Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 112 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest मुझे प्यार करो,,,

एक अद्भुत और रोमांचक अनुभव के साथ मां बेटे दोनों घर पर पहुंच चुके थे,,,, ना तो इस बात को कभी अंकित सोचा था और नहीं कभी उसकी मां सोची थी कि ब्लाउज की दुकान पर दरजी के सामने मां बेटे पूरी तरह से अनजान बनकर इस तरह से मजा लेंगे,,,, सुगंधा अपने बेटे को बेवकूफ समझती थी लेकिन आप उसे समझ में आने लगा था कि उसका बेटा बेवकूफ नहीं बहुत चालाक है जो एक ही रात में उसे एक बार फिर से औरत बना दिया था और एक ही रात में उसे खुद को पता चल गया था कि वाकई में उसका बेटा पूरा मर्द है जिसे वह ढीला ढाला समझती थी,,, हर पल अंकित उसे एक नए एहसास में डुबो दे रहा था जिसमें सुगंधा खुद डूबना चाहती थी वैवाहिक जीवन में भी उसने इतना आनंद नहीं ली थी जितना एक ही रात में उसके बेटे ने उसे आनंद प्रदान किया था एक अद्भुत अनुभव प्रदान किया था उसे एहसास दिलाया था कि औरत अपनी सोच से ज्यादा मजा ले सकती है अगर वह खुद रंडी पन पर आ जाए तो उसकी झोली में आनंद ही आनंद है इसका एहसास सुगंधा को भी अच्छी तरह से हो रहा था। सुगंधा को अच्छी तरह से मालूम था कि उसके पति ने भी उसे इतना ज्यादा खुलने की अनुमति कभी नहीं दिया था या खुद ही औरत के अंदर कितना प्यार छुपा है इस बात की गहराई को वह कभी समझ ही नहीं पाए थे संभोग की परिभाषा उनके लिए केवल इतनी सी थी कि बिस्तर पर और उसकी टांगों के बीच जाकर जोर-जोर से धक्के लगाना और ढह जाना बस इतना ही जानकारी थी औरत को खुश करने की।



लेकिन सुगंधा इस बात से खुश ठीक ही उसका बेटा अपने आप से एक कदम नहीं 10 कदम आगे था वह औरत को खुश करना जानता था कैसे उन्हें प्रसन्न किया जाता है इस बात को अच्छी तरह से जानता था। लेकिन सुगंधा को यह नहीं मालूम था कि उसका बेटा यह सब सीखा कहां से,,,, लेकिन फिर भी सुगंधा के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं थी क्योंकि इतना तो ज्ञान उसे भी था कि मर्द औरत को चोदने का हुनर अच्छी तरह से जानते हैं भले ही वह पहली बार हो या आखिरी बार हो,,, शुरू शुरू में थोड़ी दिक्कत होती है लेकिन कुछ ही समय में सब कुछ सही हो जाता है। सुगंधा ईस बात से भी भली भांति परिचित थी कि वह गंदी किताब जिसे वह खुद फुटपाथ पर से खरीदी थी,, जिसे वह अंकित चाहिए कहकर संभाल कर रखी हुई थी कि यह उसके पिता की निशानी है जिसे वह पढ़ा करते थे उसे किताब से भी अंकित को बहुत ज्ञान मिला था इस बात से उसे इनकार नहीं था क्योंकि उसके काम में औरत को खुश करने का पूरा तरीका था एक मर्द औरत के साथ संबंध बनाते समय किस तरह की हरकत करता है कैसे खुश करता है सब कुछ बड़ी बारीकी से लिखा गया था शायद उसके बेटे का हमें उसके बाप से ही आया हो इसलिए वह इस बात से कुछ ज्यादा विचार विमर्श नहीं करती थी।

सुगंधा ताला खोलकर घर में प्रवेश करते हुए मुस्कुराते हुए अपने बेटे से बोली,,,,।

मैडम का नाप लेने में मजा आया कि नहीं,,,



पूछो मत मम्मी,,, (घर में प्रवेश करते हुए और फिर दरवाजा बंद करते हुए) कसम से मेरा बस चलता है तो उसे दरजी के सामने तुम्हारी साड़ी उठाकर तुम्हारी चुदाई कर देता,,,,।

तो कर दिया उसने रोका किसने था,,, (सुगंधा थैले को टेबल पर रखते हुए बोली और अपनी मां की बात सुनकर अंकित एकदम हैरान होकर उसकी तरफ देखने लगा और बोला,,,)

क्या बात कर रही हो मम्मी सच में,,,।

तो क्या मजाक थोड़ी ना कर रही हुं,,, (अंकित की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए) तेरी हरकतों से मुझे भी न जाने क्या होने लगा था..

तुम्हारी भी बुर पानी छोड़ रही थी ना,,,।

क्यों नहीं जब तेरा खड़ा हो सकता है तो मेरा पानी नहीं छोड़ सकता और वैसे भी तेरी हरकत थी ऐसी की मेरी जगह कोई भी हो थी तो उसका भी मेरे जैसा यार होता लेकिन तू कितना बेशर्म है उस दरजी के सामने ही मेरी चूची दबा रहा था।

तो क्या मम्मी मैं तो उसे दर्जी की हालत खराब कर रहा था और दिख रहा था कि आजकल के लड़के कितने तेज हैं,,,, सच कहूं तो उसके मन में भी यही चल रहा था क्योंकि जब तुम चली गई थी तो उसने यही कहा था कि मुझे तो डर था कि कहीं तुम उसकी साड़ी उठाकर उसकी लेना लो,,,,।

तभी तो मैं भी कह रही हूं ले लिए होते तो भी मैं नहीं रोकती वैसे भी वह हम दोनों को थोड़ी ना जानता है,,,, (अपनी मम्मी की बातें सुनकर अंकित ठगा सा रह गया था उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि उसने इतना सुनहरा मौका खो दिया था उसे नहीं मालूम था कि उसकी मम्मी इतनी बड़ी छिनार हो चुकी है कि किसी के भी सामने चुदवाने के लिए तैयार है। इसलिए उदास होते हुए बोला,,,)

क्या मम्मी तुम भी इतना अच्छा मौका हाथ से गंवा दी मुझे तो लगा के तुम शर्मा रही हो,,,, तुम्हें यह सब अच्छा नहीं लगेगा अगर जरा भी मुझे एहसास होता कि तुम तैयार हो तो सच में उसे दरजी के सामने तुम्हारी बुर में लंड डालने मैं जरा भी देरी न करता और सोचो कितना मजा आता है जब बहुत दरजी अपनी आंखों से यह सब कुछ देखा कि एक अनजान लड़का है कंजन औरत को किस तरह से पल भर में मदहोश करके उसकी चुदाई करने लगा है उसे अपने आप पर शर्माने लगता कि वह इतना अच्छा मौका कम दिया क्योंकि यह सब वह भी कर सकता था।



कर तो सकता था लेकिन मुझे नहीं लगता कि वह मंजिल तक पहुंच पता उसकी हालत देखे थे सिर्फ नाप लेने में लेने में क्या सिर्फ देखने में ही उसका लंड खड़ा हो गया था वह पसीना पसीना हो गया था अगर उसे छूने का मौका मिल जाता तो शायद सच में वह दिल के दौरे से ही मर जाता।

बात तो तुम ठीक कह रही हो तुम्हारी जवानी है ही इतनी गदराई हुई कि तुम पर काबू पाने के लिए सांड बनना पड़ता है,,,,।

अच्छा तो तु सांड बन जाता है।

वह तो बनना ही पड़ता है मम्मी तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड जब तुम घोड़ी बनती हो तो पीछे से देखकर कोई कह ही नहीं सकता की,, तुम कोई सामान्य औरत हो क्योंकि तुम्हारा पिछवाड़ा इतना बड़ा दिखता है कि वाकई में तुम गाय लगने लगती हो और मुझे सांड बनना पड़ता है तुम्हें खुश करने के लिए,,,,।

(अपने बेटे की बात पर सुगंधा हंसने लगी और वैसे भी जिस तरह की बातचीत हो रही थी उसकी बुर फिर से गीली होने लगी थी,,, अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) वैसे मम्मी जिस तरह से तुम बोल रही हो सच में तुम एकदम छिनार हो गई हो,,,।

यह मत भुल तूने हीं बनाया है। चल अच्छा अब रहने दे खाना भी बनाना है रुक मैं हाथ मुंह धो लुं,,

ठीक है,,,,

(सुगंधा बाथरूम में चली गई और थोड़ी ही देर में पेशाब करने की आवाज आने लगी उसकी बुर से मधुर सिटी की आवाज आने लगी जिसे सुनकर अंकित बोल पड़ा)

तुम तो हाथ मत होने के लिए बोल रही थी तुम तो मुतने लगी।



अब लगी है तो क्या करूं करना तो पड़ेगा ही,,, (बाथरूम के अंदर से ही पेशाब करते हुए सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली अपने बेटे की बात सुनकर उसके चेहरे पर शर्म की लालिमा छा गई थी भले ही अपने बेटे से अब चाहे जितना भी खुल गई हो लेकिन फिर भी किसी किसी बात पर वह शर्म से पानी पानी हो जाती थी,,,,,, अपनी मां की बात सुनकर बोला)

बोली होती तो बाहर ही पेशाब करवा दिया होता।

क्यों पेशाब करने में तेरी जरूरत पड़ेगी क्या,,,,

अब तो पड़ेगी क्योंकि तुम्हारी बुर पर मुंह रखकर तुमसे पेशाब करवाऊंगा,,,,।

धत्,,,,,, हरामी,,,,, ऐसा सोचना भी नहीं कितना गंदा लगता है। (अंदर बैठे-बैठे ही वह बोली,,,)

तुम्हें गंदा लगता है लेकिन मुझे तो अच्छा लगेगा,,,।

बिल्कुल भी नहीं हमेशा बिल्कुल भी नहीं करने दूंगी जो कुछ भी हो रहा है उतना ही काफी है इससे ज्यादा कुछ नहीं,,,,,,।

ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी तुम्हारी मर्जी के बिना थोड़ी ना कुछ करना है,,,।

(बातों ही बातों में बुर पर मुंह रखकर पेशाब करने वाली बात करके अंकित ने सुगंधा के अरमानों को जगा दिया था भले हुए अंदर से इस तरह की हरकत करने से इनकार कर रही थी लेकिन अंदर ही अंदर ना जाने क्यों इस तरह के अनुभव से गुजरने का उसका मन कर रहा था,,,, जिनके एहसास से उत्तेजना के मारे उसकी बुर फूलने पिचकने लगी थी।

थोड़ी देर बाद वह तरो ताजा होकर खाना बनाने के लिए तैयार हो गई थी,,,,वह रसोई घर में जाकर खाना बना रही थी बाजार से वह दोनों नाश्ता करके आए थे लेकिन अंकित को भूख लग गई थी तो वह रसोई घर में गया देखा तो अभी भी खाना बनने में थोड़ा समय था अंकित को देखकर उसकी मां मुस्कुराते हुए बोली।



क्या हुआ,,,?

बड़े जोरों की भूख लगी है लेकिन अभी खाना बनने में भी समय है।

बस आधा घंटा और लगेगा तब तक एक काम कर केला खा ले,,,।

मेरे पास तो खुद ही केला है तुम्हारे लिए तुम्हें भूख लगे तो बोलना तुम्हें मैं अपना केला खिला दूंगा,,,,

नहीं तु अपना केला अपने पास ही रख,,,, तेरा वाला केला बहुत ज्यादा परेशान करता है,,,,।

लेकिन मजा भी तो बहुत देता है पूरी भूख मिटा देता है।

भूख मिटा नहीं देता है बल्कि और ज्यादा भड़का देता है,,,,।

ओहहह मतलब कि तुमको पलंग तोड़ चुदाई चाहिए।

ऐसा ही कुछसमझ,,, (सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली तो अपनी मां की मदहोश कर देने वाली अदा और उसके अंदर की प्यास को देखकर अंकित बोला)

अब तो लगता है कि तुम्हें रंडी की तरह चोदना पड़ेगा,,,।

तो अभी किस तरह से चोद रहा था,, (कढ़ाई में चमची से सब्जी को चलाते हुए बोली,,,)

अभी तो थोड़ा रहम कर रहा था,,,, क्योंकि मुझे लग रहा था कि तुम बहुत नाजुक हो लेकिन तुम्हारी बातों से लग रहा है कि तुम कितनी बड़ी खिलाड़ी हो तुम्हें तो पटक कर चोदना पड़ेगा,,,,।

उसके लिए तुझे ताकत की जरूरत पड़ेगी इसलिए कह रही हुं जाकर केला खा ले,,, वह देख थैले में रखा हुआ है,,, (रसोई घर के कोने में उंगली से इशारा करते हुए बोली इस बार अंकित अपनी मां की बात से इनकार नहीं कर पाया और वह भी जाकर के केला ले लिया लेकिन कला को हाथ में लेकर देखने लगा कला वाकई में उसके लंड जितना ही मोटा और लंबा था यह देखकर वह अकेला को हाथ में लिए हुए अपनी मां के पास आया और अपनी मां की आंखों के सामने कला को लेकर उसे हिलाते हुए बोला,,,)

मेरी साइज का ही केला तुम्हें पसंद आता है।

(इस बात को सुनकर सुगंधा मुस्कुरा दे क्योंकि ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई थी इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली)



तू एकदम सही कह रहा है जब मैं केला खरीद रही थी तो मेरी आंखों के सामने तेरा लंड ही झूल रहा था इसलिए मैं भी तेरी साइज का ही केला खरीद ली।

अब जब इतना हिम्मत दिखा ही दी हो तो,,, आज केला भी मैं अलग तरीके से खाऊंगा इसका स्वाद बढ़कर खाऊंगा।

कैसे खाएगा,,,,? (सुगंधा भी आंखों को नचाते हुए बोली,,,)

बस तुम देखती जाओ,,, (इतना कहकर अंकित अकेले को छीलने लगा और देखते-देखते वह पूरा केला छील दिया और उसके छिलके को एक तरफ कूड़ेदान में फेंक दिया केले को हाथ में लेकर इधर-उधर देखकर वह बोला,,,,) चाहे कुछ भी हो इसकी मोटाई मेरे लंड से कम ही है,,,,

दिखा तो,,, (इतना कहकर वह भी केले को ध्यान से देखने लगी तो बोली,,)

सच में तेरा एकदम सांड जैसा है मुझे तो लगा था कि यह अकेला तेरे साइज से थोड़ा बड़ा ही होगा लेकिन यह भी तेरी साइज से कम ही निकला,,,,।

चलो कोई बात नहीं जब तक खाना नहीं बन जाता है इसी से कम चलाते हैं मुझे उम्मीद है कि इससे मेरी भूख थोड़ी बहुत शांत हो ही जाएगी।

तो जल्दी से खा ले इतनी बातें क्योंकर रहा है।

खाता हूं मेरी रानी थोड़ा सबर तो करो आज थोड़ा मसाला लगा कर खाऊंगा।

कैसा मसाला,,,,?

(सुगंधा का इतना कहना था कि अंकित एकदम से मदहोश हो गया और अपनी मां के करीब आकर साड़ी के ऊपर से ही बड़ा अपनी हथेली को अपनी मां की बुर पर रखकर जोर से दबा दिया और बोला)

इसका मसाला,,,,।

हाय दईया कितना हारामी है रे तू,,,, सहहह छोड़ इस दर्द कर रही है,,,,।



जब लंड डालता हूं तब दर्द नहीं करती,,, (अंकित इस तरह से अपनी हथेली में अपनी मां की बुर को दबोचे हुए बोला,,)

लंड डालता है तो मजा आता है लेकिन ऐसे पकड़ता है तो दर्द करताहै।

ठीक है अभी दर्द को मजे में बदल देता हूं,,,,, (इतना कहने के साथ ही वह एकदम से घुटनों के बल बैठ गया,,,, यह देखकर हैरान होते हुए सुगंधा बोली,,,)

अरे यह क्या कर रहा है तू,,,,,

रुको तो सही सब समझ में आ जाएगा,,,, (इतना कहने के साथ ही एक हाथ में केला पड़े हुए दूसरे हाथ से अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगा उसकी हरकत को देखकर सुगंधा को थोड़ा बहुत ज्ञात तो हो ही गया था कि उसका बेटा क्या करना चाहता है उसकी हरकत से उसकी बुर भी पानी छोड़ रही थी इसलिए वह उसे इनकार नहीं की और उसे साड़ी को ऊपर की तरफ उठने दी लेकिन फिर भी वह पूछ रही थी)

अब बात भी दे क्या करने जा रहा है,,,?

रुको तो सही तूम्हे पता चल जाएगा बस इतना बता दो चड्डी तो नहीं पहनी हो ना,,,,।

साड़ी उठा कर रहा है खुद ही देख ले,,,, (सुगंधा भी मदहोश होते हुए बोली,,,,, और अगले ही पर अंकित अपनी मां की साड़ी को उसकी मोटी मोटी जांघो के ऊपर की तरफ ले जाने लगा,,,, और अगले ही फलों से एहसास हो गया कि उसकी मां वाकई में साड़ी के अंदर चड्डी नहीं पहनी थी यह देखकर वह एकदम से हैरान होता हुआ अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,)



तुम तो सच में चड्डी नहीं पहनी हो इसका मतलब तुम एकदम तैयार थी अगर दर्जी की दुकान में तुम्हारी साड़ी उठाकर तुम्हें चोद दिया होता तो मजा आ जाता,,,,।

अब पछताए क्या होत जब चिड़िया चुग गई खेत,,,,।

बात तो तुम एकदम सही कह रही हो अब पछताने से कोई फायदा नहीं है और दोबारा उसकी दुकान पर एक साथ मुलाकात करना भी उचित नहीं है उसे पता चल जाएगा कि हम दोनों एक दूसरे को जानते हैं ‌।

बात तो तो ठीक कह रहा है चल कोई बात नहीं दर्जी ना सही और कोई सही कहीं ना कहीं तो ऐसा मौका जरूर मिलेगा,,,,।

(अपनी मां की उम्मीद और उसका विश्वास देखकर अंकित उत्तेजित होने लगा था उसे भी उम्मीद थी कि एक लड़की ने ऐसा मौका जरूर मिलेगा जब वह किसी गैर के सामने खुलकर अपनी मां की चुदाई करेगा और यही है उम्मीद से उत्साहित होता हुआ अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया था जिसे खुद सुगंधा अपने हाथ से पकड़ ली थी सुगंधा को एहसास हो गया था कि उसका बेटा क्या करने वाला है और इसी एहसास में वह डूबने लगी थी उत्तेजित होने लगी थी और उत्सुकता के साथ अपने बेटे को देख रही थी अपनी मां की गुलाबी बुर को देखकर जो कि इस समय कचौड़ी की तरह फुल चुकी थी उसकी पतली सटीक लकीर देख कर यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था कि इस तालाब में डुबकी लगाने वाला अंकित दूसरा ही था पहला उसका पति इसीलिए तो उम्र के इस दौर में भी उसकी बुर किसी जवान लड़की से काम नहीं थी,,,, अपनी मां की बुर को देखकर अंकित का लंड अंगड़ाई लेने लगा था,,,, अपनी मां की गुलाबी बर को देखने के बाद अंकित नजर उठाकर अपनी मां की तरफ देखने लगा दोनों की नजर आपस में टकराई और सुगंधा शर्म के मारे अपनी आंखों को दूसरी तरफ घूमा ली,,,, पहले ही पल अंकित केले को धीरे-धीरे अपनी मां की गुलाबी बुर की गहरी लकीर पर रगड़ना शुरू कर दिया ऊपर से नीचे तक यह एहसास सुगंधा के तन बदन में जवानी का जोश भर रहा था उसकी आग को भड़का रहा था।

Gaarayi jawani



इस तरह की हरकत करते हुए अंकित अपनी मां की तरफ देख रहा था उसकी मां का चेहरा उत्तेजना से लाल हुआ जा रहा था,,,, अंकित की खुशी का ठिकाना न था क्योंकि उसकी हरकत से उसकी मां को मजा आ रहा था अंकित तीन चार बार अपनी मां के बुर की लकीर के ऊपर नीचे करके वह केला को रगड़ने लगा सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो रही थी सुगंधा अपनी साड़ी को खुद अपने हाथों से पड़ी हुई थी और अंकित अपनी मां की मोटी जांघ पर अपना एक हाथ रखकर उसे हल्के हल्के से दबा रहा था अंकित तो उत्तेजित हो ही रहा था उसकी मां के बदन में भी सुरूर छा रहा था। देखते ही देखते अंकित उसके लिए को अपनी मां की बुर की गहराई में प्रवेश कराने लगा। जैसे जैसे केला अंदर जा रहा था वैसे-वैसे सुगंधा के चेहरे का हाव भाव बदलता जा रहा था उसे ऐसा एहसास हो रहा था कि जैसे कोई लंड उसकी बुर में फिर से प्रवेश कर रहा है और इसी एहसास में वह डूबती चली जा रही थी। देखते ही देखते अंकित आधा केला अपनी मां की बुर में डाल चुका था और आधे केले को ही अंदर बाहर कर रहा था और इतने में ही सुगंधा के तन बदन में आग लगी हुई थी वह मदहोश हुई जा रही थी उसे मजा आ रहा था ऐसा लग रहा था कि केला नहीं जैसे कोई लंड उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा हो उसके चेहरे का हाव भाव पूरी तरह से बदल रहा था उसके चेहरे को देखकर प्रतीत हो रहा था कि वह कितनी चुदवासी हो गई है।



अंकित की भी हालत खराब हो रही थी अपनी मां की बुर में केले को अंदर बाहर होता हुआ देखकर उसे भी मजा आ रहा था और देखते-देखते वह बाकी केले को भी अंदर की तरफ सरका रहा था ,उसे पूरा यकीन था कि पूरा का पूरा केला उसकी मां के बुर में खो जाएगा,,,, और ऐसा ही हुआ अंकित पूरा का पूरा केला अपनी मां की बुर में डालकर उसे बाहर तक खींचता और उसे फिर अंदर डाल देता ऐसा करने में उसे बहुत मजा आ रहा था वह अपने हाथ को अपनी मां की जांघ से हटाकर पीछे की तरफ उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर रख दिया और उसकी गांड को मसलते हुए वह इस क्रिया को बार-बार कर रहा था। सुगंधा की सांस बड़ी तेजी से चल रही थी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां नीचे से भी ऊपर नीचे होती हुई एकदम साफ दिखाई दे रही थी अंकित पागल हो जा रहा था कुछ देर तक अंकित इसी तरह से क्रिया को दोहराता रहा और अपनी मां को मजा देता रहा,,,,,, केले की चुदाई से ही सुगंधा के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकलने लगी थी।

सहहहहह आहहहह,,,, ऊमममममम, आहहहहहहहह,,,,, (वह उत्तेजना के मारे अपने लाल-लाल होठों को अपने दांत से ही काट रही थी उसे बिल्कुल भी रह नहीं जा रहा था वाकई में उसे तेज धक्कों की जरूरत थी इस बात का एहसास अंकित को भी हो रहा था। लेकिन अंकित अपनी मां की उत्तेजना को उसके चुदासपन को और ज्यादा बढ़ाना चाहता था इसलिए कुछ देर तक केले से ही अपनी मां की बुर को चोदता रहा उसका लंड भी पूरी तरह से तैयार हो चुका था उसकी मां की बुर में घुसने के लिए,,,,,, अपनी मां की उत्तेजना उसकी मदहोशी देखकर अंकित का भी मन डोलने लगा था क्योंकि वह इस समय अपनी मां को चोदना नहीं चाहता था और इस समय उसका उद्देश्य भी नहीं था क्योंकि उसके पास समय बहुत था मौका भी था और दस्तूर भी था इसलिए वह किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करना चाहता था घर में केवल मां बेटे ही थे इसलिए वह जानता था कि दोनों को मौका ही मौका है इसलिए वह किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करना चाहता था वह केवल केले पर अपनी मां की बुर की मलाई लगाकर उसे करना चाहता था उसका स्वाद लेना चाहता था लेकिन उसकी हरकत की वजह से जिस तरह की आग उसकी मां के बदन में लगी हुई थी वह देखकर अंकित के भी पसीने छूट रहे थे सुगंधा खुद अपनी बुर गोल-गोल घूमाकर केले को ही अंदर बाहर ले रहे थे और खुद ही हल्के हल्के कमर को आगे पीछे कर रही थी और यही देखकर अंकित का मन एकदम से बदल गया वह धीरे से अपनी मां की बुर में से किले को बाहर निकाल दिया केला बाहर निकलते ही उसके मदन रस से पूरा लबालब दिखाई दे रहा था केले पर से मदन रस की बूंदे टपककर नीचे फर्श पर गिर रही थी।



मदहोशी में सुगंधा की बंद आंखें केले के बाहर निकलने से खुल चुकी थी और वह गहरी सांस लेते हुए अपने बेटे की तरफ देख रही थी अंकित भी अपनी मां की तरफ देख रहा था दोनों की नजर आपस में टकरा रही थी लेकिन इस बार सुगंधा शर्म से अपनी नजरों को ना तो बंद कर रही थी ना ही दूसरी तरफ फेर रही थी वह अपने बेटे की आंखों नहीं देख रही थी। अंकित भी अपनी मां की आंखों में डूबता हुआ धीरे से ऊठकर खड़ा हो गया,,,, और अपनी मां की आंखों के सामने ही उसकी बुर के मदन रस में डुबे हुए केले को, अपने मुंह में डाल दिया,,,, सुगंधा मस्त होकर अपने बेटे की हरकत देख रही थी उसे साथ दिखाई दे रहा था कि केले से उसकी बुर का रस टपक रहा था फिर भी उसका बेटा बेझिझक उसे अपने मुंह में डाल दिया था,,, गहरी सांस लेते हुए सुगंधा अपने बेटे की एक-एक हरकत को देख रही थी उसे नहीं मालूम था कि अगली हरकत क्या होने वाली है अपने मुंह में डाला हुआ अकेला जो कि आधा बचा हुआ था अपने मुंह में डाले हुए ही वह अपने मुंह में लिए हुए केले को अपनी मां की तरफ बढ़ने लगा सुगंधा कुछ समझ पाती ईससे पहले ही अंकित बाकी बचे केले को अपनी मां के होठों से सटा दिया उसमें से मादक खुशबू आ रही थी जो सुगंधा के नथुनों से उसके सीने के अंदर तक जा रही थी वह भी मदहोश होने लगी उसे मालूम था कि उसका बेटा उसे क्या करवाना चाहता है वह भी धीरे से अपने लाल लाल होठों को खोलकर बाकी केले को अपने मुंह में ले ली वह दोनों धीरे-धीरे अकेले का रस चूसने लगे केले का रस क्या चुस रहे थे ।अंकित अपनी मां की बुर का रस चूस रहा था और सुगंधा खुद अपनी बुर के रस स्वाद ले रही थी,,,, इस दौरान अंकित अपनी पेंट का बटन खोल रहा था इसका एहसास सुगंधा को भी हो रहा था सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था।

अगले ही पल अंकित का लंड पेट से बाहर आ चुका था जो की पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा था अंकित धीरे से अपने लंड को पकड़ा और अपनी मां की गुलाबी गली से सटा दिया,,,, सुगंधा एकदम उत्तेजना से भर गई और अपने आप ही अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल दी,,,, अंकित अपनी मां की उत्तेजना और उसका उतावलापन देखकर बिल्कुल भी सब्र करने जैसा नहीं था वह तुरंत अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाया और अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथ से थाम लिया और फिर एक करारा धक्का लगाया और पहली बार में ही अंकित का लंड उसकी मां की गीली बुर में अंदर तक समा गया। अपने बेटे की असीम ताकत और उसके जबर्दस्त प्रहार की वजह से उसके मुंह से हल्की सी चीज निकलने वाली थी लेकिन केला मुंह में होने की वजह से उसके मुंह से चीख निकल नहीं पाई थी,,,, और फिर नहीं पर अंकित अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था खड़े-खड़े ही बड़े आराम से सुगंधा की बुर में अंकित का लंड अंदर बाहर हो रहा था दोनों मां बेटे पूरी तरह से मत हो चुके थे और दोनों धीरे-धीरे केले का स्वाद लेते हुए आगे बढ़ रहे थे हल्का-हल्का टुकड़ा काटते हुए मां बेटे दोनों मदहोशी के आलम में डूबते चले जा रहे थे। अंकित अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पकड़ कर धक्को की गति तेज कर रहा था। सुगंधा भी अपनी बाहों का हर अपने बेटे के गले में डालकर इसका सहारा लेकर खड़ी थी।



देखते ही देखते केले का आकार कम होता जा रहा था दोनों धीरे-धीरे केला ख भी रहे थे और चुदाई का मजा भी लूट रहे थे अंकित आसान बदलने के बारे में सोच भी नहीं रहा था क्योंकि इसी आसन में दोनों को मजा आ रहा था। दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी दोनों मदहोश हो रहे थे दोनों का मजा आ रहा था,,,,, सुगंधा को इस बात का एहसास अच्छी तरह से हो रहा था कि केले से ज्यादा मजा उसके बेटे का केला दे रहा था। दोनों की सांस ऊपर नीचे होने लगी दोनों का बदन अकड़ने लगा और अंकित एकदम से अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हथेलियों में जितना हो सकता था उतना दबोचते हुए जोर-जोर से धक्के लगाने लगा था मुंह में केला होने की वजह से हल्की-हल्की सिसकारी की आवाज सुगंधा के मुंह में से आ रही थी जो की घुटी घुटी सी थी। अगले ही पल केला भी खत्म हो चुका था और देखते ही देखते मांबेटे दोनों एक दूसरे की बाहों में एक दूसरे को कसते हुए एक दूसरे के होठों का रस चूसना शुरू कर दिए थे,,,, और अंकित का लावा भल भला कर उसकी मां की बुर के तालाब को भर रहा था।

Sugandha ki lajawab chuchiya





वासना का तूफान शांत होने के बाद खाना भी तैयार हो चुका था लेकिन जिस तरह की दोनों ने मेहनत किया था थोड़ी थकान महसूस हो रही थी इसलिए 10-15 मिनट दोनों बैठकर आराम कर रहे थे और फिर दोनों एक साथ खाना खाने लगे खाना खाने के बाद थोड़ी देर के लिए अंकित बाहर घूमने के लिए चला गया था और सुगंधा घर की साफ सफाई करने लगी थी।
 
Back
Top