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सायरा : भाइ.. शुक्रवारको जल्दी आजाना.. हम बाते करते खुब मजे करेगे.. अकेले आना..
साहील : (मुस्कुराते कानमे फुृसफुसाते) ठीक हे भाभी.. आजाउगा.. मस्तीके लीये तैयार रहीयो..
सायरा : (सरमाते हसते धीरेसे) भाभीके बच्चे.. अेक बार आना तब बताउगी.. फीर बार बार इस भाभीको मीलने आते होकी नही.. सेतान कहीका..
साहील : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. आकर बताउगाकी ये सैतान कैसा हे.. हें..हें..हें..
कहा तो सायरा जटसे साहीलसे अलग होगइ.. ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते साहीलको सोक्ट होते देखती रही.. उसे उमीद नही थीकी साहील उनको भाभी कहेगा.. वो बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर साहीलकी ओर देखते सरमके मारे मुस्कुराती रही..
फीर साहील ओर लखन वहासे नीकल गये.. आते वक्त साहील बहुत खस था.. क्युकी उनके मनमे सायराको लेकर कुछ अलग ही प्लान चल रहा था.. अब वो सायराको अपनी बडी बहेन नही.. लखनके कहेनेपे उनको अेक ओरतकी तराह देख रहा था.. तो सायराके मनमे भी अेक प्लान चल रहा था..
लखन : (रास्तेमे हसते) कमीने क्या हस रहा हे.. कुछ समजा..?
साहील : (हसते) भाइ.. जैसा आपने कहा था वैसाही नीकला.. ये कमीनी तो पहेलेसे दो कदम आगे हे.. क्या मस्त गदराया माल हो गइ हे..
लखन : (हसते) हां.. मेने भी देखा.. कैसे तेरे पेन्टके उभारको ललचाइ नजरोसे देखते हस रही थी.. लगता हे कादीर भाइने इनपे बहुत महेनत कीहे.. हें..हें..हें..
साहील : (मुस्कुराते) हां.. जबसे स्कुलमे पढ रही थी.. ओर जवानीके देहलीजपे कदम रखा था.. भाइ तबसे उनकी ले रहा हे.. तकरीबन चार सालसे तो पका.. तभीतो अैसा सेक्सी माल लग रही हे..
लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. तेरा ये माल बीलकुल रेडी हे.. अगर वो थोडीसी भी हीन्ट दे तो आगे बढ जाना.. लेले अपने प्यारका बदला.. ये भी उसी खेतकी पेदाइस हे..
फीर साहील लखन बात करते वापस होस्टेलपे पहोंच गये.. वहासे दोनो राधीकाको लेकर घरपे आ गये.. फीर सब फ्रेस होगये ओर खानेके लीये बैठ गये.. पुनम साहीलकी ओर हसते उनको खाना परोसने लगी.. क्युकी वो सब जानती थी.. फीर खाना खानेके बाद साहील गांव चला गया..
साहील सहेर आया उसी सुबह देवायत साहीलके खेतोपे चला गया.. तो फीरोज देवायतको देखते ही खुस होगया.. ओर दोनोके लीये चाइ मंगवाइ.. फीर दोनो खटीयापे बैठकर गांवकी बाते करने लगे.. ओर देवायत धीरे धीरे करते फीरोजको सब सचाइ बताने लगा..
लेकीन देवायतको पता नही थाकी फीरोज गांवके बारेमे काफी कुछ जान चुका था.. अब गांवके अैसे नायायज रीस्ते उसे बहुत पसंद आने लगे थे.. ओर वो खुद अपनी बीवी जरीनाकी हप्तेमे कमसे कम तीन बार ठुकाइ करने लगा था..
ओर कीसीको पता भी नही चलाकी खेतोपे उसने अेक मजदुरनको भी सेट करलीया था.. जब भी मन करता.. कुछ कामके बहाने उसी मजदुरको ट्युबवेल वाली रुममे बुला लेता.. ओर उनकी ठुकाइ कर लेता.. अब तो अपनी वीधवा भाभीके उपर भी डोरे डाल रहा था..
अब फीरोज देवायतके साथ बाते करते काफी खुल गया.. तो देवायतने धीरे धीरे बातोमे लपेटते उनको बता दीयाकी इतने सालोसे सलमा अकेली थी तो उनसे भुल होगइ हे.. ओर उसने ये भी समजा दीयाकी इनमे सलमाकी कोइ गलती नही हे ये सब हालातकी वजहसे हुआ हे इसीलीये उनको सलमाकी दुसरी सादी घरके ही पुरुषके साथ कर देनी चाहीये..
पहेले तो सलमाके साहीलसे प्रेगनेन्ट होनेकी बात सुनकर मनमे गुस्सा आने लगा था.. लेकीन साहीलका उनपे बहुत अहेसान था तो कुछ सोचकर चुप रहा.. फीर घरमे ही सादीकी बात सुनकर फीरोजके मनमे ये सोचकर लडु फुटने लगे.. की चलो.. अब बीवीके साथ उनकी भाभीको भी चोदनेका मौका मीलेगा..
ये सोचते फीरोनका हथीयार ठुमके मारने लगा.. फीरोजको गांवकी बाते सुनकर गांवके बदलावकी नइ व्यवस्था पसंद आने लगी.. ओर उसे देवायतकी बात सच लगने लगी.. वो असमजमे फस गयाकी अपने दीलकी बात देवायतसे कैसे कहे.. आखीर उसने हींमत करते देवायतसे ये बात कहे दी..
फीरोज : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. आपकी बात सच हे.. अकेलापन कीसीको भी भटका सकता हे.. मुजे सलमा भाभीके बच्चेसे कोइ प्रोबलेम नही हे.. घरके ही मर्दका हे.. अगर आपको कोइ प्रोबलेम ना होतो फीर मे ही उनसे सादी करलेता हु..
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? आप..? मेतो साहीलके बारेमे सोच रहा था.. आप इस उमरमे दो बीवीया सम्हाल पाओगे..?
फीरोज : (मुस्कुराते) हां क्यु नही..? हमारे मेतो चार चार बीवीया होती हे.. ओर साहील तो अभी बहुत छोटा हे.. भले ही दोनोसे गलती होगइ हो.. लेकीन सलमा भाभी उनकी मां भी हे.. तो मांसे नीकाह कैसे..? तो मे सोच रहा हुकी मेही भाभीसे सादी करलु..
देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे तो फीर.. घरपे बात करलो ओर सलमा भाभीसे जल्द सादी करलो..
बात करके देवायत अपने खेतोपे चला गया.. देवायत भी असंमजमे फस गया की यहा तो दाव ही उल्टा पड गया.. भानु अपना मकान देख रहा था.. ओर कारीगरको जरुरी सुचना दे रहा था.. अैसे ही साम ढल गइ तो देवायतने फुरसतमे लखनको फोन कीया.. ओर फीरोजसे हुइ सारी बात बतादी.. जो लखन पहेलेसे ही सब जानता था..
साहील : (मुस्कुराते कानमे फुृसफुसाते) ठीक हे भाभी.. आजाउगा.. मस्तीके लीये तैयार रहीयो..
सायरा : (सरमाते हसते धीरेसे) भाभीके बच्चे.. अेक बार आना तब बताउगी.. फीर बार बार इस भाभीको मीलने आते होकी नही.. सेतान कहीका..
साहील : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. आकर बताउगाकी ये सैतान कैसा हे.. हें..हें..हें..
कहा तो सायरा जटसे साहीलसे अलग होगइ.. ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते साहीलको सोक्ट होते देखती रही.. उसे उमीद नही थीकी साहील उनको भाभी कहेगा.. वो बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर साहीलकी ओर देखते सरमके मारे मुस्कुराती रही..
फीर साहील ओर लखन वहासे नीकल गये.. आते वक्त साहील बहुत खस था.. क्युकी उनके मनमे सायराको लेकर कुछ अलग ही प्लान चल रहा था.. अब वो सायराको अपनी बडी बहेन नही.. लखनके कहेनेपे उनको अेक ओरतकी तराह देख रहा था.. तो सायराके मनमे भी अेक प्लान चल रहा था..
लखन : (रास्तेमे हसते) कमीने क्या हस रहा हे.. कुछ समजा..?
साहील : (हसते) भाइ.. जैसा आपने कहा था वैसाही नीकला.. ये कमीनी तो पहेलेसे दो कदम आगे हे.. क्या मस्त गदराया माल हो गइ हे..
लखन : (हसते) हां.. मेने भी देखा.. कैसे तेरे पेन्टके उभारको ललचाइ नजरोसे देखते हस रही थी.. लगता हे कादीर भाइने इनपे बहुत महेनत कीहे.. हें..हें..हें..
साहील : (मुस्कुराते) हां.. जबसे स्कुलमे पढ रही थी.. ओर जवानीके देहलीजपे कदम रखा था.. भाइ तबसे उनकी ले रहा हे.. तकरीबन चार सालसे तो पका.. तभीतो अैसा सेक्सी माल लग रही हे..
लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. तेरा ये माल बीलकुल रेडी हे.. अगर वो थोडीसी भी हीन्ट दे तो आगे बढ जाना.. लेले अपने प्यारका बदला.. ये भी उसी खेतकी पेदाइस हे..
फीर साहील लखन बात करते वापस होस्टेलपे पहोंच गये.. वहासे दोनो राधीकाको लेकर घरपे आ गये.. फीर सब फ्रेस होगये ओर खानेके लीये बैठ गये.. पुनम साहीलकी ओर हसते उनको खाना परोसने लगी.. क्युकी वो सब जानती थी.. फीर खाना खानेके बाद साहील गांव चला गया..
साहील सहेर आया उसी सुबह देवायत साहीलके खेतोपे चला गया.. तो फीरोज देवायतको देखते ही खुस होगया.. ओर दोनोके लीये चाइ मंगवाइ.. फीर दोनो खटीयापे बैठकर गांवकी बाते करने लगे.. ओर देवायत धीरे धीरे करते फीरोजको सब सचाइ बताने लगा..
लेकीन देवायतको पता नही थाकी फीरोज गांवके बारेमे काफी कुछ जान चुका था.. अब गांवके अैसे नायायज रीस्ते उसे बहुत पसंद आने लगे थे.. ओर वो खुद अपनी बीवी जरीनाकी हप्तेमे कमसे कम तीन बार ठुकाइ करने लगा था..
ओर कीसीको पता भी नही चलाकी खेतोपे उसने अेक मजदुरनको भी सेट करलीया था.. जब भी मन करता.. कुछ कामके बहाने उसी मजदुरको ट्युबवेल वाली रुममे बुला लेता.. ओर उनकी ठुकाइ कर लेता.. अब तो अपनी वीधवा भाभीके उपर भी डोरे डाल रहा था..
अब फीरोज देवायतके साथ बाते करते काफी खुल गया.. तो देवायतने धीरे धीरे बातोमे लपेटते उनको बता दीयाकी इतने सालोसे सलमा अकेली थी तो उनसे भुल होगइ हे.. ओर उसने ये भी समजा दीयाकी इनमे सलमाकी कोइ गलती नही हे ये सब हालातकी वजहसे हुआ हे इसीलीये उनको सलमाकी दुसरी सादी घरके ही पुरुषके साथ कर देनी चाहीये..
पहेले तो सलमाके साहीलसे प्रेगनेन्ट होनेकी बात सुनकर मनमे गुस्सा आने लगा था.. लेकीन साहीलका उनपे बहुत अहेसान था तो कुछ सोचकर चुप रहा.. फीर घरमे ही सादीकी बात सुनकर फीरोजके मनमे ये सोचकर लडु फुटने लगे.. की चलो.. अब बीवीके साथ उनकी भाभीको भी चोदनेका मौका मीलेगा..
ये सोचते फीरोनका हथीयार ठुमके मारने लगा.. फीरोजको गांवकी बाते सुनकर गांवके बदलावकी नइ व्यवस्था पसंद आने लगी.. ओर उसे देवायतकी बात सच लगने लगी.. वो असमजमे फस गयाकी अपने दीलकी बात देवायतसे कैसे कहे.. आखीर उसने हींमत करते देवायतसे ये बात कहे दी..
फीरोज : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. आपकी बात सच हे.. अकेलापन कीसीको भी भटका सकता हे.. मुजे सलमा भाभीके बच्चेसे कोइ प्रोबलेम नही हे.. घरके ही मर्दका हे.. अगर आपको कोइ प्रोबलेम ना होतो फीर मे ही उनसे सादी करलेता हु..
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? आप..? मेतो साहीलके बारेमे सोच रहा था.. आप इस उमरमे दो बीवीया सम्हाल पाओगे..?
फीरोज : (मुस्कुराते) हां क्यु नही..? हमारे मेतो चार चार बीवीया होती हे.. ओर साहील तो अभी बहुत छोटा हे.. भले ही दोनोसे गलती होगइ हो.. लेकीन सलमा भाभी उनकी मां भी हे.. तो मांसे नीकाह कैसे..? तो मे सोच रहा हुकी मेही भाभीसे सादी करलु..
देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे तो फीर.. घरपे बात करलो ओर सलमा भाभीसे जल्द सादी करलो..
बात करके देवायत अपने खेतोपे चला गया.. देवायत भी असंमजमे फस गया की यहा तो दाव ही उल्टा पड गया.. भानु अपना मकान देख रहा था.. ओर कारीगरको जरुरी सुचना दे रहा था.. अैसे ही साम ढल गइ तो देवायतने फुरसतमे लखनको फोन कीया.. ओर फीरोजसे हुइ सारी बात बतादी.. जो लखन पहेलेसे ही सब जानता था..