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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - ८७
तब सृतीको पहेली बार देवायतने होंठ चुमकर कीस करदी तो सृती सोक्ट होते मुह फाटते उनकी ओर देखती रही.. क्युकी पीछले कुछ महीनोसे वो सीर्फ देवायतके बारेमे ही सोचती रहेती हे.. ओर जबसे देवायतके पेन्टके उभारको देखलीया हे तबसे वो पागल हो रही हे.. ओर आज मंजुकी बातो ने आगमे घी डालनेका काम कीया.. तबतक देवायत बहार नीकल चुकाथा तो वो जटसे उनके पीछेकी ओर दोड पडी.. जैसे उनसे उनका पुराना यार बीछड रहा हो....अब आगे
सृती दोडकर गेइट तक आइ तब सभी लोग कारमे बेठ रहेथे.. तो सृती वही रुककर सबको देखने लगी.. ओर देवायतने कार स्टार्ट करदी ओर गेइटकी ओर देखने लगा तब दोनोकी आंख मीलतेही सृती उनको हाथ हीलाकर मुस्कराते बाय.. कहेने लगी.. आज सुतीके दिलके तार संगीतके सुर छोडकर प्यारकी धुन बजाने लगे.. तब सृती बहुतही रोमांचींत होते सबके जाने तक वही खडी रही..
इधर देवायत सबको लेकर अपने गांवकी ओर चला गया.. तो मंजु ओर चंदाने बीच रास्तेमे अेक कपडे ओर ज्वेलेरीकी दुकानमे मंगलसुत्र खरीद लीया ओर अपने गांवकी ओर चले गये.. तो दुसरी ओर भानुभी अपने मामाका अस्थी विसर्जन करके वहासे नीकल गयाथा.. ओर आधे घंटेके बाद वोभी सृतीकी होस्पीटल आगया वहा सृतीने भावनाको ओर बच्चीको चेक करलीया देखातो भावनाकी योनीमे रेग्युलर सुधार हुआथा..
ओर उसने भावनाको अभी दो महीने सेक्स करनेको मना कीया.. फीर वो भी सृतीको दीखाकर बाजारमे सादीकी खरीदी करने चले गये.. तो वहा भावना अपनी बच्चीको लेकर कारमे ही बैठी रही ओर रमा नीलम लता सब अपने अपने कपडे लेने लगे तो रमाने सरला ओर भावनाके लीयेभी महेंगी महेंगी सारी खरीदली.. फीर सब अेक ज्वेलेरी सोपमे चले गयेतो वहाभी रमा जबरदस्तीसे भावुको साथ ले गइ ओर उन्होने लताके लीये कुछ ज्वेलरी लेली..
फीर नीलम लता ओर रमाने लताके लीये सादीका जरुरी सामन खरीद लीया सभी देर साम तक खरीदी करते रहे.. ओर बीचमे अेक होटेलमे खानाभी खा लीया.. तबतक रातमे देर होगइ.. सभी आजही सब खरीदीका काम नीपटाना चाहते थे.. तो इधर घरपे सीर्फ सरला अकेली थी..
तो उधर देवायत मंजु चंदा दया सबको लेकर दो पहरकोही हवेलपे आगया.. तो पुनमतो देखतेही बच्चेको गोदमे उठाकर अंदर चली गइ.. वो आराम करके काफी हद तक ठीक होगइ थी.. ओर सोफेपे बेठकर विजयके साथ खेलने लगी.. फीर सबने खाना खालीया.. ओर देवायत राजीवके पास जानेके लीये नीकलने लगा.. तब..
मंजुला : देवु.. अगर पापाको होस्पीटलसे डीस्जार्ज मील जाये तो आप उन दोनोको इधर ही लेकर आना..
चंदा : हां देवु.. अगर दीदी हानाकानी करेतो मुजसे बात करवाना.. वो बहुतही जीदी हे.. अेक बार मनमे ठानली.. फीर कीसीकी नही सुनती..
देवायत : हां ठीक हे.. आप टेन्शन मत लो वो जरुर आयेगे.. चलो मे चलता हु.. सायद रातको मुजे आनेमे देर होजाये..
कहेते देवायत वहासे अपनी बडी कार लेकर नीकल गया.. वो आज बहुत खुस था.. रीजन बस अेकही था.. आज चंदा हमेसा हमेसाके लीये उनके पास आ गइथी.. ओर उधर नीर्मलासे भी सुलेह होगइ थी.. तो आज सृतीने भी उनको हाथ दबाकर जटका दे दीयाथा.. तो मनही मन हसते खुस होते वो अपने ससुरके पास होस्पीटलपे पहेच गया.. ओर कार पार्क करके सीधाही अंदर चला गया.. ओर जेसेही दरवाजा खोला..
तो देखा नीर्मला राजीलको ज्युस पीला रही थी.. तो दोनोकी नजर देवायतकी ओर गइ.. ओर दोनोके चहेरे देवायतको देखतेही खील उठे.. तब देवायत राजीवके बेडके पास खाली चेयरपे बेठ गया ओर उनके सामने देखकर मुस्कराने लगा.. तब नीर्मलाभी सरमाते उनकी ओर देखते हसती रही.. राजीव अब पहेलेसे काफी बहेतर था.. ओर धीरे धीरे थोडा बोलनेभी लगाथा.. ओर सरीरमेभी काफी सुधार था..
देवायत : (हसते) कैसेहो पापा..? लगाहे अब काफी ठीक हो गेये हो.. हें..हें..हें..
राजीव : (धीरेसे हसते) हां.. अब तुम जो आगये हो.. तो ठीकतो होना ही पडेगा.. हें..हें..हें..
नीर्मला : सुनीये राजीव.. आप अभी कम बोलना.. डोक्टरने मना कीया हेनां..? मे देवुसे बात करती हु..
देवायत : क्या कहेते हे डोक्टर..? क्या सुबह देखने आये थे..?
नीर्मला : हां देवु.. यहा बहुत अच्छी ट्रीटमेन्ट हो रही हे बहुतही फास्ट रीकवरी आ रही हे.. फीरभी आप अेक बार डोक्टरसे मील लेनां.. अभी अपनी केबीन मे होगे.. क्या मे साथमे चलु..?
देवायत : (हसते खडे होते) हां हां.. चलो अेक बार मील लेते हे देखु तो सही वो क्या कहेते हे..
कहेते वो बहार जाने लगातो राजीव दोनोको आपसमे बात करते देखकर खुस होने लगा.. तभी नीर्मलाभी खडी होकर उनके साथ बहार नीकल गइ.. ओर जटसे देवायतके साथ जाके चलने लगी ओर उनका हाथ पकडलीया.. ओर दोनो अेक दुसरेके सामने देखके हसने लगे.. ओर रीसेप्नीस्टको कहेके वो डोक्टरको मीलने उनकी ओफीसमे चले गये.. तब नीर्मलाने देवायतका हाथ छोड दीया..
डो. राजेन्द्ग : (हसते) आइअे आइअे ठाकुर साहेब.. कैसेहे आप.. मजेमे..?
देवायत : (हसते हाथ मीलाते बेठते) बस अेकदम मजेमे.. कहीये क्या कहेते हे मेरे ससुरजी.. तबीयतमे तो काफी सुधार लग रहा हे.. अभी मुजसे बात भी की.. हें..हें..हें..
डो. राजेन्द्ग : (हसते) अरे आप टेन्शन मतलो.. उनकोतो मे वापस खडा करदुगा.. ओर अपने धंधे पे भेज दुंगा.. काफी अच्छी रीकवरी हे.. टाइमपे पहोंच गये ओर दवाइभी असर कर गइ.. बस अैसेही सुधार हुआ तो सायद कल छुटी देदुगा.. कल सामको देखते हे.. बस आज रात तक ड्रीप लगी रहेगी.. फीरतो सुबह वोभी नीकाल देगे.. लगता हे वो टेन्शनमे बहुत रहेते होगे.. तभी उनका बीपी हाइ हुआ हे..
देवायत : सायद.. पता नही उनको कोनसा टेन्शन होगा.. सर.. मे उनको अपने घर लेजाउगा वहा सब होगेतो अच्छे माहोलमे ठीक रहेगा.. वहा उनकी बेटी हे तो उनकोभी देख लेगे..
डो. राजेन्द्ग : (हसते) हां ये ठीक सोचा हे आपने.. हवा पानी भी बदल जायेगातो जल्दी ठीक होजायेगे..
देवायत : (हसते) सर वो आपकी फीस जमा करवानी थी.. तो बहार रीसेपनीस्टपे देदु..?
डो. राजेन्द्ग : (हसते) ठाकुर साहेब कल घरपे बाबुजीसे बात हुइ.. तो आज सुबह वो अंकलको देखने आयेथे.. दोनो पुराने दोस्त हेनां.. ओर उसने मुजे फीस लेनेके लीये बीलकुल मना करदीया हे.. तो मे नही ले सकता.. सोरी..
देवायत : अरे अैसे थोडी चलता हे.. आपने दवाइमे इतना बडा खर्चा कीया हे.. ओर सर वैसेभी पैसेकी कोइ प्रोबलेम नही हे..तो..
डो. राजेन्द्ग : (हसते) पता हे मुजे.. आप इतनी बडी वीरासतके मालीक हेतो पैसोकी प्रोबलेम कहा होगी.. लेकीन ये मेरे भी अंकल हे.. ओर हां मुजे सर मत कहीये आप मुजे नामसेही बुला सकते हे..
देवायत : (हसते हाथ मीलाते) ठीक हे मी. राजेन्द्ग तो आजसे आप मुजेभी ठाकुरसाहब मत कहेना.. मेरा नाम देवायत हे.. सीर्फ उन्हीसे काम चल जायेगा हें..हें..हें..
डो. राजेन्द्ग : (हसते) जी देवायतजी.. आपसे मीलकर मजा आगया.. आपके जैसे बहुत कम दोस्त मीलते हे..
फीर देवायत ओर नीर्मला बहार आगये तो नीर्मला बहुतही खुस थी.. ओर देवायतका हाथ पकडलीया ओर दोनो अपने रुमकी ओर आने लये तब नीर्मलाने वापस हाथ छोड दीया.. ओर दोनो राजीवके पास आकर बैठ गये तो नीर्मला राजीवको सबकुछ बताने लगी.. तबतक देवायत ओर राजीव हसते रहे.. फीर..
देवायत : (हसते) पापा डोक्टर केह रहेथे आपको टेन्शनकी वजहसे ये सब हुआ.. तो कहीये आपको कीस बातकी टेन्शन हे..? सब अच्छेसे तो चल रहा हे अबतो बेटीओकी भी चीन्ता नही हे..
राजीव : (थोडी देर आंख बंध करलेता हे फीर) बेटा.. नीमु तुमसे बात नही कर रहीथी.. ओर मे सोचता रहेताथा की मेरे जानेके बाद इनका क्या होगा..? वो अकेली कैसे रहेगी..? बस यही भीन्ता खाये जा रहीथी.. लेकीन अब ये चीन्ता बीलकुल नही हे.. क्युकी मेने देखा आप दोनो बोल रहेहे.. हें..हें..हें.. बस मेरा अेक काम करदो.. फीर कोइ चीन्ता नही..
नीर्मला : (आंख गीली होतेभी हसते) अब कोनसा काम बाकी रेह गयाहे हे आपका..? ओर हमारे बीच भी कोइ मनमोटाव नही था.. बस हम कुछ कम बोलते थे.. बस यही.. ओर कुछ नही..
देवायत : पापा आप अब कोइ टेन्शन मत लेना.. अबी आपका बेटा जींदा हे.. कहो क्या काम करना हे मुजे..
राजीव : (गहेरी सांस लेते) भगवान आपको लंबी उम्र दे.. बस अेक वादा चाहीये मुजे.. वोभी आपसे..
देवायत : (उनका हाथ थामते) पापा बाप भी कभी बेटेसे वादा लेता हे..? बस हुकुम कीजीये.. वोतो हुकुम करता हे.. मे आपको अैसेही पापा नही कहेता..
तभी राजीव कुछ अैसा करता हे जीससे देवायत ओर नीर्मला दोनोही सोक्ट होते अचंभीत होजाते हे.. ओर तीनो अेक दुसरेकी ओर देखते ही रहेते हे.. कीसीके मुहसे अेक सब्दभी नही नीकल रहाथा.. दरसल राजीवने अेक हाथसे नीर्मलाका हाथ थामलीया.. ओर दुसरे हाथसे देवायतका हाथ थामते नीर्मलाका हाथ देवायतके हाथोमे थमा दीया.. जीसकी वजहसे दोनोही सोक्ट होके राजीवकोही देखते रहे तब राजीवने हसते हुअे कहा..
राजीव : बस बेटा.. यही वादा चाहीये मुजे.. अगर मुजे कुछ होजाताहे तो आप मेरी नीमुका खयाल रखीयेगा.. ताकी मुजे तसली होजायेकी मेरे जानेके बाद नीमु अकेली नही रहेगी.. उनकी देखभालके लीये उनका दामाद हे.. बस मुजे ओर कुछ नही चाहीये.. यही टेन्शन खाये जा रहीथी..
देवायत : (मम्मी बोलनेसे हीचकीचाते) पापा आप इनकी बीलकुल टेन्शन मतलो.. मे आपसे वादा करता हु.. म..मम्मी..का मे मरते दमतक खयाल रखुगा.. उनको मेरे पासही रखुगा.. लेकीन आप अैसा गलत क्यु सोचतेहो की मुजे कुछ होजायेगा.. आपको कुछ नही होगा हम सब हेना.. हम आप दोनोका खयाल रखेगे..
राजीव : (हसते) बस बेटा.. बुढापा हे ही अैसा.. मुजे कभीभी कुछभी हो सकता हे.. ओर नीमुकोतो अभी लंबा सफर काटना हे..
नीर्मला : (आंसुके साथ) ये आप कैसी बेहकी बेहकी बाते कर रहे हे..? आपको कुछ नही होने वाला..
राजीव : (हसते) नीमु.. हमारा देवा बहुतही अच्छा हे.. सबका खयाल रखता हे.. उनके बापुकी तराह.. मेरा जीगरजान भाइ.. मेरा सबकुछ.. जो जींदगीभर मेरा साथ नीभानेका वादा कीयाथा वो उसने पुरा कीया..
देवायत : पापा अब आप कुछ देर आराम कीजीये मे अब साम तक यही हु.. ओर कल सायद आपको यहासे छुटी मीलजाये.. तब आप दोनको मेरे साथ हवेलीपे आना हे वहा कुछ दिन आराम करलो.. जब बीलकुल ठीक होजाओ तब इधर आना होतो आजाना वरना वही रहेनां..
राजीव : बेटा बेटीके घरभी कोइ रहेता हे.. हम यहा ही ठीक हे.. आप हमारी चीन्ता मत करना..
नीर्मला : अब आप सोजाइअे वो हम बादमे देख लेगे.. अगर आप मेरी वजहसे अैसा केह रहे हो तो अब मुजे वहाभी जानेमे कोइ अेतराज नही हे.. हम वही चले जायेगे..
राजीव : (मुस्कुराते खुस होते) अच्छा..? तो फीर हम दोनो वहा मेरी मंजुके पास चलेगे..
नर्स : (अंदर आते) अंकल खाना खालीया हे..? तो लीजीये दवाइ पी लीजीये ओर आराम कीजीये.. आप बाते बहुत करते हे.. हें..हें..हें..
कहेते नर्सने राजीव अंकलको दवाइ पीलादी ओर चली गइ.. तो कुछ ही देरमे वो नींदकी आगोसमे चले गये.. तब नीर्मला देवायत हाथ पकडके उसे बहार लेगइ.. ओर वो दोनो होस्पीटलके बहार अेक पैडके नीचे बेन्च रखीथी वहा जाकर बैठ गये.. तब नीर्मला देवायतके कंधेपे सर रखके बैठ गइ.. ओर देवायतका हाथ थाम लीया.. जेसे कोइ दो प्रेमी बेठे हो..
नीर्मला : देवु क्या कर रही हे मंजु ओर चंदा..? क्या दोनो घरपे आगइ? ओर आप दोनो सादी कब कर रहे हो..?
देवायत : हां अभी मंजुको दीखाके आयेहे.. ओर दोनोको घरपे हे.. उसे घरपे छोडके ही आया हु.. ओर सादीका पता नही.. कल मंजुने मुजे घरपे रहेनेका ओर्डर दीया हे.. सायद कलही हमारी सादी होजायेगी.. आज छुटी नही मीली.. वरना आप लोगभी सामील होते.. मंजुने मुजे आप दोनोको साथ लेकर आनेको कहा हे..
नीर्मला : (हसते) कीतना अजीब हेना..? ये सब पुराने रीती रीवाज.. पता नही इनसे हम ओरतोको कब छुटकारा मीलेगा..? चंदातो बुहत छोटी थी.. मेरी गोदमे बीठाकर मेने उसे खेलाया खीलाया ओर बेचारी भर जवानीमे विधवा होगइ.. इनसेतो आपका घर अच्छा हे.. इतनी बडी रोयल फेमीली हे.. फीरभी वहा बहुत कुछ छुट हे.. ओरतको अपनी मरजीसे सादी करनेकी छुट.. मर्द कीतनीभी सादी करले कोइ कुछ पुछने वाला नही.. जीसे जैसी मरजीमे जीना हो.. सब खुलकर जींदगी जीतेहे..
देवायत : (हसते) तो फीर आप वहासे क्यु चली गइ..? मुजे कुछतो अंदाजा हे आपके साथ वहा जरुर कुछना कुछ गलत हुआ होगा.. बस मुजे आपके बारेमे ज्यादा नही पता..
नीर्मला : (आंख गीली करते अेक नजरसे) देवु.. आप मेरे बारेमे क्या जानते हे? जो मेरे इस अतीकके बारेमे पुछ रहे हे..
देवायत : नीमु.. बुरा मत मानना.. मेरी भुमी आंटीसे काफी बात चीत होचुकी हे.. तब मे इतना जान पायाकी आप ओर मेरे बापु आपसमे बहुत प्यार करते थे.. ओर आप सब अेकही कोलेजमे साथ पढते थे.. बस इतनाही.. पता हे.. नीमु मुजे तेरे अतीतके बारेमे जानना हे.. आइ प्रोमीस बात सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगी.. मुजे जानना हे मेरी नीमु वहासे सबको छोडकर क्यु इधर आगइ..
नीर्मला : (फीकी मुस्कानके साथ) देवु क्यु गडे मुदे उखाड रहेहो.. जो वो केवल हमे दुख ही देता हे.. भुल जाओ सब.. मेभी सब भुल चुकी हु.. बडी मुस्कीलसे इन सब बातोसे बहार नीकलपाइ हु.. कुछ बाते अैसीहे जो वो राज रहे उसीमे हम सबकी भलाइ हे.. बस यही समजलो मे आपकी ओर मंजुकी सादीके खीलाफ थी.. उनका कारण भी यही था.. वरना मुजे आपकी ओर मंजुकी सादीसे क्या अेतराज हो सकता हे..
देवायत : नीमु.. आज तुमसे अेक बात कहेना चाहता हु.. तेरी मंजु कोइ सामान्य ओरत नही हे.. जीस दीन हमने बाबाके आश्रममे जाकर सादी करली उसी दीन बाबाने उनको बहुत कुछ बतादीया हे ओर उनके अंदर बहुत सारी शक्तिीया स्थापीत करदी हे.. वो हम सबके बामरेमे सब कुछ जानती हे.. बस कुछ बोलती नही.. क्युकी वो बाबाके साथ वचनसे बंधी हे.. वरना वो मुजे सबकुछ नही बता देती..? मेभी उनको फोर्स नही करता.. समय आनेपे वो मुजे धीरे धीरे सब बताती रहेती हे..
नीर्मला : (आस्चर्यसे अेक नजरसे देखते) तबतो वो मेरे बारेमे सब कुछ जान चुकी होगी.. फीरभी कुछ नही बोली..? क्या उसीने बोला हेना.. मम्मीको माफ करदेनां..? देवु.. मेरी मंजुका दिल कीतना विशाल हे.. मे उनको कभी समजही नही पाइ.. सब आपहीकी बदौलत हुआ हे.. आइ अेम सोरी.. आप दोनो मुजे माफ कर देना.. मे सब कुछ जानते हुअेभी अन्जान रही.. ओर आप अन्जान होते हुअेभी सब कुछ जानते हो..
देवायत : (हसते) नीमु.. पती पत्नीके बीच माफी नही मांगी जाती.. तु आजभी मेरी पहेली बीवी हे.. मे आजभी तुमको इतनाही चाहता हु. जीतना पहेले चाहता था.. बस तुमको हमारे बीच कुछ गलतफेहमी हो गइ थी.. जो अब दुर होगइ..
नीर्मला : (बेठेही हग करते) जानु.. मे आपको सबकुछ बता दुगी.. ओर मुजे यकीन हे.. आप मेरी बात सुनके वीचलीत नही होगे.. ओर हमारे रीस्तेमे आगेभी कोइ फर्क नही पडेगा.. आप प्रोमीस करो मुजे..
देवायत : (हसते) अरे बाबा कीतनी बार प्रोमीस करु..? हें..हें..हें.. ठीक हे फीरभी आइ प्रोमीस.. हमारे रीस्तेमे कोइ फर्क नही पडेगा.. जो भी कहेना हो बीन्दास्त कहेना.. आज भलेही सब राज खुलजाये.. मे वीचलीत नही होउगा.. ओर राजीव अंकल अभी सोये हे.. तो मुजे नही लगता दो घंटेसे पहेले वो जागेगे.. हमारे पास काफी टाइम हे..
नीर्मला : (गेहेरी सास लेते कंधेपे सर रखते) जानु तो सुनो.. आप मेरी जींदगीमे पहेले सख्स हो जो उनको मे सब सचाइ बताने जा रही हु.. ओर आपनेभी मुजे प्रोमीस कीया हे कीसीको नही बतायेगे.. मेरी कुछ बाते हे जो राजीवको भी नही पता.. जो आज आप जानोगे..
देवायत : हां नीमु.. मेतो यही मानता हु पती पत्नीके बीच कोइ पर्दा नही होना चाहीये.. बोलो..
(थोडा अतीतमे..)
नीर्मला : बात तबकी हे जो मेरे पीताजी आपके दादाके वहा मुनीम थे.. मां तो चंदा छोटीथी तबही गुजर गइथी.. ओर हम दोनो बहेने ओर अेक बडाभाइ वही हवेलीमे रहेते थे.. में.. मेरे बडेभाइ राजीव..आपके पीता किशन.. भानुके पीता वीरजी.. सृतीके मम्मी पापा यानी भुमीका ओर नरेश हम सब अेकही कोलेजमे अेकही क्लासमे साथमे पढते थे.. वो तीन लडके हमसे अेक साल आगे पढ रहेथे लेकीन अेटी केटीकी वजहसे आगे नही जापाये ओर हमारे साथ होगये ओर मे भुमी ओर किशन.. अेक साथ अेकही क्लासमे पढ रहेथे..
भुमी वही होस्टेलमे रहेती थी ओर नरेश सहेर मेही उनकी माताके पास रहेताथा.. उनके पीताजी नही थे.. ओर किशन राजीव विरजी ओर में हम चारो किशनकी कारसेही कोलेज जातेथे.. हम पढाइके साथ साथ बहुत धमाल करतेथे.. खासकर वो चारो लडके.. हमारे गृपमे सीर्फ हम दो लडकीया ही थी.. कोइ हमारी ओर आंख उठाके नही देखते.. अगर कीसीने हमे छेडा.. तो गया कामसे.. ये चारो उनकी हडी पसली अेक करदेते थे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) अच्छा..? पीताजी दीखनेमे तो कीतने भोले थे.. हें..हें..हें..
नीर्मला : (हसते) नही वो सचमे बहुत भोले भाले थे.. लेकीन हम सबमे सबसे होशीयार वोही थे.. तभीतो मे उनसे दिल लगा बैठी.. किशनने मुजे क्लासमेही चीठी देकर अपने प्यारका इजहार करलीया.. ओर मेभीतो उनको चाहने लगीथी.. बस तबसे हम दोनोकी प्रेम कहानी सुरु होगइ..
ओर भानुके पीता विरजी.. वो बहुत सनकी थे.. ओर दिखनेमेभी काफी क्रुर थे.. वो कीसीके सामने देखते तो आधी तो सामने वालेकी अेसेही फट जाती.. कोलेजसे बन्क मारके हम कीतनी बार सीनेमा ओर होटेलमे जाते ओर वो चारो बीन्दास दारु पीकर धमाल करते.. तब हम दोनो उनसे दुर ही रहेती.. ओर भाइ भी बहुत भोले थे.. ओर अभी भी अैसेही हे.. हें..हें..हें..
हम सभीमे सबसे ज्यादा पढनेमे किशन होशीयार था.. घरपेभी मे भाइ ओर कीशन सब साथमेही पढते तो कभी कभी वीरजीभी पढने आजाता.. ओर भाइ पीताजीकी हेल्पभी करता.. ज्यादातर मे ओर किशन ही साथमे पढते.. ओर मुजे पढनेमे कोइ सवालमे प्रोबलेम होतीतो किशन मुजे पढाकर सोल्व कर देता.. ओर दोनोको अकेलेमे साथमे रहेनेका बहुत मौका मीला..
ओर जीनकी वजहसे हम अेक दुसरेसे नजदीक आते गये.. ओर बात आगे बढती गइ.. फीरतो पढाइके अलावा बहुत कुछ होने लगा.. मुजेतो बतानेमे भी सर्म आ रही हे.. लेकीन आप काफी समजदार हो.. मेरी बातको समज गये होगे.. हमे जबभी मौका मीलता हम दोनो मस्तीया करने लगे.. ओर धीरे धीरे आगे बढने लगे.. हम दोनोही अेक दुसरेके बगैर दुर नही रेह सकते थे.. दोनोही साथमे रहेते..
जब फाइनल यरमे आये तबतक मे ओर किशन काफी आगे बढ चुके थे.. अेक बार हवेलीपे सीर्फ हम दोनोही अकेले थे.. तब हमारे बीच सब दुरीया खतम होगइ.. ओर हम दोनोके बीच सब कुछ होगया.. उसी दिन किशनने मेरा कौमार्य भंग कीया.. ओर मेरा किशनने मुजे लडकीसे ओरत बनादीया.. फीरतो हम दोनोको जबभी मौका मीलता हम दोनो मील जाते.. हम दोनोने ये बातकी कीसीको भनकभी नही लगने दी.. किशन मौका मीलतेही मुजे कहीभी पकड लेता.. ओर हम दोनो अेक हो जाते..
तब वो बिलकुल आपही की तराह दीखतेथे.. ओर अेक दिन तुम्हारे दादा ओर दादी.. अेक खुबसुरत लडकीको तुम्हारे पुर्खोके आश्रमसे लेकर आगये.. बस.. यहीसे मेरी कीस्मतने करवट लेली.. ना हवेलीपे ओर नाही गांवमे, कीसको ये नही पताथा की ये लडकी कौन हे.. बस सब लोग यही कहेतेथे की लडकी गरीब हे ओर आश्रममे अकेली रहेतीथी तो तुम्हारी दादीको दया आगइ.. इसीलीये वो लडकीकी देखभाल करने इधर लेआये हे..
फीरतो वो लडकीभी किशनको पसंद करने लगीथी.. ओर पता नही उसने किशनपे कोनसा जादु करदीया.. मेरा किशन उनके पीछे पागल होने लगा.. ओर उनको सीर्फ वो लडकीही नजर आती थी.. फीर पता नही अेक दिन क्या हुआ.. आपके दादा ओर दादी दोनोही सुबह नही जागे.. ओर वो चल बसे..
देवायत : क्या वो लडकी मेरी मां थी नां..?
नीर्मला : हां.. वोही आपकी मां विमलादेवी.. वोभी किशनकी ओर ढलने लगी ओर मेरा किशनभी उनके पीछे तो अैसे पागल होगया की.. कुछही दिनोमे वो लडकी अपना सबकुछ लुटा बैठी.. ओर पता नही किशनभी उनके पीछे लग गया.. फीरतो नीत्यक्रम बन गया.. दिनमे मेरे साथ तो रातमे हम सब सो जाते तब किशन देर रात उनके रुममे चला जाता.. ओर दोनो पती पत्नीकी तराह रहेने लगे.. इस बातकी भनक मुजेभी नही लगने दी.. ओर वो लडकी किशनको मेरे खीलाफ उल्टी सीधी बाते करके भडकाने लगी..
ओर किशनभी धीरे धीरे मुजसे दुर रहेने लगा.. ओर विमलाका पेट धीरे धीरे बहार नीकलने लगा.. तब ना विमलाको पताथा ओर नाही मुजे की हम दोनो किशनसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. तब मेरे पेटमे मेरी मंजु पलने लगी.. ओर विमलाके पेटमे आप पलने लगे.. हम दोनोकोही नही पता था.. हम दोनो किशनसे प्रेगनेन्ट होचुकी हे..
इसी जमेलेमे अेक घटना ओर होगइ.. जो हम सबभी दोस्तोके मनमे दरार होगइ.. उनका कारण था भानुके पीता वीरजी.. तब हमे नही पताथाकी वो मनही मन भुमीकाको प्यार करने लगा हे.. ओर भुमी तब नरेशको प्यार करती थी.. जब उसने भुमीको अपने प्यारका इजहार करदीया तो भुमीने उसे सनकी कहेकर काफी भला बुरा कहेके मना करदीया ओर केह दीयाकी मे ओर नरेश काफी आगे बढ चुके हे.. तो अेक तो वो सनकी था ओर उपरसे भुमीने उनको बहुत जलील करते उनके प्यारको ठुकरा दीया.. तब वो पागल जैसा होगया..
ओर घर जाकर उसने गुसेमे सीसेमे हाथ दे मारा.. ओर उनके हाथकी नस कट गइ.. जब किशनको मालुम हुआ तो भाइ ओर किशन उसे होस्पीटल लेगये ओर उनका इलाज करवाया.. ओर वो ज्यादा सनकी होगये.. ओर मनही मन भुमीसे बदला लेनेकी ठानली.. अेक दिन पता चला.. वो अकेलाही हम सबसे छुपके भुमीको होस्टेलसे जबरदस्ती उठा लाया.. ओर उनके घरपे जबरदस्तीसे लेगया.. ओर उसी दिन उसने भुमीके साथ जबर दस्ती की.. ओर उनका रेप कर दीया..
तब नरेश ओर किशनने उनको खुब मारा.. फीर पता नही नरेश ओर भुमी दोनोही कोलेज छोडके चले गये.. ओर उनका कीसीको अता पता नही मीला.. ओर अेक दीन मुजेभी खुब उल्टीया हुइ.. ओर मुजे किशन होस्पीटल लेगया.. तब वहा चेक कीयातो पता चला मे भी पेटसे होगइ हु.. ओर उपर दो महीना होगया हे.. तब किशन परेसान होगया.. ओर उसने मजबुरन मुजे सबकुछ सचाइ बतादी..
देवायत : कोनसी सचाइ..?
नीर्मला : यहीकी वो लडकी विमला जो उनके माता पीता आश्रमसे लेकर आये हे.. दरसल उन्हीकी सगी बहेन थी.. जो उनके जन्मके बाद उनकी माता यानी आपकी दादी उसे आश्रममे छोडके आइथी.. रीजन बस अेकही था.. जो आपके खानदानमे वो श्राप.. जो अेकही बच्चा होता था.. ओर दुसरा बच्चा करनेसे उनके पीताकी मौत होजाती थी.. तब उनको ये नही पताथाकी दोनो लडके ही होने चाहीये लडकी नही.. ओर वो इसी गलत फेहमीकी वजहसे सबसे छुपके बच्चीको आश्रम छोडके आगइ..
देवायत : तो क्या तब किसीको नही पताथाकी मेरी मां पेटसे हे.. कीसीको कुछ पता नही चला..?
नीर्मला : नही.. तब पता नही आपके दादा ओर दादीका कीसी गांव वालोसे कोइ रीस्ता नही था.. सब आपके खीलाफ थे.. रीजन मुजे नही पता.. लेकीन आपकी दादी हवेलीसे कभी बहार नही नीकली.. फीरतो जब काफी सालो बाद आपके गुरुजी आये ओर उसने सचाइ बतादी.. तब आपकी दादी वो लडकीको वापस हवेलीपे लेकर आगइ.. तबतक वोभी जवानीके देहलीजपे कदम रख चुकीथी.. ओर विधीके विधान देखो..
उन विमलाके आनेके बाद कुछही दिनोमे आपके दादा दादीभी चल बसे.. ओर पता नही उनके मनमे क्या चल रहाथा.. विमलाको सब सचाइ मालुम होनके बावजुद भी अपने ही भाइसे दिल लगा बैठी.. ओर उनपे सबकुछ लुटाकर वो मुजसेभी पहेले अपने भाइसे प्रेगनेन्ट होगइ.. ओर उसे पांचवा महीना चल रहाथा.. ओर दोनो भाइ बहेन आपसमे सादी करने वाले थे..
तभी ये सब बाते सुनकर मुजपे तो पहाड ही टुट पडा.. तब किशनने मुजे बहुत समजाया ओर दोनोके साथ सादी करनेकी बात करने लगा.. तब अेक बारके लीये तो मेभी मान गइ.. की चलो दोनो बहेने साथमे रेह लेगी.. लेकीन उसी रात मुजे विमला अकेली मीलने आइ.. ओर मुजे किशनको छोड देनेके लीये कहेने लगी.. कहेतीथी..
विमला : देख नीर्मला.. अगर तु किशनसे सादी करलेगी तो हम दोनो उनकी लीगल बीवी होजायेगी.. ओर तुभी पेटसे हे ओर मे भी पेटसे हु.. अगर हम दोनोको लडका होगया तो हमारा कीशन वो श्रापकी वजहसे नही बचेगा.. ओर हम दोनोही विधवा होजायेगी.. अब फैसला तुजे करना हे उनको छोड देना हेकी किशनको मार देना हे.. क्युकी वो किशनको छोडने वाली नही थी.. ओर मे उनके श्रापकी वजहसे बडी दुवीधामे पड गइ.. ओर दिन नीकलते रहे.. ओर मेराभी पेट बढने लगा..
अब ये बात लोगोसे कीतने दीन छुपी रहेती की मे प्रेगनेन्ट हु.. ओर मेरे पापाको ओर बडेभाइको पता चल गयाकी मे कीसीसे पेटसे हुइ हु.. लेकीन मेने किशनका नाम नही बताया.. ओर मेरे बापु परेसान रहेने लगे.. ओर अेक दिन मेरी चिन्ताकी वजहसे उनको दिलका दौरा पडा.. ओर वोभी चल बसे..
बस उसी रात हम दोनो भाइ बहेनने हवेली छोडनेका फैसला करलीया.. तब चंदा बहुत छोटी थी.. आइ थींक १२ सालकी होगी.. ओर हम दोनो भाइ बहेन कीसीको कहे बगैर देर रात चंदाको लेकर हवेलीसे नीकल गये.. ओर सबसे छुपकर इसी गावमे आगये..
देवायत : तो फीर पापा ओर मेरे बापु फीरसे कैसे मीले..? क्या आप उनको दुबारा नही मीली..?
नीर्मला : (हसते) हां फीर उनसे सीर्फ अेकही बार मुलाकात हुइ.. हमारे जानेके बाद उन्होने हमे बहुत ढुंढा.. लेकीन हम तीनो यहा अेक किरायेके रुममे गांवसे दुर रहेने लगे थे.. ओर वो हमे नही ढुढ पाये.. तब भाइभी गावमे अेक कीरानेकी दुकानपे काम करने लगा.. ओर हमारा गुजारा बडी मुस्कीलसे होने लगा.. ओर वक्त बीतने लगा.. तबतक विमला आपको जन्म देचुकी थी.. ओर आखीर मेनेभी नौ महिने पुरे होते अेक बच्चीको जन्म दे दीया.. वो थी मेरी मंजु.. आपकी सौतेली बहेन.. जो आज आपकी बीवी हे..
देवायत : (हसते) मेने भी क्या कीस्मत पाइ हे.. मेने भी मेरी ही बहेनसे सादी करली.. हें..हें..हें..
नीर्मला : (सरमाते हसते) हां.. तभीतो मे आप दोनोकी सादीके खीलाफ थी.. लेकीन मे कीसीको केहभी नही सकतीथी की ये दोनो भाइ बहेन हे.. इनकी सादी नही हो सकती.. फीर सोचा आपके खानदानमे तो यही सब चलता हे ओर मेने भी अपने भाइसे सादी करली हे तो फीर मे क्यु अेतराज करु..? ओर मेने आपकी सादीके लीये हां कहेदी.. हें..हें..हें..
देवायत : तो फीर आप लोगोको बापुने कैसे ढुंढ लीया..?
नीर्मला : क्या आपको नही पता..? आपके बापुका कीतना बडा नेटवर्क हे.. उन्होने बहुत गावोमे हमे ढुंढा ओर सभीको कहेके रखाथाकी ये लोग मीलेतो उनसे इन्फोर्म करदे.. ओ यहाभी यही हुआ.. कीसी जान पहेचान वालेने राजीवको दुकानपे देखलीया ओर किशनको बता दीया.. तब उसी वक्त अपनी कार लेके सीधेही राजीवकी दुकानपे चले गये.. जहा वो नौकरी करता था.. ओर किशनने राजीवको सब सचाइ बतादी.. ओर येभी बता दीयाकी नीर्मलाकी बच्चीका बापभी मेही हु..
देवायत : तो फीर पापा कुछ नही बोले..?
नीर्मला : क्या बोलते..? आपके दादाका हमपे बहुत अहेसान था.. जब मां गुजर गइ तब आपकी दादीनेही हम सबको सम्हालाथा ओर हम सबकी पढाइका खर्चा वोही दे रहेथे.. ओर वो खुद कइ बार किशनके लीये मेरे बापुसे मेरा हाथ मांग चुकीथी.. लेकीन देखो.. कीस्मतको कुछ ओरही मंजुर था..
वरना किशन जब राजीवसे मीला तब मुजे पहेली बार मीला ओर मुजे अपनानेको तैयार था.. लेकीन मेनेही मना करदीया.. तब हम यहा इस गांवमे आगये थे.. तो मुजे नही पताथा की आपके गरुदेव हवेलीमे आकर वो श्रापका नीवारण कर चुकेथे.. वरना मे जरुर वापस आजाती.. ओर किशनसे सादी करलेती..
ओर मेने किशनकी जानकी खातीर उसे मना कर दीया.. ओर आपकी मां विमलाभी नही चाहतीथी की मे वहा वापस आजाउ.. ओर किशनने हमारे लीये हमसे छुपके यहा घरभी लेलीया ओर राजीवके साथ पार्टनरमे कीरानेका होलसेलका बीजनेसभी सुरु करदीया.. तब हमे नही पताथाकी वो ये सब हमारी मदद करनेके लीये कर रहा हे.. ओर येभी पता चलाकी वो विरजीभी आपकी खेतीबाडी सम्हालने लगाहे.. ओर उनकीभी सरलासे सादी होगइ हे.. इस बातका पता आप ओर मंजुकी सादीसे पहेलेही मुजे राजीवसे पता चला.. तबतक मेभी सबकुछ भुल चुकीथी..
देवायत : (हसते) तो फीर पापाके साथ आपकी सादी कैसे होगइ..? वोभी तो आपके बडे भाइ थे..
नीर्मला : (अेदम सर्मसार होते धीरेसे) वो..वो.. बस होगइ.. अेकतो मेरी वजहसे ओर दुसरा तब हमारी आर्थीक परीस्थीती अच्छी नहीथी.. तो भाइ कहेताथा हमारा गुजाराभी मुस्कीलसे हो रहा हे तो सादी करके क्या करुगा..? इसी वजहसे भाइने सादी ना करनेका फैसला करलीयाथा..
ओर कहेताथा अब इन बच्चीको मेरी ही बच्ची मानके पालुगा.. ओर दुसरा ओरत ओर मर्द जब साथ होतेहे ओर उनको बार बार अेकांत मीलता हेनां.. तो अेक दिन सबकुछ होही जाता हे.. फीर चाहे भाइ बहेन हो या मां बेटा.. ओर हम सब अेकही रुममे रहेते थे.. खाना पीना नहाना सोना सब अेकही रुममे होताथा.. फीर आपतो जानतेहे ओरत होया मर्द उनकीभी कुछ नीड होती हे.. बस यही मुजे ओर भाइको अेक दुसरेसे नजदीक लानेका कारण बनी..
ओर धीरे धीरे मे ओर भाइ अेक दुसरेकी ओर आकर्सीत होकर नजदीक आते गये.. मे भाइका अेक पतीकी तराह खयाल रखने लगी.. ओर हम दोनो धीरे धीरे खुलते गये.. अेक दुसरेसे छेडखानीसे सुरुआत होकर दोनोही आपसमे प्यार करने लगे.. ओर अेक दिन चंदा स्कुलमे थी..
तब हम दोनोही घरपे अकेलेथे ओर बहेक गये.. फीर सबकुछ होगया.. उस दिन हमने दो बार सेक्स कीया.. तब मे भुल चुकीथी की ये मेरा भाइ हे.. ओर भाइभी भुल चुकाकी ये मेरी छोटी बहेन हे.. बस हम दोनोही अेक दुसरेमे अेक मर्द ओर ओरतको देखते थे.. साली ये तनकी आग बहुतही खतरनाक हे.. कोइ रीस्ते नाते नही देखती..
फीर तो हम दोनो भाइ बहेन काफी खुल चुके थे.. जबभी चंदा घरमे नही होती तब आये दीन भाइ मुजे पकड लेता ओर हम अेक दुसरेके साथ छेडखानी करते.. फीर हम दोनो अेक होजाते.. ओर ये सीलसीला रोजका होगया.. ओर मुजेभी भाइसे सेक्सकी आदत लग गइथी.. अब मे भी भाइसे सेक्स करनेके बगैर नही रेह सकती थी.. ओर हम दोनो अेक पती पत्नीकी तराह रहेने लगे.. जबभी चंदा सोजाती मे देर रात सरकके भाइके पास उनके बीस्तरमे चली जाती ओर हम दोनो अेक होजाते ओर अपनी प्यास बुजा लेते..
हम दोनोके बीच प्यार ब्यार कुछ नहीथा.. बस अेक दुसरेकी तनकी जरुरत समजकर दोनोने हमेसाके लीये साथमे रहेनेका फैसला करलीया.. ओर अेक दिन मे ओर भाइ साथमे सेक्स कर रहेथे तब सोचा.. अगर किशन उनकी बहेनके साथ सादी कर सकता हे तो हम क्यु नही..? ओर हमने दुसरे ही दीन मंदिरमे जाकर आपसमे सादी करली.. ओर हमारा पती पत्नी वाला संसार अच्छेसे चलने लगा.. तब अेक दिन पता चला मे भाइसे प्रगनेन्ट होगइ हु.. तब हम दोनोही बहोत खुस हुअे.. ओर पुरे नव महीनेके बाद मेरी भावुका जन्म हुआ..
तब चंदाभी काफी समजदार हो चुकीथी.. लेकीन मेरे ओर भाइके बीच जो नया रीस्ता हुआ इनसे उनको कोइ अेतराज नही कीया.. ओर हमारे रीस्तेको अेक्सेप्ट करलीया.. फीर तो वोभी कभी कभी मजाकमे राजीवको जीजु कहेते चीडाती.. ओर जब जवान होगइ.. तब अेक दिन किशनही रीस्ता लेकर आया.. ओर हमने चंदाकी सादी करदी.. फीरतो हम दोनोको खुली छुट मील गइ.. फीर काफी समय बीतता गया..
फीर अेक दिन मुजेभी भाइसे पता चलाकी मेरी मंजुके जन्मसे पहेले विमला आपको जन्म दे चुकीथी.. जब आप उनके पेटमे छे महीनेके थे तब उन्होनेभी अपने भाइसे सादी करली.. फीर तो आप यहा पहेली बार आये तो मेतो आपको देखके हैरान होगइ.. वोही चहेरा जो मेरे किशनका था..
वोही आंखे वोही कसरती बदन.. ओर मेरा पहेला प्यार फीरसे जाग गया.. ओर मे धीरे धीरे आपकी ओर आकर्शीत होती गइ.. आप बार बार हमारे घर आने लगे.. ओर हमारी नजरे मीलती रही.. मे आपके अंदर मेरे किशनको ढुंढती रही.. ओर आखीर अेक दिन आपने भी अपने बापुकी तराह मुजसे अपने प्यारका इजहार करदीया.. फीर उसके बाद क्या हुआ वोतो आप जानते ही हे.. हें..हें..हें.. बस यही मेरी कहानी हे..
(अतीत से बहार..)
देवायत : (हसते) हंम.. काफी इन्ट्रेस्टेड स्टोरी हे आपकी.. चलो जानकर खुसी हुइ.. की मेने मेरी बहेनसे ही सादी करली हे.. मेरी मंजु.., नीमु.. हमारे खानदानमे अैसा क्यु हो रहा हे तुजे पता हे..?
नीर्मला : (सरमाते हसते) नही.. आज आपभी कुछ राज बतादो.. हें..हें..हें..
फीर देवायत नीर्मलाको उन हीमाचलके राजाकी पुरी स्टोरी सुनाने लगता हे.. तब नीर्मला बडेही गौरसे सुन रहीथी.. जीनकी वजहसे उनकी चुतमे हलचल तेज होगइ ओर चुतके नाजुक होस्ट फडफडाने लगे.. ओर पानी छोडने लगे.. लेकीन नीर्मलाने उनपे कुछ खास ध्यान नही दीया.. ओर देवायत उनको पुरी स्टोरी सुना देता हे.. जीसे सुनके नीर्मला काफी अेक्साइटेड होगइ.. ओर देवायत नीर्मलाको वोही राजा रानी फीरसे उनके घर जन्म लेकर आने वालेहे बता देता हे.. तब नीर्मला सुनक बहुतही अेक्साइटेड होगइ.. तब जाके उनको अपने नीकरमे गीलापन महेसुस हुआ....
कन्टीन्यु
अध्याय - ८७
तब सृतीको पहेली बार देवायतने होंठ चुमकर कीस करदी तो सृती सोक्ट होते मुह फाटते उनकी ओर देखती रही.. क्युकी पीछले कुछ महीनोसे वो सीर्फ देवायतके बारेमे ही सोचती रहेती हे.. ओर जबसे देवायतके पेन्टके उभारको देखलीया हे तबसे वो पागल हो रही हे.. ओर आज मंजुकी बातो ने आगमे घी डालनेका काम कीया.. तबतक देवायत बहार नीकल चुकाथा तो वो जटसे उनके पीछेकी ओर दोड पडी.. जैसे उनसे उनका पुराना यार बीछड रहा हो....अब आगे
सृती दोडकर गेइट तक आइ तब सभी लोग कारमे बेठ रहेथे.. तो सृती वही रुककर सबको देखने लगी.. ओर देवायतने कार स्टार्ट करदी ओर गेइटकी ओर देखने लगा तब दोनोकी आंख मीलतेही सृती उनको हाथ हीलाकर मुस्कराते बाय.. कहेने लगी.. आज सुतीके दिलके तार संगीतके सुर छोडकर प्यारकी धुन बजाने लगे.. तब सृती बहुतही रोमांचींत होते सबके जाने तक वही खडी रही..
इधर देवायत सबको लेकर अपने गांवकी ओर चला गया.. तो मंजु ओर चंदाने बीच रास्तेमे अेक कपडे ओर ज्वेलेरीकी दुकानमे मंगलसुत्र खरीद लीया ओर अपने गांवकी ओर चले गये.. तो दुसरी ओर भानुभी अपने मामाका अस्थी विसर्जन करके वहासे नीकल गयाथा.. ओर आधे घंटेके बाद वोभी सृतीकी होस्पीटल आगया वहा सृतीने भावनाको ओर बच्चीको चेक करलीया देखातो भावनाकी योनीमे रेग्युलर सुधार हुआथा..
ओर उसने भावनाको अभी दो महीने सेक्स करनेको मना कीया.. फीर वो भी सृतीको दीखाकर बाजारमे सादीकी खरीदी करने चले गये.. तो वहा भावना अपनी बच्चीको लेकर कारमे ही बैठी रही ओर रमा नीलम लता सब अपने अपने कपडे लेने लगे तो रमाने सरला ओर भावनाके लीयेभी महेंगी महेंगी सारी खरीदली.. फीर सब अेक ज्वेलेरी सोपमे चले गयेतो वहाभी रमा जबरदस्तीसे भावुको साथ ले गइ ओर उन्होने लताके लीये कुछ ज्वेलरी लेली..
फीर नीलम लता ओर रमाने लताके लीये सादीका जरुरी सामन खरीद लीया सभी देर साम तक खरीदी करते रहे.. ओर बीचमे अेक होटेलमे खानाभी खा लीया.. तबतक रातमे देर होगइ.. सभी आजही सब खरीदीका काम नीपटाना चाहते थे.. तो इधर घरपे सीर्फ सरला अकेली थी..
तो उधर देवायत मंजु चंदा दया सबको लेकर दो पहरकोही हवेलपे आगया.. तो पुनमतो देखतेही बच्चेको गोदमे उठाकर अंदर चली गइ.. वो आराम करके काफी हद तक ठीक होगइ थी.. ओर सोफेपे बेठकर विजयके साथ खेलने लगी.. फीर सबने खाना खालीया.. ओर देवायत राजीवके पास जानेके लीये नीकलने लगा.. तब..
मंजुला : देवु.. अगर पापाको होस्पीटलसे डीस्जार्ज मील जाये तो आप उन दोनोको इधर ही लेकर आना..
चंदा : हां देवु.. अगर दीदी हानाकानी करेतो मुजसे बात करवाना.. वो बहुतही जीदी हे.. अेक बार मनमे ठानली.. फीर कीसीकी नही सुनती..
देवायत : हां ठीक हे.. आप टेन्शन मत लो वो जरुर आयेगे.. चलो मे चलता हु.. सायद रातको मुजे आनेमे देर होजाये..
कहेते देवायत वहासे अपनी बडी कार लेकर नीकल गया.. वो आज बहुत खुस था.. रीजन बस अेकही था.. आज चंदा हमेसा हमेसाके लीये उनके पास आ गइथी.. ओर उधर नीर्मलासे भी सुलेह होगइ थी.. तो आज सृतीने भी उनको हाथ दबाकर जटका दे दीयाथा.. तो मनही मन हसते खुस होते वो अपने ससुरके पास होस्पीटलपे पहेच गया.. ओर कार पार्क करके सीधाही अंदर चला गया.. ओर जेसेही दरवाजा खोला..
तो देखा नीर्मला राजीलको ज्युस पीला रही थी.. तो दोनोकी नजर देवायतकी ओर गइ.. ओर दोनोके चहेरे देवायतको देखतेही खील उठे.. तब देवायत राजीवके बेडके पास खाली चेयरपे बेठ गया ओर उनके सामने देखकर मुस्कराने लगा.. तब नीर्मलाभी सरमाते उनकी ओर देखते हसती रही.. राजीव अब पहेलेसे काफी बहेतर था.. ओर धीरे धीरे थोडा बोलनेभी लगाथा.. ओर सरीरमेभी काफी सुधार था..
देवायत : (हसते) कैसेहो पापा..? लगाहे अब काफी ठीक हो गेये हो.. हें..हें..हें..
राजीव : (धीरेसे हसते) हां.. अब तुम जो आगये हो.. तो ठीकतो होना ही पडेगा.. हें..हें..हें..
नीर्मला : सुनीये राजीव.. आप अभी कम बोलना.. डोक्टरने मना कीया हेनां..? मे देवुसे बात करती हु..
देवायत : क्या कहेते हे डोक्टर..? क्या सुबह देखने आये थे..?
नीर्मला : हां देवु.. यहा बहुत अच्छी ट्रीटमेन्ट हो रही हे बहुतही फास्ट रीकवरी आ रही हे.. फीरभी आप अेक बार डोक्टरसे मील लेनां.. अभी अपनी केबीन मे होगे.. क्या मे साथमे चलु..?
देवायत : (हसते खडे होते) हां हां.. चलो अेक बार मील लेते हे देखु तो सही वो क्या कहेते हे..
कहेते वो बहार जाने लगातो राजीव दोनोको आपसमे बात करते देखकर खुस होने लगा.. तभी नीर्मलाभी खडी होकर उनके साथ बहार नीकल गइ.. ओर जटसे देवायतके साथ जाके चलने लगी ओर उनका हाथ पकडलीया.. ओर दोनो अेक दुसरेके सामने देखके हसने लगे.. ओर रीसेप्नीस्टको कहेके वो डोक्टरको मीलने उनकी ओफीसमे चले गये.. तब नीर्मलाने देवायतका हाथ छोड दीया..
डो. राजेन्द्ग : (हसते) आइअे आइअे ठाकुर साहेब.. कैसेहे आप.. मजेमे..?
देवायत : (हसते हाथ मीलाते बेठते) बस अेकदम मजेमे.. कहीये क्या कहेते हे मेरे ससुरजी.. तबीयतमे तो काफी सुधार लग रहा हे.. अभी मुजसे बात भी की.. हें..हें..हें..
डो. राजेन्द्ग : (हसते) अरे आप टेन्शन मतलो.. उनकोतो मे वापस खडा करदुगा.. ओर अपने धंधे पे भेज दुंगा.. काफी अच्छी रीकवरी हे.. टाइमपे पहोंच गये ओर दवाइभी असर कर गइ.. बस अैसेही सुधार हुआ तो सायद कल छुटी देदुगा.. कल सामको देखते हे.. बस आज रात तक ड्रीप लगी रहेगी.. फीरतो सुबह वोभी नीकाल देगे.. लगता हे वो टेन्शनमे बहुत रहेते होगे.. तभी उनका बीपी हाइ हुआ हे..
देवायत : सायद.. पता नही उनको कोनसा टेन्शन होगा.. सर.. मे उनको अपने घर लेजाउगा वहा सब होगेतो अच्छे माहोलमे ठीक रहेगा.. वहा उनकी बेटी हे तो उनकोभी देख लेगे..
डो. राजेन्द्ग : (हसते) हां ये ठीक सोचा हे आपने.. हवा पानी भी बदल जायेगातो जल्दी ठीक होजायेगे..
देवायत : (हसते) सर वो आपकी फीस जमा करवानी थी.. तो बहार रीसेपनीस्टपे देदु..?
डो. राजेन्द्ग : (हसते) ठाकुर साहेब कल घरपे बाबुजीसे बात हुइ.. तो आज सुबह वो अंकलको देखने आयेथे.. दोनो पुराने दोस्त हेनां.. ओर उसने मुजे फीस लेनेके लीये बीलकुल मना करदीया हे.. तो मे नही ले सकता.. सोरी..
देवायत : अरे अैसे थोडी चलता हे.. आपने दवाइमे इतना बडा खर्चा कीया हे.. ओर सर वैसेभी पैसेकी कोइ प्रोबलेम नही हे..तो..
डो. राजेन्द्ग : (हसते) पता हे मुजे.. आप इतनी बडी वीरासतके मालीक हेतो पैसोकी प्रोबलेम कहा होगी.. लेकीन ये मेरे भी अंकल हे.. ओर हां मुजे सर मत कहीये आप मुजे नामसेही बुला सकते हे..
देवायत : (हसते हाथ मीलाते) ठीक हे मी. राजेन्द्ग तो आजसे आप मुजेभी ठाकुरसाहब मत कहेना.. मेरा नाम देवायत हे.. सीर्फ उन्हीसे काम चल जायेगा हें..हें..हें..
डो. राजेन्द्ग : (हसते) जी देवायतजी.. आपसे मीलकर मजा आगया.. आपके जैसे बहुत कम दोस्त मीलते हे..
फीर देवायत ओर नीर्मला बहार आगये तो नीर्मला बहुतही खुस थी.. ओर देवायतका हाथ पकडलीया ओर दोनो अपने रुमकी ओर आने लये तब नीर्मलाने वापस हाथ छोड दीया.. ओर दोनो राजीवके पास आकर बैठ गये तो नीर्मला राजीवको सबकुछ बताने लगी.. तबतक देवायत ओर राजीव हसते रहे.. फीर..
देवायत : (हसते) पापा डोक्टर केह रहेथे आपको टेन्शनकी वजहसे ये सब हुआ.. तो कहीये आपको कीस बातकी टेन्शन हे..? सब अच्छेसे तो चल रहा हे अबतो बेटीओकी भी चीन्ता नही हे..
राजीव : (थोडी देर आंख बंध करलेता हे फीर) बेटा.. नीमु तुमसे बात नही कर रहीथी.. ओर मे सोचता रहेताथा की मेरे जानेके बाद इनका क्या होगा..? वो अकेली कैसे रहेगी..? बस यही भीन्ता खाये जा रहीथी.. लेकीन अब ये चीन्ता बीलकुल नही हे.. क्युकी मेने देखा आप दोनो बोल रहेहे.. हें..हें..हें.. बस मेरा अेक काम करदो.. फीर कोइ चीन्ता नही..
नीर्मला : (आंख गीली होतेभी हसते) अब कोनसा काम बाकी रेह गयाहे हे आपका..? ओर हमारे बीच भी कोइ मनमोटाव नही था.. बस हम कुछ कम बोलते थे.. बस यही.. ओर कुछ नही..
देवायत : पापा आप अब कोइ टेन्शन मत लेना.. अबी आपका बेटा जींदा हे.. कहो क्या काम करना हे मुजे..
राजीव : (गहेरी सांस लेते) भगवान आपको लंबी उम्र दे.. बस अेक वादा चाहीये मुजे.. वोभी आपसे..
देवायत : (उनका हाथ थामते) पापा बाप भी कभी बेटेसे वादा लेता हे..? बस हुकुम कीजीये.. वोतो हुकुम करता हे.. मे आपको अैसेही पापा नही कहेता..
तभी राजीव कुछ अैसा करता हे जीससे देवायत ओर नीर्मला दोनोही सोक्ट होते अचंभीत होजाते हे.. ओर तीनो अेक दुसरेकी ओर देखते ही रहेते हे.. कीसीके मुहसे अेक सब्दभी नही नीकल रहाथा.. दरसल राजीवने अेक हाथसे नीर्मलाका हाथ थामलीया.. ओर दुसरे हाथसे देवायतका हाथ थामते नीर्मलाका हाथ देवायतके हाथोमे थमा दीया.. जीसकी वजहसे दोनोही सोक्ट होके राजीवकोही देखते रहे तब राजीवने हसते हुअे कहा..
राजीव : बस बेटा.. यही वादा चाहीये मुजे.. अगर मुजे कुछ होजाताहे तो आप मेरी नीमुका खयाल रखीयेगा.. ताकी मुजे तसली होजायेकी मेरे जानेके बाद नीमु अकेली नही रहेगी.. उनकी देखभालके लीये उनका दामाद हे.. बस मुजे ओर कुछ नही चाहीये.. यही टेन्शन खाये जा रहीथी..
देवायत : (मम्मी बोलनेसे हीचकीचाते) पापा आप इनकी बीलकुल टेन्शन मतलो.. मे आपसे वादा करता हु.. म..मम्मी..का मे मरते दमतक खयाल रखुगा.. उनको मेरे पासही रखुगा.. लेकीन आप अैसा गलत क्यु सोचतेहो की मुजे कुछ होजायेगा.. आपको कुछ नही होगा हम सब हेना.. हम आप दोनोका खयाल रखेगे..
राजीव : (हसते) बस बेटा.. बुढापा हे ही अैसा.. मुजे कभीभी कुछभी हो सकता हे.. ओर नीमुकोतो अभी लंबा सफर काटना हे..
नीर्मला : (आंसुके साथ) ये आप कैसी बेहकी बेहकी बाते कर रहे हे..? आपको कुछ नही होने वाला..
राजीव : (हसते) नीमु.. हमारा देवा बहुतही अच्छा हे.. सबका खयाल रखता हे.. उनके बापुकी तराह.. मेरा जीगरजान भाइ.. मेरा सबकुछ.. जो जींदगीभर मेरा साथ नीभानेका वादा कीयाथा वो उसने पुरा कीया..
देवायत : पापा अब आप कुछ देर आराम कीजीये मे अब साम तक यही हु.. ओर कल सायद आपको यहासे छुटी मीलजाये.. तब आप दोनको मेरे साथ हवेलीपे आना हे वहा कुछ दिन आराम करलो.. जब बीलकुल ठीक होजाओ तब इधर आना होतो आजाना वरना वही रहेनां..
राजीव : बेटा बेटीके घरभी कोइ रहेता हे.. हम यहा ही ठीक हे.. आप हमारी चीन्ता मत करना..
नीर्मला : अब आप सोजाइअे वो हम बादमे देख लेगे.. अगर आप मेरी वजहसे अैसा केह रहे हो तो अब मुजे वहाभी जानेमे कोइ अेतराज नही हे.. हम वही चले जायेगे..
राजीव : (मुस्कुराते खुस होते) अच्छा..? तो फीर हम दोनो वहा मेरी मंजुके पास चलेगे..
नर्स : (अंदर आते) अंकल खाना खालीया हे..? तो लीजीये दवाइ पी लीजीये ओर आराम कीजीये.. आप बाते बहुत करते हे.. हें..हें..हें..
कहेते नर्सने राजीव अंकलको दवाइ पीलादी ओर चली गइ.. तो कुछ ही देरमे वो नींदकी आगोसमे चले गये.. तब नीर्मला देवायत हाथ पकडके उसे बहार लेगइ.. ओर वो दोनो होस्पीटलके बहार अेक पैडके नीचे बेन्च रखीथी वहा जाकर बैठ गये.. तब नीर्मला देवायतके कंधेपे सर रखके बैठ गइ.. ओर देवायतका हाथ थाम लीया.. जेसे कोइ दो प्रेमी बेठे हो..
नीर्मला : देवु क्या कर रही हे मंजु ओर चंदा..? क्या दोनो घरपे आगइ? ओर आप दोनो सादी कब कर रहे हो..?
देवायत : हां अभी मंजुको दीखाके आयेहे.. ओर दोनोको घरपे हे.. उसे घरपे छोडके ही आया हु.. ओर सादीका पता नही.. कल मंजुने मुजे घरपे रहेनेका ओर्डर दीया हे.. सायद कलही हमारी सादी होजायेगी.. आज छुटी नही मीली.. वरना आप लोगभी सामील होते.. मंजुने मुजे आप दोनोको साथ लेकर आनेको कहा हे..
नीर्मला : (हसते) कीतना अजीब हेना..? ये सब पुराने रीती रीवाज.. पता नही इनसे हम ओरतोको कब छुटकारा मीलेगा..? चंदातो बुहत छोटी थी.. मेरी गोदमे बीठाकर मेने उसे खेलाया खीलाया ओर बेचारी भर जवानीमे विधवा होगइ.. इनसेतो आपका घर अच्छा हे.. इतनी बडी रोयल फेमीली हे.. फीरभी वहा बहुत कुछ छुट हे.. ओरतको अपनी मरजीसे सादी करनेकी छुट.. मर्द कीतनीभी सादी करले कोइ कुछ पुछने वाला नही.. जीसे जैसी मरजीमे जीना हो.. सब खुलकर जींदगी जीतेहे..
देवायत : (हसते) तो फीर आप वहासे क्यु चली गइ..? मुजे कुछतो अंदाजा हे आपके साथ वहा जरुर कुछना कुछ गलत हुआ होगा.. बस मुजे आपके बारेमे ज्यादा नही पता..
नीर्मला : (आंख गीली करते अेक नजरसे) देवु.. आप मेरे बारेमे क्या जानते हे? जो मेरे इस अतीकके बारेमे पुछ रहे हे..
देवायत : नीमु.. बुरा मत मानना.. मेरी भुमी आंटीसे काफी बात चीत होचुकी हे.. तब मे इतना जान पायाकी आप ओर मेरे बापु आपसमे बहुत प्यार करते थे.. ओर आप सब अेकही कोलेजमे साथ पढते थे.. बस इतनाही.. पता हे.. नीमु मुजे तेरे अतीतके बारेमे जानना हे.. आइ प्रोमीस बात सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगी.. मुजे जानना हे मेरी नीमु वहासे सबको छोडकर क्यु इधर आगइ..
नीर्मला : (फीकी मुस्कानके साथ) देवु क्यु गडे मुदे उखाड रहेहो.. जो वो केवल हमे दुख ही देता हे.. भुल जाओ सब.. मेभी सब भुल चुकी हु.. बडी मुस्कीलसे इन सब बातोसे बहार नीकलपाइ हु.. कुछ बाते अैसीहे जो वो राज रहे उसीमे हम सबकी भलाइ हे.. बस यही समजलो मे आपकी ओर मंजुकी सादीके खीलाफ थी.. उनका कारण भी यही था.. वरना मुजे आपकी ओर मंजुकी सादीसे क्या अेतराज हो सकता हे..
देवायत : नीमु.. आज तुमसे अेक बात कहेना चाहता हु.. तेरी मंजु कोइ सामान्य ओरत नही हे.. जीस दीन हमने बाबाके आश्रममे जाकर सादी करली उसी दीन बाबाने उनको बहुत कुछ बतादीया हे ओर उनके अंदर बहुत सारी शक्तिीया स्थापीत करदी हे.. वो हम सबके बामरेमे सब कुछ जानती हे.. बस कुछ बोलती नही.. क्युकी वो बाबाके साथ वचनसे बंधी हे.. वरना वो मुजे सबकुछ नही बता देती..? मेभी उनको फोर्स नही करता.. समय आनेपे वो मुजे धीरे धीरे सब बताती रहेती हे..
नीर्मला : (आस्चर्यसे अेक नजरसे देखते) तबतो वो मेरे बारेमे सब कुछ जान चुकी होगी.. फीरभी कुछ नही बोली..? क्या उसीने बोला हेना.. मम्मीको माफ करदेनां..? देवु.. मेरी मंजुका दिल कीतना विशाल हे.. मे उनको कभी समजही नही पाइ.. सब आपहीकी बदौलत हुआ हे.. आइ अेम सोरी.. आप दोनो मुजे माफ कर देना.. मे सब कुछ जानते हुअेभी अन्जान रही.. ओर आप अन्जान होते हुअेभी सब कुछ जानते हो..
देवायत : (हसते) नीमु.. पती पत्नीके बीच माफी नही मांगी जाती.. तु आजभी मेरी पहेली बीवी हे.. मे आजभी तुमको इतनाही चाहता हु. जीतना पहेले चाहता था.. बस तुमको हमारे बीच कुछ गलतफेहमी हो गइ थी.. जो अब दुर होगइ..
नीर्मला : (बेठेही हग करते) जानु.. मे आपको सबकुछ बता दुगी.. ओर मुजे यकीन हे.. आप मेरी बात सुनके वीचलीत नही होगे.. ओर हमारे रीस्तेमे आगेभी कोइ फर्क नही पडेगा.. आप प्रोमीस करो मुजे..
देवायत : (हसते) अरे बाबा कीतनी बार प्रोमीस करु..? हें..हें..हें.. ठीक हे फीरभी आइ प्रोमीस.. हमारे रीस्तेमे कोइ फर्क नही पडेगा.. जो भी कहेना हो बीन्दास्त कहेना.. आज भलेही सब राज खुलजाये.. मे वीचलीत नही होउगा.. ओर राजीव अंकल अभी सोये हे.. तो मुजे नही लगता दो घंटेसे पहेले वो जागेगे.. हमारे पास काफी टाइम हे..
नीर्मला : (गेहेरी सास लेते कंधेपे सर रखते) जानु तो सुनो.. आप मेरी जींदगीमे पहेले सख्स हो जो उनको मे सब सचाइ बताने जा रही हु.. ओर आपनेभी मुजे प्रोमीस कीया हे कीसीको नही बतायेगे.. मेरी कुछ बाते हे जो राजीवको भी नही पता.. जो आज आप जानोगे..
देवायत : हां नीमु.. मेतो यही मानता हु पती पत्नीके बीच कोइ पर्दा नही होना चाहीये.. बोलो..
(थोडा अतीतमे..)
नीर्मला : बात तबकी हे जो मेरे पीताजी आपके दादाके वहा मुनीम थे.. मां तो चंदा छोटीथी तबही गुजर गइथी.. ओर हम दोनो बहेने ओर अेक बडाभाइ वही हवेलीमे रहेते थे.. में.. मेरे बडेभाइ राजीव..आपके पीता किशन.. भानुके पीता वीरजी.. सृतीके मम्मी पापा यानी भुमीका ओर नरेश हम सब अेकही कोलेजमे अेकही क्लासमे साथमे पढते थे.. वो तीन लडके हमसे अेक साल आगे पढ रहेथे लेकीन अेटी केटीकी वजहसे आगे नही जापाये ओर हमारे साथ होगये ओर मे भुमी ओर किशन.. अेक साथ अेकही क्लासमे पढ रहेथे..
भुमी वही होस्टेलमे रहेती थी ओर नरेश सहेर मेही उनकी माताके पास रहेताथा.. उनके पीताजी नही थे.. ओर किशन राजीव विरजी ओर में हम चारो किशनकी कारसेही कोलेज जातेथे.. हम पढाइके साथ साथ बहुत धमाल करतेथे.. खासकर वो चारो लडके.. हमारे गृपमे सीर्फ हम दो लडकीया ही थी.. कोइ हमारी ओर आंख उठाके नही देखते.. अगर कीसीने हमे छेडा.. तो गया कामसे.. ये चारो उनकी हडी पसली अेक करदेते थे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) अच्छा..? पीताजी दीखनेमे तो कीतने भोले थे.. हें..हें..हें..
नीर्मला : (हसते) नही वो सचमे बहुत भोले भाले थे.. लेकीन हम सबमे सबसे होशीयार वोही थे.. तभीतो मे उनसे दिल लगा बैठी.. किशनने मुजे क्लासमेही चीठी देकर अपने प्यारका इजहार करलीया.. ओर मेभीतो उनको चाहने लगीथी.. बस तबसे हम दोनोकी प्रेम कहानी सुरु होगइ..
ओर भानुके पीता विरजी.. वो बहुत सनकी थे.. ओर दिखनेमेभी काफी क्रुर थे.. वो कीसीके सामने देखते तो आधी तो सामने वालेकी अेसेही फट जाती.. कोलेजसे बन्क मारके हम कीतनी बार सीनेमा ओर होटेलमे जाते ओर वो चारो बीन्दास दारु पीकर धमाल करते.. तब हम दोनो उनसे दुर ही रहेती.. ओर भाइ भी बहुत भोले थे.. ओर अभी भी अैसेही हे.. हें..हें..हें..
हम सभीमे सबसे ज्यादा पढनेमे किशन होशीयार था.. घरपेभी मे भाइ ओर कीशन सब साथमेही पढते तो कभी कभी वीरजीभी पढने आजाता.. ओर भाइ पीताजीकी हेल्पभी करता.. ज्यादातर मे ओर किशन ही साथमे पढते.. ओर मुजे पढनेमे कोइ सवालमे प्रोबलेम होतीतो किशन मुजे पढाकर सोल्व कर देता.. ओर दोनोको अकेलेमे साथमे रहेनेका बहुत मौका मीला..
ओर जीनकी वजहसे हम अेक दुसरेसे नजदीक आते गये.. ओर बात आगे बढती गइ.. फीरतो पढाइके अलावा बहुत कुछ होने लगा.. मुजेतो बतानेमे भी सर्म आ रही हे.. लेकीन आप काफी समजदार हो.. मेरी बातको समज गये होगे.. हमे जबभी मौका मीलता हम दोनो मस्तीया करने लगे.. ओर धीरे धीरे आगे बढने लगे.. हम दोनोही अेक दुसरेके बगैर दुर नही रेह सकते थे.. दोनोही साथमे रहेते..
जब फाइनल यरमे आये तबतक मे ओर किशन काफी आगे बढ चुके थे.. अेक बार हवेलीपे सीर्फ हम दोनोही अकेले थे.. तब हमारे बीच सब दुरीया खतम होगइ.. ओर हम दोनोके बीच सब कुछ होगया.. उसी दिन किशनने मेरा कौमार्य भंग कीया.. ओर मेरा किशनने मुजे लडकीसे ओरत बनादीया.. फीरतो हम दोनोको जबभी मौका मीलता हम दोनो मील जाते.. हम दोनोने ये बातकी कीसीको भनकभी नही लगने दी.. किशन मौका मीलतेही मुजे कहीभी पकड लेता.. ओर हम दोनो अेक हो जाते..
तब वो बिलकुल आपही की तराह दीखतेथे.. ओर अेक दिन तुम्हारे दादा ओर दादी.. अेक खुबसुरत लडकीको तुम्हारे पुर्खोके आश्रमसे लेकर आगये.. बस.. यहीसे मेरी कीस्मतने करवट लेली.. ना हवेलीपे ओर नाही गांवमे, कीसको ये नही पताथा की ये लडकी कौन हे.. बस सब लोग यही कहेतेथे की लडकी गरीब हे ओर आश्रममे अकेली रहेतीथी तो तुम्हारी दादीको दया आगइ.. इसीलीये वो लडकीकी देखभाल करने इधर लेआये हे..
फीरतो वो लडकीभी किशनको पसंद करने लगीथी.. ओर पता नही उसने किशनपे कोनसा जादु करदीया.. मेरा किशन उनके पीछे पागल होने लगा.. ओर उनको सीर्फ वो लडकीही नजर आती थी.. फीर पता नही अेक दिन क्या हुआ.. आपके दादा ओर दादी दोनोही सुबह नही जागे.. ओर वो चल बसे..
देवायत : क्या वो लडकी मेरी मां थी नां..?
नीर्मला : हां.. वोही आपकी मां विमलादेवी.. वोभी किशनकी ओर ढलने लगी ओर मेरा किशनभी उनके पीछे तो अैसे पागल होगया की.. कुछही दिनोमे वो लडकी अपना सबकुछ लुटा बैठी.. ओर पता नही किशनभी उनके पीछे लग गया.. फीरतो नीत्यक्रम बन गया.. दिनमे मेरे साथ तो रातमे हम सब सो जाते तब किशन देर रात उनके रुममे चला जाता.. ओर दोनो पती पत्नीकी तराह रहेने लगे.. इस बातकी भनक मुजेभी नही लगने दी.. ओर वो लडकी किशनको मेरे खीलाफ उल्टी सीधी बाते करके भडकाने लगी..
ओर किशनभी धीरे धीरे मुजसे दुर रहेने लगा.. ओर विमलाका पेट धीरे धीरे बहार नीकलने लगा.. तब ना विमलाको पताथा ओर नाही मुजे की हम दोनो किशनसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. तब मेरे पेटमे मेरी मंजु पलने लगी.. ओर विमलाके पेटमे आप पलने लगे.. हम दोनोकोही नही पता था.. हम दोनो किशनसे प्रेगनेन्ट होचुकी हे..
इसी जमेलेमे अेक घटना ओर होगइ.. जो हम सबभी दोस्तोके मनमे दरार होगइ.. उनका कारण था भानुके पीता वीरजी.. तब हमे नही पताथाकी वो मनही मन भुमीकाको प्यार करने लगा हे.. ओर भुमी तब नरेशको प्यार करती थी.. जब उसने भुमीको अपने प्यारका इजहार करदीया तो भुमीने उसे सनकी कहेकर काफी भला बुरा कहेके मना करदीया ओर केह दीयाकी मे ओर नरेश काफी आगे बढ चुके हे.. तो अेक तो वो सनकी था ओर उपरसे भुमीने उनको बहुत जलील करते उनके प्यारको ठुकरा दीया.. तब वो पागल जैसा होगया..
ओर घर जाकर उसने गुसेमे सीसेमे हाथ दे मारा.. ओर उनके हाथकी नस कट गइ.. जब किशनको मालुम हुआ तो भाइ ओर किशन उसे होस्पीटल लेगये ओर उनका इलाज करवाया.. ओर वो ज्यादा सनकी होगये.. ओर मनही मन भुमीसे बदला लेनेकी ठानली.. अेक दिन पता चला.. वो अकेलाही हम सबसे छुपके भुमीको होस्टेलसे जबरदस्ती उठा लाया.. ओर उनके घरपे जबरदस्तीसे लेगया.. ओर उसी दिन उसने भुमीके साथ जबर दस्ती की.. ओर उनका रेप कर दीया..
तब नरेश ओर किशनने उनको खुब मारा.. फीर पता नही नरेश ओर भुमी दोनोही कोलेज छोडके चले गये.. ओर उनका कीसीको अता पता नही मीला.. ओर अेक दीन मुजेभी खुब उल्टीया हुइ.. ओर मुजे किशन होस्पीटल लेगया.. तब वहा चेक कीयातो पता चला मे भी पेटसे होगइ हु.. ओर उपर दो महीना होगया हे.. तब किशन परेसान होगया.. ओर उसने मजबुरन मुजे सबकुछ सचाइ बतादी..
देवायत : कोनसी सचाइ..?
नीर्मला : यहीकी वो लडकी विमला जो उनके माता पीता आश्रमसे लेकर आये हे.. दरसल उन्हीकी सगी बहेन थी.. जो उनके जन्मके बाद उनकी माता यानी आपकी दादी उसे आश्रममे छोडके आइथी.. रीजन बस अेकही था.. जो आपके खानदानमे वो श्राप.. जो अेकही बच्चा होता था.. ओर दुसरा बच्चा करनेसे उनके पीताकी मौत होजाती थी.. तब उनको ये नही पताथाकी दोनो लडके ही होने चाहीये लडकी नही.. ओर वो इसी गलत फेहमीकी वजहसे सबसे छुपके बच्चीको आश्रम छोडके आगइ..
देवायत : तो क्या तब किसीको नही पताथाकी मेरी मां पेटसे हे.. कीसीको कुछ पता नही चला..?
नीर्मला : नही.. तब पता नही आपके दादा ओर दादीका कीसी गांव वालोसे कोइ रीस्ता नही था.. सब आपके खीलाफ थे.. रीजन मुजे नही पता.. लेकीन आपकी दादी हवेलीसे कभी बहार नही नीकली.. फीरतो जब काफी सालो बाद आपके गुरुजी आये ओर उसने सचाइ बतादी.. तब आपकी दादी वो लडकीको वापस हवेलीपे लेकर आगइ.. तबतक वोभी जवानीके देहलीजपे कदम रख चुकीथी.. ओर विधीके विधान देखो..
उन विमलाके आनेके बाद कुछही दिनोमे आपके दादा दादीभी चल बसे.. ओर पता नही उनके मनमे क्या चल रहाथा.. विमलाको सब सचाइ मालुम होनके बावजुद भी अपने ही भाइसे दिल लगा बैठी.. ओर उनपे सबकुछ लुटाकर वो मुजसेभी पहेले अपने भाइसे प्रेगनेन्ट होगइ.. ओर उसे पांचवा महीना चल रहाथा.. ओर दोनो भाइ बहेन आपसमे सादी करने वाले थे..
तभी ये सब बाते सुनकर मुजपे तो पहाड ही टुट पडा.. तब किशनने मुजे बहुत समजाया ओर दोनोके साथ सादी करनेकी बात करने लगा.. तब अेक बारके लीये तो मेभी मान गइ.. की चलो दोनो बहेने साथमे रेह लेगी.. लेकीन उसी रात मुजे विमला अकेली मीलने आइ.. ओर मुजे किशनको छोड देनेके लीये कहेने लगी.. कहेतीथी..
विमला : देख नीर्मला.. अगर तु किशनसे सादी करलेगी तो हम दोनो उनकी लीगल बीवी होजायेगी.. ओर तुभी पेटसे हे ओर मे भी पेटसे हु.. अगर हम दोनोको लडका होगया तो हमारा कीशन वो श्रापकी वजहसे नही बचेगा.. ओर हम दोनोही विधवा होजायेगी.. अब फैसला तुजे करना हे उनको छोड देना हेकी किशनको मार देना हे.. क्युकी वो किशनको छोडने वाली नही थी.. ओर मे उनके श्रापकी वजहसे बडी दुवीधामे पड गइ.. ओर दिन नीकलते रहे.. ओर मेराभी पेट बढने लगा..
अब ये बात लोगोसे कीतने दीन छुपी रहेती की मे प्रेगनेन्ट हु.. ओर मेरे पापाको ओर बडेभाइको पता चल गयाकी मे कीसीसे पेटसे हुइ हु.. लेकीन मेने किशनका नाम नही बताया.. ओर मेरे बापु परेसान रहेने लगे.. ओर अेक दिन मेरी चिन्ताकी वजहसे उनको दिलका दौरा पडा.. ओर वोभी चल बसे..
बस उसी रात हम दोनो भाइ बहेनने हवेली छोडनेका फैसला करलीया.. तब चंदा बहुत छोटी थी.. आइ थींक १२ सालकी होगी.. ओर हम दोनो भाइ बहेन कीसीको कहे बगैर देर रात चंदाको लेकर हवेलीसे नीकल गये.. ओर सबसे छुपकर इसी गावमे आगये..
देवायत : तो फीर पापा ओर मेरे बापु फीरसे कैसे मीले..? क्या आप उनको दुबारा नही मीली..?
नीर्मला : (हसते) हां फीर उनसे सीर्फ अेकही बार मुलाकात हुइ.. हमारे जानेके बाद उन्होने हमे बहुत ढुंढा.. लेकीन हम तीनो यहा अेक किरायेके रुममे गांवसे दुर रहेने लगे थे.. ओर वो हमे नही ढुढ पाये.. तब भाइभी गावमे अेक कीरानेकी दुकानपे काम करने लगा.. ओर हमारा गुजारा बडी मुस्कीलसे होने लगा.. ओर वक्त बीतने लगा.. तबतक विमला आपको जन्म देचुकी थी.. ओर आखीर मेनेभी नौ महिने पुरे होते अेक बच्चीको जन्म दे दीया.. वो थी मेरी मंजु.. आपकी सौतेली बहेन.. जो आज आपकी बीवी हे..
देवायत : (हसते) मेने भी क्या कीस्मत पाइ हे.. मेने भी मेरी ही बहेनसे सादी करली.. हें..हें..हें..
नीर्मला : (सरमाते हसते) हां.. तभीतो मे आप दोनोकी सादीके खीलाफ थी.. लेकीन मे कीसीको केहभी नही सकतीथी की ये दोनो भाइ बहेन हे.. इनकी सादी नही हो सकती.. फीर सोचा आपके खानदानमे तो यही सब चलता हे ओर मेने भी अपने भाइसे सादी करली हे तो फीर मे क्यु अेतराज करु..? ओर मेने आपकी सादीके लीये हां कहेदी.. हें..हें..हें..
देवायत : तो फीर आप लोगोको बापुने कैसे ढुंढ लीया..?
नीर्मला : क्या आपको नही पता..? आपके बापुका कीतना बडा नेटवर्क हे.. उन्होने बहुत गावोमे हमे ढुंढा ओर सभीको कहेके रखाथाकी ये लोग मीलेतो उनसे इन्फोर्म करदे.. ओ यहाभी यही हुआ.. कीसी जान पहेचान वालेने राजीवको दुकानपे देखलीया ओर किशनको बता दीया.. तब उसी वक्त अपनी कार लेके सीधेही राजीवकी दुकानपे चले गये.. जहा वो नौकरी करता था.. ओर किशनने राजीवको सब सचाइ बतादी.. ओर येभी बता दीयाकी नीर्मलाकी बच्चीका बापभी मेही हु..
देवायत : तो फीर पापा कुछ नही बोले..?
नीर्मला : क्या बोलते..? आपके दादाका हमपे बहुत अहेसान था.. जब मां गुजर गइ तब आपकी दादीनेही हम सबको सम्हालाथा ओर हम सबकी पढाइका खर्चा वोही दे रहेथे.. ओर वो खुद कइ बार किशनके लीये मेरे बापुसे मेरा हाथ मांग चुकीथी.. लेकीन देखो.. कीस्मतको कुछ ओरही मंजुर था..
वरना किशन जब राजीवसे मीला तब मुजे पहेली बार मीला ओर मुजे अपनानेको तैयार था.. लेकीन मेनेही मना करदीया.. तब हम यहा इस गांवमे आगये थे.. तो मुजे नही पताथा की आपके गरुदेव हवेलीमे आकर वो श्रापका नीवारण कर चुकेथे.. वरना मे जरुर वापस आजाती.. ओर किशनसे सादी करलेती..
ओर मेने किशनकी जानकी खातीर उसे मना कर दीया.. ओर आपकी मां विमलाभी नही चाहतीथी की मे वहा वापस आजाउ.. ओर किशनने हमारे लीये हमसे छुपके यहा घरभी लेलीया ओर राजीवके साथ पार्टनरमे कीरानेका होलसेलका बीजनेसभी सुरु करदीया.. तब हमे नही पताथाकी वो ये सब हमारी मदद करनेके लीये कर रहा हे.. ओर येभी पता चलाकी वो विरजीभी आपकी खेतीबाडी सम्हालने लगाहे.. ओर उनकीभी सरलासे सादी होगइ हे.. इस बातका पता आप ओर मंजुकी सादीसे पहेलेही मुजे राजीवसे पता चला.. तबतक मेभी सबकुछ भुल चुकीथी..
देवायत : (हसते) तो फीर पापाके साथ आपकी सादी कैसे होगइ..? वोभी तो आपके बडे भाइ थे..
नीर्मला : (अेदम सर्मसार होते धीरेसे) वो..वो.. बस होगइ.. अेकतो मेरी वजहसे ओर दुसरा तब हमारी आर्थीक परीस्थीती अच्छी नहीथी.. तो भाइ कहेताथा हमारा गुजाराभी मुस्कीलसे हो रहा हे तो सादी करके क्या करुगा..? इसी वजहसे भाइने सादी ना करनेका फैसला करलीयाथा..
ओर कहेताथा अब इन बच्चीको मेरी ही बच्ची मानके पालुगा.. ओर दुसरा ओरत ओर मर्द जब साथ होतेहे ओर उनको बार बार अेकांत मीलता हेनां.. तो अेक दिन सबकुछ होही जाता हे.. फीर चाहे भाइ बहेन हो या मां बेटा.. ओर हम सब अेकही रुममे रहेते थे.. खाना पीना नहाना सोना सब अेकही रुममे होताथा.. फीर आपतो जानतेहे ओरत होया मर्द उनकीभी कुछ नीड होती हे.. बस यही मुजे ओर भाइको अेक दुसरेसे नजदीक लानेका कारण बनी..
ओर धीरे धीरे मे ओर भाइ अेक दुसरेकी ओर आकर्सीत होकर नजदीक आते गये.. मे भाइका अेक पतीकी तराह खयाल रखने लगी.. ओर हम दोनो धीरे धीरे खुलते गये.. अेक दुसरेसे छेडखानीसे सुरुआत होकर दोनोही आपसमे प्यार करने लगे.. ओर अेक दिन चंदा स्कुलमे थी..
तब हम दोनोही घरपे अकेलेथे ओर बहेक गये.. फीर सबकुछ होगया.. उस दिन हमने दो बार सेक्स कीया.. तब मे भुल चुकीथी की ये मेरा भाइ हे.. ओर भाइभी भुल चुकाकी ये मेरी छोटी बहेन हे.. बस हम दोनोही अेक दुसरेमे अेक मर्द ओर ओरतको देखते थे.. साली ये तनकी आग बहुतही खतरनाक हे.. कोइ रीस्ते नाते नही देखती..
फीर तो हम दोनो भाइ बहेन काफी खुल चुके थे.. जबभी चंदा घरमे नही होती तब आये दीन भाइ मुजे पकड लेता ओर हम अेक दुसरेके साथ छेडखानी करते.. फीर हम दोनो अेक होजाते.. ओर ये सीलसीला रोजका होगया.. ओर मुजेभी भाइसे सेक्सकी आदत लग गइथी.. अब मे भी भाइसे सेक्स करनेके बगैर नही रेह सकती थी.. ओर हम दोनो अेक पती पत्नीकी तराह रहेने लगे.. जबभी चंदा सोजाती मे देर रात सरकके भाइके पास उनके बीस्तरमे चली जाती ओर हम दोनो अेक होजाते ओर अपनी प्यास बुजा लेते..
हम दोनोके बीच प्यार ब्यार कुछ नहीथा.. बस अेक दुसरेकी तनकी जरुरत समजकर दोनोने हमेसाके लीये साथमे रहेनेका फैसला करलीया.. ओर अेक दिन मे ओर भाइ साथमे सेक्स कर रहेथे तब सोचा.. अगर किशन उनकी बहेनके साथ सादी कर सकता हे तो हम क्यु नही..? ओर हमने दुसरे ही दीन मंदिरमे जाकर आपसमे सादी करली.. ओर हमारा पती पत्नी वाला संसार अच्छेसे चलने लगा.. तब अेक दिन पता चला मे भाइसे प्रगनेन्ट होगइ हु.. तब हम दोनोही बहोत खुस हुअे.. ओर पुरे नव महीनेके बाद मेरी भावुका जन्म हुआ..
तब चंदाभी काफी समजदार हो चुकीथी.. लेकीन मेरे ओर भाइके बीच जो नया रीस्ता हुआ इनसे उनको कोइ अेतराज नही कीया.. ओर हमारे रीस्तेको अेक्सेप्ट करलीया.. फीर तो वोभी कभी कभी मजाकमे राजीवको जीजु कहेते चीडाती.. ओर जब जवान होगइ.. तब अेक दिन किशनही रीस्ता लेकर आया.. ओर हमने चंदाकी सादी करदी.. फीरतो हम दोनोको खुली छुट मील गइ.. फीर काफी समय बीतता गया..
फीर अेक दिन मुजेभी भाइसे पता चलाकी मेरी मंजुके जन्मसे पहेले विमला आपको जन्म दे चुकीथी.. जब आप उनके पेटमे छे महीनेके थे तब उन्होनेभी अपने भाइसे सादी करली.. फीर तो आप यहा पहेली बार आये तो मेतो आपको देखके हैरान होगइ.. वोही चहेरा जो मेरे किशनका था..
वोही आंखे वोही कसरती बदन.. ओर मेरा पहेला प्यार फीरसे जाग गया.. ओर मे धीरे धीरे आपकी ओर आकर्शीत होती गइ.. आप बार बार हमारे घर आने लगे.. ओर हमारी नजरे मीलती रही.. मे आपके अंदर मेरे किशनको ढुंढती रही.. ओर आखीर अेक दिन आपने भी अपने बापुकी तराह मुजसे अपने प्यारका इजहार करदीया.. फीर उसके बाद क्या हुआ वोतो आप जानते ही हे.. हें..हें..हें.. बस यही मेरी कहानी हे..
(अतीत से बहार..)
देवायत : (हसते) हंम.. काफी इन्ट्रेस्टेड स्टोरी हे आपकी.. चलो जानकर खुसी हुइ.. की मेने मेरी बहेनसे ही सादी करली हे.. मेरी मंजु.., नीमु.. हमारे खानदानमे अैसा क्यु हो रहा हे तुजे पता हे..?
नीर्मला : (सरमाते हसते) नही.. आज आपभी कुछ राज बतादो.. हें..हें..हें..
फीर देवायत नीर्मलाको उन हीमाचलके राजाकी पुरी स्टोरी सुनाने लगता हे.. तब नीर्मला बडेही गौरसे सुन रहीथी.. जीनकी वजहसे उनकी चुतमे हलचल तेज होगइ ओर चुतके नाजुक होस्ट फडफडाने लगे.. ओर पानी छोडने लगे.. लेकीन नीर्मलाने उनपे कुछ खास ध्यान नही दीया.. ओर देवायत उनको पुरी स्टोरी सुना देता हे.. जीसे सुनके नीर्मला काफी अेक्साइटेड होगइ.. ओर देवायत नीर्मलाको वोही राजा रानी फीरसे उनके घर जन्म लेकर आने वालेहे बता देता हे.. तब नीर्मला सुनक बहुतही अेक्साइटेड होगइ.. तब जाके उनको अपने नीकरमे गीलापन महेसुस हुआ....
कन्टीन्यु