थी और सूरज चाहता तो उसे दूर पेशाब कर सकता था लेकिन वह कमला की गांड की झलक पाना चाहता था,,, और देखना चाहता था कि उसकी उपस्थिति में कमला कैसे भाव प्रकट करती है और सूरज यही सोच कर झाड़ियों में बैठी हुई कमला को देखते हुए 5-6 कदम आगे निकल गया,,, इस बीच उसे कमला गोलाकार गांड की झलक बराबर मिली थी और वह मदहोश हो गया था,,, कमला को ईस बात का एहसास था कि सूरज उसकी तरफ देखते हुए आगे बढ़ गया लेकिन वह अपनी नंगी गांड को अपनी साड़ी से छुपा नहीं पाई थी ढंक नहीं पाई थी,, और शायद इसलिए की अंदर ही अंदर वह भी अपनी जवानी की झलक सूरज को दिखाना चाहती थी,,,, सूरज कमला से ज्यादा दूर नहीं क्या बस 5_ 6 कदम पर झाड़ियां के पास जाकर खड़ा हो गया जहां से वह कमला को अपना लंड दिखा सके।





सूरज अच्छी तरह से जानता था कि कमला उसके पास ही बैठी हुई है लेकिन वह जानबूझकर उसके सामने पेशाब करना चाहता था पेशाब करना तो एक बहाना था वह कमल को अपनी मर्दाना ताकत दिखाना चाहता था अपने मोटे तगड़े लंड के दर्शन करना चाहता था,,, सूरज को अपने बेहद करीब खड़ा देख कर कमला के तन-बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह चोर नजरों से सूरज की तरफ देख रही थी, और अगले ही पल सूरज अपने पजामे को नीचे करके अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाल लिया जो कि अपनी औकात में आकर खड़ा था जिसे देखते ही कमला का मुंह आश्चर्य से खुल गया,,,, वह आश्चर्य से फटी आंखों से सूरज के मर्दाना अंग को देखते रह गई उसे तो अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था क्योंकि आज तक उसने इतना मोटा तगड़ा लंड कभी नहीं देखी थी,,, सूरज भी पूरी तरह से बेशर्मी पर उतर आया था वह अपने हाथ की उंगलियों से अपने लंड को पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करके हिलाते हुए पेशाब करने लगा इस अवस्था में देखकर कमला की बुर उत्तेजना से फूलने पिचकने लगी,,,, हालात पूरी तरह से मदहोशी से भर चुके थे। दोनों तरफ जिज्ञासा और कुतुहल बढ़ती जा रही थी। सूरज पहले से ही कमला को पाने का मन बना लिया था,, और सूरज की कामुक हरकतें कमल की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार को पिघला रही थी उसकी जवानी की आग बढ़ती जा रही थी उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी की तपन बढ़ती जा रही थी, जिसे शीतलता प्रदान करने के लिए ठंडे पानी की बौछार की जरूरत थी।





बड़ा ही कामुक नजारा था बैलगाड़ी के उसे तरफ दोनों बहने सलवार को नीचे करके पेशाब करने बैठी थी और बैलगाड़ी के इस तरफ सूरज और कमला पेशाब कर रहे थे,,, कमला की गदराई गांड झाड़ियों के बाहर झांक रही थी जिसे सूरज पेशाब करते हुए भी अच्छी तरह से देख पा रहा था दूर से निकलने वाली सिटी की आवाज सूरज को एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,, अपना इरादा दर्शाने के लिए सूरज एकदम से अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया था और उसे आगे पीछे करके मुठीयाने लगा था,,, यह देख कर तो कमला का भी धैर्य जवाब देने लगा, उसका मन मचलने लगा अगर साथ में दोनों लड़कियां ना होती तो इस समय वह सच में आगे बढ़कर सूरज के लंड को अपने मुंह में लेकर उसकी मोटाई और लंबाई का जायजा ले ली होती,,, इस समय केवल वह सूरज के लंड को देखकर गरम आहे लेने किसी और कुछ नहीं कर सकती थी,,, दोनों पेशाब कर चुके थे दोनों लड़के अभी पेशाब करके अपनी सलवार ऊपर करके सलवार की डोरी बढ़ रही थी यह देखकर सूरज को वहां से हट जाना ही उचित लगा और वह अपना पजामा ऊपर करके बैलगाड़ी के पास आ गया,,,, कमला कुछ पल के लिए पेशाब करने के बाद भी वहीं बैठी रह गई क्योंकि वह सूरज के मुसल के बारे में सोच रही थी,,, सूरज ही आवाज लगाता हुआ बोला।





क्या हुआ चाची कर ली कि नहीं,,, ।(जिस तरह से सूरज ने आवाज लगा कर बोला था उसे सुनकर कमला शर्म से पानी पानी हो गई और शालू भी सूरज की इस बात से हैरान हो गई थी नीलू एकदम से उसे मीठी फटकार लगाते हुए बोली)

तुम्हें शर्म नहीं आती औरत से इस तरह से बात करते हो,,,।

क्यों क्या हुआ इसमें कौन सी शर्म आने की बात है,,,, यह तो सब लोग करते हैं पूछ लिया तो क्या हुआ,,,?

पूछ लिया तो क्या हुआ,,,(नीलू मुंह बनाते हुए बोली कब तक कमला भी वहां आ गई थी,,,, सूरज उन बच्चों को बैठाने लगा नीलू और शालू बैठ चुकी थी,,,, कमला बैलों के पास खड़ी होकर सूरज के आने का इंतजार कर रही थी और सूरज नीलू और शालू से बोला,,,,,,) एकाद खरबूजा काटकर बच्चों को खिला दो भूख लग गई होगी और तुम दोनों भी खा लो,,,।

लेकिन खरबूजा काटेंगे किससे,,, (शालू हैरान होते हुए सूरज से बोली तो सूरज मुस्कुराते हुए बोला)

चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है,,,, (इतना कहकर सूरज शालू के पास ऐसे ही पीछे की तरफ हाथ डालकर एक चाकू बाहर निकाल दिया और शालू को थमाते हुए बोला,,,,) चलने से पहले मैं यह सब रख लिया था मुझे मालूम था कि कब इसका काम पड़ जाए पता नहीं,,,, (यह सुनकर नीलू मुस्कुराते हुए बोली)

बहुत समझदारी का काम किए हो,,,,।

तो क्या जीवन में समझदार बनना बहुत जरूरी होता है,,,,,,,,।





अच्छा अब जाकर बैलगाड़ी चलाओ यही खड़े-खड़े समय बिता दे रहे हो,,,,।

जो हुकुम छोटी मालकिन,,,, (इतना कहकर सूरज आगे की तरफ चला गया और नीलू मुस्कुराने लगी, बड़ी बेसब्री से कमला सूरज का इंतजार कर रही थी क्योंकि कुछ देर पहले जो नजारा उसने अपनी आंखों से देखी थी उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था वह अपने मन में सोच रही थी कि इतना मोटा तगड़ा है तभी तो पूरी पीठ गर्मा जा रही थी,,, सूरज मुस्कुराते हुए कमला की तरफ देखा और बैलगाड़ी पर चढ़ते हुए बोला,,,)

अभी कितनी दूर है चाची,,,,,?

बस आधा रह गया है,,,।

ओह,,, तब तो अच्छा हुआ कि तुम्हें मैं मिल गया वरना कितना पैदल चलना पड़ता,,,।

बात तो तुम एकदम ठीक कह रहे हो,,,, (अपना हाथ ऊपर की तरफ आगे बढ़ाकर कमला बोली,,, और उसे ऊपर की तरफ खींचने लगा जिस तरह से सूरज ने कमला की कलाई को थामा था कमला की सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी,,,,, साड़ी का पल्लू अस्त-व्यस्त हो जाने के कारण ब्लाउज में से जाते उसकी भारी भरकम चूचियों की गहरी लकीर के साथ-साथ आधी चूची ब्लाउज के बाहर झलक रही थी जिस पर सूरज की नजर बराबर बनी हुई थी और सूरज किस नजर को कमला अच्छी तरह से पहचान गई थी इसलिए हल्की सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई थी,,,, सूरज संभलकर उसे फिर से अपनी दोनों टांगों के बीच बिठा लिया था,,,, अब तो कल्पना करने के लिए कुछ बाकी नहीं रह गया था क्योंकि कमला अपनी आंखों से सूरज के मर्दाना अंग को देख चुकी थी और वास्तविकता यही थी कि उसने अपने जीवन में ऐसा मुसल नहीं देखी थी वह अपने मन में यही सोच रही थी कि ऐसा मुसल जिस किसी के भी ओखली में जाएगा सब कुछ पीस कर रख देगा,,,,,,,, कमल को अपनी दोनों टांगों के बीच बैठ कर बेल की रस्सियों को अपने हाथ में लेकर सूरज बोला,,,)





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अब चले चाची,,,, ।

हां अब चलो,,,,,

(इतना सुनते ही सूरज बैलो की रस्सी को हिलाने लगा और बैल इशारा पाकर चलने लगे,,,,,, कुछ देर पहले आंखों ही आंखों में जो दोनों के बीच इशारा हुआ था उसे लेकर दोनों काफी उत्साहित थे,, ,,, कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही बेल धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था रास्ता इस तरह से सुनसान ही था पीछे चालू खरबूजा काट काट कर बच्चों को दे रही थी और अपनी बहन को भी दे रही थी वह लोग खर्च खाने में मस्त थे लेकिन कमला और सूरज अपनी इच्छा पूर्ति का रास्ता ढूंढ रहे थे,,, कुछ देर की खामोशी के बाद बातचीत की शुरुआत करते हुए सूरज कमला से बोला,,,)

क्या बात है चाची एकदम शांत क्यों हो गई कुछ तो बोलो,,,,।

क्या बोलूं,,,,,,? तूने तो मेरी बोलती बंद कर दिया,,,,

ऐसा क्यों,,,,?

यह तो तू ही जाने,,,,

लेकिन मुझे नहीं पता कि तुम किस बारे में बोल रही हो,,,,?

तुझे सब पता है,,,,,।

मुझे कुछ भी पता नहीं तुम किस बारे में बोल रही हो मैं नहीं जानता,,,,,।

( कमला का दिल जोरों से धड़क रहा था वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि अगला गांव आने में कुछ समय की देरी है और अगर अगला गांव आ गया तो वह कुछ नहीं कर पाएगी,,, जिंदगी में पहली बार इतना मोटा तगड़ा लंड देख रही थी इसलिए कमला का मन मचल रहा था वैसे भी वह पूरी तरह से छिनार हो चुकी थी जहां अपनी जरूरत के लिए वह दूसरे मर्दों के साथ संबंध बनाती थी वही उसकी भी यह जरूर बन चुकी थी,,, इसलिए वह कुछ ऐसा करना चाहती थी जिससे सूरज का लंड उसे बड़े आराम से मिल जाए वैसे भी खेली खाई कमला अच्छी तरह से समझ गई थी कि सूरज भी यही चाहता है जो वह चाह रही थी। इसलिए वह थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए बोली,,,)





तुझे नहीं लगता कि तेरा कुछ ज्यादा ही बड़ा है,,,,(थोड़ी सी बेशर्मी दिखाते हुए दबे स्वर में वह बोली उसकी बात सुनकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे क्योंकि उसे एहसास हो गया था कि अब उसकी मंजिल उसकी आंखों के सामने है इसलिए वह मुस्कुराता हुआ बोला)

हां मुझे मालूम है मेरा कुछ ज्यादा ही बड़ा और मोटा है,,,, वैसे चाची सही कहूं तो तुम्हारी गांड भी बहुत खूबसूरत है झाड़ियां के बीच से चमक रही थी इतनी गोलाकार गोरी गोरी मक्खन जैसी गांड मैंने कभी नहीं देखा,,,,,(सूरज की बेशर्मी भरी बातें सुनते ही कमल एकदम से शर्मा गई और बोली)

धत् यही सब देखता है तु,,,,

तुम दिखाओगी तो क्यों नहीं देखूंगा,,,,

मैं तुझे थोड़ी ना दिखा रही थी,,,, मैं तो पेशाब कर रही थी,,,,।

तो थोड़ा अंतर की तरफ चली गई होती ताकि तुम्हारी खूबसूरत गांड झाड़ियों से छुप गई होती खुली गांड लेकर सड़क के किनारे बैठने की क्या जरूरत थी,,,।

मुझे क्या मालूम था कि तू उधर आ जाएगा,,,,,।

मुझे भी तो पेशाब लगी थी,,,,,, इसलिए वहां चला गया,,,।

कितना बेशर्म है तु एक औरत के पास खड़े होकर पेशाब करता है तुझे यह सब करने में शर्म नहीं आती,,,,।

शर्म तो बहुत आती है चाची, लेकिन मैं जानता हूं कि शर्म करूंगा तो मजा कैसे ले पाऊंगा,,,,,, शर्म करता तो इतना खूबसूरत नजारा अपनी आंखों से कैसे देख पाता,,,,,(बातचीत के दौरान सूरज लगातार अपने लंड का एहसास कमल के नितंबों के ऊपरी सतह पर बराबर कर रहा था जिसकी गर्माहट से कमला का लावा पिघल रहा था वह मदहोश हो रही थी,,,, और वह भी जानबूझकर अपनी पीठ को पीछे की तरफ ठेल दे रही थी बाकी का काम ऊंची नीची पगडंडी से चलते हुए बैलगाड़ी कर दे रही थी,,, सूरज की बात सुनकर मत हो सोते हुए कमला बोली,,)

तो एक औरत को देखना और वह भी पेशाब करते हुए तुम्हारे लिए सबसे खूबसूरत नजारा होता है यही कह रहे हो ना तुम।





हां बिल्कुल चाची इसमें कोई दो राय नहीं है मेरे लिए तो यह दुनिया का सबसे बेहतरीन नजारा है मेरे लिए क्या हर मर्द के लिए औरत को पेशाब करते हुए देखना बेहद खूबसूरत नजारा होता है।

और ऐसा नजारा देखकर क्या होता है,,,(कमला मुस्कुराते हुए बोल रही थी और इस बीच सूरज की बाहों को अपनी चूचियों पर महसूस करके मस्त हुए जा रही थी,,,, कमला की बात सुनकर सूरज उसी के अंदाज में जवाब देते हुए बोला)

खड़ा हो जाता है चाची बिल्कुल भी रहा नहीं जाता,,, देखी तो थी तुम,,,,, क्या हाल हो रहा था,,,,।

देखी थी तभी तो पूछ रही हूं,,,,, अच्छा अपना यह हथियार,,,(इतना कहने के साथ ही तुरंत अपना हाथ पीछे की तरफ लाई और पजामे के ऊपर से ही सूरज के लंड को पकड़ते हुए) पीछे रख बार-बार चुभ रहा है,,,,,।

(कमला की हथेली में अपने लंड को महसूस करके सूरज एकदम से मत हो गया भले ही वह पजामे के ऊपर से उसे पड़ी थी लेकिन इतने से ही सूरज को चांद तारे दिखाई देने लगे थे,,,, लेकिन हैरानी की बात यह थी कि कमला अभी तक उसके लंड को छोड़ी नहीं थी अपने हाथ में ही पड़े हुए थी और वह भी एकदम दबाकर,,,, सूरज की तो सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी और वह बोला,,,)

क्या चाची,,, जब तुम्हें इसकी चुभन बर्दाश्त नहीं हो रही है तो अंदर कैसे ले पाओगी,,,,,।

(इतना सुनते ही,,, हैरानी से कमला नजर घुमा कर सूरज को देखने लगी दोनों के होठों के बीच केवल दो अंगूल का ही फर्क नहीं किया था कमल की आंखों में मदहोशी की खुमारी एकदम साफ दिखाई दे रही थी सूरज की आंखों में वासना की चमक दिखाई दे रही थी कमला हैरान थी कि उम्र में कम यह लड़का कितना तेज तर्रार है,,,, कुछ देर तक दोनों इसी तरह से एक दूसरे को देखते रहे बैलगाड़ी आगे बढ़ती चली जा रही थी और कमल का एक हाथ पजामे के ऊपर से ही उसके लंड को नाप रहा था,, फिर धीरे से कमला बोली,,,)





तू तो लुटेरों की बात कर रहा था अब देखो खुद लुटेरा बनने को तैयार हो गया है,,,।

क्या करूं चाची तुम्हारे पास खजाना इतना बेस कीमती है कि तुम्हारा खजाना देखकर कोई भी लुटेरा बनने को तैयार हो जाए,,,,,।

(इतना सुनकर कमला मुस्कुरा दे और उसकी मुस्कुराहट देखकर सूरज समझ गया था कि मामला बिल्कुल साफ है रास्ता ऊंचा नीचा भले ही हो लेकिन मंजिल एकदम साफ दिखाई दे रही है इसलिए वह बिल्कुल भी देर ना करते हुए एकदम से अपने होठों को आगे बढ़ाया और कमला के लाल-लाल होठों पर रख दिया कमला पल भर के लिए सकपका गई वह अपने होठों को पीछे खींच ले आश्चर्य से सूरज उसे देखने लगा तो अगले ही पल कमला खुद अपने होठों को एकदम से सूरज के होठों पर रखकर पागलों की तरह चुंबन करने लगी कमला को सीखाने की जरूरत नहीं थी वह खेली खाई औरत थी एक साथ दो दो मर्दों को संभालती थी,, इस मदहोश कर देने वाले चुंबन से सूरज की हालत खराब होने लगी वह बैलगाड़ी की रस्सी को अपने हाथों से छोड़ दिया और अपने दोनों हथेलियां को कमला की खरबूजे जैसी चूचियों पर रख दिया जो कि अभी भी ब्लाउज में कैद थी,,, सूरज पागलों की तरह ब्लाउज के ऊपर से ही कमला की चूचियों को मसलने लगा,,, सूरज पूरी हथेलियां को फैला कर बराबर उसकी चूचियों पर रख रहा था जो की ब्लाउज में कैद थी और पूरी तरह से उसकी हथेली में आ भी नहीं रही थी लेकिन फिर भी बड़ी शिद्दत से सूरज कमला की चूचियों से खेलने लगा था। और कमला एक हाथ में सूरज के लंड को दबाए हुए बराबर उसे अपने होठों का रसपान करा रही थी,,,, सूरज दूर-दूर तक नजर दौड़ा कर देख रहा था कि कहीं कोई दिखाई तो नहीं दे रहा है लेकिन दूर-दूर तक सन्नाटा था केवल पंछियों की आवाज आ रही थी सुनसान सड़क पर दूर-दूर तक कोई नहीं दिखाई दे रहा था वैसे भी दोपहर का समय था इसलिए और भी ज्यादा सन्नाटा फैला हुआ था मौके की नजाकत को समझते हुए सूरज अपनी उंगलियों का सहारा लेकर कमला के ब्लाउज का बटन खोलने लगा।

यह देखकर कमला अपने मन में ही सोच रही थी कि लड़का सच में कितना तेज है इसे बिल्कुल भी डर नहीं है की बैलगाड़ी में पीछे दो जवान लड़कियां बैठी हुई है और वह कोई एकांत में कमरे में या खेत में नहीं बल्कि खुली सड़क पर इस तरह की हरकत कर रहा है लेकिन कमला भी निश्चिंत थी क्योंकि वह जानती थी कि इस सड़क पर कोई आता जाता नहीं था,,,, सड़क पर घास उगी हुई थी जिसका मतलब साफ था कि कई दिनों से इधर से किसी का आना-जाना नहीं हुआ था,,,, बैलगाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी इसलिए पीछे बैठी दोनों लड़कियों को बिल्कुल भी शक नहीं हो रहा था कि आगे क्या हो रहा है और वैसे भी सूरज और कमला बहुत धीरे-धीरे बात कर रहे थे जिससे दोनों लड़कियों को उन दोनों की बातचीत भी सुनाई नहीं दे रही थी इसलिए आगे के प्रकरण के बारे में उन्हें कोई अंदाजा ही नहीं था। देखते ही देखते सूरज फुर्ती दिखाते हुए कमल के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया और उसकी चूचियों को नंगी कर दिया,,,, सूरज से रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हथेलियों को उसकी नंगी चूचियों पर रखकर दबाना शुरू कर दिया जो कि एकदम दशहरी आम की तरह कड़क थे,,,,, सूरज के द्वारा तन मर्दन की क्रिया का कमला भी आनंद ले रही थी,,,,,,, दोनों के होंठ पल भर के लिए भी अलग नहीं हो रहे थे देखते ही देखते कमला अपनी हथेली को पजामी के अंदर डाल दी और उसके नंगे लंड को पकड़ ली जो की काफी गर्म था उसकी गर्माहट इसकी मोटाई को अपनी हथेली में महसूस करके वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी अब वह उत्तेजना के मारे सूरज के लंड को मुठीयाना शुरू कर दी थी,,, सूरज भी मत हो रहा था कुछ देर तक हो इसी तरह से कमला की चूचियों को मसलते रहा दबाते रहा उसकी छोटी सी खजूर को उंगलियों के बीच रखकर मसलता रहा,,, सूरज की हरकतों से कमला पानी पानी हो गई थी, उसकी साड़ी उसके मदन रस से गीली होने लगी थी,,,,,।

बैलगाड़ी पर बैठे-बैठे सूरज जवानी का मजा लूट रहा था,,, कमला के लिए भी है पहले ही मौका था जब वह खुले में इस तरह से एक जवान लड़के से मजा लूट रही थी अब तक उसने अपनी जवानी किसी जवान लड़के के हाथों में नहीं सोंपी थी क्योंकि उसका मानना था कि जवान लड़के अनुभव के कच्चे होते हैं और वह एक जवानी से भरी हुई औरत की प्यास बुझाने में समर्थ नहीं होते लेकिन अपनी सुझभुज से उसने अंदाजा लगा ली थी कि भले ही सूरज की उम्र कम थी लेकिन अनुभव से भरा हुआ था इसीलिए तो वह अपनी मदद कर देने वाली जवानी उसके सामने परोस दी थी,,,। सूरज से रहा नहीं जा रहा था बेल गाड़ी धीरे-धीरे,,,, आगे बढ़ रही थी और सूरज एक हाथ उसकी चूची से हटाकर आगे से उसकी साड़ी मे डाल दिया,,,, और उसे ज्यादा देर नहीं लगी कमला की रसीली बुर तक पहुंचने में वह पूरी तरह से गीली थी मदन रस से चिपचिपी हो गई थी इसके बावजूद भी सूरज उत्तेजना में उसकी बुर को अपनी हथेली में एकदम से दबोच लिया और कमला गनगना अब दोनों के नग्न अंग एक दूसरे के हथेलियो में थे,,,, कमला के मुंह से हल्की-हल्की सिसकारी की आवाज निकल रही थी,,, यह देख कर सूरज बोला,,,।

जरा धीरे आवाज निकालो चाची कहीं दोनों लड़कियों ने सुन लिया तो गजब हो जाएगा,,,,।

(सूरज की बात सुनकर कमला अपनी भावनाओं पर काबू करने लगी लेकिन फिर भी उसके मुंह से हल्की-हल्की आवाज तो निकल ही रही थी,,, दोनों पूरी तरह से काम ग्रस्त हो चुके थे,,,, कमला सूरज के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना चाहती थी लेकिन यहां जगह का अभाव था अगर दोनों लड़कियां ना होती तो इस समय सूरज खुद ही बैलगाड़ी को पेड़ के नीचे उसकी छाव में रोक कर बैलगाड़ी में लेटा कर उसकी जमकर लेता लेकिन दोनों लड़कियों की मौजूदगी में काम बिगड़ गया था लेकिन फिर भी कमला ऐसी हालात में रास्ता ढूंढ ही लेती है,,, वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई दिल गाड़ी चल रही थी वह नीचे लकड़ी पर पैर रखकर खड़ी थी धीरे से सूरज की तरफ मुंह करके घूम गई सूरज गहरी गहरी सांस ले रहा था उसके हाथों में बैलों की रस्सी नहीं थी लेकिन फिर भी बैल समझदार थे वह बड़े आराम से सड़क पर आगे बढ़ रहे थे,,,, कमला इधर-उधर दिखी और फिर बेल के कंधे पर जो लकड़ी का लगाम लगाया जाता है वह बैलगाड़ी से जुड़ा हुआ था और इस पर धीरे से कमला गांड रखकर बैठ गई यह देखकर सूरज बोला,,,,)

संभलकर चाची गिरना नहीं,,,।

नहीं गिरूंगी,,,(और इतना कहने के साथ यहां आगे बढ़कर फिर से सूरज के लंड को पकड़ ली सूरज फिर से मस्त होने लगा,,,,, कुछ देर मुठियाने के बाद धीरे से अपने प्यासे होठों को अंकित के मोटे तगड़े लंड पर रख दी और अपने होठ से उस पर रगड़ने लगी पल भर में ही सूरज मदहोश होने लगा वाकई में मर्द को खुश करने की कला कमला अच्छी तरह से जानती थी तभी तो दो-दो मर्दों को एक साथ मजा देती थी,,,, सूरज बार-बार अपनी आंखों को बंद कर ले रहा था क्योंकि वह मदहोशी के सागर में डूबने लगा था और देखते-देखते कमला अपने लाल-लाल होठों को खोलकर सूरज के मोटे तगड़े लंड को अपने मुंह में भर ले और चूसना शुरू कर दी,,, कमला खेली खाई औरत थी इसलिए उसे कुछ ज्यादा सीखना नहीं था वह अपने आप ही सूरज को खुश करने में लगी थी और सूरज भी अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसकी नंगी चूचियों को बराबर दबा रहा था,,,,,,,,, सूरज और कमला दोनों बेशर्म हो चुके थे, उन्हें इस बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी कि वह किस जगह पर है किसके साथ हैं खुली सड़क पर भले यहां पर इंसानों का नाम और इंसान नहीं था लेकिन सड़क थी कोई भी आ जा सकता था लेकिन इस बात की परवाह दोनों को बिल्कुल भी नहीं थी बैलगाड़ी में भी दो जवान लड़कियां थी तो छोटे बच्चे लेकिन इस बात का भी उन्हें कोई मलाल नहीं था बस उन्हें जवानी का मजा लूटना था,,, सूरज तो खैर औरत को चोदने का मौका ही ढूंढता है लेकिन कमला तो दो बच्चों की मां थी समझदार थी लेकिन वह भी वासना में बह चुकी थी उसे बिल्कुल भी शर्म नहीं थी इसीलिए तो इस समय अपने लिए जगह बनाकर सूरज के लंड को मुंह में लेकर बराबर चूस रही थी।

कमला के दोनों दशहरी आम सूरज के हाथों में थे सूरज ने जोर-जोर से दबा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे सच में वह आम हो और वह दबा दबा कर उनका रस निकाल लेना चाहता हो,,,,, कमला को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में सूरज का लैंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था क्योंकि बड़े आराम से उसके गले तक पहुंच भी जा रहा था और उसका मुंह पूरा का पूरा खुला हुआ था,,,, बड़ी मुश्किल से वह अपने मुंह को खोलकर सूरज के लंड को मुंह में लेकर चुस रही थी।,,,,, कुछ देर तक इसी तरह से कमला मजा लेती रही वह भी जानती थी कि जिस गांव जाना है वह गांव अब ज्यादा दूर नहीं था इसलिए वह धीरे से अपने मुंह में से सूरज के लंड को बाहर निकाली और गहरी गहरी सांस लेने लगी इतना मोटा तगड़ा लंड मुंह में लेने की वजह से उसकी दोनों आंखें ऐसा लग रहा था कि जैसे बाहर निकल आएंगे उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो चुका था,,,, यह देख कर सूरज मुस्कुराते हुए बोला।

कैसा लगा चाची,,,!

बहुत बड़ा है,,,,( हांफते हुए वह बोली,,,, फिर उसे न जाने क्या सोचा वह धीरे से जिस पाटी पर सूरज बैठा हुआ था उसके इर्द-गिर अपने दोनों पैर रखकर एकदम से खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,,, अब सूरज के लिए काफी दिक्कत वाला काम आने वाला था वह कभी सोचा भी नहीं था कि एक औरत इतनी भी बेशर्म हो सकती है वह पूरी तरह से अपनी साड़ी को कमर तक उठती थी सूरज जानता था कि अब उसे क्या करना है अपनी साड़ी को कमर तक उठाने के बाद वह बैलगाड़ी की छावनी पर दोनों हाथ रखकर खड़ी हो गई और अपनी बर को सूरज के मुंह पर सटाने लगी रगड़ने लगी,,,, सूरज अच्छी तरह से समझ गया था कि उसे क्या करना है वह पागल हुआ जा रहा था एक अलग ही अनुभव से मिलने वाला था वह दोनों हाथ से कमला की मोटी मोटी जांघों को पकड़ कर उसकी मलाईदार बुर को चाटने लगा,,,, कमला पागल होने लगी क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि सूरज इतने अच्छे तरीके से बुरे की चटाई करता होगा लेकिन उसके सोच के विपरीत सूरज उसे पर भारी पड़ने लगा था जितना हो सकता था उतना अपनी जीभ अंदर डालकर उसे चाट रहा था,,,, सब कुछ बड़ी जल्दी से हो रहा था बैलगाड़ी रुकने का नाम नहीं ले रही थी बैलों के पैरों में बंधे घुंघरू सड़क के सन्नाटे को चीरते हुए आगे बढ़ते चले जा रहे थे लेकिन घुंघरू की आवाज को सुनने वाला वहां इन लोगों के सिवा दूसरा कोई नहीं था बैलगाड़ी के पीछे बैठी दोनों बहनों को तो हल्का सा अाभास तक नहीं हुआ था कि आगे क्या हो रहा है,,,, वह दोनों तो अनजान थी खरबूजा खाने के बाद उन दोनों की आंख लग गई थी,, बच्चे भी आराम से सो रहे थे,,,,, और कमला अपने काम में लगी हुई थी,,,,





कमला की हालत खराब हो रही थी क्योंकि उसकी बुर की छटाई करते हुए सूरज अपनी दो उंगलियों को एक साथ उसकी बुर में अंतर बाहर करते हुए डाल दिया था उसका बदन अकड़ने लगा था वह झड़ने के कगार पर थी वह बैलगाड़ी की ऊपरी छावनी को कस के पड़कर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दी थी जैसे मर्द औरत की बुर में ठोकर मारते हैं इस तरह से वह सूरज के मुंह में ठोकर मार रही थी सूरज भी दोनों हाथों से उसकी कारण को तब पहुंचकर पूरा साथ दे रहा था और देखते ही देखते उसकी बुर से मदन रस की पिचकारी फूट पड़ी जो सूरज के चेहरे को पूरी तरह से भिगोने लगी,,,,,, लेकिन सूरज उसकी मलाई को अपनी जीभ से चाटे जा रहा था अपने गले के अंदर उतारे जा रहा था,,,,, कमला का काम तमाम आ चुका था लेकिन वह जानते थे कि अभी खेल खत्म नहीं हुआ था,,,, वह खड़े-खड़े ही गहरी गहरी सांस ले रही थी कमल का पानी निकल गया था लेकिन सूरज बरकरार था सूरज अभी एक असली मर्द का एहसास उसे दिलाना चाहता था इसलिए उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ बैठने लगा के दिखाई कमला जानती थी कि उसे क्या करना है वह धीरे से अपनी टांगों को खोलकर सूरज के मोटे तगड़े लंड पर अपनी गुलाबी छेद को रख दी,,, मोटे सुपाडे की गर्माहट अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों पर महसूस करके कमल के तन बदन में सुरसुरी छाने लगी वह मदहोश होने लगी उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में सुपड़ा कुछ ज्यादा ही मोटा था इसलिए वह अपनी भारी भरकम गांड का दबाव एकदम से लंड पर बढ़ते हुए बैठने लगी,,, सूरज भी दोनों हथेलियां में उसकी मटके जैसी गांड को संभाल कर उसे अपने लंड पर व्यवस्थित करने लगा और देखते ही देखे बुर की चिकनाहट पाकर सुपाड़ा अंदर की तरफ सरकने लगा,,, जैसे-जैसे सुपाड़ा अंदर की तरफ जा रहा था वैसे-वैसे कमला के चेहरे के हाव-भाव बदलते जा रहे थे,,,,





सूरज उसके खूबसूरत चेहरे को ही देख रहा था,,, देखते ही देखते कमला की चालाकी और सूरज की सूझबूझ के कारण सूरज का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में खो गया था और फिर सूरज के कंधों को पकड़ कर सुपाड़ा अपनी भारी भरकम गांड को उठाने बैठाने लगी थी,,,, कमला यह प्रक्रिया बड़े धीरे-धीरे कर रही थी क्योंकि एक बार लय बनने के बाद वह रुकने वाली नहीं थी,,,, धीरे-धीरे वह बड़े आराम से अपनी बुर की गहराई में सूरज के मोटे तगड़े लंड को ले रही थी सूरज उसे अपनी बाहों में भरकर उसके धक्को का मजा ले रहा था, कमला की बुर की तपती हुई गर्मी सूरज को एकदम साफ महसूस हो रही थी अगर दूसरा कोई होता तो उसकी गर्मी से ही पिघल जाता है लेकिन सूरज दूसरे मर्दों की तरह बिल्कुल भी नहीं था जब तक औरत को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर देता था तब तक उसका पानी नहीं निकलता था और यहां भी वह कमला की जवानी पर पूरी तरह से छा चुका था,,,, नीचे से भी सूरज बराबर धक्का लगा रहा था हर धक्के के साथ कमला के मुंह से हल्की-हल्की आवाज निकल रही थी जिसे वह बहुत काबू में लिए हुए निकाल रही थी। सूरज का मोटा तगड़ा लंड हर धक्के के साथ उसके बच्चेदानी पर स्पर्श कर रहा था कमला के लिए यह हैरानी की बात थी क्योंकि अब तो कुछ नहीं बहुत से मर्दों के साथ संभोग कर चुकी थी लेकिन उसके बच्चेदानी तक कोई पहुंच नहीं पाया था सूरज पहले मर्द था जो बड़े आराम से उसके बच्चेदानी पर ठोकर लगा रहा था।





कमला मदहोश होकर सूरज के लंड पर अपनी गांड पटक रही थी। और उसकी दशहरी जैसी आम पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर उछल रहे थे जिसे रह रहकर सूरज उसे अपने मुंह में भरकर पीना शुरू कर देता था जब जब वह दोनों चूचियों को मुंह में लेकर पीता तब तब कमला की हालत और ज्यादा खराब हो जा रही थी,,,, एक बार फिर से कमला झड़ने के कगार पर पहुंच चुकी थी और इस बात का अहसास होते ही सूरज पूरी तरह से तैयार हो गया क्योंकि वह भी झड़ने वाला था वह कमला की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे थोड़ा आगे की तरफ झुका दिया और दोनों पैर का सहारा लेकर वह अपनी गांड को लकड़ी के पाटी से थोड़ा ऊपर उठा लिया और फिर जमकर धक्के लगाने लगा इस तरह से तो कमला की हालत खराब होने लगी क्योंकि उसे अभी तक लग रहा था कि वह सूरज पर भारी पड़ रही है लेकिन आप उसे एहसास होने लगा था कि सूरज असली मर्द है वह पूरी तरह से कमला पर भारी पड़ रहा था उसके हर एक धक्के पर कमला के चेहरे का हवा बदल रहा था उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव के साथ-साथ दर्द की रेखा भी झलक रही थी उसे दर्द भी हो रहा था तड़प भी रही थी और अत्यधिक आनंद भी आ रहा था,,,, इस अवस्था में उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़े पूरा कर लगाकर सूरज उसकी बुर में लंड पेल रहा था अगर इस समय कमला बिस्तर पर होती तो शायद चारपाई टूट जाती,,,,, अगर ही पर कमल का बदन पूरी तरह से अकड़ने लगा वह सूरज पर विश्वास करके उसके हाथों में अपनी जवानी सौंप कर पीछे की तरफ पूरी तरह झुक गई थी मानो कि जैसे किसी बिस्तर पर लेटी हो और सूरज भी उसके विश्वास पर खड़े उतारते हुए उसे बिल्कुल भी गिरने नहीं दिया और उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर तब तक पेलता रहा जब तक की दोनों का पानी एक साथ निकल नहीं गया,,,।

Kamlaarani or suraj





दोनों झड़ चुके वासना का तूफान शांत हो चुका था धीरे से सूरज के लंड पर से वह उठने लगी उसकी बुर में से सूरज का मोटा तगड़ा लंड बाहर निकल चुका था लेकिन झड़ने के बावजूद भी अभी भी उसी तरह से खड़ा था यह देखकर वह हैरान थी उसे इस बात का मलाल था कि अगर किसी कमरे में दोनों की मुलाकात होती तो यह मजा और ज्यादा बढ़ जाता,,,, वह अपने कपड़ों को दुरुस्त करने लगी और फिर से पहले की तरह बैठ गई लेकिन इस बीच सूरज उसके बदन से छेड़खानी करता रहा उसे मजा आ रहा था अगर मौका होता तो वह फिर से उसकी चुदाई कर देता लेकिन अब मौका बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि जहां उसे उतरना था वह गांव आ चुका था वह धीरे से बैलगाड़ी से नीचे उतर गई सूरज भी नीचे उतर गया पीछे जाकर देखा तो दोनों बहने और दोनों बच्चे सो रहे थे वह उन दोनों को उठाया,,,, कमला बहुत खुश थी क्योंकि आज किस्मत से उसे सूरज का साथ मिला था वह अपने दोनों बच्चों के साथ गांव के रास्ते मुड़ गई लेकिन बार-बार सूरज की तरफ ही देख ले रही थी वहीं पास में ही हेड पंप था जहां पर सूरज रुक कर अपना हाथ मुंह धोया और पानी पीने लगा नीलू और शालू भी अपना हाथ मुंह धो कर पानी पीने लगे सूरज दो बाल्टी बैलगाड़ी में रखा था उसमें पानी भरकर बेल के सामने रख दिया बैल भी पानी पीने लगे और फिर थोड़ी देर में वह लोग आगे के लिए निकल गए।
 
सूरज ने बड़ी चालाकी से कमल का काम निपटादिया था,,, पीछे बैठी दोनों जवान लड़कियों को बिल्कुल शक नहीं हुआ की बैलगाड़ी चलते हुए सूरज ने राह में मिली उसे औरत के साथ क्या किया होगा,,, कमला की सूरज की मर्दानगी ताकत को अच्छी तरह से समझ गई थी, उसने भी शायद कभी सोचा नहीं थी कि एक जवान लड़का उसे इस कदर संतुष्टि का अहसास कराएगी और इतना चालाक निकलेगा जहां गांव में इस उम्र में लड़के केवल औरतों का सपना देखा करते थे उनके बारे में सोच कर अपने हाथ से कम चलाया करते थे वही सूरज बड़ी चालाकी से अपनी काम हरकतों का प्रदर्शन करके उसे अपने लंड पर बिठा लिया था।





कमला की चुदाई करने के बाद सूरज उसे गांव की सड़क के पास उतार दिया था और वह अपने दोनों बच्चों के साथ गांव की तरफ चल दी थी, सूरज कुछ देर तक वहां पर रुका था क्योंकि वहीं पर हैंडपंप भी था वहीं पर उसने हाथ में धोकर पानी पिया और बैलों को भी पानी पिलाया शालू और नीलू भी दोनों उतरकर हाथ में धोकर पानी पीकर तरो ताजा महसूस कर रहे थे,,,,, सूरज बहुत खुश था क्योंकि जब से उसने कमल को देखा था तब से उसे चोदने का ख्याल उसके मन में घर कर गया था,, लेकिन वह कभी सोचा नहीं था कि शायद वह कमल को कभी चोद पाएगा लेकिन उसकी किस्मत इतनी तेज थी कि आज खुद कमला उसके पास चलकर आई थी और सूरज ने जी भर कर उसकी जवानी का रस पिया था,,, समय काफी हो चुका था इसलिए सूरज शालू और नीलू से बोला,,,।

अब हमें चलना चाहिए काफी समय हो गया है,,,.

वह तो है,,,, अभी कितनी दूर शहर है,,, (कमर पर दोनों हाथ रखे हुए नीलू बोली,,,,)

क्या पता अभी तक तो हम लोग गांव से ही बाहर नहीं निकल पांएे है,, शहर तो अभी बहुत दूर होगा देख रही है सूरज सर पर आ गया है,,,,,।





what is line deduplication

तो चलो अब चलते हैं काफी देर हो चुकी है अभी ना जाने कितना चलना है,,,, (शालू भी चिंता जताते हुए बोली ,,,,, वह सूरज से नजर नहीं मिला पा रही थी क्योंकि सूरज की हरकत उसे अच्छी तरह से याद थी,,, सफर के दौरान रह रहे कर उसे वही बात याद आ जा रही थी और वहा उत्तेजना से गनगना जाती थी,,,, सूरज फिर से, बैलगाड़ी पर बैठ गया था और दोनों लड़कियां भी पीछे बैठ गई,,,, एक बार फिर से बैलगाड़ी चल पड़ी थी अपने सफर के लिए,,,, बैलगाड़ी चलाते समय सूरज अपने मन में यही सोच रहा था कि उसने आज तक इतनी औरतों के साथ संबंध बनाया, लेकिन उनमें से सबसे गजब कमला ही निकली क्योंकि वह जानता था की दूसरी ओर से चलती हुई बैलगाड़ी पर और वह भी सड़क पर चुदवाने के लिए कभी तैयार ना होती लेकिन कमला की बात ही कुछ अलग थी,,,, कमला की चुदाई करने के बाद सुरज अभी तक उसकी मदहोशी में डूबा हुआ था।,,, बैलगाड़ी आगे चलती चली जा रही थी। काफी देर हो चुकी थी तीनों के बीच किसी भी तरह की बातचीत नहीं हो रही थी बातचीत की शुरुआत करते हुए सूरज बोला।





नीलू,,,

हां,,,,

अब तो बहुत जल्द तुम दोनों बहनों की शादी हो जाएगी,,,,,।

पता नहीं,,, (नीलू मुस्कुराते हुए बोली)

अरे पता नहीं से क्या मतलब तुम दोनों जवान हो चुकी हो शादी के लायक हो चुकी हो तो शादी भी तो होना जरूरी है,,,, क्यों शालू सही कह रहा हूं ना,,,,।

(इस सवाल पर शालु कुछ बोल नहीं पाई बस नीलू की तरफ देखती रह गई नीलू शालू को देखकर मुस्कुरा रही थी,,,, और वह शालू की जगह जवाब देते हुए बोली,,)

मां बाबूजी को जो ठीक लगेगा वही करेंगे,,,,।

वैसे तुम्हारा विचार विवाह करने को है कि नहीं,,,।

नहीं अभी तो बिल्कुल भी नहीं है इतनी जल्दी विवाह करके करेगें क्या,,,,।

और तुम शालू तुम्हें विवाह करना है,,,।

नहीं मुझे भी नहीं करना है,,, (बहुत देर बाद शालू के मुंह से कोई शब्द फूटा था वरना जब से उसने अनजाने में सूरज के लंड को पकड़ ली थी तब से उसकी बोलती बंद हो गई थी,,, शालू का भी जवाब सुनकर सूरज बोला वैसे आप सूरज के मन में शरारत सोच रही थी वह बातें ही बात में कुछ इस तरह की बातें करना चाहता था जिससे दोनों बहनों के टांगों के बीच की पतली दरार पानी पानी हो जाए,,,, शालू का जवाब सुनकर वह बोला,,,)





अरे तुम दोनों बहने पागल हो गई हो क्या गांव में देखो तुम्हारी उम्र की लड़कियां शादी कर रही है बच्चे पैदा कर ले रही है और तुम लोग हो कि शादी करने से इनकार कर रही हो,,,,।

(बच्चे पैदा करने वाली बात पर शालू थोड़ा सा झेंप गई थी,,, इसलिए वह तुरंत जवाब देते हुए बोली,,)

तुम्हारी भी तो बहन है उसकी शादी क्यों नहीं कर देते,,,।

जरूर उसके लिए तो लड़का भी ढूंढना शुरू करती है बस कोई अच्छा सा लड़का पसंद आ जाए तो उसके भी हाथ पीले हो जाए और सच कहूं तो अपनी शादी की बात उसने खुद कही थी कि मेरी भी शादी कर दो ताकि मैं अपने घर चले जाऊं यहां काम कर करके थक गई हूं,,,,,।

क्या सच में तुम्हारी बहन ने ऐसा कहीं,,, (नीलू हैरान होते हुए बोली)

हां तो क्या हो गया मन तो उसकी बात सुनकर हंस रही थी,,,,, लेकिन वह बेवकूफ है वह सोचती है की शादी के बाद ससुराल चली जाएगी तो वहां आराम मिलेगा,,, वहां तो और भी ज्यादा काम हो जाएगा।

कैसा काम,,,? (शालू बोली)





अब तुम दोनों जवान हो शादी के लायक हो चुकी हो तुम लोगों को तो पता ही होगा कि ससुराल में जाने पर क्या-क्या होता है,,,,।

(नीलू सूरज के खाने के मतलब को अच्छी तरह से संपर्क है इसलिए मन ही मन प्रसन्न हो रही थी लेकिन शालू शायद इस बात से अनजान थी इसलिए उसके चेहरे पर हैरानी के भाव दिखाई दे रहे थे और वह नीलू की तरफ आश्चर्य से देखते हुए बोली,,,)

क्या-क्या होता है,,,,?

(शालू के इस सवाल पर नीलू अपना सर पकड़ ली क्योंकि वह जानती थी कि सूरज दूसरे कीस्म का लड़का है,,,, शालू का सवाल सुनते ही सूरज बैलगाड़ी को हांकते हुए बोला,,,)

क्या सच में तुम्हें नहीं पता की शादी के बाद क्या-क्या होता है,,,।

नहीं मुझे क्या मालूम मेरी थोड़ी ना शादी हुई है,,,,

नीलू को पता होगा,,,

एकदम पागल हो क्या हम दोनों की अभी शादी नहीं हुई तो कैसे पता चलेगा कि हम दोनों को शादी के बाद क्या होता है,,,,।(सालु थोड़ा नाराजगी दिखाते हुए बोली,,,, तो सूरज नीलू से पूछा,,,)





क्या सच में तुम्हें नहीं मालूम है नीलु की शादी के बाद लड़कियों के साथ क्या होता है,,,,(सूरज जानबूझकर नीलू से इस तरह का सवाल पूछ रहा था क्योंकि वह जानता था कि नीलू को सब कुछ मालूम है की शादी के बाद या शादी के पहले लड़कियां कैसे मजा लेती हैं लेकिन उसकी बात सुनकर नीलू थोड़ा सा घबरा गई और शालू की तरफ देखने लगी फिर वह भी थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

हम दोनों को तो नहीं मालूम अगर तुम्हें मालूम हो तो बता दो,,,,(शालू बड़ी मासूमियत के साथ बोली उसे नहीं मालूम था कि सूरज कितना हरामी लड़का है,,, जबकि अभी कुछ देर पहले ही वह इस बात का अनुभव कर चुकी थी कि सूरज भी बिगड़ैल है लेकिन वह उस हरकत को अनजान समझ रही थी उसे पूरे तौर पर यकीन नहीं था कि सूरज ने वह हरकत जानबूझकर किया था इसीलिए वह सूरज को समझ नहीं पा रही थी और सूरज तो जैसे चालू के सवाल का जवाब देने के लिए तड़प रहा था वह मुस्कुरातेहुए बोला,,,)

पूरी तरह से जवान होने के बावजूद भी तुम दोनों बहने अभी बिल्कुल नादान हो तुमसे ज्यादा चलाक तो गांव की दूसरी लड़कियां हैं,,,।





हां तो क्या हो गया हम लोग चालक नहीं है,,!(शालू थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली)

अरे तुम नाराज क्यों हो रही हो तुम्हें नाराज करने के लिए थोड़ी ना कह रहा हूं मैं तो बता रहा हूं कि यह सब तुम्हें भी पता होना चाहिए।

क्या सब,,,!

यही की शादी के बाद क्या होता है,,,।

हमें नहीं मालूम तभी तो तुमसे पूछ रहे हैं तुम बता दो तुम्हें ज्यादा मालूम है ना,,।

मालूम तो बहुत कुछ है लेकिन कहीं तुम नाराज हो गई और मुखिया जी को बता दी तो मेरी तो खैर नहीं है,,,।

ऐसी कौन सी बात है कि हम अपने पिताजी से बता देंगे,,,।

अरे बात ही कुछ ऐसी है,,।

(दोनों के बीच नीलू कुछ नहीं बोल रही थी वह खामोश थी वह बिल्कुल अनजान और नादान बनने की कोशिश कर रही थी,,, शालू भी उत्सुक हो चुकी थी कि शादी के बाद क्या होता है यह जाने के लिए इसलिए वह थोड़ा झल्लाते हुए बोली,,,)

गोल-गोल बातें मत घुमाओ,,,। जो कहना है सीधे कहो।





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मैं तो कह दूं लेकिन पहले कसम खाओ कि तुम अपने मां और बाबूजी को यह सब नहीं बताओगी,,,,।

(यह सुनकर चालू सवालिया नजरों से अपनी बहन की तरफ देखने लगी तो वह भी कुछ बोल नहीं रही थी,,, बस इशारे में बोल रही थी कि बोलने को बोलो हम अपने मां-बाबुजी से कुछ नहीं बताएंगे,,,,,,, अपनी बहन का इशारा पाकर शालू बोली,,,)

अच्छा हम लोग नहीं बताएंगे अब तो बता दो,,,,

(यह सुनकर सूरज मैन ही मन बहुत खुश हो रहा था क्योंकि वह इस तरह की बातें करके दोनों बहनों के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी भड़काना चाहता था,,, नीलू का तो कुछ नहीं हुआ जब चाहे तब नीलू को अपने नीचे ला सकता था लेकिन साथ में शालू थी इसलिए वह चाहता था कि शालू केतन बदन में भी उत्तेजना की लहर उठे और वह इस मौके का सही फायदा उठा सके इसलिए वह बोला,,,)

देखो सही तरीके से कहा जाए तो शादी के बाद लड़कियां अपने घर जाती है दुल्हन बन जाती है बहू बन जाती हैं और घर का काम करने के साथ-साथ बच्चे भी पैदा करती है,,,, यह होता है आम तरीका जब लोगों को समझाया जाता है लेकिन जब आपस में बात करते हैं हंसी मजाक में तो पता है यह सब कैसे कहते हैं,,,।





कैसे,,,? (आश्चर्य जताते हुए शालू बोली क्योंकि अभी तक सूरज की बातों में उसे कोई अश्लीलता नहीं लगी थी जिससे उसे अजीब लगे या कोई ऐसी बात जिसे वहां सच में गुस्से में अपनी मां-बाबु जी से बता सके,, सूरज शालू के सवाल और उसकी उत्सुकता देखकर मन ही मन प्रसन्न हो रहा था क्योंकि यह सब उसे अपनी मंजिल के करीब ले जाती हुई नजर आ रही थी इसलिए वह बोला,,,)

देखो वैसे तो जो कुछ भी मैं कहूंगा वह अजीब नहीं लगेगा क्योंकि आपस में तुम लोग भी इस तरह की बातें करते होंगे,,,, सिर्फ समाज में खुलकर नहीं बोल सकते,,,, लेकिन मैं तुम्हें बताता हूं कि हम लड़के क्या सोचते हैं लड़की की शादी को लेकर,,,, लड़की जब शादी करती है तो हम लड़के यही सोचते कि अब वह वहां जाकर जी भर कर चुदवाएगी,,,,,,(ऐसा कहकर सूरज कुछ पल के लिए खामोश हो गया वह देखना चाहता था कि दोनों बहनों में से कोई कुछ बोलता है कि नहीं लेकिन दूसरी तरफ से भी खामोशी छाई रही चालू हैरान थी वह नीलू की तरफ हैरानी से देख रही थी वही नीलू भी हैरान होने का सिर्फ नाटक कर रही थी और वह भी सवालियां नजरों से अपनी बहन की तरफ देख रही थी,,,, लेकिन फिर भी शालू धीरे से सूरज सुन ना सके वह अपनी बहन से बोली।)





यह तो बड़ा हारामी है मैं तो इसे सीधा-साधा समझती थी,,,।

मैं भी यही समझती थी,,,।

तू रूक में अभी इसे बताती हूं,,,,(धीरे से नीलू को कहकर शालू सूरज से बोली)

तब तो तुम अपनी बहन के बारे में भी यही सोचते होंगे,,,।

(सूरज को मालूम था किस बात पर चालू या नीलू यही सवाल खड़ा करेंगे और इसके लिए भी सूरज पूरी तरह से तैयार था क्योंकि सूरज की नजरों में उसकी बहन उसके लिए केवल एक खूबसूरत लड़की थी जिसके साथ होगा रोज मजा लेता था और उसकी बहन भी खुलकर उसे मजा लेती थी इसलिए यहां पर उसे बिल्कुल भी शर्म महसूस नहीं हो रही थी वह पूरी तरह से बेशर्म बन चुका था और मुस्कुराते हुए जवाब दिया)

तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो,,, हम लड़के हैं सिर्फ दूसरी लड़कियों के बारे में यह नहीं सोचते बल्कि अपनी बहन के बारे में भी यही सोचते हैं और जब शादी की बात चल रही है तो मैं भी अपनी बहन के बारे में यही सोचता हूं मैं जानता हूं कि वह अपने ससुराल जाकर अपने पति से जमकर चुदाई करवाएगी और यह उसका हक भी है मजा लेना सबका हक है और यह मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि तुम दोनों बहनों की जब शादी होगी तो तुम दोनों भी रोज रात को क्या दिन में भी अपने पति से जी भर कर माया लगे क्योंकि शादी के बाद लड़कियों के लिए यह सबसे बड़ा सुख होता है और कई लड़कियां तो शादी के पहले ही यह मजा ले चुकी होती है।





(नीलू तो सूरज के बारे में अच्छी तरह से जानती थी लेकिन शालू इस तरह की बातें सुनकर जाने अनजाने में ही मदहोश हो जा रही थी भले ही वह सूरज की इस तरह की बातों को पसंद ना कर रही हो लेकिन उसकी बातें उसके बदन को भी झकझोर कर रख दे रही थी खास करके चुदाई वाली बात,,,, क्योंकि यह सब कुछ शालु के लिए बिल्कुल नया था कभी कभार इस तरह की बातें हो जाती थी लेकिन सिर्फ सहेलियों के साथ ही कभी लड़कों के मुंह से इस तरह की बातें नहीं सुनी थी इसलिए ना चाहते हुए भी उसे उत्तेजना महसूस हो रही थी,,,। सूरज किस तरह की बातें सुनकर शालु को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले,, लेकिन फिर भी बोलना जरूरी था क्योंकि सूरज की बातें भले उसे मदहोश कर रही थी लेकिन अच्छी नहीं लग रही थी इसलिएवह बोली)

तब तो तुम्हारी बहन भी मजा ले चुकी होगी तुम्हारे सोचने के मुताबिक,,,।

हां तो इसमें क्या हो गया,,, जवान खूबसूरत है शादी की उम्र है तो जरूर कहीं ना कहीं मजा नहीं होगी मुझे इससे कोई एतराज नहीं है आखिरकार भगवान ने टांगों के बीच जो पतली सी दरार दे रखी है वह मजा लेने के लिए ही तो है,,,।

(यह वाली बात सुनकर तो शालू एकदम से नीलू की तरफ देखने लगी आज चेहरे से उसका मुंह खुल गया और वह अपनी हथेली को अपने मुंह पर रखकर इधर-उधर देखने लगी और अपनी बहन से बोली)





बाप रे यह तो कितना बेशर्म है एकदम खुलकर बोल रहा है,,,,।

खुलकर अभी कहां बोल रहा हूं छोटी मालकिन मैं तो अभी बातों को ढका हुआ हूं लेकिन सही बताओ तो इस तरह की बातें खुलकर ही बोलने में ज्यादा मजा आता है,,,, बोलो तो खुलकर बोलुं तुम्हें सुनने में मजा आएगा और मुझे कहने में लेकिन एक बात है यह सब तुम मुखिया जी को मत बताना,,,।

क्यों नहीं बताना इस तरह की बातें करोगे तो मैं तो अपनी मां और पिताजी से सब कुछ बता दूंगी,,,।

अरे ऐसा जुल्म मत करो छोटी मालकिन देख रही हो नीलू कुछ नहीं कह रही है और तुम हो कि धमकी दे रही हो यह तो मैं मजे लेने के लिए कह रहा हूं,,, हम लोगों को इसी तरह की बातें करते रहना चाहिए ताकि सफर कट जाए,,,,।

लेकिन तुम्हें मालूम है तुम जाने अनजाने में ही अपनी बहन के बारे में भी गंदी बातें कर रहे हो दूसरी लड़कियों के बारे में तो बोल ही रहे हो अपनी बहन को भी नहीं छोड़ रहे हो तुम कैसेभाई हो।

तो इसमें क्या हो गया कोई बड़ी बात नहीं हो गई वह भी तो एक लड़की है तुम भी एक लड़की हो सबको जरूरत पड़ती है,,,,, अपनी जरूरत की पूर्ति करना कोई गलत बात तो है नहीं क्योंकि तुम्हारे पास भी बुर है मेरी बहन के पास भी बुर है,,,,(एकदम मदहोश होता हुआ सूरज इस बार दोनों बहनों के सामने खुलकर बुरशब्द का प्रयोग करने लगा और ऐसा करते हुए उसके तन बदन में मदहोशी का नशा खुल रहा था उसका लंड अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था,,,, और दोनों बहने सूरज के मुंह से बुर शब्द सुनकर हैरान हो गई थी दोनों बहनों के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी,,,,,, सूरज अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) इसमें शर्माने की कोई बात नहीं है मैं अच्छी तरह से जानता हूं और तुम भी यह बात अच्छी तरह से जानती हो की बुर में क्या जाता है क्या डालने पर लड़कीयो और औरतों को मजा आता है,,,।





क्या,,,?(शालू इतनी मधुर हो चुकी थी कि अपने आप ही उसके मुंह से क्या निकल गया था क्योंकि वह सुनना चाहती थी उसे अच्छा लग रहा था भले ही वह गुस्सा होने का दिखावा कर रही थी लेकिन अंदर ही अंदर वह पानी पानी हुई जा रही थी,,, शालू का सवाल सुनकर सूरज के चेहरे पर मादक मुस्कान तैरने लगी उसे लगने लगा था कि उसकी बहन भी उसके काबू में आ जाएगी इसलिए वह मुस्कुराता हुआ बोला)

लंड,,,,, हम मर्दों का लंड,,,,।

(सूरज के मुंह से लड शब्द सुनकर शालू के चेहरे के हवा बदलने लगे कुछ देर पहले जो कुछ भी सालों के साथ हुआ था उसके सामने किसी चलचित्र की तरह घूमने लगा कुछ देर पहले उसने अनजाने में ही सूरज की लंड को अपनी हाथ में दबा ली थी जिसका एहसास जिसकी गर्माहट अभी तक उसके बदन को मदहोश कर रही थी। अपनी सांसों को काबू में करते हुए वह बोली,,,)

यह कैसी बातें कर रहे हो तुम मुझे तो तुमसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि तुम इस तरह की बातें करते हो।

उम्मीद तो किसी को किसी से कुछ भी नहीं होती छोटी मालकिन कोई किसी से क्या उम्मीद लगा कर बैठे रहता है और वह क्या निकलता है अभी जरा तुम ही सोचो मैं तुम्हें सीधी-सादी लड़की समझता हूं अगर तुम रात को किसी से चुदवाने लगे और मुझे पता चल जाए तो हमें तुम्हारे बारे में क्या सोचूंगा,,,।

धत्,,,,, ऐसी बातें मत करो मुझे गुस्साआ जाएगा,,,(अपनी बहन की तरफ देखते हुए शालू बोली और धीरे से नीलू को भी बोली कुछ बोलने के लिए तो नीलू बोली)

फिर तुझे क्या हो गया है सूरज तू इस तरह की बातें क्यों कर रहा है हम लोगों को इस तरह की बातें बिल्कुल भी पसंद नहीं है,,,।





यह क्या कह रही हो मालकिन,,,।

और यह मालकिन मालकिन क्या लगा रखा है मेरा नाम नीलू है और इसका नाम शालू है नाम लेकर बोलो,,,।

अच्छा ठीक है नीलू तुम ही बताओ,,, क्या मैं कुछ गलत कह रहा हूं तुम्हारी शादी होगी तुम्हारी बुर में क्या जाएगा सच-सच बताना बैगन लौकी ककड़ी तो लोगी नहीं,,, लौकी तो सिर्फ लंड मर्द का लंड जो तुम्हारी बुर में जाकर तुम्हें मजा देगा तुम्हें खुश करेगा तुम्हें शादी के मतलब को अच्छी तरह से समझाएगा,,,,।

(यह सुनकर दोनों बहने एकदम खामोश हो गई दोनों एक दूसरे को देख रही थी शालू की हालत कुछ ज्यादा ही खराब हो रही थी नीलू ने तो सूरज के साथ बहुत बार मछली थी इसलिए उसे मालूम था लंड की अहमियत लेकिन शालू के लिए सब कुछ नया था शालू को अपनी बुर से कुछ रिसता हुआ महसूस हो रहा था,,, बार-बार उसका हाथ उसकी सलवार के ऊपर चली जा रही थी और वह हल्का सा दबाव देकर अपनी हथेली को हटा ले रही थी ऐसा वह बार-बार कर रही थी नीलू उसकी हालत को समझ रही थी वह जानती थी कि सूरज की बातों से उसका मन बहक रहा था,,,, यह देखकर नीलू थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)





तुम पागल हो गए हो क्या सूरज इस तरह की बातें कर रहे हो तुम्हें बिल्कुल भी डर नहीं है कि अगर हम दोनों में अपनी मां से यह सब बता दिया तो क्या होगा,,,?(नीलू अच्छी तरह से जानती थी कि अगर वह इस तरह की बातें अपनी मां को बताएगी तो सूरज का कुछ बिगड़ता वाला नहीं है क्योंकि उसकी मां सूरज के साथ बहुत बार हम बिस्तर हो चुकी थी और वह खुद अपनी आंखों से देख चुकी थी यह तो वह शालू के सामने जानबूझकर बोल रही थी,,,,,, नीलू का डर सूरज को भी बिल्कुल नहीं था लेकिन शालू का डर था वह जानता था कि अगर शालू उसकी बातों में नहीं आई तो उसके लिए अच्छा नहीं होगा उसकी मां तो उसका कुछ बिगाड़ नहीं पाएगी लेकिन अगर यह बात उसके पिताजी को पता चल गई तो उसका हुका पानी बंद हो जाएगा जो मजदूरी उसे मिलती आ रही है उससे भी हाथ धो बैठेगा इसलिए वह बोला)

चलो कोई बात नहीं बात को यहीं खत्म करते हैं अब मैं इस तरह की बातें नहीं करूंगा बस मुझे तो लगा कि तुम दोनों समझदार हो की बड़ी हो चुकी हो शादी लायक हो चुकी हो इसलिए इस तरह की बातें तुम दोनों को अच्छी लगती होगी,,,।

नहीं हम दोनों को अच्छी नहीं लगती,,,(नीलू बोली तो शालू अपने मन में सोची कि खामखा नीलू उसे रोक रही है उसकी बातें सुनकर उसे अच्छा लग रहा था उसकी बर पानी पानी हो रही थी लेकिन वह कुछ कर भी नहीं सकती थी सूरज भी खामोश हो गया बैलगाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ती चली जा रही थी ना जाने कितने गांव पीछे छूट चुके थे.,,,, लेकिन अभी भी शहर बहुत दूर था, सूरज बैलगाड़ी चलाते समय यही सोच रहा था कि किस तरह से वह शाल को अपने नीचे लाए क्योंकि उसकी कस हुई जवानी उसकी आंखों में बस गई थी,,, घर से निकले काफी देर हो चुकी थी सूरज आसमान पर ताप रहा था भूख भी लगी हुई थी और वैसे भी इतनी कड़क धूप मे बेलो को ले जाना ठीक नहीं था क्योंकि लंबा सफर था उन्हें भी आराम देना जरूरी था। तभी सड़क के किनारे बड़ा सा नीम का घना पेड़ था वहां और भी बहुत सारे पेड़ थे धीरे से सड़क से नीचे रेलगाड़ी को उतार कर पेड़ के नीचे बैलगाड़ी को खड़ा कर दिया,,,,, और बैलगाड़ी से नीचे उतर गया दोनों बहने कुछ समझ पाती से पहले ही पीछे की तरफ जाकर सूरज बोला,,,,।

धूप बड़ी तेज है ऐसे में सफर करना ठीक नहीं है बैल को भी आराम देना है,,,,, और भूख भी लगी है,,,, क्यों सहीकहा ना,,,(नीलू और शालू की तरह देखते हुए सूरज मुस्कुराते हुए बोला वह दोनों सूरज के कहने का मतलब को समझ गई थी इसलिए बिना कुछ बोले बैलगाड़ी से नीचे उतर गई थी,,,, बैलगाड़ी से नीचे उतर कर शालू इधर-उधर देखने लगी और बोली,,,)

लेकिन यहां तो पानी का कोई इंतजाम ही नहीं है खाना खाने के बाद पानी कहां से पियोगे और बैल भी प्यासे होंगे इन्हें कैसे पिलाओगे,,,,,।

हममममम अभी पता लगा लेता हूं इतनी हरियाली है तो जरूर पानी तो होगा ही,,,, रुको मैं देख करआता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही बैलगाड़ी में रखी हुई एक बाल्टी को सूरज ले लिया और,, सड़क के दूसरी तरफ उतरकर जाने लगा दोनों बहने खड़ी उसे ही देख रही थी। जब वह थोड़ी दूर पहुंच गया तो शालू बोली)

बाप रे मैं जिंदगी में इतना हरामी लड़का कभी नहीं देखी देखा नहीं रही थी कितना खुलकर बोल रहा था मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है की मां बाबुजी इस पर इतना यकीन कैसे कर लेते हैं,,,।

इसकी मेहनत देखकर अगर उन्हें सच में पता चल जाए कि यह इतना हारामी है तो शायद इसे कोई काम ना दे,,,, लेकिन एक बात तो है शालू भले ही खुलकर कह रहा था लेकिन कह रहा था एकदम सच,,,।

यह तु क्या कह रही है,,,?(कमर पर दोनों हाथ रख वहां नीलू की तरफ थोड़ा गुस्से से देखते हुए बोली तो नीलु मुस्कुरा कर बोली,,,)

मैं भी ठीक कह रही हूं और यह बात तुझे भी पता है मैं भी यही सोचती हूं कि जब मेरी शादी हो जाएगी तो शादी के बाद कितना मजा करुंगी अपने पति के साथ अभी तो सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं हकीकत में कर लिए तो पिताजी जान से मार देंगे,,,, क्या तू नहीं सोचती की शादी के बाद कितना मजा आएगा,,,,।

नहीं मैं नहीं सोचती,,,,।

चल रहने दे झुठी,,,,

तुझे भी अच्छी तरह से मालूम है की शादी के बाद क्या होता है और लड़कियां अक्सर शादी के बाद में क्यों सोचती है,,,,,।

चल तेरी बात सही है लेकिन वह तो अपनी बहन के बारे में भी यही सब बोल रहा था क्या वह बेशर्म नहीं है कोई अपनी बहन के बारे में सब गंदी बातें बोलता है क्या,,,?

मुझे क्या मालूम है तो पहली बार सुन रही थी कि कोई अपनी बहन के बारे में भी इस तरह की बातें करता है लेकिन फिर भी बोल तो सही रहा था,,,।

बोल तो सही रहा था मौका मिले तो सच में अपनी बहन पर भी चढ़ जाए मुझे तो इसकी नियत ठीक नहीं लगती,,,,।

नहीं ऐसा तो कुछ नहीं है बस बोलने में बेबाक है,,,,, और यह अभी तक आया नहीं पता नहीं यहां पानी मिलेगा भी कि नहीं वैसे भी गर्मी बहुत है भूख भी लगी है,,,,।

अब पानी मिल जाए तो खाना भी खा लिया जाए अगर पानी मिलेगा ही नहीं तो खाना खाने का कोई मतलब ही नहीं है,,,,।

बात तो सही कह रही है कुछ देर इंतजार कर कहीं ना कहीं से तो इंतजाम करके लेकर ही आएगा,,,,।

(इतना कहकर दोनों बहने बैठ गई और उसका इंतजार करने लगे थोड़ी देर में सूरज हाथ में बाल्टी का पानी लिए हुए मुस्कुराता हुआ चला रहा था और आते ही पानी की बाल्टी नीचे रख कर बोला,,,,)

अरे क्या मस्त नजारा है मैं तो नदी तालाब ढूंढ रहा था वहां तो पूरा झरना है इतना खूबसूरत नजारा मैं तो आज तक कभी नहीं देखा तुम दोनों की तो बात ही रहने दो गांव छोड़कर कभी कहीं निकली नहीं होगी आज पहली बार मेरे साथ निकल रही हो तो देखने की बात तो दूर ही रही,,,।

कहां झरना है,,,(कमर पर हाथ रखे हुए शालू सवालिया अंदाज में सूरज की तरफ देखते हुए बोली)

और यही बस थोड़ी ही दूर पर है ध्यान से सुनो झरने की आवाज भी आती है,,,(इतना कहकर वह दोनों को खामोश रहने का इशारा किया और वाकई में झरने की आवाज सुनाई दे रही थी पानी गिरने की आवाज एकदम साफ आ रही थी यह सुनकर दोनों बहने भी खुश हो गई,,,,,,,)

अब चलो जल्दी से खाना खा लेते हैं मुझे तो गर्मी लग रही है इसके बाद जाकर झरने में नहाऊंगा क्या कहती हो नीलू चलोगी,,,,,।

गर्मी तो मुझे लग रही है,,,(शालू की तरफ देखते हुए नीलू बोली और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) और मैं तो कपड़े भी लेकर आई हूं,,,.

तुम शालू चलोगी बहुत मजा आएगा नहाने में,,,,।

ना बाबा ना तुम दोनों ही नहाओ,,,,, मैं यही ठीक हूं,,,,।

चलो कोई बात नहीं बैलगाड़ी की रखवाली भी तो करना पड़ेगा इसलिए किसी को तो यहां होना जरूरी है शालु यहीं रुक जाएगी,,,,।

अपने लिए तो पानी ले आए लेकिन बैलो के लिए,,,!( शालू थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली तो सूरज मुस्कुरा कर बोला)

बैलों को वही लेकर जाना पड़ेगा पानी पिलाने के लिए बार-बार पानी लेकर यहां आना मेरे बस की बात नहीं है,,,,, अब चलो जल्दी से खाना खा लेते हैं समय बिगड़ना ठीक नहीं है,,,।

(इतना कहने के साथ ही सूरज बैलगाड़ी में से रोटी और सब्जी की थैली लेकर आया और वह तीनों पेड़ के नीचे बैठकर खाना खाने लगे,,,, खाना खाने के बाद सूरज बैलों को गाड़ी से अलग किया और उन्हें साथ लेकर नीलू के साथ झरने की तरफ जाने लगा शालू गुस्से में वहीं बैठे उन दोनों को जाते हुए देख रही थी,,,,, थोड़ी देर में दोनों शालू की नजरों से ओझल हो गए,,,,, रास्ते में सूरज से नीलू बोली)

तुम सच में बहुत बेशर्म हो उसके सामने यह सब बातें करने की क्या जरूरत थी और वह भी इतना खुलकर,,,,।

तो इसमें क्या हो गया आखिरकार शादी होने के बाद वह मेरी शादी है और शादी आदि घर वाली होती है उसके साथ हंसी मजाक करना तो रिवाज है तुम इसके लिए मुझे नहीं रोक सकती,,(सूरज कि ईस तरह की बात सुनकर नीलु मन ही मन खुश होने लगी,,, क्योंकि बात ही बात में सालों से वह जीजा साली वाला रिश्ता जोड़ रहा था,,, दोनों झरने के पास पहुंच चुके थे वाकई में नीलू ने आज तक ऐसा नजारा नहीं देखी थी वह एकदम से खुश हो गई,,,, सूरज दोनों पैरों को पानी के पास एक पेड़ से बांध दिया और दोनों बैल पानी पीने लगे और वहां की हरी हरी घास भी खाने लगे एक साथ दो-दो काम हो जा रहा था सूरज बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था इसलिए नीलू की आंखों के सामने अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगा हो गया और पानी में कूद गया नीलू को तैरना आता था लेकिन सूरज के सामने कपड़े उतारने में उसे शर्म महसूस हो रही थी यह देखकर सूरज बोला,)

मेरे सामने शर्माने की कोई जरूरत नहीं है ना जाने कितनी बार तुम मेरे सामने नंगी हुई हो अब जल्दी से कपड़े उतारो और कुद जाओ,,,,।

अगर शालू आ गई तो,,,,।

वह नहीं आने वाली है और वैसे भी अगर आ गई तो देखेगी और यही रहेगी की उसके जीजा उसकी दीदी की चुदाई कर रहे हैं,,,,,।

क्या,,,?





तुम आओ तो सही में बताता हूं,,,,,।

(सूरज की हरकतों और उसकी बातों को सुनकर पहले से ही नीलू की बुर पानी छोड़ रही थी और इस समय सूरज को नंगा पानी में कूदता हुआ देख कर नहाता हुआ देखकर उसके अरमान में चलने लगे थे और वह भी शरमाते हुए अपने कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई और पानी में कूद गई,,,,,, पानी बहुत ठंडा था इसलिए इतनी तेज धूप में गर्मी में पानी की ठंडक दोनों को बदन को राहत दे रही थी सूरज नीलू को अपनी बाहों में लेकर बार-बार पानी के अंदर घुस जाता है और थोड़ी देर बाद उसे लेकर बाहर आ जाता दोनों को बहुत मजा आ रहा था दोनों के नंगे बदन आपस में टकरा रहे थे रगड़ खा रहे थे सूरज बार-बार उसकी चूची को पानी में ही दवा दे रहा था उसकी गांड को दावत ले रहा था क्योंकि शालु से अश्लील बातें करते हुए उसके भी अरमान पूरी तरह से जाग गए थे,,,, कुछ देर तक दोनों इसी तरह से नहाने का मजा लेते रहे लेकिन समय नहीं था और सूरज को अपने अरमान भी पूरे करने थे क्योंकि ऐसा मौका पता नहीं कब मिलने वाला था,,,,,, और जब दिलु तालाब से बाहर निकल रही थी तो सूरज उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसे बाहों में भरकर उसके नंगे बदन पर अपना हाथ घुमाने लगा,,,,

सूरज की हरकत से नीलु के तन बदन में मदहोशी का रस घुलने लगा था,,,, वह भी मदहोश होने लगी थी वह अपने आप को रोक नहीं पाई और सूरज अपनी मनमानी करने का था उसकी चूचियों को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया दूसरी तरफ काफी देर हो जाने की वजह से शालु से रहा नहीं गया और वह झरने की तरफ जाने लगी,,, सूरज नीलू की नंगी जवान को अपनी बाहों में प्रकार मदहोश हो चुका था उसका लंड बार-बार नीलू की बुर पर ठोकर मार रहा था और नीलू इस रगड़ और स्पर्श से पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी वह खुद सूरज के लंड को अपनी पर की गहराई में महसूस करना चाहती थी,,, आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी,,,, पानी में भीगा हुआ नीलू का खूबसूरत बदन जवानी की आग में तपने लगा था,,,, वह बार-बार सूरज के मोटे तगड़े लंड को पकड़ कर मुठिया दे रही थी,,, नीलू की तरफ से यह हरकत सूरज के लिए इशारा था कि आप उसे रहा नहीं जा रहा है वह जल्द से जल्द उसके लंड को अपनी बुर की गहराई में लेना चाहती है सूरज भी उसके इशारे को उसकी भावनाओं को समझ रहा था इसलिए एकदम से उसे बड़े से पत्थर पर घोड़ी बना दिया और पीछे से अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में डालकर धक्का लगाना शुरू कर दिया,,,,।

सूरज और नीलू दोनों एकदम मदहोश हो चुके थे सूरज के हर एक धक्के पर ले लो खुलकर गरमा गरम शिसकारी की आवाज अपने मुंह से निकल रही थी क्योंकि वह जानती थी यहां पर कोई सुनने वाला नहीं है दूसरी तरफ धीरे-धीरे शालू झरने के करीब पहुंच चुकी थी,,,,, उसे नहीं मालूम था कि नहाने के बहाने उसकी बहन सूरज के साथ मजे लूट रही है जैसे ही कुछ दूरी पर पहुंचने के बाद शालू की नजर सामने बड़े से पत्थर के पास गई तो वह सामने का नजारा देखकर एकदम से चौंक गई उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था लेकिन भरोसा करना जरूरी था वह कोई सपना नहीं देख रही थी ना तो कोई कल्पना कर रही थी जो कुछ भी उसकी आंखें देख रही थी वह हकीकत थी जिसे झूठ लाया नहीं जा सकता था वह कभी सोच भी नहीं सकती थी कि वह नीलू को इस अवस्था में देखेगी।

वह बड़े से पेड़ के पीछे छूकर देखने लगी थी उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी बहन एकदम नंगी थी सूरज की पूरी तरह से नंगा था दोनों के बदन पर कपड़े का रेशा भी नहीं था और उसकी बहन घोड़ी बनी हुई थी उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़े सूरज जोर जोर से धक्के लगा रहा था शालू को एकदम साफ दिखाई दे रहा था कि जो कुछ भी नीलू करवा रही थी उसमें उसे बहुत मजा आ रहा था क्योंकि नीलू का मुंह खुला हुआ था और वह मदहोश होकर मस्त है होकर अपनी आंखों को बंद किए हुए इस एहसास में डूबी हुई थी पहले तो यह नजारा देखकर शालू को गुस्सा आने लगा लेकिन धीरे-धीरे उसे एहसास होने लगा कि उसे भी यही सुख की जरूरत है वह मदहोश होने लगी अपनी बहन को चुदवाते हुए देखकर उसके भी अरमान मचलने लगे। वह सूरज के लंड की तरफ गौर करने लगी और उसे देखकर वह भी आश्चर्य में डूबे क्योंकि वाकई में उसका लंड पूछा आदमी मोटा और लंबा था वैसे तो शालु ने यह सब कभी देखी नहीं थी लेकिन उसे इस बात का एहसास था कि सूरज के पास कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कुछ देर पहले जिसे अनजाने में वह पजामे के ऊपर से पकड़ ली थी वही मोटा तगड़ा लंड उसकी बहन की बुर में अंदर बाहर हो रहा है और उसे मजा दे रहा है।





यह नजारा देखकर सालु की बुर भी पानी छोड़ रही थी,,,, सलवार के ऊपर अपने आप ही उसकी हथेली पहुंच चुकी थी और वह सलवार के ऊपर से ही अपनी बुर को मसल रही थी दबा रही थी और ऐसा करने में उसे अच्छा लग रहा था सूरज की तेज हिलती कमर शालू के आश्चर्य को बढ़ा रही थी,,,,, हल्की हल्की नीलू की शिसकारी की आवाज उसके कानों तक पहुंच रही थी और वह यह भी देख रही थी कि धक्के लगाते हुए सूरज बार-बार उसकी गांड पर चपत भी लगा दे रहा था शायद ऐसा करने में उसे ज्यादा आनंद आ रहा था ऐसा शालू सोच रही थी,, तभी धीरे से सूरज अपने लंड को नीलू की बुर में से बाहर निकाला शालू को लगने लगा के साथ दोनों का काम हो चुका है उसे चलना चाहिए लेकिन तभी उसके आश्चर्य के बीच सूरज में अपने कपड़े को उसे बड़े से पत्थर पर बिछाया और शालू को उसे पर पीठ के बल लेटा दिया और उसकी दोनों टांगें खोलकर एक बार फिर से अपने लंड को उसकी गांड में डालकर तेज तेज धक्के लगाना शुरू कर दिया,,,, दोनों की मदहोशी देखकर शालू की हालत खराब हो रही थी और सूरज बार-बार धक्के लगाते हुए उसकी बहन की चूची को मुंह में लेकर पी रहा था दबा रहा था यह सब शालू के लिए असहनीय होता जा रहा था वह सलवार के ऊपर से ही अपनी बर को जोर से अपनी मुट्ठी में दबाए हुए थी,,,, थोड़ी ही देर में सूरज उसे पूरी तरह से अपनी बाहों में भर लिया और अपनी कमर वाले भाग को बड़ी तेजी से ऊपर नीचे करने लगा और देखते ही देखते दोनों एकदम से शांत होने लगे,,,,,, लेकिन शालू को नहीं मालूम था कि वह दोनों झड़ चुके हैं वह उत्सुकता और मासूमियत के साथ दोनों को देख रही थी,,,, उसे लग रहा था कि अभी खेल खत्म नहीं हुआ है लेकिन जब उसने देखी कि उसकी बहन कपड़े पहने लगी है तो वह समझ गई कि अब यहां पर ज्यादा देर खड़े रहना ठीक नहीं है और वह धीरे से वापस अपनी जगह पर आ गई।

थोड़ी देर बाद सूरज दोनों बैलों को साथ में लेकर नीलू के साथ मुस्कुराता हुआ चला रहा था दोनों को देखकर चालू कभी समझ ही नहीं पाती कि दोनों के बीच क्या चल रहा है अगर वह अपनी आंखों से यह सब ना देखी होती तो।
 
शालू हैरान थी वह कभी सोच भी नहीं सकती थी कि, उसकी बहन नीलू इस तरह की हरकत करेगी,,,, दोनों को आता हुआ देखकर वह एकदम सामान्य बनने की कोशिश कर रही थी वैसे तो उसके अंदर गुस्सा बहुत था लेकिन वह कुछ कर नहीं सकती थी कुछ कह नहीं सकती थी क्योंकि ईस तरह की बात करने में भी उसे शर्म महसूस हो रही थी, वैसे तो वह एकाद बार अपनी बहन के साथ एक दूसरे के अंगों से खेलने का मजा ले चुकी थी लेकिन वह कभी सोची नहीं थी कि उसकी बहन विवाह के पहले ही किसी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाएगी,,,।

शालू को धीरे-धीरे अपनी बहन पर शंका होने लगा था कि यह जो कुछ भी हुआ यह आज का बिल्कुल भी नहीं है ऐसा यह दोनों पहले भी कर चुके हैं आपस में मिल चुके हैं वरना इतनी जल्दी किसी के भी जिस्मानी ताल्लुकात हो जाए यह अविश्वसनीय है,,, क्योंकि कुछ देर पहले ही उसकी बहन ऐसा बर्ताव कर रही थी कि जैसे वह सूरज को ज्यादा जानती ना हो और झरने पर खुलकर चुदाई का मजा लूट रही थी और वह भी निर्वस्त्र होकर शालू को इतना तो समझ में आ रहा था कि अगर पहली बार कोई लड़की लड़के के साथ संभोग सुख प्राप्त करती है तो उसके अंदर झिझक होती है शर्म होती है हाय होती है जिसके चलते वह अपने बदन से सारे कपड़े उतारने से कतराती है घर की चार दिवारी के अंदर भी वह पहली दफा पूरी तरह से निकाला छोड़कर अपने सारे कपड़े नहीं उतारती,, लेकिन उसने अपनी बहन के चेहरे पर मासूमियत की जगह निर्लज्जता देखी थी वासना से युक्त चेहरा देखी थी आंखों में हवस साथ दिखाई दे रहा था और वह जिस तरह से निर्वस्त्र होकर चुदाई का शुख हो रही थी यह पहली दफा का तो बिल्कुल भी नहीं था,,,, यही सब शालू के दिमाग में चल रहा था कि तभी नीलू उसके करीब आते हुए बोली,,,।

बहुत मजा आया शालू मैं तो जिंदगी में पहली बार खूबसूरत झरना देख रही थी कितना ठंडा पानी था नहाने में बहुत मजा आया।

तू भी नहा रही थी,,,।

नहाने के लिए ही तो गई थी देख कितनी गर्मी लग रही थी लेकिन अब पूरा शरीर हल्का हो गया है,,,।

(भारी और लंबा चीज अपने अंदर लेगी तो शरीर तो हल्का महसूस होगा ही,, शालू अपने मन में ही बोली,,, न जाने क्यों अपनी बहन की हरकत उसे अच्छी तो नहीं लग रही थी लेकिन अपनी बहन की हरकत की वजह से उसके अंदर जलन भी हो रही थी उसे समय तो हुआ कुछ नहीं बोली दोनों फिर से बैलगाड़ी में बैठ गए और सूरज बैलों को गाड़ी में जोड़कर आगे की तरफ बढ़ गया वाकई में यहां पर भी सूरज ने बहुत मजा किया था सफर की शुरुआत में ही कमला मिल गई थी और उसके साथ अद्भुत पल बिताने के बाद झरने में जिस तरह से उसने नीलू की चुदाई किया था वह पूरी तरह से मस्त हो गया था। धीरे-धीरे फिर से बैलगाड़ी आगे बढ़ने लगी,,,,, शालू नीलू से बात नहीं कर रही थी नीलू बार-बार उससे बात करने की कोशिश कर रही थी और शालु थी कि सिर्फ हां और ना में ही जवाब दे रही थी,,, शालू की आंखों के सामने बार-बार नीलू का मदहोशी से भरा हुआ चेहरा नजर आ रहा था उसकी कमर पड़े सूरज नजर आ रहा था और उसका मोटा तगड़ा लंड जो उसकी बहन की बुर में बड़े आराम से अंदर बाहर हो रहा था यह सब सोचते हुए शालू की हालत खराब हो रही थी उसके तन बदन में भी उत्तेजना के लहर उठ रही थी आखिरकार वह भी तो पूरी तरह से जवान थी भले ही जो कुछ भी अपनी आंखों से देखी थी वह ठीक नहीं था लेकिन वह जानती थी कि एक न एक दिन वह भी इन सब का हिस्सा बनने वाली है,,,।

इस बारे में वह नीलू से बात करना चाहती थी लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,,, देखते ही देखते दोनों बहने बैलगाड़ी के अंदर सो गई और सूरज धूप से काफी थक चुका था वह अपने मन में यही सोच रहा था कि शहर जाने के लिए मुखिया को हां बोलना ही नहीं चाहिए था अगर घर पर होता तो अपनी मां की जवानी का मजा लूट रहा होता,,,, लेकिन अब वह कुछ कर भी नहीं सकता था बिना काम पूरा किया वापस भी नहीं जा सकता था अभी ना जाने कितनी दूर शहर था,,,, ईस बीच दो तीन बाजार गुजर चुके थे,,, शाम हो चुकी थी और धीरे-धीरे शाम भी ढलने वाली थी,,,, शाम ढलने से पहले गांव का एक छोटा सा बाजार आया और यहीं पर सूरज ने बैलगाड़ी रोक दिया उसके मन में यही था कि अगर,,,, अभी भी शहर बहुत दूर है तो खाने के लिए कुछ तो लेना पड़ेगा वरना रात नहीं निकल पाएगी भूखे पेट और वैसे भी रात को बैलगाड़ी चलाना ठीक नहीं था कहीं ना कहीं तो उसे आराम करने के लिए रुकना ही था,,,, बैलगाड़ी के रुकते ही दोनों बहने बैलगाड़ी से नीचे उतर गई पास में ही हैंडपंप था जिसे चला कर दोनों पानी पीने लगे और हाथ मुंह धो कर अपने आप को तरो ताजा करने लगे,,,, सूरज दोनों बहनों के पास आया और बोला।

देखो अभी कुछ निश्चित नहीं है कि शहर कितनी दूर है और रात होने को है इसलिए मैं समोसे और जलेबी या ले लेता हूं अगर कहीं रुकना पड़ गया तो यही खाकर रात गुजारनी पड़ेगी वरना भूखे पेट रहना पड़ेगा।

नहीं नहीं तुम समोसे और जलेबियां ले लो मुझसे भूख बर्दाश्त नहीं होगी,,, ,,, (नीलू अपना पेट पकडते हुए बोली,,,,, उसकी बात सुनकर सूरज मुस्कुराते हुए बोला,,,)

चलो ठीक है मैं खरीद लेता हूं,,,, (इतना कहकर वह एक छोटी सी दुकान की तरफ चल दिया, उसे जाता हुआ देखकर शालू बोली,,,)

बेवजह हम लोग इधर आगे बीना जाने कितनी दूर है शहर,,,,।

अरे कुछ नहीं बहुत मजा आएगा इसी बहाने हम लोग शहर भी देख लेंगे,,,।

(नीलू की बात सुनकर शालू अपने मन में ही बोली तुझे तो मजा आएगा ही उसका लंबा-लंबा ले जो रही है,,,, शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो रहा है धीरे-धीरे बाजार में से लोग अपने घर की तरफ जाने लगे थे कुछ दुकानें बंद होने लगी थी जो खुली थी उसमें लालटेन जल रही थी,,, सूरज समोसे और जलेबियां ले रहा था थोड़ी देर में वह भी अपने घर जाने को तैयार था इसलिए सूरज को वह दुकानदार थोड़ा ज्यादा समोसे और जलेबियां दे दिया था यह देखकर मुस्कुराते हुए सूरज बोला,,,)

यह तुमने बहुत ठीक किया,,,, वैसे भी हम लोगों का सफर बहुत लंबा है,,,।।

कहां जाना है बबुआ,,,?

शहर जाना है चाचा जी क्या बता सकते हैं कि अभी शहर कितनी दूर है,,,।

अभी तो बहुत दूर है बबुआ,,,,, अभी से चलना शुरू करोगे तो आधी रात के बाद पहुंच जाओगे लेकिन रात को चलना ठीक नहीं है तुम्हें कहीं ना कहीं रुकना होगा,,,,।

कोई बात नहीं चाचा जी कोई अच्छी सी जगह देखकर रुक जाएंगे,,,,,।

तुम अकेले हो,,,,,।

जी हां,,,, अभी तो अकेला हूं लेकिन आगे मेरा साथी इंतजार कररहा है,,,,।

(ऐसा सूरज जानबूझकर बोला था क्योंकि अगर वह कहता था कि उसे वह अकेला नहीं उसके साथ दो जवान लड़कियां ही तो हो सकता है कि दुकानदार हरामी हो और आगे चलकर अनहोनी हो जाए इसलिए चलाकी दिखाता हुआ सूरज बोल दिया था कि वह अकेला है लेकिन आगे उसका साथी इंतजार कर रहा है ताकि उसे यह ना लगे कि अकेला ही सफर कर रहा है वरना लूट फाट होने का डर बन जाता,,,, सूरज समोसे और जलेबीया लेकर बैलगाड़ी के पास पहुंचा उसके पहुंचने से पहले ही दोनों बहन गाड़ी में बैठ चुकी थी और फिर समोसे और जलेबी को बैलगाड़ी में रखकर वह रेलगाड़ी पर बैठ गया और फिर से आगे की तरफ बढ़ गया चारों तरफ धीरे-धीरे अंधेरा फैलने लगा था अंधेरा इतना कि अब तो सड़क दीखना भी मुश्किल हुए जा रही थी,,,, लेकिन फिर भी धीरे-धीरे वह 10 किलोमीटर जितना आ चुका था,,,,, धीरे-धीरे बैलगाड़ी को आगे बढ़ाते हुए वह बोला,,,)

नीलू अब आगे जाना ठीक नहीं है यहीं पर हमें रुकना होगा,,,।

यहां पर कहां पर यहां तो चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा है बस बड़े-बड़े पेड़ हैं,,,,,।

तभी तो कह रहा हूं अब आगे जाना ठीक नहीं है,,,,।

लेकिन हम लोग रुकेंगे कहां,,,?

तुम चिंता मत करो मैं जुगाड़ बनाता हूं,,,, (इतना कहकर सूरज सड़क से नीचे बैलगाड़ी को ले लिया जहां आम के बड़े-बड़े पेड़ थे,,,,,, वह धीरे से नीचे उतरा और चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगा लेकिन अंधेरा इतना था कि दूर तक देखना मुश्किल हुआ जा रहा था,,,,, वह दोनों बहनों के पास आया और बोला,,)

रात हमें यही गुजारनी पड़ेगी,,,।

यहां पर इस जंगल में,,,, (शालू हैरान होते हुए बोली)

अब कुछ कर भी नहीं सकते हैं,,,, वैसे तो रात भर चलते रहे तो शहर आ जाएगा लेकिन रात को चलना ठीक नहीं है यह उस दुकानदार ने भी कहा था।

चलो कोई बात नहीं आज की रात यहीं रुक जाते हैं,,, (इतना कहते हुए नीलू बैलगाड़ी से नीचे उतर गई,,,, उसके मन में कुछ और चल रहा था रात का सन्नाटा और सूरज की मौजूदगी को देखकर उसके तन बदन में हलचल हो रही थी,,,,, नीलू को बैलगाड़ी से नीचे उतरता देखकर शालू भी नीचे उतर गई,, उसके पेट में थोड़ी गड़बड़ हो रही थी उसे मैदान जाना था इसलिए वह धीरे से नीलू को बोली,,,)

मेरे पेट में थोड़ी गड़बड़ हो रही है,,,,,।

(उसके कहने के मतलब को नीलू समझ गई इसलिए हैरान होते हुए)

तुझे भी इस जंगल में मैदान जाना है,,,,,।

अब क्या करूं इस पर तो मेरा बस नहीं है ना,,,,।

(दोनों की बातों को सूरज सुन रहा था और शालू की बात सुनकर उसके तन बदन में हलचल सी होने लगी वह बीच में बोल पड़ा,,,)

कोई दिक्कत नहीं है मैं हूं ना चिंता मत करो,,,।

तुम हो,,,, मतलब है कि तुम भी हम लोग के साथ चलोगे,,,,।(शालू बोली)

सुरक्षा के लिए,,

नहीं कोई जरूरत नहीं है हम दोनों चली जाएंगी,,,, तुम्हें तो बिल्कुल भी शर्म नहीं है,,,।

अरे इसमें शरम कैसी माहौल देख कर में बात कर रहा हूं कहीं जंगली जानवर निकल गए तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,,,।

सूरज ठीक कह रहा है शालु,,,,।

(शालू भी अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज जो कुछ भी कह रहा है उसमें सच्चाई है वाकई में अगर जंगली जानवर निकल गए तो वह दोनों बहने कुछ कर नहीं पाएंगे इसलिए कुछ देर खामोश रहने के बाद वह बोली,,)

लेकिन यहां पानी कहां है,,,,?

पानी तो यहां होगा ही रुको में देखता हूं ,,, (इतना कहकर बुला तेल गाड़ी के अंदर रखी हुई लालटेन को निकाल दिया और दिया सलाई की मदद से उसे जला दिया थोड़ी ही देर में वहां उजाला हो गया यह देखकर दोनों बहने खुश हो गई और शालू बोली,,,,)

मैं तो इस बारे में सोची ही नहीं थी,,,।

तुम नहीं सोची थी लेकिन मैं सोचा था मैं जानता था कि सफर में इन सब चीजों की बहुत जरूरत पड़ती है,,,,,। रुको मैं देख लूं यह जगह कैसी है,,,, (इतना कहकर वह लालटेन इधर-उधर घूमा कर देखने लगा तो लालटेन की पीली रोशनी में उसे एक टूटी हुई झोपड़ी दिखाई दी जो पूरी तरह से जर्जरित हो चुकी थी लेकिन उसके पास में ही एक हेड पंप था जिस पर नजर पढ़ते ही सूरज एकदम से खुश होते हुए बोला,,,)

वह देखो हेड पंप,,,।

अरे हां यह तो हेडपंप है,,,, लगता है हमारी किस्मत इतनी भी बुरी नहीं है,,, (शालू खुश होते हुए बोली)

लेकिन देखना पड़ेगा की पानी निकलता है कि नहीं कहीं ऐसा ना हो कि बस हेड पंप ही हो पानी का नामी ना हो सब तो गड़बड़ हो जाएगा,,,,,।

हां हां चलो देखते हैं,,, (दोनों बहने एक साथ और में सुर मिलाते हुए बोली सूरज लालटेन हाथ में लिए हुए हेडफोन के पास पहुंच गया और उसकी हत्था पकड़कर उसे हिलाना शुरू कर दिया थोड़ा समय लगा लेकिन धीरे-धीरे पानी उसमें से गिरने लगा यह देखकर तीनों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे,,,, शालू जल्दी से दौड़ कर गई और बैलगाड़ी में से लौटा ढूंढ लाई और उसमें पानी भरने लगी पहले तो वह पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई और एक-एक लोटा नीलू और सूरज को भी थी दोनों ने पानी पीकर राहत महसूस की और फिर चालू लोटा भरकर अपनी बहन नीलू से बोली,,,,)

अब हमें चलना चाहिए मुझसे रोका नहीं जा रहा है,,,

चल लेकिन चलेंगे कहां,,,?

(नीलू इधर-उधर देखते हुए बोली तो सूरज हंसते हुए बोला)

अरे तुम दोनों एकदम बुद्धू हो क्या यहां पर पसंद की जगह देख रही हो जहां मन करे वहां बैठ जाओ लेकिन देख कर, कहीं सांप ना हो,,,,।

(सूरज का कहना बिल्कुल ठीक था इसलिए दोनों बहने बिना बहस किए हुए धीरे-धीरे आगे की तरफ पढ़ने लगी लालटेन सूरज के हाथ में थी और लालटेन की पीली रोशनी जहां तक पहुंच रही थी वहां तक बैठने में उन्हें शर्मा महसूस हो रही थी इसलिए जैसे ही लालटेन की रोशनी थोड़ी कम हुई और अंधेरा दिखाई देने लगा वहीं पर जगह बनाकर दोनों बहने बैठने लगी,,,,, यह देखकर सूरज का दिन जोरों से धड़कता है क्योंकि वह जानता था कि दोनों बहने अपनी सलवार खोलकर नंगी गांड दिखाते हुए बैठने वाली है,,, सूरज हाथ में लालटेन दिए हुए कर नजरों से उन दोनों की तरफ ही देख रहा था,,,, दोनों बहनों को शर्म महसूस हो रही थी लेकिन कुछ करने की स्थिति में दोनों बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि हालात और माहौल दोनों के विपरीत ही था जगह अंजनी थी कहीं भी कुछ भी हो सकता था,,,, इसलिए दोनों बहने बिना शिकायत किए हुए शर्म को एक तरफ रखकर अपनी सलवार की डोरी खोलकर सलवार को घुटनों तक नीचे खींचकर वहीं बैठ गई,,,, इस बात से दोनों बहने अनजान नहीं थी की चोरी छुपे चोर नजरों से सूरज उन दोनों को जरूर देखा होगा लेकिन यह देखने के लिए दोनों बहनों में से किसी की हिम्मत नहीं थी कि वह सूरज की तरह देख सके इसलिए दोनों अपना काम निपटाने के बाद लोट के पानी से अपनी गांड धोकर उठकर खड़ी हो गई,,,, सूरज हेड पंप के पास खड़ा था पानी चलाने के लिए,,,, दोनों बहने हेड पंप के पास आई और हाथ में धोने लगी साबुन तो दोनों के पास था नहीं इसलिए गीली मिट्टी लेकर वह अपने हाथ को धोने लगी,,,,, थोड़ी देर में दोनों एकदम तरो ताजा महसूस कर रही थी,,,, लालटेन की पीली रोशनी में आम के पेड़ से गिरे हुए पके हुए आम भी सूरज को दिखाई दे गए थे जिसे सूरज ने उठा लिया था। अब तीनों को भूख लगी हुई थी और खाना खाने का इससे अच्छी जगह और कोई दिखाई नहीं दे रही थी लालटेन को एक सूखी हुई टहनी पर रखकर सूरज बैलगाड़ी की तरफ गया और समोसे और जलेबी या लेकर आ गया साथ में आम तो थे ही उसे लाकर वह वहीं बैठ गया दोनों लड़कियां थी पलाथी मारकर वहीं बैठ गई,,,,,।

तीनों खान शुरू कर दिए थे और वैसे भी तीनों के लिए पर्याप्त समोसे और जलेबियां थी साथ में पका हुआ आम तो था ही,,,,, समोसे और जलेबी खाने के बाद सूरज उठकर खड़ा हुआ और आम को हेड पंप के पानी में धोने लगा हेड पंप चलाने के लिए नीलू भी उठकर खड़ी हो गई थी दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे दोनों की आंखों के चलते इशारे को शालु देख रही थी और अच्छी तरह से समझ रही थी,,, उसे पक्का यकीन था कि उसके सो जाने के बाद यह दोनों के बीच फिर से वही खेल शुरू होगा इसलिए वह अपने मन में ठान ली थी कि आज वह सोएगी नहीं,,,, दोनों आम ढोकर अपनी जगह पर आ चुके थे और उन तीनों ने पके हुए आम का भी स्वाद लिया तीनों का पेट भर चुका था,,,, अब सोने की तैयारी करनी थी लेकिन सूरज और नीलू की आंखों में थकान और नींद बिल्कुल भी दिखाई नहीं दे रहा था क्योंकि दोनों को मजा जो लेना था,,,, सूरज कुछ देर सोचने के बाद बोला।

यह झोपड़ी ठीक नहीं है सब जगह से टूटी हुई और नीचे सूखे हुए घास और लकडीयां पड़ी हुई है ऐसे में जंगली जानवर का होना तय रहता है इसलिए यहां सोना ठीक नहीं है नीचे भी बिछाकर सो नहीं सकते,,,, एक काम करते हैं बैलगाड़ी में से खरबूजे की पेटी को नीचे उतर कर रख देते हैं और तुम दोनों बहने अंदर ही सो जाना मैं बाहर की तरफ सो जाऊंगा जहां पर बैठकर बैलगाड़ी चलते हैं उधर भी लेटने जितनी जगह है,,,,,,,।

हां यह ठीक रहेगा,,,(शालू एकदम से बोल पड़ी और फिर इसके बाद तीनों मिलकर खरबूजे की पेटी को बैलगाड़ी से नीचे उतरने लगे और थोड़ी ही देर में बैलगाड़ी खाली हो चुकी थी तो अंतर सूरज अच्छे से सफाई करके दोनों बहनों को सोने के लिए बना दिया था,,,,, और हल्की रोशनी चालू करके लालटेन को भी बैलगाड़ी के अंदर टांग दिया था और यह रोशनी दूर तक किसी को दिखाई ना दे इसलिए आगे से पर्दा लगा दिया था ताकि किसी को यह शक ना हो कि यहां पर कोई है,,,,,, दोनों बहने मुस्कुराते हुए बैलगाड़ी के अंदर लेट गई थी और सूरज भी बैलगाड़ी में से बैलो को अलग करके पेड़ में बांध दिया था और उसके आगे ढेर सारी घास रख दिया था वैसे भी वहां हरी हरी घास बहुत थी इसलिए कोई चिंता नहीं थी,,,, और खुद लकड़ी के पाटी पर लेट गया था,,,,, धीरे-धीरे चांद आसमान में ऊपर की तरफ उठने लगा था जिसकी वजह से अंधेरा छंटने लगा था,,,,, सूरज भी शालू के सोने का इंतजार कर रहा था,,,,, इसलिए बार-बार बैलगाड़ी के अंदर की तरफ देख ले रहा था नीलू भी सूरज को ही देख रही थी और वह भी इंतजार में थी कि कब शालू गहरी नींद में सो जाएं,,,, लेकिन थोड़ी ही देर में उन दोनों को लगने लगा कि शालू सो चुकी है जबकि वह सो नहीं रही थी बस बहाना बनाई थी क्योंकि उसे भी देखना था कि उसकी बहन अब क्या करती है,,,,, तसल्ली कर लेने के लिए नीलू शालू का नाम लेकर दो-तीन बार उसे बुलाने की कोशिश की लेकिन कोई प्रतिक्रिया न देखकर नीलू की आंखों में चमक बढ़ने लगी। वह धीरे से बैलगाड़ी में से नीचे उतर गई और दबे पांव सूरज के पास पहुंच गई सूरज जग रहा था आसमान में तारों को गिर रहा था लेकिन जैसे ही चूड़ियों के खनकने की आवाज उसे आई वह एकदम से नीलू की तरफ देखने लगा उसकी आंखों में वासना की चमक बढ़ गई एकदम से उठकर बैठ गया,,,,, और धीरे से बोला,,,,)

शालू सो गई,,,,,।

हां वह सो गई तभी तो आई हूं,,,,,।

(इतना सुनते ही वह बैलगाड़ी से नीचे उतर गया और एकदम से नीलू को अपनी बाहों में भर लिया बाहों में भर्ती उसके दोनों हाथ एकदम से उसके उभारदार नितंबों पर पहुंच गए और जोर-जोर से दबाता हुआ उसके होठों पर चुंबन करते हुए बोला,,,)

मैं कब से इंतजार कर रहा था देख रही हो कितना खूबसूरत नजारा है चांदनी रात चारों तरफ घने जंगल जैसा माहौल ऐसे में तुम्हारी खूबसूरत जवानी आज तो मजा ही आ जाएगा,,,,,।

अरे धीरे बोलो कहीं शालू ने सुन ली तो गजब हो जाएगा,,,,,,।

तो आओ थोड़ी दूर चलते हैं वरना मेरे धक्कों के साथ तुम्हारी चूड़ियों की खनकने की आवाज तेज हो जाएगी और शालू जाग जाएगी,,,,,।

(ऐसा कहते हुए सूरज नीलू का हाथ पकड़ कर थोड़ी दूरी की तरफ ले जाने लगा,,,,, क्योंकि वहां थोड़ा चांदनी रात का उजाला दिखाई दे रहा था बड़े-बड़े पेड़ के बीच से आ रही चांदनी रोशनी उस जगह को और भी ज्यादा खूबसूरत बना रहे थे,,,, शालू जाग रही थी उसका दिल जोरो से धड़कता था दोनों की बातें सुनकर उसे समझ में आ गया था कि दोनों के बीच क्या होने वाला है,,,,, लेकिन उठने से घबरा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें लेकिन इतना तो उसे भी मालूम हो गया था कि सूरज और नीलू बैलगाड़ी के आसपास तो आप बिल्कुल भी नहीं थे क्योंकि दोनों के बीच किसी भी प्रकार की बातचीत की आवाज उसे सुनाई नहीं दे रही थी,,,, सूरज उसे एक आम के पेड़ के नीचे ले गया था जहां शीतल हवा बह रही थी,,,, सूरज वहां पहुंचते ही फिर से नीलू को अपनी बाहों में जाकर लिया और उसकी गांड को सलवार के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया,,,,।

ऊममममम सहहहहहह आहहहहहल ओ मेरे नीलू तुम बहुत खूबसूरत हो तुम्हारे साथ रहता हूं तो न जाने मुझे क्या हो जाता है मैं कब से इस पल का इंतजार कर रहा था लेकिन शालू की वजह से कुछ कर नहीं पा रहा था,,,।

झरने में नहाते हुए तो लिए थे फिर से तुम्हारा मन बहकने लगा,,,,।

आप क्या करूं तुम्हारी जवानी मुझे पागल बना देती है,,,,,अब जल्दी से कुर्ती उतरे मुझे तुम्हारा दूध पीना है,,,,,(इतना सुनकर नीलू शर्मा गई और मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली)

तुम्हें पीना है तो तुम ही उतार दो मैं क्यों मेहनत करूं,,,।

ओहहहहह यह बात है तो लाओ में अभी उतार देता हूं वैसे भी तुम्हारे कपड़े उतारने में मुझे बहुत मजा आता है,,,,(इतना कहकर सूरज नीलू की कुर्ती को अपने दोनों हाथों में पकड़ लिया और उसे ऊपर की तरफ उठने लगा नीलू भी उसका सहयोग करते हुए अपने दोनों हाथ को ऊपर उठती और अपने ही पर सूरज उसके बदन से कुर्ती को अलग कर चुका था कुर्ती के अलग होते ही छाती की शोभा बढ़ा रहे उसके दोनों संतरे एकदम से मचलने लगे जिसे सूरज जल्दी से अपने हाथ में पकड़ कर दबोच लिया,,,,,)

सहहहह आहहहहह क्या करते हो थोड़ा धीरे से दुखता है,,,,।

धीरे से मुझे मजा नहीं आता और तुम्हें भी मजा नहीं आएगा इसलिए मुझे मत रोको,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज एकदम से अपना मुंह आगे बढ़ाया और एक चूची को अपने मुंह में भरकर पीने शुरू कर दिया और दूसरी को अपने हाथ से जोर-जोर से दबाने लगा नीलू भी कब तक अपने आप पर काबू रख पाती वह भी मदहोश होने लगी सूरज की हरकतों से उसके बदन में भी उत्तेजना का तूफान उठने लगा। सूरज पागलों की तरह चांदनी रात में नीलू की जवानी पर टूट पड़ा दूसरी तरफ सोच सोच कर ही शालू की हालत खराब हुए जा रही थी उसे रहा नहीं जा रहा था वह धीरे से बैलगाड़ी में से नीचे उतर गई और इधर-उधर देखने लगी चारों तरफ अंधेरा था लेकिन चांदनी रात होने की वजह से अब धीरे-धीरे थोड़ा-थोड़ा दिखाई देने लगा था तभी उसे सामने कुछ दूरी पर आम के पेड़ के नीचे दो परछाई नजर आने लगी वह समझ गई कि सूरज और नीलू ही हैं। और उसे साफ दिखाई दे रहा था कि दोनों आपस में एकदम सटे हुए थे शालू से बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हुआ जा रहा था वह दबे पांव छुपते छुपाते आगे की तरफ बढ़ने लगी,,, उसका दिल भी जोरों से धड़क रहा था देखते ही देखते वह इतनी दूरी पर तो पहुंच गई जहां से वह दोनों एकदम साफ दिखाई देने लगे थे उन दोनों की हरकत और दोनों की बात एकदम साफ सुनाई देने लगी थी शालू पेड़ के पीछे छुप गई थी और उन दोनों की हरकत को देख रही थी सूरज की हरकत को देखकर उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी क्योंकि यह समय सूरज उसकी बहन की चूची को मुंह में लेकर जोर-जोर से खींच खींच कर पी रहा था मानों जैसे दशहरी आम का रस पी रहा हो,,,, उसकी हरकत से उसकी बहन को बहुत मजा आ रहा था उसका चेहरा बता रहा था उसकी आंखें बंद थी और वह गहरी गहरी सांस ले रही थी जिसका मतलब साथ था कि उसे बहुत मजा आ रहा था।

सहहहह आहहहहह,,,,,,, सूरज तुम्हारी यही अदा मुझे पागल कर देती है तुम खुश करना जानते हो,,,ऊममममम आहहहहहहहह,,,, ।

(उसका इतना कहना था कि सूरज एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के उसकी सलवार की डोरी पकड़ कर खींच दिया और सलवार कमर से ढीली पड़ गई और शालू यह देखकर हैरान थी कि नीलू खुद अपने हाथों से सलवार को पकड़ कर नीचे की तरफ सरकाने लगी और देखते ही देखते उसके कदमों में गिरी सलवार वह अपने पैरों से अलग कर दी,,,,और सूरज की बाहों में एकदम नंगी हो गई यह देखकर शालू के तनबदन में उत्तेजना की चिंगारी भड़कने लगी, यह देखकर शालू को नीलू से जलन होने लगे क्योंकि इस समय नीलू अद्भुत सुख प्राप्त कर रही थी मजा ले रही थी जवानी का जी भरकर सदुपयोग कर रही थी। नंगी कर देने के बाद सूरज अभी भी उसकी चूचीयो पर जुटा हुआ था बारी-बारी से दोनों चुचियों का मजा ले रहा था लेकिन उसका एक हाथ नीलू की टांगों के बीच हरकत कर रही थी गौर से देखने पर उसे साफ दिखाई दे रहा था कि सूरज अपनी उंगली को उसकी बुर में अंदर बाहर कर रहा था यह देखकर तो शालू की हालत और ज्यादा खराब होने लगी और अपने आप हीउसका हाथ सलवार के ऊपर आ गई और वह हल्के हल्के से अपनी बुर को दबाना शुरू कर दी उसे भी मजा आ रहा था,,,, चांदनी रात में शालू को सबकुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, नीलू पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी लेकिन अभी भी सूरज के बदन पर उसके वस्त्र थे और अगले ही पल सूरज ने भी बिल्कुल देर नहीं किया और जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतार कर एकदम नंगा होकर नंगा होने के बाद सालों की नजर जैसे ही सूरज के मोटे तगड़े लंबे लंड पर पड़ी तो उसकी सांसे एकदम से गले मे हीं अटक गई,,, उसकी आंखों की चमक बढ़ गई और वह आश्चर्य से सूरज के लंड को देख रही थी जो की दोपहर में उसकी बहन की बुर में बड़े आराम से अंदर बाहर हो रहा था।

लंड को देखकर नीलू के चेहरे की मुस्कुराहट भी शालू को दिखाई दे रही थी और अगले ही पल वह हाथ आगे बढ़ाकर उसके लंड को पकड़ लिया और उसे हिलाना शुरू कर दी यह सब देखकर तो शालू की हालत खराब होने लगी थी और उसे पक्का यकीन हो गया था कि यह एक दिन का खेल नहीं है यह कई दिनों से खेला जा रहा था तभी तो दोनों इस खेल में पक्के खिलाड़ी बन चुके थे कुछ देर तक नीलु की हरकत का आनंद लेने के बाद सूरज नीलू का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर से हटा दिया और खुद घुटनों के बल बैठ गया काम क्रीड़ा के खेल से अनजान शालु को यह समझ में नहीं आ रहा था कि सूरज अपने घुटनों के बल क्यों बैठ गया है लेकिन तभी सूरज में नीलू की एकदम उठाकर अपने कंधे पर रख लिया और अगले ही पर अपने मुंह को उसकी टांगों के बीच गाड दिया सूरज की हरकत से नीलू एकदम से मदहोश हो रही उसके चेहरे की मदहोशी एकदम साफ दिखाई दे रही थी और धीरे-धीरे शालू को एहसास होने लगा कि सूरज दिलों के साथ क्या कर रहा है इस बात का अहसास होते ही वह एकदम हैरान थी उसे तो अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था क्योंकि वह जानती नहीं थी की मर्द औरत को इस तरह से भी सुख देते हैं। सूरज की हरकत को देखकर उसका खुद का मन करने लगा कि वह भी सूरज से इस तरह की हरकत करवाएं और यही सोच के साथ वह धीरे से अपनी हथेली को अपनी सलवार के अंदर सरकाने लगी और जैसे ही उसकी हथेली उसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर के ऊपर पहुंची वह एकदम से मस्त हो गई और अपने आप उसकी आंखें बंद हो गई, उसे एहसास होने लगा कि वाकई में जब उसे इतना मजा आ रहा है तो सूरज की हरकत से उसकी बहन को कितना मजा आ रहा होगा। दोनों के बीच का खेल आगे बढ़ता चला जा रहा था घने जंगल का डर अब तीनों में से किसी को नहीं था तीनों आनंद लूट रहे थे क्योंकि वह तीनों अच्छी तरह से जानते थे कि इतनी रात को इस घने जंगल में कोई आने वाला नहीं था।

सूरज पागलों की तरह उसकी बुर की चटाई कर रहा था उसकी मलाई को चाट रहा था,,,, नीलू के मुख से गरमा गरम सिसकारियां फूट रही थी वह निश्चित थी क्योंकि वह जानती थी कि उसकी आवाज कोई सुनने वाला नहीं था एक उसे अपनी बहन का डर था लेकिन वह भी गहरी नींद में सो रही थी ऐसा हुआ है सो रही थी जबकि वह यह नहीं जानती थी कि उसके कामक्रीड़ा को उसकी बहन अपनी आंखों से देख रही है,,,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से नीलू को आनंद देता रहा लेकिन नीलू की छटपटाहट देखकर वह समझ गया था कि अब उसे क्या चाहिए,,,, इसलिए बहुत धीरे से उठकर खड़ा हो गया उसके होठों से नीलू के मदन रस की फुहार हर नीचे टपक रही थी,,, किसी संस्कारी मर्यादा सील लड़की और औरत के लिए यह नजारा शायद शर्मसार कर देने वाला होता लेकिन नीलू सूरज की संगत में बेशर्म हो चुकी थी निर्लज्ज हो चुकी थी सूरज की हालत देखकर उसकी उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ रही थी। सूरज कुछ कहता इससे पहले ही नीलू से खुद रहा नहीं जा रहा था और वह धीरे से पेड़ की तरफ घूम गई और पेड़ पड़कर घोड़ी बन गई अपनी गोलाकार गांड को सूरज की आंखों के सामने नचाते हुए परोसने लगी,,,। नीलू की कामुकता उसकी मादक अदा देखकर सूरज के पसीने छूटने लगे और वह अगले ही पल अपने दोनों हाथ को आगे बढ़कर नाचती हुई दिलों की गांड को दोनों हाथों से थाम दिया और मुस्कुराता हुआ आपने खड़े लंड को उसकी गांड की दरार पर रगड़ना शुरू कर दिया जिससे नीलू की मदहोशी और भी ज्यादा बढ़ने लगी वह जल्द से जल्द सूरज के लंड को अपनी बुर की गहराई में ले लेना चाहती थी इसलिए अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठाकर अपने गुलाबी छेद को लंड के सुपाडे की तरफ धर दे रही थी,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि बिना उसके सहयोग के उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में घुसने वाला नहीं है इसलिए वह धीरे से अपना हाथ अपने लंड पर लाकर उसके सुपाड़े को गली बुर पर सटाया और जोरदार प्रहार किया बुर की चिकनाहट प्रकार एक साथ आधा लंड नीलू की बुर में घुस गया,,,, नीलू सूरज के प्रहार को संभाल नहीं पाई और उसके मुंह से हल्की सी चीख निकल गई जिसे सुनकर शालू पानी-पानी होने लगी,,,,

शालू का सब्र का बांध टूटता हुआ नजर आ रहा था शालू भी ईस खेल में शामिल होना चाहती थी,,, लेकिन अभी भी उसे शर्म महसूस हो रही थी लेकिन जैसे ही देखी कि सूरज उसकी बहन की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया है और उसकी हरकत से नीलू एकदम हवा में उड़ रही है तो उसके भी हौसले पस्त होने लगे वह अपने आप को रोक नहीं पाई और एकदम से पेड़ के पीछे से निकल कर उन दोनों के सामने आकर खड़ी हो गई,,,, सूरज अपनी कमर जोर-जोर से हिला रहा था लेकिन शालू को देख कर एकदम से उसकी जवानी का जोश ठंडा पड़ गया और वह एकदम से रुक गया और शालू की तरफ देखने लगा नीलू की भी हालत पतली होने लगी वह भी आंखें फाड़े शालु की तरफ देख रही थी।

शशश,,,शालु तुम यहां,,, तुम सोई नहीं,,,,,।(एकदम घबराहट भरे स्वर में सूरज बोला,,,)
 
सूरज की कमर थम चुकी थी नीलू की सांस ऊपर नीचे हो रही थी लेकिन वह भी अपने कुल्हों को आगे पीछे करके हिलाना बंद कर दी थी, दोनों की सांस ऊपर नीचे हो रही थी लेकिन आंखों में और चेहरे पर एक डर सच आ गया था क्योंकि उन दोनों के सामने शालू आ गई थी शालू उन दोनों को गुस्से से देख रही थी हालांकि वह भी इस खेल में शामिल होना चाहती थी लेकिन यह सिर्फ औपचारिक भरा था वह किसी भी तरह से इस खेल का हिस्सा बनना चाहती थी मजा लेना चाहती थी इसलिए वह नाटक करते हुए जोर से बोली,,,।

यह क्या हो रहा है,,,?





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(रात के सन्नाटे में शालू की तेज आवाज पूरे जंगल में गूंजने लगी, इस सवाल का जवाब ना तो सूरज के पास था और ना ही नीलू के पास वह दोनों खामोश डरे हुए शालू की तरफ देख रहे थे,,,, नीलू और सूरज का डर एक ही था की कहानी शालू यह सब अपनी मां और पिताजी को ना बता दे वैसे तो नीलू की मां का डर सूरज को बिल्कुल भी नहीं था और ना ही नीलू को खुद अपनी मां से डर था क्योंकि वह भी उसकी करतुत सो कर अपनी आंखों से देख चुकी थी,,,,, किसी भी प्रकार का जवाब ना आता देखकर शालू फिर से जोर से चिल्लाई,,)

मैं पूछती हूं यह सब क्या हो रहा है यह क्या बेशर्मी है,,,,, मैं कभी सोच भी नहीं सकती कि तुम दोनों इस तरह की हरकत करोगे,,,,।

ककककक,,,, कुछ नहीं शालु,,,,,,, (सूरज धीरे से अपने लंड को नीलू की बुर में से बाहर निकालते हुए बोला बाहर निकालने पर उसके लंड से नीलू का मदन रस टपक रहा था,, जो की शालू की नजर से बच नहीं पाया था। सूरज के खड़े लंड को देखकर शालू के बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी थी,,,, दोनों काफी घबराए हुए थे,,,, नीलू पास में पड़ी अपनी सलवार को उठाते हुए बोली,,,)

हम दोनों शादी करने वाले हैं शालू,,,।

क्या,,? क्या कहा तूने,,,.

यही कि हम दोनों शादी करने वाले हैं,,,।

बेवकूफ हो गई है क्या तुझे लगता है की मां और बाबूजी मान जाएंगे,,,,, और इसी लालच में तू अपनी इज्जत नीलाम कर रही है,,,,।

नीलू सच कह रही है मैं भी नीली से प्यार करता हूं और इसके साथ शादी करना चाहता हूं,,,।





तुम तो चुप ही रहो,,,, तुम शादी के नाम पर सिर्फ मेरी बहन से मजा ले रहे हो,,,,, लेकिन मैं ऐसा होने नहीं दूंगी,,,, घर पर चलो मैं सब कुछ बता दूंगी,,,

(इतना सुनते ही सूरज और नीलू एक दूसरे को घबराहट भरी नजर से देखने लगे और एकदम से नीलू गिड़गिड़ाते हुए बोली,,,)

यह क्या कह रही है शालु,,,,

मैं सच कह रही हूं मैं कभी सोचा नहीं थी कि तो इस तरह से गांव के लड़के के साथ मजा लेगी,,,,, मैंने तुम दोनों को झरने पर ही देख लिया था मजा लेते हैं तभी मैं समझ गई क्योंकि तुम दोनों के बीच बहुत पहले से यह सब चल रहा है,,, फिर भी मैं किसी तरह से अपने आप को शांत कर ले गई थी लेकिन तुम दोनों तो फिर से शुरू हो गए,,,, और तुम सूरज इतने बेशर्म हो गए हो कि अपनी ही मालिक की लड़की के साथ रंगरलियां मना रहे हो,,, तुम्हें जरा भी डर नहीं लगा कि अगर यह बात पिताजी को पता चल जाएगी तो तुम्हारा क्या हस्र होगा,,, पिताजी पूरे गांव में तुम्हारा हुक्का पानी बंद करवा देंगे,,, यहां तक की तुम्हें गांव से निकाल देंगे तब क्या करोगी तब कहां झाडोगे अपनी आशिकी को,,,,

लेकिन शालू सच में मैं नीलू से शादी करना चाहता हूं और मैं जानता हूं कि मेरा प्यार झूठा नहीं है,,,,।

कौन करवाएगा तुम्हारी शादी क्या तुम्हें लगता है कि मेरे पिताजी मेरी मां इस शादी के लिए राजी हो जाएंगे जरा तुम ही सोचोगे मुखिया की लड़की है इसके लिए अच्छे-अच्छे रिश्ते आएंगे भला तुम्हारे साथ पिताजी क्यों इसकी शादी करेंगे यह सब तुम्हारे ख्याल नहीं आया,,,,(शालू जानबूझकर इस तरह की बातें कर रही थी बड़ी-बड़ी बातें हांक रही थी वह तो इस ताक में थी कि दोनों में से कोई यह कह दे की चल तू भी मजा ले ले और तुम तैयार हो जाती लेकिन दोनों एकदम डरे हुए थे शायद यह बात उन दोनों के दिमाग में आ नहीं रही थी। शालू उन दोनों को और डराना चाहती थी इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)





नीलू तुम पर जो इश्क का भूत चढ़ा है ना तुम्हारी आंखों के सामने पिताजी सूरज के टुकड़े-टुकड़े करवा देंगे तब अपनी आंखों से अपनी आशिक की जान जाते हुए देखना तब तुम्हें पता चल जाएगा कि इश्क लडाना क्या होता है,,,।

यह कैसी बातें कर रही हो शालु अपनी बहन के बारे में इस तरह की बातें करते हुए तुम्हें जरा भी रहम नहीं आ रहा है,,, मेरे बारे में बिल्कुल भी ख्याल नहीं कर रही है तुम्हें समझना चाहिए कि अगर तुम यह सब बातें पिताजी को बता दोगी तो समझ में अपनी इज्जत बचाने के खातिर पिताजी मुझे भी जान से मरवा सकते हैं तुम्हें अच्छा लगेगा अगर ऐसा हो गया तो जरा यह तो सोचो कि हम दोनों साथ में खेले हैं पढ़ें हैं बड़े हुए हैं,,,,।

(उसकी यही बात सुनकर शालू एकदम से बोल पड़ी)

हां यही तो जब हम दोनों सब चीज एक साथ किए हैं तो तू इसमें आगे कैसे निकल गई,,,,,, नीलू तू शायद यह नहीं जानती की अगर यह सब बातें मैं सच में पिताजी को बता दे तो शादी के बारे में तो तू भूल ही जा कहीं सूरज जान से हाथ ना धो बैठे,,,,।

नहीं नहीं शालू तो ऐसा बिल्कुल भी मत करना अपनी बहन के बारे में थोड़ा तो ख्याल कर,,,, मैं सूरज से प्यार करती हूं सूरज मुझसे प्यार करता है हम दोनों की शादी हो गई तो कल यह तेरा जीजा बना जाएगा ,,,, और तू इसकी साली लेकिन तू तो मरने मारने की बात कर रही है।

तू सच में इसे प्यार करती है कि सिर्फ मजा लेने के लिए यह सब कर रही है,,,,।





पहले तो सिर्फ मजा लेने के लिए होता था लेकिन मैं सच में सूरज से प्यार करने लगी हूं।

मतलब कि पहले मजा लेने के लिए यह सब हो रहा था,,,,।

(एक तरफ तीनों के बीच वार्तालाप चल रही थी और इसी बीच सूरज अपने लंड को छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था क्योंकि उसने शालू की नजर को बाप लिया था सालों बार बार तिरछी नजर से उसके लंड की तरफ देख ले रही थी,,,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि यह देखकर उसके तन बदन में भी उत्तेजना की चिंगारी फुटने लगेगी,,,, और शालू अपनी सलवार को अपने हाथ में लेकर अपनी बुर पर रखे हुए थी,,,,, कुछ देर के लिए तीनों के बीच खामोशी छा गई रात का सन्नाटा और तीनों के बीच की ये खामोशी काफी डरावनी थी शालू के लिए नहीं सूरज और नीलू के लिए पास में ही बैलों के पैर में बंधे घुंघरू की आवाज रह रह कर आ रही थी। कुछ देर शांत रहने के बाद शालू बोली,,,)





मैं समझ सकती हूं,,, तुम दोनों का प्यार सच्चा हो सकता है लेकिन जो रास्ता तुमने चुना है यह गलत है कल अगर गांव में समझ में किसी को भी इस बात की भनक लग जाएगी तो सूरज का तो कुछ नहीं जाएगा लेकिन मां और पिताजी की इज्जत सम्मान सब कुछ मिट्टी में मिल जाएगी,,,, नीलू की वजह से पिताजी समाज में किसी के साथ उठ बैठ नहीं सकेंगे और नहीं किसी से आंख मिला पाएंगे तो सोचो अगर ऐसा हो गया तो हम लोग की तो बनी बनाई इज्जत सब मिट्टी में मिल जाएगी ले लो तुम ही जरा विचार करके देखो तुम्हारे प्यार की यह नहीं है हमारे पूरे परिवार को बीच मझधार में ले जाकर के डुबो देगी,,,,।

लेकिन हम लोग गलत नहीं है शादी कर लेंगे उसके बाद सब कुछ सही हो जाएगा,,,(नीलू अपना पच्छ रखते हुए बोली और उसकी बात सुनकर शालू बोली,,,)

सही तो हो जाएगा लेकिन जब तक मैं नहीं चाहूंगी तभी तक मैं अगर चाहूं तो तुम दोनों की शादी हो जाएगी,,,,,।

वह कैसे,,,(सूरज शालू की तरफ देखते हुए बोला इस बीच उसके लंड में हल्का सा ढीलापन आ गया था लेकिन फिर भी यह कोई बड़ी बात नहीं थी इतने से भी सूरज किसी का भी पानी निकालने में सक्षम था सूरज की बात सुनकर एक बार फिर से तिरछी नजर उसके लंड के ऊपर मारकर वह मुस्कुराते हुए बोली)





नीलू यह बात अच्छी तरह से जानती है कि पिताजी मेरी बात को बिल्कुल भी नहीं टालते वह मेरी सब बात मानते हैं,,,,, मेरे हां कहने की देरी है फिर तुम दोनों की शादी कोई नहीं रोक सकता,,,,।

तो फिर क्यों हां नहीं कह रही हो क्या तुम्हें अपनी बहन की खुशी देखी नहीं जा रही है।

अच्छी तो जा रही है शादी होने के बाद तुम मेरे जीजा बन जाओगे और मैं तुम्हारी शाली,,,, और तुम इस बात को भी अच्छी तरह से जानते होंगे,,

कौन सी बात को,,,(सूरज शालू की तरफ देखते हुए बोला)

यही की साली आधी घर वाली होती है,,,,।(अपनी आंखों को गोल-गोल नचाते हुए वह बोली)

तू पहेलियां मत बुझा साफ-साफ बता कि तू कहना क्या चाहती है,,,?

अरे शाली यह तो तू अच्छी तरह से जानती है कि हम दोनों एक साथ खेली खाई बड़े हुए कपड़े भी एक जैसे पहनते हैं हर चीज बात कर खाते हैं तो तू अकेले ही मजा कैसे लेने लगी मेरे बारे में तुझे जरा भी ख्याल नहीं आया,,,,।

(सूरज और नीलू दोनों शालू के खाने के मतलब को अच्छी तरह से समझ गए थे इसलिए नीलू के चेहरे पर राहत दिखाई देने लगी और वह हल्के से मुस्कुरा दी और बोली,,)





तो तू कहना क्या चाहती है,,,,।

मुझे भी मजा चाहिए,,,(अपनी कमर पर हाथ रखते हुए शालू बोली,,,)

अरे हरामजादी अभी तो तू कहीं की शादी के बाद यह तेरा जीजा हो जाएगा,,,‌।

यह भी तो कहीं कि मैं साली हो जाऊंगी और साली आधी घरवाली होती है तो मुझे भी मजा चाहिए वरना मैं तुम दोनों का खेल बिगाड़ दूंगी,,,,,।

(सूरज को सारा मामला समझ में आ गया था लेकिन नीलू सूरज को शालू से बांटना नहीं चाहती थी दोनों एक दूसरे को हैरानी से देख रहे थे लेकिन सूरज अंदर ही अंदर खुश हो रहा था क्योंकि उसका रास्ता साफ हो चुका था,,,,,, शंका जताते हुए नीलू बोली,,,)

लेकिन यह ठीक नहीं है,, अगर आज मैं सहमति दे देता हूं तो कल को तुम दोनों फिर से मजा ले सकते हो और यह अच्छी बात नहीं है,,,।





देख नीलु अच्छा क्या है बुरा क्या है,,, यह तू समझ ले लेकिन एक बात याद रखना कि अगर मेरी बात नहीं मानी तो तेरा काम बिगड़ जाएगा और फिर कभी तो सूरज से मिल नहीं पाएगी ऐसा हाल कर दूंगी,,,,।

(एक तरह से शालू अपनी बहन को धमकी दे रही थी और शालू को भी भोगने की खुशी में सूरज का लंड फिर से अपनी औकात में आ रहा था,,, इसलिए सूरज नीलू से बोला,,,)

समझने की कोशिश करो नीलू अगर सच में शालू मुखिया जी को बता दी तो हम दोनों का काम बिगड़ जाएगा फिर सपने देखते रह जाना शादी के,

लेकिन सूरज यह ठीक नहीं है,,,,।

क्या ठीक नहीं है,,,, रुको शालू में इसे समझाता हूं,,,(ऐसा कहते हुए वह नीलू का हाथ पकड़ कर आगे की तरफ जाने लगा दोनों पूरी तरह से नंगे थे शालू की आंखों के सामने उसकी बहन की खूबसूरत नंगी गांड और सूरज की नंगी गांड दिखाई दे रही थी दोनों इस समय निर्वस्त्र थे इस बात का एहसास शायद दोनों को नहीं था कुछ दूरी पर जाकर सूरज नीलू से बात करने लगा जो कि शालु को सुनाई नहीं दे रहा था,,,, वह नीलू से बोला,,,)

क्यों बना बनाया काम बिगाड़ रही हो नीलू,,,





तुम पागल हो गए सूरज जानते हो ना वह क्या शर्त रख रही है कल को भी तुम दोनों के बीच यह सब चलता रहा तो मेरा क्या होगा,,,?

तुम्हें कल की पड़ी है सोचो अगर यह सब मुखिया जी को पता चल गया तो हम दोनों की प्रेम कहानी पूरी होने से पहले ही समाप्त हो जाएगी और साथ में हम दोनों के समाप्त हो जाएंगे बाद की बाद में देखेंगे पहले जो मुसीबत अभी आई है उससे निपटा जाए,,,।

तो तुम करना क्या चाहते हो,,,?

शालू की चुदाई यही एक रास्ता है उसका मुंह बंद करने का मेरा लंड उसकी बुर में जाएगा और उसका मुंह अपने आप बंद हो जाएगा यह राज उसके सीने में दफन हो जाएगा और सोचो वह खुद हम दोनों के विवाह में मदद करेगी अगर कोई खिलाफ हो गई तो दोनों का विवाह नहीं हो पाएगा समझने की कोशिश क्यों नहीं करती आखिर इस तरह का रिश्ता तुम्हारी मां के साथ भी तो है,,,,, उन्होंने भी तो मौके का फायदा उठाया है और अब शालू भी मौके का फायदा उठाना चाहती है यह दुनिया ऐसी ही है नीलू सब मौके का फायदा उठाना चाहते हैं,,,, हम लोगों की कमजोरी इन जैसे लोगों के लिए मौका बन चुका हैं,,,,‌

लेकिन शालू के साथ,,,!





तो क्या हो गया नीलू उसके पास भी तो बुरा है जैसे तुम्हारे पास है तुम्हारी मां के पास है ना तो शालू की बुर घिस जाएगी और ना ही मेरा लंड घिस जाएगा किसी को कुछ पता नहीं चलेगा,,,,,, और जब शालू भी यही सब चाहती है तो उसकी बात मानने में हर्ज क्या है,,,, नीलू तुम समझने की कोशिश करो मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता अगर सच में शालू ने यह सब मुखिया जी को बता दी मैं तो जीते जी मर जाऊंगा जब तो तुम्हारी जुदाई और फिर उसे पर तुम्हारे पिताजी का कहर क्या तुम मुझे मरते हुए देखना चाहती हो,,,(सूरज जानबूझकर इस तरह की बात करके नीलू की भावनाओं से खेल रहा था आखिरकार नीलू को उसकी बात माननी ही पड़ी इसलिए वह धीरे से बोली,,,)

लेकिन यह सब फिर बाद में नहीं होना चाहिए,,,।

अरे बिल्कुल अभी तो सिर्फ शालू का मुंह बंद कैसे करना है इसी बारे में सोचो,,,,।

(बाहर से भले सूरज घबराने का नाटक कर रहा था डर का माहौल बना रहा था लेकिन अंतर से हो अच्छी तरह से जानता था कि एक बार शालु की बुर में लंड डालने के बाद यह सिलसिला थमने वाला नहीं है। सूरज जिस अवस्था में था उसी अवस्था में शालू के पास चलकर आने लगा और उसके चलने की वजह से उसका मोटा तगड़ा लंड हवा में ऊपर नीचे होकर लहरा रहा था जिस पर शालू की नजर बनी हुई थी सूरज को अच्छी तरह से मालूम था कि अब क्या करना है उसकी मनोकामना आज पूरी होने वाली थी आज वह मुखिया जी के घर की तीनों बुर की चुदाई करने वाला पहला मर्द बन चुका था,,,,,, दो की तो कर चुका था तीसरी करने जा रहा था वह जानता था कि शालू पहली मर्तबा हिचकीचाएगी भले ही वह यह सब करवाने के लिए तैयार हो चुकी है लेकिन फिर भी यह सब उसके लिए बिल्कुल नया है उसके मन की झिझक को दूर करना बहुत जरूरी था,,,, इसलिए सूरज शालू के पास पहुंचते ही एकदम से उसका हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचकर उसे बाहों में भर लिया वह अपनी हरकतों से शालू को गर्म करना चाहता था,,,,, इसलिए अपने दोनों हथेलियां को सलवार के ऊपर से ही उसके नितंबों पर रखकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया पल भर में ही शालू के बदन में उत्तेजना का तूफान उठने लगा उसके बदन में मदहोशी छाने लगी,,, और फिर अगले ही पल सूरज अपने प्यार से होठों को शालू के देखे होठों पर रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा,,,,, उत्तेजना के मारे शालु की सांस अटकने लगी,,,, वह कुछ बोल नहीं पा रही थी बस गहरी गहरी सांस ले रही थी यह सब देखकर नीलू भी धीरे-धीरे चलते हुए उन दोनों के पास आकर दोनों की काम लीला को अपनी आंखों से देखने लगी,,,,।

किसी भी औरत के साथ वह सूरज को बांटना नहीं चाहती थी लेकिन अपनी आंखों के सामने ही सूरज उसकी मां और बहन दोनों के साथ बंट गया था और यह सब उसकी मजबूरी ही थी अपनी आंखों से वह अपनी मां की चुदाई देख चुकी थी और अब अपनी बहन शालू की चुदाई देखने जा रही थी,,,,, कुछ देर तक किसी तरह से आनंद लेने के बाद सूरज धीरे से अपने होठों को उसके होंठ से हटाया और नीलू की तरफ देखते हुए बोला।

अब देखना नीलू शालु की बुर में ऐसा लंड डालूंगा कि दोबारा डलवाने का नाम नहीं लेगी,,,,।(और इतना कहने के साथ ही शालू की कुर्ती को पकड़कर वह ऊपर की तरफ उठाने लगा,,, कुछ देर पहले जोश से भरी हुई शालू अब शर्मा रही थी वह अपने हाथ को ऊपर नहीं उठा रही थी यह देखकर नीलू बोली,,,)

अब क्या हुआ तुझे हां तो पर उठा ताकि तेरे जीजा तेरी कुर्ती को उतार कर तुझे नंगी कर सके मजा लेना चाहती थी ना जीजा के साथ अब लें शर्मा क्यों रही है,,,,, रुक जा मैं ही तेरी कुर्ती उतरती हूं बहुत आग लगी है तेरी बुर में मैं भी तो देखूं कि अपने जीजा के धक्के को झेल पाती है कि नहीं,,,(इतना कहने के साथ ही नीलू अपने हाथ से अपनी बहन की कुर्ती पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगी और इस बार शर्मिंदगी के एहसास में डूबी हुई शालू अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठा दे कपड़े उतारने में सहयोग करने के लिए और अगले ही पल नीलू अपने हाथों से अपनी बहन की कुर्ती उतार कर कमर के ऊपर उसे नंगी कर दी,,,,, कुर्ती के उतरते ही उसके दोनों अमरूद दिखाई देने लगे उसे देखते ही सूरज की आंखों में वासना का तूफान उठने लगा और वह बिल्कुल भी देर किए बिना, एकदम से उसकी नंगी चूचियों को अपने दोनों हाथों में भर लिया और उसे दबाना शुरू कर दिया शालू के लिए यह सब पहली बार था इसलिए स्तन मर्दन से उसे दर्द महसूस हो रहा था लेकिन दर्द के पीछे उसे मजा भी आ रहा था सूरज एक खूबसूरत जवान लड़की को खुश करना अच्छी तरह से जानता था इसलिए वह धीरे-धीरे दबा रहा था लेकिन बीच-बीच में वह उत्तेजना के चलते शालू की चूची को दशहरी आम की तरह जोर से दबा दे रहा था जिससे रह-रह कर शालू के मुंह से दर्द भरी कराह निकल जाती थी। यह सब देख कर नीलु भी गर्म हो रही थी वैसे भी दोनों बहने आपस में एक बार मजा ले चुकी थी इसलिए नीलू एकदम से शालू की तरफ आगे पड़ी और उसकी एक चूची को पकड़ कर अपने मुंह में भर लिया और उसे चूसना शुरू कर दी यह देखकर शालू शर्म से पानी पानी होने लगी,,, और यह देखकर खुश होता हुआ सूरज बोला।

अब आएगा असली मजा ,,,(और इतना कहने के साथ यही वह दूसरी चूची को अपने मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया शालू दोनों तरफ से आनंद के सागर में गोते लगा रही थी उसे उसकी बहन और उसका होने वाला जीजा बराबर मजा दे रहे थे,शालु की चूची पीने के साथ-साथ सूरज सलवार के ऊपर से ही उसकी गोलाकार गांड को दबा रहा था मसल रहा था वह बराबर मजा ले भी रहा था और दे भी रहा था जिससे शालू को अपने बदन में मदहोशी का एहसास बराबर हो रहा था बार-बार उसकी बुर से मदन रस टपक रहा था जिससे उसकी सलवार गिली हो रही थी,,,, गजब का नजारा बना हुआ था नीलू और सूरज दोनों मिलकर शालू की चूचियों से खेल रहे थे नीलू और सूरज दोनों पूरी तरह से नंगे थे लेकिन शालू अभी अर्धनग्न अवस्था में थी पूरी तरह से नंगी होना बाकी था और यही कमी को पूरा करते हुए सूरज एक हाथ उसकी सलवार के पास ले जाकर के उसके सलवार के नाड़े को पकड़ लिया और उसे खींचकर उसकी सलवार को ढीला कर दिया। बाकी का काम नीलू अपने हाथों से कर दी वह अपने हाथों से अपनी बहन की सलवार उतार कर उसे भी अपनी तरह नंगी कर दी और उसकी नंगी गांड पर अपनी दोनों हथेलियां फिर आते हुए मुस्कुराने लगे अब ऐसा लग रहा था कि शायद उसके मन में इन सब का कोई मलाल नहीं था वह भी अपनी बहन के साथ मजा ले रही थी सूरज चुची को मुंह में लिए उसे पीते हुए अपने हाथ को उसके टांगों के बीच लेकर आया और अपनी हथेली को सीधा उसकी बुर पर रख दिया जो की भट्टी की तरह तप रही थी उसमें से लावा बह रहा था जोकी सूरज को अपने साथ बहाए ले जा रहा था,,, सूरज की सांस ऊपर नीचे हो रही थी शुरू शुरू में नीलू जिस अवस्था में मतलब की एकदम कुंवारी सूरज को मिली थी आज उसकी बहन थी संपूर्ण रूप से कुंवारी उसे मिलने जा रही थी,,,, इस बात की खुशी सूरज के चेहरे पर सांप दिखाई दे रही थी वह लगातार अपनी हथेली को उसकी बुर पर रगड़ रहा था उसकी गरमाहट को महसूस करके और भी ज्यादा उत्तेजित हुआ जा रहा था।

इन सबके बीच नीलू के मन में शरारत चल रही थी वह अपनी बहन का हाथ पकड़ कर सूरज के लंड पर रख दी जैसे ही शालू को एहसास हुआ वह तुरंत अपने हाथ को पीछे की तरफ खींच लिया देखकर नीलू हंसने लगी और हंसते हुए बोली।

क्या हुआ मेरी शालू घबरा क्यों रही है तुझे तो बहुत मन कर रहा था ना चुदवाने का और अभी अपने ही जीजा से तो घबरा क्यों रही है पकड़ ईसे,,,, जब तक इसे पकड़ कर इसके साथ खेलेगी नहीं तब तक तू मजा कैसे ले पाएगी,,,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह फिर से चालू की हथेली को सूरज के लंड पर रख दी । इस बार शालू अपनी हथेली को उसे पर रखें रह गई अपने हाथ को पीछे नहीं खींची उसकी गरमाहट को अच्छी तरह से महसूस करने लगी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी चेहरे का रंग बता रहा था कि वह मदहोश हो चुकी थी तभी नीलू को न जाने क्या सुझी और वह तुरंत बैलगाड़ी के पास गई और उसमें से लालटेन को निकाल कर तुरंत वहां पर आई और उसकी लौ बढ़ाकर सूखी हुई पेड़ की डाल पर टंगड़ी अब लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साथ दिखाई दे रहा था सब कुछ मदहोश कर देने वाला था लेकिन सूरज शंका जताते हुए बोला।

लालटेन क्यों लेकर आई हो अगर किसी ने देख लिया तो गजब हो जाएगा,,,।

तुम भी पागलों जैसी बात करते हो इस जंगल जैसी जगह पर इतनी रात को कौन आएगा भला,,,,,।

अरे यहां पर हेडपंप है तो कोई ना कोई तो आता ही होगा,,,।

पहले आते होंगे लेकिन काफी दिनों से यहां कोई आया नहीं है देख नहीं रहे हो झोपड़ी पूरी तरह से टूटी हुई है चारों तरफ धूल मिट्टी जमी हुई है और हेडपंप के पास भी पानी के ताजा होने का कोई निशान नहीं है सबको सुख हुआ है आज पानी चलाएं हैं तो पानी दिखाई दे रहा है वरना सब कुछ सुख था और वैसे भी यह सब उजाले में ज्यादा अच्छा लगता है अंधेरे में मजा नहींआता,,,,।

ऊममममम देख रही हो शालू अपनी दीदी को इस अंधेरे में मजा नहीं आता जब तक मेरा लंड से दिखाई नहीं देता तब तक की अपनी बुर में डलवाती नहीं है इसीलिए लालटेन लेकर आ गई ताकि तुम भी अच्छे से देख सको,,,,।

(सूरज किस तरह की बातें शालू को मदहोश कर रही थी उसकी हथेली अभी भी सूरज के लंड पर थे जो किस तरह की बात की मदहोशी में खोकर वह अपनी हथेली को मुट्ठी बनाकर लंड को दबोचने लगी उस पर अपनी हथेली का कसाव बढ़ाने लगी,,,,, शालू की हरकत से अंकित मदहोश होने लगा ऐसा नहीं था कि इस तरह का मजा हुआ पहले कभी नहीं लिया था ना जाने कितनी बार इस तरह का मजा ले चुका था लेकिन आज शालू की हथेली को अपने लंड पर महसूस करके वह कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,,, अपने लंड पर बढ़ती हुई हथेली का कसाव महसूस करके सूरज पागल बज रहा था और वह तुरंत शालू की चूची पर से अपना मुंह हटाया और एकदम से उसके लाल-लाल होठों से सटा दिया और उसके होठों का रसपान करते हुए उसकी हरकत का मजा लेने लगा और इस बीच वह लगातार शालु की बुर को रगड़ रगड़कर उसका पानी निकालता रहा,,,।

सहहहहह,,,,,,,,ऊममममम,,,,आहहहहहहहह सहहहहहहहह(शालू के मुंह से इस तरह की आवाज निकल रही थी जिससे सूरज का जोश बढ़ता जा रहा था। पीछे से नीलू भी अपनी कचोरी जैसी पूरी बर को अपनी बहन की गांड से रगड़ रही थी जिससे शालू की मदहोशी लगातार बढ़ती चली जा रही थी। कुछ देर तक इसी तरह से मजा लेने के बाद अंकित से रहा नहीं जा रहा था अपने लंड को शालु के हाथ में महसूस कर करके वह जल्द से जल्द अपने लंड को शालू की बुर में डाल देना चाहता था लेकिन यहां पर इतनी जल्दबाजी दिखाने ठीक नहीं था वैसे भी दोनों के पास पर्याप्त समय था जंगल का माहौल ठंडी ठंडी चलती है हवा चारों तरफ अंधेरा अंधेरा किसी के देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए सूरज इस तरह के माहौल का पूरा आनंद लेना चाहता था इसलिए वह धीरे से अपने घुटनों के बल बैठ गया और अपनी प्यासी नजरों से शालू की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार को निहारने लगा। शालू के लिए काफी शर्मनाक था वह शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी वह अपनी नजरों को चुरा रही थी लेकिन सूरज की यह शरारत देखे बिना उससे भी रहा नहीं जा रहा था इसलिए वह चोर नजरों से देख ले रही थी यह सब देखकर नीलू मुस्कुरा रही थी और तुरंत अपनी हथेली को अपनी बहन की बुर पर रखकर उसे मसलते हुए बोली।

क्या रे शालू तू तो बहुत पानी छोड़ रही है लगता है अपने जीजा को ही अपने अंदर ले लेगी,,,,।

(अपनी बहन की बात सुनकर शालु एकदम से शर्मा गई,,,,, और सूरज नीलू की हथेली को शालू की बुर पर से हटाते हुए अपने प्यासे होठों को धीरे-धीरे उसकी तरफ आगे बढ़ाने लगा यह देखकर नीलू तो समझ गई थी कि क्या होने वाला है लेकिन शालू का दिल जोरो से धड़क रहा था उसे नहीं मालूम था कि सूरज अब क्या करने वाला है उसके बदन में कसमसाहट बढ़ती जा रही थी सूरज उसकी दोनों जांघों को थामे हुए था और जैसे ही वह अपने प्यार से होता को शालु की प्यासी बुर की तरफ लाया तो वह अपनी नजर ऊपर उठाकर शालू की तरफ देखने लगा शालू भी उसे ही देख रही थी दोनों की दूसरी आपस में टकराई चालू एकदम शर्म से अपनी आंखों को बंद कर ली और उसकी आंखों को बंद करते ही सूरज अपने प्यासे होठों को उसकी बुर से सटा दिया,,,, सूरज की ईस हरकत से शालू एकदम से मदहोश हो गई उसके बदन में कंपन होने लगा उसके घुटने कांप रहे थे वह तो नीलू भी अपने दोनों हाथों से उसकी कमर थामे हुए थी और सूरज भी उसकी दोनों जांघों को पकड़े हुए था इसलिए वह खड़ी थी वरना कब का गिर गई होती,,,, एक अजीब से एहसास में सालू डूबने लगी थी वह कभी सोची नहीं थी कि इस खेल में इतना मजा आता होगा वह कभी सोचा नहीं थी कि कोई उसकी बुर को इस तरह से चाटेगा, सूरज पागलों की तरह उसकी बुर की चुदाई कर रहा था उसमें से निकलने वाला मदन ड्रेस उसके लिए किसी अमृत की धार से कम नहीं था हल्का कसैला नमकीन स्वाद लिया हुआ शालू की बुर का मदन रस सूरज को एकदम स्वादिष्ट लग रहा था वह स्वाद ले लेकर चाट रहा था,,,,,, नीलू यह सब देखकर मत हो रही थी और लगातार अपनी बर को अपनी बहन की गांड से रगड़ रही थी जिससे उसकी भी उत्तेजना बढ़ती चली जा रही थी और साथ ही अपने दोनों हाथों को अपनी बहन की छाती पर रखकर उसके दोनों अमरुद को दबा रही थी इस तरह से शालू दोनों तरफ से मजा ले रही थी मर्दाना और जानना दोनों ही,,,,।

सूरज लंड डालने से पहले शालू की बर का हौसला देखना चाहता था, वह यह देखना चाहता था कि शालू की बुर आराम से उसके मोटे तगड़े लंड को अपने अंदर ले पाएगी कि नहीं और इसी का जायजा लेने के लिए सूरज अपनी एक उंगली को धीरे से उसकी बुर की गहराई में उतार दिया शालू को तो उंगली से ही अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसका चेहरा बता रहा था कि उसे चुदाई से कम सुख नहीं मिल रहा था सूरज धीरे-धीरे अपनी उंगली को अंदर बाहर करता हुआ उसे बुर में गोल-गोल घूमा रहा था वह एक तरह से अपने लंड के लिए जगह बना रहा था। गोल गोल घूमती हुई सूरज की उंगली पर शालू नाच रही थी,,, उसका बदन कसमसा रहा था अपने आप ही वह अपनी बर को भी गोल-गोल घूम रही थी और उसके मुंह से अजीब सी आवाज आ रही थी जो की काफी मदहोशी भरी थी।

अहहहहह हा,,, ऊमममममममम ,,,,सऊऊऊऊ,,सहहहहहह,,,,,ऊमममममम

इस तरह की आवाज सूरज को तो मदहोश कर रही थी नीलू की भी हालत खराब कर रही थी नीरू जोर-जोर से उसकी चूची को दबा रही थी और अपनी बर को रगड़ रही थी और उसकी गर्दन पर चुंबनों की बारिश कर रही थी,,,,,,, देखते ही देखते सूरज अपनी दूसरी उंगली को भी उसकी बुर में प्रवेश करा दिया,,,,, इस बार उत्तेजना के चलते गहरी सांस लेते हुए उसका पेट फूलने पर चलने लगा उसकी हालत खराब हो रही थी उसे अत्यधिक आनंद आ रहा था उसका बदन अकडने लगा यह देखकर सूरज उसके संपूर्ण बुर के आकार को अपने मुंह में भरने की कोशिश करते हुए लपालप चाटने लगा और सूरज की ईस हरकत से वह भल भला कर झड़ने लगी,,,, उसकी बुर से मदन रस का फव्वारा फुट पड़ा लेकिन सूरज में अपना मुंह उसकी बुर से नहीं हटाया उसके मदन ड्रेस की धार को अमृत की धार समझ कर उसकी एक एक बूंद को अपने गले के नीचे उतारने लगा उसके काम रस को गटकने लगा,,,,, उसे झड़ते हुए देखकर नीलू मुस्कुराते हुए बोली।

हाय मेरी रानी तू तो जीजा की चटाई से ही झड़ गई अभी तो चुदाई बाकी है तब तेरा क्या होगा,,,।

अब होना क्या है वही होगा जो मैं चाहूंगा,,,(दिलों की बात सुनकर सूरज मुस्कुराता हुआ अपना मुंह शालू की सलवार उठाकर उससे पोछता हुआ बोला,,,, और फिर सलवार को वापस नीचे जमीन पर फेंकते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) अभी तो आधा ही खेल खत्म हुआ है अभी तो बहुत कुछ बाकी है क्यों शालु मजा आया ना,,,,।

( सूरज की बात का वह जवाब नहीं दे पाई उसकी सांसें धीरे-धीरे दुरुस्त हो रही थी,,,,,, इस बीच नीलू काफी गर्मा गई थी क्योंकि उसकी चुदाई चालू थी तभी शालू आ गई थी और उसकी चुदाई रोकनी पड़ गई थी,,,, इसलिए सूरज एकदम से नीलू का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया उसे अपनी बाहों में भरकर उसकी नंगी चूतड़ों पर अपना हाथ रखकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया दूसरी तरफ सांसों को दुरुस्त करते हुए शालु को बड़े जोरों के पेशाब लगी हुई थी,,,, वह इधर-उधर देख रही थी सूरज समझ गया था इसलिए वह बोला,,,)

क्यों मुतवास आ गई क्या,,,? कोई बात नहीं सामने बैठकर कर लो ज्यादा दूर मत जाना,,,, और अब शर्माने की जरूरत नहीं है,,,,।

(बिना कुछ बोले सूरज की बात मानते हुए वह सामने झाड़ियों की तरफ जाने लगी कुछ देर पहले वह बहुत तप तप पर बोल रही थी लेकिन जैसे ही काम क्रीड़ा का खेल शुरू हुआ उसकी बोलती बंद हो गई थी,,,, शालू को पेशाब लगी हुई थी इस बात के हिसाब से सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी वह पागलों की तरह नीलू को अपनी बाहों में भरकर उसके अंगों से खेल रहा था और शालू की तरफ देख रहा था जैसे ही शालू झाड़ियां के पास पहुंची और नीचे बैठकर पेशाब करने लगी और उसके पेशाब करने के साथ उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज जैसे ही सूरज के कानों में पड़ी वह एकदम से मदहोश हो गया और नीलू को घोड़ी बनाकर उसकी बुर में लंड डाल दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया वह शालु को पेशाब करता हुआ देख रहा था और नीलु की चुदाई कर रहा था ऐसा करने में उसे अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी और उसका जोश दुगना बढ़ गया था,,, एक खूबसूरत लड़की को पेशाब करते हुए देखकर दूसरी खूबसूरत लड़की की चुदाई करने का जो आनंद था आज से पहली बार प्राप्त हो रहा था इसलिए वह बड़े जोर जोर से धक्के लगा रहा था और नीलू का अधूरा काम पूरा कर रहा था नीलू को भी बहुत मजा आ रहा था नीलू बिना किसी सहारे के झुकी हुई थी और उसके हरक सिक्के के साथ उसे लग रहा था कि वह नीचे जमीन पर गिर जाएगी लेकिन सूरज उसकी कमर को कस के थामे हुए था वरना वह गिर चुकी होती,,, सूरज के धक्के काफी तेज थे उसका हर एक प्रहर मदहोश कर देने वाला था,नीलू को ऐसा लग रहा था कि जैसे वह हवा में उड़ रही हो,,,, सूरज एक साथ दोनों बहनों की जवानी का मजा लूट रहा था वह कभी सोचा नहीं था कि दोनों बहनों को एक साथ चोदेगा,,,, यही तो उसकी किस्मत थी जो वह सोचता था वह तो हो ही जाता था लेकिन जो वह नहीं सोचता था वह भी उसके साथ हो जाता था दोनों में उसे बेहद आनंद मिलता था।

इस बीच शालू पेशाब करके खड़ी हो चुकी थी और सूरज की तरफ घूम कर वह धीरे-धीरे उसकी तरफ आगे बढ़ रही थी वह अपनी बहन की चुदाई देख रही थी सूरज के धक्के उसे साफ दिखाई दे रहे थे और हर सबके के साथ उसकी बहन की मुंह से निकलती हुई शिसकारी की आवाज सुनकर वह भी मदहोश हुए जा रही थी,,,, शालू सूरज के करीब पहुंच चुकी थी सूरज के मन में कुछ और चल रहा था वह एकदम से सालों का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसे एक तरफ से उसकी कमर में हाथ डालकर उसके होठों का रस पीता हुआ अपनी कमर जोर जोर से हिला रहा था,,, शालू अपनी बहन की तरफ देख रही थी उसकी बुर में अंदर बाहर होता हुआ सूरज का लंड एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,,, नीलू झड़ने के करीब पहुंच चुकी थी लेकिन तभी सूरज के मन में न जाने क्या हुआ वह एकदम से नीलू की बुर में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया और शालु के कंधे पर हाथ रखकर उसको नीचे की तरफ बैठने का इशारा करने लगा,,, शालू को समझ में नहीं आ रहा था लेकिन वह इस समय सूरज के हाथों की कठपुतली बन चुकी थी वह जैसा करता वैसा उसे करना ही था और उसके आदेश पर वह देखते ही देखते अपने घुटनों के बल बैठ गई सूरज अपने हाथ में लंड पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करके हिलाता हुआ उसके सुपाड़े को शालू के गोरे-गोरे गाल पर रगड़ना शुरू कर दिया,,,, दूसरी तरफ गहरी गहरी सांस लेती हुई नीलू सीधे खड़ी होकर शालू की तरफ देखने लगी और बोली।

देख अपने जीजा का लंड एकदम गधे की लंड की तरह है,,,, अब मजा दे अपने जीजा को बहुत चुदवाने का मन था ना तेरा,,,, अब ले असली मजा मुंह खोल और मुंह के अंदर ले ले,,,,।

(नीलू की यह बात सुनकर शालू आश्चर्य से नजर उठाकर नीलू की तरफ देखने लगी उसका मुंह आश्चर्य से खुला हुआ था और इसी मौके की तलाश में सूरज एकदम से मौके का फायदा उठाता हुआ अपने लंड के सुपाड़े को उसके लाल लाल होठों के बीच प्रवेश करा दिया, सूरज की ईस हरकत पर शालू को समझ में नहीं आ रहा था वह आश्चर्य और सवालिया नजरों से सूरज की तरफ देख रही थी तो सूरज नीलू के सुर में सुर मिलाता हुआ बोला,,)

कुछ नहीं होगा मेरी रानी बहुत मजा आएगा तुम्हारी बहन ऐसा रोज करती है उससे पूछो कितना मजा आता है,,,,, बस धीरे-धीरे इस पर अपने जीभ को घुमाओ ऐसा सोचो कि तुम्हारे मुंह में गन्ना डाला हुआ है और तुम उसके मीठे रस का मजा ले रही हो,,,,।

(गहरी सांस लेती हुई शालू सूरज की बात मानकर धीरे-धीरे अपनी जीभ को सुपाड़े पर घूमाना शुरू कर दी शुरू से लेने से थोड़ा अजीब लग रहा था क्योंकि सूरज के लंड पर उसकी बहन की बुर का मदन रस भी लगा हुआ था जिसका स्वाद हल्का कसैला और नमकीन था धीरे-धीरे शालू को मजा आने लगा और वह मजे लेकर चूसना शुरू कर दी सूरज धीरे-धीरे अपने लंड को बाहर निकलता और उसके मुंह में डालता इस प्रक्रिया में भी शालू को आनंद आ रहा था जब धीरे-धीरे यह मजा बढ़ने लगा तो सूरज धीरे से शालू का कर पकड़ कर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया वह धीरे-धीरे शालू के मुंह की चुदाई कर रहा था और सालों भी अपने होठों को एकदम गोल करके उसका कसाव लंड पर बनाई हुई थी जिससे उसे तो मजा आ ही रहा था सूरज को भी बहुत मजा आ रहा था,,,, इस प्रक्रिया से एक बार फिर से शालू तैयार हो चुकी थी चुदवाने के लिए हालांकि यह उसकी पहली चुदाई थी अभी तो केवल चाट कर ही उसका पानी निकाल दिया था सूरज ने लेकिन अब असली खेल बाकी था,,,, कुछ देर इसी तरह से चुसाई का मजा लेते हुए दोनों मदहोश होने लगे,,, और यह सब देखकर नीलू से रहा नहीं जा रहा था वह खुद ही अपनी बुर में उंगली डालकर अंदर बाहर कर रही थी और एक हाथ से अपनी चूची दबा रही थी,,,,।

सूरज धीरे से अपने लंड को शालू के मुंह में से बाहर निकाल और फिर सब कपड़ों को नीचे बिछाकर शालू को उसे पर पीठ के बल लिटा दिया,,,,, अब असली खेल शुरू हो चुका था अपने लिए शालू के दोनों टांगों के बीच जगह बनाकर सूरज उसकी मोटी मोटी जांघों को पकड़ कर उसे अपनी जांघों पर खींच लिया,,,,, शालू का दिल जोरो से धड़क रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या होने वाला है यह तो वह जानती थी कि अब सूरज का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में घुसेगा लेकिन उसका एहसास क्या होगा यह हुआ नहीं जानती थी उसका दिन जोरों से धड़क रहा था उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और सांसों की गति के साथ-साथ उसके छोटे-छोटे अमरुद भी ऊपर नीचे हो रहे थे,,,। सूरज ढेर सारा थूक उसकी बुर पर गिरा दिया और अपने लंड पर भी लगाकर उसे चिकना करने लगा ताकि आराम से उसकी बुर में प्रवेश कर सके, सूरज मुस्कुराता हुआ शालु की तरफ देखा और अपने लंड के सुपाड़े को उसके गुलाबी छेद पर रखकर हल्के हल्के रगड़ना शुरू कर दिया जिससे शालू कसमसा रही थी उत्तेजना से मदहोश हुए जा रही थी,,, नीलू की भी हालत खराब थी लेकिन वह इस तरह का मजा सूरत से मौका मिलने पर ले लेती थी लेकिन आज शालू का पहला दिन था पहली बार वह सूरज के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में लेने जा रही थी आज उसके जीवन की एक नई शुरुआत होने जा रही थी इसलिए वह धड़कते दिल के साथ इस खेल को देख रही थी,,, सूरज धीरे-धीरे अपने मोटे सुपाडे को शालु की बुर के अंदर प्रवेश कराने लगा,,, शालू के मन में घबराहट हो रही थी उसका दिल जोरो से धड़क रहा था वह अपनी आंखों को बंद करके हर एक पल को महसूस कर रही थी देखते-देखते सूरज अपने लंड के सुपाड़े को डालने में कामयाब होता नजर आ रहा था लेकिन जैसे-जैसे सुपाड़ा अंदर की तरफ प्रवेश कर रहा था वैसे-वैसे शालू के चेहरे के हाव-भाव बदलते जा रहे थे उसे दर्द का एहसास हो रहा था,,,, और उसका दर्द कम करने के लिए नीलू उसकी सहायता कर रही थी उसके अमरुद को धीरे-धीरे सहला रही थी।

ठंडी हवा चलने के बावजूद भी मेहनत करते हुए सूरज के माथे पर पसीने की बूंद उपसने लगी क्योंकी इस प्रक्रिया में काफी सूझबूझ और मेहनत का काम होता है और सूरज बराबर मेहनत कर रहा था देखते ही देखते सुपाड़ा बुर के अंदर प्रवेश कर गया,,,,, सूरज ने विजय प्राप्त कर लिया था क्योंकि अगर बुर में सुखदा चला जाए तो बाकी का हिस्सा जाने में आसान रहता है,,,, दर्द के कारण शालु रोने जैसी हो गई थी उसकी आंखों से आंसू भी टपकने लगे थे यह देखकर उसका हौसला बढ़ाते हुए सूरज बोला।

बस पास हो गया है तुमने बहुत हिम्मत दिखाई हो मेहनत वाला काम तो पूरा हो गया बस अब थोड़ा ही बाकी है देखो तुमने सुपाड़ा अंदर ले ली हो,,, और यही मुख्य होता है इसके बाद मजा ही मजा,,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज शालू की कमर पकड़ कर जोरदार धक्का लगाया और उसका आधा लंड शालू की बुर में घुस गया,,,, ईस प्रहार से शालू एकदम से तड़प उठी, और सूरज एकदम से अपने आप को रोक लिया और उसकी चूची को हाथ में लेकर दबाना शुरू कर दिया वह जानता था कि उसे क्या करना है किस तरह से शालू काबू में आएगी और वैसे भी वह पहली बार में ही इतना कुछ ज्यादा तड़प नहीं रही थी बस मजा ही ले रही थी उसमें हिम्मत ज्यादा था वह अपने दर्द को अपने अंदर दबा ले जा रही थी क्योंकि उसने अपनी बहन को मजा लेते हुए देखी थी वह जानती थी कि इसके बाद बहुत मजा आने वाला है,,,, और जैसे ही धीरे-धीरे सूरज की हरकतों से उसका दर्द कम होने लगा और मदहोशी बढ़ने लगी तो सूरज आधे लंड को ही बुर के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया,,,, शालू को आधे लंड से ही मजा आने लगा उसके चेहरे की रंगत सुर्ख लाल होने लगी,,, सूरज का काम बन चुका था उसकी मेहनत रंग ला रही थी दूसरी तरफ नीलू भी अपनी बहन के दर्द को कम करने में पूरा सहयोग कर रही थी,,,, और फिर इसके बाद सूरज ने पूरा जोर लगाकर छक्का लगाया और उसका पूरा का पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में घुस गया इस बार चालू अपने आप को रोक नहीं पाई और उसके मुंह से चीख निकल गई,,,। सूरज अपने आप को एकदम से रोक लिया उसकी सांसे भी ऊपर नीचे हो रही थी वह भी मदहोश हो चुका था पागल हो चुका था नीलू की बहन की कुंवारी बुर उसे जो मिल गई थी,,,, नीलू की जब मिली थी तब उसकी भी कुंवारी ही थी,,,, लेकिन सूरज को एहसास हो रहा था की मुखिया की बीवी के साथ-साथ उसकी दोनों बेटियां भी मजा देने में माहिर है,,,,।

नीलू एकदम से मौका देखकर अपनी दोनों टांगों को उसके कंधे पर रखकर अपनी बरु को उसके होठों पर रख दी और हल्के हल्के उसके होठों पर अपनी बुर को रगड़ना शुरू कर दी पहले तो दर्द के मारे उसे कुछ सुझ ही नहीं रहा था लेकिन धीरे-धीरे जैसे-जैसे उसका दर्द कम होने लगा उसके नथुनों से उसके मुंह से गर्म गर्म सांस बाहर आने लगी जिसकी गर्माहट में दिलों को आनंद आने लगा और सूरज भी अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया अब वह खुलकर शालु की चुदाई कर रहा था उसकी कसी हुई बुर में सूरज का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से अंदर बाहर हो रहा था,,,, शालू को मजा आ रहा था आनंद आ रहा था वह भी अपनी बहन की बुर की चुदाई करना शुरू कर दी थी सूरज शालु की कमर पकड़े जोर-जोर से धक्के लगा रहा था,,, तीनों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि तीनों की मुलाकात इस तरह से एक खूबसूरत जंगल के अंदर आधी रात में इस तरह से होगी और तीनों खुलकर मजा लूट रहे होंगे वरना नीलू तो कभी भी सूरज को किसी भी औरत से बांटना नहीं चाहती थी बस मजबूरी में ही उसके हाथ से सूरज फिसलता चला जा रहा था लेकिन उसे भी बहुत मजा आ रहा था अपनी बहन की जीभ को अपनी बुर पर महसूस करके वह गदगद हुए जा रही थी,,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से शालू की चुदाई करता रहा लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था दोनों बहनों की नंगी जवानी सूरज की आंखों की वासना को और ज्यादा बढा रहे थे। सूरज का हौसला बुलंद था उसकी किस्मत भी बड़ी तेज थी वह सोचता भर था और वैसा हो जाता था पहली बार कमला को देखा था तभी से उसका मन कमला को चोदने के लिए तड़प रहा था और उसकी किस्मत देखो घर से निकलने के बाद ही रास्ते में कमला उसे मिल गई थी और बैलगाड़ी पर बैठे-बैठे चलती हुई बैलगाड़ी में जिस तरह की चुदाई सूरज ने उसकी किया था उस चुदाई को कमला भी जिंदगी भर याद रखने वाली थी। और शालू को भी वह चोदना चाहता था और यहां भी उसे पहल नहीं करना पड़ा शालू ही स्वादिष्ट व्यंजन की तरह उसकी थाली में आ गई थी,,,,। कुछ देर तक इसी तरह से चुदाई करने के बाद सूरज ने धीरे से अपने लंड को उसकी बुर में से बाहर निकाला और उसे घोड़ी बनने के लिए बोला,,,।

सूरज के आदेश का पालन करते हुए चालू धीरे से उठकर बैठ गई और घोड़ी बन गई सूरज पीछे से उसकी कमर पकड़ कर उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया और नीलू आगे से घुटनों के बल बैठकर अपनी बहन के बाल को पकड़ कर उसके होठों को अपनी बर पर रगड़ना शुरू कर दे उत्तेजना के मारे उसकी बुर भी कचोरी की तरह फुल चुकी थी जिसे चाटने में शालु को बहुत मजा आ रहा था,,,,,,,, सूरज को लग रहा था कि एक बार झड़ जाने के बाद ज्यादा देर तक शालू टिकी रहेंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ शालू एकदम से अपने घुटने टेक दी उसका बदन अकड़ने लगा सूरज समझ गया कि वह चढ़ने वाली इसलिए उसकी कमर को जोर से खान अपनी कमर को जोर-जोर से ही लाना शुरू कर दिया और उसके दो-तीन धक्के में भी शालु पस्त हो गई,,,, वह झड़ चुकी थी उसका काम तमाम हो चुका था लेकिन सूरज बरकरार था उसका मर्दाना अंग अभी भी टनटना कर खड़ा था एक बहन तो पस्त हो चुकी थी लेकिन उसकी दूसरी बहन टक्कर की खिलाड़ी थी वह एकदम से शालू की बुर में से अपने लंड को बाहर निकाला और नीलू का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया वह घुटनों के बाल बैठे हुए सूरज की गोद में बैठ गई और सूरज एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के अपने लंड को उसकी बुर में डाल दिया और उसे गोदी में लिए हुए ही जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया यह देखकर शालू हैरान रह गई वाकई में सूरज में बहुत दम था।

तीनों काफी थक चुके थे सूरज सबके कपड़े समेटकर हाथ में लालटेन लिए हुए बैलगाड़ी के पास आया और तीनों बैलगाड़ी में घुस गए नंगे ही बिना कपड़े पहने सूरज ने पर्दा नीचे गिरा दिया और तीनों एक दूसरा की बाहों में गहरी नींद में सो गए सुबह पंछी के आवाज के साथ नीलू की है आंख खुल गई और वह अपनी स्थिति को देखकर शर्मा गई और जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहन कर बैलगाड़ी से नीचे उतर गई उसने उन दोनों को भी जागी और अपने-अपने कपड़े पहनने के लिए बोली उसे मैदान जाना था इसलिए वह धीरे से लोटा हाथ में लेकर हैंडपंप के पास गई और पानी भरकर झाड़ियां के अंदर चली गई अभी तक शालू और सूरज बैलगाड़ी के अंदर ही थे एकदम नंगे लेकिन दोनों जाग चुके थे सूरज मुस्कुराता हुआ शालु की तरफ देखा और बोला,,,)

रात को मजा आया कि नहीं ,,,,(इतना सुनकर शालू शर्मा गई और अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा ली,,, शालू के नंगे बदन के स्पर्श से सूरज का लंड एकदम से खड़ा हो चुका था,,, उसका मन फिर से शालू को चोदने को कर रहा था क्योंकि उसकी टांगों के बीच की पतली दरार उसे दिखाई दे रही थी,,,, यह देखकर धीरे से पर्दा हटाकर वह देखा तो नीलू से दिखाई नहीं दे रही थी कुछ समझ गया कि नहीं लोग कहां गई है इसलिए वह धीरे से शालू को बोला) तुम्हारी बहन मैदान गई है क्यों ना एक बार फिर से हो जाए,,,

(शालू का मन भी कर रहा था लेकिन अब उसे इस बात का डर लग रहा था की कहानी नीलू देखना ले इसलिए वह ऊपरी मन से इनकार करने लगी लेकिन सूरज मन नहीं और तुरंत उसके ऊपर चढ़ गया उसकी दोनों टांगें खोलकर अपने खड़े लंड को फिर से उसकी बुर में डाल दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया,,,, शालू को थोड़ा दर्द होने लगा तो वह बोली,,)

धीरे से दर्द कर रहा है,,,।

ऐसे नहीं पहले बोलो जीजा धीरे से दुख रहा है,,,।

(सूरज के मुंह से जीजा सुनकर शालू शर्म से पानी पानी हो गई वह शर्मा रही थी सूरज को जीजा बोलने में लेकिन सूरज था की जीद पर अड़ा हुआ था इसलिए वह धीरे से शर्मा कर बोली,,)

जीजा धीरे से दुख रहा है,,,।

ओहहह मेरी साली साहिबा अब देखो मेरा कमाल,,(इतना कहने के साथ है जोश से भरा हुआ सूरज जोर-जोर से धक्के लगाने लगा उसके हर एक धक्के साथ ही बैलगाड़ी इधर-उधर हिलने लगी थी थोडी ही देर में दोनों झड़ चुके थे,,,, इसके बाद सूरज बैलगाड़ी से नीचे उतरा और अपने कपड़े पहनने लगा शालू बैलगाड़ी में ही अपने कपड़े पहन कर बाहर निकली तब तक देखी कि नीलू सामने से आ रही थी,,, उसे भी मैदान जाना था इसलिए वह नीलू के हाथ से लोटा लेकर वह भी झाड़ियां में चली गई थोड़ी ही देर में तीनों हाथ मुंह धो कर तैयार हो चुके थे सफर के लिए तीनों बहुत खुश थे नीलू के भी मन से बहुत बड़ा बहुत हार चुका था वह भी इस बात से डर रही थी कि अगर कभी शालू को पता चल गया तो गजब हो जाएगा लेकिन इस खेल में शालू भी शामिल हो चुकी थी,,,, सुबह बड़ी जल्दी निकलने की वजह से सूरज तपने से पहले ही वह लोग शहर पहुंच चुके थे,,,,, सड़क के दोनों तरफ कतर बंद दुकान और बाजार देखकर सूरज के साथ-साथ दोनों बहने भी आश्चर्यचकित हो गई थी सूरज के हाथ में मुखिया ने एक चिट्ठी लिख कर दिया था जिस पर सेठ जी का पता था,,,, बाजार में पूछने पर जल्द ही सेठ जी का पता चल गया और बैलगाड़ी सीधा जाकर सेठ की दुकान के सामने खड़ी हो गई,,,,
 
सूरज शहर पहुंच चुका था,,, शहर में किसको माल देना है उसकी चिट्ठी सूरज के पास थी। बैलगाड़ी को एक सुरक्षित जगह पर खड़ी करके वहां चिट्ठी को लेकर सड़क पर इधर-उधर पूछने लगा। सड़क के दोनों तरफ बड़े-बड़े गोदाम थे बाजार सजी हुई थी, लोग बाजार में घूम रहे थे खरीदी कर रहे थे। गांव के मुकाबले शहर का बाजार बड़ा था खाने-पीने के लिए इधर भी गांव की तरह ही जलेबियां समोसे यही सब मिल रहे थे बस फर्क इतना था कि वहां कच्ची दुकान होती थी और यहां पक्की दुकानें थीं,,, जिस शेठ को माल देना था वह यहां का जाना माना व्यापारी था इसलिए जल्द ही उसका ठिकाना मिल गया,,,, सूरज वापस बैलगाड़ी के पास आया और बैलगाड़ी पर बैठ गया,,, दोनों बहने कुछ कहती इससे पहले ही वह बोला।

जिसको खरबूजे देना है वह यहां के जाने-माने व्यापारी हैं इसलिए जल्द ही उनका पता मिल गया,,,, (इतना कहने के साथ ही सूरज बैलगाड़ी को हांकने लगा,,,, बैलगाड़ी फिर से चल पड़ी यह देखकर नीलू गहरी सांस लेतेहुए बोली)

चलो शुक्र है मिल तो गया,,,,, और देखो तो शालू यहां के बाजार कितने खूबसूरत हैं,,,।

हां नीलू मैं भी वही देख रही हूं बहुत खूबसूरत बज रहे हैं यहां का मैं तो यहां से कपड़े लूंगी,,,।

मुझे भी कपड़े चाहिए लेकिन पहले यह काम खत्म हो फिर इत्मीनान से घूम घूम कर कपड़े लेंगे,,,।

हां यह ठीक रहेगा,,,,।

चलो तुम दोनों के साथ-साथ मैं अपनी बहन के लिए भी कपड़े खरीद लूंगा और मां के लिए एक साड़ी,,,,।

तब तो तुम्हारी मां और बहन दोनों खुश हो जाएगी,,,।

(मुस्कुराते हुए शालू बोली,,,)

हां वह दोनों तो वैसे ही खुश रहती हैं,,,।

क्यों उन दोनों की भी लेते हो क्या,,,?

(हंसते हुए शालू बोली तो उसकी बात सुनकर नीलू हैरानी से उसकी तरफ देखते हुए बोली)

तू तो एक ही रात में एकदम से बदल गई,,,,

हां नीलू देखो तो साली साहिबा को अब तो इन्हें लेने देने के बारे में बहुत मालूम पड़ने लगा है लगता है और खातेदारी करनी पड़ेगी,,,।

मैं तो तैयारी ही हूं जीजा जी लेकिन दीदी से पूछ लो,,,।

दीदी से क्या पूछना है,,,, साली वैसे भी आधी घरवाली होती है,,,, साली और जीजा में तो लेने देने का काम चलता रहता है क्यों नीलू सच कह रहा हूं ना।

इस बारे में सोचना भी नहीं रात को जो कुछ भी हुआ उसे अब भूल जाओ,,,, मैं नहीं चाहती कि आगे ऐसा चलता रहे,,,।

तुम भी खामखा नीलू यह सब बातें दिल पर लेती हो। तुम्हें पता होना चाहिए कि शालू ही हमारी शादी होने में मदद करेगी क्यों शालु,,,।

बिल्कुल मेरे बिना तो तुम सोच भी नहीं सकते कि तुम दोनों की शादी हो पाएगी,,,।

(उन तीनों में बातचीत हो ही रही थी कि बैलगाड़ी एक गोदाम के आगे आकर रुक गई ,,,, बैलगाड़ी को गोदाम के बाहर एक बड़ी से पेड़ के पास खड़ी करके वह नीचे उतरा और हाथ मे ली हुई चिट्ठी लेकर वह गोदाम में प्रवेश कर गया,,,,, गोदाम के एक तरफ सेठ जी बैठे हुए थे दो चार नौकर गोदाम में काम कर रहे थे और एक उनकी तरह ही व्यापारी पास में बैठा हुआ था उस आदमी को देखते ही सूरज समझ गया कि यही मालिक है इसलिए वह एकदम से हाथ मिली हुई चिट्ठी आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

सेठ जी नमस्कार,,,, मुखिया जी ने भेजा है बैलगाड़ी में खरबूजा भरा पड़ा है,,,,।

ओहह मुखिया जी ने,,,,,(हाथ आगे बढ़ाकर सूरज के हाथ से वह चिट्ठी ले लिया और उसे पढ़ने लगा,, पढ़ने के बाद वह मुस्कुराते हुए बोला,,,)

सही समय पर मुखिया जी खरबूजा भेजे हैं यहां के बाजार में भी खरबूजा आया ही नहीं है बहुत अच्छे दाम मिलेंगे,,,,,।

जी सर चाहिए तो और भी अच्छी बात है आपका मुनाफा हमारा मुनाफा,,,,।(सूरज मुस्कुराते हुए बोला)

मुखिया जी के साथ आज से धंधा नहीं चल रहा है बरसों का रिश्ता है हम दोनों का,,,, जो भी फल होता है सबसे पहले मुखिया जी हमारे गोदाम पर ही भेजते हैं,,,, और वह भी सही समय पर। इसलिए हमें अच्छा मुनाफा मिल जाता है,जाओ बैलगाड़ी अंदर लेकर आओ हमारे आदमी उतरवा देंगे,,,,।

जी सेठ जी,,,, मैं अभी लेकर आता हूं,,,(इतना क्या करवा बाहर गया और थोड़ी देर में बैलगाड़ी गोदाम के अंदर लेकर आया बैलगाड़ी खड़े होते ही उसमें से दो लड़कियों को उतरता देखकर सेठ थोड़ा हैरान हुआ और बोला,,,)

यह दोनों कौन है,,,?

मुखिया जी की बेटी है इन्हें शहर घूमना था,, इसलिए मुखिया जी ने इन दोनों को भी भेज दिया,,,।

(इतना सुनते ही सेठ जी एकदम से खुश हो गया और अपनी जगह से उठकर खड़ा होते हुए बोला)

और यह दोनों मुखिया जी की बेटी है तब तो यह हमारी भी बेटी है,,,, सही समय पर आए हो तुम लोग,,, आज घर पर पूजा भी है और अभी कुछ ही देर में सेठानी भी आने वाली है वह तुम लोगों को बाजार घुमा देगी,,,।

तब तो यह और भी अच्छा होगा चाचा जी,,,,।

तुम लोग बैठो मैं अभी शरबत मंगवाता हूं,,,।

नहीं शेठ जी इसकी क्या जरूरत है,,,।(औपचारिकता दिखाते हुए सूरज बोला)

अरे नहीं नहीं मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि तुम लोग कितनी दूर से आ रहे हो,,,,, रुको मैं अभी मंगवाता हूं,,, गुल्लू,,,,, अरे ओ गुल्लू इधर आना तो,,,,।

जी शेठ जी अभी आया,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपने हाथ में लिया हुआ झाड़ू एक तरफ रखकर एकदम से सेठ जी के सामने आकर खड़ा हो गया और बोला) कहिए शेठ जी,,,,,।

अरे जाकर शरबत लेकर आना तो यह तीनों बहुत दूर से आए हैं और मेरे दोस्त के बच्चे हैं,,,,।

ठीक है सेठ जी अभी लेकर आता हूं,,,,।

(इतना कहने के साथ ही सेठ जी का नौकर शरबत लाने के लिए चला गया और सेठ जी अपने काम में व्यस्त हो गए और कुछ लोग बैलगाड़ी में से खरबूजे की पेटी नीचे उतारने लगे,,, सेठ जी का व्यवहार देखकर सूरज के साथ-साथ नीलू और शालू भी खुश नजर आ रही थी ‌। सूरज चारों तरफ नजर घुमा कर देख रहा था गोदाम काफी बड़ा था यह गोदाम उसे गोदाम से भी काफी बड़ा था जहां पर वहां अपने आप की अय्याशी देखा था,,,, गोदाम में चारों तरफ आलू प्याज सब्जियां और फल बोरे में भर भर कर पड़े हुए थे,,,, देख कर ही लग रहा था की सेठ जी बड़े व्यापारी थे पैसे वाले थे उनके गले में दो-तीन सोने की चेन थी उंगलियों में अंगूठी थी आगे के बाल साफ हो चुके थे तकरीबन 55 की उम्र लग रही थी पेट आगे को निकाला हुआ था सफेद धोती कुर्ते में वाकई में सेठ जी सेठ ही लग रहे थे,,, गोदाम में दूसरी तरफ से भी रास्ता था वहां भी बैलगाड़ी खड़ी थी कुछ से समान उतार रहा था तो कुछ बैलगाड़ी में माल रखा जा रहा था यह सब यहां चलता ही रहता था,,,, नीलू की तरफ देखते हुए सूरज बोला)

सेठ जी को देखकर लग रहा है की मुखिया जी से भी बड़े हैं,,,,।

हां तो शहर में रहते हैं व्यापार करते हैं तो बड़े तो होंगे ही,,,,।

पता नहीं,,, इनकी सेठानी कब आएगी मुझे तो बाजार घूमना है,,,(शालू दरवाजे की तरफ देखते हुए बोली उसे इंतजार करना मुश्किल हुआ जा रहा था उसकी हालत को देखकर नीलू बोली)

अरे अब इतनी दूर से इधर आए हैं तो बाजार भी घूम लेंगे थोड़ा तो सब्र कर तुझसे तो सबर ही नहीं होता,,,।

(थोड़ी देर में सेठ जी का नौकर शरबत का गिलास लेकर गोदाम में दाखिल हुआ और सीधा जाकर सेठ जी के पास खड़ा हो गया यह देखकर सेठ जी थोड़ा जोर से उसे बोले,,,)

अरे बेवकूफ यह सब मेहमानों के लिए है जो उन्हें दे।

जी सेठ जी,,,,,(इतना कहकर वह नौकर सूरज के पास आया और तीनों को एक-एक क्लास शरबत थमा कर वहां से चला गया शरबत का ग्लास कुछ ज्यादा ही बड़ा था तीनों शरबत गटगटा गए तब जाकर इतनी गर्मी में उन्हें राहत महसूस हुई,,,, शरबत पीकर वह तीनों अभी बैठे ही थे के तभी सामने से एक औरत गोदाम में दाखिल होने लगी, पहेरावे से बड़े घर की लग रही थी लंबी कद-काठी होने की वजह से और गोरा रंग होने की वजह से वह काफी आकर्षक लग रही थी,,, सूरज को ज्यादा देर नहीं लगी उसे समझने में वह समझ गया कि यही सेठ जी की बीवी है और उसका सोचना बिल्कुल सही निकला क्योंकि वह सीधा जाकर सेठ जी के पास खड़ी हो गई सेठ जी उसे देखते ही बोले,,)

अरे भाग्यवान बड़ी देर लगा दि आने में,,,।

अब क्या करूं घर का काम ही इतना था कि काम खत्म करते-करते देर हो गई वैसे आज आप मेरा इंतजार क्यों कर रहे थे,,,,।

वो क्या है ना कि आज मुखिया जी की दोनों बेटियां आई है शहर घूमने के लिए,,,।

मुखिया जी की बेटी,,,।

हां वह रही,,,,, आज ये हम लोगों के मेहमान हैं,,,, मैं चाहता हूं कि तुम इन लोगों को बाजार घुमा दो और पूजा पाठ का सामान भी खरीद लेना दोपहर में पूजा है ना,,,,।

हां यह ठीक रहेगा,,,,,।

(अपनी बीवी की बात सुनकर सेठ जी उन्हें कुछ पैसे निकाल कर देने लगे और एक कागज की पर्ची भी हाथ में थामती है जिसमें समान लिखा हुआ था,,,,, पैसे और पर्ची लेकर सेठ जी की बीवी उन तीनों की तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर बोली,,,)

चलो बच्चों आ जाओ,,, तुम लोगों को बाजार घुमा देती हूं,,,,।

(उनकी बात सुनते ही शालू और नीलू अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और सूरज भी साथ में उठकर खड़ा हो गया सेठ जी और उनकी बीवी का व्यवहार काफी मिलनसार था इसलिए तीनों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आ रही थी तीनों खुशी-खुशी सेठ जी की बीवी के साथ बाजार घूमने के लिए निकल गए लेकिन ईस बीच सूरज सेठ जी की बीवी को देख रहा था,,,, दोनों की उम्र में ज्यादा फर्क तो नहीं था लेकिन सेठ जी शरीर से लाचार नजर आ रहे थे लाचार इसलिए क्योंकि उनका पेट आगे को निकल आया था और सूरज के नजरिए से देखा जाए तो सूरज अपने मन में यही सोच रहा था कि सेठ जी अपनी बीवी को खुश नहीं कर पाते होंगे और सेठ जी की बीवी तो इस उम्र में भी कर उठा रही थी लंबी चौड़ी शरीर हल्का सा पेट निकला हुआ,,,, भारी नितम्ब और व्यापार की नजर से कहा जाए तो बड़े-बड़े खरबूजे सेठ जी की बीवी के गोदाम की शोभा बढ़ा रहे थे,,,,, सेठ जी की बीवी शालू और नीलू से बात करते हुए मुख्य सड़क के बगल से आगे चली जा रहीथी,,, और सूरज पीछे-पीछे चल रहा था पीछे चलने का एक अलग ही मजा था सूरज के लिए और उसका लालच भी था सूरज पीछे चलते हुए लगातार सेठ जी की बीवी के भारी भरकम नितंबों को ही ताड़ रहा था,,, वाकई में सेठ जी की बीवी की गांड काफी आकर्षक थी जो की साड़ी में जब इतनी खूबसूरत लग रही थी तो बिना साड़ी के तो होश उड़ा देगी ऐसा सूरज को पक्का विश्वास था।

कुछ ही देर में मुखिया की बीवी और सूरज तीनों सेठ जी की बीवी के साथ ऐसा महसूस करने लगे जैसे कि उसे पहले से जानते हो सेठ जी की बीवी भी काफी मिलनसार थी जिसकी वजह से तीनों बाजार में बहुत मजे किए थे मुखिया की दोनों बेटी के साथ-साथ सूरज को भी यह बाजार काफी अच्छा लगा था बाजार में नीलू और शालू अपने लिए कपड़े खरीदी और सूरज ने भी अपनी मां के लिए साड़ी और अपनी बहन के लिए कुर्ती और सलवार खरीदा था,,,, कपड़े की खरीदी करने के बाद सेठ जी की बीवी उन्हें एक समोसे और जलेबी की दुकान पर लेकर आई तब तक नीलू और शालू दोनों आपस में खुसर फुसर कर रहे थे यह देखकर सेठ जी की बीवी बोली।

क्या हुआ बच्चों,,,?

(इतना सुनते ही नीलू धीरे से सेठ जी की बीवी के कान में कुछ बोली सेठ जी की बीवी के होठों पर मुस्कान आ गई और वह धीरे से बोली,,,)

कोई बात नहीं यह दुकान के पीछे चली जाओ,,,।

कोई दिक्कत तो नहीं है,,,( नीलू थोड़ा परेशान होते हुए बोली)

नहीं नहीं कोई दिक्कत की बात नहीं है,, जाकर कर लो तुम दोनों,,,,।

(उन तीनों की खुसर फुसर सुनकर सूरज इतना तो समझ गया था कि किस बारे में बात हो रही है इसलिए हल्की सी मुस्कान सूरज के चेहरे पर भी आ गई थी,,, वह दोनों दुकान के पीछे की तरफ जाने लगी थी और कोई मौका होता तो सूरज उन्हें देखे बिना अपने आप को रोक नहीं पता लेकिन इससमय सेठ जी की बीवी साथ में थी और सेठ जी की बीवी से बात करने का बहाना ही सूरज टूट रहा था और उन दोनों के जाते ही सूरज बोला,,)

मालकिन अगर बुरा ना मानो तो एक बात कहूं,,,।

कहो,,,,,

बुरा तो नहीं मानोगी,,,,!

नहीं बिल्कुल भी नहीं गाली तो नहीं दोगे ना,,,।

अरे कैसी बात कर रही है मालकिन आप तो हमारे लिए देवी देवता हैं भला कोई देवी देवता को गाली देता है क्या,,,?(सूरज एकदम मक्खन मलाई जैसी बातें करने लगा उसकी बात सुनकर सेठ जी की बीवी अंदर ही अंदर खुश हो रही थी और बोली)

हां तो बोलो कौन सी बात है,,,?

यही की आप इस उम्र में भी बहुत खूबसूरत है मैं तो देखा तो देखा ही रह गया,,,,,।

(सूरज की बात सुनकर सेठ जी की बीवी मन ही मन मुस्कुराने लगी और उसे आज अपने आप पर गर्व महसूस हो रहा था क्योंकि सूरज एक जवान लड़का था और एक जवान लड़के के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह एकदम रोमांचित हो गई,,, कुछ देर के लिए तो उसे समझ में नहीं आया कि इसका क्या जवाब दें लेकिन फिर काफी सोच समझकर वह बोली,,,)

अब ईस उम्र में कहां कोई खूबसूरती देखता है,,,,।

क्यों नहीं मालकिन खूबसूरत चीज को तो हर कोई देखता है,,,।

वैसे तुम बातें बहुत अच्छी करते हो,,,,, तुम मुखिया के,,,,(इतना कहकर वह कुछ आगे बोलती इससे पहले ही सूरज बोला)

मैं मुखिया जी के लिए काम करता हूं मुखिया जी मुझे बहुत मानते हैं इसीलिए तो अपनी दोनों जवान लड़कियों को मेरे साथ भेजे हैं वरना कोई घर में घुसने ना दे मुझ जैसे मामूली नौकर को,,,।

मामूली तो तुम बिल्कुल भी नहीं हो तुम्हें देखकर ही पता चल रहा है कद काठी से तुम भी अच्छे खानदान के लगते हो,,,,,।

(शेठ जी की बीवी की यह बात सूरज को बहुत अच्छी लगी थी। और जवाब में सूरज मुस्कुरा कर बोला,,,)

यह तो आपका बड़प्पन है मालकिन,,,,।

अच्छा बताओ क्या खाओगे,,,,?

आप खिलाएंगी,,,,।

क्यों नहीं आज तुम लोग हमारे मेहमान हो और मेहमानों की सेवा करना हमारा फर्ज है,,,।

हां मेहमान से मुझे याद आया कि तुम तो पूजा का भी सामान खरीदी हो आज कुछ खास है क्या,,?

दोपहर में पूजा है तुम लोगों को घर चलना पड़ेगा और आज रुकना भी पड़ेगा कल चले जाना,,,.

यह कैसे हो सकते हैं मालकिन हमें तो निकलना पड़ेगा बहुत दूर जाना है,,,,।

देखो अभी खाने-पीने में आराम करने में दिन तो निकल ही जाएगा और फिर तुम घर से निकलोगे तो मुझे पूरा यकीन है कि पहुंच तो पाओगे नहीं रात हो जाएगी रात में इधर-उधर रुकने से अच्छा है कि आज यहीं रुक जाओ कल सुबह जल्दी निकल जाना,,,,

(सेठ जी की बीवी की बात सुनकर सूरज इनकार नहीं कर पाया था वैसे भी सेठ जी की बीवी का खूबसूरत बदन सूरज की आंखों में बस गया था उसका आकर्षक दैहलालित्य सूरज की कामवासना को भड़का रहा था,,, रुकने के लिए सूरज के पास बहुत बड़ा कारण मिल गया था वह मुस्कुराते हुए बोला,,,)

चलो कोई बात नहीं तुम रहती हो तो मैं रुक जाता हूं वरना मेरा रुकने का कोई इरादा नहीं था जिस काम के लिए आए थे वह काम तो हो गया । लेकिन अब यहां रुक कर भी देख लेते हैं,, यह भी पता चल जाएगा की मेहमानों की खातिरदारी यहां पर कैसे की जाती है।

तुम्हें शिकायत का कोई मौका नहीं मिलेगा,,,।

(उसका इतना कहना था कि तभी पीछे की तरफ से दोनों बहने आते हुई दिखाई दी,, यह देखकर सूरज के मन में शरारत सोचने लगी और वह एकदम से मुस्कुरा कर बोला,,,,)

तुम भी जाओगी,,,,।

(सूरज के कहने का मतलब का वह समझ नहीं पाई इसलिए आश्चर्य से इधर-उधर देखते हुए बोली,,,)

कहां,,?

जहां से वह दोनों आ रही हैं,,,।

(सूरज के खाने के मतलब को समझकर हुआ एकदम से शर्म से पानी पानी हो गई और अपनी नजर नीचे झुका ली लेकिन होठों पर की मुस्कान वह छुपा नहीं पाई,,,, सूरज उसकी शर्म को देखकर और वह जिस तरह से मुस्कुराहट रही थी यह देखकर समझते देर नहीं लगी थी अगर कोशिश किया जाए तो यह भी उसके नीचे आ जाएगी सूरज के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती थी ऐसा लग रहा था कि जैसे कमर के नीचे उम्र की कोई बिसात नहीं थी,,,, सेठ जी की बीवी कुछ नहीं तो 45 बरस की जरूर थी लेकिन उसका गठीला बदन उसे 35। 40 के करीब ही दिखाता था,,,, सूरज पूरी तरह से उसे पर लट्टू हो चुका था,, सूरज की खासियत थी लड़कियों से ज्यादा उसे औरतें पसंद आती थी,, औरतों के सामने मर्दानगी दिखने में उसे बहुत मजा आता था और उसे संतुष्टि का एहसास होता था,,,, दोनों बहने आ चुकी थी और दुकान के बाहर रखें लकड़ी के पाटी पर बैठ चुकीथी,,, सेठ जी की बीवी समोसे और जलेबी लेने के लिए अपनी जगह से उठकर खड़ी हुई और जाकर सबके लिए समोसे और जलेबी लेने लगी दोनों बहने तो समोसे और जलेबी खाने के लिए व्याकुल थी लेकिन सूरज के मन में कुछ और ही चल रहा था लगातार उसकी निगाहें सेठ जी की बीवी की भारी भरकम गांड पर टिकी हुई थी,,,, किसी भी तरह से वह सेठ जी की बीवी के नितंबों को बिना वस्त्र के देखना चाहता था नग्न अवस्था में उसकी गांड को देखना चाहता था,,,, क्योंकि उसे एहसास हो गया था कि अब तक उसके जीवन में जितनी भी औरतें आई थी उन सब से भारी शरीर उसका ही था और उसकी गांड का आकार भी कुछ ज्यादा ही बड़ा था इसलिए उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी।

थोड़ी देर में वह सबके लिए समोसे और जलेबी लेकर आई और सबको अलग-अलग से थमाते हुए खुद भी खाने के लिए वहीं बैठ गई जलेबी और समोसे दोनों गरमा गरम थे इसलिए खाने में थोड़ा ध्यान देना पड़ रहा था लेकिन स्वाद बहुत अच्छा था इधर-उधर की बातें करते हुए चारों जलेबी और समोसे का लुफ्त उठा रहे थे थोड़ी ही देर में दोनों बहने खा चुकी थी और पानी पीने के लिए उठकर नल के पास गई इस बीच सूरज एकदम से अपना हाथ आगे बढ़ाकर फोटो के पास लेकर जलेबी के रस को अपनी उंगली से साफ करने लगा उसकी हरकत से सेठ जी की बीवी एकदम से झेंप गई उसे कुछ समझ में नहीं आया,, कुछ समझ पाता इससे पहले ही सूरज अपनी उंगली में लगे जलेबी के रस को दिखाते हुए बोला।)

जलेबी का रस लगा हुआ है,,,,(और इतना कहने के साथ ही उसे उंगली को अपनी मुंह में डालकर उसे चूसने लगा और मादक मुस्कान और वासना भरी आंखों से सेठ जी की बीवी को देखने लगा सूरज की हरकत से सेठ जी की बीवी शर्म से पानी पानी हो गई लेकिन इस बीच उसे महसूस होने लगा कि उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार से कुछ रिस रहा है,,, इस बात का एहसास उसे होते ही वह एकदम से मदहोश हो गई क्योंकि काफी समय बाद उसे ऐसा एहसास हुआ था बेटे की उम्र का लड़का उसे उत्तेजित कर गया था,,,,,, एक अजीब सी कसमसाहट अपने बदन में महसूस करते हुए सेठ जी की बीवी गनगना गई,,,,,, जल्दी-जल्दी उसने समोसे और जलेबी खाकर खत्म की ओर पानी पीने के लिए नल पर आ गई सूरज भी समोसे और जलेबी खत्म कर चुका था वह भी सर जी की बीवी के पीछे-पीछे नल पर आ गया वह नाल चलने वाली थी कि उसे रोकते हुए सूरज बोला।

तुम पानी पी लो मैं चला देता हूं,,,,।

(सूरज की बात को सेठ जी की बीवी इनकार नहीं कर पाई, और अपनी साड़ी को व्यवस्थित करके झुक गई लेकिन इस बीच उसने अपनी साड़ी के पल्लू को संभाल नहीं था और साड़ी का पल्लू एकदम से उसके कंधे से नीचे गिर गया जिसकी वजह से ब्लाउज में कैद उसकी दोनों चूचियां एकदम से उजागर हो गई गठीला बदन होने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों की पतली गहरी लकीर एकदम साफ दिखाई दे रही थी उसकी चुचियों का आकार भी काफी बड़ा था ऐसा लग रहा था कि ब्लाउज का बटन तोड़कर अपने आप बाहर आ जाएगी,,,, सूरज हाथ में हेड पंप का हत्था पकड़कर प्यासी नजरों से उसकी चूचियों को घूरे जा रहा था,,,, सेठ जी की बीवी को इसका एहसास अभी हुआ नहीं था वह दोनों हाथ सटाकर नल के नीचे लगा दी थी पानी पीने के लिए और सूरज बिल्कुल भी देर किए बिना हैंडपंप चलाना शुरु कर दिया था, और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को देखे जा रहा था झुकाने की वजह से उसकी आधी से ज्यादा चुचीया ब्लाउज के बाहर झांक रही थी यह नजारा देखकर सूरज के मुंह में पानी आ रहा था ओर नल से निकला हुआ पानी पीकर सेठ जी की बीवी अपनी प्यास बुझाने में लगी हुई थी,,,,, बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी दोनों चूचिया आपस में रगड़ खा रही थी,,,, सूरज का मन ललच रहा था,,,, बडा ही खूबसूरत नजारा था,,, और दूसरी तरफ सेठ जी की बीवी सूरज की बातों और उसकी हरकत के बारे में सोच ही रही थी कि उसकी नजर सूरज पर चली गई और जब उसकी नजरों का पीछा की तो एकदम से हैरान रह गई अपनी नजर को धीरे से झुका कर अपनी चूचियों की तरफ की तो वह हक्की बक्की रह गई क्योंकि जिस तरह से वह झुकी हुई थी वाकई में उसके आधे से ज्यादा बाहर झलक रही थी,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें इस तरह से वह पानी पीती रही लेकिन तभी उसे न जाने क्या सजी वह अपनी चूचियों को छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की और ना ही उठकर खड़ी हुई बल्कि वह कुछ देर तक और उसी तरह से झुकी रही है ऐसा लग रहा था कि वह जानबूझकर सूरज को दिखा रही थी। कुछ देर तक यह नजारा यूं ही चलता रहा,,,, फिर थोड़ी देर बाद गहरी सांस लेते हुए सेठ जी की बीवी खड़ी हो गई उसकी गहरी सांसों की गति के साथ उसकी भारी भरकम चूचियां के ऊपर नीचे हो रही थी अंकित देख-देख कर ललच जा रहा था,,,।

लेकिन इस बीच सूरज के पजामे में तंबू बन चुका था और इस बात को सूरज अच्छी तरह से जानता था लेकिन सेठ जी की बीवी के सामने वह उसे छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था और जो वह चाहता था वैसा ही हुआ सेठ जी की बीवी की नजर उसके पजामे बने तंबू पर चली गई जिसे देखकर उसके बदन में सिहरन सी दौड़ गई क्योंकि वह समझ गई थी कि सूरज की हालत उसकी चूचियों को देखने के बाद ही हुई है,,,, वह अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थी खुश हो रही थी ऐसा उसके साथ पहली बार हो रहा था वरना आज तक उसकी मन फिसला नहीं था,,,, वह सूरत से बोली,,,)

अब तुम पानी पी लो मैं नल चला देती हूं,,,,(इतना कहकर वह नल चलाने लगी और सूरज पानी पीने लगा,,,,, इसके बाद वह लोग वापस गोदाम पर आए,, गोदाम पर बैलगाड़ी में से खरबूजे की पेटी नीचे उतर चुकी थी,,,,, सबको वापस गोदाम में देखकर सेठ जी अपनी जगह से उठकर खड़े हो गए और मुस्कुराते हुए बोले,,,

आज तुम लोग हमारे मेहमान हो चलो अब घर चलते हैं पूजा का समय हो रहा है खाना पीना भी है मेहमान धीरे-धीरे आते होंगे,,,,,

लेकिन सेठ जी बैलगाड़ी,,,!

उसकी चिंता तुम बिल्कुल भी मत करो यहां पर तुम्हारी बैलगाड़ी सुरक्षित है और बैलों को चारा पानी भी दे दिया जाएगा,,,,, गुल्लू तुम सब संभाल लेना।

जी सेठ जी,,,,,।

और हां मैं यहां पर खाना भिजवा दूंगा तुम लोग खा लेना ।

ठीक है सेठ जी।

(इतना कहकर वह लोग गोदाम के बाहर आ गए थोड़ी ही देर में गोदाम के बाहर घोड़ा गाड़ी आ गई जिसमें सब लोग बैठ गए और थोड़ी ही देर में सेठ जी के घर पहुंच गए सेठ जी का घर नहीं था हवेली थी जो बाहर से पूरी तरह से सजी हुई थी,,,, घोड़ा गाड़ी ठीक मुख्य द्वार पर रुकावट और सब लोग उसमें से नीचे उतर गए धीरे-धीरे मेहमान जमा हो गए थे पूजा की तैयारी हो रही थी,,, सेठ जी ने सूरज और दोनों बहनों के लिए बैठने की अच्छी व्यवस्था किए थे,,,,

तकरीबन 2 घंटे तक पूजा चली थी 2 घंटे की पूजा के बाद खाने का कार्यक्रम शुरू हो गया था,,, सूरज और नीलू शालू को बड़े जोरों की भूख लगी हुई थी,,,, लेकिन तीनों अभी खाने के लिए बैठ नहीं रहे थे धीरे-धीरे जब भीड़ कम होने लगी तब सेठ जी की बीवी उन्हें अपने कमरे में लेकर गई खाना खिलाने के लिए क्योंकि वह लोग मेहमान थे और मेहमान की खातिरदारी करना सेठ जी अच्छी तरह से जानते थे।

शालू और नीलू दोनों खाना खाने बैठ गए थे लेकिन सूरज हां तो मुंह धोने के लिए नल पर चला गया था,,, वहां पर सूरज को थोड़ा देर हो गई क्योंकि वही पर सेठ जी भी थे उनसे बातचीत करते हुए देर हो गई जब वह वापस आया तब नीलू और शालू दोनों खाना खा चुके थे यह देखकर सूरज बोला।

अरे तुम दोनों इतनी जल्दी खाना खा लिया मेरा इंतजार तक नहीं किए,,,।

कब से तो इंतजार कर रहे थे लेकिन वह कितनी जोरों की लगी थी कि रहा नहीं गया,,,।

(नीलू मुस्कुराते हुए बोली और उसकी बात सुनकर सेठ जी की बीवी हंसने लगी सेठ जी की बीवी के मन में आज अजीब से ख्याल आ रहे थे जब से सूरज की हरकतों को देखी थी और उसकी बातों की वजह से उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रहा था जवानी के दिन उसे याद आने लगे थे ना जाने क्यों उसकी मां बहकने को कर रहा था,,,,, शेठ जी की बीवी मुस्कुराते हुए बोली।)

कोई बात नहीं मैं तो हूं ना मैं भी अभी खाना नहीं खाई हूं चलो हम दोनों साथ में खाना खा लेते हैं,,,,,।

(इतना कहकर सेठ जी की बीवी दो थाली लगा दी दोनों आमने-सामने बैठ गए,,,,, सेठ जी की बीवी बार-बार सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराते रही थी उसके साड़ी का पल्लू थोड़ा सा नीचे गिरा हुआ था जिसकी वजह से इस समय भी उसकी चूचियां भरपूर दिखाई दे रही थी जिस पर सूरज की नजर बराबर बनी हुई थी,,, सर जी की बीवी की हरकत को देखकर सूरज समझ गया था कि उसका काम बन जाएगा इसलिए वह भी मुस्कुरा कर उसकी जवानी की झलक को प्यासी नजरों से देख रहा था,,,, तभी अचानक अपने पैर को व्यवस्थित करते हुए सेठ जी की बीवी थोड़ा सा टांग उठा कर दूसरी तरफ राखी तो उसकी साड़ी के बीच से उसकी गुलाबी बुर झलकने लगी जिसे देखकर सूरज की आंखें फटी की फटी रह गई,, सूरज की नजर बराबर उसकी गुलाबी पर पर चली गई थी जिसे देखते ही उसके तन बदन में झनझनाहट से फैलने लगी और पजामे में तंबू बनने लगा सूरज को यह समझ में नहीं आ रहा था कि यह हरकत उसने जानबूझकर की की अनजाने में ऐसा हो गया लेकिन जो कुछ भी हुआ था वह सूरज के लिए किसी खूबसूरत हमले से काम नहीं था वह एकदम से सेठ जी की बीवी के जवानी के आगे घुटने टेक दिया था,,,

खाना कैसा बना है,,,?

बहुत स्वादिष्ट,,,, सब्जी बहुत अच्छी बनी है,,,।

सेठजी क बीबी अपनी जवानी दिखती हुयी





और लो,,,,

नहीं नहीं इतना बहुत है,,,.

अरे बहुत कैसे हैं तुम हम लोगों की खातिरदारी देखना चाहते थे ना तो इतने से कैसे काम चलेगा,,,(इतना कहने के साथ ही सेठ जी की बीवी हाथ आगे बढ़ाकर सब्जी के बर्तन से सब्जी लेने लगी लेकिन इस बीच फिर से उसने अपनी टांगों को थोड़ा सा इधर-उधर की और इस बार भी सूरज को उसकी गुलाबी बुर की झलक मिल गई,,, इस बार सूरज की हालत और ज्यादा खराब होने लगी वह सेठ जी की बीवी की साड़ी के बीच में ही अपनी नजर गड़ाए हुआ था और इसका एहसास सेठ जी की बीवी को अच्छी तरह से हो गया था क्योंकि वह ऐसा जानबूझकर कर रही थी वह जानबूझकर सूरज को अपनी जवानी का केंद्र बिंदु दिखाना चाहती थी और वह अपनी किए में सफल हो चुकी थी,,,, इसलिए उसके चेहरे पर मुस्कराहट तैर रही थी। जिस तरह का ख्याल सूरज के मन में चल रहा था उसी तरह का ख्याल सेठ जी के बीवी के भी मन में चलने लगा था क्योंकि काफी वर्षों से वह प्यासी थी वह जानती थी कि वह खूबसूरत है जवानी से भरी हुई है लेकिन फिर भी उसकी जवानी की प्यास बुझाने वाला उसका पति कोई काम का नहीं है वह अपने ही काम में मस्त रहता है और बिस्तर पर उसका साथ नहीं दे पाता। इसलिए आज बरसों बाद सूरज की हरकतों की वजह से उसके मन में फिर से उमंग जगने लगा था,, उसकी बर से बरसों बाद मदन रस की बूंदे टपकने लगी थी जो कि अब तक सूखी पड़ी थी लेकिन सूरज के कारण आज उसमें बरसों के बाद पानी की बूंदे झलक रही थी। थोड़ी देर में खाना पीना हो चुका था,,,,, दोपहर का समय था इसलिए सेठ जी की बीवी दोनों लड़कियों को अपने कमरे में और सूरज को दूसरे कमरे में सोने की व्यवस्था कर दी थी।

सूरज की जवानी दिखती हुयी





देर शाम को सूरज की नींद खुली तो वह धीरे से कमरे से बाहर आया तब तक देखा कि दोनों लड़कियां आंगन में बैठकर शेठ जी की बीवी से बातें कर रही थी,,, सूरज को देखते ही सेठ जी की बीवी मुस्कुराने लगी,,,, धीरे-धीरे अंधेरा हो रहा था वह भी जाकर पास में बैठ गया और बातें करने लगा, बातें करते हुए सूरज की नजर सर जी की बीवी के हाव-भाव परी टिकी हुई थी बार-बार बातें करते हुए मुस्कुराकर वह सूरज को देख नहीं रही थी उसकी अदा देखकर सूरज मैन ही मन प्रसन्न हो रहा था। तभी सूरज सेठ जी के बारे मेंपूछ लिया।

सेठ जी अभी भी गोदाम पर है क्या,,, मालकिन?

नहीं वह तो पूजा के बाद गोदाम पर गए नहीं शाम को किसी शादी में गए हैं अब कल ही वापस आएंगे,,,।

(सेठ जी की बीवी मुस्कुरा कर बोली और बातें ही बातें नहीं है एहसास कर गई थी कि आज घर पर कोई नहीं था सेठ जी की गैर मौजूदगी के बारे में सुनकर सूरज का लंड शेठ जी की बीवी की जवानी को सलामी देने लगा,,,,,, रात का खाना सबने बैठकर साथ में खाया और फिर नीलू और शालू सेठ जी की बीवी के साथ उनके कमरे में सोने के लिए चली गई और सूरज दूसरे कमरे में चला गया सूरज के मन में अजीब अजीब से भाव बना रहे थे उसके ख्याल आसमान सो रहे थे उसे पूरा यकीन था कि सेठ जी की वीडियो उसके पास जरूर आएगी इसलिए उसने दरवाजा तो बंद किया था लेकिन उसकी कड़ी नहीं लगाया था। कुछ देर तक नीलू और शालू के साथ बात करने के बाद वह सोने का नाटक करने लगी और जब उसे एहसास होने लगा कि दोनों बहने सो चुकी है तो वह धीरे से बिस्तर से नीचे उतरी और कमरे से बाहर आ गई बाहर आकर वह अपना कमरा बंद करके बाहर से कड़ी लगा दी और फिर सीधा सूरज को जिस कमरे में सोने की व्यवस्था की गई थी उसे कमरे के पास जाने लगी उसका दिन जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह उम्र के जिस पड़ाव पर थी इस तरह की बातें इस तरह के ख्याल उसके मन में नहीं आना चाहिए था लेकिन सूरज ने उसके मन की भावनाओं को भड़का दिया था जिसके चलते वह अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पा रही थी,,,,, वह सूरज के कमरे के पास पहुंच चुकी थी इधर-उधर नजर घूमाकर देख भी ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है,,,, और जैसे ही दरवाजे पर दस्तक देने के लिए उसने अपना हाथ दरवाजे पर रखी दरवाजा अपने आप ही खुल गया,,,,,।)
 
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