Incest बैलगाड़ी,,,,, - Page 24 - SexBaba
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Incest बैलगाड़ी,,,,,

कमला चाची की बहू की बहू की चुदाई करते हुए

 
जब से हरियाने अपनी बीवी को अपने हीं बेटे के साथ रंगरेलियां मनाते हुए देखा हे तबसे हरिया का मन किसी काम में नहीं लगता था वह जल्द से जल्द अपनी छोटी बहन गुलाबी और अपने बेटे राजू का विवाह कर देना चाहता था ताकि दोनों अपने-अपने रास्ते लगे रहे,,,,,, हरिया अपनी बीवी मधु से बेहद प्यार करता था,,,, हरिया को अपनी बीवी पर बहुत भरोसा था लेकिन उसका भरोसा चकनाचूर हो चुका था,,,, जिसके पीछे वह अपने आप को ही इसका जिम्मेदार समझता था अगर वह अपनी छोटी बहन के साथ ऐसा ना करता है और राजू ने अपनी आंखों से सपना देखा होता तो शायद ऐसा कुछ भी नहीं होता लेकिन हरिया को अपने बेटे राजू पर उसकी हरकत पर हैरानी हो रही थी क्योंकि राजू इस तरह का लड़का बिल्कुल भी नहीं था हरिया अपने बेटे को बहुत ही सीधा समझता था ,,,, वो कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था कि उसका बेटा इस तरह की हरकत करेगा और वह भी अपनी ही मां के साथ और बाकी अपने ही बाप के साथ मिलकर अपने बाप को उसके किए के बदले में अपनी ही मां के साथ रंगरेलियां मनाने की शर्त रखेगा ,,,,लेकिन कुछ महीनों से राजू का ओहदा बढ़ चुका था जमीदार की संगत में उसका व्यक्तित्व बदलने लगा था उसका बड़े लोगों के साथ उठना बैठना हो गया था और इसी के चलते उसके अंदर इतना बड़ा बदलाव आ गया था,,,,,, लेकिन अब हरिया के पास सोचने के सिवा और कोई रास्ता नहीं था एक बार मर्यादा की दीवार गिर जाए तो फिर उसे खड़ी करने का कोई फायदा नहीं होता वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी पीठ पीछे अब राजू रोज उसकी मां की चुदाई करेगा और राजू के मोटे तगडे लंड को पाकर मधु भी पीछे हटने वाली नहीं थी,,,,,

यह सब सोचकर हरिया जल्द से जल्द दोनों के हाथ पीले कर देना चाहता था जोड़ों का विवाह कर देना चाहता था ताकि दोनों अपने अपने साथी के साथ व्यवस्त रहे,,, यही सब सोचता हुआ हरिया रेलवे स्टेशन के सामने बड़े पेड़ के नीचे अपनी बैलगाड़ी लेकर बैठ कर बीड़ी पी रहा था कि तभी पीछे से आवाज आई,,,,

अरे हरिया चाचा,,,,,,

(इतना सुन पीछे मुड़ कर देखने लगा तो उसे वह इंसान परिचित लगा )

अच्छा हुआ चाचा तुम नहीं मिल गए नहीं तो मैं तुम्हारे घर आने वाला था,,,

क्यों क्या हुआ,,,,?

अरे मैं तुम्हारे बेटी के ससुराल से ही आ रहा हूं,,,,

सब कुशल मंगल तो है ना,,,,,

अरे चाचा सब कुशल मंगल है ऐसी खबर लाया हूं कि सुनकर उछल पडोगे,,,,,,,

ऐसी कौन सी खबर लेकर आए हो,,,,

पहले समोसे और जलेबी खिलाओ तब बताऊंगा,,,,

अरे पहले बता तो सही,,,,

नहीं नहीं चाचा ऐसा बिल्कुल भी नहीं मैं जो खबर लाया हूं उसे सुनने के बाद तुम खुद ही मेरा मुंह मीठा करवा दोगे लेकिन मैं चाहता हूं कि जलेबी और समोसा खाते खाते तुम्हें यह खबर बताऊं,,,,

चल अच्छा तू ऐसे मारने वाला नहीं है,,,(इतना कहने के साथ ही हो अपनी बैलगाड़ी पर से नीचे उतर गया और ठीक स्टेशन के सामने ही चाय और समोसे की दुकान पर लेकर गया और बाहर बड़े से पत्थर पर बैठ गया,,,,, हरिया कुछ कहता है इससे पहले ही वह खुद दो दो समोसे और थोड़ी सी जलेबी लेकर हरिया के पास बैठ गया और हरिया की तरफ समोसा बढ़ाते हुए बोला,,,)

अरे चाचा तुम तो नाना बन गए,,,,

क्या यह तु क्या कह रहा है,,,(एकदम से चौक ते हुए हरिया बोला)

हां चाचा मैं बिल्कुल सच कह रहा हूं,,,(समोसे को दांत से काटते हुए बोला)

तू मजाक तो नहीं कर रहा है ना,,,,

नहीं चाचा मैं भला कैसे मजाक कर सकता हूं मैं अपनी आंखों से देख कर आ रहा हूं,,,, दीदी दो बच्चों को एक साथ जन्मदिन है और दोनों लड़के ही हैं,,,,

(इतना सुनते ही हरिया अपनी जगह से एकदम से खड़ा हो गया और उसके कंधों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर एकदम खुश होते हुए बोला)

सच बता तू झूठ तो नहीं बोल रहा है ना,,,,

मां कसम चाचा दीदी के ससुराल वालों ने ही मुझे यह खबर तुम्हारी तक पहुंचाने के लिए कहे हैं और परसों पूजा-पाठ रखे हैं इतनी जल्दी वहां से कोई आ नहीं सकता था इसलिए,,,, मुझे यह संदेश पहुंचाने के लिए बोले हैं और खुद ना सकने के लिए माफी भी मांगे हैं,,,,

तू नही जानता कि तूने कितनी बड़ी खुशखबरी सुना दिया है,,,, तेरी चाची यह खबर सुनेगी तो खुशी से झूम उठेगी,,, मैं सबसे पहले खबर मधु को सुनाता हूं,,,,(हरिया इतना खुश हो गया था वह तुरंत अपनी बैलगाड़ी की तरफ भागा तो उसे पीछे से आवाज देता हुआ वह बोला)

अरे चाचा पैसे तो चुकाते जाओ,,,,,

(इतना सुनते ही हरिया वापस आया और अपने धोती में से पैसे निकाल कर उसे दुकान वाले को जल्दी से देकर भागता हुआ बैलगाड़ी पर चढ़ गया और बैलगाड़ी को घर की ओर हांक दिया,,,,, हरिया बहुत खुश था अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बेटी के पांव भारी नहीं हो रहे थे और आज यह खबर सुनकर उसके सीने से बहुत बड़ा बोझ उतर गया था वरना वह अपनी बेटी के बारे में बहुत चिंतित था उसे इस बात का डर था कि कहीं उसके ससुराल वाले उसे छोड़ ना दे,,,,, लेकिन अब सब कुछ सही हो गया था हरिया के चेहरे पर मुस्कुराहट बनी हुई थी वह जल्द से जल्द घर पर पहुंचाना चाहता था और यह खबर अपनी बीवी को सुनाना चाहता था,,,,

गांव जब 1 किलोमीटर जितना रह गया तब से गांव का ही अकादमी गाय भैंस को घर की ओर ले जाता दिखाई दिया जिसके चलते हरिया को बैलगाड़ी धीमी करनी पड़ी और धीमी करते हुए हरिया उस आदमी से बोला जिसे वह अच्छी तरह से जानता था,,,)

अरे जल्दी से अपनी गाय भैंस हटाओ मुझे जल्दी से घर पहुंचना है,,,,

अरे हरिया कहां तुझे इतनी जल्दी बाजी हो गई अब तो तेरे ठाठ है अपना राजू तो दिन दुगुनी और रात चौगुनी तरक्की कर रहा है,,,,,

हां वह सब तो ठीक है लेकिन अभी रास्ते से हट जाओ मुझे जल्दी जाना है,,,,

अरे घर जाकर क्या करोगे, भाभी और राजू तो गोदाम की तरफ गए हैं,,,,,,

गोदाम की तरफ,,,,

हां और अपना राजू तो घुड़सवारी करने लगा है,,,,,

घुड़सवारी,,,,

हा हरिया,,,, राजू घोड़े पर बैठकर जा रहा था और भाभी पैदल जा रही थी,,,,,

(हरिया एकदम से सोच में पड़ गया इतनी दोपहर में आखिर राजू और उसकी मां गोदाम पर क्या करने जा रही हैं,,,,, पल भर में ही हरिया एकदम से क्रोधित हो गया वह अपने मन में सोचने लगा कि एक बार छूट मिल जाने की वजह से दोनों लाज शर्म छोड़कर बस चुदाई कर रहे हैं,,,,,,, हरिया का मन एकदम व्यथित हो गया था उसे अपने बीवी और बेटे से इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी उसका दिल टूट गया था वह अपनी बीवी को खुशखबरी सुनाना चाहता था लेकिन यह खबर सुनकर उसका होश एकदम से ठिकाने आ गया था,,,,, वह घर पर बेल गाड़ी ले जाने के बजाए गोदाम की तरफ बैलगाड़ी को घुमा लिया और उसी रास्ते से जाने लगा जिस रास्ते से उन दोनों के जाने की शंका थी वह देखना चाहता था कि आखिरकार इतनी दोपहर में वह दोनों कर क्या रहे हैं,,,,,,,, थोड़ी दूर पहुंचने पर हरिया अपनी बैलगाड़ी को सड़क के बीचो-बीच रोककर बेल गाड़ी के पहिए में से घुंगरू को निकालने लगा क्योंकि वह नहीं चाहता था कि उसके आने की भनक दोनों को हो,,,,,।

चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़ घनी झाड़ियां फैली हुई थी ऐसा लग रहा था कि मानो किसी जंगल से गुजर रहा हो बेल गाड़ी के पहिए में से घुंगरू को निकाल देने के बाद अब दोनों भाइयों मैसेज और बिल्कुल भी नहीं हो रहा था और हरिया धीरे-धीरे बैलगाड़ी को आगे बढ़ा रहा था,,,,,

Jhadiyo me bhagti huyi



वह आगे बढ़ते हुए भी चारों तरफ नजर घुमाकर देख रहा था क्योंकि वह जानता था कि वह अपनी मां को अगर गलत इरादे से ले जा रहा है तो गोदाम पर बिल्कुल भी नहीं ले जाएगा क्योंकि गोदाम पर मजदूर लोग काम करते रहते हैं उसे इतनी तो आशंका थी कि राजू जरूर अपनी मां को घने जंगल जैसी जगह पर ही ले गया होगा इसलिए हरिया चारों तरफ नजर दौड़ा कर बैलगाड़ी को आगे बढ़ा रहा था कुछ दूर जाने के बाद उसे जैसे ही घोड़ों की टॉप सुनाई दी वह तुरंत बैलगाड़ी को एकदम से रोक दिया और बैलगाड़ी से धीरे से नीचे उतर गया और धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा घनी झाड़ियों को अपने दोनों हाथों से हटाकर जब सामने खुले मैदान में देखा तो उसके होश उड़ गए,,,,, इस तरह के नजारे कि उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था उसने जो देखा उसे देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और उसकी खुद की धोती में सुरसुराहट होने लगी,,,,।



उसने देखा कि उसकी बीवी मधु अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी दौड़ रही थी और उसके पीछे पीछे राजू अपना घोड़ा दौड़ा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे मधु उस घोड़े वाले से बचने की कोशिश कर रही हो लेकिन जिस तरह से दौड़ रही थी उसे दौड़ता हुआ देखकर पल भर में ही हरिया का लंड खड़ा हो गया था क्योंकि उसने आज तक अपनी बीवी को इस तरह से नगना वस्था में दौड़ते हुए नहीं देखा था,,,, जिस तरह से मधु दौड़ रही थी उसकी बड़ी बड़ी गांड की दोनों फांके पानी भरे गुब्बारों की तरह उछल रही थी,,,, हरिया अपने आपको घनी झाड़ियों के पीछे छुपा कर उस दृश्य को देखने लगा,,,,, जंगल जैसी जगह में घनी झाड़ियों के बीच छोटे से मैदान में जोकि हरी हरी घास से फैली हुई थी उस पर राजू गोल गोल घोड़ा दौड़ा रहा था और उसके आगे आगे मधु दौड़ रही थी अभी तक हरिया ने अपनी बीवी को पीछे से दौड़ता हुआ देखा था उसकी मदमस्त कर देने वाली गोल-गोल गांड को देखकर इस तरह के हालात में भी हरिया का मन उत्तेजना से भर गया था यह जानते हुए भी कि उसकी बीवी अपने ही बेटे के साथ गलत आचरण कर रही है उसका साथ दे रही है फिर भी ना जाने क्यों इस दृश्य में इतनी कामुकता भरी हुई थी कि हरिया सब कुछ भूल गया था,,,,, थोड़ी ही देर में हरिया को मधु आगे से दौड़ती भी नजर आने लगी आगे से देखने पर हरिया की नजर उसके दोनों दशहरी आम पर गए तो उसके होश उड़ गए उसकी बीवी की चूची एकदम कसी हुई थी जो कि तोड़ने की वजह से एकदम से फाट फाट कर रही थी ऐसा लग रहा था कि मानो किसी भी वक्त मधु की छातियों से उसकी दोनों चूचियां टूट कर नीचे जमीन पर पके हुए आम की तरह गिर जाएंगी,,,,,, और दोनों टांगों के बीच की जगह तो एकदम क़यामत लग रही थी जोकि दौड़ने की वजह से आपस में गुलाबी फांके रगड़ खा रही थी,,,,,, इस दृश्य को देखते-देखते थोड़ी ही देर में उसके कानों में उन दोनों की आवाज सुनाई देने लगी,,,

बस कर राजू मैं थक गई हूं मुझे मालूम होता कि तू यहां पर लाकर मेरे साथ यह सब करेगा तो मैं कभी नहीं आती,,,,,

Raju is tarah se apni man Ko uthakar ghode per bithata hua



क्या करूं मैं तुम्हें नंगी देखने का मन कर रहा था लेकिन तुम नंगी होने के बाद स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा दिखती हो एकदम खूबसूरत तुम्हारी गोल-गोल बड़ी बड़ी गांड देखकर तो देख रही हो मेरा,,,(पजामे के ऊपर से ही लंड को पकड़ते हुए) लंड खड़ा हो जा रहा है,,,

अरे लंड खड़ा हो जा रहा है तो मेरी बुर में डालकर शांत हो जा किस तरह से मुझे क्यों दौड़ा रहा है,,,,

तुम भागते हुए बहुत खूबसूरत लगती हो,

वह भी बिना कपड़ों के ना,

हां मैं सच में मैं कभी सोचा नहीं था कि तुम बिना कपड़ों के भागते हुए और भी ज्यादा खूबसूरत लगोगी यही देखना चाहता था इसलिए तो मैं तुम्हारे सारे कपड़े उतार कर तुम्हें नंगी कर दिया,,,,

चल चल अब बहुत हो गया अब मैं जा रही हूं अपने कपड़े पहनने मुझे नहीं लगता कि तू कुछ कर पाएगा,,,,(इतना कहने के साथ ही मधु अपने उतारे हुए कपड़ों की और आगे बढ़ने लगी है या यह सब सुनकर और देखकर दम हैरान हुआ जा रहा था अपनी बीवी की बात सुनकर कि अब तो से कुछ होने वाला नहीं है हरी एकदम हैरान हो गया था वह समझ गया था यह तो सीधे-सीधे एक जवान लड़के को बहका ने वाली उसका जोश बढ़ाने वाली बात है इसका मतलब है कि मधु खुद चाहती है कि उसका बेटा अपना मोटा लंड उसकी बुर में डालकर उसे चोदे,,,,,, यह सब अपने मन में सोच कर हरीया एकदम से हैरान हो गया,,,,,

वह अपनी बीवी और अपने बेटे की बेशर्मी देख रहा था वह कभी सोचा नहीं था कि दोनों इस कदर वासना के सागर में डूब जाएंगे कि उन्हें अपने बीच के रिश्ते के बारे में भी बिल्कुल भी ख्याल नहीं होगा,,,,, हरिया का मन कर रहा था कि उन दोनों के बीच जाकर उन दोनों की बेशर्मी पर उन दोनों को खूब गाली दे उन्हें भला-बुरा कह लेकिन ऐसा कर सकने की उसने हिम्मत बिल्कुल भी नहीं थी वह ना जाने क्यों इस दृश्य का आनंद लेते हुए घनी झाड़ियों के बीच छुपा रहा और अपने कपड़ों की ओर जा रही मधु मुस्कुराते हुए बड़े गौर से राजू देख रहा था और जैसे ही व कपड़ों के करीब पहुंचने वाली थी वह तुरंत अपने घोड़े को आगे बढ़ा दिया और जैसे ही वह कपड़ा उठाने के लिए झुकती राजू तुरंत उसके करीब पहुंच गया उसका एक हाथ पकड़ कर उसे जल्दी से उठाकर घोड़े पर बैठा दिया ऐसा करने में उसे पल भर की भी देरी नहीं लगी थी लेकिन अगले ही पल मधु एकदम से हैरान हो गई थी,,,, अपने बेटे की ताकत पर उसे गर्म होने लगा था राजू ने उसे घोड़े पर इस तरह से बैठाया था कि उन दोनों का मुंह आमने-सामने था दोनों एक दूसरे को देख रहे थे मधु एकदम नंगी थी और राजू अभी भी कपड़ों में था वह बड़े से पेड़ के नीचे घोड़े को रोक दिया था यह दृश्य झाड़ियों के पीछे छुप कर हरिया देख रहा था अपनी बीवी को अपने ही बेटे के साथ घोड़े पर नंगी देखकर एक तरफ हरिया का खून खोल रहा था लेकिन दूसरी तरफ ना जाने कैसी कशिश थी कि वह इस दृश्य को अपनी आंखों से देखने पर मजबूर हुआ जा रहा था,,,,,,

Ghode per bithakar apni man ke sath masti Karta hua Raju





राजू अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हाथों की हथेली में लेकर उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख दिए और से चुंबन करने लगा घोड़ा धीरे-धीरे उधर उधर हो रहा था और इधर उधर होते होते वह धीरे-धीरे हरिया के ठीक सामने जाकर खड़ा हो गया था तकरीबन 1 मीटर की दूरी पर जहां पर हरिया को सब कुछ साफ नजर आ रहा था एकदम साफ,,,,, मां बेटे दोनों के चुंबन को देखकर हरिया का दिमाग काम करना बंद कर दिया था हरिया की एक गलती की सजा उसे बार-बार मिल रही थी,,,,,, थोड़ी ही देर में चुंबन खत्म करके अपनी मां की आंखों में देखते हुए राजू बोला,,,,

तुम दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत तुम्हें चोदना किस्मत की बात है और इस समय मेरी किस्मत मुझ पर मेहरबान है तभी तो तुम एकदम नंगी मेरी गोद में हो,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां के दोनों दशहरी आम पर रख दिया और उसे जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया ऐसा करने से मधु के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूट रही थी वह तड़प रही थी अपने बेटे के लंड से मिलन के लिए इसलिए भाभी बेशर्मी दिखाते हो अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के लंड को उसके पजामे में से बाहर निकालने लगी,,, और देखते ही देखते हैं उसे अपने हाथों से बाहर निकाल ली,,,, और उसे बड़े प्यार से मुठीयाने लगी,,,और मादकता भरे स्वर में बोली,,,,)

सहहहहह राजू तेरा तो एकदम तैयार हो गया है,,,,

तुम्हारी बुर भी तो पानी छोड़ रही है,,,,,

तो देर किस बात की है मेरे बेटे,,,,, डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में,,,,,

ओहहहहह मां,,,,,,(इतना कहते ही अपनी मां की इजाजत पाते हैं राजू तुरंत अपने दोनों हाथों से अपनी मां की कमर को पकड़ा और उसे हल्के से उठाकर घोड़े के ऊपर ही अपनी खड़ी लेने पर उसे बिठाने लगा एक हाथ से अपने बेटे के कंधे का सहारा लेकर दूसरे हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर मधु अपने बेटे के लंड को पकड़ ली और,, उसे अपनी बुर के मुहाने पर लगाने लगी और देखते ही देखते अपनी भारी-भरकम गांड का दबाव अपने बेटे के लंड पर बढ़ाते हुए उसका पूरा का पूरा लंड अपनी बुर के अंदर ले ली,,,, यह देखकर हरिया एकदम से आश्चर्यचकित रह गया क्योंकि वह अपनी आंखों के सामने अपनी बीवी का रंडी बन देख रहा था इतनी खुलकर तो वह कभी उसका साथ नहीं देती जितना कि अपने बेटे का दे रही थी और वह भी घोड़े के ऊपर बैठकर दोनों वासना में इतने अंधे हो गए थे के नीचे उतर कर काम क्रीड़ा करना उचित ना समझते हुए दोनों को इतनी जल्दबाजी हो रही थी कि दोनों घोड़े पर ही शुरू हो गए थे दोनों की बातें एकदम साफ सुनाई दे रही थी दोनों की गरमा गरम सांसे तक हरिया के कानों तक पहुंच रही थी इसलिए इस दृश्य को देखकर हरिया के तन बदन में भी उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी लेकिन वह कुछ भी कर सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं था,,,

देखते ही देखते मधु अपने बेटे के लंड पर उछलना शुरू कर दी,,,,, राजू भी नीचे से ऊपर की तरफ धक्का लगा रहा था देखते ही देखते दोनों काम क्रीड़ा में पूरी तरह से मजबूर हो गए मधु अपने बेटे को अपनी बाहों में लेकर अपनी गांड पटक रही थी अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड़ कों वह सटासट अपनी चिकनी बुर में ले रही थी,,,,,, हरिया से ज्यादा वहां पर रुका नहीं जा रहा था क्योंकि उसके तन बदन में भी जोश भर गया था वह तुरंत धीरे से पीछे कदम हटाया और अपनी बैलगाड़ी को कुछ देर पैदल ही लेकर चलने लगा और फिर उस पर सवार होकर जैसे यह अपने घर पर पहुंचा वह अपने घर में दाखिल हुआ और घर का दरवाजा बंद करके तुरंत गुलाबी को अपनी गोद में उठाकर ले गया और उसे खटिया पर पटक दिया गुलाबी हैरान थी कि आज उसके भैया को क्या हो गया है लेकिन देखते ही देखते बिना कुछ बोले और ना ही गुलाबी की कुछ सुने हरिया ने पल भर में ही अपनी छोटी बहन को एकदम नंगी कर दिया और फिर उसकी बुर में अपना लंड डालकर जोर जोर से धक्का लगाना शुरू कर दिया और फिर थोड़ी देर में शांत हो गया,,,,,।

गुलाबी को अपने भैया का व्यवहार कुछ अलग लग रहा था लेकिन वह कुछ बोल नहीं पाए हरिया अपनी बहन की लेने के बाद घर से बाहर निकल गया और फिर रात को ही घर पर वापस आया खाना खाने के समय,,,,,, खाना खाते समय उसने बताया कि,,,, मधु नानी बन गई है यह सुनकर मधुर एकदम से खुश हो गई लेकिन खुश होते हुए भी और राजू की तरफ देखने लगी क्योंकि मधु अच्छी तरह से जानती थी और यह बात को गुलाबी भी अच्छी तरह से जानती थी कि,,,, राजु की बड़ी बहन के पेट में किसका बच्चा पल रहा था और उसकी बड़ी बहन किसके बच्चे की मां बनी है ,,,,, यह जानकर सब लोग खुश हैं कि वह जुड़वा बच्चों की मां बनी थी और वह भी दोनों लड़के ही थे,,,,

परसों पूजा में जाना था इस बात को बताते हुए हरिया ने बोला कि पूजा में केवल मधु और वह खुद जाएगा,,,, और वहां से आते ही गुलाबी और राजू दोनों की सगाई कर देगा और सगाई के बाद तुरंत ही शादी,,,,,,,,

इस फैसले से मधु गुलाबी और राजू तीनों हैरान भी थे लेकिन इस फैसले से राजू खुश भी था,,, लेकिन गुलाबी खुश नहीं थी वह इस घर को नहीं बल्कि राजू को छोड़कर नहीं जाना चाहती थी क्योंकि उसे इतना तो एहसास है कि राजू जितना तगड़ा मर्द उसे मिलने वाला नहीं था इसीलिए वह इस फैसले से खुश नहीं थी लेकिन वह कर भी क्या सकती थी एक ना एक दिन तो उसे शादी करके जाना ही था इसलिए वह खामोश रही,,, अपनी बहन के वहां राजू को ना ले जाने वाली बात राजू भी अच्छी तरह से समझ रहा था और इस बात को गुलाबी के साथ-साथ मधु की समझ रही थी वह अच्छी तरह से समझ रही थी कि उसका पति राजू से दूरी बनाना चाहता था वह नहीं चाहता था कि किसी भी हाल में अब मधु और राजू दोनों करीब रहे और इसी के चलते वह जल्दी से फैसला भी लिया था,,,,।
 
जल्द ही हरिया अपनी बीवी के साथ अपनी लड़की के ससुराल पहुंच गया वहां पर हरिया और मधु की खूब खातिरदारी हुई जिसका कारण यह भी था कि हरिया की बेटी मां बन चुकी थी और वह भी जुड़वा बच्चों की जिसकी उसके ससुराल वालों को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी यह तो बहुत खुशी की बात थी हरिया के लिए भी और मधु के लिए भी लेकिन हरिया इस बात से पूरी तरह से अनजान था कि उसकी बेटी का बाप उसका ही खुद का जवान बेटा राजू है,,,,, यह सब कब कैसे कहां हो गया इस बारे में हरिया को बिल्कुल भी पता नहीं था लेकिन मधु अच्छी तरह से जानती थी क्योंकि जब मधु अपने पति को अपनी ही ननंद के साथ रंगे हाथ पकड़ ली थी तब गुलाबी नहीं सारी सच्चाई बता दी थी और तभी मधु को पता चला था कि उसकी बड़ी बेटी के साथ राजू का शारीरिक संबंध है राजू अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध बनाकर उसे पेट से कर दिया था जिसका नतीजा आज प्राप्त हुआ था,,,,,।

Madhu ki madmast jawani



अपनी बेटी के जुड़वा बच्चों को देखने के बाद मधु एकदम से चौक गई थी क्योंकि उन दोनों की शक्ल एकदम राजु से मिलती जुलती थी सब लोगों को तो यही लगता था कि परिवार का होने की वजह से राजू से शक्ल मिलती है आखिरकार वह मामा जो था लेकिन असलियत कोई नहीं जानता था सिवाय मधु के मधु को समझ में नहीं आ रहा था कि राजू इन बच्चों का मामा बन गया या बाप दुनिया की नजर में तो वह मामा ही था लेकिन असलियत में तुम दोनों बच्चों का असली बाप राजू ही था अपनी ही बड़ी बहन को गर्भवती करके वह उसे मां बनने का सुख प्राप्त करवाया था,,,,,,,,,

दूसरी तरफ राजू अपनी बुआ के साथ एकांत पाकर दिनभर उस की चुदाई में लगा रहा गुलाबी भी अच्छी तरह से जानती थी कि अब वह शादी करके अपने घर चली जाएगी फिर राजू जैसा मुस्टंडा लंड उसे नहीं मिल पाएगा इसीलिए मैं जितना हो सकता था उतना राजू के लंड को अपनी बुर में लेकर मस्त हो जा रही थी,,,,,। राजू के गर्म लावा को अपनी बुर में पूरी तरह से खींच लेने के बाद थोड़ी ही देर में गुलाबी राजू के लंड पर से अपनी बुर को खींचते हुए उसे बाहर निकाली और उसके बगल में ढेर हो गई दोनों गहरी सांस ले रहे थे दोपहर का समय होने की वजह से और आज घर में उन दोनों के सिवा कोई नहीं था इसलिए इस पल का वह दोनों भरपूर आनंद ले रहे थे,,,,।

Godam k pas apni ma ki chudai karta raju



गहरी सांस लेते हुए गुलाबी राजू से बोली,,,।

राजू तुझे बड़े भैया का व्यवहार कुछ अजीब सा नहीं लग रहा है,,,

बिल्कुल बुआ लेकिन सही भी है,,,

मैं कुछ समझी नहीं,,,,(एक ही खटिया पर राजू पीठ के बल लेटा हुआ था और गुलाबी पेट के बल लेटकर बातें कर रही थी और उसकी उभरी हुई गांड पर राजू अपनी हथेली से सहला रहा था)

अरे इसमें समझने का क्या है जब एक पति के सामने उसकी बीवी अपने ही बेटे के साथ चुदवाएगी तो भला उस पति पर क्या बीतेगी,,, तुम ही बताओ,,,,,,, और पिताजी इसीलिए ना तो तुम्हें और ना तो मुझे अपने साथ ले गए दीदी के वहां और तो और हम दोनों की जल्द से जल्द शादी करके अपने और मां के बीच के फासलों को कम करना चाहते हैं,,,,,

Madhu or uska beta ek sath maje lete huye





लेकिन राजू भैया तो समझ ही गए होंगे कि जो मजा तो दे सकता है वह उनके बस की बात बिल्कुल भी नहीं है,,,,,,

सही बात है पिताजी को मैंने सब कुछ दिखा दिया हूं,,,

मतलब,,,,

मतलब यही कि पिताजी को यकीन नहीं हो रहा था कि मां मेरे साथ चुदवाने के लिए तैयार हो गई है उनके ईसी शंका को दूर करने के लिए मैं,,, पिताजी को सारा कार्यक्रम दिखा दिया जिस दिन पिताजी पड़ोस के गांव में शादी में जा रहे थे,,,,

हां हां याद आया,,,

Apne ma or pitaji ki gerhajiri me apni bua ki chudai karta raju



पिताजी कोई शादी में नहीं जा रहा था मैंने ही उनसे यह बहाना करने के लिए कहा था और यह भी कहा था कि घर से निकलने के बाद 1 घंटे में ही घर के अंदर वापस आ जाना मैं दरवाजा खुला रखूंगा,,,,,(राजू की बात सुनते ही गुलाबी की उत्सुकता बढ़ने लगी और वहां हाथ की कोहनी के सहारे टेका लेकर हल्के से अपने गर्दन को उठा दी,,,,) और पिताजी ने ठीक वैसा ही किया जैसा कि मैंने कहा था थोड़ी देर में पिताजी वापस आ गए और मैं पिताजी को घर में बुलाकर दबे पांव उन्हें मां के कमरे के सामने खड़ा कर दिया और दरवाजा बंद करके हल्का सा दरवाजा खोल दिया था कि पिताजी को सब कुछ दिखाई दे और मैंने इसीलिए मां के कमरे का लालटेन भी नहीं बुलाया था कमरे के लालटेन का उजाला पूरे कमरे में कमरे को प्रकाशित कर रहा था जिसमें पिताजी को सब कुछ साफ-साफ दिख रहा था और बुआ मैंने पिताजी को दिखाते हुए मां की ऐसी चुदाई किया ऐसी चुदाई किया कि पिताजी भी देखते रह गए,,,, सबसे पहले तो उन्हें मेरे लंड की लंबाई और मोटाई देखकर शर्मिंदगी महसूस हुई होगी क्योंकि वह तुम और मैं अच्छी तरह से जानते हैं कि पिताजी का लंड कितना बड़ा और मोटा है,,,

Raju apni bua ko mast karta hua



हां तेरे मुकाबले तो कुछ भी नहीं है,,,,

वही तो मां को तो पता ही नहीं था कि पिताजी दरवाजे पर खड़े होकर उसकी कामलीला देख रहे हैं मां तू इतनी पागल हुए जा रही थी कि मेरे लंड पर खुद कुद रही थी मुझे पूरा यकीन है कि यह सब देख कर एकदम से जल भूल गए होंगे और इसीलिए वह हम दोनों का विवाह जल्द से जल्द कर देना चाहते हैं ताकि तू अपने घर पर अपने पति के साथ मजा करे और मैं अपनी बीवी के साथ और वह अपनी बीवी के साथ,,,,,

ओहहहह अब मुझे समझ में आया तभी तो मैं कहूं कि भैया को इतनी जल्दबाजी क्यों है क्योंकि उन्हें भी तो चोदने के लिए मेरी बुर में रही रही थी तो इतनी जल्दी मुझे अपने से अलग कैसे कर रहे हैं जबकि भैया का सारा ध्यान भाभी पर है वह भाभी को तेरे साथ नहीं देखना चाहते,,,,

हां यही तो लेकिन देखना भले ही पिताजी सारे तिकड़म लगा लें भले ही मेरी शादी झुमरी के साथ हो जाए लेकिन मां को जो मेरे लंड का चस्का लग गया है जो आदत पड़ चुकी है वह कभी जाने वाली नहीं है तुम तो जानती हो वह एक बार बुर में मोटे तगड़े लंड का सांचा बन जाए तब पतला छोटा लंड जरा भी अच्छा नहीं लगता,,,, सब कुछ छोड़ छाड़ कर मेरे लंड का मजा लेने के लिए मेरे पास आएगी,,,( राजू अपनी बुआ की बड़ी-बड़ी गांड पर हथेली घुमाते हुए बोला,,)

तभी तो मुझे शादी करके इस घर को छोड़कर जाने की इच्छा बिल्कुल भी नहीं हो रही है क्योंकि जैसा तुम कह रहे हो मेरी भी बुर में भी तो तुम्हारे लंड का सांचा बन गया है अब इसमें छोटा लंड जाएगा तो मजा ही नहीं आएगा,,,,

हाय मेरी छिनार बुआ तु बिल्कुल भी चिंता मत कर,,, मैं हूं ना तेरी जवानी की प्यास बुझाने के लिए,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू धीरे से उठा और अपनी बुआ के ऊपर चल गया और उसकी टांगों को खोलकर अपने लंड को पीछे से उसकी बुर में घुसा दिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया थोड़ी ही देर में खटिया चरर मरर करने लगी और गुलाबी के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकलने लगी,,,,,

दूसरे दिन ही मधु और हरिया अपनी बेटी के ससुराल से वापस आ चुके थे और हरिया सब कुछ व्यवस्था करके गुलाबी और राजू दोनों की सगाई एक साथ कर देने का जुगाड़ कर लिया वह लड़कों वालों से भी बात कर लिया था पर अपने साले को भी बुलाया था क्योंकि वही तो इस रिश्ते को लेकर आया था और फिर खुद ही झुमरी की मां से बात करने के लिए झुमरी के घर पहुंच गया था झुमरी की मां को इस रिश्ते से बिल्कुल भी इनकार नहीं था क्योंकि वह राजू को अच्छी तरह से जानती थी और उसे मजा भी लेती थी इसलिए वह भी हामी भर दी,,,,)

निश्चित किए हुए दिन पर सभी मेहमान इकट्ठा होने लगे गांव के सभी लोग राजू और गुलाबी दोनों की सगाई में आमंत्रित थे इस सगाई में लाला और उसकी बहन भी आमंत्रित हैं जो कि थोड़ी ही देर में दोनों को आशीर्वाद देने के लिए पहुंच चुके थे,,,,, राजू दौड़ दौड़ कर सारे काम देख रहा था क्योंकि खाना पीना भी रखा गया था राजू की सगाई देखकर ही गांव वाले दंग रह गए थे,,,,, बहुत ही अच्छी व्यवस्था बनाया था राजू ने उसके सभी दोस्त दौड़ दौड़ कर काम कर रहे थे कोई खाने पीने की व्यवस्था देख रहा था तो कोई मेहमानों को इज्जत के साथ मान पान देते हुए बैठा रहा था,,,,,,,

लाला और उसकी छोटी बहन सोनी के लिए अच्छी व्यवस्था की गई थी वह दोनों ही ईस व्यवस्था से बहुत खुश थे,,,,, गुलाबी के ससुराल वाले भी इकट्ठा हो गए थे और मुहूर्त देखते हुए राजू और गुलाबी दोनों की सगाई संपन्न कर दी गई दोनों बहुत खुश नजर आ रहे थे गांव की औरतें विवाह का गीत गा रही थी कुछ औरतें नाच रही थी गांव वाले सभी बहुत खुश थे क्योंकि राजू ने ऐसा कोई भी इंसान नहीं था जिसे अपनी सगाई में ना बुलाया हो क्योंकि राजू अब दिन-ब-दिन तरक्की करता जा रहा था,,,, थोड़ी देर में खाने-पीने का भी कार्यक्रम शुरू हो गया था,,,,।

लेकिन राजू और उसके परिवार के साथ साथ गांव वाले की खुशियों के बीच एक शख्स ऐसा भी था जो इस सगाई से बिल्कुल खुश नहीं था वह था विक्रम सिंह का भतीजा रंजीत सिंह रंजीत सिंह ने हमेशा के लिए अपना एक खबरी झुमरी के पीछे लगाया हुआ था और उसी ने ही रंजीत सिंह को जल्द से जल्द खबर देकर उसे गांव में लेकर आया था जो कि दोनों चोरी-छिपे इस सगाई को देख रहे थे और रंजीत सिंह तो जोड़ी की खूबसूरती देखकर और भी ज्यादा उस पर मर मिला था क्योंकि आज हमारी दुल्हन की तरह सज धज कर सगाई में शामिल हुई थी,,,,, झुमरी की खूबसूरती को देखते ही रंजीत सिंह का चेहरा खिल उठा था उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे लेकिन अगले ही पल राजू से सगाई होता देखकर प्रसन्नता से भरा हुआ चेहरा एकदम क्रोध से लाल हो गया था वह एकदम क्रोधित हो चुका था उसका बस चलता तो इसी समय वह राजू का खून करके झुमरी को उठा ले जाता लेकिन वह मजबूर था क्योंकि राजू की ताकत को अच्छी तरह से पहचानता था,,,,,,,,, लाला को भी सगाई में शामिल होता देखकर और उसकी बहन जो कि वह भी दुल्हन की तरह सोच कर आई थी उसे भी देखकर रंजीत सिंह आग बबूला हो गया था और जल्द से जल्द खबर अपने चाचा को देना चाहता था इसलिए वह तूने वहां से निकला और सीधा जाकर अपने चाचा की हवेली पर पहुंच गया और बिना कुछ बोले सीधा अपने चाचा के कमरे में जो कि दरवाजा बंद जरूर था लेकिन उस पर सिटकनी नहीं नहीं लगी हुई थी,,,, और रंजीत सिंह इतने गुस्से में था कि बिना कुछ सोचे समझे एक झटके में ही अपने चाचा के कमरे का दरवाजा खोल दिया और उसकी आंखों के सामने जो दृश्य उसे नजर आया उसे देखकर उसके होश उड़ गए,,,,, कुछ नजारे को देखकर रंजीत सिंह एकदम से चौक गया था,,,,,,,, एक झटके से दरवाजा को खोलते ही उसने देखा कि उसके चाचा पलंग के नीचे खड़े हैं एकदम नंगे और पलंग पर उसकी चाची जो कि इस उम्र में भी बहुत खूबसूरत एकदम नंगी होकर पीठ के बल लेटी हुई थी और अपनी दोनों टांगों को चोरी करके उसे अपने पति के कमर से लपेटी हुई थी और रंजीत सिंह के चाचा अपने लंड को उसकी बुर में डालकर अपनी कमर जोर जोर से हिला रहे थे रंजीत सिंह तो यह नजारे को देखता ही रह गया क्योंकि उसकी चाची के बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था केवल मंगलसूत्र था जो हर धक्के के साथ इधर उधर हिल रहा था और उसकी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां उसके चाचा के जबरदस्त धक्को के साथ ही पानी भरी गुब्बारों की तरह छातियों पर लहरा रही थी अपनी चाची को इस अवस्था में देखकर खुद से रंजीत सिंह का लैंड खड़ा हो गया था इससे पहले उसने अपनी चाची को इस अवस्था में कभी नहीं देखा था,,,,

Is tarah se vikaram sing apni biwi ki chudai karta hua



विक्रम सिंह कुछ ऐसे ही इस बात का एहसास हुआ की दरवाजा उसके भतीजे ने खोला है तो वह एकदम से आग बबूला हो गया विक्रम सिंह की बीवी का भी था वह भी गुस्से से लाल हुए जा रही थी लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी क्योंकि जिस पल से वह गुजर रही थी वह बेहद नाजुक पल था चरमसुख के बेहद करीब था इसलिए विक्रम सिंह की बीवी तो नहीं लेकिन विक्रम सिंह एकदम से जोर से चिल्लाते हुए बोला,,,,।

रंजीत यह क्या बदतमीजी है तुम्हें बिल्कुल भी एहसास है कि तुमने क्या किया है तुम्हें जरा भी तमीज है कि किसी के कमरे में प्रवेश करने से पहले दरवाजे पर दस्तक दी जाती है,,,,

ममममम मै माफी चाहता हूं चाचा जी मुझसे बड़ी भूल हो गई और चाची तुमसे भी माफी मांग रहा हूं,,,(अपनी चाची के नंगे बदन को देखते हुए दोनों हाथ को जोड़कर माफी मांगते हुए) मैं क्या करूं हमें अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाया क्योंकि खबर ही कुछ ऐसी है,,,,

Vikaram sing ki biwi ekdam mast hote huye





जो भी हो रंजीत थोड़ी देर बाद आना जाओ कमरे से दफा हो जाओ,,,(रंजीत की तरफ देखे बिना ही विक्रम सिंह की बीवी उसे आदेश देते हुए पूरी क्योंकि वह रंग में भंग डाल रहा था और इस समय वह अपने चरम सुख के बेहद करीब थी,,,, अपनी चाची का आदेश मिलते ही वह एकदम से कमरे से बाहर चला गया और जाते-जाते दरवाजे को भी बंद कर दिया लेकिन दरवाजे के बाहर ही खड़ा रहा वह अपनी चाची की गरमा गरम सिसकारी की आवाज को सुनना चाहता था जो कि थोड़ी ही देर में कमरे से बाहर तक आने लगी और वह अपनी चाची की गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर उत्तेजित हुआ जा रहा था इससे पहले उसने कभी भी अपनी चाची को इस अवस्था में नहीं देखा था इसलिए पहली बार अपनी चाची को इस तरह की हालत में देखकर उसकी खुद की हालत खराब हो गई थी,,,, विक्रम सिंह भी अपने अधूरे काम को पूरा करते हुए अपनी बीवी की बुर में जोर जोर से धक्के लगा रहा था थोड़ी ही देर में दोनों एक साथ झड़ गए,,,,,

थोड़ी ही देर में खुद विक्रम सिंह कपड़े पहन कर कमरे से बाहर आया तो,,,, थोड़ी ही दूर पर रंजीत सिंह खड़ा था उसे देखते ही थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए विक्रम सिंह बोला,,,,।

रंजीत तुम्हें जरा भी तमीज है किसी भी कमरे में किसी के भी कमरे में बिना ईतला कीए घुस जाते हो,,,,

चाचा जी मैं माफी चाहता हूं लेकिन क्या करूं खबर ही कुछ ऐसी थी हमें तो लगा था कि लाला हमारी धमकी से डरकर अपनी हवेली में मुंह छुपाए बैठा होगा लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है वह तो गांव के जश्न में शामिल होता है नाश्ता गाता है खुश रहता है उसे तो बिल्कुल भी फर्क ही नहीं पड़ा,,,,

क्या बक रहे हो,,,,,

हां चाचा जी मैं ठीक कह रहा हूं आज गांव में उसी लड़की की सगाई थी जिस पर मेरा दिल आ गया था वहीं पर मैं गया हुआ था तो देखा लाला और उसकी बहन दोनों जश्न में शामिल होकर बहुत खुशियां मना रहे थे,,,,

हमारी धमकी का लाला पर बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ा,,,,, जरूर कुछ करना होगा हमें तो लगा था कि लाला घबराकर सब कुछ हमारे नाम कर के चला जाएगा लेकिन यहां तो सब कुछ उल्टा होता नजर आ रहा है,,,,

हां चाचा जी हमें कार्रवाई करनी होगी वरना हमारी इज्जत के साथ साथ लाला की जमीन जायदाद भी चली जाएगी,,,,,,,,

कल ही चलते हैं फिर से लाला के पास,,,,,(विक्रम सिंह एकदम क्रोधित होते हुए बोला)
 
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