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- Dec 5, 2013
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ओर कभी कभी तो लखनको लेकर देर रात दुसरे रुममे चली जाती जहा वो पहेली बार लखनसे मीली थी.. वहा लखन बीना नीचे उतरे सृतीकी खुब चुदाइ करता.. ओर हर बार सृतीकी चुतको भरके हरी भरी कर देता.. कइ बार सृती थक जाती तो वो लखनको चंदाके पास भेज देती..

जहा लखन चंदाकी भी जमकर चुदाइ कर लेता.. अब चंदाको वोही सुख मील रहा था जो कभी उनकी सादीसे पहेले देवायतसे मीलता था.. चंदाकी वजहसे लखनको नीलमको मीलनेका मौका नही मील रहा था.. क्युकी चंदा कइ बार उपरकी मंजीलपे लखनकी उनकी बीवीओकी चुदाइ देखने आजाती थी..
इसी दौरान अेक दीन वो ओर राधीका होस्टेलपे थे.. ओर अपने नीजी कमरेमे चुदाइ कर रहे थे.. तब लखनने राधीकाको रजीया ओर दयाके बारेमे बात की.. तो राधीका तुरंत लखनकी बात मान गइ.. ओर ये केह दीयाकी दोनोके आनेसे उनको भी अपने बच्चेको पालनेका टाइम मीलेगा.. ओर अब वो लखनके साथ ही हेतो उसे उन घरकी कोइ जरुरत नही हे..
इसी दौरान लखन टीना ओर वसुधासे चेट करते काफी आगे बढ चुका था.. टीनाके साथ तो दो बार ओर कोफी शापमे मील चुका था.. ओर बात चुंबन ओर हल्कीसी छेडखानी तक पहोंच गइ थी.. टीनाने लखनको डीनरके लीये अपने घरपे इनवाइट कीया.. लखन जानता था.. की जब वो टीनाके घर जायेगा तब चार पांच घंटे वही रहेना पडेगा..

उधर गांवमे भी अब भावीका घरके सदस्योसे काफी घुलमील गइ थी.. उनको पुनमका साथ बहुत अच्छा लगा.. वो बार बार धृवसे छुटकारा पानेकी वजहसे पुनमका आभार जता रही थी.. उसने पुनमसे लखनके बारेमे ओर परीवारके बारेमे काफी कुछ जान लीया.. ओर वो लखनकी ओर पुरी तराह प्रभावीत होगइ..
जब मंजुने उसे लखनके साथ मंदीरमे सादीका प्रस्ताव रखा.. तब वो मंजुसे लीपटकर खुब रोइ.. ओर उसने सादीका प्रस्ताव स्वीकार करलीया.. तो पुनम उसे अपनी सौतन कहेते छेडने लगी.. ओर ये बात उसने सृतीको फोन करके बताइ.. तो सृती भी बहुत खुस होगइ..
चारु ओर नीशा अेक साथ सुहागरात मनाते साथमे ही देवायतसे प्रेगनेन्ट हुइ थी.. ओर उनके प्रैगनन्सीका समय भी खतम होगया था.. तो अेक दीन सुबह चारुको लेबर पेइन हुआ.. ओर देवायत रश्मी चारुके साथ नीशाको भी लेकर सहेरमे सृतीकी क्लीनीकपे चला गया..
वहा सृतीने चारुकी डीलीवरी की.. ओर चारुने अेक सुंदर लडकेको जन्म दीया.. ओर उसी साम नीशाने भी अेक लडकीको जन्म दीया.. दोनो बहुत खुस थी.. लखन राधीका चंदा सबलोग वहा मौजुद रहे.. फीर दुसरे दीन सृतीने दोनोको छुटी देदी.. ओर देवायत सबको लेकर वापस गांव चला गया..
कुछ दीन बीते ही थे तब अेक दीन पुनमका फोन सृतीपे आगया.. ओर सबको गांव बुला लीया.. तो सृती सब समज गइ.. जब लखन आया तो उसने लखनसे बात करली.. तो लखन उसी वक्त जानेको तैयार होगया.. ओर बंगलेको ताला मारके सबको लेकर गांव चला गया..
वहा जाकर देखा तो आज हमेसाकी तरह मंजु बहार नही आइ.. लखन दैडकर अंदर चला गया.. तो मंजु बहुत ही थकी हुइ हालतमे सोफेपे बैठी थी.. लखन जाते ही उनसे लीपट गया.. ओर आंसु बहाने लगा.. मंजुने कसकर लखनको गले लगा लीया ओर उसे सांत करने लगी..
मंजुला : (आंख गीली करते) बस कर मेरे बच्चे.. रो मत.. मुजे खुसी खुसी हसके वीदा करना..
लखन : (रोते) मोम.. मत करो अैसी बाते.. हम सब आपके बीना कैसे जीयेगे..?
मंजुला : (मुस्कुराते आंसु पोछते) अरे लेकीन मे कहा जा रही हु..? मुजे वापस भीतो आना हे.. (भावनाके पेटकी ओर उंगली दीखाते) देख वहा.. मे वही हु.. जो ठीक पांच महीनेके बाद वापस आउगी.. तब मुजे खुब प्यार देना.. अपनी गोदीमे खीलाना..
जब लखन ओर मंजु गले लगते रोते हुअे अेक दुसरेसे बाते कर रहे थे.. तब घरके सभी सदस्यो वही खडे रहेते दोनोकी बात सुनकर आंसु बहा रहे थे.. तभी मंजुकी नजर सृतीकी ओर गइ.. तो उसने अपनी बाहे फैलाइ.. ओर सृती भी रोते हुअे दोडकर मंजुके दुसरी ओर गले लग गइ..
मंजुला : (सर सहेलाते) मेरी बच्ची.. रो मत.. मे अभी कहा जा रही हु..? बस.. आखरी दीनोमे तुम सबके साथ रहेना चाहती थी.. तो तुम सबको बुला लीया.. तु ओर पुनोतो मेरी बहादुर बच्चीया हो.. तुजे लता भावु ओर पुनोको ही मेरे लखनको सम्हालना हे.. ओर ये सबको भी.. देखो अब तो भावीकाभी आगइ हे..
फीर चंदा भी मंजुको मीलते खुब रोइ.. ओर इन सबसे बुरा हाल तो देवायतका था.. मंजुने उसे ना रोनेकी कसम खीलाइ थी.. तो वो सबके सामने रो भी नही सकता था.. वो बस.. अपनी ओफीसमे बैठकर सबसे छुपकर आंसु बहाते रहेता.. वो अंदरसे पुरी तराह टुट गया था..
आज लखन कही नही गया.. पुरा दीन मंजुके साथ ही रहा.. वो जब पुनमको उनके रुममे मीलने गया तब पुनम ओर लखन गले मीलकर खुब रोये.. पुनमने लखनको मंजुके ओर तीन दीन होनेकी बात कही.. मंजुने भी लखनको गांवमे दोस्तोको मीलनेके लीये कहा.. ओर देवायतको सम्हालनेके लीये कहा..

लेकीन लखनने मना कर दीया.. क्युकी वो इस हालतमे देवायतको नही सम्हाल पायेगा.. सामको देवायत आया तो सबलोग उनके सामने जबर दस्तीसे मुस्कुरानेका नाटक करते रहे.. लखन सबको हसानेकी कोसीस करता रहा.. सबलोग खानेके लीये बैठ गये.. पुनमने मंजुका हाथ पकड लीया.. ओर खानेकी टेबलकी ओर लेजाने लगी.. तो लखनने उसे अपनी गोदमे ही उठा लीया..
मंजुला : (जोरोसे हसते) अरे कमीने छोड मे चली जाउगी.. कही गीरा देगा.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते) नही.. अब तीन दीन आपको गोदमे ही घुमाउगा.. हें..हें..हें..
मंजुला : (सामने देखते धीरेसे) अच्छा.. तो पुनोसे सब जानलीया.. चल कोइ बात नही..
फीर सबलोग खानेको बैठ गये.. लखन माहोलको हल्का बनानेकी कोसीस करते सबको हसाता रहा.. लखनकी इस समजदारीपे पुनम सृती ओर भावीका बहुत खुस होगइ.. भावीका यहा रहेते रेग्युलर मंजुको चेक करती थी.. फीर देवायतकी बाकीकी बीवीया भी मंजुको मीलने आती थी..
उस रात खानेके बाद सबलोग होलमे बैठे थे तब मंजुने दया ओर रजीयाको अपने पास बुलाया.. फीर दोनोको पचास पचास लाख ओर राधीकाके घरके साथ दोनोको राधीकाके साथ होस्टेल सम्हालने ओर उनमे भागीदारी भी दी.. जीसे सुनकर दया ओर रजीया फुट फुटकर रोने लगी..
दया : (रोते हुअे) दीदी.. आपको ये सब.. हमे माफ करदो.. हम जाना नही चाहती.. आपको तो हम दोनोके बारेमे सब पता ही हे..
मंजुला : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) हां बेटा.. मेही सबकी मां हु.. तो तुम दोनोके दीलकी बात कैसे नही जानती..? तुम दोनो चीन्ता मत करो.. हम तुम दोनोको अपने परीवारसे थोडीना अलग कर रहे हे.. मेरा लखन तुम दोनोका खयाल अैसे ही रखेगा.. जैसे अभी रख रहा हे..
लखन : (मुस्कुराते) हां रजु.. हम सब अेक ही परीवार हे.. बस.. हमे आपकी भी भावनाओका खयाल रखना हे.. आप दोनोकी ओर हमारे बच्चेकी पुरी जीम्वेवारी हम नीभायेगे.. येतो सब अेक व्यव्सथाके भाग रुप हे.. तो तुम दोनो चीन्ता मत करो.. हमारे घरका दरवाजा हमेसा तुम दोनोके लीये खुला ही हे..
तब दया ओर रजीयाको पुरी तराह समजमे आ गयाकी उनके दीलकी बात मंजु ओर पुनमको पता चल गइ हे.. ओर पुनमने लखनको सबकुछ बता दीया हे.. ओर इस बातके लीये रजीया ओर दयाके दीलमे लखनके लीये इजत ओर बढ गइ.. ओर दयाने भी भवीस्यमे लखनको समर्पीत होनेकी ठानली..
फीर दो दीन बीत गये.. इन दो दीनमे ना लखन कही बहार गया ना देवायत खेतोपे.. भानुके माध्यमसे सरला ओर रमाको भी पता चला तो वोभी मंजुको मीलने आगइ.. देखा तो रमाका पेट भी काफी बढ गया था.. वो आते ही लखनको देखकर सरमा गइ.. ओर मुस्कुराने लगी..
आज देवायतकी सभी बीवीया सुबहसे ही मोजुद थी.. गांवमे भी कइ लोगोको सबकुछ पता चल गया था.. सबलोग मंजुके लीये प्रोर्थना कर रहे थे.. आज सुबहसे ही मंजु बीस्तरसे उठ नही पाइ.. उनको पता था आज उनकी इस हवेलीमे आखरी रात हे..
देवायत ओर लखन उनके दोनो ओर पास ही मंजुका हाथ थामते बैठे रहे.. देवायतकी आंखसे रुक रु्कके आंसु बेह रहे थे.. मंजुने उसे सम्माइल देकर नामे गरदन हीलाके आंसु बहानेको मना कीया.. देवायतकी सभी बीवीयाके साथ वसुधा ब्रीन्दा बसंती सबलोग मंजुके रुममे बैठे थे..
आज कीसीके गलेमे अेक नीवाला भी नही गया.. नीर्मलाकी तो बेटी थी.. वो सुबहसे ही मंजुके पैरके पास बैठते आंसु बहा रही थी.. कीसीको पता नही था.. लेकीन मंजुने सबको कीया हुआ वादा उसे आज भी याद था.. पुरा रुम लोगोसे भरा हुआ था.. सब लोग गुमसुम बैठे थे..
मंजुने अपने बेटे वीजयको याद कीया.. तो चंदा फौरन वीजयको लेकर आगइ.. मंजुने उनको देखतेही स्माइलकी.. ओर उनके सरपे हाथ घुकाया.. तो चंदा देवायत ओर नीर्मलाकी आंख गीली होगइ.. फीर लखनने मंजुका सर गोदमे लेकर उसे संतरेका ज्युस पीलाया..
तो मंजुने थोडासा पीया.. फीर बाकी बचा उसने लखन ओर वीजयको अपने हाथोसे पीलाया.. फीर लखनकी गोदमे ही सर रखते सो गइ.. मध्य रातके बाराह बजनेको आये थे.. सबलोग थके हुअे थे.. ओर पता नही क्यु सबकी आंखे भारी होने लगी.. जैसे सबको नीद आ रही हो.. सबलोग अेक के बाद अेक धीरे धीरे आंख बंध करते नींदकी आगोसमे चले गये..

जहा लखन चंदाकी भी जमकर चुदाइ कर लेता.. अब चंदाको वोही सुख मील रहा था जो कभी उनकी सादीसे पहेले देवायतसे मीलता था.. चंदाकी वजहसे लखनको नीलमको मीलनेका मौका नही मील रहा था.. क्युकी चंदा कइ बार उपरकी मंजीलपे लखनकी उनकी बीवीओकी चुदाइ देखने आजाती थी..
इसी दौरान अेक दीन वो ओर राधीका होस्टेलपे थे.. ओर अपने नीजी कमरेमे चुदाइ कर रहे थे.. तब लखनने राधीकाको रजीया ओर दयाके बारेमे बात की.. तो राधीका तुरंत लखनकी बात मान गइ.. ओर ये केह दीयाकी दोनोके आनेसे उनको भी अपने बच्चेको पालनेका टाइम मीलेगा.. ओर अब वो लखनके साथ ही हेतो उसे उन घरकी कोइ जरुरत नही हे..
इसी दौरान लखन टीना ओर वसुधासे चेट करते काफी आगे बढ चुका था.. टीनाके साथ तो दो बार ओर कोफी शापमे मील चुका था.. ओर बात चुंबन ओर हल्कीसी छेडखानी तक पहोंच गइ थी.. टीनाने लखनको डीनरके लीये अपने घरपे इनवाइट कीया.. लखन जानता था.. की जब वो टीनाके घर जायेगा तब चार पांच घंटे वही रहेना पडेगा..

उधर गांवमे भी अब भावीका घरके सदस्योसे काफी घुलमील गइ थी.. उनको पुनमका साथ बहुत अच्छा लगा.. वो बार बार धृवसे छुटकारा पानेकी वजहसे पुनमका आभार जता रही थी.. उसने पुनमसे लखनके बारेमे ओर परीवारके बारेमे काफी कुछ जान लीया.. ओर वो लखनकी ओर पुरी तराह प्रभावीत होगइ..
जब मंजुने उसे लखनके साथ मंदीरमे सादीका प्रस्ताव रखा.. तब वो मंजुसे लीपटकर खुब रोइ.. ओर उसने सादीका प्रस्ताव स्वीकार करलीया.. तो पुनम उसे अपनी सौतन कहेते छेडने लगी.. ओर ये बात उसने सृतीको फोन करके बताइ.. तो सृती भी बहुत खुस होगइ..
चारु ओर नीशा अेक साथ सुहागरात मनाते साथमे ही देवायतसे प्रेगनेन्ट हुइ थी.. ओर उनके प्रैगनन्सीका समय भी खतम होगया था.. तो अेक दीन सुबह चारुको लेबर पेइन हुआ.. ओर देवायत रश्मी चारुके साथ नीशाको भी लेकर सहेरमे सृतीकी क्लीनीकपे चला गया..
वहा सृतीने चारुकी डीलीवरी की.. ओर चारुने अेक सुंदर लडकेको जन्म दीया.. ओर उसी साम नीशाने भी अेक लडकीको जन्म दीया.. दोनो बहुत खुस थी.. लखन राधीका चंदा सबलोग वहा मौजुद रहे.. फीर दुसरे दीन सृतीने दोनोको छुटी देदी.. ओर देवायत सबको लेकर वापस गांव चला गया..
कुछ दीन बीते ही थे तब अेक दीन पुनमका फोन सृतीपे आगया.. ओर सबको गांव बुला लीया.. तो सृती सब समज गइ.. जब लखन आया तो उसने लखनसे बात करली.. तो लखन उसी वक्त जानेको तैयार होगया.. ओर बंगलेको ताला मारके सबको लेकर गांव चला गया..
वहा जाकर देखा तो आज हमेसाकी तरह मंजु बहार नही आइ.. लखन दैडकर अंदर चला गया.. तो मंजु बहुत ही थकी हुइ हालतमे सोफेपे बैठी थी.. लखन जाते ही उनसे लीपट गया.. ओर आंसु बहाने लगा.. मंजुने कसकर लखनको गले लगा लीया ओर उसे सांत करने लगी..
मंजुला : (आंख गीली करते) बस कर मेरे बच्चे.. रो मत.. मुजे खुसी खुसी हसके वीदा करना..
लखन : (रोते) मोम.. मत करो अैसी बाते.. हम सब आपके बीना कैसे जीयेगे..?
मंजुला : (मुस्कुराते आंसु पोछते) अरे लेकीन मे कहा जा रही हु..? मुजे वापस भीतो आना हे.. (भावनाके पेटकी ओर उंगली दीखाते) देख वहा.. मे वही हु.. जो ठीक पांच महीनेके बाद वापस आउगी.. तब मुजे खुब प्यार देना.. अपनी गोदीमे खीलाना..
जब लखन ओर मंजु गले लगते रोते हुअे अेक दुसरेसे बाते कर रहे थे.. तब घरके सभी सदस्यो वही खडे रहेते दोनोकी बात सुनकर आंसु बहा रहे थे.. तभी मंजुकी नजर सृतीकी ओर गइ.. तो उसने अपनी बाहे फैलाइ.. ओर सृती भी रोते हुअे दोडकर मंजुके दुसरी ओर गले लग गइ..
मंजुला : (सर सहेलाते) मेरी बच्ची.. रो मत.. मे अभी कहा जा रही हु..? बस.. आखरी दीनोमे तुम सबके साथ रहेना चाहती थी.. तो तुम सबको बुला लीया.. तु ओर पुनोतो मेरी बहादुर बच्चीया हो.. तुजे लता भावु ओर पुनोको ही मेरे लखनको सम्हालना हे.. ओर ये सबको भी.. देखो अब तो भावीकाभी आगइ हे..
फीर चंदा भी मंजुको मीलते खुब रोइ.. ओर इन सबसे बुरा हाल तो देवायतका था.. मंजुने उसे ना रोनेकी कसम खीलाइ थी.. तो वो सबके सामने रो भी नही सकता था.. वो बस.. अपनी ओफीसमे बैठकर सबसे छुपकर आंसु बहाते रहेता.. वो अंदरसे पुरी तराह टुट गया था..
आज लखन कही नही गया.. पुरा दीन मंजुके साथ ही रहा.. वो जब पुनमको उनके रुममे मीलने गया तब पुनम ओर लखन गले मीलकर खुब रोये.. पुनमने लखनको मंजुके ओर तीन दीन होनेकी बात कही.. मंजुने भी लखनको गांवमे दोस्तोको मीलनेके लीये कहा.. ओर देवायतको सम्हालनेके लीये कहा..

लेकीन लखनने मना कर दीया.. क्युकी वो इस हालतमे देवायतको नही सम्हाल पायेगा.. सामको देवायत आया तो सबलोग उनके सामने जबर दस्तीसे मुस्कुरानेका नाटक करते रहे.. लखन सबको हसानेकी कोसीस करता रहा.. सबलोग खानेके लीये बैठ गये.. पुनमने मंजुका हाथ पकड लीया.. ओर खानेकी टेबलकी ओर लेजाने लगी.. तो लखनने उसे अपनी गोदमे ही उठा लीया..
मंजुला : (जोरोसे हसते) अरे कमीने छोड मे चली जाउगी.. कही गीरा देगा.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते) नही.. अब तीन दीन आपको गोदमे ही घुमाउगा.. हें..हें..हें..
मंजुला : (सामने देखते धीरेसे) अच्छा.. तो पुनोसे सब जानलीया.. चल कोइ बात नही..
फीर सबलोग खानेको बैठ गये.. लखन माहोलको हल्का बनानेकी कोसीस करते सबको हसाता रहा.. लखनकी इस समजदारीपे पुनम सृती ओर भावीका बहुत खुस होगइ.. भावीका यहा रहेते रेग्युलर मंजुको चेक करती थी.. फीर देवायतकी बाकीकी बीवीया भी मंजुको मीलने आती थी..
उस रात खानेके बाद सबलोग होलमे बैठे थे तब मंजुने दया ओर रजीयाको अपने पास बुलाया.. फीर दोनोको पचास पचास लाख ओर राधीकाके घरके साथ दोनोको राधीकाके साथ होस्टेल सम्हालने ओर उनमे भागीदारी भी दी.. जीसे सुनकर दया ओर रजीया फुट फुटकर रोने लगी..
दया : (रोते हुअे) दीदी.. आपको ये सब.. हमे माफ करदो.. हम जाना नही चाहती.. आपको तो हम दोनोके बारेमे सब पता ही हे..
मंजुला : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) हां बेटा.. मेही सबकी मां हु.. तो तुम दोनोके दीलकी बात कैसे नही जानती..? तुम दोनो चीन्ता मत करो.. हम तुम दोनोको अपने परीवारसे थोडीना अलग कर रहे हे.. मेरा लखन तुम दोनोका खयाल अैसे ही रखेगा.. जैसे अभी रख रहा हे..
लखन : (मुस्कुराते) हां रजु.. हम सब अेक ही परीवार हे.. बस.. हमे आपकी भी भावनाओका खयाल रखना हे.. आप दोनोकी ओर हमारे बच्चेकी पुरी जीम्वेवारी हम नीभायेगे.. येतो सब अेक व्यव्सथाके भाग रुप हे.. तो तुम दोनो चीन्ता मत करो.. हमारे घरका दरवाजा हमेसा तुम दोनोके लीये खुला ही हे..
तब दया ओर रजीयाको पुरी तराह समजमे आ गयाकी उनके दीलकी बात मंजु ओर पुनमको पता चल गइ हे.. ओर पुनमने लखनको सबकुछ बता दीया हे.. ओर इस बातके लीये रजीया ओर दयाके दीलमे लखनके लीये इजत ओर बढ गइ.. ओर दयाने भी भवीस्यमे लखनको समर्पीत होनेकी ठानली..
फीर दो दीन बीत गये.. इन दो दीनमे ना लखन कही बहार गया ना देवायत खेतोपे.. भानुके माध्यमसे सरला ओर रमाको भी पता चला तो वोभी मंजुको मीलने आगइ.. देखा तो रमाका पेट भी काफी बढ गया था.. वो आते ही लखनको देखकर सरमा गइ.. ओर मुस्कुराने लगी..
आज देवायतकी सभी बीवीया सुबहसे ही मोजुद थी.. गांवमे भी कइ लोगोको सबकुछ पता चल गया था.. सबलोग मंजुके लीये प्रोर्थना कर रहे थे.. आज सुबहसे ही मंजु बीस्तरसे उठ नही पाइ.. उनको पता था आज उनकी इस हवेलीमे आखरी रात हे..
देवायत ओर लखन उनके दोनो ओर पास ही मंजुका हाथ थामते बैठे रहे.. देवायतकी आंखसे रुक रु्कके आंसु बेह रहे थे.. मंजुने उसे सम्माइल देकर नामे गरदन हीलाके आंसु बहानेको मना कीया.. देवायतकी सभी बीवीयाके साथ वसुधा ब्रीन्दा बसंती सबलोग मंजुके रुममे बैठे थे..
आज कीसीके गलेमे अेक नीवाला भी नही गया.. नीर्मलाकी तो बेटी थी.. वो सुबहसे ही मंजुके पैरके पास बैठते आंसु बहा रही थी.. कीसीको पता नही था.. लेकीन मंजुने सबको कीया हुआ वादा उसे आज भी याद था.. पुरा रुम लोगोसे भरा हुआ था.. सब लोग गुमसुम बैठे थे..
मंजुने अपने बेटे वीजयको याद कीया.. तो चंदा फौरन वीजयको लेकर आगइ.. मंजुने उनको देखतेही स्माइलकी.. ओर उनके सरपे हाथ घुकाया.. तो चंदा देवायत ओर नीर्मलाकी आंख गीली होगइ.. फीर लखनने मंजुका सर गोदमे लेकर उसे संतरेका ज्युस पीलाया..
तो मंजुने थोडासा पीया.. फीर बाकी बचा उसने लखन ओर वीजयको अपने हाथोसे पीलाया.. फीर लखनकी गोदमे ही सर रखते सो गइ.. मध्य रातके बाराह बजनेको आये थे.. सबलोग थके हुअे थे.. ओर पता नही क्यु सबकी आंखे भारी होने लगी.. जैसे सबको नीद आ रही हो.. सबलोग अेक के बाद अेक धीरे धीरे आंख बंध करते नींदकी आगोसमे चले गये..









