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सृती : (सरमाते) ठीक हे दीदी.. अगर आप कहेती होतो मान लेती हु.. करनेदो मजे दोनोको..
लखन : (सामने देखते) यार तुम दोनो हेनां.. मरवाओगी मुजे.. ये बात आपके अलावा कीसीको पता नही.. तो बी केर फुल.. वैसे भी वो दोनो मां बेटी सुधर गइ हे.. क्या अैसा करना जरुरी हे..?
पुनम : (कान खीचते) ज्यादा भोले मत बनो.. आप उसे गांव छोडने गये थे तब मेने आप दोनोकी बाते सुनली हे.. कमीनीको खुदको ही आग लगी हुइ हे तो आपको क्या प्रोबलेम..?
सृती : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) क्या..? नीलने खुद इसे कहा हे..?
पुनम : (लखनकी ओर कातीलाना मुस्कुराते) हां.. मीटादो उनकी खुजली.. वैसे भी वो आपके साथ ही रीलेशन रखना चाहती हे तो क्यु साधु बनते हो..? भवीस्यमे आपको ओर हमारे विजयको ही तो सम्हालना हे उसे.. ओर ये बात हम दोनो तक सीमीत रहेगी.. आप टेन्शन मतलो..
सृती : (जोरोसे हसते) लखन भैया.. आप बहुत लकी हो.. कोन बीवीया होगी जो सामनेसे दुसरी लडकीको ठोकनेको कहेती हे.. जाओ मौज करो.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) यार.. तुम दोनो.. होना.. बहोत डेन्जर हो..
पुनम : (कातीलाना मुस्कुराते) फीकर मत करो.. उनके घरमे अेक ओर लाइनमे खडी हे.. वो भी अपनी खुजली आपसे मीटवाना चाहती हे..
लखन : (आस्चर्यसे देखते) ओर कौन हे..? मां बेटी दोनोतो आगइ..
पुनम : (धीरेसे कानमे) सरला चाची.. अगर कमीनी खुद चाहे तो मार देना हथोडा.. वो भी आपका लेनेका मन बना चुकी हे..
लखन : (जुठा गु्सा करते) यार तुम दोनो पागल तो नही होगइ..? उनकी उमरका तो लीहाज करो..
पुनम : (दांत पीसते पेटमे मुका मारते) ओये उमरके बच्चे.. वो सामनेसे कहेगी तो क्या आप उनकी पुजा करोगे..? चुपचाप हम कहे अैसा करते जाओ समजे.. अपना दिमाग मत लगाओ.. उनके बारेमे आपको सबकुछ बता तो दीया हे.. ओर घरपे जाकर मुजे फोन करना.. मे आपको कुछ बाते बता दुगी.. आप समज जाओगे..
लखन : (दोनोकी गरदन दबोचते) ठीक हे.. जी तो चाहता हे तुम दोनोको यही पटक पटकके ठो..
सृती : (कातील मुस्कानसे) तो ठोकलोना.. वैसे भी हम दोनो आपकी बीवीया हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (पेटमे मुका मारते धीरेसे) भाइ.. आप हेनां.. ठोकनेकी तो बात ही मत करो.. मे घरपे नही थी तो अच्छा मौका उठाया हे आपने.. ओर उस कमीनीकी भी खबर लेनी हे.. कैसे उछल उछलके ले रही थी..
सृती : (धीरेसे हसते) दीदी आप कीसकी बात कर रहे हे..? इसने क्या फायदा उठाया..? मुजे भी तो पता चले.. की जनाब कीसकी बजाकर आये हे..
पुनम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) भावना दीदीकी.. आपसे प्यार करनेके बाद भावना दीदीके कमरेमे चले गये थे.. सुबह तक खुब बाजाइ हे उनकी.. बेचारीकी हालत बीगाडदी..
सृती : (मुहपे हाथ रखते) क्या..? भावना दीदी..? अरे हां.. तभी मे सोचु वो अैसे लंगडाते क्यु चल रही हे.. मेने पुछा भी.. तो कहेती थी बाथरुममे पैर फीसल गया.. ये नही की हमारे पतीपे उनकी नीयत फीसल गइ थी.. मीलनेदो कमीनीको..
पुनम : (हसते) दीदी छोडीयेना उनको.. वैसे आज नही तो कल.. इनके नीचे आने ही वाली थी..
लखन : (दोनोके होठ चुमते) यार.. तुम दोनोकी दोनो ही कीतनी समजदार कमीनी हो.. चलो मे चलता हु.. नीलुको भी साथ लेजाना हे..
सृती : (पीठमे मुका मारते) आगयेना लाइनपे.. अच्छे बच्चे बन जाओ.. ओर कहोतो मे साथ चलु..?
लखन : (खुस होते हसते) हां हां.. चलो..
पुनम : (सामने देखते) क्या चलो..? ओये.. क्या साथ चलु.. कोइ जरुरत नही हे.. खामखा वहा कबाबमे हडी बनोगी.. दोनोको मजे करनेदो.. जाओ भाइ.. ओर हां.. सादीके दो तीन दिन पहेले आजाना.. समजे..? ओर हां.. जानेसे पहेले अेक पप्पी नही दोगे..?
मंजुला : (जोरोसे आवाज लगाते) पुनो बेटा.. लखन वहा हे क्या..? उसे जाना नही..?
पुनम : (जोरोसे हसते) लोजी.. हो गया कबाडा.. आगइ मेरी सास.. ये मम्मी भीनां.. बीलकुल सास वाला काम करती हे.. उसे सब पता चल गया.. जाओ भाइ.. आपकी मां बुला रही हे..
सृती : (जोरोसे) मोम.. वो आ रहे हे.. बस.. जरुरी बात कर रहे थे..
लखन : (जोरोसे पुनमके होठ चुमते) बु..च.. अब बीलकुल उनकी बहु लग रही हो.. चलो मे चलता हु..
सृती : ओये.. मेरी पप्पी..?
लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) अरे आजा मेरी बहेना.. तुम भी स्पेसीयल हे..
कहेते लखनने सृतीके बुब्सको मसलते जोरोसे होठोको चुस लीया.. तो सृतीकी आंख बडी होगइ.. ओर उनकी सास उखडने लगी.. तो लखनको धका मारते उनसे अलग होगइ ओर सृती लखनके सीनेमे मुका मारने लगी.. ओर लखन हसता हुआ वहासे चला गया..
तो पुनम ओर सृती दोनो ही उनको कामुक स्माइल करते देखती रही.. बहार नीकलते ही लखनने नीलमको फोन करदीया ओर उसे तैयार रहेनेको बोला तो नीलम भी खुस होगइ.. ओर लखन सबके पैर छुते मंजुके पास चला गया ओर उनके पैर छुने लगा.. तभी..
लखन : (सामने देखते) यार तुम दोनो हेनां.. मरवाओगी मुजे.. ये बात आपके अलावा कीसीको पता नही.. तो बी केर फुल.. वैसे भी वो दोनो मां बेटी सुधर गइ हे.. क्या अैसा करना जरुरी हे..?
पुनम : (कान खीचते) ज्यादा भोले मत बनो.. आप उसे गांव छोडने गये थे तब मेने आप दोनोकी बाते सुनली हे.. कमीनीको खुदको ही आग लगी हुइ हे तो आपको क्या प्रोबलेम..?
सृती : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) क्या..? नीलने खुद इसे कहा हे..?
पुनम : (लखनकी ओर कातीलाना मुस्कुराते) हां.. मीटादो उनकी खुजली.. वैसे भी वो आपके साथ ही रीलेशन रखना चाहती हे तो क्यु साधु बनते हो..? भवीस्यमे आपको ओर हमारे विजयको ही तो सम्हालना हे उसे.. ओर ये बात हम दोनो तक सीमीत रहेगी.. आप टेन्शन मतलो..
सृती : (जोरोसे हसते) लखन भैया.. आप बहुत लकी हो.. कोन बीवीया होगी जो सामनेसे दुसरी लडकीको ठोकनेको कहेती हे.. जाओ मौज करो.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) यार.. तुम दोनो.. होना.. बहोत डेन्जर हो..
पुनम : (कातीलाना मुस्कुराते) फीकर मत करो.. उनके घरमे अेक ओर लाइनमे खडी हे.. वो भी अपनी खुजली आपसे मीटवाना चाहती हे..
लखन : (आस्चर्यसे देखते) ओर कौन हे..? मां बेटी दोनोतो आगइ..
पुनम : (धीरेसे कानमे) सरला चाची.. अगर कमीनी खुद चाहे तो मार देना हथोडा.. वो भी आपका लेनेका मन बना चुकी हे..
लखन : (जुठा गु्सा करते) यार तुम दोनो पागल तो नही होगइ..? उनकी उमरका तो लीहाज करो..
पुनम : (दांत पीसते पेटमे मुका मारते) ओये उमरके बच्चे.. वो सामनेसे कहेगी तो क्या आप उनकी पुजा करोगे..? चुपचाप हम कहे अैसा करते जाओ समजे.. अपना दिमाग मत लगाओ.. उनके बारेमे आपको सबकुछ बता तो दीया हे.. ओर घरपे जाकर मुजे फोन करना.. मे आपको कुछ बाते बता दुगी.. आप समज जाओगे..
लखन : (दोनोकी गरदन दबोचते) ठीक हे.. जी तो चाहता हे तुम दोनोको यही पटक पटकके ठो..
सृती : (कातील मुस्कानसे) तो ठोकलोना.. वैसे भी हम दोनो आपकी बीवीया हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (पेटमे मुका मारते धीरेसे) भाइ.. आप हेनां.. ठोकनेकी तो बात ही मत करो.. मे घरपे नही थी तो अच्छा मौका उठाया हे आपने.. ओर उस कमीनीकी भी खबर लेनी हे.. कैसे उछल उछलके ले रही थी..
सृती : (धीरेसे हसते) दीदी आप कीसकी बात कर रहे हे..? इसने क्या फायदा उठाया..? मुजे भी तो पता चले.. की जनाब कीसकी बजाकर आये हे..
पुनम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) भावना दीदीकी.. आपसे प्यार करनेके बाद भावना दीदीके कमरेमे चले गये थे.. सुबह तक खुब बाजाइ हे उनकी.. बेचारीकी हालत बीगाडदी..
सृती : (मुहपे हाथ रखते) क्या..? भावना दीदी..? अरे हां.. तभी मे सोचु वो अैसे लंगडाते क्यु चल रही हे.. मेने पुछा भी.. तो कहेती थी बाथरुममे पैर फीसल गया.. ये नही की हमारे पतीपे उनकी नीयत फीसल गइ थी.. मीलनेदो कमीनीको..
पुनम : (हसते) दीदी छोडीयेना उनको.. वैसे आज नही तो कल.. इनके नीचे आने ही वाली थी..
लखन : (दोनोके होठ चुमते) यार.. तुम दोनोकी दोनो ही कीतनी समजदार कमीनी हो.. चलो मे चलता हु.. नीलुको भी साथ लेजाना हे..
सृती : (पीठमे मुका मारते) आगयेना लाइनपे.. अच्छे बच्चे बन जाओ.. ओर कहोतो मे साथ चलु..?
लखन : (खुस होते हसते) हां हां.. चलो..
पुनम : (सामने देखते) क्या चलो..? ओये.. क्या साथ चलु.. कोइ जरुरत नही हे.. खामखा वहा कबाबमे हडी बनोगी.. दोनोको मजे करनेदो.. जाओ भाइ.. ओर हां.. सादीके दो तीन दिन पहेले आजाना.. समजे..? ओर हां.. जानेसे पहेले अेक पप्पी नही दोगे..?
मंजुला : (जोरोसे आवाज लगाते) पुनो बेटा.. लखन वहा हे क्या..? उसे जाना नही..?
पुनम : (जोरोसे हसते) लोजी.. हो गया कबाडा.. आगइ मेरी सास.. ये मम्मी भीनां.. बीलकुल सास वाला काम करती हे.. उसे सब पता चल गया.. जाओ भाइ.. आपकी मां बुला रही हे..
सृती : (जोरोसे) मोम.. वो आ रहे हे.. बस.. जरुरी बात कर रहे थे..
लखन : (जोरोसे पुनमके होठ चुमते) बु..च.. अब बीलकुल उनकी बहु लग रही हो.. चलो मे चलता हु..
सृती : ओये.. मेरी पप्पी..?
लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) अरे आजा मेरी बहेना.. तुम भी स्पेसीयल हे..
कहेते लखनने सृतीके बुब्सको मसलते जोरोसे होठोको चुस लीया.. तो सृतीकी आंख बडी होगइ.. ओर उनकी सास उखडने लगी.. तो लखनको धका मारते उनसे अलग होगइ ओर सृती लखनके सीनेमे मुका मारने लगी.. ओर लखन हसता हुआ वहासे चला गया..
तो पुनम ओर सृती दोनो ही उनको कामुक स्माइल करते देखती रही.. बहार नीकलते ही लखनने नीलमको फोन करदीया ओर उसे तैयार रहेनेको बोला तो नीलम भी खुस होगइ.. ओर लखन सबके पैर छुते मंजुके पास चला गया ओर उनके पैर छुने लगा.. तभी..