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राधीका : (सर्मसार होते धीरेसे) लखन.. क्या कर रहे हे..? अभी सब लोग इधर ही हे..
लता : (जाते हसते) दीदी.. इसमे सरमानेकी बात क्या हे..? हमारे पती कल जा रहे हे तो आपसे अकेलेमे बात करना चाहते हे.. तो कर लीजीये.. हें..हें..हें..
राधीका : (सरमाते धीरेसे) जी दीदी..
कहा तो रमा पीछे मुडकर लखनकी ओर देखते अपने रुममे चली गइ.. तो रजीया नीलम लता ओर सृती उपरकी ओर जाने लगी.. तब अेक बार पीछे मुडकर सृतीने लखनकी ओर देखलीया.. तो लखन राधीकासे चीपकरते बैठ रहा था.. जीसे देखकर सृतीको अच्छा नही लगा.. ओर उसे राधीकासे थोडी जलन होने लगी.. ओर वो भारी मनसे अपने रुममे चली गइ.. तो नीलम लताभी अपने रुममे जा चुकी थी..
लखन : (होठ चुमते) राधु.. चलना तुम भी.. वहा सबको मील लेना.. यहा रजु हे.. वो मम्मीका खयाल रख लेगी..
राधीका : (सरमाते धीरेसे) अरे बाबा नही आ सकती.. कल आपभी तो जा रहे हो.. तो मुजे होस्टेलपे जाना पडेगा.. समजो यार.. मे भाभीमां को वो यहा आयेगी तब मील लुगी.. प्ली..ज..
लखन : (मुस्कुराते बुब्सको मसलते होंट चुमते) ठीक हे.. तो चल.. मुजे मेरी बीवीसे थोडा प्यार तो करने दे.. हम कीतने दिन होगये नही मीले.. वो तो छोडो हमारी सादीके बाद अभी तक हमने सुहागरात भी नही मनाइ..
राधीका : (सरमाते मुस्कुराते गाल सहेलाते) अलेले.. मेरा बेबी.. अपनी बीवीको प्यार करना हे..? लेकीन थोडा सबर करलो.. जब मम्मी ठीक होजायेगी ओर हम घर चले जायेगे तब आपको जीतना प्यार करना हो करलेना.. लेकीन हमारे घरमे.. हम अपनी सुहागरा वही मनायेगे.. बस.. आप वहासे वापस आजाओ..
लखन : (बाहोमे भरते कीस करते) अरे.. तबतक तो मुजे उपर उपरसे तो प्यार करनेदो.. फीर पता नही हम तीन चार दिनके बाद ही मीलेगे.. अेक मीनीट.. तुम यही बैठो मे अभी आया..
कहेते लखन होलका दरवाजा बंध करते सभी लाइट बुजा देता हे.. ओर राधीकाके पास आकर बैठ जाता हे.. तब राधीका हसते हुअे बहुत सरमा रही थी.. तब लखन उनके होठोको चुमते ओर बुब्सके साथ खेलते प्यार करने लगता हे.. तो राधीका गरम होने लगती हे.. ओर लखनका साथ देते उनको प्यार करने लगती हे.. तब कुछ ही देरमे राधीका सीर्फ ब्रा मे ही रेह गइ.. जो लखनने उनको भी खीचके नीकालदी..
दोनो काफी उतेजीत हो चुके थे.. सबकुछ भुल गये.. की वो कहा हे.. राधीका सोफेपे लेटी हुइ थी.. ओर लखन उनकी चुतको चाटते उनके दानेको छेड रहा था.. तब राधीकाकी हालत पतली होगइ.. ओर वो सीसकारीया करते लखनके बालोको सहेलाती रही.. वो इतनी उतेजीत हो गइ.. की उसने लखनको सीक्स नाइन पोजीसनमे आनेको कहा.. ओर लखन उल्टा होकर राधीकाकी चुतको खरोदने लगा..
तो राधीकाने भी लखनके लंडको अपने मुहमे लेलीया.. ओर लोलीपोपकी तराह चुसने लगी.. तब लखनका जोस कल गुना बढ गया.. ओर वो धीरे धीरे अपनी कमर हीलाते राधीकाके मुहको ही चोदने लगा.. दोनो काफी देर ओरल सेक्स करते रहे.. लखन राधीकाके मुहको चोदे ही जा रहा था जीसे राधीकाकी हालत पतली होने लगी.. फीर भी वो लखनके प्यारको बरदास्त करती रही..
तबतक लता ओर रजीया अपने रुममे चली गइ थी.. तो नीलम ओर सृती अब भी अपने बीस्तरमे करवटे ले रही थी.. आज सृतीकी आंखसे नींद गायब हो चुकी थी.. क्युकी अेक तो वो जबसे गांवसे आइ थी तबसे इस सुखसे वंचीत थी.. दुसरा.. उन्होने बडी मुस्कीलसे लखनकी नाराजगीको दुर कीया था.. उनको लखनके साथ इन्टीमेन्ट होनेका मौका भी मीला.. लेकीन वो भी उसने गवां दीया..
तबसे सृती लखनके लीये पागल होचुकी थी.. तब आज उसने लखन ओर रमाको इसारोसे बात करते देख भी लीया.. तो सृतीकी कामाग्नी ओर भडक गइ.. वो अपने रुममे गइ तो भी उसने रुमका दरवाजा खुला छोडदीया.. इस उमीदमे.. की लखन उनके रुममे आजाये.. लेकीन सृतीको नीरासा ही हाथ लगी.. वो धीरेसे बेडसे खडी होगइ.. ओर धीरेसे दबे पांव बहार नीलने लगी..
फीर दरवाजेसे बहार देखने लगी.. की कही कोइ जाग तो नही रहा.. तब उसे बहार कोइ नजर नही आया तो वो दरवाजा धीरेसे बंध करते दबे पांव नीचेकी ओर जाने लगी.. ओर जैसे ही सीडीया उतरके नीचे आइ.. तो होलमे पुरा अंधेरा छाया हुआ था.. ओर सृतीको हल्कीसी सीसकारीयोकी आवाज सुनाइ दी.. तो वो सीढीके लास्ट वाले स्टेप पे रुक गइ.. ओर अपना सर थोडासा आगे करते होलमे देखने लगी..
तो हल्कीसी रोसनीमे उनको धुंधलीसी दो परछाइ दीखाइ दी.. जो अेक दुसरेसे प्यार कर रहे थे.. तो सृती समज गइ की लखन अपनी बीवी राधीकाको प्यार कर रहा हे.. तब रधीकाकी सीसकारीयोकी आवाजसे सृतीभी उतेजीत होने लगी.. ओर अनायास ही उनका हाथ अपनी चुतपे चला गया.. ओर वो नाइट गाउनके उपरसे ही अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर बीच बीचमे दोनोको देखने लगी..
तबतक लखन ओर राधीका भी अपने चरमो पे थे.. तो सृती अपना गाउन उचा करते अेक उंगली अपनी चुतमे घुसा देती हे.. ओर आंख बंध करते तेजीसे अंदर बहार करने लगती हे.. तब कुछ ही देरमे उनकी चतसे फवारा नीकल गया.. ओर नाइट गाउन गीला करदीया.. तब सृतीको होंस आया.. ओर वो सरमाते जटसे उपरकी ओर जाने लगी.. ओर चलते हुअे अपने गाउनसे अपनी चुतको पोछने लगी..
ओर वो चुतको पोछते अपने रुममे चली गइ.. तब उनको नही पता थाकी नीलम अपने दरवाजेके पास खडी रहेकर उनको अंदर जाते देख रही हे.. फीर सृती बाथरुममे जाकर गाउन बदलती हे.. ओर सोजाती हे.. तब नीलम वापस अपने बेडपे चली गइ.. ओर सोचने लगी.. जीस तराह सृती अपनी चुतको साफ करते आ रही थी तो उनको सृतीपे भी आसंकाये होने लगी..
कही सृतीदीदी भी तो लखन जीजुसे चुदवाकर नही आइ.. अगर अैसा हेतो अभी लखन जीजुभी उपर आयेगे.. यही सोचते कुछ देरके बाद नीलम वापस दरवाजेके पास खडी रहेते लखनका इन्तजार करती रही.. लेकीन लखन उपरकी ओर नही आया.. तो नीलमने नीचे जानेकी ठानली.. ओर वो अपने रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करते दबे पांव नीचेकी ओर जाने लगी.. ओर नीचे जाते अेक बार उसने सृतीके रुमकी ओर देख लीया..
तो नीचेकी ओर अबतक लखनने राधीकाको दो बार जडा दीया था.. ओर अभी भी उनकी चुतसे छेडखानी कर रहा था.. जीसे राधीका वापस जल्दीसे उतेजीत हो जाती.. ओर लखनको ओर जोसमे प्यार करती.. तभी अचानम लखनका तन अकडने लगा.. ओर राधीकाकी ओर देखे.. इनसे पहेले ही उनके लंडसे पीचकारीया छुटने लगी.. ओर राधीकाके मुहको भरने लगी.. तो लखनका गाढा पानी राधीकाके मुहसे नीकलने लगा..
ओर वो भी कंपकपाते जडने लगी.. ओर लखनके मुहको भीगो दीया.. फीर दोनो सांत होगये.. तब लखनका बहुत सारा पानी राधीकाके मुहमे चला गया था.. अैसा नही थाकी राधीका लखनका पानी पहेली बार पी रही थी.. जब लखन स्कुलमे था.. तब दोनो अैसा खेल कइ बार खेल चुके थे.. राधीकाको लखनके पानीका स्वाद बहुत अच्छा गता था..फीर वो लखनके पानीको गठक गइ.. ओर लखनको अपने उपरसे हटाकर उनके सीनेमे मुका मारते अपने कपडे उठाकर रुममे भाग गइ..
तो लखन हसने लगा.. ओर अपने कपडे पहेनकर वो रमाकी रुमकी ओर चल पडा.. तो रमा पुरी तराह नंगी होकर अपने उपर चदर डालकर लखनका इन्तजार कर रही थी.. ओर लखन उनके रुममे जाते ही दरवाजा लोक करते बाथरुममे चला गया.. फीर मुहको साफ करते फ्रेस होगया.. ओर बहार आकर रमाके साथ उनकी बगलमे लेटते चदरमे घुस गया.. तो रमाने करवट लेते जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर दोनोके होंठ मील गये.. तभी....
कन्टीन्यु
लता : (जाते हसते) दीदी.. इसमे सरमानेकी बात क्या हे..? हमारे पती कल जा रहे हे तो आपसे अकेलेमे बात करना चाहते हे.. तो कर लीजीये.. हें..हें..हें..
राधीका : (सरमाते धीरेसे) जी दीदी..
कहा तो रमा पीछे मुडकर लखनकी ओर देखते अपने रुममे चली गइ.. तो रजीया नीलम लता ओर सृती उपरकी ओर जाने लगी.. तब अेक बार पीछे मुडकर सृतीने लखनकी ओर देखलीया.. तो लखन राधीकासे चीपकरते बैठ रहा था.. जीसे देखकर सृतीको अच्छा नही लगा.. ओर उसे राधीकासे थोडी जलन होने लगी.. ओर वो भारी मनसे अपने रुममे चली गइ.. तो नीलम लताभी अपने रुममे जा चुकी थी..
लखन : (होठ चुमते) राधु.. चलना तुम भी.. वहा सबको मील लेना.. यहा रजु हे.. वो मम्मीका खयाल रख लेगी..
राधीका : (सरमाते धीरेसे) अरे बाबा नही आ सकती.. कल आपभी तो जा रहे हो.. तो मुजे होस्टेलपे जाना पडेगा.. समजो यार.. मे भाभीमां को वो यहा आयेगी तब मील लुगी.. प्ली..ज..
लखन : (मुस्कुराते बुब्सको मसलते होंट चुमते) ठीक हे.. तो चल.. मुजे मेरी बीवीसे थोडा प्यार तो करने दे.. हम कीतने दिन होगये नही मीले.. वो तो छोडो हमारी सादीके बाद अभी तक हमने सुहागरात भी नही मनाइ..
राधीका : (सरमाते मुस्कुराते गाल सहेलाते) अलेले.. मेरा बेबी.. अपनी बीवीको प्यार करना हे..? लेकीन थोडा सबर करलो.. जब मम्मी ठीक होजायेगी ओर हम घर चले जायेगे तब आपको जीतना प्यार करना हो करलेना.. लेकीन हमारे घरमे.. हम अपनी सुहागरा वही मनायेगे.. बस.. आप वहासे वापस आजाओ..
लखन : (बाहोमे भरते कीस करते) अरे.. तबतक तो मुजे उपर उपरसे तो प्यार करनेदो.. फीर पता नही हम तीन चार दिनके बाद ही मीलेगे.. अेक मीनीट.. तुम यही बैठो मे अभी आया..
कहेते लखन होलका दरवाजा बंध करते सभी लाइट बुजा देता हे.. ओर राधीकाके पास आकर बैठ जाता हे.. तब राधीका हसते हुअे बहुत सरमा रही थी.. तब लखन उनके होठोको चुमते ओर बुब्सके साथ खेलते प्यार करने लगता हे.. तो राधीका गरम होने लगती हे.. ओर लखनका साथ देते उनको प्यार करने लगती हे.. तब कुछ ही देरमे राधीका सीर्फ ब्रा मे ही रेह गइ.. जो लखनने उनको भी खीचके नीकालदी..
दोनो काफी उतेजीत हो चुके थे.. सबकुछ भुल गये.. की वो कहा हे.. राधीका सोफेपे लेटी हुइ थी.. ओर लखन उनकी चुतको चाटते उनके दानेको छेड रहा था.. तब राधीकाकी हालत पतली होगइ.. ओर वो सीसकारीया करते लखनके बालोको सहेलाती रही.. वो इतनी उतेजीत हो गइ.. की उसने लखनको सीक्स नाइन पोजीसनमे आनेको कहा.. ओर लखन उल्टा होकर राधीकाकी चुतको खरोदने लगा..
तो राधीकाने भी लखनके लंडको अपने मुहमे लेलीया.. ओर लोलीपोपकी तराह चुसने लगी.. तब लखनका जोस कल गुना बढ गया.. ओर वो धीरे धीरे अपनी कमर हीलाते राधीकाके मुहको ही चोदने लगा.. दोनो काफी देर ओरल सेक्स करते रहे.. लखन राधीकाके मुहको चोदे ही जा रहा था जीसे राधीकाकी हालत पतली होने लगी.. फीर भी वो लखनके प्यारको बरदास्त करती रही..
तबतक लता ओर रजीया अपने रुममे चली गइ थी.. तो नीलम ओर सृती अब भी अपने बीस्तरमे करवटे ले रही थी.. आज सृतीकी आंखसे नींद गायब हो चुकी थी.. क्युकी अेक तो वो जबसे गांवसे आइ थी तबसे इस सुखसे वंचीत थी.. दुसरा.. उन्होने बडी मुस्कीलसे लखनकी नाराजगीको दुर कीया था.. उनको लखनके साथ इन्टीमेन्ट होनेका मौका भी मीला.. लेकीन वो भी उसने गवां दीया..
तबसे सृती लखनके लीये पागल होचुकी थी.. तब आज उसने लखन ओर रमाको इसारोसे बात करते देख भी लीया.. तो सृतीकी कामाग्नी ओर भडक गइ.. वो अपने रुममे गइ तो भी उसने रुमका दरवाजा खुला छोडदीया.. इस उमीदमे.. की लखन उनके रुममे आजाये.. लेकीन सृतीको नीरासा ही हाथ लगी.. वो धीरेसे बेडसे खडी होगइ.. ओर धीरेसे दबे पांव बहार नीलने लगी..
फीर दरवाजेसे बहार देखने लगी.. की कही कोइ जाग तो नही रहा.. तब उसे बहार कोइ नजर नही आया तो वो दरवाजा धीरेसे बंध करते दबे पांव नीचेकी ओर जाने लगी.. ओर जैसे ही सीडीया उतरके नीचे आइ.. तो होलमे पुरा अंधेरा छाया हुआ था.. ओर सृतीको हल्कीसी सीसकारीयोकी आवाज सुनाइ दी.. तो वो सीढीके लास्ट वाले स्टेप पे रुक गइ.. ओर अपना सर थोडासा आगे करते होलमे देखने लगी..
तो हल्कीसी रोसनीमे उनको धुंधलीसी दो परछाइ दीखाइ दी.. जो अेक दुसरेसे प्यार कर रहे थे.. तो सृती समज गइ की लखन अपनी बीवी राधीकाको प्यार कर रहा हे.. तब रधीकाकी सीसकारीयोकी आवाजसे सृतीभी उतेजीत होने लगी.. ओर अनायास ही उनका हाथ अपनी चुतपे चला गया.. ओर वो नाइट गाउनके उपरसे ही अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर बीच बीचमे दोनोको देखने लगी..
तबतक लखन ओर राधीका भी अपने चरमो पे थे.. तो सृती अपना गाउन उचा करते अेक उंगली अपनी चुतमे घुसा देती हे.. ओर आंख बंध करते तेजीसे अंदर बहार करने लगती हे.. तब कुछ ही देरमे उनकी चतसे फवारा नीकल गया.. ओर नाइट गाउन गीला करदीया.. तब सृतीको होंस आया.. ओर वो सरमाते जटसे उपरकी ओर जाने लगी.. ओर चलते हुअे अपने गाउनसे अपनी चुतको पोछने लगी..
ओर वो चुतको पोछते अपने रुममे चली गइ.. तब उनको नही पता थाकी नीलम अपने दरवाजेके पास खडी रहेकर उनको अंदर जाते देख रही हे.. फीर सृती बाथरुममे जाकर गाउन बदलती हे.. ओर सोजाती हे.. तब नीलम वापस अपने बेडपे चली गइ.. ओर सोचने लगी.. जीस तराह सृती अपनी चुतको साफ करते आ रही थी तो उनको सृतीपे भी आसंकाये होने लगी..
कही सृतीदीदी भी तो लखन जीजुसे चुदवाकर नही आइ.. अगर अैसा हेतो अभी लखन जीजुभी उपर आयेगे.. यही सोचते कुछ देरके बाद नीलम वापस दरवाजेके पास खडी रहेते लखनका इन्तजार करती रही.. लेकीन लखन उपरकी ओर नही आया.. तो नीलमने नीचे जानेकी ठानली.. ओर वो अपने रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करते दबे पांव नीचेकी ओर जाने लगी.. ओर नीचे जाते अेक बार उसने सृतीके रुमकी ओर देख लीया..
तो नीचेकी ओर अबतक लखनने राधीकाको दो बार जडा दीया था.. ओर अभी भी उनकी चुतसे छेडखानी कर रहा था.. जीसे राधीका वापस जल्दीसे उतेजीत हो जाती.. ओर लखनको ओर जोसमे प्यार करती.. तभी अचानम लखनका तन अकडने लगा.. ओर राधीकाकी ओर देखे.. इनसे पहेले ही उनके लंडसे पीचकारीया छुटने लगी.. ओर राधीकाके मुहको भरने लगी.. तो लखनका गाढा पानी राधीकाके मुहसे नीकलने लगा..
ओर वो भी कंपकपाते जडने लगी.. ओर लखनके मुहको भीगो दीया.. फीर दोनो सांत होगये.. तब लखनका बहुत सारा पानी राधीकाके मुहमे चला गया था.. अैसा नही थाकी राधीका लखनका पानी पहेली बार पी रही थी.. जब लखन स्कुलमे था.. तब दोनो अैसा खेल कइ बार खेल चुके थे.. राधीकाको लखनके पानीका स्वाद बहुत अच्छा गता था..फीर वो लखनके पानीको गठक गइ.. ओर लखनको अपने उपरसे हटाकर उनके सीनेमे मुका मारते अपने कपडे उठाकर रुममे भाग गइ..
तो लखन हसने लगा.. ओर अपने कपडे पहेनकर वो रमाकी रुमकी ओर चल पडा.. तो रमा पुरी तराह नंगी होकर अपने उपर चदर डालकर लखनका इन्तजार कर रही थी.. ओर लखन उनके रुममे जाते ही दरवाजा लोक करते बाथरुममे चला गया.. फीर मुहको साफ करते फ्रेस होगया.. ओर बहार आकर रमाके साथ उनकी बगलमे लेटते चदरमे घुस गया.. तो रमाने करवट लेते जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर दोनोके होंठ मील गये.. तभी....
कन्टीन्यु