Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 58 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

तो सृती भी अपने रुममे अपना सामान लेने चली गइ.. तब लता रमा नीलम भी अपना सब सामान लेकर नीचे आगइ.. तो रजीया पुनमने भी अपना सामान लाकर रख दीया.. तब चंदा ओर मंजु नीर्मला भुमीका ओर सरला काकीका सामान बहार रख रहे थे.. तभी भावना विजयको लेकर आगइ.. तो चंदाको देखते ही वो रोने लगा.. तब चंदाने दोडकर उसे अपनी गोदमे ले लीया ओर अपने सीनेसे लगा लीया..

फीर उनके चहेरेको चुमते आंसु बहाने लगी.. तो मंजु देवायत सब देखकर मुस्कुराने लगे.. तो चंदा विजयको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तो पीछे मंजु ओर सृती भी हसती हुइ चली गइ.. तभी अंदर जाके देखा तो चंदा विजयको अपने दुधुसे लगाकर बैठी थी.. जैसे उनको दुध पीला रही हे.. जैसेही सृती मंजु अंदर आये वो अपना आंचल छुपाते बहुत ही सरमाने लगी.. क्युकी आज सृती ओर मंजुने उनको विजयसे दुध पीलाते देख ही लीया..

मंजुला : (हसते) अरे दीदी.. क्या आप इसे दुध भी पीलाती हे..?

चंदा : (सरमाते धीरेसे) मंजु.. सोरी.. विजयको देखकर मेरी ममता जाग गइ.. मे उनको अ‍ैसे ही सुलाती हु..

मंजुला : (मुस्कुराते पास बैठते) दीदी.. गभराइअ‍े नही.. मे जानती हु.. सचमे विजय आपका ही बेटा हे.. इनपे सबसे पहेले आपही का हक हे.. मेतो खुस नसीब हु.. की मेरे विजयका खयाल रखनेके लीये उनकी इतनी माताये हे..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) नही मंजु.. मे मेरे विजयको कीसीके साथ बांट नही सकती.. ये हमेसा मेरे साथ ही रहेगा.. अगर तुजे ओर बेटा चाहीये तो हमारे पतीको कहेदे.. वो तुजे फीरसे प्रेगनेन्ट कर देगा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) दीदी.. वो तो ठीक हे.. लेकीन अभी आपके पेटमे हमारे पतीका बच्चा पल रहा हे उनका क्या..? सृती.. इनको कुछ उल्टी बुल्टीकी दवाइआ देदे.. वरना बीच रास्ते उल्टीया होगी तो ये जायेगी कहा..? हें..हें..हें..

सृती : (आस्चर्यसे खुस होते धीरेसे) मंजुदी.. क्या केह रही हो..? क्या चंदादीदी सचमे प्रेगनेन्ट होगइ हे..?

मंजुला : (हसते) हां.. जब तुम लोग सहेर गये थे.. तब खाना खानेके बाद ये दोनो ही उपर तेरे रुममे चले गये थे.. ओर तभी हमारे पतीको अपने उपर चडा दीया था.. तो फीर सामको अपने उपरसे उतारा.. ओर जब तक हमारे पतीने अपना बीज अंदर नही डालदीया तबतक उनका हथीयार बहार ही नही नीकालने दीया.. हमारी ये सौतन सीर्फ दीखनेमे भोली लगती हे.. कमीनी हे तो हमसे भी बडी चुदकड.. हें..हें..हें..

कहातो चंदा दुसरी ओर मुह घुमाकर हसती रही.. तो सृती ओर मंजु दोनो उनकी ओर देखते हसने लगी.. तब चंदा अ‍ेक बार फीर बहुत सर्मसार होगइ.. ओर उसने विजयको अपने दुधुसे हटाया तब विजय सबकी ओर देखते मुस्कुरा रहा था.. तब चंदाने अपना बुब्स अंदर रखते ब्लाउसको सही कीया ओर खडी होकर विजयको मंजुको थमा देती हे.. ओर मुस्कुराते कहेती हे..

चंदा : (हसते) ले कमीनी संभाल मेरे विजयको.. ओर इनका खयाल रखना अच्छेसे.. चल अब जानेका समय भी हो गया हे..

सृती : (मुस्कुराते कुछ दवाइआ देते) दीदी.. लीजीये ये सब गोलीया अपने पास रखीये.. अब कुछ बैचैनी या उल्टी जैसा लगे तो इनमेसे ये दो गोली खालेना.. ओर कुछ अ‍ैसा लगे तो वहा कीसी लेडी डोक्टरको दीखा देना..

चंदा : (विजयको देते सरमाते धीरेसे) मंजु.. क्या सचमे मे प्रेगनेन्ट होगइ हु..?

मंजुला : (विजयको लेते) हां दीदी.. आपको अ‍ेक फुल जैसी बच्ची आयेगी.. जो हमारी भावनाके बेटे भावेसकी बीवी होगी.. तो आप उनको सम्हालीयेगा ओर अच्छेसे पढाइअ‍ेगा..

चंदा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हंम.. मतलब हमारी भावु मेरी समधन हे.. हें..हें..हें.. ठीक हे.. मे मेरी बच्चीको खुब पढाउंगी..

कहते चंदा हां मे गरदन हीलाते बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर मंजुको गले लगाकर हसने लगी.. तब सृती भी दोनोकी ओर देखते हसती रही.. फीर तीनो बहार आगइ.. तब देवायतने अपनी बडी कार रेडी रखी थी.. तो देवायतने लखनको अपनी जीप लेनेके लीये कहा.. ओर वहा जाकर दुसरी कार लेनेको कहेते जीप वापस यहा भेज देनेको कहा.. फीर जीपको सृतीकी कार के पीछे चलानेको कहा..

तभी नीर्मला भुमीका सरला काकी ओर चंदा सबको गले मीलने लगी.. तब सरला काकीने रमाको मीलते घरका ओर भावेसका ध्यान रखनेको कहा.. फीर नीलमको मीलते भी उनके सरको चुम लेती हे.. तो लता भी सबको गले मीलते मंजु भावनाको गले मीलते खुब रोइ.. फीर पुनमको मीलते भी रोने लगी.. तब पुनमने भी आंसु बहाते अपने घरपे आनेका न्योता दीया..

तबतक पुनम बार बार लखनकी ओर देखती रही.. उनको लगाकी लखन भी हमेसाके लीये सहेर जा रहा हे.. तो उनको मीलने आयेगा.. लेकीन लखन अ‍ैसेही कीसीके सामने देखे बीना जीपमे बैठा रहा.. तब पुनमका दिल टुट गया.. ओर वो अ‍ेक बार फीर लताको गले मीलते रोने लगी.. तब सृतीने उन्को सम्हाला.. फीर सबलोग कारमे सामान रखकर बैठने लगे.. लखनका ओर पुनमका सब सामान लखनकी खुली जीपमे पीछे रख दीया..

तब सृतीने अपनी कारमे आगे पुनमको ओर पीछे दया रजीया ओर नीलमको बीठा दीया.. देवायतकी कारमे नीर्मला चंदा भुमीका ओर सरलाकाकी बैठ गइ.. तो लखनकी जीपमे लखनकी बाजुकी सीटमे सीर्फ लता ओर रमा ही बैठ गइ.. तब देवायतने अपनी कारको जाने दी.. तो पीछे सृतीने अपनी कार जाने दी ओर लास्टमे लखन अपनी जीप लेकर सृतीकी कारके पीछे चलाने लगा.. तब जाते वक्त सबलोग मंजु ओर भावनाको हाथ हीलाते बाय कहेने लगे..

आज हजेलीपे सीर्फ तीनो बच्चोके साथ मंजु भावना ओर चंपाभाभी ही रेह गये.. दया ओर रजीयाके जानेकी वजहसे चंपाभाभी भी आंसु बहा रही थी.. तब मंजुने विजयको भावनाको थमाते चंपाभाभीको गले लगाकर सांत कीया.. ओर तीनो अंदर चली गइ.. तो इधर पुरे रास्ते लखन खामोस बैठा रहा.. तब रमा लखनके साथ बैठकर बहुत खुस हो रही थी.. ओर बार बार लखनकी ओर देखते मुस्कुराने लगती थी..

तो सृतीकी कारमे पुनम भी खामोस बैठी रही.. तब आधे घंटेके अंदर ही सबलोग धिरेनके गांवमे उनके घरके सामने खडे थे.. तब पुनम ओर दया वहा उतर गइ.. तो सृती भी अपनी कारसे उतरके उनके गले लगते जल्द से दुबारा मीलनेको कहेने लगी.. तब पुनम भी मुस्कुराते हांमे गरदन हीलाती हे.. ओर दयाके साथ अपना सामान लेनेके लीये लखनकी जीपके पीछे चली गइ.. तब भी लखन अ‍ैसे ही बेठा रहा तभी लताने कहा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २०६

तो सृतीकी कारमे पुनम भी खामोस बैठी रही.. तब आधे घंटेके अंदर ही सबलोग धिरेनके गांवमे उनके घरके सामने खडे थे.. तब पुनम ओर दया वहा उतर गइ.. तो सृती भी अपनी कारसे उतरके उनके गले लगते जल्द से दुबारा मीलनेको कहेने लगी.. तब पुनम भी मुस्कुराते हांमे गरदन हीलाती हे.. ओर दयाके साथ अपना सामान लेनेके लीये लखनकी जीपके पीछे चली गइ.. तब भी लखन अ‍ैसे ही बेठा रहा तभी लताने कहा.... अब आगे

लता : (लखनकी ओर देखते) अरे लखन.. क्या कर रहे हे..? पीछे दीदी अपना सामान नीकाल रही हे.. जाइअ‍े उनकी मदद कीजीये.. उनका सामान अंदर लेजाइअ‍े..

कहातो लखन जटसे जीपसे उतर गया.. लखन पुनमकी ओर बीना देखे उनके हाथसे सामान लेता हे.. ओर पुनमके घरकी ओर चल पडा.. तो पुनम ओर दयाभी उनके पीछे चलने लगी.. वहा जाते ही पुनमने दरवाजा खट खटाया.. तो कुछ ही देरमे धिरेनने दरवाजा खोला.. तो सबको देखकर खुस होगया.. ओर लखनको गले मीलकर देवायतकी कारके पास चला गया.. ओर वहा सबके पैर छुने लगा..

तबतक पुनम ओर दया घरके अंदर चली गइ.. तो घरमे पैर रखते ही पुनमको इस घरका सारा राज पता चल गया.. ओर वो थोडी गुस्से होगइ.. तभी लखनने भी पुनमका सामान अंदर रख दीया.. ओर मुडकर बहारकी ओर जाने लगा.. जैसेही पुनकी ओर देखे बगैर सामान रखते बहार जाने लगा.. तब पुनमने उनका हाथ पकडलीया.. तो लखनने हाथ छुडालीया ओर बहार जाने लगा..

तो पुनमने दो तीन बार लखन भैया.. कहेते पुकारा ओर उनको रोकनेकी कीसीस की.. लेकीन लखनने उनकी अ‍ेक बात भी नही सुनी.. यहा तक उसने मुडकर पुनमके सामने तक नही देखा.. ओर बहार जाकर अपनी जीपपे चुपचाप बैठ गया.. तब सृती लखनकी ओर उनकी प्रतीक्रिया देखनेकी कोसीस करने लगी.. तो अंदरकी ओर पुनमकी आंख अ‍ेक बार फीर गीली होगइ..

ओर वो जटसे उपर अपने रुममे चली गइ.. ओर वहा दरवाजा बंध करके अपने बेड पे बैठकर थोडा जोरोसे रोने लगी.. आज अ‍ेक बार फीर उनको अपने कीये पे पछतावा होने लगा.. तब बहार नीर्मला चंदाको मीलकर धिरेन लखनके पास चला गया.. तो लखन उनको देखकर मुस्कुराने लगा.. तो लता गुस्सेसे धिरेन ओर लखनकी ओर देखने लगी..

तभी लखन धिरेनको गले मीलते लता ओर रमासे छुपकर नीलमकी ओर आंख मारते इसारा करता हे.. तो धिरेन सृतीकी कारकी ओर नीलमको देखते मुस्कुराने लगा.. फीर सब लोग कार लेकर सहेरकी ओर चले गये.. तो धिरेन भी वापस अंदर आगया.. उनका भी जोबपे जानेका टाइम होगया था.. तो वो भी जल्दसे जल्द पुनमको मीलना चाहता था.. ओर वो उपर अपने जाने लगा..

तभी पुनम धिरेनके आनेकी आहट सुनते ही खडी होकर बाथरुममे चली गइ.. ओर अपना मुह पानीसे साफ करते सही होगइ.. जब वापस बहार नीकली.. तब धिरेन उनके इन्तजारमे ही खडा था.. जैसे ही पुनम बहार नीकली धिरेनने उनको अपनी बाहोमे भर लीया.. ओर पुनमके चहेरेको बेइम्तहा पागलोकी तराह चुमने लगा.. तब पुनम कोइ प्रतीक्रिया दीये बगैर अ‍ैसेही खडी रही.. तो धिरेन थोडा गुस्से होगया..

धिरेन : पुनो.. क्या होगया हे..? क्या अपने पतीके पास आकर तुजे खुसी नही हुइ..? क्यु मुड खराब हे..? लगता हे अभी तक वहा रुकनेका तेरा जी नही भरा हे.. रुकती वहा.. क्यु वापस आइ..?

पुनम : (हथेली दीखाते) धिरेन.. प्लीज ताने मत मारो.. मुने वहा रुकनेका कोइ सौक नही था.. बस ये तो मम्मीके कहेने पे पापाके कार्यके लीये रुकना पडा.. वरना मे उसी दिन वापस आजाती.. ओर आप भी तो वहा नही आते थे.. क्या इतना काममे बीजी थे..?

धिरेन : (थोडा परेसान होते) यार मुजे जोबपे जाना होता हे.. तो वहा सीर्फ खानेके लीये आउ क्या..? जब जब मेरी वहा जरुरत थी तब तो आगया था.. सोरी.. वो.. मे थोडा सख्तीसे बोल गया.. चलो मे जोबपे जाता हु.. तुम थोडा मुड ठीक करलो..

पुनम : (सामने देखते) वो.. आपका नास्ता.. अभी दया बहेनको कहेती हु.. बना देगी..

धिरेन : (मुस्कुराते) नही.. कोइ जरुरत नही.. मेने चाइ नास्ता करलीया हे..

पुनम : (सामने बडी आंखसे देखते धीरेसे) धिरेन.. चाइ नास्ता करलीया हे..? आपने कैसे बनाया..? तो फीर इतने दिन आप खानेके लीये आये नही.. तो फीर आपका खाना..? क्या आपको सब खाना बनाना आता हे..? कही मेरी गेर हाजरीमे आपने कोइ सौतन बौतन तो नही रखली..?

धिरेन : (हडबडाते मुस्कुराते) अरे नही नही.. तुम बीवीया सक बहुत करती हो.. तुम मेरी चीन्ता मत करो.. मेरे खानेका सब इन्तजाम यही होगया था.. दो पहोरको तो सहेरमे ही खालेता था.. ओर सुबहका चाइ नास्ता.. ओर रातका खाना पायल भाभीके वहासे आता था.. या मे वहा उनके घर जाकर खालेता था..

पुनम : (आस्चर्यसे देखते) पायलभाभी..? वो कौन हे..?

धिरेन : (मुस्कुराते) अरे वो हमारे भीमा अंकलकी बीवी.. भीमा अंकल ओर जीजु साथ मे पढते थे.. ओर उनका अच्छा दोस्त भी हे.. अब जीजु इनको यहाका सरपंच बना रहे हे.. हमारे घरका पुराना नाता भी हे..

पुनम : (मुस्कुराते) ठीक हे.. ठीक हे.. अब जाइअ‍े.. ओर सुनो.. सामको जल्दीसे आजायेगा.. इतने दिनके बाद तो मे आइ हु.. बस.. थोडासा मुड खराब था तो मेने आपको रोक लीया था.. सोरी..

धिरेन : (मुस्कुराते होठ चुमते) हंम.. ठीक हे.. आजाउगा.. ओर रातको तैयार रहेना.. आज तो पुरी रात तुजे सोने नही दुगा.. आज हम दोनो अ‍ेक बार फीर सुहागरात मनायेगे.. हें..हें..हें..

पुनम : (समरमाते हसते धका मारते) अब जाइये भी.. रातकी बात रातमे करेगे.. ज्यादा रोमेन्टीक होनेकी जरुरत नही हे.. हें..हें..हें.. वरना चंदा भाभीको केह दुगी.. (धीरेसे) सुहागरात मनानी हे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (बाहोमे भीचते) अच्छा.. मम्मीकी धमकी दे रही हो.. ठीक हे.. मे रातमे देख लुगा तुजे.. फीर देखना कैसे मुजसे छुटनेकी मनते करती हो.. हें..हें..हें..

पुनम : (कामुक नजरोसे देखते हसते) हां अब जाओ भी.. आज मे भी देख लुगी.. आप अ‍ेक ही बारमे ढेर होजाते होकी नही.. अब जानेमे लेट नही होता क्या..? अब जाइअ‍े भी.. वरना..

धिरेन : (कामुक नेरोसे देखकर मुस्कुराते) वरना..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) वरना छुटी रखनी पडेगी.. हें..हें..हें.. जाओना बाबा..

कहातो धिरेनने अ‍ेक बार फीर पुनमको अपनी बाहोमे भरके होठोपे कीस कर दीया.. तो पुनमने हसते हुअ‍े उनको धके मारते बहार नीकाल दीया.. तो धिरेन भी खुस होकर मुस्कुराते बहार नीकल गया.. ओर अपनी बाइक लेकर जोबपे चला गया.. क्युकी जबतक धिरेनके साथ हालात बीगड नही जाते तबतक पुनमको धिरेनके साथ अ‍ेक पत्नी जैसा अच्छा व्यवहार करना था.. तब पुनम फ्रेस होकर नीचे आगइ..
 
तो दया कीचनकी सफाइ कर रही थी.. तब पुनम भी नीचेके रुममे चली गइ.. ओर वहाकी सफाइ करने लगी.. पुुरा बेड अस्त व्यस्त था.. तो पुनमको भी अपनी शक्तिओके माध्यमसे पता चल गया था.. की धिरेन अ‍ेक ओरतके साथ रीलेशनमे हे.. इसीलीये इनके साथ यहा सोता होगा.. ओर उसने चदर बदलकर बेडको सही कर दीया.. ओर चदरको लेकर वोस रुममे वोशींग मशीनमे डालने चली गइ.. तभी उसे चदरपे कुछ हल्केसे धब्बे दीखाइ दीये.. तो पुनम उनको सुंघने लगी..

तब उनको धबेकी स्मेल जानी पहेचानी लगी.. लेकीन पुनमने कोइ खास ध्यान नही दीया ओर चदरको वोशींग मशीनमे डालदी.. फीर वहाकी अलमारीकी सफाइ करने लगी.. तब अलमारी के अ‍ेक ड्रोअरमे उनको बहुत सारे कोन्डम ओर कुछ कामोतेजक गोलीके साथ साथ आइपीलकी गोलीया भी हाथ लगी.. तब पुनमने अपनी शक्तिीओके माध्यमसे जो भी जाना वो सब सचाइ सामने आने लगी..

उनके मनमे विचारोका घमासान युध्ध चलने लगा.. धिरेनने अभी नास्ते ओर खानेकी जो बात कही.. तो पुनमको पायल भाभी पे सक होने लगा.. ओर उसे कंन्फर्म करनेके लीये आंख बंध करते बैठ गइ.. फीर मंजुने दी हुइ शक्तिओका इस्तमाल करते सब बाते जानने लगी.. तो धिरेन ओर पायल भाभीकी पुरा पीक्चर सामने आगइ.. पहेले तो पुनम पहेलेतो आग बबुला होने लगी..

फीर कुछ सोचकर वो अचानक सांत होगइ.. ओर मुस्कुराने लगी.. क्युकी अब उसे धिरेनसे छुटनेका रास्ता अनायास ही मील गया था.. ओर पुनमने पायल भाभीकी कुंडली भी जानली.. वो धिरेनकी स्टेमीनाको अच्छी तराह जानती थी.. आखीर धिरेन उनका पती जो था.. वो जानती थी की धिरेनको कामोतेजक की गोलीकी क्यु जरुरत पडती हे.. कुछ ही देरमे ढेर होजाने वाले धिरेनको कामोतेजककी गोलीकी जरुरत पडना लाजमी था..

फीर वो वापस कामपे लग गइ.. ओर लास्टमे जाडुसे सफाइ करके कचरेको डस्टबीनमे डालने जा ही रही थी.. तभी उसे डस्टबीनमे युस कीये हुअ‍े कुछ कोन्डम भी मीले.. अब पुनमको पुरा यकीन होगया.. की धिरेन उनकी गेर हाजरीमे यहा पायल भाभीको ठोकता हे.. तब पुनमको पायलभाभीको देखनेकी इच्छा होने लगी.. ओर उनके बारेमे लखन भैयासे बात करनेकी ठानली.. फीर उसने सब कचरा डस्टबीनमे डाल दीया..

वो खुद धिरेनको रंगे हाथ पकडना चाहती थी.. ओर इसमे दयाकी मदद भी लेनी थी.. तभी उसे लखनकी याद आगइ.. तो उसने लखनको फोन लगा दीया.. लेकीन दो तीन बार ट्राइ करनेके बावजुद भी लखनने फोन नही उठाया.. तब अ‍ेक बार फीर उनकी आंख गीली होगइ.. उनके जहेनसे अब लखन पुरी तराह छा चुका था.. उनको भी पता था की वो लखनके लीये इतना बेचेन क्यु रहेती हे..

ओर इस मामलेमे सीर्फ अ‍ेक लखन ही था.. जो पुनमकी मदद कर सकता था.. पुनम धीरे धीरे अपनी शक्तिओके माध्यमसे सबकुछ जानने लगी थी.. उनको पता था.. की वो इस घरमे ज्यादा दिन रहेने वाली नही हे.. उनको ये भी पता था.. की अब उनकी मंजील देवायत नही लखन हे.. फीर भी उनमे थोडा आत्म विस्वासका अभाव था.. इसीलीये इस मामलेमे बार बार मंजुसे बात करते अपनी बात कन्फोर्म करती थी..
 
तो दुसरी ओर देवायत सृती लखन भी अपनी अपनी कार लेकर सहेरमे पहोंच गये.. ओर सबको लखन सीधा ट्रावेल्सकी ओफीसपे ले गया.. जहासे टुर जाने वाली थी.. सबलोग २० मीनीट पहेले ही पहोंच गये.. वहा जाकर लखनने ओफीसमे सबका सीट नंबर लेलीया.. ओर ड्राइवर ओर बसका नंबर भी लेलीया.. फीर चारोका समान रख दीया.. तब बहुत सारे लोग अपनी जगहपे बैठ गये थे..

तो नीर्मला चंदा सरला काकी ओर भुमीका अ‍ेक बार फीर सबको गले मीलने लगी.. तभी देवायतने अपनी कारसे अ‍ेक छोटीसी केरी बेग नीकालकर नीर्मलाको थमादी.. तब नीर्मलाकी आंख गीली होगइ.. ओर देवायतको थेन्क्स कहेने लगी.. क्युकी जानेकी जल्दीमे नीर्मलाका ध्यान ही नही था.. की जीस कामके लीये जा रही हे.. वो ही भुल गइ.. उस केरी बेगमे राजीवका अस्थी था.. जो नीर्मलाने सम्हालके अपने पास रख लीया..

नीर्मला : (इमोस्नल होते) सोरी देवु.. मेतो भुल ही गइ थी.. क्या आपको याद था..?

देवायत : (मुस्कुराते) नही.. ये सब लखनको याद था.. तो रातको ही लाकर कारमे रख दीया था..

कहातो नीर्मलाने लखनको गले लगा लीया.. ओर आंसु नीकल गये.. तब लखनने हसते नीर्मलाको थोडा जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. तभी नीर्मलाको नीचेकी ओर कुछ चुभन हुइ.. तो वो जटसे लखनसे अलग होगइ.. ओर नैन जुकाते लखनके पेन्टकी ओर देखने लगी.. तब नीर्मलाका मुह खुला ही रेह गया.. क्युकी लखनके पेन्टके अंदर ही बहुत बडा उभार दीख रहा था.. तभी सब लोग बसमे बैठने लगे.. तभी..

सृती : मोम.. मौसी सबलोग बैठ रहे हे.. अब आप लोग भी बैठ जाइअ‍े.. ओर अपना खयाल रखीयेगा..

भुमीका : (हसते) अरे हां बाबा.. साथमे चंदा हेनां.. तु क्यु चीन्ता करती हे..? ओर सुन.. जबतक हम वापस नही आजाती तबतक तुम लखनके साथ उनके घरपे ही रहेना.. हमारे घरपे अकेली मत रहेना समजी..?

सृती : (लखनकी ओर देखते) अरे हां मोम.. अब वही रहुगी.. अब आप लोग जाइअ‍े.. हें..हें..हें..

भुमीका : (मुस्कुराते) लखन बेटा.. तुम सृतीका खयाल रखना.. वो खाने पीनेमे बहुत ही लापरवाह हे.. अगर कुछ नखरे करे तो उसे डांटकर फटकार भी लगाना.. हें..हें..हें..

लखन : (सृतीकी ओर देखकर मुस्कुराते) अरे बुआ.. आप इनकी फीकर मत करो.. इनका खयाल मे खुद रखुगा.. अब आप लोग बसमे बैठ जाइअ‍े.. चलो मे आपकी मदद करता हु..

कहा तो सृती लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. तभी चारो बसमे बैठ गइ तब लखन भी बसमे चडकर उन चारोको अपनी जगाहपे बीठाकर वापस नीचे उतर गया.. ओर कुछ ही देरमे बस चली गइ.. तब देवायतने लता रमा ओर नीलमको अपने साथ कारमे लेलीया.. ओर सबलोग लखनके बंगलोपे आगये.. ओर अ‍ेक अ‍ेक सामान लेकर उतरने लगे.. तब बाकीका सामान उतारनेमे नीलम ओर रमा भी साथ देने लगी..

तब अ‍ेक बार सामान उतरते वहा कोइ नही था तब लखनने रमाके बुब्सको पकडकर छेड दीया.. तब रमा बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर जटसे बंगलेकी ओर देखने लगी.. की वहा कोइ हेतो नही.. जो उन दोनोको देख रहा हो.. तब वहा कोइ नही था.. सब लोग अंदर थे.. तो रमा लखनकी ओर देखकर कातीलाना अंदाजमे मुस्कुराने लगी.. ओर लखनकी ओर आंख मारते इसारोसे अंदर आनेको कहा..

रमा : (सरमाते धीरेसे) लखनजी यहा कोइ सरारत नही.. अगर कीसीने देखलीया होता तो..? अब जो भी करना हो अंदर हमारे कमरेमे.. देखना यहा कीसीको पता ना चले..

लखन : (रमाको सामान देते) अरे भाभी.. यहा कीसीको पता नही चलेगा.. ओर अभी सब लोग अंदर हे.. देखना अब आपको छोडने वाला नही हु..

रमा : (कातील नजरसे मुस्कुराते) हां हां.. पता हे मुजे.. आप अ‍ैसे नही मानोगे.. इसीलीये तो मे यहा आइ हु.. सीर्फ आपके लीये.. अब आपकी जो भी मरजी हो कर लीजीयेगा.. बहुत तडपाया हे आपने अपनी इस भाभीको.. लेकीन हम दोनो अकेले हो तब.. बंध कमरेमे.. समज गयेनां..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) हां भाभी.. समज गया.. मुजे हमारी सुहागरात मनाने केलीये इस दिनका बडी बेसब्रीसे इन्तजार था.. देखना अब आपको छोडने वाला नही हु..

रमा : (सरमाते मुस्कुराते) हां.. देखती हु मे.. आप कैसे सुहागरात मनाते हो.. कही अ‍ेक ही बारमे ढेर मत होजाना..

लखन : भाभी.. वो नीलम.. क्या वो आपके साथ ही सोती हेनां..?

रमा : नही.. लता दीदी केह रही थी उन्होने नीलमको अलगसे कमरा देदीया हे.. वैसे भी मैने सुना हे यहा भी बहुत कमरे हे.. सायद छे कमरे हे.. तो हमे मीलनेमे कोइ दिकत नही होगी..

लखन : (मुस्कुराते) हां लेकीन आप नीलमके साथ मत सोना.. आप अलग कमरेमे रहेना.. ताकी हमे मीलनेमे आसानी रहे.. अब चलीये.. अभी भाइ चले जायेगे तब आपको पुरा बंगला दीखाता हु.. अब जब तक आप यहा हे आप मेरी गीरफ्तमे हे.. हें..हें..हें..

रमा : (अंदरकी ओर जाते मुस्कुराते धीरेसे) सीर्फ गीरफ्त मे रखोगे.. या अपनी भाभीको कुछ सहेर मे घुमाओगे भी..? सीर्फ खाली फोकट इस भाभी हाथमे आने वाली नही हे.. हें..हें..हें..

लखज : (सामान लेकर साथ चलते) अरे चलीये तो सही.. आपको पुरा सहेर घुमाउगा.. ओर जो कहोगे सब दीलवाउगा.. क्युकी मुजे वसुल करना भी आता हे.. अब आपको छोडने वाला नही हु..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) चलो हटो बदमास.. देखती हु मे.. अब आप कैसे मेरी खातेदारी करते हो..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. आपकी खातेदारीमे कोइ कशर नही रखुगा.. देखना आप भी मेरी खातीरदारीमे कोइ कशर मत रखना.. फीर देखना आप बार बार इधर आती हो की नही.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते धीरेसे) कहोतो यही रुक जाती हु.. हें..हें..हें.. लखनजी.. प्लीज.. देखना हमारे रीस्तेके बारेमे कीसीको पता ना चले.. ओर हां.. रात मे मेरे रुममे आओ तो जरा मुजे मीस कोल कर देना.. क्युकी कभी कभी नीलु मेरे साथ होती हे.. तो मे उनको उनके रुममे भगा दुगी..
 
दोनोही मस्ती मजाक के साथ फ्लर्ट करते सामान अंदर रखने लगे.. तब लताने नीलमको अपना सामान लास्ट वाले रुममे रखनेको कहा.. लताने नीलमको अ‍ेक लास्ट वाला अलग कमरा ही देदीया ताकी उनको पढाइमे डीस्टर्बना हो.. तब नीलम अपना सब सामान लेकर अपने रुममे चली गइ.. तो सृती फ्रेस होकर अपनी क्लीनीकपे जानेकी तैयारीया करने लगी.. तभी लता उनके पास आगइ..

लता : (मुस्कुराते) दीदी.. अब आप दो पहोरको यही खानेके लीये आजाइअ‍ेगा.. हम अभी खाना बना लेगी..

सृती : (सामने देखकर मुस्कुराते) नही लता.. अभी तुम लोग अपना सब काम नीपटालो.. सब अच्छेसे सेट करलो.. मे कलसे खाना खाने आजाउगी.. आज मे वही मंगा लुगी.. ओर हां.. मे देवुको भी साथ लेजा रही हु.. हम दोनो वही खा लेगे.. फीर वो वहीसे वापस गांव चले जायेगे.. क्युकी वहा मंजु ओर भावना भी अकेली हे..

लता : (हसते) नही मतलब नही.. अरे बाबा आज यहा हमारा पहेला दिन हे.. तो सुकुनकी खीर बनानी हे.. आप मेरे जेठजीको भी इधर लेकर आइयेगा.. वो भी खाना इधर ही खाकर जायेगे.. मुजे आपके देवरकी डांट नही खानी.. समजी..? हें..हें..हें..

सृती : (हसते) अरे हां बाबा.. मे तो भुल ही गइ.. ठीक हे.. आजाउगी.. ओर तेरे जेठको भी लेआउगी.. बस..? ओर सुन.. (धीरसे) लता.. पुनम दीदीने कहा हे.. इन दोनोको लखनसे मीलनेका पुरा मौका देना.. समजी.. मे उस कमीनीकी चीखे सुनना चाहती हु.. हें..हें..हें..

लता : (हसते धीरेसे) हां दीदी.. मेरी भी यही तम्मना हे.. मेरी पुनम दीदीसे सब बाते हो चुकी हे.. इसीलीये दोनोको मेने नीचे ही ठहेराया हे.. ताकी लखन दोनोको आसानीसे मील सके.. दीदी.. मेने भाभीके रुमकी खीडकी भी खुली रखी हे ओर उपरसे पडदा लगा दीया हे.. ताकी हमे बहारसे देखनेमे आसानी रहे.. हम दोनोका कमरा उपर ही हे.. आप फीकर मत करना.. दीदी.. क्या आपकी मंजुदीदी या पुनम दीदीसे ओर कुछ बात हुइ हे..?

सृती : (सामने देखकर मुस्कुराते धीरेसे) हां.. दोनोसे बात हुइ हे.. तुम फीकर मत करना.. अभी देवु मेरे साथ ही आ रहे हे.. तो मे तेरे बारेमे उनसे बात कर लुगी.. अब तो तेरी पुनो दीदीसे सभी बात हो चुकी हे.. तब तो तुजे ये भी पता लग गया होगा की आगे क्या होने वाला हे.. हंम..?

लता : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) हां दीदी.. मुजे सब कुछ पता हे.. आप फीकर मत करना.. मे कीसी भी रीलेशनसे अ‍ेतराज नही करुगी.. क्युकी आप भी तो मेरे बारेमे सबकुछ जानती हे.. दीदी.. अब आपके देवरको देखना हे.. क्या इस बारेमे आपके देवरको कुछ पता हे..? क्युकी अब तो उनका भी हम सभीके साथ रीलेशन.. मतलब..

सृती : (सरमाते धीरेसे) लता.. मे समज गइ.. की तुम क्या कहेना चाहती हो.. फीकर मत करो.. सायद.. कल रात मंजुसे उनकी बात हो चुकी होगी.. क्युकी मंजु केह रही थी वो उनसे सब बाते कर लेगी.. तो हो सकता हे वो भी सब जानते हो..

लता : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. अगर आप कहोतो इस बारेमे मे लखनसे बात करलु..?

सृती : (मुस्कुराते) वो तुम मंजुको फोन करके पुछ लेना.. अगर उसने नही बताया ओर वो तुजे बतानेकी परमीशन देती हे.. तो तुम देवरजीसे बात कर लेना.. अब हमे कीसी भी रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. लता.. फीर भी इस रीलेशनको अ‍ेक्सेप्ट करना इतना आसान भी नही हे.. तु समज गइनां..?

लता : (बहारकी ओर जाते) हां दीदी.. साज गइ.. आप अपने हीसाबसे देखलेना.. दीदी मे चलती हु.. अभी लखनके साथ मार्केट जाना पडेगा.. दुध ओर सब्वीया लेनी हे.. फीर सामको कुछ ओर सामान भी लेने जाना पडेगा.. आज हमारा कोइ सामान सेट नही करना.. वो अब हम आरामसे करती रहेगी.. अभी तो चार पांच दिन रमाभाभी इधर ही हे.. आप जेठजीको लेकर जल्दी आजाइअ‍ेगा..

सृती : (मुस्कुराते) चल ठीक हे.. मे भी नीकलती हु.. क्लीनीकपे जानेका टाइम भी होगया हे..

कहेते सृती भी तैयार होकर बहार नीकल गइ.. तब देवायत लखनको कुछ पैसे दे रहा था.. तब सृती लखनकी ओर देखते मुस्कुराती रही.. फीर देवायत अपनी कारमे सृतीके साथ उनकी क्लीनीकपे चला गया.. ओर लता रजीयाको घरका ध्यान रखनेको कहेकर लखनके साथ मार्केट जानेके लीये उपर तैयार होने चली गइ.. तब रजीया कीचन साफ करते वहाका कुछ सामान भी सेट करने लगी..

तो नीलम अपने रुममे अपना सामान नीकालकर सेट करने लगी.. इसी दौरान लताने फोन लगाकर मंजुलासे बात करली.. तो मंजुने उसे बता दियाकी कल रात ही उनकी लखनसे बात हो चुकी हे.. ओर फीर भी वो इस बारेमे लखनसे बात करना चाहती हे.. तो कर सकती हे.. सुनक लताने इस बारेमे अ‍ेक बार लखनसे बात करनेका नीस्चय करलीया.. ओर वो तैयार होकर नीचे आगइ..

आज लताने ढीला जुडा बांधके रखा था.. जीनकी वजहसे वो बहुत ही कयामत ओर कामुक दीख रही थी.. जो अभी लखनके साथ कारमे बैठकर बाजार जा रही थी.. तब लखन उनकी ओर बार बार देखकर मुस्कुरा रहाथा.. ओर लताको देखकर उनका हथीयार अंगडाइ लेने लगा.. तभी अ‍ेक सुमसान जगहमे जहा लोग नही थे.. तो लखनने कार चलाते लताके होठोको चुम लीया तब लता बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनको रास्ता दीखाते चलनेको इसारा करते हसने लगी.. तभी..
 
लखन : (कामुक नजरोसे देखते) लता.. आज तुम बहुत खुबसुरत लग रही हो.. जी करपा हे कीसी होटेल मे लेजाकर तुजे प्यार करलु..

लता : (सरमाकर हसते) लखन.. आप भीनां.. आपको हर वक्त यही सुजता हे.. अरे बाबा मेरा पीरीयड चल रहा हे.. जब पीरीयड होता हेना.. तब सभी ओरते अ‍ैसे ही दीखती हे.. ओर सुनो.. क्या आपकी बडी दीदीसे.. आइ मीन.. भाभीसे कोइ बात हुइ हे..?

लखन : (सामने देखते थोडा अन्जान बनते) बडी दीदी..? मतलब भाभीके साथ..? कीस बारेमे..? भाभीको बडी दीदी क्यु कहा..?

लता : (थोडा मजा लेते) कुछ नही..बस.. अ‍ैसेही मुहसे नीकल गया.. क्या सच केह रहे होनां..? आपकी इनसे कोइ बात नही हुइ..?

लखन : (थोडा जुठ बोलकर मजा लेते) अरे नही बाबा.. मे सच केह रहा हु.. बताना वो मुजसे क्या बात करने वाली थी..? मुजे तो कुछ भी पता नही हे.. हें..हें..हें..

लता : (मनमे) कीतने कमीने हे.. मुजसे जुठ बोल रहे हे.. ताकी सब बाते मेरे मुहसे उगलवा सके...

लखन : (मुस्कुराते) ओ लता.. क्या सोच रही हे..? बताना भाभी मुजसे क्या बात करने वाली थी..

लता : (थोडी नीरास होते) कुछ नही.. जब वो आपको मीलेगी तब आपसे कुछ बाते करेगी.. आप उनकी बाते गौरसे सुनना.. सायद बडे भैयाने ओर भाभीने मीलकर हम सबके बारेमे कुछ बडा फैसला लीया हे..

लखन : (अनजान बनकर देखते) हम सबके बारेमे..? बता मुजे.. क्या इस बारेमे तुजे कुछ मालुम हे..?

लता : (सरमाते हसते) अरे नही नही.. बस.. इधर आ रहेथे.. तब भावना दीदी मुजसे पुछ रही थी.. की मंजुदीदीने लखन भैयासे कोइ बात की हे या नही.. मैने भी उनको पुछा.. तो उनको भी कुछ मालुम नही हे..

लखन : (थोडा लताको परेसान करते) यार तुम ओरते आधी बात करके हमे बहुत परेसान करती हो.. ठीक हे.. मे भाभीमांसे ही पुछ लुगा.. क्युकी अ‍ेक हप्तेके बाद हमे श्रीधर की सादीमे जाना पडेगा..

लता : (मुस्कुराते थोडा जुठ बोलते) ठीक हे.. आज मुजे भी दीदीसे बात करनी हे.. आइ मीन भाभीसे.. दो पहोरको या सामको फुरसतमे बात कर लुगी.. जानु.. क्या मुजे मेरी नइ सौतनसे नही मीलवाओगे..? हंम..? उनको भी खानेपे बुलालोनां.. आज हमारा यहा पहेला दिन हे..

लखन : नही लता.. अभी नही बुला सकता.. क्युकी उनके घरपे सीर्फ उनकी बुढी मां ही हे.. जो वो भी बिस्तरमे पडी हे.. क्युकी उनको पेरेलीसीस हे.. राधीका नाम हे उनका.. जो अ‍ेक त्यक्ता थी.. राधुको अपनी मां को खीलाना पडता हे.. उनका सबकुछ करना पडता हे.. बाकी उनके परीवारमे अब कोइ नही हे.. जब रमा भाभी चली जायेगी.. तब अ‍ेक दिन उनको घरपे लेकर आउगा.. तब मील लेना उनको..

लता : (आस्चर्यसे देखते) लखन.. क्या तो वो हमारे साथ नही रहे सकती..?

लखन : (मुस्कुराते) नही लता.. उनको पता हे की तुम मेरी बीवी हो.. लेकीन वो हमपे कोइ बोज बनना नही चाहती.. उनको तो सीर्फ हमारा प्यार ही चाहीये.. बाकी उनका अ‍ेक छोटासा घर हे.. उनका अच्छा खासा होस्टेल चल रहा हे.. हमारी नीलु भी तो वही थी.. ओर हमने हाल हीमे गांधर्व विवाह कीया हे.. इस बारेमे अभी सीर्फ पुनोदीदी ही जानती हे..

लता : (हसते) क्या अब उनको भाभी कहेना छोडदीया..? वो आपकी भाभी भी तो हे.. हें..हें..हें..

लखन : (थोडा सीरीयस होते) नही लता.. अब वो मेरी भाभी नही हे.. सीर्फ बहेन हे.. ओर जीतनी भी बहेने हे.. वो सीर्फ हमारे बडे भाइको ही चाहती हे.. ओर उनके साथ ही सादी करती हे.. या उनसे सादी करना चाहती हे.. यहा तो छोटे भाइकी कोइ अ‍ेहमीयत ही नही हे..

लता : (अ‍ेक नजरसे देखते) लखन.. आप अ‍ैसा क्यु सोचते हो..? क्या आपको पता हे मे आपकी कौन लगती हु..? हंम..?

लखन : (अ‍ेक बार सामने देखते) हां.. सब पता हे मुजे.. तुजे सब पुनो दीदीने बताया हे.. लेकीन तुम मुजे बताना नही चाहती थी.. मुजे पता हे तुम भी मेरी बहेन हो.. हमारे बापु अ‍ेक ही हे.. यहीना..?

लता : (सामने देखते) हां.. भलेही मे आपकी सौतेली बहेन हु.. लेकीन हुतो आपकी बहेन ही.. क्या मैने आपसे प्यार नही कीया..? आपसे सादी नही की..? तो फीर अ‍ैसा क्यु सोचते हे..? मुजे पता हे आप पढते थे तब पुनो दीदीको चाहते थे.. लेकीन हमारी कीस्मतमे जो लडकी या लडका लीखा होता हे.. वो ही हमे मीलते हे.. सबकी अपनी अपनी कीस्मत हे.. आप अ‍ैसे नीरास मत होइअ‍े..

लखन : (आंख गीली करते) लता.. बुरा मत मानना.. मुजे सच बताना.. क्या तुमने भी मुजे धोखा नही दिया..? तुम भी बडे भैयाको नही चाहती..? हंम..? मुजे पता हे.. तुमने मुजसे सादी सीर्फ बडे भाइको पानेके लीये ही की हे.. क्या ये सच हेनां..?

लता : (सामने देखते आंसु बहाते) लखन.. आपको सब कैसे पता..? पहेले आप मेरी कसम खाइअ‍े.. क्या मंजु भाभीसे आपकी सब बाते होगइ हेनां..?

लखन : (सामने देखते) हां लता.. लेकीन मे तुम्हारी कसम नही खा सकता.. कल रात ही सब बाते हुइ..

लता : (आंसु पोछकर जुठे गसे से मुका मारते) कमीने.. तो फीर अब तक मेरे साथ नाटक क्यु कर रहे थे..? अभी क्यु केह रहेथे.. की भाभीसे कोइ बात नही हुइ.. लखन.. आप बहुत कमीने हो.. जाओ मुजसे बात मत करो..

लखन : (मुस्कुराते) अरे तुमतो नाराज होगइ.. हें..हें..हें.. हां लता.. भाभीमां ने कल रात मुजे सब कुछ बता दीया हे.. लता.. मे पुनोका प्यारभी नही पा सका.. वो भी बडे भाइको प्यार करती थी.. ओर तुमने भी भाइको पानेके लीये मेरा इस्तेमाल कीया.. क्या ये सच नही हे..?

कहातो लता नजरे जुकाते फीरसे आंसु बहाने लगी.. अचानक लखनने पुछे सवालका लताके पास कोइ जवाब नही था.. ओर वो जुठ बोलना नही चाहती थी.. बस.. सर जुकाये आंसु बहाती रही.. आज लखनके साथ चलते वो बुरी तराह फस चुकी थी.. तभी लखनने अ‍ेक सुमसान जगहपे अपनी कारको रोक लीया.. ओर लताको बैठे बेठे ही हग करलीया.. तब लता उनके कंधेपे सर रखके जोरोसे रोने लगी.. तो लखनने उनको सांत कीया ओर उनके आंसु पोछे.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २०७

कहातो लता नजरे जुकाते फीरसे आंसु बहाने लगी.. अचानक लखनने पुछे सवालका लताके पास कोइ जवाब नही था.. ओर वो जुठ बोलना नही चाहती थी.. बस.. सर जुकाये आंसु बहाती रही.. आज लखनके साथ चलते वो बुरी तराह फस चुकी थी.. तभी लखनने अ‍ेक सुमसान जगहपे अपनी कारको रोक लीया.. ओर लताको बैठे बेठे ही हग करलीया.. तब लता उनके कंधेपे सर रखके जोरोसे रोने लगी.. तो लखनने उनको सांत कीया ओर उनके आंसु पोछे.. तभी.... अब अगे

लता : (रोते) लखन.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेने ये बात आपसे छुपाइ.. मे भाइको सुरुसे ही पसंद करती थी.. लेकीन उनकी इतनी सादीया होगइ थी.. तो मेने सोचा अब भाइ मुजसे सादी नही करेगे.. तो मेने आपके साथ सादीका फैसला करलीया.. ओर सच कहु..? हमारी सगाइके बाद जब हमने पहेली बार मीलन कीया.. तबसे मे आपको भी प्यार करने लगी हु.. ओर मेरा यकीन मानो.. ये बात सच हे.. मे आपसे प्यार करती हु..

लखन : (मुस्कुराते) लता.. आंसु मत बहाओ.. मे जानता हु.. ओर मे इसे गलत भी नही मानता.. मुजे भाभीमांने सबकुछ बता दीया हे.. ओर सच कहु..? तो मे आज भी तुम दोनोसे इतना प्यार करता हु.. जीतना पहेले करता था.. लेकीन क्या करु..? मेरी किस्मत ही खराब हे.. मेरे नसीबमे बहेनोका प्यार लीखा ही नही हे..

लता : (अ‍ेक बार सामने देखकर सर जुकाते) नही लखन.. आप दिल छोटा मत कीजीये.. आपकी किस्मतमे भी बहेनोका प्यार लीखा हे.. लखन.. आइ अ‍ेम सोरी.. लेकीन मेरा यकीन मानो.. मे आपसे आज भी उतना ही प्यार करती हु.. मे कीसीको खोना नही चाहती.. ना आपको.. नां.. भाइको..

लखन : (मुस्कुराते) लता.. जैसे तुमने रजीया ओर राधुके बारेमे जानकर सब मेरे लीये खुसी खुसीसे स्वीकार कर लीया.. उसी तराह मेने भी तेरे बारेमे ओर भाइके बारेमे जानकर सब खुसीसे स्वीकार करलीया हे.. तो तुम सोरी मत बोलो.. बस.. भाभीमां ने मुजे कुछ जीम्वेवारी दीहे.. अब उसीको नीभाना हे..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) हंम.. मतलब अब अपनी सभी बहेनोका प्यार चाहीये आपको.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? तुजे कोइ अ‍ेतराज हे..? तो अभी बतादे.. मे भाभीमाको मना कर दुगा..

लता : (सरमाकर सामने देखते) हां.. अब उसीकी डांट खीलवाओगे मुजे.. अब आपके कीसी भी रीलेशनसे मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. लखन.. आइ लव यु.. अब आपने सब स्वीकार कर ही लीया हे.. तो अ‍ेक बात बता दीजीये.. आपने पुनो दीदीसे अपने प्यारका इजहार क्यु नही कीया..? अगर अ‍ेक बार अपने दिलकी बात उनको बता देते.. तो सायद आज वो धिरेनके बजाये आपकी बीवी होती.. वो आपसे सादी करनेके लीये बील कुल रेडी थी.. अब कारको जाने दीजीये.. लेट हो रहा हे..

लखन : (कार चलाते मुस्कुराते) लता.. तुजे कैसे पता वो मुजसे सादीके लीये रेडी थी..? बतानां..

लता : (सरमाते हसते) हंम.. अ‍ेक तो खुद पुनो दीदीने बताया मुजे.. क्युकी वो खुद धिरेनको पसंद नही करती थी.. उसे बाबाके कहेने पे धिरेनसे सादी करनी पडी.. ओर दुसरा भावना दीदीने मुजे कहा.. की पुनोदीदी धिरेनके बजाये आपसे सादी करना पसंद करती.. जानु.. फीकर मत करोे अब तो मंजुभाभीने सब परमीशन देदी हे.. तो अब आप पुनोदीदीका प्यार भी पा सकते हो.. क्युकी अब आगे सीर्फ हम पांचोको ही सब कुछ सम्हालना हे.. पुनो दीदीका प्यार पानेमे मे आपकी मदद करुगी..

लखन : (सरमाते धीरेसे) थेन्क्स लता.. लेकीन भाभीमां ने सब छुट लेली हे.. तो इसका मतलब भी जानती होनां.. की आगे क्या होने वाला हे.. हें..हें..हें..

लता : (सर्मसार होते बाजुमे मुका मारते) हटो बदमास.. मे इतनी भोली भी नही हु.. की इन सबका मतलब नही जानती.. लखन.. मतलब अब हमारे खानदानके कोइ रीस्ते नाते नही देखना.. अब हमारे घरमे सीर्फ अ‍ेक ही रीस्ता होगा.. अ‍ेक ओरत.. ओर अ‍ेक मर्दका.. जो अपनी मर्जीसे जीसे चाहे प्यार कर सकता हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. तुम सबकुछ समज गइ.. चल ठीक हे.. आगे देखा जायेगा.. चल आगया मार्केट.. तुजे जो भी चाहीये लेले.. तबतक मे दुध लेकर आता हु..

लता : (जीपसे उतरते सरमाकर धीरेसे) लखन.. मे उस दिनका इन्तजार करुगी.. जीस दिन हम दोनो बहेने आपके साथ अ‍ेक ही बीस्तमे होगी.. हें..हें..हें..

लखन : (अ‍ेक नजरसे लताको देखते) लता.. सायद अब ये पोसीबल नही हे.. चल मार्केट आ गया..

लता : (लखनकी ओर देखते साथ चलते मनमे) लखन.. अभी आपने मुजे पहेचाना ही नही.. आइ प्रोमीस.. देखना अ‍ेक दिन मे खुद पुनो दीदीको आपके बीस्तरमे लेकर आउगी..

आखीर दोनो बाते करते मार्केटमे आगये.. तो लखनने अ‍ेक जगाहपे अपनी जीपको पार्कींगपे रख दीया ओर दुध लेने चला गया.. तो लता भी सब्जीया ओर कुछ दुसरी चीजे खरीदने लगी.. आखीर लखन सहेरमे रहेनेके लीये आही गया.. ओर लतासे बहुत सारी बाते भी होगइ.. फीर दोनोही खरीदी करके वापस अपने बंगलेकी ओर चल पडे.. तब लताके पास बहुत सारा सामान था.. तभी लखनके फोनकी रींग बज उठी.. देखा तो बंसीका फोन था.. ओर उसने फौरन फोन उठालीया..

लखन : (धीरेसे) हां बंसी.. बोल.., हां.. हां.. सुन.. मे अभी तेरी भाभीको घरपे छोडकर आता हु.. तु वही रहेना..

लता : (फोन कट होते ही सामने देखकर) जानु.. कीसका फोन था..? आप इतने गभराये हुअ‍े क्यु हे..?

लखन : (थोडा परेसान होते) लता.. बंसीका फोन था.. वो सामतभाइको लेकर यहा होस्पीटल आया हे.. तो मुजे जाना होगा.. वो वहा अकेला हे.. अगर मुजे आनेमे देर होजाये तो तुम सब लोग खाना खा लेना..

लता : (गंभीर होते) ठीक हेजी.. आप जल्दीसे आजाइअ‍ेगा.. भाइ भी खाना खाने घरपे आ रहे हे..

लखन : (कारको घरकी ओर दोडाते) नही लता.. बंसीकी बातोसे लगा बात थोडी सीरीयस हे.. तो सायद भाइको भी गांव आना पडेगा.. तु साज गइनां..?

तो दुसरी ओर सृती भी देवायतको लेकर क्लीनीकपे चली गइ थी.. तब इतने दिनोसे वो क्लीनीकपे नही आइ थी.. तो आज पेसन्टभी कुछ ज्यादा थे.. तो सृती देवायतकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. तो देवायत समज गया.. ओर वो सृतीको दो पहोरको लेने आउगा.. कहेकर अपने कुछ खास व्यापारीयोको मीलने चला गया.. ओर सबको यहा ओफीस खोलनेकी ओर लखनके बारेमे जानकीया देने लगा..
 
तो गांवमे कल रातको लखन सभी दोस्तोको खाने पीनेकी पार्टी दी थी.. तो सभी दोस्तो सुबह देर तक सोते रहे.. तब सामतभाइके घरपे सांती ओर जागृतीने सुबह जल्दी जागकर घरका सभी काम नीपटा लीया.. तब तक सामतभइ भी कंपलीट होकर अखबार पढ रहे थे.. तो जया सबके लीये चाइ नास्ता बना रही थी.. तो जागृती भी नहाने चली गइ थी.. ओर सांती जयाका हाथ बटा रही थी.. तभी..

जया : (धीरेसे) सांती बेटा.. आज रातको तेरे ससुरको खुनकी उल्टीया कुछ ज्यादा ही हुइ थी.. तो मैने उसे बंसीको जगानेको कहा.. तो मुजे कसम देकर बंसीको जगानेसे रोक लीया.. ओर नही जगाने दीया.. अब बंसी उठजाये तो उसे कहेना तेरे बापुको लेकर सहेर चला जाये.. ओर जरा होस्पीटलपे दीखाकर आये..

सांती : (थोडी चीन्तासे) मम्मी.. क्या भाभइकी.. सोरी.. आइ मीन्स.. क्या पापाकी तबीयत कुछ ज्यादा ही खराब हे..? तो मे अभी आपके बेटेको जगाती हु.. आज लखन भैया सहेर चले गये.. तो कल सभी दोस्तोने पार्टी रखी थी.. तो वो देरसे आये..

जया : (चीन्तासे) हां बेटा जा.. जगादे उसे.. उनको अपने बापुको लेकर सहेरमे ही जाना पडेगा..

कहातो सांतीने बंसीको जगा दीया.. ओर सामतभाइको लेकर होस्पीटल जानेके लीये कहा.. तो बंसी भी थोडा गभराते जल्दीसे उठ गया ओर फटाफट नहाकर कंपलीट हो गया.. फीर बहार आया तो चाइ नास्ता रेडी था.. तब सबलोग अ‍ेक साथ चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तब बंसी सांती ओर जया बार बार सामनतभाइकी ओर देख रहे थे.. कीसीको उनको कुछ पुछनेकी हिंमत नही हो रही थी.. तभी..

जया : (धीरेसे) अ‍ेजी.. सुनीये.. आप चाइ नास्ता करके बंसीके साथ सहेर चले जाइअ‍े.. ओर आपके वो डोक्टरको दीखाकर आइअ‍े.. जीनसे आपका इलाज चल रहा हे.. वरना आपकी तबीयत ज्यादा बीगड जायेगी..

सामत : (थोडा जोरोसे) अरे मुजे कुछ नही हुआ.. बच्चेको क्यु परेसान कर रही हो..?

सांती : (आंग गीली करते) पापा.. क्या आप अपनी बेटीकी बात नही मानोगे..? जाइअ‍ेनां अ‍ेक बार दीखाकर आजाइअ‍े.. आपको मेरी कसम..

सामत : (थोडा सांत होते) लेकीन सांती बेटा.. कसम मत दे मुजे.. मुजे कुछ हुआ ही नही.. तो फीर क्यु खामखा जाना..?

बंसी : (मुस्कुराते) पापा.. चलीयेनां.. वैसे भी लखन भैया वहा रहेने चले गये होगे.. तो हम उसे मीलकर आजायेगे.. ओर डोक्टरको भी दीखा देगे.. आप रेडी रहो.. हम बाइकमे ही चले जायेगे..

सामत : (मुस्कुराते) हंम.. तुम लोग मानोगे नही.. ठीक हे.. पहेले ठीकसे चाइ नास्ता तो करले..

जब सबने चाइ नास्ता करलीया तो जया सामतभाइको उनकी मेडीकलकी फाइल देने लगी.. तभी सांती ओर जागृती सामतभाइकी ओर आंख गली करते देख रही थी.. तब कीसीको नही पता थाकी तीनो सामत भाइको आखरी बार देख रही हे.. बंसी सामतभाइको अपनी बाइकमे पीछे बीठाकर सहेरकी ओर नीकल गया.. तब बीच रास्ते मे ही सामतभाइ जोरोसे खांसने लगे.. तो बंसीने अपना स्कुटर स्पीडमे चलाया..

ओर आधे पोने घंटेमे ही होस्पीटल पहोंच गया.. तो वहा भी दो तीन पेसन्ट बैठे थे.. तब बंसीने सामत भाइकी फाइल काउन्टरपे रखदी.. ओर सामतभाइकी अ‍ेपोइटमेन्ट लेली.. ओर सामतभाइके साथ बैठ गया.. तब कुछ देरके बाद उनकी बारी आइ तो दोनो अंदर चले गये.. ओर डोक्टर सामतभाइको पहेचान गये.. ओर उनकी फाइलको देख लीया.. तब सामतभाइने आज उनको खुनकी उल्टीया होनेकी बात की.. तभी..

डोक्टर : सामत भाइ.. ये आपके साथ कौन हे..?

सामत : (सामने देखते) जी.. जी वो मेरा बेटा हे..

डोक्टर : तो क्या उसे सब पता हे..? आपने उसे कुछ बताया हे..?

बंसी : (थोडा वीचलीत होते सामने देखकर) डोक्टर साहेब.. प्लीज मुते बताइअ‍ेना.. आप दोनो क्या बाते कर रहे हो.. मुजेतो कुछ पता ही नही हे.. पापाने मुजे कुछ नही बताया..

सामत : बंसी बेटा तुम जाकर बहार बैठो.. मे डोक्टर साहबसे बात करके आता हु.. मुजे कुछ नही हुआ हे..

डोक्टर : (आस्चर्यसे देखते) सामत भाइ.. आप इतनी बडी बात अपने बेटेसे छुपा रहे हो..? अगर कही रास्तेमे आपको कुछ हो गया तो..? हंम..? ये तो गलत हे..

बंसी : पापा प्लीज.. मुजे यहा बैठने दीजीये.. डोक्टर साहेब.. आप मुजे बताइअ‍ेना पापाको क्या हुआ हे..?

डोक्टर : बंसी.. क्या यही नाम हेनां आपका..?

बंसी : जी..

डोक्टर : देखो बंसी.. आपके पापाको पीछले अ‍ेक सालसे बल्ड केन्शर हे.. ओर अभी लास्ट स्टेजमे हे.. तो मैने उनको १५ दिन पहेलेही बता दीया था.. की जब खुनकी उल्टीया होने लगे.. तब कभी भी कुछ भी हो सकता हे.. आप समज गयेनां..?

बंसी : (आंग गीली करते गीडगीडाते) डोक्टर साहेब.. तो फीर इनका इलाज कीजीयेनां.. जीतना भी खर्चा होगा मे देनेके लीये तैयार हु.. आप कैसे भी करके पापाको बचा लीजीये.. पैसोके पीछे मत देखीये..

डोक्टर : बंसी.. अब खर्चा करनेसे कोइ फायदा नही.. अगर पैसोसे इलाज होता तो मैने कभीका करदीया होता.. हमारे मेडीकलसे हीसाबसे इनको जीतनी भी ट्रीटमेन्ट देनी थी.. सब देदी.. अब इनसे आगे कोइ ट्रीटमेन्ट बाकी नही हे..

सामत : (बंसीके सरपे हाथ घुमाते) बेटा.. सांत होजा.. रो मते.. इसका इलाज कीसीका हुआ हे..? जो मेरा होगा.. इसीलीये तो मेने तुम्हारी सादी जल्दीसे करवादी.. बस.. अब मेरी बरखाका देखना.. उनको कोइ तकलीफ ना हो.. ओर मुजे वचन दे.. अगर जया कही सादी करना चाहे.. तो तुम उसे कुछ नही कहोगे..

बंसी : (आंसु बहाते) पापा.. आप बरखाकी चीन्ता मत करना.. उसे मे सारी जींदगी सम्हालके खयाल रखुगा.. ओर वचन देता हु.. मे मम्मीको भी कुछ नही कहुगा.. आइ प्रोमीस..

डोक्टर : (दवाइ लीखते) बंसी.. अ‍ेक गोली लीख देता हु.. अगर कुछ उल्टी जैसा लगे तो सामतभाइको खीला देना.. बाकी घर जाकर इनकी सेवा करो..

बंसी : (आंसु पोछते खडा होकर) डोक्टरसाहेब.. आपकी फीस..

डोक्टर : (सामने देखकर मुस्कुराते) नही.. कोइ फीस नही चाहीये.. ओके..? ये लीजीये.. बहारसे मेडीकल स्टोरपे दवाइ मील जायेगी..

कहातो बंसी परची लेकर सामतभाइके साथ बहार नीकल गया.. ओर सामत भाइको वही बीठाकर बहार बाजुके मेडीकल स्टोरपे चला गया.. तो वहा भी थोडी भीड थी.. तब बंसी परची लेकर अपनी बारीका इन्तजार करते वही खडा रहा.. ओर फोन लगाकर लखनसे बात करने लगा.. तो कुछ ही देरमे होस्पीटलमे चहेल पहेल दीखने लगी.. तो बंसी मुडकर होस्पीटलकी ओर देखने लगा.. तो कुछ लोग दोडकर अंदर जा रहे थे.. तो कुछ लोग जटसे बहार नीकल रहे थे..
 
तभी उनके दरवाजेपे रीसेपनीस्ट दीखाइ दी.. जो कीसीको ढुंढ ते इधर उधर देख रही थी.. तो बंसीको कुछ आसंकाअ‍े होने लगी.. तो वो होस्पीटलकी ओर जाने लगा.. तभी रीसेपनीस्टने उनको देख लीया ओर हाथ हीलाकर बंसीको जटसे आनेके लीये कहेने लगी.. तब बंसी दोडता हुआ होस्पीटलकी ओर चलाते जटसे अंदर चला गया.. तो यहा उनके पापाके पास बहुत सारे लोग जमा हो गये थे.. तभी..

बंसी : (थोडा जोरोसे) अरे हटो.. क्या हुआ..? मेरे पापा हे.. पापा.. पापा..

तो लोग बंसीकी ओर देखते साइडमे हटने लगे.. तो बंसीने आकर देखा तो सामतभाइको खुनकी उल्टीया हुइ थी.. ओर वो नीचे फर्सपे लेटे हुअ‍े थे.. ओर डोक्टर वही उनको सीनेपे हाथ रखकर पंपीग कर रहे थे.. लेकीन सामत भाइ तो अ‍ैसेही लेटे रहे.. तब कुछ देरके बाद डोक्टरने उनके हाथकी नब्सको पकडकर चेक कीया.. ओर खडे हो गये.. ओर नर्सको सामतभाइके उपर अ‍ेक चदर डालनेको कहा.. ओर बंसीको देखते ही उनके पास आगये..

डोक्टर : (कंधेपे हाथ रखते) बेटा.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे नही बचा सका इनको.. इस बारेमे इनको पहेले ही बता दीया था..

इतना सुनते ही बंसी फुटफुटके रोने लगा.. ओर रोते रोते अपने पापाके पास आकर नीचे बैठ गया.. तब कुछ लोग उनको आस्वासन देकर सम्हालने लगे.. तभी लखन भी माहोल देखकर दोडकर अंदर आगया.. तो बंसी सामतभाइको लीपटकर रो रहा था.. तब लखन उनके पास चला गया.. ओर बंसीको आवाज देकर कंधेपे हाथ रखा.. तो बंसी लखनको देखते ही खडा होगया.. ओर उनसे लीपटकर जोरोसे रोने लगा..

बंसी : (जोरोसे रोते) लखन.. पापा नही रहे..

लखन : (बंसीको सांत करते) बंसी.. क्या कर रहा हे..? सांत होजा.. मे अभी भाइको फोन करता हु.. सम्हाल अपने आपको.. अब तुही टुट जायेगा.. तो घरपे सबको कैसे सम्हालेगा..? सांत होजा..

बंसी : (अपने आंसु पोछते) भाइ.. पापाको ब्लड केन्शर था.. तो घरपे कीसीको बताया भी नही.. वरना हम उनका इलाज करवाते..

लखन : (कंधेपे हाथ रखते) बंसी.. सांत होजा अब मे यहा हुनां.. तु बैठ इधर मे भाइको फोन करता हु.. वो यही सहेरमे ही हे.. ओर सुन.. अभी तुम घरपे फोन कत करना.. वरना वहा सबको सम्हालेगा कौन..?

डोक्टर : मी. बंसी.. प्लीज आप थोडी देर बैठीये मे इनके सब पेपर रेडी करवाकर अभी आपको बुलाता हु..

लखन : सर.. मे इनका दोस्त ही हु.. आप पेपर रेडी करवाइअ‍े मे अभी लेजाता हु..

कहेते लखन फोन लेकर देवायतको फोन लगाता हे.. तब देवायत उनके व्यापारीओके साथ बैठा था.. जैसेही लखनने उसे सब बताया तो वो फौरन वहासे नीकलते होस्पीटलकी ओर नीकल गया.. तो कुछ ही देरमे वो भी होस्पीटल पहोंच गया.. तबतक लखनने सामतभाइके सारे पेपर लेलीये थे.. ओर गांवमे कीसीको ना कहेनेकी सुचना देकर मुना श्रीधर साहीलसे भी बात करली..

फीर उसने लतासे भी बात करके गांव जानेकी ओर देर रात वापस आजानेकी बात करली.. तबतक देवायतने सृतीको बता दीया की सामत भाइकी बोडीको लेकर वो गांव जा रहा हे.. फीर उसने मंजुको भी सामत भाइके घरपे जाकर सबको सुचना देकर सम्हालनेको कहा.. तभी वहाके स्टाफने भी सामत भाइकी बोडीको भी रेडी करके सोंप दीया.. तब लखन ओर बंसी देवायतके पास आगये.. तभी..

देवायत : लखन.. तुम बंसीके साथ बैठजा.. सामतभाइके लीये मैने अ‍ेम्ब्युलन्सका इन्तजाम करलीया हे.. तुम दोनो उनके साथ ही आजाओ.. मे पीछे कार लेकर आता हु.. तुम अपनी जीपको यही छोडदे.. वहासे तेरे आनेका इन्तजाम होजायेगा..

लखन : (धीरेसे) भाइ.. मे बंसीकी बाइक लेकर साथ ही चलता हु.. दोनो बाइकपे यहा दीखाने आये थे.. तो ये हादसा हो गया.. ओर वो बंसीके घरवालोको अभी इस बातका पता भी नही हे.. अब हम नीकल रहे हे.. तो क्या उनके घरपे खबर करदे..?

देवायत : ठीक हे.. तुम वहाकी फीकर मत करो.. मैने तेरी भाभीको दो तीन लेडीसको लेकर वहा जानेको कहा हे.. वो ही जया भाभीको खबर देदेगी.. ओर उन लोगोको सम्हाल लेगी.. तुम श्रीधर या मुनाको केहकर अर्थीका सामान मंगवाले.. तबतक हम लोग भी पहोंच जायेगे.. (बंसीकी ओर देखते) बंसी.. तु गभराना नही.. मे तेरे साथ हु.. चलो..

तब सब लोगोने सामतभाइकी बोडीको अ‍ेम्ब्युलन्समे रख दीया.. तो उनके साथ बंसी बैठ गया.. तो लखनने बंसीकी बाइक लेली ओर देवायत भी अपनी कार लेकर अ‍ेम्ब्युलन्सके पीछे जाने लगा.. तो अ‍ेक घंटेके बाद वो गांवमे आगये.. तब तक पुरे गांवमे ओर आजु बाजुके गांवमे भी खबर पहोंच चुकी थी.. तो सामतके घरपे बहुत सारे लोग जमा होगये थे.. तब रमेश भी घरमे जया सांती ओर बरखाको सम्हाल रहा था..

फीर सामत भाइकी बोडीको घरमे लाया गया.. तब जया बरखा ओर सांती उनसे लीपटकर बहुत रोइ.. तब ब्रीन्दा मंजु बसंतीने तीनोको सम्हाला.. फीर रमेश ओर कुछ लोगोने मीलकर सामतभाइकी अर्थीको कंपलीट कर दीया.. ओर घरके लोगोने सामतभाइके आखरी दर्शन कीये.. फीर गांवके लोग सामतभाइकी अर्थीको लेकर सम्सानकी ओर नीकल गये.. वहा बंसीने सामतभाइको अग्नीसंस्कार दीया..

फीर तीन चार घंटेके बाद सब लोग वापस घरपे आगये.. ओर गांवके कुछ गीने चुने लोगोको छोडकर बाकी सबलोग अपने अपने घरपे चले गये.. तो दुसरे गांवके सरपंचभी बंसी देवायत ओर रमेशको मीलकर जाने लगे.. आज सामत भाइके जानेकी वजहसे पुरा गांव सोकमग्न हो गया था.. तब सीर्फ अ‍ेक ही सख्स था.. जो सामत भाइके जानेकी वजहसे मन ही मन खुस हो रहा था..

जो उपरसे वो भी दुखी होनेका नाटक कर रहा था.. वो सख्स था रमेश.. जो अब उनके लीये जया भाभी को मीलनेका रास्ता आसान होगया था.. तो वो भी वहा खडे खडे मन ही मन अपने नये संसारको बसानेकी प्लानींग करने लगा.. फीर देवायतने लखन श्रीधर ओर मुनाको कहेकर बंसीके घरपे खानेका इन्तजाम करवाया.. तब मंजु ब्रीन्दा बसंती ओर बींदीया सलमाने मीलकर जया सांती ओर बरखाको समजाकर जबरदस्तीसे खाना खीलाया..

ओर देवायत रमेश के साथ साथ लखनके सभी दोस्तोने भी वही खाना खाया ओर बंसीको भी खीलाया.. फीर देवायतने वहा लखन ओर उनके दोस्तोको कहेकर सामतभाइ की उतर क्रिया तकका इन्तजाम कर दीया.. तो बंसी जल्दसे जल्द सामतभाइका.. कार्य संपन करना चाहता था.. ताकी श्रीधरकी सादीमे कोइ बाधा ना आये.. ओर अ‍ैसेही साम होगइ..
 
तो ब्रीन्दा ओर बसंतीने मीलकर रातके खानेका भी इन्तजाम करदीया.. तो बंसी ओर देवायतको कहेकर लखन सहेरमे अपने घरपे जानेकी बात करके श्रीधरको लेकर नीकल गया..

लखनने बंसीकी बाइक वही छोडदी.. ओर उनको सहेरमे छोडनेके लीये श्रीधरने अपनी बाइक लेली.. ओर लखन श्रीधरके पीछे बैठ गया.. ओर दोनोही बाते करते सहेरकी ओर जा रहे थे.. तब बीचमे ही धिरेनका गांव आ गया.. ओर वही सडकके मोडपे ही धिरेनका घर था.. तो लखनने पीछे बैठे अ‍ेक नजर धिरेनके घरकी ओर डाली.. तो वहा बहारकी ओर दया अपना आंगन जाडुसे साफ कर रही थी..

ओर उनकी नजर भी लखनपे पड गइ.. तो दयाने फौरन लखनको जोरोसे आवाज लगाकर बुलाया.. तबतक लखन वहासे आगे नीकल चुकाथा.. तो दयाकी आवाज सुनकर लखन भी उनकी ओर मुस्कुराते हाथ हीलाकर वहासे आगे चला गया.. तभी दयाकी जोरोकी आवाज सुनकर पुनमभी दोडकर बहार नीकली.. तबतक लखन भी काफी दुर नीकल गया था..

तब उसे सामनेसे धिरेन भी अपनी बाइक लेकर आते दिखाइ दीया.. जो बेन्कसे अपनी नोकरी करके अपने घरकी ओर आ रहाथा.. जैसे ही दोनोकी नजर मीली.. तो धिरेनने लखनको जोरोसे आवाज लगाइ.. तो लखनने श्रीधरको बाइक साइडमे रोकनेके लीये कहा.. तो धिरेन अपनी बाइक मोडकर लखनके पास आ गया.. तब लखनने उनको सामतभाइकी पुरी कहानी बताइ..

फीर धिरेनने लखनको अपने घरपे पुनमको मीलकर जानेके लीये कहा.. तो लखनने लता सृती घरपे अकेली हे.. कहेकर उनकी बातको टाल दीया.. ओर धिरेनको आंख मारके नीलमको मीलनेके लीये कहा.. तो धिरेन सरमाके हसने लगा.. ओर दोनो अपने अपने घरकी ओर नीकल गये.. दोनो होस्पीटलसे अपनी जीप लेकर घरपे पहोंचे.. तो लताने श्रीधरको हसते हुअ‍े आवकार दीया..

ओर उनके लीये चाइ नास्ता बना दीया.. फीर लखन ओर श्रीधरने चाइ नास्ता करते लताको सामतभाइके बारेमे कहा.. फीरे श्रीधर लखनकी इजाजत लेकर वापस गांवकी ओर नीकल गया.. तो अभी तक सृती नही आइ थी.. तो लखनने लताको सृतीको फोन करनेको कहा.. तो लताने सृतीको आपके देवरने टाइमपे आनेको कहा हे.. कहेकर सृतीको फोन कर दीया.. तो सृती भी खुस होकर मुस्कुराने लगी..

उनको सुनकर अच्छा लगा.. की चलो.. उनका देवर भी इनकी इतनी कैर करता हे.. तब यहा कीचनमे रमा ओर रजीया दोनो खाना बना रही थी.. ओर नीलम अपने रुममे अपने पढाइकी कीताब लेकर बैठी थी.. ओर लखन अपने रुममे चला गया.. ओर सीधाही बेड पे लेट गया.. तब कुछ ही देरमे सृती भी घरपे आगइ.. ओर उपर अपने रुममे जाकर फ्रेस होने लगी.. फीर वो भी चेन्ज करके नीचे आ रही थी..

तभी उनका ध्यान लखनके रुमकी ओर गया.. तो दरवाजा खुला था.. ओर लखन गहेरी नींद सो रहा था.. उनके पेन्टमे बहुत बडा तंबु साफ दीखाइ दे रहा था.. तब सृती उनको देखकर सरमाकर मुस्कुराते थोडी देर वही खडी रही.. ओर लखनके पेन्टके उभारको देखती रही.. उनको अ‍ेक बार फीर लखनके लंडको देखनेकी इच्छा होने लगी.. वो कुछ देर अ‍ैसे ही खडी रहेते लखनके तंबुकी ओर देखती रही..

अ‍ेक बार तो उनको लगा.. की वो अंदर जाकर लखनके लंडको छुकर देखले.. तभी सृतीकी चुत गीली होने लयी.. तो वो बहुत ही सर्मसार होगइ.. फीर जटसे नीचे आगइ.. पहेले तो चारो ओर नजर घुमाने लगी.. जब होलमे कोइ नही दीखा.. तो फोन लैकर सोफे पे बैठकर मंजुसे बाते करने लगी.. फीर वहाकी सभी बाते सुनकर अपनी मम्मीको फोन करके सबकी खबर पुछली.. जब वहा सब कुसल मंगल था..

फीर पुनमको फोन लगाती हे.. तब पुनमके फोनकी रींग बजती रही.. क्युकी इस वक्त पुनम धिरेनके साथ अपने रुममे थी.. ओर धिरेन उनको अपनी बाहोमे लेकर खडा था.. ओर उसे अभी सेक्सके लीये मना रहा था.. तब पुनम बडी ही सीफततासे उनको मना कर रही थी.. क्युकी उनको धिरेनकी सभी करतुतोके बारेमे पता चल गया था.. तो पुनम अब धिरेनके साथ सेक्स करना नही चाहती थी..

तभी लखनके पास आकर लताने सृतीभाभी की आजानेकी खबर देदी.. तो लखन खडा हो गया.. ओर फ्रेस होकर लताके साथ नीचे आगया.. तब लता भी कीचनमे चली गइ.. ओर रजीया रमाका काममे हाथ बटाने लगी.. तब लखन सीधाही सृतीके पास आकर बैठ गया.. तो सृती आस्चर्यसे लखनकी ओर देखती रही.. तब लखन अपना सर जुकाये थोडी देर खामोस बैठा रहा.. फीर अचानक खडा होते धीरेसे..

लखन : (धीरेसे) भाभी.. आइ अ‍ेम सोरी.. अब आइन्दा अ‍ैसी गलती कभी नही होगी.. आइ प्रोमीस..

सृती : (धीरेसे) लखन भैया.. आप अ‍ेक बार पुनोदीदीसे फोनपे बात कर लीजीये.. वो आपसे बात करना चाहती हे..

लखन : (बहारकी ओर जाते धीरेसे) नही भाभी.. अब इस बारेमे मुजे कीसीसे कोइ बात नही करनी.. जब उनसे रुबरु मुलाकात होगी.. तब उनकी भी माफी मांग लुगा..

सृती : (धीरेसे) लखन भैया.. उसे भी अपनी गलतीका अहेसा हो गया हे.. वो आपकी माफी मांगना चाहती हे..

लखन : (अचानक पीछे मुडकर रुकते) भाभी.. वो क्यु मेरी माफी मांगेगी..? गलती मैने कीहे.. तो माफी भी मे ही मांग लुगा..

कहेकर लखन बहार नीकल गया.. तो सृती उनकी ओर मुह फाडकर देखती ही रही.. उन्होने अ‍ेक बार लखनको आवाज देकर बुलाया.. लेकीन लखनने उनके सामने देखा तक नही.. ओर वो कार लेकर सीधा राधीकाके पास चला गया.. तो राधीका उसे देखते ही बहुत खुस होगइ.. ओर लखनको हाथ पकडकर अपने रुममे चली गइ.. फीर दरवाजा बंध करके लखनकी बाहोमे जोरोसे लीपट गइ..
 
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