Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 117 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९६

इनमे ब्रीन्दा बसंतीके साथ बनवारीलालकी बहु बींदीया.. ओर साथमे नीशा वसुधाभी सामील होगये.. चारु रश्मी ओर वंदना तो पहेलेसे ही पंचायतकी सदस्य थी.. अ‍ैसा लगता था पुरा गांव अब महीला प्रधान होगया हो.. सभी महीलाओने अब पुरे गांवकी कमान अपने हाथोमे लेनेकी ठानली.. ओर चारुने पुनमकी अगवाइमे गांवका ओर ज्यादा वीकास करनेपे जोर दीया.... अब आगे

लखन सबको लेकर घरपे आगया.. ओर होलमे बेठे बाते कर रहे थे तब भावीकाने लखनको अब भी थोडा डर लगनेकी बात कही.. तो लखनने थोडी सेखी मारी.. ओर सबके सामने अ‍ैसे ही धृवको हाल चाल जाननेके लीये फोन कीया.. जब फोन लगा तो सबको चुप रहेनेका इसारा करते फोन स्पीकरपे करदीया..

लखन : (मुस्कुराते) सब चुप रहेना.. अभी आपका डर खतम कर देता हु..

धृव : (फोन लगते ही) अरे भाइ.. कैसे हो..? बडी भाभीका सब कार्य संप्पन होगया..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाइ.. कल ही होगया.. सब खतम करके आज ही सहेर वापस आगया.. तो सोचा तुजे फोन करु.. बोल.. क्या हालचाल हे..? तेरे पापाका सब कार्य कंपलीट होगया..?

धृव : (फोनपे) हां भाइ.. मे मीलने आया उनसे बहुत दीन पहेलेही कर दीया.. सबकुछ पांच दीनमे ही नीपटा दीया.. आपतो जानते हो हमारे यहा कोइ रीस्तेदार नही हे.. बस.. हम ओर पुजाके ससुरलाल वाले.. हम सब हरीद्वर जाकर काम नीपटाके आगये.. ओर आते ही वहाका सब प्रोपर्टी ओर बीजनेसको समेट लीया.. ओर यहा गांधीनगर रहेने आगये..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. वहा पुजाका घर भी नजदीक होगया.. आंटीकी तबीयत तो ठीक हेनां..?

धृव : (थोडा हीचकीचाते धीरेसे) भाइ.. आपने कहाथानां..? सायद हमने भी आपके गांवके नीयम अपना लीये हे..

लखन : (मुस्कुराते) मतलब..?

धृव : (धीरेसे) भाइ.. वहा कीसीको कहेना नही.. पापाका कार्य खतम होते ही मेने मोमसे सादी करली हे.. भाइ हमारा अफैर चल रहा था.. इसी वजहसे भावुने मुजे छोड दीया था.. वो बहुत ही अच्छी थी..

लखन : (मुस्कुराते) कमीने वो इतनी अच्छी थी तो फीर तुमने उसे छोडा क्यु..?

धृव : (धीरसेसे) भाइ.. मैने नही.. उन्होने हमे छोडा हे.. उन्होने मुजे ओर मम्मीको सेक्स करते देख लीया.. सीर्फ आपको बता रहा हु.. पुजाकी दुसरी सादीसे पहेले ही मे ओर मम्मी रीलेशनमे आगये थे.. वो पापाके बीजी रहेनेकी वजहसे मुजसे बहुत प्यार करने लगी थी.. मोमने पापासे सभी उमीदे छोड दीथी..

लखन : तो फीर तुमने भावीकासे सादी क्युकी..? सम्हाल लेते पुजा ओर तेरी मम्मीको..

धृव : नही यार.. पुजाने अपनी सादीके लीये सर्त रखीथी.. की मे कीसी लडकीसे सादी करलु.. तब पुजाको मेरे ओर मोमके रीलेशनके बारेमे नही पता था.. फीर भावुसे बार बार मीलनेकी वजहसे मुजे अच्छी लगती थी.. तो सादी करली.. लेकीन मे मोम ओर पुजाके बीचमे ही फसा हुआ था.. तो भावुकी ओर ज्यादा ध्यान नही दे पाया.. तो अच्छा हुआ हमारा डीवोर्स होगया..

लखन : (भावीकाकी ओर मुस्कुराते) यार मेने सुना हे डीवोर्सके बाद उन्होने अपना क्लीनीक बंध करदीया हे..? सायद तेरे डरकी वजहसे ये सहेर छोडकर चली गइ हे..

धृव : (गहेरी सास लेते) यार बहुत गलत हुआ.. उनको लगा होगाकी पापाकी पोलीटीकल पोजीसनकी वजहसे हम उनको परेसान करेगे.. लेकीन सच कहु..? जबसे पापा चले गये तबसे मेने सबकुछ छोड दीया हे.. उन सहेरको भी.. मेने अपनी सभी अयासीया छोडदी.. ओर जीजुके साथ उनके बीजनेसमे उनका हाथ बटाता हु.. वो भी सीर्फ टाइम पास.. वो भावुको डरनेकी जरुरत नही थी.. चालु रखती अपना क्लीनीक..

लखन : (मुस्कुराते) ओर तेरी मम्मी ओर पुजादी.. वो अब खुस हे..?

धृव : (मुस्कुराते) बहुत.. यार मम्मीने तो अब मुजे पुरी तराह अपना पती मानलीया हे.. ओर साथमे मे ओर पुजा भी अब ज्यादा नजदीक आगये हे.. दोनो सौतन मुजे खुब प्यार देती हे..

लखन : (हसते) कमीने भावु भी कम नही थी.. तुने ध्यान ही नही दीया.. कास अगर मुजे मील जाये.. तो मे उसे सादी कर लेता.. हें..हें..हें..

धृव : (जोरोसे हसते) तो कमीने ढुढले उनको.. ओर करले सादी.. वैसे भी तुम लोगोमे कीतनी भी सादीया करलो.. सब चलता हे.. वो ज्यादा दुर नही होगी.. सृतीभाभीकी बेस्ट फ्रेन्ड हेनां..? उनके कोन्टेक्टमे रहेती होगी.. जरा भाभीसे जानले..

लखन : (मुस्कुराते) तो फीर तुजे बुरा नही लगेगा..?

धृव : (हसते) यार मुजे अब क्यु बुरा लगेगा..? हमारा तो डीवोर्स हो गया हे.. बस.. अ‍ेक बार मीले तो मे उनकी माफी मांग लुगा.. ताकी दीलमे कोइ गील्टी ना रहे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे यार.. वो मीलेगी तो तेरी बात जरुर पहुचाउगा.. चल.. मीलते हे..

धृव : (मुस्कुराते) हंम.. यार कभी इधर आना हुआ तो मुजे मीलना.. मे अ‍ेड्रेस सेन्ड करता हु.. चल बाय..

लखन : (फोन कट करतेही भावीकाको) बोलो.. अब डर लगता हे..?

भावीका : (सरमाकर हसते) नही यार.. आपने डर भी खतम करदीया.. ओर हमारी बात भी रखली..

सृती : (मुस्कुराते) भावु.. अब तु बीन्दास्त मेरी क्लीनीकपे चल.. वहा हम दोनो सम्हाल लेगे.. अब कहा हमे पैसोके लीये काम करना हे..

भावीका : (मुस्कुराते) सृती आज नही.. कलसे आउगी.. अभी खाना खाकर कुछ देर आराम करगे.. ओर साम पांच बजे वो वकील अंकलकी अ‍ेपोइटमेन्ट हे.. तो मे ओर लखन वही जा रहे हे..

सृती : (मुस्कुराते) हां यार.. वो जरुरी हे.. तुम अपना सब काम आरामसे नीपटालो.. बादमे आना.. ओर हां.. तेरी वो आरती ओर तेरे जरुरी स्टाफको भेजदे..

भावीका : (मुस्कुराते) ओल मोस्ट सबको छुटी देदी हे.. बस.. सीर्फ ओटीपीकी दो ओरत.. ओर अ‍ेक आरती.. तीनो ही आयेगे.. आरतीको मेने फोन करके सब बता दीया हे.. वो घरपे ही हे..

फीर दो पहोरका खाना राधीका ओर नीलमने मीलकर बना लीया.. लखन चंदा सृती ओर भावीका बाते करते रहे.. चंदा वीजयके साथ खेलते बाते करती रही.. ओर बार बार लखनकी ओर कातील स्माइल करते उनको आंखोसे रुमकी ओर इसारा करती रही.. ओर ये बात सृतीने नोटीस करली..

इतने दीन भावीकाने हवेलीपे रहेकर इस खानदानके बारेमे मंजु ओर पुनमसे काफी कुछ जानलीया था.. घरमे अब कीसीके भी साथ लीप कीस आम बात होगइ थी.. सबलोग खाना खाने बैठ गये.. सृती राधीका लखनके साथ अगल बगलमे बैठ गइ..ओर चंदा भावीका ओर नीलम इन तीनोके सामने बैठ गये..

सभी खाना टेबलके बीच था.. सब लोग अपने हाथोसे लेने लगे.. लेकीन कीसीको पता नही थाकी लखन नीचेसे पैरोसे नीलम ओर चंदाको छेड रहा था.. नीलम सरमके मारे सर जुकाते अपने होठोको दातोसे दबाके लखनकी हरकत बरदास्त कर रही थी.. ओर लखन अ‍ेक ही पैरोसे दोनोकी चुतको बारी बारी छेड रहा था..

नीलम अपनी सांसके साथ बैठी थी.. तब उनको भी नही पता थाकी जो हाल उनका हो रहा हे वोही हाल उनकी सासका हो रहा हे.. चंदाकी सांस भारी होगइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते उनकी हरकत बरदास्त करती रही.. उनकी चुत पानी छोडने लगी..
 
इसी दौरान गांवमे मुना बरखा ओर बसंती खाना खा रहे थे.. तभी बसंतीको कुछ अजीब लगने लगा.. उनको उबके आये.. ओर वो जटसे अपने मुहपे हाथ रखते खडी होकर बाथरुममे भाग गइ.. ओर अंदर जाकर उल्टीया करने लगी.. जीसे देखकर बरखा भी उनके पीछे चली गइ..

ओर मनमे खुस होते बसंतीकी पीठ सहेलाती रही.. फीर उल्टीया होगइ तो मुह साफ करते सरमाने लगी.. वो सरमके मारे बरखासे नजरे नही मीला पा रही थी.. ओर मंद मंद मुस्कुरा रही थी.. तभी बरखाने उनको कंधेसे पकडकर अपनी ओर कीया ओर मुस्कुराते बसंतीकी आंखोमे देखने लगी..

बरखा : (मुस्कुराते) मम्मी.. क्या सचमे..?

बसंती : (मुस्कुराते सरमाकर नजरे जुकाते) सायद.. पका तो सुबह पता चलेगा.. क्या तेरे पास प्रेगनन्सी चेक करनेकी कीट पडी हे..? अभी बहार कुछ मत कहेना.. पहेले पका होजानेदे.. फीर उनको सरप्राइज देगे..

बरखा : (धीरेसे फुसफुसाते) मोम.. पका ही समजो.. कमीनेका हथीयार हेही इतना दमदार की कीसीको अ‍ेक ही बारमे पेटसे करदे.. कीतना पानी नीकालता हे.. हमारी पुरी मुनीया भरदेता हे.. ठीक हे.. मेरे पास अ‍ेक कीट पडी हे.. सुबह पका करलीजीये.. अगर रीजल्ट पोसीटीव आया.. तो हम कल घरपे सेलीब्रेट करेगे..

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) सुन.. तुजे अ‍ेक बात कहेनी हे..

बरखा : (मुस्कुराते) क्या..?

बसंती : (मुस्कुराते) वो.. ब्रीन्दा.. वोभी श्रीधरसे पेटसे हो गइ हे.. दोनो सहेली साथमे..

मुना : (अंदर आते थोडी चीन्तासे) बरखा क्या हुआ मम्मीको..? तबीयत ठीक नही हे क्या..?

बरखा : (मनमे) कमीने मम्मीको चोद चोदके उनका पेट फुला दीया.. अब तो मम्मी कहेना छोडदे.. सबके सब कमीने दोस्त अ‍ेक जैसे ही हे.. वहा श्रीधर भैया भी पीछे नही रहे.. उन्होने भी अपनी मांका पेट फुला दीया हे.. पता नही तुमने सबको कोनसी जडी बुटी पीलादी हे..

बसंती : (बातको सम्हालते) अरे कुछ नही हुआ.. लगता हे खानेमे कुछ आगया होगा.. आप चीन्ता मत करे.. चलीये बहार.. खाना खा लेते हे.. चल बरखा..

फीर तीनो बहार आगये ओर खानेके लीये बैठ गये..पुरे खानेके दोरान बसंती ओर बरखा अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते मंद मंद मुस्कुराती रही.. ब्रीन्दाने बसंतीको बताया था.. की वो प्रेगनेन्ट हो गइ हे.. लेकीन उसने बसंतीसे ये बात छुपाइकी वो लखनसे चुद चुकी हे ओर उनसे पेटसे हुइ हे.. ये राज वो सीर्फ उनके ओर लखनके बीच ही रखना चाहती थी..

उघर जब खाना फीनीस हो गया तब राधीका नीलम ओर सृती कीचनका काम समेटने लगी.. तबतक लखन वीजयके साथ खेलता रहा.. तो चंदा उन दोनोको खेलते देखकर हस रही थी.. ओर खुस हो रही थी.. तभी सृतीने आकर वीजयको अपने पास लेलीया..

सृती : (चंदाकी ओर देखते) भाभी.. आज आप थोडा आराम करलो.. मे वीजयको अपने साथ उपर लेजाती हु.. लखन भी यही आराम करलेगा.. क्युकी ये उपर आये तो हो गया हमारा आराम..

कहेते सृती चंदाकी ओर देखते मुस्कुराते सबसे छुपकर आंख मारती हे.. तो चंदा समज जाती हे.. ओर सर्मसार होजाती हे.. वो जटसे खडी होते अपने रुममे चली गइ.. सृती नीलम राधीका ओर भावीकाको लेकर उपर चली गइ.. तब नीलम ओर राधीकाको पता थाकी अब चंदाकी कुटाइ होगी..

चंदा यहा आकर बहुत ही खुस थी.. क्युकी सभी लोग उनका ओर उनकी भावनाओका अच्छी तराह खयाल रख रहे थे.. जैसे ही सबलोग उपर चले गये लखन मेइन गेइट बंध करके चंदाके रुममे चला गया.. तो चंदा पहेलेसे ही लखनका इन्तजार करते हल्कासा शींगार कर रही थी..





जैसे ही लखन आया वो दोडके लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. लखन उनको अपनी गोदमे उठमकर बेठकी ओर चला गया.. फीर कुछ ही देरमे रुममे चंदाकी मादक सीसकारीयाकी आवाज गुंजने लगी.. वो अपनी कमर उछाल उछालके लखनसे चुदवा रही थी..





लखनने लगातार बीना नीचे उतरे तीन बार चंदाकी मुनीयाको भरदीया.. ओर चंदाको पुरी तराह ठंडी करदी.. उनके खुले बाल बेडपे बीखरे हुअ‍े थे.. वो अब भी सरमाकर कामुक नजरोसे लखनकी ओर देखते उनकी पीठ सहेला रही थी.. लखनका लंड अबभी उनको चुतमे सख्त महेसुस हो रहा था..

चंदा : (बाहोमे भीचते सरमाकर धीेसे) जानु.. बस.. अ‍ैसे ही मेरा खयाल रखना.. अब तो हम दोनोके बारेमे सबको पता चल गया हे.. बडी दीदीको भी.. उनको मेने सब सच बता दीया हे.. सृती भी अब पुनोदीकी तराह मेरा खयाल रखने लगी हे..

लखन : (होंठ चुमते) चंदा.. अब मुजे भाइकी सभी बीवीयोका अ‍ैसे ही खयाल रखना पडेगा.. भाइ बहुत टुट चुके हे.. कास मोम हमारे बीच होती..

चंदा : (सरमाकर कमर हीलाते) जानु.. मुजे उनकी दुसरी बीवीओका नही पता.. बस मुजे इतना पता हे की में आपसे प्यार करने लगी हु.. ओर आपको मेरा अ‍ैसे ही खयाल रखना पडेगा.. ओर जरुरत पडी तो मे आपसे सादी भी करलुगी.. ओर आप चाहोतो हमारा बच्चा भी.. अब मुजे कीसीकी परवा नही हे..





लखन : (उतेजनामे कमर हीलाते धीरेसे चोदते) सादी करोगी मुजसे..? ठीक हे.. आजसे तु मेरी सीक्रेट बीवी.. लेकीन तुजे चोदुगा तो भाभी मानकर..

चंदा : (सर्मसार होते मुस्कुराते कमर हीलाते) तो फीर सादी करनेका क्या भायदा.. अपनी ओरीजनल भाभीको ही खुस रखा करो.. प्लीज.. थोडा जोरोसे.. अ‍ेक रंडीकी तराह.. आप कीतना मस्त चोदते हो..

लखन : (जोरोसे कमर हीलाते) भाभी.. तु बहुत होट हे.. जीतो चाहता हे तुजे अ‍ैसे ही जींदगी भर चोदता रहु..





चंदा : (सीसकारीया करते) तो चोदोनां.. कीसने मना कीया हे.. जबसे हम मीले हे.. उनके बाद मेने कभी आपको मना कीया हे क्या..? मे यहा आपसे चुदवानेके लीये ही आइ हु.. इसीलीये आपकी भाभी हमेसा आपके लीये चुदवानेको तैयार रहेती हे.. लखन.. मे बहुत कामी हु.. मुजे अ‍ैसे ही चुदाइ चाहीये.. मे जींदगीभर अ‍ैसे ही चुदवानेके लीये रेडी रहुगी..





दोनो अ‍ैसे ही कामुक बाते करते चुदाइ करते रहे.. आज बाते करते लखनने चंदाको चौथी बार लगातार चोद लीया.. ओर अबतकके सारे दीनकी चंदाकी प्यास बुजादी.. फीर दोनो सावर लेकर वही सो गये.. सृतीने भी चंदाको दीनमे ही नीपटा दीया.. ताकी आजकी रात वो सब लखनके साथ पुरी रात मोज मस्ती करती रहे..

साम चार बजे सृतीने फटाफट नीचे आकर लखनको जगा दीया.. देखा तो चंदा अभी भी नंगीही अपने उपर चदर डालते गहेरी नींद सो रही थी.. सृतीने दांत पीसकर हसते हुअ‍े लखनको मुका मारदीया.. ओर उनका हाथ पकडर कीचनमे चली गइ.. ओर लखनकी बाहोमे समा गइ.. तो लखन उनके बुब्सको मसलते होठ चुमने लगा..

सृती : (होंठ चुमते) भाइ.. अब पुनोदीने मुजे यहाकी कुछ जीम्वेवारी दीहे.. अभी हम यहा जीतनी हे.. हम सबका आपको अ‍ैसेही खयाल रखना पडेगा..

लखन : (हसते धीरेसे) लेकीन यहा तो भावीका भी हे.. क्या उनका भी..? हें..हें..हें..

सृती : (हसते सामने देखते) हां.. उनका भी.. क्युकी मुजे पता हे अब वोभी हमारी सौतन होने वाली हे.. ओर साथमे नीलुका भी खयाल रखना पडेगा.. अब मुजे सब पता चल गया हे.. आप भावु पहेली बार होटेलमे मीले थेनां..? फीर दो बार उनकी क्लीनीकपे.. भावुने मुजे सब बतादीया हे.. बस.. कुछ दीन ठहेर जाओ.. हम आप दोनोकी सादी हमारे मंदीरमे करवा देगे.. जहा हमने कीथी..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे.. इस बारेमे मेरी मोमसे बात हुइ थी..

सृती : (मुस्कुराते) भाइ.. आज रात तैयार रहीयोे.. आज तो आपको चार चारको सम्हालना हे..

लखन : (सामने देखते) तु राधु ओर भावुही तो हे.. चौथा कौन..?

सृती : (मुस्कुराते) आपकी सबसे छोटी रानी.. हमारी नीलु.. मुजे पता हे आप दोनोने यहा गांधर्व सादी करली हे.. इसीलीये तो चंदाभाभीका अभी नीपटा दीया.. ताकी पुरी रात सोती रहे.. इन्हीके डरकी वजहसे बेचारी नीलुकी बारी भी नही आती.. बस.. अ‍ेक आस लेके आपकी ओर देखती रहेती हे.. ओर याद रहे.. इस बारेमे चंदा भाभीको पता ना चले..

तभी भावीका राधीका ओर नीलम भी नीचे आजाते हे.. तीनो लखन ओर सृतीको कीचनमे अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे देखकर हसने लगती हे.. राधीका सृती चाइ नास्ता बनाते हे.. तब भावीका ओर लखन फेक्टरीकी फाइल ओर उनकी मम्मीका दीया हुआ लेटर नीकाल रहे थे..

चंदा अबभी सो रही थी.. कीसीने उनको डीस्टर्ब नही कीया.. जब चाइ नास्ता करलीया तो भावीका लखनके साथ फेक्टरीके वकील.. ओर उनके पापाके दोस्त पंकजभाइकी ओफीसकी ओर चल पडे.. जहा पहेलेही उसने पंकजभाइसे बात करलीथी ओर उनका अ‍ेड्रेस लेलीया था..
 
वहा पहोचे तो अ‍ेक बहुत ही आलीसन बील्डींन्गमे उनका बहुत बडा ओफीस था.. बहार रीस्ेपनीस्ट बैठी थी.. भावीकाने वहा अपना नाम लीखवाया.. ओर अभीकी अ‍ेपोइटमेन्टकी बातकी.. तो रीसेपनीस्टने सबकुछ लीख लीया ओर इन्टरकोमसे बात करली.. तब कुछ देरके बाद..

रीसेपनीस्ट : (मुस्कुराते) मेडम.. सीर्फ आपकी अ‍ेपोइटमेन्ट थीनां..? तो आप अकेली ही अंदर जाइअ‍े..

भावीका : (थोडा असहज होते रीक्व.स्ट करते) सोरी.. प्लीज.. ये मेरे हबी हे.. मेरे साथ ही हे..

रीस्पनीस्ट : (मुस्कुराते) सोरी मेम.. सरने कहा हे.. वो सीर्फ आपको ही अकेलेमे मीलना चाहते हे.. आप समज गइनां.. ये यही बैठते हेनां.. मे इनको यही कोफी पीला दुगी.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) भावु.. कोइ बात नही तुम मीलकर आओ.. मुजे यहा इस सृष्टीका बहेतरीन सौन्दर्यका रस पान करनेदो.. ये बहुत ही खुबसुरत हे.. हें..हें..हें..

रीसेपनीस्ट : (मुस्कुराते) वेरी फनी.. सर आप बहुत ही मजाकीये हो..

भावीका : (दांत पीसते धीरेसे) देखना कोइ सरारत नही..

कहेते भावीका मुह बीगाडकर लखनको अ‍ेक मुका जडते अंदर चली गइ.. तो रीसेपनीस्ट ओर लखन दोनो हसने लगे.. जैसे ही भावीका अंदर गइ तो ओफीसमे उन वकीलके सीवा कोइ नही था.. वो भावीकाको देखते ही आंख चौडी करते खडे होगये..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) अरे भावीका.. मेरी बच्ची.. आखीर आ ही गइ..

भावीका : (मुस्कुराते) जी अंकल..

भावीकाने उसे हाथ जोडकर नमस्ते कीया.. तो भावीकाकी ओर प्यारसे देखते हाथके इसारोसे चेयरकी ओर इसारा कीया.. फीर दोनो अपनी चेयरपे बैठ गये.. पंकजभाइ अब भी भावीकाकी ओर देख रहे थे.. भावीकाने अपनी मम्मीने दीया हुआ लेटर ओर फाइल उसे देदी..

वो जैसे जैसे पढते गये उनकी आंख गीली होने लगी.. वो अभी तक अ‍ेक सब्द भी नही बोले थे.. जैसे ही लेटर पढ लीया वो कुछ नही बोले.. अपने दोनो हाथोमे चहेरा छुपा लीया.. उसे देखकर भावीका भी थोडी अनकंफेर्टबल होगइ.. क्युकी पंकजभाइ आंसु बहा रहे थे..

भावीका उसे अचंबीत होते देखती रही.. फीर पंकजभाइ सीकंसे अपना मुह साफ करके आये.. तो भावीकाने खडे होते उनके पांव छुलीये.. तो पंकजभाइने उसे फौरन पाव छुनेसे रोका.. ओर भावीकाको अपने गले लगा लीया.. फीर अपना हाथ उनके सरपे रखदीया.. ओर आंख फीरसे गीली होगइ.. फीर अपनी चेयरपे जाकर बैठ गये..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) माफ करना बेटा.. आज बरसोके बाद तुजे पहेली बार देखा.. तु हुबहु मेरी बैटी जैसी दीखती हे.. तु बहुत छोटी थी.. तुजे अपनी गोदमे खीलाया हे.. क्या तु डोक्टर बन गइ..?

भावीका : (मुस्कुराते) जी अंकल.. इसी सहेरमे अपना क्लीनीक चलाती हु..

पंकजभाइ : तुमने डोक्टरी करली.. तो फीर इतने दीनो तक तुम कहा थी..? हमने तुम्हारा कीतना इन्तजार कीया.. तुम्हारे बंगलेपे भी आये थे.. वो बंगलातो बंध ही रहेता था.. तुम्हारा नंबर भी नही मीला..

भावीका : (मुस्कुराते) सोरी अंकल.. पहेले तो मुजे इस फाइलके बारेमे नही पता था.. सोचा मम्मी पापाके कोइ फेक्टीके कागजात होगे.. तो मेने बक्षेको अलमारीके उपर ही रख दीया था..

पंकजभाइ : ओर बंगला क्यु बंध रखा था..? क्या वहा नही रहेती..?

भावीका : (थोडा सरमाते धीरेसे) वो.. वो मेने अ‍ेक लडकेसे सादी करली थी.. उनके पापा बहुत बडे पोलीटीसीयन थे.. बस.. उसीके घरमे मीन्स.. अपने ससुरालमे रहेती थी.. हालही मे हमारा डीवोर्स हुआ हे..

पंकजभाइ : (आस्चर्यसे देखते) पोलीटीसीयन थे..? मतलब..? अब नही हे..?

भावीका : (सर जुकाते) नही.. अब वो इस दुनीयामे नही रहे.. कुछ दीन पहेलेही वो स्केन्डलमे फस चुके थे.. ओर उन्होने सुसाइड करलीया..

पंकजभाइ : (चीन्तासे) क्या.. तुमने उन हरामीके बेटेसे सादी करली थी..?

भावीका : (सर जुकाते धीरेसे) सोरी अंकल.. मेभी उनको पहेचाननेमे धोखा खागइ थी.. येतो अच्छा हुआ जब ये सब कांड हुआ उनसे कुछ दीन पहेले ही मेने डीवोर्स ले लीया..

पंकजभाइ : (सामने देखते) चलो अच्छा हुआ.. तुम्हे कोइ तकलीफ तो नही हुइनां..?

भावीका : (मुस्कुराते) नही अंकल.. सबकुछ अच्छेसे नीपट गया.. मेने सुना हे वो लोग यहा अपना सबकुछ समेटकर दुसरे सहेरमे चले गये हे..

फीर पंकज फाइल देखने लगा.. ओर देखकर खडा होगया.. फीर उसने अपनी अलमारीसे अ‍ेक फाइल नीकाली.. ओर दोनो फाइलको मीलाकर चेक करने लगा.. जैसे ही फाइल देखली उनके चहेरेपे अ‍ेक चमक आगइ.. ओर खुसीसे मुस्कुराते भावीकाकी ओर देखने लगे..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बेटा.. अ‍ेकदम परफेक्ट.. इनमे कोइ डाउट नही हेकी तुम वोही भावीका हो जो अब इस फेक्टरीकी मालीक हो.. बस.. मुजे कुछ नीयम फोलोव करने हे.. जो तुम्हारे पापाकी वसीयतमे लीखा हे.. क्या तुजे कोइ अ‍ेतराज तो नही..? हें..हें..हें..

भावीका : (नम आंओसे) क्या..? मे..? फेक्टरीकी मालीक..? नही अंकल.. अ‍ैसा नही हो सकता.. मे यहा फेक्टरीपे कोइ दावा करने नही आइ हु.. बस.. मम्मीने लेटरमे आपको इस सब कागजातोके साथ मीलनेके लीये बोला हे.. तो सीर्फ मीलने आइ हु.. बाकी मम्मीने मेरे लीये इतने पैसे छोडे हे मे इनमे ही खुस हु..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) साबास बेटा.. मुजे पता था.. मेरी बेटी पैसोकी लालची नही होगी.. अब सब ध्यानसे सुन.. तुजे मे वसीयत पढकर सुनाता हु.. अगर ना समजमे आये तो मुजे पुछलेना..

भावीका : (सामने देखकर मुस्कुराते) अंकल.. मम्मीने लेटरमे लीखा हे.. की आप इनके चहीते देवर हे.. बस.. उनमे ही सबकुछ समज लीया.. अब वसीयत पढनेकी कोइ जरुरत नही हे.. मुजे आपपे पुरा भरोसा हे.. आप जो भी कहोगे मे मान लुगी..

इतना सुनते ही पंकजभाइ फाइल छोडकर चेयरकी पीठपे जुक कर बैठ गये.. ओर अपना चहेरेको हाथसे ढक लीया.. जब हाथ हटाये तो उनकी आंओमे आंसु बेह रहे थे.. फीर वो खडे हो गये.. ओर अपना मुह धो लीया.. ओर भावीकाने खडे होकर उनको पानी दीया.. तो पानी पीकर उसने भावीकाको गले लगा लीया.. फीर दोनो बैठ गये..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बेटी.. तु कीतनी भोली हे.. कीसीपे इतना भी भरोसा करना ठीक नही हे.. ओर वोभी बात जब प्रोपर्टी ओर पैसेकी हो.. तुम बहुत ही नेक दील लडकी हो.. बीलकुल मेरी नेहाकी तराह.. क्या तुम उनको जानती हे..?

भावीका : (मुस्कुराते नामे सर हीलाते) सायद पुरी तराह नही.. बस.. सीर्फ इतना ही धुंधला धुंधला याद आ रहा हे.. की मे जब छोटी थी.. तब अ‍ेक लडकीके साथ खेलती थी.. ओर जब मुजे होस्टेलमे भेज रहे थे.. तो वो कीसी ओरतसे लीपटकर रो रही थी.. बस..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बस.. वोही नेहा थी.. ओर उस ओरत मेरी पत्नी थी.. तुजे आज भी याद करती हे.. खैर.. वो सब बादमे.. जब तु हमारे घर आयेगी.. तेरी आंटी भी तेरा बेसब्रीसे आनेका इन्तजार कर रही हे..

भावीका : (मुस्कुराते) जी.. मे आंटीको मीलने जरुर आउगी..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बेटा वो मीलने मीलाना तो अब होताही रहेगा.. पहेले तु कामकी बाते सुन.. ताकी मेरा अ‍ेक बोज हल्का हो जाये..

भावीका : (मुस्कुराते) जी अंकल..

पंकजभाइ : (सामने देखते) सुन.. ये फेक्टरी सीर्फ तेते पापाकी नही हे.. इनमे बरसोसे अ‍ेक सायलन्ट पार्टनर भी हे.. जीन्होने इन फेक्टरीको खडा करनेमे तेरे पापाकी बहुत बडी फाइनान्सीयल हेल्प कीथी.. बीजनेस बढता गया.. तेरे पापा उनको सब पैसे वापस दे सकते थे.. लेकीन उन्होने अ‍ैसा नही कीया..

भावीका : (मुस्कुराते) सायद अ‍ेहसानकी वजहसे..?

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बीलकुल सही कहा तुमने.. तुम्हारे पापा भी तुम्हारी तराह खुदार थे.. उन्होने काफी हीस्सा तो वापस देदीया.. लेकीन २५ परस्ट उनका हीस्सा अभी भी रखा हे.. ओर बाकीका ७५ परसन्ट अभी भी तेरे पापाका हे.. ओर उन ७५ परसन्ट मेसे २५ परसन्ट हीस्सा अपने मेनेजमेन्टमे ओर वर्करमे बाट देते हे.. मतलब.. मेनेजमेन्ट ओर वर्करोको भी उन्होने अपना पार्टनर बनालीया..
 
भावीका : (मुस्कुराते) बहुत ही अच्छी सोच.. लोन्ग वीजन.. हेनां..?

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) हां.. सबलोग अपनी फेक्टरी समजकर काम करते हे.. लेकीन बेटा.. अब वसीयतमे थोडा बहुत चेन्ज हे..

भावीका : (मुस्कुराते) अंकल.. जो भी हो.. उनमे भी अच्छी ही व्यवस्था होगी..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) हां.. फीर भी सुनले.. अब वसीयतके हीसाबसे तु इस कंपनीकी मेइन मालीक होगी.. ओर उनमे तेरा ४० परसन्ट हीस्सा होगा.. बाकीमे १० परसेन्ट फेक्टरीकी देखभाल ओर सब लीगल कामके लीये मुजे दीया हे.. क्युकी तेरे पापाने हमेसा मुजे अपना छोटा भाइ माना हे.. बाकी २५ परसन्ट वोही सायलेन्ट मालीककी हीस्सेदारी ओर २५ परसन्ट मेनेजमेन्ट ओर वर्करके लीये..

भावीका : (मुस्कुराते) बहुत ही अच्छी व्यवस्था.. मेरे लीये तो ये सब बोनस ही हे..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बेटा.. तेरी चेम्बर आज भी खाली हे.. ओर तेरा इन्तजार कर रही हे.. बस.. वसीयतके मुताबीक सीर्फ अ‍ेक छोटासा टेस्ट करना हे.. डी. अ‍ेन. अ‍े. टेस्ट.. जब वो होजायेगा तो फेक्टरीके कागजात तुम्हारे नाम करदीये जायेगे.. क्या तुम इनके लीये रेडी हो..?

भावीका : (मुस्कुराते) जी अंकल.. जब आप चाहे.. लेकीन अ‍ेक समस्या हे..

पंकजभाइ : (सामने देखते) क्या..?

भावीका : (मुस्कुराते) अंकल.. जो भी हो.. मे इस फेक्टरीको नही सम्हाल सकती.. जैसा चल रहा हे चलनेदो.. ओर मेने अपनी क्लीनीक भी बंध करदी हे.. अब मे अपने ससुरालके गांवमे जाकर सीर्फ सेवा करुगी.. क्युकी मेरे मंगेतरके परीवाल वाले गांवमे अ‍ेक बडी होस्पीटल बनवा रहे हे..

पंकजभाइ : (आस्चर्यसे देखते) तेरा मंगेतर..? क्या तुमने फीरसे अ‍ेन्गेजमेन्ट करली..? कौन हे वो लोग..?

भावीका : (मुस्कुराते) अंकल.. समजलो मेरे लीये वो लोग भगवानके रुपमे आये हे.. ओर मुजे इन पोलीटीयनके परीवारके जमेलोसे इन्ही लोगोने बचाया हे.. ओर ये फेक्टरीकी फाइलके बारेमे भी उसीने मुजे बताया..

पंकजभाइ : (आस्चर्यसे देखते) बेटा.. तुमतो बहुत ही रहस्य भरी बाते कर रही हो..? इन फाइलके बारेमे उनको सब कैसे पता..? ओर कौन हे वो लोग..? तुम ध्यान रखना अपना..

भावीका : (मुस्कुराते) नही अंकल.. ये बहोत अच्छे लोग हे.. मेरे मंगेतर बहार ही बैठे हे.. मे उन्हीके साथ आइ हु.. अगर आप मीलना चाहोतो मील सकते हो..

पंकजभाइ : (सामने देखते) बेटा.. मेतो इसीलीये केह रहा हु.. की आजके जमानेमे बहुत सम्हलके चलना पडता हे.. पैसोकी लालचमे तुम जैसी भोली लडकीयोको लोग आसानीसे अपनी प्रेम जालमे फसा लेते हे.. ओर बादमे उनका अंजाम बहुत बुरा होता हे..

भावीका : (मुस्कुराते) नही अंकल.. ये लोग अ‍ैसे नही हे.. उनके पास इतने पैसे हेकी हमारी फेक्टरी जैसी दस फेक्टरीया वो खडे खडे खरीद सकते हे.. वो अ‍ेक रोयल फेमीली हे..

पंकजभाइ : (सामने देखते) अच्छा..? रोयल फेमीली..? इतने रइस हे..? कौन हे वो लोग..? कहाके हे..? मुजे बता सकती हो..?

फीर भावीकाने इन सोर्ट देवायत लखनके बारेमे बता दीया.. की वो लोग कीन गांवसे हे.. फीर उसने पुनम ओर मंजुकी वो शक्तियोके बारेमे भी बताया जीनकी बदौलत उनको फाइल मीली.. ओर उनको धृवके परीवारसे बचाया.. तो उन गांवका नाम सुनते ही पंकजभाइ खडे हो गये..

पंकजभाइ : (आस्चर्यसे देखते) क्या ये देवायतजीका परीवार हे..? जीनकी पत्नी कुछ दीन पहेले ही गुजर गइ..?

भावीका : (उत्सुक्तासे सामने देखते) हां अंकल.. क्या आप उनको जानते हो..? तब उनकी आखरी वक्तपे मे वही थी.. हम लोग कल ही उनका सब कार्य समाप्त करके आये हे..

पंकजभाइ : (खुसीसे) अरे बेटा.. वोही तो हे हमारे सायलन्ट पार्टनर.. मे भी देवायतजीको सोक जताने मीलने गया था.. वहा उन्होने अपने अपने छोटे भाइसे मीलवाया.. ओर कहाकी अब यही सब वहीवट करेगे.. क्या नाम बताया था.. सायद.. कु..छ.. ल.. लखन.. यही नाम बताया था..

भावीका : (मुस्कुराते) हां अंकल.. वो लखन ही हे.. जो मेरा मंगेतर हे.. ओर अभी बहार बैठे हे..

पंकजभाइ : (थोडी परेसानीसे) अरे बेटा.. तो उनको बहार क्यु बीठाया..? पहेले बता दीया होता.. मे उनको बुलाता हु..

कहेते पंकजभाइने इन्टरकोमसे लखनको अंदर भेजनेको कहा.. ओर वो खुद खडे होकर लखनको लेने दरवाजे तक गये.. जैसे ही लखन आया पंकजभाइको देखकर हसने लगा.. ओर उनके पैर छु लीये.. तो पंकजभाइने उसे जोरोसे गले लगा लीया.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते हसने लगे..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) माफ कीजीये आप बहार बैठेथे तो मुजेतो पता ही नही थाकी आप हे.. आइअ‍े..

लखन : (मुस्कुराते) अंकल माफी मत मांगीये.. कोर्पोरेटकी दुनीयामे तो अ‍ैसा सब चलता ही हे..

फीर तो पंकजभाइ लखनको अपने बीजनेसकी बाते करते लखनको बताते हे.. की इनकी फेक्टरीमे वो साइलेन्ट पार्टनर हे.. ओर फेक्टरीकी मालकीन अब भावीका हे.. फीर अ‍ेक टेस्टकी बात भी करते हे.. फीर कुछ अपनी पर्सनल बाते भी करते हे.. अब पंकज भाइ बहुत खुस थे..

फीर वो फोर्मालीटी पुरी करनेके लीये अ‍ेक क्लीनीकका अ‍ेड्रेस देते भावीकाको वही जानेको कहेते हे.. ओर अ‍ेक हप्तेके बाद पंकजभाइ लखन ओर भावीकाको सीधे अपने घरपे आनेका न्योता देते हे.. फीर भावीका ओर लखन वहासे नीकल जाते हे.. ओर दोनो घरपे आगये..

राधीका ओर नीलम कीचनमे खाना बना रही थी.. ओर सृती चंदा वीजयको लेकर होलमे बैठे बाते कर रही थी.. जैसे ही लखन भावीका आये चंदा टेडी नजरोसे लखनकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. जैसेही सृतीकी ओर देखा तो सृती उनको देखते हस रही थी.. तो चंदा बहुत ही सर्मसार होगइ..

भावीका : (सोफेपे बैठते) हाइ.. भाभी.. हाइ सृती..

सृती : (मुस्कुराते) भावु.. मील लीया वकीलसे..? क्या बोले..?

भावीका : (मुस्कुराते) बेचारे मम्मीका लेटर देखकर रो पडे.. ओर जानती हो..? उनकी फेक्टरीमे आप लोग भी पार्टनर हो.. बस.. अ‍ेक डी अ‍ेन अ‍े टेस्ट करवाना हे.. कल हम जाकर करवा लेगे..

लखन : (भावीकाके सरपे टपली मारते) फीरसे बोलतो..?

भावीका : (लखनकी ओर देखते हसते) क्या..? मेने कुछ गलत बोला क्या..?

सृती : (पीठमे अ‍ेक मुका मारते) कमीनी गलत हीतो बोला.. अब तुम ओर हम अलग हे क्या..?

भावीका : (बात समजमे आते ही) ओह.. सोरी.. सोरी.. मतलब.. हम पार्टनर हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (मुस्कुराते) भावीका.. याद हेनां मंजुने क्या कहा था.. अब तु भी इस घरकी होने वाली बहु हे.. बस.. कुछ दीन ठहेरजा.. फीर तेरी ओर लखनकी सादी भी करवा देगे..

कहा तो भावीका अपना सहेरा हथेलीमे छुपाकर रोने लगी.. तो चंदा हसते हुअ‍े उनकी पीठ सहेलाने लगी.. ओर सृतीने उनको गले लगा लीया.. तो नीलम हसते हुअ‍े पानी लेकर आगइ ओर भावीकाको पानी पीलाया फीर भावीका आंसु पोछते मुस्कुराने लगी..

भावीका : (मुस्कुराते) मुजे तो पता ही नही थाकी परीवार क्या होता हे.. ओर पहेले परीवार मीला तो भी कैसा..? कमीने सबके सब भैडीये थे.. आप लोगोने तो अ‍ेक ही दीनमे मेरी जींदगी बदलदी.. ओर उन नर्कसे नीकालकर स्वर्गमे पहोचा दीया.. पुनोदीने मुजे क्यासे क्या बना दीया..

लखन : (जोरोसे हसते) तो क्या तुम इस स्वर्गमे खुस हो..?

भावीका : (लखनके गालको चुमते) बहोत.. बहोत.. बहोत खुस हु.. अब सारी जींदगी इस स्वर्गमे रहेना चाहती हु..

फीर सबलोग खानेके लीये बैठ गये.. वहा भी लखनने चंदा ओर भावीकाको खुब छेडा.. तो भावीका काफी उतेजीत हो चुकी थी.. ओर चंदाकी हालत लखनने दोपहोरको ही खराब करदी थी.. वो अब भी धीरे धीरे लंगडाते चल रही थी.. क्युकी उसे लखनने लगातार चार बार चोद लीया था..

तो खानेके बाद चंदा लखनको इसारोमे नामे गरदन हीलाते वीजयको लेकर कमरेमे चली गइ.. तो सब हसने लगे.. ओर काम खतम करके सबलोग दरवाजा बंध करके उपर सोने जाने लगे.. तब सृतीने आज पहेली बार नीलमका हाथ पकडते उसे भी कमरेमे अपने साथ खीच लीया..

तो नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. नीलमके लीये पहेला अवसर था.. जो लखनकी सभी बीवीओके साथ चुदने वाली थी.. वो बस सरमाते मुस्कुराती रही.. फीर सृती राधीका भावीका ओर नीलम अ‍ेक साथ बेडपे आगइ.. ओर लखनका इन्तजार करने लगी..





इस रात लखनने बारी बारी चारोकी धमाकेदार चुदाइ कर डाली.. सबको बीना नीचे उतरे दो दो बार चोद लीया.. फीर लखन सृतीकी चुतमे पीछेसे लंड डालकर उनसे चीपककर सो गया.. सबलोग सुबह देर तब सोते रहे.. नीलम सुबह उठते ही अपने कमरेमे जाकर आइपील लेकर सोगइ..
 
सुबह चाइ नास्तेके बाद भावीकाने लखनके साथ क्लीनीकपे जाकर अपना डी अ‍ेन अ‍े टेस्टका सेम्पल दे दीया.. फीर लखन उसे सृतीकी क्लीनीकपे छोडकर अपनी ओफीसपे चला गया.. राधीकाके साथ नीलम होस्टेलपे तो सृती भावीका अपनी क्लीनीकपे जाने लगी थी..

अ‍ैसे ही दीन बीतने लगे.. इसी बीच अ‍ेक दीन अचानक कबीले वाले जमीलाको लेकर क्लीनीकपे आगये.. वहा सृतीने जमीलाकी डीलीवरी करदी.. ओर जमीलाको अ‍ेक लडकी पैदा हुइ.. तो सृतीको पता चलाकी येभी देवायतकी बीवी हे.. तो कुछ दीनके बाद वंदनाने भी अ‍ेक सुंदर लडकीको जन्म दीया..

इसी बीच पुनमने तैय करलीया था.. ओर उसने लखनसे कहेकर देवायत ओर नीर्मलाके लीये आने जानेकी दो फ्लाइटकी टीकीट ओर बडीया होटेलमे दोनोके लीये अ‍ेक कमरा बुक कर लीया.. ओर वहाकी रहेने खाने पेनेकी सब व्यवस्था भी करदी.. तो नीर्मला ओर देवायत मंजुका अस्थी लेकर हरीद्वार चले गये..

अब देवायतको नीर्मलाने पुरी तराह सम्हाल लीया था.. मानो देवायतका अब दुनीयासे मोह माया खतम होगइ हो.. लेकीन नीर्मला आज भी जवान थी.. उन्होने धीरे धीरे करते देवायतको फीरसे जीन्दा महेसुस करवाया.. दोनो मंजुकी अस्थीका वीधी पुर्वक वीसर्जन करके वहासे हीमाचलकी ओर घुमने नीकल गये..

नीर्मला देवायतका हाथ थामे रखती.. ओर उस रात होटेलके कमरेमे नीर्मलाने देवायतको पुरानी बातोसे उतेजीत करके अपने उपर चडनेके लीये वीवस करदीया.. फीर उस रात देवायतने नीर्मलाको खुब रगड रगडके चोद लीया.. ओर देवायतने नीर्मलाको केह दीयाकी वो अब उनके साथ ही रीलेशन बनायेगा..





फीर दोनोने अ‍ेक हप्ते तक घुमते खुब मस्तीया की.. ओर देवायत हर रात नीर्मलाकी हालत बीगाडता.. फीर दोनो वापस घर आगये तब दोनोके बीच रीस्ता ओर गहेरा हो गया था.. तो दया पहेलेसे ही रजीयाके साथ सेट थी.. उन दोनोकी अपनी योजनाअ‍े थी.. ओर लताकी हालत अब ना घरकी ओर ना घाटकी.. वो बस अब सीर्फ लखनसे आस लगाये बैठी थी..

तो अ‍ेक दीन श्रीधर अपनी कार लेकर ब्रीन्दा बसंती ओर बंसीकी बीवी सांतीको लेकर सहेर आ गया.. ओर सीधा क्लीनीकपे चला गया.. सांतीका तो रुटीन चेकअप था.. लेकीन ब्रीन्दा ओर बसंतीने अपनी प्रेगनन्सी चेक करवाते प्रेगनेन्ट होनेकी पुष्टी करली.. ओर सृतीने दोनोको दवाइया देदी..

सृतीने फोन करके लखनको बुला लीया.. ओर लखन सबको जबरदस्ती घरपे ले गया.. दोपहोर सबने साथमे लंच कीया.. ओर साम तक लखन ओर श्रीधरने खुब बाते की.. तब बीचमे अ‍ेक बार ब्रीन्दा ओर लखन अकेले मीले.. तब ब्रीन्दाने लखनको बता दीयाकी ये बच्चा हम दोनोके प्यारकी नीशानी हे.. ओर इस बारेमे वो कीसीसे जीक्र ना करे..

तो दुसरी ओर अ‍ेक दीन छोडकर सलमा ओर जरीना भी रेग्युलर साहीलके साथ सोने लगी थी.. अ‍ेक फीरोजके साथ सोती तब दुसरी साहीलके साथ सोने चली जाती.. दोनोही साहीलके साथ सोनेके लीये उत्सुक रहेती.. ओर साहील दो दो तीन तीन घंटे दोनोको पुरी तराह संटुस्ट कर देता.. तब सलमा ओर जरीनाको पता था..

की अब साहीलसे चुदवाकर जरीनाको कुछ तो होगा.. इसीलीये सलमा ओर जरीनाने मीलकर अपनी रणनीती बदलदी.. जब दोनोकी फीरोजके साथ सोनेकी बारी आती तब वो फीरोजको ओर चोदनेके लीये उक्साती.. फीर फीरोजकी जुठ मुठकी मर्दागींनीकी तारीफ करती..

जीसे फीरोजभी खुस रहेने लगा.. ओर अपनी मर्दागींनीपे गर्व महेसुस करता.. लेकीन उनको पता नही थाकी उनकी बीवी जरीना साहीलसे चुदवाकर प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. ताकी ये बात फीरोजको पता चले.. तो उसे यही लगेकी ये बच्चा उनका हे.. इसीलीये दोनोने फीरोजकी मर्दागींनीकी तारीफ करना सुरु करदीया था..

तो सहेरमे भी जब सायराने कादीरसे अपने प्रेटनेन्ट होनेकी बातकी.. तो कादीर भी खुस होगया.. ओर अ‍ेक दीन सायराको लेकर सृतीकी क्लीनीकपे चला गया.. ओर सायराके प्रेगनेन्ट होनेकी पुष्टी करली.. लेकीन ये बात सायरा ही जानती थी.. की ये बच्चा उनके छोटे भाइ साहीलका हे..

इसी दौरान लखन भी टीना ओर वसुधासे बहुत करीब आ चुका था.. लखन ओर वसुधातो फोरप्लेय तक आगे बढ चुके थे.. ओर लखन अ‍ैसे वसुधाको अ‍ेक बार ओर मील चुका था.. तब वसुधा ओर लखनने बडी मुस्कीलसे कंट्रोल कीया था.. वरना दुसरी बारमे ही वसुधा लडकीसे ओरत हो जाती..

तो टीनाके साथ भी बार बार आइसक्रीम ओर कोफी शोपमे प्राइवेट केबीनमे मीलने लगा था.. ओर बात इतनी आगे बढचुकी थीकी लीपकीसके साथ उनके बुब्सके साथ भी खेलने लगा था.. बस.. आग दोनो ओर लग चुकी थी.. इसके लीये टीना कइ बार लखनको अपने घरपे आनेके लीये कहेती थी.. बस.. अब दोनोको सीर्फ मीलनेकी देरी थी..

ओर आखीर वो दीन भी आगया.. अ‍ेक बार सहेरमे दो दीनकी छुटी थी.. ओर टीनाने सुबह ही लखनको अपने घरपे बुला लीया.. तो लखन भी सृतीको बताकर टीनाके घर चला गया.. हालाकी टीना लखनसे काफी बडी थी.. लगभग रश्मीकी उमरकी.. लेकीन उस दीन लखनने टीनाको अ‍ेक कुआरी लडकी होनेका अहेसास करवाया..

पहेले ही मीलनमे टीना मछलीकी तराह छटपटाते लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करते बेडपे पैर पटकती रही.. उनकी आंखसे आसु बेह रहे थे.. ओर वो चीला रही थी.. टीनाके पुरे बंगलेमे उनकी चीखे सुनने वाला कोइ नही था.. फीर कुछ देरके बाद सांत होगइ.. ओर दर्द भरी आवाज कामुक सीसकारीयोमे तबदील होगइ..





पहेली बार बीना नीचे उतरे.. ओर बीना लंड बहार नीकाले लखनने टीनाको तीन बार चोद लीया.. ओर लोटा भर भरके टीनाकी चुतको हरी भरी करता रहा.. टीनाकी चुतसे थोडा खुन भी नीकल गया था.. टीनाकी पुरी लाइफमे उनकी अ‍ैसी चुदाइ कभी नही हुइ थी.. फीर लखन टीनाको गोदमे उठाकर बाथरुममे लेगया..





वहा सावर लेते भी लखनने टीनाकी अ‍ेक बार खडे खडे चुदाइ करली.. फीर टीनकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करदी.. ओर दोनो बहार आगये.. टीनाने फोन करके बहारसे ही खाना मंगवा लीया.. ओर दोनोने साथमे लंच कीया.. खानेके बाद दोनोने दो घंटे आराम कीया..





फीर चाइ नास्तेके बाद अ‍ेक ओर चुदाइका दौर चला.. ओर इस बार भी लखनने टीनाको दो बार ओर चोद लीया.. टीनाकी हालत पतली होगइ.. ओर लखन सावर लेकर कंपलीट हो गया.. ओर टीनाको कल फीरसे मीलनेका वादा करके वही आराम करते छोडकर वापस घरपे आगया..

टीना पेइन कीलरकी टेबलेट लेकर सो गइ.. पुरी रात ओर सुबहसे लेकर दो पहोरतक आराम कीया.. फीर खाना खाकर वापस सोगइ.. साम चार बजते ही दरवाजेपे दस्तक सुनाइ दी.. टीनाने दरवाजा खोलकर देखा तो सामने लखन मुस्कुराते खडा था.. तो टीना बीना जीजकर लखनकी बाहोमे समा गइ..

ओर कुछ देरके बाद टीनाका बंगला फीरसे टीनाकी कामुक चीखे ओर सीसकारीयोकी आवाजसे गुंजने लगा..रात होने तक टीनाकी चुतको लखनने चार बार अपने पानीसे सीच दीया.. ओर टीनाका अ‍ेक अ‍ेक अंग ढीला करदीया.. फीर लखन सावर लेकर चला गया..





ओर टीना भी सावर लेकर फीरसे सो गइ.. लखनको पताथाकी टीना उनके साथ क्यु रीलेशन बनाना चाहती थी.. क्युकी उसे मंजु ओर पुनमने पहेले ही बतादीया था.. की वो सीर्फ बच्चेके लीये रीलेशन बनायेगी.. तब टीनाको पता नही थाकी उनके गर्भमे बच्चेके लीये घमासान युध्ध चल रहा था..

तो दुसरी ओर हर सेटरडे सन्डे सृती भी नीलमको धीरेनके घर भेज देती.. तो धिरेन नीलमको जमकर चोदता.. लेकीन अब नीलमको धिरेनका लंड चुतमे बहुत ही कम महेसुस होता था.. अगर चंदा नीलमके बारेमे पुछती तो केहती सेटरडे सन्डेकी छुटीमे वो अपने मम्मी पापाके पास गांव गइ हे.. ओर नीलमको भी समजा दीया था.. तो वोभी वापस आकर अपने मम्मी पापाका ही बहाना बनाती..

तो अ‍ेक दीन भावीकाके फोनपे पंकजकाभाइका फोन भी आगया.. ओर उसने डीअ‍ेनअ‍े टेस्टका रीजल्ट आनेकी बात कही.. ओर उनको उसी दीन साम लखनके साथ अपने घरपे डीनरका न्योता भी दीया.. तो साम होतेही भावीका सजधजके तैयार होगइ.. जैसे वो ससुरालसे मायके जा रही हो..

वो लखनके साथ उनकी कारमे चली गइ.. आज उसने सारी पहेनी हुइ थी.. ओर सारीमे भी बहुत कयामत लग रही थी.. वहा पंकजभाइ ओर उनकी वाइफ (नयना)ने दोनोका स्वागत कीया.. तो नयना भावीकाको देखते ही रेह गइ.. उनकी आंखसे आंसु नीकल गये..

उसने भावीकाको जोरोसे गले लगा लीया.. फीर लखनका भी अ‍ेक दामादकी तराह स्वागत कीया.. घरकी नौकरानीने सबको पानी पीलाया.. फीर कुछ बातोके बाद पंमजभाइने भावीकाके डीअ‍ेनअ‍े मीलनेकी पुस्टीकी.. फीर ढेर सारे कागजातोपे भावीकाकी साइन लेली.. भावीका साइन करते करते ही थक गइ.. तो पंकजभाइ हसने लगे..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बेटी.. अब पुरी फेक्टरी आपके नाम करदी गइ हे.. अब आप जब चाहो फेक्टरी सम्हाल सकते हो..

भावीका : (मुस्कुराते) नही अंकल.. मैने पहेले भी केह दीया था.. जैसे पहेले आप सम्हालते थे अ‍ैसे ही चलने दीजीये.. अब तो मुजे गांवमे जाकर सीर्फ सेवा करनी हे..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) बेटी.. अबतकके हमने आपके मुनाफेके सारे पैसे अ‍ेक अलग अ‍ेकाउन्टमे जमा करदीये थे.. जो अब उसे आपके सारे हीस्से आपकी बेन्कमे ट्रान्सफर करदीये हे.. पुछोगी नही कीतने पैसे हे..? हें..हें..हें..

भावीका : (हसते) नही अंकल.. मम्मीने दीये पैसे भी बहुत बडी रकम हे.. तो जाहीरसी बात हे इनसे तो बडी रकम ही होगी.. हें..हें..हें..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) सही कहा तुमने.. अबतक तेरे हीस्सेका लगभग ४२ करोड रुपीये जमा हो गये हे.. अब उनका सही इस्तमाल करना..

पंकजभाइ ओर भावीका बाते कर रहे थे तबतक उनकी पत्नी नयना सीर्फ भावीकाको ही देख रही थी.. तभी लखन होलमे चारो ओर नजर घुमाता हे.. तभी अ‍ेक तसवीर देखते उनकी नजर वही ठहेर जाती हे.. फीर वो भावीकाकी ओर देखता हे फीर तसवीरकी ओर.. तभी..
 
नयना : (मुस्कुराते) बेटा.. ये मेरी बेटी हे.. नेहा.. उनकी सादी होगइ हे.. वो ओर उनके पतीके साथ केनेडामे रहेती हे.. पती पत्नी दोनो सोफ्टवेर इन्जीनीयर हे.. ओर केनेडामे खुदकी फार्म चलाते हे..

लखन : (मुस्कुराते) लेकीन आंटी येतो बीलकुल भावुकी हम सकल हे.. जैसे दोनो जुडवा बहेने हो.. हें..हें..हें..

नयना : (थोडी जेंपते बातको सम्हालते) हें..हें..हें.. इन्होने भी मेरा दुध पीया हे.. कभी कभी होता हेना कुदरतका करीस्मा.. नेहा नाम हे इनका.. वो ओर भावीका बचपनमे खुब साथ खेले हे.. जब ये होस्टेल चली गइ.. तब मुजसे लीपटकर खुब रोइ थी.. बचपनसे ही दोनो अ‍ेक जैसी दीखती हे.. मेभी कभी कभी धोखा खा जाती थी.. हें..हें..हें..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) हां लखनजी.. डीनरके बाद बात करवाता हु उनसे.. वोभी भावु बीटीयाके बारेमे कइ बार पुछ चुकी हे.. दोनो बचनकी खास सहेलीया जो थी..

कहातो भावीका भी तसवीरको देखती हे.. देखते ही चोंक जाती हे.. जो हुबहु उनकी सकलकी हे.. भावीकाको बचपनकी धुंधली याद आती हे.. जो उनके मम्मी पापा उसे होस्टेलमे छोडने जा रहे थे तब अ‍ेक लडकी अपनी मम्मीसे लीपटकर उसे रोकनेके लीये कहेते रो रही थी.. भावीका अ‍ेक नजरसे देखती रही..

याद आतेही भावीकाकी आंख गीली हो जाती हे.. ओर वो आंसु पोछती हे.. फीर सबने मीलकर डीनर कीया.. तब पंकजभाइ अपनी बीवीको लखनके बारेमे उनके खानदानके बारेमे बताते रहे.. जीसे सुनकर नयना भी लखनको अपने दामादके रुपमे देखते गर्वातीत महेसुस करती हे..

फीर सबलोग सोफेपे बैठ गये.. तो पंकजभाइने अपना मोबाइल टीवीसे कनेक्ट कीया.. ओर अपनी बेटी नेहाको वीडीयो कोल कीया.. जैसे ही नेहाने भावीकाको देखा उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. फीर सबने उनके साथ बातकी.. तब नेहाने भावीकाको अपने पतीके साथ केनेडा आनेका बहुत आग्रह कीया..

ओर वो जब भारत आयेगी तब उनको मीलनेका वादा कीया.. फीर कुछ देर बाते करते लखन ओर भावीका वहासे नीकलने लगे.. तब नयना बार बार भावीकाको फीरसे घरपे आनेका आग्रह करती रही.. फीर लखन ओर भावीका देर रात वापस घरपे आगये..

इस रात लखनने फीरसे सृती राधीका भावीका ओर नीलमको संतुस्ट कीया.. तो नीलम अपनी बारी खतम करके अपने रुममे चली गइ.. ताकी चंदाको पता ना चले.. आखीरमे सृतीकी कुटाइ होने लगी.. तब बीचमे ही सृती लखनको अपने उपरसे हटाके मुहपे हाथ रखते बाथरुममे चली गइ..

तो साथमे भावीका भी मनमे खुस होते पीछे चली गइ.. देखा तो सृती उल्टीया कर रही थी.. फीब अपना मुह साफ करते दोनो बहार आगइ तो सृतीके चहेरेपे कुछ अलगही चमक थी.. वो सरमाकर मुस्कुराते लखनकी बाहोमे समा गइ.. फीर सब लोग सोगये..

सुबह जब सृती जागी तो अ‍ेक टेस्ट कीट लेकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर उसने अपनी प्राइमरी प्रेगनन्सी टेस्ट कीया.. तो रीजल्ट पोजीटीव देखकर खुसीके बारेमे बाथरुममे उछलने लगी.. ओर उसने बहार आकर ये बात भावीकाको बताइ.. ओर भावीकाने चाइ नास्तेके वक्त सबको बताया..

तो लखन खुसीके मारे सृतीको गोदमे उठालेता हे.. ओर घरमे दोडने लगा.. घरपे सबलोग खुस होते हसने लगे.. ओर भावीकाने फोन करके ये बात पुनमको बताइ.. तो मंजुके जानेके बाद फीरसे घरमे खुसीओकी बहार आगइ.. फीर सृती ओर भावीका क्लीनीकपे चली गइ..

वहा भावीकाने कायदेसे सृतीको चेक करके प्रेगनेन्ट होनेकी पुष्टीकी.. तभी अनायास भावीकाने भी खुदको सृतीको टेस्ट करनेको कहा.. ओर रीजल्ट देखकर भावीकाकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. क्युकी वोभी लखनसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. ओर ये बात हवेलीपे भी सबको पता चल गइ..

तो पुनमने इस सेटरडे सन्डेको सबको सेलीब्रेट करनेके लीये हवेलीपे बुला लीया.. ओर सृतीसे फोनपे अकेलेमे बात करली.. ओर पुनमने गांवमे भी देवायतकी सभी बीवीया.. ओर लखनके दोस्तके परीवारको हवेलीपे बुला लीया.. ओर साथमे भानुके परीवारको भी न्योता दीया..

तो सेटरडे सुबह ही सबलोग गांव जानेके लीये तैयार होगये.. सबलोग वहेली सुबह ही घरको ताला लगाकर नीकल गये.. चंदा वीजयको लेकर आगे लखनके पास ही बैठ गइ.. रास्तेपे लखनने कारको जंगलकी ओर जानेदी.. तो सबलोग खुसीसे मुस्कुराने लगे.. लेकीन भावीका आस्चर्यसे सबके सामने देखती रही..

भावीका : (सामने देखते) अरे..? हम लोग इधर कीधर जा रहे हे..? सृती.. क्या हम गांव नही जा रहे..?

सृती : (जोरोसे हसते) कमीनी हम गांव ही जा रहे हे.. तु चुपचाप बैठ.. थोडी देरमे तुजे सब पता चल जायेगा.. हें..हें..हें..

सबलोग भावीकाकी ओर देखकर हसने लगे.. तो भावीका भी मुस्कुराते चीडने लगी.. ओर उसने सृतीकी पीठमे मुका जड दीया.. आखीर सबलोग जंगलके बीच उनके पुर्खोके पुराने मंदीरपे आ गये.. फीर सबने मीलकर वहा कुछ साफ सफाइ करली.. ओर मंदीरमे चले गये..

वहा अगले ही दीन राधीका ओर नीलमने छुपकेसे तैयारीया करली थी.. तो राधीकाने दो फुलोका हार नीकाला.. फीर लखन ओर भावीकाको अ‍ेक अ‍ेक हार थमा दीया.. तो भावीका अभी भी असमजमे सबकी ओर मुस्कुराते देखती रही.. तब सृतीने हसते कहा..

सृती : (हसते) कमीनी सबको देख क्या रही हे..? अब अपने होने वाले पतीको हार पहेनादे.. आज तुम दोनोका गांधर्व विवाह हे..

भावीका : (सरमाकर धीरेसे) क्या..? हमारी सादी..? वो मंजुदीदीने कहा था वो..?

चंदा : (मुस्कुराते) हां वोही सादी.. लखनकी ज्यादातर बीवीओने उनसे अ‍ैसे ही सादी कीहे.. सृतीने भी..

इतना सुनतेही भावीका इमोस्नल होगइ.. उनकी आंख गीली होगइ.. ओर उसने सरमाते लखनको हार पहेना दीया.. तो लखनने भी भावीकाके गलेमे हार डाल दीया.. फीर सृतीने दोनोको सादीकी कसमे खीलवाइ.. ओर आखीरमे लखनने भावीकाको मंगलसुत्र पहेना दीया..





फीर जब उनकी मांग सींदुरसे भरदी.. तब भावीका सृतीसे लीपटकर फुटफुटके रोने लगी.. उसने कभी लखनके साथ सादीकी कल्पना नही कीथी.. ओर जब मंजुने उसे सादीका कहा था तो भावीकाने उसे मजाक समजके हल्केमे लीया था.. आज उनकी सचमे लखनसे सादी होगइ..

भावीका आज बहुत खुस थी.. क्युकी अब उनके गर्भमे पल रहा लखनका बच्चा नाजायज नही कहेलायेगा.. सबलोग वहासे बाबाके आश्रमपे चले गये.. तो बाबा सबको देखकर खुस हो गये.. फीर सृती चंदाने बाबाको भावीकाका परीचय करवाया.. ओर लखनसे सादीकी बात करली..

सृती : (मुस्कुराते) बाबा.. आज इस महासयकी अ‍ेक ओर सादी करवादी.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां बेटी.. सही कीया तुमने.. लगता हे तुमने मंजु बीटीया ओर पुनम बीटीयाका काम बखुबी सम्हाल लीया हे.. बहुत अच्छा कर रही हो..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) बाबा.. सब आपहीकी कृपा हे..

बाबा : (चंदाकी ओर देखते) बेटी.. क्या अब तो तुम खुस होनां..?

चंदा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) जी बाबा.. मे बहुत खुस हु.. आपको तो सब पता हे.. क्या मे कुछ गलत तो नही कर रही..?

बाबा : (मुस्कुराते) कोइ गलती नही बेटा.. बस.. तेरी आखरी मंजील यही थी..

फीर सबलोग बाबाको दक्षीणा देकर उनका आशीर्वाद लेकर वहासे नीकल जाते हे.. ओर सीधे हवेलीपे आगये.. तो सबके आस्चर्यके बीच पुनमने उनके स्वागतकी सभी तैयारीया करली थी.. लखनने देखा तो देवायतकी सभी बीवीया उनके सभी दोस्तके परीवाल वाले.. ओर भानुका परीवार मोजुद था..

सबने खुसीसे तालीया बजाते लखन ओर भावीकाका स्वागत कीया.. तो भावीकाकी आंख खुसीके मारे गीली होगइ.. फीर नीर्मलाने भावीका ओर लखनका कलश घुमाते स्वागत कीया.. तो लखन ओर भावीकाने मीलकर नीर्मला ओर देवायतके पांव छुअ‍े.. तब देवातने गीली आंख करते दोनोको आशीर्वाद दीया..

आज पुनम सबके सामने खुलकर लखनको गले मीली.. फीर वो सृती सब लेडीस भावीकाको लेकर अंदर चली गइ.. भावीका आज नइ दुल्हकी तराह बहुत ही सरमा रही थी.. फीर सभी लेडीसने मीलकर भावीकाको दुल्हनकी तराह सजाया.. फीर होलमे लखन ओर भावीकाको साथ बीठाया..

पुनमने लखन ओर भावीकाकी सादीकी सबके सामने घोसणा करदी.. तो वहा सबने दोनोको आशीर्वाद ओर उपहार दीये.. फीर पुनमने सबको सृती ओर भावीकाकी प्रेगन्सीकी खबर सुनाइ.. जीसे सुनकर सृती ओर भावीका दोनो ही सरमा गइ.. तभी ब्रीन्दा सबसे छुपकर अपने पेटपे हाथ घुमाते लखनकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराने लगी..

तो लखन हसने लगा.. तो आज रमा भी लखनसे बहुत सरमा रही थी.. इस बातपे सरला दोनोके बीच नजर गडाये लखनकी ओर ललचाइ नजरोसे देख रही थी.. उनका ध्यान बार बार लखनके पेन्टकी उभारकी ओर जा रहा था.. लेकीन सरलाको पता नही चला की लखनने सरलाकी नजरको पहेचान लीया..

इस दीन नाच गान खाना पीना सबकुछ हुआ.. सामका प्रोग्राम चल रहा था.. तब अचानक जरीनाकी तबीयत बीगड गइ.. ओर वो खडी होकर अपने मुहपे हाथ रखते पुनम वाले रुममे दौडकर चली गइ.. सब लोग उसे अ‍ैसे जाते देखकर बहुत कुछ समज गये.. पीछे सलमा पुनम ओर सृती भी चली गइ.. देखा तो जरीना उल्टीया कर रही थी.. ओर सृतीने उसे चेक कीया....

कन्टीन्यु
 
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