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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २६३
ओर भावना इस मोकेको गवाना नही चाहती थी.. उनको पता था आज पुनम भी नही हे ओर रजीया दया दोनो साथमे सोइ हुइ हे.. आज लखनके साथ सीर्फ सृती ही हे.. तो भावना अैसा चान्स गवाना नही चाहती थी.. वो लखनको खुलकर नीमंत्रण दे चुकी थी.. ओर बार बार खडी होकर दरवाजेके पास जाते लखनके रुमकी ओर देखती थी.. इस उमीदमे की लखन अेक बार बहार नीकले.. ओर मानो इश्वरने भावनाके मनकी बात सुनली.... अब आगे
तो दुसरी ओर गांवमे भी आज मंजुने लताको अपने साथ लेलीया.. अब ज्यादातर चंदा दवाइकी वजहसे नींदकी आगोसमे ही रहेती थी.. ओर देवायत इस वक्त लताकी जोरोसे चुदाइ कर रहा था.. मंजु भी कपडे नीकालकर अपनी बारीका इन्तजार कर रही थी..
देर रात तब बारी बारी देवायत लता ओर मंजुकी चुतमे धमाके करता रहा.. आज देवायतने फीर लताकी हालत बीगाडदी.. लता भी अब देवायतसे खुलकर चुदवाती थी.. लेकीन फीर भी वो लखनको भुल नही पा रही थी.. खाली वक्तमे उसे लखनकी बहुत याद आती थी..
अब रातमे सांती ओर बंसीके साथ जागुती भी सोने लगी थी.. बंसी बारी बारी दोनोकी चुतमे धमाका करता.. लेकीन ज्यादातर सांती जागृती ओर बंसीको ही मीलनेका मौका देती.. ताकी दोनो भाइ बहेन अेक दुसरेके ओर करीब आजाये..
अबतक ना जाने बंसीने जागृतीको कीतनी बार चोद लीया था.. लेकीन जीतनी बार जागृती बंसीसे चुदवाती उतनी बार वो बंसी ओर सांतीसे छुपकर आइपीलकी गोली खा लेती.. ताकी वो बंसीसे प्रेगनेन्ट ना होसके.. उसने लखनको दीया हुआ वादा आज भी याद था..
तो इधर सहेरमे देर रात तीन बजे पुरे घरमे सनाटा छाया हुआ था.. ओर सबलोग वासनाका खेल खेलकर गहेरी नींद सो चुके थे.. सीवा लखन ओर भावना.. लखनको प्यास लगी.. तो वो आजु बाजु पानीकी बोटल ढुंढने लगा.. तभी उसे याद आयाकी भावना उनका इन्तजार करती होगी..
उसने अेक नजर सृतीकी ओर डाली.. सृती बेसुध जैसी हालतमे उनके सीनेपे हाथ रखते नंगी सो रही थी.. लखनने धीरेसे सृतीका हाथ हटाया.. ओर खडा होकर अलमारीसे भावनाके लीये लीया हुआ गीफ्ट जेबमे रख लीया.. ओर नीचे पहेले पानी पीने चला गया..
लखन फ्रिजसे पानीकी बोतल नीकालके पीने लगा.. उसे पता नही थाकी भावनाने उसे नीचे कीचनमे जाते हुअे देख लीया हे.. ओर दबे पांव उनके पीछे आगइ हे.. लखन अंधेरे पानी पीकर जैसे जानेके लीये मुडा.. वो कीसीसे टकरा गया.. ओर धीरेसे सोरी सोरी बोलने लगा..
देखा तो हल्की रोसनीमे उसे भावनाका चहेरा दीखा.. तो भावना भी सर्मसार होते फ्रिजसे पानी नीकालकर पीने लगी.. लखन वही खडे रहेते उनकी ओर देखता रहा.. भावना पानी पीते हुअे भी नजरे टेडी करते लखनकी ओर देखती रही.. फीर वो भी बोटल वापस रखते जाने लगी..
तभी लखनने उनका हाथ पकड लीया.. तो भावनाके तनसे अेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. वो सर्मसार होते हाथ छुडानेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. ओर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. लेकीन लखनने उनका हाथ कसके पकड रखा.. भावनाने हाथ छुडानेकी कोसीस छोडदी..
वो नजरे जुकाये अैसे ही खडी रही.. उनकी चुत हरकतमे आगइ.. ओर हल्कासा पानी छोडते फडफडाने लगी.. वो मनसे चाहने लगीकी अभी लखन उसे पुरी तराह मसलदे.. ओर यही उसे चोदले.. लेकीन वो कुछ बोल नही पाइ.. वो चाहती थीकी पहेल लखन करे.. तभी..
भावना : (सरमाते कांपती आवाजमे धीरेसे) लखन भैया.. छोड दीजीये.. उपर मेरी बच्ची सोइ हुइ हे..
लखन : (खीचते पीछेसे बाहोमे जकडते पेटको सहेलाते) भाभी.. आप मुजे बहुत अच्छी लगती हो.. आइ लव यु.. कबतक मुजसे दुर भागती रहोगी..? अेक दिनतो हम मीलने ही वाले हे..
भावना : (सरमसे लखनके हाथपे हाथ रखते) लखन भैया.. अभी मुजे जाने दीजीये.. ये सही वक्त नही हे.. कोइ हमे देख लेगा.. हम बादमे मीलते हेनां..
लखन : (पीछे गलेको चुमते) कोइ देखता हेतो देखने दोे.. सबको पता हे अेक दिन हमारे बीच सब कुछ होने वाला हे.. तो क्या प्रोबलेम हे..? खुलके प्यार कीजीये..
भावना : (सरमाते अपने होंठ आपस भीचते धीरेसे) प्लीज.. मुजे थोडा वक्त चाहीये.. जाने दीजीये.. हम बादमे मीलते हेनां..
लखन : (दोनो हाथ बुब्सपे रखते) हंम.. बादमे भी मील लेगे.. ओर कीतना वक्त चाहीये आपको..? खाते वक्त मेरा पैर सहेलाते आपने जवाब तो देदीया था.. आपके रुममे आया था.. मुजे पता हे आप भी वोही चाहती हे जो मे चाहता हु..
भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) हां.. तो फीर इतनी देर क्यु करदी..? मे कबसे आपका इन्तजार कर रही थी.. क्या सृतीदी.. सबलोग..
लखन : (गलेको चुमते बुब्सपे हाथ रखते) भाभी.. वो सब सो गये हे.. रजु दया भाभीके पास सोइ हे.. चीन्ता मत कीजीये.. आज हम दोनोका मीलन होकर ही रहेगा..
कहेते लखन भावनाके बडे बडे बुब्सको मसलने लगा.. तो भावना मदहोस होने लगी.. वो आधी आंख चडाते पीछे लखनके कंधेपे सर डाल देती हे.. ओर लखनके हाथको पकडकर हटानेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. फीर खुद आंखोकी पुतलीया पलटते लखनके हाथको अपने बुब्सपे दबाने लगी..
अध्याय - २६३
ओर भावना इस मोकेको गवाना नही चाहती थी.. उनको पता था आज पुनम भी नही हे ओर रजीया दया दोनो साथमे सोइ हुइ हे.. आज लखनके साथ सीर्फ सृती ही हे.. तो भावना अैसा चान्स गवाना नही चाहती थी.. वो लखनको खुलकर नीमंत्रण दे चुकी थी.. ओर बार बार खडी होकर दरवाजेके पास जाते लखनके रुमकी ओर देखती थी.. इस उमीदमे की लखन अेक बार बहार नीकले.. ओर मानो इश्वरने भावनाके मनकी बात सुनली.... अब आगे
तो दुसरी ओर गांवमे भी आज मंजुने लताको अपने साथ लेलीया.. अब ज्यादातर चंदा दवाइकी वजहसे नींदकी आगोसमे ही रहेती थी.. ओर देवायत इस वक्त लताकी जोरोसे चुदाइ कर रहा था.. मंजु भी कपडे नीकालकर अपनी बारीका इन्तजार कर रही थी..
देर रात तब बारी बारी देवायत लता ओर मंजुकी चुतमे धमाके करता रहा.. आज देवायतने फीर लताकी हालत बीगाडदी.. लता भी अब देवायतसे खुलकर चुदवाती थी.. लेकीन फीर भी वो लखनको भुल नही पा रही थी.. खाली वक्तमे उसे लखनकी बहुत याद आती थी..
अब रातमे सांती ओर बंसीके साथ जागुती भी सोने लगी थी.. बंसी बारी बारी दोनोकी चुतमे धमाका करता.. लेकीन ज्यादातर सांती जागृती ओर बंसीको ही मीलनेका मौका देती.. ताकी दोनो भाइ बहेन अेक दुसरेके ओर करीब आजाये..
अबतक ना जाने बंसीने जागृतीको कीतनी बार चोद लीया था.. लेकीन जीतनी बार जागृती बंसीसे चुदवाती उतनी बार वो बंसी ओर सांतीसे छुपकर आइपीलकी गोली खा लेती.. ताकी वो बंसीसे प्रेगनेन्ट ना होसके.. उसने लखनको दीया हुआ वादा आज भी याद था..
तो इधर सहेरमे देर रात तीन बजे पुरे घरमे सनाटा छाया हुआ था.. ओर सबलोग वासनाका खेल खेलकर गहेरी नींद सो चुके थे.. सीवा लखन ओर भावना.. लखनको प्यास लगी.. तो वो आजु बाजु पानीकी बोटल ढुंढने लगा.. तभी उसे याद आयाकी भावना उनका इन्तजार करती होगी..
उसने अेक नजर सृतीकी ओर डाली.. सृती बेसुध जैसी हालतमे उनके सीनेपे हाथ रखते नंगी सो रही थी.. लखनने धीरेसे सृतीका हाथ हटाया.. ओर खडा होकर अलमारीसे भावनाके लीये लीया हुआ गीफ्ट जेबमे रख लीया.. ओर नीचे पहेले पानी पीने चला गया..
लखन फ्रिजसे पानीकी बोतल नीकालके पीने लगा.. उसे पता नही थाकी भावनाने उसे नीचे कीचनमे जाते हुअे देख लीया हे.. ओर दबे पांव उनके पीछे आगइ हे.. लखन अंधेरे पानी पीकर जैसे जानेके लीये मुडा.. वो कीसीसे टकरा गया.. ओर धीरेसे सोरी सोरी बोलने लगा..
देखा तो हल्की रोसनीमे उसे भावनाका चहेरा दीखा.. तो भावना भी सर्मसार होते फ्रिजसे पानी नीकालकर पीने लगी.. लखन वही खडे रहेते उनकी ओर देखता रहा.. भावना पानी पीते हुअे भी नजरे टेडी करते लखनकी ओर देखती रही.. फीर वो भी बोटल वापस रखते जाने लगी..
तभी लखनने उनका हाथ पकड लीया.. तो भावनाके तनसे अेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. वो सर्मसार होते हाथ छुडानेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. ओर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. लेकीन लखनने उनका हाथ कसके पकड रखा.. भावनाने हाथ छुडानेकी कोसीस छोडदी..
वो नजरे जुकाये अैसे ही खडी रही.. उनकी चुत हरकतमे आगइ.. ओर हल्कासा पानी छोडते फडफडाने लगी.. वो मनसे चाहने लगीकी अभी लखन उसे पुरी तराह मसलदे.. ओर यही उसे चोदले.. लेकीन वो कुछ बोल नही पाइ.. वो चाहती थीकी पहेल लखन करे.. तभी..
भावना : (सरमाते कांपती आवाजमे धीरेसे) लखन भैया.. छोड दीजीये.. उपर मेरी बच्ची सोइ हुइ हे..
लखन : (खीचते पीछेसे बाहोमे जकडते पेटको सहेलाते) भाभी.. आप मुजे बहुत अच्छी लगती हो.. आइ लव यु.. कबतक मुजसे दुर भागती रहोगी..? अेक दिनतो हम मीलने ही वाले हे..
भावना : (सरमसे लखनके हाथपे हाथ रखते) लखन भैया.. अभी मुजे जाने दीजीये.. ये सही वक्त नही हे.. कोइ हमे देख लेगा.. हम बादमे मीलते हेनां..
लखन : (पीछे गलेको चुमते) कोइ देखता हेतो देखने दोे.. सबको पता हे अेक दिन हमारे बीच सब कुछ होने वाला हे.. तो क्या प्रोबलेम हे..? खुलके प्यार कीजीये..
भावना : (सरमाते अपने होंठ आपस भीचते धीरेसे) प्लीज.. मुजे थोडा वक्त चाहीये.. जाने दीजीये.. हम बादमे मीलते हेनां..
लखन : (दोनो हाथ बुब्सपे रखते) हंम.. बादमे भी मील लेगे.. ओर कीतना वक्त चाहीये आपको..? खाते वक्त मेरा पैर सहेलाते आपने जवाब तो देदीया था.. आपके रुममे आया था.. मुजे पता हे आप भी वोही चाहती हे जो मे चाहता हु..
भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) हां.. तो फीर इतनी देर क्यु करदी..? मे कबसे आपका इन्तजार कर रही थी.. क्या सृतीदी.. सबलोग..
लखन : (गलेको चुमते बुब्सपे हाथ रखते) भाभी.. वो सब सो गये हे.. रजु दया भाभीके पास सोइ हे.. चीन्ता मत कीजीये.. आज हम दोनोका मीलन होकर ही रहेगा..
कहेते लखन भावनाके बडे बडे बुब्सको मसलने लगा.. तो भावना मदहोस होने लगी.. वो आधी आंख चडाते पीछे लखनके कंधेपे सर डाल देती हे.. ओर लखनके हाथको पकडकर हटानेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. फीर खुद आंखोकी पुतलीया पलटते लखनके हाथको अपने बुब्सपे दबाने लगी..