Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 20 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३७

कहेके नीलमने फोन काट दीया.. ओर तो धिरेन थोडा परेसान होगया.. ओर उसने दुबार फोन कीया.. तो इस बार नीलमने नही उठाया.. पुरी रींग बजादी.. तो धिरेनने दुबारा ट्राइ कीया.. फीरभी नीलमने नही उठाया ओर धिरेन परेसान होने लगा.. ओर वापस अपने टेबलपे आकर बैठ गया.. फीर कुछ सोचते मेनेजरके पास चला गया.. ओर थोडी जल्दी जानेको कहा तो मेनेजरने उसे नइ सादीकी वजहसे मुस्कुराते जानेकी परमीशन देदी....अब आगे

ओर धिरेन अपनी बाइक लेकर सीधेही होस्टेलपे पहोंच गया.. ओर होस्टेलकी ओफीसमे जाकर नीलमके जीजाजीके रुपमे अपनी पहेचान देदी.. तो मेडमने इन्टरकोमसे नीलमको नीचे बुला लीया.. जब नीलम आइतो उसे धिरेनको पहेचाननेके लीये कहा तो धिरेनकी गांड फटने लगी.. की नीलम कुछ ओरही ना कहेदे.. लेकीन नीलमने हां कहेते केह दीयाकी मेरे जीजाजी हे.. तब जाके उनको धिरेनसे मीलनेकी परमीशन देदी..

धिरेन : मेडम.. क्या मे इसे अ‍ेक घंटेके लीये बहार ले जा सकता हु..? इनके लीये कुछ खरीदारी करनी हे..

मेडम : (मुस्कुराते) ठीक हे.. अगर आप इनके जीजाजी हेतो इसे ले जा सकते हे.. लेकीन इसे अ‍ेक घंटेके वापस इधर छोड दीजीयेगा.. आप अपना नाम ओर मोबाइल नंबर रजीस्टरमे लीख दीजीये..

सुनतेही नीलम बहुतही सरमाइ तब धिरेन अपना नाम ओर नंबर रजीस्टरमे लीख देता हे.. ओर बहार की ओर चलने लगता हे.. तब नीलमभी सरमाते मुस्कुराते उनके पीछे चलने लगी.. ओर दोनोही बहार आगये.. नीलम पहेली बार धिरेनके साथ अ‍ैसे अकेली बहार नीकल रहीथी.. तब उनके दिलकी धडकन बढ गइ.. तभी धिरेनने अपनी बाइक स्टार्ट करदी तो नीलम दोनो ओर पैर करके धिरेनके कंधेपे हाथ रखते धिरेनके पीछे बाइकमे बैठ गइ..

धिरेन : (पीछे मुह करते) कहो मेडम अब कीधर जाना हे.. आपतो नाराज होगइ..? फोनभी नही उठाया.. पहेले दुपटेसे अपना मुह ढकलो.. वरना कोइ पहेचान वालेने देखलीया तो पंगा होजायेगा.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते दुपटेसे मुह ढकते) तो क्या करती..? अ‍ेकतो इतने दिनोके बाद आप आये हो.. ओर उपरसे मीलने भी नही आये.. ओर मेडमको ये क्यु कहाकी हमे खरीदी करने जाना हे..? अगर वापसीमे उसने हमारे पास कोइ सामान नही देखा तो..?

धिरेन : (बाइक चलाते) अरे अ‍ैसे कैसे खाली हाथ आते.. आज हमारी मेडम जो साथ मे चल रही हे तो इनके लीये कुछना कुछ तो ले लेगे.. कहो.. पहेले कीधर जाना हे..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) मुजे क्या पता.. मेने इधर थोडीना कुछ देखा हे.. आप मुजे लेकर जा रहे हो.. कहीपे भी लेलो.. ओर अ‍ैसी जगाहपे लेलो जहा हम आरामसे बैठकर बातचीत कर सके.. मुजे आपसे बहुत कुछ कहेना हे..

धिरेन : (मुस्कुरते पीछे देखते) सीर्फ बातचीत..? ओर कुछ नही..? हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते पीठमे मुका मारते) मुजे नही पता.. आप बहुत गंदे हो..

धिररेन : (हसते) चलो.. आज हम दोनो पहेली बार डेटपे जा रहेहे. तो मेरी रानीको कुछ मुह मीठा करवाउ.. क्या आइसक्रिम खाओगी..? चलो पहेले वही चलते हे.. फीर कुछ लेलेगे..

तब धिरेन अ‍ेक बडे आइसक्रिम पार्लर पे बाइ रोक देता हे.. ओर दोनो अंदर चले जाते हे.. तभी धिरेनको छोटी छोटी प्राइवेट केबीन दीख जाती हे तो धिरेन केबीनकी ओर चलने लगा.. तब नीलम बहुतही सरमाने लगी.. ओर मुस्कुराते उनके पीछे जाने लगी.. फीर दोनोही केबीनमे जाकर बैठ गये.. तो वेइटर आके उनको दो ग्लास पानी देगया.. ओर आइसक्रिमका ओर्डर लेकर चला गया.. तो नीलम बहुतही सरमा रहीथी..

धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. वहा सामने नही.. इधर मेरे पास आकर बैठजाओनां..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) नही धिरेन.. वो अभी आइसक्रिम लेकर आयेगा.. फीर आजाउगी..

धिरेन : नीलु.. मुजे पहेले तेरे होस्टेलके रुल्सके बारेमे बताओ.. क्या वहा पुरे दिनकी कुछ छुटी बुटी मीलती हे की नही..? मेनेतो सुनाथा लखनभैया ओर पुनम फीर मंजुदीदी सृतीदीदी तो इधरसे घुमनेभी नीकल जाते थे..

नीलम : (सरमाते हसते) हां मीलती हे.. लेकीन सेटर डे संन्डे को.. ये दो दिनमे लडकीया अपने घर चली जाती हे.. तो कोइ अपने रीस्तेदारके घरभी चली जाती हे.. होस्टेल १० बजेतक खुला रहेता हे.. उसी टाइमके अंदर सबको वापस आजाना हे.. अगर आपने उसे दो तीन घंटेका केह दीया होता तो भी वो परमीशन दे देती.. सीर्फ पहेचान वालोके साथ ही बहार जाने देते हे.. बाकी हमारे रुममे भी मील सकते हे..

धिरेन : (मुस्कुराते) हंम.. तो मतलब हम दो दिन साथमे रेह सकते हे.. हें..हें..हें.. नीलु.. मे इधर अ‍ेक छोटा मकान ले रहा हु.. सीर्फ हम दोनोके लीये.. बस पहेले तुम अच्छेसे पढ लीखके ग्रेज्युअ‍ेशन करलो.. फीर मेरी बेंन्कमे ही तुजे जोब दीलवा दुगा.. फीर हम दोनोही मीया बीवी साथमे जोबमे आते जाते रहेगे.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते हसते) जानु.. लगता हे आपने हमारे लीये बहुत सारी प्लानींग करके रखी हे.. अगर पुनोदीदी या कीसीको पता चल गया तो..? जोबतो क्या मेरी पढाइ ही रुकवा देगे.. तो बी केरफुल..

धिरेन : नही नीलु.. इस बारेमे मेने सबसे बात करली हे.. जीजुनेभी परमीशन देदी हे.. मेने उसे कहाकी कभी कभी रातमे देर होजाती हेतो रातमे ट्रावेल करना ठीक नही.. ओर मे हमारे मकानमे ही सो जाउगा.. कहातो मोम फौरन मान गइ ओर उसने परमीशन देदी.. अब हम सेटरडे सन्डे साथमे रेह सकते हे.. क्या आओगीना मेरे साथ रहेने..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) मुजे नही पता.. अगर कीसीको पता चल गया तो..?

धिरेन : नीलु.. कीसीको पता नही चलेगा.. तुम होस्टेलपे केह देनाकी दीदीके घर जा रही हु.. फीर मन्डेको सुबह तुजे छोड दुगा.. क्या कहेती हो..? आओगीनां..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) मुजे क्या पता..? फीर वहा दो दिन आप अ‍ैसेही थोडीना बैठोगे.. मेरे साथ सरारत करोगेतो..? मुजे नही आना.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) सरारत करनेतो लेजा रहा हु.. उस सादीवाले दिन हमने जो काम अधुरा छोड दीयाथा.. तो वही पुरा करेगे.. नीलु.. आइ लव यु.. मे तुमको बहोत चाहता हु.. मुजसे सादी करले.. मे तुजे रानी बनाके रखुगा.. मुजे तुम बहुत अच्छी लगती हो.. तेरे साथ पुरी जींदगी बीता दुगा.. क्या मुजसे सादी करोगीनां..?

नीलम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) धिरन.. सादीतो मेभी तुमसे करना चाहती हु.. फीरभी अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. मे मम्मी पापाको क्या कहुगी..? की मेने जीजुसे सादी करली..? धिरेन हमे सबको फेइस करना पडेगा.. खास करके पुनोदीदी.. बडे भैया मेरी मम्मी दादी सबलोग.. आप सबको कैसे हेन्डल करोगे..?

धिरेन : (मुस्कुराते) वो सब तु मुजपे छोडदे.. बस तुम नीडर ओर तटस्थ रहेनी चाहीये.. बाकी मे सबको हेन्डल करलुगा.. मुजेतो सीर्फ तेरे साथ रहेना हे.. नीलु.. मे तेरे साथ जींदगीका हर लह्मा जीना चाहता हु.. वोभी सादीसे पहेले.. हम हमारे गांव या कीसी होटेलमे चले जायेगे.. सेटरडे सन्डे ये दो दीन हम खुब मजे करेगे..

नीलम : (बहुतही सर्मसार होते धीरेसे) धिरेन.. कैसे मजे..? सादीसे पहेले मे आपके साथ वहा दो दिन रहीतो.. आप अ‍ैसेही थोडीना रहोगे..? कही कुछ गलत होगया तो मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगी.. क्या बीना सादी.. ये सब.. आइ मीन.. आप समज रहे हेनां..

धिरेन : नीलु.. अगर उस दिन भावुदीदी नही आइ होती तो उसी दिन हम दोनोके बीच सबकुछ हो गया होता.. तब हमने कहा सादी कीथी..? मेरा यकीन मानो.. मे तुमको कभी नही छोडुगा.. बस मेरी अ‍ेकही तम्मना हे जो पुनोने पुरी नही की.. मे सादीसे पहेले उनके साथ सबकुछ करना चाहता था.. मेने मेरी कोलेज लाइफमे जोभी सपने देखेथे.. वो मे उनके साथ पुरा करना चाहता था.. लेकीन उसने मुजे छुने तक नही दीया.. तो यही उमीद मुजे तुमसे हे.. क्या मेरी तम्मना पुरी नही करोगी..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) धिरेन.. प्लीज.. उस दिन हम दोनोही बहेक गयेथे.. मेभी अपने आपको कंट्रोल नही करपाइ.. इसीलीये अ‍ेक डर लग रहा हे.. ओर मे आपके बीना रेहभी तो नही सकती.. मेरा दिल जानता हे.. की मेने यहा आपके बीना कैसे दिन काटे हे.. ओर आप फोनभीतो नही करतेथे..

तभी वेइटर दो कप आइसक्रिम लेकर आगया.. तो दोनोही अपनी बात रोकते चुप होगये.. ओर वेइटर आइसक्रिम रखके चला गया तो दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने देखने लगे तब नीलमने सरमाके अपनी नजरे जुकाली.. ओर अ‍ैसेही बैठी रही.. तब उनके मुहके पास अ‍ेक आइसक्रिमकी भरी हुइ चमच आगइ.. तब नीलमने सरमाके अपनी नजरको उठागा.. तो धिरेन उसे खीलानेके लीये चमच भरके दे रहा था..

तब नीलम सर्मसार होगइ.. ओर सरमाते अपना मुह खोल दीया तो धिरेनने उसे आइसक्रिम खीलादी.. वो बडीही कस्मकस मे थी.. आज नीलमको धिरनने अपने मनकी बात बतादी.. वैसेतो नीलम कबसे धिरेनके साथ मीलन करनेको तैयार थी.. वो धिरेनको बहुत चाहने लगीथी.. जबसे लताने उसे धिरेनसे दुर करनेकी कोसीसकी.. ओर भावनाने उसे डांटके फटकाराथा.. तबसे गुस्सेमे धिरेनके साथ सबकुछ करनेकी ठानली थी..

धिरेन : नीलु.. क्या हुआ..? क्या सोच रही हे..? मे तुम्हारे साथ जबरदस्ती कोइ काम करवाना नही चाहता.. अगर तुम मुजसे प्यार नही करती तो मुजे मना कर सकती हो.. मुजे कोइ बुरा नही लगेगा.. हमारा रीस्ता दोस्तीकातो रहेगा ही.. लेकीन अ‍ेक बात खान खोलकर सुनलो.. मेने तुजे सच्चे दिलसे चाहा हे.. मे तुमसे हमेसा प्यार करता रहुगा..

नीलम : (फौरन) अरे.. नही नही.. धिरेन आप गलत सोच रहे हे.. मे भी आपको बहुत चाहती हु.. प्लीज.. मुजे गलत मत समजे.. मुजे थोडा टाइम चाहीये.. आपने सब अ‍ेकदमसे कहा तो.. आइ अ‍ेम सोरी.. (सोचते थोडी देरके बाद) ठीक हे.. जैसा आप चाहो.. लेकीन मेरा खयाल रखना.. मे मेरी जींदगीका बहुतही अहेम फैसला करने जा रही हु.. अगर आप मुजे छोड देगे तो मे कहीकी नही रहुगी.. मेरे पास ओर कोइ रास्ता नही बचेगा.. आप समज रहे हेनां..? मे आपके साथ रहेनेके लीये तटस्थ रहुगी..

धिरेन : नही नीलु.. अ‍ैसी कोइ नौबत ही नही आयेगी.. भलेही इसके लीये मुजे पुनमको छोडना पडे.. मेरी बीवी सीर्फ तुम ही रहोगी.. आइ प्रोमीस मे तुमसे सादी करलुगा.. बस दो तीन दीनमे हमारा मकान देख लुगा.. मेने आते ही ब्रोकरसे बात करली हे.. फीर उनका सौदा होतेही हम दोनो कही मंदिरमे जाकर सादी करलेगे.. फीर तुम मेरी बीवी बनके इघरही होस्टेलमे रहेना.. हम हर सेटरडे सन्डे साथमे रहेगे.. मेरी कसम..

नीलम : (जटसे धिरेनके पास आकर बैठते) प्लीज.. धिरेन.. आप अपनी कसम मत खाओ.. मे रेडी हु.. आप जोभी कहोगे मे करुगी.. आप जैसा कहोगे मे सबको जवाब दे दुगी.. मुजेतो आपके साथ जींदगी बीतानी हे.. अब मे आपके बीना नही रेह सकती..

धिरेन : (बैठेही हग करते हसते) तो क्या अपने होनेवाले पतीका मुह मीठा नही करवाओगी..? हें..हें..हें..

कहातो नीलम अ‍ेकदम सर्मसार होगइ.. ओर हसते हुअ‍े उसने अ‍ेक चमच आइसक्रिम लेकर धिरेनके मुहके सामने रखदी.. तो धिरेनने उनको ओर प्यारभरी नजरोसे देखते आधी चमच खाइ ओर आधी चमच उसने नीलमको खीलादी तब नीलम बहुतही सरमाइ. ओर धिरेनने उसे बैठेही अपनी बाहोमे भीचलीया.. तब दोनोके होंठ मील गये.. ओर स्मुच करते अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे..

दोनोही सबकुछ भुलके प्यारके आगोसमे चले गये.. तभी नीलुको अपने बुब्सपे धिरेनका हाथ बुब्स मसलते महेसुस हुआ तो नीलम सरसे पाव तक हील गइ.. ओर आधी आंख चडाते मदहोस होने लगी.. उसने धिरेनका कोइ विरोध नही कीया.. दोनोही भुल गयेकी दोनो कहा बैठे हे.. ओर धिरेनने बुबस्को मसलते अपना मुह थोडा खोल दीया तो दोनोही मदहोसीमे अ‍ेक दुसरेकी जीभसे पेच लडाने लगे..

तभी अचानक धिरेनने बुब्सको छोडके नीलमकी चुतपे हाथ रख दीया ओर उसे उंगलीसे सहेलाने लगा.. तो नीलम सीसकारीया करते उछलने लगी.. वो हाथ नीचे लेजाते धिरेनका हाथ पकड लेती हे.. ओर गुं..गुं.. करते अपनी गरदन नां मे हिलाते धिरेनको रोकनेकी कोसीस करती रही.. नीलम बहुतही गरम हो चुकीथी.. वो मनसेतो चाहतीथी की धिरेन उसे अभी पुरी तराह मसलदे.. लेकीन अन्जान जगहकी वजहसे..

नीलम : (जटसे दुर होते) नही धिरेन.. प्लीज.. वहा नही.. इधर कोइ आजायेगा.. आप जोभी करना हो बादमे करलेना.. लेकीन यहा नही..

धिरेन : (उखडी हुइ आवाजमे) नीलु.. आइ लव यु.. मे जल्दसे जल्द तुमसे मीलना चाहता हु.. क्या हम कही कोइ होटेलमे चले..? हंम..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) लव यु टु.. धिरेन.. लेकीन आज नही.. हम सीर्फ अ‍ेक घंटेकी परमीस लेकरही आये हे.. आप समजो प्लीज.. अब मुजसे भी आपके बीना नही रहा जाता.. लेकीन यहा नही.. हम आपके घरपे मीलते हेनां..? परसोही सेटरडे हे.. आप कुछ अ‍ेरेन्ज करलो..

धिरेन : नीलु.. मे जल्दी हम दोनोके मीलनका इन्तजाम करता हु.. पुनोको कहुगा सेटरडे सन्डे मायके उनके भाइ भाभीको मीलने चली जाये.. वरना हम यही कीसी होटेलमे चले जायेगे.. मे हमारे मीलनके लीये कुछ इन्तजाम करता हु..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) धिरेन.. देखना.. कोइ दर्द बर्दतो नही होगानां..? मे ठीकसे चलतो सकुगीनां..?

धिरेन : अरे कुछ नही होगा.. तुम खामखा गभरा रही हो.. पुनोकोभी कुछ नही हुआ था.. वोभी ठीकसे चल रहीथी.. इनमे अ‍ैसा कुछभी नही होता.. जो तुम सोच रही हो.. मे तेरे साथ हुनां..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. तो ठीक हे.. आप ही कुछ देखलो..

धिरेन : नीलु.. कलतो नही.. लेकीन परसो सेटरडे हे.. अगर पुनो माइके जायेगी तो हम मेरे घरपे ही चलेगे.. लेकीन कल हम फील्म देखने चले..? ६ से ९ बजेके सोमे.. हंम..? चलोगीनां..?

नीलम : (सरमाते) हंम.. आप आजाना मे मेडमको केह दुगी.. थोडा जल्दी आइअ‍ेगा.. रीसेसके बाद मे स्कुल नही जाउगी.. हम ४ बजे नीकल सकते हे.. पहेले हम कही गार्डनमे घुमने जायेगे.. फीर फील्म देखेगे.. लेकीन वहा ओर कोइ सरारत नही.. हें..हें..हें..

धिरेन : (धीरेसे) नीलु.. मेडमको कहेना.. सेटबडे सन्डे जीजुके घर दीदीके पास जाना हे..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. केह दुगी.. धिरेन.. बहुत डर लग रहा हे.. कीसीको पता तो नही चलेगानां..? देखना वरना मे कहीकी नही रहुगी.. मुजे मजधारमे मत छोडना.. मे सीर्फ आपहीके भरोसे चल रही हु.. हंम..?

धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. तुम खामखा गभरा रही हो.. अ‍ैसा कुछभी नही होगा.. मे तेरे साथ हुनां..? क्या मुजपे भरोसा नही हे..? हंम..? मे तुमसे सचमे सादी करना चाहता हु.. कहो.. मे तुमको कैसे यकीन दिलवाउ..?

नीलम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) नही धिरेन.. मुजे आपपे पुरा भरोसा हे.. अब आपही मेरे सबकुछ हो.. हंम..

फीर दोनोही अपना प्रोग्राम बनाते आइसक्रिम खाने लगे.. ओर आइसक्रिम खतम होतेही दोनो वहासे नीकल गये.. तब धिरेन बाइक सीधे अ‍ेक मोलमे लेजाता हे.. वहा नीलमको अ‍ेक बहुतही खुरसुरत ड्रेस दिलवाता हे वहा धिरेन उनकी पसंदका दो अडरगारमेन्ट भी दीलवाता हे तब नीलम बहुत ही समराइ.. फीर धिरेन नीलमके लीये कुछ नास्ता लेलेता हे.. ओर दोनो वापस होस्टेलपे आगये..

तो मेडम दोनोको देखकर मुस्कुराने लगी.. ओर धिरेनभी उनकी ओर देखके हसने लगा ओर नीलमको छोडके वहासे नीकल गया.. तब मेडम उसे कातील स्माइल करते देखती रही.. नीलम ओर धिरेनको नही पता थाकी दोनोके जातेही मेडने पुनमको फोन करके बता दीया था.. तब नीलम उपर अपने रुममे चली गइ.. तो उनकी रुम पार्टनर दीया.. मोबाइलमे कुछ देख रही थी.. तब माोबाइल साइडमे रखते ही..

दीया : (मुस्कुराते) आगइ महारानी.. नीलु.. कहा घुमने गइ थी..? कौन मीलने आया था..? कही कोइ बोयफ्रेन्ड तो सेट नही करलीया..? हें..हें..हें.. क्या सोपींग करने गइथी..?

नीलम : (मुस्कुराते बेग रखते) अरे नही.. वो मेरे जीजु मीलने आयेथे तो उनके साथही चली गइ थी.. मुजे कुछ सोपींग करनीथी.. तु बता.. वापस कब आइ..? क्या अपने यारको मीलने गइ थी..?

दीया : (हसते आंख मारते) हां यार.. आज हम दोनो फील्म देखने गयेथे.. क्या मस्त फील्म थी.. हें..हें..हें..

नीलम : (हसते) क्या उसने तुजे फील्म देखने दी..? हें..हें..हें.. सच बताना कमीनी..

दीया : (जोरोसे हसते) कमीनी तुजे सब पतातो हे तो फीर क्यु पुछती हे.. क्या कोइ बी.अ‍ेफ. उनकी जी.अफे. के साथ फील्म देखने थोडीना जाते हे.. उनकोतो वहा कुछ ओरही करना होता हे.. सालेने आज मुजे तीन तीन बार जडा दीया.. बहुत मस्त चुसता हे.. नीलु अब तुमभी कीसीको पटाले.. यहीतो होस्टेलमे रहेनेका मजा हे.. अ‍ैसा समय तेरी जींदगीमे दुबारा कभी नही आयेगा.. तुम खुलकर अपनी लाइफ जीलो.. ओर ये क्या सोपींग करके आइ..? दीखातो जरा..

नीलम : (हसते जटसे बेग दुर हटानेकी कोसीस करते) अरे नही नही.. कमीनी रहेने दे.. मेरे कपडे हे.. हें..हें..हें..

नीलम कुछ कहेती उनसे पहेलेही उनकी रुमपार्टनर दीयाने केरीबेग उल्टी करदी.. तो सब कपडेके बोक्ष बहार आगये.. ओर सुरुमेही नीलमके अंडरगारमेन्ट्स हाथ आगये.. तो दिया बोक्ष दोलकर देखने लगी.. तब नीलु बहुतही सरमाते हसती हुइ दीयाको देखती रही.. तो दियाभी नीलमकी ओर कातील स्माइल करते सभी कपडे गौरसे देखती रही.. तभी..

दीया : (खुस होते हसते) वाव.. क्या मस्त हे.. कमीनी सच बताना वो तेरे जीजाजी ही थेनां..?

नीलम : (सरमाते हसते) तो कुतीया क्या मे जुठ बोल रही हु..? जीजाजी ही थे.. तेरी कसम..

दीया : (कातील नजरोसे देखते हसते) नीलु.. सच बताना.. अ‍ैसे कपडे जीजाजी तो नही दिलवाते.. अच्छा तो फीर अपने दिलमे हाथ रखके सबसे ज्यादा चाहती हो उनकी कसम खाकर कहो.. की ये तेरे जीजाजी हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते अ‍ेक मुका मारते) नही.. कमीनी.. नही खाती कसम.. तुजे मानना होतो मान.. वरना जानेदे.. मे जुठ थोडीना बोलुगी.. बात करती हे..

दीया : (सब बोक्ष वापस देते) येले कमीनी.. अब मुजसे बात मत करना.. मेरी तो सब बाते उगलवा लेती हे.. ओर खुदकी बारी आइतो नखरे कर रही हे.. कमीनी मे कहा कीसीको बताने जाउगी.. तुम दोस्तीमे भी परदा कर रही हो..

नीलम : (पासमे बेठते) यार तुमतो नाराज होगइ.. मे सच कहेती हु.. ठीक हे.. सुन.. ये बात कीसीको मत कहेना.. वो मेरे जीजाजी भी हे.. ओर मेरा बोय फ्रेन्ड भी.. सब उसीने दिलवाया हे.. ओर ये मेरा मोबाइल भी.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत चाहते हे.. जब हम दोनो उनकी सादीकी खरीदी करने यहा सहेरमे आयेथे.. तबही हम दोनोके बीच प्यार होगया.. अभी अभी उनकी सादी हुइ हे.. तो हनीमुन मनाकर वापस आतेही मुजे मीलने आये थे.. दोनो आइसक्रिंम पार्लरमे गयेथे.. सुनलीया..? अब खुस..?

दीया : (खुस होते कातील स्माइल करते) अरे.. मेरी बनो.. हां बहुत खुस.. तुमने तो जीजाजीको ही सेट करलीया..? चलो अच्छा हे.. घरकी बात घरमेही रहेगी.. कीसीको पताभी नही चलेगा.. साला मेरातो कोइ मेरी जीतनी उमरका जीजा, भाइ या कजीन भी नही हे.. साले सब बडे हे दो दो तीन तीन बच्चेके बाप.. वरना मेतो पहेले उनकोही सेट करलेती.. ताकी कीसीको पतातो ना चले.. ओर घरमे आरामसे उनसे प्यार करके चुदवाओ.. कोइ कुछ कहेने वाला नही.. ओर नाही कोइ खतरा.. सीर्फ मजेही मजे.. हें..हें..हें..

नीलम : (हसते) कमीनी तु बहुत ठरकी हे.. तुजे हर वक्त चुदाइकी ही बात करनी हे.. हें..हें..हें..

दीया : (हसते) अरे नीलु.. अब तुमसे क्या कहु.. तुमने अभी नीचेका स्वाद चखा नही हेनां..? इसीलीये तुम अ‍ैसा केह रही हे.. बस अ‍ेक बार अपनी चुतमे कीसीका लंड लेकरतो देख.. फीर तु उनके बीना रेह नही पायेगी.. सच कहेती हु.. क्या तुमने ओर तेरे जीजाजीने अभी तक कुछ कीया नही..? हंम..?

नीलम : (सर्मसार होते नामे गरदन हीलाते) नही.. यार.. आज आइसक्रिम पार्लरमे वो इनके लीये बहुत केह रहेथे.. लेकीन मुजेतो बहोत सरम आ रहीथी.. दिया.. अ‍ेक बात पुछु..? क्या पहेली बारमे बहुत दर्द होता हे..? मेने सुना हे थोडा खुनभी नीकलता हे.. मुजे इसके बारेमे कुछ बताओनां.. आज वो बहुत फोर्स कर रहेथे..

दिया : (कातील स्माइल करते) हंम.. लगता हे.. तुम दोनोने कुछ तैय करलीया हे.. सुन..? जब पहेली बार अंदर डालते हेनां.. तो बस थोडा मामुली दर्द होता हे.. ओर वोभी कुछ ही देरमे खतम होजाता हे.. अगर तुम वर्जीन हे तो बस थोडासा खुन जैसा नीकलेगा.. बादमेतो मजे ही मजे.. हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (हसते) कमीनी सच बताना.. अभी तक कीतने लंड खाये हे.. हें..हें..हें..

दीया : (थोडा गुस्सा करते) कुतीया.. क्या मे तुजे रंडी लगती हु.. अ‍ेकही तो बोय फ्रेन्ट हे मेरा.. हमने अब तक चार पांच बार सेक्स कीया हे.. साला बहुत मजा देता हे.. सायद हम दोनो सादी भी करले.. बस वो मेरी पढाइ खतम होनेका इन्तजार कर रहा हे.. क्या तुमने उनसे मीलन करनेकी कुछ प्लानींग ब्लानींग कीहे की नही..?

नीलम : (सरमाते हसते धीरेसे) हंम.. आजही वो केह रहेथे की हमभी सादीसे पहेले कही मीले.. दिया.. वो हमारी सादीसे पहेले मेरे साथ सबकुछ करना चाहते हे.. फीर हमदोनो सादी करलेगे.. मेरे लीये यहा अ‍ेक मकान भी ले रहे हे.. मुजे अपनी बेन्कमे जोबके लीये भी केह रहेथे.. तो मे क्या करु..? हंम..?

दीया : (खुस होते) नीलु तबतो अच्छा हे.. मेतो कहेती हु.. अ‍ेक बार उसे अच्छेसे मीलले.. इनमे कुछ नही होता.. अगर वो दुबारा सेक्सके लीये कहे तोभी हां केहदेनां.. कोइ नखरे मत करना.. इसी बातपे कइ बार लडके हमे छोड देते हे.. अगर तुम दोनो सादी करलोगे तो तेरी लाइफ अच्छेसे सेट होजायेगी.. लेकीन फीर तेरी बहेनका क्या होगा..? इसके बारेमे तुम दोनोने कुछ सोचा हे..?

नीलम : दीया.. वो मेरी सगी बहेन नही हे.. मेरी बुआ की ननंद हे.. मे उनको दीदी कहेती हु.. मेरी छोटी मां की बडी बहेन ओर मेरी सगी बुआ देवरानी जेठानी हे.. थोडा दुरका रीलेशन हेतो कोइ दीकत नही हे..

दीया : (हसते) छोटी मां मीन्स..? चाची..?

नीलम : (सरमाते हसते) नही.. मेरी दो दो मां हे.. मेरे पापाने दो सादीया की हे.. मेरी सगी मां ओर अभीके जो मेरे पापा हे वो दोनो मामी भांजे थे.. दोनोके बीच पापा बीमारथे तबही रीलेशन हो गयाथा.. जब मेरे पापा गुजर गयेतो मांने उनके भांजेके साथही सादी करली.. अभी जो मेरे पापा हे उनकी पहेली बीवी हे उनको मे छोटी मां कहेती हु.. हें..हें..हें..

दीया : (हसते) वाव.. दो दो सादीया..? नीलु.. कीतना अजीब लगता हेनां.. वोभी आजके जमानेमे..

नीलम : (हसते) सुन.. वो पुनमदी हेना जो मेरी बुआकी ननंद हे.. अभी उनकी मेरे बोय फ्रेन्टके साथ सादी हुइ हे.. उनके बडे भाइने तीन तीन सादीया करली हे.. वो वहाके राजा हे.. मेरी बुआकी सादी उनके छोटेभासे ही हुइ हे.. वो अ‍ेक रोयल फेमीली हे.. तो उनके खानदानमे दो तीन सादीया आम बात हे.. हें..हें..हें..

दीया : (मुस्कुराते) नीलु.. अ‍ेक बात पुछु..? क्या अभी ये जो तेरे पापा हे वो तेरा खयाल तो रखते हेनां..?

नीलम : (फीकी मुस्कानसे) हां दिया.. मेरे घरमे सबको यही लगताहे की मुजे कुछ नही पता.. लेकीन तुमसे अ‍ेक बात कहु..? मेरे जो अभी ये पापा हेना.. वोही मेरे असली पीता हे.. मेरे बापु बीमारथे तब मेरे ये पापा हमारे घरपे बहुत आतेथे.. तबही मेरी मा ओर पापा रीलेशनमे आगये थे.. ओर पापाने मांको प्रेगनेन्ट कर दीया.. ओर मे आगइ.. यही मेरे असली पीता हे.. तो मेरा खयालतो रखेगेही..

दीया : (हसते) हंम.. तो फीर ये सब तुजे कैसे पता चला की यही तेरे असली पीता हे..?

नीलम : (सरमाते हसते) अ‍ेक बार मां.. ओर छोटीमां रुममे बाते कर रहीथी.. तब उनको नही पताथाकी मे उसी रुमके बाथरुममे हु.. ओर मेने सब सुनलीया.. दिया.. क्या तेरे साथभी कुछ अ‍ैसा हुआ हे..?

दीया : (आंख गीली करते) हां नीलु.. मेरी अभी जो मा हे वो मेरी सौतेली मां हे.. पहेले पापाकी सेक्रेटरी थी.. मेरी असली मां का उनके देवरके साथ यानी मेरे चाचाके साथ ही नाजायज रीस्ता था.. ओर उसने मांको पेटसे कर दीया.. फीर मेरा जन्म हुआ तब मांका सब भांडा फुट गया.. ओर मां चाचाके साथ भाग गइ.. अभी उनसे सादी करके दोनो अलग रेहते हे..

नीलम : (आस्चर्यसे) क्या केह रही हो तुम..? तेरे जन्मके बाद भांडा फुट गया मतलब..? कैसे..? आइमीन.. सबको कैसे पता चला..?

दीया : (तभी अपनी पीठपे अ‍ेक लाखका नीशान दीखाते) नीलु.. तुम ये देख रही हो..? हमारे खानदानमे यही नीशान इसी जगाहपे सीर्फ चाचाको हे.. ओर कीसीको नही.. तो सबको यही लगता हे की मे मेरे चाचाकी संतान हु.. ओर अभी चाचासे मेरी मांको अ‍ेक लडकी ओर हुइ हे.. उनकी पीठपे भी ये नीशान हे.. तो जाहीरसी बात हे.. सबको पता हे.. मेरे असली पीता मेरे चाचा ही हे..

नीलम : अच्छा.. तभी तेरे पापाने अपनी सेक्रेटरीसे सादी करली.. क्या उनके कोइ बच्चे हे..?

दीया : (आंख गीली करते) नही.. लेकीन फीरभी मेरे इस पापा मुजे बहोत प्यार करते हे.. लेकीन मां.. जानेदे सब.. उनकोभी कोइ संतान नही हेतो वोभी चाचाके साथ.. साला इनकी बात करके दीमाग खराब हो जाता हे.. नीलु अ‍ेक बात कहु..? तुजे जहासे भी खुसीया मीले बटोर लेना.. अपनी लाइफ खुलकर जीले.. फीर पता नही हमारी कीस्मतमे कहा मोड आजाये.. अब इस जमानेमे तो रीस्तेकी कोइ अ‍ेहमीयतही नही बची.. इनसेतो अच्छा वो राजा था.. जो सभी प्रकृतीके नीयमसे जीते थे..

नीलम : (खडी होकर दीयाको हग करते) हंम.. दिया.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेरी वजहसे तुजे दुख हुआ.. लेकीन तुम कीस राजाकी बात कर रही हो..?

दीया : (मुस्कुराते) कमीनी.. दोस्तीमे नो सोरी.. नो थेन्क्स.. ओके..? मे उस राजाकी बात कर रही हु जो हमारे इसी सहेरमे रहेताथा.. उसने अपनी दोनो बहेनसेही सादी करली थी.. हमभी अ‍ैसे आपसी रीस्तोमे सादी करके हमारी जींदगी अच्छी तराह जी सकते हे.. उसी राजाकी मेरे पास अ‍ेक कीताब (ये केसी अनुभुती) पडी हे.. फुरसतमे पढ लेना.. बहुत मजा आयेगा.. इनमे सब आपसी रीस्तोमेही सादीया करते हे.. यानी की अपनी दोनो बहेने चाची यहा तक वो राजाने उनकी दादीसेभी सादी करली.. बहुत अच्छी कीताब हे..

नीलम : (सरमाते हसते) क्या..? दादीसे भी..? दीया वो कीताब मुजे देना.. मे पढना चाहती हु..

नीलम ओर दीया अ‍ैसेही अ‍ेक दुसरेके बारेमे पारीवारीक बाते करती रही.. फीर दियाने वो कीताब नीकालके नीलमको पढनेके लीये देदी.. तो नीलम वही पढने लगी.. तबतक धिरेन अपने गांवकी ओर नीकल गयाथा तब उनके घरपे दोपहरको सब लंच करके आराम कर रहे थे.. नीर्मलाने राजीवको अपनी दवाइ पीलाइ तो राजीव नीदकी आगोसमे चला गयाथा.. वो नीचेके रुममेही सो रहाथा.. तो साथमे नीर्मलाभी आराम करते सो गइथी.. तब देवायतको पुनमने चंदावाले रुममे आराम करने भेज दीयाथा..

फीर दया ओर पुनमने सब काम नीपटा लीया.. ओर पुनमने दयाको उनके रुममे भेज दीया.. फीर होलका दरवाजा अच्छेसे बंध करके राजीव वाले कमरेमे देखने चली गइ.. तो दोनो मीया बीवी नींदकी आगोसमे थे.. तब पुनम धीरेसे उपर अपने रुममे चली गइ.. ओर देवायतके कमरेमे जांकते देखा तो देवायतभी अपनी सुहागरातमे पुरी रात जागनेकी वजहसे गहेरी नींद सो रहाथा..

तो पुनमने देवायतको आराम करने देनाही बहेतर समजा.. उनकोभी पता थाकी भाइ आज पुरी रात अपनी नइ बीवीके साथ सुहागरातमे जागा होगा.. तो वो अपने कमरेमे चली गइ.. ओर आराम करने लगी.. सब आराम करते रहे तब सामके चार बजनेको आयेथे.. फीर पुनम उठकर अपने बाथरुममे चली गइ.. ओर फ्रेस होकर हल्कासा सींगार करके नीचे चली जाती हे..

तभी नीर्मलाभी राजीवको जगाकर फ्रेस होकर बहार नीकली तब दया ओर पुनम दोनोही चाइ नास्ता बनाने कीचनमे चली गइ.. तभी देवायतभी कंपलीट होकर नीचे आगया.. ओर नीर्मलाके पास उनसे सटकर बैठ गया ओर उसे कंधेसे पकडकर अपनी ओर करके भीच लीया तो नीर्मला सरमाके हसने लगी.. तो राजीवभी हसने लगा.. फीर दोनो सही होकर बैठ गये.. तब..

राजीव : (हसते) क्या बात हे.. आज हमारे बेटेको सासुपे बहोत प्यार आ रहा हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां.. पापा.. अब आप सबलोग चले जाओगे तो घर बहुत सुना सुना लगेगा.. कुछ दिन ठहेर जाइअ‍ेनां..? आप हमारे साथ हेतो बहुत अच्छा लगता हे.. आप हमारे साथ रहेने आजाओ.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) बेटा तुजेतो सब पता हे.. कीतना कुछ काम करना हे.. ओर तुम दोनोभी तो हमारे साथ चल रहेहो.. तो वहा तुम दोनोही दो तीन दिन रुक जाना.. वोभी तो आपकाही घर हे..

देवायत : (मुस्कुराते) नही पापा.. अब काम बहुत बढ गया हे.. ओर दो तीन दिनमे लखनकोभी अब सहेर भेज रहा हु.. तो अब वो वहा हमारा सब काम देखेगा.. आपकी तबीयत ठीक नही हे.. वरना आप दोनोकोभी उनके साथ रहेने भेज देता.. तो लखनकोभी आपका कुछ अनुभव मीलजाता..

राजीव : (हसते) नही.. अबतो हमारे भानुभी बहुत कुछ सीख गये हे.. वोही लखनको तैयार कर देगा.. आप फीकर मत करो.. सबकुछ अच्छेसे चल रहा हे.. कास आपके बापु जीन्दा होते.. तो वो ये सब देखके बहुत खुस होते..

नीर्मला : (बापुका जीक्र होतेही टोपीक चेन्ज करते हसते) देवु.. सुना हे आप गांवमे बडी होस्पीटल बनवा रहे हो..? क्या ये सच हे..?

राजीव : (खुस होते) भाइ तबतो बहुत ही अच्छा हे.. इस गांवमे अ‍ेक बडी होस्पीटलकी सख्त जरुरत हे.. आप सृतीकोभी इधर गांवमे बुलालो..

देवायत : (हसते) जी पापा.. देखते हे.. हमे सरकार जमीन कब दे रहीहे.. स्कुलकी जमीनतो हमे देदी.. तो वहा अ‍ेक हप्तेमे कामभी सुरु होजायेगा.. मेने इस बारेमे सृतीसे बातभी करली हे.. अब आगे देखते हे..

राजीव : बेटा.. अगर स्कुल खुल रहीहे तो आप भावुका भी देखलो.. वो भी पढी लीखी हे तो अपने पावपे खडी होके कुछ कर लेगी.. बस हमे सीर्फ उनकीही चीन्ता हे..

देवायत : (मुस्कुराते) पापा भावुकी चीन्तातो छोड ही दो.. अब सब ठीक हो गया हे.. भावुभी वहा रहेने के लीये राजी होगइ हे.. फीरभी मे हुनां.. अगर भावुको कुछ हुआतो उनको मेरे साथही रखुगा.. ओर स्कुलमेभी नोकरीपे लगा दुगा..

राजीव : (खुस होते) चलो तबतो अच्छा हे अब उनकी चीन्ता नही करनी.. बस अ‍ेकही बीनंती हे आपसे.. अगर मुजे कुछ होजाये तो आप नीमुका खयाल रखीयेगा.. मे उनको वहा अकेली रखना नही चाहता.. इनको आपके साथ रखना.. बस यही कहेनाथा आपसे..

नीर्मला : (आंख गीली करते) अरे आप कैसी बाते कर रहे हे..? आपको कुछ नही होगा.. हमारा देवु हेनां..?

देवायत : पापा आपको कुछ नही होगा.. मे हुनां..? आप अ‍ैसा क्यु गलत सोचते हे..? इनको मे मरते दम तक मेरे साथ रखुगा.. आइ प्रोमीस.. बस..? आप उल्टा सीधा सोचना छोड ही दो..

पुनम : (बहार आते) भाइ.. मम्मी पापा.. चलो.. चाइ नास्ता रेडी हे.. आकर बैठ जाओ..

कहेते पुनम वापस कीचनमे चली गइ.. तब राजीव ओर नीर्मला उनको देखतेही रहे.. ओर तीनो उठकर डाइनींगपे चले गये.. तब दया ओर पुनम चाइ नास्ता लेकर आगइ.. ओर सब बैठकर चाइ नास्ता करने लगे.. तो नीर्मला ओर पुनम देवायतके आसपास बगल वाली चेयरपे बैठ गइ.. तभी..

नीर्मला : पुनो बेटा.. सारा दीन घरमे अकेली रहेके बोर होजाओतो सेटर डे सन्डे अपने मायके घुमने चली जाना.. तो थोडा फ्रैस होजाओगी..

पुनम : (सरमाते हसते) जी मम्मीजी..

दया : (हसते) मालकीन इसीलीये तो मे इनके साथ आइ हु.. इनको अकेली थोडीना रहेने दुगी.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) दया तुमभी साथ चली जाना.. तो वहा सबको मीलकर तुजेभी अच्छा लगेगा.. इतने सालो तक तुमभी वहा रही हो.. तो वो तेराभी घर हे..

तभी पुनमके मोबाइलकी रींग बजती हे तो वो उठकर मोबाइल के पास चली गइ.. ओर फोन उठाकर बात करने लगी.. फीर बात करके वापस आकर बैठ गइ ओर देवायतके सामने देखके कातीलाना स्माइल करने लगी.. फीर सबने चाइनास्ता करलीया तो नीर्मला जानेकी तैयारीया करने लगी.. तो राजीवभी फ्रेस होने अपने रुमके बाथरुममे चला गया.. तब पुनम देवायतको इसारेसे दुसरे रुममे बुलाती हे..

तो देवायत उठकर धीरेसे वही चला गया.. तब पुनम रुममे आतेही जटसे देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर देवायतके होठोको चुमने लगी.. फीर उनसे अलग होतेही धीरेसे बात करने लगी..

पुनम : (होंठ चुमते धीरेसे) भाइ.. लगता हे मे आपके पास जल्द आजाउगी..

देवायत : (मुस्कुराते) क्यु..? तुजे अ‍ैसा क्यु लगता हे..? कीसका फोन था..?

पुनम : (कातील स्माइल करते) हमारी होस्टेलकी मेडमका.. मेरी उनसे अच्छी पटती हे.. आज अभी धिरेन होस्टेल गयेथे.. नीलुको अ‍ेक घंटेके लीये कही ले गये हे.. बस ये बात अभी कीसीको मत कहेना.. आगे देखो होता हे क्या.. मे सेटर डे संन्डे उधर घरपे आ रही हु.. भाभीको कहेना.. वरना आप आकर हमे लेजाना..

देवायत : (हसते) हंम.. तुम टेन्शन मतलेना.. मंजु सब सम्हाल लेगी.. चल बहार वरना.. अभी दोनो आजायेगे..

फीर दोनोही बहार आगये.. तब कुछ देरके बाद नीर्मला ओर राजीवभी बेग लेकर बहार आगये तो देवायतने नीर्मलाके पाससे बेग लेली तब पुनम ओर दया राजीव ओर नीर्मलाके पैर छुने लगी.. तब दोनोने आशीर्वाद दीया.. ओर राजीवने दोनोको सगुनके तौरपे कुछ पैसेभी दीये.. तब पुनम देवायतके पास जाकर उनको हग करलेती हे.. ओर सबलोग बहार आगये..

फीर तीनो कारमे बैठ गये तब पुनम ओर दया वही दरवाजेपे खडी रहेकर उनको वीदा करने लगी.. ओर कार देवायतके गांवकी ओर चल पडी.. इघर धिरेन अपने गांवकी ओर आ रहाथा.. आज उसने नीलमके साथ बीताये पलसे बहुतही खुस ओर उतेजीत था.. उनको पता नही थाकी उनकी अ‍ेक अ‍ेक हरकत उनकी बीवी पुनमको पता चल जाती थी.. ओर पुनमभी इन दोनोके रीलेशन देखके मजा ले रहीथी..

पुनमको बाबाकी ओर मंजुकी अ‍ेक अ‍ेक बात सच होते दीख रहीथी.. धिरेन अब जल्दसे जल्द अ‍ेक मकान ओर अ‍ेक कारका इन्तजाम करना चाहता था.. तो दुसरी ओर देवायत आधेही घंटेमे गांवमे पहोंच गया.. ओर सीधा हवेलीपे जाके रुक गया.. तो मंजु चंदा ओर भावना.. तीनोको देखकर खुस होने लगी.. ओर सबलोग होलमे आकर बैठ गये.. तब अभी सीर्फ पांच साडे पांचही बजनेको आयेथे....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३८

पुनमको बाबाकी ओर मंजुकी अ‍ेक अ‍ेक बात सच होते दीख रहीथी.. धिरेन अब जल्दसे जल्द अ‍ेक मकान ओर अ‍ेक कारका इन्तजाम करना चाहता था.. तो दुसरी ओर देवायत आधेही घंटेमे गांवमे पहोंच गया.. ओर सीधा हवेलीपे जाके रुक गया.. तो मंजु चंदा ओर भावना.. तीनोको देखकर खुस होने लगी.. ओर सबलोग होलमे आकर बैठ गये.. तब अभी सीर्फ पांच साडे पांचही बजनेको आये थे....अब आगे

तब रजीयाने सबको पानी पीलाया ओर चाइनास्तेके लीये पुछा.. तो सब पुनमके घरपे चाइनास्ता करके ही आयेथे तो सबने मना करदीया.. फीर कुछ देर सबके साथ बैठकर देवायत अपने खेतोपे चला गया.. तो वहा भानु लखन ओर रामुकाका बैठे थे.. ओर आपसमे बाते कर रहेथे.. रामुकाका लखनको बीजनेसके बारेमे समजा रहेथे.. की कैसे तेरे बापु ओर दादा सहेरमे बीजनेस करते थे.. दोनो ही रामुकाकाकी बाते गौरसे सुन रहेथे..

देवायत : (आतेही हसते) कहो काका.. दोनोको क्या समजा रहे हो.. हें..हें..हें..

भानु : (हसते) अरे कुछ नही देवु.. काका हमारे बापुके बीजनेसके बारेमे सब जानकारीया दे रहे थे.. इन्होने भी उनके साथ बहुत काम कीया हे.. तो हमे सब बाते बता रहेथे.. काकासे काफी कुछ नया सीखनेको मीला..

देवायत : (हसते) हां.. काका ये दोनोको अच्छी तराह समजादो.. की आप सहेरमे क्या करते थे.. अब ये दोनो ही सहेरका हमारा बीजनेस सम्हालले तो मुजे कोइ जंजट ही नही हें..हें..हें..

काका : (हसते) बेटा मे वोही इनको केह रहा था.. अभी लखन बेटेने मुजे बताया की वो अब सहेरमे रहेने जा रहे हे.. तो मे उसे सब समजा रहाथा..

देवायत : (हसते अंदर जाते) ठीक हे काका आप लखनको अच्छी तराह समजा दीजीये.. भानु तुम चलो मेरे साथ अंदर.. मुजे तुमसे कुछ काम हे..

कहेते देवायत अपनी गोडाउनकी ओफीसमे चला गया.. तो पीछे भानुभी उठकर चला गया.. ओर आकर देवायतके सामनेकी चेयरपे बैठ गया.. तब बहार रमाुकाका लखनको सब डीटेलमे समजाने लगे..

भानु : हां देवु.. कहो.. कुछ अरजन्ट काम था..?

देवायत : भानु.. कल मे ओर मंजु दोनो पापाके घर जा रहे हे.. वहा भावुभी साथ चल रही हे.. तो उनके मकानका रजीस्टर वही करवा देगे.. फीर कुछ दिन भावु वहा रुककर वापस तेरे घरपे आजायेगी.. ओर सुन अब जरा उनपेभी थोडा ध्यान देना.. सीर्फ नइ बीवीके साथ मत लगे रहेना.. हें..हें..हें.. भावुको बडी मुस्कीलसे समजाया हे.. तब जाकर वो तेरे साथ रहेनेके लीये मानी हे..

भानु : (हसते) क्या यार..? चल ठीक हे मेरे लीये भावु मान गइ वोही बहोत हे..

देवायत : भानु.. अब तीन चार दिनमे लखनको भी सहेर रहेने लीये भेज रहा हु.. तो दो तीन दीनके लीये भलेही लता मायके मे रहे.. कल सुबह लखन उनको छोडने आजायेगा.. तो तुम सहेरमे उनके घरमेभी देखले.. घरमे फ्रिज टी.वी. सब चीजे अच्छी तराह देखले.. अगर जरुरत पडेतो सब नया लेले.. तुम कीसीको लेकर कल सहेर चले जाना ओर सब देख लेना..

भानु : हां भाइ.. कल सुबह हम चले जायेगे.. भाइ.. सुबह आप नही थे तो वो गांवके सुधीरेभाइके घरके पास रहेता हेनां वो.. बनवारीलाल वो आपको मीलने आया था.. दोपहेरके बाद भी दुबारा चकर लगा गया.. लगताहे उनको आपसे कोइ अरजन्ट जरुरी काम होगा.. बेचारा बहुत परेसान लग रहा था.. आप अ‍ेक बार उनको मील लेनां..

देवायत : (हसते) हंम.. चल जाते समय उनको मीलकर जाउगा.. भानु.. लगता हे अब बाबा जो कहे रहेथे उनका समय आगया हे.. अब हमारे गांवसे ही सब रीस्तोमे बदलावकी सुरुआत हो चुकी हे.. तो मुजे लगता हे ये बनवारीलाल भी इसी सीलसीले मे आया होगा..

भानु : (हसते) भाइ.. क्या उनका चकर उनकी बहु के साथ हेनां..? साला इस उमरमे भी.. ओर वोभी अपने बेटे की पत्नी.. साली ये आग ही कुछ अ‍ैसी हे.. कोइ रीस्ते नाते नही देखती..

देवायत : (मुस्कुराते) तो क्या हुआ..? इस उमरमे कीसीको इच्छा नही होती क्या..? हंम..? बसंतीभाभी भी तो बडी हे.. वोभी दो जवान बच्चोकी मां हे.. हें..हें..हें..

भानु : (सरमाते हसने लगा) क्या भाइ..? तो आपको सब पता चल गया..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) कमीने.. मे भी इसी गांवमे रहेता हु.. मुजेतो क्या आधे गांवको पता चल गया हे.. छोडदे उसे.. अभी अभीतो बडी मुस्कीलसे भावु मानी हे.. अगर उनको तेरे दुसरे लफडेके बारेमे पता चलाना.. तो फीर हमसे भावुको दुबारा मनानेकी उमीद मत रखना.. समजे..?

भानु : (जोरोसे हाथ जोडके हसते) अरे ना बाबा ना.. बडी मुस्कीलसे तो वो मानी हे.. भाइ अब कीसीसे कोइ लफडा नही करना.. घरकी मुर्गी ही बराबर हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (जोरोसे हसते) ओर वोभी दो दो मुर्गीया.. हें..हें..हें.. साले बात तो तेरी समजमे आइ.. सुन भानु.. कुछ ही दिनोमे गांवमे अ‍ैसे कइ रीस्ते उजागर होगे.. यही समय हे तुम अ‍ैसे रीस्तोसे नीकल जाओ.. वरना लेने के देने पड जायेगे.. मत भुलो.. ये समयका चकै हे.. घुम फीरके वही आकर खतम होता हे.. जहासे सुरु होता हे.. बात तेरी समजमे आइ..?

भानु : (थोडा सीरीयस होते) हां भाइ.. आप सही केह रहे हे.. अब अ‍ैसा कोइ रीस्ता नही रखना.. वरना मुजे दोनो बीवीओसे हाथ धोना पडेगा.. ओर जीसके साथ लफडा होगा उनको अपनाना पडेगा वो अलग..

देवायत : (हसते) हां भानु.. अब गांवमे सब यही होगा.. इनसे तो अच्छा हे.. तुजे जोभी करना हे.. हमारे खेतोपे ही करना हे.. तुजे मालती रीटा ओर दुसरी मजदुरन कहा मना करती हे..

भानु : (जोरोसे हसते) अच्छा.. तो आपको रीटाने सब बता दीया.. भाइ.. कैसी हे वो..? साली आजभी अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह लगती हे.. वो छोटुसे संतुस्ट नही हे.. तो अ‍ेक दिन सामनेसे आगइ.. क्या आपने हाथ मारलीया..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. जब तुम ओर लखन सहेर गये थे.. बस भानु यही कहेना था.. अब जोभी करना सीर्फ इधर.. वरना बहारतो सब लेनेके देने पड जायेगा.. समजे..?

भानु : (हसते) भाइ.. अ‍ेक बात ओर आपसे कहेनी थी.. वो आपका खास दोस्त.. रमेशभाइ.. आजकल वोभी चर्चा मे हे.. जरा उसेभी समजाइअ‍े.. वो जयाभाभीके साथ बहुत सहेरमे जाता हे.. सायद अबतो उनके घरवालोको भी दोनोपे संका हे.. वो सामतभाइ आपहीके पंचायतके सदस्य हे.. सोचो अगर उनको सब पता चल गया तो क्या होगा..?तबतो रमेशभाइका सरपंचके पदसे जाना तैय हे..

देवायत : हंम.. सही कहा तुने.. चल अब थोडी देरके बाद उनको ही मीलने जाता हु.. तब बात कर लुगा.. साला पता नही सबको क्या हो जाता हे.. पावरमे आतेही सब कमीने ठरकी हो जाते हे.. ओर सुना..

भानु : (मुस्कुराते) बस ओर कुछ नही.. बहुत मजे करलीये.. अब थोडा धंधेपे भी ध्यान देना हे.. बस अ‍ेक बार लखन वहा सेट होजाये.. फीरतो धंधा करनेके बहुत मजा आजायेगा.. बस आपतो सौदा करतेही जाओ..

देवायत : भानु.. अब इधरभी थोडा ध्यान देना पडेगा.. तेरी नइ भाभीकी वजहसे कुछ महीनो मुजे हप्तेमे दो तीन बार सहेरमे जाना पडेगा.. फीरतो उनको इधर ही लाना हे.. हम यहा अ‍ेक बहुत बडी होस्पीटल बनवा रहे हे.. फीरतो कीसीको सहेरमे जाना ही नही पडेगा..

भानु : (हसते) क्या..? तो इसके लीये भाभी यहा रहेनेके लीये मान गइ..? भाइ सहेरमे भी उनका क्लीनीक बहुत अच्छा चलता हे.. तो फीर वो यहा क्यु आयेगी..?

देवायत : हंम.. अरे वो दुसरे डोक्टरका इन्तजाम तो कर सकती हेनां..?

भानु : (हसते) हां.. ये बात तो हे.. चलो अच्छा हे.. भाइ आपका ये आइडीया बहुतही अच्छा हे..

मालती : (चाइ लेकर आते हसते) अरे दोनो मालीक इधरही बैठे हे.. लीजीये चाइ पीजीये.. बहार उन दोनो मालीकको देकर आइ हु.. ओर भानुभाइ.. वो खाद डालना हे.. आप चार बोरीया गोडाउनसे नीकाल दीजीये..

भानु : (हसते) हां अभी चाइ पीकर नीकाल देता हु.. तुम हरीया ओर दो मजदुरोको इधर भेजदे.. लेजाये..

फीर दोनोने चाइ पीली तो मालती देवायतकी ओर कातील स्माइल करके चली गइ.. ओर तभी हरीया ओर दो मजदुर आगये तो भानु उनके साथ गोडाउनमे चला गया.. तब देवायत फोन घुमाते कुछ सौदेबाजी करने लगा.. फीर आधे घंटेके बाद वो भानुके कहेकर वहासे नीकल गया.. ओर गांवमे सीधाही सुधीरकी क्लीनीकपे चला गया.. तो वहा बरखा ओर मुना बेठे थे तो देवायतको देखतेही दोनो सरमाके हसने लगे..

देवायत : (हसते) कहो मुना कैसे हो..? कोइ तकलीफ तो नही..? कहा हे तुम्हारा डोक्टर.. हें..हें..हें..

मुना : (हसते) जी.. ठाकुर साहेब.. बस अंदर हे.. जाइअ‍े आप अभी अंदर कोइ पेसन्ट नही..

तब देवायत अंदर चला गया तो सुधीर उनको देखतेही खुस होगया.. ओर उनसे हाथ मीलाके सामनेकी चेरपे बेठनेके लीये कहा.. तो मुना दोनोके लीये पानी लेकर आगया.. फीर देकर चला गया..

सुधीर : (मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. मुनाकी मा को सब पता चल गया हे.. उनको संका हुइ तो कल बरखाको चेक करवाने सहेर ले गइथी.. तो सी इस.. प्रेगनेन्ट.. मुना कहेता था उनकी मां बडी मुस्कीलसे बच्चा ना गीरवनेके लीये मानी.. उनकी मां कैसे मान गइ वो उसने नही बताया.. उसने इस दोनो भाइ बहेनके रीस्तेको अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. बस अब इनके पीताजीको आप समजा देना..

देवायत : (मुस्कुराते खुस होते) चलो ये तुमने अच्छी खबरदी मुजे.. बस अ‍ैसेही धीरे धीरे हमे सबको नीपटना हे.. यार.. भानु केह रहाथा आज तेरा पडोसी बनवारीलाल दो बार मेरे खेतोपे आकर चला गया.. क्या उनको कुछ काम था..? तुजे इनके बारेमे कुछ पता हे..?

सुधीर : (हसते) पता नही भाइ.. सुबह उनको देखा तब कुछ परेसान दीख रहाथा.. लगता हे वो कोइ नइ मुसीबतमे हे.. आप अ‍ेक बार उनके घर जाकर मीललो.. मे अभी उसे फोन करके केह देता हु..

कहेते सुधीरने फोन उठाकर बनवारीलालको फोन करदीया.. ओर देवायतके क्लीनीकपे आनेकी सुचना देदी तब बनवारीलालाने देवायतको उनके घरपे अकेले भेजनेको कहा.. ओर फोन रख दीया.. तब..

सुधीर : (हसते) भाइ.. वो अपने घरपेही हे.. आपको अकेले मीलने बुलाया हे.. आप जाओ..

फीर देवायत वहासे चला गया तो बरखा उनके सामने देखकर सरमाके हसने लगी.. ओर देवायत अपनी बाइक लेकर बनवारीलालके घर चला गया.. तब गलीमे अ‍ेकल दोकर लेडीस खडी थी.. जो देवायतको देखतेही उनके सामने हसने लगी.. ओर अपने घरपे आनेके लीये कहेने लगी.. तब देवायत हसते हुअ‍े हाथ हीलाते बनवारीलालाके घरके अंदर चला गया ओर दरवाजा बंध करके उनके घरमे आगया.. तब..

बनवारीलाल : (हसते सोफेसे खडे होते हाथ मीलाते) आइअ‍े.. आइअ‍े ठाकुरजी.. बैठीये.. कैसे हे आप..?

देवायत : (सोफेपे बैठते हसते) बस मजेमे.. हें..हें..हें.. बनवारीलालजी.. अब आपतो मुजे ठाकुरजी मत कहीये.. आपके बैटे जैसा हु.. तो नामसे ही बुलाइअ‍े..

बनवारीलाल : (हसते) अरे अ‍ैसे कैसे नामसे बुलाउ.. आपतो यहाके राजा हे.. भलेही लोकतंत्र आगया हो.. लेकीन हम सब आजभी आपको हमारा राजा मानते हे.. वरना इस गांवके बारेमे इतना कोइ भला कर सकता हे..? इतना तो सरकारभी नही करती.. कहीये क्या पीयेगे..? चाइ के कुछ ठंडा..?

देवायत : (हसते) बस थोडीसी चाइ ही पीला दीजीये.. कहीये कैसे हमे याद कीया.. भानु केह रहाथा आप हमारे खेतोपे दो बार आयेथे.. कुछ अरजन्ट काम था..?

बनवारीलाल : (थोडा परेसान होते) अ‍ेक मीनीट.. (थोडी उची आवाजमे) बींदीया.. देख ठाकुरजी आये हे.. दो कप फस्टक्लास चाइ बना देना.. (देवायतकी ओर धीरेसे) ठाकुरजी.. अब मे आपसे सब कैसे कहु..?

देवायत : बनवारीलालजी.. जोभी कहेना हे बीसन्दास कहीये.. क्युकी मुजे आपके बारेमे थोडा बहुत पता हे.. जोभी कहेना बेजीजक कहीये.. ताकी हम आपकी सभी समस्याका हल नीकाल सके.. ओर आप बीलकुल चीन्ता मत कीजीये.. क्युकी अ‍ैसी सीचुअ‍ेशनमे मे ये रीस्तेको गलत नही मानता..

बनवारीलाल : (थोडा खुस होते हाथ थामते) थेन्क्यु ठाकुरजी.. बस इसीलीये मे आपको मीलने आया था.. क्युकी मुजे विस्वासथा की आपही इस मामलेको सुलजा सकते हे..

देवायत : कहीये क्या बात हे.. कुछ प्रोबलेम हे क्या..? काफी परेसान दीखते हे आप..

कहातो बनवारीलाल खडे होकर अपने रुममे चले गये.. ओर कुछही देरमे अ‍ेक बडा लीफाफा लेकर आगये.. ओर देवायतके पास नजदीक बैठ गये.. फीर लीफाफा खोलकर उनमेसे कुछ तीन चार पेपर नीकाले.. ओर देवायतको पढनेके लीये दे दीये.. तो देवायत अ‍ेक अ‍ेक पेपर गौरसे पढने लगा.. तो उसे पता चलाकी ये सब पेपर उनको बेटे ओर उनकी बहुके डीवोर्सके पेपर हे.. उनमेसे तीन पेपर डीवार्सके थे.. ओर अ‍ेकमे उन्होने अपने पीताजीको चीठी लीखीथी.. तब देवायतसे सब पढलीया ओर पेपर वापस दे दीये तब..

बनवारीलाल : (थोडा परेसानीमे) देखा ठाकुरजी.. क्या इस लीये मेने इस कमीनेको पैदा कीयाथा..? उलुका पठा.. अ‍ेकतो यहा अपनी बीवीको सम्हाल नही पाया.. ओर उपरसे.. दुबइ चला गया.. यहा घरकी इजत बचानेके लीये मुजे ना चाहते हुअ‍े भी क्या क्या करना पड रहा हे.. अ‍ेक जवान लडकी कीतने दिनो तक अपने पतीसे दुर रहेती..? कहेता था वहा सेट होजाउगा तब दो तीन महीनेमे ही बींदीयाको लेजाउगा.. ओर ये..?

देवायत : (मुस्कुराते) बनवारीलालजी.. इसमे उसने लीखा हे डीवोर्सके बदलेमे वो बींदीयाको तगडी रकम देनेके लीयेभी तैयार हे.. क्या इतने दिनोमे उन्होने इतने रुपीये कमा लीये..? कौन दे गया ये आपको..?

बनवारीलाल : (गहेरी सांस लेते) ठाकुरजी अब आपसे मे क्या कहु..? कलही सहेरसे उनका वकील आकर देगया.. उसनेभी कल मुजसे फोनपे बातकी.. कल सालेने सब मुजे खुलके बता दीया.. ओर बींदीयासे भी बात करके उनकोभी सब बता दीया.. तो बेचारी कलसे रो रही हे..

देवायत : (हसते) अगर आपको अ‍ेतराज ना होतो क्या सब बाते मुजे सुरुसे बता सकते हे..?

बनवारीलाल : (हसते) भाइ इसीलीयेतो आपको मीलने आया था.. इसमे मेरा तो कुछ दिमाग ही काम नही कर रहा.. अगर आपसे सब सचाइ नही बताउगा तो आप इनका हल कैसे नीकालेगे.. कहोतो मे बींदीयासे भी आपकी बात करवाता हु.. (थोडा जोरोसे) बींदीया..

बींदीया : (कीचनसे) जी.. अभी चाइ लेकर आइ.. बन गइ हे..

तब बींदीया माथेपे पलु ढककर अ‍ेक ट्रे मे दो कत चाइ लेकर अपनी नजरे जुकाते आइ.. ओर दोनोको चाइ देकर वापस कीचनमे जाने लगी.. तो बनवारीलालाने उसे रोक दीया.. ओर वही बेठनेके लीये कहा तो बींदीया बहुतही सरमाइ.. ओर संकोच करते वही नजरे जुकाते दुर सोफेपे बैठ गइ.. तो देवायत ओर बनवारीलाल चाइ पीते बाते करने लगे..

देवायत : बनवारीलालजी.. कहीये मुजे सुरुसे सब जानना हे..

बनवारीलाल : ठाकुरजी.. बींदीया ओर मेरा बेटा अ‍ेकही कोलेजमे साथमे पढते थे.. बींदीया उनके मा बापकी अ‍ेक लौती संतान थी.. इनके पीताकी सहेरमे अ‍ेब बहुत बडी सारीकी दुकान हे.. कुल मीलाके सुखी सम्पन परीवार हे.. मेरा बेटा ओर बींदीया अ‍ेक दुसरेसे बहुत प्यार करते थे.. तीन साल तक दोनोके बीच प्यार रहा.. लेकीन इनके पीताजी बीरादरीसे बहार इनकी सादी करना नही चाहते थे.. वो दोनोके रीस्तोके खीलाफ थे..

देवायत : (हसते) तो फीर बींदीया इधर कैसे आगइ..? क्या दोनोने भागकर सादी करली..?

बींदीया : (सरमाते धीरेसे) जी ठाकुरजी.. हमारी कोलेज खतम होतेही हम दोनोने कोर्टमे जाकर मेरीज करली.. ओर मे यहा आगइ.. तो मेरे माता पीताने मुजसे सब रीस्ते खतम करलीये.. उसने मेरी साइन लेकर मुजे अपनी सभी प्रोपर्टीसे बेदखल करदीया.. तबसे मे वही हु..

बनवारीलाल : ठाकुरजी.. अब ये बेचारी अपने मायकेभी तो नही जा सकती.. ओर वो कमीना इसे मजधारमे छोडके चला गया.. कल ही पता चला वहा वो कीसी बहुत बडे गोल्डके सोरुममे नोकरी करता हे.. ओर उनके मालीककी लडकीसे ही सादी करली हे.. दोनोको अ‍ेक छोटा बच्चा भी हे.. ये बात उसने कल हम दोनोको बताइ.. इसीलीये उनके पास इतने पैसे हे.. उनकी बात सुनकर मेरातो दिमाग ही सुन हो गया.. अब आपही कहीये हम क्या करे..? मुजे मेरी चीन्ता नही इस बेचारी बींदीयाकी चीन्ता हे..

देवायत : बींदीया.. पहेले तुम कहो तुम क्या चाहती हो..?

बींदीया : (सरमाते नजर जुकाते) ठाकुरजी.. अब मे क्या कहु..? बस मुजे इतना पता हे मेरे लीये सब दरवाजे बंध हे.. मे मायके तो जा नही सकती.. अगर बाबुजीको अ‍ेतराज ना होतो मे यही रहेना चाहती हु..

बनवारीलाल : हां ठाकुरजी.. अबतो आपभी सब जानते हे.. वो मेराभी अ‍ेक लोता बेटा था.. अब हम दोनो अ‍ेक दुसरेके सहारेही अपनी जींदगी जी लेगे.. बस यही हम दोनोकी इच्छा हे.. अब आपही कहीये हम क्या करे..? क्युकी गांवमेभी सब लोग हमारे बारेमे तरेह रेहकी बाते करते हे.. तो इस हालतमे तो हमारा यहा रहेना मुस्कील होजायेगा..

हमारी थोडी बहुत खेती बाडीकी जमीनथी तो बाकीकी जमीन आपने हमे वापस दीलवादी.. ओर सहेरमे दो दुकान कीरायेपे दी हुइ हे.. तो उसीमे हम दोनोका गुजारा हो जाता हे.. बाकी पुर्खोकी मीलकत हे.. तो मे चाहता हु ये सब अब बींदीयाके नाम करदु.. ताकी भवीस्यमे उनको भी कोइ तकलीफ ना हो.. क्या कहेते हो आप..? मे अब मेरे बेटेको फुटी कोडीभी देने वाला नही हु..

देवायत : (हसते) बनवारीलालजी.. ये आपने बहुत अच्छा सोचा हे.. मेरी मानीये बींदीयाको कहोकी आपके लडकेको डीवोर्स देदे.. ओर उनके बदलेमे वो जो तगडी रकम दे रहाहे उसे ले लीजीये.. ओर आप दोनो उसे भुलजाइअ‍े.. अब मे जो आप दोनोको कहेने जा रहा हु वो ध्यानसे सुनीये..

कहातो बींदीया अ‍ेक आस भरी नजरोसे थोडा खुस होते देवायतकी ओर गौरसे देखने उनकी बाते सुनने लगी.. तभी देवायत बनवारीलाल ओर बींदीयाको आने वाले समयमे गांवमे कोनसा बदलाव आने वाला हे उनकी बात करता हे.. वो बाबाकी बातेभी बताता हे तब बनवारीलाल ओर बींदीयाके चहेरेपे अ‍ेक उमीद की चमक साफ दीखाइ देने लगी.. दोनोही चहेरेपे मुस्कानके साथ देवायतकी बाते गौरसे सुन रहेथे..

बनवारीलाल : (खुस होते) ठाकुरजी.. आप जो केह रहे हे क्या वो सब सचमे होने वाला हे..?

देवायत : (हसते) हां बनवारीलालजी.. ओर वोभी बहुत जल्द.. जीस तराह हीमाचलमे जो बदलाव हुआ हे वोही बदलाव ना सीर्फ हमारे गांवमे.. बल्की आजु बाजुके सभी गांवोमे होगा.. बस उनका अ‍ेकही मक्सद होगा.. अब यहाभी अ‍ेकभी विधवा या त्यक्ता नही रहेनी चाहीये.. सबको अपनी तराहसे खुलके जीनेका अधीकार होना चाहीये.. सब कुछ प्रकृतीके हीसाबसे चलना चाहीये.. सायद इसीलीये आप दोनो रीलेशनमे आये हो.. आजसे आप दोनो अपने दिमागसे नीकालदो.. की ये मेरी बहु हे.. या ये मेरे ससुर हे..

बनवारीलाल : (खुस होते हसते) तबतो सोनेपे सुहागा होगा.. कहीये इसके लीये हमे क्या करना होगा..?

देवायत : (मुस्कुराते) बस कुछ नही.. जीस दिन ये बात सामने आयेगी तब आप दोनोको खुलकर मेरा समर्थन करना हे.. फीर देखो म ेही आप दोनोकी सादी करवा दुगा.. (बींदीयाकी ओर देखते) बींदीया.. क्या इसके लीये तुम तैयार हो..?

बींदीया : (सरमाते हसते) जी ठाकुरजी.. मे अब इनके साथ ही रहेना चाहती हु.. मेनेतो कबसे इनको अपना पती मानलीया हे.. आप हमारी सादी करवा दीजीये.. ताकी हमे गांवमे उल्टा सीधा सुनना ना पडे.. गांवमे हमारी बहुत बदनामी हो चुकी हे.. ओर यहा जमीन जायदाद हेतो हम इस गांवकोभी तो नही छोड सकते..

देवायत : (मुस्कुराते) बस.. आपसे अ‍ेकही बीनंती हे.. मुजे पता हे आपके पेटमे अभी जो बच्चा पल रहा हे.. उसे इस खुबसुरत दुनीयामे आने दीजीये.. बाकी मे सबको जवाब दे दुगा.. अब आपको यहा कोइ तकलीफ नही होगी..

बनवारीलाल : (सरमाते धीरेसे) ठाकुरजी.. ये सब आपको कैसे पता..? आइ मीन.. बींदीया पेटसे हे..

बींदीया : (सर्मसार होते खडी होते) अब अगर मेरा कुछ काम नही हे.. तो मे अंदर जाती हु.. आप लोग बाते कीजीये..

देवायत : (जब बींदीया चली गइ) बनवारीलालजी.. आप दोनो जीस होस्पीटलपे बच्चेके लीये गयेथे वो डोक्टर मेरी बीवी हे.. आपतो मेरे भाइ बहेनकी सादीमे नही आये थे.. तो आपने उनको यहा देखा नहीनां इसीलीये आपको मालुम नही हे.. हमने दो दीन पहेलेही आश्रमपे सादी करली हे..

बनवारीलाल : (मुस्कुराते) माफ करना ठाकुरजी.. अब हम दोनो आपके यहा कीस मुहसे आते.. सबको हम दोनोके बारेमे पता हे.. तो हमे बहुत सर्मीन्दगी महेसुस होती हे.. इसलीये हम दोनो नही आये.. सोरी..

देवायत : (हसते) अरे सोरी मत कहीये.. बस मेतो सीर्फ बता रहा हु.. मेरी बात मानीये.. उनके वकीलको बुला लीलजीये.. ओर आपके बेंकके खातेमे पैसे जमा होतेही उनको साइन करके दे दीजीये.. ओर आपकी सब प्रोपर्टीमे अपने बेटेको बेदखल करनेका अ‍ेक पेपर आपभी अपने वकीलसे तैयार करवा लीजीये.. अबतो आप दोनो खुलकर अपनी लाइफ जीये.. कीसीसे डरनेकी कुछ जरुरत नही.. अ‍ैसे तो हमारे गांवमे बहुत रीस्ते पनप रहे हे.. जो आपको पताभी नही हे..

बनवारीलाल : (मुस्कुराते) हां.. थोडा बहुत पता हे मुजे.. लेकीन फीरभी हम दोनो ज्यादा घरसे बहार नही नीकलते..

देवायत : (हसते धीरेसे) बनवारीलालजी.. लेकीन बींदीया आपके साथ रीलेशनमे आनेके लीये तैयार कैसे होगइ..? क्या मुजे बता सकते हे..

बनवारीलाल : (मुस्कुराते) अब आपसे इतना कुछ जानलीया तो अब आपको बतानेमे कैसी सर्म.. सुनीये.. जबसे मेरा बेटा चला गयाहे तबसे बींदीया बहुतही मायुस लग रहीथी.. जब जब दीन नीकलते गये तब उनकीभी अपने पतीके लीये तडप बढने लगी.. फीर वो बार बार मेरे सामनेही देखती रहेती थी.. ओर हर राते अपने बीस्तरपे करवटे बदलती रहेती.. उनकी आंखोसे नींद कोसो दुर रहेने लगी.. ओर वो बहुतही तडपती थी..

देवायत : (हसते) हां मे जानता हु अ‍ेक सादी सुधा ओरतोके लीये पतीसे दुर रहेना कीतना मुस्कील होता हे..

बनवारीलाल : ठाकुरजी.. वो इतनी तडपी हेकी क्या बात करु..? रातको जब मे सो जाता तो वो दो तीन बार मेरे रुममे आके मुजे देखती रहेती.. ओर अ‍ेक दिन मेरी आंख खुल गइ तो वो गभराके अपने रुममे चली गइ.. तब मे सबकुछ समज गया.. ओर मे खडे होकर उनके रुममे चला गया.. तब वो सीर्फ मुजेही देखती रही..

बेचारी मुजे खुलके केहभीतो नही सकती.. मे उनकी नजरको पहेचान गयाकी वो क्या कहेना चाहती हे.. ओर मे उनके पास बेडपे जाकर बैठ गयातो उसने मुजे बेडपे जगाह देदी.. ओर उस दिन हम दोनोही बहेक गये.. ओर हमारा मीलन हुआ.. हम दोनोने पुरी रात प्यार कीया.. दुसरे दिन बींदीया बहुतही खुस नजर आ रहीथी.. तब उस दिन वो पुरा दिन चेइनकी नीद सोइ..

देवायत : (हसते) हंम.. तो तबसे दोनो रीलेशनमे हो..

बनवारीलाल (हसते) हां ठाकुरजी.. फीरतो ये सब रोजका हुआ.. हम दोनोही अ‍ेकही कमरेमे अ‍ेकही बीस्तरमे साथ सोने लगे.. आपतो जानते हे आपकी भाभीको गुजर गये कीतने साल होगये थे.. तो मेभी इसी आगमे जल रहाथा.. बस.. तबसे हम दोनो मीया बीवीकी तराह रहेते हे.. बींदीया दो बार प्रेगनेन्टभी हो चुकी हे.. लेकीन दुनीयाके डरसे हमे हमारा बच्चा गीराना पडा.. तब उस दिन हम दोनो बहुत आंसु बहाते थे..

खेवायत : (इमोस्नल होते हाथ थामते) बस.. बनवारीलालजी.. ओर कुछ मत कहीये.. सबको लगता होगा की आप अपनी अयासीके लीये ये सब कर रहे हे.. लेकीन असीलीयत कीसीको नही पता.. अब आपको अपने बच्चेको गीरानेकी जरुरत नही हे.. मे सृतीसे बात करलुगा हमारी नइ भाभीका अच्छेसे खयाल रखे..

बनवारीलाल : (हाथ थामते) थेन्क्स ठाकुरजी.. ना जाने कीतने महीनोसे हम दोन सीनेपे अ‍ेक बोज लेकर रहेते थे.. तो आज आपसे बात करके जी हल्का होगया.. आप आते रहेना.. अब मुजे कीसीसे नही डरना हम अपने बच्चेको इस दुनीयामे लायेगे.. अब तो भगवान भी हमारे साथ हे..

वो जोभी हमे दे उसेही अपना मानकर पालना हे.. ओर अब मे जीयुगाभी कीतना.. तो मेरे जानेके बाद इतनातो हे की बींदीया पुरी जींदगी आरामसे हमारे परीवारको पाल सके.. आप जैसे लोग इस गांवमे हे तो मुजे बींदीयाकी क्या फीकर.. हें..हें..हें..

देवायत : (खडा होते हसते) ठीक हे बनवारीलालजी.. अब आज्ञा दीजीये.. मे चलता हु.. बस अब जब भी सबको इकठा करु आप मेरा समर्थन करना.. मे आपके साथ हु..

बनवारीलाल : (साथ खडा होते) जी ठाकुरजी.. आप इस बारेमे नीस्चीत रहीये.. मे ओर बींदीया खुलकर आपका साथ देगे.. इसमे हमारा भी स्वार्थ हे.. आज आपने सब सही करदीया..

फीर देवायत वहासे नीकल गया.. ओर सीधाही पंचायतकी ओफीसमे चला गया.. तो वहा रमेश सामतभाइ ओर पंचायतके ओर सदस्यके साथ वंदना रश्मीभाभी सब बैठकर आपसमे स्कुलकी चर्चा कर रहे थे.. देवायतके आतेही उनको देखकर सबके चहेरेपे रोनक आगइ.. ओर सबने उनका अभीवादन कीया ओर उनको बेठनेके लीये चेयर देदी.. तब वंदना उनको देखतेही सरमाने लगी.. तो रश्मी देवायतको देखके हसने लगी..

रश्मी : (हसते) अरे.. आजतो देवरजीभी सही मौकेपे आगये..? आइअ‍े.. आइअ‍े.. बैठीये..

देवायत : (हसते) क्यु आज सारी मंडली बीना नोडीस अ‍ेक साथ इकठी होगइ.. कुछ हुआ हे क्या..? हें..हें..हें..

रमेश : (हसते कागज देते) हां भाइ.. सबका कोटेशन आगया हे तो उसी बातपे चर्चा कर रहेथे आपभी देखलो.. काम कीसे देना हे.. आज सही मौकेपे आगये आप.. आप कहो उन्हीका टेन्डर उपर भीजवा देते हे..

देवायत : (पेपरपे नजर डालते) रमेश सीर्फ भाव नही देखना.. कामभी अच्छा चाहीये.. ओर वो होस्पीटलके लीये भी जमीन चाहीये.. तो उनकाभी ठराव करके पेपर भेजदे.. हमे यहा जल्दसे जल्द अ‍ेक होस्पीटल बनानी हे..

१ पंचायत सदस्य : ठाकुरसाब येतो आपने बहुत अच्छा सोचा.. अब हमारे गांवमेभी इनकी सख्त जरुरत हे.. इसके लीये हमे सहेर जाना पडता हे.. सबको बहुत परेसानी होती हे.. आस करके लेडीसको..

सामत : हां ठाकुरसाब.. हम इसमे जीजानसे काम करेगे.. यहा बडी होस्पीटल होगीतो गांवकाभी बहुत वीकास होगा.. आप जल्दसे जल्द इसपे जोभी कार्यवाही करनी हे करवादो..

देवायत : (हसते) हां.. इसीलीये तो इधर आया हु.. ओर रमेश ये रश्मीभाभी के घरका क्या हुआ..?

रमेश : (हसते) भाइ.. वहा तो कबका काम सुरु हो चुका हे.. वहा मे ओर सामतभाइ काम देख रहे हे.. भाइ अभी यहा सभी सभ्य हाजर हे तो अभी ठराव लीख लेते हे.. तो सबकी साइनभी होजायेगी.. तो अ‍ेक दो दीनमे ही मे सहेर जाकर पेपर सबमीट करवा दुगा.. आप अपने जील्ला पंचात वाले दोस्तसे बात कर लीजीयेगा.. लगता हे आपकी बहुत खास दोस्त हे.. आपका नाम लेतेही सब काम फटाफट हो जाता हे..

रश्मी : (हसते) हां ये सही हे.. अभी ठहेरो मे ठराव लीख देती हु.. आप बोलते जाओ.. मे लीखती जाउगी..

कहेते रश्मी बुक लेकर ठराव लीखने लगी.. ओर रमेश उसे क्या लीखनाहे कहेता गया.. फीर सबने ठराब पढलीया ओर सबने सहमती देकर साइन करदी.. फीर सब घर जानेके लीये खडे होने लगे.. तो रश्मीने धीरेसे वंदनाको अपने घरपे आनेक लीये कहा तो वंदना सब समज गइ.. ओर उसने अपने पापाकी हाजरीकी वजहसे घर आनेको मना करदीया.. ओर रश्मीने जान बुजकर देरी की.. सब चलने लगे तब..

देवायत : रमेश.. तु घरपे ही हेनां..? मे अभी डीनर करके आता हु.. मुजे तुमसे थोडा काम हे..

रमेश : (हसते) हां भाइ आइअ‍े.. वही साथमे चाइ पीयेगे.. (कहेते चला गया)

रश्मी : (सरमाते हसते) चलीगे पतीदेव.. मुजे घर छोडने नही आयेगे..?

देवायत : (हसते) हां.. मेरी बीवीसे कीतने दिन हो गये नही मीला चल आता हु..

फीर दोनोही साथ चले गये ओर रश्मीके घर आगये.. तबतक साम ढल चुकी थी ओर अंधेरा छाया हुआ था.. दोनोही घरमे चले गये तब रश्मीने दरवाजा बंध करलीया.. ओर दोनो रुममे चले गये.. तब कुछही देरके बाद दोनोके कपडे टेबलपे अ‍ेक साथ पडे थे.. ओर देवायत रश्मीको बेडके कीनारे लीटाके नीचे खडे खडे ही रश्मीपे जुककर उनकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा..

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अबतक रश्मी दो बार जड चुकीथी.. ओर आखीरमे दोनोही अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीचते साथमे जडने लगते हे.. फीर दोनोही बाथरुममे जाकर नहाने लगते हे तब वहाभी देवायतने रश्मीको नहाते पीछेसे लंड डालकर चोद लीया.. फीर दोनोही बहार आगये.. ओर अपने अपने कपडे पहेनकर रेडी होगये.. ओर बहार आकर सोफेपे बैठ गये तब रश्मी देवायतकी गोदमे उनके गलेके हाथ डालके बैठ गइ.. ओर होंठ चुमलीया..

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रश्मी : जानु.. अब वंदना पुरी तराह रेडी हे.. आप उसे कब मीलोगे..? आज आपने उनको मीलने के लीये कहाथा.. लेकीन रमेशभाइकी वजहसे वो साथमे नही आइ..

देवायत : (गाल चुमते) नही रस्मी.. अभी आज बहुत काम हे.. बस सही मौका मीलने दे.. मुजे उनसे मंदिरमे जाकर सादीभी करनी हे.. तब हम दोनोकी सुहागरात होगी.. क्युकी वंदुकीभी कुछ तम्मना होगी की उनकी सादी होजाये.. ओर मे ये काम चारुभाभीकी हाजरीमे करना चाहता हु.. उनकीभी इच्छा हे की वंदुकी सादी मुजसे होजाये.. फीर भलेही वंदना उनके घरपे रहेती..

रश्मी : (खुस होते होंठ चुमते) जानु तबतो बहुत ही अच्छा होगा.. तब मेभी साथ चलुगी.. क्या मुजे लेजाओगे..? तो मे कुछ प्लान करती हु..

देवायत : (हसते) हां लेकीन अभी नही.. मे जब कहु.. तब हम सहेरमे चले जायेगे.. या फीर पुनोके घर चले जायेगे.. क्या कहेती हो..?

रश्मी : (हसते) जानु.. अ‍ेक बात कहु..? भलेही सादी बादमे करलो.. लेकीन मेरे खयालसे अ‍ेक बार उनको सादीसे पहेले मीललो.. क्युकी वो अब पुरी तराह रेडी हे.. वोभी पुनोदीदीकी तराह सादीसे पहेले अ‍ेक बार आपको मीलना चाहती हे..

देवायत : (हसते) तुम फीकर मत करो.. ये मौकाभी हमे बहुतही जल्दी मीलजायेगा.. चल अब चलता हु..

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फीर दोनोही होंठ मीलाके चुमने लगे.. तब देवायत रश्मीके बुब्स मसलते उसे चुमने लगा.. तो रश्मी सरमाके जटसे दुर हट गइ ओर हसने लगी.. फीर देवायत वहासे नीकल गया ओर सीधाही हवेलीपे आ गया तो सब उनकाही इन्तजार कर रहेथे.. ओर राजीव लखन मंजु चंदा लता नीर्मला भावना सब अ‍ेक साथ डीनर करनेके लीये बैठ गये.. तब खाना खाते देवायतने कहा..

देवायत : लखन.. अब चार पांच दिनोके अंदर तुजे ओर लताको सहेर रहेने लीये जाना हे.. तो कल लताको उनके मायके छोड आना.. जानेसे पहेले भलेही वो वहा दो तोन दिन रुके.. क्यु लता जाओगीना अपने मायके..? हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) जी भैया.. आज ही मम्मीका फोन आयाथा.. वोभी यही केह रही थी.. क्या भाइसे आपकी बात हुइ थी..?

देवायत : (मुस्कुराते) हां.. सामकोही मेने भानुको बता दीयाथा..

मंजुला : (हसते) लता हमभी कल मायके जा रही हे.. तो तुम भी चली जाओ.. हें..हें..हें.. लखन छोड देगा..

भावना : हां लता मेभी कल दीदीके साथ जा रही हु तो तुजे नही मीलपाउगी.. कुछ दिन वही रहुगी.. फीर हमारे घर चली जाउगी तब तुम वापस आना..

लता : (सरमाते हसते) जी दीदी.. आप मुजे फोन करना मे चली आउगी..

राजीव : (हसते) अरे वाह.. क्या बात हे..? भाभीसे.. दी..दी..? बेटा ये तेरी भाभी हे तो उनको दीदी क्यु कहेती हे..?

लता : (सरमाते हसते) जी..पापा.. अब ये मेरी भाभी नही हे.. मेरी बडी बहेन हे.. मेरी सादीसे पहेलेही हम बहेने हो गइ हे.. तो मे तबसे इनको दीदी ही हेती हु.. हें..हें..हें..

राजीव : (खुस होते) जीती रहो बेटा.. चलो कोइतो मेरी भावुको वहा प्यार करता हे.. बेटा कभी हमारे घर तुम भी आना.. वोभी तो तेरा ही घर हे.. यही समजले वोभी तेरा मायका हे..

नीर्मला : (हसते) हां लता.. वोभी तेरा मायका हे.. जबभी दिल करे चली आना..

लता : (सरमाते हसते) जी मम्मीजी.. जरुर आउगी.. बडी दीदीके साथ.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) क्या बात हे देवरानी.. आपकोतो सब जगाहसे प्यार मील रहा हे..? हमेतो कोइ पुछता ही नही.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) चंदा.. तुजे अ‍ेक लगाउगीनां.. अरे मेरी मंजु भावुसे पहेले वो तेरा मायका हे.. तुमभी चली आना.. मे तो कहेतीहु कल तुम भी हमारे साथ चल.. तुम क्यु अ‍ैसी बाते कर रही हे..?

चंदा : (हसते) जी दीदी मेतो मजाक कर रही थी.. क्या हेना सब लताको प्यारसे केह रहेथे तो मुजे लगा सब प्यार यही बटोरके लेजायेगी.. इसीलीये कहा.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) चंदा.. तुही तो मेरी सबसे बडी बेटी हे.. मेने तुजे अपनी छोटी बहेन कभी नही माना.. तो तुम क्यु अ‍ैसा सोचती हो..? मे सीर्फ तेरा भाइ ही नही तेरा बापभी हु..

कहातो चंदाकी आंखसे आंसुओकी धारा बहेन लगी.. ओर खडी होकर राजीवको हग करलीया.. ओर राजीवके पीछे उनके कंधेपे सर रखके आंसु बहाती रही.. तब राजीवने हाथ पीछे लेजाते चंदाके सरपे हाथ रख दीया.. तभी मंजुने हसते हुअ‍े उनको पानी पीलाया.. ओर अपनी जगाहपे वापस बीठा दीया.. तब चंदा आंसु पोछते मुस्कुराने लगी..

राजीव : (हसते) अरे मेरी बेटीतो बहुतही इमोस्नल हे.. कैसे रो पडी.. जीती रहो बेटा.. बस अ‍ैसेही तुम सबका हसी खुसी संसार चलता रहे.. भगवानसे यही प्रार्थना हे.. मेरा देवु सबको सम्हाल रहा हे तो मुजे अब कीसीकी चीन्ता नही हे.. चलो भाइ मेने तो अब खा लीया हे..

फीर सबने खाना खालीया.. तो चंपाभाभी ओर रजीया सब बर्तन समेटर खानेपे बैठ गइ.. ओर बाकीके सब लोग होलमे टी.वी. चालु करके बैठ गये.. तब नीर्मलाने राजीवको उनकी दवाइआ पीलादी.. तब कुछही देरमे राजीव रुममे जाकर सोगया.. तो लखन लताभी उपर अपने रुममे सोने चले गये.. भावनाभी बच्चीको लेकर अपने रुममे जाकर दुध पीलाने लगी.. तभी विजय रोने लगा तो चंदा जटसे जाकर उनको सम्हालके सुलाने लगी.. देवायतभी बहार घुमने चला गया तब नीर्मला ओर मंजुही रेह गये.. तभी....

कन्टीन्यु
 
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३९/१

फीर सबने खाना खालीया.. तो चंपाभाभी ओर रजीया सब बर्तन समेटर खानेपे बैठ गइ.. ओर बाकीके सब लोग होलमे टी.वी. चालु करके बैठ गये.. तब नीर्मलाने राजीवको उनकी दवाइआ पीलादी.. तो कुछही देरमे राजीव रुममे जाकर सोगया.. तो लखन लताभी उपर अपने रुममे सोने चले गये.. भावनाभी बच्चीको लेकर अपने रुममे जाकर दुध पीलाने लगी.. तभी विजय रोने लगा तो चंदा जटसे जाकर उनको सम्हालके सुलाने लगी.. देवायतभी बहार घुमने चला गया.. तब नीर्मला ओर मंजुही रेह गये.. तभी....अब आगे

मंजुला : मोम.. कल काम खतम होते ही मे ओर देवु वहासे नीकल जायेगे.. यहा चंदा दीदी अकेली होजायेगी.. मोम.. मेरे खयालसे उसेभी साथ लेलु.. वो यहा अकेली क्या करेगी..?

नीर्मला : (मुस्कुराते) अरे हां.. ये सही सोचाहे.. उसे साथ लेले.. जबतक भावु वहा हे तो तुम दोनो भी वहा रुकजाओ.. फीर देवु तुम दोनोको वापस लेजायेगा.. मंजु.. बस अब मेरी भावुका खयाल रखना..

मंजुला : (मुस्कुराते) मोम.. आप भावुकी चीन्ता मत करो.. मेने उनके बारेमे आपको सब बता तो दीया हे.. ओर अब इस बारेमे भावु भी सब जानती हे.. मेने उसे भी सब बाते करली हे.. वोतो सुनकर बहुत खुस होगइ थी.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (आस्चर्यसे हसते) अच्छा..? तो वो कुछ ओर नही बोली..?

मंजुला : (हसते) क्या बोलती..? कमीनी सुनकरतो बहुत खुस होगइ थी.. आखीर उनकोभी अपना प्यार मील गया हे.. मोम.. आप फीकर मत करना.. हमारा देवु इतना सक्षम हेकी हम सबको सम्हाल लेगा..

नीर्मला : (मुस्कुराते धीरेसे) मंजु.. कीतना अजीब हेनां..? हम मा बेटीया तीनो अ‍ेकही आदमीसे प्यार करती हे.. क्या आजके जमानेमे ये सब पोसीबल होता हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) मोम.. आपतो जानती हे की हम सब वास्तवमे कौन हे.. बस कुछ दिन इन्तजार करना हे.. क्युकी अबतो यहाभी अ‍ैसे रीस्तोके उजागर होनेकी सुरुआत हो चुकी हे.. बस कुछही दिनोमे आपको अ‍ैसा बहुत कुछ सुननेको मीलेगा.. फीर भी देवुतो आपका दामाद हे.. सगा बेटातो नही.. लेकीन यहातो गांवमे वोभी होने वाला हे.. सबलोग वासनामे इतने अंधे होजायेगे की.. मां बेटेका रीस्ताभी नही रहेगा.. जब जब हमारे स्वामीके आनेका वक्त नजदीक आता जायेगा तबतो पता नही क्या क्या होगा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) मंजु.. तो क्या यहा सब उन हमारे स्वामी की वजहसे सब हो रहा हे..?

मंजुला : (हसते) हां मोम.. सायद इसीलीये सभी लोगोमे कामशकित इतनी बढ गइ हेकी अब कीसीको रीस्ते नाते दीखते ही नही.. जीनका जीसके साथ दिल लगेगा वो प्यार करते होगे.. ओर सबको आपसी रीस्तोमे प्यार करना ही अच्छा लगता हे.. आने वाले दिनोमे अ‍ैसे सभी रीस्ते नोर्मल लगेगे.. सबने अ‍ैसे रीस्तेको अ‍ेक्सेप्ट करलीया होगा.. सब लोग पहेलेकी तराह प्रकृतीके हिसाबसे जीने लगेगे.. इनमे हमारा घरभी बाकात नही रहेगा..

नीर्मला : (हसते) मंजु.. जोभी होता हे होने दे.. अब तो मेभी अ‍ैसे रीस्ते सुननेके ओर देखनेकी आदी होगइ हु.. बस अबतो ये सोचकी हम भुमीका क्या करेगे..? हमने उसे बच्चा ना गीरावानेके लीये मना तो करदीया हे.. लेकीन हम सृतीको कैसे समजायेगे..? क्या उनके बारेमे तुजे कुछ नही पता..? तो बतानां..

मंजुला : (मुस्कुराते) मोम.. सब पता हे की क्या होने वाला हे.. बस पता चलतेही कुछ दिनोके लीये वो देवुसे नाराज रहेगी.. लेकीन उनके बगैर अकेली रेह नही पायेगी.. तो बादमे सब ठीक होजायेगा.. तब वो हमारे देवुके ओर करीब आजायेगी.. तबतक आपको भुमी आंटीको सम्हालना हे.. बस अभी सीर्फ इतनाही केह सकती हु.. मोम.. हमे अब इन सब चीजोपे ज्यादा नही सोचना चाहीये.. जो होता हे होने दो.. ओर देखती जाओ.. हम इनमे कुछभी बदलाव नही कर सकते.. बस सीर्फ इतना ही कहेना हे..

नीर्मला : (हसते) हंम.. भुमी भीनां.. हें..हें..हें.. मंजु.. बस मुजे तुमसे अ‍ेक बात जाननी हे.. अगर हो सकेतो बतादे..

मंजुला : (हसते) मोम.. मत जानो.. मुजे पता हे आपको क्या जानना हे.. बस इतना केह सकती हु.. आप अभी उनके साथ ही रहेना.. ओर उनको खुब प्यार देना.. जैसे आप पुरी जींदगी देती आइ हे.. मोम.. पापा आपको बहुत प्यार करते हे.. आप उसे प्यारके लीये मना मत करना.. उनको जोभी चाहीये सब देदो.. उनकी सब इच्छा पुरी करदो..

नीर्मला : (आंख गीली करते) हंम.. मतलब तुम समज गइ की मे क्या पुछने वाली थी.. मंजु.. तुजे सब पता चल ही गया हे.. तो येभी जानती होगीकी उनके लीये ये कीतना जोखीम भरा हे.. बस.. मुजे सीर्फ इतना बतादे.. की कीतना वक्त हे उनके पास..? क्या मुजे बता सकती हे..?

मंजुला : (अपनी आंख गीली करते) मोम.. मत जानो ये सभी बाते.. बस इतना जानलो की बहुत कम वक्त हे.. कही अ‍ैसा नाहोकी उनकी आपको प्यार करनेकी इच्छा अधुरी रेह जाये.. ओर बादमे आपको भी प्यार ना देनेके लीये अफसोस रहे.. इसीलीये केह रही थी.. की आप उनकी सब इच्छा पुरी करदो..

जब वो चले जाये तब आप इधर चली आना.. तब आपको इस घरको सम्हालना हे.. तब आपही इस घरमे बडी होगी.. पुनो सृती लता सबको सम्हालना हे.. हमारे देवुको भी.. बस सीर्फ अ‍ेकही बात आपसे कहेनी हे.. जो आपको थोडा दु:ख होगा.. पता नही ये बात आपसे कैसे कहु..

नीर्मला : (मंजुका हाथ थामते धीरेसे) मंजु.. मुजे इतना कुछ बता दीया.. तो वो भी बतादे.. मे सब सहेन कर सकती हु.. मेने तो तेरे पापाके बारेमे जानकर भी अपने आपको सम्हाल लीया हे.. तो उनसे बडी बाततो नही होगी.. बतादे.. ताकी मुजेभी आगे जाकर सबको सम्हालनेमे आसानी रहे..

मंजुला : (नीर्मलाके चहेरेकी ओर देखते धीरेसे) मोम.. आपको बताना इसलीये जरुरी हे की तब आप यहा होगी.. तो आप यहा सब जानकर या देखकर दुखी ना हो इसीलीये बता रही हु.. ओर हां ये बात भुलसे भी कीसीको मत कहेना.. खास करके चंदा दीदीको.. आप समज गइनां..?

नीर्मला : (मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. मतलब मेरी चंदाकी बात हे.. बता क्या कहेना चाहती हे..

मंजुला : मोम.. बस इतना कहेना हे जब आप यहा होगी.. तब आप कीसीभी रीस्तेको देखलो तो वीचलीत मत होजाना.. ओर नाही उसमे दखल देना.. उसे अ‍ेक्सेप्ट करलेना.. ओर देखती जाना.. आपको कीसीको कुछ नही कहेना.. क्युकी तब.. सब उस समयके हालातकी वजहसे होगा.. बस आपको सीर्फ इतना ही कहेना हे..

नीर्मला : (मुस्कुराते धीरेस) मंजु.. क्या मुजे खुलकर नही बता सकती..? हंम..? तुम कीस रीस्तोके बारेमे बात कर रही हो.. आइ प्रोमीस.. मे कीसी भी रीस्तेमे अ‍ेतराज या इन्टरफेयर नही करुगी.. क्युकी तब मे जानती होगी तो मुजे दुख नही होगा.. बस इसीलीये पुछ रही थी.. अगर तुम बता सकती हे तो बता..

मंजुला : (सरमाते मुस्कुराते) मोम.. आपतो जानती हे.. हमारे पीछले जन्ममे हमारे स्वामीने उनकी सभी बहेनोसे सादीया करके उनको अपनी रानीया बनाली थी.. ओर हमारा देवु हमारे उन स्वामीका ही अंस हे.. तो जाहीर सी बात हे अ‍ैसा यहाभी हो सकता हे.. क्या मे खुद देवुकी बहेन नही हु..? मोम.. आज आपको अ‍ेक बात ओर बताती हु.. हमारी सृती लता ओर हमारी दया भी देवु की बहेन हे.. ओर हमारी पुनो तो उनकी सगी बहेन हे.. तो वो देवुके साथ रीलेशनमे आनेके बगैर कैसे रेह सकती हे.. आप समज गइनां..?

नीर्मला : (हसते धीरेसे) हंम.. सब समज गइ.. मतलब हमारी पुनम भी.. मंजु तुम फीकर मत करो.. मे इस घरमे कोइ इन्टरफेयर नही करुगी.. ओर मुजे कीसी भी तराहके कोइ भी रीस्तोसे अ‍ेतराज नही.. क्युकी मे खुद अ‍ैसे रीस्तोसे बंधी हुइ हु.. फीर चाहे कोइ भी क्यु नाहो.. वरना मे सामनेसे भावुको हमारे देवुसे रीस्ता रखनेको थोडीना कहेती..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां मोम.. बस यही कहेना था.. अब मेरी आधी चीन्ता तो दुर होगइ.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) मंजु.. अ‍ेक बात कहु..? तुम्हारी ये सब बाते सुननेमे मुजे बहोत अच्छा लगता हे.. ये सब जानके कीतना रोमांचचीत महेसुस कर रही हु.. हें..हें..हें.. लगता हे तुमको सुनती ही रहु.. पता नही क्यु..? मुजे अ‍ैसे पारीवारीक रीस्ते बहुत अच्छे लगते हे.. खास करके भाइ बहेनके बीच रीलेशनके.. मे अब राजीवको खुब प्यार दुगी..

मंजुला : (हसते धीरेसे) मोम.. बस यही समजलो.. आने वाले दिनोमे आपको यही सब हमारे घरमे ओर गांवमे देखनेको मीलेगा.. मे इसी के बारेमे आपको केह रही थी.. अभी यहा थोडीसी मर्यादा बची हुइ हे.. लेकीन अब ज्यादा वक्त नही हे जब यहा कोइभी मर्यादा नही रहेगी..

सब अपनी मस्तीमे अपने तरेकेसे जी रहे होगे.. जीनका जीसके साथ दिल लगे उसे प्यार करते होगे.. हें..हें..हें.. ओर आपने तो उस जन्ममे हर जन्मके लीये अपने भाइको ही अपने पतीके रुपमे मांग लीया हे.. तब वहाभी हम दोनो मां बेटी होने के बावजुद अ‍ेक दुसरेकी सौतन होगी.. जैसे अभी हे.. हें..हें..हें.. बस तब उल्टा होगा.. तब आप मेरी बेटी होगी.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) ओह गोड.. मतलब मुजे इस जन्ममे ओर आने वाले जन्ममे बहुत कुछ दीखनेको मीलेगा.. हें..हें..हें.. मंजु.. बस ओर कुछ नही तुम देवुको कहेना तब वो मेरा खयाल अ‍ैसेही रखे.. हें..हें..हें.. मे आजभी देवुको इतना प्यार करती हु.. जीतना तेरे पापाको करती हु.. सायद उनसेभी ज्यादा.. तभी तो तुम दोनोके बारेमे जानकर मुजे दुख हुआ था.. तब ये सब बातोका पता नही था.. वरना उसी टाइम मे सब रीस्तोको अ‍ेक्सेप्ट करलेती.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) मोम.. अगर बाबाने मुजे हमारी सही पहेचान नही करवाइ होती तो आज मे भी कीसीको अ‍ेक्सेप्ट नही करपाती.. हमारा देवुतो ठीक हे लेकीन मे आने वाले जन्मको लेकर बहुत ही अ‍ेक्साइटेड हु.. मे हमारे स्वामीको खुद जन्म दुगी.. ओर बादमे उनकी ही रानी होजाउगी.. बीतना अजीब होगा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) मंजु.. अ‍ेक बात पुछु..? क्या तब तुजे पीछले जन्मका सब ज्ञात होगा..?

मंजुला : (सरमाते धीरेसे) हां मोम..अभीभी इस जन्ममे भी मुजे पीछले जन्मका सब ज्ञात हे.. लेकीन आने वाले जन्ममे इतना पता हे.. जब मेरा मेरे बेटेके यानीकी हमारे स्वामीके साथ पहेली बार मेरा मीलन होजायेगा तब मुजे अगला पीछला सब ज्ञात होने लगेगा.. मतलब उनका जीनके साथ मीलन होगा सबको ज्ञात होने लगेगा.. ओर.. आपकोभी सब ज्ञात होजायेगा.. वैसेभी आप ओर मे तो उनकी चहीती रानीया हे.. हें..हें..हें.. ओर अ‍ेक उनकी सबसे खास रानी होगी.. हमारी लताकी बेटी..

नीर्मला : (मुस्कुराते) हंम.. मंजु.. मे सबकुछ समज गइ.. मे कीतनी लकी हु.. की मुजे ये सब यहा देखनेको मीलेगा.. बस.. तुम देवुको कहेना.. मे जब यहा रहु.. तब वो मुजे अपना प्यार देता रहे..

मंजुला : (हसते) मोम.. आप फीकर मत करना.. हमारे घरमे जीतनीभी ओरते हे सबको देवु अपना प्यार देता रहेगा.. बस मेरे विजसे बचके रहेना हें..हें..हें..

मंजु ओर नीर्मला दोनोही मा बेटी बाते करती रही.. तब भावनाभी उनकी बच्चीको सुलाकर वापस दोनोके पास आकर बैठ गइ.. ओर तीनो आने वाले भविस्यके बारेमे बाते करती रही.. तब देवायतभी रमेशके घरपे चला गयाथा.. तो वहा सुधीर ओर नीशाभी बैठे थे.. तो सब देवायतको देखतेही खुस होगये.. तो वहा भी सब लोग गांवमे आने वाले बदलावके बारेमे चच्र्चा कर रहेथे.. तभी देवायके आनेके बाद चारुभाभीको सब बाते पता होनेके बावजुद जान बुजकर बात को छेडदी..

चारु : (हसते) देवरजी.. आपतो कही दिनोसे केह रहे हे की हमारे गांवमे बहुत कुछ बदलाव आने वाला हे.. लेकीन येतो कहेते ही नही की कीस तराहका बदवाल आने वाला हे.. अगर आपको मालुम हे तो कुछ हमे भी बताइअ‍ेनां..

रमेश : (जोरोसे हसते) रहेनेदे चारु.. अगर तुजे पता चल गयातो तुम यहासे भाग जाओगी.. हें..हें..हें..

चारु : (हसते जुठो गुस्सेमे) आपतो चुप ही रहीये.. अभी मे मेरे देवर से बात कर रही हु..

सुधीर : (हसते) हां भाभी.. वो अभी आपके जाननेकी चीज नही हे.. जब होगा तब सबको पता चल ही जायेगा.. हें..हें..हें..

नीशा : (हसते) सुधीर.. मतलब आप दोनोको सब पता हे.. तो हमे बताया क्यु नही..? चारुभाभी.. ये दोनोही बहुत सातीर हे.. हें..हें..हें.. ठीक हे हम हमारे देवरसेही जान लेगी.. प्लीज.. देवायतजी बताइअ‍ेनां..

देवायत : (हसते) अरे मे क्यु बताउ..? अपने पतीसे ही पुछलो.. हें..हें..हें.. वोभी तो आश्रमपे जाते हे..

चारु : (जुठे गुस्सेसे) रहेनेदे नीशा.. ये तीनोही कमीने हे.. मत बताये.. हमारी जुती.. हम मंजुभाभीसे ही सब जान लेगी..

देवायत : (जोरोसे हसते) कमीनो.. देखो.. तुम दोनोकी वजहसे मुजेभी गालीया सुननी पडी.. इनसेतो अच्छा हे तुम दोनो इनको सब बता देते.. हें..हें..हें..

नीशा : (हसते) तो फीर..? तुम दोनोकी वजहसे आज हमारे देवरजीको भी चारुभाभीकी गालीया सुननी पडी.. इनसे तो अच्छा हे तुम बता देते.. हें..हें..हें..

सुधीर : (हसते) अरे कुछ नही नीशा.. तुमने वो हीमाचलके राजाकी कीताब (ये केसी अनुभुती) तो पढी हे.. बस उसीकी बात कर रहेथे.. अब वोही सब हमारे ओर आसपासके सभी गांवोमे होने वाला हे.. हें..हें..हें..

चारु : (आस्चर्यसे नीशाकी ओर देखते, हसते) नीशा.. ये कोनसी कीताबकी बात कर रहे हे..?

रमेश : (हसते) अरे कुछ नही.. मे तुजे बादमे सब बता दुगा.. हें..हें..हें..

चारु : (जुठे गुस्सेसे) रमेश.. तुमतो चुपही बैठो.. तुम्हेतो मे बादमे नीपट लुगी.. नीशा बता मुजे..

नीशा : (सरमाते हसते) अरे चारुभाभी.. उस दिन मेने आपको वो हिमाचलके राजाकी बात नही बताइथी..? जीनकी सोला रानीया थी..? उनमे दोतो उनकी सगी बहेने बहेने थी.. अ‍ेक चाची.. ओर उनकी दादीभी उनकी रानीया थी.. ओर उस राजाने वहा अ‍ेक नइ परंपरा सुरु नही कीथी..? जो वहा कोइ विधवा या त्यक्ता नही हे.. बस उसीकी बात कर रहे हे.. अ‍ैसा अब यहा हमारे गांवमें भी होने वाला हे.. हें..हें..हें..

चारु : (आस्चर्यसे हसते) क्या..? देवरजी आप क्या उसी बदलाव की बात कर रहे थे..?

रमेश : (हसते) हां चारु.. अब वोही सब हमारे यहा होने वाला हे.. ओर तुमतो सब जानती हो उनकी सुरुआतभी यहा होचुकी हे.. हें..हें..हें.. देखती नही हमारे गांवमे अ‍ैसे कइ रीस्ते सामने आ रहे हे.. मेने कुछ रीस्तोके बारेमे तुजे बताया तो था.. हें..हें..हें..

चारु : (हसते) देवरजी.. क्या ये सच केह रहे हे..? मुजे तो यकीन ही नही होता.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां भाभी.. अ‍ैसा बाबाने हमे बहुत समय पहेले बता दीयाथा.. तो अब वो समय आगया हे.. की ये सब यहा भी होगा.. तब सब लोग अ‍ैसे आपसी रीस्तोमे सादीया करते होगे..

सुधीर : (हसते धीरेसे) भाइ.. वो आप सामको वहा गये थे.. हमारे पडोसमे..? क्या हुआ..?

देवायत : (हसते) अरे हां.. सुनो सब.. (कहातो सब देवायतकी बाते गौरसे सुनने लगे) मे आज सामको बनवारीलालके घरपे गया था.. वो बेचारा कोइ अयास आदमी नही हे.. जोभी कीया मजबुरीमे.. ओर घरकी इजत बचानेके लीये कीया.. उनके लडकेने आज उनकी बीवीको डीवोर्स पेपर भेजे हे..

चारु : (हसते) लेकीन उनका लडका तो दुबइमे हेनां..?

देवायत : (हसते) हां भाभी.. वो वहा अ‍ेब बडेही गोल्डके सोरुममे नोकरीपे लग गया.. ओर वही उनके मालीककी लडकीसे ही सादी करली.. ओर उनको वहा अ‍ेब बच्चाभी हे.. ये बात यहा उनकी बीवी ओर बनवारीलाल को भी नही पता थी.. उनकी यहा जो पत्नी हे उनसे उसने लव मेरीज की हे.. तो बेचारीके मायके वालेके साथभी रीस्ता नही हे.. तो वो जायेगी भी कहा..? इसीलीये मजबुरीमे अपने ससुरके साथही सबंध होगये.. ओर आपतो जाती हे.. अ‍ेक सादीसुधा लडकी कबतक अकेली रहेती..

चारु : बेचारी.. हमतो सोच रहेथे की लडकी ही कमीनी होगी.. लेकीन यहातो सब उल्टा नीकला.. हें..हें..हें.. उसने सही फैसला लीया हे.. लेकीन अब ये दोनो बहु ससुर क्या करेगे..?

देवायत : भाभी.. उनका लडका डीवोर्सके बदले इनको बहुत बडी रकम दे रहा हे.. तो मेने कहा रकम लेलो.. ओर उसे डीवोर्स देदो.. फीर तुम दोनो ससुर बहु आपसमे सादी करलो.. बस यही कहेकर मे आया..

सुधीर : हां.. कमीनेने वहा इतना बडा हाथ जो मारलीया हे.. तो पैसे तो देगा ही.. अगर जानाही था तो बेचारी इस लडकीकी जींदगी खराब करके क्यु गया..? भाइ आपने उनको अच्छा सजेसन दीया हे..

नीशा : (हसते) इनके बारेमे गांवमे इतनी सारी बाते हो रही हे.. तो बेचारी सरमके मारे बहार भी नही नीकलती.. आपके यहा सादीमे भी नही आये..

चारु : नीशा.. गलती उनकी नही हमारी हे.. हमे पहेले उनकी बात अ‍ेक बार सुनलेनी चाहीये थी.. कल हम दोनो उनको मीलने जायेगी.. ओर कहेगी हम सबको आपके रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही.. दोनो आपसमे सादी करलो.. हम सब आपके साथ हे..

देवायत : (हसते) भाभी.. वोतो मे भी कहेकर आया हु.. बस.. अब जब गांवमे इनकी चर्चा होगी तब आप लोगोको भी अ‍ैसे रीस्तोका समर्थन करना हे.. क्यु..? करेगेनां..?

रमेश : (हसते) हां भाइ.. आप आगे बढो.. हम सब आपके साथ हे.. हें..हें..हें..

चारु : (रमेशकी ओर घुरते) हां हां.. आपतो साथही होगे.. आपके फायदेकी बात जो हो रही हे.. अब उस कमीनीके सामने देखना भी नही.. अ‍ेक बार देखोतो सही.. तुम्हारे आंखोकी गोटीया नीकाल लुगी..

रमेश : (जोरोसे हसते) अरे.. वो बात यहा क्या लेकर बैठ गइ.. सबको बताते फीरना हे क्या..? हें..हें..हें..

सुधीर : (जोरोसे हसते) साले.. सबको बताते फीरना नही..? हम सबको पता हे.. बल्के आधे गांवको पता हे.. हें..हें..हें..

रमेश : (हसते हाथ जोडते) सोरी बाबा.. गलती हो गइ.. मुजे माफ करदो.. अब मे कभी कीसीभी ओरतके सामने तक नही देखुगा.. हें..हें..हें..

देवायत : (जोरोसे हसते) क्या चारुभाभीको भी नही..? हें..हें..हें..

चारु : (घुरते) हां.. मुजे भी मत देखना.. ताकी बहार कीसीसे मुह मारने की छुट मीलजाये..

रमेश : (जोरोसे हसते हाथ जोडते) भाइ.. क्यु आगमे घी डाल रहे हो.. हें..हें..हें.. सोरी बाबा.. अब गलती नही करुगा.. मेरे लीये मेरी चारु ही ठीक हे.. बस.. हें..हें..हें..

चारु : (हसते) हा.. अब आये लाइनपे.. हें..हें..हें..

सब वहा बैठकर आपसमे मस्ती मजाकर कर रहेथे.. तब बीच मे नीशा सबकी नजर बचाते देवायतको आंखोके इसारेसे अकेले मीलनेको कहेती रही.. तो देवायतनेभी उनको आंखोके इसारोसे सही मौका मीलनेका आस्वासन दे दीया.. तो नीशा खुस होगइ.. तो दुसरी ओर चारुभी देवायतकी ओर देखके कामुक इसारा कर रही थी.. वोभी नजरोसे अपने बेडरुमकी ओर इसारा करते देवायतको चुदाइका नीमंत्रण दे रहीथी..

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फीर चारुने सबको चाइ पीलाइ.. ओर सब अपने अपने घरपे जाने लगे.. तब रमेशको साइडमे बुलाकर देवायतने उसे जयाभाभीसे दुरी रखनेको केह दीया.. तो दुसरी ओर लस गांवसे दुर पुनोके घर धिरेनभी घरपे आगया था.. तो पुनम दया ओर धिरेनने डीनर करलीया.. तब धिरेन उपर अपने रुममे चला गया.. ओर दरवाजा बंध करके नीलमको फोन करके उनसे धीमी आवाजमे बाते करने लगा.. तबतक दया ओर पुनमने सब काम नीपटा लीया..

फीर सभी दरवाजा बंध करके दोनो अपने अपने रुममे सोनेके लीये चली गइ.. तब पुनम उपर अपने रुमके पास गइ तो दरवाजा बंध था.. ओर अंदरसे धिरेन कीसीके साथ धीरेसे बात करता हो अ‍ैसी आवाज आ रहीथी.. तब पुनम सब समज गइ की धिरेन नीलमसे बाते कर रहा हे.. ओर पुनम हसते हुअ‍े रुममे चली गइ.. तब धिरेनने हडहबडाते फोन बंध करदीया.. तो पुनमने पुछ ही लीया..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३९/२

पुनम : (हसते धीरेसे) जानु.. कबसे कीस के साथ बात कर रहे हे..? कोइ गलफ्रेन्ट तो नही पटाली.. हें..हें..हें.. कोइ मेरी सौतन लानेका इरादा तो नही.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) अरे नही.. तुम बीवीयोका यही प्रोबलेम हे.. अपने पतीपे सक बहुत करती हो.. अगर पटा लुगातो सबसे पहेले तुजे बता दुगा.. हें..हें..हें.. चल आजा.. मे कबसे यही तेरा इन्तजार कर रहा हु.. हें..हें..हें..

पुनम : (चेन्ज करते सरमाते हसते) हां.. पता हे मुजे आप क्यु इन्तजार कर रहे हे.. लेकीन आज कुछ नही मीलेगा.. हें..हें..हें..

धिरेन : (मायुस होते) क्यु..? क्या हुआ..? कुछ टाइम बाइम चल रहा हे क्या..?

पुनम : (हसते बेडपे आते) नही.. टाइम तो हमारी सादीसे पहेलेही चला गया था.. धिरेन.. इसीलीये थोडा डर लग रहा हे.. अभी बच्चा ठहेरनेका सही टाइम चल रहा हे.. ओर मुजे वो गोली बोली खाना पसंद नही हे.. ओर उपरसे आपभी बीना कोन्डमके करते हो.. पुरे हनीमुनमे बीना कोन्डम ही करते रहे.. तो अ‍ेक डर लग रहा हे.. कही बच्चा तो नही ठहेर गया..

धिरेन : (थोडा गंभीर होते) पुनो.. क्या कहेती हो तुम..? जानु.. मेरे पास कोन्डम हे.. सादीके लीये लीयाथा.. क्या वो लेलु..?

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे गलेमे हाथ डालते) अरे नही.. जानु.. मुजे भी पसंद नही हे.. आप अ‍ैसे ही करते हो तो बहुत मजा आता हे.. आप मस्त चुदाइ करते हो.. तो आप अ‍ैसे ही करलो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (बाहोमे भरते होंठ चुमते) डार्लींग.. अगर बच्चा ठहेर गयातो..? क्या अभी रीस्क लेना जरुरी हे..? तुमने मुजे पहेले क्यु नही बताया..?

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. जानु कोइ बात नही.. इसमे काहेका रीस्क..? वोतो भगवानकी देन हे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. ओर वैसेभी आप हमारी सुहागरातसे ही अ‍ैसे करते रहे हो.. तो बच्चा ठहेरनेका चान्सभी पुरा हे.. अबतो अगली महावारी तब पता चल जायेगा.. अगर महावारी नही हुइ तो उसके अ‍ेक हप्तेके बाद हम सृतीभाभीसे चेक करवा लेगे.. जानु.. आज आपको आनेमे बहुत देर होगइ..?

धिरेन : (हसते गाल चुमते) हंम.. आज कामभी बहुत पेन्डींग पडा था.. ओर अ‍ेक दो ब्रोेकरको भी मीलकर आ गया.. तो थोडी आनेमे देर होगइ.. अब मुजे मेरी रानीके लीये नया मकान जो लेना हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) मेरे लीये..? की ओर कोइ नइ रानी ढुंढली.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते होंठ चुमते) नही.. मेरी इस खुबसुरत पुनम रानीके लीये.. चल आजा तुजे देखतेही बहुत मन करता हे.. जी चाहता हे तुजे सुबह तक प्यार करता रहु.. ओर तुम वो गोली भी तो नही खाने देती.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) नही.. कोइ गोली नही खाने दुगी.. फीर आप मेरी हालत खराब कर देते हो.. तो सुबह ठीकसे चलभी नही पाती.. पुरा दिन आराम करना पडता हे.. ओर गोलीसे आपकी सहेतपे भी असर पडता हे.. तो मे आपको कोइ गोली बोली नही खाने दुगी.. समजे.. आपने लताभाभीकी हालत नही देखी..?

धिरेन : (हसते) क्या तुमभी.. सीर्फ अ‍ेक ही बार तो खाइ थी.. बस उस दिन हमने सीर्फ दो बार कीयाथा.. तब कहा हालत खराब हुइथी..? ठीकसे तो चल रही थी.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) मे करने देतीना तबनां.. आपने लताभाभीकी हालत तो देखी ही थी.. लखनभैया हर दिन गोली खाकर करते हे.. बेचारीकी हालत खराब कर देते हे.. ओर वो उनको ना भी नही बोलपाती.. जानु.. सच कहु..? मे आपका बच्चा पैदा करना चाहती हु.. मुजे हमारे प्यारकी अ‍ेक नीशानी चाहीये.. दे दो मुजे..

धिरेन : (आस्चर्यसे हसते) पुनो.. आर यु सीरीयस..? क्या सचमे तुम हमारा बच्चा चाहती हो..?

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कराते हां मे गरदन हीलाते) हंम.. सच्ची.. जानु.. भरदो मेरी गोद.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

धिरेन : (जोरोसे बाहोमे भीचते होंठ चुमते) हंम.. तो चल आजा.. आज मेरी बीवीको प्रेगनेन्ट कर ही देता हु..

पुनम : (सरमाते हसते) जानु.. आपको क्या पसंद हे..? लडका या लडकी..?

धिरेन : (हसते होंठ चुमते) जो मेरी इस खुबसुरत बीवीको पसंद हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) जानु.. मुजे तो लडकी बहुत पसंद हे.. हें..हें..हें..

दोनोही प्यारभरी बाते करते रोमांस कर रहेथे.. तब पुनमने बडीही सीफततासे बच्चेकी बात छेड दी.. ओर धिरेनको मानसीक रुपसे बच्चेको अ‍ेक्सेप्ट करनेके लीये तैयार करने लगी.. अबतो उनकोभी पताथा की वो अपने भाइ देवायतसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. ओर उनकी कोखसे बच्चीही जन्म लेने वाली हे.. तब कुछही देरमे धिरेन ओर पुनम दोनोही बीना कपडोमे प्यारका खेल खेलने लगे..

धिरेन धीरे धीरे कमर हीलाते पुनमको चोद रहाथा.. तो पुनम भी मदहोस होते आधी आंख चडाते अपनी कमर हीलाते धिरेनको चुदावनेमे साथ दे रही थी.. पुनमके उपर जबभी धिरेन चडता पुनम आंख बंध करके देवायतको इमेजींग करती.. वो जबभी धिरेनसे चुदवाती यही सोचती की उनकी चुदाइ उनका भाइ देवायतही कर रहा हे.. वो बीलकुल मंजुके कहेनेपे उनके प्लानके हीसाबसे चल रही थी..

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तो दुसरी ओर देवायत घरपे आगया तो तीनो मा बेटी काफी देरतक बाते करके अपने अपने रुममे सोने चली गइ थी.. तभी देवायत अपने रुममे चला गया.. तो मंजु ओर चंदा दोनोही नींदकी आगोसमे सो रहीथी.. तब देवायतको उनको जगाना सही नही लगा ओर वोभी चेन्ज करके सोगया.. तभी उपरकी मंजीलपे लता कल मायके जाने वालीथी.. तो लखन आज गोली खाकर अबभी उसे जोरोसे चोद रहा था.. तब..

लता : (होंठ चुमते) जानु.. बस.. बस.. अब कीतना चोदोगे.. धीरे करोनां..? इसीलीये मे आपको गोली खाने नही देती.. आप मेरी हालत बीगाड देते हो.. कल मायके जाना हे तो मे ठीकसे चल भी नही पाउगी.. वहा सबको पता चल जायेगा.. जानु.. जल्दी करोनां.. बीतनी देर हे..

लखन : (जोरोसे कमर हीलाते बुुब्स चुमते) डार्लींग.. बस अभी होजायेगा.. लता.. तुजे चोदनेमे बहुत मजा आता हे.. इसीलीये तो आज गोली खाइ हे.. फीरतो तुम जबतक वापस नही आओगी तबतक हमारी छुटी.. तो आज जी भरके मुजे चोद लेने दे..

लता : (छटपटाते) लखन.. बस.. यार.. धीरे करोना.. मे कही भागेजाने वाली नही हु.. तुम गोली मत खाया करो.. कही मे पेट बेटसे हो गइ तो..? आइइइ.. बस.. बस.. अब कीत नी देर हे..?

लखन : (जोरोसे चोदते) बस.. बस.. लता.. हो गया.. आइइइ..

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कहेते लखन लताकी चुतमे जड तक लंड घुसाते कमरको जटके देते जडने लगा.. तब लतानेभी लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर उनकी पीठ सहेलाने लगी.. तब कुछ ही देरमे लखन लताके सीनेपे सर रखके ढेर होगया.. तब जाके लताको कुछ राहत महेसुस हुइ.. ओर वो लखनको अपने उपरसे हडाकर धीरेसे बैडपे बेठ गइ.. ओर अपनी चुतको कपडेसे साफ करके धीरे धीरे चलके बाथरुममे चली गइ..

ओर अंदर जातेही वो टबमे बैठ गइ.. ओर फवारा चालु करके अपनी चुतपे रख दीया.. ताकी उनके गर्भासयके अंदर लखनका विर्य कोइ असर ना करे ओर चुतको भी राहत मीले.. लता बडी ही सावधानीसे लखनके बीजको मीटा देती.. फीर टबसे उठकर उन्होने छुपाइ हुइ जगहसे अ‍ेक डीबी नीकाली.. ओर उनमेसे अ‍ेक आइपील की गोली नीकालकर खाली.. वो नही चाहती थी की उनका पहेला बच्चा लखनसे हो..

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लता कीतनी बार लखनसे बेहरहमीसे चुद चुकीथी.. वो हर बार यही करती.. फीर भी उनकी जहेनसे देवायत नीकलनेका नामही नही ले रहाथा.. जबसे लताने पुनम ओर भावनासे देवायतके बारेमे जाना हे तबसे उन्होने अपने ओर देवायतके बारेमे बहुत कुछ अंदाजा लगालीया.. की अ‍ेकना अ‍ेक दिन उनको भी देवायतके पास आनाही हे.. वो देवायतकी ओर ज्यादा ढल चुकीथी.. देवायत अब लताका ड्रिमबोय होचुका था..

जबभी लखन लताको चोदने लगता.. तब लताको लखनके चहेरेकी बजाय देवायतका चहेरा दीखने लगता.. वो लखनको देवायत समजकर उनके साथ उछल उछलके संभोग करती.. जीनकी वजहसे लताका जोस कइ गुना बढ जाता.. आजकी रात लखनने लताको जमकर चोद लीया.. तो लताभी थकके चकनाचुर हो चुकी थी.. दोनो ही आपसमे अ‍ेक दुसरोसे चीपककर सोगये..

तो दुसरी ओर आजभी गांवमे देर रात बसंती अपनी बेटी बरखाको हल्कासा शींगार कर देती हे.. फीर वो खुद बरखाको लेकर मुनाके रुममे उसे छोडने आइ.. मुना बरखाका इन्तजार करते बेडपे लेटा हुआ था.. बरखा जब रुममे जाने लगी तब दरवाजेसे बसंती मुनाकी ओर देखते कामुक स्माइल करने लगी.. ओर उसने दरवाजा बंध करलीया.. तब बरखाने पलटके बसंतीकी ओर देखा.. तो उनको भी कुछ अजीब लगा..

बरखा : (दरवाजेकी ओर देखते बेडपे बैठते) भाइ.. आपने कुछ देखा..? दो दीनसे मां ही मुजे आपके लीये तैयार करके इधर छोडने आती हे.. इनमे इतना सारा परीवर्तन कैसे आगया..? क्या इनकी आपसे इस बारेमे कुछ बात हुइ हे..?

मुना : (थोडा जेंपते) नही तो..? क्यु..? तुजे अ‍ैसा क्यु लगा..? वो कुछ केह रही थी क्या..?

बरखा : (मुस्कुराते नां मे गरदन हीलाते) नहीतो..? बस अ‍ैसेही पुछ रहीथी.. वरना सोचो कोइ मां अपनी बेटीको इस तराह शींगार करके अपने बेटेके पास छोडने आती हे..? जबसे हम सहेरसे वापस आये हे तबसे मुजे मां का व्यवहार कुछ अजीब लगता हे.. छोडो इनको.. (सीनेपे सर रखते) भाइ.. ठाकुरसाहब हम दोनोकी सादी कब करवायेगे..? क्युकी आपका बच्चा मेरे पेटमे पल रहा हे.. इसीलीये..

मुना : (मुस्कुराते होंठ चुमते) हंम.. करवा देगे.. अब हमे दुसरोकी फीकर करनेकी क्या जरुरत हे..? अब तो मां भी मान गइ हे.. बस अब अ‍ेक बापु मान जाये.. तो गंगा नहाये.. चल आजा.. आज मेरी बहेन बहुतही मस्त लग रही हे.. बीलकुल दुल्हनकी तराह.. अ‍ैसा लगता हे आज हमारी सुहागरात हे.. मुजे मेरी बहेनको खुब प्यार करना हे.. मां ने वाकइ तुजे क्या मस्त तैयार करदी हे.. हें..हें..हें..

बरखा : (सरमाते हसते बाहोमे आते) भाइ.. इसीलीयेतो डर लग रहा हे.. की मां मे इतना परीवर्तन कैसे आ गया..? भाइ.. मुजेतो दालमे कुछ काला लग रहा हे.. हें..हें..हें..

मुना : (थोडा सीरीयस होते सामने देखते) बरखा.. अ‍ेक बात बता.. जब तुम दोनो होस्पीटल दीखाने गइ.. तबही उसे सब पता चला.. तो वो इतनी आसानीसे कैसे मान गइ..? क्या तुम जो केह रही थी.. की अ‍ेक विडीयो क्लीप तेरे पास हे..? क्या तुमने उसीका इस्तेमाल कीया..?

बरखा : (सरमाते हसते हांमे गरदन हीलाते) हंम.. हा भाइ.. मुजे मजबुरन वो क्लीप मां को दीखानी पडी.. वरना वो तो हमारे बच्चेको गीरवाने की जीद कर रहीथी.. भाइ बडी मुस्कीलसे उनको मनाया हे..

मुना : (सामने देखते) बरखा.. मुजे इतनातो पता चल ही गयाकी तेरे पास वो विडीयो क्लीप हे वो जरुर मा की होगी.. मतलब.. वो आपभी जानती होगी.. उनका कोइ राज आप जरुर जानती होगी.. जो इनमे उनकी इजतपे आंच आनेका डर हे.. मुजे सच बताना.. क्या वो मां की क्लीप थीनां..?

बरखा : (सरमाते थोडा परेसानीमे) भाइ.. प्लीज आप जीद छोडदो.. मे आपको इस बारेमे कुछ नही बता सकती.. मेने उनको प्रोमीस कीया हे.. ओर उसने हमारे रीस्तेको हां कहेते ही मेने वो फोनसे डीलीट करदी..

मुना : (थोडा मायुस होते) बरखा.. अब हम दोनो पती पत्नी होने वाले हे.. तो क्या तुजे लगता हे अब हम दोनोके बीच कोइ पर्दा हो..? हंम..? अगर तुम नही बताना चाहती तो मे तुजपे कोइ फोर्स नही करुगा..

बरखा : (सामने अ‍ेक नजरसे देखते) भाइ.. आइ लव यु.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु.. मे आपका विस्वास खोना नही चाहती.. मुजे जींदगी भर आपकी बीवी बनके आपके साथ रहेना हे.. आपने मुजे कैसी उलजनमे डाल दीया हे..? (कुछ सोचते) भाइ.. मुजे प्रोमीस करो की उनका नाम जाननेकी जीद मत करोगे.. ओर आप इस बारेमे मां को भी कुछ नही पुछोगे.. तब ही मे आपको सबकुछ बता सकती हु.. मुजे प्रोमीस करो..

मुना : (बरखाके होंठ चुमते) बरखा.. भगवानने मुजे दुनीयाकी सबसे खुबसुरत बीवी बहेनके रुपमे दी हे.. तो मेभी तुजे बहुत चाहता हु.. आइ लव यु टु.. क्या तुजे लगता हे हम दोनोके बीत कोइ प्रोमीसकी आवस्यक्ता हे..? तो बता.. मे हमारे बच्चेकी कसम भी खा सकता हु..

बरखा : (सीनेमे सर रखते जोरोसे बाहोमे भीचते) नही भाइ.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे आपको सब सच बताती हु.. आप कभी कसमकी बात मत करना.. अ‍ेक डरसा लगता हे.. बस इस बारेमे आप मां को कुछ मत कहेना..

मंना : (गाल चुमते) हंम.. बता मे कीसीको कुछभी कहेने वाला नही हु.. मा को भी नही.. बता..

बरखा : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. आपतो जानते हे की हमारे बापुकी तबीयतकी वजहसे वो माको वो सुख नही देपाते.. जो हर ओरतको सादीके बाद चाहीये ही चाहीये.. ओर उपरसे माकी उमरभी इतनी नही हेकी वो पतीके उस सुखसे वंचीत रेह सके.. इसलीये हमारी मां का पैर कही फीसल गयाथा.. लेकीन अब सब ठीक हो गया हे.. उसने मुजे प्रोमीस कीया हे.. की अब वो कीसीके भी साथ अ‍ैसे रीस्ते नही रखेगी.. बस उसीकी क्लीप मेरे पास थी.. ओर माने हम दोनोका रीस्ता अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे..

मुना : (मुस्कुराते) बरखा.. पता हे मुजे.. वो हमारे भानुभाइ थे.. बस मे तेरे मुहसे सब सच सुनना चाहता था.. बरखा.. तुमने जोभी कहा वो सब सच हे.. जीस तराह हम दोनो अपने प्यारके लीये तडप रहेथे उसी तराह मा भी अपनी जरुरतके लीये तडप रही थी.. तो उनके कदम थोडे डगमगा गये थे.. लेकीन अब वो हमारे घरके सामने देखेगा भी नही.. बस मेने बीना नाम लीये इन्डायरेक्टी हमारे ठाकुरसाहबसे बात करली हे..

बरखा : (आस्चर्यसे देखेत) भाइ..? क्या आपको सब पता था..? तो फीर मुजे कहा क्यु नही..?

मुना : (मुस्कुराते गाल चुमते) बरखा.. मे तुजे क्या कहेता..? की हमारे मा कीसीके साथ बीस्तर गरम कर रही हे..? हंम..? अगर तुजे ये सब पता नही होतातो तुजे कीतना दु:ख होता..? इसीलीये तुजे नही बताया..

बरखा : (सीनेमे सर छुपाते बाहोमे भीचते) भाइ.. आइ अ‍ेम सोरी.. आप मुजे कीतना चाहते हे.. मेतो आपको पाकर धन्य होगइ.. आइ लव यु सो मच.. भाइ.. अ‍ेक बात कहु..? अब हमे मा की तकलीफके बारेमे भी कुछ सोचना चाहीये.. हमारे लीये वो सबकुछ छोडनेको तैयार होगइ.. तो हमे उनके बारेमे भी कुछ सोचना चाहीये..

मुना : बरखा.. अगर तेरे दिमागमे कोइ आइडीया होतो बताना.. हम उनके बारेमे सोचेगे.. मुजे पता हे मा की अभी इतनी उमर नही हे.. तो उनकोभी अ‍ेक मर्दकी जरुरत हे.. लेकीन हम करभी क्या सकते हे.. अब पापाभी तो इस काबील नही हे.. की वो माको वो सुख दे सके.. ओर हम येभी तो नही चाहते मां कही बहारके आदमीसे सबंध रखे.. अगर तेरे पास कोइ रास्ता हे.. तो बता..

बरखा : (सामने देखकर सरमाकर मुस्कुराते) भाइ आइडीया.. तो.. हे.. मेने भी मां के बारेमे कुछ ओर ही सोचा हे.. इसका हल हम दोनोको मीलकर ही नीकालना होगा.. लेकीन इस बारेमे अभी नही बता सकती.. पहेले हम दोनोकी सादी होजाने दीजीये.. अ‍ेक बार हमारी सादी होगइ.. तब हम दोनो कभी फुरसतमे इस बारेमे बात करेगे.. चलो अभी तो मुजे अपने पतीसे प्यार करना हे.. ओर बापु सुबह जाग जाये उनसे पहेले ही मुजे जाना होगा..

मुना : (मुस्कुराते बाहोमे भीचते) हंम.. लगता हे तुमने भी मां के बारेमे काफी कुछ सोचके रखा हे.. हें..हें..हें.. चल आजा..

तब कुछही देरके बाद दानो भाइ बहेन प्यारके महासागरमे गोते लगाने लगे.. दोनोही प्यारके सागरमे गहेराइओमे चले गये.. तब बरखा आधी आंख चडाते पुरी तराह मदहोस हो चुकी थी.. वो मुनाके नीचे लेटते उसे जोरोसे बाहोमे भीचते जडती रही.. उस रात मुनाने बरखाको दो बार घमासान चुदाइ करते तृप्त करदीया.. ओर उनकी चुतको भरता रहा.. ओर सुबह चार बजे बरखा अपने रुममे जाकर सोगइ..

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तब मुनाको नही पता था की बरखाके मनमे उनकी मां को वो सुख देनेका कौनसा प्लान था.. बरखा कोलेजमे अ‍ेक पढी लीखी लडकी थी.. वोभी खुले विचारोकी थी.. उसने प्यारके लीये खुद अपने भाइको चुना था.. उनको भी आपसी रीस्तोमे प्यार करना बहुतही अच्छा लगता था.. वो हिमाचलके उन राजाकी किताब (ये केसी अनुभुती) कइ बार पढ चुकी थी.. तबसे वोभी अपने भाइको चाहने लगी थी.. ओर अब उसने अपनी मां के बारेमे भी काफी कुछ सोच लीया था..

तब इस गांवसे दुरभी वही हाल था.. देवायतसे सृतीकी सादीके बाद आज दुसरी रात थी.. सादीके दिनही लखनने रमाके दिलके तारको बडे ही बहरहेमीसे छेड दीयाथा.. तबसे रमाके दीलो दिमागसे लखन छाया हुआ था.. ओर दिलसे जानेका नामही नही ले रहाथा.. इन दोनो रातमे भानुसे चुदवाते हुअ‍े भी रमाका मन कही नही लग रहाथा.. ओर रमाको बार बार लखनका खयाल आने लगता था..

जब भानु उनके उपर चडके रमाको चोद रहाथा तब भी रमा भानुको कोइभी रीअ‍ेक्शन दीये बगैर अ‍ैसे ही लखनके खयालोमे पडी रहेती.. रमा भानुकी जगाहपे लखनको इमेजींग करते उनके बारेमे सोचमे डुब जाती.. ओर उसे भानुकी जगाह लखनका चहेरा दीखने लगता.. जब भानु जड जाता ओर रमाके सीनेपे ढेर हो जाता तब भी रमा लखनके खयालोमे डुबी रहेती.. ओर भानुकी पीठ सहेलाती रहेती.. तब भानुभी रमाका व्यवहार देखके कुछ परेसान होगया..

भानु : (सामने देखते) रमा.. ओ रमा.. क्या हुआ हे..? मे देख रहा हु पीछले दो दीनसे तुम कुछ बोल ही नही रही..? ना कोइ रीअ‍ेक्शन ना कोइ प्यार.. कुछ हुआ हे क्या..?

रमा : (थोडा जेंपते) अरे नही नही.. भानु तुम गलत सोच रहे हो.. मुजे कुछभी तो नही हुआ.. (जुठ बोलते) बस हमारी नीलुकी याद आ रही थी.. अ‍ेक दिन छुटीमे उसे घरपे लेआओनां..

भानु : (मुस्कुराते) हंम.. लेकीन रमा अभीतो उनका दाखला हुआ हे.. उनकोभी वहा थोडा सेटल होनेदे.. थोडा टाइम लगता हे.. फीर उनको सनी रवी.. इधर लेकर आउगा.. वरना वो पढ नइ पायेगी..

रमा : (मुस्कुराते भानुको उपरसे हटाते) हंम.. कोइ बात नही.. अब आपका हो गयाहे तो उपरसे उतरो.. बहुत वजन लग रहा हे.. हें..हें..हें.. कीतने मोटे होगये हो.. हें..हें..हें..

भानु : (उपरसे हटते मुस्कुराते) हंम.. पहेलेतो मेरा वजन नही लगता था.. रात रातभर मुजे उपर लेके पडी रहेती थी.. तबतो मेरा वजन नही लगता था..? अब क्या हुआ..? मुजसे थक गइ क्या..? हें..हें..हें..

रमा : (चुतको साफ करते मुस्कुराते) जब देखो उलटा सीधा सोचते रहेते हो.. मेने कब कहा की मे आपसे थक गइ हु..? आज कल आप बहुत कमीने होगये हो.. हें..हें..हें..

भानु : (बाहोमे कसते होंठ चुमते) हंम.. अब ठीक हे.. तेरे मुहसे गालीया सुनता हु तो अ‍ेक सुकुन मीलता हे.. हें..हें..हें..

रमा : (हसते) तबतो तीनो टाइम आपको खानेके साथ गालीया भी मीलेगी.. हें..हें..हें..

भानु : (हसते) हंम.. देना.. तेरे मुहसे गालीभी अच्छी लगती हे..

रमा : (अपने दिलकी बात कहेते) भानु.. अ‍ेक बात कहु..? लतादीदीके सादीको कितने दिन होगये..? अब आपको नही लगता की लतादीदी ओर हमारे जमाइको खानेके लीये हमारे घरपे बुलाना चाहीये..?

भानु : (मुस्कुराते) रमा.. बाततो तेरी सही हे.. लेकीन तुम भी देखती नही..? अ‍ेकके बाद अ‍ेक काम नीकल ही रहे हे.. बस हमे कामसे थोडा फ्रि तो होने दे.. फीर हम उन दोनोको बुला लेगे.. हमारी लता वहा अच्छी तराह सेट होगइ हे..

रमा : (सरमाते धीरेसे) जानु.. हमारी लतादीदीको कीतना अच्छा लडका मील गया हे.. दोनोकी जोडी मस्त लग रही हे.. ओर हमारे लखन बहुत ही अच्छे स्वभावके हे.. कास उनका कोइ छोटा भाइ भी होता.. तो मे मेरी नीलुका ब्याह भी मे उनसे करवा देती.. हें..हें..हें..

भानु : (मुस्कुराते होंठ चुमते) क्यु..? इसमे उनके छोटेभाइकी क्या जरुरत हे..? अगर लखन तुजे अच्छा लगता हे तो ठीक हे.. हम उनसे ही हमारी नीलुकी सादी कर देगे.. तुजेतो पता हे उनके खानदानमे तो सबने दो दो तीन तीन सादीया की हे.. अच्छा खानदान हे.. रोयल फेमीली हे.. तो अच्छे खासे पैसे ओर जमीन जायदाद भी हे.. तो नीलु भी वहा राज करेगी.. लेकीन अभी नीलु थोडी छोटी हे.. बस उसे अ‍ेक बार सब पढाइ करलेने दे.. फीर मे खुद इस बारेमे देवुसे बात करुगा.. क्या मेने सही सोचा हेनां..?

रमा : (खुस होकर जोरोसे बाहोमे भीचते होंठ चुमते) जानु.. तबतो सोनेपे सुहागा.. आपने मेरे मनकी बात छीनली.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. आपने हमारी नीलुके बारेमे बीलकुल सही सोचा हे.. हें..हें..हें..

भानु : (मुस्कुराते गाल चुमते) बस.. अभी ज्यादा खुस मत होना.. अभी इस बातको सीर्फ हम दोनोके बीचही रखनी हे.. बस.. सही समय आनेदे.. तब हम दोनोही मंजुभाभीसे बात करलेगे.. तबतक लखनभी सहेरमे अच्छी तराह सेट होजायेगा.. फीर हमारी लता ओर नीलु दोनोही बहेन बनके वहा राज करेगी राज.. हें..हें..हें..

भानुकी बात सुनकर रमा बहुतही खुस होने लगी.. क्युकी अब लखनने रमाके दिलके अ‍ेक कोनेमे अपनी जगाह बनाली थी.. तब भानुको नही पताथाकी रमाके मनमे क्या चकर चल रहा था.. रमा अ‍ेक बहहुतही गरीब परीवारसे आइ थी.. वो रीस्तोसे ज्यादा पैसोको अहेमीत देती थी.. जब वो ब्याह करके आइ तब उनसे ज्यादा पैसेवाला उनको भानु लगाथा.. ओर उसने भानुसे रीलेशन रखलीया..

आज भानुके मुहसे लखनके खानदान पैसा ओर जमीन जायदादकी बात सुनकर वो नीलमको उस हवेलीकी रानी बनाने का सपना देखने लगी.. ओर जबसे लखनने उनकी तारीफकी ओर लखनसे बात करते उन्होने रमासे अपने प्यारका इजहार करलीया.. तबसे रमाको लखनसे मीलनेका ओर उनके जरीये नीलमको सेट करनेका रास्ता ओर आसान लगने लगा.. अ‍ैसे ही बाते करते दोनो आगेकी प्लानींग करते अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे नंगेही चीपककर सोगये..

देवायतके गांवमेभी रातमे पुरा सन्नाटा छाया हुआथा तब भी कुछ घरोमे अब भी अपनी मासुका या अपने यारके साथ प्यारका खेल चल रहाथा.. बंसी आजभी अपनी विधवा बुआ सांतीको चोद रहाथा.. लेकीन आज दुर्भाग्यवस बंसीकी मां जया रातमे पानी पीनेके लीये उठ गइ.. ओर वो कीचनमे जाते वक्त अपने बेटे बंसीके रुमके पास गुजरी.. तब रुममे कुछ अजीबसी आवाज सुनाइ दी.. जो आवाज वो रमशेके साथ चुदाइ करते करती थी.. जया आवाज सुनते ही चोक्कनी होगइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४०/१

देवायतके गांवमेभी रातमे पुरा सन्नाटा छाया हुआथा तब भी कुछ घरोमे अब भी अपनी मासुका या अपने यारके साथ प्यारका खेल चल रहाथा.. बंसी आजभी अपनी विधवा बुआ सांतीको चोद रहाथा.. लेकीन आज दुर्भाग्यवस बंसीकी मां जया रातमे पानी पीनेके लीये उठ गइ.. ओर वो कीचनमे जाते वक्त अपने बेटे बंसीके रुमके पास गुजरी.. तब रुममे कुछ अजीबसी आवाज सुनाइ दी.. जो आवाज वो रमशेके साथ चुदाइ करते करती थी.. जया आवाज सुनते ही चोक्कनी होगइ....अब आगे

जयाको जरासा भी समजनेमे देर नही लगीकी उनके बेटेके रुममे क्या हो रहा हे.. बस उनको इतना ही पता करनाथा की बंसी कीसके साथ चुदाइ कर रहा हे.. ओर वो धीरेसे दबे पांव उनके रुमके पास चली गइ.. ओर दरवाजेपे कान लगाकर आवाज सुननेकी कोसीस करने लगी.. तब बंसी ओर सांती चुदाइ करते हमेसाकी तराह बातेभी करते थे.. ओर जयाको लडकीकी आवाज जानी पहेचानी लगी..

तो जया दरवाजेके की होलसे देखनेकी कोसीस करने लगी.. तब उसे बेडपे अपना बेटा बंसी कीसी लडकीके उपर नंगा लेटते उसे जोरोसे कमर हीलाते चोद रहा था.. ओर वो लडकीभी बंसीके गलेमे दोनो हाथ डालते उनको अपने तनसे चीपकाते चुदवा रही थी.. दोनोही नंगे होकर चुदाइमे मसगुल थे.. दोनोकी चुदाइ देखकर अ‍ेक बारतो जयाका दिलभी मचलने लगा.. उनकी चुतभी हरकतमे आथइ.. तभी बंसीके मुहसे बुआ सुना.. तब जया समज गइ की येतो उनकी ननंद सांती हे.. तब जया अ‍ेकदम आग बबुला होगइ..

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जयाको इस वक्त आधी रात हंगामा करना ठीक नही लगा.. ओर वो मनमे सांती ओर बंसीको गालीया देते वापस अपने रुममे चली गइ.. ओर लेटते सोचने लगीकी सुबह ही सांतीको अपने रुममे अकेली बुलाकर उनसे नीपट लेगी.. तब उनको अपनी बेटीके बारेमे भी गलत खयाल आने लगा..

की वोभी कीसीसे चुदतो नही रही.. तो फौरन बेडसे उतर गइ.. ओर अपनी बेटी जागृतीके रुमपे चली गइ.. ओर दरवाजेको हल्कासा धका देकर अंदर जाकके देखने लगीतो जागृती गहेरी नींद सो रहीथी.. तो जया राहतकी सांस लेकर वापस अपने रुममे आकर लेट गइ..

आज सुबहका सुरज अपने रथपे सवार होके नीकला.. तब देवायतके गांवमे थोडी रोसनी छीडकके हसते हुअ‍े आगे नीकल गया.. क्युकी आज गांवमे थोडासा हंगामा होनेकी सुरुआत हो चुकीथी.. अभीतो हंगामा सीर्फ अपने अपने घर तकही सीमीत रहेने वाला था.. लेकीन अब वो वक्त दुर नही था.. जो यही हंगामा बीच चोराहे पे उजागर होने वालाथा..

बंसी ओर सांती देर रात तक चुदाइ करके अभी अपने अपने रुममे गहेरी नींद सो रहेथे.. तो जागृती उठकर नहाने चली गइ थी.. तब जयाभी कंपलीट होकर थोडा गुसेमे मनमे बडबडाते घरका काम देख रहीथी.. ओर सबके बहार जानेका बेसब्रीसे इन्तजार कर रही थी..

तो आज हवेलीपे भी सबलोग जल्दी उठ गयेथे.. रजीया ओर चंपाभाभी घरका सब काम देख रहीथी तब लता कंपलीट तैयार होकर अ‍ेक बेगमे अपने दो तीन दिनके कपडे पेक कर रही थी.. आज वो सादीके बाद पहेली बार मायके जो जा रहीथी.. तब राजीव ओर नीर्मला कंपलीट होके होलमे भावुकी बच्चीके साथ खेल रहेथे.. तब भावु नहानेके लीये गइ थी.. उपर लखनभी लताकी मदद करता रहा..

तभी नीचेकी ओर मंजु चंदा ओर देवायत तीनोही अपने रुममे कंपलीट होगये तो चंदाने मंजुके बेटे विजयकी भी कंपलीट करदीया.. अब विजयको ज्यादातर चंदाही सम्हालती थी.. तो दुसरी ओर विजयभी चंदासे बीलकुल घुलमील गयाथा.. अब वो चंदाकोही अपनी मां मानने लगाथा.. सब कंपलीट हो गये तब मंजु ओर चंदा देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर देवायतने बारी बारी दोनोके होंठ चुमलीये.. तब मंजुने कहा..

मंजुला : (हसते) दीदी.. आज लताभी मायके जा रही हे.. ओर हमभी सामको देरसे आयेगे तो आप यहा अकेली क्या करेगी..? आपभी चलीयेना हमारे साथ..

चंदा : (हसते) अरे मंजु तुम संकोच मत करो.. मे वहा अकेली कहा हु.. रजीया चंपाभाभी तो हे.. ओर हमारा विजयभी तो हे.. तो मेरा तो उनके साथ खेलतेही टाइम नीकल जाता हे.. आप लोग आरामसे जाओ..

देवायत : (जोरोसे बाहोमे भीचते) चंदा.. मंजु ठीक केह रही हे तुमभी चलना.. विजयको साथ लेले..

चंदा : (सरमाते हसते) नही देवु आप लोग जाकर आइअ‍े.. आपको वहा कामभीतो हे.. आज भैयाकोभी डोक्टरको दीखाना हे तो आप चले जाइअ‍े मे बादमे कभी साथमे आजाउगी..

मंजुला : (मुस्कुराते आंख गीली करते) दीदी चलीयेनां.. सायद अगली बार आपको सबको मीलनेका मौका ना भी मीले.. आप आओगीतो पापाकोभी अच्छा लगेगा..

चंदा : (देवायसे लीपटकर आंसु बहाते) सोरी.. मंजु.. इसीलीये मे नही आ रहीथी.. मुजे पता हे तुजे सब पता चल गया हे.. तो भाइको देखकर बहुत ही दुख होता हे.. बस अ‍ेक डरसा लगा रहेता हे.. मुजमे हिंमत नही हे..

मंजुला : (आंसु पोछते) बस.. बस.. चुप होजाइअ‍े कही बहार कोइ सुन ना ले.. दीदी.. प्लीज.. आंसु मत बहाइअ‍े वरना बहार मम्मी ओर भावुने देख लीया तो वो टुट जायेगी.. प्लीज.. चलीये बहार..

तब चंदा फटाफट अपना हुलीया बाथरुममे जाकर ठीक करलेती हे.. ओर विजयको लेकर बहार आजाती हे तब मंजु भावनाके रुममे उनके कपडे बेगमे रखेते उनकी मदद करने लगी.. तो देवायतभी राजीव ओर नीर्मलाके पास जाकर बैठ गया.. तब नीर्मला उनकी ओर कामुक्तासे स्माइल करने लगी..तभी लता ओर लखनभी बेग लेकर नीचे आगये.. तो सबलोग लताको देखते ही रेह गये..

आज लताने अपने सभी बाल खुले छोड रखेथे ओर कीसी अप्सरा जैसे तैयार हुइ थी.. माथेपे सींदुर पैरमे पायलोकी जनकार.. जीनकी वजहसे आज वो कयामत लग रहीथी.. तो अ‍ेक बारतो देवायतकी नीयतभी लताको देखर डगमगा गइ.. तभी लतानेभी देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते स्माइल दी.. तो देवायत जेंप गया.. ओर लतापेसे नजर हटाके भावनाके बच्चेके साथ खेलने लगा.. तभी..

नीर्मला : (हसते खडी होकर पास आते) अरे.. आजतो मेरी बेटी बडी खुबसुरत लग रही हे.. ला तुजे टीका लगा देती हु.. मेरी बेटीको कीसीकी नजर ना लग जाये.. हें..हें..हें..

लता : (सर्मसार होते पैर पडते हसते) जी मम्मीजी..

कहेते लता बहुतही सर्मसार होते हसने लगी.. ओर नीर्मलाने अपनी आंखोसे काजल लेके लताको कान पीछे लगा दीया तो सब हसने लगे.. तब लता बहुत ही सरमाइ.. तो मंजु ओर भावनाभी अपनी बेग लेकर बहार आगइ.. तो लताको देखतेही दोनो उनके गले लग गइ.. ओर मंजुने प्यारसे उनके दोनो गाल सहेलाये.. तो लता अ‍ेक बार फीर सर्मसार होके हसने लगी.. ओर सब सोफेपे आकर बैठ गये.. तब..

मंजुला : मम्मी.. आप चंदादीदी को कहीयेना वो भी हमारे साथ चले.. आज लता भी जा रही हे तो वो अकेली यहा क्या करेगी..?

राजीव : (हसते) हांतो वोतो साथ चलही रही हे.. अगर तुम दोनो साथ चल रही हो.. तो वोतो मेरी बडी बेटी हे.. उनकातो तुम दोनो से पहेले हक हे.. चल बेटा तुम भी साथ चल रही हे..

चंदा : (आंख गीली करते) जी भैया.. मे भी साथ चल रही हु..

राजीव : (हसते) बेटी अबतो पापा कहे दे.. छोटी थी तबतो मुजे बहुत पापा पापा कहेके बुलाती थी.. हें..हें..हें.. ओर ना जाने क्या क्या कहेते मुजे चीडाती थी..

कहातो चंदा उठकर राजीवके पास बैठ गइ ओर उनके कंधेपे सर रखके जोरोसे आंसु बहाते पापा पापा करते रोने लगी.. तब मंजु भावु ओर नीर्मलाकी आंखसेभी आंसु नीकल गये.. ओर मंजुने उठकर चंदाके पास जाके उनको सम्हाला.. तब रजीया उनके लीये पानी लेकर आगइ तो मंजुने चंदाको पानी पीलाया.. तब हवेलीमे बडाही इमोस्नल माहोल होगया था.. तभी मंजुने चंदाको ना कहेते कुछ इसारा कीया..

तो चंदा आंसु बहातेभी हसने लगी.. ओर अपने आंसु पोछते राजीवको मुस्कुराते हग कर लेती हे.. ओर वही उनके कंधेपे सर रखके बेठी रही.. इसी बीच लता अबभी चोर नजरसे देवायतको देखती रही.. तब माहोलको हल्का करनेके लीये आज दयाकी जगाह रजीयाने लेली..

रजीया : (हसते) मेडम अब बाप बेटीका मीलन हो गया हे तो चाइ नास्ता करले..? हें..हें..हें..

कहातो सब जोरोसे हसने लगे.. ओर खडे होकर डाइनींगकी ओर आने लगे.. तो रजीया सरमाके लखनकी ओर देखते हसती हुइ कीचनमे चली गइ.. आज रजीयाभी बहुत खुस हो रहीथी.. क्युकी आज सबलोग जाने वालेथे.. ओर दो तीन दीन लखन अकेले सोने वाला था.. तब उनको अपने पतीको मीलनेका मीलने वाला था.. ओर चाइ नास्ता देते लखनकी ओर देखते कामुक नजरोसे हस रहीथी.. तब..

मंजुला : रजीया.. चंपाभाभी.. हम सबलोग जा रहेहेतो घरका खयाल रखीयेगा.. सायद सामको लखनभी जल्दी आजाये.. तो रजीया तुम इनको खाना खीला देना.. हम लोगतो रातका डीनर करकेही आयेगे.. क्यु देवु..?

देवायत : (हसते) हां मायकेका खाना कोन छोडता हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते बाजुमे अ‍ेक मुका मारते) सीर्फ मायकाही क्यु.. अपने ससुरालका बोलोनां.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) पहेलेतो जातेही दुध बुध सब्जीया सब लेनी पडेगी.. इतने दिनोसे यहा हे तो खराब होगइ होगी.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) दीदी वोतो मे ओर भावु लेकर आयेगे मेने तो वहा सब मार्केट देखी हुइ हे.. क्यु भावु..?

भावना : (हसते) मौसी मेने तो देखी ही होगीना.. आप पहेले सादी करके चली गइ थी.. हें..हें..हें..

सभी अ‍ैसेही मस्ती मजाकर करते चाइ नास्ता करलेते हे.. तो पहेले लखन लताके कपडेकी बेग लेकर बहार चला गया ओर अपनी जीप नीकालके जानेकी तैयारीया करने लगा.. तभी लता सबके पांव छुने लगी.. फीर लखनके पास जीपमे जाकर बैठ गइ.. तो लखन लताको लेकर उनको मायके छोडने चला गया.. तो देवायतने भी अपनी बडी कार नीकालके रेडी रखदी.. ओर वापस आकर नीर्मलाकी ओर भावनाकी बेग लेकर कारमे रखदी..

सबलोग कारकी ओर चलने लगे.. तब चंदाके हाथमे विजय था ओर नीर्मलाने भावनाकी बच्चीको अपने पास रखा.. ओर सबलोग कारमे बैठने लगे राजीव देवावतके पास बैठ गया ओर रजीया चंपा सबको हाथ हीलाके बाय करने लगी.. तो मंजु कारकी विन्डोसे रजीया ओर चंपाको घरका ध्यान रखनेकी सुचनाये देती रही.. तभी देवायतने कारको राजीवके गांवकी ओर जानेदी.. तो इधर लखनके पास लता बैठीथी तो बार बार सरमाते लखनकी ओर देखके मुस्कुरा रहीथी.. तभी..

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लता : लखन.. आप दो पहोरको इधर खाना खाने आओगेनां..? मे आपकी पसंदका खाना बनादुगी..

लखन : नही लता.. आज भाइभी नही हे.. तो मुजे हमारे खेतोपे रहेना पडेगा.. अब हमे अपनी जीम्वेवारी उठानी पडेगी.. भाइने सहेरका पुरा बीजनेस हमे सम्हालने देदीया हे.. अब हमे हमेसाके लीये वही रहेना हे.. सायद.. आज भानुभाइके साथ सहेरभी जाना पडे..

लता : (मुस्कुराते हां मे गरदन हीलाते) जानु.. यहा हमारे घरमे कीतना मजा आता हे.. भाभी बहुत अच्छी हे.. मुजेतो अपनी छोटी बहेन मानते मुजे सब कुछ बता देती हे.. मेतो हप्तेमे अ‍ेक दो दिन यही हमारे गांवमे ही रहुगी..

लखन : (हसते) हंम.. जब मन करे तब कहेना मे तुजे छोडने आजाउगा.. ओर हां.. अभी मुजे वहा सीर्फ चाइ ही पीला देना.. फीर मे चला जाउगा.. वहा रुकनेका आग्रह मत करना..

लता : (हसते) हंम.. अगर मां ने या भाभीने कहातो..? जानु.. मुजेभी वहा अच्छा नही लगातो आप मुजे वापस लेने आजाना.. मे आपको फोन कर दुगी..

लखन : (हसते) अरे.. मायकेमे कीसे अच्छा नही लगता..? अगर भाभीने कहा हे तो दो तीन दिन रुकना..

लता : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) हंंम.. मुजे जो आपकी आदत लग गइ हे.. आप भलेही मेरी हालत खराब कर देते हो.. लेकीन मुजे आपसे अलग होनेका जी नही चाहता.. देखना.. अब मे आपको कोइ भी गोलीया नही खाने दुगी.. मेरी कसम दे दुगी.. आप बहुत बीगड गये हो.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अरे डार्लीग.. अ‍ैसा जुल्म मत करना.. हें..हें..हें.. ठीक हे अब नही खाउगा.. लता.. तुम मुजे बहोत अच्छी लगती हे.. आइ लव यु.. आज तुम बहुत मस्त लग रही हो..

लता : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हंम.. आइ लव यु टु..

दोनोही प्यारभरी बाते करते भानुके घरपे आगये.. ओर जैसेही दरवाजेके अंदर आये तब सरला रमा भानु तीनोही इन दोनोको देखकर बहुत खुस होगये.. तो सरलाने लताको वही दरवाजेके बीच खडा रहेनेको कहा.. क्युकी आज लता सादीके बाद पहेली बार अपने मायकेमे आइथी.. तब लखनने सरलाके पैरको छुलीया.. तो सरलाने लखनको आशीर्वाद दीया.. तब रमा हसते हुअ‍े अ‍ेक पानीका लोटा लेकर आगइ..

ओर लताके सरपे घुमाके कुछ विधीया करने लगी.. तो बीच बीचमे टेडी नजर करते लखनको भी देखकर मुस्कुराती रही.. लेकीन लखनने रमाकी ओर देखा तक नही.. फीर रमाने लताको अपने घरमे प्रवेस करवाया.. लेकीन लखनने अ‍ेक बारभी रमाकी ओर नही देखा.. तो रमा थोडी मायुस होगइ.. फीर सभी लोग बहार आंगनमे ही खटीयाकी ओर जाते वहा बैठ गये.. तब सरलाने कहा..

सरला : (हसते) आओ आओ.. लखन बेटा.. अबतो आप हमारे जमाइ होगये हे.. बैठीये..

लखन : (सरमाते हसते) मौसी.. मुजे अ‍ैसे मान पानकी जरुरत नही हे.. मेतो पहेलेकी तराह ही आपका पुराना लखन हु.. मे इस घरका सदस्य हु.. मुजे आपका जमाइ बमाइ नही.. बेटा मानीये जो पहेले मानती थी.. मुजे अपना जमाइ नही अपना बेटाही मानीये..

सरला : (प्यारसे सरपे हाथ घुमाते) बेटा हमतो धन्य हो गये.. मेरी मंजु बीटीयाने आपको बहुत अच्छे संस्कार दीये हे.. मेतो अब आपको अपना बेटाही मानुगी.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. ये हुइना बात.. हें..हें..हें..

रमा : (हसते लखनकी ओर देखते) अरे.. अ‍ैसे कैसे हो सकता हे.. आप हमारे जमाइ हे.. हें..हें..हें.. मेरेतो नंनदोइ हुअ‍े.. देखना मे आपकी खुब मस्ती करुगी.. हें..हें..हें..

लता : (मुस्कुराते) नही भाभी.. रहेने दीजीये.. इनको अ‍ैसे मान पानकी आदत नही हे.. ये बहुतही सीम्पल रहेना पसंद करते हे.. (लखनकी ओर देखते) क्या आप चाइ पीयोगे..?

भानु : (हसते) हां रमा तुम चाइ बनादे.. फीर खेतोसे छोटुको लेकर मुजेतो आज सहेरभी जाना हे लखनके लीये उनकी ओफीसतो साफ सफाइ करवालु.. फीर कुछ सामानभी लेना हे.. लखन तुमभी साथ चलो.. अपनी पसंदका टीवी फ्रिज सब लेना हे.. ओर आज देवुभी नही हे.. सब हमारे ससुरके घरपे गये हे..

लखन : (हसते) भानुभाइ बडेभैयाभी नही हे.. तो मे आज खेतोपे ही रहुगा.. आपही जाकर लेलो.. जो आपको पसंद आये.. ओर आप आरामसे आना मे हमारे खेतोपे ही जा रहा हु.. दोनो साथ चलते हे.. अगर वहाका कुछ काम हे तो कहीये.. मे मजदुरोसे करवा लुगा..

भानु : (हसते) नही लखन.. वो हरीयाको कहेना हमारे वो ट्युबवेलके पीछे वाले खेतोमे पानी पीलादे..

दोनोही अपने खेतोकी बाते कर रहे.. तब सरला ओर लता आपसमे बैठकर धीरेसे बाते करती रही.. ओर रमा कीचनमे जाकर चाइ बनाने लगी.. वो बार बार लखनकी ओर कीचनकी खीडकीसे देख रहीथी.. की लखन अ‍ेक बारभी उनकी ओर देखले.. लेकीन लखनने अ‍ेकबारभी ना रमाकी ओर देखा ना कीचनकी ओर.. तब रमा अ‍ेक बार फीर बहुत मायुस होगइ.. ना जाने क्यु.. वो लखनकी ओर खीचतीही जा रहीथी.. ओर लखनके लीये रमाकी तडप ओर बढने लगी..

आज रमाको पहेली बार भानुके अलावा कीसी दुसरे मर्दके लीये बैचेनी हो रहीथी.. तभी लता सरलाके पाससे उठकर कीचनमे चली गइ.. तो रमा उनकी ओर देखके मुस्कुराने लगी.. तभी लताने रमाको चाइके लीये पुछा.. ओर लखनको देनेकी बात कही तो रमाने लताको वापस बहार भेज दिया ताकी वो लखनको चाइ दे तो लखन चाइ लेनेके बहानेभी उनकी ओर अ‍ेक बार देखले.. या सायद उनसे बात भी करले..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. चाइ बन गइ.. तो ईनको देदु.. उनको जाना हे..

रमा : (हसते) अरे नही.. बस.. अभी बन जायेगी.. आप बहार माजी के पास बैठो मे लेकरही आती हु.. आज हमारे जमाइ होके पहेली बार आये हे.. क्या वो नास्ता बास्ता कुछ करेगे..? तो लेकर आती हु..

लता : (बहार जाते) नही भाभी.. सीर्फ चाइ ही देदो.. हम घरसे चाइ नास्ता करकेही नीकले हे..

कहेते लता वापस बहार आगइ.. तब भानु ओर लखन आपसमे धीरेसे बाते कर रहेथे तो लता सरलाके पास जाकर वापस बैठ गइ ओर भावेसको गोदमे लेकर उनके साथ खेलने लगी.. तब भावेसभी जैसे लताको पहेचान गया.. ओर उनके साथ हस हसके खेलने लगा.. तभी रमा चाइ लेकर आगइ ओर पहेले लखनको देदी. तो लखनने भानुसे बाते करते चाइ लेली ओर रमाने सबको चाइ देदी फीरभी लखनने रमाकी ओर नही देखा..

फीर कुछ देर बात करके लखन ओर भानु वहासे नीकल गये.. लखनने अ‍ेक बारभी रमाकी ओर नही देखा.. तो रमा उनकी ओर देखती ही रही.. तब रमा सब खाली कप लेकर जटसे कीचनमे चली गइ.. ओर उनकी आंख गीली होगइ.. आज जीस तराह लखन उनको इग्नोर कर रहाथा रमा सब समज गइ की लखन उनसे नाराज हे.. उनको पताथा की लखन उनसे क्या चाहता हे.. वो बडीही दुवीधामे फसीथी.. इधर भानु भी लखनके साथ नीकला.. दोनोही खेतोपे आगये..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४०/२

तब खेतोपे पहोंचतेही भानुने कुछ देर वहाके कामका जायजा लीया.. फीर छोटुको लेकर सहेरकी ओर नीकल गया.. ओर लखन गोडाउनकी ओफीसकी ओर जाही रहाथा.. तभी उनके मोबाइलकी रींग बजने लगी.. तो अपना मोबाइल नीकालकर देखतेही मुस्कुराने लगा.. ओर वो कीसीसे बाते करते गोडाउनकी ओर चला गया.. तबतक देवायतभी अपनी कार लेकर राजीवके गांव आगया ओर उसने कारको सीधेही धरपे लेली.. ओर सब लोग अंदर चले गये.. तब..

नीर्मला : (हसते) देवु.. हम थोडा साफ सफाइ करले तबतक आप अपने पापाको लेकर होस्पीटल दीखाकर आइअ‍े.. भावु ओर चंदा इधरसे दुध सब्जीया लेकर आती हे..

कहेते नीर्मला राजीवकी मेडीकल फाइल अंदरसे लेकर आती हे ओर देवायतको देती हे तो राजीव ओर देवायत कार लेकर होस्पीटल चले गये.. तो नीर्मला चंदा ओर मंजु घरकी सफाइ करनेमे लग गइ.. तबतक भावना दोनोके बच्चेको सम्हालके उनके साथ खेलने लगी.. तबतक राजीव ओर देवायत होस्पीटल पहोंय गये.. ओर नाम रजीस्टर करवा दीया तबतक दो पेसन्ट चले गये ओर राजीवकी बारी आगइ ओर दोनो अंदर चले गये..

डोक्टर : (हसते) आइअ‍े आइअ‍े.. ठाकुरसाहेब.. कहो कैसे हो..? क्या कहेते हे राजीव अंकल..? हें..हें..हें..

देवायत : (हाथ मीलाते) बस.. इन्हीको दीखानेके लीये आये हे.. अब आपही चेक करलीजीये..

डोक्टर : (हसते) ठीक हे.. आइअ‍े अंकल इधर लेट जाइअ‍े आपको देख लेते हे..

कहातो राजीव वही अ‍ेक टेबलपे लेट गया ओर डोक्टर उनको चेक करने लगे.. कुछ देर तक राजीवको सभी तराहसे चेक करलीया फीर दोनोही अपनी अपनी जगाहपे बैठ गये.. ओर डोक्टर कुछ लीखने लगा फीर देवायतको अ‍ेक पर्ची देकर फीरसे अ‍ेक सीटीस्केनका रीपोर्ट करनेको कहेते हे.. ओर कुछ दवाइआ लीख देते हे.. तब दोनो वही रीपोर्ट करवाके वापस डोक्टरके पास आते हे तब..

डोक्टर : ठाकुरसाहेब.. इस रीपोर्टको आनेमे आधे घंटेका वक्त लगेगा.. फीर उसे देखकरही मे कुछ केह सकता हु.. अगर आपको यही बेठना हे तो बैठीये..

राजीव : (हसते) बेटा.. हमे अ‍ेक घंटेके लीये कुछ काम हे तो वो नीपटाकर आये..?

डोक्टर : (हसते) जी. अंकल.. जरुर मे यही बैठा हु.. आप आरामसे आइअ‍े..

फीर दोनोही वहासे बहार नीकल जातेहे तब देवायत राजीवकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगा.. तो राजीवने उनको हसते हुअ‍े कारको अ‍ेक वकीलके यहा लेजानेको कहा.. ओर दोनो वकीलके यहा चले गये.. वहा राजीवने वकीलको अपना मकानका पेपर भावनाके नाम करनेको कहा.. तो वकीलने सब जानकारीया लेके पेपर तैयार करदीये.. ओर दोनोको सीधा ४ बजे सब रजीस्टार ओफीपेही बुलालीया.. ओर देवायत राजीव वापस होस्पीटलपे आगये.. तबतक उनकी रीपोर्टभी आ चुकीथी ओर दोनो अंदर चले गये..

डोक्टर : (रीपोर्ट देखते) अंकल.. वैसेतो अभी आपको कोइ प्रोबलेम नही हे.. लेकीन आपको बहुत खयाल रखना पडेगा.. थोडासाभी वजन उठानेके लीये आपको मना हे.. ओर ट्रेसतो बीलकुल नही लेना..

देवायत : (हसते) सुनलीया अंकल.. अब आपको अपना कोइ बीजनेस नही करना.. उस दुकानको कीरायेपे देदो बाकी सब मे देख लुगा.. बस आपतो घरपे बेठकर मोज करो.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) बेटा अ‍ेक बात पुछनीथी.. क्या मे नोर्मल लाइफ तो जी सकता हुनां..? आइ मीन..

डोक्टर : (हसते) अंकल.. मे समज गया.. बस यही केह रहाथा.. की अबतक आप जीस तराह अपनी नोर्मल लाइफ जीते आये हो उसी तराह अब नही जीनी.. अ‍ैसा कोइ काम नही करना जीनकी वजहसे आपका रक्चताप बढे.. आप समज गयेनां.. वरना आपके लीये बहुतही खतरनाक होगा..

राजीव : (थोडा मायुस होते हसते) जी.. समज गया सब.., ठीक हे.. जैसे आप कहे.. मे कोइ ट्रेस नही लुगा..

डोक्टर : (हसते) गुड.. बस मेने जो दवाइ लीखीहे उसे रेग्युलर लेते रहेना.. ओर कुछ पुछना हेतो कहीगे..

राजीव : (खडे होते) नही बस.. थेन्कयु बेटा..

देवायत : (हसते) सर.. आपकी फीस..

डोक्टर : (हसते) अरे कोइ जरुरत नही हे ठाकुरसाहेब.. बस कभी कभी मीलने आते रहीये.. हें..हें..हें..

देवायत : (खडा होते हाथ मीलाते) सर.. अब हमभी हमारे गांवमे अ‍ेक लेडीसके लीये ओर कुछ जनरल ट्रीटमेन्टके लीये अ‍ेक मेटरनीटी होस्पीबल बनवा रहे हे..

डोक्टर : (हसते) कोन्ग्रेच्युलेशन.. इनमे मेरी कोइभी मददकी जरुरत होतो बेजीजक कहेना..

देवायत : (हसते) जी.. थेन्क्स.. मेरी बीवी ही सब देख रही हे.. वोभी लेडीसकी डोक्टर हे..

डोक्टर : (आस्चर्यसे हसते) अच्छा..? कौन..? आपकी बीवी डोक्टर हे..?

देवायत : (हसते) जी.. अभी हमारी सादीको तीन दीन ही हुअ‍े हे.. डो.सृती..

डोक्टर : (आस्चर्यसे चोंकते हसते) कौन..? डो.सृती..? क्या वो आपकी बीवी हे..? हें..हें..हें.. तबतो मेरी क्या मददकी जरुरत हे..? बस वोही सब सम्हाल लेगी.. हें..हें..हें.. (जोरोसे हसते) आपके खानदानमे अच्छा हे.. आपतो अ‍ेक रोयल फेमीली हेतो दो दो तीन तीन सादीया कर सकते हो.. यहातो अ‍ेकभी बडी मुस्कीलसे सम्हल पाती हे.. हें..हें..हें.. चलो आपकोभी कोन्ग्रेच्युलेशन.. अपनी सभी बीवीओको लेकर कभी हमारे घर आइअ‍े..

देवायत : (हसते) स्योर.. आउगा कभी.., चलो.. बाय..

फीर दोनोही अपने घर चले गये.. तब चंदा ओर भावना दोनोही दुध सब्जीया लेकर कीचनमे खाना बना रहीथी ओर नीर्मला ओर मंजु दोनो बच्चेको लेकर गपे लगा रहीथी.. तब देवायत ओर राजीव घरपे आगये.. तो दोनोकी सब जाननेकी उत्सुक्ता बढ गइ.. ओर देवायत राजीवकी ओर सवालीया नजरोसे देखती रही.. तब मंजुने खडी होकर दोनोको पानी पीलाया.. ओर वापस आकर बैठ गइ.. तब मंजुसे नही रहा गया..

मंजुला : (हसते) देवु.. अब बताभी दो डोक्टरने क्या कहा..? हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) अरे बेटी कुछभी नही हे.. सब ओलराइट ओके हे.. पुछलो देवुसे..

देवायत : (हसते) हां मंजु.. सब सही हे.. लेकीन पापाको कीसीभी तराहका ट्रेस नही लेना.. डोक्टरने उनको वजन तक उठानेको मना करदीया हे.. बाकी सब रीपोर्ट नोर्मल हे..

मंजुला : (हसते खुस होते) चलो गंगा नहाये.. पापा अब आप अपनी दुकानको कीरायेपे देदो..

राजीव : (हसते) हां बेटा अब वोही करना हे.. ओर हमे चार बजे रजीस्टार ओफीसभी जाना हे हमने वकीलसे मीलकर सब पेपर तैयार करवा दीये हे.. तो साथमे सबको आना हे.. सभीकी साइन चाहीये..

मंजुला : (हसत) अरे हां.. हम सब चलेगे.. फीकर मत कीजीये.. अच्छा हुआ सब आजही नीपट गया..

चंदा : (हाथ पोछते बहार आते) चलो आप दोनो फ्रेस होकर आजाओ.. खाना रेडी हे.. देवु.. क्या कहा डोक्टरने..?

मंजुला : (मुस्कुराते) दीदी.. सब रीपोर्ट नोर्मल हे.. सब ओके हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (मुस्कुराते) चलो अच्छा हुआ.. अब कोइ टेन्शन नही.. जाइअ‍े फ्रेस होकर आइअ‍े..

सब लोग खाना खाने बैठ गये.. आज नीर्मला जानबुजकर राजीवके पास बैठ गइ.. कल रात जबसे मंजुसे सब बाते करते जानलीया.. तबसे नीर्मलाने राजीवको भरपुर प्यार देनेके लीये मन बना लीयाथा.. तो नीर्मला अपने हाथोसेही राजीवको खाना खीलाने लगी.. तो चंदा मंजु भावु सब सोक्ट होते हसते हुअ‍े नीर्मलाकी ओर देखने लगी..

नीर्मला : (सरमाते मुस्कुराते) कमीनीओ.. अ‍ैसे क्या देखके हस रही हो.. क्या मे मेरे पतीको अपने हाथोसे खाना भी नही खीला सकती..? हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते) मोम.. बीलकुल खीला सकती हे.. हें..हें..हें.. बस आपको कभी अ‍ैसे पापाको खाना खीलाते देखा नही इसीलीये.. हें..हें..हें..

दोनोही बात कर रहेथे.. तब भावना देवायतका पैर अपने पैरसे सहेलाने लगी.. ओर देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते स्माइल करती रही.. तो देवायतनेभी अपनी नजरोसे उनको बादमे मीलनेकी बात करली.. तो आज राजीवभी रोमान्टीक होते नीर्मलाके पांवपे अपने पैर रख देता हे.. ओर उसे हल्केसे सहेलाने लगया हे.. तब नीर्मला बहृतही सर्मसार होगइ.. अ‍ैसेही सब मस्ती मजाक करते खाना खाने लगे..

तो आज सुबह गांवमेभी क्या हुआ देखते हे.. जैसेही सामतके घरपे सबने चाइ नास्ता करलीया तो सामत ओर बंसी अपने कामसे घरसे नीकल गये.. तब जयाने अपनी बेटी जागृतीको अपनी सहेल जयश्री याद कर रहीहे कहेते सानमनेसे उनके घरपे मीलनेके लीये भेज दीया..

तो जागृती बहुतही खुस होते अपनी सहेलीके घर चली गइ.. जब जया ओर सांती दोनोही घरमे अकेली रेह गइ.. तब जयाने सांतीको अपने रुमसे बुलाया.. तो सांती भी जी भाभी.. कहेते उनके रुममे चली गइ.. तो सांतीके अंदर आतेही जयाने अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया तो सांतीको कुछ अजीब लगा तभी..

जया : (दरवाजा बंध करते ही गुस्सेसे) क्युरी करमजली.. छीनाल.. तुजे अपनी आगको मीटानेके लीये मेरा ही बेटा मीला.. ओर कोइ नही मीला..? जो मेरे बेटेको फसाके बैठी हे..? बोल दोनोके बीच ये कबसे चल रहा हे..

सांती : (थोडा हडबडाते) भाभी.. क्या हुआ हे..? मेने क्या कीया..? आप जरा अपना मुह सम्हालके बोलीये.. आप कीसके बारेमे बात कर रही हे..?

जया : (अपनी कमरपे दोनो हाथ रखते) अच्छा.. मेने क्या कीया..? कल रात मेरे बेटेके रुममे तुम क्या कर रहीथी..? मेने देखली तुम दोनोकी रासलीला.. बडी ही उछल उछलके बंसीसे चुद.. मुजे सब पता हे दोनो अंदर क्या कर रहेथे.. बोल..?

तब सांती सबकुछ समज गइ.. ओर उसने अब अपनी भाभीसे लडनेका ओर उसे सबकुछ खुलके बतानेका फैसला कर लीया.. क्युकी उनके ओर बंसीके बीचके रीस्तेके बारेमे जयाको पता चल गयाथा.. अब बातको छुपानेका कोइ फायदा नही था.. आज दोनो बुआ भतीजेका उनकी भाभीके पास भांडा फुट ही गया.. तो सांतीने आज खुलकर अपनी भाभीसे बात करनेका फैसला करलीया.. तब..

सांती : (सरमाते मुह घुमाते) भाभी.. इसमे मेरी कोइ गलती नही हे.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेको प्यार करते हे.. तो इसमे हमने क्या गलत कीया..? हम दोनो सादी करने वाले हे.. अच्छा हुआ आपको सब पता चल गया.. वरना इस बारेमे बंसी खुद आपसे बात करने वालेथे..

जया : (अपना सर पकडते) हे भगवान.. ये लडकी क्या बोल रही हे..? कमीनी.. भतीजा हे वो तेरा.. तुजे जरासी भी सरम नही आइ..? कैसे बाते कर रही हे जैसे बंसी तेरा पती हो.. अगर तुजे अपनी आग ही मीटानीथी.. तो बहार दुसरे मर्दको पकड लेती.. मेरे बेटेको क्यु फसाया..?

सांती : (मुह घुमाते) भाभी.. मुह सम्हालके बोलीये.. मे कोइ रंडी नही हु समजी..? जो बहार कीसीके साथ मुह मारती फीरु.. ओर मेने बंसीको नही फसाया.. बंसी खुद सामनेसे आकर मुजसे अपने तनकी प्यास बुजाता हे.. ओर वो मुजसे अपने प्यारका इजहार कर चुके हे.. वो मेरे अलावा कीसी ओरसे सादी करनेको मना कर रहे थे.. तो मे क्या करती..?

जया : (अपना सर पकडते) सांती.. सांती तुम समजती क्यु नही..? वो तो लडका हे.. उनको अच्छे बुरे ओर रीस्ते नातेका क्या पता..? लेकीन तुमतो समजदार हो.. तुजेही समजना चाहीये.. ओर उसे समजाना चाहीये..

सांती : (आंखमे आंसु आते) क्या समजाउ..? हंम..? उसे मे क्या समजाउ..? वो कोइ दुध पीता बच्चा तो हे नही..? क्या कहेती मे उसे..? की मे तेरी बुआ हु.. तुम मेरे साथ अ‍ैसा गलत काम मत करो.. हंम..? रातकोही मेरे कमरेमे घुस आया.. मेने उसे बहुत बार मना कीया.. मेने उसे बुआ भतीजेका हवाला देकर खुब कहा.. की हम बुआ भतीजा हे.. हमारे बीच अ‍ैसे रीस्ते नही होते.. मे उसे समजाती रही.. लेकीन उसने मेरी अ‍ेक नही सुनी.. ओर तबतक तो.. वो..

कहेते सांती दोनो हाथमे अपना चहेरा छुपाके फुटफुटकर रोने लगी.. तब जयाकोभी अंदेसा होगया की सांतीके साथ जरुर उनके बेटेने ही जबरदस्ती की होगी.. बंसीनेही सांतीके साथ कुछ गलत कीया होगा.. सांतीकी बात सुनकर जयाका गुस्सा थोडा सांत होगया.. ओर वो सांतीके पास आकर बेडपे बैठ गइ.. ओर सांतीके सरपे प्यारसे हाथ रखके चुप करानेकी कोसीस करने लगी.. तब जाके सांती थोडी सांत होगइ.. तब..

जया : (थोड सांत होते धीरेसे) सांती.. मुजे सब सच बता.. क्या कीया बंसीने तेरे साथ..? कुछ गलत कीया हे क्या..? तेरे साथ उसने कोइ जबरदस्ती की..? हंम.. बता.. मे उस कमीनेकी चमडी उखाड दुगी..

सांती : (अपने आंसु पोछते) भाभी.. छोडीयेना ये सब बात.. अबतो मेने भी इस रीस्तेको अक्सेप्ट करलीया हे ओर आपभी करलीजीये.. मे नही चाहतीकी हमारे घरकी इजत मीटीमे मील जाये.. भाइ गांवके मुखीया हे.. अगर उनके बेटेके बारेमे बहार बात फैल गइतो उनकी क्या इजत रेह जाती..? मेरे साथ जोभी कुछ हुआ हे मे उसे भुल चुकी हु..

ओर आपभी जाननेकी कोसीस मत करे.. बस हमे हमारे हालपे छोड दीजीये.. अब मे नही चाहतीकी बंसीको कोइ कुछ कहे.. आपभी अब बंसीको कुछ मत कहेगी.. क्युकी अब वो मेरे सबकुछ हे.. हम दोनो बहुत आगे बढ चुके हे.. ओर मे ओर बंसी अब अ‍ेक दुसरेको समर्पीत हो चुके हे.. हम दोनोने अ‍ेक दुसरेको अपना लीया हे..

जया : (अपना सर पकडते बेडपे बैठते) सांती.. मुजे माफ करदे.. तेरे साथ कुछतो उसने गलत कीया हे.. अब तुम ना कहेती.. तोभी मुजे सब अंदाजा होगया हे.. गलती तेरी नही हे.. नही जानना मुजे.. लेकीन ये तो सोच.. अगर तेरे भाइको इन सब बातका पता चलेगा तो उनपे क्या बीतेगी..? कभी सोचा हे..?

सांती : (फीकी मुस्कानके साथ) भाभी.. अगर यही बात मे आपसे कहुतो..? क्या आपने कभी सोचा था..?

जया : (जेंपते थोडा डरते) सांती.. तुम कहेना क्या चाहती हो..? क्या कीया हे मेने.? जो तुम अ‍ैसा बोल रही हो..? अपना पाप ढकनेके लीये तुम मुजपे इल्जाम लगा रही हो..?

सांती : (मुस्कुराते) नही भाभी.. पाप ढकनेसे नही छुपते.. वोतो कभीभी सबके सामने उजागर होही जाते हे.. अभीतो मेने कुछ कहा भी नही.. ओर आप इतना कुछ बोल गइ.. सचाइ जीतनी भी छुपालो. अ‍ेकना अ‍ेक दीन जुबापे आही जाती हे.. आप सीर्फ इतना जानलो..की मुजे आपके बारेमे सबकुछ पता हे.. बस.. मुजे ओर कुछ नही कहेना..

जया : (आंखमे आसुके साथ धीरेसे) सांती.. तुम क्या केह रही हो..? मेरे बारेमे क्या जानती हे तु..?

सांती : (उनके पास सटकर बैठते कंधेपे हाथ रखते धीरेसे) भाभी.. मे आपसे इस बारेमे बात करने वाली थी.. अच्छा हुआ अभी घरपे कोइ नही हे.. मुजे कलही आपके ओर रमेशभाइके बारेमे पता चला.. सीर्फ मुजेही नही.. उनकी बीवीको भी आप दोनोके बारेमे सब पता हे..

इतना सुनतेही जया अपने हथेलीओमे अपना चहेरा छुपाके फुटफुटके रोने लगी.. तो सांती उनको हग करते उनकी पीठको सहेलाते सांत करती रही.. कुछ देरके लीये सांतीने जयाको रोने दीया फीर उसे पानी पीलाकर सांत कीया.. जीस जया आज सांतीको बदचलनका सर्टीफीकेट देने वालीथी उसी सांतीने आज जयाको भी आयना दीखा दीया.. तो जया बीलकुलही सांत हो चुकीथी.. तब..

जया : (धीरेसे नजरे जुकाते) सांती.. मुजे माफ करदे.. मेरे कदम कुछ दिनोसे गलत जगाहपे पड गये हे.. तु केह रहीथी.. की उनकी बीवीको पता हे.. तो ओर कीस कीसको पता हे..?

सांती : (धीरेसे) भाभी.. दुसरोका मुजे नही मालुम.. लेकीन कलही मुजे उनकी बीवी चारुभाभी मीली थी.. उसने कहा की अपनी भाभीको समजादे की मेरे पतीसे दुर रहे.. वरना गांवमे कीसीको पता चलातो ना तेरे घरकी इजत रहेगी ना मेरे घरकी.. ओर गांवके बारेमे भी बहुत कुछ बाते हुइ.. भाभी.. अ‍ेक बात पुछु..? मानाकी हम ओरतोकी कुछ तनकी जरुरत हे.. ओर मेतो अ‍ेक विधवा हु.. तो मेरे अ‍ैसे कदम गलत जगाह पे पडे तो लाजमी हे.. लेकीन आप..? आपतो सादीसुधा हे.. फीरभी..?

जया : (नजरे जुकाते धीरेसे) सांती.. तुमतो जानती हो तेरे भाइकी उमरमे ओर मेरी उमरमे कीतना फासला हे.. तकरीबन १४ सालका.. वो अब बुढे हो चुके हे.. वो अब मेरे तनकी आग नही मीटा सकते.. तेरे भाइ अब मुजे वो सुख नही देपाते.. हम पीछले पांच सालसे नही मीले.. इसीलीये मेरे कदम बहेक गये.. लेकीन तेरे साथ क्या हुआ..? क्या मुजे नही बता सकती..? यकीन मान अब ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगी..

सांती : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. ये सब बाते आप मत जानो.. बस अभी इतना पता हे हम दोनो अब अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे.. मानाकी उसने सुरुआतमे गलती की.. लेकीन इतने दिनोसे मेभी पतीके प्यारसे वंचीत थीतो.. बंसीके साथ मीलनसे मेरे तनकी आगभी वापस भडक गइ..

हमारे मीलनके बाद मे रात रात भर बीस्तरपे करवटे लेती रही.. मुजे बार बार बंसीसे दुबारा मीलनेकी इच्छा होने लगी.. ओर बहुत सोचनेके बाद मेने इस रीस्तेको अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. आज हम दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे.. अबतो मेने ओर बंसीने अ‍ेक दुसरेको पती पत्नी भी मानलीया हे..

जया : (मुस्कुराते) बीना सादी..? अगर कुछ उचनीच होगइ तो..?

सांती : (सरमाते हां मे गरदन हीलाते) हां भाभी.. बीना सादी.. क्युकी हमारी सादीको कौन मंजुर करता..? भाभी.. वो मेरा बहुत खयाल रखते हे.. अ‍ेक बीवीकी तराह.. भाभी.. अ‍ेक बात कहु..? चारुभाभीने कहाहे की अब हमारे गांवमेभी बहुत बदलाव होगा.. सब लोग अ‍ैसे रीस्तोमे सादीया करते होगे.. तब आप हम दोनोकी सादी करवा देना.. क्युकी अब वो ना मेरे बीना रेह सकते हे.. ओर नाही मे उनके बीना..

जया : (मुस्कुराते प्यारसे सरको सहेलाते) हंम.. यानीकी अब तुम मेरी बहु बनेगी..? चल ठीक हे.., सांती.. अब कोइ माने या ना माने.. लेकीन अब मे मानुंगी.. आजसे तुम मेरी बहु हो.. लेकीन अभी खयाल रखना.. जबतक तेरे भाइ अ‍ैसे रीस्तेको मानने ना लगे तबतक तुम दोनोको इस रीस्तेको सबसे छुपाना हे.. बादमे तुम दोनोकी सादी करवा दुगी.. अब खुस..? हें..हें..हें..

दोनोही प्यार भरी बाते करती रही तब उन दोनोको पताही नही थाकी जब जयाने सांतीसे बात करनेके लीये जागृतीको आज सामनेसे अपनी सहेली (जयश्री) के घरपे भेजा.. तब जगृती बहुतही खुस होगइ.. ओर अपनी सहेली (जयश्री)के घर जाते बीच रास्तेमे कीसीको फोन करदीया.. ओर जयश्रीके घर जातेही उनको लेकर गांवके बहार अ‍ेक विरानसी जगाहपे चली गइ..

जहा जयश्रीके साथ जागृती दो तीन बार अपने यारको मीलने आइ थी.. ओर यही विरान जगाहपे उनके यारको पहेली बार मीलके प्यारका इजहार कर चुकी थी.. ओर जब दुसरी बार मीलने आइ तब वापस गांव जाते वो अ‍ेक लडकीसे ओरत बन चुकीथी.. जागृतीके बोयफ्रेन्डने दुसरी बार मीलतेही उनसे प्यार करते जागृतीकी कामाग्नीको भडका दीया था.. ओर जागृतीका कौमार्य भंग करदीया था..

फीर तो दो बार ओर वहा जयश्रीके साथ जाकर अपने यारको मीली.. ओर अपने यारसे प्यारका खेल खेलते उनसे अपने तनकी प्यास बुजाकर वापस घरपे आजाती.. ओर आजभी अपनी सहेली जयश्रीको लेकर वही चली गइ.. वो अकेली ना जाते जयश्रीको साथ लेकर जाती.. ताकी दोनो साथ जानेकी वजहसे कीसीको उनपे सक नाहो.. जब दोनोही सहेली वहा पहोची.. तब वहा कोइ नही था.. तब कुछही देरके बाद अ‍ेक बाइक उधरकी ओर आते दीखाइ दीया.. तब जागृतीके चहेरेपे उनको देखतेही लाली छागइ.. ओर वो मंद मंद मुस्कुराने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४१/१

फीर तो दो बार ओर वहा जयश्रीके साथ जाकर अपने यारको मीली.. ओर अपने यारसे प्यारका खेल खेलते उनसे अपने तनकी प्यास बुजाकर वापस घरपे आजाती.. ओर आजभी अपनी सहेली जयश्रीको लेकर वही चली गइ.. वो अकेली ना जाते जयश्रीको साथ लेकर जाती..

ताकी दोनो साथ जानेकी वजहसे कीसीको उनपे सक नाहो.. जब दोनोही सहेली वहा पहोची.. तब वहा कोइ नही था.. तब कुछही देरके बाद अ‍ेक बाइक उधरकी ओर आते दीखाइ दीया.. तब जागृतीके चहेरेपे उनको देखतेही लाली छागइ.. ओर वो मंद मंद मुस्कुराने लगी....अब आगे

जयश्री : (हसते सरमाते) जागु.. देख तेरा यार आगया.. चल मे उधर पीछे छुपकर खडी हु.. वरना मुजे यहा अकेली खडी देखकर कीसीने देख लीया तो सक करेगा.. तुक दोनो फटाफट मीलकर अपना काम नीपटालो हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते हसते) अरे तुमभी अंदर साथ चलनां.. उन दुसरे रुममे चली जाना.. उनकोभी पता हे तुम मेरे साथ होगी..

जयश्री : (मुस्कुराते पीछे जाते) नही.. वो श्रीधर ओर बंसीभैयाका दोस्तभी हे.. उनको भी पता हे मेरे ओर श्रीधर भैयाके बीच रीलेशन हे.. वो मुजे भाभी भाभी कहेकर छेडता हे.. तो मुजेतो उनके सामने बहुत सरम आती हे.. देख वो आगये.. मे पीछे जाती हु.. तुम फटाफट अपना काम नीपटालो..

कहेते जयश्री हसते हुअ‍े पीछे चली गइ.. तो जागृतीभी सरमाके खंडहरके अंदर चली गइ.. तभी अ‍ेक बाइक वहा आकर रुक गइ.. ओर अ‍ेक सख्स बाइक वही रखके अंदरकी ओर चला गया.. तो जागृती अंदरके अ‍ेक रुमके कोनेमे सरमाते इन्तजारमे खडी रही.. उनकी चुत जोरोसे फडफडाने लगी.. उनकी चुतमे पानीका रीसाव होने लगा.. उनकी दोनो चुचीया सख्त होगइ.. जागृतीकी सांसे भारी होने लगी..

वो चाहतीथी की उनका यार आतेही उनकी चुतमे लंड उतारदे..ओर इसे बुरस तराह मसलके चोदले.. क्युकी जबसे जागृती अपने यारसे चुद गइ थी.. तबसे वो बहुतही कामुक लडकी हो चुकीथी.. गांवमे ज्यादातर लोगोका उनकी बहेनके साथ अवैध रीस्ता था.. तब जागृती ये सब जानकर अपने भाइकी ओर ढलने लगी थी.. लेकीन लाख कोसीसके बादभी उनके भाइको रीजानेमे नाकामीयाब रही.. उनका भाइ बंसी उनकी तराफ ज्यादा ध्यान नही देताथा..

ओर वो अपनी बुआको पसंद करता था.. इसी बीच जागृतीने अ‍ेक दो बार उनकी बुआको देर रात उनके भाइके कमरेमे जातेभी देख लीयाथा.. लेकीन वो उन दोनोकी रासलीला नही देख पाइ.. तब वो नीरास होगइ.. उनकी चुदवानेकी इच्छा दिनभर दिन बढने लगी.. ओर अ‍ेक दिन उनका यार उनके भाइ बंसीको मीलने उनके घरपे आया.. तब जागृती ओर उनके यारकी आंख मील गइ.. ओर उसी दिन दोनोने आंखोके इसारोसे बात करली..

फीरतो क्या दोनोही पहेली बार इसी खंडहरम अकेले मीले तब बात चुमा चाटीटे सुरु हुइ.. लेकीन जब दोनो दुसरी बार इस खंडहरमे मीले तब जागृती लडकी नही रही.. वो अ‍ेक औरत बन चुकीथी.. फीरतो ये सीलसीला चल पडा.. आज वो अपने यारको सातवी बार मील रहीथी.. वो सख्सके आते ही दोनो अ‍ेक दुसरेकी ओर दोडके बाहोमे समा गये.. ओर अ‍ेक दुसरेके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगे.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेके चहेरेकी ओर देखने लगे..

जागृती : (सरमाते नजरे जुकाते) उस दिन आपने मुजे मीलनेके लीये कसम क्यु दी..? अ‍ैसेही मीलनेको नही केह सकते..? ओर साथमे नये जीजाजी थेनां..? उनको क्या लगता..? मुजेतो बहुत सरम आ रहीथी.. कैसे सबके सामने मीलते हो.. अगर हमे कीसीने देखलीया होतातो..

लखन : (सरमाते हसते) अरे कोइ नही था वहा.. ओर जीजुको मेरे बारेमे सब पता हे.. तो उनसे डरनेकी जरुरत नही हे.. चल आजा कीतने दिन होगये.. हम नही मीले.. मेरी सादीसे पहेलेही मीलेथे..

जी..हा.. ये यार ओर कोइ नही था हमारे लखनभैया थे.. जीस दिन धिरेनके साथ गांवमे घुमने गयेथे तबही जागृतीको उनके घरके पास मीले थे.. ओर उसी दिन दोनोने मीलनेका तैय कीयाथा.. ओर आज जब मौका मीला तो जागृतीने लखनको फोन करके उनकी तैय की हुइ जगाहपे मीलनेके लीये बुला लीया.. दोनोही अ‍ेक दुसरेको पागलोकी तराह चुमने लगे.. तब लखनने जागृतीके बुब्सको अपनी गीरफ्तमे ले लीया ओर उनके होंठ चुमते मसलने लगा..

जागृती तो पहेलेसे ही कामाग्नीमे जल रही थी.. वो लखनसे चुदवानेके लीये पुरी तराह तैयार थी.. तभी अचानक जागृती लखनकी ओर वासना भरी नजरोसे देखते उनके सर्टके बटनको खोलने लगी.. फीर अपना पायजामा नीचे घुटनो तक करके नीचे जमीनपे अपनी चुनरी बीछाके उनपे लेट गइ.. ओर लखनभी अपनी पेन्ट घुटनो तक नीचे करते जागृतीपे लेट गया तब जागृतीने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके होठोको मुह खोलके चुसने लगे..

जागृती : (अ‍ेक हाथसे लंडको पकडकके चुतपे घीसते) लखन.. प्लीज.. इसे जल्दीसे अंदर डाल दीजीये.. अब नही रहा जाता.. मे कबसे इसे अंदर लेनेके लीये तडप रहीथी.. मुजे आपका ये हथीयार बहुत पसंद हे.. मुजे जल्दी घर भी जाना हे.. ये तो आपने उस दिन कसम द दी.. तो आना पडा.. अब चोद लीजीये मुजे..

कहेते लंडको चुतपे घीसते लव होलमे फसा देती हे.. ओर लखनके गलेमे हाथ डालकर उसे अपने तनसे चीपका लेती हे.. ओर लखनने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड जागृतीकी चुतमे उतार दीया तब जागृतीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. तब चीखकी आवाज सुनतेही बहारकी ओर अ‍ेक खीडकी जैसे खुली जगाहसे पीछे खडी जयश्री अंदरकी ओर देखने लगी.. तब लखन जागृतीको तनसे पुरी तराह चीपकते अपनी कमर हीलाते उनको चोद रहा था.. ओर जागृती आधी आंख चडाते मदहोसीमे लखनसे चुदवा रहीथी..

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जीसे देखतेही जयश्रीकी काम वासना भी भडकने लगी.. ओर वो वहीसे अंदरकी ओर देखते अपनी कपडोके उपरसे ही अपने भाइ श्रीधरको इमेजींग करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.. तब कुछही देरके बाद अंदरकी ओर लखन ओर जागृतीके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. तबतक लखनने अ‍ेक बार जागृतीको जडा दीयाथा.. तबभी लखन अभीभी जागृतीको हाथके बल उचा होकर जोरोसे चोद रहाथा.. तब जागृती हल्केसे चीखते जोरोसे सीसकारीया करते लखनका साथ दे रहीथी..

जागृती : (लडखडाती आवजमे चुदवाते) ल..ख..न.. आइ.. ल..व.. यु.. बस.. बस.. धी..रे.. चो..दो.. बस.. दर्द हो..ता.. हेअअअइइइइइ.. सीइइ आइ.. आह आह आह..इइइइइइ बस.. बस.. ओर नहीइइइइ...

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लखन : (लडखडाती आवाजमे) बस.. डार्लींग.. हो गया.. क्या मृ्त चुत हे तेरी.. आइ.. मे.. ग..या..इइइइ

ओर अचानक लखन जागृतीके तनसे चीपक गया तो जागृतीने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनकी पीठ जोरोसे सहेलाने लगी.. तभी लखनका लावा जागृतीकी चुतमे पीचकारीया मारते चुतको भरते फुट पडा.. तो जागुतीभी लखनको जोरोसे बाहोमे भीचते साथमे जडने लगी.. ओर कुछही देरमे दोनो सांत होगये.. दोनोही पसीनेसे तरबोर हो चुके थे.. तब लखन जागृतीके सीनेपे ढेर होकर पडाथा ओर जागृती उनकी पीठ धीरे धीरे सहेलाते अपनी सांसोको दुरस्त कर रहीथी..

तो बहारकी ओर जयश्रीभी अपनी चुतमे उंगली डालकर जोरोसे हीलाते जड चुकी थी.. ओर अपनी चुतको साफ करते अपने कपडे सही कर रहीथी.. तभी लखन जागृतीके उपरसे हट गया ओर अपना लंड साफ करके अपने कपडे पहेनने लगा.. तो जागृती बडी मुस्कीलसे बैठ गइ..

ओर बैठेही अपनी चुतको साफ करने लगी.. फीर धीरेसे खडी होगइ.. तो उनके पैर लडखडाने लगे.. तब लखनने मुस्कुराते उनको संभाला तब जागृती खुब सरमाइ.. ओर अपने कपडे पहेनने लगी.. जैसेही कपडे पहेनलीये लखनने उनको अपनी बाहोमे भीच लीया..

जागृती : (सरमाते धीरेसे) लखन.. तुम बहुत गंदे हो.. आजतो मुजे दो दो बार जडाके मेरी हालतही खराब करदी.. आज आप कीतने जोरोसे चोदते थे.. मुजे घर जाते ही आइपील लेनी पडेगी.. वरना कुछ गडबड हो गइतो.. हमारा भांडा फुट जयेगा..

लखन : (होंठ चुमते) हंम.. तो चली आना.. मे तुजे भी अपना लुगा अ‍ेक बीवी ओर सही.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते हसते) मेरे बापुको देखा हे..? मुजेतो मार ही डालेगे.. ओर बंसी भी तो आपका दोस्त हे.. लखन.. अब हम वापस कब मीलोगे..? मे आपको छोडना नही चाहती..

लखन : (होंठ चुमते) देखता हु अब.. भाइ मुजे ओर तेरी नइ भाभीको सहेरमे रहेने भेज रहे हे.. तो मे कुछ केह नही सकता.. अगर तुजे मीलनेका दिल करेतो फोन करके बता देना हम वही कीसी होटेलमे मील लेगे..

जागृती : (मायुस होते धीरेसे) क्या सहेरमे हमेसाके लीये जा रहे हे..? तो पहेले बताया क्यु नही..? अब मे यहा आपके बीना क्या करुगी..?

लखन : (हसते) हंम.. मुजेभी कहा पताथा.. भाइसे दो दिन पहेलेही पता चला.. छोड सब.. जागु आज मुजे तुमसे कुछ कहेना हे..

जागृती : (मुसकुराते सामने देखते) हंम.. कहो.. क्या कहेना हे..

लखन : जागु.. मे तुमसेभी सादी करना चाहता था.. लेकीन अब हम सादी नही कर सकते.. क्युकी तुजे कोइ ओर भी चाहता हे.. वो तुजे हर हालमे पाना चाहता हे.. ओर वो मेरा खास दोस्त भी हे.. तो मे उनकी खातीर तुमसे सादी नही कर सकता..

जागृती : (सोक्ट होते आस्चर्यसे मुह फाडके देखते) लखन.. क्या केह रहे हे आप..? आपका कौनसा दोस्त हे जो मुजे चाहता हे..? जीनकी खातीर आप मुजे छोडनेकी बात कर रहे हे.. मे आपको नही छोडुगी.. भलेही आप मुजसे सादी मत करो.. लेकीन मुजे कीसी ओरसे सादी नही करनी.. कौन हे वो..?

लखन : (मुस्कुराते बाहोमे भीचते) थेन्क्स जागु.. आइ लव यु.. मुजे तुमसे यही उमीद थी.. मे भी तुमको नही छोडना चाहता.. लेकीन मे उनकी बातभी नही टाल सकता.. इसीलीये मेने उनके दिलकी बात तुजे बतादी..

जागृती : (अलग होतेही लखनकी आंखोमे देखते) लखन.. लेकीन आपका वो दोस्त हे कौन..?

लखन : (मुस्कुराते) तेरा भाइ.. बंसी.. जागु वोभी तुजे पाना चाहता हे.. हम मेसे ज्यादातर दोस्तोने उनकी बहेनको ही प्यार कीया हे.. तो अब वोभी तुजे पाना चाहता हे..

जागृती : (आस्चर्यसे सोक्ट होते) क्या..? बंसीभैया..? क्या उसने खुद ये बात आपसे कही हे..? मुजेतो यकीन ही नही होता.. लेकीन वोतो हमारी बुआको चाहते हे.. तो फीर मुजसे.. आइ मीन.. वो मुसजे कैसे प्यार कर सकते हे..?

लखन : हां जागृती.. इस बारेमे कलही हम दोनोके बीच बात हुइ हे.. उनको हम दोनोके रीलेशनके बारेमे नही पता.. जागु.. वो मेरा दोस्त हे.. अब तुमही कहो.. हम क्या करे..?

जागृती : लखन.. आपनेतो मुजे दुवीधामे डाल दीया.. अगर वो मुजसे चाहते थे तो मुजसे बात करके पहेलेही बता देते.. लखन.. मे आपकोभी चाहती हु.. मे आपको नही छोड सकती.. अब आपही कोइ रास्ता नीकालो.. इस बारेमे सोचनेके लीये मुजे थोडा वक्त चाहीये.. आप इस बारेमे अभी उनसे कोइ बात मत करना..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. क्या आज अकेली आइ हो..? तेरी सहेली आइ मीन मेरी भाभी साथमे नही हे..? हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते हसते) वो मेने उनको पीछे भेज दीया हे.. आप जाओगे तब हम दोनो चली जायेगी.. पहेले आप नीकलो.. थोडी देरके बाद हमभी नीकल जायेगी.. आपसे बहुत सरमाती हे.. कहेती थी लखन मुजे भाभी भाभी कहेकर छेडता हे.. हें..हें..हें..

लखन : (होठ चुमते जाते हसते) जागु.. वो मेरी भाभी ही हे.. उनको कहेना घर जातेही अपने भाइ श्रीधरसे चुदवाले.. वो हमे बहारसे खीडकीसे हमारी चुदाइ देख रहीथी.. तो गरम होगइ होगी.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते हसते अ‍ेक मुका मारते) जाओ जाओ.. तुम कीतने कमीने हो.. उनको भी देख लीया.. कही जनाबका इरादातो नेक हेनां..? हें..हें..हें..

लखन : (हसते जाते) हां.. मेरे दोस्तकी बहेन ओर बीवी हे.. मे उसे अपनी भाभी मानता हु.. चल बाय.. (खीडकी को ओर देखते हसते) जयश्रीभाभी.. अब आजाओ मेतो जा रहा हु.. हें..हें..हें..

कहातो जयश्री लखनके मुहसे भाभी सुनकर बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर लखनभी जोरोसे हसते हुअ‍े वहासे चला गया.. तब बुलेटकी आवाज कम होतेही जयश्री हसती हुइ आगेकी ओर आगइ.. तबतक जागृतीभी सब कपडे पहेनकर सही होकर उनका इन्तजार कर रही थी.. आज लखनकी बातोने उनको जंजोरके रख दीया.. अ‍ैसा नही था की वो बंसीको पसंद नही करती थी..

सुरुआतमे वो बंसीको ही पाना चाहती थी.. लेकीन तब बंसी ओर उनकी बुआका प्यार उफानपे था.. इसी वजहसे बंसीने जागृतीपे ध्यान नही दीया.. ओर जागृतीने लखनको सेट करलीया.. ओर आज अ‍ेक बार फीर बंसीकी ओरसे उनके दिलकी बात लखनके जरीये जागृती तक पहोंच गइ.. तब जागृती अ‍ेक बार फीर बंसीके बारेमे सोचनेके लीये मजबुर होगइ.. तभी जयश्रीके आतेही वो उनके सामने देखकर सरमाके हसने लगी.. ओर दोनोही गांवकी ओर चलने लगी.. तब जयश्रीने पुछही लीया..

जयश्री : (सरमाते हसते) जागु.. करलीये मजे..? कमीनी आज तुम बहुत चीला रहीथी.. ओर वो जालीम भी आज उछल उछलके कीतने जोसमे तुजे चोद रहाथा.. सालेने मुजेभी गरम करदीया.. मुजे भाभी केह रहा हे.. हें..हें..हें.. क्या केह रहाथा वो..?

जागृती : (सरमाते हसते) जयश्री.. वोभी यही केह रहेथे.. की अपनी सहेलीको कहेना घर जाकर अपने भाइसे चुदवाले.. वो हमे देख रही थी.. हें..हें..हें.. वो तुजे अपनी भाभी मानता हे.. हें..हें..हें..

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) हां मेने सुना.. भाइभीनां.. जरुर उन्होने ही इसे बताया होगा.. सब आपसमे दोस्त जो हे.. जागु.. अ‍ेक बात पुछु..? तुम इनके साथ इतनी आगे बढ गइ हो.. तो क्या तुम दोनो आपसमे सादी करने वाले हो..? आज वो तुमसे काफी कुछ बाते करता रहा.. आज सच बताना..

जागृती : (साथमे चलते सरमाते) पता नही.. इनकी सादी अभी तो हुइ हे.. जालीमने उनकी सादीसे पहेलेही मुजे चोद लीया हे.. अब उनकी सादी होगइ हे तो मे कीस मुहसे उनको सादीके लीये कहु..? अभी कहेता थाकी अब वो हमेसाके लीये नइ बीवीको लेकर सहेरमे रहेने जा रहे हे.. जयश्री अब मे क्या करुगी..? उसने आज मुजसे जो बात कही.. मेतो बडीही दुवीधामे फस गइ हु.. मेरा तो दिमागही काम नही कर रहा.. तुही बता मे क्या करु..?

जयश्री : (आस्चर्यसे देखते चलते) कीस बारेमे..? उनसे तुम्हारी क्या बाते हुइ..? मुजे बता सकती हे..?

जागृती : (सरमाते धीरेसे) जयश्री.. वो केह रहेथे भाइभी मुजे चाहने लगे हे.. वोभी मुजे पाना चाहते हे.. अब तुही बता मे क्या करु..? जब मे उनको पाना चाहती थी तबतो उन्होने मेरे सामने देखा तक नही.. वो ओर बुआ खुब प्यार करते थे.. ओर अभीभी कर रहे हे.. तो फीर वो अचानक मुजसे कैसे चाहने लगे..?

जयश्री : (सामने देखते धीरेसे चलते) जागु.. तो अच्छा हेना.. मेरी अ‍ेक बात मानेगी.. तुम लखनको छोडदे.. ये तो रोयल फेमीली हे.. दो क्या चार सादी करले तो भी इनको कोइ पुछने वाला नही हे.. फीर क्या तुजे वो इतनी बीवीया होते वो ये सुख देपायेगा..? इसीलीये तुजे केह रहीथी..

की तुम तेरे भाइ बंसीके साथ सेट होजा.. कमसे कम बहार कीसी ओरसे कोइ खतरातो नही.. ओर घरकी बात घरमे ही रहेगी.. इस तराह बहार कीसीको मीलने तो नही आना पडेगा.. तुम ओर बंसीभैया घरमेही मीया बीवीकी तराह रेह सकते हो.. जैसे अभी मे ओर श्रीधर भैया रेह रहे हे..

जागृती : (सरमाते धीरेसे) जयश्री तुमने पहेले भी मुजसे ये बात कही थी.. लेकीन लखन मुजे प्यारभी बहुत करता हे.. जालीम कीतना जोसमे करता हे.. मेरा पुरा सरीर तोडके रख देता हे.. तो इनको छोडनेका मनभी नही करता.. ओर तुजेतो सब पता हे.. मेने भाइपे भी बहुत ट्राइ कीया था.. लेकीन उनको मुजसे ज्यादा हमारी बुआपे ज्यादा इन्ट्रेस हे.. भाइतो मेरी ओर देखते तक नही थे.. तु बता तेरा कैसा चल रहा हे.. हें..हें..हें..

जयश्री : (सरमाते हसते धीरेसे) हा..ये.. मेरा श्रीधर.., जागु.. हम दोनो बहुत अ‍ेन्जोय करते हे.. सब सोजाते हे तब भाइ मेरे रुममे आजाते हे.. ओर पुरी रात हम दोनो पत्नी पतीकी तराह प्यार करते हे.. मुजसे चार साल छोटा हे.. जालीम मजाभी बहुत देता हे.. पुरी रात सोने नही देता.. ओर भाइ मुजसे सादीके लीये भी तैयार हे.. बस मेरी ही हामी भरनेकी देरी हे.. वरना वो कबके मुजे लेकर सहेर भाग जाते.. लेकीन हम दोनोही अपने अपने मा बापकी अ‍ेक ही संतान हे.. इसीलीये मे उसे मना कर रही हु..

जागृती : जयश्री अ‍ेक बात कहु..? अगर तुम दोनोके मम्मी पापा नही माने तो तुम दोनो भाग जाओ.. दोनोही अपने मा बापकी अ‍ेकही संतान होतो तुम दोनोसे वो ज्यादा दिन दुर नही रेह सकेगे.. ओर तुम दोनोके रीस्तेको अपना लेगे.. तब तुम दोनो वापस गांवमे आजाना.. वैसे तेरी चाचीतो तेरे ही पक्षमे हे..

जयश्री : (मुस्कुराते धीरे) जागु.. भाइभी वोही केह रहा था.. चल देखती हु.. चाचीतो कबसे केह रहीहे की तुम दोनो भाग जाओ.. मे यहा सब सम्हाल लुगी.. अभी मम्मी पापा ओर चाचा के सामने हमारी पोल नही खुली.. हम दोनोके रीलेशनके बारेमे सीर्फ चाचीही जानती हे.. मुजेतो अभीभी यकीन नही हो रहा.. की खुद चाचीने अपने बेटेके साथ मेरी सेटींग करवाइ हे..

अब जबतक चाचीके अलावा सबको नही पता.. तबतक तो हम दोनोको मजा करने दे.. ओर मेरी मान तुमभी बंसीकी ओर ध्यान दे.. तेरे इतने मस्त दुधु हे.. बस उनको अपने जलवे दीखाती रहेना.. उनका सब काम करना.. अगर वो तुजे सचमे पाना चाहते हेतो अ‍ेक दिन वो तुजे भी अपना लेगा.. मेनेभी भाइको अ‍ैसेही सेट कीयाथा.. हें..हें..हें..

जागृती : (हसते) हंम.. लेकीन उसने बुआसे सादी करलीतो..?

जयश्री : (हसते) तो क्या हुआ..? बंसी तुम दोनोको सम्हाल सकता हे.. वो जवान हे.. उनकी बोडीभी मस्त हे.. ओर उपरसे तुमभी तो उनसे छोटी हो.. देखना अ‍ेक बार तुजे चोद लेगातो वो तेरा भी दिवाना होजायेगा..

जागृती : (कुछ सोचते सरमाते हसते) हंम.. चल देखती हु.. तीन दिन पहेले वंदना मीलीथी.. वो कुछ अ‍ैसाही गांवमे बदलावकी बाते कर रही थी.. लेकीन मेने उनकी बातोमे ज्यादा ध्यान नही दीया.. अब कीमीनी मीलेगीतो सब अच्छेसे पुछ लुगी.. वो कोइ हिमाचलके राजाकी कहानी बता रहीथी..

जयश्री : (हसते) क्या तुजे वो कीताब पढनी हे..? तो वो किताब मेरे पास हे.. चल धरजाते ही तुजे दे दुगी अ‍ेक बार पढ लेना.. क्या मस्त कहानी हे.. कास अ‍ैसा हमारे गांवमे भी होता.. तबतो मे खुलकर मेरे श्रीधरको प्यार करती.. हें..हें..हें.. कमीनेने मुजे भी गरम करदीया.. जातेही भाइको पकडना पडेगा हें..हें..हें..

जागुती : (मुस्कुराते) कमीनी तुमभी बहुत ठरकी होगइ हो.. हें..हें..हें.. जयश्री.. सायद वंदनाभी अ‍ैसाही कुछ केह रहीथी.. की अ‍ैसाही अब हमारे गांवमे होने वाला हे.. अ‍ैसा कुछ केह रहीथी..

जयश्री : (खुस होते हसते) अच्छा..? तबतो सालीको अ‍ेक बार मीलना पडेगा.. चल मे उसे मील लुगी.. फीर तुजे बताती हु वो क्या कहेती हे.. तबतक तु इन कीताबको पढलेना.. ओर हां.. कमीनी आजसेही मीशन भाइपे लगजा.. तेरे दुधतो अ‍ैसा हे कमीनी अ‍ेक बार उसे दर्शन करवादे.. फीर देख.. तेरा भाइतो क्या तेरा बापभी तेरे पीछे लटु होजायेगा.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते हसते अ‍ेक मुका मारते) कमीनी.. कुछतो सरम कर.. क्या क्या बोलती हे.. हें..हें..हें..

दोनोही बाते करते जयश्रीके घरपे आगइ.. तो जयश्रीने जागृतीको वो बुक (ये केसी अनुभुती) पढनेके लीये देदी.. तबतक दो पहोरके १२ बजनेको आयेथे तो जागृती वो बुक अ‍ेक बेगमे छुपाकर अपने घरपे आ गइ.. तब उनकी बुआ ओर उनकी मां हस हसके बाते करते कीचनमे खाना बना रहीथी.. तब दोनोको इतना खुस देखकर जागृतीको भी आस्चर्य हुआ.. ओर वो अपने रुममे चली गइ.. तबतक लखनभी अपनी हवेलीपे आचुका था....
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४१/२

तभी हवेलीपे सीर्फ चंपा ओर रजीया ही थी.. आज उसेभी पताथाकी हवेलीपे कोइ नही होगा तो लखनभी अपनी पहेली बीवीको मीलनेके लीये उत्सुक था.. तो दुसरी ओर रजीयाभी इस घरकी बहुकी तराह सुबहसे ही सज सवरके तैयार हुइ थी.. ओर इनके बारेमे चंपाभाभीकोभी पता था.. तो लखनके आतेही चंपाभाभी रजीयाकी ओर देखते हसने लगी.. ओर धीरेसे कहा..

चंपा : (हसते धीरेसे रोटी बनाते) रजु.. देख तेरा पती आगया.. आज अच्छा मौका हे.. दो पहोरको खाना खातेही तुम उनके पास चली जाना.. मे सब काम नीपडा लुगी.. आज अच्छी तराह मीलले उसे.. फीर पता नही कब उनसे मीलनेका मौका मीले..

रजीया : (सर्मसार होते हसते) हंम.. भाभी.. आज बहुत सरम आ रही हे.. इनकी सादीके बाद आज हम पहेली बार मीलेगे.. तो वो मेरी तो हालतही खराब कर देगे.. तो आप सब सम्हाल लेना..

चंपा : (खुस होते हसते) अरे हां हां.. तुम इधरकी चीन्ता मत कर मे सब सम्हाल लुगी.. जा तेरे पतीको पहेले खाना खीलादे ताकी कुछ ताजा माजा हो जाये हें..हें..हें..

कहातो रजीया सर्मा गइ.. ओर हसते हुअ‍े बहार आगइ देखातो लखन फ्रेस होनेके लीये चला गयाथा.. ओर रजीया कीचनमे आकर उनका खाना नीकालने लगी.. तब कुछही देरमे लखनभी आगया ओर खानेके लीये टेबलपे बैठ गया तब रजीया खाना लेकर बहार आगइ ओर लखनकी ओर देखके सरमाते हसने लगी.. ओर लखनको खाना सर्व कीया.. तभी लखनने देखातो रजीया अ‍ेब बीवीकी तराह तैयार हुइथी.. तो लखनने उनका हाथ पकड लीया तो रजीया सर्मसार होते कीचनकी ओर देखने लगी..

रजीया : (सरमाते धीरेसे दबी आवजमे) लखन.. छोडीये.. क्या कर रहे हे आप..? अंदर चंपाभाभी हे..

लखन : (हाथ छोडके धीरेसे) ओह.. सोरी सोरी.. रजु.. चलना तुमभी साथ खानेके लीये बैठ जाओना.. चंपाभाभीकोभी बुलाले.. जा आज तीनोही साथमे खाते हे..

चंपा : (गरम रोटी लाते हसते) नही लखनभैया आज आपही अपनी इस बीवीके साथ खालो.. मे बादमे खा लुगी.. हें..हें..हे.. रजीया.. तुम भी बैठजा.. मे तेरा खाना लेकर आती हु.. आज कीतने दिनोके बाद तुम दोनो मीया बीवी साथमे बैठकर खाओगे.. हें..हें..हें..

लखन : (सर्मसार होते हसते) भाभी.. आप.. क्या.. आपको सब पता हे..? आइ मीन..

चंपा : (हसते) अरे आप गभराये नही.. हम सबको पता हे.. बस सीर्फ आपकी नइ बीवीको नही पता.. इसीलीयेतो मंजुभाभी इनको आपके साथ सहेर भेज रही हे.. हें..हें..हें..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) रजु.. भाभी क्या केह रही हे..? क्या ये सच हे..?

रजीया : (सरमाते हांमे गरदन हीलाते) हां लखन.. मंजुभाभीने सबको बता दीया हे.. ओर मुजे अपनी देवरानीके रुपमे अ‍ेक्सेप्टभी करलीया हे.. बस.. सीर्फ थोडे दिनके लीये मुजे वेइट करनेको कहा हे.. अभी लतादीदीको इस बारेमे कुछ भी मालुम नही हे.. तो ध्यान रखीयेगा..

चंपा : (हसते) हां.. लखनभैया रजु ठीक केह रही हे.. रजु.. तुमभी बैठजा मे खाना लेकर आती हु..

तब रजीया सरमाते वही बैठने लगीतो इखनने उसे हाथ पकडके अपनी गोदमे खीचलीया तो रजीया बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर लखनकी गोदसे जटसे उठ गइ.. ओर उनकी बगल वाली चेयरपे बैठ गइ.. तब चंपाभाभीने दोनोको खाना दीया.. तो आज पहेली बार लखन रजीयाको अपने हाथोसे खीलाने लथा तो रजीयाभी लखनको अपने हाथोसे खीलाने लगी.. तब कीचनकी खीडकीसे चंपाभाभी दोनोको प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. ओर उनके लीये गरमा गरम रोटीया बनाती रही..

लखन : (धीरेसे) रजु.. मंजुभाभी तुजेभी हमारे साथ सहेर भेज रही हे.. तो क्या इसीलीये..?

रजीया : (सरमाते धीरेसे) हां लखन.. भाभी चाहती हेकी मे अपने पतीके साथ रहु.. लेकीन वहा हमे लतादीदीसे छुपकर पती पत्नी बनके रहेना पडेगा.. क्या वहा मुजे प्यारतो करोगेनां..?

लखन : (बैठेही बाहोमे भीचते) रजु.. तुमनेतो मेरी जींदगी सवरदी हे.. तुम मेरी पहेली बीवीहो.. ओर हमेसा मेरी पहेली बीवीही रहोगी.. अगर मंजुभाभीने तुजे अ‍ेक्सेप्ट करलीया हेतो अब हमे कीसीसे नही डरना.. हम खुलकर अपनी जींदगी जीयेगे..

रजीया : (धीरेसे) नही लखन.. जबतक लतादीदी पुरी तराह मुजे अक्सेप्ट नही करलेती तबतक हम दोनोको अपने रीलेशनको छुपाना हे.. ओर मंजुभाभीने भी यही कहा हे.. वो मौका देखतेही लतादीदीसे बात करलेगी..

लखन : (हसते सर चुमते) हंम.. ठीक हे.. लेकीन ये दो तीन दिनतो लता नही हे.. तो तुम अपने पतीके साथ ही रहेना.. तुम रातको मेरे रुममे आजाना.. ओर वहाभी लता मायके या कही जाये तब मे तुजे तेरे हीसेका प्यार दे दुगा.. तुम फीकर मत करना..

फीर दोनोही खा लेते हे.. तब चंपाभाभी दोनोको उपर आराम करने भेज देती हे.. तब रजीयाभी सरमाते हसती हुइ लखनके साथ चली गइ.. तब चंपाभाभी नीचे खाना खाने बैठ गइ.. जब खाना खालीया तो सब काम नीपटाके हवेलीका दरवाजा अच्छेसे बंध करके अपने रुममे आराम करने चली गइ.. तब उपरकी मंजीलपे रजीया ओर लखन दोनोही कपडे नीकालकर बेडपे प्यारके महा सागरमे डुबकीया लगा रहे थे..

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रजीया अपना टोप पायजामा नीकालकर बेडपे लेटी हुइथी.. ओर लखन उनके बाजुमे लेटकर रजीयाके होठो ओर गलेको चुमते उनकी चुत सहेला रहाथा.. तब रजीया मदहोस होते छटपटा रहीथी.. तभी लखनने रजीयाको पुरी नंगी करदीया ओर उनके पेरोके बीच चला गया.. फीर दोनो हाथ आगे लेजाकर रजीयाके दोनो बुब्सको थाम लीया.. ओर अपना मुह रजीयाकी चुतपे लगाकर चुतके दानेको जीभसे खरोदते बुब्सको मसलने लगा.. तब रजीयासे बरदास्त नही हुआ.. ओर वो चदर पकडते छटपटाने लगी..

रजीया : (मदहोसीमे) ल..ख..न.. बस.. बस.. ओर नही.. अभी नही.. हम रातमे आरामसे करेगेनां..

लखन : (सामने देखते) बस.. डार्लींग अ‍ेक बार.. फीर हम रातमे करेगे.. सीर्फ अ‍ेक बार तुजे चोदना हे..

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लखनभी दो घंटे पहेले जागृतीको चोदकर आयाथा.. तो वोभी रजीयाको उतेजीत करते पुरा समय ले रहाथा.. लेकीन अब रजीयासे बरदास्त करना मुस्कील होने लगाथा.. ओर वो जटसे बेडपे बैठ गइ.. ओर लखनकी ओर वासना भरी नजरोसे देखते उनको बेडपे लीटाने लगी.. ओर अ‍ेक पैर लखनपे डालते उनके उपर उल्टी होकर बैठ गइ.. फीर धीरेसे लंडपे जुकते लंडको अपने मुहमे लेलीया.. ओर दोनो सीक्ष नाइन पोजीसनमे होगये..

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तब अ‍ेक बार फीर लखनका लंड तनके स्टीलके रोडकी माफीक सख्त हो गया.. ओर लखनको रजीया अ‍ैसेही जडादे उनसे पहेलेही लखन.. रजीयाको बेडपे पीठके बल लीटा देता हे.. ओर उनके उपर चड जाता हे.. तब रजीया लखनका लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करदेती हे.. ओर लखनके गलेमे दोनो हाथ डालकर अपने तनसे चीपका लेती हे..

लडकी चाहे कोइभी हो.. लेकीन अपने यारसे चुदवानेका तरीका लगभग अ‍ेकही तराहका होता हे.. यहाभी वही हुआ.. ओर लखनने रजीयाकी चुतपे दबाव बनाते अपनी कमरको जटका दीया.. तो रजीयाकी चुतने लखनके लंडका अच्छेसे स्वागत कीया.. ओर उनके मुहसे हल्कीसी आहे नीकल गइ.. रजीयाने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. आज कितने दिनोके बाद रजीयाको लखनका लंड नसीब हुआथा..

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रजीया लखनके नीचे लेटी हुइ थी.. ओर अ‍ेक हाथ उनके गलेमे डालकर अपने तनसे चीपकाते दुसरे हाथसे उनकी पीठ सहेला रहीथी.. ओर लखन होले होले कमर हीलाते रजीयाको चोदने लगा.. तब रजीया आधी आंख चडाते पुरी तराह मदहोस होने लगी.. तब कुछही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. रजीया कमर उछाल उछालके लखनका साथ देने लगी.. वो चुदवाते हुअ‍ेभी लगातार लखनकी आंखोमे वासनाभरी नजरोसे देखती रही.. ओर कामुक सीसकारीया करती रही..

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काफी देर तक दोनोके बीच धमासान चुदाइ होती रही.. ओर आखीर लखन रजीयाकी चुतमे जडतक लंड घुसाते अपने गाढे पानीसे पीचकारीया छोडने लगा.. तब रजीयाके सरीरमेभी जनजनाहट होने लगी.. ओर उसने जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखनके साथमे जडने लगी.. तब लखन जडतेही रजीयाके सीनेपे ढेर होगया.. अभी अभी वो अ‍ेक घंटेके पहेले जागृतीकी चुदाइ करके आयाथा.. तो लखनकी सारी शक्तीया खतम हो चुकी थी..

ओर वो रजीयाके सीनेपे ही नींदकी आगोसमे चला गया.. तो रजीयाने उसे धीरेसे बाजुमे सुला दीया ओर बैठकर अपनी चुतको साफ करके बाथरुममे चली गइ.. ओर चुतको अच्छेसे पानीसे साफ करके.. धीरसे दरवाजा बंध करके अपने रुममे चली गइ.. ओर चंपाभाभीके पास लेटकर वोभी नींदकी आगोसमे चली गइ.. ताकी कोइ अचानक ना आजाये ओर उनको लखनके साथ अ‍ैसे लेटते ना देखले..

उधर चार बजे राजीवके घरभी सब आराम करके फ्रेस होगये ओर चाइनास्ता करके सब लोग रजीस्टार ओफीस चले गये.. वहा राजीव नीर्मला फीर भावना मंजु ओर चंदाकी साइन लेली गइ.. ओर आखीर राजीवका मकान भावनाके नाम होगया.. तब देवायतने राजीवके कहेनेपे कारको पुरे गांवमे घुमाइ.. तब राजीवने पुरा गांव देख लीया.. जैसे वो ये गांव आखरी बार देख रहा हो..

मंजुला : (हसते) पापा.. आपने हम सबको पुरा गांव घुमा दीया.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) हां मंजु.. इस गांवसे मेरी ओर नीमुकी बहुत कुछ यादे जुडी हुइ हे.. इसी गावने हमको सहारा दीया.. ओर मुजे मेरी नीमु भी देदी.. इस गांवका हमने नमक खाया हे.. तो मुजे बहुत लगाव हे..

चंदा : (सरमाते हसते) देवु.. मेरी, मंजु ओर भावुकी प्राथमीक सीक्षाभी यही हुइ हे.. आज कीतने सालोके बाद मेने अपनी स्कुलको देखा.. वो आजभी अ‍ैसी ही हे.. कुछभी चेन्ज नही हुआ.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) देवु बेटा.. आपसे अ‍ेक रीक्वेस्ट हे.. अगर आपको कोइ तकलीफ ना होतो भलेही मंजु ओर चंदा.. जबतक भावु यहा हे.. उनके साथ रहेती.. कीतने सालोके बाद हम सभी सदस्य साथ मीले हे.. अगर आपभी रुकना चाहोतो आपभी रुक जाओ..

देवायत : (हसते) अरे पापा ये आप क्या केह रहे हे..? भला मुजे क्यु अ‍ेतराज होगा.. आपकी बेटीया हे.. तो आजभी सबपे आपका उतनाही हक हे जो पहेले था.. बेसक आप सबको यहा रोक सकते हे.. लेकीन आपतो जानते हे.. हमारा कारोबार.. बस उसीकी वजहसे मुजे जाना पडेगा वरना मेभी आपके साथ जरुर रुकता..

मंजुला : (प्यारसे देवुकी ओर देखते) देवु.. क्या हम दोनो सचमे वहा रुक जाये..? तो फीर आप हमे वापीस लेनेतो आओगेनां..? मे रजीयाको कहेती हु आपका खाना बना देगी..

नीर्मला : (हसते) अपने देवुकी बहुत चीन्ता करती हो..? बेटी.. वहा रजीया ओर चंपाभाभी दोनो ही हे..

मंजुला : (सरमाते धीरेसे) सोरी मोम.. क्या हेना मेने देवुको बहुत कम अकेले रहेने दीया हे.. इसीलीये..

राजीव : (हसते) अच्छा हे.. मुजे बहुत अच्छा लगा.. बस तेरी मां भी मुजे बहुत कम दुर रही हे.. हमेसा मेरे साथही रही हे..

कहातो नीर्मलाकी आंख गीली होगइ.. आज राजीवकी अ‍ेक अ‍ेक बात उनको अपने अतीतकी याद दीलाने लगी.. जब मंजु उनके पेटमे थी तब रावीवने कैसे अ‍ेक पतीकी तराह उनका खयाल रखाथा.. ओर वो तबही राजीवको पुरी समर्पीत हो चुकीथी.. फीरतो वोभी राजीवका अ‍ेक बीवीकी तराह खयाल रखने लगी.. उनका घरपे आनेका वेइट करना.. आतेही उसे हग करना.. राजीवको प्यारसे खाना खीलाना..

यही बात राजीवके करीब जानेके लीये काफी थी.. ओर अ‍ेक दिन दोनोही बहेक गये ओर अपना होस खोकर मील गये.. उस दिन राजीवने पहेली बार नीर्मलाको अ‍ेक सच्चे पतीका अहेसास करवाते चोद लीया.. दोनोने पुरी रात अपनी सुहागरातकी तराह प्यार कीया..

फीरतो हर रात दोनो मीया बीवीकी तराह साथ सोते ओर अपनी हर राते रंगीन करते.. ओर तोहफेके बदलेमे राजीवने नीर्मलाको फीरसे गर्भवती कर दीया.. ओर भावनाका जन्म हुआ.. वो रावीजको तबतक प्यार करती रही जबतक उनकी जींदगीमे देवायत नही आया.. तभी..

मंजुला : (नीर्मलाके आंसु पोछते धीरेसे) मोम.. क्या हुआ.. मत बहाइअ‍े आंसु.. पापा देख लेगे.. तो उनको दुख होगा..

नीर्मला : (अपने आंसु पोछते मुस्कुराते) नही मंजु.. कुछ पुरानी बाते याद आ गइथी.. ओर कुछ नही..

अ‍ैसेही बाते करते सब लोग वापस घरपे आगये.. ओर सबने देवुको रातका डीनर करके जानेको कहा.. तो देवायतभी रुक गया.. तो भावना बहुत खुस होगइ.. लेकीन आज सबकी हाजरीकी वजहसे ना भावना कुछ कर सकती थी.. ओर नाही नीर्मला.. तभी भावनानेभी तैय करलीयाथा की जबतक वो देसुसे चुदाइ नही करवालेती तबतक वो भानुको छुनेभी नही देगी.. तो भावना ओर चंदा खाना बनानेकी तैयारीया करने लगी..

तब देवायत नीर्मला ओर राजीव होलमे बैठकर बाते करने लगे.. तभी देवायतको कुछ याद आगया.. ओर उसने रश्मीको फोन कर दीया.. आज हवेलीपे लखनके सीवा कोइ नहीथा.. तो देवायतको पुरा मौका मील गया.. ओर उसने थोडे दुर जाकर रश्मीसे बात करली.. फीर लखनकोभी फोन करके आज नही आनेकी बात करली.. तो लखनभी खुस होगया.. तभी मंजु अपने बच्चेको नीर्मलाको देकर अपना फोन लेकर रुममे चली गइ.. ओर उसने सृतीको फोन कर दीया.. तब सृती अपनी क्लीनीकपे थी..

मंजुला : (फोन लगतेही धीरेसे) हेलो.. सृती..?

सृती : (हसते) हां बोल मेरी कुतीया.. हें..हें..हें.. आखीर अपनी सौतनकी याद आही गइ.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हंम.. सुन.. आज हम सब पापाके घरपे आये हे.. तो पापाने हमेभी यहा रोक लीया हे.. तो मे ओर चंदा दीदी यही रुक गइ हे.. अगर तुम ठीक होगइ हे तो देवुके पास चलीजाना.. या फीर उनको वही बुलाले.. कहेता था कारोबारका बहुत काम हे.. सायद वो नीकल ना सके.. तो तुमही आजा..

सृती : (हसते) हंम.. मतलब मुजे हमारे पतीको सम्हालना हे.. कोइ बात नही.. वैसेभी चार दीन होगये हे.. तो ठीकतो हो गइ.. ओर उनको मीलनेकाभी बहुत मन कर रहा हे.. पता नही जालीमने कैसा प्यार कीया.. मंजु.. अ‍ेक बात कहु.. अब मे देवुके बगैर नही रेह सकती.. उनको मीलनेका बहुत मन कर रहा हे..

मंजुला : (हसते) हां.. पता हे मुजे.. इसीलीयेतो केह रहीहु.. जब कोइ अ‍ेक बार उनसे मीलले तो उनसे दुर रेह ही नही सकती.. तो क्या सोचा तुमने..? मेतो कहेतीहु भुमी आंटीको लेकर आजा.. वैसेभी कल सेटरडे तो हे..

सृती : (सरमाते हसते) हंम.. चल देखती हु.. कल दो पहोरके बाद नीकल जाउगी.. अगर मम्मी साथ आना चाहेतो ले लुगी.. वरना अकेली चली जाउगी.. बाकी तु बोल.. अब कैसीहे अंकलकी तबीयत..

मंजुला : (थोडा धीरेसे) सृती.. सुन.. हम इसीलीये यही रुके हे.. तुम भुमी आंटीको लेकर हमारे घर आजा.. बस अभी ओर कुछ नही केहना.. ओर सुन..? इस बारेमे अभी कीसीको कुछभी मत कहेना.. तुम समज गइनां..? हमारे देवुको भी नही.. सायद पुनोकोभी पता चल गया होगा.. हो सकता हे वोभी कल वही आजाये.. देवुको कहेना भुमीआंटीको यही छोडजाये.. फीर तुम हमारे पतीको अच्छी तराह मीललेना..

सृती : हंम.. चल देखती हु.. मे कल दोपहोरके बाद खाना खाके मम्मीको लेकर नीकल जाउगी.. अगर कहोतो सीधे वही आजाये..?

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. अभी हमारे घरपे रहेना.. देवुभी आज डीनर करके यहीसे नीकल जायेगा.. तब वहा सीर्फ तुम दोनो ओर पुनो ही होगे.. समज गइनां.. कल तुम ओर हमारी सौतन पुनोही होगी.. तुम दोनो मीलकर लुटलो हमारे पतीको.. पुनोभी सादीके बाद देवुको नही मीली.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) कीतनी कमीनी हो.. अ‍ैसी सीचुअ‍ेशनपेभी तुजे मजाक सुजता हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) नही सृती.. मे कोइ मजाक नही कर रहीहु.. येभी हमारे जीवनका अ‍ेक हीस्सा हे.. तु अभी नही समजेगी.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. चल अब मे रखती हु.. फीर तुमसे बात करुगी..

फोन रखतेही मंजु सबके पास आकर बैठ जाती हे.. तब नीर्मला राजीवके बगलमे उनसे सटकर उनका हाथ थामकर बैठी थी.. ओर सबलोग बातोमे बीजी थे.. तो सृती भी सोचमे पड गइ.. उनको पताथा की मंजु पुनमको सब पता चल जाता हे.. तो वोभी सोचकर कल दोपहोरके बाद जानेकी तैयारीया करने लगी.. उसने अपनी रीसेपनीस्टको बुलाकर कल दोपहोरके बादके केस ना लेनेकी सुचना देदी..

ओर इसी बीच सहेरमे.. दोपहोरको चार बजते ही धिरेन नीलमके पास जानेके लीये कोइ तगडा बहाना बनाकर मेनेजरकी केबीनमे छुटी लेने चला गया.. तो मेनेजर कुछ काममे थातो उसने धिरेनको सामने बैठनेका इसारा कीया तो धिरेनको मजबुरन वही बैठना पडा.. तो कुछ देरके बाद जब मेनेजर फ्रि हुआ तो धिरेनकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगा..

मेनेजर : हां मीस्टर धिरेन.. कहीये.. कुछ काम था..?

धिरेन : (मुस्कुराते) सर.. वो मकानके लीये ब्रोकरको फोन कीयाथा.. तो उनको मीलने जाना हे.. उनके पास अ‍ेक दो मकान आयाहे तो देखने जाना हे.. तो छुटी चाहीये थी..

मेनेजर : धिरेन.. वैसेभी आपने सादी ओर हनीमुनके लीये बहुत छुटी लेली हे.. तो मे नही दे सकता.. आप बेंक अवरके बाद जाकर मील लेना.. वैसे कैसा मकान चाहीये आपको..? आइ मीन कीतना बडा..?

धिरेन : (मुस्कुराते) सर.. बहुत बडातो नही.. लेकीन मेरे बजेटमे आजाये.. कोइ अ‍ेक या दो बेडरुम वाला.. कभी मम्मी या कोइ महेमान आजायेतो.. काम आयेगा.. वरनातो अ‍ेक ही बेडरुम वाला चलेगा..

मेनेजर : हंम.. देखो अगर आपको कोइ अ‍ेतराज ना होतो अ‍ेक बार हमारा मकान देखलो.. दो बेडरुम फनीर्चर सब रेडी हे.. क्युकी मुजे अब थोडा बडा मकान लेना हे.. अ‍ेक बार देखलो सायद आपको पसंद आजाये..

धिरेन : (खुस होते) स्योर सर.. मुजेभी दो बेडरुम वालाही चाहीये.. ओर आपका मकान हेतो अ‍ेरीया ओर मकानभी बडीया होगा.. कहीये हम कब देखनेके लीये जायेगे..?

मेनेजर : (मुस्कुराते) ठीक हे.. आज मे मेरी वाइफसे बात करलु.. तो आपभी अपनी वाइफको लेकर सन्डेके दिन आइअ‍े.. तो भाभीजी भी देख लेगी.. उनकोभी पसंद आना चाहीये.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) जी.. लेकीन वोतो अपने मायकेमे हे.. मेरी अ‍ेक साली इधर होस्टेलमे हे उनको लेकरही आता हु.. क्युकी दोनोकी आपसमे बहुत बनती हे.. अगर वाइफको दीखाभी दु फीरभी वो मेरी सालीको दीखानेके लीये कहेगी.. हें..हें..हें..

मेनेजर : (जोरोसे हसते) मतलब आपके घरमेभी वही हे.. हें..हें..हें.. मेरी वाइफभी उनकी बहेनको पुछे बगैर कोइ नीर्णय नही लेतीथी .. तो मेने मेरी सालीसे भी सादी करली.. आप भी करलो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) सर.. थेन्क्स.. आइडीया बुरा नही हे.. हें..हें..हें.. लेकीन अभी वो पढ रही हे.. क्या आपके साथ हमारी दोनो भाभीजी साथमे ही रहेती हे..?

मेनेजर : (हसते) हां.. उन दोनोकी आपसमे बहुत बनती हे.. तो कोइ दीकत नही हे.. ठीक हे तो आपकी सालीको लेकर आइअ‍े.. पहेले उनको दिखा दीजीये फीर हम आपसमे बेैठकर तैय करते हे..

धिरेन : (सरमाते हसते) सर.. फीरभी आप कुछ बता दीजीये.. मेरे बजेटमे फीट बैठता हेकी नही..

मेनेजर : (मुस्कुराते) अरे सब होजायेगा.. वैसेभी हमारी बेंक आपको हाउसींग लोनतो देही रही हे.. आप पैसेकी चीन्ता मत करना.. अब आप ओफीसर होगये हो.. ओर सादीभी हो गइ हे.. तो अ‍ेक छोटी मोटी कारभी लेलो.. उनकी लोन मे सेन्सन कर दुगा.. हें..हें..हें..

धिरेन : (बहुत खुस होते हसते) जी सर.. थेन्क्स.. सर.. तो मुजे मेरी सालीके पास जाना हे.. उनसे मीलकर बात करलु..? अगर आप कहेतो..

मेनेजर : (मुस्कुराते) हंम.. लगता हे आपभी मेरी तराह अपनी सालीपे कुछ ज्यादाही महेरबान हो.. हें..हें..हें.. ठीक हे जाओ.. लेकीन अगली बार ध्यार रखना.. मे आपको अ‍ैसेही छुटी नही दुगा.. ओके..? जाओ..

तब धिरेन खुस होते बहार नीकल गया ओर गाना गुनगुनाते अपनी बाइक लेकर होस्टेलकी ओर नीकल गया.. तो वहा पहेलेसे ही नीलम धिरेनके इन्तेजारमे इधर उधर टहेल रही थी.. आज उसने रीसेसके बाद स्कुलमे बंक मारलीया था.. तभी धिरेन वहा पहोंच गया.. तो वहाकी हेडनेभी उनको पहेचान लीया.. ओर उसने नीलमको नीचे बुला लीया.. फीर हेडसे बात करके नीलमको लेकर होस्टेलसे बहार आगया..

कन्टीन्यु
 
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