Incest मैं अपने परिवार का दीवाना - Page 14 - SexBaba
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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

अपडेट 122

दिलीप- सुबह मैं उठके नाहया धोया तय्यार होके नीचे गया

बड़ी नानी डाइनिंग टेबल पे बैठी थी या यूँ कहे दोनो मामा और विदू को छोड़ के सब बैठे थे

बड़ी नानी- उठ गया मेरा बेटा

दिलीप- जी बड़ी नानी

बड़ी नानी- तू यहाँ पे क्या कर रहा है तेरी विदू तो अपने रूम में है

दिलीप- बड़ी मामी आप विदू को नाश्ता करा दो

[बड़ी मामी मुझे देखती रह गयी कल मैं विद्या को अकेला नही छोड़ रहा था और आज मैं उसके पास भी नही जाना चाहता हूँ]

बड़ी नानी- क्या हुआ तुम दोनो का झगड़ा हुआ है क्या

दिलीप- नही बड़ी नानी ऐसी कोई बात नही है

बड़ी नानी- बड़ी माँ रहने दीजिए मैं ही ले जाती हूँ नाश्ता

दिलीप- बड़ी मामी उठके किचन में गयी वहाँ से नाश्ता लेके विदू के रूम में चली गयी मैं अपनी नज़र नीची करके नाश्ता करने लगा

[विद्या का रूम]

बड़ी मामी लाल पीली हुई विद्या के रूम में पहुँची विद्या की शकल देखते ही बड़ी मामी का सारा गुस्सा हवा हो गया क्यूंकी विद्या बहुत उदास दिख रही थी बड़ी मामी बेड पे बैठ गयी और विद्या के सर पे हाथ फेरते हुए बोली- क्या हुआ बेटी तुम इतनी उदास क्यूँ हैं

विद्या- नही माँ बस ऐसे ही

बड़ी मामी- विद्या तुम अपनी माँ से झूठ बोलोगि

विद्या- आप दिलीप से नाराज़ हैं

[बड़ी मामी यह बात सुनके सोच में पड़ गयी]

विद्या- आप दिलीप से इसलिए नाराज़ हैं कि वो मुझसे मिलने नही आया

बड़ी मामी- ऐसी कोई बात नही है तुम नाश्ता कर लो

विद्या- नही माँ पहले आप मेरी बात सुनिए दिलीप मुझसे बहुत प्यार करते हैं आपको पता है जब आप सब गाओं के लिए चली जाएँगी तो मैं बहुत रोउंगी मैं उनको देखके अपने आँसू नही रोक पाउन्गी इसी लिए वो मुझसे मिलने नही आए आप उनसे नाराज़ मत होना

[बड़ी मामी अपनी बेटी को देखती रह गयी फिर बड़ी मामी विदू को नाश्ता खिला कर वापस नीचे आगयि]

मैने चुप चाप नाश्ता कर लिया फिर रूम में से बड़े मामा और छोटे मामा बाहर निकले मैं अपनी सब बहनो को बाइ बोलके गाड़ी में बैठ गया सब विदू से मिलके गाड़ी में बैठ गये फिर दोनो गाड़ी अपनी रफ़्तार से चल पड़ी

दोपहर तक हम घर पहुँचे

मैने सीधा अपने रूम में आके विदू को फोन लगाया फोन उठाते ही विदू रोने लगी

मैं भी उनके साथ रोने लगा फिर मैं उनको चुप कराया और बेड पे लेट गया

थोड़ी देर बाद वँया के रूम में गया

वँया पढ़ाई कर रही थी मैं भी पढ़ाई करने लगा

पढ़ाई करते हुए मैं वँया को देख रहा था

थोड़ी देर तक तो वँया चुप रही फिर वो भी मुझे घूर्ने लगी

दिलीप- घूर क्यूँ रही हो

वँया- तुम घूर रहे हो

दिलीप- वो तो तुम मुझसे नाराज़ हो इसलिए

वँया- मैं तुमसे क्यूँ नाराज़ होंगी

दिलीप- तो फिर मुझसे बात क्यूँ नही करती

वँया- सोच लो अगर बात करोगे तो बहुत पछताओगे

दिलीप- चुहिया कहीं की बड़ी आई पछताने वाली

वँया- तो यह लो किताब तुम क्वेस्चन पूछो मैं जवाब दूँगी

दिलीप- मर गया

वँया- ऐसा फिर कभी मत बोलना

दिलीप- नही बोलूँगा

फिर मैं सवाल करता गया वँया फटाफट जवाब देती गयी ऐसे ही रात हो गयी

वँया- अब जाके खाना खा लो

दिलीप- तुम भी चलो

फिर हम दोनो खाना खाने लगे उसके बाद मैं अपने रूम में आगया

बड़ी मामी मेरे लिए दूध लेके आगयि

मैं दूध पीके बेड पे लेट गया और सोचने लगा कि अब तो फर्स्ट आना ही पड़ेगा मेरी विदू का जो ऑर्डर है

मैं बाथरूम गया फिर वापस आके बेड पे लेट गया थोड़ी देर बाद नींद आगयि

रात को कोई मेरा रूम नॉक करने लगा

मैने जाके रूम खोला

सामने बड़े मामा खड़े थे बड़े मामा बिना कुछ बोले अंदर आगये

मैने गेट बंद कर दिया जैसे ही मैं पीछे मुड़ा बड़े मामा रूम में नही थे

मेरा तो दिमाग़ घूम गया.,...
 
अपडेट 123

दिलीप- मेरी तो पूरी तरह से फटी पड़ी थी कि बड़े मामा इतनी जल्दी कहाँ चले गये

मैं अपने गाल थपथपाने लगा कि कही मुझे दौरा तो नही पड़ने वाला है

मैने बाथरूम में जाके देखा बेड के नीचे देखा बड़े मामा कहीं नही थे

और तो और मैने कबाड़ में भी देख लिए

मतलब बड़े मामा जो पहलवानों की तरह दिखते हैं उनको मैं कबाड़ में ढूँडने लगा

मैं बेड पे बैठके लंबी लंबी साँसे लेने लगा

तभी मैने वो देखा जिसको देखके मुझे लगा कि सच में मैं सपना ही देख रहा हूँ

मेरे रूम में जो अलमारी थी वो साइड हो गयी और पीछे से बड़े मामा निकले

बड़े मामा मेरे पास बेड पे बैठ गये

बड़े मामा- यह ख़ुफ़िया रास्ता है जो सिर्फ़ तुम्हारे रूम में है और इस रास्ते से तुम इस हवेली के किसी भी रूम में जा सकते हो सिर्फ़ जा सकते हो वापस नही आसाकते इस रास्ते से तुम हवेली के बाहर भी जा सकते हो और इस रास्ते से जाने में तुम्हे एक रूम दिखेगा उस रूम में तुम्हे तुम्हार सारे सवालो के जवाब मिल जाएँगे

[फिर बड़े मामा मुझे देखने लगे]

हम जानते है कि यह बहुत अजीब है तुम बहुत कुछ सोच रहे हो

हमे भी अजीब लगा था जब पिताजी ने हमे यह सब बताया

यह बात जतिन भी नही जानता

एक और बात तुम विद्या की कसम खाओ

तुम अपनी पढ़ाई पूरी करोगे फिर उस रूम में जाओगे

दिलीप- [बड़े मामा की बात सुनके तो मेरा सर फटने लगा उपर से विदू की कसम

अरे हलवा है क्या कि जो बात मैं जानता नही हूँ उसके लिए मैं अपनी विदू की कसम खा लूँ

उपर से यह भी बोल रहे है कि मेरे हर सवाल का जवाब मुझे उस रूम में मिल जाएगा

तो फिर मैं कसम क्यूँ खाऊ मैं यह सब सोच ही रहा था कि बड़े मामा ने वो किया जो मैने सोचा भी नही था

बड़े मामा ने गन निकालके अपनी कनपटी पे लगा दी]

बड़े मामा- तुम कसम खाओगे कि नही

[यह तो मेरा अंदाज़ है इस वक़्त मेरे दिमाग़ में भूचाल आया हुआ था लेकिन इस वक्त बड़े मामा की आँखो में कोई कठोरता नही थी आज मैं उनसे बिल्कुल भी डर नही रहा था बड़े मामा जैसे भी थे मेरी विदू के पिता थे मैं उनको कैसे मरने देता]

दिलीप- मैं विदू की कसम ख़ाता हूँ कि पहले अपनी पढ़ाई पूरी करूँगा उसके बाद उस रूम में जाउन्गा

[मेरी बात सुनके बमामा खड़े हो गये और मेरे सर पे हाथ फेरते हुए बोले

बड़े मामा- हमेशा खुश रहना अपने परिवार को खुश रखना अपना और अपने परिवार का ख्याल रखना

[यह बोलके बड़े मामा मेरे रूम से बाहर चले गये]

मैं अपना बेड पे बैठा रहा नींद तो हराम हो गयी थीफिर भी लेट गया रात भर नींद ही नही आई

अपने टाइम पे ही उठा नहा धोके तय्यार हुआ नीचे गया बड़ी नानी का आशीर्वाद लिया

फिर नाश्ता करके लखन के साथ अखाड़े में गया जब मैं कसरत कर रहा था तो देखा सरपंच की बेटी अखाड़े के अंदर आरहि है मैने कसरत करना बंद कर दिया

लखन- क्या हुआ छोटे मालिक

दिलीप- लखन अखाड़े के बाहर तो लिखा है कि अखाड़े के अंदर औरत नही आ सकती तो यह क्यूँ आरहि है

लखन- वो सरपंच जी से मिलने आई होगी

दिलीप- सरपंच जी भी अखाड़े में आते हैं पर किस लिए

लखन- वो उनके पैर में तकलीफ़ है इसलिए वो मालिश करवाने आते हैं

दिलीप- [मन में] सरपंच जी को क्या पता सरपंच जी तो पैर की मालिश करवाते हैं उनकी बेटी तो रोज़ दिन रात अपनी चूत की मालिश करवाती है वो भी अलग अलग लंड से मैने सरपंच की बेटी को इग्नोर किया और दोबारा कसरत करने लगा

कसरत करके जूस पीया फिर पहुँचा बिमला के घर

बिमला के घर का गेट तो खुला ही रहता था मैं सीधा अंदर चला गया...
 
अपडेट 123आ

दिलीप- बिमला किचन में थी मैं धीमे कदमो से किचन में गया बिमला की पीठ मेरी तरफ थी मैने अपने दोनो हाथ बिमला की कमर पे हल्के से रख दिए और एक झटके में बिमला को अपनी तरफ खींच लिया बिमला चीखने ही वाली थी कि मैने उसका मुँह पे अपना एक हाथ रख दिया मैं अपने दूसरे हाथ से बिमला के बूब्स ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा बिमला मुझसे छूटने के लिए छटपटाने लगी बिमला अभी तक मेरा चेहरा नही देखी थी मैं बिमला के बूब्स और ज़ोर से दबाने लगा तभी मैने देखा कि बिमला चाकू उठाने की कोशिश कर रही है

दिलीप- कैसी हो काकी

मेरी आवाज़ सुनते ही बिमला शांत हो गयी

मैने अपना हाथ बिमला के मुँह से हटा दिया

बिमला मुझे गुस्से से लाल पीली होके मुझे घूर्ने लगी

बिमला- कितना बड़ा गधा है तू अगर मैं चाकू मार देती तो

दिलीप- तो मैं रोक लेता

फिर मैने बिमला को पानी दिया बिमला पानी पी गयी फिर हम दोनो खाट पे बैठ गये

दिलीप- शांति नही आई अभी तक

बिमला- वो अब नही आएगी

दिलीप- क्यूँ

बिमला- कल दिन भर वो तेरा इंतेज़ार करती रही

शांति बोली कि अब तो तू उसके साथ सब कुछ कर चुका है तेरा मतलब निकल गया इसी लिए तू नही आया

और अब वो भी नही आएगी

दिलीप- शांति भी पूरी गँवार है

बिमला- गँवार नही है बस वो भावुक हो गयी है वो सिर्फ़ माँ बनने के लिए तेरे साथ चुदाई कर रही है

दिलीप- अच्छा आप उसको बुला कर लाओ

बिमला- वो नही आएगी

दिलीप- आप उसको बुला कर लाओ यह मत बोलना कि मैं आया हूँ बस उसको रूम में लेके आजना

बिमला- हमेशा अपने बारे में सोचता है

दिलीप- मैं साड़ी के उपर से ही बिमला की चूत सहलाने लगा

बिमला- ऐसा मत कर बहुत खुजली होती है

दिलीप- आप शांति को लेके आओ आपकी सारी खुजली आज मिटा दूँगा

मेरे इतना कहते ही बिम्ला झट से खड़ी हो गयी और घर से बाहर चली गयी

मैं रूम में आके गेट पीछे छुप गया थोड़ी देर बाद शांति और बिमला रूम में आ गई

मैने झट से गेट लॉक कर दिया शांति मुझे देखते ही बिमला को घूर्ने लगी

मैं शांति के पास पहुँचा

दिलीप- परसो मेरी बहेन हॉस्पिटल में थी हम सब शहर गये थे

बिमला- देखा मैं कह रही थी तुझसे कि यह ऐसा कभी नही कर सकता

दिलीप- अब आप बोलो मैं रुकु या जाउ

शांति- मुझे माफ़ कर दो

दिलीप- एक शर्त पे करूँगा आज मैं कुछ भी करू आप मुझे नही रोकोगि

शांति- ठीक है

दिलीप- तो फिर जल्दी से कपड़े उतारो

शांति मुँह खुला का खुला रह गया

दिलीप- क्या हुआ आप क्या खड़ी हो आप भी कपड़े उतारो

मैने अपनी शर्ट बनियान पैंट और अंडरवेर सब उतरके एक जगह रख दिया

मेरा लंड पूरा मुरझाया हुआ था बिमला अपने कपड़े उतारने लगी

पर शांति वैसे ही बिमला के पास खड़ी थी मैं शांति के पास गया

तभी बिमला की बेटी की आवाज़ आई

बिमला की बेटी- माँ आप कहाँ हो

बिमला की फॅट गयी शांति का तो बुरा हाल था

दिलीप- जल्दी कपड़े पहेन कर अपनी बेटी को संभालिए उसे कहीं पे काम से भेज दीजिए

आप मत जाना बिमला वैसे ही खड़ी थी मैने बिमला के निपल को पकड़के खींच दिया

बिमला जल्दी से अपने कपड़े पहन के रूम से बाहर चली गयी शांति अभी भी वैसे ही खड़ी थी

दिलीप- आप को क्या हो गया

मैने आगे बढ़के शांति के सारे कपड़े उतार दिए

शांति को देखके मेरा लंड झटके खाने लगा

मैं शांति के होंटो को किस करने लगा

थोड़ी देर बाद शांति भी मुझे किस करने लगी

फिर मैं शांति की चुदाई करके घर आगया

बेचारी बिमला आज भी प्यासी रह गयी...
 
अपडेट 123ब

दिलीप- मैं बुक्स लेके वँया के रूम में गया वँया के साथ पढ़ाई करने लगा

पढ़ाई करते वक़्त वँया को कुछ सूझता ही नही था पढ़ाई करते हुए दोपहर हो गयी

दिलीप- चलो खाने का टाइम हो गया है

वँया- 10 मिनिट में यह वाला चॅप्टर पढ़के

दिलीप- वँया तुम लगातार पढ़ाई करने से बोर नही होती क्या

वँया- मुझे पढ़ना अच्छा लगता है जैसे तुम्हे घूमना अच्छा लगता है

दिलीप- अच्छा तुम आगे क्या पढ़ाई करोगी

वँया- मैं तो डॉक्टर बनूँगी

दिलीप- और मैं तुम्हारे हॉस्पिटल में कॉमपाउंडर बनूंगा

वँया- तुम क्या लोगे आर्ट साइन्स या कॉमर्स

दिलीप- पता नही अभी कुछ सोचा नही है एग्ज़ॅम के बाद सोचूँगा चलो 10 मिनिट हो गये

वँया- दिलीप

दिलीप- मैं बिना कुछ कहे रूम से भागके बाहर आगया

तभी मुझसे कोई टकरा गया हम दोनो नीचे गिर गये

मैने जब उसको देखा तो मेरा मुँह खुला का खुला रह गया

यह किरण मासी थी मैं किरण मासी के उपर था

मेरा दोनो हाथ किरण मासी के बूब्स पर थे

वैसे मैं ठरकि नही हूँ लेकिन किरण मासी की खूबसूरती को देखके मैं भूल गया कि वो मेरी मासी हैं

लेकिन मेरा हरम्खोर लंड अपनी मासी को देखके ही खड़ा होने लगा तभी मुझे वँया की आवाज़ आई

मैं जल्दी से उठा और भागके अपने रूम में आगया और लंबी-2 साँसे लेने लगा

आज पहली बार मेरा मूठ मारने का मन कर रहा था

आज किरण मासी को देखके मैं अपने आप को कंट्रोल नही कर पा रहा था

मैं जल्दी से बाथरूम में घुसके नंगा हो गया

और पूरा एक बाल्टी पानी अपने लंड पे डाल दिया

लेकिन मेरा लंड बैठ ही नही रहा था

मैं कपड़े पहेन कर नीचे आगया

बड़ी नानी- दिलीप इधर आ तुझे किसी से मिलाती हूँ

[मैं बड़ी नानी के पास गया]

बड़ी नानी मुझे बड़े मामा के रूम में ले गयी

जिसमें अब सिर्फ़ बड़ी मामी रहती थी

रूम में बड़ी मामी और किरण मौसी बैठके बाते कर रही थी

किरण मौसी मुझे घूर्ने लगी

मेरी फॅट गयी मैं सोचने लगा कि किरण मौसी मेरे बारे में क्या सोच रही होंगी

कहीं बड़ी नानी को पता चल गया तो

बड़ी नानी- यह है मेरा बेटा दिलीप और यह तेरी बड़ी मौसी हैं

दिलीप- मैने किरण मौसी के पास जाके उनके पैर छुए

किरण मौसी- हमेशा खुश रहो

[फिर मैं बड़ी नानी के पास बैठ गया किरण मौसी ने सफेद सारी पहने हुई थी मैं चोर नज़रो से किरण मौसी को देखने लगा

फिर मैं अपने मन को समझाया कि वो मेरी मासी हैं उपर से विधवा कहीं वो मेरी वजह से दुखी ना हो जाए मुझे ऐसा नही करना चाहिए )

दिलीप- बड़ी नानी खाना दो ना भूक लगी है

बड़ी मामी- बड़ी माँ आप रुकिये चलो बेटा

[फिर मैं रूम से बाहर आके डाइनिंग टेबल पे बैठ गया

वँया भी बैठी हुई थी

बड़ी मामी हम दोनो के लिए खाना लेके आगयि

हम दोनो खाना ख़ाके अपने रूम में आगये

मैं किताब लेके नई मामी के रूम पे पहुँचा

फिर नई मामी के साथ मैने 1 घंटा पढ़ाई की

कमाल की बात है ना बड़े मामा जिनकी बीवी है वो अलग रूम में रहते हैं

फिर मैं वँया के रूम में गया हमेशा की तरह वँया पढ़ाई कर रही थी

दिलीप- वँया अभी भी तुम पढ़ाई कर रही हो

वँया- तुम कहना चाहते हो कि मुझे अभी बुआ के पास होना चाहिए

दिलीप- हाँ

वँया- कोई फ़ायदा नही है बुआ ज़्यादा किसी से बात नही करती हैं

दिलीप- और किरण मौसी की दोनो बेटी कहाँ है

वँया- बहेन बोलने में शरम आती है

दिलीप- नही वँया दीदी

वँया- दिलीप कभी दीदी मत बोलना वरना तुमसे कभी बात नही करूँगी

दिलीप- शांत शांत मैं तो मज़ाक कर रहा था

फिर हम दोनो पढ़ाई करने लगे...
 
अपडेट 124

दिलीप- वँया एक बात पुछु

वँया- चुप करके पढ़ाई करो

दिलीप- अच्छा यह बताओ कि किरण मौसी अकेली क्यूँ आई

वँया- क्या करूँ मैं तुम्हारा

दिलीप- तल के खा लो

वँया- तुम मेरे साथ हर वक़्त मज़ाक क्यूँ करते हो

दिलीप- अरे तो गुस्सा क्यूँ हो रही हो बताओ ना

वँया- करुणा और काव्या नाम से ही लगता है बहुत सुशील और संस्कारी लड़की होगी लेकिन हैं दोनो एक नंबर की बेवकूफ़ मुँहफट और बदतमीज़ बुआ को हमेशा परेशान करती हैं पिताजी के अलावा किसी से भी सही तरीक़े से बात नही करती है एक दिन माँ से बहस करने लगी पिताजी बहुत गुस्सा हुए उस दिन से वो दोनो यहाँ नही आती है

दिलीप- लेकिन वो दोनो ऐसी क्यूँ हैं

वँया- मुझे नही पता किसी को भी नही पता

दिलीप- तुमसे बड़ी हैं या छोटी

वँया- क्यूँ मुझे परेशान कर रहे हो मेहेरबानी करके पढ़ाई करो

दिलीप- नही करूँगा पहले बताओ

वँया- तो सुनो

विद्या दी

अरुणा दी

प्रिया दी

करुणा

काव्या

मैं

अवन्तिका

प्रीति

मेघा

सुनीता

[वँया को ऐसे बोलते देख मुझे इतनी ज़ोर से हँसी आने लगी कुछ देर तक मैं अपनी हँसी दबाता रहा फिर एक ठहाके के साथ मैं हँसने लगा वँया मेरी हँसी देखके लाल पीली हो गयी फिर पता नही वँया को क्या हुआ वँया भी हँसने लगी लेकिन उसकी आँखो में आँसू देखके मैने हँसना बंद कर दिया]

दिलीप- रो क्यूँ रही हो

मैं तो मज़ाक कर रहा था

वँया- नही वो विद्या दी की याद आरहि थी मैं तुम्हारी बात का बुरी कभी नही मान सकती

दिलीप- [फिर मैं और वँया पढ़ाई करने में लग गये लेकिन मेरे दिमाग़ में एक बात नही बैठ रही थी वो यह कि करुणा और काव्या अपनी माँ को इतना परेशान क्यूँ करती हैं पढ़ाई करते हुए शाम हो गयी मैने सोचा गाओं घूम लेता हूँ लेकिन फिर सोचा किरण मौसी से बात भी कर लूँगा और माफी भी माँग लूँगा

मैं पहुँचा किरण मौसी के रूम पे

गेट नॉक किया

किरण मौसी गेट खोलके मुझे देखने लगी

दिलीप- आपसे कुछ बात करनी थी

[मैं रूम के अंदर आगया किरण मौसी अभी भी मुझे देखे जा रही थी]

मुझे माफ़ कर दीजिए उस वक़्त के लिए

किरण मौसी- कोई बात नही मैं जानती हूँ तुम्हारी कोई ग़लती नही थी आओ बैठो

[मैं बैठ गया]

किरण मौसी--तुम तो बहुत बड़े हो गये हो मैं जानती हूँ कि मैं आज तक तुमसे कभी नही मिली तुम मुझे माफ़ करदो

दिलीप- मैं भी जानता हूँ कि आप बड़े मामा की वजह से मुझसे मिलने नही आती थी

किरण मौसी- बड़ी माँ तुम्हे बहुत प्यार करती हैं

दिलीप- करुणा दी और काव्या दी नही आई

[मैं जानबूझके यह सवाल पुच्छ रहा था]

किरण मौसी- वो दोनो अभी पढ़ाई में बिज़ी हैं

दिलीप- ठीक है फिर मैं उनसे एग्ज़ॅम के बाद मिलूँगा

[किरण मौसी कुछ परेशान दिखने लगी]

दिलीप- अब आप आराम कीजिए मैं जाता हूँ

किरण मौसी- ऐसा नही बोलते अगली बार बोलना कि जाके आता हूँ

दिलीप- [मैं रूम से बाहर आगया बाहर आके गेट बंद नही किया हल्का सा गेट खोलके देखने लगा मैने देखा कि किरण मौसी बेड पे लेटी हुई थी)

मैं अपने रूम में आगया

थोड़ी देर बाद कोई गेट नॉक करने लगा मैने जाके गेट खोला सामने बड़ी मामी दूध का गिलास लिए खड़ी थी

मैने दूध पी लिया बड़ी मामी वापस चली गयी

[किरण मौसी का रूम]

किरण मौसी बड़ी नानी की गोद में सर रख के रो रही थी

किरण मौसी- बड़ी माँ मेरे साथ ही ऐसा क्यूँ होता है ना मुझे पति का सुख मिल सका और अब तो मेरी बेटियाँ भी मुझसे दूर होने लगी हैं

बड़ी नानी- किरण तू चिंता मत कर सब ठीक हो जाएगा

किरण मौसी- यह सब उसकी वजह से हो रहा है वो मेरी खुशियो का काल बनी हुई है

बड़ी नानी- मैं जानती हूँ तू रो मत सब ठीक हो जाएगा

दिलीप- रात के खाने का टाइम हो गया मैं नीचे गया सब बैठके खाना खा रहे थे मैं भी खाना खाने लगा

तभी मेरे सर में दर्द होने लगा मैने जल्दी से खाना खाया और अपने रूम में आके गेट लॉक कर दिया

मेरे सर में और तेज़ दर्द होने लगा फिर मैं बेहोश हो गया....
 
अपडेट 125

दिलीप- जब मुझे होश आया तो 11 बज रहे थे

मतलब मैं 2 घंटे तक बेहोश था

फिर मैं विदू से बात करके सो गया

सुबह उठके नहाया धोया तय्यार होके नीचे गया

नाश्ता करके अखाड़े में गया

कसरत करके बिम्ला के घर पहुँचा

बिम्ला खाट पे बैठी हुई थी

मैं बिम्ला के साथ रूम में गया

शांति बेड पे बैठी हुई थी

मैने गेट लॉक कर दिया

बिम्ला मुझे देखके मुस्कुराने लगी

मैं अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया

अभी मेरा लंड मुरझाया हुआ था

मैं बिम्ला के होंठ चूसने लगा

बिम्ला मेरे लंड को अपने हाथो में पकड़के आगे पीछे कर रही थी

शांति हमे देखके शर्मा रही थी

मैने शांति को इग्नोर किया

और बिम्ला के कपड़े उतारने लगा

पहले साड़ी फिर ब्लाउस फिर पेटिकोट बिमला ब्रा और पैंटी तो पहनती नही थी

दिलीप- आज आपकी बेटी तो नही आएगी

बिम्ला- नही आएगी तू चिंता मत कर

दिलीप- मैं बिम्ला के बूब चूसने लगा दूसरे बूब को दबाने लगा

बिम्ला आहे भरने लगी

मैने बिम्ला के निपल को काट लिया

बिम्ला- उईइ माआ माअर डाअला

दिलीप- मैने दूसरे निपल को भी काट लिया

फिर दोनो निपल पे अपनी ज़ुबान फिरा के मलम लगाने लगा

मैं अपने हाथ से बिम्ला की चूत मसल्ने लगा

बिम्ला के निपल चाटने लगा

शांति अब अपनी शरम छोड़ कर साड़ी के उपर से अपनी चूत मसल रही थी

मैं अपनी दो उंगली एक ही बार में बिम्ला की चूत में पेल दिया

बिना रुके आगे पीछे करने लगा

बिम्ला- उंगली से कुछ नही होगा जल्दी से अपना लंड डाल दे मेरी चूत में

दिलीप- इतनी जल्दी नही पहले आपका रस तो पी लूँ

बिम्ला बेड पे लेट गयी मैं उसकी चूत चूसने लगा

बिम्ला की चूत ने पानी छोड़ दिया

मैं सारा पानी पी गया

फिर भी मैं बिम्ला की चूत चूस्ता रहा

बिम्ला ने फिर से पानी छोड़ दिया

मैने बिम्ला के मुँह पे अपना लंड रख दिया

बिम्ला मेरा लंड चूसने लगी

थोड़ी देर तक बिम्ला मेरा लंड चुस्ती रही

फिर वो घोड़ी बन गयी

मैने अपने लंड पे कॉंडम लगाया

वैसे मैं अपने आपको थोड़ा पागल समझता हूँ

एक बार में ही मैं 50 कॉंडम खरीद लिया था

मैने बिम्ला के मुँह में अपना पूरा लंड डालके गीला किया

फिर बिम्ला की चूत पे अपना लंड सेट किया

दिलीप- तकिये में अपना मुँह दबा लो

बिम्ला समझ गयी उसकी ज़ोरदार चुदाई होने वाली है

मैने अपनी पूरी ताक़त से अपना लंड बिम्ला की चूत में पेल दिया

मेरा लंड बिम्ला की चूत को फाड़ता हुआ पूरा अंदर चला गया

बिम्ला की दबी चीख निकल गयी

मैं बिना रुके बिम्ला की चूत में अपना लंड पेलने लगा

बिम्ला तकिये में अपना मुँह दबाए आहे भर रही थी

उधर शांति पूरी नंगी होके अपनी चूत मसल रही थी

मैं अपनी पूरी ताक़त से बिम्ला को चोदे जा रहा था

बिम्ला- और ज़ोर्से चोद फाड़ दे मेरी चूत अया बहुत खुजली होती एयेए ऊवू उम्म्म उईइ दम नही है क्या अया

मैं और तेज धक्के लगाने लगा

फिर मैने अपना पूरा लंड बाहर निकाला और एक ही बार में डाल दिया

बिम्ला आआहए भरने लगी

थोड़ी देर बाद बिम्ला की चूत ने पानी छोड़ दिया

मैं बिम्ला की चूत से अपना लंड निकालके लेट गया

बिम्ला धीरे-2 मेरे लंड को अपनी चूत में लेने लगी

मैं बिम्ला को अपनी तरफ झुका लिया और एक ही बार में अपना लंड पेलके तेज तेज धक्के लगाने लगा

दिलीप- काकी तुम तो बोल रही थी कि बड़ी खुजली होती है लेकिन मुझे तो मज़ा नही आरहा है

बिम्ला- तो मैं क्या करूँ मुझे तो अपनी चूत मे तेरा मुन्सल जैसा लंड लेके आ बड़ा मज़ा आरहा है

दिलीप- अच्छा मज़ा आरहा है तो यह ले मैं बिम्ला की गान्ड पे थप्पड़ मारने लगा

बिम्ला की गान्ड पे थप्पड़ मारते हुए बिम्ला की चूत फाड़ने लगा

एक बार फिर बिम्ला झड़ने लगी

बस एक राउंड और करके शांति की बारी थी

मैने बिम्ला को पेट के बल लेटा दिया

और बिम्ला की गान्ड पे अपना लंड सेट किया

बिम्ला की फॅट गयी

मैं हँसने लगा

बिम्ला मुँह बनाने लगी

मैं बिम्ला की चूत में अपना लंड डालके बिम्ला को चोदने लगा

थोड़ी देर बिम्ला फिरसे झड गयी

मैने अपना लंड बिम्ला की चूत से निकाल लिया

और शांति के पास गया

शांति तो पहले सी ही गरम हो चुकी थी

मैं अपने लंड से कॉंडम निकाला और अपना लंड शांति की चूत पे सेट किया

शांति को दीवार से सटा दिया

शांति के होंठो पे अपने होंठ रखके दो धक्को मे अपना लंड डाल दिया

शांति को थोड़ी तकलीफ़ हुई लेकिन उसे खुजली हो रही थी

मैं धीरे धीरे शांति की चूत मारने लगा

शांति उम्म किए जा रही थी

मैं शांति की आराम से चुदाई कर रहा था ताकि उसकी कुँवारी गान्ड मिल जाए

आराम से शांति को चोदने से शांति समझेगी मैं आराम से उसकी गान्ड मारूँगा

मैं नॉर्मल धक्कों से शांति को चोदने में लगा हुआ था

बिम्ला उठके बाहर चली गयी

मैं शांति को अपनी गोद में उठाके बेड पे लेटा दिया

शांति- दिलीप इतना धीरे क्यूँ अया चोद रहे हो और ज़ोर से चोदो फाड़ दो मेरी चूत को

मैं तो यही चाहता था अब मुझसे भी कंट्रोल नही हो रहा था

मैं पूरी ताक़त से शांति को चोदने लगा

शांति की चूत में मेरा लंड आराम से जा रहा था

मैने शांति की दोनो टाँगो को सटा दिया

शांति की चूत और ज़यादा टाइट हो गयी

शांति अपने मुँह पे तकिया रखके झड़ने लगी

थोड़ी देर बाद शांति फिरसे आहे भरने लगी

अब मेरा भी निकलने वाला था

मैं शांति के उपर लेटके शांति की चूत मारने लगा

शांति- दिलीप मैं झड़ने वाली हूँ

दिलीप- मैं भी आअह और मैं अपना वीर्य शांति की चूत में छोड़ दिया

शांति भी झड़ने लगी

मैं थोड़ी देर तक वैसे ही लेटा रहा

फिर मैने नहा कर कपड़े पहने और पहुँचा अपने घर....
 
अपडेट 126

दिलीप- मैं घर आके वँया के साथ पढ़ाई करने लगा

पहले तो वँया के साथ पढ़ाई करने में ऐसा लगता था

जैसे सज़ा काट रहा हूँ

लेकिन अब आदत पड़ गयी थी

पढ़ाई करते हुए दोपहर हो गयी

हम दोनो खाना खाने नीचे गये

आज कल बड़े मामा अपने अलग रूम में खाना खाते थे

बेचारे भलाई करने गये थे लेकिन मिला क्या

मैं चुप चाप खाना खा रहा था

तभी मेरा फोन बजने लगा

मैं जेब से फोन निकाला फोन लुक्खे का था मतलब अखिल का

मैं जैसे ही फोन कान में लगाया

वँया ने मेरा फोन छीन लिया

वँया- खाने के टाइम बात नही कर सकते

दिलीप- वँया फोन दो

[वँया स्क्रीन पे देखने लगी]

वँया- यह लुक्खा कौन है

दिलीप- मेरा दोस्त है

बड़ी नानी बोलिए ना फोन देने को

बड़ी नानी- वानु फोन दे दो

[वँया ने मुझे फोन दे दिया

मैं खाना बीच में छोड़ कर अपने रूम में आ गया

दिलीप- हेलो लुक्खे कैसा है

अखिल- मैं ठीक हूँ तू अपना बता

दिलीप- तू बता आजकल क्या कर रहा है

अखिल- मैं क्या करूँगा बस एक शुगर की फॅक्टरी खरीद लिया हूँ

दिलीप- क्या कहा ब्राउन शुगर की फॅक्टरी

अखिल- तू कभी नही बदल सकता

दिलीप- और बता मेरी जान आरषि कैसी है

अखिल- तुझे कितनी बार बोला है वो तेरी भाभी है

दिलीप- मतलब अब तू सुधर गया है

अखिल- हाँ चल अब रखता हूँ थोड़ा टाइम मिले तो फोन कर लेना

दिलीप- ठीक है

[मैं फोन कट करके नीचे आ गया

डाइनिंग टेबल पे मेरी प्लेट नही थी

मैं किचन में गया

किचन में किरण मौसी थी]

किरण मौसी- कुछ चाहिए दिलीप

दिलीप- मासी वो मैने आधा खाना ही खाया था

मेरा प्लेट दे दीजिए मैं बाकी भी खा लेता हूँ

किरण मौसी- तुम्हारा बचा खाना तो वँया ने खा लिया

दिलीप- पर क्यूँ मैं तो सिर्फ़ बात करने गया था

किरण मौसी- वो उसे बड़ी माँ ने कहा था कि वो तुम्हारा खाना खा ले

दिलीप- अच्छा बड़ी नानी ने कहा था

किरण मौसी- मैं चाइ बना रही हूँ तुम पीओगे

दिलीप- जी पी लूँगा

किरण मौसी- ठीक है तुम मेरे रूम में बैठो मैं चाइ लेके आती हूँ

दिलीप- [मैं किरण मौसी के रूम में आ गया किरण मौसी का रूम बिल्कुल सादा था

मतलब सफेद साड़ी उनके कुछ कपड़े और पूरा रूम भी खाली था

मैने सोचा कि बड़े नाना भी तो इस दुनिया में नही हैं

लेकिन बड़ी नानी तो ऐसे नही रहती

वो तो नॉर्मल लाइफ ही जीती हैं

और कोई औरत विधवा है तो क्या हुआ उसे नॉर्मल लाइफ ज़ीनी चाहिए

और एक तरफ किरण मौसी जो बिल्कुल सादा जीवन जीती हैं

पता नही क्यूँ जब भी किरण मौसी को देखता हूँ

नज़र ही नही हट ती है उनके चेहरे पर से

तभी किरण मौसी चाइ लेके आ गई

तभी मैं शॉक हो गया

किरण मौसी मेरे लिए दूध की चाइ लाई

और अपने लिए सादी चाइ

दिलीप- मासी आप सादी चाइ पीती हैं

किरण मौसी- हाँ दिलीप मुझे सादी चाइ अच्छि लगती है

दिलीप- फिर मैं चाइ पीने लगा

लेकिन मेरी नज़र किरण मौसी से हट ही नही रही थी

मैने चाइ पी ली

किरण मौसी क्या मैं आपके घर आसकता हूँ

किरण मौसी- इसमें पूछने की क्या बात है जब मर्ज़ी करे आ जाना

दिलीप- लेकिन मुझे तो पता ही नही है आप कहाँ रहती हैं

किरण मौसी- जहाँ सिमिता दीदी रहती हैं उसी शहेर में

दिलीप- अच्छा अब आप आराम कीजिए

मैं रूम से बाहर आ गया

और जैसे ही सीढ़िया चढ़ने लगा

मेरी नज़र नई मामी पे पड़ी जो मुझे देख रही थी

तभी मुझे याद आया कि मैं तो आज नई मामी के रूम में पढ़ाई करने गया ही नही

लेकिन अब कुछ नही हो सकता था

अगर वँया मुझे नई मामी के साथ देख लेगी

तो वो विदू को बता देगी और मैं विदू को दुखी नही करना चाहता था....
 
अपडेट 127

दिलीप- मैं नई मामी को इग्नोर किया और पहुँचा किताब लेके वँया के रूम में

वँया के साथ पढ़ाई करते हुए शाम हो गयी

मैं किताब साइड में रख दिया

दिलीप- वँया तुमसे एक बात करनी थी

वँया- हाँ बोलो

दिलीप- पहले मेरे रूम में चलो

[वँया बिना कुछ बोले मेरे साथ मेरे रूम में आ गई मैने गेट लॉक कर दिया] वो वो [कैसे कहूँ की बड़े मामा से बात करो]

वँया- क्या वो वो कर रहे हो बोलो ना

दिलीप- तुम पहले वादा करो कि तुम मुझसे नाराज़ नही होगी

वँया- सॉफ सॉफ बोलो डरा क्यूँ रहे हो

दिलीप- तुम बड़े मामा के पास जाके उनसे बात करोगी वँया गुस्सा मत हो ना

वँया- तुम जाओ यहाँ से

दिलीप- वँया शांत हो जाओ

वँया- तुम जाओगे कि नही यहाँ से

दिलीप- वँया बात को समझो

वँया- [रोते हुए] क्या समझू मेरी माँ की जिंदगी के सबसे बड़े दुख का कारण जो इंसान है मैं उसके पास चली जाउ उससे हंस हँसके बाते करू सिर्फ़ इसलिए कि वो मेरे पिता हैं अगर तुम पिताजी को इतना ही चाहते हो तो उनसे पूछो जाके कि कोई उनके दामाद से कहे कि मैं मर रहा हूँ मेरी बेटी से शादी कर लो उनका दामाद दूसरी शादी कर ले तो उनकी बेटी को कितनी तकलीफ़ होगी

दिलीप- मेरी तो समझ में ही नही आया कि वँया क्या बोल रही है लेकिन जब समझा तो वँया पे बहुत गुस्सा आने लगा]

वँया यह क्या बकवास कर रही हो

वँया- तुम क्यूँ गुस्सा हो रहे हो अरे हां मैं तो भूल ही गयी पिताजी के होने वाले दामाद तो तुम ही हो

तुम ऐसा करोगे तो विद्या दी को तकलीफ़ होगी है ना

दिलीप- वँया बस करो

वँया- क्यूँ बस करू विद्या दी को अगर ऐसी तकलीफ़ हो यह सोचके तुम इतना गुस्सा हो रहे हो

मेरी माँ इस तकलीफ़ के साथ जी रही है

तुम जब मेरी माँ को देखते हो तो उनका दुख देख कर तकलीफ़ नही होती

होगी भी कैसे तुम सारे मर्द एक जैसे होते हो कुछ भी कर लो

यही चाहते हो कि औरत हमेशा तुम्हारे साथ तो रहे

लेकिन तुम्हारे अंगूठे के नीचे

दिलीप- वँया

वँया- और सुनो अगर मम्मी ऐसा करती तो तुम्हे पता है पिताजी क्या करते मेरे माँ को जान से मार देते

और मैं फिर भी अपने पिता के साथ रहती

दिलीप- [मैं कभी सोचा नही था कि वँया मुझसे ऐसे बात करेगी

और मुझसे ऐसी ऐसी बाते करेगी

मुझे लग रहा था कि वँया अब कुछ ग़लत ज़रूर बोलेगी

मुझे वँया को रोकना होगा]

वँया चुप रहो

वँया- क्यूँ चुप रहूं

दिलीप- वँया मैं जानता हूँ कि तुम अभी बहुत तकलीफ़ में हो लेकिन तुम अपने आपको सम्भालो

वँया- सम्भालो अपने आपको

अब मैं देखती हूँ कि तुम अपने आपको संभालते कैसे हो

तुम्हे पता है इस दुनिया में सबसे बड़ी चीज़ क्या है माँ

माँ से उपर कोई नही है

अब तुम सोचोगे कि मैं तुमसे वो बात कहूँगी जिससे तुम्हे बहुत ज़्यादा तकलीफ़ होगी

लेकिन मैं तुमसे वो बात कहूँगी

जिसके बाद मैं देखूँगी कि तुम अपने आपको कैसे संभालते हो

पिताजी का एक दोस्त अपनी आखरी साँसे गिन रहा हो

दिलीप- [मैं समझ गया कि वँया क्या बोलने वाली है]

वँया चुप हो जाओ

वँया- वो पिताजी से कहे कि मेरी अंतिम इच्छा पूरी कर दो

दिलीप- [चीख के] वँया

वँया- आप मेरे सामने मेरे बेटे का विवाह अपनी बड़ी बेटी से

दिलीप- वँया प्लीज़

वँया- कर दीजिए

और पिताजी अपने दोस्त की आखरी इच्छा पूरी करने के लिए

विद्या दी की शादी अपने दोस्त के बेटे से कर दे तो

दिलीप- यह सुनते ही मैने अपना आपा खो दिया

और वँया को एक थप्पड़ मार दिया

थप्पड़ लगते ही वँया नीचे गिर गयी

[इतना गुस्सा आ रहा था वँया पे और वँया से ज़्यादा खुदपे मन कर रहा था अपनी जान दे दूँ

तभी मेरा फोन बजने लगा

मन किया कि फोन तोड़ दूं

मैं फोन निकाल लिया

फोन स्क्रीन पे नज़र पड़ते ही मैं अपना गुस्सा कम करने की कोशिश करने लगा

मैं बाथरूम में आ गया

नल चालू कर दिया

फोन उठाया

विदू- कैसे हैं मेरे पतिदेव जी उम्म्म्मम्मूऊऊुुउउन्ह

दिलीप- [विदू की आवाज़ सुनके मुझे समझ नही आया कि मैं क्या बोलूं

उनसे माफी मांगू या फिर जी भरके रोऊँ

विदू- क्या हुआ आप कुछ बोल नही रहे हैं और यह आवाज़ कैसी

दिलीप- बाथरूम में हूँ नल से पानी गिर रहा है

विदू- मैं भी ना मैं थोड़ी देर बाद फोन करती हूँ

दिलीप- विदू फोन कट कर दी

मैं बाथरूम से बाहर आया तो देखा वँया रो रही थी

मैं गेट खोलके बाहर आया

बाहर कोई नही था

मैं फिर अंदर आया

वँया का हाथ पकड़ कर उठाने लगा

वँया नही उठी

कई बार कोशिश किया वँया नही उठी

मुझे और ज़्यादा गुस्सा आने लगा

मैं वँया को ज़बरदस्ती अपनी गोद में उठा लिया

मुझे इस वक़्त इतना गुस्सा आ रहा था

वँया को देख कर मुझे लग रहा था कि मैं वँया के साथ कुछ ग़लत ना कर दूं

वँया नीचे उतरने लगी

मैं जल्दी से चलते हुए वँया के रूम में आ गया

और वँया को बेड पे छोड़ दिया

जब मैं गेट के पास पहुँचा तो पता नही मुझे क्या हुआ

मैं वँया के पास गया

वँया अभी भी रो रही थी

दिलीप- वँया तुम्हे उसकी कसम जिससे तुम सबसे ज़्यादा प्यार करती हो

अगर तुम अपने आपको ज़रा सा भी नुकसान पहुँचाओगी तो वो इंसान जिससे तुम सबसे ज़्यादा प्यार करती हो

वो तड़प तड़प कर मरेगा सुन रही हो ना वो तड़प तड़प कर मरेगा

यह कहके मैं अपने रूम में आ गया

मेरे दिमाग़ में अभी भी यह बात घूम रही थी

कि मैं वँया को ऐसा क्यूँ बोला आख़िर क्यूँ

उपर से यह हरामखोर सर दर्द

वँया पहली बात बोल देती कि मेरे पास माँ नही है मैं बर्दाश्त करलेता

लेकिन वो विदू के लिए ऐसा क्यूँ बोली

आख़िर क्यूँ

और मैं ऐसा क्यूँ बोला वँया को

क्या हो गया है मुझे

कहीं मैं पागल तो नही हो गया हूँ.,.
 
अपडेट 128

दिलीप- मैने विदू को फोन लगाया

विदू- अब बताइए आप कैसे हैं

दिलीप- ठीक हूँ आप कैसी है

विदू- जैसे आप वैसी मैं

दिलीप- खाना खा लिया आपने

विदू- नही अच्छा सुनिए ना क्या आप मेरा एक काम करेंगे

दिलीप- बोलिए

विदू- आप पढ़ाई के अलावा वँया के साथ थोड़ा वक़्त बिताएँगे

दिलीप- मैं कुछ समझा नही

विदू- पिताजी की वजह से जो दुख माँ को पहुँचा है

माँ को देख कर वँया भी दुखी रहती है

इसी लिए कह रही हूँ आप वानु के साथ रहिए उसे हंसाइए उसे खुश रखिए

मैं जानती हूँ कि यह सब मुझे करना चाहिए

मैं उसकी बड़ी बहेन हूँ

दिलीप- अरे तो आप रो क्यूँ रही हैं

और आप हर बात पे रोया मत कीजिए

मुझे बिल्कुल भी अच्छा नही लगता

विदू- आअहाये एक बार और बोलिए ना

दिलीप- और आप हर बात पे रोया मत कीजिए

मुझे बिल्कुल भी अच्छा नही लगता

विदू- एक बार और

दिलीप- अब आप आराम कीजिए

विदू- दिन भर तो रूम में बैठी रहती हूँ

और आप बोलते हैं कि आराम कीजिए

दिलीप- एक दो दिन में तो आप पूरी तरह से ठीक हो जाएँगी

विदू- आपको एक दो दिन कम लगता है

दिलीप- किस दीजिए ना

विदू- नही मिलेगी

दिलीप- उम्मम्मूऊऊुउउन्ह

विदू- उम्मूऊऊुुुुउउन्ह

दिलीप- फिर मैं फोन कट कर दिया

और सोचने लगा कि अब क्या करूँ

विदू कहती है कि वँया को खुश रखो

वँया अब मुझसे बात नही करेगी

मुझे पहले से पता था कि वँया यह सब ज़रूर बोलेगी

लेकिन मैने उसको थप्पड़ क्यूँ मारा

वँया आज तक मेरा इतना ख्याल रक्खी

और मैने उसे थप्पड़ मार दिया

अगर विदू को पता चल गया तो उसे कितना दुख पहुँचेगा

मुझे वँया को मनाना पड़ेगा

रात के खाने का टाइम हो गया

मैं नीचे आ गया

बड़ी नानी- वँया कहाँ है उसे भी बुला ला

दिलीप- आज हम ज़्यादा पढ़ाई कर रहे हैं इसीलिए मैं और वँया वँया के रूम में ही खाना खा लेंगे

आप खाना प्लेट में दे दीजिए

बड़ी मामी- बड़ी माँ आपका बेटा तो बड़ी मेहनत कर रहा है

लगता है इस बार तो फर्स्ट ही आएगा

बड़ी नानी- मेरा बेटा है हर काम पूरा दिल लगाके करता है

दिलीप- मैं दो प्लेट में खाना लेके वँया के रूम में आ गया

गेट लॉक किया

वँया अभी भी रो रही थी

मैं प्लेट टेबल पे रख दिया

और वँया के पास गया

वँया अपना मुँह दूसरी तरफ घुमा ली

मैं वँया के पैरो के पास बैठ गया

और वँया के पैर पकड़ लिया

वँया- दिलीप मेरे पैर छोड़ो

दिलीप- नही छोड़ूँगा पहले तुम खाना खाओ

वँया- दिलीप मेरे पैर छोड़ो मुझे जब भूख लगेगी मैं खाना खा लूँगी

दिलीप- नही जाउन्गी

वँया- क्यूँ मेरे पीछे पड़े रहते हो हमेशा

आख़िर क्या लगती हूँ मैं तुम्हारी

भगवान के लिए मुझे अकेला छोड़ दो

दिलीप- वँया तुम वो पहली लड़की हो जो मेरी जिंदगी में आई

जिसकी वजह से मुझे मेरा प्यार और परिवार दोनो मिला

मैने कभी नही कहा कि बड़े मामा सही हैं प्लीज़ मुझे माफ़ करदो

तुम चाहो तो मुझे मार लो लेकिन मुझे माफ़ करदो

वँया- नही करूँगी तुमने थप्पड़ मारा इसका दुख नही है मुझे

दुख तो इस बात का है की तुम्हे मेरी माँ की तकलीफ़ नही तुम्हे तुम्हारी नई मामी का अकेलापन दिखा

क्या लगता है मुझे नही पता कि तुम रोज एक घंटा अपनी नई मामी के साथ पढ़ाई करते हो

तुम फ़िक़र मत करो मैं तुमसे नाराज़ नही हूँ

लेकिन आज के बाद मुझसे बात मत करना

वरना यह बात विद्या दी को बता दूँगी

यह लो अपने खाने की प्लेट और खाओ

दिलीप- [मैं बिना कुछ कहे खाना खाने लगा

आज वँया मुझे वो वाली वँया नही लग रही थी

यह तो वँया का दूसरा रूप था जिसमें सिर्फ़ गुस्सा भरा हुआ

मैने और वँया ने खाना खा लिया

दिलीप- एक आखरी बात तुमसे कहना चाहता हूँ

तुम्हारी वजह से मुझे सब कुछ मिला

लेकिन मैने अपनी एक नादानी की वजह से तुम्हे खो दिया

मैं अपने रूम में आ गया

[वँया का रूम]

वँया- बेवकूफ़ हमेशा ग़लत ही सोचता है

मैं चाहती हूँ कि तुम मुझसे नफ़रत करो

मुझे मेरा प्यार नही मिल सका लेकिन मेरी बहेन को उसका प्यार ज़रूर मिलेगा

दिलीप हमेशा खुश रहना और अपनी विदू को भी खुश रखना

काश तुम यह कसम नही देते कि मैं अगर अपने आपको नुकसान पहुँचाउंगी तो वो इंसान जिससे मैं प्यार करती हूँ वो तड़प तड़प कर मरेगा

काश मैं पहले ही अपनी जान दे देती

अब तो वो भी नही कर सकूँगी

तुम ही तो हो जिससे मैं सबसे ज़्यादा प्यार करती हूँ बचपन से

तुम्हे देख कर ही ऐसा लगता था कि तुम ही मेरे सपनो के राजकुमार हो

तुम्हे याद है तुम्हारा चौदहवाँ जनमदिन था

उस दिन तुम मुझसे टकराए थे

पहली बार तुमने मुझे छुआ था

पहली बार मेरे राजकुमार ने मुझे छुआ था

हम चाचा जी के घर जा रहे थे

मैने कहा कि मेरा सर्द कर रहा है

तुम मेरा सर अपने कंधे पे रखके मेरा सर दबाने लगे

तुम्हारे साथ बिताए हुए ऐसे कई लम्हो को

मैं पागल तुम्हारा प्यार समझ बैठी

पता है मैं कितना डर गयी थी

जब तुम हॉस्पिटल में विद्या दी को जगाने के लिए अपने सर पे गन लगाए थे

मैं तो उसी वक़्त सोच ली थी कि मैं तुम्हे आइ लव यू बोल दूं लेकिन तभी विद्या दी को होश आ गया

एक और बात मैं तुम्हारी दुल्हन थी तुम्हारी दुल्हन हूँ

और तुम्हारी दुल्हन ही रहूंगी

अब तुम्हारे मैं तड़प तड़प कर जीऊंगी तुम्हारे बिना

तुम्हारी कसम जो पूरी करनी है

आइ लव यू दिलीप आइ लव यू

[वँया दिलीप की तस्वीर अपने सीने से लगाए फुट फुटके रोने लगी उसकी कही हर एक बात उस उपरवाले के सिवा ना कोई सुन पाया और ना ही कोई जान पाया]
 
अपडेट 129

दिलीप- मैं अपने रूम में आके लेट गया

मैं जानता था कि ग़लती मेरी थी

वँया को क्या हो गया आज

मैं अगर बड़ी मामी को बोलता कि आप बड़े मामा से बात करो

तो वो भी नाराज़ हो जाती

लेकिन बाद में मुझसे बात भी करती

कुछ समझ में नही आ रहा था

यह सब सोचते हुए कहाँ से नींद आने वाली थी

उपर से सर में दर्द हो रहा था

और मैं बेहोश भी नही हो रहा था

बेहोश होने से मेरी तकलीफ़ तो कम हो जाती

मैं सोचा बड़ी नानी के पास जाता हूँ

फिर बड़ी नानी परेशान हो जाती

उपर में मेरा और बाकी बहनो का रूम्स था

बड़ी मामी के पास जाता हूँ

शायद मेरी तकलीफ़ कम हो जाए

मैं कपड़े बदलके नीचे आ गया

और बड़ी मामी के रूम की तरफ जाने लगा

तभी किरण मौसी के रूम का गेट खुला

मैं वहाँ पे रुक गया

किरण मौसी- दिलीप इतनी रात को कहाँ जा रहे हो

दिलीप- वो मेरे सर में दर्द हो रहा है इसके आगे मैं कुछ बोल ही नही पाया

किरण मौसी मेरा हाथ पकड़ कर रूम में ले गयी और बेड पे बैठा दी

किरण मौसी- तुम बैठो मैं सर दबा देती हूँ

दिलीप- मासी आप रहने दीजिए

किरण मौसी- अच्छा बताओ अभी तुम कहाँ जा रहे थे

दिलीप- बड़ी मामी के पास

किरण मौसी- सर दर्द है इसलिए ना

दिलीप- हाँ

किरण मौसी- भाभी सो गयी हैं अब लेट जाओ मुझे पता है तुम्हे ज़्यादा तकलीफ़ हो रही है

दिलीप- मैं लेट गया किरण मौसी बाहर चली गयी

थोड़ी देर में किरण मौसी तेल लेके आ गई

मेरा सर अपनी गोद में रखके मेरे सर में तेल लगाके मेरे सर की मालिश करने लगी

थोड़ी देर बाद मैं किरण मौसी की गोद में ही सो गया

सुबह आँख खुली तो किरण मौसी रूम में नही थी

मैं बाहर आया तो बड़ी नानी बड़ी मामी और किरण मौसी किचन में थी

मैं अपने रूम में आके नहाया धोया तय्यार होके नीचे आ गया

वँया डाइनिंग टेबल पे बैठी हुई थी

मैं भी बैठ गया

थोड़ी देर बाद हम सब नाश्ता करने लगे

नाश्ता करके मैं अखाड़े में आ गया

कसरत करके बिम्ला के घर पहुँचा बिम्ला से थोड़ी देर बात किया

फिर शांति की चुदाई करके घर वापस आ गया

उस दिन मैं अपने रूम में ही पढ़ाई करता रहा

दोपहर में नई मामी के साथ 1घंटा पढ़ाई किया

ना तो उस्दिन वँया मुझसे बात की और ना ही मेरे साथ पढ़ाई

दिन ऐसे ही बीत गया

दूसरे दिन भी ऐसा ही हुआ

कुछ अच्छा नही लग रहा था

वँया के बिना मुझे अपने आप पे और ज़्यादा गुस्सा आने लगा

शाम में मैं सोचा विनय से मिल लेता हूँ

बहुत दिन से उससे मिला भी नही हूँ

जब मैं नीचे आने लगा तो किरण मौसी उपर ही मुझे मिल गई

किरण मौसी- दिलीप कल सुबह मेरे साथ मंदिर चलोगे

दिलीप- जी

फिर मैं बड़ी नानी के पास गया

उनको बता दिया कि मैं विनय से मिलने जा रहा हूँ

आने में शायद लेट हो जाउन्गा

मैं विनय के घर पहुँचा

विनय को आवाज़ दिया

आज विनय दौड़ता हुआ बाहर आया

विनय- भैया आप सही टाइम पे आए हो अंदर आओ

दिलीप- तुझसे मिलने आया था अब मैं चलता हूँ

विनय- आप अगर नही आए तो मैं छोटे मालिक कहके बुलाउन्गा

दिलीप- मैं विनय के साथ अंदर आ गया

खाट पे शांति का पति बैठा हुआ था

शांति और विनय की माँ रसोई में थी

विनय- जीजा जी यह हैं मेरे दोस्त और छोटे मालिक

दिलीप- तू नही सुधरेगा

शांति का पति- मैं कुछ समझा नही

विनय- अरे यह ठाकुरजी के भानजे हैं

दिलीप- यह सुनके शांति के पति का मुँह खुला का खुला रह गया

विनय- जीजा जी कहाँ खो गये

शांति का पति- कही नही

विनय- भैया आपको पता है अब मैं भी स्कूल में पढ़ुंगा

जीजाजी कह रहे हैं कि वो मेरा स्कूल में अड्मिशन करवा देंगे

दिलीप- यह तो बहुत खुशी की बात है

शांति का पति- आप खड़े क्यूँ हैं बैठिए ना

दिलीप- नही नही मैं चलता हूँ और तू किस स्कूल में अड्मिशन करवाएगा

विनय- आपके स्कूल में

शांति का पति- मतलब

विनय- इस गाओं में जो स्कूल है वो मेरे भैया का है

दिलीप- बस भी कर वो मेरी बड़ी नानी का स्कूल है

शांति का पति को देखने से ऐसा लग रहा था कि वो एक नंबर के लालची आदमियो में से एक है

फिर मैं घर आ गया

जब मैं घर पहुँचा तो वँया मुझे गुस्से देख कर उपर अपने रूम में चली गयी..,.
 
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