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आखिर, वह दिन आ गया जब भानगढ़ में कबड्डी प्रतियोगिता होना था। जिला स्तर पर यह खेल ठाकुर बालेंद्र सिंह के पुरुखो द्वारा आयोजित किया जाता रहा है,उस परंपरा को ठाकुर बालेंद्र सिंह ने आज भी कायम रखा है।
आज भानगढ़ में लोगो की, खिलाड़ियों की, अधिकारी कर्मचारियों की भीड़ लगी हुई है।
खेल मैदान के आसपास, दुकान सजा huwa है, जिसमे खाने पीने और अन्य सभी प्रकार के चीजे बिकने के लिए सजाया गया है। गांव में जगह जगह प्रवेश द्वार लगाया गया है, पोस्टर बैनर से प्रवेश द्वार को सजाया गया है।
पांच दिवसीय यह खेल आयोजित किया गया है, एक प्रकार से गांव में खेल मेला लगा huwa है।
दूर से आए खिलाड़ियों के लिए ठहरने एवम खाने पीने की व्यवस्था, हवेली द्वारा किया गया है।
जिले में चार ब्लॉक है। लक्ष्मण पुर, धरमपुर, गणेशपुर और अंचलपुर।
प्रत्येक ब्लॉक से 8बेस्ट टीमों के बीच यह प्रतियोगिता होनी है।
पांच दिवसीय इस खेल प्रतियोगिता में पहले दिन 8मैच होने है। पहले दिन धरम पुर और लक्ष्मण पुर के टीमों के बीच मैच होनी है। प्रत्येक टीम को एक मौका ही मिलना है अगर वे मैच हारते है तो सीधे बाहर हो जायेंगे। जितने वाला टीम अगले चरण में पहुंच जायेंगे।
पहले दिन 8मैच होने है, आठ विजई टीम अगले चरण में पहुंचेंगे।
इसी प्रकार दूसरे दिन गणेश पुर और अंचलपुर के टीमों के बीच मैच खेले जाने है। जिसमे 8विजई टीम अगले चरण में पहुंचेंगे।
तीसरे दिन धरम पुर और लक्ष्मण पुर के विजई टीमों का मुकाबला, गणेशपुर और अंचल पुर ब्लॉक के विजई टीमों के बीच होना था जिसमे 8मैच खेलें जायेंगे और इन 8 टीमों के बीच मुकाबला 4थे दिन होने है, चौथे दिन 6मैच होंगे और अंतिम पांचवे दिन फाइनल मैच खेला जाएगा। विजेता बनने के लिए किसी टीम को अपने सभी पांच मैच जीतने होंगे।
जितने वाले टीम को 10लाख रुपए इनाम दिए जायेंगे।
आज पहले दिन खेल का उदघाटन होना है, उदघाटन के लिए राज्य के खेल मंत्री को आमन्त्रित किया गया है। ठाकुर बालेंद्र सिंह इस खेल के अध्यक्ष और आयोजक है।
पहला मैच भानगढ़ और चिता पुर के बीच खेला जाना है।
मैदान के तीन और दर्शक दीर्घा बनाया गया है सामने अतिथियों के लिए मंच सजाया गया है।
मंच पर सभी आमन्त्रित अतिथि पहुंच चुके है।
दर्शक दीर्घा पूरी तरह दर्शकों से खचाखच भर गया है। अतिथियों ने मंच के सामने रखे ठाकुर के पूर्वजों की फोटो पार माल्यार्पण किया, उसके बाद बाहर से आए सभी अतिथियों का स्वागत किया गया। खेल मंत्री और ठाकुर के अभिभाषण के पश्चात उदघाटन मैच शुरू हो गया।
पहला मैच भानगढ़ और चिता पुर के टीम के बीच खेला जाना था। दोनो टीमों के खिलाड़ियों के मैदान में उतरते ही सभी दर्शकों ने तालिया बजाकर उनका स्वागत किया।
दोनो टीमों के खिलाड़ी काफी उत्साहित नजर आ रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे वे कबड्डी नही कुश्ती लड़ने के लिए आए हो।
कबड्डी के लिए स्फूर्ती, चालाकी और ताकत तीनो चीजों का होना जरूरी होता है।
अब देखना यहीं था किस टीम के खिलाड़ियों में ये तीनो गुण मौजूद है।
टूर्नामेंट में भाग लेने वाले सभी टीम के खिलाड़ी भी मैच देखने, दर्शक दीर्घा में बैठे थे ताकि वह मैच देखकर विजेता टीम के खिलाड़ियों के गुण दोष कमजोरी और मजबूती का अवलोकन कर अपनी योजना बना सके।
राजेश भी अपने टीम के खिलाड़ियों के साथ, दर्शक दीर्घा पर मौजूद था।
मैच रेफरी के सिटी बजाते ही भानगढ़ टीम का एक रेडर विरोधी टीम के पाले में कबड्डी कबड्डी बोलते हुवे विरोधी टीम के खिलाड़ियों को छूने उतर पड़ा, चिता पुर के डिफेंडरों ने रेडर को पकड़ने के लिए बहुत कोशिश किया पर उसे पकड़ नही पाया, और रेडर ने एक खिलाड़ी को टैग कर छूकर अपने पाले में वापस आ गया। भानगढ़ टीम को एक अंक प्राप्त हो गया। टैग किए खिलाड़ी मैदान से बाहर हो गया।
उसके बाद चितापुर का रेडर कबड्डी कबड्डी बोलते हुवे, टैग करने,भानगढ़ टीम के पाले में उतरा, चिता पुर के दर्शक चिल्ला चिल्ला कर अपने गांव के खिलाड़ी का हौसला बढ़ा रहे थे तो भानगढ़ के दर्शक अपने टीम के खिलाड़ियों को रेडर को पकड़ने के लिए उन्हे जोश दिला रहे थे। आखिर भानगढ़ के खिलाड़ी, रेडर को पकड़ने में सफल हो गया, वे चारो तरफ से रेडर को पकड़ कर घेर लिया, रेडर उनसे बच कर वापस नहीं आ सका, और भानगढ़ टीम को एक अंक और मिला, इस प्रकार मैच 20मिनट तक चला, पहले हाफ में भानगढ़ के टीम, चिता पुर के टीम पर भारी पड़ा ।
पहले हाफ में भानगढ़ के टीम ने 10अंको की बढ़त बना ली।
उसके बाद 5मिनट का ब्रेक दिया गया इस दौरान, टीमों के मार्गदर्शक अपने अपने टीम के खिलाड़ियों को आवश्यक दिशा निर्देश देने लगे।
5मिनट बाद फिर से खेल प्रारंभ huwa दूसरे हाफ में भी भानगढ़ का टीम अपना जोश और ताकत के दम पर चिता पुर के पूरी टीम को आउट कर दिया और बोनस अंक भी प्राप्त कर लिया। और भानगढ़ के टीम भारी अंको के अंतर से मैच जीत लिया।
चिता पुर के खिलाड़ी, और दर्शक काफी निराश हो गए, क्यू की वे टूर्नामेंट से बाहर हो गए थे। जबकि भानगढ़ के टीम के खिलाड़ियों, और दर्शक काफी उत्साहित थे, अपने टीम के खिलाड़ियों के प्रदर्शन देखकर उन्हे लग रहा था कि इस बार भी टूर्नामेंट का विनर हम ही बनेंगे।
ठाकुर भी अपने गांव के टीम का प्रदर्शन देख कर गर्व महसूस करने लगा।
अगला मैच सुरज पुर और जशपुर के बीच खेला जाना था। राजेश ने अपने टीम के खिलाड़ियों को आवश्यक दिशा निर्देश, दिया।
कुछ ही देर बाद दोनो टीमों के खिलाड़ी मैदान में उतर चुके थे दर्शकों ने अपनी अपनी टीमों के लिए ताली बजाकर उनका स्वागत किया।
सुरज पुर के खिलाड़ियों ने जोर दार खेल का प्रदर्शन किया अपने विरोधी टीम पर हमेशा दबदबा बनाकर रखा, पहले एवम दूसरे हाफ दोनो में विरोधी टीम के मुकाबले भारी अंक हासिल किए और विरोधी टीम को भारी अंको के अंतर से मैच हराया।
सुरज पुर अगले चरण में पहुंच गया तो जशपुर वाले टूर्नामेंट से बाहर हो गए। सुरज पुर वाले काफी उत्साहित नजर आ रहे थे तो ठाकुर को सुरज पुर वालो का यह प्रदर्शन खटकने लगा।
इसके बाद 6और मैच हुवे।
करीब शाम 6बजे प्रथम दिवस खेल के समापन का घोषणा huwa, इसके बाद सभी दर्शक अपने अपने घर के लिए रवाना हो गए, कुछ अपने टीम के जीत से उत्साहित से तो कुछ अपने टीम को टूर्नामेंट से बाहर होने से निराश थे।
जो अतिथि एवम टीम दूर से आए थे उनके ठहरने खाने पीने की व्यवस्था किया गया था, तो वे भानगढ़ में ही रुक गए।
अगले दिन फिर से सुबह 9बजे से खेल प्रारंभ हो गया दूसरे दिन गणेश पुर और अंचलपुर ब्लॉक के टीमों के बीच मुकाबला huwa, जिसमे कुल 8मैच खेलें गए, 8विजई टीम अगले चरण में पहुंचे। और हारने वाले 8टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गए।
तीसरे दिन, धरमपुर _लक्ष्मणपुर के विजई टीमों का मुकाबला अंचल पुर _ गणेश पुर के विजई टीमों के बीच होना था। अधिकारियों ने चिट के माध्यम से कौन सा टीम किस टीम से भिड़ेगा, इसका घोषणा किया।
तीसरे दिन खेल प्रारंभ होने से पहले ही टीमों को पता चल गया की उसकी भिडंत किस टीम से होनी है।
तीसरे दिन पहला मैच भानगढ़ के टीम का मोतीपुर के साथ होना था।
रेफरी के सिटी बजाते ही खेल प्रारंभ huwa, इस बार भानगढ़ वालो को मोतीपुर के टीम ने कड़ा टक्कर दिया। अन्त में भानगढ़ वाले ही जीते लेकिन मोती पुर वाले टीम ने भानगढ़ वाले टीम के खिलाड़ियों की पसीने छुड़ा दिए।
आज का आखिरी मैच, सुरज पुर और भीमपुर के बीच huwa,
सुरज पुर के खिलाड़ियों ने भीम पुर के खिलाड़ियों को आसानी से हरा कर, अगले चरण में पहुंच गया।
राजेश ने अपने टीम के खिलाड़ियों की बड़ी तारीफ किया और अगले चरण में ऐसे ही जोश बनाए रखने के लिए कहा।
इधर ठाकुर बालेंद्र सिंह आज भानगढ़ के टीम के खिलाड़ियों के प्रदर्शन से खुश नहीं थे उसने माखन को बुलाया।
माखन _हुजुर आपने मुझे बुलाया।
ठाकुर _माखन तुम तो कह रहे थे कि हमारी टीम, बहुत मजबूत है।
ये तो दूसरे चरण में ही लड़खड़ा गए थे। मुझे नही लगता ये टीम कल मैच जीत पाएगी।
उधर सुरज पुर वालो का खेल देखकर तो ऐसा लग रहा है की इस बार वो जबरदस्त तैयारी करके आए है।
माखन हमारी टीम को मजबूत बनाओ, मैं नही चाहता की सुरज पुर वाले विजेता बने।
माखन _ठाकुर साहब आप चिन्ता न करें हमारी टीम ही, विजेता बनेगी, कल मैं खुद ही मैदान में उतरूंगा।
ठाकुर _ये ठीक रहेगा, माखन मुझे तुम पर भरोसा है तुम मुझे निराश नहीं करोगे।
तीसरे दिन तीसरे और चौथे चरण का मैच होना था।
तीसरे चरण में 8 टीम पहुंचे थे, कुल चार मैच होने थे इसमें विजई टीम के बीच सेमीफाइनल का मैच खेला जाना था।
अधिकारियों ने चिट ड्रा के माध्यम से यह घोषणा किया की तीसरे चरण में कौन सा टीम किस टीम के साथ भिड़ेगा।
आज भानगढ़ की टीम माखन के आने से काफी उत्साहित और जोश में थे।
तीसरे चरण का पहला मैच भानगढ़ और धावलपुर के बीच होना था।
माखन के मैदान में उतरते ही, दर्शक माखन माखन, चिल्लाने लगे।
रेफरी के सीटी बजते ही खेल प्रारंभ huwa,
धवल पुर का रेडर, भानगढ़ के खिलाड़ियों को टैग करने मैदान में उतरा, वह कबड्डी कबड्डी कहतेहुए खिलाड़ियों को छूने की कोशिश किया।
पर माखन ने उसे दबोच लिया।
वह माखन से स्वयं को छुड़ा नही सका, और अपने पाले में वापस जा नही सका।
उसके बाद माखन स्वयं, विरोधी खिलाड़ियों को टैग करने के लिए मैदान में उतरा, विरोधी टीम के तीन खिलाड़ी उसे पकड़ लिए, लेकिन माखन को अपने पाले में जाने से रोक नही पाए।
तीनो खिलाड़ी मैदान से आउट हो गए।
भानगढ़ वाले माखन माखन, चिल्लाने लगे और तालिया बजाने लगे।
माखन के सामने, धवल पुर के खिलाड़ी टिक नही पाए और अन्त में धवल पुर के टीम बुरी तरह हार गया। भानगढ़ सेमीफाइनल में पहुंच गया।
चौथा मैच सुरज पुर और मानपुर के बीच huwa,
सुरज पुर वालो ने अपने टीम के समर्थन में खुब नारे लगाए।
सुरज पुर और मानपुर के बीच कड़ा मुकाबला huwa और अन्त में सुरज पुर विजई huwa, और सेमीफाइनल में पहुंच गया ।
तीसरे चरण के मैच सम्पन्न होने के बाद, अधिकारियों चौथे चरण के मैच किसके किसके बीच होने है उसका घोषणा किया गया।
1घंटा ब्रेक देने के बाद, सेमीफाइनल मैच का पहला मुकाबला, सुरज पुर और हीरापुर के बीच मैच प्रारंभ huwa, दोनो के बीच कड़ा मुकाबला huwa, और अन्त में बहुत कम अंक के अंतर से सुरज पुर विजई होकर, फाइनल में पहुंच गया।
सेमीफाइनल का दूसरा मैच भानगढ़ और आतंकपुर के बीच huwa,
खिलाड़ियों के मैदान में उतरते ही लोग माखन माखन चिल्लाने लगे। आतंक पुर के खिलाड़ी भी काफी मजबूत न, ताकत वर दिखाई पड़ रहे थे, फिर भी माखन को रोकने में असफल रहे और अन्त में भानगढ़ की टीम ने भारी अंको के अंतर से आतंक पुर के खिलाड़ियों को हरा दिया।
चारो तरफ माखन माखन ही गूंज रहा था। लोग अब कहने लगे थे की इस बार भी भानगढ़ का टीम ही विजेता बनेगी।
इधर सुरज पुर वाले चिंतित नजर आ रहे थे, उन्हे लग रहा था की इस बार भी भानगढ़ वाले ही विजेता बनेंगे।
इधर गांव पहुंचने के बाद सुरज पुर के सभी खिलाड़ी अखाड़े पर एकत्रित हुए ताकि कल की योजना बनाया जा सके।
मोहन _राजेश,कल की मैच हमारे लिए काफी मुस्किल होने वाला है। माखन को पकड़ पाना हम सबके लिए बहुत बड़ी चुनौती है। जब तक वह पकड़ में नहीं आएगा हम मैच जीत नही पाएंगे।
आज के मैच में तो छोटू को भी चोट आया है, उसके पैर में मोच आ गया है। वह ठीक से चल नही पा रहा है।
अब छोटू की जगह आप को ही मैदान में उतरना पड़ेगा। जिससे हमारी टीम के खिलाड़ियों का उत्साह बडेगा।
सभी खिलाड़ियों ने मोहन की बातो का समर्थन किया।
राजेश _अगर आप लोगो को लगता है की मेरे मैदान में उतरने से टीम का हौसला बड़ेगा तो ठीक है कल मैं भी आप लोगो के साथ मैदान में उतरूंगा।
राजेश का फाइनल मैच खेलने की बात, कुछ ही देर में पूरे गांव में फैल गया।
पर गांव वालो का उत्साह नही बड़ा, उन्हे लग रहा था की माखन को शायद ही कोई रोक पायेगा।
इधर जब ठाकुर को पता चला की कल के मैच में राजेश भी खेलेगा।
ठाकुर खुश हो गया,,,
उनके लिए यह एक मौका था, सुरज पुर वालो के साथ साथ राजेश को नीचा दिखाने का।
ठाकुर _मुनीम जी, कल का मैच बड़ा खास है, कल पता चलेगा साले में कितना दम है, बड़ा हीरो बनता फिर रहा है। शाले मेरी बेटी को पाने का ख्वाब देख रहा है?
मुनीम _जी हुजुर, मैच हारते ही शाले की इज्जत सबके सामने उतर जाएगी। उसकी सारी हीरो गिरि उतर जाएगी।
ठाकुर और मुनीम दोनो हसने लगे, हा, हा हा, हा,,,
अगले दिन फाइनल मैच देखने भानगढ़ और सुरज पुर के पूरे गांव वाले अपना काम धाम छोड़कर समय पर पहुंच चुके थे दर्शक दीर्घा में खचाखच भीड़ थी। बैठने के लिए लोगो को जगह नहीं मिल रही थी।
फाइनल मैच देखने के लिए कई अतिथि गण, दूर दूर से आए थे। आज मंच पर ठाकुर का पूरा परिवार मौजूद था।
साथ ही सुरज पुर के सरपंच सविता जी, भी मौजूद थी। जो रत्नवती के बाजू में बैठी थी। रत्नवती भानगढ़ की सरपंच थी तो सविता सुरज पुर की।
आज के मैच में मैन ऑफ द मैच को देने के लिए 2लाख की बाइक भी मंच केसामने रखा गया था।
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दिव्या को जैसे ही पता चला की राजेश भी खेल में उतरने वाला है वह खेल देखने बहुत हो गई। वैसे उसे कबड्डी खेल में कोइ खास रुचि नही थी, पर राजेश के खेल में भाग लेने की बात जानकर उत्साहित हो गई, पर वह सोचने लगी राजेश का जख्म तो पूरी तरह ठीक नहीं huwa है। उसे खेल मे उतरना नही था।
आज अतिथियों के द्वारा, ठाकुर के पुरखो के छाया चित्र पर माल्यार्पण के बाद, अतिथियों का स्वागत किया गया।
उसके बाद खेल प्रारंभ करने की अनुमति दिया गया।
दोनो टीम के खिलाड़ियों के मैदान में उतरते ही लोग अपने अपने खिलाड़ियों के सपर्थन में नारे लगाने लगे।
रेफरी ने सीटी बजाई,
सुरज पुर टीम से सबसे पहले मोहन भानगढ़ टीम के खिलाड़ियों को टैग करने, कबड्डी कबड्डी बोलते हुए, मैदान में उतरा, वह कम से कम एक खिलाड़ी को टैग कर, अपने पाले में लौटना चाहता था,माखन के इशारे पर डिफेंडर्स ने मोहन को घेर लिया, फिर माखन ने मोहन को दबोच लिया।
वह अपने पाले में लौट न सका उसे मैदान से बाहर जाना पड़ा।
मोहन के आउट होने से सुरज पुर को झटका लगा, क्यू की अभी तक जितने भी मैच हुए उसे जितने में मोहन का बड़ा योगदान था।
सुरज के लोग निराश हो गए। तो भानगढ़ वाले उत्साहित,,
इसके बाद भानगढ़ की टीम की ओर से टैग करने के लिए माखन स्वयं आया। लोग माखन माखन चिल्लाने लगे।
माखन कबड्डी कबड्डी बोलते हुवे, विरोधी के पाले में गया, उसने बड़ी फुर्ती दिखाते हुए तीन खिलाड़ियों को टैग करते हुवे, अपने पाले में वापस आ गया।
माखन के समर्थक ताली बजाने लगे।
सुरज पुर के तीन और खिलाड़ी, आउट हो गए।
भानगढ़ की टीम, चार अंक से बढ़त बना लिया।
सुरज पुर टीम के पाले में राजेश सहित सिर्फ तीन खिलाड़ी रह गए थे।
राजेश ने सुरज पुर के एक और खिलाड़ी को विरोधी के पाले में टैग करने के लिए भेजा।
वह खिलाड़ी भी, माखन द्वारा दबोच लिया गया।
सूरजपुर वाली को लगने लगा की, अब मैच जीतना मुस्किल है।
उधर भानगढ़ के कुछ लोग, सुरज पुर वाले को चिढ़ाने लगे।
जब राजेश के कानो तक, कुछ युवाओं की हरकते पहुंची उसे गुस्सा आया।
जैसे ही, भानगढ़ के खिलाड़ी, टैग करने के लिए उसके पाले में आया, वह खिलाड़ी राजेश को टैग करने के लिए अपना हाथ सामने किया।
राजेश ने फुर्ती से उसकी कलाई पकड़ ली।
खिलाड़ी ने अपने को छुड़ाने की कोशिश किया।
राजेश की पकड़ इतनी मजबूत थी की वह छुड़ा न सका, और वह हापने लगा।
भानगढ़ के खिलाड़ी के पकड़ में आते ही, सुरज पुर वालो में जोश आ गया। वे राजेश राजेश चिल्लाने लगे।
सूरजपुर वालो को एक अंक हासिल होने के साथ मोहन मैदान में लौटा।
उसके बाद मोहन फिर टैग करने के लिए, विरोधी टीम के पाले में गया, और माखन से सावधान रहते एक खिलाड़ी को टैग करने में कामयाब रहा।
इस प्रकार एक और अंक हासिल हो गया।
माखन ने अपना एक और खिलाड़ी टैग करने के लिए विरोधी पाले पर भेजा,। खिलाड़ी बिना किसी को टैग किए, अपने मैदान में वापस आ गया।
उसके बाद, टैग करने के लिए राजेश स्वयं कबड्डी कबड्डी कहते हुवे, विरोधी के पाले में गया, माखन से सावधानी बरतते हुवे वह, दो खिलाड़ियों को टैग करते हुए। अपने पाले में सुरक्षित वापस आ गया और दो अंक हासिल किया। इसके साथ ही दोनो टीमों के अंक बराबर हो गए।
सुरज पुर वालो में जोश आ गया, उन्हे लगने लगा की इस बार हम कड़ा टक्कर देने जा रहे हैं। राजेश ने उनके उम्मीद बड़ा दिया।
अगले बार माखन, फिर टैग करने आया , मोहन ने स्फूर्ति से उसपर झपट्टा मारा, एक और खिलाड़ी ने उसका साथ दिया पर माखन को रोक पाने में असमर्थ रहा और अपने पाले में सुरक्षित लौट आया,
भानगढ़ फिर से 2अंको की बढ़त बना लिया।
इस तरह मैच चलता रहा, और पहले हाफ में भानगढ़ वाले 4अंको से आगे रह गए थे। और सुरज पुर के पाले में सिर्फ तीन खिलाड़ी मौजूद थे, जबकि भानगढ़ के पाले में सभी खिलाड़ी।
5मिनट का ब्रेक huwa, सभी खिलाड़ी विचार विमर्श करने लगे आगे क्या करना है।
इधर भानगढ़ के लोग आस्वस्त थे की हमारी टीम ही जीतेगी, तो सुरज पुर वाले भी अपने टीम की हौसला बढ़ाने में लगे थे।
दूसरे हाफ में रेफरी के सीटी बजाते ही, माखन, मैदान में उतरा वह एक खिलाड़ी को टैग कर वापस अपने पाले में आ गया।
सुरज पुर का एक खिलाड़ी और कम हो गया।
अब राजेश और एक अन्य खिलाड़ी ही रह गए थे। अब राजेश खुद टैग करने के लिए मैदान में उतरा, लोग राजेश राजेश चिल्लाने लगे।
राजेश को भानगढ़ के खिलाड़ियों ने पकड़ने की कोशिश की पर पकड़ नही पाए राजेश तीन खिलाड़ियों को टैग कर अपने पाले में वापस आ गया, और सुरज पुर टीम को तीन अंक हासिल huwa, और तीन मोहन के साथ दो अन्य खिलाड़ी भी मैदान में वापस आ गया।
सुरज पुर के लोगो में काफी उत्साह आ गया।
भानगढ़ केवल दो अंक से आगे रह गए थे।
उसके बाद मोहन विरोधी टीम के खेमे में कबड्डी कबड्डी बोलते हुए टैग करने गया। और एक खिलाड़ी को टैग कर वापस अपने मैदान में आ गया।
अब सुरज पुर केवल एक अंक से पीछे रह गया।
माखन, टैग करने के लिए उतरा और उसने दो तीन खिलाड़ियों को टैग करके अपने पाले में आपस आ गया।
मोहन सहित टीम के दो अन्य खिलाड़ी बाहर हो गए।
भानगढ़ 4अंक से आगे हो गया।
माखन आगे योजना बनाया की, कोइ भी राजेश को पकड़ने की कोशिश नही करेगा, उससे बचेगा। ताकि उन्हें अंक हासिल ना हो। और हम जीत सके।
राजेश जब टैग करने गया, तो विरोधी टीम उसे पकड़ने की कोशिश नही किए वे राजेश से बचने लगे।
राजेश को खाली ही जाना पड़ा जिससे समर्थक निराश हो गए।
इधर सुरज पुर के खिलाड़ी एक एक कर आउट होने लगे। सुरज पुर 6अंको से पिछड़ गया।
अब सिर्फ पांच मिनट ही शेष रह गए थे।
इधर सुरज पुर पाले में सिर्फ राजेश शेष रह गया था। जबकि भानगढ़ टीम के पाले में सभी खिलाड़ी।
अब माखन राजेश को टैग करने के लिए, उतरा, उसने ठाकुर की ओर देखा।
ठाकुर ने माखन को इशारा किया की इस बार राजेश को छूकर ही आना।
माखन कबड्डी कबड्डी कहते हुए, राजेश को छूने के लिए आगे बड़ा, इस बार राजेश ने माखन को और अंदर घुसने दिया।
राजेश को छूने के लिए, माखन ने बोनस लाइन तक पहुंच गया।
राजेश ने चीते की तरह माखन पर झपट्टा मारा, और माखन को अपनी भुजा पे दबोच लिया।
माखन ने राजेश की भुजाओं से आज़ाद होने अपनी सारी ताकत झोंक दिया। इधर दर्शक दीर्घा में सन्नाटा छा गया, क्यू की कबड्डी नही कुश्ती शुरू हो गया था।
राजेश ने माखन को अपनी भुजाओं में दबोचे रखा।
माखन राजेश की भुजाओं से छूटने का काफी प्रयास किया लेकिन अपनी सांस को और अधिक देर तक रोके नहीं रख सका, वह हापने लगा।
लोगो को यकीन नहीं हो रहा था की राजेश ने माखन को अकेले ही पटक दिया।
सुरज पुर वाले राजेश राजेश चिल्लाने लगे।
उसके बाद राजेश ने टैग करने के लिए, विरोधी टीम के पाले में कबड्डी कबड्डी बोलते हुए दौड़ पड़ा, और बोनस लाइन को छूकर वापस मुढा तभी सभी खिलाड़ियों ने राजेश को पकड़ लिया।
दो खिलाड़ियों ने राजेश के हाथ, दो ने पैर एक ने गर्दन और एक पीछे से पेट पकड़ रखा था।
राजेश ने कबड्डी कबड्डी बोलते हुए, अपना पूरा ताकत लगाया, और आगे बड़ने लगा, पेट पकड़ने वाले अब राजेश के टी शर्ट को पकड़ लिया, राजेश ने जोर लगाया उसका टी शर्ट फैट गया, एक खिलाड़ी पीछे गिर गया।
राजेश का सक्सपैक लोगो के सामने आ गया, सभी अपनी सांसे थामे मैच देख रहे थे।
गीता और दिव्या भी अपनी सांसे थामी राजेश के इस रूप को देखने लगी।
राजेश ने पूरा ताकत लगाते हुवे, अपनी हाथ को छुड़ाया और जमीन पे नीचे गिर कर अपनी हाथ से लाइन को छू लिया।
रेफरी ने सीटी बनाया। क्यों की राजेश ने क्रास लाइन छू लिया था।
चारो तरफ राजेश राजेश गूंजने लगा।
टाइम कीपर ने सीटी बजाया।
खेल का समय भी पूरा हो चुका था , और सुरज पुर ने 2अंक से भानगढ़ के टीम को हरा दिया।
राजेश को लोगो ने भाग कर अपने कंधे में उठा लिया और राजेश बाबू जिंदा बाद के नारे लगाने लगे।
इधर ठाकुर का मुंह लटक गया।
भानगढ़ के लोगो ने भी राजेश का जमकर तारीफ करने लगे। वे भी उसके फैन बन गए।
रत्नवती ने सविता को बधाई दिया, उसके गांव का टीम जो विजेता बन गया था।
उसके बाद जीतने वाले टीम को इनाम देने के लिए बुलाया गया।
रत्नवती ने अपने हाथो से सुरज पुर के टीम को दस लाख का चैक दिया । और उपविजेता बनी भानगढ़ के टीम को गीता ने 3लाख का चेक दिया।
मैन आफ द मैच का घोषणा। किया गया।
लोग राजेश राजेश चिल्लाने लगे।
ईनाम के लिए राजेश को मंच पर बुलाया गया।
और दिव्या ने राजेश को बाइक की चाबी शौपते हुवे धीरे से कहा, अपनी बाइक पर घुमाने कब ले जा रहे हो मुझे,,,
राजेश ने कहा, जब आप कहे,,
इसके बाद विजेता टीम को आज हवेली में ही रुकना था, क्यू की पुराने नियमो के अनुसार आज विजेता टीम को हवेली में साही भोज दिया जाना था।
शाही भोज में बाहर से आए अतिथि लोग भी मौजूद थे।
ठाकुर किसी आवश्यक काम आ जाने का बहाना बनाकर हवेली से बाहर चला गया।
शाही भोज का नेतृत्व ठकुराइन रत्नवती ने किया।
शाही भोज में खाने पीने, नाचने गाने की व्यवस्था किया गया था।
गांव की सरपंच सविता भी मौजूद थी।
रत्नवती ने राजेश को बेहतरीन प्रदर्शन के लिए बधाई दिया। राजेश ने उसका पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
गीता , राजेश के इस प्रदर्शन से आश्चर्य में थी, उसका सिक्स पैक लुक अभी भी उसकी आंखो के सामने आ जा रही थी।
वह राजेश को मैच विनर बनने के लिए बधाई दिया।
गीता _राजेश, तुम तो छुपे रुस्तम निकले। बधाई हो मैच विनर बनने के लिए।
राजेश _थैंक यू दीदी।
गीता _वैसे बहुत अच्छी बॉडी बना रखी है तुमने।
राजेश _आज, तो इसी का चलन है दीदी,,,
गीता _हा वो तो है, मुस्कुराते हुवे बोली,,
दिव्या _सुरज पुर वालो के लिए आज बढ़ी खुशी का दिन है।
आज राजेश इस मौके पर हमे गीत सुनाएगा।
वहा सभी मौजूद लोगो ने, राजेश को गीत के लिए दबाव बनाया।
राजेश _ठीक है पर एक शर्त पर गीता दीदी और दिव्या जी आप दोनो को भी मेरा साथ देना होगा।
सभी के रिक्वेस्ट करने पर दोनो तैयार हो गई।
फिर गीता, दिव्या और राजेश तीनो ने जबरदस्त परफॉर्मेंस दिया।
रत्नादेवी और सविता साथ ही थी।
रत्ना देवी गीता को बहुत दिनो बाद खुश देख रही थी। उसे नाचते देख आश्चर्य करने लगी।
इधर माखन, को अभी भी यकीन नही हो रहा था की राजेश से वह हार गया। आज तक वह इस क्षेत्र का सबसे ताकत वर पुरुष माना जाता था लेकिन आज राजेश ने उसका क्रेज खत्म कर दिया था। वह काफी गुस्से में था। उसने गुस्से में अपने ही साथी जो राजेश का तारीफ कर रहा था को मार डाला।
और राजेश से बदले की आग में जलने लगा।
आज भानगढ़ में लोगो की, खिलाड़ियों की, अधिकारी कर्मचारियों की भीड़ लगी हुई है।
खेल मैदान के आसपास, दुकान सजा huwa है, जिसमे खाने पीने और अन्य सभी प्रकार के चीजे बिकने के लिए सजाया गया है। गांव में जगह जगह प्रवेश द्वार लगाया गया है, पोस्टर बैनर से प्रवेश द्वार को सजाया गया है।
पांच दिवसीय यह खेल आयोजित किया गया है, एक प्रकार से गांव में खेल मेला लगा huwa है।
दूर से आए खिलाड़ियों के लिए ठहरने एवम खाने पीने की व्यवस्था, हवेली द्वारा किया गया है।
जिले में चार ब्लॉक है। लक्ष्मण पुर, धरमपुर, गणेशपुर और अंचलपुर।
प्रत्येक ब्लॉक से 8बेस्ट टीमों के बीच यह प्रतियोगिता होनी है।
पांच दिवसीय इस खेल प्रतियोगिता में पहले दिन 8मैच होने है। पहले दिन धरम पुर और लक्ष्मण पुर के टीमों के बीच मैच होनी है। प्रत्येक टीम को एक मौका ही मिलना है अगर वे मैच हारते है तो सीधे बाहर हो जायेंगे। जितने वाला टीम अगले चरण में पहुंच जायेंगे।
पहले दिन 8मैच होने है, आठ विजई टीम अगले चरण में पहुंचेंगे।
इसी प्रकार दूसरे दिन गणेश पुर और अंचलपुर के टीमों के बीच मैच खेले जाने है। जिसमे 8विजई टीम अगले चरण में पहुंचेंगे।
तीसरे दिन धरम पुर और लक्ष्मण पुर के विजई टीमों का मुकाबला, गणेशपुर और अंचल पुर ब्लॉक के विजई टीमों के बीच होना था जिसमे 8मैच खेलें जायेंगे और इन 8 टीमों के बीच मुकाबला 4थे दिन होने है, चौथे दिन 6मैच होंगे और अंतिम पांचवे दिन फाइनल मैच खेला जाएगा। विजेता बनने के लिए किसी टीम को अपने सभी पांच मैच जीतने होंगे।
जितने वाले टीम को 10लाख रुपए इनाम दिए जायेंगे।
आज पहले दिन खेल का उदघाटन होना है, उदघाटन के लिए राज्य के खेल मंत्री को आमन्त्रित किया गया है। ठाकुर बालेंद्र सिंह इस खेल के अध्यक्ष और आयोजक है।
पहला मैच भानगढ़ और चिता पुर के बीच खेला जाना है।
मैदान के तीन और दर्शक दीर्घा बनाया गया है सामने अतिथियों के लिए मंच सजाया गया है।
मंच पर सभी आमन्त्रित अतिथि पहुंच चुके है।
दर्शक दीर्घा पूरी तरह दर्शकों से खचाखच भर गया है। अतिथियों ने मंच के सामने रखे ठाकुर के पूर्वजों की फोटो पार माल्यार्पण किया, उसके बाद बाहर से आए सभी अतिथियों का स्वागत किया गया। खेल मंत्री और ठाकुर के अभिभाषण के पश्चात उदघाटन मैच शुरू हो गया।
पहला मैच भानगढ़ और चिता पुर के टीम के बीच खेला जाना था। दोनो टीमों के खिलाड़ियों के मैदान में उतरते ही सभी दर्शकों ने तालिया बजाकर उनका स्वागत किया।
दोनो टीमों के खिलाड़ी काफी उत्साहित नजर आ रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे वे कबड्डी नही कुश्ती लड़ने के लिए आए हो।
कबड्डी के लिए स्फूर्ती, चालाकी और ताकत तीनो चीजों का होना जरूरी होता है।
अब देखना यहीं था किस टीम के खिलाड़ियों में ये तीनो गुण मौजूद है।
टूर्नामेंट में भाग लेने वाले सभी टीम के खिलाड़ी भी मैच देखने, दर्शक दीर्घा में बैठे थे ताकि वह मैच देखकर विजेता टीम के खिलाड़ियों के गुण दोष कमजोरी और मजबूती का अवलोकन कर अपनी योजना बना सके।
राजेश भी अपने टीम के खिलाड़ियों के साथ, दर्शक दीर्घा पर मौजूद था।
मैच रेफरी के सिटी बजाते ही भानगढ़ टीम का एक रेडर विरोधी टीम के पाले में कबड्डी कबड्डी बोलते हुवे विरोधी टीम के खिलाड़ियों को छूने उतर पड़ा, चिता पुर के डिफेंडरों ने रेडर को पकड़ने के लिए बहुत कोशिश किया पर उसे पकड़ नही पाया, और रेडर ने एक खिलाड़ी को टैग कर छूकर अपने पाले में वापस आ गया। भानगढ़ टीम को एक अंक प्राप्त हो गया। टैग किए खिलाड़ी मैदान से बाहर हो गया।
उसके बाद चितापुर का रेडर कबड्डी कबड्डी बोलते हुवे, टैग करने,भानगढ़ टीम के पाले में उतरा, चिता पुर के दर्शक चिल्ला चिल्ला कर अपने गांव के खिलाड़ी का हौसला बढ़ा रहे थे तो भानगढ़ के दर्शक अपने टीम के खिलाड़ियों को रेडर को पकड़ने के लिए उन्हे जोश दिला रहे थे। आखिर भानगढ़ के खिलाड़ी, रेडर को पकड़ने में सफल हो गया, वे चारो तरफ से रेडर को पकड़ कर घेर लिया, रेडर उनसे बच कर वापस नहीं आ सका, और भानगढ़ टीम को एक अंक और मिला, इस प्रकार मैच 20मिनट तक चला, पहले हाफ में भानगढ़ के टीम, चिता पुर के टीम पर भारी पड़ा ।
पहले हाफ में भानगढ़ के टीम ने 10अंको की बढ़त बना ली।
उसके बाद 5मिनट का ब्रेक दिया गया इस दौरान, टीमों के मार्गदर्शक अपने अपने टीम के खिलाड़ियों को आवश्यक दिशा निर्देश देने लगे।
5मिनट बाद फिर से खेल प्रारंभ huwa दूसरे हाफ में भी भानगढ़ का टीम अपना जोश और ताकत के दम पर चिता पुर के पूरी टीम को आउट कर दिया और बोनस अंक भी प्राप्त कर लिया। और भानगढ़ के टीम भारी अंको के अंतर से मैच जीत लिया।
चिता पुर के खिलाड़ी, और दर्शक काफी निराश हो गए, क्यू की वे टूर्नामेंट से बाहर हो गए थे। जबकि भानगढ़ के टीम के खिलाड़ियों, और दर्शक काफी उत्साहित थे, अपने टीम के खिलाड़ियों के प्रदर्शन देखकर उन्हे लग रहा था कि इस बार भी टूर्नामेंट का विनर हम ही बनेंगे।
ठाकुर भी अपने गांव के टीम का प्रदर्शन देख कर गर्व महसूस करने लगा।
अगला मैच सुरज पुर और जशपुर के बीच खेला जाना था। राजेश ने अपने टीम के खिलाड़ियों को आवश्यक दिशा निर्देश, दिया।
कुछ ही देर बाद दोनो टीमों के खिलाड़ी मैदान में उतर चुके थे दर्शकों ने अपनी अपनी टीमों के लिए ताली बजाकर उनका स्वागत किया।
सुरज पुर के खिलाड़ियों ने जोर दार खेल का प्रदर्शन किया अपने विरोधी टीम पर हमेशा दबदबा बनाकर रखा, पहले एवम दूसरे हाफ दोनो में विरोधी टीम के मुकाबले भारी अंक हासिल किए और विरोधी टीम को भारी अंको के अंतर से मैच हराया।
सुरज पुर अगले चरण में पहुंच गया तो जशपुर वाले टूर्नामेंट से बाहर हो गए। सुरज पुर वाले काफी उत्साहित नजर आ रहे थे तो ठाकुर को सुरज पुर वालो का यह प्रदर्शन खटकने लगा।
इसके बाद 6और मैच हुवे।
करीब शाम 6बजे प्रथम दिवस खेल के समापन का घोषणा huwa, इसके बाद सभी दर्शक अपने अपने घर के लिए रवाना हो गए, कुछ अपने टीम के जीत से उत्साहित से तो कुछ अपने टीम को टूर्नामेंट से बाहर होने से निराश थे।
जो अतिथि एवम टीम दूर से आए थे उनके ठहरने खाने पीने की व्यवस्था किया गया था, तो वे भानगढ़ में ही रुक गए।
अगले दिन फिर से सुबह 9बजे से खेल प्रारंभ हो गया दूसरे दिन गणेश पुर और अंचलपुर ब्लॉक के टीमों के बीच मुकाबला huwa, जिसमे कुल 8मैच खेलें गए, 8विजई टीम अगले चरण में पहुंचे। और हारने वाले 8टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गए।
तीसरे दिन, धरमपुर _लक्ष्मणपुर के विजई टीमों का मुकाबला अंचल पुर _ गणेश पुर के विजई टीमों के बीच होना था। अधिकारियों ने चिट के माध्यम से कौन सा टीम किस टीम से भिड़ेगा, इसका घोषणा किया।
तीसरे दिन खेल प्रारंभ होने से पहले ही टीमों को पता चल गया की उसकी भिडंत किस टीम से होनी है।
तीसरे दिन पहला मैच भानगढ़ के टीम का मोतीपुर के साथ होना था।
रेफरी के सिटी बजाते ही खेल प्रारंभ huwa, इस बार भानगढ़ वालो को मोतीपुर के टीम ने कड़ा टक्कर दिया। अन्त में भानगढ़ वाले ही जीते लेकिन मोती पुर वाले टीम ने भानगढ़ वाले टीम के खिलाड़ियों की पसीने छुड़ा दिए।
आज का आखिरी मैच, सुरज पुर और भीमपुर के बीच huwa,
सुरज पुर के खिलाड़ियों ने भीम पुर के खिलाड़ियों को आसानी से हरा कर, अगले चरण में पहुंच गया।
राजेश ने अपने टीम के खिलाड़ियों की बड़ी तारीफ किया और अगले चरण में ऐसे ही जोश बनाए रखने के लिए कहा।
इधर ठाकुर बालेंद्र सिंह आज भानगढ़ के टीम के खिलाड़ियों के प्रदर्शन से खुश नहीं थे उसने माखन को बुलाया।
माखन _हुजुर आपने मुझे बुलाया।
ठाकुर _माखन तुम तो कह रहे थे कि हमारी टीम, बहुत मजबूत है।
ये तो दूसरे चरण में ही लड़खड़ा गए थे। मुझे नही लगता ये टीम कल मैच जीत पाएगी।
उधर सुरज पुर वालो का खेल देखकर तो ऐसा लग रहा है की इस बार वो जबरदस्त तैयारी करके आए है।
माखन हमारी टीम को मजबूत बनाओ, मैं नही चाहता की सुरज पुर वाले विजेता बने।
माखन _ठाकुर साहब आप चिन्ता न करें हमारी टीम ही, विजेता बनेगी, कल मैं खुद ही मैदान में उतरूंगा।
ठाकुर _ये ठीक रहेगा, माखन मुझे तुम पर भरोसा है तुम मुझे निराश नहीं करोगे।
तीसरे दिन तीसरे और चौथे चरण का मैच होना था।
तीसरे चरण में 8 टीम पहुंचे थे, कुल चार मैच होने थे इसमें विजई टीम के बीच सेमीफाइनल का मैच खेला जाना था।
अधिकारियों ने चिट ड्रा के माध्यम से यह घोषणा किया की तीसरे चरण में कौन सा टीम किस टीम के साथ भिड़ेगा।
आज भानगढ़ की टीम माखन के आने से काफी उत्साहित और जोश में थे।
तीसरे चरण का पहला मैच भानगढ़ और धावलपुर के बीच होना था।
माखन के मैदान में उतरते ही, दर्शक माखन माखन, चिल्लाने लगे।
रेफरी के सीटी बजते ही खेल प्रारंभ huwa,
धवल पुर का रेडर, भानगढ़ के खिलाड़ियों को टैग करने मैदान में उतरा, वह कबड्डी कबड्डी कहतेहुए खिलाड़ियों को छूने की कोशिश किया।
पर माखन ने उसे दबोच लिया।
वह माखन से स्वयं को छुड़ा नही सका, और अपने पाले में वापस जा नही सका।
उसके बाद माखन स्वयं, विरोधी खिलाड़ियों को टैग करने के लिए मैदान में उतरा, विरोधी टीम के तीन खिलाड़ी उसे पकड़ लिए, लेकिन माखन को अपने पाले में जाने से रोक नही पाए।
तीनो खिलाड़ी मैदान से आउट हो गए।
भानगढ़ वाले माखन माखन, चिल्लाने लगे और तालिया बजाने लगे।
माखन के सामने, धवल पुर के खिलाड़ी टिक नही पाए और अन्त में धवल पुर के टीम बुरी तरह हार गया। भानगढ़ सेमीफाइनल में पहुंच गया।
चौथा मैच सुरज पुर और मानपुर के बीच huwa,
सुरज पुर वालो ने अपने टीम के समर्थन में खुब नारे लगाए।
सुरज पुर और मानपुर के बीच कड़ा मुकाबला huwa और अन्त में सुरज पुर विजई huwa, और सेमीफाइनल में पहुंच गया ।
तीसरे चरण के मैच सम्पन्न होने के बाद, अधिकारियों चौथे चरण के मैच किसके किसके बीच होने है उसका घोषणा किया गया।
1घंटा ब्रेक देने के बाद, सेमीफाइनल मैच का पहला मुकाबला, सुरज पुर और हीरापुर के बीच मैच प्रारंभ huwa, दोनो के बीच कड़ा मुकाबला huwa, और अन्त में बहुत कम अंक के अंतर से सुरज पुर विजई होकर, फाइनल में पहुंच गया।
सेमीफाइनल का दूसरा मैच भानगढ़ और आतंकपुर के बीच huwa,
खिलाड़ियों के मैदान में उतरते ही लोग माखन माखन चिल्लाने लगे। आतंक पुर के खिलाड़ी भी काफी मजबूत न, ताकत वर दिखाई पड़ रहे थे, फिर भी माखन को रोकने में असफल रहे और अन्त में भानगढ़ की टीम ने भारी अंको के अंतर से आतंक पुर के खिलाड़ियों को हरा दिया।
चारो तरफ माखन माखन ही गूंज रहा था। लोग अब कहने लगे थे की इस बार भी भानगढ़ का टीम ही विजेता बनेगी।
इधर सुरज पुर वाले चिंतित नजर आ रहे थे, उन्हे लग रहा था की इस बार भी भानगढ़ वाले ही विजेता बनेंगे।
इधर गांव पहुंचने के बाद सुरज पुर के सभी खिलाड़ी अखाड़े पर एकत्रित हुए ताकि कल की योजना बनाया जा सके।
मोहन _राजेश,कल की मैच हमारे लिए काफी मुस्किल होने वाला है। माखन को पकड़ पाना हम सबके लिए बहुत बड़ी चुनौती है। जब तक वह पकड़ में नहीं आएगा हम मैच जीत नही पाएंगे।
आज के मैच में तो छोटू को भी चोट आया है, उसके पैर में मोच आ गया है। वह ठीक से चल नही पा रहा है।
अब छोटू की जगह आप को ही मैदान में उतरना पड़ेगा। जिससे हमारी टीम के खिलाड़ियों का उत्साह बडेगा।
सभी खिलाड़ियों ने मोहन की बातो का समर्थन किया।
राजेश _अगर आप लोगो को लगता है की मेरे मैदान में उतरने से टीम का हौसला बड़ेगा तो ठीक है कल मैं भी आप लोगो के साथ मैदान में उतरूंगा।
राजेश का फाइनल मैच खेलने की बात, कुछ ही देर में पूरे गांव में फैल गया।
पर गांव वालो का उत्साह नही बड़ा, उन्हे लग रहा था की माखन को शायद ही कोई रोक पायेगा।
इधर जब ठाकुर को पता चला की कल के मैच में राजेश भी खेलेगा।
ठाकुर खुश हो गया,,,
उनके लिए यह एक मौका था, सुरज पुर वालो के साथ साथ राजेश को नीचा दिखाने का।
ठाकुर _मुनीम जी, कल का मैच बड़ा खास है, कल पता चलेगा साले में कितना दम है, बड़ा हीरो बनता फिर रहा है। शाले मेरी बेटी को पाने का ख्वाब देख रहा है?
मुनीम _जी हुजुर, मैच हारते ही शाले की इज्जत सबके सामने उतर जाएगी। उसकी सारी हीरो गिरि उतर जाएगी।
ठाकुर और मुनीम दोनो हसने लगे, हा, हा हा, हा,,,
अगले दिन फाइनल मैच देखने भानगढ़ और सुरज पुर के पूरे गांव वाले अपना काम धाम छोड़कर समय पर पहुंच चुके थे दर्शक दीर्घा में खचाखच भीड़ थी। बैठने के लिए लोगो को जगह नहीं मिल रही थी।
फाइनल मैच देखने के लिए कई अतिथि गण, दूर दूर से आए थे। आज मंच पर ठाकुर का पूरा परिवार मौजूद था।
साथ ही सुरज पुर के सरपंच सविता जी, भी मौजूद थी। जो रत्नवती के बाजू में बैठी थी। रत्नवती भानगढ़ की सरपंच थी तो सविता सुरज पुर की।
आज के मैच में मैन ऑफ द मैच को देने के लिए 2लाख की बाइक भी मंच केसामने रखा गया था।
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दिव्या को जैसे ही पता चला की राजेश भी खेल में उतरने वाला है वह खेल देखने बहुत हो गई। वैसे उसे कबड्डी खेल में कोइ खास रुचि नही थी, पर राजेश के खेल में भाग लेने की बात जानकर उत्साहित हो गई, पर वह सोचने लगी राजेश का जख्म तो पूरी तरह ठीक नहीं huwa है। उसे खेल मे उतरना नही था।
आज अतिथियों के द्वारा, ठाकुर के पुरखो के छाया चित्र पर माल्यार्पण के बाद, अतिथियों का स्वागत किया गया।
उसके बाद खेल प्रारंभ करने की अनुमति दिया गया।
दोनो टीम के खिलाड़ियों के मैदान में उतरते ही लोग अपने अपने खिलाड़ियों के सपर्थन में नारे लगाने लगे।
रेफरी ने सीटी बजाई,
सुरज पुर टीम से सबसे पहले मोहन भानगढ़ टीम के खिलाड़ियों को टैग करने, कबड्डी कबड्डी बोलते हुए, मैदान में उतरा, वह कम से कम एक खिलाड़ी को टैग कर, अपने पाले में लौटना चाहता था,माखन के इशारे पर डिफेंडर्स ने मोहन को घेर लिया, फिर माखन ने मोहन को दबोच लिया।
वह अपने पाले में लौट न सका उसे मैदान से बाहर जाना पड़ा।
मोहन के आउट होने से सुरज पुर को झटका लगा, क्यू की अभी तक जितने भी मैच हुए उसे जितने में मोहन का बड़ा योगदान था।
सुरज के लोग निराश हो गए। तो भानगढ़ वाले उत्साहित,,
इसके बाद भानगढ़ की टीम की ओर से टैग करने के लिए माखन स्वयं आया। लोग माखन माखन चिल्लाने लगे।
माखन कबड्डी कबड्डी बोलते हुवे, विरोधी के पाले में गया, उसने बड़ी फुर्ती दिखाते हुए तीन खिलाड़ियों को टैग करते हुवे, अपने पाले में वापस आ गया।
माखन के समर्थक ताली बजाने लगे।
सुरज पुर के तीन और खिलाड़ी, आउट हो गए।
भानगढ़ की टीम, चार अंक से बढ़त बना लिया।
सुरज पुर टीम के पाले में राजेश सहित सिर्फ तीन खिलाड़ी रह गए थे।
राजेश ने सुरज पुर के एक और खिलाड़ी को विरोधी के पाले में टैग करने के लिए भेजा।
वह खिलाड़ी भी, माखन द्वारा दबोच लिया गया।
सूरजपुर वाली को लगने लगा की, अब मैच जीतना मुस्किल है।
उधर भानगढ़ के कुछ लोग, सुरज पुर वाले को चिढ़ाने लगे।
जब राजेश के कानो तक, कुछ युवाओं की हरकते पहुंची उसे गुस्सा आया।
जैसे ही, भानगढ़ के खिलाड़ी, टैग करने के लिए उसके पाले में आया, वह खिलाड़ी राजेश को टैग करने के लिए अपना हाथ सामने किया।
राजेश ने फुर्ती से उसकी कलाई पकड़ ली।
खिलाड़ी ने अपने को छुड़ाने की कोशिश किया।
राजेश की पकड़ इतनी मजबूत थी की वह छुड़ा न सका, और वह हापने लगा।
भानगढ़ के खिलाड़ी के पकड़ में आते ही, सुरज पुर वालो में जोश आ गया। वे राजेश राजेश चिल्लाने लगे।
सूरजपुर वालो को एक अंक हासिल होने के साथ मोहन मैदान में लौटा।
उसके बाद मोहन फिर टैग करने के लिए, विरोधी टीम के पाले में गया, और माखन से सावधान रहते एक खिलाड़ी को टैग करने में कामयाब रहा।
इस प्रकार एक और अंक हासिल हो गया।
माखन ने अपना एक और खिलाड़ी टैग करने के लिए विरोधी पाले पर भेजा,। खिलाड़ी बिना किसी को टैग किए, अपने मैदान में वापस आ गया।
उसके बाद, टैग करने के लिए राजेश स्वयं कबड्डी कबड्डी कहते हुवे, विरोधी के पाले में गया, माखन से सावधानी बरतते हुवे वह, दो खिलाड़ियों को टैग करते हुए। अपने पाले में सुरक्षित वापस आ गया और दो अंक हासिल किया। इसके साथ ही दोनो टीमों के अंक बराबर हो गए।
सुरज पुर वालो में जोश आ गया, उन्हे लगने लगा की इस बार हम कड़ा टक्कर देने जा रहे हैं। राजेश ने उनके उम्मीद बड़ा दिया।
अगले बार माखन, फिर टैग करने आया , मोहन ने स्फूर्ति से उसपर झपट्टा मारा, एक और खिलाड़ी ने उसका साथ दिया पर माखन को रोक पाने में असमर्थ रहा और अपने पाले में सुरक्षित लौट आया,
भानगढ़ फिर से 2अंको की बढ़त बना लिया।
इस तरह मैच चलता रहा, और पहले हाफ में भानगढ़ वाले 4अंको से आगे रह गए थे। और सुरज पुर के पाले में सिर्फ तीन खिलाड़ी मौजूद थे, जबकि भानगढ़ के पाले में सभी खिलाड़ी।
5मिनट का ब्रेक huwa, सभी खिलाड़ी विचार विमर्श करने लगे आगे क्या करना है।
इधर भानगढ़ के लोग आस्वस्त थे की हमारी टीम ही जीतेगी, तो सुरज पुर वाले भी अपने टीम की हौसला बढ़ाने में लगे थे।
दूसरे हाफ में रेफरी के सीटी बजाते ही, माखन, मैदान में उतरा वह एक खिलाड़ी को टैग कर वापस अपने पाले में आ गया।
सुरज पुर का एक खिलाड़ी और कम हो गया।
अब राजेश और एक अन्य खिलाड़ी ही रह गए थे। अब राजेश खुद टैग करने के लिए मैदान में उतरा, लोग राजेश राजेश चिल्लाने लगे।
राजेश को भानगढ़ के खिलाड़ियों ने पकड़ने की कोशिश की पर पकड़ नही पाए राजेश तीन खिलाड़ियों को टैग कर अपने पाले में वापस आ गया, और सुरज पुर टीम को तीन अंक हासिल huwa, और तीन मोहन के साथ दो अन्य खिलाड़ी भी मैदान में वापस आ गया।
सुरज पुर के लोगो में काफी उत्साह आ गया।
भानगढ़ केवल दो अंक से आगे रह गए थे।
उसके बाद मोहन विरोधी टीम के खेमे में कबड्डी कबड्डी बोलते हुए टैग करने गया। और एक खिलाड़ी को टैग कर वापस अपने मैदान में आ गया।
अब सुरज पुर केवल एक अंक से पीछे रह गया।
माखन, टैग करने के लिए उतरा और उसने दो तीन खिलाड़ियों को टैग करके अपने पाले में आपस आ गया।
मोहन सहित टीम के दो अन्य खिलाड़ी बाहर हो गए।
भानगढ़ 4अंक से आगे हो गया।
माखन आगे योजना बनाया की, कोइ भी राजेश को पकड़ने की कोशिश नही करेगा, उससे बचेगा। ताकि उन्हें अंक हासिल ना हो। और हम जीत सके।
राजेश जब टैग करने गया, तो विरोधी टीम उसे पकड़ने की कोशिश नही किए वे राजेश से बचने लगे।
राजेश को खाली ही जाना पड़ा जिससे समर्थक निराश हो गए।
इधर सुरज पुर के खिलाड़ी एक एक कर आउट होने लगे। सुरज पुर 6अंको से पिछड़ गया।
अब सिर्फ पांच मिनट ही शेष रह गए थे।
इधर सुरज पुर पाले में सिर्फ राजेश शेष रह गया था। जबकि भानगढ़ टीम के पाले में सभी खिलाड़ी।
अब माखन राजेश को टैग करने के लिए, उतरा, उसने ठाकुर की ओर देखा।
ठाकुर ने माखन को इशारा किया की इस बार राजेश को छूकर ही आना।
माखन कबड्डी कबड्डी कहते हुए, राजेश को छूने के लिए आगे बड़ा, इस बार राजेश ने माखन को और अंदर घुसने दिया।
राजेश को छूने के लिए, माखन ने बोनस लाइन तक पहुंच गया।
राजेश ने चीते की तरह माखन पर झपट्टा मारा, और माखन को अपनी भुजा पे दबोच लिया।
माखन ने राजेश की भुजाओं से आज़ाद होने अपनी सारी ताकत झोंक दिया। इधर दर्शक दीर्घा में सन्नाटा छा गया, क्यू की कबड्डी नही कुश्ती शुरू हो गया था।
राजेश ने माखन को अपनी भुजाओं में दबोचे रखा।
माखन राजेश की भुजाओं से छूटने का काफी प्रयास किया लेकिन अपनी सांस को और अधिक देर तक रोके नहीं रख सका, वह हापने लगा।
लोगो को यकीन नहीं हो रहा था की राजेश ने माखन को अकेले ही पटक दिया।
सुरज पुर वाले राजेश राजेश चिल्लाने लगे।
उसके बाद राजेश ने टैग करने के लिए, विरोधी टीम के पाले में कबड्डी कबड्डी बोलते हुए दौड़ पड़ा, और बोनस लाइन को छूकर वापस मुढा तभी सभी खिलाड़ियों ने राजेश को पकड़ लिया।
दो खिलाड़ियों ने राजेश के हाथ, दो ने पैर एक ने गर्दन और एक पीछे से पेट पकड़ रखा था।
राजेश ने कबड्डी कबड्डी बोलते हुए, अपना पूरा ताकत लगाया, और आगे बड़ने लगा, पेट पकड़ने वाले अब राजेश के टी शर्ट को पकड़ लिया, राजेश ने जोर लगाया उसका टी शर्ट फैट गया, एक खिलाड़ी पीछे गिर गया।
राजेश का सक्सपैक लोगो के सामने आ गया, सभी अपनी सांसे थामे मैच देख रहे थे।
गीता और दिव्या भी अपनी सांसे थामी राजेश के इस रूप को देखने लगी।
राजेश ने पूरा ताकत लगाते हुवे, अपनी हाथ को छुड़ाया और जमीन पे नीचे गिर कर अपनी हाथ से लाइन को छू लिया।
रेफरी ने सीटी बनाया। क्यों की राजेश ने क्रास लाइन छू लिया था।
चारो तरफ राजेश राजेश गूंजने लगा।
टाइम कीपर ने सीटी बजाया।
खेल का समय भी पूरा हो चुका था , और सुरज पुर ने 2अंक से भानगढ़ के टीम को हरा दिया।
राजेश को लोगो ने भाग कर अपने कंधे में उठा लिया और राजेश बाबू जिंदा बाद के नारे लगाने लगे।
इधर ठाकुर का मुंह लटक गया।
भानगढ़ के लोगो ने भी राजेश का जमकर तारीफ करने लगे। वे भी उसके फैन बन गए।
रत्नवती ने सविता को बधाई दिया, उसके गांव का टीम जो विजेता बन गया था।
उसके बाद जीतने वाले टीम को इनाम देने के लिए बुलाया गया।
रत्नवती ने अपने हाथो से सुरज पुर के टीम को दस लाख का चैक दिया । और उपविजेता बनी भानगढ़ के टीम को गीता ने 3लाख का चेक दिया।
मैन आफ द मैच का घोषणा। किया गया।
लोग राजेश राजेश चिल्लाने लगे।
ईनाम के लिए राजेश को मंच पर बुलाया गया।
और दिव्या ने राजेश को बाइक की चाबी शौपते हुवे धीरे से कहा, अपनी बाइक पर घुमाने कब ले जा रहे हो मुझे,,,
राजेश ने कहा, जब आप कहे,,
इसके बाद विजेता टीम को आज हवेली में ही रुकना था, क्यू की पुराने नियमो के अनुसार आज विजेता टीम को हवेली में साही भोज दिया जाना था।
शाही भोज में बाहर से आए अतिथि लोग भी मौजूद थे।
ठाकुर किसी आवश्यक काम आ जाने का बहाना बनाकर हवेली से बाहर चला गया।
शाही भोज का नेतृत्व ठकुराइन रत्नवती ने किया।
शाही भोज में खाने पीने, नाचने गाने की व्यवस्था किया गया था।
गांव की सरपंच सविता भी मौजूद थी।
रत्नवती ने राजेश को बेहतरीन प्रदर्शन के लिए बधाई दिया। राजेश ने उसका पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
गीता , राजेश के इस प्रदर्शन से आश्चर्य में थी, उसका सिक्स पैक लुक अभी भी उसकी आंखो के सामने आ जा रही थी।
वह राजेश को मैच विनर बनने के लिए बधाई दिया।
गीता _राजेश, तुम तो छुपे रुस्तम निकले। बधाई हो मैच विनर बनने के लिए।
राजेश _थैंक यू दीदी।
गीता _वैसे बहुत अच्छी बॉडी बना रखी है तुमने।
राजेश _आज, तो इसी का चलन है दीदी,,,
गीता _हा वो तो है, मुस्कुराते हुवे बोली,,
दिव्या _सुरज पुर वालो के लिए आज बढ़ी खुशी का दिन है।
आज राजेश इस मौके पर हमे गीत सुनाएगा।
वहा सभी मौजूद लोगो ने, राजेश को गीत के लिए दबाव बनाया।
राजेश _ठीक है पर एक शर्त पर गीता दीदी और दिव्या जी आप दोनो को भी मेरा साथ देना होगा।
सभी के रिक्वेस्ट करने पर दोनो तैयार हो गई।
फिर गीता, दिव्या और राजेश तीनो ने जबरदस्त परफॉर्मेंस दिया।
रत्नादेवी और सविता साथ ही थी।
रत्ना देवी गीता को बहुत दिनो बाद खुश देख रही थी। उसे नाचते देख आश्चर्य करने लगी।
इधर माखन, को अभी भी यकीन नही हो रहा था की राजेश से वह हार गया। आज तक वह इस क्षेत्र का सबसे ताकत वर पुरुष माना जाता था लेकिन आज राजेश ने उसका क्रेज खत्म कर दिया था। वह काफी गुस्से में था। उसने गुस्से में अपने ही साथी जो राजेश का तारीफ कर रहा था को मार डाला।
और राजेश से बदले की आग में जलने लगा।