Incest मजबूरी या जरूरत - Page 10 - SexBaba
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Incest मजबूरी या जरूरत

गेस्ट हाउस के कमरे में आराधना नरम नरम गद्दे पर पीठ के बल लेटी हुई थी और ठीक उसके सामने खड़े होकर संजू अपने शर्ट का बटन खोल रहा था यह नजारा बेहद आनंददायक और मादकता से भरा हुआ था क्योंकि इस नजारे को देखने पर कोई भी समझ जाएगा कि आगे क्या होने वाला है क्यों एक जवान लड़का एक खूबसूरत औरत के सामने अपनी शर्ट के बटन खुलेगा उसका सिर्फ एक ही कारण होता है कि कुछ ही देर में वह लड़का उस खूबसूरत औरत की चुदाई करने वाला है और यही क्रिया इस कमरे में शुरू हो चुकी थी आराधना के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी जिस तरह से संजू अपनी भुजाओं का बल दिखाते हुए अपनी मां को अपनी गोद में उठाकर बिस्तर पर लाकर पटक दिया था यह दर्शाता था कि संजू में पूरी तरह से मर्दानगी भरी हुई है और वह अपनी मर्दानगी भरी ताकत से किसी भी औरत का पानी निकालने में पूरी तरह से सक्षम है,,,,,

अरफना और संजू बिस्तर पर मस्ती करते हुए

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आराधना अपने बेटे को देखकर मुस्कुरा रही थी और संजू पेंट में से अपने लंड को बाहर निकाले हुए अपने शर्ट के बटन खोल रहा था अपने बेटे को पूरी तरह से नग्न अवस्था में देखना भी आराधना के लिए बेहद उत्तेजना आत्मक क्रिया बनी रहती थी क्योंकि वह अपने बेटे को नंगा देखकर पूरी तरह से उत्तेजित हो जाती थी उसकी मजबूत चोड़ी छातियां कसा हुआ बदन और ऊपर से औरत को संपूर्ण रूप से तृप्ति का एहसास दिलाने वाला उसका लंबा मोटा काला लंड जो कि अभी भी पेंट के बाहर निकलकर आराधना को ही झांक रहा था,,, देखते ही देखते संजू अपने शर्ट के बटन को एक-एक करके खोलकर पूरी तरह से अपने शर्ट को बटन से आजाद कर दिया और अपने शर्ट को उतारने लगा आराधना की नजर जैसे ही अपने बेटे की नंगी छाती पर गई उसकी चूत पानी छोड़ने लगी क्योंकि वह जानती थी कि कुछ ही पल में वह अपने बेटे की चौड़ी छाती में छिप जाएगी,,,,, आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था संजू अपने शर्ट उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दिया था और अपने जिन्स का बेल्ट खोल रहा था आराधना का जोर चलने वाला बिल्कुल भी नहीं था आराधना यह देखकर और ज्यादा उत्साहित हो रही थी कि उसका बेटा आज उसे नंगी करने से पहले खुद ही नंगा हो रहा था वरना वह बिस्तर पर समझ नहीं पाती थी कि उसका बेटा कब नंगा हो जाता था और कब उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी चूत की गहराई नापने लगता था,,, क्योंकि संजू सर्वप्रथम अपनी मां के कपड़े उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी करने के बाद ही अपने कपड़े उतार कर उसे चोदता था,,,, देखते ही देखते संजू अपने बेल्ट को उतारकर जींस के बटन खोल कर उसे अपनी कमर से नीचे की तरफ सरकार ने लगा लेकिन ऐसा करना बिल्कुल भी संभव नहीं था,,, क्योंकि पेंट के साथ संजू अपना अंडरवियर नीचे सरका रहा था जिसमें के छेद से उसका तगड़ा मोटा लंड बाहर निकला हुआ था,,, जो कि एकदम खूंटे की तरह था और उसे नीचे झुका कर अंडरवियर का सरक पाना नामुमकिन था इसलिए संजु को यहां थोड़ी मशक्कत करनी पड़ रही थी और यह देखकर आराधना के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूट रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उसके बेटे का लंड बेहद तगड़ा मोटा और दमदार है,,,, और यह काम आराधना भी नहीं कर पाती थी जब उसे कभी अपने बेटे के पेंट में से चैन वाली जगह से लंड बाहर निकालना पड़ता था क्योंकि उस समय संजू का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर तंबू बनाया हुआ होता था और उंगलियों का सहारा लेकर अपने बेटे के झंडू को उस छेंद से बाहर निकाल पाना आराधना के बस में बिल्कुल भी नहीं रह पाता था तब उसे जल्दबाजी में भीग ना चाहते हुए अपने बेटे के पूरे पेंट को उतारने करता था और इस समय संजू भी खुद अपनी मर्दानगी से जूझ रहा था उसे बड़ी जल्दबाजी थी अपनी मां के सामने नंगा होने की लेकिन उसका खूंटे जैसा लंड बाधा रुप बन रहा था इसलिए वह पहले जींस को उतारा और फिर अपने अंडरवियर को आगे से पकड़कर थोड़ा आगे की तरफ खींच लिया और फिर उसके छेद में से अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर उसे छेद में से बाहर निकालते हुए अंडरवियर को जांघों तक सरकाने के बाद पूरी तरह से मस्ती में भरकर अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भर कर हिलाते हुए अपनी मां की तरफ देख कर बोला,,,।

आराधना अपने बेटे क साथ

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ज्यादा ही लंबा है इसलिए निकालने में दिक्कत होती है,,,,

डालने में तो बिल्कुल भी दिक्कत नहीं होती,,,

कैसे होगी अपने पसंदीदा छेद में जो जाना होता है वहां तो यहां आंख बंद करके भी घुस जाता है,,,,

हां इसे तो मजा आता है लेकिन मेरी हालत खराब कर देता है ना मेरी चूत पूरी लाल कर देता है,,,,

चुदाई में तो चुत अगर लाल ना हो तो सारा कसूर लंड का ही है,,, और मैं नहीं चाहता कि मेरे लंड का नाम बदनाम हो,,,,(और इतना कहते हुए अपनी अंडरवियर को पैरों का सहारा लेकर अपने पैरों से अलग करते हुए बड़ा अपने घुटने को बिस्तर पर रखकर अपनी मां की तरफ आगे बढ़ते हुए बोला,,,) अब देखना मैं तेरी चूत कैसे लाल करता हूं,,,,

(और इतना कहने के साथ ही संजु पैरों तक फैली अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाते हुए अपने होठों को अपनी मां के पेरो पर रगडना सुरु कर दिया ,,,,,।

आहहहह संजू,,,,(उत्तेजना के मारे आराधना के बदन में तनाव बढ़ने लगा उसके बदन में संकुचन होने लगा जैसे जैसे वह अपने बेटे के होंठों को अपने नंगे चिकने पैरों पर महसूस करती थी वैसे वैसे उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हो जा रही थी देखते-देखते संजू अपनी मां की साड़ी को उसके घुटनों तक उठा दिया था और उसकी नंगी चिकनी पिंडलियों पर अपने होंठ रगड़ रगड़ कर उसका मजा ले रहा था,,,,, गेस्ट हाउस के कमरे के नरम नरम गद्दे पर आराधना की जवानी पूरी तरह से मचल रही थी और उसका बेटा पूरी तरह से अपनी मां को मदहोश करने में लगा हुआ था वह अपने दोनों हाथों को अपनी मां के दोनों घुटनों पर रखकर रगडते हुए उसे ऊपर की तरफ ले जा रहा था इस तरह से आराधना को भी मजा आ रहा था और संजू को भी अपनी मां की जांघों को जोर जोर से दबोचते हुए ऊपर जाने में मजा आ रहा था,,,, जैसे-जैसे साड़ी जांघों के ऊपर जा रही थी वैसे वैसे आराधना का नंगा बदन उजागर होता चला जा रहा था कमरे में पूरी तरह से जवानी की गर्मी छाई हुई थी देखते-देखते संजू अपनी मां की साड़ी को इतनी ऊपर कर दिया कि उसकी लाल रंग की चड्डी एकदम साफ नजर आने लगी और दोनों टांगो के बीच कि वह जगह जहां पर दुनिया का सबसे बेहतरीन और बेशकीमती खजाना छिपा हुआ होता है उस जगह पर गीलापन नजर आ रहा था जो कि संजू की मेहनत का नतीजा था,,,, अपनी मां की चूत के गीले पन को देखकर संजू बोला,,,।

संजू अपनी माँ की चड्ढी उतारते हुए

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वह मम्मी तेरी चूत तो पानी छोड़ रही है आज बहुत मजा आने वाला है और इतना कहने के साथ ही संजू अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया और गहरी सांस लेते हुए अपने प्यासे होठों को चड्डी के ऊपर से ही अपनी मां की चूत पर रख दिया और उसे जीभ निकालकर चाटना शुरु कर दिया आराधना की तो हालत खराब होने लगी उत्तेजना के मारे उसे अपनी चूत के अंदर चिंटीया रेंगती हुई महसूस हो रही थी,,, अपने बेटे की हरकत पर वह उत्तेजना से बिलबिला उठ रही थी राजू अपनी मां की चड्डी के ऊपर सही उसे पूरी तरह से मदहोश करने का मन में ठान लिया था वह अपनी मां की लाल रंग की चड्डी पर जीभ का दबाव बढ़ा कर उसकी चूत का पानी निकाल रहा था,,, आराधना अपनी बेलगाम जवानी पर काबू नहीं कर पा रही थी उसे लगाम नहीं लगा पा रही थी,,,, जिसके चलते वह रह रहे कर अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा दे रही थी और संजू उत्तेजना के मारे अपनी मां की कमर था में चड्डी कोई जीभ से चाट रहा था जिसमें उसकी चूत का काम रस लगा हुआ था,,,, आराधना चाहती थी कि उसका बेटा जल्द से जल्द उसकी चड्डी निकाल कर उसकी नंगी चूत पर अपनी जीभ लगाकर चाटे क्योंकि वह अपने आप पर काबू नहीं कर पा रही थी,,,, और शायद संजू भी अपनी मां की मदहोशी और मजबूरी को समझ गया था इसलिए वह अपनी मां की चड्डी को निकाले बिना ही उसकी चड्डी क‌ो एक किनारी से पकड़ कर दूसरे छोर पर उसकी फूली हुई चूत के किनारे टीका दिया उत्तेजना के मारे आराधना की चूत कचोरी की तरफ फूल चुकी थी इसलिए बड़े आराम से चड्डी की एक किनारे दूसरे छोर पर टिक गई,,,,,।

संजू अपनी माँ की छूट से खेलता हुआ

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ऐसा करते ही आराधना की मदमस्त कचोरी जैसी फूली हुई चूत एकदम से साफ नजर आने लगी जिसे देखकर संजू के मुंह में पानी आने लगा संजू से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह अपनी मां की मोटी मोटी जागो को अपनी हथेली में दबाते हुए उसे हल्का सा खोल दिया और फिर अपनी प्यासे होठों को अपनी मां की चूत पर रख कर चाटना शुरू कर दिया,,,,, अपनी नंगी चूत पर अपने बेटे के प्यासे होठ का स्पर्श पाते ही आराधना के तन बदन में आग लग गया रोहा एकदम से अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा दी यह दर्शा रहा था की आराधना कितनी मदहोश हुए जा रही है अपने बेटे की हरकत पर,,,, आराधना काफी उत्तेजित थी इसलिए उसकी चूत से ढेर सारा काम रस निकल रहा था जिसे संजू अपनी जीभ से चाट चाट कर अपने गले के नीचे उतार रहा था चूत के काम रस का स्वाद हल्का कसैला और नमकीन था जो की पूरी तरह से संजू के लिए मालपुआ के रस से कम नहीं था जिसे वह बड़े चाव से चटकारे लगाकर चाट रहा था,,,,,,

आराधना ब्लाउज के ऊपर से ही,,, मदहोशी के आलम में अपनी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चुचियों का दबा रही थी अपने हाथ से ही मजा ले रही थी उसकी दोनों टांगों के बीच संजू पूरी तरह से छाया हुआ था और वैसे भी औरत को खुश करने के हर एक तरीके को संजू अच्छी तरह से समझ गया था वह जानता था कि किस क्रिया को करने से उसकी मां पूरी तरह से आनंदित हो जाएगी और इसीलिए वह सबसे पहले अपनी मां की चूत पर ही हल्ला बोल दिया था,,,, आराधना बिस्तर पर तड़प रही थी छटपटा रही थी अपने बेटे की जीभ को वह अपनी चूत की अंदरूनी दीवारों पर रगडती हुई महसूस कर रही थी जिससे उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जा रही थी,,,,, संजू की हरकत इस कदर मदहोश कर देने वाली थी की आराधना से कुछ भी बोला नहीं जा रहा था बस वह गरमा गरम सिसकारियां ले रही थी जोकि संजू की उत्तेजना का प्रमुख कारण बनती जा रही थी वैसे भी मुर्दों को तब तक मजा नहीं आता जब तक की औरतों के मुख से आहहह ऊहहहह ना निकल जाए,,,,,

आराधना अपने बेटे को खुस करती हुयी

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संजू को इस बात का एहसास हो रहा है ताकि उसकी मां की चूत से कुछ ज्यादा ही पानी निकल रहा है जोकि मदहोशी का प्रमुख कारण था उत्तेजना का सर्व प्रथम सोपान था इसलिए संजू अपनी एक उंगली को अपनी मां की चूत के अंदर प्रवेश करा दिया वैसे भी इस समय जिस तरह की उत्तेजना का अनुभव आराधना कर रही थी अपने बेटे की उंगली को ही वह अपने बेटे का लंड समझ कर आनंद ले रही थी,,, संजू अपनी मां की चूत के अंदर जीभ के साथ-साथ अपनी उंगली को भी अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था संजू को साफ महसूस हो रहा था कि चूत के अंदर कुछ ज्यादा ही गर्मी थी जो कि उसकी उंगली में साफ महसूस हो रही थी और यह गर्मी सीधा उसके लंड पर असर कर रही थी जितनी ज्यादा गर्मी वह अपनी उंगली पर महसूस कर रहा था उसने ज्यादा कड़क उसका लंड होता चला जा रहा था,,,,

संजू को वैसे भी अपनी मां की चूत चाटने में बहुत मजा आता था पहले भी वह अपनी मां के लिए इस तरह की कल्पना कर चुका था जब जब वह वह अपने कमरे से अपने पापा की गंदी गंदी बातें अपनी मां के लिए सुनता तो अपने आप ही संजु अपनी मां को लेकर कल्पना करने लगता था,,, कई बार वह कल्पना में ही अपनी मां की चूत को चाट चुका था और सही मायने में कल्पना में जिस तरह का आनंद मिलता था उससे भी कहीं ज्यादा आनंद उसे वाकई में अपनी मां की चूत चाटने में आ रहा था,,,। लेकिन इस समय गेस्ट हाउस के कमरे में नरम नरम बीछौने पर कुछ अधूरा सा महसूस हो रहा था और संजीव अच्छी तरह से जानता था कि ऐसा क्यों हो रहा है इसलिए वह तुरंत अपने होठों को जो कि अपनी मां की चूत के काम रस में पूरी तरह से डूब आया हुआ था उसे अपनी मां की चूत से अलग किया और गहरी सांस लेते हुए अपनी मां की तरफ देखने लगा आराधना के सर के नीचे तकिया नहीं था इसलिए वह सर बिस्तर से टिका हुआ था और इस हालात में उसकी मदमस्त कर देने वाली चुचीयां जो कि ब्लाउज के अंदर कैद होने के बावजूद भी पूरी तरह से अपना जलवा बिखेर रही थी वह कुछ ज्यादा ही बड़ी और नुकीली नजर आ रही थी जिसे देखकर संजू गहरी सांस लेता हुआ बोला,,,।

संजू इस तरह से अपनी माँ की छूट की झलक पाकर मस्त हो गया

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ओहहह मेरी प्यारी रंडी आज तो तेरी चूची कुछ ज्यादा ही बड़ी लग रही है,,,,, आज तो मजा आ जाएगा मेरी रानी,,,,

ओहहह मादरचोद तूने तो मेरी हालत खराब कर दिया,,,,(चूत चटाई के मदहोशी से बाहर आते हुए आराधना बोली)

अभी तो शुरुआत हुई है मेरी रंडी अभी तो बहुत कुछ बाकी है ,,,(और इतना कहने के साथ ही जो अभी तक अधूरा लग रहा था उसे दूर करते हुए वह अपनी मां की साड़ी को खोलना शुरू कर दिया,,,, और यही संजू को अधूरापन लग रहा था वह अपनी मां को नंगी नहीं किया था और जब तक वह अपनी मां को नंगी नहीं करता तब तक उसे मजा नहीं आता था,,,, देखते ही देखते संजू अपनी मां की साड़ी को खोल कर बिस्तर के नीचे फर्श पर फेंक दिया,,,,, वह अपनी मां की पेटीकोट की डोरी खोलने वाला था कि उसकी नजर अपनी मां की भल भलाई हुई छाती पर चली गई जिसे देखते ही उसके मुंह में पानी आ गया उसकी आंखों के सामने दशहरी आम कपड़ों के अंदर पेक था जिसका स्वाद लेने के लिए उसे खोलना बेहद जरूरी था इसलिए संजू अपनी मां की पेटीकोट को छोड़कर थोड़ा सा अपने हाथों को हरकत देता हुआ आगे बढ़ाया और अपनी उंगलियों का सहारा लेकर अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने लगा,,, वैसे भी संजू को अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने में कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव होता था जिसका असर उसे अपने लंड पर बराबर महसूस हो रहा था संजू दोनों टांगों के बीच बैठा हुआ था और आगे झुक कर अपनी मां के ब्लाउज के बटन खोल रहा था और आराधना नजरों को नीचे करके अपने बेटे के लंड को देख रही थी जो कि ऊपर की तरफ उठाए खड़ा था,,,, आराधना से रहा नहीं गया और वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के लंड को पकड़ गई जो की पूरी तरह से नंगा था नंगे लंड को अपनी हथेली में महसूस करते ही आराधना के पसीने छूटने लगे क्योंकि संजू का जवान लंड पूरी तरह से मर्दानगी से भरा हुआ था और बेहद गर्म हो चुका था जिसकी गर्मी से आराधना की चूत की मलाई पिघल रही थी,,,।

आराधना इस तरह से अपनी गांड दिखते हुए

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देखते ही देखते समझो अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलकर उसे उतारने के लिए थोड़ा सा अपने हाथ को अपनी मां के पीछे लगी और पीठ पर रखकर उसे हल्के से उठाने लगा उसके बाद भी अच्छी तरह से जानती थी कि इस तरह से ब्लाउज निकलने वाला नहीं है इसलिए अभी हल्का सा अपने बदन को ऊपर की तरफ उठा लिया और संजू मौका देख कर ब्लाउज को पुष्टि मोटी गोरी गोरी बाहों से बाहर निकालने लगा,,, और अगले ही पल वह अपनी मां के ब्लाउज को भी निकाल फेंका और उसके बाद तुरंत उसे एक झटके में अपनी बांहों में भरते हुए अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जा करके उसकी ब्रा का हुक खोलने लगा अब वह ब्रा के ऊपर से या ब्रा को ऊपर करके मजा नहीं लेना चाहता था वह पूरी तरह से अपनी मां को मादरजात नंगी करके ही उसके बदन से उसके हुस्न से खेलना चाहता था,,,, और अगले ही पल आराधना मुस्कुराते हुए अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी ब्रा को भी अपनी बाहों में से निकलवाने में अपने बेटे की मदद करने लगी और ब्रा भी उसके बदन से जुदा हो गई कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी हो गई थी,, गदराए बदन की शोभा उसकी खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां बढ़ा रही थी,,,, जोकि एकदम नुकीली निप्पल के साथ सीना ताने खड़ी थी,,,,।

हाय मेरी रंडी यह तेरी चूचियां है या तोप समझ में नहीं आता,,, मैंने आज तक किसी खूबसूरत चूचियां नहीं देखी,,,

तो जी भर कर देख ले तेरे हाथों में आने के लिए कैसे तड़प रही है,,,,

अर्धना नंगी होने क बाद शरमाते हुए

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हाय मेरी रानी तू चिंता मत कर तेरी चूचियों को दबा दबा कर लाल टमाटर की तरह कर दूंगा बहुत रस भरा है तेरी चूची में,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू दोनों हाथ को अपनी मां की चूची पर रखकर दबाते हुए उसे बिस्तर पर लेटाने लगा,,,,,, और फिर संजू अपनी मां की खरबूजे जैसी चुचियों से फुटबॉल कि तरह खेलने लगा,,,,,, वह अपनी मां की चूची को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया जिससे संजू को तो मजा आ ही रहा था उसकी मां भी पूरी तरह से आनंदित हो उठ रही थी लेकिन संजू इतनी जोर से चूची को दबा रहा था की आराधना के मुंह से आह निकल जा रही थी,,, और वैसे भी संजु का मानना यही था कि औरत के बदन से इस तरह से प्यार करना चाहिए कि उनके मुंह से आह ऊहह आऊचच निकल जाए तभी प्यार करने का असली मजा आता है इसीलिए तो संजू अपनी मां की चूचियों पर बेरहम होता जा रहा था वह उन्हें जोर जोर से दबाता हुआ उसकी खजूर जैसे निप्पल को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया था उत्तेजना के मारे आराधना की चूची के निप्पल कैडबरी के चॉकलेट की तरह एकदम कड़क हो गई थी जो कि गर्मी मिलने से धीरे-धीरे पिघल कर संजू के मुंह में काम रस बन रही थी,,,,।

आराधना नंगी हो इ क बाद

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सहहह आहररर आहहह संजू ओहहहहह मेरे राजा तुने तो मुझे पागल कर दिया है,,,,आहहहहह कितना बेरहम है रे तू कितनी बेदर्दी से दबा रहा है यह भी नहीं जानता कि दर्द हो रहा होगा,,,,

हाय मेरी रंडी,,,( चुची पर से मुंह को हटाते हुए) मुझे मालूम है कि तुझे दर्द हो रहा होगा लेकिन मजा भी बहुत आ रहा होगा तेरा चेहरा बता रहा है कि तू कितना मजा ले रही है देख कैसा लाल हो गया है,,,, आज अगर तू जोर-जोर से भी चिल्लाएगी तो भी मैं तुझे छोड़ने वाला नहीं हूं आज तेरी जबरदस्त चुदाई करूंगा जहां जहां मेरा लंड घुसेगा वहां वहां डालूंगा,,,,

हाय मेरे राजा तू तो आज सच में पागल हो गया है,,,,

तूने मुझे पागल कर दी है रंडी तेरा खूबसूरत नंगा बदन देखकर तो मुर्दे के लंड में भी जान आ जाए ,,,मैं तो जीता जागता हूं,,,, कसम से देख,,,(अपने खड़े लंड को हाथ में जोर से पकड़ते हुए,,) देख मेरी जान कैसे खड़ा है तेरी चूत में जाने के लिए,,,,,(आराधना अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर पूरी तरह से मदहोश हो गई ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी आंखों के सामने उसकी पसंदीदा चीज रख दी गई हो जिसे पाने के लिए वह पूरी तरह से तड़प रही हो इस तरह से वहां अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के लंड को जोर से पकड़ कर बोली,,,)

वाह मेरे राजा यह तो पूरा मुसल की तरह तैयार हो गया है,,, आज तो लगता है कि तू मेरी चूत में से डाल कर खूब अच्छे से कुटाई करेगा,,,,

आराधना अपने बेटे को खुस करते हुए

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तो क्या मेरी रानी आज तुझे जिंदगी का असली सुख दूंगा,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू फिर से अपनी मां की दोनों चुचियों पर जुट गया,,,, संजू पागलों की तरह अपनी मां की चुचियों को मुंह में लेकर पी रहा था इस समय आराधना की चुचियां दशहरी आम से लेकर खरबूजे तक का सफर तय कर रही थी दुनिया के सबसे बेहतरीन जो की गोलाई के आकार में होते हैं सबकी उपमा इस समय आराधना की चूचियां बनी हुई थी,,,, इस दौरान संजू का लंड आराधना की दोनों टांगों के बीच पेटीकोट के ऊपर से ही उसकी चूत के ऊपर दस्तक दे रहा था बार-बार मानो की दरवाजा खोलने के लिए उसे पीट रहा हो,,,,

जितना लंड बेकरार था चूत में घुसने के लिए उससे भी कहीं ज्यादा चूत मचल रही थी उसे अपने अंदर लेने के लिए ऐसा लग रहा था कि बरसों के बाद की बिरह के बाद दोनों का मिलन होने जा रहा है,,,, और दोनों एक दूसरे को देख कर आंसू बहा रहे हो जिसे वैज्ञानिक भाषा में प्रीकम और काम रस कहा जाता है,,,,,,

संजू अपनी मां की चूचियों पर पूरी तरह से टूट चुका था आराधना बिस्तर पर लेटी लेटी मचल रही थी,,,, उसे गेस्ट हाउस में होने का कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव रहा था,,,,, कुछ देर तक अपनी मां की चूची से जी जान से खेलने के बाद उसे लाल टमाटर की तरह कर देने के बाद संजू धीरे-धीरे नीचे की तरफ आने लगा और आकर अपनी मां की गहरी नाभि के ऊपर स्थिर हो गया इस समय संजू के तन बदन में मदहोशी छाई हुई थी इसलिए आराधना की वह गहरी नाभि चूत की तरह नजर आ रही थी जिसे देख कर संजू के मुंह में पानी आ गया और वह अपनी जीभ निकालकर उस नाभि के अंदर डाल कर उसे गोल गोल घुमाने लगा और ऐसा करने पर आराधना का बदन पूरी तरह से कसमसाने लगा वह अंगड़ाई लेने लगी,,,, वह बिस्तर पर अंगड़ाई लेते हुए मचल रही थी और संजू अपनी ही धुन में अपनी मां की गहरी नाभि से खेल रहा था,,,,।

आराधना और संजू

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सहहहह आहहहहह,,,संजु मेरे राजा,,,ऊममममम आहहहहह तु मुझे पागल कर दिया है,,,,आहहहहहहह,,,,,

(अपनी कमर को नरम नरम गद्दे पर ही इधर-उधर रखते हुए संजू की हरकत का मजा ले रही थी उसके मुख से निकलने वाली गरमा गरम शिसकारियों के साथ-साथ उसकी गरमा गरम बातें संजू के तन बदन में आग लगा रहे थे संजू अपनी मां की नाभि में जीभ डाले हुए ही अपनी हथेली को पेटीकोट के ऊपर सही अपनी मां की चूत पर रख दिया और उसे कसकर अपनी हथेली में दबोच लिया संजू की इस हरकत से आराधना के मुंह से आह निकल गई,,,,,, एकदम से तड़प उठी और संजू बार-बार अपनी हथेली में अपनी मां की चूत को दबोच रहा था छोड़ रहा था दबोच रहा था छोड़ रहा था ऐसा वह कई बार किया ऐसा करने से आराधना की चूत से पानी निकलना शुरू हो गया है पूरी तरह से मदहोश होने लगी उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच गई,,,, इस समय वह अपने बेटे के हाथों की कठपुतली बनी हुई थी वरना वह खुद अपने बेटे के लंड पर चढ़ जाती है और अपनी चूत की गर्मी शांत कर लेती,,,,,

आराधना अपने बेटे की कामलीला को देखकर पूरी तरह से मदहोश हो जा रही थी और उसे अपने बेटे पर गर्व भी हो रहा था क्योंकि वह ऐसा कोई भी कार्य बाकी नहीं रख रहा था जिससे उसके बदन में उन्माद चढ रहा हो इस समय संजू उसे कामदेव लग रहा था जो कि अपनी कामलीला से उसे पूरी तरह से विवश कर दे रहा था खुद ही उसके सामने अपनी चूत परोसने के लिए,,,,,,, आराधना की सबसे ऊपर नीचे हो रही थी और उसकी नंगी चूचियां भी सांसो की गति के साथ ऊपर नीचे होकर एक अद्भुत दृश्य खड़ा कर रही थी,,,,,, आराधना अपनी उत्तेजना पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पा रही थी लेकिन दूसरी तरफ संजू अपनी उत्तेजना पर पूरी तरह से काबू किए हुए था और अपनी मां को संपूर्ण सुख दे रहा था आराधना यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि अगर उसकी जगह कोई और होता तो अब तक उसे चोद चुका होता लेकिन उसकी तरह उसे परम आनंद की अनुभूति ना करा रहा होता,,,,, क्योंकि धीरे-धीरे आराधना भी इस बात को समझ गई थी कि संभोग जल्दबाजी में नहीं बल्कि आराम से किया जाना चाहिए,,,, जल्दबाजी में किया गया संभोग ना तो पुरुष को संभोग सुख की अनुभूति करा पाता है और ना ही स्त्री को,,,,,

आराधना की चिकनी छूट से पेशाब की धार फुट ते हुए

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आराधना तो कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि कोई इस तरह से औरत की नाभि से प्यार करता है उसे चाटता है उसे सुंघता है लेकिन संजू उन सभी मर्दों में सबसे विपरीत था वह जानता था कि औरत को किस तरह से खुश किया जाता है और खुद भी आनंद लिया जाता है औरत का हर एक अंग का कोना कोना मर्दों की उत्तेजना का कारण होता है और वह मर्द ही क्या जो औरत के हर एक अंग से मजा ना ले सके सिर्फ चूत और चूची से ही संभोग का सुख प्राप्त नहीं होता बल्कि औरत के हर एक अंग से संभोग का अद्भुत सुख प्राप्त करना चाहिए और वही संजू ही कर रहा था संजू अपनी मां की गहरी नाभि से खेलते हुए उसकी चूत से छेड़छाड़ कर रहा था जो कि बहुत ही जल्द ही पेटीकोट का ऊपरी भाग भी आराधना की चूत के काम रस से गिला हो गया था,,,, संजू से अपनी मां की तरफ देखी नहीं जा रही थी इसलिए वह नाभि से ध्यान हटाकर अपने दांत से पेटीकोट की डोरी खोलने लगा और अगले ही पर वह अपनी मां की पेटीकोट की डोरी को खोल कर पेटीकोट को ढीला कर दिया आराधना के तन बदन में आग लगी हुई थी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था अपने बेटे की हर एक हरकत पर उसकी चूत पानी छोड़ दे रही थी,,,,, आप संजू पूरी तरह से तैयार था अपनी मां के बदन से बचे हुए कपड़े उतारने के लिए इसलिए बहुत पेटीकोट को दोनों तरफ से पकड़कर उसे नीचे की तरफ खींचने लगा तो आराधना अपनी भारी-भरकम गांड को हवा में 1 इंच जितना उठा दें ताकि उसका बेटा उसकी पेटीकोट को आराम से उतार सकें और मौका देखते ही संजू अपनी मां की पेटीकोट को उसकी मोटी मोटी जांघों से नीचे की तरफ खींच कर उसकी लंबी चिकने पैर में से बाहर निकाल कर फेंक दिया अब उसके बदन पर केवल लाल रंग की चड्डी रह गई थी जो की पूरी तरह से चूत वाली जगह पर गीली हो चुकी थी,,,, अपनी मां के नंगे बदन को ललचाए आंखों से देखते हुए संजू बोला,,,

अब देखना मेरी रानी नंगी होने के बाद तू कितनी खूबसूरत लगती है,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू अपनी मां की चड्डी को दोनों हाथों से पकड़कर उसे नीचे की तरफ खींचना शुरू किया ही था की आराधना फिर से अपनी गांड को हवा में उठा दी और संजू अपनी मां की चड्डी को भी उतार फेंका बिस्तर में मां बेटे दोनों अब पूरी तरह से निर्वस्त्र हो चुके थे बिना कपड़ों के काम क्रीड़ा करने को तैयार,,,, आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि उसे लग रहा था कि उसका बेटा आप अपने लंड को उसकी चूत में डालकर उसकी चुदाई करेगा लेकिन संजू अभी भी पूरी तरह से अपनी मां के बदन से खेलना चाहता था,,, इसलिए वह अपनी मां की आंखों में देखते हुए उसकी दोनों टांगों के बीच घुटनों के बल बैठ गया,,,,,, आराधना को यही लग रहा था कि उसका बेटा उसकी चूत में लंड डालने के लिए जगह बना रहा है लेकिन अगले ही पल संजू अपनी मां की मोटी मोटी जांघों को दोनों हाथों में दबोच कर उसे अलग किया और अपनी हथेली उसकी कचोरी जैसी फूली चुतपर थपथपाने लगा ऐसा करने से आराधना की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी वह मचलने लगी और तभी उसकी इस मचल को उसकी तड़प को उसकी जवानी की आग को और ज्यादा बढ़ पाते हुए संजू तुरंत अपनी पैसे होठों को उसकी चूत पर रख दिया,,,,,, और आराधना एकदम से उत्तेजित होते हुए अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा दी और संजू तुरंत उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम कर अपनी जीभ को उसकी चूत की गहराई में उतार दिया जो कि पूरी तरह से काम रस से लबालब भरी हुई थी,,,,, आराधना के मुंह से गरमा गरम सिसकारी फुट पड़ी,,,।

संजू को खुस करती हुयी आराधना

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सहहहह आहहहहह तो मुझे मार डालेगा क्या,,,,आहहहह तूने मुझे पागल कर दिया है,,,,ऊमममम ओहहहह मेरे राजा आहहहहहहह,,,,,,

आराधना की गरमा गरम सिसकारियों का और उसकी तड़प का संजू पर बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ रहा था वह अपनी ही दुनिया में पूरी तरह से मस्त हो चुका था अपनी मां की चूत से निकले काम रस को वह मालपुआ के रस की तरह चाट रहा था,,,,, कुछ देर तक वह अपनी मां की चूत को चाटते रहा लेकिन उसे अभी भी कुछ अधूरा लग रहा था इसलिए वह गहरी सांस लेते हुए अपनी मां की चूत पर से अपना मुंह हटा लिया और फिर,,,,, मुस्कुराते आराधना को देखने लगा तो आराधना जो की पूरी तरह से कामज्वर में तप रही थी वह मदहोश होते हुए लगभग लगभग गिड़गिड़ाते हुए बोली,,,,।

आहहररह संजू मेरे राजा मुझसे रहा नहीं जा रहा है जल्दी अपने लंड मेरी चूत में डालते मुझे मेरी चूत की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही हैं,,,,

आराधना की चुदाई

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ऐसी भी क्या जल्दी है मम्मी अभी तो बहुत कुछ करना बाकी है,,( और इतना कहने के साथ,,, ही संजू अपनी मां के सिर के पास गया और दोनों तरफ अपने घुटने रख कर अपनी मां की दोनों टांगों के बीच झुकना शुरू कर दिया आराधना को समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा यह क्या कर रहा है लेकिन जैसे ही संजू का लंड वह अपने चेहरे पर रगड़ता हुआ महसूस कि उसे समझ में आ गया कि उसका बेटा क्या करना चाहता है,,, संजू एक अद्भुत आसन में आ चुका था जहां से वह एक साथ दो काम कर सकता था अपनी मां की चूत चाट भी सकता था और अपनी मां के मुंह में लंड दे भी सकता था,,,, लेकिन उसे अपनी मां के मुंह में लंड देने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि आराधना खुद ही अपने बेटे के लंड को झट से पकड़ कर,,,, अपने लाल-लाल होठों के बीच ठुंस ली और उसे चाटना शुरू कर दी,,,, संजू भी पूरी तरह से गनगना गया,,,, संजू के बदन में हल्की सी अकड़न आ गई और वह तुरंत अपनी मां की चूत में मुंह डालकर चाटना शुरू कर दिया,,,,

इस आसन में दोनों मां-बेटे अद्भुत आनंद प्राप्त कर रहे थे दोनों एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे संजू था कि हलके हलके अपनी कमर को आगे पीछे करके अपनी मां को चोद रहा था और उसकी चूत का मजा ले रहा था आराधना के तन बदन में आग लग रही थी,,,, जो लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने ही थी उसी लंड को वह अपनी चूत में जल्द से जल्द ले लेना चाहती थी लेकिन संजू था कि अभी डालने के मूड में नहीं था आराधना इस बात से हैरान भी थी कि इतनी देर से वह उसके नंगे बदन से खेल रहा था और वह भी उसके लंड को मुंह में लेकर चूसने थी लेकिन उसके लंड से पिचकारी निकलने का नाम ही नहीं ले रही थी,,, लेकिन कुछ देर बाद समय आ गया था आराधना की चूत में लंड डालने का इसलिए संजू अपने लंड को अपनी मां के मुंह में से बाहर खींचा और तुरंत अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बना लिया,,,, और उसे कमर से पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया ऐसा करने पर आराधना की आधी गांड उसकी जांघ पर चड़ गई यह देखकर आराधना गहरी सांस लेते हुए बोली,,,।

आराधना की जैम क चुदाई करते हुए

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शुक्र है मादरचोद तुझे मेरी चूत का ख्याल तो आया ,,,,

हाय मेरी भोंसड़ी चोदी तेरी चूत का ख्याल तो मुझे हमेशा रहता है तभी तो मैं तेरी चुत कि ईतनी सेवा करता हूं,,,

थोड़ी कृपा और कर दे डाल दे ऐसी मेरी चूत में आज मेरी चूत का भोसड़ा बना दे अपने मोटे लंड से,,,

तू बिल्कुल भी चिंता मत कर मेरी रंडी आज तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू अपने लंड को पकड़ कर उसके टोपे को हिला हिला कर अपनी मां की चूत पर पटकने लगा ऐसा करने पर आराधना की काम भावना और ज्यादा प्रज्वलित हो रही थी वह पूरी तरह से तड़प रही थी जल्द से जल्द अपने बेटे के लंड को चूत में रहने के लिए इसलिए वह अपनी कमर को पूरा जोर लगाकर ऊपर की तरफ उछाल रही थी लेकिन इस हालात में उससे अपनी गांड भी उछाली नहीं जा रही थी लेकिन संजू अपनी मां की तड़प को अच्छी तरह से समझ गया था और वह अपनी मां को अब और ज्यादा तड़पाना नहीं चाहता था क्योंकि उसकी चूत से लावा बुरी तरह से बाहर आ रहा था,,,,, आखिरकार आराधना को जिस पल का बेसब्री से इंतजार था वहां पर आ चुका था संजू अपने मोटे लंड के सुपारी को जो कि पूरी आलू बुखारा की शक्ल में आ चुका था उसे उसके गुलाबी चूत की गुलाबी पंखुड़ियों के बीच रखकर अंदर की तरफ ठेलना शुरू कर दिया,,,, आज आराधना को अपने बेटे का लंड को ज्यादा ही मोटा नजर आ रहा था और वह यह देखने के लिए कैसे संजू उसकी चूत में अपना मोटा लंड डालता है वह हाथ की कोहनी का सहारा लेकर अपनी गर्दन को उठा लिया और नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच स्थिर कर ली आज आराधना को भी अपनी चूत बड़ी प्यारी लग रही थी क्योंकि वह क्रीम लगाकर उसे साफ करके एकदम चिकनी कर ली थी,,,

संजू अपने हाथ से पकड़ कर अपने लंड को सहारा देते हुए उसे अपनी मां की चूत के अंदर डालना शुरू कर दिया था और देखते ही देखते चूत की चिकनाहट पाकर संजू का मोटा लंड अंदर की तरफ सरकना शुरु कर दिया,,, जैसे-जैसे संजू का मोटा लंड आराधना की चूत में उतर रहा था वैसे वैसे आराधना का मुंह खुलता चला जा रहा था संजू अपनी सूझबूझ और अपने मर्दाना हथियार से एक साथ दोनों का मुंह खोल रहा था नीचे से चुत का और ऊपर से अपनी मां का,,,, आराधना धड़कते दिल के साथ अपने बेटे के लंड को इंच दर इंच अपनी चूत में घुसता हुआ देख रही थी,,,, जो देखकर आराधना की दिल की धड़कन आधी आधी चल रही क्योंकि इस समय संजू का लंड को ज्यादा ही मोटा लग रहा था और उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके छोटे से गुलाबी छेद में इतना मोटा लंड बड़े आराम से चला जा रहा है,,,, आराधना अपने बेटे की तरफ देख रही थी और संजू अपनी मां की तरफ नहीं बल्कि अपनी मां की दोनों टांगों की तरफ उसकी चूत की तरफ देख रहा था जिसमें उसका लंड घुसा चला जा रहा था माथे पर पसीने की बूंदें उपस आई थी ऐसी वाला रूम होने के बावजूद भी एसी की ठंडक आराधना की गर्म जवानी पर पानी भर रही थी,,,,,

आराधना को घोड़ी बनाकर चुदाई करते हुए

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आखिरकार एक दमदार धक्के के साथ संजू अपनी मां की गर्म जवानी पर काबू पाते हुए उसकी चूत की गहराई में घुस गया और यह धक्का इतना तेज था कि लंड का सुपाड़ा सीधे जाकर आराधना के बच्चेदानी से जा टकराया और इसी के साथ आराधना के मुंह से चीख निकल गई,,, लेकिन यह चीज गेस्ट हाउस के कमरे में ही सीमित रह गई,,,, संजू का पूरा का पूरा लंड आराधना की चूत के अंदर अपना सर छुपाए बैठा था जिसे आराधना अपनी आंखों से देख कर हैरान हुए जा रहे थे और संजू अपनी मां की कमर पकड़कर मुस्कुराते हुए अपनी मां से बोला,,,।

देख मेरी रंडी कैसा मेरा लंड तेरे भोसड़ी में घुसा हुआ है आज देखना तेरी चूत का कैसे कचुंबर बनाता हूं,,,, आज मेरा लंड तेरे कुंए मैंने उतरकर तेरा पानी पीकर ही बाहर आएगा,,,,

क्यों नहीं मेरे राजा तेरा लंड मेरी चूत के कमरे में मेहमान बनकर आया है ,,,, और मैं पूरी मेहमान नवाजी कर आने के बाद ही तेरे लंड को बाहर निकलने दुंगी,,,,

वाह मेरी रानी तेरे कमरे में मुझे बहुत मजा आ रहा है लेकिन तेरा कमरा गर्म बहुत है,,,,

गरम कमरे में ही तो मजा आता है मेरे राजा तभी तो कमरे की दीवारें पिघलेंगी गर्माहट पाकर,,,,

आराधना को घोड़ी बना क

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ओहहह मेरी रानी अब देखने तेरी कैसे चुदाई करता हूं,,,

(और इतना कहने के साथ ही संजू अपनी मां की कमर पकड़ कर उसे चोदना शुरू कर दिया उसका लंड अंदर बाहर होना शुरू हो गया था जो कि कोहली का सहारा लेकर आराधना बड़े साफ तौर पर देख रही थी,,,, संजू की कमर लगातार आगे पीछे हो रही थी और आराधना अपने बेटे के द्वारा चुदाई का मजा लूट रही थी,,,, नरम नरम गद्दे पर चोदने का मजा ही कुछ और होता है और यह अनुभव आराधना और संजू दोनों पहली बार ले रहे थे,,,, जबरदस्त प्रहार करते हुए संजू बोला)

बोल मेरी जान कैसा लग रहा है तुझे,,,

बहुत मजा आ रहा है मेरे राजा बस ऐसे ही अपनी कमर हिलाता,,रे,,,आहहहह आहहहरहह

तू चिंता मत कर मेरी रानी मैं ऐसे ही कमर हिलाता रहूंगा और तेरा पानी निकालता रहूंगा,,,,

संजु अपनी मां की जबरदस्त चुदाई कर रहा था,,,,, संजू इतनी तेज कमर हिला रहा था कि बेड से चूं चुंं की आवाज आ रही थी,,,, संजू का हर एक धक्का आराधना को स्वर्गा का सुख प्राप्त कर आ रहा था हर एक घंटे से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छातियों पर लौटने लग रही थी जिसे आराधना खुद अपने दोनों हाथों से पकड़ कर आराम से गद्दे पर लेट गई थी,,,,, आराधना को इसी समय का बड़ी बेसब्री से इंतजार था और वह समय आज पूरी तरह से उसकी आगोश में था आराधना गेस्ट हाउस के कमरे में नरम नरम बिस्तर पर अपने बेटे से चुदवा रही थी,,,, संजू पूरी तरह से पागल हो चुका था अपनी मां को चोदने में जो मजा संजू को प्राप्त हो रहा था यह समझ जाना तो अपनी मौसी और ना ही अपनी बहन को चोदने में उसे आया था अपनी मां को चोदते समय वह पूरी तरह से जोश से भर जाता था उसकी ही रसीली चूत उसे बहुत कसी हुई लगती थी जिसमें उसे लंड डालकर ही लाने में बहुत मजा आता था,,,,,

अपनी मां की हीलती हुई चूची देखकर संजू से रहा नहीं गया और वह दोनों हाथों से बढ़ाकर अपनी मां की चूची पकड़कर धक्के पर धक्का लगाना शुरू कर दिया,,,, जब जब संजू का लंड आराधना की चूत की गहराई में घुसता तब तब संजू के लंड के दोनों गोटे उसकी चूत के निचले स्तर पर ठोकर मारने लगते थे,,,, और आराधना अपने बेटे के दोनों गोटो को अपनी गांड पर टकराता हुआ महसूस करके मस्त हो जाती थी,,,, कुछ देर तक संजू इसी अवस्था में अपनी मां को चोदता रहा लेकिन अभी भी उसका पानी निकलने का नाम नहीं ले रहा था तो वह अपने लंड को अपनी मां की चूत से बाहर निकाल कर,,, बोला,,,।

ऊठ अब घोड़ी बन जा,,,,,,,,तुझे अब घोड़ी बनाकर चोदुंगा,,, मेरी रंडी अब मैं तेरी पीछे से लूंगा,,,,,।

(आराधना की आंखों में मदहोशी का नशा छाया हुआ था वह पूरी तरह से चुदवासी हुई थी इसलिए जैसे ही संजू ने उसे घोड़ी बनने के लिए बोला वह तुरंत उठकर अपने घुटने और कोहनी के बल बैठ गई और अपनी गोल-गोल गांड को हवा में उठा दी जिसे देख कर संजू की आंखों में वासना की चमक आ गई और वह पूरी तरह से वासा होकर तुरंत अपनी मां के पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांव पर दोनों हाथों से चपत लगाने लगा,,, हर चपत के साथ आराधना के मुंह से आह निकल जा रही थी लेकिन उसे दर्द के साथ आनंद भी मिल रहा था और संजू अपनी मां की गांड को लाल कर रहा था,,,, संजू से बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा था और वह तुरंत अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके गुलाबी छेद को छुपकर देखने लगा तो उसे बहुत ही जल्द अपनी मां की गुलाबी छेद नजर आने लगी और वह तुरंत अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां की चूत के उस छेद पर लगाकर एक जोरदार धक्का लगाया और चूत का गीलापन पाकर लंड एक बार फिर से चूत के अंदर समान है और इस बार संजू अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर चोदना शुरू कर दिया संजू को पीछे से चोदने में बहुत मजा आता था क्योंकि उसकी सबसे आकर्षण वाली चीज उसकी आंखों के सामने रहती थी,,, और अपनी मां की गांड पर तो वह पूरी तरह से फीदा था,,,,,

एक बार फिर से कमरे के अंदर गरमा गरम सिसकारी गुंजने लगी,,,,,,, दीवार की घड़ी में 2:15 बज रहे थे और 1:30 बजे का संजू ने गेस्ट हाउस के स्टाफ से बोल कर आया था क्या लंच लेकर आ जाए लेकिन बिना कमरे से फोन किए गेस्ट हाउस के कर्मचारी खाना लेकर कमरे में नहीं जाते थे क्योंकि गेस्ट हाउस में क्या होता है यहां के कर्मचारी अच्छी तरह से जानते थे वह किसी भी तरह से अपने कस्टमर को डिस्टर्ब नहीं करना चाहते थे इसलिए अभी तक लंच नहीं आया था और दीवार में टंगे घड़ी में 2:15 बज रहे थे यह देखकर संजू अपने मन में सोचा कि अच्छा ही हुआ कि कोई आया नहीं वरना उन दोनों को डिस्टर्ब करता,,,,

संजू की कमर लगातार चल रही थी और कुछ ही देर में आराधना की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी,,,

ओहहहह संजू मेरे बेटे मेरे मादरचोद बेटे चोद मुझे और जोर से चोद मेरा निकलने वाला है,,,,आहहहह हरामी और जोर से पेल मुझे ,,,आहहहह आहहहहहह,,,

रुक रंडी इतनी जल्दी मत झड़ना मेरा भी होने वाला है थोड़ा रुक जा,,,,

मुझसे रुका नहीं जा रहा मेरे राजा मुझे कुछ-कुछ हो रहा है,,,

रुक जा मेरी रानी मेरी रंडी थोड़ी देर रुक जा,,,,(संजू अच्छी तरह से जानता था कि झड़ने पर उसकी मां का बस चलने वाला नहीं है इसलिए वह बड़ी तेजी से धक्के लगाने लगा था कि वह भी अपनी मां के साथ ही झड़ जाए और ऐसा ही हुआ वह भी एकदम चर्मसुख के करीब पहुंच गया,,,, दोनों की सबसे बड़ी तेजी से चलने लगी संजू अपनी मां के दोनों कंधों को पकड़कर अपनी कमर जोर जोर से हिला रहा था गांड से जांघ टकरा रही थी जिससे ठाप ठापकी आवाज आ रही थी,,,, संजू ने कसके अपनी मां के कंधों को पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचा और अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल दिया और अपनी मां के साथ साथ वह भी झड गया,,,,,

गेस्ट हाउस में दोनों मां बेटों की पहली चुदाई थी जो कि बेहद सफलतापूर्वक चरम सुख की प्राप्ति करते हुए दोनों मदहोश हो चुके थे,,,, संजू अपनी मां की नंगी पीठ पर सर रखकर जोर-जोर से हांफ रहा था,,, आराधना बी तकिए पर सर रखकर एकदम से ढेर हो चुकी थी,,,,

थोड़ी देर बाद सब कुछ शांत हुआ तो वह दोनों बिस्तर पर बैठकर गहरी सांस लेने लगे,,,, दोनों दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे,,,,, आराधना अपनी चूत की तरफ देखकर अपनी चूत पर हथेली रखकर बोली,,,।

हारामी देख तूने कैसी दुर्दशा कर दिया,,,, एकदम लाल कर दिया चोद चोद कर,,,,

तभी तो मजा आता है मेरी जान,,,,

(इतना कहने के साथ ही संजू नंगा ही बिस्तर पर से उठा और टेबल पर रखे फोन की तरफ आगे बढ़ गया और फोन उठा कर गेस्ट हाउस का ही नंबर डायल करके खाने का आर्डर देने लगा,,,,)
 
दोनों मां बेटे गेस्ट हाउस में आकर बहुत खुश थे,,, आराधना की बहुत इच्छा थी गेस्ट हाउस में आकर चुदाई का आनंद लेने की एक नई अनुभव को प्राप्त करने की और वह इच्छा संजू ने पूरी कर दिया था वाकई में गेस्ट हाउस के कमरे में नादान धर्म गद्दे पर अपने बेटे से चुदवा कर वह पूरी तरह से तृप्त हो गई थी,,, एक अद्भुत अविस्मरणीय सुख संजु ने अपनी मां को दिया था जिसके बारे में उसने आज तक कल्पना भी नहीं की थी,,,,,,।

अर्धना अपनी पंतय उतारते हुए

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चुदाई की अद्भुत त्रप्ति को प्राप्त करके आराधना नंगी बीस्तर पर बैठी हुई थी,,, और संजू खाने का ऑर्डर देकर अभी भी फोन के लग ही खड़ा था,,, और वह भी पूरी तरह से नंगा,,, लंड का गर्म लावा निकल जाने के बावजूद भी,, लंड की अकड़ बराबर बनी हुई थी ऐसा लगता ही नहीं था कि कुछ देर पहले चुदाई करके पानी निकाल चुका है,,,, अपनी चूत में लेकर अपनी जवानी की मस्ती को पिघलाकर बाहर निकल चुकी आराधना की नजर अभी भी अपने बेटे के लंड पर थी अपने बेटे के लंड को देखकर उसे गर्व होता था,,,, एक औरत होने के नाते भाई इस बात को भी भली-भांति जानती थी कि उसके बेटे का लंड जिस किसी भी औरत या लड़की की चूत में जाएगा वह उसकी दीवानी हो जाएगी,,,,,, इसीलिए आराधना अपने बेटे के लंड को देख कर मुस्कुरा रही थी और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर संजू बोला,,,,।

क्या हुआ मेरी जान,,,(अपने लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए) मजा नहीं आया क्या,,,?

मजा तो इतना आया कि पूछ मत मैं कभी सोची नहीं थी कि चुदवाने में इतना भी ज्यादा मजा आता है लेकिन तेरे से चुदवा चुदवा कर मुझे ईस बात का पता चल गया कि चुदवाने में बहुत मजा आता है,,,,,

आराधना की मस्त सुडोल गांड

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मुझे भी बहुत मजा आया तेरी चूत अभी भी बहुत कसी हुई है मम्मी,,, पापा का लंड सच में बहुत छोटा था तुम्हारी चूत में जगह नहीं बना पाया लेकिन मेरा लंड सारी कसर उतार दे रहा है,,,, अब तो तेरी चूत में मेरे लंड का सांचा बन गया है,,,, अगर अब तुम पापा से चुदवाओगी तो इतना मजा नहीं आएगा,,,,

नाम मत ले उस हरामि का उसका जिक्र होते ही ना जाने क्या होने लगता है मुझे बहुत गुस्सा आता है,,,,

(अपने पापा का नाम लेते ही जिस तरह से आराधना गुस्सा दिखा रही थी उसके गुस्से को देख कर संजू मन ही मन खुश हो रहा था क्योंकि वह भी यही चाहता था कि उसकी मां उसके पापा से नफरत करें ताकि दोबारा उसके साथ शारीरिक संबंध ना बना पाए क्योंकि अब उस संजू अपनी मम्मी को अपनी प्रेमिका बना लिया था और वह यही चाहता था कि उसकी मां सिर्फ उसका ही लंड ले अपनी मां का गुस्सा देखकर तो खुश हो रहा था लेकिन फिर भी तसल्ली कर लेने के लिए वह बोला,,,)

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लेकिन मम्मी कहीं आप वापस आ गए तब क्या करोगे अगर पापा तुम्हें चोदना चाहेंगे तब ।

उस हरामि को अब मैं हाथ भी लगाने नहीं दूंगी अभी तक मैं दुनिया समाज का शर्म रखती थी इसलिए मैं कुछ कह नहीं पाती थी और उससे डरती भी थी लेकिन अब मेरा डर एकदम खत्म हो गया है वह हरामी दूसरी औरतों के साथ गुलछर्रे उड़ा कर उन पर पैसे लूट आता है और हम लोगों की परवाह किए बिना छोड़कर चला गया था यह देखने के लिए कि यह लोग कैसे जीते खाते हैं लेकिन अब मैं भी उसे दिखा दूंगी कि तेरी जरूरत मुझे बिल्कुल भी नहीं है मेरा बेटा मेरे साथ है,,,,।

(इतना सुनते ही संजू एकदम से गदगद हो गया और तुरंत उस जगह से चलकर अपनी मां के पास आया और उसके खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हथेली में लेकर उसके लाल-लाल होठों पर अपने होठ रख कर चुंबन करने लगा अपने बेटे के दुलार से‌ वह पूरी तरह से मस्त हो गई उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी और अपने आप ही उसका हाथ संजू के लंड पर चला गया जिसे अपनी हथेली में लेकर मुट्ठीयाने लगी और मुठीयाते हुए होली,,,,)

आराधना की मस्त गांड का जलवा

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मैं तुझसे प्यार करने लगी हूं और वह भी एक प्रेमिका की तरह मां की तरह नहीं,,,,

मैं भी तुझसे प्यार करने लगा हूं एक मर्द की देना तेरी खूबसूरती मुझे बहुत अच्छी लगती है,,,,,(आराधना की नरम नरम हथेली में अपने मोटे लंड को महसूस करके संजु के मुंह से हल्की-हल्की आह निकल रही थी यह देखकर आराधना मुस्कुराते हुए बोली,,,)

क्या हो रहा है,,,?

तुम्हारे लंड को फिर से तैयार कर रही है यह फिर से तेरी चूत में जाकर धमाल मचा देगा,,,

तो क्या हुआ यही करने के लिए तो यहां आए हैं,,,,

ओहहह मेरी रंडी तेरी यही बातें तो मुझे उत्तेजित कर देती है देखना इस बार तेरी चूत में गया तो निकलने का नाम नहीं लेगा,,,,,,,

मैं भी यही चाहती हूं,,,,,

तो फिर देर किस बात की है,,,,

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अभी अभी तो किया है फिर से कर लेगा,,,,

मेरी मर्दानगी पर शक हो रहा है क्या देख नहीं रही हो तुम्हारे हाथ में कैसा फल फूल रहा है देख कर भी नहीं समझ पा रही हो कि यह फिर से तुम्हारी चूत में जाने के लिए तड़प रहा है,,,,

तो फिर हो जाए,,,,

हो जाए मेरी रानी लेकिन इस बार तो मेरे ऊपर तुम ही सब कुछ करोगी,,,,(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना मुस्कुरा रही थी तो उसे मुस्कुराता हुआ देखकर संजू बोला) कर तो लोगी ना मेरे ऊपर चढ़कर,,,,

अपने बेटे क लुंड पर कूदती हुयी

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बहुत अच्छे से,,,,(आराधना मुस्कुराते हुए जवाब दी उसकी हथेली में संजू का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था आराधना इस बात से हैरान भी थी कि अभी कुछ मिनट पहले ही पानी निकाला है और फिर से तैयार हो गया है,,,,, संजू को कुछ याद आया और वह बोला)

मम्मी तुम इस गेस्ट हाउस में एक रंडी बन कर आई हो धंदेवाली इसलिए बिल्कुल भी शर्माना मत,,,

क्यों क्या हुआ,,,,?( आराधना थोड़ा सा आश्चर्य जताते हुए बोली,,)

रुको मैं जैसा कहता हूं वैसा ही करते रहना बहुत मजा आएगा इतना मजा कि तुम कभी सोची नहीं होगी,,,,

अपने बेटे क लुंड से मस्त होती हुयी आराधना

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करने क्या जा रहा है तू,,,

अरे रुको तो सही मैं बताता हूं,,,(इतना कहने के साथ ही संजु दरवाजे की तरफ गया और दरवाजे के हैंडल को पकड़कर उसे खोल दिया और बस उसी तरह से बंद कर दिया ताकि आराम से खुल जाए और संजू को दरवाजा खोलता देखकर आराधना बोली,,,)

अरे दरवाजा क्यों खोल रहा है,,,,

मजा लेने के लिए किसी को तड़पाने के लिए,,,

किसी को तड़पाने के लिए मैं कुछ समझी नहीं,,,

अरे मम्मी कुछ ही देर में वेटर खाना लेकर आ जाएगा और फिर दरवाजे पर दस्तक देगा और जब उसे यह कहेंगे कि दरवाजा खुला है लेकर आ जाओ,,,

तो,,,(आश्चर्य के साथ आराधना बोली)

तो क्या उस समय मैं नीचे रहूंगा और तुम मेरे ऊपर मेरा मोटा लैंड तुम्हारी चूत में और तुम अपनी बड़ी बड़ी गांड को मेरे लंड पर पटकती रहोगी और वह वेटर यह नजारा अपनी आंखों से देख लेगा फिर जरा तुम सोचो कि उसके दिल पर क्या गुजरेगी उसकी हालत क्या होगी वह तो पूरी तरह से पागल हो जाएगा जब एक खूबसूरत मदमस्त जवानी से भरी हुई औरत को एक मोटे तगड़े लंड पर कूदते हुए देखेगा उसके नंगे बदन को देखेगा उसकी बड़ी-बड़ी कहानी देखेगा उसका पानी तो वहीं खड़े खड़े छूट जाएगा,,,)

नहीं नहीं संजू यह तू क्या कह रहा है,,, मुझसे नहीं हो पाएगा किसी गैर मर्द के सामने नंगी,,, नहीं नहीं संजू मुझसे यह नहीं हो पाएगा बिल्कुल भी नहीं हो पाएगा,,, और मैं उसके सामने नंगी कभी नहीं,,,

गेस्ट क बिस्तर पर चुदाई करता संजू

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क्या मम्मी तुम भी मजा किरकिरा कर रही हो तुम यहां पर एक हाउसवाइफ एक संस्कारी औरत के तौर पर नहीं बल्कि एक धंधे वाली रंडी के तौर पर आई हो,,,, यहां गेस्ट हाउस का सआरा स्टाफ यह जानता ही है कि तुम यहां पर चुदवाने आई हो तुम चुदवाने वाली औरत हो,,, इसलिए यहां पर शर्माने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि यहां पर अगर तुम सिर्फ आराम करने के लिए भी आओगी तो सब यही सोचेंगे कि तुम अपनी चूत में लंड लेने के लिए और वह भी पैसे लेकर,,,, इसलिए तुम बिल्कुल भी डरो मत घबराओ मत सिर्फ मजा लो जैसा मैं कहता हूं वैसा ही करो देखना इतना मजा आएगा कि तुम एकदम मस्त हो जाओगी और उस वेटर को पूरी तरह से पानी-पानी कर दोगी,,,,

संजू,,,,,(मुंह बनाते हुए आराधना बोली)

आराधना अपने बेटे से चुदवाती हुयी

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डरो मत मैं हूं ना बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,,,(इतना कहने के साथ ही संजु अपनी मां की दोनों बाहों को पकड़कर उसे खड़ी किया और उसे अपनी बाहों में लेकर उसके लाल-लाल होठों को चूमने लगा ताकि उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगे और ऐसा ही हुआ संजू का खड़ा लंड सीधे जाकर उसकी चूत की गुलाबी पत्तियों के बीच रगड़ खाने लगा,,, जिसकी वजह से आराधना के बदन में फिर से उत्तेजना की लहर उठने लगी और वह अपने बेटे का साथ देने लगी,,,, संजू अच्छी तरह से जानता था कि किसी भी वक्त वेटर खाना लेकर आ जाएगा इसलिए बिल्कुल भी देर करना नहीं चाहता था और वह तुरंत दरवाजे के सामने पेड़ के ऊपर अपने दोनों पैरों को नीचे जमीन पर लटका कर लेट गया उसका लंड छत के ऊपर मुंह उठाए खड़ा था यह देखकर आराधना के भी बदन में उत्तेजना की लहर मिलेगी उसे शर्मा महसूस हो रही थी लेकिन वह भी अपने बेटे की बात मानकर वेटर के ऊपर बिजलियां गिराना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि उसे नंगी चुदवाती हुए देख कर उस वॅटर पर क्या गुजरती है उसके नंगे बदन को देखकर वह क्या सोचता है उसकी चूत में अंदर बाहर होता हुआ मोटा तगड़ा लंड देखकर व क्या सोचता है कैसी प्रतिक्रिया दिखाता है आप यह देखने के लिए आराधना भी उत्साहित हुए जा रही थी इसलिए वह भी अपने बेटे की बात मानते हुए अपनी गांड को ठीक दरवाजे की तरफ करके अपने बेटे के ऊपर चढ गई और एक हाथ से उसके खड़े लंड को पकड़ कर अपनी चूत की गुलाबी फांकों के बीच रखकर,,,,,, अपनी भारी-भरकम गोल-गोल गांड को,,, दबाव बनाकर अपने बेटे के लंड पर रखने लगी और धीरे-धीरे चूत की चिकनाहट पाकर संजू का मोटा तगड़ा लंबा लंड खूंटा बनकर आराधना की चूत के अंदर घुसना शुरू कर दिया और देखते ही देखते आराधना अपने बेटे के ऊपर पूरी तरह से अपनी गांड रखकर बैठ गई और उसके लंड को अपनी चूत की गहराई गप्प कर गई,,,,,।

अपने बेटे क लुंड पर उछलती हुयी अरफना

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आहहहहह सहहहहहह आराधना मेरी जान मेरी आराधना रंडी कितना मजा आ रहा है तू मेरे ऊपर चढ़ी है,,,आहहहहह बस अब अगली बार ऊपर नीचे कर देख फिर कितना मजा आता है,,,,,।(आराधना आज पहली बार अपने बेटे के मुंह से अपना नाम सुन रही थी और उसके मुंह से अपना नाम सुनकर वह और भी ज्यादा उत्तेजित हुए जा रही थी,,,, धीरे-धीरे आराधना को मजा आने लगा अपने बेटे के खूंटे जैसे लंड पर कूदने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और इस तरह से वह अपने बेटी पर पूरी तरह से काबू करके पूरी कमान अपने हाथों में ले ली थी वह उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे कस के पकड़े हुए अपनी गांड को बड़े जोर-जोर से उसके लंड पर पटक रही थी,,, ऐसा करने से आराधना की बड़ी-बड़ी गोरी गोरी गांड में एक अजीब सी फिर कल हो रही थी ऐसा लग रहा था मानो जिसे शांत नदी के पानी में कोई कंकर फेंक दिया हो और उसकी मगर साफ दिखाई दे रही है ठीक उसी तरह से आराधना की गांड में लहर उठा रही थी जिसे संजू अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर दोनों हाथों में थामा हुआ था,,,,,

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आराधना नीचे सर झुका कर अपनी काम क्रीड़ा की प्रतिक्रिया देख रही थी जो कि उसे बेहद लुभावनी और उत्तेजित कर देने वाली लग रही थी,,, बड़े आराम से वह अपने बेटे के लंड पर उठ बैठ रही थी,,,, संजू की की उत्तेजना का ठिकाना ना था वह अपनी मां की पपाया जैसी चूची को दोनों हाथ में पकड़ कर दबाता हुआ नीचे से भी धक्के लगा रहा था जिससे आराधना का मजा दुगना होता जा रहा था आराधना यह बात भूल चुकी थी की वेटर खाना लेकर आने वाला है वह पूरी तरह से अपनी मस्ती में मस्त हो चुकी थी गेस्ट हाउस के कमरे में आकर यह दूसरी बार वह चुदवा रही थी और दोनों बार में उसे अद्भुत सुख प्राप्त हो रहा था,,,, उसके मुख से लगातार गरमा गरम सिसकारी फूट रही थी,,,,।

बाथरूम में

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सहहहह आहहहहह मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है,,,आहहह आहहहहह आहहहरहह,ऊईईई मा,,,,,ओहहहहह

(आराधना पूरी तरह से मस्ती में चूर हो चुकी थी उसके मुंह से लगातार गरमा गरम सिसकारियां फूट रही थी और तभी अचानक दरवाजे पर दस्तक होने लगी,,,,)

सर लंच,,,,(वेटर बोला और उसकी आवाज सुनते ही आराधना के होश उड़ गए संजू की तरफ घबराहट से देखने लगी लेकिन संजू एकदम निश्चिंत बना हुआ था और वह बोला,,,)

बाथरूम क अंदर

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हां दरवाजा खुला है अंदर आकर टेबल पर रख दो,,,

(यह सुनते ही आराधना के होश उड़ गए क्योंकि वह अपनी बेटे को लंड पर बैठी हुई थी और उसका लंड पूरी तरह से उसकी चूत की गहराई नाप रहा था उसका नंगा बदन उसकी नंगी गांड सब कुछ दरवाजे के ठीक सामने ही थी वह जानती थी कि वेटर जैसे ही अंदर आएगा उसकी नजर उसके नंगे बदन पर ही पड़ेगी और उसकी चूत में घुसा हुआ उसके बेटे का लंड उसे दिखाई देगा समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या सोचेगा इस दृश्य को देखकर,,,,, जहां एक तरफ उसे घबराहट और चिंता हो रही थी वहीं दूसरी तरफ उसकी उत्सुकता भी बढ़ती जा रही थी किसी गैर मर्द को अपना नंगा बदन दिखाने में और अपनी चूत में लंड डाले हुए उसके लंड पर जोर जोर से कुदते हुए,,,, आराधना के बदन में कसमसाहट बढ़ रही थी जहां पर संजू ने उस वेटर को बेझिझक अंदर आने का न्योता दे दिया था वहीं दूसरी तरफ अपनी मां को लगातार अपने लंड पर कुदने के लिए बोल भी दिया था,,, और लगातार उसके मुख से सिसकारी भी निकलने के लिए बोला था वह देखना चाहता था कि इस तरह की गर्माहट भरी आवाज सुनकर उस वेटर की क्या हालत होती है,,,,,, संजू की आज्ञा पाकर उस वेटर ने एक हाथ में लंच लिए हुए दूसरे हाथ से दरवाजा को खोल ही दिया,,,,, और जैसे ही दरवाजा खोला उसने अपनी आंखों के सामने का मंजर देखकर एकदम से जड़वंत हो गया,,,, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और मुंह खुला का खुला रह गया शायद जिंदगी में उसने इस तरह का दृश्य कभी देखा नहीं था,,,, गेस्ट हाउस में काम करने पर भी इस तरह का नजारा उसकी आंखों के सामने कभी आया नहीं था जिस तरह का नजारा आज उसने अपनी आंखों से देख रहा था उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसकी आंखों के सामने एक बेहद खूबसूरत औरत एकदम नंगी होकर एक मोटे तगड़े लंड पर खोज रही थी और वह लैंड अपना चेहरा और लंबा था कि जिसे देखकर वेटर की आह निकल गई थी,,, और उसकी आंखों के सामने आराधना की चूत में वह मोटा लंबा लंड अंदर बाहर हो रहा था और लगातार उसके मुख से गरमा गरम सिसकारी की आवाज आ रही थी,,,, वेटर को तो कुछ समझ में नहीं आया कि वह क्या करें वह उसी तरह से खड़ा का खड़ा रह गया,,,।

बाथरूम में घुसते hi

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दूसरी तरफ संजू अपनी मां की गांड पर दोनों हाथ रख कर उसे जोर-जोर से दबाते हुए नीचे से धक्के लगा रहा था और आराधना भी अब बेझिझक उसे बेहतर के सामने ही अपनी गांड पटक रही थी हालांकि अभी तक आराधना ने उस वेटर से अपनी नजर नहीं मिलाई थी,,,,, आराधना एक अद्भुत एहसास और अनुभव से भर गई थी वह जानती थी कि उसके पीछे खड़ा होकर अनजान मर्द उसे नंगी देख रहा है और एक अनजान मर्द के सामने वह पहली बार नंगी हुई थी और वह भी चुदवाते हुए,,,,, कमरे की ऐसी भी उस वेटर की गर्मी को ठंडी नहीं कर पाई वह पूरी तरह से बेहाल हो गया था उसके माथे से पसीना टपकने लगा था संजीव जानबूझकर कुछ देर तक उस वेटर को यह दृश्यदिखा रहा था,,,,, आखिरकार हकलाहट भरे स्वर में वह वेटर बोला,,,।

ससससस,,सर आपका ऑर्डर,,,,,

थैंक्यू उस टेबल पर रख दो,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू जोर-जोर से अपनी कमर नीचे से ऊपर की तरफ जाने लगा उसे वेटर को जांघ से जांघ टकराने की आवाज एकदम साफ सुनाई दे रही थी और लगातार आराधना के मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट रही थी,,,।)

बाथरूम में आराधना

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सहहहह सहहहरह आहहहहह मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है,,,आहहहहहह आहहहहहह

और जोर से उछल मेरी रंडी मेरे लंड को अपनी चूत में ले‌ ले मादरचोद,,,,।

(इस तरह की गंदी बातें और गर्म सिसकारियो की आवाज को सुनकर उस वेटर की हालत खराब होती जा रही थी उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,, वह खाना को टेबल पर रखते रखते आराधना की तरफ भी देख रहा था शायद उसने जिंदगी में इतनी खूबसूरत और गोरी औरत नहीं देखा था और वह भी एकदम नंगी और वह भी चुदवाते हुए आराधना की नंगी जवानी का उस वॅटर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा था,,, संजू ने साफ तौर पर उसके पेंट के आगे वाला भाग देखा था जो कि पूरी तरह से खड़ा हो चुका था,,,,, संजू जानबूझकर उस वेटर की आंखों के सामने ही अपनी मां की बड़ी बड़ी चूची पकड़कर जोर-जोर से दबाते हुए चोद रहा था,,,, वह बेटर भी एकदम हैरान था कि उसकी आंखों के सामने ही बेझिझक एक औरत चुदवा रही थी और एक लड़का उसे चोद रहा था,,,,।

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आराधना पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी गेस्ट हाउस में आने की ख्वाहिश उसके बेटे ने पूरी कर दिया था लेकिन एक नया ही नाटक इसमें शुरू हो गया था अनजान मर्द को चुदवाते हुए दिखाने का जिसके लिए आराधना तैयार नहीं थे लेकिन अब उसे बहुत मजा आ रहा था एक अद्भुत और अजीब किस्म की खुशी उसके तन बदन में मदहोशी भर रही थी,,,, आराधना के चेहरे पर मस्ती के साथ-साथ उत्तेजना छाई हुई थी उसके इलाज लाल होठ खुले हुए थे और गरी गरी सांसद रही थी आंखों में मदहोशी और खुमारी दोनों छाई हुई थी और मदहोशी से भरी आंखों से वह उस वेटर की तरफ देखी तो वेटर की हालत एकदम से खराब हो गई,,, आराधना बिना शर्माए उस बेटर की आंखों के सामने ही अपनी बड़ी बड़ी गांड को अपने बेटे के लंड पर पटक रही थी,,,,

लेकिन अब समय आ गया था उस वेटर को वहां से दफा करने का इसलिए संजू बोला,,,,

अब तुम जा सकते हो और दरवाजे बंद कर देना,,,

जी सर,,,(वह वेटर दोनों हाथ अपने पेंट के आगे वाले भाग पर रखकर बोला उसका जाने का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था अपनी आंखों के सामने अद्भुत कामलीला को देख रहा था लेकिन फिर भी उसे जाना था क्योंकि चाह कर भी वह खड़ा रह नहीं सकता था,,,, अपने मन की इच्छाओ का गला घोट कर वह वेटर कमरे से बाहर चला गया और जाते जाते एक नजर फिर से आराधना की मदमस्त गांड पर डालकर दरवाजे को बंद कर दिया और जैसे ही वह गया आराधना एकदम से अपनी रुकी हुई सांस को वापस लेते हुए बोली,,,।

बाथरूम में माँ बेटे

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बाप रे संजू तू तो मुझे मार ही डालेगा,,,

कैसा लगा मेरी रानी एक अनजान मर्द के सामने लंदन लेते हुए,,,,

सच में मुझे बहुत घबराहट भी हो रही थी लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था साले की हालत खराब हो गई थी,,,

उसकी पेंट के आगे वाला भाग देखी पूरा खड़ा का खड़ा था,,, अब देखना बाथरूम में जाकर ही लाने के बाद ही शांत होगा,,,, बस मेरी रानी अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है बहुत देर से अपने आप को काबू में किए हुए हुं,,(और इतना कहने के साथ ही संजू पलंग पर लेटे हुए हैं अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया और तुरंत पलटी मार लिया हालांकि इस दौरान भी उसका लंड उसकी मां की चूत में घुसा हुआ था अब आराधना नीचे थी और संजू पर था इस तरह से संजू पूरी तरह से इस खेल की बागडोर अपने हाथ में लेकर मनमानी कर सकता था और यही करने लगा वह जोर जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया आराधना की सांसे अटक अटक जा रही थी संजू के धक्के उसका प्रहार इतनी तेज था कि आराधना पीछे की तरफ खसक जा रही थी एक बार फिर से दोनों झड़ गए,,,,

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कुछ देर शांत रहने के बाद दोनों लंच करने लगे,,, दीवार पर टंगी घड़ी में 4:30 का समय हो चुका था उन दोनों के पास केवल आधा घंटा ही बचा था दोनों खाना खा चुके थे लेकिन इस आधे घंटे का उपयोग वह लोग अच्छे तरीके से करना चाहते थे आराधना को लगता नहीं था कि इस बार संजू उसकी चूत में लंड डाल पाएगा,,,, इसलिए वह बोली,,,

संजू आप हमें नहा लेना चाहिए वैसे भी कमरे का बाथरूम बहुत फर्स्ट क्लास है,,,, सावर लगा हुआ है नहाने में मजा आ जाएगा,,,,

तो चलो फिर देर किस बात की है आधे घंटे का अच्छे से समय बिताएंगे,,,।

(और इतना कहने के साथ ही संजू अपनी मां का हाथ पकड़ कर बाथरूम में लेकर चला गया दोनों अभी भी पूरी तरह से नंगे थे बाथरूम के अंदर पहुंचते ही आराधना बैठकर पेशाब करने लगे और संजू भी अपनी मां के बगल में ही खड़ा होकर पेशाब करने लगा एक दूसरे को पेशाब करते हुए देखकर दोनों के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी लेकिन आराधना को यकीन नहीं हो रहा था कि उसके बेटे का लंड फिर से खड़ा हो जाएगा इसलिए वह,,,, पेशाब करने के बाद खड़ी हुई और सावर चालू कर दी दोनों मां-बेटे शावर के नीचे नहाना शुरू कर दिया ठंडा ठंडा पानी बदन पर गिरने लगा लेकिन संजू के तन बदन में अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी की आग फिर से से लगने लगी बार-बार आराधना की गांड संजू के लंड से टकरा जा रही थी जिसके चलते संजू के लंड में फिर से जान आने लगी और देखते ही देखते संजय का लंड फिर से अपनी औकात में आ गया और इस बार संजू अपनी मां को अपनी बाहों में लेकर उसकी एक टांग ऊपर उठाया और अपनी कमर पर लपेट कर उसकी गीली चूत में डालकर चोदना शुरू कर दिया,,, संजू अपनी मां को हर तरीके से चोद रहा था पूरे बाथरूम में घुमा घुमा कर चुदाई कर रहा था कभी टॉयलेट पोट के ऊपर बैठकर उसे अपने लंड पर बैठा लेता तो कभी टॉयलेट पोट पर उसके पैर रखकर उसे झुकाकर पीछे से चोदने लगता हर तरीके से आराधना को मस्त कर रहा था आराधना भी अपने बेटे की ताकत मस्त हो चुकी थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका बेटा फिर से उसकी चुदाई कर सकता है लेकिन जबरदस्ती चुदाई कर रहा था देखते ही देखते दोनों एक बार फिर से चरम सुख को प्राप्त कर लिए हो फिर 5:00 बजने से पहले ही अपने कपड़े पहन कर वह लोग कमरे से बाहर निकल गए,,,।

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गेस्ट हाउस का पूरा स्टाफ दोनों को ही देख रहा था क्योंकि लंच लेकर आने वाला वेटर अपने साथियों को आराधना के बारे में सब कुछ बता दिया था और उसकी बात सुनकर सब का लैंड खड़ा हो गया था लेकिन सबके बीच में से आराधना का हाथ थामे हुए संजू उसे गेस्ट हाउस से बाहर लेकर आया और स्कूटी पर बैठा कर अपने घर की ओर निकल गया,,,,, आज आराधना का जन्मदिन था और आराधना के शुभ अवसर पर संजीव ने अपनी मां के इस जन्मदिन को पूरी तरह से यादगार बना दिया था जैसा कि एक औरत के जीवन में सुहागरात का महत्व होता है वैसे ही आराधना के जीवन में उसके इस जन्मदिन का बहुत ज्यादा महत्व था वह इस जन्मदिन को कभी भूलने वाली नहीं थी,,,,

रास्ते में बाजार में संजू घर के लिए खाना पैक करवाया और एक बड़ा सा केक भी पैक करवा लिया क्योंकि घर पर केक भी काटना था,,,, कुछ ही देर में दोनों घर पर पहुंच गए लेकिन घर पर पहुंचते-पहुंचते 8:00 बज चुके थे मोहिनी इंतजार कर कर के थक चुकी थी उसे समझ नहीं आ रहा कि दोनों कहां गए लेकिन स्कूटी की आवाज घर के बाहर आते ही वह दौड़ कर दरवाजे पर गई और दरवाजा खोलकर देखने लगी तो संजू और अपनी मां को देखकर बहुत खुश हो गई,,,, आराधना घर में प्रवेश करते हुए एकदम थकी हुई लग रही थी तो वह सीधा बाथरूम में चली गई फ्रेश होने के लिए और मोहिनी उसे धीरे से बोली,,,।

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क्या भाई कुछ हुआ क्या बताना,,,

मैं तुझे बोला था ना बताऊंगा नहीं लेकिन तुझे दिखाऊंगा रात को 12:00 बजे जागती रहना मैं आज तुझे जबरदस्त नजारा दिखाने वाला हूं जिसे देख कर तेरे होश उड़ जाएंगे,,,।
 
आज का दिन आराधना कभी भुलने वाली नहीं थी,,, वो कभी सपने मैं भी नहीं सोची थी कि वह अपना जन्मदिन इस तरह से मनाएगी,,,, अद्भुत सुख प्राप्त हुआ था उसे एक रंडी बनकर गेस्ट हाउस में जाकर चुदवाने में जो मजा था वह शायद घर पर भी नहीं मिला था लेकिन वह अपने बेटे के साथ संपूर्ण सुख की अनुभूति करती थी एक असली मर्द के साथ एक खूबसूरत औरत ही शोभा देती है या यूं कह लो कि एक खूबसूरत जवानी से भरी हुई औरत की बेलगाम जवानी पर एक असली मर्द ही काबू पा सकता है और वह था सिर्फ संजू जिसने गेस्ट हाउस में अपनी मां की तीन-तीन बार चुदाई करके उसे संपूर्ण सुख की अनुभूति कराया था,,,, आराधना को ऐसा ही लगा था कि उसका बेटा गेस्ट हाउस में एक ही बार करके वापस आ जाएगा लेकिन वह हैरान थी क्योंकि उसके बेटे ने 1:00 से 5:00 बजे तक गेस्ट हाउस का कमरा बुक करके रखा था 4 घंटे में उसने जो सुख उसे दिया वह कभी जिंदगी में भूलने वाली नहीं थी और सबसे ज्यादा उत्तेजना आत्मक पल उसे वह लगा था जब उसके बेटे ने अपने लंड पर उसे चढ़ा कर उसकी बड़ी बड़ी गांड पर दोनों हाथ रख कर उसे कुदने के लिए बोला था और वेटर को उसी समय कमरे में आने की इजाजत भी दे दिया था,,,,,

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उस समय आराधना शर्म से पानी-पानी हुई जा रही थी लेकिन अपने बदन में अद्भुत उत्तेजना का संचार भी महसूस कर रही थी एक अनजान मर्द के सामने एक जवान लड़के से चुदवाने में जो मजा और आनंद उसे प्राप्त हुआ था वह कभी सपने में भी सोच नहीं सकती थी उससे वेटर की निगाहों को अच्छी तरह से देख रही थी जो कि बार-बार उस के नंगे बदन पर घूम रही थी,,,,,,, संजू और उसके पति को छोड़कर आज तक किसी ने उसके नंगे बदन को अपनी आंखों से देख नहीं पाया था लेकिन संजू की जीद के आगे वह मजबूर हो चुकी थी अपने नंगे बदन को एक अनजान मर्द को दिखाने के लिए और वह भी ऐसे हालात में जब उसकी चूत में पूरा लंड घुसा हुआ था आराधना को भी निश्चित तौर पर मालूम था कि वह वेटर उसकी नंगी जवानी देखने के बाद जरूर बाथरूम में जाकर अपने हाथ से अपनी गर्मी शांत किया होगा,,,,।

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आराधना फ्रेश होकर बाथरूम से बाहर आ गई थी अंधेरा हो चुका था खाना बनाने की चिंता बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि होटल से खाने के लिए लेकर आए थे थोड़ी ही देर में मोहिनी ने एक टेबल पर अच्छे से केक रखकर सजा दी,,,, और करीब करीब 9:00 बजे आराधना अच्छे से सज धज के मोमबत्ती को अपनी फुक से बुझाकर केक काटी और सबसे पहले केक के टुकड़े को अपनी बेटी मोहिनी के मुंह में डाल दी मोहिनी भी दांतों से हल्का सा केक काटकर खाने लगी और फिर आराधना उसके एक के टुकड़े को संजू को खिलाने लगी तो संजू अपनी मां के हाथ से उसके एक के टुकड़े को लेकर अपनी मां को खिलाने लगा और उसकी मां मुस्कुराते हुए केक को खाने लगी,,,, तीनों बहुत खुश नजर आ रहे थे लेकिन मोहिनी की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी,,, वह इस बात को सोच कर हैरान हो जा रही थी कि आखिरकार उसका भाई रात के 12:00 बजे के बाद क्या दिखाने वाला है,,,,

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थोड़ी ही देर में होटल से लाया हुआ खाना तीनों खाने लगे खाना खाते खाते 10:30 बज गया था मोहिनी इस बीच वह दोनों कहां घूमने गए थे इस बारे में पूछती रही और संजू बात को घुमाते हुए उसका ध्यान भटका रहा था लेकिन जब जब मोहिनी दिन भर वह दोनों क्या किए ऐसा पूछती थी तब तब आराधना के चेहरे पर शर्म की लालिमा छा जाती थी उसका चेहरा सुर्ख लाल हो जाता था और वह अपनी नजरों को शर्मा कर नीचे झुका देती थी आखिरकार वह अपनी बेटी की बातों का जवाब किस तरह से देती क्योंकि दिन भर वह अपने बेटे के साथ गेस्ट हाउस के कमरे में थी जहां पर सिर्फ एक रंडी जाती है एक धंधे वाली औरत जाती है,,,,,, लेकिन फिर भी संजू की बातों से बात आई गई हो गई थी अगर इस बात का आराधना को जरा सा भी आभास होता कि उसकी बेटी खुद यह चाहती है कि उसकी मां अपने ही बेटे से चुदवाया तो वह आज के सारे कार्यक्रम को अपने मुंह से अपनी बेटी को सुना देते कि कैसे उसके बेटे ने गेस्ट हाउस के कमरे में उसकी प्यास बुझा या,,,,,

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खाना खाने के बाद इधर उधर की बातें करते हुए 11:00 बज गए थे और फिर आराधना संजू को इशारा करके अपने कमरे में चली गई थी,,, दूसरी तरफ संजू और मोहिनी दोनों अपने कमरे में चले गए थे,,,, कमरे में जाते ही मोहिनी संजू से बोली,,,।

भाई मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि तू मुझे 12:00 बजे के बाद क्या दिखाना चाहता है और वह भी मम्मी के कमरे में,,,

वह तो तुझे 12:00 बजने के बाद ही पता चलेगा,,,,

और अगर मुझे नींद आ गई तब क्या करेगा,,,

मैं तुझे सोने ही नहीं दूंगा,,,,

तो मुझे जगाने के लिए क्या करेगा भाई,,,?(मोहिनी मुस्कुराते हुए बोली क्योंकि मोहिनी अच्छी तरह से समझ रही थी कि उसका भाई क्या कहना चाह रहा है)

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मैं क्या करूंगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही अपने पेंट की बटन खोलने लगा और अगले ही पल अपने खड़े लंड को बाहर निकालकर हाथ में लेकर हिलाते हुए मोहिनी की तरफ आगे बढ़ाकर बोला) तुझे यह कोन खिलाऊंगा तभी तु जागती रहेगी,,,,।

(अपने भाई की हरकत को देखकर मोहिनी बहुत खुश हुई और अगले ही पल वह अपना हाथ लगाए बिना ही अपने लाल-लाल होठों को अपने भाई के लंड के करीब लेकर गई और बेहद उत्तेजना आत्मक तरीके से अपने लाल-लाल होठों को अपने भाई के लंड के सुपाड़े पर रखकर होठ से ही दबा दी,,, मोहिनी की इस कामुक हरकत पर संजू के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फुटने लगी और वह तुरंत अपना हाथ मोहिनी के सर पर रख कर उस पर दबाव बनाते हुए मोहिनी को पूरा का पूरा अंदर लेने के लिए विवश करने लगा और अगले ही पल मोहिनी भी अपने भाई की बात मानते हुए आइसक्रीम कौन की तरह मोटे और लंबे लंड को पूरा का पूरा अपने लाल-लाल होठों के बीच से लेते हुए गले की गहराई तक पहुंचा दी,,,,, संजू बहुत खुश हो रहा था मजा मोहिनी को मिल रहा था लेकिन इस बात की संतुष्टि संजू को थी कि उसकी बहन उसके लंड को मुंह में लेकर चूसने अपनी ही मां के लिए तैयार कर रही है,,,,

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संजू पागल होने लगा क्योंकि मोहिनी को लंड चूसने की प्रक्रिया पूरी तरह से आती थी वह इस काम में पूरी तरह से माहिर हो चुकी थी इसलिए मोहिनी रह रह कर अपने होठों का दबाव लंड पर बढ़ा देती तो कभी जीभ के किनारी से लंड की उभरी हुई नशो को कुरेद देती,,, संजू को अद्भुत सुख प्राप्त हो रहा था मोहिनी पूरी तरह से अपने भाई के जवानी के केंद्र बिंदु पर छाई हुई थी,,,, मोहिनी की चूत काफी लसलसी हो चुकी थी,,,,,, बार-बार उसकी गुलाबी छेद पानी छोड़ रही थी,,, मोहिनी अपनी कार्यक्षमता और काम शक्ति का प्रदर्शन करते हुए अपने भाई के लंड को पूरी तरह से टन टना दी थी,,,, अब संजू से सब्र करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था वह तुरंत अपनी बहन को खड़ी किया और खुद घुटनों के बल बैठ गया और तुरंत उसकी सलवार को एक झटके से खोले बिना ही नीचे खींच दिया उसकी सलवार पढ़ते पढ़ते रह गई थी इस कदर संजू में उत्तेजना का संचार हो चुका था,,,, मोहिनी भी अपने भाई को रोक नहीं पाई और अगले ही पल संजू उसकी चड्डी को नीचे खींचकर उसके गुलाबी छेद पर अपनी जीभ रख दिया और उसे चाटना शुरू कर दिया,,,, संजू का अपनी मां के पास जाने से पहले का यह अभ्यास था जिसमें वह किसी भी तरह से असफल नहीं होना चाहता था आज वह मोहिनी की आंखों के सामने अपनी मां की जबरदस्त चुदाई करना चाहता था और मोहिनी को दिखा देना चाहता था कि उसकी मर्दानगी के आगे उसकी मां भी घुटने टेक दि है,,,,

मोहिनी और संजू

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मोहिनी की मदहोश जवानी अंगड़ाई ले रही थी और अगले ही पल संजू उसे पीठ के बल लेटा कर दोनों टांगों को फैला दिया और फिर अपने आप को उसके कोमल अंग में उतारकर कमर हिलाना शुरू कर,,,, मोहिनी पागलों की तरह सिसकारी देना चाहती थी लेकिन वह नहीं चाहती थी कि उसकी गर्मागर्म सिसकारी की आवाज उसकी मां के कानों में जाए इसलिए वह अपने आप पर बहुत काबू किए हुए थी अपने भाई के लंड को वह अपनी चूत की गहराई तक महसूस कर रही थी,,,, हर धक्के के साथ उसे स्वर्ग का अनुभव रहा था वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी मदहोशी के सागर में वह पूरी तरह से डूबती चली जा रही थी और थोड़ी ही देर बाद मोहिनी का बदन अकड़ में लगा वह चरम सुख के बेहद करीब पहुंच गई थी यह देखकर संजू उसे अपनी बाहों में भर लिया,,,,,, मोहिनी की कसी हुई चूत हमेशा से संजू के लंड का रस निचोड़ लेती थी,,, संजु अपनी बहन की गुलाबी चूत का पूरी तरह से दीवाना था एक महीने की ही चूत थी जिसे वह जब चाहे तब ले सकता था जी भर कर ले सकता था बाकी अभी भी वह मोहिनी की नजर से बच कर ही अपनी मां की चुदाई करता था वैसे तो मोहिनी को इस बात का पता चल भी जाता तो अभी संजू के लिए कोई दिक्कत खड़ी नहीं होती लेकिन संजू के मन में कुछ और चल रहा था वह मोहिनी को अपने और अपनी मां के बीच के रिश्ते के बारे में कुछ दिखा कर आश्चर्यचकित कर देना चाहता था,,,, और इसी लिए इस समय वह अपनी बहन को बिना कुछ बताएं वह उसकी चुदाई कर रहा था,,, वैसे संजू को चुदाई करने की लिए उकसाने वाली उसकी बहन ही थी जिसका इस समय दोनों भरपूर आनंद ले रहे थे,,,, संजू जैसे मर्दाना लंड को अपनी चूत में पाकर मोहिनी पूरी तरह से खेल चुकी थी और भी ज्यादा खूबसूरत और जवान लगने लगी थी उसके अंगों में अद्भुत उभार आना शुरू हो गया था खास करके उसके संतरे धीरे-धीरे अपने आकार में आ रहे थे और नितंबों का आकार तो एकदम जानलेवा होता जा रहा था संजू इस बात से पूरी तरह से अपने आप पर गर्व महसूस करता था कि इतनी खूबसूरत लड़की उससे रोज चुदवाती है,,,,, हालांकि वह इस बात से भी इनकार नहीं कर सकता था कि दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत जो कि उसकी मां थी वह भी उससे रोज चुदवाती थी और अगर उसे अपनी मां और बहन दोनों की चूत में सबसे ज्यादा नंबर देना हो तो वह बेझिझक अपनी मां की चूत को ही सबसे ज्यादा नंबर देगा,,, क्योंकि मोहिनी तो फिर भी अभी जवानी के दौर में कदम रखी थी लेकिन उसकी मां तो जवानी के उस उम्र को पार कर आई थी और दो-दो जवान बच्चों की मां होने के बावजूद भी अपने बदन को इस तरह से संभाल कर रखी थी कि जवान लड़कियां भी उसकी जवानी के आगे पानी भरती नजर आती थी उसकी चूत अभी भी मोहिनी की चूत से भी ज्यादा कसी हुई थी जिसे चोदने में संजू को अद्भुत सुख का अनुभव होता था,,,,, अपनी बहन की जवानी की अकड़ देखकर संजू को आभास हो गया था उसकी बहन पानी छोड़ने वाली है इसलिए वह अपनी बहन को पूरी तरह से अपनी बाहों में कस लिया था

और फिर पूरा जी जान लगाकर धक्के पर धक्का लगाना शुरू कर दिया,,, और कुछ ही देर में वह अपनी बहन की चूत में अपने गर्म लावा उड़ेलने लगा,,,,

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सब कुछ शांत हो चुका था 12:00 बजने वाले थे संजू बार-बार दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ देख रहा था और मोहिनी भी घड़ी पर ही नजर टिकाई हुए थे वह भी देखना चाहती थी कि 12:00 बजे के बाद उसका भाई क्या दिखाने वाला है,,,,,, देखते ही देखते दीवार पर टंगी घड़ी में दोनों सुईया 12 बजाते हुए अपने निर्धारित स्थल पर पहुंच गई संजू का दिल जोरों से धड़क रहा था साथ ही मोहिनी के दिल की धड़कन भी बढ़ती जा रही थी संजू को अपनी जगह से उठता हुआ मोहिनी से बोला,,,।

देख मोहिनी मैं मम्मी के कमरे में जा रहा हूं दरवाजा तो मैं बंद कर दूंगा लेकिन दरवाजे की दरार में से तुझे कमरे के अंदर का सब कुछ दिखाई देगा मैं ट्यूब लाइट बंद नहीं करूंगा ताकि तुझे देखने में आसानी हो,,,

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(इतना सुनते ही मोहिनी का रोम-रोम एकदम से पुलकित हो गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या होने वाला है वह यह बात बिल्कुल भी नहीं जानती थी कि उसकी मां और उसके बारे में सब कुछ हो चुका है दोनों के बीच सारे संबंध स्थापित हो चुका है इस नए रिश्ते से मोहिनी पूरी तरह से अनजान थी इसलिए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका भाई क्या कह रहा है कुछ पल के लिए तो उसे अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ इसलिए वह अपनी शंका दूर करते हुए अपने भाई से बोली,,,)

तू क्या कह रहा है भाई मैं कुछ समझ नहीं रही हूं,,,,

देख मेरी रानी तुझे समझाने का समय मेरे पास बिल्कुल भी नहीं है क्यों मैं तुझसे कहता हूं वैसा ही तू करती जा और उसके बाद ही करना तुझे वह देखने को मिलेगा जिसके बारे में तु कभी सोची भी नहीं थी ,,,,

ऐसा क्या दिखाने वाला है भाई तू,,,

चल तुझे दिखाता हूं,,, लेकिन संभाल कर बिल्कुल भी आवाज मत करना,,,

(और इतना कहने के साथ ही संजू चोर कदमों से अपने कमरे से बाहर निकला और धीरे से बिना आहट की अपनी बहन को भी कमरे से बाहर ले आया और फिर सीधा जाकर रसोई घर में से एक कटोरी ले आया जिसमें उसके हिस्से का केक पड़ा हुआ था केक को देखकर आश्चर्य जताते हुए मोहिनी बोली)

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इतनी रात को,,,,

अरे चुप,,(इशारे से मोहिनी को चुप रहने को कहा क्योंकि संजू बिल्कुल भी नहीं चाहता था कि उसकी बहन जाग रही है इस बारे में उसकी मां को पता चले वरना रात का सारा कार्यक्रम खराब हो जाएगा,,,, और फिर वह दरवाजे के करीब पहुंच गया अंदर ट्यूबलाइट जल रही थी जिसकी रोशनी दरवाजे की दरार में से साफ नजर आ रही थी वह मोहिनी को रसोई घर के पास रुके रहने का इशारा किया और इशारों में ही उसे बताया कि जब वह अंदर चले जाए तब धीरे से दरवाजे के पास चली आना,,,,, संजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां उसके लिए दरवाजा खुला छोड़ दी होगी इसलिए संजू बिना आवाज किए बिना दरवाजे पर दस्तक दे धीरे से दरवाजे को धक्का दिया तो दरवाजा अपने आप खुल गया या देखकर मोहिनी भी हैरान हो गई,,,, और फिर धीरे से संजू कमरे में दाखिल हुआ और दरवाजेके लिए बोला और फिर दरवाजे को बंद कर दिया,,,, दरवाजे को बंद करते समय वह एक नजर बिस्तर पर डाल दिया था जहां पर उसे उसकी मां पेट के बल लेटी हुई नजर आ रही थी जिससे उसकी मदमस्त कर देने वाली कसी गांड साड़ी में कैद होने के बावजूद भी एकदम उभरकर नजर आ रही थी,,,, संजू दरवाजा बंद करके धीरे से कड़ी लगा दिया क्योंकि वह जानता था कि दरवाजे की दरार में से उसकी बहन को सब कुछ नजर आएगा और वह धीरे से बिस्तर पर आकर बैठ गया,,,बिस्तर पर देखते ही आराधना जो कि जाग रही थी वह ऊतेजना से कसमसाने लगी और धड़कते दिल के साथ मोहिनी चोर कदमों से चलते हुए अपनी मां के कमरे के दरवाजे के पास आ गई और दरवाजे की दरार में से अंदर देखने का प्रयास करने लगी,,,।
 
मोहिनी का दिल बड़े जोड़े से धड़क रहा था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उसका भाई उसकी मां के कमरे में आधी रात को क्या करने गया है वैसे तो उसे थोड़ा बहुत शक हो रहा था कि,,, इतनी रात को एक जवान लड़का एक खूबसूरत औरत के कमरे में क्या करने जाएगा लेकिन फिर भी उसे इस बात का,,, आशंका बिल्कुल भी नहीं था कि उसके भाई और उसकी मां के बीच चल रहा है उसे अभी भी ऐसा ही लग रहा था कि दोनों के बीच किसी भी प्रकार का संबंध नहीं है सिवाय मां बेटे के और मोहिनी यही चाहती थी कि दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो जाए ताकि उसकी मां बाहर अपनी इज्जत किसी और को ना सौंप दें क्योंकि उसे इस बात का डर था कि बाहर अगर ऐसा हो गया तो उसके परिवार के साथ साथ उसकी मां का भी जीवन नर्क हो जाएगा,,,,, इस बात की उत्सुकता उसके मन में थी कि अंदर कमरे में क्या होने वाला है इसलिए वह दरवाजे की दरार में अपनी नजर टीका कर,,, कमरे के अंदर का नजारा देखने लगी ट्यूबलाइट की रोशनी में उसे सब कुछ साफ नजर आ रहा था इस बात की खुशी थी कि अंदर ट्यूब लाइट जल रही थी वरना उसे कुछ नजर नहीं आता उसे साफ दिखाई दे रहा था कि बिस्तर पर उसकी मां लेटी हुई थी और उसका भाई बिस्तर पर जाकर बैठ गया था उसके हाथ में केक वाला कटोरा भी था जिसे वह धीरे से टेबल पर रख दिया था,,,,।

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मोहिनी का दिल जोरों से धड़क रहा था कुछ देर पहले ही उसकी चूत में उसके भाई का मोटा लैंड जाकर धमाल मचा कर बाहर आया था इसलिए अभी भी उसे अपनी चूत की अंदरूनी दीवारों में अपने भाई के लंड की मोटाई महसूस हो रही थी जिसकी वजह से उसके बदन में उत्तेजना अभी भी बरकरार थी,,, मोहिनी अपने मन में यही सोच रही थी कि आगे क्या होने वाला है तभी उसे बिस्तर पर हलचल सी महसूस हुई और आराधना करवट लेकर पेट के बल लेट गई जिसकी वजह से,,,, उसकी मदमस्त उभरी हुई गांड ऊपर की तरफ हो गई जिस पर संजू की नजर पड़ते ही वासना की चमक उभरने लगी और वह अपने आप को रोक नहीं पाया हुआ अच्छी तरह से जानता था कि दरवाजे की दीवार में से उसकी बहन अंदर के इस नजारे को देख रही होगी और यही तो वह दिखाना चाहता था इसलिए संजू के होठों पर वासना भरी मुस्कान तैरने लगी,,, अगले ही पल वह अपने आप को रोक नहीं पाया और अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की उभरी हुई गांड पर रखकर उसे जोर से दबोच लिया जिससे आराधना के मुंह से हल्की सी आह निकल गई और इस नजारे को देखकर मोहिनी की तो आंखें फटी की फटी रह गई उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था वह अपनी आंखों को मल मल कर अंदर की तरफ के नजारे को देखने लगी,,,,,, वह अपने आप से ही बातें करते हुए बोली,,,।

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ये में क्या देख रही हूं,,, कहीं मैं सपना तो नहीं देख रही हूं मुझे तो अपनी आंखों पर भरोसा ही नहीं हो रहा है यह अंदर चल कर आ रहा है,,,,,

(मोहिनी का दिल जोरों से धड़क रहा था वह हैरान थे कि उसकी मां बिल्कुल भी संजु को रोक नहीं रही थी और संजू कहां तभी भी उसकी मां की गांड के ऊपर था संजू अपनी हथेली में जोर-जोर से अपनी मां की गांड को लेकर दबा रहा था या देखकर मोहिनी की दोनों टांगों के बीच सिरहन सी दौड़ने लगी और फिर मोहिनी अपने मन में सोचने लगी कि क्या यही उसका भाई दिखाना चाहता था इसके बारे में तो उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी अगर यही सही है तो यह तो बहुत ज्यादा सही है यही तो वह चाहती थी,,,, वह बड़े गौर से अंदर के दृश्य को देखने लगी,,, संजू अपनी मां की गांड को जोर जोर से मसल रहा था और आराधना अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी मोहिनी यह देखकर हो ज्यादा हैरान हो गई कि उसकी मां नजर उठाकर संजू की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी यह मुस्कुराहट मोहिनी के लिए किसी पहेली से बिल्कुल भी कम ही थी,,,, मोहिनी इस बात से हैरान थी कि अपने बेटे की इस तरह की गंदी हरकत के बावजूद भी हो कुछ बोल नहीं रही थी बल्कि मुस्कुरा रही थी ऐसा तो तभी होता है जब औरत और मर्द के बीच बहुत कुछ हो चुका होता है कहीं ऐसा तो नहीं कि उसकी भाभी और उसकी मां के बीच भी शारीरिक संबंध स्थापित हो गया हो जैसा कि उसके खुद के बीच ऐसा हो गया है अगर ऐसा ना होता तो उसकी मां उसका हाथ रख देती यू संजू भी आधी रात को अपनी मां के कमरे में जाने की हिम्मत ना करता और उसकी गांड पर हाथ रखकर दबाने की जरूरत भी ना करता तो यह सब क्या था यह सब क्या हो रहा है मोहिनी की सोच के बिल्कुल परे था,,,, फिर उसे अपने भाई की बात याद आई कि वह बड़े आत्मविश्वास से कह रहा था कि 12:00 बजे वह कुछ दिखाना चाहता है तो क्या वह पूरी तरह से इस बात से आश्वस्त था कि वह अपनी मां के साथ कुछ भी करेगा उसकी मां उसे कुछ नहीं बोलेगी,,,,,,, या फिर आज जन्मदिन के दिन भाई ने मां को पूरी तरह से अपने आत्मविश्वास में ले लिया है आखिरकार वह भी तो एक औरत है उनकी भी तो कोई जरूरत है महीनों से अपने पति से मिली नहीं है उनकी चूत में भी तो आज लगता होगा जैसा कि उसकी खुद की चूत में रोज रात को लगता था और उसी आपको बुझाने के लिए उसे अपने बेटे का सहारा लेना पड़ रहा है,,,,

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मोहिनी को अपने मन में उठ रहे किसी भी सवाल का जवाब ठीक तरह से मिल नहीं रहा था अपने मन में उठ रहे बवंडर को वह किसी भी हाल में दबा नहीं पा रही थी अपने प्रश्न के उत्तर को वह किसी से अब पूछ भी नहीं सकती थी और उसके प्रश्न का हल सिर्फ यही था कि वह चुपचाप अंदर के नजारे को देखती जाए और उसी नजारे में ही उसके प्रश्नों का उत्तर भी छिपा हुआ था इसीलिए अपने मन को शांत करके वह अंदर के नजारे को देखने लगी जो कि बेहद दिलचस्प बनता जा रहा था,,,,, अभी तक दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी वरना मोहिनी के कानों में इन दोनों की आवाज जरूर सुनाई देती मोहिनी बड़े गौर से देख रही थी उसकी मां अभी भी नजर उठाए संजू की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी और संजू की हथेली उसकी गदराई गांड की दोनों फांकों पर बारी-बारी से घूम रही थी,,,, मोहिनी का दिल जोरों से धड़क रहा था,,, मोहिनी को साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां के होठों पर लाल लाल लिपस्टिक लगी हुई थी जो कि खाते समय उसकी मां के होठों पर लिपस्टिक नहीं लगी हुई थी यह देख कर मोहिनी की आंखों में आश्चर्यजनक चमक रही थी वह समझ नहीं पा रही थी,,,, लेकिन इतना तो उसे समझ में आ रहा था कि संजू और उसकी मां के बीच जरूर कुछ चल रहा है और जरूर उसकी मां भी संजू का इंतजार कर रही होगी तभी तो संजू की आत्मविश्वास के साथ 12:00 बजे उसके कमरे में आराम से चला गया था और कमरे का दरवाजा भी खुला हुआ था उसमें कड़ी नहीं लगी थी अगर ऐसा कुछ भी ना होता तो उसकी मां दरवाजे की कड़ी लगाकर दरवाजा बंद करके सो रही होती लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था आराधना भी जाग रही थी,,,,,।
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तभी संजू नीचे की तरफ झुका और अपनी मां के लाल लाल होठों पर अपने होंठ रख दिया या देखकर मोहिनी के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी संजू अपनी मां के होठों पर चुंबन कर रहा था यह देख कर मोहिनी की चूत से पानी गिरने लगा पहली बार वह अपनी मां की कामलीला को देख रही थी जो कि अभी शुरुआत थी संजू के चुंबन का जवाब आराधना चुंबन से ही दे रही थी वह भी मदहोश होकर अपने बेटे के होंठ को अपने होंठ के बीच लेकर चूसना शुरू कर दी थी और संजू अपने हाथ का करतब दिखाता हुआ अपनी मां की गांड से खेल रहा था जो कि साड़ी के अंदर कैद होने के बावजूद भी अपना पूरा उभार दिखा रही थी,,,,,,,

देखते ही देखते संजू आराधना का चुंबन एकदम प्रगाढ होता जा रहा था जिसे देखकर मोहिनी मदहोश हुए जा रही थी,,,,, तभी दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई जो कि मोहिनी को एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,,

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तुम सोई नहीं थी मम्मी,,,

नहीं रे मुझे नींद कहां आ रही थी,,, तेरा ही इंतजार कर रही थी इसीलिए तो दरवाजा खुला छोड़ दी थी मुझे मालूम था कि तू जरूर आएगा,,,

ऐसा क्यों,,,,,?

क्योंकि,,,(ऐसा कहने के साथ ही आराधना बिस्तर पर से उठ कर बैठ गई और मुस्कुराते हुए बोली) आज मेरा जन्मदिन है और मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तू मेरे जन्मदिन को यादगार बना देगा,,,,

ओहहह मम्मी तुम कितनी अच्छी हो,,,(और इतना कहने के साथ ही बिस्तर पर बैठे-बैठे ही संजू अपनी मां को अपनी बाहों में लेकर उसके होठों पर फिर से अपने होठों को रखकर चुंबन करने लगा,,,,,(यह देखकर मोहिनी का गला सूखने लगा जिस तरह से दोनों बातें कर रहे थे मोहिनी को लगने लगा था कि इन दोनों के बीच पहले से ही कुछ चल रहा है बस उसे इस बात का अंदाजा नहीं था उसे उन दोनों पर शक नहीं हुआ था वरना एक ही दिन में कोई औरत इतना नहीं खुल सकती और वह भी अपने ही बेटे के साथ,,,, जहां मोहिनी अपने भाई और अपनी मां के बीच इस तरह के रिश्ते को देखकर हैरान थी वहीं इस रिश्ते से वह बहुत खुश हुई थी क्योंकि वह समझ गई थी कि घर में ही जब भूख मिटने लगे तो कोई बाहर क्यों मुंह मारता फिरेगा,,,, दोनों के बीच कुछ मिनट तक यह चुंबन चलता रहा इसके बाद आराधना अपने होठों को पीछे लेते हुए टेबल पर नजर डालते हुए बोली,,,)

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तूने अभी तक केक नहीं खाया,,,,

हां मैं संभाल कर रखा हूं क्योंकि इस केक को मैं नहीं तरीके से खाना चाहता हूं,,,,

नई तरीके से मैं कुछ समझी नहीं,,,

अरे बहुत जल्द ही समझ जाओगी,,,, लेकिन यह क्या आज की रात तो तुम्हारे जन्मदिन को स्पेशल बनाने वाली रात है और तुम हो कि अभी भी साड़ी पहन कर बैठी हो,,,)

तो क्या करूं साड़ी उतार कर नंगी हो जाऊं,,,

(अपनी मां की इस तरह की बात सुनकर मोहिनी का दिल धक से करके रह गया,, वह कभी सोची नहीं थी कि अपनी मां के मुंह से इस तरह की बातें सुनने को उसे मिलेंगे उसने आज तक अपनी मां के मुंह से गंदी बात कभी सपने में भी नहीं सुनी थी लेकिन आज तो हद हो गई थी अपनी मां की हरकत और उसके मुंह से गंदी बात को सुनकर मोहिनी के तन बदन में आग लग रही थी,,,, अब मोहिनी को एहसास हो गया कि मजा कुछ ज्यादा आने वाला है इसलिए उसकी भी उत्सुकता पड़ने लगी और वह उसी तरह से दीवार की दरार में आंख गड़ाए अंदर कमरे के दृश्य को जी भर कर देखने की कोशिश करने लगी अपनी मां की बात सुनकर संजू बोला,,,)

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नंगी तो मैं तुम्हें करूंगा मेरी रानी लेकिन,,,, पहले दूसरे कपड़े तो पहन लो,,,।

(अपने भाई की बात सुनकर एक बार फिर से मोहिनी आश्चर्यचकित हो गई दोनों मां-बेटे इस तरह से बातें कर रहे थे जैसे दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता ही नहीं बल्कि दोनों के बीच प्रेमी-प्रेमिका का रिश्ता हो बेझिझक संजू अपनी मां से गंदी बातें कर रहा था जिसे सुनकर मोहिनी के तन बदन में अजीब सी लहर उठ रही थी उसे समझते देर नहीं लगी कि या 1 दिन का खेल नहीं है बल्कि इसके लिए कई दिन पहले से प्रैक्टिस शुरू है,,,,,)

मैं कुछ समझी नहीं तु क्या बोल रहा है,,,!

अरे मम्मी उस दिन मॉल में से जो नाईट ड्रेस खरीद कर लाई हो उसे पहन लो किस दिन के लिए रखी हो आज बहुत ही स्पेशल दिन है आज मुझे भी तो पहन कर दिखाओ कैसी लगती हो,,,,

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अरे नहीं संजू आखिर तू उतार ही देगा तो पहनने से क्या फायदा,,,,

अरे मैं भी तो देखूं उस छोटी सी नाइट ड्रेस में तुम कैसी दिखती हो,,,, मुझे तो बहुत मजा आएगा तुम्हें छोटे से ड्रेस में देखने में,,,,

(दरवाजे के बाहर खड़ी हुई तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह दोनों कौन सी नाइट ड्रेस के बारे में बातें कर रहे हैं नाइट ड्रेस के बारे में मोहिनी को कुछ भी पता ही नहीं था इसलिए वह भी देखने के लिए उत्सुक हो गई कि ऐसा कौन सा नाइट ड्रेस दोनों मां-बेटे ने मिलकर खरीद लिया है जिसे पहनने के लिए संजु जिद कर रहा है,,,)

क्या संजू अभी थोड़ी देर में तो उतार कर नंगी कर देगा ऐसे ही मजा ले ले,,,,

वह तो मैं कैसे भी ले लूंगा लेकिन मैं भी देखना चाहता हूं,,,, छोटे से ट्रांसपेरेंट नाईट ड्रेस में तुम्हारी खूबसूरती का जलवा,,,

तु मानेगा नहीं,,,,

बिल्कुल भी नहीं मानूंगा आखिरकार आज तुम्हारा जन्मदिन है इस दिन को तो बेहतर बना लो,,,

बना तो लिया है गेस्ट हाउस में ले जाकर अब कितना बेहतरीन और यादगार बनाएगा,,,

(गेस्ट हाउस का नाम सुनते ही मोहिनी के जैसे कान के पास कोई ने बम फेंक दिया हो वह एकदम से चौंक गई गेस्ट हाउस यादगार जैसे शब्द सुनकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है लेकिन इतना तो शक होने लगा था कि गेस्ट हाउस जैसी जगह पर क्या होता है और शायद या दोनों गेस्ट हाउस में जाकर क्या करके आए हैं इस बात को सोचकर ही मोहिनी की चूत और भी ज्यादा गुलाबी होने लगी उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,)

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वह तो दिन यादगार था लेकिन रात को और भी ज्यादा रंगीन बनाना है,,,

तू सच में नहीं मानेगा,,,

बिल्कुल भी नहीं,,,, जाओ जल्दी से जाकर वह छोटी सी नाइट ड्रेस पहन लो,,,,

क्या संजू तू भी,,,,

(इतना कहकर वह बिस्तर से नीचे उतरने लगी वह भले ही अपने बेटे की बात पर आनाकानी कर रही थी लेकिन उसका भी मन अंदर से कर रहा था कि वह भी अपने बेटे के सामने छोटी सी नाइट ड्रेस को पहने वह भी देखना चाहती थी कि नाईट ड्रेस में उसका गोरा बदन कैसा लगता है उसके सुडौल बदन पर महंगी नाईट ड्रेस कैसी लगती है और यही मोहिनी भी देखना चाहती थी उसके दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी उसे इस बात का अहसास होने लगा था कि उसकी पैंटी एक बार फिर से गीली हो रही है,,,,, आराधना बिस्तर पर से नीचे उतरी और अलमारी खिलाफ जाकर खड़ी हो गई और अलमारी खोलने लगी मोहिनी को साफ नजर आ रहा था कि इस समय संजू की नजर उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर ही टिकी हुई थी मोहिनी इस बात से बिल्कुल भी अनजान नहीं थी कि संजू सबसे ज्यादा उत्तेजित गांड देखकर ही होता है और वह कई बार संजू को अपनी मां की गांड निहारते हुए देखी थी,,,, मोहिनी के तन बदन में कसमसाहट बढ़ती जा रही थी,, देखते ही देखते आराधना अलमारी में से एक छोटा सा पैकेट निकाली और अलमारी बंद करके उस पैकेट के खोलने लगी देखते-देखते पैकेट खोलने के बाद उसमें से एक बहुत ही खूबसूरत लाल रंग की नई ड्रेस निकालकर अपने हाथ में ले ली जिस पर नजर पड़ते हैं मोहिनी के अरमान भी मचलने लगे मोहिनी साफ देख पा रही थी कि वह नाइट्रिस पूरी तरह से पारदर्शी थी जिसमें से कुछ भी छुपने वाला नहीं था,,, अब तो मोहिनी की दिल की धड़कन और बढ़ने लगी वह भी अपनी मां को इस छोटे से नाईट ड्रेस में देखना चाहती थी उसके अंगों को देखना चाहती थी,,,, संजू बिस्तर पर बैठे-बैठे ही अपनी मां के हाथ से उस नाईट ड्रेस को ले लिया और उसे अपने हाथों से खोल कर हवा में लहराते हुए बोला,,,)

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वाह मम्मी इसमें तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगोगी अब बिल्कुल भी देर मत करो कपड़े उतार कर फेंक दो और इसे पहन लो,,,,

तुझे तो सब कुछ आसान लगता है पता है कितनी शर्म आती है तेरे सामने कपड़े उतारने में,,,,

ओहहह हो,,,, मेरी रानी को शर्म आती है,,,, अब ज्यादा नखरे मत करो जल्दी से उतारो,,,,

(मोहिनी अपने भाई के मुंह से अपनी मां के लिए रानी शब्द सुनकर पूरी तरह से चौक गई थी इस तरह के शब्दों का प्रयोग वह रात को उसके लिए भी कर चुका था जब उसका लंड उसकी चूत में घुसा हुआ होता था,,,,, मोहिनी अपनी मां की तरफ देख रही थी जो कि संजू की बात सुन कर भी मुस्कुरा रही थी और समझो की आंखों के सामने ही अपने कंधे पर से साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दी और अपनी ब्लाउज के बटन खोलने लगी यह देखकर मोहिनी की चूत काम रस फेंकने लगे क्योंकि उसे इस तरह के दृश्य अपनी आंखों से देखे जाने का बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी लेकिन जो कुछ भी उसकी आंखों के सामने दिख रहा था वह बिल्कुल हकीकत ही था दरवाजे की दरार में से मोहिनी को ट्यूबलाइट की सफेद रोशनी में सब कुछ नजर आ रहा था मोहिनी की मां बेझिझक बेशर्म बनकर अपने बेटे की आंखों के सामने ही अपने साड़ि को कंधे पर से नीचे गिरा कर अपने बेटे की आंखों के सामने ही अपने ब्लाउज के बटन खोल रही थी मोहिनी को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था,,,, लेकिन उसे पूरा विश्वास हो चुका था कि उसके भाई और उसकी मां के बीच जरूर बहुत कुछ चल रहा था देखते ही देखते आराधना अपने बेटे की आंखों के सामने एक-एक करके अपनी ब्लाउज के सारे बटन खोल दी और ब्लाउज के दोनों पल्ले अलग होते ही लाल रंग की ब्रा में कैद उसकी गोरी गोरी छोटी नजर आने लगी जोकि छोटी सी ब्रा में बेहद बड़ी लग रही थी आराधना अपनी बाहों में से अपने ब्लाउज को उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दी और साड़ी को खोलने लगी,,,, इस तरह के दृश्य को देखकर जो मोहिनी की हालत खराब हो गई जा रही थी तो संजू की तो पूछो मत संजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी और वह अपने हाथ से अपनी मां की साड़ी पकड़कर खींचने लगा और उसकी मां गोल गोल घूमने लगी उसे अपने बेटे की यह हरकत बहुत ही ज्यादा लुभावनी लग रही थी संजू दोनों हाथों से अपनी मां की साड़ी खींच रहा था और आराधना दोनों हाथों को ऊपर करके गोल गोल घूम कर मुस्कुरा रही थी और अगले ही पल उसकी साड़ी भी उसकी कमर से उतर गई,,,, संजू अपनी मां की साड़ी को नीचे जमीन पर फेंक दिया और इस समय आराधना कमरे के अंदर ट्यूबलाइट की रोशनी में पेटिकोट और ब्रा में खड़ी थी,,,, आराधना के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी दिन भर अपने बेटे के लंड को चूत में लेकर अपनी गर्मी शांत करने के बावजूद भी एक बार फिर से उसके बदन में अपने बेटे के लंड लेने की इच्छा बढ़ने लगी थी,,,,,

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वह अपने हाथों से पेटिकोट की डोरी खोलने लगी और पेटीकोट की डोरी खोलते ही वह अपने पेटीकोट को ढीला कर दी और तुरंत उसे अपनी कमर से छोड़ दी नीचे उसके कदमों में गिरने के लिए कदमों में पेटीकोट के गिरते ही वह पैरों का सहारा लेकर जोर से पेड़ मारी और पेटीकोट बिस्तर के नीचे चला गया,,,,,, मोहिनी की तो आंखें फटी की फटी रह गई थी अपनी मां के रूप लावण्य को देख कर,,, मोहिनी यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी मां बहुत खूबसूरत है लेकिन उसका बदन इतना तराशा हुआ होगा और वह भी इस उम्र में वह कभी सोची नहीं थी लेकिन इस समय अपनी मां को अपनी आंखों के सामने लाल रंग की ब्रा और पेंटी में देखकर मोहिनी की आंखें चकाचौंध हुए जा रही थी और यही हाल संजू का भी था मोहिनी साफ तौर पर देख पा रही थी कि अपनी मां को देखते हुए संजू पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को दबा रहा था,,,,, मोहिनी के लिए भी अदृश्य बेहद उन्माद से भरा हुआ था वह पहली बार देख रही थी कि कोई बेटा अपनी मां को इस हालत में देखकर अपने लंड को सहला रहा था अपने मन में उसे चोदने की कामना कर रहा था और जिस तरह का दोनों के बीच मेलजोल चल रहा था तालमेल बिछा हुआ था उसे देखते हुए बहुत ही जल्द दोनों बिस्तर पर संभोग सुख लेते हुए नजर आने वाले थे,,,,, अपनी मां को लाल रंग की ब्रा और पेंटी में देखकर संजू बोला,,,,)

वाह इसे कहते हैं खूबसूरती इसे कहते हैं खूबसूरत औरत जिसे देखकर ही लंड खड़ा हो जाए,,,,(पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को मसलते हुए बोला यह देखकर मोहिनी की चूत फुदकने लगी,,,, और आराधना अपने बेटे के मुझे अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर इतराने लगी,,,,, और अपना हाथ आगे बढ़ा कर बोली,,,)

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ला अब दे नाईट ड्रेस,,,,

अभी नहीं पहले ब्रा और पेंटी उतार कर नंगी तो हो जाओ,,,

नहीं बिल्कुल भी नहीं तेरे कहने पर मैं सब कुछ कर रही हूं लेकिन मुझे भी तभी मजा आता है जब तू अपने हाथ से मेरी ब्रा और पेंटी उतारता है,,,

ओहहहह यह बात है तो लो,,,(इतना कहने के साथ ही संजू नाईट ड्रेस को आगे बढ़ा दिया और उसकी मां मुस्कुराते में नई ड्रेस को ले ली लेकिन मोहिनी की तन बदन में आग लगा दी मोहिनी को अपने कान पर विश्वास नहीं हो रहा था उसकी मां अपने बेटे को ब्रा और पेंटी उतारने वाली बात बोल रही थी जिसका मतलब साफ था कि संजू बहुत बार अपनी मां की ब्रा और पेंटी उतार चुका है,,, यह सोचकर जहां उसके तन बदन में आग लग रही थी वहीं दूसरी तरफ अपने भाई पर उसे गुस्सा आ रहा था वह बाहर बार उसे अपनी मां को पटाने के लिए बोलती रही और उसका भाई ना जाने कब अपनी मां को पटाकर यहां तक पहुंच चुका था लेकिन उसे बताया नहीं था फिर वह अपने मन में सोचने लगी कि शायद इसीलिए नहीं बताया था वह मुझे दिखाना चाहता था और अपने वादे के मुताबिक वह मुझे दिखा भी रहा था,,, नाईट ड्रेस को अपने बेटे के हाथ से लेकर आराधना उसे पहनने लगी और यह देखकर संजू बार-बार दरवाजे की तरफ देख कर अपने लंड को पेंट के ऊपर से ही दबा रहा था क्योंकि वह जानता था कि मोहिनी दरवाजे के पीछे खड़ी होकर सब कुछ देख रही है अगले पल आराधना उस नाइट ड्रेस को पहनकर एकदम से स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी नाईट ड्रेस बहुत ही छोटी थी मुश्किल से उसकी पेंटी उसमें छुपा रही थी जांघों से भी ऊपर तक उसकी लंबाई थी और ऊपर से पारदर्शी थी जिसमें से कुछ भी छुपाने लायक नहीं था सब कुछ साफ नजर आ रहा था अपनी मां की खूबसूरती को देखकर संजू से रहा नहीं गया और वह बिस्तर से एकदम से खड़ा हो गया और अपनी मां के चारों तरफ चक्कर लगाते हुए बोला,,,)

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वाह कमाल हो गया मैं कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरी मां इस कपड़े में इतनी ज्यादा खूबसूरत लगेगी सच में मम्मी तुम तो फिल्मों की हीरोइन को भी पीछे छोड़ दिया इतनी खूबसूरत और इतनी सेक्सी लग रही हो कि पूछो मत इस हालत में अगर तुम्हें कोई देख ले तो उसका पानी जरूर अपने आप ही निकल जाए,,,,,(अपनी मां के चारों तरफ गोल गोल घूम करवा चक्कर लगाते हुए बोल रहा था और मोहिनी अपने भाई की बात सुनकर पूरी तरह से उसके पक्ष में थी क्योंकि वह भी अपनी आंखों से देख पा रही थी कि उसकी मां छोटे से नाईट ड्रेस में बहुत ही ज्यादा खूबसूरत लग रही थी किसी फिल्म की हीरोइन लग रही थी लेकिन आराधना थोड़ा शर्म आ रही थी क्योंकि पहली बार वह इस तरह का ड्रेस पहनी थी,,,,, अपने बेटे की बात सुनकर वह सिर्फ इतना बोली)

संजू मुझे शर्म आ रही है,,,,

ओहह‌ मेरी रानी शर्म शब्द तुम्हारे मुंह से बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता तुम अच्छी तरह से जानती हो कि हम दोनों सर में संस्कार रिश्ते नाते सब कुछ बहुत पीछे छोड़ आए हैं तुम्हें याद है ना आज गेस्ट हाउस में तुम कैसे अपनी बड़ी बड़ी गांड को मेरे लंड पर कुदा रही थी और उस वेटर की हालत खराब कर रही थी देखी नहीं थी उसका भी खड़ा हो गया था,,,,

बाप रे याद मत दिला संजू सब तेरी ही कारस्तानी थी मैं तो शर्म से मरी जा रही थी लेकिन जिस तरह के हालात थे मैं अपने आप को छुपा भी नहीं पा रही थी,,,,,

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लेकिन मजा बहुत आया था ना,,,

हारे तु सच कह रहा है मजा तो बहुत आया था,,,,

(अपनी मां और अपने भाई की बात सुनकर मोहिनी पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी अपनी मम्मी और अपने भाई की बात सुनकर उसे इतना तो समझ में आ गया था कि वह डर की मौजूदगी में भी वह दोनों चुदाई का खेल जारी रखे थे,,, यह सोचकर ही मोहिनी की तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसे अपनी कानों पर तो विश्वास नहीं हो रहा था लेकिन जो कुछ भी वह दोनों कह रहे थे उसमें सच्चाई थी,,, संजू अपनी मां को एकटक देखते हुए उसके दोनों हाथ की हथेली में अपनी हथेलियों को फंसा कर जोर से अपनी तरफ खींचा और उसकी मां एकदम से उसकी तरफ खींची चली आई और उसके सीने से लग गई संजू तुरंत उसे अपनी छाती से लगाकर उसकी ना राम-राम चुचियों को अपनी छाती पर महसूस करके तुरंत अपने दोनों हथेलियों को उसकी फली फूली गांड पर रखकर दबाना शुरू कर दिया जो कि लाल रंग की पैंटी में कैद थी,,,, और गर्दन पर गहरी सांस लेते हुए बोला,,)

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ओहहह मेरी रानी इस ड्रेस में तुम्हारा कुछ भी छुपा हुआ नहीं है सब कुछ दिख रहा है,,,

इसीलिए तो तुने लिया है,,,,,

मैं जानता था इसमें तुम बहुत खूबसूरत लगोगी,,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू एक बार फिर से अपने होंठ को अपनी मां के लाल लाल होंठ पर रख दिया और उसे चूसना शुरू कर दिया,,,,, आराधना भी पूरी तरह से मस्त हो गई और अपने बेटे का साथ देने लगी एक तरफ जहां संजू की दोनों हथेलियां आराधना की गांड पर थी तो दूसरी तरफ आराधना अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर संजू के पेंट का बटन खोल रही थी यह देख कर मोहिनी की चूत में चीटियां रेंगने लगी,,,, अपनी मां की हरकत को देखकर मोहिनी को समझते देर नहीं लगेगी उसकी सोच से भी कहीं ज्यादा आगे निकल गई है उसकी मां लेकिन फिर भी इस समय वह अपनी मां की हरकत का भी मजा ले रही थी,,,, वह अच्छी तरह से जानती थी कि एक संस्कारी औरत के अंदर एक रंडी औरत भी छुपी हुई होती है बस उसे निकालने आना चाहिए और वही काम संजीवनी किया था अपनी मां के रंडी पन को एकदम से बाहर निकाल कर उसे खुशी से जीना सिखाया था और यही तो मोहिनी भी चाहती थी इस बात को सोच कर वो खुश हो रही थी कि अच्छा हुआ कि कमरे के अंदर बाहर अपने मम्मी और अपने भाई को देख रही है अगर ऐसा ना होता तो उसकी मम्मी की जगह कोई गैर मर्द होता तब वह इस तरह के दृश्य को बर्दाश्त नहीं कर पाती,,,, आराधना बड़ी फुर्ती दिखा रही थी शायद उसे अपने बेटे के लैंड को मुंह में लेने की बहुत जल्दी थी और देखते ही देखते पेंट की बटन खोल कर चैन को नीचे सरका करवाना जींस को नीचे की तरफ करने लगी जिसे संजू खुद अपने हाथ का सहारा देकर उसे नीचे की तरफ खींचकर घुटनों में फंसा दिया था और अंडरवियर के ऊपर से ही आराधना अपने बेटे के लंड को पकड़कर दबाना शुरू कर दी जिस पर संजू के लंड का काम रस लगा हुआ था और अंडरवियर आगे से गीली हो चुकी थी,,,,, जो कि यह पूरी तरह से प्राकृतिक था क्योंकि जिस तरह से उत्तेजित अवस्था में औरत अपना काम रस छोड़ती है उसी तरह से मर्द भी उत्तेजित अवस्था में अपना काम रस छोड़ते हैं,,,,,

मोहिनी अपनी मां को कमलीलa dekhte huye

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पारदर्शी नाईट ड्रेस के ऊपर से ही संजू अपनी मां की खरबूजे जैसे चुचियों का मजा ले रहा था और आराधना चड्डी के ऊपर से अपने बेटे का लंड को जोर जोर से दबा रही थी उसे अपने बेटे का लंड दबाने में बहुत मजा आ रहा था,,,,, जिससे संजू की काम इच्छा बढ़ने लगी उसके मन में कुछ और चल रहा था इसलिए वहां अपनी मां के कंधों को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ दबाव देकर उसे नीचे बिठाने लगा आराधना को पता था कि उसका बेटा क्या करवाना चाहता है इसलिए आराधना धीरे-धीरे नीचे घुटनों के बल बैठ गई उसकी आंखों के सामने संजू की चड्डी में तना हुआ उसका मोटा तगड़ा लंड था जोकि खुंटे की तरह नजर आ रहा था,,,,, आराधना घुटनों के बल बैठी हुई थी उसकी बड़ी बड़ी गांड दरवाजे की तरफ थी जिसे देखकर खुद मोहिनी के मुंह में पानी आ रहा था लाल रंग की कसी हुई पेंटिं मैं अपनी मां की गदराई गांड देखकर मोहिनी की चूत पानी पानी हो रही थी,,,,, अपनी मां की अवस्था को देखकर मोहिनी को समझते देर नहीं लगी कि उसकी मां क्या करने वाली है और वह मुस्कुराते हुए अपने बेटे की आंखों में देखते हुए,,,, उसके अंडरवियर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे थोड़ा सा आगे की तरफ खींची क्योंकि वह जानती थी कि सीधे-सीधे अंडरवियर को नीचे की तरफ ले जाने से अंडरवियर नहीं निकल सकता क्योंकि संजू का लंड खुंटे की तरह आगे की तरफ तना हुआ था इसलिए आराधना अपने बेटे की अंडरवियर को आगे की तरफ खींच कर उसे लंड से बाहर निकाल कर नीचे की तरफ सरकाने लगी,,,, अपनी मां की इस बेशर्मी पर मोहिनी पूरी तरह से फिदा हो गई,,,,,,,, जिस तरह की हरकत आराधना निकली थी उसे देखते हुए मोहिनी को अपनी मां एक रंडी लग रही थी,,,,,

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मोहिनी का दिल जोरों से धड़क रहा था 12:00 बजे से शुरू हुआ या खेल 1:00 बजने को हो गया था लेकिन अभी इस खेल की शुरुआत भर हो रही थी,,,, अभी ना जाने कितने घंटे यहां खड़ा रहना होगा इस बात को सोचकर वह परेशान तो बिल्कुल भी नहीं हो रही थी क्योंकि उसकी भी नींद उड़ चुकी थी इस तरह के मादक दृश्य को देखकर जिसमें एक नशा भरा हुआ था आराधना अपने बेटे के लंड को अपने मुट्ठी में भरकर उसे मुट्ठीयाने लगी,,,, और अगले ही पल आइसक्रीम के कौन की तरह अपने बेटे के सुपाड़े को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,, यह नजारा देखकर मोहिनी की सांस अटक गई उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था कि सीधी-सादी संस्कारी औरत के अंदर एक रंडी भी छुपी हुई हो सकती है खास करके उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि सामने कमरे के अंदर रंडी पन दिखाने वाली कोई औरत नहीं उसकी मां थी,,,, संजू का लंड को ज्यादा ही लंबा और मोटा था इस बात से मोहिनी अनजान बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि हर रात वह उसे अपने मुंह और चूत दोनों में लेती थी इसीलिए वह बड़े गौर से कमरे के नजारे को देख रही थी,,,।

आराध्ना और संजू

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देखते ही देखते संजू की आंखें अपने आप बंद होने लगी और मोहिनी को इस बात का अहसास हो गया कि उसकी मां,, संजू के लंड को पूरा का पूरा मुंह में लेकर चूसने क्योंकि संजू के चेहरे के हाव-भाव तभी इस तरह से बदलते थे जब पूरा का पूरा लंड गले तक उतरता है यह देखकर मोहिनी एकदम हैरान हो जा रही थी क्योंकि अपनी मां के भोले चेहरे को देखकर उसे कभी यकीन ही नहीं हुआ कि उसकी मां इस तरह की भी हरकत कर सकती है,,,,,।

आहहहह आहहहह ओहहहह मम्मी आहहहहह बहुत मजा आ रहा है मम्मी,,,(अपनी कमर को आगे पीछे करके खिलाता हुआ) ओ मेरी रंडी बहुत मजा आ रहा है तू तो मेरी रानी है आज देखना तुझे कैसा चोदता हूं,,,,आहहहहह ईहहहह पूरा गले तक ले,,, हां ऐसे ही मेरी जान बहुत मजा दे रही है तू,,,ऊमममममम,,,,,,(संजू अद्भुत सुख प्राप्त करता हुआ दरवाजे की तरफ देख कर अपना हाथ ऊपर उठाकर अंगूठा दिखाते हुए मजा ले रहा था और फिर दरवाजे की तरफ अपनी उंगली से भी बनाकर अपने आप को विजेता घोषित कर रहा था वह अच्छी तरह से जानता था कि मोहिनी सब कुछ देख रही है और अपने भाई की हरकत देखकर मोहिनी की हालत खराब होती जा रही थी,,,,, आराधना की बड़ी बड़ी गांड दरवाजे की तरफ तोप की तरह ऊपर की तरफ उठकर इधर उधर हील रही थी,,, जिसे देखकर मोहिनी का भी मन डोल रहा था संजू दोनों हाथों से अपनी मां का सिर पकड़ कर अपनी कमर को थोड़ा तेजी से हिलाना शुरू कर दिया एक तरह से वह अपनी मां के मुंह को ही चोद रहा था मोहिनी अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी मां अपने लाल-लाल होठों के बीच अपने बेटे के लंड को लेकर उसे बहुत सुख दे रही है उसे बहुत मजा दे रही है और यह एहसास मोहिनी की तन बदन में आग लगा रहा था और मोहिनी भी ,,,, जल्दी से अपने हथेली को अपनी चूत पर कपड़े के ऊपर से ही रखकर दबाने लगी,,,,,

संजू

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रात के सन्नाटे में जहां सब लोग गहरी नींद में सो रहे थे वही इस घर में मां बेटे और बेटी तीनों की नींद हराम हो चुकी थी तीनों की आंखों में नींद कोसों तक दूर नजर नहीं आ रही थी,,,, मां बेटे दोनों अपने जन्मदिन को पूरी तरह से यादगार बनाने में लगे हुए थे शुरू शुरू में आराधना को लंड को मुंह में लेने में बड़ी दिक्कत और घिन्न होती थी लेकिन अब वह बड़े मजे लेकर उसे मुंह में लेकर चुस्ती थी और तब तक चुसती थी जब तक कि संजू खुद उसे बाहर ना निकालें,,,,

कुछ देर तक संजू भी अपनी कमर हीलाकर मजा लेता रहा,,,, फिर अपने आप ही अपने लंड को अपनी मां के लाल लाल होठों को बीच से बाहर निकाल लिया,,,,, और अपनी मां के गाल थपथपाते हुए उसे शाबाशी देते हुए बोला,,,

आराधना अपने बेटे को मस्त करते हुए

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वाह मजा आ गया बड़ा कमाल का चुस्ती है तू तू मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसकर इसकी धार बढ़ा दी है अब देखना तेरे कैसी चूत में धमाल मचाता है,,,, इतना कहने के साथ ही संजु अपनी मां की दोनों बाहों को पकड़कर उसे खड़ी किया और उस छोटे से पारदर्शी नाइट ड्रेस को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठा दिया और आराधना भी अपने दोनों हाथों को ऊपर करके नाईट ड्रेस को निकलवाने में अपने बेटे की मदद करने लगी अगले ही पल नाइट्रस उसके बदन से अलग हो चुका था और संजू उसे भी नीचे फेंक दिया था,,,। अब आराधना लाल रंग की ब्रा और पेंटी में अपने बेटे की आंखों के सामने खड़ी थी संजू उसे बिस्तर पर चलने के लिए नहीं बोला बल्कि खुद उसे अपनी गोद में उठा लिया और एक बार फिर से उसे बिस्तर पर पटक दिया,,,, संजू की ताकत को देखकर आराधना की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी दरवाजे के पीछे छुप कर देख रही इस नजारे को मोहिनी,,, प्यासी नजरों से देख रही थी,,,।

आराध्ना अपने बेटे क लंड से केल्टी हुयी

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बिस्तर पर गिरी आराधना अपने आपको व्यवस्थित करके अपनी दोनों टांगों को बिस्तर पर खोल दी थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा अब क्या करने वाला है दोनों पैर बिस्तर के नीचे थे और उसकी सोचने के मुताबिक ही संजू आगे बढ़ा और लाल रंग की पैंटी को बिना उतारे उसके एक किनारी को खींचकर चूत के ऊभरे हुए दूसरे भाग पर टिका दिया,,,,, जिससे आराधना की मक्खन जैसी चूत एकदम उपस्कर बाहर आ गई जिस पर मोहिनी की नजर पड़ते ही उसे समझते देर नहीं लगी कि क्रीम लगाकर उसकी मां ने चूत को सांफ की है शायद अपने बेटे के लिए ही,,,,,

संजू अपनी मां को चूत में उंगली करते हुए

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चिकनी गुलाबी चूत को देखकर संजू के मुंह में पानी आ गया और वह अपने आप को रोक नहीं पाया अपनी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए संजू अपनी हथेली को पूरी की पूरी अपनी मां की चूत पर रख ढंक लिया और उसपर अपनी हथेली को गोल-गोल दबाकर रगड़ने लगा जिससे आराधना की सिसकारी फूट पड़ी,,,,,, संजू से सब्र कर पाना बड़ा मुश्किल हुआ जा रहा था वह अच्छी तरह से जानता था कि मोहिनी सब कुछ देख रही है इसलिए वह तुरंत अपने प्यासे होठों को अपनी मां की चूत पर रख कर चाटना शुरू कर दिया चूत से उठ गई मादक खुशबू उसके तन बदन में मदहोशी का नशा भर रही थी संजू अपनी जीभ से चाट चाट कर उसके काम रस को पी रहा था रह रह कर संजू अपनी जीभ को अपनी मां की चूत की गहराई में डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था आराधना से रहा नहीं जा रहा था उसकी आंखों में खुमारी छा रही थी उसके बदन में मदहोशी पूरी तरह से कब्जा जमाए हुए थे वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में गोते लगा रहे थे अपने बेटे के साथ मस्ती करते हुए वह सारे रिश्ते नाते को एक तरफ रख दी थी उसे केवल एक ही रिश्ता नजर आ रहा था मर्द और औरत का,,,,,।

आराध्ना अपनी गांड

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सहहहह आहहहहह मेरे बेटे पूरी जीभ डालकर चाट बहुत मजा आ रहा है रे तुझे बहुत मस्त चूत चाटना आता है,,,,आहहहह आहहहहह दैयारे मर गई आहहहह ऊमममममम ओहहहह संजु ऊफफफ ओहहहहह ,,,,,राज्जा,,,,आहहहहहह

अपनी मां की गरमा गरम सिसकारियों की आवाज को सुनकर खुद मोहिनी मदहोश हुए जा रही थी और वह तुरंत अपनी सलवार को खोल कर उसे अपने पैरों से बाहर निकाल लिया और अपनी नंगी चूत पर अपनी हथेली रखकर दबाना शुरू कर दी,,,,, संजू अपनी मां को पूरी तरह से मस्त कर रहा था उसे अद्भुत सुख दे रहा था देखते ही देखते दीवार पर टांगी घड़ी में 2:00 चुके थे,,,,,, अगर दूसरा कोई होता तो कब से आराधना को चोद चाद कर अलग हो गया था लेकिन कमरे के अंदर दूसरा कोई और नहीं संजू था मर्दाना ताकत से भरा हुआ संजू जोकि संभोग की इस प्रक्रिया को पूरी तरह से आनंद ले रहा था वह इस संभव की लीला को पुस्तिका के अभ्यास कर्म की तरह पढ़ रहा था उसके भूगोल को समझ रहा था उसके शब्दों के अर्थ को समझ कर आगे बढ़ रहा था तभी तो इम्तिहान में उत्तीर्ण होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है और यही संजू के साथ भी होता था संजू जिस किसी भी औरत के साथ संभोग करता था उसे संपूर्ण सुख प्रदान करने के बाद ही अलग होता था चाहे जितना समय लग जाए जब तक संतुष्टि प्राप्त नहीं होती थी तब तक वह उसमें जूता रहता था और इस समय भी वह अपनी मां के कमरे में अपनी मां के साथ वही कर रहा था आराधना के बदन में आग लगी हुई थी वह जल्द से जल्द अपने बेटे के लंड को अपनी चूत की गहराई में महसूस करना चाहती थी लेकिन संजू अपनी मां के बदन से खेल नहीं बल्कि खिलवाड़ कर रहा था वह अपनी मर्जी से अपनी मां का उपभोग कर रहा था उसे किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं थी उसे बस मजा आना चाहिए था और दूसरे को मजा देना आता था इसके सिवा उसे कुछ नहीं आता था तभी तो होगा आराधना पर पूरी तरह से काबू कर पाया था अपनी जीभ से कुरेद कुरेद पर वह अपनी मां की चूत की मलाई को चाट रहा था,,, और आराधना अपने बेटे की मर्दाना ताकत के आगे पूरी तरह से सीधी हो चुकी थी चारों खाने चित होकर वह बिस्तर पर लेटी हुई थी अभी तो संभोग का असली सुख असली खेल बाकी था लेकिन आराधना अपने बेटे की चूत चटाई से पानी फेंक दी थी,,,, जिसे बड़े चाव से मीठी खीर समझ कर संजू अपनी जीभ से चाट गया था,,,,,।

संजू और अरफना बिस्तर पर मजा करते हुए

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ओहहहह राजू मेरे बेटे मेरे राजा मुझसे रहा नहीं जा रहा है मेरी चूत में आग लगी हुई है अब जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दे मुझे चोद संजू मुझे चोद,,, फाड़ दे मेरी चूत को अपने लंड से,,,आहहहह मेरे राजा,,,, बस अब जल्दी कर मुझसे रहा नहीं जाता,,,,

मोहिनी अपनी मां की विवशता को अच्छी तरह से समझ रही थी जानती है कि जब औरत की चूत पानी फेंक देती है तो कितना तड़पति है लंड लेने के लिए और यही उसकी मां के साथ हो रहा था उसकी मां को अब लंड की जरूरत थी मोटे तगड़े लंड की,,,,, शायद संजू भी अच्छी तरह से समझ गया था कि अब उसकी मां को क्या चाहिए इसलिए वह भी तुरंत अपनी मां की दोनों टांगों के बीच से उठकर खड़ा हुआ और अपना कुर्ता निकाल कर फेंक दिया और टांगों में फंसी हुई पेंट और चड्डी को भी निकाल कर एकदम नंगा हो गया लेकिन अभी भी अपनी मां को नंगी करना बाकी था इसलिए उसकी चड्डी को दोनों छोर से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ खींचने लगा और आराधना अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी भारी-भरकम गांड को हवा में उठा दी जिससे उसके बेटे को चड्डी उतारने में आसानी हो अकेले ही संजू अपनी मां की चड्डी उतार कर अपनी मां को नंगी कर चुका था ना कि अभी भी दोनों खरबूजा को छुपाने के लिए ब्रा बदन पर थमी हुई थी लेकिन इस समय जिस तरह के हालात है इस समय संजू की नजर अपनी मां की चूचियों पर ना होकर उसकी दोनों टांगों के बीच की गुलाबी दरार पर केंद्रित हो चुकी थी और वाकई में इस समय एक मर्द को यही चाहिए कि औरत की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार पर ज्यादा ध्यान दें,,,।

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बिस्तर पर आराधना चारों खाने चित लेटी हुई थी दोनों टांगों को फैला कर क्योंकि वह जानती थी कि किसी भी वक्त उसके बेटे का लंड उसकी चूत में घुस जाएगा लेकिन दूसरी तरफ संजू यह भी जानता था कि इस नजारे को पूरी तरह से उसकी बहन दरवाजे के बाहर खड़ी हो कर देख रही है इसीलिए वह अपने लंड को अपनी बहन को दिखाने के लिए पानी से पानी पीने के लिए दरवाजे के पास गया जहां पर उसकी बहन को उसका लंड साफ टनटनाया हुआ दिख रहा था जिसे देखकर खुद मोहिनी की चूत में पानी आ गया था,,,,, पानी पीकर अपने सूखे गले को गिला करने के बाद वापस संजू बिस्तर के पास पहुंच गया और बिस्तर पर पैर का घुटना रखकर आगे बढ़ते हुए अपनी मां की मोटी मोटी जान को अपने दोनों हाथों से पकड़कर फैला दिया जिससे उसकी गुलाबी चूत उभर कर एकदम आंखों के सामने आ गई,,, जिसे देखकर संजू के मुंह में पानी आ गया और वह फिर अपनी मां को कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया जिससे उसकी मजबूत जांघों पर उसकी मां की आधी गांड टिक गई और बाकी नीचे की तरफ लहराने लगी इस मुद्रा में आराधना की चूत ठीक संजू के लंड के सामने थे और संजू अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसके टोपे को अपनी मां की गुलाबी चूत पर पटक रहा था,,, जब-जब चूत पर लंड का टोपा पडता था,,, तब तब आराधना के मुंह से कराहने की आवाज आ जाती थी,,,।

आहहह ऊहहहहह ओहहहह संजु उमममम क्या कर रहा है लग रही है,,,,

चिंता मत कर मेरी रानी जब अंदर जाएगा तो मजा भी इतना ही देगा,,,

तो डालना तडपा क्यों रहा है,,,,

हाय मेरी रानी,,,, मैं कहां तड़पा रहा हूं तड़पा तो तू रही है अपनी चूत दिखा कर,,,,,,,,आहहहहह ,,,(लंड को चूत पर रगडते हुए,,,,)

तेरे लिए ही तो खोल कर रखी हूं डालता क्यों नहीं है,,,

हाय मेरी जान तेरी यही तड़प देखने के लिए तुम्हारा जा रहा हूं,,,, अब देखना मैं कैसे तुझे चोदता हूं,,,तु एकदम मस्त हो जाएगी,,,

(मोहिनी तो अपनी मां और अपने भाई की गंदी बातें सुनकर पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी यहां तक कि वह अपनी चूत को अपनी हथेली से रगड़ रगड़ कर लाल कर दी थी उसमें से काम रस टपक रहा था उसका भी मन कर रहा था कि इसी समय अभी कमरे के अंदर चली जाए और अपनी मां से पहले अपने भाई के लंड को अपनी चूत में ले ले,,, लेकिन अभी ऐसा मुमकिन बिल्कुल भी नहीं था,,,, बिस्तर का खेल मोहिनी को दरवाजे के बाहर खड़ी रह कर भी ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, संजू अपने वादे के मुताबिक अपने लंड के कड़क सुपाड़े को अपनी मां की कोमल चूत में डालना शुरू कर दिया चूत पहले से ही पनियाई हुई थी इसलिए लंड को चूत में डालने में बिल्कुल भी दिक्कत नहीं हुई यह देखकर मोहिनी भी हैरान थी और उसका शक और भी ज्यादा पक्का हो चुका था कि यह खेल 1 दिन का नहीं बल्कि महीनों का है,,,, वरना इस बात को तो वह अच्छी तरह से जानती थी कि संजू का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा हो और लंबा है इतनी आसानी से किसी की भी चूत में पहली बार में घुसने वाला नहीं था जो कि उसकी मां ने पहली बार में ही अपने बेटे के लंड को पूरा का पूरा अपनी चूत में ले ली थी,,,,

अब मोहिनी को उसकी मां अनाड़ी नहीं बल्कि पक्की खिलाड़ी नजर आ रही थी क्योंकि उसकी चूत में पूरी तरह से संजु का लंड घुस चुका था और वह अपने दोनों पैरों को अपने बेटे की कमर में लपेट कर उसे अपनी तरफ खींच रही थी संजू धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था क्योंकि उसका लंड आराधना की चूत की गहराई नापना शुरू कर दिया था,,, आराधना अपने बेटे के लंड का मजा बहुत बार ले चुकी थी यहां तक की आज अपने जन्मदिन के दिन गेस्ट हाउस में तीन तीन बार जमकर चुदवाई थी लेकिन फिर भी इस समय ऐसा लग रहा था कि जैसे वह पहली बार ले रही हो,,,,,, अब संजू अपनी मां को चोदना सुन कर दिया था और घड़ी में अढी बज रहा था,,, मोहिनी इस बात से हैरान थी कि 12:00 बजे जो खेल शुरू हुआ था उसकी असली शुरुआत अढी बजे हो रही थी,,,,,।

संजू की कमर हिला शुरू हो चुकी थी संजू का मोटा तगड़ा गडरा देना की चूत में अंदर बाहर होना शुरू हो गया था और इसी के साथ ही आराधना की गरम सिसकारीयो का दौर भी शुरू हो गया था,,,,, हर धक्के के साथ आराधना के चेहरे का भाव बदल रहा था आराधना को अद्भुत सुख मिल रहा था अपने बेटे की लंड को वह अपनी चूत की अंदरूनी दीवारों में रगड़ता हुआ अंदर बाहर होता हुआ महसूस कर रही थी जिससे उसके आनंद में निरंतर बढ़ोतरी होती जा रही थी संजू अपनी मां की लाल लाल‌ ब्रा को पकड़कर उसकी चूची को दबा रहा था,,,, जो कि इस तरह से कुछ कम ही नजर आ रही थी इसलिए वह तुरंत अपने दोनों हाथों को अपनी मां के नीचे ले गया और उसे हल्के से उठाने की कोशिश करने लगा आराधना भी अच्छी तरह से समझ गई कि उसका बेटा क्या करने वाला है इसलिए थोड़ा सा अपने कौन है का सहारा लेकर अपने बदन को ऊपर की तरफ उठा ली और संजू अपना हाथ पीछे की तरफ ले जाकर अपनी मां के ब्रा का हुक खोलने लगा जिसमें उसे जल्द ही कामयाबी हासिल हो गई,,,, हुक के खुलते ही ब्रा का कसाव चूचियों पर से ढीला पड़ गया और अगले ही पल संजू उसे अपनी मां की बाहों में से निकाल कर नीचे फेंक दिया अब आराधना भी संजू की तरह एकदम नंगी हो चुकी थी संजू बिल्कुल भी देर किए बिना अपनी मां की चूची को दोनों हाथों से पकड़ लिया और से जोर-जोर से दशहरी आम की तरह दबाना शुरू कर दिया जिससे आराधना के आनंद में वृद्धि हो रही थी क्योंकि संजू नीचे से भी और ऊपर से भी उसे रगड़ रहा था,,,,,।

आराधना अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच टीका कर अपने बेटे के लंबे मोटे लंड को अपनी चूत की गहराई में अंदर बाहर होता हुआ देख रही थी जिसे देख कर उसके चेहरे की लाली और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,,, मोहिनी पहली बार अपनी मां को चुदवाते हुए देख रही थी और वह भी अपने ही सगे बेटे से इसकी खुशी मोहिनी से ज्यादा और किसी को भी नहीं थी आज मोहिनी के मन की हो गई थी मोहिनी यही चाहती थी कि उसका भाई उसकी मां को भी चोदे जिसमें उसका दो फायदा था एक तो उसकी मां किसी गैर से शारीरिक संबंध नहीं बनाती है और दूसरा यह कि अगर उसकी मां उसके भाई और उसको रंगे हाथों पकड़ लेती तो मोहीनी के पास भी अपने बचाव के लिए ठोस कारण मिल जाता जिससे आराधना का मुंह बंद हो जाता है और इसी तरह से घर के तीनों लोगों का आपस में ही मजा लेते रहते,,,,

ब्रा के निकलते ही संजू पूरी तरह से अपनी मां की चूचियों पर टूट पड़ा था एक तरफ से वह जोर-जोर से अपनी कमर हिलाता हुआ अपने लंबे लंड को अपनी मां की चूत में फेल रहा था और दूसरी तरफ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दशहरी आम कितना दबा दबा कर उसका रस निचोड़ रहा था,,,, पंखा चालू होने के बावजूद भी दोनों के माथे से पसीना टपक रहे थे क्योंकि दोनों मेहनत भी बराबर कर रहे थे,,,,।

आहहह आहररर मेरी रानी तुझे चोदने में बहुत मजा आता है मुझे यकीन नहीं होता की दो दो जवान बच्चों की मां होने के बावजूद भी तेरी चूत इतनी कसी हुई है,,,।

(मोहिनी अपने भाई के मुंह से इतनी गंदी बात सुनकर शर्म से पानी पानी हो जा रही थी भले ही उसकी आंखों के सामने उसका भाई अपनी ही मां को चोद रहा था लेकिन उसके मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर मोहिनी को शर्म महसूस हो रही थी लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था)

तेरे लिए ही कसी हुई है तेरे बाप के पास इतना मोटा और लंबा लंड नहीं था तभी तो मेरी चूत की प्यास बुझा नहीं पाता था और सच कहूं तो मुझे तो पता ही नहीं था कि कितना लंबा और मोटा लंड भी होता है वरना तेरे पापा का तो इतना छोटा था तेरे से ज्यादा ही था और पतला चूत में जाते ही दो-तीन मिनट में पानी फेंक देता था मुझे तो पता ही नहीं चलता था कि औरत को भी इतना मजा आता है,,,,

(अपनी मां की बात सुनकर मोहिनी हैरान हो गई थी उसे अब जाकर पता चला था कि उसकी मां को उसके पापा से बिल्कुल भी सुख नहीं मिला था चुदाई क्या होती है जुदाई का असली सुख क्या होता है इन सब से उसकी मां बिल्कुल अनजान थी उसकी मां को असली सुख उसका भाई दे रहा था इस बात से मोहिनी को गर्व महसूस होने लगा,,,,)

मैं हूं ना तेरी मस्त चूत की सेवा के लिए देखना मैं दिन-रात तेरी चूत की सेवा करते रहूंगा तुझे इतना पेलुगा कि तू दिन रात मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर पड़ी रहेगी,,,,(ऐसा कहते हुए संजू जोर जोर से धक्के लगा रहा था कुछ देर तक संजू इसी तरह से अपनी मां को चोदता रहा लेकिन उसका पानी इतनी जल्दी निकलने वाला नहीं था क्योंकि अपनी बहन मोहिनी की चूत में वहां पूरा गर्म लावा गिरा कर आया था इसलिए दोबारा गिरने में थोड़ा समय लगने वाला था इसलिए वह अपनी मां की चूत में से अपना लंड बाहर निकाला और उसे घोड़ी बन जाने के लिए बोला,,,,, आराधना पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी एक पल के लिए भी वह अपने बेटे के लंड को अपनी चूत से अलग नहीं होने देना चाहती थी इसलिए अपने बेटे की बात मानते हैं जल्दी से वह घोड़ी बन गई और अपनी गांड हवा में उठा दी संजू इस मुद्रा में अपनी मां को चोदने के लिए बिस्तर से नीचे उतर गया,,,, और अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखकर वह उस पर चपत लगाने से अपने आप को रोक नहीं पाया और दोनों हाथों से उसकी गोरी गोरी गाल पर थप्पड़ लगाने लगा जिससे पल भर में ही उसकी गोरी गोरी गाल टमाटर की तरह लाल हो गई हर थप्पड़ के साथ उसके मुंह से आह निकल जाती थी लेकिन गांड पर थप्पड़ पड़ने का मजा ही कुछ और था इस बात का एहसास उसे भी अच्छी तरह से था,,,,,

लंड को हाथ में पकड़ कर दरवाजे की तरफ दिखाकर जोर-जोर से हिलाते हुए मुस्कुरा कर एक बार फिर से वह अपनी मां के गुलाबी छेद में डाल दिया और चोदना शुरू कर दिया पीछे से चुदवाने का एक मजा और ज्यादा था कि इस तरह से वह अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से दबा दबा कर चोद पाता था,,,, किसका मजा खुद आराधना भी अच्छी तरह से लेती थी अपनी मां की कमर को पकड़कर भर जोर-जोर से अपनी कमर हिलाने लगा और अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां के लटक रही पपैया को पकड़ लिया और जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,, पूरे कमरे में आराधना की गरम सिसकारियां गुंज रही थी जोकि मोहिनी के कानों में एकदम साफ सुनाई दे रही थी अपनी मां की गर्म सिस कारीयो की आवाज सुनकर मोहिनी से भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वहां एक साथ दो उंगली अपनी चूत में डाल कर अंदर बाहर कर रही थी उसका मन तो बहुत कर रहा था कि दरवाजा खोलकर अंदर घुस जाए और अपनी मां का साथ दे लेकिन वह अपने आप को संभाले हुए थी,,,,,।

संजू की कमर बड़ी तेजी से चल रही थी और आराधना के बदन में अकड़न बढ़ने लगी थी दोनों चरम सुख के करीब पहुंच रहे थे,,,, आराधना को लग रहा था कि इसी तरह से घोड़ी बनाकर चोद कर दोनों झड़ जाएंगे लेकिन तभी संजू ने अपने लंड को बाहर निकाला और बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया और अपनी मां को अपने ऊपर चढ़ने के लिए बोल दिया दोनों चरम सुख के इतने करीब थे की आराधना से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह तुरंत अपने बेटे के इर्द-गिर्द अपना घुटना रखकर यह खास नीचे की तरफ लाकर अपने बेटे के लंड को पकड़ लिया और उसे गुलाबी छेद में दिखाकर अपनी भारी-भरकम गांड को लंड के ऊपर उसका दबाव बनाते हुए उसे अंदर लेने लगी आराधना की गांड दरवाजे के ठीक सामने थी इसलिए मोहिनी को सब कुछ साफ नजर आ रहा था अपनी मां की नंगी जवानी देख कर खुद मोहिनी के मुंह में पानी आ रहा था क्योंकि मोहिनी के अंग से कुछ ज्यादा ही तरह से और कसा हुआ उसकी मां का अंग था मोहिनी साफ तौर पर देख रही थी कि उसकी मां अपनी बड़ी बड़ी गांड को अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड पर जोर जोर से पटक रही थी अपनी मां का यह रूप देखकर मोहिनी के मुंह में पानी आ गया था और वह अपनी उंगली को जोर-जोर से अपनी चूत में अंदर बाहर करके अपना पानी भी निकाल देना चाहती थी इस समय मोहिनी को अपनी मा एक रंडी की तरह लग रही थी पहली बार में ही अपनी मां को पूरी तरह से नग्न अवस्था में देख रही थी उसका नंगा बदन स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा जैसा दिख रहा था उसकी खूबसूरती के आगे वह खुद भी कुछ नहीं थी,,,, अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखकर मोहिनी अपने मन में यह सोच रही थी कि अगर संजू की जगह कोई और दूसरा लड़का या आदमी उसकी मां को नंगी देख ले तो शायद बिना चोदे वह रह नहीं पाएगा,,,,,

फच्च फुच्च,,, फच्च फुच्च की आवाज लगातार चूत और लंड के संगम से आ रही थी जो कि बेहद मधुर और कामोत्तेजना बढ़ाने वाली आवाज थी,,,, आराधना के भारी-भरकम बदन का दमखम झेलना पाने की वजह से पलंग में से भी चरण बाहर की आवाज आ रही थी,,,,,, देखते-देखते आराधना आदि की तरफ झुकी और संजू के कंधे पर दोनों हाथ रख कर अपनी गांड को जोर-जोर से उछालते हुए मजा लेते हुए बोली,,,।

आहहह संजू आहहहहह मेरे राजा मेरा निकलने वाला है,,,आहहह आहहहह बहुत मजा आ रहा है राजा,,,,

मेरा भी निकलने वाला है मेरी रानी मुझसे भी रहा नहीं चल रहा है,,,,(इतना कहने के साथ ही संजु नीचे से भी अपनी कमर ऊपर की तरफ उछाल से लगा दोनों किसी से कम नहीं थे दोनों पीछे नहीं हटना चाहते थे दोनों एक दूसरे पर भारी पड़ना चाहते थे इसलिए दोनों तरफ से कोशिश हो रही थी और देखते ही देखते दोनों की सांसें बड़ी तेजी से चलने लगी और आराधना एक बार बड़ी जोर से अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठाई और इतनी जोर से अपने बेटे के लंड पर पटकी की पूरा का पूरा उसके ऊपर बैठ गई वो तो अच्छा हुआ कि संजू का लंड उसकी चूत के अंदर था जो की गहराई तक पहुंच गया था अगर बाहर होता तो शायद आराधना की भारी-भरकम गांड का वार वह सह नहीं पाता और टूट जाता,,,, आराधना अपने बेटे के लंड को अपनी चूत की गहराई में लेकर अपनी बड़ी बड़ी गांड को गोल-गोल घुमा रही थी और पानी छोड़ रही थी संजू भी अपनी मां की चूचियों को दोनों हाथों से दबोच ता हुआ अपना पानी निकाल रहा था,,,,

और बाहर खड़ी मोहिनी का भी हल्की आह के साथ पानी निकल गया,,, घड़ी में 3:00 बज के 15 मिनट हो रहा था कब इतना समय बीत गया मोहिनी को भी पता नहीं चला अभी भी उसकी मां अपने बेटे के ऊपर नंगी लेटी हुई थी और संजू का लंड अभी भी उसकी चूत में था अब इससे ज्यादा देख पाना मोहिनी के बस में नहीं था क्योंकि उसका भी पानी निकल चुका था और जैसा हुआ चाहती थी वैसा हो चुका था वह मुस्कुराते हुए अपने कमरे में गई और बिस्तर पर लेट गई और ना जाने कब तक दोनों मां बेटों का खेल चलता रहा मोहिनी को पता नहीं चला सुबह जब मोहिनी की नींद खुली तो संजू बिस्तर पर नहीं था यह धीरे से कमरे से बाहर आए तो अभी भी आराधना के कमरे का दरवाजा बंद था ,,,, वह धीरे से वापस अपनी मां के कमरे के दरवाजे तक पहुंची और उसमें से अंदर की तरफ देखने लगी तो अभी भी उसकी मां उसी मुद्रा में ही उसके ऊपर लेटी हुई थी दोनों उसी मुद्रा में सो चुके थे इस समय वह अपनी मां को इस अवस्था में जगाना नहीं चाहती थी,,,, क्योंकि इस अवस्था में जगह कर वह अपनी मां को किसी भी तरह से शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी इसलिए वह खुद भी अपने कमरे में जाकर लेटे रहने का बहाना करने लगे थोड़ी देर बाद बगल वाले कमरे से हड़बड़ाहट की आवाज आने लगी और तुरंत कुछ देर बाद संजू बाहर आया और कमरे का दरवाजा खोल कर देखा तो मोहिनी जानबूझकर सोने का नाटक कर रही थी उसे ऐसा करने के लिए आराधना ने हीं बोली थी मोहिनी को सोता हुआ देखकर संजू धीरे से कमरे से बाहर निकला और अपनी मां को धीरे से कान में बोला,,,।

चिंता मत करो मम्मी मोहिनी अभी सो रही है,,,

बाप रे बाल बाल बचे,,,,,

(अपनी मां के मुंह से इतना सुनकर मोहिनी मन ही मन में मुस्कुराने लगी और फिर खुद उसकी मां उसे जगाने के लिए दरवाजे पर दस्तक देने लगी)

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सुबह उठकर आराधना अपना नित्यक्रम बड़े ही सहज रूप से करने लगी उसे ऐसा लग रहा था कि उसके और उसके बेटे के बीच की कामलीला के बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं है लेकिन वह इस बात से बिल्कुल अनजान थे कि उसके बेटे नहीं उसकी बेटी को अपनी मां की कामलीला देखने का आमंत्रण दे दिया था और अब मोहिनी भी इस राज से पूरी तरह से वाकिफ हो चुकी थी,,,,

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थोड़ी देर बाद मोहिनी भी उठने का नाटक करने लगी वह तो अपनी मां के बारे में सोच कर ही हैरान हुई जा रही थी वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिसे वह इतनी सीधी सादी संस्कारी और समझती थी वह अंदर से इतनी चुदासी होगी,,,, अपनी मां के नंगे बदन के बारे में सोचकर मोहिनी के तन बदन में आग लग रही थी इतना तो है जानते थे कि उसकी मां बेहद खूबसूरत है लेकिन कपड़े उतार कर नंगी होने के बाद तो वह स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा से कम नहीं लगती थी,,, बिस्तर पर लेटे लेटे ही वह अपनी मां के बारे में सोच रही थी रात की संपूर्ण काम लेना उसकी आंखों के सामने किसी मूवी की तरह आगे बढ़ने लगी वह सब कुछ सोच रही थी उसके भाई का अंदर कमरे में जाना बिस्तर पर बैठना अपनी मां की गांड पर हाथ रखना उसके होठों पर किस करना और फिर उसकी मां का बिस्तर पर से उठना अलमारी तक जाना हो तो छोटा सा नाइट ड्रेस निकालना अपने सारे कपड़े उतार कर सिर्फ ब्रा और पेंटी में रह जाना और वह भी यह कहकर कि उसे संजू के हाथों से उतरवाना अच्छा लगता है,,,, छोटे से नाइट ड्रेस में तो,,, उसकी मां बेहद कमाल लग रही थी फिर धीरे-धीरे संजू का उसे बाहों में लेकर भरना उसके लाल-लाल होठों का रस पीना नाइट ड्रेस को उतारना और पेंटी उतारे भी नहीं उसकी चूत को चाट ना यह सब देख कर मोहिनी के तन बदन में जो आग लगी थी इस समय उसके बारे में सोच कर ही उसके बदन में मदहोशी छा रही थी,,, वह कभी सोची नहीं थी कि उसकी मां इस खेल को इतने मजे से खेलेगी क्योंकि अपनी मां को वह देखते आ रही थी उसे देखकर लगता ही नहीं था कि बिस्तर में उसकी मां आग लगाने वाली औरत है,,,, लेकिन अपने भाई के साथ अपनी मां को देखकर उसकी यह सोच पूरी तरह से बदल गई थी और फिर जिस तरह से संजू ने उसकी चुदाई किया था उस चुदाई के बारे में सोच कर ही उसकी चूत गीली हो रही थी,,,,,,, लेकिन एक बात तय थी इस बात का अंदाजा उसे लग गया था कि जिस खेल को वह कल रात को देखी थी उस खेल को एक ही दिन में खेला नहीं किया था उस खेल को अंजाम देने के लिए महीनों का अभ्यास जरूरी था जो कि दोनों के बीच शुरू से यह सब चल रहा था बस वह इस बात से अंजान थी,,,, अभी वह आगे का कुछ और सोच पाती इससे पहले ही संजू जो कि नहा कर तैयार हो चुका था वह दरवाजे पर आकर खड़ा हो गया और मोहिनी को नजर घुमाकर मुस्कुराते हुए देखने लगा उसकी मुस्कुराहट में,,,, बहुत कुछ छुपा हुआ था मोहिनी अपनी जगह से उठी और तुरंत अपने भाई के पास जाकर उसके सीने पर मुकके से मारने लगी और बोली,,,।

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भाई तू मुझे झूठ बोला तेरी और मम्मी के बीच में पहले से ही सब कुछ चल रहा था और तु मुझे कुछ बताया नहीं,,,

बता देता तो फिर देखने का मजा कहां आता मैं तुझे बताना नहीं दिखाना चाहता था और सही समय का इंतजार कर रहा था अच्छा यह बता कर देख कर मजा आया तो ना,,,

भाई मम्मी कितनी खूबसूरत है एकदम सेक्सी कपड़े उतार कर नंगी होने के बाद तो स्वर्ग की अप्सरा लगती है मम्मी के नंगे बदन को देख कर तो मुझे अपने बदन से शर्माने लगी मैं पूरी तरह से जवान होने के बावजूद भी मम्मी जैसी खूबसूरत नहीं दिखती,,,

यही तो बात है मोहिनी तेरे और मम्मी में,,,, बेशक तुझे चोदने में बहुत मजा आता है लेकिन मम्मी के साथ जो मजा मिलता है पूछो मत तुझे मालूम है मोहिनी मम्मी की चूत अभी भी एकदम कसी हुई है जैसी कि तेरी है लंड अंदर जाते ही एकदम गरम हो जाता है और तो और मम्मी अपनी चूत की फांकों से मेरे लंड को दबा देती है और उस समय इतना अच्छा लगता है कि पूछ मत मन करता है कि बस लंड को चूत में डाल कर सो जाऊं,,,,

(अपने भाई की बात सुनकर मोहिनी ठीक ठीक समझ रही थी कि बातों ही बातों में उसका भाई अपनी मां की खूबसूरत बदन की उसकी चूत की तारीफ कर रहा था इस बात से थोड़ा मोहिनी असहज महसूस कर रही थी लेकिन फिर भी इस बात से खुश थी कि कोई और मजा लेता इससे अच्छा है कि भाई मजा ले रहा है और इस तरह से मम्मी को बाहर मुंह मारना नहीं पड़ेगा)

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अच्छा भाई एक बात बता,,,, मम्मी को कैसा लगता है,,,!

मम्मी को तो बहुत अच्छा लगता है मोहिनी मम्मी ने खुद अपने मुंह से पता ही है और शायद तुझे पता नहीं मम्मी ने खुद बताई है कि पापा का लंड बहुत ही छोटा और पतला था जो कि अंदर जाते हैं 2 मिनट में ही पानी छोड़ देता था तो सोच ऐसी लंड से एक खूबसूरत जवानी से भरी हुई औरत अपनी प्यास कैसे बुझा पाएगी उसे तो असली सुख के बारे में पता ही नहीं था मेरा लंड उसकी चूत में जाते ही वह पूरी तरह से मस्त हो गई और तभी उसने बताया कि तेरे नैनों से ही मुझे चुदाई का असली सुख के बारे में पता चला है वरना वह सिर्फ जिए जा रही थी,,,,

तू रोज लेता है ना मम्मी की,,,

तेरी भी तो रोज लेता हूं दोनों जगह मुझे बराबर सेवा करनी पड़ती है तेरी चूत की भी और मम्मी की चूत की भी तुझे चोदने के बाद में अक्सर जब तू सो जाती थी तो मम्मी के कमरे में ज्यादा था और जी भर कर चुदाई करता था और फिर वापस आकर अपने कमरे में सो जाता था मैं तुझे बताने वाला था लेकिन मैं जानता था कि बताने से अच्छा दिखाने में ज्यादा मजा आएगा और सच बताना तुझे देखकर कैसा लगा,,,,

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पूछ मत भाई पहली बार जिंदगी में मैं किसी औरत को चुदवाते हुए देखी हूं और मम्मी को तो देख कर मेरी हालत ही खराब हो गई पता है तुझे मेरा मन तो कर रहा था कि दरवाजा खोलकर मैं भी तुम दोनों के साथ बिस्तर में शामिल हो जाऊं एक साथ कितना मजा आता तुम मेरे लिए तो मम्मी के लिए था मैं तेरा मुंह में लेती मम्मी भी तेरा मुंह में लेती तू मेरी चूत चाटता और मम्मी की भी चाटता ,,,,

हां मोहिनी बात तो सच कह रही है लेकिन मम्मी को थोड़ी पता है कि तु मुझसे चुदवाती है,,, ऐसा कोई जुगाड़ करना पड़ेगा कि अपना काम बन जाए,,,

हां भाई तू सच कह रहा है,,,,

(यही सब बातचीत चल रही थी कि तभी आराधना किचन में से आवाज देते हुए दोनों को बुला रही थी नाश्ता तैयार हो चुका था,,,, लेकिन अभी मोहिनी नहाई नहीं थी इसलिए तुरंत बाथरूम में घुस गई और थोड़ी देर में नहा कर बाहर आ गई नहा कर कपड़े पहनने के बाद वह किचन में गई तो संजू नाश्ता कर रहा था आराधना खाना बना रही थी मोहिनी अपनी मां की तरफ देख कर सोच रही थी कि क्या यही रात वाली औरत है जो रात को रंडी और दिन में एकदम सीधी-सादी संस्कारी औरत बन जाती है,,,,, थोड़ी ही देर में मोहिनी और संजू दोनों नाश्ता करके कॉलेज के लिए निकल गए हैं और आराधना भी अपनी ऑफिस के लिए निकल गए रोज रात को संजू मोहिनी को चोद कर अपनी मां के कमरे में जाता है और मोहिनी भी दरवाजे से रोज,,, अपनी मां की चुदाई देखती थी अपनी मां के नंगे बदन को उसकी चूत में अपने भाई के मोटे लंड को अंदर बाहर होता देख कर उससे सब्र नहीं हो रहा था वह बेसब्र हुए जा रही थी जल्द से जल्द वह भी अपनी मां के इस कामलीला में शामिल होना चाहती थी लेकिन उसे भी सही समय का इंतजार था,,,,।

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दूसरी तरफ मनीषा के तन बदन में भी जवानी के अंकुर फूट रहे थे मनीषा बार-बार क्लास के अंदर संजू की हरकत के बारे में सोच कर गीली हो जाती थी अगर क्लास के अंदर मनीषा अपने आप पर काबू करके संजू करो कि ना होती तो उसी दिन उसका कौमार्य भंग हो जाता उसी दिन उसकी चूत में लंड डालने की प्रक्रिया शुरू हो जाती,,,, मनीषा संजू से मन ही मन प्यार करने लगी थी जिसका इजहार भी वहां संजू से कर चुकी थी वह अपना तन मन सब कुछ संजू को सौंप देना चाहती थी लेकिन इत्मीनान से और संजू था कि मनीषा को चोदने का सपना देख रहा था मनीषा का कसा हुआ बदन उसका खूबसूरत चेहरा देखकर संजू को पक्का विश्वास था कि जिस तरह से उसका खूबसूरत चेहरा है उसी तरह से उसकी दोनों टांगों के बीच की उसकी चूत की बेहद खूबसूरत होगी जिसे प्राप्त करने के लिए वह दिन रात सपना देखता रहता था लेकिन शायद ऐसा लग रहा था कि उसका सपना सच होने वाला था,,,,,,

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कोचिंग क्लास की छुट्टी थी गर्मियों का महीना था,,, और कोचिंग को और ज्यादा आगे बढ़ाने के बारे में दोनों रेस्टोरेंट में बैठकर सोच रहे थे कि तभी मनीषा की नजर रेस्टोरेंट के कोने वाले टेबल पर बैठे हुए एक युगल पर गई,,, जोकि दुनिया से बेखबर होकर एक दूसरे के होंठों का रसपान कर रहे थे दोनों यह भी भूल गए थे कि वह दोनों रेस्टोरेंट पर बैठे हुए हैं और किसी की भी नजर उन पर पड़ सकती है लेकिन उन्हें किसी का भी डर नहीं था क्योंकि दोनों आपस में प्यार करते थे और प्यार किसी से डरता नहीं है यह देखकर मनीषा के तन बदन में भी हलचल होने लगी वह सोचने लगे कि वह भी तो संजू से प्यार करती है लेकिन दुनिया से डरती है और उससे अच्छे तो यह दोनों है जो पूरी दुनिया से बेखबर होकर एक दूसरे में खो चुके हैं यही देख कर अचानक ही मनीषा के मन में एक युवती आई और वह संजू से बोली,,,।

संजू आज तो कोचिंग क्लास की छुट्टी है और हम दोनों के पास समय भी बहुत है यहां से 35 किलोमीटर दूर झरना है जोकि बहुत खूबसूरत लगता है चलो वहीं चल कर बैठते हैं वही थोड़ा समय बिताएंगे काफी दिन हो गए मैं वहां गई नहीं,,,,

अभी चलना है,,,

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तो क्या अभी चलेंगे तभी ना शाम तक वापस आ जाएंगे,,,,

(मनीषा के मन में गलत भावना बिल्कुल भी नहीं थी वह बस प्रेमीका बनकर अपने प्रेमी के साथ घूमना चाहती थी,,, इसलिए वह बहुत उत्सुक थी,,,, थोड़ी ही देर में चलने का प्लान बन चुका था,,,, दोनों अपने अपने घर वालों को इत्तला किए बिना ही रेस्टोरेंट्स ही,,,, मनीषा की स्कूटी से निकल पड़े एक नए सफर के लिए,,,,,

संजू कभी उस जगह पर गया नहीं था रास्ता मनीषा बता रही थी,,,, आज मनीषा को बहुत खुशी हो रही थी संजू के पीछे बैठने में,,, वह सलवार कमीज पहनी हुई थी इसलिए स्कूटी के दोनों तरफ पैर करके आराम से बैठ गई थी,,,, आज उसे बहुत ही अच्छा अनुभव रहा था ऐसा लग रहा था कि अपने प्रेमी के साथ खुले आसमान के नीचे वह शेर सपाटे को निकली है और जो की हकीकत ही था,,,, थोड़ी ही देर में स्कूटी मुख्य सड़क पर दौड़ रही थी गर्मी का महीना होने की वजह से गर्मी बहुत ज्यादा थी इसलिए सड़क पर ज्यादा वाहन नजर नहीं आ रहे थे और यही देख कर ना जाने क्या मनीषा के मन में सुझाव है दोनों हाथ संजू के कंधों पर रखकर उसका सहारा ले ली,,,,, और उत्सुकता और खुशी के मारे वह बोली,,,)

संजू मैं कभी सोच ही नहीं थी कि इस तरह से मैं स्कूटी पर बैठकर किसी के पीछे बैठकर अपनी सबसे अच्छी जगह पर घूमने जाऊंगी,,,,

तो कैसा लग रहा है मनीषा तुम्हें,,,

सच कहूं तो संजु तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो तुम्हारे साथ वहां जाने में मुझे बहुत अच्छा लग रहा है,,,,

(मनीषा जिस तरह से संजू के कंधे का सहारा ली थी उसे देखते हुए संजू के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसे मनीषा का इस तरह से उसके कंधे का सहारा लेकर बैठना बहुत अच्छा लग रहा था,,,, मनीषा के साथ वह संभोग सुख प्राप्त करना चाहता था लेकिन उसकी मर्जी के बिना वह कुछ करना नहीं चाहता था वैसे भी बदन में जितनी भी जवानी की गर्मी थी उसे उतारने के लिए घर पर मां और बहन दोनों थी,,, जिसके साथ वह बराबर का सुख भोग रहा था,,,, और मनीषा के साथ क्लास में जिस तरह की हरकत किया था उसे देखते हुए संजू को पूरा यकीन था कि एक न एक दिन मनीषा उसके नीचे जरूर आएगी इसलिए उसे किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं थी वह मनीषा के मुताबिक ही चलना चाहता था,,,,,

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थोड़ी ही देर में शहर पीछे छूटने लगा और गांव शुरू हो गया हालांकि पूरी तरह से गांव नहीं था लेकिन फिर भी गांव ही कहा जा सकता था क्योंकि यहां पर शहर की तरह दुकानें मॉल रेस्टोरेंट होटल नहीं थे बस हाईवे के किनारे छोटे-छोटे ढाबा बने हुए थे जहां पर कुछ ट्रक खड़ी हुई थी और लोग नाश्ता पानी कर रहे थे,,,,

मैं कभी वहां गया नहीं मुझे तो पता भी नहीं है कि शहर से 35 किलोमीटर की दूरी पर ही इतनी खूबसूरत जगह होगी,,,,(संजू गाड़ी को एक्सीलेटर देता हुआ बोला,,,,)

बहुत लोगों को नहीं मालूम है संजू अभी तक मेरी सहेलियों को भी नहीं पता है और ना ही मैंने कभी बताई हूं जल्दी मेरा मन करता है मैं यहां पर अकेली ही इतनी दूर गाड़ी चला कर आ जाती है और कुछ घंटे बैठ कर चली जाती है इतना अच्छा लगता है कि पूछो मत,,,,

तुमने अब तक अपनी सहेलियों को भी नहीं बताई हो तो मुझे क्यों बता दी,,,

सहेलियों की बात कुछ और है लेकिन तुम तो मेरे एकदम खास हो,,,,

खास मतलब,,,,

खास मतलब खास,,,

मतलब की बॉयफ्रेंड,,,,( सीधी जुबान में संजू बोला,,,)

हां बाबा बॉयफ्रेंड,,(मनीषा मुस्कुराते हुए बोली तो संजु अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

सही में बॉयफ्रेंड समझती हो या सिर्फ बनाने के लिए,,,,

तुम्हें अगर अपना बॉयफ्रेंड ना समझती तो तुम्हें इतनी दूर लेकर नहीं आती,,,,

सिर्फ बॉयफ्रेंड समझती हो लेकिन बॉयफ्रेंड वाला काम करने नहीं देती हो,,,

क्या मतलब,,,?

चुम्मा तो कभी देती नहीं हो तो बॉयफ्रेंड किस बात का,,,(बातों ही बातों में संजू अपने मन की इच्छा बताते हैं बोला तो मनीषा मुस्कुराने लगी और बोली)

तुमने कभी कोशिश ही नहीं किए,,,

किया तो था एक बार कोचिंग क्लास में ऐन मौके पर रोक दी,,,,

चुम्मा नहीं तुम तो कुछ और कर रहे थे इसलिए रोक दी थी,,,

तो क्या हुआ बॉयफ्रेंड का इतना तो हक बनता ही अपनी गर्लफ्रेंड के साथ,,,,

मैं तैयार नहीं थी,,,,

किसलिए,,,,(संजू अच्छी तरह से जानता था कि मनीषा क्या कहना चाह रही है लेकिन फिर भी जानबूझकर बोला)

जैसा तुम करना चाह रहे थे,,,,,,,

मतलब कि चोदना तुम चुदवाने के लिए तैयार नहीं थी,,,

(संजू के मुंह से इस तरह के शब्द सुनकर वह एकदम से चौक गई और एकदम से शर्मा भी गई उसे यकीन नहीं हो रहा था कि संजू उसके सामने खुले शब्दों में बोल देगा)

धत्,,,,,(पीठ पर मुक्का मारते हुए बोली)

हां सही तो मैं तुम्हें चोदना चाह रहा था लेकिन तुम तैयार नहीं थी,,,,

संजू,,,,,, अभी मारूंगी,,,,

सही तो कह रहा हूं मनीषा तुम चाहे जितना भी इंकार कर लो मेरी जगह कोई और होता तो वह भी यही करता क्योंकि तुम बहुत खूबसूरत हो तुम्हें देखते ही ना जाने क्या हो जाता है,,,,,

वैसे कहां से खूबसूरत लगती हो तुमको,,,(संजू की बातों में मनीषा भी दिलचस्पी ले रही थी उसे संजू की बातें बेहद लुभावने और उत्तेजित कर देने वाली लग रही थी जिसका असर उसे दोनों टांगों के बीच अच्छी तरह से महसूस हो रहा था)

तुम तो मुझे बहुत अच्छी लगती हो और सब जगह से अच्छी लगती हो एक अंग हो तो बताओ तुम्हारा अंग अंग खूबसूरत है वैसे कभी मेरे सामने कपड़े उतार कर नंगी हो ना तब तुम्हें बताऊंगा कि तुम वाकई में क्या हो,,,,

संजु,,,,, तुम बहुत शैतान हो,,,

तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की साथ में होगी तो कोई भी शैतान बन जाएगा,,,

चलो बातें मत बनाओ और जल्दी से चलो शाम तक वापस भी आना है,,,,

जो हुकुम रानी साहिबा,,,,

(संजू के मुंह से इतना सुनकर मनीषा हंसने लगी,,,, संजू की बातों से मनीषा को एहसास होने लगा के दूसरे लड़के उसके बारे में क्या सोचते होंगे जब चचेरा भाई उसे देखकर इतना कुछ सोचता है और सब कुछ करने की चाह रखता है तो दूसरे लड़कों के बारे में तो बात ही क्या करना लेकिन इस बात की उसे खुशी थी कि वह खूबसूरत थी संजू उसे पसंद करता था इसलिए संजू की बातों से उसे बिल्कुल भी गुस्सा नहीं आ रहा था क्योंकि वह भी उससे प्यार करती थी और एक ना एक दिन उसे अपना सब कुछ देने वाली थी,,,, देखते ही देखते दोनों छोटे-छोटे कच्चे रास्तों से होते हुए छोटी-बड़ी पहाड़ियों के बीच जाकर उस झरने के पास पहुंच गए इस बारे में मनीषा बात किया करती थी झरने को देखते ही संजू बहुत खुश हो गया उसने आज तक इतना मनोरम दृश्य नहीं देखा था,,,,, इसलिए स्कूटी को एक बड़े से पेड़ के नीचे खड़ी करके उस पर से उतरा और झरने की तरफ देखकर एकदम खुश होता हुआ बोला,,,,

वह मनीषा तुमने तो कमाल कर दिया मैं तो इस तरह के दृश्य के बारे में सिर्फ कल्पना किया करता था मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि कल्पना से भी सुंदर कोई स्थल हो सकता है वाकई में बहुत अच्छा लग रहा है,,,

मुझे मालूम था संजू तुम्हें बहुत अच्छा लगेगा इसीलिए मैंने अपनी सहेलियों को इस जगह के बारे में नहीं बताया अगर बता देती तो धीरे-धीरे सब को पता चल जाता और यह स्थल भी खराब कर देते यहां पर कोई नहीं आता सिर्फ गांव के लोग ही सुबह-शाम नजर आते हैं लेकिन कड़ी धूप होने की वजह से आज कोई नजर नहीं आ रहा है,,,(मनीषा चारों तरफ नजर घुमाकर देखते हुए बोली ,,,,,चारों तरफ छोटी-छोटी पहाड़ी थी जंगली झाड़ियां थी हरे भरे पेड़ थे जिसकी वजह से यह जगह और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,,,, पेड़ों से चारों तरफ घिरा होने की वजह से यहां तक किसी की नजर भी नहीं पहुंच सकते थे,,,, संजु को देखकर मनीषा खुश हो रही थी,,, क्योंकि उसे पूरा यकीन था कि इस जगह पर आकर संजू पूरी तरह से संतुष्ट होगा इस जगह को देखकर और वैसा ही हो रहा था,,,, मनीषा संजू का हाथ पकड़कर एक बड़े से पेड़ की छांव के नीचे जाकर बैठ गई और झरने को चढ़ता हुआ देखने लगी चारों तरफ मनोरम दृश्य पैदा हुआ था हजारों चिड़ियों की आवाज से वह जगह और भी ज्यादा खूबसूरत नजर आ रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे स्वर्ग में आ गए हो झरने से गिर रहे पानी की आवाज से बहुत ज्यादा शोर हो रहा था लेकिन इस दौर में भी मधुर संगीत थी जिसे सुनकर संजू और मनीषा दोनों बेहद खुश हो रहे थे,,,,

बड़े से पेड़ के नीचे बैठकर संजू और मनीषा गपशप करने लगे,,,,, यहां आने से पहले मनीषा के मन में कोई गलत भावना नहीं थी लेकिन रास्ते में जिस तरह से संजू ने खुले शब्दों में चोदने चुदवाने वाली बात की थी उस बारे में याद करके ना जाने क्यों उसके बदन में हलचल सी हो रही थी और संजू ने ठीक ही कहा था अगर एन मौके पर वह उसीे ना रोकी होती तो उस दिन ही संजू उसे चोद चुका होता,,,, इंसाफ बातों को याद करके मनीषा के बदन में हलचल तो हो ही रही थी उसे अपनी पेंटिं गीली होती वह महसूस हो रही थी,,,, कुछ देर तक संजू और मनीषा दोनों बातें करते रहे संजू चाहता तो मनमानी करते हुए मनीषा को चुदवाने पर मजबूर कर देता लेकिन वह धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहता था वह नहीं चाहता था कि मनीषा को उसकी तरफ से कोई दुख पहुंचे,,,,, संजू से रहा नहीं जा रहा था झरने से गिर रहा ठंडा पानी इस गर्मी में उसे ठंडक महसूस करा रहा था वह झरने के पानी में उतर कर नहाना चाहता था इसलिए मनीषा को बिना बोले उसे अपनी जगह से खड़ा हुआ और उसके सामने ही अपना टीशर्ट उतार कर घनी खास पर रख दिया और फिर पेंट की बेल्ट खोलने लगाया देखकर मनीषा शर्मिंदा हो गई और अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा ली और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

यह क्या कर रहे हो,,,?

अरे मनीषा यह भी कोई पूछने वाली बात है इतनी खूबसूरत झरने के पास आए हो और बिना नहाए चले जाओगे तो झरना बुरा मान जाएगा इसलिए मैं नहाना चाहता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही बेल्ट को खोलकर वह पेंट की बटन खोलने लगा और चैन को नीचे सरका दिया है यह देखकर मनीषा के तन बदन में आग लगने लगी इस पल संजू का कपड़ा उतारना उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे संजू उसे चोदने के लिए अपने कपड़े उतार ना इसलिए उसके बदन में हलचल सी होने लगी थी देखते देखते संजू उसकी आंखों के सामने अपनी जींस की पेंट उतार कर एक तरफ रख दिया और केवल अंडरवियर में उसके सामने खड़ा हो गया जिसमें उत्तेजना के मारे तंबू बना हुआ था यह देखकर मनीषा के होश उड़ गए,,,,, एक पल के लिए संजू के अंडरवियर को देखती ही रह गई और संजू या देखकर मन ही मन मुस्कुराने लगा क्योंकि कपड़े उतारने में भी उसकी एक जला की थी जिसमें वह कामयाब होता हुआ नजर आ रहा था,,,,,, मनीषा अभी भी उसके अंडर वियर की तरफ देख रही थी जवान होने के नाते इतना तो उसे पता ही था कि इसके अंदर बीयर में क्या है कैसा है लेकिन अभी तक मनीषा ने संजू के लंड के दर्शन नहीं की थी,,,, मनीषा का ध्यान भंग करते हुए संजू बोला,,,)

अब मैं चला नहाने,,,,(इतना सुनते ही मनीषा को जैसे किसी ने नींद से जगाया हो वह एकदम से चूक गई और अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा दी संजू धीरे-धीरे झरने के पानी में उतरने लगा तो पीछे से आवाज लगाते हुए मनीषा बोली,,,)

आराम से संजू फिसलन होगी,,,,

चिंता मत करो मनीषा,,,,(और ऐसा कहते हुए धीरे-धीरे बिछड़ने के पानी में उतरने लगा मनीषा उसके बदन को देख रही थी उसकी चौड़ी पीठ को देख रही थी उसके मजबूत शरीर को देख रही थी और एक गठीले बदन मजबूत शरीर को देखकर उसकी चूत खुद की काबू में बिल्कुल भी नहीं थी और पानी छोड़ रही थी,,,,, देखते ही देखते संजू झरने के पानी में उतर कर नहाने लगा पानी बहुत गहरा नहीं था सिर्फ छाती तक था इसलिए बड़े आराम से तैरता हुआ संजू नहाने का मजा लेने लगा,,,,,, पानी बहुत ठंडा था जिससे गर्मी से राहत मिल रही थी नहाते हुए समझो मनीषा की तरफ देख कर उसे भी अंदर आने के लिए बोला तो मनीषा उसे इंकार कर रही थी मनीषा का भी मन कर रहा था कि संजू के साथ झरने में नहाए ठंडे पानी का मजा ले लेकिन शर्म आ रही थी और वैसे भी उसके पास कोई दूसरा कपड़ा भी नहीं था यह सोचकर बंदर उतरने से कतरा रही थी लेकिन फिर सोचा कि संजू भी तो एक ही कपड़ा लाया है उसे उतारकर अंदर चला गया लेकिन वह कैसे उतार सकती है वह एक लड़की है,,,, मनीषा अपने आप से ही सवाल कर रही थी और अपने आप को ही जवाब दे रही थी,,,, लड़की है तो क्या हुआ संजू को तो वह अपना बॉयफ्रेंड समझती है ना फिर उसके सामने कैसी शर्म और वैसे भी यहां कोई तीसरा तो है वह देखने वाला उसके सामने कपड़े उतार कर जाने में शर्म कैसी,,,,,

नहीं नहीं यह गलत है,,,, कुछ भी गलत नहीं है कपड़े उतार कर उतर जा पानी में बहुत मजा आएगा,,,,,

(अपने आप से ही सवाल जवाब करने के बाद मनीषा का खुद पर काबू नहीं चल रहा था वह संजू को देखकर उसकी तरफ आकर्षित व जा रही थी वह भी पानी में उतर जाना चाहती थी इसलिए धीरे से अपनी जगह से उठी और एक बड़े से पत्थर के पीछे चली गई संजू की नजर अभी तक मनीषा पर नहीं थी वह नहाने का मजा ले रहा था लेकिन जब पेड़ के नीचे देखा तो वहां मनीषा नहीं थी तो वह एकदम चिंतित हो गया यहां वहां देखने लगा लेकिन मेरी सांसों से कहीं नजर नहीं आ रही थी तो वह धीरे से किनारे की तरफ आते हुए आवाज लगाते हुए बोला,,,)

मनीषा,,,,, मनीषा कहां हो तुम मजाक का समय नहीं है,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह किनारे पर आ गया और जैसे ही उसकी नजर बड़े से पत्थर के पीछे गई तो धीरे से वहां पर मनीषा बाहर निकलती हुई नजर आई और मनीषा को देखकर संजू के होश उड़ गए उसकी आंखें फटी की फटी रह गई संजू बड़े से पत्थर के पीछे अपनी सलवार और कमीज दोनों उतारकर केवल ब्रा और पेंटी में बाहर आ रही थी पीले रंग की ब्रा और पेंटी में मनीषा के खूबसूरत गोरे बदन को देख कर संजू का लंड एकदम से खड़ा हो गया उसके मुंह में पानी आ गया वह देखता ही रह गया और मनीषा मुस्कुराते हुए धीरे-धीरे झरने के पानी के किनारे आ गई,,,, संजू को इस तरह से आंखें फाड़े देखता हुआ देखकर मनीषा बोली,,,)

ऐसे क्या देख रहे हो,,,?

संजू और मनीषा झरने क किनारे

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तुम बहुत खूबसूरत हो मनीषा,,,,,

चलो रहने दो हाथ आगे बढ़ाओ मैं भी नहाऊंगी,,,(इतना कहने के साथ ही मनीषा पानी के बाहर रहकर हाथ आगे बढ़ाकर संजू का सहारा लेने लगी संजू भी आगे बढ़ाकर मनीषा का हाथ थाम लिया और उसे झरने के पानी के अंदर उतारने लगा धीरे से अपनी चिकनी नंगी टांगों पानी के अंदर रखकर वो धीरे धीरे उतरने लगी लेकिन जैसे ही दूसरा पैर रखी कीचड़ की वजह से उसका पैर फिसल गया और वह सीधा जाकर संजू के ऊपर गिर गई संजू ने उसे अपनी बाहों में लेकर एकदम से संभाल लिया लेकिन उसे संभालते संभालते पानी में गिर गया था और मनीषा भी पानी में गिर गई थी पानी बहुत ठंडा था लेकिन संजू के बदन की गर्मी उसे ठंडक महसूस नहीं होने दे रही थी,,, संजू अपनी बाहों में पकड़कर मनीषा को सहारा देते हुए धीरे-धीरे से पानी मिले जाने लगा मनीषा संजू की आंखों में पूरी तरह से खोने लगी थी उसके बदन की गर्मी उसे मदहोश कर रही थी वह एक जवान मर्द की बांहों में थी दोनों के बदन पर नाम मात्र के कपड़े थे और पूरा बदन नंगा था पानी में रहने के बावजूद भी मनीषा को,,,, संजू के अंडरवियर में तना हुआ खून का अपनी दोनों टांगों के बीच साफ महसूस हो रहा था जिसे वह अपनी दोनों टांगों के बीच महसूस करके मस्त हुए जा रही थी संजू मनीषा को पानी के अंदर बिल्कुल भी छोड़ना नहीं चाहता था वह उसे अपनी बाहों से लगाए हुए झरने के पानी के बीचो बीच पहुंच गया और नहाने का मजा लेने लगा मनीषा भी नहाना शुरू कर दी थी लेकिन एक जवान लड़के के करीब रहकर वह उत्तेजित हुए जा रही थी यही हाल संजू का भी था संजू की आंखों के सामने सबसे बेहद खूबसूरत लड़की की ब्रा और पेंटी में थी और वह भी पानी में नहा रही थी यह देखकर संजू का लंड दर्द करने लगा था बार-बार पानी में उसे सहारा देने के बहाने संजू उसके अंगों को पकड़ ले रहा था,,,, उसे आगे से सहारा देने के बहाने उसकी चूची को दबा दे रहा था यह सब मनीषा को अच्छी तरह से समझ में आ रहा था कि जो कुछ भी संजु कर रहा है जानबूझकर कर रहा है लेकिन मनीषा को मजा आ रहा था वह उत्तेजित हुए जा रही थी,,,, संजू से अब सब्र करवाना बिल्कुल मुश्किल हुआ जा रहा था इसलिए पानी के अंदर मनीषा को एक बार फिर से अपनी बाहों में लेकर उसकी आंखों में देखते हुए बोला,,)

संजू और मनीषा

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मैं कभी सपने में नहीं सोचा था कि एक खूबसूरत लड़की के साथ झरने के पानी में इस तरह से नहाऊंगा,,,,

और मैं भी कभी नहीं सोची थी कि जिससे प्यार करूंगी उसके साथ झरने के पानी में नहाने का मजा भी लूंगी,,,,,(मनीषा का खुद पर काबू बिल्कुल भी नहीं था संजू के द्वारा अंगों का छेड़छाड़ करने की वजह से मनीषा के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी वह पूरी तरह से बेकाबू हुए जा रही थी,,,, दोनों एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे दोनों की आंखों में प्यार के साथ-साथ वासना के शोले भी नजर आ रहे थे संजू औरतों से कैसे खेला जाता है अच्छी तरह से जानता था उन्हें कैसे काबू में किया जाता है अच्छी तरह से जानता था इसलिए अकेले ही पर बिना कुछ सोचे समझे अपने होठों को मनीषा के लाल-लाल होठों पर रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा संजू की इस हरकत पर मनीषा पूरी तरह से मदहोश हो गई वह अपने आप को पीछे लेने की जगह उसका साथ देते हुए थे लाल-लाल होठों को खोल दी और एक दूसरे के होंठों को अपने होंठों में लेकर पीना शुरू कर दिए संजू पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था वह पानी के अंदर ही अपने हाथ को नीचे की तरफ लाकर मनीषा की गांड को पकड़कर जोर जोर से दबा रहा था और अपने तंबू को उसकी दोनों टांगों के बीच की दरार में ठोकर मार रहा था जिसे महसूस करके मनीषा पानी के अंदर भी पानी छोड़ रही थी,,,, संजू उसके अंगों से छेड़छाड़ करते हुए उसका लाल-लाल होठों का रसपान कर रहा था और यह अच्छी तरह से समझ गया था कि आप मनीषा पूरी तरह से उसके काबू में आ गई है क्योंकि मनीषा भी उसका साथ दे रही थी आखिरकार वह भी पूरी तरह से जवान लड़की थी और पहली बार जवान लड़की का साथ पाकर वो मदहोश हो रही थी अपने आपको खो रही थी और उसी का फायदा उठाते हुए,,,, संजू धीरे से उसकी पीठ के पीछे अपना हाथ ले गया और उसकी ब्रा का हुक खोल कर उसे उसकी बाहों में से अलग करने लगा मनीषा उसे बिल्कुल भी रोक नहीं रही थी वह जैसा वह कर रहा था उसे करने दे रही थी देखते-देखते मनीषा के बदन से कपड़ा उतार कर सामने पेड़ के नीचे फेंक दिया वह कमर के ऊपर पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी संजू पानी के अंदर उसकी दोनों चूचियों को पकड़कर दबाने का मजा लेने लगा मनीषा को भी मदहोशी जा रही थी वह पूरी तरह से मस्त हो जा रही थी,,,,, पानी के अंदर ही संजू मनीषा को अपनी गोद में उठाया और उसकी चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया यह पहला मौका था जब मनीषा अपनी चूची को किसी को पिला रही थी मनीषा पूरी तरह से मस्त हो गई मदहोश हो गई ठंडे ठंडे पानी में भी उसके बदन में गर्मी जाने लगी संजू अपनी काबिलियत से मनीषा को पूरी तरह से अपने वश में कर रहा था और मनीषा भी पूरी तरह से संजू की मर्दानगी के आगे घुटने टेक रही थी,,,,

मनीषा की टांग उठके

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संजू जी भर कर मनीषा की दोनों चुचियों का मजा ले रहा था कपड़ों के ऊपर से ही सूचियों का आकार देखकर संजू समझ गया था कि मनीषा की चूची में कुछ ज्यादा ही मजा आएगा और ऐसा हो भी रहा था मनीषा बारी बारी से अपनी दोनों चुचियों को संजू को पिला रही थी,,,,, संजू की हालत और ज्यादा खराब हो गई जब उसने अपने अंडर वियर में मनीषा के हाथ को फिसलता हुआ महसूस किया और अगले ही पल मनीषा की मजबूत नरम नरम हथेलियों में अपने लंड को महसूस किया यह एहसास संजू के तन बदन में आग लगा दिया संजू से अब सब्र कर पाना मुश्किल हुआ जा रहा था इसलिए वह धीरे-धीरे मनीषा को लिए हुए पानी से बाहर आने लगा मनीषा को भी जैसे पानी से बाहर आने की जल्दबाजी हो गई थी वह बिना कुछ बोले संजू के इशारे पर धीरे-धीरे पानी से बाहर आ गई और बाहर आते ही संजू से बिल्कुल भी सब्र नहीं हुआ वह मनीषा को तुरंत अपनी गोद में उठा लिया और बड़े से पत्थर के पास पहुंच गया जो कि पेड़ की छांव के नीचे ही था और उस बड़े से पत्थर पर मनीषा को लीटा कर तुरंत उसकी चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे उतारने लगा मनीषा उसे बिल्कुल भी रोक नहीं रही थी वह भी यही चाह रही थी अपनी गांड उठाकर संजू को अपनी चड्डी उतरवाने में मदद करने लगी और अगले ही पल संजू ने अपनी मौसी की लड़की दोनों हाथों से उतारकर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया,,,, चड्डी के उतरते हैं संजू की नजर जैसे ही मनीषा की चूत पर पड़ी तो वह उसे नजर भर कर देखने लगा उसकी आंखों में चमक आ गई चूत एकदम साफ थी झांठ के बाल का रेशा तक नहीं था ऐसा लग रहा था कि आज ही क्रीम लगाकर साफ कि है,,,,, संजू की सासे बड़ी तेजी से चल रही थी उससे सब्र कर पाना मुश्किल हो जा रहा था वह धीरे से नीचे झुका और मनीषा के दोनों टांगों को अपने हाथों से पकड़कर फैलाते हुए अपने प्यासी होठों को उसके गुलाबी चूत पर रख दिया या देखकर और उसके होंठ को अपनी चूत पर महसूस करके मनीषा के तन बदन में आग लग गई वो एकदम से मचल उठी और अपने आप ही उसकी कमर ऊपर की तरफ उठ गई,,,,,।

मनीषा और संजू

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अब मनीषा के बस में कुछ भी नहीं था कुछ देर पहले मनीषा अपने आप पर काबू करके सबकुछ रोक सकती थी लेकिन संजू के होठों को अपनी चूत पर महसूस करके वह बेकाबू हो गई थी उससे अब अपने आप को रोक पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन लगने लगा था वह पूरी तरह से पागल हो जा रही थी जैसे-जैसे संजू कीजिए उसके गुलाबी पत्तियों के अंदर तक शिरकत कर रही थी वैसे वैसे मनीषा के तन बदन में जवानी की आग और ज्यादा भड़क रही थी वह मचलने लगी थी पड़े से पत्थर पर पीठ के बल लेटी हुई वह कसमसा रही थी,,,,

संजू को मनीषा की चूत चाटने में बहुत मजा आ रहा था मनीषा की चूत पूरी मलाई से भरी हुई थी इससे पहले मनीषा ने कभी किसी को अपनी चूत के दर्शन तक नहीं कराई थी संजू पहला लड़का था जिसे वह अपना सब कुछ सौंपने जा रही थी,,,, और इस मौके का इस अवसर का पूरा लाभ लेते हुए संजू मनीषा की जवानी पर पूरी तरह से छा जाना चाहता था,,,,,।

ओहहहह संजू,,,,आहहहहहह आहहहहहह ऊममममममम,,, बहुत मजा आ रहा है संजू,,,,,आहहहहह पूरी जीभ‌ अंदर तक डालकर चाटो,आहहहहहहहह,,,

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मनीषा का इस तरह से कसमसा ना उसकी उत्तेजना संजू से बर्दाश्त नहीं हो रही थी और अगले ही पल वह अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल कर उसे अंदर-बाहर करने लगा जिससे मनीषा के तन बदन में उत्तेजना की लहर और ज्यादा उठने लगी वो मदहोश होने लगी मस्ती के सागर में डूबने लगी उसे बहुत मजा आ रहा था वह अपनी गांड को बड़े से पत्थर पर गोल गोल घुमा कर संजू से चूत चटाई का मजा ले रही थी,,,,, संजू की चूत से बहुत पानी निकल रहा था संजू कभी सोचा नहीं था कि मनीषा को झरने के किनारे भोगने का उसे अवसर मिलेगा,,,,,

बहुत मजा आ रहा है मनीषा तुम्हारी चूत भी बहुत खूबसूरत है,,,,।ऊममममम चाटने में बहुत मजा आ रहा है,,,,ऊममममम बहुत ही लाजवाब है,,,(. उंगली से मनीषा की चूत की मलाई निकाल निकाल कर मनीषा की आंखों के सामने ही वह अपने मुंह में डालकर उसे मूली को चाट रहा था या देखकर मनीषा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह बेकाबू हुए जा रही थी,,,,, अपनी उंगली को रफ्तार देते हुए और अपनी जीत को चूत पर घुमाते हुए मनीषा को संजू बहुत ज्यादा मजा ले रहा था देखते ही देखते मनीषा किसान से ऊपर नीचे होने लगी उसके बदन में अकड़न बढ़ने लगी और अगले ही पल उंगली और चीज से ही मनीषा झड़ गई और उसकी चूत से काम रस की पिचकारी फूट पड़ी जिसे संजू अपनी जी से चाट चाट कर अपने गले के नीचे उतार रहा था,,,, मनीषा झड़ चुकी थी बिना चुदवाई बिना लंड को अपने चूत मिली है वह अपना काम रस की पिचकारी मार चुकी थी लेकिन अभी बहुत कुछ बाकी है संजू धीरे से खड़ा हुआ और मनीषा की आंखों के सामने ही अपनी अंडरवियर को निकाल कर फेंक दिया और उसकी आंखों के सामने खुद को एकदम नंगा होगा संजू को देखकर मनीषा की आंखों की चमक बढ़ाएं वह पूरी तरह से मौत हो गई एक उसके तन बदन में हिलोरे मारने लगी यह डर था संजू के मोटे तगड़े लंबे लंड को देखकर,,, वह कभी संजू के लंड को देखती तो कभी अपनी चूत की तरफ देखने लगती संजू अच्छी तरह से समझ रहा था कि मनीषा के मन में क्या चल रहा है इसलिए वह अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए बोला,,,)

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चिंता मत करो मनीषा,,,, लड़कियों की चूत,,, लंड के लिए ही बनी होती है बड़े आराम से चला जाएगा तुम चिंता मत करो बस एक बार इसे मुंह में लेकर चूस‌ लो फिर देखना इसकी ताकत कैसे बढ जाती है,,,,,,

(मनीषा अपनी सहेलियों से इतना तो ज्ञान ले चुकी थी कि लड़कियां लड़कों के लंड़ को मुंह में लेकर चुस्ती है,,,, और बहुत मजा भी आता है लेकिन इस सुख को प्राप्त करने से पहले उसे झिझक हो रही थी लेकिन इस समय उसके बगल में भी उन्माद का असर चढ रहा था,, जिसके चलते हैं वह धीरे से उठी और,,,, संजू के लंड की तरफ देखने लगी उसकी नजरों में अचरज भरा हुआ था इसलिए संजू अपने लंड को हाथ में पकड़ कर आगे बढ़ते हुए ठीक उसके मुंह के सामने लाकर खड़ा कर दिया और बोला,,,।

अपने हाथ में पकड़ कर देखो बहुत मजा आएगा,,,,

और मनीषा यह सुनकर अपने हाथ को आगे बढ़ाई और अगले ही पल संजू के मोटे तगड़े लंड को अपने हाथ में पकड़ ली लंड पूरी तरह से गर्म था अपनी हथेली में उसकी मोटाई और गरमाहट को महसूस करके उसकी चूत से पानी निकलने लगा,,, लेकिन फिर भी लंड के सुपाड़े को अपने होठों से लगाने में उसे अजीब सा लग रहा था और यही झिझक को खत्म करने के लिए संजू अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसके होठों से रगड़ने लगा और मनीषा मदहोश होने लगी उसके होठों पर रगड़ते रगडते कब मनीषा के हॉट अपने आप खुल गए खुद मनीषा को भी पता नहीं चला और अगले ही पल मनीषा के लाल-लाल होठों के बीच संजू का लंड और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था शुरु शुरु में मनीषा को थोड़ा अजीब लग रहा था लेकिन थोड़ी ही देर में उसे मज़ा आने लगा और आइसक्रीम कौन की तरह वह मजा लेने लगी वह पूरा गले तक लेकर उसे चाटने का आनंद लुट रही थी,, संजू पूरी तरह से मदहोश बजा रहा था झरने के किनारे बड़े से पेड़ के पत्थर पर खड़े होकर संजू धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करके खिला रहा था यह जगह जंगली झाड़ियों और बड़े बड़े पेड़ों से गिरी होने के कारण दूर-दूर से कुछ भी दिखाई देने का अंदेशा नहीं था इसलिए दोनों बेफिक्र होकर मजा लूट रहे थे कुछ देर तक मनीषा संजू के लंड का मजा इसी तरह से लउटती रही लेकिन अब समय आ गया था मनीषा की चूत का उद्घाटन करने का उसकी चूत में पहली मर्तबा लंड डालने का और यह कार्य संजू अपने कंधों पर ले चुका था जिसे सफलतापूर्वक पार करना था और यही करते हुए वह मनीषा के मुंह में से अपने लंड को बाहर खींच लिया और फिर हम मनीषा को उसी तरह से बडे से पत्थर पर लिटा कर उसकी दोनों टांगों को फैला दिया और अपने लिए जगह बनाने लगा अगले ही पल संजू के लंड का मोटा सुपाड़ा मनीषा की चूत के ऊपर था जो कि काफी गर्म था मनीषा की चूत से लगातार काम रस बह रहा था जिसकी चिकनाहट पाकर सुपाड़ा अंदर घुसने को तड़प रहा था और अगले ही पल,,,, गुलाबी छेद पर सुपाड़ा को रखकर धीरे-धीरे उसे अंदर डालने का प्रयास करने लगा,,,, मदन रस की चिकनाहट पाकर संजू का लंड धीरे-धीरे अंदर प्रवेश करने लगा लेकिन मनीषा पहली बार किसी लंड को अपनी चुत मे ले रही थी इसलिए,,,, उसे थोड़ा दर्द महसूस हो रहा था,,,, संजीव इस बात को अच्छी तरह से जानता था इसलिए बड़े आराम से आगे बढ़ रहा था लेकिन देखते ही देखते काफी मशक्कत करने के बाद आलूबुखारे की तरह मोटा सुपाड़ा चूत के अंदर प्रवेश कर गया अब कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन सुपाड़ा अंदर घुसते ही उसकी गर्माहट पाकर मनीषा की हालत खराब होने लगी उसे दर्द महसूस होने लगी,,,, लेकिन अभी तक में दर्द को बर्दाश्त कर रही थी मनीषा जैसी खूबसूरत लड़की की चूत पाकर संजू पूरी तरह से मस्त हो चुका था इसलिए एक करारा धक्का मारा और आधा लंड मनीषा की चूत में समा गया लेकिन वह दर्द से बिलबिला उठी उसके मुख से चीख निकल गई लेकिन उसकी चीख को इस वीराने में कोई सुनने वाला नहीं था झरने से नीचे गिरी रहे पानी के स्वर में चाहे कितना भी आवाज करो किसी को सुनाई देने वाला नहीं था इसलिए संजू निश्चिंत था लेकिन मनीषा के दर्द को वह भी कम करना चाहता था इसलिए उसके कंधों को पकड़कर उसे समझाते हुए बोला,,,,।

बस बस बस मनीषा हो गया बस थोड़ा सा और अंदर घुस आने दो फिर देखो कितना मजा आता है,,,,

नहीं नहीं संजू मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है बाहर निकाल लो मुझसे नहीं हो पाएगा मुझे बहुत दर्द हो रहा है,,,

बस थोड़ा सा रानी थोड़ा सा दर्द और सहन कर लो फिर स्वर्ग का मजा मिलेगा,,,,

नहीं संजू मुझसे नहीं हो पाएगा प्लीज इसे बाहर निकाल लो,,,

(संजू अच्छी तरह से जानता था कि मनीषा की बात को मानने का मतलब था कि फिर दोबारा वह कभी भी मनीषा की चूत हासिल नहीं कर पाएगा,,,, और यही संजू नहीं चाहता था वह जानता था कि समझाने से काम चलने वाला नहीं है उसे अपनी हरकतों से उसका दर्द कम करना पड़ेगा इसलिए दोनों हाथ को आगे बढ़ाकर उसकी चूची को पकड़कर जोर-जोर से दबाते हुए बोला,,,)

बस बस मनीषा हो गया बहुत मस्त और कसी हुई चूत है तुम्हारी मैं कभी सोचा भी नहीं था कि तुम्हारी चुत कसी हुई होगी,,,

पहली बार है,,,(लड़खड़ाते और दर्द भरे स्वर में बोली)

साफ दिखाई दे रहा है मनीषा की पहली बार है मैं तो बहुत खुश हूं कि मैं ऐसी खूबसूरत लड़की से प्यार करता हूं जिसके बदन को स्पर्श करने वाला है जिस की चूत तक पहुंचने वाला में पहला इंसान हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही संजु चुचियों पर झुका उसे मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया,,,, संजू की बात का और उसकी हरकत का मनीषा पर‌ असर कर रहा था उसका दर्द धीरे-धीरे कम हो रहा था जब सच में यह देखा कि मनीषा का दर्द कम हो रहा है तो वह फिर से अपने आप को पूरी तरह से तैयार करके एक फिर से जोरदार धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड चूत में घुसा दिया इस बार फिर से मनीषा के मुंह से चीख निकल गई लेकिन अब समझाने का कोई मतलब नहीं था इसलिए संजू तुरंत उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और दोनों हाथों से उसकी दोनों संतो को दबा दबा कर उसे मजा देने लगा कुछ ही देर में संजू की हरकत का असर मनीषा पर होने लगा और उसका दर्द पूरी तरह से गायब हो गया और दर्द की जगह आनंद ने अपनी जगह ले लिया था,,,,

थोड़ी सी देर में मनीषा के मुंह से हल्की-हल्की सिसकारी की आवाज निकलने लगी तो संजू भी अपनी कमर पिलाना शुरू कर दिया,,,, मनीषा को चोदने में संजु को बहुत मजा आ रहा था कुछ महीने पहले ही उसे अपनी किस्मत पर इतना यकीन नहीं था कि उसे चोदने के लिए इतनी मस्त मस्त चूत मिलेगी और शुरुआत मनीषा की मां की चूत से ही हुई थी मनीषा की मां की चूत पाकर वह पूरी तरह से अपने आप को धन्य समझने लगा था और फिर उसके बाद खुद की छोटी बहन की चूत पाकर वह पूरी तरह से मदहोश हो गया फिर धीरे-धीरे मनीषा की सहेली और फिर उसके बाद बड़ी मशक्कत करने के बाद उसे अपनी मां की चूत हासिल हुई थी और आज मनीषा को देखते ही देखते वह चुदाई के मामले में एक से झंडे गाड़ता चला जा रहा था,,,,

संजू की कमर एक ही लय में आगे पीछे हो रहे थे जिसका मजा मनीषा बड़े अच्छे से उठा रही थी ,,, अपनी गर्दन उठा कर अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच दिखाकर संजू के मोटे तगड़े लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर होता हुआ देख रही थी और मस्त हो रही थी इस तरह से खुली वादी में चुदाई करने का अपना अलग ही मजा था इस बात को समझो अच्छी तरह से समझ रहा था और यह मजा वह अपनी मौसी की लड़की मनीषा को भी अच्छी तरह से दे रहा था,,,, मनीषा को अब किसी बात का डर नहीं लग रहा था वह बड़ी से पत्थर पर नंगी लेट कर दोनों टांगों को फैला कर अपने चचेरे भाई के लंड का मजा ले रही थी,,, संजू मनीषा को हर एक तरह से चोदना चाहता था इसलिए थोड़ी देर में अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाल लिया और उसकी जगह खुद पीठ के बल लेट गया और मनीषा को अपने लंड पर चढ़ने के लिए बोला मनीषा को इस तरह का अनुभव बिल्कुल भी नहीं था लेकिन संजू जैसा जैसा बताया कि ऐसा वैसा मनीषा कर दी गई और अपनी दोनों टांगों को संजू की कमर के इर्द-गिर्द रखकर,,,, अपनी गोल-गोल कांड को नीचे की तरफ लाकर अपनी गुलाबी शहर को ठीक है संजू के लंड के सुपाड़े पर रखकर अपनी गांड का दबा उसके ऊपर बढ़ाने लगी देखते ही देखते मनीषा की आंखों के सामने,,, ही संजू का मोटा और लंबा लंड धीरे-धीरे उसके गुलाबी छेद में अंदर तक घुसता चला गया और जैसे ही लंड चूत में घुसकर खो गया वैसे ही मनीषा संजू के लंडपर उठक बैठक करने लगी,,, मनीषा के आश्चर्य के बीच बड़े आराम से मनीषा संजू के लंड पर अपनी गांड पटक रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था इस क्रिया को करने में,,, संजू उसके दोनों हाथ की हथेली को अपनी हथेली में पकड़कर उसे सहारा दिए हुए था कि कहीं वह लड़का ना जाए और इसीलिए वह बड़े आराम से संजू के लंड को उठक बैठक करके अपनी चूत में ले रही थी कुछ देर तक संजू इसी तरह से चुदाई का मजा लूटता रहा लेकिन अभी तक उसका पानी निकला नहीं था और इस दौरान मनीषा का दूसरी बार पानी निकल चुका था वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी पहली चुदाई ही इतनी देर तक चल रही थी वह कभी सोची नहीं थी वह आनंद के सागर में गोते लगा रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,,

संजू उसकी हथेली को छोड़कर उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ा और उसे थाम कर ऊपर की तरफ उठाए रखे और अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाल लिया और उसे अपने ऊपर से हटने के लिए बोला गहरी सांस लेते हुए मनीषा उसके ऊपर से हट गई और संजू उसे बड़ी से पत्थर का सहारा लेकर अपनी गांड उठाकर खड़े रहने के लिए बोला,,,, संजू के आकर्षण में पूरी तरह से खो चुकी मनीषा जैसा जैसा संजू कह रहा था वैसा वैसा मनीषा करती जा रही थी यह सब करने में उसे बहुत शर्म महसूस हो रही थी लेकिन हालात पूरी तरह से उसके काबू में नहीं था वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी इसलिए संजू की बात मानते हुए बड़े से पत्थर को पकड़ कर उसका सहारा लेकर अपनी गांड को ऊपर की तरफ हवा में उठा दी,,,, गोल गोल गांड देख कर संजू फिर से मस्त हो गया और पीछे से मनीषा की चूत में डालकर चोदना शुरू कर दिया इतनी जोर जोर से अपनी कमर हिला रहा था कि,,, मनीषा की जांघे उसकी जांघों से टकराकर अजीब सी आवाज पैदा कर रही थी,,,,

देखते ही देखते एक बार फिर से मनीषा की सांसे ऊपर नीचे होने लगी और यही आप संजू का भी था संजू कस के मनीषा की चूची को दोनों हाथों से पकड़ लिया पूरा जोर लगा कर धक्के पर धक्का पेलने लगा,,,,।

आहहहह आहहहह ऊहहहहहह मनीषा मेरी जान,,,आहहहहहह ऊममममम

ओहहहहह ,,ओहहहहह और जोर से राजा और जोर से,,,आहहहहह मुझे कुछ-कुछ हो रहा है,,,आहहहहहह

और अगले ही पल दोनों एक साथ झड़ गए वासना का तूफान शांत हो चुका था दोनों ने अद्भुत सुख प्राप्त किया था संजू ने धीरे से मनीषा की चूत से अपने लंड को बाहर निकाला तो मनीषा शर्म से पानी पानी हो गई वह पूरी तरह से नंगी थी लेकिन अब वह होश में आ चुकी थी इसलिए संजू से शर्मा रही थी वह धीरे से पेड़ के नीचे से अपनी ब्रा और पेंटी उठाई और बड़े से पत्थर के पीछे चली गई संजु अच्छी तरह से जानता था कि मनीषा क्या करने के लिए बड़े से पत्थर के पीछे गई है इसलिए वह वहां गया नहीं और वह भी पेड़ के नीचे आकर अपनी अंडरवियर पहने लगा जोकि गर्मी की वजह से धूप पाकर सूख चुकी थी,,,, संजू अपने कपड़े पहन कर तैयार हो चुका था और थोड़ी देर में मनीषा बड़े से पत्थर के पीछे से बाहर आए उसकी आंखों में शर्म साफ नजर आ रही थी अपनी नजरों को नीचे छुपाई हुई थी बाल अभी भी गीले थे लेकिन कपड़े वह पहले से ही उतार चुकी थी इसलिए सूखे ही थे ब्रा और पेंटी थोड़ी बहुत गीली होगी जो कि बदन की गर्मी से ही सूख जाएगी,,,, मनीषा शरमाते हुए स्कूटी के पास आई और बिना कुछ बोले वही खड़ी हो गई संजू जानता था कि अब चलना जरूरी है इसलिए बिना कुछ बोले स्कूटी को स्टार्ट किया और मनीषा को पीछे बिठाकर घर की तरफ निकल गया रास्ते भर वह दोनों बात नहीं किए संजू बात करना चाहता था लेकिन मनीषा की हालत को वह अच्छी तरह से समझ सकता था,,,

कुछ भी देर में वह दोनों उसी रेस्टोरेंट के पास पहुंच गए जहां से दोनों झरने के लिए निकले थे वहां पहुंचते ही मनीषा का फोन बजने लगा फोन उठाकर देखी तो डिस्प्ले पर उसकी मम्मी का नंबर था कॉल रिसीव करके हेलो बोलिए तो सामने से उसकी मम्मी बोली,,,,

मनीषा मैं और तेरे पापा एक रिश्तेदार के घर जा रहा है और कल शाम तक लौटेंगे तू सब कुछ देख लेना,,,,

लेकिन,,,,(इतना कहना था कि सामने उसकी मम्मी ने फोन कट कर दी और मनीषा संजू की तरफ देखने लगी और संजू मनीषा की तरफ देख कर मुस्कुराने लगा)
 
जिंदगी में पहली बार मनीषा चुदाई के अद्भुत सुख को प्राप्त करते हुए उसे महसूस कर रही थी वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी एक जवान लड़की होने के नाते उसे इतना तो पता था कि चुदाई के काम में बहुत मजा आता है लेकिन इतना ज्यादा मजा आता है वह कभी सपने में नहीं सोचा कि बहुत पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी संजू के लंड के मोटाई को अपनी चूत की अंदरूनी दीवारों में महसूस करके वह पानी पानी हो चुकी थी संजू एक बार पानी निकाला था और वह 3 बार पानी फेंक चुकी थी,,, बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय,,, चुदाई का मजा लेकर मनीषा पूरी तरह से निहाल हो चुकी थी अब तो वहां संजू की और भी ज्यादा दीवानी हो चुकी थी,,,,,

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पूरे रास्ते पर स्कूटी पर बैठे-बैठे मनीषा को यही एहसास हो रहा था कि जैसे अभी भी संजू का मोटा तगड़ा लंड उसकी चूत में घुसा हुआ है हल्का हल्का मीठा दर्द उसे अभी भी अपनी चूत में महसूस हो रहा था लेकिन यह दर्द उस सुख के आगे कुछ भी नहीं था जिस सुख को प्राप्त करने के लिए मनीषा ने कोई भी जल्दबाजी नहीं की थी सब कुछ अपने आप ही हो गया था झरने पर आने से पहले मनीषा के मन में या संजू के मन में इस तरह की भावना बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन झरने के पानी में उतरते ही जैसे दोनों के तन बदन में मदहोशी छाने लगी थी,,, ऐसा लग रहा था कि वह छोटा सा तालाब मीठे झरने का पानी से नहीं बल्कि शराब की बूंदों से भरा हुआ था जिसका नशा एहसास अभी भी दोनों के तन बदन में अपना असर दिखा रहा था,,,

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संजू और मनीषा दोनों उसी रेस्टोरेंट के पास पहुंच चुके थे जहां से वह दोनों नए सफर की शुरुआत किए थे लेकिन यहां पर उसकी मम्मी का फोन आ गया था और वह एकदम से आंखों में खुशी लिए संजू की तरफ देख रही थी संजू भी मनीषा के मतलब को अच्छी तरह से समझ गया था दोनों के तन बदन में फिर से हलचल होने लगी मनीषा की चूत से तो अभी भी काम रस टपक रहा था और रात भर घर वालों की बिरादरी में क्या क्या होगा इस बारे में सोच कर ही उसके तन बदन में मदहोशी का नशा छा रहा था मनीषा रात के मुकाबले के लिए पूरी तरह से तैयार थी इसलिए संजू को अपने घर पर फोन करके यह कहने को कह दी थी कि उसके दोस्त की बर्थडे पार्टी और आज वह रात को ही रुकेगा और संजू भी एक नई और खूबसूरत चूत की लालच में घर पर इंतजार कर रही दो दो चूत को छोड़कर मनीषा की चूत में खो जाने के लिए तैयार हो गया,,,,, वैसे तो मनीषा शर्म के मारे संजू से नजर नहीं मिला पा रही थी संजू से बड़ी होने के बावजूद भी वह संजू से शर्मा रही थी क्योंकि जिंदगी में पहली बार वह अपने तन को किसी जवान मर्द को सौंपी थी और वह भी किसी और को नहीं अपने ही चचेरे भाई को इसलिए संजू से आंख मिलाने में उसे शर्म महसूस हो रही थी,,,, घर पर खाना तो बनाना नहीं था इसलिए,,,, मनीषा एक अच्छे से रेस्टोरेंट्स खाना पैक करा कर संजू के साथ अपने घर पर पहुंच गई थी,,,,

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घर का मुख्य द्वार बंद करके दोनों सोफा सेट पर आकर बैठ गए पंखा चालू करके दोनों ठंडी हवा लेने लगे संजू मनीषा की तरफ देख कर मुस्कुरा रहा था लेकिन मनीषा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह संजू की नजरों का सामना नहीं कर पा रही थी बार-बार उसकी आंखों के सामने वही तेरी याद आ रहा था जब बड़े से पत्थर पर लिटा कर संजू ने उसकी दोनों टांगों को अपने हाथों से खिला कर उसकी मखमली चूत में अपना मोटा लंड डालकर उसको चोदा था,,, बेहद अद्भुत सुख प्राप्त करने के बावजूद भी उस अदृश्य के बारे में सोच कर मनीषा शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी आज उसके जीवन में उसकी चूत में लंड प्रवेश का उद्घाटन था जो कि बेहद सफलतापूर्वक संजू ने प्राप्त कर लिया था मनीषा की चूत का उद्घाटन करके वह भी बेहद खुश था वह मनीषा को देखकर बार-बार मुस्कुरा रहा था और मनीषा अपनी नजरों को चुरा रही थी तो यह देखकर संजू बोला,,,,।

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क्या हुआ मनीषा तुम्हें अच्छा नहीं लगा क्या,,,?

नहीं ऐसी कोई भी बात नहीं है,,,

तो कुछ बोल क्यों नहीं रही हो,,,, अगर ऐसे ही शर्म आती रहोगी तो अभी तो पूरी रात बाकी है और तुम भी तो रात को कुछ करने के लिए ही मुझे अपने घर लेकर आई हो ना फिर इस तरह से शर्माओगी तो मजा कैसे ले पाओगी,,,,

नहीं ऐसी कोई भी बात नहीं है संजू पहली बार था ना इसलिए मुझे थोड़ी शर्म आ रही है,,,

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अरे यह तो अच्छी बात है शर्माने वाली लड़कियां और भी ज्यादा खूबसूरत और ज्यादा ही मजा देती हैं,,,,,

(संजू के मुंह से यह सुनकर मनीषा और ज्यादा शर्माने लगी,,, यह देखकर संजू समझ गया था कि अगर ज्यादा मजा लेना है तो मनीषा को उसके व्यक्तित्व से विपरीत खोलना पड़ेगा महीनों से मनीषा के साथ रहते हुए वह इतना तो समझ ही गया था कि मनीषा उसकी सहेली काव्या जितनी खुली हुई बिल्कुल भी नहीं है उन लड़कियों के साथ रहने के बावजूद भी मनीषा अभी तक एक संस्कार की डोरी में बंधी हुई है अपने आपको मर्यादा की दीवार की आड़ में रखे हुए हैं है,,,,,,, और यह अच्छा भी था संजू के लिए क्योंकि संजू को ऐसी लड़कियां और भी ज्यादा मजा देती हैं जो शर्माती है अभी तक झरने के किनारे तो वह मनीषा से खुलकर मजा ले चुका था हालांकि मनीषा वहां भी शर्म आ रही थी लेकिन उसे बेहद मजा भी दे रही थी और वही मजा संजू फिर से दोहराना चाहता था और इसके लिए मनीषा के बारे में चुदाई का नशा भरना होगा तभी रात अच्छे से गुजरेगी,,,, संजू यह सब अनुभव अपनी मौसी और अपनी मां के साथ साथ अपनी छोटी बहन के साथ ले चुका था और उसे मालूम था कि एक अच्छी खासी रात बिताने के लिए औरत को किस तरह से प्यार करना चाहिए और औरत को किस तरह से उनके अंदर की एक नई औरत को जलाना चाहिए इसमें संजू अच्छी तरह से माहीर था,,, इसलिए मनीषा की शर्म को देखते हुए उसके शर्म को दूर करने के लिए संजू बोला,,,,।)

सब कुछ छोड़ो मनीषा एक अच्छी सी चाय पिला दो फिर बदन में ताजगी आ जाए उसके बाद देखना मैं कैसे तुम्हें खुश करता हूं,,,,(इतना सुनते ही मनीषा शर्मा कर मुस्कुराने लगी और अपनी जगह से उठते हुए बोली)

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2 मिनट में बनाकर लाइ,,,,(और इतना कहने के साथ ही मनीषा अपनी जगह से उठी और किचन की ओर चल दी संजू उसे जाते हुए देख रहा था सलवार के अंदर कैसी हुई उसकी गांड को देख रहा था हालांकि दोपहर में वह मनीषा के नंगे बदन के दर्शन करके उन्हें पूरी तरह से भोग भी चुका था लेकिन मर्द की आदत कभी नहीं जाती उनकी नजर हमेशा औरतों के उन्हीं अंगों पर रहती है जिन्हें वह बहुत बार देख चुके होते हैं उनका मजा ले चुके होते हैं लेकिन हर बार उस अंग को देखकर उनके बदन में एक अच्छा सा नया नशा छाने लगता है और इस समय भी संजू के बदन में भी वही हो रहा था जैसे ही मनीषा किचन के अंदर प्रवेश की संजू अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ और जाकर किचन के दरवाजे पर खड़ा होकर अंदर के नजारे को देखने लगा जहां पर मनीषा चाय बनाने की तैयारी में लगी हुई थी,,,, किचन के दरवाजे पर खड़े होकर संजू को वह दृश्य याद आने लगा जब इसी तरह से वहां किचन के अंदर प्रवेश किया था और मनीषा की मां को अपनी बाहों में लेकर उसके अंगों से खेलने लगा था घर में सभी लोग की उपस्थिति होने के बावजूद भी संजू ने किचन के अंदर जबरदस्त आनंद प्रमोद का उदाहरण देते हुए मनीषा की मां के साथ पूरी मस्ती किया था आज समय अपने चक्र गति से चलते हो वहीं पर आकर ठहर गया था सब कुछ वैसा ही था बस सामने वाला किरदार बदल चुका था आज मनीषा की मां नहीं किचन में मनीषा थी जिसके साथ वह कुछ भी कर सकता था मनीषा को इस बात का अहसास तक नहीं था की किचन के दरवाजे पर संजू खड़ा है संजू मनीषा को देख कर मुस्कुरा रहा था मनीषा के व्यक्तित्व को वह फिर से खोलना चाहता था इसलिए वह अंदर गया और सीधे मनीषा की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके गर्दन पर अपने होंठ को रख दिया,,,,, मनीषा को इसकी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी वह एकदम से चौक गई और जैसे ही उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसके पीछे संजू खड़ा है तो वह उत्तेजना से सिहर उठी संजू उसी तरह से उसकी गर्दन पर अपने होंठ रख कर होठों को रगड़ना शुरू कर दिया और उसकी कमर पर कसाब बढ़ाने लगा और साथ ही उसके नितंबों के उभार पर अपने पेंट का तंबू रगड़ने लगा यह हरकत पूरी तरह से उत्तेजित कर देने वाली थी और मनीषा भी बेशक उत्तेजित हो जा रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हो जा रही थी हालांकि उसने गैस स्टोव पर चाय रख दी थी पकने के लिए लेकिन संजू अपनी अलग खिचड़ी पकाना शुरू कर दिया था,,,, मनीषा के तन बदन में फिर से उत्तेजना की लहर उठने लगी और इस लहर को और ज्यादा बढ़ाने के लिए संजू अपने दोनों हथेली को ऊपर की तरफ लाकर उसकी चूची पर रख दिया और उसे दोबारा शुरू कर दिया कुर्ती में होने के बावजूद भी,,,, रबड़ के गेंद की तरह उसकी चुची संजू के हाथों में आनंद देने लगी संजू पागलों की तरह उसकी चूची को दबाना शुरू कर दिया और मनीषा गहरी गहरी सांस लेने लगी,,,,।

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संजू के लंडको अपनी गांड पर महसूस करते ही मनीषा की चूत गीली होने लगी मनीषा कुछ कह पाती जाकर पाती इससे पहले ही उसकी दोनों बांहों को पकड़कर संजू एक झटके से उसे अपनी तरफ घुमा लिया और उसके खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हथेली में भरकर देखने लगा शर्म के मारे मनीषा की आंखें बंद हो गई उसके लाल लाल होठ खुले के खुले रह गए लाल-लाल होठों में कंपन हो रही थी जिसे देखकर संजू से रहा नहीं गया और वह उसके कंपन को दूर करने के लिए अपने प्यासे होठों को उसके तपते होंठ पर रखकर चुंबन करने लगा,,,,,, संजू की हरकत से मनीषा के तन बदन में एक बार फिर से आग लगने लगे वहीं दोपहर वाला एहसास उसके तन बदन को झकझोरने लगा,,,, संजू पागल हुआ जा रहा था मनीषा के लाल लाल होंठ उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा रहे थे वह पूरी तरह से काम भावना से ग्रस्त हो गया और पागलों की तरह उसके लाल-लाल होठों का रसपान करने लगा यहां तक कि वह उसकी कमर को कस के दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ऊपर उठाया और किचन के फ्लोर पर रख दिया,,,,,

संजू के इस चमन में मनीषा बराबर का साथ दे रही थी वह भी अपने आप को पूरी तरह से इस चुंबन में डूबा देना चाह रही थी,,,,, संजू लगातार चुंबन करते हुए उसके अंगों से खेल रहा था उसकी नारंगी जैसी चूची को जोर जोर से पकड़ कर उसका रस निकालने में लगा हुआ था अब संजू से सब्र कर पाना बिल्कुल भी उसके बस में नहीं था इसलिए वह तुरंत कुर्ती को पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाने लगा और मनीषा भी उसका साथ देते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठा दी और संजू अगले ही पल मनीषा की कुर्ती को उतार कर फेंक दिया और उसकी ब्रा के हुक को एक झटके में खोल कर उसकी ब्रा को भी उसकी नंगी चिकनी बाहों में से अलग कर दिया कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी हो गई उसके नारंगी जैसी चूचियां एकदम टमाटर की तरह लाल हो चुकी थी संजू गहरी सांस लेते हुए मनीषा की छाती को देख रहा था और यह देख कर संजू शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी यह देखकर मनीषा और भी ज्यादा हैरान थी कि संजू अपने आप पर बिल्कुल भी सब्र नहीं कर पाता है,,,,, आखिरकार पूरी रात बाकी थी लेकिन संजू से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था और संजू की जल्दबाजी से मनीषा को भी मजा आ रहा था क्योंकि मनीषा का यह सब पहली बार था आज पहला दिन था उसके कौमार्य भंग का और इतनी जबरदस्त और दिलचस्प तरीके से संजू ने उसका कौमार्य भंग किया था कि मनीषा पूरी तरह से अपनी जवानी को उसके कदमों में लूटा दी थी,,,,,।

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वाह मनीषा मेरी रानी तुम्हारी चूची कितनी खूबसूरत है एकदम नारंगी की तरह मन करता है इसे मुंह में लेकर इसका रस पी जाऊं,,,,

(संजू की बात सुनकर जवाब में मनीषा भी बहुत कुछ बोलना चाहती थी लेकिन शर्म के मारे उसके होंठ खुल नहीं पा रहे थे,,,, लेकिन संजू को मनीषा के जवाब की कोई जरूरत नहीं थी संजू उसके चेहरे के भाव को अच्छी तरह से पढ़ पा रहा था और वह जानता था कि जो कुछ भी वह करेगा मनीषा की उसमें हामी ही होगी इसीलिए तो संजू मनीषा के छातीयो की तरफ आगे बढ़‌ा और अगले ही पल उसकी नारंगी जैसी चूची की शोभा बढ़ा रही खजूर को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया,,,,, मनीषा के मुंह से हल्की सी सिसकारी की आवाज टूट पड़ी और संजू उस गरमा-गरम सिसकारी की आवाज से और भी ज्यादा जोशीला हो गया और पागलों की तरह दोनों चूची को अपनी दोनों हथेली में कस के दबाते हुए बारी-बारी से पीना शुरू कर दिया ऐसा नहीं था कि संजू की हरकत से मनीषा को दर्द महसूस हो रहा था दर्द तो उसे हल्का हल्का महसूस तो हो ही रहा था क्योंकि संजू उसकी छातियों को जोर जोर से दबा रहा था लेकिन जिस तरह का सुख वह दे रहा था वह काबिले तारीफ थी,,,,

किचन फ्लोर पर मनीषा को बिठाकर संजू उसकी चूची को जोर जोर से दबाते हुए पीने का आनंद ले रहा था और दूसरी तरफ गेश के स्टॉव पर चाय पूरी तरह से पक चुकी थी और उस में उबाल आने लगा था जैसे ही वह बाल आया और गैस के बर्नल पर चाय गिरते हैं उसमें से आवाज आई मनीषा का ध्यान तुरंत उस तरफ गया और वह एकदम से चौक गई और संजू को उसी स्थिति में रोककर खुद किचन के पूरा ऊपर से नीचे उतरी और गैस को बंद करने लगे इस दौरान उसके बदन पर कमर के ऊपर कुछ भी नहीं था वह पूरी तरह से नंगी थी,,,,

बाप रे चाय पक गई और तुम्हारी वजह से जल भी गई,,,

तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की दूध पिलाने वाली हो तो चाय भला कौन पीना पसंद करेगा,,,

अच्छा बच्चु,,,,(संजू की तरफ देखे बिना ही वह मुस्कुराकर शरमाते हुए बोली,,,)

तो क्या मनीषा तुम्हारी चूची पीने में इतना मजा आ रहा था कि अब चाय पीने का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा है,,,,

लेकिन चाय तो तुम्हें पीनी ही पड़ेगी क्योंकि तुमने बनवाई है,,,,

कोई बात नहीं तुम्हारे हाथ से तो मैं जहर पी लूंगा तो चाय क्या चीज है लेकिन मेरी एक शर्त है,,,,

कैसी शर्त,,,?

पहले बोलो मानोगे कि नहीं,,,,

पहले बताओ तो,,,,

नहीं मुझे डर लग रहा है कि कहीं तुम इंकार कर दी तो,,,,

तुमसे प्यार करती हूं तुम्हारी बात को मैं टाल नहीं सकती,,,

तो फिर तुम्हें इस प्यार की कसम मेरी बात तुम्हें मानना पड़ेगा,,,,

कहो तो सही,,,,(दो कप को ट्रे में रखते हुए बोली,,,)

देखो आज की रात घर में कोई नहीं है सिर्फ मैं और तुम हो और हम दोनों के बीच सबकुछ हो चुका है किसी से कोई पर्दा नहीं है तो क्यों ना हम दोनों आज के साथ बिना कपड़ों के ही घर में रहे यहां वहां चाहे जहां जाए लेकिन बिना कपड़ों के एकदम नंगे इस बंद घर में,,,,

पागल हो गए हो क्या,,,?(मनीषा एकदम से मुस्कुराते हुए बोली संजू की बात सुनकर उसे शर्म महसूस होने लगी थी)

देखो मनीषा यह गलत बात है तुम्हें मैंने प्यार का वास्ता दिया हूं और तुम हो कि ईन्कार कर रही हो,,,

अरे संजू यह भी कोई बात है,,,, नहीं मुझे शर्म आती है,,,

शर्म कैसी अभी कुछ देर में ही तुम्हारे कपड़े उतार कर मैं तुम्हें नंगी कर दूंगा और तुम्हारी चूत में लंड डालकर चोदुंगा तब तुम्हें शर्म नहीं आएगी,,,

संजू,,,,,,,,(मनीषा थोड़ा सा शर्माते हुए और थोड़ा नखरा दिखाते हुए बोली)

मान जाओ ना मेरी जान,,,(संजू फिर से मनीषा को पीछे से अपनी बाहों में लेते हुए बोला और इस बार फिर से उसकी नंगी चूची पर अपनी हथेली रखकर दबा दिया जिससे मनीषा के तन बदन में हलचल होने लगी और वह संजू की बात टाल नहीं पाई और बोली)

तुम मानोगे नहीं ना,,,

बिल्कुल भी नहीं,,,,

(मनीषा शर्म से पानी पानी हो जा रही थी लेकिन संजू की बात माने बिना कोई रास्ता भी नहीं था इसलिए वह दूसरी तरफ किए हुए ही अपनी सलवार की दूरी खोलने लगी आधा कपड़ा तो खुद संजू ने अपने हाथों से उतार कर अपना काम कर दिया था आधा काम उसे खुद करना था,,,, देखते ही देखते मनीषा अपने सलवार की डोरी को खोल चुकी थी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था संजू की बात माने बिना उसके पास कोई रास्ता नहीं था आज तक उसने कभी किसी के सामने अपने कपड़े उतारे नहीं थी लेकिन आज के दिन जो कुछ भी वह नहीं की थी सब कुछ बात करने पर मजबूर भी हो चुकी थी और ऐसा करने में उसे मजा भी आ रहा था वह भी यह सोचकर उत्सुक थी कि बिना कपड़ों के घर में घूमने में कैसा महसूस होगा क्योंकि वह अपने कमरे में भी पूरी तरह से नंगी होकर इधर-उधर नहीं घूमी थी तो पूरे घर में कैसे और वह भी एक जवान लड़की के सामने कैसे नंगी रहेगी यही सोचकर वह हैरान भी थी और यही सोचकर उसके बदन में हलचल भी हो रही थी देखते ही देखते हो अपनी सलवार की डोरी को खोलकर सलवार को नीचे करने से पहले नजर पीछे करके संजू की तरफ देखने लगी जो कि संजू हाथ बांधे उसी की तरफ देख रहा था और यह देख कर मनीषा के तन बदन में हलचल होने लगी,,,
 
माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था किचन में गरमा-गरम दृश्य परोसा जा रहा था मनीषा के सोच के विरुद्ध संजू पूरी तरह से अपनी मनमानी करने पर उतर आया था और जिस तरह के हालात नजर आ रहे थे ऐसे में मनीषा भी उसका साथ दे रही थी क्योंकि इस खेल में मनीषा को भी बराबर का मजा प्राप्त हो रहा था,,,, मनीषा अपने अंदर शर्म महसूस कर रहे थे लेकिन संजू अपनी सूझबूझ और अपनी हरकत की वजह से मनीषा के इस शर्म को पूरी तरह से दूर कर देना चाहता था,,, और उसके कहे अनुसार अपने मम्मी पापा की गैर हाजिरी में मनीषा और संजू दोनों को नग्न अवस्था में पूरे घर में रहना था इस बात को सोचकर ही मनीषा की चूत पानी छोड़ रही थी जो अपने कमरे में नंगी होकर इधर-उधर नहीं घूमती थी वह पूरे घर में एक जवान लड़के के साथ नंगी होकर कैसे घूमेगी इस बात को लेकर मनीषा के तन बदन में अजीब सी हलचल और उत्सुकता थी जिसके चलते वह भी संजू की बात मानने को तैयार हो गई थी,,,

मनीषा अपने कमरे में

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कमर के ऊपर तो पहले से ही संजू ने उसके कपड़े उतार कर उसे नंगी कर दिया था उसके संतरे नग्न अवस्था में और भी ज्यादा खूबसूरत नजर आ रहे थे बस कमर के नीचे नंगी होना बाकी था और वह काम मनीषा बखूबी निभा रही थी संजू किचन में मनीषा के ठीक पीछे खड़ा था दोनों के बीच तकरीबन 2 फीट की दूरी थी संजू की नजर उसकी नंगी चिकनी पीठ पर थी जो कि बेहद मखमल कि तारा बेहद मुलायम थी,,,,, मनीषा के दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि उसे अपने हाथों से नंगी होना था इसलिए वह अपनी सलवार की डोरी धीरे-धीरे खोल रही थी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था बार-बार वह अपनी नजर को तिरछी करके संजू की तरफ देख रही थी संजू उसी को ही देख रहा था बेहद अजीब पल था मनीषा के लिए एक जवान लड़के की गैर हाजिरी में उसके सामने उसे अपने कपड़े उतार कर नंगी होना था,,,,, मनीषा को यह काम अपने हाथों से करने में शर्म महसूस हो रही थी जबकि यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि कुछ देर में ही वह पूरी तरह से नंगी होकर बिस्तर पर चुदाई का मजा लेने वाली है और वह भी उसी शख्स से जिसके सामने उसे शर्म महसूस हो रही है,,,,,

बदन में हलचल और उत्सुकता लिए मनीषा अपनी सलवार की डोरी को खोलकर कमर पर कसी हुई अपनी सलवार को ढीली कर ली और उसे दोनों हाथों से थाम ली वह अच्छी तरह से जानती थी कि सलवार को छोड़ते ही सलवार उसके नंगे पन को उजागर करके उसके कदमों में जा गिरेगी ऐसा करना जरूरी भी था क्योंकि संजू भी यही चाहता था लेकिन फिर भी शर्म का एहसास उसके तन बदन में अजीब सी लहर पैदा कर रहा था उसका चेहरा शर्म के मारे लाल टमाटर की तरह हो गया था कुछ देर तक मनीषा उसी तरह से अपनी सलवार को उंगलियों का सहारा देकर पकड़े हुए खड़ी रही तो संजू बोला,,,।

मनीषा की लेने की तयारी में संजू

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अरे अब उतारोगी भी या ऐसे ही खडी रहोगी,,,,

अरे उतार रही हुं ना,,,, तुम्हें बहुत जल्दी पड़ी है,,,

अरे क्यों नहीं तुम्हारे नंगे बदन की खूबसूरती को मैं जी भर कर देखना चाहता हूं,,,,

ऐसे कह रहे हो जैसे कि देखे नहीं हो,,,,

अरे तुम क्या जानो मनीषा औरत का शरीर होता ही ऐसा है कि चाहे जितनी बार उसे नंगी देखो,,,, मन भरता ही नहीं है हर बार एक अलग मजा एक अलग नशा लेकर दिल में उतर जाता है,,,।

(संजू की बातों को सुनकर मनीषा मन ही मन मुस्कुरा रही थी एक तरह से वह उसकी खूबसूरती की तारीफ ही कर रहा था,,,, संजू की बातें मनीषा के दिल में हलचल मचा रही थी वह भी जल्द से जल्द संजू की आंखों के सामने अब नंगी हो जाना चाहती थी वह भी इस अनुभव को पूरी तरह से जी लेना चाहती थी,,,, इसलिए एक संस्कारी नारी के अंदर की बेशर्म औरत को प्रदर्शित करते हुए वह अपनी सलवार को अपने दोनों हाथों की उंगलियों की पकड़ से आजाद कर दी और अगले ही पल उसकी खूबसूरत सलवार उसके खूबसूरत नंगे बदन को उजागर करते हुए सीधे जाकर उसके कदमों में गिर गया,,,,, संजू की आंखों के सामने मनीषा नंगी हो गई लेकिन उसके नंगे पन को पूरी तरह से लागू करने में अभी भी उसकी छोटी सी पेंटिं बाधा रुप बन रही थी,,,, लेकिन संजू की आंखों में एकदम से चमक आ गई मनीषा की उभरी हुई गांड बेहद खूबसूरत लग रही थी ट्यूबलाइट की रोशनी में एकदम गोरी चिकनी बेदाग गांड की खूबसूरती को देखकर संजू मन ही मन प्रसन्न हो रहा था लाल रंग की पेंटिं में उसकी खूबसूरत गांड और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,,,, मनीषा की गांड की दोनों फांकों की दरार कुछ ज्यादा ही गहरी थी जोकि गांड की खूबसूरती को और भी ज्यादा निखार रही थी,,,, गांड की दरार में मनीषा की लाल रंग की पेंटी अंदर तक फंसी हुई थी जिसे देखकर संजू का लंड एकदम से टनटन आ गया था,,,,,

मनीषा और संजू

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मनीषा का दिल जोरों से धड़क रहा था वह अपने दोनों हाथों को फिर से अपनी पेंटिं पर रखकर उसे उतारने ही वाली थी कि,,, संजू आगे बढ़ा और अपनी दोनों हथेली को मनीषा की गोल-गोल गांड पर रखकर उसे अपनी हथेली में कस के दबा दिया जिससे मनीषा के मुंह से आह निकल गई,,, संजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह मनीषा की कार को जोर-जोर से दोनों हाथों से दबाते हुए उसकी गर्दन पर अपने होंठ रख कर गरम गरम सांसे छोड़ रहा था और उस गरम गरम सांसो को अपनी गर्दन पर महसूस करके मनीषा की मलाई उसकी चूत से निकलकर बाहर आ रही थी,,,,, संजू पागलों की तरह दोनों हाथों से मनीषा की गांड पर चपत लगा रहा था जिससे मनीषा की गोरी गोरी गाल टमाटर की तरह लाल हो गई वैसे तो मनीषा को संजू के चपत से दर्द हो रहा था लेकिन उसे एक अद्भुत मजा भी आ रहा था और उसकी आंखों में नशा भी चाहा था पहली बार वह किसी मर्द के हाथों में अपने गोरे बदन को खूबसूरत बदन को सौंप रही थी वैसे तो दिन में ही वह अपने आप को संजू के हाथों में सौंप कर मस्त हो गई थी लेकिन आज पहला ही दिन था जब दूसरी बार वह अपना सर्वस्व संजू पर निछावर करने पर तैयार थी,,,, संजू भी इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठाते हुए उसकी गांड पर चपत लगाते हुए बोला,,,,

संजू और मनीषा

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वाह मनीषा तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की मैंने आज तक नहीं देखा,,,‌,,, कसम से तुम्हारे बदन की खुशबू मुझे मदहोश कर रही है मेरा मन बिल्कुल भी काबू में नहीं है मन कर रहा है कि अपने लंड को तुम्हारी गांड में डाल दुं,,,,

(मनीषा संजू की हरकत और उसकी गरमा गरम बातों से पूरी तरह से मदहोश हो जा रही थी उसकी आंखों में 4 बोतलों का नशा छाने लगा था वह अपने आप के काबू में बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए मदहोश होते हुए अपना हाथ पीछे की तरफ लाई और पेंट के ऊपर से ही संजू के लंड को पकड़ कर उसे जोर जोर से दबाने लगी यह देखकर संजू बहुत खुश होने लगा क्योंकि उसकी हरकत पूरी तरह से मनीषा को उसके व्यक्तित्व से बाहर लाने में मदद कर रहा था वह पूरी तरह से खुल रही थी अगर ऐसा ना होता तो वह अपने हाथ पीछे की तरफ लाकर उसके लंड को ना पकड़ती,,,,, संजू अब पीछे हटने वाला नहीं था,,,, देखते ही देखते संजू अपने दोनों हाथों को उसकी छाती पर रखकर उसके संतरो को दबा दबा कर उसका रस निचोड़ने लगा,,,।

मनीषा और संजू

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अपने मम्मी पापा के गैर हाजिरी में,,, मनीषा पूरी तरह से खुलकर संजू से मजा ले रही थी,,,,, वादे के मुताबिक मनीषा को अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होना था लेकिन वह पैंटी उतार पाती इससे पहले ही संजू मनीषा की मदमस्त कर देने वाली गांड को देख कर पागल हो गया और उसी स्थिति में मनीषा के खूबसूरत बदन से खेलने लगा,,,,। चाय कबकी पक चुकी थी,,, लेकिन चाय को छोड़कर संजू अपनी अलग खिचड़ी पका रहा था वह अपनी पूरी हथेली में आ रही मनीषा की चूची को जोर जोर से दबाकर उसे टमाटर बना रहा था,,,, दूसरी तरफ मनीषा के तन बदन में चुदाई की लहर उठने लगी थी,,, वह पागल हुए जा रही थी उसे अपने बदन की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी खास करके चूत में जिस तरह की हलचल हो रही थी उसे मिटाने के लिए उसे संजू के मोटे तगड़े लंड की बेहद जरूरत थी इसीलिए तो वह पेंट के ऊपर से संजू के मोटे लंड को दबा दबा कर उसे और ज्यादा मजबूत बना रही थी और जब उससे रहा नहीं गया तो पेंट के अंदर धीरे से हाथ डालकर उसके नंगे लंड को पकड़ ली और ऐसा करने से मनीषा के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी वह पागल होने लगी वह पीछे की तरफ नजर घुमाकर संजू की तरफ देखने लगी तो संजू धीरे से अपने होठों को मनीषा के होंठ पर रखकर उसका रसपान करते हुए उसकी चूची का आनंद लेने लगा और मनीषा के द्वारा अपने लंड को दबाने का सुख भोगने लगा,,,,, मनीषा के बदन की गर्माहट और उसकी चाहत देखकर संजू समझ गया था कि अब उसे लंड की बेहद जरूरत है,,,, वह भी पागल हुआ जा रहा था उससे भी अब बर्दाश्त कर पाना मुश्किल था इसलिए उसने तुरंत मनीषा के कंधों को पकड़कर आगे की तरफ झुकाया और जैसे मनीषा की समझ गई कि अब संजू क्या करने वाला है इसलिए वह तुरंत किचन फ्लोर को पकड़ ली,,, और धीरे से अपनी गांड को संजू के सामने परोस दी संजू मनीषा की अद्भुत हरकत को देखकर पूरी तरह से पागल हो गया अब उससे बरदास कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हुआ जाना था इसलिए वह तुरंत मनीषा की चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ा उसे खींच के नीचे कर दिया और मनीषा भी अपने पैरों का सहारा लेकर अपनी चड्डी को अपने पैर में से निकाल कर फिर से एक तरफ फेंक दी अब वह किचन के अंदर पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी वह पीछे नजर घुमा कर देखी तो अभी भी संजू कपड़े में ही था तो वह व्यंग भरी नजरों से संजू को ऊपर से नीचे की तरफ देखने लगी तो सं६ उसका इशारा समझ गया और अगले ही पल अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगा हो गया किचन के अंदर अब दो जवान बदन एकदम नंगे होकर एक होने वाले थे संजू ने तुरंत मनीषा की कमर को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी तरफ खींचा और उसकी गोल-गोल गांड को एकदम अपने लंड के सिधान पर कर लिया,,,, मनीषा का दिल जोरों से धड़क रहा था कुछ ही देर में उसकी चूत में मोटा लंड घुसने वाला था एक बार फिर से मनीषा उस पल को भोगना चाह रही थी जिस पल को और दोपहर में भोक चुकी थी,,,,।

संजू क ऊपर चढ़ी हुयी मनीषा

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मनीषा के बदन में कसमसाहट बढ़ने लगी और जैसे ही मनीषा ने संजू के लंड के सुपाड़े को अपनी गरम चूत पर महसूस की वह पूरी तरह से पानी पानी हो गई,,, उसकी चूत से काम रस का बुलबुला छूटने लगा और अगले ही पल संजू एक करारा झटका मारा और पूरा का पूरा लंड मनीषा की चूत में समा गया,,,,, दोपहर में ही संजू ने मनीषा की चूत में अपने लंड के लिए रास्ता बना लिया था इसलिए इस समय उसमें डालना में उसे बिल्कुल भी दिक्कत पेश नहीं हुई और बड़े आराम से वह सीधे मनीषा के बच्चेदानी में अपना स्पर्श कराकर उसे मदहोश कर दिया और फिर उसे चोदना शुरु कर दिया,,,, मनीषा के साथ से ऊपर नीचे होने लगी एक बार फिर से उसकी चूत की गरम दीवारें पानी छोड़ने लगी,,,, संजू के लंड को मनीषा अपनी चूत की गहराई तक महसूस कर रही थी और यह एहसास उसे पूरी तरह से मस्त कर रहा था वह संजू से मजा लूट रही थी,,,,

संजू और मनीष घर में एकदम नंगे

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आहहह आहहहह आहहहह संजू बहुत मजा आ रहा है,,आहहहह आहहहह बहुत मोटा है तुम्हारा,,,

फिर भी तो बड़े आराम से ले रही हो,,,,(संजू गहरी गहरी सांस लेता हुआ बोला)

हां तुम सच कह रहे हो तुम्हारा देखकर तो मैं घबरा गई थी मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मेरे छोटे से छेद में चला जाएगा लेकिन तुमने बिना चोट पहुंचाए मुझे बहुत मजा ले रहे हो,,,,

अभी तो शुरुआत है पूरी रात अभी बाकी है मेरी जानू,,,

आहहहह आहहहह संजू आहहह आहहहह ,,,,

(मनीषा मस्ती के सागर में गोते लगाते हुए गरमा गरम सिसकारियां ले रही थी पूरा कमरा उसकी गर्म सिसकाकीयो से गूंज रहा था लेकिन उसकी मादक सिसकारियां को सुनने के लिए वहां पर संजू के सिवा और कोई नहीं था,,,, संजू का लंड बड़े रफ्तार से मनीषा की चूत के अंदर बाहर हो रहा था,,,,,,, मनीषा का चेहरा बता रहा था कि उसे कितना मजा मिल रहा है,,,, अभी तक उसने किसी भी मर्द को अपने बदन को छूने तक नहीं देखे लेकिन संजू को देखते ही उसके आकर्षण में इस कदर वह खो गई थी कि मन ही मन था निकली थी कि अपना सर्वस्व संजू को सौंप देगी और अपने वादे को पूरा करते हुए आज वह अपनी बेशकीमती खजाने को अपनी मदमस्त कर देने वाली गुलाबी चूत को संजू को परोस दी थी और संजू भी मनीषा को खुश करता हुआ उसके लिए खिलौने से जी भर कर खेल रहा था,,,,,

मनीषा संजू क लुंड से खेलती हुयी

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कुछ देर तक घमासान चुदाई करने के बाद दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी और देखते ही देखते दोनों झड़ गए,,,,, थोड़ी ही देर में संजू ने धीरे से अपने लंड को मनीषा की चूत से बाहर निकाला तो उस पर मनीषा की चूत का काम रस लगा हुआ था जो कि उसके लंड से नीचे फर्श पर टपक रहा था जिसे देखकर मनीषा शरमा गई थी,,,,,

चाय तो ठंडी हो गई,,,(शर्म के मारे मनीषा संजू की तरफ देखे बिना ही बोली)

फिर से गर्म कर दो उसके बाद खाना खाते हैं,,,,

ठीक है तुम बाहर जाओ मैं लेकर आती हूं,,,

क्या मनीषा अभी भी शर्मा रही हो,,,

संजू और मनीषा

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तुम जाओ संजू,,,,(मनीषा मुस्कुराते हुए बोली तो संजू की मुस्कुराकर किचन से बाहर चला गया,,,,, मनीषा को अभी भी सब कुछ सपना सा लग रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बेहद खूबसूरत ख्वाब देख रही हो क्योंकि जो कुछ भी हो रहा था वह कल्पना से बिल्कुल परे था वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी की चुदाई में इतना जबरदस्त सुख मिलता है,,,, वरना वह कब से संजु के साथ चुदाई का मजा ले ली होती,,, हालांकि इतना तो उसे पता ही था कि चोदने चुदवाने में बहुत मजा आता है लेकिन इस कदर आनंद आता है वह कभी सोची नहीं थी,,,, नीचे फर्श पर नजर गई तो उस पर उसके कपड़े भी करे पड़े थे उसकी पेंटी भी एक कोने में पड़ी हुई थी जिसे देखकर वह मुस्कुराने लगी,,,, थोड़ी देर में वह दो कप में चाय लेकर नंगी ही संजू के पास गई और धीरे से शर्माते संकोचाते हुए सोफे पर बैठ गई और संजू को चाय थमा दी,,,दोनों चाय की चुस्की लेने लगे,,, संजू भी पूरी तरह से नंगा था उसका लंड ढीला होने के बावजूद भी बहुत ही मोटा लग रहा था बार-बार मनीषा की नजर उसके लंड पर चले जा रही थी और चाय पीने के दौरान भी मनीषा के नंगे बदन को देख रहा था,,,,,

संजू और मनीषा

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थोड़ी देर में मनीषा खाली कब लेकर अपनी जगह से उठी और किचन की तरफ आगे बढ़ गई उसे शर्म तो बहुत आ रही थी लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था गोरी गोरी गांड पानी भरे गुब्बारे की तरह आपस में रगड़ खाते हुए इधर-उधर हो रही थी जिसे देख कर संजू के तन बदन में आग लग रही थी,,,,, मनीषा खाली कब को धोकर बाथरूम में चली गई और पेशाब करने लगी,,,, पेशाब करने के बाद बड़े अच्छे से अपनी चूत को साबुन लगाकर साफ की और टावल से पोछकर नंगी ही बाथरूम से बाहर आ गई,,,, देखते ही देखते 10:00 बज गए थे,,,, मनीषा खाना लगा रही थी और समझो वही कुर्सी पर बैठकर मनीषा के नंगे बदन को देख रहा था नंगी होने के बाद मनीषा स्वर्ग से उतरी अप्सरा नजर आ रही थी बेहद खूबसूरत घटिला और कसेला बदन,,,, और उसकी खूबसूरती बढ़ा रही है उसकी संतरे जैसी चूचियां सब कुछ उसे और भी ज्यादा खूबसूरत बना रही थी संजू उसे ही देखे जा रहा था,,, मनीषा खाना परोस रही थी और आगे से उसकी मदमस्त कर देने वाली संतरे जैसी चूचियां बहुत खूबसूरत लग रही थी जिससे जी भर कर खेलने के बाद भी संजू की प्यास बुझी नही थी इसलिए वह डाइनिंग टेबल पर दोनों हाथ की कोहनी को रखकर उसकी चूची की तरफ देखते हुए बोला,,,)

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मनीषा तुम्हारी चूची देख कर ही प्यास बढ़ जाती है,,,,

क्या तुम्हें इतनी अच्छी लगती है,,,(खाना परोस ते हुए मुस्कुराकर मनीषा बोली)

मुझे तो बहुत अच्छी लगती है,,,

लेकिन मेरी तो बड़ी-बड़ी भी नहीं है फिर कैसे अच्छी लगती है और मैंने तो सुनी होगी लड़कों को बड़ी-बड़ी चूचियां पसंद है,,,,,(यह पहला मौका था जब मनीषा अपने मुंह से चूची शब्द बोल रही थी और मनीषा के मुंह से चूची शब्द सुनकर संजू का लंड तनने लगा,,)

हां ऐसा है लेकिन सबको नहीं सबकी पसंद अलग-अलग है,,,,

तुम्हें कैसी पसंद है,,,?

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मुझे तो तुम्हारी पसंद है,,,,, संतरे जैसी गोल-गोल हथेली में भी पूरी तरह से आ जाती है,,,, सच मनीषा तुम्हारी चूची दबाने में बहुत मजा आ रहा था और पीने में तो पूछो मत,,,,आहहहह,,,,

चलो‌अब रहने दो चाहे जितना भी मजा ले लोगे लेकिन जी नहीं भरने वाला,,,, देख नहीं रहे हो मार मार कर एकदम (अपनी चूत की तरफ नजर से इशारा करके जो कि डाइनिंग टेबल के ऊपर इस अदा पर एकदम साफ नजर आ रही थी) सुजा दीए हो,,,,

(मनीषा के मुंह से इतना सुनकर और उसकी अदा देख कर संजू पूरी तरह से मस्त हो गया उसके लंड की एठन बढ़ने लगी,,,, और वह पागलों की तरह मनीषा की चूत की तरफ देखे जा रहा था,,,, और बोला)

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यह तो मेरा प्यार है मेरी रानी अभी तो पूरा खेल बाकी है,,,

चलो रहने दो अब यह खेल में नहीं खेलने वाली,,,,

यह खेल तुम क्या तुम्हारी मां भी,,,(इतना कहने के साथ ही संजू एकदम से रुक गया और घबराहट भरे स्वर में बोला)

सससस सॉरी मनीषा मेरे मुंह से अचानक ही निकल गया,,,

(संजू के मुंह से अपनी मां का जिक्र सुनकर मनीषा पहले तो हैरानी से उसे देखती रहेगी लेकिन जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि गलती से उसके मुंह से निकल गया है तो वह मुस्कुरा दी और कोई बात नहीं बोलकर बात को टाल दी,,,, यह बात मनीषा बिल्कुल भी नहीं जानती थी कि संजू उसकी मां को पहले ही चोद चुका है और आए दिन मौका देख कर उसकी मां खुद अपनी चूत उसके आगे परोस देती है,,,, थोड़ी ही देर में होटल से लाया हुआ खाना प्लेट में सजाकर वह भी डाइनिंग टेबल पर खाना खाने के लिए बैठ गई थी दोनों पूरी तरह से नंगी तैयार जिंदगी में पहली बार संजू भी और मनीषा भी नंगे ही कमरे में रहने का अद्भुत सुख को भोग रहे थे और सच कहा जाए तो इस अवस्था में दोनों को बेहद आनंद प्राप्त हो रहा था थोड़ी देर में दोनों खाना खाकर कमरे में चले गए क्योंकि मनीषा के साथ-साथ संजू भी नहीं चाहता था कि उन दोनों का समय बेकार में व्यर्थ हो,,,,,

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बिस्तर पर सांचौर मनीषा दोनों संपूर्ण अवस्था में थे कपड़े उतारने की जय मत दोनों में से किसी को नहीं करनी थी दोनों के अंग साफ नजर आ रहे थे संजू का लंड तो लगातार अपनी औकात में ही खड़ा था जिसे देखकर मनीषा भी हैरान रह जा रही थी लेकिन इस बात की खुशी उसके मन में हो रही थी कि आखिरकार संजू का लंड खड़ा भी तो उसकी चूत की सेवा करने के लिए ही है जो कि इस समय उसकी चूत बहुत सेवा मांग रही थी,,,,, बिस्तर पर पेट के बल मनीषा लेटी हुई थी और संजू बिस्तर पर घुटनों के बल आगे बढ़ते हुए उसकी दोनों गांड की आंखों को दोनों हाथों में पकड़ कर दबाते भी उस पर चुंबन की बौछार कर दिया जिससे मनीषा के तन बदन में सावन की फुहार फूटने लगी वह मदहोश होने लगी और अगले ही पल संजू उसे पीठ के बल लिटा कर उसकी दोनों टांगों को चौड़ी करके उसकी चूत को चाटने शुरू कर दिया,,,, मनीषा मदहोश हुए जा रही थी उसकी आंखों में खुमारी छा रही थी,,, संजू अपने अनुभव से और हरकत से मनीषा को एक बार फिर से स्वर्ग का सुख दे रहा था मनीषा बिस्तर पर मछली की तरह तड़प रही थी थोड़ी ही देर में संजू अपने अद्भुत आसन का करामत दिखाते हुए उसकी दोनों टांगों के बीच जमा रहा और अपने लंड को मनीषा के होठों पर रगड़ने लगा और अगले ही पल मनीषा अपने लाल-लाल होठों को खोल कर संजू के लंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने शुरू कर दी एक साथ दो-दो काम हो रहे थे दोनों एक दूसरे के अंगों को चाट रहे थे दोनों के बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी दोनों वासना के तूफान में फंसते चले जा रहे थे,,,,

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संजू पर खुद का संयम था इसलिए वह खुद को संभाले हुए था लेकिन मनीषा की हालत खराब होती जा रही थी वह जल्द से जल्द संजू के लंड को अपनी चूत में ले लेना चाहती थी इसलिए वह खुद ही बोली,,,।

अब हम से बर्दाश्त नहीं हो रहा है संजू जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दो,,,

(पहली बार मनीषा अपनी तड़प को अपने शब्दों में दर्शा रही थी जिसे सुनकर संजू से भी रहा नहीं गया और वह तुरंत उसकी दोनों टांगों को फैला कर उसकी गुलाबी छेद में समा गया और धक्का लगाना शुरू कर दिया,,,, संजू मनीषा को चोदना शुरु कर दिया था और हर धक्के के साथ मनीषा की आह निकल जा रही थी,,,, संजू के धक्के इतने करारे थे कि पलंग चरर मरर कर रही थी,,,,

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,, दोनों चचेरे भाई बहन रात भर मजा लेते रहे,,,, मनीषा को थक कर चूर हो गई थी लेकिन संजू ना तो वरना उसे सोने दिया घर में ऐसा कोई कोना नहीं था जहां पर समझूं मनीषा को ले जाकर उसकी चुदाई ना किया हो किचन से लेकर के बाथरूम टॉयलेट पोट कर वीडियो पर बिस्तर पर कमरे के बाहर कुर्सी पर रात के 3:00 बजे तो वह मनीषा को गोद में उठाए हुए छत पर लेकर गया और छत पर पूरी तरह से अंधेरा होने पर उसका भरपूर फायदा उठाते हुए आसमान के नीचे खुले में उसकी जी भर कर चुदाई किया,,,, और फिर सुबह 6:00 दोनों नहा धोकर तैयार हो गए और नाश्ता करके अपने अपने कॉलेज के लिए भी चले गए,,,,

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एक ही दिन में मनीषा ने जो संभोग के अद्भुत क्रीडा का जी भर के आनंद ली थी वह बेहद अकल्पनीय था,,,,, मनीषा कभी सोची नहीं थी कि एक ही दिन में वह कितनी बार चुदवाएगी,,,, मनीषा पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी और संजू भी अपनी चचेरी बहन की कुंवारी चूत को पाकर अपने आप को धन्य महसूस कर रहा था,,, संजू कभी सोचा भी नहीं था कि कुछ ही महीनों में उसे इतनी खूबसूरत हसीन चूत चोदने को मिलेगी शुरुआत मौसी से करने के बाद वह अपने आपको बेहद भाग्यशाली समझ रहा था कि वह पहली बार में ही अपनी मौसी की जी भर कर चुदाई किया था उसकी मोटी फांकों वाली चूत पाकर वह‌ धन्य हो गया था,,, वो कभी सोचा भी नहीं था कि परिवार में ही अपनी सगी मौसी को चोदने का सुख से प्राप्त होगा और यह सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ मौसी से शुरू होगा तो छोटी बहन पर आगे और छोटी बहन की कमसिन चूत उसे पूरी तरह से दीवाना कर गई फिर काव्या फिर अपनी सगी मां जिसकी चूत का सुख पाकर वह अपने आप को दुनिया का सबसे भाग्यशाली बेटा समझने लगा था और फिर उसके बाद अपनी ही मौसी की लड़की मनीषा सफर बेहद रोमांचक होता जा रहा था मंजिल कहां जाकर मिलेगी इस बारे में संजू को बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था लेकिन मंजिल पर पहुंचने से पहले सफर का मजा वह पूरी तरह से उठा रहा था,,,,,

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दूसरी तरफ मोहिनी की आंखों के सामने बार-बार उसकी मां का नंगा बदन नजर आता था और उस नंगे बदन पर घूमते हुए उसके भाई के हाथ होठ और उसकी रसीली चूत में घुसता हुआ उसके भाई का मोटा लंड,,,, सब कुछ याद करके मोहिनी अपने काबू में नहीं रह पा रही थी ना चाहते हुए भी उसकी आंखों के सामने अपनी मां के कमरे वाला हर एक दिल से नजर आने लगता था और यह दृश्य उसके बदन में इतनी ज्यादा मदहोशी भर देता था कि बदल की मदहोशी उसकी चूत के रास्ते से बहने लगती थी,,,, मोहिनी के मन में अब कुछ और चल रहा था अपनी मां की खूबसूरती है उसके खूबसूरत बदन को देखकर वह भी अपनी मां की तरफ आकर्षित होती चली जा रही थी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां बड़ी बड़ी बहन गोरा नंगा बदन गजब की लंबाई लिए हुए उसका पूरा खूबसूरत बदन सब कुछ मोहिनी के दिलो-दिमाग पर अजीब सा जादू कर रहा था मोहिनी खुद भी बेहद खूबसूरत थी लेकिन उसे अपनी मां की खूबसूरती कुछ ज्यादा ही अच्छी लग रही थी और वह इस बात से इंकार नहीं कर पा रही थी कि उससे ज्यादा खूबसूरत उसकी मां है,,,,

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जब जब अपने भाई को अपनी मां की चुदाई करते हुए देखती थी तब तक उसके मन में यही होता था कि वह भी कमरे में घुस जाए और एक साथ अपनी मां के साथ बिस्तर पर नंगी बैठकर अपने भाई के लंड का मजा ले,,,, लेकिन ऐसा करने में उसे डर महसूस हो रहा था,,,,, क्योंकि वह यह सोचकर घबरा रही थी कि अगर उसकी मां को यह सब पता चल गया तो उसकी मां उसके बारे में क्या सोचेंगी,,,, क्योंकि घर का माहौल तो कुछ दिनों से घर का माहौल पूरी तरह से संस्कारी और मर्यादा से भरा हुआ था उसकी मां की कुछ उम्मीदें थी मोहिनी से और मोहिनी है बात अच्छी तरह से जानती थी नहीं जानती थी कि अगर वह कुछ भी गलत करेगी तो उसकी मां शर्मिंदा हो जाएगी और समाज में मुंह दिखाने के लायक नहीं रह जाएगी इसलिए अपने आप को किसी तरह से रुकी हुई थी,,,, अपना मन इन सब बातों से हटाकर वह घर के काम में व्यस्त होने की पूरी कोशिश करती थी लेकिन नाकामयाब हो जाती थी क्योंकि बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी बड़ी गांड उसके भाई के मोटे तगड़े लंड पर कुदती हुई नजर आती थी,,,,। और वह मादकता से भरा हुआ नजारा वह बर्दाश्त नहीं कर पाती थी,,,,

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ऐसे ही एक दिन रात के 8:00 बज रहे थे और उसकी मां गैस पर दाल चढ़ा कर पड़ोस की आंटी का हाल समाचार लेने गई थी क्योंकि वह कुछ दिनों से बीमार थी घर में केवल संजू और मोहिनी ही थे मोहिनी अपने भाई को मनाना चाहती थी एक साथ तीन-तीन लोग मिलकर चुदाई का मजा ले इसलिए और वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका भाई मान जाएगा,,,,, इसलिए वह अपनी मां की गैरमौजूदगी में अपने भाई से बोली,,,,।

भाई तू आजकल बहुत मजा लूट रहा है मां की चूत में कुछ ज्यादा ही रस हैं ना,,,,

अरे पूछ मत मोहिनी मां की चूत तो बेहद कसी हुई है कसम से मोहिनी जब भी मम्मी की चूत में डालता हूं तो ऐसा लगता है कि किसी कुंवारी लड़की को चोद रहा हूं,,,(संजू एकदम से खुश होता हुआ बोला)

क्यों मुझे चोदने में मजा नहीं आता क्या,,,?(मोहिनी थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली)

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नहीं नहीं मोहिनी ,,,, तेरी तो बात ही कुछ और है आखिर तुम भी तो मम्मी की चूत से बाहर आई है तो तु भी तो उनकी तरह ही होगी ना,,,,,

लेकिन मैं जानती हूं भाई मम्मी मुझसे ज्यादा खूबसूरत है मैं तेरे साथ मम्मी को देख चुकी हूं मम्मी का नंगा बदन खूबसूरत चूची बड़ी-बड़ी गांड एकदम गठीला बदन,,,, मम्मी मेरे से भी ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी है तभी तो तू रोज रात को मम्मी को चोदता है,,,

लेकिन तेरे को चोदने के बाद ही तो जाता हूं,,,,

जाता तो है ना,,,,

मुझे समझ में नहीं आ रहा है तु कहना क्या चाहती है,,,

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मैं कहना चाहती हूं कि जो रोज तू रात को मम्मी के रूम में जाकर खेल खेलता है उस खेल में मैं शामिल होना चाहती हुं,,,,

(मोहिनी की बात सुनकर संजू एकदम से हैरान होता हुआ बोला)

क्या,,, पागल हो गई हो क्या तु,,,, तुझे कुछ समझ में आ रहा है कि तू क्या बोल रही है अगर तू कमरे में आ गई तो समझ लो हम दोनों के बीच क्या चल रहा है मम्मी को पता चल जाएगा,,,,

तो क्या हुआ भाई मैं भी तो जानती हूं कि तेरे और मम्मी के बीच क्या चल रहा है,,,,

मैं सब समझता हूं तू क्या कहना चाह रही है लेकिन हम दोनों के बीच क्या चल रहा है अगर यह मम्मी को पता चल गया तो मम्मी के साथ यह धोखा होगा मम्मी हम दोनों से बहुत उम्मीद लगाए बैठी है,,,, उन्हें पता चल जाएगा कि हम दोनों एक साथ कमरे में सो कर क्या करते हैं,,,,

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तो इसमें क्या हो गया भाई एक न एक दिन तो मम्मी को पता ही चल जाने वाला है,,,,

नहीं मोहिनी मैं बिल्कुल भी नहीं चाहता कि मम्मी कौन दोनों के बारे में कुछ भी पता चले या मम्मी को इस तरीके से धोखा तो नहीं देना चाहता,,,

वाह भाई एक तरफ रोज मम्मी की चुदाई भी करते हो दूसरी तरफ कहते हो कि मम्मी को धोखा नहीं देना चाहता,,,,,

देख मोहिनी तू समझने की कोशिश नहीं कर रही है,,,, तू जो बोल रही है सुनकर मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा है और सच कहूं तो मैं भी उत्सुक हूं एक साथ दो दो की चूत लेने के लिए मम्मी की भी और तेरी और सोच कितना मजा आएगा जब एक साथ में मम्मी की भी लूंगा और तेरी भी लूंगा एक ही बिस्तर पर तुम दोनों को नंगी करके,,,,, चोदुंगा,,,,, लेकिन मम्मी को इस बारे में बिल्कुल भी भनक तक नहीं है कि हम दोनों के बीच कुछ चल रहा है मम्मी तुझसे बहुत प्यार करती है तू ही सोच अगर मम्मी को इस बारे में पता चल गया कि उनके पीठ पीछे उनकी लड़की अपने ही भाई से चुदवा रही है तो उन पर क्या बीतेगी,,,, मेरा और मम्मी के बीच जो कुछ भी हुआ वह तो समझ लो एक तरह से अनजाने में ही आकर्षण हुआ है,,,, मैं मम्मी को पापा की मार से बचाने जाता था और मम्मी आपके जैसे कपड़ों में रहती थी इसी तरह से हम दोनों की आंखें चार हुई और फिर यह सब सिलसिला शुरू हो गया लेकिन तुम्हारे और मेरे बीच में जो चल रहा है इसके बारे में मम्मी को क्या बताऊंगा,,,,

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(संजू चाहे कुछ भी हो अपनी मां की इज्जत करता था उसका सम्मान करता था भले ही अपनी मां के शरीर का आकर्षण उसे इस कदर हो गया था कि आज उन दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो गया था लेकिन वह किसी भी हालत में या नहीं बताना चाहता था कि उसकी और उसकी छोटी बहन के बीच भी यही सिलसिला ना जाने कब से शुरू है क्योंकि यह खुलासा होने पर उसकी मां का दिल टूट जाता था वह दुखी हो सकती थी अपनी बेटी से वह इस तरह की उम्मीद बनाकर कभी नहीं रखी थी वह चाहती थी कि उसकी बेटी भी उसी गंदी लड़कियों की तरह बिल्कुल भी ना हो,,,,, एक तरफ संजू मोहिनी को समझाने की पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन मोहिनी अपनी मां की खूबसूरत बदन के आकर्षण में और एक साथ बिस्तर पर अपनी मां के साथ नंगी होकर अपने भाई से चुदाई का आनंद लूटने की लालच में वह कुछ भी समझने को तैयार नहीं थी,,,और, फिर भी मोहिनी जब नहीं मानी तो समझो बोला,,,,)

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देख मोहिनी जो तू कह रही है वैसा करने में मुझे भी बहुत मजा आएगा लेकिन जो कुछ भी करना है तुझे ही करना है अब मम्मी को कैसे समझाना है यह तू जाने और तेरा काम मैं सिर्फ दरवाजा खुला छोड़ दूंगा उसकी कड़ी नहीं लगाऊंगा और मौका देख कर तू भी कमरे में आ जाना,,,, देखता हूं फिर क्या होता है,,,,

(अपने भाई की बात सुनकर मोहिनी खुश हो रही थी क्योंकि उसे अपने भाई की तरफ से हरी झंडी मिल गई थी वहां रात को अपनी मां के कमरे में जा सकती थी और फिर जैसा वह चाहती थी वैसा हो सकता था बस मोहिनी को अपने तरीके से काम लेना था जो कि मोहीनीको अच्छी तरह से आता था,,,, संजू अपनी बहन के पास था उसे अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था एक साथ दो दो चूत को चोदने का या उसके पास पहला मौका था और वह इस अवसर को गवाना भी नहीं चाहता था और किसी भी तरह से अपनी मां को नाराज भी नहीं करना चाहता था इसलिए सब कुछ मोहिनी के हाथों में छोड़ दिया था,,,,, थोड़ी ही देर में आराधना भी घर पर आ गई और खाना बनाकर समूह पर तीनों ने भोजन भी कर लिया,,,,, आज संजू मोहिनी की चुदाई किए बिना 12:00 बजते ही अपनी मां की कमरे में चले गया वह जानबूझकर अपनी बहन को चोदा नहीं क्योंकि वह जानता था कि जमकर चुदाई करने के बाद उसकी बहन को गहरी नींद आ जाती है और वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहता था इसलिए अपनी मां के कमरे में जाते ही मैं दरवाजा तो बंद कर दिया था लेकिन अपनी मां की नजर से बचाकर कड़ी को बंद नहीं किया था वैसे ही खुला छोड़ दिया था,,,,, 12:00 बजने के बावजूद भी आराधना की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी वह बड़ी बेसब्री से अपने बेटे का इंतजार कर रही थी और अपने बेटे को अपने कमरे में आता देखकर पूरी तरह से उत्साहित हो गई थी और इस उत्साह में उसकी चूत भी पूरी तरह से शामिल थी,, जोकी खुशी के मारा बह रही थी,,,।
 
मोहिनी का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था वह अपने कमरे से निकलकर अपनी मां के कमरे के बाहर खड़ी हो गई थी संजू ने बड़ी चालाकी से दरवाजे को बंद तो कर दिया था लेकिन उसकी कड़ी नहीं लगाया था दरवाजा पूरी तरह से खुला छोड़ रखा था,,,, क्योंकि एक तरह से खुला दरवाजा अपनी बहन के लिए आमंत्रण था कि वह किसी भी वक्त मौका देखकर अंदर आ सकती है,,,,, संजू के दोनों हाथ में घी के लड्डू थे जिससे वह अपनी भूख मिटा रहा था,,, दरवाजे को खुला छोड़ने में संजू का दील भी बड़े जोरों से धड़क रहा था,,,,,, क्योंकि उसे इस बात का अहसास हो चुका था कि अद्भुत आनंद प्राप्त होने वाला है,,,,।

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हर दिन की तरह आज भी आराधना की आंखों में नींद नहीं थी उसे अपनी बेटी का नशा हो गया था उसके मर्दाना अंग को अपने अंदर लेकर जो अद्भुत मदहोशी का वह एहसास करती थी उस एहसास में वह पूरी तरह से डूब चुकी थी और वह उस एहसास में रोज जीना चाहती थी इसीलिए तो आज भी वह जाग रही थी,,, दरवाजे की खुलने की आवाज से ही उसकी चूत में थइरकन होने लगती थी,,, उसकी चूत भी अपने साजन से मिलने की राह देखती रहती थी और जैसे ही दरवाजा खोलने की आवाज होती थी उसकी चूत एकदम खुशी के मारे फुदकने लगती थी,,,,,,,, दरवाजा बंद होने की आवाज सुनते ही बिस्तर पर लेटी हुई आराधना सर उठाकर संजू की तरफ देखने लगी उसके होठों पर मादक मुस्कान थी,,,, औरतों की मुस्कान की भी एक अलग कहानी होती है मुस्कान भी अलग अलग तरीके की होती है,,,, किसी परिचित से मिलने की अलग मुस्कान किसी खास से मिलने की अलग मुस्कान किसी जगह पर पहुंच जाने की अलग मुस्कान और ऐसे शख्स को देखकर जिसके साथ शारीरिक संबंध बनाना है औरत की मुस्कान कुछ अलग ही किस्म की हो जाती है उसकी मुस्कान देख कर ही मर्द का लंड खड़ा हो जाए कुछ ऐसा ही संजू भी महसूस कर रहा था अपनी मां के लाल लाल होठों को देखकर और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर संजू के लंड में हरकत होने लगी,,,,,,, वह अपनी मां के बिस्तर की तरफ आगे बढ़ते हुए बोला,,,,।

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हाय मेरी जान तेरी आंखों में नींद नजर ही नहीं आती,,,

कैसे आएगी मेरे राजा तेरा इंतजार जो करती रहती है,,,

तू मेरी रानी इंतजार खत्म हुआ,,,, देख तेरा सैयां तेरे सामने खड़ा है,,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना मुस्कुराने लगी और दरवाजे के पीछे खड़ी मोहिनी दरवाजे की पतली दरार में से इस अदभुत मिलन और उन दोनों की कामलीला से भरपूर बातों को सुनकर मदहोश हुए जा रही थी,,,, वह मौके की तलाश में थी मौका मिलते ही वह कमरे में प्रवेश कर जाने वाली थी और फिर सारी बाजी अपने हाथ में लेकर एक अद्भुत काम क्रीड़ा को अंजाम देने वाली थी,,,,, आराधना अपने बेटे के लंड से पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी उसके आकर्षण में पूरी तरह से खो चुकी थी इसलिए बिस्तर के करीब आते ही वह संजू के पैजामा को दोनों हाथों से पकड़ कर तुरंत नीचे कर दी और अपने बेटे के टनटनाए लंड को देखकर मुस्कुराने लगी,,, और अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के बमपिलाट लंड को अपने हथेली में भरते हुए बोली,,,,)

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देख तो तेरा लंड कितना पागल हुआ जा रहा है मेरी चूत से मिलने के लिए,,,,

फिर देर किस बात की है मम्मी मिला दो अपनी चूत से और गर्म कर दो मेरे लंड को ताकि अंदर का जमाना बा पूरी तरह से पिघल कर तुम्हारी चूत को भर दे,,,,

ऐसा ही होगा मेरे बेटे लेकिन पहले तेरे लंड से खेलने तो दे,,,ऊममममम,,,(लंड के आलूबुखारे जैसे मोटे सुपाडे को अपनी गाल पर रगडते हुए,,,)आहहहहहह कितना गर्म है रे तेरे लंड की गर्मी से तो मेरी चूत पिघल रही है,,,,,।

इसका काम ही यही है मम्मी औरतों की चूत को पिघलाना,,, और अगर ऐसा ना कर पाया तो लंड किस बात का,,,

सच कह रहा है तू बेटे लंड का काम यही होता है हम औरतों को मस्त कर देना जैसा कि तू कर रहा है,,,,‌ससहहहहह आहहहहह (लंड के मोटे सुपाड़े को अपने लाल-लाल होठों पर रगडते हुए,,,)

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा मम्मी इसे अंदर ले लो,,,(मदहोश होता हुआ संजू बोला)

बर्दाश्त तो मुझसे भी नहीं हो रहा है मेरे बेटे तेरा सांड जैसा लंड मुझे पागल बना रहा है,,,,

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अगर ऐसा है तो सीधे अपनी चूत में ही ले लो,,,

नहीं मेरे राजा जल्दबाजी में मजा नहीं आता है मजा तो धीरे-धीरे आता है जैसे कि शराब का नशा और सच कहूं तो तेरे से चुदवाने में जो मजा जो नशा चाहता है मैंने तो कभी आज तक इस तरह की कल्पना भी नहीं की थी तेरे साथ मुझे बहुत मजा आता है,,,,

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मुझे भी बहुत मजा आता है मम्मी,,,,,

आहहहहहहहह,,,,(इतना कहना था कि संजू के मुंह से आह निकल गई क्यों की आराधना तुरंत अपने बेटे के लंड को उसके सुपाड़े को मुंह में भर ली थी,,,,, दोनों की इस कामलीला को देखकर दरवाजे के बाहर खड़ी मोहिनी बेसब्र हुए जा रही थी उसे सब्र कर पाना मुश्किल हुआ जा रहा था लेकिन अभी भी वह मौके की तलाश में थी,,,, वह अपने भाई और अपनी मां की कामलीला को थोड़ा और निहारना चाहती थी और उसे देखकर गर्म हो जाना चाहती थी वैसे तो इस समय भी मोहिनी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी उसकी चूत से काम रस टपक रहा था,,,,, मोहिनी को दरवाजे की पत्नी दरार में से अंदर का नजारा एकदम साफ नजर आ रहा था कि मैं की आंतरिक लाइट जल रही थी ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में उसकी मां और उसका बड़ा भाई दोनों कामलीला में तल्लीन हो चुके थे मोहिनी साफ तौर पर देख पा रही थी कि उसकी मां की हरकत उसके भाई को कितना मदहोश कर रही थी संजू की आंखें पूरी तरह से बंद हो चुकी थी,,,, उसका एक हाथ कमर पर था दूसरा हाथ आराधना के सर पर और धीरे-धीरे वह अपनी कमर को हीला भी रहा था बेहद अद्भुत और कामोत्तेजना से भरपूर इस नजारे को देखकर मोहिनी सलवार के ऊपर से ही अपनी चूत को रगड़ रही थी,,,,,,, मोहिनी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी हालांकि इस तरह के सुख को वह भी रोज भोगती थी लेकिन अपनी आंखों के सामने अपनी मां को इस हाल में देख कर,,,, वैसे तो वह अब रोज ही अपनी मां को इस हाल में देखती ही थी लेकिन आज की बात कुछ और थी आज वह खुद इस खेल में सहभागी होने वाली थी इसलिए उसके बदन में कुछ अजीब सी हलचल हो रही थी,,,,

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देखते ही देखते आराधना अपने बेटे के मुंह से जैसे लंड को पूरा गले तक उतार ली थी और कुछ सेकेंड तक उसे अंदर ले कर,,,गगगगगगग,,गहगगगगग जैसी कामुक आवाज अपने मुंह से निकालकर लंड को बाहर कर दे रही थी,,,, लंड जैसे कि मुंह से बाहर आता था एकदम देखने लायक हो जाता था क्योंकि आराधना अपने थुक और लार से उसे पूरी तरह से गिला कर देती थी जो कि उसके लंड से टपकता था,,, और अपने भाई के लंड को इस हाल में देखकर मोहिनी की चूत में पानी आ जाता था,,,।

कमरे के अंदर का माहौल पूरी तरह से गरमा गया था ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था आराधना को इस बात का अहसास तक नहीं था कि दरवाजे के पीछे से उसकी बेटी उसकी कामलीला को अपनी आंखों से देख कर मस्त हो रही है,,,,,, संजू अपनी कमर को होले होले से हिलाता हुआ अपने दोनों हाथों का सहारा लेकर अपनी टीशर्ट को निकाल कर फेंक दिया उसकी मजबूत चौड़ी छाती देखकर मोहिनी के मुंह में हमेशा पानी आ जाता था क्योंकि जब भी वह अपने भाई के नंगे छाती को देखती थी तब तब उसे अपने पूरे वजूद को अपने भाई की छाती में समा लेने का मन करता था,,,,, एक तरफ आराधना अभी भी पूरी तरह से अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर उसे पूरी तरह से गर्म करने में लगी हुई थी और दूसरी तरफ संजू थोड़ा सा नीचे झुक कर अपनी मां की साड़ी को पैरों से ऊपर की तरफ उठा रहा था और देखते ही देखते संजू की मेहनत रंग लाने लगी और साड़ी धीरे-धीरे उसकी जांघों तक आ गई जानू के नीचे तक हुआ बेशुमार खूबसूरती से भरी हुई थी कोई अनजान मर्द अगर केवल इतना भर देख ले तो भी उसका लंड पानी फेंक दें इस कदर आराधना गदराई जवानी से भरी हुई थी,,,,,,, दूसरे मर्दों की तो छोड़ो अपनी मां की गोरी गोरी मोटी जांघों को देखकर खुद समझो का मन ललचा रहा था और वह गर्म आह भरते हुए अपनी मां की मोटी मोटी जांघों को अपनी हथेली से सहला रहा था,,,,।

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सहहहरह आहहहहह,,,, मम्मी तुम्हारी जांघें कितनी खूबसूरत है,,,, मन करता है अपने लंड को तुम्हारी गोरी गोरी जांघों पर रगडता रहूं,,,,,ऊफफ,,,,,,,(कस के अपनी मां की जान को अपनी हथेली में भरते हुए) जी करता है खा जाऊं,,,,,,

(अपने बेटे की बातों का उसकी हरकत का आराधना पर भी असर पड़ रहा था वह पागलों की तरह अपने मुंह को आगे पीछे करके अपने बेटे के लंड को अपने मुंह से ही हस्तमैथुन वाला मजा दे रही थी,,,,,,, जिससे रह-रहकर संजू के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ती थी,,,, कुछ देर तक आराधना इसी तरह से अपने बेटे के लंड का मजा लूटती रही लेकिन अब वह भी खुल जाना चाहती थी क्योंकि जिस खेल को वह खेल रही थी उस खेल को खेलने में उसके बदन के वस्त्र बाधा रूप बन रहे थे और वह अपने इस बाधा को दूर कर देना चाहती है इसलिए अपने बेटे के लंड को अपने मुंह से बाहर निकाल कर वहां धीरे से बिस्तर पर बैठ गई हो खुद ही अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी,,,, यह देखकर मोहिनी अपने मन में बोली,,,

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साली मम्मी कितनी छिनार है दोपहर में तो दुनिया के सामने मेरे सामने कितनी सीधी-सादी बनी रहती है और रात को पूरी तरह से रंडी बन जाती है देखो तो सही कैसे उतावली हुए जा रही है अपने हाथ से अपने ब्लाउज का बटन खोल रही है,,,,,(एक तरफ आराधना अपने ब्लाउज के बटन खोल रही थी तो दूसरी तरफ जांघों पर अटकी हुई अपने पजामे को तेरे से अपने पैरों से निकाल कर नीचे फेंक दिया अब वह अपनी मां की आंखों के सामने पूरी तरह से नंगा हो गया था उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड आराधना के ठोक और लार में डूब कर और भी ज्यादा भयंकर और मजबूत लगने लगा था,,,, संजू अपनी मां की तरफ देख रहा था वह अपने ब्लाउज के आखिरी बटन को खोल रही थी लेकिन उत्तेजना बस खोल नहीं पा रही थी तो संजू आगे बढ़ता हुआ बोला,,,)

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हाय मेरी रानी यह काम तो मेरे ऊपर छोड़ दो तुम्हारे बदन से कपड़े उतार कर नंगी करना मेरा काम है तुम्हारा नहीं,,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू अपने दोनों हाथों को अपनी मां के ब्लाउज के आखिरी बटन पर रखकर अपनी उंगलियों के सहारे से खोलने लगा,,,, और आराधना अपने बेटे के खड़े लंड को हाथ में लेकर उसे मुठियाने लगी मानो कि जैसे अपनी चूत में लेने से पहले उसमें धार दे रही हो,,,,, देखते-देखते संजू अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खून कर उसके ब्लाउज को उसकी बांहों से निकालकर अलग कर दिया,,,,, लेकिन अभी भी छातियों की शोभा बढ़ा रहे दोनों खरबूजा लाल रंग की ब्रा के पर्दे में छिपे हुए थे और बाहर आने के लिए आतुर नजर आ रहे थे,,,,, संजू अपने दोनों हाथों को अपनी मां के पेट की तरफ ले जाते हुए बोला,,,)

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कसम से मम्मी लाल रंग की ब्रा में तुम्हारी गोरी गोरी चूचीयां बहुत खूबसूरत लगती है मेरा तो मन नहीं करता पूरा उतारने का,,,



तो उतार क्यों रहा है,,,(लंड की जड़ को अपनी उंगलियों के सहारे पकड़कर हिलाते हुए बोली)

क्या करु मम्मी मजबूर हूं तुम्हारी चूचियों को दबा दबा कर मुंह में लेकर पीने में मजा बहुत आता है,,,,(ब्रा के हुक को खोल कर अपनी मां की बाहों में से उसे निकालते हुए) तुम्हारी जैसी खूबसूरत चूची मैंने आज तक नहीं देखा एकदम कसी हुई तनी हुई खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी,,,, सच में ईन्५ पीने का मजा ही कुछ और है,,,(ब्रा को उतारकर बिस्तर के नीचे फेंकते हुए,,,,, और फिर अपनी मां की नंगी चूची को दोनों हाथों से पकड़कर उसे जोर-जोर से दबाते हुए खुद अपनी मां के ऊपर चढ़ने लगा और आराधना देखते ही देखते पीठ के बल बिस्तर पर लेट गई और संजू नंगा ही अपनी मां की कमर के इर्द-गिर्द अपने पैर के घुटने रखकर अपनी मां के ऊपर बैठ गया और उसकी छाती को दोनों हाथों से पकड़कर झकझोर ने लगा,,,,,

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आराधना को अपने बेटे के बेदर्दी बनने में भी बहुत मजा आ रहा था संजू पागलों की तरह अपनी मां की चूची को दशहरी आम समझकर जोर जोर से दबा रहा था और आराधना गरमा गरम सिसकारी ले रही थी संजू इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि दरवाजे पर खड़ी उसकी बहन सब कुछ देख रही है और इस बात का एहसास भी उसे अच्छी तरह से ताकि उसकी बहन भी पूरी तरह से चुदवासी हो गई है और यह सोचकर तो उसका लंड और भी ज्यादा कड़क हो गया कि एक साथ दो दो चूत में अपना लंड डालेगा,,,,,

अपने बेटे क इंतजार में आराधना

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आराधना पागल हुए जा रही थी एक तरफ संजू इस तन मन धन से अपनी मां को पूरी तरह से मस्त किए हुए थे और दूसरी तरफ से अपने लंड के सहारे उसकी गर्मी को और ज्यादा बढ़ा रहा था क्योंकि जिस तरह से समझो उसके ऊपर बैठा हुआ था उसका लंड पूरी तरह से नाभि से लेकर के उसकी चूची तक अपना असर दिखा रहा था जिसे बार-बार आराधना अपने हाथ में लेकर पकड़ ले रही थी,,,, संजू से अपनी मां की जवानी बर्दाश्त नहीं हो रही थी और वह स्तन मर्दन के साथ-साथ स्तन चूसाई का भी मजा लेने लगा वह नीचे झुका और अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरु कर दिया खासकर के चूची की शोभा बढ़ा रहे उसके भूरे रंग के खजूर को पूरी तरह से मुंह में लेकर खींच खींच कर पीना शुरु कर दिया मानो कि जैसे उस में से दूध निकल रहा हो,,,,, और आराधना मस्ती के सागर में गोते लगाने लगी,,,,।

आराधना अपने बालो को सवारते हुए एकदम नंगी

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सहहहह आहहहहह मेरे राजा मेरा संजू बेटा बहुत मजा दे रहा है तू जोर जोर से पी,,,आहहहहह आहहहहहहहह,,,

(आराधना बिस्तर पर मछली की तरह तड़प रही थी और संजू अपनी मां की तरफ देखकर पूरी तरह से जोश में आ चुका था,,,,, कमर के ऊपर नंगी हो चुकी आराधना कमर के नीचे अभी भी वस्त्रों में थी और कुछ देर तक संजू अपनी मां की चूची से खेलने के बाद अपनी मां को नंगी करने के उद्देश्य से उसके ऊपर से उठा और उसके कमर में ठुशी हुई साड़ी की गांठ को खोलने लगा,,,,

दरवाजे पर खड़ी मोहिनी इस गरमा गरम नजारे को देखकर पूरी तरह से गिली हुई जा रही थी उसकी जवानी रस छोड़ रही थी,,,, मोहिनी को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह पागल हुए जा रही थी दरवाजे पर खड़े होकर अंदर के गरमा गरम दृश्य को देखना उसके बस में बिल्कुल भी नहीं था,,,, वह भी इस काम दिला के खेल में भाग लेना चाहती थी मजा लेना चाहती थी अपनी मां के साथ मिलकर जवान लंड से चुदवाना चाहती थी,,,, लेकिन अभी भी ना जाने क्या सोचकर उसके कदम दरवाजे पर ही जमे रह गए थे और बंदर के दिल से को अपनी आंखों से देख कर पागल हो जा रही थी,,,,, संजू बिस्तर के नीचे खड़ा हो चुका था उसकी मां भी भी पेट के बल लेटी हुई थी और अपने बेटे की क्रिया कलाप को देख रही थी और अंदर ही अंदर उत्तेजित हो रही थी क्योंकि उसका बेटा उसकी साड़ी को खोल रहा था,,,, एक औरत के लिए यह पल बेहद उत्तेजना आत्मक या तो शर्मनाक होता है शर्मनाक इसलिए कि अगर उसकी साड़ी को कोई गैर इंसान जिसे वह जानती ना हो पहचानती ना हो और वह उसकी सारी खोल रहा हो तो ऐसी औरतों को शर्मिंदगी का अहसास होता है लेकिन उसी औरत के परिचित जिसके साथ वह खुल चुकी है शारीरिक संबंध बना चुकी है ऐसा शख्स जब उस औरत की साड़ी को खोलता है तो उसके एवज में उसकी खुद की चूत पानी छोड़ने लगती है आनंद के मारे और यही आराधना के साथ भी हो रहा था और पूरी तरह से गीली हो चुकी थी उसकी पूरी संपूर्ण चुत चिपचिपा हो गया था,,,,।

आराधना पंतय बदलते हुए

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संजू अपनी उंगलियों की फुर्ती दिखाते हुए अपनी मां की साड़ी खोलकर उसे कमर से अलग करने लगा था और देखते ही देखते संजू अपनी मां की साड़ी उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दिया था उसकी आंखों के सामने उसकी खूबसूरत मां पेटीकोट में थी जिसमें वह बला की खूबसूरत लग रही थी लेकिन जल्द से जल्द संजू अपनी मां को संपूर्ण रूप से नंगी कर देना चाहता था क्योंकि वह जानता था नंगी होने पर उसकी मां स्वर्ग से उतरी अप्सरा से कम नहीं लगती,,,,, इसलिए वह तुरंत ही अपनी मां के पेटीकोट की दूरी पर अपना हाथ रख दिया और उसे खोलने की तैयारी में ही था कि उसके हाथ को पकड़कर इशारों में ही उसकी मां उसे रोकने लगी संजू ऐसे तो रुकने वाला नहीं था लेकिन अपनी मां की आंखों में उसे 4 बोतलों का नशा नजर आ रहा था मदहोशी से भरी हुई आंखें संजू को अपने अंदर डूब के लिए चली जा रही थी संजू अपनी मां की कारी कजरारी आंखों में पूरी तरह से खो गया,,,, आराधना का चेहरा उत्तेजना से तमतमा रहा था इस समय वह काम की देवी तक रही थी पूरी तरह से उत्तेजना से भरी हुई मदहोशी उसके हर एक अंग से टपक रही थी वह संजू का हाथ पकड़े हुए ही बिस्तर पर एकदम से खड़ी हो गई और संजू की आंखों में देखते हुए खुद अपने दोनों हाथों को अपनी पेटीकोट की दूरी पर रखकर एक हाथ से पेटीकोट की डोरी को खींच ली और तुरंत ही पेटीकोट कमर से एकदम ढीली हो गई संजू देखता ही रह गया अपनी मां की मदहोश कर देने वाली अदा को देखकर वह पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था,,,,,,,, इस तरह की अदाकारी को उसने आज तक फिल्मों में देखा था लेकिन आज अपनी आंखों के सामने अपनी मां का नया रूप देख रहा था वह पूरी तरह से कामुकता के सागर में डुबकी लगाते हुए अपने बेटे को साथ में लिए जा रही थी उसकी आंखों में नशा छा रहा था होठो पर थरथराहट थी लेकिन थरथराहट भरे होठों से भी वह संजू को अपने पास बुला रही थी अभी तक उसकी हाथों में पेटीकोट की डोरी थी जिसे वह अपने हाथों से छोड़कर पेटीकोट को उसके कदमों में गिरने पर मजबूर कर दी पलक झपकते ही पेटीकोट मानो सब कुछ त्याग कर उसके कदमों में जा गिरी थी और ऐसा अद्भुत दृश्य उसकी आंखों के सामने नजर आया था जिसे देखकर संजू का लंड 10 गुना और ज्यादा कड़क हो गया था,,, पेटीकोट के कदमों में गिरते ही आराधना संपूर्ण रूप से नंगी हो गई थी मात्र उसके बदन पर छोटी सी लाल चड्डी थी जो कि उसके बेश कीमती खजाने को छुपा रही थी,,,,,,,,,

आराधना अपने बेटे की आंखों में अपनी जवानी की चमक देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी और खुश हो रही थी वह अच्छी तरह से समझ रही थी कि उसकी जवानी का असर उसके बेटे पर पूरी तरह से हो रहा है क्योंकि वह देख रही थी कि उसका लंड ठुनकी ले रहा था,,,, अपने बेटे के बदन में और ज्यादा आग लगाते हुए आराधना अपनी टांग को धीरे से हल्का सा खोली और,,,,, अपनी चूत को मखमली चड्डी सहित अपने बेटे के सामने अपनी कमर को आगे की तरफ करके परोस दी यह देखकर संजू अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं रख पाया और तुरंत जानू के इर्द-गिर्द अपनी बाहों को लपेटकर वह अपनी मां की चूत को चड्डी के ऊपर से ही चूमना शुरू कर दिया,,,,,,,,,, अपने बेटे की हरकत से आराधना के बदन में और ज्यादा उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी हो पागलों की तरह अपने बेटे के सर को बालों से पकड़कर अपनी कमर को अपनी चूत को जोर-जोर से अपने बेटे के मुंह पर मारने लगी मानो कि एक मर्द औरत की चुदाई कर रहा हूं उसकी कमर बड़े जोरों से चल रही थी वह अपनी चूत को बार-बार अपने बेटे के मुंह पर पटक रही थी और अपनी मां की हरकत पर संजू पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था दरवाजे पर खड़ी मोहिनी इस दृश्य को देखकर पागल हुए जा रही थी उसकी आंखें फटी की फटी रह जा रही थी वह अपनी मां को देखकर समझ नहीं पा रही थी कि वास्तव में कमरे के अंदर जो औरत है वह उसकी मां ही है या कोई और है क्योंकि अपनी मां को आज तक उसने इस रूप में नहीं देखी थी पहले ही हर रात को अपने बेटे से चुदाई करवाते हुए मोहिनी देख रही थी लेकिन इस तरह का रूप नहीं देखी थी क्योंकि ऐसा लग रहा था कि जैसे इस खेल की बागडोर को वह अपने हाथों में ले ली हो,,,,,

पहले से ही काम रस में भीग चुकी चड्डी को संजू अपनी जीभ से चाट चाट कर और ज्यादा गिला कर रहा था लेकिन आराधना चाहती थी कि उसका बेटा उसकी नंगी चूत पर अपनी हॉट रखकर चाटे अपनी जीभ को उसकी चूत में डालकर उसकी मलाई को चाटे इसलिए अपने दोनों हाथों को अपनी कमर पर रखकर उंगलियों को चड्डी में फंसा कर उसे उतारने की तैयारी में थी कि संजू अपनी मां की हरकत को देखकर खुद अपनी मां की चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसे उतारना शुरू कर दिया देखते ही देखते संजू अपनी मां की चड्डी को घुटने तक उतार कर रख दिया,,,,, आराधना खुमारी भरी आंखों से अपने बेटे को देख रही थी संजू भी अपनी मां की आंखों में ही देख रहा था दोनों की नजरें आपस में टकरा चुकी थी और नजरों ही नजरों में एक अद्भुत आकर्षण पैदा हो रहा था दोनों मदहोश हो जा रहे थे आराधना घुटनों तक आई चड्डी को अपने पैर के सहारा देकर उसे उतारने लगी और अपने पैसे निकालकर चड्डी को एक झटका मार कर फेंक दी और चड्डी जाकर सामने दीवार के कोने में गिर गई,,,,,,, अपनी मां की अद्भुत काम देना को देखकर मोहिनी का दिल जोरों से धड़क रहा था वह जल्द से जल्द इस खेल में शामिल हो जाना चाहती थी,,,,,,

आराधना पागल हो जा रही थी वह थोड़ा सा अपनी कमर को नीचे झुका कर अपने बेटे के बाल को पकड़ी हुई थी उसकी चूत ठीक संजू के होठों के सामने थी दोनों के बीच केवल 1 फीट की ही दूरी रह गई थी आराधना को ना जाने क्या सूझा कि उसकी चूत से पेशाब की धार फूट पड़ी और सीधे जाकर संजू के मुंह पर गिरने लगी,,,,, पल भर में यह क्या हो गया ना तो आराधना को समझ में आ रहा था ना तो संजू को संजू ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी मां उसके साथ इस तरह की हरकत करेगी अपनी इस हरकत से आराधना ने अपने बेटे को पूरी तरह से मस्त कर दी थी मदहोश कर दी थी पल भर में ही 10 गुना चुदवासा हो गया था वह,,,,,

आराधना को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसा कैसे हो गया आराधना जानबूझकर ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहती थी क्योंकि वह एक समझदार पढ़ी-लिखी और संस्कार ही औरत थी वह कभी सपने में भी ऐसा हरकत करने को सोच नहीं सकती थी लेकिन उसने जना की चलती वह पूरी तरह से विवश हो चुकी थी मजबूर हो चुकी थी अनजाने में ही उसकी चूत से पेशाब का फव्वारा फूट पड़ा था,,, जो कि सीधे संजू के होठों के अंदर धार गिर रही थी आराधना अपने आप को रोक नहीं पाए वह अपनी पेशाब को रोकना चाहती थी पूरा दम लगाकर रोकना चाहती थी लेकिन एक बार पेशाब की धार पहुंचने पर उसे रोक पाना मुश्किल हुआ जा रहा था,,,, देखने वाले को तो यही लग रहा है होगा कि जानबूझकर आराधना अपने बेटे के मुंह में मुत रहि‌ है,,,,, और मोहिनी को भी ऐसा ही लग रहा था मोहिनी तो इस नजारे को देखकर पूरी तरह से पागल हो गई,,,, वह अपनी मां की हरकत पर पूरी तरह से हैरान थी आज तक तो उसने अपने भाई के साथ ऐसा नहीं की थी लेकिन उसकी मां पूरी तरह से मोहिनी को चौंका दी थी,,,, चौक तो संजु भी गया था लेकिन वह एक मर्द था और मर्द तो हमेशा से औरत की इस अदा से इस हरकत के कायल रहते हैं वह मर्द अपने आप को बहुत खुशनसीब समझते हैं जो अपनी चूत से पेशाब की धार उसके मुंह में मारती है,,,,,, और इस समय संजू भी अपने आप को बहुत खुशनसीब समझ रहा था,,,, संजू अपने होठों को या अपने चेहरे को अपनी मां की पेशाब की धार से छुपाने की हटाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था जो कि साफ नजर आ रहा था कि संजू को अपनी मां की हरकत पर पूरी तरह से मजा आ रहा था,,,,,, लेकिन मोहिनी पूरी तरह से मस्त होने के बावजूद भी पूरी तरह से अद्भुत एहसास में डूबी हुई थी अपनी मां से या किसी भी औरत से उसे इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी और अपने भाई से भी इस तरह की उम्मीदों से नहीं थी उसका भाई बड़े चाव से अपनी मां की चूत से निकले पेशाब की धार को पेप्सी की धार समझकर अपने गले के नीचे उतार रहा था,,,,,

अपनी इस हरकत पर आराधना की भी आंखें फटी की फटी रह गई थी वह अपने पेशाब को रोक देना चाहती थी लेकिन ऐसा कर पाना उसके बस में बिल्कुल भी नहीं था लेकिन जैसे ही पेशाब की धार कमजोर पड़ी आराधना उत्तेजना के मारे अपने भाई के सर को कस के पकड़ कर उसे अपनी चूत से हटा दें और उसे अपनी चूत चाटने पर मजबूर कर दे,,,,,, लगातार उसके मुंह से। आहहह आहहहह इस तरह की कराने की आवाज आ रही थी जो कि इस बात का सबूत था कि आराधना को इस हरकत पर बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,,,, संजू अपने दोनों हाथों से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पकड़कर उसकी चूत को चाटने में मगन हो गया अभी भी पेशाब की धार रह-रहकर उसकी चूत से फूट पड़ रही थी और संजू उसे पीने में पूरी तरह से मदहोश और मस्त हुआ जा रहा था और यही मौका था मोहिनी के लिए इस खेल में शामिल होने का,,,, वह अपने मन में सारे चित्र को स्पष्ट कर ली थी कि अंदर जाकर क्या बोलना है क्या कहना है कैसे बर्ताव करना है,,,,, वह अंदर जाने के लिए अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर ली थी,,,, गहरी सांस लेकर वह दरवाजे को जोर से धक्का मारकर खोली और कमरे में प्रवेश कर गई और सामने के नजारे को ऐसे चौक कर देखी जैसे मानो पहली बार देख रही हो और बोली,,,,।

यह क्या हो रहा है,,,,?

(धड़ाक से दरवाजे के खुलने की आवाज और मोहिनी की आवाज सुनते ही आराधना एकदम से चूक गई और दरवाजे की तरफ देखी तो मोहिनी खड़ी थी और मोहिनी के सामने अपनी मौजूदा स्थिति को देखते हुए पूरी तरह से घबरा गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी वह मोहिनी को एकटक देखती रह गई थी संजू भी पूरी तरह से घबराने का नाटक कर रहा था लेकिन अभी भी उसके होंठ अपनी मां की चूत पर सटे हुए थे क्योंकि आराधना करके उसके बालों को पकड़कर उसे अपनी चूत से सटाई हुई थी,,,,, आराधना कमरे में अपने बेटे के साथ पूरी तरह से नंगी थी बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था ऐसे में मोहिनी उसकी आंखों के सामने खड़ी थी आराधना की चोरी पकड़ी गई थी आराधना मदहोश पल में पूरी तरह से शर्मिंदा हो गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अपनी बेटी की आंखों के सामने भी वह अपने बेटे के बालों को कस के पकड़ कर अपनी चूत से सगाई हुई थी यह पल आराधना के लिए एकदम शर्मनाक हो चुका था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने बेटे को अपनी चूत से कैसे अलग करें वह मोहिनी को देखती ही रह गई थी और मोहिनी अपनी मां को देख रही थी संजू को देख रही थी,,,,,, पल भर के लिए कमरे में पूरी तरह से सन्नाटा छा गया था ऐसा लग रहा था कि संजू जैसे शर्म के मारे अपने चेहरे को अपनी मां की दोनों टांगों के बीच छुपाया हुआ है,,,, आराधना के मुंह से बस इतना ही निकला,,,,)

मममम ,,,,,, मोहिनी तू,,,,,,,
 
बेहद उन्माद कौर अत्यधिक काम उत्तेजना से भरे हुए इस मनोहर दृश्य को देखकर मोहिनी के तन बदन में जवानी के जोश वाले भड़क रहे थे उसे बुझाने के लिए उसे अपने भाई के लंड की फुहार की जरूरत थी,,,, जो कि इस समय अपनी मां के साथ काम क्रीड़ा में पूरी तरह से तल्लीन हो चुका था अनजाने में ही उत्तेजना के चलते आराधना की चूत से पेशाब की धार फूट पड़ी थी,,, जो कि सीधे संजू के मुंह में गिर रही थी संजू भी अपनी मां की है इस हरकत से पूरी तरह से चौक गया था लेकिन पहली बार इस तरह के अद्भुत खेल का मजा ले रहा था इसीलिए तो उत्तेजना की स्थिति में अपनी मां की चूत से निकले पेशाब की धार को वह अमृत की धार समझ कर गले के नीचे गटक रहा था,,,, आराधना से यह कार्य अनजाने में ही हुआ था वह अपने पेशाब की तीव्रता को रोकने की भरपूर कोशिश कर रही थी लेकिन उसे रोका नहीं जा रहा था लेकिन कुछ पल में ही उसे इस बात का एहसास होने लगा कि जो किया वह अपने बेटे के साथ कर रही है उसमें उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही है,,,, और उसे अपने बेटे के मुंह में मुतने में मजा आने लगा एक मां होने के नाते आराधना की हरकत पर हाथ शर्मनाक थी इस बात को वह भी अच्छी तरह से जानती थी लेकिन इस समय वह एक औरत थी मतवाली औरत प्यासी औरत,,,चुदास‌ से भरी हुई औरत जोकि संजू को अपना बेटा नहीं बल्कि एक मर्द समझकर इस हरकत को अंजाम दे रही थी तभी तो यह बेहद शर्मनाक हरकत भी,,,, वह बेहद सहज रूप से कर ले रही थी,,,,, बाहर खड़ी मोहिनी इस दृश्य को देखकर पानी पानी हुई जा रही थी उसकी चूत बार-बार पानी फेंक रही थी इस तरह की हरकत उसने आज तक अपने भाई के साथ नहीं की थी और अपनी मां को इस तरह की हरकत करते हुए देखा करूंगा पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी मदहोशी और खुमारी उसकी आंखों में पूरी तरह से अपना असर दिखा रहे थे,,,,,

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दरवाजे के बाहर खड़ा रहना मोहिनी के लिए मुश्किल हुआ जा रहा था वह जल्द से जल्द कमरे में दाखिल हो जाना चाहती थी और उस मदन मस्त कर देने वाले खेल में शामिल हो जाना चाहती थी,,,, आखिरकार देखते ही देखते गरमा गरम आहें भरते हुए आराधना की चूत से पेशाब कि धार कम होने लगी और मदहोश होते हुए आराधना अपने बेटे के मुंह को अपनी चूत से सटा ली और यही मौका था मोहिनी के लिए कमरे में दाखिल होने का दरवाजे की कड़ी पहले से ही संजू ने लगाया नहीं था दरवाजा पूरी तरह से खुला था बस औपचारिक रूप से उसने उसे बंद किया हुआ था,,, और इस शुभ और मदहोश कर देने वाले अवसर का पूरा फायदा उठाते हुए मोहिनी कमरे में दाखिल हो गई,,,भडाक की आवाज के साथ खुले दरवाजे से और अंदर प्रवेश करते ही मोहिनी के मुंह से केवल इतना ही निकला था,,,,

यह क्या कर रहे हो तुम दोनों,,,,

(बस इतनी सी आवाज सुनकर आराधना और संजू दोनों चौक पर थे संजू तो केवल चौक ने का नाटक भर कर रहा था क्योंकि उसे सब कुछ मालूम था लेकिन आराधना की हालत एकदम खराब हो गई थी आराधना के तन बदन में मानो खून का दौरा एकदम से रुक सा गया था,,,, उसकी हालत ऐसी थी कि मानो काटो तो खून नहीं अपनी बेटी की आंखों के सामने ही वह अपने बड़े बेटे के बालों को कस के पकड़ कर उसके होठों को अपनी चूत से सटाई हुए थी,,,, औपचारिक रूप से सहज रूप से यह दृश्य बेहद शर्मनाक था जो कि संस्कार और मर्यादा और रिश्तो की डोर को तार-तार करते हुए,,,, मां बेटे के रिश्ते को पानी में मिला रहा था,,,,, अपनी बेटी की आंखों के सामने औपचारिक‌ था की आराधना को शर्म से हट जाना चाहिए था अपने नंगे बदन को चादर से ढक लेना चाहिए था लेकिन आराधना को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह उसी स्थिति में अपने बेटे को उसी तरह से पकड़े हुए ही अपनी चूत से लगाए हुए थी और संजू भी अपनी मां की दोनों टांगों के बीच अपने होठों को उसकी चूत पर लगाकर उसके काम रस को चाट रहा था ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे शर्म के मारे संजू अपना मुंह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच छुपाया हुआ हो,,,,,, कुछ सेकंड तक फटी आंखों से आराधना अपनी बेटी की तरफ देखती रह गई और केवल उसके मुंह से इतना ही निकला,,,।

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मममममम,,,,, मोहिनी तु,,,,,

(अब बारी मोहिनी की थी,,,, वह इस खेल की बागडोर अपने हाथों में ले लेना चाहती थी वह जानती थी कि जिस हालात में हो कमरे में दाखिल हुई है उस हालात को देखते हुए उसकी मां के सामने उसकी हर एक शर्त मानने के सिवा और कोई रास्ता नहीं होगा अंदर ही अंदर मोहिनी खुश हो रही थी ऐसा नहीं था कि अपनी मां को यह हालत में देखकर अपने बड़े भाई के साथ देख कर वह गुस्से से आगबबूला हो गई हो उसे तो इस तरह के दृश्य देखकर और मजा आता था खास करके अपने भाई के साथ,,,, वैसे भी वह अपनी मां की मदमस्त कर देने वाली जवानी और उसकी खूबसूरती की कायल हो चुकी थी वह किसी भी हाल में अपनी मां के नंगे बदन कर रस अपने होठों से पीना चाहती थी एक औरत होने के नाते और एक औरत होने के बावजूद भी वह अपनी ही मां की खूबसूरती से पूरी तरह से आकर्षित हो चुकी थी अपनी मां के नंगे बदन के नंगे अंगों को अपने हाथों में लेकर खेलना चाहती थी इसीलिए तो वह इतना षड्यंत्र रची थी,,,,, संजू अभी भी अपने पैसे होठों को अपनी मां की चूत पर रखे हुए था अपनी बहन की मौजूदगी में उसे बिल्कुल भी शर्म का एहसास नहीं था ना तो किसी प्रकार की ग्लानि थी क्योंकि वह इस खेल का सहभागी पहले से ही हो चुका था,,,, वह तो सिर्फ औपचारिकता निभा रहा था,,,,, मोहिनी की खुद की चूत पानी फेंक रही थी लेकिन फिर भी वह अपने आप पर संयम रखते हुए और ऐसा जताते हुए कि वह इस दृश्य को देखकर पूरी तरह से सदमे में है वह थोड़ा सा ऊंची आवाज करते हुए बोली,,,)

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हां मम्मी में,,,,, तुम यही सोच रही होगी ना कि इतनी रात को मैं तुम्हारे कमरे में कैसे आ गई,,,,, मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि मैं तुम्हें इस रूप में देख रही हूं और अभी अपने बड़े भाई के साथ क्या मम्मी यह तुमने क्या कर दिया,,,,,, तुम दोनों या खेल बहुत पहले से ही खेल रहे हो लेकिन मैं ही बेवकूफ थी कि तुम दोनों की इस काम क्रीडा को समझ नहीं पाई अच्छा ही होता कि आज भी मेरी आंख नहीं खुलती आज भी मैं गहरी नींद में सोई रहती तो शायद में इस तरह के शर्मनाक दृश्य को अपनी आंखों से देख नहीं पाती,,,,,,

(मोहिनी की बातों को सुनकर आराधना शर्म से गढ़ी जा रही थी हालांकि अभी भी उसकी दोनों टांगे खुली हुई थी और उसकी तीन टांगों के बीच संजू अपना मुंह छुपाए हुए अपनी मां की चूत को अभी भी चाट रहा था और ऐसे हालात में भी अपनी मां को अद्भुत उसको कर दे रहा था जिससे ना चाहते हुए भी आराधना के तन बदन में मदहोशी का असर छा रहा था,,,,,)

मममम,, मोहिनी,,,,,, मुझे माफ कर दे मुझसे गलती हो गई,,,,,(संजू को अपने आप से अलग करते हुए और बिस्तर पर पड़ी चादर को अपने बदन पर झांककर अपने नंगे बदन को छुपाने की कोशिश करते हुए आगे बोली,,,) मैं बहक गई थी मोहिनी,,,,,(इतना कहकर वह रोने लगी)

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रोने से तुम्हारी गलती छुपने वाली नहीं है मम्मी,,,, मैं तो कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि मेरी मम्मी इस तरह की हरकत करेगी,,,, तुम तो ऐसी बिल्कुल भी नहीं थी मम्मी फिर ऐसा कैसे हो गया,,,,,।

(आराधना के पास जवाब देने के लिए कुछ भी नहीं था वह रोने लगी थी उसकी आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे,,,, यह देख कर मोहिनी जानबूझकर नाटक करते हुए संजू की तरफ देख कर बोली,,,)

भाई मुझे तुमसे भी यह उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी,,, आज मैं पहली बार अपनी आंखों से देख रही हूं कि एक बेटा अपनी सगी मां के साथ इस तरह की हरकत कर रहा है,,,,, मुझे तो तुम दोनों को मम्मी और भाई बोलने में शर्म आ रही है अगर यह बात किसी और को पता चलेगी तो सोचो क्या होगा तुम दोनों क्या मेरा भी घर से निकलना भारी हो जाएगा किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रह जाऊंगी,,,,,,(मोहिनी किस तरह की बातें सुनकर आराधना सुबक सुबक कर रो रही थी आज पकड़े जाने पर उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि जो कुछ भी हो कर रही थी वह पाप था वासना की आग में तब कर वह अंधी हो चुकी थी मां बेटे के पवित्र रिश्ते को भी वह नजरअंदाज करते हुए अपने बेटे के साथ ही संबंध बना ली थी,,,,,, एक तरफ अपनी चोरी पकड़ी जाने पर और मोहिनी की बातों को सुनकर जहां आराधना का बुरा हाल था वहीं दूसरी तरफ जो कि इस खेल का सहभागी होने पर संजू अपनी मां को रोता हुआ देखकर उसे रहा नहीं जा रहा था और उसे लगने लगा था कि अपनी मां का बीज बचाओ करने के लिए उसे ही कुछ बोला होगा इसलिए वह बोला,,,)

मोहिनी इसमें मम्मी की कोई गलती नहीं है इसमें सारी गलती मेरी है,,,,

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तुम दोनों की गलती है भाई सारा इल्जाम अपने सर पर लेकर मम्मी की करतूतों पर पर्दा नहीं डाला जा सकता तुम्हारी उम्र और मम्मी की उम्र में जमीन आसमान का फर्क है जहां तुम बह गए थे वही मां को रोक देना चाहिए था मम्मी को आगे नहीं बनना चाहिए था मम्मी तो समझदार थी दुनिया देखी थी और सबसे बड़ी बात यह कि तुम कोई गैर लड़के नहीं थे तुम तो सगे बेटे हो और मां बेटे के बीच इस तरह का रिश्ता पाप है,,,,

हां मैं जानता हूं,,,, मां बेटे के बीच का यह रिश्ता जायज बिल्कुल भी नहीं है लेकिन जो कुछ भी हुआ उसमें मेरी गलती थी मेरे ही कारण मां को बहकना पड़ा,,,,,

मुझे विश्वास नहीं हो रहा है भाई क्योंकि जितने तुम कसूरवार हो उतनी ही मम्मी भी कसूरवार हैं,,,,,

नहीं-नहीं मोहिनी,,,, मम्मी का कसूर बिल्कुल भी नहीं है मैं ही कसूरवार हूं,,,,

जो कहना है साफ साफ कहो लेकिन इससे पहले अपने इसको,,,(उंगली के इशारे से संजू के लंड की तरफ दिखाते हुए जो की पूरी तरह से खड़ा था) कपड़े से ढको,,,,।

(ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि इस समय संजू के मोटे तगड़े खड़े लंड को देखकर मोहिनी के बदन में कुछ हलचल ना हो रही हो वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी अपने भाई के खड़े लंड को देखकर लेकिन औपचारिक रूप से उसे नाटक के रूप में अपने भाई के खड़े लंड को अनदेखा करना था और संजू भी है बात अच्छी तरह से समझता था इसलिए बिस्तर पर पड़े अपने टीशर्ट को अपनी कमर से लपेटने की नाकाम कोशिश करते हुए बोला,,,)

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हां हां मोहिनी तु मेरी बात सुन ,,,(और वहीं दूसरी तरफ रोते हुए दीवाल का सहारा लेकर आराधना बिस्तर पर बैठ गई थी और नजरों को नीचा करके रोए जा रही थी) जैसा तू समझ रही है वैसा बिल्कुल भी नहीं है मम्मी का कसूर बिल्कुल भी नहीं है मैं ही बहक गया था,,,

बहक गया था लेकिन कैसे,,,! तुझे अपनी ही मां में ऐसा क्या दिख गया कि तू बहक गया मम्मी की उम्र और अपनी उम्र के साथ-साथ रिश्ते का भी ख्याल तूने नहीं किया,,,,

अरे पागल मेरी जगह तू अगर होती तो तू भी मेरी तरह ही करती,,,,,

भाई कुछ भी हो मैं तेरी तरह तो बिल्कुल भी नहीं करती की वासना में अंधे होकर अपनी ही मां के साथ,,,, छी,,,,

यह तो तू ऐसा बोल रही है ना अगर मेरी जगह तू होती तो ऐसा ही करती तुझे इतना तो मालूम नहीं है कि पापा रात को आकर मम्मी के साथ जबरदस्ती करते थे उन्हें मारते पीटते थे गाली देते थे और ऐसे हालत में बचाने के लिए मुझे जाना पड़ता था और जब जब मैं मम्मी के कमरे में उन्हें बचाने के लिए गया तब तक तू नहीं जानती मोहिनी मैंने मम्मी को कैसे हाल में देखा हूं अगर उस हाल में तो मम्मी को देख लेती तो शायद तू भी मेरी तरह ही करती अगर तू लड़का होती तो,,,,

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ऐसे कौन से हाल में तूने देख लिया भाई कि तुझे ना करने का करना पड़ा,,,,,

(आराधना रोते हुए अपने बेटे और अपनी बेटी दोनों की बातों को सुन रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि सारा मामला दोनों के हाथ में चला गया था उसके हाथ में कुछ भी नहीं था शिवाए रोने को,,,,)

तू नहीं जानती मोहिनी,,,,, मैंने कैसे-कैसे हालात में मम्मी को देखा हूं उनकी हालत देखकर मेरी जगह कोई भी होता तो उसकी भी हालत होती जैसा कि मेरी हो रही है,,,, तू जानती है मम्मी रात को करीब 1:30 बज रहे थे और मम्मी के कमरे से अजीब अजीब सी आवाज आ रही थी,,,, मम्मी के चीखने की आवाज में बर्दाश्त नहीं कर पाया और मैं तुरंत अपने कमरे से निकलकर मम्मी के कमरे में गया दरवाजा खुला हुआ ही था जैसे मैं दरवाजे पर पहुंचा तो अंदर का दृश्य देखकर मेरे तो होश उड़ गए,,,

क्यों ऐसा क्या देख लिया,,,,,,,

मोहिनी वैसे तो तुझसे बताने में मुझे शर्म आ रही है लेकिन हालात ही कुछ ऐसे हो गए हैं कि मुझे बताना ही पड़ेगा,,,,, मैंने देखा कि मम्मी एकदम नंगी घुटनों के बल बिस्तर पर झुकी हुई है और पापा मम्मी की चूत में लंड डालते हुए जोर-जोर से मम्मी की गांड पर चपत लगा रहे थे और इतनी जोर जोर से मार रहे थे कि मम्मी रो रही थी,,,,, और मम्मी की नजर जैसे ही मुझ पर पड़ी मम्मी शर्म के मारे अपने चेहरे को अपनी ही साड़ी से छुपाने लगी उस समय मैं मम्मी को उस मुसीबत से निकाल नहीं सकता था क्योंकि हालात ही कुछ इस तरह से थे लेकिन मम्मी की हालत पर पापा को बहुत मजा आ रहा था पापा मेरी हाजिरी में भी मम्मी की चूत में अपना लंड अंदर बाहर कर रहे थे यह भी देख रहे थे कि मैं दरवाजे पर खड़ा हूं मैं बिल्कुल भी शर्म नहीं थी मेरे सामने ही मम्मी की चुदाई कर रहे थे,,,,,

(संजू सब बनी बनाई बातें नमक मिर्च लगाकर बता रहा था नजरे नजर झुका कर आराधना अपने बेटे की बात को सुन रही थी और जानती भी थी कि उसका बेटा जो कुछ भी कह रहा है गलत कह रहा था लेकिन उसके पास भी कोई रास्ता नहीं था क्योंकि उसकी गलती पर खुद उसका बेटा पर्दा डाल रहा था,,,, लेकिन इस बात से भी हैरान थी कि संजू अपनी बहन से इस तरह की गंदी बातें बता रहा था,,,, अपने भाई की बात सुनकर जानबूझकर चौक ने का नाटक करते हुए मोहिनी बोली,,,)

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क्या कह रहे हो भाई क्या सच में पापा को बिल्कुल भी शर्म नहीं थी,,,,

नहीं बिल्कुल भी नहीं,,,,

हो सकता हो भाई कि तुम गलत समय पर गए हो हो सकता है कि इसी से दोनों को मजा आ रहा हो,,,,,

नहीं मोहिनी ऐसा बिल्कुल भी नहीं है मम्मी को मजा बिल्कुल भी नहीं आ रहा था क्योंकि मैं देख रहा था ना उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे,,,,,

फिर,,,,

फिर क्या मैं अपने कमरे में आ गया मैं मम्मी की मदद बिल्कुल भी नहीं कर सकता था और जैसे तैसे करके मैं सो गया लेकिन 2 दिन बाद फिर से वही गाली गलौज मारना पीटना शुरू हो गया और मैं फिर से मम्मी के कमरे में गया,,, रोज की तरह उस दिन भी दरवाजा खुला हुआ था,,, मैं कमरे में गया तो देखा पापा जबरदस्ती मम्मी के कपड़े उतार रहे थे ब्लाउज के बटन खुले हुए थे ब्रा चुचियों के ऊपर चढ़ी हुई थी,,,,,(मोहिनी के सामने संजू के मुंह से चूची शब्द सुनकर आराधना एक पल के लिए अपनी नजर उठाकर मोहिनी की तरफ देखने लगी मोहिनी आराधना की तरह दोनों की नजरें आपस में टकराई और शर्मा कर आराधना फिर से अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,, कोई और समय होता तो आराधना जरूर अपने बेटे को अपनी बेटी के मौजूदगी में इस तरह के शब्दों का प्रयोग करने से रोकती लेकिन इस समय वह कुछ भी नहीं कर सकती थी,,, संजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) मम्मी पापा को रोकने की बहुत कोशिश कर रही थी लेकिन पापा उसके हाथ को बार-बार झटक दे रहे थे,,,, और मम्मी की चूची पर ताबड़तोड़ तमाचा मार रहे थे जिससे मम्मी को बहुत दर्द हो रहा था मुझे मम्मी का दर्द बर्दाश्त नहीं हो और मैं आगे बढ़कर पापा को पकड़ लिया,,,, पापा को ऐसा करने से रोकने लगा,,,,, मम्मी रोए जा रही थी अपनी हालत पर और शायद इस बात से और ज्यादा दुखी थी कि मेरी आंखों के सामने उनकी ऐसी स्थिति थी,,,, मुझे झटकने की कोशिश करते हुए पापा मम्मी की साड़ी उतारने पर लगे हुए थे और मैं उन्हें रोक रहा था इसी बात पर पापा भी मुझे गाली गलौज करने लगे लेकिन मैं पापा की एक नहीं सुना और उन्हें धक्का देकर एक तरफ कर दिया,,,, जैसे तैसे करके उस समय तो सब कुछ शांत हो गया मैं कुछ देर तक मम्मी के कमरे में बैठा भी रहा,,,, मम्मी रो रही थी ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें अपनी हालत की सुध बुध नहीं थी उनकी सूची अभी भी ब्रा के बाहर थी मोहिनी सच कहूं तो उस समय मुझे पता नहीं क्या होने लगा और मैं अपने हाथों से मम्मी की चूची को‌ ब्रा के अंदर डालकर मम्मी के ब्लाउज का बटन बंद किया उस समय मेरे तन बदन में जो हालत हुई थी पूछ मत मोहिनी मम्मी की चूची खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी भले दिखती है लेकिन रूई की तरह एकदम नरेंद्रन थी पहली बार में किसी औरत की चूची को अपने हाथों से पकड़ा था उस समय मेरी हालत है बिल्कुल इस तरह की,,(अपनी आंख से अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए) हो गई थी मुझे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैं तुरंत मम्मी के कमरे से बाहर निकल गया,,,,,

(संजू को अपनी मां की उपस्थिति में अपनी मां की गंदी गंदी बात अपनी बहन को बताने में इतना आनंद और इतनी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था कि जिसको बयां कर पाना मुश्किल था यही हाल शर्मसार होने के बावजूद भी आराधना का था आराधना इस बात से जहां हैरान थी कि उसका बेटा अपनी बहन के सामने गंदी गंदी बातें कर रहा है और दूसरी तरफ उस बात से उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर भी उठ रही थी,,,, कुछ देर खामोश रहने के बाद मोहिनी बोरी,,,)

मोहिनी और संजू अपनी मम्मी क सामने कुछ इस तरह से

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फिर,,,,

फिर क्या यह रोज का हो गया रोज पापा की गाली गलौज होती और मैं उन्हें रोकने के लिए उनके कमरे में चले जाता और मम्मी मुझे रोज अस्त-व्यस्त हालत में दिख जाती है ऐसे ही एक दिन,,,, 12:00 बजे के बाद जब तू गहरी नींद में सो गई तब फिर से मम्मी के कमरे से गाली गलौज की आवाज आने लगी इस बार में पूरी तरह से गुस्से में था मम्मी के कमरे में घुस गया और देखा तो पापा जबरदस्ती मम्मी के साथ संबंध बनाना चाहते थे मम्मी को चोदना चाहते थे मम्मी नंगी बिस्तर पर लेटी हुई थी और पापा जबरजस्ती मम्मी की दोनों टांगें खोलकर अपने लंड को मम्मी की चूत में डालना चाहते थे,,,,(संजू जानबूझकर मोहिनी के सामने गंदी गंदी बातें कर रहा था इससे आराधना को हैरानी भी हो रही थी और उत्तेजना भी महसूस हो रही थी) लेकिन मम्मी बार-बार अपनी हथेली से अपनी चूत को छुपाने नहीं थे क्योंकि मम्मी का मन बिल्कुल भी नहीं था और उन्हें दर्द भी हो रहा था,,,, मुझसे मम्मी की हालत देखी नहीं रही और मैं आगे बढ़कर पापा को पकड़कर जोर से धक्का दिया और पापा दीवाल से जाकर टकरा गए और वहीं पर गिर गए मुझे इतना गुस्सा आ रहा था कि मैं गया और पापा को दो-चार झापड़ भी रसीद कर दिया पापा एकदम खामोश हो गए क्योंकि वह नशे में पूरी तरह से लत थे,,,, मैं मम्मी के पास आए और मम्मी की तरफ नजर किया तो मेरी खुद की हालत खराब हो गई मम्मी उसने एकदम नंगी थी मम्मी के बदन पर बिल्कुल भी कपड़े नहीं थे और मम्मी का गोरा बदन ट्यूबलाइट की रोशनी में कल चमक रहा था मेरी नजर बार-बार मम्मी की दोनों टांगों के बीच उसकी चूत पर चली जा रही थी जिसे देख कर मुझे ना जाने क्या होने लगा मम्मी की चूत एकदम चिकनी थी एकदम मुलायम मक्खन की तरह ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे मम्मी ने क्रीम लगाकर आज ही साफ की हो ,,,, मैं बड़े देर तक मम्मी की चूत को घूरता रहा तो कोने में पडे हुए पापा बोले,,,

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देख क्या रहा है जा चढ़ जा अपनी मां पर डाल दे अपना लंड अपनी मां की चूत में इंतजार किसका है तुझे मैं सब समझता हूं मेरी पीठ पीछे तुम दोनों जुदाई का खेल खेलते हो और यह रंडी अपने ही बेटे से चुदाई का मजा लुटती है और मुझे हाथ नहीं लगाने देती,,,,, होली हराम ज्यादा मादरचोद अपनी ही मां को चोद कर मादरचोद हो गया है इसे दुनिया में कोई और लड़की नहीं मिली कोई औरत नहीं मिली मिली भी तो अपनी ही मां दोनों मां बेटे आपस में मुंह काला करते रहते हैं,,,,।

मोहिनी पापा के मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर मैं तो एकदम से सन्न रह गया और मैं एक पल भी कमरे में नहीं रुका और कमरे से बाहर निकल कर आ गया लेकिन पापा की बात याद कर करके ना जाने क्या होने लगा मेरे बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी जब भी पापा की बात सुनता तो ना जाने क्यों मेरा लंड खड़ा हो जाता था पापा की बात सुनकर ही मेरे मन में ना जाने क्यों मम्मी को चोदने का ख्याल आने लगा,,,,,,, और फिर मम्मी और पापा की दोनों की जमकर लड़ाई होने लगी और पापा घर छोड़ कर चले गए,,,,,,,,

पापा चले गए तो फिर तुझे मौका मिल गया ना भाई इस तरह का काम करने का,,,,

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नहीं मोहिनी नहीं तो फिर गलत सोच रही है मैं भले ही मम्मी के बारे में गलत सोचने लगा था लेकिन मेरे मन में ऐसा कुछ भी नहीं था,,,, मम्मी अकेली पड़ गई थी इस बात का एहसास मुझे उस दिन हुआ जब मैं दोपहर में मम्मी के कमरे में गया और मम्मी अपने में खोई हुई थी और अपनी ही उंगली को अपनी चूत में अंदर-बाहर कर रही थी,,,,(इतना सुनते ही आराधना अपनी नजरों को उठाकर सब्जी की तरफ देखने लगी जो कि सरासर झूठ बोल रहा था लेकिन वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा झूठ भी किसी कारण से बोल रहा है इसलिए वह कुछ बोली नहीं और इस बात का असर मोहिनी पर भी कुछ खास नहीं पड़ रहा था क्योंकि मोहिनी सब कुछ जानती थी बस चौक ने का नाटक करते हुए बोली)

क्या,,,?

हा मोहिनी में सच कह रहा हूं मुझे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था मम्मी की हालत देखकर मुझे जरा सा भी लगा मम्मी जोर जोर से अपनी उंगली को अपनी चूत के अंदर बाहर कर रही थी मम्मी की आंखें बंद थी मम्मी की हालत देख कर मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं इसका मम्मी दोनों टांगें ऊपर उठाकर अपनी चूत में उंगली कर रही थी मम्मी की गांड और चूत देखकर मेरी हालत खराब हो गई और मम्मी की हरकत से मुझे इस बात का एहसास हुआ कि मम्मी को भी मर्द की जरूरत पड़ रही है क्योंकि पापा को महीना हो गए थे घर से निकले और तब जाकर मुझे इस बात का एहसास हुआ कि औरत को भी इस चीज की बेहद जरूरत होती है और मोहिनी मम्मी के हालत देखकर मैं घबरा गया था क्योंकि मम्मी जिस तरह से एक मर्द के लिए तड़प रही थी मुझे डर लगने लगा कि कहीं मम्मी घर के बाहर किसी गैर से संबंध ना बना ले अगर ऐसा हो जाता तो हम लोगों की तो बदनामी हो,,, जाती,,,,, और फिर मैंने जो फैसला किया उसका नतीजा आज तुम्हें दिखाई दे रहा है,,,

क्या किया तुमने भाई,,,,,

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मैंने जो किया आज मम्मी उससे बहुत खुश है मैंने उस दिन जब देखा कि मम्मी आंखें बंद करके मजा ले रही है तो मैं तुरंत मम्मी के बिस्तर के करीब भी और अपने घुटनों के बल बैठकर बिना कुछ बोले अपने होंठ को मम्मी की चूत पर रख दिया मम्मी एकदम से चौक पर आंखों को खोलकर मेरी तरफ देखी तो एकदम से घबरा गई,,, मुझे मम्मी हटाने की कोशिश कर रही थी मुझे हटाना चाहती थी लेकिन तब तक नहीं अपनी जीभ को मम्मी की चूत पर रख कर चाटना शुरू कर दिया था और मेरी हरकत से मम्मी पल भर में एकदम गरम हो गई क्योंकि महीनों गुजर गए थे वह संबंध नहीं बनाई थी और देखते ही देखते मेरी हरकत से मम्मी की मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूटने लगी,,,, और मम्मी जिस हाथ से मुझे हटाने की कोशिश कर रही थी उसी हाथ को मेरे सर पर रख कर जोर जोर से दबाने लगी और फिर उसके बाद मैंने मम्मी को ऐसा सुख दिया ऐसा सुख दिया कि मम्मी रोज मुझ से चुदवाती है,,,,,, और यह मोहिनी सही भी है क्योंकि मम्मी की हालत अगर तुम देखी होती तो तुम्हें समझ में आता कि कैसा गजब हो जाता अगर मैं साथ न दिया होता तो,,,,

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तुम्हारी बातों से भाई तुम्हारी बहन से अनैतिकता को नैतिकता का रूप नहीं दिया जा सकता,,, तुम और मम्मी मिलकर जो काम क्रीड़ा कर रहे हो वह बात है तुम लोग को इस बात का एहसास भी है अगर इस बात का पता पापा को चल गया तो क्या होगा,,,,,

पापा ने तो पहले भी हम दोनों पर इल्जाम लगा दिए हैं,,,

लेकिन पक्के तौर पर जानते नहीं है ना अगर यह बात में पापा को बता दु तो,,,,

नहीं नहीं मुझे नहीं ऐसा बिल्कुल भी मत करना एक बार बड़ी मुश्किल से हम लोगों के घर पर खुशियां आई है तुम्हारी इस बात पर सब कुछ ठीक हो जाएगा सब कुछ तबाह हो जाएगा पर एक बार फिर से हम लोगों का परिवार बिखर जाएगा,,,,,

(मोहीनी और संजू की बातों को सुनकर आराधना भी घबराए हुए मोहिनी की तरफ देख रही थी क्योंकि आराधना को भी इस बात का एहसास था कि अगर मोहिनी ने अपने पापा को सब कुछ बता दी तो क्या हो जाएगा क्योंकि वह जानती थी कि वह शराबी है,,,, अपने सभी दोस्तों में उसे बताने में बिल्कुल भी शर्म नहीं आएगी,,,, इसी बात को बस सोचकर घबरा रही थी वह कुछ बोलना चाहती थी लेकिन उसे बोलने की हिम्मत बिल्कुल भी नहीं थी वह अपनी बेटी की आंखों के सामने शर्मसार जो हो गई थी,,,,,)

लेकिन भाई यह मैं कैसे देख सकती हूं अपनी आंखों के सामने की एक मां अपने ही बेटे के साथ हमबिस्तर हुई है,,,,

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जरूरी नहीं है कि तुम्हारी आंखों ने हम दोनों को ही देखी है तो हमें दो इसके गुनहगार है ऐसा तो ना जाने कितने घरों में होता होगा जो कि किसी को कानों कान खबर तक नहीं होती होगी,,,, मोहिनी तुम समझने की कोशिश नहीं कर रही हो,,,,,,,(इतना कहने के साथ अपनी कमर पर से अपनी टी-शर्ट को नीचे गिरा कर वहां एक बार फिर से अपनी बहन के सामने संपूर्ण रूप से नंगा हो गया शायद वह अपनी मां को यह दिखाना चाहता था कि वह अपनी हरकतों से अपनी बहन को भी लाइन पर लाना चाहता है,,,,,) मम्मी का रूप खूबसूरत नंगा बदन देख लोगी तो तुम खुद पागल हो जाओगी तब तुम्हें इस बात का एहसास होगा कि मैंने जो किया उसमें कुछ भी गलत नहीं था एक तरह से मैंने मम्मी की सेवा ही किया है उनका साथ दिया है वरना उनके कदम डगमगा जाते ,,,,,

तुम बिल्कुल भी ऐसा मत बताने की कोशिश करो कि तुमने जो कुछ भी किया है उसमें गलत कुछ भी नहीं है मम्मी की मदद किए हो बल्कि तुमने पाप किए हो,,,, मैं जरूर पापा को बता दूंगी,,,,।

(मोहिनी की बात सुनकर आराधना फिर से घबरा गई)

मोहिनी ऐसा बिल्कुल भी मत करना बेटी,,, मैं कहीं की नहीं रह जाऊंगी,,,

तुमने काम ही ऐसा की हो मम्मी,,,

मोहिनी मम्मी का दोष इसमें बिल्कुल भी नहीं है तुम खामखा मम्मी को दोष दे रही हो अगर तुम पापा को बताओगी तो तुम भी एक सुख से वंचित रह जाओगी,,,,

(संजू की बात सुनकर आराधना आश्चर्य से संजू की तरफ देखने लगी और मोहिनी भी जानबूझकर नाटक दिखाते हुए आश्चर्य से संजू की तरफ देखने लगी और बोली)

मैं समझी नहीं,,,,

अरे पगली बुद्धू है तू हम दोनों के साथ मिल जाएगी तो तुझे भी बहुत मजा आएगा,,,,

तू कहना क्या चाहता है भाई,,,,

मैं यह कहना चाहता हूं कि तू यह बात अच्छी तरह से जानती है कि मम्मी तेरे से इस उम्र में भी बहुत ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी लगती है,,,, तेरी चूची से भी बड़ी बड़ी मम्मी की चूची है,,,,(इतना सुनते ही आराधना आश्चर्य से संजू की तरफ देखने लगी और संजू की अपनी मां की तरफ देखकर आंख से इशारा करके उसे खामोश रहने का इशारा कर रहा था क्योंकि मोहिनी और संजू के बीच क्या चल रहा है आराधना को इस बात का बिल्कुल बनाकर नहीं था और आराधना को ऐसा लग रहा था कि उसका बेटा अपनी बहन के बारे में उसके अंगों के बारे में खुलकर कैसे कह रहा है,,, वह खामोश थी अगर कोई और समय होता तो वह अपने बेटे को जरूर रोक दी और डांट थी लेकिन समय आराधना के विपरीत था और आराधना को ऐसा लग रहा था कि संजू मोहिनी को भी इस खेल में शामिल करके उसका मुंह बंद कराना चाहता है,,, मोहिनी आश्चर्य से अपने भाई की बात सुन रही थी) मम्मी का अंग अंग खरा सोना है क्योंकि मैं तो मम्मी को पूरी तरह से नंगी देख चुका हूं और उसके बदन का मजा भी ले चुका हूं इसलिए कह रहा हूं,,,, तू भी मम्मी को एकदम नंगी करीब से दूसरी नजर से देखेगी तो पागल हो जाएगी और मम्मी के अंगों से खेलेगी और मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि तेरी उम्र भी अब लंड लेने लायक हो रही है तेरा भी मन करता होगा तेरी भी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल होती होगी हम दोनों के बीच जिस तरह का रिश्ता तूने अपनी आंखों से देखी है उस दृश्य को देखकर तेरे बदन में भी गर्माहट आ गई होगी तू भी लंड लेने के लिए मचल रही होगी सिर्फ इस समय गुस्सा में है,,,, गुस्से से बाहर निकल,,,,, और फिर दूसरी नजर से हम दोनों के रिश्ते को देख तुझे भी बहुत मजा आएगा,,,,(संजू अपनी मां के सामने अपनी बहन को बहकाने का नाटक करते हुए धीरे-धीरे उसके करीब जा रहा था वह पूरी तरह से नंगा था उसका लंड एकदम खड़ा हुआ था ऐसे हालात में मोहिनी की नजर भी बार-बार अपने भाई के लंड पर चली जा रही थी जो कि इस दृश्य को आराधना भी अपनी नजरों से देख रही थी वह कुछ बोल नहीं पा रही थी ना चाहते हुए भी वह भी इसी बात को चाह रही थी कि मोहिनी भी इस खेल में शामिल हो जाए ताकि अपना मुंह बंद रख सके,,,,) मैं जानता हूं मांगना तेरी चूत भी मोटे लंड के लिए तरस रही है अगर एक बार तेरी चूत में लंड घुस गया तो तू भी सब रिश्ते नाते को भूल कर इस खेल का मजा लेगी,,,,,(अपने भाई की बात सुनकर मोहिनी एकदम खामोश हो गई थी मानों की नाटक का आखिरी परदा गिरने वाला है और कुछ भी नहीं बोल रही थी बस अपने भाई की बात सुनकर गहरी गहरी सांस ले रही थी वह अपनी मां को यह दिखाना चाहती थी कि उसके बदन में भी उत्तेजना अपना असर दिखा रही है और देखते ही देखते संजू ठीक अपनी बहन के पीछे जाकर खड़ा हो गया और पीछे से अपनी मां की आंखों के सामने ही अपनी बहन की छाती पर हाथ रखकर उसे हल्के से दबाते हुए उसके बेहद करीब इतना करीब कि अपने लंड को वह सीधे सलवार के ऊपर से अपनी बहन की गांड पर धंशा दिया,,, आराधना सब कुछ अपनी आंखों से देख रही थी लेकिन खामोश थी अपने बेटे को वह अपनी ही बहन के साथ मस्ती करते देख रही थी उसे बताते हुए देख रही थी लेकिन कुछ भी कर सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि अब वह भी यही चाहने लगी थी कि उसकी बेटी भी अपने भाई की बात मान जाए और इस खेल में शामिल होकर मजा ले,,,, क्योंकि अगर एक बार मोहिनी भी इस खेल में शामिल हो गई तो आराधना के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं हो जाएगा घर में तीनों खुल कर मजा ले सकेंगे और संजू जो कि पहले से ही अपनी बहन की चुदाई करके रोज रात को अपनी रात रंगीन करता था वह भी अपने इस खेल में मोहिनी को शामिल करके अपनी मां के सामने अपनी बहन को चोदने का सुख प्राप्त करेगा और ऐसा आराधना को जताएगा कि आज सही उसके और उसकी बहन के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो गया है,,,)

मोहिनी की हालत खराब होती जा रही थी मोहिनी की गांड पर संजू का लंड पूरी तरह से अपना असर दिखा‌ रहा था संजू अपनी बहन की गर्दन पर अपने होंठ रख कर उस को चूमते हुए अपनी बहन की चूची को दबाना शुरू कर दिया था और बोला,,,,।

मोहिनी तू भी बड़े लंड का मजा ल६ देख मम्मी कितना मस्त हो जाती है मेरा लंड अपनी चूत में लेकर,,,,

ममममम,,मै कैसे,,,,?(कांपते हुए स्वर में मोहिनी बोली)

तू भी मम्मी की तरह मजा है एकदम नंगी होकर जैसा कि,,,,(ऐसा कहते थे वह धीरे-धीरे अपनी मम्मी के बेहद करीब उसके बिस्तर तक ले जाया और अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मम्मी के बदल से चादर को एक झटके से खींचकर अपनी मम्मी को पलभर में ही फिर से नंगी करते हुए) मम्मी नंगी है मैं नंगा हूं तू भी अपने कपड़े उतार कर नंगी हो जाए फिर तुझे ऐसा मजा दूंगा कि तू जिंदगी भर याद रखेगी,,,,,

(मोहिनी कुछ भी नहीं बोल रही थी वह आश्चर्य जताते हुए खामोश खड़ी थी उसकी आंखों में मदहोशी साफ नजर आ रही थी वह नाटक का आखरी पर्दा गिरा चुकी थी सब कुछ उसके सोचने के मुताबिक ही हो रहा था उसकी मां को बिल्कुल भी शक नहीं हुआ था और मोहिनी का जवाब जाने बिना ही अपनी मां की आंखों के सामने ही वह मोहिनी की कुर्ती को नीचे से दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा,,,,, यह देख कर जहां एक तरफ आराधना हैरान और आश्चर्य थी वहीं दूसरी तरफ उसके मन में इस बात की खुशी भी थी कि उसका राज का पर्दाफाश करने वाली मोहिनी भी अब इस खेल में शामिल होकर उन दोनों की राजदार बन जाएगी और तीनों मिलकर इस खेल को जिंदगी भर खेलते रहेंगे
 
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