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जैसे ही मंजु गइ लखन बाथरुमकी ओर जाते रुक गया.. ओर बहार नीकलकर देखने लगा तो मंजु नीचेकी ओर जा रही थी.. तब लखन धीरेसे रमाके कमरेकी ओर गया.. तो अंदर जाते देखा तो रमा अपना गाउन पहेन रही थी.. ओर नीलम अब भी घोडे बेचके सो रही थी.. लखनने रमाको धीरेसे इसारा कीया.. तो रमा लखनको देखते ही जटसे नीलमकी ओर देख लेती हे..
फीर नीलमको सोती हुइ देखकर मुृ्कुराते लखनको नां मे गरदन हीलाते मना करती हे.. लेकीन लखन उनको दरवाजा खोलनेकी जीद करने लगा.. तब रमा नीलमकी ओर देखते भारी धडकनके साथ धीरेसे दरवाजा खोलती हे.. तो लखन जटसे अंदर आगया ओर दरवाजा बंध करके रमाका हाथ पकडकर उसे बाथरुममे ले गया.. तो रमा सर्मसार होते नीलमकी ओर देखते लखनके पीछे खीची चली गइ..
रमा : (अंदर जातेही दबी आवाजमे) लखनजी.. क्या कर रहे हे..? नीलु अभी जाग जायेगी.. अगर कीसीको पता चल गया तो..? छोडीयेना हम बादमे मीलते हेनां.. मेरे घरपे..
लखन : (दरवाजाज बंध करके बाहोमे भीचते) नही भाभी.. पता नही आपने मुजपे क्या जादु करदीया हे.. मेतो रातमे भी आया था.. लेकीन आप दोनो अेक दुसरेके साथ लगी हुइ थी.. भाभी.. आप बहुत खुबसुरत हो.. क्या मस्त लग रही हो.. मे तो आपका दिवाना हो गया हु.. बस.. सीर्फ अेक बार.. अभी फटाफट होजायेगा.. कल तो आपकी ननंद भी नीचे थी..
रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) तो फीर रातको ही बुलाना चाहीयेनां.. मे आजाती.. अगर हम मां बेटी साथमे थी तो क्या हुआ..? हमारे पास कीतना अच्छा मौका था.. मुजे तो लगता हे अब नीलु भी हम दोनोके बारेमे जान चुकी हे.. लखनजी.. वैसे क्या सचमे मे आपको खुबसुरत लगती हु..?
लखन : (होंठ चुमते) हां भाभी.. आपकी कसम.. मे सच केह रहा हु.. पता नही आप चली जाओगी तो मेरा क्या होगा.. भाभी.. गाउन नीकालीयेना.. फीर मुजे भी जाना हे..
रमा : (सरमाते गाउन नीकालते धीरेसे) लखनजी.. आप बहुत बदमास हो.. मेरी मानोगे तो नही.. लीजीये.. नीकाल दीया.. अब जो भी करना हो फटाफट करलो.. वरना नीलु कभी भी जाग सकती हे..
तभी लखन रमाको पीछेसे बाहोमे भरलेता हे.. ओर दोनो हाथोसे रमाकी चुचीओको मसलते रमाकी चुतमे पीछेसे ही लंडको घुसा देता हे.. तब रमाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर लखन रमाके बुब्सको मसलते पीछे कमर हीलाते रमाको धनाधन चोदने लगा.. तो रमा भी कामातुर होते मदहोस हो गइ थी.. ओर अपना पीछवाडा पीछे धकेलते लखनको चुदवानेमे साथ देने लगी..
लखनने रमाको फटाफट चोदकर दो बार जडा दीया.. ओर अपना माल भी रमाकी चुतमे उडेल दीया.. अब रमाको लखनसे चुदवानेमे इतनी तकलीफ नही होती थी.. जो पहेली दुसरी बारमे हुइ थी.. फीर लखन अपने कपडे पहेनकर रमाके होठोको चुमकर बहार आगया.. जैसे ही लखन बहार नीकला नीलम बेडपे अपनी आंखोको मलते बैठी थी..ओर रमा दरवाजा बंध करके अपना नीत्य क्रम करते नहाने लगी..
तो लखनको बाथरुमसे नीकलते देखकर नीलम चोंक गइ.. फीर सबकुछ समज गइ ओर लखनकी ओर देखते सरमाकर मुस्कुराने लगी.. तो लखन अपने नाकपे उंगली रखते नीलमको चुप रहेनेका इसारा करते उनके पास चला गया.. ओर नीलम बैठी थी वही बैठकर बाहोमे भरते उनके होठोको चुमते नीलमके बुब्सको मसल दीया.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनके सीनेपे मुका मारते धीरेसे कहा..
नीलम : (मुस्कुराते दबी आवाजमे) क्या जीजु.. सुबह सुबह ही सुरु हो गये..? अंदर मांको तो नीपटाकर आये.. अब बेटी.. कुछ तो सरम करो.. अगर कीसीको पता चल गया तो क्या सोचेगे..? मम्मी अंदर हेनां..?
लखन : (होंठ चुमते) हां नीलु.. क्या करु.. तेरी मम्मी भी तेरी तराह बहुत मस्त हे.. तो मे नही रेह पाया.. बस.. कीसीको कहेना नही वरना बेचारी मुसीबतमे फस जायेगी.. चल मे चलता हु.. सहेर जाना हे.. क्या तु साथ चलेगी..? चलना दोनो मस्तीया करेगे..
नीलम : (नां मे गरदन हीलाते) नही नही.. मुजे जोखीम नही लेना.. मेने देखी हे मम्मीकी हालत.. आप ही जाओ.. वरना वहा मेरे साथ आप कुछ ना कुछ सरारत करोगे.. हें..हें..हें..
लखन : (बुब्सको दबाते होंठ चुमते) नही नीलु.. वोतो हमारी स्पेसीयल नाइट होगी.. वो भी कीसी होटेल या आउट ओफ स्टेशन.. क्या चलोगीनां..? चल तो फीर मे चलता हु.. अब तो हम दोनो सहेरमे ही मीलेगे..
नीलम : (मनमे खुस होते हां मे गरदन हीलाते) हां.. चलुगी.. लेकीन होटेलमे नही.. आउट ओफ स्टेशन.. जहा सीर्फ हम दोनोके अलावा कोइना हो.. (होठोको चुमकर) जीजु.. आइ लव यु.. अब जाओ भी.. वरना मम्मी आजायेगी..
फीर लखन फटाफट यहासे नीकलकर बाथरुममे घुस गया ओर नहाकर कंपलीट हो गया.. फीर नीचे आगया तो रमा नीलम भी कंपलीट होकर नीचे आगइ थी.. नीलम लखनको देखकर मुस्कुराते अपनी मम्मीकी ओर देखने लगी.. लखनने भी हसते हुअे नीलमको बडी आंख करते ना मे गरदन हीलाइ.. फीर बाकीके सबलोग कंपलीट होकर आने लगे.. ओर डाइनींगपे बैठ गये..
तो आज भी पुनम लखनके पास बैठी थी.. जो अभी नीचेसे लखनके पैरोको अपने पैरसे सहेला रही थी.. जैसे दो प्रेमी हो.. तभी लखनने भी अेक हाथ नीचे लेजाकर पुनमके हाथोमे उंगलीया फसाली.. तो पुनमने भी लखनके हाथोमे उगलीया कसके फसादी.. सबलोग चाइ नास्ता कर रहे थे तब लखन ओर पुनमका चाइ नास्ता करते भी सबसे छुपछुपके प्यारका खेल चल रहा था.. पुनमकी चुत गीली होने लगी.. तभी..
देवायत : लखन.. तुम नास्ता करके फटाफट नीकलो.. जानेमे ही अेक घंटा लग जायेगा..
लखन : (मुस्कुराते) जी भैया.. अभी जाता हु.. (पुनमकी ओर देखते) क्या कीसीको मेरे साथ चलना हे..?
मंजुला : (दोनोका खेल समज गइ तो कातील नजरोसे मुस्कुराते) नही बी..टु.. कीसको साथ नही चलना तुम अकेले ही चले जाओ.. ओर सबको लेकर फटाफट आजाओ.. क्या तुजे सादीमे नही जानां..?
लखन : (सरमाते मुस्कुराते) जी भाभीमां.. जाना हे.. ठीक हे अकेला ही चला जाता हु..
कहा तो पुनम सरमाकर मुस्कुराने लगी.. ओर उसने लखनका हाथ फौरन छोड दीया.. क्युकी उसे पता थाकी अभी उनके ओर लखनके बीच जोभी हरकते हो रही थी.. वो सब मंजु जानती होगी.. ओर पुनम मंजुकी ओर सरमाते देखने लगी.. तो मंजु उनको ही देखते हस रही थी.. पुनम बहुत ही सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. फीर लखन चाइ नास्ता करके देवायतकी बडी कार लेकर सहेरकी ओर नीकल गया..
फीर नीलमको सोती हुइ देखकर मुृ्कुराते लखनको नां मे गरदन हीलाते मना करती हे.. लेकीन लखन उनको दरवाजा खोलनेकी जीद करने लगा.. तब रमा नीलमकी ओर देखते भारी धडकनके साथ धीरेसे दरवाजा खोलती हे.. तो लखन जटसे अंदर आगया ओर दरवाजा बंध करके रमाका हाथ पकडकर उसे बाथरुममे ले गया.. तो रमा सर्मसार होते नीलमकी ओर देखते लखनके पीछे खीची चली गइ..
रमा : (अंदर जातेही दबी आवाजमे) लखनजी.. क्या कर रहे हे..? नीलु अभी जाग जायेगी.. अगर कीसीको पता चल गया तो..? छोडीयेना हम बादमे मीलते हेनां.. मेरे घरपे..
लखन : (दरवाजाज बंध करके बाहोमे भीचते) नही भाभी.. पता नही आपने मुजपे क्या जादु करदीया हे.. मेतो रातमे भी आया था.. लेकीन आप दोनो अेक दुसरेके साथ लगी हुइ थी.. भाभी.. आप बहुत खुबसुरत हो.. क्या मस्त लग रही हो.. मे तो आपका दिवाना हो गया हु.. बस.. सीर्फ अेक बार.. अभी फटाफट होजायेगा.. कल तो आपकी ननंद भी नीचे थी..
रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) तो फीर रातको ही बुलाना चाहीयेनां.. मे आजाती.. अगर हम मां बेटी साथमे थी तो क्या हुआ..? हमारे पास कीतना अच्छा मौका था.. मुजे तो लगता हे अब नीलु भी हम दोनोके बारेमे जान चुकी हे.. लखनजी.. वैसे क्या सचमे मे आपको खुबसुरत लगती हु..?
लखन : (होंठ चुमते) हां भाभी.. आपकी कसम.. मे सच केह रहा हु.. पता नही आप चली जाओगी तो मेरा क्या होगा.. भाभी.. गाउन नीकालीयेना.. फीर मुजे भी जाना हे..
रमा : (सरमाते गाउन नीकालते धीरेसे) लखनजी.. आप बहुत बदमास हो.. मेरी मानोगे तो नही.. लीजीये.. नीकाल दीया.. अब जो भी करना हो फटाफट करलो.. वरना नीलु कभी भी जाग सकती हे..
तभी लखन रमाको पीछेसे बाहोमे भरलेता हे.. ओर दोनो हाथोसे रमाकी चुचीओको मसलते रमाकी चुतमे पीछेसे ही लंडको घुसा देता हे.. तब रमाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर लखन रमाके बुब्सको मसलते पीछे कमर हीलाते रमाको धनाधन चोदने लगा.. तो रमा भी कामातुर होते मदहोस हो गइ थी.. ओर अपना पीछवाडा पीछे धकेलते लखनको चुदवानेमे साथ देने लगी..
लखनने रमाको फटाफट चोदकर दो बार जडा दीया.. ओर अपना माल भी रमाकी चुतमे उडेल दीया.. अब रमाको लखनसे चुदवानेमे इतनी तकलीफ नही होती थी.. जो पहेली दुसरी बारमे हुइ थी.. फीर लखन अपने कपडे पहेनकर रमाके होठोको चुमकर बहार आगया.. जैसे ही लखन बहार नीकला नीलम बेडपे अपनी आंखोको मलते बैठी थी..ओर रमा दरवाजा बंध करके अपना नीत्य क्रम करते नहाने लगी..
तो लखनको बाथरुमसे नीकलते देखकर नीलम चोंक गइ.. फीर सबकुछ समज गइ ओर लखनकी ओर देखते सरमाकर मुस्कुराने लगी.. तो लखन अपने नाकपे उंगली रखते नीलमको चुप रहेनेका इसारा करते उनके पास चला गया.. ओर नीलम बैठी थी वही बैठकर बाहोमे भरते उनके होठोको चुमते नीलमके बुब्सको मसल दीया.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनके सीनेपे मुका मारते धीरेसे कहा..
नीलम : (मुस्कुराते दबी आवाजमे) क्या जीजु.. सुबह सुबह ही सुरु हो गये..? अंदर मांको तो नीपटाकर आये.. अब बेटी.. कुछ तो सरम करो.. अगर कीसीको पता चल गया तो क्या सोचेगे..? मम्मी अंदर हेनां..?
लखन : (होंठ चुमते) हां नीलु.. क्या करु.. तेरी मम्मी भी तेरी तराह बहुत मस्त हे.. तो मे नही रेह पाया.. बस.. कीसीको कहेना नही वरना बेचारी मुसीबतमे फस जायेगी.. चल मे चलता हु.. सहेर जाना हे.. क्या तु साथ चलेगी..? चलना दोनो मस्तीया करेगे..
नीलम : (नां मे गरदन हीलाते) नही नही.. मुजे जोखीम नही लेना.. मेने देखी हे मम्मीकी हालत.. आप ही जाओ.. वरना वहा मेरे साथ आप कुछ ना कुछ सरारत करोगे.. हें..हें..हें..
लखन : (बुब्सको दबाते होंठ चुमते) नही नीलु.. वोतो हमारी स्पेसीयल नाइट होगी.. वो भी कीसी होटेल या आउट ओफ स्टेशन.. क्या चलोगीनां..? चल तो फीर मे चलता हु.. अब तो हम दोनो सहेरमे ही मीलेगे..
नीलम : (मनमे खुस होते हां मे गरदन हीलाते) हां.. चलुगी.. लेकीन होटेलमे नही.. आउट ओफ स्टेशन.. जहा सीर्फ हम दोनोके अलावा कोइना हो.. (होठोको चुमकर) जीजु.. आइ लव यु.. अब जाओ भी.. वरना मम्मी आजायेगी..
फीर लखन फटाफट यहासे नीकलकर बाथरुममे घुस गया ओर नहाकर कंपलीट हो गया.. फीर नीचे आगया तो रमा नीलम भी कंपलीट होकर नीचे आगइ थी.. नीलम लखनको देखकर मुस्कुराते अपनी मम्मीकी ओर देखने लगी.. लखनने भी हसते हुअे नीलमको बडी आंख करते ना मे गरदन हीलाइ.. फीर बाकीके सबलोग कंपलीट होकर आने लगे.. ओर डाइनींगपे बैठ गये..
तो आज भी पुनम लखनके पास बैठी थी.. जो अभी नीचेसे लखनके पैरोको अपने पैरसे सहेला रही थी.. जैसे दो प्रेमी हो.. तभी लखनने भी अेक हाथ नीचे लेजाकर पुनमके हाथोमे उंगलीया फसाली.. तो पुनमने भी लखनके हाथोमे उगलीया कसके फसादी.. सबलोग चाइ नास्ता कर रहे थे तब लखन ओर पुनमका चाइ नास्ता करते भी सबसे छुपछुपके प्यारका खेल चल रहा था.. पुनमकी चुत गीली होने लगी.. तभी..
देवायत : लखन.. तुम नास्ता करके फटाफट नीकलो.. जानेमे ही अेक घंटा लग जायेगा..
लखन : (मुस्कुराते) जी भैया.. अभी जाता हु.. (पुनमकी ओर देखते) क्या कीसीको मेरे साथ चलना हे..?
मंजुला : (दोनोका खेल समज गइ तो कातील नजरोसे मुस्कुराते) नही बी..टु.. कीसको साथ नही चलना तुम अकेले ही चले जाओ.. ओर सबको लेकर फटाफट आजाओ.. क्या तुजे सादीमे नही जानां..?
लखन : (सरमाते मुस्कुराते) जी भाभीमां.. जाना हे.. ठीक हे अकेला ही चला जाता हु..
कहा तो पुनम सरमाकर मुस्कुराने लगी.. ओर उसने लखनका हाथ फौरन छोड दीया.. क्युकी उसे पता थाकी अभी उनके ओर लखनके बीच जोभी हरकते हो रही थी.. वो सब मंजु जानती होगी.. ओर पुनम मंजुकी ओर सरमाते देखने लगी.. तो मंजु उनको ही देखते हस रही थी.. पुनम बहुत ही सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. फीर लखन चाइ नास्ता करके देवायतकी बडी कार लेकर सहेरकी ओर नीकल गया..