- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 148,789
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २६०
तो पुनम सरमाते हसने लगी.. दोनोने मुह साफ करलीया.. लखन भी मुह साफ करके हल्का होने लगा.. लेकीन पुनमको लखनके सामने पीसाब करनेमे सरम आरही थी.. फीर भी हिंमत करके पीसाब करने लगी.. लखन उसे देखता रहा.. तो पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. इसी दौरान बहारकी ओर अंदरसे आवाज आनी बंध होगइ तो चारो समज गइकी लखन ओर पुनम बाथरुममे चले गये हे.. तभी.... अब आगे
सृती : (आंख गीली करते) यार मेरा लखन मुजसे कीतना प्यार करता हे.. कास मेने पहेले ही इनसे सादी करली होती..
भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) हां दीदी.. हमने भी सुना.. वो आपको ओर पुनोदीदीसे बहुत प्यार करता हे..
सृती : (मुस्कुराते दबी आवाजमे) सीसस.. आवाज मत करना.. मुजे मेरी सोतनकी चीखे सुननी हे..
भावना : (मुस्कुराते) हां मुजे भी.. देखु तो सही हमारे देवर कहा तक जाते हे..
सृती : (हसते धीरेसे दबी आवाजमे) हां.. वोतो जब आपके उपर चडेगाना तब आपको पता चल ही जायेगा.. हें..हें..हें..
दया : (नाकपे उगली रखते) सीससस.. आवाज मत करो.. लगता हे दोनो बहार आगये हे..
तो सृती भावना दया ओर रजीया फीरसे दरवाजेपे कान लगाकर खडी होगइ.. आज सृती ओर भावना बहुत खुस हो रही थी.. भावनाकी चुत भी काफी गीली होने लगी थी.. फीर अंदरकी ओर दोनो कंपलीट होगये तो लखनने फीरसे पुनमको गोदमे उठालीया.. ओर बेडपे आकर लीटा दीया ओर खुदभी बाजुमे लेट गया.. तो पुनमने लखनके सीनेपे सर रखदीया.. तभी..
पुनम : (लखनके सीनेपे सर खते) भाइ.. आप मेरी कीतनी केर करते हो.. नीचे चलनेभी नही दीया..
लखन : (सरको सहेलाते) दीदी.. इस रुममे आप मेरी चहीती बहेन हो.. ओर मेरी बहेन मेरी चहीती रानी हे.. तो आपको कैसे चलने देता..
पुनम : (कातील नजरोसे सरारतसे) तो फीर देखलो.. आपकी ये बहेन हमेसा हमेसाके लीये आपके साथ सोने वाली हे.. देखती हु कब तक मुजे चलने नही देते..
लखन : (बाहोमे भरते) दीदी.. जींदगी भर.. आप मेरा पहेला प्यार हो.. मेरे सपनोकी परी.. मेरी प्यारीसी भोलीसी पीयु.. मैने आपके लीये बहुत आंसु बहाये हे..
पुनम : (जोरसे बाहोमे भीचते आंख गील करते) भाइ.. आइ अेम सोरी.. मुजे नही पता थाकी आप मुजसे इतना प्यार करते हो.. ओर मे नादान भाइके पीछे पागल थी.. लेकीन वो मेरा प्यार नही था.. जो सीर्फ अेक भ्रम था.. अेक मर्द ओरतका आकर्षण था.. ओर बाबाके कहेनेपे सीर्फ अेक फर्ज नीभाना था..
लखन : (सामने देखते) बाबाके कहेनेपे..?
पुनम : (सीनेको सहेलाते) हां भाइ.. बाबाके कहेने पे.. भाइ.. बाबाने मुजे कुछ जीम्वेवारी दीथी.. ये सब उसीके केहेनेपे हुआ हे.. मे आपको सबकुछ बता दुगी.. लेकीन अभी नही.. अभी तो मुजे मेरे भाइका ढेर सारा प्यार चाहीये.. आज मे वो हर लह्मा जीना चाहती हु.. जो कभी मेरे भाइने मेरे प्यारमे सजाये थे.. भाइ.. आज मे आपकी आगोसमे खो जाना चाहती हु.. मुजे आपके अंदर समालो..
कहेते पुनमने लखनको बाहोमे भीचते अपने उपर खीच लीया ओर लखनसे होठोको चुमने लगी.. इस वक्त दोनो ही नंगे थे.. पुनमको अपनी चुतपे लखनका लंड चुभते हुअे महेसुस हो रहा था.. जो जटके मारते अंदर घुसनेके लीये बेकरार था..लखन पुनमके बुब्सको चुमते मसलते पुनमको प्यार करने लगा..
दोनो फीरसे उतेजीत होते मदहोस होने लगे.. पुनम लखनसे मीलनके लीये पुरी तराह तैयार थी.. पुनम आधी अंख चडाते पुरी तराह मदहोस हो चुकी थी.. लखन लगातार पुनमके होठोको.. बुब्सको गलेको चुमता रहा.. पुनमकी चुत पुरी तराह गीली हो चुकी थी..
अध्याय - २६०
तो पुनम सरमाते हसने लगी.. दोनोने मुह साफ करलीया.. लखन भी मुह साफ करके हल्का होने लगा.. लेकीन पुनमको लखनके सामने पीसाब करनेमे सरम आरही थी.. फीर भी हिंमत करके पीसाब करने लगी.. लखन उसे देखता रहा.. तो पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. इसी दौरान बहारकी ओर अंदरसे आवाज आनी बंध होगइ तो चारो समज गइकी लखन ओर पुनम बाथरुममे चले गये हे.. तभी.... अब आगे
सृती : (आंख गीली करते) यार मेरा लखन मुजसे कीतना प्यार करता हे.. कास मेने पहेले ही इनसे सादी करली होती..
भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) हां दीदी.. हमने भी सुना.. वो आपको ओर पुनोदीदीसे बहुत प्यार करता हे..
सृती : (मुस्कुराते दबी आवाजमे) सीसस.. आवाज मत करना.. मुजे मेरी सोतनकी चीखे सुननी हे..
भावना : (मुस्कुराते) हां मुजे भी.. देखु तो सही हमारे देवर कहा तक जाते हे..
सृती : (हसते धीरेसे दबी आवाजमे) हां.. वोतो जब आपके उपर चडेगाना तब आपको पता चल ही जायेगा.. हें..हें..हें..
दया : (नाकपे उगली रखते) सीससस.. आवाज मत करो.. लगता हे दोनो बहार आगये हे..
तो सृती भावना दया ओर रजीया फीरसे दरवाजेपे कान लगाकर खडी होगइ.. आज सृती ओर भावना बहुत खुस हो रही थी.. भावनाकी चुत भी काफी गीली होने लगी थी.. फीर अंदरकी ओर दोनो कंपलीट होगये तो लखनने फीरसे पुनमको गोदमे उठालीया.. ओर बेडपे आकर लीटा दीया ओर खुदभी बाजुमे लेट गया.. तो पुनमने लखनके सीनेपे सर रखदीया.. तभी..
पुनम : (लखनके सीनेपे सर खते) भाइ.. आप मेरी कीतनी केर करते हो.. नीचे चलनेभी नही दीया..
लखन : (सरको सहेलाते) दीदी.. इस रुममे आप मेरी चहीती बहेन हो.. ओर मेरी बहेन मेरी चहीती रानी हे.. तो आपको कैसे चलने देता..
पुनम : (कातील नजरोसे सरारतसे) तो फीर देखलो.. आपकी ये बहेन हमेसा हमेसाके लीये आपके साथ सोने वाली हे.. देखती हु कब तक मुजे चलने नही देते..
लखन : (बाहोमे भरते) दीदी.. जींदगी भर.. आप मेरा पहेला प्यार हो.. मेरे सपनोकी परी.. मेरी प्यारीसी भोलीसी पीयु.. मैने आपके लीये बहुत आंसु बहाये हे..
पुनम : (जोरसे बाहोमे भीचते आंख गील करते) भाइ.. आइ अेम सोरी.. मुजे नही पता थाकी आप मुजसे इतना प्यार करते हो.. ओर मे नादान भाइके पीछे पागल थी.. लेकीन वो मेरा प्यार नही था.. जो सीर्फ अेक भ्रम था.. अेक मर्द ओरतका आकर्षण था.. ओर बाबाके कहेनेपे सीर्फ अेक फर्ज नीभाना था..
लखन : (सामने देखते) बाबाके कहेनेपे..?
पुनम : (सीनेको सहेलाते) हां भाइ.. बाबाके कहेने पे.. भाइ.. बाबाने मुजे कुछ जीम्वेवारी दीथी.. ये सब उसीके केहेनेपे हुआ हे.. मे आपको सबकुछ बता दुगी.. लेकीन अभी नही.. अभी तो मुजे मेरे भाइका ढेर सारा प्यार चाहीये.. आज मे वो हर लह्मा जीना चाहती हु.. जो कभी मेरे भाइने मेरे प्यारमे सजाये थे.. भाइ.. आज मे आपकी आगोसमे खो जाना चाहती हु.. मुजे आपके अंदर समालो..
कहेते पुनमने लखनको बाहोमे भीचते अपने उपर खीच लीया ओर लखनसे होठोको चुमने लगी.. इस वक्त दोनो ही नंगे थे.. पुनमको अपनी चुतपे लखनका लंड चुभते हुअे महेसुस हो रहा था.. जो जटके मारते अंदर घुसनेके लीये बेकरार था..लखन पुनमके बुब्सको चुमते मसलते पुनमको प्यार करने लगा..
दोनो फीरसे उतेजीत होते मदहोस होने लगे.. पुनम लखनसे मीलनके लीये पुरी तराह तैयार थी.. पुनम आधी अंख चडाते पुरी तराह मदहोस हो चुकी थी.. लखन लगातार पुनमके होठोको.. बुब्सको गलेको चुमता रहा.. पुनमकी चुत पुरी तराह गीली हो चुकी थी..