Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 108 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

पुनम मंजुके अलावा कीसीको पता नही थाकी भावीकासे डीवोर्स लेतेही उन मां बेटे हरकतमे आगये थे.. साम तक फर्नीचरको छोडके जो जरुरी सभी सामान लोड करके गांधी नगर वाले बंगलेपे भेज दीया.. इस रात धृव ओर उनकी मम्मीकी यहा आखरी रात थी.. जब सामान चला गया तो दोनो नहानेके लीये उपर चले गये..

आज बीना डर दोनोने साथमे सावर लीया.. जाहीरसी बात हे दोनो अ‍ैसे ही चुपचाप बीना सरारत नही रेह सकते.. धृवने उनकी मम्मीके तनपे खुब साबुन रगडा.. ओर उनके अंगोको छेडता रहा.. तो उनकी मम्मीने भी धृवके तगडे हथीयारको मल मलके साबुनसे सहेलाया..

gif-sex-in-bathroom-70.gif


ओर नतीजेके फल स्वरुप धृवने वही नहाते उनकी मम्मीकी धमाकेदार चुदाइ करली.. फीर दोनो सावर लेकर अपने बदन पोछते बेडपे आकर अ‍ेक दुसरेसे चीपकके नंगे बैठ गये.. उनकी मम्मीने फोन हाथमे लेते नंबर लगाते नाकपे उगली रखते धृवको चुप रहेनेका इसारा कीया..

सामने (पुजा) : हेलो..? हां मम्मी.. बोलो..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) बीटु.. अकेली हे क्या..? देख जरा.. आस पास कोइ हेतो नही..?

पुजा : (मुस्कुराते धीरेसे) नही मोम.. मेरे रुममे हु.. पीन्टु मौसीके साथ नीचे खेल रहा हे.. बोलीये..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) बीटु.. मेने तुजे उस दीन दो पार्सल दीये थे.. क्या इसके बारेमे कीसीको पता तो नही चला..?

पुजा : (धीरेसे) नही मोम.. मेने छुपाकर रखे हे.. लेकीन क्या हे.. बताइअ‍े तो सही..?

धृवकी मम्मी : (धीरेसे) बेटी.. बस.. यही समजले ये हम दोनोके उजवल भवीस्यके लीये हे.. क्या तु खुलकर धृवके साथ जीना चाहती हेनां..?

पुजा : (मुस्कुराते) येस मोम.. मेरा पहेला प्यार.. क्या कुछ हुआ..?

धृवकी मम्मी : (धीरेसे) हां.. हमारे रास्तेका काटा हट गया.. भावीका धृवसे तलाक लेकर चली गइ.. बीना कोइ सोर सराबा.. सुन.. तु आज ही वो दोनो पार्सल कीसी पोस्टके डीबेमे डालदे..

पुजा : (धीरेसे) मोम.. अ‍ेक तो वही लोकल हे.. पापाकी पाटीकी ओफीसका.. दुसरा दील्हीका हे.. उनको मीलनेमे दो तीन दीन लग जायेगे..

धृवकी मम्मी : (धीरेसे) पता हे बेटी.. सुन.. सहेरसे थोडी दुरकी पोस्टमे.. जहा आस पास कोइ सीसी केमेरा ना हो.. पार्सल डालते वक्त अपना चहेरा छुपा लेना.. वो चुनीसे बुर्का बांध लेना.. ओर तेरी कार भी दुर खडी रखना.. तु समज गइनां..

पुजा : (थोडा डरते) मोम.. इतना सीक्रेट..? आप क्या करने वाली हो..? मुजे तो डर लग रहा हे..

धृवकी मम्मी : : (धीरेसे मुस्कुराते) अरे डर मत.. तेरा पती मेरे साथ ही बैठा हे.. कमीना क्या मजा देता हे.. पुजा.. यही समजले.. हम दोनो हमेसाके लीये धृवके साथ रहेगी.. बीना डर.. हम तीनोकी अ‍ेक अलग ही दुनीया होगी.. हम वहा आ रहे हे.. हमेसाके लीये.. तेरे सहेरके बीलकुल पास.. ताकी तुजे हमारे घर आनेमे आसानी रहे.. समज गइनां..?

पुजा : (मनमे खुस होते) मोम.. सच केह रही हे आप..? मे अभी पार्सल डालकर आती हु.. कहा हे भाइ..? जरा उनसे बात करवाइये..

धृवकी मम्मी : (फोन धृवको देते) ले.. तेरी बीवीसे बात कर.. मे अभी आइ..

कहेते धृवकी मम्मी अपनी अलमारीके पास चली गइ.. ओर अ‍ेक पुराना फोन.. ओर अ‍ेक नया सीम लेकर आगइ.. जो उन्होने कइ दीन पहेले ही लेकर रखा था.. सीम भी दुसरेकी आइडीसे लीया हुआ था.. जो पार्टीके लोग उनके पतीको मीलने आते थे.. फीर धृवके पास आकर बैठ गइ..

पुजा : (मुस्कुराते फोनपे) हाइ ब्रधर.. कैसे हो..? सब क्या तैयारीया चल रही हे..?

धृव : (मुस्कुराते फोनपे) दीदी.. अभी कुछ नही.. बस.. जैसा मम्मी कहे उतना करदे.. ओर सुन.. जब तुजे अ‍ेक अ‍ेड्रेस सेन्ड करु.. तब वहा आजाना..

पुजा : (मुस्कुराते) आजाउगी.. आजाउगी.. पहेले ये बता जब मम्मीकी लेता हे तब मुजे याद करता हेकी नही..? कमीने क्या हथीयार हे तेरा..मेरी तराह माको भी तीन तीन बार पेटसे करदीया..

धृव : (मुस्कुराते धीरेसे) बहुत याद करता हु.. सुन.. वो दिन दुर नही हे जब तुम दोनोको अ‍ेक साथ अ‍ेक ही बीस्तरमे पेलुगा.. ले मम्मी आगइ.. उनसे बात कर..

धृवकी मम्मी : (फोन लेते) पुजा.. सायद कल हम वहा आजायेगे.. अभी फोन रखती हु.. तु आज ही पार्सल डालदे.. (फोन कट होते ही हसते अ‍ेक मुका मारते) कमीने.. उसे क्या बोल रहा था..? की हम मां बेटीको अ‍ेक ही बीस्तरमे पेलेगा.. मे भी तो देखु तु उसे मेरे सामने कैसे चोदता हे.. वो सब छोड पहेले ये फोन ओर सीम पकड.. सीम डालदे इसमे..

धृव : (फोन सीम लेते सीमको डालते) मोम.. ये फोन..? अ‍ेक दम पुराना हे.. सीम भी..?

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) हां.. इसे इस्तमाल करके सीम नीकालकर फोन डेमेज कर देना.. फीर कीसी बहेते नदी नालेमे फेक देना हे.. ओर सुन.. इनमे सीम डाल.. ओर मे जो कहु उसे इंगलीसमे टाइप करदे.. मुजे कहा इंगलीस आती हे.. फीर मे कहु इस नंबरपे भेजदे..

धृव : (सीम डालकर) येस मोम.. बोलो.. क्या मेसेज लीखना हे..?

तभी धृवकी मम्मी धीरे धीरे बोलते मेसेज लीखवाती हे.. जैसे कोइ खुफीया खबर देते चेतावनी दे रहा हो.. मेसेजमे इडीकी रेडकी चेतावनी.. ओर उनके पार्टी वर्करके साथ नाजायज रीस्तेकी घमकी भरा लहेजा था.. ओर धृव इसे इंगलीसमे ट्रान्सलेट करते लीखता गया..
 
जैसे ही मेसेज पुरा हुआ धृवकी आंखे फटी की फटी रेह गइ.. उनको पता नही थाकी उनकी मम्मी.. जो अ‍ेक सामान्य गांवकी ओरत.. इतनी खतरनाक सोच वाली होगी.. उसने अपने ही पतीको मेसेज टाइप कीया था.. फीर धृवकी मम्मीने उसे सहेरके दुसरे कोनेपे जाकर अपने पीताके नंबरपे सेन्ड करनेको कहा..

धृव : (आस्चर्यसे) सहेरके दुसरे कोनेमे..? इतनी दुर जाके क्यु..? यहीसे होजायेगानां..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) बीटु तेरे बापके साथ रहेकर इतना तो सीख ही गइ हु.. तेरा बाप बहुत पहोंच वाला हे.. उनकी हर जगह जान पहेचान हे.. वो तुरंत सायबर सेल वालेको कहेगा.. की फोन कहासे आया हे.. बस.. उनको यहाकी लोकेशन पता ना चले.. इसीलीये यहासे दुरसे सेन्ड करना.. ओर अपनी कार मत लेजाना.. कीसी ओरकी कार.. बीना नंबर प्लेटवाली.. उनको हमारा कोइ सुराग मीलना नही चाहीये..

धृव : (मुस्कुराते) मोम.. यु आर वेरी स्मार्ट.. क्या दुरकी सोचती हो.. कहासे सीखा ये सब..?

धृवकी मम्मी : (सामने देखते) तेरे बापके साथ रहेकर सीख गइ हु.. सुन.. मेसेज सेन्ड करते ही फोन स्वीच ओफ कर देना.. फीर सीम नीकालकर अपने पास रख लेना.. ओर फोनको वही तोडकर कोइ नदी नालेमे फेंक देना.. हो सके तो सब कारमे बैठकर ही करना.. फीर आज रात नीचे अपने कमरेमे जाकर सोजाना.. उपर मत आना..

धृव : (कातीलाना मुस्कुराते) क्या सचमे..? अकेली सो पाओगी..?

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) बहुत मुस्कील हे.. तेरी आदत जो होगइ हे.. अगर तेरे बापने कुछ गलत कीया हेतो तुरंत घरपे आजायेगा.. ओर अपना सबकुछ इधर उधर करने लगेगा.. तो मे नही चाहती वो हम दोनोको उपर साथ देखले.. ओर उनको हम दोनोके उपर कोइ सक हो.. समज गयानां..?

धृव : (मुस्कुराते होठ चुमते) येस मोम.. यु आर जीनीयस.. क्या दीमाग पाया हे आपने.. मे चलता हु..

फीर धृव फोन लेकर चला गया.. उधर अहेमदाबादमे भी पुजा अपने पर्समे दोनो लीफाफे सम्हालके रखती हे.. फीर बपने बच्चेको लेकर नीचे आरामसे आजाती हे.. तो उनकी सास.. जोकी उनकी मौसी भी हे.. वो टीवीपे कोइ सीरीयल देख रही थी.. तब पुजा उनको फ्रेन्डको मीलने जा रही हु कहेती हे..

पुजा : (मुस्कुराते) मौसी.. मे मेरी अ‍ेक फ्रेन्डको मीलने जा रही हु.. अभी अ‍ेक घंटेमे वापस आजाउगी..

पुजाकी सास : (मुस्कुराते) ठीक हे बेटा.. सुन.. आजकल धृव इधर दीखाइ नही देता.. उसे फोन करके बोल तुजे मौसी याद कर रही हे..

पुजा : (मुस्कुराते) जी मौसी.. सायद कल वो ओर मम्मी यहा आयेगे.. फीर भी मे फोन करदुगी..

फीर पुजा अपने बच्चेको भी साथ लेगइ.. पर्समे उसने दोनो पार्सलके लीफाफे छुपा लीये थे.. फीर अपनी कार लेकर सहेरसे दुर चली गइ..ओर सहेरके आखरी छोडपे उनको अ‍ेक लाल डीबा दीखाइ दीया.. पुजाने आजु बाजु नजर घुमाते देखा.. फीर पुजाने अपनी चुनीसे मुह ढक लीया..

ओर कारको काफी दुर खडी करदी.. फीर बच्चेको लेकर अ‍ैसे नीकली जैसे टहेलने जा रही हो.. फीर बडे ही नोर्मल तरीकेसे दोनो लीफाफे पोस्टके डीबेमे डाल दीये.. ओर आगे चली गइ.. फीर कुछ दुरीपे जाकर रोडके दुसरे कोनेपे आकर मुड गइ.. ओर दुकानोकी ओर नजर घुमाते वापस आने लगी..

दो तीन सोपमे जाकर अ‍ैसे रुकी जैसे वो कोइ सोपींग करने आइ हो.. फीर धीरेसे सरकते वापस कारके पास आगइ.. ओर बच्चेको पासकी सीटपे बीठाकर कार लेकर वापस घरकी ओर नीकल गइ.. ओर उसने रास्तेपे अपने मम्मीको कोल भी करदीया.. की काम होगया हे..

तो दुसरी ओर धृव भी अपने अ‍ेक दोस्तकी कार लेकर नंबर प्लेट नीकाल देता हे.. फीर सहेरसे दुर अ‍ेक अ‍ैसी जगहपे चला गया जहा नदी बेह रही थी.. वहा जाकर कारमे बैठे ही उन्होने अपने पापाके मंबरपे मेसेज सेन्ड करदीया.. फीर फोन स्वीच ओफ करके सीम नीकालके अपनी पोकेटमे रख लीया..

फीर फोनको पथ्थरसे तोडकर बहेती नदीमे बहा दीया ओर घरकी ओर चल पडा.. तो उधर उनके पापाको मेसेज मीलते ही वो चौक गये.. की उनको अ‍ैसा मैसेज कीसने भेजा..? पहेले तो लगा कीसीने उनके साथ मजाक कीया हे.. लेकीन दुसरे पल ही वो चौकने हो गये..

क्युकी उन्होने पार्टीमे रहेकर बहुत गलत तरीकेसे पैसे कमाये थे.. ओर घरपे अ‍ैसी जगाहपे रखे थे उनकी बीवीको भी नही पता था.. वो इस मामलेमे कोइ रीस्क लेना नही चाहते थे.. उन्होने तुरंत सायबर सेलमे अपने पहेचान वालोको फोन कीया ओर जीस नंबरसे मेसेज आया था वो नंबर दे दीया..

तो कुछ देरके बाद पता चला नंबर स्वीच ओफ आ रहा हे.. ओर मेसेज सहेरसे बहारसे भेजा गया हे.. लेकीन अपनी पार्टी वर्करकी बातने उसे परेसान कर दीया..फीर अ‍ेक घंटेके बाद फीर फोन आयाकी जहासे मेसेज भेजा हे वहा आस पास कोइ सीसी केमेरा भी नही हे..

सुनकर धृवके पापा घबरा गये.. वो इस बारेमे कीसी ओरसे बात करना नही चाहते थे.. ओर तुरंत तबीयतका बहाना बनाकर पार्टी दफतरसे घरकी ओर नीकल गये.. धृवकी मम्मीका अंदाजा बीलकुल सही नीकला.. दो घंटेके अंदर ही उनका पती घरपे आगया.. वो कुछ गभराये ओर परेसान दीख रहा था..

आते ही उन्होने धृवकी मम्मीको जोरोसे आवाज लगाइ.. उपर धृवकी मम्मीके चहेरेपे कुटील मुस्कान आगइ.. फीर अपने आपको सम्हालते जटसे नीचे आनेका नाटक कीया.. धृव भी अपने पापाकी जोरोकी आवाजसे अपने रुमसे बहार नीकल गया.. तो उनके पापाने दोनोकी ओर देखा..
 
धृवकी मम्मी : (गभरानेका नाटक करते) अ‍ेजी.. क्या हुआ..? इतना क्यु चीला रहे हो..?

धृवके पापा : (थोडा परेसानीमे) अरे.. तुम दोनो फटाफट कमरेमे आजाओ.. कुछ जरुरी बात करनी हे.. धृव.. तु कोइ बडे वाला बेग लेकर जल्दी आजा.. हमे आज ही सब हटाना पडेगा..

धृवकी मम्मी : (पीछे जाते) अ‍ेजी क्या बोल रहे हो..? क्या हटाना पडेगा..? कुछ कहोगे भी की नही..?

धृवके पापा : (थोडा गभराते) अरे भागवान धृवको आने दे.. फीर तुम दोनोको कुछ बताता हु..

कुछ ही देरमे धृव अपने कमरेसे अ‍ेक बडी बेग लेकर आगया.. धृवके पापा अ‍ेक अलमारीसे कुछ दस्तावेजोकी फाइले नीकालने लगे.. फीर उसी बंगलोकी फाइल अलग नीकालते बाकीकी सब बेगमे रखने लगे.. ओर साथमे धृव ओर उनकी पत्नीको उन मेसेजके बारेमे बताते रहे..

धृवकी मम्मी : (गभरानेका नाटक करते) हे भगवान.. अ‍ैसा कौन होगा.. जो आपको अ‍ैसा मेसेज भेजा.. ओर आपके पास इतना कुछ हे..? हमे तो पता ही नही था.. सुक्र मनाओ उन्होने आपको मेसेज भेजा.. अगर ये बात सच हुइ तो हम तो फस सकते हे..

धृवके पापा : (अलमारीको धकेलते) मेने कुछ पुलीस वालो.. ओर सायबर सेलको कामपे लगा दीया हे.. वो उनका पता लगा लेगे.. लेकीन हम कोइ रीस्क लेना नही चाहते.. सीर्फ हमारे कुछ नीजी खाते.. ओर इस बंगलेका दस्तावेज ही इधर रखेगे.. बाकी सबकुछ तुम दोनो लेकर नीकल जाओ..

धृवकी मम्मी : (आस्चर्यसे) हम नीकल जाये..? लेकीन कहा..?

धृवके पापा : (अलमारी पीछेसे खोलते) कही भी.. यहासे दुर.. तुम दोनो कुछ दीन पुजाके घरपे चले जाओ.. या फीर हमारे दुसरे बंगले पे.. धृवको पता हे उनके बारेमे.. ओर कीसीको नही पता..

धृवकी मम्मी : (जानते भी अन्जान होते) दुसरा बंगला..? ये कब लीया आपने..?

धृवके पापा : (थोडे गुस्सेसे) अभी ये बतानेका टाइम नही हे.. धृवको सब पता हे.. उनसे पुछ लेना.. तेरे नामपे लीया हे.. गांधीनगरसे पहेले..

धृव ओर उनकी मम्मी आस्चर्यसे सुननेका नाटक करते सब देखते रहे.. उनके पापाने अलमारीके पीछेसे अ‍ेक छुपा दरवाजा खोला.. उनमे बडी बडी रकमकी नोटोकी गडीयोका अंबार लगाके रखा था.. सब कुछ बेगमे भरने लगे.. जब बेग भर गइ तो धृव अ‍ेक दुसरी बेग लेकर आया.. उनके पापा ओर धृंवने मीलकर सबकुछ बेगमे भर लीया..

धृवके पापा : (धृव ओर उनकी पत्नीकी ओर देखते) तुम दोनो इसे लेकर सुबह होनेसे पहेले ही यहासे नीकल जाओ.. वहाका मे सबकुछ सम्हाल लुगा.. ओर तुम दोनोसे फोनसे कोन्टेक्टमे रहुगा.. अब मे घरपे ही रहुगा.. जबतक ये मामालेकी तहेकीकात जा होजाये..

धृवकी मम्मी : (चीन्तासे) अ‍ेजी.. कोइ गभरानेकी बात तो नही हेनां..? वरना मे आपके साथ रुक जाती हु..

धृवके पापा : (जटसे) अरे नही नही.. तुम दोनो सीर्फ ये सम्हाललो.. बाकी मे सब देख लुगा.. कुछ ही दिनोकी तो बात हे.. फीर सब सही होजायेगम तब तुम दोनोको वापस बुला लुगा..

धृव : (धीरेसे) पापा.. क्या हम अभी नीकल जाये..?

धृवके पापा : (सामने देखते धीरेसे) अरे अभी रातमे नही.. साथमे इतने सारे केश हे.. रास्तेपे पुलीसकी चेकींग होगी.. सुबह चार पांच बजे नीकल जाना.. अ‍ेक दो दीन पुजाके वहा रहो.. जब मे कहु तब हमारे बंगलोपे चले जाना.. अभी तीन चार घंटे आराम करलो.. ओर सोजाओ..

धृव अपनी मम्मीकी ओर देखते अपने रुममे चला गया.. उनकी मम्मी ओर पापा दोनो वही रुममे सो गये.. उस रात धृवकी मम्मीने अपने पतीको प्यार करनेकी कोसीस की.. जैसे उनको आखरी बार मीलना चाहती हो.. लेकीन टेन्शनकी वजहसे उनके पतीने प्यार करनेको मना कर दीया.. फीर दोनो सोगये..

लेकीन धृवके पापाको नींद नही आइ.. उन्होने सुबह चार बजे अपनी पत्नीको जगा दीया.. ओर उनको धृवको भी जगानेको कहा.. जैसे ही वो धृवको जगाने उनके रुममे चली गइ.. ओर धृवको जगाया तो धृवने दरवाजेकी ओर देखकर अपनी मम्मीको अपने उपर खीच लीया..

morning-couple.gif


ओर खुसीके मारे उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. लेकीन उनकी मम्मीने अभी थोडा सयम रखनेको कहा.. ओर उनसे अलग होते धृवको फटाफट तैयार होजानेको कहेते खुद तैयार होनेके लीये बहार चली गइ.. मां बेटे फटाफट नहाके कंपलीट होगये.. ओर तीनो होलमे आगये..

धृवकी मम्मी : (धीरेसे) अ‍ेजी.. मे चाइ नास्ता बनादु..?

धृवकी मम्मी : (चीन्तासे) अरे नही.. सीर्फ चाइ बनादे.. आज तीनो साथ बैठकर पीयेगे.. देर होजायेगी.. मे चाहता हु सुबह होनेसे पहेले तुम दोनो इस सहेरको छोडदो.. अगर सब ठीक रहा तो मे फोन कर दुगा.. तुम दोनो हमारे बंगलोपे चले जाना.. मे वहा आजाउगा..

धृवकी मम्मी चाइ बनाने चली गइ.. तो धृवके पापा धृवसे सबकुछ समजाने लगे.. ओर अपनी प्रोपर्टीकी जानकारीया देने लगे.. जैसे उनको कुछ अघटीत होनेका अंदेसा होगया हो.. फीर तीनोने चाइ पीली.. ओर अ‍ेक दुसरेको गले मीले.. धृवने दोनो बेग सम्हालके कारमे रखदीया..

धृवकी मम्मी धृवके पास आगे बैठ गइ.. ओर अपने पतीकी ओर देखने लगी.. जैसे उनको आखरी बार देख रही हो.. उनकी आंखसे आंसु टपक गये.. जैसे अपने गुनाहोकी मांफी मांग रही हो.. फीर धृवने कार जानेदी.. धृवके पापा दोनोको जाते हुअ‍े देखते रहे.. ओर दोनो चले गये..

इडीकी रेडकी मनघडत कहानीसे दोनोने बहुत कुछ हासील करलीया.. इस बातसे धृव ओर उनकी मम्मी दोनो ही बहुत खुस थे.. लेकीन जो उसने पुजाके जरीये जो काम करवाया था.. उनका परीणाम क्या होगा वो उसने सपनेमे भी नही सोचा होगा.. उनको लगाकी इनसे उनके पापाको छोटी मोटी जेलकी सजा होगी.. ओर वो अपने बेटेसे खुलकर वासनाका खेल खेल सकेगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९५

इडीकी रेडकी मनघडत कहानीसे दोनोने बहुत कुछ हासील करलीया.. इस बातसे धृव ओर उनकी मम्मी दोनो ही बहुत खुस थे.. लेकीन जो उसने पुजाके जरीये जो काम करवाया था.. उनका परीणाम क्या होगा वो उसने सपनेमे भी नही सोचा होगा.. उनको लगाकी इनसे उनके पापाको छोटी मोटी जेलकी सजा होगी.. ओर वो अपने बेटेसे खुलकर वासनाका खेल खेल सकेगी.... अब आगे

कहेते हेनां पोलीटीक्समे कोइ परमेनेन्ट दोस्त नही होता.. ओर ना कोइ परमेनेन्ट दुस्मन.. जीन्होने आपको उंगली पकडकर आगे बढाया.. उन्हीके सरपे पावं रखकर आपको आगे बढना होता हे.. सबलोग भले अ‍ेक ही पार्टीके हो.. सब उचे पदकी होडमे अमगे बढनेमे लगे रहेते हे ओर मौकेका फायदा उठा लेते हे..

धृवके पापाके साथ भी वही हुआ.. उसी साम मेइन कार्यालयपे अध्यक्षके नामका लीफाफा पोस्टसे आगया.. जैसे ही सामको अध्यक्ष आया ओर उन्होने लीफाफा खोला.. पढकर चौंक गये.. उनमे धृवके पापाकी पार्टीकी ओरतोके साथ गलत आचरणकी बहुत सारी सीकायत ओर सबुत थे..

ओर साथमे अ‍ेक पेइन ड्राइव जो उनमे कुछ वीडीयो फुटेजकी फाइले.. जीनमे पार्टीकी अलग अलग महीलाये ओर लडकीओके साथ चुदाइकी तसवीर भी थी.. ओर अ‍ेक सीकायतका गुमनाम लेटर भी.. जीनमे इमेइलके माध्यामसे सीसी टु करके दील्हीकी हेट ओफीस ओर कुछ मीडीयाका नाम भी लीखा था..

अ‍ेक पल तो अध्यक्षको पसीना आगया.. ओर बात हेड ओफीस ओर मीडीया तक पहोंच गइ थी.. फीर उसने अकेले अ‍ेक अलग कमरेमे पेनड्राइव टीवीमे लगाकर देखा.. तो धृवके पापाकी कइ वीडीयो क्लीप थी.. जो पार्टीकी अलग अलग महीलाके साथ बीस्तरमे रंगरेलीया मना रहे थे..

देखते ही अध्यक्ष फौरन हरकतमे आगया.. उन्होने फोरन दील्हीके आला कमान अधीकारीसे बात करली.. ओर उनके कहेनेके मुताबीक अ‍ेक्शनमे आगये.. क्युकी ये सब मीडीयामे चलेगा तो पार्टीकी इमेज खराब हो सकती हे.. उन्होने फौरन सुबह लोकल वर्कींग कमीटीकी बेठक बुलाइ..

जीनमे अ‍ेक सदस्य खुद धृवके पापा भी थे.. उनको कुछ समजमे नही आयाकी अध्यक्षने अचानक मीटींग क्यु बुलाइ हे.. वो सुबह अपनी कार लेकर पार्टी ओफीसमे चले गये.. ओर सबको हाइ हेलो करते ओफीसमे चले गये.. तो सबलोग उनको अजीब नजरोसे देखने लगे.. क्युकी मीटींगकी वजह सबको पता चल गइ थी..

फीर सभी कमीटीके सदस्य बेठक कक्षमे चले गये.. ओर दरवाजा बंध करदीया.. अध्यक्षने धृवके पापाकी ओर लीफाफा सरका दीया.. ओर उनको देखनेके लीये कहा.. जैसे ही लीफाफा खोलकर देखा धृवके पापाके पसीने छुट गये.. ओर उन्होने सब जुठ हे.. ये सब वीरोधीकी चाल हे कहेकर आरोप नकार दीया..

तब ना चाहते हुअ‍े भी अध्यक्षने सभी सदस्योके सामने वोडीयो क्लीप दीखाइ.. धृवके पापाकी हार्टबीट बढ गइ.. उनको पसीना आने लगा.. ओर सीनेमे दर्द होने लगा.. वो कुछ नही बोल पाये.. ओर अध्यक्षने उसे आला कमानका संदेश दे दीया.. ओर अ‍ेक हप्तेमे लीखीत जवाब देनेको कहा..

धृवके पीता मीटींग छोडकर वहासे जल्दी नीकल गये.. वो इनकी गंभीरता समजते थे.. घर जाते ही सबसे पहेले उन्होने अपने वकीलको घरपे बुला लीया.. फीर जीतनी जल्दी हो सके सब प्रोपर्टी अपनी पत्नी ओर धृव के नाम ट्रान्सफर करनेकी सुचना देदी.. ओर अपना अ‍ेक वील बनवाया..

फीर पार्टीके आरोपोकी चर्चाकी.. उन्होने अपने सुत्रोसे पता लगवाया तो लीफाफा कीसी गुमनाम ज्यक्तीने भेजा था.. ओर उनमे अहेमदाबादके कीसी रुलर अ‍ेरीयाका पोस्टका सीका होनेकी बात कही.. फीर वकीलको पार्टीको क्या जवाब लीखनाहे उनपे चर्चा हुइ.. धृवके पापाका पुरा दीन व्यस्त रहा..

लेकीन उनको पता नही चला उनकी पीठके पीछे अपने ही वर्कींग कमीटीके कीसी मेम्बरने उनकी वोडीयो क्लीप कोपी करके स्योसील मीडीयामे वायरल करदी.. ओर साम होते होते वो क्लीप लाखो लोगो तक पहोंच गइ.. सोसीयल मीडीयामे उनकी बहुत कीरकीरी हुइ.. ओर उनकी इजत मीटीमे मील गइ..

जीनकी वजहसे पाटीकी वो वर्कर महीलाये.. जीन्होने धृवके पापाके साथ बीस्तर साजा कीया था.. सबकी इजतपे भी उगलीया उठने लगी.. फीर ना चाहते हुअ‍े भी अपनी इजत बचानेकी खातीर धृवके पापाके खीलाफ पुलीसमे सारीरीक सोसणकी कंप्लेन करने लगी.. साम तक चार महीलाने अपनी कंपलेन दर्ज करदी थी..

उनके घरपे पुलीस अधीकारीओकी आवा जाही सुरु होगइ.. कइ पार्टी वर्कर नाराज होते उनके घरके सामने धरनेपे बैठ गये.. पुलीसने बल प्रयोग करके उन सबको वहासे खदेडा.. सोसीयल मीडीयापे धृवके पापाके अ‍ेरेस्टकी मांग बढने लगी.. इन सब जमेलेमे उनको अपनी बीवी ओर धृवसे फोनपे बात करनेका टाइम भी नही मीला..

ओर तीसरे दीन तो पुजाने पोस्टमे डाला हुआ लीफाफा नेशनल न्युज चेनलपे भी पहोंच गया.. ओर वो लोग ब्रेकींग न्युज टायटल पे क्लीप धुंधली करके दीखाने लगे.. बात हाथसे नीकल गइ थी.. तो दील्ही पार्टी आला कमानने उसी दीन धृवके पीताको पार्टीसे सस्पेन्ड भी करदीया..

बात इतनी बीगड गइकी धृवके पीता कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहे.. उनके घरके सामने इतने लोगोकी भीड इकठा होगइ की पुलीसको कंट्रोल करना मुस्कील होगया.. कुछ लोग उनके घरपे पथ्थर भी फेंकने लगे.. ओर आखीर उनकी सुरक्षाके लीहाजसे पुलीसको उनको सुबह हीरासतमे लेनेका फैसला कर लीया..

ये सब पुनम भावीका लखन ओर घरके सदस्यो टीवीपे देख रहे थे.. ओर न्युज देखते भावीका बार बार पुनका सुक्रीया बदा कर रही थी.. क्युकी पुनमने ही इन सब जमेलोसे सही समयपे बहार नीकाला था.. तो अहेमदमबादमे भी धृवकी मम्मी ये सब देखकर आंसु बहा रही थी.. उसे इतना कुछ होगा उनकी उमीद नही थी..

आखीर धृवके पीताको लगाकी अब उनका जेल जाना तैय हे.. तब देर रात उसने अपनी पत्नी ओर पुजासे बातकी.. ओर अंतमे धृवसे बात करते उन्होने उनकी मम्मी ओर पुजाका खयाल रखनेको कहा.. फीर फोन स्वीच ओफ करके अपने रुममे चले गये.. ओर दरवाजा बंध करलीया..

सुबह होते ही उनके बंगलोपे पुलीस बलकी कंपनी तैनात होगइ.. कुछ अधीकारी ओर पार्टीके लोग आने लगे.. कीसीको कुछ पता नही चलाकी अंदर क्या हो रहा हे.. पुलीसकी टीम अंदर गइ.. देखा तो रुमका दरवाजा अंदरसे लोक था.. बहुत कोसीसके बावजुद भी अंदरसे कोइ रीस्पोन्स नही मीला..

तब पुलीसको कुछ अनहोनी होनेकी आसंका हुइ.. ओर पुलीसने दरवाजा तोड दीया.. अंदर देखते ही पुलीस स्तब्ध रेह गइ.. धृवके पापा गलेमे रसी डालते पंखेसे लटक रहे थे.. पुलीसने फोन करके डोक्टर ओर अ‍ेम्ब्युलन्स बुलाली.. तभी अ‍ेक अ‍ेम्ब्युलन्स आइ.. ओर साथमे अ‍ेक डोक्टरकी टीम अंदर आइ..

डोक्टरने उनको चेक कीया.. तो वो मर चुके थे.. फीर पुलीस अपना लीगल काम देखने लगी.. पंचनामा करके उनके घर वालोको फोन करके सुचीत कीया.. कुछ ही देरेमे मीडीयामे धृवके पापाकी सुसाइडकी न्युज आने लगी.. तो लखनने धृवको फोन कीया.. तो पता चला वो सबलोग अहेमदाबादमे पुजाके घरपे हे..

अहेमदाबादमे भी सबलोग उनकी न्युज देख रहे थे.. सुसाइटकी न्युज देखकर पुजा धृव ओर उनकी मम्मी रोने लगी.. धृवने लखनको होस्पीटल पहोंचने कहा.. फीर पुलीसका फोन आया सबने डीसाइड कीया की उनका अंतीम संस्कार अहेमदाबादमे करेगे.. ताकी लोगोकी नाराजगीका सामना ना करना पडे..

ओर पार्टीवाले ओर पुलीसने भी धृव ओर उनकी मम्मीको यही सलाह दी.. तब धृव अकेला ही वापस सहेरमे आगया.. आनेसे पहेले उसने पुजासे अकेलेमे बातकी.. तो पता चला पुजाने पहेलेसे ही पैसो ओर फाइलकी दोनो बेग छुपाकर रखदी थी.. लोगोकी पहेचानमे ना आये इसीलीये धृव अ‍ेक ट्रावेल्सकी बससे नीकल गया..

धृवके आनेसे पहेले ही लखन होस्पीटल पहोच चुका था.. जैसे ही धृव आया लखनको गले मीलकर फुटफुटके रोने लगा.. उनको उमीद नही थीकी इनके पापा इतना बडा कदम उठा लेगे.. लखनने धृवको सम्हाला.. धृवके पीताके मृत्युसे भी मामला सांत होने लगा.. लेकीन होस्पीटलमे भीड अभी भी उतनी थी..

जब पीअ‍ेम होगया तो धृवके साथ लखन ओर धृवके कुछ दोस्त भी उनके पीताकी डेड बोडी लेकर अहेमदाबाद चले गये.. धृवके दोस्त डेड बोडीके साथ अ‍ेम्ब्युलन्समे बैठ गये.. ओर धृव अकेला आया था.. तो लखनके साथ उनकी कारमे बैठ गया.. ओर दोनो अ‍ेम्ब्युलन्सके पीछे ही चलने लगे..

रास्तेमे धृवने लखनको सबकुछ सच बता दीया.. की कीन हालातमे भावीका उनको डीवोर्स देकर चली गइ.. लखनके सामने धृवने पहेली बार कबुल करलीया.. की पुजाकी सादीसे पहेले ही उनका अपनी मम्मीके साथ जानयज रीस्ता होगया था.. जीनकी वजहसे उनका भावीकासे डीवोर्स हुआ..

पुरी बात सुननेके बाद लखनने उसे नही बतायाकी भावीका उनके साथ हे.. उसने धृवको सलाह दी.. अब उनकी मम्मी वीधवा होगइ हे.. तो सब कार्य खतम करनेके बाद वो अपनी मम्मीसे सादी करले.. अहेमदाबाद पुजाके घर पहोंचकर उनके पापाका अंतीम संस्कार करदीया.. फीर लखन ओर धृवके दोस्तो उनसे मीलकर वापस आगये..

जबसे धृव ओर उनकी मम्मी पुजाके घरपे आये थे तबसे उनकी मौसी यानीकी पुजाकी सास बहुत खुस थी.. क्युकी धृव उनको बहुत ही हसाता था.. दोनो बहेने भी हस हसके बाते करती थी.. तभी धृवके पापाका ये हादसा हो गया.. फीर धृव ओर उनकी मम्मी अंतीम वीधी तक पुजाके घरपे ही रहे..

फीर धृव उनकी मम्मी पुजा उनका पती ओर उनकी मौसी.. उनके पापाके अस्थी लेकर हरीद्वार चले गये.. वहा अस्थी वीर्सन करके धृवने उनके पापाका पींड दान कीया.. वहा सबलोग चार दीन साथमे रहे.. फीर सब लोग वापस आगये.. तब कीसीको पता नही चला वहा इन चार दीनोमे अ‍ेक नये रीस्तेने जनम लेलीया था..

फीर तो वापस आकर धृव उनकी मम्मीको लेकर अपने नये बंगलेपे चला गया.. इसी दरम्यान लखनके घरपे सृती रजीया राधीका ओर चंदा नीलम ही थे.. पुनमके ना होनेकी वजहसे सृतीने लखनका बहुत अच्छी तराह खयाल रखा.. सृती अब पुनमकी तराह ही सोचने लगी थी.. लखन राधीका ओर रजीयासे प्यार कर लेता तब सृती लखनसे खुब प्यार करती..
 
ओर कभी कभी तो लखनको लेकर देर रात दुसरे रुममे चली जाती जहा वो पहेली बार लखनसे मीली थी.. वहा लखन बीना नीचे उतरे सृतीकी खुब चुदाइ करता.. ओर हर बार सृतीकी चुतको भरके हरी भरी कर देता.. कइ बार सृती थक जाती तो वो लखनको चंदाके पास भेज देती..

54.gif


जहा लखन चंदाकी भी जमकर चुदाइ कर लेता.. अब चंदाको वोही सुख मील रहा था जो कभी उनकी सादीसे पहेले देवायतसे मीलता था.. चंदाकी वजहसे लखनको नीलमको मीलनेका मौका नही मील रहा था.. क्युकी चंदा कइ बार उपरकी मंजीलपे लखनकी उनकी बीवीओकी चुदाइ देखने आजाती थी..

इसी दौरान अ‍ेक दीन वो ओर राधीका होस्टेलपे थे.. ओर अपने नीजी कमरेमे चुदाइ कर रहे थे.. तब लखनने राधीकाको रजीया ओर दयाके बारेमे बात की.. तो राधीका तुरंत लखनकी बात मान गइ.. ओर ये केह दीयाकी दोनोके आनेसे उनको भी अपने बच्चेको पालनेका टाइम मीलेगा.. ओर अब वो लखनके साथ ही हेतो उसे उन घरकी कोइ जरुरत नही हे..

इसी दौरान लखन टीना ओर वसुधासे चेट करते काफी आगे बढ चुका था.. टीनाके साथ तो दो बार ओर कोफी शापमे मील चुका था.. ओर बात चुंबन ओर हल्कीसी छेडखानी तक पहोंच गइ थी.. टीनाने लखनको डीनरके लीये अपने घरपे इनवाइट कीया.. लखन जानता था.. की जब वो टीनाके घर जायेगा तब चार पांच घंटे वही रहेना पडेगा..

2VNx.gif


उधर गांवमे भी अब भावीका घरके सदस्योसे काफी घुलमील गइ थी.. उनको पुनमका साथ बहुत अच्छा लगा.. वो बार बार धृवसे छुटकारा पानेकी वजहसे पुनमका आभार जता रही थी.. उसने पुनमसे लखनके बारेमे ओर परीवारके बारेमे काफी कुछ जान लीया.. ओर वो लखनकी ओर पुरी तराह प्रभावीत होगइ..

जब मंजुने उसे लखनके साथ मंदीरमे सादीका प्रस्ताव रखा.. तब वो मंजुसे लीपटकर खुब रोइ.. ओर उसने सादीका प्रस्ताव स्वीकार करलीया.. तो पुनम उसे अपनी सौतन कहेते छेडने लगी.. ओर ये बात उसने सृतीको फोन करके बताइ.. तो सृती भी बहुत खुस होगइ..

चारु ओर नीशा अ‍ेक साथ सुहागरात मनाते साथमे ही देवायतसे प्रेगनेन्ट हुइ थी.. ओर उनके प्रैगनन्सीका समय भी खतम होगया था.. तो अ‍ेक दीन सुबह चारुको लेबर पेइन हुआ.. ओर देवायत रश्मी चारुके साथ नीशाको भी लेकर सहेरमे सृतीकी क्लीनीकपे चला गया..

वहा सृतीने चारुकी डीलीवरी की.. ओर चारुने अ‍ेक सुंदर लडकेको जन्म दीया.. ओर उसी साम नीशाने भी अ‍ेक लडकीको जन्म दीया.. दोनो बहुत खुस थी.. लखन राधीका चंदा सबलोग वहा मौजुद रहे.. फीर दुसरे दीन सृतीने दोनोको छुटी देदी.. ओर देवायत सबको लेकर वापस गांव चला गया..

कुछ दीन बीते ही थे तब अ‍ेक दीन पुनमका फोन सृतीपे आगया.. ओर सबको गांव बुला लीया.. तो सृती सब समज गइ.. जब लखन आया तो उसने लखनसे बात करली.. तो लखन उसी वक्त जानेको तैयार होगया.. ओर बंगलेको ताला मारके सबको लेकर गांव चला गया..

वहा जाकर देखा तो आज हमेसाकी तरह मंजु बहार नही आइ.. लखन दैडकर अंदर चला गया.. तो मंजु बहुत ही थकी हुइ हालतमे सोफेपे बैठी थी.. लखन जाते ही उनसे लीपट गया.. ओर आंसु बहाने लगा.. मंजुने कसकर लखनको गले लगा लीया ओर उसे सांत करने लगी..

मंजुला : (आंख गीली करते) बस कर मेरे बच्चे.. रो मत.. मुजे खुसी खुसी हसके वीदा करना..

लखन : (रोते) मोम.. मत करो अ‍ैसी बाते.. हम सब आपके बीना कैसे जीयेगे..?

मंजुला : (मुस्कुराते आंसु पोछते) अरे लेकीन मे कहा जा रही हु..? मुजे वापस भीतो आना हे.. (भावनाके पेटकी ओर उंगली दीखाते) देख वहा.. मे वही हु.. जो ठीक पांच महीनेके बाद वापस आउगी.. तब मुजे खुब प्यार देना.. अपनी गोदीमे खीलाना..

जब लखन ओर मंजु गले लगते रोते हुअ‍े अ‍ेक दुसरेसे बाते कर रहे थे.. तब घरके सभी सदस्यो वही खडे रहेते दोनोकी बात सुनकर आंसु बहा रहे थे.. तभी मंजुकी नजर सृतीकी ओर गइ.. तो उसने अपनी बाहे फैलाइ.. ओर सृती भी रोते हुअ‍े दोडकर मंजुके दुसरी ओर गले लग गइ..

मंजुला : (सर सहेलाते) मेरी बच्ची.. रो मत.. मे अभी कहा जा रही हु..? बस.. आखरी दीनोमे तुम सबके साथ रहेना चाहती थी.. तो तुम सबको बुला लीया.. तु ओर पुनोतो मेरी बहादुर बच्चीया हो.. तुजे लता भावु ओर पुनोको ही मेरे लखनको सम्हालना हे.. ओर ये सबको भी.. देखो अब तो भावीकाभी आगइ हे..

फीर चंदा भी मंजुको मीलते खुब रोइ.. ओर इन सबसे बुरा हाल तो देवायतका था.. मंजुने उसे ना रोनेकी कसम खीलाइ थी.. तो वो सबके सामने रो भी नही सकता था.. वो बस.. अपनी ओफीसमे बैठकर सबसे छुपकर आंसु बहाते रहेता.. वो अंदरसे पुरी तराह टुट गया था..

आज लखन कही नही गया.. पुरा दीन मंजुके साथ ही रहा.. वो जब पुनमको उनके रुममे मीलने गया तब पुनम ओर लखन गले मीलकर खुब रोये.. पुनमने लखनको मंजुके ओर तीन दीन होनेकी बात कही.. मंजुने भी लखनको गांवमे दोस्तोको मीलनेके लीये कहा.. ओर देवायतको सम्हालनेके लीये कहा..

320.gif


लेकीन लखनने मना कर दीया.. क्युकी वो इस हालतमे देवायतको नही सम्हाल पायेगा.. सामको देवायत आया तो सबलोग उनके सामने जबर दस्तीसे मुस्कुरानेका नाटक करते रहे.. लखन सबको हसानेकी कोसीस करता रहा.. सबलोग खानेके लीये बैठ गये.. पुनमने मंजुका हाथ पकड लीया.. ओर खानेकी टेबलकी ओर लेजाने लगी.. तो लखनने उसे अपनी गोदमे ही उठा लीया..

मंजुला : (जोरोसे हसते) अरे कमीने छोड मे चली जाउगी.. कही गीरा देगा.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) नही.. अब तीन दीन आपको गोदमे ही घुमाउगा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सामने देखते धीरेसे) अच्छा.. तो पुनोसे सब जानलीया.. चल कोइ बात नही..

फीर सबलोग खानेको बैठ गये.. लखन माहोलको हल्का बनानेकी कोसीस करते सबको हसाता रहा.. लखनकी इस समजदारीपे पुनम सृती ओर भावीका बहुत खुस होगइ.. भावीका यहा रहेते रेग्युलर मंजुको चेक करती थी.. फीर देवायतकी बाकीकी बीवीया भी मंजुको मीलने आती थी..

उस रात खानेके बाद सबलोग होलमे बैठे थे तब मंजुने दया ओर रजीयाको अपने पास बुलाया.. फीर दोनोको पचास पचास लाख ओर राधीकाके घरके साथ दोनोको राधीकाके साथ होस्टेल सम्हालने ओर उनमे भागीदारी भी दी.. जीसे सुनकर दया ओर रजीया फुट फुटकर रोने लगी..

दया : (रोते हुअ‍े) दीदी.. आपको ये सब.. हमे माफ करदो.. हम जाना नही चाहती.. आपको तो हम दोनोके बारेमे सब पता ही हे..

मंजुला : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) हां बेटा.. मेही सबकी मां हु.. तो तुम दोनोके दीलकी बात कैसे नही जानती..? तुम दोनो चीन्ता मत करो.. हम तुम दोनोको अपने परीवारसे थोडीना अलग कर रहे हे.. मेरा लखन तुम दोनोका खयाल अ‍ैसे ही रखेगा.. जैसे अभी रख रहा हे..

लखन : (मुस्कुराते) हां रजु.. हम सब अ‍ेक ही परीवार हे.. बस.. हमे आपकी भी भावनाओका खयाल रखना हे.. आप दोनोकी ओर हमारे बच्चेकी पुरी जीम्वेवारी हम नीभायेगे.. येतो सब अ‍ेक व्यव्सथाके भाग रुप हे.. तो तुम दोनो चीन्ता मत करो.. हमारे घरका दरवाजा हमेसा तुम दोनोके लीये खुला ही हे..

तब दया ओर रजीयाको पुरी तराह समजमे आ गयाकी उनके दीलकी बात मंजु ओर पुनमको पता चल गइ हे.. ओर पुनमने लखनको सबकुछ बता दीया हे.. ओर इस बातके लीये रजीया ओर दयाके दीलमे लखनके लीये इजत ओर बढ गइ.. ओर दयाने भी भवीस्यमे लखनको समर्पीत होनेकी ठानली..

फीर दो दीन बीत गये.. इन दो दीनमे ना लखन कही बहार गया ना देवायत खेतोपे.. भानुके माध्यमसे सरला ओर रमाको भी पता चला तो वोभी मंजुको मीलने आगइ.. देखा तो रमाका पेट भी काफी बढ गया था.. वो आते ही लखनको देखकर सरमा गइ.. ओर मुस्कुराने लगी..

आज देवायतकी सभी बीवीया सुबहसे ही मोजुद थी.. गांवमे भी कइ लोगोको सबकुछ पता चल गया था.. सबलोग मंजुके लीये प्रोर्थना कर रहे थे.. आज सुबहसे ही मंजु बीस्तरसे उठ नही पाइ.. उनको पता था आज उनकी इस हवेलीमे आखरी रात हे..

देवायत ओर लखन उनके दोनो ओर पास ही मंजुका हाथ थामते बैठे रहे.. देवायतकी आंखसे रुक रु्कके आंसु बेह रहे थे.. मंजुने उसे सम्माइल देकर नामे गरदन हीलाके आंसु बहानेको मना कीया.. देवायतकी सभी बीवीयाके साथ वसुधा ब्रीन्दा बसंती सबलोग मंजुके रुममे बैठे थे..

आज कीसीके गलेमे अ‍ेक नीवाला भी नही गया.. नीर्मलाकी तो बेटी थी.. वो सुबहसे ही मंजुके पैरके पास बैठते आंसु बहा रही थी.. कीसीको पता नही था.. लेकीन मंजुने सबको कीया हुआ वादा उसे आज भी याद था.. पुरा रुम लोगोसे भरा हुआ था.. सब लोग गुमसुम बैठे थे..

मंजुने अपने बेटे वीजयको याद कीया.. तो चंदा फौरन वीजयको लेकर आगइ.. मंजुने उनको देखतेही स्माइलकी.. ओर उनके सरपे हाथ घुकाया.. तो चंदा देवायत ओर नीर्मलाकी आंख गीली होगइ.. फीर लखनने मंजुका सर गोदमे लेकर उसे संतरेका ज्युस पीलाया..

तो मंजुने थोडासा पीया.. फीर बाकी बचा उसने लखन ओर वीजयको अपने हाथोसे पीलाया.. फीर लखनकी गोदमे ही सर रखते सो गइ.. मध्य रातके बाराह बजनेको आये थे.. सबलोग थके हुअ‍े थे.. ओर पता नही क्यु सबकी आंखे भारी होने लगी.. जैसे सबको नीद आ रही हो.. सबलोग अ‍ेक के बाद अ‍ेक धीरे धीरे आंख बंध करते नींदकी आगोसमे चले गये..
 
लखन देवायत भी बैठे बैठे जपकी लगाने लगे.. कीसीको पता नही थाकी ये सब मंजुकी मायाजाल थी.. सबलोग नींदकी आगोसमे चले गये.. कुछ ही देरके बाद सबको नींदमे ही सपनोमे अ‍ेक तेज प्रकाश बीन्द दीखने लगा.. सब लोगोके तन अ‍ेक फुलके माफीक हल्का होगया.. जैसे सबलोग हवामे तैर रहे हो..

सबको परम आंनदकी अनुभुती होने लगी.. जैसे संभोगके आखरी चरणमे होती हे.. गमंवमे भी सबलोगोको संभोगकी अनुभुती होने लगी.. ओर तेज बीन्दु धीरे धीरे बडा होता गया.. ओर उनके सबको अ‍ेक आकृती दीखाइ दी.. वोही मंजुकी आकृती.. जो कभी उन्होने पुनम सृती ओर लखनको दीखाइ थी.. सबलोग मंजुका ये रुप देखकर अचंभीत हो गये..

main-qimg-1a9e0899fc42fe8ced4edfeb2f339fb4.jpg


वोही सबकी जननी.. पीछले जन्मकी देवयानी.. मोहीनी.. अप्सरा ओर परीओकी रानी.. दस भुजाअ‍े.. पुर्ण नग्न स्वरुप.. फीर भी तनपे ढेर सारे गहेने.. अ‍ेक पल तो सभी लोग मंजुका ये रुप देखकर कामाग्नीमे जलने लगे.. वहा जीतनी भी ओरते ओर मर्द थे.. सब मंजुका ये रुप देखकर स्खलीत हो गये.. ओर स्खलीत होते ही सबकी तंद्ना टुट गइ..

सबलोग आंखे मलते अ‍ेक दुसरेकी ओर देखने लगे.. फीर सबका ध्यान मंजुकी ओर गया.. तोवो अभी भी आंख बंध करके लखनकी गोदमे हल्कीसी मुस्कानके साथ सो रही थी.. जैसे वो गहेरी नींदमे सो रही हो.. भावना अब भी सो रही थी.. फीर सब लोगोका ध्यान पुनमकी ओर गया..

देखा तो वो दरवाजेपे कंधा टीकाकर अपने हाथोमे चहेरा छुपाकर रो रही थी.. सृतीको कुछ आसंकाअ‍े हुइ.. ओर वो जटसे खडी होकर मंजुके हाथकी नब्स चेक करने लगी.. तब उनकी आंखोसे भी आंसु नीकल गये.. मंजु बीलकुल सांत हो चुकी थी.. वो जानेसे पहेले सबको अपना असली रुप दीखानेका वादा पुरा करके इस संसारको छोडकर भावनाके गर्भमे जा चुकी थी..

61.gif


सृतीको आंसु बहाते देखकर सबलोग समज गये.. ओर देवायत लखन मंजुसे लीपटकर जोरोसे रोने लगे.. तो वहा सभी लेडीस समज गइकी मंजु जा चुकी हे.. ओर सबकी आंखोमे आंसु आ गये.. सब लोग फुटफुटके रोने लगे.. ओर इतनी जोरोसे रोनेकी आवाज गांवमे गुंजने लगी..

सबलोग नींदकी आगोससे जागकर हवेलीकी ओर दोडने लगे.. ओर देखते ही देखते पुरे गांव मे ये खबर फैल गइ.. सबलोग फोन करके अपने रीस्तेदारोको भी बताने लगे.. सुबह होते होते आजु बाजु सभी गांव वालो तक ये खबर पहोचं गइ.. की बडी ठाकुराइन नही रही.. सब लोगोने देवायतके गांवकी ओर रुख कीया..

लखनने अपने आपको सम्हाल लीया.. वो ओर भानु देवायतको सम्हाल रहा था.. तो पुनम सृती ओर चंदा नीर्मलाको सम्हाल रही थी.. लखनके दोस्तोने अंतीम यात्राकी व्यवस्थाकी.. मंजुको अ‍ेक दुल्हनकी तराह सादीके जोडेमे सजाया.. मांगमे सींदुर लगाया.. अ‍ैसा सजाया.. मानो वो अभी भी जींन्दा होकर खडी होजाये..

तबतक हवेलीके बहार आजु बाजुके कइ गांवसे सेंकडो लोगोकी भीड इकठी होगइ थी.. गांवके प्रतीस्ठीत राज घरानेकी बहु चली गइ थी.. तो कइ मीडीयाके लोग भी सब कवर करने आ गये.. तब गाव वालोको पता चलाकी देवायतकी गांवके बहार भी कीतनी बडी साख थी..

सब लोगोने मंजुलाका अंतीम दर्शन कीया.. सम्सान यात्रामे हजारो लोगोकी भीड थी.. ओर भीड भी क्युना हो..? क्युकी रीस्तोमे बदलावकी मुहीमकी वजहसे मंजु युवाओ ओर महीलाकी आइकोन बन चुकी थी.. ओर स्मसान यात्रामे ज्यादातर लोग युवा ही थे.. कइ युवाओका मीडीया कर्मी इन्टरव्यु भी ले रहे थे..

तब मीडीयाके माध्यमसे सबको पता चलाकी मंजु युवाओकी आइकोन क्यु थी.. नेशनल न्युजमे सब लाइव हो रहा था.. ओर साथमे इसमे इस बात मे डीबेट भी हो रही थी.. की मंजुने गांवमे वीधवा या त्यक्ता अ‍ेक भी महीला नही रहेनी चाहीये.. ओर इसके लीये रीस्तोमे बदलाव भी क्यु ना करना पडे..

पेनलमे कुछ पुराने खयालातके आलोचकके साथ यंग ओर प्रतीभासाली आधुनीक सोच वाले युवा भी भाग ले रहे थे.. उनमे पहेले बदलावके तैरपे उन हीमाचलके उन राजा रानीओका भी जीक्र कीया.. की वो लोग वास्वमे कौन थे.. फीर उन कीताके बारेमे भी बहुत चर्चा हुइ.. जीनका अ‍ेक्षाम्पल दीया जा रहा था.. ओर बात आगे बढते न्युजके माध्यामसे पुरे देशमे चर्चाका वीसय बन गया..

यहा स्मसान पहोचते ही कुछ वीधीओके बाद देवायत ओर लखनने मीलकर मंजुको मुखाग्नी दीया.. मुखाग्नी देते वक्त देवायत पुरी तराह टुट गया.. ओर वो जोरोसे रोने लगा.. तब भानु ओर कुछ दोस्तोने उन्हे सम्हाला.. इस कार्यमे साम ढल चुकी थी.. फीर सबलोग वापस आ गये..

ओर देवायतसे हाथ जोडकर लोग जाने लगे.. न्युज देखकर धृवको भी पता चला.. उसने देर रात लखनको फोन कीया.. ओर सुबह आनेकी बात कही.. तो लखन सतर्क होगया.. ओर उसने पुनमको ये बात बताइ.. तो पुनमने भावीकाको सुबह उपरकी मंजीलपे ही रहेनेकी सलाह दी..

ओर रातको ही भावीकाकी कारको वसुधाके बंगलेपे रखवा दीया.. सुबह होते ही सहेरसे कइ उद्योगपती पार्टनर.. दोस्त.. सबलोग अ‍ेक अ‍ेक करके सोक व्यक्त करने देवायतको मीलने आने लगे.. उनमे धृव धी देरसे आगया.. फीर लखनको मीलकर खाना खाकर चला गया.. उसने लखनसे ज्यादा बात नही की..

जब वो चला गया तब सृतीने भावीकाको नीचे बुला लीया.. जब जब देवायतके बीजनेस पार्टनर आते तब देवायत हर अ‍ेकको लखनका परीचय अपने छोटे भाइके रुपमे करवाता.. ओर कहेता अब सब बीजनेका काम यही देखेगा.. सात दीनमे मंजुका सब कार्य समाप्त करना था.. दीन बीतने लगे.. हर दीन देवायतके यहा लोग बैठनेके लीये आते जाते रहे..

इसी बीच सहेरमे भी धृव अपना सब कारोबार.. ओर प्रोपर्टीका काम समेटने लगा.. उनके पापा इतनी प्रोपर्टी ओर केश रकम छोड गये थे.. की धृवको कुछ करना ही नही था.. उन मा बेटेका गुजारा अ‍ैसे ही चल जाता.. पुजाके पतीने धृवको अपने बीजनेसमे साथ आनेकी पेसकस की..

ओर धृव सहेमत होगया.. क्युकी इसी बहाने धृवका टाइम पास भी हो जाता.. ओर पुजाके घरपे बार बार जानेका मौका भी मीलता.. ओर पुजाको मीलनेके साथ साथ उनकी मौसी यानीकी पुजाकी सासके साथ धनीस्टा बढानेका मौका भी मील गया.. वो पुजाको आज भी उतना प्यार करता था.. जीतना वो उनकी सादीसे पहेले करता था..

पुजा आज भी धृवको अपना पहेला पती मानती थी.. लेकीन कुछ बाते अ‍ैसी थी.. जो सीर्फ धृव ही जानता था.. जब धृवने सहेरकी प्रोपर्टी बेची तब खुब पैसे आये.. धृव पुरी तराह पुराने सहेरसे नाता तोडना चाहता था.. उसने अपना पुराना बीजनेस भी समेट लीया.. वो बस अपनी लाइफ मजेसे जीना चाहता था..

कुछ पैसा अपने जीजाकीके कारोबारमे इन्वेस्ट करके बाकी पैसोकी अच्छी व्यवस्था करदी ताकी हर महीने उनको पैसे मीलते रहे.. वो हमेसाके लीये अपने गांधीनगरके पास वाले बंगलोपे चला गया.. उसने अपने पापाके अंतीम कार्य तक ही सौक रखा.. जब अपनी मम्मीको लेकर अपने नये बंगलोपे चला गया तब दोनो मां बेटे फीरसे अ‍ेक होगये..

पहेले दीन पुजा भी साथ आइ थी.. ओर उसी दीन धृवने पहेली बार अ‍ेक ही बीस्तरमे अपनी मां ओर पुजाको बारी बारी खुब रगडके चोदा.. पहेलेतो मां बेटी अ‍ेक ही बीस्तरमे साथ थीतो थोडी हीच कीचाइ.. फीर लाज सरम त्यागकर दोनो धृवका साथ देने लगी.. दोनोने धृवका खुब साथ दीया..

22771.gif


तीनोने मीलकर फीरसे नये वादे कसमे खाते आगेकी योजना बनाइ.. पुजा अपनी मम्मीको अपनी सौतनके रुपमे अ‍ेक्सेप्ट करनेको राजी होगइ.. क्युकी उनको अपना परीवार भी सम्हालना था.. पुजाकी सास यानीकी उनकी मौसी भी पुजाको खुसी खुसी दो दो तीन तीन दिनके लीये मायके रहेने भेजती.

लेकीन क्यु भेजती वो पुजाको आज तक पता नही चला.. ओर अ‍ेक दीन फीर मौका मीलते ही पुजा अपने बच्चेको अपनी सांसके पास छोडकर फीरसे अकेली धृवके घर आगइ.. उस दीन पुजाने अपने हाथोसे अपनी मम्मीको दुल्हनके लीबासमे सजाया.. धृव पहेले ही दुर अ‍ेक मंदीरमे सबकुछ तैय करके आया था.. वहा उन्होने अपनी असली पहेचान छुपाइ..

ओर पंडीतको खुब तगडे पैसे दीये.. जीसे पंडीतने भी अपनी जुबा ओर आंख कान बंध कर लीये.. उसे तो ये भी नही पता थाकी जो ओरत ओर लडकेकी सादी करवा रहा हे वो उन मंत्रीकी बीवी बेटे हे जीन्होने हाल ही मे सुसाइड कीया था.. वोतो बस यही सोचता रहा.. की साथमे अ‍ेक जवान लडकी भी हे..

divyanka-vivek.gif


तो ये लडका इन लडकी को छोडकर इस मां जैसी ओरतसे क्यु सादी कर रहा हे..? धृव पुजा ओर उनकी मम्मी उस मंदीरके अंदर खडे थे.. पंडीतने धृव ओर उनकी मम्मीकी सात फेरे लेकर सादी करवाइ.. बस.. ये राज सीर्फ ये चारोके लोगोके बीच ही रहेने वाला था.. उस रात सुहागरातमे पुजाने दोनोको पुरा स्पेस दीया.. ओर अपनी मम्मीका बेड सजाकर अपने घर चली गइ..
 
धृवने उस रात वायाग्रा खाली.. ओर उनकी मम्मीको भी कामोतेजक गोली खीलाइ.. फीर पुरी रात फुलोसे सजाये नये कमरेमे वासनाका खेल तुफान बनके तांडव मचाता रहा.. अबतब की धृवकी मम्मीकी सारी कशर धृवने पुरी करदी.. सुबह होते होते धृवने उनकी मम्मीकी हर अ‍ेन्गलसे चुदाइ करली..

20201106-212008.jpg


उनकी मम्मीका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोड दीया.. धृवने चुदाइ करते उनकी चाल तक बदलदी.. ओर वो साम तक आराम करती रही.. फीर तो दोनो मीया बीवीकी तराह रहेने लगे.. अब उनकी मम्मी धृवको अ‍ेक पतीकी हेसीयतसे रीस्पेक्टसे बुलाने लगी.. जब कभी कभी दोनो पुजाके घर जाते फीरसे मां बेटे हो जाते..

धृव ओर उनकी मम्मी दोहरी जींदगी जीने लगे.. तो दुसरी ओर पुजाको भी जब अपने भाइसे चुदवानेका मन होता.. वो दो तीन दीनके लीये बच्चेको लेकर मायके चली जाती.. ओर धृवकी पत्नी होनेका हक अदा करती.. तब रातमे धृव दोनो मां बेटीको अ‍ेक ही बीस्तरमे खुब रगड रगडके चोदता..

37570.gif


पुजा ओर उनकी मम्मीकी दीनमे भी कुटाइ हो जाती.. धृव उनकी मम्मीके सामने ही पुजाको चोद लेता.. या फीर पुजाके सामने उनकी मम्मीको.. अ‍ैसे ही अ‍ेक दीन पुजा तीन दीनके लीये अपने मायके आइ हुइ थी.. उस रात धृवने मां बेटीको खुब रगडके चोद लीया.. तीनो देर तक सोते रहे.. फीर धृव कंपलीट होकर अपने जीजाकी फेक्टरीपे चला गया..

फेक्टरीपे जानेसे पहेले रास्तेमे धृवने कीसीको अ‍ेक फोन कीया.. तो सामने धृवको कीसी भी बहाना बनाकर घरपे आनेको कहा.. फीर धृव फेक्टरीपे आगया.. दो पहोर तक उन्होने अपने जीजाजीका बीजनेसमे हाथ भी बटाया.. फीर दोनोने टीफीनसे साथमे खाना भी खाया.. उनके जीजाजीको तो सीर्फ कारोबारमे ही इट्रेस्ट था..

तभी धृवके जीजाके फोनपे उनकी मम्मीका फोन आया तो उनके जीजाजीने बात करली.. फीर धृवही कुछ बेन्कका काम सोंपते कहा.. (धृवके जीजाजीको सीर्फ जीजाजी ही लीखुगा.. ओर उनकी मम्मीको सीर्फ मौसी.. क्युकी इस कहानीमे उन दोनोका कुछ ज्यादा रोल नही हे.. सीर्फ आपके मंनोरंजनके लीये)

जीजाजी : (तीन चार चेक देते) धृव.. तुम ये जरा चेक बेन्कमे डाल देनां.. क्युकी आज वो ओफीसका आदमी नही आया हे.. ओर रास्तेसे मम्मीकी कुछ दवाइआ भी लेनी हे.. उसे घरपे देकर जाना..

धृव : (मनमे खुस होते) जीजु.. बेन्कमे तो आज बहुत रस होगा.. जापस आनेमे देर हो जायेगी..

जीजाजी : (मुस्कुराते रीक्वेस्ट करते) धृव प्लीज.. सीर्फ आजके दीन.. बहुत जरुरी हे.. मुजे दो पेमेन्ट भी डालना हे.. प्लीज.. फीर तु वहीसे घर चले जाना.. ओर कुछ काम नही हे.. क्युकी मुजे पार्टीको मीलने भी दुर जाना हे.. रातमे आनेमे भी देर हो जायेगी.. तु मम्मीको बोल देना वो डीनर अकेली करले.. मे देर रात घर जाउगा..

धृव : (मुस्कुराते) अरे जीजु.. आप अ‍ैसे रीक्वेस्ट मत करो.. दीजीये मे चला जाता हु.. फीर घर चला जाउगा.. क्युकी पुजा वहा हे तो दोनोको घुमाने भी लेजाना हे..

कहेते धृव चेक ओर दवाकी पर्ची लेकर नीकल गया.. धृवके नशीब भी अच्छे थे जो बेन्कमे ज्यादा रस नही था.. उन्होने चारो चेक बेन्कमे डाल दीये.. फीर मेडीकलसे उनकी मौसीकी दवाइ ओर अ‍ेक छोटा पेक लेकर उनके जीजाजीके घर चला गया.. जब दरवाजा खटखटाया.. तो कुछही देरमे दरवाजा खुल गया..

सामने उनकी मौसी.. यानीकी पुजाकी सास खडी थी.. धृवको देखत ही कामुक स्माइल करते साइडमे होगइ.. धृव बीना कुछ बोले बंगलेके अंदर चला गया.. तो उनकी मौसीने दरवाजा बंध करके लोक कर दीया.. फीर धृवकी ओर कामुक स्माइल करते अपने बेडरुमकी ओर जाने लगी..

धृव भी उनकी ओर कुटील मुस्कान करता हे.. फीर वो भी दवाइआ लेकर उनकी मौसीके पीछे बेडरुममे चला गया.. ओर धृवने बेडरुमका दरवाजा बंध करके लोक करदीया.. तभी उनकी मौसी धृवकी ओर जटसे जाने लगी.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये..

56.gif


मौसी : (मुस्कुराते) आ गया दवाइआ लेकर..? वो कुछ बोला तो नही..?

धृव : (बाहोमे भीचकर होंठ चुमते) नही मौसी.. आज बहुत बीजी हे.. रातको देरसे आयेगे.. उसने कहा हे आप अकेले खाना खालेना.. लीजीये आपकी दवाइ.. क्या हुआ हे आपको..? येतो महेंगी भी नही हे.. सीर्फ बीस रुपीये लीये..

मौसी : (मुस्कुराते) अब तुमने फोन कीया था तो कुछ तो जुगाड करनाही था.. मुजे कुछ नही हुआ.. ये सब फालतुकी दवाइआ हे.. चल अब समय बरबाद मत कर.. क्या वो बडा वाला बलुन (कोन्डम) लाया हेनां..?

धृव : (मुस्कुराते गोदमे उठाकर बेडकी ओर चलते) मौसी.. उनके बीनातो आप मुजे हाथ भी नही लगाने देती.. दवाइके साथ पुरा पेकेटे लेकर आया हु.. तीन हे.. तो तीन राउन्ड तो पका ही समजो..

मौसी : (गलेमे बाहे डालकर मुस्कुराते) कमीने कैसे हाथ लगाने देती..? अभी भी मेरे पीरीयड आते हे.. कही उच नीच हो गइ तो..? मुजे तो इन कोन्डमपे भी भरोसा नही हे.. जबभी हम मीलते हे बादमे आइपील भी लेती हु.. पता नही हरीद्वारमे तुमने मुजे कैसे पटा लीया.. अगर कीसीको पता चल गया होता तो..? पहेलीबारमे तो मेरी तो हालत ही बीगाडदी थी..

धृव : (जोरोसे बाहोमे भीचते मुस्कुराते) क्या करु मौसी.. उस दीन तो आपको देखकर कंट्रोल ही नही करपाया.. आप हे ही इतनी खुबसुरत.. अ‍ेकदम परी लगती थी.. लव यु मौसी..

मौसी : (अपनी सारी नीकालते) हंम.. लव यु टु.. पता नही तुमने मुजपे क्या जादु करदीया हे.. अब तेरी आदत जो होगइ हे.. चल अब बाते ही करेगा.. की मुजे जनतकी सैर भी करवायेगा.. कमीने मुजे तो तुमने अपने वसमे ही करलीया.. चल अब सुरु होजा.. आज वो देरसे आयेगा तो तीन राउन्ड हो जायेगे.. जबसे तुमने फोन कीया तबसे नीचे खुजली हो रही हे..

फीर कुछ ही देरमे दोनो अ‍ेकदम नंगे थे.. धृवकी मौसी पीठके बल धृवकी कमरमे पैरोकी आंटी लगाकर लेटी हुइ थी.. ओर धृव उनकी मौसीको हाथके बल उचा होते जोरोसे चोद रहा था.. पुरे कमरेमे सीर्फ थप..थप.. ओर फच..फचकी आवाजे आ रही थी.. पुजाकी सास बहुत ही कामुक तरीकेसे धृवसे चुदवा रही थी..

133.gif


धृवकी मौसी धृवसे नजरे चुराते इधर उधर मुह करते दर्दसे सीसकारीया नीकाल रही थी.. कुछही देरमे उनकी मौसीने धृवको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर अपनी कमर जोरोसे हीलाते धृवको लीपलोक करते कमरको जटकने लगी.. ओर धृवके लंडको भीगोते जडने लगी..

तो धृवभी लंडको अपनी मौसीकी चुतमे जडतक घुसा देता हे.. ओर अपनी कमरको जटके मारते कोन्डममे ही जड जाता हे.. फीर अपनी मौसीके सीनेपे ढेर होजाता हे.. तब उनकी मौसी धृवकी पीठ सहेलाते धृवको अपने तनसे चीपका लेती हे.. ओर अपने सासको दुरस्त करती हे..

मौसी : (सरमाकर मुस्कुराते) धृव.. तुम मुजे पहेले क्यु नही मीला..? कीतना अच्छा चोदता हे.. तुम लंबी रेसका घोडा हे.. मुजे अ‍ेक ही बारमे नीचोड लेता हे.. बस.. अ‍ैसे ही अपनी मौसीकी सेवा करता रहे..

जीस दीन धृव अपने पापाके अस्थी लेकर सबको हरीद्वार लेगया तब धृव उनकी मौसीका खयाल रखते कुछ ज्यादा ही उनके करीब आगया था.. तो उनकी मौसीको भी धृवका साथ अच्छे लगने लगा.. कही मंदीरमे दर्शन करने जाते तो धृव उनके पीछेही रहेता.. ओर बार बार उनका हाथ पकड लेता..

जब लोकल टेम्पो या रीक्षामे बैठते तो उनकी मौसी धृवके पास ही बैठती.. ओर कम जगहकी वजहसे धृव उनकी चुचीयोको छु लेता.. तब पुजाकी सांसको धृवका इरादा समजमे आगया.. इन खेलमे उनको भी मजा आने लगा.. ओर जवाबमे उनकी मौसी सरमाकर धृवकी ओर मुस्कुरा देती.. उनका बेटा तो पुजा ओर बच्चेको सम्हालनेमे ही लगा रहेता..

धृवकी मम्मी अभी भी थोडी सदमे मे थी.. अ‍ेक बार गंगा घमटपे स्नास करते उनकी मौसीका पैर फीसल गया.. ओर धृवने तेजीसे उनको पकड लीया.. धृवका अ‍ेक हाथ उनके बुब्सपे था.. लेकीन फीर भी वो पानीमे पुरी तराह भीग गइ.. उनकी सारी गीली होते उनके तनसे चीपक गइ.. ओर ट्रान्सपरन्ट सारीकी वजहसे उनके दोनो चुचे साफ दीखाइ देने लगे..

धृवकी मौसी बहुत ही सरमाइ.. साडी गीली होगइ तो वो वापस होटेलपे चेन्ज करने जाना चाहती थी.. ओर उनके जीजाजी ओर पुजाने धृवको रीक्वेस्ट करते उनके साथ होटेलपे भेज दीया.. बस.. यही दोनोके रीस्तेकी सुरुआत होगइ.. धृवने जाते वक्त बाते करते उनका हाथ थामे रखा.. ओर दोनो होटेलमे आगये..
 
मौसी : (सर्मसार होते) धृव.. जरा मुह उधर करलोनां.. मुजे चेन्ज करना हे..

धृव : (मुस्कुराते) ठीक हे मौसी.. आप चेन्ज करलो.. लेकीन वैसे भी सबकुछ दीख रहा हे.. मौसी आप वाकइ बहुत खुबसुरत लग रही हो.. जीतो चाहता हे मे आपसे ही सादी करलु.. हें..हें..हें..

मौसी : (सर्मसार होते हसते) धृवे अ‍ेक मारुगी.. मुजे पता हे तेरी नीयत ठीक नही हे.. भीडमे कैसे मुजसे चीपक जाता हे.. ओर हाथ पकडलेता हे.. मे मौसी हु तेरी.. अगर कीसीने देख लीया होता तो..?

धृव : (हींमत करते खडा होगया ओर पास आते) अ‍ैसे कैसे कीसीको पता चलता..? मौसी होतो क्या हुआ.. हेतो आप भी अ‍ेक औरत.. वोभी अकेली.. मौसी आप मुजे बहुत अच्छी लगती हो..

मौसी : (सरमाते अपने हाथोसे अपनी चुचीया छीपाते) नही धृव.. ये ठीक नही हे.. मे तुम्हारी मौसी हु.. प्लीज.. ये गलत हे.. अगर कीसीको पता चल गया तो हम दोनोकी बदनामी होगी..

धृव : (पीछेसे बाहोमे भरते चुचीया मसलते कानमे) नही मौसी कुछ गलत नही हे.. यकीन मानो कीसीको पता नही चलेगा.. मुजे पता हे जबसे मौसाजी नही रहे तबसे आप प्यासी हो.. तो फीर क्यु अपनी जवानी बरबाद कर रही हो..? ये भांजा कीस दीन आपके काम आयेगा.. सीर्फ इतना सोचो आप अ‍ेक ओरत हे.. ओर मे अ‍ेक मर्द.. आपकी सेवा करना मेरा धर्म हे..

मौसी : (गरम होते) धृ..व.. मत कर अ‍ैसी बाते.. अगर कीसीको पता चल गया तो मे कहीकी नही रहुगी..

धृव : (पीछेसे गलेको चुमते) मौसी.. ये राज सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगा.. आप बहुत खुबसुरत हो.. मत रोको मुजे.. कीसीको पता नही चलेगा.. मुजे आप बहुत अच्छी लगती हो.. आज सबकुछ होजाने दो.. मे वादा करता हु जींदगीभर आपकी सेवा करता रहुगा..

कहेते धृव उनके गले ओर गालको चुमते उनके दोनो उरोजोको थाम लेता हे.. ओर मसलने लगता हे.. तो उनकी मौसी भी इतने सालोके बाद कीसी मर्दके हाथ लगानेसे मदहोस होने लगी.. ओर वो जटसे पलटकर धृवकी बाहोमे समा गइ.. कुछ ही देरमे दोनो अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पी रहे थे..

धृवकी मौसीको पता भी नही चलाकी धृवने कब उसे पुरी तराह नंगी करदी थी.. धृवने बडी ही सावधानीसे उनकी मौसीको बेडपे लीटा दीया.. ओर उनके उपर छागया.. दोनो अभी भी अ‍ेक दोनोके होठोको चुम रहे थे.. ओर धृवका लंड अपनी मौसीकी चुतपे दस्तक देते बीलमे धुसनेका रास्ता ढुंढ रहा था..

ओर आखीर वो रास्ता ढुंढकर अंदर घुसनेमे कामयाब हो गया.. उनकी मौसीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर आंखमे आसु आगये.. धृवने उसे पुरी तराह अपनी बाहोमे भीचते अपने कब्जेमे लेलीया था.. मौसी धृवसे नजरे चुराते इधर उधर मुह करते धृवसे नजरे चुरा रही थी.. ओर धृव होले होले अपनी कमर हीलाते अपनी मौसीकी चुदाइ करने लगा..

21665.gif


उनकी मौसी इतने दीनोके बाद चुद रही थी.. तो कुछही देरमे उसने धृवको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर कमरको जटके देते जडने लगी.. इनके बाद धृव हाथके बल उचा होगया.. ओर जोरोसे कमर हीलाते अपनी मौसीकी धमासान चुदाइ करने लगा..

उनकी मौसीकी कामुक सीसकारीया होटेलके कमरेमे गुंजने लगी.. अब वो भी खुलकर धृवका साथ देने लगी.. तब कुछ ही देरमे धृव उनकी मौसीसे चीपक गया.. ओर लीपलोक करलीया.. तो उनकी मौसी समज गइ.. ओर उसने धृवको जोरोसे धका मारते अपने उपरसे हटा दीया.. तो लंड बहार नीकल गया..

धृव उनकी मौसीकी ओर देखता ही रेह गया.. लेकीन तभी उनकी मौसी जटसे बेडपे बैठ गइ.. ओर धृवका लंड अपनी मुठीमे थामते जोरोसे आगे पीछे करते हीलाने लगी.. तभी धृवके लंडसे पीचकारीया छुटते उनकी मौसीके मुहको भीगोने लगी.. जब धृव छुट गया तो उनकी मौसी बाथरुममे भाग गइ..

फीर मौसी ओर धृवने बारी बारी सावर लीया.. दोनो तैयारहोते कंपलीट होगये.. तो दोनो अ‍ेक बार फीर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर होठ चुम लीये.. फीर रुमको ताला मारके बहार आगये.. धृवकी मौसी सर्मसार होते धृवसे लज्जा रही थी.. ओर धृवकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी.. होटेलसे बहार नीकलते दोनोने ओटो पकडलीया.. तब ओटोमे..

धृव : (धीरेसे कानमे फुसफुसाते) मौसी.. आपने अ‍ैसा क्यु कीया..?

मौसी : (सरमाते धीरेसे) तो क्या करती..? धृव.. मुजे अभी भी पीरीयड आ रहा हे.. अगर कुछ बच्चा ठहेर गया तो..? मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहेती..

धृव : (हाथ थामते) मौसी कैसा लगा..? आपको मजा तो आयानां..?

मौसी : (सर्मसार होते) मुजे नही पता.. तुम बहुत बदमास हो.. आज तुमने मुजे गंदी करदी..

धृव : (मुस्कुराते) अरे.. बताओनां..?

मौसी : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. अच्छा लगा.. बहुत मजा आया..

धृव : (मुस्कुराते) तो क्या अब हम दुबारा मील सकते हे..? घरपे..

मौसी : (सरमाकर मुस्कुराते) वहा खतरा हे.. पुजा घरपे ही होती हे..

धृव : (मुस्कुराते) अब तो हम यही रहेने आ गये हे.. तो पुजा मेरे घरपे आती जाती रहेगी.. तब वो नही होगी.. तबतो मील सकते हेनां..?

मौसी : (मुस्कुराते) हंम.. लेकीन दो पहोरके समय.. तेरा जीजाभी फेक्टरीपे होगा.. तब आजाना.. ओर हां.. अब आओतो कोन्डम लेकर ही आना.. ओर साथमे अ‍ेक आइपीलकी स्ट्रीप भी लेआना.. इनके बीना मे तुजे हाथ भी नही लगाने दुगी.. ओर प्रोमीस कर.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगी..

वादे कसमे खाते दोनो वापस घाटपे चले गये.. फीर वहा पुजा पाठ हुइ.. ओर तीन दीन सबलोग बहुत घुमे.. लेकीन अब धृव ओर उनकी मौसीके बीच रीस्ता बदल चुका था.. अब उनकी मौसी ज्यादातर धृवके साथ ही रहेती.. ओर मौका मीलते ही वो खुद धृवका हाथ थाम लेती.. फीर सबलोग वापस सहेर आगये..

वापस आनेके बादतो धृव ओर उनकी मौसीके बीच रीस्ता ही बदल गया.. दोनो अ‍ेक प्रेमी हो गये.. बादमे तो धृव उनकी मौसीकी कइ बार चुदाइ कर चुका था.. अब तो धृवकी मौसीको भी धृवसे चुदवानेकी आदत होचुकी थी.. पुजा ओर धृवकी मम्मीको आज भी पता नही चला.. की धृव ओर उनकी मौसीके बीच नाजायज रीस्ता पल रहा हे.. ओर धृवकी मौसीको भी धृवने पता नही चलने दीयाकी उनका अपनी बहेन ओर मम्मीके साथ नाजायज रीस्ता हे..

इधर गांवमे भी सबकी हाजरीकी वजहसे लखन बीना चुदाइ काम करता रहा.. जीनकी वजहसे उसे नीचे दर्द होने लगा.. पुनम लखनकी तकलीफ समज गइ.. हवेलीपे बहुत सारे लोग थे.. उनमे गांवकी ओरते भी थी.. पुनमने रश्मीसे उनके घरकी चाबी लेली.. फीर सृती ओर राधीकाको लेकर रश्मीके घर चली गइ..

वहा उसने लखनकी तकलीफके बारेमे दोनोसे बातकी.. तो सृतीने फोन करके लखनको फौरन अकेले रश्मीके घर बुला लीया.. जैसे ही लखन आया सृतीने दरवाजा लोक करलीया.. ओर लखनको लेकर बेडरुममे चली गइ.. लखनने अंदर जाके देखा तो पुनम ओर राधीका पुरी तराह नंगी होकर बेडपे लेटी थी..

लखन : (मायुस होते धीरेसे) दीदी.. ये सब..? अभी..?

पुनम : (सामने देखते) भाइ.. कुछ मत बोलो.. मुजे आपकी तकलीफके बारेमे पता हे.. मोमने भी मुजसे कहा हे.. चाहे कुछ भी होजाये.. कैसी भी परीस्थीती हो.. आपके अंदरके कामको जगाये रखना हे.. बस.. आप सुरु होजाओ.. ओर हां.. अब इतनी तकलीफ सहेनीकी जरुरत नही हे.. जो होनाथा होगया.. आपको तकलीफ देखकर मोम कोभी अच्छा नही लगेगा.. आप यही समजलो आपकी ओरसे यही मोमको सची श्रधांजली हे.. आजाओ सृतीदी.. आप भी लेट जाओ..

36067.gif


उस दीन लखनने तीनोको बीना हथीयार बार नीकाले दो दो बार चोद लीया.. तब लखनको नीचे कुछ राहत महेसुस हुइ.. फीर चारोने वही बाथ लेलीया.. तो लखनने अ‍ेक बार सृतीको वही खडे खडे चोद लीया.. तो पुनम राधीका हसने लगी.. फीर पहेले लखन चला गया.. ओर कुछ देरके बाद वो तीनो भी घर आगइ..

नीर्मला ओर चंदा ज्यादातर साथ ही रहेती.. इसी दौरान नीर्मलाने नोटीस कीयाकी अब चंदा बीलकुल ठीक लग रही थी.. वो पहेले जैसे ही सब नोर्मल व्यवहार करने लगी थी.. लेकीन जब वो लखनसे बात करती तब अ‍ेक बीवीकी तराह बहुत ही रीस्पेक्टसे बात करती.. जीसे देखकर नीर्मला बहुत कुछ समज गइ.. तब मोका मीलते ही..
 
नीर्मला : (मुस्कुराते) चंदा.. आजकल तुम बहुत खुस लग रही हो.. क्या लखनके घर इतना अच्छा लगता हे तुजे..? तुमतो बीलकुल ठीक होगइ हो..

चंदा : (मुस्कुराते) हां दीदी.. मे लखनके साथ बहुत खुस हु.. मुजे पता हे आप क्या जानना चाहती हे.. मे घुमा फीराके बात नही करुगी.. आपको सबकुछ सच बता दुगी.. वही हुआ जो हमारी मंजु चाहती थी..

नीर्मला : (मुस्कुराते धीरेसे) तो क्या तुमने लखनको.. आइ मी..न..

चंदा : (मुस्कुराते सामने देखते धीरेसे) हां दीदी.. मेने लखनको पुरी तराह अपनालीया हे.. पता नही क्यु.. मे देवुकी बीवी हु.. फीर भी मुजे अनदेखा कीया जाता था.. ओर लखन मेरा पती नही हे.. फीर भी पतीका हर फर्ज पुरा करते मुजे वो सुख दे रहा हे जो कभी मुजे देवुसे नही मीला.. इसीलीये अब मेने लखनको ही अपना सबकुछ मानलीया हे.. मनसे पती भी..

नीर्मला : (मुस्कुराते) चलो अच्छा हुआ.. कमसे कम तुम खुस तो हो.. इसीलीये मंजुने तुमको देवुसे अलग करदीया था.. ताकी तुजे जींदगीभर अ‍ेक पतीका प्यार मीलता रहे..

चंदा : (सामने देखते) तो क्या आपको पहेलेसे ही सब पता था..?

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां मेरी बच्ची.. मंजुने मुजे सबकुछ बता दीया था.. जब तुम्हारी धिरेनकी वजहसे मानसीक हालत खराब हो गइथी.. तब ही पता थाकी तु सीर्फ लखनसे ही ठीक होगी.. ओर जींदगी भर लखनके साथ ही रहोगी.. आज तुम बीलकुल ठीक हो गइ हो.. अब तेरा असली पती सीर्फ लखन ही हे.. बल्की अब देवुकी सभी बीवीयोको लखन ही सम्हालेगा..

चंदा : (मुस्कुराते) आइ नो दीदी.. वो इतने सक्षम हेकी हम सभीको सम्हाल सकते हे.. मेने भी तैय करलीया हे.. अब पुरी लाइफ मे लखनकी बीवी बनकर रहुगी.. ओर जरुरत हुइ तो उनके बच्चे भी पैदा करुगी.. कमसे कम हम दोनोकी अ‍ेक नीशानी..

नीर्मला : (मुस्कुराते) जरुर मेरी बच्ची.. मे तेरे साथ हु.. तुजे सायद पता नही होगा लखन सचमे मंजुका बेटा हे.. सीर्फ लखन ही नही.. हमारी पुनो ओर सृती भी..

चंदा : (मुस्कुराते) यस दीदी.. पुनोदीने मुजे सबुकछ बता दीया हे.. अब हवेलीकी रानी हमारी पुनो ही हे..

वाकइ अब हवेलीका सब वहीवट पुनम देखने लगी थी.. वो हर कार्य नीर्मला सरला ओर चंदाको पुछकर करती थी.. भानुने खेतो ओर गोडाउनका काम सम्हाल लीया था.. अ‍ेक सुबह रमेश भी सहेरसे देवायतसे मंजुका सौक मनाने आगया.. जया अपनी प्रेगनन्सीकी वजहसे नही आपाइ..

रमेशको देखते ही बंसी थोडा वीचलीत होगया.. उनको रमेशके उपर गुस्सा आने लगा.. लेकीन कुछ नही बोला ओर वहासे दुर चला गया.. सरला ओर रमा भी इतने दीनोसे यहा थी.. रमा काममे चंपा काकीका हाथ बटाती.. ओर सरला नीर्मला चंदाके साथ ही बैठी रहेती.. ओर आखीर वो दीन भी आगया..

आज हवेलीपे मंजुका अंतीम कार्य था.. मंजुला सबकी आइकोन बन चुकी थी इसीलीये देवायतने उनका अंतीम कार्य अ‍ेक उत्सवकी तराह मनाया.. लखनने पींडदान दीया.. तब सबकी आंखे नम थी.. देवायतने पुरे गांव ओर आजु बाजुके पंचायतके सदस्योको भी न्योता दीया था..

जैसे ही कार्य खतम हुआ तो सबके लीये भोजन हुआ.. ओर सब भोजन करके अपने अपने घर जाने लगे.. अब सीर्फ देवायतकी सभी बीवीया.. लखनके दोस्तकी फेमीलीके लोग.. रमा सरला ओर घरके सदस्य ही रहे.. देवायत नीर्मलासे लीपटकर खुब रोया.. देवायतकी सभी बीवीओने महेसुस कीयाकी देवायत मंजुके जानेकी वजहसे टुट गया हे..

भानु ओर लखन उसे सांत करते रहे.. सब ये कहेकर उसे समजाते रहेकी मंजु कही नही गइ.. अब वो भावनकी कोखमे पल रही हे.. सीर्फ पांच महीनेका इन्तजार करलो.. फीर मंजु वापस हवेलीमे आजायेगी.. बहुत लोग ये सुनकर राहत महेसुस करने लगे.. की चलो.. पांच महीनेके बाद खुसीया फीरसे लोटेगी..

तो ये सब सुनकर भावना बहुत ही सरमाइ.. रातके खानेके वक्त चारु ओर रश्मीने पंचायतका सहेरका कुछ काम लखनको दीया.. तो देवायतने भी लखनको अब वापस काम सम्हालने कहा.. क्युकी अब पुनम ओर उनकी बच्ची हमेसाके लीये यही रहेने वाली थी.. खानेके बाद भानु सरला ओर रमाको लेकर चला गया..

चारु नीशा वंदना रश्मी ओर वसुधा भी अपने घर चले गये.. लखनके दोस्तकी फेमीली भी चली गइ.. उस रात पहेली बार नीर्मला देवायतके बेडरुममे बीना जीजक चली गइ.. साथमे लता भी चली गइ.. इतने दीनो लखन यहा था.. फीर भी अ‍ेक बार भी उसने लताकी ओर नही देखा.. तो लता पुरी तराह टुट गइ..

देवायत सोते हुअ‍े भी मंजुके बारेमे सोचता रहा.. ओर उनको याद करते आंसु बहाता रहा.. नीर्मलाने उसे रातमे भी अपनी बाहोमे लेकर खुब समजाया.. तब देर रात सोया.. तो दुसरी ओर आज पुनम सृती राधीका भी लखनको अपने रुममे लेगइ.. ओर लखनने तीनोको खुब पेला..

चंदा वीजयको लेकर अलग रुममे सो गइ.. अब उनका यहा जी नही लगता था.. तो दुसरी ओर जबसे रजीया यहा आइ थी तबसे दया उनको लेकर अपने पुराने रुममे लेकर चली जाती.. ओर दोनो आज भी लेस्बीयनका खेल खेलती.. ओर आगेकी योजनापे चर्चा करती..

दुसरे दीन लखन सहेर जानेको तैयार होगया.. उसने कहा तो तीन चार दीनके बाद काम नीपटाकर वापस आजायेगा.. अब लखनको दोनो जगह तीन चार दीनके लीये टाइम देना था.. तो क्लीनीकपे ना जानेकी वजहसे सृती भी साथ चलने तैयार होगइ..

तो चंदा भी अब सहेरमे रहेना चाहती थी.. तो भावीकाको भी अपने वकीलसे मीलना था.. ओर नये सीरेसे क्लीनीक सम्हालना था.. तब सबने मीलकर तैय कीया की अब भावीका अपना क्लीनीक बंध करके सृतीके साथ ही बैठेगी.. जबतक गांवका होस्पीटल कंपलीट नही होजाता..

भावीकाने अपना कुछ पर्सनल स्टाफ अपने साथ रखनेकी बात कही.. जीनमे उनकी हमराज ओर रीसेपनीस्ट आरती.. ओर दो ओटीकी नर्सींग स्टाफ.. ओर सबलोग इस बातपे सहेमत होगये.. ओर भावीकाने अपने पीताकी फेक्टरीमे दावेके लीये लीगल काममे लखनको साथ रखनेकी बात कही.. तो इस बातपे भी सब लोग सहेमत होगये..

क्युकी अब पुनम ओर सृतीको पता था की अब भावीका का भवीस्य उन लोगोके साथ ही जुडा हुआ था.. जब भावीकाने गांवमे भी अ‍ेक अलग मकान बनानेकी बात कही तो पुनम सृतीने उनको मना कर दीया.. ओर कहाकी अब वो हमेसाके लीये इसी हवेलीपे रहेगी.. तब भावीका बहुत कुछ समज गइ..

उसे मंजुकी बात याद आने लगी.. की कैसे मंजुने उसे लखनके साथ मंदीरमे जाकर सादी करलेनेको कहा था.. ओर भावीका सरमाकर हवेलीपे रहेनेके लीये सहमत होगइ.. उसने नइ होस्पीटलके लीये वसुधा ओर सृतीसे मीलकर कुछ नये उपकरणकी लीस्ट भी बनाइ थी..

जो भावीका अपनी तरफसे खुद नइ होस्पीटलको अपने मम्मी पापाके नामसे डोनेट करने वाली थी.. दुसरी ओर अब धृवकी ओरसे भी कोइ खतरा नही था.. तो लखनके साथ भावीकाने भी अब सहेर जानेका फैसला करलीया.. ओर होस्टेलकी वजहसे राधीका भी साथ चलनेको तैयार होगइ..

रजीया कुछ दिन हवेलीपे रहेना चाहती थी.. तो सृतीने नीलमको पढाइके कारण साथ चलनेको केह दीया.. तो इस बातपे मन ही मन नीलम भी बहुत खुस होगइ.. लेकीन लता नीलम ओर लखनकी ओर देखते बहुत मायुस थी.. वो लखनसे बात करना चाहती थी.. लेकीन हीमत नही होपाइ..

लखन सृती भावीका चंदा राधीका ओर नीलमको लेकर सहेरकी ओर नीकल गया.. देवायत चारु ओर रश्मी वंदनाके आग्रहसे पुनमने हवेलीके साथ साथ अब पंचायतका काम भी सम्हालनेके लीये फैसला करलीया.. साथमे पुनमने गांवकी ओर महीलाओको भी इनमे सामील करलीया..

इनमे ब्रीन्दा बसंतीके साथ बनवारीलालकी बहु बींदीया.. ओर साथमे नीशा वसुधाभी सामील होगये.. चारु रश्मी ओर वंदना तो पहेलेसे ही पंचायतकी सदस्य थी.. अ‍ैसा लगता था पुरा गांव अब महीला प्रधान होगया हो.. सभी महीलाओने अब पुरे गांवकी कमान अपने हाथोमे लेनेकी ठानली.. ओर चारुने पुनमकी अगवाइमे गांवका ओर ज्यादा वीकास करनेपे जोर दीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९६

इनमे ब्रीन्दा बसंतीके साथ बनवारीलालकी बहु बींदीया.. ओर साथमे नीशा वसुधाभी सामील होगये.. चारु रश्मी ओर वंदना तो पहेलेसे ही पंचायतकी सदस्य थी.. अ‍ैसा लगता था पुरा गांव अब महीला प्रधान होगया हो.. सभी महीलाओने अब पुरे गांवकी कमान अपने हाथोमे लेनेकी ठानली.. ओर चारुने पुनमकी अगवाइमे गांवका ओर ज्यादा वीकास करनेपे जोर दीया.... अब आगे

लखन सबको लेकर घरपे आगया.. ओर होलमे बेठे बाते कर रहे थे तब भावीकाने लखनको अब भी थोडा डर लगनेकी बात कही.. तो लखनने थोडी सेखी मारी.. ओर सबके सामने अ‍ैसे ही धृवको हाल चाल जाननेके लीये फोन कीया.. जब फोन लगा तो सबको चुप रहेनेका इसारा करते फोन स्पीकरपे करदीया..

लखन : (मुस्कुराते) सब चुप रहेना.. अभी आपका डर खतम कर देता हु..

धृव : (फोन लगते ही) अरे भाइ.. कैसे हो..? बडी भाभीका सब कार्य संप्पन होगया..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाइ.. कल ही होगया.. सब खतम करके आज ही सहेर वापस आगया.. तो सोचा तुजे फोन करु.. बोल.. क्या हालचाल हे..? तेरे पापाका सब कार्य कंपलीट होगया..?

धृव : (फोनपे) हां भाइ.. मे मीलने आया उनसे बहुत दीन पहेलेही कर दीया.. सबकुछ पांच दीनमे ही नीपटा दीया.. आपतो जानते हो हमारे यहा कोइ रीस्तेदार नही हे.. बस.. हम ओर पुजाके ससुरलाल वाले.. हम सब हरीद्वर जाकर काम नीपटाके आगये.. ओर आते ही वहाका सब प्रोपर्टी ओर बीजनेसको समेट लीया.. ओर यहा गांधीनगर रहेने आगये..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. वहा पुजाका घर भी नजदीक होगया.. आंटीकी तबीयत तो ठीक हेनां..?

धृव : (थोडा हीचकीचाते धीरेसे) भाइ.. आपने कहाथानां..? सायद हमने भी आपके गांवके नीयम अपना लीये हे..

लखन : (मुस्कुराते) मतलब..?

धृव : (धीरेसे) भाइ.. वहा कीसीको कहेना नही.. पापाका कार्य खतम होते ही मेने मोमसे सादी करली हे.. भाइ हमारा अफैर चल रहा था.. इसी वजहसे भावुने मुजे छोड दीया था.. वो बहुत ही अच्छी थी..

लखन : (मुस्कुराते) कमीने वो इतनी अच्छी थी तो फीर तुमने उसे छोडा क्यु..?

धृव : (धीरसेसे) भाइ.. मैने नही.. उन्होने हमे छोडा हे.. उन्होने मुजे ओर मम्मीको सेक्स करते देख लीया.. सीर्फ आपको बता रहा हु.. पुजाकी दुसरी सादीसे पहेले ही मे ओर मम्मी रीलेशनमे आगये थे.. वो पापाके बीजी रहेनेकी वजहसे मुजसे बहुत प्यार करने लगी थी.. मोमने पापासे सभी उमीदे छोड दीथी..

लखन : तो फीर तुमने भावीकासे सादी क्युकी..? सम्हाल लेते पुजा ओर तेरी मम्मीको..

धृव : नही यार.. पुजाने अपनी सादीके लीये सर्त रखीथी.. की मे कीसी लडकीसे सादी करलु.. तब पुजाको मेरे ओर मोमके रीलेशनके बारेमे नही पता था.. फीर भावुसे बार बार मीलनेकी वजहसे मुजे अच्छी लगती थी.. तो सादी करली.. लेकीन मे मोम ओर पुजाके बीचमे ही फसा हुआ था.. तो भावुकी ओर ज्यादा ध्यान नही दे पाया.. तो अच्छा हुआ हमारा डीवोर्स होगया..

लखन : (भावीकाकी ओर मुस्कुराते) यार मेने सुना हे डीवोर्सके बाद उन्होने अपना क्लीनीक बंध करदीया हे..? सायद तेरे डरकी वजहसे ये सहेर छोडकर चली गइ हे..

धृव : (गहेरी सास लेते) यार बहुत गलत हुआ.. उनको लगा होगाकी पापाकी पोलीटीकल पोजीसनकी वजहसे हम उनको परेसान करेगे.. लेकीन सच कहु..? जबसे पापा चले गये तबसे मेने सबकुछ छोड दीया हे.. उन सहेरको भी.. मेने अपनी सभी अयासीया छोडदी.. ओर जीजुके साथ उनके बीजनेसमे उनका हाथ बटाता हु.. वो भी सीर्फ टाइम पास.. वो भावुको डरनेकी जरुरत नही थी.. चालु रखती अपना क्लीनीक..

लखन : (मुस्कुराते) ओर तेरी मम्मी ओर पुजादी.. वो अब खुस हे..?

धृव : (मुस्कुराते) बहुत.. यार मम्मीने तो अब मुजे पुरी तराह अपना पती मानलीया हे.. ओर साथमे मे ओर पुजा भी अब ज्यादा नजदीक आगये हे.. दोनो सौतन मुजे खुब प्यार देती हे..

लखन : (हसते) कमीने भावु भी कम नही थी.. तुने ध्यान ही नही दीया.. कास अगर मुजे मील जाये.. तो मे उसे सादी कर लेता.. हें..हें..हें..

धृव : (जोरोसे हसते) तो कमीने ढुढले उनको.. ओर करले सादी.. वैसे भी तुम लोगोमे कीतनी भी सादीया करलो.. सब चलता हे.. वो ज्यादा दुर नही होगी.. सृतीभाभीकी बेस्ट फ्रेन्ड हेनां..? उनके कोन्टेक्टमे रहेती होगी.. जरा भाभीसे जानले..

लखन : (मुस्कुराते) तो फीर तुजे बुरा नही लगेगा..?

धृव : (हसते) यार मुजे अब क्यु बुरा लगेगा..? हमारा तो डीवोर्स हो गया हे.. बस.. अ‍ेक बार मीले तो मे उनकी माफी मांग लुगा.. ताकी दीलमे कोइ गील्टी ना रहे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे यार.. वो मीलेगी तो तेरी बात जरुर पहुचाउगा.. चल.. मीलते हे..

धृव : (मुस्कुराते) हंम.. यार कभी इधर आना हुआ तो मुजे मीलना.. मे अ‍ेड्रेस सेन्ड करता हु.. चल बाय..

लखन : (फोन कट करतेही भावीकाको) बोलो.. अब डर लगता हे..?

भावीका : (सरमाकर हसते) नही यार.. आपने डर भी खतम करदीया.. ओर हमारी बात भी रखली..

सृती : (मुस्कुराते) भावु.. अब तु बीन्दास्त मेरी क्लीनीकपे चल.. वहा हम दोनो सम्हाल लेगे.. अब कहा हमे पैसोके लीये काम करना हे..

भावीका : (मुस्कुराते) सृती आज नही.. कलसे आउगी.. अभी खाना खाकर कुछ देर आराम करगे.. ओर साम पांच बजे वो वकील अंकलकी अ‍ेपोइटमेन्ट हे.. तो मे ओर लखन वही जा रहे हे..

सृती : (मुस्कुराते) हां यार.. वो जरुरी हे.. तुम अपना सब काम आरामसे नीपटालो.. बादमे आना.. ओर हां.. तेरी वो आरती ओर तेरे जरुरी स्टाफको भेजदे..

भावीका : (मुस्कुराते) ओल मोस्ट सबको छुटी देदी हे.. बस.. सीर्फ ओटीपीकी दो ओरत.. ओर अ‍ेक आरती.. तीनो ही आयेगे.. आरतीको मेने फोन करके सब बता दीया हे.. वो घरपे ही हे..

फीर दो पहोरका खाना राधीका ओर नीलमने मीलकर बना लीया.. लखन चंदा सृती ओर भावीका बाते करते रहे.. चंदा वीजयके साथ खेलते बाते करती रही.. ओर बार बार लखनकी ओर कातील स्माइल करते उनको आंखोसे रुमकी ओर इसारा करती रही.. ओर ये बात सृतीने नोटीस करली..

इतने दीन भावीकाने हवेलीपे रहेकर इस खानदानके बारेमे मंजु ओर पुनमसे काफी कुछ जानलीया था.. घरमे अब कीसीके भी साथ लीप कीस आम बात होगइ थी.. सबलोग खाना खाने बैठ गये.. सृती राधीका लखनके साथ अगल बगलमे बैठ गइ..ओर चंदा भावीका ओर नीलम इन तीनोके सामने बैठ गये..

सभी खाना टेबलके बीच था.. सब लोग अपने हाथोसे लेने लगे.. लेकीन कीसीको पता नही थाकी लखन नीचेसे पैरोसे नीलम ओर चंदाको छेड रहा था.. नीलम सरमके मारे सर जुकाते अपने होठोको दातोसे दबाके लखनकी हरकत बरदास्त कर रही थी.. ओर लखन अ‍ेक ही पैरोसे दोनोकी चुतको बारी बारी छेड रहा था..

नीलम अपनी सांसके साथ बैठी थी.. तब उनको भी नही पता थाकी जो हाल उनका हो रहा हे वोही हाल उनकी सासका हो रहा हे.. चंदाकी सांस भारी होगइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते उनकी हरकत बरदास्त करती रही.. उनकी चुत पानी छोडने लगी..
 
Back
Top