Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 116 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

ओर कभी कभी तो लखनको लेकर देर रात दुसरे रुममे चली जाती जहा वो पहेली बार लखनसे मीली थी.. वहा लखन बीना नीचे उतरे सृतीकी खुब चुदाइ करता.. ओर हर बार सृतीकी चुतको भरके हरी भरी कर देता.. कइ बार सृती थक जाती तो वो लखनको चंदाके पास भेज देती..





जहा लखन चंदाकी भी जमकर चुदाइ कर लेता.. अब चंदाको वोही सुख मील रहा था जो कभी उनकी सादीसे पहेले देवायतसे मीलता था.. चंदाकी वजहसे लखनको नीलमको मीलनेका मौका नही मील रहा था.. क्युकी चंदा कइ बार उपरकी मंजीलपे लखनकी उनकी बीवीओकी चुदाइ देखने आजाती थी..

इसी दौरान अ‍ेक दीन वो ओर राधीका होस्टेलपे थे.. ओर अपने नीजी कमरेमे चुदाइ कर रहे थे.. तब लखनने राधीकाको रजीया ओर दयाके बारेमे बात की.. तो राधीका तुरंत लखनकी बात मान गइ.. ओर ये केह दीयाकी दोनोके आनेसे उनको भी अपने बच्चेको पालनेका टाइम मीलेगा.. ओर अब वो लखनके साथ ही हेतो उसे उन घरकी कोइ जरुरत नही हे..

इसी दौरान लखन टीना ओर वसुधासे चेट करते काफी आगे बढ चुका था.. टीनाके साथ तो दो बार ओर कोफी शापमे मील चुका था.. ओर बात चुंबन ओर हल्कीसी छेडखानी तक पहोंच गइ थी.. टीनाने लखनको डीनरके लीये अपने घरपे इनवाइट कीया.. लखन जानता था.. की जब वो टीनाके घर जायेगा तब चार पांच घंटे वही रहेना पडेगा..





उधर गांवमे भी अब भावीका घरके सदस्योसे काफी घुलमील गइ थी.. उनको पुनमका साथ बहुत अच्छा लगा.. वो बार बार धृवसे छुटकारा पानेकी वजहसे पुनमका आभार जता रही थी.. उसने पुनमसे लखनके बारेमे ओर परीवारके बारेमे काफी कुछ जान लीया.. ओर वो लखनकी ओर पुरी तराह प्रभावीत होगइ..

जब मंजुने उसे लखनके साथ मंदीरमे सादीका प्रस्ताव रखा.. तब वो मंजुसे लीपटकर खुब रोइ.. ओर उसने सादीका प्रस्ताव स्वीकार करलीया.. तो पुनम उसे अपनी सौतन कहेते छेडने लगी.. ओर ये बात उसने सृतीको फोन करके बताइ.. तो सृती भी बहुत खुस होगइ..

चारु ओर नीशा अ‍ेक साथ सुहागरात मनाते साथमे ही देवायतसे प्रेगनेन्ट हुइ थी.. ओर उनके प्रैगनन्सीका समय भी खतम होगया था.. तो अ‍ेक दीन सुबह चारुको लेबर पेइन हुआ.. ओर देवायत रश्मी चारुके साथ नीशाको भी लेकर सहेरमे सृतीकी क्लीनीकपे चला गया..

वहा सृतीने चारुकी डीलीवरी की.. ओर चारुने अ‍ेक सुंदर लडकेको जन्म दीया.. ओर उसी साम नीशाने भी अ‍ेक लडकीको जन्म दीया.. दोनो बहुत खुस थी.. लखन राधीका चंदा सबलोग वहा मौजुद रहे.. फीर दुसरे दीन सृतीने दोनोको छुटी देदी.. ओर देवायत सबको लेकर वापस गांव चला गया..

कुछ दीन बीते ही थे तब अ‍ेक दीन पुनमका फोन सृतीपे आगया.. ओर सबको गांव बुला लीया.. तो सृती सब समज गइ.. जब लखन आया तो उसने लखनसे बात करली.. तो लखन उसी वक्त जानेको तैयार होगया.. ओर बंगलेको ताला मारके सबको लेकर गांव चला गया..

वहा जाकर देखा तो आज हमेसाकी तरह मंजु बहार नही आइ.. लखन दैडकर अंदर चला गया.. तो मंजु बहुत ही थकी हुइ हालतमे सोफेपे बैठी थी.. लखन जाते ही उनसे लीपट गया.. ओर आंसु बहाने लगा.. मंजुने कसकर लखनको गले लगा लीया ओर उसे सांत करने लगी..

मंजुला : (आंख गीली करते) बस कर मेरे बच्चे.. रो मत.. मुजे खुसी खुसी हसके वीदा करना..

लखन : (रोते) मोम.. मत करो अ‍ैसी बाते.. हम सब आपके बीना कैसे जीयेगे..?

मंजुला : (मुस्कुराते आंसु पोछते) अरे लेकीन मे कहा जा रही हु..? मुजे वापस भीतो आना हे.. (भावनाके पेटकी ओर उंगली दीखाते) देख वहा.. मे वही हु.. जो ठीक पांच महीनेके बाद वापस आउगी.. तब मुजे खुब प्यार देना.. अपनी गोदीमे खीलाना..

जब लखन ओर मंजु गले लगते रोते हुअ‍े अ‍ेक दुसरेसे बाते कर रहे थे.. तब घरके सभी सदस्यो वही खडे रहेते दोनोकी बात सुनकर आंसु बहा रहे थे.. तभी मंजुकी नजर सृतीकी ओर गइ.. तो उसने अपनी बाहे फैलाइ.. ओर सृती भी रोते हुअ‍े दोडकर मंजुके दुसरी ओर गले लग गइ..

मंजुला : (सर सहेलाते) मेरी बच्ची.. रो मत.. मे अभी कहा जा रही हु..? बस.. आखरी दीनोमे तुम सबके साथ रहेना चाहती थी.. तो तुम सबको बुला लीया.. तु ओर पुनोतो मेरी बहादुर बच्चीया हो.. तुजे लता भावु ओर पुनोको ही मेरे लखनको सम्हालना हे.. ओर ये सबको भी.. देखो अब तो भावीकाभी आगइ हे..

फीर चंदा भी मंजुको मीलते खुब रोइ.. ओर इन सबसे बुरा हाल तो देवायतका था.. मंजुने उसे ना रोनेकी कसम खीलाइ थी.. तो वो सबके सामने रो भी नही सकता था.. वो बस.. अपनी ओफीसमे बैठकर सबसे छुपकर आंसु बहाते रहेता.. वो अंदरसे पुरी तराह टुट गया था..

आज लखन कही नही गया.. पुरा दीन मंजुके साथ ही रहा.. वो जब पुनमको उनके रुममे मीलने गया तब पुनम ओर लखन गले मीलकर खुब रोये.. पुनमने लखनको मंजुके ओर तीन दीन होनेकी बात कही.. मंजुने भी लखनको गांवमे दोस्तोको मीलनेके लीये कहा.. ओर देवायतको सम्हालनेके लीये कहा..





लेकीन लखनने मना कर दीया.. क्युकी वो इस हालतमे देवायतको नही सम्हाल पायेगा.. सामको देवायत आया तो सबलोग उनके सामने जबर दस्तीसे मुस्कुरानेका नाटक करते रहे.. लखन सबको हसानेकी कोसीस करता रहा.. सबलोग खानेके लीये बैठ गये.. पुनमने मंजुका हाथ पकड लीया.. ओर खानेकी टेबलकी ओर लेजाने लगी.. तो लखनने उसे अपनी गोदमे ही उठा लीया..

मंजुला : (जोरोसे हसते) अरे कमीने छोड मे चली जाउगी.. कही गीरा देगा.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) नही.. अब तीन दीन आपको गोदमे ही घुमाउगा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सामने देखते धीरेसे) अच्छा.. तो पुनोसे सब जानलीया.. चल कोइ बात नही..

फीर सबलोग खानेको बैठ गये.. लखन माहोलको हल्का बनानेकी कोसीस करते सबको हसाता रहा.. लखनकी इस समजदारीपे पुनम सृती ओर भावीका बहुत खुस होगइ.. भावीका यहा रहेते रेग्युलर मंजुको चेक करती थी.. फीर देवायतकी बाकीकी बीवीया भी मंजुको मीलने आती थी..

उस रात खानेके बाद सबलोग होलमे बैठे थे तब मंजुने दया ओर रजीयाको अपने पास बुलाया.. फीर दोनोको पचास पचास लाख ओर राधीकाके घरके साथ दोनोको राधीकाके साथ होस्टेल सम्हालने ओर उनमे भागीदारी भी दी.. जीसे सुनकर दया ओर रजीया फुट फुटकर रोने लगी..

दया : (रोते हुअ‍े) दीदी.. आपको ये सब.. हमे माफ करदो.. हम जाना नही चाहती.. आपको तो हम दोनोके बारेमे सब पता ही हे..

मंजुला : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) हां बेटा.. मेही सबकी मां हु.. तो तुम दोनोके दीलकी बात कैसे नही जानती..? तुम दोनो चीन्ता मत करो.. हम तुम दोनोको अपने परीवारसे थोडीना अलग कर रहे हे.. मेरा लखन तुम दोनोका खयाल अ‍ैसे ही रखेगा.. जैसे अभी रख रहा हे..

लखन : (मुस्कुराते) हां रजु.. हम सब अ‍ेक ही परीवार हे.. बस.. हमे आपकी भी भावनाओका खयाल रखना हे.. आप दोनोकी ओर हमारे बच्चेकी पुरी जीम्वेवारी हम नीभायेगे.. येतो सब अ‍ेक व्यव्सथाके भाग रुप हे.. तो तुम दोनो चीन्ता मत करो.. हमारे घरका दरवाजा हमेसा तुम दोनोके लीये खुला ही हे..

तब दया ओर रजीयाको पुरी तराह समजमे आ गयाकी उनके दीलकी बात मंजु ओर पुनमको पता चल गइ हे.. ओर पुनमने लखनको सबकुछ बता दीया हे.. ओर इस बातके लीये रजीया ओर दयाके दीलमे लखनके लीये इजत ओर बढ गइ.. ओर दयाने भी भवीस्यमे लखनको समर्पीत होनेकी ठानली..

फीर दो दीन बीत गये.. इन दो दीनमे ना लखन कही बहार गया ना देवायत खेतोपे.. भानुके माध्यमसे सरला ओर रमाको भी पता चला तो वोभी मंजुको मीलने आगइ.. देखा तो रमाका पेट भी काफी बढ गया था.. वो आते ही लखनको देखकर सरमा गइ.. ओर मुस्कुराने लगी..

आज देवायतकी सभी बीवीया सुबहसे ही मोजुद थी.. गांवमे भी कइ लोगोको सबकुछ पता चल गया था.. सबलोग मंजुके लीये प्रोर्थना कर रहे थे.. आज सुबहसे ही मंजु बीस्तरसे उठ नही पाइ.. उनको पता था आज उनकी इस हवेलीमे आखरी रात हे..

देवायत ओर लखन उनके दोनो ओर पास ही मंजुका हाथ थामते बैठे रहे.. देवायतकी आंखसे रुक रु्कके आंसु बेह रहे थे.. मंजुने उसे सम्माइल देकर नामे गरदन हीलाके आंसु बहानेको मना कीया.. देवायतकी सभी बीवीयाके साथ वसुधा ब्रीन्दा बसंती सबलोग मंजुके रुममे बैठे थे..

आज कीसीके गलेमे अ‍ेक नीवाला भी नही गया.. नीर्मलाकी तो बेटी थी.. वो सुबहसे ही मंजुके पैरके पास बैठते आंसु बहा रही थी.. कीसीको पता नही था.. लेकीन मंजुने सबको कीया हुआ वादा उसे आज भी याद था.. पुरा रुम लोगोसे भरा हुआ था.. सब लोग गुमसुम बैठे थे..

मंजुने अपने बेटे वीजयको याद कीया.. तो चंदा फौरन वीजयको लेकर आगइ.. मंजुने उनको देखतेही स्माइलकी.. ओर उनके सरपे हाथ घुकाया.. तो चंदा देवायत ओर नीर्मलाकी आंख गीली होगइ.. फीर लखनने मंजुका सर गोदमे लेकर उसे संतरेका ज्युस पीलाया..

तो मंजुने थोडासा पीया.. फीर बाकी बचा उसने लखन ओर वीजयको अपने हाथोसे पीलाया.. फीर लखनकी गोदमे ही सर रखते सो गइ.. मध्य रातके बाराह बजनेको आये थे.. सबलोग थके हुअ‍े थे.. ओर पता नही क्यु सबकी आंखे भारी होने लगी.. जैसे सबको नीद आ रही हो.. सबलोग अ‍ेक के बाद अ‍ेक धीरे धीरे आंख बंध करते नींदकी आगोसमे चले गये..
 
लखन देवायत भी बैठे बैठे जपकी लगाने लगे.. कीसीको पता नही थाकी ये सब मंजुकी मायाजाल थी.. सबलोग नींदकी आगोसमे चले गये.. कुछ ही देरके बाद सबको नींदमे ही सपनोमे अ‍ेक तेज प्रकाश बीन्द दीखने लगा.. सब लोगोके तन अ‍ेक फुलके माफीक हल्का होगया.. जैसे सबलोग हवामे तैर रहे हो..

सबको परम आंनदकी अनुभुती होने लगी.. जैसे संभोगके आखरी चरणमे होती हे.. गमंवमे भी सबलोगोको संभोगकी अनुभुती होने लगी.. ओर तेज बीन्दु धीरे धीरे बडा होता गया.. ओर उनके सबको अ‍ेक आकृती दीखाइ दी.. वोही मंजुकी आकृती.. जो कभी उन्होने पुनम सृती ओर लखनको दीखाइ थी.. सबलोग मंजुका ये रुप देखकर अचंभीत हो गये..





वोही सबकी जननी.. पीछले जन्मकी देवयानी.. मोहीनी.. अप्सरा ओर परीओकी रानी.. दस भुजाअ‍े.. पुर्ण नग्न स्वरुप.. फीर भी तनपे ढेर सारे गहेने.. अ‍ेक पल तो सभी लोग मंजुका ये रुप देखकर कामाग्नीमे जलने लगे.. वहा जीतनी भी ओरते ओर मर्द थे.. सब मंजुका ये रुप देखकर स्खलीत हो गये.. ओर स्खलीत होते ही सबकी तंद्ना टुट गइ..

सबलोग आंखे मलते अ‍ेक दुसरेकी ओर देखने लगे.. फीर सबका ध्यान मंजुकी ओर गया.. तोवो अभी भी आंख बंध करके लखनकी गोदमे हल्कीसी मुस्कानके साथ सो रही थी.. जैसे वो गहेरी नींदमे सो रही हो.. भावना अब भी सो रही थी.. फीर सब लोगोका ध्यान पुनमकी ओर गया..

देखा तो वो दरवाजेपे कंधा टीकाकर अपने हाथोमे चहेरा छुपाकर रो रही थी.. सृतीको कुछ आसंकाअ‍े हुइ.. ओर वो जटसे खडी होकर मंजुके हाथकी नब्स चेक करने लगी.. तब उनकी आंखोसे भी आंसु नीकल गये.. मंजु बीलकुल सांत हो चुकी थी.. वो जानेसे पहेले सबको अपना असली रुप दीखानेका वादा पुरा करके इस संसारको छोडकर भावनाके गर्भमे जा चुकी थी..





सृतीको आंसु बहाते देखकर सबलोग समज गये.. ओर देवायत लखन मंजुसे लीपटकर जोरोसे रोने लगे.. तो वहा सभी लेडीस समज गइकी मंजु जा चुकी हे.. ओर सबकी आंखोमे आंसु आ गये.. सब लोग फुटफुटके रोने लगे.. ओर इतनी जोरोसे रोनेकी आवाज गांवमे गुंजने लगी..

सबलोग नींदकी आगोससे जागकर हवेलीकी ओर दोडने लगे.. ओर देखते ही देखते पुरे गांव मे ये खबर फैल गइ.. सबलोग फोन करके अपने रीस्तेदारोको भी बताने लगे.. सुबह होते होते आजु बाजु सभी गांव वालो तक ये खबर पहोचं गइ.. की बडी ठाकुराइन नही रही.. सब लोगोने देवायतके गांवकी ओर रुख कीया..

लखनने अपने आपको सम्हाल लीया.. वो ओर भानु देवायतको सम्हाल रहा था.. तो पुनम सृती ओर चंदा नीर्मलाको सम्हाल रही थी.. लखनके दोस्तोने अंतीम यात्राकी व्यवस्थाकी.. मंजुको अ‍ेक दुल्हनकी तराह सादीके जोडेमे सजाया.. मांगमे सींदुर लगाया.. अ‍ैसा सजाया.. मानो वो अभी भी जींन्दा होकर खडी होजाये..

तबतक हवेलीके बहार आजु बाजुके कइ गांवसे सेंकडो लोगोकी भीड इकठी होगइ थी.. गांवके प्रतीस्ठीत राज घरानेकी बहु चली गइ थी.. तो कइ मीडीयाके लोग भी सब कवर करने आ गये.. तब गाव वालोको पता चलाकी देवायतकी गांवके बहार भी कीतनी बडी साख थी..

सब लोगोने मंजुलाका अंतीम दर्शन कीया.. सम्सान यात्रामे हजारो लोगोकी भीड थी.. ओर भीड भी क्युना हो..? क्युकी रीस्तोमे बदलावकी मुहीमकी वजहसे मंजु युवाओ ओर महीलाकी आइकोन बन चुकी थी.. ओर स्मसान यात्रामे ज्यादातर लोग युवा ही थे.. कइ युवाओका मीडीया कर्मी इन्टरव्यु भी ले रहे थे..

तब मीडीयाके माध्यमसे सबको पता चलाकी मंजु युवाओकी आइकोन क्यु थी.. नेशनल न्युजमे सब लाइव हो रहा था.. ओर साथमे इसमे इस बात मे डीबेट भी हो रही थी.. की मंजुने गांवमे वीधवा या त्यक्ता अ‍ेक भी महीला नही रहेनी चाहीये.. ओर इसके लीये रीस्तोमे बदलाव भी क्यु ना करना पडे..

पेनलमे कुछ पुराने खयालातके आलोचकके साथ यंग ओर प्रतीभासाली आधुनीक सोच वाले युवा भी भाग ले रहे थे.. उनमे पहेले बदलावके तैरपे उन हीमाचलके उन राजा रानीओका भी जीक्र कीया.. की वो लोग वास्वमे कौन थे.. फीर उन कीताके बारेमे भी बहुत चर्चा हुइ.. जीनका अ‍ेक्षाम्पल दीया जा रहा था.. ओर बात आगे बढते न्युजके माध्यामसे पुरे देशमे चर्चाका वीसय बन गया..

यहा स्मसान पहोचते ही कुछ वीधीओके बाद देवायत ओर लखनने मीलकर मंजुको मुखाग्नी दीया.. मुखाग्नी देते वक्त देवायत पुरी तराह टुट गया.. ओर वो जोरोसे रोने लगा.. तब भानु ओर कुछ दोस्तोने उन्हे सम्हाला.. इस कार्यमे साम ढल चुकी थी.. फीर सबलोग वापस आ गये..

ओर देवायतसे हाथ जोडकर लोग जाने लगे.. न्युज देखकर धृवको भी पता चला.. उसने देर रात लखनको फोन कीया.. ओर सुबह आनेकी बात कही.. तो लखन सतर्क होगया.. ओर उसने पुनमको ये बात बताइ.. तो पुनमने भावीकाको सुबह उपरकी मंजीलपे ही रहेनेकी सलाह दी..

ओर रातको ही भावीकाकी कारको वसुधाके बंगलेपे रखवा दीया.. सुबह होते ही सहेरसे कइ उद्योगपती पार्टनर.. दोस्त.. सबलोग अ‍ेक अ‍ेक करके सोक व्यक्त करने देवायतको मीलने आने लगे.. उनमे धृव धी देरसे आगया.. फीर लखनको मीलकर खाना खाकर चला गया.. उसने लखनसे ज्यादा बात नही की..

जब वो चला गया तब सृतीने भावीकाको नीचे बुला लीया.. जब जब देवायतके बीजनेस पार्टनर आते तब देवायत हर अ‍ेकको लखनका परीचय अपने छोटे भाइके रुपमे करवाता.. ओर कहेता अब सब बीजनेका काम यही देखेगा.. सात दीनमे मंजुका सब कार्य समाप्त करना था.. दीन बीतने लगे.. हर दीन देवायतके यहा लोग बैठनेके लीये आते जाते रहे..

इसी बीच सहेरमे भी धृव अपना सब कारोबार.. ओर प्रोपर्टीका काम समेटने लगा.. उनके पापा इतनी प्रोपर्टी ओर केश रकम छोड गये थे.. की धृवको कुछ करना ही नही था.. उन मा बेटेका गुजारा अ‍ैसे ही चल जाता.. पुजाके पतीने धृवको अपने बीजनेसमे साथ आनेकी पेसकस की..

ओर धृव सहेमत होगया.. क्युकी इसी बहाने धृवका टाइम पास भी हो जाता.. ओर पुजाके घरपे बार बार जानेका मौका भी मीलता.. ओर पुजाको मीलनेके साथ साथ उनकी मौसी यानीकी पुजाकी सासके साथ धनीस्टा बढानेका मौका भी मील गया.. वो पुजाको आज भी उतना प्यार करता था.. जीतना वो उनकी सादीसे पहेले करता था..

पुजा आज भी धृवको अपना पहेला पती मानती थी.. लेकीन कुछ बाते अ‍ैसी थी.. जो सीर्फ धृव ही जानता था.. जब धृवने सहेरकी प्रोपर्टी बेची तब खुब पैसे आये.. धृव पुरी तराह पुराने सहेरसे नाता तोडना चाहता था.. उसने अपना पुराना बीजनेस भी समेट लीया.. वो बस अपनी लाइफ मजेसे जीना चाहता था..

कुछ पैसा अपने जीजाकीके कारोबारमे इन्वेस्ट करके बाकी पैसोकी अच्छी व्यवस्था करदी ताकी हर महीने उनको पैसे मीलते रहे.. वो हमेसाके लीये अपने गांधीनगरके पास वाले बंगलोपे चला गया.. उसने अपने पापाके अंतीम कार्य तक ही सौक रखा.. जब अपनी मम्मीको लेकर अपने नये बंगलोपे चला गया तब दोनो मां बेटे फीरसे अ‍ेक होगये..

पहेले दीन पुजा भी साथ आइ थी.. ओर उसी दीन धृवने पहेली बार अ‍ेक ही बीस्तरमे अपनी मां ओर पुजाको बारी बारी खुब रगडके चोदा.. पहेलेतो मां बेटी अ‍ेक ही बीस्तरमे साथ थीतो थोडी हीच कीचाइ.. फीर लाज सरम त्यागकर दोनो धृवका साथ देने लगी.. दोनोने धृवका खुब साथ दीया..





तीनोने मीलकर फीरसे नये वादे कसमे खाते आगेकी योजना बनाइ.. पुजा अपनी मम्मीको अपनी सौतनके रुपमे अ‍ेक्सेप्ट करनेको राजी होगइ.. क्युकी उनको अपना परीवार भी सम्हालना था.. पुजाकी सास यानीकी उनकी मौसी भी पुजाको खुसी खुसी दो दो तीन तीन दिनके लीये मायके रहेने भेजती.

लेकीन क्यु भेजती वो पुजाको आज तक पता नही चला.. ओर अ‍ेक दीन फीर मौका मीलते ही पुजा अपने बच्चेको अपनी सांसके पास छोडकर फीरसे अकेली धृवके घर आगइ.. उस दीन पुजाने अपने हाथोसे अपनी मम्मीको दुल्हनके लीबासमे सजाया.. धृव पहेले ही दुर अ‍ेक मंदीरमे सबकुछ तैय करके आया था.. वहा उन्होने अपनी असली पहेचान छुपाइ..

ओर पंडीतको खुब तगडे पैसे दीये.. जीसे पंडीतने भी अपनी जुबा ओर आंख कान बंध कर लीये.. उसे तो ये भी नही पता थाकी जो ओरत ओर लडकेकी सादी करवा रहा हे वो उन मंत्रीकी बीवी बेटे हे जीन्होने हाल ही मे सुसाइड कीया था.. वोतो बस यही सोचता रहा.. की साथमे अ‍ेक जवान लडकी भी हे..





तो ये लडका इन लडकी को छोडकर इस मां जैसी ओरतसे क्यु सादी कर रहा हे..? धृव पुजा ओर उनकी मम्मी उस मंदीरके अंदर खडे थे.. पंडीतने धृव ओर उनकी मम्मीकी सात फेरे लेकर सादी करवाइ.. बस.. ये राज सीर्फ ये चारोके लोगोके बीच ही रहेने वाला था.. उस रात सुहागरातमे पुजाने दोनोको पुरा स्पेस दीया.. ओर अपनी मम्मीका बेड सजाकर अपने घर चली गइ..
 
धृवने उस रात वायाग्रा खाली.. ओर उनकी मम्मीको भी कामोतेजक गोली खीलाइ.. फीर पुरी रात फुलोसे सजाये नये कमरेमे वासनाका खेल तुफान बनके तांडव मचाता रहा.. अबतब की धृवकी मम्मीकी सारी कशर धृवने पुरी करदी.. सुबह होते होते धृवने उनकी मम्मीकी हर अ‍ेन्गलसे चुदाइ करली..





उनकी मम्मीका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोड दीया.. धृवने चुदाइ करते उनकी चाल तक बदलदी.. ओर वो साम तक आराम करती रही.. फीर तो दोनो मीया बीवीकी तराह रहेने लगे.. अब उनकी मम्मी धृवको अ‍ेक पतीकी हेसीयतसे रीस्पेक्टसे बुलाने लगी.. जब कभी कभी दोनो पुजाके घर जाते फीरसे मां बेटे हो जाते..

धृव ओर उनकी मम्मी दोहरी जींदगी जीने लगे.. तो दुसरी ओर पुजाको भी जब अपने भाइसे चुदवानेका मन होता.. वो दो तीन दीनके लीये बच्चेको लेकर मायके चली जाती.. ओर धृवकी पत्नी होनेका हक अदा करती.. तब रातमे धृव दोनो मां बेटीको अ‍ेक ही बीस्तरमे खुब रगड रगडके चोदता..





पुजा ओर उनकी मम्मीकी दीनमे भी कुटाइ हो जाती.. धृव उनकी मम्मीके सामने ही पुजाको चोद लेता.. या फीर पुजाके सामने उनकी मम्मीको.. अ‍ैसे ही अ‍ेक दीन पुजा तीन दीनके लीये अपने मायके आइ हुइ थी.. उस रात धृवने मां बेटीको खुब रगडके चोद लीया.. तीनो देर तक सोते रहे.. फीर धृव कंपलीट होकर अपने जीजाकी फेक्टरीपे चला गया..

फेक्टरीपे जानेसे पहेले रास्तेमे धृवने कीसीको अ‍ेक फोन कीया.. तो सामने धृवको कीसी भी बहाना बनाकर घरपे आनेको कहा.. फीर धृव फेक्टरीपे आगया.. दो पहोर तक उन्होने अपने जीजाजीका बीजनेसमे हाथ भी बटाया.. फीर दोनोने टीफीनसे साथमे खाना भी खाया.. उनके जीजाजीको तो सीर्फ कारोबारमे ही इट्रेस्ट था..

तभी धृवके जीजाके फोनपे उनकी मम्मीका फोन आया तो उनके जीजाजीने बात करली.. फीर धृवही कुछ बेन्कका काम सोंपते कहा.. (धृवके जीजाजीको सीर्फ जीजाजी ही लीखुगा.. ओर उनकी मम्मीको सीर्फ मौसी.. क्युकी इस कहानीमे उन दोनोका कुछ ज्यादा रोल नही हे.. सीर्फ आपके मंनोरंजनके लीये)

जीजाजी : (तीन चार चेक देते) धृव.. तुम ये जरा चेक बेन्कमे डाल देनां.. क्युकी आज वो ओफीसका आदमी नही आया हे.. ओर रास्तेसे मम्मीकी कुछ दवाइआ भी लेनी हे.. उसे घरपे देकर जाना..

धृव : (मनमे खुस होते) जीजु.. बेन्कमे तो आज बहुत रस होगा.. जापस आनेमे देर हो जायेगी..

जीजाजी : (मुस्कुराते रीक्वेस्ट करते) धृव प्लीज.. सीर्फ आजके दीन.. बहुत जरुरी हे.. मुजे दो पेमेन्ट भी डालना हे.. प्लीज.. फीर तु वहीसे घर चले जाना.. ओर कुछ काम नही हे.. क्युकी मुजे पार्टीको मीलने भी दुर जाना हे.. रातमे आनेमे भी देर हो जायेगी.. तु मम्मीको बोल देना वो डीनर अकेली करले.. मे देर रात घर जाउगा..

धृव : (मुस्कुराते) अरे जीजु.. आप अ‍ैसे रीक्वेस्ट मत करो.. दीजीये मे चला जाता हु.. फीर घर चला जाउगा.. क्युकी पुजा वहा हे तो दोनोको घुमाने भी लेजाना हे..

कहेते धृव चेक ओर दवाकी पर्ची लेकर नीकल गया.. धृवके नशीब भी अच्छे थे जो बेन्कमे ज्यादा रस नही था.. उन्होने चारो चेक बेन्कमे डाल दीये.. फीर मेडीकलसे उनकी मौसीकी दवाइ ओर अ‍ेक छोटा पेक लेकर उनके जीजाजीके घर चला गया.. जब दरवाजा खटखटाया.. तो कुछही देरमे दरवाजा खुल गया..

सामने उनकी मौसी.. यानीकी पुजाकी सास खडी थी.. धृवको देखत ही कामुक स्माइल करते साइडमे होगइ.. धृव बीना कुछ बोले बंगलेके अंदर चला गया.. तो उनकी मौसीने दरवाजा बंध करके लोक कर दीया.. फीर धृवकी ओर कामुक स्माइल करते अपने बेडरुमकी ओर जाने लगी..

धृव भी उनकी ओर कुटील मुस्कान करता हे.. फीर वो भी दवाइआ लेकर उनकी मौसीके पीछे बेडरुममे चला गया.. ओर धृवने बेडरुमका दरवाजा बंध करके लोक करदीया.. तभी उनकी मौसी धृवकी ओर जटसे जाने लगी.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये..





मौसी : (मुस्कुराते) आ गया दवाइआ लेकर..? वो कुछ बोला तो नही..?

धृव : (बाहोमे भीचकर होंठ चुमते) नही मौसी.. आज बहुत बीजी हे.. रातको देरसे आयेगे.. उसने कहा हे आप अकेले खाना खालेना.. लीजीये आपकी दवाइ.. क्या हुआ हे आपको..? येतो महेंगी भी नही हे.. सीर्फ बीस रुपीये लीये..

मौसी : (मुस्कुराते) अब तुमने फोन कीया था तो कुछ तो जुगाड करनाही था.. मुजे कुछ नही हुआ.. ये सब फालतुकी दवाइआ हे.. चल अब समय बरबाद मत कर.. क्या वो बडा वाला बलुन (कोन्डम) लाया हेनां..?

धृव : (मुस्कुराते गोदमे उठाकर बेडकी ओर चलते) मौसी.. उनके बीनातो आप मुजे हाथ भी नही लगाने देती.. दवाइके साथ पुरा पेकेटे लेकर आया हु.. तीन हे.. तो तीन राउन्ड तो पका ही समजो..

मौसी : (गलेमे बाहे डालकर मुस्कुराते) कमीने कैसे हाथ लगाने देती..? अभी भी मेरे पीरीयड आते हे.. कही उच नीच हो गइ तो..? मुजे तो इन कोन्डमपे भी भरोसा नही हे.. जबभी हम मीलते हे बादमे आइपील भी लेती हु.. पता नही हरीद्वारमे तुमने मुजे कैसे पटा लीया.. अगर कीसीको पता चल गया होता तो..? पहेलीबारमे तो मेरी तो हालत ही बीगाडदी थी..

धृव : (जोरोसे बाहोमे भीचते मुस्कुराते) क्या करु मौसी.. उस दीन तो आपको देखकर कंट्रोल ही नही करपाया.. आप हे ही इतनी खुबसुरत.. अ‍ेकदम परी लगती थी.. लव यु मौसी..

मौसी : (अपनी सारी नीकालते) हंम.. लव यु टु.. पता नही तुमने मुजपे क्या जादु करदीया हे.. अब तेरी आदत जो होगइ हे.. चल अब बाते ही करेगा.. की मुजे जनतकी सैर भी करवायेगा.. कमीने मुजे तो तुमने अपने वसमे ही करलीया.. चल अब सुरु होजा.. आज वो देरसे आयेगा तो तीन राउन्ड हो जायेगे.. जबसे तुमने फोन कीया तबसे नीचे खुजली हो रही हे..

फीर कुछ ही देरमे दोनो अ‍ेकदम नंगे थे.. धृवकी मौसी पीठके बल धृवकी कमरमे पैरोकी आंटी लगाकर लेटी हुइ थी.. ओर धृव उनकी मौसीको हाथके बल उचा होते जोरोसे चोद रहा था.. पुरे कमरेमे सीर्फ थप..थप.. ओर फच..फचकी आवाजे आ रही थी.. पुजाकी सास बहुत ही कामुक तरीकेसे धृवसे चुदवा रही थी..





धृवकी मौसी धृवसे नजरे चुराते इधर उधर मुह करते दर्दसे सीसकारीया नीकाल रही थी.. कुछही देरमे उनकी मौसीने धृवको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर अपनी कमर जोरोसे हीलाते धृवको लीपलोक करते कमरको जटकने लगी.. ओर धृवके लंडको भीगोते जडने लगी..

तो धृवभी लंडको अपनी मौसीकी चुतमे जडतक घुसा देता हे.. ओर अपनी कमरको जटके मारते कोन्डममे ही जड जाता हे.. फीर अपनी मौसीके सीनेपे ढेर होजाता हे.. तब उनकी मौसी धृवकी पीठ सहेलाते धृवको अपने तनसे चीपका लेती हे.. ओर अपने सासको दुरस्त करती हे..

मौसी : (सरमाकर मुस्कुराते) धृव.. तुम मुजे पहेले क्यु नही मीला..? कीतना अच्छा चोदता हे.. तुम लंबी रेसका घोडा हे.. मुजे अ‍ेक ही बारमे नीचोड लेता हे.. बस.. अ‍ैसे ही अपनी मौसीकी सेवा करता रहे..

जीस दीन धृव अपने पापाके अस्थी लेकर सबको हरीद्वार लेगया तब धृव उनकी मौसीका खयाल रखते कुछ ज्यादा ही उनके करीब आगया था.. तो उनकी मौसीको भी धृवका साथ अच्छे लगने लगा.. कही मंदीरमे दर्शन करने जाते तो धृव उनके पीछेही रहेता.. ओर बार बार उनका हाथ पकड लेता..

जब लोकल टेम्पो या रीक्षामे बैठते तो उनकी मौसी धृवके पास ही बैठती.. ओर कम जगहकी वजहसे धृव उनकी चुचीयोको छु लेता.. तब पुजाकी सांसको धृवका इरादा समजमे आगया.. इन खेलमे उनको भी मजा आने लगा.. ओर जवाबमे उनकी मौसी सरमाकर धृवकी ओर मुस्कुरा देती.. उनका बेटा तो पुजा ओर बच्चेको सम्हालनेमे ही लगा रहेता..

धृवकी मम्मी अभी भी थोडी सदमे मे थी.. अ‍ेक बार गंगा घमटपे स्नास करते उनकी मौसीका पैर फीसल गया.. ओर धृवने तेजीसे उनको पकड लीया.. धृवका अ‍ेक हाथ उनके बुब्सपे था.. लेकीन फीर भी वो पानीमे पुरी तराह भीग गइ.. उनकी सारी गीली होते उनके तनसे चीपक गइ.. ओर ट्रान्सपरन्ट सारीकी वजहसे उनके दोनो चुचे साफ दीखाइ देने लगे..

धृवकी मौसी बहुत ही सरमाइ.. साडी गीली होगइ तो वो वापस होटेलपे चेन्ज करने जाना चाहती थी.. ओर उनके जीजाजी ओर पुजाने धृवको रीक्वेस्ट करते उनके साथ होटेलपे भेज दीया.. बस.. यही दोनोके रीस्तेकी सुरुआत होगइ.. धृवने जाते वक्त बाते करते उनका हाथ थामे रखा.. ओर दोनो होटेलमे आगये..
 
मौसी : (सर्मसार होते) धृव.. जरा मुह उधर करलोनां.. मुजे चेन्ज करना हे..

धृव : (मुस्कुराते) ठीक हे मौसी.. आप चेन्ज करलो.. लेकीन वैसे भी सबकुछ दीख रहा हे.. मौसी आप वाकइ बहुत खुबसुरत लग रही हो.. जीतो चाहता हे मे आपसे ही सादी करलु.. हें..हें..हें..

मौसी : (सर्मसार होते हसते) धृवे अ‍ेक मारुगी.. मुजे पता हे तेरी नीयत ठीक नही हे.. भीडमे कैसे मुजसे चीपक जाता हे.. ओर हाथ पकडलेता हे.. मे मौसी हु तेरी.. अगर कीसीने देख लीया होता तो..?

धृव : (हींमत करते खडा होगया ओर पास आते) अ‍ैसे कैसे कीसीको पता चलता..? मौसी होतो क्या हुआ.. हेतो आप भी अ‍ेक औरत.. वोभी अकेली.. मौसी आप मुजे बहुत अच्छी लगती हो..

मौसी : (सरमाते अपने हाथोसे अपनी चुचीया छीपाते) नही धृव.. ये ठीक नही हे.. मे तुम्हारी मौसी हु.. प्लीज.. ये गलत हे.. अगर कीसीको पता चल गया तो हम दोनोकी बदनामी होगी..

धृव : (पीछेसे बाहोमे भरते चुचीया मसलते कानमे) नही मौसी कुछ गलत नही हे.. यकीन मानो कीसीको पता नही चलेगा.. मुजे पता हे जबसे मौसाजी नही रहे तबसे आप प्यासी हो.. तो फीर क्यु अपनी जवानी बरबाद कर रही हो..? ये भांजा कीस दीन आपके काम आयेगा.. सीर्फ इतना सोचो आप अ‍ेक ओरत हे.. ओर मे अ‍ेक मर्द.. आपकी सेवा करना मेरा धर्म हे..

मौसी : (गरम होते) धृ..व.. मत कर अ‍ैसी बाते.. अगर कीसीको पता चल गया तो मे कहीकी नही रहुगी..

धृव : (पीछेसे गलेको चुमते) मौसी.. ये राज सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगा.. आप बहुत खुबसुरत हो.. मत रोको मुजे.. कीसीको पता नही चलेगा.. मुजे आप बहुत अच्छी लगती हो.. आज सबकुछ होजाने दो.. मे वादा करता हु जींदगीभर आपकी सेवा करता रहुगा..

कहेते धृव उनके गले ओर गालको चुमते उनके दोनो उरोजोको थाम लेता हे.. ओर मसलने लगता हे.. तो उनकी मौसी भी इतने सालोके बाद कीसी मर्दके हाथ लगानेसे मदहोस होने लगी.. ओर वो जटसे पलटकर धृवकी बाहोमे समा गइ.. कुछ ही देरमे दोनो अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पी रहे थे..

धृवकी मौसीको पता भी नही चलाकी धृवने कब उसे पुरी तराह नंगी करदी थी.. धृवने बडी ही सावधानीसे उनकी मौसीको बेडपे लीटा दीया.. ओर उनके उपर छागया.. दोनो अभी भी अ‍ेक दोनोके होठोको चुम रहे थे.. ओर धृवका लंड अपनी मौसीकी चुतपे दस्तक देते बीलमे धुसनेका रास्ता ढुंढ रहा था..

ओर आखीर वो रास्ता ढुंढकर अंदर घुसनेमे कामयाब हो गया.. उनकी मौसीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर आंखमे आसु आगये.. धृवने उसे पुरी तराह अपनी बाहोमे भीचते अपने कब्जेमे लेलीया था.. मौसी धृवसे नजरे चुराते इधर उधर मुह करते धृवसे नजरे चुरा रही थी.. ओर धृव होले होले अपनी कमर हीलाते अपनी मौसीकी चुदाइ करने लगा..





उनकी मौसी इतने दीनोके बाद चुद रही थी.. तो कुछही देरमे उसने धृवको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर कमरको जटके देते जडने लगी.. इनके बाद धृव हाथके बल उचा होगया.. ओर जोरोसे कमर हीलाते अपनी मौसीकी धमासान चुदाइ करने लगा..

उनकी मौसीकी कामुक सीसकारीया होटेलके कमरेमे गुंजने लगी.. अब वो भी खुलकर धृवका साथ देने लगी.. तब कुछ ही देरमे धृव उनकी मौसीसे चीपक गया.. ओर लीपलोक करलीया.. तो उनकी मौसी समज गइ.. ओर उसने धृवको जोरोसे धका मारते अपने उपरसे हटा दीया.. तो लंड बहार नीकल गया..

धृव उनकी मौसीकी ओर देखता ही रेह गया.. लेकीन तभी उनकी मौसी जटसे बेडपे बैठ गइ.. ओर धृवका लंड अपनी मुठीमे थामते जोरोसे आगे पीछे करते हीलाने लगी.. तभी धृवके लंडसे पीचकारीया छुटते उनकी मौसीके मुहको भीगोने लगी.. जब धृव छुट गया तो उनकी मौसी बाथरुममे भाग गइ..

फीर मौसी ओर धृवने बारी बारी सावर लीया.. दोनो तैयारहोते कंपलीट होगये.. तो दोनो अ‍ेक बार फीर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर होठ चुम लीये.. फीर रुमको ताला मारके बहार आगये.. धृवकी मौसी सर्मसार होते धृवसे लज्जा रही थी.. ओर धृवकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी.. होटेलसे बहार नीकलते दोनोने ओटो पकडलीया.. तब ओटोमे..

धृव : (धीरेसे कानमे फुसफुसाते) मौसी.. आपने अ‍ैसा क्यु कीया..?

मौसी : (सरमाते धीरेसे) तो क्या करती..? धृव.. मुजे अभी भी पीरीयड आ रहा हे.. अगर कुछ बच्चा ठहेर गया तो..? मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहेती..

धृव : (हाथ थामते) मौसी कैसा लगा..? आपको मजा तो आयानां..?

मौसी : (सर्मसार होते) मुजे नही पता.. तुम बहुत बदमास हो.. आज तुमने मुजे गंदी करदी..

धृव : (मुस्कुराते) अरे.. बताओनां..?

मौसी : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. अच्छा लगा.. बहुत मजा आया..

धृव : (मुस्कुराते) तो क्या अब हम दुबारा मील सकते हे..? घरपे..

मौसी : (सरमाकर मुस्कुराते) वहा खतरा हे.. पुजा घरपे ही होती हे..

धृव : (मुस्कुराते) अब तो हम यही रहेने आ गये हे.. तो पुजा मेरे घरपे आती जाती रहेगी.. तब वो नही होगी.. तबतो मील सकते हेनां..?

मौसी : (मुस्कुराते) हंम.. लेकीन दो पहोरके समय.. तेरा जीजाभी फेक्टरीपे होगा.. तब आजाना.. ओर हां.. अब आओतो कोन्डम लेकर ही आना.. ओर साथमे अ‍ेक आइपीलकी स्ट्रीप भी लेआना.. इनके बीना मे तुजे हाथ भी नही लगाने दुगी.. ओर प्रोमीस कर.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगी..

वादे कसमे खाते दोनो वापस घाटपे चले गये.. फीर वहा पुजा पाठ हुइ.. ओर तीन दीन सबलोग बहुत घुमे.. लेकीन अब धृव ओर उनकी मौसीके बीच रीस्ता बदल चुका था.. अब उनकी मौसी ज्यादातर धृवके साथ ही रहेती.. ओर मौका मीलते ही वो खुद धृवका हाथ थाम लेती.. फीर सबलोग वापस सहेर आगये..

वापस आनेके बादतो धृव ओर उनकी मौसीके बीच रीस्ता ही बदल गया.. दोनो अ‍ेक प्रेमी हो गये.. बादमे तो धृव उनकी मौसीकी कइ बार चुदाइ कर चुका था.. अब तो धृवकी मौसीको भी धृवसे चुदवानेकी आदत होचुकी थी.. पुजा ओर धृवकी मम्मीको आज भी पता नही चला.. की धृव ओर उनकी मौसीके बीच नाजायज रीस्ता पल रहा हे.. ओर धृवकी मौसीको भी धृवने पता नही चलने दीयाकी उनका अपनी बहेन ओर मम्मीके साथ नाजायज रीस्ता हे..

इधर गांवमे भी सबकी हाजरीकी वजहसे लखन बीना चुदाइ काम करता रहा.. जीनकी वजहसे उसे नीचे दर्द होने लगा.. पुनम लखनकी तकलीफ समज गइ.. हवेलीपे बहुत सारे लोग थे.. उनमे गांवकी ओरते भी थी.. पुनमने रश्मीसे उनके घरकी चाबी लेली.. फीर सृती ओर राधीकाको लेकर रश्मीके घर चली गइ..

वहा उसने लखनकी तकलीफके बारेमे दोनोसे बातकी.. तो सृतीने फोन करके लखनको फौरन अकेले रश्मीके घर बुला लीया.. जैसे ही लखन आया सृतीने दरवाजा लोक करलीया.. ओर लखनको लेकर बेडरुममे चली गइ.. लखनने अंदर जाके देखा तो पुनम ओर राधीका पुरी तराह नंगी होकर बेडपे लेटी थी..

लखन : (मायुस होते धीरेसे) दीदी.. ये सब..? अभी..?

पुनम : (सामने देखते) भाइ.. कुछ मत बोलो.. मुजे आपकी तकलीफके बारेमे पता हे.. मोमने भी मुजसे कहा हे.. चाहे कुछ भी होजाये.. कैसी भी परीस्थीती हो.. आपके अंदरके कामको जगाये रखना हे.. बस.. आप सुरु होजाओ.. ओर हां.. अब इतनी तकलीफ सहेनीकी जरुरत नही हे.. जो होनाथा होगया.. आपको तकलीफ देखकर मोम कोभी अच्छा नही लगेगा.. आप यही समजलो आपकी ओरसे यही मोमको सची श्रधांजली हे.. आजाओ सृतीदी.. आप भी लेट जाओ..





उस दीन लखनने तीनोको बीना हथीयार बार नीकाले दो दो बार चोद लीया.. तब लखनको नीचे कुछ राहत महेसुस हुइ.. फीर चारोने वही बाथ लेलीया.. तो लखनने अ‍ेक बार सृतीको वही खडे खडे चोद लीया.. तो पुनम राधीका हसने लगी.. फीर पहेले लखन चला गया.. ओर कुछ देरके बाद वो तीनो भी घर आगइ..

नीर्मला ओर चंदा ज्यादातर साथ ही रहेती.. इसी दौरान नीर्मलाने नोटीस कीयाकी अब चंदा बीलकुल ठीक लग रही थी.. वो पहेले जैसे ही सब नोर्मल व्यवहार करने लगी थी.. लेकीन जब वो लखनसे बात करती तब अ‍ेक बीवीकी तराह बहुत ही रीस्पेक्टसे बात करती.. जीसे देखकर नीर्मला बहुत कुछ समज गइ.. तब मोका मीलते ही..
 
नीर्मला : (मुस्कुराते) चंदा.. आजकल तुम बहुत खुस लग रही हो.. क्या लखनके घर इतना अच्छा लगता हे तुजे..? तुमतो बीलकुल ठीक होगइ हो..

चंदा : (मुस्कुराते) हां दीदी.. मे लखनके साथ बहुत खुस हु.. मुजे पता हे आप क्या जानना चाहती हे.. मे घुमा फीराके बात नही करुगी.. आपको सबकुछ सच बता दुगी.. वही हुआ जो हमारी मंजु चाहती थी..

नीर्मला : (मुस्कुराते धीरेसे) तो क्या तुमने लखनको.. आइ मी..न..

चंदा : (मुस्कुराते सामने देखते धीरेसे) हां दीदी.. मेने लखनको पुरी तराह अपनालीया हे.. पता नही क्यु.. मे देवुकी बीवी हु.. फीर भी मुजे अनदेखा कीया जाता था.. ओर लखन मेरा पती नही हे.. फीर भी पतीका हर फर्ज पुरा करते मुजे वो सुख दे रहा हे जो कभी मुजे देवुसे नही मीला.. इसीलीये अब मेने लखनको ही अपना सबकुछ मानलीया हे.. मनसे पती भी..

नीर्मला : (मुस्कुराते) चलो अच्छा हुआ.. कमसे कम तुम खुस तो हो.. इसीलीये मंजुने तुमको देवुसे अलग करदीया था.. ताकी तुजे जींदगीभर अ‍ेक पतीका प्यार मीलता रहे..

चंदा : (सामने देखते) तो क्या आपको पहेलेसे ही सब पता था..?

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां मेरी बच्ची.. मंजुने मुजे सबकुछ बता दीया था.. जब तुम्हारी धिरेनकी वजहसे मानसीक हालत खराब हो गइथी.. तब ही पता थाकी तु सीर्फ लखनसे ही ठीक होगी.. ओर जींदगी भर लखनके साथ ही रहोगी.. आज तुम बीलकुल ठीक हो गइ हो.. अब तेरा असली पती सीर्फ लखन ही हे.. बल्की अब देवुकी सभी बीवीयोको लखन ही सम्हालेगा..

चंदा : (मुस्कुराते) आइ नो दीदी.. वो इतने सक्षम हेकी हम सभीको सम्हाल सकते हे.. मेने भी तैय करलीया हे.. अब पुरी लाइफ मे लखनकी बीवी बनकर रहुगी.. ओर जरुरत हुइ तो उनके बच्चे भी पैदा करुगी.. कमसे कम हम दोनोकी अ‍ेक नीशानी..

नीर्मला : (मुस्कुराते) जरुर मेरी बच्ची.. मे तेरे साथ हु.. तुजे सायद पता नही होगा लखन सचमे मंजुका बेटा हे.. सीर्फ लखन ही नही.. हमारी पुनो ओर सृती भी..

चंदा : (मुस्कुराते) यस दीदी.. पुनोदीने मुजे सबुकछ बता दीया हे.. अब हवेलीकी रानी हमारी पुनो ही हे..

वाकइ अब हवेलीका सब वहीवट पुनम देखने लगी थी.. वो हर कार्य नीर्मला सरला ओर चंदाको पुछकर करती थी.. भानुने खेतो ओर गोडाउनका काम सम्हाल लीया था.. अ‍ेक सुबह रमेश भी सहेरसे देवायतसे मंजुका सौक मनाने आगया.. जया अपनी प्रेगनन्सीकी वजहसे नही आपाइ..

रमेशको देखते ही बंसी थोडा वीचलीत होगया.. उनको रमेशके उपर गुस्सा आने लगा.. लेकीन कुछ नही बोला ओर वहासे दुर चला गया.. सरला ओर रमा भी इतने दीनोसे यहा थी.. रमा काममे चंपा काकीका हाथ बटाती.. ओर सरला नीर्मला चंदाके साथ ही बैठी रहेती.. ओर आखीर वो दीन भी आगया..

आज हवेलीपे मंजुका अंतीम कार्य था.. मंजुला सबकी आइकोन बन चुकी थी इसीलीये देवायतने उनका अंतीम कार्य अ‍ेक उत्सवकी तराह मनाया.. लखनने पींडदान दीया.. तब सबकी आंखे नम थी.. देवायतने पुरे गांव ओर आजु बाजुके पंचायतके सदस्योको भी न्योता दीया था..

जैसे ही कार्य खतम हुआ तो सबके लीये भोजन हुआ.. ओर सब भोजन करके अपने अपने घर जाने लगे.. अब सीर्फ देवायतकी सभी बीवीया.. लखनके दोस्तकी फेमीलीके लोग.. रमा सरला ओर घरके सदस्य ही रहे.. देवायत नीर्मलासे लीपटकर खुब रोया.. देवायतकी सभी बीवीओने महेसुस कीयाकी देवायत मंजुके जानेकी वजहसे टुट गया हे..

भानु ओर लखन उसे सांत करते रहे.. सब ये कहेकर उसे समजाते रहेकी मंजु कही नही गइ.. अब वो भावनकी कोखमे पल रही हे.. सीर्फ पांच महीनेका इन्तजार करलो.. फीर मंजु वापस हवेलीमे आजायेगी.. बहुत लोग ये सुनकर राहत महेसुस करने लगे.. की चलो.. पांच महीनेके बाद खुसीया फीरसे लोटेगी..

तो ये सब सुनकर भावना बहुत ही सरमाइ.. रातके खानेके वक्त चारु ओर रश्मीने पंचायतका सहेरका कुछ काम लखनको दीया.. तो देवायतने भी लखनको अब वापस काम सम्हालने कहा.. क्युकी अब पुनम ओर उनकी बच्ची हमेसाके लीये यही रहेने वाली थी.. खानेके बाद भानु सरला ओर रमाको लेकर चला गया..

चारु नीशा वंदना रश्मी ओर वसुधा भी अपने घर चले गये.. लखनके दोस्तकी फेमीली भी चली गइ.. उस रात पहेली बार नीर्मला देवायतके बेडरुममे बीना जीजक चली गइ.. साथमे लता भी चली गइ.. इतने दीनो लखन यहा था.. फीर भी अ‍ेक बार भी उसने लताकी ओर नही देखा.. तो लता पुरी तराह टुट गइ..

देवायत सोते हुअ‍े भी मंजुके बारेमे सोचता रहा.. ओर उनको याद करते आंसु बहाता रहा.. नीर्मलाने उसे रातमे भी अपनी बाहोमे लेकर खुब समजाया.. तब देर रात सोया.. तो दुसरी ओर आज पुनम सृती राधीका भी लखनको अपने रुममे लेगइ.. ओर लखनने तीनोको खुब पेला..

चंदा वीजयको लेकर अलग रुममे सो गइ.. अब उनका यहा जी नही लगता था.. तो दुसरी ओर जबसे रजीया यहा आइ थी तबसे दया उनको लेकर अपने पुराने रुममे लेकर चली जाती.. ओर दोनो आज भी लेस्बीयनका खेल खेलती.. ओर आगेकी योजनापे चर्चा करती..

दुसरे दीन लखन सहेर जानेको तैयार होगया.. उसने कहा तो तीन चार दीनके बाद काम नीपटाकर वापस आजायेगा.. अब लखनको दोनो जगह तीन चार दीनके लीये टाइम देना था.. तो क्लीनीकपे ना जानेकी वजहसे सृती भी साथ चलने तैयार होगइ..

तो चंदा भी अब सहेरमे रहेना चाहती थी.. तो भावीकाको भी अपने वकीलसे मीलना था.. ओर नये सीरेसे क्लीनीक सम्हालना था.. तब सबने मीलकर तैय कीया की अब भावीका अपना क्लीनीक बंध करके सृतीके साथ ही बैठेगी.. जबतक गांवका होस्पीटल कंपलीट नही होजाता..

भावीकाने अपना कुछ पर्सनल स्टाफ अपने साथ रखनेकी बात कही.. जीनमे उनकी हमराज ओर रीसेपनीस्ट आरती.. ओर दो ओटीकी नर्सींग स्टाफ.. ओर सबलोग इस बातपे सहेमत होगये.. ओर भावीकाने अपने पीताकी फेक्टरीमे दावेके लीये लीगल काममे लखनको साथ रखनेकी बात कही.. तो इस बातपे भी सब लोग सहेमत होगये..

क्युकी अब पुनम ओर सृतीको पता था की अब भावीका का भवीस्य उन लोगोके साथ ही जुडा हुआ था.. जब भावीकाने गांवमे भी अ‍ेक अलग मकान बनानेकी बात कही तो पुनम सृतीने उनको मना कर दीया.. ओर कहाकी अब वो हमेसाके लीये इसी हवेलीपे रहेगी.. तब भावीका बहुत कुछ समज गइ..

उसे मंजुकी बात याद आने लगी.. की कैसे मंजुने उसे लखनके साथ मंदीरमे जाकर सादी करलेनेको कहा था.. ओर भावीका सरमाकर हवेलीपे रहेनेके लीये सहमत होगइ.. उसने नइ होस्पीटलके लीये वसुधा ओर सृतीसे मीलकर कुछ नये उपकरणकी लीस्ट भी बनाइ थी..

जो भावीका अपनी तरफसे खुद नइ होस्पीटलको अपने मम्मी पापाके नामसे डोनेट करने वाली थी.. दुसरी ओर अब धृवकी ओरसे भी कोइ खतरा नही था.. तो लखनके साथ भावीकाने भी अब सहेर जानेका फैसला करलीया.. ओर होस्टेलकी वजहसे राधीका भी साथ चलनेको तैयार होगइ..

रजीया कुछ दिन हवेलीपे रहेना चाहती थी.. तो सृतीने नीलमको पढाइके कारण साथ चलनेको केह दीया.. तो इस बातपे मन ही मन नीलम भी बहुत खुस होगइ.. लेकीन लता नीलम ओर लखनकी ओर देखते बहुत मायुस थी.. वो लखनसे बात करना चाहती थी.. लेकीन हीमत नही होपाइ..

लखन सृती भावीका चंदा राधीका ओर नीलमको लेकर सहेरकी ओर नीकल गया.. देवायत चारु ओर रश्मी वंदनाके आग्रहसे पुनमने हवेलीके साथ साथ अब पंचायतका काम भी सम्हालनेके लीये फैसला करलीया.. साथमे पुनमने गांवकी ओर महीलाओको भी इनमे सामील करलीया..

इनमे ब्रीन्दा बसंतीके साथ बनवारीलालकी बहु बींदीया.. ओर साथमे नीशा वसुधाभी सामील होगये.. चारु रश्मी ओर वंदना तो पहेलेसे ही पंचायतकी सदस्य थी.. अ‍ैसा लगता था पुरा गांव अब महीला प्रधान होगया हो.. सभी महीलाओने अब पुरे गांवकी कमान अपने हाथोमे लेनेकी ठानली.. ओर चारुने पुनमकी अगवाइमे गांवका ओर ज्यादा वीकास करनेपे जोर दीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९६

इनमे ब्रीन्दा बसंतीके साथ बनवारीलालकी बहु बींदीया.. ओर साथमे नीशा वसुधाभी सामील होगये.. चारु रश्मी ओर वंदना तो पहेलेसे ही पंचायतकी सदस्य थी.. अ‍ैसा लगता था पुरा गांव अब महीला प्रधान होगया हो.. सभी महीलाओने अब पुरे गांवकी कमान अपने हाथोमे लेनेकी ठानली.. ओर चारुने पुनमकी अगवाइमे गांवका ओर ज्यादा वीकास करनेपे जोर दीया.... अब आगे

लखन सबको लेकर घरपे आगया.. ओर होलमे बेठे बाते कर रहे थे तब भावीकाने लखनको अब भी थोडा डर लगनेकी बात कही.. तो लखनने थोडी सेखी मारी.. ओर सबके सामने अ‍ैसे ही धृवको हाल चाल जाननेके लीये फोन कीया.. जब फोन लगा तो सबको चुप रहेनेका इसारा करते फोन स्पीकरपे करदीया..

लखन : (मुस्कुराते) सब चुप रहेना.. अभी आपका डर खतम कर देता हु..

धृव : (फोन लगते ही) अरे भाइ.. कैसे हो..? बडी भाभीका सब कार्य संप्पन होगया..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाइ.. कल ही होगया.. सब खतम करके आज ही सहेर वापस आगया.. तो सोचा तुजे फोन करु.. बोल.. क्या हालचाल हे..? तेरे पापाका सब कार्य कंपलीट होगया..?

धृव : (फोनपे) हां भाइ.. मे मीलने आया उनसे बहुत दीन पहेलेही कर दीया.. सबकुछ पांच दीनमे ही नीपटा दीया.. आपतो जानते हो हमारे यहा कोइ रीस्तेदार नही हे.. बस.. हम ओर पुजाके ससुरलाल वाले.. हम सब हरीद्वर जाकर काम नीपटाके आगये.. ओर आते ही वहाका सब प्रोपर्टी ओर बीजनेसको समेट लीया.. ओर यहा गांधीनगर रहेने आगये..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. वहा पुजाका घर भी नजदीक होगया.. आंटीकी तबीयत तो ठीक हेनां..?

धृव : (थोडा हीचकीचाते धीरेसे) भाइ.. आपने कहाथानां..? सायद हमने भी आपके गांवके नीयम अपना लीये हे..

लखन : (मुस्कुराते) मतलब..?

धृव : (धीरेसे) भाइ.. वहा कीसीको कहेना नही.. पापाका कार्य खतम होते ही मेने मोमसे सादी करली हे.. भाइ हमारा अफैर चल रहा था.. इसी वजहसे भावुने मुजे छोड दीया था.. वो बहुत ही अच्छी थी..

लखन : (मुस्कुराते) कमीने वो इतनी अच्छी थी तो फीर तुमने उसे छोडा क्यु..?

धृव : (धीरसेसे) भाइ.. मैने नही.. उन्होने हमे छोडा हे.. उन्होने मुजे ओर मम्मीको सेक्स करते देख लीया.. सीर्फ आपको बता रहा हु.. पुजाकी दुसरी सादीसे पहेले ही मे ओर मम्मी रीलेशनमे आगये थे.. वो पापाके बीजी रहेनेकी वजहसे मुजसे बहुत प्यार करने लगी थी.. मोमने पापासे सभी उमीदे छोड दीथी..

लखन : तो फीर तुमने भावीकासे सादी क्युकी..? सम्हाल लेते पुजा ओर तेरी मम्मीको..

धृव : नही यार.. पुजाने अपनी सादीके लीये सर्त रखीथी.. की मे कीसी लडकीसे सादी करलु.. तब पुजाको मेरे ओर मोमके रीलेशनके बारेमे नही पता था.. फीर भावुसे बार बार मीलनेकी वजहसे मुजे अच्छी लगती थी.. तो सादी करली.. लेकीन मे मोम ओर पुजाके बीचमे ही फसा हुआ था.. तो भावुकी ओर ज्यादा ध्यान नही दे पाया.. तो अच्छा हुआ हमारा डीवोर्स होगया..

लखन : (भावीकाकी ओर मुस्कुराते) यार मेने सुना हे डीवोर्सके बाद उन्होने अपना क्लीनीक बंध करदीया हे..? सायद तेरे डरकी वजहसे ये सहेर छोडकर चली गइ हे..

धृव : (गहेरी सास लेते) यार बहुत गलत हुआ.. उनको लगा होगाकी पापाकी पोलीटीकल पोजीसनकी वजहसे हम उनको परेसान करेगे.. लेकीन सच कहु..? जबसे पापा चले गये तबसे मेने सबकुछ छोड दीया हे.. उन सहेरको भी.. मेने अपनी सभी अयासीया छोडदी.. ओर जीजुके साथ उनके बीजनेसमे उनका हाथ बटाता हु.. वो भी सीर्फ टाइम पास.. वो भावुको डरनेकी जरुरत नही थी.. चालु रखती अपना क्लीनीक..

लखन : (मुस्कुराते) ओर तेरी मम्मी ओर पुजादी.. वो अब खुस हे..?

धृव : (मुस्कुराते) बहुत.. यार मम्मीने तो अब मुजे पुरी तराह अपना पती मानलीया हे.. ओर साथमे मे ओर पुजा भी अब ज्यादा नजदीक आगये हे.. दोनो सौतन मुजे खुब प्यार देती हे..

लखन : (हसते) कमीने भावु भी कम नही थी.. तुने ध्यान ही नही दीया.. कास अगर मुजे मील जाये.. तो मे उसे सादी कर लेता.. हें..हें..हें..

धृव : (जोरोसे हसते) तो कमीने ढुढले उनको.. ओर करले सादी.. वैसे भी तुम लोगोमे कीतनी भी सादीया करलो.. सब चलता हे.. वो ज्यादा दुर नही होगी.. सृतीभाभीकी बेस्ट फ्रेन्ड हेनां..? उनके कोन्टेक्टमे रहेती होगी.. जरा भाभीसे जानले..

लखन : (मुस्कुराते) तो फीर तुजे बुरा नही लगेगा..?

धृव : (हसते) यार मुजे अब क्यु बुरा लगेगा..? हमारा तो डीवोर्स हो गया हे.. बस.. अ‍ेक बार मीले तो मे उनकी माफी मांग लुगा.. ताकी दीलमे कोइ गील्टी ना रहे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे यार.. वो मीलेगी तो तेरी बात जरुर पहुचाउगा.. चल.. मीलते हे..

धृव : (मुस्कुराते) हंम.. यार कभी इधर आना हुआ तो मुजे मीलना.. मे अ‍ेड्रेस सेन्ड करता हु.. चल बाय..

लखन : (फोन कट करतेही भावीकाको) बोलो.. अब डर लगता हे..?

भावीका : (सरमाकर हसते) नही यार.. आपने डर भी खतम करदीया.. ओर हमारी बात भी रखली..

सृती : (मुस्कुराते) भावु.. अब तु बीन्दास्त मेरी क्लीनीकपे चल.. वहा हम दोनो सम्हाल लेगे.. अब कहा हमे पैसोके लीये काम करना हे..

भावीका : (मुस्कुराते) सृती आज नही.. कलसे आउगी.. अभी खाना खाकर कुछ देर आराम करगे.. ओर साम पांच बजे वो वकील अंकलकी अ‍ेपोइटमेन्ट हे.. तो मे ओर लखन वही जा रहे हे..

सृती : (मुस्कुराते) हां यार.. वो जरुरी हे.. तुम अपना सब काम आरामसे नीपटालो.. बादमे आना.. ओर हां.. तेरी वो आरती ओर तेरे जरुरी स्टाफको भेजदे..

भावीका : (मुस्कुराते) ओल मोस्ट सबको छुटी देदी हे.. बस.. सीर्फ ओटीपीकी दो ओरत.. ओर अ‍ेक आरती.. तीनो ही आयेगे.. आरतीको मेने फोन करके सब बता दीया हे.. वो घरपे ही हे..

फीर दो पहोरका खाना राधीका ओर नीलमने मीलकर बना लीया.. लखन चंदा सृती ओर भावीका बाते करते रहे.. चंदा वीजयके साथ खेलते बाते करती रही.. ओर बार बार लखनकी ओर कातील स्माइल करते उनको आंखोसे रुमकी ओर इसारा करती रही.. ओर ये बात सृतीने नोटीस करली..

इतने दीन भावीकाने हवेलीपे रहेकर इस खानदानके बारेमे मंजु ओर पुनमसे काफी कुछ जानलीया था.. घरमे अब कीसीके भी साथ लीप कीस आम बात होगइ थी.. सबलोग खाना खाने बैठ गये.. सृती राधीका लखनके साथ अगल बगलमे बैठ गइ..ओर चंदा भावीका ओर नीलम इन तीनोके सामने बैठ गये..

सभी खाना टेबलके बीच था.. सब लोग अपने हाथोसे लेने लगे.. लेकीन कीसीको पता नही थाकी लखन नीचेसे पैरोसे नीलम ओर चंदाको छेड रहा था.. नीलम सरमके मारे सर जुकाते अपने होठोको दातोसे दबाके लखनकी हरकत बरदास्त कर रही थी.. ओर लखन अ‍ेक ही पैरोसे दोनोकी चुतको बारी बारी छेड रहा था..

नीलम अपनी सांसके साथ बैठी थी.. तब उनको भी नही पता थाकी जो हाल उनका हो रहा हे वोही हाल उनकी सासका हो रहा हे.. चंदाकी सांस भारी होगइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते उनकी हरकत बरदास्त करती रही.. उनकी चुत पानी छोडने लगी..
 
इसी दौरान गांवमे मुना बरखा ओर बसंती खाना खा रहे थे.. तभी बसंतीको कुछ अजीब लगने लगा.. उनको उबके आये.. ओर वो जटसे अपने मुहपे हाथ रखते खडी होकर बाथरुममे भाग गइ.. ओर अंदर जाकर उल्टीया करने लगी.. जीसे देखकर बरखा भी उनके पीछे चली गइ..

ओर मनमे खुस होते बसंतीकी पीठ सहेलाती रही.. फीर उल्टीया होगइ तो मुह साफ करते सरमाने लगी.. वो सरमके मारे बरखासे नजरे नही मीला पा रही थी.. ओर मंद मंद मुस्कुरा रही थी.. तभी बरखाने उनको कंधेसे पकडकर अपनी ओर कीया ओर मुस्कुराते बसंतीकी आंखोमे देखने लगी..

बरखा : (मुस्कुराते) मम्मी.. क्या सचमे..?

बसंती : (मुस्कुराते सरमाकर नजरे जुकाते) सायद.. पका तो सुबह पता चलेगा.. क्या तेरे पास प्रेगनन्सी चेक करनेकी कीट पडी हे..? अभी बहार कुछ मत कहेना.. पहेले पका होजानेदे.. फीर उनको सरप्राइज देगे..

बरखा : (धीरेसे फुसफुसाते) मोम.. पका ही समजो.. कमीनेका हथीयार हेही इतना दमदार की कीसीको अ‍ेक ही बारमे पेटसे करदे.. कीतना पानी नीकालता हे.. हमारी पुरी मुनीया भरदेता हे.. ठीक हे.. मेरे पास अ‍ेक कीट पडी हे.. सुबह पका करलीजीये.. अगर रीजल्ट पोसीटीव आया.. तो हम कल घरपे सेलीब्रेट करेगे..

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) सुन.. तुजे अ‍ेक बात कहेनी हे..

बरखा : (मुस्कुराते) क्या..?

बसंती : (मुस्कुराते) वो.. ब्रीन्दा.. वोभी श्रीधरसे पेटसे हो गइ हे.. दोनो सहेली साथमे..

मुना : (अंदर आते थोडी चीन्तासे) बरखा क्या हुआ मम्मीको..? तबीयत ठीक नही हे क्या..?

बरखा : (मनमे) कमीने मम्मीको चोद चोदके उनका पेट फुला दीया.. अब तो मम्मी कहेना छोडदे.. सबके सब कमीने दोस्त अ‍ेक जैसे ही हे.. वहा श्रीधर भैया भी पीछे नही रहे.. उन्होने भी अपनी मांका पेट फुला दीया हे.. पता नही तुमने सबको कोनसी जडी बुटी पीलादी हे..

बसंती : (बातको सम्हालते) अरे कुछ नही हुआ.. लगता हे खानेमे कुछ आगया होगा.. आप चीन्ता मत करे.. चलीये बहार.. खाना खा लेते हे.. चल बरखा..

फीर तीनो बहार आगये ओर खानेके लीये बैठ गये..पुरे खानेके दोरान बसंती ओर बरखा अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते मंद मंद मुस्कुराती रही.. ब्रीन्दाने बसंतीको बताया था.. की वो प्रेगनेन्ट हो गइ हे.. लेकीन उसने बसंतीसे ये बात छुपाइकी वो लखनसे चुद चुकी हे ओर उनसे पेटसे हुइ हे.. ये राज वो सीर्फ उनके ओर लखनके बीच ही रखना चाहती थी..

उघर जब खाना फीनीस हो गया तब राधीका नीलम ओर सृती कीचनका काम समेटने लगी.. तबतक लखन वीजयके साथ खेलता रहा.. तो चंदा उन दोनोको खेलते देखकर हस रही थी.. ओर खुस हो रही थी.. तभी सृतीने आकर वीजयको अपने पास लेलीया..

सृती : (चंदाकी ओर देखते) भाभी.. आज आप थोडा आराम करलो.. मे वीजयको अपने साथ उपर लेजाती हु.. लखन भी यही आराम करलेगा.. क्युकी ये उपर आये तो हो गया हमारा आराम..

कहेते सृती चंदाकी ओर देखते मुस्कुराते सबसे छुपकर आंख मारती हे.. तो चंदा समज जाती हे.. ओर सर्मसार होजाती हे.. वो जटसे खडी होते अपने रुममे चली गइ.. सृती नीलम राधीका ओर भावीकाको लेकर उपर चली गइ.. तब नीलम ओर राधीकाको पता थाकी अब चंदाकी कुटाइ होगी..

चंदा यहा आकर बहुत ही खुस थी.. क्युकी सभी लोग उनका ओर उनकी भावनाओका अच्छी तराह खयाल रख रहे थे.. जैसे ही सबलोग उपर चले गये लखन मेइन गेइट बंध करके चंदाके रुममे चला गया.. तो चंदा पहेलेसे ही लखनका इन्तजार करते हल्कासा शींगार कर रही थी..





जैसे ही लखन आया वो दोडके लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. लखन उनको अपनी गोदमे उठमकर बेठकी ओर चला गया.. फीर कुछ ही देरमे रुममे चंदाकी मादक सीसकारीयाकी आवाज गुंजने लगी.. वो अपनी कमर उछाल उछालके लखनसे चुदवा रही थी..





लखनने लगातार बीना नीचे उतरे तीन बार चंदाकी मुनीयाको भरदीया.. ओर चंदाको पुरी तराह ठंडी करदी.. उनके खुले बाल बेडपे बीखरे हुअ‍े थे.. वो अब भी सरमाकर कामुक नजरोसे लखनकी ओर देखते उनकी पीठ सहेला रही थी.. लखनका लंड अबभी उनको चुतमे सख्त महेसुस हो रहा था..

चंदा : (बाहोमे भीचते सरमाकर धीेसे) जानु.. बस.. अ‍ैसे ही मेरा खयाल रखना.. अब तो हम दोनोके बारेमे सबको पता चल गया हे.. बडी दीदीको भी.. उनको मेने सब सच बता दीया हे.. सृती भी अब पुनोदीकी तराह मेरा खयाल रखने लगी हे..

लखन : (होंठ चुमते) चंदा.. अब मुजे भाइकी सभी बीवीयोका अ‍ैसे ही खयाल रखना पडेगा.. भाइ बहुत टुट चुके हे.. कास मोम हमारे बीच होती..

चंदा : (सरमाकर कमर हीलाते) जानु.. मुजे उनकी दुसरी बीवीओका नही पता.. बस मुजे इतना पता हे की में आपसे प्यार करने लगी हु.. ओर आपको मेरा अ‍ैसे ही खयाल रखना पडेगा.. ओर जरुरत पडी तो मे आपसे सादी भी करलुगी.. ओर आप चाहोतो हमारा बच्चा भी.. अब मुजे कीसीकी परवा नही हे..





लखन : (उतेजनामे कमर हीलाते धीरेसे चोदते) सादी करोगी मुजसे..? ठीक हे.. आजसे तु मेरी सीक्रेट बीवी.. लेकीन तुजे चोदुगा तो भाभी मानकर..

चंदा : (सर्मसार होते मुस्कुराते कमर हीलाते) तो फीर सादी करनेका क्या भायदा.. अपनी ओरीजनल भाभीको ही खुस रखा करो.. प्लीज.. थोडा जोरोसे.. अ‍ेक रंडीकी तराह.. आप कीतना मस्त चोदते हो..

लखन : (जोरोसे कमर हीलाते) भाभी.. तु बहुत होट हे.. जीतो चाहता हे तुजे अ‍ैसे ही जींदगी भर चोदता रहु..





चंदा : (सीसकारीया करते) तो चोदोनां.. कीसने मना कीया हे.. जबसे हम मीले हे.. उनके बाद मेने कभी आपको मना कीया हे क्या..? मे यहा आपसे चुदवानेके लीये ही आइ हु.. इसीलीये आपकी भाभी हमेसा आपके लीये चुदवानेको तैयार रहेती हे.. लखन.. मे बहुत कामी हु.. मुजे अ‍ैसे ही चुदाइ चाहीये.. मे जींदगीभर अ‍ैसे ही चुदवानेके लीये रेडी रहुगी..





दोनो अ‍ैसे ही कामुक बाते करते चुदाइ करते रहे.. आज बाते करते लखनने चंदाको चौथी बार लगातार चोद लीया.. ओर अबतकके सारे दीनकी चंदाकी प्यास बुजादी.. फीर दोनो सावर लेकर वही सो गये.. सृतीने भी चंदाको दीनमे ही नीपटा दीया.. ताकी आजकी रात वो सब लखनके साथ पुरी रात मोज मस्ती करती रहे..

साम चार बजे सृतीने फटाफट नीचे आकर लखनको जगा दीया.. देखा तो चंदा अभी भी नंगीही अपने उपर चदर डालते गहेरी नींद सो रही थी.. सृतीने दांत पीसकर हसते हुअ‍े लखनको मुका मारदीया.. ओर उनका हाथ पकडर कीचनमे चली गइ.. ओर लखनकी बाहोमे समा गइ.. तो लखन उनके बुब्सको मसलते होठ चुमने लगा..

सृती : (होंठ चुमते) भाइ.. अब पुनोदीने मुजे यहाकी कुछ जीम्वेवारी दीहे.. अभी हम यहा जीतनी हे.. हम सबका आपको अ‍ैसेही खयाल रखना पडेगा..

लखन : (हसते धीरेसे) लेकीन यहा तो भावीका भी हे.. क्या उनका भी..? हें..हें..हें..

सृती : (हसते सामने देखते) हां.. उनका भी.. क्युकी मुजे पता हे अब वोभी हमारी सौतन होने वाली हे.. ओर साथमे नीलुका भी खयाल रखना पडेगा.. अब मुजे सब पता चल गया हे.. आप भावु पहेली बार होटेलमे मीले थेनां..? फीर दो बार उनकी क्लीनीकपे.. भावुने मुजे सब बतादीया हे.. बस.. कुछ दीन ठहेर जाओ.. हम आप दोनोकी सादी हमारे मंदीरमे करवा देगे.. जहा हमने कीथी..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे.. इस बारेमे मेरी मोमसे बात हुइ थी..

सृती : (मुस्कुराते) भाइ.. आज रात तैयार रहीयोे.. आज तो आपको चार चारको सम्हालना हे..

लखन : (सामने देखते) तु राधु ओर भावुही तो हे.. चौथा कौन..?

सृती : (मुस्कुराते) आपकी सबसे छोटी रानी.. हमारी नीलु.. मुजे पता हे आप दोनोने यहा गांधर्व सादी करली हे.. इसीलीये तो चंदाभाभीका अभी नीपटा दीया.. ताकी पुरी रात सोती रहे.. इन्हीके डरकी वजहसे बेचारी नीलुकी बारी भी नही आती.. बस.. अ‍ेक आस लेके आपकी ओर देखती रहेती हे.. ओर याद रहे.. इस बारेमे चंदा भाभीको पता ना चले..

तभी भावीका राधीका ओर नीलम भी नीचे आजाते हे.. तीनो लखन ओर सृतीको कीचनमे अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे देखकर हसने लगती हे.. राधीका सृती चाइ नास्ता बनाते हे.. तब भावीका ओर लखन फेक्टरीकी फाइल ओर उनकी मम्मीका दीया हुआ लेटर नीकाल रहे थे..

चंदा अबभी सो रही थी.. कीसीने उनको डीस्टर्ब नही कीया.. जब चाइ नास्ता करलीया तो भावीका लखनके साथ फेक्टरीके वकील.. ओर उनके पापाके दोस्त पंकजभाइकी ओफीसकी ओर चल पडे.. जहा पहेलेही उसने पंकजभाइसे बात करलीथी ओर उनका अ‍ेड्रेस लेलीया था..
 
वहा पहोचे तो अ‍ेक बहुत ही आलीसन बील्डींन्गमे उनका बहुत बडा ओफीस था.. बहार रीस्ेपनीस्ट बैठी थी.. भावीकाने वहा अपना नाम लीखवाया.. ओर अभीकी अ‍ेपोइटमेन्टकी बातकी.. तो रीसेपनीस्टने सबकुछ लीख लीया ओर इन्टरकोमसे बात करली.. तब कुछ देरके बाद..

रीसेपनीस्ट : (मुस्कुराते) मेडम.. सीर्फ आपकी अ‍ेपोइटमेन्ट थीनां..? तो आप अकेली ही अंदर जाइअ‍े..

भावीका : (थोडा असहज होते रीक्व.स्ट करते) सोरी.. प्लीज.. ये मेरे हबी हे.. मेरे साथ ही हे..

रीस्पनीस्ट : (मुस्कुराते) सोरी मेम.. सरने कहा हे.. वो सीर्फ आपको ही अकेलेमे मीलना चाहते हे.. आप समज गइनां.. ये यही बैठते हेनां.. मे इनको यही कोफी पीला दुगी.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) भावु.. कोइ बात नही तुम मीलकर आओ.. मुजे यहा इस सृष्टीका बहेतरीन सौन्दर्यका रस पान करनेदो.. ये बहुत ही खुबसुरत हे.. हें..हें..हें..

रीसेपनीस्ट : (मुस्कुराते) वेरी फनी.. सर आप बहुत ही मजाकीये हो..

भावीका : (दांत पीसते धीरेसे) देखना कोइ सरारत नही..

कहेते भावीका मुह बीगाडकर लखनको अ‍ेक मुका जडते अंदर चली गइ.. तो रीसेपनीस्ट ओर लखन दोनो हसने लगे.. जैसे ही भावीका अंदर गइ तो ओफीसमे उन वकीलके सीवा कोइ नही था.. वो भावीकाको देखते ही आंख चौडी करते खडे होगये..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) अरे भावीका.. मेरी बच्ची.. आखीर आ ही गइ..

भावीका : (मुस्कुराते) जी अंकल..

भावीकाने उसे हाथ जोडकर नमस्ते कीया.. तो भावीकाकी ओर प्यारसे देखते हाथके इसारोसे चेयरकी ओर इसारा कीया.. फीर दोनो अपनी चेयरपे बैठ गये.. पंकजभाइ अब भी भावीकाकी ओर देख रहे थे.. भावीकाने अपनी मम्मीने दीया हुआ लेटर ओर फाइल उसे देदी..

वो जैसे जैसे पढते गये उनकी आंख गीली होने लगी.. वो अभी तक अ‍ेक सब्द भी नही बोले थे.. जैसे ही लेटर पढ लीया वो कुछ नही बोले.. अपने दोनो हाथोमे चहेरा छुपा लीया.. उसे देखकर भावीका भी थोडी अनकंफेर्टबल होगइ.. क्युकी पंकजभाइ आंसु बहा रहे थे..

भावीका उसे अचंबीत होते देखती रही.. फीर पंकजभाइ सीकंसे अपना मुह साफ करके आये.. तो भावीकाने खडे होते उनके पांव छुलीये.. तो पंकजभाइने उसे फौरन पाव छुनेसे रोका.. ओर भावीकाको अपने गले लगा लीया.. फीर अपना हाथ उनके सरपे रखदीया.. ओर आंख फीरसे गीली होगइ.. फीर अपनी चेयरपे जाकर बैठ गये..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) माफ करना बेटा.. आज बरसोके बाद तुजे पहेली बार देखा.. तु हुबहु मेरी बैटी जैसी दीखती हे.. तु बहुत छोटी थी.. तुजे अपनी गोदमे खीलाया हे.. क्या तु डोक्टर बन गइ..?

भावीका : (मुस्कुराते) जी अंकल.. इसी सहेरमे अपना क्लीनीक चलाती हु..

पंकजभाइ : तुमने डोक्टरी करली.. तो फीर इतने दीनो तक तुम कहा थी..? हमने तुम्हारा कीतना इन्तजार कीया.. तुम्हारे बंगलेपे भी आये थे.. वो बंगलातो बंध ही रहेता था.. तुम्हारा नंबर भी नही मीला..

भावीका : (मुस्कुराते) सोरी अंकल.. पहेले तो मुजे इस फाइलके बारेमे नही पता था.. सोचा मम्मी पापाके कोइ फेक्टीके कागजात होगे.. तो मेने बक्षेको अलमारीके उपर ही रख दीया था..

पंकजभाइ : ओर बंगला क्यु बंध रखा था..? क्या वहा नही रहेती..?

भावीका : (थोडा सरमाते धीरेसे) वो.. वो मेने अ‍ेक लडकेसे सादी करली थी.. उनके पापा बहुत बडे पोलीटीसीयन थे.. बस.. उसीके घरमे मीन्स.. अपने ससुरालमे रहेती थी.. हालही मे हमारा डीवोर्स हुआ हे..

पंकजभाइ : (आस्चर्यसे देखते) पोलीटीसीयन थे..? मतलब..? अब नही हे..?

भावीका : (सर जुकाते) नही.. अब वो इस दुनीयामे नही रहे.. कुछ दीन पहेलेही वो स्केन्डलमे फस चुके थे.. ओर उन्होने सुसाइड करलीया..

पंकजभाइ : (चीन्तासे) क्या.. तुमने उन हरामीके बेटेसे सादी करली थी..?

भावीका : (सर जुकाते धीरेसे) सोरी अंकल.. मेभी उनको पहेचाननेमे धोखा खागइ थी.. येतो अच्छा हुआ जब ये सब कांड हुआ उनसे कुछ दीन पहेले ही मेने डीवोर्स ले लीया..

पंकजभाइ : (सामने देखते) चलो अच्छा हुआ.. तुम्हे कोइ तकलीफ तो नही हुइनां..?

भावीका : (मुस्कुराते) नही अंकल.. सबकुछ अच्छेसे नीपट गया.. मेने सुना हे वो लोग यहा अपना सबकुछ समेटकर दुसरे सहेरमे चले गये हे..

फीर पंकज फाइल देखने लगा.. ओर देखकर खडा होगया.. फीर उसने अपनी अलमारीसे अ‍ेक फाइल नीकाली.. ओर दोनो फाइलको मीलाकर चेक करने लगा.. जैसे ही फाइल देखली उनके चहेरेपे अ‍ेक चमक आगइ.. ओर खुसीसे मुस्कुराते भावीकाकी ओर देखने लगे..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बेटा.. अ‍ेकदम परफेक्ट.. इनमे कोइ डाउट नही हेकी तुम वोही भावीका हो जो अब इस फेक्टरीकी मालीक हो.. बस.. मुजे कुछ नीयम फोलोव करने हे.. जो तुम्हारे पापाकी वसीयतमे लीखा हे.. क्या तुजे कोइ अ‍ेतराज तो नही..? हें..हें..हें..

भावीका : (नम आंओसे) क्या..? मे..? फेक्टरीकी मालीक..? नही अंकल.. अ‍ैसा नही हो सकता.. मे यहा फेक्टरीपे कोइ दावा करने नही आइ हु.. बस.. मम्मीने लेटरमे आपको इस सब कागजातोके साथ मीलनेके लीये बोला हे.. तो सीर्फ मीलने आइ हु.. बाकी मम्मीने मेरे लीये इतने पैसे छोडे हे मे इनमे ही खुस हु..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) साबास बेटा.. मुजे पता था.. मेरी बेटी पैसोकी लालची नही होगी.. अब सब ध्यानसे सुन.. तुजे मे वसीयत पढकर सुनाता हु.. अगर ना समजमे आये तो मुजे पुछलेना..

भावीका : (सामने देखकर मुस्कुराते) अंकल.. मम्मीने लेटरमे लीखा हे.. की आप इनके चहीते देवर हे.. बस.. उनमे ही सबकुछ समज लीया.. अब वसीयत पढनेकी कोइ जरुरत नही हे.. मुजे आपपे पुरा भरोसा हे.. आप जो भी कहोगे मे मान लुगी..

इतना सुनते ही पंकजभाइ फाइल छोडकर चेयरकी पीठपे जुक कर बैठ गये.. ओर अपना चहेरेको हाथसे ढक लीया.. जब हाथ हटाये तो उनकी आंओमे आंसु बेह रहे थे.. फीर वो खडे हो गये.. ओर अपना मुह धो लीया.. ओर भावीकाने खडे होकर उनको पानी दीया.. तो पानी पीकर उसने भावीकाको गले लगा लीया.. फीर दोनो बैठ गये..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बेटी.. तु कीतनी भोली हे.. कीसीपे इतना भी भरोसा करना ठीक नही हे.. ओर वोभी बात जब प्रोपर्टी ओर पैसेकी हो.. तुम बहुत ही नेक दील लडकी हो.. बीलकुल मेरी नेहाकी तराह.. क्या तुम उनको जानती हे..?

भावीका : (मुस्कुराते नामे सर हीलाते) सायद पुरी तराह नही.. बस.. सीर्फ इतना ही धुंधला धुंधला याद आ रहा हे.. की मे जब छोटी थी.. तब अ‍ेक लडकीके साथ खेलती थी.. ओर जब मुजे होस्टेलमे भेज रहे थे.. तो वो कीसी ओरतसे लीपटकर रो रही थी.. बस..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बस.. वोही नेहा थी.. ओर उस ओरत मेरी पत्नी थी.. तुजे आज भी याद करती हे.. खैर.. वो सब बादमे.. जब तु हमारे घर आयेगी.. तेरी आंटी भी तेरा बेसब्रीसे आनेका इन्तजार कर रही हे..

भावीका : (मुस्कुराते) जी.. मे आंटीको मीलने जरुर आउगी..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बेटा वो मीलने मीलाना तो अब होताही रहेगा.. पहेले तु कामकी बाते सुन.. ताकी मेरा अ‍ेक बोज हल्का हो जाये..

भावीका : (मुस्कुराते) जी अंकल..

पंकजभाइ : (सामने देखते) सुन.. ये फेक्टरी सीर्फ तेते पापाकी नही हे.. इनमे बरसोसे अ‍ेक सायलन्ट पार्टनर भी हे.. जीन्होने इन फेक्टरीको खडा करनेमे तेरे पापाकी बहुत बडी फाइनान्सीयल हेल्प कीथी.. बीजनेस बढता गया.. तेरे पापा उनको सब पैसे वापस दे सकते थे.. लेकीन उन्होने अ‍ैसा नही कीया..

भावीका : (मुस्कुराते) सायद अ‍ेहसानकी वजहसे..?

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बीलकुल सही कहा तुमने.. तुम्हारे पापा भी तुम्हारी तराह खुदार थे.. उन्होने काफी हीस्सा तो वापस देदीया.. लेकीन २५ परस्ट उनका हीस्सा अभी भी रखा हे.. ओर बाकीका ७५ परसन्ट अभी भी तेरे पापाका हे.. ओर उन ७५ परसन्ट मेसे २५ परसन्ट हीस्सा अपने मेनेजमेन्टमे ओर वर्करमे बाट देते हे.. मतलब.. मेनेजमेन्ट ओर वर्करोको भी उन्होने अपना पार्टनर बनालीया..
 
भावीका : (मुस्कुराते) बहुत ही अच्छी सोच.. लोन्ग वीजन.. हेनां..?

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) हां.. सबलोग अपनी फेक्टरी समजकर काम करते हे.. लेकीन बेटा.. अब वसीयतमे थोडा बहुत चेन्ज हे..

भावीका : (मुस्कुराते) अंकल.. जो भी हो.. उनमे भी अच्छी ही व्यवस्था होगी..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) हां.. फीर भी सुनले.. अब वसीयतके हीसाबसे तु इस कंपनीकी मेइन मालीक होगी.. ओर उनमे तेरा ४० परसन्ट हीस्सा होगा.. बाकीमे १० परसेन्ट फेक्टरीकी देखभाल ओर सब लीगल कामके लीये मुजे दीया हे.. क्युकी तेरे पापाने हमेसा मुजे अपना छोटा भाइ माना हे.. बाकी २५ परसन्ट वोही सायलेन्ट मालीककी हीस्सेदारी ओर २५ परसन्ट मेनेजमेन्ट ओर वर्करके लीये..

भावीका : (मुस्कुराते) बहुत ही अच्छी व्यवस्था.. मेरे लीये तो ये सब बोनस ही हे..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बेटा.. तेरी चेम्बर आज भी खाली हे.. ओर तेरा इन्तजार कर रही हे.. बस.. वसीयतके मुताबीक सीर्फ अ‍ेक छोटासा टेस्ट करना हे.. डी. अ‍ेन. अ‍े. टेस्ट.. जब वो होजायेगा तो फेक्टरीके कागजात तुम्हारे नाम करदीये जायेगे.. क्या तुम इनके लीये रेडी हो..?

भावीका : (मुस्कुराते) जी अंकल.. जब आप चाहे.. लेकीन अ‍ेक समस्या हे..

पंकजभाइ : (सामने देखते) क्या..?

भावीका : (मुस्कुराते) अंकल.. जो भी हो.. मे इस फेक्टरीको नही सम्हाल सकती.. जैसा चल रहा हे चलनेदो.. ओर मेने अपनी क्लीनीक भी बंध करदी हे.. अब मे अपने ससुरालके गांवमे जाकर सीर्फ सेवा करुगी.. क्युकी मेरे मंगेतरके परीवाल वाले गांवमे अ‍ेक बडी होस्पीटल बनवा रहे हे..

पंकजभाइ : (आस्चर्यसे देखते) तेरा मंगेतर..? क्या तुमने फीरसे अ‍ेन्गेजमेन्ट करली..? कौन हे वो लोग..?

भावीका : (मुस्कुराते) अंकल.. समजलो मेरे लीये वो लोग भगवानके रुपमे आये हे.. ओर मुजे इन पोलीटीयनके परीवारके जमेलोसे इन्ही लोगोने बचाया हे.. ओर ये फेक्टरीकी फाइलके बारेमे भी उसीने मुजे बताया..

पंकजभाइ : (आस्चर्यसे देखते) बेटा.. तुमतो बहुत ही रहस्य भरी बाते कर रही हो..? इन फाइलके बारेमे उनको सब कैसे पता..? ओर कौन हे वो लोग..? तुम ध्यान रखना अपना..

भावीका : (मुस्कुराते) नही अंकल.. ये बहोत अच्छे लोग हे.. मेरे मंगेतर बहार ही बैठे हे.. मे उन्हीके साथ आइ हु.. अगर आप मीलना चाहोतो मील सकते हो..

पंकजभाइ : (सामने देखते) बेटा.. मेतो इसीलीये केह रहा हु.. की आजके जमानेमे बहुत सम्हलके चलना पडता हे.. पैसोकी लालचमे तुम जैसी भोली लडकीयोको लोग आसानीसे अपनी प्रेम जालमे फसा लेते हे.. ओर बादमे उनका अंजाम बहुत बुरा होता हे..

भावीका : (मुस्कुराते) नही अंकल.. ये लोग अ‍ैसे नही हे.. उनके पास इतने पैसे हेकी हमारी फेक्टरी जैसी दस फेक्टरीया वो खडे खडे खरीद सकते हे.. वो अ‍ेक रोयल फेमीली हे..

पंकजभाइ : (सामने देखते) अच्छा..? रोयल फेमीली..? इतने रइस हे..? कौन हे वो लोग..? कहाके हे..? मुजे बता सकती हो..?

फीर भावीकाने इन सोर्ट देवायत लखनके बारेमे बता दीया.. की वो लोग कीन गांवसे हे.. फीर उसने पुनम ओर मंजुकी वो शक्तियोके बारेमे भी बताया जीनकी बदौलत उनको फाइल मीली.. ओर उनको धृवके परीवारसे बचाया.. तो उन गांवका नाम सुनते ही पंकजभाइ खडे हो गये..

पंकजभाइ : (आस्चर्यसे देखते) क्या ये देवायतजीका परीवार हे..? जीनकी पत्नी कुछ दीन पहेले ही गुजर गइ..?

भावीका : (उत्सुक्तासे सामने देखते) हां अंकल.. क्या आप उनको जानते हो..? तब उनकी आखरी वक्तपे मे वही थी.. हम लोग कल ही उनका सब कार्य समाप्त करके आये हे..

पंकजभाइ : (खुसीसे) अरे बेटा.. वोही तो हे हमारे सायलन्ट पार्टनर.. मे भी देवायतजीको सोक जताने मीलने गया था.. वहा उन्होने अपने अपने छोटे भाइसे मीलवाया.. ओर कहाकी अब यही सब वहीवट करेगे.. क्या नाम बताया था.. सायद.. कु..छ.. ल.. लखन.. यही नाम बताया था..

भावीका : (मुस्कुराते) हां अंकल.. वो लखन ही हे.. जो मेरा मंगेतर हे.. ओर अभी बहार बैठे हे..

पंकजभाइ : (थोडी परेसानीसे) अरे बेटा.. तो उनको बहार क्यु बीठाया..? पहेले बता दीया होता.. मे उनको बुलाता हु..

कहेते पंकजभाइने इन्टरकोमसे लखनको अंदर भेजनेको कहा.. ओर वो खुद खडे होकर लखनको लेने दरवाजे तक गये.. जैसे ही लखन आया पंकजभाइको देखकर हसने लगा.. ओर उनके पैर छु लीये.. तो पंकजभाइने उसे जोरोसे गले लगा लीया.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते हसने लगे..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) माफ कीजीये आप बहार बैठेथे तो मुजेतो पता ही नही थाकी आप हे.. आइअ‍े..

लखन : (मुस्कुराते) अंकल माफी मत मांगीये.. कोर्पोरेटकी दुनीयामे तो अ‍ैसा सब चलता ही हे..

फीर तो पंकजभाइ लखनको अपने बीजनेसकी बाते करते लखनको बताते हे.. की इनकी फेक्टरीमे वो साइलेन्ट पार्टनर हे.. ओर फेक्टरीकी मालकीन अब भावीका हे.. फीर अ‍ेक टेस्टकी बात भी करते हे.. फीर कुछ अपनी पर्सनल बाते भी करते हे.. अब पंकज भाइ बहुत खुस थे..

फीर वो फोर्मालीटी पुरी करनेके लीये अ‍ेक क्लीनीकका अ‍ेड्रेस देते भावीकाको वही जानेको कहेते हे.. ओर अ‍ेक हप्तेके बाद पंकजभाइ लखन ओर भावीकाको सीधे अपने घरपे आनेका न्योता देते हे.. फीर भावीका ओर लखन वहासे नीकल जाते हे.. ओर दोनो घरपे आगये..

राधीका ओर नीलम कीचनमे खाना बना रही थी.. ओर सृती चंदा वीजयको लेकर होलमे बैठे बाते कर रही थी.. जैसे ही लखन भावीका आये चंदा टेडी नजरोसे लखनकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. जैसेही सृतीकी ओर देखा तो सृती उनको देखते हस रही थी.. तो चंदा बहुत ही सर्मसार होगइ..

भावीका : (सोफेपे बैठते) हाइ.. भाभी.. हाइ सृती..

सृती : (मुस्कुराते) भावु.. मील लीया वकीलसे..? क्या बोले..?

भावीका : (मुस्कुराते) बेचारे मम्मीका लेटर देखकर रो पडे.. ओर जानती हो..? उनकी फेक्टरीमे आप लोग भी पार्टनर हो.. बस.. अ‍ेक डी अ‍ेन अ‍े टेस्ट करवाना हे.. कल हम जाकर करवा लेगे..

लखन : (भावीकाके सरपे टपली मारते) फीरसे बोलतो..?

भावीका : (लखनकी ओर देखते हसते) क्या..? मेने कुछ गलत बोला क्या..?

सृती : (पीठमे अ‍ेक मुका मारते) कमीनी गलत हीतो बोला.. अब तुम ओर हम अलग हे क्या..?

भावीका : (बात समजमे आते ही) ओह.. सोरी.. सोरी.. मतलब.. हम पार्टनर हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (मुस्कुराते) भावीका.. याद हेनां मंजुने क्या कहा था.. अब तु भी इस घरकी होने वाली बहु हे.. बस.. कुछ दीन ठहेरजा.. फीर तेरी ओर लखनकी सादी भी करवा देगे..

कहा तो भावीका अपना सहेरा हथेलीमे छुपाकर रोने लगी.. तो चंदा हसते हुअ‍े उनकी पीठ सहेलाने लगी.. ओर सृतीने उनको गले लगा लीया.. तो नीलम हसते हुअ‍े पानी लेकर आगइ ओर भावीकाको पानी पीलाया फीर भावीका आंसु पोछते मुस्कुराने लगी..

भावीका : (मुस्कुराते) मुजे तो पता ही नही थाकी परीवार क्या होता हे.. ओर पहेले परीवार मीला तो भी कैसा..? कमीने सबके सब भैडीये थे.. आप लोगोने तो अ‍ेक ही दीनमे मेरी जींदगी बदलदी.. ओर उन नर्कसे नीकालकर स्वर्गमे पहोचा दीया.. पुनोदीने मुजे क्यासे क्या बना दीया..

लखन : (जोरोसे हसते) तो क्या तुम इस स्वर्गमे खुस हो..?

भावीका : (लखनके गालको चुमते) बहोत.. बहोत.. बहोत खुस हु.. अब सारी जींदगी इस स्वर्गमे रहेना चाहती हु..

फीर सबलोग खानेके लीये बैठ गये.. वहा भी लखनने चंदा ओर भावीकाको खुब छेडा.. तो भावीका काफी उतेजीत हो चुकी थी.. ओर चंदाकी हालत लखनने दोपहोरको ही खराब करदी थी.. वो अब भी धीरे धीरे लंगडाते चल रही थी.. क्युकी उसे लखनने लगातार चार बार चोद लीया था..

तो खानेके बाद चंदा लखनको इसारोमे नामे गरदन हीलाते वीजयको लेकर कमरेमे चली गइ.. तो सब हसने लगे.. ओर काम खतम करके सबलोग दरवाजा बंध करके उपर सोने जाने लगे.. तब सृतीने आज पहेली बार नीलमका हाथ पकडते उसे भी कमरेमे अपने साथ खीच लीया..

तो नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. नीलमके लीये पहेला अवसर था.. जो लखनकी सभी बीवीओके साथ चुदने वाली थी.. वो बस सरमाते मुस्कुराती रही.. फीर सृती राधीका भावीका ओर नीलम अ‍ेक साथ बेडपे आगइ.. ओर लखनका इन्तजार करने लगी..





इस रात लखनने बारी बारी चारोकी धमाकेदार चुदाइ कर डाली.. सबको बीना नीचे उतरे दो दो बार चोद लीया.. फीर लखन सृतीकी चुतमे पीछेसे लंड डालकर उनसे चीपककर सो गया.. सबलोग सुबह देर तब सोते रहे.. नीलम सुबह उठते ही अपने कमरेमे जाकर आइपील लेकर सोगइ..
 
सुबह चाइ नास्तेके बाद भावीकाने लखनके साथ क्लीनीकपे जाकर अपना डी अ‍ेन अ‍े टेस्टका सेम्पल दे दीया.. फीर लखन उसे सृतीकी क्लीनीकपे छोडकर अपनी ओफीसपे चला गया.. राधीकाके साथ नीलम होस्टेलपे तो सृती भावीका अपनी क्लीनीकपे जाने लगी थी..

अ‍ैसे ही दीन बीतने लगे.. इसी बीच अ‍ेक दीन अचानक कबीले वाले जमीलाको लेकर क्लीनीकपे आगये.. वहा सृतीने जमीलाकी डीलीवरी करदी.. ओर जमीलाको अ‍ेक लडकी पैदा हुइ.. तो सृतीको पता चलाकी येभी देवायतकी बीवी हे.. तो कुछ दीनके बाद वंदनाने भी अ‍ेक सुंदर लडकीको जन्म दीया..

इसी बीच पुनमने तैय करलीया था.. ओर उसने लखनसे कहेकर देवायत ओर नीर्मलाके लीये आने जानेकी दो फ्लाइटकी टीकीट ओर बडीया होटेलमे दोनोके लीये अ‍ेक कमरा बुक कर लीया.. ओर वहाकी रहेने खाने पेनेकी सब व्यवस्था भी करदी.. तो नीर्मला ओर देवायत मंजुका अस्थी लेकर हरीद्वार चले गये..

अब देवायतको नीर्मलाने पुरी तराह सम्हाल लीया था.. मानो देवायतका अब दुनीयासे मोह माया खतम होगइ हो.. लेकीन नीर्मला आज भी जवान थी.. उन्होने धीरे धीरे करते देवायतको फीरसे जीन्दा महेसुस करवाया.. दोनो मंजुकी अस्थीका वीधी पुर्वक वीसर्जन करके वहासे हीमाचलकी ओर घुमने नीकल गये..

नीर्मला देवायतका हाथ थामे रखती.. ओर उस रात होटेलके कमरेमे नीर्मलाने देवायतको पुरानी बातोसे उतेजीत करके अपने उपर चडनेके लीये वीवस करदीया.. फीर उस रात देवायतने नीर्मलाको खुब रगड रगडके चोद लीया.. ओर देवायतने नीर्मलाको केह दीयाकी वो अब उनके साथ ही रीलेशन बनायेगा..





फीर दोनोने अ‍ेक हप्ते तक घुमते खुब मस्तीया की.. ओर देवायत हर रात नीर्मलाकी हालत बीगाडता.. फीर दोनो वापस घर आगये तब दोनोके बीच रीस्ता ओर गहेरा हो गया था.. तो दया पहेलेसे ही रजीयाके साथ सेट थी.. उन दोनोकी अपनी योजनाअ‍े थी.. ओर लताकी हालत अब ना घरकी ओर ना घाटकी.. वो बस अब सीर्फ लखनसे आस लगाये बैठी थी..

तो अ‍ेक दीन श्रीधर अपनी कार लेकर ब्रीन्दा बसंती ओर बंसीकी बीवी सांतीको लेकर सहेर आ गया.. ओर सीधा क्लीनीकपे चला गया.. सांतीका तो रुटीन चेकअप था.. लेकीन ब्रीन्दा ओर बसंतीने अपनी प्रेगनन्सी चेक करवाते प्रेगनेन्ट होनेकी पुष्टी करली.. ओर सृतीने दोनोको दवाइया देदी..

सृतीने फोन करके लखनको बुला लीया.. ओर लखन सबको जबरदस्ती घरपे ले गया.. दोपहोर सबने साथमे लंच कीया.. ओर साम तक लखन ओर श्रीधरने खुब बाते की.. तब बीचमे अ‍ेक बार ब्रीन्दा ओर लखन अकेले मीले.. तब ब्रीन्दाने लखनको बता दीयाकी ये बच्चा हम दोनोके प्यारकी नीशानी हे.. ओर इस बारेमे वो कीसीसे जीक्र ना करे..

तो दुसरी ओर अ‍ेक दीन छोडकर सलमा ओर जरीना भी रेग्युलर साहीलके साथ सोने लगी थी.. अ‍ेक फीरोजके साथ सोती तब दुसरी साहीलके साथ सोने चली जाती.. दोनोही साहीलके साथ सोनेके लीये उत्सुक रहेती.. ओर साहील दो दो तीन तीन घंटे दोनोको पुरी तराह संटुस्ट कर देता.. तब सलमा ओर जरीनाको पता था..

की अब साहीलसे चुदवाकर जरीनाको कुछ तो होगा.. इसीलीये सलमा ओर जरीनाने मीलकर अपनी रणनीती बदलदी.. जब दोनोकी फीरोजके साथ सोनेकी बारी आती तब वो फीरोजको ओर चोदनेके लीये उक्साती.. फीर फीरोजकी जुठ मुठकी मर्दागींनीकी तारीफ करती..

जीसे फीरोजभी खुस रहेने लगा.. ओर अपनी मर्दागींनीपे गर्व महेसुस करता.. लेकीन उनको पता नही थाकी उनकी बीवी जरीना साहीलसे चुदवाकर प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. ताकी ये बात फीरोजको पता चले.. तो उसे यही लगेकी ये बच्चा उनका हे.. इसीलीये दोनोने फीरोजकी मर्दागींनीकी तारीफ करना सुरु करदीया था..

तो सहेरमे भी जब सायराने कादीरसे अपने प्रेटनेन्ट होनेकी बातकी.. तो कादीर भी खुस होगया.. ओर अ‍ेक दीन सायराको लेकर सृतीकी क्लीनीकपे चला गया.. ओर सायराके प्रेगनेन्ट होनेकी पुष्टी करली.. लेकीन ये बात सायरा ही जानती थी.. की ये बच्चा उनके छोटे भाइ साहीलका हे..

इसी दौरान लखन भी टीना ओर वसुधासे बहुत करीब आ चुका था.. लखन ओर वसुधातो फोरप्लेय तक आगे बढ चुके थे.. ओर लखन अ‍ैसे वसुधाको अ‍ेक बार ओर मील चुका था.. तब वसुधा ओर लखनने बडी मुस्कीलसे कंट्रोल कीया था.. वरना दुसरी बारमे ही वसुधा लडकीसे ओरत हो जाती..

तो टीनाके साथ भी बार बार आइसक्रीम ओर कोफी शोपमे प्राइवेट केबीनमे मीलने लगा था.. ओर बात इतनी आगे बढचुकी थीकी लीपकीसके साथ उनके बुब्सके साथ भी खेलने लगा था.. बस.. आग दोनो ओर लग चुकी थी.. इसके लीये टीना कइ बार लखनको अपने घरपे आनेके लीये कहेती थी.. बस.. अब दोनोको सीर्फ मीलनेकी देरी थी..

ओर आखीर वो दीन भी आगया.. अ‍ेक बार सहेरमे दो दीनकी छुटी थी.. ओर टीनाने सुबह ही लखनको अपने घरपे बुला लीया.. तो लखन भी सृतीको बताकर टीनाके घर चला गया.. हालाकी टीना लखनसे काफी बडी थी.. लगभग रश्मीकी उमरकी.. लेकीन उस दीन लखनने टीनाको अ‍ेक कुआरी लडकी होनेका अहेसास करवाया..

पहेले ही मीलनमे टीना मछलीकी तराह छटपटाते लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करते बेडपे पैर पटकती रही.. उनकी आंखसे आसु बेह रहे थे.. ओर वो चीला रही थी.. टीनाके पुरे बंगलेमे उनकी चीखे सुनने वाला कोइ नही था.. फीर कुछ देरके बाद सांत होगइ.. ओर दर्द भरी आवाज कामुक सीसकारीयोमे तबदील होगइ..





पहेली बार बीना नीचे उतरे.. ओर बीना लंड बहार नीकाले लखनने टीनाको तीन बार चोद लीया.. ओर लोटा भर भरके टीनाकी चुतको हरी भरी करता रहा.. टीनाकी चुतसे थोडा खुन भी नीकल गया था.. टीनाकी पुरी लाइफमे उनकी अ‍ैसी चुदाइ कभी नही हुइ थी.. फीर लखन टीनाको गोदमे उठाकर बाथरुममे लेगया..





वहा सावर लेते भी लखनने टीनाकी अ‍ेक बार खडे खडे चुदाइ करली.. फीर टीनकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करदी.. ओर दोनो बहार आगये.. टीनाने फोन करके बहारसे ही खाना मंगवा लीया.. ओर दोनोने साथमे लंच कीया.. खानेके बाद दोनोने दो घंटे आराम कीया..





फीर चाइ नास्तेके बाद अ‍ेक ओर चुदाइका दौर चला.. ओर इस बार भी लखनने टीनाको दो बार ओर चोद लीया.. टीनाकी हालत पतली होगइ.. ओर लखन सावर लेकर कंपलीट हो गया.. ओर टीनाको कल फीरसे मीलनेका वादा करके वही आराम करते छोडकर वापस घरपे आगया..

टीना पेइन कीलरकी टेबलेट लेकर सो गइ.. पुरी रात ओर सुबहसे लेकर दो पहोरतक आराम कीया.. फीर खाना खाकर वापस सोगइ.. साम चार बजते ही दरवाजेपे दस्तक सुनाइ दी.. टीनाने दरवाजा खोलकर देखा तो सामने लखन मुस्कुराते खडा था.. तो टीना बीना जीजकर लखनकी बाहोमे समा गइ..

ओर कुछ देरके बाद टीनाका बंगला फीरसे टीनाकी कामुक चीखे ओर सीसकारीयोकी आवाजसे गुंजने लगा..रात होने तक टीनाकी चुतको लखनने चार बार अपने पानीसे सीच दीया.. ओर टीनाका अ‍ेक अ‍ेक अंग ढीला करदीया.. फीर लखन सावर लेकर चला गया..





ओर टीना भी सावर लेकर फीरसे सो गइ.. लखनको पताथाकी टीना उनके साथ क्यु रीलेशन बनाना चाहती थी.. क्युकी उसे मंजु ओर पुनमने पहेले ही बतादीया था.. की वो सीर्फ बच्चेके लीये रीलेशन बनायेगी.. तब टीनाको पता नही थाकी उनके गर्भमे बच्चेके लीये घमासान युध्ध चल रहा था..

तो दुसरी ओर हर सेटरडे सन्डे सृती भी नीलमको धीरेनके घर भेज देती.. तो धिरेन नीलमको जमकर चोदता.. लेकीन अब नीलमको धिरेनका लंड चुतमे बहुत ही कम महेसुस होता था.. अगर चंदा नीलमके बारेमे पुछती तो केहती सेटरडे सन्डेकी छुटीमे वो अपने मम्मी पापाके पास गांव गइ हे.. ओर नीलमको भी समजा दीया था.. तो वोभी वापस आकर अपने मम्मी पापाका ही बहाना बनाती..

तो अ‍ेक दीन भावीकाके फोनपे पंकजकाभाइका फोन भी आगया.. ओर उसने डीअ‍ेनअ‍े टेस्टका रीजल्ट आनेकी बात कही.. ओर उनको उसी दीन साम लखनके साथ अपने घरपे डीनरका न्योता भी दीया.. तो साम होतेही भावीका सजधजके तैयार होगइ.. जैसे वो ससुरालसे मायके जा रही हो..

वो लखनके साथ उनकी कारमे चली गइ.. आज उसने सारी पहेनी हुइ थी.. ओर सारीमे भी बहुत कयामत लग रही थी.. वहा पंकजभाइ ओर उनकी वाइफ (नयना)ने दोनोका स्वागत कीया.. तो नयना भावीकाको देखते ही रेह गइ.. उनकी आंखसे आंसु नीकल गये..

उसने भावीकाको जोरोसे गले लगा लीया.. फीर लखनका भी अ‍ेक दामादकी तराह स्वागत कीया.. घरकी नौकरानीने सबको पानी पीलाया.. फीर कुछ बातोके बाद पंमजभाइने भावीकाके डीअ‍ेनअ‍े मीलनेकी पुस्टीकी.. फीर ढेर सारे कागजातोपे भावीकाकी साइन लेली.. भावीका साइन करते करते ही थक गइ.. तो पंकजभाइ हसने लगे..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बेटी.. अब पुरी फेक्टरी आपके नाम करदी गइ हे.. अब आप जब चाहो फेक्टरी सम्हाल सकते हो..

भावीका : (मुस्कुराते) नही अंकल.. मैने पहेले भी केह दीया था.. जैसे पहेले आप सम्हालते थे अ‍ैसे ही चलने दीजीये.. अब तो मुजे गांवमे जाकर सीर्फ सेवा करनी हे..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बेटी.. अबतकके हमने आपके मुनाफेके सारे पैसे अ‍ेक अलग अ‍ेकाउन्टमे जमा करदीये थे.. जो अब उसे आपके सारे हीस्से आपकी बेन्कमे ट्रान्सफर करदीये हे.. पुछोगी नही कीतने पैसे हे..? हें..हें..हें..

भावीका : (हसते) नही अंकल.. मम्मीने दीये पैसे भी बहुत बडी रकम हे.. तो जाहीरसी बात हे इनसे तो बडी रकम ही होगी.. हें..हें..हें..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) सही कहा तुमने.. अबतक तेरे हीस्सेका लगभग ४२ करोड रुपीये जमा हो गये हे.. अब उनका सही इस्तमाल करना..

पंकजभाइ ओर भावीका बाते कर रहे थे तबतक उनकी पत्नी नयना सीर्फ भावीकाको ही देख रही थी.. तभी लखन होलमे चारो ओर नजर घुमाता हे.. तभी अ‍ेक तसवीर देखते उनकी नजर वही ठहेर जाती हे.. फीर वो भावीकाकी ओर देखता हे फीर तसवीरकी ओर.. तभी..
 
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