Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 114 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

तो गांवमे आज सुबह ब्रीन्दा भी अपने घरपे उल्टीया कर रही थी.. ओर श्रीधर उनकी पीठ सहेला रहा था.. ब्रीन्दाको यकीन हो गयाकी वो लखनसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. लेकीन ये बातको अभीके लीये लखनसे छुपानेका फैसला करलीया.. ओर मन ही मन तैय करलीया की वो इस बच्चेको जन्म देगी..

फीरसे सबलोग अपनी नोर्मल लाइफमे बीजी होगये.. लेकीन रजीयाकी आंखोमे देखकर पुनमको सबकुछ पता चल गया.. की इतने दीनो हवेलीपे रहेकर उसने दयाके साथ मीलकर क्या क्या खीचडी पकाली थी.. क्युकी उसे पता थाकी दया ओर रजीयाके बीच पहेलेसे ही लेस्बीयन रीलेशन था..

दोनोके बीच उनकी सादीसे पहेले ही बहुत कुछ तैय हो चुका था.. अब दोनो ही अपने अपने पतीसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. तो दोनोका मक्सद भी पुरा हो चुका था.. लेकीन अभी इसके लीये काफी टाइम था.. ओर पुनमके हीसाबसे सब सही चल रहा था.. ओर दोनोकी योजनासे वो मन ही मन खुस भी थी.. सबकुछ मंजुके कहेनेके हीसाबसे चल रहा था..

इस साम अ‍ेक बार फीर लखन चंदाको लेकर घुमने चला गया.. लेकीन चंदाको पता नही थाकी इनसे पहेले लखनने फोनपे धीरेनसे बात करली थी.. पार्कमे जाते ही चंदा जुठमुठ लखनसे इस बातपे जगडा करने लगी.. की अब वो उनसे रातको मीलने नही आता..

ओर लखनने उसे बडी मुस्कीलसे ये कहेकर मनालीया की इतनी बीवीयोकी वजहसे उनको अकेलेमे मीलनेकी प्रोबलेम हो रही हे.. चलो अभी मील लेते हे.. कहेकर लखनने चंदाको मना लीया.. क्युकी उन्होने पहेलेसे ही भुमीकाके खाली पडे घरकी चाबी लेली थी..

फीर कुछ देर बैठकर लखन चंदाको लेकर भुमीका वाले घरपे चला गया.. ओर दरवाजा बंध करके दोनो ही अंदर नीचेके बेडरुममे चले गये.. अंदर जाते ही चंदा लखनसे लीपट गइ.. ओर उनके चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करदी.. ओर लखन उसे गोदमे उठाकर बेडपे चला गया..

कुछ ही देरमे पुरे कमरेमे चंदाकी चीखने ओर सीसकारीयोकी आवाज गुंजने लगी.. वो जब भी जडनेकी कगारपे होती लखनको जोरोसे बाहोमे भीच लेती.. ओर उनसे लीपलोक कर लेती.. जैसे ही जडकर सुस्त हो जाती लखन हाथके बल फीरसे मोरचा सम्हालता..



ओर चंदाको फीरसे उतेजीत करदेता.. हमेसाकी आदत के मुताबीक इस बार भी लखनने बीना हथीयार बहार नीकाले चंदाकी चुतको दो दो बार अपने पानीसे सीच दीया.. ओर चंदाको ठंडी करके उनको पुरी तराह संतुस्ट करदीया.. फीर दोनोने ही वहा स्नान कीया.. ओर कपडे पहेनकर तैयार होगये..

चंदा : (बाहोमे आकर होठ चुमते) हां तो जानु.. अब चले..?

लखन : (मुस्कुराते हां.. चलते हे.. लेकीन घरपे नही.. कीसी ओर जगाहपे..

चंदा : (सामने देखते) कीसी ओर जगाह..? देर नही होजायेगी..? कहा जाना हे..?

लखन : (दरवाजेपे लोक लगाते सामने देखते) धीरेनके घर.. आज आप उसे माफ करही दो..

चंदा : (सामने देखते) धीरेनके घर..? क्या अभी..? नही.. हम फीर कभी जायेगे..

लखन : (सामने देखते) क्यु..? अभी मीलनेमे क्या प्रोबलेम हे..?

चंदा : (नजरे जुकाते) जानु.. बस.. अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. ओर कुछ नही..

लखन : (मुस्कुराते) मे आपके साथ हुनां..? तो फीर काहेका डर..? आपको उनसे कोइ बात नही करनी.. बस.. वो माफी मांगे तो उसे माफ करदेना.. फीर हम घर वापस आजायेगे..

चंदा : (थोडा गभराते) आप साथ होनां..? अगर वो कुछ कहे तो आप सम्हाल लेना..

लखन : (मुस्कुराते) मेरे साथ होते इनकी कोइ मजाल हे..? जो आपसे कुछ केह सके.. डरो मत.. मे साथ हु..

फीर दोनो घरको लोक करके सीधे ही धीरेनके घर चले गये.. चंदा अ‍ेक बार ये घर देखने आ चुकी थी.. धीरेनने इसे रीनोवेशन करके बहुत ही डेकोरेट करलीया था.. लखनने बेल बजाइ.. ओर धीरेनने दरवाजा खोला.. तो चंदाको देखते ही वो जोरोसे रोने लगा.. ओर चंदाके पांवमे गीर गया..

धीरेनको अ‍ैसे रोते हुअ‍े पांवमे गीरते चंदाकी आंखोसे भी आंसे बहेने लगे.. उसने धीरेनको कंधा पकडकर खडा कीया.. ओर जोरोसे धीरेनको गले लगा लीया.. दोनोकी फुटफुटके रोने लगे.. ओर धीरेन रोते हुअ‍े चंदाकी माफी मांगता रहा.. फीर लखनने दोनोको सांत कीया..

वही बाथरुमके पास सीन्क था.. फीर दोनोने मुह साफ कीया.. ओर धीरेनने दोनोको पानी पीलाया.. फीर तीनो होलमे आकर सोफेपे बैठ गये.. धीरेन चंदासे सटकर बैठ गया.. ओर चंदाके पांव पकडकर फीरसे गीड गीडाते माफी मांगने लगा.. ओर आखीर चंदाने बोला..

चंदा : (आंग गीली करते सरको सहेलाते) चल जा.. माफ करदीया.. क्यु की अ‍ैसी नादानी..?

धीरेन : (नजरे जुकाते) मोम.. तब मुजमे इतनी समज नही थी.. बहुत गुस्सेमे भी था.. बादमे मुजे आप सबके बारेमे सचाइ पता चली.. की आप सब वास्तवमे कौन हे.. मोम.. मेने सही फैसला कीया.. क्युकी मे पुनोके लायक नही था.. पुनो मुजसे बहेतरकी हकदार थी.. ओर मे खुस हुकी उनको अपना बहेतर साथी मील गया हे..

चंदा : (सामने देखते) हां.. अब वो मेरी बेटी हे.. ओर मे खुस हु.. की उनको अपना बेस्ट पार्टनर मील गया हे.. मेरा लखन.. क्या अब भी तुम सींगल हो..?

धीरेन : (लखनकी ओर देखते धीरेसे) येस मोम..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. धीरेन अ‍ेक लडकीसे प्यार करता हे.. बस.. कुछ टाइमके बाद वो उनसे सादी करलेगा.. लडकी को मे मीला हु.. धीरेनके लीये बहुत अच्छी लडकी हे..

चंदा : (मुस्कुराते) क्या..? चलो अच्छा हुआ.. अगर लडकी अच्छी हेतो तुम अपना घर बसालो..

धीरेन : (हाथ थामते) मोम.. आपने मुजे माफ तो करदीयानां..?

चंदा : (सामने देखते) हां.. लेकीन लखन मुजे नही कहेता तो सायद मे तुम्हे कभी माफ नही करती.. खैर.. छोठो अब पुरानी बाते.. बस.. मे चाहती हुकी तुम भी अपना घर बसालो.. ओर नये सीरेसे जींदगीकी सुरुआत करो..

धीरेन : (मुस्कुराते) थेन्क्स लखन भैया.. आप बीलकुल अ‍ेक अच्छा दोस्त हे.. (चंदाकी ओर देखते) मोम.. अब आप कभी कभी मुजसे मीलने आओगीनां..?

चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. पहेले तुम सादी करलो.. फीर सोचुगी.. क्युकी अब तो मे यहा मेरे देवरके साथ ही रहेती हु..

धीरेन : (असमजमे देखते) मोम.. क्या आप जीजुके साथ नही रहेती..? मतलब.. सब ठीक तो हेनां..?

चंदा : (मुस्कुराते) चीन्ता मत कर.. सबकुछ ठीक हे.. बस.. मेरे उपर अब वीजयकी जीम्वेवारी हे.. मेने उसे गोद लेलीया हे.. हमारी मंजुका बेटा.. जो अब मेरा बेटा हे.. इसे मे यही पढाउगी.. ओर अ‍ेक बहेतर ओर काबील इन्शान बनाउगी.. जो कमी मेने तुजसे पालनेमे की.. उस कमीको मे वीजयको पालकर पुरी करुगी..

धीरेन : (मुस्कुराते) तब कीतना छोटा था जब मे वहा आता था.. अब तो बडा होगया होगा..

चंदा : (मुस्कुराते) हां.. अभी अ‍ेक महीनेके बाद दो साल पुरे होजायेगे.. खैर.. अब हम चलते हे..

धीरेन : (मुस्कुराते पांव छुते) मोम.. कभी कभी मीलने आया करो.. ओर अगेइन सोरी..

फीर लखन ओर चंदा धीरेनको गले मीलकर वापस घर आगये.. तब चंदा बहुत खुस थी.. मानो उनके उपरसे अ‍ेक बहुत बडा बोज नीकल गया हो.. आते वक्त चंदा लखनसे हस हसके बाते कर रही थी.. ओर लखनकी मस्तीया करते उनसे फ्लर्ट कर रही थी..

इस रात खानेपे सब बैठे थे तब भी चंदा सबके साथ मस्तीया करते बहुत ही हस रही थी.. जैसे पुरानी चंदा वापस आगइ हो.. लेकीन अब रजीया बहुत ही सांत हो चुकी थी.. वो बहुत मुस्कीलसे हस रही थी.. ओर हर वक्त लखनसे नजरे चुरा रही थी.. मानो कीसी अपराध बोध जेल रही हो..

ओर इस बार लखनने भी नोटीस करलीया.. रातमे लखनने सृती राधीका ओर रजीयाको खुब जमकर पेला.. लेकीन इस बार रजीया कुछ खास प्रतीक्रीया नही दे रही थी.. देर रात सब सो गये तो लखन पुनमसे चीपककर सो गया.. तो पुनम भी लखनकी बाहोमे आ गइ.. ओर उनकी बाहेपे सर रख दीया..

लखन : (बहुत धीरेसे) पुनो.. अ‍ेक बात पुछनी थी..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. मुजे सब पता हे आपको क्या पुछना हे.. लेकीन अभी नही.. हम अकेले होगे तब बात करेगे.. कल हम तीनो भावीकाके घर जा रहेहेनां..? तब बात करेगे..
 
आज सुबह धृवके घरपे भावीका धृव ओर उनकी मम्मी.. तीनो चाइ नास्ता कर रहे थे.. तब भावीकाने घरके नोकरोको दो हजार रुपीये दीये.. ओर यहा काम खतम होते ही उनके घरकी सफाइ करनेको कहा.. तो तीनो नोकर भी खुस होगये.. क्युकी वो भावीकाके घर सफाइ करनेको उत्सुक रहेते..

क्युकी भावीका हर पंद्नह दीनमे अ‍ेक बार अपने घरकी सफाइ नोकरोसे करवाती.. जहा वो सादीसे पहेले रहा करती थी.. हर वक्त वो नोकरोको दो हजार रुपये सफाइ.. ओर खानेके लीये देती.. नोकरो भी चारसो पांचसो रुपयेका खाना खाते.. ओर बाकीके पंद्नसो रुपये तीनो आपसमे बांट लेते..

ओर ये सब हर दो हप्तेके बादका रुटीन हो गया था.. तो धृव ओर उनकी मम्मीने भी कोइ सवाल नही कीये.. फीर चाइ नास्ता करते भावीका उनकी सास ओर धृवके गालको चुमकर अपनी क्लीनीकपे चली गइ.. ओर यहा पहोंचकर उसने सृतीको फोन लगाया..

सृती : (फोन उठाते ही मुस्कुराते) हां कुती बोल.. आज सुबह सुबह ही तुजे फोन करनेका टाइम मील गया..?

भावीका : (मुस्कुराते) कमीनी सुबह सुबह गालीया तो मत दे.. सुन.. आज साम पांच बजे तुम ओर पुनमदीदी आ रहे होनां..?

सृती : (मुस्कुराते) हां.. सुबह चाइ नास्तेपे पुनोदी वही बता रही थी.. हम तीनो आ रहे हे.. मे पुनोदी ओर लखन..

भावीका : (सुनतेही खुस होते) सुन.. ठीक पांच बजे पहोंचजाना.. मे वहा थोडी जल्दी चली जाउगी.. वही कुछ नास्ता बास्ता करगे.. मे साथमे लेकर जाउगी..

सृती : (मुस्कुराते) ओके.. लेकीन हम आयेगे कहा..? कुछ अ‍ेड्रेस बेड्रेस तो दे..

भावीका : (मुस्कुराते) अभी तुजे सेन्ड करती हु.. चल बाय.. पेसन्ट हे..

कहेते भावीकाने फोन रख दीया.. ओर उसने आरतीको बुलाकर सामके सभी अ‍ेपोइटमेन्ट ना लेनेको कहा.. फीर उसने सृती ओर लखन दोनोको अपने पुराने घरका अ‍ेड्रेस सेन्ड करदीया.. वो खास करके लखनसे मीलनेके लीये बहुत ही उत्साहीत थी.. क्युकी अब उनको लखनको मीले बीना कही चेइन नही मीलता था..

तो दुसरी ओर भावीकाके जाते ही उनकी सास अपने बेटे धृवकी ओर देखकर कामुक स्माइल करने लगी.. उनको अ‍ेबोर्सन करवाये काफी दीन होगये थे.. ओर अब वो बीलकुल ठीक लग रही थी.. इसीलीये आज बडे बेसब्रीसे अपने बेटेको मीलनेके लीये भावीका ओर नौकरोके जानेका इन्तजार कर रही थी.. जैसे ही सब नोकर भावीकाके घरकी सफाइ करने चले गये..

तब वो धृवको उपरके बेडरुमकी ओर इसारा करते सीडीया चडने लगी.. ओर धृव भी घरका गेइट बंध करते उपरकी ओर अपनी मम्मीके पीछे चला गया.. जैसे ही वो रुममे गया.. उनकी मम्मीने रुमका दरवाजा बंध करदीया.. फीर धृवकी बाहोमे समा गइ.. धृव उनको अपनी गोदमे उडाकर बेडकी ओर चला गया..

कुछ ही देरमे दोनोके कपडे अ‍ेक मेजपे पडे अपनी कीस्मतपे रो रहे थे.. पुरे कमरेमे धृवकी मम्मीकी सीसकारीयोकी आवाज गुजने लगी.. अब दोनो ही अपने प्रोटेक्शनका खयाल रखने लगे थे.. धृव अपने हथीयारपे कोन्डम चडाकर अपनी मम्मीके दोनो पैर अपने कंधेपे लेकर उसे जोरोसे चोद रहा था..



अ‍ैसा नही थाकी ये कभी कभार ही होता था.. भावीकाके घरसे नीकलते ही दोनोकी रुटीन लाइफ होगइ थी.. अब धृवकी मम्मीको धृवसे हर दिन ओर रात जमकर चुदवानेकी आदत हो चुकी थी.. इसी वजहसे वो धृवसे तीन बार प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. हाल ही मे अ‍ेक महीने पहेले ही उनका तीसरी बार अ‍ेबोर्सन हो चुका था..

अ‍ेबोर्सनके बाद दोनो कुछ दीन सख्तीसे अपनी प्रोटेक्शनका खयाल रखते.. फीर धीरे धीरे दोनो ही फीरसे बीना सेफ्टीसे चुदाइ करने लगते.. क्युकी धृवको कोन्डम लगाना अच्छा नही लगता था.. क्युकी उसे जो फीलींन्ग्स चाहीये उसे वो कोन्डम लगानेसे नही मीलती थी..

ओर उनकी मम्मी भी कइ बार आइपील लेना भुल जाती थी.. ओर सायद यही वजह थी जो ज्यादातर लडकी धृवसे चुदवाकर प्रेटनेन्ट हो जाती.. आज धृवकी बहेन पुजाकी कोखमे उन दोनोका दुसरा बच्चा पल रहा था.. ओर पुजा अपने ससुरालमे पाल रही थी..

बस.. उनमे सीर्फ भावीका ही बाकात रह थी.. क्युकी धृव हमेसा उनके पीछवाडेका दीवाना था.. ओर भावीका भी नही चाहती थीकी उनको धृवसे बच्चा पैदा हो.. धृव ओर उनकी मम्मीको लगता थाकी उनके अफैरके बारेमे भावीकाको कुछ नही पता.. लेकीन दोनोको पता नही थाकी भावीकाको उनका हर राज मालुम था..

जीसे भावीकाने छुपकर मां बेटेकी कइ वीडीयो क्लीप भी बनाली थी.. ओर आरतीसे भी सबुत अ‍ेकठा करलीया.. ताकी अपनी मुसीसबतमे वो उनका इस्तमाल कर सके.. लेकीन ज्यादार भावीका अपने इलीगल कामकी वजहसे चुप ही रहेती.. भावीका चार बजे ही अपनी क्लीनीक्स नीकल गइ..

ओर रास्तेसे कुछ ठंडेकी बोतल.. ओर नास्ता थी साथ लेगइ.. उनको नही पता थाकी आज सामसे ही उनकी जींदगी पुरी तराह बदलने वाली हे.. पुनमसे अपने अतीतके बारेमे जानकर वो काफी उत्साहीत थी.. लेकीन कुछ बात उनको पुनमने नही बताइ थी.. जो उसीका खुलासा करने आज पुनम आने वाली थी.. ठीक साम पांच बजे पुनम सृती ओर लखन घरसे नीकल गये.. ओर भावीकाने दीये हुअ‍े पते पे पहोंच गये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९२

ओर रास्तेसे कुछ ठंडेकी बोतल.. ओर नास्ता थी साथ लेगइ.. उनको नही पता थाकी आज सामसे ही उनकी जींदगी पुरी तराह बदलने वाली हे.. पुनमसे अपने अतीतके बारेमे जानकर वो काफी उत्साहीत थी.. लेकीन कुछ बात उनको पुनमने नही बताइ थी.. जो उसीका खुलासा करने आज पुनम आने वाली थी.. ठीक साम पांच बजे पुनम सृती ओर लखन घरसे नीकल गये.. ओर भावीकाने दीये हुअ‍े पते पे पहोंच गये.... अब आगे

भावीकाका घर नही था.. वो अ‍ेक बंगलो था.. ना छोटा.. ना बडा.. बस.. चार पांच लोगोके लीये पर्याप्त था.. भावीकाने सबको गले मीलकर स्वागत कीया.. ओर लखनको गले मीलते थोडा जोरोसे भीच लीया.. ओर कमरपे चुटकी काटी.. तो सृती ओर पुनम दोनो ही हसने लगी.. फीर सब लोग अंदर आगये..

जबसे सृतीकी मंजु ओर पुनमसे बात हुइ.. ओर भवीस्यकी पुरी योजना बताइ तबसे सृतीकी भावीकाके प्रती जलनकी भावना खतम हो चुकी थी.. अब वो लखन ओर भावीकाको मीलनेकी वजहसे लखनसे नाराज नही रहेती थी.. भावीकाने तीनोको पुरा बंगलो दीखाया.. फीर सब लीवींगमे आकर सोफेपे बैठ गये..

सृती : (मुस्कुराते) कमीनी.. तेरा घर तो काफी बडा हे.. तेरा ससुराल वाला कीतना बडा हे..?

भावीका : (मुस्कुराते) वो आपके बंगलो जीतना ही बडा हे.. उपर चार कमरे.. नीचे दो.. बेड होल कीचन.. लेकीन ये मेरे लीये पर्याप्त हे.. अरे.. पानी देना तो भुल गइ.. बैठो मे लेकर आती हु..

सृती : (खडी होते) अरी तु बैठ.. बाते कर मे लेकर आती हु..

फीर कुछ औपचारीक बाते करते हे.. तबतक सृतीने सबको पानी पीलाया.. फीर वो भी सबके साथ आकर बैठ गइ.. पुनमने उसे अ‍ेक पुराने बक्षेके बारेमे पुछा.. तो भावीका याद करते सोचमे पड गइ.. लेकीन उसे कुछ याद नही आ रहा था.. तभी उसने उनके मम्मीके रुमके बारेमे पुछा.. ओर भावीकाको कुछ याद आ गया..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. सायद आपकी मम्मीके रुममे बाथरुमके उपर अ‍ेक छोटी जगाह हे.. जहा हम बेकारकी चीजे रखते हे.. वही मुजे दीख रहा हे.. अ‍ेक छोटासा बक्षा..

भावीका : (कुछ याद आते) अरे हां.. याद आगया.. लेकीन मेने उसे डीकसे देखा भी नही.. सायद उनमे तो मम्मीके ओफीसके कुछ कागजात ओर उनके पहेचानके कागजात हे.. ओर कुछ नही..

पुनम : (मुस्कुराते) अरे वो लेकर तो आइअ‍े.. फीर मे कुछ दीखाती हु..

भावीका : (खडी होते) बहुत उपर हे.. सायद छोटी सीडी लगानी पडेगी.. हे हमारे पास.. लखन.. प्लीज.. आप कुछ मदद कर दीजीयेनां.. मे वहा नही पहोंच सकती..

लखन : (हसते खडा होते) मुफ्तमे मजदुरी करवा रही हो.. देखना अगर कोइ खजाना बजाना नीकला तो मे भी हीस्सा लुगा.. भले ही मजदुरी समजके दे देना..

भावीका : (हाथ पकडकर खीचकर लेजाते) अरे पुरा खजाना दे दुगी.. चलो तो सही..

भावीका हाथ पकडर उसे रुममे ले गइ तो पुनम ओर सृती हसने लगी.. भावीकाने उसे अ‍ेक बडा टेबल लाकर दीया ओर लखन उनपे चड गया ओर अ‍ेक बक्षा लेकर भावीकाके हाथोमे दे दीया.. फीर टेबलसे उतर गया.. देखा तो भावीका बक्षा लेकर खडी थी.. ओर लखनने उनके दोनो उरोजोको थामते पीछेसे बाहोमे भीच लीया..

भावीका : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे फुस फुसाते) अरे क्या कर रहे हो.. वो दोनो बहार हे.. अभी छोडो मुजे.. अगर प्यार करना हेतो कल दोपहोर क्लीनीकपे आजाना.. फीर वहा जीतनी मरजी करे प्यार कर लेना..

कहा तो लखनने उनके होठोको चुमलीया ओर उसे छोड दीया तो भावीका लखनकी ओर कामुक स्माइल करते बक्षा लेकर बहार चली गइ.. फीर सबने उनको खोला.. ओर कागजात देखने लगे.. तधी पुनमने अ‍ेक दुसरे खानेमे से दो फाइल नीकाली.. ओर भावीकाको थमा दी..

पुनम : लीजीये.. ये देखीये.. इनमे कुछ मीलेगा.. बहुत बडा सरप्राइज..

भावीका : (सामने देखकर मुस्कुराते फाइल लेते) अरे.. इनको कहासे नीकाला.. येतो मेने देखी ही नही..

फीर चारो अ‍ेक फाइल देखने लगे.. ओर देखते ही भावसका सृतीकी आंख खुसीके मारे बडी होगइ.. देखा तो उनमे पचास पचास लाखकी ६(छे) बेन्ककी अ‍ेफ.डी.की रसीदे पडी हुइ थी.. ओर लगभग इनकी दो बार अवधी समाप्त हो चुकी थी.. जीनक आजकी तारीखमे १२(बाराह) करोडसे भी अधीक रासी होगइ थी..

उनको देखते ही भावीकाकी आंखोमे खुसीसे आंसु आगये.. क्युकी अबतक वो अपनी क्लीनीकसे दोसे ढाइ करोड ही जमा कर पाइ थी.. फीर सबलोग दुसरी फाइल देखने लगे.. तब उनमे उनके पापाकी फेक्टरीके कुछ कागजात नीकले.. जो अ‍ेक वसीयतकी तराह अनुबंध था..

सबने पढा.. ओर सबकी आंखे चकाचौंद होगइ.. उनमे भावीका उनकी अ‍ेक लौती संतान थी.. फीर उनमे अ‍ेक बचपनके दोस्तका जीक्र था.. जो फेक्टरीका लीगल अ‍ेडवोकेट था.. ओर उनमे उलेख था.. की जीस दीन वो या उनकी मम्मी नही रहेगे तबसे ये अनुबंध लागु हो जायेगा..

उनमे ये भी लीखाथा की इनकी अ‍ेक कोपी उनके वकीलके पास.. यानीकी उनके दोस्तके पास हे.. ओर भावीकाकी पुर्ण पहेचानके बाद उनका हक उनको दे दीया जायेगा.. इनमे उनके वकीलका नाम ओर उनका फोन नंबर पता भी दीया हुआ था.. ओर उनको कोन्टेक्ट करनेके लीये लीखा था..

वकीलका नाम सुनतेही भावीकाको बचपनकी यादे धुंधली होगइ.. की वो बचपनमे कैसे अपनी हम उम्रकी अ‍ेक लडकीके साथ खेलती थी.. जब उसे होस्टेलपे ले जा रहे थे तब वो लडकी अपनी मम्मीसे लीपटकर कैसे रो रही थी.. ओर उसे होस्टेलपे जानेके लीये मना कर रही थी..

तभी भावीकाका ध्यान अ‍ेक छोटेसे लीफाफे पे पडा.. तो भावीकाने उन लीफाफेको सावधानीसे खोला.. तो उनमे उनकी मम्मीका अ‍ेक पत्र था.. जो उसने भावीकाके नाम लीखा था.. ओर भावीका पत्र पढने लगी.. जब पत्र समाप्त हुआ तो पढते ही भावीका अपना चहेरा हथेलोओमे छीपाकर फुटफुटकर रोने लगी..

पुनम ओर सृतीने थोडी देर उनको रोने दीया.. फीर सृती पानी लेकर आइ ओर भावीकाको पीलाया.. जब भावीका सांत हुइ तो पत्र सृतीको देकर बाथरुममे मुह धोने चली गइ.. तब पुनम ओर सृती उनकी मम्मीका पत्र पढने लगी.. उनमे भावीकाको संबोधन करके लीखा था..
 
मेरी प्रीय बेटी भावीका.. मे ये पत्र इसीलीये लीख रही हु सायद मे ना रहु तो अपने दीलकी बात तुजे केह सकु.. जब ये पत्र तुजे मीलेगा तब तेरे पास सबकुछ होगा.. सायद तु सोच रही होगी की इतनी दोलत थी तो मुजे होस्टेलमे क्यु रखकर पढाया.. क्युकी मेने तेरे अ‍ेकाउन्टमे इतने ही पैसे रखे थे जीनमे तेरी पढाइ ओर होस्टेलका खर्चा ही पर्याप्त हो.. अगर मे तुजे तभी सबकुछ दे देती.. तो तुजे पैसोकी अहेमीयतका कभी पता नही चलता..

ओर हो सकता हे तु अ‍ेक अयास लडकी होजाये.. बेटा.. अ‍ेक दीन राजाका भंडार भी समाप्त हो जाता हे.. ओर मे चाहती हुकी मेरी बेटीको दुजीया दारीका ज्ञान हो.. तु पैसोके लीये थोडा संघर्स ओर महेनत करे.. ओर पुर्ण परीपकव होजाये.. ताकी तुजे पैसोकी अहेमीयतका पता चले.. बाकी तेरे लीये इतने पर्याप्त पैसे छोडे हे तुजे पुरी जींदगी कुछ करनेकी जरुरत ही नही हे..

मेने अ‍ेफडी की रसीदे ओर फेक्टरीके पेपर छोडे हे.. मेरा ये पत्र लेकर हमारे वकील पंकजभाइके पास चली जाना.. इनमे उनका कोन्टेक्ट नंबर हे.. तेरे पापाके बचपनके दोस्त हे.. मेरे चहीते देवर.. उसे पत्र दीखाना वो सबकुछ समज जायेगे.. बस.. वो जैसा कहे करती जाना.. ओर दुसरी बात.. बेटा.. मेरे ओर तेरे पापाके बारेमे दुनीया भले ही कुछ भी कहे.. कीसीकी बात मत सुनना.. क्युकी मे तेरे पापाकी रखैल नही थी..

हम दोनोने बाकायदा मंदीरमे फेरे लेकर सादी करली थी.. इनके साक्षी मेरा चहीता देवर ओर देवरानी भी हे.. ओर इन बक्षेमे हमारी सादी वाली तसवीर भी हे.. सीर्फ तेरे जानकारीके लीये.. ताकी तुजे दुनीया वालोसे ताने ना सुनना पडे.. बस.. भगवान तुजे खुस रखे.. तेरी प्यारी मम्मी..

पत्र इतना भावुक थाकी पुनम ओर सृतीकी आंखे भी नम होगइ.. पत्र पढा तबतक भावीका भी आ चुकी थी.. ओर बक्षेसे अ‍ेक तसवीर नीकालकर उसे देख रही थी.. उनमे उनकी मम्मी ओर पापाकी सादीकी तसवीर थी.. फीर भावीका ठंडेकी बोटल ओर समोसे लेकर आइ.. फीर सब बंडा ओर समोसा खाते बाते करने लगे..

पुनम : (मुस्कुराते) हां तो भावीका दीदी.. अब आगे आपका क्या प्लान हे..?

सृती : (बीचमे ही) भावु.. अब तेरे पास इतने पैसे हे.. तो फीर छोडदे अपना इलीगल काम.. सब पैसोके लीये ही करती थीनां..?

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. मे भी यही सोच रही हु.. अब छोड दुगी ये इलीगइ काम..

पुनम : (मुस्कुराते) ओर सायद इसीलीये धृवभैयासे सादी कीथी.. हेनां..? तो फीर अब..?

भावीका : (हांमे गरदन हीलाते) हां.. अब..? अ..ब.. पहेलेतो वो वकील पंकज चाचासे मीलुगी.. फीर कुछ तैय करते हे.. दीदी.. आपको तो सबकुछ पता चल जाता हेनां..? तो फीर बताइअ‍े.. मेरा उजवल भवीस्य कैसा होगा.. मतलब.. मेरे लीये क्या उचीत होगा..? क्युकी अ‍ेक बात तो पकी हे.. अब मे उस घरमे तो नही रहुगी.. जहा मेरा मानसीक ओर सारीरीक सोसण हो रहा हे..

पुनम : (मुस्कुराते) अ‍ेक्जेटली.. मे भी आपको वही बताने वाली थी.. आप पहेले अपने वकील चाचासे मत मीलो उनसे पहेले अपने घरका मामला सुलजालो.. आपके लीये यही बहेतर हे.. वरना फसनेका डर हे..

भावीका : (मुस्कुराते) वोतो बहुत आसान हे.. मेरे पास उन मां बेटेकी कइ वीडीयो क्लीप हे..

लखन : (सामने देखते) ये.. हेलो.. मेडम.. आप जीतना सोच रही हो वो इतना भी आसान नही हे.. मत भुलो वो लोग कौन हे.. बडे पोलीटीशयन.. ओर वो भी मंत्री.. इनका मतलब भी जानती होनां..? आपका जीना हराम कर देगे.. आपको अपनी क्लीनीक चलानी हेनां..?

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. भैया सही केह रहे हे..

भावीका : (थोडा डरते मुस्कुराते) यार.. आप लोग थो मुजे डरा रहे हो.. इस बारेमे तो मेने सोचा ही नही हे.. मुजे नही रहेना इस सहेरमे.. मे कीसी ओर सहेरमे चली जाउगी.. जहा उनकी पहोंच नाहो.. बंध कर दुगी इस क्लीनीकको..

सृती : (गुस्सेसे देखते) कमीनी.. तो..? यहासे उनके डरसे भाग जाओगी..? (धीरेसे) क्लीनीक बंध करनी हे.. तो फीर क्लीनीक बंध करके क्या करोगी..? ये भी सोचा हे..?

भावीका : (थोडी परेसान होते) यार.. तो फीर मे क्या करु..? अब इतने पैसे आगये हे.. नही कमाना ओर पैसा.. मे कही दुर जाकर गरीब महीलाओका इलाज करके अब सीर्फ सेवा करुगी..

लखन : (जटसे बीचमे बोलते) हेय.. हेय.. हेय.. देवीओ.. अगर आप तीनो मुजे इजाजत देतो क्या इस केसको मे हेन्डल करु..? आपकी सुरक्षाकी पुरी गेरंटी मेरी..

भावीका : (अ‍ेक पल पुनम सृतीकी ओर आस्चर्यसे मुस्कुराते लखनकी ओर देखते) स्योर.. कहीये..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां भावु दीदी.. भाइ हेन्डल कर लेगे.. वीस्वास रखो..

भावीका : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. इनपे मुजे पुरा वीस्वास ओर भरोसा हे.. लखन कहीये..

लखन : (मुस्कुराते) सबसे पहेले तो आप अपना डीवोर्सका पेपर तैयार रखो.. फीर दोनोको रंगे हाथो पकडकर वही साइन लेलो.. उनके पास पावर हेतो क्या हुआ..? वो भी इजतदार लोग हे.. अगर वो कोइ धमकी की भासामे बात करे तो केह देना.. मेरे दो दोस्त ओर मेरे वकीलके पास भी इनका बेकअप हे.. अगर मुजे कुछ हुआ तो वो लोग इनको सोसीयल मीडीयापे सार्वजनीक करदेगे.. आपको कुछ नही कहेगे.. चुपचाप साइन करदेगे..

भावीका : (मुहपे हाथ रखते हसते) वाव.. ये बहुत बडीया आइडीया हे.. आइ केन डु इट..

पुनम : (मुस्कुराते अपनी बात रखते) दीदी.. अगर आपको सेवा ही करनी हेतो हमारा गांव आपका स्वागत करता हे.. वहा बडे भैया अ‍ेक बहुत बडी होस्पीटल.. ओर स्कुल बनवा रहे हे.. आप वही आकर रेह सकती हे ओर सेवा भी कर सकती हे.. क्युकी कुछ दीनोके बाद हम वही वापस रहेने जा रहे हे..

सृती : (उत्साहसे सामने देखते) हां भावु.. पुनोदी ठीक केह रही हे.. वहा तुजे कोइ खतरा नही हे.. ओर सुन.. जबतक होस्पीटल कंपलीट नही हो जाती तबतक तु मेरी क्लीनीकपे मेरे साथ बैठ सकती हे.. ओर तु कलसे ही अपने पेसन्टको वहीका अ‍ेड्रेस दे देना.. ओर कहेना अब मे वहा मीलुगी..

भावीका : (खुसीसे आंखमे आंसु आगये) यार तुम सब मेरे लीये कीतना कुछ कर रहे हो.. ठीक हे.. कही तो जाना था.. तो आपका गांव क्यु नही..? मे वहा आउगी..

पुनम : (सबकुछ पता था फीर भी मुस्कुराते) दीदी.. वहा आपके रेहेना इन्तजाम होजायेगा.. क्या आप हमारे साथ रहेना पसंद करोगी..? हमारी बहुत बडी हवेली हे..

भावीका : (आंसु पोछते मुस्कुराते) दीदी.. क्यु सर्मीन्दा कर रही हो.. आप लोग रोयल फेमीली हो.. तो हवेलीतो बडी ही होगी.. मेरा सौभाग्य हे.. जो आप मुजे अपने साथ रहेनेके लीये केह रही हो.. सृती.. क्या तुम भी वहा रहोगी..?

सृती : (मुस्कुराते) दोनो जगाहपे.. यहा भी तो क्लीनीक चलानी हे.. लेकीन तु फीकर मत कर.. वहा अ‍ेक लेठी डोक्टर भी हे.. ओर अ‍ेक लडकी भी आ रही हे.. नइ फ्रेसनर.. दो साल वही पढ रही हे.. जहा हमने डोक्टरकी डीग्री लीथी.. बस.. तेरी नीगरानीमे उसे भी तैयार करदे.. फीर तुम दोनो लेडीसका पुरा डीपार्टमेन्ट सम्हाल लेना..

पुनम : (मुस्कुराते) पहेले आप डीवोर्स लेलो.. फीर इन रसीदका कुछ करो.. बादमे अपने वकील चाचाको मीलना.. सब आसान रहेगा..

भावीका : (मुस्कुराते) यार.. उसे अकेले मीलनेमे डर लग रहा हे.. मीन्स.. थोडी नर्वसेस.. लखन.. क्या आप उनसे मीलने मेरे साथ आओगे..?

लखन : (हसते) देखीये मेडम.. आप जहा कहोगी वहा हम चलेगे.. लेकीन इसके लीये मेरी फीस होगी..

सृती : (जोरसे हसते लखनकी जांगपे चपत लागाते) भाइ.. कीतने कमीने हो आप.. इसे दो दो बार होटेलपे ले गये.. फीर भी फीस वसुल करोगे..? वहा फीस वसुल नही की क्या..? हें..हें..हें..

इतना सुनते ही भावीका अपना दोनो हाथ मुहपे रख लेती हे.. फीर अ‍ेकदम सरमसे पानी पानी होते सृतीकी ओर देखकर मुस्कुराने लगती हे.. उसे पता ही नही थाकी वो लखनसे दो बार होटेलमे मीली इस बारेमे सृती या पुनमको भी पता होगा.. उनके गाल सर्मसे लाल होगये..
 
सृती : (हसते) कमीनी देख क्या रही हे.. मत भुल पुनोदीको सब पता चल जाता हे.. हें..हें..हें..

भावीका : (हाथोमे मुह छुपाते) सोरी.. मुजे लगा..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. सरमाओ मत.. उस दीन भैया मुजसे सब बताकर ही आपके पास आये थे.. ये हमसे कुछ नही छीपाते..

भावीका : (अभी भी मुहपे हाथ थे धीरेसे सरमाते) दीदी.. तो क्या आप दोनोको बुरा नही लगा..? मतलब..

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. क्युकी हमे पता हे इनकी जींदगीमे कोन कोन ओरत या फीर लडकीया आयेगी.. ओर आप भी कोइ सामान्य ओरत नही हो.. हम मेसे ही अ‍ेक हो.. ओर वो सब आगे चलकर आपको सब पता चल जायेगा.. बस.. तीन चार दीन ओर इन्तजार कीजीये..

सृती : (मुस्कुराते) भावु.. तु फीकर मत कर.. हमे कोइ बुरा नही लगा.. बस.. थोडासा मजाक कर लीया.. लखन भैया तेरे साथ आयेगे.. जब जाना हो इस कोल कर देना.. (जोरोसे हसते) हां.. इसके लीये ये थोडी फीस वसुल करेगे.. तो तैयार रहेनां.. हें..हें..हें..

पुनम : (जोरसे हसते) सृतीदी.. इनकी ज्यादा टांगे मत खीचो वरना भावीकासे तो बादमे वसुल करेगे.. इनसे पहेले आपसे वसुल ना करले.. हें..हें..हें..

सृती : (भडकते) दी..दी.. क्यु इसे उक्सा रही हो.. ये तो सचमुच पागल हे.. आपको तो पता हेनां..?

लखन : (गरदनको दबोचते) अच्छा मे पागल हु.. अभी बताता हु..

पुनम : (जोरोसे हसते) क्यु..? उस दिन सरम नही आइ थी.. जो आप सबने इनको मेरे खीलाफ उक्साया था.. इन्होने सबके सामने ही मेरी कुटाइ करदी थी.. ओर आप सामने बैठकर सब मजे ले रही थी.. (लखनकी ओर इसारा करते) लखन भैया.. अच्छा मौका हे.. हो जाये.. हें..हें..हें..

सृती : (खडी होते भागनेकी कोसीस करते) नो लखन भैया.. नो.. नो प्लीज..

इनसे पहेले सृती जोरोसे हसते खडी होते भागनेकी कोसीस करती लखनने उसे हाथ पकडकर अपने उपर खीच लीया.. पुनम ओर भावीका जोरोसे हसते देखती रही.. तब लखन ओर सृती हाथ पाव चलाते अ‍ेक दुसरेके उपर हावी होनेकी कोसीस करने लगे.. तभी लखनने सृतीकी लंहेंगेका नाडा खीच लीया..



अ‍ैसी बाते सुनते लखनका हथीयार तो पहेलेसे ही जटके मार रहा था.. ओर पुनमने उसे मौका दे दीया तो लखन कैसे छोडदेता..? लखनने सृतीका लहेंगा खीच लीया तो सृती जोरोसे हसते लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करती रही.. ओर लखनने भी पेन्ट घुटनो तक करते अपना हथीयार नीकाल दीया..

जीसे देखकर भावीका बहुत ही सर्मसार होते टेडी नजरोसे देखते हसती रही.. तबतक लखनने सृतीको वही सोफेपे पटक दीया ओर उनके उपर छा गया.. तब सृतीकी चुतपे लखनका लंड दस्तक देते अंदर घुसनेकी कोसीस कर रहा था.. तभी सृती नो.. नो.. नो.. करते जोरोसे चीख पडी..



जो उनकी चीख लखनके मुहमे ही दब गइ.. क्युकी लखनके सांपने अपने बीलका रास्ता ढुंढ लीया था.. ओर बीलमे घुस चुका था.. तब लखन जोरोसे कमर हीलाते सृतीको चोदने लगा.. तो सृतीने लखनसे छुटनेकी कोसीस छोडदी.. ओर कामुक सीसकारीया करते लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती हे..



सृती भुल गइकी सामने भावीका ओर पुनम बैठे मजे ले रही हे.. उनकी कामाग्नी इतनी प्रजलीत होगइ की वो अपनी कमर उछालते बडी ही कामुक्तासे सीसकारीया करते लखनका साथ देने लगी.. जीसे देखते भावीका ओर पुनमकी चुतमे भी खुजली होने लगी.. ओर पानी छोडने लगी.. कुछ देर अ‍ैसे ही चुदाइ चलती रही..



सृती अ‍ेक बार जड चुकी थी.. दोनो ही इतने जोसो चुदाइ कर रहे थेकी जल्दी जडनेकी कगारपे पहोंच गये.. लखनने जोरोसे सृतीके होठोसे लीपलोक करलीया तो सृतीने भी लखनको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. ओर बडी आंखोसे लखनको देखते अपनी कमरको जटके देने लगी.. तब लखन भी कमरको जटकते जडने लगा..

सृती अपनी सांस दुरस्त करते लखनकी पीठको सहेलाने लगी.. जब जोस ठंडा हो गया तब उसे अहेसास हुआकी सामने पुनम ओर भावीका हसते दोनोके मजे ले रही हे.. तब सृती सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर लखनको अपने उपरसे हटाते चुतपे रुमाल रख दीया.. ओर सोफेसे जटसे खडी होगइ..

फीर अपना लहेंगा उठाकर दांत पीसते लखनको तीन चार मुके जड दीये.. ओर लहेंगा लेकर बाथरुममे भाग गइ.. तो पुनम ओर भावीका जोरोसे हसते उनको देखती रही.. तभी पुनमने भी हसते हुअ‍े लखनको बाथरुमकी ओर इसारा कीया तो लखन पुनमके होठोको चुमते बाथरुममे चला गया.. तब..

भावीका : (हसते धीरेसे) दीदी.. क्या लखन घरपे भी सभी बीवीओके साथ अ‍ैसे ही करते हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) अरे भावु.. पुछो ही मत.. भैया बडे ही कमीने हे.. अ‍ेक बार सबके सामने मेरी भी अ‍ैसी कुटाइ हो गइ थी.. सृतीके साथ ये दुसरी बार हे.. घरमे अ‍ैसे ही सब मस्ती मजाक चलते रहेता हे.. बस.. अ‍ेक बार आप आजाओ..

भावीका : (मुस्कुरते आस्चर्यसे देखते) मे आजाउ..? मतलब..? आपको सब पता हेनां..?

पुनम : (बातको सम्हालते) अरे कुछ नही.. बस अ‍ैसे ही मुहसे नीकल गया..

तधी इधरसे लखन तो रुमसे सृती फ्रेस होकर बहार आगये.. तो दोनो उनकी ओर देखने लगी.. तो लखनको देखते ही सृती कातील नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. जैसे ही लखन पास आया सृतीने फीरसे लखनकी पीठपे दो तीन मुके जड दीये.. तो लखनने सृतीको गोदमे उठालीया तो सृती जोरोसे हसने लगी.. फीर दोनो आकर सोफेपे अ‍ेक दुसरेसे सटकर बैठ गये.. तभी..

पुनम : (मुस्कुराते) तो दीदी.. अब तो हमारे गांव आ रही होनां..?

भावीका : (लखनकी ओर देखकर मुस्कुराते) हां.. अब तो आना ही पडेगा.. अब मेरा आसीयाना वही होगा.. ओर मे गांवके होस्पीटलके लीये कुछ ओर भी करुगी..

पुनम : (मुस्कुराते) तो फीर हम चले..? आप कल बेन्कका काम नीपटालो..

भावीका : (मुस्कुराते) दीदी.. थेन्क्स.. पता नही आपका सुक्रीया कैसे अदा करु.. मुजे तो पता ही नही थाकी मेरे पास इतनी दौलत हे.. ओर पता नही आगे क्या होगा.. (लखनकी ओर देखते) लखन.. आप कल मेरे साथ बेन्कपे आ रहे होनां..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. स्योर.. जब जाना हो कोल करदेनां..

भावीका : (मुस्कुराते) थेन्क्स..

सृती : (खडी होते जोरोसे हसते) तु फीकर मत कर.. तुजे सुक्रया अदा करनेकी जरुरत नही हे.. वो सब हम अपने पतीसे वसुल करवा लेगे.. हें..हें..हें..

कहतो भावीका फीरसे सर्मसार होगइ.. ओर वो हसते जुठा गुस्सा करते सृतीकी पीठमे मुका मारने लगी.. फीर पुनम ओर सृतीके गले लग गइ.. ओर आखीर लखनको गले मीली.. तब लखनने अचानक भावीकाको होठोपे चुम लीया.. तो भावीका सर्मसार होगइ.. लखनसे जटसे दुर हो गइ..
 
पुनम : (हसते) भाइ.. अब चलो भी.. वरना यही फीरसे सुरु होजाओगे.. बाय दीदी..

जब लखन पुनम सृती भी चले गये.. तो भावीकाने भी पेपरकी दोनो फाइल लेकर घरको ताला लगादीया.. ओर अपनी कलीनीकपे चली गइ.. वहा पेपर छुपाकर रखदीये.. वहीसे उसने अ‍ेक वकीलसे अ‍ेपोइटमेन्ट लेली.. फीर अपने घर चली गइ.. तो इधर घरकी ओर जाते पुनम कारमे..

पुनम : (सामने देखते थोडी गंभीर) भाइ.. मुजे आप दोनोसे कुछ बात करनी हे.. आप कारको कीसी आइसक्रीम पार्लरमे लेलो..

सृती : (सामने देखते) दीदी.. डीनरका टाइम भी होगया हे.. क्या हम घर जाकर रातमे बात करे..? सब सोजाये तब..

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. आप घरपे फोन करके बोलदो.. की भावीकाका काम अभी खतम नही हुआ.. आधा घंटा ओर लगेगा.. आप लोग डीनर करलो.. हम आकर कर लेगे..

सृती : (मुस्कुराते) अच्छा.. समज गइ.. बात थोडी गंभीर होगी.. मे फोन कर देती हु..

कहेते सृती घरपे फोन करके बता देती हे.. लखनने अ‍ेक प्राइवेट केबीन वाले पार्लरमे कार रोकदी.. ओर तीनो अंदर अ‍ेक प्राइवेट केबीनमे चले गये.. लखनने आइसक्रीम ओर्डर कीया.. ओर दो केजी घरके लीये पेक करनेको कहा.. जब आइसक्रीम आगइ तो लखन ओर सृती पुनमकी ओर देखने लगे..

पुनम : (सामने देखते) भाइ.. आप रजीया दीदीके बारेमे पुछ रहे थेनां.. इस बारेमे मुजे आप दोनोसे कुछ बात करनी हे..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) रजुदीदीके बारेमे..? अब नया क्या हुआ..?

पुनम : (मुस्कुराते) अरे हुआ कुछ नही.. सुनोतो सही.. बस.. उनके बारेमे थोडी जानकारी देनी थी..

लखन : सृतीदी.. वो जबसे गांवसे आइ हे तबसे कुछ उखडी उखडी लग रही हे.. अ‍ैसा लगता हे उनको कोइ परेसानी हे.. तो मेने पुनोको पुछा था.. दीदी.. बताइये..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. बात उन दीनोकी हे जब बापु भी जीन्दा थे.. रजुदीदी ओर दया बहेन हमेसा साथ रही हे.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करती हे.. सायद दुसरा वाला प्यार.. दोनोके बीच सुरुसे ही लेस्बीयन रीस्ता रहा हे.. हालाकी बडे भैया उनके तनकी जरुरतोको पुरा करते थे..

सृती : (सामने देखते) क्या..? सचमे..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. गांवमे अभी बदलाव हुआ हे.. लेकीन हमारे घरमे सुरुसे ही इस बदलाव आ चुका था.. दोनो अ‍ेक साथ ही भाइके साथ बीस्तर साजा करती थी.. तब कीसीको पता नही थाकी दया बहेन हमारी बहेन हे.. ओर तब ही दोनोने मीलकर कुछ वादे कीये थे..

सृती : (सामने देखते) कैसा वादा..?

पुनम : (मुस्कुराते) यहीे की दोनो हमेसा साथ रहेगी.. दोनो ही भाइसे अ‍ेक बच्चा चाहती थी.. तबही डीसाइड कीया थाकी जीस दीन दोनो प्रेगनेन्ट होजायेगी उस दीन दोनो सहेर जाकर अपनी अलग दुनीया बसायेगी.. ओर आज दयाबहेन भाइसे.. ओर रजुदी हमारे पतीसे प्रेगनेन्ट हो गइ हे..

सृती : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) तो क्या वे दोनो हमे छोड देगी..?

पुनम : (मुस्कुराते) सायद.. याद हे अ‍ेक बार मंजुमोमने कहा था.. कुछ आयेगी.. कुछ जायेगी.. ओर कुछ उपर चली जायेगी.. ओर वापस आयेगी.. बस.. इनमे जाने वाले ये दोनो भी सामील हे.. अभी हाल हीमे ये गांवमे रहेकर आइ हे.. तब दोनोको अपना वादा याद आगया.. लेकीन दोनो अ‍ेक उलजनमे फसी हे..

लखन : (मुस्कुराते) कैसी उलजन..?

पुनम : (हसते) जब दोनोने अ‍ेक दुसरेसे वादा कीयाथा तब उनको पता नही थाकी दोनोकी सादी इसी खानदानमे हो जायेगी.. क्युकी तब दोनो ही अपने आपको इस घरकी नौकरानी समजती थी.. ओर अब दयाबहेन हमारी बहेन हे ओर उसने भाइसे सादी करली.. ओर रजुने लखन भैयासे.. बस.. यही उलजनमे फसी हे.. की अब दोनो इस खानदानकी बहु हे तो कैसे घर छोडे..

लखन : (सामने देखते) दीदी.. तो फीर क्या करना चाहीये..?

पुनम : (मुस्कुराते) सबकुछ तैय हे.. फीर भी फैसला आपके उपर छोडती हु.. की आप क्या नीर्णय लेते हे..

लखन : (सामने देखते) दीदी.. आपने ओर मंजु मोमने मुजे पुरी छुट दी हे.. ओर कहा हेकी मुजे सबकी भावनाओका सन्मान करना चाहीये.. तो क्या भावनाओका मतलब सीर्फ सेक्स तक ही सीमीत हे..? तो फीर दयाभाभी ओर रजुओकी भावनाओका क्या..? मुजे लगता हे हमे उन दोनोकी भावनाओका भी सन्मान करना चाहीये..

पुनम : (आंख गीली करते हाथ थामते) भाइ.. आइ अ‍ेम प्राउड फोर यु.. बस.. मुजे आपसे यही अपेक्षा थी.. अब मेरा भाइ बीलकुल मेच्योर.. ओर परीपकव हो गया हे.. आप जो भी नीर्णय लोगे अच्छा ही लोगे..

सृती : (लखनकी ओर मुस्कुराते) हां वोतो हे..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. अगर उसे जाना हे तो हम उसे पुरी जीम्वेवारी ओर सन्मानके साथ भेजेगे..

लखन : (सामने देखते) लेकीन अब वो दोनो हमारे खानदानकी बहु भी हे.. तो हम अपनी जीम्वेवारीसे भाग भी नही सकते.. मे कोइ भी नीर्णय लेनेसे पहेले अ‍ेक बार मोमसे इस बारेमे बात करना चाहता हु..

सृती : (सामने देखते) कब जाना हे मोमके पास..?

पुनम : भाइ.. अब मोमके पास कुछ दीनोका ही समय बचा हे.. सायद अ‍ेक महीना.. या उनसे भी कम.. तो मे चाहती हुकी उनके आखरी दीनोमे मे उनके साथ टाइम स्पेन्ड करु.. ताकी कुछ ज्ञान.. ओर कुछ बाते उनसे समज सकु.. ओर अभी इन दोनोके बारेमे फीकर मत करो.. उन्होने कुछ ओर ही डीसाइड कीया हे..

लखन : (सामने देखते) ओर क्या..?

पुनम : (मुस्कुराते) यही की.. जबतक मोम हे तबतक वो घर नही छोडेगी.. उनको भी सबकुछ पता हे.. मोमके जानेके बाद भाइ दयाभाभीको प्यार करना कम करेगे तब ही वो दोनो जायेगी..

लखन : (सामने देखते) क्या अ‍ैसा कुछ होगा..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाइ.. मोम आने वाले वक्तके बारेमे सबकुछ जानती हे.. मोमने आपको अ‍ैसे ही जडी बुटी देकर छुट नही दी.. उनको सब पता हे.. मोमके जानेके बाद भाइ पुरी तराह टुट जायेगे.. ओर इन सब चीजोमे उनका इन्ट्ररेस्ट कम होजायेगा.. तब उनकी सभी बीवीओको सम्हालेगा कौन..? इसीलीये मोमने आपका चुनाव कीया हे..
 
लखन : (आइसक्रीम खाते) तो फीर तब भाइको सम्हालेगा कौन..? कोइ तो बीवी होगी..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. इसके लीये उनकी बीवी वहा पहोंच गइ हे.. अब भाइको वोही सम्हालेगी.. उनकी पहेली बीवी.. जो हर जन्ममे उनकी पहेली बीवी होती हे.. हमारी नीर्मला आंटी..

लखन : (सामने देखते) आपको कब जाना हे..?

पुनम : (सामने देखते) जीतनी जल्दी हो सके.. (सृतीकी ओर देखते) दीदी.. मे इनको कब मील सकती हु..?

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) डीलीवरीको काफी टाइम हो गया हे.. आप मील सकती हो..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. आज मे सृतीदीदी वाले रुममे सोउगी.. अपनी बाकी बीवीओको नीपटाकर आजाओ.. आज पुरी रात हमारी.. फीर पता नही हमे कब मीलनेका मौका मीलेगा..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? वहा आउगा तो नही मीलोगी..?

पुनम : (सरमाकर धीरेसे) अफकोर्स हम मीलेगे.. मे यहाकी बात कर रही हु.. वहा तो आप जीतनी बार मीलना चाहो हम मील सकते हे..

सृती : (सामने देखते) दीदी.. मे भी आना चाहती हु.. लेकीन कैसे.. मे आखरी दीनोमे उनके पास रहेना चाहती हु..

पुनम : (मुस्कुराते) मे आपको फोन करदुगी.. तब आजाना.. तीन चार दीन काफी होगा.. यहा हमारे पतीको भी तो सम्हालना हे..

सृती : (हसते) मे अकेली क्यु..? राधुदीदी.. रजुदी भी अभी हे.. ओर इनकी नीलुतो सदाबहार हेही.. हें..हें..हें.. ओर आजकल भाभी कोभी बहुत घुमाते हे.. वोभी तो हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) देखा..? ज्वेलेसी.. हें..हें..हें..

सृती : (जांगपे चपत लगाते) अरे.. मे क्यु जलुगी..? अब तो ये रोजका होगा.. जबसे मोमसे बात हुइ तबसे नही जलती.. मेनेतो भावीकाको भी अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. ओर पता नही ओर कीतनी आयेगी.. आप फीकर मत करो.. बस मजे करो.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) सृतीदी.. ध्यान रहे.. चंदाभाभीके सामने नीलुका जीक्र मत करना.. वो उनके बेटेकी बीवी हे.. ये बात वो बरदास्त नही करपायेगी.. जबतक धीरेन हे.. इसके बाद वोही नीलुको हमारे पतीको सम्हालनेके लीये कहेगी.. लेकीन अभी इनमे काफी टाइम हे.. अब चले..?

सृती : (मुस्कुराते) कीतना..?

पुनम : (मुस्कुराते) सायद ढाइ से तीन साल.. फीर नीलुको उनकी जोब मील जायेगी.. लेकीन अब चंदाभाभी यही रहेगी.. हमेसाके लीये.. ओर मे हवेलीपे.. आप आती जाती रहेगी..

फीर तीनो आइसक्रीम लेकर पेमेन्ट देकर बाते करते घरकी ओर नीकल गये.. घर जाकर देखा तो सब इनके इन्तजारमे बैठे थे.. कीसीने डीनर नही कीया था.. फीर सबलोग खाना खाने बैठ गये.. ओर भावीकाकी बाते करते रहे.. पुनमने कुछ बाते छोडकर बाकीका सब कुछ बता दीया..

चंदा ये सुनकर बहुत खुस होगइ की अब भावीका हमेसाके लीये गांवमे रहेते होस्पीटल सम्हालने वाली हे.. फीर सबलोग सोफेपे बैठकर आइसक्रीम खा रहे थे.. तब लखन जानबुजकर चंदासे सटकर बैठ गया.. ओर सबसे छुपकर उनको छेडता रहा.. तो चंदा बहुत ही सरमाकर मुस्कुराती रही..

दीन बीतने लगे.. इसी बीच टीना ओर लखन भी अ‍ेक कोफी शोपमे मीले.. उस दीन टीना बहुत ही सजधजके आइ थी.. दोनोकी पहेली डेट थी.. ओर कोफी पीते बाते करते रहे.. ओर बातोसे दोनोके बीच ओर घनीस्टा बढ गइ.. टीना बाते करते बार बार लखनका हाथ छु लेती थी.. ओर आखीर उसने लखनसे प्यारका इजहार करलीया..



ओर अगली बार दुबारा बहुत ही जल्द मीलनेका वादा करके दोनो जुदा हुअ‍े.. लखन भी रेग्युलर वसुधासे चेटपे बाते करने लगा.. ओर बात बहुत आगे बढी.. लखन अगली बार गांव आये तो वसुधाने उसे घरपे अकेले मीलने लीये कहा.. ओर दोनोके अफैरके बारेमे छुपानेके लीये कहा..

तो अ‍ेक दीन मुना अपनी क्लीनीकपे बैठा था.. बरखा अपनी छोटी बच्चीकी वजहसे अभी भी छुटीपे थी.. मुनाका फोन बज उठा.. देखा तो उनकी मामी गीताका फोन था.. आम तौरपे गीता कामके वक्त दोपहोरको ही फोन करती हे.. क्युकी तब उनका पती वीनोद घरसे बहार होता हे.. मुनाने फोन उठा लीया..

मुना : (मुस्कुराते धीरेसे) हेलो गीता डार्लींग.. बात करनेका टाइम मील गया..?

गीता : (सरमाकर धीरेसे) हां.. वो अभी अभी बहार गये हे.. तो सोचा पहेले आपसे बात करलु.. जानु.. मुजे आपसे कुछ कहेना हे..

मुना : (मुस्कुराते) हंम.. बोलो.. क्या कोइ खुसखबर तो नही..?

गीता : (आस्चर्यसे मुस्कुराते) हाय राम..? आपको कैसे पता..? कीसीने कुछ कहा हे क्या..?

मुना : (हसते) अरे नही यार.. मेतो बस अ‍ैसे ही केह रहा था.. बोलो.. क्या कहेना हे..?

गीता : (सरमाकर धीरेसे) जानु.. मे.. मे प्रेगनेन्ट हु.. आपसे.. मुजे पका यकीन हे ये हम दोनोका बच्चा हे.. क्युकी इतने साल होगये.. मे उनसे इतनी कोसीसोके बावजुद कभी नही हुइ..

मुना : (धीरेसे) तो क्या उनको सक नही होगा..?

गीता : (मुस्कुराते धीरेसे) नही.. सहेरसे वापस आनेके बाद मेने उसे कहाथा की हम सहेरमे पेपर सबमीट करवाने गये.. तब मे अ‍ेक वैदजीसे मीली थी.. ओर उसने मुजे जडी बुटी दीथी.. वो काम कर गइ.. तो मान गये... ओर बहुत खुस हुअ‍े.. हें..हें..हें.. यारो दोस्तोमे पार्टीया दे रहे हे.. हें..हें..हें..

मुना : (मुस्कुराते) क्या कोइ रीस्तेदार नही हे..? मतलब.. आपके मायके वाले.. या फीर आपके ससुरालके पक्षमे.. उनको पता हे..?

गीता : (आंख गीली करते) हे.. लेकीन उन लोगोने हमारे साथ रीस्ता खतम करलीया हे.. ओर ससुरालमे भी कीसीने हमसे रीस्ता नही रखा..

मुना : (धीरेसे) क्यु..? अ‍ेक बात पुछु..? आपके ससुरालमे कौन कौन हे..

गीता : (आंख गीली करते) बताउगी.. आपको सब कुछ बताउगी.. लेकीन फोनपे नही.. कल सुबह वो अहेमादाबाद कीसी कामसे जा रहे हे.. तो क्या आप कल मीलने आओगे..?

मुना : (मुस्कुराते) नेकी ओर पुछपुछ.. जरुर आउगा.. दोनो मीलकर सेलीब्रेट करेगे.. हें..हें..हें..

गीता : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) मुजे पता हे आपका सेलीब्रेट.. हालत खराब कर देते हो.. पता नही आपके हथीयारने मुजपे क्या जादु करदीया मेतो आपकी दीवानी होगइ.. कल मीलते हे.. तब आपको सब कुछ बतादुगी.. सायद मेरे दीलका बोज भी कुछ कम होजाये..

कहेते फोन रखदीया.. मुना उनकी पुरी कहानी बसंतीके मुहसे सुन चुका था.. वो जानना चाहता थाकी गीता उनको कीतनी सचाइ बताती हे.. वो गीताको प्रेगनेन्ट करके अपना बदला लेना चाहता था.. जो उसने लेलीया.. लेकीन बदलेके चकरमे वो गीताको प्यार भी करने लगा था..

इसी दौरान भावीकाने भी अपने डीवोर्स पेपर तैयार करवा लीये.. ओर उन्होने पुनमको फोन करके बता दीया.. तब पुनमने कुछ अ‍ैसा कहा जीसे सुनकर भावीका भी चौंक गइ.. ओर उसने आज ही क्लीनीकसे डीवोर्स पेपर अपने साथ लेलीया.. वो जानती थीकी उनका ससुरतो बहार ही घुमता रहेता हे.. घरपे सीर्फ मां बेटे ही होगे.. भावीका थोडी डर भी रही थी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९३

इसी दौरान भावीकाने भी अपने डीवोर्स पेपर तैयार करवा लीये.. ओर उन्होने पुनमको फोन करके बता दीया.. तब पुनमने कुछ अ‍ैसा कहा जीसे सुनकर भावीका भी चौंक गइ.. ओर उसने आज ही क्लीनीकसे डीवोर्स पेपर अपने साथ लेलीया.. वो जानती थीकी उनका ससुरतो बहार ही घुमता रहेता हे.. घरपे सीर्फ मां बेटे ही होगे.. भावीका थोडी डर भी रही थी.... अब आगे

तो आज उसने अपना काम करलेनेका फैसला करलीया था.. भावीका घरपे पहोंच गइ.. तीनो डीनर कर रहे थे.. तब धृवकी मम्मी भावीकासे छुपकर कामुक मुस्कानके साथ कातील नजरोसे देखते धृवको उपरकी मंजीलकी ओर आंखोसे इसारा करते धृवके अंदर उतेजना पैदा कर रही थी..

ताकी देर रात सृतीके सो जानेके बाद धृव उनकी धमाकेदार चुदाइ कर सके.. पुजाकी सादीसे पहेले जबसे उनका धृवके साथ रीलेशन हुआ हे तबसे धृवकी मम्मीको हर दिन ओर रातमे धृवसे चुदवानेकी आदत हो गइ थी.. तो धृवका लंड भी उनकी मम्मीकी हरकतसे पेन्टके अंदर ही जटके मारते रस टपका रहा था..

तो दुसरी ओर धृवको भी भावीकासे ज्यादा उनकी मम्मी ओर बहेनकी चुदाइ करना ज्यादा पसंद था.. यही कारणसे धृव भावीकासे भावनात्मक तरीकेसे दुर होगया था.. भावीका टेडी नजरोसे उन मां बेटेको इसारोमे बाते करते देख रही थी.. ओर हमेसाकी तराह आज भी देर रात दोनो मीलनेके लीये इसारे कर रहे थे..

धृवकी मम्मी धृवकी ओर कातील स्माइल कर रही थी.. ओर बीच बीचमे टेडी नजरसे भावीकाको देख लेती.. की वो उनकी ओर देखतो नही रही.. फीर घरके नोकर अपना काम समेटकर चले गये.. धृव रुममे आकर भावीकासे प्यार जताने लगा.. देखा तो भावीका अ‍ेक बडी सुटकेशमे अपने कपडे समेट रही थी..

धृव : (आस्चर्यसे देखते पीछेसे बाहोमे भरते) अरे डार्लींग.. कही जा रही हो क्या..?

भावीका : (अपने आपको बाहोसे छुडाते) धृव.. अभी दुर हटो.. मुजे अ‍ेक हप्तेके लीये बोम्बे मेडीकल कोन्फरन्स ओर ट्रेनींगके लीये जाना हे.. आज कोइ प्यार ब्यार नही.. मेरा पीरीयड चल रहा हे..

धृव : (थोडा परेसान होते) क्या यार तुम भी.. जब भी मुड होता हे मना कर देती हो.. अगर पीरीयड हेतो पीछे ही देदे.. मुजे कहा आगे करना हे..

भावीका : (थोडा गुस्से) यार अ‍ेक बार कहा तो तुजे समजमे नही आता क्या..? मुजे सुबह जल्दी जाना हे.. ७ बजेकी फ्लाइट हे.. तु सोजा.. जब वापस आउ तब जीतना प्यार करना हे कर लेना..

धृव : (थोडा चीडते) क्या यार.. आजकल देख रहा हु तेरे हजार नखरे हे.. भाडमे जाओ.. सोजा..

भावीका : (गुस्से देखते) नखरे तो होगे ही.. क्युकी अभी भी तु सुधरा नही हे.. कुछ दीन पहेले तु आरतीको लेकर गयाथानां होटेल..?

धृव : (थोडा जेंपते) न..न.. नही.. तुजे सब कैसे पता चला.. आरतीने कहा क्या..?

धृव : (गुस्सेसे) वो बेचारी क्यु कहेगी..? क्या मे अंधी हु..? सबुत चाहीये तुजे..? येले.. मेने होटेलके वेइटरको पैसे दीये थे.. क्युकी तुमपे सकतो मुजे कही दीनोसे था..

कहेते भावीकाने जुठ बोलकर अपना फोन नीकाला.. ओर अ‍ेक वीडीयो क्लीप चलाइ.. जीनमे धृव आरतीको चोद रहा था.. जीसे देखते ही धृवकी सीटीबीटी गुल हो गइ.. उसे भावीकाके गुस्सेका पता था.. धृव उसे माफी मांगने लगा.. ओर गीडगीडाने लगा..

भावीका : (गुस्सेसे) धृव.. तुम्हारी इन हरकतोकी वजहसे मे तंग आ चुकी हु.. पता नही कीस मनहुस घडीमे मेने तुमसे सादी की.. इतना तो पता थाकी तुम अयास हो.. लेकीन इतना अयास होगे ये पता नही था..

धृव : (गीडगीडाते) यार बस अ‍ेक बार माफ करदे मुजे.. आइ प्रोमीस.. आइन्दा अ‍ैसी गलती नही करुगा..

भावीका : (गुस्से देखते) अब इस बार गलतीकी तो तुजे छोडुगी भी नही.. अपने बापकी रेप्युटेशनका अच्छा फायदा उठा रहा हे तु.. लेकीन याद रखना मे तुमसे डरने वाली नही हु.. ना तुजसे ओर ना तेरे बापसे.. मेने ओल रेडी मेरी दो तीन दोस्तको ओर अ‍ेक वकीलको सबुतकी कोपीया देदी हे.. अगर कुछ कीया तो समजले गया तु कामसे..

धृव : (चोंकते) क्या बक रही हो..? मत भुलो अब तक तु मेरे बापकी वजहसे ही बचती आ रही हो.. वरना कबकी जेलमे सड रही होती..

भावीका : (गुस्सेसे तील मीलाते) धमकी दे रहा हे मुजे..? जा.. मेरे उपर केश करदे.. मे कर रही हु इलीगल काम.. मेभी देखती हु तुम दोनो बाप बेटे मेरा क्या बीगाड लेते हो.. अब मेने इलीगल काम करना ही छोड दीया हे.. ओर जीतना भी कीया हेनां.. वो तुम दोनो बाप बेटेकी करतुतका कीया हे.. ताकी तुम दोनोकी इजत बची रहे.. मेरे पास पुरा रीकोर्ड हे.. जाओ.. करदो केश.. मे भी देखती हु.. कैसे तुम दोनो भी फसते हो..

धृव : (थोडे ठंडा होते) यार तु क्यु बातका बतंगड बना रही हे..? हम तेरे साथ अ‍ैसा करेगे क्या..? तु सब डीलीट करदे.. आइन्दा अ‍ैसा कुछ नही होगा.. कसमसे..

भावीका : (सामने अदब लगाते) अच्छा..? ताकी तुम दोनोकी गुलाम रहु.. मेतो डीलीट कर दुगी.. लेकीन मेरी फ्रेन्ड ओर वकीलके पास हे उसे कैसे डीलीट करवाओगे..?

धृव : (सांत लहेजेमे) देख भावु.. हमे कोइ जगडा नही करना.. तुम उनको बोलदे सब मीटादे.. हम कुछ नही करेगे.. यार हम आरामसे बैठकर बात करते हेनां..

भावीका : (सामने देखते) वसे भी तुम बाप बेटे कुछ नही कर सकते.. बाकी हम इस बारेमे वापस आउ तब बात करेगे.. अभीतो मुजे सोना हे.. सुबह जल्दी जाना हे.. ओर तेरी जानकारीके लीये बतादु.. मे इस क्लीनीकको बंध कर रही हु..

धृव : (चोंकते) व्होट..? तो फीर तुम क्या करोगी..? तु अ‍ेक डोक्टर हे..

भावीका : (सख्तीसे) नही करनी कोइ डोक्टरी.. जीतना पैसा कमाना था कमालीये.. अब तेरी बीवी हु.. अ‍ैसे ही घर सम्हालुगी तो तु मुजे अ‍ैसै ही नही खीला सकता..?

धृव : (मुस्कुराते) अफकोर्स खीला सकता हु.. लेकीन अ‍ेक बार फीर ठंडे दीमागसे सोचलेना.. अब नो अयासी.. नो धमकी.. आइ अ‍ेम सोरी.. भुलजाओ सब.. तु क्लीनीक बंध मत कर..

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) ठीक हे.. इस बारेमे वापस आउगी तब सोचेगे.. तुजे इस बारतो माफ करती हु.. लेकीन याद रखीयो.. अब दुबारा पकडा गया तो सीधा डीवोर्स ही दे दुगी.. आइ बात समजमे..?

धृव : (गले लगते मुस्कुराते) येस डार्लींग.. सीधी गोली ही मार देना.. हें..हें..हें..

भावीका : (कातील मुस्कानसे) नौटंकीबाज.. हर बार अ‍ैसे माफी मांगकर छुट जाता हे.. चल जा.. पेकींग करनेदे.. सुबह जल्दी जाना हे..

कहा तो धृव राहतकी सांस लेते मुस्कुराते बहार नीकल गया.. भावीकाने जटसे दरवाजा बंध करने चली गइ.. देखा तो धृव होलमे टीवी देख रहा था.. भावीकाने धीरेसे दरवाजा बंध कीया ओर फोन घुमाने लगी.. उसने सीधा सृतीको फोन करदीया.. ओर उनसे कुछ बात करली..
 
भावीकाने अपने सभी कपडे ओर अपने सब डोक्युमेन्ट समेटके बेगमे भरलीये.. जब भी भावीकासे जगडा होता तब धृव कीसी भी दुसरे कमरेमे सो जाता.. ओर देर रात अपनी मम्मीके कमरेमे चला जाता.. वो धृवके बारेमे अच्छी तराह जानती थी की धृव कीतना लापरवाह हे.. ओर सायद धृव लापराह था भी..

क्युकी जब भावीका ओर नोकर चले जाते तब वो सीर्फ नीचेका मेइन डोर ही बंध करता.. ओर अपनी मांको लेकर उपरकी मंजीलपे चला जाता.. हर बार रुमका दरवाजा सीर्फ बंध ही करता.. लोक करनेकी जहेमत नही उठाता.. ओर उपरकी मंजीलको इस लीये चुनता ताकी वहा नोकरोको भी बीना इजाजत उपर जानेकी मंजुरी नही थी.. सीर्फ सफाइ करने ही जाते थे..

उसे पता थाकी उपरकी मंजीलपे उनके पापा ओर भावीका कभी नही आते.. ओर उनकी मां चुदाइके वक्त आवाज भी ज्यादा करती थी.. उनका यही कोन्फीडन्स उनपे भारी पडने वाला था.. भावीका देर रात कइ बार उन मां बेटेकी चुदाइ देखने चली जाती.. जब धृवसे उनकी बहेस होजाती या फीर उनके पीरीयड होते..

आज भावीकाने पुरी योजना बनाली थी.. कीसीको पता नही थाकी घरपे आते वक्त भी उन्होने अपनी कार बंगलोके बहार ही खडी रखी थी.. देर रात भावीकाने अपने डीवोर्स पेपर लेलीये.. ओर अपने पलुमे छुपाकर भावीकाने रुममे लाइट बंध करके अंधेरेमे धीरेसे दरवाजा खोला.. तो होलमे भी अंधेरा था..

वो अपना मोबाइल लेकर चुपकेसे दुसरे नीचेके कमरेमे देखने चली गइ.. जहा अक्सर जगडेके बाद धृव सोता था या फीर उपर अपनी मम्मीके पास चला जाता था.. तो नीचेके सभी कमरे भी खाली थे.. भावीकाके चहेरेपे कातील स्माइल आगइ.. वो दबे पांव धीरे धीरे सीडीया चडते उपरकी मंजीलमे जाने लगी.. जहा कइ बार धृव ओर उनकी सासको चुदाइ करते देख चुकी थी..

आखीर भावीका उन रुम तक पहोंच गइ.. तो कमरेमे हल्कीसी सीसकारीयोकी आवाज गुंज रही थी.. उसने जुककर की होलसे जांकके देखा.. सामने ही बेड दीखाइ दीया.. जीनपर धृव हाथके बल उचा होते जोरोसे अपनी मम्मीकी चुदाइ कर रहा था.. भावीकाने धीरेसे दरवाजेका हेन्डल घुमाया..



दरवाजा खुल गया.. ओर भावीका दबे पांव अंदर चली गइ.. दोनो चुदाइमे इतने मसगुल थेकी अंधेरेकी वजहसे दोनोको पता ही नही चलाकी भावीका रुममे आ चुकी हे.. ओर भावीकाने हल्कीसी रोसनीमे स्वीच बोर्ड ढुंढ लीया.. ओर उसने अचानक लाइट ओन करदी..

मां बेटे दोनोही नंगे थे.. उनकी मम्मी धृवकी कमरपे पैरोकी आंटी लगाकर नीचे लेटी थी.. ओर धृव पुरा लंड उनकी चुतमे घुसाके हाथके बल चुदाइकी पोजीसनमे था.. दोनो गभरकार चुदाइ रोकदी.. ओर आंखे फाडते दरवाजेकी ओर देखने लगे.. तो सामने भावीका दोनोकी ओर गुस्सेसे देख रही थी..

भावीका : (बेडके पास आते गुस्सेसे) तो ये सब चल रहा हे.. धृव.. तु कीतना नीच आदमी हे.. अपनी मम्मीको भी नही छोडा..

धृव : (जटसे अपना लंड नीकालते खडा होगया ओर अपनी चडी ढुंढने लगा) भावु.. वो.. वो.. अ‍ैसा कुछ नही हे.. सोरी..

धृवकी मम्मी : (डरके मारे अपने उपर चदर खीचते) बेटा.. वो.. सोरी.. हम बहेक गये थे.. गलती होगइ.. पर क्या करती..? तेरे पापा तो घरपे रहेते ही नही हे.. तुतो जानती हे..

भावीका : (हाथ उठाते) बस.. मुजे कुछ नही सुनना.. आपको क्या लगता हे..? की मुजे तुम दोनोके बारेमे पता नही चलेगा..? आप काम वासनामे इतनी अंधी हो गइहो.. की मेरे घरसे नीकलते ही तुम दोनो क्या क्या करते हो मुजे नही पता..? कभी सोचा हे इस बारेमे पापाको पता चला तो क्या होगा..?

इतना सुनते ही धृवकी मम्मी चादर हटाते अ‍ेक जटकेसे बेडके नीचे आगइ.. ओर रोते हुअ‍े भावीकाके पैर पकडकर गीडगीडाने लगी.. जीसे देखकर धृवने भी डरके मारे भावीकाके पैर पकडलीये.. दोनो भुल गयेकी उनके उपर अभी भी कोइ वस्त्र नही हे.. भावीका पीछे हट गइ..

भावीका : (हटते) मम्मीजी आप क्या कर रही हो..? आप सास हे मेरी.. पहेले कपडे पहेनलो..

धृवकी मम्मी : (रोते) बेटा हमे माफ करदे.. उनको कुछ मत बताना.. वरना हम कहीके नही रहेगे.. मेरे पास मरनेके अलावा कोइ रास्ता नही होगा..

धृव : (गीडगीडाते) हां भावु.. हम सब बरबाद हो जायेगे.. ये घर बीखर जायेगा.. प्लीज.. तु जो कहेगी हम करेगे..

धृवकी मम्मी : (रोते) हां बेटी.. मेरा सबकुछ तुजे दे दुगी.. तु बोल.. क्या जाहीये तुजे..? पैसा.. गहेने..? मेरे सब गहेने तुजे दे दुगी.. बस.. उनको पता नही चलना चाहीये..

जैसे ही भावीकाने ये सुना.. उसे लगाकी अब मामला लंबा खीचनेकी जरुरत नही हे.. जीतनी जल्दी हो सके काम खतम करके यहासे नीकल जाना चाहीये.. क्युकी ये बहुत बडी पहोंच वाले लोग थे.. ओर भावीकाको भी अपनी जानको लेकर अ‍ेक डर महेसुस होरहा था.. तभी..
 
भावीका : (सामने देखते) ठीक हे.. पहेले दोनो अपने कपडे पहेन लीजीये..

धृवकी मम्मी : (फटाफट अपने कपडे पहेनते) हां बेटा बोल.. क्या चाहीये तुजे..

भावीका : (सामने देखते) मम्मीजी.. मुजे आपकी अ‍ेक फुटी कोडी भी नही चाहीये.. बस.. मे इस दलदलसे नीकलना चाहती हु.. मुजे धृवसे डीवोर्स चाहीये..

धृवकी मम्मी : (डरते सामने देखते) बेटी.. ये तु क्या बोल रही हे.. हमारी इजत मीटीमे मील जायेगी.. हम लोगोको क्या कहेगे..?

भावीका : (सख्तीसे) आपको ये सब करते लोगोका डर नही लगा..? अगर कोइ पुछे तो केह देना दोनो पती पत्नीके बीच जगडा होगया था.. ओर आपसमे नही बनती थी.. तो डीवोर्स होगया..

धृव : (अपनी पेन्ट पहेनते) तुम पागल होगइ हो क्या..? ओर पापाको..? उसे हम क्या कहेगे..?

भावीका : (गुस्सेसे देखते) तुजे अलगसे समजाना पडेगा..? सुना नही मेने क्या कहा..? ओर तेरे पापाको क्या कहेना हे ये तेरी प्रोबलेम हे.. मेरी नही.. ओर फीकर मत करो.. उनके आनेसे पहेले ही मे यहासे चली जाउगी..

धृव : (सामने देखते) भावु.. तु ये ठीक नही कर रही हे..

भावीका : (गुस्सेसे पेपर नीकालते) कमीने तुतो ना बोल तो ही अच्छा हे.. अभी नीचे क्या कहाथा तुजे.. की आइन्दा कोइ अ‍ैसी गलती कीतो सीधे डीवोर्स दे दुगी.. ओर अभी दो घंटा भी नही हुआ.. ओर अपनी माके साथ मुह काला करने लगा.. तेरी बहेनके साथ भी तेरा रीलेशन हेनां..?

धृवकी मम्मी : (थोडी सख्तीसे) भावीका.. क्या बकवास कर रही हे..?

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) मम्मीजी आप नाही बोलो तो अच्छा हे.. ये सब आप भी जानती हेनां..? इसीलीये तो आपने अपने बेटेको अपनी जालमे फसाया हे.. जरा सोचो.. अगर उनके पतीको ये पता चला.. की दोनो बच्चे उनके नही हे.. तो पुजादीदीपे क्या बीतेगी..? इसीलीये कहेती हु.. इनको बोलो चुपचाप साइन करदे.. ताकी मे यहासे चली जाउ..

धृवकी मम्मी : (रोते गीडगीडाते) बेटी.. मेरी बेटीने क्या बीगाडा हे तेरा..? मत कर हम सबको बरबाद.. तेरे हाथ जोडती हु.. तु जो कहेगी करेगे हम.. धृव.. देख क्या रहा हे.. इसे साइन करदे..

धृव : (थोडा जीजकते) मम्मी.. वो.. वो पापा..

धृवकी मम्मी : (जोरोसे) कमीने उसे मे समजा दुगी.. पता नही कीस मनहुस घडीमे तु इसे ब्याह कर ले आया हे.. (भावीकाको) ओर क्या भरोसा करे की साइनके बाद तु अपना मुह बंध रखेगी..?

भावीका : (मुस्कुराते) मम्मीजी.. मे इस दुनीयामे अकेली हु.. मुजे भी मेरी जान प्यारी हे.. ओर मे आप सबको भी अच्छी तराह जानती हु.. इसीलीये मे मेरी जानकी खातीर मुह बंध रखुगी.. आपको मुजपे भरोसा करना ही होगा..

धृव : (सख्तीसे) अगर तुजे सब पता ही हेतो क्यु अपनी जान जोखीममे डाल रही हे..? अगर मेने साइन नही कीया तो..?

धृवकी मम्मी : (गुस्सेसे) हरामी.. क्यु इनके साथ बहेस कर रहा हे.. चुपचाप साइन करदे.. वरना बाप बेटे दोनोकी हेकडी नीकल जायेगी..

भावीका : (सामने देखते) रहेने दीजीये मम्मीजी.. इनको अपनी पोजीसनका बहुत पावर हेनां..? तो फीर ओर सबुत दीखाउ..? अ‍ेक महीने पहेले तुम दोनो तीन चार दीनके लीये कीसी रीस्तेदारसे मीलने गये थेनां..? पता हे वो रीस्तेदार कौन थी..? वो मेरी सहेली थी.. ओर हमारी सादीमे भी आइ थी.. अ‍ेबोर्सन करवाने गये थेनां दोनो..?

इतना सुनते ही धृवकी ओर उनकी मम्मीकी सीटीबीटी गुल हो गइ.. दोनो गभराते अ‍ेक दुसरेके मुहकी ओर आंखे फाडते देखने लगे.. धृवकी मम्मीको सब बाते समजमे आ गइकी की भावीका सबकुछ तैयारीया करके आइ हे.. अब उनके पास कोइ ओप्शन नही था.. तब..

धृवकी मम्मी : (अपना माथा पीटते) हे भगवान.. इस लडकीको सबकुछ पता हे.. कमीने तु जट साइन करदे..

भावीका : (मुस्कुराते) मम्मीजी.. अ‍ेक हप्ते पहेले आप ओर पापा इसी बातपे बहेस कर रहे थेनां..?

धृवकी मम्मी : (धृवको जोरोसे चीलाते) हरामी साइन करनां.. तुजे समजमे नही आता..?

कहा तो धृवने फटाफट साइन करदी.. ओर भावीकाने सब पेपर मुस्कुराते समेट लीया.. धृवकी मम्मी उसे आंखे फाडकर देखती रही.. जब साइन होगया तो भावीकाने दोनोको आस्वासन दीयाकी वो इस बारेमे कीसीको नही कहेगी.. ओर भावीका डीवोर्स पेपर लेकर फटाफट नीचे चली गइ..
 
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