Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 28 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

आजकल अ‍ेक घर बहुतही खुस था.. वोथा बनवारीलालका घर.. उनके बेटेने अपनी बहुको बहुतही तगडी रकम देकर डीवोर्स देदीयाथा.. तो आज कल वो ओर उनकी बहु दोनो ही बीन्दास होकर अब अ‍ेक पती पत्नीकी तराह रहेने लगे थे.. ओर अबतो आस पडोसके लोगोको भी दोनो अ‍ेक दुसरेकी पती पत्नीकी पहेचान देने लगेथे.. तो गांवके लोगोका भी मुह बंध होने लगा.. ओर सबने उनकी बाते करनाभी बंध कर दीयाथा.. तो दोनोही बहुत खुस होने लगे..

तो आज राजीवके घरपे भी सब देर तक सोते रहे.. सबसे पहेले नीर्मला जाग गइ.. ओर देखातो राजीव अबभी गहेरी नींद सो रहाथा.. नीर्मलाको पताही नही थाकी राजीव कल रात उनकी चुदाइ करके बेहोस हो गयाथा.. वो बाथरुममे जाकर नहाने लगी.. ओर फीर तैयार होकर कंपलीट होगइ.. फीर राजीवके पास आकर उनको प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. ओर उनके सरपे चुमी लेकर कीचनमे चली गइ..

तो कुछही देरमे चंदा ओर मंजुभी तैयार होकर कीचनमे आगइ.. ओर नीर्मलाके काममे हाथ बटाने लगी.. भावना अपनी बच्चीको दुध पीलाकर तैयार हो रहीथी.. तो कुछ देरके बाद वोभी कीचनमे चली गइ.. ओर सबके साथ काममे हाथ बटाने लगी.. जैसेही नीर्मला कीचनसे बहार चली गइ.. तो तीनोही अ‍ेक दुसरेके सामने कल रात तीनोके बीच लेस्बीयन खेलकी बातको लेकर जोरोसे हसने लगी..

भावना : (सरमाते हसते) मौसी.. मेतो समजती थी सीर्फ दीदी ही अ‍ैसी हे.. लेकीन पता नही थाकी आपभी उनके साथ रहेकर अ‍ैसी होगइ हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते मंजुकी पीठमे अ‍ेक मुका मारते हसते) हां.. ये सब तेरी बहेनका ही सीखाया हुआ हे.. कमीनीने मुजेभी ठरकी बना दीया.. देखा नही कैसे उछल उछलके अ‍ेक मर्दकी तराह कर रही थी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) रहेने दीजीये दीदी.. मेरी सादीसे पहेले भी ये खेल आप मेरे साथ कइ बार खेल चुकी हो..

चंदा : (हसते) कमीनी रहेने दे.. तुम तो चुपही रहेना.. तब मेभी क्या करती..? अपनी आग बुजानेका सीर्फ अ‍ेक हीतो जरीया था.. ये सब उस कमीनी.. तेरी सहेली सीखाकर गइ हे.. दीखनेमे तो कीतनी भोली भाली लगती हे.. लेकीन हे बहुत ठरकी..

भावना : (हसते आस्चर्यसे देखते) मौसी.. आप कीसकी बात कर रही हे..?

चंदा : (हसते) अरे वो सृती.. जो अब हमारी भी सौतन होगइ हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : अरे दीदी.. जरा बुआकोभी तो जगादो.. अभीतक सो रही हे.. अच्छा हे सो रही हे.. वरना अपनी बेटीकी बात सुनकर उनको बुरा लगता.. भावु.. जा जगादे उनको.. सायद आज सृती ओर पुनोभी सामको यहा आयेगी.. देखते हे देवु कब उनको छोडने आता हे..

जैसेही भावना भुमीको जगाने उनके रुममे जानेके लीये कीचनसे बहार नीकली.. तो देखा भुमीका ओर नीर्मला दोनोही धीरेसे कल रातके बारेमे सरमाती हस हसके बाते कर रहीथी.. तो भावना उनकी ओर देखते ही हसने लगी.. ओर उनके साथ जाकर बैठ गइ.. तो भुमीका प्यारसे उनके सरको सहेलाने लगी.. तो नीर्मलाभी भावनाकी ओर प्यार भरी नजरोसे देखते मुस्कुराती रही.. तभी भुमीने पुछही लीया..
 
भुमीका : भावुबेटी.. तु अपने आपको कभी अकेली मत समजना.. अभी तक तेरी मौसी जींदा हे.. कभी कभी तु हमारे घरपेभी रहेने आजा.. वो भी तेराही घर हे..

भावना : (सरमाते हग करते) ठीक हे मौसी.. अब मे बीलकुल ठीक हु.. मुजे अब कोइ दु:ख या अफसोस नही हे.. अब मे सीर्फ मेरे तरीकेसे जींदगी जीयुगी.. मुजे दीदी ओर जीजुका जो सहारा हे..

भुमीका : (मुस्कुराते) हंम.. मेरी स्ट्रंोंग बच्ची.. बस अभी कुछ देर पहेले तेरी मम्मीसे तेरे बारेमे ही बात हो रहीथी.. तु फीकर मत करना.. अब हम तीनोको साथही रहेना हे.. हम सब अ‍ेक दुसरेका सहारा भी हे ओर राजदार भी.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (सरमाते मुस्कुराते) हां भावु.. आगे जाकर हम तीनोको ही साथमे रहेना हे..

भावना : (सरमाते हसते) मोम.. क्या इस बारेमे मंजुदीदीसे आपकी कुछ बात हुइ हे..?

नीर्मला : (हां मे गरदन हीलाते) हंम.. बहुत कुछ.. बस कुछ दिन इन्तजार करले.. फीर तुजेभी बहुत कुछ पता चल जायेगा.. बस कुछ बाते जानकर वीचलीत मत होना.. क्युकी ये सब हमारी जींदगीका हीस्सा हे.. ओर हमारे नसीबमे लीखा हे.. भावु.. हम मेसे कीसीकी जंदगीकी दोर हारे हाथमे नही हे.. हम सब अ‍ेक कठपुतलीकी तराह हे.. जो हमे कोइ ओरही कंट्रोल कर रहा हे..

भावना : (मुस्कुराते) मोम.. मौसी.. आप दोनो फीकर मत करो.. मुजे दीदीने सबकुछ बता दीया हे.. ओर मुजे आप दोनोके कीसीभी रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही.. क्युकी आने वाले वक्तमे मेरे साथभी बहुत कुछ होगा.. तो आपभी जानकर वीचलीत मत होना.. बस.. आपको सीर्फ यही कहेना हे..

नीर्मला : (सरमाते मुस्कुराते) बस.. भावु.. हमे इसी बातकी चींन्ता थी.. तुजे यही बात समजानी थी.. जो तुम पहेले सेही सब जानती हो.. हमे तुजे ओर कुछ नही कहेना.. क्युकी तुमभी जानती हो हम सभी औरते कोइ सामान्य औरते नही हे.. हम सबको अ‍ेक दुसरेके राजके बारेमे पता हे..

भावना : (हसते सरारतसे) हां मोम.. पता हे मुजे.. अभी सीर्फ हमारी पीठमे पंख नही हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (भावनाकी पीठमे मुका मारते हसते) हंम.. मतलब तुजे सब पता हे.. तु बहुतही सरारती हो.. हें..हें..हें..

आज राजीवके घर सुबह अ‍ैसेही हसी मजाक के साथ सुबह होगइ.. तबतक नीर्मलाने राजीवको जगाकर उसे भी कंपलीट करदीया.. आजकल नीर्मला राजीवसे कुछ ज्यादाही प्यार जता रहीथी.. वो उनकी हर बाते मानतीथी.. ओर बादमे सबने इकठा बैठकर चाइ नास्ता भी करलीया.. फीर मंजु भावनाने उनके दोनो बच्चोको भी तैयार करके दुध पीला दीया.. ओर सबलोग आपसमे बैठकर बाते करते मस्ती मजाक करते रहे..
 
तब हेलीपे सुबह सुबह पुनम अपने रुममे तैयार हो रहीथी तब देवायतके रुममे सृतीकी आंख खुल गइ.. तो खुदको देवायतकी बगलमे नंगी सोते हुअ‍े पाया.. तो उसे रातमे हुइ उनकी धमाकेदार चुदाइकी याद आने लगी.. ओर वो सरमाकर मुस्कुराते देवायतकी ओर देखने लगी.. तभी देवायतकी आंख खुल गइ.. तो सृती उनकी ओर देखते सरमाकर हसने लगी.. तो देवायतने उसे पीछेसेही अपनी बाहोमे भरलीया..

सृती : (सरमाते धीरेसे गलेमे हाथ डालते) जानु.. अभी सुबह होगइ हे.. तो अभी कोइ सरारत नही.. चलो.. अ‍ेक अच्छे बच्चेकी तराह उठ जाओ.. ओर फटाफट तैयार होजाओ..

देवायत : (पीछेसे बुब्स मसलते गलेको चुमते) अरे अ‍ैस कैसे छोडदु.. अ‍ेक बार मुजे मेरी बीवीसे अच्छेसे गुड मोर्नींंगतो करने दो.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) नही.. आपकी गुड मोर्नींग मेरी हालत बीगाड देता हे.. हें..हें..हें..

कहातो देवायतने सृतीके दोनो बुब्स अपने हाथोमे थाम लीया.. ओर मसलते उनका मर्दन करने लगा.. तो सृती जोरोसे हसते करवट लेते देवायतसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तबतक देवायतके लंडने पीछेसे अपने बीलका रास्ता ढुंढ लीयाथा.. तो सृती अपनी चुतमे लंडको महेसुस करतेही बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर पीछे मुडकर देवायतके गलेमे हाथ डालकर उनके होठोको चुमने लगी.. ओर अपनी कमरको पीछे करते देवायतके लंडको बडी आसानीसे अपनी चुतमे जानेके लीये रास्ता आसान करने लगी..

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तो देवायत हाथके बल हो गया.. ओर सृतीकी पीछेसेही जमकर चुदाइ करने लगा.. तभी उनके रुमका दरवाजा धीरेसे खुला ओर पुनम अंदर आगइ.. तो देखा उनका भाइ सृतीकी धमाकेदार चुदाइ कर रहा था.. तो पुनमने फौरन दरवाजा बंध करदीया ओर मुस्कुराते बेडके पास आकर कीनारेपे बैठ गइ.. ओर अपने भाइ भाभीकी चुदाइ देखते हसती रही.. तभी सृतीका ध्यान पुनमकी ओर गया.. तो..

सृती : पुनोदी.. देखलो.. आप चली गइ तो आपका भाइ मेरे साथ गुडमोर्नींग कर रहा हे.. आपभी आजाओनां.. दोनो साथमे गुडमोर्नींग करेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) नही भाभी.. अभी आपही करवालो.. मुजेतो अभीभी नीचे जलन हो रही हे.. पता नही कल इनको क्या हो गयाथा.. मेरीतो हालतही खराब करदी..

सृती : दीदी.. चीन्ता मत कीजीये.. मेरी भी वोही हालत हे.. फीरभी इनको अभी चोदना हे.. दीदी.. क्या ये मंजुके साथभी अ‍ैसा करते हे..?

देवायत : (हसते) हंम.. तेरी मंजुको मे ना कहु फीरभी उनको सुबह चुदवाना होता हे.. ओर वो उनके साथ चंदाकोभी चुदवा लेती हे.. हें..हें..हें..

सृती : (कामु्क्तासे चुदवाते) देवु.. आप बडेही कमीने हो.. कोइ सुबह अपनी बीवीकी हालत अ‍ैसी करता हे..?

देवायत : (हसते) मुजे गालीया देती हे.. हां.. मे करता हु.. देख अभी..

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कहेते देवायत सृतीको जोरोसे चोदने लगा.. तो सृती अपनी धुआधार चुदाइके कारण जोरोसे हसते देवायतसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तो पुनमभी जोरोसे हसते खडी होगइ.. तब कुछही देरमे देवायत सृतीकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तो सृतीभी उतेजनासे देवायतकी बाहोमे चीपक गइ.. ओर उनसे लीपलोक करते वोभी साथमे जडने लगी..तब देवायत उनके उपरसे हट गया..

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सृती : (जटसे बैठकर अपनी चुतको साफ करते) दीदी.. देखा आपने.. अपने भाइको कुछ समजाइअ‍े..

पुनम : (सरमाते) भाभी.. कास आज आपकी जगाह मे होती.. वरना मेतो इनको अबभी नही छोडती.. अब चलो दोनो फटाफट नहाकर कंपलीट होजाओ.. मे हमारे देवरको जगाती हु.. वोभी अपनी बीवीके साथ पुरी रात प्यार करके अभी तक बीस्तरमे पडा होगा..

देवायत : पुनो.. हां जा जगादे उसे.. आज मुजे जानाभी हे.. ओर उनसे कुछ कामभी हे.. मे दो पहोरको देरसे वापस आजाउगा.. फीर आप दोनोको मुजे छोडनेभी आना हे..

सृती : (हसते) दीदी.. क्या आप लखन भैयाको अपना देवर कहेती हे..? हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी.. अब मे भाइकी बीवी हुतो उनको देवरही कहुगीनां.. (देवायतकी ओर देखते) भाइ.. क्या हम सुबह नही चल सकते..? आज हम दोनोकी हालत खराब हे..

देवायत : (सामने देखते धीरेसे) नही पुनो.. मंजुने तुम दोनोको आजही बुलाया हे.. तुम समज गइनां..?

पुनम : (थोडी नीरास होते) हंम.. ठीक हे भाइ.. हमे सामको छोड जाना.. अब चलो चाइ नास्ताभी बन गया हे.. दोनो फटाफट नहाकर आजाओ.. मे लखनभैयाको जगाती हु..

कहेते पुनम देवायतके होठ चुमकर बहार चली गइ.. तो सृती उनको आस्चर्य भावसे देखती ही रही.. फीर देवायत ओर सृती दोनोही बाथरुममे घुस गये ओर नहाने लगे.. सृती देवायतको साबुन लगाकर नहेलाने लगी.. तो देवायतभी सृतीके बदनमे साबुन लगाने लगा ओर साबुन लगाते सृतीके दोनो बुब्सकी मालीस करने लगा.. तब सृती अ‍ेक बार फीर उतेजीत होने लगी.. तो
 
सृती : (लंडको सहेलाते होठोको चुमते) जानु.. अ‍ेक बार फीर यहा मुजे चोदलोनां.. आपसे चुदाइ करवाते बहुत मजा आता हे.. चलो फटाफट चोदलो.. अभी होजायेगा..

देवायत : (हसते) सृती.. तुभी अब मंजुकी तराह बहुतही ठरकी हो गइ हे.. चल आजा..

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कहातो सृती देवायतकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते उनके लंडपे साबुन लगाते सहेलाने लगी.. फीर क्या..? कुछही देरमे अंदर देवायत सृतीकी खडे खडे ही जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. तो सृतीभी मजसे अपनी कमर हीलाते देवायतका चुदवानेमे साथ दे रहीथी.. तब कुछही देरकी धमाकेदार चुदाइके बाद दोनोही अ‍ेक साथ जडकर सांत होगये.. ओर अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर हसने लगे.. तभी..

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सृती : जानु.. अ‍ेक बात बताओ.. अभी अभी पुनोदीदीने कहा की हमारा देवर अपनी बीवीको प्यार करके बीस्तरपे पडा होगा.. तो लता तो उनके मायके गइ हे.. तो फीर पुनमदीदी कीस बीवीकी बात कर रही थी..? क्या लखनभैयाकी अ‍ेक ओर वाइफ हे..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. सृती अभी ये बात तुम कीसीको मत कहेना.. खास करके लताको.. अभी उनको इस बारेमे कुछ नही पता.. लखनने लतासे पहेले हमारी रजीयासे गांधर्व सादी करली थी.. तबसे वो लखनकी बीवी हे.. ओर जबभी लता नही होती तब वो लखनके साथ सोती हे..

सृती : (सरमाते हसते) क्या..? दोनो के दोनो भाइ कमीने हो.. पता नही अभी कीतनी सादीया करोगे..

देवायत : (मुस्कुराते) क्यु.. तुजे बुरा लगा..? हंम..? हें..हें..हें..

सृती : (जोरोसे बाहोमे भीचते) अरे नही नही.. मेतो मजाकमे केह रही हु.. जानु.. कुछभी हो.. आप हमसे कभी नाराज मत होना.. मे सहेन नही करपाउगी.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु.. भलेही आप कीतनीभी सादीया करलो.. लेकीन हमे कभी मत भुलना.. क्युकी अ‍ैसा प्यार तो कुछ हम जैसी नसीब वाली को ही मीलता हे..

देवायत : (सर चुमते) हंम.. चल.. ठीक हे.. मुजेतो पता ही नही थाकी मेरी इस बीवी मुजे इतना चाहती हे..

सृती : जानु.. मे अपनी जानसेभी ज्यादा आपको चाहती हु.. बस.. अब कोइ ओर सवाल नही.. चलो मुजे भुख लगी हे.. हें..हें..हें..

फीर दोनोही नहाके बहार नीकल गये ओर फटाफट कंपलीट तैयार होकर बहार आगये.. तब तक पुनमने रजीयाको कहेकर लखनको जगाया.. तब रजीया बहुतही समसार होगइ.. ओर उपर जाकर लखनको जगाने लगी.. तो लखन उनके साथ प्यार करना चाहता था.. लेकीन रजीया पुनमदीदीका हवाला देकर बच गइ.. ओर हसते हुअ‍े भागकर वापस नीचे आगइ.. तब कुछही देरमे लखनभी कंपलीट होकर नीचे आ गया ओर सबलोग अ‍ैकठे होकर चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तब सृती लखनकी ओर सरारतसे हसती हे..

सृती : (सरारतसे नैन नचाते) कहो देवरजी.. क्या अपनी बीवीके बगैर आपको नींद आती हे..? हें..हें..हें..

लखन : (सर्मसार होते धीरेसे) क्या भाभी आपभीनां.. अभी भाइ हे.. तो मे आपको कुछभी नही केह सकता..

देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. मे दोपहोर तक कामसे बहार जा रहा हु.. तु तेरे दोस्तको आज पुछ लेना.. अगर उनका वहा सब काम होगया हे तो उसे बोलदे दोनो घर वापस आजाये..

लखन : (थोडा खुस होते) भाइ.. क्या कल आप उनके मम्मी पापाको मीलने गयेथेनां..? क्या वो लोग मान गये..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. दोनोके मम्मी पापा मान गये हे.. वो अब दोनोकी सादी बडी ही धुमधामसे कर देना चाहते हे.. तो मेने उनको दोनोको ढुंढ नीकालनेका वादा कीया हे.. तु समज गयानां..?

सृती : (लखनकी ओर देखते) अरे देवरजी.. आप दोनो कबसे कीसकी बात कर रहे हो..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. वो लखन भैयाका दोस्त.. श्रीधर जो उनकी कजीन बहेन जयश्रीको लेकर भाग गया हे.. बस दोनो उसीकी बात कर रहे हे..

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. भाइ उसीकी बात कर रहे हे.. भाइ.. अगर आज उन दोनोको सर्टीफीकेट मील गया तो दोनोको आजही बुला लुगा.. बंसीको कहुगा हमारी जीप लेकर उसे सहेरसे लेकर आजायेगा..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. लखन.. अगर बंसी उसे लकर आये.. तो कहेना दोनोको सीधा यही हवेलीपे लेकर आये.. हम उनकी फेमीलीको यही बुला लेगे.. ताकी पीछेसे घरमे कोइ हंगामा ना करे..

लखन : (खुस होते हसते) हां.. ठीक हे भाइ.. मे बंसीको केह दुगा.. हें..हें..हें..

सबने बाते करते चाइ नास्ता करलीया.. तो पुनम सृतीको लेकर अपने रुममे घुस गइ.. ओर आराम करने लगी.. क्युकी रातमे देवायतने वाकइ दोनोकी हालत खराब करदी थी.. ओर सुबह सुबह भी सृतीकी दो बार चुदाइ होगइ थी.. तब लखनभी अपने खेतोपे चला गया.. ओर फोन लेकर श्रीधर ओर फीर बंसीसे बात करने लगा.. तो देवायतभी अपनी कार लेकर अपने खेतोपे आगया ओर सब कामका जायजा लेने लगा..
 
देवायत ज्यादातर गांवके कीशानसे ही माल खरीद लेताथा.. ओर उसे मंडी जीतना पैसा यहा देताथा.. तो वहाके कीशानकोभी मंडी तक माल लेजानेका कीराया बच जाता था.. ओर कभीभी कीसीभी कीशानको पैसोकी जरुरत पडती.. तब देवायत उनको अ‍ैसेही देताथा.. ओर बादमे कीशानके मालसे वसुल कर लेताथा.. तो ना सीफ्र गांवके बल्की आजु बाजुके सभी गांवके कीशानके साथ उनके रीलेशन अच्छे थे..

देवायत सब काम देखकर लखनको कहेकर वहासे गांवमे चला गया.. तो देखा सुबह सुबह रमेश ओर सामतभाइ रमेशकी बाइकपे कही जाते नजर आये.. तो देवायत उनको रास्तेमे ही मील गया.. तो रमेशने उसे सहेर पंचायतकी ओफीसमे होस्पीटलकी जमीनके लीये जानेकी बातकी.. भलेही रमेश जयाभाभीके पीछे लगा हुआथा.. लेकीन गांवके काम काजको भी अच्छी तराह देखता था.. जैसेही दोनो नीकल गये देवायत अपनी कार लेकर रश्मीके घरपे आगया..

तो रश्मी ओर वंदना दोनोही कंपलीट होकर पंचायतकी ओफीसपे जानेकी तैयारीया कर रहीथी.. अब वंदना काफी हदतक ठीक हो चुकी थी.. जैसेही देवायत अंदर आया तो वंदना सभी सरम त्यागकर देवायतकी ओर दोड पडी ओर उनकी बाहोमे समा गइ.. तो देवायतने वंदनाके होठोको चुमलीया.. तब वंदना बहुतही सर्मसार होगइ.. तब रश्मी उनको देखकर हसने लगी.. ओर वोभी आकर देवायतकी बाहोमे समा गइ..

देवायत : (मुस्कुराते) क्या कर रही हे मेरी दोनो बीवीया..? वंदु तुम ठीकतो हो गइनां..?

वंदना : (सर्मसार होते धीरेसे) हां भाइ.. आइ अ‍ेम रेडी.. भाइ.. थेन्क्यु वेरी मच.. आपने मेरा सब सपना पुरा कर दीया.. ओर मेरा जीना सार्थक करदीया..

रश्मी : (मुस्कुराते) वंदु.. हमारे पती आये हे.. जा उनके लीये आज तेरे हाथोकी मस्त चाइ बनादे..

वंदना : (खुस होते जाते) जी भाभी.. मे अभी बनाकर लेआइ.. आप दोनो बैठो..

कहेकर वंदना खुस होकर मुस्कुराते कीचनमे चली गइ.. तो देवायत रश्मीको लेकर उनके बेडरुममे चला गया ओर रश्मीको अपनी बाहोमे भीचते उसे होठोपे होठ रखते बेइम्तहा चुमने लगा.. तो रश्मीभी मदहोस होकर देवायतका साथ देने लगी.. फीर देवायत उनको लेकर उनके बेडपे बैठ गया तो रश्मी सरमाते देवायतकी ओर सवालीया नजरोसे देखती रही.. तभी देवायतने धीरेसे रश्मीको कहा..

देवायत : (धीरेसे) रश्मी.. मे अभी चारु ओर नीशाको लेकर मंदिर जा रहा हु.. तुम वंदनाको सम्हालना.. अभी उसे इस बातका पता ना चले.. वरना उसे दुख होगा.. मे वंदनासे भी जल्द सादी करलुगा..

रश्मी : जानु.. आप फीकर मत करो.. वंदुकोभी सब पता हे.. वोभी चारुभाभी ओर आपके रीलेशनके बारेमे जानती हे.. फीर भी मे वंदुको अब मेरी नीगरानीमे रखकर उसे धीरे धीरे सब समजा दुगी.. क्या आप आज चारु भाभीसे सादी कर रहे हो..? हंम..?

देवायत : हां डार्लींग.. ना सीर्फ चारुसे बल्की नीशाके साथभी कर लुगा.. अब तुम चारो मेरी सीक्रेट बीवीया बनकर साथ रहोथी.. बस आजकी रात तुम वंदनाको यही रखना.. सायद आज मुजे नीशाके घर जाना पडे.. आज सुधीर नही हे.. तो चारु ओर नीशा दोनोही नीशाके घर सोयेगी.. सायद आज मुजे उन दोनोके साथ अपनी सुहागरात मनानी पडे.. तु समज गइनां..?

रश्मी : (खुस होते मुस्कुराते बाहोमे भीचते) जानु.. फीकर मत करो.. यहा मे सब सम्हाल लुगी.. हो सकेतो आप आज ही नीशाका काम करदो.. करदो उसे प्रेगनेन्ट.. वोभी यही चाहती हे..

देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. चल ठीक हे मे देखता हु.. क्या हो सकता हे.. तुम नीशाको फोन करके बोलदो.. तैयर होकर चारुके घरपे आजाये.. मे दोनोको वहीसे लेकर नीकल जाउगा..

रश्मी : (फोन लगाते) ठीक हे जानु.. आप चाइ पीकर नीकल जाइअ‍े.. हमभी ओफीस नीकलती हे..

वंदना : (चाइ लाते) भाइ.. लीजीये चाइ पीजीये.

कहेते वंदना अ‍ेक सादी सुधा औरतकी तराह आज सारी पहेनकर तैयार हुइथी.. जैसे उनकी नइ नइ सादी हुइ हो.. देवायत चाइ पीने लगा.. तबतक वंदना उनको मुस्कुराकर देखती ही रही.. फीर देवायत उनकी कमरमे हाथ डालकर अपनी ओर खीच लेता हे.. ओर वंदनाके होठोको चुम लेता हे.. तब वंदना बहुतही सर्मसार होगइ.. फीर देवायत नीकल गया.. तो रश्मी ओर वंदनाभी पंचायतकी ओफीसपे चली गइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १५९

कहेते वंदना अ‍ेक सादी सुधा औरतकी तराह आज सारी पहेनकर तैयार हुइथी.. जैसे उनकी नइ नइ सादी हुइ हो.. देवायत चाइ पीने लगा.. तबतक वंदना उनको मुस्कुराकर देखती ही रही.. फीर देवायत उनकी कमरमे हाथ डालकर अपनी ओर खीच लेता हे.. ओर वंदनाके होठोको चुम लेता हे.. तब वंदना बहुतही सर्मसार होगइ.. फीर देवायत नीकल गया.. तो रश्मी ओर वंदनाभी पंचायतकी ओफीसपे चली गइ....अब आगे

तो आज भानुके घरभी रमा सुबह जल्दी उठकर तैयार होगइ.. ओर कीचनमे जाकर सबके लीये चाइ नास्ता बनाने लगी.. तो लताभी कंपलीट होकर घरकी साफ सफाइमे लग गइ.. भानु सुबह सुबह तैयार होकर अखबार पढ रहाथा तो सरलाभी उनके साथ खटीयापे बैठकर भावेशके साथ खेल रहीथी.. तो रमा अबभी कीचनमे नास्ता बनाते लखनकी सोचमे डुबी हुइ थी.. अब लखन रमाके दिलमे पुरी तराह छा गयाथा..

जैसे लखनके बगैर उनके चहेरेपे नुर ही गायब होगया.. वो बेमन चाइ नास्ता बनाती रही.. इसी बीच लताभी अपना काम करते दो बार कीचनमे चकर लगाकर गइ.. फीरभी रमाको कुछ पता नही चला.. तब लता समज गइकी जरुर कोइ बात हे.. जो उनकी भाभीके चहेरेपे चीन्ताका भाव हे.. उसने चाइ नास्ताके बाद देरसे नीलुकी बात उनकी भाभीसे करवानेकी सोचली.. ओर वो अपने रुममे जाकर इस बारेमे लखनसे फोनपे बात करने लगी..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) हाइ जानु.. में लता.. कैसेहो आप..?

लखन : (फोनपे मुस्कुराते) हाइ डार्लींग.. क्या बात हे.. आजतो सुबह सुबह ही हमारी याद आगइ..? हें..हें..हें..

लता : (फोनपे सरमाते मुस्कुराते) याद तो आयेगीनां.. क्युकी आपकोतो फोन करनेका टाइम ही नही मीलता.. जानु.. क्यु सुबह सुबह मेरी टांग खीच रहे हो.. यादतो आयेगीनां..? लखन.. प्लीज.. मुजे यहासे लेजाइअ‍ेनां.. मुजे आपके बगैर यहा अच्छा नही लगता..

लखन : (फोनपे हसते) अरे.. अ‍ैसे कैसे अच्छा नही लगता..? भला कीसीको मायकेमे अच्छा नही लगता ये तो मेने आज पहेली बार सुना.. हें..हें..हें.. क्या घरपे कोइ नही हे..? तेरी माजी हे.. भाभी हे.. ओर तेरा छोटा भतीजाभी तो हे..

लता : (सरमाते धीरेसे) जानु.. सबलोग हे.. लेकीन आप नही होनां..? मुजे भाभीके बारेमे आपसे बात करनी हे..

लखन : (थोडा गभराते धीरेसे) भाभीके बारेमे..? क्या हुआ..?

लता : (फोनपे धीरेसे) जानु.. कुछ नही हुआ हे.. बस.. मे देख रही हु.. जबसे मे यहा आइ हु.. मुजे भाभीका मुड कुछ ठीक नही लग रहा.. उनसे कुछ पुछुतो कहेती हे नीलुकी याद आ रही हे.. जानु.. प्लीन.. आप अ‍ेक बार उनकी नीलुसे बात करवा दीजीयेनां.. वो उनको बहुत याद कर रही हे..

लखन : (थोडी राहतकी सांस लेते) लता.. अभी नही.. मे ११ बजेके आसपास तुमको फोन करता हु.. देखता हु वहा बात करके बताता हु.. नीलु कब फोनपे मीलती हे.. अगर उनका कोन्टेक्ट होगया तो उनकी भाभीसे बात करवा दुगा.. ओर बता.. भानुभाइ वहासे नीकले की नही..?

लता : नही.. वो अभी अखरबार पढ रहे हे.. तो नहाने गये हे.. बस चाइ नास्ता करके नीकलेगे.. कुछ खास काम था..? तो मे फोन करवाती हु..

लखन : (जटसे) अरे नही नही.. कुछ काम नहीथा.. बस अ‍ैसेही पुछ रहाथा..

लता : (धीरेसे) जानु.. प्लीज.. मुजे यहासे लेजाइअ‍ेनां.. मुजे उधर आपके पास आना हे.. आपके बगैर यहा अच्छा नही लगता..

लखन : (मुस्कुराते) अरे.. तुमतो अ‍ेकही बात लेकर बैठी हो.. अभी वहा अ‍ेक दो दीन रुकनां.. फीर तुजे लेजाउगा..

लता : (धीरेसे सरमाते) अ‍ेक दो दिन क्यु..? वहा आपको मेरे बीना अच्छा लगता हे..? कही वहा मेरी कोइ सौतन बौतन तो लेकर नही आये..? हंम..? हें..हें..हें..

लखन : (हसते) बस.. तुम औरतोका यही अ‍ेक प्रोबलेम हे.. अपने पतीपे सक बहुत करती हो.. मानलो अगर मे तेरी सौतनको लेकर आयातो..? क्या करोगी तुम..? हें..हें..हें..

लता : (जुठा गुसा करते) लाओ मेरी जुती.. मुजे क्या..? वैसेभी आपके खानदानमे तो ये सब रीवाज पहलेसे ही हे.. लेकीन याद रखना.. अगर मेरी सौतन बौतन आइ तो आपकीतो खैर नही.. आपतो मुजे भुलही जाना.. समजे..? बडे आये सौतन वाले.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) लता.. तु मेरे लीये मस्त बीवी हे.. मुजे सौतनकी जरुरत नही हे.. बोल.. कब आना हे इधर..? मे तुले लेजाउगा..

लता : (खुस होते) जानु.. आज.. आप आजही मुजे लेने आजाइअ‍े.. खाना इधरही खाना..

लखन : (धीरेसे) लता.. आज नही.. मे तुजे कल सामको लेने आउगा.. आज बहुत काम हे..

लता : (जुठा गुसा करते) अरे.. ये क्या बात हुइ..? बीवीसे बढकर अ‍ैसा कौनसा काम हे..? जो आप कलकी बात कर रहे हो..? जानु.. क्या वाकइ कुछ खास काम हे..?

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. हां लता.. सुन.. वो मेरा दोस्त थाना..? श्रीधर.. वो उनकी बहेनको लेकर भाग गया हे.. बस.. भाइने यहा सक ठीक करदीया हे तो उनको लेने सहेर जाना हे.. वो अभी सहेरमे हमारे बंगलेपे ही हे.. तुम अभी कीसीको कहेना मत.. तु यहा आयेगी तब तुजे सबकुछ बताउगा..

लता : (सरमाते हसते) क्या..? श्रीधरभैया अपनी बहेनको लेकरही भाग गये.. जयश्री नाम हेना उनका..?

लखन : (हसते) क्या तुम जानती हो उनको..?

लता : (हसते) अरे नही नही.. कुछ खास नही.. अ‍ेक बार वंदना दीदीके साथ हमारे घरपे आइथी.. तब उनसे मुलाकात हुइथी.. वो ओर आपके वो दोस्त.. क्या नाम हे उनका.. हां.. बंसीभैया.. उनकी बहेन जागृती भी उनके साथ थी.. दोनो क्या मस्त पटाका बनकर आइथी.. बीलकुल हीरोइनकी तराह लग रहीथी.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) हां वोही.. अरे तुमतो दोनोको जानती हो.. हें..हें..हें.. सुन.. भाइने मुजे आज इसी कामपे लगा दीया हे.. इसीलीये मे आज नही आपाउगा.. वैसेभी भाइ भी नही हे.. वोभी आज पुनोदीदी ओर सृतीभाभीको छोडने राजीव अंकलके घरपे जायेगे.. समजी..?

लता : (सरमाते हसते) हंम.. वाकइ आज आप बीजी हो.. ठीक हे.. आप कल आना.. मे इन्तजार करुगी.. जानु.. क्या आपने भाभीको फोन कीया था..? अ‍ेक बार आप उनसे बात करलोनां..

लखन : (थोडा गभराते) अरे नही नही.. मे कल आउगानां.. तब उनसे बात करलुगा.. चलो बाय..

कहेते लखनने फोन कट कर दीया.. ओर राहतकी सांसली.. अभी फोन कटही कीयाथा की उनके फोनमे दुबारा रींग बजने लगी.. लखनने देखातो जागृतीका फोन था.. तो उसे देखतेही उनके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर उसने फोन उठालीया.. तो जागुतीने लखनको ११ बजे उसी खंडहरपे मीलनेके लीये बुलाया.. तो लखनने फौरन हां कहेदी.. ओर फोन रखदीया.. अभी फोन रखाही थाकी उनके पास बंसी आगया..
 
बंसी : (आतेही मजाक करते) क्युरे.. क्या सुबह सुबह भाभीसे बात हो रही हे..? हें..हें..हें..

लखन : (मनमे हसते) कमीने भाभी नही.. तेरी बहेन थी वो.. जो मुजसे चुदवानेके लीये बुला रही हे..

बंसी : (थोडा जोरोसे) अबे.. उलुके पठे.. मे तुमसे बात कर रहा हु.. सामने देखकर हसता क्या हे..? चल पहेले चाइ बाइ पीला..

फीर लखन मालतीको आवाज देकर चाइके लीये बोलता हे.. फीर दोनोने श्रीधरसे फोनपे सब बाते करली.. लखनने श्रीधरको सबकुछ बतादीया की उनके भाइने दोनोके माता पीताको सादीके लीये मनालीया हे.. तो सुनकर श्रीधर ओर जयश्री दोनोही बहुत खुस होगये.. ओर श्रीधरने आजही दो पहोरको कोर्टमे मेरेज सर्टीफीकेट मीलनेकी बातकी.. तो लखनने सर्टी मीलतेही दोनोको रेडी रहेनेको कहा..

श्रीधर : (फोनपे खुस होते) भाइ.. क्या बडी मम्मी ओर बडे पापा सचमे मान गये..? आप मजाकतो नही करते..?

लखन : (हसते) अरे कमीने.. तो क्या मे जुठ बोल रहा हु..? हें..हें..हें.. पुछले बंसीको.. तु भाभीको कहेना अब कोइ चीन्ता ना करे.. बस सर्टी मीलतेही दोनो रेडी रहेना.. बंसी तुम दोनोको लेने उधर आ रहा हे..

श्रीधर : (खुस होते) ठीक हे भाइ.. बंसीको दो बजेके आसपास भेजदेना.. भाइ.. सुनो.. आपकी भाभी.. आपसे कुछ बात करना चाहती हे..

लखन : (मुस्कुराते) हां फोन दे उनको.. मे बात कर लेता हु..

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) हेलो.. लखनभैया.. मे.. आपकी भाभी.. क्या.. मेरे मम्मी पापा सचमे हमारी सादीके लीये मान गये हे..? उन्होने कुछ कहा नही..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. उनको समजाने मेरे बडेभैया खुद गयेथे.. ओर उसने हमारे गांवमे बदलावकी बातकी.. ओर उन्होने समजाया तो वो समज गये ओर आपकी सादीके लीये मान गये.. जब आप आओगे.. तो वो आप दोनोकी सादी बडी धुम धामसे करवाना चाहते हे.. अगर फीर भी यकीन नही हेतो अपनी सहेलीको फोन करके पुछलेना.. हें..हें..हें..

जयश्री : (सरमाते हसते) अरे नही नही.. मुजे आपपे पुरा भरोसा हे.. बस.. सीर्फ मेरी मम्मीकी चीन्ता थी.. सीर्फ वोही हमारे प्यारके बीच दिवार बनके खडी थी.. अब कोइ दिकत नही हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अबतो आप दोनो खुसीया मनाओ.. ओर सुनो.. अभी बंसी खाना खाकर आप दोनोको उधर लेने आ रहा हे.. तो दोनो रेडी रहेना.. वो आप लोगोको कुछभी नही कहेगे.. अ‍ेक सवाल भी नही..

जयश्री : (सरमाते हसते) लखनभैया.. थेन्क्स.. आपने हमारी बहुत मददकी.. हम आपके अ‍ेहसान मंद रहेगे.. सोरी.. मे आपको गलत समजती थी.. आइ अ‍ेम सोरी..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. सोरी मत बोलो.. ये हम दोस्तोका फर्ज हे.. बाकी सब बाते हम मीलेगे तब करेगे.. चलो.. बाय.. आप अपना खयाल रखना.. आपकी नइ जींदगीके लीये.. ओल ध बेस्ट..

जयश्री : (सरमाते हसते) हंम.. थेन्क्स.. बाय..

कहेते जयश्रीने मुस्कुराकर फोन काटदीया.. ओर खुसीके मारे श्रीधरके गले लग गइ.. इधर लखनने बंसीको दोपहोरको खाना खानेके बाद नीकलनेको कहा.. तभी मालती दो कप चाइ लेकर आगइ.. लेकीन बंसी बैठाथा.. तो उसने लखनके साथ कोइ सरारत नही की.. ओर नाही लखनने मालतीके साथ.. जब चाइ पीली तो मालती दोनो कप उठाकर लेगइ.. तब बंसी कुछ बात करना चाहता था लेकीन सरमाता भी बहुत था..
 
लखन : (मुस्कुराते) क्यु..बे..? आज कुछ ज्यादाही परेसान लग रहा हे.. कही रातमे भाभीने कुछ डांटा बांटातो नही.. हें..हें..हें.. जो अ‍ैसे मुह लटकाके बैठा हे.. बोल.. क्या प्रोबलेम हे..?

बंसी : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. बातही कुछ अ‍ैसी हे.. अब आपसे कैसे कहु..?

लखन : (मुस्कुराते) कमीने.. तु कबसे बात करनेमे सरमाने लगा.. जोभी बोलना हो बीन्दास्त बोल.. हम दोस्तोके बीचतो सब बाते होती हे.. तो तु क्यु हीचक रहा हे..? बोल क्या कहेना हे..

बंसी : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. वो मेरी बहेन.. जागृती.. बस उसीके बारेमे मुजे आपसे बात करनी हे.. आजकल मेरी बहेन जागु.. कुछ ज्यादा ही मेरा काम करते खयाल रख रही हे.. जैसे मेरी बीवी हो..

लखन : (जानताथा फीरभी अनजान बनके) मतलब..? कैसा काम..?

बंसी : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. जैसेकी मेरे रुममे सफाइ करना मेरा ब्रस कंपलीट करना.. बाथरुममे टोलीया रखना.. ओर जब मे नहाकर बहार आता हुतो मेरे कपडेभी नीकालके रेडी रखती हे.. भाइ.. हदतो तब होगइ.. जब मे खानेके लीये बैठता हु तो मुजे आग्रह कर करके खीलाती हे.. ओर.. ओर..

लखन : (मुस्कुराते) अरे बोलनां..? क्या सरमाता हे.. हें..हें..हें..

बंसी : (मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. वो.. वो आज सुबह ही बातोही बातोमे मुजसे अपने प्यारका इजहार करके गइ.. मे बडी दुवीधामे हु.. क्या करु..? अगर आपकी भाभीको पता चल गया तो वो कही नाराजतो नही होजायेगी..? हंम..? अब आपही कोइ रास्ता नीकालो.. वो मुजे प्यार करने लगी हे..

लखन : (हसते) अरे वाह.. तुमभी तो उसे पाना चाहता था.. येतो अच्छा हेनां.. जो तु चाहताथा वो तो होगया.. जाके बोलदे उसे की मेभी तुमसे प्यार करता हु.. इसमे क्या दीकत हे..? वो खुस होजायेगी..

बंसी : (सरमाते) भाइ.. वोतो ठीक हे.. लेकीन आपकी भाभी..? मत भुलो अभी तक हमने सादी नहीकी.. अगर उसे पता चलातो कही मुजसे नाराज ना होजाये.. ओर मुजे छोडना दे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. तो ये बात हे..? सुन.. तु अ‍ेक काम कर.. तु भाभीसे जल्द सादी करले.. ओर उनको प्रेगनेन्ट करदे.. तबतक तुम ओर जागृती अपना प्यार सबसे छुपाकर रखना.. समज गयानां..?

बंसी : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. मेनेभी वही सोचाथा.. इसीलीयेतो कही दिनोसे मे बीना कोन्डमसे ही करता हु.. ओर बुआकोभी कोइ गोली खाने नही देता.. तो कहेती हे आप पहेले मुजसे सादी करलो.. फीर हम बच्चा पैदा करेगे.. वरना मे इस बच्चेको कीसका नाम दुगी..? बस.. बात सीर्फ यही अटकी हे..

लखन : बंसी.. भाभी सहीतो केह रही हे.. क्या जागु तुम दोनोके रीस्तेके बारेमे जानती हे..?

बंसी : भाइ.. सायद.. जागृतीका पता नही.. लेकीन बुआ केह रहीथी हमारे रीस्तेके बारेमे मम्मीको पता चल गया हे.. ओर उसने हम दोनोके रीस्तेको कबुल भी करलीया हे.. मम्मी अब बुआको अपनी बहु मानती हे.. मुजे लगाता हे.. जागृतीको भी हम दोनोके रीलेशनके बारेमे पता होगा..

लखन : (हसते) क्यु..? तुजे अ‍ैसा क्यु लगा..? उसने तुजे इस बारेमे कुछ कहा हे..?

बंसी : (हसते) नही भाइ.. पहेले वो बुआसे ठीकसे बातभी नही करती थी.. जैसे उनसे जलती हो.. आपतो जानते हे अ‍ेक औरत दुसरी ओरतको अ‍ेक्सेप्ट नही कर पाती.. मुजे लगताहे बस यही रीजन होगा.. लेकीन तीन दिन पहेले मेने जागृतीको उनके साथ अच्छे रीस्तेके लीये कहाथा.. तो लगता हे.. वो अब बुआसे प्यारसे बात कर रही हे.. जैसे वो उनकी पुरानी सहेली हो.. वो मेरी बात मान गइ..

लखन : (कुछ सोचते) बंसी.. इसका मतलब यही हुआ की जागृती तुजे सचमे दिलसे चाहती हे.. वो तेरी हर बात मानती हे.. तो मेरे खयालसे तुजे इस बारेमे अ‍ेक बार जागृतीसे खुलकर बात करलेनी चाहीये.. अगर उसे तुम दोनोके रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. तो तुम उसे विस्वासमे लेकर बुआसे सादी करलो..

बंसी : भाइ.. बाततो आपकी सही हे.. इस बारेमे मे आजही जागृतीसे बात करता हु.. बस.. अब सीर्फ बापुकी चीन्ता हे.. पता नही उनको जब सब पता चलेगा तो क्या होगा..

लखन : (हसते) अरे कुछ नही होगा.. तुम उनकी चीन्ता मत करो.. बडेभैया उनको समजा देगे.. ओर वो खुदभी तो बहुत कुछ जानते हे.. की गांवमे अ‍ैसा बदलाव होगा.. तो क्या दिकत हे..? बस तुम सादीकी तैयारीया करो.. जब सब सही होजाये.. तो तुम तेरी बहेनसेभी सादी करलेना.. मे इस बारेमे भाइसे बात करता हु..

बंसी : (खुस होते मुस्कुराते) ठीक हे भाइ.. जैसा आपने कहा हे.. वैसाही करुगा.. चलो मे चलता हु..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. चल ठीक हे. ओर कुछ हे तो बताना..

बंसी : (खडा होकर मुस्कुराते) भाइ.. लगता हे आज कुछ नया होगा.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते साथ खडा होते) क्यु..? कुछ ओर हुआ हे क्या..? हें..हें..हें..

बंसी : (दोनो बहार नीकलते धीरेसे) भाइ.. अभी मे इधर आ रहाथा.. तो मुना बरखा ओर उनकी मम्मी.. तीनो बसमे बैठकर कही जा रहे थे.. तो मुजे लगता हे हमारे मुनाका मामला सुलज जायेगा..

लखन : (हसते) चल ठीक हे.. वो बडेभैया देखलेगे.. कमीना उनका खास आदमी जो हे.. हें..हें..हें.. बंसी.. तु अभी मेरे साथ चल.. घरसे मेरी कार लेजा.. खाना खाकर उन दोनोको लेने नीकल जाना.. तबतक मुजेभी कुछ काम नीपटाना हे.. ओर सुन.. आतेही तुम उन दोनोको सीधा हवेलीपे लेकर आना.. फीर बडेभैया उनके माता पीताको बुलाकर जोभी करना हे देख लेगे.. समज गयानां..?

बंसी : (अपनी बाइक लेकर जाते) ठीक हे भाइ.. आप फीकर मत करो.. वोही करुगा.. भाइ.. अ‍ेक बार आप साहीलसे मीललो.. आजकल वो कुछ परेसान दीख रहा हे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे.. रातमे हम सब मीलेगे तब उनसे बात कर लुगा..

कहातो बंसी चला गया तो लखन वापस ओफीसमे आकर बैठ गया.. वो मनही मन मुस्कुराते बंसी ओर जागृतीके बारेमे सोचने लगा.. की कैसे जागृती उनके कहेनेपे अपने भाइ बंसीको प्यार करने लगी.. लेकीन आज उसने खुद फोन करके उनको अपनी पुरानी जगहपे मीलनेके लीये बुलाया हे.. वो सोचने लगाकी अब जागृतीको उनसे क्या काम होगा..? तब उनको जागृतीकी सर्तके बारेमे कहाथा उनका खयाल आया..
 
तो दुसरी ओर आज उसने लताकोभी वादा कीया था.. की नीलमकी बात उनकी भाभीसे करवा दुगा.. लेकीन कैसे..? क्युकी तब उनको अपना पहेला प्यार याद आगया.. लेडीस होस्टेलकी मालकीन राधीका मेडम.. जो अ‍ेक त्याक्ता थी.. अपनी बुढी मांके साथ रहेती थी.. ओर लखनको प्यार करते उनसे अपने तनकी प्यास बुजाती थी.. दोनोकी उमरमे काफी अंतर था.. इस बातको पुनमभी अच्छी तराह जानती थी..

जबसे लखन अपनी पढाइ छोडकर आयाथा.. तबसे उसने अ‍ेक बारभी राधीकाको फोन नही कीयाथा.. तो राधीकाभी उनसे कुछ नाराज होगी.. वो इस बारेमे सोच ही रहाथा तभी उसे अपनी बहेन पुनमका खयाल आया.. क्युकी लखनकी वजहसे राधीकासे उनके अच्छे रीस्ते थे.. ओर उनकी सीफारीससेही नीलमको अच्छी जगाह मीली थी.. तो लखनको पुनमसे मीलना जरुरी लगा.. ओर वो खडा होकर हवेलीकी ओर नीकल गया..

तो दुसरी ओर सुबह सुबह देवायतभी रश्मी ओर वंदनाको मीलकर गांवके बहार चला गया.. तो कुछही देरमे चारु ओर नीशा कंपलीट तैयार होकर गांवके बहार पैदल चली गइ.. तो अ‍ेक जगाहपे उसने देवायतकी कारको देखा.. तो दोनोके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर दोनो फटाफट कारके पास चली गइ.. ओर दरवाजा खोलकर अंदर बैठ गइ.. चारु देवायतके पासही आगे बैठ गइ.. तो देवायतने कारको सीधे सहेरकी ओर जानेदी..

देवायत : (अंदर बैठतेही) नीशा.. क्या सुधीर चला गया..? मेने रमेश ओर सामतभाइको तो सुबह सुबह सहेरकी ओर जाते हुअ‍े देखा.. वो दोनो पंचायतके कामसे सहेर गये हे..

नीशा : (सरमाते धीरेसे) हां.. वोतो सुबह ही पांच बजेकी बसमे चले गये.. देवरजी.. हम कीधर जा रहे हे..?

चारु : (सरमाते धीरेसे) अरे तु चुपचाप बैठना.. अभी कुछही देरके बाद तुजे सब पता चल जायेगा.. देवु.. मेने सब सामान लेलीया हे.. अब रास्तेसे कुछभी नही लेना.. आप कारको सीधे वही जानेदो.. जहा आपने तैय कीया हे..

नीशा : (हसते) मतलब आपको सब पता हे.. हम कहा जा रहे हे.. हें..हें..हें..

चारु : (हसते) हां.. नीशा.. बस यही समजले आज हम दोनोकी जींदगी बदलने वाली हे.. मुजे अभी ओर कुछ नही कहेना.. बस तु चुपचाप बैठी रहे.. आज हमारी जींदगीका सबसे अनमोल दिन हे.. तेरे लीये आज बडी सरप्राइझ हे.. हें..हें..हें..

तीनोही बाते करते जा रहेथे.. तब रास्तेमे चंदाका गांव आया.. तो उनका घरभी रोडपे ही था.. तो देवायतने वहासे गुजरते अ‍ेक नजर चंदाके घरकी ओर डाली.. तो आंगनमे धिरेनकी बाइक खडी थी.. तो वो समज गयाकी अभी धिरेन घरपे ही हे.. वैसेभी आज सन्डेका दिन था.. तो धिरेनका घरपे होना लाजमी था.. अ‍ैसेही सोचते देवायत आगे नीकल गया.. लेकीन उनको पता नही थाकी अंदर क्या हो रहा हे..

सुबह धिरेन ओर नीलम देरसे आठ बजे तक सोते रहे.. तब नीलमकी आंख खुल गइ.. तो खुदको धिरेनके पास नंगी होकर सोते पाया.. तो नीलमको कल रातकी पुरी धटनाक्रम याद आगइ.. ओर वो सरमाते मुस्कुराइ.. ओर उसने अ‍ेक नजर धिरेनकी ओर डाली.. तो धिरेन अबभी गहेरी नींद नंगाही सो रहाथा.. तब नीलमका ध्यान अनायास ही धिरेनके लंडकी ओर चला गया.. जो साइडमे मुरजाके पडा था..

तो नीलम उसे देखकर सरमाइ.. ओर अ‍ेक नजरसे उनको देखते सोचती रही.. की यही वो लंड हे.. जीसे वो कल रात अ‍ेक लडकीसे ओरत बनी हे.. नीलमने पहेली बार धिरेनके लंडको दिनके उजालेमे इतने नजदीकसे देखा.. उसे छोटे बडे लंडा कुछ पता ही नही था.. कल धिरेनने उनको दो बार चोदलीया था.. लेकीन पेइन किलरकी टेबलेटकी वजहसे आज उनकी हालत काफी अच्छी होगइ थी.. वो लगातार लंडकी ओर देखते सोचती रही..

की कल कैसे इस लंडको मुहमे लेकर धिरेनको संतुस्ट कीयाथा.. ओर इसमे नीकले हुअ‍े पानीको पीयाथा.. कीतना अजीब स्वाद था.. बीलकुल नमकीनसा.. फीर रातको इसी लंडसे धिरेनने उनका कौमार्य भंग कीयाथा.. तब उनके आंसु भी नीकल गयेथे.. कीतना दर्द हो रहाथा.. यही सब सोचते नीलमकी काम वासना फीरसे बढने लगी.. नीलमभी उनकी मां रमाकी तराह बहुतही कामी लडकी थी.. ओर उसे अ‍ेक बार फीर इस लंडसे खेलनेका मन हुआ..

तो नीलम धीरेसे उठकर धिरेनके पैरोके पास बैठ गइ.. ओर धिरेनके लंडकी ओर चली गइ.. उसने अ‍ेक बार धिरेनके चहेरेकी ओर देखा.. तो धिरेन अबभी गहेरी नींद सो रहाथा तो नीलमने हींमत करते धीरेसे लंडको अपनी मुठीमे थामकर पकडलीया.. ओर थोडी देर उनको देखती रही.. फीर सरमाते धीरेसे अपना मुह लंडकी ओर लेगइ.. ओर लंडके टोपे पे अपने होंठ रखते अ‍ेक कीस करली.. ओर धीरे धीरे लंडको सहेलाने लगी..

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तो कुछही देरमे धिरेनके लंडपे तनाव बढने लगा ओर वो धीरे धीरे खडा होकर सख्त होने लगा.. जीनकी वजहसे धिरेनकी आंख खुल गइ.. ओर उसने देखा तो उनके लंडसे नीलम खेल रहीथी.. तो धिरेनभी खुस होगया.. ओर अ‍ैसेही आधी आंख बंध करते देखने लगाकी नीलम उनके लंडके साथ क्या कर रही हे..? नीलम लंडको मुहमे लेकर चुसने लगी.. तो कुछ देरके बाद धिरेनको भी बरदास्त करना मुस्कील होने लगा..

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तो धिरेनभी मुस्कुराते नीलमके सरको सहेलाने लगा.. तो नीलम लंड चुसते उनकी ओर देखते हसने लगी.. ओर वो फीरसे लंडको मुहमे लेकर चुसने लगी.. जैसे कोइ कुल्फी चुस रही हो.. तो धिरेनने नीलमका हाथ पकडते उसे अपने उपर खीचलीया.. तो नीलम सरमाते मु्स्कुराने लगी.. ओर धिरेनके उपर लेटकर छागइ.. तो धिरेनने उनके गलेमे हाथ डालकर उसे अपने तनसे चीपकालीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये..
 
दोनोही कामातुर होते अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. तब दोनोके तनपे वासना फीरसे हावी होगइ.. दोनोही अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते अ‍ेक दुसरेके होठोका रसपान करते रहे.. तब धिरेनने नीलमके दोनो बुब्स अपने हाथोमे थाम लीया.. ओर उसे दबाते मसलता रहा.. जीनकी वजहसे नीलमकी तनकी आग भडकने लगी.. ओर वो धीरेसे उठते धिरेनकी कमरपे बैठ गइ..

ओर अपनी कमरको थोडी उची करते अ‍ेक हाथ नीचे लेजाकर धिरेनके लंडको अपनी मुठीमे थामलीया.. फीर धिरेनकी ओर वासनाभरी नजरोसे देखते लंडको अपनी चुतके लव होलपे सेट करने लगी.. तब धिरेन नीलमकी सभी हरकतको अ‍ैसेही लेटे देखता रहा.. जब लंडको चुतमे फसा दीया.. तब नीलम धीरेसे कमरको नीचेकी ओर पुस करने लगी.. ओर आहीस्ता आहीस्ता धिरेनके पुरे लंडको अपनी चुतकी गीरफ्तमे लेलीया..

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फीर धिरेनकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. जैसे नीलमने कोइ कीला जीतकर फतेह करलीया हो.. फीर धीरे धीरे अपनी कमरको उची नीची करते धिरेनको चोदने लगी.. तो उनको कुछ मीठासा दर्द महेसुस होने लगा.. ओर वो धीरेसे धिरेनके गलेके पास दोनो हाथ टीकाते धिरेनके उपर जुक गइ.. ओर उनको होठोको चुमने लगी.. तो धिरेननेभी उनके गलेके हाथ डालकर अ‍ेक हाथसे उनकी पीठको सहेलाने लगा..

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धिरेन : नीलु.. क्या बात हे..? आजतो सुबह सुबह तुमने बडी मस्त सरप्राइज देदी.. हंम..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) धिरेन.. अब मे आपकी बीवी हु.. जब हम दोनो साथ रहेगे तब आपको हर दिन यही प्यार मीलने वाला हे.. अब सीर्फ हमारी सादी.. ओर साथ रहेनेकी देरी हे.. बाबु.. आइ लव यु.. चोदो मुजे.. बहुत मन कर रहा हे..

धिरेन : (खुस होकर मुस्कुराते) बेबी.. आइ लव यु टु.. बस मुजे यही प्यार चाहीये जो तुम दे रही हो..

नीलम : (धीरेसे अपने मनकी बात रखते) जानु.. अब आप जल्दसे जल्द वो घर लेलो.. ताकी हमे मीलनेमे आसानी रहे.. हम सेटरडे सन्डेको वही चले जायेगे.. ओर दो दिन तक हम पती पत्नीकी तराह रहेगे.. आप मुजे वहा पुरा दो दिन ओर रात चोदते रहेना.. मुजे बहुत मजा आता हे..

धिरेन : हां डार्लींग.. अब वही होगा.. मे अब तुमसे दुर रहेना नही चाहता.. बस.. मन्डेको ही मे मम्मी ओर जीजुसे बात करलुगा.. ताकी वो उनका सौदा करले.. फीर हम दोनो आजाद.. फीर हमे मीलनेसे कोइ नही रोक सकेगा.. ना भावनादीदी ओर नाही लताभाभी.. मेरे पास अब सबको देनेके लीये जवाब हे..

नीलम : (सामने देखते) जानु.. देखना.. मेरे लीये कीसीसे जगडा मत करना.. वरना आगे जाकर हमे ही प्रोबलेम होगी.. तो बी केरफुल.. हंम..? बस सबको प्यारसे समजाना हे.. मे कीसीके साथ हमारा रीलेशन खराब करना नही चाहती.. आपभी फीकर मत करना.. मे कीसीभी तरीकेसे आपको मीलती रहुगी.. बस.. अबतो मुजे पुरी जींदगी आपके साथही गुजारनी हे..

धिरेन : (होंठ चुमते) नीलु.. तु फीकर मत कर.. तु जो केह रही हे.. अ‍ैसाही होगा.. कोइ मुजे दुसरी सादीके लीये मना नही कर सकता.. क्युकी सबकी दो दो बीवीया हे.. तो वो हमे क्यु रोकेगे..?

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) हंम.. पता हे.. मेरे पापानेभी वही कीया हे.. मम्मी कहेनेसेतो उनकी दुसरी बीवी हे.. लेकीन हकीकतमे वो उनकी पहेली बीवी हे.. पापाने उनकी सादीसे पहेलेही मम्मीके साथ गांधर्व सादी करलीथी.. बस.. उसीका नतीजातो मे हु.. हें..हें..हें..

दोनोही अ‍ैसी बाते करते धीरे धीरे चुदाइ कर रहेथे.. ओर नीलमभी मौका देखकर अ‍ैसी सीचुअ‍ेशनमे धिरेनसे बात कर रहीथी की धिरेन उसे कीसी बातके लीये मना ना कर सके.. नीलमभी अपनी मां की तराह सातीर दिमाग वाली थी.. उसे अपनी बात धिरेनसे कैसे मनवानी हे वो अच्छी तराह जानती थी.. उसेतो बस अपनी अ‍ैसो आरामकी जींदगी जीनी थी.. जो उनकी हर डीमांड उनका पती पुरी कर सके..

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ओर उसके लीये अभी धिरेनसे बहेतर कौन होगा.. जो अच्छी जोबभी करता हे. ओर उसे बेइम्ताह प्यारभी करता हे.. नीलम धिरेनके साथ जींदगी बीतानेका सपना देखने लगी.. ओर चुदाइ करती रही.. तब कुछ देरकी चुदाइके बाद नीलमका तन अकडने लगा.. ओर वो धिरेनके तनसे चीपक गइ.. तो धिरेनने भी नीलमको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर कुछही देरमे दोनो साथमे जडने लगे..

तब धिरेन नीलमको गोदमे उठाकर बाथरुममे लेगया.. वहा दोनोने अपना नीत्यक्रम करके साथमे बाथलीया ओर बहार आकर तैयार होने लगे.. तो धिरेनने नीलमको सीर्फ उनकी दिलवाइ पारदर्सी ड्रेस ही पहेने दी.. ओर खुदने सीर्फ गंजी ओर सोर्टही पहेना.. फीर दोनोही नीचे आगये.. तो नीलमने दोनोके लीये चाइ नास्ता बनाया.. तब धिरेन उनको वही बैठकर देखता ही रहा तब नीलम बहुतही सरमाइ..

नीलम : (सरमाते हसते) जानु.. क्या देख रहे हो..? जाइअ‍ेना मुजे सरम आ रही हे..

धिरेन : (हसते) मे देख रहा हु मेरी बीवीको कुछ आता भी हे की नही.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) देखलीया..? तो जाइअ‍े यहासे.. वरना फीरसे कोइ सरारत करने लगोगे.. हें..हें..हें..

धिरेन : नही नीलु.. अभी नही.. अब जोभी करना हे चाइ नास्ताके बाद.. ये दो दिन हमारी जींदगीका सबसे अनमोल दिन हे.. मे तुजे इस घरके हर कोनेमे प्यार करना चाहता हु.. बस अ‍ेक बार चाइ नास्ता करलेने दे..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) मतलब.. ये दो दिन मेरी खैर नही.. हें..हें..हें.. जानु.. लेकीन ध्यान रखना.. मुजे कल सुबह होस्टेलभी जाना हे.. तो मुजे प्यारसे.. मतलब.. आप समज गयेनां..?

धिरेन : (पीछे जाकर बाहोमे भरते गाल चुमते मुस्कुराते) हंम.. मेरी बीवीसे प्यारसे ही प्यार करुगा..

नीलम : (हसते) अरे.. जाइअ‍ेना.. मेने कहाथानां की यहा कोइ सरारत नही.. जाइअ‍े.. मुजे चाइ नास्ता बनाने दीजीये.. फीर जोभी करना हे कर लीजीयेगा.. लेकीन अभी नही.. जाइअ‍े..

दोनोही प्यारभरी मस्तीया करते चाइ नास्ता बनालेते हे.. फीर बहार डाइनींगपे जाकर दोनोही चाइ नास्ता करते हे तब धिरेनने नीलमको जबरदस्तीसे अपनी गोदमे बीठादीया.. ओर अपने हाथोसे नीलमको खीला रहाथा.. तो नीलमभी धिरेनको प्यारसे अपने हाथोसे खीलाती रही.. फीर चाइ नास्ता होगया तब नीलमने सब बर्तन साफ करके सब काम नीपटा लीया.. तब धिरेन नीलमको लेकर सोफेपे बैठ गया..

धिरेनने वही नीलमको अपनी गोदमे बीठाकर बाहोमे भीचलीया.. तो नीलमने खुद धिरेनके होठोको चुमते अपनी जीभ धिरेनके मुहमे डालदी.. तो धिरेनने नीलमका परदर्सी स्कर्ट उचा करते उनके दोनो संतरे जैसे गोरे गोरे बुब्सको अपने पंजोमे थाम लीया.. ओर नीलमकी जीभको बडेही कामुक तरीकेसे चुसने लगा.. ओर दोनोही प्यारकी आगोसमे चले गये.. ओर आपसमे बाते करते प्यारके खेलको खेलने लगे.. कलसे धिरेनसे तीन बार चुदवाकर अब नीलम उनसे काफी खुल चुकी थी.. ओर उनकी ठरकभी काफी बढ गइथी....

कन्टीन्यु
 
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