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सृती : (जोरोसे हसते) क्या..? हें..हें..हें.. दीदी.. देखना.. कही वोभी हमारी सासुमां ना होजाये.. हें..हें..हें..
पुनम : (मुस्कुराते) नही.. नही होगी.. आप फीकर मत करो.. वो सादी ही नही करेगी.. वो उसुलकी पकी हे.. इनके बारेमे हम बादमे बात करेगे.. लगता हे.. हमारी सासुमां मुजे बुला रही हे.. मे फोन रखती हु.. बाय..
सृती : (मुस्कुराते) हंम.. वाकइ सासुमां आपपे महेरबान हे.. हें..हें..हें.. बाय..
दो घंटेके बाद लखन अपनी नइ कार लेकर घरपे आजाता हे.. तो पीछे आज नीलम भी नया स्कुटर अकेली चलाकर आगइ.. जीसे देखकर रजीया बहुत खुस हुइ.. लखन सृतीको भी गोदमे उठाकर नीचे लेकर आ गया.. फीर रजीया नीलम ओर सृतीने मीलकर कारकी पुजाकी.. लखनने तीनोको अंदर बीठाकर अेक चकर लगवाया.. ओर रास्तेसे मीठाइआ लेकर घरपे आ गये..
रजीया राधीकाकी मम्मीको खाना खीला चुकी थी.. लखनने पहेरे राधीकाकी मम्मीका मुह मीठा करवाया.. फीर बारी बारी सबका मुह मीठा करवाया.. ओर खानेके लीये बैठ गये.. तो आज सृती भी सबके साथ खानेके लीये बैठ गइ.. लखनने उनको अपने हाथोसे खीलाया.. इसी तराह रजीया राधीका ओर नीलुको भी खीलाया तो तीनो खुस होगइ.. तो सृती भी लखनको खीलाने लगी..
सृती : (मुस्कुराते) भाइ.. आजका दिन कीतना अच्छा हे.. आज आप भी मेरे हाथसे खालो..
रजीया : (मुस्कुराते) दीदी.. कार तो बहुत बडी हे.. क्या मस्त दीखती हे..
सृती : (मुस्कुराते) रजु दीदी.. अब हम सब अेक ही कारमे कही भी जा सकते हे.. ओर ये पुनो दीदीकी पसंदकी कार ली हे.. तो अच्छी ही होगीनां..?
चारो बाते करते खाना खा रहे थे.. तभी सृती नीचेसे लखनके पैरोको सहेला रही थी.. ओर बार बार अपना हाथ लखनकी जांघोपे रखते सहेलाती थी.. जीसे लखनका लंडभी अंगडाइआ लेके जटके मार रहा था.. फीर सबने खाना खालीया तब लखन सृतीको लेकर उनके रुममे छोडने चला गया.. ओर रजीया नीलम मीलकर घरका काम समेटने लगी.. अब सृतीके उपर प्यारका परवाना बीलकुल छाया हुआ था..
जैसे ही लखनने सृतीको बेडपे बीठाया सृतीने लखनको हाथ पकडक खीचके अपने उपर गीराया.. तो लखन सृतीके उपर गीरके लेट गया.. सृतीने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. आखीर लखनभी अेक मर्द था.. सृती कबसे उनको छेड रही थी.. तो लखन भी मदहोस होने लगा.. ओर सृतीके बुब्सको मसलते सृतीके होठोको चुमने लगा..
सृती : (मदहोसीमे वासना भरी नजरोसे) भाइ.. मुजसे रहा नही जाता.. मुजे अपनी आगोसमे समालो..
लखन : (मदहोसीमे) दीदी.. बस.. थोडासा कंट्रोल करलो.. आपकी सभी तम्मना जल्द पुरी करदुगा..
सृती : (प्यारसे आंखोमे देखते धीरेसे) भाइ.. वही तो नही होता.. अब तो थोडासा भी कंट्रोल नही होता.. कबतक तडपाओगे मुजे.. भाइ.. मुजे भी वो सुख चाहीये.. मुजे समालो आपके अंदर..
लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) दीदी.. लगता हे आज तो आप पका मेरा रेप करदोगी.. हें..हें..हें..
सृती : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) ओर नही तो क्या..? भाइ.. अपनालो मुजे.. बनालो अपनी सुहागन.. अब तो मे बडे भैयाकी बीवी भी नही हु.. आप भरदो मेरी मांग.. मे हमेसा हमेसाके लीये आपकी होजाना चाहती हु..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. प्लीज.. मेरी खातीर.. बस.. थोडासा इन्तजार करलो.. बस कुछ होगा जो आप चाहती हो.. लेकीन इसके लीये मेने अेक खास दिन चुना हे.. बस.. थोडासा इन्तजार.. प्ली..ज..
सृती : (होंठ चुमकर मुस्कुराते) ठीक हे भाइ.. आप कहेतेहो तो मे इन्तजार करलुगी.. लेकीन याद रखना.. ओर ज्यादा इन्तजार नही कर सकती.. वरना इस बार पका आपका रेप करदुगी.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते उपरसे हटते) ठीक हे स्वीट हार्ट.. तो फीर आज सरप्राइजके लीये तैयार रहेना..
सृती : (मनमे खुस होते मुस्कुराते) आज ही..? ठीक हे भाइ.. पका.. मे रडी हु..
फीर लखन नीचे आगया.. तो रजीया ओर नीलम कीचनमे बर्तन रख रही थी.. तो लखन वहा चला गया.. ओर नीलमके सामनेही रजीयाको बाहोमे भरते होठोको चुमने लगा.. तो रजीया नीलमकी ओर देखते सरमा गइ.. ओर लखनको हटानेकी कोसीस करने लगी.. तो नीलम भी दोनोका प्यार देखकर सरमा गइ.. ओर हसती रही.. वो सरमके मारे बहार जाने लगी तो लखनने उनका हाथ भी पकड लीया..
रजीया : (सर्मसार होते लखनपे जुठा गुस्सा करते) कुछ तो सरम करो.. घरमे अेक जवान बच्ची हे.. ओर उनके सामने ही आप सुरु होगये..
लखन : (मुस्कुराते) अरे ये तो मेरी साली हे.. ओर साली आधी घरवाली भी होती हे.. तो उनके सामने क्या सरमाना.. सुन.. तुम दोनोसे अेक बात करनी हे..
रजीया : (नीलमकी ओर देखते मुस्कुराते) क्या..?
लखन : (धीरेसे) सुनो.. कल सृती दीदीका बर्थ डे हे.. तो हम आज ही बाराह बजनेके बाद उनका बर्थडे सेलीबे्रट करेगे.. तुम दोनो उनको कुछ मत कहेना.. हम उनको सरप्राइज देगे..
नीलम : (खुस होते धीरेसे) वा..व.. जीजु.. तब तो मजा आजायेगा.. कहीये क्या करना हे हमे..
लखन : (मुस्कुराते) रजु.. तुम ओर नीलु अभी थोडा आराम करलो.. फीर देर साम मे ओर नीलु केक.. ओर कुछ सेलीब्रेट करनेका सामान लेआयेगे..
पुनम : (मुस्कुराते) नही.. नही होगी.. आप फीकर मत करो.. वो सादी ही नही करेगी.. वो उसुलकी पकी हे.. इनके बारेमे हम बादमे बात करेगे.. लगता हे.. हमारी सासुमां मुजे बुला रही हे.. मे फोन रखती हु.. बाय..
सृती : (मुस्कुराते) हंम.. वाकइ सासुमां आपपे महेरबान हे.. हें..हें..हें.. बाय..
दो घंटेके बाद लखन अपनी नइ कार लेकर घरपे आजाता हे.. तो पीछे आज नीलम भी नया स्कुटर अकेली चलाकर आगइ.. जीसे देखकर रजीया बहुत खुस हुइ.. लखन सृतीको भी गोदमे उठाकर नीचे लेकर आ गया.. फीर रजीया नीलम ओर सृतीने मीलकर कारकी पुजाकी.. लखनने तीनोको अंदर बीठाकर अेक चकर लगवाया.. ओर रास्तेसे मीठाइआ लेकर घरपे आ गये..
रजीया राधीकाकी मम्मीको खाना खीला चुकी थी.. लखनने पहेरे राधीकाकी मम्मीका मुह मीठा करवाया.. फीर बारी बारी सबका मुह मीठा करवाया.. ओर खानेके लीये बैठ गये.. तो आज सृती भी सबके साथ खानेके लीये बैठ गइ.. लखनने उनको अपने हाथोसे खीलाया.. इसी तराह रजीया राधीका ओर नीलुको भी खीलाया तो तीनो खुस होगइ.. तो सृती भी लखनको खीलाने लगी..
सृती : (मुस्कुराते) भाइ.. आजका दिन कीतना अच्छा हे.. आज आप भी मेरे हाथसे खालो..
रजीया : (मुस्कुराते) दीदी.. कार तो बहुत बडी हे.. क्या मस्त दीखती हे..
सृती : (मुस्कुराते) रजु दीदी.. अब हम सब अेक ही कारमे कही भी जा सकते हे.. ओर ये पुनो दीदीकी पसंदकी कार ली हे.. तो अच्छी ही होगीनां..?
चारो बाते करते खाना खा रहे थे.. तभी सृती नीचेसे लखनके पैरोको सहेला रही थी.. ओर बार बार अपना हाथ लखनकी जांघोपे रखते सहेलाती थी.. जीसे लखनका लंडभी अंगडाइआ लेके जटके मार रहा था.. फीर सबने खाना खालीया तब लखन सृतीको लेकर उनके रुममे छोडने चला गया.. ओर रजीया नीलम मीलकर घरका काम समेटने लगी.. अब सृतीके उपर प्यारका परवाना बीलकुल छाया हुआ था..
जैसे ही लखनने सृतीको बेडपे बीठाया सृतीने लखनको हाथ पकडक खीचके अपने उपर गीराया.. तो लखन सृतीके उपर गीरके लेट गया.. सृतीने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. आखीर लखनभी अेक मर्द था.. सृती कबसे उनको छेड रही थी.. तो लखन भी मदहोस होने लगा.. ओर सृतीके बुब्सको मसलते सृतीके होठोको चुमने लगा..
सृती : (मदहोसीमे वासना भरी नजरोसे) भाइ.. मुजसे रहा नही जाता.. मुजे अपनी आगोसमे समालो..
लखन : (मदहोसीमे) दीदी.. बस.. थोडासा कंट्रोल करलो.. आपकी सभी तम्मना जल्द पुरी करदुगा..
सृती : (प्यारसे आंखोमे देखते धीरेसे) भाइ.. वही तो नही होता.. अब तो थोडासा भी कंट्रोल नही होता.. कबतक तडपाओगे मुजे.. भाइ.. मुजे भी वो सुख चाहीये.. मुजे समालो आपके अंदर..
लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) दीदी.. लगता हे आज तो आप पका मेरा रेप करदोगी.. हें..हें..हें..
सृती : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) ओर नही तो क्या..? भाइ.. अपनालो मुजे.. बनालो अपनी सुहागन.. अब तो मे बडे भैयाकी बीवी भी नही हु.. आप भरदो मेरी मांग.. मे हमेसा हमेसाके लीये आपकी होजाना चाहती हु..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. प्लीज.. मेरी खातीर.. बस.. थोडासा इन्तजार करलो.. बस कुछ होगा जो आप चाहती हो.. लेकीन इसके लीये मेने अेक खास दिन चुना हे.. बस.. थोडासा इन्तजार.. प्ली..ज..
सृती : (होंठ चुमकर मुस्कुराते) ठीक हे भाइ.. आप कहेतेहो तो मे इन्तजार करलुगी.. लेकीन याद रखना.. ओर ज्यादा इन्तजार नही कर सकती.. वरना इस बार पका आपका रेप करदुगी.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते उपरसे हटते) ठीक हे स्वीट हार्ट.. तो फीर आज सरप्राइजके लीये तैयार रहेना..
सृती : (मनमे खुस होते मुस्कुराते) आज ही..? ठीक हे भाइ.. पका.. मे रडी हु..
फीर लखन नीचे आगया.. तो रजीया ओर नीलम कीचनमे बर्तन रख रही थी.. तो लखन वहा चला गया.. ओर नीलमके सामनेही रजीयाको बाहोमे भरते होठोको चुमने लगा.. तो रजीया नीलमकी ओर देखते सरमा गइ.. ओर लखनको हटानेकी कोसीस करने लगी.. तो नीलम भी दोनोका प्यार देखकर सरमा गइ.. ओर हसती रही.. वो सरमके मारे बहार जाने लगी तो लखनने उनका हाथ भी पकड लीया..
रजीया : (सर्मसार होते लखनपे जुठा गुस्सा करते) कुछ तो सरम करो.. घरमे अेक जवान बच्ची हे.. ओर उनके सामने ही आप सुरु होगये..
लखन : (मुस्कुराते) अरे ये तो मेरी साली हे.. ओर साली आधी घरवाली भी होती हे.. तो उनके सामने क्या सरमाना.. सुन.. तुम दोनोसे अेक बात करनी हे..
रजीया : (नीलमकी ओर देखते मुस्कुराते) क्या..?
लखन : (धीरेसे) सुनो.. कल सृती दीदीका बर्थ डे हे.. तो हम आज ही बाराह बजनेके बाद उनका बर्थडे सेलीबे्रट करेगे.. तुम दोनो उनको कुछ मत कहेना.. हम उनको सरप्राइज देगे..
नीलम : (खुस होते धीरेसे) वा..व.. जीजु.. तब तो मजा आजायेगा.. कहीये क्या करना हे हमे..
लखन : (मुस्कुराते) रजु.. तुम ओर नीलु अभी थोडा आराम करलो.. फीर देर साम मे ओर नीलु केक.. ओर कुछ सेलीब्रेट करनेका सामान लेआयेगे..