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कहेते पुनमने फोनको स्वीच ओफ करदीया.. ओर वो भी लाइट बंध करके सोनेका नाटक करने लगी.. पुनमकी दिलकी धडकन तेज चलने लगी थी.. आज वो लखनको मीलनेके लीये बैचेन होने लगी.. ओर वो भी रातके अंधेरेमे अकेली.. कुछ देरके बाद लता गहेरी नींदमे चली गइ.. तो पुनम लताकी ओर देखते धीरेसे बेडसे उतर गइ.. ओर दबे पांव बहारकी ओर जाने लगी.. ओर उसने धीरेसे दरवाजा खोलदीया..
बहार नीकलते ही दरवाजेको बहारसे कुंडी लगाते बंध करदीया.. ओर होलकी ओर चल पडी.. देखा तो लखन वहा पहेलेसेही पुनमका इन्तजार करते बैठा था.. तो पुनम उनको देखतेही अेक्साइटेड होने लगी.. उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. उनकी चुतकी नाजुक पंखडीया फडफडाने लगी.. पुनम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर वो धीरेसे दबे पाव चारो ओर देखते लखनके पास चली गइ.. ओर उनकी बगलमे सर जुकाते बैठ गइ..
तो लखनने धीरेसे पुनमका हाथोमे उगलीया फसाली.. जैसे दोनो अक्सर अेक दुसरेके हाथको पकडते थे.. लखन पुनमकी ओर देखने लगा.. ओर अपने दोनो हाथसे पुनमके चहेरेको अपनी हथेलीमे थाम लीया.. ओर प्यार भरी नजरोसे पुनमकी आंखोमे देखने लगा.. पुनमने सरमाके अपनी नजरे जुकाली.. लखन पुनमके चहेरेको ओर काफी देर तब देखता रहा..
पुनम लखनकी ओर ढलने लगी.. वो लखनकी ओर प्यार भरी नजरोसे देखने लगी.. आज उसे लखनपे बहुत प्यार आने लगा.. वो भली भांती जानती थी.. की अब उनकी जींदगीमे सीर्फ लखन ही अेक सहारा हे.. लखनके साथ मीलकर वो सबकुछ करना चाहती थी जो दोनोने स्कुल टाइममे मीस कीया था.. वो मनसे तो चाहती थी की अभी लखन उनके साथ सारी हदे पार करले.. लेकीन इसके लीये पुनमको कुछ ओर दिन इन्तजार करना था.. तभी लखन धीरे धीरे करते पुनमके चहेरेको ओर बढने लगा..
तो पुनमने सरमके मारे अपनी आंख बंध करली.. ओर उसे अपने होठोपे लखनके गरम होठ महेसुस हुअे.. पुनम अेक पलके लीये सरसे पांव तक कांप उठी.. ओर उसने उतेजीत होते लखनके गलेके हाथ डालदीया.. तो लखनने भी उनको अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर दोनो अेक दुसरेके होठोके रसको पीने लगे.. पुनमके दोनो बुब्स कठोर होते सख्त होगये.. वो मनसे चाहने लगीकी लखन उनको मसलदे..
दोनो काफी देर अेक दुसरेके होठोको चुमते रहे.. लेकीन लखनने अेक बार भी पुनमके बुब्सको नही छुआ.. तो पुनम लखनका कंट्रोल देखकर बहुत खुस होगइ.. लेकीन खुद बेकाबु होने लगी.. उनकी चुतसे लगातार पानी बहेने लगा.. ओर पुनमको अपनी पेन्टीपे गीलापन महेसुस हुआ.. तो वो जटसे लखनसे अलग होगइ.. ओर सरमके बारे नजरे जुकाये बैठी रही.. तभी..
लखन : (धीरेसे बाहोमे भरते) दीदी.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. थेन्क्स.. मेरे प्यारको कबुल करनेके लीये..
पुनम : सोरी भाइ.. मे नादान आपके प्याको समज नही पाइ.. भाइ.. तब आपने थोडीसी हींमत करली होती.. तो आज मे धिरेनके बजाय आपकी बीवी होती.. खैर.. अब भी कुछ नही बीगडा.. अच्छा हुआ सही समयपे धिरेनसे अलग होगइ.. आप फीकर मत करना.. मे वहा आकर आपको इतना प्यार दुगी की आपकी सारी कसर पुरी कर दुगी.. अब ये पुनम आपकी हे..
लखन : (चहेरेको थामते) दीदी.. मे आपका इन्तजार करुगा.. आप वहा कब आ रही हो..?
पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. बहुत जल्द.. बस.. पहेले हम दोनोको सृती दीदीको सम्हालना होगा.. वो हम सबको छोडकर अपने घरपे चली गइ हे.. तो आपको सुबह जाते ही सृती दीदीको मनाकर वापस हमारे घरपे लाना होगा.. मे उनसे फोनपे बात करलुगी..
लखन : (होंठ चुमते धीरेसे) दीदी.. अब आपके बीना रहेना बहुत मुस्कील होगा.. क्या सृती दीदी मान जायेगी..?
पुनम : (खडी होते) भाइ.. अभी बहुत देर होगइ हे.. वो सब मे कल फोनपे आपको बता दुगी.. चलो मे चलती हु.. हम बहुत जल्द वहा मीलेगे.. बाय..
कहेते पुनम जाने लगी.. तो लखनने उनका हाथ पकडलीया ओर खडा होकर अेक बार फीर पुनमको अपनी बाहोमे भर लीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगा.. पुनम अेक बार फीर सर्मसार होगइ.. ओर लखनकी ओर मुस्कुराते उनकी बाहोसे आजाद होते चली गइ.. लखन उनको जाते हुअे देखता रहा.. तभी पुनमने दरवाजेके पास पलटकर देखा ओर लखनको हसते हुअे फ्लाइंग कीस देकर अंदर चली गइ....
कन्टीन्यु
बहार नीकलते ही दरवाजेको बहारसे कुंडी लगाते बंध करदीया.. ओर होलकी ओर चल पडी.. देखा तो लखन वहा पहेलेसेही पुनमका इन्तजार करते बैठा था.. तो पुनम उनको देखतेही अेक्साइटेड होने लगी.. उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. उनकी चुतकी नाजुक पंखडीया फडफडाने लगी.. पुनम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर वो धीरेसे दबे पाव चारो ओर देखते लखनके पास चली गइ.. ओर उनकी बगलमे सर जुकाते बैठ गइ..
तो लखनने धीरेसे पुनमका हाथोमे उगलीया फसाली.. जैसे दोनो अक्सर अेक दुसरेके हाथको पकडते थे.. लखन पुनमकी ओर देखने लगा.. ओर अपने दोनो हाथसे पुनमके चहेरेको अपनी हथेलीमे थाम लीया.. ओर प्यार भरी नजरोसे पुनमकी आंखोमे देखने लगा.. पुनमने सरमाके अपनी नजरे जुकाली.. लखन पुनमके चहेरेको ओर काफी देर तब देखता रहा..
पुनम लखनकी ओर ढलने लगी.. वो लखनकी ओर प्यार भरी नजरोसे देखने लगी.. आज उसे लखनपे बहुत प्यार आने लगा.. वो भली भांती जानती थी.. की अब उनकी जींदगीमे सीर्फ लखन ही अेक सहारा हे.. लखनके साथ मीलकर वो सबकुछ करना चाहती थी जो दोनोने स्कुल टाइममे मीस कीया था.. वो मनसे तो चाहती थी की अभी लखन उनके साथ सारी हदे पार करले.. लेकीन इसके लीये पुनमको कुछ ओर दिन इन्तजार करना था.. तभी लखन धीरे धीरे करते पुनमके चहेरेको ओर बढने लगा..
तो पुनमने सरमके मारे अपनी आंख बंध करली.. ओर उसे अपने होठोपे लखनके गरम होठ महेसुस हुअे.. पुनम अेक पलके लीये सरसे पांव तक कांप उठी.. ओर उसने उतेजीत होते लखनके गलेके हाथ डालदीया.. तो लखनने भी उनको अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर दोनो अेक दुसरेके होठोके रसको पीने लगे.. पुनमके दोनो बुब्स कठोर होते सख्त होगये.. वो मनसे चाहने लगीकी लखन उनको मसलदे..
दोनो काफी देर अेक दुसरेके होठोको चुमते रहे.. लेकीन लखनने अेक बार भी पुनमके बुब्सको नही छुआ.. तो पुनम लखनका कंट्रोल देखकर बहुत खुस होगइ.. लेकीन खुद बेकाबु होने लगी.. उनकी चुतसे लगातार पानी बहेने लगा.. ओर पुनमको अपनी पेन्टीपे गीलापन महेसुस हुआ.. तो वो जटसे लखनसे अलग होगइ.. ओर सरमके बारे नजरे जुकाये बैठी रही.. तभी..
लखन : (धीरेसे बाहोमे भरते) दीदी.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. थेन्क्स.. मेरे प्यारको कबुल करनेके लीये..
पुनम : सोरी भाइ.. मे नादान आपके प्याको समज नही पाइ.. भाइ.. तब आपने थोडीसी हींमत करली होती.. तो आज मे धिरेनके बजाय आपकी बीवी होती.. खैर.. अब भी कुछ नही बीगडा.. अच्छा हुआ सही समयपे धिरेनसे अलग होगइ.. आप फीकर मत करना.. मे वहा आकर आपको इतना प्यार दुगी की आपकी सारी कसर पुरी कर दुगी.. अब ये पुनम आपकी हे..
लखन : (चहेरेको थामते) दीदी.. मे आपका इन्तजार करुगा.. आप वहा कब आ रही हो..?
पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. बहुत जल्द.. बस.. पहेले हम दोनोको सृती दीदीको सम्हालना होगा.. वो हम सबको छोडकर अपने घरपे चली गइ हे.. तो आपको सुबह जाते ही सृती दीदीको मनाकर वापस हमारे घरपे लाना होगा.. मे उनसे फोनपे बात करलुगी..
लखन : (होंठ चुमते धीरेसे) दीदी.. अब आपके बीना रहेना बहुत मुस्कील होगा.. क्या सृती दीदी मान जायेगी..?
पुनम : (खडी होते) भाइ.. अभी बहुत देर होगइ हे.. वो सब मे कल फोनपे आपको बता दुगी.. चलो मे चलती हु.. हम बहुत जल्द वहा मीलेगे.. बाय..
कहेते पुनम जाने लगी.. तो लखनने उनका हाथ पकडलीया ओर खडा होकर अेक बार फीर पुनमको अपनी बाहोमे भर लीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगा.. पुनम अेक बार फीर सर्मसार होगइ.. ओर लखनकी ओर मुस्कुराते उनकी बाहोसे आजाद होते चली गइ.. लखन उनको जाते हुअे देखता रहा.. तभी पुनमने दरवाजेके पास पलटकर देखा ओर लखनको हसते हुअे फ्लाइंग कीस देकर अंदर चली गइ....
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