Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 132 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

धीरे-धीरे गर्मियों की छुट्टी खत्म होने को आ गई थी, लेकिन मां बेटे को यह छुट्टियां खत्म होती अच्छी नहीं लग रही थी क्योंकि जो मजा जो सुख मां बेटे ने गर्मी की छुट्टियों में प्राप्त किया था उन्हें लग रहा था कि शायद अब ऐसा मजा उन्हें आने वाला नहीं है क्योंकि अब तृप्ति भी आने वाली थी उसकी मौजूदगी में घर के अंदर मां बेटे खुलकर मजा नहीं ले पाएंगे,,,,,, फिर भी दोनों को इस बात की उम्मीद थी कि कभी खबर तो वह लोग मजा ले ही लेंगे जब तृप्ति घर के बाहर जाएगी ट्यूशन जाएगी या कॉलेज जाएगी तब तुम दोनों को मौका मिल ही जाएगा और इसी बात की संतुष्टि दोनों को थी।

अंकित के रिजल्ट भी आ चुके थे अपनी मां के साथ जवानी का मजा लूटने का प्रभाव उसकी पढ़ाई पर बिल्कुल भी नहीं पड़ा था वह अच्छे नंबरों से पास हुआ था,,,,,, इस बात की खुशी सुगंधा को भी था,वरना उसे इस बात का डर अपने अंदर बना रहता था कि उसकी वजह से उसके बेटे का नंबर कम आएगा लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ था इसलिए वह कुछ ज्यादा ही खुश थी,,, अपने बेटे के रिजल्ट से खुश होकर सुगंधा उसे पैसे देने लगे यह देखकर अंकित बोला,,,।



यह किस लिए,,,!

अरे बेवकूफ तेरे अच्छे नंबर आए हैं अभी कोई पूछेगा तो बताया कि अच्छे नंबर आए हैं तो मुंह तो मीठा करवाना पड़ेगा ना,,,,।

हां यह बात तो है,,,।

जा जल्दी से मिठाई लेकर ए कुछ नहीं तो अपनी पड़ोसन तो जरूर मिठाई मांगेंगी,,,।

कौन सुषमा आंटी,,,,!

हां वही कल ही पूछ रही थी कि रिजल्ट कब आ रहा है,,,, तब तो नंबर जानकर मिठाई तो मांगना तय है,,।

ठीक है मम्मी मैं अभी जाकर मिठाई लेकर आता हूं,,।

जा जल्दी आना,,,,।

शर्मा जी की मोटरसाइकिलले लूं क्या,,,?

नहीं नहीं ऐसा बिल्कुल भी मत करना रोज-रोज वहां पहुंचे रहेगा तो यह अच्छी बात नहीं है,,,,।

(अंकित अच्छीतरह से जानता था कि अगर वह शर्मा जी के घर गया और मोटरसाइकिल मांगा तो शर्मा जी की बहू कभी इंकार नहीं करेगी लेकिन उसकी मां का भी कहना ठीक था कम आना जाना हो तो इज्जत बनी रहती है,,,, और रोज रोज किसी की मोटरसाइकिल मांगना भी ठीक नहीं था इसलिए वह अपनी मां की बात मान गया और पैदल ही चल दिया,,,, दरवाजे पर खड़ी होकर सुगंधा अपने बेटे को जाते हुए देख रही थी उसे आज बहुत रात मिली थी क्योंकि रात दिन भले ही वह अपने बेटे के साथ मजा लेती थी लेकिन उसे इस बात का डर पिता की कहानी उसकी अय्याशी उसके बेटे की रिजल्ट पर भारी न पड़ जाए लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था,,,, जैसे ही अंकित आंख से ओझल हुआ वह घर में आ गई और दरवाजा बंद करके अपना काम करने लगी,,, चलता हुआ अंकित गाना गुनगुना रहा था लेकिन आते जाते औरतों पर उसकी नजर बराबर बनी हुई थी लड़कियों से ज्यादा आकर्षक उसका औरतों की तरफ था खास करके उसकी मां की उम्र की औरतें उसे कुछ ज्यादा ही अच्छी लगती थी उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां बड़ी बड़ी गांड का आकर्षण उसके दिलों दिमाग से उतरता नहीं था,,,, जिस तरह से यह साल गुजरा था अपनी मां की मदद कर देने वाली जवानी की आगोश में उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका इतना अच्छा नंबर आएगा,,,, वह बार-बार अपने मन को मानता कि जैसे अंतिम परीक्षा आने वाली होगी दो-तीन महीना पहले से ही वह अपनी मां से किसी भी प्रकार का संबंध नहीं बनाएगा लेकिन वह अपनी ही बात से मुकर जाता था वह अपने मन को मन नहीं पता था क्योंकि जब-जब के दिमाग उसकी आंखों के सामने आई थी उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी उसे पागल बना देती थी और वह खुद ही अपनी कसम को तोड़ देता था,, लेकिन अब सब कुछ ठीक हो गया था।



थोड़ी ही देर में वह बाजार में पहुंच चुका था और एक अच्छी सी मिठाई की दुकान पर जाकर वह पहले तो सभी मिठाइयों को ध्यान से देख रहा था। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह कौन सी मिठाई ले,,, वही मिठाई की दुकान के अंदर बैठी एक औरत का ध्यान अंकित के ऊपर ही था वह अंकित को बड़े गौर से देख रही थी,,, न जाने क्यों उसे अंकित अच्छा लग रहा था उसका हाव भाव भोलापन, उस औरत को उसकी तरफ आकर्षित कर रहा था,,,, वह जिस तरह से मिठाई की तरफ देख रहा था उसे समझते देर नहीं लगी की उसका नंबर भी अच्छा है क्योंकि वह जब से बैठी थी तब से तीन-चार लड़के और लड़कियां आ चुकी थी मिठाई लेने के लिए जिनका नंबर अच्छा आया था इसी से वह अंदाजा लगा ली थी इसका भी नंबर अच्छा आया है इसलिए वह मिठाई खरीदने के लिए आया है,,,, वह औरत समोसे खा रही थी,,, और अंकित को ही देख रही थी तभी अंकित दुकानदार से बोला,,,।

शेठ सबसे अच्छी मिठाई कौन सी है,,,?

सबसे अच्छी मिठाई,,, गुलाब जामुन ही है,,,।

गुलाब जामुन,,,, लेकिन ताजी तो नहीं दिख रही है,,,।



अरे बबुआ ताजी है,,,, आज सबसे ज्यादा यही बिक रहा है,,,,।

(अंदर बैठी औरत समझ गई थी कि दुकानदार झूठ बोल रहा था और वाकई में गुलाब जामुन को ज्यादा दिन का ही था और वह बेचकर उसे निकालना चाहता था अंकित दुकानदार की बात में आ भी गया था और वह खरीदने ही वाला था कि वह औरत अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और मुस्कुराती हुई अंकित के पास आई अंकित की नजर उसे औरत से टकराई अंकित वैसे भी औरत को पहचानने के मामले में बहुत तेज नजर रखता था वह देखते ही समझ गया की औरत कोई ऊंचे खानदान की है और खूबसूरत भी थी उसके कपड़े भी काफी महंगे लग रहे थे वह पीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी जिसमें उसका खूबसूरत गोरा बदन और भी ज्यादा आकर्षक लग रहा था,, लेकिन अंकित ने उस पर ज्यादा गौर नहीं किया और दुकानदार से बोला,,,)

अच्छा चलो 1 किलो तोल दो,,,,,।

(इतना सुनकर वह औरत अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और चलते हुए अंकित के पास आई और बोली)

लगता है आज तुम्हारा रिजल्ट अच्छा है,,,।

जी आंटी,,,,,



तब तो मुझे भी मिठाई खिलाना पड़ेगा,,,।

(इतना सुनकर अंकित उसे औरत को नीचे से ऊपर तक देख वाकई में वह एकदम कड़क औरत थी जिसे देखकर अंकित के मन में भी अरमान जगने लगे थे लेकिन वह अनजान थी उसे अंकित जानता नहीं था फिर भी जिस तरह से उसने बात की थी उसे अच्छा लगा था और वह बोला,,,,)

कोई बात नहीं आंटी अब यह दुकान वाले भैया तोल दे रहे हैं तो उसमें से जितना मन करे उतना गुलाब जामुन खा लो,,,,।

हममम,,, लेकिन मुझे तो सफेद वाला रसगुल्ला खाना है,,,,, मुझे यह गुलाब जामुन ठीक नहीं लग रहा है।

(इतना सुनकर वह दुकान वाला गुलाब जामुन तोलने की तैयारी में था ही की तभी वह बोला,,)

नहीं नहीं मैडम जी अच्छा है,,,,।

अच्छा नहीं है,,,, मैं जानती हूं,,,,, तुम ऐसा करो 1 किलो सफेद वाला रसगुल्ला तोल दो वह ताजा भी है,,,,।

(इतना सुनकर दुकानदार अंकित की तरफ देखने लगा तो अंकित भी मुस्कुराते हुए बोला,,)

देख क्या रहे हो आंटी जो कह रही है वही करो मुझे तो मालूम नहीं था तुम मुझसे झूठ बोल रहे थे कि यह ताजा है,,,,।



यह ताजा नहीं है तभी तो मैं अपनी जगह से उठकर इधर आई हूं कि तुम पूरे पैसे दे रहे हो और यह भाई साहब है कि पूरा पैसा लेकर भी ताजी मिठाई नहीं दे रहे हैं,,,,।

(उस औरत की बात सुनकर दुकानदार कुछ बोल नहीं पाया और सफेद वाले रसगुल्ले वजन करने लगा,,, जब तक वहां रसगुल्ला वजन कर रहा था तब तक मुस्कुराते हुए वह औरत अंकित की तरफ देखी और बोली,,)

तुम्हारा नाम क्या है,,?

अंकित,,,,।

बड़ा प्यारा नाम है,,,,,।

जी शुक्रिया,,,,।

(तब तक दुकानदार ने सफेद रसगुल्ले वजन कर दिया यह देखकर अंकित उस औरत से बोला,,)

ले लीजिए जितनी खानी है,,,।

नहीं मुझे नहीं खानी मैं तो तुम्हारा दिल देख रही थी तुम अच्छे नंबर से पास हो गए यही बहुत है,,,,।

इसका मतलब आप मुझे आजमा रही थी सिर्फ मिठाई के लिए,,,।

हां मैं देखना चाहती थी कि तुम्हारा दिल कितना बड़ा है लेकिन सच में तुमने तो दिल खोलकर मिठाई खाने के लिए बोल दिए जबकि,,, दूसरों से में मिठाई खाने के लिए बोली तो वह लोग इनकार कर दिए और शायद इसलिए कि वह लोग मुझे जानते नहीं थे कोई इस तरह से अपरिचित को मिठाई क्यों खिलाएगा भला,,,।



आप अपरिचित कहां है इतनी देर से तो हम दोनों के बीच बातचीत हो रही है,,,,।

हाजिर जवाबी हो,,,,।

जी ऐसा कुछ भी नहीं है,,,,।

(तब तक दुकानदार रसगुल्ला पैक कर चुका था और अंकित उसे पैसे देने लगा,,,,, उसे औरत के बदन से हल्के परफ्यूम की खुशबू आ रही थी जो अंकित को मदहोश बना रही थी वैसे भी वह औरत जवानी से भरी हुई थी भले ही उम्र में 45 से 50 के करीब थे लेकिन फिर भी जवान बिल्कुल भी काम नहीं हुई थी उसके कपड़े पहनने के ढंग से ही पता चल रहा था कि यह औरत रईस है,,,, इसी बीच वह औरत भी पैसे देने लगी और उसके हाथ से उसका बटुवा नीचे गिर गया जिस पर उसकी नजर नहीं गई थी,,, पर वह पैसे देकर दुकान से नीचे उतरने लगी इस बीच अंकित की नजर उसके पिछवाड़े पर चली गई जो कि कई हुई साड़ी में जानलेवा लग रही थी,,, उसका पिछवाड़ा भी विशालकाय था जिसे देखकर अंकित के पेंट में हलचल होने लगी थी,,,,, देखते ही देखते वक्त औरत सड़क के दूसरी तरफ चली गई वहां पर एक कर खड़ी थी वह कर में बैठने वाली थी कि तभी अंकित की नजर अपने पांव के पास पड़े बटुए पर गई वह एक लेडिस पर्स था जिसे देखकर उसे समझते देर नहीं लगी कि यह पर्स किसका है क्योंकि वह काफी कीमती भी था,,,,,, अंकित बिना एक पल गवाह है उसे स्पर्श को उठा लिया और उसे औरत को आवाज लगाते हुए दुकान से नीचे उतर गया लेकिन गाड़ियों के शोर में वह अंकित की आवाज को सुन नहीं पाई अंकित जल्दी से सड़क पार करके उसे कर के पास पहुंच गया जो की उसे औरत ने स्टार्ट कर चुकी थी लेकिन अगले ही पल हुआ एकदम से कर की विंडो के पास पहुंच गया और जोर-जोर से सांस लेने लगा कर के विंडो के पास वही लड़के को देखकर वह एकदम से खुश होतेहुए बोली ‌



क्या हुआ इतना हांफ क्यों रहे हो,,,?

आपका पर्स,,,,(अंकित हांफते हुए विंडो से कर के अंदर उसे थमाने लगा अपना पर्स देखकर वह एकदम से चौंक गई और इधर-उधर देखने लगी यह तसल्ली करने के लिए कि वाकई में वह उसका ही पर्स है या किसी और का लेकिन कर में दूसरा कोई पर्स नहीं था और वह मुस्कुरा कर अपना हाथ आगे बढ़ाकर वह पर्स ले ली,,,, वैसे तो उसके पास में कुछ खास पैसे नहीं थे क्योंकि वह पर्स में पैसे नहीं रखती थी यही कुछ 100 डेढ़ सौ रुपए पड़े थे और इसका थोड़ा मेकअप का सामान पड़ा था छोटी सी कंगी परफ्यूम की छोटी सी बोटल और चेहरे पर लगाने के लिए हल्का सा खुशबू वाला पाउडर,,,,, वह औरत मुस्कुराते हुए अंकित की तरफ अच्छी और बोली,,,)

तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया,,, वैसे तो स्पर्श में कुछ खास नहीं था लेकिन यह मेरा पसंदीदा पर्श है,,, जिसे मेरी सहेली ने गिफ्ट की थी इसलिए मुझे यह बहुत प्यारा है।

चलो अच्छा है कि मैं आपका कोई कीमती और प्यार पर्स खोने से बचा लिया,,,,।

हां सही कह रहे हो वैसे तुम जा कहांरहे हो,,,।

अपने घर जा रहा था,,,,।

पैदल या,,,,,।

नहीं नहीं पैदल ही जा रहा हूं,,,।

चलो मैं तुम्हें छोड़ देती हुं,,,,।

नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं है मैं पैदल चला जाऊंगा,,,,।



अरे नहीं चलो मैं छोड़ देता हूं देख रहे हो कितनी धूप है,,,,।

(ब्लाउज के बीच की उसकी गहरी घाटी अंकित को पैदल जाने से बार-बार रोक रही थी अंकित की नजर बार-बार उसके ब्लाउस पर चली जा रही थी और उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि ब्लाउज के अंदर खरबूजे के आकार की बड़ी-बड़ी चूचियां हैं जिसे दबाने में और पीने में बहुत मजा आएगा,,,,, लेकिन उसे इस बात की शंका थी कियहां उसकी दाल गलने वाली नहीं थी अब तक बिना मांगे उसे न जाने कितनी बुर चोदने को मिल चुकी थी और इसीलिए अंकित इधर भी आस लगाया हुआ था,,,, लेकिन जैसा वह सोच रहा था ऐसा बिल्कुल भी नहीं था,,, उसे औरत को अंकित का स्वभाव अच्छा लग रहा था अभी तक उसके मन में ऐसा कुछ भी नहीं चल रहा था कि उसे अंकित के साथ हम बिस्तर होना है वह आमतौर पर उसकी तरफ आकर्षित थे अंकित भी उसे इनकार नहीं कर पाया और उसकी कार में आगे वाली सीट पर उसके बगल में बैठ गया,,,,, वह मुस्कुराते हुए कार को एक्सीलेटर देकर आगे बढ़ा दी औपचारिकता निभाते हुए वह औरत अंकित से बातचीत की शुरुआत करते हुए बोली,,,,)

घर में कौन-कौन है,,,?

मैं हूं मम्मी है और बड़ी दीदी है।

पापा,,,,!

पापा नहीं है,,,,।

ओह मैं माफी चाहती हूं मुझे मालूम नहीं था,,।

कोई बात नहीं,,, समय चार-पांच साल का था तभी पापा गुजर गए थे तब से मम्मी हम लोगों को संभालते आ रही है,,,,,।



तुम्हारी मम्मी बहुत बहादुर है जो बिना डरे हालात का सामना करते हुए आगे बढ़ रही है।,,,, मुझे ऐसी औरतों पर गर्व होता है,,,,।

(धीरे-धीरे कार सड़क पर आगे बढ़ रही थी,,, कार के अंदर उसे औरत के बदन से उठने वाली परफ्यूम की खुशबू फैली हुई थी जो अंकित को मदहोश बना रही थी,,,, अंकित ने उसे औरत के परफ्यूम के बारे में पूछ ही लिया,,,,)

लगता है आपको परफ्यूम का ज्यादा शौक है।

बिल्कुल मुझे परफ्यूम बहुत पसंद है बिना परफ्यूम लगाने में घर से बाहर नहीं निकलती,,,,।

लेकिन तुम्हारे परफ्यूम की खुशबू वाकई में बहुत अच्छी है मिठाई की दुकान से लेकर अभी तक मुझे सिर्फ तुम्हारे बदन से उठ रही परफ्यूम की खुशबू ही आ रही है,,,।

(अंकित की आवाज सुनकर औरत खुश होने लगी और बोली)

तुम्हें भी परफ्यूम अच्छा लगता है,,,।

अच्छा तो लगता है लेकिन कभी खरीदा नहीं,,,,।

हममममम एक काम करो मेरा पर्स खोलो,,,,,।(कर के सामने रखा हुआ पर्स वह अपने हाथ में लेकर अंकित की तरफ आगे बढ़ा दी,,, यह देखकर अंकित बोला,,)

क्यों,,?

इसमें एक परफ्यूम पड़ा है वह तुम रख लो,,,,।

नहीं रहने दो,,,,।



अरे ले लो,,,,,, डरो मत,,,, तुम अच्छे नंबर से पास हो गए समझ लो मेरी तरफ से यह गिफ्ट,,,,।

(उस औरत की बात को अंकित मना नहीं कर पाया,,, और उसके हाथ से पर्स लेकर उसे खोलने लगा,,, स्पर्श का चैन खोलकर वह अंदर नजर दौड़ाया तो उसे एक रंगीन प्लास्टिक का छोटा सा पैकेट दिखाई दिया,,, वह परफ्यूम को ढूंढ रहा था लेकिन उसे छोटे से पैकेट पर नजर जाते हैं उसका दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि वह कंडोम था,,,, जिसे देखते ही उसकी आंखों की चमक एकदम से बढ़ गई,,, और वह औरत इस बात पर गौर न कर ले इसलिए वह तुरंत एक छोटे से शीशी को अपने हाथ में ले लिया और पर्स का चैन बंद कर दिया,,,,,, इतने में ही अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा था,,,,,,।)

मिला,,,,

हां यह रहा,,,,(पर्स को फिर से उसी जगह पर रखते हुए अंकित बोला और सहज बनने की कोशिश करते हुए सीसी के ढक्कन को खोलकर उसे अपनी नाक के करीब ले जाकर के उसे सुंघने लगा जो कि वाकई में बहुत ही गजब की खुशबू आ रही थी,,, यह देखकर वह औरत मुस्कुराते हुए बोली,,,)

अच्छा है ना,,,,।



बहुत अच्छा है सच कह रहा हूं मेरे लिए यह सबसे अनमोल गिफ्ट है,,,,,,।

अनमोल क्यों,,,?

क्योंकि देखो ना मैं आपको जानता नहीं पहचानता नहीं लेकिन फिर भी आप मुझे इतना प्यार दे रही हैं मुझे गिफ्ट भी दे रही है जरूर कोई अगले जन्म का हम दोनों का रिश्ता है।

हां तुम सच कह रहे हो,,,,(औरत भी हंसते हुए बोली हंसते हुए वह और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,,,,, अंकित के मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे वह अपने मन में यही सोच रहा था कि यह औरत जानबूझकर उसे पर्स खोलने के लिए बोली या फिर अनजाने में क्योंकि पर्स के अंदर अगर कंडोम हो तो गलत कौन सी औरत उसे किसी अनजान मर्द को छूने देगी,,,,,, इस बात से अंकित के मन में दो बातें चल रही थी या तो वह अनजाने में भी है या तो फिर उसके मन में कुछ और चल रहा है,,,, अंकित अच्छी तरह से जानता था कि चालू औरतें रिश्ता की हरकत करती है ताकि मर्द उसकी तरफ आकर्षित हो और उसके साथ संबंध बनाएं लेकिन यहां पर अंकित को गलतफहमी भी हो सकती थी इस बात का एहसास भी अंकित को अच्छी तरह से था वह जानता था कि उसकी एक गलती उसे पर भारी पड़ सकती है इसलिए बस कुछ नहीं बोल पाया इस तरह से कार एक जगह पर खड़ी हो गई,,,, कर एक बंगले के सामने खड़ी थी जिस पर बड़ा सा गेट लगा हुआ था यह देखकर अंकित बोला,,,)



यह कहां लेकर आई हो यहां मेरा घर नहीं है,,,।

यहां मेरा घर है,,,,(वह औरत मुस्कुराते हुए बोली)

लेकिन यहां क्यों,,,?

अरे आओ तो सही,,,,,,।

(इतना कहकर वह औरत कर से नीचे उतर गई और अंकित को भी नीचे उतरना पड़ा अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि इसी तरह से वह नूपुर के घर गया था और धीरे-धीरे नूपुर के साथ नजदीकी बढ़ने लगी और नूपुर के साथ हुआ हम बिस्तर हो गया उसे ऐसा लग रहा था कि यहां भी कुछ ऐसा होने वाला है इसलिए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था,,,, गेट के पास ही एक तख्ती लगी हुई थी जिसमें नेम प्लेट का लिखा हुआ था श्रीमती बिंदु देवी,,, अंकित को समझती देर नहीं लगी कि इस औरत का नाम बिंदू है वह औरत गेट खोली और अंदर प्रवेश कर गई पीछे-पीछे अंकित भी घर में प्रवेश करने लगा बंगला काफी बड़ा था,,, सड़क के दोनों तरफ इसी तरह के बंगले थे जिसमें अमीर लोग ही रहते थे,,,,, औरत आगे आगे चल रही थी अंकित की निगाहें उसके पिछवाड़े पर ही बनी हुई थी क्योंकि कई हुई साड़ी में उसकी कसी हुई गांड वाकई में गजब ढा रही थी,,,, वह औरत बंगले का दरवाजा खोली और मुस्कुराते हुए अंकित का अभिवादन की अंकित भी उसके पीछे-पीछे बंगले में प्रवेश करके बाहर से जितना खूबसूरत था अंदर से और भी ज्यादा खूबसूरत था। अंकित तो चारों तरफ नजर घुमा कर देखता ही रह गया,,,,, अंकित की हालत को औरत अच्छी तरह से समझ रही थी अंकित को बैठने के लिए बोली और किचन में चली गई थोड़ी देर में वह हाथ में दो गिलास का जूस एक ट्रे पर रखकर लेकर आए और अंकित के सामने ही टेबल पर बैठ गई और एक गिलास उसकी तरफ आगे बढ़ा दी,,,,, संतरे के जूस के ग्लास को अपने हाथ में लेते हुए अंकित बोला,,,)



इसकी क्या जरूरतथी,,,।

अरे जरूर कैसे नहीं है देख रहे हो कितनी कड़कड़ाती धूप है गर्मी है ऐसे में संतरे का ठंडा ठंडा जूस शरीर को बहुत आराम देता है,,,।

बात तो आप ठीक कह रही है,,,,(इतना कहते हुए अंकित दीवार पर लगी हुई कुछ तस्वीरों को देखने लगा जिसमें यही औरत नजर आ रही थी किसी तस्वीर में पुरस्कार लेते हुए तो किसी तस्वीर में पुरस्कार देते हुए और तभी उसकी एक तस्वीर पर नजर गई जिसमें उसकी मां जी स्कूल में पढ़ाती थी उस स्कूल की तस्वीर थी,,, यह देखकर वह थोड़ा हैरान हुआ और उसे तस्वीर की तरफ उंगली दिखाते हुए वह बोला,,,,)

यह सब तस्वीरें !

तस्वीर में स्कूल देख रहे हो या मेरी स्कूल है मैं इस स्कूल की प्रिंसिपल हूं,,,,।

ओहहहहह आपका ही नाम बिंदु देवी है,,,।

हां लेकिन तुम्हें कैसे मालूम,,,,

बंगले के बाहर नेम प्लेट पर नाम पढा था,,,। आप तो बहुतअमीर है।

(यह सुनकर वह हंसने लगी लेकिन अंकित ने यह नहीं बताया कि जिस स्कूल की वह प्रिंसिपल है उसी स्कूल में उसकी मम्मी टीचर है क्योंकि अंकित अपनी पहचान चुकाना चाहता था वह बहुत आगे की सोच रहा था उसे इस बात का डर था कि अगर उसकी पहचान मालूम हो गई तो कहीं ऐसा ना हो कि अगर यह औरत उसके साथ हम बिस्तर होना चाहती होगी तो भी नहीं होगी यह जानकारी की उसकी मम्मी इस स्कूल में पढ़ती है जिस स्कूल की वह प्रिंसिपल है उसका नाम बदनाम हो जाएगा इसलिए वह अपनी पहचान छुपा रहा था,,,,,, थोड़ी बहुत इधर-उधर की बातचीत होने के बाद अंकित अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और बोला,,,)

अब मुझे चलना चाहिए काफी देर हो गई है,,,।

अरे रुको मैं छोड़ देती हूं,,,,।

नहीं रहने दीजिए मैं चला जाऊंगा बस थोड़ी दूर पर ही मेरा घर है वैसे भी मुझे पैदल चलने की आदत है आप परेशान मत हो,,,,,,।

अरे इसमें परेशानी की कौन सी बात है चलो मैं छोड़ देती हूं,,,,।

रहने दीजिए आपने वैसे भी मुझे इतना सम्मान इज्जत दी हो मेरे लिए यही बहुत है,,,,,,(इतना कहकर वह नमस्ते किया और कमरे से बाहर निकल गया श्रीमती बिंदु देवी उसे जाते हुए देखते रह गई वाकई में इस लड़के में बाद में वरना वह आज तक इस उम्र के लड़के की तरफ कभी आकर्षित नहीं हुई थी,,,,,, रास्ते भर अंकित बिंदु देवी के बारे में सोचता रह गया,,,, उम्र में बिंदु देवी उसकी मां से 7 8 साल बड़ी थी लेकिन फिर भी बदन का कसाव बरकरार था हां थोड़ा भारी शरीर था लेकिन बेहद आकर्षक था यह सब सो कर उसके लंड का तनाव रह कर बढ़ जा रहा था,,,, थोड़ी देर में अपने घर पहुंच गया,,,,, घर में उसकी मां आराम कर रही थी,,,,, उसे देखकरबोली।

बहुत देर कर दिया तूने कहांरह गया था,,,।

कहीं नहीं मम्मी बस दो-तीन दोस्त मिल गए थे इसीलिए रुकना पड़ा सफेद रसगुल्ले लाया हूं,,,,।

हां किचन में रख दे मैं अभी आराम कर रही हूं,,,,,।

ठीक है मैं सुषमा आंटी के घर मिठाई दे आता हूं,,,।

हां यह ठीक रहेगा जा कर दे दे,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर वहां किचन में गया और रसगुल्ला का पैकेट रखकर उसमें से 5 से रसगुल्ले कटोरी में लिया और सीधा सुषमा के घर पहुंच गया वैसे सुषमा के घर आने का रसगुल्ला एक बहाना था वह मौका देखकर सुषमा या उसकी बेटी सुमन की चुदाई करना चाहता था,,,,,, दरवाजा बंद था वह हाथ में रसगुल्ले की कटोरी लिए हुए दरवाजे पर दस्तक देने लगा थोड़ी देर में दरवाजा खुला तो सामने सुषमा आंटी थी सुषमा आंटी,,,,)



तुम्हारे लिए मिठाई लाया हूं,,,,।

मेरे लिए मिठाई मैं कुछ समझी नहीं,,,,।

अरे पहले मुझे अंदर तो आने दीजिए कौन-कौन है घर में,,,,।

अभी तो कोई नहीं है,,,,आजा,,,,(सुषमा आराम कर रही थी इसलिए अभी भी नींद में थी अंकित धीरे से अंदर आ गया और दरवाजा बंद कर दिया और एकदम से झुक कर सुषमा के पैर छूकर आशीर्वाद लेने लगा और। बोला,,,)

तुम्हारा आशीर्वाद से मैं पास हो गया हूं,,,,।

(अंकित के संस्कार देखकर वह मुस्कुराने लगी और बोली)

अभी तो पर छुड़ाएं मौका मिलते ही टांग खोलने लगता है,,,,,।

मैं अभी भी इसीलिए आया हूं,,,,,,,,(इतना कहकर वहां रसगुल्ले वाली कटोरी को टेबल पर रख दिया और रखने की एकदम से सुषमा आंटी को अपनी गोद में उठा दिया सुषमा एकदम से घबरा गई उसे डर था कि कहीं वह गिर ना दे लेकिन अंकित के बाजुओ की ताकत को अच्छी तरह से जानती थी इसलिए कुछ बोली नहीं और अंकित उसे अपनी गोद में उठाया हुआ सीधा उसके कमरे में ले गया और नरम नरम गद्दे पर पटक दिया,,,,,,, उसकी हरकत पर सुषमा की सड़ी हुई उसकी मोटी मोटी जांघों तक उठ गई और मोटी-मोटी जांघों को देखकर अंकित की आंखों में वासना की चमक बढ़ने लगी,,,, बिल्कुल भी देर ना करते हुए अंकित दोनों हाथों से सुषमा की टांगों को खोल दिया वह आसमानी रंग की चड्डी पहनी हुई थी ऐसा लग रहा था कि अंकित बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था और वह अपना हाथ आगे बढ़कर सुषमा की चड्डी को पकड़ कर नीचे की तरफ खींचने लगा और अगले ही पल सुषमा के बदन से उसकी चड्डी उतार कर बिस्तर के नीचे फेंक दिया,,,,, सुषमा की आंखों की नींद एकदम से उड़ गई वह भी अंकित के साथ मजा लेना चाहती थी इसलिए उसे रोकने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी।



और अंकित देखते ही देखते हैं उसकी दोनों टांगों के बीच छाने लगा अंकित अपनी जीभ से उसके गुलाबी बुर को चाटना शुरू कर दिया,,,, बिस्तर पर सुमन की मां तड़पने लगी मैन चलने लगी अंकित दोनों हाथों से उसकी मोटी जांघों को पकड़कर उसे काबू में किए हुए,,, लपालप उसकी बुर को चाट रहा था,,,,,, मदहोश होकर सुषमा की बुरे भी पानी पर पानी छोड़ रही थी,,,,।

अरे थोड़ा आराम से मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूं,,,।

मैं जानता हूं मेरी जान लेकिन मुझे रहा नहीं जा रहा है एक तो पास होने की खुशी अलग से है और यह खुशी में तुम पर लूटाना चाहता हूं,,,, दीदी तो नहीं आने वाली है ना।

नहीं वह शाम को लौटेगी,,,

तब तो हम दोनों के पास टाइम ही टाइम है,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपने कपड़े उतारने लगा और अगले ही पल वह अपने बदन से सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया सुषमा की नजर उसके मोटे तगड़े लंड पर ही टिकी हुई थी,,,,, कपड़े उतारने के बाद अंकित फिर से उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया वह उसे पागल बना देना चाहता था , मदहोश कर देना चाहता था,,,,,, कमरे में सुषमा की सिसकारियां गुंज रही थी,,,,, अंकित मदहोश होता हुआ उसकी बुर की चुदाई करता हुआ अपने दोनों हाथों को उसकी छाती पर रखकर उसकी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से दबाना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा देखते ही देखते अंकित सुषमा के ब्लाउज के बटन को खोल दिया था,,,, उसकी नंगी चूचियां हाथ में आते ही उसे एहसास हुआ कि सुषमा ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी है,,,, यह देखकर अंकित पागलों की तरह उसकी नंगी चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ कर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया सुषमा को थोड़ा दर्द भी हो रहा था लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि एक मर्द ही औरत की जवानी के रस को नीचोड़ सकता है। भले ही अंकित अपनी हरकतों से उसे दर्द दे रहा था लेकिन मजा भी बहुत दे रहा था।



कुछ देर बाद अंकित अपने हाथों से उसके बाकी के कपड़े उतार कर उसे भी पूरी तरह से नंगी कर दिया नंगी होने के बाद सुषमा के ऊपर उम्र का कोई प्रभाव दिखाई नहीं देता था वह बिना कपड़ों के वाकई में बहुत खूबसूरत लगती थी बस थोड़ा सा शरीर ज्यादा था लेकिन जब मरद पूरी तरह से जोर से भरा हुआ हो तो औरत का ऐसा ही शरीर उसे ज्यादा आनंद देता है,,,, अंकित बिस्तर के ऊपर ही खड़ा हो चुका था यह देख कर सुषमा जानती थी कि उसे क्या करना है वह तुरंत अपनी घुटनों के बल बैठकर अंकित के लंड को पड़कर उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, अंकित मदहोश हुआ रहा था पागल हुआ जा रहा था। थोड़ी-थोड़ी देर पर वह जोर-जोर से अपनी कमर के पीछे करके हिलाने लगता था ऐसा करने में उसे भी बहुत मजा आता था लेकिन उसकी हरकत से, सुषमा के लिए थोड़ी दिक्कत पैदा हो जाती थी क्योंकि उसकी हरकत पर उसका मोटा तगड़ा लंड उसके गले के अंदर तक उतर जाता था जिससे उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगती थी,,,,, लेकिन फिर भी उसे मजा बहुत आ रहा था कुछ देर तक दोनों इसी तरह से मजा लेते रहो और अब समय आ गया था सुषमा की चुदाई करने का धीरे से अपने लंड को उसके मुंह में से निकाल कर अंकित बोला,,,।



अब घोड़ी बन जा मेरी जान अब घोड़े की तरह तेरी चुदाई करता हूं,,,,,।

(ऐसा सुनते ही सुषमा एकदम से पहलू बदल ली और घुटनों के बल बैठ सुषमा एकदम से घोड़ी बन गई और अपनी भारी भरकम गांड को अंकित की तरफ परोस दी उसकी बड़ी-बड़ी गांड देखकर अंकित की आंखों की चमक बढ़ने लगी और वह उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर दो-चार चपत लगाकर उसकी गोरी गोरी गांड को टमाटर की तरह लाल कर दिया,,,,,, सुषमा भी जल्द से जल्द अंकित के लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस करना चाहती थी,,,, इसलिए वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में इधर-उधर नचा रही थी वह एक तरह से अंकित को आगे बढ़ने का इशारा दे रही थी अंकित की उसका इशारा समझ गया और उसकी कमर पकड़ कर अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में डाल दिया और आगे पीछे करके हीलाना शुरू कर दिया,,,, अंकित सुषमा की चुदाई कर रहा था,,,, कुछ देर पहले बिंदु देवी की जवानी का नशा उसके ऊपर पूरी तरह से छाया हुआ था और वह उसी का कसर सुमन की मां पर उतार रहा था।



दोनों चुदाई में पूरी तरह से मशगुल हो चुके थे,, अंकित से एक गलती हो गई थी अंकित घर में प्रवेश करने के बाद दरवाजा बंद तो किया था लेकिन दरवाजे की कड़ी लगाना भूल गया था। दोनों चुदाई में पूरी तरह से मस्त हो चुके थे। इस बात से अनजान की सुमन इस समय भी घर पर आ सकती है सुषमा को लग रहा था कि उसकी बेटी शाम को ही आएगी लेकिन आज जल्दी घर पर आ चुकी थी दरवाजे पर दस्तक देने वाली थी कि दरवाजा पर हाथ रखते ही दरवाजा खुल गया और वह धीरे से घर में प्रवेश कर गई इस बात से अनजान की उसकी पीठ पीछे घर के अंदर चुदाई का खेल खेला जा रहा है वह अपनी ही दोनों में अपने कमरे की तरफ आगे बढ़ने लगी लेकिन जैसे अपनी मां के कमरे के पास पहुंची तो उसे अपनी मां के कमरे से अजीब सी आवाज आने लगी यह आवाज़ जानी पहचानी थी इस आवाज को अच्छी तरह से जानती थी कि ऐसी आवाज कब निकलती है इसलिए उसका दिल जोरो से धड़कने लगा। वह समझ गई कि उसकी मां के कमरे में चुदाई चल रही है उसे ऐसा लग रहा था कि शायद उसके पिताजी और उसकी मम्मी लगे हुए हैं पल भर के लिए वह सोची कि यह सब देखना ठीक नहीं है और वह अपने कमरे की तरफ आगे बढ़ने लगी कि तभी ना जाने उसे क्या सुझा वह फिर से दबे पांव फिर से अपनी मां के कमरे के पास आ गई।और कौतुहल वश अपनी मम्मी के कमरे में देखने की कोशिश करने लगी कमरे का दरवाजा बंद था इसलिए वह खिड़की के पास आई खिड़की बंद नहीं थी हम किसी खुली हुई थी और अंदर ट्यूबलाइट चल रही थी और उत्सुकता बस सुमन अपनी आंख को खिड़की पर जमा दी,,,, और अंदर देखने की कोशिश करने लगी।



पहले प्रयास में उसे अपनी मम्मी का बिस्तर देखने लगा और उसे पर दो परछाई नग्नावस्था में दिखाई देने लगी उसका दिल जोरो से धड़क रहा था लेकिन धीरे-धीरे अंदर की परछाई स्पष्ट होने लगी और जैसे-जैसे परछाई स्पष्ट हो रही थी उसके दिल की धड़कन बढ़ती चली जा रही थी,,,,, उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मम्मी बिस्तर पर घोड़ी बनी हुई थी उसकी गांड खिड़की की तरफ थी और,,,, और एक आदमी पीछे से लगातार अपनी कमर हिलता हुआ चुदाई कर रहा था लेकिन धीरे-धीरे चित्र स्पष्ट होने पर उसे एहसास होने लगा कि पीछे जो इंसान धक्के लगा रहा था वह उसके पापा बिल्कुल भी नहीं थे क्योंकि उसके पापा का शरीर उसकी मां की तरह ही था मोटा लेकिन जो इंसान पीछे से धक्का लगा रहा था उसका शरीर कसा हुआ था गठीला लंबा,,,,, यह देखकर सुमन की हालत खराब होने लगी उसके दिल की धड़कन और तेजी से बढ़ने लगी कि यह क्या हो रहा है इतना तो स्पष्ट था की घोड़ी बनी हुई औरत उसकी मां ही थी लेकिन पीछे से धक्का लगता हुआ इंसान उसका बाप बिल्कुल भी नहीं था,,,,, सुमन की हालत खराब होने लगी उसके माथे से पसीना टपकने लगा क्योंकि वह कभी सोच नहीं थी कि वह अपनी मम्मी को इस हालत में दिखेगी किसी गैर मर्द के साथ वह गैर मर्द कौन है अभी स्पष्ट नहीं था कुछ देर तक इसी तरह से सब कुछ चलता रहा अंदर सन्नाटा छाया था केवल उसकी मम्मी की गरमा गरम सिसकारीयो की आवाज ही गूंज रही थी,,, उसकी तरह की आवाज सुनकर समान इतना तो समझ गई थी कि उसकी मां को बहुत मजा आ रहा था लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां यह कौन सा कदम उठाए यह किसके साथ चुदाई का मजा ले रही है।



सुमन धड़कते दिल के साथ अपनी मां के कमरे का नजारा देख रही थी बिस्तर पर चुदाई का खेल देख रही थी वह देखना चाहती थी कि थका लगता हुआ इंसान कौन है तभी वह धीरे से रुक गया और अपने लंड को बाहर निकाला,,,, और उसने उसकी मां को हिदायत देते हुए बोला,,,,।

अब मेरी जान मेरे लंड पर बैठकर कूदो मैं भी तो देखूं कि तुम्हारे में कितना दम है,,,,।

(उसे इंसान की आवाज जानी पहचानी थी,,,, लेकिन जिस तरह के हालात थे वह समझ नहीं पा रही थी की आवाज किसकी है लेकिन इतना तो जानती थी की बहुत गरीबी इंसान की ही आवाज है तभी वह दरवाजे की तरफ मुंह घूमर खड़ा हो गया जब तक की उसकी मां बिस्तर से नीचे उतरती और जैसे ही सुमन की नजर उसे इंसान पर पड़ी तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई सामने उनकी तथा कमरे के अंदर अंकित था उसकी मां के साथ उसकी मां की चुदाई कर रहा था वह कभी सपने में भी सोच नहीं सकती थी कि अंकित इस तरह की हरकत करेगा,,,,,,, सुमन का दिमाग काम करना बंद कर दिया था क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि अंकित तो चलो जवान लड़का है लेकिन उसकी मां उसकी मां कैसे एक अपने बेटे की उम्र के साथ इस तरह की हरकत कर सकती है वह अभी यह सब सो ही रही थी कि तभी अंकित बिस्तर पर लेट किया उसका लंड आसमान की तरफ मुंह उठाई खड़ा था और देखते ही देखते सुषमा भी मुस्कुराते हुए बिस्तर पर चढ़ गई इसका भारी भरकम शरीर लग्न अवस्था में और भी ज्यादा आकर्षक लग रहा था इस बात का एहसास सुमन को अच्छी तरह से हो रहा था लेकिन वह शर्मिंदा थी अपनी मां की हरकत से, वह कभी सपने में भी नहीं सोचती थी कि उसकी मां इतनी बेशर्म होगी,,,, वह ना चाहते हुए भी अपनी आंखों से सब कुछ देख रही थी वह देख रही थी उसकी मां कैसे मजे लूट रही थी और धीरे से अपनी जगह बना कर अपने भारी भरकम गांड को अंकित के लंड पर रखकर अपनी गांड का दबाव उसे पर बना रही थी ताकि उसका मोटा तगड़ा लंड आराम से उसकी बुर की गहराई में घुस जाए,,, और ऐसा ही हो रहा था।

सुमन को एकदम साफ दिखाई दे रहा था धीरे-धीरे अंकित का मोटा लंड उसकी मां की बुर की गहराई में गुस्सा चला जा रहा था और जैसे ही उसकी मां ने अपनी बुर की गहराई में पूरा लंड डुबो ली तब देखते ही देखते वह धीरे-धीरे अपनी गांड को उसे पैर पटकना शुरू कर दी उसका मुंह खिड़की की तरफ ही थी मदहोशी में उसकी आंखें बंद थी मुंह खुला हुआ था वह गहरी गहरी सांस ले रही थी और पानी भरी गुब्बारे की तरह उसकी दोनों चूचियां हवा में लहरा रही थी जिसे कुछ देर बाद अंकित अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसे अपनी हथेली में दबोच लिया और जोर-जोर से दबाने लगा और नीचे से भी धक्के लगा रहा था कुछ देर या खेल चलता रहा और देखते ही देखते दोनों झड़ने लगे सुमन ,,,, के लिए वहां खड़े रहना अब उचित नहीं था इसलिए वह धीरे से दबे पांव वापस घर से बाहर निकल गई और दरवाजे को इस तरह से बंद कर दी ताकि उन दोनों को बिल्कुल भी शक ना हो,,,, थोड़ी देर बाद अंकित अपने कपड़े पहनकर सुषमा के घर से चला गया इस बात से अनजान की उसकी काम क्रीड़ा को सुमन अपनी आंखों से देख चुकी है।
 
अपने पास होने की मिठाई देने के बहाने अंकित सुमन की मां की एक बार फिर से चुदाई कर दिया था समय पर्याप्त होने की वजह से वह जी भर कर उसकी चुदाई किया था उसे पूरी तरह से नंगी करके मजा लिया था और ऐसा वहां पहली बार कर पाया था वरना इतना समय उसके पास होता ही नहीं था कि वह सुषमा के सारे कपड़े उतार सके लेकिन इस बीच उस गलती हो गई थी और वह दरवाजा खुला छोड़ दिया था जिसकी वजह से सुमन ने सब कुछ अपनी आंखों से देख ली थी।



सुमन भी अपनी मां की बेशर्मी को देखकर हैरान थी उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि वह अपनी मां को कभी भी वह किसी के साथ इस तरह से मजा लेगी इस बारे में सोची भी नहीं थी अभी तक उसने अपनी मां को एक संस्कारी मां की तरह ही देखते आ रही थी इसलिए जो कुछ भी उसने अपनी आंखों से देखी थी वह उसे हजम नहीं हो रहा था। बार-बार उसके दिमाग में एक ही बात आ रही थी कि उसकी मां उसके पापा को धोखा दे रही है और यह सब ना जाने कब से चल रहा है और यहां तक की अंकित भी उसे धोखा दे रहा है एक तरफ उसके साथ मजा ले रहा है और उसकी गैरमौजूदगी में उसकी मां के साथ भी जवानी का मजा लूट रहा है,,, सुमन इस बारे में अंकित से बात करना चाहती थी और पूछना चाहती थी कि आखिर उसने ऐसा क्यों किया जब वह एक जवान लड़की के साथ मजा ले सकता है तो अपनी मां की उम्र की औरत के साथ ऐसी क्या मजबूरी हो गई कि यह सब करना पड़ा इन सब का सवाल उसे जानना था लेकिन इस समय अंकित अपने घर जा चुका था थोड़ी देर बाद वह अभी अपने घर में चली गई घर में सब कुछ सामान्य था लेकिन जैसे ही वह घर पर पहुंची थी तो उसे एहसास हो रहा था कि उसकी मां उसके सामने अपने कपड़ों को व्यवस्थित कर रही थी व्यवस्थित क्या कर रही थी वह तो पूरी नंगी होकर मजा ले रही थी इसलिए वह अपने कपड़े पहन कर उसे ठीक कर रही थी और सुमन को देखते ही वह मुस्कुरा कर बोली,,,)



अरे सुमन तू आज जल्दी आ गई,,,, अंकित अच्छे नंबर से पास हो गया देख तेरे लिए रसगुल्ले लाया है,,, (टेबल पर पड़े रसगुल्ले की कटोरी की तरफ इशारा करके दिखाते हुए सुषमा बोली अपनी मां की बात सुनकर वह अपने मन में ही बोली तो यह बात है रसगुल्ला खिलाने के बहाने पूरा मजा लेकर गया है हरामि,,,)

चलो अच्छा हुआ पास हो गया मेरा पढाना उसे कुछ तो काम आया,,,,।

तुझे तो ट्यूशन पढ़ाना चाहिए तेरी बदौलत ही उसका इतना अच्छा नंबर आया है,,,,।

मैं भी यही सोच रही हूं,,,, लेकिन ईस तरह से घर पर सब लड़कों का आना ठीक नहीं रहता,,,, (इतना कहकर वह अपने मन में ही बोली की अगर सच में ऐसा हो गया तो न जाने कितने लड़के तुम पर चढ़ाई कर देंगे और तुम दिन रात लेती रहोगी और थकोगी नहीं,,,,,)

हां यह बात तो है चल जल्दी से हाथ मुंह धो ले में चाय बना देती हुं मैं भी काफी थक गई हूं,,,।

थक तो जाओगी इतना मेहनत जो करती हो,,,।

हंं,,,,, बात तो सही कह रही है तू सुबह से उठकर बस काम काम,,, थकावट तो लगेगी ही,,,,।

हमममममम लेकिन ऐसा लग रहा है कि आज कुछ ज्यादा ही काम करती हो देखो तो सही पसीना टपक रहा है,,,,,।



कहां,,, (अपनी साड़ी का पल्लू लेकर उसे माथे पर लगाते हुए,,,,,) अरे हां वह क्या है ना की मैं अंदर अपने कमरे की सफाई कर रही थी इसलिए पसीना निकलने लगा,,,,,।

रुको मैं पंखा चालू कर देती हूं,,, (इतना कहकर सुमन पंखे की स्वीच दबा दी और पंखा चलने लगा,,,, सुमन अपनी मां की बदले हुए रूप को देख रही थी उसके चेहरे पर प्रसन्नता और संतुष्टि के भाव एकदम साफ दिखाई दे रहा था। उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि जिस तरह से उसकी मां चुदाई का मजा लूट रही थी संतुष्ट तो होना ही था और ऊपर से अंकित जिसकी चुदाई करें उसे पूरा पानी पानी करके ही छोड़ता है और जरूर उसकी मां को जवानी के दिन याद आ गए होंगे अंकित से चुदवाकर ऐसा सोचते हुए सुमन बाथरूम में चली गई और फ्रेश होकर थोड़ी देर बाद बाथरूम से बाहर निकल गई,,,,

दूसरी तरफ सुगंधा अभी भी अपने कमरे में सो रही थी,, अपनी मां को परेशान ना करते हुए अंकित भी अपने कमरे में जाकर आराम करने लगा और इस बात की खुशी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी कि वह अपनी मां की जवानी में पूरी तरह से को जाने के बावजूद भी नंबर काम नहीं लाया वरना इस बात का डर उसे भी बना हुआ था,,,,, अपनी बिस्तर पर लेटे-लेटे अंकित अपनी मां के बारे में सोचने लगा कि कुछ महीने पहले उसकी मां किस तरह का जीवन की रही थी बिल्कुल भी उमंग नहीं था जीवन में कोई रंग नहीं था बस दिए जा रही थी परिवार के लिए मेरे लिए तृप्ति के लिए बस सुबह उठकर जल्दी से खाना बनाना घर की सफाई करना और स्कूल चले जाना वहां से आने के बाद फिर से वही काम में जुड़ जाना और रात को अकेले ही बिस्तर पर सो जाना लेकिन जब से जीवन में बदलाव आया है उसके जीवन में भी उमंग दिखने लगी है,,,, सफेद पाने की तरह जीवन रंगीन हो गई है जीवन में इतना कुछ अधूरा था उसकी मां के वह धीरे-धीरे पूरा हो रहा है,,,, अंकित अपने मन में सोच रहा था कि वाकई में बिना मर्द के एक औरत की जिंदगी कितनी सुनी हो जाती है,,, भले ही औरत समाज के सामने हंसती हो मुस्कुराती हो लेकिन उसे हंसी के पीछे न जाने कितना दर्द छुपा होता है,,,,, यह बात सोचने के बाद वह अपने मन में सोच रहा था कि अच्छा हुआ कि उसके और उसकी मां के बीच जिस्मानी ताल्लुकात हो गए इसकी वजह से उसकी मां हंसने लगी बोलने लगी जीवन का असली मजा लेने लगी। अंकित को इस बात का भी एहसास हो रहा था कि उसके साथ संभोग का मजा ले लेकर उसकी मां की खूबसूरती बढ़ाने लगी थी उसके चेहरे का निखार बढ़ने लगा था बदन का कसाव भी बढ़ चुका था कोई कह नहीं सकता था कि उसकी मां दो जवान बच्चों की मां है।



अपनी मां के बारे में इस तरह की बातें सोचकर कुछ पल के लिए उसके लंड का तनाव बढ़ने लगा जो कि अभी-अभी सुमन की मां की चुदाई करके आया था वह जानता था कि समय उसकी मां आराम कर रही है और उसे परेशान करना ठीक नहीं है इसलिए वह पेट के ऊपर से ही अपने लंड को दबाए हुए कब गहरी नींद में सो गया उसे भी पता नहीं चला वह तो दरवाजे पर दस्तक हुई तब उसकी आंख खुली और जब दीवार पलटन की घड़ी पर उसकी नजर गई तो 7:00 बज रहे थे वह जल्दी से उठकर खड़ा हो गया और जल्दी-जल्दी हाथ में धोकर फ्रेश हो गया उसकी मां चाय बना कर तैयार रखी थी और वह अपनी मां के साथ बैठकर चाय पीने लगा इधर उधर की बातें करने के बाद वह टहलने के लिए घर से बाहर निकल गया,,,, वह धीरे-धीरे चलता हुआ पास कहीं बगीचे पर पहुंच गया और वहीं पर एक कुर्सी पर जाकर बैठ गया,,,,, बगीचे में सुमन भी थी जो शाम को टहलने के लिए आई थी और वह अब बगीचे से निकाल कर जा रही थी लेकिन जैसे ही अंकित को कुर्सी पर बैठा हुआ देखी वह तुरंत चेहरे पर गुस्सा लिए हुए एकदम से उसके पास आकर बैठ गई अपने पास सुमन को बैठा हुआ देखा कर वह मुस्कुराते हुए बोला।

अरे सुमन तुम यहां,,,?

क्यों हैरानी हो रही है तुझे मुझे यहां देख कर मुझे भी हैरानी हुई थी तुझे मेरी गैरहाजिरी में अपने घर पर देख कर,,,।



यह तुम क्या कह रही हो मैं कुछ समझ नहीं रहा हूं,,,।

नादान बनने की कोशिश मत कर मैं जो कह रही हूं तो अच्छी तरह से समझ रहा है कि मैं क्या कह रही हूं,,, मुझे तो सोच कर हैरानी होती है कि,,, तू यह सब कैसे कर लेता है,,,,।

तुम किस बारे में बात कर रही हो मुझे कुछ समझने की कोशिश करोगी तब ना मैं समझूंगा,,,,।

अभी भी कितना नादान बनने की कोशिश कर रहा है सच में तो बहुत ही हरामी लड़का है मैं तो तुझे सीधा-साधा समझते थे लेकिन तू तो हरामियों का बाप निकला,,,,,।

फिर वही यह सब पहेलियां बुझाना बंद करो और थोड़ा धीरे बोलो देख रही हो आते जाते लोग हमको देखने लग रहे हैं,,,,।

(अंकित की बात सुनकर सुमन को भी एहसास हुआ कि वह कुछ ज्यादा ही जोर से बोल रही थी इसलिए वह एकदम से शांत हो गई है अंकित का हाथ पकड़ कर उठकर खड़ी हो गई और इधर-उधर देखकर उसे एकांत जगह पर ले जाने लगी वह आगे आगे चल रही थी उसका हाथ पकड़े और अंकित पीछे-पीछे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन उसका दिल जोरो से धड़क रहा था उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि शायद कुछ गड़बड़ हो चुकी है और यह गड़बड़ किस बारे में हुई है इसका भी अंदाजा उसे लग गया था लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रहा था एकांत में पहुंचने के बाद सुमन उसपर और भी ज्यादा भड़कते हुए बोली,,,)



तु पास हो गया ना,,,!

हां मैं अच्छे नंबर से पास हो गया,,,।

और पास होने की खुशी में रसगुल्ला मेरे घर लेकर गया था,,,,।

हां यह भी सही है क्योंकि आंटी पास होने की खुशी में मिठाई मांग रही थी तो मुझे लेकर जाना पड़ा,,,,।

मिठाई तो तू लेकर गया लेकिन उसके बाद क्या किया यह भी जरा बता दे,,,,।

(अब अंकित को एहसास हो गया कि सुमन किस बारे में बात कर रही है वह एकदम से घबरा गया,,,,, वह कुछ बोल नहीं पा रहा था बस आश्चर्य से सुमन की तरफ देखे जा रहा था यह देखकर सुमन फिर से बोली)

रसगुल्ला लेकर गया था ना मेरे घर फिर इसके बाद,,,, मेरी ही मां को,,,,,,, हरामजादे मैं तुझे कितना सीधा समझ रही थी मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि तू ऐसा कर सकता है लेकिन अगर कोई और कहता तो शायद मैं यकीन नहीं कर पाती लेकिन मैंने सब कुछ अपनी आंखों से देखी तेरी बेशर्मी मेरी मां की बेशर्मी कितने बेशर्म हो चुके थे तुम दोनों मेरी मां को तो अपनी उम्र का बिल्कुल भी ख्याल नहीं आया कि अपनी बेटी की उम्र के साथ यह सब कैसे कर रही है और तुझे भी ख्याल नहीं आया कि जिसकी बेटी के साथ तु यह सब करता है उसकी मां के साथ भी वही सब करने लगा अरे तुझे जरा भी फर्क नहीं पड़ता बस तुझे औरत का गुलाबी छेद चाहिए उम्र से कोई फर्क नहीं पड़ता कि तेरे लिए कमर के नीचे उम्र मायने नहीं रखती,,,,।



देखो सुमन में यह सब के बारे में मैं बहुत शर्मिंदा हूं,,, (कुछ देर खामोश रहने के बाद वह बोला )

शर्मिंदा होने से क्या होता है,,,, तूने तो मेरा दिल तोड़ दिया यहां तक कि मेरी मां का विश्वास भी तोड़ दिया मुझे अपनी मां पर बहुत भरोसा था लेकिन आज जो मैंने अपनी आंखों से देखी सब कुछ खत्म हो गया।

(सुमन की बातों को सुनकर अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि वह क्या बोले , कोई तो रास्ता निकालना पड़ेगा जिससे सब कुछ ठीक हो जाए अगर वह ऐसा नहीं किया तो घर में ही झगड़ा हो जाएगा और कहीं यह झगड़ा उसकी मां तक पहुंच गया तो और भी ज्यादा गड़बड़ हो जाएगी इसलिए वह अपने मन में कोई युक्ति सोच रहा था,,,, इसलिए वह धीरे से बोला,,,)

कुछ खत्म नहीं हुआ है बस तुम सोच गलत रही हो,,,।

कैसे खत्म नहीं हो गया,,,,, तू नहीं जानता जिस पर अगर की जान से भरोसा करो अगर वह भरोसा तोड़ दे तो कैसा दुख होता है मैं अपनी मां पर बहुत भरोसा करती थी लेकिन आज उसे घोड़ी बनी देखकर मैं खुद शर्मिंदा हो गई शर्म से पानी पानी हो गई मुझे तो आईने में अपने आप को देखने में शर्म महसूस हो रही है,,,,, अगर यह सब मेरे पापा को पता चल गया तो क्या होगा,,,,,,,।

कैसे पता चलेगा तुम बताओगी,,,

बताना तो होगा ही मैं कभी सोचा नहीं थी कि मेरी मां मेरे पापा को इतना बड़ा धोखा देगी,,,, मेरी मां के द्वारा उठाए गए इस कदम सही पता चलता है कि वह पापा से खुश नहीं है पापा उसकी जवानी की आग बुझाने में सक्षम नहीं है यह सब अगर पापा को पता चलेगा तो वह भी यही सब सोचेंगे,,,,,।

सुमन तुम कुछ ज्यादा ही सोच रही हो,,,,, मेरे और आंटी के बीच में यह सब नहीं होता अगर उनका भी विश्वास ना टूटा होता,,,।



उनका विश्वास उनका विश्वास कैसे टूट गया किस पर से टूट गया,,,।

तुम पर से,,,,,

मुझ पर से,,, (सुमन हैरान होते हुए बोली)

हां सुमन इस तरह से तुमने आज अपनी मां को देख ली इस तरह से आंटी ने तुम्हें मेरे साथ देख ली थी। उनका भी दिल विश्वास सब कुछ टूट गया था तुम्हें मेरे साथ देखकर और वह भी नंग-धड़ंग अवस्था में,,,,।

(अंकित की बात सुनकर समान एकदम से चौंक गई और आश्चर्य से अंकित की तरफ देखने लगी तो अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

हां आंटी ने तुम्हें मेरे साथ देख ली है,,,, ।

यहक्या कह रहा है,,, तु,,,,।

मैं सच कह रहा हूं नहीं तो मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था कि आंटी के साथ यह सब करना पड़ेगा,,,,।

(अंकित की बात सुनकर सुमन अब हैरान होने लगी उसके चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी,,,,, वह इधर-उधर देखने लगी उसे नहीं मालूम था कि अंकित यह सब बनी बनाई बात कह रहा है उसकी बात में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है उसकी मां ने आज तक उसे अंकित के साथ नंग धड़ंग हालत में कभी नहीं देखी थी लेकिन अंकित के लिए भी यह मजबूरी बन चुकी थी बातों के गुच्छों में सुमन को वह उलझाना चाहता था,,,, ताकि उसे भी लगे कि जो कुछ भी हुआ उसमें अंकित की मजबूरी थी ना की उसकी सहमति कुछ देर खामोश रहने के बाद सुमन कमर पर दोनों हाथ रखे हुए बोली,,,)



लेकिन यह सब कब हुआ,,,?

मुझे क्या मालूम मैं तो आंटी को रसगुल्ले देने गया था मुझे लगा था कि तुम घर पर होगी तो तुमसे मुलाकात हो जाएगी,,,।

फिर,,,?

फिर क्या दरवाजे पर मुझे देखकर आंटी मुझे अंदर बुलाई पहले तो एकदम सामान्य दिख रही थी लेकिन वह मेरा हाथ पकड़ कर अपने कमरे में ले गई,,,,,,,।

और वहां क्या हुआ,,,? (सुमन एकदम परेशान होते हुए बोली)

पहले तो मुझे सब कुछ ठीक लग रहा था लेकिन जैसे ही आंटी तुम्हारा जिक्र करते हुए बोली कि यह सब कितने दिन से चल रहा है यह सुनकर तो मेरे होश उड़ गए मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या बोलूं लेकिन फिर भी मैं बहाना करते हुए आंटी से बोला मेरे को समझा नहीं आप क्या कह रही है तो आंटी गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,।

बनने की कोशिश मत कर सच-सच बता सुमन के साथ यह है जो तेरी काम लीला है कब से चल रही है,,,।

तब तूने क्या कहा,,?

मैं क्या करता मैं तो सबकुछ छुपाने की कोशिश कर रहा था लेकिन छुपाने का कोई फायदा नहीं था क्योंकि आंटी को सब कुछ पता था लेकिन एक काम में कर सकता था कि तुम्हें बचा सकता था।

मुझे,,,, मे कुछ समझी नहीं।

मेरा मतलब है कि जो कुछ भी हुआ था उसमें भी अपने आप को ही दोषी बना रहा था जिसमें तुम एकदम मासूम थी मतलब की जो कुछ भी हम दोनों के बीच हुआ था उसमें तुम्हारी तरफ से पहला बिल्कुल भी नहीं थी तुम इनकार करती रही हो और मैं आगे बढ़ता रहा इस तरह की बात थी जिससे आंटी को तुमसे नफरत ना हो,,,।



तो क्या कहा तूने,,,?

मैंने क्या कहा मुझे मनाना पड़ा मैं आंटी से बोला कि जो कुछ भी तुमने देखी हो उसमें सच्चाई है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता लेकिन इसमें सुमन दीदी की कोई गलती नहीं है,,,,।

सुमन दीदी,,,, ऐसा कहने पर मम्मी कुछ बोली नहीं।

बोली ना वह कहने लगी की एक तरफ उसे अपनी दीदी भी कहता है और उसके साथ मजा भी लेता है कैसा भाई है तू,,,,,।

तब तू क्या बोला,,,?

बोलना क्या सब कहानी बनाना पड़ा मुझे अब यह तो कह नहीं सकता था की शुरुआत तुमने की थी तुमने मुझे मजबूर किया था यह सब करने के लिए सब कह देता तो तुम्हारी बदनामी हो जाती,,,,,।

यह तूने ठीक किया लेकिन क्या कहा तूने,,,,,?

मैंने कहा कि मैं जब परीक्षा चालू थी तब ,,, तुम्हारे पास आता था पढ़ाई करने के लिए और फिर धीरे-धीरे मेरा आकर्षण तुम्हारी तरफ बढ़ने लगा और एक दिन जब पढ़ते समय तुम बीच में बाथरूम में पेशाब करने गई तो थोड़ी देर बाद में भी पीछे-पीछे चल दिया और,,,,

और क्या,,,?



और क्या मैंने कहा कि तुम बाथरुम का दरवाजा खुला है छोड़कर पेशाब कर रही थी और मैं तुम्हें उसे हालत में देख लिया मुझे रहा नहीं गया और मैं तुम्हें एकदम से अपनी बाहों में भरकर प्यार करने लगा और हम दोनों के बीच ऐसा हो गया,,,,,,।

बाप रे,,,(एकदम गहरी सांस लेते हुए सुमन बोली) लेकिन मम्मी ने यह नहीं कहीं कि मैं विरोध की कि नहीं,,,,

आंटी पूछी मुझे कि तुमने क्या की तो मैंने आंटी को बताया कि तुम यह सब करने के लिए मना करती थी क्योंकि तुम मुझे छोटा भाई की तरह मानती थी लेकिन मैं नहीं मान पाया,,,, और यह भी कहा कि तुम बिल्कुल भी तैयार नहीं हो रही थी तो मैं तुम्हें अपना खडा लंड दिखा दिया इसके बाद,,,, जो नहीं होना चाहिए था वह होने लगा,,,,।

यह सुनकर मम्मी ने क्या कहीं,,,,?

(सुमन को ऐसा लग रहा था कि अंकित जो कुछ भी कह रहा है वह सच कह रहा है लेकिन वह यह नहीं जानती थी कि अंकित झूठी कहानी कह रहा था ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था ना तो उसकी मां ने कभी उसे चुदाई करवाते हुए देखी थी ना हीं उनके मन में दोनों को लेकर किसी बात की शंका थी फिर भी अंकित झूठी कहानी बन रहा था सुमन की बात सुनकर वह बोला,,,)

आंटी मुझे देखने लगी उनके मन में न जाने क्या चल रहा था,,, जो मुझसे गुस्से में बात कर रही थी लेकिन लंड वाली बात सुनकर वह एकदम शांत हो गई और मुझे कुछ देर देखने के बाद बोली,,,।

क्या बोली,,,?

वह बोली की दिखा तो तेरा कैसा है जिसे देखकर सुमन अपने आप को रोक नहीं पाई,,,,,।

ऐसा कहीं मम्मी,,,,

हां आंटी ने ऐसा कहीं लेकिन मैं तुम पर बिल्कुल भी दोष नहीं देना चाहता नहीं था इसलिए बोला कि नहीं आंटी सुमन दीदी का इसमें कोई भी दोष नहीं है सारी गलती मेरी है वह तो इंकार करती रही लेकिन मैं ही नहीं माना और फिर हम दोनों के बीच यह सब चलने लगा,,,,,,,। फिर इतना कहने के साथ ही में धीरे से उठकर खड़ा हो गया लेकिन शर्मा रहा था,,,,, मैं कुछ कर सकते की स्थिति में नहीं था तो पता है आंटी ने क्या की,,,?

क्या की,,,,?

वह खुद मेरे पेंट का बटन खोलने लगी मेरी तो हालत खराब होने लगी,,,।

क्या कह रहा है तू मम्मी ने खुद,,,,

हां आज जो कुछ भी हुआ वही तो बता रहा हूं आंटी खुद मेरे पेट का बटन खोलने लगी मैं आंटी का हाथ पकड़ कर उन्हें रोकने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह थी कि रुकने का नाम नहीं दे रही थी जब जब मैं आंटी का हाथ पकड़ता हुआ मेरी तरफ गुस्से से देखी तो मुझे उनका हाथ छोड़ना पड़ जाता पर देखते-देखते वह मेरे पेंट का बटन खोलकर नीचे सरका दी,,,,।

,, फिर क्या हुआ,,,?

फिर क्या था आंटी के सामने में अंडरवियर में खड़ा था और आंटी की नरम नरम उंगलियों से तुम तो जानती हो कि मेरे बदन में क्या होने लगता है आंटी जिस तरह से मेरे पेट का बटन खोलकर पेंट उतर थी अपने आप ही मेरे अंडरवियर में मेरा लंड खड़ा हो गया यह देखकर यहां आंटी की आंखें आश्चर्य से चौड़ी होने लगी वह मेरे अंडरवियर की तरफ ही देख रही थी,,,,, और मैं कुछ ना तो बोल सकता था ना कुछ कर सकता था अगले ही पल आंटी मेरेअंडरवियर को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे खींच दी और अगले ही पल मेरा लंड हवा में लहराने लगा और तुम तो जानती हो कि मेरे लंड की मोटाई और लंबाई थोड़ा ज्यादा है इस बात को आंटी भी अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए वह हैरानी से मेरे लंड की तरह देख रही थी कुछ देर तक देखने के बाद मुझे रहने की और मैं बोला कि अब मैं जा रहा हूं,,,,।

फिर मम्मी ने क्या की,,,?

तुम्हें तो पता होना चाहिए कि एक औरत की आदत अगर अपनी आंखों के सामने मर्द का मोटा तगड़ा लंबा लंड देख ले तो क्या स्थिति होती है आंटी के भी अरमान मचलने लगे और वह एकदम से मेरा लंड पकड़ ली और बिना कुछ बोले अपना मुंह मेरे लंड की तरफ बढाई और मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, तो फिर जो कुछ भी हुआ वह शायद तुम अपनी आंखों से देख ली।

बाप रे,,,,(एकदम से अपना सर पकडते हुए) यह माजरा है मैं कभी सोचा नहीं थी की मम्मी इस तरह की हरकत करेगी।

लेकिन कर दी लेकिन इसमें तुम्हारा ही फायदा है,,,,, आंटी हम दोनों को देख भी ली तो कुछ बोलेगी नहीं क्योंकि वह खुद मुझसे मजा ली है तो यह राज राज ही रह जाएगा।

तुझको तो मजा ही मजा है मेरे से भी और मेरी मम्मी से भी दिक्कत तो मुझे है,,,,।

कोई दिक्कत नहीं है मैं तो कहता हूं की मां बेटी दोनों अगर एक साथ एक ही बिस्तर पर हो तो कितना मजा आ जाएगा,,,।

हरामजादे,,,,,।

अरे अरे गुस्सा मत करो लेकिन जरा सोच कर देखो एक ही बिस्तर पर मां बेटी बिल्कुल नंगे मेरे साथ मजे ले रहे हैं कोई मेरा लंड चूस रहा है तो कोई अपनी बुर चटवा रहा है,,,।

(अंकित की बात थोड़ा गुस्से वाली थी लेकिन सुमन को सोचने पर मजबूर कर दी थी क्योंकि उसकी बात सुनने में भी कानों में रस घोल रही थी लेकिन यह सब होगा कैसे इस बारे में वह सोच रही थी इसलिए अंकित की बात सुनकर वह बोली।)

हां जैसा तू कह रहा है सब कुछ वैसा ही हो जाएगा ना मैं मम्मी से जाकर कहूंगी कि हम दोनों एक साथ अंकित के साथ मजा लूटते हैं चलो एक ही बिस्तर पर हरामी साला,,,,।

अरे इसका भी जुगाड़ मेरे पास है,,,।

क्या है जुगाड़,,,,?

देखो जब कभी भी मैं और आंटी चुदाई का मजा लूट रहे हो इस समय तुम वहां चली आना और ऐसा बर्ताव करना जैसे कि अपनी आंखों के सामने तुमने कोई अनहोनी देख ली हो आंटी को यह पता मत लगने देना कि तुम्हारा मेरे साथ ऐसा ही रिश्ता है तुम ऐसा बर्ताव करना जैसे कि अपनी मां की हरकत पर बहुत गुस्सा आ रहा हो और तुम अपनी मां से यह कहना कि यह सब में पापा को बता दूंगी फिर देखना आंटी को तैयार हो जाएगी बिस्तर शेयर करने के लिए।

धत् मुझे नहीं करना यह सब और हां अब मम्मी के साथ भी ऐसा मत करना।

मैं तो नहीं करूंगा लेकिन आंटी से खुद नहीं रह जाएगा देखना वह खुद मुझे बुलाएंगी तब तो जानती हो मेरा लेने के बाद क्या हालत होती है,,,,।

कुछ भी हो,,,,,(हाथ में बंधी घड़ी की तरह देखते हुए) काफी देर हो चुकी है अब हमें चलना चाहिए

अब तो तुम्हारे मन में कोई मलाल नहीं है ना,,,।

नहीं लेकिन आइंदा से यह सब मत करना,,,।

मैं फिर से कहता हूं मैं तो यह सब नहीं करना चाहता क्योंकि जहां तुम जैसी खूबसूरत लड़की के साथ मजा मिल रहा हो वहां आंटी के साथ मुझे मजा लेने में कोई दिलचस्पी नहीं है लेकिन आंटी खुद नहीं मानेगी तुम देख लेना।

जोभी हो,,,(कितना का कर सुमन वहां से चलने लगी वह अच्छी तरह से जानती थी कि अंकित जो कुछ भी कह रहा था उसमें सच्चाई थी उसकी मम्मी खुद अंकित के बिना अब नहीं रह पाएगी लेकिन अंकित का यह प्रस्ताव की एक ही बिस्तर पर मां बेटी दोनों अगर बिल्कुल नंगी होकर मजा लूट रही हो तो कितना मजा आएगा इस बारे में वह भी सोचने पर मजबूर हो गई थी,,,,

दूसरे दिन शाम के समय अंकित बाजार में अकेला ही घूम रहा था तभी उसकी नजर एक किताब की दुकान पर पड़ी और वह दुकान में यूं ही घुस गया कुछ किताबें देखने के लिए,,,,,, लेकिन जैसे ही वह अंदर घुस रहा था वैसे ही वह एक औरत से टकरा गया और उसके हाथ से सारी किताबें नीचे गिर गई और वह तुरंत माफी मांगते हुए नीचे बैठ गया और किताबों को समेटने लगा वह औरत भी नीचे बैठकर अपनी किताबें समेटने लगी,,,,, तभी नजर उठा कर अंकित देखा तो हैरान रह गया क्योंकि वह वही स्कूल की प्रिंसिपल थी बिंदु मैडम बिंदु के खूबसूरत चेहरे पर नजर पड़ते ही अंकित मुस्कुराते हुए बोला।

आंटी आप,,,,

(इतना सुनते ही वह भी अंकित की तरफ देखने लगी और देखकर एकदम से हैरान होते हुए बोली)

अरे अंकित तुम क्या बात कल भी मिले थे और आज देखो अनजाने में टकरा गए,,,,(ऐसा कहते हो पर वह अपनी किताबों को समेट रही थी कि तभी अंकित गिरी हुई किताबों में से एक किताब को उठा लिया जो की अश्लील किताब थी इसी तरह की किताब उसके पास भी थी अलमारी में जो उसकी मम्मी के कहे अनुसार उसके पापा पढ़ा करते थे जिसमें गंदी कहानीया थी,,,, उस किताब के मुख्य पृष्ठ पर एक खूबसूरत औरत थी तकरीबन 40 वर्षीय जो की केवल साड़ी में लिपटी हुई थी और वह नहा रही थी साड़ी के लिए हो जाने की वजह से उसके अंगों का उभार एकदम साफ झलक रहा था। उसकी चुचियों का आकार एकदम गोल था जो की भीगी हुई साड़ी में एकदम साफ दिखाई दे रहा था अंकित उसे किताब को हाथ में लेकर देखने लगा कि तभी वह एकदम से हाथ आगे बढ़कर उसके हाथ से किताब छीन ली और किताबों के नीचे रखकर उसे दबा ली और मुस्कुरा दी,,, यह देखकर अंकित से रहा नहीं गया और वह बोला,,,)

आप इस तरह की किताब पढ़ती हो,,,।

मेरी नहीं है किसी और के लिए है,,,,।

लेकिन खरीद के तो आप ही ले जा रही हो आप ही पसंद की होगी आपको अच्छी तरह से मालूम होगा कि इस किताब में क्या है,,,?

तुम्हें मालूम है क्या,,,?

मालूम तो नहीं है लेकिन मुख्य पृष्ठ को देखकर इतना तो पता चल जा रहा है कि अंदर क्या होगा,,,!

यह राज की बात है किसी से कहना मत,,,(इतना कहकर सारी किताबें को समेट करवा उठकर खड़ी हो गई और अंकित की तरफ मुस्कुराते हुए बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) मन हल्का करने के लिए कभी कभार पढ़ लेती हूं,,, इसमें कोई दिक्कत नहीं है तुम भी तो पड़े होंगे तुम्हारी उम्र के लड़के तो अक्सर यह किताबें पढ़ते हैं,,,,

लेकिन मैं नहीं पढता क्योंकि मेरे पास इतने पैसे नहीं होते कि मैं इस तरह की किताबें खरीद सकूं,,,,।

पढ़ना चाहते हो,,,(मुस्कुराते हुए बिंदु बोली)

नहीं,,(अंकित हंस कर बोला उसकी हंसी देखकर बिंदु समझ गई थी कि वह भी यह किताब को पढ़ना चाहता है लेकिन बिंदु उसे किताब दी नहीं बस मुस्कुरा कर बोली,,,)

तुम्हें यहां कोई काम है क्या,,,?

नहीं मैं तो ऐसे ही आया था किताबें देखने के लिए,,,,,

अगर कोई काम नहीं है तो चलो तुम्हें समोसे खिलाती हूं,,,,,,और हां लगता है कि परफ्यूम लगा कर आए हो देखो कितनी अच्छी खुशबू आ रही है,,,।

जी हां अब आप गिफ्ट दी हो तो लगाना तो पड़ेगा ही,,,, आप यकीन नहीं करेगी जब से लगाया हूं तब से कम से कम 10 लोगों ने तो पूछ लिया होगा कि कौन सा परफ्यूम लगाए हो,,,,।

यह बात है तो तुम क्या बोले,,,?

मैं क्या बोलता मैं नहीं चाहता था कि इसी तरह का परफ्यूम कोई लगा कर घूम इसलिए मैं भी बोल दिया कि मुझे नहीं मालूम,,,,, बस ऐसे ही लगा लिया हूं।

(इतना सुनकर बिंदु जोर-जोर से हंसने लगी हंसते हुए दोनों किताब की दुकान से बाहर निकल गए,,,, बिंदुओं से समोसे की दुकान पर ले गई और अपने लिए और उसके लिए समोसा ऑर्डर करके पेप्सी की कांच की दो बोतल भी लेकर आई जिसमें स्ट्रॉ डालकर अंकित को दी और खुद पीने लगी,,,, अंकित की नजर बार-बार बिंदु की चूचियों की तरफ चली जा रही थी क्योंकि उसने लॉकेट ब्लाउज पहनी थी जिसमें से इसकी भारी भरकम चूचियों के बीच की गहरी लकीर एकदम साफ दिखाई दे रही थी और उसी लकीर को देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था इस बात पर बिंदु ने भी गौर की थी लेकिन न जाने क्यों वह अपनी साड़ी को व्यवस्थित करके अपनी चूचियों की गहरी लकीर को छुपाने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं कर रही थी बल्कि ऐसा लग रहा था कि जैसे वह खुद उसे दिखा रही हो अंकित भी पेप्सी पीता हुआ तिरछी नजर से उसकी चूची को ही देख रहा था और उसका इस तरह से देखना बिंदु को अच्छा लग रहा था। थोड़ी देर में दुकान वाला समोसा लेकर आया और वह दोनों समोसे खाने लगे,,,, अंकित का व्यक्तित्व उसका गठीला बदन बेहद आकर्षक था और उसकी तरफ बिंदु भी धीरे-धीरे आकर्षित हुए चली जा रही थी। अंकित का साथ बिंदु को अच्छा लग रहा था तभी टेबल पर रखी हुई कर की चाबी नीचे गिर गई और उसे उठाने के लिए अंकित और बिंदु दोनों एक साथ नीचे झुक गए अंकित ने कर की चाबी को अपने हाथ में पकड़ लिया लेकिन बिंदु भी जल्दबाजी में थी उसके हाथ में कर की चाबी तो नहीं आई लेकिन वह अंकित के हाथ पर अपना हाथ रख दे उसकी हरकत से दोनों एक दूसरे को देखने लगे दोनों की नजर आपस में टकरा रही थी,,, लेकिन इस बीच नीचे झुकने की वजह से बिंदु के कंधे से उसके साड़ी का पल्लू नीचे सड़क गया था जिसकी वजह से उसकी मदहोश कर देने वाली छाती एकदम से उजागर हो गई थी और अंकित की नजर एकदम से उसकी भरपूर जवानी से भरी हुई छाती पर चली गई।

अंकित जवानी का प्यासा था और उसके सामने जवानी से भरा हुआ कुआं था और वह एक प्यासे की तरह कुएं को देख रहा था साड़ी का आंचल है जाने की वजह से बिंदु की जवानी से भरपूर छातियां अंकित की आंखों के सामने हाहाकार मचा रही थी अंकित उसकी छातियों को देखता ही रह गया कुछ पल के लिए बिंदु भी अंकित की आंखों में डूबने लगी लेकिन जल्द ही उसे एहसास हो गया कि वह किस जगह पर है इसलिए वह एकदम से अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करने लगी और धीरे से उठने लगी तो अंकित भी अपनी जगह से उठने लगा और धीरे से बोला।

यह लो आपकी कार की चाबी,,,,।

(बिंदु का दिल जोरो से धड़क रहा था बिंदु कभी सोची नहीं थी कि उसके बेटे की उम्र का लड़का उसकी छाती को प्यासी नजरों से दिखेगा लेकिन उसका इस तरह से देखना उसे अच्छा लग रहा था वह कुछ बोल नहीं पाई और खामोश होकर समोसा खाने लगी समोसा खत्म करने के बाद वह धीरे से बातचीत की शुरुआत करते हुए बोली)

तुम इस बाजार में अक्सर आते रहते हो क्या,,?

हां मैं यही पास में तो रहता हूं,,,, इसलिए मेरा यहां रोज ही आना-जाना रहता है।

चलो तब तो ठीक है कभी कोई काम पड़ेगा तो तुम्हें बोल दूंगी,,,।

बेझिझक,,,,, कोई टेंशन की बात नहीं है।

अच्छा अब मैं चलती हूं,,,,,(इतना क्या करवा है कुर्सी से उठकर खड़ी हो गई तो अंकित भी अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और टेबल पर रखी हुई किताबों को अपने हाथ में ले लिया और बोला)

तुम कर में बैठो मैं लेकर आता हूं,,,,,।

(अंकित की यह बात सुनकर बिंदु मुस्कुरा दे और धीरे से अपनी कर की तरफ चलने लगी कई हुई साड़ी में उसकी जवानी से भरी हुई बड़ी-बड़ी गांड और भी ज्यादा उभारदार और कसी हुई लग रही थी साड़ी को वह अपनी कमर से कस के लपेटी हुई थी जिसकी वजह से उसके कम थोड़े छोटे पड़ रहे थे और जब वह चल रही थी तो उसकी भारी भरकम गांड एकदम मटक रही थी जिस पर अंकित की निगाह एकदम बराबर बनी हुई थी, बिंदु अपने कार के पास पहुंच गई थी और एकदम से नजर घुमा कर देखी तो अंकित उसकी गांड की तरफ प्यासी नजरों से देख रहा था यह एहसास होते हैं बिंदु शर्म से पानी पानी हो गई और वह तुरंत अपनी नजर दूसरी तरफ घुमा ली अंकित कर के पास पहुंचकर खड़ा रह गया और बिंदु कर का दरवाजा खोलकर कार के अंदर घुस गई और पास वाली सीट पर अंकित ने किताबों को रख दिया,,,, जो कुछ भी हो रहा था उसकी वजह से बिंदु की सांस थोड़ी गहरी चलने लगी थी जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम चुचीया भी ऊपर नीचे लहरा रही थी और वह जल्दी से कर स्टार्ट करके वहां से चलती बनी और अंकित उसे तब तक देखता रहा जब तक की कार आंखों से ओझल नहीं हो गई।
 
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