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- Dec 5, 2013
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दिलीप- सुबह मैं उठके नाहया धोया तय्यार होके नीचे गया
बड़ी नानी डाइनिंग टेबल पे बैठी थी या यूँ कहे दोनो मामा और विदू को छोड़ के सब बैठे थे
बड़ी नानी- उठ गया मेरा बेटा
दिलीप- जी बड़ी नानी
बड़ी नानी- तू यहाँ पे क्या कर रहा है तेरी विदू तो अपने रूम में है
दिलीप- बड़ी मामी आप विदू को नाश्ता करा दो
[बड़ी मामी मुझे देखती रह गयी कल मैं विद्या को अकेला नही छोड़ रहा था और आज मैं उसके पास भी नही जाना चाहता हूँ]
बड़ी नानी- क्या हुआ तुम दोनो का झगड़ा हुआ है क्या
दिलीप- नही बड़ी नानी ऐसी कोई बात नही है
बड़ी नानी- बड़ी माँ रहने दीजिए मैं ही ले जाती हूँ नाश्ता
दिलीप- बड़ी मामी उठके किचन में गयी वहाँ से नाश्ता लेके विदू के रूम में चली गयी मैं अपनी नज़र नीची करके नाश्ता करने लगा
[विद्या का रूम]
बड़ी मामी लाल पीली हुई विद्या के रूम में पहुँची विद्या की शकल देखते ही बड़ी मामी का सारा गुस्सा हवा हो गया क्यूंकी विद्या बहुत उदास दिख रही थी बड़ी मामी बेड पे बैठ गयी और विद्या के सर पे हाथ फेरते हुए बोली- क्या हुआ बेटी तुम इतनी उदास क्यूँ हैं
विद्या- नही माँ बस ऐसे ही
बड़ी मामी- विद्या तुम अपनी माँ से झूठ बोलोगि
विद्या- आप दिलीप से नाराज़ हैं
[बड़ी मामी यह बात सुनके सोच में पड़ गयी]
विद्या- आप दिलीप से इसलिए नाराज़ हैं कि वो मुझसे मिलने नही आया
बड़ी मामी- ऐसी कोई बात नही है तुम नाश्ता कर लो
विद्या- नही माँ पहले आप मेरी बात सुनिए दिलीप मुझसे बहुत प्यार करते हैं आपको पता है जब आप सब गाओं के लिए चली जाएँगी तो मैं बहुत रोउंगी मैं उनको देखके अपने आँसू नही रोक पाउन्गी इसी लिए वो मुझसे मिलने नही आए आप उनसे नाराज़ मत होना
[बड़ी मामी अपनी बेटी को देखती रह गयी फिर बड़ी मामी विदू को नाश्ता खिला कर वापस नीचे आगयि]
मैने चुप चाप नाश्ता कर लिया फिर रूम में से बड़े मामा और छोटे मामा बाहर निकले मैं अपनी सब बहनो को बाइ बोलके गाड़ी में बैठ गया सब विदू से मिलके गाड़ी में बैठ गये फिर दोनो गाड़ी अपनी रफ़्तार से चल पड़ी
दोपहर तक हम घर पहुँचे
मैने सीधा अपने रूम में आके विदू को फोन लगाया फोन उठाते ही विदू रोने लगी
मैं भी उनके साथ रोने लगा फिर मैं उनको चुप कराया और बेड पे लेट गया
थोड़ी देर बाद वँया के रूम में गया
वँया पढ़ाई कर रही थी मैं भी पढ़ाई करने लगा
पढ़ाई करते हुए मैं वँया को देख रहा था
थोड़ी देर तक तो वँया चुप रही फिर वो भी मुझे घूर्ने लगी
दिलीप- घूर क्यूँ रही हो
वँया- तुम घूर रहे हो
दिलीप- वो तो तुम मुझसे नाराज़ हो इसलिए
वँया- मैं तुमसे क्यूँ नाराज़ होंगी
दिलीप- तो फिर मुझसे बात क्यूँ नही करती
वँया- सोच लो अगर बात करोगे तो बहुत पछताओगे
दिलीप- चुहिया कहीं की बड़ी आई पछताने वाली
वँया- तो यह लो किताब तुम क्वेस्चन पूछो मैं जवाब दूँगी
दिलीप- मर गया
वँया- ऐसा फिर कभी मत बोलना
दिलीप- नही बोलूँगा
फिर मैं सवाल करता गया वँया फटाफट जवाब देती गयी ऐसे ही रात हो गयी
वँया- अब जाके खाना खा लो
दिलीप- तुम भी चलो
फिर हम दोनो खाना खाने लगे उसके बाद मैं अपने रूम में आगया
बड़ी मामी मेरे लिए दूध लेके आगयि
मैं दूध पीके बेड पे लेट गया और सोचने लगा कि अब तो फर्स्ट आना ही पड़ेगा मेरी विदू का जो ऑर्डर है
मैं बाथरूम गया फिर वापस आके बेड पे लेट गया थोड़ी देर बाद नींद आगयि
रात को कोई मेरा रूम नॉक करने लगा
मैने जाके रूम खोला
सामने बड़े मामा खड़े थे बड़े मामा बिना कुछ बोले अंदर आगये
मैने गेट बंद कर दिया जैसे ही मैं पीछे मुड़ा बड़े मामा रूम में नही थे
मेरा तो दिमाग़ घूम गया.,...
दिलीप- सुबह मैं उठके नाहया धोया तय्यार होके नीचे गया
बड़ी नानी डाइनिंग टेबल पे बैठी थी या यूँ कहे दोनो मामा और विदू को छोड़ के सब बैठे थे
बड़ी नानी- उठ गया मेरा बेटा
दिलीप- जी बड़ी नानी
बड़ी नानी- तू यहाँ पे क्या कर रहा है तेरी विदू तो अपने रूम में है
दिलीप- बड़ी मामी आप विदू को नाश्ता करा दो
[बड़ी मामी मुझे देखती रह गयी कल मैं विद्या को अकेला नही छोड़ रहा था और आज मैं उसके पास भी नही जाना चाहता हूँ]
बड़ी नानी- क्या हुआ तुम दोनो का झगड़ा हुआ है क्या
दिलीप- नही बड़ी नानी ऐसी कोई बात नही है
बड़ी नानी- बड़ी माँ रहने दीजिए मैं ही ले जाती हूँ नाश्ता
दिलीप- बड़ी मामी उठके किचन में गयी वहाँ से नाश्ता लेके विदू के रूम में चली गयी मैं अपनी नज़र नीची करके नाश्ता करने लगा
[विद्या का रूम]
बड़ी मामी लाल पीली हुई विद्या के रूम में पहुँची विद्या की शकल देखते ही बड़ी मामी का सारा गुस्सा हवा हो गया क्यूंकी विद्या बहुत उदास दिख रही थी बड़ी मामी बेड पे बैठ गयी और विद्या के सर पे हाथ फेरते हुए बोली- क्या हुआ बेटी तुम इतनी उदास क्यूँ हैं
विद्या- नही माँ बस ऐसे ही
बड़ी मामी- विद्या तुम अपनी माँ से झूठ बोलोगि
विद्या- आप दिलीप से नाराज़ हैं
[बड़ी मामी यह बात सुनके सोच में पड़ गयी]
विद्या- आप दिलीप से इसलिए नाराज़ हैं कि वो मुझसे मिलने नही आया
बड़ी मामी- ऐसी कोई बात नही है तुम नाश्ता कर लो
विद्या- नही माँ पहले आप मेरी बात सुनिए दिलीप मुझसे बहुत प्यार करते हैं आपको पता है जब आप सब गाओं के लिए चली जाएँगी तो मैं बहुत रोउंगी मैं उनको देखके अपने आँसू नही रोक पाउन्गी इसी लिए वो मुझसे मिलने नही आए आप उनसे नाराज़ मत होना
[बड़ी मामी अपनी बेटी को देखती रह गयी फिर बड़ी मामी विदू को नाश्ता खिला कर वापस नीचे आगयि]
मैने चुप चाप नाश्ता कर लिया फिर रूम में से बड़े मामा और छोटे मामा बाहर निकले मैं अपनी सब बहनो को बाइ बोलके गाड़ी में बैठ गया सब विदू से मिलके गाड़ी में बैठ गये फिर दोनो गाड़ी अपनी रफ़्तार से चल पड़ी
दोपहर तक हम घर पहुँचे
मैने सीधा अपने रूम में आके विदू को फोन लगाया फोन उठाते ही विदू रोने लगी
मैं भी उनके साथ रोने लगा फिर मैं उनको चुप कराया और बेड पे लेट गया
थोड़ी देर बाद वँया के रूम में गया
वँया पढ़ाई कर रही थी मैं भी पढ़ाई करने लगा
पढ़ाई करते हुए मैं वँया को देख रहा था
थोड़ी देर तक तो वँया चुप रही फिर वो भी मुझे घूर्ने लगी
दिलीप- घूर क्यूँ रही हो
वँया- तुम घूर रहे हो
दिलीप- वो तो तुम मुझसे नाराज़ हो इसलिए
वँया- मैं तुमसे क्यूँ नाराज़ होंगी
दिलीप- तो फिर मुझसे बात क्यूँ नही करती
वँया- सोच लो अगर बात करोगे तो बहुत पछताओगे
दिलीप- चुहिया कहीं की बड़ी आई पछताने वाली
वँया- तो यह लो किताब तुम क्वेस्चन पूछो मैं जवाब दूँगी
दिलीप- मर गया
वँया- ऐसा फिर कभी मत बोलना
दिलीप- नही बोलूँगा
फिर मैं सवाल करता गया वँया फटाफट जवाब देती गयी ऐसे ही रात हो गयी
वँया- अब जाके खाना खा लो
दिलीप- तुम भी चलो
फिर हम दोनो खाना खाने लगे उसके बाद मैं अपने रूम में आगया
बड़ी मामी मेरे लिए दूध लेके आगयि
मैं दूध पीके बेड पे लेट गया और सोचने लगा कि अब तो फर्स्ट आना ही पड़ेगा मेरी विदू का जो ऑर्डर है
मैं बाथरूम गया फिर वापस आके बेड पे लेट गया थोड़ी देर बाद नींद आगयि
रात को कोई मेरा रूम नॉक करने लगा
मैने जाके रूम खोला
सामने बड़े मामा खड़े थे बड़े मामा बिना कुछ बोले अंदर आगये
मैने गेट बंद कर दिया जैसे ही मैं पीछे मुड़ा बड़े मामा रूम में नही थे
मेरा तो दिमाग़ घूम गया.,...