Incest यह क्या हुआ - Page 39 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

मधु और आरती अब परीक्षा की तैयारी में ध्यान दे रही थी। एग्जाम नजदीक था। राजेश खुद की तैयारी करने के साथ साथ दोनो की मदद भी कर रहा था।

आखिर वह दिन आ ही गया जब प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोम के लिए प्रवेश परीक्षा होना था।

मधु और आरती को परीक्षा देने। धरम पुर जाना था।

परीक्षा का समय सुबह 10बजे से 1बजे था।

राजेश उन दोनों को अपने बाइक में बिठाकर सुबह 8बजे ही सूरज पुर से धरम पुर के लिए निकल गया।

वे आधा घंटा पहले ही परीक्षा केंद्र पहुंच गए।

सूचना फलक पर पता किए की कोन से कमरा में उनका रोल नंबर लिखा हुआ है।

घंटी बजते ही मधु आरती दोनों परीक्षा हाल में चले गए।

राजेश परीक्षा केंद्र के सामने गार्डन था, वहा जाकर पेड़ के नीचे बैठ गया। और अपना तैयारी करने लगा।

दोपहर 1बजे मधु और आरती एग्जाम सेंटर से बाहर आए। दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी।

दोनों राजेश के पास पहुंचे।

राजेश _कैसा गया तुम दोनों का एग्जाम?

आरती _बहुत अच्छा भईया।

राजेश _और मधु तुम्हारा।

मधु _मेरा भी बहुत अछा गया है भईया।

राजेश _ये तो बडी अछी बात है।

आरती _भईया भूख लगी है, चलो न किसी होटल या ढाबे पर जाकर भोजन करते है।

राजेश _भूख तो मुझे भी लगीं है। चलो किसी अच्छे से ढाबे में चलते हैं।

तीनो बाइक से ढाबे पे जा रहे थे की रास्ते में आरती की नजर पोस्टर पर पढ़ी।

आरती _भईया ये तो टाकीज है न ।

राजेश _हा,

आरती _भईया, मैंने अब तक कभी टाकीज में मूवी नही देखी है। चलो टाकीज में मूवी देखते हैं।

मधु _राजेश भईया, आरती ठीक कह रही है मैंने भी कभी टाकीज में मूवी नही देखी है, चलो न चलते है।

राजेश _तुम दोनों की इच्छा है तो ठीक है, पर मूवी 2बजे शुरू होगी, चलो पहले ढाबे में जाकर भोजन कर लेते हैं।

राजेश ने दोनो को एक अच्छे से ढाबे में ले गया।

आरती और मधु से पूछकर उनका पसंदीदा भोजन आर्डर किया।

तीनो भोजन किए।

भोजन तीनो को बहुत पसंद आया।

भोजन करने के बाद तीनों टाकीज पहुंचे।

रानी मुखर्जी की मर्दानी मूवी लगीं थी।

आरती _भईया ये हीरोइन तो रानी मुखर्जी है न।

राजेश _हा तुमने सही पहचाना।

राजेश ने तीन बालकनी का तीन टिकट लिया।

और तीनो टाकीज के अन्दर गए।

जब तीनो बालकनी में गए, तो वहां कोई नहीं था।

मधु _भईया यहां तो कोई दर्शक ही नहीं है।

राजेश _शायद लोगो को मूवी पसंद नही आ रही है।

राजेश ने बालकनी से नीचे झांका नीचे काफी कम दर्शक बैठे थे।

कुछ देर बाद एक लड़का और लड़की बालकनी में आए शायद दोनों प्रेमी युगल थे।

वो दोनों कोने वाले सीट पर बैठ गए।

मूवी चालू हो गई।

हाल का लाइट ऑफ कर दिया गया।

पूरे सिनेमा हाल में अंधेरा छा गया।

आरती _भईया हाल में तो पूरा अंधेरा छा गया, मुझे तो डर लग रहा है।

राजेश _अरे मै हूं न फिर डरने की जरूरत नहीं मूवी पे ध्यान दो।

पहले मधु बैठी थी, फिर आरती उसके बाद राजेश।

तीनो मूवी देखने लगे।

कुछ देर बाद मधु को कुछ आवाजे सुनाई पड़ा, उसने कोने पर बैठे लड़का और लड़की की ओर देखा।

बीच बीच में पर्दे की रोशनी तेज होने पर मधु ने जो देखी उससे वह दंग रह गई।

लड़का ने लड़की को अपने गोद में बिठा लिया था।

और उसकी चुचियों से खेल रहा था।

लड़की सिसक रही थी।

मधु _ने आरती के कानो में फुसफुसाई। आरती उधर देखो, क्या कर रहे हैं दोनों लड़का और लड़की।

आरती ने भी गौर से उस ओर देखा।

जब स्क्रीन से तेज रोशनी आने पर जो उसने देखा, वह भी दंग रह गई।

मधु _ये दोनों कितने बेशर्म है, इन्हे कोई शर्म नही।

आरती _सिनेमा हाल में ये सब भी होता है। मैंने कभी सोंची ही नहीं थी।

राजेश _क्या बात है? तुम लोगो का ध्यान मूवी पर क्यू नही?

आरती _भईया उधर देखो, उधर, दोनों क्या कर रहे है।

राजेश ने _कोने में बैठे लड़का और लड़की की ओर देखा।

राजेश _ये लोग वही कर रहे है जो करने आए है। तुम लोग उस तरफ ध्यान मत दो, मूवी पर ध्यान दो।

आरती _भईया यहां ये सब भी होता है ।

राजेश _ये लोग मूवी देखने के बहाने मजा करने आए हैं। तुम लोग उस ओर ध्यान मत दो।

राजेश मूवी देखने लगा।

इधर मधु और आरती का ध्यान मूवी पर कम लड़का और लड़की पर ज्यादा था।

कुछ देर बाद,,,

मधु _आरती, क्यू न हम भी मजा करे,, फुसफुसाते हुए बोली।

आरती _मै समझी नहीं।

मधु _जो ये दोनों कर रहें है,,,

हम भी,,

आरती _पर कैसे?

मधु _तू, राजेश भईया के बाजू वाले सीट पर चली जा, मै तेरी सीट पर बैठती हूं।

फिर दोनों राजेश भईया को गरम करेंगे। अपने हाथ और मुंह से।

आरती _कही भईया भड़क न जाए,,

मधु _उसने कहा था न परीक्षा तक कुछ नहीं हमने उसका कहना माना,अब तो परीक्षा हो गई है। अब भईया को हमारा कहना मानना होगा।

आरती _ठीक है।

आरती अपने सीट से उठ कर राजेश के बाजू दूसरी सीट पर बैठ गई।

मधु आरती के सीट पर बैठ गई। राजेश बीच में बैठा था। आजू बाजू दोनो।

राजेश _तुम दोनो सीट क्यू चेंज कर रही।

मधु _भईया मेरी सीट ठीक नहीं है। इसकी फोम बैठ गई है।

कुछ देर आरती और मधु दोनों मूवी देखने का नाटक करने लगी उसके बाद वे अपने एक एक हाथ राजेश के पर रख दिए।

राजेश के जांग को सहलाने लगीं।

राजेश _ये क्या कर रहे हो तुम दोनों।

आरती _कुछ नही, मूवी में तो मजा नही आ रहा इसलिए हमने भी ये सोचा कि क्यूं न हम भी उन लड़का लड़की की तरह मजा करे।

राजेश _नही नही ये ठीक नहीं है।

मूवी अच्छी नहीं लग रही तो चलो घर चलते है।

मधु _भईया अब तो मजे करके ही घर जायेंगे।

आरती ने राजेश की ओंठ को अपने मुंह में भर कर चूसना शुरु कर दी।

इधर मधु ने राजेश की पैंट का चैन खीच कर लंद बाहर निकाल कर मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी।

धीरे धीरे राजेश भी उत्तेजित होने लगा।

उसका लंद मधु के मुंह की रगड़ से शख्त हो गया।

मधु अपनी पेंटी निकाल दी और अपनी बैग में डाल दी।

फिर राजेश के लंद को पकड़ कर उसे अपनी योनि में सेट की और बैठ गई। सामने वाली कुर्सी को पकड़ कर उठक बैठक करना शुरू कर दी।

लंद लंद boor में अन्दर बाहर होने लगा।

मधु को बहुत मजा आने लगा, वह कुछ देर में ही झड़ने लगी।

वह उछलना बंद कर सुस्ताने लगी।

अब आरती ने अपनी पेंटी उतार दी और उसे राजेश के मुंह में ठूंस दी।

आरती _मधु, अब उठो भी, हो गया न तुम्हारा, अब मुझे बैठने दे।

मधु राजेश के लंद से उठ गई। राजेश का लंद मधु की boor का पानी पीकर और लंबा मोटा हो गया था।

आरती ने राजेश का लंद पकड़ कर अपनी chut में सेट कर बैठ गई।

फिर लंद पर उछलने लगी।

लंद आरती की योनि में पूरी गहराई नाप रहा था।

आरती को बहुत मजा आने लगा। कुछ देर में वह भी झड़ने लगी।

इधर मधु फिर से गर्म हो चुकी थी।

मधु _आरती तुम्हारा हो गया न अब हटो।

आरती राजेश के गोद से हट गई।

अब मधु राजेश की ओर मुंह कर उसके लंद को chut में डाल कर बैठ गई।

राजेश के मुंह से पेंटी निकाल, उसके ओंठ को मुंह में भर कर चूसते हुए उछल उछल कर चुदाने लगी।

उसे फिर से बहुत मजा आने लगा।

इधर राजेश को भी मजा आने लगा।

वह मधु की कमर पकड़ कर अपने लंद पर पटकने लगा।

कुछ देर में ही मधु फिर से झड़ने लगी।

मधु लंद से उठी तो आरती लंद पर बैठ गई। और तब तक चुदती रही जब तक फिर से वह झड़ ना गई।

इंटर वेल होने वाला था।

राजेश _लाइट ऑन होने वाला है, चलो जल्दी अपने कपडे ठीक करो, तुम दोनों और तरीके से बैठ जाओ, अपनी कुर्सी पर ।

तीनो अपने कपडे ठीक किए।

कुछ देर में इंटरवेल huwa, हाल की लाइट ऑन हो गया।

आरती _भईया मूवी में मजा नहीं आ रहा चलो मार्केट चलते है, हमे कुछ जरूरत की चीजे खरीदनी है।

तीनो सिनेमा हाल से निकल कर मार्केट आ गए।

मधु और और आरती दोनों अपनी जरूरत की समान खरीदी।

उसके बाद तीनों घर के लिए निकल पड़े।

आरती _मधु, माधूरी मैम हमे अपने घर आने के लिए आमंत्रित करती है क्यू ना आज हम उनके घर चलें।

मधु _हा, कुछ समय रुक कर निकल जायेंगे।

अभी समय क्या huwa है?

आरती अपनी मोबाइल पर समय देखी। साढ़े पांच huwa है।

राजेश _देखो, हमे अभी घर चलना चाहिए फिर कभी आ जाना, माधूरी मैम का घर।

आरती _भईया, अब हम साथ कब आयेंगे, क्या पता चलो ना, मैम का घर चलते है।

मधु _हां भईया चलो ना।

राजेश _तुम लोग बडी जिद्दी हो,,,

राजेश गाड़ी को माधुरी के घर की ओर मोड़ दिया।

जब वे घर पहुंचे।

माधूरी ने दरवाजा खोला,,

राजेश _नमस्ते मैम।

माधूरी _अरे तुम लोग, अचानक,,, तुम लोगो का तो आज एग्जाम था न।

आरती _, मैम हम एग्जाम देकर घर जा रहें थे की हमने सोचा क्यूं ना हम मैम का घर चलें हम उनका घर भी देख लेंगे।

राजेश _ये दोनों बडी जिद्दी है, मैना कहा फिर कभी आ जाना, शाम हो गई है, पर माने नही, मुझे मजबूरी में लाना पड़ा।

माधूरी _अरे अच्छा किए, आ गए, पता नही कब फिर तुम लोगो को इकट्ठा आने का मौका मिले।

मुझे बड़ी खुशी हुई, आओ अन्दर आओ।

सभी ड्राइंग रूम में बैठे।

माधुरी _देखो जी कौन आए है।

माधूरी का पति मनोज बेडरूम से बाहर आया।

मनोज _कोन है भई।

माधूरी _ये राजेश है।

राजेश _नमस्ते सर।

मनोज _अच्छा तुम ही राजेश हो, भई तुम्हारी बडी तारीफ सुनी है। अच्छा huwa आज मुलाकात भी हो गया।

माधूरी _ये मधु और ये आरती है, मेरे स्कूल में पढ़ाती है।

मधु, आरती _नमस्ते सर।

मनोज _नमस्ते, नमस्ते।

आप लोगो से मिलकर बडी खुशी हुई।

माधूरी, मधु आरती सभी बातचीत करने लगे।

मनोज _भई बाते ही करते रहोगे या मेहमानों को चाय नाश्ता भी कराओगे।

माधूरी _ओ हो मै तो बातो में भूल ही गई।

आरती _मैम रहने दो न, आप क्यूं कष्ट उठा रही, हम बना देते है, हमे किचन दिखा दो।

आरती मधु और माधुरी तीनों किचन में चले गए।

मनोज _राजेश, माधूरी बता रही थी की तुम आईएएस की तैयारी कर रहे हो, मैन एग्जाम क्लियर कर चुके हो, अब इंटर व्यू की तैयारी कर रहे हो।

राजेश _हां सर, कुछ दिनों बाद इंटर व्यू होना है। तैयारी तो करनी पड़ेगी।

मनोज _भाई, तुम अफसर बन जाओ ge तो हमे भी बडी खुशी होगी।

राजेश और मनोज बात चीत ही कर रहे थे कि माधुरी दोनों के लिए नाश्ता ले आई।

मनोज _लो भाई राजेश गरम गरम प्याज पकोड़ा खाओ।

माधूरी तो बहुत अच्छा पकोड़ा बनाती है।

राजेश ने पकोड़ा टेस्ट किया।

राजेश _सच में पकोड़ा बहुत अच्छा बना है।

कुछ देर बाद माधुरी, चाय लेकर आई।

मनोज और राजेश चाय और पकोड़ा का आनंद लेने लगे।

मधु और आरती कीचन में ही नाश्ता करने लगीं।

माधूरी _, वैसे तुम दोनों का एग्जाम तो 10से 1बजे तक था न, फिर आने में शाम कैसे हो गई।

क्या क्या किए धरमपुर में।

मधु _मैम, एग्जाम होने के बाद ढाबे में खाना खाए।

हमने कभी टाकीज में मूवी नही देखी थी न तो भईया को बोले टाकीज में मूवी दिखाने, भईया हमे टाकीज ले गया।

माधूरी _अच्छा अच्छा, वैसे कोन सी मूवी लगीं है टाकीज में।

आरती _वो रानी मुखर्जी की मर्दानी।

माधूरी _मूवी देखने में तो बड़ा मजा आया होगा।

मधु और आरती दोनों एक दूसरे का मुंह देखने लगे।

माधूरी _तुम दोनों एक दूसरे का मुंह क्यू देख रहे।

आरती _मैम अब आपको क्या बताए, हमे तो बताने में ही शर्म आ रही है।

माधूरी _क्यू ऐसा क्या हो गया वहां।

मधु _मैम अब क्या बताए, जब हम सिनेमा हाल में गए तो वहां तो कोई दर्शक था ही नहीं।

भइया ने बालकनी का टिकट लिया था।

कुछ देर बाद एक लड़का और लड़की आए, दोनों कोने में जाकर बैठ गए।

माधूरी _फिर, फिर क्या huwa?

आरती _मूवी चालू होते ही, सिनेमा हाल में अंधेरा छा गया।

माधूरी _वो तो होता ही है, मूवी चालू होने के बाद हाल की लाइट ऑफ कर देते है।

मधु _वो तो ठीक है , पर वो लड़का और लड़की, छी,, मुझे तो बताने में ही शर्म आ रही।

माधूरी _क्यू क्या किया उन दोनों ने,,

आरती _मैम अब कैसे बताए आपको, वो दोनों तो हम लोगो की कोई परवाह न करते हुए, छी,,,

माधूरी _अरे रुक क्यू गई, क्या किए उन दोनों ने।

मधु _लड़की, लड़का के गोद में बैठ गई, और उछलने लगी, मुंह से अजीब अजीब आवाजे निकालने लगी।

माधूरी _क्या?

आरती _हम लोग तो शर्म से गड़ी जा रहीं थी।

मूवी पे हमारा ध्यान ही नहीं रहा।

मधु _भइया को इस बारे में बताए तो बोले, तुम लोग उस तरफ ध्यान मत दो।

पर हमारा वहा और बैठ पाना मुश्किल हो रहा था।

माधूरी उनकी बाते सुनकर हसने लगी।

माधूरी _फिर क्या किए।

मधु _फिर क्या? शर्म के मारे हमारा वहा बैठ पाना मुश्किल हो गया। हम मूवी बीच में ही छोड़ आए।

माधूरी _हसने लगीं,,, लो पहली बार मूवी देखने टाकीज गए थे बीच में ही छोड़ आए।

आरती_अब क्या करते? लड़की की अजीब अजीब आवाजे अब तक मेरे कानो में गूंज रही है!

टाकीज से हम मार्केट चले गए, वहा हमने अपने लिए कुछ सामान खरीदे फिर, गांव के लिए निकल पड़े।

माधूरी _क्या खरीदे? हमे भी तो दिखाओ।

आरती और मधु, माधूरी को समान दिखाने लगी।

माधूरी, मधु और आरती तीनो किचन से हाल में आ गए।

माधूरी _, राजेश, आरती और मधु बता रही थी की तुम लोग टाकीज गए थे मूवी देखने।

मुझे भी अगर बताए होते की तुम लोग टाकीज जाओगे तो मैं भी चली जाती तुम लोगो के साथ, मुझे भी काफी दिन हो गए टाकीज गए।

राजेश, आरती की ओर देखने लगा, कही इन लोगो ने सब बता तो नही दिया, वहा क्या huwa?

राजेश _मैम वो क्या है न कि प्लान अचानक से बना।

अच्छा मैम अब हम लोग चलते है। घर वाले चिंतित हो रहे होंगे?

हमे इजाजत दीजिए सर।

मनोज _ठीक है राजेश, अच्छा लगा तुम लोग आए, आते रहा करो।

राजेश _ज़रूर सर।

तीनो इजाजत लेकर बाइक से घर के लिए निकल पड़े।

रास्ते में,

राजेश _कही तुम दोनों ने मैम को टाकीज में क्या huwa सब बता तो नही दी।

आरती _भईया, हमने सिर्फ उस लड़का और लड़की के बारे में बताया की वे टाकीज के अन्दर हमारे सामने ही क्या कर रहे थे। हमने क्या किया ये नही बताया।

मधु और आरती दोनों हसने लगी। जब वे घर पहुंचे तो 7बज चुके थे।

रात में भोजन करने के बाद, पदमा किचन में कुछ काम कर रही थी।

राजेश कीचन में गया और पदमा को पीछे से बाहों में भर लिया।

पदमा चौंक गई।

दरअसल आरती और मधु दोनों ने टाकीज में अपनी प्यास तो बुझा ली थी।

राजेश झड़ा नहीं था, उसे chut मारने का मन कर रहा था।

पदमा _क्या कर रहा है मुआ, छोड़ कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा।

राजेश उसकी चूंची मसलते हुवे कहा _ताई आज बडा मन कर रहा है?

पदमा _अरे रात में आ जाऊंगी तेरे कमरे में, कर लेना अपनी इच्छा पूरी, अभी छोड़, आरती या ज्योति आ गई तो मुसीबत हो जायेगी।

पदमा फुसफुसाते हुए बोली।

राजेश पदमा को छोड़ दिया, और अपने कमरे की ओर जाने लगा।

पदमा राजेश को जाता देख मुस्कुराने लगी।

राजेश की हरकत से वह भी गर्म हो गई।

जब पदमा अपने कमरे में गई, उसका पति सो रहा था। वह बाजू में जाकर लेट गई।

आज राजेश से वह चुदेगी यह सोचकर उसकी boor पानी बहाने लगी।

जब उसे लगा की सब लोग सो गए होंगे। वह चुपके से उठी और अपने कमरे से निकलकर राजेश के कमरे की ओर जाने लगी।

उसने सभी के कमरे का मुआइना किया।

सभी के दरवाजे बंद थे।

वह राजेश की कमरे की ओर चली गई।

हल्के से दरवाजा धकेल कर कमरे के अन्दर चली गई।

राजेश उसी के आने का इंतजार कर रहा था।

राजेश पहले से ही उत्तेजित था।

पदमा ने देखा राजेश पहले से ही नंगा होकर अपना लंद सहला रहा है।

वह देखकर मुस्कुराने लगीं।

राजेश _ताई, आने में काफी देर कर दी।

पदमा _क्यू रहा नही जा रहा है क्या?

पदमा अपनी साड़ी उतारने लगीं।

राजेश उसे देख कर लंद सहलाने लगा।

पदमा साड़ी निकालने के बाद, अपनी ब्लाउज भी निकाल दी।

राजेश का लंद उसकी चूची देखकर झटके मारने लगा।

राजेश _ताई पेटीकोट भी उतार दो।

पदमा _जानती हूं, तुम्हे औरतों को नंगी करके चोदने में मजा आता है।

पदमा ने अपना पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया।

पेटीकोट उसकी पैरो में आ गई।

पदमा को नंगी देख राजेश का लंद और तन गया।

पदमा बेड के ऊपर आ गई।

और राजेश का लंद मुंह में भर कर चूसने लगीं।

राजेश उसकी बालो को सहलाने लगा।

पदमा _आज तो कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा लग रहा है re तेरा, लगता है आज तू मेरा मूत ही निकाल देगा।

पदमा बेड पर खड़ी हो गईं और राजेश का लंद पकड़ कर अपनी chut पे सेट की, उसके बाद उस पर बैठ गई।

लंद chut की चीरकर boor में समा गया।

पदमा के मुंह से आह निकल गया।

राजेश पदमा की चूची पकड़ कर मसलने लगा।

पदमा अब राजेश के लंद पर उछल उछल कर chudna सुरू कर दी।

उसकी योनि पहले से ही गीली थी।

लंद boor में आसानी सेफच फाच करता huwa अन्दर बाहर होने लगा।

राजेश और पदमा दोनों को बहुत मजा आने लगा।

पदमा के मुंह से कामुक सिसकारी निकलकर कमरे मे गूंजने लगी।

कुछ देर बाद

राजेश ने पदमा की कमर थाम लिया और नीचे से अपनी कमर उछाल उछाल कर पदमा की साथ देने लगी।

दोनों को संभोग का अपार सुख प्राप्त होने लगा।

इधर आरती, अब तक सोई नहीं थी। वह टाकीज में राजेश से किस प्रकार chudi उसे याद कर गर्म हो गई थी और अपनी boor सहला रही थी।

जब उसे बर्दास्त नही huwa तो, उसने राजेश के कमरे में जानें का फैसला किया।

उसने देखा ज्योति गहरी नींद में सो रही है वह अपने बेड से उठी और चुपके से कमरे से बाहर निकली।

उसने इधर उधर देखा।

चारो ओर सन्नाटा था।

वह राजेश के कमरे की ओर आगे बडी, जैसे ही वह राजेश के कमरे के दरवाजे के पास पहुंची उसे अंदर से किसी के सिसकने की आवाज सुनाई दी।

वह चौंक गई।

वह ध्यान से आवाज को सुनने लगीं।

आरती _लगता है अंदर कोई भईया से chud रही है।

कौन हो सकता है।

भाभी की कमरे का दरवाजा तो अंदर से बंद है।

और ज्योति दीदी तो कमरे में है फिर और कौन हो सकता है।

कही मां,,,

नही नही ये मै क्या सोचने लगीं।

मां तो बडी संस्कारी और भोली है वो नही हो सकती।

आरती दरवाजे पर कान लगाकर सुनने लगी।

इधर राजेश पदमा को घोड़ी बना कर जोर जोर से चोद रहा था।

पदमा बहुत अधिक उत्तेजित हो गई थी।

पदमा _बेटा और जोर से चोद मै झड़ने वाली हूं, चोद अपनी ताई को, और जोर से फाड़ दे अपनी ताई की chut

इन शब्दों को सुनकर आरती के होश उड़ गए।

हे भगवान अंदर तो सच में मां ही है। राजेश भइया से रंडियों की तरह chud रही है।

उसके हाथ पैर कपकपाने लगे।

उसने सपने में भी नहीं सोचा था उसकी संस्कारी मां, इस तरह अपने भतीजे से रंडियों की तरह चुदेगी।

वह अपने कमरे में आकर सोचने लगीं।

पता नही मां राजेश भइया से कब से chud रही है।

अब तक मुझे मां पर कोई शक भी नहीं huwa

कुछ देर बाद आरती ने सोचा की चलो अच्छा huwa की यह राज मुझे पता चल गया।

अब मुझे मां से डरने की कोई जरूरत नहीं। अगर मैं राजेश भइया के साथ पकड़ी गईं तो, मै उसका मुंह बंद करा सकूंगी।

आरती अब और अधिक उत्तेजना महसूस करने लगीं।

यह जानकर उसकी मां राजेश भइया से रंडियों की तरह chud रही है।

उसकी boor और पानी छोड़ने लगीं।

वह उंगलियों से अपनी भग्नासा रगड़ने लगी और कुछ ही देर में झड़ने लगी।

इधर राजेश पदमा की जमकर chudai कर रहा था।

पदमा को जन्नत की सैर करा रहा था।

वह पदमा को बेड किनारे लिटा कर उसकी टांगो को अपनी कंधे में डाल कर हाथ से उसकी चूची मसल मसल कर तेज तेज धक्के लगा लगा कर चोद रहा था।

राजेश झरने के करीब आ गया,,,

राजेश _ताई मेरा आने वाला है,,,

पदमा _आज अंदर ही छोड़ दे,,,

राजेश _क्यू, कही तुम पेट से हो गई तो,,,

राजेश जोर जोर से चोदते हुए कहा,,

पदमा _यहां आने से पहले गोली खा ली थी,,

राजेश और तेज तेज चोदने लगा,,,

कमरे में पदमा की सिसकारी चूड़ियों की खनक फाच फच की आवाज गूंज रहा था,,

राजेश अब खुद को और न रोक सका और आह मां आह,,,,

आह ह ह,,, आह,,

करा हते हुवे अपनी वीर्य की फुहारे से पदमा की गर्भाशय को सींचने लगा।

गर्म गर्म वीर्य को अपने गर्भसाय में अनुभव कर फिर से झड़ने लगीं।

दोनों काफी थक गए थे। बेड पर लेट कर सुस्ताने लगे।

कुछ देर बाद,,

पदमा उठी और अपने कपडे पहनने लगी।

राजेश देखकर मुस्कुराने लगा।

कपडे पहनने के बाद वह राजेश के बगल में बैठ गई।

पदमा _देखो बेटा, अब तेरा इंटर व्यू पास आ गया है।

अब तू सिर्फ अपनी पढाई पर ध्यान लगा।

इंटरव्यू से पहले अब ये सब बंद कर।

कही तू इंटरव्यू में फैल हो गया तो,,, सारा दोष मेरे ऊपर आ जायेगा। मैंने ये सब करने से रोका क्यू नही। मै सुनिता को जवाब नही दे पाऊंगी।

मूझसे वादा कर इंटर व्यू से पहले अब इन चीजों से दूर रहेगा।

मै पुनम को भी बोल दूंगी तुमसे दूर रहने के लिए।

राजेश _, ठीक है ताई, आपकी आज्ञा सिर आंखों पर।

जाने से पहले एक किस तो देदो।

पदमा _चल हट बदमाश इतना करने के बाद भी तेरा जी नही भरा है।

अब तेरा इंटर व्यू से पहले कुछ नहीं मिलेगा।

पदमा अपनी गाड़ मटकाते हुवे कमरे से बाहर चली गईं।

अगले दिन से राजेश इंटरव्यू की तैयारी में जी जान से जुट गया।

पुनम और आरती ने भी समय की नजाकत को देखकर, राजेश से दूर ही रही।

राजेश को इंटर व्यू के लिए दिल्ली जाना था।

उसके एक दिन पहले संडे था।

दिव्या ने राजेश को से मिलने सूरज पुर आया।

पुनम _देवर जी आपसे मिलने के लिए, राजकुमारी दिव्या आई है।

राजेश अपने कमरे में पढाई कर रहा था।

राजेश _दिव्या जी आई है, अचानक,, कहा है?

पुनम _आंगन में बैठी है मां जी के पास।

राजेश अपने कमरे से बाहर आया।

राजेश _दिव्या जी आप, यहां अचानक।

दिव्या _कैसे हो राजेश, कैसे चल रही है तुम्हारी तैयारी।

राजेश _मै ठीक हूं दिव्या जी आप कैसी है? यूं अचानक कुछ काम था क्या? मुझे फोन कर देती। मै आ जाता।

दिव्या _तुमने बताया था न कि कल तुम इंटर व्यू देने दिल्ली जाओगे।

तो मिलने चली आई।

कल कितने बजे की ट्रेन है?

राजेश _जी सुबह 10बजे की।

दिव्या _राजेश, 10बजे तो मेरा भी ड्यूटी जाने का समय रहती हैं। तुम चाहो तो मैं तुम्हे स्टेशन छोड़ दूंगी।

राजेश _शुक्रिया दिव्या जी।

वार्तालाप चल ही रहा था कि ज्योति चाय लेकर आई।

दिव्या _कैसी हो ज्योती दीदी? कोई समस्या तो नही।

ज्योती _जी मै बिल्कुल ठीक हूं।

दिव्या _आपका बच्चा कैसा है?

ज्योती _वो भी बिल्कुल ठीक है, छोटी राजकुमारी जी।

पदमा _लो बेटी, चाय लो।

सभी चाय पीने लगे।

ज्योति, अपने बच्चे को लेकर आई।

दिव्या ने उसे अपने गोद में ले लिया और दुलारने लगी।

कुछ देर रुकने के बाद,,,

दिव्या _अच्छा राजेश अब मैं चलती हूं, तुम्हे भी अपनी तैयारी करनी है। मै कल तुम्हे लेने 9बजे आ जाऊंगी।

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

दिव्या अपनी घर चली गई।

अगले दिन दिव्या 9बजे कार लेकर सूरज पुर पहुंची।

राजेश दिल्ली जाने के लिए अपना बैग तैयार कर चुका था।

दिव्या के आने के बाद, राजेश ने अपनी ताई और ताऊ जी का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

भुवन ने राजेश को गले लगाकर शुभकामनाएं दिया। और राजेश का बैग उठाकर कार के डिक्की में डाला।

राजेश और दिव्या कार से स्टेशन के लिए निकल पड़े रास्ते में चाचा का दुकान आया, राजेश ने कार रोकने कहा।

राजेश ने अपने चाचा चाची का आशीर्वाद लिया। सविता और माधव ने परीक्षा में कामयाब होने के लिए शुभकामनाएं दिए।

और जल्दी वापस लौटने को कहा।

रास्ते में दिव्या ने राजेश से पूछा,,,

दिव्या _राजेश तुम्हारी वापसी कब होगी।

राजेश _दिव्या जी दिल्ली पहुंचने में ही 36घंटे लगेंगे।

इंटरव्यू के बाद दिल्ली से अपना घर राजधानी जाऊंगा। वहा कुछ दिन रुकने के बाद, यहां वापसी होगी। सप्ताह 2सप्ताह तो लगेंगे ही।

समय पर वे स्टेशन पहुंचे।

ट्रेन के आने का इंतजार करने लगें।

कुछ देर में ट्रेन भी आ गई।

राजेश _अच्छा दिव्या जी, अब मैं चलता हूं।

दिव्या _राजेश तुम अपना खयाल रखना। मुझे फोन करना।

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

राजेश ट्रेन पर बैठ गया।

कुछ देर में ट्रेन छूट गई।

दिव्या _हाथ हिलाकर उसे बाई करती रही जब तक ट्रेन दूर न चली गई।

दिव्या के आंख भर आई थी।

वह अपने आंखों के आंसू, रूमाल से पोछी फिर स्टेशन से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चली गई।

राजेश को 36घंटे तक ट्रेन में ही सफर करना था।

अगले दिन हवेली में सुबह 9बजे नाश्ता करने के लिए डायनिंग टेबल पर बैठी थी। परिवार के अन्य सदस्य, रत्नावति, ठाकुर, और गीता भी नाश्ता कर रही थी।

दिव्या, अपने मुंह में दो निवाला डालने के बाद जैसे ही तीसरा निवाला लेने को हुई, उसे उबकाई आने लगीं।

वह डायनिंग टेबल से उठ कर बाथरूम में गई। सभी दिव्या की ओर देखने लगे।

आखिर उसे huwa क्या है ?

गीता _मां मै देखती हूं, बात क्या है?

गीता, दिव्या के पीछे गई।

उसने देखा, दिव्या बाथरूम के वाश बेसिंग में उल्टी कर रही थी।

गीता बहुत चिंतित होने लगीं।

गीता _दिव्या, तुम ठीक तो हो,,,,

दिव्या _हा दी,,

गीता ने दिव्या की आंखों में आंसू देखा,,,

गीता _, दिव्या, तुम मूझसे कुछ छिपा रही हो,,,

बताओ बात क्या है?

कही तुम,,,

दिव्या, गीता के गले लग कर रोने लगी,,,
 
दिव्या, गीता के सीने से लग कर रोने लगी।

गीता _दिव्या, तुम्हे राजेश को इस बारे में सब कुछ बता देना चाहिए।

दिव्या _नही दीदी, मै राजेश को नही बता सकती।

गीता _पर क्यू, अब तुम्हारे पास और कोई चारा है नही । तुम्हे पता है तुम कितनी बडी मुसीबत में फस चूंकि हो।

मेरी बात मानो तुम राजेश को सच बता दो, अगर तुम नहीं बता सकती, तो मैं उससे बात करूंगी।

दिव्या _नही दीदी, तुम ऐसा नहीं करोगी तुम्हे मेरी कसम।

गीता _पर क्यू दिव्या क्यू?

दिव्या _दीदी तुम तो जानती हो न की राजेश किसी और से प्यार करता है। मै उस पर दबाव नही बना सकता। वैसे भी जो कुछ huwa उसमे उसकी कोई गलती नही है, वो होश में नहीं था, और अभी वो एग्जाम देने जा रहा है, मै नही चाहती की मेरे कारण उनका इन्टर व्यू खराब जाए।

गीता _तब तो एक ही चारा है इस मुसीबत से बचने का तुम्हारे पास,,

ये बच्चा गिरा दो,,,

दिव्या चौंकी, वह गीता से दूर हो गई,,

दिव्या _दीदी ये आप क्या कह रही हो?

मै बच्चा गिराने के बारे में सपने में भी नहीं सोच सकती,,

दिव्या रोती हुई अपने कमरे में चली गई।

गीता _दिव्या रुको , मेरी बात सुनो,,,

दिव्या अपने कमरे में गई और बेड पर लेट कर रोने लगीं।

गीता उसके बाजू में आकर बैठ गई,,

दिव्या की बालो को सहलाने लगीं,,,

गीता _फिर क्या करेगी तू ही बता,,

और कोई रास्ता है तुम्हारे पास।

मां और पिता जी जब पता चलेगा तब क्या करेगी? उन्हे क्या जवाब देगी।

हम उनसे ये बात ज्यादा दिन तक छुपा भी नहीं सकते।

हे भगवान मेरी बहन को ये कैसी मुसीबत में डाल दिया?

उधर रत्ना वती, ने देखा की दिव्या वाश रूम से निकलकर अपने कमरे में जा रही है और गीता भी उसके पीछे उसे रोकने की कोशिश कर रही है,को आखिर बात क्या है? वो चिंतित हुई।

रत्नवती _मै देखकर आती हूं जी आखिर बात क्या है?

ठाकुर _ठीक है।

रत्नवती दिव्या के कमरे में गई।

रत्नवती _गीता क्या huwa? दिव्या की तबियत तो ठीक है न।

गीता _मां, वो,,,,,,,सब्र ठीक,,, ही,,,

रत्नवती _क्या बात है, तुम्हारी जुबान क्यू लड़खड़ा रही है? आख़िर बात क्या है?

गीता _चुप रही,,,

रत्नवती _दिव्या बेटा, तुम रो क्यू रही हो, तुम ठीक तो हो न,,,

तुम दोनो कुछ बताती क्यू नही? आखिर बात क्या है? गीता बताओ, बात क्या है?

गीता _दिव्या,,, मां बनने,,, वाली,,,,,

रत्नावती _क्या? गीता तू समझ भी रही है तू क्या बोल रही है? रत्नवती की शरीर कपकपा गई।

वह दिव्या को बेड से उठाई,,

दिव्या बेटा कह दो की ये झूठ है!

दिव्या रत्नवती के सीने से लग कर रोने लगी।

रत्ना वती_दिव्या बेटा तू तो समझदार है फिर इतनी बडी गलती,,,,,

किसका बच्चा है?

दिव्या चुप रही।

रत्नवती _जवाब दो बेटा। आख़िर तुम्हारे पेट में किसका बच्चा है?

चुप क्यू हो बताओ मुझे,,

गीता _मां दिव्या तुम्हे कुछ नहीं बताएगी। मै बताती हूं आख़िर ये सब huwa कैसे?

गीता ने सारी घटना, रत्नवती को बता दी।

रत्नवती _ इतनी बडी घटाना हो गई और मुझे आज पता चल रहा है,,,,

रत्नवती _मेरी बच्ची, तो निर्दोष है, और उसे इतनी बडी सजा,,, नही नही,,,

रत्नवती _गीता तू अभी राजेश को फोन लगा,,,,

दिव्या _नही मां, तुम्हे मेरी कसम तुम राजेश को कुछ नही बोलोगी,,

रत्नवती _बेटा तू ये क्या बोल रही है? तुम्हारे पेट में ये बच्चा है?

दिव्या _इसमें राजेश का भी तो कोई दोष नहीं है न मां, वह जानबूझकर तो ऐसा नही किया न, उसे तो पता भी नहीं है, उस रात क्या huwa है?

वैसे भी राजेश एग्जाम देने दिल्ली जा रहा है! मै नही चाहती मेरी वजह से उसका इंटरव्यू खराब जाए।

रत्नवती _तो ठीक है? उसे इटरव्यू देकर आ जानें दो फिर उससे बात करूंगी।

दिव्या _नही मां, राजेश से इस बारे में कोई बात मत करना। क्यू की ओ किसी और से प्यार करता है। मै राजेश पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं बनाना चाहती।

रत्नवती _अगर ऐसा है तो तुम्हारे पास सिर्फ एक ही विकल्प बचता है बेटा, इससे पहले तुम्हारे प्रेगनेंसी के बारे में किसी को कुछ पता चले ये बच्चा गिरा दो,,,

दिव्या _ने अपने पेट को पकड़ते और देखते हुए कहा,,

नही मां मैं ऐसा नहीं कर सकती।

रत्नवती _बेटी तू ये क्या कह रही है? न तू राजेश को इस बारे में बताना चाहती है और न ही बच्चा गिराना फिर, कुछ दिनों मै सबको पता चल जायेगा कि तू पेट से है, फिर हवेली की इज्जत मिट्टी में मिल जायेगी बेटा।

तुम्हारे पिता जी को इस बारे में पता चलेगा तो पता नही वो क्या करेगा?

इस बात को हम उनसे छिपा भी नहीं सकते।

मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा,,,

इधर ठाकुर भी चिंतित होने लगा, लो ठाकुराइन भी पता करने गई थी। वह भी वही रुक गई, पता नही आख़िर बात क्या हो गई?

कुछ देर बाद वह रत्नवती ठाकुर के पास आई।

ठाकुर _क्या huwa, तुम्हारा मुंह क्यूं लटका हुआ है। दिव्या ठीक तो है न।

रत्नवती _यहां मै आपको कुछ नहीं बता सकती?

आप मेरे कमरे मे आइए।

भोजन कक्ष में नौकर लोग मौजूद थे। रत्नवती नही चाहती थी कि किसी को भी इस बात की जानकारी हो।

ठाकुर _ऐसी क्या बात हो गई है जो यहां नही बता सकती।

ठाकुर, रत्नवती के पीछे पीछे उसके कमरे तक गई।

रत्नवती अपने बेड पर बैठ कर सुबकने लगी।

ठाकुर _ये क्या तमाशा है? मुझे अपने कमरे में बुलाकर बात क्या है? बताने के बजाय सुबकने लगी। बताओ क्या हो गया है दिव्या को,,,

रत्नवती अपनी आंसू पोछते हुवे कहा की, दिव्या मां बनने वाली,,,

ठाकुर _ठाकुराइन, जुबान सम्हाल कर बात करो, मेरा तुम तुम पर हाथ उठ जाएगा।

रत्नवती _ये सच है जी,,

ठाकुर _नही, दिव्या इतनी बडी गलती नहीं कर सकती? वो हमारी खानदान की इज्जत पर में नही मिला सकती! कह दो ये झूठ है,,,

ठाकुर ने चीखते हुए कहा।

रत्नवती _काश ये झूठ होता,, सुबकती हुई, बोली।

ठाकुर _उसके पेट में किसका बच्चा है बताओ मैं उस साले को गोलियों से भून डालूंगा,,,

रत्नवती चुप रही,,

ठाकुर _तुम चुप क्यू हो बोलती क्यूं नही?

दिव्या की पेट में किसका बच्चा है?

रत्नवती _जी,,, राजेश का,,

ठाकुर _मुझे उसी पर शक था !

मै उस साले को गोलियों से भून डालूंगा। हवेली की इज्जत को तार तार कर दिया है?

उस हरामि साले को दिल्ली से लौटने दे। उसे ऊपर न पहुंचाया न मेरा भी नाम बालेन्द्र सिंह नही।

रत्नवती _राजेश को तो पता ही नहीं जी कि उसने दिव्या के साथ कुछ किया है।

ठाकुर _ये तुम क्या बक रही हो?

रत्नवती ने जो घटना घटित हुआ उस्के बारे में ठाकुर को सब बात बताई।

ठाकुर _मै झोपड़ी के बाहर बैठा था और वो शाला मेरी बेटी के इज्जत से खेल रहा था।

ठाकुर गुस्से से आग बबूला हो रहा था।

मैंने दिव्या से कहा था, उस शाले को मत बचाओ।

पर वो नही मानी, देखा नेकी का फल। शाले ने हमारे घर की इज्जत को तार तार कर दिया।

मै उस साले को छोडूंगा नही।

दिव्या से बोलो, वह बच्चा गिरा दे,,,

रत्नवती _मैंने उन से कहा पर वो बच्चा नहीं गिराना चाहती।

ठाकुर _क्या बक रही हो? उसका दिमाक खराब है क्या?

रत्नवती _मैंने उसे समझाने की कोशिश की पर वह बात पर अडिग है? वो बच्चा नहीं गिराना चाहती।

ठाकुर _अगर बच्चा नही गिराना चाहती, तो उसे बोल दो इसी माह उसकी शादी खेल मंत्री के बेटे से होगी।

मंत्री जी कुछ दिन पहले ही शादी के बारे में बोल रहे थे मैंने ही उसे मना किया था, चुनाव हो जानें के बाद करने को बोला।

लेकिन अब मुझे इसी माह शादी के लिए बोलना होगा। तुम दिव्या से इस बारे में बात करो और उसे राजी करो।

ठाकुर वहा से चला गया।

रात में सोने के समय रत्नवती दिव्या के कमरे मे गई।

दिव्या _मां आप इस समय।

रत्नवती _बेटा मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।

दिव्या के बेड पर बैठ कर बोली।

दिव्या _बोलो मां।

रत्नवती _बेटा तुम्हारे पिता जी तुम्हारी शादी मंत्री के बेटे से करना चाहते है इसी माह।

दिव्या _मां ये आप क्या कह रही है?

आप उन लोगो को धोखा में रख कर मेरी शादी करना चाहती हो। जब उन लोगो को सच्चाई पता चलेगा, तब क्या होगा इसके बारे में सोचें हो।

नही मां मैं ऐसा नहीं कर सकती।

बेटा तुम राजेश को भी नही बताना चाहती, और दूसरे से भी नही शादी करना चाहती। आख़िर चाहती क्या हो? जब लोगो को पता चलेगा तुम्हारी प्रेगनेंसी के बारे में तो सब थू थू करेंगे।

देखो बेटा, इस घर की मान मर्यादा को बनाए रखने के लिए, तुम्हे कुछ न कुछ तो फ़ैसला लेना ही होगा।

दिव्या _मैंने फैसला कर लिया है मां।

रत्नवती_कैसा फैसला बेटा?

दिव्या _मां मै इस बच्चे को जन्म दूंगी मां।

मां मैं मुंबई चली जाऊंगी, ताकि खानदान की इज्जत पर कोई ऊंगली न उठा सके, यही मेरा आखरी फैसला है मां।

रत्नवती _बेटी ये तू क्या कह रही हैं। तू मुंबई में अकेली रहेगी।

रत्नवती ने दिव्या को मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह नहीं मानी।

इधर ठाकुर रात भर शराब पीता रहा, उसे राजेश पर बहुत गुस्सा आया। रात में कोई भी ठीक से सो नहीं पाया।

सुबह ठाकुर ने रत्नवती से पूछा।

ठाकुर _तुमने दिव्या से बात की।

दिव्या शादी के लिए तैयार हुई?

रत्नवती ने दिव्या के फैसले के बारे में बताया।

ठाकुर _तुम अपनी बेटी को समझा भी नहीं सकी कैसी मां हो तुम।

रत्नवती _देखो जी, दिव्या एक पढ़ी लिखी सुलझी हुई लड़की है उस पर हम ज्यादा दबाव नहीं बना सकते। मैंने उससे समझाने की बहुत कोशिश की पर वह अपने फैसले पर अडिग है।

इधर राजेश दिल्ली पहुंच चुका था वह वहा एक होटल बुक कराया अगले दिन उसका इंटरव्यू था।

वह इंटरव्यू की तैयारी में लगा था।

इधर दिव्या ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर अपना इस्तीफा दे दिया।

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के कर्मचारि काफी दुखी हुवे। उन लोगो ने जानने की कोशिश की।

पर उसने किसी को कुछ नही बताया।

अगले दिन राजेश का इंटरव्यू था।

वह इंटरव्यू के लिए निर्धारित स्थल और समय पर पहुंच गया।

इंटरव्यू लेने वाले के टीम ने राजेश से बारी बारी से कई प्रश्न पूछे, राजेश की ईमानदारी, निर्णय लेने की क्षमता, को परखने की कोशिश किया।

राजेश ने उनके सभी प्रश्नों का धैर्यता, स्पष्टता से जवाब दिया। सभी राजेश से काफ़ी प्रभावित हुवे, राजेश के सवालों के जवाब सुनकर ताली बजाने पर मजबूर हो गए।

करीब आधे घण्टे तक इंटरव्यू चला।

इंटरव्यू से बाहर आने पर , राजेश सीधा होटल आ गया।

उसे याद आया कि मां ने कहा था कि केमेस्ट्री टीचर सुमन दिल्ली में ही रहती हैं।

क्यू ना उनसे मुलाकात की जाए। कितने दिन हो गए मैम से मिले।

उसने सुमन को काल किया।

सुमन ने देखा राजेश का फोन, उसने आश्चर्य प्रकट की,

राजेश _हेलो मैम,,,

सुमन _राजेश कितने दिनों बाद मुझे याद किए, कैसे हो तुम।

राजेश _मै ठीक हूं मैम आप कैसी है?

सुमन _मै भी ठीक हूं, वैसे कहा हो तुम आजकल, अभी तो आईएएस की इंटरव्यू चल रही है न,,,

सुमन _हा मैम उसी सिलसिले में मै दिल्ली आया था।

इंटरव्यू हो जानें के बाद सोचा आपसे मिलता चलूं।

सुमन _क्या तुम दिल्ली में हो और अभी बता रहे हो,,

राजेश _हा मैम, इंटरव्यू का प्रेसर था न सोचा कि इंटरव्यू हो जानें के बाद आपसे मिलता चलूं।

सुमन _ओह राजेश कितने दिन हो गए तुमसे मिले हुए, तुम तो मुझे भूल ही गए थे।

तुम तुरंत मेरे घर आ जाओ। मै तुम्हारा इंतजार कर रही।

सुमन ने राजेश को अपना एड्रेस दिया।

इधर दिव्या अपना समान पैक करने लगी।

तभी रत्नवती, उसके कमरे में आई।

रत्नवती _क्या ये तुम्हारा अंतिम फैसला है मुंबई जानें का,

क्या तुम अपना फैसला नही बदल सकती। बेटा वहा तुम मुंबई में अकेली कैसे रहेगी?

तुम्हारी चिंता में मै जी नही सकूंगी। इससे अच्छा है बेटा तुम अपनी नानी के पास सेवा आश्रम चली जाओ।

वहा तुम्हारी देखभाल के लिए मां रहेगी तो मेरी चिंता कम हो जाएगी, बेटा।

दिव्या _पर क्या पिता जी इसके लिए तैयार होंगे?

रत्नवती _मै उसे मना लूंगी बेटा।

दरअसल रत्नवती के माता पिता भी राज घराने से थे।

उसकी मां राजवती और पिता ठाकुर मानसिंह दोनो धार्मिक प्रवृत्ति और सज्जन व्यक्तिव के थे। रत्नवती उनकी इकलौती संतान थी।

जब मानसिंह की मृत्यु हुई, उसके बाद राजवती अकेली हो गई।

राजवती ने एक आश्रम की स्थापना की। अपनी सारी जमीन जायदाद आश्रम के नाम कर दी, और वह आश्रम में रहने लगीं।

आश्रम हजारों एकड़ जमीन में बना huwa था। आश्रम, हजारों अनाथ बच्चे, त्यागी हुई महिलाए और वृद्ध लोगो का सहारा स्थल था।

आश्रम और उस क्षेत्र के लोग, राजवती को माता राजवती कहकर पुकारते थे।

रत्नवती ने दिव्या को अपनी मां के पास भेजने का फैसला किया।

दिव्या अपनी मां की चिन्ता को देखते हुए वहा जाने तैयार हो गई।

रत्नवती ने इस बारे में ठाकुर को बताया।

वह भी दिव्या को लेकर काफ़ी चिंतित और दुखी था। रत्नवती की बात पर वह भी राजी हो गया।

रत्नवती, दिव्या को लेकर अपनी मां के पास छोड़ आने के लिए वह भी तैयार हो गई।

जाते समय गीता, दिव्या की गले लगकर खूब रोई।

दिव्या ने जाते समय ठाकुर का पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाही, लेकिन ठाकुर ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया।

रत्नवती ने ड्राइयर से कार निकालने के लिए कह दिया था।

रत्नवती और दिव्या दोनों आश्रम के लिए निकल पड़े।

रत्नवती के पिता मानसिंह चंद्र पुर के जमीदार थे। चंद्र पुर एक जिला था, जो धरमपुर जिला से लगा हुआ था।

आश्रम नदी के किनारे एक गांव शिवपुर केपास बनाया गया था। भानपुर से लगभग 300km दूर था।

वे शाम होते तक आश्रम पहुंचे।

इधर राजेश सुमन के घर पहुंचा। सुमन राजेश को देखकर बहुत खुश हुई।

उसका पति सौरभ ड्यूटी पर गया था।

घर में नौकरानी, सुमन और उसका छोटा बच्चा ही था।

सुमन _आओ राजेश?

आओ बैठो? लाओ बैग को मुझे दो।

राजेश सोफे पर जाकर बैठ गया।

सुमन _कैसा गया तुम्हारा इंटरव्यू?

राजेश _उम्मीद से बेहतर?

सुमन _चलो, कुछ ही दिनों में आई ए एस बनने का तुम्हारा सपना पूरा हो जाएगा।

वैसे पहले से तुम और भी ज्यादा स्मार्ट हो गया है। बॉडी वाडी भी बहुत अच्छी बना रखी है।

चलो यहां आने के बाद कम से कम मुझे याद तो किया।

मुझे तो लगा था कि अब तुमसे कभी मुलाकात नहीं होगी? तुम तो मुझे बिल्कुल भूल ही गया था re

राजेश _नही मैम मै कैसे आपको भूल सकता हूं। मै तो हमेशा आपको याद करता था।

सुमन _चल झूठा कही का,,, अच्छा सुबह से तुमने कुछ खाया पिया है की नही।

एक काम करो तुम बाथरूम में जाकर फ्रेश हो जाओ और ये कपडे भी बदल लो, मै तुम्हारे लिए कुछ बना देती हूं। पता नही तुमने सुबह से कुछ खाया पिया है भी की नही।

राजेश को मेहमानों के कमरे में ले गया।

राजेश वहा कपड़ा चेंज कर फ्रेश होने लगा।

इधर रत्नवती और दिव्या आश्रम पहुंचने के बाद, अपनी मां राजवती से मिली। काफ़ी दिनो के बाद अपनी बेटी और नातिन को देखकर उसकी आंखें भर आई।

रत्नवती ने अपनी मां को दिव्या के बारे में सबकुछ बताया, ओर यहां आने का कारण भी बता कर रोने लगी।

राजवती _बेटी, तू दिव्या की चिन्ता मत कर अब वो मेरी जिम्मेदारी है।

भगवान पर विश्वास करो सब ठीक होगा, बेटा।

अगले दिन सुबह, रत्नवती अपनी मां से इजाजत लेकर और दिव्या को फोन करती रहना, कहकर वहा से भानगढ़ के लिए निकल गई।

अब दिव्या अनाथ बच्चों के संग अपना समय बिताने लगीं और बुजुर्गो की सेवा करने लगी।

उसकी अंतरात्मा यह गीत गाने लगी,,,

मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया,,,

इक हवा का झोका आया,,

टूटा डाली फूल टूटा डाली से फूल,,

,,,
 
राजेश बाथरूम में जाकर फ्रेश होने लगा। सुमन उसके लिए नाश्ता बनाने लगीं।

राजेश के फ्रेश होते तक नाश्ता भी तैयार हो गया।

सुमन _राजेश क्या तुम फ्रेस हो हो गए हो।

राजेश _जी मैम।

सुमन _चलो फिर नाश्ता कर लो।

राजेश, डायनिंग टेबल पर जाकर बैठ गया।

सुमन राजेश के लिए नाश्ता लगाया।

राजेश _मैम आपका बेबी दिखाई नहीं दे रहा है।

सुमन _अभी सो रहा है। जब उठेगा तब मिलाऊंगी।

राजेश नाश्ता करने लगा।

राजेश का चाय नाश्ता हो जानें के बाद।

सुमन _राजेश आओ मैं तुम्हे बेबी से मिलाती हूं।

सुमन राजेश को बेडरूम में ले गई।

बच्चा अभी भी सो रहा था।

राजेश,_कितना प्यारा है ये।

सुमन हसने लगीं।

सुमन _हुं, बिल्कुल तुम पर गया है।

राजेश _कुछ कुछ आप भी गया है।

सुमन हसने लगीं।

सुमन _थैंक्स राजेश,,

राजेश _वो किसलिए

सुमन_तुमने मुझे जीवन का सबसे बडा तोहफा जो दिया। मेरे जीवन को खुशियों से भर दिया।

राजेश और सुमन पुराने यादों में खो गए।

कुछ देर बाद सुमन का पति सौरभ ऑफिस से घर आया। उसने बेल बजाया।

सुमन _लगता है, वो घर आ गए हैं।

सुमन ने दरवाजा खोला।

सुमन _आप आ गए। देखो जी कौन आया है।

सौरभ _कौन आया है भई, बड़ी खुश लग रही हो।

अरे राजेश, तुम,,

राजेश _नमस्ते सर,,

सौरभ _नमस्ते, ये तो सच में बड़ी सरप्राईज है भाई।

वैसे कब आया राजेश, वो भी बिना कोई खबर दिए।

राजेश _हा सर वो आई ए एस का इंटर व्यू था न, इस लिए दिल्ली आया था। घर जानें से पहले सोचा आप लोगो से मिलता चलूं।

सौरभ _बडा अच्छा किया जो हमसे मिलने चले आए,

वैसे कैसा गया तुम्हारा इंटर व्यू?

राजेश _बहुत अच्छा सर।

सौरभ _चलो अब तुम्हारा सपना भी पूरा होने वाला है। वैसे घर में सब ठीक तो है न मां और पापा

राजेश _हा सर वे दोनो ठीक।

सौरभ _यार अच्छा किया जो यहां आ गया, सुमन तुम्हे काफी मिस करती थी।

हम लोग तो सोच रहे थे की तुम हम लोगो को भूल ही गए, न कोई खोज खबर न कोई फोन।

राजेश _नही सर आप लोगो को भला कैसे भुल सकता हूं मैं वो क्या है न कि मैं अपने दादा जी का गांव चला गया था, वहा मोबाइल ठीक से काम ही नहीं करता। और वहां गांव में भी कुछ परीक्षा की तैयारी के साथ कुछ कामों में भी उलझा रहा।

सौरभ _ओह।

अब आय हो तो कुछ दिन रह के ही जाना।

राजेश _नही सर परसो मेरी ट्रेन है। मै परसो शाम को निकल जाऊंगा।

मां का भी फोन आया था। कह रही थी कब आ रहे हो, तुम्हारे मामा के घर जाना है।

सौरभ _ओह, कोई बात नही।

सौरभ सुमन और राजेश तीनों आपस में बात चीत कर रहे थे की,,,

नौकरानी _मैम साब खाने में क्या क्या बनाना है?

सौरभ _सुमन, आज राजेश आया है बाहर घूमने चलते है, वही किसी अच्छे से होटल में खायेंगे।

सुमन _ठीक है जी।

कुछ देर में तीनो अपने कमरे में जाकर तैयार हो गए, बाहर घूमने जानें के लिए।

सुमन ने

नौकरानी को छुट्टी दे दी।

तीनों कार में घूमने के लिए निकल पड़े, साथ में बच्चे को भी ले गए।

सौरभ _राजेश मेरे खयाल से दिल्ली तुम पहली बार आ ये हो।

राजेश _हा सर।

वैसे दिल्ली में आप लोग सेट हुवे कि नही।

सौरभ _दिल्ली एक अच्छा शहर है पर यहां की सबसे बड़ी समस्या है ट्रैफिक और प्रदूषण। यहां के लोग सुद्ध हवा के लिए तरसते हैं भई। मै तो कहता हूं। सारी पेट्रो गाड़ियों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए और सिर्फ एलिक्ट्रिक गाड़ियों को ही अलाउ करना चाहिए।

शायद तभी इस समस्या का समाधान हो।

राजेश _आपने बिल्कुल ठीक कहा सर।

वे दिल्ली के प्रमुख जगह पर घूमे फिर एक अच्छे से होटल में जाकर खाना खाए।

खाना खाकर जब वे घर लौटे तो रात के 10बज चुके थे।

इधर आश्रम में राजवती, दिव्या को अपने साथ ही सुलाती थी। ताकि उसे अकेलापन महसूस न हो,,,

दोनो बेड पर सोए हुवे थे।

राजवती _बेटी तू तो डॉक्टर है चाहती तो अनचाहे गर्भ को गिरा भी सकती थी पर तुमने ऐसा नहीं किया,,,

कही तुम उस लड़के से प्यार तो नही करती?

दिव्या _मेरे प्यार करने से क्या होता है नानी,,

वो तो किसी और को चाहता है न।

राजबती _पर बेटा, तुम्हे एक बार इस बारे में बात तो करनी चाहिए थी, उनके मन में क्या है पता चल जाता, तुम्हारे प्रति वह क्या सोच रखता है?

दिव्या _नानी वो मुझे अपना अच्छा दोस्त समझता है। मै जानती हूं जब उसे पता चलेगा मेरे बारे में उसे बहुत दुख होगा, और मेरे खुशी के लिए वह अपनी खुशी को त्याग देगा। पर मै नही चाहती मेरे कारण वह अपनी खुशियों का त्याग करे।

राजवती _ बेटी तुम्हारे इस त्याग की भावना देखकर मैं अभिभूत हूं। तू अपने को कभी अकेली न समझना मै तुम्हारे साथ हूं बेटी।

दिव्या _थैंक यू नानी।

राजवती _वैसे क्या नाम है उस लड़के का?

दिव्या _राजेश।

राजेश _क्या उसकी फोटो है तुम्हारे पास?

दिव्या ने अपनी मोबाइल से राजेश का फोटो राजवती को दिखाया।

राजवती _ऐसा लगता है मैंने इसे कही देखा है।

दिव्या _दादी ये कैसा हो सकता है, वो तो यहां कभी आया नही।

राजवती _इसके मां बाप कौन है, क्या करते हैं?

दिव्या _इनका गांव हमारे गांव से लगा huwa है, इसके पिता जी बैंक में मैनेजर है, इनके मा पापा शहर में रहते है। इनके ताऊ जी और चाचा जी गांव में रहते है।

राजेश अभी गांव आया huwa है।

अभी राजेश आई ए एस की तैयारी कर रहा था। वह इंटरव्यू देने दिल्ली गया huwa है।

कहते हैं की एक समय मेरे दादा जी और राजेश के दादा जी घनिष्ट मित्र huwa करते थे।

राजवती _क्या नाम था राजेश के दादा जी का।

दिव्या _मानव प्रसाद।

राजवती _ओह, अब समझी। मुझे ऐसा क्यो लगा की राजेश को मैं जानती हूं।

मानव प्रसाद की शकल राजेश से मिलती है।

दिव्या _क्या आप उनके दादा जी को जानती थी।

राजवती _रत्ना को देखने के लिए तुम्हारे दादा जी के साथ, राजेश के दादा जी भी आया था। काफ़ी सज्जन व्यक्ति था। वह तुम्हारे दादा जी के साथ 3_4बार चंद्रपुर आया था।

तुम्हारे नाना जी, राजेश के दादा जी के विचारो से काफ़ी प्रभावित हुए थे।

दिव्या _राजेश भी बहुत अच्छा लड़का है नानी, हमेशा दूसरों की मदद करता है। दूसरो की मदद करते समय अपनी जान की भी परवाह नहीं करता।

गांवों के लोग उसे बहुत मानते हैं।

राजवती _तब तो मुझे भी राजेश से मिलने की इच्छा हो रही है।

दिव्या _ओ आएगा नानी, वो ज़रूर आएगा जब उसे मेरे बारे में पता चलेगा। पर नानी आप मूझसे वादा करो। उसे मूझसे शादी के लिए नही बोलोगे।

मैं नहीं चाहती की कोई उस पर दबाव बनाए।

राजवती _ठीक है बेटी, मै तुम्हारी भावनाओं का ख्याल रखूंगी।

इधर दिल्ली में ,,,

होटल से लौटने के बाद,,

राजेश अपने कमरे में आराम करने लगा।

सौरभ भी अपने कमरे में आराम करने लगा।

सुमन बच्चे को सुलाने के बाद, एक बहुत ही खूबसूरत सेक्सी नाइटी पहन ली। हल्की सी ओंठो पर लिपिस्टिक भी लगा ली।

सौरभ _वाउ क्या बात है? इस नाइटी में तो कयामत ढा रही हो मेरी जान। आज किसी पे बिजली गिराने का इरादा है क्या?

सुमन, सौरभ के बाजू, बेड में जाकर बैठते हुए बोली।

हूं, आप पर, ओर कौन है कमरे में जिस पर बिजली गिराओंगी।

सौरभ _भई इस बिजली को झेल पाने की क्षमता हममें तो नही है।

कोई ताकतवर ही झेल पाएगा। हम तो कुछ ही देर में ढेर हो जायेंगे।

सुमन _मैने आपसे कभी शिकायत की है क्या?

सौरभ _भई, वो पति ही क्या जो अपनी पत्नी की अरमानों को न जान सके।

आज राजेश आया huwa जाओ उसके पास अपनी अरमानों को पूरा कर लो।

सुमन _ये आप क्या कह रहे जी? आपके सामने ही मैं राजेश के कमरे में चला जाऊ। आपको बुरा नहीं लगेगा।

सौरभ _भई राजेश का भी तो तुम पर हक है, आख़िर उसने तुम्हे इतनी बडी खुशियां जो दी है। जाओ राजेश के पास, हो सकता है वो भी तुम्हारे लिए तड़फ रहा हो।

सुमन _नही जी, मै आपको यहां छोड़ कर उसके पास नहीं जा सकती।

सौरभ _ठीक है भई, फिर हम ही ले चलते है आपको, राजेश के पास।

सुमन _ये आप क्या कह रहे है जी? आप खुद ही राजेश के पास मुझे ले जायेंगे, मै शर्म से नजरे नही मिला पाऊंगी।

सौरभ _शर्म तो औरत की गहना है मेरी जान। शरमाओ खूब शरमाओ।

तभी तो सामने वाले का मजा डबल हो जाता है।

चलो मेरे साथ,,,

सौरभ, सुमन की हाथ पकड़ कर उसे राजेश के कमरे में ले गया।

राजेश आंख बंद कर सोने की कोशिश कर रहा था।

सौरभ _अरे यार राजेश, सो गया क्या?

राजेश _सर, मैम ,आप लोग, कुछ काम था क्या?

सुमन सिर झुकाए खड़ी थी।

सौरभ _ये क्या? इतने दिनो बाद मिलने आए हो अपनी सुमन से, और ऐसे ही सोने लगे।

राजेश _मै समझा नही सर।

सौरभ _भई, सुमन पर जितना हक हमारा है उतना हक तुम्हारा भी है। इतने दिनो बाद तुम दोनो मिले हो। इस हसीन रात को यादगार बनाओ भई। पता नही जिंदगी में फिर मौका मिले या न मिले दोबारा। दिल की कोई हसरत बांकी न रह जाए।

सुमन शर्म से गड़ी जा रही थी।

राजेश _सर ये आप क्या कह रहे है?

सौरभ _अरे यार मैं ठीक कह रहा हूं। आज और कल सुमन तुम्हारे साथ सोएगी। परसो तो तुम घर चलें जाओगे।

सुमन तो मूझसे कुछ कहती नही पर मै जानता हूं, मै सुमन को संतुष्ट नहीं कर पाता।

मै चाहता हूं इन दो दिनों, सुमन को जी भर कर प्यार दो।

अच्छा अब मैं चलता हूं, तुम दोनो इंज्वॉय करो।

राजेश _रुको सर,,,

सौरभ रुक गया,,

सौरभ _बोलो भई क्या बात कहनी है?

राजेश _सर आपने कहा, मैम को आप संतुष्ट नहीं कर पाते,,

पर मैं समझता हूं की, हर महीला को, हर व्यक्ति संतुष्ट कर सकता है। बस आदमी को तरीके पता हो और यह पता हो की स्त्री को क्या पसंद है।

आप इन दो दिनों हमारे साथ रहे तो मैं समझता हूं की आप मैम को अच्छे से संतुष्ट करना सीख पाएंगे।

सौरभ _ओह, ये तो बड़ी अच्छी बात है। मै अगर सुमन को संतुष्ट करना सीख जाऊ, तो इससे बड़ी खुशी मेरे लिए और कुछ नहीं होगी। पर मेरे रहने से तुम दोनो को खुलकर इंजॉय करने में दिक्कत तो नही होगी।

राजेश _नही सर ऐसा नही होगा, बल्कि आपके जुड़ जानें से मजा डबल हो जायेगा। क्यू मैम?

सुमन शर्म से पानी पानी होने लगीं।

उसके दिल धक धक करने लगा।

उसके पति के सामने ही राजेश उसे चोदेगा।

हे भगवान, मै शर्म से मर न जाऊ।

राजेश _चलो हम हाल में चलते है?

तीनों हाल में आ गए।

सर बेड का गद्दा निकलकर फर्श पर बिछा देते है।

सौरभ बेड से गद्दा निकालकर ले आया और हाल के फर्श पर बिछा दिया।

राजेश _सर आप देखते जाइए। मै मैम और मेरे बीच की कामक्रीड़ा। फिर आप भी मैम को संतुष कर सकेंगे।

सौरभ सोफे पर बैठ कर देखने लगा।

राजेश सुमन को पीछे से बाहों में भर लिया।

दोनो हाथो से नाइटी के ऊपर से ही उसकी चूंची मसलने लगा।

उसके खुले हुवे पीठ को चूमने लगा।

राजेश की हरकत से सुमन अपनी आंखें बन्द कर ली।

राजेश, सुमन की कान के पीछे चाटने लगा।

गर्दन को चूमने चाटने लगा।

राजेश की हरकत से सुमन उत्तेजित होकर सिसकने लगीं।

सौरभ राजेश की गतिविधियों को एक टक देखने लगा।

राजेश अब सुमन की नाइटी को उपर कर निकाल दिया।

अब वह ब्रा और पैंटी में थी।

राजेश, सुमन को अपनी ओर घुमाया।

सुमन की आंखों में देखा।

दोनो की नजरे मिली।

राजेश सुमन की ओंठ को अपने मुंह में भरकर चूसने लगा।

सुमन के हाथ पैर कपकपने लगे।

वह उत्तेजित हो कर राजेश का ओंठ चूसने लगी।

राजेश अब नीचे बडा उसकी गर्दन को चूमने लगा।

सुमन सिसकने लगी।

राजेश अब अपने हाथ पीछे ले गया और सुमन की ब्रा की हूक खोल दिया।

और अपना टी शर्ट उतार दिया।

राजेश सुमन की मस्त दुध से भरी चूंची को मुंह में भर कर चूसना शुरु कर दिया।

वह दुध को गटक गटक कर पीने लगा।

वह अपने हाथ से दुध को मसल मसल कर निचोड़ निचोड़ कर दुध पीने लगा।

सुमन सिसकने लगी। प्यार से राजेश की बालो को सहलाने लगी।

राजेश की गतिविधियों को देखकर सौरभ भी गर्म होने लगा।

राजेश कुछ देर चूची पीने के बाद।

नीचे बडा फिर उसकी खूबसूरत बदन को चूमने चाटने लगा। उसकी गहरी नाभी को चाटने लगा।

सुमन बहुत अधिक उत्तेजित हो गई।

वह मादक सिसकारी निकालने लगीं।

ऊ आह, उन,,,

राजेश अब सुमन को बाहों में उठा लिया और उसे गद्दे पे लिटा दिया।

उसकी पैर चूमते हुए आगे बडा।

उसकी एक टांग सहलाते हुवे दूसरे को चूमते हुए आगे बढ़ा।

सुमन सिसक रही थी।

राजेश अब सुमन की पेंटी के ऊपर से उसकी boor को सहलाया।

सुमन मादक सिसकारी निकालने लगी।

राजेश सुमन की पेंटी को पकड़ कर टांग से नीचे खींचते हुवे पैरो से अलग कर दिया।

फिर पेंटी को सूंघा, पेंटी गीली हो चुकी थी।chut रस की गंध से राजेश मदहोश हो गया।

वह पेंटी को सौरभ की ओर फेका।

सौरभ ने पेंटी कैच किया।

उसमे देखा सुमन की पेंटी एकदम गीली हो गई है। वह भी पेंटी को सूंघने लगा।

उसकी गंध से उसका शरीर भी मदहोश हो गया।

उसका लंद तन गया।

इधर राजेश ने सुमन के चूतड के नीचे तकिया लगा दिया। और टांग को फैला दिया।

सुमन के टांगो के बीच में अपना सिर ले जाकर chut चाटना शुरू कर दिया।

सुमन उत्तेजना में अपना सिर पटकने लगीं।

मादक सिसकारी निकालने लगीं।

ओह,, आह,, ओह मां,, आह,,,

राजेश जीभ से सुमन की भग्नाशा को रगड़ने लगा।

सुमन की उत्तेजना चरम पर पहुंच गया।

शौरभ आश्चर्य आंखें गड़ाए देखने लगा।

इधर सुमन बहुत अधिक उत्तेजित हो गई। वह खुद को ज्यादा देर तक न रोक सकी और चीखते हुए झड़ने लगी।

राजेश ने chut चाटना बंद कर दिया।

राजेश _सर देखा न औरत का झाड़ना कितना आसान है।

राजेश सौरभ के बाजू बैठ गया।

सौरभ _सच में यार तुमने तो कमाल कर दिया।

इधर सुमन अपने आंखें खोली।

वह राजेश की ओर देखने लगा।

राजेश _मैम आप ठीक तो हैं न।

सुमन शर्मा गई।

राजेश सोफे से खड़ा हो गया।

वह सुमन के पास गया।

सुमन उठ कर बैठ गई।

राजेश का लोवर और चड्डी उतार कर नंगा कर दिया।

राजेश की चड्डी उतरते ही उसका घोड़े जैसा लंद हवा में लहराने लगा।

उसके मोटे और लम्बे लंद को सौरभ आश्चर्य से देखने लगा।

सुमन राजेश के लंद को पकड़ कर हिलाने लगी। उसका अंडकोश चाटने लगी।

फिर उसके टोपा को मुंह में भर ली।

धीरे धीर पूरा लंद मुंह में भर कर अंदर बाहर करने लगी।

राजेश को बहुत मजा आने लगा, उसका लंद और मोटा लंबा हो गया।

इधर सौरभ भी गर्म हो चुका था। वह अपने कपडे उतार कर नंगा हो गया। और अपना खड़ा लंद सहलाने लगा।

इधर राजेश ने सुमन को घोड़ी बना दिया।

राजेश _सर आप मैम का boor चांटिए।

सौरभ सोफे से उठा और सुमन के पीछे जाकर उसकी boor चाटने लगा।

सुमन राजेस का लंद चूसने लगी।

सौरभ के boor चाटने से सुमन फिर सिसकने लगी।

सुमन _राजेश अब और रहा नही जा रहा, चोदो मुझे।

राजेश अब सुमन के पीछे गया।

सौरभ आगे आ गया। और अपना लंद सुमन को पकड़ा दिया।

इधर राजेश ने अपना लंद सुमन के boor में सेट कर एक जोर का धक्का मारा लंद boor फाड़कर एक ही बार में फच की आवाज करता huwa अंदर चला गया।

सुमन चीख उठी।

इधर सुमन सौरभ का लंद हिला रही थी तो पीछे से राजेश, उसकी boor चोद रहा था।

लंद बड़ी तेजी से boor में अन्दर बाहर होने लगा।

सुमन को बहुत मजा आने लगा। उसकी मुंह से मादक सिसकारी निकल कर हाल में गूंजने लगा।

सौरभ भी काफ़ी गर्म हो चुका था। उसका लंद अकड़ गया था।

राजेश ने अपना लंद बाहर खींच लिया।

राजेश _सर अब आप chut मारो।

सौरभ पीछे आया और अपना लंद सुमन के chut में डालकर चोदने लगा।

राजेश सामने आ गया और अपना लंद सुमन के मुंह में डाल दिया।

कुछ देर तक सौरभ, सुमन की boor चोदता रहा। फिर लगा वो झड़ सकता है।

सौरभ _राजेश मै झड़ने की स्थिति में पहुंचने वाला हूं।

राजेश _सर अपनी सांस अंदर खींचो।

सौरभ चोदना बंद कर, अपनी सांस ऊपर खींचा। अपने पर नियंत्रण पाया।

इधर राजेश सोफे पर बैठ गया।

सुमन को अपने गोद में बिठा लिया।

सुमन लंद को boor में डालकर उठक बैठक करने लगी।

राजेश भी नीचे से अपनी कमर हिला हिला कर सुमन की मदद करने लगा।

लंद सुमन की boor में गपागप अंदर बाहर होने लगा।

दोनो को संभोग का अपार सुख प्राप्त होने लगा।

सुमन की मादक सिसकारी कमरे में गूंजने लगी।

सुमन खुद को ज्यादा देर और न रोक सकी और फिर से झड़ने लगी।

राजेश के लंद में बैठ कर सुस्ताने लगीं।

इधर सौरभ खड़ा था और लंद सहला रहा था।

सुमन कुछ देर बाद होश में आई।

राजेश ने सुमन को अपने गोद से हटाया।

और सोफे पर घोड़ी बना दिया।

सौरभ ने सुमन की chut चाटना शुरु कर दिया।

राजेश सोफे पर चढ़ गया और अपना लंद सुमन के मुंह में डाल दिया।

शौरब के chut चाटने से सुमन फिर से गर्म होने लगीं।

राजेश गद्दे पर जाकर पीठ के बल लेट गया।

सुमन ने सौरभ से chut चटवाना रोका और राजेश के ऊपर आकर अपना लंद boor में डालकर बैठ गई औरउछल उछल कर chudna सुरु कर दिया।

कुछ देर बाद वह राजेश के लंद से उठी और अपने पति के लंद पर बैठ गई।

उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश अपना लंद सुमन के मुंह में डाल दिया।

कुछ देर

सौरभ _आई एम कमिंग, आई एम कमिंग,,

सुमन तेजी से सौरभ के लंद से उठा।

सौरभ खुद को रोक नहीं सका और हवा में झड़ने लगा।

वीर्य उसके उसी के जांघ में गिरने लगा।

इधर गद्दे पे लेट गई।

राजेश सुमन को अपनी गोद में उठा लिया और लंद को boor में सेट कर सुमन को हवा में उछाल उछाल कर चोदने लगा।

इधर सौरभ आंखें बन्द कर झड़ने का आनंद लें रहा था।

उसने आंखें खोला। राजेश की ओर आश्चर्य से देखा। सुमन चीख रही थी।

राजेश उसे हवा में उछाल उछाल कर चोद रहा था।

सौरभ राजेश की मर्दानगी को सैल्यूट किया।

कुछ देर बाद राजेश ने सुमन को गद्दे में लिटा दिया।

उसकी कमर के नीचे तकिया लगा दिया और टांगो को अपने कंधे में डाल दिए।

फिर अपने लंद को सुमन की boor में डाल कर गाच गच चोदने लगा।

लंद सुमन की boor की गहराई तक जाकर बच्चेदानी को ठोकने लगा।

कमरे में सुमन की मादक सिसकारी गूंजने लगी।

आह मेरे राजा और चोदो मुझे, मेरी सारी प्यास बुझा दो,,, आह पूरा अंदर तक जा रहा है तेरा,,, आह उन और तेज आह,,

फाड़ दे मेरी boor

राजेश _ले मेरी रानी,, और ले ले, बुझा ले अपनो प्यास,,, ले एक और ले,,,

राजेश तेज तेज़ चोदने लगा,, सुमन खुद को न रोक सकी और चीखते हुवे झड़ने लगी,,

राजेश रुका नहीं और तेज तेज़ चोदता रहा और कुछ देर में वह भी सुमन के अंदर झड़ने लगा,,,

आह आह,, मां आह, ह ह,,,

सुमन ने राहत की सांस ली।

तीनों सुस्ताने लगे,,,

कुछ देर बाद तीनों नार्मल हुवे,,,

सौरभ _ यार मजा आ गया,,, तुम तो कमाल के खिलाड़ी हो,,,

इधर सुमन को बड़ी शर्म आ रही थी, पति के सामने ही निर्लज होकर राजेश से chud रही थी।

वह अपने कपडे लेकर अपने कमरे में भाग गई।

राजेश और सौरभ दोनो हसने लगे।

सौरभ _यार तुमने तो मुझे काफ़ी कुछ सीखा दिया। मुझे लगता है कि अब मैं भी सुमन को काफ़ी हद तक संतुष्ट कर पाऊंगा।

राजेश _कल देखेंगे सर आप कितना सीखे।

अब चलो हम भी आराम करते है, रात काफ़ी हो गई है।

दोनो अपने कमरे मे चले गए।

इधर आश्रम में,,,,

राजवती _दिव्या बेटा उठो, राजवती ने दिव्या को जगाया।

दिव्या आंखें खोली,,,

राजवती _दिव्या बेटा चलो नहाकर तैयार हो जाओ सुबह प्राथना सभा में जाना है न,,,

दिव्या _जी नानी,,

आश्रम में पतिदिन सुबह प्रार्थना सभा होता था और शाम को भजन संध्या, आश्रम में रहने वाले सभी लोगो को सभा में उपस्थित होना अनिवार्य था। आसपास के गांव वाले भी सभा में आते थे।

सभा में सभी लोग इकठ्ठा हो चुके थे।

माता राजवती के आने का लोग इंतजार कर रहे थे।

कुछ देर में राजवती और दिव्या दोनों प्रार्थना सभा पहुंचे।

पुजारी ने भगवान कृष्ण की पूजा अर्चना किया उसके बाद राजवती ने दिव्या को प्रार्थना गीत गाने का आग्रह किया,,,

राजवती _बेटा तुम भी भगवान के सामने अपनी प्रार्थना गीत गाओ,,,

दिव्या ने गीत गाना शुरू किया,,,

सत्यम शिवम् सुंदरम,,,,

सत्यम शिवम सुंदरम,,,,

प्रार्थना गीत सुनकर वहा मौजूद सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए,,,

सभी लोग दिव्या के साथ गुनगुनाने लगे,,,

सभी लोगो को दिव्या को अपनी ओर आकर्षित किया,,,,

कौन है ये, बहुत अच्छा गाती है,,,,

ये माता राजवती की नातिन है,,

कल ही आश्रम आई है,,,,
 
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अगले दिन सौरभ, अपना ऑफिस चला गया। कार घर में छोड़ गया। सुमन को यह कह कर की, राजेश को आज दिल्ली घुमा देना।

राजेश और सुमन दिन भर दिल्ली के प्रमुख स्थानों का भ्रमण किया।

रात में तीनो ने फिर से जमकर सेक्स का मजा लिया।

फिर अगले दिन राजेश अपने घर के लिए ट्रेन पकड़ा।

इधर आश्रम में एक दिव्या सुबह प्रार्थना सभा में गीत और शाम को भजन संध्या में भजन गाकर वहा रहने वालो का दिल जीत लिया।

आश्रम में न केवल स्कूल था बल्कि एक बडा hospital भी बनाया गया था जिसमे आश्रम के लोगो का इलाज तो होता ही था साथ में दुर दराज के गांव के लोग भी इलाज के लिए आते थे।

दिव्या हॉस्पिटल में अपनी सेवा देने लगी।

इधर 24घंटे की सफर के बाद राजेश जब अपना घर पहुंचा तो शाम हो चुका था।

जब वह घर पहुंचा तो स्वीटी ने दरवाजा खोली।

वह राजेश को देखकर उससे लिपट गई।

स्वीटी _भईया आप आ गए, हम कब से आपके आने का ही इंतजार कर रहे थे।

राजेश _ओह मेरी बहना कैसी है तू?

स्वीटी _मै ठीक हूं भईया।

सुनिता कीचन में काम कर रही थी।

स्वीटी _मां, भईया आ गया?

सुनिता कीचन से बाहर आई।

सुनिता _अरे बेटा तू आ,,

राजेश _हा मां,

राजेश ने पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

सुनिता _जी ता रह बेटा।

राजेश _कैसी हो मां?

सुनिता_मै तो ठीक हूं बेटा, बस तुम्हारी ही चिंता सताती रहती है। कैसा गया तेरा इंटर व्यू।

राजेश _बहुत अच्छा मां।

स्वीटी _मां, अब भईया कुछ ही दिनों में आई ए एस अफसर बन जायेगा।

सुनिता _हा, मेरे बेटा ज़रूर मेरा नाम रौसन करेगा।

बेटा तू सफर से थक गया होगा। जा अपने कपडे उतार कर फ्रेस हो जा, मै तेरे लिए काफ़ी बनाती हूं।

, राजेश _ठीक है मां।

राजेश अपने कमरे में चला गया। और अपने कपडे उतार कर फ्रेस हो गया।

वह हाल में आया।

राजेश _स्वीटी कैसी चल रही है तुम्हारी कालेज की पढाई।

स्वीटी _बहुत अच्छा भईया, कालेज के लड़के लड़किया तुम्हे अभी भी बहुत मिस करते है भइया।

राजेश _, अच्छा।

रोहन सुधर गया है कि वैसा ही है।

स्वीटी _रोहन तो अब अच्छा लड़का बन गया है।

इस साल बेस्ट स्टूडेंट की दौड़ में सबसे आगे है। वह तो आपको अपना आदर्श मानता है।

सुनिता _लो बेटा पहले नाश्ता कर लो, पता नही सुबह से कुछ खाया भी है कि नही।

सुनिता _अरे बेटा तुम्हारा इंटरव्यू तो दो दिन पहले ही हो चुका था, फिर दिल्ली में,,,

राजेश _मां, आपने बताया था न सुमन मैम दिल्ली में रहती है, तो मेने सोचा क्यूं न उससे मिल लूं, तो दो दिन उसी के यहां रुका था।

सुनिता _ओह, कैसी है सुमनऔर उसका बच्चा।

राजेश _दोनो अच्छे है मां।

सुनिता _और गांव में सब कैसे है?

राजेश _वहा भी सब मजे में हैं?

सुनिता _बेटा दो माह पहले ही न्यूज में दिखाया जा रहा था कि नक्सलियों ने वहा के नेताओ को मार डाला और ठाकुर की बेटी गीता और ठाकुर दोनो का अपहरण कर लिया है?

फिर अगले दिन पता चला की उसे रिहा करा लिया गया है।

पदमा दीदी बता रही थी की तुम भी दिव्या के साथ गणेश पुर गया था मेला देखने,।

हम तो बहुत घबरा गए थे।

राजेश _ओ हा मां, सैनिकों ने नक्सलियों से गीता और ठाकुर को छुड़ा लाए।

कुछ देर बाद, शेखर भी बैंक से घर आ गया।

वह राजेश को देखकर बहुत खुश huwa

शेखर ने इन्टर व्यू के बारे में पूछा।

राजेश ने कहा, इटरव्यू तो बहुत अच्छा गया है पापा पूरी उम्मीद है कि मेरा चयन हो जायेगा।

शेखर बहुत खुश हुआ।

रात्रि भोजन करने के बाद भी चारों आपस में बात चीत करते रहे,,

सुनिता _सुनोजी रात के 10बज गए हैं, अब बाते कल होती रहेगी । राजेश ट्रेन के सफर से थका होगा उसे आराम करने दो।

बेटा तुम जाओ अपने कमरे मे और आराम करो, स्वीटी तुम भी जाओ अपने कमरे में।

राजेश _ठीक है मां, गुड नाईट पापा, गुड नाईट मां।

राजेश अपने कमरे में चला गया।

वह ट्रेन की सफर से थका हुआ महसूस कर रहा था।

वह अपने बेड में जाकर गहरी नींद में सो गया।

कुछ देर बाद सुनिता उसके रूम , पानी बातल

लेकर आई।

उसने देखा राजेश गहरी नींद में सो गया है।

वह मुस्कुराई और चादर ओढ़ा कर, वहा से चली गईं।

अगले दिन सुबह,राजेश देर तक सोया huwa था।

सुनिता कमरे में आई।

सुनिता _अरे, राजेश बेटा कितने देर तक सोता रहेगा, तुम्हरी तबियत तो ठीक है ना, उसकी बालो को सहलाते हुए पूछा।

राजेश ने अपनी आंखें खोला।

राजेश _मां आप कब आई।

सुनिता _अरे बेटा, तू तो जल्दी उठ जाता था, आज देर तक सोया है तो मुझे तुम्हारी चिंता हुई, तुम्हारी तबियत तो ठीक है न।

राजेश _मै बिल्कुल ठीक हूं मां।

सुनिता _पर मुझे तो कुछ ठीक नहीं लग रहा है?

राजेश _ऐसा क्यूं?

सुनिता _पहले तू जब आता था, सुबह उठ कर मुझे गुड मॉर्निंग बोलने कीचन में आता था।

पर मुझे लगता है तुम पहले जैसे नहीं रहे।

राजेश _अरे नही मां, मै तो पहले जैसा ही हूं, तुम्हारा राजेश बेटा,,,

सुनिता _चल अब उठ जा, नहाकर तैयार हो जाओ, मै नाश्ता बना रही हूं। तुम्हारे पापा और स्वीटी के साथ तुम भी नाश्ता कर लेना।

राजेश _ठीक है मां,,

राजेश उठ कर बैठ गया।

सुनिता _अच्छा, नहाकर आ जाना डायनिंग टेबल पर,,

सुनिता जाने को हुई तो, राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया।

सुनिता ने पलट कर देखा।

सुनिता _अरे क्या कर रहा है छोड़ न।

राजेश ने उसे अपनी ओर खींच कर गोद में बिठा लिया।

सुनिता _अब छोड़ो भी दिखावा मत करो,,

राजेश _क्यू दिखावा क्यू लग रहा है?

सुनिता _तू बदल चुका है, गांव में तो तुम्हारी भाभी और ताई के कारण तो अपने मां को भी भूल गया। मेरे लिए तो फोन में बात करने का समय नहीं रहता तुम्हारे पास।

राजेश _ओह तो ये बात है, आओ आपकी नाराजगी अभी दूर कर देता हूं।

राजेश ने ने एक एक हाथ से उसकी चूची को मसला और फिर उसके गाल में किस कर दिया।

सुनिता _, न छोड़ो मुझे,,,

मुझे नई करना गंदा काम,,,

पाप पड़ता है।

वह राजेश के गोद से उठी और तेजी से वहा से भागी,,,

राजेश _अरे मां रुको न,,,

सुनिता शर्माते हुवे वहा से भाग कर किचन में चली गईं और नाश्ता बनाने लगी।

इधर राजेश नहाकर तैयार हुआ और हाल में आ गया। जहां शेखर पहले से मौजूद था।

स्वीटी भी पहुंच गई। तीनों ने नाश्ता किया।

नाश्ता करने के बाद शेखर अपना ऑफिस निकल गया। कुछ समय के बाद स्वीटी भी अपनी कालेज चली गईं।

राजेश, भी तैयार होकर अपने कमरे से बाहर निकला।

सुनिता _अरे राजेश बेटा तू कही जा रहा है।

राजेश _हा मां काफ़ी दिन हो गए दोस्तो से मिले।

सुनिता _ठीक है पर जल्दी आ जाना, दोपहर मे तुम्हारे लिए खाना बनाकर रखूंगी।

राजेश _, ठीक है मां।

राजेश बाइक लेकर भगत से मिलने उसके पार्टी कार्यालय पहुंचा।

वहा जाने पर पता चला की भगत किसी कार्य से बाहर गया है।

उसने भगत को काल किया।

भगत_अरे राजेश भाई, कैसे हो?

राजेश _मै बिल्कुल ठीक हूं। तुमसे मिलने आया था। पता चला की तुम किसी काम से बाहर गए हो।

भगत _हां भाई कुछ लोगो से मिलने आया था। आप कब आए दिल्ली से बताया नही।

राजेश _कल शाम को, सफर से थक गया था सोचा आज मिल लूंगा।

भगत _, भाई पहले बता दिया होता तो यहां नही आता। सारी भाई

राजेश _कोई बात नही, तुम अपना काम निपटाओ, शाम को मिलते हैं।

भगत _ठीक है भाई, मै वहां पहुंचते ही काल करूंगा।

राजेश _ठीक है।

राजेश सोचा कहां जाऊं?

क्यू न सुजाता से मिलु, पर वो तो मूझसे खफा हैं? पिछले बार आया था तो मिलने से मना कर दिया था।

फिर सोचा गलती तो मेरी ही है, पर इतने दिनो बाद हो सकता है उसका विचार बदल गया हो, वो भी मूझसे मिलना चाहती हो।

मुझे उससे मिलने जाना चाहिए।

वह उसके ऑफिस गया।

वहा पहुंचने पर पता चला मैडम अभी आई नही है।

वह वेटिंग रुम में इंतजार करने लगा।

कुछ देर बाद, सुजाता अपनी ऑफिस पहुंची।

उसके ऑफिस पहुंचने के बाद, कंपनी के सीईओ कुछ फाइल लेकर उसके रुम में आया। काफ़ी देर तक वे फाइल पे चर्चा करते है।

जब सीईओ उसके रुम से गया।

सुजाता की असिस्टेंट, उसके रुम में आई।

कई लोग वेटिंग रुम में बैठकर, सुजाता से मिलने के लिए इंतजार कर रहे थे।

सुजाता ने बताया की कौन कौन आपसे मिलना चाहते है?

असिस्टेंट ने सुजाता को बताया कि पिछले बार एक राजेश नाम का लड़का आपसे मिलने आया था, वह फिर आया है आपसे मिलना चाहता है। मैने उनसे कहा था मैडम से आप ऐसे नही मिल सकते मिलने से क्या अपॉयमेंट लेना पढ़ता है? पर मैनेजर ने कहा की वह राजेश को जानता है, उसे मिलवा दो।

सुजाता ने रुम में लगे स्क्रीन से,वेटिंग हाल पे बैठे राजेश को देखा।

सुजाता _कब से आया है।

असिस्टेंट _2घंटा हो गया।

सुजाता _उनसे पूछो क्या काम है मूझसे?

असिस्टेंट_ठीक है मैम।

असिस्टेंट राजेश के पास पहुंची।

असिस्टेंट _राजेश जी, मैम पूछ रही है की किस काम से उनसे मिलना चाहते हो, मैम बिना किसी काम के किसी से मिलती नहीं।

राजेश _जी,, काम तो कुछ था नही, बस मिलने का मन किया तो चला आया?

असिस्टेंट _क्या? बिना किसी काम के तुम मैम से मिलने चले आए? जानते हो जिससे तुम मिलने आए हो वो कौन है? तुम्हारा मिलने का मन किया तो मिलने चले आए, तुम तो ऐसे बोल रहे हो जैसे वो तुम्हारी गर्लफ्रेंड है?

देखो तुम यहां से चले जाओ। बड़े बड़े लोगो को भी मैम से मिलने के लिए काफ़ी इंतजार करना पड़ता है।

और तुम उनसे यू ही मिलने चले आए।

पता नही गार्ड तुम्हे अंदर कैसे आने दे देता है?

बेहतर होगा तुम यहां से चले जाओ।

इधर सुजाता स्क्रीन से सब देख रही थी।

राजेश, वहा से निराश होकर जाने लगा।

इधर असिस्टेंट, सुजाता के केबिन में आई।

असिस्टेंट _मैम मैने उस लड़के को भगा दिया। कह रहा था, आपसे मिलने का मन किया तो वह मिलने ऑफिस चला आया।

सुजाता ने असिस्टेंट की गाल पर एक जोर का तमाचा जड़ दिया।

असिस्टेंट आश्चर्य से अपनी गाल को पकड़े सुजाता की ओर देखने लगी।

सुजाता _, मैने तुम्हे, वो क्यू मिलना चाहता है ?ये जानने के लिए भेजा था। उससे बदतमीजी करने के लिए।

गार्ड को फोन करो, उसे लेकर आने कहो।

असिस्टेंट _ठीक है मैम।

असिस्टेंट ने गार्ड फोन लगाया। राजेश को जानें से रोकने और मैडम से मिलने के लिए कहना,,,

ये मैडम का आदेश है?

गार्ड ने देखा, राजेश तो अपने बाइक के पास पहुंच गया है वह दौड़ते हुए गया, और बोला की मैम बुला रही है।

राजेश गार्ड की बात सुनकर खुश हुआ, उसे लगने लगा की सुजाता उसे अब तक भूली नहीं है। वो मेरी गलतियों को माफ कर देगी। यह सोचकर वह फिर से सुजाता के केबिन के सामने पहुंचा।

असिस्टेंट _जाओ, मैम तुम्हे बुलाई है!

राजेश अंदर गया।

राजेश वहा जाकर चेयर पर बैठ गया।

सामने सुजाता पीछे मुंह कर बैठी थी।

दोनो कुछ बोल नहीं रहे थे। केबिन में खामोशी थी।

कुछ देर बाद, सुजाता ने अपना मुंह खोला?

सुजाता _यहां क्यू आए हो? क्या काम था मूझसे?

राजेश _बस मिलने का मन किया। काफ़ी दिन हो गए,,, आपसे ,,,

सुजाता _देखो राजेश, अच्छा यही होगा कि हमारे बीच जी भी संबंध था उसे भूल जाओ। अब सबकुछ खत्म हो गया है।मैंने खुद को बड़ी मुस्किल से संभाला है। मेरेपास और टूट कर बिखरने की हिम्मत नही है।

जानती हूं तुम्हारी वजह से ही ये कंपनी डूबने से बचा है। तुमने बड़ा अहसान किया है हम पर,,

तुम्हारे सामने चेक बुक रखा रखा है। तुम हम पर किए अहसान के बदले जितना रकम लिखना चाहते हो, लिख सकते हो।

या कंपनी में हिस्सेदारी चाहते हो तो वो भी मिल जायेगा।

पर पहले जो कुछ भी हमारे बीच था वो अब फिर से शुरू नही हो सकता।

सुजाता की बात सुनकर राजेश निराश हो गया। वह केबिन से बाहर चला गया।

इधर राजेश का कोई जवाब न आते सुन अपनी चेयर को घुमाया।

सामने देखा तो राजेश चला गया था।

उसने चेक बुक देखा, उसपर राजेश ने लिखा था, सारी मैम अब मैं आपको परेशान करने कभी अापके सामने नही आऊंगा।

उसे पढ़ते ही सुजाता की आंखों से आंसू बहने लगी।

वह स्क्रीन से राजेश को जाते हुए देखने लगी। जब राजेश चला गया।

वह चेयर पर बैठ कर रोने लगी।

इधर राजेश, उदास मन से घर पहुंचा।

सुनिता ने दरवाजा खोला।

सुनिता _अरे तू आ गया? जा कर कमरे में फ्रेस होकर आ जा। मै तेरे लिए खाना लगाती हूं।

राजेश _रहने दो मां, मुझे भूख नहीं है। तुम खा लो।

सुनिता _क्या huwa तुम्हारा मुंह क्यूं लटका हुआ है।

राजेश _कुछ नही मां।

राजेश अपने कमरे में जानें लगा।

सुनिता भी उसके पीछे पीछे कमरे में गई।

राजेश बेड में जाकर लेट गया।

सुनिता _क्या बात है बताओ मुझे?, तुम उदास क्यों हो? घर से जाते समय तो खुश थे।

राजेश ने कुछ नहीं बोला।

सुनिता _कही तुम सुजाता के पास तो नही गए थे?

राजेश खामोश रहा,

उसकी खामोशी देखकर सुनिता समझ गई।

सुनिता _ओह तो मेरे मना करने के बावजूद तुम उससे मिलने गए थे।

राजेश _बेटा मैने तुमसे कहा था न, बड़े लोग बड़े मतलबी होते है। जब तक काम रहता है। मीठी मीठी बातें करते है? मतलब निकल जानें पर दुध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक देते हैं। उन्हे किसी की भावनाओ से कोई मतलब नहीं।

तुम तो मेरा कहना मानता ही नहीं, मेरा कहना मानता ही नहीं, मेरा मना करने के बाद भी उससे मिलने चला गया।

सुनिता सुबकने लगीं।

तुम्हे क्या पता तुम्हे उदास देखकर, मेरे दिल पर क्या बितती है, पर तुम्हे मेरी चिंता कहा।

राजेश _सारी मां, मैने उसे कह आया मां कि अब उसके सामने कभी नहीं आऊंगा।

सुनिता _ठीक किया बेटा, उन लोगो से दूर रहने में ही हमारी भलाई है।

सुनिता सुबकते हुए बोली।

राजेश _मां, बोला न अब नही जाऊंगा उसके सामने, अब चुप हो जाओ।

चलो मेरे लिए खाना लगाओ, बड़ी भूख लगी है। आज मैं आपके हाथो से खाना खाऊंगा।

राजेश ने अपनी मां को खुश करने के लिए कहा,,,

सुनिता अपनी आंखें पोछते हुए बोली।

सुनिता _चल हाथ मुंह धोकर आजा।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश हाथ मुंह धोकर डायनिंग टेबल पर जाकर बैठ गया।

सुनिता उसके लिए खाना लगाई।

सुनिता ने अपने हाथो से राजेश को खाना खिलाई।

राजेश के खाने के बाद स्वयं भी भोजन की।

राजेश अपने कमरे में आराम कर रहा था।

सुनिता उसके कमरे में गई।

राजेश _क्या बात है मां? कुछ काम था?

सुनिता _बेटा कल तुम्हारे मामा के यहां जाना है न, तुम्हारे मामी के बच्चे का नामकरण संस्कार कार्यक्रम रखा गया है, तो मार्केट से समान लेना था। चलो मार्केट चलते है। मै तैयार हो रही हूं तुम भी तैयार हो जाओ।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश अपना कपड़ा पहनकर तैयार हो कर हाल में आ गया।

वह सोफे पर बैठा था तभी, सुनिता ने राजेश को आवाज दी।

सुनिता _राजेश बेटा, जरा इधर आना।

राजेश _क्या है मां?

सुनिता इस समय पेटीकोट में थी।

ब्रा पहन रही थी।

सुनिता _बेटा देखो न ब्रा का हुक नही लग रहा, थोड़ी मदद कर दो।

राजेश सुनिता को पेटीकोट में देखकर, उसके शरीर के नसों में रक्त संचार बढ़ने लगा।

राजेश पीछे खड़ा होकर ब्रा की दोनो छोर अपनी हाथो से पकड़ लिया।

सुनिता _, बेटा, लगता है मैं मोटी हो गई हूं। ब्रा टाइट होने लगा है।

राजेश _नही मां तुम मोटी नहीं हो एकदम फिट हो।

सुनिता _चल झूठा कही का अपनो मां का मन रखने के लिए ऐसा बोल रहा है।

राजेश _सच में मां आज भी तुम बहुत खूबसूरत लगती हो। राजेश ने सुनिता की बैक को चूमते हुए कहा।

सुनिता सिसक उठी,

सुनिता _क्या कर रहा है?

राजेश _अपनी मां को प्यार,,

सुनिता_चल बदमाश कही का, ऐसा प्यार थोड़े ही करते हैं, कोई बेटा अपनी मां को।

राजेश _हम तो ऐसे ही प्यार करेंगे,,

राजेश ने सुनिता की ब्रा छोड़ कर उसकी चूची मसलते हुवे कहा।

सुनिता सिसकने लगीं।

अरे छोड़ न क्या कर रहा है?

राजेश ने का लंद खड़ा हो चुका था, वह लंद को सुनिता के गाड़ में धसा दिया।

राजेश ने सुनिता की ब्रा निकाल दिया और सुनिता को अपनी ओर घुमा कर उसकी चूची को मुंह में भर कर बारी बारी से चूसने लगा।

सुनिता प्यार से राजेश की बालो को सहलाते हुए सिसकने लगी।

राजेश की हरकत से सुनिता भी गर्म हो गई।

राजेश कुछ देर सुनिता की चूची से खेला फिर, सुनिता को घुमा कर आईने के सामने झुका दिया।

उसकी पेटी कोट ऊपर उठा कर उसकी योनी चाटने लगा।

सुनिता की सिसकारी कमरे में गूंजने लगी। उसकी chut से पानी बहने लगा।

राजेश अब अपना पैंट का चैन खीच कर लंद बाहर निकाल लिया।

फिर उसे सुनिता की योनी के छेद में सेट कर, गच से पेल दिया।

लंद एक ही बार में फुच की आवाज करता huwa chut चीरकर अंदर चला गया।

सुनिता _, उई मां,,,

राजेश एक और धक्का मारा, लंद chut में जड़ तक घुस गया।

अब राजेश सुनिता की की चूची पकड़ कर लंद को boor में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

सुनिता की मादक सिसकारी कमरे में गूंजने लगी।

आईने में राजेश को चोदता देख शर्माने लगी।

राजेश, सुनिता को तेज तेज चोदने लगा।

सुनिता, को बहुत मजा आने लगा।

वह कमर हिला हिला कर, राजेश का सहयोग करने लगी।

सुनिता _आह उन उई मां आह,,,, आई,,, ई,,

राजेश को भी बहुत मजा आ रहा था।

राजेश अब अपना लंद बाहर निकाल दिया

सुनिता राजेश की लंद को देखने लगी।

राजेश ने लंद चूसने का इशारा किया। सुनिता राजेश के लंद के नीचे बैठ गई और लंद को पकड़ कर चूसना शुरू कर दी।

राजेश को बहुत मजा आने लगा।

राजेश सुनिता की बालो को सहलाते हुवे हल्के हल्के धक्का मारने लगा।

कुछ देर बाद, राजेश ने सुनिता को बेड किनारे लिटा दिया, और स्वयं उसके टांगो के बीच आ गया।

लंद को boor में सेट कर एक ही धक्का में पूरा अंदर कर दिया।

वह झुककर सुनिता की ओंठो को चूमते हुवे।

लंद को boor में अन्दर बाहर करने लगा।

सुनिता के फिर सिसकने लगी।

राजेश अब सुनिता की चूची को पकड़ कर मसलते हुवे boor को जोर जोर से चोदने लगा।

सुनिता जन्नत की सैर करने लगीं।

वह संभोग की परम सुख को प्राप्त करने लगी।

वह बहुत अधिक उत्तेजित हो गई।

कुछ ही देर में राजेश को जकड़ कर चीखते हुए झड़ने लगी।

आह मां आई,,,, आह,,,

राजेश ने चोदना बंद कर दिया।

सुनिता के ऊपर लेटा रहा।

कुछ देर में सुनिता होश में आई,,,

सुनिता _बेटा अब उठो,,,

राजेश _मां अभी मेरा huwa नही है।

सुनिता _जानती हूं, तुम्हे झड़ने में समय लगता है।

हमे मार्केट जाना है न, लेट हो रहे हैं। रात में कर लेना।

राजेश को न चाहते हुए भी, हटना पड़ा।

सुनिता, मुस्कुराने लगी।

सुनिता _अब तुम कमरे से जाओ मै साड़ी पहनकर जल्दी से आती हूं।

राजेश,सुनिता के कमरे से बहार आ गया। सोफे पर बैठ कर इंतजार करने लगा।

जब सुनिता तैयार होकर आई राजेश देखता ही रह गया।

सुनिता काफी खूबसूरत और हॉट लग रही थी।

राजेश, ने सुनिता को अपनी बाहों में भर लिया।

सुनिता _छोड़ो न क्या कर रहे फिर सुरू हो गए।हम लेट हो रहे हैं।

राजेश _मां इस साड़ी में बहुत खूबसूरत और हॉट लग रही हो, रहा नही जा रहा है। चलो न फिर करते हैं।

सुनिता _न बाबा अब जो करना है रात में करना।
 
,,

राजेश और सुनिता दोनो बाइक से मार्केट चले गए।

दोनो को सामान खरीदते खरीदते शाम को 6बज गए।

स्वीटी कालेज से आ चुकी थी, वह सुनिता को काल की।

सुनिता _हा बेटी बोलो,,,

स्वीटी _मां और कितना समय लगेगा मां,,,

सुनिता _कुछ समय और लग जायेगा बेटा।

Switi _तो क्या मैं खाना बनाने की तैयारी शुरू कर दू।

सुनिता _ठीक है बेटा।

स्वीटी _क्या क्या बनाना है बता दो?

सुनिता _दाल, चावल, रोटी, सब्जी,, और क्या बेटा वहीं जो रोज बनता है।

स्वीटी _मां सब्जी में क्या बनाऊं?

सुनिता _देखना फ्रिज में कौन सी सब्जी रखी है तुमको जो पसंद हो बना देना।

स्वीटी _ठीक है मां।

राजेश _मां, स्वीटी कब से खाना बनाने लगीं।

सुनिता _अरे बेटा, एक साल बाद उसे भी ब्याह के जाना है। एक महिला को घर के काम काज आनी चाहिए न, तो मैंने स्वीटी को काम सिखाना शुरू कर दी, अब तो वह बहुत कुछ सीख गई है।

खाना भी बहुत अच्छा बना लेती हैं।

राजेश _अच्छा ये तो बहुत अच्छी बात है मां।

अभी उसे फोन लगाता हूं।

राजेश ने स्वीटी को फोन किया,,,

स्वीटी _बोलो भईया कुछ काम था क्या?

राजेश _स्वीटी की बच्ची सुना है तुम बहुत अच्छा खाना बनाने लगी है, मेरे लिए अंडा कढ़ी बनाना, मै भी तो देखूं तू अंडा कढ़ी के कैसे बनाती है?

स्वीटी _ठीक है भईया।

स्वीटी _हूं, भईया मै जानती अंडा खाने के बाद तुम क्या करोगे?

मां कि लोगे,,

मां मुझे चुदने से मना कर के भइया से खुद मजा लेती हैं। आज मैं भी देखती हूं,,,

स्वीटी खाना बनाने की तैयारी करने लगीं।

इधर सुनिता और राजेश बाजार से खरीदी करके ढेर सारा सामान लेकर घर पहुंचे।

स्वीटी ने दरवाजा खोला,,

सुनिता _सारी बेटा आने में थोड़ी देर हो गई,,

स्वीटी _कोई बात नहीं मां,,,

राजेश _अरे स्वीटी बड़ी अच्छी खुशबू आ रही हैं, क्या बना रही है?

Switi _वही तुम्हारा स्पेशल अंडा कढ़ी।

स्वीटी और सुनिता हसने लगीं।

राजेश _लगता है आज तो खाने में मजा आ जायेगा?

स्वीटी _हूं, और उसके बाद लेने में,,, फुसफुसाते हुए बोली। और हसने लगी।

राजेश _कुछ कहा तुमने?

स्वीटी _नहीं तो,,,

मैं ये कह रही थी कि आप दोनो थक गए होगे कमरे में जाकर फ्रेस हो जाओ फिर मैं काफ़ी लाती हूं।

राजेश _स्वीटी मेरे लिए अभी कॉफी मत लाना, भगत फोन किया था , वह मूझसे मिलने घर आ रहा है, जब वह आएगा तब साथ में काफ़ी पियेंगे।

स्वीटी _ठीक है भईया।

सुनिता और राजेश दोनो अपने कमरे में जाकर फ्रेस हो गए।

सुनिता कीचन में आकर स्वीटी की मदद करने लगी।

राजेश बेड में आराम करने लगा।

कुछ देर बाद भगत आया।

सुनिता ने दरवाज़ा खोला,,

भगत _नमस्ते मां।

सुनिता _नमस्ते भगत बेटा, कैसे हो?

भगत _मै अच्छा हूं मां जी, राजेश आया है तो उससे मिलने चला आया, कहां है राजेश?

सुनिता _राजेश अपने कमरे में आराम कर रहा है बेटा। जाओ वह तुम्हारा ही राह देख रहा होगा।

मै कॉफी लेके आती हूं।

भगत _ठीक है मां जी।

भगत राजेश के कमरे में चला गया।

दोनो गले मिले।

राजेश _अरे यार कैसा है तू?

भगत _मै ठीक हूं भईया, बस आपकी कमी खलती है। आप कैसे हैं?

आपका इंटरव्यू कैसा गया?

राजेश _मै भी मजे में हूंऔर उम्मीद है आई ए एस में मेरा चयन हो जायेगा?

भगत _वो तो होना ही है भईया, मुझे पता है आप टॉप करोगे।

राजेश _और सुना कैसा चल रहा है तेरा पार्टी का काम।

भगत _भईया चुनाव आने वाला है, थोड़ा बीजी चल रहा हूं। थोड़ा टेंशन भी है।

राजेश _अरे तू टेंशन मत ले, मुझे यकीन है तुम्हारी पार्टी बहुत अच्छा करेगी।

भगत _भईया मुझे तुम्हारी सलाह की आवश्यकता पड़ेगी।

राजेश _अरे यार तुम्हे जब भी मेरी जरूरत महसूस हो तो मुझे काल करना, आख़िर दोस्त दोस्त का काम नही आयेगा तो, फिर कौन आयेगा।

भगत _शुक्रिया भईया।

दोनो आपस में बात चीत कर रहे थे तभी, सुनिता काफ़ी लेकर आई,,,

सुनिता _लो बेटा काफ़ी लो,,,

भगत _धन्यवाद मां जी,,

राजेश और भगत दोनो काफ़ी पीने लगे,,,

काफ़ी पीने के बाद,,,

राजेश _चलो यार बाहर थोडा टहल कर आते हैं।

दोनो कमरे से बाहर निकले,,,

सुनिता _अरे बेटा तुम दोनो कही जा रहे हो क्या?

राजेश _मां हम थोडा टहल कर आते हैं?

सुनिता _भगत बेटा, तुम भी आज खाना यहीं खा लेना, तुम दोनो टहल कर जल्दी आ जाना।

भगत _ठीक है मां जी।

राजेश और भगत दोनो बाहर टहलने निकले,,,

भगत _भइया, निशा जी का कोई काल वगैरा आया था।

राजेश _नही यार, निशा जी तो मुझे भूल ही गई। सुजाता मैम भी मूझसे मिलना नही चाहती।

भगत _भईया आप कहे तो सुजाता मैम के घर चलें,

राजेश _मै सुबह उसकी आफिस गया था, पर अब उनके मन में पहले जैसी भावनाएं नही रही।

मैने उससे कह दिया है कि अब मैं उसके सामने कभी आऊंगा।

भगत _भईयाआप कहे तो, मै सुजाता मैम से बात करू।

राजेश _नही, भगत कोई फायदा नही, अब जो होगा वहीं होगा जो किमस्त में लिखा है।

दोनो एक दूसरे से बात चीत करते हुवे टहल रहे थे।

तभी सुनिता का फोन आया।

राजेश _हां मां

सुनिता _अरे बेटा तुम दोनो कहा रह गए, भोजन का समय हो गया है तुम्हारे पापा वेट कर रहे है जल्दी आ जाओ तुम दोनो।

राजेश _ठीक है मां,,

राजेश और भगत दोनो घर के लिए चलने लगे।

कुछ देर बाद घर पहुंचे।

सभी भोजन का आनंद लेने लगे।

राजेश _अरे स्वीटी तू तो सच में बहुत अच्छा खाना बना लेती हैं। अंडा कड़ी तो बडा स्वादिष्ट बना है।

भगत _हां, स्वीटी खा कर मजा आ गया।

स्वीटी _थैंक्यू भईया।

सभी ने स्वीटी की जम कर तारीफ की।

भोजन करने के बाद भगत अपने घर चला गया।

राजेश और शेखर दोनो अपने कमरे में।

स्वीटी और सुनिता भी भोजन करने लगी।

भोजन करने के बाद, स्वीटी बोली,,

मां आप जाकर आराम करो मै बर्तन साफ कर दूंगी।

आप मार्केट से खरीदे करते करते थक गई होगी।

सुनिता_अरे नही बेटा, तुम जाओ अपने कमरे में पढाई वगैरा तो भी करनी होगी तुमको।

मैं कर लूंगी।

स्वीटी अपने कमरे में आ गई।

राजेश अपने कमरे में सुनिता की आने का इंतजार करने लगा।

दोपहर में सुनिता ने कहा था, जो भी करना है रात में कर लेना।

इधर स्वीटी अपने कमरे में पढाई करने लगीं।

इधर राजेश के शरीर में अंडे ने असर दिखाना शुरू कर दिया था। साथ ही वह दोपहर में झड़ा नहीं था। जिसके कारण उसके लंद में तानव बढने लगा।

वह अपने हाथो से लंद को लोवर से बाहर निकाल कर सहलाने लगा।

वह अपनी मां के आने का बेसब्रीसे इंतजार करने लगा।

इधर सुनिता कीचन का काम निपटाकर अपने कमरे में चली गईं। वह थकान महसूस कर रही थी। वह सोने की कोशिश करने लगी।

राजेश ने जब देखा उसकी मां अब तक आई नही कही वह सो तो नही गई।

उसने सुनीता को मेसेज किया।

राजेश _मां, कहा हो, सो गई क्या?

सुनिता थकान के कारण आंखें बंद होने लगीं थी, उसने जब मोबाइल की मेसेज घंटी सुनी,,

अपनी मोबाइल को चेक की,, इतनी रात को कौन मेसेज कर रहा है,?

उसने देखा राजेश का मेसेज है।

सुनिता ने भी मेसेज किया।

सुनिता _अरे बेटा, तू अब तक सोया नही।

राजेश _क्या मां, आप भी न भूल गई क्या?

सुनिता _क्या, भूल गई? मै कुछ समझी नहीं।

राजेश _मां ओ दोपहर में आपने कहा था न जो करना है रात में कर लेना।

सुनिता _ओह, मैं आज थक गई हूं, मेरा मूड नहीं है, मुझे तेज नींद आ रही हैं।

आज सो जाओ। कल देखेंगे।

राजेश _पर मां आज मेरा बडा मूड है। दोपहर में भी आपने मुझे अधूरा छोड़ दिया था। ऊपर से आज अंडा कड़ी कुछ ज्यादा ही खा लिया।

मुझे नींद नहीं आएगी न।

राजेश _बेटा समझा कर मैं बड़ी थकान महसूस कर रही हूं। मुझे आराम की जरूरत है।

राजेश निराश हो गया। पर वह सोचा मां सच में थक गई होगी, उसे परेशान करना ठीक नहीं।

राजेश ने लिखा,,

राजेश _ठीक है मां, आप सो जाओ, मै खुद को किसी तरह नियंत्रित कर लूंगा।

राजेश ने मोबाइल रख दिया।

इधर सुनिता को भी अच्छा नहीं लगा, उसने राजेश को निराश कर दिया। पर वह सच बहुत थकान महसूस कर रही थी।

सुनिता कुछ सोचने के बाद। स्वीटी को मेसेज की।

सुनिता _स्वीटी, सो गई क्या?

स्वीटी, इस समय पढाई कर रही थी उसने देखा मोबाइल पे किसी का मेसेज आया है?

उसने चेक की।

उसने देखा मां ने मेसेज की है उसे आश्चर्य हुआ।

उसने अपनी मां को मेसेज की।

स्वीटी _क्या बात है मां, अभी सोई नहीं, पढाई कर रही थी।

सुनिता _अरे बेटा तुम्हे मुझसे। शिकायत रहता है न की मै खुद तुम्हारे भैया के साथ मजा करती हूं और तुम्हे उससे दूर रहने कहती हूं।

स्वीटी _हूं ,,

सुनिता _आज से मै तुम्हे कुछ छूट देना चाहतीं हूं।

स्वीटी _कैसी छूट मां, देखो आज से तुम अपने भाई के नुनु को तुम प्यार कर सकती हो उसे छू सकती हो पुचकार सकती हो।

स्वीटी खुश हो गई।

स्वीटी _सच मां।

सुनिता _पर हा, पर एक शर्त है। तुमअपने भाई के नुनु के साथ सब कुछ कर सकती हो, पर अपनी नूनी के अंदर नहीं लोगी।

बोलो शर्त मंजूर है।

स्वीटी _ओह थैंक यू मां, मुझे शर्त मंजूर है।

सुनिता _तो ठीक है, जाओ अपने भाई के कमरे में उसे तुम्हारी मदद की जरूरत है।

तुम्हारा बनाए अंडा कढ़ी खाने के कारण उसकी शरीर की गर्मी बड़ गई है। अब उसे तुम ही शांत करो।

स्वीटी खुश हो गई।

वह अपने बेड से उठी और अपने कपडे नाइटी उतार नंगी हो गई। फिर ओंठो पर लिपिस्टिक लगाई। पूरे शरीर में सुगंधित इत्र छिड़की, फिर एक सेक्सी नाइटी निकाल कर पहन ली और राजेश के कमरे में चली गईं।

राजेश सोने की कोशिश कर रहा था।

राजेश _अरे स्वीटी तुम इस समय।

स्वीटी _हां।

स्वीटी राजेश के बेड में बैठ गई।

राजेश _कुछ काम था क्या?

स्वीटी _मां ने भेजा है। बोल रही थी की तुम्हारे भैया को कुछ समस्या है, उसका समाधान कर दो।

राजेश _ये तुम क्या कह रही हो। मां तुम्हे मेरे कमरे में भेजेगी। ओ भी रात को।

स्वीटी _हा, मुझे पता था कि आप यकीन नहीं करोगे।

मैसेज खुद ही पड़ लो।

राजेश ने मोबाइल से सुनिता की चैटिंग पढ़ने लगा।

स्वीटी _अब तो यकीन huwa

राजेश _मुझे तो अब भी यकीन नहीं हो रहा,,

स्वीटी _यकीन तो मुझे भी नही हो रहा पर ये सच है।

चलो मैं तुम्हारी तकलीफ दूर कर देती हूं।

स्वीटी ने अपनी नाईटी उतार कर नंगी हो गई।

उसकी खूबसूरत संतरे, और मस्त फूली हुई चिकनी chut देखकर राजेश का लंद चादर के अंदर झटके मारने लगा।

स्वीटी ने राजेश के ऊपर का चादर हटा दिया। उसका विशाल लंद स्वीटी की आंखों के सामने आ गया। स्वीटी की boor पानी छोड़ने लगी।

स्वीटी मुस्कुराने लगी।

वह राजेश के टांगो के बीच में अपना। सिर झुका दी और लंद को चाटने लगी।

राजेश स्वीटी की हरकतों को देखने लगा।

स्वीटी कुछ देर तक राजेश की अंडकोष और सुपाड़े को चांटी फिर उसका सुपाड़ा मुंह में भर ली।

फिर लंद को मुंह में लेकर अंदर बाहर करना शुरू कर दी।

राजेश प्यार से स्वीटी की बालो को सहलाने लगा।

कुछ देर लंद चूसने के बाद,,

स्वीटी _भइया मुझे भी झड़ना है, मुझे पहले झाड़ दो न।

राजेश ने स्वीटी को अपनी ओर खींचा।

स्वीटी राजेश की ओंठ चूसने लगीं। राजेश भी उसकी ओंठ चूसने लगा।

उसके बाद राजेश ने स्वीटी को पलटा और खुद उसके ऊपर आ गया।

उसके ओंठ चूसने लगा।

उसकी गर्दन को चूमने लगा।

स्वीटी सिसकने लगी।

राजेश आगे बढ़ा और उसकी मस्त चूचियां को हाथ में थाम लिया। बारी बारी मसल मसल कर चूसने लगा।

स्वीटी मुंह से मादक सिसकारी निकालने लगीं।

वह प्यार से राजेश की बालो को सहलाने लगीं।

राजेश नीचे बडा और उसकी सपाट पेट को चाटने लगा। उसकी नाभी को जीभ से कुरेदने लगा।

स्वीटी बहुत अधिक उत्तेजित हो गई।

राजेश नीचे बढ़ा और उसकी खूबसूरत boor को निहारा जो पानी छोड़ रही थी।

राजेश ने boor चाटना शुरु कर दिया।

उसकी भगनाशा को जीव से कुरेदने लगा।

स्वीटी के मुंह से लगा तार कामुक सिसकारी निकलने लगी।

वह राजेश के सिर को अपने boor में दबाते हुवे छटपटाने लगी।

राजेश स्वीटी की boor को तेज तेज चाटने लगा।

स्वीटी अपना हाथ पैर छटपटाने लगीं। सिर पटकने लगी। उसे बहुत मजा आ रहा था।

राजेश लगातर boor चांटता रहा।

स्वीटी खुद को रोक न सकी और चीखते हुए झड़ने लगी।

राजेश ने boor चाटना बंद कर स्वीटी के बाजू लेट गया।

स्वीटी उससे लिपट गई।

कुछ देर बाद, स्वीटी उठी और राजेश के टांगो के बीच आ गई। और राजेश का लंद मुंह में लेकर फिर चूसना शुरू कर दी।

कुछ देर बाद,,,

स्वीटी _भइया, मां ने boor पे लंद लेने से मना किया है पर एक और आपसन है हमारे पास।

स्वीटी _आप मेरी गाड़ मारो।

राजेश _तू पागल हो गई है क्या?

इतना मोटा लंद तू, अपनी सकरी गाड़ में ले पाएगी।

स्वीटी _मेरी गाड़ सकरी नही है, वह लंद लेने लायक हो चुकी है।

राजेश _वो कैसे?

स्वीटी _मै अपनीगाड़ पे डिल्डो डालती हूं।

राजेश _ये तू क्या कह रही?

स्वीटी _हा ये सच है खुद ही देख लो।

स्वीटी उठी और अपनी चूतड को राजेश के मुंह के पास ले आई।

राजेश ने उसकी चूतड पकड़ कर गाड़ की छेद को देखा।

राजेश _तुम्हारी गाड़ तो सचमुच चौड़ी लग रही है। इसे मारने में तो सच में बहुत मजा आयेगा।

स्वीटी _फिर देर क्यू हो डाल दो मेरी गाड़ पे। मां ने सिर्फ chut पे लंद लेने से मना किया है गाड़ में नही।

राजेश _ये तो अच्छी बात है।

चलो पहले तुम्हारी गाड़ में क्रीम लगा दू नही तो तुम्हे बहुत दर्द होगा।

राजेश और स्वीटी दोनो बेड से उतरे।

उसके बाद राजेश ने अलमारी से चिकनाई वाला क्रीम निकाला। और स्वीटी को थमा दिया।

स्वीटी ने क्रीम अपने ऊंगली पे लगाई फिर झुक कर अपनी गाड़ में डाल दी।

फिर राजेश के लंद में अच्छे से लगा दी।

स्वीटी बेड पर चढ़ कर kutiya बन गई।

राजेश उसके पीछे आ गया।

उसकी चूतड को सहलाया। चूमा थप्पड़ मार मार कर लाल कर दिया।

स्वीटी सिसकने लगी।

स्वीटी _भईया अब डाल भी दो।

राजेश ने पहले एक ऊंगली गाड़ में डाला अंडर बाहर किया।

स्वीति सिसकने लगी।

कुछ देर बाद राजेश ने क्रीम लगाकर दो ऊंगली, गाड़ में डाल दिया। और गाड़ चौड़ा किया।

कुछ देर बाद, दो ऊंगली डाल कर अन्दर बाहर करने के बाद,

राजेश _क्या तुम तैयार हो,,,

स्वीटी _हा भइया डाल दो।

राजेश ने लंद का सुपाड़ा गाड़ के छेद में सेट किया फिर गाड़ पर दबाव डालने लगा।

कुछ देर बाद लंद का सुपाड़ा गाड़ के अन्दर चला गया।

स्वीटी _चीख उठी।

राजेश स्वीटी की चूची को सहलाने पीठ को चाटने लगा।

स्वीटी फिर सिसकने लगीं।

राजेश अब स्वीटी की कमर को पकड़ लिया और धीरे धीरे लंद का दबाव गाड़ में डालने लगा।

लंद सरक कर गाड़ में समाने लगा।

स्वीटी को दर्द से कराहने लगी।

राजेश इसकी चूची सहलाता उसे चूमता चाटता अब राजेश कमर पकड़ कर धीरे धीर लंद को गाड़ में अंडर बाहर करना शुरू किया।

स्वीती के मुंह से कराहने की आवाज निकलने लगी।

राजेश उसकी परवाह न करता huwa लंद को गाड़ में अंडर बाहर करता रहा।

लंद गाड़ में अपनी जगह बनाने लगा।switi की गाड़ फैल कर चौड़ी हो गई। अब राजेश के लंद का आधे से ज्यादा भाग अंदर बाहर होने लगा।

राजेश को बहुत मजा आने लगा।

धीरे धीर स्वीटी का दर्द भी कम होने लगा।

राजेश स्वीटी की भग्नाश को ऊंगली से छेड़ने लगा।

स्विति सिसकने लगीं। उसे दर्द और मजा दोनो आने लगा।

राजेश अब अपना स्पीड बढ़ाने लगा।

अब लंद गाड़ में पूरी तरह जगह बना चुका था। लंद अब आसानी से गाड़ में अंडर बाहर होने लगा।

अब स्वीटी को भी मजा आने लगा।

अब राजेश स्वीटी की चूची मसलते हुवे गाड़ मारने लगा दोनो को मजा आने लगा।

तभी कमरे मे सुनिता आ गई,,,

राजेश ने गाड़ मारना रोक दिया।

राजेश _मां आप,

सुनिता _हां,

राजेश _आप तो आने से मना की थी।

सुनिता _हां, मैने मना की थी, पर मुझे लगा कही तुम लोग मेरी छूट का गलत फायदा तो नही उठा रहे।इस लिए देखने चली आई। पर मेरा डर सही था।

वह स्वीटी पर चीखी,,

स्वीटी मैंने तुम्हसे शर्त रखी थी न की अपनी boor में लंद नही लोगी। तुमने शर्त तोड़ी।

स्वीटी _नही मां मैने शर्त नहीं तोड़ी।

मैने अपनी boor में भइया का लंद नही लिया।

सुनिता _मेरे सामने लंद boor में डाली हुई है और झूठ बोल रही है तुम्हे शर्म नही आती, बेशर्म कही की।

राजेश _मां, स्वीटी ठीक कह रही है, उसने अपनी boor में लंद नही डलवाई है खुद ही देख लो।

सुनिता राजेश के पास गई।

राजेश _देखो मां, लंद कहा घुसा है।

सुनिता आंखें फाड़कर देखने लगी।

राजेश ने लंद को गाड़ से थोडा बाहर खींचा, फिर झटके से अंदर कर दिया।

राजेश _, देखो मां लंद किसमे जा रहा है।

सुनिता _, आश्चर्य से देखने लगीं।

इतना बडा लंद को स्वीटी गाड़ में कैसे ले सकती हैं।

स्वीटी _स्वीटी _कही तू, हमे धोखा तो नही दे रही है, तू किसी से अपनी गाड़ तो नही मरवाती है। इतना मोटा लंद आसानी से अपनी गाड़ में ले रही है।

स्वीटी _नही मां मैने आप लोगो को कोई धोखा नहीं दिया है।

सुनिता _फिर इतना मोटा लंद कैसे ले सकती हैं?

राजेश _मां स्वीटी बता रही थी की वह अपनी गाड़ में डिल्डो लेने की आदत है जिसके कारण इसकी गाड़ की छेद चौड़ी हो गई है।

स्वीटी _हां मां ये सच है।

राजेश _मां स्वीटी की गाड़ मारने में बडा मजा आ रहा है। बहुत मस्त गाड़ है।

राजेश तेज तेज गाड़ मारने लगा।

स्वीटी कभी आनंद में तो कभी दर्द से करांहने लगीं।

स्वीटी _भइया, रुको।

राजेश _क्या huwa स्वीटी।

स्वीटी _मुझे लंद की सवारी करनी है।

राजेश _ओह

राजेश ने गाड़ से लंद निकाल दिया।

और बेड पर पीठ के बल लेट गया।

स्वीटी बेड के ऊपर चढ़ गई और लंद को पकड़ कर अपनी गाड़ में सेट कर बैठ गई।

फिर कमर हिला हिला कर गाड़ में लंद लेने लगीं।

सुनिता आश्चर्य से देखने लगीं।

वह भी गर्म होने लगी। उसकी योनि में पानी भरने लगा।

स्वीटी को अपने मां के सामने गाड़ मरवाने में बडा मजा आ रहा था।

इधर सुनिता की पेंटी गीली होने लगीं। वह अपने पेंटी के गीलापन को अपनी हाथ ले जाकर कर छूकर देखी।

स्वीटी लंद पर उछल उछल कर थक गई। वह राजेश के एक ओर लुड़क कर सुस्ताने लगीं।

स्वीटी _मां, भईया को मैं अकेली नहीं सम्हाल सकती, अब तुम्हे भी मेरी मदद करनी पड़ेगी। नही तो भईया मेरी कबाड़ा कर देंगे।

स्वीटी कि बात सुनकर सुनिता मोर्चा सम्हालने तैयार हुई।

वह अपनी नाईटी उतार और पेंटी निकाल फेकी जो पूरी तरह chut रस से भीग चुकी थी। वह पूरी नंगी हो चुकी थी।

वह बेड पर चढ़ गई। और राजेश का लंद पकड़ कर अपनी योनी पे सेट की और बैठ गई।

लंद फुच की आवाज करता huwa योनि में समा गया।

सुनिता सिसक उठी।

अब राजेश सुनिता की कमर पकड़ कर। अपनी कमर उठाकर लंद सुनिता की boor में ठेलने लगा। सुनिता भी उछल उछल कर राजेश की मदद करने लगीं।

लंद सुनिता की boor में फॉच फाक की आवाज करता huwa अंदर बाहर होने लगा।

सुनिता और राजेश दोनो को जन्नत का मजा आने लगा।

सुनिता को इतना मजा आने लगा की वह लंद पर तेज तेज उछल उछल कर चुदने लगी। और कुछ ही देर में चीखते हुए झड़ने लगी।

राजेश सुनिता को अपने नीचे ले आया और स्वयं उसके ऊपर।

वह उसकी ओंठ चूसने लगा। उसकी चूंची दबा दबा कर चूसने लगा।

जिससे सुनिता फिर गर्म हो गई।

राजेश ने सुनिता के चूतड के नीचे तकिया लगा दिया। और अपना लंद एक ही बार में गच से पेल दिया।

लंद का टोपा सीधा सुनिता के बच्चेदानी से टकराया। सुनिता चिहुक उठी।

अब राजेश स्वीटी को उठाया और सुनिता के ऊपर घोड़ी बना दिया।

स्वीटी सुनिता की ओंठ चूसने लगी। सुनिता भी स्वीटी की साथ देने लगीं।

इधर राजेश सुनिता को जोर जोर से चोदने लगा। लंद उसके बच्चे दानी को रहा था जिससे सुनिता का पूरा शरीर गन गना रहा था। वह मादक सिसकारी निकाल रही थी।

कुछ देर सुनिता की chut खोदने के बाद राजेश अपना लंद बाहर निकाल कर स्वीटी की गाड़ में डाल दिया और स्वीटी की गाड़ मारने लगा। स्वीटी चीखने लगीं।

सुनिता उसकी ओंठ चूसने लगा।

राजेश बारी बारी से दोनो की chut और गाड़ मारने लगा।

तीनों को इस सामूहिक chudai मे बहुत मजा आ रहा था।

इधर सुनिता और स्वीटी फिर से एक बार झड़ गई।

राजेश दोनो को जन्नत की सैर करा रहा था। और खुद झड़ने की स्थिति में आ गया।

राजेश _आह मां, मै आने वाला हू,,, आह,,,

राजेश तेजी से बेड से उतरा उसके साथ ही सुनिता और स्वीटी भी तेजी से बेड से उतरी और दोनो राजेश के लंदके के नीचे चूची पकड़े बैठ गई।

राजेश कराहते हुवे वीर्य की पिचकारी दोनो की चेहरे और चूची में छोड़ने लगा।

आह मां,,, आह,,,, आह,,,

ढेर सारा वीर्य दोनो के मुंह और चुचियों में छोड़ा दोनो अपने वीर्य से नहला दिया।

राजेश थक चुका था, वह बेड पे लेट कर सुस्ताने लगा।

इधर दोनो मां बेटी राजेश की वीर्य को चखने लगी।

दोनो एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रही थी दोनो बाथरूम में गई और नहाने लगीं।

वहा से दोनो बाहर आई और टॉवल से अपने शरीर को पोछि फिर दोनो अपनी नाईटी पहन कर राजेश के आजू बाजू लिपट कर लेट गई।

राजेश दोनो की पीठ को प्यार से सहलाने लगा।

कुछ देर बाद,,,

सुनिता _स्वीटी आज जो कुछ भी huwa उसके बारे में भूलकर भी किसी से न कहना नही तो हम किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।

स्वीटी _मां ऐसी बात भी किसी को बताने लायक है।

सुनिता _मुझे तुमसे यही उम्मीद है। चलो अब तुम अपने कमरे में जाओ। मै भी चलती हूं।

रात काफ़ी हो गई है।

स्वीटी _ठीक है मां, लव यू मां, कहकर स्वीटी सुनिता से लिपट गई।

सुनिता _लव यू टू बेटा।

स्वीटी और सुनिता राजेश को चादर ओढ़ा कर मुस्कुराते हुवे अपने अपने कमरे मे चली गईं।

राजेश का
 
अगले दिन सुबह राजेश देर तक सोया था।

सुनिता राजेश के कमरे में गई।

सुनिता _अरे बेटा काफ़ी देर तक सोया है तबियत तो ठीक है न।

प्यार से राजेश के बालो को सहलाते हुए बोली।

राजेश ने अपनी आंखें खोला।

राजेश _मां आप,,

सुनिता _आज काफ़ी देर तक सोया है तो चिंता हुई तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना।

राजेश _मै बिलकुल ठीक हूं मां।

राजेश ने अपने दोनो बांहे सुनिता के गले में डाल दिया।

राजेश _सुनिता को चूमने की कोशिश करने लगा।

राजेश _अरे छोड़ क्या कर रहा है। सुबह सुबह ही बदमासी शुरू।

चलो उठो फ्रेस हो जाओ।

सुनिता ने राजेश की चादर को खींचा।

चादर के खींचते ही। उसकी नजर राजेश के लंद पर गया।

सुनिता,_हे भगवान तुम्हारा तो सुबह सुबह खड़ा हो गया है।

राजेश मुस्कुराते हुवे।

ये तो सुबह रोज ही खड़ा रहता है मां।

राजेश बेड से उठ कर बैठ गया।

सुनिता कमरे से जानें को मूढ़ी तभी राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया।

सुनिता ने पीछे मुड़कर देखा।

राजेश ने खींचकर अपने गोद में बिठा लिया। और सुनिता की चूची मसलने लगा।

सुनिता _अरे छोड़ न , देखो सुबह सुबह ही ये ठीक नहीं, छोड़ो मां।

राजेश _मां मुझे जोरो की पेसाब लगीं है।

सुनिता _तो जाओ बाथरूम में जाकर पेशाब करो, मुझे क्यू अपने घोड़े पे बिठा लिया।

राजेश _मां आज आप मुझे पेशाब करा दो न।

सुनिता _छी बेशरम तू छोटा बच्चा है जो पेंट उतार कर सुसु कराऊंगी।

राजेश _मै तो तुम्हरे लिए अभी भी छोटा बच्चा हूं न।

सुनिता, हसने लगी,,,

हा हां तू तो बहुत छोटा है तेरा नुनु अभी मात्र एक इंच का है। चल अपने राजा बेटे को सुसु करा देती हूं। नही तो पेंट गिला कर देगा मेरा राजा बेटा।

सुनिता हंसने लगीं।

राजेश _मां मेरी मजाक उड़ा रही हो।

सुनिता _मजाक नही उड़ा रही, तुम्हे आइना दिखा रही, जब बेटे की ऊंचाई बाप के बराबर हों जाय तो मां को अपने बेटे के सामने पल्लू छिपा के रखना चाहिए। तू तो अपने बाप से भी ऊंचा हो गया है तुम्हारा नुनु बाप दोगुना हो गया है, और कह रहा है सुसु कराओ, चल छोड़ मुझे, कमबख्त कही का।

राजेश _नही, एक बार करा दो न सुसु। जब मेरा हाथ फ्रैक्चर huwa था उस समय कराती थी। उसे आनंद को मैं फिर से महसूस करना चाहता हूं।

सुनिता _तू बड़ा गंदा, हो गया है कैसी कैसी शौंके पालने लगा है। अब तेरी शादी करवानी पड़ेगी फिर अपनी बीवी के हाथो ही सुसु करना।

राजेश _मां मान जाओ न नही तो मैं अपना हाथ फिर से फ्रैक्चर कर लूंगा, फिर करवाना ही पड़ेगा।

सुनिता _चुप बदमाश कही का, फिर कभी फ्रैक्चर वाली बात मत कहना।

चल तेरी इच्छा पूरी कर देती हूं।

सुनिता राजेश काहाथ पकड़ के अपने साथ, बाथरूम ले गया।

सुनिता राजेश के पीछे खड़ी हो गई।

सुनिता _चलो सुसु करो।

राजेश का लंद तन कर खड़ा था।

राजेश _मां पहले नुनु को तो पकड़ो नही तो पेशाब इधर उधर कही भी गिरने लगेगा।

सुनिता ने राजेश का लंद, आगे हाथ ले जाकर पकड़ लिया। और उसे सही दिशा दिखाया ताकि पेशाब, सही जगह गिरे।

सुनिता _लो अब जल्दी करो।

राजेश ने जोर लगाया पर लंद में तनाव के कारण पेशाब बाहर नहीं आया।

सुनिता _क्या हुवा बाबा जल्दी करो।

राजेश _मां जोर तो लगा रहा हूं पर पेशाब बाहर नही आ रहा है।

सुनिता हंसने लगीं,,,

नुनु खड़ा रहेगा तो पेशाब कहा से आएगा।

राजेश _मां थोडा नुनु को हिलाओ न तब शायद, पेशाब बाहर आए।

सुनिता _हूं तेरी सब चाल समझती हूं बच्चू।

सुनिता राजेश के लंद को हिलाने लगी।

एक हाथ से अंडकोष सहलाने लगीं।

सुनिता _अब जोर लगा।

राजेश ने फिर जोर लगाया, इस बार पेशाब की तेज धार निकली और बाथरूम की दीवार पर चर र,,

की आवाज के साथ गिरने लगीं।

कुछ देर बाद पेशाब की धार रुक गई। सुनिता फिर लंद को हिलाई,,

राजेश ने फिर जोर लगाया फिर से पेशाब की तेज धार दीवार पर गिरने लगा।

सुनिता मुस्कुराने लगीं। राजेश को बहुत मजा आ रहा था।

इस तरह यही प्रक्रिया तब तक चलती रहीं जब तक राजेश के मूत्राशय का एक एक बूंद बाहर नही निकल गया।

पेशाब कर लेने के बाद भी राजेश का लंद खड़ा ही था।

सुनिता _और कितने देर तक करेगा?

राजेश _बस हो गया मां।

सुनिता _, चल अब तू नहा ले तभी ये बैठेगा।

राजेश _, मां मुझे नहला दो न।

सुनिता _अब तेरा कुछ ज्यादा नही हो रहा।

मुझे नाश्ता बनाना है।

सुनिता वहा से निकल कर स्वीटी के कमरे मे गई।

सुनिता _स्वीटी बेटा तुम ठीक तो हो न, अभी तक उठी नही है। प्यार से उसकी बालो को सहलाते हुए पूछी।

स्वीटी _मां पीछे बड़ा दर्द कर रहा है। ठीक से चल नहीं पा रही।

सुनिता _दिखा मुझे देखू, क्या हाल है तेरी,,,

स्वीटी _मां, मुझे शर्म आयेगी।

सुनिता _कल तो बड़ी उछल उछल कर ले रही थी अपनी पिछवाड़े में अपने भाई के तब तो शर्म नहीं आ रही थी।

अब दिखाने में शर्म आ रही हैं।

चल दिखा मुझे।

सुनिता ने स्वीटी को पकड़ कर घोड़ी बना दिया।

फिर उसकी नाइटी ऊपर उठा कर उसकी गाड़ को चेक करने लगीं।

सुनिता _हाय राम ये तो पूरा सूज गई है।

पता नही तू कैसे ले पा रहीं थी। पूरा हालत बिगाड़ के रख दिया है, कमबख्त ने।

मैं बर्फ से सिकाई कर क्रीम लगा देती हूं। फिर टैबलेट दूंगी उसे खा लेना। हमे दोपहर में तुम्हारे मामा के यहां भी निकलना है। वहा ठीक से रहना, किसी को कोई शक न हो।

सुनिता फ्रिज से बर्फ निकाल लाई और स्वीटी की गाड़ की सेकने लगी। उसके बाद उसमे क्रीम लगा दी। स्वीटी को राहत मिली।

सुनिता ने उसे दर्द की टैबलेट खाने को दी।

इधर राजेश नहाकर फ्रेश हो गया।

कुछ देर स्वीटी आराम की फिर वह भी नहाकर फ्रेश हो गई।

शेखर और राजेश दोनो नाश्ता करने लगे।

शेखर _आज स्वीटी नही आई नाश्ता करने,,,

राजेश _हा मां, स्वीटी कहा है?

सुनिता _उसकी तबियत थोड़ी ठीक नहीं वो मेरे साथ करेगी, नाश्ता तुम दोनो कर लो।

आपको ऑफिस भी निकलनी है। 1 बजे छूटी लेकर आ जाना जी। हमे भईया के घर जाना है।

शेखर _हा याद है भई याद है, आ जाऊंगा छुट्टी लेकर।

वैसे भी कल संडे है। छूटी रहती है, दो एक दिन और ले लूंगा।

सुनिता _राजेश बेटा प्रिया को फोन कर दो उससे कहना, 1बजे तैयार रहे।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश ने प्रिया को काल किया।

राजेश _प्रिया दी क्या कर रही हो?

प्रिया _कुछ नही बस जानें की तैयारी ही कर रही थी।

राजेश _गुड, दीदी मां कह रही है हम 1बजे निकलेंगे।

प्रिया _राजेश, मुझे बड़ी टेंशन हो रही है।

मैं पिता जी का सामना कैसे कर पाऊंगी। यही सोच सोच कर मेरी हालत खराब हो रही।

राजेश _दीदी आप टेंशन मत लो मै हूं न। सब ठीक होगा।

प्रिया _तुम्हरे कारण ही तो हिम्मत कर पा रही, गांव जानें की, देखो राजेश, तुम सब सम्हाल लोगे न।

राजेश _दीदी, तुम्हे मुझ पर भरोसा नहीं क्या?

प्रिया _तुम पर भरोसा नहीं होता तो जाति क्या?

राजेश _दी आप बस जानें की तैयारी करो, ये न सोचों की मामा जी का सामना कैसे करोगी?

वैसे जीजू जा रहे की नही।

प्रिया _उसको अभी ले जाना ठीक नहीं, पहले मैं ही हो आती हूं। पता नही मुझे देखकर पिता जी की प्रतिक्रिया कैसी होगी?

राजेश _अच्छा ठीक है दी।

प्रिया _अच्छा सुनो, तुम एक बजे के पहले घर आ जाना, हम सब एक ही कार में चलेंगे। बड़ी वाली कार में सभी आ जायेंगे।

राजेश _अच्छा ठीक है दी।

मैं समय पर पहुंच जाऊंगा।

सुनिता _क्या बोली बेटा, प्रिया?

राजेश _मां, दी बोली की एक ही कार में चलेंगे, सब मुझे दी अपने घर बुलाए है, बोल रही थी बडी कार में सभी आ जायेंगे।

सभी साथ में ही चलेंगे।

सुनिता _ठीक है बेटा तुम 12बजे प्रिया और बच्चो को ले आना।

कुछ देर बाद सुनिता स्वीटी के कमरे में गई।

सुनिता _कैसा है अब दर्द कुछ आराम मिला।

स्वीटी _हां मां आप ने जो दवाई मलहम लगाई उससे काफ़ी आराम मिला।

सुनिता _अब चलो तुम भी नहा कर तैयार हो जाओ और नाश्ता कर लो।

राजेश और तुम्हारे पापा नाश्ता कर चुके हैं।

स्वीटी _ठीक है मां।

12बजने के बाद, राजेश प्रिया के घर पहुंचा।

राजेश ने दरवाज़ा का बेल बजाया।

नौकरानी ने दरवाज़ा खोला।

राजेश _दीदी कहा है?

नौकरानी _वो तो कमरे में बच्चो को तैयार कर रही है।

राजेश, प्रिया के कमरे की ओर गया ।

राजेश _दी, कहा हो? हो गया तैयारी?

प्रिया _अरे राजेश तुम आ गए।

पिंकी को तैयार कर रही थी। सारा सामान पैक हो चुका है।

राजेश _अरे पिंकी इस ड्रेस में तो बड़ी प्यारी लग रही है।

पिंकी _थैंक यू मामा जी। मामा जी मां कह रही है की हम नाना जी के घर जा रहे हैं।

प्रिया _नाना जी के घर जानें के बात से पिंकी बड़ी खुश हैं।

राजेश _ये तो बड़ी अच्छी बात है।

हमारा भांजा रेडी huwa है की नही।

प्रिया _उसे भी तैयार कर दी है, अभी दुध पिलाई थी, वो सो रहा है।

राजेश _ओह,,

प्रिया _राजेश तुम ड्राइवर से कार की चाबी लेकर, कार निकालो फिर ये बैग कार में रख दो तब तक मैं भी रेडी होती हूं।

राजेश _ठीक है दी।

राजेश कार निकालने चला गया इधर प्रिया अपने कमरे में तैयार होने लगी।

राजेश पार्क से कार बाहर निकाला फिर सामान को ले जाकर गाड़ी के डिक्की डाला।

कुछ देर बाद राजेश प्रिया को आवाज लगाया।

राजेश _दीदी और कितना समय लगेगा?

प्रिया _बस हो गया, एक मिनट इधर आना।

राजेश कमरे में गया।

राजेश _क्या बात है दी?

प्रिया _देखो तो,मै ठीक तो लग रहीं हूं न इस साड़ी में।

राजेश _wow दी सच में तुम तो इस साड़ी में कमाल की लग रही हो।

राजेश ने प्रिया को पीछे से बाहों में भर लिया।

प्रिया _अरे छोड़ न क्या कर रहा है? पिंकी आ जाएगी।

राजेश _दी सच में तुम कमाल की लग रही हो? एक किस तो दे दो।

प्रिया _न पिंकी, कभी भी आ जायेगी। छोड़ो,,

राजेश ने प्रिया के गर्दन को चूमने चाटने लगा।

दीदी बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है आपके बदन से।

प्रिया _अरे छोड़ो न, समझा करो पिंकी आ जायेगी।

तभी कमरे में पिंकी की आने की आहट हुई।

राजेश ने प्रिया को छोड़ दिया।

प्रिया हसने लगी।

पिंकी _मम्मी, भाई को उठाओ न वो भी तो जायेगा नाना के घर।

प्रिया _अरे नही बेटा बाबू को मत उठाओ नही तो रोना शुरू कर देगा। ओ अपने मन से उठेगा।

राजेश _अब चलो दी हम लेट हो रहे हैं।

प्रिया _हां, मै बाबू को गोद में ले लेती हूं।

प्रिया ने नौकरानी को आवश्यक निर्देश दी।

फिर

सभी कार में जाकर बैठे।

राजेश कार को अपने घर की ओर दौड़ा दिया।

कुछ ही देर में वे घर पहुंचे।

सुनिता ने दरवाज़ा खोला

सुनिता _आ गए तुम लोग, तुम्ही लोगो का राह देख रहे थे।

प्रिया _बच्चो को तैयार करते थोडा लेट हो गया, बुआ।

सुनिता _मुन्ना सो गया है क्या? दिखाओ मुझे।

प्रिया _ये अभी इसका अभी सोने का समय है, न तो मैने इसको उठाया नही , मुन्ने को सुनिता को पकड़ाते हुए बोली।

सभी अंदर गए सोफे पर बैठ गए। शेखर भी आ चुका था, वो भी कमरे से तैयार होकर बाहर निकला।

सुनिता _राजेश बेटा सारा सामान कार में डाल दो।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश ने सारा सामान कार में डाल दिया।

सुनिता _प्रिया, कुछ खाकर निकले हो कि नही गांव पहुंचते शाम हो जाएगी।

स्वीटी कमरे से बाहर आई।

हाई दी कैसी हो, इस साड़ी में तो बहुत प्यारी लग रही हो।

प्रिया _थैंक क्यू,

तुम भी इस ड्रेस में बड़ी प्यारी लग रही हो।

प्रिया _बुवा अभी तो कुछ खाने का मन भी नहीं कर रहा।

रास्ते में ही कुछ खा लेंगे।

सुनिता _अच्छा ठीक है।

चलो अब हमें निकलना चाहिए।

सभी लोग घर से निकले,

सुनिता _किसको कहा बैठना है?

देख लो।

राजेश कार ड्राइव किया।

जब वे पहुंचे तो शाम हो चुकी थी।

गांव में राजेश के मामा मामी उन्ही लोगो के आने का इंतजार कर रहे थे।

उनके पहुंचने की खबर सुनकर सभी खुश हो गए।

राजेश _नमस्ते मामा जी।

सत्जन सिंह _अरे आओ मेरे शेर।

राजेश ने सत्जन सिंह के पैर छुए,,

सत्जन सिंह _अरे यार पैर मत छुओ गले लगो।

सुना है कुछ दिनों में कलेक्टर बनने वाले हो।

राजेश _आपका आशीर्वाद रहा तो, ज़रूर बनूंगा मामा जी।

सत्जन _अरे यार मेरा आशीर्वाद तो हमेशा तुम्हारे साथ है।

वैसे दिखने में तो एकदम फौजी लगता है। बड़ी अच्छी बॉडी बनाई है, लगता हैं सुबह खूब मेहनत करते हो।

राजेश _ये सब तो आप से ही सीखा है मामा जी। मै जब भी यहां आता था, आप दोनो मामा को सुबह दंड बैठक लगाते देखता था।

तो मैंने भी ठान लिया था की मै भी अपने मामा जी की तरह सुबह कसरत कर अपनी बॉडी बनाऊंगा।

सत्जन सिंह _तो सुबह तैयार रहना, कुस्ती करने के लिए। मै भी तो देखूं मेरा भांजा कितना ताकत वर है।

राजेश _अरे मामा जी मै भी देखना चाहूंगा आख़िर इस उम्र में भी आप कितनी ताकत रखते हैं।

तभी शेखर वहा पहुंचा।

क्या बाते हो रही है भई मामा भांजे के बीच।

सत्जन _अरे आओ शेखर आओ।

भांजे की बॉडी देखकर, भांजे से कुश्ती लड़ने की इच्छा हो गई। कल सुबह हम दोनो की कुस्ती होगी। तुम मौजूद रहना।

शेखर _अरे बिल्कुल देखेंगे भई, आखिर हमें भी तो देखना है इस उम्र में आप जवान को हरा पाते हैं की नही, जवानी में तो आप अच्छे अच्छे पहलवानों को पानी पिला देते थे। दोनो हंसने लगे।

सत्जन सिंह _वैसे तुम्हारा बैंक का काम कैसा चल रहा है।

शेखर _वैसा ही जैसे पहले, बैंक से घर फिर घर से बैंक, बस ऐसे ही जिंदगी निकल रहीं है। 25सालो से।

उधर प्रिया अपनी मां सावित्री से मिली।

सावित्री ने प्रिया को देखते ही गले लगा।

सावित्री _मेरी बच्ची कैसी है तू।

क्या तुम्हे तुम्हारी मां की कभी याद नहीं आई।

प्रिया रोने लगी।

प्रिया _मां ये क्या कह रही हो, ऐसा भी कोई दिन रहा होगा जब मैने आप लोगो को याद न किया हो,,

मै आप लोगो से मिलने के लिए तड़प रही थी मां, पर बाबू जी का सामना करने की हिम्मत मुझमें नहीं थी।

प्रिया की छोटी बहन सुप्रिया भी आई थी। वह भी दो लड़कियो की मां बन चुकी थी।

प्रिया _छोटी कैसी है तू?

सुप्रिया , प्रिया के गले से लिपट गई।

प्रिया _दी आप कैसी है?

आप ठीक तो है न।

प्रिया _मै तो बिल्कुल ठीक हूं मेरी बहना। मै जिंदगी भर आभारी रहूंगी तुम्हारी।

इस घर की मान मर्यादा को तुमने ही तो बचाया।

प्रिया _ये तो मेरा फर्ज था दी।

आज मैं आपको यहां देख कर कितना खुश हूं बता नहीं सकती दी।

प्रिया ने अपने पिता जी को दूर से देखा।

सुप्रिया _दी जाओ दी, बापू से मिलो,,

प्रिया _मुझे बापू के सामने जानें की हिम्मत नही हो रही छोटी।

सावित्री _बेटी, तुम्हारे बापू बाहर से जीतने कठोर है अंदर से उतने ही मुलायम है।

मैं जानती हूं, वो तुमसे अब भी बहुत याद करते है। मैने कई बार तुम्हारी फोटो को अकेले में देखते हुए देखा है।

जाओ बेटी,,

मां की बातो को सुनकर, प्रिया के अंदर कुछ हिम्मत आया।

वह अपने पिता की ओर आगे बडी।

जैसे ही वह उसकी पैर छूना चाही सत्जन सिंह दूर हट गया और वहां से अपने कमरे में चला गया।

सभी लोग इस घटना को देख रहे थे।

प्रिया, रोने लगी।

राजेश ने प्रिया को गले लगा लिया।

राजेश _दी चुप हो जाओ, सब ठीक हो जायेगा। मै हूं न। मुझ पर भरोसा रखो।

सुनिता _प्रिया, चुप हो जा बेटा, मै भईया से बात करूंगी। वो तुम्हे माफ कर देंगे।

सावित्री भी रो रही थी।

सतपाल सिंह, छोटा मामा।

अपनी पत्नी से।

अब देखते ही रहोगे की मेहमानों को उनका कमरा भी दिखाओगी।

सुमित्रा ने सभी लोगो को उनका कमरा दिखाया।

राजेश को एक अलग कमरा दिया गया।

सुमित्रा राजेश को कमरा दिखाने ले गई।

सुमित्रा _राजेश ये रहा तुम्हारा कमरा।

राजेश _तुम आराम करो, किसी चीज की जरूरत हो तो बताना।

राजेश _मामी ये बताओ अपनी बैग कहा रखूं।

सुमित्रा _यहां अलमारी में रख दो।

सुमित्रा अलमारी को खोल कर दिखाया।

राजेश उसके पीछे गया।

सुमित्रा की चूतड पर चिकोटी काट दी।

सुमित्रा _उई मां, बदमाश कितनी जोर से चिकोटि कांटी।

राजेश _मानी की बच्ची, सब भूल गई क्या?

मैं कब से देख रही हूं मुझे तू इग्नोर कर रही है।

राजेश ने सुमित्रा को पीछे से अपनी बाहों में जकड़ कर कहा।

भूल गई क्या अपने भांजे का प्यार, मामी तू मतलबी निकली।

राजेश ने सुमित्रा को छोड़ दिया और पलंग पर लेट गया।

सुमित्रा हसने लगी।

सुमित्रा _तो तू चाहता है की मै तुम्हे देखते ही, मेरा प्यारा भांजा आ गया करके सबके सामने तेरे गोद में बैठ जाती।

सुमित्रा _बेड किनारे बैठते हुवे बोली।

बोलो क्या चाहते हो तुम?

राजेश _मामी सच में बच्चे को जन्म देने के बाद तो तुम एकदम से गदरा गई हो।

सुमित्रा _चल हठ बेशरम कितनी गंदी बातें बोलता है अपनी मामी से।

तभी राजेश ने सुमित्रा को अपने ऊपर खींच लिया।

सुमित्रा _अरे छोड़ न क्या कर रहा है? कोई आ जाएगा। मुझे घर से निकलवाएगा क्या?

राजेश _कितने दिन हो गए तुम्हारे लिए हुवे।

आज तुम मस्त लग रही हो, एकदम गदरा गई हो, आज रात तुम मेरे कमरे में आवोगी।

सुमित्रा _पागल हो गया है क्या?

घर में इतने लोग है और मुझे रात में अपने कमरे मे बुला रहा है।

राजेश _मै तुम्हारा इन्तजार करूंगा।

सुमित्रा _न छोड़ो मुझे मै नही आ सकती।

अब छोड़ो भी नहीं तो भांडा अभी फूट जायेगा ।

राजेश ने पकड़ ढीली कर दी।

सुमित्रा खुद को छुड़ाकर, हंसते हुए भागी।

फिर दरवाजे के पास जाकर पलटी राजेश को जीभ दिखाकर चिढा ने लगी।

राजेश को गुस्सा आया।

राजेश _मामी की बच्ची, रुक अभी सबक सिखाता हूं।

सुमित्रा वहा से भाग गई।

राजेश अपना पैंट शर्ट चेंज कर दिया। कमरे में बाथरूम था नही।

बाथरूम घर के पीछे बनाया गया था।

राजेश फ्रेश होने घर के पीछे गया। बाथरूम पक्का था। 4लेट बाथ बना huwa था।

बाथरूम आधुनिक ढंग से बनाया गया था जैसे शहरों में होती है।

राजेश बाथरूम में फ्रेश होकर हाल में आया।

वहा अन्य लोग भी मौजूद थे।

सुप्रिया राजेश के लिए चाय पकौड़े लेकर आई।

सुप्रिया _लो राजेश चाय पकोड़ा लो।

राजेश _थैंक यू दी।

सुप्रिया _वैसे जब तुम छोटे थे तो गोल मटोल थे। प्रिया दी तो तुम्हे गोलू गोलू करके बुलाती थी। अब तो तू बडा स्मार्ट हो गया है रि। एकदम हीरो की तरह लगता हैं। काफ़ी अच्छी बॉडी बना रखी। लगता है रोज कसरत करते हो।

राजेश _दी एक बात कहूं।

सुप्रिया _हा हा बोलो।

राजेश _पहले जब मैं आता था तब तुम बिल्कुल पतली दुबली लगती थी।

अब तो एकदम खूबसूरत लगती हो। बिल्कुल प्रिया दी की कॉपी।

सुप्रिया शर्मा गई,,,

सुप्रिया _अच्छा,,

राजेश _लगता ही नहीं की आप दी बच्चो की मां हो, अब भी कुंवारी लगती हो।

सुप्रिया _चुप बेशरम।

अच्छा ये पकोड़ा कैसा लगा?

राजेश _बहुत स्वादिष्ट, जायकेदार।

सुप्रिया _अच्छा ये बता, प्रिया दी तो तुम्हारे शहर में ही रहती हैं उसके घर में तो तू आता जाता तो होगा ही।

राजेश _, हां, मै तो दीदी के हॉस्पिटल भी जाता हूं।

सुप्रिया _अच्छा, वहा क्या करता है? राजेश _दीदी से कुछ काम रहता है तो,,,

प्रिया _मामी बता रही थी दीदी तो शहर की बहुत बड़ी नामी डॉक्टर है।

शहर में बडा नाम है उनका, और यहां देखो बिलकुल सामान्य औरतों की तरह व्यवहार कर रही है।

राजेश _यही तो खासियत है दीदी की, जरा भी घमंड नहीं है उसके अंदर।

अच्छा दी मामी ने मेरे बारे में कुछ नही बताया आपको।

सुप्रिया _बताया न,

राजेश _क्या?

सुप्रिया _यही की तू बडा बदमाश है? कई लड़कियां तुम्हारे आगे पीछे घूमती है।

राजेश _बस, यही बताया आपको।

सुप्रिया _हुं।

तभी पिंकी वहा पर मौजूद सभी बच्चो को लेकर राजेश के पास आ गई।

पिंकी _मामा जी चलो न खेलते हैं।

राजेश बच्चों के साथ खेलने लगा।

सुनिता अपनी भाभी सावित्री से।

सुनिता _भाभी कल की सारी तैयारी हो गई है न।

सावित्री _वैसे तो सारी तैयारी हो चुकी है, सुनिता।

पर तू एक बार देख ले कोई, चीज छूट तो नही गया है।

कुछ देर बाद सुमित्रा राजेश के पास आया, गोद में उसका बच्चा था।

सुमित्रा _अरे राजेश, तुमने मुन्ना को देखा है कि नही।

राजेश _नही मुझे तो किसी ने दिखाया ही नहीं।

सुमित्रा _ये लो देख कर बताओ ये किस पर गया है।

राजेश ने बच्चा अपने गोद में ले लिया।

राजेश _मामी मुन्ना तो बड़ा प्यार है।

पर ये किस पे गया है, मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा।

सुमित्रा हंसने लगीं।

सुमित्रा ने राजेश के कान में धीरे से फुसफुसाते हुवे कहा, तुम पर,,

राजेश इधर उधर देखने लगा,,,

ये मामी तो मुझे पिटवा देगी।

सुमित्रा _क्या huwa जानकर ख़ुशी नहीं हुई।

राजेश _तू रात में आना तब बताऊंगा, कितनी खुशी हुई।

फुसफुसाते हुए कहा।

तभी वहां सतपाल सिंह पहुंच गया ।

सतपाल सिंह _क्या फुसुर फुसुर हो रही है मामी और भांजे के बीच भई।

राजेश _मामा, मै मामी से कह रहा था कि मुन्ने को बड़े मामा की तरह स्ट्रॉन्ग बनाना आख़िर यह इस घर की वारिस जो है।

सतपाल सिंह _हा भई ये तो है।

वैसे मुन्ना काफ़ी स्ट्रॉन्ग है। देखो कैसे हाथ पैर हिला रहा है।

औरते रात्रि भोज की तैयारी में लग गई। पुरुष लोग कल की तैयारी पे बातचीत करने लगे।

मेहमानों के स्वागत में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होनी चाहिए।

रात में सभी लोगो ने एक साथ भोजन किया।

पुरषो के भोजन के बाद महिलाओं ने भी भोजन कर लिया।

राजेश अपने कमरे में सोने चला गया।

राजेश ने सुमित्रा को रात को कमरे में आने को कहा था।

पर सुमित्रा ने मना कर दिया था।

राजेश सोने की कोशिश करने लगा। उसे लगा की मामी शायद ही आयेगी।

उसे नींद आ गई।

रात के करीब 1बजे सुमित्रा राजेश के कमरे में चुपके से आई।

राजेश ने दरवाज़ा खुला रखा huwa था। क्या पता मामी आ जाए।

सुमित्रा राजेश के कमरे में जाकर देखी तो राजेश सो रहा था।

सुमित्रा _लो रात में आने को कहकर मेरी नींद खराब करके खुद सो रहा है महाशय।

सुमित्रा ने राजेश का लोवर नीचे खींच कर अंडर वियर भी नीचे कर लंद बाहर निकाल दिया।

फिर अपने में लेकर चूसने लगी।

राजेश का नींद खुल गया।

राजेश _अरे मामी तुम कब आई।

सुमित्रा _बदमाश मुझे बुलाकर खुद चैन की नींद सो रहाहै।

राजेश _मामी मुझे लगा तुम नही आयेगी।

सुमित्रा _हूं, नही आती तो बाद में शिकायत करते मामी ने ठीक से खातिर दारी नही की।

राजेश का लंद तनकर खड़ा हो चुका था।

सुमित्रा _सुन जो करना है जल्दी कर, मेरे पास ज्यादा समय नहीं तुम्हरे मामा जी उठ गए न तो तमाशा हो जजायेगी।

राजेश उठ कर बैठ गया।

सुमित्रा को अपने पास बिठा लिया।

राजेश _मुझे तो आपकी दुध पीने है, जरा चख कर तो देखू आपका दुध कैसा है?

राजेश ने सुमित्रा कीचोली का बटन खोल दिया। बड़ी बड़ी दुध से भरी चूचियां राजेश के आंखों के सामने आ गया।

मामी, आपकी चूंची तो एकदम बड़ी बड़ी हो गई है, लगता हैं इसमें खूब दुध भरा है।

राजेश ने सुमित्रा की चूची का निप्पल ऊंगली से दबाया।

दुध की तेज धार निकल कर उसके चेहरे पर पड़ा। सुमित्रा हसने लगी।

राजेश ने चूचक मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया।

वह दुध गटक गटक कर पीने लगा।

सुमित्रा भी गर्म होने लगी।

उसकी मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

राजेश एक हाथ सुमित्रा के पेटीकोट के अंदर डाल दिया और boor को रगड़ने लगा।

सुमित्रा बहुत अधिक उत्तेजित हो कर मादक सिसकारी निकालने लगी।

सुमित्रा _, राजेश मेरे पास ज्यादा समय नहीं है जल्दी करो प्लीज।

राजेश सुमित्रा को बेड पकड़ा कर घोड़ी बना दिया।

फिर उसकी पेटीकोट साड़ी सहित ऊपर उठा दिया। पेंटी को नीचे खींचकर निकाल दिया।

राजेश ने chut में ऊंगली डाल कर देखा एक दम गीली थी।

उसने अपना लंद का सुपाड़ा छेद पर रखा और एक जोर का धक्का मारा, लंद boor चीरकर आधे से ज्यादा अंडर घुस गया।

सुमित्रा चिहुंक उठी।

राजेश ने फिर एक करारा शार्ट मारा, लंद boor में जड़ तक घुस गया। लंद का टोपा सुमित्रा की बच्चेदानी से टकराया।

सुमित्रा फिर चिहुंक उठी।

उसके बाद राजेश ने लंद को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

वावह सुमित्रा की कमर पकड़ कर गपागप chodna

सुरु कर दिया।

Chudai में दोनो को बहुत मजा आने लगा।

सुमित्रा कमर हिला हिला कर राजेश का साथ देने लगी। कमरे मे सुमित्रा की मादक सिसकारी और चूड़ियों की खनक तथा फुक फुक की आज गूंज रही थी ।

सुमित्रा की boor से पाणी झरने की तरह बह रहा था।

कदोनो को संभोग में आपार सुख प्राप्त हो रहा था।

राजेश कुछ देर इसी पोजीशन में चोदने के बाद। उसे बेड किनारे लिटा दिया। टांगों को फैला कर लंद एक ही धक्के ने जड़ तक घुसा दिया

और चूची मसलते हुए कस कस कर धक्के लगाने लगा।

कमरे में फिर से मादक सिसकारी गूंजने लगा।

सुमित्रा दो बार झड़ चुकी थी।

राजेश अब बेड पे लेट गया। उसका लंद हवा में लहरा रहा था।

सुमित्रा को ऊपर आने का इशारा किया।

सुमित्रा बेड के ऊपर आ गई और राजेश का लंद पकड़ कर अपनी boor में डाल कर बैठ गई।

राजेश ने उसकी चूंची पकड़ लिया।

सुमित्रा उछल उछल कर chudna सुरू कर दी। राजेश भी जोश में था वह भी सुमित्रा की कमर पकड़ कर नीचे से कमर उठा उठा कर लंद को boor की गहराई में ले जानें की कोशिश करने लगा।

कमरे में दोनो की ऊ आह ऊ आह की आवाजे गूंजने लगी।

कुछ ही देर में सुमित्रा फिर झड़ कर राजेश के ऊपर लुड़क गई।

जब वह होश में आई वह बेड से उतरी,,

सुमित्रा _राजेश अब बस करो , काफ़ी देर हो गई है। तुम्हारे मामा जी उठना जाए।

राजेश_पर मामी मेरा अभी huwa नहीं है।

सुमित्रा _तुमारा बस चले तो रात भर लेते रहोगे।

न बाबा अब मैं और नही रुक सकती।

सुमित्रा पेंटी पकड़ कर कमरे से बाहर निकल गई।

राजेश लंद हिलाता रह गया।

राजेश _ये मामी तो खुद मज़े लेकर मेरी नींद उड़ा कर चली गईं। शाला अब ऐसे में नींद कहा से आयेगी।

अब क्या करूं?

राजेश ने सोचा क्यूं न प्रिया दीदी से बात करे शायद वो मान जाए।

राजेश ने देखा 2बजने वाला था।

उसने प्रिया को काल किया।

प्रिया गहरे नींद में सो रही थी। पहले तो उसे पता नही चला किसी ने काल किया है।

राजेश ने फिर काल किया।

प्रिया की नींद खुली।

इतनी रात को किसका फोन है?

उसने फोन चेक किया। राजेश का काल, इस वक्त।

उसने काल उठाया।

राजेश _दी,,

प्रिया _राजेश इस वक्त, क्या बात है?

राजेश _दी मुझे नींद नहीं आ रही। शायद नई जगह है इसलिए। तुम्हारे पास कोई दवा है क्या? नींद आने की।

प्रिया _राजेश, नींद की दवा लेना अच्छी बात नहीं, तुम कोशिश करो, सोने की।

राजेश _दी कब से कोशिश कर रहा हूं। पर नींद आ ही नहीं रही है।

प्रिया _अच्छा ठीक है मैं ठंडे तेल से तेरी सिर की मालिश कर देती हूं, उससे फर्क पड़े।

राजेश _राजेश ठीक है दी, आ जाओ। प्रिया ने देखा बच्चे गहरी नींद में सो रहे हैं।

प्रिया ठंडे तेल की सीसी लेकर राजेश के कमरे में गया।

राजेश अपना शरीर को चादर से ढक लिया था।

राजेश _दी शरीर में गर्मी बहुत बड़ गई है। ठंडे तेल से मालिश कर दो। तो शायद राहत मिले।

प्रिया ने राजेश के ऊपर से हटाया।

उसने देखा राजेश तो नंगा है उसका लंद अकड़ा huwa है।

प्रिया _ये क्या है re?

_तुम्हे मालिश नही chut की जरूरत है।

सीधा बोल नही सकता था, तेरा बडा मन है सेक्स का, नींद नहीं आ रही है।

राजेश _दी मै सच बता देता तो आप आती क्या?

प्रिया _न, एक तो ऐसे ही पिता जी मुझसे नाराज़ ऊपर से किसी ने पकड़ लिया तो,,,,

न बाबा ना मैं जा रहीं अपने कमरे में।

राजेश _ठीक है दीदी आप जाओ, राजेश करवट लेकर लेट गया।

प्रिया _हूं, नाराज हो गया क्या?

अच्छा ठीक है, चल नाराज मत हो अपनो दीदी से।

प्रिया राजेश को सीधा की और उसका लंद पकड़ ली।

प्रिया _अरे तेरे लंद पर तो अजीब सा गंध आ रहा है किसी की boor मार रहा था क्या?

राजेश _हूं

प्रिया _किसकी?

राजेश _छोटी मामी की । वो मुझे अधूरा छोड़ कर भाग गई।

प्रिया _हूं तो ये बात है?

चल मेरी chut चांट के गर्म कर मुझे।

अपनी नाईटी उतार कर बेड पर लेट गई।

राजेश उसकी टांगो के बीच आकर उसकी boor पे मुंह डाल कर चाटने लगा।

प्रिया गर्म हो गई।

वह राजेश को लिटा कर उसके लंद पर बैठ गई और उछल उछल कर चुदाने लगी।

कमरे में दोनो के मुंह से उह आह ऊ आह निकलने लगा।

दोनो को बहुत मजा आने लगा।

कुछ देर में ही प्रिया झड़ गई।

उसके बाद राजेश ने प्रिया को घोड़ी बना दिया और उसकी गाड़ मारने लगा।

वह कभी boor तो कभी गाड़ में लंद डालकर प्रिया की ठुकाई करने लगा और अंत में प्रिया की गाड़ में झड़ गया।

दोनो कुछ देर इक दूसरे की बाहों में लिपट कर सो गए।

कुछ देर बाद प्रिया उठी और अपनी नाईटी पहन कर जाने लगीं।

जब वह राजेश के कमरे से निकली तो सुप्रिया ने उसे निकलते देख ली,,,,

 
जब सुप्रिया ने प्रिया को राजेश के कमरे से बाहर निकलते देखी। वह सोच में पड़ गई, आख़िर इतनी रात को राजेश के कमरे में दीदी क्यू गई थी।

दरसल सुप्रिया की बड़ी लड़की को पेशाब लगी थी। उसको पेशाब कराने के लिए वह उठी थी। लड़की को आंगन के मोरी के पास ही पेशाब करने बिठा दी और उसके पीछे खड़ी थी। तभी उसे दरवाज़ा खुलने का आहट सुनाई पढ़ी, उसका ध्यान उस ओर गया।

जब प्रिया राजेश के कमरे से निकल कर अपने कमरे में गई।

लड़की के पेशाब कर लेने के बाद, उसे लेकर कमरे में चली गईं। बेड पर लेट कर वह यही सोचने लगी की आख़िर इतनी रात को दीदी राजेश के कमरे में क्यों गई थी।

फिर सोंची हो सकता है राजेश को किसी चीज की जरूरत पड़ी होगी। वह यही सोचते सोचते सो गई।

इधर सत्जन सिंह प्रतिदिन की तरह सुबह उठ कर घर के आंगन में कसरत करने लगा।

स्घर के सभी महिलाएं उठ चुके थे।

सत्जन सिंह _अरे ये भांजा अभी तक उठा नही क्या, वो तो आज मेरे साथ कुश्ती लड़ने वाला था। अभी तक उठा नही।

सुप्रिया वही खड़ी थी।

अरे सुप्रिया बेटा देखो तो, यू भांजा, कल तो बड़ी बड़ी बाते कर रहा था मुझे कुश्ती में हरा देगा।

भूल गया क्या? जरा याद तो दिलाओ उसे। बॉडी तो बड़ी अच्छी बना रखी है। इतनी देर तक सोता है तो कसरत कितना समय करता है।

सुप्रिया _पिता जी मै अभी राजेश को बुला कर लाती हूं।

सुप्रिया राजेश के कमरे के पास गई। रात में कमरा अंदर से बंद नहीं किया था।

सुप्रिया को रात में प्रिया राजेश के कमरे में क्यू गई थी यह जानने की जिज्ञासा थी वह बिना दरवाज़ा खटखटाए अंदर घुस गई।

जब वह अंदर गई तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।

राजेश बिलकुल नंगा था। उसका लंद भी सुबह सुबह प्रतिदिन की तरह खड़ा हुआ था।

सुप्रिया, की नजर जब राजेश के लंद पर पड़ी तो, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।

बाप re कितना बडा है।

ये तो नंगा ही लेटा है। इसका मतलब दीदी रात में राजेश से चुदने आई थी। हे भगवान।

तभी राजेश ने करवट लिया।

सुप्रिया घबरा गई।

वह कमरे से बाहर निकल गई।

फिर दरवाज़ा खटखटाया ।

राजेश का नींद खुल गया।

राजेश ने देखा वह रात में नंगा ही सो गया था।

वह तेजी से उठा और अपना कपड़ा पहनने लगा।

सुप्रिया _अरे कितने देर तक सोता रहेगा उठो।

बाहर से बोली।

राजेश _कोन आ गई,मै आ रहा हूं। राजेश ने आवाज दिया।

राजेश ने कपड़े पहन कर दरवाज़ा के पास गया, दरवाज़ा तो पहले ही खुला huwa था।

राजेश _अरे दीदी तुम।

सुप्रिया _पिता जी ने भेजा है तुम्हे बुलाने, कह रहा था कि कितने देर तक सोता रहेगा।

राजेश _ओह मामा जी उठ गए क्या?

सुप्रिया _वो कसरत कर रहे हैं? तुम्हारा वेट कर रहे हैं कुश्ती लड़ने के लिए। सुप्रिया हसने लगी।

पर मुझे नही लगता तुम कुश्ती में पिता जी को हरा पाओगे।

राजेश _क्यू?

सुप्रिया _रात भर कुश्ती लड़कर थक जो गए होगे, धीर से फुसफुसाते हुवे बोली।

राजेश _दीदी, आपने क्या कहा?

सुप्रिया _अरे कुछ नहीं मैन ये कहा, तुम्हारी सकल तो ऐसी लग रही है जैसे तुम रात भर जगे हो, किसी के साथ कुश्ती लड़े हो। अब सुबह सुबह पिता जी के साथ मुझे नहीं लगता तुम, कुश्ती लड़ पाओगे।

राजेश _, दीदी, तुमने अभी मेरा पावर देखा कहा है। जिस दीन देखोगी न मेरा फैन बन जावोगी।

सुप्रिया _अच्छा मै भी देखना चाहूंगी कितना पावर है तुझमें।

राजेश _अच्छा दी तुम चलो, मै फ्रेस होकर आता हूं।

सुप्रिया _जल्दी आना।

राजेश फ्रेश होने बाथरूम चला गया।

वहा से सीधे आंगन में पहुंचा जहां, सत्जन सिंह कसरत कर रहा था।

सतजन सिंह _आ गया बरखू दार,

राजेश _नमस्ते मामा जी।

सत्जन सिंह _उठने लेट हो गए, नौजवान। चल पहन ले लंगोट और उतर जा मैदान में। दिखाओ सबको कितनी ताकत है तुम्हारी भुजाओं में ।

राजेश _मामा जी, मैने कभी लंगोट पहना नही।

चड्डा चलेगा, वैसे भी लंगोट में मुझे शर्म आयेगी।

घर के लोग मुझे देख कर हसेंगे।

सत्जन सिंह _अरे यार तू मर्द होकर लड़कियों की तरह शर्मा रहा है। अगर कुश्ती लड़ना है तो लंगोट तो पहनना पढ़ेगा बेटा।

सतपाल पहना दो भांजा को लंगोट।

सतपाल _आओ राजेश।

राजेश को सतपाल सिंह एक कमरे में ले गया। और उसे लंगोट पहना दिया।

राजेश लंगोट पहन कर बाहर निकलने में शरमा रहा था।

वह शर्माते हुवे आंगन में पहुंचा।

घर की सभी महिलाए, राजेश को लंगोट में देखकर मुंह छिपाकर हसने लगीं।

सुप्रिया _बॉडी तो बहुत अच्छी है, देखते है ताकत है की नही, वैसे लंगोट में बिल्कुल बंदर लग रहा है।

सुप्रिया की बात सुनकर, सभी हसने लगे।

राजेश _मामा जी सभी मेरा मजाक उड़ा रहे हैं।

सतजन सिंह _अरे यार, मर्द को औरतों की बातो पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

चल आ जा मैदान पे, हो जाए दो दो हाथ।

सतपाल सिंह रेफ्री बन गया।

राजेश _मामा जी देखते है इस उम्र में भी आपके पास कितना ताकत है। आप तैयार हो जाइए, मुझ्से हारने के लिए।

सतपाल सिंह _ये हुई मर्दों वाली बात चल आ जा मैदान पे।

राजेश मैदान पे आ गया।

सभी लोग दोनो की कुश्ती देखने लगे।

कभी राजेश आगे बढ़ता, कभी सत्जन सिंह तभी सत्जन सिंह ने अपना चाल चला। और घुमाके राजेश को चीत कर दिया।

सतपाल सिंह ने सिटी बजाया।

राजेश हार गया।

सत्जन सिंह,_बरखुदार तुम तो कमजोर निकले एक ही बार में चीत हो गया।

सभी लोग सत्जन सिंह के लिए ताली बजाने लगे।

सुप्रिया _, क्यू बड़ी बड़ी बाते कर रहा था। एक ही बार में चीत हो गया। बेचारा।

सुप्रिया chidane लगी।

सतजन सिंह _बरखु दार कुश्ती में सिर्फ ताकत नहीं, दीमाक की भी जरूरत पड़ती है।

राजेश _मां मां जी एक बार और मौका दो, अबकी बार हरा दूंगा।

शुप्रिया _रहने दे और कितनी बेजजती कराएगी अपनी।

सतजन सिंह _अरे आजा, कर ले अपनी ईच्छा पूरी।

राजेश फिर मैदान में आ गया।

दोनो के बीच फिर कुश्ती शुरू हो गया।

कुछ ही देर में राजेश फिर चित हो गया।

सभी लोग मुंह छिपा कर हसने लगे।

राजेश फिर से एक और मौका मांगा। पर राजेश सत्जन सिंह को हरा न सका।

सुनिता _बस बस अब रहने दे, अपने मामा जी को तू हरा नही पाएगा।

राजेश _मामा मैंने आपसे हार मान लिया।

सत्जन सिंह _बरखु दार, जानते हो तुम क्यू हार रहे। तुम इस लिए हार रहे हो की, तुम सामने वाले को चीत करने पे ज्यादा ध्यान दे रहे थे, जबकि पहलवान को अपनी सुरक्षा पर पहले ध्यान देना है और जब सामने वाले थकने लगे तो मौका देखकर उस पर अटैक करना है।

चलो मैं तुम्हे सिखाता हूं।

सत्जन सिंह ने राजेश को कुछ तकनीक सिखाए।

सावित्री _अब बस भी करो जी, आज घर में कार्यक्रम है। कुछ देर में मेहमानों की आने की सिलसिला शुरू हो जाएगा।

तैयारी भी करनी है। वैसे भी राजेश कुश्ती सीखकर करेगा क्या? उसे तो कलेक्टर बनना है। कुश्ती थोड़ी लड़नी है।

सतपाल सिंह _तुम्हारी मामी ठीक कह रहा है भांजा। इतना पर्याप्त है तेरे लिए। वैसे भी गांव में कल कुश्ती प्रतियोगिता होनी है। पहलवानों को कुश्ती लड़ता देख, बहुत कुछ तुम्हे सीखने को मिलेगा। तुम भी चलना,कुश्ती देखने।

राजेश _ज़रूर मामा जी।

इसकेे बाद घर के सभी लोग नहा धोकर तैयार हो गए। घर के कार्यक्रम की तैयारी में लग गए।

कुछ देर बाद सुप्रिया के पति गांव पहुंचा।

सुप्रिया _राजेश ये है तुम्हारे जीजू।

राजेश _नमस्ते जीजू, ये क्या जीजू आप अभी आ रहे हो, घर का दामाद हो, तैयारी की जिम्मेदारी तो घर की दामाद की होती है ना, और आप ही पीछे रह गए।

जीजा जी _अरे यार क्या करे? सरकारी नौकरी है। बड़ी मुस्किल से एक दिन की छूटी मिली है।

वैसे शादी के समय तुझे देखा था। तू छोटा था। अब तो एकदम जवान और स्मार्ट हो गया है यार।

वैसे क्या कर रहा है अभी।

सुप्रिया _राजेश, आई ए एस का इंटरव्यू देकर कुछ दिन पहले ही आया है दिल्ली से।

जीजा जी _ओह ये तो बड़ी अच्छी बात है, बहुत बहुत शुभकामनाएं भई हमारे तरफ से, इंटर व्यू में तुम ज़रूर सफल हो।

राजेश _शुक्रिया जीजू।

धीरे धीरे सभी मेहमानों का आना शुरू हो गया।

सत्जन सिंह _कोई पंडित जी को फोन करो भाई, सारे मेहमान आ गए। आने में और कितना समय लगेगा।

सतपाल सिंह ने पंडित जी को फोन किया।

पंडित जी ने कहा की बस कुछ ही देर में वह पहुंचने वाला है।

कुछ ही देर में पंडित जी पहुंच गया।

पंडित जी ने पूजा पाठ शुरू किया।

पूजा पाठ संपन्न होने के बाद, मुन्ने का कुंडली देखा।

पंडित जी _मुखिया जी, मुन्ने का नाम अ अक्षर से निकल रहा है। क्या नाम रखना है मुन्ने का।

सत्जन सिंह _मुन्ने का नाम रखने का अधिकार तो उसके माता पिता का है। वही बताएंगे।

सतपाल सिंह _ये क्या भईया, आप घर के बड़े है, मुन्ने का नाम रखने का अधिकार तो आप का ही है।

राजेश _हां मामा जी, छोटे मामा जी सही बोल रहे है। कोई अच्छा सा नाम सुझाइए मुन्ने का।

सत्जन सिंह _तुम लोगो की यही ईच्छा है तो आज से मुना अर्जुन के नाम से पुकारा जायेगा।

सभी लोग ताली बजाने लगे।

राजेश _वाह मामा जी बहुत अच्छा नाम सुझाया है आपने।

उसके बाद सभी मेहमानों को भोजन कराया गया।

शाम होते होते आस पास के मेहमान तो अपने अपने घर जानें लगे। दूर से आए मेहमान रात वही रुक गए।

सुबह होते ही शेष बचे मेहमान भी, अपने अपने घर के लिए निकल गए।

सुप्रिया का पति भी, एक ही दिन की छूटी लेकर आया था वह भी चला गया।

शाम को 4बजे गांव में कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित किया गया था।

विजेता पहलवान को 2लाख रुपए इनाम रखा गया था। आस पास एवम दूर दूर से भी पहलवान कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लेने आए थे।

सतजन सिंह खुद एक पहलवान था। गांव का मुखिया भी था।

उसी के अध्यक्षता में यह प्रतियोगिता आयोजित किया गया था।

सतपाल सिंह _भईया, लड़के लोग बुलाने आए थे। प्रतियोगिता की सारी तैयारी हो चुकी है।

सत्जन सिंह _चलो हम चलते है। घर के सभी पुरुष सदस्य, कुश्ती देखने के लिए जाने की तैयारी करने लगे।

सुप्रिया _पिता जी, मुझे भी देखनी है कुश्ती। सुनिता बुआ चलो न हम भी चलते है।

सुनिता _भईया, क्या हम भी देखने जा सकते है।

सतजन _अगर तुम लोगो की ईच्छा हो तो, जा सकती हो।

शुप्रियां, और सुनिता बच्चों को लेकर कुश्ती देखने के लिए जाने की तैयार करने लगी।

सभी लोग तैयार हो कर साथ में, प्रतियोगित स्थल पहुंचे।

प्रतियोगिता स्थल पर महिलाओं बच्चों और पुरुषो की बहुत भीड़ थी।

पास के गांव वाले मुखिया का नाम नाथू सिंह था।

वह भी अपना पहलवान लेकर आया huwa था।

पिछले बार नाथू सिंह और सत्जन सिंह के लड़को के बीच ही अंतिम मुकाबला huws था। जिसमे सत्जन सिंह के लड़के विजेता बने थे।

नाथू राम इस बार सतजन सिंह के लड़को को कुश्ती में हराकर, उसे नीचा दिखाना चाहता था। पिछले बार वह बहुत अपमानित महसूस किया था। उसका बदला लेना चाहता था। इस बार एक से बढ़ कर एक पहलवान लेकर आया huwa था। एक तो उसका बेटा था शेरा जो काफी खूंखार लग रहा था।

नाथू सिंह माइक लेते हुए कहा,,,

सत्जन सिंह इस बार मेरे लड़को को कोई हरा नही पाएगा।

विजेता मेरे लड़के ही बनेंगे।

सतजन सिंह _रहने दो सत्जन सिंह, पिछले बार भी तुमने यही कहा था। पर देखा न तुमने मेरे लड़को ने तुम्हारे पहलवानों की क्या दुर्गति की।

नाथू सिंह _सब याद है मुझे सतजन सिंह, इस बार मेरे लड़के पिछले अपमान का बदला लेने आए है। वो देखो मेरा बेटा सेरा।

अगर कोई मेरे बेटे शेरा का तुम्हरे लड़के हरा देंगे तो मैं अपना मूछ मुड़ा दूंगा।

अब तुम बोलो अगर मेरे लड़के तुम्हरे पहलवानों को हरा देंगे, तो क्या तुम अपना मूछ मुड़वाओगे।

सतजन _देखो नाथू सिंह खेल को खेल भावना की तरह लो। इसमें किसी किसी को अपमानित करने का इरादा नहीं होना चाइए।

नाथू सिंह,_सत्जन सिंह इसका मतलब तुमने अभी से हार मान लिया। हा हां हा

सत्जन सिंह डरपोक है।

सत्जन सिंह _नाथू सिंह, सतजन सिंह डरपोक नही है। ठीक है मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर है अगर मेरे लड़के हारे तो मैं अपना मूछ मुड़वा दूंगा।

सतपाल सिंह _भईया ये आप क्या कह रहे है?

सतजन सिंह _छोटे, सामने वाले ने मुझे चैलेंज दिया है। मै पीछे नहीं हट सकता।

सतपाल सिंह _पर भइया इस बार उसके पहलवान कुछ ज्यादा ही मजबूत लग रहे है।

नाथू सिंह _अब आएगा खेल का असली मजा।

मैं तो सतजन सिंह का मूछ अपने हाथो से साफ करूंगा। नाथू सिंह के छोटे भाई ने कहा,हा हा हा,, उसके साथी लोग हसने लगे।

इसके बाद मंच पर नारियल तोड़ा गया। सतजन सिंह ने खेल प्रारंभ करने का आदेश दिया।

नाथू सिंह _ये है मेरा बेटा शेरा, सतजन सिंह अपने पहलवानों को भेजो। मेरा शेरा अकेला ही काफी है सबसे निपटने के लिए।

सतजन सिंह ने अन्य गांव से आए हुए सभी पहलवानों को पहले मौका दिया, शेरा को हराने के लिए।

शेरा बहुत ताकत वर और चालक था।

उसने सभी पहलवानों को एक एक कर चीत कर दिया और सभी की हालत खराब कर दी।

उसकी ताकत देखकर गांव वाले चिंतित होने लगें। उधर नाथू सिंह के साथी बहुत उत्साहित थे। शेरा शेरा शेरा,,,,

करके शोर मचा रहे थे।

नाथू सिंह _सतजन सिंह, शेरा ने तो अन्य गांव से आए सभी पहलवानों को हरा दिया है, अब तुम अपने पहलवानों को भेजो,, हा हा हा हा,,

सत्जन सिंह के आदेश पर, उसके लड़के एक एक करके मैदान में शेरा से भिड़ने के लिए उतरे, शेरा नेको हराने के लिए बहुत कोशिश किया। लेकिन शेरा ने सभी को चीत कर , सबकी हालत खराब कर दी।

गांव के सभी लोग दुखी हो गए।

नाथू सिंह _हा हा हां हा,,,

सतजन सिंह, और कोई बचा है क्या? तुम्हारे पहलवान, तुम्हारे पहलवान तो सब नामर्द निकले, किसी ने शेरा को हरा नही पाया।

हा हा हा हा,,,

सतजन सिंह, शर्त के मुताबिक अपनी मूंछ हमे दे दो,,,

छोटे जाओ सत्जन सिंह का मूंछ लेकर आओ।

ठीक है भईया,, हां हा हा,,,,

नाथू सिंग का छोटा भाई छुरा लेकर सतजन सिंह के पास आ गया।

हा हां हा हा, सतजन सिंह यह मूछ मुझे dede , सुनिता सुप्रिया, शेखर सतपाल सिंह को कुछ समझ नही आ रहा था , क्या करे? सतजन सिंह का ही नहीं पूरे गांव वाले अपमानित महसूस करने लगें थे।

सतजन सिंह अपनी आंखें बन्द कर लिया।

इधर नाथू सिंह का भाई छुरा लेकर, हाथ आगे बढ़ा रहा ही था की, राजेश ने हाथ रोक लिया।

राजेश _, मामा की मान सम्मान को मिट्टी में मिलाने से पहले, मुझसे निपटना होगा।

राजेश ने एक जोर का मुक्का मारा नाथु सिंह के भाई का, चकरा कर वही गिर गया।

नाथु सिंह _अरे छोर तू कौन होता है। रोकने वाला। अगर इतनी ही ताकत है तो शेरा से क्यू नही लड़ लेता।

राजेश,_, हां हां लडूंगा मैं, पर मेरे होते हुवे मामा जी के इज्जत पर आंच नहीं आने दूंगा।

नाथु सिंह _तो उतर जा मैदान पर।

सतजन सिंह _राजेश, तू नही लड़ पाएगा उस शेरा से, मत जा, कर लेने दो नाथु सिंह को अपनी ईच्छा पूरी।

राजेश _नही मामा जी मै ऐसा होने नहीं दूंगा।

इधर शेखर सुनिता और सतपाल को कुछ समझ नहीं आ रहा था। क्या करे? एक तरफ तो खानदान की इज्जत दूसरी ओर बेटा।

राजेश _मामा जी मुझे आशीर्वाद दो।

सतजन सिंह न चाहते हुवे भी राजेश की जिद पर मजबूर होकर, विजई होने का आशीर्वाद दिया।

राजेश मैदान पर कुश्ती के अखाड़े में उतर गया।

गांवों वाले खामोश थे पता नही क्या होगा।

नाथु सिंह के आदमी शेरा शेरा सोर मचा रहे थे।

सुनिता आंखें बन्द कर भगवान से प्रार्थना कर रही थी।

राजेश और शेरा का घमासान युद्ध शुरू huwa। कभी शेरा भारी पड़ता तो कभी राजेश। राजेश का खेल देखकर गांव वालों में भी जोस आ गया।

वे भी राजेश राजेश चिल्लाने लगे।

धीरे धीर शेरा थकने लगा। राजेश ने चीखतेहुए , अपना पूरा ताकत लगाया और शेरा को अपने कंधो में उठा लिया। सभी लोग आश्चर्य से देखने लगे।

राजेश ने शेरा को घुमा कर जमीन पर पटक दिया।

कुछ छन के लिए शेरा बेहोश हो गया।

शेरा हार चुका था।

सभी लोग राजेश राजेश शोर मचाने लगे।

सुप्रिया _बुआ आंखें खोलो, राजेश जीत गया।

सुनिता ने जब देखा राजेश जीत गया है उसकी आंखो में आंसू भर आए।

शेरा के हारने के बाद नाथु ने अपने दूसरे पहलवान को मैदान में उतार दिया।

बांकि पहलवानों में शेरा जैसी ताकत नहीं था। राजेश ने एक एक करके सभी पहलवानों को धूल चटवा दिए।

गांव वालों ने राजेश को कंधो में उठा लिया। चारो तरफ राजेश राजेश गूंजने लगा।

नाथु सिंह मुंह छिपाने लगा।

सतपाल ने उसे पकड़ लिया।

नाथु सिंह कहा छिप रहा है। छुरा लाओ re इसका मूछ मुड़ना है।

सतजन सिंह _छोटे छोड़ दो उसको, खेल को खेल भावना की तरह ही खेलना चाहिए। किसी की मान सम्मान को ठेस पहुंचाना खेल भावना नहीं। नाथु सिंह ने सतजन सिंह से माफी मांगा।

राजेश को मंच पर ले जाया गाया।

सत्जन सिंह ने उसे फूलों की हार पहना कर गले से लगा लिया।

सतजन सिंह _यार तूने तो कमाल कर दिया।

सुनिता की आंखों से आंसू बह रहे थे।

राजेश ने अपने पिता और छोटे मामा का पैर छूकर आशीर्वाद लिया, दोनो ने उसे गले से लगा लिया।

अंत में वह अपनी मां के पास गया।

सुनिता रो रही थी।

राजेश _मां तुम रो क्यू रही हो?

सुनिता _ये तो खुशी के आंसू है पगले। तूने अपने मामा की मान मर्यादा को बचा लिया बेटा मुझे तुम पर गर्व है। सुनिता राजेश को अपनी बाहों में भर लिया।

उसके बाद राजेश को गांव के का एक चक्कर घुमाया गया। सभी नाच रहे थे राजेश की जयकार लगा रहे थे।

इधर घर का नौकर घर आकर घटना की सारी जानकारी, सावित्री और सुमित्रा को दी।

वे पूजा की थाली सजाकर राह देखने लगे।

गांव भ्रमण के बाद, जुलूस सत्जन सिंह का घर पहुंचा।

सावित्री, सुमित्रा और प्रिया पूजा की थाली लेकर, दरवाजे पर खड़ी थी।

सावित्री ने सत्जन सिंह की आरती उतरना चाही।

सतजन सिंह _, मेरी नही राजेश की आरती पहले उतारो। योद्धा यही है।

सावित्री ने राजेश की आरती उतारी राजेश ने अपने मामी से आशिर्वाद लिया।

सभी की आरती उतारने के बाद। सतजन सिंह नेगांव वालो से हाथ जोड़कर शुक्रिया कहते हुए अपने अपने घर जानें को कहा। गांव वाले अपने अपने घर चलें गए।

इधर राजेश कुश्ती लड़ते लड़ते काफी थक चुका था।

वह लंगड़ा रहा था। उसे शरीर में काफी दर्द हो रहा था।

सत्जन सिंह राजेश को उसके कमरे में ले जाया गया।

प्रिया उसकी उपचार करने लगी।

राजेश के कपड़े उतार दिया गया। वह सिर्फ उंडर वियर में था।

गीले कपड़े से उसके पूरे शरीर को पोछा गया।

फिर उसके शरीर को गर्म सरसो के तेल से मालिश किया गया। सभी महिलाए राजेश की सेवा में लगी थी।

प्रिया ने राजेश को कुछ दर्द निवारक गोली दिया।

कुछ देर बाद राजेश बेहतर महसूस करने लगा।

रात्रि भोजन के समय सुनिता ने राजेश के कमरे में ही अपने हाथो से उसे भोजन कराया।

सतजन सिंह ने राजेश के पास जाकर पुछा?

तू ठीक तो है न मेरा शेर,

राजेश _हा मामा जी मै बिल्कुल ठीक हूं।

सतजन सिंह ने सभी को भोजन करने के लिए कहा।

सभी लोग भोजन करने लगें।

सतजन सिंह _देखो राजेश को उसके कमरे में रात में अकेला छोड़ना ठीक नहीं। तुम में से कोई एक रात में राजेश के कमरे में ही सो जाना। उसे किसी चीज की जरूरत पड़ी तो।

सुनिता _मै सो जाऊंगी, आज राजेश के कमरे में।

सतजन सिंह _हाये ठीक रहेगा।

सभी लोग रात में राजेश का हाल चाल पूछकर। अपने अपने कमरे में सोने को चले गए।

कमरे में सुनिता, प्रिया रुकी हुई थी। तभी सुमित्रा राजेश के लिए दुध लेकर आई।

प्रिया _चाची, राजेश को गाय की जगह मां की दुध की जरूरत है इससे उसके शरीर को ज्यादा लाभ होगा।

सुमित्रा _क्यू नही, दीदी इजाजत दे तो अपनी दुध पीला दू।

सुनिता _पीला दो न तो, अगर मेरा बेटा को मां की दुध से ज्यादा लाभ मिलेगा तो मैं भला मना क्यों करूंगी।

पहले दरवाज़ा बंद कर दो कोई आ न जाए।

प्रिया ने दरवाज़ा बन्द कर दिया।

सुमित्रा ने अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया। और चूचे बाहर निकाल दिया।

सुनिता _राजेश बेटा अपनी मामी की दुध पिलो इससे तुम्हे जल्दी आराम मिलेगा।

राजेश ने सुमित्रा की चुचियों को पकड़ लिया और फिर मसल मसल कर बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया।

सुनिता _अरे प्रिया तुम्हारा भी तो दुध, आता है न। राजेश को सुमित्रा का दुध कम न पड़ जाए तू भी पिला दे अपनी दुध।

प्रिया _जी बुवा।

प्रिया ने भी अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया। राजेश अब बारी से दोनो की चूचे मसल मसल कर चूसने लगा दुध गटक गटक कर पीने लगा।

तभी प्रिया ने देखा राजेश के अंडरवियर काफी ऊपर उठ गया है, उसका लंद खड़ा हो गया है। वह मुस्कुराने लगी।

प्रिया _बुवा देखो तो राजेश का घोड़ा तो इसके घायल होने के बाद भी दौड़ने को तैयार है।

सुनिता _तुम जैसे घोड़ी की चूचे देखेगा तो होगा ही। तीनो महिलाए हसने लगी।

प्रिया _बुआ राजेश का अंडर वियर उतार दो , राजेश को दर्द कर रहा होगा।

सुनिता ने राजेश का अंडर वियर, उतार दिया उसका मोटा और लम्बा लिंग हवा में में लहराने लगा।

तीनों औरते देखकर मुस्कुराने लगी। प्रिया _बुवा, सेक्स भी दर्द निवारक होता है। आदमी सेक्स के समय अपना सारा दर्द भूल जाता है।

सेक्स से मर्द को दर्द से जल्दी राहत मिलता है। हमे राजेश को सेक्स सुख भी देना चाहिए।

सुनिता राजेश के लंद को सहलाने लगी, फिर अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दी।

इधर राजेश दोनो औरतों का चूची पी रहा था।

सुनिता उसका लंद चूस रही थी।

तीनों औरते राजेश का लंद देखकर और चूची मसलने से गर्म हो चुकी थी।

सुनिता ने अपनी सारे कपड़े उतार फेकी। वह राजेश के लंद को chut में रख कर बैठ गई, फिर हल्के हल्के उछल उछल कर राजेश को सेक्स का मजा देने लगी और खुद मजा लेने लगी। कुछ देर बाद जब वह झड़ गई तो, सुमित्रा नंगी हो गई और राजेश के लंद पर उछल उछल कर उसे सेक्स सुख देने लगी और खुद मजा लेने लगी। इस तरह तीनो महिलाए बारी बारी से राजेश केलंद का सवारी कर चुदने लगी। राजेश को भी तीनो महिलाओं को चोदने में बड़ा मजा आ रहा था। वह अपना सारा दर्द भूल गया, अब वह तीनो महिलाओं को अलग अलग आसनों जमकर चोदने लगा, खुद भी मजा लेने लगा और औरतों को भी मजा देने लगा। कमरे में चारों की सिसकारी गूंज रही थी,, आह उह आह उह आह। उह। आह। उह। आह उह आह, उह,,,,,

करीब दो घंटे तक तीनो औरतों को जमकर बजाया।

उसके बाद तीनों को अपनी वीर्य से नहला दिया।

राजेश थक चुका था। वह गहरी नींद में सो गया।

सुमिता और प्रिया दोनो अपने कपड़े पहन कर अपने अपने कमरे में चली गईं। सुनिता राजेश से लिपट कर उसके बाजू में सो गया।

सुबह सुनिता जल्दी उठ कर नहाकर पूजा पाठ की और घर के काम में सहयोग करने लगी।

इधर सतजन सिंह उठ कर राजेश केकी हाल चाल पुछने उसके कमरे में गया।

सतपाल और शेखर भी वहां पहुंचा।

सतजन सिंह _, अब कैसी तबियत है यार तेरी।

राजेश _, मै बिल्कुल ठीक हूं, मामा जी। कल रात मां मामी और प्रिया दी ने बहुत अच्छी सेवा की।

सुमित्रा भी वहा खड़ी थी वह शर्मा गई।

सत्जन सिंह _यार तुमने तो कल कमाल ही कर दिया, हमारी घर की मान मर्यादा को बचा लिया।

राजेश _ये तो मेरा फर्ज था मामा जी।

सतजन सिंह _यार तू इतना ताकत वर है, फिर तुम कल सुबह मुझसे कुश्ती में कैसे हार गए।

राजेश _भला मै अपने मामा जी से कैसे जीत सकता हूं।

सभी लोग हसने लगे।

सतजन सिंह _यार तूने मेरा दिल जीत लिया। हम सबको तुम पर गर्व है।

राजेश _मामा जी मुझे आपसे कुछ चाहिए।

सतजन सिंह _अरे बोल भांजे क्या चाहिए तुम्हे, तुम्हरे लिए तो मेरी जान भी हाजिर है।

राजेश _मामा जी एक बार आप प्रिया दीदी को माफ कर दो, वो आपसे बहुत प्यार करती है।

सज्जन सिंह _, राजेश, क्या तुम्हे लगता है मैं प्रिया से प्यार नहीं करता। ऐसा एक दिन भी नही रहा होगा जब मैं प्रिया को याद नही किया होऊंगा।

शायद, अपनी झूठी शान को बचाने के चक्कर में कभी, उससे मिलने की कोशिश नही किया।

पर आज तुमने मेरी आंखें खोल दिया है। अब चाहे कोई कुछ भी कहे, मुझे किसी की परवाह नही।

सज्जन सिंह ने प्रिया को पुकारा, प्रिया वही खड़ी थी।

प्रिया _पिता जी।

सज्जन सिंह _मुझे माफ कर दो बेटी।

प्रिया _नही पिता जी माफी तो मुझे मांगनी चाइए, मैने आपक दिल दुखाया।

दोनो एक दूसरे से गले लग कर रोने लगे।
 
राजेश अपने कमरे में आराम कर रहा था। तभी प्रिया उसके लिए नाश्ता लेकर आई।

राजेश अब कैसे फिल कार रहे हो?

राजेश _मै बिल्कुल ठीक हूं दी।

प्रिया _चलो नाश्ता कर लो।

राजेश अपने बेड सेउठ कर बैठ गया।

प्रिया _थैंक यू, राजेश

राजेश,_किस बात के लिए दी।

प्रिया _तुम्हारी वजह से पिता जी ने मैरी गलती के लिए क्षमा कर दिया। अगर तुम नहीं होते तो ये संभव नहीं हो पाता। सच में तुम कमाल के हो।

I Love you राजेश।

राजेश,_i love you टू दी।

प्रिया राजेश का ओंठ चूसने लगी।

राजेश भी प्रिया की ओंठ चूसने लगा।

उनके बीच जबरदस्त किसिंग सीन चल ही रहा था कि सुप्रिया, चाय और पानी का ट्रे लेकर कमरे में आई।

वह दोनो को एक दूसरे की ओंठो को चूसते हुए, आश्चर्य से देखने लगी।

तभी राजेश की नजर सुप्रिया पर गया। राजेश ने प्रिया को अपने से दूर किया।

तभी प्रिया को नजर, सुप्रिया पर गई।

प्रिया,_अरे छोटी तू कब आई।

सुप्रिया _,, जस्ट अभी दी।

बड़ा प्यार हो रहा है भाई बहन के बीच।

प्रिया,_अरे छोटी मै तो राजेश को शुक्रिया का रहा था, उसने पिता जी की नाराजगी दूर कराई।

सुप्रिया _हां भई ये तो राजेश के कारण ही संभव हो पाया। मै चाय और पानी लेकर आई हूं। चलो राजेश जल्दी नाश्ता ख़त्म करके। चाय पी लो, नही तो चाय ठंडी हो जाएगी।

राजेश,_,, जी दी।

प्रिया _अच्छा राजेश अब मै चलती हूं। घर जानें की तैयारी भी तो करनी है।

राजेश _ठीक है दी।

प्रिया वहा से चली गईं।

सुप्रिया _ हूं, बडा रोमांस हो रहा था, भाई बहन के बीच।

राजेश _वो दीदी मुझसे बहुत प्यार करती है न,i

सुप्रिया _वो तो है, जब से आय हो दोनो का प्यार देख रही हूं।

राजेश _दीदी मै समझा नही।

सुप्रिया _ हम भी तुम्हारी बहन है, पर हमसे आप प्यार नही करते?

राजेश _दीदी, ये आप क्या कह रही है?

हम आपसे भी उतना ही प्यार करते है जितना प्रिया दी से।

सुप्रिया _चल झूठा कही का।

हमे तो एक बार भी गले नही लगाया।

राजेश _आपने हमे मौका ही कब दिया?

सुप्रिया _मौका मिले तो हमें भी वैसे ही प्यार करोगे जैसे प्रिया दी से करते हो।

राजेश _हा क्यू नही? मै भला भेद भाव क्यू करूंगा?

सुप्रिया _,, अच्छा ठीक है, मै भी देखना चाहूंगी, मौका मिलने पर कितना प्यार करते हो मुझे।

अभी तो मैं चलती हूं।

सुप्रिया, नाश्ता प्लेट, कप और गिलास, उठा कर ले गई। राजेश ने चाय नाश्ता कार लिय था।

इधर सुनिता शेखर स्वीटी और प्रिया घर जानें के लिए तैयारी कर रही थी।

सावित्री ने कुछ दिन और रुकने के लिए कहा,

सुनिता _भाभी, तुम तो जानती हो इनको तो बैंक से छुट्टी बड़ी मुस्किल से मिलती है।

सावित्री _हूं वो तो है? प्रिया बेटी तुम कितने दिनों बाद आई हो तुम कुछ दिन और रुक जाओ।

प्रिया _मां, सुबह से ही hospital से बार बार फोन आ रहा है, कुछ डिफिकल्ट केस आया हूवा है। मुझे भी जाना होगा।

कुछ दिनों बाद मैं और आ जाऊंगी। आप लोगो से मिलने।

सावित्री _सभी लोग जा रहे हो कोई तो कुछ ओर रुक जाओ।

सत्जन सिंह _हा भाई, सावित्री ठीक कह रही हैं। तुम लोगो के जानें के बाद घर सुना सुना लगेगा।

सुप्रिया _पिता जी, दीदी को रोक नहीं सकते, उसे हॉस्पिटल सम्हालनी है। बुआ को भी रोक नहीं सकते फूफा जी को बैंक से और छुट्टी मिल नही सकती। स्वीटी को भी कालेज जाना है।

बच गया राजेश, वह तो रुक सकता है। उसके पास तो अभी कोई काम नहीं है।

सुनिता_पर वह अकेला, यहा रहकर करेगा क्या? वह ज्यादा दिन रहेगा तो बोर हो जाएगा।

सतपाल सिंह _दीदी मै और भईया कल परसों 5 दिनो के लिए सामाजिक अधिवेशन के कार्यक्रम में जायेंगे।

समाजिक अधिवेशन इस बार समाज प्रमुख का चुनाव होना है।

इसलिए मेरा और भईया दोनो का जाना जरूरी है। राजेश हमारे आते तक ठहर जाता तो अच्छा रहता।

सतजन सिंह _हा सुनिता, छोटे ठीक कह रहा है। राजेश हमारे आते तक यहां रुक जाता तो अच्छा रहता।

सुनिता _अगर ऐसी बात है तो, मै राजेश को बोलूंगी। वह कुछ दिन यही रुक जाए।

सुप्रिया खुश हो गई।

सुनीता , राजेश के कमरे में गई।

राजेश _मां जानें की तैयारी हो गई क्या? मेरे भी कपड़े पैक कर दो।

सुनिता _बेटा, तुम्हारे मामा कह रहे थे की परसो वे दोनो भाई, कुछ दिनों के लिए जरूरी काम से बाहर जा रहे है। घर में सिर्फ महिलाए ही रह जायेंगी।

तो हम लोग चाह रहे हैं की तुम कुछ दिन यही रह जाओ। जब तुम्हारे मामा आयेंगे तो तुम शहर आ जाना।

राजेश _ओह पर मां मुझे सूरज पुर जाना था। वैसे भी मैं यहां बोर हो जाऊंगा।

सुनिता _अरे बेटा एक सफ्ताह की तो बात है, और यहां तुम्हारी, छोटी मामी तो है ही तुम्हारा ख्याल रखने।

रोज ताजी दूध पीने को मिलेगा।

सुनिता हंसते हुए बोली।

राजेश _ठीक है मां आप चाहती है तो रुक जाता हूं।

सुनिता _हा, एक बात सुन, ज्यादा इधर उधर घूमना मत, और किसी से लड़ाई झगड़ा मत करना।

राजेश _ठीक है मां।

मेरा प्यारा बेटा, सुनिता ने राजेश को गले से लगा लिया।

तभी राजेश को मस्ती सूझी उसने सुनीता को कस कर अपने बाहों में जकड़ लिया।

उसकी चूंची राजेश के सीने से एकदम से दब गए। सुनिता _अरे क्या कर रहा है छोड़ न, कोई आ जाएगा बदमाश।

राजेश _सारी मां।

राजेश ने सुनिता को छोड़ दिया।

भोजन करने के बाद, सुनिता स्वीटी शेखर और प्रिया अपने बच्चों को लेकर सबसे इजाजत लेकर घर निकल गए।

अगले दिन सुबह राजेश अपने को बिलकुल फिट महसूस किया।

वह सुबह उठ कर। फ्रेश होकर आंगन में आ गया। जहां सतजन सिंह और सतपाल सिंह कसरत कर रहे थे।

सतजन सिंह _अरे आओ मेरे शेर, लगता हैं अब तुम बिल्कुल ठीक हो गए हो।

राजेश _हां मामा जी, अब मैं अपने को बिलकुल फिट महसूस कर रहा हूं इसलिए आपके साथ, कसरत करने चला आया।

सतजन सिंह _ये तो बड़ी अच्छी बात है।।

सुप्रिया राजेश को कसरत करते हुए देखने लगी।

तभी सावित्री आई।

सावित्री, _अगर तुम लोगो का कसरत हो गया हो तो, जाकर नहा लो, नाश्ता तैयार हो गया है।

सत्जन सिंह _चलो यार अब नहाते है, नही तो तुम्हारी मामी फिर चिल्लाएगी।

तीनों घर के पीछे चले गए। सतज़न सिंह को बाथरूम में नहाना पसन्द नहीं था। वह पीछे ट्यूबवेल में नहाता था।

राजेश भी वहीं ट्यूब वेल में नहाने लगा।

नहाने के बाद, के बाद वे नाश्ता किए।

नाश्ता करने के बाद सत्जन सिंह ग्राम पंचायत में बैठक रखा गया था, वहां जानें के लिए तैयार हो गया।

सतजन सिंह _अरे भांजे, तू यहां रहकर क्या करेगा, चल तू भाई मेरे साथ, तुम्हारा भी टाइम कट जायेगा।

राजेश _ठीक है मामा जी।

राजेश तैयार होकर सत्जन सिंह के साथ चला गया।

सतपाल सिंह भी तैयार होकर, खेत चला गया।

आज से मजदूर खेत में काम करने के लिए आने वाले थे।

दोपहर में भोजन के समय वे सभी घर पहुंचे। भोजन करने के बाद तीनों घर में ही आराम करने लगें।

कुछ देर आराम करने के बाद सतपाल सिंह फिर खेत चला गया। मजदूर लोग ठीक से काम कर रहे हैं की नही देखने।

इधर शाम को सत्जन सिंह और राजेश दोनो टहलने निकल गए।

रात में भोजन के बाद, सभी अपने कमरे मे सोने चले गए।

सतपाल सिंह के सो जानें के बाद, सुमित्रा नंदन राजेश के कमरे में चुपके से आई।

राजेश ने अलग अलग पोजीसन में आधे घंटे तक चोदा। सुमित्रा तीन बार झड़ चुकी थी।

वह राजेश को अधूरा छोड़ कर ही कमरे से भाग गई।

राजेश लंद सहलाता रह गया।

राजेश _अरे यार ये मामी तू मुझे अधूरे में ही छोड़ कर भाग जाती है। साला रात अब कैसे कटेगी। मुझे कोई दूसरा जुगाड करना ही पड़ेगा नही तो रोज का यही किस्सा होगा।

अगले दिन सुबह से ही सतपाल सिंह और सतजन सिंह दोनो समाजिक अधिवेशन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 5दिनो के लिए बाहर चले गए।

इधर खेत में मजदूर लोग काम करने आ रहे थे। उसे देखने के लिए सावित्री खेत जाने के लिए तैयारी हुई।

राजेश _मामी आप कहां जा रही है।

सावित्री _अरे बेटा मै खेत जा रही हूं, खेत में मजदूर लोग अभी काम करने आ रहे है, देखने के लिए जाना पड़ेगा, नही तो सिर्फ टाइम पास करेंगे। उन पर नजर रखनी पड़ती है।

राजेश _अरे मामी चलो मै भी चलता हूं वैसे भी यहां रहकर क्या करूंगा?

सावित्री _अच्छा चलो।

खेत घर से ज्यादा दूर नहीं था। वे पैदल ही चले गए।

जब वे पहुंचे।

कुछ मजदूरन वहा पहुंच चुके थे।

सावित्री _अरे तुम लोग अभी तक काम शुरू नही किए हो, इतना देर हो गया। चलो काम में लग जाओ।

एक मजदूरं _अरे काकी, अभी तो सभी मजदूर पहुंच रहे हैं, थोडा राहत तो लेने दो।

वैसे ये तो वहीं बाबू है न जिसने सारे पहलवानों को धूल चटाया था। पहलवानी छोड़कर बेचारा खेत में क्या करने आया है?

सावित्री_तुम लोगो का दर्शन करने आया है, कलमुही कही की, फालतू बाते बंद कर और काम सुरु करो।

मजदूरण काम करना शुरू कर दी।

करीब 12, _13 गांव की औरते थी, कोई जवान तो कोई अधेड़, अलग अलग उम्र की।

मजदूर लोग काम करने लगें और खेत के मेड पर खड़े हो कर सावित्री उन पर नजर रखने लगी। राजेश भी बाजू में खड़ा था।

कुछ देर बाद एक और मजदूरन खेत में पहुंची।

अरे पारो तू अभी आ रही है, ये कोई आने का समय है।

पारो _काकी माफ करना बच्चा रो रहा था दुध पीने के लिए। उसे दूध पिलाने लग गई।

एक मजदूरन _, बच्चे को दुध पिला रही थी या पति से कुआ खुदा रही थी।

सभी औरते हसने लगीं।

सावित्री _चुप करो छिनारो, जवान लडका सामने खड़ा है और शर्म नहीं आती गंदी भाषा बोलते हो।

सभी औरते चुप हो गई।

सावित्री _पारो तु जल्दी आया कर काम में कल लेट करेगी तो खेत में घुसने नहीं दूंगी, हा।

पारो _जी काकी।

पारो भी काम में जुट गई।

सभी औरते झुक कर काम कर रही थी। उसके चूचे सामने झूलने लगे।

एक जवान लड़के को सामने देखकर कुछ औरते मजा लेने के लिए, अपनी साड़ी की पल्लू और हटा दिया। ताकि राजेश की नजर उसके चूचे पर जाए।

पारो _अरे काकी ये बाबू तो आपका भांजा है न जिसने सारे पहलवानों को पटकनी दी थी।

दिखने में तो बडा भोला लगता है। लगता ही नहीं इसने बड़े बड़े पहलवानों को पानी पिला दिया।

क्या नाम है बाबू का?

सावित्री _क्यू जानकर क्या करेगी?

इसके साथ कुश्ती लड़ेगी क्या?

पारो _अरे काकी, भले ही बाबू ने बड़े बड़े पहलवानों को धूल चटाया हो पर मुझे नही लगता हमसे ये ज्यादा देर टिक पाएगा।

सावित्री _चुप कर छिनार कही की, जवान लौंडा देखा नही की मुंह से लार टपकाने लगी। और ये अपनी साड़ी की पल्लू ठीक से ठीक कर।

सामने जवान लडका खड़ा है और पुरा दुकान खोल रखी है।

सभी औरते हसने लगी।

सावित्री _अरे राजेश बेटा, जाओ तुम जाकर झोपड़ी में आराम करो। यहां खड़े रहोगे तो ये कलमुही लोग गंदी हरकत करेंगे।

राजेश झोपड़ी में चला गया।

खाट में लेटकर, मोबाइल चलाने लगा।

कुछ देर बाद, पारो बोली,

ओ हो बड़ी प्यास लगी है। अरे काकी मैं पानी पीकर आती हूं।

झोपड़ी में ही पानी का दो तीन मटका रखा huwa था। खाने की चीजे भी मजदूर लोग झोपड़ी में ही रखते थे। और दोपहर को झोपड़ी में आकर घर से लाया भोजन करते थे।

पारो को प्यास लगी थी,,,

सावित्री _घर से आए ज्यादा समय नहीं huwa है ओर प्यास लगने लगी, तेरी कामचोरी मैं अच्छे से समझती हूं।

पारो_अरे काकी मैं सच कह रही, बड़ी प्यास लगी है।

सावित्री _अच्छा ठीक है, जा जल्दी पीकर आ जाओ। और सुन वहा एक पानी का डिब्बा रखा होगा, उसमे पानी भर ले आना, और किसी को प्यास लगी हो तो पी लेगी।

पारो _ठीक है काकी।

पारो झोपड़ी में गई।

झोपड़ी के बाहर मटका रखा था।

अंदर राजेश खाट में लेटा मोबाइल पर गाना सुन रहा था।

पारो _, अरे बाबू, गाना सुन रहे हो?

राजेश _अरे भौजी तुम यहां।

पारो _मै तो यहां पानी पीने आई थी बडी प्यास लगी थी।

वैसे गांवों में चारों ओर तुम्हारी ताकत के ही चर्चे हो रहे है। लग कह रहे थे, बड़ी ताकत है तुम्हारी भुजाओं में।

कभी औरतों के साथ कुश्ती लड़े हो।

राजेश _नही भौजी, मै औरतों के साथ कुश्ती नही लड़ता।

पारो _अरे शादी के बाद तो अपनी मेहरारू के साथ कुश्ती लड़ोगे न।

राजेश _अरे भौजी मै भला अपनी लुगाई से भला क्यू कुश्ती लड़ने लगा।

पारो खिलखिला कर हंसने लगी।

तू तो एकदम भोंदू है re

अच्छा ये बता इसका मतलब समझता है?

पारो एक हाथ की दो ऊंगली से रिंग बनाकर दूसरे हाथ की एक ऊंगली अन्दर बाहर करते हुवे बोली।

राजेश _नही, क्या होता है इसका मतलब, तुम ही बता दो।

पारो _नही बाबा काकी को पता चलेगा तो मुझे डांटेगी, इस्का मतलब तुम अपनी मामी से ही पूछना। पारो हसने लगी।

तू तो एकदम भोंदू है। केवल शरीर में ताकत रहने से क्या होगा? असली कुश्ती मर्द के साथ नही औरत के साथ होती है और जो औरत को कुश्ती में हरा दे वही असली मर्द होता है। तुम्हे तो मुठ मारना क्या है?, ये भी पता नहीं होगा।

पारो हसने लगी।

राजेश _ भौजी,तुम क्या बोल रही हो मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है?

पारो,_अगर तुम ये सब सीखना या जानना चाहते हो तो मैं तुम्हे सीखा सकती हूं। ये चीजे शादी के बाद तुम्हारा बहुंत काम आयेगा।

राजेस्_अच्छा तो सीखा दो न, अभी।

पारो _अभी नही बुद्ध, ये चीजे अकेले में सिखाया जाता है। अभी तो कोई भी आ जायेगा, वैसे भी तुम्हारी मामी, गुस्से में होगी की इतनी देर मैं यहां क्या कर रही।

अच्छा मै चलती हूं।

पारो वहा से चली गईं।

सावित्री _अरे कलमुही, तू पानी पीने गई थी की जवान लौंडे से boor मरवाने गई थी। क्या कर रही थी इतनी देर तक।

सभी औरते हसने लगी।

पारो _अरे काकी तुम्हारा भांजा तो एकदम भोंदू है भोंदू, वो क्या मेरा boor मरेगा। उसे तो ये भी नही पता, मुठ मारना क्या होता है?

यहां तो बच्चा बच्चा मूठ मारता फिरता है।

सावित्री _रण्डी कही ये क्या बक रही है तू।

पारो,_काकी मै बक नही रही, सच कह रही हूं।

अपने भांजे को कुछ सिखाओ।

इस उम्र में तो अकेले में जवान लौंडे, मोबाइल में नंगी वीडीयो देखते हैं, वह तो गाना सुन रहा था।

सावित्री _छीनार कही कि ज़रूर तू उसके साथ गंदी हरकत की होगी।

पारो _काकी कोशिश तो की थी कुछ करने की पर तेरा भांजा तो एकदम भोंदू है। बड़े बड़े पहलवानों को हराने से क्या फायदा, जब जवान औरत उसके सामने चूची निकाल कर खड़ी हो और उसके पैजामे में कोई हलचल न हो।

वहा मौजुद सभी महिलाए हसने लगी।

एक औरत _पारो तू क्या सच कह रही है?

पारो _नही तो क्या मैं झूठ कह रही हूं।

औरत _तब तो काकी तुम्हारे भांजे को एक औरत से शिक्षा लेने की शख्त जरूरत है।

पारो को भेज दो झोपड़ी में सब सीखा देगी।

सभी महिलाए खी खी करने लगी।

सावित्री _चुप करो बेशर्मों, मेरे भांजे से तो दूर ही रहना तुम लोग।

उसे बिगाड़ने में तुले हुए हो।

अब काम में ध्यान दो, बहुत हो गई तुम लोगो की बकचोदी।

सभी महिलाए सावित्री की गुस्सा देखकर, चुप हो गई और काम करने लगी।

कुछ देर बाद,,,

सावित्री _तुम लोग जल्दी जल्दी काम करो, मै आकर देखूंगी कितना काम किए हो।

सावित्री वहा से चली गईं और झोपड़ी में आ गई।

राजेश मोबाइल पर गाना सुन रहा था।

सावित्री _अरे बेटा क्या कर रहा है?

राजेश _कुछ नही ताई बस गाने सुन रहा था।

सावित्री _ये पारो तुम्हे परेशान तो नही कर रही थी।

राजेश _भौजी मुझसे क्या बोल रही थी मुझे तो उसकी बाते कुछ समझ ही नहीं आई, मामी।

सावित्री _वो ज़रूर तुमसे कोई गंदी बाते की होगी , कमिनी कही की।

राजेश,, _, गंदी बाते कैसी गंदी बातें ताई।

सावित्री _,, अरे छोड़ो बेटा उस कलमुहि के बाते।

राजेश _मामी मुझे आपसे कुछ पूछना था।

सावित्री _,, पूछो बेटा क्या पूछना है?

राजेश _, अच्छा मामी इसका मतलब क्या होता है?

राजेश ने एक हाथ से रिंग बनाकर उसमें दूसरे हाथ की एक ऊंगली अन्दर बाहर करते हुए कहा।

सावित्री, शर्म से पानी पानी हो गई।

राजेश _मामी बताओ न इसका मतलब क्या होता है?

सावित्री _, ये गंदे इशारे तुम्हे कहीं वो कलमुही तो नही बताई।

राजेश _हां मामी, और मैंने जब कहा की इसका मतलब क्या होता है मुझे नहीं पता तो मुझ पर हंसने लगी। और मुझे भोंदू बोलने लगी।

मामी क्या होता है, बताओ न इसका मतलब, राजेश ने उंगलियों से फिर इसारे करते हुवे पूछा।

सावित्री शर्म से गड़ी जा रहीं थी।

राजेश _, मामी आप तो शर्माने लगी।

सावित्री _अरे बेटा, ऐसी गंदी इशारे मत करो, मुझे बड़ी शर्म आ रही है।

राजेश,_मामी इसमें शर्म की क्या बात,?

और हा मुझे भौजी ने एक और बात पूछी।

सावित्री,_और क्या पूछी उस कलमुहि ने।

राजेश _उसने मुझसे पूछी की मूठ मारते हो कि नही।

मामी ये मूठ मारना क्या होता है?

सावित्री, शर्म से गढ़ी जा रही थी।

राजेश _मामी बताओ न?

जब मैने भौजी से कहा की मुझे नही पता तुम ही बता दो।

तो कहने लगी की अपनी मामी से पूछना और अगर तुम्हारी, मामी नही बताई तो मुझसे अकेले में मिलना मै तुम्हे सब बता और सीखा दूंगी।

सावित्री,_, अरे बेटा तू उस कलमुहि के भूल कर भी मत जाना, वह तुम्हे बदनाम कर देगी।

राजेश _अरे मामी आप तो कुछ बता ही नही रही है तो मुझे मजबूरी में उसके पास जाना ही पड़ेगा न।

वह मुझे भोंदू बोल बोल कर हस रही थी, मुझे बिल्कुल अच्छा नही लगा।

मैं जानना चाहता हू इस इशारे और मूठ मारने का मतलब क्या होता है?

सावित्री _अरे बेटा ये दोनो चीजे बड़ी गंदी होती है। मै तुम्हारी मामी हूं, मै इन चीजों के बारे में कैसे बताऊं, मुझे बड़ी शर्म आयेगी। छी बेटा तुम इन चीजों को भूल जाओ।

राजेश _, ठीक है मामी आप नही बता सकती तो रहने दो मै पारो भौजी से पूछ लूंगा।

सावित्री _अरे बेटा तू लगता है तू नही मानेगा। मुझे बेशर्म बना के ही मानेगा।

अच्छा सुन ,,

लड़के लोग अपने नुनु को अपने हाथ से हिलाते हैं उसे मूठ मारना कहते है।

सावित्री शर्म से गड़ी जा रहीं थी वह अपनी मुंह छिपाने लगी।

राजेश _पर मामी पेशाब करते समय तो नुनु को तो मैं भी हिलाता हूं, इससे अंदर रुका पुरा पेशाब बाहर आ जाता है। ये क्या? बात हुई, क्या इसे ही मुठ मारना कहते हैं।

सावित्री _तू सच में बुद्धू है।

राजेश _तो ठीक से बताओ न तो।

सावित्री _जब लडके अपने नुनु को लगातार बार बार हिलाता है तो पेशाब नही उसका सफेद पानी बाहर आता है।

राजेश _मामी, ये सफेद पानी क्या होता है?

क्या मेरे भी हिलाने से सफेद पानी बाहर आएंगे।

सावित्री शर्म से गड़ी जा रही थी, वह अपनी मुंह छिपाकर शर्माते हुवे बता रही थी।

सभी लडके के निकलते है।

राजेश _पर मामी लडके अपने सफेद पानी बाहर क्यू निकालते है।

सावित्री _क्यू की ऐसा करने से उन्हें बड़ा मजा आता है।

राजेश_अच्छा, मामी मैं भी हिलाकर देखू?

सावित्री _, चुप बेशरम मेरे सामने ही हिलाएगा क्या?

राजेश _तो फिर!

सावित्री _रात में अकेले में हिला कर देखना? हा ऐसा करते समय ध्यान रखना कोई देखे मत नही तो तेरा मजाक उड़ाएंगे।

राजेश_अच्छा, ठीक है आज रात को मैं भी हिलाकर देखता हूं, सफेद पानी बाहर निकलता है कि नही।

सावित्री _अब मजदूरों के भोजन का समय हो गया है।

वे आ रहीं होंगी।

अब ये सब बाते बंद कर।

राजेश _ठीक है मामी।

कुछ देर बाद, औरते भोजन करने, झोपड़ी में आई।

पारो,_क्या चल रहा है मामी और भांजे के बीच में।

सभी औरते हसने लगीं।

सावित्री _चुप कर कलमुही कहीं की।

राजेश बेटा जा तू घर जा, भोजन कर लेना।

मैं अपने लिए भोजन लेकर आई थी।

राजेश _ठीक है मामी।

सावित्री _और बेटा तुम घर में ही आराम करना, यहां आयेगा तो ये कलमुही तुझे फिर परेशान करेगी।

राजेश _ठीक है मामी।

पारो _अरे काकी, काहे भेज रहे हो, बाबू को, हम लोग लाए हैं न खाना, मिल बांटकर खा लेंगे। यहां रहेगा तो बेचारा को कुछ सीखने को मिलेगा।

सभी औरते हसने लगी।

सावित्री _चुप कर बेशर्मों।

बेटा तू जा।

राजेश _ठीक है मामी।

राजेश खेत से घर आ गया।

सुमित्रा _अरे राजेश तू आ गया। चल हाथ पैर धोकर आ जा मै तेरे लिए खाना लगाती हूं।

राजेश _ठीक है मामी।

राजेश भोजन करने के बाद अपने कमरे में आराम करने लगा।

शाम के समय सुप्रिया चाय लेकर कमरे में पहुंची।

सुप्रिया _राजेश उठो चलो चाय पिलो।

राजेश _अरे दीदी, मामी आ गई क्या खेत से।

सुप्रिया _नही आ रही होगी।

सुप्रिया _अच्छा राजेश, मुझे तुमसे एक बात पूछनी थी।

राजेश _, हा बोलो दीदी क्या बात?

सुप्रिया ,, ये प्रिया दीदी के पति दीदी को खुश नही रखते क्या?

राजेश _क्यू दी ऐसे क्यों पूछ रहे हो, जीजू तो बड़े अच्छे है।

वो क्या है न कि जीजू डॉक्टर है तो हॉस्पिटल में ही थोडा ज्यादा बीजी रहते है।

वैसे प्रिया दीदी को तो वह बहुत चाहते है।

सुप्रिया _एक और बात पूछनी थी तुमसे।

राजेश _हा दीदी पूछो न तो, संकोच क्यों कर रही हो?

सुप्रिया _परसो रात मैंने दीदी को तुम्हारे कमरे से निकलते हुए देखा था।

और सुबह जब मैं तुम्हारे कमरे में आई तो तुम बिना कपड़ो के थे।

इन सबका मतलब मै क्या समझू?

राजेश _दी, वो क्या है न कि,,,

दी अब छोड़ो न तुम भी किन बातों को लेकर बैठ गई।

सुप्रिया _कब से चल रहा है सब, मै भी तो जानू।

राजेश _दी ये सब जानकर क्या करोगी?

रहने दो न। ये बात किसी से कहना मत, नही तो बदनामी हो जाएगी।

सुप्रिया _ठीक है मुझे क्या? पर,,

राजेश _पर क्या दी!

सुप्रिया _उस दिन तुम दीदी के साथ जो किसिंग कर रहे थे, वो मेरे साथ भी करना होगा।

राजेश _दी आप मुझे ब्लैक मेल कर रही हो।

सुप्रिया _अब जो समझो।

सुप्रिया, राजेश के क़रीब आकर बैठ गई।

और अपनी ओंठ राजेश की ओंठो पर रख दी।

राजेश की ओंठ को चूसना शुरू कर दी।

कुछ देर बाद राजेश ने भी उसकी ओंठ को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा।

सुप्रिया राजेश से लिपट गई।

राजेश ने भी उसे अपनी बाहों मे कस लिया।

दोनो एक दूसरे की ओंठो को पागलों की तरह चुसने लगे।

तभी दोनो को किसी की आने की आहट हुई।

दोनो अलग हो गए।

सुप्रिया मुस्कुराते हुए, कमरे से बाहर चली गईं।

सावित्री, खेत से घर आ चुकी थी।

रात में राजेश के कमरे में सुमित्रा फिर आई।

राजेश उसे आधे घण्टे तक जमकर चोदा। खुद संतुष्ट होकर,

सुमित्रा, राजेश को अधूरा छोड़ कर फिर भाग गई।

ये मामी तो बड़ी मतलबी निकली। अब दूसरा जुगाड करना ही पड़ेगा। नही तो रात भर, लंद सहलाकर ही गुजारनी पड़ेगी।

राजेश ने अपना लंद को बाथरूम में जाकर अच्छे से धोया।

फिर टावेल से अच्छे से पोछा।

वह सावित्री के कमरे की ओर चला गया।

उसने धीरे से दरवाज़ा खटखटाया।

सावित्री की पूरी तरह लगी नही थी।

सावित्री _इतनी रात को कौन दरवाज़ा खटखटा रहा है।

अपने बेड से उठ कर दरवाज़ा खोली।

सावित्री _अरे राजेश तुम इतनी रात को,,

राजेश _हा मामी मैं!

मामी तुम झूठी हो।

सावित्री _क्यू क्या huwa?

राजेश _, पहले अंदर तो आने दो एफआईआर बताऊं।

सावित्री ने इधर उधर झांका, चारों तरफ सन्नाटा था।

सावित्री _अच्छा आओ, बताओ क्या हुआ?

राजेश _मामी आपने कहा था न नुनु हिलाने से लड़को का सफेद पानी बाहर निकलता है?

मैं आधे घंटे से हिला रहा हूं, मेरा तो कुछ नहीं निकला।

सावित्री शर्म से पानी पानी हो गई।

राजेश _आप झूठी हो!

सावित्री _तुमने ठीक से किया नही होगा? शर्माते हुवे बोली।

राजेश _तो आप ही देख लो, और बताना ठीक से हिला रहा हूं कि नही।

राजेश अपना लोवर और चड्डी नीचे खिसका कर लंद बाहर निकाल लिया।

सावित्री, की नजर जब राजेश के लंद पर पढ़ी तो, आश्चर्य में पड़ गई। मुरझाया huwa लंद इतना बड़ा है तो खड़ा होने के बाद, कितना बडा लगता होगा।

राजेश लंद को मुठियाने लगा।

सावित्री देखने लगी।

राजेश _मामी देखो मैं ठीक से कर रहा हूं न।

सावित्री _थोडा, हाथ को आगे पीछे तेज तेज चलाओ। शर्माते हुए अपनी मुंह छिपाते हुए बोली।

राजेश _मामी आप ही सीखा दो न कैसे हिलाना है?

सावित्री _चुप बेशर्म, किसी को पता चल गया तो किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी।

राजेश _मामी, कैसे किसी को पता चलेगा यहां कमरे में हम दोनों ही तो है।

सावित्री _अगर तुमने किसी से कह दिया तो।

राजेश _अपने भांजे पर भरोसा नहीं है।

सावित्री _भरोसा तो है पर डर लगता है?

राजेश _मामी, तुम मुझ भरोसा करो, मै यह बात किसी से नहीं कहूंगा। तुम बस मेरा सफेद पानी बाहर निकालकर, दिखाओ, मुझे देखना है कैसा होता है सफेद पानी।

सावित्री _तुम किसी को बताना नही, हा,,

राजेश _तुम भरोसा रखो, और जल्दी करो।

सावित्री ने, राजेश के लंद को कपकपाते हुए हाथो से पहले पकड़ी, फिर धीरे धीरे सहलाने लगी।

जानना हाथ लगते ही राजेश के नशों में खून की रफ्तार तेज हो गया, धीर धीर लंद बडा होने लगा।

राजेश _मामी ये तो कमाल हो रहा है, देखो तो आपके हाथ लगते ही नुनु कैसे बडा हो रहा है।

सावित्री शर्म से पानी पानी हो गई।

सावित्री अब राजेश के लंद को मुठ्ठी में भर कर आगे पीछे हिलाने लगी।

राजेश का लंद तनकर पुरा खड़ा हो गया।

राजेश _मामी, आह सच में बहुत मजा आ रहा है, थोडा तेज तेज हिलाओ।

आपने सच कहा था, मुठ मारने मे लड़को को मजा आता है।

हां, ऐसे ही और थोडा तेज, हा बहुत अच्छा लग रहा है।

सावित्री शर्म से गड़ी हुई थी। एक हाथ से मुंह छिपाते हुवे दूसरे हाथ सी लंद हिला रही थी।

राजेश का लंबा और मोटा लण्ङ देखकर, वह अपनी योनि में वर्षो बाद गिला पन, महसूस करने लगी।

447 वर्ष की उम्र हो जानें के बाद भी अभी तक उसका मासिक धर्म बंद नहीं हुआ था।

हर माह समय पर उसका मासिक धर्म आ जाता था।

सतजन सिंह ने पिछले बार कब चोदा था उसे याद नही रहा।

आज राजेश का लंबा और मोटा लण्ङ हाथ में लेते ही उसकी boor पानी छोड़ने लगीं।

काफी देर तक हिलाने के बाद भी राजेश का वीर्य बाहर नही आया।

सावित्री _सच में इसका बीज तो बाहर ही नहीं निकल रहा।

राजेश _मामी देखा न, आप झूठ बोल रही थी। कोई सफेद पानी बाहर नही आ रहा।

सावित्री _पता नही re, तेरा बीज मतलब सफेद पानी कैसे बाहर नही आ रहा।

राजेश _क्या कहा आपने? बीज

क्या इसे यूज बीज कहते हैं?

सावित्री _शर्म से पानी हो गई।

हूं।

राजेश _अच्छा मामी अब बस करो, लगता है मेरे अंदर बीज नही है।

अच्छा अब तुम इस इशारे का मतलब बताओ। एक हाथ के ऊंगली से रिंग बनाकर दूसरे हाथ की ऊंगली को अंदर बाहर करते हुए दिखाया।

इस इशारे को देखते ही, सावित्री की boor से पानी की धार फूट पड़ा।

वह शर्म से पानी पानी हो गई।

राजेश _मामी बताओ न इसका मतलब क्या है? तुम शर्मा क्यू रही हो।

सावित्री _छी, मुझे बड़ी शर्म आ रही हैं, मै इसका मतलब नहीं बता पाऊंगी।

राजेश _अच्छा ठीक है मत बताओ कल मैं पारो भौजी से पूछ लूंगा।

सावित्री _नही बेटा, वो गंदी औरत है, उससे तुम कुछ मत पूछना वो तुझे बदनाम कर देगी।

राजेश _अच्छा ठीक है फिर तुम बताओ।

सावित्री _वो क्या है न कि इस इशारे का मतलब होता है न,,, कि,,,, मरद अपनी नुनु को,,,, औरत के,,, नूनी में,,, डालकर अन्दर बाहर करता है,,, यह बड़ी मुस्किल से बोल पाई, और दोनो हाथो से अपनी चेहरा छिपा ली, उसे बड़ी शर्म आ रही थी।

राजेश _,, ओह, तो इसका ये मतलब है। पर मामी लोग ऐसा क्यो करते हैं?

सावित्री _अरे सच में तू भोंदू है,,,

ऐसा करने से मरद का बीज औरत के गर्भ में जाता है। औरत मां बनती हैं।

राजेश _ओ हो तो ये बात है। मुझे अब पता चला।

मामी तब तो शादी से पहले सबको ये अच्छे से आना चाहिए।

मामी मुझे भी सिखाओ न, नूनी में नुनु कैसे बाहर करना है।

सावित्री _छी चुप कार बेशरम, मै तुम्हारी मामी हूं। मामी के साथ ये सब नहीं करते।

राजेश _ठीक है, मै पारो भाभी के साथ सीखूंगा, वो बोली है सीखना हो तो मुझे बता देना।

सावित्री _अरे बेटा, वो बदनाम औरत है और तूझे भी बदनाम कर देगी। उस से मिलना भी मत।

राजेश _तो तुम मना क्यों कर रही हो सिखाने से।

सावित्री _मुझे बड़ी शर्म आयेगी। हाथो से मुंह छिपाते हुए शर्माते हुवे बोली।

राजेश _अरे मामी अपने भांजे से क्या शर्माना।

तुम्हारे सामने नंगा खड़ा हू, मुझे तो शर्म नहीं आ रही है।

सावित्री _, किसी को पता चल गया तो, किसी को मुंह नही दिखा पाऊंगी।

राजेश _अरे मामी, यहां हम दोनों के अलावा है कौन? यह बात कैसे किसी को पता चलेगा।

सावित्री _तू खा कसम मेरी पहले तू ये बात किसी को बताएगा नही।

राजेश _मामी मुझे तुम्हारी सिर की कसम मै यह बात किसी को नहीं बताऊंगा।

सावित्री _, सुन लाईट को बंद करदे पहले। नही तो मुझे तुम्हारे सामने बड़ी शर्म आयेगी।

राजेश _अच्छा ठीक है। पर एकदम अंधेला में तो कुछ सीख नही पाऊंगा। थोड़ी रोसनी तो, रहने दो।

सावित्री _अच्छा ठीक है।

सावित्री ने अलमारी से मोम बत्ती निकाला और उसे जला कर कमरे में रखे स्टूल पर रख दिया।

उसके बाद सावित्री अपनी चढ़ी उतार दी। वह साड़ी पहनी हुई थी।

वह बेड किनारे लेट गई।

राजेश का लंद तो पहले ही तना हुआ था।

अपनी बड़ी मामी को चोदने का सोंच कर लंद झटके मारने लगा।

सावित्री _अपनी टांगे खोल दी, राजेश उसकी टांगो के बीच आ गया।

सावित्री की boor में घने बाल थे। योनि द्वार दिखाई नहीं दे रहा था।

राजेश _मामी आपके तो घने बाल है। नुनु को डालना कहा है।

सावित्री शर्म से पानी पानी हो गई।

वह अपनी हाथो से राजेश का लंद पकड़ ली, और अपनी योनि के छेद में सेट की।

सावित्री _थोडा धक्का लगा। शर्माते हुए, धीर से बोली।

राजेश ने एक करारा शॉट मारा।

लंद एक ही बार में boor चीरकर आधा अन्दर घुस गया।

सावित्री की boor एकदम गीली थी।

सावित्री सिसक उठी। आह माई।

थोडा आराम से,,,

राजेश _अब क्या करू मामी, नुनु तो आधा अन्दर घुस गया गया। अपको दर्द huws क्या?

सावित्री _अब थोडा नुनु बाहर निकाल कर फिर धक्के मार। धीर से फुसफुसाते हुए बोली।

राजेश ने लंद बाहर खींचा फिर एक जोर का धक्का मारा।

लंद का टोपा सीधा सावित्री के बच्चे दानी से टकराया।

सावित्री चिहुंक उठी।

राजेश _,, क्या huwa मामी। दर्द हो रहा है क्या?

सावित्री _न में सिर हिलाया।

राजेश _अब क्या करू मामी।

सावित्री _अब तू, नुनु को अंदर बाहर करता रह।

शर्माते हुवे धीरे से बोली।

राजेश ने अब अपने लंद को boor में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया और धीरे धीरे अपना स्पीड बढ़ाने लगा।

राजेश _, आह मामी, इसमें तो बहुत मजा आ रहा है।

आह,,

मन कर रहा है कि ऐसा ही नुनु को तुम्हारी नूनी में अन्दर बाहर करता रहूं।

इधर, सावित्री को भी बहुत मजा आने लगा।

राजेश का लंबा लंद उसकी बच्चेदानी को ठोक रहा था। लंद मोटा होने के कारण योनि की भगनाशा अच्छी तरह रगड़ खा रहा था।

जिसके कारण, सावित्री को संभोग का परम सुख प्राप्त होने लगा। जिसकी कल्पना उसने कल्पना नहीं की थी।

रकमरे में उसकी मादक सिसकारी, ऊं आह,, उह,,,, चूड़ियों की खनक खन खन,,, फ़च फ्च की आवाज गूंजने लगा।

राजेश को भी अब बहुत मजा आ रहा था। वह भी जोश में आ चुका था।

वह सावित्री की दूदू को ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने लगा और दनादन boor चोदने लगा।

सावित्री तो जन्नत की सैर कर रही थी।

वह खुद ही अपनी ब्लाउज की बटन खोल कर अपनी दूदू को आजाद कर दी।

उसकी बड़ी बड़ी चूचियां राजेश के आंखों के सामने आ गया।

राजेश चुचियों को मुंह में भर कर चूसने लगा।

और गपागप boor में लंद डालने लगा।

सावित्री भी मस्ती में होस खो बैठी थी। वह राजेश की कमर पकड़ कर आगे पीछे करने लगी।

दोनो chudai के परम सुख को प्राप्त कर रहे थे। मजे में दोनो के मुंह से,,,

आह उह,,, आह,,,, उह,, आह,, उह,,,,,

निकल रहे थे।

तभी सावित्री खुद को रोक न सकी और राजेश को कसकर जकड़ ली और झड़ने लगी।

झड़ते समय उसे वह आनंद मिला जिसकी कल्पना तक उसने नही की।

राजेश chudai छोड़कर सावित्री की चूची चूसने लगा।

फिर वह अपना सावित्री की ओंठ चूसने लगा।

सावित्री कुछ ही देर में फिर गर्म हो गई।

राजेश ने सावित्री को बेड से उठा कर खड़ा किया और बेड पकड़ा कर घोड़ी बना दिया।

उसके टांगो के बीच आकर एक ही धक्के में लंद को उसकी योनि में जड़ तक अन्दर घुसा दिया।

सावित्री चिहुंक उठी।

अब राजेश ने सावित्री की कमर पकड़ कर गच गच चोदना शुरु कर दिया।

एज बार फिर से कमरे में सावित्री की मादक सिसकारी, चूड़ियों की खनक खन खन,, और फच फ्च की आवाज गूंजने लगा।

दोनो फिर से जन्नत में पहुंच गए थे।

राजेश लगातार तेज तेज चोदे जा रहा था।

सावित्री को बहुत मजा आ रहा था।

तभी राजेश ने chudai बंद कर दिया।

सावित्री नही चाहती थी की राजेश रुके उसे बहुत मजा मिल रहा था।

सावित्री _राजेश रुक क्यू गया? धक्का लगा तेज तेज,, रुक मत।

राजेश _नही मामी, पहले बताओ, आ रहा है कि नही। आप कुछ बता नहीं रही है।

सावित्री _, मुझे शर्म आ रही, बोलने में ,,

राजेश _, तो सिर हिला कर बता दो।

क्या तुम्हे मजा आ रहा है।

सावित्री _, हां में सिर हिलाया।

राजेश _और धक्के मारू।

सावित्री _, हा में सिर हिलाया।

राजेश के मेरी रानी मुझे भी तुम्हे चोदने में बड़ा मज़ा आ रहा है। ले लंद अपनी योनि में।

ले ले अपने भांजे के लंद का मजा।

राजेश फिर तेज तेज चोदने लगा। फिर से कमरे में दोनो की उह आह उह आह, की आवाजे गूंजने लगी।

राजेश रुका औरअपना लंद बहार निकाल लिया।

वह अपना शर्ट उतार कर नंगा हो गया।

राजेश _, मामी तुम भी अपना कपड़े उतार दो मुझे तुम्हे बिना कपड़ो के देखना है।

सावित्री _न मुझे शर्म आयेगी।

राजेश _, देखो मैं भी तो नंगा हू।

नही तो मैं अपने कमरे में जा रहा हु।

मैं और धक्के नही मरूंगा।

सावित्री इतनी चूदास हो गई थी, की वह एक बार फिर झड़ कर परम सुख को प्राप्त करना चाहतीं थी, जो एक बार राजेश ने उसे दिया था।

वह अपनी साडी निकाल दी।

अपनी ब्लाउज खोलकर फेक दिया। अपनी चूची दोनो हाथो से छुपाने लगी।

राजेश उसे बाहों में भर लिया। जी भर कर उसकी ओंठ चूची को चूसने चाटने लगा।

सावित्री फिर मदहोश हो गई।

राजेश ने उसकी पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया। सावित्री एकदम नंगी हो गई। वह शर्म से गड़ी जा रहीं थी अपने हाथ से अपनो शरीर छिपाने की नाकाम कोशिश करने लगी।

राजेश ने सावित्री को बेड पर चढ़ा दिया और घोड़ी बना दिया।

अब पीछे से लंद योनि में डालकर, फिर से चोदना शुरु कर दिया।

कुछ ही देर में कमरा फिर से दोनो की सिसकारी से गूंजने लगी।

सह ऊ आह उह,,,,

अब राजेश अपना लंद फिर से बाहर निकाल कर बेड पर नीचे लेट गया।

उसका लंद सावित्री की boor का पानी पीकर खूब लंबा और मोटा हो गया था।

उसकी boor रस की चिकनाई से चमक रहा था।

राजेश _मामी, लंद को मुंह में लेकर चूसो, और मुझे मजा दो।

सावित्री _, आज्ञाकारी पत्नी की तरह लंद को मुंह में भर कर चूसना चाटना शुरु कर दी।

राजेश _, चलो अब बैठ जाओ लंद के ऊपर।

सावित्री, मदहोश और चूदास थी वह राजेश की हर बात मान रही थी। वह राजेश के लंद को अपनी योनि में सेट की और उस पर बैठ गई।

राजेश ने उसकी कमर पकड़ लिया।

सावित्री अब लंद पर उछल उछल कर चुदाने लगी।

राजेश भीअब कमर को उठा उठा कर लंद को योनि की गहराई में पहुंचाने लगा।

दोनो एक बार फिर जन्नत की सैर करने लगें।

दोनो के मुंह से आह उह,, आह उह,,,

निकलने लगा।

सावित्री एक बार फिर झड़ने की स्थिति में आ गई।

राजेश उसकी कमर पकड़कर पटक पटक कर चोदने लगा।

सावित्री अपनी चरम अवस्था में पहुंच गई।

वह राजेश लिपट कर चीखते हुए झड़ने लगी।

राजेश उसके पीठ सहलाने लगा।

कुछ देर बाद राजेश सावित्री के ऊपर आ गया। उसकी योनि को चाटना शुरु कर दिया।

सावित्री चिहुंक उठी, उसके पति ने कभी योनि नही चाटा था।

योनि चटवाने में उसे असीम आनंद का अनुभव होने लगा।

उसकी मुंह सी मादक सिसकारी और boor से रस की धार बहने लगी।

अब राजेश सावित्री के कमर की नीचे तकिया लगा दिया।

ओर और उसकी टांगो को अपनी कंधे में डाल दिया। फिर लंद को योनि में रख कर एक जोर का धक्का मारा लंद का टोपा सीधा सावित्री के बच्चेदानी से टकराया।

सावित्री का सरीर गन गना गया।

अब राजेश सावित्री की चूची पकड़ कर तेज तेज धक्के लगाने लगा।

दोनो को संभोग का अपार सुख मिलने लगा।

राजेश इस पोजीसन में लगातार चोदता रहा झड़ने की स्थिति में पहुंच गया । वह तेज तेज़ चोदने लगा और आह मां आह, करके करहत्ते हुए सावित्री की योनि को अपनी बीज से भरने लगा।

सावित्री अपनी boor में गर्म गर्म वीर्य का अहसास पाकर, उसे अद्भुत आनंद का अनुभव huwa और एक बार फिर से झडने लगी।

दोनो बुरी तरह एक दूसरे से जकड़े हुए थे। कुछ देर बाद दोनो को होश आया।

राजेश, सावित्री के बाजू में लुड़क गया।

जब स्थिति नार्मल huea तो सावित्री अपनी स्थिति देख कर काफी शर्मिंदगी महसूस हुई।

वह बेड से उठी और कपड़े पहनने लगी।

राजेश उसे मुस्कुराते हुए लंद सहलाने लगा।

कपड़े पहनने के बाद,,

सावित्री _, तू बडा बदमाश निकला रि, तूने भोंदू बनने का नाटक किया।

पता नही तू कितनी औरतों के साथ कर चुका है।

बोलो नाटक क्यों किया तूने।

राजेश _, अरे मामी, अगर नाटक नही करता तो क्या तुम मुझे देती।।

सावित्री _पर ये तूने ठीक नहीं किया, तूने मेरी पतिव्रता भंग कर दिया।

राजेश _सॉरी मामी। क्या अपको मजा नही आया।

सावित्री _, बात मज़े की नही, मर्यादा की है। जो तूने तोड़ने पर मजबूर कर दिया।

राजेश_सारी मामी मुझे लगा की आपको अच्छा लगेगा।

पर शायद मै गलत था।

सावित्री _,,, इससे पहले कोई आ जाए, मै किसी को मुंह दिखाने लायक न रहूं।तुम कपड़े अपने कमरे में जाओ।

राजेश _ठीक है मामी।

राजेश अपना कपड़ा पहन लिया।

मुंह लटकाकर कमरे से चला गया।

राजेश को लगा की उसे मामी के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था।

वह यही सोचता huws बेड पर लेटा ही था कि कब नींद लगी पता ही नहीं चला।

अगले दिन सुबह सावित्री और राजेश के बीच ज्यादा बातचीत नहीं huwa।

सावित्री खेत चली गईं।

राजेश घर में ही रह गया।

सावित्री जब घर में आई तो, सुमित्रा ने उसे बताई की राजेश को पता नही आज क्या हो गया है।

उस्का चेहरा उतरा हुआ है।

रात में भी राजेश ने थोडा सा भोजन करके उठ गया।

राजेश अपने कमरे में सोने चला गया।

रात के क़रीब 12बजे, राजेश के कमरे में कोई आई।

राजेश ने देखा,,

उसकी बड़ी मामी आई है।

राजेश,,, _मामी आप इस समय।

सावित्री _क्यू तेरा मुंह क्यूं उतरा हुआ है, सुबह से।

राजेश _आप नाराज हैं न, मैने आप को दुखी कर दिया। सारी मामी।

सावित्री,_अब जो huwa उसे भूल जा।

राजेश _क्या आपने मुझे माफ कर दिया।

सावित्री _हू।

राजेश _थैंक यू।

मामी।

राजेश ने सावित्री को अपनी बाहों में भर लिया।

सावित्री _, हू हू, ये कर रहा है।

राजेश _,, ओह सॉरी मामी।

राजेश सावित्री को छोड़ दिया।

सावित्री हसने लगीं।

सावित्री _अच्छा अब में चलती हूं।

सावित्री जानें लगी, तभी वह दरवाजे के पास जाकर रुक गई।

पीछे मुड़कर बोली,

वैसे कल मुझे भी, बहुत मजा आया। शर्माते बोली।

राजेश _तो आज फिर से करे।

सावित्री,_तुम्हारी मर्जी,

कहकर सावित्री, मुस्कुराते शर्माते, कमर matkaate अपने कमरे में चली गई।

राजेश, खुश हो गया।

वह कुछ देर बाद सावित्री के कमरे मे गया। कमरा खुला रखी थी। राजेश के आने का इन्तजार रही थी।

इस बार राजेश ने उसके सारे कपड़े उतार दिए। उसने देखा आज सावित्री की boor एकदम चिकनी थी।

राजेश का लंद एकदम लंबा मोटा हो गया। चिकनी boor देखकर। राजेश ने उसकी boor चांट चांट कर उसके सरीर में chudas भर दिया।

अब वह आज्ञा कारी पत्नि की तरह राजेश से चुदाने लगी। तरह तरह आसन में राजेश ने सावित्री को जमकर भोगा और अंत में उसकी योनि को अपनी बीज से भर दिया।

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अगले दिन, पड़ोसी के यहां पूजा का कार्यक्रम था। सावित्री तो खेत चली गईं।

सुमित्रा _अरे सुप्रिया।

सुप्रिया _जी चाची क्या बात है?

सुमित्रा _पड़ोसी के यहां पूजा का कार्यक्रम रखा गया है। वहा जाना पड़ेगा। चल जल्दी नहाकर तैयार हो जाओ।

सुप्रिया _चाची, घर में इतने सारे काम पढ़े है। कपड़े भी धोने के लिए निकाल रखे है। आप चली जाओ। घर भी तो देखना पड़ेगा।

सुमित्रा _अच्छा ठीक है। मै ही चली जाती हूं।

सुप्रिया _चाची, बच्चो को तैयार कर देती हूं। उन्हे भी साथ में ले जाना।

सुमित्रा _अच्छा ठीक है, पर जल्दी कर।

सुप्रिया _ठीक है चाची।

सुप्रिया ने बच्चों को नहला कर तैयार कर दिया।

सुमित्रा बच्चो को लेकर, पड़ोसी के यहां चली गईं।

राजेश टहलने के लिए निकला था, वह घर ही जा रहा था की रास्ते में सुमित्रा मिली।

राजेश _अरे मामी, बच्चो को लेकर कहा जा रही हो।

सुमित्रा _पड़ोसी के यहां पूजा का कार्यक्रम है, मै वही जा रही हूं। सुप्रिया घर में है। किसी चीज की जरूरत हो तो उसे बता देना।

राजेश _ठीक है मामी।

राजेश घर पहुंचा, दरवाज़ा खटखटाया।

सुप्रिया ने दरवाज़ा खोला।

सुप्रिया _आ गया टहलकर।

राजेश _हां दी, मामी रास्ते में मिली थी, बता रही थी की वह पड़ोसी के यहां पूजा में शामिल होने जा रही है।

सुप्रिया _हा, राजेश मै नहाने जा रही हूं।तुम्हे कुछ चाहिए क्या?

राजेश _नही दी।

सुप्रिया, बाथरूम चली गईं वह, कपड़ा धोने लगी फिर नहाने, लगी।

इधर राजेश हाल में बैठकर टीवी देखने लगा।

इधर सुप्रिया नहाने के बाद,

अपने कमरे में आकर, कपड़े पहनने लगी।

कुछ देर बाद सुप्रिया को आवाज लगाई।

सुप्रिया _राजेश थोडा इधर आना।

राजेश हाल में बैठा था। सोफे से उठ कर सुप्रिया के कमरे के पास गया।

राजेश _दी क्या आपने मुझे बुलाया।

सुप्रिया _हा, अंदर आना।

राजेश जब अंदर गया तो देखा, सुप्रिया, सिर्फ पेटीकोट में थी और ब्रा की हूक लगाने की कोशिश कर रही थी।

राजेश _दी, क्या बात है दी।

सुप्रिया _देखो न मेरी ब्रा की हूक नही लग रही है। मेरी मदद कर दो।

सुप्रिया राजेश की ओर पीठ करके खड़ी थी। वह सिर्फ पेटीकोट में थी। उसका बैक पुरा ओपन था। उसका गोरा बदन दमक रहा था।

राजेश का शरीर गर्माने लगा।

सुप्रिया _क्या huwa re,,,

राजेश _ कुछ नहीं दी।

सुप्रिया _फिर हूक लगा क्यू नही रहा।

राजेश ने ब्रा का हुक लगाने की कोशिश किया।

सुप्रिया की बदन की मादक खुशबू, राजेश को उत्तेजित करने लगा।

राजेश _दी आपकी ब्रा तो टाइट है, हूक लग नही रहा। कोई दूसरी ब्रा पहन लो।

सुप्रिया _ओह लगता है तुम्हारे जीजू, गलत साइज के ब्रा ले आया। या फिर मैं मोटी हो गई हूं।

राजेश _दी आप तो बिलकुल परफेक्ट है कही से भी मोटी नहीं लगती।

सुप्रिया _चल झूठा कही का।

राजेश _दीदी मै सच कह रहा हूं। आप का बदन एकदम सुंदर और हॉट है।

राजेश ने सुप्रिया को पीछे से बाहों में भरते हुए कहा।

सुप्रिया _ अच्छा ऐसी क्या खास है मुझमें।

राजेश _आपके तो सारे चीज खास है।

राजेश ने सुप्रिया को अपनी ओर घुमा दिया।

ये आंखें, लंबे लंबे बाल, ये शराबी ओंठ।

ये उन्नत स्तन, ये गहरी नाभी। सच में आप स्वर्ग की अप्सरा से कम नहीं।

सुप्रिया, हसने लगीं।

सुप्रिया _बस कर बस, झूठी तारीफ कर, मुझे चने की झाड़ में न चढ़ा।

राजेश _मै सच कह रहा हूं दी, आप सच में बहुत खूबसूरत और हॉट हो।

राजेश _दी आप इजाजत दे तो एक किस कर लूं।

सुप्रिया _कहा

राजेश _आपकी, नाभी पे।

आपकी नाभी काफी आकर्षक है।

राजेश नीचे घुटनों पे खडा हो गया।

और सुप्रिया की नाभी को किस किया।

सुप्रिया आंखें बंद कर सिसक उठी।

राजेश ने सुप्रिया की आंखों में देखा। सुप्रिया, राजेश की आंखों में देखने लगी।

राजेश सुप्रिया को देखते हुए, उसकी नाभी चाटने लगा।

सुप्रिया आंखें बंद कर सिसकने लगीं।

तभी राजेश उठ खडा हुआ।

राजेश _सॉरी दी मै बहक गया था।

राजेश कमरे से जानें लगा, तभी सुप्रिया तेजी से दौड़ी और राजेश को पीछे से पकड़ कर लिपट गई।

सुप्रिया _जिस्म में आग लगा कर कहा जा रहा है? अब तो इसआग को तुम्हे बुझाना ही पड़ेगा।

राजेश सुप्रिया की ओर घुमा,

राजेश ने सुप्रिया की आंखो में देखा। सुप्रिया ने आंखें झुका ली।

राजेश ने सुप्रिया की सिर को ऊपर उठाया और उसकी दोनो आंखो को प्यार से चूमा।

सुप्रिया आंखें बंद कर रखी थी।

राजेश ने अपना ओंठ, सुप्रिया की ओंठ के ऊपर रख दिया।और ओंठ चूसने लगा।

सुप्रिया भी राजेश की ओंठ चूसने लगी।

धीरे धीरे राजेश नीचे बडा। उसकी गर्दन को चूमने चाटने लगा।

सुप्रिया सिसकने लगी।

राजेश फिर आगे बडा। सुप्रिया की ब्रा को खीच कर निकाल दिया।

गोरे गोरे मस्त सुडौल चूचियां, राजेश के सामने आ गया।

राजेश का लंद टनटना गया।

राजेश ने सुप्रिया की चूची को मुंह में भर कर चूसने लगा। उसे मसल मसल कर, दुध निकालने की कोशिश करने लगा।

सुप्रिया सिसक रही थी। उसकी boor में पानी भर रिसने लगा।

अब राजेश नीचे गया और उसकीसपाट पेट को चूमने चाटने लगा।

गहरी नाभी को चूम लिया।

सुप्रिया एक दम गर्म हो गई।

मादक सिसकारी निकालने लगीं, प्यार से राजेश की बालो को सहलाते लगी।

तभी राजेश नीचे बडा।

सुप्रिया की पेटीकोट की नाडा खीच दिया।

पेटी कोट सुप्रिया के पैरो में गिर गया।

सुप्रिया पेंटी नहीं पहनी थी।

सुप्रिया शर्म से अपनी हाथो से योनि को ढकने लगी।

राजेश ने सुप्रिया के हाथ हटाकर उसकी योनि का दीदार किया।

सुप्रिया की योनि मस्त फूली हुई, एकदम चिकनी, शायद आज ही बाल साफ की थी।

उसकी रसीली boor देखकर राजेश का लंद लंबा और मोटा होकर झटके मारने लगा।

अब प्रिया राजेश का कपड़ा उतारते चली गईं।

जब उसने राजेशकच्छा उतारा, तो राजेश का लंद देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।

वह आश्चर्य से राजेश के लंद को देखने लगी।

राजेश _क्या huws दी।

सुप्रिया _तुम्हारा, काफी बडा है।

राजेश _क्यूं, जीजू का इससे छोटा है क्या?

सुप्रिया _उसका तो इसका आधा है।

राजेश _कही डर तो नही गई।

सुप्रिया _मै दो बच्चे निकाल चुकी हूं, पहली बार होता तो ज़रूर डर जाती।

सुप्रिया राजेश का लंद पकड़ कर उसे सहलाने लगी उसकी अंडकोश चाटने लगी।

फिर टोपा को मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश को बहुत मजा आने लगा वह सुप्रिया की बाल सहलाने लगा।

अब सुप्रिया, राजेश के लंद को जितना हो सके मुंह में भर कर चूसने लगीं।

राजेश हवा में उड़ने लगा।

आह दी तुम मस्त लंद चूसती हो बडा मजा आ रहा है।

राजेश जोश में आकर सुप्रिया की मुंह में लंद अंदर बाहर करने लगा।

कुछ देर बाद राजेश ने सुप्रिया को ऊपर उठाया और बेड पर लिटा दिया।

अब राजेश सुप्रिया की टांगो को फैला दिया। उसकी योनि को चाटने लगा।

सुप्रिया हवा में उड़ने लगी।

राजेश उसकी भगनासा को जीभ से कुरेदने लगा।

सुप्रिया के शरीर आग धधकने लगी।

उसका पुरा शरीर चुदाशा हो गया।

सुप्रिया _राजेश अब डालदो प्लीज, मुझसे बर्दास्त नही हो रहा, सिसकते हुवे बोली।

राजेश अपना लंद सुप्रिया की योनि में रखा फिरboor को लंद से घिसा।

सुप्रिया _और मत तड़फाओ डाल दो,,, प्लीज,

राजेश ने टोपा छेद में रखा और एक जोर का धक्का लगाया।

सुप्रिया चीख उठी। लंद boor चीरकर आधा अन्दर घुस गया था।

राजेश अब सुप्रिया की ओंठ चूसने लगा। उसकी चूची से खेलने लगा फिर धीरे धीरे लंद योनि में अदंर बाहर करने लगा।

योनि लंद के अंदर अपनी जगह बनाने लगा। धीरे धीरे लंद boor में पुरा अदंर समा गया।

राजेश तेज तेज चोदने लगा।

सुप्रिया को chudai में इतना मजा आ रहा था जिसकी कल्पना भी उसने नही की थी।

लंद भगनासा को अच्छी तरह रगड़ रहा था।

सुप्रिया स्वर्ग में पहुंच चुकी थी

इधर राजेश को भी सुप्रिया को चोदने में एक अलग मजा आ रहा था ।

उसकी boor एकदम कसा कसा लग रहा था।

जिससे उसको चोदने में बड़ा मजा आ रहा था।

सुप्रिया बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी। लंद पूरे गहराई नाप रहा था। सुपरिया की बच्चेदानी को ठोक रहा था।

जिससे सुप्रिया को एक अलौकिक कामसुख प्राप्त हो रहा था। वह खुद को ज्यादा देर तक न रोक सकी और राजेश को जकड़ कर झड़ने लगी।

राजेश चोदना बंद कर दिया। उसकी ओंठ चूसने लगा

कुछ देर बाद, राजेश फिर से योनि चांटकर सुप्रिया को गर्म कर दिया।

सुप्रिया को घोड़ी बना दिया, और चोदना शुरु कर दिया ।

दोनो फिर से जन्नत की सैर करने लगें।

कमरे में फच फच, गछ गाछ की आवाज, दोनो की मादक सिसकारी आह उह आह उह, की आवाज गूंजने लगा।

सुप्रिया की boor की रस से राजेश का लंद एकदम गीला हो गया था। लंद के ऊपर सुप्रिया की boor का मक्खन लगा huwa दिखाई पड़ रहा था।

राजेश सुप्रिया की कमर पकड़ कर तेज तेज चोदने लगा, दोनो संभोग के परम सुख को प्राप्त कर रहे थे।

काफी देर तक इसी पोजीशन में संभोग करने के बाद राजेश ने लंद को boor से निकाल लिया। और बेड पर लेट गया, राजेश ने सुप्रिया को ऊपर आने का इशारा किया।

सुप्रिया बेड पर चढ़ गई और राजेश के लंद को अपनी योनि में रखकर बैठ गई।

राजेश सुप्रिया की चूची से खेलने लगा।

सुप्रिया अब लंद पर उछल उछल कर चुदाने लगी।

कमरे में फिर से दोनो की आह उह आह उह गूंजने लगी।

दोनो इसी पोजीशन में तब तक खेलते रहे जब तक सुप्रिया फिर से न झड़ गई।

सुप्रिया, राजेश के सीने से लग कर सुस्ताने लगी।

सुप्रिया ने देखा राजेश अभी तक झड़ा नहीं है उसका पति तो उसके झड़ने के पहले ही किनारा लग जाता है।

वह राजेश की मर्दानगी, देख दंग थी।

सुप्रिया _राजेश, अब मैं थक गई । अब थोडा ब्रेक लेते हैं।

राजेश _ठीक है दी।

सुप्रिया _राजेश तुम चाय पियोगे।

राजेश _दी ऐसे समय में चाय नही, नमकीन खाना चाहिए।

सुप्रिया _अच्छा, बडा अनुभव रखता है।

ठीक है मै कुछ नमकीन तक कर लाती हूं।

सुप्रिया, कीचन में नमकीन तलने लगी, वह बिलकुल नंगी थी।

राजेश भी किचन में आ गया।

सुप्रिया _अरे तू क्यू यहां आ गया।

राजेश _दी रहा नही जा रहा, तुम्हे चोदना है।

सुप्रिया _जानती हू तू अब तक झड़ा नहीं है।

सुप्रिया झुक गई।

ले डाल दे मेरी boor में।

राजेश ने अपना लंद सुप्रिया की योनि में सेट कर धक्का मारा लंद इक ही बार में boor चीरकर अंदर घुस गया।

राजेश कमर पकड़ कर गच गछ चोदने लगा।

सुप्रिया नमकीन तलने लगी।

सुप्रिया की कामुक सिसकारी किचन में गूंजने लगी।

राजेश की नजर सुप्रिया की गांड़ पे गया।

राजेश _दी आपकी गाड़ तो सकरी लग रही है। क्या जीजू आपकी गाड़ नही मारते।

गाड़ पे एक ऊंगली डालते हुए कहा।

सुप्रिया _पोर्न वीडियो में देखकर मुझे भी गाड़ मराने की इच्छा तो होती है। पर तुम्हारे जीजू में इतना दम नहीं की वो गाड़ मार सके।

गाड़ मारने के लिए दमदार लंद होना चाहिए। जो गाड़ को खोल सके।

राजेश _दी क्या मैं आपकी यह इच्छा पूरी कर दू।

सुप्रिया _पर तेरा लंद तो कुछ ज्यादा ही मोटा है। मेरे सकरी गाड़ में घुस पाएगा।

बहुत दर्द होगा।

राजेश _हूं वो तो है। पर अगर थोडा दर्द सह सकती हो तो आपकी ईच्छा पूरी कर दू।

एक ऊंगली को घुसाते हुवे कहा।

सुप्रिया _क्या प्रिया दी गाड़ मराती है।

राजेश _जीजू तो दीदी के गाड़ का दीवाना है।

वो तो बस गाड़ ही मारता है।

सुप्रिया _अच्छा, तुमने भी दीदी का गाड़ मारा है क्या?

राजेश _हां। पहले उसकी boor मारता हू, फिर उसकी गाड़ मारकर झड़ जाता हूं।

सुप्रिया _ओह, तो मेरा भी गाड़ मारकर मेरी इच्छा पूरी कर दो। मै भी तो जानू कैसा लगता है गाड़ मराने में।

राजेश _दी घर में घी तो होगा।

सुप्रिया _ने घी का डब्बा कीचन से निकाल कर दिया।

राजेश _चलो दी तुम्हारे कमरे मे चलते है।

दोनो किचन से निकल कर बेड रुम में आ गए।

राजेश ने सुप्रिया को बेड पर घोड़ी बना दिया।

फिर ऊंगली में घी डालकर उसकी गाड़ में भरने लगा।

राजेश ने एक ऊंगली गाड़ में घुसा कर अदंर बाहर किया, कुछ देर बाद दो ऊंगली, फिर तीन ऊंगली डाल कर गाड़ की मासपेशियों को फैलाने लगा।

सुप्रिया चीख न सके उसके लिय उसने उसके मुंह में उसकी ब्रा ठूस दिया।

काफी देर तक ऊंगली से गाड़ चौड़ी करने के बाद, राजेश ने लंद में ढेर सारा घी चुपड कर उसका टोपा उसकी गाड़ की छेद में डालने की कोशिश करने लगा।

सुप्रिया _राजेश मुझेलगता है अदंर नही जायेगा। तुम्हारा बहुत मोटा है।

राजेश _दी, आप गाड़ को थोडा ढ़ीली करो।

और दर्द सहने को तैयार रहो।

अबकी बार राजेश ने जोर का दबाव डाला।

लंद का टोपा कुछ अंदर सरका।

राजेश ने फिर दबाव डाला।

लंद फिर कुछ सरका।

फिर एक जोर का दबाव डाला। सुप्रिया जोर से चीखना चाही।

उसे तेज दर्द huwa लंद का टोपा गाड़ फाड़कर घुस चुका था।

राजेश ने सुप्रिया की चूची मसला, पीठ चूमा।

उसकी पीठ सहलाया।

फिर लद और गाड़ पर तेल डाला।

और दबाव बनाया।

लंद फिर कुछ आगे सरका, सुप्रिया के आंसू निकल आए।

राजेश ने दबाव डालना जारी रखा लंद कुछ और आगे सरक गया।

अब राजेश लंद को थोडा खींचा फिर अंदर धकेला इस प्रकार लंद धीरे धीरे आगे सरकता गया।

सुप्रिया दर्द से छटपटा रही थी । देखते ही देखते

राजेश का लंद आधा , घुस गया।

अब राजेश लंद को गाड़ में धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

लंद गाड़ को फैलाते चला गया। और एक स्थिति ऐसा आया आधा से ज्यादा लंद गाड़ में घुस चुका था।

राजेश ने अब लंद कोगाड़ में थोडा तेज अदंर बाहर करना शुरू कर दिया।

सुप्रिया अभी भी दर्द से छटपटा रही थी ।

सुप्रिया की गाड़ फैलता गया। राजेश उसकी गाड़ में तेल डालता गया।

अब सुप्रिया का दर्द कम होने लगा।

गाड़ फैलता गया।

राजेश का लंद अब गाड़ में काफी गहराई तक घुस गया था।

सुप्रिया को गाड़ मराने में दर्द के साथ अब मजा भी आ रहा था

धीरे धीरे राजेश अपना स्पीड बढ़ाने लगा।

राजेश ने अपना लंद गाड़ से निकाल कर उसकी boor में डाल दिया और boor मारने लगा ।

सुप्रिया सिसकने लगीं। जोश में आने लगी तभी राजेश लंद को boor से निकाल कर फिर गाड़ में डाल दिया, और गाड़ मारने लगा।

कुछ देर गाड़ मारने के बाद फिर लंद को boor में डाल कर चोदने लगा।

इस प्रकार प्रिया को भी अब मजा आने लगा।

उसे यकीन नही हो रहा था की इतना मोटा लण्ङ को उसकी गाड़ ने निगल लिया है।

अब वह भी मस्ती में आ गई।

राजेश कभी गाड़ तो कभी boor की खुदाई करता रहा। इसी बीच सुप्रिया फिर से झड़ गई।

दोनो हाल में आ गए।

सुप्रिया कीचन में गई और राजेश के लिए, नमकीन खाने को ले आई। दोनो नमकीन खाने लगे। जिससे दोनो की उत्तेजना फिर बड़ गई।

राजेश ने सुप्रिया को सोफे पर करवट लेकर लिटा दिया खुद उसके पीछे लेट गया।

फिर पीछे से उसकी योनि में लंद डालकर चोदने लगा। सुप्रिया फिर सिसकने लगी।

कुछ देर boor मारने के बाद, राजेश ने लंद को उसकी गाड़ में डाल दिया। और गाड़ मारने लगा।

इस तरह फिर गाड़ औरboor की ठुकाई होने लगी।

कुछ देर बाद

राजेश सोफे पर बैठ गया, सुप्रिया को अपनी गोद में बिठा लिया दोनो एक दूसरे की ओंठो को चूसते लगे।

उसके बाद सुप्रिया राजेश का लंद अपनी boor में डालकर उछलने लगी। कुछ देर बाद वहलंद को गाड़ में डाल दी। राजेश नीचे से कमर हिला हिला कर गाड़ मारने लगा।

इस तरह दोनो संभोग के परम सुख को प्राप्त कर रहे थे।

अंत में राजेश ने अपना सारा वीर्य सुप्रिया की गाड़ में भर दिया।

उसकी गाड़ से वीर्य टपक कर, फर्स पर गिरने लगा।

दोनो बेड रुम में आ गए और एक दूसरे से लिपट कर सो गए।

सुप्रिया _राजेश उठो, चाची किसी भी वक्त आ सकती हैं ।

सुप्रिया, बेड से उतरी तो वह ठीक से चल नहीं पर रही थी, उसकी boor और गाड़ दोनो फट चुकी थी।

राजेश _क्या huws दी।

सुप्रिया _बडा दर्द कर रहा है।

राजेश _पहली बार गाड़ मरवाई हो न इस लिए।

सुप्रिया बाथरूम गई और वहां से फिर से नहाकर आई।

फिर अपना कपड़ा पहनने लगी।

राजेश उसी को देख रहा था।

सुप्रिया _राजेश क्या देख रहे हो, अब उठो भी मामी और बच्चे कभी भी आ सकते है।

राजेश बेड से उठा और सुप्रिया को बाहों में भर लिया।

सुप्रिया _इतना करने के बाद तुम्हारा मन नही भरा है क्या?

राजेश _न और करने का मन कर रहा है।

सुप्रिया _अब मै देने की स्थिति में नहीं हूं, आगे पीछे दोनो तुने फाड़ दिया है।

चलो अपने कपड़े पहन लो।

राजेश _आप ही पहना दो, उतारी तो आपने ही थी।

सुप्रिया _अच्छा तो उतारूंगी भी मैं और पहनाऊंगी भी मैं। हंसते हुवे बोली।

राजेश _हां,

सुप्रिया _और क्या करना पड़ेगा।

राजेश _मेरे लंद को चूसकर साफ भी करना पड़ेगा।

सुप्रिया _सब नही किया तो,,

राजेश _ फिर मामी के आते तक यही रहूंगा, नंगा और मामी जब आयेगी तो बोल दूंगा।

दीदी ने मुझे लूट लिया।

सुप्रिया _क्या? तू बडा बदमाश निकला।

सुप्रिया ने राजेश के लंद को मुंह में भर कर चूसी उसे चांतकर साफ की फिर, उसे कपड़े पहना दी।

सुप्रिया _अब तुम जाओ, मै भी कीचन में जाकर खाना बनाती हूं।

राजेश _दी एक किस तो दे दो।

राजेश ने सुप्रिया को बाहों में भर कर उसकी ओंठ को चूसने लगा।

सुप्रिया _अब जा यहां से बदमाश, राजेश वहा से निकल कर अपने कमरे मे चला गया और आराम करने लगा।

कुछ देर बाद सुमित्रा बच्चो के साथ घर पहुंची।

जब उसने देखा की सुप्रिया लंगड़ा कर चल रही है उसने पूछा

सुमित्रा _सुप्रिया तू लंगड़ा के क्यू चल रही है? क्या huwa

सुप्रिया _चाची बाथरूम में नहाते समय पैर फिसल गया।

सुमित्रा _कही ज्यादा चोंट तो नही आई।

सुप्रिया _नही चाची, पैरो में थोडा मोच है, ठीक होजाऊंगी डरने की कोई बात नही।

सुमित्र को सुप्रिया के चलने फिरने के ढंग से कुछ सक huwa

सुमित्रा _राजेश कहा हैं कही दिख नही रहा।

सुप्रिया _वो अपने कमरे में आराम कर रहा है।

सुमित्रा राजेश के कमरे मे गई।

राजेश _अरे मामी आप कब आई?

सुमित्रा _थोड़ी देर पहले। मुझे तुमसे कुछ पूछना था।

राजेश _हा मामी पूछो न।

सुमित्रा _ये सुप्रिया क्यू लंगड़ा कर चल रही है? क्या किया उसके साथ?

राजेश _मुझे क्या पता मैने तो कुछ नहीं किया?

क्या huwa दीदी को?

सुमित्रा _ज्यादा भोला मत बन, जब तुमने पहली बार मेरी गाड़ मारी थी तो मैं भी ऐसे ही लंगड़ा कर चलती थी। कही तुमने उसके साथ जबरदस्ती तो नही किया?

राजेश _नही मामी, मै भला कैसे जबरदस्ती कर सकता हूं वो भी दीदी के साथ, वो तो दीदी की ही ईच्छा से huwa जो भी huwa, उसे प्रिया दीदी और मेरे बीच

संबंधों का राज , पता चल गया था।

सुमित्रा _क्या?

राजेश _हा मामी।

सुमित्रा _ओह, देखो इन संबंधों के बारे में सावित्री दीदी को पता नही चलना चाहिए।

राजेश _जी।

सुमित्रा _और सुन, आज मेरी भी गाड़ मराने की ईच्छा हो रही है। रात में मेरे कमरे में आ जाना। मै तुम्हारे कमरे में नही आऊंगी। कही सुप्रिया न आ जाए।

राजेश, सुमित्रा को खीच कर अपनी गोद में बिठा लिया।

राजेश _कहो तो अभी मार दू। वैसे इस साड़ी में पटाखा लग रही हो।

सुमित्रा _चुप बेसरम। छोड़ कोई आ जाएगा।

वह खुद को राजेशसे छुड़ाकर भागी।

इधर खेत में पारो,

पारो _अरे काकी आज राजेश बाबू नही आया।

सावित्री _क्यों रि राजेश के आने न आने से तुम्हे क्या मतलब,तुम अपनी काम पर ध्यान दो।

पारो _अरे काकी, मै तो यू ही पूछ रही थी। वैसे आपने कल उसे कुछ सिखाया की नही।

सभी महिलाए हसने लगी।

सावित्री _अरे कलमुही, मै उसकी मामी हू, मै क्यों उसे सिखाने लगीं।

पारो _अरे काकी राजेश बाबू को तुम नहीं सिखाई टू, उसे आज यहां ले आती हम लोग सीखा देते। बेचारे का बडा काम आता। सभी महिलाए हसने लगीं।

सावित्री _चुप कर छीनार कही की। लगता है तेरी boor में बड़ी खुजली हो रही है जवान लंद लेने के लिए।

पारो _अरे चाची मैं टी राजेश बाबू के भलाई के लिए ही कह रही थी। वैसे मुझे क्या, अगर भोंदू ही बना रहना है तो कोई कर भी क्या सकता है?

सावित्री _चुप कर मेरा भांजा भोंदू नही है।

पारो _अरे काकी s

जिसे मूठ मारने का मतलब बताओ क्या होता है वो भोंदू नही तो क्या होशियार है।

सावित्री अपने मन में बोली,,

रण्डी, लगता है तेरी boor राजेश से फडवाना ही पड़ेगा, तभी तू मानेगी। नही तो राजेश की बेज्जती करती ही रहेगी।

सावित्री _ठीक है कल के आऊंगी राजेश को खेत में सीखा देना उसको।

सभी महिलाए आश्चर्य करने लगी।

पारो _, क्या सच कह रही हो काकी। हमे राजेश बाबू को सिखाने की अवसर दोगी।

सावित्री _हा हा कर लेना अपनी हडरते पूरी।

सभी महिलाए खुश हो गई।

सावित्री _सुनो तुम लोग जिसको भी राजेश को कुछ सीखाना है, वो कल अच्छे कपड़े पहनकर और शरीर की अच्छे से साफ सफाई करके आना।

सभी महिलाओ को यकिन ही नहीं हो रहा था की ये बाते सावित्री बाई बोल रही है।

शाम के 5 बजते ही सभी महिलाएं घर के लिए निकल पढ़ी ।

सावित्री भी घर पहुंची।

उसने सुमित्रा से राजेश के बारे में पूछा, सुमित्रा ने बताया की राजेश टहलने के लिए गया है।

शाम को करीब 7बजे राजेश घर में पहुंचा, वह हाल में बैठकर टीवी देखने लगा ।

तभी वहां पर सावित्री आई।

सावित्री _अरे राजेश बेटा कहा गया था

कही नही मामी बस थोडा टहलने गया था।

राजेश _अच्छा मामी खेत का काम कैसा चल रहा है, मजदुर औरते ठीक से काम कर रही है की नही।

सावित्री _सब एक नंबर की छिनार औरते है, पर मुझे भी कान लेना आता है। सब तुम्हारे बारे में पूछ रही थी आपका भोंदू भांजा आज क्यू नही आया।

राजेश _अच्छा, फिर क्या बोली?

सावित्री _बोल दी हूं उन लोगो को कल आयेगा। उसे सिखाने के लिए तुम लोग मरी जा रही हो, कल ले आऊंगा उसे सिखा देना जो सीखा देना उसे जो सिखाना है उसे।

बेटा कल तू मेरे साथ खेत चलना, उन औरतों को अच्छा सबक सिखाना, ताकि किसी का मजाक उड़ाना भूल जाए। और बता देना तू भोंदू नही कुछ और है।

राजेश _भोंदू नही तो क्या हूं मामी जी मै, जरा मै भी तो जानू।

सावित्री _अब क्या है तू, ये मुझसे बेहतर और कौन जानेगा, सावित्री शर्माते हुवे बोली। तुम उन औरतों को अच्छी सबक सिखाना। फाड़ के रख देना उन छीनारो को।

राजेश _जो आज्ञा मामी जी। जो आप कहे। जाओ बेटा फ्रेश हो जाओ, फिर मैं खाना लगाती हूं।

राजेश _ठीक है मामी जी।

भोजन करने के बाद राजेश अपने कमरे में जाकर आराम करने लगा।

घर की सभी औरते भोजन करके घर का काम निपटा कर सोने चली गईं।

रात में राजेश, सुमित्रा के कमरे मे गया।

सुमित्रा उसी का इन्तजार कर रही थी।

राजेश ने जाते ही उसकी चूंची को जमकर निचोड़ा फिर गाड़ मारने लगा

इधर सावित्री भी राजेश का अपने कमरे में आने की इन्तजार कर रही थी।

जब जेकाफी समय हो गया, राजेश उसके कमरे में नही आया, तो वह सोंचि कही, राजेश की नींद तो नही लग गई। वह सोने की कोशिश करने लगी पर उसे नींद नहीं आई, उसकी boor राजेश से चुदने के लिए तड़प रही थी।

वह मजबूर होकर राजेश के कमरे में गई, पर राजेश कमरे में नही था।

सावित्री _ये मुआ कहा चला गया।

वह घर के पीछे बाथरूम में जाकर देखी कही बाथरूम तो नही गया है?

पर राजेश उसे नही मिला।

ये मुआ आधी रात को कहा चला गया। वह इधर उधर ढूंढने लगी।

जब वह सुमित्रा के कमरे के पास से गुजर रही थी तो उसे कुछ आवाजे, महसूस हुई।

वह दरवाजे पर कान लगाकर सुनने की कोशिश करने लगी।

उसे औरत की सिसकने की आवाज सुनाई पड़ी।

सुमित्रा _हे भगवान, कही ये कमबख्त सुमित्रा की chudai तो नही कर रहा है।

वह अपने कमरे में जानें को हुई पर उसकी chut मेंआग लगी थी ।

वह दरवाजे को पीटी।

सुमित्रा और राजेश दोनो घबरा गए।

सुमित्रा _इतनी रात को कौन हो सकता है?

राजेश तुम पलंग के नीचे छिप जाओ मै देखती हूं।

राजेश _नही मामी मै नही छिपूंगा।

सुमित्रा _क्या कह रहा है तू?

राजेश _हा मै ठीक कह रहा हूं जो होगा देखा जायेगा। तुम दरवाज़ा खोलो।

सुमित्रा दरवाज़ा खोली।

सुमित्रा _अरे दीदी आप इतनी रात को कुछ काम था क्या?

सुमित्रा _अरे छोटी मै राजेश के कमरे में गई थी उसे किसी चीज की जरूरत तो नही पता करने, पर वो अपने कमरे में नही है।

मैने उसे इधर उधर बहुत ढूंढा वो नही मिला, पता नही वह इतनी रात को कहा चला गया। मुझे बड़ी चिंता हो रही उसकी।

कही वह तुम्हारे कमरे में तो नही आया।

सुमित्रा को समझ नहीं आया की वह क्या बोले?

पर वह झूठ भी नहीं बोलना चाहती थी।

सुमित्रा _वो क्या है न दीदी, राजेश को नींद नहीं आ रही थी तो मुझसे बात चीत करने मेरे कमरे में आ गया ।

सावित्री _ओह मै तो डर गई थी, की वह कहा चला गया इतनी रात को।

सुमित्रा _अच्छा एक काम करो उसे मेरे कमरे में भेज दो, मै उसे लोरी सुनाऊंगी, फिर उसे अच्छे से नींद आ जायेगी ।

सुमित्रा _ठीक है दीदी ।

सावित्री अपने कमरे मे चली गईं।

सुमित्रा _राजेश दीदी ने तुम्हे अपने कमरे मे बुलाया है?

राजेश _क्या?

सुमित्रा _मेरी प्यास अभी बुझी नही है मुझे और chudna है अभी तुमसे।

राजेश _, अच्छा तो मामी को बोल देना था न की राजेश को मैं लोरी सुना कर सुला दूंगी, आप चिंता न करे।

सुमित्रा _मैने तो तुम्हे उसके कमरे में भेजने के लिए हा कह दिया है।

अभी तो मैं ठीक से झड़ी नहीं हु, तुम चले जावोगे तो मुझे नींद नहीं आएगी।

राजेश _मामी, तुम चिंता न करो, मै कोई उपाय करूंगा,,,
 
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