Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 62 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

लता : (आस्चर्यसे देखते) जानु.. क्या केह रहे हे आप..? ये कमीनी अपनी हरकोते बाज नही आयेगी.. कुतीयाको बहुत आग लगी हुइ हे.. स्कुलके पहेले ही दिन चुदवाकर आगइ.. पता नही हम नीलुको तीन साल तक कैसे सम्हालेगे.. लेकीन दोनो मीले कैसे..? नीलुका फोन तो मेरे पास हे..

लखन : लता.. आज कल कीसीका कोन्टेक्ट करना कोइ मुस्कील काम नही हे.. लगता हे उसने अपनी दोस्तके फोनसे कोन्टेक्ट कीया होगा.. क्युकी धिरेन जब घरपे आया था तब ही उसने नीलुको अपना फोन नंबर देदीया होगा..

लता : (थोडी चीन्तासे) जानु.. भैया ओर भाभीने नीलुकी जीम्वेवारी हमे दी हे.. पता नही हम नीलुको तीन साल कैसे सम्हालेगे..

लखन : (मुस्कुराते) सुन.. अब हमे नीलुको सम्हालनेकी जरुरत नही हे.. अब हमे नीलुको धिरेनसे मीलनेमे नही रोकना.. क्युकी अ‍ैसा खुद पुनो दीदीने कहा हे..

लता : (आस्चर्यसे देखते) क्या अ‍ैसा दीदीने खुद कहा हे..? लेकीन क्यु..?

लखन : हां लता.. सुन.. पुनो दीदी सबकुछ जानती हे.. वो मुजे बता रही थी.. की हम नीलुको रोकनेकी कीतनी भी कोसीस करले.. फीर भी वो धिरेनसे सादी करके ही रहेगी.. तो पुनोदीदी इसीको जरीया बनाके धिरेनसे अलग होना चाहती हे.. ताकी वो जल्दसे जल्द वापस हवेलीपे आजाये.. तु समज गइनां..?

लता : (धीरेसे) अरे हां.. जानु.. इस बारेमे तो मेरी भी पुनो दीदीसे अ‍ेक बार बात हुइ थी.. ठीक हे.. अब आप जैसा पुनो दीदी कहे करते जाइअ‍े.. अब हमे नीलुकी परवाह नही करनी.. जो करे करनेदो उसे..

लखन : (मुस्कुराते) लता.. तुम भी मुजसे कुछ बात करने वाली थी.. बताना क्या बात करनी थी..

लता : (सामने देखकर मुस्कुराते धीरेसे) अरे हां जानुं.. मेने सुना हे.. आज कल आप दोनो भाइ बहेन बोलते नही हो..? दोनोके बीच कुछ अन बन चल रही हे..? ओर ये अन बन कीसलीये हे वो भी मुजे पता हे.. तो जानु.. प्लीज.. आप अ‍ेक बार पुनोदीदीको माफ करदो.. ओर ये बहेन हे आपकी.. उनसे अ‍ेक बार बात करलो.. आपके लीये वो बहुत रोइ हे.. प्लीज.. मेरी खातीर..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. तो सृती भाभीने तुजे सब बता दीया.. लता.. सोरी.. पता नही क्यु.. उस दिन हम मस्तीया कर रहे थे.. तो मे थोडा बहेक गया था.. तो पुनोदीदीने मुजे चांटा मार दीया.. ओर कुछ नही..

लता : (जोरोसे हसते) अच्छा कीया उसने.. हें..हें..हें.. अगर मे होती तो आपको डंडेसे पीटती.. हें..हें..हें.. लेकीन जानु.. पता हे.. आपको चाटा मारते ही उसे अपनी गलतीका अहेसास होगया था.. फीर वो खुब रोइ.. आपसे बात करनेके लीये बहुत तरसी.. लेकीन अ‍ेक आप हो.. उनके सामने देखते भी नही.. जानु.. आपके जानेके बाद वहा मंजुदीदी आइ थी.. उसने पुनोदीदी ओर सृती भाभीको खुब खरी खोटी सुनाइ.. क्युकी पुनो दीदीको भी पता हे.. आगे क्या होने वाला हे.. फीर भी उसने आपसे बात छुपाइ..

लखन : (थोडा सोचमे) लता.. क्या मुजे सचमे सबके साथ रीलेशनमे आना होगा..? क्या ये सब गलत तो नही हेनां..? क्युकी सब मेरी भाभीया हे.. तो मुजे भी अ‍ेक डर लग रहा हे..

लता : (थोडी सही बैठते) लखन.. आप मेरी अ‍ेक बात सुनो.. भुल जाओ हमारे घरकी ओरते आपकी क्या लगती हे.. अब हमारे खानदानमे सीर्फ अ‍ेक ही रीस्ता होगा.. ओर वो हे अ‍ेक मर्द ओर अ‍ेक ओरतका रीस्ता.. क्युकी दीदी केह रही थी हम सब कोइ सामान्य मानवी नही हे.. बस.. आप सीर्फ इतना याद रखना.. ओर हां.. भुल जाओ अब पुनोदीदी आपकी बहेन हे.. ओर मे आपकी बीवी हु.. सीर्फ इतना याद रखो.. वो आपका पहेला प्यार हे..

लखन : (आंख गीली करते) लता.. बस.. यही तो नही भुल पा रहा.. बडी मुस्कीलसे उनको भाभी मानने लगा था.. ओर उसने चाटा मारकर अहेसास करवा दीया.. की वो मेरी बहेन ही हे..

लता : (मुस्कुराते) नही लखन.. कभी कभी जल्दबाजीमे बीना सोचे समजे गलती हो जाती हे.. तो क्या इनको इतनी बढी सजा दोगे..? आप फीकर मत करो.. उसने आपके साथ सभी तराहके रीलेशनको स्वीकार करलीया हे.. तो आप उसे माफ करदो.. ओर बाय चान्स वो सब अब भी स्वीकार नही करती.. तो मे आपसे वादा करती हु.. की मे भाइका खयाल हमेसा हमेसाके लीये छोड दुगी..

लखन : (आस्चर्यसे सामने देखते) लता.. ये तुम क्या बोल रही हो..? जीस तराह पुनोदीदी मेरा पहेला प्यार हे.. उसी तराह बडे भैया भी तेरा पहेला प्यार हे.. मे तो खामखा तुम दोनोके बीच आ गया..

लता : (मुस्कुराते) हां लखन.. जानती हुमे.. मे सच केह रही हु.. मे भाइके सामने कभी देखुगी भी नही.. आइ प्रोमीस.. सीर्फ अ‍ेक बार माफ करदो उसे.. ओर बात करलो.. मुजे पुरा यकीन हे.. आपकी जींदगी बदल जायेगी.. ओर हां.. अब उल्टा पुल्टा सोचना छोडदो.. जैसा पुनोदीदी कहे करते जाओ.. क्युकी आने वाले समयमे अब सीर्फ पुनो दीदी ही इस हवेलीकी महारानी हे.. ओर इस घरके सभी मर्द राजा.. आप समज गयेनां..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) हंम.. हां समज गया.. ठीक हे.. मे टाइम मीलेगा तब फुरसतमे पुनोदीदीसे बात करलुगा..

लता : (खुस होकर होठ चुमते) जानु.. थेन्कयु.. चलो इसी बातपे आपको अ‍ेक ओर खुस खबरी सुनाती हु.. ओर हां.. अभी इस बारेमे कीसीसे बात मत करना.. क्युकी पकातो हमे कल ही पता चलेगा.. जानु.. आज सृती भाभीको उल्टीया हुइ हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) अरे.. तो इसमे इतना खुस होनेकी क्या बात हे..? वो तो हम स्कुटर लेने गये थे तब भी इनको उल्टीया हुइ थी.. सायद उनकी तबीयत थोडी ठीक नही हे..

लता : (मुस्कुराते सरपे टपली मारते) अरे बुध्धु.. तबीयत तो बीलकुल ठीक हे.. आप समजे नही..? इसका मतलब सृती भाभी सायद प्रेगनेन्ट होगइ हे.. अब पका तो कल टेस्टके बाद ही पता चलगा.. हें..हें..हें.. सुनो.. कल आपको भाभीके साथ दीखाने जाना हे..

लखन : (खुस होते हसते) क्या..? भाभी प्रेगनेन्ट हे..? थेन्क्स गोड.. अब तो मे दो दो बच्चेका चाचा हो गया हु.. हें..हें..हें.. लता.. कास हमारा भी कोइ बच्चा पैदा होता.. मेने कीतनी कोसीसकी.. लेकीन ना तुम प्रेगनेन्ट हो पाइ.. ओर ना ही रजीया.. क्या मे कभी बाप नही बन सकता..?
 
लता : (आंख गीली करते गाल सहेलाते) जानु.. दिल छोटा मत करो.. आप जरुर बाप बनेगे.. लेकीन आप मुजे कभी प्रेगनेन्ट नही करपायेगे.. क्यु नही.. इस बारेमे मे ज्यादा कुछ नही केह सकती.. आप इस बारेमे पुनोदीदीको पुछ लेना.. इनको सब पता हे.. हां.. अब रजीयादीदीका पीरीयड चल रहा हे.. तो इसके बाद उनके प्रेगनेन्ट होनेका पुरा चान्स हे.. ओर दीदी केह रही थी.. सायद इसीलीये पुनोदीदीने आपको जडी बुटी पीलाइ हे.. तो आप रजीया दीदीको अ‍ेक बच्चा देदो.. वो बहुत खुस होजायेगी.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे लता.. आइ लव यु.. तुम सबका कीतना खयाल रखती हो.. अब मेरी दोनो बीवीया लाल टेग लगाकर बैठी हे.. तो मे अब कहा जाउगा.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते अ‍ेक चपत लगाते) बडे कमीने हो आप.. क्यु.. नीचे हमारी भाभी तो हे.. कमीनी जबसे आइ हे आपपे लाइन मार रही हे.. लखन.. आज बहुत अच्छा मौका हे.. जीस कामके लीये पुनोदीदीने कहा था.. उसी कामका अच्छा वक्त हे.. आप आज कीसी भी तराह भाभीकी बजादो.. वो कीतनी भी चीलाये हम वहा नही आयेगी.. कमीनी बहुत चुदकड हे.. मुजे यकीन हे आज आप कीला फतेह करलोगे..

लखन : (हसते धीरेसे) कैसी बीवी हो तुम..? अपनी ही भाभीको चोदनेके लीये केह रही हो.. हें..हें..हें.. लता.. तो फीर वो भानुभाइको हम धोखा तो नही दे रहे..? वो भी तो हमारा भाइ हे..

लता : (मुस्कुराते) तो क्या मे आपकी बहेन नही हु..? बडे भैया मेरे भाइ नही हे..? लखन.. मुजे पता हे मे ओर भानुभाइ हमारे बापुकी नीशानी हे.. आप भाइके बारेमे ज्यादा मत सोचना.. क्युकी मंजुदीदी केह रही थी.. भाइने भी अ‍ेक ओरत रखली हे.. जो अभी तीन चार दिनसे भाइके साथ ही रहेती हे.. वो उसीसे अपनी प्यास बुजाते हे.. ओर हम सभी भाइ बहेनको तो अब बडी दीदीने छुट देदी हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) क्या..? वो तुजे भी पता हे..? हें..हें..हें.. बता कौन हे वो ओरत.. हें..हें..हें..

लता : (मुस्कुराते अ‍ेक मुका मारते) ज्यादा हसो मत.. तुम सबके सब कमीने अ‍ेक जैसे ही हो.. क्या वो वहा कोइ छोटुकी बीवी नही हे..? रीटा नाम हे उनका.. कमीना उनका पती ही इन दोनोकी रखवाली करता हे.. ओर आप भी तो उनकी कइ बार ले चुके हो.. कमीने कहीके..

लखन : (जोरोसे हसते) अरे वाह.. तुमतो तेरे भाइकी पुरी कुंडली जानती हो.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर हसते) सीर्फ भाइकी नही.. आपकी भी पुरी कुंडली जानती हु.. हें..हें..हें.. लखन प्लीज.. मजाक नही.. आप मेरी बात ध्यानसे सुनो.. आप इन मां बेटीके साथ जीतने भी मजे करना चाहे बेसक कर सकते हो.. लेकीन अ‍ेक बातका खयाल रखना.. कभी भी नीलु आपसे प्रेगनेन्ट नही होनी चाहीये.. वरना हमारा सारा खेल बीगड जायेगा.. आप समज गयेनां..?

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) मतलब तुजे हमारे प्लानके बारेमे सब पता हे.. लता.. तु फीकर मत कर.. आज तो तेरी भाभी गइ कामसे.. देखना कमीनी दो दिन बीस्तरसे नीचे पैर नही रख पायेगी.. उनकी चुतमे बहुत खुजली हो रही हेनां.. अगर भाभीकी चीखे सुनकर नीलु वहार आगइ तो..? हम क्या करेगे..?

लता : (सामने देखते) क्या करेगे मतलब..? क्या आपको पता नही हे..? की वो मां बेटी दोनो ही आपसमे मीली हुइ हे.. भाभी खुद आपके साथ नीलुका रीलेशन रखवाकर उनको आपसे चुदवाना चाहती हे.. अगर नीलु भी वही आजाये तो उनको भी अपनी माके सामने पटक पटकर चोद लेना.. कमीनीको पता तो चले.. दुसरेके घरमे आग लगानेका क्या नतीजा होता हे..अब आपको उनके पास जाना नही हे क्या..? जाइअ‍े.. वो आपका इन्तजार करती होगी.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) क्या..? तुजे पता था आज हम दोनो मीलने वाले हे..? हें..हें..हें..

लता : (जुठे गुसेसे देखते) कीतने कमीने हो आप..? जीस तराह खाना खाते आप दोनो हरकत कर रहेथेनां.. मुजे क्या वहा सबको पता होगा.. की आप दोनो क्या चाहते थे.. कमीनी आगे पीछे कीतनी हीलती थी.. जैसे वो कीसीसे चुदवा रही हो.. जानु.. आज इनकी सारी गरमी नीकाल दो.. फीर दो दिनमे मेभी ठीक होजाउगी.. तब आप मेरी भी गर्मी नीकाल देना.. जबसे आपका बडा हथीयार देखा हे तबसे मुजे भी बहुत आग लगी हुइ हे..

लखन : (मुस्कुराते) नही लता.. क्या तुम अब भी मेरे साथ रीलेशन रखोगी..? हंम..? अब तेरी गर्मी नीकालनेके लीये भैया हेनां.. हें..हें..हें..

लता : (आस्चर्यसे सामने देखते) लखन.. आपने अ‍ैसा सोचा भी कैसे..? की मे आपके साथ रीलेशन नही रखुगी.. जानु.. मानाकी मे बडे भाइसे प्यार करती हु.. तब मुजे पता नही थाकी आप दोनो भी मेरे भाइ हो.. लखन.. इस बारेमे अ‍ेक बार आप पुनोदीदीसे अच्छी तराह बात करलो..

क्युकी भले ही मे सायद भाइके साथ सादी भी करलु.. लेखीन फीर भी हमारा रीलेशन कभी खतम नही होगा.. आइ प्रोमीस.. मे भाइसे ज्यादा आपको प्यार करुगी.. आप दिलको छोटा मत कीजीये.. मे आपको भी इतना चाहती हु.. जीतना भाइको चाहती हु.. मे दोनो भाइके साथ रीलेशन रखना चाहती हु..

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कहातो लखनने लताको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगा.. तो लता भी सरमाकर लखनका साथ देने लगी.. तो दुसरी ओर लखन भी अ‍ेक बार पुनमको मीलनेकी आसमे जोसमे आगया.. ओर लताके उरोजोको थामते मसलने लगा.. तब लताकी सीसकारीया नीकल गइ.. वो उतेजीत होकर बेकाबु होने लगी.. तभी उसे खयाल आयाकी वो पीरीयडमे हे.. तो लखनसे दुर होगइ..

लता : (भारी सांसोसे) बस.. बस लखन.. अभी नही.. सीर्फ दो दिन ठहेर जाओ.. फीर आपको मुजे जीतना प्यार कना हो उतना करलीजीयेगा.. मे उंह.. तक नही करुगी.. अभी तो ये अपनी आगको सम्हालके रखो.. आज सारी आग उस भाभीकी चुतमे उडेलना हे.. कमीनीको चोद चोदके पेटसे करदो.. डालदो अपना बीज.. आपको भी पता चल जायेगाकी आप भी बाप बन सकते हो.. इस खानदानसे पंगा लेना इतना आसान नही हे.. अब जाओभी.. बहुत रात हो गइ हे..

कहा तो लखन लताके होठोको चुमकर खडा होगया.. ओर धीरेसे कमरेसे बहार नीकल गया.. फीर सृतीके रुमकी ओर अ‍ेक नजर डालता हे.. तो वहा दरवाजेपे सृती खडी नजर आइ.. ओर लखनको देखते ही सर्मसार होगइ.. फीर सरमाकर हसते लखनको थम्स अपकी साइन दीखाने लगी.. तो लखन भी इसकी ओर हसते सरमा गया.. ओर चुप चाप नीचेकी ओर जाने लगा.. जैसे ही लखन नीचे गया.. सृती मुस्कुराते लताके रुममे चली गइ..

तो वहा लता भी अपने आपको सही करते नीचे जानेकी तैयारीया कर रही थी.. जैसे ही सृती आइ वो उनकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. फीर दोनो हाथ पकडकर धीरेसे दबे पांव नीचेकी ओर जाने लगी.. तबतक लखन रमाके रुममे चला गया था.. जबसे रमा लखनके साथ प्यार करके आइ थी तबसे उनको कही चेइन ही नही मीलता था.. आज रमा दुल्हनकी तराह सजधजके लखनका ही इन्तजार कर रही थी....

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कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२०

तो वहा लता भी अपने आपको सही करते नीचे जानेकी तैयारीया कर रही थी.. जैसे ही सृती आइ वो उनकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. फीर दोनो हाथ पकडकर धीरेसे दबे पांव नीचेकी ओर जाने लगी.. तबतक लखन रमाके रुममे चला गया था.. जबसे रमा लखनके साथ प्यार करके आइ थी तबसे उनको कही चेइन ही नही मीलता था.. आज रमा दुल्हनकी तराह सजधजके लखनका ही इन्तजार कर रही थी.... अब आगे

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जैसे ही लखन आया रमा बेडसे उतरके नीचे खडी होगइ.. ओर अपना शींगार दीखाते सरमाने लगी.. जैसे ही लखनने अपनी दोनो बाहे फैलाइ रमा जटसे दोडकर लखनकी बाहोमे समा गइ.. तो लखनने भी रमाको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. रमा लखनके सीनेमे सर छुपाकर खडी रही.. तब लखनने उनकी टुंडी पकडकर चहेरा उपरकी ओर कीया.. ओर अपना चहेरा रमाके चहेरेकी ओर लेजाते उनके होठो पे होंठ रखदीया..

दोनोके होठ मील गये.. ओर अ‍ेक दुसरेके होठोका रसपान करने लगे.. तभी अचानक लखनका चहेरा थामकर रमा उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. तो लखन भी रमाके बुब्सको थामते उनके गलेमे मुह डालते रमाको उतेजीत करने लगा.. रमा अ‍ेक दम पागल जैसी होने लगी.. वो खाना खा रहे थे तबसे ही बहुत उतेजीत थी.. वो जल्दसे जल्द लखनके साथ मीलन करते उनमे समा जाना चाहती थी..

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अ‍ेक तो वो कइ दिनोसे भानुसे चुदी नही थी.. ओर उपरसे लखनके लंडको देखनेकी कबसे उनकी उत्सुकता बढी हुइ थी.. तो वो जल्दसे जल्द लखनके साथ चुदाइ करना चाहती थी.. ओर उपरसे लखनने आज उनको होस्टेलपे लेजाकर पुरी तराह छेड दिया था.. तो लखनके होठोको चुमते ही उसने हाथ नीचे लेजाकर जटसे लखनका लंड पेन्टके उपरसे ही पकडलीया.. तो उसे बहुत बडा लगा..

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रमा लखनके लंडको कपडेके उपरसे ही मसलने लगी.. साथमे दोनो अ‍ेक दुसरेके मुहमे मुह डालकर जीभसे पेच लडाते चुमते रहे.. ओर अ‍ेक दुसरेके रसको पीते रहे.. आज डाइनींग पे रमाको छेडा तबसे वो लखनसे चुदवानेके लीये बेताब हो रही थी.. आज वो सारी सरम त्यागकर कीसी भी हद जानेको तैयार थी.. रमाको जल्दसे जल्द अपनी चुतमे अ‍ेक लंड चाहीये था.. तभी रमा जटसे नीचे बैठ गइ..

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ओर लखनकी ओर वासना भरी कातील नजरोसे देखते लखनकी पेन्ट खोलने लगी.. तो लखन रमाकी ओर देखते मुस्कुराता रहा.. रमा बहुत उतेजीत हो गइ थी.. ओर उसने जटसे लखनके पेन्टको खोलकर थोडासा नीचे कर लीया.. ओर वो लखनके नीकरको खीचने लगी.. जैसे ही नीकर नीचे होगया लखनका फन फनाता लंड कीसी नागकी तराह जटकेसे बहार नीकलते हवामे उपरकी ओर लहेराने लगा.. तो रमा उसे देखते ही चोंक गइ.. ओर थोडा डरकर लखनकी ओर देखने लगी.. तभी..

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लखन : (धीरेसे मुस्कुराते) भाभी.. क्या हुआ..? अब तो देख लीयानां..? हेना सानदार..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे सामने देखते) ओ बापरे.. इतना बडा..? लखनजी.. ये तो बहुत बडा ओर मोटा हे.. इतना बडा मैने कभी नही देखा.. मतलब.. आपके भाइका भी नही..

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. तो फीर आज ध्यानसे देखलो.. यही लंडसे आपकी ननंद मजे लेती हे.. ओर आज आप भी लोगी.. हें..हें..हें.. इसे छुकर भी देख लीजीये.. अब तो यही हथीयार आपके नसीबमे हे.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाकर अपनी मुठीमे थामते) लखनजी प्लीज.. आज हम उपर उपरसे प्यार करे..? हंम..? आपका तो बहुत बडा हे.. मेरी तो फाडके रख देगा.. मुजे अपनी हालत खराब नही करवानी.. कल सुबह कीसीको पता चल गया तो..?

लखन : (कंधेसे पकडकर खडा करते) अरे डरीये मत.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. ओर इनसे कुछ नही होगा.. मे बहुत प्यारसे करुगा.. क्या आपकी ननंदको कुछ हुआ..? इसे तो रजीया भी अपनी चुतमे ले चुकी हे.. क्या इनकी फट गइ..? नहीनां..? तो फीर आप क्यु डर रही हे..? मैने तो सुना हे ओरते ओर लडकीया बडे लंडकी दिवानी होती हे..

रमा : (सरमाते नजरे चुराते) हां ये सही हे.. लेकीन इतना बडा..? लखनजी.. इनके सामने तो आपके भाइकी नुनी लगती हे.. अगर हमने करलीया तो मेरी तो चौडी होजायेगी.. अगर आपके भाइको मुजपे सक हुआ तो..? मेरा तो घर ही बरबाद होजायेगा..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते धीरेसे) भाभी.. आपको भानुभाइ से डरनेकी जरुरत नही हे.. इनको पता भी नही चलेगा.. फीर भी मेरे पास इलाज हे.. वो आपको कुछ नही कहेगे.. अगर आपको कुछ कहे तो मुजे बता दीजीयेगा.. अब चलीये मुजसे रहा नही जाता.. हमे कीतने दिनोके बाद मीलन करनेका मौका मीला हे.. आज तो पुरी रात आपके पास हु..

कहेते लखनने अपनी पेन्ट वही नीकालकर रमाको अपनी गोदमे उठालीया.. तो रमा बहुत ही सरमाइ.. ओर लखनके गलेमे बाहे डालकर सीनेमे सर छुपालीया.. तो लखन उसे बेडकी ओर लेगया.. ओर रमाको धीरेसे बेडपे लीटा दीया.. तो रमा सरमाकर थोडासा खीसक गइ.. ओर लखनके लीये जगा देदी तो लखन भी उनकी बगलमे लेट गया.. तो रमा नइ नवेली दुल्हनकी तराह सरमाने लगी..

तभी लखनने लेटतेही रमाको जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर रमाके होठोको चुमने लगा.. तो रमा भी लखनकी कमरमे हाथ डालकर उनका चुमनेमे साथ देने लगी.. वो बहुत मदहोस हो चुकी थी.. रमा आधी आंख चडाते लखनके होठोका रस पी रही थी.. रमाकी सारी भी नीकलकर उनकी कमरपे अटकी हुइ थी.. उतेजनाकी वजहसे रमाके दोनो बुब्स कठोर हो चुके थे..

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जीनकी वजहसे रमाका ब्लाउस बहुत ही तंग हो गये थे..तभी लखनने अ‍ेक हाथसे रमाके बुब्सको थामलीया ओर धीरेसे मसलते रमाके मुहमे अपनी जीभ घुसाने लगा.. तो रमानेभी थोडासा मुह खोल दीया.. ओर लखनकी जीभसे जीभ मीलाकर पेच लडाने लगी.. लखन रमाको चुमते ब्लाउसके बटनको खोलने लगा.. अब वो भी काफी उतेजीत हो चुका था.. ओर उनका लंड नइ चुतमे घुसनेके लीये जटके मार रहा था..
 
तो बहारकी ओर सृती ओर लता दोनो ही धीरेसे मेइन डोर खोलकर बंगलेसे बहारकी ओर चली गइ.. जहा बहार रमाके रुमकी खीडकीया आंगनमे लगी हुइ थी.. बहार बहुत अंधेरा था.. तो दोनो खीडकीके पास जाकर देखने लगी.. जो लताने पहेलेसे ही थोडी खोलकर रखी थी.. तो दोनो खीडकीसे थोडासा पदडा हटाकर जांकने लगी.. ओर कान लगाकर अंदरकी बाते सुननेकी कोसीस करने लगी.. तो अंदरसे बहुत धीमी आवाज आ रही थी..

तबतक अंदर रमा ओर लखन कामातुर हो चुके थे.. ओर अ‍ेक दुसरेमे समा जानेके लीये बेकरार थे.. लखनने रमाके ब्लाउसको खोल दिया था.. तो रमाकी ब्रा अबभी बाधा बनी हुइ थी.. ओर लखनने ब्राको अ‍ेक ही जटकेमे पटीया तोडके नीकाल दीया.. तो रमाके दोनो भरावदार बुब्स उछलकर बहार आगये.. तो लखन रमाके होठोको छोडकर बुब्सको मुहमे लेकर नीपलको दांतोसे खीचने लगा.. तो रमा दर्दके मारे सीसकारीया करने लगी..

रमा : (थोडा दर्दसे) लखनजी.. प्लीज.. अ‍ैसे खीचये मत.. दर्द होता हे.. धीरेसे चुसीयेनां.. मे कहा भागी जा रही हु..

लखन : (चुसते) भाभी.. क्या मस्त दुधु हे आपके.. मुजसे रहा नही जाता..

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रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) दुधु तो मेरी ननंदका भी मस्त हे.. लगता हे आपने उनपे बहुत महेनत की हे..

लखन : हां.. लेकीन आपके दुधुकी तो बात ही ओर हे.. अब तो मुजसे रा भी नही जाता..

कहेते लखनने रमाके ब्लाउसको नीकाल दीया.. ओर ब्राको भी नीकालकर साइडमे फेक दीया.. अब रमा उपरसे पुरी नंगी थी.. तभी लखन रमाके दोनो बुब्स बारी बारी चुसने लगा.. तो रमा लखनके सरको पकडकर अपने बुब्समे दबाने लगी.. तो लखनने उसे अपने मुह मे लेलीया.. ओर चुसने लगा.. तो रमा भी आधी आंख चडाते मदहोसीमे सीसकारीया करते लखनके बालोको सहेलाने लगी..

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लखन कभी रमाके मुमे चुसने लगता.. तो कभी रमाके होठोको चुमने लगता.. वो रमाके गलेमे मुह डालकर गलेको चुमने लगा.. तो रमा बहुत उतेजीत होते पागल जैसी होगइ.. ओर उनकी चुतसे लगातार पानी बहेने लगा.. आज रमाको लखनने पुरी तराह पागल करदीया था.. ओर ये तो अभी सुरुआत थी.. तभी लखन रमाके उपरसे उतर गया.. ओर रमाकी साडीको खीचकर नीकालने लगा तो रमा बहुत सर्मसार होने लगी..

तब लखनने रमाके पेटीकोटका नाडा भी खीचलीया ओर पेटीकोट नीकालने लगा.. तो रमाने अपनी कमर थोडी उची करते लखनको पेटीकोट नीकालनेमे मदद की.. अब रमा सीर्फ पेन्टीमे रेह गइ.. तभी लखनने उनकी पेन्टीमे उंगलीया फसाकर खीचली.. तो रमा लखनसे नजरे चुराते सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. ओर पेन्टीके नीकलते ही उसने जटसे अपने दोनो हाथ अपनी चुतपे रख दीया.. ओर बहुत ही सरमाकर मुस्कुराने लगी..

लखन : (रमाके हाथ हटाते मुस्कुराते) भाभी.. अब मुजे आपकी जनतके दर्शन करादो.. इसके लीये मे बहुत तडपा हु..

रमा : (र्सासार होते मुस्कुराते नसीली आंखोसे) अपनी मनमानी करके देख तो रहे हो.. लखनजी.. प्लीज.. अब अपनी भाभीको ओर मत तडपाओ.. आजाओ मेरे उपर.. आपकी भाभी बहुत प्यासी हे.. आज मुजेमे समा जाइअ‍े.. ओर मुजे भी आपके अंदर समा लीजीये.. अब मुजसे रहा नही जाता..

लखन : (दोनो पैर पसारते रमाके उपर लेटते) भाभी.. अभी तो हमारी सुरुआत हे.. देखना आज मे आपको जनतकी सेर कराउगा.. आज आप हमेसा हमेसाके लीये मेरी होजायेगी.. यही समजलो आज हम दोनोकी सुहागरात हे..

रमा : (सरमाकर लखनको बाहोमे भीचते) हां लखनजी.. ये भाभी तो मनसे आपकी कबकी होचुकी हे.. ओर आज तनसे भी होजायेगी.. जबसे आपका प्यार कबुल कीया.. तबसे मेने आपके भाइको इस तनको हाथ भी नही लगाने दीया.. अब ये तन सीर्फ अपका हे.. अब आपके अलावा इस तनको कोइ छुअ‍ेगा भी नही.. आपका ये देखकर लगता हे.. आज सचमे मेरी सुहागरात हे.. ये तो मेरी फाडके रखदेगा.. देखना सुबह आप सबकुछ सम्हाल लेना..

लखन : (बुब्सको चुमते) भाभी.. आपको कुछ नही होगा.. मे हुनां.. मे पेइन कीलरकी ओर आइ पीलकी टेबलेट लेकर आया हु.. वैसे भी हमारे धरमे दुसरी ओरतके साथ सेक्स करनेकी छुट हे.. तभी तो मेरी ओर भाइकी इतनी बीवीया हे.. आपको लतासे भी डरनेकी जरुरत नही हे.. वो आपको कुछ नही कहेगी.. फीरभी सुबह सबको केह देना मेरी तबीयत ठीक नही हे..

रमा : (सरमाकर सरको सहेलाते) लखनजी.. इनकी कोइ जरुरत नही हे.. गोलीया तो मे भी लेकर आइ हु.. मुजे पता था आप मुजे छोडने वाले नही हो.. ओर मे भी तो आपसे मीलन करनेके लीये तरस रही थी.. आइअ‍े अब वक्त जाहीर मत कीजीये.. समा लीजीये मुजे आपके अंदर..

कहा तो लखन उनके बुब्सको चुमते हुअ‍े धीरे धीरे नीचेकी ओर सरकने लगा.. जैसेही रमाकी नाभीमे जीभ घुसाइ.. रमाके तनमे बीजलीसा करंट दोड गया.. वो कांपते सीसकारीया करने लगी.. ओर लखनके बालोको पकडलीया.. तभी लखन सरकते ओर नीचे चला गया.. तो रमाने अपने दोनो पैर फैला दीये.. ओर लखन रमाके पैरोके बीच आगया.. फीर चुतपे नजर डालकर सर उठाके अ‍ेक बार रमाकी ओर देखने लगा..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आपकी चुत तो बहुत मस्त हे.. देखो अ‍ेकदम रेडी हे.. पुरी गीली होगइ हे..

रमा : (सर्मसार होते नजरे चुराते) लखनजी.. ये सब आपके जादुका कमाल हे.. आपने मुजे सामको छेडके रखा हे.. खानेपे भी नही छोडा.. वहा भी मुजे बीना कुछ कीये ही जडा दीया.. आप सचमे जादुगर हो.. आपकी भाभी तो आपकी दिवानी होगइ.. देखना अब मुजे छोडीयेगा नही..

लखन : (सामने देखते) नही भाभी.. नही छोडुगा.. क्या भानुभाइ आपके साथ अ‍ैसा नही करते..?

रमा : (सर्मसार होते) नही.. इनको तो इन सब चीजोमे कोइ इन्ट्रेस नही.. बस.. अंदर डाला ओर सीधा ही चोदने लगते हे.. ओर कुछ ही देरमे ढेर होकर सो जाते हे.. ये भी नही देखते बीवीका क्या हुआ.. सादीके बाद वो अ‍ैसेही करते हे.. पहेले वो अ‍ैसे नही थे.. हम बहुत लंबे वक्त तक प्यार करते थे.. पता नही इनको सादीके बाद क्या होगया हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी कोइ बात नही.. अब मे हुनां.. आपको पुरा मजा दुगां.. चलीये आज जनतकी सेर करनेके लीये रेडी होजाइअ‍े.. आज मे आपको पुरी रात प्यार करुगा..

कहेते लखन रमाकी चुतमे मुह लगा देता हे.. ओर चुतको चाटने लगता हे.. थो रमाके बदनमे सुर सुराहट होने लगती हे.. वो हल्कासा कांपने लगी.. लखन इनकी चुत चाटते जीभको चुतमे घुसा देता हे.. ओर चुतके दानेको टटोलने लगता हे.. रमा बहुत कामुक हो गइ.. तो अपनी कमर उछालते पागल जैसी होने लगी.. ओर कुछ ही देरमे उनकी चुतने जवाब देदीया.. ओर लखनके मुहपे फवारा छोड दीया..

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तब वो सांत होते जोरोसे सांस ले रही थी.. तभी लखन बाथरुममे चला गया ओर अपना मुह साफ करके वापस आया तब रमा लखनसे नजरे चुराते मुस्कुरा रही थी.. तभी लखनने उसे बेडसे खडा करदीया.. ओर खुद बेडके कीनारे बैठ गया.. फीर उसने रमाको अपने पेरोके बीच बैठनेको कहा तो रमा सरमाती लखनके पैरोके बीच घुटनोके बीच बैठ गइ.. ओर लखनकी ओर सरमाके देखने लगी..

रमा : (सरमाते धीरेसे) लखनजी.. कहीयेनां क्या करना हे.. मुजे इस बारेमे कुछ मालुम नही हे.. क्युकी मैने कभी नही कीया.. आप बताते जाओ..

लखन : भाभीजी.. बस.. कुछ नही इसे अपने मुहमे लेकर लोलीपोपकी तराह चुसना हे.. इसे ब्लु जोब कहेते हे.. अपकी ननंदको ये बहुत पसंद हे.. उनको मेरा पानी पीना बहुत अच्छा लगता हे..

रमा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) छी.. क्या इसे मुहमे लेना हे..? इसका पानी पीया भी जाता हे..? लेकीन ये गंदा नही हे..?

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. फीकर मत कीजीये.. मे इसे अंदर धोकर ही आया हु.. चलीये सुरु होजाइअ‍े.. आज मे आपको अपना अमृतका रस पीलाता हु..

रमा : (लंडको मुठीमे थामते) क्या..? अपके रसको पीना भी हे..? ये तो बहुत चीपचीपासा होता हे.. मुजे कुछ होगातो नही..? देखना बाबा मैने अ‍ैसा कभी नही कीया.. आप सीखा देना.. मेरा ये सब पहेली बार हे..

लखन : (मुस्कुराते गाल सहेलाते) भाभी.. लडकीया ओर ओरतको मर्दका पानी पीना बहुत अच्छी लगता हे.. आपकी ननंद तो पुरा पीजाती हे.. ओर इस चाटकर साफ भी करदेती हे..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) लखनजी.. मेरी ननंद भी पागल हे.. ओर आप भी पागल हो.. ना जाने आज तो आप मुजसे क्या क्या करवाओगे..

सृती : (लताकी ओर देखते धीरेसे) लता.. मे ये क्या सुन रही हु.. तुम भी मेरे देवरका अमृत पीती हे..?

लता : (सर्मसार होते पीठमे मुका मारते) भाभी.. आपभीनां.. तो क्या आप बडे भैयाका नही पीती..? बाते बादमे करलेना पहेले अंदर देखोतो सही दोनो क्या कर रहे हे..

तब रमाने दोनो हाथोकी मुठीमे लंडको पकड लीया था.. ओर हल्कासा उपर नीचे करते सहेलाने लगी.. फीर लखनकी ओर मुस्कुराते धीरेसे अपनी जीभको नीकालती हे.. ओर लखनके लंडको टच कराती हे.. ओर उनको थोडा अजीब लगा.. ओर वो लखनकी ओर देखते हसने लगी.. तो लखन भी मुस्कुराते रमाके सरको पीछेसे पकड लेता हे.. ओर रमाके मुहको आगे करते इसारोसे अपने लंडको मुहमे लेनेको कहेता हे..

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तो रमा सरमाकर अपना मुह खोलती हे.. ओर धीरेसे इखनके लंडके टोपेको मुहमे लेकर चाटने लगती हे.. ओर उसे थोडा अच्छा लगा.. ओर धीरेसे पुरे लंडको मुहमे नीगलने लगी.. तो लखन आंख बंध करते रमाके सर ओर गालको सहेलाने लगा.. ओर रमा धीरे धीरे करते लंडको मुहमे अंदर बहार करने लगी.. लखनका पुरा लंड मुहमे नही आ रहाथा.. तो लखन रमाके सरको पकडकर अपनी कमर आगे पीछे करने लगा..

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ओर रमाके मुहको चोदने लगा.. लखनका लंड रमाकी हलकसे टकराने लगा.. तो कुछ ही देरमे रमा खांसने लगी.. ओर उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. तो रमाने लंडको मुहसे बहार नीकाल दीया.. तब बहार खीडकीसे सृती ओर लता अंदर जाकते उतेनीत होने लगी.. आज रुममे हल्की रोसनी थी.. फीर भी बहारसे काफी अंधेरा लग रहा था.. तो जैसे ही रमाने मुहसे लंड नीकाला..

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सृतीको अंधेरेमे लखनके लंडकी परछाइआ नजर आइ.. तो वो चोंक गइ.. क्युकी अंधेरेकी वजहसे वो ठीकसे देख नही पाइ.. इसके बावजुद उसे लखनका लंड बहुत बडा लगा.. ओर उनकी चुतमे हलचल तेज होने लगी.. उनका हाथ अनायास ही उनकी चुतपे चला गया.. ओर नाइट ड्रेसके उपरसे ही अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर यही हाल लताकी भी थी.. ओर वो लताके कानमे धीरेसे कहेने लगी..

सृती : (धीरेसे कानमे) लता.. मेरे देवरका तो बहुत बडा लग रहा हे.. आज तो रमा भाभी गइ कामसे..

लता : (सरारतसे हसते धीरेसे) भाभी.. इसे अच्छी तराह देखलो.. अब तो हमारे नसीबमे यही लंड लीखा हे.. देखना अ‍ेक दिन आप भी भाभीकी तराह इनका स्वाद चखोगी.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) कमीनी क्या बोल रही हे..? कुछ तो सरम कर.. वो देवर हे मेरा.. पहेले इन मां बेटीको तो नीपटने दे.. हम हमारी बादमे सोचेगे..

लता : (उतेजनामे पीछेसे सृतीको बाहोमे भरते धीरेसे कानमे) भाभी.. अब सोचने समजनेका वक्त बीत गया.. अब तो हमे सीर्फ मजे ही करने हे.. ओर अपनी लाइफ खुलकर जीनी हे.. क्या बडे भैयाका भी इतना बडा हे..?

सृती : (सरमाते धीरेसे कानमे) हां.. तु जब उनको मीलेगीनां तब देखलेनां.. बहुत जल्द तेरा भी सपना पुरा होजायेगा..

इधर दोनो धीमी आवाजमे अ‍ेक दुसरेके कानमे बाते कर रही थी.. तब अंदरकी ओर रमा भाभीने फीरसे लखनके लंडको अपने मुहमे लेलीया था.. ओर जोरोसे मुह हीलाते लंडको अंदर बहार कर रही थी.. तब लखन रमा भाभीके दोनो गाल सहेलाते धीरे धीरे अपनी कमर हीला रहा था.. अ‍ैसा काफी देर चला.. तब जाके लखन अकडने लगा.. ओर वो जोरोसे कमर हीलाते रमा भाभीके मुहमे पीचकारीया छोडने लगा..

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तो पीचकारीया सीधा ही रमा भाभीके गलेमे उतर गइ.. तब रमा भाभी ना चाहते हुअ‍े भी लखनका पानी पी गइ.. ओर उसने फौरन लखनके लंडको मुहसे नीकाल दीया.. तब रमा भाभीका पुरा मुह लखनके पानीसे भर गया.. तो वो खांसते हुअ‍े जटसे खडी होगइ.. ओर बाथरुममे भाग गइ.. वहा जटसे लखनके पानीको मुहसे नीकारते उल्टीया करने लगी..

फीर कुछ देरके बाद अपने अपना मुह साफ करके अपने आपको सही करके वापस बहार आगइ.. ओर बहार आते ही थोडे जुठे गुस्सेसे लखनकी पीठमे मुके मारने लगी.. जीसे देखकर लखन हसने लगा.. तो बहारकी ओर लता ओर सृती भी अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते हसने लगी.. तभी रमाने लखनके लंडकी ओर देखा.. तो वो खब भी अ‍ैसे ही तनके खडा था.. जीसे देखकर रमाको भी आस्चर्य हुआ..
 
रमा : (लखनके पास आकर बैठते लंडको थामते) लखनजी.. आपका पानी तो नीकल गया.. ये तो अब भी अ‍ैसे ही सख्त होके खडा हे.. आपने कुछ गोली बोली खाइ हे क्या..?

लखन : (रमाके बुब्स मसलते होठोको चुमते) नही भाभी.. मैने कोइ गोली नही खाइ.. ओर मुजे गोलीओकी जरुरत भी नही हे.. ये सब मुजे दि गइ जडी बुटीका कमाल हे.. अब मे कीतनी बार चोदकर पानी नीकालु.. मे थकता ही नही.. ओर ये भी अब अ‍ैसे ही खडा रहेगा.. भाभी.. ये तो मेरा शेर हे.. देखना आपकी गुभामे जाकर कैसे धहाड मारता हे.. अब आइअ‍े आपको असली मजा देता हु..

रमा : (सर्मकार होते बेठपे आकर लेटते) क्या आप थकते भी नही..? ओ बापरे.. लगता हे आज तो पुरी रात मेरी खैर नही.. लखनजी.. प्लीज.. धीरे धीरे करना.. मुजे बहुत डर लग रहा हे..

लखन : (पासमे लेटते) अरे भाभी मे प्यारसे डालुगा.. आपको कुछ नही होगा.. यही समजलो आज हम दोनोकी सुहागरात हे.. हम दोनो पुरी रात जागेगे.. बस.. आपको पहेली बार करवाते दर्द हुआ था.. अ‍ैसा मामुली दर्द होगा ओर कुछ नही..

रमा : (सरमाते धीरेसे) पहेली बार कहा दर्द हुआ था.. मेरा पती तो साला नामर्द था.. आपके भाइने ही मेरी सील तोडी हे.. तब थोडासा दर्द हुआ था.. जब हम दोनो पहेली बार मीले थे..

लखन : (मुस्कुराते) हां तो बस अ‍ैसा ही दर्द होगा.. आप गभराइअ‍े नही..

कहेते लखन रमा भाभीके उपर चडकर लेट गया.. ओर उनके बुब्सको थामते उनके होठोको चुमने लगा.. तो रमा भाभी लखनकी गरदनमे अ‍ेक हाथ डालकर उनको अपनी बाहोमे भरते लखनको अपने तनसे चीपका लेती हे.. ओर इखनके होठोको चुमते लखनका साथ देने लगती हे.. तब लखनका लंड रमाभाभीकी चुतमे ठोकरे मारते जटके देने लगा.. जो रमाभाभी अपनी चुतमे साफ महेसुस कर सकती थी..

वो फीरसे उतेजीत होते बहुत जोसमे आगइ.. ओर लखनको जोरोसे अपने तनसे चीपकाने लगी.. जैसे लखनके अंदर समा जाना चाहती हो.. रमा भाभीकी चुत लगातार पानी बहा रही थी.. तो उसने धीरेसे अ‍ेक हाथ नीचे लेजाकर लखनके लंडको अपनी मुठीमे पकडलीया.. ओर धीरेसे मसलते अपनी चुतपे घीसते लंडको गीला करने लगी.. जीसे लखन बहुत ही तावमे आ गया.. ओर जोरोसे बुब्सको चुमते काटने लगा..

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रमा : (उतेजनाके नशेमे) उइ..मां.. लखनजी.. प्लीज.. काटीये मत.. प्यारसे चुसीयेनां.. बहुत मजा आ रहा हे.. अब धीरेसे डालना सुरु कीजीये.. मुजसे रहा नही जाता..

लखन : (बुब्स चुसते) अरे भाभी.. अ‍ैसे कैसे अभी थोडा मजा तो लेने दीजीये.. हम आरामसे करते हेनां..

रमा : (र्सासार होते सरको सहेलाते) लखनजी.. प्लीज डालीयेनां.. हमारे पास पुरी रात पडी हे.. फीर आपको जीतना प्यार करना हो करते रहीयेगा.. अभी मुजसे बरदास्त नही हो रहा.. प्लीज.. डालीयेनां.. क्यु अपनी भाभीको तडपा रहे हो..

इधर दोनो अ‍ेक दुसरेमे समाजानेकी जल्दीमे थे.. तो बहारकी ओर सृती ओर लता भी दोनोकी बाते सुनकर बहुत गरम होगइ थी.. तब लताने सृतीको पीछेसे अपनी बाहोमे पकडे रखाथा.. ओर अपना सर सृतीके कंधेपे रखते दोनो अंदरका नजारा देखते.. कामुक बातोको सुन रही थी.. तब लताने धीरेसे सृतीके दोनो बुब्सको अपने हाथोमे थाम लीया ओर धीरेसे मसलते दबाने लगी.. तो सृती भी तावमे आगइ..

सृती : (धीरेसे कामुक आवाजमे) कमीनी क्या कर रही हे..? छोड मुजे.. वरना हम दोनोको अभी अंदर भागना पडेगा.. अभी तो इस कमीनीकी चीखे सुननी हे..

लता : (पीछेसे गालको चुमते कानमे) भाभी.. मे हुनां.. फीकर मत करो.. कहोतो कल लखनको आपके पास भेजदु..? हंम.. फीर देखो.. वो कैसे आपकी भी चीखे नीकलवाते हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) लता प्लीज.. अभी मजाक नही.. अंदर देखने देनां.. देख दोनोने पोजीसन लेली हे.. अब कुछ ही देरमे रमाभाभीका काम तमाम.. देख वो कैसे चीलाती हे..

रमाने लखनके लंडको अपनी चुतपे धीसते जैसेही लंड गीला हो गया.. उसने धीरेसे अपनी चुतके लव होलमे थोडासा फसालीया.. ओर लखनके लंडको अपनी चुतका रास्ता दीखा दीया.. तो लखनने रमाके दोनो हाथ पंजोसे पकडकर पोजीसन लेली.. ओर रमाके होठोको चुमते उसने लीपलोक करलीया.. ताकी रमाकी चीख उनके कुहमे ही दब जाये.. रमा अब होने वाले हमलेसे पुरी तराह सतर्क थी..

वो लखनकी आंखोमे आंखे बडी करते देखती रही.. लखनको रमाकी आंखोमे वासना साफ दीखाइ दे रही थी.. उसने लीपलोक करते रमाकी ओर देखा.. तो रमाने हां मे गरदन हीलाइ.. ओर लखनने अपनी कमरको पुस करते अ‍ेक जटका मारा.. लखनका आधा लंड रमाकी चुतको चीरता हुआ अंदर खुस गया.. ओर रमाकी आंख बडी होगइ.. वो लखनसे अपने दोनो हाथ ओर मुह छुडानेके लीये छटपटाने लगी..

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जैसे तैसे करते उसने लखनसे मुह छुडालीया.. ओर जोरोसे चीखते अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. रमाकी चुतसे हल्कासा खुन भी नीकल गया.. वो इतना जोरसे चीलाइ.. की बाजुके रुममे उनकी बेटी नीलम सोइ हुइ थी.. जो रमाकी चीख उनको भी सुनाइ दी.. तो वोभी अपने बेडपे बैठ गइ.. ओर आजु बाजु देखने लगी.. की क्या हुआ..? वो अभी कुछ सोच रही थी.. तभी उसे फीरसे रमाकी चीख सुनाइ दी..

क्युकी लखनने देर ना करते अ‍ेक जटका ओर मारा था.. तो लखनका पुरा लंड रमाकी चुतको फाडके अंदर घुस गया.. तो रमा फीरसे चीखकर बेहोस होगइ.. तब लखनने देर ना करते हाथके बल उचा होगया.. ओर रमाको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. लखनको अपने लंडपे बहुत ही गरमाहट महेसुस हो रही थी.. लेकीन उसने उनपे ध्यान नही दिया ओर रमाकी ताबडतोब चुदाइ करने लगा..

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रमा बेहोसीमे भी मुह बीगाडते अ‍ैसे ही आंसु बहाते लेटी रही.. लखनके हर धके के साथ उनके दोनो बुब्स तालमेलमे उछल रहे थे.. रमाकी चीखे सुनकर लता ओर सृती बहुत खुस हुइ.. फीर दोनो लखन रमाकी चुदाइ देखते लगी.. ओर अ‍ैसा कामुक द्नष्य देखते सृती ओर लता भी उतेजीत होकर बहुत ही गरम होगइ.. सृती फौरन लताकी ओर घुम गइ.. ओर लताकी कमरमे हाथ डालते उसने लतासे अपने होठोको सटालीये..

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दोनो ही अ‍ेक दुसरेके होठोका रसपान करने लगी.. तब अंदरकी ओर रमाकी दुसरी चीख सुनकर नीलम भी गभराते बहार नीकल गइ.. ओर अपने मम्मीके कमरेके पास जाकर दरवाजेको हल्केसे धका मारने लगी.. लेकीन रमाके रुमका दरवाजा अंदरसे लोक था.. तो उसे अपनी मम्मीपे कुछ आसंकाये होने लगी.. क्युकी वो कइ बार रमा ओर लखनके बीच चल रही आंख मीचोली देख चुकी थी..
 
जब दरवाजा नही खुला तो नीलम जुकते की होलसे देखने लगी.. तब उनको सीधाही रमाका बेड दीखाइ दीया.. जहा लखन हाथके बल जोरोसे कमर हीलाते रमाकी चुदाइ कर रहा था.. जीसे देखते अ‍ेक पलतो नीलम भी चोंक गइ.. ओर उनका मुह खुला ही रेह गया.. फीर वो की होलसे फीरसे देखने लगी.. तब रमा अ‍ैसेही लेटी हुइ थी.. ओर लखन रमाकी जबरदस्त चुदाइ कर रहा था..

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जीसे देखते ही नीलम भी गरम होते उतेजीत होने लगी.. ओर उनका हाथ अनायास ही अपनी चुतपे चला गया.. ओर नाइट ड्रेसके उपरसे ही अपनी चुतको सहेलाने लगी.. तो बहारकी ओर लता ओर सृती भी अ‍ेक दुसरेके बुब्सको मसलते अ‍ेक दुसरेके होठोको चुम रही थी.. कुछ ही देरकी चुदाइके बाद लखनका लंड बडे आरामसे रमाकी चुतमे अंदर बहार होने लगा.. तभी अचानक रमाको होंस आने लगा..

वो अपना मुह बीगाडते आंसु बहाने लगी.. तो लखनने फौरन अपनी चुदाइ रोकली.. ओर रमाके उपर लेटते उनके होठोको ओर उनके बुब्सको बारी बारी चुमने लगा.. तब रमाने धीरेसे अपनी आंखे खोली.. ओर वो लखनसे नजरे चुराते दुसरी ओर मुह करते आंसु बहाती रही.. तब लखन रमाके दोनो बुब्स बारी बारी चुम रहा था.. ओर उसने चुमना छोडके रमाकी ओर देखा तो रमा रो रही थी.. तो..

लखन : (मुस्कुराते गाल चुमते) भाभी.. बस.. हो गया.. आप मेरा पुरा लंड अपनी चुतमे ले चुकी हो..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे रोते) उइइइ.. मां... लखनजी.. प्लीज नीकाल दीजीये मुजे नही चुदवाना.. आपने क्या घुसा दीया..? हाइ दइया... नीचे बहुत जलन हो रही हे.. प्लीज.. नीकाल दीजीये..

लखन : (थोडा गुस्सेसे धीरेसे) अरे..? पागल होगइ हो क्या..? हम दोनो कीतने दिनोसे मीलनेके लीये तो तडप रहे थे.. अब आपको कोइ दर्द नही होगा.. जो होना था होगया.. अभी वहा ध्यान मत दीजीये.. अभी दर्द कम होजायेगा आप चुप होजाइअ‍े.. कीतनी जोरसे चीलाइ..

रमा : (थोडी कमर हीलाते छटपटाते) लखनजी.. नीचे बहुत जलन हो रही हे.. इतना दर्द तो मे पहेली बार चुदी तब भी नही हुआ था.. देखीयेना कही मेरी फट तो नही गइ..?

लखन : (होठोको चुमते प्यारसे) अरे भाभी.. क्यु इतना गभरा रही हो..? आजतक कीसीकी चुदवाते फटी हे क्या..? बस.. कुछ मामुली खुन नीकला होगा.. भाभी.. मत भुलो आज हमारी सुहागरात हे.. यही समजलो मेने आज फीरसे आपका कौमार्य भंग कीया हे.. आप उसपे ध्यान मत दो.. बस.. मुजे कीस करती रहो..

कहातो रमा लखनको कीस करनेमे साथ देने लगी.. नीलम दोनोकी बाते नही सुन पा रही थी.. लेकीन लता ओर सृती दोनो लखन रमाकी बाते साफ सुन रही थी.. आज लतासे ज्यादा सृती बहुत खुस हो रही थी.. क्युकी अ‍ेक तो वो भी लखनकी ओर काफी ढल चुकी थी.. ओर उपरसे आज उसने लखनको रमाको चोदते हुअ‍े लाइव देख भी लीया.. ओर ये बाते कल सुबह वो पुनमको सुनाने वाली थी..

तो दुसरी ओर कुछ देरके बाद रमाका दर्द कम होने लगा.. वो लखनका लंड अपनी चुतमे साफ महेसुस कर रही थी.. ओर धीरे धीरे फीरसे उतेजीत होने लगी.. वो लखनकी ओर सरमाते वासना भरी नजरोसे देखने लगी.. ओर उनके गलेमे बाहोका हार पहेनाते लखनको अपने तनसे चीपका लीया.. ओर धीरे धीरे अपनी कमर हीलाने लगी.. तो लखन रमाके बुब्सको चुमते रुक गया.. ओर रमाके सामने देखने लगा तब..

रमा : (सरमसे पानीपानी होते धीरेसे) लखनजी.. अब दर्द कम होगया हे.. आप धीरे धीरे सुरु कीजीये..

कहा तो लखन रमाके होठो ओर उनके बुब्सको चुमते हुअ‍े धीरे धीरे कमर हीलाते रमाको चोदने लगा तो रमा भी सीसकारीया करते फीरसे उतेजीत होने लगी.. अब लखनका लंड बडेही आरामसे रमाकी चुतमे अंदर बहार हो रहा था.. तो आज रमाको अ‍ेक अलग ही अहेसास होने लगा.. वो लखनकी पीठ सहेलाते लखनके होठोको चुम रही थी.. फीर दोनो ही अ‍ेक दुसरेके मुह खोलते आपसमे जीभके पेच लडाने लगे..

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धीरे धीरे करते लखनने अपनी चोदनेकी स्पीड बढाइ.. रमा बहुत ही उतेजीत होते कामुक सीसकारीया करते लखनको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी.. तो लखन थोडा हाथके बल उचा हो गया ओर रमाको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. तो रमाने छटपटाते बेडकी चदरको पकडलीया ओर आधी नसीली आंखोसे चुदाइका आनंद लेने लगी.. अब वो लखनके लंडकी दिवानी हो चुकी थी..

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रमा : (नसेही हालतमे) ल..ख..न.. प्ली..ज.. जोरोसे चोदो.. मे आने वाली हु..

कहेते रमाने लखनको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर लखनसे लोपलोक करते अपनी कमरको जटके देने लगी.. ओर जडने लगी.. तब लखनको भी अपने लंडपे गरमाहट महेसुस हुइ.. ओर वो जोरोसे रमाको चोदने लगा.. तो रमा जड चुकी थी.. तो हल्कासा चीखने लगी.. ओर लखनको रोकनेकी कोसीस करने लगी.. लेकीन आज लखन पुरी तराह रमाकी चुतको फाडनेकी फीराकमे था.. क्युकी वो रमाको चोदनेके लीये नही.. पुनमके कहेनेपे रमाकी चुत फाडनेके लीये ही आया था..

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तो कुछ ही देरमे रमा फीरसे उतेजीत होने लगी.. इस बार लखनने उसे बहुत ही बरेहमीसे चोदलीया.. ओर रमाको दुसरी बार जडा दीया.. आज रजीयाके बाद रमा दुसरी ओरत थी जीसे लखनने दो दो बार जडा दीया फीर भी वो जडा नही था.. जब रमा फीरसे उतेजीत हो गइ.. तब लखन अकडने लगा.. उसे अहेसास होने लगा की हजारो चीटीया रेंदते उनके लंडकी ओर जा रही हे.. लखन कांपने लगा..

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तब वो रमासे चीपकते उनको जोरोसे लीपलोक करलेता हे.. तो रमाभी लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती हे.. ओर लखन अपनी कमरको जटके मारते अपने गाढे पानीकी लंबी लंबी पीचकारीया छोडते रमाकी चुतको भरने लगता हे.. जीसे रमा अपने गर्भासयपे लखनका गरम विर्य साफ महेसुस कर रही थी.. जीसे वो भी उतेजीत होते कांपने लगी.. ओर लखनके साथ जडने लगी..

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अब वासनाका तुफान तांडव मचाकर सांत हो चुका था.. लखन रमाके सीनेपे ढेर होकर पडा था.. ओर रमा अपनी सांस दुरस्त करते उनकी पीठ सहेला रही थी.. दोनो पुरी तराह पसीनेसे भीग चुके थे.. तब बहारकी ओर नीलम अपनी चुतमे उगली डालकर अपने आपको सांत कर चुकी थी.. तो बहार आंगनमे सृती ओर लता होठोको चुमते अ‍ेक दुसरेकेबुब्स ओर चुतको सहेलाते सांत हो चुकी थी.. फीर दोनो अंदरका नजारा देखने लगी.. तब....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२१

अब वासनाका तुफान तांडव मचाकर सांत हो चुका था.. लखन रमाके सीनेपे ढेर होकर पडा था.. ओर रमा अपनी सांस दुरस्त करते उनकी पीठ सहेला रही थी.. दोनो पुरी तराह पसीनेसे भीग चुके थे.. तब बहारकी ओर नीलम अपनी चुतमे उगली डालकर अपने आपको सांत कर चुकी थी.. तो बहार आंगनमे सृती ओर लता होठोको चुमते अ‍ेक दुसरेकेबुब्स ओर चुतको सहेलाते सांत हो चुकी थी.. फीर दोनो अंदरका नजारा देखने लगी.. तब.... अब आगे

लखन : (सामने देखकर मुस्कुराते) भाभी.. कैसा लगा हमारा पहेला मीलन..? मजा आया की नही..?

रमा : (सरमाकर नजरे चुराते मुस्कुराते) ओ बापरे.. लखनजी.. आप बहुत गंदे हो.. कोइ इतना जोसमे करता हे क्या..? देखो आपने तो अ‍ेक ही बारमे मेरी हालत बीगाडदी.. आज पहेली बार पता चला की सुहागरातक क्या होती हे.. इतना तो आपके भाइने भी कभी प्यार नही कीया.. मेने आपको अपनाकर कोइ गलती नही की.. आज आपने अपनी इस भाभीका दिल जीत लीया..

लखन : (होंठ चुमते) भाभी.. अब तो आपको अ‍ैसा ही प्यार मीलेगा.. आज तो हम सुबह तक प्यार करेगे.. जी तो चाहता हे मे सुबह तक आपके उपर पडा रहु.. ओर आपको प्यार करता रहु..

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रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) लखनजी.. ये तो अभी भी अंदर सख्त लग रहा हे.. कुछ गोली बोली खाइ हे क्या..? नीकालीयेनां.. मुजे बाथरुममे जाना हे.. आपने कीतना पानी अंदर छोडा हे.. जो अभी भी नीचे बहुत चीप चीपासा लग रहा हे..

लखन : (बुब्स चुमते) अरे भाभी.. अ‍ैसे कैसे बहार नीकालु.. अभी तो अ‍ेक ही बार आपको चोदा हे.. आपको अ‍ेक बार ओर चोदना हे.. अब मेने भी ठान लीया हे.. की जबतक कीसीको दो बार चोद नही लेता तबतक उपरसे उतरना नही हे.. हें..हें..हें.. ओर आजतो मुजे पुरी रात आपको अ‍ैसे ही प्यार करना हे.. अभी आगे.. फीर पीछे भी तो करना हे..

रमा : (थोडा डरते) अरे नही नही.. वहा नही प्लीज.. मैने पीछे कभी नही कीया.. आपके भाइने भी अ‍ेक दो बार कोसीस की.. बहुत दर्द करने लगा था.. अ‍ैसा लगता था कही फटनां जाये..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अ‍ैसे तो आज भी आप डर रही थी.. क्या कुछ हुआ आपको..? नहीनां..? तो फीर पीछे भी सीर्फ अ‍ेक ही बार दर्द होगा.. फीर तो हम दोनोके मजे ही मजे हे..

रमा : (सरमाते धीरेसे रीक्वेस्ट करते) लखनजी.. मान जाओनां प्ली..ज.. आपको आगे जीतनी मर्जी हो कर लीजीयेगा.. भले ही मेरी हालत बीगड जाये.. पर पीछे..? नही प्ली..ज.. प्ली...ज...

लखन : (थोडा नाटक करते) ठीक हे भाभी.. तो फीर मे जा रहा हु.. आप आराम कीजीये.. मेने देखलीया आपका प्यार..

रमा : (बाहोमे भीचते) नही लखनजी.. अ‍ैसे रुठीये मत.. मुजे मजधारमे अकेला छोडकर मत जाइअ‍े.. मेतो आपको पुरी समर्पीत होचुकी हु.. आपको जो भी करना हो करलीजीये.. मे उह.. तक नही करुगी.. प्लीज.. अ‍ैसे मुजसे नाराज मत हो.. आजसे ये भाभी.. पुरी तराह आपकी होगइ हे.. इसके लीये मुजे आपके भाइको भी क्यु ना छोडना पडे.. अब मुजे ओर नीलुको सीर्फ आपहीका सहारा हे..

तभी बहारकी ओर..

सृती : (धीरेसे कानमे) देखा लता.. कमीने बीलकुल अपने बडे भाइकी तराह हो गये हे.. उनको भी दो बार करना होता हे.. ओर येभी कमीनी कैसे लाइनमे आगइ.. आजतो मेरा देवर पका इनकी गांड भाडेगा.. कमीनी सुबह चलने लायक नही होगी.. कास मेने अपना मोबाइल लीया होता.. तो इनकी पुरी विडीयो फील्म बनाकर पुनो दीदीको भेजती.. वो भी देखकर खुस होजाती..

लता : (बुब्स मसलते) भाभी.. इनका छोडो.. मेरे लखनको देखो.. अब तो येभी मेरा सेर मर्द हो गया हे.. कमीनीको तीन तीन बार आउट करके भी अभी बेटींगके लीये मैदानमे खडा हे.. रजुदीदीकी भी अ‍ैसी हालत करदी थी.. उस दिन मे बच गइ.. वरना मेरी भी अ‍ैसी हालत होती..

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सृती : (सरमाते बुब्स दबाते) कमीनी.. ज्यादा उछल मत.. मेरा देवु भी अ‍ैसा हे.. वो भी अ‍ेक ही ओरतको बीना नीचे उतरे पुरी रात चोद सकता हे.. तेरी भी बारी आयेगी.. तुम तैयार रहेना.. मंजु केह रही थी.. तेरा पीरीयड खतम होते ही तुजे वहा जाना हे.. अब बहुत जल्द देवु तेरे उपर चडेगा.. ओर तुजे गर्भवती करेगा..

लता : (मनमे खुस होते) भाभी.. तब तो आपके मुहमे घी सकर.. मेतो कबसे वहा जानेके लीये तरस रही हु.. बस.. अ‍ेक बार मंजुदीदी लखनसे बात करले.. फीर आप ओर रजुदीदी लखनको यहा सम्हाल लेना.. मे वादा करती हु.. बडेभाइको पुरी रात मेरे उपरसे उतरने नही दुगी.. उनसे खुब जमकर चुदवाउगी..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) कमीनी क्या बोल रही हे..? तुभस मंजुदीकी तराह बहुत चुदकड होगइ हे.. ओर मे कोइ तेरे लखनको सम्हालने वाली नही हु.. देखा नही.. कैसे सबकी हालत बीगाडने लगे हे.. कास पुनो दीदी यहा होती.. तो मे कुछ सोचती.. लता.. चल देखते हे दोनो क्या कर रहे हे..

लता : (बुब्ससे खेलते) भाभी.. देखो.. आपके दुध कीतने मस्त हे.. इसे देखकर मेरी भी नीयत बीगड जाती हे.. अगर मेरा लखन इनको अ‍ेक बार देख लेगा तो वो आपको छोडेगा नही.. वही पटक पटककर आपको चोदलेगा.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) लता.. छोड इसे.. दर्द होता हे.. देख अभी मजाक नही.. लखनको हम बादमे देख लेगे.. अभी अंदर देख.. दोनो फीरसे सुरु होगये हे..

कहेते दोनो अंदर देखने लगी.. तब लखन ओर रमा दोनो अ‍ेक दुसरेके मुहमे मुह डालकर अ‍ेक दुसरेके रसको पी रहे थे.. ओर लखन धीरे धीरे कमर हीलाते रमाको चोदने लगा था.. फीर कुछ ही देरमे दोनोके बीच अ‍ेक बार फीर घमासान चुदाइ होने लगी.. तो रमा भाभी धीरेसे चीलाते लखनको धीरेसे चोदनेके लीये मनते कर रही थी.. पर लखन कहा मानने वाला था.. उसे तो बस.. अपनी पुनम दीदीकी बात माननी थी..
 
वाकइ लखन रमाकी चीदे नीकलवा रहा था.. जीसे देखकर बहार लता ओर सृतीभी गरम होगइ थी.. ओर दोनोकी चुदाइ देखकर आपसमे अ‍ेक दुसरेको रगडके पुरा मजा ले रही थी.. इस बार भी लखनने रमाको दो दो बार जडादीया था.. ओर अभी आखरी चरणमे दोनो ही बहुत उतेजीत होते जडनेकी कगारपे आ गयेथे.. तब रमाकी हालत बहुत बीगड चुकी थी.. उनकी आंखोसे आंसु नीकल रहे थे..

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आखीर लखनने अपना पुरा लंड रमाकी चुतमे घुसा दीया.. तो रमाकी अ‍ेक बार फीर जोरोकी चीख नीकल गइ.. उनकी आंखसे आसु बहेने लगे.. तभी लखनने लीपलोक करलीया.. ओर अपनी कमरको जटके माते जडने लगा.. तो रमा भी अपने दोनो पैर बेडपे पटकते कांपने लगी.. ओर लखनको बाहोमे भीचते लखनके साथ जडने लगी.. फीर दोनो सांत हो गये.. तब रमा लखनकी पीठ सहेला ही थी..

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फीर कुछ देरके बाद रमाके कहेनेपे लखन उनके उपरसे उतर गया.. तो रमाने जटसे अपना नीकर उठाकर अपनी चुतपे रखदीया.. तो पुरा नीकर दोनोके कामरससे गीला होगया.. ओर साथमे खुन भी लगा हुआ था.. जीसे देखकर रमा थोडी डर गइ.. ओर वो बडी मुस्कीलसे बेडपे बैठ गइ.. ओर अपनी चुतकी ओर देखने लगी.. तो नीचे बेडपे बहुत बडा खुनका धबा दीखाइ दीया.. जीसे देखकर वो गभराते लखनकी ओर देखने लगी..

रमा : (लखनकी ओर देखते) हाये.. देखो.. ये क्या करदीया आपने..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. क्या देख रही हे..? क्या कीया मैने..? मेने कहा थानां की आज हम दोनोकी सुहागरात हे.. तो देखीये.. ये हमारे प्यारकी नीसानी हे.. ओर कुछ नही.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमसे पानी पानी होते लखनको बाजुमे अ‍ेक मुका मारते) क्या प्यारकी नीसानी हे..? मेरी तो पुरी चुत फाडके रखदी आपने.. ये प्यारकी नीसानी नही.. ये आपके गध्धे जैसे मुसलसे मेरी फट चुकी हे.. देखो.. अभी भी जलन हो रही हे.. अब आपके भाइको क्या कहुगी मे..? की ये कैसे चौडी होगइ..

कहेते रमा बेडसे उतरनेकी कोसीस करने लगी.. वो जैसे ही खडी हुइ उनके दोनो पैर कांपने लगे.. ओर रमा डगमगाने लगी.. वो गीरने ही वाली थी तभी लखनने उसे अपनी बाहोमे थाम लीया.. ओर मुस्कुराते रमाको अपनी गोदमे उठा लीया.. फीर वो रमाको लेकर बाथरुममे चला गया.. तब रमा जुठा गुस्सा करते लखनके सीनेमे मुका मारती रही.. ओर दोनो बाथरुममे चले गये.. ओर लखनने रमाको कमोडपे बीठा दीया..

फीर गरम पानीसे रमाकी चुतकी सीकाइ करने लगा तो रमा लखनको अपनी इतनी केर करते देखकर थोडी भावनाओमे बहेने लगी.. ओर अपनी आंख गीली करते लखनको देखती रही.. वो इतने दिनोसे लखनका इस्तमाल करते जो साजीस कर रही थी.. उनपे रमाको थोडा पछतावा होने लगा.. क्युकी रमा सचमे लखनको प्यार करने लगी थी.. ओर उनकी इतनी केरतो कभी भानुने भी नही की.. वो मनमे सोचने लगी..

रमा : (मनमे) हे भगवान.. मे क्या कर रही थी..? लखन कीतने अच्छे हे.. मेरी जरुरत तो मे उनकी रखेल बनके भी पुरी कर सकती हु.. कास मेरी नीलुकी सादी इनसे हो जाये.. तो हम मां बेटी दोनो की जींदगी सवर जायेगी.. इतना प्यार तो मुजे भानुसे भी नही मीला..

आज मे कीतनी बार संतुस्ट हुइ हु.. मेरी पुरी चुत इनके पानीसे लबालब भरी हुइ हे.. अभी दस दिन पहेले ही मेरा पीरीयड खतम हुआ हे.. अगर मे प्रेगनेन्ट होगइ तो..? तब तो अच्छा हे.. माजी भी कबसे अ‍ेक बच्चेके लीये केह रही थी.. तो उनकी भी तम्मना पुरी होजायेगी..

लखन : (मुस्कुराते सामने देखते) भाभी.. कया सोच रही हे..? मुजसे कोइ गलती होगइ क्या..?

रमा : (जटसे गाल सहेलाते) अरे नही नही.. लखन आप गलत सोच रहे हे.. कास मेरी सादी आपसे हुइ होती.. आप कीतना प्यार करते हे मुजे.. मेरी इतनी कैर तो आपके भाइने भी कभी नही की..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. मे तो कहेता हु जबतक नीलु यहा पढती हे आप भी यही रुक जाइअ‍े.. मे आपको अ‍ैसा ही प्यार हमेसा देता रहुगा..

रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) लखनजी.. ये क्या बोल रहे हे..? कास अ‍ैसा हो पाता.. अगर मे यहा रुक गइ तो आपके भाइको हम दोनोपे सक होजायेगा.. ओर मे आपको खोना नही चाहती.. मुजे आपका यही प्यार हमेसाके लीये चाहीये.. आजसे ये भाभीका तन आपका होगया हे.. आप जब भी चाहो इस तनको भोग सकते हो.. मे कभी मना नही करुगी.. बस.. मुजे आपका प्यार मीलते रहेना चाहीये..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. यही होगा जो आप चाहती हे..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) लखनजी.. अ‍ेक प्रोबलेम हे.. मेरा अभी अ‍ेक हप्ते पहेले ही पीरीयड खतम हुआ हे.. अगर मे पेटसे होगइ तो..? आप मेरे अंदर कीतना जडे हो.. पुरी चुत आपके पानीसे लबालब भरी हुइ हे.. लगता हे आज तो आप पका मुजे प्रेगनेन्ट करदोगे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. तो इसमे गभरानेकी क्या बात हे.. मुजे कोन्डम लगाना अच्छा नही लगता.. आजकल तो मार्केटमे गर्भ नीरोधककी कीतनी गोलीया मीलती हे.. आप खा लेना..

रमा : (मनमे) लखनजी.. मुजे गोली खानेकी कोइ जरुरत नही हे.. अगर आपसे प्रेगनेन्ट होगइ तो मे जरुर आपका बच्चा पैदा करुगी.. मुजे चीन्ता मेरी नही.. मेरी नीलुकी हे.. अगर आपने उसे चोदलीया तो पता नही उनकी क्या हालत करोगे आप.. मेरी चीखे नीकलवादी.. तो नीलुकी क्या होलत हीगी..? वैसे भी वो आपकी होने वाली बीवी हे.. तो मे उसे आपसे चुदवानेके लीये मना भी तो नही कर सकती.. जो भी हो.. आगे देखा जायेगा..

लखन : (सामने देखते) भाभी.. फीरसे कहा खो गइ.. कोइ दिकत हे क्या..?

रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) अरे नही रे.. लखनजी.. मे क्या केह रही थी.. मेने गोली खाली.. अगर फीर भी मे प्रेगनेन्ट होगइ तो..? तो फीर आपके भाइको क्या कहुगी..?

लखन : (मुस्कुराते) क्या भाभी आपभी.. तो फीर आप घर जाते ही अ‍ेक दो बार भानुभाइसे चुदवा लेना.. ताकी इनको सक नाहो.. वो कुछ कहे तो केह देना ये आपका बच्चा हे.. इनमे इतना गभरानेकी क्या बात हे..? भानुभाइ आपके पती हे.. तो अ‍ैसा मत सोचीये.. की अब मे उनको ये तनसे छुने नही दुगी.. ये तनपे पहेला हक उनका हे.. समजी..?

रमा : (सरमाकर हसते) जी.. आपकी बात समज गइ.. मे अ‍ैसा ही करुगी..
 
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