Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 60 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

मंजुला : (धीरेसे होंठ चुमकर) जानु.. आज आपके लीये बहुत बडी सरप्राइज हे..

देवायत : (मंजुकी ओर प्यारसे देखते) मंजु.. बताना कौनसी सरप्राइज हे.. क्युकी आज तु बहुत रोमेन्टीक मुड मे हे.. ओर बहुत खुस लग रही हे..

मंजुला : (प्यारसे आंखोमे देखते) हां जानु.. आज आपको मेरी भावुका सपना पुरा करना हे.. चलीये वो हमारा वही इन्तजार कर रही हे..

देवायत : (मंजुके बुब्सको मसलते होठोको चुमते) पहेले मुजे मेरी इस बहेनको प्यार तो करने दे.. फीर तेरी बहेनको भी नीपट लुगा..

मंजुला : (सरमाते धीरेसे) नही जानु.. अब जो भी करना हे हमारे रुममे जाकर करना हे.. पहेले आपको उनके साथ गांधर्व विवाह करना हे.. जो मे करवाउगी.. आज हम दोनो बहेने आपको छोडने वाली नही हे.. आज मेरी भावुका भी कल्याण करदो.. हम तीनो सुबह तक प्यार करेगे..

देवायत : (होंठ चुमते) मंजु.. मुजे कल अ‍ेक दिनके लीये वहा कबीलेपे भी जाना हे.. मे वहा जमीलाको प्रोमीस देकर आया हु.. उनसे भी सादी करनी हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. आप कल सुबह वहा चले जाना.. ओर उनसे सादी करके अपनी सुहागरात मनाकर उसे कबीलेकी रानी बनाकर आना.. आप जानते नही आपकी वो बीवी हमारे लीये कीतनी इम्पोर्टन्ट हे.. हमारी पुनोकी बच्चीकी बच्चीको वो ही सम्हालने वाली हे..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) मंजु.. लगता हे उनके बारेमे तुजे बहुत कुछ पता हे.. क्या मुजे बता सकती हो..?

मंजुला : (सीनेपे सर रखते धीरेसे) हां जानु बस.. थोडा बहुत बताउगी.. आप उस बुढी ओरतको कम मत आंकना.. वो बहुत कुछ जानती हे.. ओर जमीला रानी बनते ही अपनी सारी विद्या उनको सीखाने वाली हे.. जो आगे जाकर वो ही विद्या पुनोकी बेटीको देगी.. जो हमारे विजयकी बीवी होगी.. फीर उनकी बेटी ही हमारे स्वामीकी बीवी होगी.. ओर हमारे स्वामीको वहीसे सबकुछ ज्ञात होजायेगा..

देवायत : अच्छा.. तो ये बात हे..? मंजु.. क्या पुनोकी बेटी.. यानीकी मेरी ही बेटी हमारे विजयकी बीवी होगी..? तो फीर वो भी दोनो भाइ बहेन होगेनां..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानु.. अब भाइ बहेनकी सादी हमारे खानदानकी परंपरा हो गइ हे.. आपकी जीतनी भी बेटीया होगी.. सब मेरे विजयकी बीवीया हे.. अब चलो भी सब आज ही जानलोगे क्या..?

कहेते मंजु देवायतका हाथ पकडकर उसे अपने रुममे ले गइ.. तो वहा बेडपे भावना पुरी तराह दुल्हनके लीबासमे बेठी थी.. जैसे ही देवायत ओर मंजु रुममे आये तब मंजुने दरवाजा बंध करदीया तब भावना देवायतको देखते ही बहुत ही सरमाने लगी.. तभी मंजुने उनको भी खडा करदीया ओर दोनोको लेकर घरके मंदिरके सामने चली गइ.. ओर वहाके दोनो हार उतारके देवायत ओर भावनाको अ‍ेक अ‍ेक हार थमा दीया..

मंजुला : जानु.. जीस तराह आपने मम्मीके साथ सादी कीथी उसी तराह आज आपको भावुके साथ सादी करनी हे.. दोनो अ‍ेक दुसरेको हार पहेना दीजीये..

देवायत : (सामने देखते) मंजु.. क्या सादी करना जरुरी हे..? क्युकी भावु हमारे भानुकी बीवी हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. जब आपने मम्मीसे सादी की.. तब वो भी तो हमारे पापाकी बीवी थी.. चलीये कोइ बहाना नही.. जैसा मे कहु दोनो करते जाओ.. फीर मुजे आपसे कुछ बात भी करनी हे.. पहेनाइअ‍े हार..

कहातो देवायतने भावनाके गलेमे हार पहेना दिया तो भावनाने भी सरमाकर देवायतको हार पहेना दीया.. फीर मंजुने देवायतको अ‍ेक सींदुरकी डीबी थमादी.. ओर उसे भावनाकी मांग भरनेको कहा.. तो देवायतने चुटकी सींदुर लेकर भावनाकी मांग भरदी.. तो भावनाकी आंखसे आंसु छलक गये.. फीर मंजुने दोनोको सादीकी सभी कसमे खीलवाइ.. ओर भावनाने मंजु ओर देवायतके पैर छु लीये.. तो मंजुने उसे गले लगालीया..





मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. आजसे भावु भानुभाइकी नही.. आपकी बीवी हे.. ये सादी जरुरी थी.. देखना अब मेरी भावु पुनो सृती ओर लता.. कभी विधवा नही कहेलायेगी.. चारो हमेसा सुहागन ही रहेगी.. अब चलीये हमारे बेडपे.. आज तो पुरी रात हम दोनो बहेने आपको सोने नही देगी.. हें..हें..हें..

भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. थेन्क्स.. आपने मेरा सपना पुरा करदीया.. पहेले आप चलीयेनां.. मुजे तो बहुत सर्म आ रही हे..

मंजुला : (बेडकी ओर जाते हसते) अरे क्यु सरमा रही हे.. आज तेरी सारी तम्मना पुरी हो रही हे.. लुटले हमारे पतीको.. आजा.. ओर मीलले अपने पहेले प्यारको.. आज बहुत दिनोके बाद मौका मीला हे तुजे.. ओर आज तो हम दोनो खुसकीस्मत हे.. की हम दोनो बहेने अ‍ेक ही बीस्तरमे हमारे पतीको मील रही हे.. वरना तुम दोनोको मे वहा हमारे घरपे भेजने वाली थी.. चल.. आजा..

देवायत : (मुस्कुराते) भावु.. आजा.. आज तो पुरी रात मुजे तुम दोनो बहेनोके साथ प्यार कना हे.. आज तुजे छोडने वाला नही हु..

कहातो भावना सर्मसार होकर मुस्कुराते बेडपे चड गइ.. वो आज दुल्हनके लीबासमे कयामत लग रही थी.. ओर उपरसे ढीला जुडा बनाके रखा था.. जो भावनाकी कामुक्तामे चार चांद लगा रहे थे.. वो अपने दोनो पैर सीकुडकर बेडके बीच बैठ गइ.. तब देवायत भी उनके पास आकर बैठ गया ओर भावनाको अपनी बाहोमे भीचलीया.. तो भावना बहुत ही सरमा गइ.. तो मंजु हसने लगी.. ओर बेडपे पीठके बल लेट गइ....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१०

कहातो भावना सर्मसार होकर मुस्कुराते बेडपे चड गइ.. वो आज दुल्हनके लीबासमे कयामत लग रही थी.. ओर उपरसे ढीला जुडा बनाके रखा था.. जो भावनाकी कामुक्तामे चार चांद लगा रहे थे.. वो अपने दोनो पैर सीकुडकर बेडके बीच बैठ गइ.. तब देवायत भी उनके पास आकर बैठ गया ओर भावनाको अपनी बाहोमे भीचलीया.. तो भावना बहुत ही सरमा गइ.. तो मंजु हसने लगी.. ओर बेडपे पीठके बल लेट गइ.... अब आगे

मंजुला : (लेटकर हसते) भाइ.. आज हमारी इस बहेनको तृप्त करदो.. हमारी सादीसे पहेले ही आपको प्यार करती थी.. जो आज फायनली आपकी बीवी होगइ.. हें..हें..हें..

भावना : (सर्मसार होते हसते) दीदी.. क्या आप जीजुको भाइ कहेती हो..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. हम दोनो अ‍ेक ही बापकी संतान हे.. ये बात मुजे सुरुसे ही पता थी.. इसीलीये तो मेने भाइसे सादी करली.. चल आज तु भी अपने नये पतीके साथ सुहागरात मनाले..

तभी देवायतने बाहोमे भरते भावनाके होठोको चुमते प्यारसे मंजुके पास लीटा दिया.. ओर उनके उपर चडके लेट गया.. तो भावना बहुत ही सरमा गइ.. तभीदेवायत भावनाके बुब्सपे हाथ रखकर मसलते भावनाके होठोको चुमने लगा.. तो भावनाके तनसे अ‍ेक बीजलीसी दोड गइ.. ओर वो उतेजीत होने लगी.. उनकी चुत फडफडाते पानी छोडने लगी.. ओर धीरे धीरे मदहोस होने लगी..

आज वो आपना सबकुछ लुटाना चाहथी थी.. इसीलीये वो आंख बंध करते देवायतका साथ देने लगी.. तब मंजु दोनोको देखते मुस्कुराते खडी होगइ.. ओर अपने कपडे नीकालने लगी.. फीर कपडे नीकालकर सीर्फ ब्रा ओर पेन्टीमे रेह गइ.. ओर वापस भावनाके साथ लेटते कामुक्तासे अपने बुब्सको मसलते अपनी चुतको सहेलाने लगी..

तब भावना ओर देवायत दोनो ही प्यारकी आगोसमे खोने लगे.. भावना धीरे धीरे होठोको चुमते मदहोस होगइ थी.. वो भुल गइकी उनके साथ उनकी बडी बहेन भी हे.. वो देवायतके गलेमे हाथ डालकर उनके होठोको जोरोसे चुसते जीभसे जीका पेच लडाने लगी.. तब दोनो अ‍ेक दुसरेके मुहमे अपनी जीभ घुसाते अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे.. अब भावना पुरी तराह मदहोस हो चुकी थी..

भावना : (कामुक आवाजमे धीरेसे कांपते) ओह.. जीजु.. आइ लव यु.. आपने बहुत इन्तजार करवाया हे मुजे.. आज सारी हदे पार करदो..

मंजुला : (चुतको सहेलाते कामुक नजरोसे) भावु.. अब ये तेरे जीजु नही हे.. आजसे येभी तेरे पती हो गये हे.. मम्मीकी तराह तुम भी इनकी सीक्रेट बीवी होगइ हो.. आज जी भरके लुटले हमारे पतीको.. मेरा भाइ बहुत मजा देता हे.. देखना आजके बाद तु इनकी दिवानी होजायेगी.. आज करले अपनी सारी कशर पुरी..

मंजुला : (मदहोसीमे) हां दीदी.. मे इसे बहुत प्यार करती हु.. आज तो पुरी राइ इनको सोने नही दुगी..

कहा तो मंजु भावनाके सादीके अ‍ेक अ‍ेक कपडे नीकालने लगी.. तब भावना बहुत ही सर्मसार हो रही थी.. तो देवायतने भी अपने सब कपडे नीकाल दिये.. ओर तीनो जन्मजात नंगे होगये.. तब भावना धीरेसे पीठके बल लेट गइ.. ओर देवायतका हाथ खीचकर अपने उपर खीचने लगी.. तो देवायत भी मुस्कुराते भावनाके उपर चडकर छा गया.. तो भावनाने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगी..





देवायतने भावनाके दोनो बुब्स अपने पंजोसे थाम लीया.. ओर दबाते धीरेसे मसलने लगा.. तो भावना उतेजीत होते सीसकारीया करने लगी.. वो मदहोसीमे आधी आंख चडाते देवायतके तनको अपने तनसे दबाकर रगडने लगी.. भावनाके दोनो बडे बुब्स देवायतके सीनेमे दब गये.. तो देवायत भावनाके गलेमे मुह डालकर चुमने लगा.. फीर उनके कानकी बुटको अपने दांतोसे दबाकर खीचने लगा..





भावना : (आंखोकी पुतलीया पलटते मदहोसीमे) आह.. सीससससस... जा..नुउउउ... उहं.. आइइइ...

भावना बहुत ही उतेजीत होकर सीसकारीया करते देवायतको अपनी बाहोमे भीचते कसाव बढाने लगी.. जैसे वो देवायतके अंदर समा जाना चाहती हो.. तब मंजु भावनाका पागलपन देखते हसने लगी.. तभी देवायत चुमते चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा.. तो मंजुने भावनाके बुब्सको अपने कब्जेमे लेलीया ओर मुहमे लेकर चुसने लगी.. ओर देवायत भावनाकी नाभीको चुमकर छेड रहा था.. तो भावना दोनो तरफसे हमलेसे पागल जैसी होने लगी..

भावना : (आधी आंख चडाकर नसेमे) कमीनो.. दोनो मीया बीवी.. क्या कर रहे हो..? दीदी.. मुजे कुछ हो रहा हे.. बहुत मजा आ रहा हे.. कुछ कीजीयेनां..

मंजुला : (दुधु चुसते) भावु.. तेरा दुध तो बहुत मीठा हे.. मेरा लखन ओर विजय बहुत खुस होजायेगे..

भावना : (मदहोसीमे) दीदी.. अब इस घरके सभी मर्दोका इस दुधपे अधीकार हो गया हे.. आज जीजुको भी अपना दुध पीलाउगी.. ओर मुजे भी जीजुका रस पीना हे.. वो बहुत टेस्टी हे.. मे अ‍ेक बार पी चुकी हु..

मंजुला : (मदहोस होते) भावु.. तेरे दुधमे नसा हे.. आज मे भी तुजे अपना रस पीलाउगी.. देखना तुम पागल होजाओगी.. आजसे तुम भी इस खानदानसे जुड गइ हो.. आजसे तु भी इस घरकी बहु होगइ हो.. अब यही तेरा ससुराल हे.. तो आजसे इसी घरके सभी मर्दोका तुजपे अधीकार हे.. ओर इस घरके सभी मर्दोपे तम्हारा भी अधीकार होगा.. अब यहा कोइ रीस्ते नाते नही देखना.. यहा सीर्फ मर्द ओर ओरतका ही रीस्ता रहेगा.. अब तुम तेरे जीजु.. ओर हमारे देवर लखनके साथ सेक्स कर सकती हे..

भावना : (मदहोसीमे) दीदी.. थेन्क्स.. मेने सपने मे भी नही सोचा था.. की मेरी जींदगीमे इतना बडा बदलाव आयेगा.. क्या आप यही बदलावकी बात कर रही थी..?

मंजुला : (मदहोसीमे होठ चुमते) हां मेरी बहेन.. यही तो बदलाव हे.. जो सीर्फ हमारे घरपे ही नही.. आजु बाजुके सभी गांवमे होगा.. ओर सहेरमे भी इनकी हवा लगेगी..

तबतक देवायत चुमते चुमते भावनाकी चुतपे पहोंच गया था.. उनको दोनो बहेनोकी बातोसे कोइ मतलब नही था.. वो भी जानता था.. की आगे ये सब होने वाला हे.. ओर वो अपनी साली भावनाके साथ साथ अपने भाइकी बीवी लताको भी चोदनेके लीये बेकरार था.. तभी भावनाने अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडकर फैला दीये.. ओर देवायत उनके पैरोके बीच आगया..
 
फीर अपना मुह भावनाकी चुतपे लगा दीया.. तब भावना जोरोसे सीसकारीया करते नसेकी हालतमे चली गइ.. तभी मंजुला भावनाके बुब्सको छोडकर उनके होठोको चुमने लगी.. तो भावनाने भी मंजुका सर अपने हाथोमे थाम लीया.. ओर मंजुके होठोको जोरोसे चुसने लगी.. तभी देवायत भावनाकी चुतको चाटते चुतमे जीभ घुसा देता हे.. ओर चुतको खरोदने लगता हे.. तो भावना बहुत ही उतेजीत होकर बेकाबु होगइ..





ओर अपनी कमर उछालने लगी.. जैसे कीसीने उनकी चुतमे करंट लगा दीया हो.. वो मंजुके होठोको छोडकर जोरोसे सीसकारीया करते मंजुकी ओर वासना भरी नजरोसे देखने लगी.. तब मंजु थोडी खडी होते भावनाके सीनेपे दोनो ओर पैर पसारते बैठ गइ.. ओर अपनी चुतको भावनाके मुहके पास रखदीया.. तो भावनाने फौरन अपना मुह मंजुकी चुतपे लगा दीया ओर मंजुकी चुतको चाटने लगी..

तब मंजु भी आंख बंध करते सातवे आसमानमे पहोंच गइ.. ओर नसेकी हालतमे भावनाके सरको सहेताने लगी.. आज देवायतके रुममे वासनाका खेल सुरु हो गया था.. देवायतने भावनाकी चुतके दानोको अपने दातोसे हल्केसे दबाके छेड दीया.. तब भावनाकी चुत पानीका रीसाव करने लगी.. ओर चुतकी नाजुक पंखुडीया अंदर बहार होते फडफडाने लगी..

देवायत आज पहेली बार अ‍ेक साथ दोनो बहेनोसे प्यार कर रहा था.. तो भावना भी मंजुकी चुतको चाटते अपनी जीभ चुतमे घुसा देती हे.. ओर चुतके दानेको अपनी जीभसे खरोदने लगती हे.. जीनकी वजहसे मंजु भी पागल जैसी होने लगी.. ओर अपनी कमरको आगे पीछे करते जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. तीनोही पागल होते अ‍ेक दुसरेके प्राइवेट पार्टके साथ खेलने लगे..

तो भावना ओर मंजु दोनो ही बरदास्त नही करपाइ.. ओर अकडने लगी.. दोनोही कांपते हुअ‍े जडने लगी.. तो मंजुका पुरा रस भावनाके मुहमे चला गया.. ओर भावनाकी चुतसे नीकली तेज धार देवायतके मुहको भीगोने लगी.. ओर कुछही देरमे दोनो बहेने सांत हो गइ.. तो तीनोही बाथरुममे घुस गये.. ओर अपना अपना मुह साफ करने लगे.. तभी..

देवायत : (हसते) दोनो बहेने कमीनी हो.. देखो तुम दोनोका हो गया लेकीन ये अभी भी अ‍ैसे ही फटा जा रहा हे.. भावु.. कैसा लगा..?

मंजुला : (हसते धीरेसे) हां भावु.. बोलनां.. कैसा लगा..? मजा आयाकी नही..? हें..हें..हें..

भावना : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. पुछो ही मत.. मजेकी तो बात ही मत करो.. अ‍ैसा लगता था.. मे तो स्वर्गमे आ गइ हु.. मैने भानुके साथ अ‍ैसा कभी नही कीया.. वोतो बस आतेही अंदर घुसा देता हे.. ओर ओर कुछही देरमे ढेर हो जाता हे.. पता नही उनको इतनी जल्दी कीस बातकी हे.. ओर कमीनेको बच्चे पैदा करनेका बहुत सौक हे..

मंजुला : भावु.. उनके बापु भी अ‍ैसे थे.. तभी तो सरला काकी मेरे ससुरके साथ रीलेशन रखती थी.. भानुभाइ ओर लता हमारे बापुकी तो संतान हे.. भावु.. अ‍ेक मर्द सेक्सके बीना रेह सकता हे.. लेकीन अ‍ेक ओरत कभी इस सुखसे वंचीत नही रहेती.. कमीनी कीसीना कीसीके साथ रीलेशनमे आही जाती हे.. ओर अपनी प्यास बुजा लेती हे.. इसीलीये तो मेने इस बदलवाके लीये कहा हे..

देवायत : (मुस्कुराते) मंजु.. तुम दोनो बाते बादमे करलेना.. अभी देखो.. मेरा ये फटा जा रहा हे.. भावु.. चल.. आज तुजे जनतकी सेर करता हु.. अब तुम दोनो बहेनोके बीना नही रेह सकता..

मंजुला : (मुस्कुराते बहार आते) हां हां पता हे.. आज तो नइ चुत मील रही हे तो जनाब बडे उतावले हो रहे हे.. चल भावु लेटजा.. अब तेरी असली सुहागरातका वक्त आ गया हे.. तु डरना मत मे यही तेरे पास हु..

कहेते बहार जाने लगी.. तब देवायतने भावनाको अपनी गोदमे उठालीया.. तब भावना बहुत ही सरमाने लगी.. ओर तीनो अपने बेडपे आगये.. देवायतने भावनाको बेडपे लीटादीया.. तो भावनाने हाथ पकडकर देवायतको भी अपने उपर खीच लीया.. ओर देवायत भावनाके उपर लेटते उनके होठोको चुमने लगा.. ओर कुछही देरमे दोनो प्यारकी आगोसमे खो गये.. तब भावना अ‍ेक बार फीरसे उतेजीत होने लगी..

तो मंजुभी भावनाके बुब्सके साथ छेडखानी करने लगी.. देवायतका लंड भावनाकी चुतपे ठोकर मारते अंदर घुसनेकी कोसीस करने लगा.. तो भावनाने हिंमत करते अपना हाथ नीचे लेजाकर देवायतके लंडको पकडलीया.. ओर अपनी चुतपे घीसने लगी.. तब उनकी चुत अ‍ेक बार फीर गोली होते देवायतके लंडको भीगोने लगी.. तभी मंजुने मुस्कुराते देवायतकी ओर देखते आंख मारदी..

तो देवायत मुस्कुराने लगा.. तो भावना सब कुछ समज गइ.. ओर लंडको पकडकर अपनी चुतमे थोडासा फसालीया.. ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भरते अपने तनसे चीपकाने लगी.. ओर उनके होठोको चुमने लगी.. तो देवायतने भी भावनाकी दोनो हाथकी कलाइको थाम लीया.. ओर होठोको चुमते चुमते लीपलोक करलीया.. फीर अपनी कमरको थोडा पुस करते थोडा जोरोसे जटका दीया..





तो आधा लंड भावनाकी चुतको चीरते अंदर घुस गया.. ओर भावनाकी आंख फटी की फटी रेह गइ.. ओर उनके मुहसे चीख नीलकते देवायतके मुहमे ही दब गइ.. वो आंसु बहाते अपने दोनो पैर बेडपे पटकन लगी.. ओर देवायतके होठोसे अपना मुह छुडानेकी कोसीस करते छटपटाने लगी.. तब मंजु उनके सरके पास आगइ ओर सरको सहेलाते भावनाको हिंमत देते उनका होसला बढाने लगी.. तब भावनाकी आंखसे आंसु बेह रहे थे..





मंजुला : (सरको सहेलाते) बस.. बस.. भावु.. सांत होजा.. हो गया.. आज तेरी असली सुहागरात हे.. अभीनंदन.. आजसे हमारी मम्मीकी तराह तुम भी मेरी सौतन होगइ हो.. अब हम तीनो मा बेटी हमारे इस पतीकी बीवीया हो गइ हे.. भावु.. हमारे घरके तीनो छेदोको मेरे भाइने फतेह करलीया.. कोन्ग्रेच्युलेशन..

फीर कुछ ही देरके बाद भावना सांत होगइ.. तो देवायतने उनके होठोको छोडदीया.. तो भावना लंबी लंबी सांसे लेने लगी.. तब मंजुने उनके बुब्सको अपने मुहमे लेलीया ओर चुसने लगी.. तो भावनाने अपने दोनो पैरसे देवायतकी कमरपे आंटी लगादी.. ओर देवायतसे नजरे चुराने लगी.. आखीर उसने देवायतके लंडको अपनी चुतमे लेही लीया.. तभी देर ना करते देवायतने अ‍ेक जटका ओर मारा ओर उनका पुरा लंड भावनाकी चुतमे घुस गया..





तो भावनाकी फीरसे जोरोसे चीख नीकल गइ.. तो मंजुने फौरन उनके मुहपे हाथ रखदीया.. भावना फीरसे आंसु बहाने लगी.. तो मंजु उनके होठोको चुमते उनको सांत करने लगी.. भावनाका मुह खुलाही रेह गया.. ओर वो कमर हीलाते देवायतसे छुटनेकी कोसीस करते छटपटाने लगी.. उनकी चुतसे हल्कासा खुन नीकल गया.. भावनाको अपनी चुतपे बहुत जलन होने लगी.. ओर वो आंसु बहाती रही.. तभी..
 
मंजुला : (धीरेसे सरको सहेलाते) भावु.. बस.. होगया.. तुमने पुरा अंदर लेलीया हे.. अब तुजे कभी दर्द नही होगा.. आजसे हमारे पतीने तुजे पुरी तराह अपना लीया हे.. अब तुम मेरी बहेन नही मेरी सौतन होगइ हो.. इस खानदानकी बहु..

भावना : (मुह बीगाडते धीरेसे) दीदी.. बहुत जलन हो रही हे.. जीजुका बहुत बडा हे..

देवायत : (बुब्स चुमते) भावु.. तु उनपे ध्यान मत दे.. मुजे कीस करती रहे.. अभी दर्द खतम होजायेगा..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. आज तेरी असली सुहागरात हुइ हे.. हम बहुत नसीब वाली हे.. की हमे इतने बडे लंड नसीब हुअ‍े हे.. अब जबतक सब लोग वापस नही आजाते तब तुजे यही रुममे हमारे पास सोना हे.. ओर इसी लंडसे चुदवाकर मजे करने हे.. अब तो हम दोनोके मजे ही मजे हे..

भावना : (हां मे गरदन हीलाते) हां दीदी.. अब थोडा दर्द कम हुआ हे.. जीजु.. अभी थोडी देर अ‍ैसे ही रहेना.. जब मे कहु तब करना.. अब बुहत अच्छा लग रहा हे.. जीजु.. कास आप पहेले मील गये होते.. मे आपसे ही सादी करलेती.. उस कमीनेके पले तो नही पडती..

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे.. पहेले के बादमे.. तुजे मील तो गये.. अब क्यु अफसोस कर रही हे..? कमसे कम तुजे कुछ हुआ तो नही.. वरना ज्यादातर कमीनी पहेली बारमे बेहोस होगइ थी.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. इसीलीये.. क्युकी मुजे दो दो बच्चे होगये हे.. अगर जीजु पहेले मीले होते तो जीजुके बच्चे ही पैदा करती.. उस कमीनेके बच्चे कभी पैदा नही करती.. जीजु.. अब ठीक हे.. आप धीरे धीरे चोदीये.. बहुत मन कर रहा हे.. आज हमारा मीलन हो ही गया..

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. फीकर मत कर.. तेरे जीजुसे भी तुजे बच्चे होगे.. चल अब असली मजेके लीये तैयार होजा.. बाते बादमे करेगे..

तब देवायत धीरे धीरे कमर हीलाकर भावनाको चोदने लगा.. तो भावना सीत्कार करते देवायतका साथ देने लगी.. तभी देवायत हाथके बल उचा हो गया.. तो मंजु भी घुटनोके बल देवायतके पास आकर उनके होठोको चुमने लगी.. तो कुछ ही देरमे देवायत जोरोसे कमर हीलाने लगा.. तब भावना आधी आंख चडाकर पुरी तराह मदहोस हो चुकी थी.. ओर बडबडाते देवायतको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्सा रही थी..





तभी कुछ ही देरमे भावनाका तन अकडने लगा.. तो अपनी कमरको जटके देते जडने लगी.. ओर जडते ही सांत हो गइ.. फीर भी देवायत उनको जोरोसे चोद रहा था.. तब भावना थोडा मुह बीगाडते सांत रही.. देवायतके हर धके के साथ उनके बडे भरावदार बुब्स तालमेलमे उछल रहे थे.. तब कुछही देरमे वो फीरसे उतेजीत होगइ.. ओर इस बार दोनोके बीच बहुच लंबी धमासान चुदाइ हुइ..





तो कुछ देरकी चुदाइके बाद भावना दुबारा अकडने लगी.. तभी देवायत उनके उपर जुक गया.. तो भावनाने उनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर उनके होठोपे होठ रखते लीपलोक करलीया.. ओर अपनी कमरको आडी टेडी हीलाते जटकने लगी.. ओर जडते देवायतके लंडको चुतके अंदर ही भीगोने लगी.. तब देवायतको भी अपने लंडपे गरमाहट महेसुस हुइ..





उनके पुरे बदनमे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. ओर वो जोरोसे कमर हीलाते भावनाको चोदने लगा.. वो भावनाको काफी देर तक चोदता रहा.. तो भावना भी पहेली बार देवायतसे चुदवाते दो दो बार जड चुकी थी.. तभी देवायत जोरोसे कमर हीलाते भावनासे चीपक गया.. ओर उनके गेलेमे मुह डालकर जोरोसे चुमने लगा.. तो भावना समज गइ.. ओर उसने देवायतको अपनी बाहोमे जोरोसे भीच लीया..

देवायतके तनमे खुन दोडते लंडकी ओर जाने लगा.. ओर वो परम आनंदकी अनुभुती करते अपनी कमरको जटके देते लंठसे लंबी लंबी पीचकारीया छोडते जडने लगा.. ओर भावनाकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तब भावनाको अपनी बच्चेदानीपे गरम गरम महेसुस हुआ.. जीनकी वजहसे वो भी उतेजनामे कांपने लगी.. ओर अपनी आंखोकी पुतलीया पलटते अ‍ेक बार फीर देवायतके साथ जडने लगी..





दोनो ही जैसे हवामे उड रहे हो.. दोनोने परम आनंदकी अनुभुती करते चरम सुखको पालीया.. तब देवायत जडते ही भावनाके सीनेपे ढेर होगया.. तो भावना जोरोसे सांस लेते उनकी पीठ सहेलाती रही.. दोनो पसीनेसे तरबोर हो चुके थे.. फीर कुछ देरके बाद दोनो सांत हो गये.. तो देवायतने सर उठाया ओर भावनाकी ओर देखकर मुस्कुराने लगा.. तब भावना भी मुस्कुराते बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर देवायतसे नजरे चुराने लगी..
 
मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. कैसा रहा..? मजा आयाकी नही..?

भावना : (सरमाते हसते) दीदी.. पुछो ही मत.. मेतो स्वर्गमे चली गइ थी.. इतना मजातो मुजे कभी नही आया.. आज पता चला सुहागरात क्या होती हे.. मे पहेली बार तीन तीन बार जडी हु.. दीदी.. मुजे अब भानुके साथ नही रहेना.. प्लीज.. मुजे यही रहेने दो..

मंजुला : (हसते) अरे.. तो अब तुजे यही तो रहेना हे.. लेकीन अभी नही.. वो वक्त भी बहुत जल्दी आयेगा.. जब तुम हमेसाके लीये इधर रहोगी.. सुन.. अभी तो सीर्फ अ‍ेक बारही हुआ हे.. हमारे पतीकी आदत हे.. जबतक वो कीसीको भी दो बार नही चोद लेते.. तबतक वो अपना हथीयार बहार ही नही नीकालते.. हें..हें..हें.. क्यु भाइ..?

देवायत : (मंजुके होठ चुमते) हां भावु.. ओर ये सब तेरी दीदीका कमाल हे.. ये सब इसीने मुजे सीखाया हे..

भावना : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. मुजे तो अ‍ेक ही बारमे पुरी नीचोडली.. तो दुसरी बारमे मेरी तो हालत ही बीगड जायेगी.. देखो.. अभी भी अंदर बहुत ही सख्त लग रहा हे.. वरना भानुका तो जडते ही अपने आप बहार नीकल जाता था.. कुछ पता ही नही चलता था.. आज असली मर्दसे पाला पडा हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (होठोको चुमते) भावु.. आज हम पहेली बार मील रहे हे.. हमारी सादी भी हुइ हे.. तो आज हमारी सुहागरात भी हे.. तो मे तुजे सुबह तक छोडने वाला नही हु.. अब भुलजा भानुको.. अब तुम मेरी बीवी हो..

भावना : (सरमाते) जीजु.. अगर सुबह तक करोगे.. तब तो मे सुबह चलने लायकभी नही रहुगी.. आपको जेलना इतना आसान नही हे.. भानु गोलीया खाकर करता हे तब भी मेरी हालत बीगड जाती थी.. ओर आपने तो बीना गोली खाये ही मुजे तीन तीन बार जडा दीया.. आज मे पहेली बार संतुस्ट हुइ हु.. लव यु जीजु..

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. जब तेरा दुसरी बार होजाये तब देवुको मे सम्हाल लुगी.. तबतकत तुम कुछ देर आराम कर लेना.. फीर वो तेरे पास आजायेगे.. देखले.. मे तो इनका पुरी रात अंदर लेकर सोती हु.. हें..हें..हें..

भावना : (सर्मसार होते हसते) दीदी.. आज पता चला तुम ओर हमारी मम्मी जीजुके पीछे इतना पागल क्यु थी..

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. सीर्फ मे ही नही.. हमारी सभी सौतनोके अलावा मम्मी.. भुमी आंटी जैसी ओरते भी इनके पीछे पागल हे.. हमारी मौसी अ‍ैसेही इनके प्यारमे नही पडी.. कमीनी मेरी सादीमे ही इनसे आंख लडा बैठी थी.. ओर मुजे पता भी नही चला.. ओर इनसे चुद गइ..

तबसे वो भी इनकी दिवानी हो गइ थी.. ओर इतना बडा लडका होनेके बावजुद इनसे सादी भी करली.. आज तेरे साथ सादी करके मेरे देवुकी ग्याराह बीवी होगइ हे.. ओर अभी तीन सादीया ओर भी करनी हे.. तो मेरे देवुकी चौदाह बीवीया होजायेगी..

भावना : (मुह फाडकर आस्चर्यसे) चौदाह बीवीया..? जीजु.. आप सबको कैसे सम्हालेगे..? क्या अभी ग्याराह बीवीओको सम्हाल पाते हे..? क्या सबको समय दे पाते हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) नही भावु.. इसीलीये तो मुजे ओर देवुको वो नीर्णय लेना पडा.. जो तुजे पुनोने कहा हे.. मेरे खयालसे हमारे खानदानके बारेमे तुजे सबकुछ पता चल गया हे..

भावना : (मुस्कुराते) हां दीदी.. मेरी पुनो दीदीसे सभी बाते होगइ हे.. दीदी.. बताओनां.. हमारे इस पतीकी ग्याराह बीवीया कौन कौन हे..? ओर अभी तीन कौन बाकी हे.. जो हमारी सौतन होगी.. क्या मुजे बता सकती हो..?

मंजुला : (मुस्कुराते बुब्सको छेडते) हां भावु.. अब तो सीर्फ तुम चारो ही होगी जो इस विरासतको सम्हालोगी.. पहेली पत्नीतो हमारी मम्मी खुद हे.. फीर मे.. चंदा मौसी.. तुम.. फीर भुमीका आंटी ओर सृती.. फीर हमारी पुनो.. इसके अलावा चारुभाभी ओर नीशा भाभी.. फीर रश्मी भाभी ओर वंदना.. ओर जीनकी सादीया बाकी हे उनमे अ‍ेक कबीलेकी लडकी जमीला.. फीर हमारी लता.. ओर दया बहेन..

भावना : (सरमाकर हसते) ओ बापरे.. क्या दया बहेन भी..? दीदी.. क्या सृती दीदीको भुमीका आंटीके बारेमे पता हे..?

देवायत : (बुब्सको चुमते) नही भावु.. अभी इस बातका सृतीको नही पता.. तो बी केरफुल.. पता नही जब उनको पता चलेगा तब वो क्या हंगामां करेगी..

मंजुला : हां भावु.. अभी उनको भुमीका आंटीके बारेमे नही पता.. लेकीन उनको बहुत जल्द पता चल जायेगा.. क्युकी भुमीका आंटी हमारे पतीसे प्रेगनेन्ट होगइ हे.. ओर भावु.. दया बहेन भी हमारी बहेन हे.. मेरी ओर देवुकी सोतेली बहेन.. बेचारीको उनको भी नही पता की वो भी हमारी बहेन हे.. मे उनकी भी सादी जल्दसे जल्द देवुसे कर देना चाहती हु.. क्युकी अब हमारे रामुकाका का समय भी नजदीक आगया हे..

देवायत : (मुस्कुराते होठ चुमते) भावु.. तुम दोनो बाते बादमे करलेना.. चल दुसरे राउन्डके लीये तैयार होजा.. आइ अ‍ेम रेडी..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) जीजु.. क्या रेडी..? इतनी जल्दी..? अभी अभी तो मेरे अंदर जडे हो.. देखो अभी मेरी पुरी चुत भरी पडी हे..

मंजुला : (हसते) हां भावु.. तेरे जीजु वो जडी बुटीकी वजहसे अ‍ेक साथ दस दस ओरतोको चोद सकते हे.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. क्या लखन भैयाको भी वो जडी बुटी दी हेनां..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. अब इस घरकी सभी ओरतोको इन दोनो भाइको ही सम्हालना हे..

भावना : (मुस्कुराते) जीजु.. क्या ये सब सुनकर आपको बुरा नही लगता..? हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते होठ चुमते) नही भावु.. क्युकी मुजे भी इनकी बीवी.. ओर तेरी ननंदसे सादी करनी हे.. फीर मेरा रजीयाके साथ भी रीलेशनमे था.. जो अब लखनकी बीवी हे.. ओर मंजुने ये नीर्णय कुछ सोच समजकर ही लीया होगा.. तो मुजे बुरा क्यु लगेगा..? आखीर वो भी तो इस खानदानका खुन हे.. चल अब दुसरे राउन्डके लीये रेडी होजा.. मे ओर नही रहे सकता.. आज तो दोनो बहेनकी पुरी रात बजाता रहुगा..





ओर इस बार भी देवायतने भावनाकी जबर दस्त तरीकेसे धमाकेदार चुदाइ करली.. भावनाको इस बार भी तीन तीन बार जडाकर उनकी चुतको अपने पानीसे लबालब भरदीया.. तब भावनाकी अ‍ेक अ‍ेक नब्स ढीली हो चुकी थी.. उनका पुरा बदन दर्द कर रहा था.. वो हीलनेकी स्थीतीमे भी नही रही.. तब देवायत उनको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया ओर वहा दोनोने सावर लीया..

फीर देवायत उसे वापस लाकर बेडपे सुला देता हे.. तब मंजु पहेलेसे ही पीठके बल लेटकर अपनी चुतको सहेलाते देवायतका इन्तार कर रही थी.. तो इस बार मंजुको भी देवायतने दो बार चोद लीया.. फीर भावनाको कभीघोडी बनाकर चोदा.. तो कभी खडे खडे चोद लीया.. पुरी रात यानीकी सुबह चार बजे तब देवायत दोनो बहेनेको बारी बारी चोदता रहा.. आज भावना ओर मंजुला दोनो ही संतुस्ट हो चुकी थी.. फीर तीनो ही नंगे अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सो गये..
 
सुबह तीनो देर तक सोते रहे.. फीर भी देवायतको जाना था तो मंजुने उस्े आठ बजे जगा दीया.. तो वो उठ गया ओर तैयार हो गया.. तबतक मंजुने दो जोडी कपडे पेक करदीये ओर चंपाभाभीने चाइ नास्ता भी बना लीया.. ओर चाइ नास्ता करके देवायत अपनी कार लेकर सीधाही अपने खेतोपे चला गया.. फीर वहासे हरीया ओर उनकी दोनो बीवीया मालती ओर रेणुको लेकर कबीलेकी ओर नीकल जाता हे..

तब मालती फोन करते जमीलासे सब बाते करलेती हे.. जीसे सुनकर जमीला भी बहुत खुस होजाती हे.. फीर सबलोग कबीलेकी ओर चले जाते हे तब बीच रास्ते जमीला सबकी नजर बचाते पीछेसे देवायतसे छेडखानी करती रहेती हे.. ओर अ‍ेक बार मौका मीला तो देवायतको वहा मीलनेके लीये इसारा भी करती हे.. क्युकी काफी दिन हो गये थे जमीला ओर देवायत नही मीले थे..

तो हवेलीपे भावना अब भी नींदकी आगोसमे थी.. क्युकी देवायत सुबह चार बजे तक दोनो बहेनोकी चुदाइ करता रहा.. तो भावना थककर चकनाचुर हो गइ थी.. तभी उसे मंजुने जगाया तो भावना अब भी ठीकसे चल नही पा रही थी.. तब मंजुने उसे सहारा दीया.. ओर बाथरुममे जाकर उनकी चुतकी सीकाइ भी करदी.. फीर बहार आकर भावनाको अ‍ेक पेइन कीलरकी गोली भी खीलाइ.. तब जाके भावनाको राहत महेसुस हुइ..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आप सही केह रही थी.. जीजुको जेलना इतना आसान नही हे.. पता नही आप उनको कैसे जेल पाती हो.. आज पता चला.. सब इनके पीछे क्यु पागल हे.. इनमे हमारी मम्मी भुमी मौसी ओर पुनो दीदी भी बाकात नही हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. अ‍ेक बात कहु..? तुमने आज पहेली बार हमारे पतीके साथ मीलन कीया हे.. जब तुम लखन भैयाके साथ मीलन करोगी.. तब तुम हमारे इस पतीको भी भुल जाओगी.. ओर जब हमारा विजय बडा होजायेगा.. ओर उनके साथ मीलन करोगी.. तब तुम लखन भैयाको भी भुल जाओगी.. तब तुम सोचो.. जब हमारे स्वामी स्वयंम आयेगे तब तुम सबकी क्या हालत होगी.. सबकी सब इनकी दिवानी होजाओगी..

भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. क्या हमारी सभी ओरते सचमे.. आइ मीन.. क्या हमे सचमे लखन भैयाके साथ.. क्युकी पुनो दीदीने मुजे कुछ ओर भी बताया हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. पता हे मुजे.. तुजे पुनोने जो भी बताया हे वो ही सच हे.. हमारे इस पतीके बीजसे सीर्फ मेही तेरी कोखसे जन्म लुगी.. जब सही वक्त आयेगा.. बाकीके संतान हमारे लखन भैयासे ही होगे.. तेरे ओर सृतीके.. सृतीकी दुसरी संतान भी लखनसे पैदा होगी.. ओर तुजे अ‍ेक बात ओर बताती हु.. सृती अभी प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. इस बार सृती यहासे पेटसे होकर गइ हे.. जो इस बातकी अभी उनको भी खबर नही हे..

भावना : (बेडपे लेटते) दीदी.. आप केह रही थी.. भुमी मौसी भी हमारे पतीसे प्रेगनेन्ट हे.. तो क्या इन दोनोके रीलेशनके बारेमे सृतीदीदीको पता नही हे..? क्युकी ये बात ज्यादा दिन छुपाकर तो नही रख सकते..

मंजुला : (थोडी सीरीयस होते) हां भावु.. मुजे भी इस बातकी चीन्ता सता रही हे.. ओर देखा जाये तो सब कुछ अपने समयपे हो रहा हे.. भावु.. हमारा जीवन हमारे हाथोमे हे ही नही.. तो फीर इन सब बातोकी क्यु चीन्ता करना.. सृती थोडे समयके लीये हम सबसे रुठी रहेगी.. तब हमारी पुनो ओर लखन ही उनको सम्हाल लेगे.. ओर तब ही वो लखनके साथ रीलेशनमे आजायेगी.. ओर वो भी बहुत जल्द..

भावना : (गौरसे सुनते) दीदी.. तो फीर अ‍ेक बात बताओ.. लखन भैया इतना सक्षम होगये हे.. तो वो अभीतक लताको प्रेगनेन्ट क्यु नही करपाये..? क्या वो आपके साथ भी रेलेशनमे आयेगे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) नही भावु.. हम तीन ओरते अ‍ैसी हे जो हमे हमारे स्वामी ओर देवुके अलावा ओर कोइ प्रेगनेन्ट नही कर सकता.. इनमे अ‍ेक तो मे हु.. दुसरी हमारी पुनो ओर तीसरी हमारी लता हे.. इसीलीये लखन भैया लताको प्रेगनेन्ट नही करपायेगे.. ओर दुसरी बात..

पुनो भी लखनसे कीतना भी रीलेशन बनाये.. वो भी लखनसे प्रेगनेन्ट नही होगी.. ओर मेरा रीलेशन लखनसे कभी नही होगा.. क्युकी वो मुजे अपनी भाभी नही.. अपनी मां मानता हे.. ओर मे उनकी मां ही हु.. उस हिमाचलमे मे भी मे उनकी मां थी..

भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर आपके बारेमे ओर लखन भैयाके बारेमे थोडासा बताओनां.. कौन थे आप दोनो..?

मंजुला : (मुस्कुराते) तुमने वो किताब तो पढी हे.. पहोनले हमे..

भावना : (मुस्कुराते) अरे बताओना दीदी.. क्यु सता रही हो..? हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते) ठीक हे.. सुन.. मेही उस देवयानी देवी हु.. सबकी जननी.. मेरा जन्म हमारे स्वामीके अंस से ही होता हे.. फीर हमारे स्वामीसे ही सादी करके उनके अंसको जन्म देती हु.. फीर उसी अंससे फीरसे सादी करके उनके ही वंसको आगे बढाती हु.. जबसे उन हीमाचलमे मेरे पतीका मोक्ष हो गया.. तबसे मे हमेसाके लीये मेरे स्वामीको समर्पीत होगइ थी.. ओर तबसे ये सीलसीला चल रहा हे..

भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. कीतना अजीब हे.. अपने ही बेटेको जन्म देकर उनसे सादी करना.. फीर उनके बच्चे पैदा करना.. क्या ये सब आजके जमानेमे पोसीबल हे..? तो फीर लखन भैया..?

भावना : (मुस्कुराते) हां.. सुन.. उस हिमाचलमे बबलु ही मेरा बेटा था.. जो इस जन्ममे लखन बनके आया हे.. तब भी उस राजा बबलुको अपना छोटा भाइ मानता था.. जो इस जन्ममे भी हमारे पतीका भाइ बनके आया हे.. ओर लखन भैया मुजे पहेचान गये हे.. तो वो मेरे साथ कभी रीलेशन नही बनायेगे.. क्युकी ये बात खुद लखनने मुजसे कही हे..

भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर पुनो दीदी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. हमारी पुनो वही पीयु हे.. जो उस जमानेमे बबलुकी बीवी थी.. वो उनके अगले जन्ममे वहा उस राजाकी कभी दादी हुआ करती थी.. चल अब बहुत होगइ बाते.. तुमतो अ‍ेक अ‍ेक करते सबके बारेमे पुछ रही हो.. भावु.. आजके दिन ओर रात थोडा आराम करले.. फीर कल रातको हमारे पती वापस आयेगे तो हम दोनोको छोडेगे नही.. हें..हें..हें..

कहेते मंजु बहार नीकल गइ.. ओर भावना आराम करने लगी.. तो सहेरमे भी सुबह चार बजे रमा अपने रुममे जाकर सो गइ थी.. तो आज लखन लता रजीया तीनो ही सुबह छे बजे उठकर तैयार होकर नीचे आगये थे.. तो सृती भी अ‍ेक घंटेके बाद यानीकी सात बजे जाग चुकी थी.. ओर अभी बाथरुममे नहा रही थी.. फीर वो भी कंपलीट होकर नीचे आगइ.. तब लखन टीवीपे न्युज देख रहा था.. तो सृती उनके पास जाकर बैठ गइ.. तब लता ओर रजीया चाइ नास्ता बना रही थी.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २११

कहेते मंजु बहार नीकल गइ.. ओर भावना आराम करने लगी.. तो सहेरमे भी सुबह चार बजे रमा अपने रुममे जाकर सो गइ थी.. तो आज लखन लता रजीया तीनो ही सुबह छे बजे उठकर तैयार होकर नीचे आगये थे.. तो सृती भी अ‍ेक घंटेके बाद यानीकी सात बजे जाग चुकी थी.. ओर अभी बाथरुममे नहा रही थी.. फीर वो भी कंपलीट होकर नीचे आगइ.. तब लखन टीवीपे न्युज देख रहा था.. तो सृती उनके पास जाकर बैठ गइ.. तब लता ओर रजीया चाइ नास्ता बना रही थी.. तभी.... अब आगे

सृती : (मुस्कुराते) लखन भैया गुड मोर्नीग.. कैसे हो आप..?

लखन : (सामने देखे बीना) गुड मोर्नीग.. बस ठीक हु..

सृती : (सरमाते धीरेसे) लखन भैया.. प्लीज.. हमसे बात कीजीये.. इसमे मेरी क्या गलती हे..? मैने आपको थोडीना कुछ कहा हे..? जो आप मुजसे भी बात नही करते..

लखन : (टीवीका वोल्युम कम करते) भाभी.. मैने कब कहा गलती आपकी हे.. मैने कीसीको कुछ कहा..?

सृती : (धीरेसे मुस्कुराते) तो फीर आप मुजसे बात क्यु नही करते..? बात तो छोडो.. आपतो मेरे सामने भी नही देखते..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. मे कैसे आपसे नजरे मीलाउ..? गलती आप दोनोकी नही मेरी थी.. क्युकी मे ही अपनी मर्यादा भुल गया था.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे आप दोनोके साथ अ‍ैसा नही करना चाहीये था.. मे पुनो दीदीसे मीलुगा तब उनकी भी माफी मांग लुगा.. अब मुजे अपनी हदका पता चल गया हे.. की मुजे कीस हद तक रहेना हे..

सृती : (धीरेसे) लखन भैया.. प्लीज.. मत करो अ‍ैसी बाते.. आप हमारे साथ नही बोलते तो हमे अच्छा नही लगता.. पहेले आप कैसे हमारी मस्तीया करते थे.. हमारे साथ फ्लर्ट भी करते थे.. तब भी हमने कोइ अ‍ेतराज नही कीया.. मे जीतने दिन भी वहा रही.. आपके साथ मस्तीया करते बहुत मजा आया.. तो फीर इतनीसी बातके लीये कोइ बोलना बंध करदेता हे क्या..?

लखन : (आंख गीली करते) भाभी.. तब आप भी तो वहा साथ थी.. जब कोइ दिलसे ज्यादा करीब होते हेनां..? ओर चोट भी उसीसे मीलती हेनां..? तो दुख बहुत ज्यादा होता हे.. मानाकी मे बहेक गया था.. लेकीन गलती सीर्फ अ‍ेक तरफा तो नही होती..? जब मे आप लोगोके साथ मस्तीया ओर फ्लर्ट कर रहा था.. तब भी आप मुजे रोक सकती थी.. तो बात इतनी आगे कभी नही बढती.. ओर मे सबसे ज्यादा करीब आप दोनोसे ही था..





सृती : (मुस्कुराते) यार सोरी.. आपकी बात सही हे.. लेकीन मैने कहा अ‍ैतराज कीया हे..? देवर भाभीमे इतनी मस्तीया तो होती ही रहेती हे.. ओर मैने तो सुना हे.. जब आप दोनो स्कुलमे पढते थे.. तब तो बहुत सारी मस्तीया करते थे.. ओर खुलकर सभी तराहकी बाते भी करते थे.. ओर आपतो पुनो दीदीको प्यार भी करते थेनां..? तो फीर उनसे इतनी नाराजगी क्यु..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. वही तो.. हम जब स्कुलमे थे.. तब तो हम दोनो सभी मर्यादा लांघते चर्चा करते थे.. तब तो उसने कोइ अ‍ेतराज नही कीया..? तब वो अ‍ैसी चर्चा करनेसे मना कर देती.. मे कहा उनके साथ जबरदस्ती कर रहा था.. उनके अंडर गारमेन्ट तक मेही लाकर देता था.. तब तो उसे मुजे कभी नही रोका.. उनको भी पता था की मेरे दिलमे उनके लीये क्या फीलींग्स हे.. उनको भी पता थाकी मे उसे प्यार करने लगा हु.. तब तो उनको मुजे रोकना चाहीयेनां..? तो फीर..

सृती : (पास आते धीरेसे हाथ थामते) लखन भैया.. प्लीज.. मुजे पता हे गलती पुनोदीदी की थी.. आप अ‍ेक बार उसे माफ करदो.. उनको भी अपनी गलतीका अहेसास फौरन होगया था.. वो मेरे पास खुब रोइ हे.. अब तो आपसे बात करनेसे भी डर रही हे.. प्लीज.. आप अ‍ेक बार उनके साथ फोनपे बात करलो.. वरना वो मन मे ही घुटती रहेगी.. वो वहा भी आंसु बहा रही हे.. मेरी कल रात ही उनसे बात हुइ हे.. वो वहा खुस नही हे.. वो आपसे बात करना चाहती हे..

लखन : (आंख पोछते) नही भाभी.. अब कीसीके साथ कुछ भी बात करनेका मन नही हो रहा.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे ही पागल था.. जो उसे भाभी मानने लगा था.. ओर उनकी मस्तीया करने लगा था.. उसमे मुजे बता दीया हे.. की वो मेरी भाभी नही मेरी बहेन ही हे.. अब उसे आइन्दा कभी भाभी नही कहुगा.. ओर अब भाइने भी मुजे बहुत सारी जीम्वेवारी दी हे.. तो अब उसीपे ध्यान देना हे..

सृती : (अ‍ेक नजरसे देखते) ठीक हे.. तो फीर मे उसे आपकी बात बता दुगी.. क्युकी वो आपसे कोइ ओर ही बात सेर करना चाहती थी.. सायद धिरेनके बारेमे.. रात अ‍ेक बजे उनका फोन आया था.. कहेती थी बहुत जरुरी बात हे.. अब आपकी मरजी.. अगर उनसे बात करना चाहो तो उनको फोन करलेना.. फीर मुजे मत कहेना मैने आपको बताया नही था.. सायद धिरेनके बारेमे आपको कोइ इन्फोर्मेशन देना चाहती थी..

लखन : (चीन्तासे सामने देखते) भाभी.. वो कोइ मुसीबतमे तो नही..? आपकी तो उनके साथ बहुत अच्छी पटती हे.. तो फीर आपको नही बतायाकी वो धिरेनके बारेमे क्या बात करना चाहती हे.. क्युकी मुजे पता हे.. की आगे जाकर आप चारोको ही सब कुछ सम्हालना हे.. तो फीर आपसे ही बात कर लेती..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) आपको कैसे पता.. की आगे जाकर हम चारो सबकुछ सम्हालने वाली हे.. क्या आपकी मंजुदीदीसे बात हुइ हे..?

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) हां भाभी.. यहा आनेसे पहेले अगली रातमे ही भाभी मांने मुजे सब कुछ बता दीया था.. वो चारो आप पुनो दीदी.. भावना भाभी ओर लता हेनां..?

सृती : (आस्चर्यसे देखते) हां.. लेकीन अ‍ेक पांचवा नाम आप भुल गये.. जो हमारी मदद करेगे.. क्या उनका नाम नही लोगे..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. मैने मददके लीये कभी मना नही कीया.. उसने जो काम मुजे सोंपा हे मे कर दुगा.. उनको केह दीजीयेगा..

सृती : (सरमाके मुस्कुराते) क्या सीर्फ यही अ‍ेक काम करना हे..? आप पुनोदीदीका कोइ ओर काम.. मतलब अगर आपको दुसरा काम सोंपा जायेगा.. तो नही करोगे..? लखन भैया.. मत भुलो.. वो हमारे खीलाफ बहुत बडी साजीस कर रही हे.. आगे जाकर हमे विजयके लीये.. फीर उस राजाके लीये भी तो काम करना हे.. ओर ये सब उन्हीके लीये तो हो रहा हे.. अगर आप पुनो दीदीसे बात नही करोगे.. तो कैसे चलेगा..? हो सकता हे.. वो धिरेनकी वजहसे कोइ मुसीबतमे भी हो..

लखन : (चीन्ताके भावसे) भाभी.. प्लीज.. अ‍ेक बार उनसे बात कर लीजीये.. अगर वो कोइ मुसीबतमे हे.. तो मुजे बता दीजीयेगा.. मे उनके लीये सब कुछ करुगा.. अपनी जान भी दे दुगा.. ओर मे काम करनेके लीये कहा मना कर रहा हु..? बस.. इतना केह रहा हु.. की उनको जो भी काम हो.. आपको बतादे.. आप मुजे कहेना मे सब काम कर दुगा..

सृती : (मुस्कुराते) मतलब.. आप पुनो दीदीसे डायरेक्ट बात करना नही चाहते.. ठीक हे.. मे ही उनसे बात करलुगी.. क्या पुनो दीदीसे बहुत प्यार करते हेनां..? हंम..? आज मैने देखली आपकी चाहत..

लखन : (आंखसे आंसु छलक गये) भाभी.. वो मेरा पहेला प्यार थी.. आज भी हे.. ओर आगे भी रहेगी.. मैने उनको अपने दिलसे नीकालनेकी बहुत कोसीस की.. लेकीन मे नही नीकाल पाया.. तभी इतनी तकलीफ होती हे.. मे पुनो दीदीसे आज भी बहुत प्यार करता हु.. बस.. अब उनका सामना नही कर पाउगा..

सृती : (मुस्कुराते) लखन भैया.. आपका प्यार सच्चा हे.. लगता हे वो भी आपको चाहने लगी हे.. तभी तो आपके लीये इतने आंसु बहाती हे.. मुजे लगता हे.. आपको अ‍ेक बार पुनो दीदीसे बात करलेनी चाहीये.. मुजे यकीन हे आपको अपना प्यार जरुर मील जायेगा..

लखन : (आंसु पोछते) नही भाभी.. अब वो भाइकी अमानत हे.. इस जन्ममे उनको कभी नही पा सकुगा.. अब मे मरते दम तक उनको अपनी बहेन ही मानुगा.. ओर अगले जन्ममे फीर उनका इन्तजार करुगा.. सीर्फ अगले जन्ममे नही.. मे हर जन्ममे उनका इन्तजार करता रहुगा..

सृती : (मुस्कुराते) क्यु..? आपकी तो मंजु दीदीसे सभी बात हुइ हेनां..? मंजुने ये नही कहा की आपको कुछ जीम्वेवारी भी मीली हे.. आपके भाइ ओर भाभीमांने मीलकर कुछ फैसले भी लीये हे.. आपको वो अधीकार भी दीये हे.. जो सीर्फ अ‍ेक पतीका होता हे.. वो अधीकार.. जो आजके जमानेमे पोसीबल नही हे.. इसीको जरीया बनाकर आप अपना पहेला प्यार पा सकते हो.. अगले जन्म तक इन्तजार करनेकी क्या जरुरत हे..?

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) भाभी.. भाभीमांने ये भी कहा हे.. जो भी हो.. अ‍ेक दुसरेकी सहमतीसे हो.. जबरदस्ती कुछ भी नही होगा.. ओर मेने जबरदस्ती करके देख भी लीया.. ओर वैसे भी मेरा मानना हे.. जो प्यार पानेकी चाहत रखता हेनां.. जब उसे अपना वोही प्यार मील जाता हे तो वो प्यारकी अहेमीतको खो देता हे.. ओर मे मेरे प्यारकी अहेमीतको खोना नही चाहता.. मे उनसे दुर रेहकर भी मेरे दिलके करीब रखना चाहता हु.. वो हमेसा मेरे दिलमे रहेगी.. मेरे दिलसे उनको कोइ छीन नही सकता..

सृती : (मुस्कुराते) देवरजी.. आपने तो बहुत गहेरी बात कहेदी.. आइ अ‍ेम इम्प्रेस.. मतलब आप पुनोको प्यार तो करते हो.. लेकीन उसे पाना नही चाहते.. ठीक हे.. मे पुनो दीदीसे बात करके आपके दिलकी बात बता दुगी.. फीर वो क्या कहेती हे वो भी मे आपको बता दुगी.. देखना वो आपकी बाते सुनकर बहुत रोयेगी.. क्युकी वो भी आपको चाहने लगी हे.. कही अ‍ैसा नाहो वो आपकी जीदकी वजहसे हमेसाके लीये आपकी जींदगीसे दुर होजाये.. अ‍ेक बार फीर सोचलो..

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. अ‍ैसी नोबत कभी नही आयेगी.. इनसे पहेले मे इस दुनीयाको छोड दुगा.. भाभी.. बस.. कुछ दिन उनसे दुर रहेना चाहता हु.. ओर कुछ नही..

सृती : (हसते) डीक हे देवरजी.. कमसे कम मुजसे तो बात करलीया करो.. हमारे बीच कहा कुछ अनबन हुइ हे..? मेने कहा आपको कुछ कहा हे..? ओर अब तो मे हमेसाके लीये यही रहेने वाली हु.. आपके साथ..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. वैसे भी मे आपसे नाराज नही हु.. तो आप दिलसे ये बात नीकाल दीजीये.. आप आज भी मेरी चहीती भाभी हे.. हें..हें..हें..

सृती : (खुसीसे हाथ मीलाते गाल खीचते) अरे.. ये हुइना बात..? मेरे प्यारे क्युट देवर.. हें..हें..हें..





लता : (हाथ पोछते पास आते) अरे.. देवर भोजाइ इधर ही बैठे हो..? भाभीको बडा प्यार आ रहा हे आपे देवरपे.. हें..हें..हें.. चलीये चाइ नास्ता रेडी हे.. मे भाभी ओर नीलुको जगाकर आती हु.. देखो कीतने बज गये.. दोनो महारानी अभी तक सोये पडी हे..

लखन ओर सृती अ‍ेक दुसरेकी ओर खुस होते हस रहे थे.. लेकीन उस लखन पुनम वाले हादसेके बाद आज पहेली बार सृती ओर लखनने इतनी बाते की थी.. ओर बीचमे लताके आनेकी वजहसे सृतीको अच्छा नही लगा.. फीर दोनो चाइ नास्ताके लीये खडे होगये.. तब रमा ओर नीलम भी कंपलीट होकर अपने अपने रुमसे बहार नीकली.. ओर सब लोग चाइ नास्ता करने बैठ गये..
 
रजीया अब इस घरकी नोकरानी नही लखनकी बीवी थी.. तो लताने रजीयाको भी अपने पास बीठा दीया.. तो रजीया बहुत ही सरमा रही थी.. आज लताके साथ साथ उसने भी अपनी मांग भरी हुइ थी.. दोनो ही लखनके पास बैठ गइ.. तो सृती रमा ओर नीलम उनके सामने बैठी थी.. तब रमा बहुत ही कामुक तरीकेसे लखनकी ओर देखते मुस्कुरा रही थी.. तो नीलम भी रमाकी नजरको पहेचानते सरमा गइ.. तभी..

लता : (मुस्कुराते) लखन.. आज आप नीलुको इनके स्कुलपे छोडदो.. ओर वहाकी प्रीन्सीपालसे भी मील लेना.. बहुत दिन हुअ‍े स्कुल नही गइ.. ओर आपकी मेडमको मील लेना.. ओर बात करलेना की वो कब हमारे घरपे आ रही हे.. देखे तो सही मेरी सौतन कैसी हे.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते धीरेसे) लता.. वो उनकी मां की वजहसे यहा नही आपायेगी.. हम सबको उनके घरपे खानेके लीये बुलाया हे.. ताकी वो भी अपनी मां से आप सबको मीलवा सके..

लता : (खुस होते) ठीक हे.. यहाका सब काम नीपट जायेगा तब अ‍ेक दिन हम उनसे भी मील लेगे.. क्यु सृती दीदी..?

सृती : (लखनकी ओर तीरछी नजरोसे मुस्कुराते) हां.. हम भीतो देखे.. हमारी देवरानी कैसी हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. मे उनसे मीलवा दुगा.. (लताकी ओर देखते) लता.. हमारी जीप तो खेतोके लीये हे.. ओर भाइने मुजे यहाके लीये अ‍ेक नइ कार लेनेको कहा हे.. तो तुम ओर भाभी डीसाइड कर लेना.. हमे कौनसी कार लेनी हे.. क्युकी अब हम घरपे जायेगे तो जीपको छही छोडदेना हे..

सृती : (मुस्कुराते) क्यु..? यहा मेरी कार तो हे.. तो फीर दुसरी कारका खर्चा क्यु करना..? अगर लेना हे तो अ‍ेक स्कुटर लेलो.. ओर लताको भी सीखादो.. यहा सहेरके लीये ठीक रहेगा.. फीर हम तीनो ही इनमे अडजेस्ट करलेगे.. क्यु लता..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) नही भाभी.. ये कार तो आपकी हे.. आपको क्लीनीकपे भी जाना होता हे.. ओर कुछ दिनमे भुमी बुआ भीतो आजायेगी.. तो आप उनके साथ अपने घरपे चली जायेगी.. तो हम यहाके लीये नइ कार ले लेगे..

सृती : (थोडी मायुस होते) ठीक हे.. जैसे आपकी मरजी.. वैसे कीसने कहा.. की मे अपने घरपे चली जाउगी..? अब तो वही घर मेरा ससुराल हे.. मे अब कही जाने वाली नही.. यही मेरे देवरके पास ही रहुगी.. हां.. अगर आप लोग मुजे अभी भी पराइ समजते हो.. मे मम्मीके साथ चली जाउगी.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

लखन : (थोडा गुस्सेसे) भाभी.. आपको कीसने कहा ये घर आपका नही हे..? अब तो आप यही रहेगी.. ओर ये घरपे पहेला हक आपहीका हे.. अब दुबारा अ‍ैसी बात कभी मत कहीयेगा.. वरना मुजसे बुरा कोइ नही होगा.. समजी..? बात करती हे..

सृती : (हसते) हां ये हुइना बात.. तो चलीये क्या आप मुजे क्लीनीकपे छोडने नही आ सकते..? मेने तो सोचा था.. मेरा देवर अब यही हे.. तो मुजे क्लीनीकपे छोडने लेने आयेगा.. ओर मेरी खुब सेवा करेगा.. तो मुजे कारकी क्या जरुरत हे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते मुस्कुराते) अरे.. नही नही दीदी.. ये जरुर आयेगे.. आप अ‍ैसी बाते मत कीजीये.. आपकी बात सही हे.. हम स्कुटर ही लेगे.. हें..हें..हें..

लखन : (सामने देखते) भाभी.. सोरी.. ठीक हे.. जैसा आप कहो.. आप जब चाहो मे आपको छोडने लेने आजाउगा.. बस..? आप पराइ वाली बात कभी मत करना.. वरना मुजसे बुरा कोइ नही होगा.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. नही करुगी.. तो फीर मे साम छे बजे चली आउगी.. फीर हम तीनो स्कुटर देखने जायेगे.. ओर पंसद करके लेआयेगे..

लता : (हसते) अरे दीदी.. आप अपने देवरके साथ ही देखने चली जाना.. उनमे मुजे कहा पता चलेगा.. तब तक मे ओर भाभी कुछ सामान भी सेट कर देगे.. नीलु.. तुम चाइ नास्ता करके तेरी स्कुलकी तैयारीया करले.. फीर तेरे जीजु तुजे छोडने ओर लेने आजायेगे.. क्या टाइम हे तेरी स्कुलका..?

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) जी.. वो.. दोपहोर.. १२ से साम ५ बजे तक..

सृती : (मनमे खुस होते मुस्कुराते) तो देवरजी.. मेतो सुबह नौ बजे क्लीनीकपे जाती हु.. ओर साम आठ बजे वापस आती हु.. हम दोनोका टाइम अ‍ेडजेस्ट होजायेगा.. हें..हें..हें.. अब सामको तैयार रहीयो.. हम दोनो ६ बजे स्कुटर लेने जा रहे हे.. आज मे छे बजे चली आउगी..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) जी भाभी.. नीलुको स्कुलसे वापस लाउगा तब हम दोनो चलेगे..

इतना सुनते ही सृती मन ही मन खुस होगइ.. क्युकी इनके बीच ओर लखनके बीच जो दुरीया होगइ थी.. वो खतम हो गइ थी.. तो दुसरी ओर नीलम भी मनमे खुस होने लगी.. क्युकी वो धिरेनको मीलना चाहती थी.. ओर धिरेनका कोन्टेक्ट कैसे करना हे.. उनकी भी नीलमने तैयारीया करली थी.. तो दुसरी ओर नीलम लखनके साथ जा रही थी.. तो रमा भी इस उमीदमे मन ही मन खुस हो रही थी..

क्युकी वो चाहती थी की इसी बहाने लखन ओर नीलम दोनोके बीच नजदीकीया बढे.. फीर वो भी लखनको अकेले मे मीलकर उनके साथ बहुत कुछ करना चाहती थी.. जीसके लीये वो कामके बहाने सहेरमे आइ थी.. सबने भाइ नास्ता करलीया.. तो सृती अपने क्लीनीकपे जानेकी तैयारीया करने लगी.. तो रजीया घरका काम समेटने लगी.. तब रमा ओर लता घरका सामान होलमे रखकर खोलने लगी.. आज वो दोनो धीरे धीरे करते सब सामानको सेट कर देना चाहती थी..
 
तो दुसरी ओर देवायत कबीलेपे पहोंच गया.. तो जमीलाके साथ साथ कबीलेके लोग भी बहुत खुस हो गये.. ओर वहाकी बुढी माइ दोनोकी सादीकी तैयारीया करने लगी.. फीर गांवकी ओरतोने जमीलाको वहाकी दुल्हनकी तराह सजा दीया.. तो सभी जेन्ट्सने वहाके पारंपरीक पोसाकमे देवायतको भी सजाकर दुल्हा बना दीया.. फीर सब लोग सादीके लीये वही मंदिरमे चले गये.. जहा उन्होने चंदासे ओर चारु नीशा ओर भुमीकासे से सादी की थी..

सबलोग मंदिरमे अ‍ेकठे हो गये.. ओर बुढी माइ देवायत ओर जमीलाको साथ बीठाकर पुजा करवाने लगी.. तभी अचानक अंदरके बीलसे वोही लंबा सांप नीकला.. जो पहेले भी देवायत देख चुका था.. ओर कबीलेके लोग उसे वही भगवानका रुप मानते थे.. ओर साप आकर वही शीवलींगपे आकर अपने फन फैलाकर बैठ गया.. तो कबीलेके लोग थोडा दुर होगये.. ओर बैठकर आपना सीस जुकाते उसे प्रणाम करने लगे..

बुढीमाइ देवायत ओर जमीला उनको आंख बंध करते प्रणाम करने लगे तो पीछे कबीलेके भी सबलोग आंख बंध करते दर्शन करने लगे.. तब कीसीको पता नही थाकी सांप सरकते देवायतकी गोदमे कंडली लगाकर बैठ गया.. जैसे ही सबने आंख खोली तो सापको देवायतकी गोदमे बैठा पाया.. तो सबलोग डरके थोडा दुर हो गये.. फीर थोठी देर बैठकर सांप अपनी जगाहपे बीलमे चला गया.. तो सबलोग देवायतको प्रवीत्र मानते उनके पैरोमे जुकने लगे..

फीर वहा देवायत ओर जमीलाकी उन्हीके रीती रीवाजसे वो बुढीमाइने सादी करवाइ.. फीर सबलोग वापस कबीलेपे आगये.. तब हरीयाने वहाके लोगोसे मीलकर बढीया खाना बनाया.. फीर साम ढलते ही नाच गानका प्रोग्राम सुरु हुआ.. इनसे पहेले देवायतने जमीलाको वहाकी रानी घोसीत कीया.. तो सभी लोगोने हर्षोलासके साथ देवायत ओर जमीलाको वहाके राजा रानीके रुपमे स्वीकार करते अपनी अपनी ओर से उपहार दीया..

जब वहा नाच गानका कार्यक्रम सुरु हुआ तो उनके साथ देवायत ओर जमील भी कुछ देरके लीये सबके साथ नाचे.. फीर मालती रेणु ओर दुसरी ओरतोने दोनोको अ‍ेक नइ ओर बडी कुटीयामे भेज दीया.. जीसे वहाके लोगोने अपने नये राजा रानीके लीये बनाइ थी.. फीर पुरी रात सबलोग नाच गान करते रहे.. ओर देवायत जमीलाके साथ अपनी सुहागरात मनाता रहा.. पुरी रात वो जमीलाको जमकर चोदता रहा..





चोद चोदके जमीलाकी हालत खराब करदी.. हांलाकी उनके पेटमे देवायतका बच्चा पल रहा था.. तो देवायत बहुत ध्यान रखते जमीलाको चोद रहा था.. तब जमीला थकके चकना चुर होचुकी थी.. ओर सुबह चार बजे जमीला लगभग बेहोसीकी हालतमे चली गइ थी.. तब मालती सबकी नजर बचाते सुबह दोनोकी कुटीयाके पास चली गइ.. ओर अंदर जांकते देखने लगी.. तब जमीला घोडे बेचकर सो रही थी..

तो मालती धीरेसे दरवाजा खोलकर अंदर चली गइ.. ओर नंगी होकर चुपचाप देवायतके पास लेटकर उनको चुमने लगे.. तो देवायत मालतीको देखकर हसने लगा.. ओर देर ना करते उनके उपर चड गया.. फीर देवायतने मालतीको भी दो बार जमकर चोद लीया.. फीर मालती अपने कपडे पहेनकर देवायतके होठोको चुमकर वापस चली गइ.. बहार गांवमे भी सब लोग कुछ देरके लीये सो गये.. ओर अ‍ैसेही रात बीत गइ..





तो दुसरी ओर देवायतके गांवमे दिनमे सबकुछ रुटीन हुआ.. अ‍ेक तरफ श्रीधरके घरपे सादीकी तैयारीया चल रही थी.. तो दुसरी ओर बंसीके घरपे दुसरे गांवके लोग अपना सोक व्यक्त करने आ रहे थे.. इस वक्त सांती बरखा बंसी ओर जया सब लोग सोकमे थे.. जैसे भी हो.. सामत जयाका पती था.. इसकी वजहसे जयाका मुड भी ठीक नही था.. तो इस हालमे कुछ दिनके लीये रमेशने भी जयासे दुर रहेना उचीत समजा..

यहा कबीलेपे भी सुबह सबलोग देरसे उठे.. फीर सब लोग अ‍ेकठे हो गये.. तब देवायत ओर जमीला वहाके मुखीयाके पोसाकमे आगये.. फीर देवायतने वहाकी सारी जीम्वेवारी जमीलाको सोंपदी.. ओर उनके साथ रहेने लीये देवायतने उन बुढी माइको बोल दीया.. फीर देवायतने कबीोेके लोगोको होने वाले बदलावको लेकर बातकी.. इसमे उनके बेटे ओर पोतेको लेकर गांवकी कीतनी जीम्वेवारी हे.. उनके बारेमे भी बात करली.. जीसे सुनकर वहाके लोग ओर खुस होगये.. फीर..

देवायत : (मुस्कुराते) माइ.. अब आपको जमीलाके साथ रहेना हे.. ओर मेरी पत्नीने कहा हे.. आप जमीलाको वो सब अच्छी तराह सीखादे.. जो आप जानती हे..

बुडी माइ : (हसते) अच्छा.. तो रानी साहीबाको सब पता हे.. ठीक हे.. इस बारेमे हमारे गुरुजीकी भी याज्ञा हे.. मे हाल मे ही आश्रमपे गइ थी.. तब गुरु बाबाने मुजे सबकुछ बता दीया हे.. आप फीकर मत कीजीये.. अब जमीला यहाकी रानी होगइ हे.. उनके देखभालकी सब जीम्वेवारी मेरी.. मे उसे सब कुछ सीखा दुगी..

फीर देवायत बुडी माइ ओर जमीलाको बहुत सारे पैसे भी देता हे.. ओर गांजके लोगोको भी बहुत सारे उपहार देता हे.. तो सब लोग बहुत खुस होगये.. फीर देवायत दो पहोरके भोजनके बाद हरीया ओर उनकी दोनो बीवीया मालती ओर रेणुको लेकर वहासे नीकल जाता हे.. ओर वापस गांवमे आकर सीधा खेतोपे चला जाता हे.. तो मालती देवायतकी ओर कातीलाना मुस्कुराते रेणुको लेकर अपने रुममे चली जाती हे..
 
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