Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 66 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

राधीका : (सर्मसार होते धीरेसे) लखन.. क्या कर रहे हे..? अभी सब लोग इधर ही हे..

लता : (जाते हसते) दीदी.. इसमे सरमानेकी बात क्या हे..? हमारे पती कल जा रहे हे तो आपसे अकेलेमे बात करना चाहते हे.. तो कर लीजीये.. हें..हें..हें..

राधीका : (सरमाते धीरेसे) जी दीदी..

कहा तो रमा पीछे मुडकर लखनकी ओर देखते अपने रुममे चली गइ.. तो रजीया नीलम लता ओर सृती उपरकी ओर जाने लगी.. तब अ‍ेक बार पीछे मुडकर सृतीने लखनकी ओर देखलीया.. तो लखन राधीकासे चीपकरते बैठ रहा था.. जीसे देखकर सृतीको अच्छा नही लगा.. ओर उसे राधीकासे थोडी जलन होने लगी.. ओर वो भारी मनसे अपने रुममे चली गइ.. तो नीलम लताभी अपने रुममे जा चुकी थी..

लखन : (होठ चुमते) राधु.. चलना तुम भी.. वहा सबको मील लेना.. यहा रजु हे.. वो मम्मीका खयाल रख लेगी..

राधीका : (सरमाते धीरेसे) अरे बाबा नही आ सकती.. कल आपभी तो जा रहे हो.. तो मुजे होस्टेलपे जाना पडेगा.. समजो यार.. मे भाभीमां को वो यहा आयेगी तब मील लुगी.. प्ली..ज..

लखन : (मुस्कुराते बुब्सको मसलते होंट चुमते) ठीक हे.. तो चल.. मुजे मेरी बीवीसे थोडा प्यार तो करने दे.. हम कीतने दिन होगये नही मीले.. वो तो छोडो हमारी सादीके बाद अभी तक हमने सुहागरात भी नही मनाइ..

राधीका : (सरमाते मुस्कुराते गाल सहेलाते) अलेले.. मेरा बेबी.. अपनी बीवीको प्यार करना हे..? लेकीन थोडा सबर करलो.. जब मम्मी ठीक होजायेगी ओर हम घर चले जायेगे तब आपको जीतना प्यार करना हो करलेना.. लेकीन हमारे घरमे.. हम अपनी सुहागरा वही मनायेगे.. बस.. आप वहासे वापस आजाओ..

लखन : (बाहोमे भरते कीस करते) अरे.. तबतक तो मुजे उपर उपरसे तो प्यार करनेदो.. फीर पता नही हम तीन चार दिनके बाद ही मीलेगे.. अ‍ेक मीनीट.. तुम यही बैठो मे अभी आया..

कहेते लखन होलका दरवाजा बंध करते सभी लाइट बुजा देता हे.. ओर राधीकाके पास आकर बैठ जाता हे.. तब राधीका हसते हुअ‍े बहुत सरमा रही थी.. तब लखन उनके होठोको चुमते ओर बुब्सके साथ खेलते प्यार करने लगता हे.. तो राधीका गरम होने लगती हे.. ओर लखनका साथ देते उनको प्यार करने लगती हे.. तब कुछ ही देरमे राधीका सीर्फ ब्रा मे ही रेह गइ.. जो लखनने उनको भी खीचके नीकालदी..

40.gif


दोनो काफी उतेजीत हो चुके थे.. सबकुछ भुल गये.. की वो कहा हे.. राधीका सोफेपे लेटी हुइ थी.. ओर लखन उनकी चुतको चाटते उनके दानेको छेड रहा था.. तब राधीकाकी हालत पतली होगइ.. ओर वो सीसकारीया करते लखनके बालोको सहेलाती रही.. वो इतनी उतेजीत हो गइ.. की उसने लखनको सीक्स नाइन पोजीसनमे आनेको कहा.. ओर लखन उल्टा होकर राधीकाकी चुतको खरोदने लगा..

69-gif.gif


तो राधीकाने भी लखनके लंडको अपने मुहमे लेलीया.. ओर लोलीपोपकी तराह चुसने लगी.. तब लखनका जोस कल गुना बढ गया.. ओर वो धीरे धीरे अपनी कमर हीलाते राधीकाके मुहको ही चोदने लगा.. दोनो काफी देर ओरल सेक्स करते रहे.. लखन राधीकाके मुहको चोदे ही जा रहा था जीसे राधीकाकी हालत पतली होने लगी.. फीर भी वो लखनके प्यारको बरदास्त करती रही..

439895666.gif


तबतक लता ओर रजीया अपने रुममे चली गइ थी.. तो नीलम ओर सृती अब भी अपने बीस्तरमे करवटे ले रही थी.. आज सृतीकी आंखसे नींद गायब हो चुकी थी.. क्युकी अ‍ेक तो वो जबसे गांवसे आइ थी तबसे इस सुखसे वंचीत थी.. दुसरा.. उन्होने बडी मुस्कीलसे लखनकी नाराजगीको दुर कीया था.. उनको लखनके साथ इन्टीमेन्ट होनेका मौका भी मीला.. लेकीन वो भी उसने गवां दीया..

तबसे सृती लखनके लीये पागल होचुकी थी.. तब आज उसने लखन ओर रमाको इसारोसे बात करते देख भी लीया.. तो सृतीकी कामाग्नी ओर भडक गइ.. वो अपने रुममे गइ तो भी उसने रुमका दरवाजा खुला छोडदीया.. इस उमीदमे.. की लखन उनके रुममे आजाये.. लेकीन सृतीको नीरासा ही हाथ लगी.. वो धीरेसे बेडसे खडी होगइ.. ओर धीरेसे दबे पांव बहार नीलने लगी..

फीर दरवाजेसे बहार देखने लगी.. की कही कोइ जाग तो नही रहा.. तब उसे बहार कोइ नजर नही आया तो वो दरवाजा धीरेसे बंध करते दबे पांव नीचेकी ओर जाने लगी.. ओर जैसे ही सीडीया उतरके नीचे आइ.. तो होलमे पुरा अंधेरा छाया हुआ था.. ओर सृतीको हल्कीसी सीसकारीयोकी आवाज सुनाइ दी.. तो वो सीढीके लास्ट वाले स्टेप पे रुक गइ.. ओर अपना सर थोडासा आगे करते होलमे देखने लगी..

तो हल्कीसी रोसनीमे उनको धुंधलीसी दो परछाइ दीखाइ दी.. जो अ‍ेक दुसरेसे प्यार कर रहे थे.. तो सृती समज गइ की लखन अपनी बीवी राधीकाको प्यार कर रहा हे.. तब रधीकाकी सीसकारीयोकी आवाजसे सृतीभी उतेजीत होने लगी.. ओर अनायास ही उनका हाथ अपनी चुतपे चला गया.. ओर वो नाइट गाउनके उपरसे ही अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर बीच बीचमे दोनोको देखने लगी..

तबतक लखन ओर राधीका भी अपने चरमो पे थे.. तो सृती अपना गाउन उचा करते अ‍ेक उंगली अपनी चुतमे घुसा देती हे.. ओर आंख बंध करते तेजीसे अंदर बहार करने लगती हे.. तब कुछ ही देरमे उनकी चतसे फवारा नीकल गया.. ओर नाइट गाउन गीला करदीया.. तब सृतीको होंस आया.. ओर वो सरमाते जटसे उपरकी ओर जाने लगी.. ओर चलते हुअ‍े अपने गाउनसे अपनी चुतको पोछने लगी..

ओर वो चुतको पोछते अपने रुममे चली गइ.. तब उनको नही पता थाकी नीलम अपने दरवाजेके पास खडी रहेकर उनको अंदर जाते देख रही हे.. फीर सृती बाथरुममे जाकर गाउन बदलती हे.. ओर सोजाती हे.. तब नीलम वापस अपने बेडपे चली गइ.. ओर सोचने लगी.. जीस तराह सृती अपनी चुतको साफ करते आ रही थी तो उनको सृतीपे भी आसंकाये होने लगी..

कही सृतीदीदी भी तो लखन जीजुसे चुदवाकर नही आइ.. अगर अ‍ैसा हेतो अभी लखन जीजुभी उपर आयेगे.. यही सोचते कुछ देरके बाद नीलम वापस दरवाजेके पास खडी रहेते लखनका इन्तजार करती रही.. लेकीन लखन उपरकी ओर नही आया.. तो नीलमने नीचे जानेकी ठानली.. ओर वो अपने रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करते दबे पांव नीचेकी ओर जाने लगी.. ओर नीचे जाते अ‍ेक बार उसने सृतीके रुमकी ओर देख लीया..

तो नीचेकी ओर अबतक लखनने राधीकाको दो बार जडा दीया था.. ओर अभी भी उनकी चुतसे छेडखानी कर रहा था.. जीसे राधीका वापस जल्दीसे उतेजीत हो जाती.. ओर लखनको ओर जोसमे प्यार करती.. तभी अचानम लखनका तन अकडने लगा.. ओर राधीकाकी ओर देखे.. इनसे पहेले ही उनके लंडसे पीचकारीया छुटने लगी.. ओर राधीकाके मुहको भरने लगी.. तो लखनका गाढा पानी राधीकाके मुहसे नीकलने लगा..

24.gif


ओर वो भी कंपकपाते जडने लगी.. ओर लखनके मुहको भीगो दीया.. फीर दोनो सांत होगये.. तब लखनका बहुत सारा पानी राधीकाके मुहमे चला गया था.. अ‍ैसा नही थाकी राधीका लखनका पानी पहेली बार पी रही थी.. जब लखन स्कुलमे था.. तब दोनो अ‍ैसा खेल कइ बार खेल चुके थे.. राधीकाको लखनके पानीका स्वाद बहुत अच्छा गता था..फीर वो लखनके पानीको गठक गइ.. ओर लखनको अपने उपरसे हटाकर उनके सीनेमे मुका मारते अपने कपडे उठाकर रुममे भाग गइ..

तो लखन हसने लगा.. ओर अपने कपडे पहेनकर वो रमाकी रुमकी ओर चल पडा.. तो रमा पुरी तराह नंगी होकर अपने उपर चदर डालकर लखनका इन्तजार कर रही थी.. ओर लखन उनके रुममे जाते ही दरवाजा लोक करते बाथरुममे चला गया.. फीर मुहको साफ करते फ्रेस होगया.. ओर बहार आकर रमाके साथ उनकी बगलमे लेटते चदरमे घुस गया.. तो रमाने करवट लेते जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर दोनोके होंठ मील गये.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२६

तो लखन हसने लगा.. ओर अपने कपडे पहेनकर वो रमाकी रुमकी ओर चल पडा.. तो रमा पुरी तराह नंगी होकर अपने उपर चदर डालकर लखनका इन्तजार कर रही थी.. ओर लखन उनके रुममे जाते ही दरवाजा लोक करते बाथरुममे चला गया.. फीर मुहको साफ करते फ्रेस होगया.. ओर बहार आकर रमाके साथ उनकी बगलमे लेटते चदरमे घुस गया.. तो रमाने करवट लेते जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर दोनोके होंठ मील गये.. तभी.... अब आगे

रमा : (सरमाते धीरेसे) आगये अपनी बीवीको प्यार करके..? कुछ मेरे लीये भी बचाके रखा हेकी नही..?

लखन : (होंठ चुमते बुब्सको मसलते) अरे डार्लींग तेरे लीये तो मे हमेसा रेडी रहुगां.. तुम तो कंपलीट होकर लेटी हो.. चलो.. सुरु करे..?

रमा : (मुस्कुराते) हंम.. पहेले अपने कपडेतो नीकाल दीजीये.. क्या आपको यहा आनेसे कीसीने देखा तो नही..? हंम..? देखना बाबा मेरी फजीहत ना होजाये.. ओर हां.. आज सीर्फ दो ही बार.. बापरे.. उस रात तो मेरी हालत खराब करदी थी.. मे दो दिन बिस्तरसे उठ भी नही पाइ.. आप कीतना जोसमे करते थे.. ओर कल हमे जाना भी हे.. इसीलीये तो आज आपको बुलाया हे.. फीर पता नही कब हमे दोबारा मीलनेका मोका मीले..

लखन : (कपडे नीकालते रमाके उपर चडते) चल आज प्यारसे करुगा.. क्या हेना उस दिन हम दोनोका पहेला मीलन था.. लेकीन आज आपको कोइ तकलीफ नही होगी.. मे बडे प्यारसे करुगा..

तभी बहारकी ओर नीलम नीचे पहोंची तबतक राधीका अपने रुममे जा चुकी थी.. ओर लखन रमाके रुममे चला गया था.. तो नीलम ने पुरा होल ओर कीचन देखलीया.. वहा कोइ नही था.. तब उसे अचानक अपनी मम्मीका रुम याद आया ओर नीलम वही चली गइ.. तो देखा उनके मम्मीकी रुमकी लाइट जल रही थी.. ओर अंदरसे हल्कीसी बाते करनेकी आवाज आ रही थी..

तब लखन रमाको प्यार करते बाते कर रहा था.. तो कुछ ही देरमे रमा उतेजीत होगइ.. ओर उनकी चुत पानी बहाने लगी.. तब लखनने रमाकी चुतमे धीरे धीरे करते अपना पुरा लंड घुसा दीया.. फीर भी लखनका लंड उसे बहुत बडा लग रहा था.. दोनोके बीच चुदाइका तांडव होने लगा.. लखन जोरोसे कमर हीलाते रमाको चोद रहा था.. तब रमाने दोनोके उपरसे चदरको भी हटालीया था..

दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. रमाके दोनो बुब्स तालमेलमे उछल रहे थे.. ओर रमाने दोनो हाथसे चदरको कसके पकडा था.. ओर उनके मुहसे बहुत ही कामुक सीसकारीया नीकल रही थी.. तभी लखनने रमाके मुहमे चदर घुसादी.. ओर हाथके बल उचा हो गया.. ओर रमाको जोरोसे चोदने लगा.. तो इस बार भी रमाकी चीखे नीकलवा दी.. लेकीन इस बार रमाके मुहमे चदरकी वजहसे आवाज बहार नही नीकल रही थी..

27565531.gif


तब नीलम समज गइ.. की लखन जीजु इस वक्त मम्मीके रुममे हे.. ओर सृती दीदी इनकी चुदाइ देखकर ही उपर आइ होगी.. तब नीलम जुककर दरवाजेकी की होलसे देखने लगी.. तब लखन रमाकी जबरदस्त चुदाइ कर रहा था.. नीलम समज गइकी उसी दिनकी तराह आज भी लखन जीजु उनकी मम्मीकी चुदाइ कर रहे हे.. तब नीलम गरम होने लगी.. ओर वोभी सृतीकी माफीक कीहोलसे देखते अपनी चुतको सहेलाते उनमे उगली करते सोचने लगी..

नीलम : (मनमे) मोम भीनां.. अब पकी चुदकड होगइ हे.. जबसे यहा आइ हे हर रात जीजुका लंड खा रही हे.. ये भी नही की चलो अ‍ेक बार अपनी बेटीको भी साथ लेले.. हम दोनोके बीच डील हुइ थी.. फीर भी अकेली अकेली चुदवा रही हे.. देखना अब तो मे भी आपकी तराह पकी वाली रंडी बनकर दीखाउगी.. आप तो कल चली जाओगी.. फीर देखती हु जीजु कैसे मुजसे बचते हे.. क्या मस्त लंड हे जीजुका.. मेतो देखते ही इनकी दिवानी हो गइ हु.. अब देखती हु.. जीजु मुजे कब मीलते हे..

वो सोचते वापस की होलमे देखने लगी.. देखा तो रमाने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते लीप लोक करलीया था.. ओर लखन रमाको चीपकते जोरोसे चोदने लगा.. तब कुछ ही देरमे लखनने अपना लंड रमाकी चुतमे जड तक घुसा दीया.. तो रमाकी आंख बडी होगइ.. तभी लखन अपनी कमरको जटका देते रमाकी चुतको अपने गाढे पानीसे सीचने लगा.. जीसे देखकर नीलम बहुत उतेजीत होगइ..

38318.gif


नीलमकी सांसे जोरोसे चलने लगी.. वो जोरोसे अपनी चुतमे उगलोको अंदर बहार करने लगी.. तभी उतेजीत होते आंख बंध करते जडने लगी.. तो उनका हाथ दरवाजेसे टकरा गया.. तब उसे यहा ज्यादा देर ठहेरना उचीत नही लगा.. ओर वो भी अपने नीकरसे अपनी चुतको साफ करते उपर चली गइ.. ओर बाथरुममे चुतको साफ करते सही होगइ.. फीर बेडपे बैठ गइ..

serve-yourself-and-save-001.gif


तबतक नीचेकी ओर लखन रमाके बुब्सको चुम रहा था.. ओर रमा लखनकी पीड सहेला रही थी.. आज अ‍ेक ही बारमे रमा ढेर होगइ.. लखनका लंड अब भी रमाकी चुतमे जटके मार रहा था.. तब लखन धीरे धीरे कमर हीलाते रमाकी दुसरी बार रमाकी चुदाइ करने लगा.. जीसे रमाकी हालत पतली होने लगी थी.. ओर वो लखनको धीरेसे चोदनेकी मनते कर रही थी..

रमा : (सरमाते धीरेसे नजरे चुराते) लखनजी.. प्लीज.. जरा धीरेसे.. आप बहुत जोसमे आजाते हो..

लखन : (होठको चुमते) रमा.. क्या करु.. तुम ओर तुम्हारी ये चुत मुजे भा गइ हे.. क्या मस्त चुत हे तुम्हारी.. लगता हे भानु भाइ आपको ठीकसे चोदते नही.. वरना अ‍ेक लडकी होनेके बावजुद अ‍ैसी टाइट चुत नही होती..

रमा : (सरमाते मुस्कुराते) अब जैसी भी हे आपकी ही हे.. सायद उपर वालेने आपके लीये समलके रखी होगी.. अब मुजे आपके भाइसे कोइ मतलब नही.. अब आप ही मेरे पती हो.. थोडासा जोरसे चोदीयेनां.. बहुत मजा आ रहा हे.. अ‍ैसा लगता हे मे हवामे उड रही हु..

gentle-sex-79.gif


आज भी लखन ने जबरदस्त तरीकेसे रमाको चोद चोदके उनकी चुतको दो दो बार अपने पानीसे सीच दीया था.. लखन रमाको अ‍ेक बजे तक योदता रहा.. इन दो घंटेकी चुदाइमे लखनने रमाकी हालत पतली करदी.. फीर दुबारा मीलनेकी बात करके लखन उपरकी ओर अपने रुममे चला गया.. तब रमा बडी मुस्कीलसे बाथरुममे चली गइ.. ओर अपनी चुतकी सीकाय करते फ्रेस होते सही होगइ.. फीर वो भी आकर सो गइ..
 
लखन जब उपर पहोचां ओर सृतीके रुमकी ओर नजर डालते अपने रुममे जा ही रहा था.. तभी उसे लास्ट वाले कमरेमे अ‍ेक परछाइ दीखी.. जो उसे दरवाजेके पीछेसे छुपकर देख रही थी.. तो लखन समज गयाकी ये रुम नीलमका हे.. ओर उसने रमाकी चुदाइ करते देख लीया होगा.. ओर लखन वही रुक गया.. तो नीलनमे गरभाकर दरवाजा बंध करदीया.. ओर दिलकी भारी धडनके साथ अपने बेडपे चली गइ..

तभी उसे आभास हुआकी उनके रुमका दरवाजा कीसीने खोलदीया हे.. तो नीलम भारी धडकनोके साथ दरवाजेकी ओर देखने लगी.. देखा तो लखन उनका दरवाजा खोलकर अंदर आ गयाथा.. ओर वापस मुडकर धीरेसे दरवाजा बंध कर रहाथा.. तब नीलम गभराकर बेडपे बैठ गइ.. ओर देखने लगी.. उसे लगाकी अब लखन जीजु आज पका उनको भी चोद लेगे.. तभी लखन उनके पास आकर बैठ गया तो नीलम नजरे जुकाये बेठी रही.. उनकी सांसे तेज चल रही थी..

लखन : (कंधेपे हाथ रखते) नीलु.. क्या हुआ..? तुम अभी तक सोइ नही हो..? हंम..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. वो.. वो.. मुजे नींद नही आ रही थी.. तो जाग रही हु..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. अभी नीचे दरवाजेके पास तुम ही थीनां..?

नीलम : (हडबडाते सर्मसार होते धीरेसे) जीजु.. वो.. वो.. मे.. पानी पीने आइ थी..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन तुमने गलतीसे पानी तेरी मम्मीके रुमके दरवाजेके पास ही गीरा दीया हे.. वहा काफी गीला था..

नीलम : (सरमीन्दा होते) जी..जु.. वो.. सोरी.. मेने मम्मीके रुमकी लाइट जल रही थी.. तो देखने आगइ.. तो अंदरसे आवाज आ रही थी तो देखलीया..

नीलम : (मुस्कुराते) देख नीलु.. मुजे घुमा फीराके बाते करनेकी आदत नही हे.. आज मे तुजे अ‍ेक सचाइ बताना चाहता हु.. सुन.. मे ओर तेरी मम्मी अ‍ेक दुसरेसे प्यार करते हे.. क्युकी तेरे पापा तेरी मम्मीको वो प्यार नही देपा रहे.. जीसकी उनको जरुरत हे.. ओर इनसे हमारे रीलेशनमे कोइ फर्क नही पडेगा.. तुम समज गइनां..? क्या वो तेरी मम्मीके साथ सहेली भी हेनां..?

नीलम : (सामने देखकर हांमे गरदन हीलाते) जी.. जीजु.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? मुजे आपके ओर मम्मीके रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. सायद आपने ठीक कहा.. आजकल मम्मी ओर पापाके बीच कुछ ठीक नही चल रहा.. जीजु.. मे तो बस मम्मीको खुस देखना चाहती हु.. उसने बहुत दुख जेले हे..

लखन : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. सुन.. जब हम गांवसे वापस आये.. तब मे तेरी ओर धिरेनकी सादी जल्दसे जल्द करवाना चाहता हु.. तुम तेरे सब पेपर रेडी रखना.. क्या तुम दोनो कल भी मीले थेनां..?

नीलम : (सर जुकाते हांमे गरदन हीलाते) हां जीजु.. आपसे अ‍ेक रीक्वेस्ट हे.. देखना हमारी सादीके बारेमे मम्मीको पता ना चले.. मे मेरी पढाइ तक ये बात सबसे छुपाकर रखना चाहती हु.. फीर आप जैसा चाहो करुगी..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) हंम.. अ‍ैसा ही होगा जो मेरी छोटी रानी चाहती हे.. ओर कुछ..?

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) नही.. जीजु.. हम अपना रीलेशन भी छीपायेगे.. मे वादा करती हु.. सादीके बाद भी हमारा रीलेशन कायम रहेगा.. मुजे सीर्फ आपका साथ चाहीये बाकी कुछ नही..

लखन : (मुस्कुराते बाहोमे भरते) हंम.. सीर्फ साथ..? ओर कुछ नही..

नीलम : (सीनेमे सर रखते मुस्कुराते) ओर.. ओर आपका प्यार.. जीजु.. आइ लव यु.. मे आपसे बहोत प्यार करती हु.. मुजे भी वो सुख चाहीये.. जो आप मम्मीको देते हो..

लखन : (मुस्कुराते) अरे वाह.. मेरी रानीने तो अपने प्यारका इजहा भी करलीया.. नीलु.. लव यु टु.. देखना मे तेरी जींदगी खुसीयोसे भर दुगा.. चल अभी तो मे आज मेरी रानीको थोडा प्यार देदु..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) जीजु.. पता हे वो प्यार करनेसे मेरी हालत खराब होजायेगी.. क्या हम मेरी मम्मीके जाने तक इन्तजार नही कर सकते..? क्युकी कल हमे नीकलना भी हे.. तो मुजे तकलीफ.. आइ मीन.. आप समज गयेनां..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन वो वाला प्यार नही जो अभी तेरी मम्मीको देकर आया हु.. हम उपर उपरसे तो कर ही सकते हे.. जीसे ओरल सेक्स करते हे.. चल आजा.. आज तेरी भी खुजली मीटाता हु..

कहेते लखनने नीलमको बेडसे खडा करदीया तब नीलमके दिलकी धडकन बढ गइ.. ओर लखनने उसे अपनी गोदमे बीठा लीया ओर अपनी बाहोमे भरते नीलमके होठोको चुमने लगा.. तो नीलम भी उतेजीत होने लगी.. ओर वो अपनी सरम त्यागकर लखनका साथ देने लगी.. लखन नीलमके होठोको चुमते उनके उरोजोके साथ खेलने लगा.. तब नीलमके मुहसे उतेजनकी वजहसे सीसकारीया नीकलने लगी..

ओर धीरे धीरे करते दोनोके तनसे कपडे हटते गये.. तब लखनने नीलमको गोदमे उठाकर बेडपे लीटा दीया.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. दोनो ही नंगे थे.. तब नीलमके संतरे जैसे बुब्स हल्कीसी रोसनीमे चमक रहे थे.. ओर लखन नीलमके उपर चडते छा गया.. तब नीलमने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तो लंखनका लंड नीलमकी चुतपे चुभने लगा.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके मुहमे मुह डालकर जीभसे पेच लडाने लगे.. तभी..

38477.gif


नीलम : (धारी सांसोसे धीरेसे) जीजु.. प्लीज.. अगर मे बहेक जाउ तो अभी आप कंट्रोल करलेना..

लखन : (बुब्स चुमते) नीलु.. तु फीकर मत कर.. उस रात हमारी स्पेसीयल रात होगी.. जब हमारा पहेला मीलन होगा.. यही समजले वो हमारी सुहागरात होगी.. तब तुम धिरेनको भी भुल जायेगी..

नीलम : (उतेजनासे कमर उछालते) जीजु.. यही तो मे चाहती हु.. की मे धिरेनको भुल जाउ.. क्युकी मुजे आपसे प्यार हो गया हे.. धिरेनके साथ सादी करना मेरी मजबुरी हे.. वो मे बादमे आपको बताउगी.. अभी तो मुजे प्यार करो.. आज अपनी इस सालोको आपके अंदर समालो..

नीलम काफी गरम हो चुकी थी.. वो मनसे चाहने लगी.. की उसे अभी लखन चोदले.. लेकीन अभी चुदवाना उनके लीये जोखीम भरा था.. लखनने उसे बहुत ही उतेजीत कर दीया था.. वो लखनकी कीसी भी हरकतका विरोध नही कर रही थी.. लखन नीलमके बुब्सको छोडकर चुमते चुमते धीरे धीरे नीचेकी ओर सरकने लगा.. तो नीलम मछलीकी तराह तडपने लगी.. उसने चदरको कसके पकडीया.. उसे लगा वो हवामे उड रही हे..

51.gif
 
ओर लखन चुमते चुमते नीलमकी चुत तक पहोंच गया.. ओर नीलमकी चुतको चाटने लगा.. तब नीलमने दोनो हाथसे चदरको पकडलीया.. ओर मुडीमे मसलने लगी.. वो आंख बंध करते मछलीकी तराह छटपटाने लगी.. तभी लखनने नीलमकी चुतमे अपनी जीभको घुसा दीया.. ओर नीलमके चुतके दानेको जीभसे खरोदने लगा.. तब नीलम पागल जैसी होने लगी.. ओर वो अपनी कमरको उछालने लगी..

159.gif


नीलम : (मदहोसीमे बडबाते) ओ..ह.. जी..जु.. क्या.. कर..दीया.. आइ.. सीससस... उहं.. आइ.. मम्मी.. जीजु.. उपर आजाओनां.. मुजे कुछ हो रहा हे.. चोदलो मुजे.. नही रहा जाता.. बस.. अ‍ेक बार.. घुसादो अंदर.. मे आपसे चुदना चाहती हु.. उस भडवेमे इतना दम नही जो मुजे संतुस्ट कर सके..

लखन बीना कुछ बोलेही नीलमकी चुतको छेडता रहा.. तो कुछ ही देरमे नीलमका तन अकडने लगा..ओर वो अपनी कमर उछालते पानी छोडने लगी.. ओर लखनके मुहको भीगोने लगी.. नीलम आज बीना चुदाइके ही जड गइ.. ओर वो धडामसे अपनी कमर गीराते भारी सांसे लेते नीढाल होगइ.. ओर कुछ देर अ‍ैसे ही पडी रहेते अपनी सांसको कंट्रोल करती रही.. तब उसे होस आयाकी वो लखनके साथ हे..

27726.gif


लखन : (मुह साफ करते मुस्कुराते) नीलु.. कैसा लगा तुजे..? हंम.. मजा आयाकी नही..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) जीजु.. आपने तो मुजे स्वर्गकी सेर करादी..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. अब चल.. तेरा तो होगया.. अब मुजे भी थोडी सेर करादे.. तुमने धिरेनको ब्लु जोब तो दिया ही होगा.. चल आजा सुरु होजा.. लेकीन तुम उसे गाली क्यु दे रही थी..?

नीलम : (मुस्कुराते बेडसे खडी होते) जीजु.. वो.. वो.. बस.. मुहसे अ‍ैसे ही नीकल गया.. लेकीन जीजु.. आपका ये बहुत बडा हे.. आप ध्यान रखना..

कहेते नीलम लखनके पैरोके बीच आकर बैठ गइ.. ओर लखनका लंड मुठीमे पकडलीया.. फीर धीरे धीरे करते सहेलाने लगी.. लखनका लंड अब भी तनके हवामे जटके मार रहाथा.. तब नीलम सरमाते लखनकी ओर देखती हे.. ओर अपनी जीभ नीकालकर लखनके लंडको नीचेसे चाटने लगती हे.. फीर धीरेसे मुहमे लेकर लोली पोपकी तराह चसते मुहमे अंदर बहार करने लगी..

105.gif


तो लखन भी काफी उतेजीत हो गया.. अ‍ेक पल तो उसे लगाकी वो अभी के अभी नीलमको पटक पटककर चोदले.. मगर लखनने बडा सयम रखा.. ओर नीलमको हाथ पकडकर खडी करदी.. फीर पीठके बल लेटते लखनने नीलमको अपने उपर खीचली.. ओर उसे उल्टा होकर सीक्स नाइन पोजीसनमे लंडको मुहमे लेनेके लीये कहा.. तो नीलम सीक्स नाइन पोजीसनमे आगइ.. ओर लखनके लंडको मुहमे भर लेती हे..

69-gif-70.gif


फीर मुहसे जोरोसे हीलाने लगती हे तब लखनभी नीलमकी कमरको पकडते उनकी चुतमे मुह लगाता हे.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके पार्टके साथ खेलने लगे.. काफी देर दोनो इस खेलको खेलते रहे.. तब लखनका लंड अकडने लगा.. तो नीलमकी चुत भी लगातार पानी बहा रहीथी.. ओर लखनके लंडसे तरल पदार्थकी पीचकारीया छुटने लगी.. ओर नीलमके मुहमे जाते उनके हलकमे उतरने लगी..

तो नीलम भी पुरा लंड मुहमे लेकर अपनी कमरको जटकाते जडने लगी.. नीलमका पुरा मुह लखनके विर्यसे भर गया.. तो वो खांसने लगी.. ओर जटसे बेडसे उतरते बाथरुममे भाग गइ.. तो लखन हसने लगा.. ओर वो भी नंगा नीलमके पीछे बाथरुममे घुस गया.. ओर दोनो अपना मुह साफ करने लगे.. जब दोनो सही होगये.. तब नीलम लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर खुब सरमाते मुस्कुराती रही.. तभी..

लखन : (बाहोमे भरते) नीलु.. मजा आया..? हंम.. चल अब मे चलता हु..

नीलम : (नजरे जुकाते) जीजु.. थेन्क्स.. इतना मजा तो मुजे धिरेनके साथ भी नही आया.. मे तो आपकी दिवानी होगइ.. आज आपने बहुत कंट्रोल कर लीया.. वरना मेतो कंट्रोल खो चुकी थी.. मुजे लगा आज ही आपसे मीलन करलु..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) नीलु.. मुजे पता हे अभी हमारे मीलनके लीये सही माहोल नही हे.. ओर मे कीसीसे मजबुरीका फायदा नही उठाता.. जब सही वक्त आयेगा.. ओर तुम राजी होगी.. तब हमारा मीलन होगा.. बस.. कुछ दिन इन्तजार करले..

नीलम : (खुसीसे हांमे गरदन हीलाते) हां जीजु.. आइ प्रोमीस.. हम बहुत जल्द मीलेगे.. आज आपने कंट्रोल करके मेरा दिल जीत लीया.. जीजु.. आइ लव यु.. मे आपसे प्यार करती हु..

लखन : (कमरमे हाथ डालकर बहार नीकलते हसते) नीलु.. अगर तुम मुजसे प्यार करने लगी.. तो फीर धिरेनका क्या होगा..? हें..हें..हें..

नीलम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) जीजु.. इसके बारेमे भी मेने सोच लीया हे.. इस बारेमे हम फुरसतमे बात करेगे.. मुजे आपसे बहुत कुछ बाते करनी हे.. बस.. सही मौका मीलनेदो.. मे आपको सबकुछ बता दुगी..

फीर लखन ओर नीलम अपने अपने कपढे पहेन लेते हे.. ओर लखन अ‍ेक बार फीर नीलमको बाहोमे भरके कीस करता हे.. आज नीलम लखनका प्यार देखकर उनकी ओर काफी ढल चुकी थी.. फीर लखन अपने रुममे चला जाता हे.. इस रात लखनके बंगलेपे देर रात तक वासनाका तांडव हुआ.. लखनने राधीका ओर नीलमको अ‍ैसेही संतुस्ट करते रमाको दो बार चोद लीयाथा.. फीर लखन लताके पास उनसे चीपककर सो गया.. तो लता भी करवट लेकर लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर अ‍ैसे ही रात बीत गइ..
 
आज सुबह हवेलीपे मंजु जल्दीसे जाग गइ.. ओर नहा धोकर कंपलीट होते ही आश्रम जानेकी तैयारीया करने लगी.. चंपाभाभी चाइ नास्ता बनाने लगी.. तबतक मंजुने बहुत सारा काम नीपटा लीया.. ओर वो देवायत ओर भावनाको जगाने चली गइ.. तब देवायत ओर भावना दोनो ही नंगे अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे सोये हुअ‍े थे.. तब मंजुने अंदर जाकर दोनोको जगाया.. ओर फटाफट तैयार होजानेको कहा..

तो भावना अपनी हालत देखकर सरमा गइ.. ओर फटाफट देवायतकी ओर देखते हसते हुअ‍े बाथरुममे जाने लगी.. तो देवायत समज गया.. ओर वो भी जटसे बेडसे उतर गया.. ओर भावनाके पीछे बाथरुममे घुस गया.. तो भावना जोरोसे हसते उनको बहार नीकलनेकी मनते करने लगी.. तो मंजु दोनोका सारा तमासा देखकर हसती रही.. ओर बाथरुमके पास जाकर दरवाजेसे दोनोको गालीया देने लगी..

मंजुला : (थोडा जोरोसे) देवु.. आज कोइ सरारत नही.. दोनो फटाफट नहाकर बहार आजाओ.. हमे देर हो रही हे..

देवायत : (भावनाको पकडते) मंजु.. अभी आया.. बस.. तेरी बहेनसे सीर्फ थोडासा प्यार करलु..

भावना : (जोरोसे हसते) दीदी.. इनको बहार बुलालो.. नही करना प्यार मुजे.. देखो.. ये मुजे नहाने नही दे रहे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (थोडा गुस्सेसे) देवु.. बहार नीकलो.. आज कोइ प्यार ब्यार नही.. पुरी रात तो हम दोनोको ठोकते रहे.. फीर भी जी नही भरा..? नीकलो बहार.. ओर वो भी कमीनी हे.. पीछले कइ दिनसे तो चुदवा रही हे.. फीर भी कमीनीको चुदवाना हे.. जो आपको उक्साते अंदर भाग जाती हे.. दोनो नीकलो फटाफट..

कहेते मंजु हसते हुअ‍े बहार चली जाती हे.. तबतक देवायतने भावनाको अपनी बाहोमे भरते भीच लीयाथा.. ओर उनके बुब्सको चुमते भावनाको उतेजीत कर रहा था.. तब थोडी ही देरमे भावना गरम हो चुकी थी ओर सीसकारीया करते देवायतका लंड मसलते अपनी चुतपे रगड रही थी.. तब उनसे बरदास्त नही हुआ.. ओर उसने खडे खडे ही देवायतका लंड अपनी चुतपे सेट करदीया..

भावना : (कामुक आवाजमे) जानु.. बहुत कमीने हो आप.. नही मानोगे.. अब जो भी करना हे फटाफट करलो.. आज दीदी बहुत भडकी हुइ हे.. ओर हां.. आज सीर्फ अ‍ेक ही बार.. वरना आप मेरी हालत खराब कर देते हो..

कहातो देवायत भावनकी अ‍ेक टांग उठालेता हे.. ओर जोरसे धका मारते पुरा लंड भावनाकी चुतमे घुसा देता हे.. तब भावनाकी चीख नीकल गइ.. ओर उसने दोनो हाथ देवायतके गलेमे डाल दीया.. तभी देवायत कमर हीलाते भावनाको जोरोसे चोदने लगा.. दोनो बहुत गरम हो चुके थे.. तब कुछ देरकी चुदाइके बाद दोनो ही साथमे जड गये.. फीर साथमे बाथ लेकर कंपलीट होकर बहार आ गये.. ओर कपढे पहेनने लगे..

मंजुला : (अंदर आते ही) देवु.. तुम दोनो अभी तक तैयार नही हुअ‍े..? अरे बाबा हमे आश्रमपे भी पहोंचना हे.. वो दोनो भी कंपलीट होकर हमारा इन्तजार कर रही हे.. ओर भावु.. अब तुम दो तीन दिन देवुके पास मत जाना.. उसे अब हमारी दया बहेनके साथ मजे करने दे.. आज दोनोकी सादी हे.. क्युकी दया बहेनकी अ‍ेक बरसोकी इच्छा हे.. की वो अ‍ेक बच्चेको जन्मदे.. ताकी वो मां बन सके..

भावना : (थोडी मायुस होते) क्या दीदी.. अभी तो सीर्फ चार ही दिन हुअ‍े हे हमारी सादीको.. ओर क्या मे सारा दिन यही करती हु..? हमारे पतीको भी समजाओनां.. वो ही लगे रहेते हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) अरे हां बाबा समज गया मे.. इसमे भावुका क्या दोस..? बस.. ये तो भावुपे थोडा ज्यादा प्यार आ रहा हे इसीलीये.. ओर वैसे भी अभी तुम्हारे ओर भावुके अलावा यहा हे ही कौन..?

मंजुला : (मुस्कुराते) ठीक हे ठीक हे.. अगर भावु इतजी ही अच्छी लगती हे तो कर लेते इनसे सादी.. क्यु उस कुतेके पले बांध दीया..? जो सारा दिन कीसी भी ओरतके साथ पडा रहेता हे.. अब चलो दोनो फटाफट तैयार होकर बहार आजाओ हमे नीकलना भी हे.. भावु.. तु भी चल मुजे तुमसे कुछ बात करनी हे..

कहेते मंजु बहार नीकल गइ.. तो देवायत ओर भावना अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते जोरोसे हसने लगे.. फीर दोनो कंपलीट होकर बहार आगये तो देवायत डाइनींगपे जाकर बैठ गया.. तो चंपा भाभी मौका देखकर देवनयतके पास आगइ.. ओर उसे मीलनेके लीये कहेने लगी.. तब मंजु पुनम वाले रुममे चली गइ.. तो पीछे पीछे भावना भी मुस्कुराते चली गइ.. तब दोनो ही बेडपे जाकर बैठ गइ.. तभी..

मंजुला : (मुस्कुराते) देख भावु.. कुछ दिन अपनी भावनाओपे कंट्रोल करले.. आज देवुकी सादी हे.. अब कुछ दिन दया बहेनको उनके साथ सोनेदे.. दोनोने बहुत मजे करलीये..

भावना : (थोडी मायुस होते) क्या दि..? अभी हमने कहा मजा कीया..? हमारी सादीको सीर्फ चार पांच दिनतो हुअ‍े हे.. क्या कोइ पतीसे इतने दिनोमे दुर हो सकती हे..? बात करती हे..

मंजुला : (प्यारसे समजाते) भावु.. तुम भी देवुसे प्यार करती थीनां..? इसीलीये मेने तुम दोनोकी सादी करवाइ.. लेकन मत भुलो.. तुम सबकी मंजील अब देवु नही हे.. खास करके तुम चारोकी.. तुम चारोकी मंजील मेरा लखन बेटा हे.. अब जीतनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी मेरे बेटेको भी अपनाले.. ताकी तुजे इस सुखसे ज्यादा दिन वंचीत ना रहेना पडे.. तु समज गइनां..?

भावना : (र्ससार होते धीरेसे) हां दीदी.. इस बारेमे पुनोदीदीसे काफी बात हो चुकी हे.. क्या सचमे हमारी मंजील हमारा देवर हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हमारा नही.. तुम सबका.. क्युकी वो सचमे मेरा बेटा हे.. मेरे पीछले जन्मका बबलु..

भावना : (आस्चर्यसे देखते) बबलु..? वो आइसक्रिम वाला बबलु..? उन राजाका भाइ..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. ठीक पहेचाना तुमने.. सुन.. तुम अ‍ेक बार लखनको मीलेगीनां तो फीर हमारे देवुको भी भुल जायेगी.. आज कल अ‍ेक तो लाइनमे लगी हुइ हे.. जो बहुत जल्द मेरे लखन बेटेके नीचे आजायेगी.. इसीलीये केह रही हु.. तुम अब लखन बेटेको अपनाले.. वो तुजे खुस रखेगा..

भावना : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. अ‍ेक बात पुछु..? आपने हमारी सभी सौतनोको छुट दे रखी हे.. तो क्या आप भी..? मम्मी भी तो हमारी सौतन हे.. ओर आप तो उनको अपना बेटा माती हो.. तो आप ही केह रही थी मुजे अपने बेटेको जन्म देकर उनसे ही सादी करनी पडती हे.. तो वो सब बाते मीथ्या होजायेगी क्या..?

मंजुला : (मुस्कुराते) नही भावु.. मे तेरे कहेनाका मतलब समज गइ.. लखन भले ही इस जन्ममे मेरी कोखसे पैदा ना हुआ हो.. फीर भी अगर लखन चाहगा तो मे रेडी हु.. लेकीन मुजे पता हे वो मेरे साथ कभी भी रीलेशन नही बनायेगा.. क्युकी वो खुद मांके प्रती अपनी मर्यादा लांधना नही चाहता.. ओर रही बात मम्मीकी.. तो उसे अ‍ैसे ही जवान रहेनेके लीये लखनके साथ रीलेशन बनाना ही होगा.. मे बस इतना केह सकती हु..

भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. अगर हमारा पती उनकी इतनी बीवीया नही सम्हाल पाते.. तो क्या लखन भैया अकेले सम्हाल पायेगे..? वोभी तो वहा बीजनेस करने गये हे..

मंजुला : नही भावु.. वहा तो हमारा पहेलेसे ही अ‍ेक पार्टनर हे.. जब मेरी सादी भी नही हुइ थी.. वहाका सब बीजनेस वोही सम्हालते हे.. बस.. लखन बेटेकोतो अ‍ैसे ही वहा भेजा हे.. वो भी अ‍ेक खास मक्सदसे जो अभी उनको भी नही पता.. वो सीर्फ पुनो ओर मेही जानती हु.. ओर कोइ नही.. हमारा देवु भी नही.. वहा मेरे बेटेको यही काम करना हे.. तुम सबको सम्हालनेका.. तभी तो उसे जडी बुटी दे गइ हे..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आपकी सभी बाते मे समज गइ.. मे लखनके साथ रीलेशन रखनेको तैयार हु.. लेकीन इनमे मुजे थोडा सोचनेके लीये वक्त लगेगा.. ओर कुछ नही..

मंजुला : (सामने देखकर मनमे सोचते) कमीनी.. तु जीतना भी सोचना हे सोचले.. तु सोचती ही रहेगी.. इनसे पहेले ही मेरा बेटा तुजे चोदलेगा.. तुजे पता भी नही भलेगा..

भावना : (मुस्कुराते) दी.. क्या सोच रही हे..? कुछ कहेना हे क्या..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. तुजे सोचनेके लीये जीतना वक्त चाहीये लेले.. आखीर तुजे अ‍ेक दिन उनको अपनाना ही पडेगा.. मेरी ये बात याद रखना.. ओर सुन.. अब यहा बहुत कुछ होने वाला हे.. कीसी भी रीस्तोमे तुम इन्टर फैयर मत करना.. फीर चाहे रीस्तोमे जो भी हो.. हमारी मम्मी ही क्युना हो.. अब चल.. हमे नीकलना हे..

कहेते मंजु ओर भावना दोनो बहार आगइ.. ओर देवायतके साथ जाकर बैठ गइ.. फीर सबने चाइ नास्ता करलीया.. ओर अपना सामान कारमे रखकर चंपाभाभीको कहेकर तीनो कारमे अपने खेतोकी ओर चले गये.. वहासे रामुकाकाको लेकर चारो आश्रमकी ओर नीकल गये.. तब पुनमके घरपे धिरेन चाइ नास्ता कर रहा था.. ओर दया पुनम जानेके लीये कंपलीट तैयार होकर धिरेनको चाइ नास्ता दे रही थी.. तभी..
 
धिरेन : (थोडा सखतीसे) पुनो.. मुजसे बात नही करती इसका मतलब ये नही की कही जाना हेतो अपने पतीको भी ना पुछा जाये.. कहो.. दोनो बन ठनके कीधर जा रही हो..? अपने आसीक को मीलने..?

पुनम : (गुस्सा होते) हां.. मे अपने आसीक को मीलने ही जा रही हु.. धिरेन.. थोडा तो मुह सम्हालके बोलो.. हम भैया भाभीके साथ आश्रम जा रही हे.. कही अ‍ैयासीया करने नही.. समजे..? ओर अब आपसे पुछनेका कोइ मतलब भी नही हे.. अब हमारा रीस्ता तो खतम हो गया हे.. तो फीर मे आपसे क्यु पुछु..?

धिरेन : (कातील मुस्कानसे) अभी तक अकड नही गइ.. मत भुलो अभी हमारा डीवोर्स नही हुआ हे.. तुम अभी भी मेरी बीवी हो.. तो इस नाते तुमसे पुछनेका मेरा अभी भी हक हे.. समजी..? कही नही जाना बैठो दोनो घरपे.. अगर जाना हेतो डीवोर्सके पेपरमे साइन करके जाओ..

पुनम : (गुस्सा करते) कीतने कमीने हो तुम.. मेरी मजबुरीका अच्छा फायदा उठा रहे हो.. जाओ नही करती साइन क्या करलोगे तुम..? ओर हम जायेगी भी.. जो तुमसे हो सके करलेना.. मे अभी चंदा भाभीको फोन करती हु..

धिरेन : (गुस्सा होते) ठीक हे.. जाओ दोनो.. मे भी देखता हु तुम कैसे जाती हो.. मे उनसे डरता नही हु.. वो भी तेरी ही तराह हे.. रंडी कहीकी.. पता नही मेरी पीठ पीछे उसने भी तेरे भाइके साथ क्या क्या गुलछने उडाइ हे.. तुम कान खोलकर सुनलो.. अगर तुमने इस घरकी चोखटके बहार कदम भी रखा तो भुल जाना इस घरको.. ये घर हमेसा हमेसाके लीये तुम्हारे लीये बंध.. फीर जहा जाना चाहती हो चली जाना..

पुनम : (जोरसे चीलाते) हां चली जाउगी.. मुजे नही चाहीये तुम्हारा ये घर.. मे तुम्हारी सकल भी देखना नही चाहती.. कीतने कमीने हो तुम.. अपनी मांके बारेमे अ‍ैसा बोलते हो..? तुमे डीवोर्स चाहीयेनां..? लाओ पेपर मे साइन करदेती हु.. फीर नही आउगी इधर.. लेकीन याद रखीयो.. ये पेपर तुम्हे भाभीकी हाजरी मे ही मीलेगा.. सबके सामने.. अगर हीमत हे तो हवेलीपे आकर लेजाना.. (दयाकी ओर देखते) दया बहेन.. हमारा कपडे वैगेरे जो भी सामान हे साथ लेलो.. अब हमे यहा कदम भी नही रखना..

कहा तो धिरेन मनमे खुस होते उपर अपने रुममे चला गया.. ओर डीवोर्सका पेपर फटाफट लेकर आ गया.. तो पुनमने गुस्सेमे आकर उनपे साइन करदी.. तब धिरेनके चहेरेपे कातील स्माइल आगइ.. तब दया भी अपना सब सामान पेक करने लगी.. तो पुनम साइन करके पेपरको साथ लेकर उपर चली गइ.. ओर अपना कपडा बेगमे पेक करते आंसु बहाने लगी.. उसने पेपरको भी बेगमे रखलीया ओर नीचे आगइ..

धिरेन : अगर सामान लेलीया हेतो देदो पेपर.. मे आज ही कोर्टमे सबमीट करवा दुगा.. ओर तुजे तेरी कोपी मील जायेगी.. समजी..? लाओ..

पुनम : (गुस्सेसे देखते) क्यु.. सुना नही तुमने..? अब ये पेपरतो सबकी हाजरीमे ही मीलेगा.. अगर हिंमत हे तो वहा आकर लेजाना..

धिरेन : (तील मीलाते) हां हां.. लेजाउगा.. मे कीसीके बापसे डरता नही हु.. जा चलीजा.. ओर हो सके तो ये बच्चा भी गीरा देना.. पता नही कीसका पाप मेरे पले बांध दीया.. कही अ‍ैसा ना होकी कल जाके ये मेरी प्रोपर्टीमे भाग मांगले..

इतना सुनते ही पुनमने अ‍ेक जोरका तमाचा धिरेनके गालपे जड दिया.. तो अचानक गालपे पडे तमाचेसे धिरेन भी सक्तेमे आ गया.. ओर अपना गाल सहेलाते बडी ओंखोसे सीर्फ पुनमको ही देखता रहा.. तब पुनम गुस्सेसे उनको देखते आंसु बहा रही थी.. फीर अपना सोफेपे बैठकर दोनो हाथसे अपना चहेरा छीपाते जोरोसे रोने लगी.. तो धिरेन उनको देखता ही रहा..

फीर गुस्सा करते अपनी बेग लेकर घरसे नीकल गया.. तो कुछ ही देरमे देवायत अपनी बडी कार लेकर आ गया.. तब मंजुकी संज्ञानमे सबकुछ आ चुका था.. ओर वो पुनम दयाको बुलाकर आती हु कहेते सबको कारमे ही बैठे रहेनेको कहेकर अकेली पुनमके घरमे चली गइ.. ताकी अंदर जो भी कुछ हुआ हे सबको पता ना चले.. जैसे ही मंजु अंदर गइ.. तब पुनक उनको देखते ही उनसे लीपट गइ.. ओर फुटफुटके रोने लगी..

मंजुला : (सांत करते सरको सहेलाते) बस.. बस कर मेरी बची.. बहार सब खडे हमारा इन्तजार कर रहे हे.. सांत होजा.. वरना बहार सबलोग सुनलेगे.. तुजे कुछ भी कहेनेकी जरुरत नही.. मुजे सब पता हे.. अ‍ेक दिन तो ये सब होना ही था..

पुनम : (रोते) दीदी.. मे क्या करु..? मेरे बच्चे ओर चंदा भाभीके बारेमे कैसा बोल रहा था.. दीदी.. आज मे आजाद हो गइ.. मेने करदी साइन उनको..

मंजुला : (आंसु पोछते) हां मेरी बच्ची.. सही कीया तुमने.. तेरा धिरेनके साथ सफर यही तक था.. अभी सांत होजा ओर जा अपना हुलीया ठीक करले.. हमे जाना भी हे.. बहार कारमे तेरे भाइ हमारा इन्तजार कर रहे हे.. जा फटाफट..

मंजुला : (पुनमके जाते ही मुस्कुराते) दया.. क्या कंपलीट होगइ..? तुने तेरी सभी तैयारीया करली हेनां..?

दया : (सर्मसार होते मुस्कुराते) जी दीदी.. कल रात ही सब कंपलीट करलीया था.. दीदी.. दोनोके बीच बहुत जगडा हुआ.. हमे जीजुने यहासे जानेके लीये केह दीया हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) दया तुम चीन्ता मत करो.. अब वैसे भी तुम दोनोका यहासे जानेका वक्त हो गया था..

पुनम : (मुह पोछते बहार आते) दीदी.. चलीये.. मे रेडी हु.. ओर ये हमारा सामान..?

मंजुला : (मुस्कुराते) अभी इसे यही रहेने दे.. हम वापसीमे ले लेगे.. या लखन लेलेगा.. वो भी आश्रमपे आ रहा हे.. तुम ताला लगाकर चाबी भीमाभाइके वहा दे देना.. वो वहासे लेलेगा.. चलो अब.. वही आश्रमपे जाकर हम आरामसे बात करेगे.. अभी वहा कीसीको कुछ मत कहेना..

कहा तो दयाने अपना जरुरी सामानका अ‍ेक बेग लेलीया.. ओर पुनमने घरको ताला लगा दीया.. ओर सब कारमे बैठने लगे.. तो दया रामुकाकाको देखते ही खुस होगइ.. ओर सरमाते उनके पैर छुलीया.. रामुकाका देवायतकी बगल वाली सीटमे बैठे थे.. तो पुनम देवायतको देखते ही सरमा गइ.. ओर मुस्कुराने लगी.. तो देवायतभी मुस्कुराते कारमे बैठनेका इसारा करता हे.. ओर सबलोग कारमे बैठ गये..

रामुकाका : (हसते) जीती रहो बेटा.. बेटीया बापके पैर नही छुती.. ओर आज तो खुसीओका दिन हे.. चल बैठजा.. हमे जल्द आश्रमपे पहोंचना हे..

फीर सबलोग बैठ गये तो मंजुने लताको फोन करदीया ओर उसे भी जल्द आश्रमके लीये नीकलने को कहा.. तो लता फटाफट लखनको जगा देती हे.. ओर रजीयाको सोने देती हे.. क्युकी रजीयाका अभी भी पीरीयड चल रहा था.. ओर आज लताका पीरीयड भी खतम हो गयाथा.. तो वो आज नहाकर कंपलीट होना चाहती थी.. तो वो सृतीको जगाकर नीलमको जगाने चली जाती हे.. फीर वो खुद नहाने जाते लखनको कहेती हे..

लता : (मुस्कुराते आंख मारते) जानु.. मेभी नहाने जा रही हु.. तो आप अ‍ेक काम करो.. नीचे जाकर भाभीका बाथरुम युज करलो.. ओर उसे जगाभी देना.. समज गयेनां..? हें..हें..हें..

लखन : (टोवेल लेकर खडा होते) लता.. तुम बहोत डेन्जर हो.. क्या सुबह सुबह अ‍ैसा काम करवा रही हो.. हें..हें..हें..

लता : (सरारतसे मुस्कुराते) अरे जाओना बाबा.. मेतो आपकी ओर पुनो दीदीकी मदद कर रही हु.. ओर वैसे भी आज भाभी अपने घर चली जायेगी.. तो क्या उनको आखरी बार नही मीलोगे..? देखना ज्यादा नही.. सीर्फ अ‍ेक बार.. वरना उनकी हालत खराब होजायेगी.. तो वहा सबको पता चल जायेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते बहार जाते) ओह.. गोड.. मेरी बीवीया मुजसे कैसे कैसे काम करवा रही हे..

लता : (हसते लखनको बहारकी ओर धका मारते) जाओ जाओ.. ज्यादा नौटंकी मत करो.. मुजे भी पता हे.. रातमे उनकी जमकर बजाकर आये हो.. तो आज आपको उनसे आखरी बार मीलना हे..

लखन लताकी ओर हसते जटसे नीचे चला गया.. देखा तो राधीकाका कमरा अभी भी बंध था.. जाहीरसी बात हे.. राधीका ओर रजीया जाने वाली नही थी.. तो लताने उसे इतनी जल्दी नही जगाया.. तभी लखन रमाके रुममे घुस गया ओर दरवाजा धीरेसे बंध करलीया.. देखा तो रमा पहेलेही जाग चुकी थी.. ओर अभी बाथरुममे नहा रही थी.. तो लखन मुस्कराने लगा..

ओर फटाफट अपने सकपडे नीकालके नंगा हो गया.. ओर रमाके नीकलनेका इन्तजार करते बैडपे बैठ गया.. ओर रमाको याद करते अपना लंड हीलाकर खडा करने लगा.. तब कुछ ही देरमे लखनके लंडमे तनाव आगया.. ओर स्टीलके रोडके माफीक सख्त हो गया.. तभी बाथरुमके दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ.. तो लखन जटसे बाथरुमके दरवाजेके पीछे चला गया....

कन्टीन्यु
 
YzYr.gif


my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
vekkam-shruti-haasan.gif


my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२७

ओर फटाफट अपने सकपडे नीकालके नंगा हो गया.. ओर रमाके नीकलनेका इन्तजार करते बैडपे बैठ गया.. ओर रमाको याद करते अपना लंड हीलाकर खडा करने लगा.. तब कुछ ही देरमे लखनके लंडमे तनाव आगया.. ओर स्टीलके रोडके माफीक सख्त हो गया.. तभी बाथरुमके दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ.. तो लखन जटसे बाथरुमके दरवाजेके पीछे चला गया.... अब आगे

देखा तो रमा सीर्फ ब्रा ओर पेन्टी पहेनकर अपने माथेपे टोलीया लपेटकर नीकलती हे.. जीसे देखते ही लखनका लंड जटके मारने लगा.. क्युकी इस रुपमे रमा बहुत ही कामुक ओर सेक्सी दीख रही थी.. वो बेडके पास जाकर माथेसे टोलीया नीकालती हे.. ओर अपने बालोको जटकने लगी.. तो लखनसे रहा नही गया.. ओर वो धीरेसे आकर रमाको पीछेसे अपनी बाहोमे भर लेता हे..

तो रमा गभराते जटसे पीछेकी ओर देखती हे.. तो पीछे लखनको पुरा नंगा देखा तो रमाने अ‍ेक पलतो लखनको देखते ही राहतकी सांसली.. लेकीन दुसरे ही पल लखनके इरादेको समजते ही वो जटसे पलट गइ.. ओर लखनको छोडनेकी मनते करने लगी.. लेकीन लखन कहा मानने वाला था.. ओर उपरसे लताका हुकुम भी था.. की वो रमाको आज आखरी बार मीलले.. तभी..

रमा : (धीरेसे दबी आवाजमे) लखनजी.. ये सुबह सुबह आप यहा क्या कर रहे हे..? छोडीये अगर कीसीने देखलीया तो मे बदनाम हो जाउगी..

लखन : (उतेजीत आवाजमे गलेको चुमते) भाभी.. आज तो आप चली जओगी.. फीर पता नही दुबारा कब हमे मीलनेका मोका मीलेगा.. तो अ‍ेक बार करलेने दीजीये.. मे आपके बीना नही रेह सकता..

35062.gif


रमा : (उतेजीत होते मदहोसीमे) ओह.. लखनजी.. आप समजते क्यु नही.. रातमे तो हमने कीया था.. ओर अबतो मे हमेसाके लीये आपकी होगइ हु.. हमे आगे मीलनेका बहुत मौका मीलेगा.. जब आपके भाइ खेतोपे होग.. तब आप मीलनेके लीये कभी भी मेरे घरपे आ सकते हो.. वरना फोन करना.. मे ही कुछ बहाना बनाकर आजाउगी..

लखन : (रमाके बुब्सको मसलते होठ चुमते) भाभी.. अब घर पेतो आता जाता रहुगा.. लेकीन आज आपपे बहुत प्यार आ रहा हे.. मत रोकीये मुजे.. मे आपके बीना नही रेह सकता.. सीर्फ अ‍ेक बार.. आपको इस रुपमे दखकर बहुत मन कर रहा हे..

रमा : (उतेजीत होते मदहोसीमे सरको सहेलाते) ओह.. लखनजी.. बीलकुल पागल हो.. इतना प्यार करते हो मुजसे..? करलो प्यार.. मे भी आपके बीना नही रेह सकती.. तो फीर बनालो मुजे अपनी बीवी.. मेने तो आपको पती मानलीया हे.. कर लीजीये प्यार.. लेकीन जटसे.. वरना कोइ जाग गया तो हमे देख लेगे..

cunnilingus-001.gif


कहेते रमा लखनकी बाहोमे समा गइ.. तो लखन बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. तो रमा भी लखनका साथ देने लगी.. दोनो पागलोकी तराह अ‍ेक दुसरेके चहेरेको चुमने लगे.. तभी अचानक लखनने रमाको पलटाते पीछे करदीया.. ओर रमाकी पेन्टीको खीचकर नीचे करदी.. फीर अपना लंड रमाकी चुतपे सेट करने लगा.. तबतक रमाकी चुत भी काफी गीली हो चुकी थी..

तो वोभी आगेसे लखनके लंडको पकडकर अपनी चुतका रास्ता दीखाने लगी.. ओर लखनने अ‍ेक ही जटकेो अपना लंड रमाकी चुतमे पीछेसे घुसा दीया.. तो रमाकी हल्कीसी चीखके साथ आंसु नीकल गये.. तो लखनने फौरन अपना हाथ रमाके मुहपे रख दीया.. ओर रमाके बुब्सको थामते अपनी कमर हीलाते रमाको जटसे चोदने लगा.. तो रमा भी थोडी जुक गइ.. ओर लखनके हर धकेको जेलने लगी..

black-white-porn-gif-001-22.gif


रमा : (मदहोसीमे धीरेसे) ल..ख..न.. आइइइ.. सीससस.. आह.. आह.. आह.. मर.. ग..इइइइइ.. प्लीज.. धीरे चोदीयेना दर्द होता हे.. मे कहा भागी जा रही हु.. आरामसे चोदीये.. आपने तो मुजे भी पागल करदीया हे..

लखन : (गलेको चुमते) भाभी.. हमे आश्रम भी जाना हे.. तो थोडा जल्दी कर रहा हु.. फीर आरामसे चोदनेके लीये मे वहा आउगा.. तब हम दोनो खुब मजे करेगे.. अब आपके बीना मजा नही आयेगा..

रमा : (चुदवाते हुअ‍े दर्दसे मुह बीगाडते) आपका मजा मेरी हालत खराब कर देता हे.. धीरे चोदीयेनां..

लखन रमाको पीछेसे जोरोसे अपनी कमर हीलाते चोदने लगा.. तब चोदते चोदते लखनने रमाकी ब्राका हुक भी खोल दीया.. तो रमाकी ब्रा नीचे गीर गइ.. तभी रमा बहुत उतेनीत होगइ.. ओर उनका तन अकडने लगा.. तो वो लखनसे चीपकनेके लीये अपनी कमर पीछे करते हीलाने लगी.. ओर कुछ ही देरमे लखनके लंडको अपने पानीसे भीगोने लगी.. फीर जडकर सांत होगइ..

तब लखन समज गयाकी रमा जड गइ हे.. तो लखनने फोरन अपने लंडको बहार खीचलीया.. ओर रमाको पीठके बल बेडके कीनारे लीटा दीया.. फीर उनके दोनो पैरोके बीच आकर खडे खडे लंडको रमाकी चुतमे घुसाने लगा.. तब रमा मुह बीगाडते हाथसे लखनको रोकनेकी कोसीस करने लगी.. लेकीन तबतक लखनने अ‍ेक धका मारते अपना लंड रमाकी चुतमे घुसा दीया था.. तो रमाकी फीरसे चीख नीकल गइ..

28504.gif


रमा : (मुह बीगाडते धीरेसे) आइइइइ... मर गइइइइ.. उइइइ मां... धीरे.. चो..दो.. दुखता.. हे..

रमा कुछ कहे इनसे पहेले ही लखन रमाकी धनाधन चुदाइ करने लगा.. तब रमाके दोनो बुब्स लखनके धकेसे तालमेलमे उछलने लगे.. ओर रमा दोनो हाथसे बेडसीटको पकडते मसलती रही.. ओर मछलीकी तराह छटपटाती रही.. लखन रमाकी अ‍ेक नही सुनता.. ओर रमाको लगातारा चोदता रहा.. तब रमाकी अ‍ेक बार फीर हालत खराब होने लगी.. ओर लखन उनके उपर छागया..

रमाको बाहोमे भीचते अपनी कमरको जटके देते पुरा लंड जड तक घुसा दीया.. ओर रमाकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तब रमाको अपनी बच्चेदानीपे गरमाहट महेसुस हुइ.. ओर जीनकी वजहसे वो भी उतेजनासे कांपते लखनको अपनी बाहोमे जोरोसे भीच लेती हे.. ओर अपनी कमरको जटके देते जडने लगी.. तब लखन रमाके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. ओर रमा अपनी सांसको कंट्रोल करते लखनकी पीठ ओर सरको सहेलाती रही..

24571969.gif


लखन : (भारी सांसोसे) भाभी.. आजतो सुबह सुबह मस्त कसरत हो गइ.. बहुत मजा आया..

रमा : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) हंम.. लेकीन आपकी कसरतने मेरी हालत खराब करदी उनका क्या..? लखनजी.. बस.. अ‍ैसे ही मुजे प्यार करते रहेना.. आपने मुजपे क्या जादु करदीया.. मे तो आपकी दिवानी होगइ.. आजसे सही मायनेमे आपही मेरे भरथार हो.. अब ये रमा पुरी जींदगी आपकी होगइ.. बस.. आपसे सीर्फ अ‍ेक ही बीनंती हे..

लखन : (समने देखते गालको चुमते) क्या..?

रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) लखनजी.. बस.. ओर कुछ नही.. लेकीन अब हम दोनो जब भी अकेले हो मुजे भाभी मत कहेना.. सीर्फ नामसे बुलाना.. मेने आजसे आपको अ‍ेक पतीका हक दीया हे..

लखन : (मुस्कुराते) बस.. सीर्फ इतनीसी बात.. ठीक हे रमा डार्लींग.. लेकीन अब आप भी मुजे लखनजी नही.. सीर्फ लखन कहेकर बुलायेगी.. रमा.. तुम फीकर मत करना.. मे तेरा पती होनेका पुरा फर्ज नीभाउगा..

रमा : (सरमाते धीरेसे) जी.. अब उपरसे हटीये.. वरना आपका फीरसे मुड बन जायेगा.. देखो अभी भी अंदर बहुत सख्त लग रहा हे.. ओर हमे जाना भी हे.. आपने तो मुजे पुरी गंदी करदी.. अब दुबारा नहाना पडेगा.. जाइअ‍े अब.. अब हम घरपे मीलेगे.. तब जीतनी मर्जी हो उतना प्यार करलीजीयेगा..

कहा तो लखन अपने तनपे टोलीया लपेटकर जटसे बाथरुममे घुस गया.. ओर नहाकर बहार नीकल गया.. ओर दोडकर उपर अपने रुमकी ओर चला गया.. तो सृती कंपलीट होकर बहार नीकल ही रही थी.. ओर उसने लखनको इस हालतमे देख लीया.. तो सृती समज गइ की लखन रमाकी बजाकर आ रहा हे.. जब दोनोकी आंख मीली तो लखन सृतीको इग्नोर करते अपने रुममे चला गया.. ओर सीधा अपने रुममे घुस गया..
 
तो लखनने सृतीको इग्नोर कीया तो सृतीको अच्छा नही लगा.. ओर उनकी आंख गीली होगइ.. ओर वो जटसे नीचे आगइ.. देखा तो लता कीचनमे चाइ नास्ता बना रही थी.. तबतक राधीका ओर रजीया भी जाग चुकी थी ओर कंपलीट हो रही थी.. राधीका कंपलीट होकर अपनी मम्मीको भी सभी कार्य करवाके कंपलीट कर रही थी.. ओर सृती धीरेसे कीचनमे लताके पास चली गइ.. ओर उनकी कदद करने लगी..

सृती : (मनमे) हे भगवान.. अब लतासे कैसे कहु..? की उनका पती मुजसे नाराज हे.. मेरे सामने भी नही देखते.. ओर अ‍ेक ये रमाभाभी हे.. कीतनी खुसनसीब हे.. उनको हर रात वो सब प्यार मील रहा हे.. जीनकी मुजे सख्त जरुरत हे.. क्या कसुर था मेरा..? सीर्फ अ‍ेक छोटीसी गलती ही हुइ हे.. जो मेने उनको खरी खोटी सुनाइ.. मेभी कीतनी कमीनी हु.. क्या जरुरत थी उनको सब सुनानेकी..?

करने देती उनको सब.. कीतना मजा आरहा था.. अ‍ेक दिन तो ये सब होने ही वाला हे.. तो फीर क्या जरुरत थी मुजे देवुके बारेमे सोचनेकी..? ज्यादा से ज्यादा उस दिन मुजे चोद लेते.. ओर क्या..? वैसे भी उस दिन वहा देखने वाला भी कौन था.. सीर्फ मंजु ओर पुनोदीको ही पता चलता.. लेकीन वो दोनोभी तो यही चाहती हे.. की मे लखनसे चुदवालु.. अबतो मौका हाथसे नीकल गया.. पता नही ये अब कब मुजसे बात करेगे..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. सुबह सुबह क्या सोचमे पड गइ..? तबीयत ठीक नही हे क्या..?

सृती : (जेंपते) हंम..? हां.. हां लता.. तबीयत बीलकुल ठीक हे.. क्या मेरा देवर जाग गया..? हमे जाना हेनां..

लता : (मुस्कुराते) हां.. पहेले उनको ही जगाया.. हम चाइ नास्ता करके नीकल जायेगे..

rashami-desai-indian-television-actress.gif


सृती लखनके बारेमे लतासे बात करना चाहती थी.. लेकीन उनकी हिंमत नही हुइ.. ओर वो चुपचाप लताकी मदद करती रही.. तो दुसरी ओर लता भी सृतीकी मनोदसा समजते मनमे हस रही थी.. फीर सब साथमे बैठकर चाइ नास्ता करने लगे.. तो रजीया राधीकाकी मम्मीको चाइ नास्ता खीला रही थी.. तब भी सृती बार बार लखनकी ओर दया भावसे देखती रही.. लेकीन फीर भी लखनने सृतीकी ओर देखा तक नही.. तभी..

लखन : लता.. मे हमारी जीप ले लेता हु.. तुम सबका सामान उनमे रख देना.. फीर हमे जीपको वही छोडकर वापस आना हे.. यहाके लीये हम दुसरी कार ले लेगे..

सृती : (लखनसे बात करनेका मौका मीलते ही) अरे बाबा मेने कहा तो हे की हम यही कारसे अ‍ेडजेस्ट करलेगे.. तो दुसरी कार लेनेकी क्या जरुरत हे..?

लता : (बातको सम्हालते लखनकी ओर देखते) नही भाभी.. आप तो अपने घर जाना चाहती हेनां..? तो आपको भी तो कार चाहीये.. इसीलीये आपके देवरने कहा हे.. हम यहाके लीये दुसरी कार ले लेगे..

कहा तो सृती सोक्ट होते अ‍ेक नजरसे लखनकी ओर देखती रही.. उसे जल्द बाजीमे कही हुइ बातोसे अपनी गलतीका अहेसास होगया.. उनके पास लताको देनेके लीये कोइ जवाब नही था.. ओर उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. तो उसने फटाफट अपने आंसु पोछ लीये.. आज उसे लखनके साथ कीया हुआ व्यवहारसे बहुत पछतावा होने लगा.. ओर वो चाइ नास्ता करते खडी होगइ.. ओर लताके सामने देखकर कहा..

सृती : ठीक हे.. हम जा रहे हे.. तो फीर तुम लोग मेरी कारमे तो बैठोगीनां..?

लता : (सोक्ट होते आस्चर्यसे देखते) भाभी.. कैसी बाते कर रही हे..? आप हमे अ‍ैसा क्यु पुछ रही हे..? जरुर बैठेगी.. ओर ये कार लेनेका नीर्णय मेरा नही हे.. आपके देवरका हे..

सृती : (गलतीका अहेसास होते ही) ओह.. सोरी.. मेरे मुहसे अ‍ैसे ही नीकल गया.. चलो मे अपना बेग लेकर आती हु.. तुम भी अपना सब सामान लेलो.. हमे नीकलना हे.. मंजुदीका भी फोन आगया हे..

फीर सब लोग अपना अपना सामान लेकर लखनकी जीपमे रखने लगे.. ओर सृतीने अपनी कार लेली.. तो लता नीलम ओर रमा उसमे बैठ गइ.. ओर लखनने अपनी जीप लेली.. फीर सब लोग राधीका रजीयाको बाय करते आश्रमकी ओर नीकल गये.. सृती लखनके पीछे ही कार चलाने लगी.. तो दुसरी ओर मंजु देवायत पहेले ही आश्रम पहोंच चुके थे.. ओर सब लोग बाबाके पास बैठे थे..

तो आज पुनमका मन कही नही लग रहाथा.. वो बार बार दरवाजेकी ओर देखते परेसान हो रही थी.. क्युकी आज कइ दिनोके बाद वो लखनको मीलने वाली थी.. तब मंजु उनकी मनोदसा समज गइ.. ओर उसने धीरेसे पुनमका हाथ पकड लीया.. तो पुनम उनकी ओर देखके सरमा गइ.. तो मंजु मुस्कुराने लगी.. फीर धीरेसे उनके कानमे कहा..

मंजुला : फीकर मत कर मेरी बच्ची.. बस.. वो अभी आजायेगा.. तब मीललेना उनको..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. वो.. मेतो बस अ‍ैसे ही देख रही थी..

तो इधर पुरे रास्ते सृती खामोस रहेते सोचमे डुबी रही.. उसे लखनके साथ कीये बरतावपे पछतावा हो रहा था.. तब अ‍ेक घंटेके बाद लखन ओर सृती भी अपनी कारसे आश्रमपे पहोंच गये.. तो लखन अपनी जीप पार्क करते सीधा अंदर चला गया.. उसने सृतीकी कारकी ओर देखा तक नही.. ओर बाबाको प्रणाम करने लगा.. तो बाबा हसते हुअ‍े लखनकी पीठमे मुका मारते हे.. ओर उनको आशीर्वाद देते हे..

तब पुनम लखनको देखते ही खुसीके मारे आंसु बहाने लगी.. जी तो चाहता था की अभीके अभी लखन भैयाको गले मीलकर उनकी बाहोमे समा जाये.. लेकीन सबकी हाजरीकी वजहसे उन्होने अपनी भावनाओपे कंट्रोल रखा.. ओर लखनकी ओर आंसु नीकलनेके बावजुद हसते हुअ‍े देखने लगी.. तब पुनमको आंसु बहाते देखकर लखनकी आंख भी गीली होगइ.. ओर वो पुनमकी ओर देखते हसता रहा..

तो बहारकी ओर चारो कारसे उतरते ही होलकी ओर जाने लगी जहा बाबा बैठते हे.. तब रमाकी सुबह सुबह ही कुटाइ हो गइ थी.. तो वो थोडा लंगडाते धीरे धीरे चल रही थी.. तो लता सृती ओर नीलम भी उनके साथ चलने लगी.. लता रमाकी चाल देखते मन ही मनह हसते खुस हो रही थी.. तभी सृती लता ओर नीलम रमाके साथ धीरे धीरे चलते अंदर आगये.. ओर बाबाका आशीर्वाद लेते वही बैठ जाते हे..

तो पुनम ओर मंजुने चारोको आते हुअ‍े देख लीया.. तब रमाकी चाल देखते ही मंजु ओर पुनम खुस होते अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर मुस्कुराती रही.. जैसे उसने रमासे कोइ बडा बदला लेलीया हो.. सृती ओर लता पुनमके पास जाकर बैठ गइ.. तो लता पुनमके कानके पास मुह लेजाकर रमा ओर लखनके बारेमे हस हसके बाते करने लगी.. जीसे सुनकर पुनम भी हसने लगी.. तभी..

बाबा : (मुस्कुराते) मंजु बेटोे सब लोग आगये हे.. तो हम चले..? वहा सब रेडी हे..

मंजुला : (मुस्कुराते खडी होते) जी बाबा चलीये.. बस.. इन्ही लोगोका इन्तजार था..

फीर सब लोग खडे होगये.. ओर मंदिरकी ओर जाने लगे.. तभी पुनमने लखनको आंखोके इसारोसे रुकनेके लीये कहा.. तो लखन जानबुजकर सबके पीछे होगया.. तो पुनम भी सबके पीछे रेह गइ.. ओर लखनके साथ पीछे चलने लगी.. जैसे ही सबलोग होलसे बहार नीकल गये.. तो पुनमने लखनको हाथ पकडकर रोक लीया.. ओर साइडमे चली गइ.. तब होलके ओर कोइ नही था..

3.gif


ओर पुनम जोरोसे लखनकी बाहोमे लीपट गइ.. ओर उनके गलेमे दोनो हाथ डालकर सीनेपे सर रखके दबी आवाजमे रोने लगी.. तब लखनने बडी मुस्कीलसे उनको सम्हाला ओर सांत कीया तब पुनम लखनकी आंखोमे दया भावसे देखने लगी.. तब लखनको उनकी आंखोमे सीर्फ पस्च्याताप ही दीख रहा था.. तब पुनमकी आंख अ‍ेक बार फीर गीली होगइ.. ओर लखनकी बाहोमे समा गइ..
 
Back
Top