Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 50 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

लता : (हां मे गरदन हीलाते) ठीक हे दीदी.. मे आपकी सब बाते समज गइ.. मुजे समय समयपे मार्गदर्शन करीयेगा.. लेकीन दीदी.. अब मे लखन भैयाको क्या कहुगी..?

पुनम : लखनभैया..? हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर हसते) हां.. अब भाइको भाइ नही तो क्या कहुगी..? कमीनेने.. अपनी बहेनकी ठोक ठोकके हालत खराब करदी.. हें..हें..हें.. दीदी.. कल रात जब अंदर डालानां.. मेरी तो चीख ही नीकल गइ.. अ‍ैसा लगा कीसीने बडा डंडा घुसादीया हो.. हें..हें..हें.. दीदी.. क्या उनको पता हे मे उनकी बहेन हु..?

पुनम : (हसते) हां.. कुछ दिन पहेले ही मेने उसे बताया.. हें..हें..हें.. तो कमीने सुनकर बहुत ही खुस हो रहेथे..

लता : (हसते) हां वैसे भी हमारे खानदानमे सबको अपनी बहेनको ठोकने मे ही मजा आता हे.. तो खुस तो होगेंनां.. हें..हें..हें.. पता नही आप उनसे कैसे बच गइ.. हें..हें..हें.. आप दोनो तो साथमे पढते थेनां..? तो फीर कभी आप पे लाइन मारनेकी कोसीस नही की..?

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. वो मुजे पानेकी पुरी कोसीस कर चुके हे.. आज अ‍ेक ओर सचाइ आपको बता ही देती हु.. आज मे आपसे कुछ छुपाना नही चाहती.. हांलाकी इस बारेमे मंजुभाभीके अलावा सृतीभाभी ओर भावना भाभी भी जानती हे.. की जब हम दोनो स्कुलमे थे.. तब ही लखन भैया मुजको प्यार करने लगे थे.. लेकीन तब मेरी चाहत बडे भैया थे.. मे उनको प्यार करती थी.. तो लखन भैयाको मैने ज्यादा तवजो नही दी.. ओर उनका मुजे प्यार करनेका सपना सपना ही रेह गया..

लता : (खुस होते हसते) दीदी.. क्या केह ही हो..? इस बारेमे मुजेतो पता ही नही था.. लेकीन आपको कैसे पता चला..? क्या कभी उसने अपने प्यारका इजहार कीया था..?

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) नही.. दीदी.. उनकी प्यार जतानेकी हिंमत ही नही हुइ.. वरना आज मे उनकी बीवी होती.. ओर तब मेरे पास ये सब शकितया भी नही थी.. मुजे तो शक्तिया मीली तब पता चला.. ओर जब उनको भी ये पता चलाकी मे बडे भैयाकी बीवी हु.. तबसे वो मुजे भाभी कहेने लगे.. ओर हम दोनो ज्यादा नजदीक आगये.. तब उसने अ‍ेक दिन मेरी मस्तीया करते सबकुछ बता दीया.. की मे भी आपसे प्यार करता था.. लता दीदी.. क्या आपके साथ भी अ‍ेक हादसा हुआ हेनां..?

लता : (सर्मसार होते धीरेसे) हां दीदी.. वो भी तो हमारे भाइ ही हे.. तो वो कैसे अछुत रेह सकते हे.. इस बातका तो कीसीको पता भी नही हे.. मे ही जानती हु की उस रात मे भानु भाइसे कैसे बच गइ.. वरना उस रात पका वो मेरा बलात्कार कर देते.. हें..हें..हें.. (सरमाते हसते) दीदी.. अब तो बता दीजीये वो दोनो कौन हे जीन्होने लखनके साथ गांधव विवाह करलीया हे.. ओर मेरी सौतने हे..

पुनम : (मुस्कुराते) लता.. अ‍ेक तो हम स्कुलमे थे तब मेरी होस्टेलकी मालकीन.. ओर दुसरी हमारी रजीया..

लता : (सरमाते धीरेसे) क्या..? हमारी रजीया..? दीदी.. तो फीर रजीयाको कहीयेना.. अब वो भी हमारे साथ ही सोये.. क्युकी अब मे लखनको अकेली नही जेल पाउगी..

पुनम : (मुस्कुराते) ठीक हे लता.. मे भाभीसे कहुगी वो उनसे बात करलेगी.. उनको बताना भी हे की मेने तुजे सबकुछ बता दीया हे.. की तुम भी हमारी बहेन हो.. ओर सुन.. अ‍ेक राजकी बात ओर.. दया भी हमारी बहेन हे.. वो भी बडे भैयाके साथ रीलेशनमे हे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर हसते) दीदी.. हमारे बापु कीतने सौकीन ओर रंगीन मीजाजके रहे होगे.. यहा सबको अपनी बहेनकी लेनेमे ही मजा आता हे.. ओर हम जैसी बहेने भी कम नही हे.. कमीनी सबकी सब अपने भाइसे चुदवानेके लीये बेताब हे.. इनमे आप भी बाकात नही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाकर हसते) हां.. सही कहा तुमने.. लता.. मे भी तुम्हारी तराह सुरुसे ही भाइको पसंद करती थी.. ओर मंजु भाभी डीलीवरीमे होस्पीटलमे थी तब हमने सादी भी करली.. लता मे बहुत खुस हु.. की इस वक्त मे हमारे भाइके बच्चेको मेरी कोखमे पाल रही हु.. अ‍ेक दिन अ‍ैसा भी आयेगा.. की तुम भी हमारे बडे भाइसे प्रेगनेन्ट होजायेगी.. ओर हमारे स्वामीकी चहीती रानीको जन्म देगी..

लता : (सर्मसार होते मुस्कुराते) दीदी.. वो सबतो ठीक हे.. लेकीन मे लखनको क्या कहुगी.. अगर उसे पता चल गयाकी मे भी बडे भाइके साथ रीलेशनमे हु.. तो हम उनको कैसे सम्हालेगे.. क्युकी अभी आपने कहानां की हम चारोके साथ लखन भैया भी हमारे साथ सामील हे..

पुनम : (मुस्कुराते) वो सब तु मुजपे छोडदे.. क्युकी आज तुजे वो बात भी बता देती हु.. जो मंजु भाभीने तैय कीया हे.. अब तुजे इस बातके लीये लखन भैयासे गभरानेकी जरुरत नही पडेगी..

लता : (आस्चर्य भावसे देखकर मुस्कुराते) दीदी.. आज तो अ‍ेक के बाद अ‍ेक राज खोल रही हे.. मुजे सबकुछ बता दीजीये.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. सुनो.. आपतो जानती हे भाइकी लीगल ओर इलीगल.. मतलब जीनके साथ गांधर्व सादीया की हे.. सब मीलाकर उनकी कीतनी बीवीया हे..? मंजुभाभी.. चंदाभाभी.. सृतीभाभी.. के अलावा मे.. फीर रश्मीभाभी.. हमारी वंदना..

हाल हीमे उनकी मम्मी चारुभाभी.. हमारी नीशाभाभी.. दोनोके साथ भी भाइ सादी कर चुके हे.. ओर दो तीन ओर हे जो उनकी जींदगीमे आगेथी.. इनमेसे अ‍ेक तुम भी हो.. इसके अलावा कबीलेकी अ‍ेक लडकी.. फीर हमारी दया बहेन.. ओर दुसरी ओरतोके साथ रीलेशन हे वो अलग..

लता : (जोरोसे हसते) ओह गोड.. भाइ कीतनी बीवीया सम्हालेगे..? क्या भैया सबको टाइम दे पाते हे..? हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) हां.. वो हीतो.. दीदी.. यही तो अ‍ेक समस्या खडी हुइ हे.. की भाइ सबको टाइम नही दे पाते.. इसीलीये मंजु भाभीने कुछ फैसला कीया हे.. ओर इस बातकी उन्होने भाइसे परमीशन भी लेली हे.. तो भाइ भी इस बातके लीये मान गये हे..

लता : (उत्सुक्तासे मुस्कुराते) दीदी.. प्लीज.. जल्दी बताइअ‍ेना भाभीने भाइसे कोनसी बात मनवाली हे..

पुनम : (हसते) दीदी.. भाइकी भी इतनी बीवीया हे.. ओर आने वाले वक्तमे लखन भैयाकी भी दो तीन बीवीया होगी.. तो भाइ भाभी दोनोने डीसाइड कीया हे.. की दोनो भाइकी जीतनी भी बीवीया हे.. वो सभी बीवीओको दोनो भाइ मीलकर सम्हाल ले.. लेकीन इनमे दोनोकी सहमती होनी चाहीये.. यहा जबरदस्ती कुछ भी नही होगा..

लता : (मुहपे हाथ रखकर आस्चर्यसे हसते) दीदी.. क्या कहे रही हे आप..? इसका मतलब.. अब वो दोनो भाइ हम सबको.. मतलब..? आप समज गइनां..? क्या ये कुछ अजीब नही हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही लता.. इनमे कुछ भी अजीब नही हे.. हमारे उस लोकमे कहा कोइ रीस्ते नाते हे.. ओर हम सभी यहा हमारे स्वामीके लीये तो आइ हे.. जो कभी हमने उनको हर जन्ममे पानेकी कामना की थी.. तो ये दोनो भाइ उन्हीका तो अंस हे.. वरना सोच.. तु जब बडे भाइके साथ रीलेशन रखेगी..

तो क्या लखन भैयाको अच्छा लगेगा..? नहीनां.. ओर वैसे भी भाइको भी इतनी सादीया करनी ही थी.. वरना उस वचनका क्या होगा.. जो पीछले जन्ममे उनकी बीवीओको दे चुके हे.. इसीलीये उन्होने भी स्वीकार करलीया हेकी वो सबको टाइम नही देपायेगे.. इसीलीये भाइ भाभीने मीलकर ये फैसला लीया हे..
 
लता : (मनमे खुस होते हसते) ओह गोड.. हमे क्या क्या देखनेको मीलेगा.. दीदी.. तो इसका मतलब आप भी दोनो भाइसे.. आइ.. मीन.. भाइकी सभी बीवीया भी लखनके साथ..

पुनम : (थोडी सीरीयस होते) हां लता.. मत भुलो हम सब कौन हे.. हम सब उस्ी हिमाचलके राजाकी रानीया थी.. जो दुबारा जन्म लेकर उन राजाके लीये आइ हे जो मंजु भाभीके दुसरे जन्ममे उनकी कोखसे जन्मेगा.. हम सब यातो परीया हे या अप्सराये.. हम सबने कभी कामना कीथी.. की हर जन्ममे हमे यही पतीके रुपमे मीले.. ओर हमारे दोनो भाइ उसीका अंस हे.. इसीलीये हम सबका फर्ज हे उन दोनोको खुस रखे.. दरसल हम सभी उन दोनो भाइकी बीवीया हे..

लता : (मुसकुराते) दीदी उन कहानीको तो मे अच्छी तराह जानती हु.. ओर ये भी पता हे हम सब कौन हे.. तो क्या इसीलीये..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. तो फीर सुन.. तुजे अ‍ेक बात ओर बतादु.. फीर तुम ही डीसाइड करना आगे जाकर तुजे क्या करना हे.. भाभीने कहा हे.. अब हम सब की उमर थम जायेगी.. हम सब अ‍ैसेही जवान रहेगी.. ओर जब हमारा विजय बडा होजायेगा तब भाइ भी बुढे होजायेगे.. वो तब हमे कीसीको सारीरीक सुख देनेमे सक्षम नही रहेगे.. तब हम सब क्या करेगी..? क्या तुम अब मर्दके बीना रेह पाओगी..? बता..

लता : (सरमाते मुस्कुराते) नही दीदी.. वैसे भी हमारे घरकी सभी ओरते बहुत ही कामुक हे.. उनको हर दीन अपनी चुतमे अपने पतीका लंड चाहीये.. तो हम क्या करेगी..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. इसीलीये भाइ ओर भाभीने ये फैसला लीया हे.. तुम सोच जब भाइही सक्षम नही रहेगे.. तब अभी हमारे लखन भैया हे.. फीर हमारा विजय भी बडा होजायेगा.. वो तो इन दोनोसे भी ज्यादा अयास होगा.. फीर उनका बेटा जो स्वयंम वो राजा होगा वो आयेगे.. तब ये सब रीस्तेनाते धरेके धरे रेह जायेगे.. तब हमे यहा बहुत कुछ देखनेको मीलेगा.. तब हम चारो होगी.. तब तुम क्या करोगी..?

लता : (हसते) दीदी.. आपकी सभी बाते मे समज गइ.. मतलब हमे अपनी सोच बदलनी होगी.. हम सबको हमारी सरम त्यागनी होगी.. क्या यहीनां..? हें..हें..हें.. मतलब अब इनमे आप भी बाकात नही रहेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां दीदी.. मे अभी कुछ बता नही सकती.. लेकीन सायद तुम्हारी बात सच हे.. दीदी.. बडे भैयाका भी लखन भैयाके जीतना ही हे.. अब तुम क्या करोगी..?

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) नही दीदी.. मेने सादीसे पहेले बडे भाइका भी देखा हे.. लेकीन लखनका तो उनसे भी बडा दीख रहा हे.. ओर वैसे भी बडे भैयासे मीलकर आप लोगोको तो कुछ नही हुआ.. लेकीन दीदी.. मैने इतना बडा कभी नही देखा.. इसीलीये अ‍ेक डर लग रहा था.. लेकीन लगता हे अब मुजे अ‍ेक बारतो ये दर्द जेलना ही पडेगा..

पुनम : (हसते) हां.. अब आइ लाइनपे.. दीदी.. क्या लखन भैयाका सचमे बडे भाइसे बडा दीखता हे..?

लता : (सरमाकर हसते धीरेसे) हां दीदी.. मेने तो भाइका भी देखा हे.. ओर अब लखन भैयाका भी देखा.. बापरे कीसी गध्धेका लग रहा हे.. हमारी तो फाडके रख देगा.. आप बचके रहीयो.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते धीरेसे) कमीनी तुम तो मुजे भी डरा रही हो.. मुजे इस बारेमे सृती भाभीसे भी बात करनी पडेगी.. चल सबके साथ बैठते हे.. सादी भी होगइ होगी..

लता : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. क्या इस बारेमे लखन भैया भी सब जानते हे..?

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे सरमाकर) नही दीदी.. मुजे तो उनको बतानेमे भी सरम आ रही हे.. तो मैने मंजु दीदीको कहा हे.. वो उनसे बात करलेगी.. क्युकी ये सब उनको भी बताना पडेगा.. अब चलीये सबके साथ बैडते हे..

कहेते दोनो वापस मंडपके नीचे आगइ.. तो मंजु दोनोकी ओर देखकर हसने लगी.. तब पुनम ओर लता दोनोही सरमाकर हसने लगी.. ओर सबके साथ बैठ गइ.. आज पुनमने लताको सबकुछ खुलकर बता दीया था.. इस बातसे लता भी अ‍ेक्साइटेड होगइ थी.. तबतक सादीका फेरे भी होगये.. ओर सादी संपन होगइ.. तो सबलोग बंसी ओर सांतीको आशीर्वाद देने लगे.. ओर सामतभाइ भी खुस होते सभी महेमानोके पास आकर सबको गले मीलकर मीलने लगे..

तबतक भोजनकी भी तैयारीया होगइ थी.. तो रमेश सबको भोजनके लीये बुलाने आगया.. तो सभी जेन्ट्स सादीकी चर्चा करते भोजन पंडालकी ओर जाने लगे.. ज्यादातर लोग इस सादीसे खुस थे तो कुछ लोगोको अ‍ैसी सादी रांच नही आइ.. सभी जेन्ट्स भोजन करने चले गये.. तो गीताने बसंतीको बुलानेकी कोसीस की तो बसंतीने मुस्कुराकर बडे ही आरामसे गीताको पहेचाननेसे इन्कार करदीया..

तो गीताको बहुत बुरा लगा.. ओर वो बार बार धीरेसे बसंतीकी माफी मांगने लगी.. लेकीन हर बार बसंतीने उनको पहेचाननेसे इन्कार करती रही.. ओर वो ब्रिन्दाको लेकर गीतासे दुर चली गइ.. तब गीताकी आंख गीली होगइ.. ओर वो मंजुके पास जाकर बैठ गइ ओर उनसे बाते करने लगी.. तब मंजुके सामने गीताकी पुरी कुंडली आगइ.. ओर उसने गीताका भवीस्य भी जानलीया..
 
तबतक लखन भी बंसीको उनके रुममे छोडकर भोजन पंडालमे आगया.. ओर सभी दोस्तोके साथ मीलकर काम करने लगा.. तभी उनका ध्यान मुनाके मामा विनोदकी ओर गया तो वो मुस्कुराते विनोदके पास चला गया.. विनोद लखनको देखते ही उनके गले लग गया ओर दोनो हस हसके बाते करने लगे.. तब लखनने विनोदके साथ घनीष्ठा बढानेके लीये गांवमे बडी होस्पीटल ओर बडी स्कुलके बारेमे बाते करने लगा..

ओर बातो ही बातो मे लखनने उनकी बीवीको इस बडी स्कुलमे जोबकी ओफर करदी.. जीसे सुनकर विनोद बहुत खुस होगया.. बस.. यही तो लखन चाहता था.. आज लखनने मुनाका काम करते मछलीको पहेला दाना डाल दीया था.. ओर लखन विनोदसे बात करते वहासे मुनाके पास चला गया.. लेकीन उनको मुना कही नही मीला.. तो उसने दुसरे दोस्तोको मुनाके बारेमे पुछा.. तो कीसीको नही पताथा की मुना कहा गया..

दरसल बाबाके जाते ही मुना अपने घरपे चला गया था.. फीर घरसे कुछ जडी बुटीका पावडर मीलाकर दवाइ बना लेता हे.. फीर दवाइकी अ‍ेक पुडी बनाकर जेबमे रख लेता हे.. ओर जेबमे छुपाकर वापस आगया.. तब लखन उनको ढुंढते दीखाइ दीया.. तो मुना लखनके पास चला गया.. तब लखन उनको विनोदकी ओर इसारा करते हसने लगा.. तो मुना भी समज गया की लखन जरुर कुछना कुछ बाते करके आया हे..

फीर मुना धीरेसे सरकते श्रीधरके पास चला गया.. ओर उनके कानमे कुछ कहेने लगा.. तो श्रीधर भी थोडा गुस्सा होकर भानुकी ओर टेडी नजरसे देखते हां मे गरदन हीलाता रहा.. दोनोने मीलकर कुछ प्लान बनालीया.. जीसके बारेमे मुनाने श्रीधरको अभी कीसीको भी ना कहेनेकी बात करली.. फीर दोनो अपने अपने कामपे लग गये.. तो दुसरी ओर आज बंसी ओर सांतीकी सादी होगइ थी..

तो वो सादीके जोडेमे बैठकर नइ नइ दुल्हनकी तराह बहुत ही सरमाते अपने रुममे बैठी थी.. तब बरखा जयश्री ओर जागृती सांतीकी टांग खीचाइ करते छेड रही थी.. तो सांती बहुत ही सर्मसार होते मुस्कुराने लगती थी.. तब बंसी अपने रुममे जाकर फ्रेस होने लगा.. तभी कीसीने जागृतीको आवाज लगाइ.. तो वो खडी होकर हसते हुअ‍े बहार चली गइ.. तो जयश्री बरखा ओर सांती हस हसके बाते करने लगी..

जब जागृती बहार नीकली तो उनको वहा कोइ नही दीखा.. तो वो वापस जाने लगी.. तभी उनका ध्यान बंसीके रुमकी ओर गया.. ओर उसे आज सुबह बंसीको जगाने गइ तब बंसीने उनको कैसे दबोच लीया था.. ओर अपनी नीचे लीटाकर प्यार कीया था.. जागृतीको उनके साथ कीये हुअ‍े प्यारकी याद आगइ.. तब जागृतीकी दिलकी धडकन बढने लगी.. ओर अ‍ेक बार फीर उनको बंसीको मीलनेकी इच्छा होगइ..

तो दुसरी ओर इस वक्त घरमे कोइ नही था.. ओर सांती भी जयश्री बरखाके साथ उनके रुममे गप्पे लगा रही थी.. तब जागृतीकी बंसीके रुममे जानेकी उत्सुक्ता बढ गइ.. अ‍ेक बार फीर जागृतीकी चुत हरकतमे आकर फडफडाने लगी.. जैसे जागृतीसे पहेले उनकी चुतको बंसीके साथ मीलन करनेकी जल्दी हो.. ओर वो धीरेसे दबे पांव अ‍ेक बार फीर बंसीके रुमकी ओर चली गइ.. तब बंसी फ्रेस होकर दरवाजेकी ओर आ रहा था..

जैसेही जागृती बंसीके रुममे घुसी.. तो बंसीसे टकरा गइ तो सरमाकर हडबडा गइ.. तब रुममे कोइ नही था.. तो बंसीने जटसे बहारकी ओर देख लीया.. जब बहार भी कोइ नही दीखा तो बंसीने जटसे जागृतीका हाथ पकडकर रुममे खीच लीया ओर दरवाजा बंध करदीया.. तब जागृती बहुत ही सर्मसार होते हसते हुअ‍े बहारकी ओर जाने लगी.. तभी बंसीने जागृतीको अपनी बाहोमे दबोच लीया.. ओर उनके बुब्सको थामते मसलने लगा.. ओर उनके होठोपे कीस करते जागृतीके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. तब..

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जागृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. बस.. बस.. ओर नही.. अभी घरपे सब महेमान हे.. हम बादमे प्यार करेगे.. छोडदो मुजे.. कोइ आजायेगा..

बंसी : (होट चुमते) जागु.. क्या मस्त लग रही हे.. अ‍ैसा लगता हे दुल्हन सांती नही तुम हो.. चलनें हम भी सादी करलेते हे.. प्लीज.. मे तेरे बीना नही रेह सकता.. कल मीलनेको कहा था.. तो क्यु नही आइ..? हंम..? सुबह भी नही करने दीया..

जागृती : (जोरोसे बाहोमे भीचते) भाइ.. मे कैसे आती..? भाभीने मुजे कामपे रोक लीया था.. भाइ.. इसीलीये मे आपको सुबह मीलने आइ थी.. हमने प्यार भी तो कीया था.. आज आप भाभीके साथ अपनी सुहागरात अच्छेसे मनालो.. फीर हम बादमे मीलीगे.. तब आप अपनी सारी तम्मना पुरी करलेना.. अब तो मे भी आपकी होगइ हु.. अब आपही मेरे पती होगे..

बंसी : (बुब्स दबाकर मसलते) जागु.. प्लीज.. मुजसे दुर मत होना.. मे तुमसे भी जल्दी सादी करना चाहता हु..

जागृती : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. जानती हु मे.. मेभी आपसे सादी करना चाहती हु.. ओर भाभी खुद चाहती हेकी मेभी आपसे सादी करलु.. लेकीन भाइ.. मे इस बारेमे अ‍ेक बार भाभीसे बात करलु.. फीर हम तीनो डीसाइड करलेगे की कब हमे सादी करनी हे.. तब तक हम दोनो अ‍ैसेही मीलेगे.. ओर आपकी कुछ तम्मना भी हे.. तो मे उसे भी पुरी करना चाहती हु.. भाइ.. फीकर मत करो.. हम हमारी सादीसे पहेले ही मीलेगे..

जागुती : (गलेको चुमते) ठीक हे जागु.. चलना अभी कोइ नही हे.. मे तेरे साथ मीलन करना चाहता हु.. मे तेरे बीना नही रेह सकता.. आज क्या पटाका लग रही हे.. जीतो चाहता हे आज सांतीके साथ तेरे साथ भी सादी करके हमारी सुहागरात मनालु..

जागृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते) भाइ.. मे सीर्फ आपके लीये ही सजी थी.. बस.. थोडासा सब्र करलो.. हमारी सादी भी होगी ओर हमारी सुहागरात भी होगी.. मे भी तो यही चाहती हु.. हम जरुर मीलेगे लेकीन अभी नही.. अभी मुजे छोड दीजीये.. कोइ कभी भी इधर आ सकता हे.. वो दोनो भी मेरे पीछे पडी हेकी मे भी आपस सादी करलु.. भाइ छोडदो मुजे.. आइ प्रोमीस.. हम दोनो बहुत ही जल्द मीलेगे.. बस..?

कहातो बंसीने जागृतीके बुब्सको मसलते होठोको चुमकर छोड दीया.. तो जागृती बंसीकी ओर कामुक नजरोसे देखते हसते हुअ‍े जटसे अपने बालो ओर कपडेको सही करने लगी.. फीर अचानक बंसीकी बाहोमे समा गइ.. ओर बंसीके होठोपे कीस करके हसते हुअ‍े बहारकी ओर भाग गइ.. तब बंसी भी खुसीके मारे हसने लगा.. ओर जागृतीको जाते हुअ‍े देखता रहा.. फीर कुछ देरके बाद वो भी कंपलीट होकर बहार आगया ओर भोजनके पंडालमे चला गया....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९७

कहातो बंसीने जागृतीके बुब्सको मसलते होठोको चुमकर छोड दीया.. तो जागृती बंसीकी ओर कामुक नजरोसे देखते हसते हुअ‍े जटसे अपने बालो ओर कपडेको सही करने लगी.. फीर अचानक बंसीकी बाहोमे समा गइ.. ओर बंसीके होठोपे कीस करके हसते हुअ‍े बहारकी ओर भाग गइ.. तब बंसी भी खुसीके मारे हसने लगा.. ओर जागृतीको जाते हुअ‍े देखता रहा.. फीर कुछ देरके बाद वो भी कंपलीट होकर बहार आगया ओर भोजनके पंडालमे चला गया....अब आगे

कल राजीवका क्रिया कर्म था.. तो पंडीत सादीसे फ्रि होगये तब देवायत ओर मंजुने उनसे सब बाते करली.. तो पंडीतने भी देवायतको सुबह जल्दी आजानेकी बातकी.. तब जवेरीलालने जीतुलाल ओर अपनी बीवी वृन्दासे श्रीधर जयश्रीकी सादीकी बात करली.. तो दोनो खुस होगये.. फीर जवेरीलाल ओर जीतुलाल देवायतको आकर मीले.. ओर उनको सादीका न्योता दीया..

फीर सभी जेन्ट्स भोजन कर रहे थे तब ज्यादातर देवायतको इस बदलावके बारेमे बाते करते रहे.. जब सभी जेन्ट्सने भोजन करलीया तो सभी लेडीस भी भोजनके लीये आगइ थी.. तब गांवकी सभी लेडीस मंजु ओर पुनमको धेरकर बाते करने लगी.. तब दोनोने हस हसके सबको गांवमे कीस तराहका बदलाव होगा सब जानकीया देती रही.. तो उनमेसे ज्यादातर लेडीस सुनकर बहुत ही खुस होने लगी..

क्युकी कीसीना कीसी ओरते वो खुद अ‍ैसे आपसी रीस्तोमे बंधी हुइ थी.. ओर सब लेडीस मंजु ओर पुनमका समर्थन करने लगी.. तब मंजु ओर पुनम दोनो खुस होगइ.. इसी दौरान लता ओर भावना पुनमके साथ ही रही.. इसी तराह बंसी सांतीकी सादीके साथ साथ मंजु देवायतका मक्सद भी पुरा होगया.. कुछ लोगोको छोडकर गांवके ज्यादातर लोगोने इस बदलावको स्वीकार करलीया था..

ओर अपने अपने घरपे पनप रहे अ‍ैसे आपसी रीस्तोको स्वीकार करने लगे.. तो कुछ दुसरे गांवके लोगोको ओर कुछ सरपंचको अ‍ैसे रीस्तोमे बदलाव पसंद नही आये.. ओर वो भोजन करके सीधे अपने गांवकी ओर नीकल गये.. तो कुल मीलाकर आज गांवमे उत्सव जैसा माहोल होगया था.. जब सादी ओर भोजन संम्पन हुआ तो सब लोग सामतभाइकी इजाजत लेकर नीकलने लगे..

तब सामतभाइकी खुसीका भी ठीकाना नही था.. ओर लास्टमे लखन ओर बंसीके सभी दोस्त आपसमे मस्तीया करते भोजन पंडालका काम नीपटाने लगे.. तब मुना ओर श्रीधर सभी दोस्तो ओर हलवाइके लीये कुछ ठंडा लेने चले गये.. ओर कुछ ही देरमे सबके लीये कोल्ड्रींक्स लेकर वापस आगये.. फीर मुना ओर श्रीधर सबको ठंडा पीलाने लगे.. तब श्रीधरने भानु ओर रमेशको भी कोल्ड्रींक्स दीया..

तो दोनो पीने लगे.. तब मुना भानुकी ओर देखकर कातील मुस्कान करने लगा.. क्युकी उनका काम श्रीधरने करदीया था.. दरसल जब भानु बसंतीको इसारा करते उनसे बात करनेकी कोसीस कर रहा था तब ही मुनाको गुस्सा आगया था.. क्युकी भानुने बसंतीके सामने कभी नही देखनेका देवायतसे कीया वादा तोड दीया था.. तो मुनाने घर जाकर तीन जडीबुटीके पावडरको मीलकार अ‍ेक नपुसक होनेकी दवाइ बनाली..

ओर श्रीधरसे बात करके भानुको कीसी भी बहानसे पीलानेको कहा.. तो श्रीधरने सबकी नजर बचाते छुपकेसे भानुके कोल्ड्रींक्समे वो पावडर मीलाकर भानुको पीला दीया.. अब कुछ ही दिनके बाद धीरे धीरे करते भानुका हथीयार बेकार होने वाला था.. ओर आने वाले वक्तमे इन्हीका फायदा हमारे लखन भैयाको मीलने वाला था.. जब सादीका काम नीपट गया तब देवायत भी अपना परीवार लेकर घरपे चला गया..

तब रमेश अब भी सामतभाइके घरपे जयासे आंख मीचोली खेलते बैठा रहा.. तो लखन ओर उनके सभी दोस्तो पंडालका काम समेटकर बंसी ओर सांतीकी सुहागरातकी तैयारीया करने लगे.. बंसी सांतीके रुम ओर बेडको सजाते आपसमे अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते रहे.. लेकीन मुना ओर श्रीधरके अलावा भानु वाली बात कोइ नही जानता था.. तो दुसरी ओर ब्रीन्दाके साथ बसंती भी अपने अपने घर जा चुकी थी..

जयश्री ओर बरखाको जागृती ओर सांतीने रोक लीया था.. ताकी वो सामका भोजन उनके साथ करके सांतीको अपनी सुहागरातके लीये सजाकर जाये.. अब रमेश अकेला होगया था.. तो सामत भाइने उसे भी रातके खानेके लीये अपने घरपे रोक लीया था.. जब साम ढल चुकी तबतक लखनके सभी दोस्तोने बंसीके रुमको सजा दीया.. फीर सब लोगोने भोजन कर लीया..

तो जयश्री बरखाने सांतीको अपनी सुहागरातके लीये तैयार कर दीया.. ओर उसे बंसीके रुममे बीठा दीया.. तो जयश्री बरखा ओर सांती जागृतीकी टांग खीचाइ करती रही.. फीर वो भी अपने अपने पतीको लेकर अपने घर चली गइ.. ओर आखीर बंसीके सभी दोस्तो भी अपने अपने घरपे चले गये.. तो रमेश भी सबसे छुपकर जयाको इसारा करते अपने घरपे चला गया.. सामतभाइका पुरा घर खाली हो चुका था..

इधर घर जाते वक्त लता पुनम ओर भावना साथ चल रहीथी.. तो मंजु चंदा सृती रमा सभी बाते करते धीरे धीरे घरकी ओर जा रही थी.. तब लता पुनमसे कुछ बाते करना चाहती थी.. जो उसे पुनमने कहा था.. लेकीन तभी नीलम भी मुस्कुराते तीनोके साथ चलने लगी.. तब पुनमने नीलमकी ओर इसारा करते बादमे अपने रुममे अकेली आनेको कहा.. ओर वही बैठकर आरामसे बात करनेको कहा.. तो लता समज गइ..

सामतभाइके घरपे सीर्फ घरके लोग ही रेह गये.. तो आज सामतभाइ ओर जया भी बहुत थके हुअ‍े थे.. तो बीस्तरमे गीरते ही दोनो गहेरी नींद सो गये.. आज जागृती भी बहुत थकी हुइ थी.. इनके बावजुद उनको आज अपने भाइ भाभीकी सुहागरात देखनेकी बहुत ही इच्छा हो रही थी.. तो वो भी थकी होनेके बावजुद बीस्तरपे करवटे बदलती रही.. फीर देर रात धीरेसे उठकर बहार आंगनमे बंसीके रुमकी ओर चली गइ..
 
जैसे ही बंसीके रुमके पास आइ.. ओर खीडकीसे जांकते देखा तो आज बंसी पुरा नंगा होकर पीठके बल लेटा हुआ था.. ओर उनकी कमरपे सांती पुरी तराह नंगी होकर बैठी हुइ थी.. ओर बंसीके लंडको अपनी चुतपे फसाकर अपनी कमर हीलाते बंसीको बहुत ही कामुक तरीकेसे नसीली आंखोसे देखते धीरे धीरे बंसीको चोद रही थी.. आज सांतीने अपने सभी बाल खुले छोड रखे थे.. ओर बंसीके उपर जुकते बालोसे बंसीके चहेरेके ढकते उनके होंठ चुम रही थी..

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जागृती आज पहेली बार सांतीका अ‍ैसा कामुक रुप देख रही थी.. तभी सांतीने अपने बाल जटकते पीछे करलीया.. ओर बंसीके दोनो पंजोको पकडकर अपनी कमरको आडी टेडी हीलाते बंसीको चोदने लगी.. आज सांती बंसीकी कमरपे बैठी थी तब खीडकी बीलकुल उनके चहेरेके सामने थी.. जहा इस वक्त जागृती दोनोकी चुदाइ देखते अपनी चुतको सहेलाते अ‍ेक हाथसे अपने बुब्सको मसल रही थी..

तभी अचानक सांतीकी नजर खीडकी की ओर चली गइ.. तो जागृती आंख बंध करते पुरी मदहोस होते अपनी चुतमे उंगली कर रही थी.. तो सांतीके चहेरेपे जागृतीको देखते ही कामुक स्माइल आगइ.. ओर वो बंसीको चोदते हुअ‍े जागृतीकी ओर देखती रही.. तभी जागृती आंख खोलकर अंदरका नजारा देखने लगी.. तो सांती उनको ही देखते कामुक स्माइल कर रही थी..

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तब जागृती बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर सांतीकी ओर देखते सरमाते मुस्कुराने लगी.. तभी अचानक सांतीने आंखोके इसारोसे जागृतीको अपने रुममे आनेका इसारा कीया.. तो जागृती वापस सर्मसार होने लगी.. ओर सरमाकर गरदनको नां मे हीलाते जागृती मना करने लगी.. तो सांती थोडी जोरोसे कामुक सीसकारीया करते बंसीकी कमरपे उछलने लगी.. ओर दर्दके मारे अपना मुह बिगाडने लगी..

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जैसे जागृतीको दीखाना चाहती हो.. की देखो बंसीको वो अकेली नही जेल पा रही हे.. तभी वो ज्यादा उछलने लगी तब उनकी चुतने भी जवाब दे दीया.. ओर वो बंसीके उपर जुकते उनके होठोको लीप लोक कर लेती हे.. ओर अपनी कमरको जटके देते जडने लगती हे.. तभी बहारकी ओर जागृतीकी चुतसे भी फवारा नीकल गया.. तो अंदरकी ओर बंसी सांतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेता हे..

ओर सांतीको बाहोमे भीचते पलट जाता हे.. अब सांती बंसीके नीचे लेटी हुइ थी.. जैसेही बंसी सांतीके उपर आगया.. तब उनका ध्यान भी खीडकीपे चला गया.. जहा जागृती उनकी ओर देखते मुस्कुरा रही थी.. तो बंसीने भी सांतीकी नजर बचाते जागृतीको आंख मारके अंदर आनेका इसारा कीया.. तब जागृती वापस बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर बंसीको हसते हुअ‍े हाथ हीलाकर बाय कहेते चली गइ..

तो बंसी भी हसने लगा.. तब उनको नही पता था की सांतीने उनकी इस हरकतको देख लीया हे.. ओर वो जागृतीको देखकर ओर जोसमे आगया.. ओर उनका लंड स्टीलके रोडके माफीक होगया.. वो सांतीको जागृती मानकर हाथके बल उचा होकर सांतीको जोरोसे चोदने लगा.. तो सांती हल्कासा मुह बीगाडते चीखने लगी.. आज उनको वाकइ बंसीको जेलना मुस्कील होने लगा.. क्युकी वो अभी अभी जडी हुइ थी..

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सांतीके लीये आजकी रात कयामतकी रात थी.. उनको पता था आज पुरी रात बंसी उनको चोद चोदके थका देगा.. ओर उनका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख देगा.. क्युकी बंसी उसे इस वक्त अपनी बीवीको नही.. अपनी बहेनको इमेजींग करते उनको चोद रहा हे.. दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. तब कुछ ही देरके बाद सांती भी अपनी मनमे खुस होते कमर उछाल उछालके बंसीको चुदवानेमे साथ देने लगी..

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ओर आखीर दोनो अकडने लगे.. तो अ‍ेक दुसरेको जोरोसे बाहोमे भीच लेते हे.. ओर बंसी कमरको जटके देते पुरा लंड सांतीकी चुतमे घुसा देता हे.. ओर पीचकारीया मारते सांतीकी चुतको भरके हरी भरी करने लगता हे.. तब सांती भी बंसीके साथ जडने लगी.. ओर दोनो अ‍ेक साथ जड गये.. तब बंसी सांतीके सीनेके उपर सर रखते ढेर होगया.. तो सांती उनकी पीठ ओर बालको सहेलाती रही.. तभी..

सांती : (सांसको कंट्रोल करते सरमाते मुस्कुराते) बंसी.. आज आप कीतने जोसमे चोद रहे थे.. आजतो मजा ही आगया.. कीतने दिनोके बाद मेरी अ‍ैसी चुदाइ हुइ हे..

बंसी : (बुब्सकी नीपलको चुमते) सांती.. आज तो हमारी सुहागरात हे.. आज मे तुजे छोडने वाला नही हु.. आज मे तुजे पुरी रात अ‍ैसे ही चोदुगा.. सुबह चलने लायक भी नही रहेगी.. मे तुमसे बहुत प्यार करता हु..

सांती : (सरमाते होंठ चुमते) हां बंसी.. आज मेरी सारी तम्मना पुरी होगइ.. हमारी सादी भी होगइ.. अब मे जींदगी भर आपको अ‍ैसेही प्यार देती रहुगी.. बंसी.. अब मुजे आइपील लेनेकी जरुरत नही हे.. अब मे प्रेगनेन्ट हो जाउ तो भी कोइ दिकत नही हे.. हम हमारे बच्चेको इस दुनीयामे लायेगे.. लेकीन बंसी.. मुजे आपसे आज अ‍ेक बात भी कहेनी हे..

बंसी : (मुस्कुराते होंठ चंमते) हंम.. कहो.. क्या बात कहेनी हे..

सांती : (सरमाते धीरेसे गाल चुमते) जानु.. बुरा मत मानना.. क्या आज आप अपनी बीवीको ही चोद रहेथेनां..?

बंसी : (थोडा जेंपते) सांती.. अ‍ैसा क्यु पुछ रही हो..? अफकोर्स मे तुजे ही चोद रहा था.. क्या यहा कोइ ओर हे..?

सांती : (मुस्कुराते) क्या हेना.. आज आप मुजे बहुत जोसमे चोद रहे थे.. इसीलीये पुछ रही थी.. मेरे खयालसे आपको जेलना मुज अकेलीका काम नही हे.. मतलब.. अब मे आपको अकेली नही जेल पाती.. अगर आप दुसरी सादी करना चाहा तो..

बंसी : (थोडा गुस्सा होते) सांती.. तेरा दिमाग तो ठीक हेनां..? अभी हम दोनोने अपनी सुहागरात भी ठीकसे नही मनाइ.. ओर तुम होकी.. (थोडा जुठ बोलते) सांती मे तुजे बहुत प्यार करता हु.. अ‍ैसा सोच भी नही सकता.. ओर तुम.. तेरे दिमागमे ये बात आइ कैसे..?

सांती : (मुस्कुराते) बंसी अगर आपको बुरा लगा तो आइ अ‍ेम सोरी.. मे तो बस आपको अ‍ैसे ही केह रही थी.. क्या हेनां आप जब भी मुजे पुरी रात चोदते होनां तो सुबह मे बहुत थक जाती हु.. ओर पुरा दिन सरीस दर्द करता हे.. इसीलीये आपको केह रही थी.. अगर आप चाहो तो मे आपके लीये दुसरी लडकीका इन्तजाम कर सकती हु.. मीन्स.. मैने करलीया हे.. आप चाहो तो उनसे भी सादी कर सकते हो..

बंसी : (थोडा चोंकते) सांती.. क्या केह रही हो तुम..? कौन हे वो..? सांती.. मे तुमसे वाकइ सचा प्यार करता हु.. मुजे नही करनी दुसरी सादी.. अगर तुम नही चाहती तो हम पुरी रात चुदाइ नही करेगे.. जब तुम कहोगी तब ही करेगे..

सांती : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. लेकीन अब तो मुजे आपसे पुरी रात चुदवानेकी आदत हो गइ हे.. तो मे बीना चुदाइ रेह भी तो नही सकती.. क्या हेना अगर दो होगी तो मुजे बीच बीचमे आराम भी मीलेगा.. इसीलीये केह रही हु.. की आप दुसरी सादी करलो.. ओर वो भी तो आपको पसंद करती हे..
 
बंसी : (आस्चर्यसे देखते) वो मुजे पसंद भी करती हे..? सांती.. कौन हे वो..? बता मुजे..

सांती : (सरमाते धीरेसे) जानु.. प्रोमीस करो.. इनका नम सुनकर आप गुस्सा मत होना.. तो ही मे उनका नाम बताउगी..

बंसी : (हसते कीस करते) अरे डार्लींग इसमे गुस्सा करनेकी क्या बात हे.. ठीक हे.. प्रोकीस.. मे गुस्सा नही करुगा.. बता मुजे..

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सांती : (मुस्कुराते धीरेसे) जानु.. वो.. वो.. हमारी.. जा..गु..

बंसी : (चोकते धीरेसे) सांती.. क्या केह रही हो तुम.. वो मेरी बहेन हे.. क्या वो मुजे पसंद करती हे..?

सांती : (सीना सहेलाते मुस्कुराते) हां जानु.. बहेन हेतो क्या हुआ.. अब तो हमारे गांवमे भी अ‍ैसे रीस्तोको सभीने स्वीकार करलीया हे.. ओर आपके सभी दोस्तोने भी उनकी बहेनसे ही सादी करली हे.. तो फीर आपको क्या प्रोबलेम..? उनकी भी तम्मना हे.. की वो भी अपने भाइसे प्यार करेगी.. इसीलीये तो खीडकीसे हम दोनोकी सुहागरात देख रही थी..

बंसी : (चोंकनेका नाटक करते) क्या..? जागु हमको खीडकीसे देख रही थी..?

सांती : (जुठे गु्स्सेसे दांत पीसते सीनेमे मुका मारते) जानु.. आप कीतने कमीने हो.. कीतना अनजान बननेका नाटक कर रहे हो.. मे तो देख रही थी.. की आप क्या कहेते हो..? मुजे सब पता हे आपने भी उनको देखलीया हे.. ओर उनको क्या इसारा कर रहे थे..? अगर वो खुद आपसे चुदवाना चाहती हे.. तो फीर आपको क्या प्रोबलेम हे..? जानु.. अ‍ेक बार उस कमीनीको मेरे सामने पटक पटकके चोदलो.. फीर करलो उनसे भी सादी.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. हें..हें..हें..

बंसी : (मनमे खुस होते धीरेसे होंठ चुमते) हें..हें..हें.. सांती.. क्या तुने सब देखलीया..? लेकीन क्या ये सही होगा..? अगर मेने उनसे भी सादी करली तो तुजे बुरा नही लगेगा क्या..? ओर हम मम्मी पापाको क्या जवाब देगे..

सांती : (होंठ चुमते) जानु.. वो सब मे सम्हाल लुगी.. बस.. आप अ‍ेक बार हां केह दिजीये.. क्युकी मे खुद चाहती हु.. की जागु मेरी ननंद नही.. मेरी छोटी बहेन बनकर मेरे साथ रहे.. बस.. आप कुछ दिन इन्तजार कीजीये.. फीर सब सही होजायेगा..

बंसी : (सामने देखते) कुछ दिन मतलब..? क्या कुछ होने वाला हे क्या..?

सांती : (बातको सम्हालते) अरे नही नही.. मेरे कहेनेका मतलब.. कुछ दिनोके बाद मे खुद इस बारेमे जागुसे बात करलुगी.. कमीनी वो भी तो यही चाहती हे.. ओर इस बारेमे आपको कोइ टेन्सन लेनेकी जरुरत नही.. अगर आप आगे बढना चाहो तो बढ सकते हो.. मुजे पता हे आप भी उनको पसंद करते हो..

बंसी : (मनमे खुस होते) ठीक हे सांती.. जैसे तुम्हारी मरजी.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

सांती : (मनमे खुस होते) हंम.. देखा.. बहेनका सुनकर कैसे मनमे लडु फुटने लगे.. कमीने कहीके.. सबको अपनी बहेनको ठोकनेमे ही मजा आता हे.. चलो कोइ बात नही.. इसी खुसीपे मुजे दोबारा चोदीये.. ओर इस बार मुजे अपनी बहेन मानकर नही.. अपनी बीवी मानकर चोदना.. आप क्या मस्त चुदाइ करते हे.. देखना जागु भी खुस होजायेगी.. हें..हें..हें..

कहा तो बंसी मुस्कुराने लगा.. तब सांतीको नही पता था.. की आज ही बंसी ओर जागृतीने दो बार मील लीया था.. ओर दोनो बार जागृती चुदाइसे बच गइ थी.. ओर धीरे धीरे कमर हीलाते बंसी वापस सांतीको चोदने लगा.. इस बार सांती भी अपनी कमर उछाल उछालके बंसीको चुदाइमे साथ देने लगी.. सांती जागृतीका नाम लेते बंसीको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साती रही..

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तो बंसी भी पुरे जोसमे सांतीकी चुदाइ करता रहा.. ये दोनोके लीये आजकी वो रात थी जो कभी थमने वाली नही थी.. दोनो पुरी रात चुदाइ करते रहे.. पुरी रात मे बंसीने सांतीको चार बार चोद लीया.. ओर चोद चोदके सांतीका पुरा सरीर तोडके रख दीया था.. सांती चाहती थी की बंसी उसे आज ही प्रेगनेन्ट करदे.. लेकीन उनको नही पता था की बंसी उनको ओल रेडी पहेले प्रेगनेन्ट कर चुका हे..

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तो दुसरी ओर दो दिनमे ब्रीन्दा ओर बसंतीने भी अपने अपने बेटोके साथ जमकर चुदाइ करवाली थी.. तो वो भी संतुस्ट होकर सो रही थी.. तब मुना ओर श्रीधर अपनी अपनी बहेन जो अब उनकी बीवीया थी.. उनकी जमकर चुदाइ कर रहे थे.. पुरे गांवमे आज बदलावके बारेमे सुनकर वासनाका तांडव मचा हुआ था.. आज सब लोग खुलकर अपनी अपनी मासुकाओके साथ चुदाइमे मसगुल थे..

तब अ‍ेक सख्स अब भी अपना लंड हाथमे थामकर चुतका इन्तजाम करनेमे लगा हुआ था.. जीहा.. वो सख्स थे हमारे लखन भैया.. क्युकी वो अब खुद लताको चोदना नही चाहते थे.. क्युकी अ‍ेक तो लताका पीरीयड चल रहा था.. तो दुसरी ओर लता उनके लंडसे बहुत डरी हुइ थी.. तो वो खुद अब लतासे दुर रहेना चाहता था.. बस.. यही लता ओर लखनके बीच दुरीया बढनेकी सुरुआत थी..

लखनको आज रजीया ओर राधीकाकी बहुत याद आ रही थी.. राधीका तो उनसे दुर सहेरमे थी.. तब उसने रजीयाको फोन लगाके कोल कीया.. तो रजीया भी गहेरी नींद सो चुकी थी.. ओर उसने फोन नही उठाया.. तब लखन पागल जैसा होने लगा.. अ‍ेक पल तो उसने सोचा आज वो रमाको बुलाकर उनकी चुदाइ करले.. लेकीन उसने रमाकी चुदाइ कभी नही कीथी..

तो रमाके साथ चुदाइ करनेमे हंगामा होनेका बहुत खतरा था.. तो उसने रमासे मीलनेका विचार भी त्याग दिया.. वो अपने खेतो पे जाकर भी कीसी लडकी या फीर रीटाको चोद सकता था.. लेकीन इस वक्त रात भी बहुत हो चुकी थी.. तो वो वहा भी जाना नही चाहता था.. अब उनके पास रजीयाके पास जानेके अलावा ओर कोइ रास्ता नही था.. अ‍ेक रजीया ही थी जो उनसे हर वक्त चुदाइके लीये तैयार रहेती थी..

इस वक्त दया ओर चंपाभाभी भी गहेरी नींदमे होगी.. ओर वो रजीयाको वही चोदकर अपने रुममे चला जायेगा.. यही सब सोचते उसने रजीयाके रुममे जाकर उनकी चुदाइ कर लेनेका फैसला करलीया.. देर रात यही सब सोचते लखन हवेलीपे आगया.. पुरी हवेलीमे सनाटा छाया हुआ था.. इस वक्त हवेलीपे सभी लाइटे बंध थी.. ओर सब लोग अपने अपने कमरेमे जाकर सो चुके थे..

क्युकी कल सुबह राजीवका क्रिया कर्म था.. तो सबको जल्दी उठना था.. सीर्फ देवायत ही अपने रुममे अपनी तीनो बीवीओको चोद रहा था.. तो लखन चारो ओर देखने लगा.. ओर कुछ सोचते वो रजीया दयाके रुमकी ओर दबे पांव चला गया.. ओर दरवाजेको हल्कासा धका मारा.. तो लखनके अच्छे नसीबसे दरवाजा खुल गया.. ओर लखन दबे पांव अंदर चला गया..
 
तो वहा आस पास तीन बीस्तर लगे हुअ‍े थे.. ओर तीनो अपने उपर कंबल डालकर सोइ हुइ थी.. तब लखन समज गया की रजीया दया के अलावा यहा चंपा भाभी भी सोइ हुइ हे.. पुरे रुममे अंधेरा छाया हुआ था.. तो कीसीकी सकल भी नजर नही आ रही थी.. तब लखन हिंमत करते अ‍ेक बीस्तरके पास चला गया.. ओर चहेरेके नजदीक चहेरा लेजाते गौरसे देखने लगा.. तो उनको ये चहेरा दयाका लगा..

ओर लखन वहासे धीरेसे दुर हट गया.. ओर दुसरे बीस्तके पास चला गया.. तब उनको नही पता था.. की जब वो अंदर आया तब ही दो आखोने उनको पहेचान लीया था.. जो बीना चुदाइके कही दिनोसे प्यासी थी.. जब लखन उनके पास आया ओर उनपे जुकते उनके चहेरेको देखनेकी कोसीस करने लगा. तभी अचानक कंबलसे अ‍ेक हाथ नीकला.. ओर लखनका हाथ थामते पकडलीया..

फीर अपने बीस्तरपे खीचते लखनको भी अपने साथ सुला दीया.. तो लखन भी रजीया समजकर मुस्कुराते उनके कंबलमे घुस गया.. ओर समजने लगाकी रजीयाने उनको देख लीया होगा.. ओर ये रजीया ही होगी.. जो उनको इस तराह खीचकर अपने साथ सुलाती हे.. तब लखन बीना देरी कीये उनको अपनी बाहोमे भरते उनपे चड गया.. ओर चहेरेको अपने हाथोमे थामते चुमने लगा..

लखन : (धीरेसे कानमे) रजु.. मुजे पता हे तुमने मुजे पहेचान लीया था..

कहा तो उनके होठोपे फौरन अ‍ेक उंगली आगइ.. ओर लखनको इसारोमे चुप रहेनेको कहा.. ताकी कोइ.. इनकी हल्कीसी आवाज से भी जाग ना जाये.. उसने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर हाथ नीचेकी ओर लेजाते लखनके लंडको अपनी मुठीमे पकडनेकी कोसीस करने लगी.. तभी लखन उनके उपरसे हट गया ओर बैठकर अपनी सर्ट पेन्टको नीकाल देता हे.. ओर पुरा नंगा होकर वापस कंबलमे घुसकर उनके उपर लेट गया..

तब उसने वापस लखनको अपनी बाहोमे कस लीया ओर उनके लंडको अपनी मुठीमे थाम लीया.. तो अ‍ेक बार तो वो भी चोंक गइ.. लेकीन इतने दिनोसे चुदाइसे वंचीत थी.. तो वो कीसी भी हालमे कीसीसे भी चुदवाना चाहती थी.. जी..हां.. दोस्तो ये रजीया नही थी.. ये चंपा भाभी थी.. जो रजीयाकी बाते सुन सुनकर कही दिनोसे लखनके लंडको नोटीस कर रही थी.. ओर आज उसे लखनसे चुदवानेका मौका मील गया था..

वो लखनके लंडको पकडकर अपनी चुतपे घीसने लगी.. तब लखनको अपने लंडपे चुतकी गरमी महेसुस हुइ जो भठीकी माफीक गरम थी.. तब लखन भी तावमे आ गया.. ओर चंपा भाभीको रजीया समजकर उनके होठोको चुमते बुब्सको थाम लेता हे.. तो आज लखनको कुछ अजीब ही फील हुआ.. उनको बुब्स बहुत बडे लगे.. लेकीन इतने दिनोसे चुदाइसे वंचीत रहेते इनपे कुछ खास ध्यान नही दिया..

जब चंपाभाभीकी चुत गीली होगइ तब उसने लंडको अपनी चुतमे थोडासा पुस करते फसालीया ओर लखनको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. तब लखनको भी पता था की आज रजीया भी इनके लंडको नही जेल पायेगी.. तब उसने लीपलोक करते अपनी कमरको जटकते अ‍ेक जटका मारा.. तो चंपा भाभीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. वो लखनके मुहमे ही गुं..गुं..गुं.. करने लगी..

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लेकीन येतो लखन था.. अ‍ैसा मौका हाथसे क्यु जाने देता..? ओर उसने देर ना करते अ‍ेक जटका ओर मारा.. तो लखनका पुरा लंड चंपा भाभीकी चुतमे उतर गया ओर वो छटपटाते लखनसे होठ छुडवानेकी कोसीस करने लगी.. तब भी लखन उनके होठोको ना छोडते चुमने लगा.. ओर उनका सर सहेलाते सांत रहेनेका इसारा करने लगा.. तब कुछ देरमे चंपा भाभी सांत होने लगी.. तभी..

लखन : (कानमे धीरेसे) बस.. बस रजु.. हो गया.. अब तुजे ओर दर्द नही होगा.. मेरा लंड थोडा बडा हो गया हे.. ओर ये सब जडी बुटीकी वजहसे हुआ हे.. ओर हम कइ दिनोसे मीले भी तो नही..

तब चंपा भाभी समज गइ.. की लखनने उनको अभी भी नही पहेचाना.. ओर वो उनकी रजीया समजकर चुदाइ कर रहे हे.. तब चंपा भाभीने भी कुछ बोलना मुनासीब नही समजा.. ओर वो अपने दोनो पैरकी आंटी लखनकी कमरपे लगा देती हे.. ताकी कुछ देर तक लखन उनकी चुदाइ ना कर सके.. ओर वो लखनकी पीठको सहेलाते उनके होठोको चुमती रही.. तो लखन भी उनका साथ देता रहा..

जब उनका दर्द कम हो गया तब उसने आंटी हटाली.. ओर लखनके नींतंबको पीछेसे पकडलीया.. ओर अपनी चुतपे दबाव बनाने लगी.. तब लखन समज गयाकी रजीयाका दर्द खतम हो गया हे.. ओर वो उसे चोदनेके लीये केह रही हे.. तब लखन धीरे धीरे कमर हीलाते चोदने लगा.. तब उनको हल्कीसी सीसकारीयोकी आवाज सुनाइ देने लगी.. ओर दोनोके बीच धीरे धीरे करते घमासान चुदाइ होने लगी..

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तो कुछ ही देरमे चंपा भाभीका तन अकडने लगा.. ओर उसने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर लीपलोक करलीया फीर अपनी कमरको जटके मारते जडने लगी.. लेकीन आज लखन हे की जडनेका नाम ही नही ले रहा था.. तभी अचानक लखन हाथके बल उचा होगया.. ओर चंपा भाभीके गलेमे मुह घुसाते उनको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा..

तब पुरे कमरेमे सनाटा छाया हुआ था ओर सीर्फ थप.. थप.. ओर फच.. फच..की आवाजे सुनाइ दे रही थी.. रजीया तो गहेरी नींद सो रही थी.. लेकीन थप थपकी आवाजसे दयाकी आंख खुल गइ.. ओर वो धीरेसे अपने सरसे कंबल हटाते लेटे लेटे ही सर उचा करके देखने लगी.. तब उसे चंपा भाभीका कंबल हीलता हुआ महेसुस हुआ.. तो दया कुछ देर अ‍ैसे ही देखती रही.. तब उसे लगाकी कोइ चंपा भाभीकी चुदाइ कर रहा हे..

तो वो धीरेसे खडी होकर लाइट बोर्डकी ओर जाने लगी.. तभी अचानक लखन चंपा भाभीपे जुक गया.. ओर अपनी कमरको जटके देने लगा.. तब चंपा भाभीने लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखन आज ढेर सारी पीचकारीया छोडते चंपा भाभीकी चुतको लबा लब भरने लगा.. ओर वो उनके सीनेपे ढेर होगया.. तो चंपा भाभी लखनकी पीठको सहेलाती रही.. तब लखन ओर चंपा भाभी.. दोनो संतुस्ट हो गये थे..

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अ‍ैसा पहेली बार हुआ लखनने जडीबुटी खाकर पहेली बार चुदाइ करली.. फीर भी उनको थकान महेसुस नही हुइ.. तभी उसे खयाल आया की वो रजीयाके रुममे हे.. तो वो फटाफट नीचे उतर गया ओर अपने कपडे पहेनने लगा.. तभी अचानक रुमकी लाइट जल गइ.. तो चंपा भाभी ओर लखन रोसनीकी वजहसे थोडा डर गये.. चंपाभाभी अपने नीकरसे अपनी चुतको साफ कर रही थी.. ओर लखन अपने कपडे पहेन रहा था.. दोनोही डरते स्वीच बोर्डकी ओर देखने लगे..

की कीसने लाइट जलाइ.. तब वहा दया दोनोकी ओर देखते मुस्कुरा रही थी.. तभी लखनका ध्यान भी चंपा भाभीकी ओर गया.. जो अभी भी सरमाते हुअ‍े अपनी चुतको मुस्कुराते साफ कर रही थी.. तो लखन उनको देखते ही चोंक गया.. ओर वो फटाफट कपडे पहेनने लगा.. तभी रजीयाकी आंख भी खुल गइ.. ओर ये सब देखकर सारा माजरा समज गइ.. ओर वो भी दया ओर चंपा भाभीके साथ जोरोसे हसने लगी.. तभी..

लखन : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. आप..? क्या हेना.. वो.. वो.. मे समजा.. रजीया होगी.. सोरी भाभी..

दया : (जोरोसे हसते) लखन भैया.. गभराइअ‍े नही हम कीसीको कुछ नही कहेगे.. आपकी बीवी इधर थी.. उधर नही समजे..? हें..हें..हें.. खामखा भाभीकी कुटाइ हो गइ.. हें..हें..हें..

रजीया : (सरमाकर हसते) लेकीन भाभी.. आपको तो बता देना चाहीयेना.. की आपकी बीवी इधर हे..

चंपा : (सरमाकर हसते) अरे.. मे क्यु बोलु..? तेरा पती मुजे बोलनेका मौका दे तब बोलुगीनां.. वो तो आतेही सुरु हो गये.. लेकीन रजु.. तु हे बहुत नसीब वाली.. अ‍ैसा दमदार पती तुजे कहा मीलेगा..? हें..हें..हें.. आज तो मजा आगया.. हें..हें..हें.. लखन भैया अ‍ैसे ही आते रहीयेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते बहारकी ओर जाते) तुम तीनो की तीनो कमीनी हो.. मे तीनोको देख लुगा..

कहेते लखन जटसे बहार नीकल गया.. तो तीनो जोरोसे हसने लगी.. फीर लाइट बंध करके वापस सो गइ.. तो इधर लखन भी खुस होते अपने रुममे आगया.. तब लता गहेरी नींद सो रही थी.. तो लखनको उसे जगाना उचीत नही लगा ओर वो भी फ्रेस होकर नाइट ड्रेस पहेन लेता हे.. ओर लतासे चीपकर सो जाता हे.. तब लता भी नींदमे मुस्कुराते लखनसे चीपक गइ.. ओर दोनो सो गये..
 
हवेलीपे सुबह सुरज उगनेसे पहेले ही दया रजीया ओर चंपा भाभी जल्दी जाग गइ.. तब चंपा भाभी थोडा लंगडाते चल रही थी.. जीसे देखकर रजीया ओर दया दोनो हसने लगी.. तब चंपा भाभी बहुत ही सर्मसार होगइ.. फीर तीनो कंपलीट होकर कीचनमे आगइ.. ओर घरका सब काम फटाफट नीपटाने लगी.. तबतक नीर्मला भुमीका ओर सरला काकी भी जल्दी जाग गये थे.. ओर कंपलीट होकर बहार होलमे आकर बैठ गइ..

तब अ‍ेक अ‍ेक करके सबलोग तैयार होकर नीचे आगये.. आज सबको क्रिया कर्म खतम होने तक उपवास रखना था.. तभी पंडीतजी भी चार ओर पंडीतको लेकर आगये.. ओर क्रीया कम्रकी सब तैयारीया करने लगे.. तब कुछ ही देरमे भानु भी आगया.. तो रमा ओर नीलम दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर मुस्कुराने लगी.. तब नीर्मलाने भावनाको भी भानुके साथ बैठनेको कहा.. तो रमा थोडी नीरास होकर भावना भानुको देखने लगी..

तभी धिरेन भी अपनी बाइक लेकर आगया.. ओर जैसे ही नीलमको देखा चहेरेपे खुसी छागइ.. ओर नीलमको देखकर मुस्कुराने लगा.. तब नीलम भी खुस होते सरमा गइ ओर मुस्कुराते धिरेनको मीलनेका आंखोसे इसारा करने लगी.. तभी धिरेनने सबकी नजर बचाते नीलमको आंख मारदी.. ओर इसारोसे हां कहेते होलमे आगया.. तब उनको नही पता था की इन दोनोके उपर तीन लोग नजर रख रहे हे..

पुनम भावना ओर लता तीनो जैसे ही धिरेन आया तबसे नजर जमाये हुअ‍े खडी थी.. धिरेनकी हरकत देखकर लता ओर भावनाको गुस्सा आने लगा.. लेकीन पुनमने मुस्कुराते भावनाका हाथ थाम लीया.. जैसे उनको कोइ फर्क ही नही पडा.. ओर वो भावनाका हाथ पकडकर उसे अपने रुममे ले गइ.. ओर लता मन ही मन धिरेनको गालीया देती रही.. तब रुममे जाते ही..

भावना : (धीरेसे) दीदी.. देखा आपने..? कमीना आते ही सुरु होगया.. कैसे खुले आम नीलुको आंख मार रहा था.. जैसे हमारी हाजरीसे उनको कोइ फर्क ही नही पडा..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. छोडीयेनां गुस्सा.. अब उन दोनोको जो भी करना हे करने दीजीये.. ये सब मेरे यहा वापस आनेका रास्ता आसान कर रहे हे.. तो हम क्यु अपना दिमाग खराब करे..

भावना : (पुनमके सामने देखते धीरेसे) पुनोदी.. क्या आपको इनपे गुस्सा नही आता..? आपके पती हे वो.. कमीना कैसे खुले आम नीलुको आंख मार रहा था..

पुनम : (मुस्कुराते धिरेसे) भाभी.. मे सब जानती हु.. पता हे मुजे की वो मेरे पती हे.. लेकीन जो भी होना हे उसे ना आप रोक सकती हे ओर नाही मे.. तो फीर हम क्यु अपना दिमाग खराब करे..? हमे तो सीर्फ प्यार चाहीयेनां..? वो ही प्यार तो मेरे पहेले पतीसे मुजे खुब मील रहा हे.. जीसे मे भी बेहद प्यार करती हु.. तो फीर ये पती तो टेम्पररी हे.. इनका क्या दुख लगाना.. हें..हें..हें..

भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. कमाल हो आप भी.. कास इतनी समज मुजमे भी होती.. तो आज मुजे भानुसे इतना दुख नही होता.. मे भी अपने पुराने प्यारको मील लेती.. ओर उनसे सारा प्यार पा लेती.. क्या फर्क पडता.. की भानु रमासे मीले या कीसी ओरसे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. आपको भी अपना प्यार बहुत ही जल्द मील जायेगा.. इसी घरमे.. मंजु भाभीने सब इन्तजाम करलीया हे.. अब चलीये बहार मुजे भी धिरेनके साथ बैठना पडेगा.. जब तक ये मेरे पती हे.. मुजे उनकी पत्नी होनेका मेरा नाटकर जारी रखना पडेगा.. हें..हें..हें..

भावना : (खुस होते मुस्कुराते) हां चलीये.. आपको ओर दीदीको तो सब पता चल जाता हे.. हें..हें..हें..

तब कुछ ही देरमे देवायतके साथ मंजु चंदा ओर सृती तीनो हस हसके अ‍ेक दुसरेसे बाते करते बहार आगइ.. तबतक पंडीतजीने भी सभी तैयारीया करली.. तो भानु ओर धिरेन भी धीती पहेनकर तैयार हो गये.. फीर पंडीतजीने सबको बुला लीया.. तब देवायतके साथ मंजु बैठ गइ.. इनके साथ भानु ओर भावना भी बैठ गये.. तो देवायतने मुख्य पुजाके लीये धिरेन ओर पुनमको बीठा दीया..

फीर पंडीतजी सबको क्रिया कर्मकी वीधीया कराने लगे.. तीन घंटे तक पुजा चली.. जीसमे राजीवके पीडदानको लेकर सबकुछ वीधीया हुइ.. तबतक नीर्मला अपने आंसु बहाती रही.. ओर अंतमे पुजा खतम हुइ तब तीनो कपलको नदी कीनारे पैडल चलकर जाना था.. ओर पुजाकी सभी चीजे उसमे प्रवाहीत करनी थी.. तो तीनो कपल चले गये.. जीनके साथ पंडीतजी भी गये थे.. इस पुजामे सीर्फ घरके लोग ही सामील थे.. बहारके कीसीभी लोगको नही बुलाया था..

जब सबलोग वापस आगये तब पंडीतजी अपना सब सामान समेटने लगे.. तबतक दया रजीया ओर चंपा भाभीने सबके लीये बडीया भोजन भी बना लीया था.. तो देवायतने सबसे पहेले सभी पंडीतोको भोजनके लीये बीठा दीया.. जब भोजन करलीया तब देवायतने सभी पंडीतोको तगडी दक्षीणा देदी.. तो सभी पंडीत बहुत खुस हो गये.. ओर सबको आशीर्वाद देकर चले गये.. तब घरके सभी लोग भी भोजन करने बैठ गये..

आज नीलम बडी ही अंसमजमे फसी हुइ थी.. क्युकी जबसे उसने धिरेनके लंडको अपनी चुतमे लीया था तबसे उसे कही चैइन ही नही मीलता था.. ओर वो उसे अ‍ेक बार फीर अकेलेमे मीलना चाहती थी.. तो दुसरी ओर उनको लखनको भी पटाना था.. ओर उपरसे वो अपना धिरेनके साथका रीलेशन भी रमासे छुपाना चाहती थी.. ओर इस वक्त रमा उनके साथ ही बैठी थी.. तो नीलम धिरेनकी ओर कुछ खास ध्यान नही देपाइ.. ओर उसे मजबुरन लखनकी ओर ध्यान देना पड रहा था..

तब रमा भी बार बार लखनकी ओर देखते सरमाकर मुस्कुरा रही थी.. ओर उनसे आंख मीचोलीका खेल रही थी.. तब मंजु ये सब देखकर पुनमकी ओर देखते हस रही थी.. जीसे देखकर सृती पुनमसे धीमी आवाजमे कुछ कहेने लगी.. तो भावना भी पुनमकी ओर जुकते सृतीकी बाते गौरसे सुनने लगी.. जब बात खतम होगइ तब तीनो जोरोसे हसने लगी.. ओर इसी तराह सबने भोजन करलीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९८

तब रमा भी बार बार लखनकी ओर देखते सरमाकर मुस्कुरा रही थी.. ओर उनसे आंख मीचोलीका खेल रही थी.. तब मंजु ये सब देखकर पुनमकी ओर देखते हस रही थी.. जीसे देखकर सृती पुनमसे धीमी आवाजमे कुछ कहेने लगी.. तो भावना भी पुनमकी ओर जुकते सृतीकी बाते गौरसे सुनने लगी.. जब बात खतम होगइ तब तीनो जोरोसे हसने लगी.. ओर इसी तराह सबने भोजन करलीया....अब आगे

तो नीलम फटाफट सीडीयोके पास चली गइ.. ओर सबकी नजर बचाते धिरेनकी ओर फोनका इसारा करते नंबर मांगने लगी.. ओर इसारोसे केह दियाकी उनका फोन लता दीदीके पास हे.. तब धिरेन थोडा नीरास होगया.. ओर वो जेबसे अ‍ेक चीठी नीकालकर उनपे अपना नंबर लीखने लगा.. फीर चीठीकी गडी करके अपनी जेबमे रख लीया.. ओर नीलमको इसारोसे अपनी जेबपे हाथ रखके तसली देने लगा..

भोजन करके सबलोग होलमे बैठेथे.. तब पुनम सृती ओर भावनाके कानमे कुछ कहेती हे.. तो सृती भावना हसने लगी.. ओर पुनमके साथ कीचनमे चली गइ.. तो वहा दया रजीया ओर चंपा भाभी काम नीपटाते अपने खानेकी तैयारीया कर रही थी.. जैसेही चंपाभाभी कुछ लेने के लीये चली तो पुनम सृती ओर भावना उनको देखकर जोरोसे हसने लगी.. तब चंपा भाभी बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर सफाइ देने लगी..

चंपा : (मुस्कुराते) दीदी.. कल रात पैरमे मोच आगइ थी.. थो थोडा दर्द अभी भी हे..

पुनम : (जोरोसे हसते) अच्छा..? हें..हें..हें..

दया : (हसते धीरेसे) चुपा भाभी.. अब पुनो दीदीसे छुपानेसे कोइ फायदा नही हे.. आपको तो पता हे बडी मालकीन ओर पुनोदीदीको सब पता चल जाता हे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) भाभी.. कोइ बात नही.. हम कीसीसे कुछ नही कहेगे.. हम तो सीर्फ आपकी खबर पुछने आइ थी.. हें..हें..हें.. आप ठीक तो हेनां..

चंपा : (सरमाकर मुस्कुराते) देवरानीजी.. आप तो देख ही रही हे मेरी हालत कैसी हे.. क्या हेनां.. आपतो जानती हे.. हम ओरतोकी भी क्या क्या तकलीफ होती हे.. अ‍ेक तो पती नही हे.. ओर उपरसे जो मेरा खयाल रखता था वो भी गुजर गया.. ओर अब बडे देवरके पास भी हमारे लीये समय नही हे.. तो मे कइ दिनोसे अ‍ैसे ही तडप रही थी.. तो कल.. बुडी मुस्कीलसे मौका हाथ लग गया.. तो अ‍ैसी हालत होगइ..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) बडे देवर मतलब.. क्या देवु..?

पुनम : (हसते बीचमे ही रोकते) अरे हां.. सृती भाभी सुनीये तो सही.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. हां चंपा भाभी.. फीर..?

चंपा : (सरमाकर मुस्कुराते) फीर क्या..? जैसे ही छोटे देवर आये तब मेतो जाग ही रही थी.. तो मे समज गइ की ये रजुको मीलनेके लीये आये हे.. तो मेने सोचाकी दया ओर रजुतो सो गइ हे.. आज अच्छा मौका हे.. बडा देवर नही तो छोटा देवर ही सही.. क्या फर्क पडता हे.. अपनी प्यास ही तो बुजानी हे.. मैने उसे अंधेरेमे ही पकड लीया.. तब मुजे क्या पता था.. की छोटा पेक बडा धमाका करेगा.. हें..हें..हें..

कहातो पुनम सृती भावनाके साथ दया ओर रजीया भी जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी.. तब दया ओर रजीया तो अपना दोनो हाथोसे पेट पकडकर हस रही थी.. जीसे देखकर चंपा भाभी भी सरमाकर हसने लगी.. सबकी हसीकी आवाज सुनकर मंजु ओर चंदा भी कीचनमे आगइ.. तब सृतीने दोनोको पुरी कहानी सुनाइ तो मंजु ओर चंदाभी जोरोसे हसने लगी.. हांलाकी इस बातका मंजुको पता था.. फीर सब लोग वापस होलमे आकर बैठ गये..

तब भावना रुममे जाकर हल्कासा दरवाजा बंध करके अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. तो लता रमा ओर नीलम तीनो उपरकी मंजीलपे जाने लगी.. तभी लताने भावनाको अपने रुममे जाते देखा तो लता रमाको अभी आती हु.. आप दोनो मेरे कमरेमे जाकर बैठीये.. करते भावनाके रुमकी ओर जाने लगी.. तो रमा ओर नीलम मुस्कुराते उपरकी ओर जाने लगी.. ओर लता भावनाके पास आकर बैठ गइ.. तभी..

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) आगइ मेरी छोटी..? बोल.. यहा कोइ तकलीफ हे..? कल रात पुनोदीदी ओर सृतीदीदी तेरे पास आइ थीनां..? क्या हुआ था तुजे..?

लता : (मुस्कुराते) हां दीदी.. बात ही मत पुछो.. लेकीन अब कोइ तकलीफ नही हे.. इतना सुख ओर प्यारतो मुजे हमारे घरपे भी नही मीलता था.. यहापे सब लोग इतना प्यार दे रहे हे मुजे.. ओर पुनोदीदी तो मेरी सहेली जैसी हे.. कल हम दोनोके बीच बहुत सारी बाते हुइ.. उन्होने मुजे सब कुछ बता दीया हे.. मतलक सबकुछ.. जो आगे जाकर होने वाला हे..

भावना : (मुस्कुराते) तो फीर.. अब क्या दिकत हे.. अब मजे करो.. हमे ही तो सम्हालना हे सबको.. क्या इस बारेमे भी बात हुइनां..?

लता : (सरमाते हां मे गरदन हीलाते धीरेसे) हां दीदी.. पुनोदीदीने मुजे सबकुछ बता दीया हे.. कलतो पुनोदीदी भी चली जायेगी.. ओर हम भी चले जायेगे.. ओर वो रमाभाभी नीलु.. दोनो तो मेरे साथ ही रहेती हे.. ओर पुनो दीदीको अकेलीमे मीलनाका मौका भी नही मीलता था.. तो कल हम दोनोके बीच बहुत सारी बाते होगइ.. दीदी.. कल रात वाकइ मेरी हालत खराब होगइ थी.. इतना दर्द तो मुजे कभी नही हुआ..

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. सुन.. पहेले तो ये जडीबुटी तुजे पुनो दीदीने नही दीहे.. वो मंजु दीदीके कहेनेपे तुजे पुनो दीदीने दि हे.. दुसरी बात.. वो जडी बुटी सीर्फ तेरे लीये नही हे.. उनका रीजन कुछ ओर ही हे.. वो भी तुजे पुनोदीदीने बता दीया होगा.. रही बात तेरी तकलीफकी.. तो ये दर्द अ‍ेक बारतो तुजे जेलना ही पडेगा.. जो तुने लखन भैयाके साथ पहेला मीलन करते जेला हे..

लता : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. लेकीन इतना दर्द तो मुजे तब भी नही हुआ था.. ओर येतो इतना बडा हे.. बापरे.. अब मे आपको कैसे समजाउ..? बस.. मुजे इतना पता हे अब लखनको जेलना मुज अकेलीका काम नही हे..

भावना : दीदी.. अब तो सब पता हे तुजे.. सीर्फ तुजे ही नही.. मुजे भी इस दर्दको अ‍ेक बार जेलना पडेगा.. ओर आगे तो बहुत कुछ होगा.. ओर सुन.. उन दोनोके प्रती तेरे व्यवहारमे कुछ फर्क नही पडना चाहीये.. उन दोनोके साथ अ‍ैसेही बीहेव करना जैसे तुजे कुछ पता ही नही हे..

लता : (मुस्कुराते) दीदी.. आप फीकर मत करो.. अब तो उन दोनोके बारेमे मुजे सब कुछ पता चल गया हे.. मे अब इस बातका पुरा खयाल रखुगी.. अब तो उन दोनो कमीनीओको लखनको मीलनेका पुरा मौका दुगी.. ताकी मेरा लखन उन दोनोकी फाडके रखदे.. हें..हें..हें..

भावना : (हसते) लगता हे पुनो दीदीने तुजे पुरी ट्रेनींग देदी हे.. हें..हें..हें.. जा अब उनके पास जाकर बैठ.. ओर ध्यान रखना.. अपना कोइ भी सामान खुला मत छोडना.. समजी..?

लता : (खडी होकर जाते) जी दीदी.. मेरा जोखीम वाला सामान इधरही मंजु दीदीके पास हे.. बाकी अब सब ध्यान रखुगी.. दीदी.. क्या आपने बडे भैयाको मील लीया..?

भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) नही लता.. यहा मीलनेका मौका ही नही मीलता..

लता : (मुस्कुराते) दीदी.. कल पता चला तो बहुत अच्छा लगा.. की हम सभी आपसमे बहेने हे.. ओर मजेकी बात.. हम सभी बहेने हमारे भाइकी ही बीवीया हे.. ओर मंजु दीदीने भी कैसा फैसला लीया हे..? अब हम सभी बहेने कीसी भी भाइके साथ रीलेशन बना सकती हे.. हें..हें..हें..

भावना : (आस्चर्यसे हसते) मंजुदीदी..? क्या पुनम दीदीने तुजे ये बात भी बतादी..? हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) हां दीदी.. उन्होने मुजे सबकुछ बता दीया हे.. सक तो मुजे पहेलेसे ही था.. की मे हमारी बापुकी संतान नही हु.. लेकीन कल पुनम दीदीसे बातकी तो सब कन्फोर्म हो गया.. की हम सब आपसमे सौतेली बहेने हे.. हें..हें..हें.. चलो अब मे चलती हु..

तब भावना हसते हुअ‍े लताको जाते हुअ‍े देखती रही.. फीर भावना वापस बच्चीको दुध पीलाने लगी.. तब बहारकी ओर पुनम जाकर मंजुके पास बैठकर लतासे हुइ बाते बताने लगी.. की लताको सब कुछ बता दीया हे.. ओर लताने उनकी सभी बाते मान भी लीहे.. कल पुनमने उनको सभी सचाइ बताकर मनालीया.. सुनकर मंजु भी खुस होते हसने लगी..
 
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