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पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी.. आप फीकर मत करो.. आपको कुछ नही होगा.. अबतो आप मजे करो.. लखन भैया भी तो हमारे खानदानका खुन हे.. थोडा देरसे ही सही.. इनमे डरने वाली कोइ बात नही.. ओर हां.. अभी इस बारेमे कीसीसे बात करनेकी जरुरत नही.. मे इस बारेमे सृती भाभीसे बात करलुगी.. क्युकी वो इन्हीकी डोक्टर हे.. अगर आपको कोइ तकलीफ लगे तो मुजे फोन करदेना..
लता : (राहतकी सांस लेते मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. इसीलीये तो आपके पास आइ हु.. आप अेक बार सृती भाभीसे बात करलेना..बाबा मुजे तो बहुत डर लग रहा हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. इसमे डरनेकी कोइ बात नही हे.. आप भी तो बडे भैयासे प्यार करती हो.. उनसे अपनी सादीसे पहेले ही मीलन करना चाहती थी.. अगर पहेले इनका लीया होता तो..? अच्छा भाभी.. क्या बडे भैयासे आपकी इस बारेमे कुछ बात हुइ की नही..? आपने उसे प्यारका इजहार तो करदीया हे..
लता : (बहुतही सर्मसार होते) दीदी.. वो.. वो.. नही.. कुछ खास बात नही हुइ.. सीर्फ नीलुके बारेमे थोडी बहुत बाते हुइ.. मुजे बहुत डर लग रहा हे.. दीदी.. आपको ओर मंजुभाभीको सब पता हे.. तो प्लीज.. कीसीसे कहीयेगा नही.. मैने सीर्फ अपने दिलकी बात उनको बताइ हे.. लेकीन कहेते हे मे तुजे अपनी बहेन मानता हु..
पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) वो भी अजीब हे.. सगी बहेनके साथ तो सादी करली हे.. तो फीर तुजे प्यार करनेके क्या प्रोबलेम..? भाभी.. आप फीकर मत करो.. अगर हम कीसीसे प्यार करते हेना..? तो अेक बार हमे अपने दिलकी बात उनसे दिल खोलकर करलेनी चाहीये.. मुजे यकीन हे वो आपका प्यार कबुल करलेगे.. ओर आप फीकर मत करना आपकी बात कीसीको पता नही चलेगी.. बस.. कुछ दिन इन्तजार कीजीये.. फीर तो आप भाइको सबके सामने मील सकोगी..
लता : (सरमाते हसते) दीदी.. आपको तो सबकुछ पता चल जाता हे.. तो क्या आप मुजे मेरे बारेमे सब कुछ बता सकती हे..?
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. बताउगी.. सबकुछ बता दुगी.. लेकीन अभी नही.. जब वक्त आयेगा तब मे आपको सीर्फ आपके बारेमे ही नही.. ओरोके बारेमे भी सबकुछ खुलकर बता दुगी.. क्युकी आने वाले दिन हम दोनोके लीये बहुत ही सुहाने दिन होगे.. बस.. आप कुछ रीस्ते देखकर वीचलीत मत होजाना.. क्युकी मुजे आपका भी साथ चाहीये..
लता : (सरमाते हसते) जी दीदी.. मे सबकुछ समज गइ.. आप फीकर मत करना.. मे आपके साथ हु.. अब तो मेभी अैसे रीस्ते देखने की आदी होगइ हु.. ओर सच कहु.. तो मुजे भी अब अैसे कोइ रीस्तोसे अेतराज भी नही हे.. क्युकी मुजे भी सक हे.. की लखनके मेरे अलावा कइ ओर रीस्ते भी हे..
पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. लेकीन अभी कुछ भी नही.. इस बारेमे हम दोनो फुरसतमे बात करेगे.. मे आपको सबकुछ बता दुगी.. अगर लखन भैयाका ओरोके साथ रीस्ता हे तो क्या आपको सुनकर बुरा लगेगा..?
लता : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. दीदी.. मे खुद बडे भैयाको प्यार करती हु.. तो बुरा क्या लगना.. वैसे भी हमारे खानदानमे कीसी भी मर्दको अेक ओरतसे कहा संतोष होता हे..? हें..हें..हें.. ठीक हे दीदी.. अब आप जब बताना चाहो मुजे कहेना.. मे इस दिनका इन्तजार करुगी.. बस अेक आप ही मेरी सहेली ओर राजदार हो.. तो आपसे सब खुलकर पुछ सकती हु.. हें..हें..हें.. चलो मे चलती हु.. अभी नहाकर आगये होगे..
कहेते लता वापस कीचनमे चली गइ.. तब पुनम उनको जाते हुअे देखती रही.. फीर तैयार होने लगी.. लताकी बाते सुनकर पुनमको भी लखनके पेनीसमे आये बदलावको देखनेकी दलचस्पी होने लगी.. वैसे भी दोनो भाइ बहेन सभी तराहकी चर्चा खुलकर करने लगे थे.. ओर जबसे देवर भाभी वाला रीलेशन होगया तब तो दोनो सभी तराहके रीलेशनकी चर्चा करते बहुत आगे बढ चुके थे.. इस बातसे अभी लता भी अन्जान थी..
तो आज भी लतासे लखनके पेनीसके बारेमे बाते करते पुनमने अेक बार फीर अपनी चुतको गीली करलीया.. तब पुनम बहुतही सरमा गइ.. ओर तैयार होने लगी.. तो दुसरे कमरेमे आज सृती ओर चंदाके बजाइ देवायतको जगाते मंजु हाथ लग गइ.. जो इस वक्त देवायत उनके उपर लैटे इनकी जबरजस्त चुदाइ कर रहा था.. तो मंजु भी सुबह सुबह अपनी कमर उछाल उछालके देवातको चुदवानेमे पुरा साथ दे रही थी.. तब सृती ओर चंदा बहुतही सरमाते दोनोकी चुदाइ देख रही थी.. तभी..
मंजुला : (दोनोकी ओर हसते) देखो कमीनीओ.. पतीका इस तराह खयाल रखा जाता हे.. सुबह सुबह तुम दोनो कैसे हमारे पतीसे भागती हो.. जैसे वो कोइ भुत हो.. हें..हें..हें..
चंदा : (सरमाते हसते) कमीनी तु ही चुदवा इनसे.. अब तु पकी चुदकड होगइ हे.. तुही इनको जेल पाती हे.. इनको जेलना हम अकेलीका काम नही.. क्यु सृती..? हें..हें..हें..
सृती : (सरमाते हसते) हां दीदी.. जब इन दोनोकी सादी नही हुइ थी तब भी दोनो अैसेही चुदाइ करते रहेते थे.. ओर अब तो ये इनकी बीवी हे.. तो कमीनीको पुरी छुट मील गइ हे.. देखो कैसे उछल उछलके चुदवा रही हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. चलो बहार.. वरना इनके साथ हमारी भी वापस कुटाइ हो जायेगी.. हें..हें..हें..
कहेते दोनोही अेक दुसरेका हाथ पकडकर मंजुकी ओर देखते जोरोसे हसती हुइ बहार चली गइ.. ओर दरवाजा बंध कर लीया.. तब कुछ ही देरमे मंजु ओर देवायत साथमे जड गये.. तो दोनो ही हसते हुअे अेक साथ बाथरुममे घुस गये..तो वहाभी मंजुने अेक बार देवायतके साथ खडे खडे चुदवालीया.. ओर दोनो नहाके बहार आगये.. ओर तैयार होने लगे.. मंजु अपनी जींदगीका पुरा मजा बटोर रही थी.. दोनोही रुममे अकेले थे तभी....
कन्टीन्यु
लता : (राहतकी सांस लेते मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. इसीलीये तो आपके पास आइ हु.. आप अेक बार सृती भाभीसे बात करलेना..बाबा मुजे तो बहुत डर लग रहा हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. इसमे डरनेकी कोइ बात नही हे.. आप भी तो बडे भैयासे प्यार करती हो.. उनसे अपनी सादीसे पहेले ही मीलन करना चाहती थी.. अगर पहेले इनका लीया होता तो..? अच्छा भाभी.. क्या बडे भैयासे आपकी इस बारेमे कुछ बात हुइ की नही..? आपने उसे प्यारका इजहार तो करदीया हे..
लता : (बहुतही सर्मसार होते) दीदी.. वो.. वो.. नही.. कुछ खास बात नही हुइ.. सीर्फ नीलुके बारेमे थोडी बहुत बाते हुइ.. मुजे बहुत डर लग रहा हे.. दीदी.. आपको ओर मंजुभाभीको सब पता हे.. तो प्लीज.. कीसीसे कहीयेगा नही.. मैने सीर्फ अपने दिलकी बात उनको बताइ हे.. लेकीन कहेते हे मे तुजे अपनी बहेन मानता हु..
पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) वो भी अजीब हे.. सगी बहेनके साथ तो सादी करली हे.. तो फीर तुजे प्यार करनेके क्या प्रोबलेम..? भाभी.. आप फीकर मत करो.. अगर हम कीसीसे प्यार करते हेना..? तो अेक बार हमे अपने दिलकी बात उनसे दिल खोलकर करलेनी चाहीये.. मुजे यकीन हे वो आपका प्यार कबुल करलेगे.. ओर आप फीकर मत करना आपकी बात कीसीको पता नही चलेगी.. बस.. कुछ दिन इन्तजार कीजीये.. फीर तो आप भाइको सबके सामने मील सकोगी..
लता : (सरमाते हसते) दीदी.. आपको तो सबकुछ पता चल जाता हे.. तो क्या आप मुजे मेरे बारेमे सब कुछ बता सकती हे..?
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. बताउगी.. सबकुछ बता दुगी.. लेकीन अभी नही.. जब वक्त आयेगा तब मे आपको सीर्फ आपके बारेमे ही नही.. ओरोके बारेमे भी सबकुछ खुलकर बता दुगी.. क्युकी आने वाले दिन हम दोनोके लीये बहुत ही सुहाने दिन होगे.. बस.. आप कुछ रीस्ते देखकर वीचलीत मत होजाना.. क्युकी मुजे आपका भी साथ चाहीये..
लता : (सरमाते हसते) जी दीदी.. मे सबकुछ समज गइ.. आप फीकर मत करना.. मे आपके साथ हु.. अब तो मेभी अैसे रीस्ते देखने की आदी होगइ हु.. ओर सच कहु.. तो मुजे भी अब अैसे कोइ रीस्तोसे अेतराज भी नही हे.. क्युकी मुजे भी सक हे.. की लखनके मेरे अलावा कइ ओर रीस्ते भी हे..
पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. लेकीन अभी कुछ भी नही.. इस बारेमे हम दोनो फुरसतमे बात करेगे.. मे आपको सबकुछ बता दुगी.. अगर लखन भैयाका ओरोके साथ रीस्ता हे तो क्या आपको सुनकर बुरा लगेगा..?
लता : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. दीदी.. मे खुद बडे भैयाको प्यार करती हु.. तो बुरा क्या लगना.. वैसे भी हमारे खानदानमे कीसी भी मर्दको अेक ओरतसे कहा संतोष होता हे..? हें..हें..हें.. ठीक हे दीदी.. अब आप जब बताना चाहो मुजे कहेना.. मे इस दिनका इन्तजार करुगी.. बस अेक आप ही मेरी सहेली ओर राजदार हो.. तो आपसे सब खुलकर पुछ सकती हु.. हें..हें..हें.. चलो मे चलती हु.. अभी नहाकर आगये होगे..
कहेते लता वापस कीचनमे चली गइ.. तब पुनम उनको जाते हुअे देखती रही.. फीर तैयार होने लगी.. लताकी बाते सुनकर पुनमको भी लखनके पेनीसमे आये बदलावको देखनेकी दलचस्पी होने लगी.. वैसे भी दोनो भाइ बहेन सभी तराहकी चर्चा खुलकर करने लगे थे.. ओर जबसे देवर भाभी वाला रीलेशन होगया तब तो दोनो सभी तराहके रीलेशनकी चर्चा करते बहुत आगे बढ चुके थे.. इस बातसे अभी लता भी अन्जान थी..
तो आज भी लतासे लखनके पेनीसके बारेमे बाते करते पुनमने अेक बार फीर अपनी चुतको गीली करलीया.. तब पुनम बहुतही सरमा गइ.. ओर तैयार होने लगी.. तो दुसरे कमरेमे आज सृती ओर चंदाके बजाइ देवायतको जगाते मंजु हाथ लग गइ.. जो इस वक्त देवायत उनके उपर लैटे इनकी जबरजस्त चुदाइ कर रहा था.. तो मंजु भी सुबह सुबह अपनी कमर उछाल उछालके देवातको चुदवानेमे पुरा साथ दे रही थी.. तब सृती ओर चंदा बहुतही सरमाते दोनोकी चुदाइ देख रही थी.. तभी..
मंजुला : (दोनोकी ओर हसते) देखो कमीनीओ.. पतीका इस तराह खयाल रखा जाता हे.. सुबह सुबह तुम दोनो कैसे हमारे पतीसे भागती हो.. जैसे वो कोइ भुत हो.. हें..हें..हें..
चंदा : (सरमाते हसते) कमीनी तु ही चुदवा इनसे.. अब तु पकी चुदकड होगइ हे.. तुही इनको जेल पाती हे.. इनको जेलना हम अकेलीका काम नही.. क्यु सृती..? हें..हें..हें..
सृती : (सरमाते हसते) हां दीदी.. जब इन दोनोकी सादी नही हुइ थी तब भी दोनो अैसेही चुदाइ करते रहेते थे.. ओर अब तो ये इनकी बीवी हे.. तो कमीनीको पुरी छुट मील गइ हे.. देखो कैसे उछल उछलके चुदवा रही हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. चलो बहार.. वरना इनके साथ हमारी भी वापस कुटाइ हो जायेगी.. हें..हें..हें..
कहेते दोनोही अेक दुसरेका हाथ पकडकर मंजुकी ओर देखते जोरोसे हसती हुइ बहार चली गइ.. ओर दरवाजा बंध कर लीया.. तब कुछ ही देरमे मंजु ओर देवायत साथमे जड गये.. तो दोनो ही हसते हुअे अेक साथ बाथरुममे घुस गये..तो वहाभी मंजुने अेक बार देवायतके साथ खडे खडे चुदवालीया.. ओर दोनो नहाके बहार आगये.. ओर तैयार होने लगे.. मंजु अपनी जींदगीका पुरा मजा बटोर रही थी.. दोनोही रुममे अकेले थे तभी....
कन्टीन्यु