- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 148,789
बडी मुस्कीलसे वृन्दा उनके लंडमे तनाव लानेमे कामयाब रही.. जब जवेरीलालका लंड खडा होगया.. तब वो जटसे बेडपे पीठके बल लेट गइ.. वृन्दा जवेरीलालको खीचकर अपने उपर चडा देती हे.. ओर उनका लंड पकडकर अपनी चुतमे जबरदस्तीसे घुसा देती हे.. फीर जवेरीलालके होठोको चुमते उनको अपनी बाहोमे भीचते अपनी कमरको हीलाते जवेरीलालको चोदनेके लीये वीवस करती हे.. ओर जवेरीलाल कमर हीलाते वृन्दाको चोदने लगे.. तब..
जवेरीलाल : (मुस्कुराते बुब्स चुमते) वृन्दा.. आज तुजे क्या होगया हे..? हंम..? अपने पतीपे बहुत प्यार आ रहा हे..? बता क्या बात हे..? तुम मुजसे अैसेही चुदवाने नही आती.. हें..हें..हें..
वृन्दा : (सरमाते धीरेसे) जाओ जी.. क्या मे मेरे पतीको प्यारभी नही कर सकती..? आज बहुत मन हुआतो आगइ.. प्यारसे चोदीयेना.. अब तो आप मुजे चोदते ही नही.. मेरी भी चुदवानेकी बहुत इच्छा होती हे..
जवेरीलाल : (मुस्कुराते कमर हीलाते) अब हमारी उमर होगइ हे.. हमारे बच्चेभी जवान हो गये हे.. तो अब इस उमरमे ये सब करना अच्छा नही लगता..
वृन्दा : (सरमाकर हसते) हां.. आप होगये होगे बुढे.. मे नही.. समजे..? मत भुलो मे आपसे दस साल छोटी हु.. मुजेतो ये सब आजभी चाहीये अभी.. ओर हां.. बच्चोसे याद आया.. अब आप इस दोनोकी सादी जल्दी करवा दीजीये.. कमीनोने हमारी नाक कटवादी..
जवेरीलाल : (मुस्कुराते) क्यु..? क्या हुआ..? उसीकी तो प्लानींग हो रही हे.. कुछ हुआ हे क्या..?
वृन्दा : (सरमाते धीरेसे) नही.. आज सुबह जयश्रीको उल्टी हुइ थी.. सायद हमारी जयश्री पेटसे हे.. दोनोही सादीसे पहेले सबकुछ कर रहे होगे.. इस लडकीने तो हमे कहीका नही छोडा.. कभी भाइ बहेनके बीच चुदाइ होती हे क्या..? सुनीयेजी.. अब हमे यहा नही रहेना.. अब वक्त आगया हे हमे इस घरका बटवारा करदेना चाहीये.. मुजे नही रहेना यहा.. आप थोडा जोरोसे चोदीयेनां.. बहुत मजा आता हे.. हें..हें..हें..
जवेरीलाल : (जोरोसे कमर हीलाते) मे थक जाता हु यार.. तु बहुत चुदडक होगइ हो.. (जोरोसे कमर हीलाते) वृन्दा.. बात तो तेरी सही हे.. हमने इसीलीये तो वो ठाकुर साहेबके खीलाफ सबको भडकाया था.. उन्होने भी अपनी बहेनसे सादी करली थी.. मुजे लगता हे हमारे बच्चोकी आपसमे सादी करवाके भगवानने इसी बातका हमारे साथ बदला लेलीया हे.. भलेही यहा सब कुछ बदलाव होगा.. लेकीन लोगतो हमारी ओर उंगली उठायेगेनां..
वृन्दा : (मनमे खुस होते) तो फीर..? इसीलीये आपसे केह रही हु.. अब ब्रीन्दा ओर देवरजीको यही रहेना हे तो भले ही रहे.. हम छोटासा मकान लेकर सहेरमे चले जायेगे.. भले ही दोनोका धंधा अभी साथ चले..
जवेरीलाल : (जोरोसे चोदते गलेको चुमते) वुन्दा.. क्या ब्रीन्दा ओर जीतुके बीच रीलेशन कुछ ठीक हुआ की नही..? पता नही दोनोके बीच क्या प्रोबलेम हे. कोइ कुछ बतानेको भी तैयार नही हे..
वृन्दा : (जोरोसे कमर हीलाते) छोडीयेना उसे.. उनकी बात अभी करके क्यु हमारा मजा खराब कर रहे हे.. वो दोनो पती पत्नीके बीचका मामला हे..
जवेरीलाल : (जोरोसे चोदते) नही.. जीतुसे इस बारेमे बात करुगा तो उनको दुख होगा.. इसीलीये पुछ रहा था..आइ.. आह.. आह.. आह..वृ..न्दा.. मे गया.. आह.. आइ.. बुच.. बुच..
वृन्दा : (जोरोसे कमर हीलाते बाहोमे भीचते) अरे.. रुकीये.. अैसे कैसे जल्दी छुट गये.. अभी तो मेरा अेक बार भी नही हुआ.. चोदीयेनां..
जवेरीलाल : (कमरको जटको देते) आइ.. आह.. बस.. बस.. हो गया.. तु अपनी उंगलीसे करले..
कहेते जवेरीलाल वृन्दाके होठोको चुमते जड गये.. ओर उनके सीनेपे लुढक गये.. तब वृन्दा प्यासी रेह गइ.. फीरभी वो मुस्कुराते जवेरीलालको अपने उपरसे हटाकर बाथरुममे चली गइ.. ओर चुतमे उंगली डालकर जोरोसे हीलाने लगी.. तब कुछही देरमे उनकी चुतसे अेक फवारा नीकल गया ओर वृन्दा सांत होगइ.. फीर अपनी चुतको साफ करके वापस जवेरीलालकी बगलमे लेटकर उनको बाहोमे भरके सोने लगी.. आज वृन्दाने अपनी बात रखदी थी..
तब गांवसे दुर भानुके घर आजभी रमा भानुके नीचे लेटकर उनसे चुदवा रही थी.. ओर भानुको नीलम ओर लखनकी सादीके लीये.. बाते करते मनवा रही थी.. तब उन दोनोको नही पताथा की नीलम लताके रुमसे उन दोनोकी चुदाइ देख रही हे.. ओर धिरेनके साथ हुइ अपनी चुदाइको याद करते अपनी चुतको सहेला रही थी.. अब नीलमको भी फीरसे चुदवानेकी इच्छा होने लगी.. फीर वो चुतमे उंगली करके सांत होकर सो गइ..
जबभी इस गांवमे सुरज अपनी पहेली कीरण छोडता तब कुछ ज्यादा ही मस्तीमे छोडता.. जैसे कामदेवके बाणोको छोड रहा हो.. जैसे इस गांवके सभी लोगोके मनकी बात जानता हो.. तो आजभी मस्तीके साथ इस गांवमे अपनी रोसनीकी कीरणे छोडकर मुस्कुराते आगे बढने लगा.. ओर गांवके लोगोको सुबह होनेका अहेसास करवाने लगा.. तब कुछ बुजुर्ग लोगो बैलगाडीको लेकर अपने खेतोकी ओर जाने लगे..
हवेलीमे दया रजीया चंपाभाभी.. तीनोही सुबह जल्दी उठकर अपने कामोपे लग गइ थी.. तो नीर्मला भुमीका सरला भी कंपलीट होकर होलमे बैठ गइ थी.. तब पुनम ओर भावना दोनो भी तैयार हो रही थी.. तो लता नहा रही थी.. तब लखन अबभी घोडे बेचकर सो रहाथा.. तो यही हाल देवायतके रुममे भी था.. कल देवायतने सृती ओर चंदाकी हालत वाकइ खराब करदी थी.. तो मंजुने भी सुबह चार बजे तक देवायतसे चुदवाया था..
तो देवायत सृती ओर मंजु अबभी खर्राटे मारते सो रहे थे.. तब चंदा धीरेसे बेडसे उतर गइ.. तो उनकी चुतमे अबभी मीठीसी जलन हो रही थी.. कल देवायतने उनका पुरा बदन चोद चोदके तोड दीयाथा.. तो वो थोडासा लंगडाते बाथरुममे चली गइ.. ओर अपनी चुतकी सीकाइ करके नीत्यक्रम करलीया.. फीर नहाने लगी.. ओर नहाकर बहार नीकली.. तब देवायत जागते ही सृतीकी धमाकेदार चुदाइ कर रहाथा.. तो चंदा देखकर सरमा गइ.. ओर हसने लगी..
चंदा : (सरमाकर हसते) सृती.. क्या रातमे तेरा जी नही भरा.. जो सुबह सुबह ही सुरु होगइ..? हें..हें..हें..
सृती : (सर्मसार होते धीरेसे चुदवाते) दीदी.. पता नही मे जबसे यहा आइ हु.. मेरे साथ सुबह यही करते हे.. हें..हें..हें.. दीदी आपभी आइअेना..
देवायत : (मुस्कुराते) हां.. चंदा.. तुम भी आजा.. कीतने दिन होगये हम सुबहमे नही मीले..
चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) ना बाबा ना.. अभी भी नीचे जलन हो रही हे.. कलतो आपने मुजे चोद चोदके बेहोस ही करदीया था.. ओर ये देखो महारानी.. अभी भी घोडे बेचकर सो रही हे.. लगता हे.. दोनो देर रात तक जागे होगे.. कमीनी बहुतही चुदकड हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) अेय.. मेरी मंजुको गालीया मत दे.. मे उसे केह दुगा.. हें..हें..हें..
चंदा : (मुहपे हाथ रखते) ना बाबा ना.. इसे कुछ मत कहेना.. वरना मेरी हालत फीरसे बीगडवा देगी.. ओर आप उनकी हर बात मानते हो.. हे..हें..हें..
कहेते चंदा हसते हुअे आयनेके सामने चली गइ.. तब देवायत ओर सृती धमाकेदार चुदाइ करके साथमे जड गये.. तब दोनोही हसते बाथरुममे अेक साथ घुस गये.. ओर मस्तीया करते नहाने लगे तबतक मंजु भी जाग गइ.. ओर चंदाको अेक मुका मारकर वो बेडपे बैठ गइ..
जब देवायत सृती नहाकर बहार आगये तब मंजुभी बाथरुममे घुस गइ.. फीर देवायत चंदा ओर सृती तीनो कंपलीट होकर बहार आगये.. कुछ देरके बाद मंजु भी नहाकर बहार नीकल गइ.. ओर आयनेके सामने बैठकर तैयार होने लगी.. वो अपने बालोको सवार रही थी.. अभी देवायतके रुममे मंजु अकेली ही थी..
तभी पुनम रुममे आकर दरवाजा धीरेसे बंध करदेती हे.. ओर मंजुके पास चली जाती हे.. क्युकी उसने लखनको वो जडीबुटी देनेकी बात कही थी.. जो इस वक्त मंजुके पास थी.. पुनम आतेही साइड मे रखा टेबल खीचकर मंजुके पास बैठ गइ.. ओर धीरेसे सरमाकर मंजुसे बात करने लगी....
कन्टीन्यु
जवेरीलाल : (मुस्कुराते बुब्स चुमते) वृन्दा.. आज तुजे क्या होगया हे..? हंम..? अपने पतीपे बहुत प्यार आ रहा हे..? बता क्या बात हे..? तुम मुजसे अैसेही चुदवाने नही आती.. हें..हें..हें..
वृन्दा : (सरमाते धीरेसे) जाओ जी.. क्या मे मेरे पतीको प्यारभी नही कर सकती..? आज बहुत मन हुआतो आगइ.. प्यारसे चोदीयेना.. अब तो आप मुजे चोदते ही नही.. मेरी भी चुदवानेकी बहुत इच्छा होती हे..
जवेरीलाल : (मुस्कुराते कमर हीलाते) अब हमारी उमर होगइ हे.. हमारे बच्चेभी जवान हो गये हे.. तो अब इस उमरमे ये सब करना अच्छा नही लगता..
वृन्दा : (सरमाकर हसते) हां.. आप होगये होगे बुढे.. मे नही.. समजे..? मत भुलो मे आपसे दस साल छोटी हु.. मुजेतो ये सब आजभी चाहीये अभी.. ओर हां.. बच्चोसे याद आया.. अब आप इस दोनोकी सादी जल्दी करवा दीजीये.. कमीनोने हमारी नाक कटवादी..
जवेरीलाल : (मुस्कुराते) क्यु..? क्या हुआ..? उसीकी तो प्लानींग हो रही हे.. कुछ हुआ हे क्या..?
वृन्दा : (सरमाते धीरेसे) नही.. आज सुबह जयश्रीको उल्टी हुइ थी.. सायद हमारी जयश्री पेटसे हे.. दोनोही सादीसे पहेले सबकुछ कर रहे होगे.. इस लडकीने तो हमे कहीका नही छोडा.. कभी भाइ बहेनके बीच चुदाइ होती हे क्या..? सुनीयेजी.. अब हमे यहा नही रहेना.. अब वक्त आगया हे हमे इस घरका बटवारा करदेना चाहीये.. मुजे नही रहेना यहा.. आप थोडा जोरोसे चोदीयेनां.. बहुत मजा आता हे.. हें..हें..हें..
जवेरीलाल : (जोरोसे कमर हीलाते) मे थक जाता हु यार.. तु बहुत चुदडक होगइ हो.. (जोरोसे कमर हीलाते) वृन्दा.. बात तो तेरी सही हे.. हमने इसीलीये तो वो ठाकुर साहेबके खीलाफ सबको भडकाया था.. उन्होने भी अपनी बहेनसे सादी करली थी.. मुजे लगता हे हमारे बच्चोकी आपसमे सादी करवाके भगवानने इसी बातका हमारे साथ बदला लेलीया हे.. भलेही यहा सब कुछ बदलाव होगा.. लेकीन लोगतो हमारी ओर उंगली उठायेगेनां..
वृन्दा : (मनमे खुस होते) तो फीर..? इसीलीये आपसे केह रही हु.. अब ब्रीन्दा ओर देवरजीको यही रहेना हे तो भले ही रहे.. हम छोटासा मकान लेकर सहेरमे चले जायेगे.. भले ही दोनोका धंधा अभी साथ चले..
जवेरीलाल : (जोरोसे चोदते गलेको चुमते) वुन्दा.. क्या ब्रीन्दा ओर जीतुके बीच रीलेशन कुछ ठीक हुआ की नही..? पता नही दोनोके बीच क्या प्रोबलेम हे. कोइ कुछ बतानेको भी तैयार नही हे..
वृन्दा : (जोरोसे कमर हीलाते) छोडीयेना उसे.. उनकी बात अभी करके क्यु हमारा मजा खराब कर रहे हे.. वो दोनो पती पत्नीके बीचका मामला हे..
जवेरीलाल : (जोरोसे चोदते) नही.. जीतुसे इस बारेमे बात करुगा तो उनको दुख होगा.. इसीलीये पुछ रहा था..आइ.. आह.. आह.. आह..वृ..न्दा.. मे गया.. आह.. आइ.. बुच.. बुच..
वृन्दा : (जोरोसे कमर हीलाते बाहोमे भीचते) अरे.. रुकीये.. अैसे कैसे जल्दी छुट गये.. अभी तो मेरा अेक बार भी नही हुआ.. चोदीयेनां..
जवेरीलाल : (कमरको जटको देते) आइ.. आह.. बस.. बस.. हो गया.. तु अपनी उंगलीसे करले..
कहेते जवेरीलाल वृन्दाके होठोको चुमते जड गये.. ओर उनके सीनेपे लुढक गये.. तब वृन्दा प्यासी रेह गइ.. फीरभी वो मुस्कुराते जवेरीलालको अपने उपरसे हटाकर बाथरुममे चली गइ.. ओर चुतमे उंगली डालकर जोरोसे हीलाने लगी.. तब कुछही देरमे उनकी चुतसे अेक फवारा नीकल गया ओर वृन्दा सांत होगइ.. फीर अपनी चुतको साफ करके वापस जवेरीलालकी बगलमे लेटकर उनको बाहोमे भरके सोने लगी.. आज वृन्दाने अपनी बात रखदी थी..
तब गांवसे दुर भानुके घर आजभी रमा भानुके नीचे लेटकर उनसे चुदवा रही थी.. ओर भानुको नीलम ओर लखनकी सादीके लीये.. बाते करते मनवा रही थी.. तब उन दोनोको नही पताथा की नीलम लताके रुमसे उन दोनोकी चुदाइ देख रही हे.. ओर धिरेनके साथ हुइ अपनी चुदाइको याद करते अपनी चुतको सहेला रही थी.. अब नीलमको भी फीरसे चुदवानेकी इच्छा होने लगी.. फीर वो चुतमे उंगली करके सांत होकर सो गइ..
जबभी इस गांवमे सुरज अपनी पहेली कीरण छोडता तब कुछ ज्यादा ही मस्तीमे छोडता.. जैसे कामदेवके बाणोको छोड रहा हो.. जैसे इस गांवके सभी लोगोके मनकी बात जानता हो.. तो आजभी मस्तीके साथ इस गांवमे अपनी रोसनीकी कीरणे छोडकर मुस्कुराते आगे बढने लगा.. ओर गांवके लोगोको सुबह होनेका अहेसास करवाने लगा.. तब कुछ बुजुर्ग लोगो बैलगाडीको लेकर अपने खेतोकी ओर जाने लगे..
हवेलीमे दया रजीया चंपाभाभी.. तीनोही सुबह जल्दी उठकर अपने कामोपे लग गइ थी.. तो नीर्मला भुमीका सरला भी कंपलीट होकर होलमे बैठ गइ थी.. तब पुनम ओर भावना दोनो भी तैयार हो रही थी.. तो लता नहा रही थी.. तब लखन अबभी घोडे बेचकर सो रहाथा.. तो यही हाल देवायतके रुममे भी था.. कल देवायतने सृती ओर चंदाकी हालत वाकइ खराब करदी थी.. तो मंजुने भी सुबह चार बजे तक देवायतसे चुदवाया था..
तो देवायत सृती ओर मंजु अबभी खर्राटे मारते सो रहे थे.. तब चंदा धीरेसे बेडसे उतर गइ.. तो उनकी चुतमे अबभी मीठीसी जलन हो रही थी.. कल देवायतने उनका पुरा बदन चोद चोदके तोड दीयाथा.. तो वो थोडासा लंगडाते बाथरुममे चली गइ.. ओर अपनी चुतकी सीकाइ करके नीत्यक्रम करलीया.. फीर नहाने लगी.. ओर नहाकर बहार नीकली.. तब देवायत जागते ही सृतीकी धमाकेदार चुदाइ कर रहाथा.. तो चंदा देखकर सरमा गइ.. ओर हसने लगी..
चंदा : (सरमाकर हसते) सृती.. क्या रातमे तेरा जी नही भरा.. जो सुबह सुबह ही सुरु होगइ..? हें..हें..हें..
सृती : (सर्मसार होते धीरेसे चुदवाते) दीदी.. पता नही मे जबसे यहा आइ हु.. मेरे साथ सुबह यही करते हे.. हें..हें..हें.. दीदी आपभी आइअेना..
देवायत : (मुस्कुराते) हां.. चंदा.. तुम भी आजा.. कीतने दिन होगये हम सुबहमे नही मीले..
चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) ना बाबा ना.. अभी भी नीचे जलन हो रही हे.. कलतो आपने मुजे चोद चोदके बेहोस ही करदीया था.. ओर ये देखो महारानी.. अभी भी घोडे बेचकर सो रही हे.. लगता हे.. दोनो देर रात तक जागे होगे.. कमीनी बहुतही चुदकड हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) अेय.. मेरी मंजुको गालीया मत दे.. मे उसे केह दुगा.. हें..हें..हें..
चंदा : (मुहपे हाथ रखते) ना बाबा ना.. इसे कुछ मत कहेना.. वरना मेरी हालत फीरसे बीगडवा देगी.. ओर आप उनकी हर बात मानते हो.. हे..हें..हें..
कहेते चंदा हसते हुअे आयनेके सामने चली गइ.. तब देवायत ओर सृती धमाकेदार चुदाइ करके साथमे जड गये.. तब दोनोही हसते बाथरुममे अेक साथ घुस गये.. ओर मस्तीया करते नहाने लगे तबतक मंजु भी जाग गइ.. ओर चंदाको अेक मुका मारकर वो बेडपे बैठ गइ..
जब देवायत सृती नहाकर बहार आगये तब मंजुभी बाथरुममे घुस गइ.. फीर देवायत चंदा ओर सृती तीनो कंपलीट होकर बहार आगये.. कुछ देरके बाद मंजु भी नहाकर बहार नीकल गइ.. ओर आयनेके सामने बैठकर तैयार होने लगी.. वो अपने बालोको सवार रही थी.. अभी देवायतके रुममे मंजु अकेली ही थी..
तभी पुनम रुममे आकर दरवाजा धीरेसे बंध करदेती हे.. ओर मंजुके पास चली जाती हे.. क्युकी उसने लखनको वो जडीबुटी देनेकी बात कही थी.. जो इस वक्त मंजुके पास थी.. पुनम आतेही साइड मे रखा टेबल खीचकर मंजुके पास बैठ गइ.. ओर धीरेसे सरमाकर मंजुसे बात करने लगी....
कन्टीन्यु