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तभी लखनने पलटकार रमाको अपनी बाहोमे भर लीया.. तब रमा बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर उसने भी हिंमत करते लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखनके सीनेमे सरको छुपा लीया.. तभी लखनने उनके चहेरेको पकडकर थोडा उंचा कीया ओर अपने चहेरेको रमाके होठोकी तरफ लेजाने लगा.. तब रमाने सरमाकर अपनी आंख बंध करली.. ओर लखनके होठोका इन्तजार करने लगी..
ओर लखनने धीरेसे रमाके होठो पे अपना होंठ रखदीया.. तो रमा सरसे पांव तक कांप गइ.. आज वो पहेली बार लखनके इतनी करीब थी.. ओर लखन उसे प्यार कर रहा था.. रमाने अपने कांपते होठोसे लखनके होठोको भीच लीया.. तो लखन अपनी जीभ नीकालकर रमाके मुहमे ठुसनेकी कोसीस करते उनके बुब्सको मसलने लगा.. तो रमा छटपटाते बहुत ही उतेजीत होने लगी.. ओर उनकी चुत पानी बहाने लगी..
रमा : (कांपती आवाजमे धीरेसे) लखनजी.. प्लीज.. धीरेसे दबाइअेना.. दर्द होता हे..
कहातो लखन रमाके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. उनका लंड खडा होकर पेन्टके अंदर ही जटके मारने लगा.. वो भी अपने नये बीलमे घुसनेके लीये मचल रहा था.. तभी रमाको नीचे अपनी चुतपे लखनका लंड महेसुस हुआ तो वो सरसे पांव तक कांपने लगी.. तभी लखनने रमाके चहेरेको चुमते बुब्ससे हाथ हटालीया ओर हाथको नीचे लेजाते रमाकी चुतको दबोच लीया.. तो रमा उछल पडी..
वो लखनकी इस हरकतसे बहुत ही उतेजीत होगइ.. ओर उनकी कामवासना बहुत ही भडक गइ.. अेक पल तो लगाकी वो अभी के अभी लखनसे चुदवाले.. लेकीन रमाकी बजबुरी थी.. क्युकी दोनोको समयपे घर पहोंचना था.. रमा बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर वो लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते.. उनके कंधेपे सर रख देती हे.. रमाकी उतेजनाकी वजहसे सांसे तेज चलने लगी..
रमा : (लडखडाती आवाज मे) ल..ख..न..जी.. प्लीज.. अभी कुछ नही.. हम रातमे आरामसे करेगेनां..
लखन : (भारी सांसोसे) भाभी.. मत रोकीये मुजे.. आज मे आपके अंदर समा जाना चाहता हु..
रमा : (सरमाते लखनका हाथ पकडते) लखनजी.. प्लीज.. घरपे सब लोग हमारा इन्तजार करते होगे.. मे ये सब जल्द बाजीमे करना नही चाहती.. आप उपर उपरसे प्यार कर लीजीयेनां.. हमारे पास पुरी रात पडी हे..
लखन : (होठोको चुमते) भाभी.. बस.. थोडासा प्यार करने दीजीये.. हम अभी चले जायेगे..
कहेते लखनने रमाको अपनी गोदमे उठालीया ओर बेडकी ओर जाने लगा.. तो रमा बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर उसने लखनके सीनेमे मुह छुपा लीया.. तभी लखनने रमाको बेडपे लीटा दीया.. ओर उनकी सारी खीचकर नीकालने लगा.. तो रमा सरमसे पानी पानी होने लगी.. ओर लखनको रोकनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. रमा अब सीर्फ ब्लाउस ओर पेटीकोटमे रेह गइ..
रमा : (बहुत ही सरमाते अपना चहेरा छुपाते) लखनजी.. प्लीज.. यहा नही.. हम घरपे प्यार करेगेनां.. वहा आपको जीतनी मरजी हो प्यार करलीजीयेगा.. लेकीन यहा नही.. आप कंट्रोल नही करपायेगे..
लखन : (टीसर्ट नीकालते) भाभी.. करलुगा.. हम तो उपर उपरसे ही प्यार करेगे.. गभराइअे नही..
ओर लखन अपना टीसर्ट नीकालके पेन्टको नीकालने लगा.. तब रमा लेटे ही टेडी नजरसे लखनकी चडीकी ओर देखने लगी.. जब पेन्ट उतर गया तो लखनकी चडीमे बहुत बडा तंबु हो गया.. जीसे देखकर रमा थोडी डर गइ.. उनको लखनके लंडको देखनेकी हिंमत नही हुइ.. ओर लखनने भी अपना नीकर नही नीकाला.. तभी लखन रमाके उपर चड गया.. ओर उनके बुब्सको थामते होठोको चुमने लगा..
तो रमाने लखनको अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर लखनका साथ देने लगी.. तभी लखनने रमाके पेटीकोटको उनके घुटने तक उचा करदीया.. ओर उनकी पेन्टीके उपरसे ही चुतपे हाथ रखते उनको सहेलाने लगा.. तो रमा मदहोस होते अपनी कमरको आडी टेडी करते सीसकारीया करने लगी.. तभी लखनने उनकी पेन्टीमे उंगली फसाकर खीचली.. तो रमाने जटसे अपनी चुतपे हाथ रख दीया..
ओर वो कामुक नजरोसे गरदनको नांमे हीलाते लखनको मना करनेकी मनत करने लगी.. तो लखन धीरेसे रमाकी चुतकी ओर सरकते उनके दोनो पैरोके बीच आगया.. तो रमा समज गइकी लखन क्या करना चाहता हे.. तो उसने अपने दोनो पैर फैलादीये.. ओर होने वाले हमलेका इन्तजार करने लगी.. तभी लखनने उनकी चुतपे मुह लगा दीया.. ओर रमाकी चुतको चुमते उसे भीगोने लगा..
तो रमाकी चुत फडफडाते पनीयाने लगी.. तो लखन चुतको चाटते अपनी जीभ रमाकी चुतमे घुसाने लगा.. तो रमा कांपते अपनी कमर उछालते जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. वो हाथ नीचे लेजाकर लखनके बालोको पकडकर खीचने लगती हे.. क्युकी रमाको अैसा प्यार कभी नही मीला था.. तो वो बहुत ही उजेजीत होते लखनको रोकनेकी कोसीस करने लगी..
रमा : (मदहोसीमे धीरेसे) लखनजी.. ये आप क्या कर रहे हे.. वो बहुत गंदी जगाह हे.. हटीयेना मुजे कुछ हो रहा हे..
लखन : (मुस्कुराते सामने देखते) भाभी.. यही तो असली मजा हे.. क्या भानुभाइ अैसा नही करते..?
रमा : (सरमाकर नां मे गरदन हीलाते) नही.. वो तो सीधा उपर ही चड जाते हे.. उसे ये सब पसंद नही..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. तब तो आज मे आपको जनत की सेर करवाउंगा.. रातमे तैयार रहेना..
रमा : (सरमाते) लखनजी.. हटीयेनां.. मुजे कुछ हो रहा हे.. चलोना हम चलते हे.. वरना कोइ हमपे सक करेगा..
लखन : (चुतमे उंगली खुसाते) बस भाभी.. हो गया.. यहा कोइ नही आता.. हम अभी चलते हे.. थोडा मजा तो लेनेदो.. क्या मस्त चुत हे आपकी.. रातमे यही चुतमे धमाके करने हे.. तैयार रहेना..
रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) पता हे मुजे.. मेतो रेडी ही हु.. आप नही आते..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आज तो पका आउगा.. हम दोनो सुबह तक प्यार करेगे..
कहेते लखन रमाकी चुतमे उगलीको अंदर बहार करने लगता हे.. तो रमा जोरोसे सीसकारीया करते सातवे आसमानमे पहोंच जाती हे.. वो मदहोसीमे वासनामे अंधी होकर आंधी आंख चडाते उंगलीसे चुदाइका मजा लेने लगी.. तो लखन भी उगली करते रमाके उपर आकर उनके होठोको चुमने लगा.. ओर दुसरे हाथसे उनके ब्लाउसको उचा करदीया.. ओर ब्राको उचा करते उनके बुब्सको चुमने लगा..
रमाके उपर नीचे दोनो ओरसे हमले होने लगे.. तो रमा पागल जैसी होगइ.. आखीर आज अेक जवान लडकेने उसे छेड ही दीया.. रमाकी जींदगीमे लखन दुसरा मर्द था.. जो उसे इस तराह प्यार कर रहा था.. रमा कइ दिनोसे भानुसे दुर थी.. तो उनके उपर भी चुदाइका बुखार चडा हुआ था.. तो वो लखनके हमलेको ज्यादा देर बरदास्त नही करपाइ.. ओर वो अकडने लगी.. ओर अपनी कमरको जटके देते चुतसे फवारा छोडते जडने लगी..
फीर कुछही देरमे जडकर सांत हो गइ.. तो लखनका पुरा हाथ भीगो दीया.. फीर लखनने उंगली नीकालली.. ओर वही हाथ पोछते रमाके होठोपे कीस करने लगा.. तो रमाके चहेरेपे भी संतुस्टीके भाव थे.. ओर वो लखनको कीस करते मुस्कुराने लगी.. फीर उसने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगी.. फीर दोनो खडे होगये ओर अपने अपने कपडे पहेनने लगे.. तभी....
कन्टीन्यु
ओर लखनने धीरेसे रमाके होठो पे अपना होंठ रखदीया.. तो रमा सरसे पांव तक कांप गइ.. आज वो पहेली बार लखनके इतनी करीब थी.. ओर लखन उसे प्यार कर रहा था.. रमाने अपने कांपते होठोसे लखनके होठोको भीच लीया.. तो लखन अपनी जीभ नीकालकर रमाके मुहमे ठुसनेकी कोसीस करते उनके बुब्सको मसलने लगा.. तो रमा छटपटाते बहुत ही उतेजीत होने लगी.. ओर उनकी चुत पानी बहाने लगी..
रमा : (कांपती आवाजमे धीरेसे) लखनजी.. प्लीज.. धीरेसे दबाइअेना.. दर्द होता हे..
कहातो लखन रमाके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. उनका लंड खडा होकर पेन्टके अंदर ही जटके मारने लगा.. वो भी अपने नये बीलमे घुसनेके लीये मचल रहा था.. तभी रमाको नीचे अपनी चुतपे लखनका लंड महेसुस हुआ तो वो सरसे पांव तक कांपने लगी.. तभी लखनने रमाके चहेरेको चुमते बुब्ससे हाथ हटालीया ओर हाथको नीचे लेजाते रमाकी चुतको दबोच लीया.. तो रमा उछल पडी..
वो लखनकी इस हरकतसे बहुत ही उतेजीत होगइ.. ओर उनकी कामवासना बहुत ही भडक गइ.. अेक पल तो लगाकी वो अभी के अभी लखनसे चुदवाले.. लेकीन रमाकी बजबुरी थी.. क्युकी दोनोको समयपे घर पहोंचना था.. रमा बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर वो लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते.. उनके कंधेपे सर रख देती हे.. रमाकी उतेजनाकी वजहसे सांसे तेज चलने लगी..
रमा : (लडखडाती आवाज मे) ल..ख..न..जी.. प्लीज.. अभी कुछ नही.. हम रातमे आरामसे करेगेनां..
लखन : (भारी सांसोसे) भाभी.. मत रोकीये मुजे.. आज मे आपके अंदर समा जाना चाहता हु..
रमा : (सरमाते लखनका हाथ पकडते) लखनजी.. प्लीज.. घरपे सब लोग हमारा इन्तजार करते होगे.. मे ये सब जल्द बाजीमे करना नही चाहती.. आप उपर उपरसे प्यार कर लीजीयेनां.. हमारे पास पुरी रात पडी हे..
लखन : (होठोको चुमते) भाभी.. बस.. थोडासा प्यार करने दीजीये.. हम अभी चले जायेगे..
कहेते लखनने रमाको अपनी गोदमे उठालीया ओर बेडकी ओर जाने लगा.. तो रमा बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर उसने लखनके सीनेमे मुह छुपा लीया.. तभी लखनने रमाको बेडपे लीटा दीया.. ओर उनकी सारी खीचकर नीकालने लगा.. तो रमा सरमसे पानी पानी होने लगी.. ओर लखनको रोकनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. रमा अब सीर्फ ब्लाउस ओर पेटीकोटमे रेह गइ..
रमा : (बहुत ही सरमाते अपना चहेरा छुपाते) लखनजी.. प्लीज.. यहा नही.. हम घरपे प्यार करेगेनां.. वहा आपको जीतनी मरजी हो प्यार करलीजीयेगा.. लेकीन यहा नही.. आप कंट्रोल नही करपायेगे..
लखन : (टीसर्ट नीकालते) भाभी.. करलुगा.. हम तो उपर उपरसे ही प्यार करेगे.. गभराइअे नही..
ओर लखन अपना टीसर्ट नीकालके पेन्टको नीकालने लगा.. तब रमा लेटे ही टेडी नजरसे लखनकी चडीकी ओर देखने लगी.. जब पेन्ट उतर गया तो लखनकी चडीमे बहुत बडा तंबु हो गया.. जीसे देखकर रमा थोडी डर गइ.. उनको लखनके लंडको देखनेकी हिंमत नही हुइ.. ओर लखनने भी अपना नीकर नही नीकाला.. तभी लखन रमाके उपर चड गया.. ओर उनके बुब्सको थामते होठोको चुमने लगा..
तो रमाने लखनको अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर लखनका साथ देने लगी.. तभी लखनने रमाके पेटीकोटको उनके घुटने तक उचा करदीया.. ओर उनकी पेन्टीके उपरसे ही चुतपे हाथ रखते उनको सहेलाने लगा.. तो रमा मदहोस होते अपनी कमरको आडी टेडी करते सीसकारीया करने लगी.. तभी लखनने उनकी पेन्टीमे उंगली फसाकर खीचली.. तो रमाने जटसे अपनी चुतपे हाथ रख दीया..
ओर वो कामुक नजरोसे गरदनको नांमे हीलाते लखनको मना करनेकी मनत करने लगी.. तो लखन धीरेसे रमाकी चुतकी ओर सरकते उनके दोनो पैरोके बीच आगया.. तो रमा समज गइकी लखन क्या करना चाहता हे.. तो उसने अपने दोनो पैर फैलादीये.. ओर होने वाले हमलेका इन्तजार करने लगी.. तभी लखनने उनकी चुतपे मुह लगा दीया.. ओर रमाकी चुतको चुमते उसे भीगोने लगा..
तो रमाकी चुत फडफडाते पनीयाने लगी.. तो लखन चुतको चाटते अपनी जीभ रमाकी चुतमे घुसाने लगा.. तो रमा कांपते अपनी कमर उछालते जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. वो हाथ नीचे लेजाकर लखनके बालोको पकडकर खीचने लगती हे.. क्युकी रमाको अैसा प्यार कभी नही मीला था.. तो वो बहुत ही उजेजीत होते लखनको रोकनेकी कोसीस करने लगी..
रमा : (मदहोसीमे धीरेसे) लखनजी.. ये आप क्या कर रहे हे.. वो बहुत गंदी जगाह हे.. हटीयेना मुजे कुछ हो रहा हे..
लखन : (मुस्कुराते सामने देखते) भाभी.. यही तो असली मजा हे.. क्या भानुभाइ अैसा नही करते..?
रमा : (सरमाकर नां मे गरदन हीलाते) नही.. वो तो सीधा उपर ही चड जाते हे.. उसे ये सब पसंद नही..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. तब तो आज मे आपको जनत की सेर करवाउंगा.. रातमे तैयार रहेना..
रमा : (सरमाते) लखनजी.. हटीयेनां.. मुजे कुछ हो रहा हे.. चलोना हम चलते हे.. वरना कोइ हमपे सक करेगा..
लखन : (चुतमे उंगली खुसाते) बस भाभी.. हो गया.. यहा कोइ नही आता.. हम अभी चलते हे.. थोडा मजा तो लेनेदो.. क्या मस्त चुत हे आपकी.. रातमे यही चुतमे धमाके करने हे.. तैयार रहेना..
रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) पता हे मुजे.. मेतो रेडी ही हु.. आप नही आते..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आज तो पका आउगा.. हम दोनो सुबह तक प्यार करेगे..
कहेते लखन रमाकी चुतमे उगलीको अंदर बहार करने लगता हे.. तो रमा जोरोसे सीसकारीया करते सातवे आसमानमे पहोंच जाती हे.. वो मदहोसीमे वासनामे अंधी होकर आंधी आंख चडाते उंगलीसे चुदाइका मजा लेने लगी.. तो लखन भी उगली करते रमाके उपर आकर उनके होठोको चुमने लगा.. ओर दुसरे हाथसे उनके ब्लाउसको उचा करदीया.. ओर ब्राको उचा करते उनके बुब्सको चुमने लगा..
रमाके उपर नीचे दोनो ओरसे हमले होने लगे.. तो रमा पागल जैसी होगइ.. आखीर आज अेक जवान लडकेने उसे छेड ही दीया.. रमाकी जींदगीमे लखन दुसरा मर्द था.. जो उसे इस तराह प्यार कर रहा था.. रमा कइ दिनोसे भानुसे दुर थी.. तो उनके उपर भी चुदाइका बुखार चडा हुआ था.. तो वो लखनके हमलेको ज्यादा देर बरदास्त नही करपाइ.. ओर वो अकडने लगी.. ओर अपनी कमरको जटके देते चुतसे फवारा छोडते जडने लगी..
फीर कुछही देरमे जडकर सांत हो गइ.. तो लखनका पुरा हाथ भीगो दीया.. फीर लखनने उंगली नीकालली.. ओर वही हाथ पोछते रमाके होठोपे कीस करने लगा.. तो रमाके चहेरेपे भी संतुस्टीके भाव थे.. ओर वो लखनको कीस करते मुस्कुराने लगी.. फीर उसने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगी.. फीर दोनो खडे होगये ओर अपने अपने कपडे पहेनने लगे.. तभी....
कन्टीन्यु