Incest मजबूरी या जरूरत - Page 11 - SexBaba
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Incest मजबूरी या जरूरत

आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि मोहिनी की आंखों के सामने ही उसके बेटे ने उसके बदन से चादर खींचकर उसे एक बार फिर से नंगी कर दिया था लेकिन फिर भी आराधना अपने बेटे को एक शब्द नहीं बोल रही थी क्योंकि उसे इस बात का अहसास हो गया था कि जो भी उसका बेटा इस समय कर रहा है यह उस के भले के लिए ही कर रहा है इसी में उन दोनों की भलाई,,,, है,,,,, आराधना अच्छी तरह से समझ रही थी कि उसका बेटा मोहिनी को उकसाने की कोशिश कर रहा था वह मोहिनी को भी इस खेल में शामिल कर देना चाहता था ताकि तीनों एक-दूसरे के राजदार बनकर रह जाए और इसीलिए आराधना भी खामोश थी,,,,,,

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देख मोहिनी मम्मी और मेरे बीच क्या चल रहा है इस बात को पापा से बता कर कोई फायदा होने वाला नहीं है क्योंकि पापा पहले से ही हम दोनों के बीच इस तरह का इल्जाम लगा चुके हैं इसलिए अगर यह राज पापा के सामने खुल गया तो कोई हर्ज नहीं होगा बल्कि पापा तो तुझ पर भी इल्जाम लगा सकते हैं क्योंकि तू भी पूरी तरह से जवान हो चुकी है तेरे अंगों में निखार आ चुका है,,,,(अपनी ही बहन के लिए इस तरह की बातें सुनकर आराधना आश्चर्य से संजू की तरफ देख रही थी लेकिन हालात के आगे वह पूरी तरह से मजबूर हो चुकी थी अगर आराधना मजबूर ना होती तो मोहिनी को इस काम कीड़ा के खेल में कभी उतरने नहीं देती लेकिन इस समय आराधना भी यही चाहती थी,,,) तेरी जैसी लड़कियां बाहर रोज अपने बॉयफ्रेंड से चुदवाती हैं तो क्या पापा तुझ पर इल्जाम नहीं लगा सकते जब मुझ पर एक सगे बेटे पर अपनी मां को चोदने का इल्जाम लगा सकते हैं तो फिर तो तू मेरी तो है नहीं तुझ पर भी इल्जाम लगा ही सकते हैं,,,,,,(संजू अपनी मां के बदन पर से चादर खींचकर उसे पूरी तरह से नंगी कर चुका था और खुद भी पूरी तरह से मांगा था इस समय उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में था जिस पर बार-बार मोहिनी की नजर चली जा रही थी और यह हरकत को आराधना अच्छी तरह से देख रही थी आराधना के मन में एक आशा की किरण नजर आ रही थी वह अपनी बेटी मोहिनी की नजरों से वाकिफ होते ही अपने मन में सोचने लगी कि काश उसके मन में भी संजू के लंड को अपनी चूत में लेने की प्यास जाग जाए तो कितना मजा आ जाए और दूसरी तरफ संजू बार-बार अपनी बहन की आंखों के सामने अपने लंड को पकड़ कर हिला दे रहा था आराधना को ऐसा लग रहा था कि जैसे संजीव जानबूझकर मोहिनी को उकसाने के लिए इस तरह से हरकत कर रहा है उसे क्या मालूम था कि मोहिनी अपनी मां से पहले ही अपने भाई के लंड का स्वाद चख चुकी थी,,,)

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देख मोहिनी तू जो करने जा रही है उसमें कोई मजा नहीं है मजा तो इस खेल में शामिल होने में है तू भी मम्मी की तरह जवानी का मजा ले तू ही जरा सोच मम्मी इस उम्र में जब अपनी जवानी की गर्मी को संभाल नहीं पा रही है तो तू इस समय जवानी की पहली सीढ़ी पर पांव रखी है,,,,,,(ऐसा कहते हो गए संजू धीरे-धीरे अपनी बहन की तरफ आगे बढ़ रहा था मोहिनी का दिल जोरों से धड़क रहा था भले ही मोहिनी जो कुछ भी कर रही थी वह केवल नाटक था लेकिन इस नाटक में भी उसे उत्तेजना का अनुभव हो रहा था वह मदहोश हो रही थी एक तरफ बिस्तर पर उसकी मां पूरी तरह से नंगी बैठी हुई थी उसके नंगे बदन को ट्यूबलाइट की रोशनी में चमकता हुआ देखकर खुद मोहिनी के मुंह में पानी आ रहा था और दूसरी तरफ उसका जवान भाई अपने लंड को हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए उसके बेहद करीब आ रहा था और वह भी उसकी मां की आंखों के सामने यह नजारा ही बेहद मदहोश कर देने वाला था कि एक मां की आंखों के सामने एक जवान बेटा अपनी बहन की जवानी का रस पीने के लिए उसकी तरफ आगे बढ़ा जा रहा है,,,,,,,, मोहिनी के तन बदन में जवानी की चिंगारी फूट रही थी,,, उसकी सांसे गहरी चलने लगी थी कुछ देर के लिए वह खामोश हो चुकी थी यह देखकर आराधना मन ही मन खुश हो रही थी देखते ही देखते समझो उसके बेहद करीब पहुंच गया और अपनी मां की आंखों के सामने ही अपनी छोटी बहन का हाथ पकड़ कर उसे अपने खड़े लैंड पर रख दिया जैसे ही मोहिनी को अपनी हथेली में गरम गरम एहसास हुआ वह अपनी स्थिति पर गौर की तो उसके होश उड़ गए संजू ने उसकी हथेली को अपने लंड पर रख दिया था,,,, वैसे तो इस समय मोहिनी का मन कर रहा था कि अपनी मां की आंखों के सामने ही अपने भाई के लंड को कस के पकड़ कर घुटनों के बल बैठ जाए और उसे अपनी भूमि गले तक उतार ले लेकिन पहली बार में ही इस तरह की हरकत करना आराधना के मन में शंका पैदा कर सकता था,,,, इसलिए वह अपनी भावनाओं पर काबू करते हुए एकदम घबराहट का नाटक करते हुए अपनी हथेली के पीछे खींचते हुए बोली,,,,।

नननन,
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नहीं भाई यह मुझसे बिल्कुल भी नहीं होगा,,,,(अपने हाथ को पीछे लेकर एकदम गहरी गहरी सांस लेते हुए बोली मोहिनी की हालत को देखकर आराधना का मन फिर उदास हो गया आराधना अपने मन में मोहिनी को भला बुरा कह रही थी क्योंकि आराधना भी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि मोहिनी की उम्र की जवान लड़कियां लंड के लिए कितनी पागल रहती है जब वह इस उम्र में अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में लेने के लिए तड़प रही है तो मोहिनी जैसी जवान लड़कियों का तो पूछो मत लेकिन मोहिनी है कि इस खेल में उतरना नहीं चाहती,,, लेकिन आराधना को अपने बेटे पर पूरा विश्वास था वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा कोई ना कोई तरीका लगाकर मोहिनी को भी मना ही लेगा जैसा कि उसे मनाया था,,,,)

देखो मोहिनी पागल मत बनो इस खेल में इतना मजा आएगा कि पूछो मत एक बार इस खेल में शामिल हो गई तो जिंदगी भर इस खेल को खेलती रह जाओगी लेकिन तुम्हारा मन कभी भरेगा नहीं,,,

नहीं नहीं भाई मैं मम्मी की तरह इस खेल को खेला नहीं चाहती अभी पढ़ने की उम्र है कुछ करने की उम्र है इस खेल में पढ़कर में अपना जीवन बर्बाद नहीं होने देना चाहती,,,

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तुम्हें क्या लगता है तुम्हारे साथ जो तुम्हारी सहेलियां पढती है क्या वह लड़कियां नहीं चुदवाती देखी तो हो कॉलेज में कैसे अपने बॉयफ्रेंड के साथ बाइक पर बैठकर घूमती रहती है क्या जवान लड़के ने लड़कियों को चोदते नहीं है,,,,

मुझे नहीं मालूम,,,,,

तुम्हें सब मालूम है मोहिनी लेकिन तुम कुछ भी नहीं समझने का नाटक कर रही हो तुम पूरी तरह से जवान हो चुकी हो मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि इस तरह के दृश्य को देखकर तुम्हारी चूत भी पानी छोड़ रही होगी तुम्हारी चूचियां भी कड़ी हो गई होंगी तुम्हारे मन में भी अरमान मचल रहे होंगे कि मेरी चूत में भी मोटा तगड़ा लंड अंदर बाहर हो,,,,

नहीं नहीं मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं सोच रही हूं,,,,, बस अब मुझे कुछ नहीं कहना है मैं तुम दोनों की करतूतों को जरूर पापा से बता कर ही रहूंगी,,,,,

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तुम ऐसा बिल्कुल भी नहीं कर सकती मोहिनी,,,

क्यों नहीं कर सकती जरूर करूंगी जरूर पापा को सब कुछ बता दूंगी,,,,,

(मोहिनी के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर संजू अपनी मां की तरफ देखने लगा वह देखना चाहता था कि उसकी मां क्या कहती है क्या कहना चाहती है उसके मन में क्या चल रहा है जैसे ही हो अपनी मां की तरफ देखा आराधना और घबराहट और उदासी दोनों साफ नजर आ रहे थे जो कि आज तक संजू अपनी मां के चेहरे पर चमक और उत्तेजना देखते आ रहा था लेकिन आज मोहिनी की वजह से वह उदास थी और यह भी देखा कि उसकी मां इशारों से ही कुछ करने के लिए कह रही थी और आंखों ही आंखों में संजू भी अपनी मां को दिलासा देते हुए मोहिनी की तरफ आगे बढ़ा और बोला,,,,)

ठीक है मोहिनी तुम्हारी अगर यही मर्जी है तो यही सही बता देना पापा को वैसे भी पापा हम दोनों को पहले से ही बदनाम कर चुके हैं तुम बता दोगी तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं होगी,,,, और वैसे भी तुम्हारे बताने से भी हम दोनों रुकने वाले नहीं है मैं रोज इसी तरह से रात को मम्मी की कमरे में आऊंगा और मम्मी को जमकर चोदूंगा,,,, क्योंकि मम्मी भी यही चाहती है हम दोनों की यही मर्जी है और हम दोनों तुम्हारी बात में आकर अपना जीवन बर्बाद नहीं करना चाहते इस खुशी को लुटाना नहीं चाहते,,,,, लेकिन बताने से पहले,,,,(इतना कहने के साथ ही एक बार फिर से वह मोहन के पीछे जाकर खड़ा हो गया और उसे पीछे से अपनी बाहों में भर कर अपने होठों को उसकी गर्दन पर रखकर चूमते हुए बोला) मैं जरूर जानना चाहूंगा कि क्या हम दोनों की इस हालत में देखकर तुम्हें भले गुस्सा आया होगा लेकिन मुझे और मम्मी को नंगा देखकर मम्मी के खूबसूरत नंगे बदन को देख कर मम्मी की चूचियां मम्मी की चूत मम्मी की गांड देखकर और मेरे खड़े लंड को देखकर तुम्हारे बदन में कुछ कुछ नहीं हुआ तुम्हारी चूत से पानी नहीं निकला,,,,,

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(एक बार फिर से अपने दोनों हथेली को कुर्ती के ऊपर से ही अपनी बहन की चूची पर रख कर दबाते हुए) मैं सब कुछ देखना चाहूंगा तभी तुम पापा से कुछ कहने लायक रहोगी,, और अगर तुम्हारी चूत गीली हुई तो तुम पापा से कुछ भी कहने के लायक नहीं रहोगी तुम हम दोनों के राज को पापा के सामने खोलने की हकदार नहीं रहोगी क्योंकि मन ही मन तुम भी यही सब चाहती हो,,,,

नहीं में यह सब नहीं चाहती,,,(अपने भाई की हरकत से पूरी तरह से गर्म होते ही मैं अपनी आंखों को बंद करके और अपनी गांड के बीचो बीच सलवार के ऊपर से ही अपने भाई के मोटे तगड़े लंड के आकर्षण महसूस करते हुए मोहिनी बोली)

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तो डर किस बात का ही दिखाओ मुझे भी,,,,,

(और इतना कहने के साथ ही संजु अपनी बहन की कुर्ती को नीचे से दोनों हाथों में पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा मोहिनी भी अच्छी तरह से जानती थी कि अब ज्यादा नाटक करने से कोई फायदा नहीं है इस खेल में उतरने में ही भलाई है इसलिए वह मदहोशी के आलम में अपने दोनों हाथों को धीरे से ऊपर की तरफ उठाते हुए बोली,,,)

नहीं भाई ऐसा कुछ भी नहीं है,,,,

यही तो देखना चाहता हूं मोहिनी कि तुम दूसरी लड़कियों से अलग हो या दूसरी लड़कियों की तरह ही हो,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू मोहिनी की कुर्ती को उसके खूबसूरत बदन से अलग करते हुए उतार कर नीचे फेंक दिया और मोहिनी अपनी मां के कमरे में सलवार और ब्रा में खड़ी हो गई पीले रंग की ब्रा में उसका खूबसूरत गोरा बदन और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था आराधना अपने बेटे की हरकत को और वह भी अपनी सगी बहन के साथ देख कर उसकी हालत खराब होने लगी,,,, अपनी बहन की कुर्ती को उतारकर फेंकने के बाद संजू बिल्कुल भी दे रखी है बिना अपने दोनों हथेली को ब्रा के ऊपर से ही अपनी बहन की चूची पर रखकर दबाना शुरू कर दिया और उसकी गर्दन को अपने होठों से चूमना शुरू कर दिया कुछ देर पहले जो अपनी भावनाओं पर काबू करके संगम दिखा रही थी और वह भी अपनी मां की आंखों के सामने और इस समय अपने भाई की हरकत से पूरी तरह से मदहोश होकर अपनी आंखों को बंद कर कर गहरी गहरी सांस ले रही थी जिसे देखकर आराधना को सुकून मिल रहा था उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि संजू अपनी हरकत से उसकी बहन को मना लेगा और ठीक वैसा ही हो रहा था,,,,,

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संजू अपनी छोटी बहन को नंगी करने में लग गया था वह अपने दोनों हाथों से ब्रा का हुक खोल करके अपनी बहन की ब्रा को भी गीली कर दिया और उसे उतारकर कमर से ऊपर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया संतरे जैसे गोल गोल चूची को देखकर संजू के मुंह में पानी आ गया और वह अपनी मां की आंखों के सामने ही उसके पीछे खड़ा होकर अपनी दोनों हथेली में उसकी नंगी चूचियों को लेकर दशहरी आम की तरह दबाना शुरू कर दिया आराधना इस बात से हैरान भी थी कि उसका जवान बेटा अपनी बहन के साथ इतना खुल कैसे गया,,,,। फिर आपने ही मन में उठे शंका के बादल को अपने विश्वास से दुर करते हुए अपने मन में बोली,,,,)

संजू mohini ki chuchi pita hua

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नहीं नहीं संजू है ही ऐसा वो किसी भी लड़की या औरत को पलभर में ही अपने काबू में कर सकने की क्षमता रखता है इसीलिए तो मोहिनी भी अपने काबू में बिल्कुल भी नहीं है और अपने भाई की हरकत से मस्त हुए जा रही है,,,,, आराधना अपनी आंखों से अपने बेटे की हरकत को अपनी ही जवान बेटी के साथ देख रही थी और अंदर ही अंदर मस्त भी हुए जा रही थी अगर कोई और समय होता तो शायद आराधना अपने बेटे की हरकत पर उसके गाल पर दो-चार थप्पड़ रसीद कर दी होती लेकिन इस समय माहौल और हालात पूरी तरह से बदले हुए थे इसलिए ना चाहते हुए भी आराधना कुछ कर नहीं सकती थी बस अपने बेटे की हरकत पर मन ही मन उसे शाबाशी दे रही थी,,,,, संजू अपने होंठ को अपनी बहन की गर्दन पर र करते हुए जोर जोर से उसके संतरे जैसी चूची को दशहरी आम की तरह दबा रहा था और अपने भाई की इस हरकत पर मोहिनी पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी अगर वह अपने भाई के साथ चुदाई का मजा ना भी होती तो शायद इस समय वह अपने भाई की इस तरह की हरकत को कभी माफ नहीं करती लेकिन वह भी जवानी के जोश में पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि इस खेल में कितना बचा है इस खेल को खेलने में कितना मजा आता है इसीलिए तो वह नाटक करने के बावजूद भी अपनी मां की आंखों के सामने अपने भाई की हरकत का मजा ले रही थी,,,, और संजू अपनी बहन की चूची को मसलते हुए और सलवार के ऊपर से ही उसकी गांड पर अपने लंड को धंसाते हुए,,,बोला,,,)

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ओहहहहह मोहिनी तेरा बदन कितना खूबसूरत है तेरी चूचियां तो मुझे पागल कर रही है मुझे पूरा यकीन है कि इस समय तेरी चूत का गुलाबी छेद नमकीन रस छोड़ रहा होगा तुझे पता है मोहिनी जब औरत की चूत में मर्द की जीभ अंदर तक जाकर चाटती है तो औरतो को कितना मजा आता है,,,, तो शायद नहीं जानती लेकिन मम्मी से पूछ मम्मी को कितना मजा आता है जब मैं मम्मी की दोनों टांगें खोलकर उनकी गुलाबी चूत में अपनी जीभ डाल कर उनकी मलाई को चढ़ता हूं मम्मी पागल हो जाती है बिस्तर पर करवटें बदलने लगती है छटपटाने लगती है मेरे बाल कस के पकड़ कर अपनी चूत पर लगा देती है,,,,,,, तुझे भी मैं उतना ही मजा दूंगा जितना मम्मी को देता हूं देखना जब तेरी गुलाबी चूत पर मेरी जीभ घूमेगी तो तू कितना पागल हो जाएगी,,,, कसम से बता रहा हूं तो बार-बार पानी छोड़ेगी,,,,, और मोहिनी जब मेरा मोटा लंड तेरी चूत की गहराई नाप आएगा तब तो समझ पाएगी कि एक औरत चुदवाने के लिए क्यों तड़पती है क्यों इस उम्र में मम्मी मेरे लंड के लिए तड़प रही है जब तक तु उस एहसास को जिएगी नहीं तब तक तुझे हम दोनों की स्थिति का बिल्कुल भी पता नहीं चलेगा,,,,,,।

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ल लल,,,,लेकीन यह गलत है भाई,,,,

कुछ भी गलत नहीं है मोहिनी एक बार तू मेरी और मम्मी की नजरिए से देख तुझे बहुत मजा आएगा,,,,,( इतना कहने के साथ ही संजू अपनी मां की आंखों के सामने बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए अपनी बहन की सलवार की डोरी पर हाथ रख दिया जिसका एहसास मोहिनी को भी अच्छी तरह से हो रहा था लेकिन अब वह उसे रोकने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं कर रही थी,,, क्योंकि वह जानती थी कि उसका काम हो गया है क्योंकि सारी बाजी अब संजू ने संभाल लिया था और अकेले ही पर वह अपनी बहन की सलवार की डोरी को एक झटके से खींच कर खोल दिया और जैसे ही सलवार की डोरी खुली वैसे ही कमर पर उसका कसाव एकदम से ढीला पड़ गया और एक बार फिर से जानबूझकर अपना हाथ एक झटके से अपनी सलवार पर रखकर उसे पकड़ ली ताकि वह नीचे ना गिरे पाए यह सिर्फ अपनी मां को दिखाने के लिए था कि वह इस खेल का हिस्सा अभी भी नहीं बनना चाहती,,, इसलिए वह बोली,,)

नहीं भाई मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहती भाई,,,

कुछ नहीं हो रहा मोहिनी बहुत मजा आएगा तू मेरी बात मान,,, मेरी ना सही मम्मी की तो बात मान ले मम्मी को बहुत मजा आता है इस खेल को खेलने में,,,,

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नहीं भाई नहीं,,,,,

मत रोक मोहिनी मुझे मैं पागल हुआ जा रहा हूं तेरे बदन से मादक खुशबू मेरा जोश बढ़ा रही है मुझे मदहोश कर रही है,,,,,(और इतना कहते हुए मोहिनी की हाथ पर अपना हाथ रख कर उसे सलवार पर से हटाने लगा और मोहिनी भी इसी में अपनी भलाई समझ रही थी इसलिए वह भी अपने हाथ का अपने भाई के हाथ में देकर सलवार पर से हटा दी और अगले ही पर सलवार एकदम से ढीली होकर उसके कदमों में जा गिरी,,, एक पल की भी देरी किए बिना संजू अपनी हथेली को ठीक मोहिनी की चूत पर उसकी पैंटी के ऊपर ही रख दिया जो की पूरी तरह से गिरी थी और उसके गीले पन को अपनी उंगलियों पर महसूस करते ही संजू खुश होता हुआ बोला,,,,,)

देख मैंने बोला था ना तेरी भी चूत पानी छोड़ रही है मतलब कि तुझे भी मम्मी और मुझे नंगा देखकर मजा आ रहा था,,,

अपनी मां की आंखों के सामने मोहिनी अपनी चूत चटवाती हुई

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नहीं भाई,,,,,,सहहहहहह,,,आहहहहहहहह,,,(संजू की गरमा गरम हथेली को अपनी चड्डी के ऊपर से ही अपनी चूत पर महसूस करके मोहिनी अपने जज्बात पर अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई और ना चाहते हुए भी उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज फूट पड़ी जिसे सुनकर आराधना मन ही मन में खुश होने लगी,,, और अपनी बहन की गरमा गरम सिसकारी की आवाज को सुनकर संजू बोला)

देखी ना मोहिनी तुझे भी मजा आ रहा है तभी तो तेरे मुंह से इस तरह की आवाज आ रही है,,,,

मोहिनी की चुदाई करते हुए संजू

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मुझे नहीं पता भाई क्या हो रहा है मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,,

सब समझ में आ जाएगा मोहिनी,,,,(इस बार अपनी हथेली को मोहिनी की पैंटी में डालकर उसकी चूत को अपनी हथेली में दबाते हुए) सहहहहहहह बहुत गर्म चुत‌ है मोहिनी तेरी तुझे भी बहुत मजा आएगा जब तू मम्मी की बड़ी बड़ी चूची को अपने हाथों में लेकर दब आएगी उसके निप्पल को अपने मुंह में लेकर पिए गी,,,, बचपन में तो तो बहुत दूध भी है लेकिन जवानी में मम्मी की चूची को मुंह में लेकर पीने का मजा ही कुछ और होता है मुझे तो बहुत मजा आता है मम्मी की चूची मुंह में लेकर पीने में,,,, तुझे भी बहुत मजा आएगा मंगनी देखना जब मम्मी अपनी दोनों टांगें खोलकर तुझे अपनी चूत के दर्शन कराएगी तब तू,,, धन्य हो जाएगी अपनी आंखों से अपनी मां की चूत की खूबसूरती देखकर देखना इस उम्र में भी मम्मी की चूत जवान लड़की की चूत से भी कहीं ज्यादा हसीन और चिकनी है और मस्त होकर तो कचोरी की तरह एकदम से फुल जाती है और उसमें रसमलाई झरता रहता है,,,,

(मोहिनी अपने भाई की इस तरह की अश्लील बातें सुनकर पूरी तरह से मस्त हो जा रही थी आराधना भी अपने बेटे के मुंह से अपनी ही जवानी की खूबसूरती की गरमा गरम बातें सुनकर उत्तेजित में जा रही थी और वह अपनी आंखों से अपने बेटे की हरकत को देख रही थी जो कि अपनी ही बहन की चड्डी में हाथ डालकर उसकी चूत के रस को अपनी उंगलियों से पी रहा था संजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) तू ही सोच महीने कितना मजा आएगा जब तू मम्मी की चूत पर अपने होंठ लगा कर अपनी जीभ से उसके काम रस को चाटेगी,,,, सहहहह,,,, बहुत मजा आएगा मोहिनी,,,,( लगातार मोहिनी की चूत को अपनी हथेली से मसलते हुए जिसकी वजह से मोहिनी उत्तेजित हुए जा रही थी),,,, तउ६ मम्मी की चूत चाटेगी और सोच मोहिनी के बाद तू भी अच्छी तरह से जानती है कि मम्मी बहुत ज्यादा खूबसूरत है उसकी चूत कितना मजा देगी तो सोच कर ही पागल हो जाएगी और यह भी तो सोच मम्मी भी तेरी गुलाबी चूत को अपने होठों से चाटेगी उसमें चीभ डालेगी तुझे भी पूरा मजा देगी,,,,,,(इतना सुनते ही मदहोश अवस्था में मोहिनी अपनी आंखों को खोल कर अपनी मां की तरफ देखी और आराधना उसी की तरफ देख रही थी और अपने बेटे की बात पर हामी भरते हुए मुस्कुराकर जैसा संजू कह रहा है वैसा ही होगा इसकी तसल्ली मोहिनी को दे रही थी मोहिनी भी अंदर ही अंदर मचल उठी अपने भाई के बताए अनुसार उस सुख को प्राप्त करने के लिए मोहिनी की गहरी चलती सांसो को देखकर संजू समझ गया कि अब नाटक के खत्म होने का समय आ गया है इसलिए वह बोला,,,)

अपनी मा की चुची दबाकर पीता हुआ संजू

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बस मोहिनी अब अपनी चड्डी उतार कर तू भी एकदम नंगी हो जा,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू मोहिनी की चड्डी को दोनों हाथों से खींचकर उसके घुटनों तक ले आया और बाकी का काम मोहिनी इस खेल में सम्मिलित होने का इशारा करते हुए अपने ही पैर का सहारा लेकर अपनी चड्डी को अपने पैरों से बाहर निकाल कर अपने पैर से सरका कर उसे पलंग के नीचे डाल दी,,,)
 
संजू ने अपनी सूझबूझ चालाकी से जवानी से भरी हुई मोहिनी को इस खेल में सम्मिलित होने के लिए मना लिया था ऐसा आराधना को लगता था आराधना अपने बेटे की इस चालाकी से उसकी सूझबूझ से बहुत प्रभावित हुई थी उसे अब अपने बेटे पर कुछ ज्यादा ही गर्म होने लगा था अगर आज संजू मोहिनी को इस खेल में सम्मिलित होने के लिए ना मना पाता तो शायद गजब हो जाता और खुद आराधना अपनी बेटी से नजर नहीं मिला पाती लेकिन अब नजारा पूरी तरह से बदल चुका था आराधना के सोच के विरुद्ध संजू ने खेल को पलट दिया था पासा अपनी तरफ कर लिया था जिसके चलते मोहिनी भी इस खेल में पूरी तरह से सम्मिलित हो चुकी थी इसीलिए तो आराधना के कमरे का नजारा और भी ज्यादा गर्म हो चुका था मां बेटे पहले से ही अपने सारे कपड़े उतार कर नंगे हो चुके थे आराधना तथा में अपने आप को अपने बदन को अपनी बेटी से छुपाते हुए बिस्तर पर बैठी हुई थी,,,,, लेकिन संजू की वजह से अब मोहिनी भी अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो चुकी थी आराधना अपनी जवान हो चुकी बेटी को पहली बार बिना कपड़ों के देख रही थी और उसके अंगों को उसके बदन के उभरते हुए उठाव और कटाव को देखकर कुछ ज्यादा ही प्रभावित हो रही थी उसे इस बात का गर्व हो रहा था कि उसकी ही तरह उसकी बेटी भी बहुत खूबसूरत है,,,,,

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मोहिनी जो किस खेल में सम्मिलित होने के लिए सारा खेल रही थी इस समय अपनी मां के सामने और अपने भाई के समय नगना वस्था में शर्म आने का नाटक कर रही थी वह अपने हथेली का सहारा लेकर अपनी टांगों के बीच के उस खूबसूरत खजाने को छुपाने की कोशिश कर रहे थे जिसे नाकाम करते हुए संजू उसकी कलाई पकड़ कर उस जगह से हटाते हुए बोला,,,।

अरे पगली अब इसका कोई फायदा नहीं है अब तो भी इस खेल में शामिल हो चुकी है इसलिए तुझे भी जी भरकर खेलना होगा अगर ऐसे करेगी तो खेल नहीं पाएगी,,,,,

(मोहिनी तो अपने भाई के बारे में सब कुछ जानती थी लेकिन आराधना मोहिनी के चरित्र से बिल्कुल अनजान थी इसलिए मोहिनी अपने भाई की हरकत पर शर्मा कर अपनी मां की तरफ देख रही थी,,,, जो कि बिस्तर पर अभी भी उसी स्थिति में बैठी हुई थी,,,,, संजू मोहिनी की कलाई पकड़ कर उसे अपनी मां के बिस्तर के करीब लेकर जा रहा था,,,)

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मोहिनी आज तुझे जन्नत का मजा दुंगा,,,, तुझे इतना मजा आएगा कि तू खुद इस खेल को खेलने के लिए तड़प उठेगी,,,,, कभी तो ने औरत के हमको से खेली नहीं है ना आज देखना तुझे मम्मी के खूबसूरत अंगों से खेलने में कितना मजा आता है,,,,,(मोहिनी अब कुछ भी बोल नहीं रही थी वो एकदम खामोश थी उसके चेहरे पर उत्तेजना के बादल कुमार आए थे वह पूरी तरह से मदहोश हो जा रही थी अपने भाई के मोटे तगड़े लंड का मजा तो हर रोज लेती थी लेकिन आज अपनी मां की चूची और उसकी चूत का मजा लेना चाहती थी उसके रस को अपने होठों से लगाकर पीना चाहती थी वह भी देखना चाहती थी कि कैसे चूत चाटने में मजा आती है,,,,. देखते ही देखते संजू मोहिनी को अपनी मां के बिस्तर के बेहद करीब लेकर पहुंच गया,,, और संजू अपनी मां की आंखों के सामने ही अपनी हथेली को अपनी बहन की चूत पर रखते हुए बोला,,,,)

सहहहरह आहहहहहह मम्मी मोहिनी की चूत तो तुमसे भी ज्यादा गर्म लग रही है आज तो बहुत मजा देगी,,,,

(संजू अपनी मां की आंखों के सामने अपनी बहन की मखमली चूत से खेलते हुए बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए अश्लील बातें कर रहा था जो कि इस समय आराधना को भी अपने बेटे की इस तरह की गंदी बातें बहुत ही लुभावनी लग रही थी,,, क्योंकि संजू की बदोलत मोहिनी बीच खेल में शामिल होकर अपने मुंह को बंद किए हुए थी,,,, अपनी मां की आंखों के सामने ही अपने भाई की इस तरह की हरकत को महसूस करके मोहिनी अपनी मां की आंखों के सामने शर्माने का नाटक कर रही थी मचलने का नाटक कर रही थी हांलाकि संजू की हरकत की वजह से उसके तन बदन में आग लगी थी,,,, इस जवानी की आग को किसी भी तरह से बुझाना चाहती थी,,,,। संजू अभी भी अपनी हथेली से अपनी बहन की चूत को रगड़ रगड़ कर अपनी हथेली को गर्म कर रहा था और उत्तेजना के मारे मोहिनी की चूत से काम रस टपक रहा था जो कि उसकी पूरी हथेली को गिली कर रहा था,,,, संजू अपनी हथेली को अपनी बहन की चूत से हटाकर उसके गीले पन को मोहिनी की तरफ दिखाते हुए और अपनी मां की तरफ देखकर बोला,,,)

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देख रही हो मम्मी मोहिनी हम दोनों का राज खोलना चाहती थी लेकिन खुद कितना पानी छोड़ रही है उसे खुद इसका एहसास नहीं है मैं अच्छी तरह से जानता हूं मोहिनी भी मोटे तगड़े लंड के लिए तड़प रही है ,,आज मोहिनी की इच्छा को पूरी कर दूंगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही अपनी हथेली में लगे मोहिनी के काम रस को मलाई समझकर अपनी जीभ से चाटने लगा यह देखकर आराधना के तन बदन में भी आग लग गई उसकी चूत पानी के बुल्ले छोड़ने लगी,,,, संजू कुछ अद्भुत करना चाहता था इसलिए अपनी बहन की गर्मी को और ज्यादा बढ़ाने के लिए वह अपने खड़े लंड को लेकर मोहिनी के पीछे चला गया और उसकी चूची को अपनी बांहों में भरते हुए उसे जोर जोर से दबाते हुए अपने लंड की ठोकर को उसकी गुदाज गांड पर मारते हुए बोला,,,)

मम्मी रोज तो मैं तुम्हारी चूत चाटता हूं,,,, लेकिन आज मोहिनी की जीभ का मजा ले लो,,,,।

(संजू की इस तरह की बातें मोहिनी और आराधना दोनों के कानों में मिश्री घोल रही थी दोनों को संजू की बातें सुनकर उत्तेजना का अनुभव हो रहा था और संजू की इस बात पर तो दोनों मां बेटी एक दूसरे को देखने लगे दोनों की नजरें आपस में टकराई और मोहिनी शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे झुका ली लेकिन आराधना कि तन बदन में आग लग गई वह भी इस अनुभव के लिए तड़प उठे वह भी अपनी बेटी की जीभ को अपनी चूत के अंदर महसूस करना चाहती थी इसलिए उसका बदन कसमसाने लगा,,, और संजू के यह शब्द तो आग में घी डालने का काम कर दिया,,,, संजू एकदम बेशर्मी दिखाते हुए बोला,,,)

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आप शर्मा क्यों रही हो मेरी रानी अपनी दोनों टांगे खोलो और अपनी चूत के दर्शन अपनी बेटी को कराओ,,,, ताकि तुम्हारी बेटी तुम्हारी चूत को अपने होठों से लगाकर उसका रसपान कर सकें,,,,,।

(संजू की यह बात सुनते ही मोहिनी और आराधना दोनों के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी आराधना पूरी तरह से अपने बेटे की बातों में और उसके इरादों में मदहोश होने लगी थी उसकी आंखों में खुमारी जाने लगी थी और वह बिना किसी झिझक के उसी तरह से बैठे हुए ही अपनी हथेली का सहारा लेकर पलंग के एकदम किनारे आ गई आराधना को अब मोहिनी के सामने बिल्कुल भी शर्म महसूस नहीं होती बल्कि अब तो मोहिनी के सामने वह और भी ज्यादा उत्तेजित हुए जा रही थी अपने बदन में और भी ज्यादा उत्तेजना काम तो कर रही थी उसकी चूत से लगातार उत्तेजना के मारे काम रस का बुल्ला छुट रहा था,,,, देखते-देखते आराधना पलंग के किनारे अपनी बेटी की आंखों के ठीक सामने आ गए और उत्तेजना के मारे मोहिनी को दिखाते हुए अपनी दोनों टांगों को फैला दीदी महीने की नजर जैसे ही अपनी मां की दोनों टांगों के बीच उसकी कचोरी जैसी फूली हुई चूत पर पहुंची तो उसकी आंखों में वासना की चमक साफ नजर आने लगी मोहिनी पूरी तरह से उत्तेजित हो गई उसके होंठ,,, खुले के खुले रह गए शायद वह अपनी मां की चूत की खूबसूरती को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी जो कि वाकई में बहुत खूबसूरत लग रही थी एकदम चिकनी मखमली कचोरी की तरफ खुली हुई और अभी भी उसकी गुलाबी पत्तियां चूत के बाहर ठीक तरह से खिली हुई नहीं थी ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी जवान लड़की की चूत हो,,,,, कुछ पल तक मोहिनी एक तक अपनी मां की चूत को देखती रह गई यह देखकर संजू मोहिनी की उभरी हुई गांड पर अपनी हथेली रखते हुए बोला,,,)

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देख क्या रही है मोहिनी मम्मी की चूत तेरा इंतजार कर रही है आज तुझे एक अद्भुत अनुभव मिलने वाला है आज देखना तुझे कितना मजा आता है,,,,, बस अब कुछ सोच मत आगे बढ़ो और मम्मी की चूत को होठ से लगा ले मम्मी की चूत तेरे होंठ के स्पर्श के लिए तड़प रही है,,,,,।

(संजू की बात सुनकर गहरी सांस लेते हुए वह संजू की तरफ देखी और फिर जैसे कि अपने आप को अगले पल के लिए तैयार कर रही हो इस तरह से आगे बढ़ी और अपनी मां की दोनों टांगों के बीच पलंग के नीचे घुटनों के बल बैठ गई और अपनी मां की चूत को नजर भर कर देखती रही यह देखकर आराधना के तन बदन में मदहोशी छा रही थी,,,,, आराधना के लिए भी है पल बेहद शर्मनाक और शर्मसार कर देने वाला था लेकिन इस समय यही पल उसके लिए उत्तेजना का चरम शिखर बना हुआ था जिस पर वह खुद विराजमान थी,,,,,, मोहिनी आश्चर्य से अपनी मां की चूत को देख रही थी लेकिन आराधना से रहा नहीं जा रहा था वह जल्द से जल्द मोहिनी के लाल लाल होठों को अपनी चूत पर रगड़ना चाहती थी उसका स्पर्श महसूस करना चाहती थी इसलिए आराधना खुद अपना हाथ आगे बढ़ाकर मोहिनी के सर पर रख ली मानो कि जैसे मोहिनी को आगे बढ़ने के लिए आशीर्वाद दे रही हो मोहिनी भी आश्चर्यचकित थी अपनी मां की हरकत को देखकर मोहिनी साफ तौर पर देख रही थी कि उसकी मां की आंखों में शर्म बिल्कुल भी नहीं थी शायद इसी वजह से आज तीनों एक ही कमरे में नंगे थे,,,,, आराधना मोहिनी के सर पर हाथ रखकर उसकी आंखों में देखते हुए आंखों को नीचे झपका कर इशारा करने लगी और अपनी हथेली का दबाव उसके सर पर बढ़ाते हुए उसे अपनी चूत की तरफ,,, बढ़ाने लगी देखते ही देखते मोहिनी के होठ आराधना की चूत से जा लगे,,,, और जैसे ही आराधना को अपनी चूत पर मोहिनी के होंठ का स्पर्श हुआ आराधना के तन बदन में मानो कि जैसे करंट फैल गया हो वो एकदम से गनगना गई और उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,,,।

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सहहहरह,,, आहहहहहह,,,,,, मोहिनी,,,,,,

(अपनी मां की गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनते ही और अपनी मां की तरफ देखते ही मोहिनी के तन बदन में आग लग गया और वह एक औरत के साथ पूरी तरह से खुलने की कोशिश करते हुए अपने लाल-लाल होठों का दबाव अपनी मां की चूत पर बढ़ाते हुए उसके गुलाबी छेद में अपनी जीभ से कुरेदने लगी,,,, यह पहला मौका था जब मोहिनी एक औरत के अंगों से खेल रही थी और उसे इतना अधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी कि पूछो मत आराधना को,,, ऐसा ही लग रहा था कि इस तरह के खेल में पहली बार मोहिनी सम्मिलित हुई है लेकिन वह इस बात से अनजान थी कि मोहिनी इस खेल में पूरी तरह से खिलाड़ी बन चुकी थी लेकिन सिर्फ अपनी मां के सामने अनजान बनने का केवल नाटक कर रही थी अपनी मां की चूत में से आ रही मादक खुशबू को अपने सीने में महसूस करके मोहिनी और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगी और वह अपनी जीभ को पूरी तरह से अपनी मां की चूत के नीचे से ऊपर तक ले जा कर चाटना शुरू कर दी मोहिनी की चूत से पहले ही काम रस पूरी तरह से भर भराकर बह रहा था जिसे मोहिनी अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दी थी,,,,, मोहिनी की दोनों हथेलियां आराधना की मोटी मोटी जांघों पर थी जिससे वह अपनी मां की टांगों को फैलाए हुए थी,,,,

आराधना को लग रहा था कि जैसे पहली मर्तबा ही उसकी बेटी चूत चाटने में पूरी तरह से माहिर हो चुकी है लेकिन वह यह बात कहां जानती थी कि उसकी बेटी चूत तो पहली बार चार्ट रही है लेकिन लंड चाटने में पूरी तरह से माहिर हो चुकी है और लंड चाटने के ही अनुभव को वह अपनी मां की चूत पर उतार रही थी जोकि सफल भी हो रही थी,,,,।

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देखते ही देखते मोहिनी अपनी मां की चूत को चाटते हुए पूरी तरह से मस्त होने लगी और आराधना को अपनी मां को अद्भुत सुख प्रदान करने लगी आराधना की चूत पर पहली बार किसी लड़की के होंठों का स्पर्श हो रहा था उसकी जीभ का उसकी चूत में रगड़न हो रहा था जिसकी बदौलत आराधना पूरी तरह से मस्त हो जा रही थी और पीछे खड़ा संजू अपनी बहन की गोल-गोल गांड को मिलते हुए देखकर बिल्कुल भी अपने काबू में नहीं था और वह भी घुटनों के बल बैठ कर अपनी बहन की गोल गोल रानी को दोनों हथेली में लेकर से दबाते हुए उसकी गांड पर अपने होठों से चुंबन कर रहा था वह अपनी बहन की गांड को चाट रहा,,,, था,,,,, आराधना मस्ती के कुमारी में अपनी आंखों को बंद कर ले रही थी लेकिन जिस तरह का नजारा उसकी आंखों के सामने पेश हो रहा था उसे देखने के लिए वह अपनी आंखों को खोल दे रही थी और अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी जवान बेटी और अपनी जवान बेटी की मदमस्त कर देने वाली गांड से खेलते हुए अपने जवान बेटे को देखकर और भी ज्यादा मस्त हो जा रही थी संजू पागलों की तरह मोहिनी की गांड को अपनी जीभ से चाट चाट कर गिरा कर रहा था वह गोल-गोल गांड को अपनी हथेली में लेकर जोर जोर से दबा रहा था जिसका असर मोहिनी पर बहुत ही गहरा पढ़ रहा था और वहां अपने इस उत्तेजना के असर को अपनी मां की चूत पर उतार रही थी,,,,,

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अपने भाई को अपनी गांड से खेलता हुआ देखकर मोहिनी की चूत भी गीली हो रही थी वह चाहती थी कि उसका भाई भी उसकी चूत को चाटने इसलिए अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठा दी थी लेकिन जिस तरह की पोजीशन में तीनों थे उस तरह के पोजीशन में समझो अपनी बहन की चूत तक पहुंचने में दिक्कत महसूस कर रहा था वह ठीक तरह से अपनी बहन की गुलाबी चूत के लोग अपने होठों को ले जा नहीं पा रहा था इसलिए संजू अपनी बहन की गांड के ठीक पीछे उसकी गांड के लगा अपना सर रखकर पीठ के बल लेट गया और अपनी बहन की दोनों टांगों को अपने हाथों से पकड़कर फैलाने की कोशिश करने लगा मोहिनी अपने भाई की हरकत से प्रभावित होकर समझ गए कि उसे क्या करना है और वह अपनी दोनों टांगों को खोल दी और उसकी दोनों टांगों के बीच उसका भाई अपने सर को डाल कर दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़े हुए उसे नीचे की तरफ झुकाने लगा और जैसे ही मोहिनी की चूत संजू की नाक से टकराने लगी वह एकदम से अपने होठों को ऊपर की तरफ उठाकर अपनी जीभ बाहर निकाल लिया और अपनी बहन की चूत को चाटना शुरू कर दिया,,,,,

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बेहद अद्भुत और कामोत्तेजना से भरा हुआ यह मादक दृश्य बेहद प्रभावशाली और मस्त कर देने वाला था लेकिन इस समय इस दृश्य को देखने वाला वहां पर कोई नहीं था मां बेटे और बेटी तीनों आपस में मिलकर काम क्रीडा का यह अद्भुत खेल खेल रहे थे ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था आराधना अपने कमरे में अपने ही बच्चों के साथ काम क्रीड़ा में लगी हुई थी और इस खेल में उसे इतना आनंद आ रहा था कि वह किसी भी स्थिति में यह सोचने के काबिल नहीं थी कि यह सही है या गलत क्योंकि ऐसे माहौल में ऐसे हालात में सही क्या है गलत क्या है इस बारे में फैसला कर पाना उसके बस में बिल्कुल भी नहीं था इस समय गलत भी उसे सही लग रहा था इसीलिए तो वह समझदार पढ़ी-लिखी और संस्कारी होने के बावजूद अपनी बेटी के सामने अपनी दोनों टांगें खोलकर उससे अपनी चूत चटवा रही थी,,,,,,,

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आराधना अपने दोनों बच्चों को ऐसी स्थिति में देखकर इस समय खुशी से फूली नहीं समा रही थी वह अपने मन में यह सोच रही थी कि अच्छा हुआ कि उसका पति घर छोड़कर चला गया वरना इस तरह के अद्भुत सुख से वह पूरी तरह से वंचित रह जाती,,, वह तो कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उसके जीवन में ऐसा भी दौर आएगा जब वह अपने ही बच्चों से जवानी का मजा लूटेगी,,,,,

‌स‌हहहह ,,,,आहहहहहहह मोहिनी,,,आहहहहहह,,,, बहुत मजा आ रहा है,,,, जीभ अंदर तक डाल बेटी,,,,,आहहहहह,,, एकदम अंदर तक,,,,(अपनी मां की बात सुनकर मोहिनी अपनी जीभ को और अंदर तक डालते हुए) हां मोहिनी ऐसे ही बहुत मजा आ रहा है रे,,,,,आहहहहहह तू तो बहुत मस्त चाटती है,,,,,ऊममममममम,,,,,(आराधना इतनी उत्तेजित हो जा रही थी कि रह रह कर अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठा दे रही थी जिसे मोहिनी अपने हाथों से पकड़कर काबू में रखे हुए थे और पीछे से संजू पूरी तरह से अपनी बहन की जवानी का रस चाटने में लगा हुआ था मोहिनी भी पूरी तरह से मस्त होकर अपनी गांड को गोल-गोल अपने भाई के चेहरे पर घूम रही थी ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,,, इस समय दीवार पर टली घड़ी में 2:00 बज रहे थे लेकिन तीनों की आंखों से नींद कोसों दूर थी दोनों पूरी तरह से मस्त होकर एक दूसरे से मजा लूट रहे थे,,,, कुछ देर तक यह खेल ऐसे ही चलता रहा,,,,,,,, लेकिन आप खेल की स्थिति आराधना बदलना चाहती थी जिस तरह से मोहिनी अद्भुत साहस का परिचय दिखाते हुए उसकी चूत को अपनी होठ से चाट रही थी अपनी जीभ अंदर तक डाल रही थी अब यही खेल आराधना मोहिनी के साथ खेलना चाहती थी,,,,, इसलिए आराधना बोली,,,,।

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सस‌हहहहह आहहहहह बस कर मोहिनी,,,,अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,,,,ऊमममम तूने तो मुझे पागल कर दिया है मुझे तो विश्वास नहीं हो रहा है कि पहली बार में ही तू इतना अच्छा कैसे कर ले रही है,,,,,(अपनी मां के मुंह से इतना सुनते ही मोहिनी थोड़ा सा चौक गई लेकिन वह बिल्कुल भी अपने चेहरे पर वह भाव नहीं लाई बल्कि एकदम सहज और उत्तेजित बनी रही और उसी तरह से अपनी मां की चूत को चाटती रही,,,,,) सच में इतना मजा मुझे पहले कभी नहीं आया,,,,,(संजू की अपनी मां की बात सुनकर अंदर ही अंदर बेहद खुश और उत्तेजित हुआ जा रहा था वह अभी भी अपनी बहन की चूत चाटने में लगा हुआ था,,,,,)

बस मोहिनी अब मुझे थोड़ा सा मौका दें तेरी चूत की सेवा करने का,,,,,, मैं भी तो देखूं मेरी बेटी की चूत कितना पानी छोड़ती है,,,,,

(अपनी मां के मुंह से इस तरह की बात सुनकर मोहिनी का दिल जोरो से धड़कने लगा वह भी यही चाहती थी उसके मन में भी यही अच्छा थी कि उसकी मम्मी उसकी चूत पर अपने लाल लाल होठ लगाए उसे चाटे,,, उसे अद्भुत आनंद प्रदान करें,,,, इसलिए वह भी अपनी मां की बात सुनकर गहरी सांस लेते हुए अपनी मां की चूत पर से अपने होंठ हटाकर अपनी मां की तरफ देखने लगी मोहिनी को अपनी मां की आंखों में मदहोशी की खुमारी एकदम साफ नजर आ रही थी,,,, आराधना की आंखों में उत्सुकता थी अपनी चूत पर अपनी बेटी के होठो का स्पर्श पाने के लिए एक अद्भुत सुख को अपने अंदर महसूस करने के लिए वह पूरी तरह से पागल हुए जा रही थी उसका चेहरा उत्तेजना के मारे तमतमा रहा था,,,, खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां देखकर मोहिनी के मुंह में पानी आ रहा था वह अपनी मां की चूची की तरफ देखकर अपनी संतरे जैसी चूची की तरफ देखकर एकदम से शर्मा गई क्योंकि उसे भी इस बात का एहसास था कि उसकी मां के खरबूजे जैसे चूची के आगे उसकी संतरे जैसी चूची कुछ भी नहीं थी,,,,,,, दोनों मां बेटी पूरी तरह से मदहोशी के आलम में खो चुकी थी और संजू अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच टिका हुआ था वह अभी भी पागलों की तरह अपनी बहन की चूत से काम रस चाट रहा था,,,,, मोहिनी को इस समय बहुत मजा आ रहा था अपनी मां की आंखों के सामने ही अपने भाई से अपनी चूत चटवाने ने जिस तरह की अद्भुत आनंद की प्राप्ति उसे हो रही थी इस तरह से वह कभी भी मदहोश नहीं हुई थी,,,,, फिर भी वह अपनी मां की तरफ से आए हुए आमंत्रण को ठुकराना नहीं चाहते थे वह भी अपनी मां से भाई क्रिया कराना चाहती थी जैसा कि वह खुद अपनी मां की चूत के साथ कर रही थी,,,,।

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आराधना के कमरे में काम क्रीड़ा का अद्भुत खेल चल रहा था जो कि ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में एकदम साफ तौर पर दिखाई दे रहा था कुछ भी छुपाने लायक नहीं था मां बेटी बेटा तीनों पूरी तरह से नग्न अवस्था में एक दूसरे के अंगो का मजा लूट रहे थे और इस समय दो-दो जवानी से भरी हुई औरतों की प्यास बुझाने का जिम्मा संजू के सर पर था जिसे वह बखूबी निभाना जानता था,,, और वह भी खुद बेकरार था मचल रहा था अपनी बहन और अपनी मां की चूत में अपनी मोटे लंड को डालकर अपनी गर्मी के साथ-साथ अपनी मां और अपनी बहन की जवानी की गर्मी पिलाने के लिए लेकिन इससे पहले वह अपनी मां और अपनी बहन की खूबसूरत बदन के खूबसूरत रंगों से पूरी तरह से मजा ले लेना चाहता था,,,, मोहिनी अपने भाई के ऊपर से धीरे से उठी और बिस्तर की तरफ आगे बढ़ने ही वाली थी कि आराधना पूरी तरह से सारे खेल को अपने काबू में कर लेना चाहते थे इसलिए धीरे से महीने की तरफ देखते हुए पलंग पर पीठ के बल लेट गई है और मोहिनी को इशारे से अपने ऊपर आने के लिए बोली,,,, अपने भाई के संगत में संभोग सुख का अद्भुत खेल खेलने के बाद मोहिनी को अच्छी तरह से मालूम था कि उसकी मां क्या चाहती है और उसे क्या करना है धीरे-धीरे मोहिनी पैर के घुटनों के बल पलंग पर चढ़ी और धीरे-धीरे अपनी मां की तरफ आगे बढ़ने लगी आराधना अपने दोनों पैरों को अपने बेटे की तरफ करके पीठ के बल लेटी हुई थी और मोहिनी धीरे-धीरे अपने दोनों घुटनों को आराधना के खूबसूरत बदन के इर्द-गिर्द रखकर आगे बढ़ रही थी और देखते ही देखते मोहिनी अपनी मां की छातियों तक आ गई थी,,,, लेकिन चुचियों के ऊपर ही छातियों के इर्द-गिर्द अपने घुटनों को टिका कर वह स्थिर हो गई थी तो आराधना खुद ही अपने दोनों हाथों को मोहिनी के पीछे ले जा कर के उसके गोल गोल नितंबों पर रखकर अपनी हथेली में दबा ली और एकदम से मस्त हो गई यह पहला मौका था जब आराधना अपनी बेटी की गांड को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर दबा रही थी एकदम नरम नरम मखमली रुई की तरह,,, अपनी बेटी की गांड को अपनी हथेली में महसूस करके वह पूरी तरह से मदहोश हो गई,,,,,, मोहिनी की चूत आराधना को एकदम साफ नजर आ रही थी एकदम कसी हुई पतली दरार के रूप में उसकी चूत बहुत खूबसूरत लग रही थी,,,, अपनी बेटी की चूत देखकर आराधना से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह अपना हाथ अपनी बेटी के दोनों टांगों के बीच नहीं जा करके अपनी हथेली को उसकी चूत पर रख दिया जिसकी गर्माहट को अपनी हथेली पर महसूस करते ही आराधना की चूत फुदकने लगी,,,,, मुझे की चूत को अपनी हथेली से रगडते हुए आराधना अपनी बेटी की आंखों में झांकते हुए बोली,,,,,।

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सहहहहहह आहहहहहह मोहिनी वाकई में तेरी चूत बहुत खूबसूरत और एकदम गरम है तू जानती है मेरी चूत भी बिल्कुल तेरी तरह ही थी जब मैं तेरी उम्र की थी एकदम कसी हुई एकदम पतली दरार और कचोरी की तरह फूली हुई मुझे मेरी चूत बहुत खूबसूरत लगती थी मैं हमेशा बाथरूम में एकदम नंगी होकर आईने में अपने नंगे बदन को देखती थी और मन ही मन में प्रसन्न होती थी हालांकि मैं किसी लड़के के प्रति कभी भी आकर्षित नहीं हुई थी ना ही किसी को अपने बदन को छूने देती बस अपने में ही मस्त रहती थी आज बरसों बाद तेरी मस्त चूत देखकर मुझे अपनी जवानी के दिन याद आ गए,,,,।

मम्मी,,,,(एकदम मदहोश स्वर में) तुम्हारी चूत अभी भी एकदम जवान है कचोरी की तरह फूली हुई एकदम सीधी लीटी,,,, लगता ही नहीं कि तुम दो बच्चों की मां हो,,,, सच मम्मी मेरी जिंदगी में ऐसा पहली बार हो रहा है और इतना मजा आ रहा है कि पूछो मत अच्छा हुआ कि मैं तुम दोनों की बात मान गई वरना इस अद्भुत सुख से वंचित रह जाती मुझे तुम्हारी चूत चाटने में इतना मजा आया कि पूछो मत और मेरी चूत में और तुम्हारी चूत में कुछ ज्यादा फर्क नहीं है बल्कि मम्मी मुझे तो तुम्हारी चूत बहुत खूबसूरत लग रही है शाहिद भाई का लंड चूत में ले ले कर तुम्हारी चूत और भी ज्यादा हसीन हो गई है,,,,

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हाय मोहिनी,,,, तेरे मुंह से चूत और लंड से तो सुनकर कितना मजा आ रहा है कसम से तेरी उम्र की जब मैं थी तो आते जाते लड़कों को इस तरह की गाली देते सुनती थी जिसमें चूत और लंड का जिक्र होता था उस समय ना जाने मुझे अजीब सा लगने लगता था गिन्न सा लगता था सच कहूं तो मुझे उससे मैं बहुत खराब लगता था क्योंकि मुझे उस समय पता नहीं था ना कि लंड और चूत का क्या महत्व है लेकिन यह सब जान जाने के बाद मुझे इस तरह के शब्दों को सुनने में इतना मजा आता है कि पूछो मत और आज तो तेरे मुंह से सुनकर मेरी चूत पानी छोड़ने लगी है,,,,(इतना सुनते ही मोहिनी पीछे की तरफ नजर घुमाकर अपनी मां की चूत की तरफ देखने लगी जिसे संजू अपनी हथेली से हल्के हल्के होले होले सहला रहा था,,,,,,,)

तुम चिंता मत करो मम्मी भाई है ना तुम्हारी चूत का पूरा रस जीभ लगाकर चाट जाएगा,,,,

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हारे मैं जानती हूं तेरे भाई पर मुझे पूरा विश्वास है वही तो है जो तेरे पापा के जाने के बाद मुझे स्वर्ग का सुख दे रहा है वरना मुझे भी इस तरह का सुख कहां मिलने वाला था,,,,,

ओहहहह मम्मी अब तो भाई मुझे भी इसी तरह का सुख देगा ना मुझे भी मजा आएगा ना,,,,(एकदम अनजान बनते हुए मोहिनी अपनी मां से बोली तो आराधना मोहिनी की बात सुनकर एकदम खुश होते हुए बोली,,,)

बिल्कुल देगा कैसे नहीं देगा मर्दों को औरत की यही तो चीज सबसे ज्यादा पसंद है तेरे भाई को भी यही (मोहिनी के चूत को कस के हथेली में दबाते हुए)सबसे ज्यादा पसंद है देखना जब तेरे भाई का लंड तेरी चूत में जाएगा तो तो एकदम मस्त हो जाएगी,,,,

ओहहहह मम्मी मैं एकदम पागल हो जाऊंगी,,,(अपनी चूत को अपनी मम्मी के चेहरे की तरफ आगे बढ़ाते हुए) मुझसे रहा नहीं जा रहा है मम्मी कुछ करो,,,,

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ओहहहह मेरी बच्ची अभी तुझे मजा देती हुं,,,(और इतना कहने के साथ ही आराधना एकदम मदहोश होते हुए मोहिनी की गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए अपने प्यासे होठों को मोहिनी की चूत से लगा ली,,,, यह पल दोनों मां बेटी के लिए बेहद अद्भुत था,,, मैंने कभी सोचा नहीं थी कि वह अपनी ही बेटी की चूत को अपने होठों से लगाएगी और बेटी ने भी कभी यह नहीं सोची थी और ना ही कल्पना की थी कि खुद उसकी सगी मां उसकी चूत पर अपने होंठ लगाकर उसके काम रस को चाटेगी,,,, लेकिन इस समय सारे समीकरण बदल चुके थे रिश्ते नातों के सारे गणित फेल हो चुके थे,,,, आराधना पागलों की तरह अपनी बेटी की कुंवारी चूत जो कि अभी भी आराधना की नजरों में कुंवारी थी उसे चाट कर पूरी तरह से मस्त भी जा रही थी यह क्रिया वैसे तो मोहिनी के साथ हर रात को उसका भाई करता था लेकिन आज अपनी मां के साथ इस क्रिया को करने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और संजू जो कि अभी तक अपनी मां की पूरी हुई चूत को सहला रहा था अपनी मां और अपनी बहन की हरकत को देखकर पूरी तरह से काम भावना से ग्रस्त होकर वह अपनी मां की दोनों टांगों को फैला कर उसकी चूत पर अपने होंठ रख कर चाटना शुरू कर दिया,,,,

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अब इस खेल को खेलने के लिए किसी का रोक-टोक नहीं था घर में तीन ही सदस्य थे और तीनों काम क्रीडा में पूरी तरह से लिप्त हो चुके थे इसलिए अब किसी से झुकने छुपाने का कोई कारण ही नहीं था सब कुछ शीशे की तरह साफ हो चुका था आराधना की दोनों टांगों को अपने हाथों से फैला कर संजू जहां तक हो सकता था वहां तक अपनी जीभ अपनी मां की चूत में डालकर उसकी मलाई को खींचकर चाट रहा था और मोहिनी अपनी चूत को अपनी मां के होठों पर रखकर गोल-गोल अपनी गांड घुमाकर अपनी चूत को अपनी मां के चेहरे पर ही लग रही थी जिससे आराधना को ही बहुत मजा आ रहा था आराधना पागलों की तरह अपनी जीभ से अपनी बेटी के चूत से निकले काम रस को‌ चाट रही थी,,,,

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पूरे कमरे में मोहिनी और आराधना की गरम सिसकारी पूछ रही थी जो कि अब किसी के भी सुने जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था संजू से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था उसका लैंड पूरी तरह से टनटनाया हुआ था,,,, लंड की बेकरारी चूत में घुसने के लिए बढ़ती जा रही थी इस समय संजू अपनी मां की चूत में बड़ा लंड डालना चाहता था जो कि पूरी तरह से अपनी औकात में आकर लोहे के रोड की तरह हो गया था,,,,,, बस फिर क्या था संजू अपनी जगह से उठा और अपनी मां की दोनों टांगों को उसी तरह से फैलाए हुए ही पलंग के नीचे खड़े होकर थोड़ा सा आगे झुका और अपने लंड को पकड़ कर उसे अपनी मां की चूत का रास्ता दिखाते हुए एक झटका मारा और लंड पूरा का पूरा चूत में घुस गया,,,, संजू की हरकत की वजह से आराधना के मुंह से हल्की सी चीखने की आवाज आई और फिर क्या था वह पूरी तरह से मस्त हो गई लेकिन उसके चीखने की आवाज से शायद मोहिनी को शक हो गया था और वह पीछे नजर घुमा कर देगी तो वाकई में संजू अपनी मां की दोनों टांगों के बीच खड़ा होकर उसकी चूत में अपना लंड पेलकर उसे चोदना शुरू कर दिया था,,,, मोहिनी और संजू की नजरें आपस में टकराई और दोनों के होठों पर मुस्कान छा गई संजू अपनी बहन के दोनों कंधों पर अपनी हथेली पर रखकर उसका सहारा लेकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था वह ताबड़तोड़ अपनी मां की चुदाई कर रहा था,,,, संजू इतनी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था कि उससे रहा नहीं जा रहा था वैसे भी अपनी मां के कमरे में है उसे 3 घंटे जैसा समय हो गया था लेकिन अभी तक उसके अंदर से पानी नहीं निकला था इसलिए तो वह पूरी तरह से पागल हो गया था और अपनी बहन के कंधों को कस के पकड़ कर वह अपनी कमर हिला रहा था मोहिनी भी अपने भाई की हरकत से पूरी तरह से उत्तेजित हो गई थी और गोल गोल अपनी गांड को घुमाते हुए अपनी मां के चेहरे को पूरी तरह से अपने काम रस में भिगो देना चाहती थी,,,,, संजू के धक्के इतनी तेज थी कि बार-बार आराधना के मुंह से आह निकल जा रही थी,,,,, संजू चाहता था कि वह ज्यादा देर तक टिके रहे लेकिन मैदान पूरी तरह से गिला होने की वजह से वह लाख कोशिश करने के बावजूद भी संभल नहीं पा रहा था और देखते ही देखते उसके लंड से गर्म पानी का फव्वारा फुटा और अपनी मां की चूत को भरने लगा,,,,, संजू झड़ चुका था,,,,,, अपनी चूत में अपने बेटे के गर्म लावा का पिचकारी महसूस करते ही आराधना पूरी तरह से भाव विभोर हो गई पागल हो गई वह अपने हाथ को ऊपर की तरफ बढ़ा कर अपनी लड़की की दोनों संतरे जैसे चूचियों को पकड़ लिया और उसे जोर जोर से दबाते हुए उसकी चूत को चाट ना शुरू कर दी,,,,

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संजू का लंड झड़ चुका था 3 घंटों के अंतराल में वह दो बार कर चुका था एक बार मोहिनी के साथ और एक बार अपनी मां के साथ और अब तो कमरे में उसकी मां और बहन दोनों की दोनों की प्यास बुझा ना था लेकिन उसका लंड पानी फेंक चुका था लेकिन तभी मोहिनी की गर्म सिसकारी की आवाज तेज होने लगी उसकी सांसे और रुपए चलने लगी,,,,

ओहहह मम्मी मुझे कुछ और है,,,आहहहह मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा कि क्या हो रहा है कुछ अजीब सा लग रहा है,,,आहहह आग्रह मम्मी,,,,,आहहहह मुझे बड़ी जोरों की पेशाब लगी है,,,, आहहहरहह,,,,ऊमममम मम्मी,,,।

(मोहिनी झड़ने वाली थी लेकिन अपनी मां के सामने जानबूझकर इस तरह का नाटक कर रही थी कि झड़ने के बारे में उसे कुछ पता ही नहीं है और उसकी मां अनजान थी मोहिनी के नाटक से इसलिए वह कसके मोहिनी की कमर को पकड़ कर उसकी गांड को अपने चेहरे पर रखते हुए उसकी चूत को जोर-जोर से चाट रही थी और अगले ही पल उसकी चूत से पानी का फव्वारा फूट पड़ा जोकि आराधना के पूरे चेहरे को भिगो दिया,,,,, आराधना मोहिनी और संजू तीनों झड़ चुके थे संजू धीरे से अपने लंड को अपनी मां की चूत से बाहर निकाल दिया जो कि ,, दो बार झढ़ने के बाद झुल चुका था,,,, अपनी सांसो को दुरुस्त करने के बाद मोहिनी अपनी मां के ऊपर से नीचे उतरी और जैसे ही उसकी नजर संजू के लंड पर पड़ी तो वह एकदम से चौक ने का नाटक करते हुए बोली,,,,।

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यह क्या मम्मी भाई का लंड तो एकदम ढीला हो गया अब क्या होगा मम्मी,,,,।

(मोहिनी के भोलेपन जो कि केवल नाटक ही था उसकी बात सुनते ही आराधना हंसने लगी और हंसते हुए बोली)

तू चिंता मत कर मेरी रानी भाई का लंड फिर खड़ा कर दूंगी,,,

फिर से कैसे,,,?(मोहिनी जानबूझकर आश्चर्य जताते हुए बोली)

हो जाएगा बस थोड़ा सब्र रख मैं तेरे भाई के लंड को फिर खड़ा करके तेरी चूत के लिए तैयार कर दूंगी देखना फिर कैसे तेरा भाई तेरी चुदाई करता है,,,,(अपनी मां की बात सुनकर मोहिनी जानबूझकर शर्माने का नाटक करते हुए दूसरी तरफ मुंह घुमा कर खड़ी हो गई जिससे उसकी गांड एकदम साफ नजर आने लगी और आराधना मोहिनी की गांड पर चपत लगाते हुए बोली,,,)

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तुम 1 मिनट रुको मैं पेशाब करके आती हूं,,,

ठीक है मम्मी,,,,(

और फिर आराधना पलंग पर से नीचे उतरी और चादर को उठाकर अपने नंगे बदन पर डालने लगी तो संजू अपनी मां के भजन से चादर को खींचकर उसे फिर से नंगी करता हुआ बोला)

अब इस,,, घर में पर्दा किस बात का ऐसे ही जाओ,,,,,

तू बहुत शैतान हो गया है,,,(इतना कहने के साथ ही आराधना नंगी दरवाजे तक गई और दरवाजे की घड़ी खोले लगी लेकिन दरवाजे की घड़ी खोल दे खोल दे अपनी नजर घुमा कर पीछे की तरफ देखने लगी बिस्तर पर संजु और मोहिनी दोनों बैठे हुए थे एकदम नंगे उन दोनों को देखकर आराधना मुस्कुराने लगी और दरवाजा खोलकर बाथरूम की तरफ आगे बढ़ गई,,,,)

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बहुत अच्छा नाटक की मोहिनी तूने,,,(एकदम धीमे स्वर में संजू बोला)

सच भाई मैं कभी सोची नहीं थी कि मम्मी से इस तरह से झूठ बोल पाऊंगी लेकिन आज बहुत मजा आया मम्मी की चूत वाकई में एकदम करारी है तभी तो तू पागल हुआ है मम्मी की चूत के पीछे,,,

तो क्या मम्मी को चोदने में कितना मजा आता है,,,,,

(दोनों धीरे-धीरे फुसफुसा रहे थे कि तभी दोनों को बाथरूम में पानी गिरने की आवाज आई इसलिए दोनों एकदम से चौकन्ना हो गए,,)

बस चुप कर भाई मम्मी आने वाली है,,,,,,,,

(लेकिन खेल तो पूरी तरह से शुरु हो गया था इसलिए अपनी मम्मी के आने से पहले ही संजू अपनी बहन को अपनी बाहों में लेकर उसके लाल-लाल होठों का रसपान करने लगा और तभी आराधना भी अंदर आ गई संजू और मोहिनी को इस अवस्थामें देखकर वह मुस्कुराने लगी और बोली,,,)

वाह भाई अपनी बहन को सुख देने में लगा हुआ है लेकिन तेरी बहन को इस तरह के चुंबन की नहीं बल्कि तेरे मोटे तगड़े लंड की जरूरत है जो कि इस समय झूल गया है उसे खड़ा करना जरूरी है,,,,,

लेकिन यह होगा कैसे मम्मी,,,,(अपने होठों को संजू के होठों से अलग करते हुए मोहिनी बोली)

आराधना अपनी बेटी के सामने अपने बेटे पर चढ़ी हुई

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तू चिंता मत कर अभी हो जाएगा,,,,।

(इतना कहने के साथ ही आराधना संजू के ठीक सामने घुटनों के बल बैठ गई संजू पलंग के नीचे दोनों पैर को लटकाए बैठा हुआ था और उसकी दोनों टांगों के बीच उसका मर्दाना लंड झुल रहा था और उसे खड़ा करके अपनी बेटी के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी इस समय आराधना के सिर पर आ गई थी जिसे वह बखूबी निभा ना जानती थी अपनी मां को अपनी आंखों के सामने घुटनों के बल बैठता हुआ देखकर संजू समझ गया कि उसकी मां क्या करने वाली है इसलिए वह मोहिनी से बोला,,,)

अब देखना मम्मी क्या करती हो मेरा लंड फिर से खड़ा हो जाएगा और तुम्हारी चूत में जाने के लिए तैयार हो जाएगा,,,,

(मोहिनी को सब कुछ पता था कि क्या होने वाला है लेकिन वह जानबूझकर ऐसा बता रही थी कि उसे कुछ भी मालूम नहीं है और वह बड़े गौर से अपनी मम्मी की हरकत को देखने लगी और आराधना मुस्कुराते हुए अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के झूलते हुए लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करके हिलाते हुए मुट्ठीयाने लगी और बोली,,,)

देखना मोहिनी कैसे खड़ा होता है,,,,

संजु इस तरह से भारी बारिश है आराधना और मोहिनी की चुदाई करता हुआ,,

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(इतना कहने के साथ ही आराधना अपने बेटे के ढीले लंड को मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दी और यह देख कर मोहिनी के तन बदन में आग लग गई हालांकि वह अपनी मां को इस तरह की क्रिया करते हुए रोज रात को दरवाजे के पीछे खड़ी हो कर देती थी लेकिन आज अपनी आंखों के ठीक सामने अपनी मां को इस तरह की हरकत करते हुए देखकर वह खुद अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हो जा रही थी उसकी आंखों में नशा छा रहा था,,,,, और कुछ ही देर में आराधना की मेहनत रंग लाई और उसके बेटे का लंड एक बार फिर से चोदने लायक एकदम खड़ा हो गया,,,,, लेकिन आराधना अपने बेटे के लंड को चूसने का मजा ले रही थी और मुंह में गले तक लंड लिए हुए हाथ के इशारे से मोहिनी को भी संजू के लंड को मुंह में लेने के लिए इशारा कर रही थी जो कि मोहिनी अपनी मां के इशारे को अच्छी तरह से समझ रही थी लेकिन जानबूझकर उसके सामने हिचकीचाने का नाटक कर रही थी और उसकी यही झिझक को खत्म करते हुए संजु उसका हाथ पकड़कर पलंग के नीचे बिठाने लगा,,,,

संजू अपने हाथों से अपनी मां की चड्डी उतारता हुआ

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मोहिनी भी अपनी मां के बगल में जाकर घुटनों के बल बैठ गई क्योंकि वह भी अब मजा लेना चाहती थी अपनी मां के सामने अपने ही भाई के लंड को मुंह में लेकर चूसने चाहती थी इसलिए वह भी अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी ,,, आराधना अपने मुंह में से अपने बेटे के लंड को बाहर निकालकर मोहिनी की तरफ आगे बढ़ाने लगी जो की पूरी तरह से उसके लार और थोक से सना हुआ था,,,,, आराधना इस खेल में अपनी बेटी को पूरी तरह से उतार लेना चाहती थी ताकि आगे का रास्ता तीनों के लिए एकदम साफ हो जाए और आराधना अपने बेटे के लंड को पकड़े हुए ही उसे मोहिनी की तरफ आगे बढ़ाकर उसके होठों से लगा दी मोहिनी को लंड चूसने का अनुभव बहुत पहले से ही था इसलिए वह बिना झिझक के,, अपने भाई के मोटे लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी अपनी मां के सामने इस तरह की हरकत करने में उसे भी अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,,, आराधना दो मोहिनी के मुंह में अपने बेटे के लंड को अंदर बाहर होता हुआ देखकर पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी उसकी चूत भी फिर से पानी फेकने लगी थी,,,,,।

अपनी बेटी की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए ,,, आराधना घुटनों के बल बैठे हुए ही अपनी हथेली को अपनी बेटी की चूत पर रख कर उसे मसलते हुए बोली,,,,।

मा बेटी दोनों मजे लेती हुई

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सहहहह आहहहहह बहुत गरम चूत है मोहिनी तेरी अच्छे से चूस अपने भाई के लंड को क्योंकि इसी लंड से तेरी चूत की सेवा करनी है तो अच्छा करेगी तभी तेरा भाई तेरे साथ अच्छा कर पाएगा,,,,,आहहहह ऐसे ही,,,, बहुत अच्छा लग रहा है,,,,।

मोहिनी पूरी तरह से चुदवाती हो चुकी थी अपनी मां की आंखों के सामने अपने भाई के लंड को अपनी चूत में लेने के लिए,,,, संजू का लंड चूत में जाने के लिए तैयार हो चुका था जिसका सिग्नल खुद संजू ने दिया और बोला,,,,।

बस मोहिनी तेरी चूत कितने मेरा लंड तैयार हो गया है अब जल्दी से टांग फैला कर लेट जा,,,,,।

(इतना सुनना था कि मोहिनी अपनी जगह पर खड़ी,,, होने लगी,,,, और अपनी मां की तरफ देखने लगी उसकी मां भी उसे आगे बढ़ने का इशारा कर दी और देखते ही देखते मोहिनी पलंग के ऊपर अपने भाई की आंखों के सामने अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपनी चूत को उसके सामने परोस दी,,,, संजू भी ऐसा बर्ताव कर रहा था कि मानव जैसे वह मोहिनी की चूत को पहली बार देख रहा हूं इसलिए अपने लंड को हिलाता हुआ अपनी मां की तरफ देख कर बोला,,,)

आराधना की चूची पीता हुआ संजू

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ओहहह मम्मी लगता है आज मोहिनी की चूत से बहुत मजा आने वाला है देख कितनी पानी छोड़ रही है,,,,

हां बेटा बिल्कुल भी देर मत कर अपनी बहन की चूत में अपना लंड डालकर उसका उद्घाटन कर दें ताकि इस खेल में मोहिनी भी हमेशा के लिए शामिल हो जाए,,,

तुम चिंता मत करो मम्मी,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू घुटनों के बल पलंग के ऊपर चढ़ा और मोहिनी को कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया उसकी गांड अपनी जांघ पर चढ़ाकर वह अपने मोटे लंड को मोहिनी की चूत में डालने की कोशिश करने लगा वैसे भी पहले से ही मोहिनी की चूत में संजू के लंड का सांचा बन चुका था इसलिए बड़े आराम से अंदर प्रवेश करने लगा लेकिन फिर भी जानबूझकर मोहिनी अपनी मां की आंखों के सामने ,,, पहली बार चुदाई करवाने का नाटक करते हुए हल्के हल्के चीखने लगी और उसके चीखने की आवाज सुनकर आराधना भी घुटनों के बल पलंग पर चड़ गई और मोहिनी का हाथ पकड़कर उसे दिलासा देते हुए बोली,,,)

आराधना और मोहिनी दोनों चुदवाने के लिए तैयार

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बस बस बैठी हो गया एक बार अंदर चला गया तब देखना कितना मजा आएगा,,,,

(और संजू पूरी तरह से नाटक करते हुए ऐसा बर्ताव कर रहा था जैसे बड़ी मुश्किल से मोहिनी की चूत में लंड जा रहा हो,,,, जैसे तैसे करके अपनी मां के सामने पहली बार चुदाई करने का दोनों भाई बहन नाटक करते हुए मस्त भेजा रहे थे और देखते ही देखते संजू का लंड पूरी तरह से मोहिनी की चूत के अंदर समा गया था अब संजू मोहिनी को चोदना शुरू कर दिया था आराधना अपनी आंखों के सामने अपने जवान बेटे को अपनी जवान बेटी को चोदते हुए देख रही थी जिसकी उत्तेजना के फलस्वरूप उसकी चूत से काम रस का बहाव बड़ी जोर शोर से हो रहा था वह पागल हुए जा रही थी,,,, संजू बड़े आराम से अपनी कमर हिला था वह मोहिनी को चोद रहा था और आराधना यह देखकर पागल हो जा रही थी अपनी चूत की गर्मी शांत करने के लिए आराधना तुरंत अपनी बेटी के इर्द-गिर्द छाती के करीब अपने घुटनों को रखती और अपनी बेटी की दोनों चूची को दोनों हाथों में पकड़ कर दबाने लगी जिससे मोहिनी की उत्तेजना और आनंद दोनों बढ़ता जा रहा था इस अवस्था में संजू के ठीक सामने आराधना की बड़ी-बड़ी गांड हवा में लहरा रही थी जिसे देखकर संजू का जोश बढ़ता जा रहा था और वह अपने दोनों हाथों से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पकड़कर उसे थोड़ा अपनी तरफ खींचा और उसकी चूत पर अपने होंठ रख कर चाटना शुरू कर दिया एक साथ तीनों अलग-अलग अवस्था में मजा ले रहे थे संजू पागल हुआ जा रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने तो दो औरत थी जो कि पूरी जवानी से भरी हुई थी और दोनों की कसी हुई जवानी का मजा संजू एक साथ लेना चाहता था इसलिए संजू अपनी मां की कमर दोनों हाथों से पकड़कर उसे नीचे की तरफ झुकाने लगा और देखते ही देखते आराधना अपने बेटे की आंखों के सामने घोड़ी बन गई इस अवस्था में अपनी मां को देखकर संजू से रहा नहीं गया और संजू अपनी बहन की चूत में से अपना लंड बाहर निकालकर अपनी मां की चूत में डाल दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया और देखते ही देखते संजू बारी-बारी से कभी अपनी बहन की चूत में डालते तो कभी अपनी मां की चूत में,,,

आराधना और मोहिनी

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गजब का कामुक दृश्य बना हुआ था मां बेटी और बेटा तीनों चुदाई के खेल में पूरी तरह से लेफ्ट हो चुके थे संजू अपने मोटे लंड को कभी अपनी बहन की चूत में डालते तो कभी उसकी चूत से बाहर निकालकर अपनी मां की मदमस्त रसीली चूत में डाल देता एक साथ दो दो औरतों को चोदने का अद्भुत सुख संजू प्राप्त कर रहा था और अपने आपको धन्य समझ रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने दुनिया की सबसे ज्यादा खूबसूरत औरत और उसकी बहन थी जो कि दोनों की मलाई से भरी हुई चूत में अपना लंड डालकर दोनों की मलाई बाहर निकाल रहा था देखते ही देखते दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी दोनों झड़ने के करीब थी लेकिन संजू अपनी बहन की चूत में से अपने लंड को बाहर निकालकर अपनी मां की चूत में डाल दिया और उसे जोर जोर से धक्का देकर चोदना शुरू कर दिया और देखते ही देखते आराधना का पानी,,,, छूट गया वह पूरी तरह से मस्त हो गई वह भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही थी अपनी भारी-भरकम गांड को अपने बेटे का लंड पर पटक रही थी और साथ ही मोहिनी की संतरे जैसे चूचियों को दबा दबा कर खरबूजा बना रही थी,,,, अपनी मां का पानी निकालने के बाद संजू तुरंत अपनी मां की चूत से बाहर अपने लंड को निकाल कर उसे मोहिनी की चूत पर भटकते हुए उसे अंदर डाला और फिर जोर शोर से उसे चोदना शुरु कर दिया क्योंकि उसका भी पानी निकलने वाला था और खुद वह भी झड़ने वाला था और देखते-देखते मोहिनी भी गरम आहें भरते हुए अपना पानी छोड़ दी और संजू भी भलभला कर ,,, अपनी बहन की चूत में अपना गरम लावा उड़ेल दिया,,,,।

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तीनों एकदम थक चुके थे इसलिए चुदाई के बाद जैसे ही बिस्तर पर पड़े तीनों को नींद आ गई तीनों एकदम नग्न अवस्था में नींद की आगोश में खो गए,,, सुबह सबसे पहले जब आराधना की आंख खुली तो वह पहले तो बिस्तर पर मोहिनी को भी नंगी देखकर एकदम से चूक गई लेकिन फिर उसे याद आया कि हम तीनों के बीच सबकुछ साफ हो चुका है और वह मुस्कुरा कर अपने कमरे से बाहर आ गई और बाथरूम में जाकर सबसे पहले पैसा आपकी और फिर वापस अपने कमरे में आकर कपड़े पहनने लगे अपने बिस्तर पर अपनी बेटी और अपने बेटे को पूरी तरह से नग्न अवस्था में देखकर आराधना के चेहरे पर सुकून साफ नजर आ रहा था वह पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी और अपने और अपने बेटे के बीच जो राज था उसकी सहभागी अब उसने अपनी बेटी को भी बना ली थी,,,,।
 
संजू ने बड़ी चालाकी से अपनी मां की आंखों के सामने ही अपनी छोटी बहन की चुदाई करके उसे भी इस खेल में पूरी तरह से शामिल कर लिया था और यह खेल दोनों भाई बहन मिलकर सफलतापूर्वक निपटा चुके थे,,,, संजू और मोहिनी दोनों नाटक कर रहे हैं इस बात का आभास तक नहीं हुआ आराधना को वह तो मूकदर्शक बनकर सब कुछ अपनी आंखों से देख रही थी अपनी आंखों के सामने ही अपने परिवार को वासना के सागर में डूबते हुए देख रही थी वह कभी सोची नहीं थी कि उसके परिवार में इस तरह के रिश्ते कायम हो जाएंगे बहन का भाई के साथ भाई का मां के साथ लेकिन आराधना यह सब अच्छी तरह से जानती थी कि जो कुछ भी हो रहा है सब कुछ गलत है समाज की नजर में लेकिन इस बात की संतुष्टि उसे थी कि जो कुछ भी हो रहा है वह चारदीवारी के अंदर हो रहा है पर वह भी एक दूसरे की सम्मति से जिसके बारे में बाहर वालों को कानो कान खबर तक नहीं पड़ेगी इस बात की तसल्ली से वह अपने मन को दिलासा देती थी,,,, और इस खेल का भरपूर मजा भी ले रही थी,,,,

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रात की घमासान चुदाई और थकान से चूर होकर तीनों एक ही बिस्तर पर नग्न अवस्था में सो गए थे और सुबह सबसे पहले आराधना की नींद खुली थी और वह नित्यक्रम करके नहा धोकर तैयार हो गई थी और अपने कमरे में आकर अपने बेटे और अपनी बेटी को नग्न अवस्था में देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी मोहिनी के नंगे बदन पर नजर डालकर वह अपने आप पर गर्व कर रही थी कि उसकी बेटी भी उसकी तरह ही खूबसूरत है,,,,, आराधना मोहिनी को जगाते हुए उसकी गोल-गोल गांड पर हाथ रखकर उसे झकझोरते हुए बोली,,,,।

उठ मोहिनी सुबह हो गई है देख तो सही तू किस अवस्था में सोई है तुम दोनों इतना थक गई कि सुबह होने का भान तक नहीं है,,,,,।

(अपनी मां की आवाज को सुनकर मोहिनी और संजू दोनों धीरे से आंख खुले तो दोनों की नजर आपस में टकरा गई दोनों को जब स्थिति का भान हुआ तो दोनों एकदम से चौंक गए मोहिनी की तो एकदम से हालत खराब हो गई वह अपनी मां की आंखों के सामने अपनी मां के बिस्तर पर अपने भाई के साथ नंगी सोई हुई थी,,,, वैदम से उठ कर बैठ गई और बिस्तर पर पड़ी चादर को अपने नंगे बदन पर डालते हुए बोली,,,।

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कितना बज रहा है मम्मी मेरी तो आंख ही नहीं खुली,,,

कैसे खुलेगी रात भर मेहनत जो की हो,,,,।

(मेहनत शब्द के मतलब को मोहिनी अच्छी तरह से समझती थी इसलिए अपनी मां की बात सुनते ही उसके चेहरे पर शर्म की लालिमा छा गई और वह शरमा कर अपनी नजरों को नीचे झुका ली लेकिन संजू बिल्कुल बेशर्म बना हुआ था सुबह का समय था इसलिए औपचारिक रूप से उसके बदन की गर्मी से उसके लंड में तनाव बरकरार था,,, वह भी अपनी बहन की तरह बिस्तर पर उठ कर बैठ गया लेकिन अपने नंगे बदन को छुपाने की बिल्कुल की कोशिश नहीं कर रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि आप छुपाने लायक कुछ भी नहीं है,,,,, पर अपनी मां की बात सुनकर वह मोहिनी की तरफ मुस्कुरा कर देखते हुए बोला,,,)

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तुम दोनों से ज्यादा तो मुझे मेहनत करना पड़ा था,,,, तुम दोनों की चूत इतनी कसी हुई है कि मेरे लंड की हालत खराब हो गई,,,,।

(मोहिनी तो अपने भाई के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर एकदम शर्म से पानी-पानी हो गई और थोड़ा बहुत शर्म की लालिमा आराधना के भी चेहरे पर साफ झलक रही थी लेकिन वह अपने बेटे की बात सुन कर मुस्कुरा रही थी,,,, और अपनी कमर पर हाथ रखते हुए बोली,,,)

मेरी तो ठीक है लेकिन मोहिनी की चोट पर तुझे कुछ ज्यादा मेहनत करनी पड़ गई मोहिनी का पहली बार था ना इसके लिए मम्मी की चूत कुछ ज्यादा ही कसी हुई होगी,,,,,

(मोहिनी तो अपनी मां की बात सुनकर उत्तेजना और शर्म से गदगद हुए जा रही थी,,, अपनी मां की बेशर्मी से भरी हुई रंडी वाली हरकत को तो अच्छी तरह से जानती थी लेकिन उसकी मौजूदगी में भी और पहली बार में ही उसकी मां इस तरह से बात करेगी उसे यकीन नहीं हो रहा था इसलिए सुबह-सुबह अपनी मां के मुंह से इस तरह की गंदी बात सुनकर वह हैरान भी हुए जा रही थी और अत्यधिक उत्तेजित भी हो जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें चादर के अंदर उसका पूरा बदन नंगा था, जो कि रात को उसके भाई ने अपने हाथों से उसके एक-एक कपड़े उतारकर उसे नंगी किया था,,,,, अपनी मां की बात सुनकर आग में घी डालने का काम करते हुए संजू बोला,,,,)

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रात को मेरा लंड ले लेकर मोहिनी की चूत अब थोड़ी ढीली हो गई होगी,,,,,,,, क्यों मोहिनी सच कह रहा हूं ना,,,,

(मोहिनी क्या कहती उससे तो कुछ भी बोला नहीं जा रहा था भले ही वह अपने भाई के साथ पूरी तरह से खुल चुकी थी और रात को बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए अपनी मां के सामने भी अपने भाई के लैंड को अपनी चूत में लेकर चुदाई का अद्भुत आनंद लूट चुकी थी लेकिन फिर भी इस समय अपनी मां के सामने उसे शर्म महसूस हो रही थी इसलिए अपने भाई की बात सुनते ही वह अपने बदन पर चादर लपेटे हुए ही बिस्तर से उठने की कोशिश करते हुए बोली,,,)

बाप रे तुम दोनों की बातें सुनकर तो मुझे ना जाने क्या हो रहा है तुम दोनों बातें करो मैं जा रही हूं,,,,,(उसका इतना कहकर बिस्तर से उठना था कि संजू उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया,,,, और मोहिनी सीधे जाकर संजू की गोद में गिर गई संजु पूरी तरह से नंगा था और पीछे से मोहिनी की गांड एकदम खुली हुई थी और जैसे ही अपने भाई के गोद में गिरी उसका खड़ा लंड उसकी गांड में एकदम से धंस गया और वह एकदम से चौक कर उठने को हुई लेकिन संजू अपने दोनों हाथ को उसकी कमर पर रखकर उसे कस के पकड़ लिया था और अपनी गोद में से उसे उठने नहीं दे रहा था आराधना खड़ी-खड़ी यह द्रश्य देख कर मुस्कुरा रही थी,,,, वह अपनी आंखों के सामने अपने बेटे को अपनी बहन के साथ मस्ती करते हुए देख रही थी लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी क्योंकि अब बोलने जैसा कुछ भी नहीं था रिश्तो के बीच की मर्यादा तार-तार हो चुकी थी,,,, वह अपनी बहन की कमर को कस के पकड़ कर उसकी गोल-गोल कांड को अपने लंड पर दबाते हुए बोला,,,)

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कहां चली मेरी जान सुबह-सुबह तुम्हारी गांड देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया है,,,,,

जाने दो भाई कुछ तो शर्म करो मम्मी खड़ी है,,,,

रात को मम्मी भी बिस्तर पर नंगी ही थी मैं बारी-बारी से तुम दोनों की चूत में बड़ा लंड डाल रहा था तब शर्म नहीं आ रही थी और अभी शर्म आ रही है,,,,

भाई,,,,आहहह जाने दो भाई,,,,(संजू की पकड़ से छूटने की नाकाम कोशिश करते हुए मोहिनी अपने भाई के लंड पर छटपटा रही थी हालांकि उसे मजा भी बहुत आ रहा था लेकिन अपनी मां के सामने जानबूझकर शर्माने का नाटक कर रही थी लेकिन इसी बीच संजू जल्दबाजी दिखाता हु आपने खड़े लंड को बहुत ही जल्द ही अपनी बहन की चूत के गुलाबी छेद पर रखकर उसकी कमर को नीचे की तरफ दबा दिया और उसकी चूत में लब लबाकर संजू का लंड घुसता चला गया और अपनी मां की आंखों के सामने शर्म और हया का ढोंग करते-करते मदहोशी में मोहिनी की आंखें बंद होने लगी वह मदहोश होने लगी उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी अपने भाई के मोटे तगड़े लंड को अपनी बहन चूत की गहराई में महसूस कर के वह‌ पूरी तरह से मस्ती के सागर में गोते लगाने लगी,,,,। और संजू इसी बीच अपनी बहन की कमर को पकड़े हुए उसे ऊपर नीचे करके अपने लंड पर उठाने और बैठाने के बाद ऐसा करने पर मोहिनी की चूत में संजू का लंड अंदर बाहर होने लगा और लंड के घर्षण से चूत की अंदरूनी दीवारें पिघलने लगी और मोहिनी को आनंदित करने का की मोहिनी मदहोश होकर अपने आप ही अपनी कार को अपने भाई के लंड पर उछालना शुरू कर दी,,,, चुदाई का सुख ईतना अद्भुत और कमाल का होता है कि रिश्ते नातों की गहराई को एक तरफ करके बस आनंदित हो उठता है रिश्ता चाहे जो भी हो बस उसे चुत या बुर की जरूरत होती है लड़कियों और औरतों को लंड के पीछे का रिश्ता बिल्कुल भी दिखाई नहीं देता और ठीक है ऐसा ही लड़कों को भी चूत के पीछे का रिश्ता चाहे जैसा भी हो उसे बिल्कुल भी दिखाई नहीं देता उसे दिखाई देती है तो सिर्फ चुत,,,,।

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और इस समय संजू और मोहिनी के साथ भी यही हो रहा था अपनी मां की मौजूदगी में ही संजू अपनी बहन की चूत में लंड डाल रहा था और मोहिनी भी अपनी मां की मौजूदगी में पूरी तरह से मस्त होकर अपने भाई के लंड पर कूद रही थी,,,, यह गरमा गरम नजारा देखकर खुद आराधना की चूत से पानी निकलने लगा लेकिन वह अपनी भावनाओं पर काबू करते हुए बोली,,,।

बाप रे तुम दोनों अभी भी शुरू पड़ गए जल्दी से काम खत्म करके नहा धोकर तैयार हो जाना मैं नाश्ता तैयार करती हूं,,,,,

(इतना कहने के साथ ही आराधना कमरे से बाहर निकल गई हालांकि अपनी बेटी के लंड को अपनी बेटी की चूत में अंदर-बाहर होता हुआ देखकर खुद उसकी चूत पानी छोड़ रही थी और वह खुद अपने बेटे के लंड पर उठक बैठक करना चाहती थी लेकिन वह नहा धोकर तैयार हो चुकी थी इसलिए ऐसा करना इस समय वह जरूरी नहीं समझी,,,,

आराधना की कमरे से बाहर जाते ही संजू अपनी बहन की चूत में लंड डाले हुए उसे घोड़ी बना लिया और घुटनों के बल खड़ा होकर जबरदस्त धक्का लगाना शुरू कर दिया,,, और अपनी बहन की नंगी चूची को जोर जोर से दबाते हुए बोला,,,)

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तुमने तो कमाल कर दी मोहिनी रात में मम्मी को ऐसा बेवकूफ बनाई कि मम्मी को चारों खाने चित कर दी मम्मी को तो बिल्कुल भी एहसास तक नहीं हुआ कि तुम नाटक कर रही हो,,,,

भाई तुम भी तो बाद में सारी बाजी को पलट कर रख दिया,,,,

अब हमें किसी का डर नहीं है जब चाहे तब चुदाई का मजा लूट सकते हैं,,,

आहहह आहहहह तुम सच कह रहे हो,,,आहहहह भाई थोड़ा धीरे से,,,,आहहहह अब हमें किसी का डर नहीं है,,,,

हां मेरी रानी अब तेरी चूत से मुझे कोई अलग नहीं कर सकता,,,,,

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(कुछ ही देर में संजू अपनी बहन की चुदाई करता हुआ,,, उसे पूरी तरह से तृप्त करता हुआ झड़ गया,,,, अब तीनों को खुला दौर मिल चुका था तीनों को किसी का डर नहीं था तीनों घर की चारदीवारी में सारे रिश्ते नाते को भूल कर एक दूसरे में समा जाते थे और बाहर समाज के सामने रिश्तेदारी निभाते थे इसी तरह से उन तीनों का जीवन अच्छी तरह से गुजरने लगा था तीनों को अब किसी बात की कमी नहीं थी ट्यूशन का काम अच्छा चल रहा था आराधना का ऑफिस का काम भी बहुत अच्छा चल रहा था आमदनी ठीक-ठाक हो जा रही थी जिससे तीनों की जरूरतें पूरी हो जा रही थी और शरीर की जरूरत भी आपस में पूरी हो जा रही थी,,,,,,, जैसे तैसे करके महीनों गुजर गए और तीनों का शारीरिक संबंध और भी ज्यादा गहरा होता चला गया बीच-बीच में संजू मौका मिलते ही अपनी मौसी की चुदाई कर देता था उसे भी पूरी तरह से तृप्ति का एहसास कराता था और मनीषा तो उसकी दीवानी हो चुकी थी खास करके उसकी मर्दानगी की,,,,,,,

अशोक के जाने के बाद आराधना अपने बेटे और बेटी का प्यार पाकर बहुत खुश थी उसे किसी बात की फिक्र नहीं होती थी बीच-बीच में उसे अशोक की चिंता होती जरूर थी लेकिन अब वह अशोक को भी भूल चुके थे क्योंकि संजू भी उसे इतना प्यार और सुख देता था कि अशोक कि उसे जरूरत ही नहीं थी ऐसे ही एक दिन आराधना के मोबाइल की घंटी बजी और आराधना कॉल रिसीव करके हेलो बोली क्योंकि अनजान नंबर था,,,,।

हेलो कौन,,,?

अरे मुझे भूल गई,,,,,

(आवाज कुछ जानी पहचानी लग रही थी वैसे भी कुछ ही महीने हुए थे आराधना को मोबाइल लिए हुए,,,, इसलिए वह समझ नहीं पा रही थी कि आवाज किसकी है,,,)

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मैं माफी चाहती हूं मैं पहचानी नहीं,,,,

अरे पगली सुखदेव बोल रहा हूं,,,,

भैया,,,,,, आप,,,,, नमस्ते भैया,,,,, तबीयत कैसी है सब मजे में तो है ना बच्चे कैसे हैं,,,,

अरे पगली सब एक ही सांस में पूछ डालेगी क्या,,,, सब कुशल मंगल है सब ठीक है,,,,

बहुत दिनों बाद मुझे याद कर रहे हो,,,

क्या करूं आराधना कैसे खबर अंतर पूछता कुछ समझ में नहीं आता यह तो अच्छा हुआ कि मोबाइल है तो आज साधना से नंबर लेकर तुझे फोन किया हूं,,,, और हां लल्ली की शादी तय हो गई है,,,,

क्या बात कर रहे हो भैया हमारी बिटिया इतनी बड़ी हो गई अब शादी लायक,,,

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हां आराधना इसलिए तो फोन किया हूं,,,, 1 सप्ताह बाद शादी है इतनी जल्दबाजी में शादी तय हो गई कि कुछ कर नहीं पा रहा हूं अगर समय होता तो मैं खुद वहां आकर तुम लोगों को गांव लेकर आता लेकिन शादी की तैयारी भी करना है इसलिए फोन से आमंत्रण भेज रहा हूं,,,,, शादी से 5 दिन पहले ही तुम दोनों को परिवार सहित आना है,,,,

इतनी जल्दी,,,,

अरे पगली यह जल्दी है मेरा बस चलता तो महीना पहले से बुला लेता,,,,, कोई दिक्कत है तो बता देना,,,,

नहीं नहीं भैया कोई दिक्कत नहीं है,,,,, मैं आ जाऊंगी वैसे भी बहुत समय हो गया है गांव आए,,,,

ठीक है आराधना मैं फोन रखता हूं दूसरों लोगों को भी बुलाना है,,,,

ठीक है भैया नमस्ते,,,

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खुश रहो,,,,।

(फोन कट गया था आराधना के चेहरे पर संतुष्टि के भाव नजर आ रहे थे बरसो बाद वह गांव जाने वाली थी वह तो अपना मायका ही भूल चुकी थी क्योंकि अपनी गृहस्ती में इतना उलझ गई थी और इतना दुखी थी कि उसे कुछ समझ में नहीं आया और कब इतना समय गुजर गया उसे इस बात का अहसास तक नहीं हुआ लेकिन आज अपने भाई के फोन से पुरानी यादें ताजा हो गई थी वह तुरंत अपनी बड़ी बहन साधना को फोन लगाइ ,,)

हेलो दीदी,,, भैया का फोन आया था,,,

आराधना मुझे भी भैया का फोन आया था लल्ली की शादी तय हो गई है,,,, मैं तो बहुत खुश हूं गांव जाने के नाम से,,, कुछ दिन वहां आराम तो करेंगे,,,

सच कह रही हो दीदी मैं भी यही सोच रही थी,,,,

बात तो ठीक है लेकिन मनीषा नहीं जा पाएगी और ना ही मनीषा के पापा जा पाएंगे मनीषा का एग्जाम शुरू होने वाला है,,,,,

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मेरी भी यही दिक्कत है दीदी मोहिनी का एग्जाम शुरू होने वाला है,,,,,

तो कोई बात नहीं मैं तो और संजू चलेंगे बहुत मजा आएगा वैसे भी संजू बहुत छोटा था तब गांव गया था अब गांव जाएगा तो वहां का माहौल देखकर खुश हो जाएगा,,,,

तुम ठीक कह रही हो दीदी,,,,,,

हां आराधना दो दिन बाद ही हमें निकलना होगा क्योंकि 5 दिन पहले से ही भैया हमें अपने घर देखना चाहते हैं,,,,

ठीक है दीदी संजू के आते ही जाने की तैयारी शुरू कर देती हूं लेकिन एक दिक्कत है,,,

कैसी दिक्कत,,,,

मोहिनी,,,,

अरे बुद्धू मैं भी जानती हूं मोहिनी को मेरे घर पर छोड़ देना मनीषा के साथ,,,,

आराधना और मोहिनी इस तरह से मजा लेते हुए

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हा दीदी यह ठीक रहेगा,,,,, मनीषा के साथ मोहिनी को छोड़कर मैं निश्चिंत हो जाऊंगी,,,,

चल ठीक है आराधना मैं रखती हूं तैयारी भी करना है 2 दिन का ही समय भी है,,,,

हां दीदी मैं भी संजू से बात कर लूं,,,,

ठीक है,,,(इतना कहकर साधना फोन काट दि)
 
आराधना गांव जाने के नाम पर बहुत खुश थी और वह भी अपने भाई के लड़की की शादी में जा रही थी बरसों बाद वह घर के किसी सदस्य की शादी में गांव जा रही थी इसलिए खुशी लाजमी थी,,,,,, बहुत जल्द ही उसे तैयारी भी करनी थी शादी में पहनने के लिए नई साड़ी नए कपड़े चाहिए थे इसलिए खरीदी करना भी जरूरी था,,, गांव जाने की बात केवल आराधना और साधना को ही मालूम था आराधना को इस बात से तसल्ली थी कि उसकी बड़ी बहन भी साथ में थी वरना अकेले वहां इतना सफर नहीं कर सकती थी लेकिन वह संजू को भी लेकर जाना चाहती थी क्योंकि संजू अगर साथ में रहेगा तो अच्छा ही रहेगा,,,,,।

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आराधना मोहिनी और संजू को रात को खाना खाते समय बताई की लल्ली की शादी में गांव जाना है,,,, इतना सुनते ही संजू और मोहिनी दोनों एकदम खुश हो‌गए क्योंकि गांव जाना होने भी अच्छा लगता था लेकिन कुछ वर्षों से किसी को भी मौका नहीं मिला था गांव जाने का और अब मामा की लड़की में वह लोग शामिल होना चाहते थे लेकिन तभी मोहिनी को याद आया उसका तो एग्जाम है और वो एकदम से निराश हो गई बोली,,,,।

ओहहह नो,,,, मेरा तो एग्जाम है मैं तो नहीं जा पाऊंगी,,,

मुझे मालूम था मोहिनी क्योंकि तुम 3 दिन पहले ही मुझे बताई थी इसलिए तो मुझे चिंता हो रही है कि मैं जाऊंगी कैसे,,,,, वैसे तो बड़ी दीदी भी जा रही है और उन्हें बताया था कि मनीषा के एग्जाम है मनीषा शादी में नहीं जा पाएगी,,,,,,

मैं तो चलूंगा मम्मी कोचिंग का काम मनीषा ही संभाल लेगी,,,,,

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चलो यह तो अच्छा हुआ कि तू चलने को तैयार है,,, तू साथ रहेगा तो अच्छा रहेगा,,,,,

मौसी भी चल रही है मम्मी,,,

हां बड़ी दीदी भी जा रही है मतलब कि यह तय हो गया कि हम तीनों को चलना है,,,,

यह तो ठीक है मम्मी लेकिन मोहिनी घर में अकेले कैसे रहेगी,,,,

मोहिनी मनीषा के साथ रहेगी दोनों को एक दूसरे का साथ मिल जाएगा,,,

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हां जी ठीक रहेगा मम्मी मनीषा दीदी के साथ मुझे भी रहने का मौका मिल जाएगा,,,,(मोहिनी एकदम से खुश होते हुए बोली,,,)

वैसे निकलना कब है,,,,?(संजु निवाला मुंह में डालते हुए बोला,,,)

भैया तो जल्दी ही बुलाए हैं 2 दिन बाद निकलते हैं,,,,

हां यह ठीक रहेगा मम्मी तो मैं कल ही हम तीनों की बस की टिकट बुक करवा देता हूं क्योंकि रिजर्वेशन ट्रेन का मिलने से रहा क्योंकि सीजन ही शादी का चल रहा है तो टिकट मिल नहीं पाएंगी बस से सही रहेगा,,,,

हां तु ठीक कह रहा है,,,, हम लोगों को गांव में 15 दिन लग जाएगा मोहिनी तू अपना ख्याल ठीक से रखना वैसे तो मनीषा के साथ किसी भी तरह की तुझे परेशानी नहीं आएगी लेकिन फिर भी मैं बता देती हूं कि पढ़ाई में ध्यान देना और अच्छे मार्क्स लाना,,,,

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तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मम्मी,,,,

(तीनों खाना खा चुके थे,,,,,,, बैठकर गांव जाने की तैयारी करने की बात कर रहे थे उन्हें कपड़े खरीदना था जिसके लिए कल मार्केट जाना था तीनों को बातें करते करते रात के 12:00 बज गए थे संजू अपनी जगह से उठा और बाथरूम में पेशाब करने के लिए चला गया और उसी समय मोहिनी को बड़े जोरों की पेशाब लगी,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह जब अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाई तो बाथरूम के बाहर ही,,, जहां पर बर्तन धोया जाता था और पानी निकलने के लिए जुगाड़ बना हुआ था वहीं पर मोहिनी खड़ी होकर अपनी सलवार की डोरी खोल कर तुरंत सलवार को नीचे घुटनों तक कर दी और अपनी मां की आंखों के सामने ही अपनी गोल गोल गांड दिखाते हुए बैठ गई और पेशाब करने लगी,,,,, आराधना मोहिनी की गोरी गोरी और गदराई गांड देखकर एकदम मदहोश हो गई,,,, ऐसा उसके साथ पहले बिल्कुल भी नहीं होता था,,, लेकिन जब से बिस्तर पर अपने बेटे और अपनी बेटी का साथ पाई थी तब से उसे भी औरतों के अंगों के प्रति आकर्षण होने लगा था और इस समय मोहिनी की गोरी गोरी गांड देखकर उसके मुंह में पानी आ रहा था,,,, वह अपने मन में सोचने लगी कि 15 दिन के लिए गांव जा रही है 15 दिन तक वह मजा नहीं ले पाएगी क्यों ना जो दो रात बची है उसी में मजा लिया जाए,,,,,।

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मन में यही सोचकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ देने की उसकी चूत से पानी झरने लगा और देखते ही देखते मोहिनी पर साफ करके उठ कर खड़ी हो गई और अपनी सलवार को ऊपर उठा पाती इससे पहले बाथरूम का दरवाजा खुला और संजू बाहर आ गया और देखा तो मोहिनी की नंगी गांड देख कर उसके मुंह में पानी आ गया और वह मुस्कुराता हुआ एक चपत अपनी बहन की गांड पर लगा दिया,,,, जिससे वो एकदम से उछल गई और अपनी सलवार को कमर तक उठाते हुए बोली,,,।

क्या भैया तुम भी मैं तो एकदम से डर गई,,,,

चल कमरे में अभी और तुझे डराऊंगा,,,,

कमरे में मुझे डर नहीं लगता,,,,

क्यों डर नहीं लगता,,,

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कमरे में तुम जो मेरे साथ रहते हो,,,,

तो चल फिर देर किस बात की है,,,(इतना कहने के साथ ही संजु मोहिनी की कलाई पकड़ कर उसे अपने कमरे की ओर ले जाने लगा तभी आराधना बोली,,,,)

तुम दोनों मेरे कमरे में चलो वहीं पर मजा करते हैं वैसे भी 15 दिन तक कुछ करने को मिलेगा नहीं,,,,।

(इस बात से संजू एकदम से हैरान होता हु आराधना की तरफ देखा और बोला)

15 दिन तक कुछ भी नहीं करने को मिलेगा तब तो गांव जाने का कोई फायदा नहीं है तुम तो जानती हो मम्मी तुम्हारी चूत के बिना मुझे नींद नहीं आती,,,,

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यही तो 15 दिन तक मुझे भी तो यहां अकेले रहना है मेरा क्या होगा तुम दोनों ने मिलकर जो मेरे बदन में नशा भरा है वह अगर नहीं मिलेगा तो मेरा तो बुरा हाल हो जाएगा,,,,

गांव में शादी का माहौल है सब रिश्तेदार नाती आस-पड़ोस के लोग घर में इकट्ठा रहेंगे तो मौका कहां मिलेगा इसीलिए तो कहती हूं कि दो रात है तो रात में मजा कर लो,,,,

मोहिनी कुर्ती उतारते हुए

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हां यह आइडिया तो बिल्कुल ठीक है,,,(मोहिनी एकदम से खुश होते हुए बोली,,, तीनों में अब बिल्कुल भी शर्म नहीं रह गई थी तीनों एक दूसरे की हाजिरी में ही एक दूसरे से मजाक और मस्ती किया करते थे एक दूसरे के अंगों को अपने हाथों से पकड़ कर दबा दिया करते थे और ऐसा करने में तीनों को अलग ही मजा मिलता था चारदीवारी के बाहर दुनिया वालों के लिए समाज वालों के लिए वह तीनों मां बेटे भाई बहन थे लेकिन चारदीवारी के अंदर केवल औरत और मर्द थे जो एक दूसरे से आनंद के सिवा और कुछ नहीं चाहते थे,,,,,,

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आराधना संजु मोहिनी को लेकर अपने कमरे में दाखिल हो गई और खुद ही दरवाजा बंद करके कभी लगा दी यह जानते हुए भी कि घर में उन तीनों को सिवा और कोई भी नहीं है और कोई आने वाला नहीं है लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर वह दरवाजा बंद करके कड़ी लगाती थी क्योंकि बंद दरवाजे के अंदर यह खेल खेलने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है,,,,, कमरे में प्रवेश करते ही संजू से रहा नहीं गया और संजू तुरंत अपनी मां को उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और उसे अपनी बाहों में भर लिया वह पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में फंसा हुआ था उसकी बड़ी बड़ी गांड उसके खड़े लंड पर एकदम टनटना रहा था,,,, आराधना अपनी गांड पर अपने बेटे के लंड की चुभन को महसूस करके पूरी तरह से मस्त हो गई और जो क्रिया उसके बेटे ने उसके साथ किया था वही क्रिया को दोहराते हुए वह मोहिनी की कलाई पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच ली और उसे वह खुद अपने पीछे से उसे अपनी बांहों में भर लिया और उसकी छोटी छोटी चूची को कुर्ती के ऊपर से ही दबाते हुए बोली,,,,।

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ओहहह मोहिनी देखना तेरी चूची भी बड़ी बड़ी हो जाएगी तो भी बहुत मस्त लगने लगेगी,,,,।

ओहहहह मम्मी ने भी यही चाहती हूं कि मेरी चूची भी तुम्हारी चूची की तरह हो जाए क्योंकि तुम्हारी क्योंकि मुझे बहुत अच्छी लगती है बड़ी-बड़ी एकदम कैसी हुई,,,

हो जाएगी मेरी रानी जब तेरा भाई से मुंह में लेकर पिएगा ना तब तेरी चूची भी मेरी तरह हो जाएगी,,,,(ऐसा बोलते हुए आराधना अपनी बेटी की कुर्ती को ऊपर की तरफ उठाकर उसे नंगी करने लगी और मोहिनी भी अपनी मां का साथ देते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाकर कुर्ती को निकलवाने में उसकी मदद करने लगी और देखते ही देखते आराधना मोहिनी की कुर्ती को निकाल कर बिस्तर पर फेंक दिया और उसकी ब्रा के हुक को खोलना शुरू कर दी और पीछे संजू अपनी मां की साड़ी की गीठान को खोलकर उसे धीरे-धीरे उतारना शुरू कर,,,, दिया,,, और देखते ही देखते संजू अपनी मां की साड़ी को खोलकर नीचे जमीन पर फेंक दिया और उसके ब्लाउज के बटन को खोलने लगा,,,,।

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तीनों अपने अपने तरीके से मजा ले रहे थे समझो देखते ही देखते अपने हाथों से अपनी मां के कपड़े उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया था और आराधना ब्रा का हुक खोलने के बाद मोहिनी की बाहों में से उसके ब्रा को निकाल कर बाहर फेंक दी थी और उसकी सलवार की डोरी को एक झटके से खींचकर उसकी सलवार को ढीली कर दी है उसे नीचे की तरफ उतारने लगी जोकि मोहिनी खुद ही अपने कपड़े उतार कर नंगी होने के लिए उतावली होने लगी देखते ही देखते मोहिनी संजू और आराधना कमरे के अंदर पूरी तरह से नग्न अवस्था में हो गए संजू का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था जिसे आराधना घुटनों के बल बैठ कर उसे पकड़कर अपने मुंह में ले कर रही थी और आराधना भी अपनी मां के बगल में बैठ कर अपने नंबर का इंतजार कर रही थी जो की आराधना खुद उसे यह शुभ अवसर देते हुए अपने हाथों से अपने बेटे के लंड को पकड़ कर अपनी बेटी के मुंह में डालकर उसे चूसने के लिए दे रही,,, थी,,,,।

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एक साथ दो दो मादरजात नंगी औरतों को अपना लंड चूस वाकर संजू पूरी तरह से आसमान में उड़ने लगा था वह अपनी कमर को हल्के हल्के आगे पीछे करके हिलाता हुआ अपनी आंखों को बंद करके अपने दोनों हाथों को अपनी मां और अपनी बहन के सर पर रख कर उन पर दबाव देता हुआ अपने लंड की तरफ खींच रहा था,,,,, कुछ देर तक इसी तरह से मजा लेने के बाद संजू अपनी बहन को बिस्तर पर लिखकर पर लेटा कर उसकी दोनों टांगों को फैला कर उसकी चिकनी चूत पर अपने होंठ लगाकर उसकी मलाई को चाटने शुरू कर दिया और आराधना अपनी दोनों टांगों को मोड़कर घुटनों के बल होकर अपनी चूत को मोहिनी के होठों पर रखकर उसे रगड़ना शुरु कर दी मोहिनी भी मौके की नजाकत को समझते हुए,,,, अपनी जीभ को बाहर निकालकर अपनी मां की मोटी मोटी जागो को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी मां की चूत चाटना शुरू कर दी,,,,

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बेहद उन्मादक और मदहोश कर देने वाला दृश्य आराधना के कमरे में रचा जा रहा था,,,, एक तरफ संजू अपनी बहन की चूत चाट रहा था और दूसरी तरफ मोहिनी अपनी मां की चूत चल रही थी आराधना गरमा गरम सिसकारी लेते हुए अपने हाथों से अपनी बड़ी बड़ी चूची को दबा रही थी और समझो भी दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर अपनी बहन के नारंगी को पकड़कर उसका रस निचोड़ रहा था,,,,,, कुछ देर तक आराधना अपनी बेटी के चेहरे पर ही अपनी चूत कोरा करती रही और अपनी चूत की मलाई से उसके चेहरे का फेशियल करती रही और फिर अपनी बड़ी बड़ी गांड को घुटनों के बल पीछे की तरफ लाकर अपने बेटे की आंखों के सामने कर दी और संजू पागलों की तरह अपनी बहन की चूत चाटते हुए अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर बारी बारी से अपनी मां और बहन दोनों की चूत को चाटना शुरू कर दिया और आराधना अपनी छाती पर लटकती हुई पपिया जिसे चूची का एक हाथ से पकड़ कर अपनी बेटी के मुंह में डालकर उसे पीने के लिए इशारा करने लगी और मदहोशी में मोहिनी भी अपनी मां की दोनों चूची को हाथ में पकड़ कर उसे बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर पी रही थी,,,,

संजू मोहिनी को गॉड में उठाकर

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गरमा गरम शिसकारियों से पूरा कमरा गूंज रहा था यही तो सबूत था तीनों की आनंददायक काम क्रीड़ा का मां बेटी दोनों अपने संजू के लंड के लिए तड़प रही थी वह दोनों जल्द से जल्द संजू के लंड को अपनी चूत में लेकर तृप्त हो जाना चाहती थी,,,, और संजू सर्वप्रथम अपनी मां की चूत को अग्रिमता देते हुए अपने मोटे और लंबे लंड को अपनी मां की चूत के छेद पर रखकर एक हल्का सा प्रहार किया और चूत की चिकनाहट पाकर लंड सटासट अंदर की तरफ घुस गया और संजू अपनी मां की कमर को पकड़े अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया 20-25 धक्के लगाया था कि फिर अपनी मां की चूत से अपने लंड को बाहर निकालकर अपनी बहन की चूत के मुहाने पर रख दिया और उसकी कमर को पकड़ कर एक धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड उनकी चूत में समा गया इस तरह से बारी-बारी से संजू अपनी मां और बहन दोनों को चोद रहा था दोनों एक ही बिस्तर पर संजू की चुदाई का मजा लूट रही थी,,,, आराधना और मोहिनी अच्छी तरह से जानते थे कि 15 दिन तक शायद हो सकता है उन्हें लंड के दर्शन तक ना हो इसीलिए वह दोनों पूरी तरह से इस शुभ अवसर का मजा ले लेना चाहते थे और यह काम क्रीड़ा का खेल सुबह 4:00 बजे तक चला और फिर गहरी नींद में तीनों एक ही बिस्तर पर सो गए,,,,।

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दूसरे दिन सुबह जल्दी से उठ गई और नहा धोकर तैयार हो गए आराधना को जल्दी ऑफिस पहुंचने का और अपनी छुट्टी के लिए अर्जी देना था और जाते-जाते आराधना संजू से कह दी थी कि अपनी मौसी से पूछकर परसों की टिकट निकलवा ले,,,,,, और शाम को आकर खरीदी करने के लिए भी जाना था,,,,,,, संजू ने ठीक वैसा ही किया अपनी मौसी को फोन करके वह तीन टिकट बस की कंफर्म करवा दिया था,,,,,,

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15 दिन की छुट्टी लेकर आ रहा था ना शाम को जल्दी घर आ गई हो और संजू के साथ खरीदी करने के लिए निकल गई शादी में पहनने के लिए उसने नई-नई 2 साड़ियां और कुछ कपड़े ली संजू ने भी अपने लिए कपड़े खरीदे पैसों की चिंता अब उन्हें बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए निश्चिंत होकर वालों खरीदी कर रहे थे,,,,, आराधना अपनी बेटी के साथ शारीरिक संबंध का रिश्ता बनाकर उसके साथ पूरी तरह से खुल चुकी थी इसलिए बाजार में सबसे नजर बचा कर जब कभी भी दूर जाना होता था तो वह एक बीवी और प्रेमिका की तरह ही संजू की कमर में अपने दोनों हाथ डाल देती थी और,,, खरीदी करते-करते शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो चुका था इसलिए लौटते समय खुशी के मारे आराधना अपने बेटे से एकदम से चिपक कर बैठी हुई थी जो कि अशोक की नजर में यह आ चुका था क्योंकि शाम को अशोक भी बाजार में ही था,,,,, अपनी बीवी को इतना निश्चिंत और खुश देखकर और अपने बड़े बेटे के साथ इस तरह से चिपक कर बैठी हुई देखकर अशोक की शंक६ एकदम द्रढ हो गई वह समझ गया कि जरूर उन दोनों के बीच कुछ चल रहा है और वह गुस्से से आगबबूला हो गया लेकिन इस समय वह अपने घर पर जा नहीं सकता था क्योंकि वह भी किसी औरत के साथ ही बाजार में घूम रहा था,,,,।
 
गांव जाने की सारी तैयारियां हो चुकी थी,,,, बस की टिकट कंफर्म हो चुकी थी आराम से गांव जा सके सफर का मजा मिल सके इसलिए संजू ने बस की केबिन बुक करवाई थी जिसमें तीनों आराम से जा सकते थे,,,, केबिन होने से तीनों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होती इसीलिए संजू ने कभी नहीं बुक करवाया था ताकि लेटे-लेटे जा सके क्योंकि सफर थोड़ा लंबा था सीट पर बैठे बैठे कमर दुखने लगती,,,,

संजू और आराधना बैग में नए-नए कपड़े और जरूरत का सामान रख रहे थे जिसमें मोहिनी मदद भी कर रही थी,,,

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साधना भी अपना बैग तैयार कर चुकी थी रात 8:00 बजे की बस्ती जो कि दूसरे दिन रात को 9:00 बजे गंतव्य स्थान पर पहुंचा देती,,,, सफर में 24 घंटे से ज्यादा का समय लगने वाला था वैसे तो ट्रेन की रिजर्वेशन ही सही पसंद होती लेकिन विवाह का समय होने की वजह से रिजर्वेशन नहीं मिल पा रहा था इसलिए ना चाहते हुए भी संजू ने बस की टिकट करवाई थी,,,, लगभग लगभग सारी पैकिंग हो चुकी थी फिर भी आराधना याद कर कर के एक-एक सामान को बैग में रख रही थी ताकि गांव में जरूरत पड़ने पर इधर-उधर भागना‌ ना पड़े,,,,,

अभी दोपहर के 12:00 बज रहे थे अभी बहुत समय था बस पकड़ने में इसलिए मोहिनी सोची की आज तो वह अपनी मौसी के घर चली जाएगी तो क्यों ना अपनी सहेलियों से मिल लिया जाए,,, और यही सोचकर वह अपनी मम्मी से बोली,,,

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मम्मी मैं अपनी सहेलियों से मिलकर आती हूं क्योंकि मौसी के घर चली जाऊंगी तो उनसे मिलना नहीं हो पाएगा,,,

ठीक है जा लेकिन जल्दी आ जाना अभी सफर के लिए खाना भी बनाना है,,,,

ठीक है मम्मी मैं जल्दी से आ जाऊंगी,,,,।

(इतना कहकर मोहिनी घर से बाहर चली गई और संजू और उसकी मां दोनों बैग के पास ही थक कर बैठे हुए थे,,,, दोनों पसीने से लथपथ थे आराधना के माथे से पसीना टपक रहा था और पसीने की खुशबू दे उसकी गर्दन से हो करके उसकी दोनों चूचियों के बीच की घाटी में झरने की तरह बह रही थी जिसे देखकर संजू मुस्कुराता हुआ बोला,,,)

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देखो तो सही मम्मी पसीने की बूंदें भी तुम्हारी चूचियों के बीच ही जाना चाहती हैं देखो तो सही कैसे दोनों चूचियों के बीच की घाटी में जा रही हैं,,,,।

(अपने बेटे के मुंह से इतना सुनकर आराधना सहज रूप से अपनी छातियों की तरफ देखने लगी ब्लाउज का पहला बटन खुला हुआ था इसलिए दोनों चूचियों के बीच की घाटी और भी ज्यादा गहरी और उभरी हुई नजर आ रही थी जिसमें वाकई में पसीने की बूंदे जा रही थी अपने बेटे की बात और अपनी हालत को देखकर आराधना मुस्कुराते हुए बोली,,,)

आजकल सब का ठिकाना वहीं पर है,,,

क्यों ना हो मम्मी आखिरकार इतनी खूबसूरत जगह जो है,,,

उससे भी खूबसूरत जगह तो,,,(अपने चेहरे की टोढी को इशारे से अपनी दोनों टांगों के बीच नीचे की तरफ करते हुए) यहां पर है,,,,,

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हाय,,, सच कह रही हो मम्मी दुनिया की सबसे खूबसूरत जगह तुम्हारी दोनों टांगों के बीच ही है,,,, उधर भी पसीना बह रहा होगा,,,,

क्यों,,,?(आराधना मुस्कुराते हुए बोली)

क्योंकि तुम्हारी चूत बहुत गर्म है इसलिए वहां ज्यादा गर्मी के साथ-साथ पसीना छूट रहा होगा,,,

नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है,,, हम औरतों का पसीना छोड़ता नहीं बल्कि हम औरतें मर्दों का पसीना छुड़ा देते हैं,,,

यह तो सच कही लेकिन सभी मर्दों के साथ ऐसा नहीं होता है टक्कर का मर्द होना चाहिए जो औरतों का खुद का पसीना छुड़ा दे जैसा कि मैं मैं हमेशा तुम्हारा पसीना छुड़ा देता हूं माना कि तुम्हारी चूत एकदम कसी हुई है लेकिन मेरा लंड भी कुछ कम नहीं है,,, एक बार तुम्हारी चूत में जाता है ना मम्मी तो तुम,,आहहहह ऊहहहह करने लगती हो,,,, मेरा लंड घुसते ही देखती है तुम्हारी चूत की हालत कैसी हो जाती है तुम्हारी चूत में छल्ला बन जाता है और कैसे कचोरी की तरह फुल जाती है,,,,

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चल रहने दे अपनी मर्दानगी की महान गाथा कहने को देखता नहीं जब मैं तेरे मोटे लंड को अपनी चूत के अंदर दबा लेती हो तो कैसा तू हांफने लगता है,,,,

वह तो मम्मी इतना थोड़ा सा होगा ही ना के पास तुम इतनी खूबसूरत औरत जो हो तुम्हारा बदन इतना खूबसूरत है गदराया हुआ और तो और तुम्हारी चूत की फांके कितनी मोटी है वह तो मैं हूं कि झेल लेता हूं दूसरा कोई हो तो डालते ही झड़ जाए,,,

जैसा कि तेरे पापा,,,,

हां अभी तुमने सच कही ,,,,, पापा तो 1 2 धक्के में ही ढेर हो जाते होंगे,,,, सच मम्मी पापा को देखता था तो यकीन ही नहीं होता था कि वह तुम्हारे पति है क्योंकि तुम इतनी खूबसूरत हसीन जवान हो और पापा बिल्कुल भी तुम्हारे लायक नहीं है,,,

तू तो है ना मेरे राजा मेरे लायक,,,,

हां वह तो हूं,,,, तभी तो तुम्हें मस्त कर देता हूं,,,,

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और मैं तुझे मस्त नहीं करती क्या,,,,

तुम तो मुझे पानी पानी कर देती हो,,,,(इतना कहते हुए संजू अपने होठों को अपनी मां की फोटो की तरफ आगे बढ़ने लगा दोनों इस तरह की अश्लील बातें करते हुए पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रहे थे,,,, देखते ही देखते दोनों मां बेटों के होठों का मिलन हो गया और संजू अपनी मां के लाल लाल होठों को अपने होंठों के बीच लेकर उसके रस को चूसना शुरू कर दिया और साथ ही अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर ब्लाउज पर रखकर अपनी मां के खरबूजे को दबाना शुरू कर दिया,,,, पल भर में ही दोनों के बीच उन्मादक स्थिति पैदा हो गई दोनों मदहोश में जा रहे थे,,,, सफर में ले जाने के लिए एक किए हुए बैग के बगल में बैठ कर दोनों आनंद की पराकाष्ठा तक पहुंचने की कोशिश करने लगे संजू पागलों की तरह अपनी मां के लाल लाल होठों को चूस रहा था और उसकी चूची को दबा रहा था साथ ही आराधना भी कम नहीं थी वह भी अपने हाथ को अपनी बेटी के पेंट पर रखकर उसकी खड़े लंड को पेंट के ऊपर से ही जोर जोर से दबा रही थी,,,,,

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दोनों की सबसे बड़ी तेजी से चलने लगी दोनों की सांसो की आवाज कमरे में सुनाई दे रही थी दोपहर का समय था साथ में गर्मी भी पढ़े जोरों की थी इसलिए घर के बाहर सड़क पर वाहनों का शोर भी बहुत कम था और लोग अपने अपने घरों में आराम कर रहे थे इसलिए इस सन्नाटे में दोनों की गरमा गरम सिसकारी की आवाज कमरे में एकदम साफ सुनाई दे रही थी देखते ही देखते संजू अपनी मां के ब्लाउज को लगभग फाड़ने की स्थिति में उसके बटन को खोलना शुरू कर दिया जैसे-जैसे संजू अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोल रहा था कैसे-कैसे उसका उतावलापन और ज्यादा बढ़ता जा रहा था आराधना भी अपने बेटे की पेंट को खोलने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह खोल नहीं पा रही थी,,,,, पेंट के अंदर संजू का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था जो कि पेंट के ऊपर से कुछ ज्यादा ही मोटा तगड़ा लग रहा था जिसे आराधना अपनी हथेली में लेकर मस्त हुए जा रही थी,,,,

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दोनों का प्रगाढ़ चुंबन पूरी तरह से उन्मादक स्थिति में पहुंचता चला जा रहा था दोनों के थूक और लार जीभ के द्वारा एक दूसरे के मुंह के अंदर आदान-प्रदान हो रहा था,,, उत्तेजना और गर्मी का समन्वय से आराधना का बदन पसीने से तरबतर हो चुका था,,,,, देखते-देखते संजू अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया था और पल भर में उसकी ब्रा को ऊपर की तरफ खींच कर उसकी नंगी चूचियों पर दोनों हाथ रख कर उसे दबाने का मजा लूट रहा था पसीने से तरबतर चूचियां संजू के हाथों में छटक रही थी,,,, पसीने की वजह से चुचियों पर फिसलन थी जो कि बार-बार संजू कोशिश करता था और बार-बार फिसल जा रहा था और इस तरह से करने में आराधना को भी बहुत मजा आ रहा था,,,,,

हाय तेरी चूची कितनी मस्त है रे,,,,आहररर मन करता है कच्चा चबा जाऊं,,,,।

सहहहरह आहहहहह मादरचोद चबा जाना रोका किसने है,,,,

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हाय मेरी छिनार तेरी यही अदा तो मुझे पागल कर देती है,,,,,

(और इतना कहने के साथ ही संजु अपनी मां की चूची को अपने मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया और आराधना भी अपने बेटे को अच्छी तरह से अपना दूध पिला सके इसलिए पीछे की तरफ अपने दोनों हाथों की हथेली का सहारा लेकर अपनी छातियों को थोड़ा ऊपर की तरफ उठा दी,,,, खरबूजे की तरह गोल-गोल बड़ी चूचियां आराधना की छातियों की शोभा बढ़ा रही थी जिसे संजू अपने हाथों से पकड़कर रोंदता हुआ उसे अपने मुंह में लेकर पी रहा था,,,, मजा ले रहा था लेकिन जिस तरह का मजा आराधना लेना चाह रही थी उसे थोड़ी दिक्कत पेश आ रही थी इसलिए वह संजू से बोली,,,)

अरे मादरचोद तू तो मजा ले रहा है मुझे भी तो मजा दे लंड तो बाहर निकाल,,,,

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अरे छिनार पहले बोली होती तेरे लिए ही तो खड़ा हुआ है,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू थोड़ा सा अपने आप को दुरुस्त किया और अपने पेंट का बटन खोल कर पल भर में है उसे अपने घुटनों का खींच कर नीचे कर दिया और अपना खड़ा लंड पकड़कर हिलाना शुरू कर दिया वह इस तरह से हरकत करते हुए अपनी मां को अपने लंड की तरफ आकर्षित कर रहा था और आराधना भी अपने बेटे के लैंड के आकर्षण में पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी और बिल्कुल भी देर किए बिना वह तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के लंड को तो कभी नहीं जो की पूरी तरह से गर्म हो चुका था मानो कि उसके लिए कोई स्वादिष्ट व्यंजन गरमा गरम परोसा जा रहा हो,,,,,,, कमरे का हालात मां बेटे दोनों के काबू में बिल्कुल भी नहीं था दोनों मदहोश हो जा रहे थे पागल हुए जा रहे थे आराधना चुदवासी हुए जा रही थी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि गांव जाने पर पता नहीं है मौका मिले या ना मिले इसलिए जो मजा लेना था इसी समय ले लेना चाहती थी और यह सोचकर वह और भी खुश थी कि अच्छा हुआ कि मोहिनी चली गई उन दोनों को एकांत मिल गया वरना मोहिनी को भी भाग देना पड़ता,,,, वैसे तो आराधना को अपनी बेटी के साथ अपने बेटे से मजा लेने में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी लेकिन वह अकेले में खुलकर मजा लेना चाहती थी बिना संजू को किसी से बातें,,,, और इसमें उसे बिल्कुल भी शक नहीं था कि उसका बेटा उन दोनों की जवानी का रस निचोड़ ने में पूरी तरह से सक्षम है वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा अपने खड़े लंड से दोनों का पानी निकालने में पूरी तरह से समर्थ है लेकिन फिर भी वह इस तरह के मजे को अकेले लेना चाहती थी वह अपने बेटे के लंड को पूरी तरह से अपनी चूत में रहना चाहती थी अंदर तक लेना चाहती थी इसलिए वह पूरी तरह से मदहोश होकर अपने प्यासे होठों को अपने बेटे के लंड की गरम सुपाड़े पर रख दी और अपने होठों का दबाव सुपाडे पर एकदम से बढा दी,,,, अपनी मां की इस हरकत पर संजू पूरी तरह से मदहोश हो गया और मदहोशी में उसकी आंखें एकदम से बंद हो गई वह अपनी कमर पर दोनों हाथ रख कर अपनी मां की हरकत का मजा लेने लगा देखते ही देखते आराधना धीरे-धीरे करके अपने बेटे के समूचे लंड को अपने मुंह में गप्प कर गई,,,, अपनी मां की इसी अदा पर उसकी इसी हरकत पर संजू चारों खाने चित हो जाता था,,,,, आराधना अपनी हरकत से अपने बेटे को तड़पाना भी अच्छी तरह से जानती थी वह संजू के लंड को अपने गले तक उतार कर कुछ देर तक उसे पूरी तरह से अपने मुंह में लेकर उसे दाएं बाएं हिलाकर झनझना देती थी,,,, और जैसे ही उसे लगने लगता था कि सांस लेने में से थोड़ी तकलीफ हो रही है वह तुरंत बाहर निकाल देती थी और संजू का लंड पूरी तरह से उसके थूक और लार में सना हुआ और भी ज्यादा मादकता लिए हुए नजर आता था,,, और फिर अपने सांसों को दुरुस्त करके आराधना फिर से उसे अपने मुंह में ले लेती थी इस तरह से संजू की तड़प अपने लंड को अपनी मां की चूत में डालने के लिए और ज्यादा बढ़ जाती थी आराधना अच्छी तरह से जानती थी कि जब जब वह अपने बेटे के साथ इस तरह की हरकत करके उसे पूरी तरह से मदहोश करती थी तब तक संजू उसे जमकर चोदता था,,,,, और ऐसा चोदता था कि उसकी चूत फैला देता था जिससे आराधना को दो-तीन दिन चलने में तकलीफ होने लगती थी लेकिन यह तकलीफ इस आनंद के आगे कुछ भी नहीं थी आराधना के लिए यह सुख थोड़ी सी तकलीफ के लिए छोड़ नहीं सकती थी,,,।

आराधना अपने बेटे को मस्त करती हुई

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आराधना आज संजू पर पूरी तरह से छा चुकी थी एक तरह से,,, आज वह अपने बेटे को पूरी तरह से मस्त कर देना चाहती थी और खुद भी मस्त हो जाना चाहती थी कुछ देर तक इसी तरह से वह अपने बेटे को लंड चुसाई का आनंद देती रही,,,, लेकिन अब उसकी चूत में भी खुजली मच रही थी वह भी अपने बेटे के आगे अपनी चूत परोस कर उसकी सेवा का आनंद लेना चाहती थी,,,, इसलिए वह घुटनों के बल बैठ गई और अपनी साड़ी को धीरे-धीरे कमर तक उठाते वह साड़ी के अंदर कुछ भी नहीं पहनी थी वह साड़ी के अंदर पूरी तरह से नंगी थी यह देखकर संजू के तन बदन में आग लग गई और वह बोला भी,,,।

आराधना अपने बेटे के सामने अपनी गांड परोसती हुई

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मम्मी आज तुमने चड्डी नहीं पहनी हो,,,,

नहीं रे आज बिल्कुल भी नहीं पहनी हुंं,(ऐसा कहते हुए आराधना सूटकेस के ऊपर टांग फैला कर बैठ गई जिसमें से कपड़े निकाल कर वह बैग में भर रही थी सूटकेस पूरी तरह से मजबूत थी ,,,, आराधना बड़े आराम से सूटकेस पर दोनों टांगे फैला कर बैठ गई थी और अपने बेटे को अपनी चूत दिखा कर उसके मुंह में पानी ला रही थी आराधना इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि वीआईपी की सूटकेस होने की वजह से उसकी सूटकेस पर उसकी वजन का कोई भी असर पड़ने वाला नहीं था,,,,, इसलिए वह निश्चिंत होकर अपनी टांगे पसार कर बैठी थी संजू तो अपनी मां की चूत देखकर एकदम मदहोश हो गया,,, उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसे क्या करना और वह तुरंत अपनी घुटनों के बल ही आगे बढ़ा और अपनी मां की मोटी मोटी जांघों पर अपनी हथेली रखकर उसकी लप-लपाती हुई चूत पर अपने होंठ रख कर से चाटने शुरू कर दिया संजू पागलों की तरह अपनी मां की चूत को चाट रहा था उसमें मदन रस भरा हुआ था जिसे वह अपनी जीभ से चाट कर गले के नीचे उतार रहा था अपने बेटे की हरकत पर आराधना गहरी गहरी सांस लेते हुए सिसकारी छोड़ रही थी दोनों पूरी तरह से मस्त हो चुके थे संजू का लंड पूरी तरह से तैयार था अपनी मां की चूत में जाने के लिए और वह धीरे से अपने होठों को अपने मां की चूत से अलग किया और अपने लंड को अपनी मां की चूत में डालने की तैयारी करने ही वाला था कि दरवाजे पर दस्तक होने लगी,,,,,,, दरवाजे पर दस्तक की आवाज को सुनकर दोनों एक दूसरे को देखते हुए यह सोचने लगी कि शायद दरवाजे पर मोहिनी है इसलिए दोनों निश्चिंत हो गए और दोबारा संजू अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां की चूत की तरफ़ आगे बढ़ने लगा लेकिन फिर से दस्तक की आवाज हुई और आवाज आई,,,,

संजू अपनी मां की चूत में डालने की तैयारी में

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दरवाजा खोल,,,,

(इतना सुनते ही दोनों एकदम से घबरा गए)
 
कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था गांव जाने की तैयारी में सारी पैकिंग हो चुकी थी और ऐसे में मोहिनी अपनी सहेलियों से मिलने के लिए कमरे से बाहर चली गई थी और मां बेटे दोनों एकांत पाकर एक दूसरे से बात करते हुए ही मदहोश होने लगे और एक दूसरे के साथ चुंबन का आनंद लेते हुए एक दूसरे की आंखों से खेलने लगी संजू और आराधना अपने मन में यही सोचे कि गांव जाने के बाद ना जाने ऐसा मौका मिले ना मिले इसलिए इसी समय चुदाई का आनंद लूट लेना चाहते थे और इसीलिए संजू अपनी मां को सूटकेस पर बिठाकर उसकी दोनों टांगों को खोल चुका था और उसकी रसीली फूली हुई चूत में अपने लंड डालने की तैयारी कर ही रहा था कि दरवाजे पर दस्तक होने लगी दरवाजे पर हो रही दस्तक की आवाज सुनकर तो पहले दोनों मां बेटों को बिल्कुल भी चिंता नहीं हुई क्योंकि उन्हें ऐसा ही लग रहा था कि दरवाजे पर मोहिनी होगी लेकिन बाहर से आ रही आवाज को सुनकर बाद उन्हें एक दम से चौंक गए थे एकदम से हड़बड़ा गए थे,,,, संजू तुरंत उठ कर खड़ा हो गया और अपने पेंट को पहन कर अपनी स्थिति को सामान्य करने लगा,,, और आराधना की भी हालत खराब हो गई थी वह तुरंत खड़ी होकर अपने ब्लाउज का बटन बंद करके अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके कुर्सी पर बैठ गई थी क्योंकि दरवाजे के बाहर जो शख्स खड़ा था वह अशोक था आराधना का पति संजू का बाप जो कि महीनों बाद उसके घर पर आया था,,,,,।

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रंग में भंग पड़ गया था राजू चाहता तो दरवाजा खोले बिना अपनी मां की चुदाई करने के बाद ही दरवाजा खोलता लेकिन वह कुछ सोच नहीं पाया था और अपने पापा की आवाज सुनकर एकदम से घबरा गया था लेकिन जैसे-जैसे उसकी स्थिति सामान्य हुई उसे लगने लगा कि खामखा वह अपने पापा से डर गया था लेकिन फिर भी औपचारिक रूप से आगे बढ़कर दरवाजा खोल दिया दरवाजा खुलते ही अशोक लगभग लड़खड़ाते हुए कमरे में दाखिल हुआ और कमरे में शराब की दुर्गंध फैल गई,,,,, अपने पति की स्थिति को देखकर कुर्सी पर बैठी हुई आराधना थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली और वैसे तो गुस्सा उसे इस बात का ही था कि गलत समय पर उसका पति घर पर आया था अगर कुछ देर बाद आता तो भी उसका काम बन जाता उसके बेटे का लंड उसकी चूत की गर्मी को शांत कर देता लेकिन ऐसा हो नहीं पाया था इसलिए आराधना सहज रूप से थोड़ा गुस्से में थी और बोली,,,।

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इतने महीनों बाद घर पर आए तो वह भी शराब पीकर तुम्हें शर्म नहीं आती,,,,

शर्म तो मुझे नहीं तुम दोनों को आनी चाहिए हरामजादी,,,, पूरे बाजार में कमर में हाथ डालकर गाड़ी पर बैठकर घूम रहे हो तुम दोनों समझ में नहीं आता कि तुम दोनों मां-बेटे हो कि प्रेमी प्रेमिका,,,,

यह क्या बकवास है,,,,( अपने बाप के मुंह से इस तरह की बात सुनकर संजू गुस्सा करते हुए बोला और उसकी बात सुनकर अशोक लगभग लगभग उसे डांटते हुए बोला)

चुप कर मादरचोद,,,, तेरे से बात नहीं कर रहा हूं मैं,,,,(तभी उसकी नजर पैकिंग किए हुए सामान पर गई और वह कुटिल मुस्कान अपने चेहरे पर लाते हुए बोला)

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ओ,,हो,,,, कहां जाने की तैयारी हो रही है हनीमून पर गजब है एक बेटा अपनी मां को हनीमून पर ले जा रहा है,,,

क्या बकवास कर रहे हैं आप तुम्हें कुछ समझ में आ रहा है कि क्या कह रहे हो,,,,

मुझे सब समझ में आ रहा है कि मैं क्या कह रहा हूं हरामजादी तु एकदम रंडी हो गई है,,,,

खबरदार जो तुमने मम्मी को गाली दी तो मैं भूल जाऊंगा कि तुम मेरे बाप हो,,,

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क्या बात है मम्मी को गाली दी तो या माशूका को गाली दे दो,,,,,

(अशोक की बातों को सुनकर आराधना के तन बदन में आग लग रही थी वह क्रोधित हो रही थी वह चित्र से जानती थी कि उसके और उसके बेटे के बीच किस प्रकार का रिश्ता है लेकिन अपने पति के मुंह से अपनी और अपने बेटे के बारे में इस तरह की बातें सुनकर उसे गुस्सा आ रहा था वह नहीं चाहती थी कि उन दोनों के बीच जो कुछ भी चल रहा है वह किसी समाज को पता चलेगा कोई अपने मुंह से बताएं इसलिए अपने पति की बात उसे एकदम कड़वी लग रही थी वह एकदम गुस्से में थी और अशोक था कि अनाप-शनाप बक रहा था,,,)

मैं देख रहा हूं मां बेटे दोनों कैसे चिपक कर पूरे बाजार में घूमते फिर रहे हैं लगता ही नहीं है कि मां बेटे हैं तभी तो मैं कहूं कि इस रंडी को मेरी जरूरत क्यों नहीं पड़ रही है क्यों मुझे बुला नहीं रही है अब पता चला,,,, नया लंड मिल गया है और वह भी एकदम जवान तभी तो अपनी चूत की प्यास बुझा रही है,,,, मेरे लंड से तो इसे पूरा ही नहीं पड़ता था,,,,।

(अपनी मां के बारे में अपने पापा के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर संजू एकदम क्रोधित अवस्था में अपने पापा को तमाचा जड़ दिया इतने पर एकदम से हड़बड़ा कर आराधना खड़ी हो गई लेकिन वह कुछ कर सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी अपने बाप को तमाचा मार कर संजू बोला,,,)

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तुम्हें समझ में आ रहा है कि कितना गंदा लांछन लगा रहे हम दोनों पर कुछ समझ में आ रहा है,,,,,(संजू किसी भी तरह से अपने आप अपनी मां के बीच के नाजायज रिश्ते को दुनिया वालों से अपने वालों से छुपाना चाहता था इसलिए वह इस तरह का बर्ताव कर रहा था कि मानो उसके और उसकी मां के बीच किसी भी प्रकार का नाजायज संबंध नहीं है)

मादरचोद तूने मुझ पर हाथ उठाया,,,,

यह मादरचोद मादरचोद क्या लगा रखा है,,,,, समझ में आता है कि मादरचोद किसे कहते हैं,,,,,

कहने दे संजू कहने दे शायद मादरचोद का मतलब यह जानता तू जानना चाहता है कि हम दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता है,,,,,,,,, तू तो अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ कर चला गया सब कुछ छोड़ कर चला गया और बाहर रंडियों के साथ मजा लेने लगा,,,,,

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हां तो

हुआ तो एकदम ठंडी औरत है मुझे गर्म होना चाहिए इसलिए मुझे तेरे साथ सोने में मजा नहीं आता और मैं बाहर रंडियों के साथ मजे उड़ाता हूं,,,,

हां अब आया ना असलियत पर यही तेरी असलियत है और तेरी असलियत जानने के बाद मैं भी सोचने लगी की मैं क्यों सती सावित्री बनकर अपनी जिंदगी को खराब करो और जानता है फिर मैंने क्या किया,,,,,

(अशोक नशे की हालत में आराधना की तरफ देख रहा था और आराधना गहरी गहरी सांस ले रही थी वह थोड़ा गुस्से में जरूर थी लेकिन अपने होशो हवास में थी अच्छी तरह से जानती थी कि वह क्या कह रही है क्या कर रही है और वह अपने पति के सामने ही अपने बेटे का हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचा और उसे अपनी बाहों में लेकर उसके होठों पर अपने होंठ रख कर चुंबन करने लगी यह देखकर अशोक की आंखें फटी की फटी रह गई वह तो सिर्फ साफ कर रहा था लेकिन आज अपनी आंखों से देख रहा था वह कुछ समझ पाता इससे पहले ही संजू भी अपने बाप को अपनी और अपनी मां की असलियत बताते हुए अपने दोनों हाथों को साड़ी के ऊपर से उसकी गांड पर रखकर जोर जोर से दबाते हुए उसके होठों का रस पीने लगा,,,, क्रोधित अवस्था में भी आराधना पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी क्योंकि आज अपने पति के सामने हुआ है अपनी असलियत उसे दिखाते हुए अपने बेटे के साथ गंदी हरकत कर रही थी और संजू भी पूरी तरह से अपनी मां को अपनी आगोश में लेकर उसकी बड़ी बड़ी गांड को जोर जोर से दबा रहा था और अपने बाप के सामने ही धीरे-धीरे उसके साड़ी ऊपर करके उसकी नंगी गांड को अपने बाप की आंखों के सामने ही जोर जोर से दबा रहा था पागलों की तरह दोनों एक दूसरे से प्यार कर रहे थे कुछ देर चुंबन का मजा देने के बाद आराधना बोली,,,,।

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देख लिया हरामि मेरे और मेरे बेटे के बीच किस तरह का रिश्ता है तुझे अपनी मर्दाना ताकत पर बड़ा घमंड था ना तो अगर मेरे बेटे का लंड देखेगा तो शर्म से पानी पानी हो जाएगा दिखाऊं तुझे,,,, मादरचोद,,,(आराधना आज अपनी असलियत पर उतर आई थी आज उसे अपने पति का बिल्कुल भी डर नहीं था बिल्कुल भी खौफ नहीं था वह अपने पति को अपने बेटे के सामने लज्जित कर देना चाहती थी और ऐसा करने से संजू कि उसे रोकने वाला नहीं था वाली अपने बाप की तरफ देखकर गुस्से में मुस्कुरा भी रहा था देखते ही देखते आराधना अपने घुटनों के बल बैठ गए और अपने पति की तरफ देखते हुए अपने बेटे की पेंट की बटन खोलने लगी यह देखकर अशोक को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करेगा तो पूरी तरह सदमे में था उसे बिल्कुल भी होशो हवास नहीं था और अपने पति के सामने ही आराधना अपने बेटे की पेंट घुटनों तक सरका कर उसके मोटे तगड़े लंबे लंड को जो कि अभी भी पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था उसे हाथ में पकड़ लिया और उसे हीलाना शुरू कर दी अशोक पहली बार,,, इस तरह के मोटे तगड़े और लंबे लंड को देख रहा था इसलिए वो और ज्यादा आश्चर्य में था,,,,, अपनी बीवी को अपने ही बेटे का लंड हिलाते यह देखकर अशोक थोड़ा सदमे से बाहर आया और बोला,,,।

यययय,,, क्या कर रही हरामजादी अपने ही बेटे का,,,,

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हां तो किसका तुझे बहुत घमंड था अपने लंड पर जो कि एकदम छोटा है तुझे लगता था कि तेरे साथ चुदवाकर ही मुझे मजा आएगा,,,,ना,,, इसलिए तू ज्यादा मेरे साथ नाटक करता था ना देख ले अपनी आंख से तेरा तो मेरे बेटे के सामने कुछ भी नहीं है तू तो 1 मिनट में ही ढेर हो जाता था ना मेरा बेटा तो घंटों तक पेलते रहता है,,,,।

तततत,,,,, तुझे शर्म नहीं आ रही है ऐसा करते हुए,,,,

कैसी शर्म और क्यों आएगी पहले तो आती थी लेकिन अब बिल्कुल भी नहीं आती तूने तो पहले से ही हम दोनों के बीच गलत रिश्ते का इल्जाम लगा दिया था जब जब संजू मुझे बचाने के लिए आता था तो हम दोनों के बीच गलत रिश्ते का इल्जाम लगाकर गाली देता था ना तेरे लगाए गए एग्जाम का ही नतीजा है कि मैं आज अपने बेटे के साथ खुश हूं तुझे क्या लगा था तेरे जाने के बाद हमें तड़प तड़प कर मर जाऊंगी तू बाहर रंडी औरतों से आई याद करते रहे और मैं बिस्तर पर करवटें बदलते रहु ऐसा बिल्कुल भी नहीं हो सकता हरामजादे,,,,(आराधना अपने बेटे के लंड को पकड़ कर हिला रही थी वह अपने पति से बात भी कर रही थी लेकिन संजू अपने बाप को और ज्यादा लज्जित करने के लिए उसके सर पर हाथ रख कर उसे अपने लैंड की तरफ बढ़ा रहा था और इशारों में उसे अपने मुंह में लेने के लिए कर रहा था जो कि गुस्से में आराधना अपने पति से बात किए जा रही थी उसे बुरा भला कह रहे थे और बात हुई बातों में संजू अपने लंड को उसके होठों पर लगा दिया जिसे आराधना भी अपने होठों को खोल कर उसे अपनों में लेकर चूसना शुरू कर दिया देखकर अशोक एकदम हैरान हो गया और उसके अंदर भी गुस्सा आने लगा और संजू अपने बाप के गुस्से को और ज्यादा बढ़ाते हुए अपनी कमर को आगे पीछे करने लगा और अपनी आंखों को बंद करते हुए बोला,,,)

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आहहहह मम्मी बहुत मजा आ रहा है तुम बहुत मजा देती हो तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत मैंने आज तक नहीं देखा पता नहीं इस इंसान को तुम्हारे साथ मजा क्यों नहीं आया ना जाने क्या सोचकर यह तुम्हें छोड़कर रंडी लोग के साथ मजा ले रहा था यह एकदम पागल है बुद्धू है खूबसूरती का इसे पता नहीं है इसे तो यह भी नहीं पता होगा कि इस उम्र में भी तुम्हारी चूत एकदम कसी हुई है बस डालता था और निकालता था इससे ज्यादा इसे और कुछ नहीं आता,,,,,आहहहहह मम्मी पूरा अंदर तक,,,, लो,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना भी अपने पति को जलाने के उद्देश्य से उसके मोटे लंड को पूरा गले तक उतार कर चूसना शुरू कर दी यह देख कर अशोक का पारा सातवें आसमान पर चढ़ने लगा और वह गुस्से में संजू को मारने के लिए आगे बढ़ा और लेकिन संजू भले ही अपनी मां के मुंह में लंड दिया हुआ था लेकिन फिर भी वह पूरी तरह से तैयार था क्योंकि वह जानता था कि उसका बाप इस तरह की हरकत जरूर करेगा और वह गुस्से में उसे मारने के लिए उसके करीब आया,,,, लेकिन पहले से ही तैयार संजू ने उसे धक्का मारा और वह जाकर बिस्तर पर धम्म करके गिर गया अगर बिस्तर ना होता तो वह नीचे गिरता है और उसे चोट लग जाती,,,,, अशोक समझ गया था कि वह नशे में है और संजू उससे ज्यादा मजबूत शरीर का है क्योंकि अभी तक उसने उसके गाल पर तमाचा भी जड़ दिया था और उसे धक्का देकर गिरा भी दिया था और अशोक उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं पाया था इस तरह से वह पहले भी अशोक को मार चुका था इसलिए अशोक समझ गया कि संजू से वह जीत नहीं पाएगा और इसलिए उसके पास देखने किसी और कोई रास्ता नहीं था,,,, अशोक हैरान था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है वह तो सिर्फ उन दोनों पर शक कर रहा था लेकिन उसका शक पूरी तरह से हकीकत में खुद उन दोनों ने ही बदल दिया था अशोक साफ तौर पर देखा था कि उसकी बीवी जो इस समय बला थी खूबसूरत लग रही थी,,,, उसकी खूबसूरती देखकर अशोक खुद हैरान था क्योंकि उसके साथ उसकी बीवी इस तरह का बर्ताव खुले तौर पर बिल्कुल भी नहीं करती थी और हमेशा डरी सहमी रहती थी लेकिन इस समय तो वह पूरी तरह से बदल चुकी थी और वह देख रहा था कि उसकी बीवी निडर और एकदम बेशर्म औरत की तरह अपने बेटे के लंड को ही गले तक लेकर मजे लेकर चूस रही थी,,,, और ऐसा उसने उसके साथ कभी भी नहीं करती थी,,,,,

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अशोक के सामने जो कुछ भी हो रहा था उसे देखकर अशोक को समझ में नहीं आ रहा था कि वह सपना देख रहा है या हकीकत में हो रहा है ऐसा उसे लग रहा था कि जैसे वह पोर्न मूवी देख रहा हूं क्योंकि इस तरह सेवा पोर्नमूवी में ही देखा था संजू बड़े मजे लेकर अपनी मां के मुंह में लंड डालकर अपनी कमर आगे पीछे करते हुए अपनी आंखों को बंद करके उस अनुभव में पूरी तरह से खो चुका था उन दोनों मां-बेटे को बिल्कुल भी शर्म नहीं था कि उसके सामने उसका पति उसका बाप बैठा है,,,,,

एक बाप होने के नाते उसे इस तरह का नजारा देखने में शर्म महसूस हो रही थी क्योंकि उसके सामने कोई गैर मर्द और औरत नहीं बल्कि उसकी बीवी और उसका बड़ा बेटा ही थे दोनों अपने ही बाप के सामने अपने ही पति के सामने पोर्न मूवी की तरह मजे ले रहे थे अशोक का मन कर रहा था कि वहां से उठकर चला जाए लेकिन इस तरह के गरमा-गरम दृश्य को देखकर ना जाने क्यों उसके पैर एकदम से जम गए थे क्योंकि आज तक उसने अपने बीवी को इस रूप में खुद अपने साथ नहीं देखा था और आज तक उसकी आंखों के सामने इतना मोटा तगड़ा लंबा लंड नहीं आया था जिसे देख कर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी कुछ देर बाद इसी तरह से मजा लेते हुए संजू अपने लंड को अपनी मां के मुंह में से बाहर निकाला और उसकी बांह पकड़कर उसे उठाते हुए खड़ी कर दिया और उसे बाहों में लेकर अपने बाप की तरफ देखते हुए बोला,,,,।

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हम दोनों के बीच तुम ही गलत रिश्ते का इल्जाम लगाते थे ना उसी में मुझे ऐसा लगता था कि तुम नशे में किस तरह का अनाप-शनाप बक रहे हो लेकिन तुम्हारी उस तरह के इल्जाम में ही मुझे ऐसा करने पर मजबूर कर दिया क्योंकि तुम्हारी नजर तो अंधी हो गई थी तुम देख नहीं सकते थे कितनी खूबसूरत बीवी होने के बावजूद भी तुम बाहर मुंह मारते फिरते रहते हो मैंने अपनी मां की खूबसूरती को देखा उसके बदन की बनावट से मदहोश हो गया और फिर जो एक मर्द को औरत के साथ करना चाहिए था वही मैंने मम्मी के साथ भी किया और मम्मी इससे खुश भी है देखना चाहते हो तुमसे ज्यादा सुख मै देता हूं मम्मी को,,,,

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तुम दोनों के बीच जो कुछ भी चल रहा है मैं सबको बता दूंगा तुम दोनों को बदनाम कर दूंगा,,,

हमें बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तुझे जैसे शराबी का कोई विश्वास नहीं करेगा जो कि अपने परिवार को इतने महीनों से छोड़कर कोई खबर अंतर भी नहीं पूछा और बाहर दूसरी औरतों के साथ गुलछर्रे उड़ाता फिरता है,,,।

(अशोक इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि अगर इस बात को वह बाहर किसी से कहेगा भी तो लोग उसे ही भला बुरा कहेंगे क्योंकि कोई भी उसकी बात पर यकीन नहीं करेगा क्योंकि उसका खुद का चरित्र इतना गिरा हुआ है कि सब जानते हैं कि यह जो भी कहता है उसमें बिलकुल भी सच्चाई नहीं होती और इस तरह से अगर अपने ही बीवी और बच्चे के बारे में बाहर किसी से बात कहेगा तो लोग उसे ही भला बुरा कह कर भगा देंगे,,,,)

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छोड़ो ना मम्मी इन सब बातों को,,,, अभी हमें तैयार भी होना है,,,, तुम्हें पता है,,,(अपने बाप की तरफ देख कर) हम दोनों गांव जा रहे हैं मामा की लड़की की शादी है,,,,

क्या,,, लेकिन मुझे तो पता ही नहीं,,,

क्योंकि तुम्हारी जरूरत भी नहीं है तुम्हारे बारे में मैंने भैया से सब कुछ बता दिया हूं और उन्होंने कहा है कि उस हरामजादे को एक बार मेरी आंखों के सामने लेकर आना उसकी हड्डी पसली एक कर दूंगा,,,,,

जाने दो ना मम्मी अपना काम करते हैं,,,, आज हम दोनों के पास मौका है इस आदमी से बदला लेने का इस आदमी ने तुम को ठुकरा कर दिया था ना तुम आज दिखा दो कि इसके बिना भी जिंदगी कितने मजे से जी सकती हो,,,

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तू सच कह रहा था इसे अपनी मर्दाना ताकत पर घमंड था जो कि बिल्कुल भी मर्द नहीं है देखना चाहेगा तो मर्द किसे कहते हैं देखना चाहेगा मेरे बेटे की ताकत को,,,,,

(आराधना का इतना कहना था कि संजू तुरंत अपनी मां की साड़ी को एकदम कमर तक उठाकर अपने बदन से सब डाल दिया और उसे तुरंत उठा कर अपनी गोद में उठा लिया दोनों टांगे आराधना अपने बेटे की कमर पर लपेट लें और संजू बिना किसी सहारे की अपनी मां को गोद में उठाए हुए अपने हाथ को नीचे की तरफ लाया और अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां की चूत के छेद पर रख कर उसे अंदर की तरफ डालना शुरू कर दिया यह देखकर अशोक एकदम हैरान हो गया था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह हकीकत में सब कुछ देख रहा है क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बीवी का वजन कुछ ज्यादा था,,, लेकिन संजू बिना हड़बड़ाए बेझिझक अपनी मां को गोद में उठाए हुए उसे चोदना शुरु कर दिया था अशोक यह नजारा देखकर अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और बिस्तर से उठ कर खड़ा हो गया उसकी आंखें फटी की फटी थी और मुंह खुला का खुला रह गया था अशोक पूरी तरह से आश्चर्यचकित हो गया था संजु अपनी मां को गोद में उठाए हुए अपनी कमर हिला कर अपनी मां को चोद रहा था और आराधना अपने पति की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी और बोल रही थी,,,,

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इसे कहते हैं असली मर्द हरामजादे इसे कहते हैं मादरचोद तुझे शायद मादरचोद का मतलब समझ में नहीं आ रहा था और तू हमेशा मेरे बेटे को मादरचोद कह रहा था ना तेरी बदौलत ही मेरा बेटा आज मादरचोद बन गया है वह देख कितना अच्छा मादरचोद ना मोटा तगड़ा लंड मेरी चूत में डाल कर मेरा पानी निकाल देता है मुझे तो तेरे साथ बिल्कुल भी मजा नहीं आया था,,, लेकिन मेरे बेटे ने मुझे एहसास दिलाया की चुदाई क्या होती है,,,,,आहहह आहहहह बेटा मुझे जमकर मेरी चुदाई कर,,,, बता दे इस हरामजादे को की चुदाई क्या होती है,,,,आहहहह आहहहह मेरे बच्चे तेरा लंड बहुत मोटा है रे मेरे बच्चेदानी तक जा रहा है,,,,आहहहरहह

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तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मम्मी मैं इस हारामी के सामने तुम्हारी ऐसी चुदाई करूंगा कि यह रंडी के पास जाने में भी शर्म महसूस करेगा,,,,(इतना कहने के साथ ही संजु अपनी मां को गोद में उठाए हुए ही दिवार के पास पहुंच गया और दीवार से सटाकर उसे जमकर चोदना शुरु कर दिया,,,,, अशोक फटी आंखों से सब कुछ देख रहा था बड़ी बेरहमी से उसका बेटा अपनी ही मां को चोद रहा था और उसके हर एक धक्के पर उसकी बीवी गरमा गरम सिसकारी ले रही थी अशोक समझ गया था कि उसका बेटा अपनी मां को पूरी तरह से संतुष्टि दे रहा है वह ज्यादा देर तक खड़े रहना उचित नहीं समझ रहा था लेकिन फिर भी वह खड़ा था,,,,, इस समय अशोक को अपनी बीवी बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी ऐसा लग रहा था कि उसके जाने के बाद उसकी खूबसूरती में निखार आ गया था और वह अपने बेटे की गोद में साड़ी कमर तक उठाए हुए जिस तरह से अपनी चूत में लंड ले रही थी वह काबिले तारीफ थी इस समय अशोक यही सोच रहा था क्योंकि इस तरह से उसने अशोक के साथ बिल्कुल भी बर्ताव नहीं की थी इतना खुलापन उसके साथ बिस्तर में कभी नहीं लाई थी शायद यह अशोक की ही गलती थी और इसी बात को याद दिलाते हुए एहसास कराते हुए आराधना अपनी चूत में अपने बेटे का लंड लेते हुए बोली,,,,,,)

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अशोक तेरे साथ मैंने क्या कुछ नहीं की थी तेरे साथ जीवन बिताने की कसम खाई थी तेरी थी इज्जत करती थी कि मैं खुद तेरी पूजा रन बन गई थी लेकिन तूने मेरी जरा भी इज्जत नहीं की मेरी कदर नहीं की दूसरी औरतों की तुलना में तूने मुझे बहुत दुख दिया बिस्तर पर आकर तुम मुझे प्यार से समझाया होता मेरे साथ नरमी दिखाया होता तो शायद आज जो मैं अपने बेटे के साथ कर रही उसे सुख दे रही हूं यही सुख में तुझे दे दी लेकिन तू नीच निकला तो एकदम गिरा हुआ निकला मेरा साथ देने की जगह तो मुझे छोड़कर दूसरी औरतों के संगत में चला गया इसी का बदला मैं तुझे दे रही हूं,,,,,आहहहह आहहहह संजू मेरा होने वाला है मेरा निकलने वाला है संजू,,,,।

(आराधना चरम सुख के बेहद करीब पहुंच गई थी लेकिन जानबूझकर अपने पति के सामने झड़ने का नाम ले गई थी वो झड़ने वाली थी और अपने मुंह से यह बता रही थी जो कि आज तो कुछ नहीं कभी भी यह एहसास नहीं की थी और ना ही अपने पति को कुछ बोल ही थी अशोक अपनी बीवी के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर शर्म से पानी पानी हो जा रहा था अब उसके लिए वहां खड़े रहना गवारा नहीं था और वह तुरंत कमरे से बाहर निकल गया और आराधना असीम शांति अपने अंदर लिए हुए अपने बेटे के लंड के धक्के को पूरी तरह से महसूस करते हुए झढ़ने लगी और थोड़ी देर बाद संजू भी अपना गरम लावा निकाल दिया आराधना को आज एकदम हल्का पर महसूस हो रहा था सुबह अपने पति के सामने अपने बेटे से चुदवाया कर अपनी बेइज्जती का अपने अपमान का अपने पति से बदला ले चुकी थी,,,,,।

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शाम को तैयार होकर संजू आराधना और मोहिनी तीनों ऑटो पकड़ कर साधना के घर की तरफ निकल गए और जाने से पहले स्कूटी को घर में रख दी थी ताकि कोई नुकसान ना कर सके और थोड़ी देर में तीनों साधना के घर पहुंच गए और वहां से साधना और मनीषा भी ऑटो में बैठकर ट्रैवल एजेंसी के पास पहुंच गई वहां पहुंचते पहुंचते हैं अंधेरा हो चुका था,,,, साधना में सलवार और सूट पहनी थी कसी हुई सलवार में साधना की गांड को ज्यादा ही बड़ी लग रही थी जिसे देखकर संजू के मुंह में पानी आ रहा था और ऑटो में उसी ने बताई थी कि सफर के दौरान वह हमेशा साड़ी की जगह सलवार सूट पहनना पसंद करती है,,,,, ट्रैवल एजेंसी से थोड़ी ही दूरी पर बस खड़ी थी लोग धीरे-धीरे अपना सामान रखकर उस पर चल रहे थे अंधेरा हो चुका था इसलिए मोहिनी और मनीषा का वहां ज्यादा देर तक ठहरना ठीक नहीं था,,,,, इसलिए संजू ने मनीषा और मोहिनी को दोनों को घर जाने के लिए बोला और जाते-जाते यह हिदायत भी दिया कि,,, दोनों आराम से रहना और मिल पाटकर काम कर लेना,,,,, मनीषा से संजू की दूरी बर्दाश्त नहीं हो रही थी इसलिए उसकी आंखों में आंसू भर आए थे जो कि जैसे तैसे करके वह अपने आप को संभाल लेती क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि किसी को इस बात का आभास हो कि उसके और संजू के बीच में कुछ चल रहा है,,,,

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संजू कुछ ट्यूशन की बात करने के बहाने उसे बस के पीछे लेकर गया जहां पर कुछ ज्यादा दे रहा था वहां पर जाते ही वह मनीषा के होंठों पर अपने होंठ रख कर से चुंबन करने लगा मनीषा पूरी तरह से तड़प उठी और कसके संजू को पकड़ लि और संजू ने भी उसे अपनी बाहों में भर कर उसकी गोल गोल गाना पर अपना हाथ रख कर दबाते हुए उसके लाल-लाल होठों का रसपान करने लगा समय कुछ ज्यादा नहीं था किसी भी वक्त मोहिनी या उसके घर का कोई भी उधर आ सकता था इसलिए वह उसे ना चाहते हुए भी अपनी बाहों की कैद से आजाद कर दिया,,,,, मोहिनी की आंखों में आंसू भर आए थे जिसे खुद संजू नहीं अपने रुमाल से साफ करते हुए उसे धैर्य रखने के लिए बोला और फिर वह वापस अपनी जगह पर आकर दोनों को एक ऑटो में बैठा कर घर की तरफ रवाना कर दिया,,,।

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आराधना और संजू मोहिनी को लेकर पहले अपनी मौसी के घर गए और वहां से साधना और मनीषा को साथ लेकर बस स्टैंड पर सही समय पर पहुंच गए थे धीरे-धीरे बस के पैसेंजर राते जा रहे थे और अपना-अपना सामान बस में रखकर अपनी सीट पर बैठते चले जा रहे थे,,, अंधेरा हो चुका था इसलिए मोहिनी और मनीषा का वहां ठहरना उचित ना समझते हुए संजू ने उन्हें जाने के लिए बोल दिया था और वह दोनों थोड़ी देर रुक कर वहां से चली गई थी,,,, बस के चलने में अभी भी बहुत समय था,,,, बस मुख्य सड़क के किनारे खड़ी थी ठीक उसके सामने ही ढाबा था कुछ लोग ढाबे पर बैठकर चाय नाश्ता कर रहे थे,,,, क्योंकि उन्हें भी पता था कि बस के निकलने में अभी समय है इसलिए निश्चिंत होकर भर लोग अपना समय व्यतीत करते हुए चाय नाश्ता कर रहे थे,,,, संजू और साधना के पास कुछ ज्यादा समय नहीं था कुल मिलाकर चार बैग थे जो कि अभी भी उन लोगों के पास ही नीचे जमीन पर रखे हुए थे और उसके चारों तरफ तीनों खड़े होकर बातें कर रहे थे संजू की नजर बार-बार अपनी मौसी की सलवार सूट पर चली जा रही थी वह मन ही मन में उत्तेजित हुआ जा रहा था क्योंकि सलवार सूट में उसकी मौसी की गांड कुछ ज्यादा ही गदराई हुई नजर आ रही थी,,,,,,

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ना जाने कभी अब बस चलने को तैयार होगी,,,(आराधना दोनों हाथों को बात कर अपनी छाती से सटाते हुए बोली,,)

सारे यात्री आ जाएंगे तभी यह बस निकलेगी क्योंकि बहुत लोग दूर-दूर से आते हैं उन्होंने आने में समय हो जाता है तोबा लोग फोन करके ईत्ला कर देते हैं जब तक सारे यात्री बस में बैठ ना जाए तब तक बस जाएगी नहीं,,,,(संजू अपनी मां को समझाते हुए बोला)

तभी तो दिमाग खराब हो रहा है इससे अच्छा तो ट्रेन का रिजर्वेशन मिल गया होता तो अच्छा होता,,,(साधना भी अपने चारों तरफ नजर घुमाते हुए बोली,,,,,, बात ऐसी थी कि साधनों को बड़ी जोरों की पैसाब लगी हुई थी और वह अपने चारों तरफ नजर घुमाकर पेशाब करने के लिए सुनसान जगह ढूंढ रही थी पेशाब की तीव्रता इतनी तेज थी कि वह बार-बार अपने पैर को एकदम से जमीन पर पटक दे रही थी,,,,)

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बात तो तुम सही कह रही है मौसी तकिन कर भी क्या सकते हैं शादी का सीजन चल रहा है इसलिए रिजर्वेशन मिल पाना मुश्किल हो गया इसीलिए तो बस की टिकट निकाले हैं और वैसे भी बस से जाने में भी कोई दिक्कत नहीं आएगी आराम से हवा पानी लेते हुए पहुंच जाएंगे यह तो सिर्फ यहां से दिक्कत हो रही है एक बार चल पड़ी तो चल पड़ी,,,,

बात तो तू ठीक ही कह रहा है संजू,,,, गर्मी भी बहुत है,,,,

सो तो है मम्मी लेकिन कर भी क्या सकते हैं,,,,

(इसी तरह से बातें करते करते समय व्यतीत होने लगा संजू अपनी मौसी को सलवार सूट में देखकर उत्तेजित तो हो जा रहा था लेकिन वह इस बात से थोड़ा खफा था कि अगर उसकी मौसी सलवार सूट की जगह साड़ी पहन कर आती तो शायद थोड़ी सी छेड़खानी हो जाती उसकी चूत से,,,,,,,, एक तरफ संजू अपनी मौसी को देखकर उत्तेजित भी हो रहा था उसके सलवार सूट से थोड़ा नाराज भी था लेकिन दूसरी तरफ साधना के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी अगर वह इस समय पेशाब करने का निर्णय नहीं ले पाती तो कुछ ही देर में उसकी चूत से पेशाब की धार फूट पड़ती और फिर दिक्कत हो जाती है और इसी दिक्कत से बचने के लिए वह संजू से बोली,,,,)

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संजु अभी बस के चलने में थोड़ा समय है,,,, क्यों ना सामने के ढाबे से कुछ वेफर वगैरा ले लिया जाए ताकि रास्ते में खाते हुए समय व्यतीत कर लेंगे,,,

इतना नाश्ता तो है ना दीदी,,,,

अरे वह तो खाना है मैं पड़ी के की बात कर रही हूं,,,,

हां मम्मी मौसी ठीक कह रही हैं खाना तो इतनी गर्मी में खराब हो जाएगा बस कल शाम को जाकर पहुंचेगी रात भी हो सकती है इसलिए कुछ तो चाहिए ना रास्ते के लिए,,,,

ठीक है जाओ लेकिन जल्दी आना,,,,

ठीक है मम्मी तुम समान का ख्याल रखना हम जल्दी आते हैं,,,,।

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(इतना कहने के साथ ही संजू और उसकी मौसी दोनों सड़क के दाएं बाएं देखकर अच्छे तरीके से सड़क पार कर के सामने ढाबे पर पहुंच गए जहां पर थोड़ी भीड़ बढ़ती आराधना उन दोनों को देखती रही लेकिन भीड़ भाड़ होने की वजह से दोनों भीड़ में कहीं खो गए आराधना को दोनों नजर नहीं आ रहे थे,,,, आराधना अपनी आंखों से अपनी बड़ी दीदी को अपने जवान बेटे से चुदवाते हुए देख चुकी थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बेटे संजू और उसकी बड़ी बेटी के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो चुका है दोनों एक दूसरे से मजा लेते हैं,,,,, यह सब जानने के बावजूद भी आराधना के मन में किसी भी प्रकार का शंका नहीं हो रहा था,,,, वैसे भी इस जगह पर आराधना के लिए शक करने जैसा कुछ भी नहीं था अगर कोई और जगह होती तो साधना और अपने बेटे को एकांत में देखकर उसे जरूर शक होता कि दोनों के बीच जरूर कुछ ना कुछ शुरू हो गया होगा लेकिन इस समय मुख्य सड़क पर भीड़ भाड़ में ऐसा कुछ भी संभव नहीं था इसलिए वह निश्चित थी,,,,,

सड़क पार करते हुए ही संजू अपने मन की बात को अपनी मौसी से बताते हुए बोला,,,

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मौसी तुम सलवार सूट में एकदम पटाखा लग रही हो तुम्हारी गांड को ज्यादा ही बड़ी-बड़ी दिख रही है मेरा तो लंड खड़ा हो गया,,,

संभाल कर रख बेटा हर जगह शुरू नहीं हो जाने का वैसे मेरी तारीफ करने के लिए शुक्रिया,,,

तुम तारीफ के ही लायक हो मौसी वैसे कोई और जगह होती तो मैं सच में तुम्हारी चुदाई कर दिया होता लेकिन इस समय मैं मजबूर हूं और हां तुम साड़ी पहनकर क्यों नहीं आई साड़ी पहन कर आई होती तो शायद बस के अंदर हम दोनों थोड़ा बहुत मजा कर सकते थे,,,,

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नहीं नहीं बस के अंदर कुछ भी नहीं वैसे भी तेरी मां भी है साथ में समझा हम दोनों के लिए होते तो पूरे सफर पर चुदाई का मजा लेते चलते लेकिन बस में ऐसा कुछ भी मत करना कि तेरी मां को जरा भी शक हो और वैसे भी सफर के दौरान मुझे साड़ी नहीं बल्कि सलवार सूट में ही आरामदायक महसूस होता है इसलिए मैं सलवार सूट पहन कर आई हूं,,,,,

लेकिन तुम्हारी सलवार सूट बहुत खुशी हुई है तुम्हारी गांड तुम्हारी चूची एकदम बाहर निकली हुई नजर आ रही है जिस किसी की भी नजर तुम्हारे पर पड़ रही है सबसे पहले तुम्हारी गांड को ही देख रहे हैं,,,,

देखने दे मेरी गांड देखकर मस्त हो जाएंगे और अपना हाथ से ही लाकर शांत हो जाएंगे उन्हें भी तो पता चलना चाहिए कि उनके बीच से कौन सी हसीना गुजरी है,,,

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बात तो तुम सही कह रही हो मौसी,,,,

(इस तरह की बातें करते हुए दोनों सड़क पार कर चुके थे और ढाबे पर पहुंच चुके थे ढाबे पर पहुंचते ही आराधना कुछ वेफर और स्नेक के पड़ीके खरीद ली और उन पड़ी को को संजू को थमाते हुए इधर-उधर चकर पकर देखने लगी तो अपनी मौसी को इस तरह से इधर उधर देखता हुआ पाकर संजू बोला,,,)

क्या हुआ मौसी इधर उधर क्या देख रही हो,,,

अरे बुद्धू मुझे बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,,

तो कर लो ना इसमें कौन सी बड़ी बात है,,,

अरे पागल कहां कर लूं कहीं अच्छी जगह दिखी होती तो मैं वहीं नहीं कर लेती एक बहाने से तो मैं इधर आई हूं,,,

क्या मौसी पेशाब करने के लिए आना था तो मम्मी को लेकर आ गई होती उन्हें पता चलेगा तो वह क्या सोचेंगी,,,

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अरे उन्हें कैसे पता चलेगा,,,, तू बातों में वक्त बर्बाद कर रहा है और मेरा प्रेशर बढ़ता जा रहा है ऐसा ना हो कि सलवार में ही मेरा पैसाब छुट जाए,,,

ऐसा बिल्कुल भी मत करना मौसी वरना सफर का मजा किरकिरा हो जाएगा,,,

तभी तो कह रही हूं जल्दी से कोई जगह बता यहां तो सब लोग खड़े हैं,,,,

कोई बात नहीं चलो भाभी के पीछे लेकर चलता हूं,,,

वहां तो बहुत अंधेरा है,,,

तो क्या हुआ उजाले में पेशाब करोगी,,,,

अच्छा चल जल्दी चल,,, इसीलिए तो मैं तुझे लेकर आई हूं तेरी मम्मी के साथ आती तो कोई भी अंधेरे का फायदा उठाते हुए पकड़ लेता और फिर मेरे साथ से तेरी मां की भी चुदाई कर देता,,,

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वैसे भी मौसी तुम चोदने लायक हो,,,,(अपनी छोटी सी मोबाइल की बैटरी जलाकर वह ढाबे के पीछे आगे आगे चलने लगा और पीछे पीछे साधना चलने लगी संजू की बात सुनकर वह बोली)

मैं चोदने लायक हूं तेरी मां तेरी मां को तो कोई आ जाए तो दिन रात चोदते ही रहे,,,,

(अपनी मौसी कि मुझे अपनी मां के बारे में इस तरह की गंदी बातें सुनकर संजू को बिल्कुल भी गुस्सा नहीं आ रहा था बल्कि वह तो मन ही मन उत्तेजित हो रहा था क्योंकि अगर यह बात कोई और कहां होता तो शायद वह गुस्से से आगबबूला हो जाता लेकिन उसकी मां के बारे में अश्लील बातें करने वाली उसकी मां की खुद की सगी बड़ी बहन थी इसलिए वह कुछ बोल नहीं रहा था देखते ही देखते दोनों ढाबे के पीछे पहुंच चुके थे चारों तरफ झाड़ियां झाड़ियां थी और चारों तरफ अंधेरा ही था सिर्फ मोबाइल का टॉर्च जल रहा था जिसने थोड़ा थोड़ा साफ नजर आ रहा था एक अच्छी सी जगह देखकर संजू अपनी मौसी से बोला,,,)

बस मौसी यही कर लो इससे अच्छी जगह कोई और नहीं है,,,,

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ठीक है संजू ले मेरा पर्स पकड़,,,।

(इतना कहने के साथ ही साधना अपने पर्स को संजू को पकड़ते हुए तुरंत अपने सलवार की डोरी खोलने लगी और इस दौरान संजू मोबाइल के टॉर्च से सब कुछ साफ दिख रहा था उसकी आंखों के सामने उसकी मौसी अपनी सलवार की टोपी खोलकर तुरंत अपनी चड्डी सहित उसे घुटनों तक खींचकर तुरंत नीचे बैठ गई और पेशाब की धार मारने लगी उसे इतने जोरो की पिशाब लगी हुई थी कि तुरंत उसकी चूत से सीटी की आवाज आने लगी जिसे सुनकर संजू का धैर्य जवाब दे रहा था उसका लंड अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था वह मोबाइल के टॉर्च में अपनी मौसी की गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड देख रहा था और उत्तेजित हो रहा था थोड़ी ही देर में साधना पेशाब करके खड़ी हो गई हो अपनी सवार को ऊपर करने ही वाली थी कि संजु से रहा नहीं गया और वह तुरंत अपनी मौसी का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचा और से बाहों में लेकर उसके लाल-लाल होठों को चूसना शुरू कर दिया इस दौरान उसने अपने मोबाइल के टॉर्च को बंद कर दिया था ताकि दूर से कोई देख ना सके,,,)

अरे पागल हो गया है क्या थोड़ा तो शर्म कर कहां पर हैं इसका तो लिहाज कर कोई आ गया तो गजब हो जाएगा,,,

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कुछ खराब नहीं होगा मौसी अब ना जाने कब तुम्हारी चूत चोदने को मिले इससे अच्छा मौका मुझे कभी नहीं मिलेगा तुम्हारी गांड में देख कर मुझसे रहा नहीं जा रहा है मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया है देखो तो जरा,,,(इतना कहने के साथ ही संजु अपनी मौसी का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया और साधना भी पूरी तरह से मजा लूटी जब उसका हाथ संजू के लैंड पर जो की पैंट के अंदर पूरी तरह से खड़ा हो चुका था उस पर पड़ा वह उत्तेजना के मारे पेंट के ऊपर से ही संजू के लंड को दबा दीं,,,, उसका इस तरह से लंड को दबाना संजू के लिए आगे बढ़ने का सिग्नल था और संजू इस मौके को गंवाना नहीं चाहता था इसलिए वह तुरंत अपनी मौसी के कंधों को पकड़कर घुमा दिया और उसे घोड़ी बनने के लिए बोल दिया,,,,, सलवार पहले से ही खुली हुई थी इसलिए मौके का फायदा उठाते हुए साधना भी जल्दी से झुक कर अपनी बड़ी बड़ी गांड संजू के सामने परोस दी और संजू बिना मोबाइल की टॉर्च जलाए अंधेरे में ही अपनी मौसी की गांड को दोनों हाथों से पकड़कर टटोल ते हुए अपने लंड को बाहर निकाल लिया और एक हाथ से अपनी मौसी की चूत को टटोलकर उस पर अपने लंड का सुपाड़ा रखकर जोरदार धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड एक बार में ही साधना की चूत में समा गया,,,,,

साधना एकदम उत्तेजना से गदगद हो गई,,,, वह भी काफी दिनों बाद संजू के मोटे तगड़े लंड को अपनी चूत की गहराई में महसूस करके पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि ऐसी जगह पर संजू उसकी चुदाई कर देगा लेकिन जो कुछ भी संजु कर रहा था उसमें साधना को बहुत मजा आ रहा था,,,, संजू के पास ज्यादा समय नहीं था वह अपनी मौसी की कमर पकड़कर बड़ी रफ्तार से अपने मोटे लंड को अपनी मौसी की चूत के अंदर बार कर रहा था,,, साथ ही अपना हाथ आगे बढ़ाकर कुर्ती के ऊपर से ही बड़ी बड़ी चूची को दबा रहा था देखते ही देखते जबरदस्त चुदाई का प्रदर्शन करते हुए संजू अपनी मौसी का पानी निकालते हुए खुद झड़ गया,,,,, संजू अपने लंड को अपनी मौसी की चूत से बाहर निकाल कर हांफते हुए बोला,,,)

सच में मौसी तुम बहुत कमाल हो मजा आ गया,,,(इतना कहते हुए वह अपने लंड को पकड़ कर हीलाते हुए पेशाब करने लगा और साधना अपनी सलवार और चड्डी को एक साथ ऊपर करके अपने सलवार की डोरी बांधने लगी और बोली,,,)

अब जल्दी कर आखिर कर लिया ना अपनी मनमानी,,,, जल्दी हम दोनों को काफी समय हो गया है पता नहीं आराधना क्या सोचती होगी,,,,।

(इतना कहने के साथ ही दोनों वापस ढाबे पर आ गए और साधना पानी की 2 बोतल खरीदने लगी दोनों बोतल को हाथ में लेकर वह दोनों बस की तरफ चल दिए काफी समय से साधना दोनों को देखने की कोशिश कर रही थी लेकिन दोनों दिखाई नहीं देने थे और जैसे ही दोनों दिखाई दिए आराधना के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव में जान आ जाएगी और वह दोनों जैसे ही आराधना के पास पहुंचे आराधना बोली)

कहां देर लगा रही थी कब से बस वाला बोल रहा है कि जो भी सवारी है जल्दी से बैठ जाओ 10 मिनट में चलने वाली है,,,

अरे क्या बताऊं आराधना ढाबा वाला तो लूट मचाया है पानी के बोतल का डबल भाव मांग रहा था इसलिए रिकझिक में देर हो गई,,,, चलो जल्दी से अपना सामान रखते हैं,,,,।

(इतना कहने के साथ ही संजू बस के क्लीनर से बस का कंपार्टमेंट खुलवा कर उसमें सामान रख दिया और फिर तीनों अपने बस की केबिन में जाकर बैठ गए,,, अंदर बैठने के बाद क्लीनर को अपनी बस की टिकट दिखा कर सब कुछ क्लियर कर लिया और फिर केबिन का दरवाजा बंद करके खिड़की को थोड़ा सा खोल दिया था कि हवा आ सके और रात का समय होने के नाते ठंडी ठंडी हवा चल रही थी और थोड़ी देर में बस भी स्टार्ट हो गई तीनों का बस का सफर शुरू हो चुका था,,,)
 
सफर की शुरुआत हो चुकी थी यह सफर बेहद रोमांचक होने वाला था लेकिन इस बात का एहसास उन तीनों को बिल्कुल भी नहीं था रोमांच की शुरुआत तो ढाबे के पीछे ही हो चुकी थी जिसका पूरा फायदा उठाते हुए अंधेरे में अपनी मौसी को पेशाब कराने के लिए संजु ढाबे के पीछे ले गया था, और अपनी मौसी की नंगी गांड देखकर और उसकी चूत से आ रही सीटी की आवाज को सुनकर वह पूरी तरह से कामज्वर में जलने लगा जिसके चलते राजू समय और स्थान का भी ख्याल किए बिना ही मौके का फायदा उठाते हुए ढाबे के पीछे अंधेरे में ही अपनी मौसी को घोड़ी बनाकर पीछे से उसकी चूत में लंड डालकर उसकी गरमा गरम चुदाई कर दिया था और इस चुदाई से साधना भी पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी,,, साधना को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि संजू ऐसे हालात में उसकी चुदाई करेगा वैसे भी वह अपनी सलवार और सूट जो कि बेहद कसी हुई थी उसकी बदौलत उसका प्रभाव संजू पर किस तरह से पड़ रहा है वह अच्छी तरह से समझ गई थीं,,,, अपनी खूबसूरती और कसी हुई सूट सलवार का प्रभाव संजू पर किस तरह से पढ़ रहा है इस बात का अंदाजा तो साधना लगा दी थी लेकिन इस प्रभाव के चलते संजू किस तरह से प्रतिक्रिया करेगा इस बारे में उसे जरा भी अहसास नहीं था और उसी के चलते वह बेफिक्र होकर संजू के साथ ढाबे के पीछे पेशाब करने के लिए गई थी लेकिन वहां पर अपनी मौसी की मत मत जवानी देख कर संजू से रहा नहीं गया और संजू घोड़ी बनाकर उसी जगह पर उसकी चुदाई कर दिया था जिससे वह पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी इस बात को अभी अच्छी तरह से जानती थी कि वह विवाह में जा रही थी और अपने मायके वहां पर इस तरह का मौका उसे बिल्कुल भी मिलने वाला नहीं था क्योंकि विवाह में सभी रिश्तेदार घर में मौजूद होने वाले थे और ऐसे में उन दोनों को एकांत मिल जाए ऐसा बिल्कुल भी नहीं था इसलिए साधना भी अपने भतीजे संजू को बिल्कुल भी इंकार नहीं कर पाई और उसके मोटे तगड़े लंड का मजा ले ली,,,।

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बस के केबिन में तीनों आराम से बैठ चुके थे किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी,,, राजू एकदम खिड़की के करीब बैठा हुआ था जहां से उसे बहुत अच्छी हवा लग रही थी और ठंडी हवा के चलते उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे और उसके बगल में उसकी मौसी साधना बैठी हुई थी और उसके बगल में आराधना,,,, आराधना खुद अपने बेटे के बगल में बैठना चाहती थी क्योंकि वह अपनी बड़ी बहन के चरित्र से अच्छी तरह से वाकिफ थी इसीलिए वह नहीं चाहती थी कि उसका बेटा उसके बावजूद भी उसकी बड़ी बहन के साथ किसी भी प्रकार का संबंध बनाकर रखें,,,,

एक तरफ वह अपनी बहन के चरित्र को लेकर अपने बेटे के संबंध में परेशान थी तो दूसरी तरफ वह अपने मन में यही सोचती थी कि आज जो कुछ भी जिस तरह का वाह मजा अपने बेटे के साथ ले रही है वह उसकी बड़ी बहन के ही बदौलत मुमकिन हुआ है अगर वह अपनी बड़ी बहन को अपने बेटे के साथ रंगरलिया मनाते ना देखी होती तो शायद उसके मन में अपने ही बेटे के प्रति इस तरह का बदलाव ना आया होता और आज वह संभोग के अद्भुत सुख को भोग ना रही होती,,,, इसलिए रह रहे कर उसे अपनी बहन के प्रति किसी भी प्रकार की ईर्ष्या भी नहीं होती थी क्योंकि एक औरत होने के नाते वह एक औरत की व्यथा को अच्छी तरह से समझती थी,,,, क्योंकि वह खुद इस तरह के दौर से गुजर चुकी थी एक पति के साथ के लिए एक मर्दाना जिस्म के लिए जो उससे पलंगतोड़ प्यार करें और वही पलंगतोड़ प्यार उसे उसके सगे बेटे ने दिया था जिस की हकदार खुद साधना भी थी क्योंकि वह साधना के पति मतलब अपने जीजा जी के कार्य क्षमता को अच्छी तरह से समझ रही थी वह देख रही थी कि किस तरह से उसके जीजा जी का शरीर एकदम भारी था और आगे से पेट निकला हुआ था और भाई अभी अच्छी तरह से जानती थी कि उसके जीजा के मुकाबले उसकी बड़ी बहन की जवानी और गूगल रही थी और इसे मैं धरती हुई जवानी पर काबू पाना उसके जीजा जी के पास में बिल्कुल भी नहीं था इसलिए वह इस बात को अच्छी तरह से समझती थी कि जिस तरह से उसके बेटे की जरूरत उसे खुद है उसी तरह से उसकी बड़ी दीदी को भी उसके बेटे की जरूरत है इसलिए वह निश्चिंत होकर सफर का मजा ले रही थी,,,,।

बस
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रफ्तार से मुख्य सड़क पर भागती चली जा रही थी लोग पीछे छूटे चले जा रहे थे छोटी छोटी गाड़ियों को ओवरटेक करते हुए बस अपने गंतव्य स्थल पर पहुंचने के लिए मचल रही थी,,,,, साधना जो कि कुछ देर पहले ही चुदाई का मजा ले चुकी थी वह संतुष्ट होकर सोने की तैयारी कर रही थी क्योंकि देखते ही देखते रात के 12:00 बज गए थे इस दौरान बस एक भी जगह रुकी नहीं थी,,,,, एक तो साधना का शरीर थोड़ा भारी था और वहां आराधना और संजू के बीच में लेटी हुई थी इसलिए उसे थोड़ी दिक्कत हो रही थी तो वह संजू से बोली,,,

संजू बेटा तू मेरी जगह पर आजा वैसे भी तुझे नींद नहीं आ रही है और मुझे बहुत गहरी नींद आ रही है ,,,, मुझे खिड़की के पास सोने दे मैं बहुत थक गई हूं,,,,।

(अपनी बड़ी दीदी के मुंह से इतना सुनते ही आराधना के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे एकदम से खुश हो गई और वह खुद चहकते हुए बोली,,,)

हां हां संजू तू मौसी को खिड़की के पास सोने दी वैसे भी दीदी थक गई होगी,,,,

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ठीक है कोई बात नहीं,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू धीरे से उठ कर बैठ गया और साधना खिड़की के पास सड़क पर पहुंच गई और संजू दोनों खूबसूरत औरतों के बीच में हो गया और अपनी मां की तरफ देख कर मुस्कुराने लगा अपने बेटे को मुस्कुराता हुआ देखकर आराधना के चेहरे पर मुस्कान आ गई ऐसा लग रहा था कि जैसे दोनों इसी पल का इंतजार कर रहे थे दोनों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे,,,, खिड़की के पास पहुंचते ही साधना लंबी आह भरते हुए बोली)

अब सोने में मजा आएगा,,,,(इतना कहने के साथ ही साथ ना फिर से आंखों को बंद करके खिड़की में से आ रही ठंडी हवा का मजा लेते हुए नींद की आगोश में चली गई और दूसरी तरफ संजू जो कि कुछ देर पहले ही अपनी मौसी की जबरदस्त चुदाई करके तृप्त हुआ था एक बार फिर से अपनी मां के करीब उसके बदन से चिपक ते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ में लगी और की अकड़ अपनी औकात दिखाने लगी,,,,, दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी संजू बार-बार अपनी मौसी की तरफ देख ले रहा था कि कहीं उसकी मौसी जाग तो नहीं रही है लेकिन वह आंखों को बंद किए हुए पीठ के बल लेटी हुई थी और उसे आंखें बंद करके सोते हुए देखकर संजू जल्दी से अपनी मां के लाल लाल होठों पर अपने होठ रख कर उसे चुंबन कर ले रहा था और अपने बेटे के इस चुंबन से आराधना के तन बदन में पूरी तरह से उत्तेजना की लहर दौड़ में लगती थी घर से निकलने से पहले ही वह अपने बेटे से चुदाई का भरपूर मजा लूट चुकी थी,,,,, और वह अपने पति की आंखों के सामने,,,,

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आराधना कभी सपने में नहीं सोचा थी कि उसके जीवन में ऐसा पल आएगा जब वह बेशर्म और निर्लज्ज होकर अपने ही पति के सामने अपने बेटे से चुदाई का आनंद प्राप्त करेगी लेकिन माहौल और हालात इस कदर बदल चुके थे कि आराधना भी अपने पति से बदला लेने की सोच रही थी और मौका मिलते ही वह अपने पति के सामने ही अपनी गांड खोलकर अपने बेटे से चुदवाया शुरू कर दी थी वह अपने पति को दिखाना चाहती थी कि उसे अपनी मर्दानगी पर बड़ा गर्व है तो वह संजू की मर्दानगी के आगे कुछ भी नहीं है,,,,, और इस बात को उसका पति भी मान लिया था जब उसने,,, अपने बेटे के लंड को पहली बार देखा था वाकई में लंड इतना बड़ा होता है उसने आज तक सिर्फ पोर्नमोबी नहीं देखा था लेकिन असली जिंदगी में अपनी ही बेटी के मोटे तगड़े लंड को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी,,,,, आराधना उस पल को याद कर रही थी जब वह शर्मा होकर अपने ही पति के सामने अपने बेटे से चुदाई का आनंद ले रही थी वह अपने पति के चेहरे को देखकर मन ही मन बहुत खुश हो रही थी क्योंकि उसके पति के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी शायद उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी बीवी वाकई में बहुत खूबसूरत है,,,,,

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दिन-ब-दिन अपने पति के मुंह से अपने ही बेटे और अपने आप के बारे में गंदी बातें और गंदे इल्जाम को सुन सुनकर वह‌ परेशान हो चुकी थी आज ने इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि जब तक उसका पति उन दोनों के बीच के स्लिप नहीं जान जाएगा तब तक दोनों के बीच के गलत रिश्ते को अपने मुंह से बकता रहेगा और नशे की हालत में और किसी और को भी बता सकता था इसीलिए आराधना अपने पति से बदला लेने की खातिर ही उसकी आंखों के सामने अपने जवान बेटे से चुदवाई थी इस बात का भी एहसास उसे अच्छी तरह से हो रहा था कि अपने बाप के सामने संजू भी पूरी तरह से मर्द बंद कर अपने बाप को नीचा दिखाते हुए उसकी चूत में कस कस के धक्के लगा रहा था उसका हर एक धक्का उसके बाप के सीने पर छुरी की तरह चल रहा था,,,,,।

आराधना उस पल को याद करके पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी,,,, और वह भी रह रह कर अपनी बड़ी दीदी की तरफ देख ले रही थी और कोई तसल्ली लिख कर लेने के बाद वह भी अपने होठों को अपने बेटे के होठों पर रख दे रही थी,,,, दोनों ईस तरह से चुंबन का आदान प्रदान कर रहे थे और अपनी इस हरकत से दोनों मां-बेटे पूरी तरह से उत्तेजित हो चुके थे,,,,,, संजू अपनी मौसी से नजर बचाकर जो कि वह पूरी तरह से गहरी नींद में सो चुकी थी फिर भी उसके जाग जाने का डर था और इसीलिए अपनी मौसी की तरफ देखते हुए वह साड़ी के ऊपर से ही अपनी मां की चूत को जोर जोर से दबा रहा था जिसके चलते आराधना की चूत से काम रस टपकने लगा था और उत्तेजित अवस्था में संजू अपनी मां के लाल लाल होठों को अपने मुंह में लेकर उसका रस चूस रहा था,,,,,

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मां बेटे दोनों के बदन में चुदास की लहर उठ रही थी,,,, बस की केबिन में होने की वजह से किसी के भी देखे जाने का डर उन दोनों को बिल्कुल भी नहीं था केवल डर था तो साधना का जो कि वह भी पूरी तरह से गहरी नींद में सो रही थी,,,,,

मौसी जाग गई तो,,,,

लगता तो नहीं है कि वह सुबह तक ऊठने वाली है,,(अपनी बड़ी दीदी की तरफ देखते हुए)

जाग गई तो गजब हो जाएगा,,,,

नहीं जागेंगी,,,(अपनी बेटी का एक हाथ पकड़ कर अपनी चूची पर रखते हुए जो कि ब्लाउज के अंदर कह देती अपनी मां की हरकत देख कर संजू के तन बदन में आग लग गई उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया संजू अच्छी तरह से देख रहा था कि उसकी मां पूरी तरह से बेकरार हो रही थी मसल रही थी इसलिए संजू भी एक नजर अपनी मौसी के ऊपर डाला हो ब्लाउज के ऊपर अपना दूसरा हाथ भी रखकर ब्लाउज के ऊपर सही अपनी मां की बड़ी बड़ी चूची को दबाना शुरू कर दिया संजू के द्वारा स्तन मर्दन का आनंद लेकर आराधना के चेहरे का हाव भाव पूरी तरह से बदलने लगा था उसका चेहरा सुर्ख गुलाबी होता जा रहा था और संजू अपनी मौसी की तरफ देखते हुए,,,, अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलने लगा अपने बेटे को अपने ब्लाउज का बटन खोलता हुआ देखकर आराधना नजर उठा कर अपनी बड़ी दीदी की तरफ देखने लगी जो की पूरी तरह से निश्चिंत होकर गहरी नींद में सो रही थी बस के अंदर इस तरह की हरकत से आराधना के तन बदन में अजीब सी हलचल मची हुई थी या पहला मौका था जब वह घर के बाहर इस तरह से पब्लिक बस में बेटे की हरकतों का मजा ले रही थी उसकी पानी-पानी हो रही थी उसकी पेंटी गीली हो चुकी थी,,,,,)

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सारे बटन मत खोल देना अगर दीदी जाग गई तो गजब हो जाएगा बंद नहीं कर पाऊंगी,,,

तो क्या हुआ साड़ी का पल्लू छाती पर डाल कर देख लेना अगर मौसी देखेंगी फिर भी कह देना कि गर्मी की वजह से खोल दी थी,,,

नहीं नहीं तू तो बटन रहने दे नीचे के भले सारे बटन खोल दे,,,,

जैसी तुम्हारी मर्जी मेरी जान,,,(धीरे से अपनी मां की कान में कहां हो ऊपर के दो बटन छोड़कर व नीचे के 4 बटन को खोल चुका था और ब्लाउज के दोनों भागों को ऊपर की तरफ करके ब्रा के ऊपर से ही अपनी मां की चूची को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया था,,,,)

सहहह आहहहहहह ,,,,,,हमममममम,,,,

(आराधना अंगड़ाई लेते हुए सिसकारी भर रही थी यह देखकर संजू बोला)

बहुत मजा आ रहा है,,ना ,,,,,

हां,,,,,,,, बहुत मजा आ रहा है लेकिन मेरी चूत में आग लगी हुई है,,,,,

अपनी माँ क ब्लाउज का बटन खोलता हुआ संजू

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(संजू अपनी मां की तरफ को और उसके कहने का मतलब को अच्छी तरह से समझ रहा था वह जान रहा था कि उसकी मां को अपनी चूत में उसके मोटे लंड की जरूरत है लेकिन इस समय शायद वह भी यही सोच रही है कि यह काम मुमकिन नहीं हो पाएगा,,,, संजू अपनी मां की चूत की गर्मी को थोड़ा शांत करने के लिए पेट पर हाथ रखते हुए अपनी उंगली को धीरे से उसके पेटीकोट के अंदर सरकाया और सीधे उसकी चूत के साम्राज्य पर पहुंच गया और उस पर पूरी हथेली रखकर उसे अपनी हथेली में दबोच लिया अपने बेटे की इस हरकत पर आराधना पूरी तरह से सिहर उठी वह पूरी तरह से मस्त हो गई,,,, और इसी दौरान संजू अपनी मां के बदन की गर्मी को और ज्यादा बढ़ाता हुआ उसकी ब्रा को ऊपर की तरफ उठाकर उसकी नंगी चूची को,,, मुंह में भर लिया और पीना शुरू कर दिया,,,,, आराधना पूरी तरह से गरम हो गई वह मदहोश होने लगी बस यात्री से भरी हुई थी लेकिन किसी को इस बात का अहसास तक नहीं था कि केबिन के अंदर मां बेटे इस तरह की कामलीला कर रहे होंगे,,,,,

संजू पागलों की तरह अपनी मां की चूची को पीता हुआ अपनी हथेली से बार-बार अपनी मां की चूत को दबोच ले रहा था उसकी नंगी चूत संजू की हथेली में पूरी तरह से गर्माहट फैला रही थी और अपना काम रस से भिगो रही थी संजू मस्त होकर अपनी मां की चूत में बीच वाली उंगली डालकर उसे अंदर बाहर करते हुए उसे अद्भुत सुख प्रदान कर रहा था आराधना से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था वह बर्दाश्त से बाहर होता चला जा रहा था इसलिए आराधना मदहोश शब्दों में बोली,,,।

बेटा उंगली नहीं अपना लंड डाल दे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है,,,,,(अपनी मां के मुंह से इतना सुनते ही संजू का लंड पूरी तरह से बगावत पर उतर आया था और पेंट फाड़ कर बाहर आने के लिए तैयार हो चुका था वह अपनी मां की बात सुनते ही अपनी मां को आश्चर्य से देखने लगा वह अपनी मां की हिम्मत की दाद दे रहा था कि बगल में बड़ी बहन होने के बावजूद भी वह चुदवाने के लिए तैयार हो चुकी थी,,,, संजू की अपनी मां को चोदने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुका था वह घुटनों के बल बैठकर अपनी मौसी की तरफ देखते हुए अपने पेंट का बटन खोलने लगा था कि तभी बस की ब्रेक लगी और बस रुक गई संजू गिरता गिरता बचा और खिड़की से बाहर देखने लगा,,,, बस एक ढाबे पर आकर खड़ी हो चुकी थी और तभी क्लीनर की आवाज उसके कानों में आई,,,,।

अपने बेटे की हरकत की वजह से कसमसाती हुयी आराधना

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यहां पर बस 15 मिनट के लिए रुकेगी जिसे चाय पानी करना है उतर कर कर ले,,,,।

(सारा मजा किरकिरा हो चुका था अगर बस 10 मिनट और रुकी होती तो वह अपने अरमान पूरा कर लिया होता लेकिन किस्मत खराब थी,,,, हाथ में बनी घड़ी की तरफ देखा तो 2:00 बज रहे थे दोनों की क्रियाकलाप में 2 घंटे से ज्यादा का समय गुजर चुका था लेकिन इस दौरान दोनों संभोग सुख प्राप्त नहीं कर पाए थे,,,,, धीरे धीरे बस में से पैसेंजर नीचे उतरना शुरू हो गए,,,,, संजू का मूड खराब हो चुका था चलती बस में चुदाई करने का मजा ही कुछ और होता है इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,)

रुको मैं पेशाब करके आता हूं,,,

नहीं चाहती हूं मुझे तो बड़े जोरों की लगी है तुम्हारी हरकत की वजह से तो ऐसा लग रहा था कि आप पेशाब निकल जाएगा,,,,

(इतना सुनकर संजू मुस्कुराने लगा और बोला)

चलो,,,

दीदी को जगा दूं क्या,,,?

नहीं मौसी को सोने दो अगर जाग गई तो हो सकता है उन्हें नींद ना लगे और फिर हम दोनों का काम अधूरा ही रह जाएगा,,,,

संजू और आराधना

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सही कह रहा है तू,,,(मुस्कुराते हुए आराधना बोली थोड़ी ही देर में दोनों मां-बेटे बस से नीचे उतर गए कुछ लोग ही बस से नीचे उतरे थे रात के 2:00 बज रहे थे इसलिए बहुत से यात्री सो रहे थे,,,, कुछ लोग खाना खाने के लिए ढाबे पर चले गए कुछ लोग बैठ कर चाय पी रहे थे संजू की ढाबे पर से पानी लिया और हाथ मुंह धोने लगा,,,,, अंधेरे का फायदा उठाते हुए पेशाब करके आ चुका था लेकिन आराधना अभी भी खड़ी थी उसे यूं खड़ा देखकर संजू बोला,,,)

क्या हुआ खड़ी क्यों हो जाओ मुत कर‌ आओ,,,,,

कहां जाऊं,,,(पेशाब की तीव्रता के चलते अपने पैर को पटक ते हुए बोली तो संजू उसे एक अच्छी सी जगह दिखाते हुए बोला,,,)

वह देखो उधर अंधेरा है और कोई देख भी नहीं रहा जल्दी से जाकर करके आ जाओ मैं तुम्हारे लिए भी चाय ले लेता हूं,,,,

ठीक है मैं जल्दी से आती हूं,,,,

(और इतना कहने के साथ ही आराधना अपने चारों तरफ नजर दौड़ाते हुए आगे बढ़ने लगी और अपने बेटे के बताए अनुसार उस जगह पर पहुंचकर खड़ी हो गई वहां पर अंधेरा था,,,, फिर भी अपने चारों तरफ नजर घुमा कर देख रही थी कि कहीं कोई उसकी तरफ देख तो नहीं रहा है लेकिन उसके बेटे को छोड़कर और किसी का भी ध्यान उसकी तरफ नहीं था इसलिए निश्चिंत होकर धीरे से अपनी साड़ी को कमर तक उठाई और,,,, अपनी चड्डी को घुटनों तक खींचकर तुरंत बैठ गई और पेशाब करना शुरू कर दी संजू चाय खरीदते खरीदते अपनी मां की तरफ देख ले रहा था,,, आराधना की गाड़ी तेरी गोरी थी कि अंधेरे में बैगन साफ नजर आया था जिसे देखकर संजू का लंड फिर से खड़ा होने लगा था,,,, और संजू इस बात पर भी गौर कर रहा था कि कहीं कोई उसकी मां को देख तो नहीं रहा है लेकिन 2:00 बजे रात को किसी का भी ध्यान उस तरफ नहीं था इसलिए निश्चिंत होकर चाय लेकर पीने लगा था और आराधना पेशाब करने के बाद उसके मन में क्या सुझाव है तुरंत अपनी चड्डी को अपनी टांगों से नीचे करके निकाल ली और उसे तुरंत अपने पर्स में लपेटकर भरली अब वह चड्डी बिगर थी,,,, अपनी मां की हरकत की खबर संजू के तन बदन में आग लग गई थी और जैसे ही उसकी मां उसके करीब आई थी सबसे पहले संजू ने यही सवाल पूछा,,,।

संजू और आराधना

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चड्डी क्यों निकाल ली,,,

ताकि बस में दिक्कत ना हो,,,

ओ,,,,हो,,,,, एकदम शातीर हो गई हो,,, जल्दी से हाथ मुंह धो कर चाय पी लो मैं चाय ले लेता हूं,,,,।

(थोड़ी देर में आ रहा था ना हाथ मुंह धो कर फ्रेश हो गई और अपने बेटे से चाय लेकर पीने लगी देखते ही देखते 15 मिनट गुजर चुके थे और धीरे-धीरे सब लोग बस के अंदर जाना शुरु कर दिए थे संजू भी बस के अंदर आया और तुरंत अपने केबिन में अपनी मां को लेकर घुस गया,,, और केबिन का दरवाजा बंद कर लिया दोनों साधना की तरफ देख रहे थे जो कि अभी भी गहरी नींद में सो रही थी इसलिए वह दोनों निश्चिंत हो चुके थे थोड़ी ही देर में,,, बस होर्न देकर इशारा की ओर चल पड़ी,,,,, देखते ही देखते बस फिर से मुख्य सड़क पर दौड़ने लगी थी और एक बार फिर से ठंडी हवा का झोंका खिड़की से पूरे कैबिन में ठंडक पर आने लगा था लेकिन फिर भी मां बेटे के बदन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था क्योंकि दोनों की जवानी की गर्मी पसीने के रूप में दोनों के माथे से टपक रही थी,,,,

saसंजू और आराधना

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केबिन में छोटा सा बल्ब जल रहा था जिससे केबिन के अंदर हो जाना था और इसीलिए संजू केबिन के चारों तरफ उसका स्विच ढूंढने लगा और तुरंत उसकी नजर एकदम कोने में लगी स्विच पर गई और उसे स्विच को देखते ही संजू के चेहरे पर प्रश्ननता के भाव नजर आने लगे और अगले ही पल वह तुरंत स्विच दबाकर केबिन में अंधेरा कर दिया यह देखकर आराधना के भी चेहरे पर मुस्कान करने लगी और अगले ही पल संजू बिना देर की अपनी मां को अपनी बाहों में लेकर उसके लाल-लाल होठों का रसपान करने वाला दोनों फिर से एक दूसरे के अंगों को नोचने खरोंचने लगे तो में पूरी तरह से मदहोश हुए जा रहे थे,,,, देखते-देखते आराधना खुद अपने बेटे को पीठ के बल लिटा कर उसके जींस के पेंट की बटन को खोने लगी और देखते ही देखते उसे खींचकर घुटनों तक कर दी और अंधेरे में ही अपने बेटे के लंड को पकड़ कर ही लाना शुरू कर दी जो कि हाईवे पर स्ट्रीट लाइट के उजाले में कभी-कभी नजर आ जा रहा था अपने बेटे के मोटे लंड को अपनी हथेली में लेते ही आराधना के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ नहीं लग रही थी और चूत से काम रस टपक रहा था उसी से बर्दाश्त नहीं हो रहा था और अंधेरे का फायदा उठाते हुए अपनी बड़ी बहन की मौजूदगी नहीं वह अपने लाल-लाल होठों को अपने बेटे के लंड पर रखकर उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,, पहली बार में ही आराधना जल्दबाजी दिखाते हुए अपने बेटे के लंड को पूरा गला तक लेकर चूसने लगी थी जिससे संजू के मुंह से आह निकल गई थी और संजू अपने मन में सोचने लगा कि अच्छा हुआ उसे बल्ब बंद करने की बटन मिल गई थी वरना इस तरह का आनंद उसकी मां चलती बस में कभी नहीं दे पाती और ना ही ले पाती संजू पागलों की तरह अपने दोनों हाथ को अपनी मां के सर पर रख कर उसे ऊपर नीचे करते हुए नीचे से अपनी कमर हिला रहा था वह पागल हुआ जा रहा था,,,,

अपने बेटे क लुंड को सहलाती हुयी अर्धना

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आराधना अपनी गरमा-गरम सिसकारी पर बेहद काबू किए हुए थी ताकि उसकी बहन जाग ना जाए,,, संजू एक तरफ अपनी मां के मुंह में लंड को अंदर बाहर करते हुए नीचे से कमर हिला रहा था और दूसरी तरफ अपने हाथ को अपनी मां की साड़ी में डालकर उसकी चूत के गुलाबी पतियों को अपनी उंगली में लेकर दबा रहा था जिससे आराधना पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी केबिन के अंदर इतनी जगह तो थी कि दोनों आराम से मजे ले सकते थे इसलिए अपने बेटे की हरकत से बेकाबू होकर हुआ तुरंत अपनी स्थिति को बदलते हुए अपने घुटनों के बल अपने बेटे की छाती के इर्द-गिर्द रख दी और वह अपनी बड़ी बड़ी गांड सहित अपनी गुलाबी चूत को अपने बेटे के मुंह पर रख दी,,,

और जैसे ही संजू अपनी मां की गुलाबी चूत को अपने होठों पर महसूस किया वैसे ही अपने होठों को खोल कर अपनी जीभ बाहर निकाल लिया और अपनी मां की गुलाबी चूत में प्रवेश कराकर उसे चाटना शुरू कर दिया संजू पागलों की तरह अपनी मां की चूत को चाट रहा था और आराधना अपने बेटे के लंड को पूरी तरह से अपनी चूत के लायक बना रही थी,,,,,,, केबिन में पूरी तरह से अंधेरा छा चुका था कुछ भी नजर नहीं आ रहा था इसलिए दोनों पूरी तरह से निश्चिंत हो चुके थे कुछ देर तक दोनों इसी तरह से एक दूसरे को आने देते थे रहे लेकिन अब आराधना की चूत में चींटियां रेंग रही थी उसे अब अपने बेटे की जीभ नहीं अपने बेटे का लंड चाहिए था,,,,,,, इसलिए वह तुरंत अपनी बड़ी बड़ी गांड को अपने बेटे के मुंह पर से हटाई और स्थिति को बदलते हुए अपने घुटनों को अपने बेटे के कमर के इर्द-गिर्द रख दी और एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के लंड को पकड़ लिया और उसे अपनी गुलाबी चूत से सटाते हुए अपनी बड़ी बड़ी गांड का दबाव अपने बेटे के लंड पर बढ़ाने लगी देखते ही देखते संजू का मोटा तगड़ा लंबा लंड धीरे-धीरे करके आराधना की चूत की गहराई में घुसता चला जा रहा था और देखते ही देखते उसका समुचा लंड चूत की गहराई में खो गया,,,

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दोनों किसी भी प्रकार की खुसरूपुर नहीं कर रहे थे क्योंकि उन्हें इस बात का डर था कि कहीं उनकी आवाज सुनकर साधना जागना जाए इसीलिए अपनी बहन को वह किसी भी तरह से जगाना नहीं चाहती थी और धीरे-धीरे अपनी बेटे के लंड पर उठक बैठक करना शुरू कर दी थी,,,, संजू को स्वर्ग का मजा प्राप्त हो रहा था अपनी मां की हरकत देखकर वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था और अपने दोनों हाथ को अपनी मां की चूची पर रख कर दबाना शुरू कर दिया था जो कि वह केबिन में आते ही अपनी मां के ब्लाउज को उसके बटन को पूरी तरह से खोद चुका था क्योंकि अब उसकी मौसी के देखे जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था इसलिए पागलों की तरह अपनी मां की चूची दबाते हुए धीरे-धीरे नीचे से भी अपनी कमर को ऊपर की तरफ धक्के लगा रहा था,,,, आराधना बड़ी मुश्किल से अपनी सिसकारी को रोके हुए थी वह बार-बार अपना हाथ अपने मुंह पर लगा दे रहे थे ताकि उसके मुंह से आवाज नहीं निकल सके वह बड़ी मस्ती से अपने बेटे के लंड को सीधा अपनी चूत की गहराई में अपने बच्चेदानी तक ले ले रही थी,,,, इसीलिए तो उसकी मदहोशी बढ़ती जा रही थी और चलती हिलती दुलती बस में पूरा जोर लगा कर अपनी कमर उछाल रही थी अपनी गांड अपने बेटे के लंड पर पटक रही थी,,,,

अर्धना अपने ब्लाउज का बटन खोलते हुए

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तकरीबन अपनी बड़ी बहन की मौजूदगी में ही आधे घंटे की जबरदस्ती चुदाई के बाद वह अपने बेटे का भी पानी निकाल दी और फिर गहरी सांस लेते हुए अपने बेटे के लंड पर से नीचे उतरी और कुछ दिन तक उसी तरह से बैठी रही और फिर धीरे-धीरे अपने ब्लाउज के बटन बंद करने लगी और फिर अपने कपड़ों को दुरुस्त करके अपनी जगह पर लेट गई,,,, तब तक संजू भी अपने कपड़ों को ठीक कर लिया था और फिर केबिन के अंदर की लाइट को ऑन कर दिया था और एक बार फिर से केबिन के अंदर उजाला फैल गया था अपनी घड़ी में देखा तो रात के 3:00 बज रहे थे और वह मुस्कुराता हुआ अपनी मां के गाल पर चुंबन किया और फिर दोनों मां-बेटे गहरी नींद में सो गए सुबह जब आंख खुली तो सुबह के 6:00 बज रहे थे,,,।
 
सुबह के 6:00 बज चुके थे,,, बस एक भाभी पर आकर रुक गई थी अभी भी थोड़ा थोड़ा अंधेरा था,,,, ड्राइवर को इस बात का अंदाजा था कि सुबह-सुबह लोग शौच क्रिया करने के लिए जाते हैं इसलिए सही समय पर उसने बस को एक ढाबे पर रोक दिया था धीरे-धीरे बस में से यात्री उतरने लगे और खेतों की राह पकड़ने लगे,,,, क्योंकि ढाबे पर शौच क्रिया के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी सोच करने के लिए खेतों में ही जाना पड़ता था,,,, खलासी ने पहले ही बता दिया था कि यहां पर बस एक घंटा रुकेगी जिसको जो कुछ भी करना है कर लो,,,,,

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और उस खलासी की बात सुनकर धीरे-धीरे आराधना साधना और संजू भी बस से नीचे उतर गए इस सफर के दौरान संजू ने जिस तरह का आनंद अपनी मां और अपनी मौसी से लिया था वह काबिले तारीफ थी ना तो संजू ने कभी सोचा था और ना ही आराधना और साधना ने की सफर के दौरान दोनों को संभोग सुख प्राप्त होगा अपनी मौसी को तो वह सफर शुरू होने से पहले ही ढाबे के पीछे ले जाकर जमकर चोद चुका था और फिर बस की केबिन के अंधेरे का फायदा उठाते हुए आराधना भी अपनी जवानी की गर्मी पिलाने के लिए अपने बेटे के खड़े लैंड पर चड़ गई थी और उठक बैठक करते हुए अपना गरम लगा बाहर निकाल दी थी,,,,,

अरे संजू देख तो इधर कोई बाथरूम की सुविधा है कि नहीं,,,

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जी मौसी में अभी ढाबे वाले से पूछ कर आता हूं,,,

(इतना कहकर संजू चला गया और आराधना अपनी बड़ी बहन से बोली)

दीदी लगता तो नहीं है,,(चारों तरफ नजर घुमाकर देखते हुए) कि यहां पर बाथरूम की सुविधा होगी देख नहीं रही हो सब लोग बोतल लेकर खेतों की तरफ जा रहे हैं वह तो अच्छा है कि सिर्फ एक हेडपंप है वरना पानी भी नसीब नहीं होता,,,,

सच कह रही है आराधना तू,,,,, ट्रेन में कम से कम बाथरूम की सुविधा होती है,,,

हां दीदी लेकिन भीड़ बार भी तो इतनी होती है कि जाना चाहो तो भी बाथरूम में ना जा पाओ,,,

हां तु ठीक ही कहती है,,,, उससे अच्छा तो यहां के खेत हैं कम से कम हल्के तो हो जाओगे,,,,

अगर दीदी जाना पड़ा तो जाएंगे कहां,,,,

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वही तो मैं भी देख रही हूं,,,(साधना अपने चारों तरफ नजर दौड़ाते हुए बोली,,,)

वह देखो दीदी (उंगली से दिखाते हुए) घनी झाड़ियां है ना वही चलते हैं अभी थोड़ा अंधेरा भी है जल्दी से निपट कर आ जाएंगे,,,

हां तु ठीक कह रही है,,,,,।

(तब तक संजू हाथ में दो बोतल भर कर लेकर आता हुआ नजर आया उसे देखते ही दोनों बहने समझ गई कि यहां पर बाथरूम की सुविधा बिल्कुल भी नहीं है संजू दोनों के पास आकर बोला,,,)

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यहां पर बाथरूम की सुविधा बिल्कुल भी नहीं है खेतों में ही जाना होगा,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू अपने हाथ के दोनों बोतल को अपनी मौसी और अपनी मां की तरफ आगे बढ़ा दिया दोनों एक दूसरे की तरफ देखते हुए हाथ में ले भी ले हालांकि उन्हें शर्म तो महसूस हो रही थी लेकिन कर भी क्या सकती थी वह तो अच्छा था कि अभी थोड़ा अंधेरा था इसलिए किसी की नजर उन दोनों पर नहीं थी,,,, हाथ में बोतल लेकर साधना बोली)

और तू,,,,

मैं भी अभी आता हूं,,,,,

(इतना कहने के साथ ही संजू हेडपंप की तरफ आगे बढ़ गया बोतल लेने के लिए और दोनों बहने चारों तरफ नजर घुमाते हुए घनी झाड़ियों की तरफ जाने लगी,,,,, सुबह का समय होने की वजह से ठंडी ठंडी हवा चल रही थी वातावरण एकदम खुशनुमा था,,, गर्मी का मौसम होने के बावजूद भी वातावरण में ठंडक थी धीरे-धीरे करके साधना और आराधना चारों तरफ नजर दौड़ा कर देखते हुए घनी झाड़ियों की तरफ जा रही थी और सभी हेडपंप से पानी भरता हुआ अपनी मां और अपनी मौसी दोनों की लचकती और मटकती गांड को देखकर उत्तेजित हो रहा था,,, और अपने मन में सोच रहा था कि दोनों औरतें कितनी चुदवासी हैं मौका मिलता नहीं है कि लंड को चूत में लेने के लिए तैयार हो जाती है,,,, दोनों एक से बढ़कर एक है दोनों को अगर एक साथ चोदा जाए तो बहुत मजा आया लेकिन ना जाने कब ऐसा मौका आएगा कि दोनों की चूत एक साथ चोदने को मिलेगी,,,,, अपने मन में अपनी मां और अपनी मौसी के बारे में सोचता हुआ संजू पानी की बोतल को भर लिया था और उसे हाथ में लेकर वह भी इधर उधर देखते हुए अपनी मां और मौसी से दूसरी दिशा में जाने लगा था क्योंकि यहां पर अपनी मां और मौसी के पास जाना ठीक नहीं था क्योंकि किसी की भी नजर पड़ सकती थी और ऐसा करना उचित नहीं था,,,,

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आराधना और साधना घनी झाड़ियों के बीच उचित जगह देख कर बैठने की तैयारी करने लगे आराधना को तो बिल्कुल भी दिक्कत नहीं आई क्योंकि वह साड़ी पहनी हुई थी और वह तुरंत अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी चड्डी को तो वह पहले से ही निकालकर अपने पर्स में रख चुकी थी ताकि रात को अपने बेटे के साथ मजा लेने में उसे किसी प्रकार की दिक्कत पेश न हो और ऐसा ही हुआ था वह बड़े आराम से अपनी साड़ी उठाकर अपने बेटे के लंड पर बैठ गई थी और अपनी गर्मी को शांत कर ली थी,,, पर वही सहूलियत उसे इस समय सोच करने में भी पैसा रही थी वह तुरंत अपनी साड़ी को ऊपर उठाकर नीचे बैठ गई थी लेकिन साधना सलवार सूट पहनी हुई थी और एकदम कसी हुई इसलिए उसे थोड़ी दिक्कत आ रही थी पहले तो वह अपने सलवार की डोरी को खोलने लगी और चारों तरफ देखने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है और सलवार की डोरी खोल कर अपनी सलवार को नीचे जहां तक ले जाए जो की पूरी तरह से कसी हुई थी इसलिए थोड़ी दिक्कत हो रही थी और फिर अपनी चड्डी को भी वह घुटनों का खींच कर बैठ गई कसी हुई सलवार होने की वजह से बैठने में भी उसे आरामदायक महसूस नहीं हो रहा था जैसे तैसे करके वह बैठकर सोच करने लगी,,,,,

बरसों बाद साधना और आराधना दोनों खेतों में शौच करने का अनुभव ले रहे थे जब से विवाह करके शहर आए थे तब से वह दोनों बहने खेत में सोच करना भूल ही गई थी लेकिन वर्षो की याद ताजी हो गई थी,,,, उन्हीं यादों को ताजा करते हुए साधना बोली,,,,।

झाड़ियों के बीच में आराधना

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याद है आराधना बरसों पहले जब हम दोनों का विवाह नहीं हुआ था तो हम दोनों इसी तरह से खेतों में सोच करने के लिए जाया करते थे,,,,

हां दीदी वह भी क्या दिन थे किसी भी प्रकार की सहूलियत नहीं मिलती थी लेकिन फिर भी कितना खुश थे,,, अब तो सब कुछ होते हुए भी सब कुछ अधूरा सा लगता है,,,,,

बात तो तू सही कह रही है आराधना,,,, लेकिन तुझे याद है हम दोनों जब भी मैदान जाते थे तो अपने पड़ोस वाला लड़का कैसे चोरी चोरी हम दोनों के पीछे पीछे चला आता था और पेड़ के पीछे छुप कर हम दोनों को देखता था,,,,

हां दीदी सही कह रही हो मुझे उसका इस तरह से पीछा करना अच्छा नहीं लगता था,,,,,,, अरे उसे भी तो इधर-उधर बैठ जाना चाहिए हम दोनों के पीछे आना जरूरी था,,,

अरे पगली वह हम दोनों के पीछे कुछ और मकसद से आता था तुझे पता है,,,

साधना के पड़ोसन की ननंद और उसका बेटा

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कौनसा मकसद दीदी,,,,

अरे वह हम दोनों की नंगी गांड में नंगी चूत देखने के लिए आता था,,,,

ओहहह,,,(एकदम चौक ते हुए) यह क्या कह रही हो दीदी मुझे तो कभी भी ऐसा महसूस नहीं हुआ,,,,,,, वह तो हम दोनों को दीदी दीदी कहता था,,,,

अरे बुद्धू तो दुनिया के दस्तूर को नहीं जानती इसीलिए अनजान है दीदी दीदी कहने वाले ही सबसे पहले दीदी पर चढ़ते हैं,,,

बाप रे मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है दीदी कि उस लड़के का मकसद इतना गलत था,,,

अरे मैं तो पहले ही समझ गई थी वह पेड़ के पीछे छुप कर हम दोनों की नंगी गांड को देखता था,,,,

लेकिन तुम कुछ कहते क्यों नहीं थी तुम्हें अगर सब पता था तो,,,

क्या कहती डर जो लगता था,,, कहीं उल्टा हम दोनों को बदनाम ना कर दें कि हमें दोनों उसे बुलाती है जानती है ना गांव में अलग ही हवा बहती है,,,, सुमन को जानती है ना

साधना की पड़ोसन और उसका भतीजा

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वह अपने घर के पीछे वाली जो खेत में रहती थी जिसका बड़ा घर था,,,,

हां हां वही,,,, वह भी सोच करने के लिए मैदान में जाती थी तो उसके पीछे पीछे भी गांव का एक लड़का जाता था और रोज-रोज का यह मिलना कब जुदाई में बदल गया पता ही नहीं चला सुमन रोज अंधेरा होते ही डब्बा लेकर निकल जाती थी और वह उसका आशिक भी उसके पीछे पीछे निकल जाता था और दोनों झाड़ियों में जाकर चुदाई का खेल खेलते थे और पकड़े जाने पर पता है सब किसकी गलती निकली,,,

किसकी,,,?

सुमन की,,, इसीलिए तो किसी से बताने में भी डर लगता था और वह रोज हम दोनों को देखा करता था और हम दोनों जान कर भी कुछ नहीं कर पाते थे तू तो अनजान थी लेकिन मुझे सब पता चलता था हम दोनों को देखकर पता है वो क्या करता था,,,

क्या करता था,,,?(आश्चर्य से आराधना बोली)

हम दोनों की नंगी गांड देखकर वह पेंट में से अपना लंड निकाल कर उसे हिलाता था,,,

तुम्हें कैसे पता चला दीदी,,,

अरे मैंने देख ली थी उस समय तो मुझे इतनी शर्म आई कि पूछो मत,,,,, मैंने उसकी हरकत को उसकी मां से बताना चाहा लेकिन हिम्मत नहीं हुई क्योंकि तुम तो जानती हो उसकी मां बात का बतंगड़ बनाने में माहिर थी उल्टा हम दोनों पर ही इल्जाम लगा देती,,,,

साधना की पड़ोसन अपने भतीजे से मजा लेते हुए

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यकीन नहीं होता दीदी कि दीदी दीदी कहने वाले लड़के भी अपने मन में अपनी बहन के बारे में कितना गंदा सोचते हैं,,,

यही तो दुनिया का दस्तूर हो गया है आराधना तू समझ नहीं रही है,,, सब लोग अपनी अपनी जरूरत पूरी करने में लगे हैं तुझे पता है,,,, मैं जहां रहती हूं ना उसके बगल वाले घर में इसी तरह का काम क्रीड़ा चल रहा है,,,

किस तरह का दीदी,,,,

मेरी बगल वाली है ना उसका पति शहर से बाहर रहता है और घर में उसके देवर का जवान लड़का रहता है जो उसे बड़ी मम्मी बड़ी मम्मी कहता है और तुझे यकीन नहीं होगा कि बड़ी मम्मी कहने के बावजूद भी वही अपनी बड़ी मम्मी को चोदता भी है,,,,

क्या कह रही हो दीदी,,,(आश्चर्य से आराधना अपने मुंह पर हाथ रखते हुए बोली अपने बेटे के साथ शारीरिक संबंध बना लेने के बाद उसे हर गरीबी रिश्तो के बीच नामुमकिन कहा जाने वाला शारीरिक संबंध मुमकिन लगने लगा था वह अपनी बड़ी बहन की बात से पूरी तरह से वाकिफ थी वह समझ सकती थी कि वाकई में उसकी बहन जो कह रही है उसमें हकीकत है कोई बनाओ की बात नहीं है क्योंकि वह खुद अपनी बड़ी बहन को अपने ही बेटे के साथ देख चुकी थी लेकिन कुछ कह नहीं रही थी क्योंकि इस बात को अभी समझ रही थी कि सबकी अपनी जरूरत होती है वह सिर्फ जानबूझकर अपनी बड़ी बहन के सामने अनजान बनने का नाटक कर रही थी,,,।)

मैं सच कह रही हूं आराधना यह सुनी सुनाई बात नहीं है मेरा और उसका हम दोनों के घर पर आना जाना बनाकर बना रहता है दोपहर के समय में यूं ही समय बिताने के लिए उसके घर गई थी और मेरी किस्मत इतनी तेज थी कि दरवाजा खुला हुआ था बाहर का भी और उसके कमरे का भी ने धीरे-धीरे उसके कमरे में चली गई और दरवाजा खुला होने के नाते में अंदर देखी तो दंग रह गई,,,

क्या देखी दीदी,,,,

अरे आराधना क्या बताऊं उससे नजारे को देखकर तो खुद मेरे पसीने छूट गए थे,,,

ऐसा कैसा नजारा देख ली थी दीदी,,,,,

पड़ोसन की ननंद और उसका सगा बेटा

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अरे क्या बताऊं आराधना उसका भतीजा जिसे मैं इतना सीधा साधा लड़का समझती थी वह मेरे घर पर भी आता जाता था लेकिन अच्छा हुआ कि सही समय पर मैंने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया था मैंने देखी थी उसकी बड़ी मम्मी पलंग के ऊपर एकदम नंगी होकर घुटनों के बल बैठकर अपने भतीजे के लंड को मुंह में लेकर चूसने रही थी और वह पलंग के नीचे खड़ा था इस नजारे को देखकर तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए और वह उसका भतीजा जो उसे बड़ी मम्मी बड़ी मम्मी कहकर थकता नहीं था उस समय भी बड़ी मम्मी बड़ी मम्मी कह कर मजा ले रहा था और उसकी बड़ी बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर दबा रहा था मेरे को तो समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूं मैं वहां से चले जाना चाहती थी लेकिन इस तरह का दृश्य देखकर मेरे तो होश उड़ गए थे इसलिए वहीं कुछ देर तक खड़ी रही,,,

तुम्हें डर नहीं लगा दीदी कि अगर कोई देख लेता तो,,,,

डरने वाली कौन सी बात थी आराधना डरना तो उन दोनों को चाहिए था इसलिए मैं हिम्मत करके खड़ी रही उसके बाद तो उस लड़के ने अपने मोटे लंड से जो अपनी बड़ी मम्मी की चुदाई किया में देखती ही रह गई उसकी बड़ी मम्मी बिस्तर पर टांग फैला है अपने भतीजे के लंड को अपनी चूत में लेकर पूरी तरह से पसीना बहा रही थी,,,,

बाप रे ऐसा भी होता है,,,,

तो क्या रात ना तू ही एक सती सावित्री बनी फिरती है अशोक के इंतजार में अपनी जवानी को कुर्बान किए हुए हैं मैं चित्र से जानती हूं कि हर औरत की अपनी जरूरत होती है अपनी प्यास होती है उसमें भी वह प्यास लगती होगी लेकिन तू मर्यादा और संस्कार की आड़ में उसे दबा देती है क्योंकि ऐसा करना उचित बिल्कुल भी नहीं है,,,,,

(अशोक का जिक्र छेड़ कर साधना आराधना को भी अपनी जिंदगी अच्छे से जीने का तरीका बता रही थी अशोक का जिक्र होते ही जानबूझकर आराधना अपने चेहरे पर उदासी के भाव लाती हुई नजरो को झुका ली,,,, और फिर धीरे से बोली)

मेरी जगह तुम होती दीदी तो क्या करती,,,

पड़ोसन की ननंद और उसका जवान बेटा

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तेरी जगह घर में होती तो तेरी तरह रोते हुए अपनी जिंदगी को ना गुजारती बल्कि अपने तरीके से अपनी जिंदगी को जीती अपनी जरूरतों को पूरी कर दी मैं दुनिया की नहीं देखती क्योंकि दुनिया तेरे या मेरे दुख में सहभागी बनने का भी नहीं आएगा हमें ही दुख को अपने कंधों पर उठाकर आगे बढ़ना पड़ेगा इसीलिए तो कहती हूं जिंदगी को खुल कर जीना चाहिए,,,,,

तो क्या तुम भी किसी से संबंध बना लेती,,,,

किसी से भी नहीं आराधना किसी अच्छे इंसान से,,,,, और हां उस नजारे को देखने के बाद,,,, मैं तो वहां से चली गई लेकिन वह दृश्य मेरे दिलो-दिमाग पर पूरी तरह से छा गया था और एक दिन मौका देखकर मैं उससे सारी बात बता दी 1 दिन से घबरा गई मेरे हाथ जोड़ने लगे कि किसी को कुछ भी मत बताना,,,,, और अपनी आपबीती बताने लगी की साल साल गुजर जाते हैं उसे अपने पति का सुख नहीं मिलता और इसीलिए उसे अपने बदन की जरूरत के खातिर अपने भतीजे के साथ ही संबंध बनाना पड़ा,,, और हां आराधना उसने जो मुझे एक बात बताई उसे सुनकर तो मेरे होश उड़ गए,,,,,

कौन सी बात है दीदी,,,,(साधना की बातों को सुनकर खुद आराधना की चूत गीली हो रही थी)

अरे उसने मुझे बताइए जी जो कुछ भी वह कर रही है वह अकेले ही इसमें नहीं है हर घर में इस तरह का रिश्ता कायम हो रहा है और उसने अपने रिश्तेदार के बारे में बताइ,,,, अपनी छोटी बहन के बारे में और उसने इसलिए बताएं कि मुझे इस तरह के रिश्तो में बिल्कुल भी खराबी ना लगे उसने बताई कि उसकी ननद खुद अपने ही बेटे से चुदवाती है,,,, मैं तो सुनकर एकदम से चौक नहीं थी,,,

क्या कह रही हो दीदी अपने ही बेटे से एक सगी मां अपनी बेटी के साथ कैसे चुदवा सकती हैं,,,

साधना के पड़ोसन की मनोज और उसका जवान बेटा बिस्तर पर मजा लेते हुए

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अरे बताती हूं,,, जिस तरह से तुझे हैरानी हुई थी मुझे भी उतनी ही हैरानी हुई थी लेकिन जो कारण उसने बताइए उसे सुनकर मुझे भी उससे हमदर्दी होने लगी,,,,

कौन सा कारण,,,,

यही कि उसका नंदोई उससे बिल्कुल भी प्यार नहीं करता था और बाहर दूसरी औरतों के साथ मजे लेता था वह बिस्तर पर तड़पती रहती थी आखिरकार वह भी जवान थी उसके भी अरमान थे और सच कहूं आराधना तो चूत की जो प्यास होती है ना वह अगर सर पर चढ़कर बोलने लगे तो फिर उसे बुझाने के लिए औरत किसी भी हद तक चली जाती है,,,, उसने मुझे बताया कि उसकी ननद पूरी तरह से हैरान हो चुकी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह अगर बाहर अपनी जरूरत पूरी करती है तो बदनाम होने का डर था और उसका लड़का जवान था और वह अपने ही लड़के के साथ संबंध बनाना शुरू कर दी और वह बहुत खुश भी है उसी को देख कर ही उस औरत ने अपने भतीजे के साथ शारीरिक संबंध बनाना शुरू की और तब से मुझे लगने लगा कि इस तरह का रिश्ता शायद हर घर में चारदीवारी के बीच कायम होता है बस किसी को कानों कान खबर तक नहीं पड़ती,,,,

बाप रे दीदी मैं तो एकदम हैरान हुं,,, मैं तो इस बात से भी हैरान हूं कि तुम भी अपनी जरूरत पूरी करने के लिए कुछ भी कर सकती हो,,,,

तो इसमें हर्ज ही क्या है,,,,, औरत और मर्द दोनों अपनी अपनी जरूरत पूरी करते ही हैं क्या मतलब की जिंदगी को इसी तरह से प्यासी ही गुजार दिया जाए आखिरकार चुत किस लिए है सिर्फ मुतने के लिए या बच्चे पैदा करने के लिए ही नहीं है,,,, अपनी जरूरत पूरा करने के लिए भी है,,,,,

तो क्या अगर तुम्हें मौका मिले दीदी तो तुम सस सस सस संजू के साथ भी,,,,

(संजू का नाम सुनते ही पल भर के लिए साधना का चेहरा फीका पड़ गया लेकिन साधना अपने आप को तुरंत संभाल कर अपने चेहरे पर मुस्कुराहट लाते हुए बात को संभालते हुए बोली)

तो क्या हुआ आराधना तू ही सिर्फ रिश्तेदारी देखती है अगर मुझे जरूरत पड़े और मुझे भी अपने बदन की जरूरत पूरी करनी पड़े तो ऐसे में अगर संजू का सहारा लेना पड़े तो भी मैं कुछ गलत नहीं समझती,,,,

हाय दइया क्या तुम सच कह रही हो दीदी,,,

तो क्या हुआ रे संजू जवान है हट्टा कट्टा है गठीला बदन का नौजवान लड़का है और उसके साथ ही उसका लंड की मोटा और तगड़ा होगा और तू तो समझती होगी कि हम जैसी उम्र की औरतों को अगर एक जवान लड़का मिल जाए तो फिर बात ही कुछ और होती है,,,,(बात ही बात में साधना अपने चरित्र का प्रदर्शन अपनी छोटी बहन के सामने जानबूझकर कर दी थी कि अगर बाद में कभी आराधना को उसके और उसके बेटे के बीच में कुछ चल रहा है इस बात में पता चले तो ज्यादा बात का बतंगड़ ना बन पाए क्योंकि वह पहले से ही अपना इरादा बता चुकी थी लेकिन वह इस बात को बिल्कुल भी नहीं जानती थी की आराधना उसके और उसके बेटे के बीच में क्या चल रहा है सब कुछ जानती है,,,, साधना अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,) मैं तो कहती वह आराधना अशोक जीजा का तो मुझे पता नहीं है क्योंकि 6,,,,,7 महीने गुजर चुके हैं और घर पर अभी तक आए नहीं है,,,, मेरी मान तो तू भी मेरे पड़ोस की ननद की तरह अपने ही बेटे से शारीरिक संबंध बना ले मुझे पूरा यकीन है कि संजू तेरी जरूरत को जरूर पूरा करेगा,,,,

धत् दीदी,,,,,,(इतना कहने के साथ ही आराधना एकदम से शर्मा गई लेकिन जिस तरह से उसकी बड़ी दीदी उससे संजू के बारे में बात कर रही थी उसे सुनकर आराधना कोई तसल्ली महसूस हो रही थी कि अगर उसकी और संजू के बीच में जो कुछ भी चल रहा है अगर उसकी दीदी को पता चल भी जाए तो वह खुद अपनी बड़ी दीदी को उसके ही कहे अनुसार उसके कहे रास्ते पर चल रही है यह कहकर बात को टाल देगी और सब कुछ सही हो जाएगा,,,, आराधना तुरंत पानी से अपनी गांड धोना शुरू कर दी और बोली,,,) दीदी तुम्हें अगर संजू के साथ मजे लेना है तो मैं इंकार नहीं करूंगी लेकिन मुझसे तो यह ना हो पाएगा,,,,

पागल है तू घर में इतना मस्त जवान लड़का है और तू अपनी चूत को जंग लगा रही है,,,,,(इतना कहते हुए साधना भी बोतल के पानी से गांड धोने लगी क्योंकि उन दोनों को यहां पर बैठे काफी समय हो गया था पानी से धोने के बाद वह दोनों खड़ी हो गई आराधना तो तुरंत अपनी कमर पर से साड़ी को नीचे छोड़ दी और उसका नंगा बदन एकदम से पर्दे में ढक दिया लेकिन साधना,,,, खड़ी होकर की सलवार के ऊपर करने लगी थी और थोड़ा सा झुकी हुई थी तभी काफी समय हो जाने की वजह से संजू उन दोनों की तरफ उनके करीब आ चुका था और उसकी नजर साधना की गांड पर जा चुकी थी जो कि संजू की तरह की गांड किए हुए झुकी हुई थी और अपनी सलवार को ऊपर कर रही थी,,,, संजू कुछ देर के लिए अपनी मौसी की गांड को देखने लगा था और संजू की यह हरकत आराधना भी अपनी आंख से देख रही थी और मन ही मन में मुस्कुरा कर रही थी क्योंकि आप उसे संजू और उसकी बड़ी दीदी के बीच कुछ भी खराब नहीं लग रहा था,,,,, वह तो खुदा कैसा चाहती थी कि कोई ऐसा मौका मिले जिसमें दोनों बहने संजू के साथ पूरी तरह से मस्ती कर सके जैसा की मोहिनी और वह खुद करती थी,,,, साधना का ध्यान संजू पर बिल्कुल भी नहीं था और वह धीरे से अपनी चड्डी को अपनी गांड पर चढ़ा कर,,, सलवार को कमर तक खींचकर उसकी डोरी बांधने लगी और संजू की तरफ घूम गई और संजू को देखकर एकदम से चौंकते हुए बोली,,,)

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अरे संजू तु,,,,

अरे कितनी देर लगा दी तुमने मन 20 मिनट ही रह गए हैं,,,, जल्दी से तुम दोनों जन आकर हाथ मुंह धो लो मैं तब तक चाय गरम करवाता हूं,,,,

(इतना कहने के साथ ही संजु अपनी मां के सामने चरित्रवान बनने का नाटक करते हो वहां से चला गया लेकिन अपनी मौसी की गांड देखते हुए राजू को वह देख ली थी और संजू के थोड़े दूर जाने पर ही दोनों बहने झाड़ियों में से बाहर आने लगी और आराधना बोली,,,)

तुम तो नहीं दी थी लेकिन मुझे लग रहा है कि संजू जरूर तुम्हारे ऊपर चढ़ जाएगा,,,

क्यों क्या हुआ,,,?

तुम चड्डी पहन रही थी उससे पहले जब झुककर सलवार को उपर कर रही थी तब तुम्हारी नंगी गांड एकदम साफ दिख रही थी और संजू प्यासी आंखों से तुम्हारी गांड ही देख रहा था,,,,

क्या कह रही है तू,,,

सच में दीदी पहली बार मैंने संजू की आंखों में एक औरत के लिए आकर्षण देखा है तुम्हारी गांड देखकर वह पागल हुआ जा रहा था,,,,

ओहहह इसका मतलब इस उम्र में भी मैं किसी भी जवान लड़के को अपनी तरफ आकर्षित कर सकती हूं,,,,

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आकर्षित करने वाली बात कह रही हो दीदी मुझे तो लगता है कि जिस तरह से मैंने आज संजू की आंखों में तुम्हारी गांड देखकर चमक देखी हूं अगर तुम एक इशारा कर दो तो शायद वो तुम्हारी चुदाई भी कर दे,,,,

अब आराधना तू मेरा मन बहका रही है,,,, इस तरह की बातें मत कर कहीं मेरा मन भी संजू से चुदवाने को ना करने लगे,,,,,

इस तरह से गांड दिखाती रहोगी तो कभी ना कभी तो वह जरूर तुम्हें चोद देगा,,,,।

(इतना कहते हुए दोनों हेंडपंप के पास पहुंच गए और वहीं पर बोतल रखकर हाथ पैर धोकर एकदम फ्रेश हो गए तब तक संजू ने चाय गरम करवा दिया था और 3 प्याली चाय लेकर साथ में नाश्ते के लिए नरम नरम ताजे पाव भी ले लिया था तीनों साथ में मिलकर चाय नाश्ता किया और थोड़ी देर में बस के क्लीनर में बस में बैठने के लिए आवाज लगाई और धीरे-धीरे सब लोग बस में जाकर बैठ गए और फिर से बस चल पड़ी आराधना साधना की बातों पर गौर करने लगी उसके द्वारा दी गई हिदायत की अपने ही बेटे के साथ संबंध बना ले यह हिदायत आराधना को अपने पक्ष में होता हुआ महसूस हो रहा था वह अपने मन में ठान देती कि अगर कभी भी उसकी बड़ी बहन को उसके और उसके बेटे के बीच के संबंध के बारे में पता चलेगा तो वह उसकी ही बात का उदाहरण देते हुए अपनी गलती पर पर्दा डाल देगी,,,,,,,, बस अपने सही समय पर चल रही थी लेकिन बस के पंचर हो जाने की वजह से 3 घंटे बिगड़ चुके थे शाम हो चुकी थी और यहां से गांव बहुत करीब था लेकिन यहां का वातावरण थोड़ा खराब नजर आ रहा था आसमान में बादल घिरे रहे थे बारिश गिरने की आशंका नजर आ रही थी,,)

दीदी घर पहुंचने में देर हो जाएगी भैया को फोन कर लो,,,, मैं तो लगा रही हूं तो स्विच ऑफ आ रहा है,,,

मैं भी तो ट्राई कर चुकी हूं एक तो अपनी गलती कर दी है कि निकलने से पहले भैया को बताया नहीं और आप भैया का फोन बंद है यह तो तुम जानती हो कि गांव में लाइट की समस्या बहुत होती है हो सकता है लाइट ना होने की वजह से मोबाइल चार्ज नहीं हो पाया होगा,,,,

तुम ठीक कह रही हो दीदी लेकिन अब तो मुसीबत हो जाएगी,,,

यही तो मैं भी सोच रही हूं,,,,

तकरीबन 8:00 बजे बस अपनी जगह पर पहुंच गई लेकिन काफी देर हो चुकी थी अंधेरा छा चुका था और हल्की हल्की बारिश भी हो रही थी ऐसे में तीनों अपना सामान लेकर नीचे उतर गए थे यहां से रात का समय हो चुका था इसलिए पैदल ही जाना था और तकरीबन मुख्य सड़क से गांव की दूरी लगभग लगभग 3 या 4 किलोमीटर की थी और ऐसी बरसात में वहां तक पहुंचना नामुमकिन था,,,,, क्योंकि धीरे-धीरे बरसने के बावजूद भी तीनों के कपड़े एकदम गिरे हो चुके थे तीनों फिर भी बैग लेकर आगे बढ़ते चले जा रहे थे लेकिन जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे थे वैसे वैसे बारिश अपना जोर पकड़ रही थी अब उन तीनों को बिल्कुल भी समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें हालांकि रास्ता तो आराधना और साधना दोनों को मालूम था लेकिन वहां तक पहुंचना रात के अंधेरे में और इस तरह की बारिश में बिल्कुल नामुमकिन सा था क्योंकि चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था ऐसे में कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा था और मिट्टी के सड़क होने के नाते मिट्टी गीली हो गई थी जिस पर फिसलने का भी डर था,,,,

अब क्या किया जाए दीदी,,,,

मुझे भी समझ में नहीं आ रहा है आराधना चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा है ऐसे में घर तक पहुंचना बहुत मुश्किल है,,,,

तो अब क्या करें मौसी,,,,

अरे वह देख,,,,,,,, वह खंडहर जैसा घर देख रही आराधना अभी भी वैसे का वैसा ही है चल इसी में चलते हैं कम से कम बारिश से तो बच जाएंगे,,,

हां हां दीदी सही कह रही हो चलो इसी में चलते हैं,,,, जब तक बारिश बंद नहीं हो जाएगी तब तक यही रुकना पड़ेगा,,,

अब तो सुबह ही निकलना पड़ेगा आराधना तू तो जानती है कि यहां पर सियार का कितना डर है,,,,

हा दीदी तूम ठीक कह रही हो,,,,

सियार कैसा होता है,,,(संजू आश्चर्य जताते हुए बोला)

जानवर ही होता है तू देखेगा तो समझ जाएगा,,,,

(थोड़ी ही देर में तीनों टूटे हुए मकान में पहुंच चुके थे जो कि पूरी तरह से खंडहर ही था तीनों भीग चुके थे तेज चलती हवाओं के साथ तीनों के बदन में ठंड की सुरसुरी दौड़ने लगती थी,,,,)
 
अपने मुख्य पड़ाव पर पहुंचते-पहुंचते अंधेरा हो चुका था बस लगभग 3 घंटे पहले से ही लेट थी और बारिश भी शुरू हो चुकी थी और ऊपर से संजू के मामा का मोबाइल बंद था,,,, तीनों एकदम से परेशान हो चुके थे बस से उतरने के बाद बारिश से बचने के लिए सर्वप्रथम उपाय करना था हालांकि बारिश इतनी तेज नहीं थी जब तीनों बस से उतरे थे लेकिन धीरे-धीरे बारिश तेज हो चुकी थी थोड़ी तेज बारिश से बचने का उनके पास कोई सहारा नजर नहीं आ रहा था तो वह लोग धीरे-धीरे मुख्य सड़क से नीचे उतर कर गांव की ओर चल पड़े थे और रास्ते में ही उन्हें एक खंडहर जैसा पुराना घर दिखाई दिया था जिसमें तीनों बारिश से बचने के लिए प्रवेश कर चुके थे,,,,

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खंडहर नुमा घर में प्रवेश करते-करते तीनों पूरी तरह से देख चुके थे वह तो अच्छा था कि उन लोगों के पास जो बैग थे वह वाटरप्रूफ थे जिसकी वजह से बैग के अंदर का सामान सुरक्षित था,,,, तीनों खंडहर के अंदर पहुंचते हुए बैग को एक तरफ रख कर कुछ देर तक यूं ही खड़े होकर अंधेरे में ही बारिश को देखने लगे जो कि बहुत तेज से बरसना शुरू हो चुकी थी और साथ ही बादलों की गड़गड़ाहट से वातावरण और भी ज्यादा भयानक होता जा रहा था चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा छाया हुआ था और उस पर तेज बारिश माहौल को पूरी तरह से भयानक बना रहा था,,,, इस तरह का वातावरण भयानक इसलिए था कि तीनों एक अनजान जगह पर खंडहर में बारिश से बचने के लिए रुके हुए थे और ऐसे में तेज चल रही बारिश किसी के भी लिए भयानक ही नजर आती और अगर यही बारिश एकदम सुरक्षित जगह पर अच्छे खासे घर में मौजूद होने पर बरस रही होती तो शायद इस तरह की बारिश माहौल को पूरी तरह से रोमांटिक बना दिया होता जोकि प्रेम प्रसंग के लिए बेहद उत्तम माहौल होता लेकिन इस समय माहौल पूरी तरह से बिगड़ा हुआ था तीनों के कपड़े पूरी तरह से पानी में भीग चुके थे और तेज चलती हवाओं के साथ तीनों को ठंड का भी अनुभव हो रहा था,,,, बादलों की गड़गड़ाहट की आवाज से रह-रहकर तीनों चौक जा रहे थे और ऐसे माहौल में संजू घबराहट भरे स्वर में बोला,,,।

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अब क्या करें मौसी हम तो पूरी तरह से फंस चुके हैं,,,,

करना क्या है किसी खंडहर में रात गुजारनी होगी जब तक की बारिश बंद नहीं हो जाती और वैसे भी गलती हम लोगों की है कि हम लोगों ने भैया को बिना बताए वहां से निकल गए अगर शहर होता तो शायद बात कुछ और थी लेकिन गांव में तकलीफ और भी ज्यादा बढ़ जाती है जब संपर्क करने का कोई साधन नहीं होता,,,,

मामा के पास तो मोबाइल थाना,,,

सो तो हे संजू लेकिन तू नहीं जानता गांव में बिजली की बहुत समस्या होती है हो सकता है लाइट ना आई हो और मोबाइल चार्जिंग नहीं हो पाया होगा इसीलिए भैया का मोबाइल स्विच ऑफ है,,,,(आराधना संजू को हालात के बारे में समझाते हुए बोली,,,,)

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चलो कोई बात नहीं यहीं पर रात गुजारते हैं लेकिन अंधेरा बहुत है और ठंड भी लगने लगी है,,,,(संजू चिंतित स्वर में बोला)

हां तो सच कह रहा है संजू ठंड तो लगने लगी है क्योंकि हम तीनों पूरी तरह से भेज चुके हैं और कपड़े गीले होने की वजह से तेज चल रही हवाओं के साथ बदन में ठंड‌ का भी अनुभव हो रहा है इस तरह से तो रात गुजरने वाली नहीं है,,,,,

तुम ठीक कह रही हो दीदी अगर किसी तरह से खंडर में उजाला हो जाता है तो आपने के लिए लकड़ियां जला दी गई होती तो कुछ राहत मिल जाती,,,,

आराधना मस्ती में मचलती हुई

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वैसे तो खंडहर काफी पुराना है हो सकता है यहां पर सुखी लकड़ियां मिल जाए,,,, रुको मैं ढूंढता हूं मम्मी तुम अपना मोबाइल देना तो उसके टॉर्च के उजाले में देखुं,,

(इतना सुनते ही आराधना अपने पर्स में से मोबाइल निकालने लगी जो कि पर्स को बड़े संभाल कर वह खंडहर तक लेकर आई थी ताकि पर्श भीग ना जाए और उसका यह जतन काम कर गया था उसका पर्स केवल ऊपर से थोड़ा बहुत भी गया था इसलिए उसमें रखा हुआ मोबाइल और बाकी का सामान एकदम सुरक्षित था,,,, जिसमें से मोबाइल निकाल कर वह संजू को थमाने लगी और संजू अपनी मां के हाथ से मोबाइल लेकर उसका टॉर्च चालू कर दिया और पूरे खंडहर मैं टॉर्च जलाकर वह देखने लगा वैसे तो खंडहर देखने में काफी भयानक नजर आ रहा था मोबाइल के टॉर्च के उजाले में खंडहर के हालत को देखकर आराधना बोली,,,)

बाबरी कितना डरावना खंडहर है एकदम भूतिया लग रहा है,,,,

अपनी मां को चोदने की तैयारी करता संजू

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तेरा सोचना ही गलत है आराधना तो जरा दूसरी तरीके से सोचते जवान औरत के तरीके से तो तुझे यह खंडहर डरावना नहीं बल्कि एकदम रोमांटिक लगने लगेगा,,,

कैसी बातें कर रही हो दीदी यह खंडहर भी भला रोमांटिक लगने की जगह है,,,,

क्यों नहीं आ रहा था ना जरा सोच एक जवान लड़का तेज बारिश और ऐसे में उस जवान लड़की के साथ दो हसीन औरत जवानी से भरी हुई,,,,

धत् दीदी कैसी बातें कर रही हो संजू है थोड़ा तो शर्म करो,,,

अरे संजू है तभी तो कह रही हूं तुझे अभी मैंने बस में बताई थी ना पारिवारिक रिश्तो के बीच शारीरिक संबंध के बारे में और तुझे यह भी बताई थी कि अगर सब कुछ सही चलता रहे तो मुझे संजू के साथ सारी संबंध बनाने में बिल्कुल भी एतराज नहीं होगा,,,,

हाय दैया तुम कैसी बातें कर रही हो दीदी थोड़ा तो शर्म करो संजू सुन लेगा,,,,

सुन ले तो सुन ले मैं तो अपने मन की बात बता रही हुं,,,,(आराधना बार-बार अपनी दीदी से बात करते हुए संजू की तरफ देख ले रही थी कि कहीं वह सुन तो नहीं रहा है,,,, और आराधना अपने मन में यही सोच रही थी कि काश साधना की बातें उसका बेटा सुन लेता तो मजा आ जाता,,,,)

बस करो दीदी तुम भी ना,,,,

अरे तुम भी ना क्या हम दोनों की क्या उम्र हो गई है क्या अभी हम दोनों आराम से मोटा तगड़ा गधा जैसा लंड कितनी चूत में ले सकते हैं,,,,

हाय दीदी चुप रहो ना,,,, मुझे तो तुम्हारी बातें सुनकर शर्म आ रही है,,,,,

इसमें शर्माने की कौन सी बात है,,,,

(बात करते हुए साधना की संजू की तरफ देख रही थी जो कि मोबाइल के टॉर्च से सूखी लकड़ियों को इकट्ठा कर रहा था इस तरह के वातावरण में तेज चलती बारिश तेज हवा बादलों की गड़गड़ाहट और खंडहर मैं अपने आपको पाकर साधना बहकने लगी थी उसकी चूत में खुजली होना शुरू हो गई थी वैसे भी हो अपने मन की बात को पहले से ही सफर के दौरान आराधना से बता चुकी थी ताकि बाद में कोई दिक्कत ना हो और आराधना भी यही चाहती थी कि काशीष खंडहर में ही अपनी बड़ी दीदी का सहारा लेकर वह भी अपने बेटे से चुदाई का सुख प्राप्त कर ले और वह भी अपनी बहन के सामने ताकि दोनों के बीच किसी भी तरह का पर्दा ना रह जाए दोनों अपने अपने तरीके से जुगाड़ लगाने के फिराक में थे और संजू दोनों की बातों को शांति से सुनता हुआ सूखी लकड़ियों को बटोर रहा था क्योंकि चाहे जैसे भी उसके हाथ में तो लड्डू ही लड्डू था,,,,,, साधना पूरी तरह से अपनी छोटी बहन आराधना को,,, अपनी मद भरी बातों में फंसाना चाहती थी ताकि वह आराधना को अपने विश्वास में लेकर संजू के साथ शारीरिक संबंध बना सके और आराधना को भी कार्य में आगे बढ़ा सके ताकि उसका भी जीवन हरा-भरा हो जाए क्योंकि साधना को यही लगता था कि अशोक से वह काफी महीनों से दूर थी ऐसे में एक जवान खूबसूरत औरत होने के नाते उसके मन में भी उमंग भरी होगी बस उसे खोलने की जरूरत थी वह चाहती थी कि उसकी बहन भी जिंदगी के हर सुख को भूखे सकें भले ही वह सुख उसे अपने जवान बेटे से ही क्यों न प्राप्त हो,,,,, देखते ही देखते मोबाइल के टॉर्च के सहारे संजू काफी लकड़ियों को इकट्ठा कर चुका था जो कि रात भर आराम से चल सकती थी उन्हें खंडहर के बीचो-बीच लाकर रखते हुए बोला,,,।

अच्छा है कि खंडहर में ही सूखी लकड़ियां मिल गई वरना मुश्किल हो जाता है लेकिन लकड़िया जलेगी कैसे माचिस तो है नहीं हम लोगों के पास,,,,,

1 मिनट,,,,(इतना कहने के साथ ही साधना अपने बैग के पास गई और बैठ गई और संजू मोबाइल के टॉर्च का उजाला अपनी मौसी की तरफ कर दिया था और जिस तरह से वह बैठी थी उसकी बड़ी बड़ी गांड और भी ज्यादा वह भरी हुई और बड़ी लग रही थी और पानी में भीग जाने की वजह से उसकी सलवार पूरी तरह से उसके नंगे बदन से चिपकी हुई थी जिसमें से उसका खूबसूरत बदन झलक रहा था,,,, जो नजारा संजू देख रहा था वही नजारा संजू की मां आराधना भी देख रही थी वह भी देख रही थी कि उसकी बड़ी बहन की सलवार उसके बदन से एकदम से चिपक गई थी और उसकी पेंटी तक नजर आ रही थी और वह अपने बेटे की तरफ देखी तो संजू भी ललचाई आंखों से अपनी मौसी को देख रहा था अपने बेटे की नजरों को देखकर आराधना को गुस्सा नहीं आया बल्कि उम्मीद की एक किरण नजर आने लगी,,,,। थोड़ी ही देर में देख के चारों तरफ के खाने में देखने के बाद साधना के हाथ एक लाईटर लग गया और लाइटर हाथ में आते ही वह एकदम से खुश होते वह बोली,,,,)

अच्छा हुआ कि तेरे मौसा जी का लाइटर बैग में ही था और यह बैग उनका ही है इसीलिए मुझे पूरी उम्मीद थी कि उनका लाइटर भी उनके बैग में होगा क्योंकि वह ऑफिस के सिलसिले में 10 दिन के लिए शहर के बाहर जाते हैं वही बैग लेकर जाते हैं उन्हें तो सिगरेट पीने की आदत है यह तो तुम जानते ही हो तभी,,,, चलो अच्छा ही हुआ पिलाकर मिल गई वरना तुम्हारी मेहनत पानी में चली जाती,,,,

हा मौसी तुम सच कह रही हो,, लाओ में लकड़ी को जलाने की कोशिश करता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपनी मौसी के हाथ में चार लाइटर ले लिया और मोबाइल को अपनी मौसी को थमा दिया और उन्हें टॉर्च दिखाने के लिए बोला साधना अपनी जगह से खड़ी हुई और सूखी लकड़ियों के पास आकर टॉर्च दिखाने लगी और संजू लाइटर जलाकर उनकी लकड़ियों को जलाने की कोशिश करने लगा जो कि थोड़ी ही देर में लकड़ियां से लगने लगी और देखते ही देखते वह जलने लगी इस तेज बारिश में तेज चलती हवाओं के बीच और पूरी तरह से भी जाने की वजह से जैसे ही लकड़ियां जलने लगी वैसे ही तीनों के चेहरे पर मुस्कुराहट थी क्योंकि वह तीनों जानते थे कि तेज चलती हवाओं के ठंडक सिर्फ राहत दे सकती है,,,, लकड़ी के जलते ही खुश होते हुए साधना बोली,,,।

वह संजू तू ने कमाल कर दिया रात गुजारने का इससे अच्छा तरीका और कोई नहीं हो सकता था,,,,,(और फिर तीनों उस जलती हुई आग के किनारे बैठ कर अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर ठंडक को दूर करने की कोशिश करने लगे,,,,, संजू अपनी जगह पर बैठे-बैठे ही लकड़ियों के जलने से पहली भी रोशनी में अपनी मां की तरफ देखा तो उसका भी बदन पूरी तरह से पानी में भीगा हुआ था उसके वस्त्र भी उसके बदन से चिपके हुए थे जिसमें से उसकी बड़ी बड़ी चूची एकदम साफ नजर आ रही थी और उनमें से बीच की खाई एकदम जानलेवा नजर आ रही थी जिसे देख कर संजू उत्तेजित हो जा रहा था वह अपने आपको अपनी मौसी की मौजूदगी में संभालने की कोशिश कर रहा था अगर वह इस समय केवल अपनी मां के साथ अकेला होता तो शायद बदल में गर्मी के लिए लकड़ी चलाने की भी जरुरत ना पड़ती है वह अपनी मां की कर्म चूत में अपना लंड डालकर ठंडक को अपने से दूर कर दिया होता,,,, पर यही हाल साधना का भी था उसकी भी कुर्ती से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी अंदर पहनी हुई लाल ब्रा भी एकदम साफ झलक रही थी जिस पर आराधना की नजर गई तो वह तुरंत संजू की तरफ देखने लगी जो कि संजू भी अपनी मौसी की छातियों की तरह ही देख रहा था,,,, यह देखकर आराधना की दोनों टांगों के बीच हलचल बढ़ने लगी कुछ देर तक खामोश रहने के बाद संजू अपनी मौसी से बोला,,,।

मौसी तुम दोनों को अपने अपने कपड़े बदल लेना चाहिए क्योंकि तुम दोनों की पूरी तरह से भीग चुके हो और अगर ऐसे भीगे कपड़े में रहोगी तो ठंड लग जाएगी और शादी के माहौल में अगर बुखार आ गया तो शादी का मजा किरकिरा हो जाएगा,,,,

हां यह तो तू ठीक कह रहा है लेकिन कपड़े उतार भी देंगे तो पहनेंगे क्या,,,,, मैं इस समय अपनी साड़ी पहन कर उसे गंदा नहीं करना चाहती उसे तो मैं सुबह ही पहनूंगी यहां से चलने से पहले,,,,

और मैंने तो अपनी सारी साड़ीया नीचे रखी हुई है अगर निकालूंगी तो सब बिगड़ जाएगी,,,,(एकदम से सोच समझ कर जवाब देते हुए आराधना बोली,,,, अपनी मौसी और अपनी मां का जवाब सुनकर संजू सोच विचार कर बोला क्योंकि वह जानता था कि वह अपनी मौसी के साथ भी चुदाई का मजा लूट चुका है और अपनी मां के साथ भी इसलिए उसे दोनों के सामने इस तरह की बात करने में शर्म बिल्कुल भी महसूस नहीं होने वाली थी क्योंकि वह जानता था कि दोनों सिर्फ एक दूसरे को दिखाने के लिए ही औपचारिक रूप से असहज होने का नाटक करेंगी,,, इसलिए वह बोला,,,)

देखो तुम दोनों का जो हाल है मेरा भी वही हाल है मुझे भी अपने कपड़े उतारने ही होंगे क्योंकि मैं जानता हूं कि अगर सर्दी लग गई तो बुखार आ जाएगा और फिर शादी में दौड़-धूप करना पड़ता है अगर बीमार पड़ गया तो मामा भी परेशान हो जाएंगे और ऊपर से मैं शादी में उनका हाथ नहीं बटा पाऊंगा वैसे भी इतनी तेज हवा चल रही है कि सुबह तक तो एकदम सुख हीं जाएगा,,,,

हां संजू यह बात तो तू सही कह रहा है,,,,

सच कह रहा हूं मौसी मैं तो जा रहा हूं अपने कपड़े उतारने,,,,(इतना कहते हुए संजू अपनी जगह पर खड़ा हो गया उसके मन में कुछ और चल रहा था वह किसी भी तरह से अपनी मां और मौसी दोनों को अपने लंड के दर्शन कराना चाहता था क्योंकि वह अब अपनी मौसी और अपनी मां दोनों को एक साथ चोदना चाहता था और जो कि इस खंडहर में ही मुमकिन था क्योंकि इस तरह का माहौल और मौका जिंदगी में कब मिलेगा यह कहना बहुत मुश्किल था इसलिए भाई इस पल का फायदा उठा लेना चाहता था,,, संजू अपनी जगह पर खड़ा हो चुका था और साथ ही अपनी मां और मौसी के बारे में सोचने की वजह से उसका लंड भी खड़ा हो चुका था जो कि उसके पैंट में तंबू बनाया हुआ था संजू ने तुरंत अपने सारे कपड़े उतार कर,,,, शिवाए अंडरवियर के ,,,, अंडरवियर में संजू के तने हुए तंबू को देखकर दोनों बहने की चूत से काम रस की बूंद टपक पड़ी दोनों एकदम से मदहोश होने लगी और संजू बिना अपना अंडरवियर निकाले अपनी जगह पर बैठ गया लेकिन बैठने के बावजूद भी,,,, उसके आगे वाला भाग दोनों बहनों की आंखों में कयामत ढा रही थी,,,,, संजू भी किसी तरह से अपनी मां और अपनी मौसी के बदन से उनके कपड़ों को उतरवाना चाहता था क्योंकि संजू अपनी मां और मौसी दोनों की स्थिति से अच्छी तरह से वाकिफ थी दोनों एक नंबर की चुदवासी थी ,,,, और संजू अंगड़ाई लेता हुआ बोला,,,

अब जाकर थोड़ा राहत महसूस हुआ मैं तो कहता हूं कि तुम दोनों भी अपने सारे कपड़े उतार कर आग ताप लो क्योंकि वैसे भी यहां कोई देखने वाला थोड़ी ना है,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना का दिल जोरो से धड़कने लगा वह साफ शब्दों में उन दोनों को नंगी होने के लिए कह रहा था और अंदर ही अंदर आराधना भी यही चाहती थी केवल अपनी बड़ी बहन का लाज शर्म रख रही थी और अपनी बहन को इस कार्य में आगे बढ़ता हुआ देखना चाहती थी ताकि वह पीछे पीछे मजा ले सकें आराधना तो नहीं लेकिन साधना एकदम से तैयार हो गई क्योंकि उसकी चूत में कुछ ज्यादा ही खुजली मची हुई थी इसलिए वह बोली,,,)

संजू सही कह रहा है हमें अपने कपड़े उतार कर यही टांग देना चाहिए सुबह तक सूख जाएंगे लेकिन अगर यही गीले कपड़े पहने रह गए तो हो सकता है हम दोनों बीमार पड़ जाए और फिर लेने के देने पड़ जाएंगे इसलिए मैं तो अपने कपड़े उतार रही हूं और वैसे भी यहां पर शर्म करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि संजू अपना ही बच्चा है कोई गैर तो है नहीं,,,,

लेकिन दीदी संजू के सामने,,,,

तो क्या हुआ,,,(इतना कहने के साथ ही साधना अपनी जगह पर खड़ी हो गई,,, और धड़कते दिल के साथ अपनी कुर्ती को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाने लगी और अपने आप को नंगी करने की शुरुआत करने लगे यह देखकर संजू का दिल जोरो से धड़कने लगा और आराधना भी यही चाहती थी वह पहले अपनी बहन को अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होने देना चाहती थी ताकि फिर वह अपनी बहन को देखकर अपने कपड़े उतार सकें और शुरुआत हो चुकी थी,,,)
 
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